Fantasy Story - Rudradev pariwar ka rakshak - Page 5 - SexBaba
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Fantasy Story - Rudradev pariwar ka rakshak

अपडेट. 28

समय ....क्या दी अकेली अकेली पानी निकल रहे हो मुझे बता दिया होता हेहेहे

सोनिया ....हेहेहे गुड़िया मेरी चोर अपनी पंतय देख

समय ने छूट को छुआ तो पूरी गीली थी

दोनों बहेनो ने एक राउंड एक दूसरे की छूट चूस कर पानी निकला पुर सो गई एक प्यार नींद .......

अब आगे.........

वही दिल्ली से दूर त्रिकाल सिंह आवर संबु दोनों जा पहुंचे उदयपुर

जहा पे त्रिकाल सिंह को अपने बेटे भैरव आवर रॉकी बहुत ज्यादा याद आने लगी थे

त्रिकाल सींग बहुत ज्यादा परेशान हो चूका था

संबु ...क्या हुवा गुरुदेव आप विचलित क्यों हो रहे हो

त्रिकाल सिंह ...संबु मुझे यहाँ ऐसा लग रहा है की मेरे दोनों बेटे यही कहि है

संबु ...ये कैसे संभव है गुरुदेव

trikal...ham सत्य कह रहे है

हमें ऐसा लग रहा है की वो दोनों तड़प रहे है तकलीफ में है

हमें ऐसा लग रहा है

संबु ...अगर ऐसा है तो आप उनको अपनी मन्त्रिक ( काली ) सक्तियो से दंड क्यों नै लेते हो

त्रिकाल ...अब जो बे है संबु तुम उचित कह रहे हो हमें यही कहि कोई मसान ( सैमसन भूमि )

देख कर अपनी मन्त्रिक सक्तियो के द्वारा उनको खोजना चाइये

कीच समय पश्चात त्रिकाल आवर संबु एक पुराने मसान में

नज़र आये

त्रिकाल यहाँ पे अपनी काली शक्तियों को प्रबल करने ड़याँ में भेठ गया

वही संबु त्रिकाल की रखवाली करने लगा

कुछ गान्तो की म्हणत से त्रिकाल को पता चल गया के उनके दोनों बेटे मरे जा चुके है

त्रिकाल वही पे फुट फुट के रोने लगा

संबु बे रो रहा था

त्रिकाल जैसा बे था पापी दुराचारी

क्रिमिनल .रेपिस्ट उस सब पाप करम किये थे किन्तु वो अपने दोनों बेटो से बहुत प्रेम करता था

आवर उसे इस बात का अंदेसा तो हो चूका था बहुत पहले हे की कुछ तो बुरा हुवा है उनके साथ में नै तो कब के लौट आते उसके बेटे उसके पास

संबु ....गुरुदेव सम्भालिया खुद को अगर आप ऐसे हे टूट गए तो भैरव आवर रॉकी को मरने वालो को सजा कैसे दे पाएंगे

त्रिकाल सिंह गुस्से में उसका चेहरा पहले से दरिंदो जैसा डराना था अब तो आवर बे बड़ा दरिंदा नज़र आ रहा था

त्रिकाल सिंह ...गुस्से me....nai संबु हम उसके खंडन को हे मिटा देंगे जिन्होंने हमारे बेटो को हमसे अलग कर के उनको तड़पा तड़पा के मारा है

संबु ...ऐसा हे होगा गुरुदेव बस एक बार पता चल जाये तो अपनी इन्हे हाथो से तड़पा तड़पा के मरूंगा मई

त्रिकाल ...नै संबु जिसजिस किसी ने मेरे बेटो को मारा है मई उस से जुड़े हर एक लड़की या ोुरत उनको मई अपनी आवर अपने सिसयो की रखेल बनाऊंगा आवर आदमियों की तड़पा तड़पा के बलि चढ़ाऊंगा

संबु ..उन सब की यही सजा है गुरुदेव

तबे वह पे एक काली से परछाई हवा में परगट होती है

जिसे देख संबु आवर त्रिकाल हाथ जोड़ के परनाम करते है

त्रिकाल एंड संबु ...परनाम गुरुदेव

परछाई ....त्रिकाल हम तुम्हारे गुरु नै है

तुम एक महापापी हो दुराचारी हो हम नै है तुम्हारे गुरु

त्रिकाल ....गुरुदेव आज मई जो बे हु आपकी हे दी हुए मन्त्रिक शिक्षा के कारन हु

परछाई ....नै हमने तुम्हे मन्त्रिक विद्या जरूर शिखाई थी किन्तु हमने कबे बलि यज्ञ नै किया आवर न हे अपने गुरु की चाल ( धोखे ) से हत्या की थी

तुम एक महापापी हो तुमने सक्तियो के लिया हमारी धोखे से हत्या की

तबे तुम्हे हमने सर्फ़ दिया की समय आने पे तुम्हारे कोई बे विद्या काम नै आएगी तुमने जिन काली शक्तियों के लिया हमें मारा वो काली सकतिया तुम्हारे किसी काम नै आएगी

आवर उसकी शुरुआत हो चुकी है

तुम यहाँ खुद नै आये हो तुम्हे लाया गया है

त्रिकाल ...ऐसा कबे नै होगा गुरुदेव त्रिकाल से कोई उसकी सकती नै चीन सकता है

परछाई ...ऐसा तुम्हे लगता है

खेर छोड़ो ये सब वक़्त अपने आँचल में क्या छुपाये है समय आने पे हे पता चलेगा

परछाई .....हमने तुम्हे कबे शिक्षा दी थे तो थोड़ी सहायता कर देते है तुम्हारी

संबु ....कैसे सहायता गुरुदेव

परछाई .....त्रिकाल तुम्हारे दोनों बेटो की हत्या यही पे हुयी थी किन्तु तुम हत्यारे तक आवर अपने दोनों बेटो की पापा आत्मा तक कबे नै पहुंच पाओगे

त्रिकाल ...क्यों गुरुदेव ऐसे कोनसी बढ़ा है जो मुझे उन तक नै पहुंचने दे रहे है

मैंने बहुत बार कोसिस की उन तक पहुंचने की किन्तु न तो वो स्तन आवर न वो इंसान नज़र आ रहा जहा उनकी मरतु हुयी आवर जिस ने उनको मारा

परछाई ....तुम नै पहुंच सकते उन तक उनकी रक्षा स्वयं महादेव करते है तुम क्या पूछो गए वह तक

है तुम्हारे बेटो का अंतिम संस्कार यही पे हुवा था उस पेड के आगे ( एक पेड के आवर इसरत करते हुए )

Trikal....kya महादेव उनकी रक्षा करते है ये संभव नै गुरुदेव

परछाई ...उनके लिया कुछ बे असंभव नै त्रिकाल मेरा मुक्ति डाटा जल्द हे आने वाला है

उसी के हाथो तुम्हारी मरतु होगी

तुम्हारी मरतु का सेक्सी मई रहूँगा

चलता हु जल्द आखरी मुलाकात होगी

वही दिल्ली में सब जल्दी नास्ता वगेरा कर के कल की पार्टी की तयारी कर थे

दिव्या इस वक़्त अपनी माँ सा ( मोहिनी देवी ) के पैरो की मालिश कर रहे थी आवर अपनी माँ से बात बे कर रहे थी

( मोहिनी देवी केवल सुन रहे थे बोल तो केवल दिव्या रहे थी )

दिव्या ...पता है माँ कल हमारे प्रिंस घर आ रहे है

हम उनको पुरे 5साल बाद देख पाएंगे

दिव्या ...माँ क्या प्रिंस हमें पहचान पाएंगे

क्या हम प्रिंस को पहचान पाएंगे

( मोहिनी अपने मन में हमारा देव आ रहा है मेरा बच्चा मेरा राजकुमार आ रहा है

अब तो काफी बड़े हो गया होगा मेरा बच्चा

हम उनको उनकी पसंद का खाना बना कर अपने हाथो से खिलाएंगे

अपने हाथ की आवर देखते हुए

किन्तु हम तो कबे उठ हे नै सकते

....ये सोचते हुए मोहिनी की आँखों से आंसू निकल गए )

दिव्या ...क्या हुवा माँ हमने कितनी बार आपको बोलै है आप रोया मत कीजिए

आपकी आँखों में आंसू अछए नै लगते

( मोहिनी क्या कृ मेरी गुड़िया अपने राजकुमार को गले नै लगा सकती इतनी लचर जो हो गई रोये नै तो क्या करे

अपने बेटे के लिया खाना नै बना सकता न अपने हाथो से खिला सकते है

नै हे कुछ बात कर सकते है

फिर से आंसू निकल जाते है )

दिव्या ...माँ अब से हम रोज प्रिंस के साथ रहना चाहते है उन से बहुत साडी बाते करनी है

क्या वो हमें अब बे प्यार करते है

माँ हम प्रिंस के बिना नै जी पाएंगे प्लेसेस हमें उनसे दूर न करना

( कहते कहते दिव्या की खूबसूरत आंको में आंसू बहने लगे आवर वो रोरी हुए रूम से निकल गई )

((( मोहिनी ...न मेरी बच्ची आपको आपके प्रिंस से कोई दूर नै करेगा

किन्तु हमें दर है जो प्यार आप कर भेटि है अपने भाई से वो प्यार भाई भें वाला नै है

ही एकलिंग जी मेरी गुड़िया की खुशिया आपके आशीर्वाद बिना संभव नै

आशीर्वाद बनाये रखना एकलिंग जी )))

थोड़ा रतन सिंह की आवर बे देख ले

कल जब सब राणा मेंशन से निकले तो उनके चेहरों पे जो सुबह के आते वक़्त मौसी थी अबे वो नै थी

सब साम को काफी लेट 8 बजे तक घर पहुंचे

माया देवी ....जानवी बीटा देखो तो कृषि क्या कर रहे है

उसको बोलना की कल के लिया आपने कपडे पैक करले ले

कल उसको जीजा ( दीदी ..रानी माँ के लिया यहाँ जीजा सब्द प्रयोग किया जा रहा है )

के यहाँ जाना है

अच्छा चलो हम बे साथ में चलते है

जानवी ...जी माँ आपकी लाड़ली को आप हे समझाओ हमसे नै समाज ने वाली वो

माया देवी ...है है जानती हु तुम दोनों माँ बेटी को

खुसी अबे अपने रूम में अपनी किसी दोस्त से बात कर रहे थी

माया देवी ..क्या कर रहे है मेरी गुड़िया रानी

खुसी ..दादी माँ हमने कितनी बार आपसे खा है हम गुड़िया नै है अब

है रानी कह सकती है आप हमें

आपको तो पता है हमारा राजकुमार आने वाला है

माया देवी ...तुम्हे कैसे पता की तुम्हारा राजकुमार आने वाला है हमने तो नै बताया आपको

...जानवी अपनी सास की बात सुन के सर पिट लेती है ....

