Erotica मोहे रंग दे - Page 15 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

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merry x mas

komaal
 
लिप सर्विस

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एयरलाइन का मेसज था , ... बनारस से उनकी फ्लाइट ४५ मिनट लेट थी , मतलब मेरे साथ ४५ मिनट और ,...

उनका बस चलता तो वही सीढी पर , ... लेकिन मैंने किसी तरह , और कमरे में घुसते ही ,...

लेकिन इस बार कमान मैंने अपने हाथ में ले ली ,

मैं जानती थी उनका बल चला तो मुझे पलंग पर पटक कर वो चालू हो जाएंगे , मन तो मेरा भी यही कह रहा था ,

पर टिकट ढूंढने में इतना टाइम तो लग नहीं सकता था ,

फिर नीचे टैक्सी भी आ गयी थी और वो दस मिनट बाद हल्ला मचाना शुरू कर देती और साथ ही में इनकी माँ और भौजाई भी , ...

तो बस

कमरे में उन्हें रोक कर मैं घुटनों के बल बैठ गयी और शरारत से उनके ज़िप के ऊपर से अपने कोमल कोमल हाथों से रगड़ने लगी ,

" हे टिकट , ... "

वो अभी तक खेल अच्छी तरह समझ नहीं पाए थे ,

" बुद्धू वहीँ हैं जहाँ मैंने रखा था , तेरे पर्स में और पर्स पैंट की बायीं जेब में , ... सिम्पल "

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और उसके बाद मेरे मुंह के पास बात करने के अलावा भी बहुत से काम थे ,

मेरे होंठ पैंट में उनके उभर रहे बल्ज पर कस के मैंने चुम्मी ली , होंठों से रगड़ा , और तम्बू में बम्बू एकदम खड़ा हो गया , ...

मेरे होंठों ने उनकी ज़िप खोली और टाइम कम था ,

इसलिए साथ में उनकी बेल्ट खींच कर नीचे कर दी,

और अब मोटा तन्नाया खड़ा खूंटा , सीधे चड्ढी फाड़ते हुए , ...

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खूब बदमाश लग रहा था उतना ही प्यारा भी ,

बस मेरे होंठों ने चड्ढी के ऊपर से ही उसे गप्प कर लिया , लगी चुभलाने चूसने ,...

अब मैं समझ गयी थी की उनके नितम्ब भी कम सेंसिटिव नहीं हैं ,

और मेरे दोनों हाथ उनके पिछवाड़े , पहले तो चड्ढी के ऊपर ही दबाते सहलाते , फिर हलके हलके मैंने सिर्फ पीछे चड्ढी सरका दी ,

और मेरी उँगलियाँ उनके नितम्बो पर कभी सुरसुरी करतीं तो कभी छेड़ती , ...

असर सामने पड़ रहा था , खूंटा एकदम तन्नाया , बेसबरा , बेक़रार , ...

पर मैं चड्ढी के ऊपर से चूस चूस कर के उसकी हालत और ख़राब कर रही थी।

तड़पे ,

अगले पांच दिन तो मैं भी तड़पने वाली थी इसके लिए , ...

और फिर मेरे होंठों ने आगे से भी चड्ढी पकड़कर नीचे खींचा , लेकिन बस थोड़ा सा ,

मोटे मूसल का बस बेस दिख रहा था ,

और अब मेरी उँगलियों ने वहां हलके हलके सहलाना सुरसुरी करना शुरू कर दिया , ...

और दांतों से पकड़ कर चड्ढी थोड़ा और ,

आधे से ज्यादा , ' वो ' खुल गया था , पर मैंने अब उसे खोलना छोड़ दिया ,

होंठ भी हटा दिए और अब ढेर सारे छोटे छोटे चुम्बन उनकी जाँघों पर , एकदम खूंटे के ठीक नीचे चारो ओर ,

वो जोर से सिसक रहे थे , आंखे उनकी बंद हो चुकी थीं ,

और मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था , ... एक झटके से मैंने अपने हाथ से चड्ढी सरका कर घुटने तक , पैंट के साथ ,

फटा पोस्टर निकला हीरो ,

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मेरा बित्ते भर का,

मेरी कलाई से भी मोटा ,

मेरा हीरो बाहर , एकदम ९० डिग्री पर , सुपाड़ा थोड़ा खुला थोड़ा बंद ,

दुल्हन का घूँघट हटाने का हक़ तो मेरा ही था ,

बस होंठों से बहुत हलके से दबाया ,

और धीरे धीरे होंठों के जोर से सुपाड़े का चमड़ा खोल दिया ,

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मोटा , मांसल , मस्त सुपाड़ा ,

जिसने पहली रात को मेरी फाड् के रख दी थी ,... और जिसके बारे में सोच सोच के मैं पनिया जाती थी , ...

लेकिन अभी मैं उसे तंग करना चाहती थी ,

मैंने होंठ हटा लिए और मेरी जीभ ,

सिर्फ जीभ की टिप , सुपाड़े के बीचोबीच, छेद पर , पी होल पर ,

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जैसे जीभ की टिप से मैंने उसे चोद देना चाहती होऊं ,

खूब खूब कस कस के सुरसुरी ,

और मेरी कोमल कोमल उँगलियाँ भी मैदान में आ गयीं , ...

नहीं नहीं , उनके तड़पते खूंटे को न छुआ न पकड़ा , ... बस मेरे नाख़ून

मेरे लम्बे पेंटेड नाख़ून कभी उनके बॉल्स को तभी कभी जांघो को , ...

एकदम हालत खराब थी उनकी , ...

