मेरी जेठानी
और ' दिन की देवरानी '
ये और गुड्डी डाइनिंग टेबल की ओर बढे जहाँ मेरी जेठानी इंतज़ार कर रही थीं , खाना लग गया था।
और मैं किचेन की ओर नाश्ते के बर्तन लेकर ,
जब पहुंची तो मेरी ननद रानी की रगड़ाई अच्छी तरह शुरू हो गयी थी ,
उसकी बड़ी भाभी थीं न , मेरी जेठानी , उस का 'स्वागत -सत्कार ' करने के लिए ,
जान बुझ कर उन्होंने 'इन्हे ' किनारे वाली सीट पर बैठाया ,
बस गुड्डी इनकी बगल वाली चेयर पर बैठ गयी और उसकी खिंचायी शुरू।
" आज से तुम मेरी नयी देवरानी हो गयी "
उसके मीठे मीठे गाल पर जोर से चिकोटी काटती मेरी जेठानी ने चिढ़ाया , और समझाया भी
" अरे मेरे देवर के बाएं बैठी हो , वामा , ... तो मेरी देवरानी तो हुयी न। "
जब तक वो उठने की कोशिश करती , तब तक मैं भी पहुंच गयी और जबरन वहीँ उसे दबा कर बैठा दिया
और खुद गुड्डी के बगल में बैठ गयी , और जेठानी जी से बोला ,
" तो ठीक तो है , दीदी ,...देवर एक देवरानी दो ,... हम लोग शिफ्ट बांध लेंगे , १२ -१२ घंटे की , रात वाली देवरानी मैं और दिन वाली ये , ...
क्यों आप बुरा तो नहीं मानोगे . "
मैंने बात इनकी ओर मोड़ दी और क्या जबरदस्त ब्लश किया इन्होने , इत्ता तो इनका माल नहीं शरमा रहा था।
और जवाब सामने टेबल पैट बैठती मेरी जेठानी ने अब अपने देवर को छेड़ते दिया ,
" ये क्यों बुरा मानेगा , ...इसका तो बचपन का माल है , ... और नया नया स्वाद भी मिलेगा ,
फिर दोनों टाइम कब्बडी खेलने का मौका , .... और तुम भी रोज रतजगा करती हो , कम से कम दिन में सो लेना , ...दिन में ये तेरी 'ननद बनी देवरानी' रहेगी न , ... "
बात जेठानी ने मेरे ऊपर ख़तम की और मैंने मोर्चा सम्हाल लिया ,
" गुड्डी , चुप का मतलब जानती हो न , ... मौनं स्वीकृति ही लक्षणम , मतलब तू रेडी है न दिन की ड्यूटी सम्हालने के लिए ,... "
" अरे ये तो तबसे रेडी है जबसे इसकी केसर क्यारी आयी और नीचे रक्तपात शुरू हुआ , ... ये तेरा वाला ही थोड़ा , ... स्लो स्टार्ट है ,... "
जेठानी ने अब जवाब दे दिया।
लेकिन मेरी शंकाये ऐसी थी की कम होने का नाम नहीं ले रही थीं ,
फिर बगल में जेठानी जी बैठी थीं न शंका समाधान के लिए और ऊपर से अब तक जो उन्होंने कहा था ,
उसपर न उनके देवर ने कोई आब्जेक्शन लगाया था , न ' दिन की शिफ्ट वाली देवरानी ' ने , तो इस लिए मैंने पूछ ही लिया ,
" लेकिन दी , लेकिन ,... "
मैं थोड़ा हिचकिचा रही थी पर जेठानी जी ने हिम्मत बढ़ाई ,
" अरे पूछो न , पूछो मैं बताउंगी न , ... "
और मैंने पूछ लिया, गुड्डी की ओर साफ़ साफ़ इशारा कर के ,
" मान लिया , आपकी कहीं , . ये जो दिन वाली आपकी देवरानी मेरी बगल में बैठीं हैं , कहीं ,... मेरा मतलब है , कहीं , गाभिन वाभिन हो गयीं तो , ... "
जेठानी जी ने मुझे भी जवाब दिया और अपनी नयी बनी ' दिन की शिफ्ट वाली देवरानी ' को हड़काया भी ,
" अरे रोज बिना नागा कबड्डी खेलेंगी मेरे देवर के साथ तो गाभिन तो होगी ही , देवरानी काहें को बनाया है , फिर बात उन्होंने गुड्डी की ओर मोड़ दी और उसे हड़काने लगी ,
" अरे सुनो , मेरी नयकी देवरानी , खबरदार , कोई मॉर्निंग आफ्टर , मॉर्निंग बिफोर कोई गोली वाली मत खाना , और वैसे भी तुझे मैं वो गोली खिला के अपने देवर के पास भेजूंगी न की किसी पिल विल का कोई असर नहीं होगा और रबड़ वबड़ का कोई चक्कर नहीं , सीधे चमड़े से चमड़े की रगड़ाई , "
और फिर उन्होंने मेरी ओर देखते हुए अपनी बात पूरी की ,
" तो हाँ तुम कह रही थी ये 'दिन वाली देवरानी ' कतौं गाभिन हो गयीं , तो का हुआ , अरे गाभिन होंगी तो नौ महीने पेट फुलाये घूमेंगी ,
नौवें महीना बियायेंगी , सोहर होगा , लड़का को दूध पिलायेंगी ,
कुछ हमरे देवर को भी पिला देंगी ,...
