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अपडेट 57 चावला बैक होम
चावला साहब काफी दूर निकल गए थे ड्राइव करते हुए और उस्का फ़ोन बजा तो कार पार्क करके कॉल अटेंड किया.
“हाँ बेबी, मैं वापस घर जा रहा हूँ तुम्मो बताने का मौका hi नहीं मिला, सॉरी.”
संजना: “मगर क्यों? अचानक और ऐसे क्यों चले गए आप?”
चावला साहब: “बुसस एक चाकर सा आया था घर के अंदर और दम जैसे घुटने लगा था अचानक… शायद मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, बाहर निकला हवा खाने को तो चक्कर सा आया और उलटी जैसे होने को आया मगर हुआ नहीं….”
संजना फिकरमंद होते हुए पूछा, “कितने दूर पहुंचे हो आप? कितने देर पहले निकले? आप ड्राइव कर पाओगे इतने दूर तक? वहीँ रुकिएगा मैं किसी को लेकर आती हूँ आप के पास!”
चावला साहब: “अरे नहीं फ़िक्र करने की बात नहीं अभी ठीक फील कर रहा हूँ, मैं ने कुछ खाया भी नहीं नाह? ऊपर से व्हिस्की पी लिया था बोतल से बिना आइस कुबेस के बिना खाना काये उस चक्कर का वजा और उलटी का संभावना वो ड्रिंक भी हो सकता है, ी ऍम फाइन मैं ठीक से घर पहुँच जाऊंगा यू don’t वोर्री स्वीटहार्ट.”
संजना: “कैसे वोर्री नाह करूँ? आप अभी अभी यहाँ थे और ठीक थे अब अचानक आप की तबियत बिगड़ गयी, मुझे बहोत फ़िक्र हो रही है मैं आप के पास होना चाहती हूँ! किआ करोगे अगर ड्राइविंग करते हुए आगे वैसा hi फील हुआ तो फिरसे? नहीं आप ड्राइव मत करो नाह मैं किसी के साथ आती हूँ नाह वहां जहाँ रुके हो आप वहीँ रुको प्लीज!”
अरे रात हो चुकी है इस वक़्त किस्सके साथ होगी? मैं 60 कंस से ज़्यादा दूर निकल चूका हूँ और सान्वी ने भी फ़ोन किया तो मैं ने उस से कहा के घर ारः हूँ, रहने दो तुम; कल मिलते हैं नाह! जाओ अपने पापा के पास एन्जॉय करो तुम!”
संजना: “पापा का हो गया, मैं अभी फ्री हूँ और अकेली बाहर से बात कर रही हूँ आप से…. वैसे आप ने कहाँ तक मुझको कमरे के अंदर देखा? मैं ने आप को लास्ट देखा था जब पापा ने शुरू भी नहीं किया था…. बताइए!”
चावला साहब: “इतनी जल्दी कर लिया आनंद ने? पता होता तो वहीँ रुकता, मगर अब देर हो चुकी है, मैं ने तुमको उसस्के ऊपर चढ़ते हुए देखा, जब तुम उठक बैठक करने लगे थे उसस्के ऊपर वहां तक देखा तभी मुझको लगा के मैं चोरर हूँ तुम्हारे घर में और अचानक एक घुटन से महसूस हुई तो बाहर निकला तुरंत तभी!”
संजना: “ओह तो आप ने वो सब देखा बाद में कुछ नहीं देखा, मतलब आप बहोत पहले निकल गए थे, चलो कोई बात नहीं जाइए आप और घर पहुँचते hi मुझको कॉल करना okay? मैं वेट करुँगी आप के कॉल का ठीक है जी?”
चावला साहब: “ok बेबी ज़रूर कॉल करूँगा, जैसे कार को गेराज में करूँ तुमको फ़ोन करूँगा उसस्के बाद तुम फ़ोन मत करना क्यूंकि सान्वी मेरे आस पास रहेगी, और मैं मोबाइल को साइलेंट पर कर दूंगा ठीक है?”
संजना: “ok ठीक है आप सान्वी से कहना का आप को किआ हुआ, कैसा फील हुआ, वो ज़रूर आप का ख्याल रखेगी. Ok bye ड्राइव सेफ एंड रीच सेफ. लव यू मुउउउउआअह!”