खुसी ...क्या खा आपने दादी माँ

आप किस राजकुमार की बात कर थे है

आप दोनों के दीमक में क्या प्लान चल रहा है बताओगी हमें

माया देवी ...नै नै खुसी बीटा हम तो आपके हे राजकुमार की बात कर थे है

अबे आपने हे तो बोलै आपका राजकुमार आने वाला है

खुसी ..क्या आप दोनों सच कह रहे है

माया देवी ...है बीटा हम सच कह रहे है

माया देवी ...अच्छा सुनु खुसी बीटा हम आपसे एक ज्यूरी बात करना चाहते है

खुसी ...दादी माँ ऐसे क्या बात है

जानवी devi...khusi आपको कुछ दिन के लिया राणा मेंशन में जाना होगा

कल आपको आपके दादू आवर गुरुवार के साथ जाना है

इस लिया आप अपने पैकिंग कर लीजिये कुछ दिन के कपडे आपकी डेली उसे के जो चीज़े जरीरी है वो

सब पैक करलो

खुसी ....आप किश राणा मेंशन की बात कर रहे है

यहाँ दिल्ली में तो सायद एक हे राणा मेंशन है

उम्म्म्म है याद आया रुद्रप्रताप राणा जी कहि आप R.d ..मेंशन की तो बात नै कर रहे है

( खुसी ने ये सब खुस होती हुए खा जैसे उसको खजाना मिल गया हो ...अब्द न सही बाद में तो मिलेगा हे खजाना )

जानवी देवी ...है हम उसी मेंशन की बात कर रहे है

(बहार खिड़की से रतन सिंह सुन आवर देख रहा था

उसको यकीं नै था की राणा जी सबकुछ जानते हुए खुसी की रक्षा करने वाले है

वो खुसी को खुस हो कर नाचते देख अपनी आँखों में आये आंसू पूछते हुए चल दिया

किन्तु कोई था जो रतन सिंह को काफी टाइम से देख रहा था

यार सस्पेंस नै बदउगा वो रघुवीर था.)/

खुसी ....अह्ह्ह यही याहू ओह्ह्ह याहू यही

माँ आप नै जानती हम कितना खुश है आज

लव यू माय स्वीट माँ

लव यू माय डार्लिंग ग्रंड्मा माँ

माया देवी ...क्यों ऐसा क्यों हो गया ऐसा क्या है वह पे जो आप इतना खुश है

जानवी देवी ...है खुसी ये तो हम बे जानना चाहते है

खुसी ...माँ दादी माँ पहले आप बताओ आप कैसे जानती है उनको आवर वो हमें वह क्यों रुकने देंगे

जानवी देवी ...बस बस मेरी जान संत संत सब बताते है

हम आज वह पर गए थे

जिन राणा जी तुम बात कर रहे हो ..रुद्रप्रताप राणा जी ...वो उदयपुर के राजा है आवर उनके पिता तुम्हारे दादू के दोस्त हुवा करते थे

आवर दूसरी बात वो आपको क्यों रुकने देंगे तो बात एहि की परसो उन्हीके यहाँ पे उनके राजकुमार रुद्रदेव की बर्थडे पार्टी है

वो काफी समय से गए हुए थे वो परसो लौट रहे है

तो आपको इन्विटेशन मिला है आवर आपको कल अपने दादू के साथ जाना है

खुसी ....वाओ माँ क्या खुशखबरी सुनाई है आपने आज तो हम आपको दुबले चुम्बी देंगे आवर दादी डार्लिंग आपको बे

पुसवः पूछ हम्म्म माय स्वीट माँ

पूछ पूछ माय लवली ग्रंड्मा

क्या वो सच में उदयपुर की राजा है आवर दूदू के दोस्त के बेटे है

माया देवी ... है वो सच में उदयपुर के राजा है आवर आपके दादू के दोस्त के बेटे बे है अब आवर नै बस बस मेरी गुड़िया रानी

खुसी ...दादी माँ ...

माया देवी ...ok ok गुड़िया नै तू तो मेरी राजकुमारी है

खुसी ...आपको पता है दादी माँ मेरा उस मेंशन में गुमने का ड्रीम था काफी बार में गई थे उस तरफ लेकिन कबे अंदर नै जा पायी अबे गुमगि बे आवर वही पे जब तक दिल करेगा स्टे बे करुँगी

माया देवी ...ठीक है ठीक है आवर है वह बे तुम्हे तुम्हारे उम्र की आवर बहने बे मेलिगी तो ज्यादा मस्ती नै नै करना

जानवी देवी ..है खुसी आवर कोई शिकायत नै आणि चाइये हम लोग परसो तक आएंगे तुम कल कुछ आवर शॉपिंग कर लेना पार्टी के लिया

अब चलो खाना खो आवर पैकिंग पूरी करो फिर सो जाना है ok

खुसी ...ok माँ एंड दादी

सब सोने चले गए सिवाय रतन सिंह की वो आज रात बे अपनी पुराणी यादे में निकलने वाले थे

.......

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नेक्स्ट अपडेट कल
 
अपडेट 29

जानवी देवी ..है खुसी आवर कोई शिकायत नै आणि चाइये हम लोग परसो तक आएंगे तुम कल कुछ आवर शॉपिंग कर लेना पार्टी के लिया

अब चलो खाना खो आवर पैकिंग पूरी करो फिर सो जाना है ok

खुसी ...ok माँ एंड दादी

सब सोने चले गए सिवाय रतन सिंह की वो आज रात बे अपनी पुराणी यादे में निकलने वाले थे

.......

अब आगे .........

त्रिकाल सिंह आवर संबु के ातक पर्याशो के बाद बे रॉकी आवर भैरव की आत्मा तक नै पहुंच पाए

उदयपुर में संबु ने कुछ लोगो से पूछ टाच की तो तब उनको पता चला

राणा जी की फॅमिली के बारे में की कैसे उनके जुड़वाँ बच्ची हुए कोई बहुत पहुंची हुए ऋषि ने उनकी कुंडली बनाई आवर नामकरण किया

त्रिकाल ...संबु है जिन कुंवारी लड़कियों को खोज रहे है हो न हो ये इसे राणा फॅमिली से है हमें जल्द से जल्द कल सुबह हे दिल्ली पहुंचना है

sambu....gurudev आपके लिया दिल्ली पहुंचना छोटी से बात है

trikal...nai संबु अबे हम अपनी सकती से वह नै जा सकते है

अबे जितना हो सके अपनी सकती काम उसे करना है उचित समय पे उचित वॉर तुम ऐसा करो किसी कार का बंदोबस्त करो हमें कल सैम से पहले पूछना है

संबु ....जैसा आप खो गुरुदेव

........----------------_-----------------_-----------

राणा मेंशन ....

komal...di हमें पार्टी के लेता कुछ बे पसंद नै आ रहा है कल की पार्टी के लिया हमें आवर शॉपिंग करना है

sheetal...di हमें बे कुछ समाज नै आ रहा है

chanchal...divya दी आप हे बताओ कुछ हम कब से आपको पूछ रहे है खा खोई हुयी है आप

निधि ...लगता है दी प्रिंस के सपने देख रहे है दिन में हे

कोमल ...दी क्या निधि सच बोल रहे है

दिव्या... गुड़िया तुम बे न ऐसा हम कुछ नै सोच रहे है

komal..di सच बताओ न क्या सोच रहे हो

दिव्या ...हम न सोच रहे थे प्रिंस के पेय क्या गिफ्ट ले

सोनालिका ....दी हम कुछ बोले

कोमल ....है मेरी जान बोल न क्या कहना है

( गले लगते हुए कोमल ने हल्का सा सोनालिका के लिप्स पे किश कर दिया )

sonalika...haste हुए ...दी आप न ऐसा न किया करो हमारे साथ

हम कह रहे थे क्यों न प्रिंस के लिया को बढ़िया सा कार गिफ्ट करे अपनी पॉकेट मनी से

दिव्या ...गुड़िया आईडिया तो अच्छा है लेकिन पापा ने पहले हे प्रिंस के पेय कार्स का गेराज भर रखा है नई नई मॉडल्स का

chanchal...di बड़े पापा ( राणा जी ) ने प्रिंस के पेय कार्स हे खरीदी क्यों न हम प्रिंस के लेता बाइक खरीद कर गिफ्ट करे

इनको यही पर छोड़ कर चलते है रतन हाउस की आवर

जहा पे इस वक़्त पूरी रतन फॅमिली थी खुसी को छोड़ कर

माया देवी ....गुरु जी हमने जीजा से बात की है वो खुसी को वह रखने को त्यार है किन्तु...

गुरु जी ....हम जानते है आपके किन्तु का मतलब

महारिणी चाहती है की खुसी बिटिया को रतन सिंह ले कर जाये वह पे

माया देवी ...जी गुरुवार आवर ये अबे बे वह जाने को त्यार नै है

गुरु जी कुछ सोचते हुए एक रूम वकी आवर चले गए कुछ समय में आने का बोल कर

(कुछ समय गुरु जी ड़याँ में किसी से टेलीपेथी द्वार बात करते है फिर रूम से निकल कर वापस वही आ जाते है )

गुरु जी ....रतन सिंह अपना हाथ हमें पकड़ो आवर अपनी आँखे बंद कर के सांत भेट जाओ

रतन सिंह ने वैसा हे किया जैसा गुरु देव ने खा

गुरु जी यंग के माद्यम से रतन सिंह के मस्तिक्ष ( दिमाग ) में उनकी बचपन से ले कर के जाधव की अंतिम साँस तक की दृश्य देखते जैसे जैसे दृश्य अंत की आवर जा रहे थे वैसे वैसे रतन सिंह की आँखों में आंसू बाह रहे थे

सब कुछ दिखने के बाद गुरु जी ने रतन सिंह का हाथ चोर दिया

रतन सिंह गुरु जी के चरण पकड़ कर माफी मांगने लगा

गुरु जी ...रतन सिंह हमसे माफी न मानगो तुम किसी आवर के गुनहगार हो वही तुम्हे माफ कर सकती है

तुमने जो पा जो अन्याय उस देवी के साथ किया सजा देना या माफ करना दोनों का अधिकार केवल आवर केवल उस देवी या फिर उसकी सन्तानो का है जिनके सर से तुमने एक पिता का साया चीन था

रतन सिंह ...हम क्या करे गुरुवार हम अपनी भें मरतु के कारन इतने अंडे हो गए आवर उस

वक़्त हमने अपने भाई जैसे दोस्त को गलत मान लिया था

हमने बहुत बड़ा पाप किया है

हम भाबी सा ( लक्समी देवी ) का सामना नै कर सकते है

गुरुवार हमें यही पे भसम कर दो इस पाप से हमें मुक्त कर दो गुरुवार

गुरु जी ...जो पाप किया है उसका प्रायश्चित बे तुम्हे हे करना होगा आवर

ोुस्की सजा बे भुगतनी होगी आपको

सबकी आँखों में आंसू थे लगभग 2 बजे तक खुसी बे अपनी शॉपिंग कर लौट आयी

जानवी ...खुसी त्यार हो जाओ आपको अपने दादू के साथ जाना है

माया देवी ...है बीटा आप त्यार हो जाओ हम बे कल दोपहर तक आ जायेंगे

आपके पास

जल्दी हे खुसी रतन सिंह गुरु जी

रतन हाउस से निकल गए

1 हर के बाद सब लोग राणा मेंशन के सामने थे

दरबान ने गेट खोला गाड़ी आगे बाद गई

खुसी ....वाओ दादू क्या महल है कितना खूबसूरत है

( रतन सिंह अपने चेहरे पे नकली मुस्कान लाटेवहुये )

रतन सिंह ...है खुसी बीटा बहुत खूबसूरती महल है

हो बे क्यों नै आखिर राणा रुद्रप्रताप का महल जो है

खुसी ...है दादू आपको पता है हम कितनी बार यहाँ तक आये बूत अंदर आने की कबे हिमत नै हुए

यहाँ पे गुमना रहना मेरा ड्रीम था जो आज पूरा हो रहा है

कुछ हे समय में सब द्वार पे थे

रानी maa...parnam गुरु जी

परनाम रतन सिंह

आवो खुसी बीटा आप बहार क्यों कड़ी है अंदर आवो

सबने आगे बाद कर रतन सिंह गुरु जी को परनाम किया रानी माँ के कहने पे रेणुका देवी खुसी को बाकि लड़कियों के पास ले गे

...दिलावर सींग राणा जी विजयप्रताप चल दिए मीटिंग रूम में गुरु जी आवर रानी माँ के साथ ...

रूम में आते हे रतन सिंह भाग कर लक्समी देवी के पेअर पकड़ लिया

अबे तक तीनो जो गुस्से में रतन सिंह को देख रहे थे वो मुँह फाडे देख रहे थे की आच्चंक ये हुवा क्या

रतन सिंह ...भाबी सा हमें माफ कर दो हमने बहुत बड़ा पाप किया है

या तो हमें माफ कर दो या फिर अपने हाथो से मार डालो

रानी maa...phele खड़े हो जाओ रतन सिंह

हम आपको माफ तो नै करना चाहते किन्तु आपके दोस्त ने मरते हुए हमसे आपको माफ करने का वचन लिया था इस पेय मई आवर मेरा परिवार

( तीनो की आवर देखते हुए )

आपको माफ करते है

आवर रहे बात सजा की तो सजा के रूप में हम आपसे एक वचन चाहते है

रतन सिंह ...हम वचन देते है भाबी सा आपके एक बार कहने पे रतन सिंह अपने सर उतर के आपके चरणों में रखा देगा

रानी माँ ....हमें आपका सर नै कुछ आवर छाए जो समय आने पे आपको देना होगा यही तमारा वचन होगा

रतन सिंह ...ठीक है भाबी सा

हम आप तीनो से बे हाथ खोद कर माफी मागंते है ..राणा जी विनय ..दिलावर ....

