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- Dec 5, 2013
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#83.
तभी उड़नतस्तरी वापस पानी से निकलकर अराका द्वीप की ओर बढ़ गयी। लुफासा अभी भी उसी स्थान पर खड़ा था। लुफासा के देखते ही देखते उड़नतस्तरी वापस पानी में समा गयी।
लुफासा को 'सुप्रीम' का इस तरह से भटकाना अच्छा नहीं लगा था, पर वह मजबूर था। वह मकोटा के विरुद्ध नहीं जा सकता था।
लुफासा अब उदास मन से पैदल ही महल की ओर चल दिया।
चलते-चलते वह सोचता भी जा रहा था-
“पता नहीं जैगन इंसान के मृत शरीर के साथ कौन सा प्रयोग कर रहा है?और यह मान्त्रिक भी सीनोर वासी होकर भी द्वीप के नियमों का उलंघन कर रहे हैं। क्यों ना छिपकर पिरामिड के अंदर जाकर देखा जाये कि आख़िर कौन सा प्रयोग कर रहे हैं वहां पर? पर अगर मान्त्रिक को इस बारे में पता चल गया तो?.... तो फिर क्या होगा?...पर उन्हें पता कैसे चलेगा? मैं स्वयं तो उन्हें बताऊंगा नहीं...और मैं तो कोई भी रूप धारण कर सकता हू, मुझे कोई पहचान कैसे पायेगा?"
यह ख्याल दिमाग में आते ही लुफासा ने फ़िर से बाज का रूप धारण कर लिया और पिरामिड की ओर उड़ चला। काफ़ी देर उड़ने के बाद लुफासा को पिरामिड दिखाई देने लगे।
लुफासा सबसे पहले वाले पिरामिड की छत पर उतर गया। छत पर किसी भी प्रकार का कोई रोशनदान या खिड़की नहीं थी।
“यह क्या? इसमें ऊपर से तो अंदर की ओर जा पाना असंभव है। कोई और रास्ता ढूंढता हू।"
पर चारो ओर से गहन निरिक्षण करने के बाद भी लुफासा को पिरामिड के अंदर घुसने का कोई रास्ता नजर नहीं आया।
तभी लुफासा को पिरामिड की ओर आता हुआ मकोटा दिखाई दिया।
मकोटा को देख लुफासा ने मक्खी का रूप धारण कर लिया।
मकोटा ने पिरामिड के दरवाजे के पास पहुंचकर अपने दोनों तरफ देखा और फ़िर अपने हाथ में पकड़े सर्पदंड को दरवाजे से स्पर्श करा दिया।
पिरामिड का दरवाजा एक गड़गड़ाहट के साथ खुल गया।
मकोटा के साथ लुफासा भी मक्खी बनकर पिरामिड के अंदर प्रवेश कर गया।
अंदर से पिरामिड बहुत ही आधुनिक अंतरिक्ष यान की तरह से दिख रहा था। पिरामिड की दीवारों से तेज रोशनी फूट रही थी।
एक छोटी सी गैलरी के बाद एक बहुत ही विशालकाय कमरा था। जिसे देखकर लुफासा हैरान रह गया क्यों कि उस कमरे में एक लगभग 400-500 फुट ऊंचा, एक आँख और चार हाथो वाला एक दैत्य, धातु की जंजीरों में बंधा था, जिसके शरीर से हजारों पतले-पतले पाइप जुड़े हुए थे। उस दैत्य की 2 सिंगे भी थी।
उस पाइप का दूसरा शिरा छोटे-छोटे काँच के ग्लोब से जुड़ा हुआ था और हर उस ग्लोब में एक इंसानी मृत शरीर दिखाई दे रहा था।
अब उस दैत्य को उन मानव शरीरो से क्या दिया जा रहा था, यह लुफासा की समझ में नहीं आया।
उस पूरे कमरे में असंख्य मशीन लगी हुई थी, जिन पर अजीब तरीके से कुछ संकेत दिखाई दे रहे थे और हज़ारों की संख्या में हरे कीड़े उन मशीनो पर काम कर रहे थे।
