महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

hotaks

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Dec 5, 2013
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हैप्पी नई ईयर 2025 डिअर फ्रेंड्स

एक नयी स्टोरी की साथ हाज़िर हों ........... उम्मीद है बाक़ी कहाणयूं की तरह यह भी आप सुब को पसंद आय गई ............ आप सुब दोस्तों की रिस्पांस का इन्तिज़ार रही गए ...............

पिंकबाबी

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अपडेट NO: 01

बंगलोरे की एक बुहत बरी मंच की आईटी डिपार्टमेंट की एक ऑफिस मैं महीन और विनोद एक टेबल पर अपना सर पकड़े बैठी थय ........... उनकी सामन्य टेबल पर उनकी प्रमोशन लेटर्स रखी होय थय ........... वह प्रमोशन लेटर्स जिनका उन दोनों को बुहत hi बी सबरी सी और काफी दिनों सी इन्तिज़ार था .......... मगर आज यह प्रमोशन ऑर्डर्स मिलनी की बाद दोनों को hi कुछ समझ नहीं आ रहा था की उनकी साथ यह सुब क्या होआ है .........

महीन ....... नहीं विनोद मैं यह ऑफर एक्सेप्ट नहीं क्र सकती ..... आईटी इस जस्ट इम्पॉसिबल........ ना hi आसिफ इस बात को एक्सेप्ट क्रय गए और ना hi मैं उसी चोर की जा सकती हों कहीं ........ महीन अपनी कलेग विनोद की तरफ देखती होइ बोली .............

विनोद ..... आप ठीक कह रही हो ..... कंपनी हमारी साथ ऐसी कैसी क्र सकती है ....... हम अपनी फैमिलीज़ को चोर की कैसी लंदन जा सकती हैं और वह भी एक साल की लय ........ प्रिय भी अकेली नहीं रह सकती .........

महीन ..... यस ... यह तो बुहत hi स्ट्रेंज ऑफर है की प्रमोशन की साथ hi ट्रांसफर क्र दया जाय और भी आउट ऑफ़ थे कंट्री ..... इतस इंसाने.....

विनोद ....... जी बिलकुल .............

ऑफिस टाइम एन्ड होनी तक सुब कलगुएस उनको मुबारकबाद दी रही थय और वह दोनों फीकी मुस्कराहट की साथ उनको जवाब दी रही थय ........ सुब कलगुएस की एहि ओपिनियन थी उनको आउट ऑफ़ थे कंट्री वर्क एक्सपीरियंस की ओप्पोर्तुनिटी मिस नहीं करनी चाहिए ............

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महीन की आगे 27 इयर्स थी ...... बुहत खूबसूरत .... सुफैद कलर .... बुहत hi अट्रैक्टिव फिगर्स ....... 34-27-38 मारसुरेमेन्ट्स ........ बुहत hi चिकनी जिल्द ...... सेक्सी लुकिंग गुलाबी होंठ .......... लाइट बरवां आंखें ...... कमर की हाफ लेंथ तक आती होय सिल्की बाल ...... नाज़ुक सा स्लिम जिसम ..... ..... और बुहत hi हंसमुख और खुश मिज़ाज और बुहत hi सूपरतत्वे लड़की थी ........... हर किसी की साथ और हर किसम की हालात मैं खुद को एडजस्ट क्र लेनी वाली लड़की ..... जो देखता बस देखता रह जाता ......... जो बात करता वह उस सी इम्प्रेस होय बिना ना रह सकता ........ अपनी खूबसूरती और बी मिसाल हुसैन की वजह सी वह पूरी ऑफिस मैं नज़रों का मरकज़ रहती थी .......... इस सुब की साथ साथ वह बुहत hi मज़बूत और ाच्य करैक्टर की लड़की थी .......... स्ट्रिक्ट मज़हबी ........... वह किसी भी मेल कलगुएस को बुहत ज़्यादा लिफ्ट नहीं करवाती थी .......... ना बुहत ज़्यादा फ्रैंक होती थी ............ सिर्फ ऑफिसियल काम तक hi उन सी राब्ता रखती थी ........ महीन एक टैलेंटेड आईटी एक्सपर्ट थी ....... ऑफिस मैं सब की साथ मिल की काम करती मगर एक बाउंड्री की अंदर ....... हमेशा hi अपनी लिबास का ख्याल रखती .... उसकी ड्रेसिंग हमेशा प्रोफेशनल होती .... हमेशा hi ब्रांडेड शलवार कमीज, कुरता और वेल फिटेड ट्राउज़र्स hi पहनती .... मगर ऐसी ड्रेसिंग नहीं होती थी की उसका जिसम कुछ एक्सपोज़ हो या किसी को कोई ग़लत सिग्नल जाय ........ या किसी को उसकी लिबास और जिसम को लय की कोई बात करनी का मौका मिले ............. स्टिक्ट मजभी बैकग्रॉउंड सी होनी की वजह सी शादी सी पहली सी hi वह हिजाब पहनती थी ........ और यहाँ ऑफिस मैं भी वह वैल भी लेती थी सर पी ...... मगर इसकी बावजूद भी मेल कलगुएस की नज़रें उसकी खूबसूरत ... उभरी होय बूब्स को तारती रहती थीं .......... जिनको वह हमेशा अपनी दोपटा सी कवर करनी की कोशिश करती रहती थी ........

महीन एक स्ट्रिक्ट मज़हबी फॅमिली सी थी ........... उसकी फादर एक मौलवी थय .......... इमाम मस्जिद ........... महीन को पढ़ाया ज़रूर था मगर कभी बुहत ज़्यादा आज़ादी नहीं दी थी .............. महीन की शादी क़रीब एक साल पहली आसिफ सी होइ थी ..... वह भी एक और फर्म मैं काम करता था ....... 30 साल का ाचा खूबसूरत लड़का ...... सुफैद रंग ..... स्मार्ट बॉडी ....... एक्सरसाइज नहीं करता था मगर बॉडी उसकी फिट थी ....... हेअल्थी लुकिंग एंड अट्रैक्टिव था ......... ा परफेक्ट मैच फॉर महीन .... दोनों hi एक दूसरी सी बुहत ज़्यादा प्यार कृत्य थय ....... और यह प्यार लव आफ्टर मैरिज वाला था ...... एक दूसरी सी मुकमल तोर पी सटिस्फीएड और खुश थय ........ आसिफ महीन का बुहत ख्याल रखता था .......... उस पी जान चिरकता था ........ और महीन भी उसी दिल सी चाहती थी ............ महीन की ज़िन्दगी मैं कोई कमी नहीं थी ....... ना पॉकेट की मामली मैं और ना hi बीएड पी ....... आसिफ को तो महीन हर रात को चाहिए थी अपनी बिस्तर पी ........... वीक की कोई hi रात होती जब वह महीन की ना लेता था ............. अक्सर महीन को hi बहाना बना क्र आसिफ सी जान छुड़वाना पार्टी थी ...... मगर उसकी जान सिर्फ एक आध रात की लय hi चोट टी थी ....... क्यों की अगली दिन तो वह उसी ज़रूर अपनी नीची लिटा लेता था ......... या फिर उसी कुछ दिन की ब्रेक अपनी पीरियड्स की दिंनो मैं मिलती थी ...... मगर वह दिन भी उस पी बुहत भारी होती थय ........ क्यों की महीन को अपनी पीरियड्स की शुरू की दिंनो मैं बुहत ज़्यादा तकलीफ होती थी ...... बुहत ज़्यादा क्रैम्प्स होती थय ....... इतनी ज़्यादा पैन की उसी बर्दाश्त करना hi मुश्किल हो जाता था ...... ख़ास क्र पहली 2 दिन ......... और फिर आहिस्ता ाहसिता उसकी पैन काम होती .........

महीन भी अपनी हस्बैंड की तरफ सी इतनी तवज्जह मिलनी पी बुहत खुश रहती थी ...... उसको भी तो जैसी आदत हो गए थी इतना ज़्यादा सेक्स करनी की .......... मगर उसकी इस आदत को और इस प्यास को आसिफ इतनी ाच्य सी सटिस्फी करता था की उसी किसी और मर्द की तरफ देखनी की ज़रूरत hi नहीं पार्टी थी .......... किसी और मर्द की तरफ देखनी और उस सी दोस्ती करनी की आदत तो उसी शादी सी पहली भी नहीं थी ...... ना hi उसका कोई ऐसा दोस्त था जिसकी साथ वह कुछ प्राइवेट लम्हात गुज़ारी हो ........ इस मंच मैं महीन अपनी शादी सी पहली सी जॉब क्र रही थी ...... और अपनी क़ाबलियत और एक्सपीरियंस की वजह सी अपनी जगा बना चुकी होइ थी ...... और इसी बेस पी hi वह अपनी लय प्रमोशन एक्सपेक्ट क्र रही थी ..........

विनोद ....... 30 ईयर ओल्ड फ्रॉम हिन्दू कम्युनिटी ......एक और आईटी एक्सपर्ट था .... महीन को क्लोज कलेग जो की क़रीब 5 मंथ पहली hi दूसरी ब्रांच सी ट्रांसफर हो की इस ब्रांच मैं आया था और महीन को ज्वाइन क्या था ......... विनोद चार्मिंग पर्सनालिटी ....... स्ट्रांग बॉडी .......... स्टैंडिंग टालल विथ वेल बिल्ट पिसीके ... फूली कॉंफिडेंट और डायनामिक ........ सांवला कलर ........ नॉट ब्लैक नॉट वाइट ....... क्लीन शवेद फेस ...... स्टाइलिश हेयर स्टाइल .... डार्क ब्लैक आईज ...... और वेल बिल्ड बॉडी मसल्स...... हमेशा hi सीतलिश टैलोरेड शर्ट्स, पैन्ट्स और ट्राउज़र्स मैं रहता था ...... जो उसकी पर्सनालिटी की इफ़ेक्ट को और भी बढ़ा देती थय ........... विनोद अपनी ाच्य बेहेवियर की साथ आती hi सुब नए लोगो की साथ एडजस्ट हो चूका होआ था ..... सुब की साथ उसका तालुक बुहत फ्रेंडली था ............ महीन की साथ बुहत सी प्रोजेक्ट्स मैं काम क्र चूका था और बुहत सी अभी चल रही थय ....... ओफ्फिकल वर्किंग की लय दोनों मैं अछि केमिस्ट्री डेवेलोप हो चुकी होइ थी ...... मगर यह केमिस्ट्री और यह रिलेशनशिप सिर्फ वर्किंग की हद तक hi था ........... उस सी ज़्यादा ना कभी महीन न्य उसी स्पेस दी थी और ना hi कभी विनोद न्य कोई लिमिट और बाउंड्री क्रॉस करनी की कोशिश की थी .......... अछि शरीफ फॅमिली सी तालुक जो था उसका भी ............. इसी लये हमेशा महीन की रेस्पेक्ट करता था ........ और रिस्पांस मैं महीन भी उसकी वैसी hi रेस्पेक्ट करती थी ........

8 महीनी पहली विनोद की शादी प्रिय सी होइ थी ...... उसकी पापा की मर्ज़ी सी .......... ....... प्रिय बस एक मुनासिब शकल सूरत वाली लड़की थी ....... थोड़ा भरी जिसम था उसका ....... विनोद की पापा की दोस्त की लड़की थी ...... इसलय विनोद को उस सी शादी करना पारी .... ................... प्रिय विनोद को बुहत प्यार करती थी ....... और करती भी क्यों न आखिर इतना हैंडसम हस्बैंड जो उसी मिला था जिस पर उसकी फ्रेंड्स भी उस सी जेलस होती थीं .............. और प्रिय उस पी प्राउड फील करती थी ............ अपनी मर्ज़ी की शादी ना होनी की बावजूद भी कभी विनोद न्य प्रिय को इस बात का अहसास नहीं होनी दया था ........ हमेशा उसकी साथ भी प्यार सी पेश आता था .....

महीन अपनी हस्बैंड की साथ ऑफिस की अक्सर बातें शेयर करती रहती थी ..... विनोद न्य जब ऑफिस ज्वाइन क्या तो उसकी बारी मैं भी महीन न्य आसिफ को बताया था और आसिफ भी विनोद सी मिल की उसकी पर्सनालिटी सी इम्प्रेस होआ था ....... उसनी विनोद को अपनी घर पी इन्विते क्या और विनोद प्रिय की साथ उनकी घर पी आया ...... महीन प्रिय सी मिल की बुहत खुश होइ ......... और पहली hi मुलाक़ात पी दोनों फैमिलीज़ मैं अछि दोस्ती हो गए ........ इसकी बाद दोनों अक्सर एक दूसरी की घर आती जाती रहती थय .................. विनोद ऑफिस सी बहार महीन को भाभी बोलनी लगा ...... और आसिफ भी प्रिय को भाभी बोलता था ..... ाच्य दोस्तों वाला तालुक इन सब मैं डेवेलोप हो चूका था ........... आसिफ भी सटिस्फीएड था विनोद की महीन की साथ काम करनी पर ........ उसी यक़ीन हो चूका था की विनोद चाही दूसरी रेलगिओं सी है ............ मगर फिर भी वह ऐसा इंसान है जिस की साथ काम करनी मैं उसकी बीवी महफूज़ है ........... . और प्रिय को भी कोई ऐसी वैसी रेसेर्वशन्स नहीं थीं महीन को लय क्र .......... वह जानती थी की महीन उस सी ज़्यादा खूबसूरत और हॉट जिसम की है ...... मगर उस सी मिलनी की बाद उसकी नेचर सी वाक़िफ़ हो चुकी थी की वह किसी को भी ऐसी वैसी लिफ्ट देंय वाली लड़की नहीं है ...............
 
अपडेट NO: 02

ऑफिस सी वापिस अन्य की बाद महीन आसिफ की अन्य का वेट क्र रही थी ...... उसनी घर आ की चेंज भी नहीं क्या था और सिर्फ अपना हिजाब उतार की ...... ऐसी hi सिटींग रूम मैं बैठी होइ थी .......... और साफ़ तोर पी परेशां लग रही थी ......... जैसी hi आसिफ घर की अंदर आया तो उसी महीन की कंडीशन का अंदाज़ा होआ ........ आसिफ न्य अपना कोट उतरा और सोफी की बैक पी रख की महीन की तरफ बढ़ा और उसकी बिलकुल क़रीब बेथ की उसी अपनी बहून मैं खींच की बोलै ....

आसिफ ..... डार्लिंग खैरयत तो है ........ यू अरे लुकिंग सो मच डिस्टर्बेद.

महीन न्य परेशान चेहरी की साथ आसिफ की तरफ देखा और अपनी दूसरी तरफ रखा और प्रमोशन लेटर उठा क्र आसिफ की तरफ बढ़ा दया ....... आसिफ न्य लेटर का पहला पैराग्राफ पढ़ा जिस मैं महीन की प्रमोशन ऑर्डर्स थय ....... और लेटर को हाथ मैं पकड़े पकड़े hi महीन को अपनी सीने सी लगाया और उसकी गळून को चूमती होय उसी मुबारक बाद देंय लगा .......

आसिफ ..... वाओ जान ........ व्हाट ा सरप्राइज .............. यह तो ज़बरदस्त न्यूज़ है और तुम मुंह लटका की बैठी होइ ......... ओह तो मुझी सरप्राइज देंय की लये ऐसी मुंह लटका की बैठी होइ थी क्या ............. यार इस पी तो सेलिब्रेशन बनती है .........

महीन न्य आसिफ की तरफ देखा और बोली .... पूरा लेटर पढ़ो ......

आसिफ न्य दोबारा सी लेटर को खोला और परहंय लगा ....... जैसी जैसी लेटर कम्पलीट होआ तो उसकी चेहरी की एक्सप्रेशंस भी बदलनी लगी .......... और उसकी मुस्कराहट और गरम जोशी ग़ायब हो गए ........ और वह भी परेशान नज़रों सी महीन की तरफ देखनी लगा .......

आसिफ ाहसिता सी .............. यययययी ....... यीएहहहहहहह क्या है ......

महीन वीर्य सी बोली ..... हाँ यह सिर्फ प्रमोशन नहीं है ...... प्रमोशन विथ ट्रांसफर है और वह भी ुक और वह भी एक साल की लये ........ ी चैंट टेक आईटी आसिफ ...... no वे

आसिफ वीर्य सी महीन को अपनी साथ लगाती होय बोलै ... धीरज .. धीरज ..... हम सोचती हैं इसकी बारी मैं ..... ऐसी hi स्ट्रैट फॉरवर्ड इंकार क्र देना ठीक नहीं है ......... कुछ न कुछ सलूशन निकल आय गए इस का .. तुम फ़िक्र नहीं करो ...

महीन चुप रही ......

आसिफ लेटर को देखती होय बोलै ...... और वह विनोद की भी तो प्रमोशन देय थी न उसका क्या होआ .........

महीन ...... हे इस आल्सो प्रमोटेड .....

आसिफ ..... यह तो अछि बात है .. फिर तो कंपनी उसी ुक भेज सकती है तुम्हारी जगा और तुम यहाँ पी अपनी प्रमोशन लय सकती हो ........

महीन न्य आसिफ की तरफ देखा और बोली ....... उसको भी शामे hi ऑर्डर्स मिले हैं ..... की दोनों को अगर प्रमोशन लेनी है तो यह ुक वाली ऑफर एक्सेप्ट करनी पारी गई ोथेरविसे वे विल बे ड्रॉप्ड फॉर प्रमोशन और किसी जूनियर को कंसीडर क्या जाय गए इसकी लय ......

आसिफ ..... ओह no ...... यह कैसी हो सकता है यार की तुम्हारी जगा किसी जूनियर को प्रमोट क्र दया जाय .............

महीन ....... क्यों ....... क्यों नहीं क्र सकती ....... प्राइवेट मंच है जो मर्ज़ी आय क्र सकती है ..........

आसिफ ........ हम्म्म ........... एक विनोद वाली ऑप्शन समझ आ रही थी और वह भी ख़तम हो गए ............ अन्य्वयस ......... डोंट गेट वरीड ...... लेटस थिंक अबाउट सम सलूशन. ........... उठो चेंज करो चल की और फिर खाना खाती हैं .......

आसिफ न्य महीन को हाथ पाकर की उठाया और उसी अपनी साथ बैडरूम मैं लय गया ........... आसिफ बीएड की बैक सी टेक लगा की बेथ गया ....... महीन न्य अपनी रूटीन की मुताबिक़ अपनी कप्बोर्ड सी अपनी कपड़े निकाली और बाथरूम मैं चली गए चेंज करनी की लये ........... वहां ............ महीन न्य अपनी शर्ट उतार दी ............... अब वह एक ट्रॉउज़र और वाइट ब्रा मैं आंय की सामन्य खरी थी ........... महीन की बूब्स ब्रा मैं कैसे होय थय ....... हाफ बूब्स उसकी ब्रा की कप्स मैं सी बहार को चालक रही थय .......... और बुहत hi सेक्सी क्लीवेज बना रही थय .......... महीन अपनी गूरी गूरी ....... नीम बढ़ाना जिसम को बाथरूम की मिरर मैं देखनी लगी ............ अपनी खूबसूरती की अपनी hi आँखों सी तारीफ करनी लगी ............ फिर महीन न्य घर की कपड़े पहनी और बाहिर आगये ....... उसकी नज़र आसिफ पर पारी.............. जो अभी तक बीएड पर लेता होआ था ......... कुछ सोच रहा था ...........

महीन ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो क्र अपनी हाथों और चेहरी पी लोशन लगानी लगी ................... और आसिफ की तरफ देखा जो अब माही की तरफ देख रहा था ............. महीन उसको देखती होइ बोली ........

महीन ...... ऐसी क्या देख रही हो आसिफ ....... चेंज नहीं करना क्या ........

आसिफ ....... दकनी दो न मेरी जान ........ फिर तो तुम न्य एक साल की लय मुझ सी दूर चली जाना है न ..............

महीन न्य आंय मैं सी आसिफ को घूरती होय कहा ........ कभी नहीं आसिफ ..... मैं कभी नहीं जाऊँ गई तुमको चोर की ....... मैं ऐसी कैसी किसी अनजानी देश मैं रह सकती हों अकेली .... तुम्हारी बिना ............

आसिफ अपनी जगा सी उठा ...... महीन की पिच्य आया और उसकी बाज़ूओं की नीची सी अपनी दोनों हाथ दाल की उसकी पेट पी अपनी हाथ रख डाई .......... और उसकी नैक को चूम की बोलै .......

आसिफ ........ मैं समझता हों मेरी जान .......... मैं भी तुम सी दूर नहीं रह सकता ......... लकिन तुम जानती हो न की तुम न्य इस प्रमोशन की लय कितनी म्हणत की है ..... कितना इस प्रमोशन का इन्तिज़ार क्या है ........ और अब जब यह मौका आया है तो मैं नहीं चहौं गए की तुम इसी ावैल ना क्र पाओ ..... आसिफ न्य महीन की नैक को चूमती होय कहा ......

महीन ...... no वे आसिफ ...... मुझी कोई परवाह नहीं है प्रमोशन की ...... मैं तुम सी दूर जांय की क़ीमत पर प्रमोशन नहीं लय सकती .......... मैं कल hi अपना रेफुसल सबमिट करवा दूँ गई .......

आसिफ अपनी हाथों को महीन की शर्ट की ऊपर सी उसकी दोनों बूब्स पी रखती होय बोलै ............. इतनी जल्द बाज़ी नहीं करो ......... तुम्हारी पास 3 दिन हैं डीडे करनी की लय ............. जो मैं कह रहा हों उस पी ठंडी दिमाग़ सी सोचो ........

