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- Dec 5, 2013
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सावित्री - सुनो न मेरे बदन का हर अंग आपको पुकार रहा है. जब भी किसी जोड़े को देखती हु तो मुझे आपकी यद् आ जाती है. और अब तो अपना देव भी शादी के लिए राजी हो गया है बस आप उठ जाइये तो उसकी शादी अपने हाथो से करवा दीजिये फिर तो बस हम दोनों और हमारा बैडरूम होगा जब तक आप नहीं कहोगे मए कमरे से बहार hi नहीं जोगी बस नंगी आपसे यु hi लिपटी रहूगी और आपका लुंड अपनी बुर में डेल रखूगी बस आप उठ जाइये.
तभी उसे देव का ध्यान आता है उसका बदन तो दन के बदन से भी कही ज्यादा मजबूत और आकर्षक हो गया है और ये सब सोचते hi वो दन से अलग हो जाती है ये सोच कर के देव और पद्मा क्या कर रहे होंगे.
वो तुरंत सीढ़ी होती है और अपने ब्लाउज के बटन लगा कर अपने आपको सही करती है और कमरे का दरवाजा खोल देती है. उसने एक पल के लिए भी दन की तरफ नहीं देखा अगर देख लेती तो चीख पड़ती क्यों की दन का लुंड एक डैम तना हुआ था पजामा में.
तभी वह एक नर्स आती है.
सावित्री - सुनिए क्या देवा अपने केबिन में hi है?
नर्स – जी मैडम सर अभी अभी अपने केबिन में hi गए.
सावित्री - अभी अभी मतलब?
नर्स – सर बहार hi थे डॉ. साब के साथ उनसे बाटे कर रहे थे बस अभी hi गए है अपने केबिन में.
सावित्री - ok थैंक यू मए जरा आती हु
सावित्री रूम का दूर बंद कर की आगे बढ़ जाती है दन की हालत की तरफ न सावित्री किन अजर गयी न hi उस नर्स की. सावित्री वह से निकलती है और देव के केबिन में जाती है वैसे तो कोई भी दूर नॉक किये बिना वह नहीं जा सकता था लेकिन वो देव की माँ है तो जाहिर है उसे कोई रोक तो सकता नहीं है कही भी जाने से.
सावित्री देव के केबिन में जाती है तो केबिन में कोई नहीं था. वो केबिन का दरवाजा बंद कर के आगे बढ़ती है तो सामने एक और दरवाजा था जो की थोड़ा खुला हुआ था. सावित्री धीरे धीरे आगे बढ़ती है तो सामने hi उसे देव और पद्मा नजर आ जाते है दोनों एक सोफे पे बैठे थे.
देवा – है तो अब बोलो काकी यहाँ हम दोनों की लावा कोई नहीं है. जो भी कहना हो कह सकती हो क्यों की ये आपके लिए आखरी मौका है बाद में मत कहना के मैने कुछ कहने hi नहीं दिया और………
पद्मा मुस्कराते हुए - और??????
देवा – यही के मैने आपको बोलने का कोई मौका hi नहीं दिया और आप को अपना बना लिया.
पद्मा - नहीं देवा ये सही नहीं है. मए यही सब तो कहना चाहती हु. के जो तू चाहता है वो सही नहीं है. न समाज के नजरिये से न hi रिश्तो के नजरिये से.
देवा – समाज ने आपकी कदर कब की है जो आप समाज की बात कर रही हो. काका के जाने के बाद इतने सालो आप तड़पती रही. क्या समाज ने आप के लिए कुछ करने की सोची?
पद्मा - क्या करता समाज मेरे लिए? क्या दूसरी शादी करवाते?
देवा – क्यों नहीं? क्या आप में कोई कमी थी? क्या इस गाँव में या आसपास के गाँव में कोई ऐसा मर्द नहीं था जिसकी बीवी ने उसे छोड़ दिया हो या मर गयी हो. जो आपके बच्चो को संभल सके आपकी इस जवानी को संभल सके. लेकिन समाज ने कभी ऐसा नहीं सोचा यहाँ तक की आप अकेली hi अपने बच्चो की परवरिश करती रही किसी ने आपका हाथ नहीं बताया. क्या समाज का ये कर्त्तव्य नहीं था के एक बेसहारा दो बच्चो की माँ के लिए एक ऐसा मर्द ढूंढते जो आपके और आपके बच्चो के सर पे हाथ रख सकता? ये तो भोलेनाथ की कृपा रही वार्ना आप जो खुद की हिफाजत नहीं कर पति हो? वो अपनी जवान होती बेटी को बहतकनए से भला रोक पति अगर कुछ ऊंच नीच पूनम के साथ हो जाती तो क्या कर लेता ये समाज? तो ऐसे समाज के लिए क्या और क्यों सोचना है आपको अब. जबकि उसी समाज ने आपके और आपके परिवार के लिए कभी नहीं सोचा ? क्या समाज सिर्फ ऊँगली उठाने के लिए है मदद का हाथ बढ़ाने के लिए नहीं?
