Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 7 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 57 चावला बैक होम


चावला साहब काफी दूर निकल गए थे ड्राइव करते हुए और उस्का फ़ोन बजा तो कार पार्क करके कॉल अटेंड किया.

“हाँ बेबी, मैं वापस घर जा रहा हूँ तुम्मो बताने का मौका hi नहीं मिला, सॉरी.”

संजना: “मगर क्यों? अचानक और ऐसे क्यों चले गए आप?”

चावला साहब: “बुसस एक चाकर सा आया था घर के अंदर और दम जैसे घुटने लगा था अचानक… शायद मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, बाहर निकला हवा खाने को तो चक्कर सा आया और उलटी जैसे होने को आया मगर हुआ नहीं….”

संजना फिकरमंद होते हुए पूछा, “कितने दूर पहुंचे हो आप? कितने देर पहले निकले? आप ड्राइव कर पाओगे इतने दूर तक? वहीँ रुकिएगा मैं किसी को लेकर आती हूँ आप के पास!”

चावला साहब: “अरे नहीं फ़िक्र करने की बात नहीं अभी ठीक फील कर रहा हूँ, मैं ने कुछ खाया भी नहीं नाह? ऊपर से व्हिस्की पी लिया था बोतल से बिना आइस कुबेस के बिना खाना काये उस चक्कर का वजा और उलटी का संभावना वो ड्रिंक भी हो सकता है, ी ऍम फाइन मैं ठीक से घर पहुँच जाऊंगा यू don’t वोर्री स्वीटहार्ट.”

संजना: “कैसे वोर्री नाह करूँ? आप अभी अभी यहाँ थे और ठीक थे अब अचानक आप की तबियत बिगड़ गयी, मुझे बहोत फ़िक्र हो रही है मैं आप के पास होना चाहती हूँ! किआ करोगे अगर ड्राइविंग करते हुए आगे वैसा hi फील हुआ तो फिरसे? नहीं आप ड्राइव मत करो नाह मैं किसी के साथ आती हूँ नाह वहां जहाँ रुके हो आप वहीँ रुको प्लीज!”

अरे रात हो चुकी है इस वक़्त किस्सके साथ होगी? मैं 60 कंस से ज़्यादा दूर निकल चूका हूँ और सान्वी ने भी फ़ोन किया तो मैं ने उस से कहा के घर ारः हूँ, रहने दो तुम; कल मिलते हैं नाह! जाओ अपने पापा के पास एन्जॉय करो तुम!”

संजना: “पापा का हो गया, मैं अभी फ्री हूँ और अकेली बाहर से बात कर रही हूँ आप से…. वैसे आप ने कहाँ तक मुझको कमरे के अंदर देखा? मैं ने आप को लास्ट देखा था जब पापा ने शुरू भी नहीं किया था…. बताइए!”

चावला साहब: “इतनी जल्दी कर लिया आनंद ने? पता होता तो वहीँ रुकता, मगर अब देर हो चुकी है, मैं ने तुमको उसस्के ऊपर चढ़ते हुए देखा, जब तुम उठक बैठक करने लगे थे उसस्के ऊपर वहां तक देखा तभी मुझको लगा के मैं चोरर हूँ तुम्हारे घर में और अचानक एक घुटन से महसूस हुई तो बाहर निकला तुरंत तभी!”

संजना: “ओह तो आप ने वो सब देखा बाद में कुछ नहीं देखा, मतलब आप बहोत पहले निकल गए थे, चलो कोई बात नहीं जाइए आप और घर पहुँचते hi मुझको कॉल करना okay? मैं वेट करुँगी आप के कॉल का ठीक है जी?”

चावला साहब: “ok बेबी ज़रूर कॉल करूँगा, जैसे कार को गेराज में करूँ तुमको फ़ोन करूँगा उसस्के बाद तुम फ़ोन मत करना क्यूंकि सान्वी मेरे आस पास रहेगी, और मैं मोबाइल को साइलेंट पर कर दूंगा ठीक है?”

संजना: “ok ठीक है आप सान्वी से कहना का आप को किआ हुआ, कैसा फील हुआ, वो ज़रूर आप का ख्याल रखेगी. Ok bye ड्राइव सेफ एंड रीच सेफ. लव यू मुउउउउआअह!”

चावला साहब: “लव यू तू स्वीटहार्ट, bye. मऊआअह.”

और चावला साहब धीरे धीरे ड्राइव करते हुए सही सलामत घर पहुंचे और कार को गेराज में करते hi संजना को कॉल करके बता दिया के वो घर आ गए हैं, फिर घर के अंदर गए.

रात के 8.30 हो चुके थे और सान्वी अपनी निघ्त्य में थी ऊपर गाउन थी निघ्त्य पर और वो चावला साहब का इंतज़ार कर रही थी दीप्ति को सुलाने के बाद. बुसस कुछ देर पहले उस्सने भी चावला साहब को फ़ोन करके पूछा था के वो कब वापस आरहे हैं तो चावला साहब ने कहा था के बुसस रास्ते में hi हैं तो सान्वी उसी का वेट कर रही थी.

सान्वी लोगे के अंदर से hi उनको देख रही थी जब वो गेराज से निकल कर लोगे के मैं दूर तक आरहे थे और उनके चलने के ढंग से सान्वी को दिख गया के वो ठीक नहीं लग रहे हैं, कुछ थके हुए और बीमार दिख रहे थे. सान्वी पिछले 5 सालों में उनके हर रंग से वाकिफ थी. तो जैसे चावला साहब अंदर दाखिल हुए सान्वी उनके करीब गयी और पहला सवाल जो किया वो यह था, “आप ठीक तो हो? बीमार दिख रहे हो? किआ हुआ आप को?” यह पूछकर सान्वी ने अपने हाथ को उनके कमर पर किया और जैसे उस्सको सहारा देते हुए घर के अंदर लेगये और काउच पर बिठाया उनके चेहरे में देखते हुए. चावला साहब थोड़ा हांफ रहे थे हलके से. सान्वी ने उनके बैठने के बाद उनके चेहरे में देखते हुए फिर से पूछा, “किआ हुआ बताओ तो आप?”

तो चावला साहब ने सान्वी के काँधे पर अपना हाथ थपथपाते हुए कहा, “अरे कुछ ख़ास नहीं बुसस थोड़ा सा चाकर आगया था कुछ देर पहले और दम घुटने लगा था. अभी ठीक हूँ! शायद मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया था मगर अब नार्मल हो गया होगा इसी लिए अब ठीक लग रहा है.”

सान्वी ने कहा, “मगर आप को तो हाई B.P नहीं है, तो अचानक कैसे हो सकता है? आप बैठिये मैं चेक करती हूँ. इलेक्ट्रॉनिक बप चेक करने वाला मशीन और डायबिटीज चेक करने वाला एपरेटस भी थे चावला साहब के यहाँ तो सान्वी गयी वो लेने चेक करने को.

सान्वी जब एपरेटस लेकर आयी और चावला साहब के कमीज़ की बाहें को ऊपर उठाया निचे ज़मीन पर बैठ कर तो उस्सकी गाउन जांघ पर सरक गयी और उस्सकी खूबसूरत सफ़ेद जांघ दिखने लगे और चावला साहब की नज़र वहां पड़े…. बहोत खूब सूरत दिख रही थी सान्वी और इतनी अच्छी खुशभू लगाई थी के चावला साहब को उस्सको सूंघने में बहोत अच्छा लग रहा था.

सान्वी जिस वक़्त उसस्के बाज़ू पर एपरेटस की रेपर बांध रही थी तो उस्सने नोट किया के चावला साहब की नज़र उस्सकी जांघ पर थे और वो बुसस मुस्कुरायी अपना काम करते हुए उस को टाइम नहीं था अपने गाउन को ठीक करने को, और जब मशीन को पंप करने लगी तब अपने गाउन को ठीक किया सान्वी ने उनके चेहरे में देखते हुए.

मशीन ने काम पूरा किया तो रिजल्ट आया के 8.8 थे उनके ब्लड प्रेशर और सान्वी ने कहा, “आप की बप हाई नहीं बल्कि लौ हुई है!!” किआ खाया पिया था आप ने संजना के यहाँ?

चावला साहब ने बताया के सिर्फ लंच किया था बारह बजे उसस्के बाद बिल्कुल कुछ भी नहीं खाया बल्कि आनंद के साथ दो पेग लिया ड्राइव करने से पहले”

तो सान्वी उन् पर चिलायी, डांटा उनको यह कहते हुए, “आप बच्चे हो? दिमाग़ नहीं आप के पास? बिना कुछ खाये ड्रिंक लिया वो भी बारह बजे से कुछ भी दाना मुंह में नहीं डाला और इतने दूर ड्राइव किया, किआ कर रहे हो आप? चाय पानी, बिस्कुट कुछ नहीं दिया संजना ने आप को आफ्टर लंच? जूस भी नहीं पिया आप ने? एक पेप्सी या कोका कोला hi पी लिए होते आप ने तो यह सब नहीं होता!! अब चलए हाथ मुंह धो लीजिये और जल्दी से खाना खाइए बप अपने आप नार्मल हो जाएगा!”