महीन आसिफ की बहून मैं कसमसाती होय बोली ...... लकिन आसिफ .........

आसिफ ...... सोचो महीन इस प्रमोशन की कितनी इम्पोर्टेंस है तुम्हारी करियर मैं ...... तुम बहार जाओ गई तो तुम्हारी लय और बुहत सी ोप्पेर्टुनिटीज़ ओपन हो जाईं गए ........

महीन ........ लकिन किस क़ीमत पर ..........???? एक साल का लम्बा पीरियड तुम्हारी बग़ैर गुज़ारनी की क़ीमत पर ........???? मैं अभी सी कैंम्प रही हों ऐसा कुछ सोच की भी ............. महीन की आँखों सी ांसो बाह निकली ..........

आसिफ न्य महीन को अपनी बहून मैं पलटा और एक हाथ उसकी कमर मैं डाली होय दूसरी हाथ सी सी महीन की आंसू साफ़ कृत्य होय बोलै ........ क्यों परेशां हो रही हो ....... इतना मत सोचो ....... हम साथ hi हों गए ............. यह दूरी हमारी दिलोओं की दरम्यान दूरी पैदा नहीं क्र सकती ............ हम जब चाहें बात क्र सकती हैं ..... एक दूसरी को देख सकती हैं ............. वीडियो कॉल सी ...........

महीन अपना सर आसिफ की सैन्य मैं छुपाती होइ बोली .......... मैं तुम्हारी इन बहून सी दूर नहीं रह सकती ............. यह तुम जानती हो न ........

आसिफ मुस्कराया और महीन का चेहरा ऊपर उठा की अपनी होंठ उसकी होंठों पी रख डाई ...... और उसी चूमनी लगा ........... महीन न्य भी अपनी बाज़ू आसिफ की गर्दन मैं डाली और उसकी किश का साथ देंय लगी ........ महीन का जिसम ....... आसिफ की बहून मैं था .......... कुछ देर तक ऐसी hi किश करनी की बाद महीन न्य खुद को आसिफ सी अलग क्या और रूम सी बहार जाती होइ बोली ................ चलो जल्दी करो चेंज और कहानी की टेबल पी ाजाओ मैं खाना गरम क्र रही हों ........... आसिफ भी मुस्कराता होआ बाथरूम की तरफ बढ़ गया ..............

थोड़ी देर मैं दोनों दिंनिंग टेबल पी बैठी खाना खा रही थय ........ खाना खाती होय महीन बोली .......

महीन ....... आसिफ अगर इस ऑफर को एक्सेप्ट क्र भी लय जाय तो फिर भी मैं ुक मैं अकेली कैसी राहों गई ........... मैं कभी भी अकेली कहीं नहीं रही ....... और तुम सी दूर अकेली मैं कैसी सर्वाइव क्र पाऊँ गई ....... कैसी मैनेज क्र पाऊँ गई ........... सुच मैं मुझ सी यह सुब नहीं हो सकी गए ........

आसिफ ...... ी अंडरस्टैंड यार ....... लकिन तुम अकेली तो नहीं हो गई न वह ........ विनोद भी तो तुम्हारी साथ हो गए न ..... तुम लोगो का एक ाचा वर्किंग रिलेशनशिप बना होआ है ..... वह वह रहंय मैं ज़रूर तुम्हारी हेल्प क्रय गए ...... हर तरह सी सपोर्ट क्र गए ..........

महीन ........... विनोद ???? ............ क्या मतलब है तुम्हार .......... विनोद की साथ मेरा रिलेशनशिप सिर्फ ऑफिस की हद तक है ........... आउट ऑफ़ थे ऑफिस मैं न्य कभी उसकी सपोर्ट नहीं ली ........... न मैं ऐसा कुछ तालुक उसकी साथ रखना छाती हों ............

आसिफ ........ आर्य यार क्या हो गया है तुमको ........ तुम वह अपना अलग सी अपार्टमेंट लय सकती हो ........ और वह तुमको तुम्हारी अपार्टमेंट मैं सेटल होनी मैं हेल्प क्र सकता ......... और भी बुहत सी मैटर्स को सोल्वे करनी मैं वह तुम्हें सपोर्ट क्रय गए ............. अब वह इतना तो क्र hi सकता है न वहां रहती होय ........ आखिर अब वह सिर्फ तुम्हारा ऑफिस कोलगगए hi नहीं बल्कि हमारा फॅमिली फ्रेंड भी तो है न ...........

महीन ....... हम्म्म ....... लकिन आसिफ ..... तुम जानती हो न की वह ........... मेरा मतलब है की डिफरेंस ऑफ़ आवर रेलगिओं एंड कल्चर .......

आसिफ ........... आर्य यार क्या हो गया है तुमको तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो .... .......... जब आप लोगो न्य रहना hi अलग अलग है तो फिर इन बातों सी क्या फरक परता है ........ वह भी तो इतना hi कांटेक्ट रहना है न तुम लोगो का जितना अब है सिर्फ ऑफिस तक ...... जस्ट एक सपोर्ट हो गई की कोई ऐसा बाँदा उसी देश मैं मौजूद है जो हमरा जान न्य वाला है ....... हमारा फॅमिली फ्रेंड है ............

महीन .......... हम्म्म ...... महीन न्य सर झुकाया और खाना अकहानी लगी .............

आसिफ ....... वैसी विनोद न्य क्या डीडे क्या है ........

महीन ........ वह भी एहि कह रहा था की वह प्रिय को चोर की नहीं जा सकी गए ...............

आसिफ .......... हम्म्म ........ बात तो ठीक है उसकी भी .... आसिफ कुछ सोचती होय बोलै .........
 
उसी शाम ...... विनोद और प्रिय महीन की घर बैठी थय ............ ......... और कॉफी पीती होय महीन और विनोद की होइ प्रमोशन को डिसकस क्र रही थय ...........

विनोद ......... मैं न्य तो डीडे क्र लय होआ है की मैं इस प्रमोशन ऑफर को रेफुसे क्र रहा हों .......

आसिफ थोड़ा हैरानी सी ........ रियली ........... ???

विनोद ...... हाँ आसिफ ....... मेरी जांय सी प्रिय अकेली रह जाय गई ......

आसिफ ........ हम्म्म

प्रिय ..... देखें न आसिफ भाई ...... मैं कब सी इनको समझा रही हों की यह ऑफर ज़रूर ावैल करें ...... क्यों की ऐसी चान्सेस बार बार नहीं मिलती .......

महीन ..... और तुम्हारा क्या प्रिय .....

प्रिय ..... आर्य यार मैं न्य विनोद को कहा है की मैं अपन मम्मी पापा की पास शिफ्ट हो जाऊँ गई ....... वैसी भी मम्मी की तबियत कुछ ठीक नहीं रहती तो उनको भी सपोर्ट मिल जाय गई ....... और देखती hi देखती तो एक साल गुज़र जाना है न .......

आसिफ ....... हाँ प्रिय भाभी ..... यह बात तो आप की ठीक है ........ मेरा भी यही ख्याल है की इन दोनों को यह प्रमोशन ऑफर रेफुसे नहीं करनी चाहिए ........ और फिर दोनों वहां हों गए तो एक दूसरी को सपोर्ट भी क्र सकें गए ........ एक दूसरी को सहारः रही गए दूसरी देश मैं .......... विनोद वहां हो गए तो जहाँ वह अपनी लय अपार्टमेंट ढूंढी गए वहीँ यह महीन को भी कोई अपार्टमेंट या फ्लैट ढूंढ़नी मैं हेल्प क्र दी गए ...........

प्रिय ..... हाँ हाँ क्यों नहीं ....... यही तो मैं इसको समझा रही हों की आप दोनों वह हो गए तो एक दूसरी को सपोर्ट रही गई अलग अलग रहती होय भी .......... और फिर ऑफिस तो एक hi है न जहाँ काम करना है ीन्हो न्य .......

महीन न्य सर झुका दया ............

विनोद ......... जो भी हो लकिन अभी मेरा कुछ भी फाइनल नहीं है ..........

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विनोद और प्रिय की जांय की बाद जब महीन और आसिफ अपनी बीएड पर लेती तो महीन न्य अपना सर आसिफ की सैन्य पी रखा और उसकी जिसम की साथ चिपक गए ...........अंधेरी कमरे मैं दोनों एक दूसरी की साथ जुड़े होय थय ....... आसिफ भी उसकी जिसम को सहलानी लगा ......... और आहिस्ता ाहसिता उसकी माथै और सर की बलून को चूमनी लगा .......... फिर आसिफ न्य वीर्य सी महीन की चेहरी को ऊपर उठाया और अपनी होंठ उसकी होंठों पी रख डाई ............... महीन न्य अपनी आंखें बंद क्र लीन ............. आसिफ न्य महीन की एक होंठ को अपनी होंठों मैं लय और उसी चूसनी लगा ............ महीन भी पूरी तरह सी उसका साथ दी रही थी .............. आसिफ न्य अपनी जुबां को महीन की होंठों की बीच दाल दया ...... महीन न्य आसिफ की जुबां को अपनी मुंह मैं लय और आहिस्ता आहिस्ता उसी चूसनी लगी ....... उसकी जुबां आसिफ की जुबां सी टकरा रही थी ........... और वह उसकी जुबां को चूसी जा रही थी अपनी आंखें बंद की होय ........... आसिफ न्य महीन का एक हाथ पकड़ा और वीर्य वीर्य उसी अपनी स्लीपिंग ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया .......... जो की वीर्य वीर्य खरा होता जा रहा था ............ महीन न्य भी बिना कोई मज़हमत कए अपनी हस्बैंड की लुंड को अपनी मुठी मैं लय लय और उसी आहिस्ता ाहसिता दबानी लगी ....... अपनी मुठी मैं लय क्र आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगी ............... वह ाच्य सी जानती थी की उसकी हस्बैंड का यह लुंड उसी कितना मज़ा देता है ............... लज़्ज़त की किन किन वडयूं की सैर करवाता है ........... कमरे की अंधेरी मैं वह आहिस्ता आहिस्ता आसिफ की लुंड को सहला रही थी .........

आसिफ न्य ाहसिता सी अपनी पजामी को थोड़ा नीची सिरकाया ..... और अपना लुंड बहार निकाल की महीन की हाथ मैं पकड़ा दया ........... महीन बिना कुछ सोची अपनी हस्बैंड की नंगी लुंड को सहलानी लगी ..... अपनी मुठी मैं लय की दबानी लगी ........... दोनों की होंठ अभी तक ापास मैं जुड़े होय थय ........ और एक दूसरी की होंठों को चूस रही थय .............. कुछ देर की बाद आसिफ न्य महीन को बीएड पी सीधा लिटाया और उसकी होंठों को चूमता होआ उसकी ऊपर आज्ञा ............. महीन की टांगों मैं बेथ क्र आसिफ न्य महीन की पाजामे को उतरना शुरू क्र दया ............ महीन न्य भी अपनी गांड को ऊपर उठाया और आसिफ को अपना पजामा उसकी जिसम सी अलग करनी मैं हेल्प करनी लगी ........ आसिफ न्य महीन का पजामा उतारा और उसकी जिसम की निचली हिस्से को पूरा नंगा क्र दया ...... फिर महीन की ऊपर लेत तय होय आसिफ न्य अपना लुंड हाथ मैं पाकर की महीन की छूट की ऊपर रखा और उसकी छूट को अपनी लुंड सी रगड़नी लगा ........ फिर महीन की छूट की सूराख पी रख की आहिस्ता आहिस्ता उसी अंदर क्र दया ......... महीन की गीली हो रही होइ छूट मैं आसिफ का लुंड फिसलता होआ अंदर चला गया और महीन की मुंह सी एक सिसकारी सी निकल गए ...... और उस न्य अपनी दोनों बाज़ू आसिफ की गर्दन की गिर्द लपेट लये .......आसिफ न्य वीर्य वीर्य नीची सी ढक्की लगानी शुरू क्र डाई और अपना लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ......... महीन की आंखें भी बंद हो रही थी ........... ाहसिता आहिस्ता आसिफ की धक्कों मैं तेज़ी आती जा रही थी .......... वह नीची झुक की महीन की होंठों पी अपनी होंठ रख की उसी चूमती होय अपना लुंड उसकी छूट मैं अंदर बहार क्र रहा था ....... महीन की सिसकार्यं आसिफ की होंठों मैं hi दबती जा रही थीं ....... महीन भी आसिफ सी लिपटी जा रही थी ....... थोड़ी hi देर मैं महीन की छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया .......... और उसनी आसिफ को अपनी जिसम की साथ दबा लय ....... महीन की छूट को पानी चोरटी होय देख की आसिफ रुक गया ...... और महीन की शांत होनी का इन्तिज़ार करनी लगा ....... मगर आसिफ अभी तक फ़ारिग़ नहीं होआ था ....... जैसी hi महीन का ओर्गास्म ख़त्म होआ ...... वह शांत होइ तो आसिफ दोबारा सी शुरू हो गया ........ महीन ......... आआआहहहहह ...... मममममम उउउउउउफफ्फफ्फ्फ़ ...... बस करो आसिफ ......

आसिफ ढक्की लगाती होय बोलै ........ ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह न्यूऊऊऊ ...... महीन अभी तक मेरा नहीं होआ ....... करनी दो न और मुझी ........

महीन ...... आआह ...... आह ......... ाः ....... ऊऊऊऊह्ह्ह्ह ..... तुम हमेशा hi ऐसा कृत्य हो ....... बुहत तंग कृत्य हो मुझी ....... कितना मुश्किल हो जाता है न तुमको शांत करवाना ........ ऊऊफफफफफफफफ ...... मेरी तो हालत hi ख़राब क्र देती हो तुम ....

आसिफ मुस्कराया और अपना काम जारी रखा .......... अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करना ....... महीन को छोड़ना ......... कुछ देर मैं hi महीन का जिसम दोबारा सी गरम होनी लगा ...... और वह ना चाहती होय भी फिर सी आसिफ का साथ देंय लगी .......... क़रीब 10 मिनट की बाद दोनों एक साथ hi जहर गए ............. और एक दूसरी की साथ लेती होय लम्बी लम्बी सांस लेंय लगी ......... महीन की नाईट शर्ट अभी भी उसकी जिसम पी थी ...... सिर्फ निचला जिसम नंगा था ........ और उसकी छूट सी आसिफ और उसकी छूट का पानी बेहटा होआ बहार आ रहा था ............

आसिफ वीर्य सी बोलै ........ महीन मज़ा आया ........

महीन थोड़ा शर्माती होय ....... ह्म्म्मम्म्म्म

आसिफ मुस्कराया ...... तो फिर इतना शोर क्यों मचाती हो की है मर गए मैं ......

महीन गहरी सांसें लेती होइ बोली ........ आसिफ ..... तुम को झेलना बुहत मुश्किल है ........... तुम तो मेरा जिसम hi तोर की रख देती हो ......... मेरी जान hi निकाल देती हो ........

आसिफ मुस्कराया ....... चलो अब तो एक साल की लय तुम्हारी जान चोट जाय गई मेरी सी न .......

महीन न्य तेज़ी सी करवट ली और आसिफ सी लिपट की बोली ........ आसिफ मैं नहीं रह सकती तुम सी अलग ..........

आसिफ ..... रह लो गई यार ...... सिर्फ एक साल की तो बात है ..... झट पैट hi तो यह टाइम गुज़र जाना है ......

महीन आसिफ की सीने पी हाथ फेरती होइ बोली ........ आसिफ मुझी बुहत मुश्किल लग रहा है यह सुब ....... कैसी मैं वह पी रह पाऊँ गई ...... मैं कल रेफुसे क्र रही हों बस ............... मुझी नहीं लेनी प्रमोशन ..........

आसिफ .......... महीन सोच लो अभी 2 दिन ........ इतनी जल्दी ना करो .......

महीन कुछ नहीं बोली ........... बस आसिफ की बाज़ू पी सर रखी होय सो गए ........ कुछ देर मैं आसिफ की भी आँख लग गए ........
 
अपडेट NO: 03

15 डेज लेटर

महीन आसिफ और अपनी अब्बू की साथ एयरपोर्ट मैं दाखिल होइ ........ महीन की अब्बू एक मज़हबी आदमी थय ...... सुफैद शलवार कमीज ....... सर पी सुफैद जाली वाली टोपी ...... चेहरी पी लाल रंग मैं रंगी होइ दाढ़ी ........ और हाथ मैं तस्बीह थी .......... एयरपोर्ट पोहंच क्र महीन और आसिफ इधर उधर देखती होय विनोद को ढूंढ़नी लगी ........... अचानक आसिफ की नज़र एक तरफ खरी होय विनोद और प्रिय पी पारी .......... आसिफ महीन और उसकी अब्बू को लय कर सामान की ट्राली पुश करता होआ उनकी तरफ बरहनी लगा ............

विनोद की साथ प्रिय, विनोद की पापा, मां और प्रिय की पापा थय ....... प्रिय की मां की तबियत ठीक नहीं थी इसलय वह नहीं आई थी ........ विनोद की पापा एक धोती और कुर्ते मैं थय ........ उनकी गले मैं एक माला थी ....... माथै पर बारे सा तिलक लगा होआ था ....... वह एक पंडित की तरह लग रही थय ....... आसिफ और महीन न्य उनकी पास जा की उनको hello बोलै .......... विनोद न्य उनको hi बोलै और अपनी पापा और मां सी आसिफ और उसकी फॅमिली का इंट्रोडक्शन करवानी लगा ........

विनोद ..... पापा यह आसिफ हैं और यह इनकी पत्नी महीन है ...... महीन का भी मेरी साथ लंदन मैं ट्रांसफर होआ है ....... और यह भी मेरी साथ जा रही हैं .......

विनोद की पापा न्य वैल पहनी होइ महीन और उनकी साथ एक मुस्लिम कैप पहनी होय आदमी को देखा तो थोड़ी नागवारी उनकी चेहरी पी फैल गए .... जैसी एक मुस्लिम वैली लड़की का अपनी बेटे की साथ जाना उनको ाचा न लगा हो .... जिसे महीन न्य भी महसूस क्र लय ........ मगर फिर भी उनको Hello अंकल बोल दया .......... विनोद की पापा न्य सिर्फ सर की ईशारी सी उसकी Hello का जवाब दया ....... महीन और आसिफ खामोशी सी एक तरफ खरी हो गए ...........

महीन की अब्बू बुहत आहिस्ता सी महीन सी बोली ........... क्या यह काफिर जा रहा है तुम्हारी साथ ......

महीन आहिस्ता सी ....... जी अब्बू .......

महीन की अब्बू थोड़ा गुस्सी सी बोली ....... लकिन तुम कैसी उसकी साथ रह सकती हो वहां पी.......

आसिफ ....... नहीं अंकल उसकी साथ नहीं रहना महीन न्य ....... मैं न्य समझा दया है ाच्य सी ........... अलग सी घर लय क्र रही गई महीन ..........

अब्बू ....... हाँ ठीक है बेटी ........ उस काफिर सी दूर hi रहना .......... कोई ज़्यादा मेल जॉल बढ़ानी की ज़रूरत नहीं है इन काफिरों की साथ ........... पता है तुम को की कितनी बुरे लोग होती हैं यह ............

महीन ........ जी अब्बू जानती हों ........... ाच्य सी पता है मुझी .......... मुझी खुद भी उस सी कोई ज़्यादा तालुक नहीं रखना ........... बस ऑफिस तक hi रही गए राब्ता तो ........ आप फ़िक्र नहीं करो ........... मैं आप की बेटी हों ........ एक मुस्लीम ........... और मुझी अपनी बौन्डिएस का पता है अब्बू .......... मैं कभी भी आप का सर नीचे नहीं होनी डॉन गई ...........

अब्बू ...... मुझी पता है बेटी ........ मुझी फखर है अपनी बेटी पी और अपनी तरबियत पी ...........

वह पर उन दोनों की फैमिलीज़ की लय बुहत hi परेशानी और सडनेस का माहोल बना होआ था ........ विनोद प्रिय को अपनी साथ चिपका की हौसला दी रहा था जो अपनी आँखों मैं आंसू लये होय विनोद की पास खरी थी ..............

उन दोनों की क़रीब hi महीन खरी थी आसिफ की साथ, उसका भी ऐसा hi हाल था जैसा की प्रिय का ............ वह रो रही थी .......... और आसिफ उसी चुप करवा रहा था ........

कुछ देर बाद ........... विनोद की पापा जो विनोद की पास खरे उस सी बातें क्र रही थय ........ . ... उन्हों न्य अपनी कुर्ते की साइड पॉकेट सी एक छोटी छोटी बीड्स वाली तुलसी माला निकली और उसी विनोद की गले मैं पहनानी लगी ........ विनोद न्य गर्दन नीची झुकाई तो विनोद की पापा न्य वह माला विनोद की गले मैं दाल दी .......... विनोद न्य बुहत hi अक़ीदत की साथ उसी अपनी हाथ मैं लय और उसी चूम लय ....... फिर विनोद की पापा न्य एक छोटा सा बॉक्स निकला और उसी खोल की उस मैं सी कुछ सुफैद सुफैद अपनी उंगलयों पी लय और उसी विनोद की तरफ देखा ........ विनोद न्य फौरन hi अपना माथा उनकी ाग्य क्र दया .......... विनोद की पापा न्य विनोद की माटी पी तीन उगंलों फेर दिन ........ हलकी सी .......... जिस सी उसकी माथै पर सुफैद रंग की तीन लकीरें लग गईं ... विनोद की मां न्य अपनी हैंड बैग सी एक छूती सी दिब्या निकाली और उसी खोल की प्रिय की तरफ बढ़ाया ........ उस मैं सुराख़ पाउडर था ....... प्रिय न्य उस मैं अपनी दाईं हाथ की अंघूटी को उस पाउडर मैं दिप क्या और फिर भीगी होइ आँखों की साथ विनोद की तरफ देखनी लगी ........ विनोद न्य मुस्कराती होय अपना चेहरा उसकी ाग्य क्या और प्रिय न्य उसकी माथै पी उस सी सुराख़ तिलक लगा दया ............. लम्बा सा ऊपर की तरफ जाता होआ .......