मकोटा वहां खड़ा उस दैत्य को देख रहा था।
तभी दूर से एक ‘भेड़िया मानव’ चलता हुआ आया। जिसका सिर भेड़िये का और शरीर इंसान का दिख रहा था।
लुफासा समझ गया कि इसी भेड़िया मानव की मूर्ति स्तंभ के रूप में मकोटा महल के ऊपर लगी थी।
मकोटा के पास आकर उस भेड़िया मानव ने झुककर अभिवादन किया।
“जैगन कब तक होश में आ जायेगा वुल्फा?" मकोटा ने वुल्फा को देखते हुए पूछा।
“कुछ कह नहीं सकता मालिक? मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं।" वुल्फा ने कहा।
तभी वुल्फा की निगाह मकोटा के पास उड़ रही मक्खी पर गयी।
उसने अपने दोनों हाथों को ताली बजाने के अंदाज में मक्खी बने लुफासा पर मार दिया।
एक सेकंड में ही लुफासा मारा गया।
वुल्फा मक्खी को वहीं फेंक मकोटा से बात करने लगा। मक्खी का शरीर तभी धुंआ बनकर हवा में विलीन हो गया।
उधर पिरामिड की छत पर लुफासा इंसानी शरीर में प्रकट हो गया। उसने जोर से एक गहरी साँस ली।
“बेकार में ही एक रूप नष्ट हो गया। अब में कभी मक्खी नहीं बन पाऊंगा।"
लुफासा ने अफसोस प्रकट किया- “पर ये जैगन तो बेहोश है, तो मान्त्रिक ने हमसे झूठ क्यों बोला? वो जैगन को क्यों होश में लाना चाहते हैं? और...और मुझे तो पिरामिड पर भी अधिकार मान्त्रिक का ही लग रहा था। और ये वुल्फा कौन है?......कुछ तो ऐसा जरूर चल रहा है, मान्त्रिक के दिमाग में?....जो अत्यन्त खतरनाक है।.... अब मुझे क्या करना चाहिए?.....मेरे हिसाब से मुझे अभी मानव शरीर का प्रबंध करना चाहिये और सभी पर छिप कर नजर रखनी चाहिए। अब मैं उचित समय आने पर ही कुछ करूगा।"
तभी आसमान में एक जोर की गड़गड़ाहट हुई और इससे पहले कि लुफासा कुछ समझ पाता, एक हेलीकाप्टर जोर की आवाज करता हुआ पिरामिड से कुछ दूरी पर आकर गिरा।
लुफासा बाज का रूप धारण कर उस हेलीकाप्टर की ओर उड़ चला।
लुफासा को कुछ दूरी पर हेलीकाप्टर के अवशेष पड़े दिखायी दिये, जिनसे धुंआ निकल रहा था।
लुफासा ने जमीन पर उतरते ही एक बड़े से शेर का रूप धारण कर लिया और उस हेलीकाप्टर की ओर चल पड़ा।
हेलीकाप्टर पेडों के एक झुरमुट के बीच गिरा पड़ा था। लुफासा ने झांककर उस हेलीकाप्टर में देखा। हेलीकाप्टर में उसका पायलेट मरा हुआ पड़ा था, जो बेचारा इस दुर्घटना का शिकार हो गया था।
लुफासा ने अपने पंजे से पायलेट की सीट बेल्ट को हटाया और उसे अपने मुंह में पकड़कर बाहर निकल गया।
लुफासा, पायलेट के शरीर को मुंह में दबाए पिरामिड की ओर चल दिया।
थोड़ी ही देर में पिरामिड दिखाई देने लगे। कुछ ही देर में लुफासा पिरामिड की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।
लुफासा ने पिरामिड के दरवाजे पर पहुंचकर, पायलेट की लाश वहीं दरवाजे पर रख दी। इसके बाद लुफासा ने एक जोर की दहाड़ मारी और फ़िर पलटकर सीढ़ियों से उतर, अपने महल की ओर चल दिया।
लाश का सच (आज से 6 दिन पहले....)
