Erotica मोहे रंग दे - Page 49 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

कोचिंग का प्रोग्राम -२१ दिन

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" यार मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है , खुल के बोल न. अब तुझे ये कैम्प तो करना है , और होर्डिंग पर तेरी फोटो भी लगनी है , सोच ले ये तेरी भाभी का हुकुम है लेकिन परेशानी बता न, ... " मैंने पूछ लिया।

" अरे भाभी आप भी न , सुनिए , पांच दिन बाद तो शुरू होगा एक्जाम के फिर १२ दिन का कैम्प , एक दो दिन और जोड़ लीजिये , यानी १९ -२० दिन होली के बाद , गुड्डो की मम्मी भाभी क्या सोचेंगी, ... उनके यहाँ इस तरह चार पांच दिन के लिए रुका था इक्जाम के लिए ,... मेरी हिम्मत नहीं हो रही , उनसे बोलने की और वो इतनी अच्छी, इतनी अच्छी है , लेकिन उन्हें क्या लगेगा ,... "

वो बहुत परेशान लग रहा था.

लेकिन मैं जोर जोर से हंस रही थी , फिर किसी तरह हंसी रोक के बोली,

" मुझे मालूम है वो क्या करेंगी , तुझसे बोलेंगी , स्साले मुड़ निहुर , और किचेन वाला मोटा बेलन तेरे पिछवाड़े,... अच्छा चल मैं उनसे बात कर लुंगी। "

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अनुज ने गहरी सांस ली जैसे बड़ा बोझ उतर गया हो उसके ऊपर से। पर एक बात मेरे मन में उमड़ घुमड़ रही थी तो मैंने पूछ ली,

" यार ये बता तेरी रैंक अच्छी आने का पूरा चांस है , तो तू बजाय दिल्ली बंबई के आई आई टी बी एच यू के चक्कर में क्यों पड़ा है , सब लोग तो बम्बई दिल्ली कानपुर कुछ भी मिल जाए और तू बनारस,... "

फिर कुछ रुक के उसे चिढ़ाते हुए मैंने छेड़ा,...

" कहीं गुड्डो के चक्कर में तो नहीं ? "

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वो बड़ी जोर से शरमाया और धीमे से बोला,

" भाभी, ... भाभी,... आप जानती हैं तो पूछती क्यों हैं? "

लेकिन कुछ रुक के उसने अपना प्लान पूरा पता दिया। हम दोनों देवर भाभी के साथ एकदम दोस्त की तरह भी थे। "

" भाभी, सिर्फ इंजीयरिंग से तो होगा नहीं या मैनेजमेंट या एम् एस वो भी कहीं फॉरेन में , तो मैंने तय कर लिया है सेकेण्ड ईयर से ही शुरू कर कैट की तैयारी, थर्ड इयर में कैट की कोचिंग भी ज्वाइन कर लूंगा, ... और पूरी कोशिश करूँगा की टॉप तीन आई आई एम् में हो जाए, साथ में इंजीयरिंग की ग्रेड भी अच्छी रहे तो कैम्पस में आराम रहेगा। "

प्लानिंग उसकी परफेक्ट थी, पर था तो देवर ही , बिना उसे चिढ़ाए मैं फोन रखने वाली नहीं थी,...

" हे सुन अगर बनारस का रस चाहता है न तो अभी स्क्रीनिंग के एक्जाम तक जम के पढ़ाई कर, उसके बाद लेकिन वो पांच दिन एकदम पढ़ाई नहीं फुल रिलेक्स और फिर बूट कैम्प में रगड़ के पढ़ाई,... अब तुम २० दिन बाद ही घर का रुख करना मैं भाभी से भी बात कर लुंगी और हाँ कल मैं अपने मायके आ रही हूँ दस दिन के लिए , तो बीच में बनारस आउंगी ूतझसे मिलने ,... और ये फोन तो गुड्डो का है न उसे दे दे ,... "

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गुड्डो और मम्मी अनुज के कमरे में पढ़ाई के समय नहीं आती , गुड्डो भी फोन दे कर दूसरे कमरे में चली गयी थी , अनुज ने उसे बुला के फोन दे दिया और गुड्डो फिर अपने कमरे में ,

मैंने उससे सिर्फ यही पूछा की मम्मी है उसकी तो वो बोली की शाम को आएँगी और वो बोल देगी उनको बात करने के लिए।

" होली में क्या कर रही हो तू " मैंने पूछा तो फिर तो जो उसने बताया मान गयी मैं उसे और उससे बढ़कर भाभी को,

होलिका दहन के दिन तो शाम को वो लोग जाएंगी, अनुज को भी ले जाएंगी, होलिका की पूजा में व्रत कर रही थी वो अनुज के लिए।

, लेकिन उसके बाद, घर बंद, चारो ओर दरवाजे खिड़की पर मोटे मोटे परदे, जिससे बाहर का हल्ला गुल्ला अंदर तक न आए, ...

वो लोग होली, रंग पंचमी के तीसरे दिन मनायेगीं , अनुज के इम्तहान के एक दिन बाद।

और सबसे बड़ी बात , होली और जिस दिन अनुज का इक्जाम है, वो दोनों लोग व्रत रखेंगी , इक्जाम के दिन तो निर्जला, और इक्जाम सेंटर से ही मा बेटी दोनों लोग अनुज को ले के सब मंदिर जायेगीं, फिर कशी चाट भण्डार में चाट और मिश्रांबू भांग वाली ठंडाई पी कर व्रत तोड़ेंगी।

गुड्डो हंस रही थी और साथ मेंमैं भी लेकिन सोच रही थी कैसी है ये लड़की। पहले से ही सात सोमवार और सात शुक्रवार का, ...