प्रिय सुबकती होय बोली ...... विनोद वह गणेश जी की मूर्ती ज़रूर अपनी घर मैं रख लेना याद सी सामन्य सामन्य जहा पी हर वक़त आती जाती तुम्हारी नज़र पारी .......... भूलना मत ........... उस सी तुम गणेश जी की रक्षा मैं रहो गए ...........

विनोद मुस्कराया ...... हाँ हाँ याद है मुझी नहीं भूलों गए मैं गणेश जी को ............

महीन और आसिफ भी विनोद की फॅमिली को यह सब करता होआ देख रही थय ........... उनको थोड़ा अजीब लग रहा था मगर विनोद की फॅमिली की उस सी मोहब्बत को देख की ाचा भी लग रहा था ............ महीन सोच रही थी की यह फॅमिली किस क़दर स्ट्रिक्ट है अपनी मज़हबी मामलात मैं ..

कुछ देर की बाद अनाउंसमेंट होइ तो महीन और विनोद अपनी फैमिलीज़ को मिल क्र अपनी अपनी सामान की ट्रॉलीज पुश कृत्य होय एयरपोर्ट की अंदर की लाउन्ज की तरफ बरही .......... महीन का दिल डूबा जा रहा था .......... और दूसरी तरफ अब प्रिय का भी ऐसा hi हाल हो रहा था .......... लाउन्ज की गेट पी रुक की विनोद और महीन न्य पिच्य खरी होय सब लोगो को देखा जो उनकी तरफ देख क्र हाथ हिला रही थय ............. बुहत hi मुश्किल सी महीन न्य आसिफ की तरफ हाथ हिलाया और फिर विनोद की पिच्य पिच्य लाउन्ज की अंदर दाखिल हो गए ............. अंदर जा की काउंटर की लाइन मैं खरी हो गए अपना अपना पासपोर्ट और सामान चेक करवानी की लय ...........

क़रीब आधा घंटा लगा उनको अपनी चेकिंग मुकमल करवानी मैं ...... उसकी बाद दोनों बोर्डिंग पास लय कर अपना अपना हैंड बैग उठाय होय साथ साथ चलती होय सिटींग एरिया की टाफ बरहनी लगी ............ महीन का यह पहला मौका था किसी ग़ैर मर्द की साथ ऐसी चलने का ........ उसी थोड़ी झिझक हो रही थी ........ अजीब भी लग रहा था ........... मगर अब तो यह जर्नी उसी की साथ hi करना है उसी ........... महीन न्य खुद को तसली दी ........

महीन न्य अपनी रूटीन की मुताबिक़ अपना वैल लय होआ था .......... उसकी रेशमी बाल छुपी होय थय मगर सिर्फ चेहरा खुला था ....... नीची उस न्य ब्लू कलर का शलवार सूट पहना होआ था ........... हाथों मैं चूडयां ....... और चेहरी पी मेक उप था जो की रूण्य की वजह सी अब थोड़ा ख़राब हो चूका होआ था ...........

विनोद एक जीन्स और हाफ स्लीव शर्ट मैं था ............ स्मार्ट फिट शर्ट थी जिस मैं उसकी बॉडी काफी अट्रैक्टिव लग रही थी ........ उसकी मस्कुलर बाज़ू नज़र आ रही थय ...... गले मैं एक पेंडंट पहना होआ था जिस पी ॐ का सिंबल बना होआ था ...... उसकी साथ hi एक छोटी छोटी बीड्स वाली तुलसी माला थी जो की विनोद की पापा न्य अभी थोड़ी देर पहली उसकी गले मैं डाली थी ........... माथै पर सुफैद लम्बा निशाँ और उसकी बीच मैं सुराख़ तिलक .........

दोनों साथ साथ चल रही थय ... महीन सी लम्बा क़द था उसका ..... महीन उसकी शोल्डर सी थोड़ा ऊपर तक आ रही थी ........ वह छोटी छोटी क़दमों सी विनोद की साथ चल रही थी ....... और देखनी वालों को ऐसा लग रहा था की जैसी दोनों हस्बैंड और वाइफ हों ............. लकिन जो भी उनको देखता तो उसी अजीब सा कपल लगता ........... एक हिजाब पहनी होइ मुकमल मुसलीएम बुहत खूबसूरत लड़की और दूसरा मुकमल तोर पी एक कट्टर हिंदू की अपीयरेंस की साथ सांवला मगर हैंडसम मर्द ............... बुहत ओड सा कपल लग रहा था यह देखनी वालों को ........... दोनों लाउन्ज मैं सोफे पर बेथ गए क़रीब क़रीब लकिन थोड़ा दूर हो की ........ लोग उनको अजीब नज़रों सी देख रही थय ............. महीन को भी अहसास हो रहा था .......... लकिन वह इस सब को इग्नोर क्र रही थी .............

उनकी फ्लाइट अभी एक घंटा लेट थी ............ विनोद उठ क्र थोड़ा घूमनी की लय चला गया .............. और महीन न्य आसिफ को कॉल की और उस को बतानी लगी की चेकिंग वघैर हो गए है और अब वह फ्लाइट का वेट क्र रही हैं ......... कुछ देर तक महीन न्य आसिफ सी बात की फिर आसिफ न्य फ़ोन कट क्र दया क्यों की वह घर की लय ड्राइव करनी वाला था अब ...........
 
महीन की कॉल ख़तम होइ तो उसनी इधर उधर विनोद को देखनी की लय नज़रें घुमैन तो उसी एक तरफ सी विनोद आता होआ दिखाई दया ........ उसकी दोनों हाथों मैं कॉफ़ी कप्स थय ........... महीन की क़रीब आ क्र विनोद बैठा और कॉफ़ी का कप महीन की तरफ बढ़ा दया ....... महीन न्य थैंक्स बोलती होय कॉफ़ी लय ली .......... और दोनों आहिस्ता आहिस्ता सिप लेंय लगी ............

दोनों कॉफ़ी पीती होय इधर उधर की बातें कृत्य रही महीन आहिस्ता आहिस्ता विनोद की साथ कम्फर्टेबले हो रही थी ............ फिर विनोद बोलै ...

विनोद ...... महीन जी आप काफी रूई हो आप का चेहरा बुहत ख़राब हो रहा है ी थिंक की आप को थोड़ा अपना हुल्य ठीक क्र लेना चाहिए .......... वर्ण कहीं लोग यह न समझें की मैं आप को किडनैप क्र की लय जा रहा हों .......... हाहाहा

महीन भी इस बात पी हंसी और फिर अपनी पर्स मैं सी अपना छोटा सा मिरर निकल की खुद को देखा और फिर अपना हुल्य देखा की खुद hi हंसनी लगी ....... उसका पूरा मेक ख़राब हो चूका था और काजल भी आँखों सी फैल गया होआ था ............

महीन .......... ठीक कह रही हैं आप विनोद जी ........ मैं आती हों फ्रेश हो की ...........

महीन न्य विनोद को बोलै और फिर अपना हैंड बैग लय क्र वाशरूम की तरफ चली गए .....................

वाशरूम मैं जा की महीन न्य अपना हिजाब उतरा ...... अपनी बलून को ठीक करनी लगी .......... फिर अपना फेस धू क्र दोबारा सी अपना मेक उप करनी लगी ............ हल्का फुल्का मेक क्र की होंठों पी लिपस्टिक लगाई .......... हिजाब उतारनी की वजह सी उसकी फिटिंग वाली शर्ट मैं उसकी सीने की उभार काफी उठे होय दिख रही थय ......... गोल और टाइट ...... बिलकुल सीधी खरी होय .......... महीन न्य एक नज़र अपनी बूब्स पी डाली और फिर अपना हिजाब दोबारा पहन क्र खुद को देखा ........... काफी अछि लग रही थी हमेशा की तरह hi ............ और फिर अपना हैंड बैग संभालती होइ वापिस विनोद की तरफ जांय लगी ......... वह खरी लोग उसको और उसकी खूबसूरती को देख रही थय ........... महीन उन सब को इग्नोर करती होइ वापिस विनोद की पास आ की बेथ गए .........

विनोद न्य महीन की तरफ देखा और बोलै ............ हाँ अब ठीक लग रहा है ..... महीन भी मुस्करा दी ...

महीन अब थोड़ा विनोद की क़रीब बैठी थी .......... मगर अभी भी उनकी हैंड बैग उनकी बीच मैं पारी होय थय ............. महीन को विनोद की परफ्यूम की खुसबू आ रही थी ............ बुहत hi ज़बरदस्त मरदाना परफ्यूम था ............. महीन भी उस परफ्यूम को पसंद कए बिना ना रह सकीय .............. जैसी hi अनाउंसमेंट होइ तो दोनों उठी और अपना अपना हैंड बैग उठा की प्लेन की तरफ जांय लगी ............. हैंड बैग की इलावा महीन की पास एक छोटा बैग और भी था ........... महीन उसी उठानी लगी तो विनोद न्य उसी ऑफर की

विनोद ..... लाइन महीन जी यह मैं पाकर लेता हों ........

महीन ........ थैंक्स इतस okay ..........

मगर विनोद न्य हाथ बढ़ा की अपनी हाथ मैं पकड़ा होआ अपना पासपोर्ट महीन की हाथ मैं दया और उस सी वह बैग लय लय और ाग्य ाग्य चलनी लगा ........ महीन न्य इस बार उसी कुछ नहीं बोलै ........ बस एक नज़र उसी देख क्र उसकी पिच्य पिच्य चलनी लगी ............ उसी विनोद का यह केयरिंग अंदाज़ ाचा लगा था ............ उसी उम्मीद होइ की लंदन जा की भी वह ज़रूरत परण्य पर उसकी ऐसी hi हेल्प क्रय गए ............

प्लेन मैं एंटर होय तो एयरहोस्टेस न्य भी उन दोनों की तरफ एक नज़र डाली और फिर उनको उनकी सीट का बताया ........... महीन की सीट विंडो की तरफ थी ....... उसकी साथ विनोद और तीसरी सीट पी शायद कोई और पैसेंजर ........... विनोद न्य सामान ऊपर की बॉक्सेस मैं रखा और फिर महीन को सीट पर बेथनी का इशारा क्या .......... महीन खामोशी सी ाग्य बरही और अपनी सीट पर बेथ गए .............. फिर विनोद उसकी साथ वाली सीट पी बेथ गया .......... महीन बहार देखनी लगी ........... कुछ देर गुज़री तो एक और पैसेंजर आ की तीसरी सीट पी बेथ गया ............

महीन को विनोद की इतना क़रीब बेथनी प् अजीब सा अहसास होनी लगा ...... विनोद की कंधी महीन की कंधी सी चूय तो महीन की जिसम मैं एक अजीब सी कैफियत रींग गए ......... यह पहला मौका था की वह अपनी हस्बैंड की इलावा किसी और मर्द की इतना क़रीब बैठी थी ......... और यह पहला मौका था की वह विनोद की इतना क़रीब बैठी थी ........ इतना क़रीब बैठी होनी की वजह सी अब उसको विनोद की परफ्यूम की खुसबू और भी ज़्यादा महसूस हो रही थी ........... बुहत hi मशहूर कुन और टोक्सिकेटिंग खुसबू थी ............. जो विनोद की मरदाना अपीयरेंस की साथ मैच क्र रही थी ............. और महीन की साँसों की साथ उसकी दिमाग़ तक जा रही थी ............. बुहत hi ाचा अहसास दिला रही थी महीन को ....

कुछ देर की बाद अनाउंसमेंट होइ ............. सीट बेल्ट्स बांधनी की लय ................ सुब न्य अपनी सीट बेल्ट्स बाँध लीन ......... महीन भी अपनी सीट बेल्ट बांधनी लगी ............ मगर उसका यह प्लेन मैं ट्रेवल करनी का पहला मौका था ............ उस सी बेल्ट नहीं लग रही थी ............... वह बेल्ड की बुखले की साथ फंबले क्र रही थी .......... मगर उस सी बेल्ट लग नहीं पा रही थी .......... विनोद न्य उसकी तरफ देखा तो उसी हेल्प की ऑफर की ........... महीन न्य बयबूसी सी उसकी तरफ देखती होय अपनी हाथ हटा लये ........... बेल्ट का बुखले विनोद की तरफ hi था ........

विनोद न्य हाथ बढ़ा की बेल्ट की दोनों बुक्क्लेस को पकड़ा और उसको हुक करनी लगा ........ विनोद की उंगलयों की बैक साइड महीन की थिगह सी तक्राण्य लगी ....... जैसी hi विनोद की उंगलयां महीन की तइस की बहार वाली साइड पी टच होइन तो महीन का जिसम कैंम्प सा गया ..... और उसनी सिमटना चाहा .......... मगर स्पेस hi उतनी थी की वह कुछ न क्र सकीय ........... मगर विनोद न्य ज़्यादा देर नहीं ली बेल्ट को बुखले करनी की लय ...... और बेल्ट लगा क्र अपना हाथ हटा लय ........... महीन न्य होले सी विनोद को थैंक्स बोलै .............

अब प्लेन रन वे पी दौड़नी लगा ............ यह महीन का पहला एरोप्लेन ट्रेवल था ........ वह पहली बार प्लेन मई बैठी थी ........... जैसी hi प्लेन रनवे पी दौड़नी लगा तो उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धरकनी लगा ...... उसी घबराहट होनी लगी ............ जैसी hi एक हल्की सी झटकी की साथ प्लेन न्य टेक ऑफ शुरू क्या तो महीन न्य घबरा क्र खौफ की मारी बिलकुल ग़ैर इरादी तोर पर अपनी बिलकुल क़रीब बैठी होय विनोद का हाथ मज़बूती सी पाकर लय ........... और अपनी आंखें बंद क्र लीन ......... वह ज़ोर सी विनोद का हाथ दबाय होय थी और मुंह मैं कुछ पढ़ रही थी .............. विनोद न्य भी महीन को हिम्मत देती होय उसकी हाथ पी अपना दूसरा हाथ रखा और उसी आहिस्ता आहिस्ता सहलाती होय उसी हौसला देंय लगा .............

थोड़ी देर मैं जैसी hi प्लेन फ्लाई करनी लगा तो महीन की घबराहट थोड़ा काम होइ ............. और उसनी अपनी आंखें खोलीं ............ और इधर उधर देखनी लगी .......... फिर प्लेन की विंडो सी हवा मैं उड़ती होय ज़मीन को देखनी लगी ............ उसका सांस थोड़ा बहाल होआ तो उसनी देखा की उसनी मज़बूती सी विनोद का हाथ पकड़ा होआ है .......... महीन न्य विनोद की तरफ देखा और फिर जल्दी सी उसका हाथ चोर की शर्मिंदगी सी लाल होती होय उसी सॉरी बोलै ................

विनोद मुस्कराया .......... इतस okay महीन जी ........... लगता है की यह आप का फर्स्ट टाइम है प्लेन मैं .........

महीन शर्मिंदाह होती होइ सिर्फ अपनी सर को हाँ मैं हिला पाई ....

विनोद मुस्कराया .......... कोई बात नहीं होता है ऐसी ...........

वीर्य वीर्य सब नार्मल हो गया .......... और जर्नी ठीक सी गुज़ारनी लगा ........ मगर स्पेस काम होनी की वजह सी कभी उन दोनों की बाज़ू एक दूसरी सी टच होती और कभी नीची सी घुटनी ............ जिस पर महीन को थोड़ी अजीब सी फीलिंग होती........ जैसी उसी करंट सा लगा हो ....... किसी ग़ैर आदमी की जिसम को शून्य सी ........ और वह थोड़ा सिमट जाती ..........

बातें कृत्य होय एक बार फिर सी महीन विनोद की हलए की तरफ देखनी लगी ............ एक कट्टर हिंदू की तरह पंत शर्ट मैं होनी की बावजूद भी हिंदू ट्रडिशन्स की मुताबिक़ वह सुब कुछ पहनी होय था ............ मगर उन सब चीज़ों की बावजूद भी हमेशा की तरह हैंडसम लग रहा था ....... मगर महीन की दिल मैं कोई भी ऐसी वैसी फीलिंग नहीं थी विनोद की लय ............

विनोद उसी अपनी तरफ देखती होय देख की मुस्कराया और फिर बोलै ..... क्या देख रही हैं आप ..........

महीन वीर्य सी मुस्कराई और बोली ....... विनोद जी लगता है की काफी प्यार कृत्य हैं आप की परिवार वाले आप सी ........

विनोद मुस्कराया ........ जी महीन जी ऐसा hi है

महीन आहिस्ता सी मुस्कराई ....... मुझी नहीं पता था की आप और आप की फॅमिली वाले इतनी ज़्यादा रेलेगिओउस हो .......

विनोद न्य अपनी गले मैं लटकी होय पेंडंट को पाकर की देखा और मुस्कराती होय बोलै ........... जी बस पापा बुहत ज़्यादा इन सब बातों का ध्यान कृत्य हैं .........

महीन मुस्कराई ............ जी मुझी दिख रहा था ....... अछि बात है वैसी ........... मज़हबी होना अछि बात है ....... जो भी मज़हब हो ....

विनोद ...... जी बिलकुल ........ वह एक पोलिटिकल पार्टी सी भी हैं न तो इसलय कुछ ज़्यादा hi स्ट्रिक्ट हैं रिलिजन को लय क्र .......

महीन आहिस्ता सी बोली ........ और आप .... क्या आप भी स्ट्रिक्ट रेलेगिओउस हैं .......

विनोद मुस्कराया ........ नहीं मैं इतना नहीं हों वैसी ....... आप को पता hi है

......

विनोद आहिस्ता सी बोलै ....... अगर आप बुरा न मनाएं तो एक बात बोलोँ की आप भी तो काफी रेलेगिओउस हैं वैसी ........... विनोद न्य महीन की हिजाब की तरफ देखती होय कहा ........... आप भी हर वक़त इस हिजाब मैं रहती हैं ........ वैसी यह आसिफ की कहनी पर है न ...........

महीन मुस्कराई ............ नहीं आसिफ न्य तो कभी भी ऐसा कुछ ज़बरदस्ती नहीं करवाया .......... वह तो अब्बू न्य hi शुरू सी hi आदत बनाई होइ है हमारी ............

विनोद ....... वैसी आप की अब्बू भी काफी रेलेगिओउस लग रही थय ....

महीन ........ जी...... काफी ज़्यादा ...... वह इमाम मस्जिद हैं न ....... तो इसी लये काफी रेलेगिओउस और स्ट्रिक्ट माहोल मैं हमारी उपब्रिंगिंग होइ है ....... शादी सी पहली तो मुझी वैल की साथ साथ आबय भी पहन न परता था .......... यह तो शादी की बाद आसिफ न्य मुझी सिर्फ वैल पहन की जॉब करनी की इजाज़त दी दी ......... मगर अब्बू तो अभी भी गुस्सा कृत्य हैं ........ महीन मुस्कराई .......

विनोद ...... हम्म्म .....

महीन .... यूनिवर्सिटी और जॉब तक मेरी अब्बू मुझी खुद चोर की और लय क्र आती थय घर .......... और पता है मुझी मोबाइल फ़ोन शादी की बाद आसिफ न्य hi लय क्र दया उस सी पहली तो हमें घर मई फ़ोन रखनी की भी इजाज़त नहीं थी .......... महीन न्य मुस्कराती होय बताया ........

विनोद ..... ओह्ह्ह्ह .. आईटी मीन्स आप की फॅमिली तो काफी कन्सेर्वटिवे है ......

महीन मुस्कराई ...... जी ....... वैसी मुझी आप की पापा को देख की लग रहा था की उनको मेरा आप की साथ जाना ाचा नहीं लगा .....

विनोद थोड़ा शर्मिंदाह होती होय बोलै ...... जी उसकी लय मैं सॉरी करता हों आप सी ......... बस वह हैं थोड़ी स्ट्रिक्ट रेलेगिओउस ........ आप को तो पता hi है क्या चलता है हमारी देश मैं .......... लकिन मैं ऐसा नहीं हों ......

महीन मुस्कराई ..... जी जी मुझी पता है........... ी ऍम नॉट जुड़गिंग यू ......... डोंट वोर्री ....