(3 जनवरी 2002, गुरुवार, 00:15, सुप्रीम)
लुफासा और सनूरा एक छोटी सी बोट से ‘सुप्रीम’ के साथ- साथ चल रहे थे।
बोट में एक हरा कीड़ा भी था।
“पहले मैं ऊपर जाता हूं और पूरे जहाज को देखकर आता हूं। उसके बाद सोचेंगे कि आगे क्या करना है?" लुफासा यह कहकर बाज बनकर सुप्रीम के एक डेक पर पहुंच गया।
देर रात होने की वजह से उस समय उस डेक पर कोई नहीं था। लुफासा ने फ़िर इंसानी आकृति धारण कर ली, जिससे अगर कोई उसे देख ले तो उसे अटपटा ना महसूस हो।
लुफासा दरवाजे के रास्ते से अंदर आ गया। सामने एक गैलरी जा रही थी। लुफासा उस गैलरी में आगे की ओर चल दिया।
3-4 गलियो को पार करने के बाद जैसे ही वह आगे बढ़ने चला, उसे सामने के मोड़ से किसी के आने की आवाज सुनाई दी।
लुफासा तुरंत बगल में मौजूद एक दरवाजे के अंदर चला गया। वह कमरा अंदर से बाकी जहाज की अपेक्षा थोड़ा ठंडा था।
तभी लुफासा के नाक से एक अजीब सी गंध टकरायी, जो अच्छी तो हरिगज ना थी।
लुफासा ने उस गंध की दिशा में देखा। उसे पॉलिथीन में बंद किसी लड़की की लाश दिखाई दी।
सामान्य कंडीशन में तो लुफासा उधर नहीं जाता, पर अभी वह इस जहाज पर लाश ही तो लेने आया था। लुफासा ने पहले कमरे पर एक नजर मारी और सामने दिख रही, खिड़की को खोल दिया।
ठंडी हवा का एक झोंका उसके चेहरे से टकराया।
बाहर दूर-दूर तक अंधेरा दिखाई दे रहा था। उसने तुरंत अपनी कमर पर बंधा एक लाल रंग का कपड़ा उस खिड़की पर पहचान के लिये बांध दिया।
“शायद यह वह कमरा है जहां पर लाशें रखी जाती हैं।" लुफासा बुदबुदाया- “किस्मत से मैं बिल्कुल सही जगह पर पहुंचा हूं। पर सनूरा तो बोट के साथ दूसरी दिशा में है"
फ़िर लुफासा ने वहां मौजूद एक कालीन में लॉरेन की लाश लपेटी और उसे कंधे पर उठाकर जिस दिशा से आया था, उसी दिशा में चल दिया। लुफासा दबे कदमों से चलने की कोशिश कर रहा था।
तभी गैलरी के दूसरे किनारे पर, 2 इंसान दिखाई दिये। लुफासा यह देख रुक गया।
तभी उसे एक कड़कदार आवाज सुनाई दी- “कौन है वहां? रुक जाओ....रुक जाओ, वरना गोली मार दूँगा।"
यह आवाज सुनते ही लुफासा तेजी से एक दिशा की ओर भागा।
उसको भागते देख लारा व सुयश तेजी से उस साये के पीछे भागे।
“मैं कहता हूं रुक जाओ।" लारा के दहाड़ते हुए शब्दो से पूरी गैलरी थर्रा सी गयी- “वरना मैं गोली चला दूँगा।"
लारा की दूसरी धमकी से भी लुफासा की गति में कोई अंतर नहीं आया। वह अभी भी निरंतर भागता जा रहा था।
लुफासा की रफ़्तार इतनी तेज थी कि पीछे से आ रहे लारा को गोली चलाने का भी समय नहीं मिल पा रहा था। तभी लुफासा को सामने सीढ़ियाँ दिखाई दी। वह तेजी से सीढ़ियो को पार कर सामने लगे दरवाजे से बाहर निकल गया।
दरवाजे के दूसरी ओर एक डेक था। वहां पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा सिगरेट पी रहा था, जो कि अल्बर्ट था।
लुफासा को भागते देख अल्बर्ट लुफासा की ओर लपका, जिसकी वजह से अल्बर्ट की सिगरेट वहीं गिर गयी।
