Fantasy इच्छाधारी देव - Page 20 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट – 130

सभी उस ट्रक में बैठ जाती है. तो गुरतुम अपने बैग से हैवी हैंड ग्रेनेड निकल के उस माकन पे फेंकता है 5-6 ग्रेनेड से hi पूरा माकन धू धू कर के जलने लगता है और विल्सन और उसके साथियो का अंतिम संस्कार हो जाता है.

गुरुम – कावेरी मैडम इस ऑपरेशन में डपटत के लिए तो कुछ हाथ नहीं लगा लेकिन देश की बेतिया सब पूरी तरह से सुरक्षित हो गयी.

कावेरी - इससे ज्यादा कीमती और कुछ मिल भी नहीं सकता. और न hi मुझे या डपटत को कुछ चाहिए. बाकि रही रिपोर्ट की बात तो वो मए सर से कह दूगी के यहाँ लड़कियों की स्मगलिंग की जाती थी और साडी लेडीज को सुरक्षित उनके घर पंहुचा दिया गया है. क्यों की तुम लोगो के हाथो में तो ये अपने घर से भी ज्यादा सुरक्षित है hi और इन्हे तुम लोग इनके घर भी पंहुचा hi डोज.

शलाका – सूरे कावेरी जो भी अपने घर जाना चाहेगा उन्हें उनके घर पंहुचा दिया जायेगा सही सलामत. यू don’t वोर्री.

ये चेप्टर निपटने के बाद सभी वह से चल पड़ते है. कावेरी अपने घर चली जाती है. और ये लोग गाँव की तरफ.

ये सब करीब सुबह 4 बजे गाँव पहुंचते है हवेली में. जहा गुरुम माला को कॉल कर के पहले hi जगा चूका था. और वो भी इन सब का hi वेट कर रही थी.

जब ये लोग हवेली पहुंचे. तो माला उन्हें देख कर हैरान रह गयी .

माला – ye....ye सब कौन है गुरुम और तुम लोग इन सब को कहा से लाये हो? क्या लफड़ा है?

गुरुम - माला जी, देवा ने आपको शायद सब नहीं बताया अब तक लेकिन अगर नहीं बताया तो वही बताएगा. बस ये जान लीजिये के ये सब देवा की मेहमान है. और अब से देवा के अगले आदेश तक आपकी मेहमान है.

माला मुस्कराते हुए – अगर देवा की मेहमान है तो फिर तो मए कुछ कह hi नहीं sakti.ladies आप सबका इस हवेली में स्वागत है. इसे आप लोग अपना hi घर समझे बिना किसी झिझक के रहिये आप सब यहाँ पूरी तरह से सुरक्षित है. आप लोगो के कमरे में आप लोगो की इजाजत के बिना मए भी नहीं ाउगि. और आप लोग जब जहा चाहे जा सकती है.

गुरुम – लेडीज सबसे पहले मए परिचय करवा देता हु. मेरा नाम है गुरुम, ये मेरी मंगेतर channo,ye है मेरा दोस्त नागार्जुन, ये इनकी होनेवाली पत्नी शलाका, ये इस गाँव की ठकुराइन माला जी है बाकि जो लेडीज इस घर में है उन सबसे माला जी आपको मिलवा देगी. और है आप सब भी अभी आराम कीजिये मए दिन में आउगा. तब बाकि की बाटे होगी. आप में से जो भी अपने घर वापस जाना चाहे वो बात कर लीजियेगा. और हम उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पंहुचा देंगे. लेकिन अभी तो आप लोगो के घर पे भी सब सो रहे होंगे तो अभी आराम कीजिये आप लोग. दिन निकलने के बाद बात कर लीजियेगा. मए कुछ सेल फ़ोन्स यहाँ छोड़े जा रहा हु. कॉल इन्ही से लगाइएगा. फ़िलहाल मुझे इजाजत दीजिये. Bye. एंड गुड़ नाईट.

इतना बोल कर गुरुम एंड टीम वह से निकल जाते है. और वह कड़ी साडी लेडीज उन्हें भीगी पलकों से देख रही थी क्यों की ये सब उनकी जिंदगी में फ़रिश्ते hi बन की ए थे. और अब नयी जिंदगी भी इन्ही की दें थी.

उधर अनजान जगह पे देव और उसके साथी आगे बड़े चले जा रहे थे. सूरज भी सर पे आ चूका था जिस वजह से वो थोड़ा गर्मी से परेशां भी थे. और प्यास भी लग रही थी. पानी था उनके पास लेकिन गरम हो रहा था. तो उसमे भी मजा नहीं आ रहा था. फ़िलहाल इस वक़्त वो किसी भी बात को समझने की स्थिति में नहीं थे. सब कुछ उनकी समझ से परे था. नयी जगह वो भी एकदम सुनसान, एक लक्ष्य लेकिन वो भी छुपा हुआ. रस्ते में कदम कदम पे मौत के साये, और अनजान खतरों का दर, कब किस वक़्त क्या होना है किसी को नहीं पता. कोई तयारी hi नहीं बस जो आएगा उससे निपटने का एक हौसला और कुछ नहीं. यहाँ तो दुश्मन कौन है ये भी नहीं पता. तभी रूद्र को कोई नजर आता है. जो उसकी लेफ्ट साइड से एक ुण्ठ पे बैठ कर चला आ रहा था. कपडे उसके ठीक थक थे. जैसे की रेगिस्तान में सफर करते समय पहने जाते है. बाकि आप लोग लगा लो. वो शख्स उन तक करीब 10 मिनट में पहुँचता है.

अरे आप लोग कौन है राहगीर ने पुछा. …..

हम लोग मुसाफिर है. घूमने निकले थे लेकिन रास्ता भटक गए है रूद्र ने राहगीर से कहा. तुम कौन हो?

मेरा नाम यु तो अफ़ज़ल है लेकिन जिसे जो पसंद आता है सफर के अंत में मुझे नाम दे देते है. राहगीर बोलै

सफर के अंत में मतलब रूद्र ने पुछा

मतलब ये के मए ये रेगिस्तान लोगो को पार भी करवाता हु. और इस रेगिस्तान में भी कई खूबसूरत जगहे है जो मए उन्हें दिखता हु. और जब आखरी में मए उनसे विदा लेता हु तो हर कोई अपने मन के मुताबिक मुझे नाम देता है. अफ़ज़ल ने डिटेल में बताया.

भला इस रेगिस्तान में भी कोई खूबसूरत और देखने योग्य जगह हो सकती है क्या? मुझे तो दूर दूर तक बस मिटटी hi नजर आ रही है. और तो कुछ है नहीं इस बार देवा बोलै.

देखने की नजर भी तब मिलती है जब दिखने वाला साथ हो जो की मए हु. बाकि मिटटी तो तुम भी हो और मए bhi.farak इतना है के हम मिटटी के होकर भी खड़े है. और ये मिटटी फैली पड़ी है. अफजल बोलै.

देखो भाई हमें इस वक़्त कुछ नहीं देखना क्यों की हम थके हुए है. और प्यासे भी रूद्र ने कहा

यही तो फायदा है मेरे होने का क्यों की जो आपको नजर नहीं आता वो मए दिखा सकता हु. जैसे की आप लोग प्यास से हलकान है लेकिन पानी तो आप के पास भी है. अफजल बोलै

रूद्र – अरे यार हमें बह पता है के पानी हमारे पास है लेकिन ये तो गरम हो गया है न.

हाहाहाहाहा…….. मए आपके पास वाले पानी की बात नहीं कर रहा मित्र … अफजल हंस कर बोलै

तो फिर दूसरा पानी कहा है इस बार देवा ने कहा जिसकी आंखे सिकुड़ गयी थी.

वो जो बड़ा सा टीला नजर आ रहा है न अफजल ने एक तरफ ऊँगली उठाई तो सभी ने वह देखा, उस के पीछे मीठे पानी का तालाब है. देखो अगर मए तुम लोगो से न मिला होता तो तुम इसे पर कर के आगे निकल जाते वो बह प्यासे.

रूद्र – तुम लोग रुको मए देख कर बताता हु के ये कितना सच कह रहा है. और रूद्र ने उस तरफ दौड़ लगा दी.

देवा कभी अफजल को देखता तो कभी जाते हुए रूद्र को अभी रूद्र थोड़ा आगे hi गया था के तभी.

ठहरो रूद्र देवा ने चिल्ला के रूद्र को रोका रूद्र जहा का तहा रुक गया. और पलटकर देवा को देखने लगा

क्या हुआ यार अब तुझे. रूद्र ने झल्ला के पुछा

देव ने अफजल की आँखों में देखते हुए कहा- हम सब साथ चलते है. तुम अकेले मत जाओ. फिर देव ने पूनम और नीलम को साथ चलने का इशारा कर दिया. और ये तीनो भी रूद्र के पीछे चल दिए.

इधर अफजल के चेहरे पे सिर्फ एक मुस्कान थी.

फ्रेंड्स कौन है ये अफजल इन सब का दोस्त या दुश्मन या कोई साजिश का हिस्सा. क्या देव का उस पर शक करना सही है या ये भी देव की टीम का hi हिस्सा बन जायेगा और इनका साथ देगा. इस रेगिस्तान के एन्ड तक. ये सब आगे पता चल जायेगा. टिल थें गुड़ bye.......
 