इसलिए मेरी जीभ ने लेवल और आगे बढ़ाया और अब पूरे खुले मोटे सुपाड़े पर ,

सपड़ सपड़ , घूम घूम के सिर्फ सुपाड़े पर चाटती ,

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सच्च में इसके स्वाद की अब मैं दीवानी हो गयी थी ,

पर उनकी हालत ख़राब हो रही थी , बोले , ...

" हे लो न अंदर ,... "

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वो तो मैं लेती ही , उनके कहने की जरूरत नहीं थी ,

पर जब उन्होंने कह दिया तो मैं उन्हें और तड़पाने , छेड़ने में लग गयी

एक हाथ से कस के उनकी बॉल्स को पकड़ कर दबाने लगी , दूसरे हाथ से उनके पिछवाड़े के आलमोस्ट सेंटर पर

और जीभ बस सुपाड़े पर लपड़ सपड़ , रस ले ले कर ,...

' लो न , चुसो , ... न , ... '

उनकी हालत खराब हो रही थी ,

और अबकी मेरे होठ सुपाड़े से हट गए , एक हाथ से मैंने उनके लंड के बेस को पकड़ लिया था और उन्हें देखते ,

उनकी आँखों में आँख डाल कर , मुस्कराते बोली

" लेकिन अगली बार जब आओगे न , तो तेरे उस माल से चुसवाऊँगी , ... "

वो कुछ नहीं बोले ,

हाँ आंखे उन्होंने खोल दी ,

मैंने फिर छेड़ा ,

" अरे वही तेरे उस माल से ,

बोल चुसवाओगे न उस अपने माल से , ... "

" ठीक है , लेकिन अभी तो तू ,... ले न मुंह में ,... "

वो बोले और यही तो मैं सुनना चाहती थी उनके मुंह से ,

" ओके पक्का न , तो अगली बार गुड्डी रानी चूसेंगी इसे , ... लो "

मैं हंस के बोली और मेरा मुंह बंद हो गया ,

उन्होंने मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया था ,

और मैं मुँह खोल कर उनका सुपाड़ा अंदर ले ही रही थी की उन्होंने एक करारा धक्का मारा ,

जैसे किसी कुँवारी की सील तोड़ रहे हो , अपनी उस बहिनिया की झिल्ली फाड़ रहे हों ,

और पूरा सुपाड़ा एक बार में मेरे मुंह में ,

गप्पाक,

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मुख सेवा

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" ओके पक्का न , तो अगली बार गुड्डी रानी चूसेंगी इसे , ... लो "

मैं हंस के बोली और मेरा मुंह बंद हो गया ,

उन्होंने मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया था ,

और मैं मुँह खोल कर उनका सुपाड़ा अंदर ले ही रही थी की उन्होंने एक करारा धक्का मारा , जैसे किसी कुँवारी की सील तोड़ रहे हो ,

अपनी उस बहिनिया की झिल्ली फाड़ रहे हों ,

और पूरा सुपाड़ा एक बार में मेरे मुंह में ,

गप्पाक,

और अब मेरी हालत ख़राब हो रही थी ,

जो मैं इतने देर से उन्हें तड़पा रही थी छेड़ रही थी , सूद सहित मुझे उसका बदला मिल रहा था ,

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वो कस के मेरा सर पकडे अपना बीयर कैन ऐसा मोटा लंड मेरे मुंह में ठेल रहे थे , पेल रहे थे , धकेल रहे थे ,

मेरा गाल फूला हुआ था , मेरी आँखे बाहर को निकली पड़ रही थी , मेरे मुंह से खाली गों गों की आवाज निकल रही थी ,

लेकिन मैं भी अपने साजन की सजनी थी ,

बस अगले पल ही , उनके धक्के के साथ साथ ,

मेरी जीभ नीचे से उनके सुपाड़े को चाट रही थी , मेरे होंठ कस के उस मोटे खूंटे से रगड़ रगड़ रहे थे ,

और मैं कस कस के चूस रही थी

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मेरे दोनों हाथ भी अब मैदान में आ गए थे , एक जो लंड के बेस पर था , अब कस के लंड को मुठिया भी रहा था

और दूसरा प्यार से उनके बॉल्स को सहला रहा था ,

अभी भी दोनों हाथो से उन्होंने मेरे सर को कस के , झुक के पकड़ रखा था ,

पर अब उनका जोर कम हो गया था , धक्के मारने भी उन्होंने बंद कर दिया था ,

आधे से ज्यादा , ६-७ इंच खूंटा अंदर था ,

और अब कमान मेरे हाथ में थी , ...

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मैं खुद मुंह अंदर बाहर कर रही थी , आलमोस्ट सुपाड़ा तक बाहर कर , फिर धीरे धीरे , आलमोस्ट पूरा ,...

और मेरे गुलाबी टीनेजर रसीले होंठ ,

लंड पर रगड़ते दरेररते , घिसते , साथ में मेरी नाचती उछलती जीभ नीचे से उस चर्मदण्ड पर ,

और कस के मैं चूस रही थी ,

और मेरी आँखे उनकी आँखों में झाँक कर जैसे बार बार याद दिला रही थीं , जो मैंने उनसे कबुलवाया था

ये मोटा खूंटा ,

उस कच्ची कली , नए नए टिकोरों वाली के मुंह में , ...

बिलबिलायेगी , चीखेगी , लेकिन अगर एक बार खूंटा मुंह में धंस गया न मेरी ननदिया के ,

उस एलवल वाली के , ... बस ,

ये सोच सोच के मैंने चूसने की रफ्तार बढ़ा दी , और

शायद ये भी वही सोच रही थी , वो कैसे उनका मस्त खूंटा अपने मुंह में लेगी , और बस ,

सर तो उन्होंने पकड़ ही रखा था , बस एक से एक करारे धक्के , ...