पर इससे पहले कि अल्बर्ट लुफासा को पकड़ पाता, लुफासा ने डेक की रैलिंग पर चढ़कर लॉरेन की लाश के साथ ही पानी में छलांग लगा दी।
जारी रहेगा________
तभी उड़नतस्तरी वापस पानी से निकलकर अराका द्वीप की ओर बढ़ गयी। लुफासा अभी भी उसी स्थान पर खड़ा था। लुफासा के देखते ही देखते उड़नतस्तरी वापस पानी में समा गयी।
लुफासा को 'सुप्रीम' का इस तरह से भटकाना अच्छा नहीं लगा था, पर वह मजबूर था। वह मकोटा के विरुद्ध नहीं जा सकता था।
लुफासा अब उदास मन से पैदल ही महल की ओर चल दिया।
चलते-चलते वह सोचता भी जा रहा था-
“पता नहीं जैगन इंसान के मृत शरीर के साथ कौन सा प्रयोग कर रहा है?और यह मान्त्रिक भी सीनोर वासी होकर भी द्वीप के नियमों का उलंघन कर रहे हैं। क्यों ना छिपकर पिरामिड के अंदर जाकर देखा जाये कि आख़िर कौन सा प्रयोग कर रहे हैं वहां पर? पर अगर मान्त्रिक को इस बारे में पता चल गया तो?.... तो फिर क्या होगा?...पर उन्हें पता कैसे चलेगा? मैं स्वयं तो उन्हें बताऊंगा नहीं...और मैं तो कोई भी रूप धारण कर सकता हू, मुझे कोई पहचान कैसे पायेगा?"
यह ख्याल दिमाग में आते ही लुफासा ने फ़िर से बाज का रूप धारण कर लिया और पिरामिड की ओर उड़ चला। काफ़ी देर उड़ने के बाद लुफासा को पिरामिड दिखाई देने लगे।
लुफासा सबसे पहले वाले पिरामिड की छत पर उतर गया। छत पर किसी भी प्रकार का कोई रोशनदान या खिड़की नहीं थी।
“यह क्या? इसमें ऊपर से तो अंदर की ओर जा पाना असंभव है। कोई और रास्ता ढूंढता हू।"
पर चारो ओर से गहन निरिक्षण करने के बाद भी लुफासा को पिरामिड के अंदर घुसने का कोई रास्ता नजर नहीं आया।
तभी लुफासा को पिरामिड की ओर आता हुआ मकोटा दिखाई दिया।
मकोटा को देख लुफासा ने मक्खी का रूप धारण कर लिया।
मकोटा ने पिरामिड के दरवाजे के पास पहुंचकर अपने दोनों तरफ देखा और फ़िर अपने हाथ में पकड़े सर्पदंड को दरवाजे से स्पर्श करा दिया।
पिरामिड का दरवाजा एक गड़गड़ाहट के साथ खुल गया।
मकोटा के साथ लुफासा भी मक्खी बनकर पिरामिड के अंदर प्रवेश कर गया।
अंदर से पिरामिड बहुत ही आधुनिक अंतरिक्ष यान की तरह से दिख रहा था। पिरामिड की दीवारों से तेज रोशनी फूट रही थी।
एक छोटी सी गैलरी के बाद एक बहुत ही विशालकाय कमरा था। जिसे देखकर लुफासा हैरान रह गया क्यों कि उस कमरे में एक लगभग 400-500 फुट ऊंचा, एक आँख और चार हाथो वाला एक दैत्य, धातु की जंजीरों में बंधा था, जिसके शरीर से हजारों पतले-पतले पाइप जुड़े हुए थे। उस दैत्य की 2 सिंगे भी थी।
उस पाइप का दूसरा शिरा छोटे-छोटे काँच के ग्लोब से जुड़ा हुआ था और हर उस ग्लोब में एक इंसानी मृत शरीर दिखाई दे रहा था।
अब उस दैत्य को उन मानव शरीरो से क्या दिया जा रहा था, यह लुफासा की समझ में नहीं आया।
उस पूरे कमरे में असंख्य मशीन लगी हुई थी, जिन पर अजीब तरीके से कुछ संकेत दिखाई दे रहे थे और हज़ारों की संख्या में हरे कीड़े उन मशीनो पर काम कर रहे थे।
