Erotica मोहे रंग दे - Page 69 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

७७

इंटरवल के बाद ननदों की मस्ती

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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ७७इंटरवल के बादननदों की मस्ती14,42,820इंटरवल हो गया था , एक बजे काकुछ खाना पीना आधे घंटे तक दस पांच मिनट आराम उसके बाद और फिर मस्ती।कपड़े सब ने पहन लिए थे, हम भौजाइयों का तो झंझट ही नहीं था सबने सिर्फ साड़ी पहन रखी थी, सीने पर खूब टाइट बाँध रखी थी, उभार झलक रहे थे उनका...

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Joru ka Gullam

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २५८- एम् ३ पृष्ठ १६२३ अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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गुड्डी के पिछवाड़े के उद्घाटन के सात भाग पूरे होगये

सचित्र

पृष्ठ ११६२

१. कमल जीजू और गुड्डी का पिछवाड़ा----आ गयी गुड्डी

२. गुड्डी

३. घुस गया कमल जीजू का

४. कच्ची कच्ची कोरी टाइट पिछवाड़े पर हमला

५. घुस गया, धंस गया, अटक गया, अंड़स गया

६. ये और इनकी साली रीनू

७. हे बोल न मजा आया न,

६,००० शब्दों से बड़ा अपडेट
 
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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ७८चंदा का पिछवाड़ा और कमल का खूंटा१४,७८, ९२०रेनुआ थोड़ी शरमाई, थोड़ा मुस्करायी, और उस झुण्ड से हट के मेरे पास आ गयी,... और कमल से चिपक के बैठ गयी जिससे जो गाँव वालियां उसके भाई को ताना मारती थी, की पहले घर के माल को पटाओ सब को पता चल जाए, माल पट भी गया, सट भी गया और फट भी गया...

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भाग ७८

चंदा का पिछवाड़ा और कमल का खूंटा


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फागुन के दिन चार

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फागुन अभी लगा नहीं , लेकिन दस्तक दे रहा है , और मुझे लगा यही सही समय है फागुन के दिन चार को पोस्ट करने का।

लिंक भी दे रही हूँ और थोड़ा इस कहानी के बारे में

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" फागुन के दिन चार " मेरी लम्बी कहानी बल्कि यूँ कहें की उपन्यास है। इसका काल क्रम २१ वी शताब्दी के शुरू के दशक हैं, दूसरे दशक की शुरुआत लेकिन फ्लैश बैक में यह कहानी २१ वीं सदी के पहले के दशक में भी जाती है.

कहानी की लोकेशन, बनारस और पूर्वी उत्तरप्रदेश से जुडी है, बड़ोदा ( वड़ोदरा ) और बॉम्बे ( मुंबई ) तक फैली है और कुछ हिस्सों में देश के बाहर भी आस पास चली आती है। मेरा मानना है की कहानी और उसके पात्र किसी शून्य में नहीं होने चाहिए, वह जहां रहते हैं, जिस काल क्रम में रहते हैं, उनकी जो अपनी आयु होती है वो उनके नजरिये को , बोलने को प्रभावित करती है और वो बात एक भले ही हम सेक्सुअल फैंटेसी ही लिख रहे हों उसका ध्यान रखने की कम से कम कोशिश करनी चाहिए।

लेकिन इसके साथ ही कहानी को कुछ सार्वभौम सत्य, समस्याओं से भी दो चार होना पड़ता है और होना चाहिए।

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कहानी फागुन में शुरू होती है और फागुन हो, बनारस हो फगुनाहट भी होगी, होली बिफोर होली भी होगी।

लेकिन होली के साथ एक रक्तरंजित होली की आशंका भी क्षितिज पर है और यह कहानी उन दोनों के बीच चलती है इसलिए इसमें इरोटिका भी है और थ्रिलर भी जीवन की जीवंतता भी और जीवन के साथ जुडी मृत्यु की आशंका भी। इरोटिका का मतलब मेरे लिए सिर्फ देह का संबंध ही नहीं है , वह तो परिणति है। नैनों की भाषा, छेड़छाड़, मनुहार, सजनी का साजन पर अधिकार, सब कुछ उसी ' इरोटिका ' या श्रृंगार रस का अंग है। इसलिए मैं यह कहानी इरोटिका श्रेणी में मैं रख रही हूँ .

