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- Dec 5, 2013
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नागार्जुन मुस्कराते हुए– तुम गुस्से में बहोत खूबसूरत लगती हो शलाका………..
शलाका – अच्छा , तो क्या मए वैसे खूबसूरत नहीं लगती?
……. कोई अँधा hi होगा जो तुम्हे खूबसूरत न कहे. नागार्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा.
लेकिन तुम तो आँखों वाले हो फिर भी कभी तारीफ तो नहीं की मेरी शलाका ने भी उसी तरह नागार्जुन की आँखों में देखते हुए कहा.
…. तुम एक राजकुमारी हो, मए तुम्हारे सामने कुछ नहीं भला मए कैसे तुम्हरी तारीफ कर सकता हु?
….आज बोलै है फिर कभी ऐसा मत बोलना नागार्जुन, और मए तुम्हरे लिए कोई राजकुमारी नहीं हु समझे. हम तो अब तक बहोत अचे दोस्त है न? कभी मेने राजकुमारियों वाली कोई हरकत की है क्या? शलाका ने मुँह फूलते हुए कहा.
अच्छा बाबा नहीं करुगा ऐसी बात आगे से. माफ़ कर दो अब मुझे नागार्जुन ने भी कानो को हाथ लगते हुए कहा
ऐसे नहीं तुम्हे तो सजा दूगी मए, माफ़ नहीं करुँगी तुमने ऐसा बोलै कैसे.
….. ok मंजूर है बोलो मेरी सजा क्या है? नागार्जुन ने अब हथियार दाल दिए थे.
कल तुम सिर्फ वो पहनोगे फंक्शन में जो मए कहुगी शलाका ने अधिकार से कहा और मुस्कराने लगी.
ओह्ह गॉड इतनी बड़ी सजा? चलो ठीक है बताओ क्या पहनना है मुझे कल?
शलाका वही राखी अलमारी से एक सूट निकल के नागार्जुन को देती है.
ये लो कल तुम ये पहनोगे.
ये कब लिया तुमने? नागार्जुन सूट को अप्लता पलटा के देखते हुए बोलै
जब मए शॉपिंग करने गयी थी तो तुम्हारे लिए ले लिया था. क्यों की तुम्हे तो शॉपिंग करने की फुर्सत थी नहीं तुम यहाँ जो बिजी हो गए थे अब अपने दोस्तों का इतना ख्याल तो रखना hi पड़ता है न.
….. अरे वाह पर मेरे लिए क्यों लिया तुमने ये मए कुछ भी इंतजाम कर लेता यार?
…..सवाल नहीं बस मैने कहा न कल तुम इसे पहनोगे, तो पहनोगे बात ख़तम. शलाका ने आंखे तरेरते हुए होकुम सुना दिया.
ok , पर तुम क्या पहनोगी कल?
शलाका ने उसी अलमारी से अपना ड्रेस निकल के दिखाया वो भी शामे था मेहरून कलर का ईवनिंग गाउन
ववववव इतस तो बेऔतीफुल्ल बहोत अच्छी लगोगी तुम इसमें
….एक काम करते है मए इसे पहनती हु तुम भी मुझे ये सूट पहन के दिखाओ शलाका ने चहकते हुए कहा
क्या अभी? अरे रहने दो न कल पहनूंगा तो देख लेना. नागार्जुन टालने लगा
……नहीं मए चाहती हु के तुम्हे इस सूट में सबसे पहले मए hi देखु. जो कल पॉसिबल नहीं होगा. आखिर मैने खरीदा है तुम्हरे लिए इतना हक़ तो बनता है. और मए ये भी चाहती हु के मेरी इस ड्रेस में सबसे पहले तुम मुझे देखो. चलो चेंज कर लेते है और नयी ड्रेस पहन के देखते है.
तो क्या इसे तुम मेरे सामने यही पहनोगी? नागार्जुन ने शलाका को छेड़ते हुए कहा. और मुस्कराने लगा.