मकोटा वहां खड़ा उस दैत्य को देख रहा था।
तभी दूर से एक ‘भेड़िया मानव’ चलता हुआ आया। जिसका सिर भेड़िये का और शरीर इंसान का दिख रहा था।
लुफासा समझ गया कि इसी भेड़िया मानव की मूर्ति स्तंभ के रूप में मकोटा महल के ऊपर लगी थी।
मकोटा के पास आकर उस भेड़िया मानव ने झुककर अभिवादन किया।
“जैगन कब तक होश में आ जायेगा वुल्फा?" मकोटा ने वुल्फा को देखते हुए पूछा।
“कुछ कह नहीं सकता मालिक? मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं।" वुल्फा ने कहा।
तभी वुल्फा की निगाह मकोटा के पास उड़ रही मक्खी पर गयी।
उसने अपने दोनों हाथों को ताली बजाने के अंदाज में मक्खी बने लुफासा पर मार दिया।
एक सेकंड में ही लुफासा मारा गया।
वुल्फा मक्खी को वहीं फेंक मकोटा से बात करने लगा। मक्खी का शरीर तभी धुंआ बनकर हवा में विलीन हो गया।
उधर पिरामिड की छत पर लुफासा इंसानी शरीर में प्रकट हो गया। उसने जोर से एक गहरी साँस ली।
“बेकार में ही एक रूप नष्ट हो गया। अब में कभी मक्खी नहीं बन पाऊंगा।"
लुफासा ने अफसोस प्रकट किया- “पर ये जैगन तो बेहोश है, तो मान्त्रिक ने हमसे झूठ क्यों बोला? वो जैगन को क्यों होश में लाना चाहते हैं? और...और मुझे तो पिरामिड पर भी अधिकार मान्त्रिक का ही लग रहा था। और ये वुल्फा कौन है?......कुछ तो ऐसा जरूर चल रहा है, मान्त्रिक के दिमाग में?....जो अत्यन्त खतरनाक है।.... अब मुझे क्या करना चाहिए?.....मेरे हिसाब से मुझे अभी मानव शरीर का प्रबंध करना चाहिये और सभी पर छिप कर नजर रखनी चाहिए। अब मैं उचित समय आने पर ही कुछ करूगा।"
तभी आसमान में एक जोर की गड़गड़ाहट हुई और इससे पहले कि लुफासा कुछ समझ पाता, एक हेलीकाप्टर जोर की आवाज करता हुआ पिरामिड से कुछ दूरी पर आकर गिरा।
लुफासा बाज का रूप धारण कर उस हेलीकाप्टर की ओर उड़ चला।
लुफासा को कुछ दूरी पर हेलीकाप्टर के अवशेष पड़े दिखायी दिये, जिनसे धुंआ निकल रहा था।
लुफासा ने जमीन पर उतरते ही एक बड़े से शेर का रूप धारण कर लिया और उस हेलीकाप्टर की ओर चल पड़ा।
हेलीकाप्टर पेडों के एक झुरमुट के बीच गिरा पड़ा था। लुफासा ने झांककर उस हेलीकाप्टर में देखा। हेलीकाप्टर में उसका पायलेट मरा हुआ पड़ा था, जो बेचारा इस दुर्घटना का शिकार हो गया था।
लुफासा ने अपने पंजे से पायलेट की सीट बेल्ट को हटाया और उसे अपने मुंह में पकड़कर बाहर निकल गया।
लुफासा, पायलेट के शरीर को मुंह में दबाए पिरामिड की ओर चल दिया।
थोड़ी ही देर में पिरामिड दिखाई देने लगे। कुछ ही देर में लुफासा पिरामिड की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।
लुफासा ने पिरामिड के दरवाजे पर पहुंचकर, पायलेट की लाश वहीं दरवाजे पर रख दी। इसके बाद लुफासा ने एक जोर की दहाड़ मारी और फ़िर पलटकर सीढ़ियों से उतर, अपने महल की ओर चल दिया।
लाश का सच (आज से 6 दिन पहले....)