अपडेट - 131

देव ने अफजल की आँखों में देखते हुए कहा- हम सब साथ चलते है. तुम अकेले मत जाओ. फिर देव ने पूनम और नीलम को इशारा कर दिया.

आगे

वो लोग आगे बड़े hi थे के देव ने पीछे मुद के देखा अफजल की तरफ – तुम नहीं चल रहे हो?

तुम लोग पानी पी के आओ मए यही इंतजार करता हु. अफजल ने कहा

देव ने है में गार्डन हिलायी और आगे बड़े रूद्र अब उनके साथ hi था वो लोग टीले के काफी नजदीक पहुंच गए किसी का ध्यान नहीं था देव की तरफ तो देव ने अपनी जेब में हाथ डाला और एक बहोत बड़ा प्याज़ निकला (ोपनीओं) और टीले की तरफ फेंका टीले पे गिरते hi वो प्याज़ टीले में घुस गया जिसे देख देव की आंखे सिकुड़ गयी और उसने तेजी से दौड़ के आगे बढ़ते रूद्र का पांव पकड़ के पीछे खिंच लिया लेकिन रूद्र तब तक अपना दूसरा पैर टीले पे रख चूका था जो के रखते hi अंदर समां गया लेकिन देव ने उसका एक पैर पकड़ रखा था जिससे वो उस टीले में सामने से बच गया. और देव ने पूरी ताक़त लगा कर रूद्र को बहार खिंच लिया.

रूद्र हड़बड़ा गया और देव को देखने लगा फिर दोनों ने पीछे मुद के अफजल को देखा जो दूर खड़ा मुस्करा रहा था. अब उसके कपडे बदल गए थे एक लम्बा सा चोगा था उसके बदन पे और एक ऊँची सी टोपी. उसके हाथ में एक छड़ी थी जादूगरों वाली और अब उसका ुण्ठ भी कही नजर नहीं आ रहा था.

मए इस सेल अफजल को छोड़ूगा नहीं मादरचोद ने हमें मरना चाहा रूद्र भड़क कर कह उठा और तभी देव ने उसका हाथ फिर से पकड़ लिया

नहीं रूद्र ये सब मायावी है वह जाओगे तो खुद भी फंस जाओगे हमें भी फंसाओगे. देव ने कहा वह शायद अफजल मिलेगा भी नहीं वो बस नजर hi आ रहा है. मुझे इस पे शक हो चूका था इसीलिए मए बोल नहीं रहा था बस उसे समझने की कोशिश कर रहा था. पूजनम और नीलम की आँखों में भी अंगारे थे क्यों की रूद्र की जान जाते जाते बची थी यहाँ. ये सब लोग वापस उसी तरफ आने लगे तो अफजल गायब हो गया.

नीलम देव भैया आप को उस पर शक क्यों हुआ? नीलम ने पुछा

नीलम हम सब धुप में थे हम सब की परछाईया जमीन पे थी लेकिन जब वो मिटटी की बात कर रहा था तब मेरी नजर नीचे पड़ी तो मए चौंक गया क्यों की उसकी परछाई नहीं थी. मए समझ गया के ये कोई मायावी है और हमें फ़साने आया है. वैसे भी हम जहा है वह का हर कदम खतरे से भरा हुआ है.

रूद्र – अबे शादी जब तू समझ hi गया था के कोई नौटंकी है वो तो उसे वही क्यों नहीं दबोच लिया?

देव – वो इसिलीये मेरे भाई क्यों की वो तो मायाजाल hi था उसे पकड़ने को हाथ बढ़ाता तो वो कोई गेम खेल जाता और हम सब फंस सकते थे इसीलिए हम सबका उसे पकड़ना जरुरी नहीं था बल्कि उससे दूर जाना जरुरी था.

पूनम – मुझे यकीन है देव जब तक हम सब साथ है चारो सुरक्षित रहेंगे. बस सावधान रहना है चारो को.

ह्म्म्मम्म्म्म सही कह रही हो देव की आवाज गंभीर थी.

वो लोग फिर से अपने उसी चुने हुए रस्ते की तरफफ चलने लगे. काफी देर धुप में चलने के बाद उन्हें एक पेड़ नजर आया जो था तो कटीली झाड़ियों वाला लेकिन फिर भी कुछ छाया थी.

देव – चलो उस पेड़ के नीचे बैठ कर कुछ खा लेते है और थोड़ा आराम भी करेंगे लेकिन सावधान रहना.

कही ये भी कोई नौटंकी तो नहीं रूद्र ने अजीब सा मुँह बना के कहा.

देव – लगत तो नहीं फिर भी हमें तो आगे बढ़ना hi है. चलो

चारो थोड़ी hi देर में उस पेड़ के नीचे पहुंच गए पेड़ की छाँव में उन्हें कुछ रहत मिली उन्होंने अपने बैग से निकल के पानी पीया और जो भी बैग में खाने के लिए था खा के थोड़ी देर आराम करने की सोची. और वही चारो लेट गए.

देव लगता है हम जंगल के करीब hi है. पूनम बोली

देव – है लग तो यही रहा है. क्यों की पेड़ पानी की नाम से hi बढ़ते है और यहाँ की मिटटी में ठंडक है और अंदर नमी भी होगी जिससे ये पेड़ इतना बढ़ गया है.

देव क्या हम सफल होंगे पूनम ने देव के सीने पे सर रखे हुए कहा.

देव पूनम के सर को सहलाते हुए – यहाँ बहोत बड़ी बड़ी ताकते है हमें रोकने के लिए और वो हमें हरा भी सकती है. इसीलिए कहना मुश्किल है. देव के होठ भींच गए थे.

देव हर तिलिस्म किसी न किसी के नाम से बंधा होता है. पूनम ने शून्य में देखते हुए कहा, एक तरह से तिलिस्म एक टेल के सामान होता है और तिलिस्म बनाने वाला जिस रूप में जिसके नाम से चाहे चाबी बना सकता है और उसके आलावा कोई उस तिलिस्म को तोड़ नहीं सकता. हलाकि जिसके नाम से तिलिस्म बंधा जाता आहे. उसे भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन तिलिस्म खोलने की उम्मीद सिर्फ उसी से की जा सकती है. और किसी से नहीं. और फकीर बाबा ने हम दोनों को यहाँ भेजा है इसका मतलब …………..

देवा अचानक उठ के बैठ गया इसका मतलब ये तिलिस्म हम दोनों के नाम से बंधा गया है. पर हमारे नाम से बंधे तिलिस्म में स्वर्ण मणि होने का क्या अर्थ है. कई सरे सवाल है पूनम ये काम इतना आसान नहीं है. और इसे पूरा किये बिना हम वापस नहीं जा सकते अब या तो ये काम ख़तम होगा या हम लोग.

तो तुम क्या समझे थे देव ये काम पूनम को ब्याहने जितना आसान होगा ? अचानक पूनम के होठ हिले लेकिन अब ये पूनम नहीं बल्कि पूनम के अंदर से कोई मर्द बोल रहा था. और इस आवाज़ ने रूद्र और नीलम का ध्यान भी अपनी तरर्फ खिंच लिया. तीनो हैरानी से पूनम का चेहरा देखने लगे. नीलम ने आकर पूनम को हिलना चाहा तो उसे एक जोर का झटका लगा और वो रूद्र की गॉड में गिरी.

तू दूर रह अभी नीलू. मए तुझसे बात नहीं कर रहा. है तो देव तुमने सही अंदाजा लगाया है ये तिलिस्म तुम दोनों के नाम से बंधा गया है.

देव की आंखे सिकुड़ गयी - तुम कौन हो और तुमने पूनम के शरीर पे कब्ज़ा क्यों किया है?

पूनम के होठ पे मुस्कराहट आ गयी - मए कौन हु क्या तुम मुझे नहीं जानते देव? तुम्हे और पूनम को तो पिछली साडी बाटे यद् आ गयी थी न ? फिर तुम मुझे कैसे नहीं जानते ? या ये की तुम्हे पूनम ने मेरे बारे में बताया hi नहीं ? पर ये मए मन नहीं सकता. वो एक अच्छी लड़की है उसकी नियत में खोट नहीं है वो वफादार है तो उसने तुम्हे मेरे बारे में तो बताया hi होगा.
 
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पूनम के होठ पे मुस्कराहट आ गयी - मए कौन हु क्या तुम मुझे नहीं जानते देव? तुम्हे और पूनम को तो पिछली साडी बाटे यद् आ गयी थी न ? फिर तुम मुझे कैसे नहीं जानते ? या ये की तुम्हे पूनम ने मेरे बारे में बताया hi नहीं ? पर ये मए मन नहीं सकता. वो एक अच्छी लड़की है उसकी नियत में खोट नहीं है वो वफादार है तो उसने तुम्हे मेरे बारे में तो बताया hi होगा.

अब आगे…………

रूद्र – तेरी ये आवाज़ कुछ जनि पहचानी लग रही है मुझे पर तू कौन है यद् नहीं आ रहा …………. एक मिनट कही तुम….

पूनम के होठ मुस्कराहट की वजह से फ़ैल गए - बिलकुल ठीक अंदाजा लगाया तूने रूद्र मए हु शंकर वैसे मन्ना पड़ेगा तुम्हे हम तो उस वक़्त बस यु hi मिले थे कुछ देर के लिए फिर भी तुजे सेकड़ो सालो बाद भी मए याद आ गया. बहोत खूब जितना तुम्हारे बारे में सुना तहत ुम उससे कही आगे हो इसीलिए तुम आज भी देव और पूनम के साथ हो.