शलाका नागार्जुन की आँखों में देखते हुई……… क्या तुम ऐसा चाहते हो?
……………………….. नागार्जुन सिर्फ शलाका की आँखों में देखता रहता है कुछ कह नहीं पता.
…….फ़िलहाल तो मए इसे बाथरूम में पहनती हु तुम यही चेंज करो बाद में सोच के बताना फिर कभी. क्यों की नई ड्रेसेस तो आती रहेगी न.
इतना कह कर शलाका वो ड्रेस लेती है और बाथरूम में घुस जाती है और नागार्जुन उसे जाते देखता रहता है. फिर वो भी अपने कपडे उतर के शलाका का दिया हुआ सूट पहन लेता है. एक डैम ग्रूम सूट था. मेहरून क्लोलोर का पेण्ट, ब्लेजर, शामे कलर की साटन की शर्ट और टाई, सब कुछ पहन लेने के बाद वो शूज भी पहन लेता है और शलाका का वेट करता है. थोड़ी hi देर में शलाका बहार आती है वो बेहद खूबसूरत लग रही थी उस ईवनिंग गाउन में.
नागार्जुन तो आंखे फाडे शलाका को देखता रह जाता है जिसमे से उसके उन्नत उरोज भी कुछ दिख रहे थे. और उन दिलकश उरोजों की गहरी घाटी भी. एक डैम तने हुए उरोज. पीछे उसकी गांड एक डैम उभरी हुई. पतली कमर और लम्बे घने काळा बाल जो खुले हुए थे .
शलाका - ऐसे क्या देख रहे हो कैसी लग रही हु मए इस ड्रेस में?
न – अवेसमे यार….. यू अरे सो मच हॉट . बहोत खूबसूरत लग रही हो. कल खुद को बचा कर रखना कही किसी की नजर न लगे तुम्हे.
स – तुम हो न मुझे सबकी नजर से बचा के रखना .
न – जरूर, अब ये बताओ मेरा ड्रेस कैसा लग रहा है?
स – तुम तो दूल्हे लग रहे हो इस ड्रेस में. देखना कही कल hi तुमसे कोई शादी के लिए न कह दे.
न – जिसे कहना है जब वो कहेगी तब hi मए शादी करुगा. यु किसी के भी कहने से नहीं.
स – अच्छा? कौन है वो हमें भी बताओ हम तुम्हारी सिफारिश कर देंगे.
न – बताना hi होता तो इतना समय इंतजार नहीं करता.
स – तो अब मत करो इंतजार उसे कह दो वार्ना कही देर न हो जाये अब समय ज्यादा नहीं बचा .
दोनों एक दूजे की आँखों में hi अपने अपने सवालो के जवाब ढूंढने में लगे हुए थे. लेकिन दोनों में से की भी धुंध नहीं पा रहा था.
न – अब तुम जाओ चेंज कर लो और सो जाओ कल बहोत काम है.
स – हम यही सो जाते है न
न – ठीक है जैसी तुम्हरी मर्जी. यही सो जाओ बीएड पे. मए दूसरे पे सो जाता हु.
फिर दोनों hi चेंज कर लेते है और नागार्जुन एक बार सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से बारीकी से नजर मार के सो जाता हैस शलक भी दूसरे बीएड पे लेती हुई थी, नींद तो इन्हे भी नहीं आ रही थी दोनों hi अपने अपने बिस्तर पे करवाते बदलते रहे आखिर आधी रत के बाद जा कर उन्हें भी नींद आयी.
दूसरे दिन सुबह से hi सब तैयार होने में लगे हुए थे निश्चित समय पर सरे मेहमान देवा के बंगले पे आ जाते है जिसमे हवेली से भी सब शामिल थे. उस के बाद तीनो होने वाली दुल्हन आती है फिर पूजा और हवन होता है. इसी सब में दोपहर हो जाती है. तीनो दूल्हे और तीनो दुल्हन बहोत hi शानदार लग रहे थे. फिर तीनो जोड़े एक दूजे को माला पहनते है. फिर आती है अंगूठी पहनने की बरी.