फिर होस्टेस उनको खाना सर्वे करती है तो दोनों खाना कहानी लगती हैं ........ तब भी इतना क्लोज बैठी होनी की वजह सी दोनों की ेलबोस बार बार एक दूसरी सी टच करती हैं ......... महीन काफी बार अवॉयड करनी की कोशिश क्र रही थी मगर यह सुब इतना फ्रेक्वेंटली हो रहा था की वह छह क्र भी इसी होनी सी नहीं रोक पा रही थी ...............खाना कहानी की बाद बातें कृत्य होय महीन को नींद आगये ........ और उसकी आँख लग गए ........ विनोद जाग रहा था ......... वह अपनी क़रीब hi सोइ महीन की खूबसूरत चेहरी को देखनी लगा ........ वह उसी सोती होइ बुहत अछि लग रही थी ........... सत्य होय महीन का हिजाब सोनी की वजह सी थोड़ा उसकी सीने पर सी सिरक गया होआ था ........... और महीन की सीने का एक उभार विनोद की आँखों की सामन्य था .......... आज पहली बार वह महीन की बूब्स को देख रहा था ....... उसी अंदाज़ा हो रहा था की बुहत hi खूबसूरत ब्रेअस्ट्स हैं महीन की ........ सादूल और तानी होइ ........ सख्त और सॉलिड ......... विनोद की नज़रें महीन की बूब्स पी जमी होइ थीं ............ उसकी ब्लू कलर की शर्ट की ऊपर सी साफ़ दिख रहा था की उसनी नीची ब्रा पहनी होइ है ....... क्यों की महीन की ब्रा कप की लाइनिंग साफ़ नज़र आ रही थी शर्ट की ऊपर सी .............. ऐसा नहीं था की विनोद आज पहली बार महीन को देख रहा था ........ वह पहली भी एक मर्द की नज़र सी महीन को देखता था ............. उसकी खूबसूरती सी वह पहली दिन सी hi मुतासिर था ........ मगर महीन की प्रोफेशनल बेहेवियर और किसी सी ज़्यादा फ्री ना होनी की आदत की वजह सी उसनी कभी भी कोई ऐसी वैसी बात नहीं की थी ........ और यही वजह भी थी की महीन उसकी साथ ुक तक अन्य को राज़ी हो गए थी ........... महीन की खूबसूरत चेहरी को देखती होय उसका दिल फिर सी छह रहा था की वह महीन का हाथ अपनी हाथ मैं लय लय ........... लकिन वह ऐसा नहीं क्र रहा था ......... बस उसी देखी जा रहा था .......... वाक़फ़ी वाक़फ़ी सी .............

महीन की शर्ट उसकी तइस पर सी हैट गए होइ थी सोनी की वजह सी ....... उसकी पोजीशन की वजह सी ....... और टाइट ट्रॉउज़र मैं महीन की तइस विनोद की नज़रों की सामन्य थीं ......... वह उनको देखनी लगा ........ महीन की खूबसूरत सादूल तइस की पूरी पूरी शेप उस टाइट ट्रॉउज़र मैं दिख रही थी ......... विनोद की नज़रें नहीं हैट पा रही थीं .......... उसका दिल छह रहा था की वह हाथ बढ़ा की महीन की तइस को फील क्रय ....... उनको सहलाय ........ मगर वह खुद पी कण्ट्रोल क्र रहा था .........

एक घंटा सोनी की बाद महीन की आँख कुल गए ........... विनोद न्य जल्दी सी अपनी नज़रें दूसरी तरफ क्र लीन ........... महीन न्य आँख खुलती hi अपनी हालत की तरफ देखा और फिर शर्मिंदाह हो कर जल्दी सी खुद का हुल्य ........ हिजाब दरुस्त करनी लगी ............

अपनी मंज़िल की क़रीब पोहंची तो एयरहोस्टेस न्य दोबारा सी अनाउंसमेंट की की वह लोग अब लैंड करनी वाली हैं ............ और जैसी hi प्लेन लैंड करनी लगा तो एक बार फिर सी महीन की लये वह बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया ........... और इस बार उसनी घबरा की अपनी दोनों हाथों सी विनोद की बाज़ू को पाकर लय .......... उस घबराहट मैं महीन को अहसास नहीं था मगर विनोद का नेकेड मस्कुलर बाज़ू महीन की नाज़ुक नाज़ुक उंगलयों की ग्रिफ्ट मैं था ......... और वह आंखें बंद क्र की कैंम्प रही थी .......... वह अपनी दोनों हाथों की ग्रिफ्ट मैं विनोद की नंगी बाज़ू को दबा रही थी ......... विनोद की बाइसेप्स पर उसकी दोनों हाथ थय ........ जो शर्ट की स्लीव्स सी बहार नंगी हो रही थय ... और विनोद उसी देख की मुस्करा रहा था ........... आखिर प्लेन लैंड होआ तो महीन की जान मैं जान आई ....... उसी अहसास होआ की उसकी हाथ विनोद की नंगी बाज़ू पर हैं ........ जो काफी मस्कुलर और मज़बूत है ...... उसी अपनी नाज़ुक हाथों मैं विनोद की जिसम की मज़बूती का अहसास हो रहा था ............. उसनी विनोद की तरफ देखा और घबरा क्र जल्दी सी उसकी बाज़ू पर सी अपनी हाथ हटा लये ........... और आहिस्ता सी उसी सॉरी बोलै ........... विनोद न्य सिर्फ हल्की सी मुस्करा की उसी देखा ........... और महीन शर्म सी लाल होनी लगी ........

आखिर कार प्लेन न्य लंदन की एयरपोर्ट पर लैंड क्या ............ गेट खुलनी की बाद पैसेंजर्स नीची उतरण्य लगी ......... उनकी सीट पर जो तीसरा पैसेंजर था वह भी नीची उतर गया ..... मगर विनोद नहीं उठा और बोलै की थोड़ा रश काम हो जाय फिर उतरती हैं ........ महीन न्य भी हाँ मई सर हिला दया ....... कुछ देर मैं रश काम होआ तो विनोद उठ क्र सीट सी बहार आया और ऊपर की बॉक्स सी बैग्स निकालनी लगा ...... महीन भी उठ क्र अब विनोद वाली सीट पर आ क्र बेथ गए ......... विनोद ऊपर सी बाद उतार रहा था ........ नीची बेथनी पर महीन की नज़र सीढ़ी विनोद की जीन्स की सामन्य वाले हिस्से पर गए ........ उसकी लुंड वाले हिस्से पर .......... खुद सी hi ..... बिना किसी इरादे की ...... बिना कुछ सोचे होय ........ और कुछ देर की लय उसकी नज़रें वहीँ पर जैम गईं ........ कुछ भी ना सोचती होय ........... और फिर उसनी खुद सी शर्मिंदाह होती होय नज़रें हटा लीन और विनोद की तरफ देखनी लगी .......... वह सामान निकालनी मैं बिजी था ........ उसी नहीं पता था की महीन की नज़रें कहा देख रही थीं उसकी .......... फिर दोनों न्य अपनी हैंड बैग्स लये और प्लेन सी नीची उतरण्य लगी ........... विनोद ाग्य ाग्य थय और महीन उसकी पिच्य थी .......

कोई एक घंटी की चेकिंग की बाद दोनों अपना सामान लये होय एयरपोर्ट लाउन्ज सी बहार आय ........ बहार खरी होइ टैक्सी को हिरे क्या और अपनी लय कंपनी की तरफ सी बुक कए होय होटल की तरफ रवाना हो गए ........... हाफ ऑवर मैं वह अपनी होटल पोहंची .......... दोनों की लय कंपनी की तरफ सी अलग अलग रूम्स बुक थय ...... चेक इन करनी की बाद अपनी अपनी रूम मैं पोहंच गए ....... दोनों की रूम्स साथ साथ थय .... रूम मैं जाती hi महीन न्य आसिफ को कॉल की और अपनी लंदन पोहनचंय का बताया ....... और फिर थोड़ी देर तक बात करनी की बाद महीन न्य फ़ोन बंद क्या और उठ क्र ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो गए .............
 
अपडेट NO: 04

आंय मैं खुद की देखती होय महीन न्य लम्बी सांस ली ....... और खुद सी बोली की आखिर आना hi पारा न उसी ुक ना चाहती होय भी ........... महीन की चेहरी पी अभी भी उदासी थी .......... फिर महीन न्य अपना वैल उतरा और अपनी बलून मई लगी होइ पिंस को निकल की अपनी बलून को खोल दया ........... अपनी सर मैं हाथ फैरती होय अपनी बलून को सहलाती होय अपनी सर का जासीय मस्सगे करनी लगी .......... आखिर इतनी देर सी उसनी अपनी सर पी वैल पहना होआ था ......... महीन न्य ब्रश उठाया ...... और उसी अपनी बलून मैं पहिरण्य लगी ........... थोड़ा ज़ोर सी चलाती होय अपनी स्क्लेप का मस्सगे क्र रही थी ........ जिस सी उसकी सर को सुकून मिल रहा था ......... अपनी बलून को स्मूथ करनी की बाद महीन आंय की सामन्य सी हैट क्र वाशरूम की तरफ बढ़ गए .......उसी नहाना था ..... फ्रेश होना था ........ ..........

वाशरूम का दरवाज़ा खोल की देखा तो उसी साफ़ सुथरा और कुशादा बाथरूम देख क्र ख़ुशी होइ ........ ाचा लगा ....... वह अंदर दाखिल होइ ........ एक तरफ लगी होय हैंग पर अपनी कपड़े लटकाय ...... और फिर बाथरूम का जायज़ा लेंय लगी ........ बुहत बारे सा आइना ........ साफ़ सुथरा वषबसों ........ हर चीज़ सी एक्विपपड़ ........... साफ़ सुथरे टॉवल .... और टॉवल गाउन लटक रहे थय एक तरफ ......... वषबसों की क़रीब hi एक छोटी सी कैबिनेट मैं सोप, फेस वाश, छोटा सा टूथ पेस्ट, टूथ ब्रश और एक छोटा सा पैकेट रखा था ......... क्यूरोसिटी की साथ महीन न्य वह पैकेट उठाया और उसी ओपन क्या ..... तो उसकी चेहरी पर एक शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गए ....... उस मैं एक हेयर रेम्योविंग सचेत था ....... और एक बॉडी शेविंग रेजर ........ महीन न्य उसी वापिस वहीँ रख दया... ... नहानी की लय शिष्य का एक केबिन था .......... जिस मैं शावर लगा होआ था ............. बाथरूम की एक हिस्से मैं साफ़ सुथरा ........ वाइट ...... कोड़े था .......... बारे सी आंय और वाश बसों की क़रीब hi एक बास्केट पारी होइ थी ............ जिसकी ऊपर लौंडरी का स्टीकर लगा होआ था .......... यह शायद उतारी होय कपड़े डालनी की लय है ........ महीन न्य सोचा .............. उसी वाशरूम की अरेंजमेंट अछि लगी थी .................

महीन न्य बारी सी फुल हाइट आंय की सामन्य खरी हो की अपनी शर्ट को नीची सी पाकर की ऊपर को उठाया ....... और उसी उतार की लौंडरी वाली बकेट मैं दाल दया ........ फिर उस न्य अपनी ब्लू कलर की मैचिंग ट्रॉउज़र को भी उतर दया ....... और उसी भी बकेट मैं दाल दया ........... अब वह आंय की सामन्य सिर्फ वाइट कलर की ब्रा और मैचिंग पंतय मैं खरी होइ अपनी खूबसरत जिसम को देख रही थी ....... उसकी नज़र सामन्य आंय मैं दिख रही होय अपनी बूब्स पर पारी ........ जिनका ऊपरी हिस्सा उसकी ब्रस्सिएर दिख रहा था ...... उभरा होआ ....... और दोनों बूब्स की दरम्यान का चिकना सुफैद सीना ....... गोरा गोरा जिसम जैसी चमक रहा था ........ पेट बिलकुल सपाट था .......... ज़रा सा भी बहार को नहीं निकला होआ था ....... उस सी नीची उसकी सुफैद पंतय ......... जो उसकी छूट को एक ट्राइंगल की सूरत मैं कवर की होय थी ......... और नीची सादूल भरी भरी तइस .......... ब्रा और पंतय की इलावा वह बिलकुल नंगी थी .............. अपनी आप को आंय मैं देखती होय महीन न्य हाथ पिच्य लय जा क्र अपनी ब्रा का हुक खोल दया ........... टाइट ब्रा लूसे हो क्र उसकी बाज़ोँ पर लटक गए ........ और महीन न्य उसी उतार की लौंडरी बकेट मैं डाला ....... और आंय मैं अपनी नंगे बूब्स को देखनी लगी ........... खूबसूरत ........ सुफैद कबूतरों की तरह .......... दूध सी भारी होय गोल गोल प्यालों की तरह .... जिन की टिप्स पी गुलाबी निप्पल थय ........... नोकीले ........ तनय होय ........... सीने की उभार ऐसी दिख रही थय जैसी ेगीपत की मख़रूति मक़बरे ........... उसकी दिमाग़ मैं यही लफ़ज़ गूंजी ........... ेगीपत की मख़रूति मक़बरे .......... हाँ यही तो आसिफ उसकी उभारून की तारीफ मैं कहता होता है ............ आसिफ की बात को याद क्र की महीन की होंठों पी मुस्कराहट फैल गए ............ और उसनी अपनी हाथ अपनी बूब्स पी रख डाई और उनको आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगी ............... इतनी देर तक टाइट ब्रस्सिएर मैं क़ैद रहंय की बाद आज़ादी मिली थी तो उनपर हाथ फैरती होय महीन को ाचा महसूस हो रहा था ........... वह बूब्स की नीची हाथ पहिरण्य लगी ....... जहा पी टाइट ब्रस्सिएर की इलास्टिक की हल्की निशाँ पारी होय थय .............. फिर अपनी पेट को सहलाती होय महीन अपना हाथ नीची अपनी पंतय पी लय गए ............. और आहिस्ता आहिस्ता अपनी पंतय भी उतारनी लगी ........ पंतय भी उतार की महीन न्य बकेट मैं दाल दी और अपनी पूरी नंगी जिसम को फुल हाइट आंय मैं देखनी लगी ................ इतनी बारे होटल की इतनी शानदार कमरे की ऐसी शानदार बाथरूम मैं नंगी खरी महीन को अपनी जिसम का नज़ारा और भी ाचा लग रहा था ............... आंय मैं खुद की नंगी गूरी गूरी चिकनी जिसम को देखती होय उसकी नज़र एक बार फिर कैबिनेट मैं रखी होय उसी पैकेट पर गए ............. महीन न्य उसी देखा तो बी इख्तयार hi अपनी बाज़ू ऊपर कए और अपनी आर्मपिट्स को देखनी लगी ............ बिलकुल सुफैद आर्मपिट्स थीं महीन की ........ बुहत hi हल्की हल्की बाल थय उन मैं ......... 3 दिन पहली तो साफ़ कए थय बाल उसनी ...... अपनी पीरियड्स सी फ़ारिग़ होनी की बाद ..... फिर उसकी नज़र अपनी छूट की ऊपर की हिस्से पर गए ........ वह भी वैसी hi हल्की हल्की बाल थय ........... अपनी आर्मपिट्स मैं हाथ फेर क्र फिलहाल उनको साफ़ करनी का इरादा पोस्टपोन क्र दया ....

महीन कोड़े की तरफ बरही .......... और उसकी कवर को उठा क्र उस पी बेथ गए ........... अपनी घुटनो पर अपनी दोनों बाज़ू रख की वीर्य वीर्य रिलैक्स होती होइ पेशाब करनी लगी ........... जैसी जैसी महीन का ब्लैडर हल्का हो रहा था उसी ाचा फील हो रहा था .............. महीन को इस तरह सुकून सी बैठना बुहत ाचा लग रहा था ..................... महीन न्य कोड़े की बैक सी अपनी कमर को टिकाया ........ और आंखें बंद क्र की सुकून की लम्बे लम्बे सांस लेंय लगी .............. थोड़ी देर की बाद महीन उठी और गिलास केबिन मैं दाखिल हो गए .............. शैम्पू, सोप, बॉडी वाश, बॉडी लोशन सुब कुछ रखा होआ था ........... महीन न्य शावर चलाया और नहानी लगी ............... उसी शावर की हल्की हल्की गरम पानी मैं ाचा लग रहा था ............ काफी देर तक वह अपनी जिसम को शावर की पानी मैं भिगोती होइ अपनी जिसम को सुकून देती रही ............. ठण्ड नहीं थी ........... मगर हल्का गरम पानी उसी ाचा लग रहा था और सफर की थकावट को जैसी उसकी जिसम सी निकाल रहा था ............. फिर महीन न्य शैम्पू क्या .......... और ाच्य सी नहानी की बाद टॉवल सी अपनी जिसम को साफ़ क्या ......... दूसरी टॉवल सी अपनी गीले बलून को लपेट लय ....... और वहीँ रखा होआ सुफैद टॉवल गाउन या बाथरोब कह लो वह पहन क्र बाथरूम सी बहार आगये .......... बाथरोब उसकी पूरी ऑपेरी जिसम को कवर क्र रहा था ....... मगर नीची उसकी घुटनो तक था ..... उस सी नीची उसकी टांगें नंगी थीं ....... महीन न्य इसका कोई ज़्यादा नोटिस नहीं लय ..... क्यों की वह तो रूम मैं अकेली hi थी . .... हल्के गरम पानी सी बाथ लेंय की बाद वह खुद को बुहत hi हल्का फुल्का और रिलैक्स फील क्र रही थी .............. उसनी बहार आ कर क्लॉक को देखा तो उसी पता चला की वह क़रीब 40 मिनट बाथरूम मैं लगा क्र आई है .......... महीन मुस्कराई और उसी बाथरोब मैं बीएड पर लेट गए थोड़ा रेस्ट करनी की लय ................

मोबाइल की बेल्ल सी उसकी आँख खुली तो उसनी जल्दी सी मोबाइल उठाया ....... विनोद की कॉल थी ...........

महीन नींद सी भरी होइ आवाज़ मैं ........ ह्म्म्मम्म ...... hello ......

विनोद ..... ओह .... लगता है आप सो गए होइ थीं .....

महीन अभी भी नींद मैं थी .......... हम्म्म .... आँख लग गए थी शायद ......

विनोद ..... वह रिसेप्शन सी कॉल आई थी डिनर की लये ....... तो आप त्यार हो जाओ नीची चल की डिनर क्र लेती हैं फिर आप रेस्ट क्र लेना .......

महीन को भी अब भूक का अहसास होआ ....... हम्म्म्म ठीक है ........... गिव में हाफ ऑवर प्लीज ........

विनोद .......... okay ...... टेक योर टाइम प्लीज ......

फ़ोन बंद होनी की बाद महीन न्य क्लॉक की तरफ देखा तो उसी पता चला की 8 बज रही हैं रात की और वह एक घंटी सी ज़्यादा सोती रही है ........ महीन मुस्कराई और फिर मोबाइल रख की अपनी हालत की तरफ देखा ....... उसकी सर पी लिप्त होआ टॉवल खुला होआ था .......... टॉवल गाउन की बेल्ट भी थोड़ी ढीली हो चुकी होइ थी ...... जिसकी वजह सी उसका गोरा गोरा सीना नंगा हो रहा था ....... नीची तइस पर सी भी गाउन हैट चूका होआ था ....... और मुलायम तइस भी नंगी थीं .......... महीन मुस्कराई और उठा क्र अपना गाउन ठीक करती होइ अपनी बैग की तरफ बढ़ गए ..........

महीन न्य अपना बैग खोला......... एक पिंक कलर का ट्रॉउज़र और शर्ट निकला ..... साथ ब्लैक कलर की ब्रा और पंतय ..... आंय की सामन्य खरी हो क्र अपना बाथिंग गाउन उतार की अपनी कपड़े पहन न्य लगी .... ड्रेस पहन क्र हल्का सा मेक उप क्या ....... फिर अपना वैल लय उसी ाच्य सी पहन क्र विनोद को कॉल क्र दी ......... विनोद न्य उसी रूम सी बहार अन्य को बोलै ........ महीन न्य आंय पी लास्ट नज़र डाली..... हल्की सी मेक उप की साथ भी महीन बोहत प्यारी लग रही थी ........... महीन रूम सी बहार आगये ...... विनोद भी साथ वाले रूम सी बहार आज्ञा ........ और दोनों अपनी अपनी रूम को लॉक क्र की लिफ्ट की तरफ बढ़ गए ..........

लिफ्ट मैं सिर्फ वही दोनों थय ........ महीन विनोद सी चाँद इनचेस की फ़ासली पर खरी थी ........... उसी विनोद की जिसम सी परफ्यूम की खुसबू आ रही थी ...... जो उसी अछि लगी ........ महीन न्य ना चाहती होय भी एक लम्बी सांस खींची और विनोद की परफ्यूम की खुसबू महीन की अंदर उतर गए ............ उसी ाचा लगा ...... विनोद न्य एक जीन्स और हाफ स्लीव टी शर्ट पहनी होइ थी ..... टी शर्ट उसकी जिसम पर टाइट थी ... उसकी बाज़ूओं और जिसम की मसल्स साफ़ दिख रही थय ...... साफ़ दिख रहा था की विनोद की बॉडी काफी स्ट्रांग और सॉलिड है ....महीन उसको hi देख रही थी ........... विनोद का स्टाइल ..... और ड्रेसिंग ........ उसी पसंद आई थी ........ लिफ्ट की ज़रिए नीची जा क्र दोनों दिंनिंग हॉल मैं ाग्य ...........

महीन प्लेट उठा क्र इधर उधर घूम रही थी .....वह छह रही थी की कुछ हलाल चीज़ उसी कहानी को मिले .......... विनोद को उसकी परेशानी समझ आ रही थी .......

विनोद उस सी बोलै...... ी थिंक यू अरे लुकिंग फॉर सम हलाल फ़ूड हेरे ..... विनोद मुस्कराया ......