राणा जी ...जब माँ सा ने आपको माफ कर दिया तो हम माँ सा के वचन के विरुद नै जा सकते है

किन्तु एक बात आप हमारे सुन लीजिये अगर फिर से आपने खुश गलत किया माँ सा की चरणों की कसम आपका सर हम खुद अपने हाथो से उतर कर माँ सा चरणों में रखेंगे

इन सब में काफी समय निकल चूका था

(गुरु जी ने टेलीपेथी द्वारा रानी माँ से बात की थी उनसे परमिशन ले थे सचाई रतन सिंह को बॉटने की )

वही लड़किया निकल गई एक बार फिर से शॉपिंग करने इनके ग्रुप में एक मेंबर आवर ज्वाइन हो चूका था मुस्कान उर्फ़ खुसी

सबसे पहले इन्होने एक ब्लैक कलर का बाइक ख़रीदा देव के लिया गिफ्टवके लिया

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( भाई लोगो मॉडल्स कोनसा है पता नै )

बाइक कल पार्टी के लिया गिफ्ट के रूप में भिजवाने का बोल कर निकल गई शॉपिंग के लिया

....वही त्रिकाल सिंह पहुंच चूका था दिल्ली में ....

trikal...sambu अब हम दिल्ली तो पहुंच गए है

अब उनको खा डंडे हमारे पास बलि के लिया ज्यादा समय बे नै बचा है

संबु ...है गुरुदेव हमारे पास केवल तीन दिन है 4 वे दिन तो आपको आखरी बलि देनी होगी 101 वे थे आपको मंचाई सिडिया मिलेगी

trikal...ha इस लिया अपनी पुराने नेटवर्क ( अंडरवर्ल्ड से जुड़ा था के गुंडे ) से प्या करो की ये राणा फॅमिली खा रहती है

संबु ....जी गुरुदेव ...( संबु कुछ लोगो को कॉल करके उनका प्या लगाने का बोल देता है )

sambu....gurudev मई बोल दिया है जल्द हे पता चल जायेगा उनका तब तक हमें बे अपनी आवर से कोसिस करने चाहे

trikal...ha ठीक खा तुमने चलो ढूंढ़ते है उनको

त्रिकाल आवर संबु ढूंढ़ते हुए उस मॉल की तरफ जा पहुंचे त्रिकाल को कुछ बहुत काम मात्रा में पवित्र ऊर्जा महसूस होती है वो उस आवर बढ़ गया संबु के साथ

वही मॉल में लड़किया अपनी मस्ती में शॉपिंग कर रहे थे

खुसी बे कोमल के साथ में शॉपिंग कर रहे थी

वीर को आज फिर कुली बना रखा था

तबे त्रिकाल आवर संबु मॉल में इंटर हुए

दिव्या को अच्चानक से कुछ भेचेनि होने लगी जैसे कुछ गलत होने वाला हो यहाँ वैसा हे हॉल बलियो का था वीर सोनालिक आवर निधि को छोड़ कर के

दिव्या ....सबको ...जितनी शॉपिंग हो गयी है उतनी माफी है हमें अब चलना चाइये

वीर की आवर इसरत करते हुए फ़ौरन चलो यहाँ से

वीर समाज गया की कुछ गड़बड़ है वो सबको साथ ले निकल रहा था आवर सामने से त्रिकाल आवर संबु आ रहे थे

त्रिकाल जब कोमल के बराबर से निकल रहा था तब हडबड़ीबमे गलती से कोमल के सरीर से टच हो गया त्रिकाल का सरीर

त्रिकाल के मुँह से ेल बहुत बयनाक चीख निकल गई त्रिकाल उदय हुयवा डीआर से जा टकराया

संबु दौड़ कर

sambu....kya हुवा गुरुदेव आपकी किसने ऐसे हालत कर दी

त्रिकाल...( कराहते हुए ) आआआह्ह्ह्ह संबु बहुत जोर का झटका लगा

बहुत दर्द हो रहा हॉस्पिटल ले कर चल मुझे

sambu....kya खा आपने जतका लगा परन्तु कैसे आवर किश से

त्रिकाल ..गुस्से में ....तेरी माँ के भोसड़े में लैंड दाल दिया था मादरचो उठा मुझे

यहाँ साली गांड मर ले आवर हमें पता हे नै चला लैंड किसका था

अह्ह्ह मज़ा माअररर्र डाला रे मादरचोद ने

दोनों वह से निकल गए बहार

बहार गाड़ी में दाल कर संबु त्रिकाल को हॉस्पिटल की आवर ले जा रहा था की

त्रिकाल ...मदर छोड़ खा ले जा रहा है

संबु ...गुरुदेव हॉस्पिटल में आवर खा

त्रिकाल ...गुस्से में ारी मादरचोद हॉस्पिटल नै मसान में ले चल वही ठीक हो सकता hi में

इनको जाने देते है मसान में है चलते लड़कियों की आवर

मॉल से निकलने के कुछ अदा पौने जानते बाद लड़किया मेंशन में पहुंची

कोमल ...दी आप मेरा साथ आवो ज्यूरी बात करनी है

चंचल शीतल आवर खुसी ...दी हमें बे कुछ बात करने है

दिव्या ...तुम सब आवो मेरा साथ में

सब दिव्या के रूम में

खुसी ...दिव्या से ...दी मॉल में क्या हो गया था आपको

divya...kuch बे तो नै गुड़िया .

खुसी ...दी झूट न बोलो आप मन की हम आज पहेली बार मिले है किन्तु इतना तो मई समिति हु आपको

मुझे बे वह पे कुछ वाज़िब सा महसूस हुवा था जैसे कुछ बुरा होने वाला हो

komal...khusi तुम्हे बे

चंचल शीतल ....तुम्हे बे से क्या मतलब आपको बे हुवा था क्या कोमल दी ...

दिव्या ...सब संत हो जाओ ..है मुझे बे ऐसा हे कुछ महसूस हुवा था जैसे हमारे साथ कुछ गलत होने वाला हो इसी लिया मैंने जल्दी चलने को बोलै तुम सब को

komal...di आपको एक बात बतानी थी

दिव्या ...बोल न मेरी गुड़िया क्या बात है

komal...di जब हम बहार आ रहे थी तब वो जो डरावना सा आदमी था न जो डीआर से टकड़ा कर जोर जोर से चीला रहा था

वो न मुझसे टच हुवा थे मुझे एक बार अजीब से तस्वीर से देखि आवर ऐसा लगा जैसे मुज में बिजली आवर आवर उस आदमी को उठा के दूर मैंने हे देखा हो ऐसा लगा मुझे

divya..strang मुझे बे उस आदमी को कुछ अच्छी फीलिंग नै आ रहे थी मन कर रहा था उसको वही पे जला कर भसम कर दू

कोमल ...दी एक आवर बार जब ये सब हुवा तो एक बार मेरी सीने में ( दिल के ऊपर हाथ रख कर )

यहाँ बे दर्द हुवा आवर हल्का सा करंट बे लगा

ऐसे हे इनकी कुछ आवर बाते होती रहे

फिर ये लोग सोने जाने लगी तो रानी माँ ने ेंजो एक अलग रूम में सोने के लिया बोलै

सबको अजीब लगा किन्तु किसी ने कुछ नै बोलै

निधि दिव्या कोमल शीतल चंचल सोनालिका खुसी

7 लड़किया

आवर 4 बाद ये तो न इंसाफ़ी है भाई

1 ...बीएड ...दिव्या कोमल साथ में

2 ...बीएड ...चंचल शीतल साथ में

3 ..बीएड ....निधि अकेली

4 ..बीएड ...खुसी आवर सोनालिका एक साथ

ऐसा सोने के लिया गुरु जी ने रानी माँ से खा था

इनके सोने के बाद गुरु जी ने बहार से रूम बंद कर के बहार हे गेट पे स्वस्तिक चक्र बना कर के उसमे भेट कर ड़याँ में लीं हो गए ......

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कीप सपोर्ट माय स्टोरी

नेक्स्ट अपडेट

रूद्र आवर देव का मिलान ( विथ फुल पावर )
 
अपडेट ...30

1 ...बीएड ...दिव्या कोमल साथ में

2 ...बीएड ...चंचल शीतल साथ में

3 ..बीएड ....निधि अकेली

4 ..बीएड ...खुसी आवर सोनालिका एक साथ

ऐसा सोने के लिया गुरु जी ने रानी माँ से खा था

इनके सोने के बाद गुरु जी ने बहार से रूम बंद कर के बहार हे गेट पे स्वस्तिक चक्र बना कर के उसमे भेट कर ड़याँ में लीं हो गए ......

अब आगे.........}}}

वही दूर दिल्ली के एक कोने में त्रिकाल आवर संबु रात के इस अंदर में एक जलती हुयी चिटा के सामने बेथ कर त्रिकाल खुद को ठीक कर रहा था तो वही संबु

त्रिकाल की निगरानी कर रहा था

रात के कुछ 11 बजे तक त्रिकाल पूरी तरह से ठीक हो गया

संबु ...गुरुदेव अब आपको को कैसा लग रहा है

Trikaal...sambu अब जा कर कुछ अच्छा लग रहा है पता नै कैसे आवर क्यों मुझे इतना तेज़ जतका लगा मनो में हज़ारी नंगी तारो में बहती हुयी बिजली को छू दिया हो ऐसा लगा आवर इतना तेज़ दर्द पूछो मत

संबु ...गुरुदेव ये कैसे संभव है

trikal..ye सब वह मॉल में उपस्थित पवित्र ऊर्जा के कारन हुआ है सायद मैंने आकाश तत्वा वाली लड़की को छू लिया था गलती से

अब उस भीड़ में कोण थी वो ये कैसे पता कृ संबु आवर समय बे निकल रहा आज का दिन बे ख़तम हुवा अब हमारे पास केवल 3 दिन है 3सरे रात बलि चांदनी होगी नै तो मेरा बलि यज्ञ खंडित हो जायेगा

संबु ...है गुरुदेव कुछ बे करना है वो जल्दी करना होगा

हमारे पुराने आदमी का फ़ोन आया था हमें उस राणा की फॅमिली खा रहती है पता चल गया है

trikal...sambu फिर जल्दी चल ( कुछ सोचते हुए )

संबु जल्दी चलो अगर वह वही लड़किया हुयी जिनकी हमें तलाश है तो आज हे पता चल जायेगा आजके भरममुहारत में सभी गरजा नक्षत्र सूर्य उदय से पहले एक रेखा में होंगे

संबु ...उस से क्या होगा गुरुदेव

Trikaal...are मूरख अबे नक्शत्र एक दिशा में होने पे पांच तत्वों को सकती आवर बाद जाती है

अगर आज काली अमावश्या होती तो मेरी सकती बे कई गुना बाद जाती जल्दी चाट

इनको राणा मेंशन की आवर आने देते है

हम चलते है दिव्या तलवार की आवर अबे रात्रि के लगभग 2 बज रहे है

गुफा से गुरुदेव ने रक्षा कवच हटा दिया था क्युकी जो गुफा पिछले 5 सालो से अदृस्य सकती से बंदी हुयी थी वो आज मुक्त हो चुकी थी

किन्तु अबे बे कोई इसके अंदर बहार नै हो सकता

अंदर एक पत्थर में एक दिव्या तलवार फांसी हुयी थी

तलवार के चारो आवर 7 रंग के चमकते हुए स्टोन गम रहे थे

इस वक़्त तलवार .तलवार न हो कर के मनो कोई प्रकाश (रौशनी ) का स्टोरोट हो

वही पास में एक कुटिया ( झोपडी ) बानी हुयी थे

आवर एक साफ पानी का जर्ना बाह रहा था उस झरने में इस वक़्त एक 18 '20 साल का हलक जैसे सॉलिड बॉडी का मालिक पूरा नंगन ( नुदे ) हो कर भ रहा था पास में एक 70 .75 ईयर के साडू बाबा लड़के के बगवा कपडे लिया खड़े थे

लड़का भ कर बहार निकला

शादू बाबा ...देव पुत्र ये वस्त्र दर्जन कर हसन के पास पहुँचो हम अबे आये स्नान करके

( हो ये सॉलिड बॉडी वाला तो अपना हीरो रुद्रदेव निकला )

देव ...जी गुरुदेव ....ओह मतलब शादू बाबा है गुरुदेव (आर्य)

गुरुदेव स्नान करने चले गए जल्दी हे सब कार्य निपटा कर गुरुदेव ने हवन यज्ञ आरम्भ किया उनकी शय्या गुरुमाता कर रहे थी

1 से 1:30 .जानते चले इस यज्ञ में वो दिव्या तलवार आवर आदिक चमकने लगे आवर डेरी डेरी रुद्रदेव में से रूद्र बहार आने की कोसिस करने लगा

कुछ समय बाद हसन पूर्ण हुवा

गुरुदेव ...रुद्रदेव यज्ञ पूर्ण हुवा अब तुम वो दिव्या तलवार प्राप्त कर सकते हो किन्तु ...