चावला साहब एक बचे की तरह दांत खाने के बाद संजना का हाथ पाकर के उस्सको खिंचा और वो उन् के गॉड में गिर बैठी, तो चावला साहब ने बड़े प्यार से उसस्के गाल पर हाथ फरते हुए कहा, “हाँ मेरी माँ हाँ चलता हूँ खाने को, तू है तो मुझे किआ फ़िक्र करना है.” और सान्वी के गाल पर किश किया चावला साहब ने फिर उसस्के गर्दन को सूंघते हुए कहा, “कौन सा परफ्यूम लगाया है तुमने बहोत अच्छी खुशभू आरही है ह्म्मम्म्म्म” और उन्हों ने सान्वी के गर्दन को चुम्मा, फिर उसस्के गले को और उन् का एक हाथ सान्वी के घुटने से आहिस्ते आहिस्ते ऊपर उस्सकी जांघ तक गयी तो सान्वी उठ कड़ी हुई यह कहते, “बुसस बुसस आप की दुलार, चलिए खाना पड़ोसती हूँ, तब तक आप फ्रेश हो जाईये मैं ने टॉवल रख दिया है बाथरूम में एक क्विक शावर ले लीजिये आप.”

तो बे कीटुएड…………….
 
अपडेट 58 सान्वी टेकिंग केयर ऑफ़ चावला साहब

चावला साहब का खड़ा हो गया था जिस वक़्त उस्सने सान्वी के गर्दन को चूमा और हाथ फेर्रा था उसस्के जांघ पर. वो उठकर बाथरूम के तरफ बढ़ रहे थे और सान्वी किचन के तरफ जाते हुए कहती गयी, “दीप्ति दिन भर पूछती रही आप के बारे में आप को मिस करती है वो, दिन भर आप को नहीं देखा न इस लिए!”

तो चावला साहब बाथरूम तक पहुँच कर कहा, “और दीप्ति की मम्मी ने नहीं मिस किया मुझको? वो मुझको कभी मिस नहीं करती किआ?”

सान्वी ने उनके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और होंठों को दांतों में दबाते हुए कहा, “नाह! बिल्कुल भी नहीं मिस करती वो आप को!” फिर हंस पड़ी!

और चावला साहब अंदर चले गए नहाने को. अंदर से नहाते हुए आवाज़ ऊंची करके चावला साहब ने कहा, “सुनों एक पेग बना दो प्लीज, एक पेग लेकर खाना कहूंगा फिर बाद में पियूँगा खाना खा कर!” सान्वी बाथरूम के दरवाज़े के पास गयी और कहा, “आप ने तो कहा के आप ने संजना के पापा के साथ पिया था नाह? तो और क्यों अभी? आप तो खाने के बाद पिटे हो?”

चावला साहब ने अंदर से जवाब दिया, “अरे कभी कभी ऐसे पीने का मूड बन जाता है बना दो नाह एक पेग!” तो सान्वी ने धीरे से कहा, “okay”

कुछ देर बाद चावला साहब बाथरूम से निकले एक शार्ट और टीशर्ट में टॉवल से सर पोंछते हुए और सान्वी उनके खाना लगा रही थी टेबल पर तो उसस्के पास आते हुए उन्हों ने पूछा, “आज विवान कितने बजे ारः है वापस?”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए उनको देखा और पूछा, “क्यों?”

तो उन्हों ने चेयर खिंच कर बैठते हुए कहा, “अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”

सान्वी फिर दांतों में होठ दबाते हुए कहा, “सुबह के 1 बजे आएंगे वो, कुछ देर पहले फ़ोन किया था एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उस्सने!”

चावला साहब ने निवाला लेते हुए कहा, “हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”

सान्वी भी चेयर खिंच कर उनके पास बैठी और कहा, “क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”

चावला साहब ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”

सान्वी ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा, “आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?

चावला साहब ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा, “पता नहीं जैसे आज मुझे फील हुआ उस वक़्त जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”

तब सान्वी ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”

अब यह तो चावला साहब नहीं बता सकता था सान्वी को के उस वक़्त उस्सने अपने आप को एक चोरर की तरह घर के अंदर महसूस किया था संजना को अपने पापा के साथ रिकॉर्ड करते हुए, तो बिल्कुल एक घबराहट की तरह हुई थी ठीक उसी वक़्त उनको घुटन सी मेहसूस हुई थी और ठंडी हवा खाने का मैं किया था…. तो चावला साहब अब समझे के क्यों उस्सकी बप लौ हुई थी उस वक़्त संजना के घर के अंदर!!

खाना ख़तम करने के बाद चावला साहब लाउन्ज में काउच पर बैठ कर टीवी ों किया और सान्वी बाकी के बर्तनों को धोने गयी. अपने काउच से चावला साहब सान्वी को देख रहे थे. सान्वी की निघ्त्य और गाउन दोनों साटन की मटेरियल थे और जब सान्वी टेबल से प्लेट्स उठा कर चल रही थी तो उसस्के नितम्बों का फॉर्म उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख रहे थे और सान्वी के कमर का वो हिस्सा जो चउरवे होता है वो बिल्कुल नज़र आरहे थे चावला साहब ko….ussko उस तरह से देख कर चावला साहब संजना की जिस्म को याद करने लगे और सोचा के उस्सको टेक्स्ट करना चाहिए… मगर इस वक़्त वो सान्वी के जिस्म से इंटरेस्टेड हो रहे थे…. सोचा के सान्वी के जिस्म अंदर कैसा होगा? किआ वैसा hi होगा जैसा संजना की है? संजना कुंवारी है, माँ नहीं बानी है, सान्वी एक बची की माँ है फिर भी उस्सकी फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहे थे….. चावला साहब उस्सकी क्लीवेज तो अक्सर देखा करता है, उस्सकी जांघें भी बहोत देखा है मगर सान्वी को उस से ज़्यादा अंदर नहीं देखा है कभी पिछले 5 सालों में, तो उस्सको देखने का मैं हो रहा था…

सान्वी ने कुछ देर बाद और ड्रिंक्स बनाये उनके लिए और उनके पास काउच पर बैठी बात करते हुए. चावला साहब ने ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो सान्वी ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया और चौथा ड्रिंक बनाने लगी तो सान्वी ने कहा, यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है?!”

जब चावला साहब ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब सान्वी के ज़्यादा करीब जा सकता है और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता है….

सान्वी उनके दाएं तरफ बैठी थी सत् के उन् से. तो चावला साहब ने अपने दायां बाज़ू को सान्वी के काँधे पर किया और उस्सको अपने करीब किया तो सान्वी का सर उनके छाती तक गए, वैसे करना आदत थे उनके और सान्वी अक्सर अपना सर उनके छाती पर रखती थी टीवी देखते वक़्त. लगता था के बाप बेटी बैठे टीवी देख रहे हैं. उंनका प्यार वैसा था. मगर अभी चावला साहब की नियत कुछ और थे. उनके छाती के बालों में तो सान्वी ने कई बार अपने उँगलियों को फेर्रा था मगर अभी चावला साहब टीशर्ट में थे और उतार भी नहीं सकते थे क्यूंकि संजना की किये हुए लोवेबिट्स अभी भी मिठे नहीं थे, हल्का सा अब बी नज़र आरहे थे…. सान्वी उनके चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रही थी हलके हलके जिस से चावला साहब को बहोत अच्छा महसूस हो रहा था और उतेजिना भी बढ़ रहे थे उंनका….

हिमत जूता कर उन्हों ने कहा, “तुम हमेशा इस गाउन को निघ्त्य के ऊपर पहनती हो, मगर मैं ने कभी भी तुमको इस्सके अंदर वाले निघ्त्य में नहीं देखा, आज दिखा दो किसी लगती हो इस में!”

सान्वी झट से हट गयी उनके करीब से और सीरियस होकर कहा, “अगर आप ऐसे बातें करोगे तो मैं जाती हो सोने हाँ!” चावला साहब ने तब कहा, “अरे सान्वी किआ बुरा कहा मैं ने? बुसस इस गाउन को निकालना है तो?”

संवी ने मुंह बनाते हुए कहा, “नहीं, मैं नहीं निकलने वाली इससे आप के सामने!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है तो फिर मैं hi निकाल देता हूँ क्यों?”

सान्वी कड़ी हो गयी और डेंटन में अपने होंठ को दबाते हुए कहा, “आप को चढ़ गयी है आप जब नशे में नहीं होते हो तब क्यों ऐसे बातें नहीं करते? मैं जा रही हूँ!”

चावला साहब ने उस्सको रोकते हुए कहा, “आरी सुनो तो, औ आओ नाह इधर मेरे पास!” सान्वी रुकी और एक दो कदम उनके करीब आयी तो चावला साहब ने कहा, “कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बेहवे करता हूँ? आज सुबह सुबह तो थी तुम मेरे बाहों में किचन में और तुमने वही अपना पुराण, ‘वह लोग आजायेंगे, जाग जाएंगे लगा रखा था? हम्म? तो किआ मैं सुबह सुबह नशे में था किआ?”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “मुझे लगता है के आप जब से संजना से मिले हो तो उस्सने आप की आदतें बिगाड़ दिया है कहीं आप उसस्के साथ ऐसे तो नहीं बेहवे करते हो? हम्म बताइये मुझे?!”

चावला साहब ने झूट बोलते हुए कहा, “अरे वो नयी है, उसस्के साथ इतना क्लोसनेस्स कहाँ जितना तुमसे हैं, आओ मेरे पास बैठो नाह, तुमको ज़ोर से हुग करने को मैं कर रहा है औ मेरे पास!”