देव – shankra………….lekin हम तुम्हे नहीं जानते

शंकर - यद् करो यद् आ जायेगा मए भूलने वाली चीज़ नहीं

रूद्र – मए जनता हु इसे ये शंकर hi है. बुरा आदमी नहीं था ये तब.

देव ने रूद्र की बातो को अनदेखा करते हुए कहा– तुम कोई भी हो लेकिन तुम यहाँ क्यों आये हो? और पूनम के शरीर में क्या कर रहे हो?

शंकर - देव मए यहाँ पूनम की मदद करने आया हु. क्यों के मए पिछले जनम का पूनम का प्रेमी हु.

ये सुन कर देव का क्रोध बढ़ जाता है उसकी होठ बीच जाते है

देव – क्या बक रहे हो तुम मेरी पूनम पे इल्जाम लगाने से पहले 10,000 बार सोच लेना शंकर.

शंकर - देव अपने आप पे काबू रखो अभी तो मैने कहना शुरू hi किया है आधी बात सुन के नतीजे पे नहीं पहुंचना चाहिए. मुझे बोलने दो

देव – ठीक है बोलो

शंकर - मए भी पूनम से प्यार करता था तब मए तिलिस्म नगरी में रहता था. एक अचे खासे परिवार से था पूरी नगरी में हमारा नाम था पूनम से मेरी दोस्ती भी थी हम लोग साथ खेल के hi बड़े हुए लेकिन फिर तुम उसकी जिंदगी में आ गए . हलाकि मैने पूनम से अपने प्यार का इजहार किया था लेकिन वो मुझे एक दोस्त hi मानती थी उससे ज्यादा कुछ नहीं. पर मए तो उसे अपनी जिंदगी मान बैठा था. फिर वो वक़्त आया जब नगरी में लड़ाई शुरू हुई और तुम सब बिखर गए उन दिनों मए व्यापर के लिए दूर देश गया हुआ था. जब वापस आया तो उजड़ी हुई नगरी देख के चौंक गया . जब पूरी बात पता चली तो मए भी टूट गया. मेरी हालत रूद्र से जुड़ा नहीं थी लेकिन मेरी खामोश मोहब्बत का पता मेरे और पूनम के आलावा किसी को नहीं था इसीलिए किसी ने मुझ पर ध्यान नहीं दिया. उस नगरी का बच्चा बच्चा साधना करता है. मैने भी की हुई थी लेकिन तब वो बस एक औपचारिकता hi थी. क्यों के हम व्यापारी थे तो शक्तियों के पीछे नहीं भागते थे. पर नगरी की लड़ाई के बाद मए टूट गया. मए तो पूनम से आखरी बार मिल भी नहीं पाया था. और मेरे पास इतनी शक्तिया नहीं थी के मए पूनम की आत्मा को धुंध सकू और उसे वापस ला सकू तब उस दिन मुझे अपनी इस कमोजरी का अहसास हुआ. और मए जा पंहुचा अपने कुलगुरु के साथ जो के फ़कीर बाबा के बराबर तो नहीं थे लेकिन कुछ दिनों की म्हणत के बाद आखिर उनका भी संपर्क फ़कीर बाबा से बना और उन्हें जो पता चला वो मुझे बताया गया तो मैने भी साधना में जाने का फैसला कर लिया

उस के बाद मए भी समाधी में चला गया और मैने भी कई सौ साल समाधी में बिता दिए मेरी समाधी अब भी जारी है, अब मए पहले वाला शंकर नहीं रहा बहोत सी शक्तियों का मालिक हु आज मए. और अपनी उन्ही शक्तियों से hi मुझे अहसास हुआ के पूनम स्वर्ण मणि की तलाश में निकल चुकी है जहा कदम कदम पे मौत कड़ी है मए बस पूनम को बचने आया हु. बाकि तुम तीनो से मुझे कोई लेना देना नहीं है.

एक बात कहना चाहुगा के तुम्हरा अंदाजा सही है ये तिलिस्म तुम्हरे और पूनम के नाम से बंधा गया है.

देव – तुम सामने क्यों नहीं आते? ये पूनम के शरीर का सहारा क्यों ?

शंकर - देव मैने बताया के मए अभी समाधी में हु और इस वक़्त मैने अगर अपनी समाधी को छोड़ा तो मुझे मेरी कई शक्तिया गावनि पड़ेगी. इसीलिए जब भी पूनम मुसीबत में होगी मए इसी तरह आकर उसे बचाऊगा और कुछ बात करनी होगी तो भी इसी तरह आउगा. अगर तुम लोग इस काल चक्र से निकलने में सफल हो गए और यदि भोलेनाथ ने चाहा तो हम जरूर sa-shareer मिलेंगे कब, कहा, किन हालातो में ये तो भोलेनाथ hi जाने परन्तु अभी ये मुमकिन नहीं है.

देव- ये तिलिस्म किसने बंधा है और हमारे नाम से क्यों?

शंकर -सब पता चल जायेगा अभी बस इतना जान लो के ये तिलिस्म महाकाल ने बंधा है. वो तिलिस्म नगरी का बहोत बड़ा शक्तिशाली व्यक्ति था. अब मए चलता हु. तुम लोग भी आगे बढ़ो अब

इसके साथ hi शंकर चला गया क्यों के पूनम का चेहरा अब सामान्य दिख रहा था और उसके होठो पे मुस्कान भी थी.

देव – तुम्हे मालूम है अभी क्या हुआ ?

जानती हु शंकर आया था और उसने मेरे जरिये तुम सब से बात की वो ऐसे hi आगे भी करेगा. क्यों की अभी वो समाधी में है.

देव – तुमने मुझे बताया नहीं कभी शंकर के बारे में ?

पूनम- बताने जैसा कुछ था hi नहीं. है उसने मुझसे अपने प्यार का इजहार किया था लेकिन मैने उसे इंकार कर दिया था हम बचपन के दोस्त थे. इससे ज्यादा कुछ भी नहीं हुआ कभी. क्यों के मुझे तुम भ गए थे और हमारा प्रेम शुरू हो चूका था. बात शादी तक आ गयी इस बीच तो मए भी तुम्हारे प्रेम में hi उलझी रही. फिर हमारी सगाई भी कितनी अचानक तय हुई बड़ो के बीच बात होने के तीसरे दिन hi हमारी सगाई तय हो गयी और तुम अपने परिवार के साथ तिलिस्म नगरी आये और वह भी जैसे hi हमारी सगाई हुई और नगरी की लड़ाई चालू हो गयी क्या हमें कभी ऐसा मौका मिला के मए इस तरह की बात बता पति. वैसे भी बात में कुछ था भी नहीं . पर उसका एक तरफ़ा प्रेम इतना गहरा था ये मुझे आज पता चल रहा है तुम्हारे सामने. क्यों के मेरे hi वजह से उसने सदियों से अपने घर वालो से मुँह मोड़ लिया और समाधी में चला गया. और आज वो मेरी सहायता करने आ पंहुचा.

देव – तुम उसे बुला सकती हो?

है बुला सकती हु लेकिन वो आएगा इसी तरह मेरे अंदर और तभी बात करेगा मए जब चहु उसे अपने अंदर बुला सकती हु.

देव – चलो आगे चलते है
 
भाई सिमिलॅरिटी की बात है तो ऐसी कौन सी कहानी है जिनमे सिमिलॅरिटी नहीं होती हर स्टोरी में हर सेक्स सन एक सा hi होता है, हर दूसरी कहानी भाई बहन, माँ बीटा, या एस hi कई रिश्तो की होती है. और इतनी लम्बी कहानी में अगर आप को कही से कोई सोत्री का कुछ part मिलता जुलता लगता है तो ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है. सोत्रिएस हमने भी कई साडी पढ़ी है अब इन किरदारों पे जो सन लिखे गए है या लिखे जा रहे है अगर उनमे कही कोई समानता नजर आती है किसी इतर स्टोरी से मिलती जुलती है तो इसमें अचम्भा कैसा? लेकिन ये तो आप भी मानेगे की ये स्टोरी शुरू से अब तक कोई कॉपी पेस्ट नहीं बल्कि अपनी म्हणत से लिखी हुई है. और दूसरी बात के ये कालचक्र, तिलिस्म, पूनम के शरीर में शंकर ये कुछ पॉइंट्स अगर आपको पढ़े हुए लगते है तो हो सकता है आपने पढ़ा भी हो लेकिन इनकी पूरी यात्रा और यात्रा के बाद का सफर कही भी किसी इतर स्टोरी से मेल नहीं खता. तो कुछ एक सन पे आप परेशां न हो. फिल्मो में भी कई सीटुएशन्स एक जैसी होती है कई बार तो गाने भी शामे होते है. बस बोल थोड़ा अलग कर दिए जाते है. पर हर चीज़ का अपना अलग मजा भी होता है. एनीवे थैंक्स फॉर योर रिव्यु एंड सपोर्ट भाई ी होप आप भी मेरी फीलिंग्स को समझेंगे.
 
अपडेट – 133

देव – तुम उसे बुला सकती हो?