रुद्रदेव ...किन्तु क्या गुरुदेव

गुरुदेव ..पहले तुम दोनों को एक होना होगा न अकेला देव आवर न अकेला रूद्र तलवार प्राप्त कर सकता है

तुम दोनों का सरीर एक है आवर आत्मा 2

सरीर के साथ साथ आत्मा बे एक होनी होगी थे ये दिव्या तलवार आवर उसकी सकती दर्जन कर पाओगे

देव ...गुरुदेव मई त्यार हु किन्तु रूद्र नै मन रहा है

गुरुदेव ..ये समय नै इन बातो का वो सुबह समय निकट हाबे

या तो दोनों मन वचन से एक हो जाओ या फॉर इस दिव्या तलवार को भूल जाओ

rudra...uchit है गुरुदेव

मई त्यार हु

देव ...मई बे त्यार हु गुरुदेव

गुरुदेव ..रूद्र आवर देव तुम्हे ये मंत्र दोहराना है ताकि महादेव पर्सन हो तुम दोनों को एक होने की सकती दे

दोनों मंत्र उच्चारण करने लगे

वही ब्रमांड में महादेव अपने योग में लीं थे

आवर उनके सीने से एक ऊर्जा निकलने लगे

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जल्दी हे वो ऊर्जा महादेव के सीने से निकल कर परतविलोक की आवर बहुत तेज़ी से निकल गई

रूद्र एंड देव अबे मंत्र जप कर रहे थे के एक बहुत तेज़ रौशनी देव से राम्रै आवर उसके सरीर में समां गई रूद्र जो परछाई बन के खड़ा था वो देव के सरीर में समां गया

उसी के साथ देव के सरीर में 6 आवर रोस्निया समां गई

कुछ समय रुद्रदेव ( रद) तड़पा रहा फिर संत हो गया

अब रद को बहुत आदिक ऊर्जा महसूस हो रहे थी

गुरुदेव ...रुद्रप्रताप अब समय आ गया है इस दिव्या तलवार को दर्जन करने का इसमें बहुत तकलीफ होगी किन्तु तलवार से अपना हाथ नै हटाना आवर नै अपना विश्वास टूटने देने

खुद को सब बंदनों से आजाद कार्डो अपनी सकती को बहने दो

रुद्रदेव ...जो अवघ्या गुरुदेव

आवर दिव्या तलवार को परनाम कर किया

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आगे बाद कर रद ने दिव्या तलवार को पकड़ा

( यहाँ से रुद्रदेव की मघा रद ..या फिर ..मई ..लिखूंगा )

जैसे हे मैंने दिव्या तलवार को पकड़ा मुझे बहुत जोरो से जटके लगने लगे साथ में पूरी बॉडी में दर्द बे होने लगा

मुझे बहुत तकलीफ हो रहे थी किन्तु मैंने अपनी हिमत नै टूटने दी मुझे गुरुदेव की बाते याद थी की विश्वाश नै टूटने देना

कुछ समय बाद तलवार डेरी डेरी पत्थर से निकल गई उसी के साथ में जो 7 स्टोन थे वो मेरी बॉडी में समां गई

इस वक़्त मेरी बॉडी कुछ ऐसे नज़र आ रहे थी

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कुछ समय बाद मेरी बॉडी नार्मल होने लगे

तबे मेरी बॉडी से 7 रोस्निया निकली आवर गुफा से बहार निकल गई

मई जब गुरुदेव के सामने गया तब गुरुदेव ने मुझे ड़याँ में बैठने को बोलै

मई ड़याँ में बेथ गया

अब चलते है ब्रमांड में जहा कुछ समय पहले एक अद्भुत घटना गति थी

थर्ड पार्टी के बेहत....

जब रुद्रदेव ने तलवार को छुआ तब यहाँ से बहुत दूर ा आकाशगंगा में उथल पुथल मच गई

एक साथ में 7 प्लेनेट में मन कोई भूचाल आ गया हो

( 1 ..सत्यलोक ....2 सौपानलोक 3....paralok....4....jinlok...5..devillok..6...wolflok..7...vemplok.....

फुल इंट्रो समय आने पे )

इन 7 लोक में से 4 ( 1 से 4. लोक ) लोक बहुत खूबसूरत थे उनमे खुसिया मनाई जा रहे थी

वही 5से 7 लोक में इस हलचल से निकट भव्य में सबको अपनी मरतु नज़र आ रहे थी

सबसे ज्यादा तो डेविल लोक के किंग ( डेविल किंग ) को अपनी पीड़ा दायक मरतु नज़र आ रहे थी

रूद्र के साथ साथ डेविल ने देव की ऊर्जा को बे महसूस किया था किन्तु उसको पता नै ये दो नै एक हे ऊर्जा है ..एक संत ...दूसरी उग्र ( करोड़ ) ऊर्जा है

चलिए है चलते है दूसरी आवर

राणा मेंशन में आवर देखते है कुछ समय पहले वह क्या हुवा था ..........

दोस्तों अपडेट उम्मीद से बड़ा है तो उसको नेक्स्ट अपडेट में देता हु

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स

शेयर योर सुग्गेस्टियन्स

कीप सपोर्ट माय स्टोरी

एंड थे इम्मोर्टल भाई इंडेक्स अपडेट करने के लिया दिल से सुखरिया
 
अपडेट 31

रूद्र के साथ साथ डेविल ने देव की ऊर्जा को बे महसूस किया था किन्तु उसको पता नै ये दो नै एक हे ऊर्जा है ..एक संत ...दूसरी उग्र ( करोड़ ) ऊर्जा है

चलिए है चलते है दूसरी आवर

राणा मेंशन में आवर देखते है कुछ समय पहले वह क्या हुवा था ..........

अब आगे.........

राणा मेंशन....

अबे सब लड़किया सोई हे थे की निधि को चोर कर बाकि सब के सरीर में कुछ हलचल होने लगे थे

ये सब बहार बैठे गुरु जी को बे पता चल गया था

गुरु जी उनकी ऊर्जा को महसूस कर प् रहे थे

मेंशन से कुछ दूर पेड के पिच्य खड़ा त्रिकाल को बे ये ऊर्जा महसूस हो रहे थे

वो छह कर बे इस ऊर्जा के केंद्र को न देख प् रहा था आवर न मेंशन के अंदर जा प् रहा था

( कुछ वक़्त पहले त्रिकाल ा आवर संबु ने कोसिस की अंदर जाने की लईकिन गुरुदेव द्वारा b'nai गई अदृश्य कवच को त्रिकाल पर नै कर पाया )

जैसे जैसे समय गुजर रहा था वैसे वैसे हे

उन 6 लड़कियों की सरीर के चारो आवर अलग अलग रौशनी की part से बनने लगी थी

( देव .आवर गुरुदेव का हवन जैसे जैसे अपने अंतिम चरण में जा रहा था यहाँ पे ठीक उसी वक़त ऐसा हो रहा था)

कुछ समय बाद जब ये प्रक्रिया पूरी हुए थो

दिव्या के सीने से एक रेड स्टोन निकला ( अग्नि तत्वा )/

कोमल के सीने सफ़ेद एंड नीला मिक्स कलर स्टोन निकला ( आकाश तत्वा)/

चंचल से पारदर्शी स्टोन

आवर शीतल से नीला स्टोन निकला

सोनालिका से पुरे विगत एनर्जी

मुस्कान से मिक्स सप्तरंगी एनर्जी

फिर सं स्टोन आवर एनर्जी रूम में चाट से निकल कर देव की आवर भाड़ गेन

भर गुरु जी आवर देय से चुप के त्रिकाल हे सब देख रहे थे

त्रिकाल की इस समय जो ऊर्जा की ताकत देख के मनो आगे आवर पिच्य से पिली आवर गीली जो राखी थी

संबु को ज्यादा फरक नै पता क्युकी संबु अबे तक पूरी तरह से काली सक्तियो का गुलाम नै बना तहत है थोड़ी बहुत गब्रहत जरूर संबु no हुयी थी

कुछ सुबह के 4 बेब के लगभग त्रिकाल की एक बार फॉर से फैट गई जब वही एनर्जी कई गुना आदिक सक्तिसाली फिर से उस आवर आती हुयी महसूस हुयी

टिकल बे वह से सबमु को ले कर गायब होना हे बेहतर समझा

7 रोशनी 7 लड़कियों के सरीर में फिर से समां गई

निधि को तत्वा मिला सो था परतवि तत्वा ( जी है रीडर्स निधि को रद द्वारा 5व तत्वा मिला तहत जो की रद को जनम से मिला था )

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दिव्या कुछ ऐसे नज़र अस थे थी

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शीतल कुछ वाइज

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कोमल

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चंचल

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सोनालिका

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मुस्कान कुछ ऐसे

इनको यही पे चोर कर हम चलते है रद की आवर

सुबह के 7 बजे गुफा में इस वक़्त

गुरुदेव

गुरु माँ

रुद्रदेव (रद )

तीनो अबे कुटिया के बहार आसान बिछा के नीचये बैठे हुए थे

गुरुदेव ...रद ान समय अस गया तुम्हारा अपने परिवार में फिर से शामिल होने का

रद ....जनता हु गुरुदेव बरसो बाद में अपने परिवार से मिलूंगा

gurumaa...dev पुत्र अपने परिवार से मिलने के पश्चात अपनी गुरुमा को तो नै भूल जाओगे न

Rd...nai गुरुमा ऐसा संभव नै आप गुरु होने के साथ साथ मेरिट माता बे है

आपने मुझे जनम न दिया किन्तु आप मेरे लिया मेरी जनम देने वाक माँ से काम बे नै जो

आपका स्थान मेरी असली माँ से ज्यादा नै तो उनसे काम बे नै है

गुरुमा ने आगे बाद कर रद को रोटी हुए गले लगा लिया

Gurumaa....tum नै जानते पुत्र मुझे हमेशा अपना निसंतान होने का ढक होरा था लईकिन जब से तुमने पहले बार मुझे गुरुमा के स्थान पे माँ बोलै उसी समय से तुम मेरा पुत्र बन गए फिर मुझे कबे दुख नै हुवा की मेरी कोई संतान नै

रद ...माँ आप ऐसा न बोलो मई हु न आपका बीटा आपका रद

gurudev...Rd अब हमारी बात ड़याँ से सुनो

Rd...ji गुरुदेव

gurudev....apne परिवार में जाने से पुरवा तुम्हे रूद्र की सक्तियो का त्याग करना होगा

gurumaa....ye आप क्या कह रहे है स्वामी क्या ऐसा करना उचित होगा

गुरुदेव ...है देवी ये उचित होगा अगर हमने ऐसा नै किया तो रद को अपनी सकतिया का महत्व नै समाज आएगा आवर अपनी सकती का दुरूपयोग कर बैठेगा

जो रद के लिया उचित नै

रद की सकतिया पवित्र सकती है जिनका दुरूपयोग करने पे ये रद से त्रिदेवो के द्वारा चीन ले जाएगी जो हम ऐसा नै चाहते है

gurudev...RD के पास रूद्र की आत्मिक ( आत्मा से जुडी ) सकतिया होगी किन्तु बाकि की जो रूद्र की सकती है उसको त्याग कर कठिन रास्तो पे चल कर फिर से प्राप्त करना होगा

आसानी से मिली हुयी कोई चीज़ हो या वरदान इंसान उसकी क़द्र नै करता है आवर गलत प्रयोग करता है जो रद के लिया तो कबे बे उचित नै

रद ...जैसा आप कहे गुरुदेव मई त्यार हु

गुरुदेव आगे बाद कर रद के सर पे हाथ रख कुछ मंत्र पड़ते है तो गुरुदेव के हाथो में रूद्र की सकती ऊर्जा रूप में आ जाती है

गुरुदेव उन्हें आकाश की आवर चोर देते है

जैसे हे रूद्र की सकती परतविलोक से निकलती है परतवि के चारो आवर जो सेफ्टी शील्ड ( काली सक्तियो को रोकने के लिया एक शील्ड थी ) टूट जाती है

आवर रूद्र की सकतिया 5 भागो में बात जाती है

(ये 5 भाग सक्तियो के किश लोक में जाते है आगे के अपडेट में खुलासा होगा ...थोड़ा सुसेपेंस बे होना चाइये )

गुरुदेव ..रद तुम अपनी सकतिया किसी आवर के सामने जितना हो पाए काम हे उसे में लिया

अब महागुरु द्वारा पार्थवी पे लगाई हुयी सेफ्टी शील्ड टूट चुकी है तो तुम्हे सावधानी से आने वाले खतरों का सामना करना होगा

अपनी सक्तियो का खुद के लिया जब तक बहुत जरूरी न हो उसे मत कर आवर किसी को बेवजा अपनी सकती से परेशान न करना

Rd...jaisa आप खो गुरुदेव वैसा हे होगा

गुरुदेव ...रद अब चलने की तयारी करो आज आपके घर लौटने की खुसी में आपकी रानी माँ ने बहुत बड़ा समारोह रखा है

रद ...गुरुदेव आप चलो हम बाद में आते है हम कुछ समय यहाँ पे आखरी बार बीतने चाहते है एकांत में

गुरुदेव ...उचित है किन्तु ज्यादा समय न लेना

आपको पता है आपकी माँ सा का....