दन – अरे सावित्री देवा और पायल को अँगूठिया दो , और पद्मा बहन आप भी बच्चियों को अँगूठिया दो तो ये रसम भी पूरी हो जाये.
तभी महाराज बीएस - क्षमा चाहते है दीनानाथ जी लेकिन ये सौभाग्य हमें दे. हम बच्चो के लिए अँगूठिया लाये है अगर आप लोगो की इजाजत हो तो ये वाली अँगूठिया hi बच्चे पहनाये एक दूजे को.
दन – अरे भाई साब आपने क्यों तकलीफ की?
सड़ – कमल करते है दन जी भला इसमें तकलीफ कैसी क्या हमारे बच्चे हमसे नगुठिया नहीं ले सकते? अरे भाई ये तो इनकी hi है. इनका हक़ है इन पर. आखिर ये लोग हम से अलग तो नहीं.
दन – बिलकुल सुमंत देव जी जरूर. आपने सही कहा.
और फिर महारज बीएस ने देव को वही हीरो से जड़ी सोने की अंगूठी दी जो पिछली बार उसने पूनम को पहनाई thi.saath hi रूद्र को भी वैसे hi अंगूठी दी और सड़ ने पूनम को पिछली बार वाली अंगूठी दी. साथ hi उन्होंने पायल और नीलम को भी वैसे hi हीरो से जड़ी सोने की अंगूठी दी. तीनो जोड़ो ने एक दूजे को अँगूठिया पहना दी. और तालियों की गड गडाहट के साथ उनकी सगाई सकुशल सम्पन्न हुई.
लेकिन इतनी भरी और इतनी कीमती अँगूठिया सरे गाँव में चर्चा का विषय बन गयी.
दन – महाराज आपने बच्चो को इतनी कीमती अँगूठिया क्यों दी. इसकी क्या जरुरत थी.
बीएस – बच्चो से कीमती भी भला कुछ होता है क्या दन जी? और ऐसा कह कर आप हमें पराया कर रहे है.
दन – मए अपने शब्दों के लिए माफ़ी चाहता हु आपका पूरा हक़ है लेकिन फिर भी ये अँगूठिया तो बहोत ज्यादा कीमती है. आपको यकीन अनहि होगा इस एक अंगूठी की कीमत में ये पूरा गाँव खरीदा जा सकता है.
सड़ – इस अंगूठी से हमारे बच्चो को खुशिया मिल जाये तो हम समझेंगे हमने पूरी दुनिया hi खरीद ली दन जी अब छोड़िये भी इन अंगूठियों की बाते. आइये कुछ खा लेते है बड़ी भूख लग रही है.
फिर ये तीनो यु hi घूमते हुए कुछ खाने लगते है. उधर दोनों महाराणीअ भी लेडीज के साथ बैठी थी और वह भी चर्चा का विषय वही अँगूठिया थी. इसे सरे गाँव की औरते पूनम और नीलम की अँगूठिया देख देख कर ललचा रही थी. क्यों की अँगूठिया बेहद शानदार थी hi. हलाकि पायल को रामु ने एक सोने की अंगूठी hi पहनाई थी. जो की जाहिर है उन अंगूठियों के सामने कुछ नहीं थी. लेकिन पायल को महारानी कौशेय और नीलमणि ने सोने का सेट और दूसरे हीरे जड़ित गहने दिए थे जो की उसे भी खास बना रहे थे. कुल मिला कर तीनो लड़किया इस समय पूरे गाँव वालो की नजरो में अप्सराये लग रही थी. और वो सभी इनके गहनों की और इनकी तारीफे करते नहीं थक रही थी.
