Erotica मोहे रंग दे - Page 71 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

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आपको आपके प्रियजनों को, परिजनो को, मित्रों और पाठको को

ज्योति पर्व की असीम शुभकामनाएं
 
बात आपकी सही है शायद

चाहती तो मैं भी हूँ की इस कहानी के पाठकों की संख्या कम से कम २० लाख पार करे

और अब आप ने कहा है तो मैं कम से कम बाकी कहानियों पे अपने पाठकों से अनुरोध करती हूँ की जिन्होंने ' मोहे रंग दे "न पढ़ी हो वो जरूर पड़ें और जिन्होंने पढ़ भी ली हो, वो भी एक बार फिर समय निकाल कर उसे फिर से देखें अपने कमेंट्स से बाकी रीडर्स को उत्साहित करें

दूसरे महीने में कम से कम एक बार अपनी कहानियों पे इसके कुछ अंश शेयर करूँ और लिंक दूँ

और इस कहानी का इंडेक्स बना दूँ

और कुछ आइडियस हो तो बताएं लेकिन बात आपकी मेरे मन को भी सालती है, यह कहानी एकदम अलग है और उसे और पाठकों तक पहुँचाना चाहिए
 
शायद आप इसे किसी और कहानी से जोड़ के देख रहे हैं जो बहुत सम्भव है, क्योंकि इस से मिलते जुलते नाम वाली मेरी कई कहानिया हैं

दूसरे इस कहानी के नाम से ही होली से जुडी किसी कहानी के होने का अंदाज लगता है और पहले मैं हर साल होली पर एक नई कहानी लिखती थी तो उससे भी भ्रम होता है।

इस फोरम में यह पहली ओरिजिनल कहानी थी जो मैंने २०१९ में शुरू की, ६ अप्रेल २०१९ को और कहानी की पहली पोस्ट में ही मैंने ' रंग ' का संदर्भ भी बता दिया,

रंग की यह कहानी साजन के रंग में सजनी के रंगने की है ,

सजनी के रंग में साजन के रंगने की है ,

नेह के रंग की , देह के रंग की ,... एक ऐसी कहानी जो सिर्फ इस देस में हो सकती है ,

वो रंग जो चढ़ता है सिर्फ, उतरता नहीं


और फिर मैंने इसे खुसरो से भी जोड़ा

वो रंग जो कभी उतरता नहीं



जो खुसरो ने कहा ,

आज रंग है री मां रंग है री , मेरे महबूब के घर आज रंग है री

मोरे ख्वाजा के घर रंग है री ,

अबकी बहार चुनर मोरी रंग दे ,... रखिये लाज हमारी

आज रंग है री मां रंग है री , मेरे महबूब के घर आज रंग है री


इसलिए मेरी गुजारिश है की आप इस कहानी को पढ़ के देखिये और कैसी लगी ये जरूर बताइयेगा '

अग्गर पहले पढ़ भी रखी हो तो इस नजरिये से पढ़ के देखिये और अपने कमेंट से इस को नवाजिये

एडवांस में थैंक्स
 
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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में भाग ११२ -अगला दिन, बुच्ची और इमरतिया पृष्ठ ११४५ मेगा अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११२ -अगला दिन, बुच्ची और इमरतिया पृष्ठ ११४५

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११३ हल्दी-चुमावन की रस्म पृष्ठ ११७०

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७ मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में, मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें

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जोरू का गुलाम।

भाग २५९ तीज पार्टी का दिन -निधि पृष्ठ १६२९

१२,००० शब्दों से ज्यादा बड़ा सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६ पृष्ठ १२०३ बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११४ हल्दी- बुच्ची और गप्पू पृष्ठ 1178

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, आंनद लें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें
 
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होली की असीम शुभकामनायें
 
मैं एक ऐसे ए आई की तलाश में हूँ जिसे एरोटिक या थोड़े बहुत सेमी न्यूड चित्रों के बनाने से परहेज न हो, क्या ऐसा कुछ उपलब्ध है ? मैं टेक्नोलॉजी के आँगन में एकदम नई और मूढ़ हूँ। कोई भी विज्ञ पाठक मित्र सहायता कर सकते हैं, यही इस फोरम में ही बता सकते हैं , मेरे ख्याल मॉडरेटर्स को आपत्ति नहीं होगी क्योंकि वह कहानी को समृद्ध ही करेगा।

यह फ्री या पेड कुछ भी हो सकता है।

Thanks in advance.
 
छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६



बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ


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बुच्ची

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2... लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से



लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से



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इमरतिया ने दोनों को अलग किया,

थोड़ी देर में बुच्ची हंसती खिलखिलाती फर्श पर लेटी थी, अपने उभारों को उचकाती और इमरतिया धीरे धीरे खीर उसके जोबन पर गिरा रही थी, और फिर अपने देवर से बोली

" लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से "

दूध से गोरे गोरे जोबन, बड़े बड़े,

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भरे भरे, रस से छलकते, अपने भैया को ललचाते, बुलाते, और उन दूधिया जोबन पर वो गाढ़ी गाढ़ी खीर, जो इमरतिया धीरे धीरे सूरजु को दिखा के गिरा रही थी, और इस तरह से निपल तब भी खीर से डूबे भी रहें और दिखते भी रहें।

पूरे बड़े कटोरे भर खीर थी, और उसकी दर्जा नौ वाली कोरी कुँवारी ननद की कच्ची अमिया पे धीरे धीरे इमरतिया भौजी चुवा रही थी।

आज खीर उसका भाई बहन की चूँची पर से,

लेकिन बुच्ची भी कम बदमाश नहीं थी।

वह लेटे लेटे साइड में देख के अपने भैया को ललचा रही थी, उसकी मुस्कराहट में दावत थी और बदमाशी भी।

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नयी आती कच्ची अमिया पर मर्द की जीभ, और मरद वो भी भाई, जिसे बचपन से आज तक राखी बांधती चली आयी, थोड़ी ही देर में बुच्ची पहले अपनी जाँघे रगड़ने लगी, फिर अपने आप उसके मुंह से सिसकियाँ निकल रही थीं,

" उफ़ भैया उफ्फ्फ्फ़, बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसे ही करो ओह्ह "

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गाढ़ी गाढ़ी खीर थोड़े देर में भैया के पेट में, और बुच्ची के निपल खड़े, चूँची पथराई, एक चूँची भाई की मुट्ठी में और दूसरे निपल को मुंह में लेकर वो चुसूर चुसूर चूस रहा था। पहली बार कच्चे टिकोरे कुतर रहा था,

कच्ची कलियाँ को ऐसे ही रगड रगड़ के पेलने से वो जिंदगी भर के लिए छिनार हो जाती हैं।

थोड़ी देर में बुच्चिया फर्श पर लेटी थी, इमरतिया ने बची हुयी सब खीर उसके बुर पर उड़ेल दी थी

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और उसका भाई सपड़ सपड़ चाट रहा था।

भाई की एक ऊँगली बहन की पिछवाड़े की कसी कसी दरार में धंस गयी,

बुच्ची ने जोर से सिसकी ली,

इमरतिया ने फैसला ले लिया, इस स्साली की गाँड़ भी आज फड़वा दी जायेगी, आगे की झिल्ली अभी फटेगी, और रात में पिछवाड़ा,

साँड़ चढ़ा बछिया (बुच्चिया) पर

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जो हफ्ते भर बाद नयी आयी दुलहिनिया के साथ जेठानियाँ करतीं. ... ये काम अभी से मंजू भाभी और रामपुर वाली के जिम्मे था,....

कुल आठ भाग , गाँव की शादी की रस्में, गाँव का माहौल और एक दस हजार शब्दों से बड़ा मेगा अपडेट

जरूर पढ़ें और अपने कमेंट भी दें



कोमल
 
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