सान्वी ने कहा, “हम्म्म हुग ठीक है…” और वो बैठी उनके पास और चावला साहब ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके सीने से दबाया, और सान्वी ने भी अपने बाहों को उनके पीठ पर करके उनको सीने से लगाया काउच पर बैठे हुए. ऐसे हुग करना दोनों के आदत थे.

मगर आज चावला साहब का हाथ उसस्के पीठ से धीरे धीरे हट कर सान्वी के काँधे पर आये और उस्सने हलके से गाउन को काँधे पर से थोड़ा सा सरकाया, और सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप पर उनके ऊँगली पड़े तो सान्वी ने उनके उँगलियों को अपने काँधे पर फील किया और उस्सने हुग चोर्रा और उनके बाहों से निकलने की कोशिश किया मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे और सान्वी के गर्दन को चुम्मा फिर गले पर अपना जीब फेर्रा और सान्वी को ज़ोर से अपने ऊपर दबाते हुए काउच पर पीठ के बल लेट गया जिस से सान्वी उनके ऊपर हो गए अपने कांड पर अपनी सर्कि हुई गाउन को देखते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड……………..
 
थैंक्स वैरी मच फॉर थे अप्प्रेसिअतिवे कमेंट एंड योर पॉइंट ऑफ़ व्यू बीआरओ.

ी रियली अप्प्रेसियते आईटी...... बूत यू सी ा राइटर ओफ्तें है इतर थिंग्स इन मंद...

बूत तो सम एक्सटेंट यू अरे राइट एंड थिंग्स मई टर्न थे इतर वे आल्सो.

बूत ी वोउल्ड लिखे तो कीप संजना थे मैं अट्रैक्शन फॉर थे मोमेंट अस हेर रोले इन थिस स्टोरी इस ऑफ़ एक्सट्रीम इम्पोर्टेंस, इतस देय तो हेर तहत ओने डे सान्वी विल कनईल इन फ्रंट ऑफ़ चावला साहब... सी ी ऍम टेलिंग यू थे सीक्रेट ऑफ़ थे स्टोरी एंड इतस तू अर्ली तो रीच तेरे.... इतस ा long-running स्टोरी बीआरओ, प्लीज कीप रीडिंग एंड योर कमैंट्स विल बे थे मोस्ट वेलकॉमेड एंड ी, इन फैक्ट, विल नीड योर पॉइंट ऑफ़ व्यूज तो कीप थिस मूविंग बेटर .

थैंक्स एंड कीप किंग बीआरओ :हुग:
 
अपडेट 59 स्टिल सान्वी एंड चावला

उस पोजीशन में पहले सान्वी ने अपने काँधे पर अपने गाउन को ठीक किया फिर अपने मुठी बांध करके चावला साहब के छाती पर मारा हलके से यह कहते हुए, “छोरये मुहे चोररये नाह, किआ कर रहे हो आप पापा जी बुसस भी कीजिये अब चोररये नाह!!” मगर चावला साहब का जीब सान्वी के गर्दन को चाटते जा रहे थे और उस्का एक हाथ सान्वी के नितम्बों पर गया उस्सको दबाते हुए तो झट से सान्वी ने अपने हाथ से उस्का हाथ वहां से हटाया और ज़ोर लगाके उसस्के ऊपर से उठी हांफते हुए और थोड़ा जैसे नाराज़ होते हुए कहा, “उफ़ आप भी नाह, आप को बिल्कुल चढ़ गयी है मैं टीवी ऑफ करती हूँ आप जाइये अपने कमरे में इतस टाइम तो स्लीप, बप लौ होने पर यह हाल है ठीक होंगे आप तब किआ करेंगे भला उफ़!! जाओ जाओ सोने अब मैं तो चली अपने कमरे में, आप को जाना है तो जाओ वार्ना यहीं पड़े रहो आप!”

सान्वी का कमरा ऊपर था फर्स्ट फ्लोर पे और ससुर का कमरा निचे. तो ससुर वहीँ सोफे पर लेते अपने जीब को होंठों पर फरते हुए सान्वी को सीढ़ियां चढ़ते हुए देख रहे थे, उस्सकी गांड का मटकना, उस साटन वाले ड्रेस में कितना खूबसूरत और आकर्षित करती जा रही थी सान्वी ऊपर, एक दो बार नुड़कर उस्सने चावला साहब को देखा भी पर आगे बढ़ती गयी अपने बैडरूम के तरफ. जब कमरे तक आगयी तो दूर खोलने से पहले एक बार फिर सान्वी ने निचे लाउन्ज में चावला साहब को देखा के वो वहीँ लेते हुए हैं तो कहा, “ेय पिता जी जाओ अपने कमरे में यहीं रात गुजरने का इरादा है किआ आज रात?”

चावला साहब ने कहा, “ी ऍम ा साद मन टुनाइट!”

सान्वी हंससने लगी उनको सुनकर और पूछा, “क्यों साद मन हो आप आज की रात?”

चावला साहब ने कहा, “बेसोज माय सान्वी ऑलवेज मेक में स्लीप ों माय बीएड थें शी गोज तो स्लीप तो हेर रूम बूत टुनाइट शी लेफ्ट में हेरे अलोन एंड वेंट अवे! सो, ी ऍम ा बेरी बेरी साद मन टुनाइट!”

सान्वी ज़ोर से हंसी और सीढ़ियां उतारते हुए बोलती आयी, “आप भी नाह इमोशनल ब्लैकमेल करने में बहोत माहिर हो, चलो आप को आप की बैडरूम में चोरर कर आती हूँ वार्ना कहोगे के मैं ने आप का ख्याल नहीं रखा आवो चलो अब!” तब तक काउच के पास आ चुकी थी और चावला साहब को थाम कर उसस्के कमर पर और काँधे पर हाथ करके उसस्के बगल में चलते हुए उनके बैडरूम तक ले गयी उनको. जैसे के वो एक बेवड़ा था.

चावला साहब तो एहि चाहता था के उसस्के बीएड पर सान्वी को पटके इसी लिए वैसा इमोशनल ब्लैकमेल किया ताके सान्वी शो बीएड तक लेजाए.

अब सान्वी ने उनको कपडे उतारने को कहा, उनके टीशर्ट निकालने जा रही थी तो चावला साहब ने कहा, “नहीं यह नहीं सिर्फ शार्ट निकलूंगा टीशर्ट पेहेन कर सोऊंगा, ठण्ड है आज रात.” तो सान्वी ने कहा, “हाँ तो निकालिये शार्ट!” चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम निकालो नाह!” सान्वी ने अपने दोनों बाहों को क्रॉस किया और खड़े होकर चावला साहब को देखते हुए कहा, “आप एक छोटा सा बचा हो जो मुझको आप के शार्ट निकलना चाहिए हम्म?”

चावला साहब ने कहा, “आरी तो किआ आज पहली बार है किआ? कितनी बार मैं नशे में होता हूँ तो मेरे सभी कपडे उतार कर मुहको सुलाकर तब जाती हो है के नहीं?”

सान्वी ने कहा, “हाँ सही है, मगर आज आप उतने नशे में नहीं हो, नशे में होते तो चल कर यहाँ तक नहीं आ पाते, और जो कुछ किया अभी मेरे साथ काउच पर? पुरे नशे में होते तो वो सब नहीं करते!”

और चावला साहब ने फिर कहा, “आओ नाह यहाँ बीएड पर मेरे पास आओ नाह …”

सान्वी ने कहा, “नहीं बिल्कुल नहीं आप बहोत नॉटी हो रहे हो नहीं आउंगी!”

चावला साहब: “तुम पे बहोत प्यार ारः है मुझे, आओ नाह प्यार करूँ तुमको थोड़ा सा प्लीज आओ नाह!”

सान्वी को दया आगया जिस तरह से उन्हों ने कहा, पिघल गयी वो, ेंखें भर आयी उस्सकी और चली गयी प्यार करने उन् से!”

और जैसे hi वो बैठी बीएड पर उनके पास चावला साहब ने बड़े प्यार से कहा “शार्ट तो उतार्दो नाह प्लीज,” वो लेता हुआ था अपने पीठ पर.

तो सान्वी ने उनके शार्ट निकाले और जैसे शार्ट निकल गयी तो संवी ने उनके बॉक्सर के निचे उनके मोठे लिंग को देखा जो एकदम तन्ना हुआ था, उस्का फॉर्म बहोत बड़ा दिख रहे थे और सान्वी जैसे स्टेचू बन गयी लिंग को देखा फिर उनके चेहरे में देखा दोबारा लिंग को देखा फिर उनको देखा के वो अपने होंठों पर जीब फरते हुए ेंखों से जैसे इशारे में पूछ रहे हो के किआ हुआ?

सान्वी जो बीएड पर बैठी थी उठ गयी और कहा अब जा रही है तो जल्दी से चावला साहब उठ बैठे बीएड पर और सान्वी का हाथ पाकर के उस्सको खींचा अपने तरफ और सान्वी को ठीक अपने लिंग पर बिठाया, सान्वी कुछ बोल नहीं रही थी उस्सको पता था के वो उनके लिंग पर बैठी है फील भी कर रही थी अपने नितम्बों के निचे उनके मोठे लिंग को, और क्यूंकि साटन मटेरियल की ड्रेस थी तो आसानी से फिसल रही थी और चावला साहब ने सान्वी को बाहों में जकरा और फिरसे उसस्के गर्दन को चूमते हुए जीब फेर्रा उसस्के गर्दन और गालों पर. सान्वी ने करने दिया और तब चावला साहब का जीब सान्वी के होंठ को छुआ तब सान्वी ने मुंह को एक तरह कर लिया और कहा, “बुसस अब मैं चलती हूँ आप होश में नहीं हो पिता जी मुझे यहाँ से चले जाना चाहिए अब!” सान्वी की धड़कनें तेज़ होने लगी थी और हलके से हांफने लगी थी और उस्सकी आवाज़ में एक थरर्ठराहट थी.