बहार कड़ी सावित्री भी ये सब सुन कर सोच में पद गयी की देवा कह तो सही रहा है. वो बस डैम साढ़े देवा की बाटे सुन रही थी.
देवा - रही बात हमारे रिश्ते की तो आपकी जरूरतों का ध्यान पूनम को भी है और आपकी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अगर उसका बस चले तो वो अपनी शादी से पहले आपकी शादी करवा देती. और मुझे उस पर पूरा भरोसा है मैने घुमा फिर के पूनम से इस बारे में बात की है. उसे कोई एतराज नहीं है अगर आपकी जरूरते पुअर होती है तो. आखिर हम सब का hi तो फ़र्ज़ है आपकी जरूरतों को पूरा करने का. और एक बात आप अपनी उम्र की बात को छोड़िये अगर आपको मए पसंद नहीं अगर आपको कोई दूसरा मर्द पसंद हो तो खुल कर कहो हम लोग आपकी शादी करवाएंगे. वो भी आज hi बोलो कोई है?
पद्मा - क्या बकता है देव “ पद्मा की आंखे आंसू और गुस्से से लाल हो गयी.
देव - अगर आप गोपाल के साथ भी ये सब कर लेती न तो भी पूनम को कोई एतराज नहीं होता. फिर मए तो गोपाल की जगह भी नहीं. यानि आपका सागा बीटा तो नहीं हु न मए.
पद्मा - क्या बकवास है भला क्या एक माँ अपने hi बेटे के साथ सो सकती है?
देवा – काकी ये सब छोडो अगर जरुरत हो तो क्यों नहीं सो सकती? बुराई क्या है बहार किसी के साथ सोने से अच्छा तो बीटा hi है न. उससे बदनामी का दर तो नहीं रहेगा . और जरुरत भी पूरी हो जाएगी.
पद्मा - अच्छा तो जहा तक मए जानती हु तेरी सगी माँ भी रोज hi जवानी का सुख भोगती थी तुम्हारे बाबू जी के साथ, लेकिन जब से तेरे बाबूजी की तबियत ख़राब हुई है वो भी तड़प hi रही है न तो क्या तू उसकी आग भी बजायेगा.
वह थोड़ी देर के लिए शांति छ गयी. जहा पद्मा को अपने जवाब का इंतजार था वही सावित्री भी अचानक ये जानने के लिए उत्सुक हो उठी के देव क्या जवाब देता है. और देव जो की जान hi गया था की सावित्री छुप कर उनकी बाटे सुन रही है. तो उसने कहा
देवा – काकी अगर बात नार्मल होती तो माँ को शायद परेशानी नहीं होती बाबूजी के ठीक होने का इंतजार वो कर लेती लेकिन मए भी जनता हु के बाबू जी और माँ के बीच ये सब रोज hi होता था किसी नवजवान जोड़े की तरह . और मए ये भी जनता हु के ऐसे में एक औरत होने के नाते माँ ज्यादा दिन ये दूरी बर्दाश्त नहीं कर सकती. और डीआरएस. ने भी कहा है के रोज सेक्स करने वाला यदि अचानक से सेक्स करना बंद कर दे तो उसकी सेहत पे असर होने लगता है वो चिड़चिड़ा हो जाता है. उसका बप हाई रहने लगता है और उसे हार्ट अटैक तक आ सकता है. और भी कई परेशानिया हो सकती है कई तरह की बीमारिया हो सकती है यहाँ तक की कैंसर भी. और मए माँ को खोना नहीं चाहता. ऐसे में अगर मुझे जरुरी लगा तो मए माँ के साथ भी ये सब करुगा और जरूर करुगा. और दूसरी बात मेरे लिए आप और माँ एक जैसी हो. तो है मए आप दोनों के साथ सेक्स करना चाहता हु. आपसे इसीलिए बोल दिया क्यों की ये सब हमारे बीच पहले से चल रहा था तो आज बोलै है लेकिन माँ को मए अभी अभी hi इस नजर से देख रहा हु तो उन्हें मए नहीं बोल पाउगा पर उन्होंने कोई कोशिश की तो मए उन्हें निराश नहीं करुगा.
देवा की पूरी बात सुन कर जहा पद्मा मुस्कराने लगी वही. सावित्री को कभी गुस्सा आया तो कभी बहोत ज्यादा शर्म ये जान कर की उसका बीटा जनता है के वो आज भी रोज चुदाई करती है . कभी आश्चर्य हुआ ये जान कर के उसका बीटा भी उसकी तरफ आकर्षित है. और सावित्री ने मन hi मन फैसला कर लिया के उसे देवा से क्या बात करनी है.