है बुला सकती हु लेकिन वो आएगा इसी तरह मेरे अंदर और तभी बात करेगा मए जब चहु उसे अपने अंदर बुला सकती हु.

देव – चलो आगे चलते है

अब आगे……..

फिर ये चारो आगे चलने लगते है. चारो hi अभी हुई घटना के बारे में सोच रहे थे. तभी

रूद्र – यार बाकि सब तो ठीक है लेकिन वो शंकर हम सब को कैसे जनता है.

पूनम - मेरे जरिये, जो जो मुझसे जुड़ा हुआ था शंकर उन सब को जनता है.

……लेकिन ये त्रिकाल कौन है देव ने पुछा

पूनम – त्रिकाली बहोत शक्तिशाली था तब लेकिन उसने हमारे नाम से ये तिलिस्म क्यों बंधा ये मए भी नहीं जानती. पर वक़्त पे छोड़ दो सब पता चल जायेगा.

कोई 2 घंटे और पैदल चलने के बाद उन्हें सामने hi जंगल नजर आने लगा. लेकिन अभी भी ये लोग उस जंगल से काफी दूर थे. उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा और करीब ½ घंटा पैदल चलते हुए ये लोग उस जंगल तक पहुंच hi गए लेकिन तब तक सूरज भी डूब hi गया था.

देव – चलो काम से काम रत होने से पहले हम जंगल में तो पहुंच hi गए लेकिन जब तक पूरा अँधेरा नहीं छ जाता हमें चलते रहना चाहिए. वो लोग जंगल में अंदर प्रवेश कर गए. और जंगल को देखते hi चारो मंत्रमुग्ध हो गए.

वह के हरे भरे पेड़ो पे तरह तरह के खूबसूरत पक्षी थे. जिनकी बोली बहोत जायदा सुरीली थी. हर पत्ता सोने की तरह चमक रहा था. गन्दगी का तो नमो निशान नहीं था जबकि जंगल में टहनियों और पातु की या घास की वजह से गन्दगी आम बात है लेकिन वह न तो गन्दगी थी न hi कोई बदबू बस चारो तरफ बेहद सुन्दर वातावरण था और एक दिल को लुभाने वाली खुशबू फैली हुई थी. जैसे जैसे अँधेरा बढ़ रहा था उन पत्तो का रंग भी अब्दल रहा था अब वह हलके नीले रंग की रौशनी भर चुकी थी इसका मतलब सूरज ढल चूका था. जब हवाएं चलती और पत्ते हिलते तो एक मधुर संगीत गूंज रहा था.

देव – ये कैसा जंगल है. जो बहार से तो सामान्य था लेकिन अंदर से ये किसी जादुई नगरी के जैसा है.

पूनम – ये तिलिस्मी जंगल है देव और तिलिस्म का एक नियम है के अगर उसकी किसी चीज़ को न छेड़ो तो वो तुम्हे नहीं फसायेगा लेकिन तुम्हारा एक गलत कदम मौत को दावत देने के सामान होगा. तिलिस्म में जो होता है वो दीखता नहीं जो दीखता है वो होता hi नहीं लेकिन कभी कभी जो दीखता है वही होता है और इस होने या न होने के चक्कर में hi फंस कर या फिर किसी लालच में फंसकर अक्सर तिलिस्म में गया हुआ इंसाने मौत की गॉड में चला जाता है ये hi है tilism.isiliye कुछ मत करना कोई भी बस आराम से चलते रहो . क्यों के ये सुरीली आवाज़े ये सुनहरे पेड़ पत्ते ये सब इसीलिए है के तुम इन्हे छेड़ो और फिर फंस जाओ यहाँ के तिलिस्म में.

चारो ुए अनोखे जंगल में घूमते हुए बस देख रहे थे. तभी नीलम ने रूद्र को एक तरफ दिखाया जहा से एक बेहद सुन्दर सोने का हिरन निकल रहा था वो बहोत ज्यादा चमक रहा था जैसे सचमुच सोने का hi बना हो. और किसी रिमोट से चल रहा ho.tabhi उस हिरन ने उन्हें देखा और रुक गया. लेकिन इन चारो में से किसी ने उसे कुछ नहीं किया तो वो हिरन उन्ही की तरफ आगे बढ़ के आया और उनके सामने खड़ा हो कर चारो को देखने लगा.

सुनेहरा हिरन थोड़ी देर उन्हें देखता रहा फिर एक तरफ को चला गया शायद उसे उम्मीद थी के इन में से कोई उसे पकड़ने की कोशिश करेगा लेकिन किसी को कुछ न करता देख कर वो एक तरफ को निकल गया.

पूनम – ये सब तिलिस्म जाल है बच के रहना पड़ेगा सबको . ये था तिलिस्म का लालच. हम में से किसी ने कुछ नहीं किया तो वो चला गया वार्ना यही मौत का दूत बन जाता अभी.

नीलम - क्या मुसीबत है किस चीज़ पे भरोसा करे किस पर न करे कुछ समझ hi नहीं आ रहा है यहाँ तो और ुओंपर से पूनम मेरा तो गर्मी के मरे बुरा हल है. और वो सामने देखो कितना खूबसूरत झरना है चलो न नाहा लेते है ये दोनों यही बैठ जायेगे हम नाहा के आते है आओ.

पूनम मुस्करा के नीलम को देखती है और अपने बैग से एक लोटा निकल के रूद्र को देती hae.jara इसे भर के तो आओ रूद्र भैया. पहल थोड़ा गाला hi गीला करा दो नीलम का लेकिन है किनारे से hi भर लेना ज्यादा अंदर मत जाना. और तू यहाँ बैठ. पहले वो ठंडा पानी आने दे फिर चलते है.

उधर रूद्र आगे बढ़ जाता है जहा उसे पानी की शीतलता का अहसास हो रहा था पूरा बदन hi उस ठंडक में झूम उठा रूद्र का वो थोड़ी देर तो उस मजेदार ठंडक का अहसास करता रहा और पानी को देखता रहा फिर हाथ आगे बढ़ाया और बहते हुए झरने से पानी भरने लगा. लेकिन कोई 10 मिनट गुजर जाने पे भी लोटा खली का खली रहा उसे आश्चर्य होने लगा.

रूद्र मन में - ये साला क्या नाटक है लोटा तो एक मिनट में भर जाना चाहिए यहाँ तो 10 मिनट हो गए अब तक लोटा नहीं भरा

उसने लोटे में झाँका तो लोटा पूरा खली hi नहीं बल्कि सूखा भी था. जबकि वो इतनी देर से पानी में दाल के रखा था.

वो दौड़ कर वापस पूनम के पास आता है.

रूद्र – भाभी ये क्या ड्रामा है यार लोटे में तो एक बूँद पानी की नहीं भर रही वो भी इतने तेज झरने से जबकि ये तो आधे मिनट से भी काम में भर जाना चाहिए.

पूनम नीलम को देखते हुए – देखा मेरी बन्नो ये कोई झरना नहीं ये भी दिखावा है अगर कोई इसमें नहाने को घुसेगा न तो कहा जाकर निकलेगा पता भी नहीं चलने वाला.

इतना सुनते hi नीलम की आंखे हैरत से खुली रह गयी और वो झटके से उठकर रूद्र के गले लग गयी.

देवा - रूद्र बैग से टेंट निकालो तो. उसे यही लगा ले फिर कुछ खा के आराम करते है थोड़ा आराम जरुरी है.

रूद्र ने अपने बैग से फोल्डिंग टेंट निकले और रूद्र और देव वो टेंट लगाने लगे. फिर टेंट के बहार hi उन्होंने बैठ कर खाना खाया और साथ लाया हुआ पानी भी पि लिया

रूद्र – देव तेरे हिसाब से अभी कितना आगे जाना है?

देव – यार ये तो मानचित्र hi बताएगा लेकिन मेरे ख्याल से अभी तो कुछ कहा नहीं जा सकता सुबह उजाले में मानचित्र देख कर तय करेंगे.

नीलम – तो फिर अभी आराम करे? मेरा तो पूरा बदन दुःख रहा है. चलो पूनम हम एक hi टेंट में सोते है

देवा – रुको तुम दोनों एक टेंट में नहीं सोगी बल्कि दोनों जोड़े में hi सोयेगे

नीलम शरारती मुस्कान के साथ - क्यों देव भैया क्या इरादा है?

देव गंभीर हो कर - ऐसा कोई इरादा नहीं जैस तेरे दिमाग में चल रहा है मए बस ये कह रहा हु के तिलिस्मी जंगल है तुम दोनों का अकेले सोना सही नहीं इसीलिए तुम और रूद्र रहोगे और मए और पूनम

पूनम – सही बात है. और वैसे भी हम लोग यहाँ कोई हनीमून मानाने नहीं आये है तो देव और रूद्र अपने आप पर कण्ट्रोल रखना और सावधान रहना खतरा कभी भी कही से भी आ सकता है. बल्कि मए तो ये कहुगी के हम सोयेगे अलग अलग टेंट में लेकिन हम में से एक जागेगा दूसरा सोयेगा वो भी कच्ची नींद कोई घोड़े बेच के नहीं सोयेगा.

रूद्र – सही है भाभी आप निश्चिन्त रहिये हमें मौके की गंभीरता का अहसास है. अभी आप दोनों अपने अपने टेंट में सो जाइये मए और देव जागेंगे.