रद ...है हम जानते है गुरुदेव

गुरुमा ...जल्दी आना पुत्र

Rd...ji माँ हम जल्दी आ जायेंगे

गुरुदेव आवर गुरुमा वह से गायब हो जा पहुंचे सीधा राणा मेंशन के मुख्या द्वार पे

अब थोड़ा पिच्य चलते है की सुबह जब 7 लड़किया उठी तब क्या हुवा

सुबह में जब सब 7 बजे उठी तब उनको बहुत अच्छा फइलल हो रहा था मनो किसी ने उनकी सोई हुए ऊर्जा जगा दी हो

(आवर ये सच बे था )

सोनालिका ....दी आज तो बहुत अच्छा लग रहा इतनी अच्छी नींद तो मुझे कबे बे नै आई थी

कोमल अंगड़ाई लेते हुए

कोमल. है मेरी जान मुझे बे बहुत अच्छी नींद आयी तू ऐसा करना आज रात मेरा साथ में सोना ुम्मम्हा ( सोनालिका को किश करते हुए )

चंचल ..कोमल दी कबे ऐसा प्यार हमें तो नै किया आपने

कोमल ...आअह्ह्ह मेरी चंचु को बे प्यार चाइये आ न मेरी जान उम्म्म्म उम्म्म्म अह्ह्ह तू बड़ी टेस्टी है चंचु

Chanchal...chi ची दी आपने मेरी पूरी गाल गीली करदी

ऐसे हे सब उत्साह से भरपूर उनकी मॉर्निग की मस्ती मज़ाक सुरु हो गई

सब फ्रेश हो कर नास्ता वगेरा करके आज सैम की पार्टी के लिया त्यार करने आये बोटसाइन के साथ में त्यार होने चली

एक रूम में गुरु जी आवर रानी माँ

रानी माँ ...गुरु जी सब ठीक से तो हो गया न मेरा बच्चा तो ठीक है न

गुरु जी ...है लक्समी देवी एकलिंग जज की कारण से सब उचित आवर सुबह समय पे सब की सकतिया जागृत हो गई आवर आपका पुत्र बे पूर्ण रूप से ठीक है

गुरुदेव का सन्देश आया था की वो यहाँ के लिया निकलने वाले है

साथ में गुरुमा बे आ रहे है

रानी माँ ...ये तो बहुत खुसी की बात है गुरु जी

हम अबे उनके स्वागत की तयारी करते है

गुरु जी ...लक्समी देवी अबे आपका पुत्र उनके सात नै आ रहा

राणा माँ ...क्या किन्तु क्यों साथ नै आ रहा है गुरु जज

कहि वो हमसे रस्ट तो नै है

ये अबे बात कर हे रहे थे की गुरुदेव आवर गुरु माँ रूम में प्रवेश करते है साथ में राणा जी बे थे

गुरुदेव ...ऐसा कुछ बे नै है लक्समी देवी जैसा आप सोच रहे है

रद कुछ समय एकांत में रहना चाहता था

रानी माँ ...परनाम गुरु देव परनाम गुरुमा

गुरुदेव gurumaa...yasasvi भवा पुत्री

गुरुमा ...आप चिंतित न हो लक्समी देवी वो रद बीटा साम तक आ जायेगा

सब का बातो का सिलसिला चलता रहा साम 7 बजे से पार्टी सुरु हो गयी थी जैसे जैस पार्टी का माहौल खुशनुमा हो रहा था वैसे वैसे

दिव्या निधि कोमल चंचल शीतल सोनालिका का मन में एक अजीब से खुसी उत्पन हो रहे थी

वही खुसी को ऐसा लगने लगा जैसे आज उसकी बरसो की सबसे बड़ी मुराद सबसे बड़ी खुसी पूरी होने वाली है

रद बे निकल चूका था घर के लिया

रद सीधा अपने माँ सा के रूम में पहुंचा उनकी हालत देख रद की आँखों से अपनी माँ सा इस हल में देख कर अपनी माँ का हाथ पकड़ कर रोने लगा कुछ देर रोने के बाद

अपनी हीलिंग पावर से ठीक कर दिया

.............

.......

....

...............

...........

बहार सब रद के लिया परेशान थे की वो अबे तक आया क्यों नै सब मुख्या द्वार किबोर देख रहे थे

गुरुदेव ..गुरुमा ...गुरु जी मुस्कुरा रहे थे अपने मन हे मन ...क्युकी देव के साथ ये तीनो में मिल गए थे

ठीक 8 बजे मेंशन के अंदर से एक डैम हीरो स्टाइल में सुते बूट में एक खूबसूरत 6 फिट 3 इंच छोड़ी छाती मस्कुलर बॉडी वाला हीरो निकला

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रद ...रुद्रदेव सिंह राणा ...

सब के सब मुँह फाडे देख रहे थे पार्टी में जितने बे क्या जवान क्या सदी सुधा सब इस एक बन्दे कक आँखे फाडे देख रहे थे ...........
 
ही फ्रेंड्स मैंने एक आवर स्टोरी स्टार्ट की

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इन्सेस्ट - दिल का राजा ( इन्सेस्ट मैजिक अडुल्टेरी )

ही फ्रेंड्स ये मेरा दूसरा स्टोरी है जो मैंने स्टार्ट किया है इन्सेस्ट .मैजिक .अडुल्टेरी ...है थोड़ा बहुत सुसेपेंस बे है ( स्टोरी लिकने ंव नया नया हु तो ज्यादा सुसेपेंस की उम्मीद न रखना) आप सबके सपोर्ट की जरूरत रहेगी दोस्तों आप सबका छोटा भाई कल्याणसूर्य...

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अपडेट. 32

ठीक 8 बजे मेंशन के अंदर से एक डैम हीरो स्टाइल में सुते बूट में एक खूबसूरत 6 फिट 3 इंच छोड़ी छाती मस्कुलर बॉडी वाला हीरो निकला

रद ...रुद्रदेव सिंह राणा ...

सब के सब मुँह फाडे देख रहे थे पार्टी में जितने बे क्या जवान क्या सदी सुधा सब इस एक बन्दे कक आँखे फाडे देख रहे थे ...........

अब आगे .......

सब रद को देख रहे लड़किया अबे बे सब गेट की आवर देख रहे थी

रद ने जैसे हे पार्टी हॉल में एंट्री की लड़कियों की दिल की धड़कन अचानक से बाद गई

तबे रानी माँ ने किसी की नज़रो का पीछा किया जो नज़रे जब से रद हॉल में आया था तब से उसी पे तिकी हुयी थी

रानी माँ ने जैसे हे रद को देखा

अचानक से रानी माँ के चेहरे पे चमक आ गई

आवर उनके मुँह से निकल गया मेरा देव आ गया

कोमल जो पास में कड़ी थी उस ने रानी माँ की आवाज़ सुन उनकी नज़रो का पीछा किया

कोमल ने जैसे हे देव को देखा तो मनो उसकी एक पल के लिया धड़कन हे रुक गई

कोमल ....जोर .....प्रिन्सी

मेरा प्रिंस आ गया

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कोमल ने दौड़ लगा दी रद की आवर आवर भाग कर रद के गले लग गई रोटी हुए

कोमल ...मेरा प्रिंस आ गया मेरा प्रिंस आ गया

सब के सब रुद्रदेव की आवर दौड़ लगा दी कोमल दिव्या चंचल शीतल सोनालिका निधि

जिसको झा जग्गा मिली वही चिपक गई रोटी हुए चूमने लगे सब

क्या कोई मुझसे नै मिलेगा क्या मई बे हु यहाँ पे

सबने रद के पीछे देखा अपने सामने सबने उस शख्स क देख कर दुबले जतका लगा

किसी को अंदाजा नै था की वो शख्स यहाँ पे हो सकता

आवर इतना खूबसूरत कैसे हो गया

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...मोहिनी devi.....this टाइम लुकिंग सो क्यूट .....

मोहिनी devi....kya हुवा आप सब ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे

रद ...क्या हुवा आप सबको मिलोगे नै क्या मेरी नई गफ मोस्ट ब्यूटीफुल गफ इन माय लाइफ

सब रद के इस तरह से बोलने से शॉक लगा

दिव्या ...घर ke...kya खा प्रिंस आपने

रद ...उपपसस सॉरी दी

आवर आगे बाद कर दिव्या को गले लगा लिया

मुझे आपकी बहुत याद आई दी

कोमल .शीतल .चंचल ..निधि ..सोनालिका ...आवर हमारी याद नहीं आई प्रिंस आपको

R.d ..सॉरी सॉरी आप सबकी बहुत बहुत ज्यादा याद आई

इन सब में सब लोग खुसी को भूल हे गाइये थे जो अपनी फॅमिली के साथ में कड़ी थी

खुसी ...अपने मन में ....ये तो मेरा वही राजकुमार है जो रोज मेरे सपने में आता है

यही तो है किश से मई रोज सपनो में मिलती थे

थोड़ा अलग है बस उसके बॉल गोल्ड कलर के थे आवर बड़े बड़े थे उसके पुरे चेहरे से बहुत ज्यादा तेज़ निकलता था

जंगी ...खुसी बीटा क्या हुवा खा खो गई आप

खुसी ....कुछ नै माँ मेरा राजकुमार....

Janvi....kya खा तुमने

खुसी ....मैंने कब कुछ बोलै माँ

( दर्शक मानवी को पूरी बात ठीक से सुनाई नै दी थे )

रद ...ने आगे भाड़ कर ..दादी .पापा ..चाचा ..चची बड़ी चची बड़े चाचा अपनी 2 बुवा आवर दोनों फूफा जी को पेअर छू कर परनाम किया

गुरुदेव ....लक्समी देवी अब देख लीजिये अपने देव को जी भर के

रेणुका देवी ...माँ सा देखिये न मेरा बीटा कितना हैंडसम हो गया है आवर कितना लम्बा छोड़ा बे

राणा ji....ha माँ सा देखिये न ये तो मुझसे आवर पापा ( जयदेव )से ुचा आवर छोड़ा हो गया है

रानी माँ ...है तुमने सच खा रूद्र बीटा

रानी माँ ..चलो पहले केक काट करते है फिर पार्टी के बात करेंगे

सब चल दिए पार्टी में केक कटाई हुए 4 बहेनो ने आवर रद ने मिल कर केक कट कर के सबने डिस्ट्रीब्यूट कर दिया

राणा ji..ne रद को सब से मिलाया उदयपुर का नेक्स्ट यूवराज घोसित करते हुए

ऐसे हे डेरी डेरी पार्टी ख़तम हो गई लईकिन बहा वालो के लिया

सब फॅमिली मेंबर खुसी की फॅमिली सब मेंशन के हॉल में मौजूद थे जहा पे एक छोटी पार्टी की जा सकती है

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सब लोग हॉल में लगी हुए सोफे पे बेथ गया

sonalika...bhai मुझे आपके साथ बैठना है

Rd....aaja मेरी गुड़िया तू यहाँ बेथ मेरी गौड़ में पहले तो खुद हे चली आती थे मेरी गौड़ में

दिव्या सोनालिका को रद की गौड़ में देख कर थोड़ी जल गई

divya...prince तब वो छोटी थी अब गुड़िया बड़ी हो गई है

रद ...क्या मेरी प्रिंसेस बड़ी हो गयी है

सोनालिका ...नै भाई हम अब बे आपसे बहुत छोटे है ...रद को खड़ा कर के खुद उस के बराबर कड़ी हो के

सोनालिका ...दिव्या दी देखो हम अब बे भाई से बहुत छोटे है

सब पेट पकड़ कर हसने लगे

समय अपनी बेटी को गले लगते हुए

somya...ha मेरी बच्ची तू हमेसा छोटी हे रहेगी अपने भाई से

वीर आवर दीपक रद के पेअर छूटे हुए

दीपक .वीर ...दादा भाई परनाम

रद ...खुस रो आप हमें दादा भाई नै केवल आवर केवल वीर खा करो

दिव्या बिच में हे बोल पड़ी जल्दी में

दिव्या ....बोल के तो दिखाए आपको दोनों की टंगे न तोड़ दू तो कहना मुझे

मोहिनी देवी ...दिव्या बीटा क्या खा आपने

दिव्या ...सॉरी माँ आवर नीची देखने लगी

Rd..ne एक हाथ से पास में बैठी दिव्या को उठा कर अपने सीने से लगा लिया

उसका चेहरा ऊपर किया तो देखा की अबे रो देगी ऐसा लग रहा था

रद ....बस बस कोई मेरी दी को कुछ नै खाएगा वो जैसा छाएगी वैसा हे होगा

माहौल को चेंज करने के लिया

समय ने मोहिनी देवी से खा

समय ....भाबी सा आप ठीक कैसे हो गई आप तो पिछले 5 साल में एक बार बे बीएड से नै उठ पाई थे आवर काफी कमजोर बे हो गई थी