सावित्री - सुनो न मेरे बदन का हर अंग आपको पुकार रहा है. जब भी किसी जोड़े को देखती हु तो मुझे आपकी यद् आ जाती है. और अब तो अपना देव भी शादी के लिए राजी हो गया है बस आप उठ जाइये तो उसकी शादी अपने हाथो से करवा दीजिये फिर तो बस हम दोनों और हमारा बैडरूम होगा जब तक आप नहीं कहोगे मए कमरे से बहार hi नहीं जोगी बस नंगी आपसे यु hi लिपटी रहूगी और आपका लुंड अपनी बुर में डेल रखूगी बस आप उठ जाइये.
तभी उसे देव का ध्यान आता है उसका बदन तो दन के बदन से भी कही ज्यादा मजबूत और आकर्षक हो गया है और ये सब सोचते hi वो दन से अलग हो जाती है ये सोच कर के देव और पद्मा क्या कर रहे होंगे.
वो तुरंत सीढ़ी होती है और अपने ब्लाउज के बटन लगा कर अपने आपको सही करती है और कमरे का दरवाजा खोल देती है. उसने एक पल के लिए भी दन की तरफ नहीं देखा अगर देख लेती तो चीख पड़ती क्यों की दन का लुंड एक डैम तना हुआ था पजामा में.
तभी वह एक नर्स आती है.
सावित्री - सुनिए क्या देवा अपने केबिन में hi है?
नर्स – जी मैडम सर अभी अभी अपने केबिन में hi गए.
सावित्री - अभी अभी मतलब?
नर्स – सर बहार hi थे डॉ. साब के साथ उनसे बाटे कर रहे थे बस अभी hi गए है अपने केबिन में.
सावित्री - ok थैंक यू मए जरा आती हु
सावित्री रूम का दूर बंद कर की आगे बढ़ जाती है दन की हालत की तरफ न सावित्री किन अजर गयी न hi उस नर्स की. सावित्री वह से निकलती है और देव के केबिन में जाती है वैसे तो कोई भी दूर नॉक किये बिना वह नहीं जा सकता था लेकिन वो देव की माँ है तो जाहिर है उसे कोई रोक तो सकता नहीं है कही भी जाने से.
सावित्री देव के केबिन में जाती है तो केबिन में कोई नहीं था. वो केबिन का दरवाजा बंद कर के आगे बढ़ती है तो सामने एक और दरवाजा था जो की थोड़ा खुला हुआ था. सावित्री धीरे धीरे आगे बढ़ती है तो सामने hi उसे देव और पद्मा नजर आ जाते है दोनों एक सोफे पे बैठे थे.
देवा – है तो अब बोलो काकी यहाँ हम दोनों की लावा कोई नहीं है. जो भी कहना हो कह सकती हो क्यों की ये आपके लिए आखरी मौका है बाद में मत कहना के मैने कुछ कहने hi नहीं दिया और………
पद्मा मुस्कराते हुए - और??????
देवा – यही के मैने आपको बोलने का कोई मौका hi नहीं दिया और आप को अपना बना लिया.
पद्मा - नहीं देवा ये सही नहीं है. मए यही सब तो कहना चाहती हु. के जो तू चाहता है वो सही नहीं है. न समाज के नजरिये से न hi रिश्तो के नजरिये से.
देवा – समाज ने आपकी कदर कब की है जो आप समाज की बात कर रही हो. काका के जाने के बाद इतने सालो आप तड़पती रही. क्या समाज ने आप के लिए कुछ करने की सोची?
पद्मा - क्या करता समाज मेरे लिए? क्या दूसरी शादी करवाते?
देवा – क्यों नहीं? क्या आप में कोई कमी थी? क्या इस गाँव में या आसपास के गाँव में कोई ऐसा मर्द नहीं था जिसकी बीवी ने उसे छोड़ दिया हो या मर गयी हो. जो आपके बच्चो को संभल सके आपकी इस जवानी को संभल सके. लेकिन समाज ने कभी ऐसा नहीं सोचा यहाँ तक की आप अकेली hi अपने बच्चो की परवरिश करती रही किसी ने आपका हाथ नहीं बताया. क्या समाज का ये कर्त्तव्य नहीं था के एक बेसहारा दो बच्चो की माँ के लिए एक ऐसा मर्द ढूंढते जो आपके और आपके बच्चो के सर पे हाथ रख सकता? ये तो भोलेनाथ की कृपा रही वार्ना आप जो खुद की हिफाजत नहीं कर पति हो? वो अपनी जवान होती बेटी को बहतकनए से भला रोक पति अगर कुछ ऊंच नीच पूनम के साथ हो जाती तो क्या कर लेता ये समाज? तो ऐसे समाज के लिए क्या और क्यों सोचना है आपको अब. जबकि उसी समाज ने आपके और आपके परिवार के लिए कभी नहीं सोचा ? क्या समाज सिर्फ ऊँगली उठाने के लिए है मदद का हाथ बढ़ाने के लिए नहीं?