और उनका सुपाड़ा मेरे हलक तक , ...

एक बार तो लगा मेरी साँस रुक जायेगी , जबरदस्त गैग रिफ्लेक्स

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लेकिन धीरे धीरे मैंने अपने ऊपर कंट्रोल किया , ... पहली बार तो मैं उनका पूरा घोंट नहीं रही थी , लेकिन हर बार , वही , ..

कुछ देर बाद मैं नार्मल हुयी और फिर तो खूब कस कस के मैं चूस रही थी , चाट रही थी ,

जड़ तक लंड वो ठूंसे हुए थे , पूरा बित्ते भर का मेरे अंदर था , आलमोस्ट बॉल्स तक ,

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दो मिनट ,

चार मिनट , और

थोड़ा प्रेशर उन्होंने हलका किया और मैंने मुंह धीरे धीरे बाहर किया ,

मेरे गाल थके लग रहे थे , गले में भी लगता था कुछ छिल गया , ...

अब सिर्फ सुपाड़ा मेरे मुंह के अंदर था , गाल की मसल्स को कुछ आराम मिल रहा था ,

मैं मजे से सुपाड़े को चूस रही थी , चुभला रही थी , ...

पर सिर्फ सुपाड़े से न इनका मन भरने वाला था न मेरा , ...

बस एक बार फिर धीरे धीरे मैंने प्रेस करना शुरू कर दिया , और अपने गले के , बाड़ी के पूरे जोर से

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अबकी बिना इनके धक्के के , मैंने पूरा घोंट लिया , एक मिनट पूरा घोंट के मैं चूस रही थी , फिर हलके हलके सुपाड़े तक बाहर ,

और कुछ देर बाद फिर अंदर ,...

तब तक नीचे से इनकी भौजाई की आवाज आयी

टिकट मिला की नहीं , ...

मेरा तो मुँह फंसा था , वही बोले , हाँ अभी मिला है बस आ रहे हैं हम लोग ,

और मैंने चूसने की रफ़्तार बढ़ाई ,

मेरी निगाह घडी रानी पर पड़ी , ...

पंद्रह मिनट हो गए थे मुझे चूसते , पर

इस स्साले मेरे साजन में एक बड़ी गड़बड़ थी , ... क्विकी भी इसकी ३० मिनट से कम टाइम नहीं लेती थी ,

और इधर मेरे गाल की मसल्स थक रही थीं , ...

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लेकिन मेरे पास कोई एक हथियार था क्या , ... मैंने झट से अपने ब्लाउज के बटन खोले , फिर फ्रंट ओपन ब्रा का हुक , ...

मेरे दोनों जोबन , ३४ सी , बाहर ,
 
जोबन का जोर

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इस स्साले मेरे साजन में एक बड़ी गड़बड़ थी , ...

क्विकी भी इसकी ३० मिनट से कम टाइम नहीं लेती थी ,

और इधर मेरे गाल की मसल्स थक रही थीं , ...

लेकिन मेरे पास कोई एक हथियार था क्या , ... मैंने झट से अपने ब्लाउज के बटन खोले , फिर फ्रंट ओपन ब्रा का हुक , ...

मेरे दोनों जोबन , ३४ सी , बाहर ,

और अब खूंटा उनके बीच में ,

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अपनी दोनों मांसल रसीली गदरायी चूँचियों को पकड़ के मैं उनके लंड को चोद रही थी ,

नहीं मेरे होंठ खाली नहीं बैठे थे ,

कुछ पल में ही एक बार फिर , सुपाड़ा मेरे मुंह में था ,

और वो मेरी चूँची चोद रहे थे

मैं उनका लंड चूस रही थी ,

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मस्ती से हम दोनों की हालत ख़राब थी ,

जब वो मोटा मूसल मेरी दोनों चूँचियों को रगड़ते दरेरते घिसटते निकलता , बता नहीं सकती कितना मज़ा आ रहा था

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पर कुछ देर में सुपाड़ा चूसते एक बार फिर मैंने आधे से ज्यादा लंड घोंट लिया और मुख मैथुन जोर से स्टार्ट हो गया ,

वो मेरे सर को पकड़ के कस कस के धक्के ऐसे मार रहे थे जैसे मैं लंड नहीं चूस रही होऊं ,

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वो मेरे मुंह को चोद रहा हो , बुर समझ के ,...

लेकिन तब तक नीचे से आवाज आयी , ... अबकी मेरी सासू माँ थी

" अरे वो टैक्सी वाला हल्ला कर रहा है ,... "

२२ मिनट ,... घडी रानी ने सूचना दी , ... और मैं बिना उन्हें झाड़े छोड़ने वाली नहीं थी , पर टाइम भी ,...

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मुझे याद आया एक वो अच्छी वाली फिल्म मैंने देखी थी , ... और नेट पर भी पढ़ा था ,...

नहीं नहीं ये ट्रिक इनकी सलहज ने नहीं सिखाई थी , ...

ये मेरी माँ , इनकी सास ने बताई समझायी थी ,

जब मेरी शादी पक्की हुयी उसी दिन ,

और फिर जब मेरी विदायी हो रही थी , एक बार फिर से इनकी सास ने ,...

रोते हुए भी मुझे हंसी आ गयी , इनकी सास भी न

मेरी एक ऊँगली इनके पिछवाड़े पर थी ही , एकदम सेंटर पर ,

गच्चाक ,

अपनी कलाई की पूरी ताकत से मैंने पेल दिया , ..

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दो धक्का और अबकी जड़ तक ऊँगली इनकी गांड में

गोल गोल मैं घुमा रही थी और साथ में मूसल कस के चूस रही थी

गोल गोल घुमाते मिल गया मैंने जो पढ़ा था ,

प्रोस्ट्रेट , ... मर्दो का जादुई का बटन ,...