चावला साहब ने अपने कमर को थोड़ा सा हिलाया उस्सकी नितम्बों के निचे जो सान्वी ने खूब फील किया तब झट से उठ गयी और चल कर जाने लगी बिना कुछ कहे, चावला साहब बुलाता रहा उसे मगर वो बिना कुछ बोले चुप चाप निकल गयी कमरे से दरवाज़े को बांध करते हुए और चावला साहब को पता चल गया के अब वो नहीं आने वाली.

चावला साहब ने खुद से कहा के एक पहली बार के लिए इतना कम नहीं था, आहिस्ते आहिस्ते सान्वी ज़रूर रास्ते पे आजाएगी!

उधर सान्वी अपने कमरे में जाकर अपनी निघ्त्य के ऊपर वाले गाउन को निकला, खुद को आईने में देखा और कहा, “क्यों वो मुझे ऐसे देखना चाहते हैं? किआ है मुझ में जो वह देखना चाहते हैं? मुझे बहोत शर्म आएगी उनके सामने इस निघ्त्य में जाना, ब्रा नहीं है मेरे बूब्स साफ नज़र आरहे हैं, सब दिखेगा उनको, और वो शायद एहि देखना चाहते हैं…. किआ उनको पता है के मैं निघ्त्य के निचे ब्रा नहीं पहनती हूँ? और इस निघ्त्य में मेरा पंतय भी दिख रहा है, तो उनको सब दिखेगा… मुझको बहोत शर्म आएगी इस तरह उनके सामने रहना क्यों वो मुझे ऐसे देखना चाहते हैं भला? धत!!”

सान्वी बीएड पर लेट कर उनको सोचती रही. उनके बॉक्सर में उनके लिंग को सोचती गयी और किश तरह उसस्के ऊपर बैठी थी अपने नितम्बों के निचे उस्सको फील करते हुए, किश तरह से उसस्के दिल की धड़कनें तेज़ हुई थी, सब कुछ सान्वी लेते हुए सोच रही थी के उस्सकी ेंख लग गयी……….

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 60 स्टिल अबाउट बोथ ऑफ़ थम

अगले सुबह को चावला साहब लेट उठे. सान्वी सुबह 5 बजे से उंनका वेट कर रही थी किचन में, मामूल से वो भी 5.30 तक उठ जाते हैं मगर आज सोते रहे वो, शायद कल की थकान की वजा से या बप लौ होने की वजा से सोते रहे… जब 8 बज गए और चावला साहब कमरे से नहीं निकले थे तो सान्वी को फ़िक्र हुआ के कहीं उनके बप की वजह से कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुई है उनको, तो जल्दी से वो उनके कमरे में गयी तो देखा के वो नींद में है…. सान्वी उनको नींद में देख कर मुस्कुरायी उस्सको लगा जैसे एक बच्चा सो रहे हैं… कुछ नहीं ओढ़े थे उन्हों ने ऐसे hi थे टीशर्ट और बॉक्सर में, और सान्वी की नज़र बॉक्सर पर गयी तो देखा के लिंग कल रात की तरह तना हुआ नहीं है, नार्मल फॉर्म में थे उंनका लिंग. सान्वी को हंसी आयी और अपने मुंह को हाथ से कवर करके हंसी सान्वी ने. कुछ देर उनको वैसे सोते हुए देखते रहे फिर आहिस्ते से उनके बीएड पर बैठी और उनको हलके से छह कर जगाने की कोशिश की सान्वी ने, मगर चावला साहब ने एक करवट लिया और चेहरे उस तरफ करके सोते रहे…. तो सान्वी ने कहा, "सुबह के 8 बज गए हैं आज नहीं उठना है किआ जी?”

तब चावला साहब ने ेंख खोला सान्वी की आवाज़ सुनकर और पीठ पर आकर अपने बाहों को खोला सान्वी को बाहों में भरने के लिए, और सान्वी गयी उनके बाहों में अपने सर को उनके छाती पर रखते हुए. चावला साहब सान्वी के सार पर, उसस्के बालों में उँगलियाँ फरते हुए कहा, “क्यों इस से पहले नहीं जगाया तुमने? दीप्ति अभी तक नहीं उठी किआ?” विवान चला गया किआ काम पर?”

सान्वी उनके छाती पर सर रखे हुए hi जवाब दिया, “हम्म्म दीप्ति नहीं उठी अभी तक और विवान तो 10 बजे उठेगा नाह?” चावला साहब ने एक अंगराई लिया और सान्वी उनके चेस्ट पर हलके से हाथ मलते हुए पूछा, “कल रात की बात याद है आप को?” चावला साहब उस्सको फिर बाँहों में बरके कहा, “बिल्कुल याद है तुम हो के चली जाती हो हर बार मेरे साथ थोड़ा वक़्त नहीं गुज़ार सकती हो किआ?”

सान्वी ने कहा, “वैसे आप के साथ वक़्त गुज़ारना ठीक होगा किआ?”

चावला साहब उसस्के गर्दन को चूमते हुए कहा, “क्यों ठीक नहीं होगा? विवान तो 1 बजे आने वाला था तुम 11 बजे यहाँ थी, दो घंटे थे हमारे लिए तो कम से कम एक घंटे तक तो तुम मेरे साथ इस बीएड पर गुज़ार सकती थी तो क्यों चली गयी थी?”

सान्वी ने कहा, “आप ने किआ कहा था आप मुझे मेरे निघ्त्य में देखना चाहते हो क्यों? वो नशे में कहा था या सच में आप वैसा चाहते हो?”

चावला साहब ने कहा, “अभी इसी वक़्त भी देखना चाहता हूँ निकालो गाउन को और दिखाओ मैं सच में देखना चाहता तुम्हें इस निघ्त्य में!” सान्वी ने उनके छाती से सर उठाते हुए, उठकर कढ़ी हुई और कहा, “सच? मैं निकलूं गाउन को अभी के अभी?”

चावला साहब उठ बैठे बीएड पर और तैयार हो गए सान्वी को निघ्त्य में देखने के लिए मगर सान्वी ने अपने जीब निकालके उनको चेररते हुए दावती हुई कमरे से बाहर चली गयी. जाते जाते कहते गयी, “जल्दी नहाधो कर तैयार हो जाईये आप की चाहती संजना आप का वेट कर रही होगी ड्राइविंग सीखने के लिए!!”

चावला साहब सान्वी की उस ऐडा पर मर मिठे, जिस तरह से सान्वी ने जीब निकला उस्सको चेर्रा, वो बहोत इरोटिक और सेक्सी था. चावला साहब ने सोचा किआ सान्वी समझती है के वो उस तरह से जीब निकाल कर मुझको चेररणा एक इशारा दे गयी के वो राज़ी है मेरे साथ सोने के लिए? किआ वो अपनी निघ्त्य निकालना चाहती थी सच में या मुझको यूँही तरसा रही है? किआ है उसस्के दिल में इस बारे में?

उधर सान्वी वापस किचन में जा कर सोच रही थी किश तरह ससुर ने उस्सको अभी के अभी निघ्त्य की गाउन निकालने को कहा, खुद से कहा संवी ने, “विवान घर में है फिर भी सुबह सुबह वो मुझको मेरे निघ्त्य में देखना चाहते हैं? किआ करते वो अगर मैं सच में निघ्त्य में उनके सामने होगी तो? मुझको बाहों में भरेगा, मेरे बूब्स उनके सीने से चिपकेगा, और वो मेरे गर्दन को चूमेगा, पर मेरी एंटी पतली निघ्त्य की स्ट्राप, उस्का मुंह मेरे नंगे काँधे पर भी फ्रेगा, उफ़ मैं तो मर्डर जाउंगी उनके छुवन से, किआ मैं सेहेन कर पाऊँगी? बहोत लज्जा आएगी मुझको उन् के सामने ऐसे रहने को!! उफ़ यह पिता जी बी नाह? पता नहीं कैसे कैसे ख्याल पैदा करत्ते हैं मेरे में में! धत!!”

चावला साहब फ्रेश होकर तैयार होने लगे तो एक कपडे की तलाश कर रहे थे तो सान्वी को आवाज़ दिया उस कपडे को ढूंढ़ते हुए. सान्वी गए उनके कमरे में और कपडे को अलमारी से निकाल कर उनको देते हुए कहा, "अरे वह आप तो यंग और हैंडसम लगने लगे, शेव भी कर लिया? कौन सा आफ्टर शेव लगाया है जो इतना महक रहा है, ज़रा देखूं तो, यह कहते हुए सान्वी उनके पास गयी और उनके गाल को सुंघा, और चावला साहब ने उस्सको जाकर लिया और वही उस्सकी गले और गर्दन को चूमने लगा खड़े हुए पोजीशन में. सान्वी ने धीमी आवाज़ में कहा, “उफ़ आप फिर शुरू हो गए अब विवान उठने वाला है चोरडिये नाह, जाईये अपनी संजना को ऐसे जकरना, उस के साथ भी ऐसे hi करते होंगे आप, है नाह? सच बोलिये!”