और फोन काटने के पहले गुड्डो ने बोला की उसकी मम्मी ने अनुज के फाइनल सेलेक्शन के लिए गंगा मैया की आर पार की चुनरी भी मान रखी है।



सीढ़ी से नीचे उतरते समय मैं सोच रही थी, अनुज के बारे में,

शार्प तो वो है ही, लेकिन कितनी लगन और कमिटमेंट है,... स्क्रीनिंग के बार में तो मैं पक्की श्योर थी, लेकिन अगर ये जो उसने बूट कैम्प की उसने बात की, अगर वो कर ले तो मेंस में भी उसका चांस २०-२५% बढ़ जाएगा, और ये मौक़ा यहाँ तो मिल नहीं सकता, बेस्ट टीचर और उससे बढ़कर सेलेक्टेड स्टूडेंट, टफ कम्पटीशन, परफेक्ट माहौल,... ये तो अच्छा हुआ मैंने पूछ लिया।

मैं मुस्करायी, लेकिन है पागल, आधा नहीं पूरा पागल। झिझक कितनी, की कैसे भाभी से बोलेगा इतने दिन और,... चल मैं बोल दूंगी, उन्हें तो अच्छा ही लगेगा,... और दिन भी कितने, स्क्रीनिंग के बाद पांच दिन, और वो मैंने साफ़ साफ़ बोल दिया है नो बुक्स , सिर्फ मस्ती और आराम, ...बूट कैम्प के पहले एकदम फ्रेश माइंड से, बूट कैम्प में तो पूरी रगड़ाई होनी ही है,... और कुल कितने दिन, पांच दिन वो बूट कैम्प बारह दिन का यानी , पांच और बारह , कुल सत्रह और दो तीन दिन और, मतलब बीस -इक्कीस दिन।
 
पता नहीं, आप तो पुराने पाठक हैं आपको पता है कैसे फागुन के दिन चार की कहानी ख़तम हुयी थी, थ्रिलर भी था, इरोटिका भी था, काफी कुछ मस्ती भी, लेकिन अंत जो हुआ तो कितनों की आँखे नम नहीं हुयी, मेरी भी, ...

रीत: नवरीत देवल



आई॰बी॰ वालों ने एक पक्की पर्सनैलिटी उनके लिए गढ़ दी थी, डाक्युमेंट्स, बैकग्राउंड, फिजिकल अपीयरेंस, लेकिन मन में उमड़ती घूमड़ती यादों का क्या करें।

अक्सर वह हँसते-हँसते उदास हो जाती थी, कोई लाख पूछे बोल भी नहीं सकती थी, अतीत की दरवाजे खिड़कियां तो छोड़िये, रोशनदान तक खोलना मुश्किल था। अब वह पूरी तरह आई॰बी॰ की हो चुकी थी, और करन आर॰ए॰डब्लू॰ का।

गुड्डी की शादी में रीत नहीं आई। गुड्डी को मालूम भी था कि वो नहीं आ पाएगी। सुहाग के लाल जोड़े में सजी वो गुमसुम बैठी थी, और जब वह मंडप में जाने के लिए उठने ही वाली थी कि किसी ने फोन पकड़ा दिया- “रीत का फोन”



बहुत देर तक दोनों फोन पकड़े रही। बातें कुछ भी नहीं हुईं। लेकिन दोनों रोयीं बहुत।

.....


तो मेरे लिए बताना बहुत मुश्किल है कहानी किधर मुड़ेगी, कहाँ रुकेगी। मेरी कहानियां शैतान बच्चो की तरह होती हैं जो कई बार मेरी ही गर्दन कान पकड़ के घुमा देती हैं।

आजकल आप पंद्रह बीस दिन में एकाध बार आते हैं , मैं समझ सकती हूँ जिंदगी की व्यस्तताएं,... तब तक दो चार पोस्ट्स आ ही जाती हैं ,...

तो अगली बार अब जब आएंगे तब तक शायद कहानी की दिशा और दशा दोनों तय हो चुकी होगी,
 
२१ दिन

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इक्कीस दिन ,

सोचते ही मेरे दिमाग में कुछ चमका, मैं जोर से खिलखिलाई और उतरते उतरते एक पल के लिए ठहर गयी।

यही तो, यही तो। अब मेरी ननदिया की अच्छी तरह लिखी जायेगी मोटी वाली कलम और सफ़ेद स्याही से।

मैंने जेठ जेठानी और सासु जी का २१ दिन का ट्रेवेल पॅकेज तो बना दिया था, २१ दिन के लिए घर भी खाली , गुड्डी रानी भी राजी और मेरी सास ने उसके घर से भी,

कम्मो का शैतान दिमाग भी चालू हो गया था , गुड्डो रानी ने भी अपने भौंरो को दावत देना शुरू कर दिया था,... लेकिन,

यह एक बहुत बड़ा लेकिन था क्या वो सच में २१ दिन रह पाएगी। दो चार दिन की बात और. और मुझे लग रहा था की संडे को मेरी सास जेठ जेठानी जाएंगे, उसी दिन मेरी ननद रानी आ जाएंगी,... अगले दिन मंडे से , लेकिन उसी दिन सोमवार को ही तो अनुज की स्क्रीनिंग ही और उसके दो तीन दिन बाद, अनुज लौट आएगा, बृहस्पति हद से हद शुक्रवार, और वो अगर आगया तो घर रखाने की जिम्मेदारी उसके ऊपर, ... और कुछ नहीं तो वो भी आ जाएगा साथ साथ साथ रहने, फिर सारा प्लान,

मैंने खुद रीत दी वाले ऐप से सुना था , एक को उसने मंगल को दावत दी तो दूसरे को बृहस्पति को, और अगर एक बार उसने अपने स्कूल के यारों के सामने टाँगे फैलानी शुरू कर दी तो इतनी जल्दी पर्दा गिरने पर, ...