महीन थोड़ी शर्मिंदा सी मुस्कराई और हाँ मैं सर हिलाया ......... विनोद न्य एक वेटर को बुलाया और उस सी हलाल फ़ूड का पुछा ........ उसनी एक कन्दर की तरफ इशारा क्या ......... विनोद महीन को लय कर वह गया ...... वहां पर चिकेर और मटन की डिशेस थीं ...... और उस टेबल पी हलाल फ़ूड की डिस्प्ले प्लेट भी राखी होइ थी ....... महीन मुस्कराई और अपनी प्लेट मैं थोड़ी बिरयानी और चिकन लय कर टेबल की तरफ बढ़ गए ......... विनोद भी अपनी प्लेट लय कर आज्ञा .......... और दोनों ामन्य सामन बेथ क्र खाना कहानी लगी ........

विनोद खाना खाती होय मुस्कराया ....... यू अरे तू मच रेलेगिओउस ..... मच स्ट्रिक्ट ओने .......

महीन वीर्य सी मुस्कराई ..... नहीं ऐसा नहीं है मगर कहानी की मामली मैं ख्याल तो करना परता है न ........ आप को बताया तो है न अपनी पेरेंट्स और घर का माहोल .......

विनोद मुस्कराया ...... और इनकी लिखी पर भी ऐतबार करना परता है .......

महीन न्य उसकी बात पी घोर क्या ... और थोड़ी परेशानी सी उसी देखा और फिर मुस्कराई ........ जी यह तो है ...... ऐतबार तो करना hi पारी गए न ..........

विनोद ....... आप न्य तो लगता है की नींद क्र ली है .......

महीन मुस्कराई ..... जी बस आँख लग गए थी ...... बुहत थकावट हो गए थी न प्लेन मैं .......

विनोद ........ जी ....... ाच्य सी रेस्ट क्र लाइन ....... टुमारो ा नई फेज ऑफ़ आवर कॉर्पोरेट लाइफ इस गोइंग तो स्टार्ट ..........

महीन मुस्कराई ..... जी ....... और पता नहीं वह कितना हेक्टिक हो गए ..... कैसा हो गए यहाँ की ऑफिस का माहोल ..... वर्किंग एनवायरनमेंट ...... कलगुएस ....... बॉस ......

विनोद ...... डोंट वोर्री ..... भगवन ाचा क्रय गए ....... सुब ठीक हो जाय गए .......

खाना कहानी की बाद दोनों थोड़ी देर होटल की लॉन मैं टहलनी लगी ...... अँधेरा था ...... हलकी हलकी बल्ब्स की रौशनी थी ....... और महीन विनोद की साथ चल रही थी ........ उसी अजीब लग रहा था ...... फर्स्ट टाइम था की वह ऐसी किसी ग़ैर मर्द की साथ ऐसी रात मैं वाक क्र रही थी ....... लकिन उसी कुछ बुरा फील नहीं हो रहा था ..... बल्कि इस दूसरी देश मैं ..... उसी विनोद का साथ अपनी लये ब्लेसिंग और प्रोटेक्टिव लग रहा था ........... विनोद की पर्सनालिटी उसी पहली सी ज़्यादा अब इफ़ेक्ट करनी लगी थी ......... इतनी ारस्य सी दोनों ीखती काम क्र रही थय मगर महीन को कभी भी इस तरह सी विनोद की साथ टाइम गुज़ारनी का मौका नहीं मिला था ......... न कभी इस तरह ऑफिसियल वर्क की इलावा वह उसकी साथ रही थी .......... विनोद की साथ चलती होय उसी ाचा लग रहा था ..... उसकी पर्सनालिटी और बॉडी अपीयरेंस उसी अछि लग रही थी ......... उसकी साथ क़दम सी क़दम मिला की चल रही थी ....... विनोद की परफ्यूम की महक अभी भी महीन की सांसूं मैं घुल रही थी .........

महीन ...... ाचा होटल है लकिन एक्सपेंसिव है ..... हमें जल्द hi कोई अल्टेरनाते और पर्मनंट अरेंजमेंट देखना हो गए .......

विनोद हंसा .... जी जी यह तो कंपनी की मेहरबानी है की 5 डेज का स्टे दी दया है हमें इस होटल मैं ...... वर्ण हम खुद तो इतना एक्सपेंसिव अफ़्फोर्ड नहीं क्र सकती

महीन भी हंस पारी ......

विनोद ... ...... हम कल ऑफिस की बाद कुछ अपार्टमेंट्स और फ्लैट देखनी जैन गए ...... उम्मीद है की कुछ नई कलगुएस भी हेल्प क्र डैन गए ..... कुछ मैं अब रात को सर्च करता हों नेट पी ......... कुछ ऑनलाइन इन्फो मिल जाय तो आसानी हो जाय गई ..........

महीन ..... जी ठीक है .......

कुछ देर वाक करनी की बाद दोनों अपनी फ्लोर पर ाग्य .......... और अपनी अपनी रूम का दरवाज़ा खोलनी लगी .........

विनोद .... okay महीन जी गुड नाईट .....

महीन मुस्कराई ....... गुड नाईट विनोद जी ........

विनोद न्य दरवाज़ा खोला ....... सी यू इन मॉर्निंग .....

महीन .... सी यू ..... और हाँ सुबह फिर कॉल क्र देना आप ..... कहीं ऐसा न हो की मैं सोती hi रह जाऊँ आज शाम की तरह ..... और ऑफिस की लय पहली दिन hi लेट हो जैन ......... महीन न्य मुस्करा की कहा .......

विनोद मुस्कराया ..... जी जी ज़रूर .........

और फिर दोनों अपनी अपनी कमरे मैं दाखिल हो गए और अपनी रूम्स को लॉक क्र लय .........
 
महीन न्य रूम के टेबल पर राखी ........ और फिर लेद ों क्र दी ....... कुछ काम की चीज़ नज़र नहीं आ रही थी ....... आखिर एक बोल्लोवूड सांग्स चैनल लगा क्र अपनी काम मैं लग गए ............ उठ क्र अपना बैग एक कार्नर मैं रखा ......... अपना वैल उतार की चेयर पी रख दया ......... इतनी मैं दूर बेल्ल बजी ......... महीन हैरान होइ की इस वक़त कौन है ...... हो सकता है की विनोद हो और कोई बात करनी हो .......... महीन न्य दरवाज़ा खोल दया ...दरवाज़ा खोला तो सामन्य रूम सर्विस बॉय खरा था ........

रूम सर्विस ....... सॉरी मम ....... प्लीज हैंड ओवर योर tomorrow's ड्रेस फॉर इरविंग .......

महीन एक लम्हे की लय रुकी ..... पहली तो उसी समझ नहीं आई ..... फिर ख्याल आया की यह भी होटल की सर्विसेज का हिस्सा है ........

महीन .... okay ..... प्लीज वेट फॉर ा व्हिले ....

महीन न्य दरवाज़ा अनलॉक और थोड़ा सा खुला होआ छोरा और कार्नर मैं रखी होय अपनी बैग की तरफ चली गए ....... उस मैं सी उस न्य अपना नया खरीदा होआ एक ब्रांडेड सूट निकला ........ ब्लैक कलर का शर्ट और ट्रॉउज़र ..... और उसी गेट पी ला क्र रूम सर्विस की हवाले क्र दया .... अपनी कपड़े ऐसी एक ग़ैर मर्द की देती होय उसी अजीब सा लग रहा था ....... मगर वह खामोश रही और कपड़े उसी दी कर दूर लॉक क्र की वापिस आगये .........

लॉक्ड दरवाज़ी की पास रुक क्र महीन न्य एक लम्बी सांस ली ........ और वार्डरॉब की तरफ बढ़ गए .......... वार्डरॉब खोली तो ...... सामन्य खाली हेंगर लटक रही थय और शेल्फ मैं बुहत hi सलीक़ी सी दो ट्रांसपेरेंट पैकेट्स रखी थय जिन मैं 2 सेट नाईट ड्रेस की थय ......... एक गेट्स और एक लेडीज था .......... महीन मुस्कराई ......... आसिफ साथ होता तो वह यह कपल्स वाला दूसरा ड्रेस काम आता न .......

महीन न्य लेडीज नाईट ड्रेस का पैकेट ओपन क्या ...... एक शार्ट सी पिंक कलर की फ्लोरल शर्ट और मैचिंग पजामा था ........ महीन घर पी भी नाईट मैं पजामा और शर्ट उसे करती थी ..... इसलय उस न्य नाईट ड्रेस चेंज करनी का इरादा क्र लय ........ अपनी कपड़े उतारी ........ ......शर्ट और ट्रॉउज़र को हेंगर मैं हैंग क्र दया ........ ब्रा भी उतार क्र वहीँ हेंगर की रोड पी लटका दी ......... पंतय उतरण्य लगी ..... मगर फिर कुछ सोच क्र उसी उतरण्य का इरादा कैंसिल क्र दया ....... वही पिंक फ्लोरल पजामा पहना और शर्ट की बटन सामन्य सी खोल क्र शर्ट पहन क्र बटन बंद करनी लगी ......... शर्ट का गाला थोड़ा बारे था डीप व् शेप्ड था ...... मतलब की बटन पूरी ऊपर तक नहीं थय ...... व् नैक थोड़ा डीप तक जाता था ...... और बटन क्लीवेज की स्टार्ट सी शुरू होती थय ............ क्लीवेज तो नहीं दीखता था मगर सीना काफी ओपन था सामन्य सी ......... गोरा सुफैद सीना ......... महीन न्य खुद को आंय मैं देखा ........... शर्ट सी उसकी चेस्ट दिख रही थी ......... उसकी बूब्स का ऊपरी हिस्सा ........ शर्ट उसकी पाजामे की बेल्ट तक थी ....... जहा सी पजामा शुरू होता था वहीँ पर शर्ट की लेंथ ख़तम हो जाती थी ..... स्लीव्स भी शार्ट थीं ....... जिस तरह का नाईट सूट वह पहनती थी घर पी उस सी यह ज़्यादा छोटा था और सेक्सी लुक दी रहा था ......... उसकी घर वाली ड्रेस की शर्ट उसकी हिप्स को कवर करती होती थी ...... मगर इस नाईट ड्रेस की शर्ट महीन की हिप्स को कवर नहीं करती थी ..... बल्कि हिप्स सी ऊपर hi ख़तम हो जाती थी ..... और ज़रा सा भी बाज़ू को ऊपर उठाओ तो उसकी बेल्ली का कुछ हिस्सा नंगा हो जाता था ............ महीन न्य घूम क्र देखा ..... उसकी हिप्स पजामी मैं साफ़ दिख रही थय ....... खूबसरत गांड की पूरी शेप और उतार चढ़ाऊ नज़र आ रही थय ........... महीन न्य खुद को तारीफी नज़रों सी देखा ............. यह ड्रेस तो बुहत hi सेक्सी लग रहा है पहना होआ .......... मगर यहाँ कोनसा कोई और है ....... या किसी न्य देखना है जो मुझी इतना षर्मान्य की ज़रूरत है ......... महीन न्य मुस्करा की अपनी ख्याल को झटका ........... और रूम की लाइट बंद क्र की नाईट लाइट ों क्र की बीएड पी लेट गए ...........

बारी सी डबल बीएड की नरम नरम बिस्तर पी लेती होय उसी फिर सी आसिफ का ख्याल अन्य लगा ........... वह थोड़ा उदास भी होनी लगी ....... आसिफ की कमी उसी महसूस हो रही थी ......... .... अगर आसिफ यहाँ होता और मुझी इस नाईट ड्रेस मैं देखता तो फौरन hi शुरू हो जाता ....... कभी भी मेरी जान ना चोरता ......... मेरी लये बिना .......... महीन अपनी सोच पर मुस्कराई और आहिस्ता आहिस्ता अपनी जिसम पर हाथ पहिरण्य लगी ......... उसी ाचा लग रहा था ...... इस शानदार होटल की ऐसी कोजी माहोल मैं ऐसी लेती होय अपनी जिसम को सहलाना ......... उसी आसिफ की साथ की होइ पिछली रात की चुदाई याद अन्य लगी ... कैसी उसनी महीन की जिसम को तोड़ की रख दया था ........ जैसी पूरी साल की कसार निकाल देना चाहता हो अपनी भी और महीन की भी ......... आसिफ को याद करती होइ महीन की आँख लग गए ............

सुबह अपनी मोबाइल की अलार्म सी 6 ऍम पी महीन की आँख खुली ........ महीन न्य सब सी पहली अपनी लय चाय बनाई और बीएड पर बेथ क्र सिप करती होइ अपना मोबाइल देखनी लगी ......... चाय पीनी की बाद वह अभी मोबाइल मैं hi बिजी थी ...... आसिफ की तरफ सी उसी ऑफिस मैं पहली दिन की विश करनी की ंसग्स आय होय थय ........ वह मुस्कराती होइ उनकी जवाब देंय लगी ..........

6:30 ऍम पी रूम की बेल्ल बजी ......... महीन चौंक पारी की यह सुबह सुबह कौन है ....... कहीं विनोद तो नहीं है उसी जगानी की लय आया होआ ......... लकिन वह तो कॉल क्र की जगा देता ऐसी गेट पी अन्य की क्या ज़रूरत थी .......... महीन अभी यही सोच रही थी की बेल्ल दोबारा सी बजी ....... महीन बीएड सी उत्तरी ..... अपनी हलए पर नज़र डाली ...... चेंज करनी का वक़्त नहीं था ..... ऐसी hi ाग्य बरही ....... गेट पी पोहंच क्र बिना दूर खोली आवाज़ दी क्र पुछा .........

महीन ..... हु इस आईटी .......

बहार सी आवाज़ आई ...... रूम सर्विस मम .....

महीन न्य दूर अनलॉक क्या ..... और थोड़ा सा दरवाज़ा खोल क्र देखा तो सामन्य रात वाला hi लड़का उसका प्रेसिंग की लय दया होआ सूट लये होय खरा था .........

रूम सर्विस रूम की अंदर क़दम बढ़ाती होय बोलै ....... एक्सक्यूज़ में प्लीज मम .......

उसकी कहनी पी महीन खुद सी hi पिच्य हैट गए ....... और उसकी लय रास्ता चोर दया ...... वह लड़का बरी खामोशी और तमीज की साथ अंदर आया ...... ड्रेसिंग टेबल की साइड पर राखी होइ एक छोटी टेबल पी उसनी महीन का प्रेस क्या होआ सूट रखा और वापस दरवाज़ी की तरफ आज्ञा ....... जहा महीन अभी तक खरी थी ...... महीन की क़रीब आती होय उस न्य महीन को ऊपर सी नीची तक देखा .... उस शार्ट वाली नाईट ड्रेस और सेक्सी ट्रॉउज़र मैं .......... महीन को पहली बार एक अजनबी ....... ग़ैर मर्द की सामन्य नाईट ड्रेस मैं आना अजीब लग रहा था ...... और वह भी ऐसी सेक्सी दिखनी वाले पजामा और शर्ट मैं .......... उसकी चेहरी पर शर्म की आसार थय ........... वह लड़का गेट की पास रुक क्र दोनों हाथ बांध क्र बोलै .......

रूम सर्विस ...... मम विल यू टेक योर ब्रेकफास्ट इन योर रूम और इन थे दिंनिंग हॉल?????

महीन आहिस्ता सी बोली ...... no वे विल टेक इन थे दिंनिंग हॉल ....

रूम सर्विस बॉय न्य महीन की बात पर फौरन मुद की इधर उधर देखा .... जैसी देखना चाहता हो की दूसरा कौन है महीन की साथ ....

महीन भी समझ गए और उसकी सोच पी थोड़ी शर्मिंदाह भी होइ ....... फिर थोड़ा हंस की बोली ..... no ओने ेल्स इस हेरे ........ माय कलेग इस इन नेक्स्ट रूम, मर. विनोद ....... वे बोथ विल टेक ब्रेकफास्ट इन थे दिंनिंग हॉल ......

रूम सर्विस ..... ओह ...... सॉरी मम ी थॉट तहत ..... थैंक्स ...

महीन फिर मुस्कराई ........ इतस okay .........

उसी उस लड़के की सामन्य इस ड्रेस मैं खरा होना भी अजीब सा लग रहा था ...... पहली बार कोई ग़ैर मर्द उसी नाईट ड्रेस मैं देख रहा था और वह भी ऐसी शार्ट शर्ट वाले जिस मैं उसका सीना भी खुला नज़र आ रहा था ......

रूम सर्विस बॉय की जांय की बाद महीन न्य दूर लॉक क्या .... और अंदर आकर ........ अपनी नाईट शर्ट और पजामा उतार क्र बीएड पी फेंक दया और सिर्फ पंतय पहनी होय बाथरूम मैं चली गए .......... महीन न्य अपनी पंतय नीची उतारी .. घुटनो तक उसी लय जा की कोड़े पर बेथ गए ........ पेशाब करनी की लय ...... पेशाब कृत्य होय महीन की नज़र अपनी घुटनो पी मौजूद अपनी पंतय की अंदर की हिस्से पर पारी ....... उसी वह पी कुछ सुफैद सुफैद सा नज़र आया ....... महीन न्य फौरन hi उसी थोड़ा सा और खोल की देखा और अपनी उंगलयों सी छूआ ..... चिप छिपा सा .... लेसदार ..... गाढ़ा पानी सा लगा होआ था ...... महीन फौरन समझ गए की यह उसकी छूट का पानी है ..... जो शायद कहीं रात मैं सत्य होय आसिफ को याद कृत्य होय उसकी छूट न्य छोरा हो गए ........ महीन मुस्कराई और खुद को वाश क्र की कोड़े सी उठी ...... और अपनी पंतय अपनी पैरों सी निकाल की लौंडरी बकेट मैं दाल दी .......

महीन आंय की सामन्य खरी हो कर दोबारा खुद को देखनी लगी ...... अपनी बाज़ू ऊपर क्र की एक बार फिर अपनी आर्मपिट्स की बिलकुल हल्की हल्की बलून को देखा .... फिर उसी जांय क्या ख्याल आया की उस न्य कैबिनेट मैं पारा होआ बॉडी शेविंग रेजर उठाया और अपना बाज़ू ऊपर क्र की अपनी आर्मपिट मैं मौजूद हल्की हॉकी बलून को साफ़ करनी लगी ...... दो तीन बार रेजर पहिरण्य सी उसकी आर्मपिट की बाल बिलकुल साफ़ हो गए ....... फिर उसनी दूसरी आर्मपिट सी भी हेयर रेम्योविंग की ...... और उसकी बाद अपनी छूट की ऊपर की हिस्से की बलून को भी रेजर सी क्लीन क्र दया ......... फ़ारिग़ हो क्र अपनी बह्लूं और छूट की ऊपर हाथ पहिरण्य लगी ... दोनों hi जगहें बुहत hi मुलायम और चिकनी हो चुकी होइ थीं .....

ऑफिस मैं पहली दिन कुछ स्पेशल तयारी क्र की जाना तो बनता hi है न ........महीन न्य मुस्कराती होय खुद सी कहा और फिर नहंय की लय गिलास केबिन मैं चली गए ..........

ाच्य सी नहा क्र महीन न्य एक टॉवल सी अपना जिसम साफ़ क्या ....... और एक दूसरा टॉवल लय कर अपनी नंगी जिसम पी लपेट लय ..... जो उसकी बूब्स की ऊपर सी लय कर उसकी हाफ तइस तक आ रहा था ......... महीन उसी टॉवल मैं बाथरूम सी बहार आगये ........ बुहत hi सेक्सी लग रहा था उसका गोरा गोरा जिसम ....... सुफैद टॉवल मैं आधा नंगा और आधा छुपा होआ ...... महीन आंय की सामन्य खरी हो कर अपनी जिसम को देखती होय अपनी बाल ब्रश करनी लगी ........

इतनी मैं बेडसाइड टेबल पर पारा होआ उसका मोबाइल बजा ..... महीन न्य टाइम देखा तो 7:15 ऍम हो रही थय ....... जा की अपना मोबाइल उठाया ..... विनोद की कॉल थी ...... महीन न्य कॉल अटेंड की और चलती होइ वापिस आंय की सामन्य आगये .....

महीन ..... hello .....

विनोद ...... महीन आप को जगानी की लय फ़ोन क्या था ..

महीन आंय मैं .. टॉवल मई लिपटी होय अपनी हाफ नंगे जिसम को देखती होइ मुस्करा क्र बोली ..... वह .. बारे टाइम पी जगानी का ख्याल आया है आप को .....

विनोद ...... हाहाहाहा .... वह बस मेरी भी अभी 15 मिनट पहली आँख खुली है ........ तो आप को कॉल क्र दी है जगानी की लये ...... त्यार हो जाईं 8:15 ऍम तक निकलती हैं

एक हाथ सी महीन न्य फ़ोन पकड़ा होआ था और दूसरी हाथ सी ब्रश क्र रही थी ...... उसकी जिसम पर टाई क्या होआ टॉवल खुल क्र नीची फ्लोर पर गिर गया ...... महीन न्य उसी उठानी की कोई कोशिश नहीं की ...... वह कोनसा कोई मौजूद था उसकी इलावा .......

महीन बोली ...... विनोद सब आप की इत्तला की लय अर्ज़ है की मैं 6 बाजी सी उठी होइ हों और नहा चुकी होइ हों और अभी हेयर ब्रश क्र रही हों ............