चावला साहब: “लव यू तू स्वीटहार्ट, bye. मऊआअह.”
और चावला साहब धीरे धीरे ड्राइव करते हुए सही सलामत घर पहुंचे और कार को गेराज में करते hi संजना को कॉल करके बता दिया के वो घर आ गए हैं, फिर घर के अंदर गए.
रात के 8.30 हो चुके थे और सान्वी अपनी निघ्त्य में थी ऊपर गाउन थी निघ्त्य पर और वो चावला साहब का इंतज़ार कर रही थी दीप्ति को सुलाने के बाद. बुसस कुछ देर पहले उस्सने भी चावला साहब को फ़ोन करके पूछा था के वो कब वापस आरहे हैं तो चावला साहब ने कहा था के बुसस रास्ते में hi हैं तो सान्वी उसी का वेट कर रही थी.
सान्वी लोगे के अंदर से hi उनको देख रही थी जब वो गेराज से निकल कर लोगे के मैं दूर तक आरहे थे और उनके चलने के ढंग से सान्वी को दिख गया के वो ठीक नहीं लग रहे हैं, कुछ थके हुए और बीमार दिख रहे थे. सान्वी पिछले 5 सालों में उनके हर रंग से वाकिफ थी. तो जैसे चावला साहब अंदर दाखिल हुए सान्वी उनके करीब गयी और पहला सवाल जो किया वो यह था, “आप ठीक तो हो? बीमार दिख रहे हो? किआ हुआ आप को?” यह पूछकर सान्वी ने अपने हाथ को उनके कमर पर किया और जैसे उस्सको सहारा देते हुए घर के अंदर लेगये और काउच पर बिठाया उनके चेहरे में देखते हुए. चावला साहब थोड़ा हांफ रहे थे हलके से. सान्वी ने उनके बैठने के बाद उनके चेहरे में देखते हुए फिर से पूछा, “किआ हुआ बताओ तो आप?”
तो चावला साहब ने सान्वी के काँधे पर अपना हाथ थपथपाते हुए कहा, “अरे कुछ ख़ास नहीं बुसस थोड़ा सा चाकर आगया था कुछ देर पहले और दम घुटने लगा था. अभी ठीक हूँ! शायद मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया था मगर अब नार्मल हो गया होगा इसी लिए अब ठीक लग रहा है.”
सान्वी ने कहा, “मगर आप को तो हाई B.P नहीं है, तो अचानक कैसे हो सकता है? आप बैठिये मैं चेक करती हूँ. इलेक्ट्रॉनिक बप चेक करने वाला मशीन और डायबिटीज चेक करने वाला एपरेटस भी थे चावला साहब के यहाँ तो सान्वी गयी वो लेने चेक करने को.
सान्वी जब एपरेटस लेकर आयी और चावला साहब के कमीज़ की बाहें को ऊपर उठाया निचे ज़मीन पर बैठ कर तो उस्सकी गाउन जांघ पर सरक गयी और उस्सकी खूबसूरत सफ़ेद जांघ दिखने लगे और चावला साहब की नज़र वहां पड़े…. बहोत खूब सूरत दिख रही थी सान्वी और इतनी अच्छी खुशभू लगाई थी के चावला साहब को उस्सको सूंघने में बहोत अच्छा लग रहा था.
सान्वी जिस वक़्त उसस्के बाज़ू पर एपरेटस की रेपर बांध रही थी तो उस्सने नोट किया के चावला साहब की नज़र उस्सकी जांघ पर थे और वो बुसस मुस्कुरायी अपना काम करते हुए उस को टाइम नहीं था अपने गाउन को ठीक करने को, और जब मशीन को पंप करने लगी तब अपने गाउन को ठीक किया सान्वी ने उनके चेहरे में देखते हुए.
मशीन ने काम पूरा किया तो रिजल्ट आया के 8.8 थे उनके ब्लड प्रेशर और सान्वी ने कहा, “आप की बप हाई नहीं बल्कि लौ हुई है!!” किआ खाया पिया था आप ने संजना के यहाँ?