और इस कहानी में लोकगीत भी हैं, फ़िल्मी गाने भी हैं, कवितायें भी है

पर जीवन के उस राग रंग रस को बचाये रखने के लिए लड़ाई भी लड़नी होती है जो अक्सर हमें पता नहीं होती और उस लड़ाई का थ्रिलर के रूप में अंश भी है इस कहानी में।

तो यह थ्रेड इन्तजार कर रहा है आपके साथ का, प्यार का दुलार का आशीष का दुआओं का

कुछ नजारा मिल जाए इसलिए इस थ्रेड के शुरू करने के साथ मैंने आने वालो भागों की कुछ झलकियां भी शेयर की है

और इस भाग में तीन प्रंसग है, बनारस की शाम, सुबहे बनारस और बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम,

तो पधारे इस थ्रेड पर आशीष दें, और इन झलकियों पर भी अपना मंतव्य रखे

प्रतीक्षारत

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Erotica - फागुन के दिन चार

फागुन के दिन चार भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१ अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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A Mega Update has been posted in Joru ka Gullam

more than 9000 Words

जोरू का गुलाम भाग २१७

गुड्डी का पिछवाड़ा

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २१७गुड्डी का पिछवाड़ा२३,७४,६१४गुड्डी की किस तरह , क्या कोई धुनिया रुई धुनता होगा , जिस तरह गुड्डी रानी की गांड धुनी जा रही थी , साथ में जीजू की उंगलिया तेजी से गुड्डी की सहेली के अंदर बाहर , गुड्डी काँप रही थी और थोड़ी देर में वो झड़ने लगी , लेकिन कमल जीजू की रफ़्तार...

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Erotica - फागुन के दिन चार

फागुन के दिन चार भाग -५३ गुड्डी और रंजी --मस्ती ही मस्ती पृष्ठ ५०१ अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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फागुन के दिन चार -महागाथा

पहला भाग पोस्ट हो गया।

फागुन के दिन चार भाग 1

फागुन की फगुनाहट

update posted, please do read, enjoy, like and post your comments.
 
फागुन के दिन चार भाग २

रस बनारस का - चंदा भाभी


एक दस हजार से अधिक शब्दों वाला मेगा अपडेट

बहुत से नए प्रसंग

कृपया पढ़ें, आनंद ले , लाइक करे और कमेंट करे

रस बनारस का - चंदा भाभी

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२. गुझिया

३, आनंद की बहिनी बिके कोई ले लो.

४. मिर्ची---“चल मेरे घोड़े चने के खेत में

५. थोड़ा सा फ्लैश बैक---गुड्डी और भाभी ( गुड्डी की मम्मी )

६. यादों की झुरमुट से--- गुड्डी

७. रसगुल्ला

८. भाभी, गुड्डी और भांग की गुझिया

९ शलवार सूट

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Erotica - फागुन के दिन चार

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६ बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ बुच्ची 2... लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से इमरतिया ने दोनों को अलग किया, थोड़ी देर में बुच्ची हंसती खिलखिलाती फर्श पर लेटी थी, अपने उभारों को उचकाती...

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २१८ब्रेक -गुड्डी का पिछवाड़ा और उनके भैया 24,32,870गुड्डी एकदम थेथर, अभी तीन बार तो उसकी गाँड़ कूटी गयी थी, तीन मर्दो की मलाई भरी थी गुड्डी की गांड में। मेरे दोनों जीजू, अजय और कमल और रीनू के जीजू मेरे ये, मेरा सोना मोना।मेरी कमीनी बहिनिया की आँखे फटी पड़ रह...