बहार कड़ी सावित्री भी ये सब सुन कर सोच में पद गयी की देवा कह तो सही रहा है. वो बस डैम साढ़े देवा की बाटे सुन रही थी.
देवा - रही बात हमारे रिश्ते की तो आपकी जरूरतों का ध्यान पूनम को भी है और आपकी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए अगर उसका बस चले तो वो अपनी शादी से पहले आपकी शादी करवा देती. और मुझे उस पर पूरा भरोसा है मैने घुमा फिर के पूनम से इस बारे में बात की है. उसे कोई एतराज नहीं है अगर आपकी जरूरते पुअर होती है तो. आखिर हम सब का hi तो फ़र्ज़ है आपकी जरूरतों को पूरा करने का. और एक बात आप अपनी उम्र की बात को छोड़िये अगर आपको मए पसंद नहीं अगर आपको कोई दूसरा मर्द पसंद हो तो खुल कर कहो हम लोग आपकी शादी करवाएंगे. वो भी आज hi बोलो कोई है?
पद्मा - क्या बकता है देव “ पद्मा की आंखे आंसू और गुस्से से लाल हो गयी.
देव - अगर आप गोपाल के साथ भी ये सब कर लेती न तो भी पूनम को कोई एतराज नहीं होता. फिर मए तो गोपाल की जगह भी नहीं. यानि आपका सागा बीटा तो नहीं हु न मए.
पद्मा - क्या बकवास है भला क्या एक माँ अपने hi बेटे के साथ सो सकती है?
देवा – काकी ये सब छोडो अगर जरुरत हो तो क्यों नहीं सो सकती? बुराई क्या है बहार किसी के साथ सोने से अच्छा तो बीटा hi है न. उससे बदनामी का दर तो नहीं रहेगा . और जरुरत भी पूरी हो जाएगी.
पद्मा - अच्छा तो जहा तक मए जानती हु तेरी सगी माँ भी रोज hi जवानी का सुख भोगती थी तुम्हारे बाबू जी के साथ, लेकिन जब से तेरे बाबूजी की तबियत ख़राब हुई है वो भी तड़प hi रही है न तो क्या तू उसकी आग भी बजायेगा.
वह थोड़ी देर के लिए शांति छ गयी. जहा पद्मा को अपने जवाब का इंतजार था वही सावित्री भी अचानक ये जानने के लिए उत्सुक हो उठी के देव क्या जवाब देता है. और देव जो की जान hi गया था की सावित्री छुप कर उनकी बाटे सुन रही है. तो उसने कहा
देवा – काकी अगर बात नार्मल होती तो माँ को शायद परेशानी नहीं होती बाबूजी के ठीक होने का इंतजार वो कर लेती लेकिन मए भी जनता हु के बाबू जी और माँ के बीच ये सब रोज hi होता था किसी नवजवान जोड़े की तरह . और मए ये भी जनता हु के ऐसे में एक औरत होने के नाते माँ ज्यादा दिन ये दूरी बर्दाश्त नहीं कर सकती. और डीआरएस. ने भी कहा है के रोज सेक्स करने वाला यदि अचानक से सेक्स करना बंद कर दे तो उसकी सेहत पे असर होने लगता है वो चिड़चिड़ा हो जाता है. उसका बप हाई रहने लगता है और उसे हार्ट अटैक तक आ सकता है. और भी कई परेशानिया हो सकती है कई तरह की बीमारिया हो सकती है यहाँ तक की कैंसर भी. और मए माँ को खोना नहीं चाहता. ऐसे में अगर मुझे जरुरी लगा तो मए माँ के साथ भी ये सब करुगा और जरूर करुगा. और दूसरी बात मेरे लिए आप और माँ एक जैसी हो. तो है मए आप दोनों के साथ सेक्स करना चाहता हु. आपसे इसीलिए बोल दिया क्यों की ये सब हमारे बीच पहले से चल रहा था तो आज बोलै है लेकिन माँ को मए अभी अभी hi इस नजर से देख रहा हु तो उन्हें मए नहीं बोल पाउगा पर उन्होंने कोई कोशिश की तो मए उन्हें निराश नहीं करुगा.
देवा की पूरी बात सुन कर जहा पद्मा मुस्कराने लगी वही. सावित्री को कभी गुस्सा आया तो कभी बहोत ज्यादा शर्म ये जान कर की उसका बीटा जनता है के वो आज भी रोज चुदाई करती है . कभी आश्चर्य हुआ ये जान कर के उसका बीटा भी उसकी तरफ आकर्षित है. और सावित्री ने मन hi मन फैसला कर लिया के उसे देवा से क्या बात करनी है.