और मैंने वहां दबाना , मालिश करना , रगड़ना शुरू कर दिया ,

असर दो मिनट में हो गया ,

मूसल एकदम जड़ तक मेरे गले तक मेरे मुंह में धंसा था , ... और मेरी ऊँगली भी जड़ तक इनके पिछवाड़े ,

दूसरे हाथ से कस कस के मैं मूसल को उसके बेस पर दबा दबा के मुठिया भी रही थी

उनकी देह एकदम ढीली पड़ने लगी ,

लंड एकदम कड़ा , ... और फट गया ज्वालामुखी , सीधे मेरे मुंह में , ... बल्कि गले में

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सफ़ेद मलाई की फुहार , सीधे मेरे गले में , गले से पेट में

मेरी पकड़ भी ढीली हो गयी थी पर प्रोस्ट्रेट को रगड़ना मैंने कम नहीं किया था ,

उनकी हालत एकदम खराब थी ,...

और जब खूंटा बाहर निकला , ...

२५ मिनट ,...

लेकिन मैं एक बात भूल गयी थी , ये डबल बैरेल गन थी , एक बार में खाली नहीं होती

और जब दूसरी बार फुहार निकली तो सीधे मेरे चेहरे पर ,

गाढ़ी थक्केदार दही मेरे चेहरे पर लिपी पोती , ...

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मैंने झट से साडी ठीक की , बलाउज के बटन बंद किये , ब्रा के हुक भी

और इन्होने अपनी पैंट ऊपर चढ़ा ली , ...

लेकिन तब तक नीचे से फिर गुहार आ गयी

मैं शीशे में अपना चेहरा देख रही थी , चेहरा दिख नहीं रहा था , सिर्फ इनकी रबड़ी मलाई ,...

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वो बदमाश लड़का देख देख के मुस्करा रहा था ,

मैं कौन कम थी , मैं भी उसे देख के मुस्करायी , ...

और न तो साफ़ करने का टाइम था न मैं साफ़ करना चाहती थी , ..

बस चेहरे पर अच्छी तरह फैला लिया ,

सास जेठानी देखें तो देखे ,

आखिर उन्ही का लड़का देवर है , और वही तो गयी थीं मुझे लाने ,...

सच में टैक्सी वाला हल्ला कर रहा था , बाबतपुर ( बनारस के एयरपोर्ट ) से उसे कोई और सवारी पिक करनी थी ,
 
साजन गए परदेस

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लेकिन तब तक नीचे से फिर गुहार आ गयी

मैं शीशे में अपना चेहरा देख रही थी , चेहरा दिख नहीं रहा था , सिर्फ इनकी रबड़ी मलाई ,...

वो बदमाश लड़का देख देख के मुस्करा रहा था ,

मैं कौन कम थी , मैं भी उसे देख के मुस्करायी , ...

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और न तो साफ़ करने का टाइम था न मैं साफ़ करना चाहती थी , ..

बस चेहरे पर अच्छी तरह फैला लिया ,

सास जेठानी देखें तो देखे , आखिर उन्ही का लड़का देवर है , और वही तो गयी थीं मुझे लाने ,...

सच में टैक्सी वाला हल्ला कर रहा था , बाबतपुर ( बनारस के एयरपोर्ट ) से उसे कोई और सवारी पिक करनी थी ,

टैक्सी चली गयी उन्हें लेकर , मैं देर तक वहीँ चुप चाप खड़ी रही ,

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मुझे पता भी नहीं चला , कब मेरी जेठानी सास अंदर गयीं , क्या वो बोल रही थीं

बस मैं चुपचाप ऊपर आकर अपने कमरे में लेट गयी , पेट के बल तकिये में मुंह छिपा के

मैं रो नहीं रही थी , सच्च

उन्होंने कसम धरायी थी ,

पर आंसू उनपर मेरा क्या कंट्रोल था , अपने आप आँख से निकल रहे थे।

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तकिया पूरी गीली हो गयी।

थोड़ी देर में मैं सुबक रही थी , कस के चादर को भींचे ,...

ये भी न ,...

आये ही क्यों , ... बस एक दिन के लिए ,... जलते तपते तवे पर कोई दो बूँद पानी छींट दे बस वैसे ही लग रहा था ,

उनके साथ बिताये एक एक पल , ... अब कांटे की तरह चुभ रहे थे , ...

ये लड़का बहुत बहुत ख़राब है , ... इसने मेरी सारी आदते ख़राब कर दी , ...

मुझे तकलीफ होने वाली भी होती तो उसे मुझसे पहले पता चल जाता , और

वो पास में होता न तो मैं और कुछ नहीं करती ,...

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कम से कम उसके सीने में सर छुपाकर , ...

फिर तो मैं खुद को भुला लेती , ... खुद क्या पूरी दुनिया को , ...

पहले दिन से ही उसकी यही हालत है , तड़प वो रहा था मेरे नाम को पता करने के लिए , ... मुझसे दो मुंह बतियाने के लिए , ...

लेकिन उसे क्या मालूम , मेरी हालत उससे कम खराब नहीं थी ,

हाँ मैं थोड़ी कम झिझकती लजाती थी उससे और मैंने उसका नाम पता कर लिया , ...

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और सिर्फ जताने के लिए मैंने उसका नाम पता कर लिया है , ...

सारे लड़केवालों में सिर्फ उसी का नाम ले ले कर गारी दी , सिर्फ उस का ही नाम नहीं , उस की कजिन्स का भी नाम ले ले कर ,...