चावला साहब अपने निचे के जिस्म का हिस्सा सान्वी के निचे वाले हिस्से पर ज़ोर से दबाते हुए कहा, “क्यों तुम हर बार संजना को लेकर ऐसे बातें करती हो? तुम समझती हो के जैसे तुमसे क्लोज हूँ उस से भी हूँगा? तुम समझती हो के वो नयी लड़की मुझको उससे ऐसे बाहों में भरने देगा किआ? हम्म?”

सान्वी ने उनके छाती पर अपने हथेली को ज़ोर से दबाते हुए , जैसे उनको पुश करते हुए कहा, “जिस तरह से मैं ने आप दोनों के ेंखों को एक दूसरे को देखते हुए देखा, जिस तरह से आप को उस से बातें करते हुए सुना तो एहि लगता है के आप उस से मुझसे बहोत ज़्यादा क्लोज हो, मुझे किआ पता आप किआ किआ करते होंगे उसस्के साथ? दिन दिन भर उसस्के साथ रहने लगे हो आप. आरव से ज़्यादा वक़्त तो आप बिताते हो उसस्के साथ, मांगितर आरव है या आप? आरव को उस से मिलना जाना चाहिए था तो यहाँ आप मिलने जाते हो जैसे आप से hi मांगनी हुई है उस्सकी, चलो जाओ आप उसी के पास और चोर्रो मुझे आप!!”

चावला साहब ने सान्वी को बाहों में जाकर hi रखा और उसस्के गालों को और नेकलिने पर अपने होंठ और जीब फरते हुए कहा, “हम्म्म तुम्हारे बातों से जलन की भूः आने लगी है, किआ तुम संजना से इन्सेक्युरे फील करने लगी हो? अभी तो वो इस घर में आयी भी नहीं है, जब आगयी तब किआ बोलोगी हम दोनों को तुम हम्म्म?”

सान्वी ने फील किया के उंनका लिंग मोटा हो गया और उसस्के पथ के निचे वो ज़ोर से दबा रहे हैं और थोड़ा रागढ भी रहे हैं, तो सान्वी उनके बाहों से निकलने के लिए स्ट्रगल करने लगी, अपने कमर को पीछे कर लिया, और चावला साहब ने अपना मुंह सान्वी के मुंह पर किया, उस्का जीब सान्वी के होंठ पर फ्री तो झट से सान्वी ने मुंह घुमा लिया और स्ट्रगल करती रही निकलने के लिए उनके बाहों से. मगर चावला साहब उस्सको नहीं चोरर रहे थे…

तो सान्वी ने बिनती किया, “ोफो चोररये नाह विवान अगर जाग गया तो हमारी आवाज़ उस तक पहुंचेगा, वो ऐसे hi चेररता रहता है मुझे के आप मेरे दूसरे पति हो और अब कहेगा के दूसरे पति के बाँहों में मौज मस्ती कर रही थी चोररये नाह!!”

चावला साहब ने अपने लिंग को कपडे समेत और ज़ोर से दबाया सान्वी के पथ के निचे और कहा, “तो बनालो मुझे अपना दूसरा पति, करलो मुझ मस्ती इस दूसरे पति से, एक किश दो मुझे तब चोररटा हूँ…”

सान्वी ने अपना मुंह उनके चेहरे तक किया उनके गालों पर किश करने के लिए जो हर रोज़ करती थी जो मामूली बात थी मगर आज चावला साहब ने सान्वी के मुंह को अपने मुंह में ले लिया और अपने जीब को उसस्के मुंह के अंदर डालना चाहा, सान्वी अपना मुंह नहीं हत्ता पायी क्यों के चावला साहब ने उसस्के सर के पीछे एक हाथ दबा रखे थे किश करते वक़्त…. सान्वी के होटों को चूसा चावला साहब ने और सान्वी चटपटा रही थी उनके बाहों से निकलने के लिए, फिर सान्वी के होंठों को चुस्सने के बाद चावला साहब ने कहा, “मुंह खोलो नाह, प्लीज खोलो नाह, अपने मुंह का स्वाद अपने मुंह में लेने दो नाह!!” सान्वी नाह में गर्दन हिलाती रही और मुंह नहीं खोला.

तो चावला साहब ने उस्सको चोरर दिया. सान्वी दो कदम पीछे हाथ कर उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “उफ्फ्फ!! मैं ने बिल्कुल नहीं सोचा था के आप इस तरह से किश करोगे मुझे, यह ठीक नहीं है!! किआ हो गया है आप को भला? किआ संजना को ऐसे किश करते हो किआ आप? बोलो?” किआ वो मुंह खोलती है हाय राम किआ आप और संजना यह सब करते हो तभी आप मुझसे भी अब वो सब करना चाहते हो? आप संजना से मिलने से पहले तो मेरे साथ ऐसे नहीं करते थे? बताइये किआ आप का संजना के साथ ऐसा सम्बन्ध है किआ?”

चावला साहब मुस्कुरा रहे थे संजना की बात आयी तो, और सान्वी के चेरे में देखते हुए कहा, "तुम पागल हो, उसस्के साथ ऐसा कुछ भी नहीं, तुम ग़लत सोच मत पालो अपने दिमाग़ में, तुम किआ समझती हो के हर कोई सान्वी है किआ मेरे लिए? तुम अब मेरे इस घर में मेरी पत्नी की तरह हो, विवान ने कहा नाह के मैं तुम्हारा दूसरा पति हूँ, सो हूँ और आज रात को अगर विवान लेट आया तो तुम मेरे बीएड पर मेरे साथ रहोगी सिर्फ निघ्त्य में बिना इस मनहूस गाउन के okay? सो सी यू टुनाइट डार्लिंग सान्वी…..”

यह कहकर चावला साहब अपने कमरे से निकले और सान्वी वहीँ कड़ी रह गयी अपने खुले मुंह पर अपना हाथ किये हुए! उस्सको झटका लगा चावला जी के बातों से…..

सान्वी उनके पीछे जल्दी से निकले लाल चेहरा लिए तब तक चावला साहब गेराज तक जा चुके थे, भागते हुए सान्वी गेराज तक गए और उनको रोका. चावला साहब कार का दरवाज़ा खोलने hi वाले थे के सान्वी वहां आयी और उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “आप ऐसे सोच अपने दिमाग़ से निकाल दीजिये, मैं आप की बहोत इज़त करती हूँ, प्यार भी करती होऊं मगर उस तरह नहीं जैसे आप सोच रहे हो, यह सब ग़लत है जी…. आप हमारे प्यार को बदनाम कर डोज अगर ऐसा कुछ हुआ तो.

चावला साहब मुस्कुराते हुए सान्वी के चेहरे में देख रहे थे और अचानक सान्वी का हाथ पाकर के अपने तरफ खिंचा और सान्वी के मुंह को फिर अपने मुंह में लिया, इस बार सान्वी का मुंह थोड़ा सा खुला था और चावला साहब का जीब कोई एक इंच तक उस्सने मुंह के अंदर गया….. फिर झट से तुरंत सान्वी ने उनको पुश करते हुए हट गयी और उनके चेहरे में देखते हुए भीगे ेंखों से कहा, “आप क्यों ऐसा कर रहे हो? किआ हो गया है आप को! मैं वैसी नहीं हूँ पिता जी!!”

सान्वी के ेंखों में ेंसू देख कर चावला साहब हैरान हुए और तरस आया उस्सको, तो जल्दी से उस्सको अपने बाहों में भरके उसस्के सर को सहलाते हुए कहा, “आरी इस में रोने की किआ बात है? ससष्ठ. छुप हो हो. शह्ह्ह्ह!” और सान्वी और ज़्यादा रोने लगी उनके सीने पर सर रख कर.

चावला साहब नहीं समझ रहे थे के अब किआ करें. सान्वी का पीठ सहलाता रहा और उस्सको छुप होने का वेट किया. और जब वो रुकी रोने से तो कहा, “अब जॉन मैं? हम्म okay अगर तुमको यह सब नहीं पसंद तो आज के बाद नहीं करूँगा यह सब ठीक है?”

सान्वी ने हाँ में सर हिलाया सर झुकाये हुए. और चावला साहब ने उसस्के गाल पर अपना हाथ फरते हुए उस्सको bye कहा और गुड डे विश किया, तब सान्वी अपने नाक के पानी अंदर खींचते हुए कहा, “हैवे ा नीस डे आप भी और ज़्यादा देर मत करना अँधेरा होने से पहले वापस आजाना आप” तब तक कार स्टार्ट कर दिया था चावला साहब ने और निकलने लगे थे वेव करते हुए सान्वी को तो सान्वी ने आवाज़ थोड़ा ऊंची करके कहा, “और खाना खा लेना टाइम पर, बप को लौ मत होने देना, bye!”

और चावला साहब निकल गए और ड्राइव करते हुए बड़बड़ाते गए, “इस्सके गर्दन को चूमूँ ठीक है, इस्सके गले को चूमूँ ठीक है, इस्सके जांघ पर पांच सालों से हाथ फरता चलूँ ठीक है, इस्को सीने से जी भर के दबाऊं ठीक है, मगर निघ्त्य में देखना चाहूँ तो रोने लगी, मुंह में किश करूँ तो नखरें भरी हुई है, चल कुछ नहीं करता तेरे साथ फिलहाल मगर एक दिन छोडूंगा तुझे भी सान्वी और तू छुडवाएगी मुझसे, एक बार छुड़वा लिया तब खुद बार बार कहेगी के तुझे छुड़वाना hai…chal जा, तुझसे तो मेरी संजना अच्छी!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………… (3400 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अरे जणू यू दीद नॉट रिप्लाई माय लास्ट काउंटर रिप्लाई प्लीज बोलो तुम ष्प वाले जणू हो?