पूनम – है लेकिन तुम दोनों भी टेंट में hi रहोगे. बहार बैठ के नहीं जागना है. तुम नीलम के साथ जाओ टेंट में और उसे सोने दो तुम जागते रहना ऐसा hi देव भी करेंगे.

देव – ठीक है फिर चलो आराम करो.

उन्हें टेंट में गए हुए काफी देर हो चुकी थी नीलम और पूनम को नींद आ चुकी थी.

रूद्र – यार देव ये त्रिकाल का क्या चक्कर है?

देव – मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा यार. बल्कि मए तो ये सोच रहा हु के फकीर बाबा ने हमें क्यों नहीं बताया ये सब

रूद्र – शायद वो भी नहीं जानते होंगे या फिर ये बात बताने की उन्हें भी इजाजत नहीं होगी आखिर सबके ऊपर बड़े होते है फ़कीर बाबा के ऊपर भी होंगे. वार्ना वो जरूर बताते.

देव – तू सही कह रहा है.

इसी तरह की बातो और अटकलों से देव और रूद्र बाटे करते हुए जागते रहे. रूद्र को भी आधी रत के बाद नींद आ गयी लेकिन देव जगता रहा उसने पूनम नीलम या रूद्र किसी को भी नहीं उठाया बस खुद hi जग कर देखभाल करता रहा बीच बीच में वो रूद्र वाले टेंट में झांक लेता था के सब ठीक है या नहीं. और सुबह करीब 5 बजे पूनम की आंख खुली.
 
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रूद्र को भी आधी रत के बाद नींद आ गयी लेकिन देव जगता रहा उसने पूनम नीलम या रूद्र किसी को भी नहीं उठाया बस खुद hi जग कर देखभाल करता रहा बीच बीच में वो रूद्र वाले टेंट में झांक लेता था के सब ठीक है या नहीं. और सुबह करीब 5 बजे पूनम की आंख खुली.

पूनम – गुड़ मरंग जणू उउउउम्म्माह उसने देवा के होठो पे किश किया देवा ने भी रिस्पांस किया .

आपने मुझे जगाया क्यों नहीं पूनम देवा के गले में बहे दाल के बोली

कैसी बात करती हो तुम्हारी नींद ख़राब कर के भला मए सो पता क्या देवा ने कहा

ऊऊऊह्ह्ह्ह मेरी जान मेरी इतनी चिंता है आपको सो स्वीट पूनम ने देवा के गाल पे किश करते हुए कहा.

चलो अब उठ कर मुँह हाथ धो लो और अगर फ्रेश होना चाहो तो वो भी हो लो लेकिन अकेले नहीं पहले नीलम को उठा दो. देवा ने कहा

पूनम – अभी लो . निलाआआआं ो निलाआआम…..

नीलम - है पूनम क्या हुआ?

पूनम – अरे उठ जा बन्नो ससुराल में नहीं है तू अभी. और है अपने पति परमेश्वर को भी उठा दो.

नीलम ने रूद्र को उठाने के लिए उसे हिलाया – रूद्र…….. उठो मेरी जान सुबह हो गयी.

रूद्र ने नीलम को पकड़ के अपने साथ लिटा दिया और उसके होठ चुम लिए.

आआअह्ह्ह्हह ……. नीलम की हलकी सी चीख निकल गयी

इधर वो चीख सुन कर पूनम और देवा के चेहरे पे मुस्कान आ गई

रुद्राआआ………. देव ने आवाज़ लगा दी

है देव क्या हुआ…. रूद्र अचानक बोल पड़ा

देव – अबे उठ जा सुबह हो गयी है.

रूद्र - है यार उठता हु पर तूने जग कर रत काट दी मुझे hi उठा देता यार

देव – कोई नहीं चल उठ जा अब और फ्रेश हो लो तुम तीनो

रूद्र - देव मए इन के साथ जाता हु तुम थोड़ी देर आराम कर लो हम आते है.

देव – ठीक है लेकिन ज्यादा दूर मत जाना और पूनम तुम अचे से देख लेना कोई जाल न हो

पूनम - ठीक है देव आप आराम करो हम आते है.

फिर नीलम रूद्र और पूनम थोड़ा दूर जाते है जहा पे एक पानी का अच्छा सा झरना बाह रहा था. वो दूर से hi नेचुरल लग रहा था. और वह पे अच्छी घास भी थी. पूनम अपनी शक्तियों से देखती है वह कोई खतरा नहीं था. तो वो नीलम को इशारा करती है और खुद झाड़ियों में जा कर फ्रेश हो जाती है थोड़ी देर के बाद नीलम और फिर उसके बाद रूद्र भी हो आता है.

नीलम - पूनम चलो नाहा लेते है यहाँ का पानी भी साफ़ है. और रूद्र तो बहार है hi. कोई खतरा नहीं होगा.

पूनम है नीलम चलो नाहा hi लेते है. फिर रूद्र से कह कर पूनम और नीलम नहाने चली जाती है रूद्र उनकी तरफ पीठ कर के खड़ा हो जाता है. कोई 15-20 मिनट नहाने के बाद ये दोनों बहार आ जाती है दोनों hi पूरी नंगी थी क्यों की ये पूरे कपडे उतर के hi झरने में घुसी थी. और वही कपडे अब इन्हे पहनने थे. रूद्र भी सब समझ रहा था इसीलिए उसने पलट कर नहीं देखा क्यों की नीलम के साथ इस वक़्त पूनम भी थी फिर दोनों कपडे पहन कर तैयार हो जाती है.

पूनम – रूद्र तुम भी नाहा लो फिर चलते है.

फिर रूद्र भी नाहा के आ जाता है. उसे काफी ताजगी महसूस हो रही थी. एक नयी फुर्ती महसूस हो रही थी. फिर ये तीनो अपने टेंट में जाते है तो देवा आराम से सो रहा था. पूनम देव के पास जाकर उसके चेहरे को ध्यान से देखती है. और उसके माथे पे चुम कर वही बैठ जाती है करीब दो घंटे बाद देव की आँख खुलती है. तो पूनम उसे देख कर मुस्करा रही थी.

देव – अरे पूनम तुम लोग आ गए मुझे उठाया क्यों नहीं

पूनम - कल दिन भर पैदल चलना फिर रत भर का जागना तुमने हम सबको आराम करने दिया हम तुम्हे कैसे उठा देते. और तुम इतनी जल्दी क्यों उठ गए तुम सो जाओ न थोड़ी देर.

देव – नहीं मेरी नींद हो गयी पूनम मए आता हु नाहा के.

इतना कह कर देव बहार आता है और रूद्र के साथ उसी जगह जाता है फ्रेश हो कर वो भी नाहा लेता है तो ताजगी आ जाती है. फिर ये वापस टेंट में आ कर कुछ खा पी कर टेंट समेत लेते है.

रूद्र - क्या जगह है देव मजा hi आ गया दिल hi नहीं करता यहाँ से जाने का.

देव – ये पूरी जादुई शक्तियों से बनाई हुई है. तू किसी चीज़ को छेड़ कर देख पता चल जायेगा. ये कितनी अच्छी जगह है.

पूनम – देव आप सही कह रहे है. ये कोई आम जगह नहीं है तभी सब ठिठक जाते hae.kyu की पूनम रुक गयी थी.

देव की आंखे सिकुड़ जाती है क्यों के वो समझ जाता है के शंकर आ गया है. मतलब कोई खास बात है. सभी पूनम को देखने लगते है और पूनम के होठ हिलते है.

उधर जैसे hi सुबह हुई तो करीब 10 बजे गुरुम नागार्जुन और शलाका हवेली पहुंचते है.

गुरुम – माला जी सब लड़कियों को बुलवाओ

माला ने सबको हॉल में बुलवा लिया. सभी उन के सामने कड़ी थी

गुरुम – उम्मीद है बची हुई रत जो आप लोगो ने यहाँ बितायी वो अच्छी गयी होगी कोई दिक्कत तो नहीं हुई आप लोगो को?

आरफा – नहीं गुरुम जी हम सब को कोई दिक्कत नहीं हुई आप लोगो का शुक्रिया हम कैसे ऐडा करे समझ नहीं प् रहे है.

गुरुम - आरफा जी शुक्रिया जैसी कोई बात नहीं है. ख़ैर अब ये बताइये के आप लोगो ने अपने अपने घर पे बात की?