अचानक महीन को ख्याल आया की यह उसनी क्या बोलै है ..... ऐसी किसी ग़ैर मर्द सी अपनी नहानी का ज़िकर करना उसकी लय पहली बार था ....... उसी अजीब लगा .... मगर अब तो वह अपनी बात बोल चुकी होइ थी ......... उसनी आंय मैं देखती होय अपनी जुबां अपनी दांतों की नीची दबा ली ...... आंय मैं उसी अपना जिसम पूरी तरह नंगा दिख रहा था ......... अचानक उसकी दिमाग़ मई ख्याल आया की वह बिलकुल नंगी हालत मैं खरी होइ विनोद सी फ़ोन पर बात क्र रही है ......... एक ग़ैर मर्द की साथ ...... उसकी जिसम मैं एक अजीब सी लहर सी दौड़ गए .......... कितनी अजीब बात थी की वह बिलकुल नंगी खरी एक ग़ैर मर्द सी फ़ोन पी बात क्र रही थी .... और वह ग़ैर मर्द बिलकुल उसकी साथ वाले कमरे मैं था ......... महीन की दिल की धरकन तेज़ हो गए ........

विनोद .... okay .. मैं भी त्यार हो जाता हों फिर ब्रेकफास्ट क्र की निकलती हैं ऑफिस की लय .........

महीन आहिस्ता सी बोली .... जी ठीक है .... यह कह क्र महीन न्य फ़ोन बंद क्र दया और झुरझुरी सी लय क्र मुस्कराती होइ फिर सी अपनी बाल ब्रश करनी लगी ........ विनोद को यह बात बोलनी की भला क्या ज़रूरत थी भला की मैं नहीं हों ........ क्या सोचता हो गए न वह .......... और मैं भी तो देखो कैसी बिना कपड़ों की खरी उस सी बात क्र रही थी ........... महीन खुद सी बोल रही थी ....... बिना कपड़ों की थी भी तो क्या होआ ...... वह कोनसा मुझी देख रहा था की मैं किस हालत मैं खरी हों ........... हाँ पर फिर भी थोड़ा थ्रिलिंग तो था hi ......... महीन मुस्कराई .......... हेयर ब्रश करनी की बाद महीन न्य ड्रेसिंग टेबल की पास hi प्रेस हो क्र आया होआ अपना ब्लैक कलर का ड्रेस पहना ........फिर लाइट सा मेकअप करनी लगी ...... मेक उप सी फ़ारिग़ हो कर महीन न्य वैल लय और फिर आंय मैं अपनी आप को देखनी लगी ........ ब्लैक कलर की शर्ट की बाज़ू लाइट सी नेट की थय ..... जिस मैं सी उसकी गूरी गूरी बाज़ूओं की सुफैद रंगत साफ़ नज़र आ रही थी ...... शर्ट टाइट फिटिंग मैं थी ...... जैसी वह हमेशा पहनती थी ...... उसकी बूब्स शर्ट मैं तनय होय थय .......... बिलकुल खरी नज़र आ रही थय ......शर्ट उसकी घुटनो सी थोड़ा ऊपर थी......... नीची ब्लैक कलर का पंत टाइप की कटाई वाला ट्रॉउज़र बुहत ाचा लग रहा था .......... ओवर आल वह बुहत हॉट लग रही थी ....... फिर महीन अपना हैंड बैग लय कर रेडी हो गए ....... टाइम देखा तो 7:45 ऍम हो रही थय ........

इतनी मैं विनोद क कॉल आगये ...... और उसनी महीन को बहार अन्य को बोलै ..... ..... वह भी बहार hi आ रहा था ........... महीन न्य बीएड पर बिखरी होय ब्लैंकेट और अपनी नाईट ड्रेस शर्ट और पाजामे पर नज़र डाली ..... टॉवल भी वहीँ पारा था ...... मतलब की पूरा रूम बिखरा होआ था .... मगर महीन को लगा की अभी उसकी पास टाइम नहीं है यह सुब ठीक करनी का ..... उसनी डीडे क्या की वह वापिस आकर रूम की हालत दरुस्त क्र लय गई ........ एहि सोचती होय महीन न्य अपनी दूर के उठाई और रूम सी बहार आ गए ...... विनोद भी जैसी hi बहार निकला तो महीन उसी देख क्र इम्प्रेस होय बिना नहीं रह सकीय ..... नेवी ब्लू कलर की शर्ट, ब्लैक कोट और ब्लैक पंत पहनी होय बुहत hi डैशिंग लग रहा था .......... एक लम्हे की लये महीन की नज़र उस पर hi टिक गए ......... उसे विनोद काफी हैंडसम लग रहा था ........ जैसी hi वह दूर लॉक क्र की महीन की पास आया तो बुहत hi प्यारी सी तेज़ परफ्यूम की खुसबू महीन की सांस की साथ उसकी जिसम मैं उतर गए ...........

विनोद भी महीन को देख क्र बुहत इम्प्रेस होआ था ....... आज वह काफी प्यारी लग रही थी .......... उस ब्लैक सूट और वैल मैं ...... नेट की शर्ट मैं सी झांकती होइ उसकी गूरी गूरी बाज़ूओं की सफेदी बुहत सेक्सी लग रही थी ............ मगर उसनी अपनी लिमिट्स मैं रहती होय महीन की कोई तारीफ नहीं की और ख़ामोशी सी उसकी साथ लिफ्ट मैं स्वर हो गया ......... नीची दिंनिंग हॉल मैं आ क्र ब्रेकफास्ट करनी लगी .............. ब्रेकफास्ट कृत्य होय विनोद बोलै .....

विनोद ..... महीन जी मैं न्य रात को ऑनलाइन कुछ अपार्टमेंट्स सर्च कए हैं अपनी ऑफिस की एरिया की अराउंड .......

महीन ..... that's गुड ...

विनोद ..... लकिन वह काफी एक्सपेंसिव हैं ......

महीन चुप हो गए ........ हम एक बार उनको विजिट क्र की देख लेती हैं फिर डीडे क्र लाइन गए की क्या करना है ...........

विनोद .... हम्म ........ ऑफिस की बाद चलें गए देखनी की लय ........

महीन ....... ठीक है ....... उम्मीद है की रेंट मैं कुछ न कुछ कमी हो hi जाय गई बात करनी सी ............

विनोद ........ यस ....... let's सी .......

चाय का सिप लेती होय विनोद महीन की तरफ देखती होय बोलै ....... महीन जी एक बात कहौं अगर आप बुरा न मनाएं तो ......

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ......... जी जी क्यों नहीं ...........

विनोद थोड़ा हेसिटते कृत्य होय बोलै ....... मैं यह कहना चाहता था की हम अब ुक मैं हैं ..... यू क्नोव की यहाँ कितना ओपन एनवायरनमेंट है ..... मुझी कहना तो नहीं चाहिए ........ क्यों की यह आप का पर्सनल मटर है....... लकिन क्या आप को नहीं लगता की यहाँ पी आप की यह वैल पहन न्य सी आप को कोई दिक्कत हो सकती है .... ी मैं तो से ऑफिस मैं और यहाँ पर बहार भी .......

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ........ उसकी बात को घोर सी सुना ..... और फिर अपनी चाय की कप की बॉर्डर्स पी अपनी ऊँगली फेरती होइ कुछ सोचनी लगी ............. कोई जवाब नहीं दया ........ लकिन उसकी चेहरी सी ऐसा लग रहा था की जैसी वह विनोद की बात सी एग्रीड हो ...... और थोड़ी वरीड भी ........

विनोद .......... ी ऍम सॉरी महीन जी ...... आप को मेरी बात अछि नहीं लगी ........

महीन धीमी आवाज़ मैं बोली ..... नहीं विनोद जी ऐसी बात नहीं है ...... आप की बात किसी हद तक ठीक भी है .......... लकिन ी don't क्नोव की यह पॉसिबल है या नहीं ........ क्यों की आसिफ और मेरी अब्बू कभी भी मुझी इजाज़त नहीं धयन गए की मैं बिना वैल की राहोँ यहाँ पर ..........

महीन चुप हो गए ....... और अपना सर झुका लय ........

विनोद ...... it's okay महीन जी ........ don't गेट वरीड ....... let's जो तो ऑफिस ....... और देखती हैं की क्या होता है ........

महीन भी फीकी सी मुस्कराहट अपनी होंठों पी ला की विनोद की तरफ देखनी लगी ........ दोनों न्य अपना ब्रेकफास्ट ख़तम क्या इतनी मैं उनकी कैब आगये ........ और दोनों कैब की पिछली सीट पर बेथ गए और कैब उनकी नई ऑफिस की तरफ चल पारी ........
 
अपडेट NO: 05

कैब एक बुहत बरी बिल्डिंग की सामन्य रुकी ........ जिस पर उनकी कंपनी की नाम का बोर्ड लगा होआ था ......... दोनों न्य अपनी अपनी पेपर फाइल्स सम्भालीन और कैब को पाय क्र की ऑफिस की शानदार बिल्डिंग मैं दाखिल हो गए ............. सामन्य एंट्रेंस पी hi रिसेप्शन थी ............ विनोद न्य जा क्र अपनी पेपर्स उनको दिखाय ............. वह पर मौजूद अंग्रेज़ लड़की न्य उनको वेलकम बोलै और उनको गाइड क्या की उनको कहा पी जा की अपनी जोइनिंग देनी है ...............

विनोद न्य थैंक्स बोलै और जोइनिंग की लय बताय होय ऑफिस मैं चली गए ......... वह पी उन्हों न्य एक अफसर को अपनी पेपर्स दिखाय ....... उसनी दोनों को वेलकम क्या ......... और फिर उनको बताया की वह अपनी आईटी डिपार्टमेंट जा सकती हैं ........ कुछ देर मैं जोइनिंग पेपर्स उनकी ऑफिस मैं hi अजाइन गए और वहीँ पी वह दोनों सिग्न क्र की जमा करवा डैन .......... उसी अफसर न्य उनकी आईटी डिपार्टमेंट मैं कॉल भी क्र दी ...........

जब विनोद और महीन अपनी डिपार्टमेंट मैं पोहंची तो अंदर दाखिल होती hi वह की स्टाफ न्य फ्लावर्स की साथ उनको वेलकम क्या .......... अपनी नए कलगुएस की तरफ सी ऐसी वेलकम की जांय पी उन दोनों को बुहत ख़ुशी होइ ..........

वह सब उन दोनों को लय कर टिया रूम मैं बेथ गए ........... जहाँ उनकी लय कॉफ़ी का अर्रंगे था ........... उस डिपार्टमेंट मैं टोटल 5 लोग थय उनकी इलावा .......... कॉफ़ी पीते होय विनोद और महीन न्य अपना इंट्रोडक्शन करवाया .......... और फिर बाक़ी सब न्य अपना अपना इंट्रोडक्शन करवाया उनको ........

जेनी............ एक अंग्रेज़ लड़की थी .......... महीन की hi उम्र की ........ बिलकुल सुफैद ...... गोरी मैं ............. कैसा होआ जिसम ........ भरी होइ छात्याँ ........ गुदाज़ बदन ............ खूबसूरत चेहरा ............. गोरी गोरी टांगें ............ जो उसकी स्कर्ट सी निकल रही थीं ............ जेननयनय मैरून स्कर्ट और बटन्स वाली वाइट शर्ट पहनी होइ थी .............. उस ऑफिस ड्रेस मैं उसका जिसम और भी सेक्सी लग रहा था .............

नीतू ........... 28 इयर्स की इंडियन लड़की थी वह मुंबई सी थी ................ महीन की तरह मैरिड .......... पिछली 3 साल सी वह ुक मैं रह रही थी ..... लकिन उसकी ड्रेसिंग काफी बोल्ड थी ............. ब्लू कलर की टाइट फिटिंग फेडेड जीन्स ............ जिस मैं उसकी खूबसरत गांड बहार को निकली होइ थी ............ एक पिंक कलर की टी शर्ट ............. जो उसकी बूब्स पी चिपकी होइ थी ............ और बूब्स को और भी नुमायां क्र रही थी ................ जिसम स्मार्ट था ......... रंग गोरा ........ मगर बुहत ज़्यादा गोरा नहीं थी महीन की तरह .............. मगर फिर भी अट्रैक्टिव और खूबसरत थी ..............

कारन ............... 27 इयर्स ओल्ड ुक सिटीजन .......... स्मार्ट आदमी था ....... वेल मैनटैनेड बॉडी .......... गुड लुकिंग ......... हैंडसम ............ अट्रैक्टिव फेस ............. और होंठों पी स्माइल ................ वह ड्रेस शर्ट और पंत मैं था ..............

डेन ........... 25ईयर ओल्ड ........ सब सी जूनियर था ....... ुक सिटीजन hi था ........ बिलकुल गोरा ........... और खूबसरत फेस ............ जिसम उसका नाज़ुक सा लगता था ............. थोड़ा फेमिनिन अपीयरेंस थी उस मैं ............ लकिन दिखनी मैं और बात करनी मैं वह भी बुहत ाचा था ............

इंट्रोडक्शन की बाद विनोद न्य पुछा ........ हु इस थे बॉस हेरे ..... और हमारी जोइनिंग कोण लय गए यहाँ पी ............

नीतू बोली ........ मर. निक .......... हैं ऑफिस की हेड .......... और बॉस ....... वह एक मीटिंग मैं हैं आज ........... हो सकता है की आज आईं hi नहीं वह ........... वही आप की जोइनिंग लाइन गए ............ टुमारो .....

विनोद .......... okay ............ okay ........

महीन ........ तो फिर आज हम लोग क्या करें गए ...........

जेनी....... कुछ नहीं .......... आज आप लोग जस्ट एन्जॉय करो ........ ऑफिस देखो ....... और उसकी बाद वापिस ........... और कल आ की आप लोग निक सी भी मिल लेना और अपनी ड्यूटी भी कल सी hi वर्किंग स्टार्ट क्र लेना ..............

विनोद और महीन न्य उन सी एग्री क्या ............ डेन उनको लय कर पूरी बिल्डिंग दिखानी की लय ऑफिस सी निकल गया ........... दोनों को पूरी बिल्डिंग दिखाई .......... और फिर विनोद और महीन क़रीब 12 बजाय ऑफिस सी निकल पारी ............... ऑफिस सी बहार आ क्र ........

विनोद ........ महीन जी अब क्या प्रोग्राम है ......

महीन ........ ी थिंक की आज हमारी पास टाइम है तो क्यों न चल की कुछ अपार्टमेंट और फ्लैट देख लाइन ...........

विनोद ........ यस सूरे .......... डेन न्य भी एक प्रॉपर्टी कंसलटेंट का कार्ड दया है उस सी भी मिल लेती हैं ..............

फिर विनोद न्य डेन का दया होआ कार्ड निकला और एक कैब को उस एड्रेस पी चलनी को बोलै .............

प्रॉपर्टी ब्रोकर न्य काफी ाच्य सी उनको वेलकम क्या ........... 4 मुख्तलिफ अपार्टमेंट्स और फ्लैट उनको दिखाय ........ जो सिंगल पर्सन्स की लये थय ........ मगर जिसकी भी रेंट और एडवांस पेमेंट बताई तो दोनों की होश उड़द गए ........ क्यों की उनको लग रहा था की इतना ज़्यादा रेंट अफ़्फोर्ड नहीं क्र सकें गए ............... अपार्टमेंट चारों hi ाच्य थय मगर रेंट ज़्यादा होनी की वजह सी वह दोनों कुछ भी डीडे नहीं क्र सकी ........... और फिर उनको फ़ोन पी बतानी का कह क्र वह सी निकल आय ........... यह सब काम करनी और अपनी होटल पोहनचंय मैं उनको 5:30 पं हो गए ....... होटल पोहंच क्र विनोद न्य मश्वरा दया की क्यों न खाना खा क्र hi ऊपर अपनी रूम्स मैं जाया जाय वर्ण फिर नीची आना पारी गए .......... महीन को भी यह बात ठीक लगी ........... दोनों खाना खाती होय ऑफिस, ऑफिस कलगुएस और रेंट बिल्डिंग्स को डिसकस करनी लगी ..........

खाना खा क्र दोनों लिफ्ट सी ऊपर अपनी अपनी रूम की सामन्य ाग्य ............ एक दूसरी को मुस्करा की देखा और अपना अपना गेट खोल क्र अपनी रूम मैं एंटर हो गए ...........

महीन दूर लॉक क्र की के टेबल पी रख की मुड़ी तो उसी खुशगवार अहसास होआ ............ और ख़ुशी भी होइ ........... क्यों की उसका रूम बिलकुल फ्रेश और बिलकुल सेट था ........... जैसी वह सुबह चोर की गए थी बी तरतीब और सुब कुछ बिखरा होआ वैसा कुछ नहीं था वह पी ........ कमरे का जायज़ा लेती होय महीन न्य अपना वैल उतर की चेयर पी रख दया ...... उसका बीएड बिलकुल साफ़, सलवटों सी पाक, और ठीक क्या होआ था ............ जो नाईट ड्रेस वह बीएड पी फेंक की गए थी वह भी वह पर नहीं थी ............. तब उसी पता चला की उनकी जांय की बाद रूम सर्विस वाले आ क्र सुब कुछ ठीक ठाक क्र की गए हैं ............

महीन न्य ाग्य बढ़ की अपनी कप्बोर्ड खोली ......... एक फ्रेश, साफ़ सुथरा धुला होआ नाईट ड्रेस का पैकेट वहीँ शेल्फ मैं रखा होआ था ............... ................... अचानक उसी ख्याल आया की उसनी कल रात को जो कपड़े और ब्रस्सिएर उतर की वह हैंग कए थय वह वह पर नहीं थय .............. उसको झटका सा लगा की उसका ड्रेस और पर्सनल इनर क्लोथ्स वह पी नहीं थय ............. वह हैरान होइ ........... की क्या वह कपड़े भी धूनी की लय लय गए हैं रूम सर्विस वाले ............ उसका दिल ज़ोर सी धारक उठा ........ की रूम सर्विस वाले उसकी ब्रा भी लय क्र गए हैं ......... फिर उसको बाथरूम मैं रखी होय अपनी कपड़ों का ख्याल आया ............ उसी ख्याल आया की सुबह जो उसनी अपनी पंतय उतारी थी ........ जो उसकी छूट की पानी सी गीली हो गए होइ थी रात को सत्य होय वह भी उसनी उसी बकेट ऐन डाली थी ........... यह ख्याल आती hi महीन का दिल उछाल की उसकी हलक़ मैं आज्ञा ............ वह जल्दी सी बाथरूम की तरफ गए ........

बाथरूम मैं जा क्र देखा तो लौंडरी वाली बकेट खाली थी ......... घबराहट और शर्म सी महीन की हाथ पेअर कंम्पनी लगी ........ उसी अजीब सा लगनी लगा ............ की उसकी वैरी पर्सनल कपड़े होटल मैं धुलनय की लय गए होय हैं ............ वाशरूम मैं इधर उधर देखा तो तमाम टॉइलटेरिएस चेंज हो चुकी होइ थीं ........ सुब कुछ नया रखा होआ था ........... महीन ख़ामोशी सी बहार आगये और सोफे पर बेथ क्र इन्ही बातों को सोचनी लगी ...... कैसी उन्हों न्य मेरी ब्रा और पंतय को धोया हो गए ...... उस पी लगी होय मेरी छूट की पानी की निशाँ तो साफ़ दिखी हों गए उनको .......... उसी यह सुब सोच क्र शर्म अन्य लगी ......... की उसकी अपनी पर्सनल इनर वियर ग़ैर मर्दून की हाथों मैं गए और उन्हों न्य उनको वाश क्या हो गए ........ पता नहीं क्या सोच रही हों गए वह लोग ........ फिर महीन न्य बैठी बैठी hi आसिफ को वीडियो कॉल मिला ली ........... महीन उसी अपनी पहली दिन की रूटीन बतानी लगी ........ और जो अपार्टमेंट्स सर्च की थय उनकी बारी मैं भी बताया ........ सारी दिन जो होआ वह सुब कुछ बताया ......... मगर जो अभी उसकी िंन्देर गारमेंट्स की साथ होआ था वह महीन न्य नहीं बताया आसिफ को ........ बताती भी कैसी ........ बस उस बात को वह आसिफ सी छुपा गए ........ थोड़ी देर की बाद महीन न्य कॉल ख़तम क्र दी ............

महीन उठी और कपबओर्ड की तरफ चल पारी ...... अपना ड्रेस चेंज करनी की लय .......... उसनी होटल की तरफ सी वह रखा होआ नई पजामा सेट पैकेट सी निकाल लय ........... उसी बीएड पी रखा ...... आज वाले पजामा सेट का कलर और डिज़ाइन कल वाले सी डिफरंट था ...... क्लॉथ का भी फरक था ....... आज वाला सिल्की कपड़े का था ....... .... .. महीन अपना ऑफिस का ड्रेस उतरण्य लगी ......... महीन न्य अपनी शर्ट, ट्रॉउज़र , ब्रा और पंतय उतार की कप्बोर्ड मैं हैंग क्र दी ......... और फिर बिना ब्रा और पंतय की वह शर्ट और ट्रॉउज़र पहन लय ......... बिना ब्रा और पंतय की वह ड्रेस उसी अपनी जिसम पी काफी कम्फर्टेबले लग रहा था ........... ऊपर की गले का हिस्सा ज़्यादा खुला होआ था ......... शर्ट थोड़ी फिटिंग मैं थी ....... कल रात वाली शर्ट की निस्बत ....... . मगर थी यह शर्ट भी उसी तरह hi ट्रॉउज़र की बेल्ट सी ऊपर ऊपर रह रही ...... ट्रॉउज़र भी थोड़ा फिटिंग मैं था ....... और आज उसकी लेंथ भी थोड़ी शार्ट थी ....... बुहत ज़्यादा नहीं ...... लकिन थी घुटनो सी नीची hi ..... मगर महीन की हाफ पिण्डल्यां नज़र आ रही थीं उस पजामा मैं ............. महीन न्य खुद को आंय मैं देखा .......... फिर घूम क्र खुद को देखा ...... उसकी हिप्स कल सी ज़्यादा टाइट लग रही थय इस पजामा मैं ........ और उसकी गांड पिच्य सी बुहत hi सेक्सी लुक दी रही थी .......... महीन खुद को देख क्र मुस्कराई और .............. अपना मोबाइल लय क्र बीएड पी लेट गए ....... और मोबाइल पी ब्राउज़िंग कृत्य कृत्य उसी नींद आगये ........