उधर……………..
नागार्जुन मुस्कराते हुए– तुम गुस्से में बहोत खूबसूरत लगती हो शलाका………..
शलाका – अच्छा , तो क्या मए वैसे खूबसूरत नहीं लगती?
……. कोई अँधा hi होगा जो तुम्हे खूबसूरत न कहे. नागार्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा.
लेकिन तुम तो आँखों वाले हो फिर भी कभी तारीफ तो नहीं की मेरी शलाका ने भी उसी तरह नागार्जुन की आँखों में देखते हुए कहा.
…. तुम एक राजकुमारी हो, मए तुम्हारे सामने कुछ नहीं भला मए कैसे तुम्हरी तारीफ कर सकता हु?
….आज बोलै है फिर कभी ऐसा मत बोलना नागार्जुन, और मए तुम्हरे लिए कोई राजकुमारी नहीं हु समझे. हम तो अब तक बहोत अचे दोस्त है न? कभी मेने राजकुमारियों वाली कोई हरकत की है क्या? शलाका ने मुँह फूलते हुए कहा.
अच्छा बाबा नहीं करुगा ऐसी बात आगे से. माफ़ कर दो अब मुझे नागार्जुन ने भी कानो को हाथ लगते हुए कहा
ऐसे नहीं तुम्हे तो सजा दूगी मए, माफ़ नहीं करुँगी तुमने ऐसा बोलै कैसे.
….. ok मंजूर है बोलो मेरी सजा क्या है? नागार्जुन ने अब हथियार दाल दिए थे.
कल तुम सिर्फ वो पहनोगे फंक्शन में जो मए कहुगी शलाका ने अधिकार से कहा और मुस्कराने लगी.
ओह्ह गॉड इतनी बड़ी सजा? चलो ठीक है बताओ क्या पहनना है मुझे कल?
शलाका वही राखी अलमारी से एक सूट निकल के नागार्जुन को देती है.
ये लो कल तुम ये पहनोगे.
ये कब लिया तुमने? नागार्जुन सूट को अप्लता पलटा के देखते हुए बोलै
जब मए शॉपिंग करने गयी थी तो तुम्हारे लिए ले लिया था. क्यों की तुम्हे तो शॉपिंग करने की फुर्सत थी नहीं तुम यहाँ जो बिजी हो गए थे अब अपने दोस्तों का इतना ख्याल तो रखना hi पड़ता है न.
….. अरे वाह पर मेरे लिए क्यों लिया तुमने ये मए कुछ भी इंतजाम कर लेता यार?
…..सवाल नहीं बस मैने कहा न कल तुम इसे पहनोगे, तो पहनोगे बात ख़तम. शलाका ने आंखे तरेरते हुए होकुम सुना दिया.
ok , पर तुम क्या पहनोगी कल?
शलाका ने उसी अलमारी से अपना ड्रेस निकल के दिखाया वो भी शामे था मेहरून कलर का ईवनिंग गाउन
ववववव इतस तो बेऔतीफुल्ल बहोत अच्छी लगोगी तुम इसमें
….एक काम करते है मए इसे पहनती हु तुम भी मुझे ये सूट पहन के दिखाओ शलाका ने चहकते हुए कहा
क्या अभी? अरे रहने दो न कल पहनूंगा तो देख लेना. नागार्जुन टालने लगा
……नहीं मए चाहती हु के तुम्हे इस सूट में सबसे पहले मए hi देखु. जो कल पॉसिबल नहीं होगा. आखिर मैने खरीदा है तुम्हरे लिए इतना हक़ तो बनता है. और मए ये भी चाहती हु के मेरी इस ड्रेस में सबसे पहले तुम मुझे देखो. चलो चेंज कर लेते है और नयी ड्रेस पहन के देखते है.
तो क्या इसे तुम मेरे सामने यही पहनोगी? नागार्जुन ने शलाका को छेड़ते हुए कहा. और मुस्कराने लगा.