लेकिन अब एकदम पक्का २१ दिन होली के बाद अनुज बनारस में और मेरी ननदिया यहाँ, अकेले कम्मो भौजी की निगरानी में,... अब तो कोई रोक नहीं सकता उसकी दुरगत होने से,

मैं सीढ़ी पर खड़ी खड़ी यही सोच रही थी, ...

कल यहीं तो मैं और कम्मो उसे खूब चिढ़ा रही थीं जब उसके भैया ने उसकी नथ उतार दी थी, ' तेरे भैया के बाद अब हम दोनों के भैया लोगों का नंबर लगेगा, चार पांच से कम नहीं एक दिन में।

वो बेचारी एकदम घबड़ा रही थी, नहीं नहीं भाभी एक दिन में चार पांच बार नहीं , नहीं , पर कम्मो भौजी भी न, शीशे में उतारने में उनका कोई सानी नहीं, चाहे देवर हो चाहे ननदें। उन्होंने जोर से मेरी टीनेजर ननद के गाल पे चिकोटी काटी और मामला साफ़ किया , ... और बोलीं ,

" ननद रानी, चार पांच बार नहीं , चार पांच हम लोगों के भैया, अब तीन बार से कम तो कोई करेगा नहीं तो समझ लो पंद्रह बार,... "

मेरी मैथ्स अच्छी है जो मैंने ननद रानी की कच्ची अमिया दुलार से सहलाते जोड़ के बता भी दिया,

' यार पहली बात, तुझे तो कुछ करना नहीं , बस अपनी ये प्यारी प्यारी लम्बी गोरी टाँगे फैला देना, या कुतिया की तरह निहुर जाना, बस. उसके बाद तो करेंगे हमारे भैया लोग, तेरे शहर के यार ,... और फिर कितना टाइम पंद्रह, बीस मिनट। तो अगर बीस मिनट भी जोड़ा तो पन्दरह बार में कितना कुल ३०० मिनट या ६ घण्टे,... तो २४ घंटे के दिन में २५ % ही तो हुआ , बाकी टाइम में गली मोहल्ले वालों से नैन मटक्का करना नए नए जोबन मिसवाना। हाँ एक बात और तुम सब ननदें मुझे बहुत चिढ़ाती थी न, मेरी सेंचुरी २० दिन में लग गयी थी, तेरे भैया के साथ तो तेरी सेंचुरी देखना एक हफ्ते में लग जाएगी। "
 
सेंचुरी

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पूरे २१ दिन , २१ दिन में तो उसकी, कुछ दिन पहले की तो बात है जब मैं शादी में आयी थी, जरा सी गारी सुनने पर ऐसी उचकती थी, गरम तवे पर जैसे कोई छींटा मार दे वैसे छनकती थी, ...

एक किया दो किया साढ़े तीन किया , हिन्दू मुसलमान किया तुरक पठान किया, कोरी,चमार किया अरे सौ -सौ छैले हमरे मायके के , ...

कैसे बुरा मान के मुंह बिचकाती थी,

अब सही मौका है , तीन हफ्ते में सच मुच् सौ चढ़ जाएँ उसके ऊपर, सौ लौंडो की सेंचुरी बन जाए,... मेरा दिमाग तेजी से काम कर रहा था, कम्मो ने वैसे ही अपने गाँव जवार के , लेकिन अब जब २१ दिन का पक्का हो गया, ...

और जितना उसके शहर वाले, १४ भौंरे तो उसकी अपनी लिस्ट में ही थे, ... कम से कम ८ -१० तो उसमें से ही ,

फिर उनके भी कुछ यार दोस्त होंगे, फिर उसकी सहेलियां , उनके यार, भाई , उसकी पक्की सहेली लीला तो रोज बिना नागा अपने सगे भाई का लीलती है, तो उसका वो भाई ही,...

और वो दोनों पड़ोस वाली दोनों लड़कियां जो होली खेलने आयीं थी और मैंने और कम्मो ने पटक के , जबरदस्त ऊँगली, दोनों की अच्छी तरह पहले से फटी थी, उनके यार,..

असली मजा तो तब आएगा , जब उसकी सहेलियों के सामने, स्कूल मोहल्ले की लड़कियों के सामने लौंडे चढ़ेंगे, उसके ऊपर,...

मैंने तय कर लिया था अभी कम्मो से मिल के,... कम्मो ने तो अपने गाँव जवार के मैं भी रीतू भाभी से बात कर के,... नहीं तो जो ग्वालिन भौजी हैं दूध दुहने आती हैं , अहिराने के भरौटी के, अरे वो लड़के गाँव जवार के नाते मेरे भाई ही तो लगेंगे,...

लेकिन तभी नीचे से मुझे सासू जी की आवाज सुनाई पड़ीं और मैं झट से नीचे उतर आयी,

नहीं नहीं वो मुझे नहीं बुला रही थीं, अपने छोटे बेटे को हड़का रही थीं , उसके कान का पान बना रही थीं

मुझे बहुत मज़ा आया. मेरी ससुराल में जब इनकी रगड़ाई होती थी, कोई इनको हड़काता था, मेरी सास, जेठानी तो मैं झट से इनके खिलाफ हो जाती थी.

लेकिन अभी मुद्दा कुछ साफ़ नहीं हुआ, पर मेरी सास ने ही मामला साफ़ किया, ...