ये चमत्कार हुवा कैसे

अब तो आप दिव्या की जुड़वाँ भें लग रहे हो

आप बहुत खूबसूरत लग रहे हो

मोहिनी देवी ने देव की आवर इसरत करते हुए

मोहिनी देवी ...हमारी जान जो वापिस लौट आई थी गुड़िया हमें तो ठीक होना हे था

पता नै जब हमारी आँखे खुली तब हमारा बीटा हमारे पास था मेरे हाथ को थामे हुए पास भेटा था

अब इसने क्या किया मुझे पता नै

जब मेरे बेटे ने मुझे अपने गले लगाने को खा तब कुछ कोसिस के बाद कड़ी हो गई मई

आवर अपनी जान को अपने गले लगा लिया मेरी साडी चिंता सरे सुख दर्द एक जटके में ख़तम हो गए आवर एक नै ऊर्जा मेरी सरीर में दौड़ने लगे

soniya....ye तो बहुत अच्छी बात है आप पूरी तरह से ठीक हो गई

Rd....maa सा ये कोण लोग है हमने पहचाना नै

रानी maa...dev बीटा ये आपके दादा जी के दोस्त आवर उनकी फॅमिली जय

ये है रतन सिंह राठौर आपके छोटे दादा

ये है उनकी दर्मपत्नि माया देवी आपकी छोटी दादी

आवर ये है इनका पुत्र रघुवीर सिंह आपके चाचा

आवर ये आपकी सबसे छोटी चची है जानवी देवी

आवर ये इनकी बेटी है खुसी

खुसी बिच में बे माय सेल्फ मुस्कान सिंह राठौर डॉटर ऑफ़ रघुवीर एंड जानवी सिंह राठौर

रद ...नीस तो मीट यू मिस मुस्कान सिंह राठौर

( इन दोनों की बातचीत से कुछ लोग खुस थे तो कुछ को हलकी हलकी जलन हो रहे थी )

रद ..ने रतन सींग आवर माया देवी को चरण छू काट परनाम किया

माया देवी ने

देव को फ़ौरन गले लगा लिया माया देवी को देव के गले लगने पे बहुत अच्छा महसूस हुवा जैसे उनकी सरीर आवर आत्मा से बहुत बड़ा बोज उतर गया हो

रघुवीर ने बे देव को गले लगाया

आवर जानवी देवी ने बे देव को गले लगा देव के मरदाना जिसम को महसूस करते हे देव को आवर जोर से कसके चिपक गई

खुसी अपनी माँ को घर के देखा तब जा कर अलग हुए

काफी टाइम तक बातो का सिलसिला चलता रहा

सबने खाना खाया आवर सोने के लिया चले गए

रतन फॅमिली जाना चाहती थे किन्तु रानी माँ ने सब को रोक दिया

अब सब लड़किया रद के पिच्य पद गई की वो उसके साथ में सोयेगी

समय सोनिया निधि दिव्या कोमल चंचल शीतल

अब एक को है बेलो तो दूसरी नाराज़

सब के बिच देव को वास्ता देख मोहिनी देवी ने देव को पकड़ अपने रूम की आवर ले चली सब आँखे फाडे देखते रह गए

कोमल .....दी प्रिंस तो निकल गए हाथ से ......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स

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कीप सपोर्ट माय स्टोरी

.......
 
अपडेट ...33

अब सब लड़किया रद के पिच्य पद गई की वो उसके साथ में सोयेगी

समय सोनिया निधि दिव्या कोमल चंचल शीतल

अब एक को है बेलो तो दूसरी नाराज़

सब के बिच देव को वास्ता देख मोहिनी देवी ने देव को पकड़ अपने रूम की आवर ले चली सब आँखे फाडे देखते रह गए

कोमल .....दी प्रिंस तो निकल गए हाथ से ......

अब आगे........

रद ....माँ मई अपने रूम में जा रहा हु सोने के लिया

आप आराम से सो जाये

mom...kyu क्या हुवा बीटा अपनी माँ के साथ क्या प्रॉब्लम है है

या फिर तुम अब मुझसे प्यार नै करते हो

देव ....no माँ ऐसा न सोचो आप वो क्या है न मुझे नाईट में टाइट कपड़ो में सोने की आदत नै है

ऐसे में मुझे नींद नै आएगी

माँ ...कोई बात नै तू मेरा राजा बीटा है जैसे तुझे अच्छा लग वैसे सोना तुम्हे कोई नै रोकने वाला

देव ....अपक्क प्रॉब्लम नै होगा ऐसे में मेरा साथ में सोने सेक्

माँ ....अपने बेटे से कैसे प्रॉब्लम अब चल कपडे निकल आवर लेट जा

देव ..ठीक है माँ

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जैसे हे देव कपडे निकल के बाथरूम से एक ढेले बरमुंडा (निकर ) में बहार निकला

मोहिनी देवी की तो संसेचे अटक गई देव की बॉडी की बनावट आवर मजबूत सरीर देख कर

कब मोहिनी देवी की पंतय आज पुरे 5 साल बाद गीली हुए उसको बे पता नै चला

मोहिनी देवी बस सब कुछ भूल कर देव की छोड़ी छाती आवर निकर में तगड़े हतियार की लम्बाई मोटाई हे नाप रहे थी मन में

देव ...माँ माँ खा खो गई आप कब से आवाज दे रहा हु सोना नै है क्या

माँ ..है है बीटा सोना है चल लेट जा

मई अबे आये चेंज करके के

मोहिनी जब अंदर गई बाथरूम में तो अपनी पंतय को हाथ लगाया तो ऐसे लगा मनो पिसाब कर दिया हो पंतय में हे इतना पानी निकला था की आगे से पंतय आवर दये बाये से जंगो का जोड़ छूट के पास से पूरा भेज गया था

मोहिनी जल्दी हे चेंज कर के आ गई

आवर देव की बगल में लेट गई

माँ ...चल अपना हाथ ीदार कर मुझे तुम्हारे हाथ का तकिया बनाना है

देव ..ठीक है माँ

मोहिनी देवी देव के हाथ का तकिया बना कर उस की छाती से चिपक गई

देव को अपनी छाती में कुछ नुकीला सा आवर उसके साथ में गरम सॉफ्ट सॉफ्ट सा महसूस हुवा उसको जतका लगा फिर इग्नोर कर के अपने माँ को पीठ के पिच्ये से अपने हाथ से अपनी आवर खींच कर चिक्पा लिया

देव ...माँ अब कैसा लग रहा है आपको

माँ ...बहुत अच्छा लग रहा है

देव ...अबे तो आपके सरीर में कोई कमजोरी फेल नै हो रहे है न

देव की बात जब समाज आये टी मोहिनी देवी झेप गई वो क्या पूछ रहा था आवर मई क्या बता रहे थे ऐसा सोचते हे हे शर्मा के आवर आदिक देव से चिपक गई

देव ...ok माँ गुड नाईट ...माथे पे किश करते हुए ...अब सो जाये आप बे

माँ ...गुड नाईट बीटा ....गाल पे किश करके दोनों माँ बीटा सो गए

रत को जब देव बाथरूम गया पिसाब करने

मोहिनी देवी बे देव के उठने जग गई थी

जब जब डोर खोला तो आवाज़ की दिशा में अच्चानक हे मोहिनी की नज़र गयी

मोहिनी ने जो सामने नजारा देखा उसकी आँखे फटी की फटी रह गई

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सामने आँखे बंद करे आदि नींद में देव चला आ रहा था बिस्तर पे

मोहिनी की तो नींद हे ुध गई देव के तगड़े निकर में से जुलते लैंड आवर टमाटर जैसे बड़े आवर लाल टोपी को देख कर

देव चुप चाप जक अपनी माँ की आवर करवट ले कर सो गया

मोहिनी की आँखों में जो बची खुची नींद थी वो देव के मोहिनी की तरफ करवट बदलते हे गायब हो गयी

क्युकी करवट बदलते हे देव का सुपडे से लगभग 2 इंच नीची तक का लैंड अब मोहिनी 3 फिट की दुरी पे साफ चमक रहा था

मोहिनी .मन me....he बागवान ये क्या है ऐसा बे किसी का लैंड होता है इतना बड़ा इतना मोटा आवर इसकी टोपी तो देखो कीटंक लाला है जैसे सारा खून यही एकता हो गया हो

थोड़ा नीचये देखते हुए आवर कितना गोरा बे है देव का लैंड

क्या कृ इसको चुने का मन कर रहा है

dimak...aaghe बाद कर छू ले मोहिनी इतना बड़ा आवर इतना सुन्दर लैंड नहीं मिलेगा फिर देखने को

मोहिनी का man....mohini आगे भाड़ आवर छू ले इतने खूबसूरत लैंड को

मन ....छू कर देख कितना बड़ा है

दीमक .....मोहिनी ऐसा न कर ये पाप है

man....koi पाप नै है लैंड बना हे छूट के लिया है

dimak....land छूट के लिया बना है तो क्या कोई बे माँ अपने बेटे का लैंड हे ले लेगी क्या

man...to इसमें गतल क्या है मोहिनी तू पकड़ कर देख न इतना सुंडार आवर तगड़ा तो राणा जी का बे नै है

dimak....nai मोहिनी ये गलत हो गए तेरा बीटा है वो राजा बीटा कहती है न तू उसको

उसके सात ऐसा न कर

man.....mohini छू कर देख ले अबे देव सो रहा है

वो जगहे उस से पहले पकड़ के देखले

डेरी डेरी मोहिनी का मन दीमक पे भरे पद रहा था वैसे वैसे मोहिनक का हाथ देव के सोये हुए लैंड तक पहुंच रहा था

कुछ देर सोचने विचरने के बाद कंपते हुए हाथो से सुपडे के नीचये देव के लैंड को पकड़ा

मोहिनी के पूरी सरीर में संसंहत से दौड़ गई

मोहिनी अपने मन में अह्ह्ह्हह देव मेरी जान कितना तगड़ा लैंड है तुम्हारा

कितना गरम है अह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ मेरी जान ये मेरी छूट में कब जायेगा

( इस वक़्त मोहिन्ज के सरीर आवर मन में पिछले 8 .10 सालो की दबी हुए वासना हावी हो चुकी थी मोहिनी को नै पता वो क्या कर रहे है क्यों कर रहे है )

डेरी से उठ कर बीएड पे देव के लैंड की आवर झुक कर

दूसरे हाथ से निकर को थोड़ा आवर ऊपर खिसकाया डरते डरते

मोहिनी ने थोड़ा नीची झुक कर अपने मुँह को लैंड की टोपी के पास किया आवर जोर से एक साँस अपने अंदर खींची

उस साँस के साथ मनो छूट का वाल किसी ने खोल दिया हो मोहिनी जटके पे जतका कहते हुए लगातार मल्टिपल ओर्गंस का मज़ा लेती रहे

मोहिनी की पंतय के साथ साथ जहा वो अपनी छूट टिकाये थी वह से बे बहुत ज्यादा गिला हो चूका था बीएड

जब मोहिनी संत हुए देव के लैंड को अपने हाथ में पकड़ा देखा सब यद् आते हे लैंड छोड़ दिया आवर चादर दाल कर देव के बाथरूम में बैग गई

बाथरूम लॉक कर के रोने लगे

कुछ मिन्ट्स बाद गेट नॉक हुवा

देव ...माँ क्या आप अंदर हो

आपको कुछ हुवा तो नै

खुद को सँभालते हुयेक

मोहिनी ...है देव में ठीक हु तुम चलो मई आती हु

देव ....ok माँ जल्दी आना

मोहिनी अंदर अपनी पंतय बदल कर अपनी छूट को धो कर तिसु पेपर से साफ करके नई पंतय दाल कर निघ्त्य ठीक कर की आवर मुँह दो कर के बहार चली आये

देव ....माँ अरे यू ाललरिघ्त

माँ ...यस माय सोन

चल सो जा मैंने तेरी नींद बे ख़राब कर दे देव को खुश तो गड़बड़ लगी

वो अपनी माँ का मंद नै पड़ना छठा था

देव ...ok माँ सुबह बाटवकरते है

मोहिनी देवी एक बार फिर से देव से चिपक कर आँखे बंद कर ली

देव डेरी डेरी टपकी देता रहा

मोहिनी को कब नींद आये पता नै चला

सुबह 5 बजे उठ कर देव

मेंज़िन के पिच्य चला गया अपने ध्यान योग करने ............