शलाका नागार्जुन की आँखों में देखते हुई……… क्या तुम ऐसा चाहते हो?
……………………….. नागार्जुन सिर्फ शलाका की आँखों में देखता रहता है कुछ कह नहीं पता.
…….फ़िलहाल तो मए इसे बाथरूम में पहनती हु तुम यही चेंज करो बाद में सोच के बताना फिर कभी. क्यों की नई ड्रेसेस तो आती रहेगी न.
इतना कह कर शलाका वो ड्रेस लेती है और बाथरूम में घुस जाती है और नागार्जुन उसे जाते देखता रहता है. फिर वो भी अपने कपडे उतर के शलाका का दिया हुआ सूट पहन लेता है. एक डैम ग्रूम सूट था. मेहरून क्लोलोर का पेण्ट, ब्लेजर, शामे कलर की साटन की शर्ट और टाई, सब कुछ पहन लेने के बाद वो शूज भी पहन लेता है और शलाका का वेट करता है. थोड़ी hi देर में शलाका बहार आती है वो बेहद खूबसूरत लग रही थी उस ईवनिंग गाउन में.
नागार्जुन तो आंखे फाडे शलाका को देखता रह जाता है जिसमे से उसके उन्नत उरोज भी कुछ दिख रहे थे. और उन दिलकश उरोजों की गहरी घाटी भी. एक डैम तने हुए उरोज. पीछे उसकी गांड एक डैम उभरी हुई. पतली कमर और लम्बे घने काळा बाल जो खुले हुए थे .
शलाका - ऐसे क्या देख रहे हो कैसी लग रही हु मए इस ड्रेस में?
न – अवेसमे यार….. यू अरे सो मच हॉट . बहोत खूबसूरत लग रही हो. कल खुद को बचा कर रखना कही किसी की नजर न लगे तुम्हे.
स – तुम हो न मुझे सबकी नजर से बचा के रखना .
न – जरूर, अब ये बताओ मेरा ड्रेस कैसा लग रहा है?
स – तुम तो दूल्हे लग रहे हो इस ड्रेस में. देखना कही कल hi तुमसे कोई शादी के लिए न कह दे.
न – जिसे कहना है जब वो कहेगी तब hi मए शादी करुगा. यु किसी के भी कहने से नहीं.
स – अच्छा? कौन है वो हमें भी बताओ हम तुम्हारी सिफारिश कर देंगे.
न – बताना hi होता तो इतना समय इंतजार नहीं करता.
स – तो अब मत करो इंतजार उसे कह दो वार्ना कही देर न हो जाये अब समय ज्यादा नहीं बचा .
दोनों एक दूजे की आँखों में hi अपने अपने सवालो के जवाब ढूंढने में लगे हुए थे. लेकिन दोनों में से की भी धुंध नहीं पा रहा था.
न – अब तुम जाओ चेंज कर लो और सो जाओ कल बहोत काम है.
स – हम यही सो जाते है न
न – ठीक है जैसी तुम्हरी मर्जी. यही सो जाओ बीएड पे. मए दूसरे पे सो जाता हु.
फिर दोनों hi चेंज कर लेते है और नागार्जुन एक बार सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से बारीकी से नजर मार के सो जाता हैस शलक भी दूसरे बीएड पे लेती हुई थी, नींद तो इन्हे भी नहीं आ रही थी दोनों hi अपने अपने बिस्तर पे करवाते बदलते रहे आखिर आधी रत के बाद जा कर उन्हें भी नींद आयी.
दूसरे दिन सुबह से hi सब तैयार होने में लगे हुए थे निश्चित समय पर सरे मेहमान देवा के बंगले पे आ जाते है जिसमे हवेली से भी सब शामिल थे. उस के बाद तीनो होने वाली दुल्हन आती है फिर पूजा और हवन होता है. इसी सब में दोपहर हो जाती है. तीनो दूल्हे और तीनो दुल्हन बहोत hi शानदार लग रहे थे. फिर तीनो जोड़े एक दूजे को माला पहनते है. फिर आती है अंगूठी पहनने की बरी.