" बहू तूने इसे कुछ गुन ढंग नहीं सिखाया, एकदम ऊदबिलाव की तरह,... "
 
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तभी नीचे से मुझे सासू जी की आवाज सुनाई पड़ीं और मैं झट से नीचे उतर आयी,

नहीं नहीं वो मुझे नहीं बुला रही थीं, अपने छोटे बेटे को हड़का रही थीं , उसके कान का पान बना रही थीं

मुझे बहुत मज़ा आया. मेरी ससुराल में जब इनकी रगड़ाई होती थी, कोई इनको हड़काता था, मेरी सास, जेठानी तो मैं झट से इनके खिलाफ हो जाती थी.लेकिन अभी मुद्दा कुछ साफ़ नहीं हुआ, पर मेरी सास ने ही मामला साफ़ किया, ...

" बहू तूने इसे कुछ गुन ढंग नहीं सिखाया, एकदम ऊदबिलाव की तरह,... "

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मामला ये था की मेरी सास ने अपनी समधन के बारे में पूछा था की मिठाई विठाई कुछ ले जा रहे हो की नहीं , और ये भी बोल बैठे, आपने इतनी गुझिया वुझिया बनायी तो है अपनी समधन के लिए. और ऊपर से कम्मो, उनकी भौजी, उन्हें भी अपने देवर की खिंचाई करने में मजा आता था, झट्ट से डेढ़ पाव शुद्ध देशी घी आग में छोड़ दिया , भोली बन के बोलीं,

" अरे हम लोगों का जमाना होता न, पहली बार बहू अपने मायके जा रही है, कम से कम पांच झाँपा, एक झाँपा खाजा, एक झाँपा लड्डू, ,..."

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और उनकी बात काट के मेरी सास झुंझला के बोल उठीं,

" तो कौन सा जमाना बदल गया है, पांच झाँपा न सही पांच किलो तो कम से कम ले जाना चाहिए न,... "

मुझे देख कर मेरी सास थोड़ा सा मुस्करायीं , और अपनी तोप का मुंह मेरी जेठानी की ओर मोड़ दिया लेकिन उनके गुस्से में कोई कमी नहीं आयी,...

" बहू, तुझसे बोला था न की अपनी देवरानी ज़रा सोच समझ के ले आना, ठोंक बजा के देख लेना , सब जिम्मेदारी मैंने तुम्हारे ऊपर छोड़ दी थी , लेकिन ये कैसी , इतनी बुद्धू,,... "

जेठानी मुझे देख के मीठा मीठा मुस्करा रही थीं , सच में अगर मेरी जेठानी न होतीं न , तो हम लोगों का जो चट मंगनी पट ब्याह हुआ एकदम नहीं हो पता, शादी में इनके देवर से मेरे नैना चार हुए थे, ये भी आयी थीं, बस देख भी उन्होंने लिया था मेरी जबरदस्त गारियाँ भी सुन ली थीं, उन्होंने खुद ही रीतू भाभी से बात की , दो दिन में इन्ही के यहाँ से फोन आया, और पहली लगन में शहनाई,... इनकी सास ने जो जो शर्तें रखीं सब मेरी सास ने मान ली, गाँव की शादी,

लेकिन मेरी सास अब मुझे देख रही थीं और मुस्कराते हुए बोलीं ,

" लेकिन तेरी गलती भी कम नहीं है,... ' और मुझे कुछ समझ में आता उन्होंने अर्था के बता दिया,

" तूने इस लड़के से बहुत जल्दी हाँ बोल दी, कम से कम तीन महीने रोज नाक रगड़वाती न , तब हाँ बोलती तब इसको ससुराल का मतलब समझ में आता। "

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मैंने झट ५०० ग्राम मक्खन लगाया, और सासू जी से बोली,

" पर मुझे तो आप के पास आने की जल्दी थी न "

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और जा के एकदम अपनी सास को पकड़ के चिपक के खड़ी हो गयी। मेरी सास ने भी मुझे बहुत दुलार से मुझे दुबका लिया लेकिन इनके ऊपर डांट की बारिश कम नहीं हुयी,

" इतनी, प्यारी, अच्छी, मीठी, सुन्दर मेरी बहू इतनी आसानी से मिल गयी न इसलिए,... अब मुंह क्या देख रहे हो जाओ पांच किलो और मेरी समधन के लिए अलग से ,... "

कम्मो मज़ाक के मामले में रिश्ता विश्ता नहीं देखती थी, और ख़ास तौर पर देवर खड़ा हो, मेरी सास की हाँ में हाँ मिलाती इनसे बोली,

" मालूम है इनकी समधन को कौन सी मिठाई पसंद है ? " , फिर खुद ही जवाब भी दे दिया, अपना बित्ता पूरी तरह फैला के खोल के दिखाते हुए,
 
रसीला चमचम

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" मालूम है इनकी समधन को कौन सी मिठाई पसंद है ? " , फिर खुद ही जवाब भी दे दिया, अपना बित्ता पूरी तरह फैला के खोल के दिखाते हुए,

" रसीली समधन के लिए रसीला चमचम, ये बित्ते की साइज़ वाला, लंबा और खूब मोटा, रस से डूबा, जिससे रस ले लेकर समधियाने का रस चूसें और समधियाने को याद करें,... "

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सासू माँ ने कम्मो को तारीफ़ की नजर से देखा और जो बात वो कहना चाह रही थीं पर नहीं पा रही थी वो कम्मो ने कह दिया। और ये अक्सर होता था जो असली वाली गाली ननदों को जेठानी जी दिलवाना चाहती थीं और खुद कुछ सकुचाती थीं बस कम्मो को इशारा भी करने की जरूरत नहीं पड़ती थी, एक बार कम्मो ने बोल दिया तो मेरी सास भी चालू होंगीं अपनी समधन की तारीफ़ में, ...