ी ऍम वैरी वैरी हैप्पी तो सी यू हेरे यार!!

थैंक्स वैरी वैरी मच

जणू प्लीज मेरे बाकी रीडर मिले तो उन् लोगों से कहना के मैं ने फिर लिखना शुरू किया है

दो यू बंगाली भाई आफ ब्रेगो भाई? िफ़ यू मीट थम समवेयर प्लीज गिव थम माय लिंक... थे आल अस्केद में सेवेरल टाइम्स तो व्रिठे अगेन, ी हैवे लॉस्ट आल कॉन्टेक्ट्स विथ थम.... डोंट क्नोव वेयर तो गेट थम.... प्लीज सेंड माय वर्ड्स तो थम िफ़ यू क्नोव.....
 
यू कन्नोत अंडरस्टैंड हाउ मच हैप्पी ी ऍम तो सी यू हेरे, ी एडिटेड एंड ऐड फ्यू वर्ड्स इन माय लास्ट पोस्ट प्लीज चेक

एंड ओनली यू एंड जेम्स अरे माय ष्प रीडर्स हेरे... ओठेर्स अरे नई... सो प्ल्ज़ तेल्ल ओठेर्स ऑफ़ माय रीडर्स िफ़ यू क्नोव थम

आईटी इस अस िफ़ ी हैवे फाउंड बैक ा लॉस्ट फ्रेंड यार :हुग: :लव: :दोस्त:

तेल्ल में हाउ दीद यू फंड में हेरे?
 
ी हैवे आल्सो कॉन्टिनोएड थे इनोसेंट वाइफ बोथ हिंदी एंड इंग्लिश - ी हवे तवो ष्प रीडर्स फ्रॉम इंग्लिश ..एंड सो मान्य मान्य ओठेर्स रेक्वेस्टेड हुंडरेड्स ऑफ़ टाइम तो कंटिन्यू तहत, एंड ी विल कम्पलीट आईटी हेरे जणू.....

एन्जॉय रीडिंग जणू एंड दो हैवे ा नीस टाइम हेरे माय फ्रेंड :हुग:
 
अपडेट 61 चावला साहब इंडिफ्रेंट

संजना उंनका वेट कर रही थी रेडी होकर क्यूंकि कल बात हो गयी थी के सीधे शहर जाएंगे ड्राइविंग के लिए. चावला साहब कार में hi बैठे रहे और हॉंक किया. संजना घर के द्वार पर कड़ी उनको घर के अंदर आने का इंतज़ार कर रही थी. मगर चावला साहब ने कार से hi हाथ से कार में आने का इशारा किया संजना को.

संजना को बहोत हैरानी हुई क्यूंकि वो वेट कर रही थी के साहब अंदर आएगा उस्सको बाहों में भरके थोड़ा प्यार करेगा फिर कुछ देर बाद ड्राइविंग को जाएंगे, मगर जब चावला साहब ने उस्सको कार में आने के लिए कहा तो उस्सको कुछ अजीब लगा, मगर गयी कार में जाना तो था hi.

अंदर आते hi संजना ने चावला साहब को अपने गाल दिए किश के लिए तो उन्हों ने किश किया और फर्स्ट गियर लगा कर ड्राइव करने लगे, संजना ठीक से बैठी भी नहीं थी के कार चल पड़ा. संजना खामोश उनको देख रहे थे और उस्सको भी दिख गया के साहब का मूड कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं. तो काफी देर तक संजना भी खामोश रही कुछ भी नहीं कहा. 20 कंस में शहर रीच होना था और ज़्यादा नहीं बचा था कोई 10 मीन्स में रीच होने वाले hi थे बिना एक भी बात किये…..

संजना के समझ में नहीं आरहे थे के किआ बात हुई है, वो यह सोचने लगी के कल रात को चावला साहब ने उसस्के पिता के साथ देखा वो उस्सको पसंद नहीं आया होगा इसी लिए वो इस तरह अजीब बेहवे कर रहे हैं…. संजना ने एक स्कर्ट और ब्लाउज पहनी थी जिस में वो बहोत सेक्सी दिख रही थी, उस्सने सोचा था पूरा रास्ता चावला साहब का हाथ उसस्के जाँघों को सहलाता जाएगा मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि चावला साहब ने ठीक से उस्सको देखा तक नहीं…. संजना के समझ में नैन आरही थी के किआ करें!

और आखिर में उस ड्राइविंग स्कूल तक पहुँच गए बिना एक बात किये एक दूसरे से. ऐसा आज पहली बार हुआ था जब से दोनों मिले थे. चावला साहब का आशिकाना मिज़ाज, उस्का फ़्लर्ट करना, रोमांस करना सब ग़ायब थे. संजना उदास हो गयी और वो खामोश hi रहना बेहतर समझी.

कार रुकी, चावला साहब उतरे और संजना को बाहर निकलने का इशारा किया. वो उस आदमी से मिले और कहा, “हेरे शी इस, आप कितने बजे फिनिश करोगे उसस्के साथ? और किधर जाओगे सीखने को?” उस आदमी ने कहा शाम 1.30 को एक दूसरा आदमी ड्राइविंग के लिए आने वाला है तो 1.30 को वापस आजाएगा. तो चावला साहब ने कहा ok. और निकलने लगे.

संजना उनको देखती रही मगर उन्हों ने संजना के तरफ देखा भी नहीं और निकल गए…. संजना को रोना आया और रट हुए बाहर निकली उनके पीछे, और जैसे चावला साहब कार के अंदर जाने वाले थे संजना ने कहा, “सुनिए तो” तृप्ति आवाज़ में, और जब चावला साहब ने मुड़के देखा तो यह मोती मोती ेंसू बह रहे थे संजना के दोनों गैलन पर. चावला साहब को बहोत अफ़सोस हुआ, बिल्कुल जेईई एक छोटी बच्ची रोटी है उस तरह से संजना ने सिसकते हुए पूछा, “मुझसे कोई ग़लती हुई किआ जी?”

चावला साहब ने झपट के ज़ोर से संजना को अपने बाहों में भरा और उसस्के दोनों गैलन से उसस्के ेंसुओं को अपने जीब से चाटते हुए कहा, “no माय बेबी, no माय लव, कोई भी ग़लती नहीं हुई है तुमसे, मैं बुसस काम के सिलसिले में कुछ खोया हुआ था इसी लिए बात नहीं किया, ी ऍम वैरी सॉरी डार्लिंग, प्लीज फॉरगिव में, माफ़ करो मुझे मेरी जान. मऊवः.” और चरों तरफ किश किया उन्हों ने संजना को जो रोटी hi जा रही थी. जब रुकी तो संजना ने अपनी बचपने आवाज़ में सिसकते हुए रुक रुक कर कहा, “आप ने ka…kabhi बी.. बी … भी एईई…. ऐसे न… नहीं बेहवे की… किया मेरे साथ…. मैं ने सो… सोचा के…… मैं ने कुछ गलती कर दिया है….” रुक रुक कर सांस लेते हुए बात किया संजना ने एक प्यारी छोटी बच्ची की तरह जिस से चावला साहब का दिल बिल्कुल माँ हो गया.

चावला साहब काफी देर तक उस्सको अपने बाहों में जकरा रहा, उसस्के सर सहलाते हुए और गालों पर चुम्बन देते हुए जब तक के संजना बिल्कुल छुप नहीं हुई.

वो लड़की जो चुलबुली थी जो बात बात पर हीहीहीही करती रहती थी आज इतना रो पड़ा उनके बेहेवियर की वजा से यह खुद चावला साहब को बहोत hi बुरा लगा और खुद को कॉस्ट हुए उस्सने अपने आप से कहा के सान्वी का ग़ुस्सा वो संजना पर उतार रहे थे….. संजना छुप हुई तो उंनसे पूछा, “आप तब तक किआ करोगे, कहाँ रहोगे जब तक मैं ड्राइविंग के लिए जाउंगी?”

चावला साहब ने कहा “तुम मेरा फ़िक्र छोर्रो जाओ और अछि तरह से ड्राइविंग सीखना, ड्राइविंग पर कंसन्ट्रेट करना”

संजना ने कहा, “कैसे फ़िक्र नाह करूँ, आप मुझे यह बताओ के आप को कल किआ हुआ था मैं कितनी फ़िक्र कर रही थी, मैं ने आप को कितने मेस्सगेस भी सेंड किया रात को आप ने एक भी रिप्लाई नहीं किया मुझे, मेरे यहाँ आने से पहले फ़ोन भी नहीं किया, बताइये किआ हुआ था आप को कल?”

“कुछ ख़ास नहीं बुसस बप लौ हो गया था कुछ नहीं खाया था इस लिए, घर पर खाना खा लिया तो सब नार्मल हो गया, इस में कुछ फ़िक्र करने वाली बात hi नहीं है. संजना ने अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कहा, “हाय, मैं ने आप को कुछ भी नहीं दिया था कल लंच के बाद, मैं बिल्कुल भूल गयी थी हम बातों में इतने बिजी थे और आप ने वो प्लान वाली बात कर दिया था तो उस में उलझ गए थे तो खाने पिने का बिल्कुल नहीं सोचा मैं ने भी, ी ऍम सॉरी!”