चावला साहब ने बताया के सिर्फ लंच किया था बारह बजे उसस्के बाद बिल्कुल कुछ भी नहीं खाया बल्कि आनंद के साथ दो पेग लिया ड्राइव करने से पहले”
तो सान्वी उन् पर चिलायी, डांटा उनको यह कहते हुए, “आप बच्चे हो? दिमाग़ नहीं आप के पास? बिना कुछ खाये ड्रिंक लिया वो भी बारह बजे से कुछ भी दाना मुंह में नहीं डाला और इतने दूर ड्राइव किया, किआ कर रहे हो आप? चाय पानी, बिस्कुट कुछ नहीं दिया संजना ने आप को आफ्टर लंच? जूस भी नहीं पिया आप ने? एक पेप्सी या कोका कोला hi पी लिए होते आप ने तो यह सब नहीं होता!! अब चलए हाथ मुंह धो लीजिये और जल्दी से खाना खाइए बप अपने आप नार्मल हो जाएगा!”
चावला साहब एक बचे की तरह दांत खाने के बाद संजना का हाथ पाकर के उस्सको खिंचा और वो उन् के गॉड में गिर बैठी, तो चावला साहब ने बड़े प्यार से उसस्के गाल पर हाथ फरते हुए कहा, “हाँ मेरी माँ हाँ चलता हूँ खाने को, तू है तो मुझे किआ फ़िक्र करना है.” और सान्वी के गाल पर किश किया चावला साहब ने फिर उसस्के गर्दन को सूंघते हुए कहा, “कौन सा परफ्यूम लगाया है तुमने बहोत अच्छी खुशभू आरही है ह्म्मम्म्म्म” और उन्हों ने सान्वी के गर्दन को चुम्मा, फिर उसस्के गले को और उन् का एक हाथ सान्वी के घुटने से आहिस्ते आहिस्ते ऊपर उस्सकी जांघ तक गयी तो सान्वी उठ कड़ी हुई यह कहते, “बुसस बुसस आप की दुलार, चलिए खाना पड़ोसती हूँ, तब तक आप फ्रेश हो जाईये मैं ने टॉवल रख दिया है बाथरूम में एक क्विक शावर ले लीजिये आप.”
तो बे कीटुएड…………….
चावला साहब काफी दूर निकल गए थे ड्राइव करते हुए और उस्का फ़ोन बजा तो कार पार्क करके कॉल अटेंड किया.
“हाँ बेबी, मैं वापस घर जा रहा हूँ तुम्मो बताने का मौका hi नहीं मिला, सॉरी.”
संजना: “मगर क्यों? अचानक और ऐसे क्यों चले गए आप?”
चावला साहब: “बुसस एक चाकर सा आया था घर के अंदर और दम जैसे घुटने लगा था अचानक… शायद मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, बाहर निकला हवा खाने को तो चक्कर सा आया और उलटी जैसे होने को आया मगर हुआ नहीं….”
संजना फिकरमंद होते हुए पूछा, “कितने दूर पहुंचे हो आप? कितने देर पहले निकले? आप ड्राइव कर पाओगे इतने दूर तक? वहीँ रुकिएगा मैं किसी को लेकर आती हूँ आप के पास!”
चावला साहब: “अरे नहीं फ़िक्र करने की बात नहीं अभी ठीक फील कर रहा हूँ, मैं ने कुछ खाया भी नहीं नाह? ऊपर से व्हिस्की पी लिया था बोतल से बिना आइस कुबेस के बिना खाना काये उस चक्कर का वजा और उलटी का संभावना वो ड्रिंक भी हो सकता है, ी ऍम फाइन मैं ठीक से घर पहुँच जाऊंगा यू don’t वोर्री स्वीटहार्ट.”
संजना: “कैसे वोर्री नाह करूँ? आप अभी अभी यहाँ थे और ठीक थे अब अचानक आप की तबियत बिगड़ गयी, मुझे बहोत फ़िक्र हो रही है मैं आप के पास होना चाहती हूँ! किआ करोगे अगर ड्राइविंग करते हुए आगे वैसा hi फील हुआ तो फिरसे? नहीं आप ड्राइव मत करो नाह मैं किसी के साथ आती हूँ नाह वहां जहाँ रुके हो आप वहीँ रुको प्लीज!”