" ससुराल जा रहे तो, ये मत सोचना की ससुराल में सिर्फ साली सलहज हैं, सास का भी ख्याल रखना पड़ता है, "

मुस्कराते हुए मेरी सास बोलीं, और मैंने अपनी मुस्कराहट बड़ी मुश्किल से दबायी।

मेरी सास और इनकी सास के विचार बहुत मिलते हैं. जब एक बार मैंने इनकी सास से बोला था की और सब कुछ तो ठीक है लेकिन ये लजाते बहुत हैं,... तो हंस के अपना इरादा उन्होंने साफ़ कर दिया, " आने दे उसे, जितना उसकी रगड़ाई उसकी सब, गाँव भर की साली सलहज मिल के करेंगी, उतना तो मैं अकेले करुँगी, ... सारी लाज सरम दो दिन में उसके पिछवाड़े,'

और मेरी जेठानी ने भी पाला बदल दिया और अपने देवर को चिढ़ाती बोलीं,

" एकदम सही तो कह रहीं है, जो दो मीठी मीठी सालियों के चक्कर में ललचा रहे हो नहीं, वो निकली कहाँ से हैं,... और ये मीठी मीठी बरफी जो रोज बिना नागा गपकते हो,... वो,... " मेरे गाल पे कस के चिकोटी काटते वो बोलीं।

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लेकिन मज़ाक का लेवल बढ़ाने के लिए कम्मो थी न, उनसे बोली,

" और लम्बे मोटे चमचम के साथ रसगुल्ले भी,... मैं लगा दूंगी ठीक से, एक लम्बे मोटे चमचम के दोनों ओर दो गोल गोल रसगुल्ले, समधन जी के लिए,... "

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और मेरी सास खिलखिला पड़ीं और एक जोर का हाथ कम्मो के पीठ पर और बात बदलते हुए उससे बोलीं,

" तू न एकदम पक्की,... देख होली के दिन हम लोग निकल जाएंगे पूरे २१ दिन के लिए और २१ दिन तक घर और वो तेरी ननद भी यहाँ रहेगी, दोनों की जिम्मेदारी पूरी तेरे ऊपर है.

मैंने और कम्मो ने आँखों में हाई फाइव किया, कम्मो ने अपनी जिम्मेदारी अपनी ननद के प्रति तो कल से ही शुरू कर दी, उस कुँवारी कच्ची कोरी ननद की अपने देवर से फड़वा के , रात भर उस के भाई चढ़े रहे , अब हमारे भाइयों और उसके यारों का नंबर लगना था,...

सासू जी ने मुझे भी काम पकड़ा दिया , मैं उनकी सेक्रेटरी थी,... लम्बी लिस्ट बनाने का,... वो बोलती गयीं मैं लिखती गयी, उनके समधियाने के सामान लाना था , ... एक हाथ की शॉपिंग की लिस्ट मैंने उन्हें पकड़ा दी.

ये बाजार के लिए चल दिए , जेठानी की दो मिस्ड काल आ चुकी थीं , जेठ जी को चैन नहीं पड़ रहा था, तो वो भी अपने कमरे में और कम्मो भी पीछे अपनी कोठरिया में,...
 
मीठी मीठी सासू माँ

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ये बाजार के लिए चल दिए , जेठानी की दो मिस्ड काल आ चुकी थीं , जेठ जी को चैन नहीं पड़ रहा था, तो वो भी अपने कमरे में और कम्मो भी पीछे अपनी कोठरिया में,...

और मैं सास जी के पीछे पीछे उनके कमरे में,...

उनके बेटे के वार्डरोब की जिम्मेदारी तो इस घर में आने के अगले दिन से ही मेरे ऊपर आगयी थी वरना वो दो रंग मोज़े और उलटा पजामा पहन के पूरे घर में टहलते , पर साथ साथ दस पन्दरह दिन में सासू माँ की भी जिम्मेदारी,... उनकी अलमारी, बॉक्स सब की चाभी,... कहीं जाना हो तो क्या पहनेंगीं वो, ...

और उनके कमरे में घुसते ही मैंने उन्हें बाँहों में भर लिया, और उन्होंने भी मुझे अँकवार में भर लिया, बोली मैं कुछ नहीं, बोलीं वो भी कुछ नहीं,...

मुझे याद है की जब वो मुझे देखने आयी थीं, बस खींच के मुझे गोद में बिठा लिया और माँ से बोलीं बस ये मेरी बेटी है मुझे ले जाना है अपने साथ. लड़के वाले शर्त रखते हैं लेकिन मेरी माँ ने,... और ये बिना कुछ सुने सिर्फ मुझे देखती रहीं, और माँ से बोली, समधन जी आपकी सब बातें सर माथे, लेकिन मेरी सिर्फ एक शर्त है ,

सब लोग चुप हो गए,.. दान दहेज़ क्या बोलेंगी, पर मुझे दुलराते वो बोलीं,

" जैसे लगन शुरू होगी, पहली लगन को मैं अपनी बेटी को ले जाउंगी, बस. बाकी आप की सब बातें मंजूर।"

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सब लोग कहते थे ससुराल में ऐसे रहना, वैसे रहना, पुराने ज़माने का चलन है और मेरी सास ने जिस दिन आयी, उसके अगले दिन ही घूँघट को मना कर दिया, ... सब के सामने जेठानी जी से बोलीं,

" इत्ती सुन्दर चाँद सी देवरानी ले आयी हो ताले में बंद करने के लिए, अरे घूँघट करेगी तो ये हमारे घर में पूनो का चाँद निकला है दिखेगा कैसे, "

और उसी दिन, मेरी सब सास थीं बुआ सास , कुछ मोहल्ले की औरतें,... मैंने हल्का सा घूंघट ओढ़ रखा था , ज़रा सा माथा ढका था बस , चेहरा पूरी तरह खुला लेकिन सबके सामने जोर की डांट पड़ गयी मुझे,...