महीन की आँख खुली तो 10 पं हो रही थय ........ महीन अंगराई लेती होइ उठी ....... और वाशरूम मैं जा की फ्रेश हो क्र वापिस आई ....... मोबाइल देखा तो विनोद की 5 मिस कॉल्स आई होइ थीं ......... महीन न्य विनोद को कॉल बैक क्या ....

विनोद .... Hello.......

महीन ...... सॉरी वह मेरी आँख लग गए थी इस लय आप की कॉल्स का पता hi नहीं चला ..........

विनोद ...... इतस okay .. वह मैं न्य कॉल की थी आप को डिनर की लय ....

महीन ..... ओह ... बस आँख hi नहीं खुली .....

विनोद .... कोई बात नहीं आप रूम मैं मंगवा लाइन कुछ ...

महीन ..... हाँ ठीक है थोड़ी देर मैं मंगवा लेती हों .......

विनोद .... जी ठीक है .......

कॉल ख़तम हो गए ....... महीन न्य मोबाइल रखा और उठ क्र ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो गए ..... और अपना हुल्य ठीक करनी लगी ..... बलून मैं ब्रश क्या ...... और हल्का सा मेक उप भी क्र लय ........ अपनी ड्रेस पी नज़र डाली तो उस शार्ट हाफ स्लीव शर्ट और पाजामे मैं भी बुहत सेक्सी लग रही थी ........ महीन न्य सोचा की खाना मंगवानी सी पहली चेंज क्र लय ...... लकिन फिर खुद सी hi बोली ...... ड्रेस तो ठीक hi है ...... और सुबह भी तो रूम सर्विस वाले उसी ऐसी देख hi चुकी हैं न.......... महीन न्य ड्रेस चेंज करनी का इरादा बदल दया ...... और रूम मैं रखी होय फ़ोन सी रिसेप्शन पी कॉल क्र की डिनर रूम मैं सर्वे करनी का कह दया ........

महीन टीवी देख रही थय जब 15 मिनट्स की बाद रूम की दरवाज़ी पर नॉक होआ ....... महीन न्य उठ क्र दरवाज़ा खोला तो वही वाला रूम बॉय कहानी की ट्रे लय क्र खरा था ........

रूम सर्विस ..... गुड इवनिंग मम ........ योर डिनर इस हेरे

महीन न्य आज उसकी यूनिफार्म पी लगा होआ उसका नाम बैज देखा ...... आदम ... उसका नाम लिखा होआ था .... आदम एक 19-20 साल का यंग लड़का था ..... खूबसरत और इनोसेंट फेस ...... नार्मल हाइट और बॉडी पिसीके ...... महीन उसी hi ऊपर सी नीची तक देख रही थी ......

आदम .... मई ी के इन मम तो सर्वे आईटी फॉर यू प्लीज ..

महीन को अहसास होआ की उसनी आदम को अंदर नहीं बुलाया अभी तक ...... महीन थोड़ा सा झीणम्प गए और आदम को अंदर अन्य की लय रास्ता दी दया ...... आदम न्य अंदर आ की सोफे की सामन्य राखी होइ टेबल पी कहानी की ट्रे रख दी ....... आदम एक तरफ हो की खरा था और महीन को ऊपर सी नीची तक देख रहा था .... महीन को उसकी देखनी सी अजीब सा फील हो रहा था .......खास क्र इस ड्रेस मैं ..... महीन ख़ामोशी सी चलती होइ आई और सोफे पर बेथ गए ....... जो की थोड़ा नीचे था ...... सोफे पर बेथ की ट्रे पर रखी होय कवर्स को हटानी की लय झुकी ........ उसकी नाईट शर्ट का गाला थोड़ा और खुल गया ...... और उसकी बूब्स की दरम्यानी लकीर दिखनी लगी ..... और आदम उस पी अपनी नज़र जमाय बिना ना रह सका ......

महीन न्य आदम को अपनी बूब्स की तरफ देखती होय देखा तो थोड़ा सीढ़ी हो गए ..... और वीर्य सी बोली .... अन्य थिंग ेल्स ....

आदम .... ओह सॉरी मम ..... नथिंग ेल्स ..... मम योर लौंडरी इस रेडी ..... ी शॉल ब्रिंग तहत विथ तहत इन 10 मिनट्स प्लीज .......

यह कह क्र आदम न्य एक नज़र फिर सी महीन की थोड़ी सी ओपन हो रही होय गूरे सीने पर डाली और फिर रूम सी निकल गया ..........

महीन वहीँ बेथ क्र खाना कहानी लगी ........

थोड़ी देर मैं दोबारा सी नॉक होआ ......

महीन वहीँ बेथ की खाना खाती होय बोली ..... यस के इन थे दूर इस ओपन ...

दरवाज़ा खुला और आदम अपनी हाथ मैं महीन धुली होय और प्रेस कए होय कपड़ों का पैकेट उठा की अंदर आज्ञा ...... वह उसनी महीन की क़रीब आ कर उसकी पास पारी होइ छोटी सी टेबल पी रख डाई ........ दो बारी पैकेट्स की ऊपर एक छोटा रेड कलर का पैकेट भी था ....

आदम महीन की साइड पी खरा था .... उसकी टेबल की क़रीब hi ....... और उसकी नज़र फिर सी ाग्य को झुक की खाना खाती होइ महीन की खुली गले सी नज़र आ रही होय उसकी क्लीवेज पी थी ..... महीन को ाचा नहीं लग रहा था ..... मगर वह एक नए देश मैं थी ..... जहाँ उसकी अभी अपनी कोई वैल्यू नहीं थी .... कोई पावर नहीं थी ...... और फिर यहाँ का माहोल भी बुहत ओपन और बोल्ड था इंडिया की निस्बत ....वह खुद को आदम की सामन्य उस छोटी सी शर्ट और पाजामे मैं बैठी होय काफी एक्सपोज्ड महसूस क्र रही थी ........ मगर फिर भी वह खामोश रही ........... और बस आहिस्ता सी नज़र उठा की आदम की तरफ देखा जैसी उसी पूछ रही हो की अब वह क्यों खरा है .....

आदम उसकी नज़रों को समझ गया और आहिस्ता सी बोलै ....... सॉरी मम .... ी ऍम हेरे तो टेक थे ट्रे ....

महीन ....... प्लीज वेट ा व्हिले ..

आदम ........ सूरे मम ..........

महीन न्य जल्दी सी अपना खाना ख़तम क्या और फिर आदम को ट्रे उठानी को बोलै .......

आदम ...... थैंक्स मम ......... वह रूम की दूर की तरफ बढ़ा ..... और फिर दूर की क़रीब रुक की मुद की बोलै ...... एक्सक्यूज़ में मम ....... ी शॉल के लेटर फॉर योर tomorrow's क्लोथ्स

महीन न्य okay मैं सर हिला दया .......

आदम रुका ..... ओने मोरे थिंग मम ........ प्लीज चेक योर लौंडरी आइटम्स ........ िफ़ समथिंग इस मिसिंग यू मई आस्क प्लेसेस .... मम तेरे अरे योर तवो सुइट्स इन लार्जर पैकेट्स एंड योर इनर वेअर्स अरे सेपरटेली पैक्ड इन स्माल पैकेट .......

आदम की बात सुन कर महीन का चेहरा शर्म सी सुराख़ हो गया ........ उस न्य अपनी नज़रें झुकाय होय .......... आहिस्ता सी okay बोलै ........ और आदम रूम सी चला गया ........ महीन न्य उठ क्र दूर लॉक क्या और गहरी सांस लय क्र वाशरूम मैं हाथ धोनी चली गए ....... वह सी वापिस आ की ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो कर अपनी हाथों और खुली होय बाज़ूओं पर लोशन लगानी लगी ........ फिर लोशन लय कर अपनी सीने की खुले होय हिस्से पी लगानी लगी ...... अपनी शर्ट की की ऊपर की दो बटन खोली और लोशन अपनी बूब्स पर भी लगानी लगी .........

कैसी इनको देखनी की कोशिश क्र रहा था आदम .......... महीन यह सोच क्र मुस्कराई ......... जैसी यहाँ तो कभी देखी hi ना हों न ....... हर लड़की तो यहाँ पी अपना सुब कुछ खोल की फिर रही है ...... और ओपनली और बोल्डली सुब कुछ दिखा रही हैं .... खुद की नाईट केयर सी फ़ारिग़ हो कर महीन अपनी वाश हो क्र आय होय कपड़ों की तरफ गए ..... ाच्य सी धुलनय की बाद प्रेस क्र की पॉलिथीन बैग मैं रखी होय थय ..... ओर पैकेट्स की ऊपर उसकी रूम नंबर का स्टीकर लगा होआ था .......... महीन न्य उनको उठा क्र अपनी कप्बोर्ड मैं रख दया .......... फिर कुछ सोच क्र उसनी छोटी वाला पैकेट उठा लय ..... उसकी ऊपर भी उसकी रूम नंबर स्टीकर लगा होआ था ........ महीन न्य वह पैकेट खोल लय ...... अंदर साफ़ सुथरी ......... धूलि होइ ...... और बुहत hi ाच्य सी फोल्ड की होइ उसकी ब्रा और पंतय की 2 सेट थय .............. इसी पंतय पी लगा होआ मेरी छूट का पानी भी उन्हों न्य देख लय हो गए ........ और उसी धोया भी हो गए ........ uuuuuuffffffffffff.......... यह सोच क्र महें की चेहरी पर एक शर्मीली सी मुस्कराहट दौड़ गए ............. इतनी मैं फिर सी दूर नॉक होआ ....

लो फिर सी आज्ञा है मुझी देखनी की लय ......... महीन मुस्कराई और अपनी शर्ट की बटन बंद करती होइ दूर खोलनी चली गए .... ड्रेसिंग टेबल की सामन्य सी गुज़रती होय खुद पी एक नज़र डालती होय ..........

आदम को एक्सपेक्ट कृत्य होय महीन न्य दूर अनलॉक क्या ....... और दरवाज़ा खोल दया ....... बिना दरवाज़ी की पिच्य छुपे होय ....... क्यों की उसी पता था की आदम है और वह तो काफी बार अंदर भी आचुका होआ था उसकी रूम मैं ..... महीन की इसी ड्रेस मैं रहती होय ........ मगर अगली hi लम्हे महीन चौंक गए ............ इस बार आदम नहीं आया था ......... कोई और था दरवाज़ी मैं खरा होआ उसी देख रहा .............
 
अपडेट NO: 06

खुली दरवाज़ी मैं महीन की नज़रों की सामन्य विनोद अपनी हाथ मैं अपना तब लये खरा था ....... और विनोद की नज़रों की सामन्य महीन एक सेक्सी सा नाईट पजामा सेट पहनी होय खरी थी .......... जिस मैं उसका गोरा गोरा सीना नज़र आ रहा था ........ शर्ट की ऊपर सी भी उसकी बूब्स बिना ब्रस्सिएर की भी तनय होय खरी नज़र आ रही थय ........... हाफ स्लीव शर्ट मैं सी महीन की गोरी गोरी बहिन भी नंगी हो रही थीं ............ नीची थोड़ा फिटिंग वाला पजामा था ........ जो उसकी हाफ पिंडलों तक था ......... नीची उसकी सुफैद पिण्डल्यां भी नंगी हो रही थीं ............... सर पर वैल नहीं था ...... और ना hi कोई दुप्पटा ..... महीन की रेशमी बाल एक पोनी टेल मैं बंधी होय थय .............. महीन को इस हालत मैं ........ ऐसी सेक्सी हालत मैं ......... ऐसी कासुअल और सेक्सी ड्रेस मैं देखनी का विनोद का यह पहला मौका था ......... और वह भी यौन अचानक सी जिसे वह एक्सपेक्ट भी नहीं क्र रहा था ......

महीन बट बानी होइ विनोद की सामन्य खरी थी .......... और विनोद भी बिना अपनी पलकें झपकी महीन की खूबसूरत बदन को देख रहा था .......... आज वह पहली बार इस हालत मैं ........... ऐसी ड्रेस मैं विनोद की सामन्य आई थी ........... विनोद न्य उसी ऐसा कभी नहीं देखा था ........... महीन भी चुप थी ........... उसी कुछ समझ नहीं आ रही थी की वह क्या बोली ....... वापस दरवाज़ा बंद क्र दी या कुछ और क्रय ...........

आखिर विनोद hi बोलै ...... ओह सॉरी महीन जी ........ ी थिंक मैं न्य आप को डिस्टर्ब क्या है ............ आप शायद सोनी जा रही थीं ........... ी ऍम रियली सॉरी ...... मैं जाता हों ..........

यह कह क्र विनोद अपनी कमरे की दरवाज़ी की तरफ मुड़नी लगा तो महीन भी जैसी किसी ट्रांस सी बहार आई ........ और बोली ......... नहीं नहीं विनोद जी ........ मैं सोनी तो नहीं जा रही थी ............ आप कैसी आय थय .......

विनोद महीन की जिसम की नंगे हिस्सों पी अपनी नज़रों को फिसलनी सी रोकनी की कोशिश कृत्य होय सिर्फ उसकी चेहरी पर अपनी नज़रों को रखनी की कोशिश कृत्य होय बोलै ........... बस ऐसी hi आया था ...... कुछ प्रॉपर्टीज सर्च की थी मैं न्य शाम मैं सोचा आप सी डिसकस क्र लोन ....... अन्य वेज़ सुबह क्र लाइन गए ............ गुड नाईट .......

यह कह क्र विनोद जांय लगा तो महीन को लगा की यह बुरी बात हो गई ....... और आदाब की खिलाफ ............ और जब एक और ग़ैर बाँदा ....... आदम उसी इस ड्रेस मैं देख hi चूका है तो फिर विनोद सी क्यों छुपना ........ और झिझकना ....... और वैसी भी यह कोनसा कोई रेवेलिंग ड्रेस है ........... वह खुद सी बोली .......

महीन ........ रुकिए विनोद जी ....... आप अजाइन डिसकस क्र लेती हैं ....... वैसी भी मुझी अभी नींद नहीं आणि ............ अजाइन आप अंदर ............

महीन न्य विनोद को रास्ता दया ........ विनोद न्य एक लम्हे की लय रुक क्र महीन को ऊपर सी नीची की तरफ देखा ............ जैसी अंदाज़ा लगा रहा हो की ऐसी महीन की साथ रूम मैं जाना ठीक है या नहीं ...... और वैसी वहां सी जांय का मन तो उसका अपना भी नहीं क्र रहा था ........... और फिर अगली hi लम्हे विनोद न्य अपनी क़दम महीन की रूम मैं रख डाई ................ विनोद की रूम मैं एंटर होनी की बाद महीन न्य दूर बंद क्या ............ विनोद को सोफे पर बेथनी का इशारा क्या ............. विनोद सिंगल सोफे पर बेथ गया .......... और महीन उसकी क़रीब hi बारी वाले सोफे पर बेथ गए ................ विनोद न्य तब दरम्यान की टेबल पी रख दया ............ दोनों की अंदाज़ मैं अभी थी थोड़ी झिझक और शर्मिंदगी सी थी ....... जैसी दोनों hi इस सिचुएशन की लये तैयार ना हों .......... महीन का दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था ........ उसी घबराहट सी हो रही थी ....... उसकी लये ऐसा मौका पहली बार था की वह अपनी हस्बैंड की इलावा किसी ग़ैर मर्द की साथ रात की इस टाइम एक कमरे मैं तनहा थी ..... और वह भी इस तरह की नाईट ड्रेस मई ....... महीन को अहसास हो था की उसकी गोरी पिण्डल्यां और बाज़ू विनोद की सामन्य नंगी हो रही हैं ...... वह उनको देख रहा है ............. महीन खुद को नार्मल करनी की कोशिश क्र रही थी ...... इस सुब को अब्सॉर्ब करनी की कोशिश क्र रही थी .... की जो भी हो रहा है वह सुब नार्मल है ...... और उसी इस पर खुद को ब्लामे करनी या ओवर रियेक्ट करनी की ज़रूरत नहीं है ....

विनोद भी अपनी नज़रों को महीन की जिसम को देखनी सी नहीं रोक पा रहा था ..... नज़रें नीची करता तो महीन की नंगी सुफैद पिण्डल्यां उसकी आँखों की सामन्य होतीं .... बिलकुल स्मूथ और चिकनी ...... बलून सी बिलकुल पाक ....... जो महीन की बेथनी की वजह सी उसका पजामा थोड़ा और ऊपर चढ़ जांय की वजह सी और भी ज़्यादा एक्सपोज़ हो रही थीं ........ अगर नज़र ऊपर करता तो महीन का खुला होआ सुफैद सीना और नंगी बाज़ू उसी दिखनी लगती .............. दोनों मैं सी किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बात शुरू करें ........ आखिर

विनोद बोलै ........ आप न्य खाना खा लय ......

महीन ....... जी खा लय है ......... रूम मई hi मंगवा लय था ......... महीन अपनी दोनों हाथों को आपस मैं रगड़ती होइ आहिस्ता सी बोली .........

विनोद ........ सही किआ .....

महीन .... आप कुछ लाइन गए क्या ......

जैसी hi महीन न्य यह बोलै तो विनोद न्य फौरन hi सर उठा की महीन की चेहरी की तरफ देखा ....... दोनों की नज़रें आपस मैं मिलीं ........ और महीन अपनी कही होइ बात का अल्टरनेटिव मतलब समझ की अपनी नज़रें चुरानी लगी ...........

महीन ....... ी मैं तो से रिसेप्शन सी मैं कुछ मंगवाती हों आप की लये ............. आप चाय लाइन गए या कॉफ़ी ...........

विनोद ...... नहीं नहीं कुछ नहीं ..... आप तकलीफ नहीं करें प्लीज .....

महीन मुस्कराई ....... आर्य विनोद जी मुझी क्यों तकलीफ होनी है ..... वह तो नीची सी hi मंगवानी है न ....... आप पीएन गए तो मैं भी लय लोन गई आप की साथ .......

विनोद मुस्कराया ...... ठीक है फिर कॉफ़ी मंगवा लाइन ........

महीन उठी और अपनी बीएड की साइड टेबल पी रखी होय फ़ोन की तरफ बरही .......... विनोद फौरन hi महीन की बैक को देखनी लगा ........ उसकी नज़रें महीन की पतली कमर सी होती होइ नीची सादूल गांड पर जा रुकीं ........ जो उसकी फिटिंग वाले पाजामे मैं बुहत hi सेक्सी दिख रही थी .................. महीन न्य थोड़ा झुक क्र फ़ोन उठाया और रिसेप्शन पर बात करनी लगी ............ झुकनी सी महीन की गांड और भी बहार को निकल आई ......... और विनोद पर तो जैसी क़यामत hi धान्य लगी .......... झुकनी सी महीन की पजामा सूट की शर्ट भी थोड़ी ऊपर को सिरक गए थी ...... जिस सी उसकी बेल्ली का निचला हिस्सा थोड़ा नंगा हो रहा था ........... गूरी गूरी जिसम का नज़र अन्य वाला वह हिस्सा भी विनोद की नज़रों सी नहीं बच सका .............. और उसका मुंह तो जैसी खुली का खुला hi रह गया ............

महीन कॉफ़ी का आर्डर क्र की मुड़ी और वापिस विनोद की तरफ आई ............ विनोद की नज़र महीन की सीने की उभारों पर चली गए ....... जो सीधी तनय होय थय ........ मगर महीन की चलनी की वजह सी सिल्की नाईट शर्ट की नीची हौली हौली हिल रही था ....... मचल रही थय ...... महीन की बूब्स को ऐसी आज़ादी सी हिलती होय देख क्र विनोद की आंखें फैल गईं ........ और फिर उस न्य जल्दी सी अपनी नज़र हटा ली ........... और नीची देखनी लगा ............ उसनी कभी सोचा भी नहीं था की वह .......... वैल पहन न्य वाली ....... और हर वक़त खुद को कवर रखनी वाली मुस्लिम कलेग को ऐसी इस हालत मैं ...... इस ड्रेस ऐन देखी गए ............ और उसका जिसम इस क़दर क़यामत खैज़ हो गए ......

महीन को भी उसकी नज़रों का अहसास हो गया था ........ वह अपनी नज़रें चुराती होइ खामोशी सी वापस आ कर अपनी जगा पर बेथ गए ......... और विंड की साथ बातें करनी लगी ........ विनोद बातें कृत्य होय चोरी सी महीन की जिसम को hi देख रहा था ........ ऐसी की महीन को पता ना चली ........