चावला साहब ने उस से कहा के उस में उस्सकी कोई भी दोष नहीं और माफ़ी मांगने की ज़रुरत hi नहीं. तो संजना ने कहा, “देखो आप, आज ज़रूर खा लेना बारह बजे वो देखिये वहां एक होटल है, एक ढाबा भी है उस तरफ, और उस तरफ मेरा कॉलेज है… और आप मेरा वेट करोगे नाह 1.30 बजे तक?”

चावला साहब ने कहा, “नहीं मैं वापस जा रहा हूँ तुम मुझे मत एक्सपेक्ट करना वापस आने के बाद!”

संजना बिल्कुल हैरान होकर उनको देखते हुए रोनी सूरत बना के कहा, “व्हाट? आप वापस जा रहे हो? तो आये क्यों थे मैं बस से भी तो यहाँ आ सकती थी!”

और चावला साहब ने कहा, “आरी बुद्धू मैं मज़ाक कर रहा हूँ, भला इतनी दूर आकर वापस जाऊंगा मैं किआ? तो संजना ने अपने बाहों को उनके गले का हार बना के उनके गालों को चूमा और चरों तरफ देख कर के कोई नहीं देख रहा तो चावला साहब के होंठों को किश किया संजना ने, और चावला साहब ने कहा, “अंदर आओ कार में!”

संजना ख़ुशी से अंदर गयी और दोनों एक लम्बी किश में एक दूसरे के जीब चूस्ते हुए कार में बैठे रहे जब तक उस ड्राइविंग स्कूल वाले ने अपने ड्राइविंग वाले कार से हॉंक नहीं किया!!

तब झट से संजना उनके बाहों से निकली और अपने ड्राइविंग कार के तरफ बढ़ते हुए मूढ़ कर चावला साहब से कहा, “खाना खाना मत भूलना और ईस्ट में कोई 3 किलोमीटर्स के बाद एक पार्क है वहां वक़्त गुज़ार सकते हो जब तक मैं वापस आऊं okay?”

चावला साहब ने उस्सको वेव किया और संजना चली गयी…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 62 चावला वेटिंग फॉर संजना बूत ....

चावला साहब उस पार्क के तरफ ड्राइव करते गए जिस के बारे में जाते जाते संजना ने बताया. वहां पहुंचे तो कार पार्क करके एक बेंच पर एक दरखत के निचे बैठे और अपने दोनों हाथ सर के पीछे करके बेंच पर लेट गए. उस दरखत पे सब से ऊपर वाले डाली पर एक चिडया घोंसला बना रहे थे, चावला साहब उस्सको अदमीरे करने लगे. चावला साहब ने खुद से कहा, “हम इंसान समझते हैं के सिर्फ हम म्हणत करते हैं दुन्या में, इस छोटी सी चिडया को देखो, कितनी म्हणत से एक एक तिनके को किश तरह जोरर कर एक बाध्य घोंसला बना रहे हैं, कितना हिमत और पेशेंस हैं इस एक छोटी सी जान में, यह नाह घबराती है नाह दरर्ति है, इस्को पता है के यह घोंसला बनाना ज़रूरी है तो किसी भी हाल में यह इस्को बना के रहेगी…. वह वह वह!”

फिर अचानक चावला साहब उठ बैठे और अब खुद से कहा, “साला मैं ये फिलोसोफिकल बातें क्यों कर रहा हूँ, ऐसे hi आदमी शायर बनता होगा हाहाहाहा! अकेलापन, तन्हाई, घुटन यह ऐसे हालात इंसान को शायर बनता होगा हाहाहाहा….. मुझे यहाँ आने की बजाए किसी मैखाने में जाना चाहिए था, एक दो ड्रिंक मार्लोन तो बेहतर फील करूँगा…. लो किसी रेस्टोरेंट की तलाश करते हैं…”

वो अपने कार को वहीँ पार्किंग में चोरर कर चलते हुए शहर के भीड़ भर में गए और चारों तरफ ढूंढ़ते हुए एक रेस्टोरेंट में पहुंचा जहाँ दिन में भी ड्रिंक सर्वे होता है और एक टेबल पर बैठ गया और व्हिस्की का आर्डर दिया. वेटर आया तो उनको मेनू कार्ड दिखाया. चावला साहब ने कहा, “अबे मैं ने व्हिस्की मांगी है खाना नहीं” तो बॉय ने कहा, “सर यहाँ अगर आप खाना आर्डर नहीं करोगे तो ड्रिंक नहीं सर्वे होता!” चावला साहब ने ग़ुस्से में उस्सको देखा और कहा “व्हाट? यह कौन सी रूल है भाई?” वेटर ने कहा, “सर अगर आप ड्रिंक लेना चाहो तो ऑफ लेजा सकते हो, मगर इस वक़्त यहाँ खाने के बिना पीना अल्लोवेद नहीं है!”

तो चावला साहब ने कहा के उस्सको मैनेजर से मिलना है. वो प्रेजेंट नहीं था, तो चावला साहब ने काफी हंगामा किया वहां, बहोत ग़ुस्सा किया और निकल पड़े उस जगह से.

फिर एक दूकान में पहुंचे जहाँ थर्रा सर्वे होता था मगर चोरी छुपके क्यूंकि उस शेर में दिन में ड्रिंक बेचना अल्लोवेद नहीं था. चावला साहब ने वहां की ओनर को कुछ ज़्यादा पैसे दिए और उस से कहा के उसके लिए तीन चार पेग व्हिशक्य का आइस क्यूब के साथ बंदोबस्त करे कैसे भी करके. उस आदमी ने कहा के हो जायेगा… तक़रीबन 2 हज़ार रूपए दिए उस आदमी को. उस्का पहचान था वहां के लोगों से तो पता नहीं उस्सने कैसे करके व्हिस्की और आइस कुबेस ले आये कहीं से.

अब क्यूंकि उस्सको दिख गया के चावला साहब बड़ा आदमी है तो उस ओनर ने उनको अंदर अपने दूकान में पीछे के तरफ एक कमरे में टेबल और चेयर दे दिया बैठ कर आराम से पिने के लिए. उस्सको दो हज़ार रूपए जो मिल गए साहब का बड़ा ख्याल रखने लगा, शायद और पैसे ऐंठने को सोच लिया था उस्सने.

चावला साहब ने 15 मिनट में सभी ड्रिंक ख़तम कर दिए और उस ओनर ने पूछा और लाना है किआ? चावला साहब ने कहा हाँ. तो आदमी ने कहा और पैसा लगेगा इस वक़्त व्हिशक्य ढूंढ़ने के liye….to और 2 हज़ार रुपये दिए साहब ने उस आदमी को जिस ने कुछ देर बाद और 4 पेग और आइस कुबेस चावला साहब के टेबल पर लाकर रख दिया.

चावला साहब पीते हुए बड़बड़ाने लगे लड़खड़ाते जुबां में कहा, “साली सान्वी किआ समझती है अपने आप को, किआ मैं उसस्के सामने घुटने टेकूँगा? नाह! कभी नहीं, मैं बात तक नहीं करूँगा उस से घर वापस जाने के बाद. समझती किआ है अपने आप को महारानी है किआ वो? अरे मैं चावला हूँ, सूरजप्रकाश चावला, बॉस ऑफ़ थे चावला एम्पायर! मैं नहीं झुकता किसी के सामने, मैं ने सब कुछ अपने बल पर किया हुआ है. मैं ने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया, मैं self-made मन हूँ, मुझको अपने ेंसुओं से तुगति है सान्वी साली!! किआ समझती है के मैं नहीं समझता के वो मुझको जान बुझ कर तारपा रही है? हिएण!!! किआ मैं अँधा हूँ? मैं hi मैं सब चाहती है मगर ऊपर से ढोंग करती है? साली उस्सकी वजा से मैं ने प्यारी संजना को रुला दिया आज. बेचारी संजना कितनी भोली है उसस्के ेंखों से कितने ेंसू बहे आज सुबह सुबह……”

चावला साहब ने सिगरेट की फरमाईश किये उस आदमी से और एक जलाया, और बाकी के व्हिस्की को ख़तम किये और नशे में धुत हो गए, बाहर निकले, चार कदम चले और पेवमेंट पर बैठ गए…. आते जाते लोग उस्सको बेवड़ा कहकर चले जाते!

वो वहीँ बैठे रहे ऊपर लोगों को आते जाते देखते और कहते, “मेरी संजना को बोल्दो के मैं इधर हूँ वो मुझको ढूंढेगी!!” जीन लोगों ने उस्सको सुना वो यह समझे के किसी संजना नाम की लड़की की वाजा से वो दीवाना हो गया है, और अपने प्यार को खोने के बाद ऐसा शराबी बन गया है!

उनको उठने की ताक़त नहीं थी इतना पिए हुए थे, एक दो बार तरय किया उठने को मगर गिर्र पड़े. कड़ी धुप थी बाहर और वो उसी धुप में पेवमेंट पर गिर्री पड़े रहे…. उनके ेंखों से सब धुंदला नज़र आरहे थे, सब कुछ दूर और तीन चार में दिखने लगे थे… 8 पेग व्हिशक्य पी लिए थे बिना कुछ खाये तो नशा होना लाज़मी था.. दिन के बारे बज गए थे और उधर संजना करीबन ड्राइविंग लेसन एन्ड करने वाली hi थी.