अरे रात हो चुकी है इस वक़्त किस्सके साथ होगी? मैं 60 कंस से ज़्यादा दूर निकल चूका हूँ और सान्वी ने भी फ़ोन किया तो मैं ने उस से कहा के घर ारः हूँ, रहने दो तुम; कल मिलते हैं नाह! जाओ अपने पापा के पास एन्जॉय करो तुम!”
संजना: “पापा का हो गया, मैं अभी फ्री हूँ और अकेली बाहर से बात कर रही हूँ आप से…. वैसे आप ने कहाँ तक मुझको कमरे के अंदर देखा? मैं ने आप को लास्ट देखा था जब पापा ने शुरू भी नहीं किया था…. बताइए!”
चावला साहब: “इतनी जल्दी कर लिया आनंद ने? पता होता तो वहीँ रुकता, मगर अब देर हो चुकी है, मैं ने तुमको उसस्के ऊपर चढ़ते हुए देखा, जब तुम उठक बैठक करने लगे थे उसस्के ऊपर वहां तक देखा तभी मुझको लगा के मैं चोरर हूँ तुम्हारे घर में और अचानक एक घुटन से महसूस हुई तो बाहर निकला तुरंत तभी!”
संजना: “ओह तो आप ने वो सब देखा बाद में कुछ नहीं देखा, मतलब आप बहोत पहले निकल गए थे, चलो कोई बात नहीं जाइए आप और घर पहुँचते hi मुझको कॉल करना okay? मैं वेट करुँगी आप के कॉल का ठीक है जी?”
चावला साहब: “ok बेबी ज़रूर कॉल करूँगा, जैसे कार को गेराज में करूँ तुमको फ़ोन करूँगा उसस्के बाद तुम फ़ोन मत करना क्यूंकि सान्वी मेरे आस पास रहेगी, और मैं मोबाइल को साइलेंट पर कर दूंगा ठीक है?”
संजना: “ok ठीक है आप सान्वी से कहना का आप को किआ हुआ, कैसा फील हुआ, वो ज़रूर आप का ख्याल रखेगी. Ok bye ड्राइव सेफ एंड रीच सेफ. लव यू मुउउउउआअह!”
चावला साहब: “लव यू तू स्वीटहार्ट, bye. मऊआअह.”
और चावला साहब धीरे धीरे ड्राइव करते हुए सही सलामत घर पहुंचे और कार को गेराज में करते hi संजना को कॉल करके बता दिया के वो घर आ गए हैं, फिर घर के अंदर गए.
रात के 8.30 हो चुके थे और सान्वी अपनी निघ्त्य में थी ऊपर गाउन थी निघ्त्य पर और वो चावला साहब का इंतज़ार कर रही थी दीप्ति को सुलाने के बाद. बुसस कुछ देर पहले उस्सने भी चावला साहब को फ़ोन करके पूछा था के वो कब वापस आरहे हैं तो चावला साहब ने कहा था के बुसस रास्ते में hi हैं तो सान्वी उसी का वेट कर रही थी.
सान्वी लोगे के अंदर से hi उनको देख रही थी जब वो गेराज से निकल कर लोगे के मैं दूर तक आरहे थे और उनके चलने के ढंग से सान्वी को दिख गया के वो ठीक नहीं लग रहे हैं, कुछ थके हुए और बीमार दिख रहे थे. सान्वी पिछले 5 सालों में उनके हर रंग से वाकिफ थी. तो जैसे चावला साहब अंदर दाखिल हुए सान्वी उनके करीब गयी और पहला सवाल जो किया वो यह था, “आप ठीक तो हो? बीमार दिख रहे हो? किआ हुआ आप को?” यह पूछकर सान्वी ने अपने हाथ को उनके कमर पर किया और जैसे उस्सको सहारा देते हुए घर के अंदर लेगये और काउच पर बिठाया उनके चेहरे में देखते हुए. चावला साहब थोड़ा हांफ रहे थे हलके से. सान्वी ने उनके बैठने के बाद उनके चेहरे में देखते हुए फिर से पूछा, “किआ हुआ बताओ तो आप?”