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" एक बार में नहीं समझती हो, सीढ़ी चढ़ के ऊपर जाती हो , नीचे आती हो, कहीं घूंघट के चक्कर में भहरा पड़ी तो , कितना खरचा आएगा अस्पताल का , कौन भरेगा , तेरी माँ को हफ्ते भर के लिए गिरवी रखूंगी तब पैसा निकलेगा, ... जैसी तेरी ननदें रहती हों उसी तरह रहना है समझ लो. "

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मैं समझ रही थी ये बात मुझसे ज्यादा मेरी उन सास लोगों के लिए है फिर तो अगले दिन से,...

" मेरा जाने का मन नहीं कर रहा है ,... " मैंने बोल दिया।

" तू न एकदम पागल है, तू न जाएगी तो बड़ी मुश्किल से जो मैं जा रही हूँ २१ दिन के लिए वो भी गड़बड़ हो जाएगा। " हँसते हुए वो बोलीं।

" चलिए आपका सामान पैक कर देती हूँ , मैं बोली और उन के ट्रिप की एक बड़ी अटैची दो बैग बैठ के पैक करने लगी।
 
कम्मो संग पिलानिंग

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जब पैकिंग करने के बाद मैं उठी तो सास जी की नाक जोर जोर से बज रही थी. जेठानी जी अपने कमरे में सो रही थीं.

मैं बाहर निकली तो बस मेरे मन में मेरी ननदिया बसी थी, वही कच्ची कली. फट तो उसकी गयी थी, और कम्मो के भरोसे तो, ...

अब उसकी जबरदस्त रगड़ाई होना भी तय थी, लेकिन मैं कुछ और सोच रही थी, इन २१ दिनों को फायदा उठा के कैसे उसे मशहूर कर दूँ उस के शहर में , सारे लौंडों को पता चल जाए, ... जितने ठरकी हैं न सिर्फ उसके गली मोहल्ले के बल्कि, जिल्ला टॉप माल तो है ही वो, खुल के चलती है ये भी पता चल जाए सबको, और फिर दुबारा अपनी टाँगे न सिकोड़ पाए.

सासू जी और जेठानी जी कस के नींद के चंगुल में थीं, कम से कम डेढ़ दो घंटे। ये बाजार गए थे, मेरी सासू जी की पौने दो फिट लम्बी लिस्ट और मिठाई की शॉपिंग के लिए , घर में मैं अकेली जग रही और मेरे दिमाग में उथलपुथल चल रही थी, ...

किचेन में कुछ खटर पटर की आवाज आयी तो मैं वहीँ चल पड़ी, कम्मो थी, उसे देख के मेरे चेहरे पे हजार वाट की मुस्कान चमक गयी.

" चाय चलेगी ? " हँसते हुए कम्मो ने पूछा।

मैंने उसे कस के अँकवार में भींच लिया और बोली , दौड़ेगी, लेकिन तब तक मैं एकदम डबल खुशखबरी सुनाती हूँ.

कम्मो ने चाय चढ़ा दी और मैंने उसे खुशखबरी सुना दी, वही अभी जो अनुज से पक्की कर के आ रही थी.

अनुज एक्जाम के बाद भी २० -२१ दिन बनारस रुकेगा, ... उसकी कोई १२ दिन की कोचिंग और है , एक्जाम के पांच दिन बाद शुरू होगी।

कम्मो मुझसे भी ज्यादा समझदार थी , उसका चेहरा खशी से चमक गया , वो बोल पड़ी, इसका मतलब ?

" मतलब यही की अपनी अनारकली ऑफ़ आजमग़ढ २१ दिन तक यहीं अकेले बस अपनी कम्मो भौजी के हवाले,... अनुज तो आएगा नहीं तो ये जो डर था की कहीं उसका भाई आ गया तो वो भी यही आ जाये या घर रखाने का काम उसके जिम्मे पड़ जाय, ... तो इसलिए बस अपनी ननदिया और उनकी कम्मो भौजी पूरे तीन हफ्ते , ... "

मैंने खिलखिलाते हुए पोल खोल दी।

" अब देखना तीन हफ्ते में उसे तीन लोक न दिखा दिया तो, मेरे पास एक थी कई साल से लेकिन उसका आज तक इस्तेमाल नहीं कर पायी थी, अब सही मौका मिला है ,... "

चाय की पत्ती डालते हुए कम्मो ने एक राज की बात बताई , और अजब तक चाय खौल रही थी कम्मो ने उसका राज भी खोल दिया।

कम्मो मैंने बताया था न की मेरी तरह पक्की बनारस वाली, तो बनारस में ही किसी अघोड़ी ने , एकदम माने हुए लेकिन कम्मो पर खुश थे और उन्होंने बहुत सी चीजें दी भी थीं और कम्मो को सिखायीं भी थीं।

उसी में से एक कामिनी कामचूर्ण भस्म थी, लेकिन उसकी शर्तें बहुत बेढब थी,

पहली तो जिस कन्या पर उसका इस्तेमाल किया जाये वो किशोरी हो, और इस्तेमाल पहली बार पूनो की रात में और पूरे असर के लिए होली वाली पूनो को, उसे नंग्न कर के उसकी योनि में चार चुटकी एकदम अंदर तक, वो भी कम्मो को ही डालना था. लेकिन अगली शर्त उससे भी कठिन थी, अगले दिन से उस किशोरी की योनि और गुदा दोनों के अंदर वीर्य भरा होना चाहिए , सिर्फ एक दिन नहीं पांच दिन, और पांचो दिन उसे अलग अलग पुरुषों से सम्भोग करना होगा, और रोज सुबह भी सोने के पहले वही भस्म चुटकी भर अगवाड़े पिछवाड़े अंदर।
 
२१ दिन ननदिया के.