किसी तरह तकिया से मैंने मुंह उठाया , दीवाल की ओर ,

घडी बता रही थी , उन्हें गए अभी सिर्फ २५ मिनट हुए हैं , ...

ये घडी रानी भी न ,.. मेरी ननदों की तरह स्साली एकदम पक्की छिनार , ...

जब वो पास रहते हैं न तो दोनों सुइयां , ... स्साली ऐसे दौड़ती है , जैसे १०० मीटर का वर्ड रिकार्ड तोड़ना हो ,...

घण्टे वाले सुई सेकेण्ड की तरह दौड़ दौड़ कर ,.. मैं इनके पास आती हूँ , नौ बजे रात में ,.... ( मेरी सास का हुकुम , पहले दिन से ही , कभी भी मुझे नौ बजे से एक पल देर नहीं हुयी , वो आठ बजे से घर सर पर उठा लेती हैं ) ,

और ये मेरी सौतन घडी , ... बेईमान ,... घंटे भर में नौ बजे से छह बजा देती है ,

बिना इस बात की परवाह किये की कोई देख रहा है , पर इत्ती देर हो गए इन्हे गए हुए और ,... अभी सिर्फ २५ मिनट

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वो साथ रहते हैं तो घण्टे की सुई सेकेण्ड की तरह चलती है , और

ये अलग हैं तो सेकेंड की सुई घण्टे की तरह चल रही है।

घडी को कोसने में मेरे आंसू कुछ सूख गए , ...

मैंने सोचा उन्हें फोन लगाऊं , फिर याद आया , ...

वो भी न ,... मेरी लालच में वो लड़का कुछ भी ,... कुछ भी मतलब कुछ भी ,... उन्हें प्रोजेक्ट करना था , आज रात में सबमिट करना है , पर वो यहाँ पर

लालची ,... मैं सोच के मुस्करा पड़ी ,... इएकदम सुपर फास्ट ,... इ नकी ये आदत सब को पता है , भाभी को मम्मी को ,...

मैंने पूछा भी प्रोजेक्ट कैसे पूरा करोगे तो बोले , लौटते हुए , रास्ते में आजमगढ़ से बनारस ढाई घंटे , डेढ़ दो घंटे प्लेन में , ...

और डेढ़ घंटे बैंगलौर में टैक्सी में

एकदम सुपर फास्ट करूंगा तो हो जाएगा ,...

और मैं उनका लाया आई फोन देखती रही ,... फिर रजाई ओढ़ ली ,.. शायद नींद में मुलाकात हो जाए ,

नींद आयी भी पर ,...

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लेकिन नींद की जगह सुबकियां आ रही थीं , बस उन्ही का चेहरा , ... और फिर उन की बदमाशियां ,

पर थोड़ी देर में ,

रात भर न मैं सिर्फ जगी थी , बल्कि

मेरी उस, मेरे ननद के यार ने , क्या रगड़ाई की थी , पूरी देह टूट रही थी ,

और ननद , वही उस गुड्डी को नाम ले ले के कितना चिढ़ाया था मैंने , और उस का कितना खामियाज़ा भी भुगतना पड़ा मुझे ,

कैसे गाली दे दे कर , ...

और यही सोचते सोचते , सो गयी मैं , ....

एकदम घोड़े बेच के

( मैंने और इनकी जेठानी ने इस मुहावरे को थोड़ा बदल दिया था , ख़ास तौर से जब ये सामने होते थे , हम लोग बोलते, ननद बेच के )

और जगी पूरे घंटे , डेढ़ घंटे बाद , ...

जगाया किसने , ...

वही मेरी नींद का दुश्मन , मेरे कपड़ो का दुश्मन ,...
 
मेरी नींद का दुश्मन

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और जगी पूरे घंटे , डेढ़ घंटे बाद , ...

जगाया किसने , ...

वही मेरी नींद का दुश्मन , मेरे कपड़ो का दुश्मन ,...

वो रहते तो सोने नहीं देते

( और वो चाहते भी तो मैं सोने नहीं देती , अब तो 'उस के लिए ' मेरा मन इन से भी ज्यादा करता था )

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और नहीं रहते तो उनकी यादें नहीं सोने देतीं

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उन्होंने और उनके दिए आई फोन ने ,

वो बनारस पहुँच गए थे ... बाबतपुर एयरपोर्ट , अभी बोर्डिंग पर थे

जैसे कई बार आप बहुत सोना चाहें तो नींद नहीं आती , उसी तरह जब आप बहुत बात करना चाहें तो बात भी समझ में नहीं आती ,

बस उस बदमाश की आवाज सुनना काफी था ,

वो बोलते रहे मैं सुनती रही , ... जब कुछ समझ में नहीं आया तो बस वही बात बोली ,

" अपना ख्याल रखना "

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और जैसे कोई लूज बाल पर सेट बैट्समेन चौक्का मार दे , वो हँसते हुए बोले ,

" तू है न उसके लिए "

मैंने कुशल राजनीतिज्ञ की तरह बात बदल दी , ...

" वो तुझे प्रोजेक्ट रिपोर्ट , कम्प्लीट करनी थी न ... बहुत पिटाई होगी तुम्हारी "

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" काफी हो गयी , बाकि प्लेन में कर लूंगा " वो बोले ,

पर वो लड़का भी न उसे कुछ भी नहीं आता था सिवाय मेरा ख्याल करने के ,

और पता नहीं कहाँ से उसने कैमरे , कमरे में , मेरे मन के कोने कोने में लगा रखे थे , उसे सब पता चल जाता था ,

वैसे तो एकदम बुद्धू , पर ,...