और दो चार महीना बाद फिर पेट फुला लेंगी , ये कौन नोखे की बात है ,... :
ये बात जेठानी जी की एकदम सही थी की उनके देवर सच में ' स्लो स्टार्टर ' थे , कुछ ज्यादा ही सीधे , शर्मीले , लजीले , इतना तो आज कल कोई लड़की भी नहीं लजाती , सह में इनसे न , ... खाली पढ़ाई लिखाई में अव्वल होने से थोड़े हो जाता है सब कुछ
पहले दिन ही अगर मैंने थोड़ा ज्यादा ना नुकुर की होती न , ... तो ये खुद बोलते , अच्छा चलो सो जाते हैं , जिस लड़के को मेरा नाम पता करने में २४ घंटे लग गए ,... पर अब तो ये इतना फास्ट है की , कोई मौका नहीं छोड़ते ,...
मैंने जेठानी जी की बात में थोड़ा सुधार किया ,
" दीदी , ... आप की बात पहले सही थी , ... लेकिन अब एक बार गाडी स्टार्ट हो गयी है तो चलेगी , ... अब दिन रात दोनों टाइम ,... तो अभी दिन भी है , देवर भी है , खाने के बाद एक राउंड , ... क्यों हो जाए , ... "
" नहीं नही , मेरी फ्लाइट का टाइम है , फिर रास्ता भी अभी खराब है ,... "
वो बीच में बात काट के बोले ,
तो उनकी भाभी ने अपने देवर से बोला
कोई बात नहीं मान तो गया न तू , ये मेरी ननद तो पहले ही तैयार है , खुद तेरे बांये आके बैठ गयी , ... चल अगली बार , ...
गुड्डी सुन यार तू अगली बार थोड़ा जल्दी आना साफ़ सूफ करके , तेरा फीता कटवा दूंगी मैं अपने देवर से , ... "
" एकदम पक्का , गुड्डी मान जा यार , मैं सर्टिफाई करती हूँ , बहुत मज़ा मिलेगा , ... अरे मुंह मत लटका , एक हफ्ते की तो बात है , फिर हम लोगों की बिरादरी में आ जायेगी , ... ठीक है दीदी , आपके देवर भी तैयार , नयी नयी देवरानी भी तैयार , ... बस अगले संडे को ,... " ,
अब मैं चालू हो गयी थी।
उन्होंने खाने का ढककन खोल के बात बदलने के लिए बोला ,
"भाभी चलिए खाना शुरू करते है , "
और एक बैगन निकाल के गुड्डी की प्लेट में रख दिया ,
अब तो मुझे और इनकी भाभी को और मौका मिल गया ,
" देख तेरे भइया ने चुन के सबसे लम्बा मोटा वाला दिया है , "
मैंने अपनी ननद को छेड़ा।
" अरे इनके बचपन का माल है , इनकी सब पसंद मालूम है , इसके भइया को , बैगन , खीरा , मूली , .... अरे एलवल वाली के चक्कर में बैगन के दाम बढ़ गए हैं ,... "
इनकी भौजाई भी अब हमले में शामिल हो गयीं ,
और मैंने गुड्डी से अब खुल्लमखुल्ला सीधे चिढ़ाया ,
" अरे यार अब तेरी असली वाला लेने की उम्र हो गयी है , बगल में ही तो है , एक बार पकड़ के देख ले , .... बैगन मूली सब भूल जायेगी ,... "
लेकिन रोज हम लोग के हलके से मजाक का बुरा मानने वाली किशोरी ,
हंस हंस के अपनी भाभियों की बात का मज़ा ले रही थी , बल्कि ज़वाब भी देने की कोशिश कर रही थी ,
बैगन का कैसरोल मेरी ओर बढ़ाते बोली ,
" अच्छा चलिए भाभी मेरी पसंद तो मेरे भैया को मालूम है , और आज से नहीं कब से ,...
लेकिन आप अपनी पसंद बता दीजिये और ले लीजिये , ... "
मैंने एक बैगन निकालते बोला ,
" अरे यार सिम्पल , लम्बा मोटा और कड़ा , ... "
और उसे जेठानी जी को पास कर दिया और उन्होंने भी मत व्यक्त किया ,..