(3 जनवरी 2002, गुरुवार, 00:15, सुप्रीम)
लुफासा और सनूरा एक छोटी सी बोट से ‘सुप्रीम’ के साथ- साथ चल रहे थे।
बोट में एक हरा कीड़ा भी था।
“पहले मैं ऊपर जाता हूं और पूरे जहाज को देखकर आता हूं। उसके बाद सोचेंगे कि आगे क्या करना है?" लुफासा यह कहकर बाज बनकर सुप्रीम के एक डेक पर पहुंच गया।
देर रात होने की वजह से उस समय उस डेक पर कोई नहीं था। लुफासा ने फ़िर इंसानी आकृति धारण कर ली, जिससे अगर कोई उसे देख ले तो उसे अटपटा ना महसूस हो।
लुफासा दरवाजे के रास्ते से अंदर आ गया। सामने एक गैलरी जा रही थी। लुफासा उस गैलरी में आगे की ओर चल दिया।
3-4 गलियो को पार करने के बाद जैसे ही वह आगे बढ़ने चला, उसे सामने के मोड़ से किसी के आने की आवाज सुनाई दी।
लुफासा तुरंत बगल में मौजूद एक दरवाजे के अंदर चला गया। वह कमरा अंदर से बाकी जहाज की अपेक्षा थोड़ा ठंडा था।
तभी लुफासा के नाक से एक अजीब सी गंध टकरायी, जो अच्छी तो हरिगज ना थी।
लुफासा ने उस गंध की दिशा में देखा। उसे पॉलिथीन में बंद किसी लड़की की लाश दिखाई दी।
सामान्य कंडीशन में तो लुफासा उधर नहीं जाता, पर अभी वह इस जहाज पर लाश ही तो लेने आया था। लुफासा ने पहले कमरे पर एक नजर मारी और सामने दिख रही, खिड़की को खोल दिया।
ठंडी हवा का एक झोंका उसके चेहरे से टकराया।
बाहर दूर-दूर तक अंधेरा दिखाई दे रहा था। उसने तुरंत अपनी कमर पर बंधा एक लाल रंग का कपड़ा उस खिड़की पर पहचान के लिये बांध दिया।
“शायद यह वह कमरा है जहां पर लाशें रखी जाती हैं।" लुफासा बुदबुदाया- “किस्मत से मैं बिल्कुल सही जगह पर पहुंचा हूं। पर सनूरा तो बोट के साथ दूसरी दिशा में है"
फ़िर लुफासा ने वहां मौजूद एक कालीन में लॉरेन की लाश लपेटी और उसे कंधे पर उठाकर जिस दिशा से आया था, उसी दिशा में चल दिया। लुफासा दबे कदमों से चलने की कोशिश कर रहा था।
तभी गैलरी के दूसरे किनारे पर, 2 इंसान दिखाई दिये। लुफासा यह देख रुक गया।
तभी उसे एक कड़कदार आवाज सुनाई दी- “कौन है वहां? रुक जाओ....रुक जाओ, वरना गोली मार दूँगा।"
यह आवाज सुनते ही लुफासा तेजी से एक दिशा की ओर भागा।
उसको भागते देख लारा व सुयश तेजी से उस साये के पीछे भागे।
“मैं कहता हूं रुक जाओ।" लारा के दहाड़ते हुए शब्दो से पूरी गैलरी थर्रा सी गयी- “वरना मैं गोली चला दूँगा।"
लारा की दूसरी धमकी से भी लुफासा की गति में कोई अंतर नहीं आया। वह अभी भी निरंतर भागता जा रहा था।
लुफासा की रफ़्तार इतनी तेज थी कि पीछे से आ रहे लारा को गोली चलाने का भी समय नहीं मिल पा रहा था। तभी लुफासा को सामने सीढ़ियाँ दिखाई दी। वह तेजी से सीढ़ियो को पार कर सामने लगे दरवाजे से बाहर निकल गया।
दरवाजे के दूसरी ओर एक डेक था। वहां पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा सिगरेट पी रहा था, जो कि अल्बर्ट था।
लुफासा को भागते देख अल्बर्ट लुफासा की ओर लपका, जिसकी वजह से अल्बर्ट की सिगरेट वहीं गिर गयी।
पर इससे पहले कि अल्बर्ट लुफासा को पकड़ पाता, लुफासा ने डेक की रैलिंग पर चढ़कर लॉरेन की लाश के साथ ही पानी में छलांग लगा दी।
जारी रहेगा________