और उसने पूछ लिया ,

" रोई तो नहीं , सच बोल ,... "

मैं क्या बोलती ,

मुश्किल से अपनी सुबकियां रोक पायी , तकिया पूरा गीला था , मेरे चेहरे पर भी , ...

बहुत मुश्किल से झूठ बोल पायी ,

" नहीं नहीं रोऊँगी क्यों , ... "

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और एक बार फिर आंसुओं की धार फूट पड़ी ,

" बस पांच दिन की बात , अगले सैटरडे , फिर मैं आ जाऊँगा , " उनकी आवाज आयी ,

जेठानी जी की बात याद करके मैं मुस्करा पड़ी , चोर

" चोर की तरह मत आना , आधी रात को ,... "

मैं बोली

" नहीं नहीं अबकी शाम को ही जाऊँगा , ... पक्का "

वो बोले , तबतक पीछे से कुछ अनाउंसमेंट सुनाई पड़ा और वो बोले बोर्डिंग शुरू होगयी है , बंगलौर पहुँच के फोन करता हूँ , "

और फोन काट दिया।

मैं बिना बोले देर तक फोन देखती रही , जैसे अभी फोन से फिर उनकी आवाज आनी शुरू हो जायेगी , ...

मुझे मालूम था , अब ज़नाब गगन विहारी होंगे , दो ढाई घंटे से पहले उनकी आवाज सुनने का कोई चांस नहीं , ...

और फोन पकडे पकडे , देखते देखते कब मैं सो गयी पता नहीं ,

उठी घंटे सवा घंटे बाद , लेकिन जानबूझ कर मैंने आँख नहीं खोली ,

गुड्डी थी ,

वही उनका माल ,और उसकी दो सहेलियां , एकदम पक्की वाली।
 
ननदें , ... गुड्डी

मैं बिना बोले देर तक फोन देखती रही , जैसे अभी फोन से फिर उनकी आवाज आनी शुरू हो जायेगी , ...

मुझे मालूम था , अब ज़नाब गगन विहारी होंगे , दो ढाई घंटे से पहले उनकी आवाज सुनने का कोई चांस नहीं , ...

और फोन पकडे पकडे , देखते देखते कब मैं सो गयी पता नहीं ,

उठी घंटे सवा घंटे बाद , लेकिन जानबूझ कर मैंने आँख नहीं खोली ,

गुड्डी थी , वही उनका माल ,

और उसकी दो सहेलियां , एकदम पक्की वाली।

पता तो मुझे चल गया था ,

भौजाइयों को तो ननदों की महक ,

और खास तौर से वो गुड्डी और उसकी सहेलियों की तरह कच्ची उमर वाली हों , तो सपने में भी लग जाती है , और ये तीनों तो नयी नयी टीनेजर में पहुंची किशोरियों की तरह चहक रही थीं ,

लेकिन जानबूझ कर मैंने आंखे और कस के मींच ली ,

" भाभी उठिये न , कित्ता सोयेंगी , ... "

ये गुड्डी थी , इनकी ममेरी बहन , वही एलवल वाली।

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" रात भर भैया ने सोने नहीं दिया होगा , ... "

ये लीला थी , गुड्डी की सहेसी गुड्डी के घर के बगल में ही रहती थी , उसी मोहल्ले में।

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गुड्डी की तो ब्रा मैंने खोल कर देख ली थी , २८ सी , इसकी नहीं देखी थी , पर मेरा अंदाज ये था की ३० से कम नहीं होगी , कप साइज भी सी या डी होगी , और मेरी भौजाइयों की सोहबत ने सिखा दिया था की मैं समझ जाऊं , ... ये मेरी ननद की सहेली , या तो आलरेडी चल रही होगी , या कम से काम रगड़वा मिजवा तो रही ही होगी , अपनी अमिया।

लम्बाई गुड्डी के बराबर ही होगी , ५.३ पर देह थोड़ी ज्यादा भरी , सिर्फ सीना ही नहीं चूतड़ भी थोड़े ज्यादा बड़े , रंग गुड्डी ऐसा गोरा तो नहीं था , गुड्डी तो जैसे कोई दूध में दो बूँद गुलाबी रंग के डाल दे उस तरह गोरी थी , पर ये ,... हाँ सांवली भी नहीं। पर नमक बहुत था , ...

" तू तो कह रही थी तेरे भैया , ... बाहर गए हैं। "

पूछने वाली रेनू थी , गुड्डी की दूसरी सबसे क्लोज सहेली , और मैं इन दोनों से मिल चुकी थी।

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इन के जाने के बाद गुड्डी दो बार आयी थी , अपने स्कूल से इन दोनों के साथ , ...

रेनू , के उभार लीला ऐसे तो नहीं लेकिन गुड्डी से थोड़े हलके से ज्यादा , बोलने में भी बहुत मुंहफट , मैं और जेठानी जी उसे चिढ़ाते थे , तो वोई भी मुंह खोल के जवाब देती थी , गंदे से गंदे मजाक का बुरा नहीं मानती थी। मेरी उससे एकदम पक्की दोस्ती हो गयी थी।

अनुज जब गुड्डो के चक्कर में , चक्कर लगाता था तो भी ये दोनों , गुड्डी और अनुज के साथ , फिर तो मैं गुड्डी , रेनू और लीला के साथ कभी लूडो खेलती कभी कैरम , ...

और अनुज अपने माल के साथ , कबड्डी।

लेकिन लीला ने भांप लिया , सोने में मेरा आँचल लुढ़क गया था , ब्लाउज तो लो कट मैं पहनती ही थी , ब्रा भी नहीं , ... बस इनके दांतों के निशान , मेरे उभारों पर साफ़ दिख रहे थे , चलते चलाते उन्होने चुम्मा लेते लेते मेरे गाल को कचकचा के काटा था और वहां भी दांतों के निशान , उभारों के ऊपरी भाग पर इनके नाखूनों के निशान , ...