तो चावला साहब ने सान्वी के काँधे पर अपना हाथ थपथपाते हुए कहा, “अरे कुछ ख़ास नहीं बुसस थोड़ा सा चाकर आगया था कुछ देर पहले और दम घुटने लगा था. अभी ठीक हूँ! शायद मेरा ब्लड प्रेशर हाई हो गया था मगर अब नार्मल हो गया होगा इसी लिए अब ठीक लग रहा है.”
सान्वी ने कहा, “मगर आप को तो हाई B.P नहीं है, तो अचानक कैसे हो सकता है? आप बैठिये मैं चेक करती हूँ. इलेक्ट्रॉनिक बप चेक करने वाला मशीन और डायबिटीज चेक करने वाला एपरेटस भी थे चावला साहब के यहाँ तो सान्वी गयी वो लेने चेक करने को.
सान्वी जब एपरेटस लेकर आयी और चावला साहब के कमीज़ की बाहें को ऊपर उठाया निचे ज़मीन पर बैठ कर तो उस्सकी गाउन जांघ पर सरक गयी और उस्सकी खूबसूरत सफ़ेद जांघ दिखने लगे और चावला साहब की नज़र वहां पड़े…. बहोत खूब सूरत दिख रही थी सान्वी और इतनी अच्छी खुशभू लगाई थी के चावला साहब को उस्सको सूंघने में बहोत अच्छा लग रहा था.
सान्वी जिस वक़्त उसस्के बाज़ू पर एपरेटस की रेपर बांध रही थी तो उस्सने नोट किया के चावला साहब की नज़र उस्सकी जांघ पर थे और वो बुसस मुस्कुरायी अपना काम करते हुए उस को टाइम नहीं था अपने गाउन को ठीक करने को, और जब मशीन को पंप करने लगी तब अपने गाउन को ठीक किया सान्वी ने उनके चेहरे में देखते हुए.
मशीन ने काम पूरा किया तो रिजल्ट आया के 8.8 थे उनके ब्लड प्रेशर और सान्वी ने कहा, “आप की बप हाई नहीं बल्कि लौ हुई है!!” किआ खाया पिया था आप ने संजना के यहाँ?
चावला साहब ने बताया के सिर्फ लंच किया था बारह बजे उसस्के बाद बिल्कुल कुछ भी नहीं खाया बल्कि आनंद के साथ दो पेग लिया ड्राइव करने से पहले”
तो सान्वी उन् पर चिलायी, डांटा उनको यह कहते हुए, “आप बच्चे हो? दिमाग़ नहीं आप के पास? बिना कुछ खाये ड्रिंक लिया वो भी बारह बजे से कुछ भी दाना मुंह में नहीं डाला और इतने दूर ड्राइव किया, किआ कर रहे हो आप? चाय पानी, बिस्कुट कुछ नहीं दिया संजना ने आप को आफ्टर लंच? जूस भी नहीं पिया आप ने? एक पेप्सी या कोका कोला hi पी लिए होते आप ने तो यह सब नहीं होता!! अब चलए हाथ मुंह धो लीजिये और जल्दी से खाना खाइए बप अपने आप नार्मल हो जाएगा!”
चावला साहब एक बचे की तरह दांत खाने के बाद संजना का हाथ पाकर के उस्सको खिंचा और वो उन् के गॉड में गिर बैठी, तो चावला साहब ने बड़े प्यार से उसस्के गाल पर हाथ फरते हुए कहा, “हाँ मेरी माँ हाँ चलता हूँ खाने को, तू है तो मुझे किआ फ़िक्र करना है.” और सान्वी के गाल पर किश किया चावला साहब ने फिर उसस्के गर्दन को सूंघते हुए कहा, “कौन सा परफ्यूम लगाया है तुमने बहोत अच्छी खुशभू आरही है ह्म्मम्म्म्म” और उन्हों ने सान्वी के गर्दन को चुम्मा, फिर उसस्के गले को और उन् का एक हाथ सान्वी के घुटने से आहिस्ते आहिस्ते ऊपर उस्सकी जांघ तक गयी तो सान्वी उठ कड़ी हुई यह कहते, “बुसस बुसस आप की दुलार, चलिए खाना पड़ोसती हूँ, तब तक आप फ्रेश हो जाईये मैं ने टॉवल रख दिया है बाथरूम में एक क्विक शावर ले लीजिये आप.”
तो बे कीटुएड…………….