दन – अरे सावित्री देवा और पायल को अँगूठिया दो , और पद्मा बहन आप भी बच्चियों को अँगूठिया दो तो ये रसम भी पूरी हो जाये.
तभी महाराज बीएस - क्षमा चाहते है दीनानाथ जी लेकिन ये सौभाग्य हमें दे. हम बच्चो के लिए अँगूठिया लाये है अगर आप लोगो की इजाजत हो तो ये वाली अँगूठिया hi बच्चे पहनाये एक दूजे को.
दन – अरे भाई साब आपने क्यों तकलीफ की?
सड़ – कमल करते है दन जी भला इसमें तकलीफ कैसी क्या हमारे बच्चे हमसे नगुठिया नहीं ले सकते? अरे भाई ये तो इनकी hi है. इनका हक़ है इन पर. आखिर ये लोग हम से अलग तो नहीं.
दन – बिलकुल सुमंत देव जी जरूर. आपने सही कहा.
और फिर महारज बीएस ने देव को वही हीरो से जड़ी सोने की अंगूठी दी जो पिछली बार उसने पूनम को पहनाई thi.saath hi रूद्र को भी वैसे hi अंगूठी दी और सड़ ने पूनम को पिछली बार वाली अंगूठी दी. साथ hi उन्होंने पायल और नीलम को भी वैसे hi हीरो से जड़ी सोने की अंगूठी दी. तीनो जोड़ो ने एक दूजे को अँगूठिया पहना दी. और तालियों की गड गडाहट के साथ उनकी सगाई सकुशल सम्पन्न हुई.
लेकिन इतनी भरी और इतनी कीमती अँगूठिया सरे गाँव में चर्चा का विषय बन गयी.
दन – महाराज आपने बच्चो को इतनी कीमती अँगूठिया क्यों दी. इसकी क्या जरुरत थी.
बीएस – बच्चो से कीमती भी भला कुछ होता है क्या दन जी? और ऐसा कह कर आप हमें पराया कर रहे है.
दन – मए अपने शब्दों के लिए माफ़ी चाहता हु आपका पूरा हक़ है लेकिन फिर भी ये अँगूठिया तो बहोत ज्यादा कीमती है. आपको यकीन अनहि होगा इस एक अंगूठी की कीमत में ये पूरा गाँव खरीदा जा सकता है.
सड़ – इस अंगूठी से हमारे बच्चो को खुशिया मिल जाये तो हम समझेंगे हमने पूरी दुनिया hi खरीद ली दन जी अब छोड़िये भी इन अंगूठियों की बाते. आइये कुछ खा लेते है बड़ी भूख लग रही है.
फिर ये तीनो यु hi घूमते हुए कुछ खाने लगते है. उधर दोनों महाराणीअ भी लेडीज के साथ बैठी थी और वह भी चर्चा का विषय वही अँगूठिया थी. इसे सरे गाँव की औरते पूनम और नीलम की अँगूठिया देख देख कर ललचा रही थी. क्यों की अँगूठिया बेहद शानदार थी hi. हलाकि पायल को रामु ने एक सोने की अंगूठी hi पहनाई थी. जो की जाहिर है उन अंगूठियों के सामने कुछ नहीं थी. लेकिन पायल को महारानी कौशेय और नीलमणि ने सोने का सेट और दूसरे हीरे जड़ित गहने दिए थे जो की उसे भी खास बना रहे थे. कुल मिला कर तीनो लड़किया इस समय पूरे गाँव वालो की नजरो में अप्सराये लग रही थी. और वो सभी इनके गहनों की और इनकी तारीफे करते नहीं थक रही थी.
उधर……………..