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जोरू का गुलाम भाग २१८

अपडेट पोस्टेड

ब्रेक -

गुड्डी का पिछवाड़ा और उनके भैया

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गुड्डी एकदम थेथर, अभी तीन बार तो उसकी गाँड़ कूटी गयी थी, तीन मर्दो की मलाई भरी थी गुड्डी की गांड में। मेरे दोनों जीजू, अजय और कमल और रीनू के जीजू मेरे ये, मेरा सोना मोना।

मेरी कमीनी बहिनिया की आँखे फटी पड़ रह थी जिस तरह से ये अपनी बहन की मार रहे थे अब तक हम सब कमल जीजू जो ही पिछवाड़े का पी एच डी मानते थे लेकिन रीनू ने इन्हे देख कर पूछा, पी एच डी के आगे कौन सी डिग्री होती है।

सच में जबरदस्त मारी थी गाँड़ इन्होने अपनी बहना की और अब ये अपनी साली के साथ,... अजय जीजू वाली पेसल सिगी, रीनू ने गुड्डी के मुंह में भी एक खोंस दी थी। गुड्डी और रीनू में खूब दोस्ती भी हो गयी थी, गुड्डी रीनू को मीठी भाभी कहने लगी थी।

दोनों जीजू फ्रेश होने गए थे और मैं सोच रही थी,... थोड़ी देर पहले के बारे में

गुड्डी को दर्द के साथ मजे भी दे रहे थे ये,...ऐसी बात नहीं थी की मेरी ननद को दर्द नहीं हो रहा था , बीच बीच में उसे चिलख उठती थी तो वो जोर से चीख उठती थी , चेहरे से दर्द छलक उठता था , तूफान में पत्ते की तरह उसकी देह लरज़ उठती थी , ... लेकिन वो साथ भी दे रही थी , जब वो झुक के उसके होंठों को चूमते , ... तो इनकी ममेरी बहन के थके होंठ एक बार फिर खुल उठते , वो भी चुम्मी का जवाब चुम्मी से देती , खुद उनके होठ चूस लेती , अपनी जीभ इनके मुंह में डाल देती ,

कृपया पढ़िए, आनंद लीजिये, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
अपडेट पोस्टेड

फागुन के दिन चार -भाग ३ फगुनाई शाम बनारस की

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फगुनाई शाम बनारस की

तेरी मम्मी - ----मम्मी

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तबतक डिप्टी एस एस आ गए, ... गाडी चलने वाली है और मैं और गुड्डी उतर पड़े। हाँ गुड्डी के कान में गुड्डी की मम्मी ने कुछ समझाया भी।

लौटते समय मैंने उसके उभारों की ओर देखा। हम स्टेशन से बाहर निकल आये थे। और मुझे देखकर मुश्कुराकर उसने दुपट्टा और ऊपर एकदम गले से चिपका लिया और मेरी ओर सरक आई ओर बोली खुश।

“एकदम…” और मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी ओर खींच लिया।

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“हटो ना। देखो ना लोग देख रहे हैं…” वो झिझक के बोली।

“अरे लोग जलते हैं। तो जलने दो ना। जलते हैं और ललचाते भी हैं…” मैंने अपनी पकड़ और कसकर कर ली।

“किससे जलते हैं…” बिना हटे मुश्कुराकर वो बोली।

“मुझ से जलते हैं की कितनी सेक्सी, खूबसूरत, हसीन…”

मेरी बात काटकर मुश्कुराकर वो बोली- “इत्ता मस्का लगाने की कोई जरूरत नहीं…”

“और ललचाते तुम्हारे…” मैंने उसके दुपट्टे से बाहर निकले किशोर उभारों की ओर इशारा किया

8 Parts

1. फगुनाई शाम बनारस की

2, दवा -आई पिल -माला डी

3. खयी के पान बनारस वाला

4. गुलाब जामुन

5. मम्मी का फोन

6. मम्मी

7. रगड़ाई


8. गुड्डी और मम्मी
 
भाग ८१ बारी भौजाइयों की पृष्ठ ८१८

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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ८१ - बारी भौजाइयों की१५,७४, ०८० और अब नंदों ने दौड़ा दौड़ा के एक भौजी को पकड़ना शुरू किया।रज्जो भाभी मौका पाके सटक ली थीं , नंदों ने दो चार छुटकियो को दौड़ाया, कम्मो, बेला, लीना,दीपा सब और रज्जो भौजी पकड़ी गयीं , पास में ही एक पेड़ों के झुण्ड में, ..." काहो भौजी कउनो मायके का यार आया...

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