आरफा - गुरुम जी हम में से ज्यादातर तो अनाथ आश्रम से उठायी हुई है. लेकिन 9 लड़किया ऐसी है जिन्हे घर से उठाया गया दसवीं मए हु. लेकिन हमारे घरवाले भी हमें अब नहीं चाहते. सबका यही हल है. इन दो लड़कियों को छोड़ कर. इनका नाम है विद्या और शहनाज़ इन दोनों के घरवालों ने जब सुना के ये दोनों सकुशल है तो वो इनसे मिलने को बेचैन हो उठे तब इन्होने कहा के ये कल तक घर पहुंच जाएगी. जिससे वो लोग थोड़ा शांत हुए. बाकि की 7 लड़कियों के घरवालों ने ये कह कर फ़ोन काट दिया के अब उनका इनसे कोई रिश्ता नहीं क्यों की उनके घर में और भी लड़किया है और अगर ये लोग वापस गयी तो समाज में इनके घर की बाकि लड़कियों की शादी नहीं हो पायेगी सब उन्हें वैश्य hi कहेगे. इसीलिए ये लोग भी कही नहीं जा सकती अब. बची मए तो मेरे सिर्फ पति hi थे. लेकिन मए और मेरे पति दोनों hi अनाथ थे और हम दोनों ने लव मैरिज की थी, जब विल्सन के लोग मुझे उठा के ले जा रहे थे तब मेरे पति ने विरोध किया था लेकिन उन्होंने मेरी आँखों के सामने hi उन्हें मार डाला था. और मुझे उठा के ले गए थे. तो अब मेरा तो कोई घर बार है नहीं

शलाका – इसका मतलब के आप 25 में से सिर्फ 2 लड़कियों को उनके घर छोड़ने जाना आहे बाकि सब का कोई ठिकाना नहीं.

आरफा - जी शलाका जी. हालत तो यही है लेकिन आप लोग चिंता मत कीजिये हम लोग भी एक दो दिन में चले जायेगे कही न कही और अपनी जिंदगी बिताने के लिए कही नौकरी कर लगे जिससे हमारा गुजरा हो सके. हम में से कोई भी आप लोगो पे बोझ नहीं बनेगा.

शलाका – आरफा बहन सबसे पहले तो एक बात आप समझ ले के आप सब हम पे बोझ नहीं है न hi कभी होगी. दूसरी बात के आप लोग अब बेसहारा नहीं है आप लोग उन्हें नहीं जानती जिनकी वजह से आज आप लोग यहाँ है. उनका नाम है देवा. उन्होंने आप सब के यहाँ रहने और खाने पीने का इंतजाम कर दिया है. और वो भी साडी जिंदगी भर के लिए. क्यों की उन्हें अंदाजा था के आप में से कई अपने घर नहीं जा पायेगी. आगे भी उन्होंने आप सब के लिए कुछ सोचा है जिसका मुझे पूरा पता तो नहीं लेकिन कुछ कुछ अंदाजा जरूर है. जिससे के आप लोग यहाँ इज्जत और शान से अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी गुजर सके और खुद को किसी पर बोझ न समझे. पर बेहतर होगा के वही आपको सब बताये . ये उनका हक़ भी है. और आप सब यहाँ पूरी तरह से आजाद है जिसको जब जहा जाना हो जा सकती है. जिससे बात करनी हो कर सकती है. अगर किसी की नजर में कोई लड़का हो जिससे वो शादी करना चाहे तो उसकी भी कोई मनाही नहीं है हम सब की तरफ से बल्कि हम हेल्प करेंगे. और अगर ऐसा कुछ नहीं है तो आप लोग फ़िलहाल तो यही रहेंगे इसे अपना hi घर समझ कर. कुछ समय बाद आप लोगो को रियल में आपका घर मिल जायेगा जो देवा ने बनवाने शुरू कर दिए है. बस उनके तैयार होने तक आप लोग यही रहे.

अब विद्या और शहनाज़ आप लोगो के लिए हमें ख़ुशी है के आप के माता पिता और आपके घरवाले आप सबसे इतना प्यार करते है. आप लोगो को आज hi भेज दिया जायेगा. आप लोग निश्चिन्त रहे. ये है हमारे नागार्जुन जी . ये आप लोगो को आप के घर सलामती से पंहुचा देंगे. अब आप लोग आराम कर लीजिये. फिर सभी वह से अपने अपने कमरे में चली जाती है. और हॉल में बच जाते है हवेली वाले और गुरुम एंड पार्टी
 
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गुरुम - माला जी अब हमें भी इजाजत दीजिये. हमें भी जाना है. कुछ काम निपटने है.

माला - है दामाद जी चले जाना अब चन्नो नहीं है तो क्या आप हमारे साथ बैठ भी नहीं सकते.

माला की इस बात से गुरुम थोड़ा शर्मा जाता है लेकिन बाकि सब हंस पड़ते है.

माला – अरे शलाका ये तुमने क्या कहा के देवा ने इन सब के लिए माकन बनवाने शुरू कर दिए है? क्या ये सच है?

शलाका - जी है बिलकुल सच है. जो जमीन उन्होंने आपसे अभी खरीदी है न जो बंजर थी. उस पे वो बहोत बड़ी कॉलोनी बनवा रहे है. जिसमे इसी तरह की लड़किया और औरते रहेगी जो समाज के जुल्मो की शिकार है. एक तरह से देवा वह ंगो खोल रहा है. जिसका नाम होगा सावित्री निवास ये नाम उनकी माँ का है और इसी नाम से उन्होंने ंगो की स्थापना करने का सोचा है पेपर वर्क मैने करवा दिया है. बस बिल्डिंग बनने की देर है आप जाकर देखना उस जमीन पे काम चालू हो चूका है.

माला – ये देवा सच मच का देवता hi है. अभी लड़किया आयी भी नहीं थी और उसने मुझसे जमीन ले ली और उनके आने से पहले hi इतना सब करवा भी लिया और बिल्डिंग भी बननी चालू हो गयी. वो महँ है.

शलाका – सच में वो ऐसे hi है.

तभी सबकी नजर सीढ़ियों पे गयी जहा आरफा कड़ी थी उसकी आँखों में आंसू थे. जिसे देख कर शलाका कड़ी हो गयी और अपनी बहे फैला दी आरफा दौड़ती हुई आयी और शलाका की बहो में समां गयी और सुबकने लगी.

शलाका - क्या हुआ आरफा आप रो क्यों रही है?

आरफा - दीदी क्या मए उस महँ इंसाने के दीदार कर सकती हु?

शलाका – तुम उनसे जरूर मिल लेना लेकिन अभी वो एक बहोत जरूरी काम में बिजी है. यहाँ से बहोत दूर है. जब आएंगे तो मिल लेना.

आरफा – वो सच में महँ hi है. माला जी ने सही कहा. हम सब के आने से पहले hi उन्होंने हमारे लिए इतना कुछ न सिर्फ सोचा बल्कि कर भी दिया और सामने तक नहीं आये. हमें तो वो बस उस कीचड से निकल देते और छोड़ देते तो भी हम उनके अहसानमंद रहते पर अब तो अगर हम उनके रोज पैर धो कर पिए तो भी उनका अहसान नहीं चूका पाएंगे.

शलाका – मेरे सामने ये बात कर दी उनके सामने मत करना. उन्हें सिर्फ प्यार की भूख है वो अहसान वगैरह में नहीं मानते.

आरफा – अब तो उनसे मिलने की बेताबी बढ़ती जा रही है. जिसकी इतनी ज्यादा तारीफे हो रही है. जो दिल का इतना अच्छा है. उससे मिलने का नसीब पता नहीं कब बनेगा. कैसा होगा वो? कहा होगा?

उधर देवा गौर से पूनम का चेहरा देख रहा था तभी पूनम के होठ हिलते है और शंकर की आवाज़ आती है.

शंकर – तुम लोग अब महाकाल क जंगल में आगे बढ़ रहे हो. तो होशियारी से बढ़ना क्यों के यहाँ कब क्या हो जाये पता नहीं चलने वाला जो दिखे उस पे आँखे बंद कर के भरोसा मत करना. क्यों के ये महाकाल तुम्हारी धरती वाले महाकाल नहीं है. ये एक बहोत चतुर, खूंखार, मायावी, चालबाज़, है इसमें और भी कई खुबिया है. इसके पास कई अच्छी बुरी शक्तिया है, तुम लोग धरती पे जिस महाकाल की पूजा करते हो ये उसके ठीक विपरीत है. ये खुद को कल से महँ समझता है. क्यों की इसमें अपर शक्तिया है. इसीलिए खुद को महाकाल या त्रिकाल कहलवाता है. इसकी तुलना अपनी धरती वाले महाकाल से मत करना वो दयावान है ये धूर्त. वो पलटा है ये मिटाता है. वो मुसीबत से बचते है ये मुसीबते पैदा करता है.

देव – फिर तो इसे त्रिकाल hi कहो भले hi ये खुद को किसी भी नाम से पुकारे आज से ये हमारे लिए त्रिकाल है वैसे शंकर क्या तुम बता सकते हो के ये त्रिकाल ने पूनम और मेरे नाम का तिलिस्म क्यों बंधा?

शंकर – आसान है देव. त्रिकाल को स्वर्ण मणि की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली और तभी तिलिस्म नगरी में लड़ाई ख़तम हुई थी. तुम्हारा और पूनम का दुबारा जनम लेना तय था. लेकिन उसके लिए कई सौ साल लगने वाले थे. अगर त्रिकाल ने तुम दोनों के नाम से तिलिस्म बनवा तो ये तो तय हो गया के अब जब तक तुम दोनों का दुबारा जनम नहीं हो जाता और फिर तुम लोग बालिग हो कर यहाँ तक नहीं पहुंचते तब तक स्वर्ण मणि सुरक्षित रहेगी क्यों के और कोई उस तिलिस्म को तोड़ hi नहीं सकता. और यदि किसी ने प्रयास किया भी तो उसके लिए बहोत कठोर तपस्या और साथ hi तुमसे ज्यादा शक्तिया चाहिए. जो के किसी के पास उस वक़्त थी नहीं यहाँ तक की खुद त्रिकाल के पास भी नहीं. है लेकिन आज की तारिख में ऐसा होने का अंदेशा पैदा हो गया है क्यों की तुमसे ज्यादा नहीं तो तुमसे काम भी नहीं है वो धूर्त अघोरी जो तुम्हरा सबसे बड़ा दुश्मन है और वो भी अब इस स्वर्ण मणि की दौड़ में शामिल हो चूका है

देव – ऐसा क्यों ? वो चाहे तो तिलिस्म का टाला बदल सकते थे. किसी और के नाम पे या खुद अपने नाम पे तिलिस्म बांध सकते थे.