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सुहागरात की अगली सुबह से मैं समझ गयी थी ,

छोटी से छोटी ननदें ढूंढ ढूंढ के ये सब निशान देखतीं थी और उन्हें चिढ़ाने का बहाना मिल जाता था , ...

और लीला तो मुझे शुरू से , खेली खायी या खेलने खाने के लायक लगती थी , ...

बस उसने रेनू और गुड्डी दोनों को निशान दिखाए , और तीनों खिलखिलाने लगी ,

" लगता है तेरे भैया कल आये थे , ... "

लीला गुड्डी से बोली ,

गुड्डी जरा सा मुस्करायी फिर आँख तरेर कर बोली ,

" तेरे भैया मतलब और तेरे क्या ,... "

लीला ने तुरंत गलती सुधारी और बोली , " ओके ओके , तेरे नहीं , सिर्फ भैया ,... "

लेकिन रेनू को कुछ याद आया , पिछली बार जब वो और गुड्डी आयीं थी तो मैं और जेठानी जी , गुड्डी को इनका माल कह के बार बार छेड़ रहे थे। गुड्डी ने भैया बोला तो जेठानी जी ने छेड़ा सिर्फ भ की जगह स लगा ले न दिन में भैया रात में सैंया।

पर मैंने और जोड़ा ,

"नहीं दीदी , दिन में भी सैंया रात में सैयां , ... अरे जब मिले मौका , तब मारो चौका। दिन रात का क्या। "

रेनू ने गुड्डी के गुलाबी डिम्पल वाले गाल में कस के चिकोटी काटी और छेड़ा ,

" चल हम दोनों के तो भैया और तेरे ,... बोल न भाभी पिछली बार क्या कह रही थीं , ... "

गुड्डी के गाल गुलाब हो गए , ... शर्म से लाल।

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उसने बात बदल के मुझे पकड़ के जगाने की कोशिश शुरू कर दी।

" भाभी उठिये न , ... शाम हो गयी है ".

बस मुझे मौका मिल गया उस , को दबोचने का।

मैंने ये ऐक्टिंग किया जैसे मैं गुड्डी को , ' वो ' समझ रही होऊं , और मैंने उसे पकड़ लिया , और बोली ,

" छोड़ न , रात भर , .. तंग किया , सुबह से , ... थोड़ी देर सोने दो न "

मेरी आँखे बंद थे लेकिन हाथ जाग रहे थे , और अगर क्यों भाभी ननद को पकड़ती है , तो उसके हाथ सबसे पहले कहाँ पहुँचते है , ... ये के बी सी का एक हजार वाला सवाल भी नहीं है , सिम्पल , ननद के , और खास तौर से गुड्डी की तरह नयी उमर की नयी फसल , ... सीधे उसके नए नए आते जुबना पर ,

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और मेरे हाथ भी वहीँ ,

ऐसे ,

एकदम रुई के फाहे ऐसे मुलायम , मुलायम , छोटे छोटे , जस्ट आते ,...

और मेरी ऊँगली निप्स पर , फ्लिक करतीं , ...

मटर के दाने जैसे , नहीं , ... नहीं बड़े वाले मटर के दाने नहीं ,

कच्ची छीमी जैसे होती है न , नयी नयी आयी मटर की फली , ... बस उसके दाने ऐसे , खूब मुलायम छोटे छोटे , बस वैसे ही

मैंने अंगूठे और तर्जनी के बीच दबा कर कस के मसल दिया , उन नए नए निप्स को ,

" भाभी छोड़िये न , ... " गुड्डी चीखी ,

लेकिन मैंने छोड़ने के लिए थोड़ी पकड़ा था , बस और कस के मसलने लगी ,

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" अरे भैया नहीं हैं , मैं हूँ " वो बेचारी बोली।

" जानती हूँ मैं , ... " और मैंने झट्ट से आँखे खोल दीं , ... जब तक वो सम्हले सम्हले , मैंने कस के अबकी उसके सर को पकड़ के उसे अपनी ओर खिंचा ,

मू मु ...

और कस के चुम्मी , लिप्पी ,... सीधे मेरे होंठ उस के होंठ पर , थोड़ी देर तक , .. फिर मेरे होंठों ने उस के होंठों को अपने होंठों के बीच दबोच लिया , और कचकचा कर ,

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चूमा भी , चूसा भी , काटा भी , ...
 
मस्ती ननदों के संग

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और कस के चुम्मी , लिप्पी ,... सीधे मेरे होंठ उस होंठ पर , थोड़ी देर तक , ..

फिर मेरे होंठों ने उस के होंठों को अपने होंठों के बीच दबोच लिया , और कचकचा कर ,

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चूमा भी , चूसा भी , काटा भी , ..

.

रेनू , लीला दोनों खिलखिला रही थीं , ...

मैं भी खिलखिलाते बोली , ...

" भैया नहीं है तो भइया की बहिनी से ही काम चलाना पडेगा न। "

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"लेकिन लगता है , भैया आये थे , लग तो यही रहा है "

मेरे बगल में खड़ी लीला हँसते , मेरे अधखुले उभारों पर उनके दांतो के , नाखूनों के निशान देखते , मुझे छेड़ते बोली ,

गुड्डी को मैंने छोड़ा और लीला को दबोच लिया , वो थोड़ी गदरायी भी थी और उसके उभार भी रसीले ज्यादा थे ,

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मेरे होंठ एक बार फिर ननदिया के होठो के रस ले रहे थे , ...