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और,...रोज बिना नागा

तब तक चाय बन गयी थी , मैंने जोड़ घटाना भी कर लिया , कम्मो के पास पूरा मौका था , होली की शाम तो हम दोनों की ननदिया आ ही जायेगी। दस बजे जेठ जेठानी सासू जी की ट्रेन है तो वो लोग पौने नौ बजे ही घर से निकल जाएंगे , फिर तो वो और कम्मो, ऊपर के कमरे में ननद रानी रहेंगी, और उससे सटी बड़ी सी खुली छत है , जिस पर कितनी बार मैंने कम्मो के देवर के साथ कबड्डी खेली है, बस उसी छत पर ननद को निसूती कर के, चांदनी से ढकी ननद के अगवाड़े पिछवाड़े भसम डालना तो कम्मो भौजी के बाएं हाथ का खेल हैं , और अगले दिन ही कम्मो के गाँव के पठान के तीन लौंडे , अगले दिन गुड्डी रानी ने अपने भौंरे को दावत दे दी है, तो पांच दिन क्या अब तो एक्कीसों दिन अगवाड़ा पिछवाड़ा रबड़ी मलाई से बजबजाती रहेगी।

तो असर तो उस भस्म का पूरा होगा लेकिन होगा क्या ?

और चाय की चुस्की लेते हुए मैंने कम्मो से पूछ लिया, लेकिन वो देर तक खिलखिलाती रही. फिर हंसी रुकी तो बोली,

" वही होगा जो हम तुम और हमारे तुम्हारे सारे देवर और भाई चाहते हैं."

मेरी समझ में अभी भी कुछ नहीं आया और मैंने पूछा भी नहीं। मैं जानती थी वो खुद ही बताएगी और यही हुआ, वो खुद बोली,

" अरे तुम यही चाहते हैं की अब वो टांगें न सिकोड़े, तो बस पांच दिन भसम अगर लग गयी न रानी जी को , तो बस, टाँगे सिकोड़ने को कौन कहे, खुद टाँगे फैलाने को बेताब रहेंगी, खुद ही निहुर जाएंगी, कातिक क कुतिया की तरह हरदम चौबीसो घंटा गरमाई रहेंगी। किसी को मना नहीं करेंगी बल्कि खुद लौंडे फ़साने लगेंगी। सुबह से ही बिलिया में अगले हफ्ते से इतनी जोर जोर से मोटे मोटे चींटे काटेंगे की खुद ही मुझे कहेंगी की उसे नए नए यार चाहिए। "

अब खिलखिलाने की बारी मेरी थी पर कम्मो चुप नहीं हुयी और बाकी फायदे भी गिनाने लगी,

दूसरा सबसे बड़ा फायदा ये की चाहे जिससे करवाए, मरवाये लेकिन कोई रोग दोष नहीं होगा न गाभिन होगी। लेकिन असली चीज ये है की दिन रात चलने से कोई भी उसकी बिल को भोंसड़ा बनते देर नहीं लगेगी, लेकिन सोलह साल की कुँवारी मात इतनी कसी चूत और गाँड़ रहेगी, कानी उँगरी भी कोई पेलना चाहे न तो बिना सुध देसी कड़ुआ तेल लगाए नहीं घुसेगा,

मैं बोले बिना नहीं रह सकी,

" तो इतनी कसी होने का मतलब हर बार ननद रानी खूब चिल्लायेगीं, रोयेंगी, चूतड़ पटकेंगी,... "

"एकदम, और भौजाई के लिए ननद क रोई रोहट चिल्लाहट से बढ़ के कौन म्यूजिक होता है,... " कम्मो हँसते हुए बोली, लेकिन तब तक कम्मो का फ़ोन बज गया और मैंने झांक के देखा, फोटो भी था काल करने वाले का कोई मस्त चिकना लौंडा था,...

कम्मो समझ गयी और हलके से मुस्कराते हुए ,अपना फोन का स्पीकर ऑन कर दिया और मुझे जोर से आँख मारी।

" हे सुन भूलना मत, होली के अगले दिन, सोमवार के दिन, सुबह आठ बजे, ... "

" अरे मैं भूल सकता हूँ , क्या मस्त माल है, एकदम कच्ची कली, फोटो मैंने अपने मोबाइल में सेव कर ली है. अभी से सांडे का तेल लगा के मुठिया रहा हूँ, लेकिन झेल पायेगी वो? " उस लड़के की आवाज आयी.