शंकर - नहीं देव, ऐसा नहीं हो सकता तिलिस्म जिसके नाम से बंधा जाता है. उसे वही खोल सकता है. और एक बार तिलिस्म बांध देने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता. खुद तिलिस्म बांधने वाला भी उसे बदल नहीं सकता. और तुम दोनों के नाम पे तिलिस्म बांधने का मतलब hi ये था की स्वर्ण मणि सुरक्षित रहे.

देव – त्रिकाल को स्वर्ण मणि सँभालने की जिम्मेदारी किसने दी?

शंकर – हमारे भी ऊपर लोग है जो सारा तालमेल बैठते है. उन बड़ो ने मिल के त्रिकाल को ये जिम्मेदारी दी वार्ना वो तो इतना व्यस्त रहता है के वो ऐसे चीजों को सँभालने जैसे छोटे काम करता hi नहीं पर वो भी किसी के आगे मजबूर होता है और वो है हमारे बड़े.

देव – तो त्रिकाला हमारी मदद करेगा तिलिस्म तोड़ने में?

शंकर – इस भूल में मत रहना के वो मदद करेगा. बल्कि वो तो तुम्हे रोकने की कोशिश करेगा. क्यों की उसके पास जिम्मेदारी है मणि को सुरक्षित रखने की, न क तुम्हे सौपने की. वो अपना काम अचे से करेगा. वो तुम्हे अपनी मायावी शक्तियों से बहार भी ाकरेगा और पूरी कोशिश भी करेगा के तुम तिलिस्म न तोड़ पाओ. क्यों के अगर वो सफल हुआ तो फिर उसे कई सौ साल का आराम मिल जायेगा. जब तक तुम लोग सब इकठे यहाँ वापस न आओ. इसीलिए वो तो यहाँ तुम्हे अपने तिलिस्म में उलझने की, भटकने की, बल्कि मरने की भी पूरी कोशिश करेगा.

देव – तो फिर हमारे नाम से बंधा hi क्यों अगर हमें मणि देनी नहीं थी तो.

ये उसका फैसला था. मैने कहना तुम जिन्दा नहीं थे और वापस आने में समय लेने वाले थे इसीलिए तुम दोनों केन ऍम से बंधा. इसलिए नहीं के मणि तुम्हे देनी है तो तुम्हरे नाम से बांध दे.

देव – तुम उलझी बाटे कर रहे हो

शंकर - मए सही बात कह रहा हु. अब मए चलता हु. सावधान रहना.

तभी पूनम एक झटका खा के देव को देखती है और मुस्करा देती है.

देव – तुम्हे पता है अभी शंकर ने क्या कहा?

पूनम – है जानती हु. और वो सही कह रहा hae.Trikal ने सिर्फ अपने बड़ो का दिया एक काम किया है हमारी सहायता के लिए वो कोई हमारा शुभचिंतक नहीं है. आगे तो हमें अपने लावेल पे hi बढ़ना होगा चलो.

फिर देव पूनम, रूद्र और नीलम आगे बढ़ने लगते है. अब जंगल बहोत जायदा घाना हो चूका था. लेकिन वह फैली खुशबू का अंत नहीं हुआ था. दोपहर का समय हो चूका था. ये सब थकने भी आगे थे और लगातार पैदल चलने से सबका जिस्म पसीने से भरा हुआ था. लेकिन वो बिना रुके चले जा रहे थे.

रूद्र – देवा वो सामने देखो ये क्या नजारा है?

देव ने सामने देखा तो जंगल एक दीवार पे ख़तम हो रहा था. जैसे वो कोई जंगल नहीं बल्कि किसी कमरे में हो पेड़ो की वजह से आसमान तो दिख नहीं रहा था लेकिन अब सामने ये दीवार का क्या मतलब hae?aur उसके दायी तरफ एक बहोत बड़ी गुफा बानी हुई थी. यानि के अगर अब आगे बढ़ना है तो उस गुफा में जाना hi होगा और कोई रास्ता hi नहीं था. देव ने पीछे मुद के देखा तो सब सामान्य hi था वो रास्ता साफ़ नजर आ रहा था जिससे वो अभी चल के आये थे. कुछ भी तो नहीं बदला था. लेकिन ये अचानक दीवार कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

देव – हमें इस गुफा में जाना होगा. उसके होठ भींच गए थे और आँखे सिकुड़ गयी .
 
थैंक यू वैरी मच बीआरओ आपके सरे hi रेविएवस एंड कमैंट्स बेहतरीन है. उम्मीद है आपको भी स्टोरी पसंद आएगी आपने शुरू से पढ़ी है और एक साथ अपाधि है जिस वजह से आपको एक लाइनअप मिला और आपको उस कॉन्टिनुइटी में स्टोरी का पूरा आनंद भी आया होगा. तो अब आप स्टोरी में साथ बने रहिये और ेनोजय कीजिये. और आपके रेविएवस भी दीजिये . थैंक यू ओनेस अगेन बीआरओ
 
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देव – हमें इस गुफा में जाना होगा. उसके होठ भींच गए थे और आँखे सिकुड़ गयी .

रूद्र – अबे लेकिन यार इस खौफनाक और सुनसान जगह पे ये गुफा ये दीवार कुछ अजीब लग रही है. गुफा तो चलो मन के हो सकती है पर ये दीवार? एक काम करते है पीछे चलते है और कोई दूसरा रास्ता देखने की कोशिश करते है.

नहीं रूद्र नक्शा यही कहता है के हमें इसी दिशा में जाना है. देवा की नजरे हाथ में थामे नक़्शे को घर रही थी और उसने बिना नजर उठाये रूद्र से कहा.

नीलम - लेकिन गुफा से hi क्यों? हम घूम के पीछे चलते है शायद कोई दूसरा रास्ता मिल जाये क्यों के इस गुफा में तो पता नहीं क्या होगा?

देव – ठीक है चलो ये भी कर के देख लेते है.

रूद्र जैसे hi पीछे मुद के चलने लगता है तो वो आगे नहीं बढ़ पता. वो बहोत कोशिश कर रहा था लेकिन उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी अदृश्य दीवार से टकरा रहा है

रूद्र – यार मए आगे नहीं बढ़ प् रहा हु ऐसा लग रहा है जैसे किसी अदृश्य दीवार ने मेरा रास्ता रोका हुआ है.

पूनम वही एक पठार पे बैठी सब देख सुन रही थी. तब देव ने उसे देखा

देव – तुम ऐसे क्यों बैठ गयी? तुम्हे अजीब नहीं लग रहा के हम पीछे नहीं जा प् रहे है?

पूनम – नहीं , मुझे अजीब नहीं लग रहा क्यों के मए जानती हु हम पीछे नहीं लौट सकते. क्यों के ये त्रिकाल का तिलिस्म है. और मेरी शक्तियों से मुझे इतना तो पता चल hi गया है ेके वो किस लेवल का तिलिस्म जनता है. यानि वो कोई मामूली शख्स नहीं है. इसी से अंदाजा लगा कर मए कह सकती हु के हम आगे चाहे जितना बढ़ जाये पीछे नहीं हैट सकते. और अब हर बढ़ाया हुआ कदम हमारा आखरी कदम साबित हो सकता है क्यों के आगे क्या है हम नहीं जानते और पीछे होने की तो जगह hi नहीं. बस पीछे मुद के आँखों से देख सकते हो पीछे चल नहीं सकते.

देव – ऐसा है तो फिर सोचना कैसा चलो गुफा में. क्यों की और तो कोई रास्ता है भी नहीं और जहा तक मेरा मंद कहता है के यदि रास्ता एक hi है तो उसमे खतरा तो होगा लेकिन आगे बढ़ने का रास्ता भी वही से मिलेगा.

पूनम – तुम सही हो. चलो सब गुफा में.

चारो एक साथ गुफा के दरवाजे पे जा पहुंचते है लेकिन अभी वो गुफा में जाये उससे पहले hi.

नीलम - देव भैया वो देखो सामने से कोई आ रहा है.

एक नाते कद का आदमी सामने से चला आ रहा था. जिसके एक हाथ में डंडा था. जिसे देख कर सभी चौंक जाते है.

उस आदमी का शरीर नाता था लेकिन सर अजीब तरह से बड़ा था. सर पे छोटे छोटे बल खड़े थे. एक छाती तक झूलती पतली सी दादी थी और मुछे होठो तक लटक रही थी. तोंद निकली हुई थी और उसके बदन पे सिर्फ एक धोती hi थी ऊपर का बदन नंगा hi था.

……मेरा नाम खतरा है. मए त्रिकाल का सेवक आप लोगो का स्वागत करता हु. आइये मुझे आपका hi इंतजार था.