विनोद न्य सामन्य टेबल पर रखा होआ अपना तब ों क्या और और कुछ अपार्टमेंट्स की पिक्टुरेस दिखानी लगा ........ महीन भी सोफे पर ाग्य को खिसक क्र थोड़ा झुक क्र टेबल पी पारी होय तब पर देखनी लगी ........... किसी पिक्चर को बारे करती और कभी पिक्टुरेस को ाग्य पिच्य चेंज करती .......... विनोद की नज़रें महीन की थोड़ी सी खुले होय शर्ट की व् नैक पी जा रही थी ....... जो खुलनी की वजह सी महीन की बूब्स की लकीर को थोड़ा सा दिखा रहा था ...... और महीन की बूब्स का ऊपरी उभरा होआ हिस्सा भी थोड़ा दिख रहा था ............ विनोद न्य अपनी खुश्क होती होय गले मैं फंसती होय अपनी थूक को निगला और अपनी नज़रें हटा क्र तब पी देखनी लगा ....... मगर उसकी नज़रें खुद सी hi बार बार उसी नज़ारे को देखनी को महीन की तरफ जा रही थीं .....................

दोनों बातें क्र रही थय इतनी मैं दूर नॉक होआ ........... महीन अपनी जगा सी उठी ..... और जा की दरवाज़ा खोला ........ सामन्य आदम हाथ मैं ट्रे लये खरा था .......... जिस मैं 2 कॉफ़ी राखी होइ थीं ........... महीन न्य उसी अंदर अन्य को बोलै और खुद उसकी ाग्य ाग्य चलती होइ सोफे की तरफ बरही ....................... महीन की पिच्य आती होय आदम की नज़रें महीन की गांड पी थीं ........ और विनोद की नज़रें अपनी तरफ आती होइ महीन की हिलती होय तनय होय बूब्स पर थीं ................... उसी सिल्की शर्ट की ऊपर सी महीन की निप्पल्स का निशाँ भी नज़र आ रहा था ........ विनोद की आंखें यह मंज़र देख क्र फैली जा रही थीं....... उसनी कभी भी महीन को ऐसी नहीं देखा था ..... और न hi कभी ऐसी इमेजिन क्या था ............

महीन को अपनी जिसम पर ाग्य और पिच्य दोनों की नज़रों का अहसास हो रहा था ...... वह उन दोनों मर्दों की नज़रों की गर्मी अपनी जिसम पी महसूस क्र पा रही थी ......... और यह गर्मी उसकी जिसम की अंदर भी हरारत पैदा क्र रही थी ..... एक अलग सा अहसास .... एक अलग सी थ्रिल ....... एक अलग सी सेंसेशन ........ जो उसनी कभी पहली महसूस नहीं की थी ........ महीन सोफे पर बेथ गए .......... अपनी जगा पर ............ आदम न्य विनोद को गुड इवनिंग सर बोलै ........ और टेबल पर कॉफ़ी की कप रखनी लगा ........ कप रखती होय आदम न्य महीन की तरफ देखा ..... उनकी नज़रें मिलीं तो आदम की होंठों पर बुहत hi हलकी सी स्माइल आगये ........ जैसी वह महीन को जाता रहा हो की उसकी साथ उसकी रूम मैं एक और मर्द है ..... विनोद ... जैसी उसनी अपना कलेग बोलै था ..... महीन न्य अपनी और विनोद की बीच कुछ ऐसा वैसा ना होनी की बावजूद भी आदम की नज़रों और उसकी हलकी सी स्माइल का मतलब समझती होय उस सी अपनी नज़रें चुरा ली ...... उसकी चेहरी पर हलकी सी शर्मिंदगी और घबरात फैल गए ..... जो आदम न्य फौरन hi नोट क्र ली .. महीन अपनी नज़रें नीची क्र की तब पर देखनी लगी ............. आदम न्य कॉफ़ी टेबल पर राखी और एक तरफ हाथ बांध की खरा हो गया और बोलै ......

आदम ....... एनीथिंग ेल्स मम ...... ??

महीन न्य उस सी नज़रें चुराती होय कहा ...... no थैंक्स ...

आदम मुस्कराता होआ महीन की रूम सी चला गया ..............

कुछ देर की बाद विनोद न्य अपनी कॉफ़ी उठाई और सिप लेंय लगा ...... सोफे सी टेक लगा क्र ............ महीन न्य भी अपनी कॉफ़ी उठा ली और सिप लेनी लगी ............. महीन न्य अपना एक पाऊँ मोड़ क्र सोफे की ऊपर रख लय ....... जिसकी वजह सी उसका ट्रॉउज़र दोनों पिंडलों पर थोड़ा ऊपर को चढ़ गया ........ उसकी घुटनों की बिलकुल नीची तक ........ उसकी पिण्डल्यां पूरी पूरी नंगी दिखनी लगीं ........ मगर उसी इस बात का अहसास नहीं होआ .......... मगर विनोद की नज़रें तो महीन की गोरे गोरे जिसम पर hi थी न ............. वह उसकी नंगी सुफैद मुलायम पिंडलों को देख रहा था ........ बात कृत्य होय विनोद की नज़र महीन की सीने पर गए तो ऊपर को हो क्र बेथनी की वजह सी महीन की शर्ट की बटन्स की दरम्यान सी उसका गोरा गोरा सीना भी नज़र आ रहा था ........ महीन की बूब्स का दरम्यानी हिस्सा ...........

दोनों न्य अभी कॉफ़ी की चाँद सिप hi लये थय की ............. अचानक टेबल पर रखा होआ महीन का मोबाइल रिंग करनी लगा ......... दोनों की नज़रें मोबाइल की स्क्रीन पर गईं ............ व्हाट्सप्प पर आसिफ की वीडियो कॉल आ रही थी ......... दोनों न्य आसिफ का नाम पढ़ लय था मोबाइल पर विबरते होता होआ ........ मोबाइल पर आसिफ का नाम परहंय की बाद दोनों की नज़रें एक दूसरी सी मिलीं .......... महीन की दिल की धरकन तेज़ हो गए ...... उसी ऐसी लगा की जैसी उसकी कोई चोरी पकरि गए हो ........... जैसी ........ जैसी ......... उसकी हस्बैंड न्य उसी विनोद की साथ रंगी हाथों पाकर लय हो ............. महीन को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या क्रय ............

विनोद बोलै ............ महीन जी आप बात क्र लाइन अपनी हस्बैंड सी मैं चलता हों ......
 
विनोद न्य अपना कप टेबल पर रखा तो अभी कॉफ़ी पूरी पारी होइ थी .......... महीन को यह ाचा नहीं लगा की विनोद बिना कॉफ़ी पये होय उसकी रूम सी चला जाय गए .............

महीन न्य बोली बिना hi हाथ सी विनोद को बैठी रहंय का इशारा क्या ..... और साथ hi अपनी ऊँगली अपनी लिप्स की तरफ लाती होय उसी चुप रहंय का इशारा भी क्र दया ........ विनोद न्य हैरानी सी महीन की तरफ देखा और फिर चुप हो की बेथ गया ..... वह समझ गया की महीन अपनी हस्बैंड को नहीं बताना चाहती की विनोद इस वक़्त उसकी कमरे मैं है ..... उसकी साथ अकेला ........ उसी अजीब भी लगा और ाचा भी ......

महीन न्य फ़ोन उठाया और सोफे उसी उठी ....... और बीएड पी जा की पिलो सी टेक लगा क्र दोनों टांगें बीएड की ऊपर क्र की बेथ गए ....... टेबल की साइड सी उसनी रूम का नाईट बल्ब ों क्या और बाक़ी लाइट्स ऑफ क्र दिन ......... अब महीन की रूम का नज़ारा बुहत hi खवाबनाक और रोमांटिक हो रहा था ....... नाईट बल्ब की हलकी रौशनी मैं महीन बीएड पी नीम दराज़ थी .... और दूर सोफे पर विओड़ बैठा होआ था ......... जो उसी hi देख रहा था ......... महीन की नज़र विनोद की नज़रों सी मिली तो उसी विनोद की नज़रों मैं सवाल नज़र आया ..... जिस पी महीन न्य शर्मीली सी मुस्कराहट दी ...... और अपनी हस्बैंड की कॉल अटेंड क्र ली .......... रूम मैं आसिफ की आवाज़ सुनाई देंय लगी ...........

आसिफ ........ कैसी हो डार्लिंग .......

डार्लिंग बोलनी पर महीन थोड़ा सा शर्मा गए ........ और थोड़ा ब्लश होती होय विनोद की तरफ देखा ....... वह भी वीर्य सी मुस्कराया और अपनी कॉफ़ी की कप मैं देखनी लगा .........

महीन ........ जी ठीक हों .... आप कैसी हैं .....

आसिफ ...... मैं भी ठीक हों ........ क्या क्र रही थी ........ सोइ नहीं अभी तुम .........

महीन जल्दी सी बोली ........... बस सोने की लये hi लेती होइ थी ...... वह विनोद न्य कुछ अपार्टमेंट्स की पिक्टुरेस सर्च की थीं रेंट की लये .......... वही देख रही थी .............

आसिफ ...... ओह ाचा ......... विनोद यहीं है क्या .....

महीन को अहसास होआ की उसनी क्या बोल दया है विनोद की बारी मैं अपनी हस्बंड को ............. विनोद भी चौंक क्र महीन की तरफ देखनी लगा .......... महीन को लगा की आसिफ को यह बताना ठीक नहीं हो गए की वह रात की इस वक़्त विनोद की साथ रूम मैं अकेली है ........ और दूसरा अब वह लाइट्स भी ऑफ क्र चुकी होइ थी ......... महीन और विनोद की नज़रें मिलीं ...... फिर महीन अपनी बात को संभालती होइ बोली ......

महीन ....... नहीं विनोद तो नहीं है ....... उसनी व्हाट्सप्प की थीं वही देख रही थी अपनी मोबाइल मैं ........... काफी एक्सपेंसिव हैं यह सब ........... सुबह विनोद को कहौं गई कुछ चीप मैं देखी .......... जो अफ़्फोर्ड भी हो सकी ...........

महीन न्य बात संभाली और विनोद की तरफ देखा तो विनोद न्य मुस्करा क्र महीन को थम्ब्स उप का सिग्नल दया ........... और महीन भी हल्का सा मुस्करा दी ..........

आसिफ ....... वैसी ाचा आदमी है विनोद भी न .......... अपना तो उसनी सर्च करना hi है पर तुम्हारी लय भी उसी को ढूंढ़ना पर रहा है ........

आसिफ की बात सुन क्र विनोद मुस्कराया ........ महीन भी उसी तैसे करनी की लय उसकी तरफ देखती होइ थोड़ा मसकरा क्र बोली .......... इस मैं कोनसी बरी बात है ....... आखिर अब वह यहाँ आया है तो फिर मेरी सपोर्ट तो करनी hi पारी गई न ....... आखिर हमारा फॅमिली फ्रेंड है अब वह ............

विनोद न्य भी मुस्कराती होय अपनी सीने पर हाथ रखा और थोड़ा सा झुक क्र ऐसी इशारा क्या जैसी कह रहा हो .............. ात योर सर्विस मम ........

महीन को उसकी इस अंदाज़ पर थोड़ी हंसी आ गए .......... महीन विनोद की सामन्य बीएड पर अपनी टांगें घुटनो सी मोड़ क्र बैठी होइ थी ....... उसका पजामा भी उसकी लेग्स पर थोड़ा ऊपर को चढ़ गया होआ था ........ और उसकी गोरी गोरी पिण्डल्यां नंगी हो रही थीं ......... टांगें फोल्ड क्र की बेथनी की वजह सी टाइट फिटिंग पजामा मैं महीन की गांड भी सेक्सी लुक दी रही थी ..... और उसकी पूरी शेप दिख रही थी ........... विनोद बार बार महीन की फिगर को hi देख रहा था ........ थोड़ी देर तक आसिफ सी बात करनी की बाद महीन न्य कॉल कट क्र दी यह कह क्र की 11:15 पं हो रही हैं .......... और अब वह सोने लगी है और सुबह उसी उठ क्र ऑफिस जाना है ............ कॉल कट क्र की महीन न्य मोबाइल वापिस टेबल पर रख दया ..... और दोबारा सी रूम की लाइट हों क्र दी ........

विनोद ........ ी ऍम सॉरी आप को मेरी वजह सी दिक्कत होइ .......

महीन ....... नहीं ऐसी कोई बात नहीं ..... आप का कॉफ़ी ऐसी चोर का जाना मुनासिब नहीं था ...........

विनोद भी मुस्कराया ......... मगर उसनी महीन सी इस बारी मैं कोई बात नहीं की की महीन न्य उसकी रूम मैं मौजूदगी का आसिफ को क्यों नहीं बताया ..................... क्यों की उसी भी पता था की वह आसिफ की लय इतनी सी बात को कम्पलीकाते नहीं करना चाहती थी .............

एक घंटा हो चूका था विनोद को महीन की रूम मैं आय होय ...... और बातें कृत्य होय .......... कॉफ़ी ख़तम करनी की बाद भी विनोद क़रीब आधा घंटा वहां बैठा रहा ......... महीन न्य भी उसी जांय की लय नहीं बोलै ........ 12:15 ऍम पी विनोद उठा

विनोद ........... थैंक्स महीन जी अब मैं चलता हों आप भी आराम करें ......

महीन ....... जी ठीक है .......... थैंक्स की आप न्य इतना सर्च वर्क क्या है अपार्टमेंट्स की लय .......

विनोद मुस्करा की दूर की तरफ बढ़ा ....... महीन भी उसकी साथ साथ दूर की तरफ जाती होइ बोली ........... विनोद न्य दरवाज़ा खोला ...... और बहार निकल गया ........ गेट सी बहार खरी हो कर विनोद न्य महीन की जिसम पर ऊपर सी नीची तक एक नज़र डाली और उसी गुड नाईट बोल क्र अपनी रूम की तरफ चला गया ......... महीन न्य अब फिर उसकी नज़रों को महसूस क्या ....... मगर अब इतनी देर तक उसकी सामन्य इसी हालत मैं रहंय की बाद वह विनोद और उसकी नज़रों की साथ काफी कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी ....... महीन भी दूर लॉक क्र की अंदर आगये ................ फिर अपनी कपबओर्ड की तरफ चली गए ......... अगली दिन की लय अपनी बैग सी ड्रेस निकालनी लगी ......... अपना ड्रेस और वैल निकाल क्र महीन न्य टेबल पर रख दया और खुद रिमोट लय क्र बीएड पर बेथ गए पिलो सी टेक लगा क्र ......... उसी पता था की रूम सर्विस वाले एक बार ज़रूर आईं गए उसी डिस्टर्ब करनी की लय ......... इस लय उस न्य दूर लॉक नहीं क्या था अभी ..........

कोई 12:25 ऍम पी दूर नॉक होआ ........... और आवाज़ आई ...... रूम सर्विस प्लीज मम ...........

महीन न्य बीएड पी बैठी बैठी hi आवाज़ दी ......... यस के इन प्लीज ....... दूर इस नॉट लॉक्ड .......

दरवाज़ा ओपन होआ और एक बार फिर आदम रूम मैं दाखिल हो गया ........ आदम को एक बार फिर अपनी रूम मैं देख क्र महीन को थोड़ी हंसी आ गए ......... आदम न्य महीन को बीएड पर बैठी होय देखा तो उसकी नज़र महीन की नंगी हो रही होइ टांगों और उसकी हिप्स की कटाओ पर चली गए .......

आदम ..... ी ऍम सॉरी मम तो डिस्टर्ब यू ात थिस ऑवर ........ ी ऍम हेरे फॉर योर tomorrow's ड्रेस ........

महीन ...... इतस okay ........ थे ड्रेस इस ओवर तेरे .....

आदम टेबल की तरफ बढ़ा ..... और महीन की ड्रेस उठा क्र दूर की तरफ बढ़ा ....... दरवाज़ी की पास जा की वह मुदा ......... महीन भी बीएड सी उतर क्र दरवाज़ी की तरफ बरही ..... उसकी बोस बिना ब्रा की उसकी शर्ट की नीची हिल रही थय ........... आदम को महीन की सिल्की शर्ट की ऊपर सी महीन की निप्पल्स की निशान भी दिख रही थय ..............

महीन ....... are'nt यू लेट टुनाइट तो पिक थे ड्रेस??

आदम ....... यस मम ....... ी did'nt फील गुड तो डिस्टर्ब यू विथ योर कलेग सर ......... that's व्हाई ी चामे लेट .....

महीन आदम की बात सुन क्र शर्मा गए ........ और कुछ नहीं बोली ...... आदम मुस्कराती होय महीन की जिसम पर एक नज़र डालती होय रूम सी चला गया ..... और महीन दूर लॉक क्र की शर्म सी लाल होती होइ बीएड की तरफ यह सोचती होइ बरहनी लगी की ऊऊफफफफफफफ ...... पता नहीं क्या सोच रहा हो गए वह मेरी और विनोद की बारी मैं ............. महीन हंसी और जा की बीएड पी लेट गए ........ सोने की लय .......

सुबह उठ क्र महीन न्य अपनी लय चाय बनाई ....... चाय को एन्जॉय करनी की बाद महीन नहंय की लय बाथरूम मैं चली गए ........ उसका ड्रेस प्रेस हो क्र अभी तक नहीं आया था ........ इसलय नाहा क्र महीन बाथ गाउन पहन क्र बहार आगये ....... बाल टॉवल सी साफ़ क्र लये थय मगर अभी भी गीले थय ....... महीन बहार आई और ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो क्र बाल ब्रश करनी लगी ......... इतनी मैं दूर नॉक होआ ........... महीन न्य जा क्र दूर ओपन क्या तो सामन्य आदम खरा था अपनी हाथों मैं महीन की ड्रेस का पैकेट लये होय ......... आदम महीन को बाथ गाउन पहनी होय ...... गीले बालों की साथ अपनी सामन्य खरी देख रहा था .......... बाथ गाउन महीन की घुटनो तक था ..... नीची उसकी टांगें नंगी हो रही थीं .......... महीन न्य आदम को अंदर अन्य का रास्ता दया ...... आदम थैंक्स मम बोल की अंदर आया और बुहत तमीज की साथ टेबल पर महीन की ड्रेस का पैकेट रख की वापिस मुद आया ..... महीन अभी भी दूर की पास खरी थी ........ एक नज़र महीन की जिसम पी दाल की आदम रूम सी चला गया ....... महीन न्य अपना दूर लॉक क्या और ड्रेसिंग टेबल की तरफ बरही ......... ड्रेसिंग टेबल की तरफ जाती होय महीन न्य अपना टॉवल गाउन खोल की उतरा और उसी बीएड पी फेंक दया ........ और खुद बिलकुल नंगी हो कर आंय की सामन्य खरी हो गए ........ साथ hi उसी ख्याल आया की ..... वह अभी थोड़ी देर पहली आदम की सामन्य सिर्फ यह गाउन पहनी होय थी .... जिसकी नीची उसका पूरा जिसम बिलकुल ऐसी नंगा था ............ यह ख्याल आती hi महीन की जिसम मैं सनसनाहट सी दौड़ गए ....... और वह मुस्करा दी .........

आंय मैं अपनी नंगी जिसम गूरी खूबसरत जिसम को देख क्र महीन मुस्कराई और बॉडी लोशन अपनी जिसम पर लगानी लगी ...... अपनी बाज़ूओं, सीने और बूब्स पर ........ इतनी मैं बीएड की साइड टेबल पी रखा होआ महीन का मोबाइल रिंग करनी लगा ........ महीन नंगी hi चलती होइ मोबाइल की तरफ गए ......... विनोद की कॉल थी ........

महीन ...... hi विनोद .....

विनोद ..... महीन जी आप रेडी हो गईं क्या .....

महीन ..... जी बस कपड़े hi पहन रही थी ........

महीन की मुंह सी निकल गया ...... जिसका अहसास महीन को फौरन hi हो गया ..... की विनोद सोच सकता हो गए की इस वक़्त वह बिलकुल नंगी खरी उस सी बात क्र रही है .......... महीन बस मुस्करा की रह गए .......

विनोद .... okay मैं वेट क्र रहा हों फिर निकलती हैं .....

महीन ..... okay ..... गिव में जस्ट 10 मिनट्स .......

कॉल बंद क्र महीन कपड़े पहन न्य लगी ...... और जल्दी सी तैयार हो की हिजाब लय लय ...... अपनी कल की कपड़े ...... पर्पल कलर की डॉटेड ब्रा और ब्लैक कलर की पंतय सामन्य hi हैंग थय कपबओर्ड मैं ........ महीन न्य उनको देखा .... कुछ सोचा ...... और फिर मुस्करा की उनको उठाया और जा की वाशरूम मैं पारी होइ लौंडरी की बकेट मैं दाल दया ............ क्र महीन रूम सी निकली ........ विनोद का दूर नॉक क्र की उसको बुलाया और फिर उसकी साथ नीची दिंनिंग हॉल की तरफ चल पारी ब्रेकफास्ट की लय ......... नीची रिसेप्शन की सामन्य सी गुज़रती होय महीन न्य देखा की आदम वहीँ खरा था ........ आदम भी महीन को देखनी लगा ........ उसकी चेहरी पर हैरानी थी जैसी वह महीन को इस तरह सी हिजाब मैं देख क्र हैरान हो रहा हो ....... क्यों की कल सी तो वह उसी सिर्फ नाईट ड्रेस मैं hi देख रहा था ......... महीन ाग्य बारथ्य होय हल्का सा मुस्कराई और फिर विनोद की पिच्य पिच्य दिंनिंग हॉल मैं दाखिल हो गए .........

दोनों ब्रेकफास्ट क्र की कैब सी ऑफिस की लय निकल गए .........
 
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