उधर एक आदमी काफी देर से चावला साहब को उस हालत में देख रहा था, वो खुद एक चोरर दीखता था.. घंटा भर चावला साहब को उस पोजीशन में देखने के बाद वो आदमी उनके पास गए और कहा, “अरे साहब आप ने कितना पी लिए हैं के आप खड़ा भी नहीं हो पा रहे हो? चलिए मैं आप को सहारा देता हूँ उठिये भी….” और उस आदमी ने चावला साहब को सहारा देने के बहाने उनके मोबाइल और कुछ पैसे उनके जेब से निकाल लिए और उनको थोड़ी दूर एक पेयर के निचे बिठा कर चल दिए मोबाइल और पैसों के साथ.

संजना वापस आयी 1.30 को और चावला साहब का वहीँ वेट करने लगी जहाँ उस्सको सुबह को चोर्रा था उन्हों ने. आधे घंटे वेट करने के बाद जब चावला साहब नज़र नहीं आये तो संजना ने उनको कॉल किया मगर मोबाइल स्विच ऑफ ारः था. संजना घबरा गयी और अब उसस्के समझ में नहीं ारः था के वो किआ करें उंनका और वेट करें या बस से वापस घर चली जाए!! वो सोचने लगी के किश तरह सुबह को चावला साहब अजीब बेहवे कर रहे थे उस से बिल्कुल बात भी नहीं किये थे. कुछ खफा सा लग रहे थे जैसे ग़ुस्से में हो, नाराज़ हो…. यह सब सोचते हुए संजना और बहोत परेशान होती जा रही थी…..

कुछ देर और इंतज़ार करने के बाद संजना ने सोचा के उनको पार्क को जाने के लिए कहा था तो उनको उस तरफ देखने को गयी संजना. 3 किलोमीटर्स चलना था और वो पैदल चल कर गयी उधर. और बात यह थी के जहाँ चावला सब निचे ज़मीन पर पड़े हुए थे संजना वहीँ से गुज़री मगर रास्ते के दूसरी तरफ से सामने देखते हुए.

जब संजना पार्क के करीब आयी तो चावला साहब की कार देख कर उनके जान में जान आयी और खुश हुई तो जल्दी से कार के तरफ बढ़ती गयी यह सोचते के चावला साहब की ेंख लग गयी होगी कार में, कार एक पेयर के निचे पार्क थे. मगर संजना को ताजुब हुआ के चावला साहब कार में नहीं थे, फिर भी उस्सने सोचा के वो पार्क में टहल रहे होंगे, तो पार्क के अंदर गयी उनको ढूंढ़ते हुए, पूरा पार्क छान मारा मगर चावला साहब कहीं नहीं थे तो संजना बहोत परेशान हुई, उनके मोबाइल तरय करती गयी पर वो स्विच ऑफ hi आरहे थे फिर उस्सने कार के दरवाज़े को तरय किया तो वो लॉक थे, पार्क में एते जाते लोगों से पूछा के उनको किसी ने देखा क्यूंकि वो इस शहर में अजनबी थे मगर किक्सी को कुछ पता नहीं था. संजना एक बेंच पर बैठ कर रोने लगी.

और आखिर में और 1 घंटा वेट करने के बाद संजना ने अपने पापा से मिलने का फैसला किया वो इसी शहर में काम करता था तो वो गयी अपने पापा की फैक्ट्री.

आनंद से मिलकर सब कुछ बताया संजना ने तो वो भी बहोत हैरान हुआ के कार पार्क में है तो चावला साहब किकधार गए होंगे!

आनंद ने छूती लिया काम से और संजना के साथ उस पार्क तक गए, कार्ट वहीँ था पर चावला साहब नहीं थे. आनंद के समझ में नहीं ारः था के अब किआ करें. सोचा के पुलिस को इन्फॉर्म करें, मगर संजना ने अपने पापा से पूछा, “किआ ठीक होगा पुलिस को बताना? वो बड़े आदमी है अगर बात बढ़ी तो उनको कहीं कोई तकलीफ नाह हो जाए!!”

संजना फिर रोने लगी अपने पापा के बाहों में लिपट कर. आनंद ने उस से कहा के चलें शहर के हर कोने में उस्सको ढूंढे अगर नहीं मिले तब पुलिस को बताना hi पड़ेगा.

और जब शहर में ढूढ़ने लगे तो देखा के चावला साहब निचे ज़मीन पर पड़े हुए हैं बिल्कुल नशे में धुत्त!! संजना ने उनको अपने बाहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. आनंद ने संजना से कहा, “चुप कर देख लोग कैसे देख रहे हैं तमाशा मत कर, एक टैक्सी लेकर अत हूँ इनको घर लेचलते हैं चुप कर तू पागल लड़की!”

संजना ने कहा, “पापा उनके कार का किआ होगा?” आनंद घबरा गया के अब कार को कैसे घर ले जाया जाए!! तो आनंद ने कहा सुन्न एक काम करते हैं टैक्सी ड्राइवर को ज़्यादा पैसे दे कर कहेंगे के साहब की कार में खुद ड्राइव करके हमको घर चौररने को और वो वापस बस से अजय… मेरे पास उतने पैसे तो नहीं है देख साहब के जेब में शायद पैसा हो!!”

जब संजना ने चावला साहब के जेबों में देखा तो नाह पैसा था नाह मोबाइल. आनंद समझ गया के किसी ने हाथ मार दिया उनको ऐसे नशे में देख कर. आनंद ने पूछा, “कार की चाभी तो है के वो भी ग़ायब है?” संजना ने कहा, “सिर्फ कार की चाभी hi है उनके जेब में.” तो आनंद ने कहा, “तो शायद मोबाइल उनके कार में होगा!”

किसी तरह से एक टैक्सी ड्राइवर से आनंद ने बात किया और सब समझाया तो ड्राइवर राज़ी हुआ चावला साहब के कार को ड्राइव करके उनको घर चौररने को आनंद के यहाँ. रास्ते में जाते वक़्त आनंद ने संजना से कहा, “पता नहीं कितना पैसा मांगेगा यह ड्राइवर घर पर तो सिर्फ कोई 500 रूपए होंगे नाह?” तो संजना ने कहा, “पापा मेरे पास 2000 है मैं देदूंगी” आनंद ने कहा, “अरे? तुम्हारे पास कहाँ से आये इतने पैसे?” तो संजना ने कहा, “आप hi की दी हुई पैसे हैं पापा जो मैं सेव करती हूँ!” आनंद ने कहा, “पता नहीं कितने पैसे चुररये चोरर ने इनके जेब से, इनके पास तो 10 या 20 हज़ार ज़रूर होता होगा नाह?”

कार में मोबाइल ढूंढे संजना ने जो नहीं मिला पर ग्लोव बॉक्स में कई क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स थे चावला साहब के नाम से. संजना ने उन् कार्ड्स को अपने हैंडबैग में रख लिए, साहब की ईद और लाइसेंस की कॉपी भी थे और कई कागज़ात थे जो संजना ने वापस ग्लोव बॉक्स में रखे.

संजना चावला साहब को अपने गॉड में लिए बैठी थी और उन् के सर को अपनी छाती से ज़ोर से दबा कर उनके चेहरे को चुम रही थी अपने पापा के सामने. आनंद ने कहा, “हम्म बहोत प्यार ारः है अपने आशिक पर तुझे?!” संजना ने “सशह्ह्ह” कहा आनंद को और ड्राइवर के तरफ इशारा करते हुए कहना चाही के वो सुन लेगा.

घर पहुँचने पर ड्राइवर 1500 रूपीस मांगे जो संजना ने दिए घर से पैसे लाकर. और चावला साहब को खुद अपनी रूम में अपने बीएड पर लगाई संजना अपने पापा के हेल्प से. चावला साहब बेहाल थे, जैसे बेहोश थे बिल्कुल नशे में थे….. आनंद ने कहा अब उस्सको जागने का वेट करना पड़ेगा… वो कुछ कन्हार रहे थे जैसे उस्सको चाओत लगा है कहीं, तो संजना ने उनके शर्ट उतारे आनंद के सामने hi और उनके जिस्म का मुआएना किया के कहीं कोई चोट तो नहीं लगी…. और उनके चेस्ट और गले पर लोवेबिट्स देख कर आनंद ने पूछा, “यह तेरा किया हुआ है नाह?”

संजना मुस्काई और सर झुका कर हाँ में हिलाया अपने पापा से नज़रें चुराते हुए….

आनंद ने कहा, “वह भाई वह, अपनी बेटी को उसस्के आशिक के साथ इस तरह शायद hi कोई बाप ने देखा होगा हाहाहा!”

संजना ने अपने पापा को हलके हलके छोटे छोटे थपड मारते हुए कहा, “अब आप जाओ यहाँ से मुझे इनके साथ रहने दीजिये आप!!”

आनंद ने उस्सको चावला साहब के सात बीएड पर चोरर दिया और चला गया. संजना चावला साहब के चेस्ट को चुम्मन लगी, उनको प्यार करने लगी उनके कपडे सभी उतार डेल और खुद के कपडे भी निकाल फेंकी उस्सने और उनको चारों तरफ किश करने लगी उन् के ऊपर चढ़ कर…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (3420 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
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