और वो ज्यादा छुड़ाने की भी कोशिश नहीं कर रही थी लेकिन मेरे हाथ कुछ और सोच रहे थे ,

असल में ननदो को देख कर भौजाइयों के हाथ एकदम डाकू हो जाते हैं ,

फिर ऐसे रसीले जोबन टॉप में बंद रहे , बड़ी नाइंसाफी है

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और नाइंसाफी मुझे पसंद नहीं , मेरे हाथों को तो बिलकुल नहीं ,

और जब तक वो सम्हले मुझे रोके , लीला के टॉप के बटन मैंने खोल दिए

जोबन उछल कर बाहर , आलमोस्ट ,...

क्योंकि ब्रा का कवच अभी भी था , और पीछे से बंद , ...

पर न मैं पहली भाभी थी , न वो पहली ननद, जिसके उभारों को आजाद करने पर उसकी भाभी तुली हो ,

बस उसने दोनों हाथों से मेरे टॉप खोलते हाथों को रोकने की कोशिश की ,

और वहीँ लीला से चूक हो गयी , मेरा एक हाथ टॉप के पीछे से , ..

और आराम से मैंने ब्रा का हुक भी खोला और ब्रा को ढीला कर के सरका भी दिया , ...

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अब रेनू और गुड्डी खिलखिला रही थीं , हम दोनों का खेल तमाशा देख रही थीं ,

टॉप के ऊपर के दो बटन खुल चुके थे , मेरे काम के लिए ,

गुड्डी की सहेली लीला का ध्यान , टॉप बंद करने की कोशिश और टॉप में घुसे एक हाथ को निकालने के चक्कर में था ,

लेकिन चोली में घुसा हाथ बिना जुबना के रस लिए निकलता है क्या

, मेरा भी नहीं निकला और साथ में मैंने ये भी भांप लिया मेरी इस ननद के उभारों पर पर किसी लौंडे का हाथ जरूर पड़ चुका है ,

फिर मैं क्यों छोड़ती ,

अब पीछे से जिस हाथ ने सेंध लगाई थी , ब्रा खोला था , वो भी ,...

और दोनों जोबन , दोनों हाथों ने एकदम बराबर बराबर बाँट लिया ,

आखिर लौंडो से मिजवाती रगड़वाती है और भौजी से नखड़ा ,...

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लेकिन असली हमला हवाई होना था होंठों का ,

हाथ तो सिर्फ डाइवरजनरी टैक्टिस थे ,

वो मेरे उभारों के निशान देख के छेड़ रही थी न बस मेरे होंठ सीधे लीला रानी के उभारों के ऊपरी भाग पर

पहले तो कस के चूसा ,

फिर कस के दांत गड़ा दिए , वो जोर से चीखी ,

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लेकिन चीखने से क्या,

हम भाभियाँ चीखती हैं तो क्या ननदों के भाई छोड़ देते हैं ,

कुछ देर तक कचकचा कर काटने के बाद , ... वहीँ पर होंठों का ही मलहम , हलके हलके जीभ से सहलाना , चूसना , फ्लिक करना

और जैसे ही दर्द थोड़ा सा कम हुआ , कचकचा के पहली बार से दूनी ताकत से काटा ,

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ये ट्रिक मैंने ननद के भाई से ही सीखी ही थी , एक बार काटने पर अगर दुबारा काट लो , चूस के , तो निशान पक्का हो जाता है , ...

और मैंने तो हैट ट्रिक की , और फिर सिर्फ एक उभार पे टैटू बनाने से दूसरा वाला नाराज नहीं हो जाता ?

इसलिए दूसरे वाले पर भी।

" अब तेरे भैया तो थोड़ी देर पहले चले गए , तो चलो भाभी से ही निशान बनवा लो। "

लेकिन तब तक मेरी निगाह रेनू पर पड़ी , वो पहले ही मुझसे बहुत खुली थी।

वो लीला के बगल में खड़ी उचक उचक कर अपनी सहेली के खुले उभार पर जो मैंने दांतों से निशान बनाये थे ,

वो देख रही थी और उसे चिढ़ा रही थी ,

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बस मुझे मौका मिल गया ,

उसकी छोटी सी नेवी ब्लू कलर की स्कर्ट से रेनू की चिकनी मांसल गदरायी जाँघे झांक रही थीं , थोड़ी खुली और फैली भी ,

बस , एक भाभी को इससे ज्यादा क्या चाहिए , ...

और मैंने स्कर्ट के अंदर हाथ डाल दिया ,

वो चौंकी , उचकी और जाँघे सिकोड़ने की कोशिश की , पर इन सबका इलाज मुझे मालूम था , हल्की सी गुदगुदी और जांघ के एकदम ऊपरी हिस्से पर , एक जोर की चिकोटी काटी , बस ,... जाँघे पहले से भी ज्यादा फ़ैल गयीं। मेरी गदोरी , अब जाँघों के सबसे ऊपर के हिस्से में थी , एकदम उसकी पैंटी को छूती , ... और अब मुझे जल्दी भी नहीं थी।

हलके हलके मैं जाँघों के ऊपरी हिस्से को सहला रही थी , रेनू की आंखे मुंद रही थी , उसकी देह सिहर रही थी , पर बड़ी मुश्किल से बेचारी बोली ,

" भाभी , निकालिये न "

जवाब में मैंने हथेली सीधे उसकी पैंटी में घुसेड़ दिया और हँसते हुए बोली ,

" अरे ननद रानी , दो बातें तेरी गलत हैं , पहले तो अभी मैंने डाला भी नहीं है , ... दूसरे ये तुम तीनों की उमर डलवाने की है , और ऐसे मस्त माल को , ... अरे देखना लौंडे डालेंगे पहले , पूछेंगे बाद में। "
 
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