" एकदम और साथ में ,... जो सटाक से अंदर जाए , ... इसलिए तो तेल लगा के इतना चिकना किया है , मुझे मालूम था आज मेरी कोरी कुँवारी ननद आने वाली है , ... लेकिन गुड्डी यार तेरे भैया ने तो तुझे लम्बा मोटा पकड़ा दिया , ... पर क्या तू इन्हे भूखा रखेगी , तू नहीं देगी इन्हे ,... थक गयी है क्या "
पर आज गुड्डी भी , ..
आँखे नचा के , थोड़ा अपने छोटे छोटे उभारों को और उभारती , अपने भैया को ललचाती , चिढ़ाती , दाल उनकी कटोरी में डालती , बोली
" भइया लो न , ... देख ले , आपकी ये बहन देते देते नहीं थकेगी , ... भले आप लेते लेते थक जाएँ ,... "
गुड्डी ने ऊपर हमारे कमरे में अपनी ब्रा की जो हालत देखी थी , एकदम उनकी मलाई से लबालब , ...
वो समझ चुकी थी की उसके जोबन का जादू उसके भइया पर कैसे चलता है।
वो कुछ शर्मा रहे थे , झिझक रहे थे , ... भौजाई के सामने ,... और इस का फायदा वो शोख भी उठा रही थी , ...
बस हलके हलके वो मना कर रहे थे और मत डालो
पर मेरी जेठानी थी न अपने देवर की टांग खींचने के लिए , बोली ,
" अरे गुड्डी पूछ न , जब ये डालेंगे और तू मना करेगी तो ये रुकेंगे क्या , जो तुझे रुकने को बोल रहे हैं। "
गुड्डी एकदम उनसे सटी , रुई के फाहे ऐसे बस छोटे छोटे उभार , उनसे हलके हलके दबते ,... उनसे बोली ,
" भैया ठीक है न , जब आप मना करेंगे तब मैं नहीं मान रही , और जब मैं मना करुँगी , कितना भी ,... आप मत मानियेगा , ... मेरी एडवांस में हाँ , अब तो ,... "
और उनकी कटोरी लबालब भर दी।
अब मैं उनके पीछे पड़ गयी ,
" हे डाल दो न , मेरी ननद की भी कटोरी पूरी भरो , आधा नहीं ,...आधे में , ... "
और मेरी बात आधी रह गयी , मेरी सास आ के डाइनिंग टेबल पर हमारे साथ बैठ गयीं , ... और बोलीं
" अरी बहू , आधे तीहै में न डालने वाले को मजा न डलवाने वाली को ,... "
वो जेठानी के बगल में बैठी थी और उन की ननदों के बारे में विचारधारा मुझेपहले दिन ही मालूम हो गयी थी , जब मैं ऊपर इनके कमरे में जा रही थी , सुहागरात वाली रात और सास का पैर छूने तभी बुआ सास की ओर इशारा करके उन्होंने बता दिया की इस घर ननदें अपने भाई से फंसी बचपन की बज्जर छिनार होती हैं , और जेठानी जी जो मेरे साथ थीं , उन्होंने उसी समय , मामला साफ़ करवा लिया , ...
माता जी , सिर्फ आप की ननदें या , ...
उन की बात पूरी भी नहीं हुयी थी की सासू जी का फैसला आ गया , और वो सीधे मुझसे बोलीं , ..
समझ ले तू , ननद छिनार का दूसरा नाम है , और तेरी ससुराल में तो एकदम , ननद चाहे जिसकी हो , मेरी या तेरी ,...
फिर गुड्डी की ओर देख के उन्होंने मुझे हड़काया ,
" अरे तेरी ननद की , ... खिलाओ न इसे आज , अब तो इसकी उमर हो गयी है न खाने की अब नहीं खायेगी तो कब खायेगी , ... "
मैं जैसे गुड्डी की थाली में डालती कुछ उसके नखड़े ,... नहीं भाभी नहीं , ... ओर आज मेरी जेठानी एकदम खुल के ,... बोली
" ननद रानी , खाना तो तुझ पड़ेगा , ... हाँ अगर थाली में कुछ बचा न तो ये कलछुल देख रही हो न , इसी से सीधे ,... नीचे वाले छेद से , जाएगा तो दोनों ओर से पेट में ही ,.... "
" अरे दीदी साफ साफ समझाइये इसको , नीचे और पीछे ,
इसका ध्यान तो हमेशा नीचे और आगे वाले पर रहता है ,... "
मैं क्यों छोड़ देती अपनी ननद को।
" अरे आगे वाले छेद के लिए मेरा देवर है न , करेगा इसकी सेवा , तभी तो इसे अपने बगल में वो भी बाएं बैठाया है। "
जेठानी जी ने अपने देवर को छेड़ा।
पर मेरी सास , हम लोगों से भी दस हाथ आगे थीं , उन्होंने हम दोनों को उकसाया ,...
अरे दो दो भाभियाँ और ननद सूखे सूखे खा रही है , ...इसीलिए तो नहीं घोंट रही है ,
उनका इशारा समझ के मैं चालू हो गयी ,
बनारस की ख़ास गारी