" तुझे ठोंकने से मतलब, अरे यार मैं रहूंगी न सम्हालने के लिए, ... ऐसी चिड़िया आज तक नहीं मिली होगी, अच्छा चल सोमवार की सुबह। "

और यह कह के कम्मो ने फोन काट दिया, और मेरी ओर देख के जोर से मुस्करायी और अपने फोन में उस की पिक खोल दी,

सच्च में एकदम मस्त माल, पूरा पठान का लौंडा, खूब चिकना, एकदम गोरा मूछों की जगह बस हलकी सी रेख, लेकिन सबसे जबरदस्त बात थी उसकी आँखों की चमक और मीठी मुस्कान, सच में एक बार उस मुस्कान को देख के ही कोई लौंडिया खुद नाड़ा खोल देती।
 
जावेद,

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सच्च में एकदम मस्त माल, पूरा पठान का लौंडा, खूब चिकना, एकदम गोरा मूछों की जगह बस हलकी सी रेख, लेकिन सबसे जबरदस्त बात थी उसकी आँखों की चमक और मीठी मुस्कान, सच में एक बार उस मुस्कान को देख के ही कोई लौंडिया खुद नाड़ा खोल देती।

जावेद, मुस्कराते हुए कम्मो ने नाम बताया, लम्बाई ६ फीट १ इंच, उन्ही के गाँव का, अभी बी ए सेकेण्ड इयर में इसी साल गया है, गाँव के रिश्ते से भाई लगेगा, ...

और आगे की बात कम्मो ने जो उसकी अगली पिक दिखाई उसी से पूरी हो गयी, एकदम, टॉपलेस, सिर्फ एक हिप हगिंग देह से चिपकी जींस में

स्साला, क्या मस्त सिक्स पैक्स थे, खूब चौड़ी छाती और उतनी ही पतली कमर, एक एक मसल्स साफ़ साफ़ दिख रही थी, मैं समझ गयी थी एकदम पावरहाउस होगा। और वो बॉडी देखकर तो कोई भी लड़की पिघल जायेगी, मेरी ननद के भौरों से तो मीलों आगे, कम्मो ने एकदम सही चुना था,

" हे असली चीज दिखाओ न , ... " मैंने कम्मो से बोला,

" मेरे देवर से अच्छा तो नहीं होगा ,... अच्छा चल यार तेरा मेरा दोनों का भाई भी लगेगा ननदोई भी , ... दिखाती हूँ "

कम्मो मुस्करा के बोली,...

सच में रीतू भाभी ने मुझसे सुहागरात की अगली सुबह ही पूछा था, अपने नन्दोई के ' उसकी ' लम्बाई मोटाई ; और मेरे गाँव में वैसे भी जब कोई लड़की अपनी ससुराल से पहली बार आती तो भौजाइयां सब से पहले सुहागरात की हाल चाल के साथ ननदोई की ' लम्बाई, मोटाई ' सब कुछ पूछ लेती थीं, ... मैंने उलटा भाभी से बोला , आप सलहज हैं जब आप के नन्दोई आएंगे तो खोल के नाप लीजियेगा , हंस के वो बोलीं, तो क्या तुझसे पूछूँगी, तुझे तो छूने भी नहीं देंगी लेकिन कल नहीं बताया तो , छिनार रात भर गपागप मेरे नन्दोई का घोंटती हैं, नाप के बता भी नहीं सकती।

दो तीन दिन बाद मैंने जब उन्हें बताया की पूरे एक बित्ते का है, साढ़े आठ इंच के आस पास, तो उन्हें बिस्वास नहीं हुआ ,

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अब तय ये हुआ था की कल जैसे हम लोग पहुंचगे , इनकी सलहज पहला काम यही करेंगी , इनकी सबसे छोटी साली से खुलवाकर, नपवाएंगी,...

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सच में कम्मो भौजी के देवर से बीस नहीं तो अट्ठारह भी नहीं होगा , हाँ थोड़ा बहुत , लेकिन मोटाई में टक्कर का , पर जब कम्मो ने क्लोज अप दिखाया

तो मेरा कलेजा मुंह को आ गया.

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उस स्साले का सुपाड़ा, मेरी मुट्ठी से कम नहीं होगा, खूब मोटा और एकदम कड़ा, ...

" कैसे , ... उसके पिछवाड़े,... इतना मोटा,... " थूक गटकते हुए मैं बोली।

" तभी तो मैंने इसे चुना, अपनी ननद के पिछवाड़े का फीता कटवाने के लिए ,

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देवर से एक मामले में ये और बीस नहीं बल्कि पच्चीस छब्बीस है,.... रगड़ के जबरदस्ती पटक के चोदने में, लौंडिया बेहोश हो जाय , खून खच्चर हो जाये ये बिना पूरा ठेले छोड़ेगा नहीं, देवर का औजार तो फौलादी है लेकिन दिल एकदम मक्खन, ... "

ये मुझसे ज्यादा और कौन जानता था, मेरे चेहरे पर दर्द का एक कतरा ये बर्दाश्त नहीं कर सकते थे, पर मैं कुछ और सोच रही थी और मैंने कम्मो से पूछ लिया,

" मान लो कोल्हू का पर देसी कड़ुआ तेल लगा के तूने उसे दबोच के उसकी कसी गाँड़ में ये मोटा सुपाड़ा घुसवा भी लिया तो असली चीज तो गाँड़ का छल्ला, ..

कम्मो जोर जोर से हंसने लगी, फिर जब हंसी रुकी तो बोली,

अरे तभी तो असली मजा आएगा, वो चीखेगी, चिल्लायेगी , लेकिन ये बांस तो निकलने वाला नहीं है और ताकत बहुत जबरदस्त है इसमें,... वो तड़पा तड़पा के रुला रुला के ठेलेगा, ... जब टसुए बहाना बंद कर देगी तो दुबारा , और कस के , ...

सच में उसकी मसल्स देख के ही मैं समझ गयी थी जबरदस्त ताकत होगी इस लड़के में , लेकिन मुझे एक डर लग रहा था और उसका जवाब भी था कम्मो के पास ,

यही सोच रही हों न की कहीं हम दोनों के इस भाई का औजार देख कर ननद रानी भड़क न जाये, तो उसका इलाज है कम्मो के पास,... कम्मो बोली और जो प्लानिंग उसने बताई तो मैं मान गयी.
 
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