देव – तुम्हे कैसे पता के हम यहाँ आने वाले है.

खतरा – कमल करते हो देव सिंह जब तिलिस्म तुम्हारे नाम का बंधा है तो तुम्हारा आना तो तय hi था न और साथ में पूनम और रूद्र नीलम भी है. तुम चारो का यहाँ आना तो बहोत पहले तय हो चूका था मए तो तब से तुम्हारा इंतजार hi कर रहा हु. जब से इस तिलिस्म का निर्माण हुआ है.

देव – लेकिन तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

खतरा – देव सिंह जहा तुम जाने वाले थे यानि इस गुफा में. मए इस गुफा के दरवाजे का पहरेदार हु.

रूद्र – अबे पहरेदार है तो डेढ़ घंटे से कहा था ऐसे पहरेदारी करता है तू. बताऊ क्या त्रिकाल को अभी.

खतरा – नहीं नहीं रूद्र तुम ऐसा मत करना मए तो बस टहलने गया था. अब इतने समय से यहाँ बैठा हु तो क्या टहल भी नहीं सकता? मए यहाँ बहोत जयादा परेशां भी हु.

रूद्र - किसलिए परेशां है तू?

खतरा - इतने सालो से अपनी लुगाई से नहीं मिल पाया हु उसे छू भी नहीं पाया हु. तुम्हारे साथ औरत देख कर मुझे ख़ुशी हुई क्या मए नीलम से अकेले में बात कर लू थोड़ी देर उसे छू लू?

रूद्र – सेल मर कहानी है क्या?

खतरा – अरे रूद्र तू अब भी नहीं बदला बात बात में गुस्सा करता है. मए तो बस नीलम को छू के देखना चाहता हु वो भी उसकी मर्जी से.

नीलम - मेरी ऐसी कोई मर्जी नहीं मए और रूद्र शादी करने वाले है इसके अलवाल मुझे कोई नहीं छू सकता. तू भूल जा.

देव – अब हम चले गुफा में ?

खतरा है है आओ अगर आना चाहो तो ? वैसे न भी आओ तो मुझे क्या? अंदर आ कर तो तुम्हे मरना hi है बहार हो तो सुरक्षित हो.

सब की नजर आपस में मिलती है.

देव - ऐसा क्यों कह रहे हो?

खतरा - मुझे तो बोलने से मतलब है जो जी में आये बोलता हु. अब मतलब तुम निकलते रहो मेरी बातो को न भी निकालो तो मेरा क्या घटा. और फिर ये तो सब hi समझ रहे है न के इस तिलिस्म में जितनी उम्मीद जिन्दा रहनेकी है उससे कही ज्यादा उम्मीद मरने की. तो मैने नया क्या कहा जोट ुम सब ऐसे चौंक रहे हो ?

सभी उसे इग्नोर कर के अंदर आ जाते है. और अंदर आ कर. उन्हें एक अजीब सा सुकून मिलता है. बहोत ठंडक थी वह . कोई बदबू तो थी hi नहीं. वो लोग उस गुफा में चलते hi जा रहे थे.

खतरा – तुम लोगो ने यहाँ आकर अच्छा hi किया मेरा भी थोड़ा मनोरंजन हो जायेगा मए तो कई सालो से अकेला यहाँ बैठा था कभी कोई इस तरफ भटक के आ जाये तो अलग बात है.

रूद्र – क्या यहाँ हमसे पहले भी कोई आया था?

खतरा - है क्यों नहीं कई लोग आये थे. और उनमे से अब कोई भी जिन्दा नहीं है त्रिकाल के जल में फंस के मरे गए.

देव – तुम्हे कैसे पता के वो सभी मरे गए?

खतरा - क्या देवा तुम भी कैसे सवाल करते हो? अगर वो जिन्दा होते तो इस तिलिस्म को अब तक पर कर चुके होते यानि ये तिलिस्म कब का ख़तम हो चुक्का होता और मए आज़ाद होता, और अपनी बीवी के साथ मजे कर रहा होता, तुम सब यहाँ न होते. लेकिन सब जैसे था वैसा hi है मतब वो लोग विफल हुए और विफल होने का मतलब यहाँ सिर्फ एक hi है उनकी मौत.

रूद्र – तेरी बीवी कहा है? लगता है तू उसे बहोत यद् कर रहा है.

खतरा – देख रूद्र तू मेरी बवि में दिलचस्पी न दिखा वार्ना मए नीलम के पास चला जाउगा फिर मत बोलना.

तू उसके पास जा सके तो चला जा रूद्र ने उसे देखते हुए कहा

खतरा – मेरी बीवी इस तिलिस्म के दूसरे दरवाजे पे है. वो वह की पहरेदार है. मए यहाँ का हम तभी मिलेंगे जब ये तिलिस्म टूटेगा. तब तक हम दोनों नहीं मिल सकते.

रूद्र – तब तो तेरे मिलान की रात बस आने hi वाली है. देख देव और पूनम तेरे सामने है हमें स्वर्ण मणि का रास्ता बता दे. ये लोग जा कर ले आएंगे फिर अपन चलते है मस्त हनीमून पे तू अपनी बीवी को ले के चलना मए नीलम को. मजा आएगा फिर तू जितना चाहे अपनी बीवी को छू लेना वो भी खुश होगी तेरे छूने से.

खतरा – मुझे यहाँ मणि का रास्ता बताने के लिए नहीं बिठाया गया न. वार्ना कसम से मए बता hi देता.

देव – तो क्यों बिठाया गया है तुम दोनों को गेट पे.

खतरा आगे बढ़ते हुए. आने वाले को रस्ते दिखने के लिए वार्ना यहाँ के रास्तो की जानकारी भला किसे है? पर पता नहीं क्यों जब भी मए किसी को कोई रास्ता दिखता हु वो मर जाता है. मेरी समझ में तो आज तक नहीं आया ऐसा क्यों ? जब के मए रास्ता तो सही hi बताता हु. बाहर निकल कर ये मए जरूर पूछुंगा त्रिकाल से.

रूद्र – अबे भद्दी शकल के हमें भी तो रास्ता दिखा रहा आहे न तू अगर हम लोग मर गए तो तू अपनी बीवी को कैसे छुएगा? तू जनता है अगर देव और पूनम मर गए तो तेरी जुदाई और लम्बी हो जनि है तेरी बीवी से.

खतरा – जनता हु लेकिन उससे फरक नहीं पड़ता. ये हमारा काम है. जो की हमें करना hi होगा.

रूद्र- खतरा भूख लगी है यार और प्यास भी.

खतरा - अभी इंतजाम कर देता हु. तुम लोगो की सेवा के लिए तो मए यहाँ हु.

उसने जेब से एक अजीब यन्त्र निकला और किसी से बात करने लगा. दूसरी तरफ से कोई औरत की आवाज आयी.

खतरा – है ढिबरी, मेहमान आये है उन्हें भूख लगी है.

ढिबरी – ठीक है मए मिलती हु तुम्हे रस्ते में थोड़ा वक़्त दो.

खतरा – ठीक है हम अभी गुफा में घुसे hi है और झंडे तक पहुंचे है.

ढिबरी - मुझे तुम्हारी जगह की जानकारी है यन्त्र ने बता दिया है तुम आगे आओ सब तैयार मिलेगा.

रूद्र – अबे ये क्या मोबाइल उसे करते हो तुम लोग?

खतरा – ये त्रिकाल का यन्त्र है. कोई मोबाइल नहीं.

देव – ये कब दिया तुम्हे त्रिकाल ने.

जब इस तिलिस्म की रचना हुई थी उसी समय दिया था और अब तक ये सही काम कर रहा है. क्यों?

देव ने पूनम को देखते हुए – त्रिकाल ने सेकड़ो साल पहले hi ये बना दिया था. हमारे यहाँ अब बना है. कितना पीछे है हम लोग.

पूनम मुस्करा दी लेकिन उसकी मुस्कराहट में वो बात नहीं थी देव ये भांप गया लेकिन खामोश रहा क्यों के उसे पता था के यहाँ के हालत को पूनम से बेहतर कोई नहीं समझ पायेगा इसीलिए वो उसे डिस्टुरेब नहीं करता

रूद्र – यार खतरा ये त्रिकाल तो बड़ा जालिम है. उसने तुम्हे तुम्हरी बीवी से दूर कर दिया वो भी अनिश्चित काल के लिए.

खतरा – तुम गलत मत बोलो वो हमारे भगवन है वो सबसे शक्तिशाली है. वैसे ये इसके पीछे भी एक कहानी है गलती मेरी और मेरी बीवी की थी.

रूद्र – कैसे?

खतरा बिना डरे या संकोच के बोलता चला गया……
 
थैंक यू वैरी मच फॉर योर बेऔतिफुल रिव्यु एंड कमैंट्स. बात करे खतरा की तो उसकी बाटे hi नहीं वो खुद एक रहस्य hi है. जो के जितना खुलेगा उतना उलझेगा भी ुझायेगा भी. बहोत इंट्रेस्टिंग लगेगा ये बाँदा आप सब को. और जाहिर है के वो त्रिकाल का सेवक है तो उसको तो मानेगा hi बाकि प्रश्नो के जवाब आपको नेक्स्ट अपडेट में मिल जायेगे ओनेस अगेन थैंक्स बीआरओ नाउ वेट एंड वाच.
 
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