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नेक्स्ट अपडेट जल्दी हे

दोस्तों अबे मेरा पास थोड़ा फ्री टाइम है जिस कर के

एक के बाद एक अपडेट रहा हु

कबे 2 अपडेट तो कबे कबे 3 बे देता हु

जब टाइम की थोड़ी प्रॉब्लम होगी तो समझने की कोसिस जरूर करना

कोसिस रहेगी की दल्ली काम से काम 1 अपडेट तो बस्सी टाइम में दे पाव आप सबके लिया

थैंक्स एंड गुड नाईट फ्रेंड्स
 
अपडेट 34

देव ...ok माँ सुबह बाटवकरते है

मोहिनी देवी एक बार फिर से देव से चिपक कर आँखे बंद कर ली

देव डेरी डेरी टपकी देता रहा

मोहिनी को कब नींद आये पता नै चला

सुबह 5 बजे उठ कर देव

मेंज़िन के पिच्य चला गया अपने ध्यान योग करने ............

अब आगे.........

सुबह जब मोहिनी देवी उठी तो देव को बिस्तर पे न प् कर बाथरूम चेक किया

देव को वह बे न प् कर

बहार निकल गई सामने से दिव्या आवर गुरु माँ को आते हुए देख मोहिनी देवी ने दिव्या से पूछा

मोहिनी ....दिव्या आपके प्रिंस खा है

divya.....kya प्रिंस आपके साथ नै है

gurumaa....gabrawo नै दिव्या बीटा आपके भाई अबे अपने ध्यान योग कर रहे होंगे किसी संत जगह

मोहिनी ....वैसे ये देव उठ कब गया मुझे तो पता हे नै चला बरसो बाद इतनी अच्छी नींद आई

गुरुमा.. है नींद तो अच्छी आणि हे थे बरसो बाद बेटे की बहो में जो सोई थी आप

Divya...ham अबे प्रिंस को देख कर आते है

मोहिनी ...रहने दे वो आ जायेगा तुम अपनी बहनो को उठा दो

divya...ji माँ

मोहिनी अपने रूम में चली गई आवर गुरुमा रानी माँ के पास का बोलके निकल गई

वही देव मेंशन के पीछे अपने ध्यान आवर ट्रेनिंग में लगा हुवा था मेंशन की खिड़की से कोई उसको ताड रहा था

मोहिनी अपने रूम से कपडे ले कर के बाथरूम में चली गई जब मोहिनी पूरी नंगी हो कर खुद को मिरर में देखा तो

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मोहिनी खुद को मिरर में देख के शर्मा

गई वो पहले से जवान आवर खूबसूरत लग रहे थी

मोहिनी ने जैसे हे अपने चूचियों को चुवा उसे देव के साथ में की गई घटना याद आई

रात जो कुछ बे हुवा मोहिनी को एक एक घटना सामने मिरर ने किसी फिल्म के जैसे चलती हुए नज़र आने लगे

मोहिनी का दूसरा हाथ कब उसकी छूट पे चला गया कब वो अपनी छूट को सहलाने लगी

शावर ों कर के नहाते हुए हेंड शावर से अपनी छूट पे पानी मरते हुए अगली करने लगे

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जैसे जैसे मोहिनी के दीमक में देव के लैंड को खुसबू को महसूस किया मोहिनी की छूट पे हाथ की स्पीड आवर बढ़ने लगी आवर छूट से बहते मधुरस की खुसबू पुरे बाथरूम में फ़ैल गई

मोहिनी की छूट का मनो किसी ने वाल ों कर दिया हो मल्टिपल ओर्गंस से महोनी की टंगे कपङे लगी

कुछ टाइम खुद को सम्बल के मोहिनी नाहा कर बहार निकली

सब लड़किया त्यार हो कर नास्ते के लेता आ चुके थे

वही एक रूम में गुरुदेव रानी माँ आवर गुरुमा बैठे हुए थे

गुरुदेव ....लक्समी देवी देव को बहुत जल्दी अपने सफर पे निकलना होगा

जो लोग बसरो से इस पल का इन्तजार कर रहे है उनको आवर प्रतीक्षा नै करवानी चाइये

देव ने जो शक्तियों का त्याग किया है

फिर से देव को वो पानी होगी

रानी माँ ...गुरुदेव देव अबे तो आये आवर अबे से जाने के लिया बोल रहे हो आप

gurudev....abe कुछ समय देव यहाँ रुक सकता है

अब यहाँ पर देव का कार्य पूर्ण नै हुवा है

ऐसे में अगर देव यहाँ से चला गया तो आपका परिवार संकट में पद जायेगा

गुरुमा ....कोई तो उपाय होगा स्वामी देव ने मुझे अपनी माँ मन है इस नाते इस परिवार की सुरक्षा मेरी बे जिम्मेदारी है

गुरुदेव ....आपने ूचीमा खा देवी

अबे देव का सामना जल्द हे त्रिकाल से होगा त्रिकाल की काली शक्तियों को मैंने यहाँ पे महसूस किया है

उसको पता चल चूका पांच तत्वा दरक लड़किया कोण है

वो इनकी बलि दे कर के शीतन को खुश करना चाहता है जिस से वो आवर आदिक ज्यादा शैतानी तकते अपने मालिक से प्राप्त कर ले

रानी माँ ....फिर क्या होगा गुरुदेव मेरी बच्चियों की जान खतरे में है आवर आप देव को सफर पे जाने के लिया बोल रहे है

गुरुदेव ......लक्समी देवी अबे त्रिकाल की मरतु का समय नै आया है किन्तु पराजित किया जा सकता है

त्रिकाल को उसके गुरु की हत्या फलस्वरूप सराफ मिला है

देव का त्रिकाल की आत्मा को मुक्ति दिलाने का समय आ गया है आवर ये कार्य आज हे होना चाइये

रानी माँ ....आपको जो उचित लगे गुरुदेव आप वही कीजिये बस मेरे परिवार को या अन्य किसी को कोई तकलीफ न पहुंचे

ऐसे हे ये सब लगे रहे बातो में

त्रियकल की आवर

आज त्रिकाल की आखरी बलि ( 101 ) का समय था

इस समय त्रिकाल अपनी किसी तांत्रिक किर्या कर रहा था उसके सामने एक बच्चो का जोड़ा रखा हुवा था

(जुड़वाँ बचे )

sambu....gurudev क्या इन जुड़वाँ बचो की बलि देना उचित होगा

trikal....sambu तुम ये सब न सोचो अगर ये बलि नै दी हमने तो हम उस रक्षा कवच को नै भेद पाएंगे

उसको भेड़े बिना उन लड़कियों को नै ला सकते यहाँ पे

संबु ....जैसा आपको ठीक लगे ( गुरुदेव कितने क्रूर है ये इन छोटे छोटे बच्चो की हे बलि चढ़ा रहे है )/

कुछ समय बाद त्रिकाल ने उन दोनों बच्चो की बलि चढ़ा दे

दोनों बच्चो के सरीर से आत्मा निकल कर शैतान की मूर्ति में समां गई

शीट की मूर्ति .....खो त्रिकाल क्या कहते हो तुम

trikal....mahamahim को गुलाम का परनाम ...महामहिम मुझे ऐसे सकती प्रदान करे जिस से मई किसी बे रक्षा काच को तोड़ कर किसी को बे यहाँ पे ले कर आ पाव

sheetan...uchit है त्रिकाल किन्तु तुम को उसकी लिया आत्मा रूप में हे जाना होगा अन्यथा तुम उस रक्षा कवच की बात कर रहे हो उसको भेद नै पाओगे

इस सकती का तुम केवल एक बार हे प्रयोग कर सकते है

त्रिकाल ....महामहिम की जय हो महामहिम की जय हो

शैतान की मूर्ति से एक रौशनी निकली आवर त्रिकाल में समां गई कुछ हे मिंट में त्रिकाल की आत्मा उसके सरीर से अलग हो गई

शैतान ...तुम्हारा कार्य पूरा होते हे तुम अपने सरीर में लौट आवोगे

अन्यथा तुम्हारा सरीर नस्ट हो जायेगा

त्रिकाल .जैसा आप कहे महामहिम

त्रिकाल संबु को अपनी सरीर की रक्षा करने का बोल कर कहि निकल गया .......

राणा मेंशन.....

अबे दोपहर का समय हो रहा था

गुरुदेव ....देव पुत्र हमें अब चलना चाइये कोई हमारा इन्तजार कर रहा है

रद ....जी गुरुदेव हम कब तक वापिस लौट के आएंगे

गुरुदेव ....ज्यादा समय नै लगेगा

रद ...ठीक है गुरुदेव

देव सब से विदा ले कर गुरुदेव के साथ एक जगह को टेलीपोर्ट हो गया

इस वक़्त जहा पे गुरुदेव आवर देव खड़े थे उनके सामने एक बहुत हे घना था गुरुदेव का अनुसरण करते हुए देव गुरुदेव के पीछे पिच्य चलने लगा

देव को लग रहा था जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो आवर ये जोई कोई बे है ये कोई पापी हे हो सकता है देव उसकी एनर्जी को महसूस कर प् रहा था

2 हर चलने के बाद दोनों एक बहुत पुराने कंधार के सामने पहुंचे

देव को पता नै क्यों उस खण्डार की आवर देख कर गुस्सा आ रहा था

उसकी आँखे डेरी डेरी लाल होने लगे

गुरुदेव ....संत हो जाओ देव आवर अपने मन को एकाग्र करो

यहाँ हम किसी मरने नै आये है

संत हो कर मेरी पीछे आवो

देव ...जी गुरुदेव

कुछ देर बाद एक तहखाने में थे दोनों वह किसी का कंकाल रखा था

गुरुदेव .....देव तुम्हे इस कंकाल की विधिपुरवा अंतिमसंस्कार करना है

देव .....जो आज्ञा गुरुदेव ...किन्तु ये किसका का कंकाल है गुरुदेव

गुरुदेव .....ये जिसका कंकाल है कबे कैसे इसे अपना मित्र मन था किन्तु उसने बुराई का रास्ता अपनाया आवर ाचै को टुकड़ा दिया

देव ....फिर आप इनका अंतिमसंस्कार के लिया मुझे क्यों बोल रहे है

गुरुदेव ....समय आने पे पता चल जायेगा

अपने जल तत्वा से इनके सरीर को पवित्र करो करो आवर

इनके कंकाल को अग्नि के सुपुर्द कर दो

देव अपने गुरुदेव के कहे अनुसार करता रहा

कुछ समय में दिव्या अग्नि से कंकाल रख में बदल गया

गुरुदेव ने आगे बाद कर एक कपडे में कुछ रख को रखा आवर बाकी की रख को जल से स्टाफ करने को बोलै

कुछ समय बाद गुरुदेव वही पर देव के साथ बेथ कर यज्ञ करने लगे

थोड़े देर बाद वह एक आत्मा प्रकट हुए

aatma....parnam मेरे गुरु भाई आर्य

गुरुदेव ....परनाम मेरी मित्र

ये मेरा सिस्य रुद्रदेव

aatma....mahadev के क्रोड़ांश को तांत्रिक का परनाम

रद ...परनाम गुरुदेव

आत्मा ....अपने हमें गुरु मान कर दांया कर दिया रद

Rd...isme दांया करने वाली कोनसी बात है गुरुदेव

( अपने गुरुदेव की आवर इसरत करते हुए ) आप मेरे गुरु के गुरु भाई आवर मित्र रह चुके है इस नाते आप मेरे बे गुरुदेव हुए

गुरुदेव ...उचित खा रद .पुत्र ये बे तुम्हारे गुरु हुए

आत्मा ...सत्य खा मित्र तुमने मई तांत्रिक शक्तियों के पीछे पागल हो अच्छे की सकती का हे त्याग कर दिया

कितना अंतर है सच्चाई आवर बुराई में तुम्हारे सिस्य को देख कर पता चलता है

एक तुम्हारा सिस्य है जो कितना निकाल पवित्र है

आवर एक मेरा सिस्य था त्रिकाल चल जप्ती पापी आदर्मी कोनसा ऐसा पाप नै जो उसने नै किया

यहाँ तक की अपनी गुरु की चल से हत्या तक कर दी

aatma...dev पुत्र मई तुम्हे अपनी सकतिया अपने तांत्रिक किर्या द्वारा अर्जित की हुए सिडिया तुम्हे पर्दैन करता हु

रद ...अपने गुरुदेव से ..गुरुदेव क्या ये उचित होगा मेरा लिया तांत्रिक सक्रिय तो पाप युकक़्त होती है न

गुरुदेव ....नै रद पुत्र सकतिया कहे बुरी या अच्छी नै होती है

सकतिया को जो दर्जन कर प्रयोग करता है उसकी सच्चाई आवर बुराई पे निर्भर करती है

है ये अवस्य है की काली तकते काम .करोड़ ..मोह ..माया जैसे विकारो से झड़ी हुयी रहती है

किन्तु मुझे तुम पे विस्वाश है तुम इन सब विकारो पे नियत्रण कर लोगे

भविस्य में तुम्हे इन शक्तियों की जरजरुरत पड़ेगी

रद ....जी गुरुदेव मई त्यार हो आपकी दी हुयी शक्तियों को ग्रहण करने के लिया

आत्मा ...उचित है रद पुत्र मई तुम्हे अपनी शक्तियों के साथ साथ अपनी आत्मा का अंश बे प्रदान करता हु जो काली सक्तियो के सामने एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करेंगे

शीतन की सकती के अलावा कोई आवर काली सकती तुम्हे मेरे कवच के होती हुए ज्यादा हानि नै पहुंचा पायेगा

कुछ समय में देव को आत्मा की सम्पूर्ण सकती के साथ आत्मा अंश से जो कवच प्राप्त हुवा देव ने पुरे मन से स्वीकार किया इन सक्तियो के सात में देव को अपने सरीर में कुछ बदलाव बे महसूस हुवा जो उसने इग्नोर कर दिया

इन सब में बहुत समय निकल चूका था

राणा मेंशन की आवर .......

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अपडेट. 35

कुछ समय में देव को आत्मा की सम्पूर्ण सकती के साथ आत्मा अंश से जो कवच प्राप्त हुवा देव ने पुरे मन से स्वीकार किया इन सक्तियो के सात में देव को अपने सरीर में कुछ बदलाव बे महसूस हुवा जो उसने इग्नोर कर दिया

इन सब में बहुत समय निकल चूका था

राणा मेंशन की आवर .......

अबे रात के 8 बज रहे थे सब लोग डिनर कर रहे थे

माया देवी ...जीजा अब हम चलते है है 2 दिन हो गए घर को संभाले हुए

कोमल ....दादी सा कुछ दिन आवर रुकरुक जाते अबे तो खुसी से हमारी ठीक से दोस्ती बे नै हुए थी

माया devi.....komal बिटिया आप चिंता न करो खुसी बेटी अबे कुछ दिन आपके साथ हे रहने वाली है जी भर से मस्ती करना खुसी के साथ

आवर इस बार आपको आना है हमारे घर नेक्स्ट मंथ खुसी का 18 बर्थडे है

आवर आप सब के बिना तो बर्थडे पार्टी होगी नै क्यों खुसी

खुसी ....बिलकुल दादी माँ इतनी बहने इतने दोस्तों के बिना कैसे बर्थडे आवर कैसे पार्टी

खुसिया तो अपनों के साथ मानाने में हे मज़ा है

मोहिनी देवी ....बिलकुल ठीक खा मेरी गुड़िया ने

खुसी ....क्यों नै बड़ी मम्मी

माया देवी .जानवी देवी रतन रघुवीर ....चारो मुँह फाडे कबे खुसी को तो कबे मोहिनी देवी को देख रहे थे ...

रानी maa....kya हुवा आप सब ऐसे क्यों देख रहे हो खुसी आवर मोहिनी को

जीनवी devi....wo माँ सा क्या है की कोई बे खुसी को गुड़िया बोलता है तब ये गुस्सा हो जाती है

अबे मोहिनी जीजी ने खुसी को गुड़िया खा तो गुस्सा नै करते हुए ये खुस हो रहे है आवर जीजी को बड़ी मम्मी बे बोलै है इसे लिया ऐसे देख रहे थे हम सब

खुसी ...तो क्या हुवा माँ बड़ी मम्मी के मुँह से अपने लिया गुड़िया सुन्ना मुझे अच्छा लगता है

मोहिनी ...आवर नै तो ये है हे माँ की गुड़िया जैसी

komal...mom मई क्या हु फिर

झूठा मुँह फूलते हुए

mohini...haste हुए ....ः तू तो मेरी बड़ी गुड़िया है न

कोमल ...फिर ठीक है

दिव्या ....माँ ये आपकी बड़ी गुड़िया खुसी आपकी छोटी गुड़िया तो फिर मई क्या हु आपकी

रानी maa...divya बीटा आप तो अपने प्रिंस की राजकुमारी है न क्यों हमने सही खा न

( आँख मरते हुए )

दिव्या ...वो तो हम है हे माँ सा

आवर शर्मा कर निचे देखने लगी

ऐसे हे एक दूसरे की तंग कीचै करते हुए

खाना खाया

रतन फॅमिली ने राणा मेंशन से विदाई ले

खुसी कुछ समय के लिया यही रुक गई थी

सोनालिका अपनी भाई दीपक माँ सोनिया समय के साथ जा चुकी थी घर पे

11 बजे तक सब लड़किया अपने अपने गॉसिप में लगे रहती है फिर डेरी डेरी नींद आने लगती है

वही दूर जंगल में देव आवर गुरुदेव बाटे करते हुए आगे बाद रहे थे

गुरुदेव .....देव तुम इन शक्तियों को जल्द हे अपने नियंत्रण में ले लेना ये तांत्रिक सकतिया है ये इंसान को उसी रूप में स्वीकार कर लेती है जैसा इन को दर्जन करने वाले की सोच आवर मन होता है

दूसरी काली सकतिया होती है तामसिक सकती जो की हमेशा विनाश की लिया अपने दरक को उकसाती रहती है

जो इंसान तामसिक सकतिया दर्जन करता है उसमे करोड़ आवर हवस बढ़ने लगती है

भवस्य में तुम्हे तामसिक सकतिया बे न चाहते हुए दर्जन करने होगी

तुम खुद पे नियंत्रण रखना पुत्र

अगर ऐसा नै कर पाए तो इस संसार की तुम्हारे तांत्रिक तामसिक आवर दिव्या सक्तियो से कोई बे रक्षा नै कर पायेगा

तुम्हारी तीनो सकतिया तुम्हारे नियंत्रण से बहार हुए तो तुम्हे त्रिदेवो के करोड़ का सामना करना होगा

देव .....गुरुदेव तामसिक सकती इतनी विध्वंसकारी है तो मेरा उनको दर्जन करना जरूरी है क्या

गुरुदेव ....तुम्हारे लिया ज्यूरी नै है किन्तु रूद्र के लिया ज्यूरी है रूद्र के करोड़ के लिया ज्यूरी है

देव ....वो कैसे गुरुदेव

गुरुदेव .....तुम दोनों ( रूद्र- देव )

दोनों हे महादेव के अंश हो उनकी सकती के पार्टीको हो

किन्तु ...एक नदी के दो पता ( किनारे )की तरह हो

जहा रूद्र ..महादेव के करोड़ का पार्टीको है

वही देव ....महादेव के के प्रेम का प्रतीक है

तामसिक सकती से रूद्र को करोड़ आता है उसकी सकती बाद जाती है

वही तुम्हे अपने प्रेम की सकती से रूद्र के करोड़ को सही दिशा सही लक्ष्य पे उसके करोड़ को काम में लेना है

देव ...जी गुरुदेव

देव ये मुझे अचानक से दीदियो की याद क्यों आ रहे है

गुरुदेव ...देव तुम्हारे भेने खतरे में है

देव .....क्याआ

गुरुदेव .....है देव तुम्हारी बहेनो की जान खतरे में है

त्रिकाल ने उनका किडनेप ( अपहरण ) किया है

तुम्हारी भेने आवर खुसी की बलि चढ़ाने के लिया

ताकि वो बलि चढ़ा कर शैतान को खुस कर के तुम्हारे बहने की पांच तत्वों की सकती खुद दर्जन कर सके

देव ...गुस्से में उसकी इतनी हिमत मेरी राजकुमारी की बलि देगा

( देव के अंदर से रूद्र जग चूका था )

मेरी .sawpnika..ki बलि देगा वो शीतन

इतना कहते हुए रुद्रदेव गुरुदेव को वही जंगल में छोड़ कर गायब हो गया

gurudev...ruko रूद्र रुक जावूवू

गुरुदेव चिमटे रहे किन्तु देव अब पूरी तरह से रुद्रदेव में बदल चूका था ......

राणा मेंशन ...

आज अमावस्या होने के कारन त्रिकाल बिना सरीर के बे बहुत ताकतवर था

12 बजते हे त्रिकाल एक काळा सेक्स के रूप में राणा मेंशन के बहार खड़ा अपने हाथो को उल्टा झोड़ कर ( शक्तिमान के किल्विष को परनाम करते वैसे )

कुछ मंत्रो का उच्चारण किया

उस के मुँह से कुछ कला कला धुंवा सा निकला आवर पुरे मेंशन में फ़ैल गया

5 मिंट के अंदर हे जो जहा पे था वही पे गाह्रो नीं में सो गया

त्रिकाल उड़ता हुवा सब को गाह्रो नींद में देख कर हस्ता हुवा आगे बाद रहा था

वो रक्षा कवच के भीतर आ चूका था उसको सिर्फ एक बार हल्का सा झटका लगा मनो किसी ने उसको टच किया हो

त्रिकाल ....हस्ते हुए ...आज मेरी बरसो की तमना पूरी हो जाएगी

मई बनुगा इंसानो का बागवान

मेरी लिया ये तूच इंसान सिर्फ कीड़े मकोड़े होने

जैसे हे पांच तत्वा मेरी आदिन होंगे मई अपने दोनों बेटो को फिर से जिन्दा कर दूंगा

तीनो बाप बेटे एक एक लड़की एक एक ोुरत की जवानी का भोग करेंगे

ऐसे हे अपनी पापयुक्त इच्छा का बखान करते हुए हुए वो जा पहुंचा उस रूम में जहा साडी लड़किया सोई हुए थी

त्रिकाल खुसी की सुंदरता को देख उसकी आवर बड़ा

वह खुसी को चुने हे वाला था की साथ में सोई हुयी कोमल को देख कुछ याद करने लगा

त्रिकाल .....इसको कहि तो देखा है मैंने

खा देखा खा देखा ....है याद आया उस दिन मॉल में सायद इसी से टच हुवा था मई

ओह्ह तो ये आकाश तत्वा है जिसने मुझे उतनी जोर से बिजली का झटका दिया

वैसे बे साली है बड़ी हसीं

कुछ मंत्रो उच्चारण करके 6 लड़कियों ( दिव्या .komal..chanchal.sheetal..nidhi. खुसी..) को हवा में हाथ के इसारे से ले कर मेंशन के बहार निकल गया

आवर वह से लड़कियों को साथ ले पहुंच गया अपनी शीतनी गुफा में

( ये वही वक़्त तो जब देव को अपनी बहनो की याद आयी )

त्रिकाल सभी लड़कियों को बलि के पास सुला कर हसन की तयारी कर रहा था

सबमु त्रिकाल का सरीर ले आया था वही पे

त्रिकाल ने मंत्रो से गुफा को सिल्ल ( बंद दिया था )/कर दिया

त्रिकाल आत्मा रूप में हे हे हवन करने लगा अबे हवन पूरा हुवा तबे मूर्ति से आवाज आयी त्रिकाल तुम सफल हुए आखिर पांच तत्वा दरक लड़कियों को यहाँ लेन में

त्रिकाल ....जी महामहिम आपके आशीर्वाद आवर आपकी दी सक्तियो से संभव हुवा है महामहिम

शीतन खुसी को देख कर कुछ सोच में पद गया

खुसी से जो ऊर्जा शीतन महसूस कर रहा था वो कुछ कुछ जनि पहचानी थे किन्तु उसे याद नै आया कुछ

तबे एक बहुत बड़ा दमक हुवा जिस से लगभग आदि गुफा मिटी में मिल गई सामने था उनके रुद्रदेव ............

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नेक्स्ट अपडेट कल तक.....
 
अपडेट. 36

त्रिकाल ....जी महामहिम आपके आशीर्वाद आवर आपकी दी सक्तियो से संभव हुवा है महामहिम

शीतन खुसी को देख कर कुछ सोच में पद गया

खुसी से जो ऊर्जा शीतन महसूस कर रहा था वो कुछ कुछ जनि पहचानी थे किन्तु उसे याद नै आया कुछ

तबे एक बहुत बड़ा दमक हुवा जिस से लगभग आदि गुफा मिटी में मिल गई सामने था उनके रुद्रदेव ............

अब आगे............

जैसे हे शैतान की नज़ारा रुद्रदेव पे पड़ी उसकी ऊर्जा को महसूस करते हे

शैतान की हवा टाइट हो गई

शैतान उस ऊर्जा के बन्दर को आवर किसकी ऊर्जा है पहचानते हे वह से निकलने हे बलाई समझी अपनी

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रुद्रदेव ने अपने पास में पड़े त्रिकाल के सरीर को एक बार गुस्से से देखा

त्रिकाल का सरीर पल भर में हे रख में बदल गया

त्रिकाल के सरीर से जुडी हुए तामसिक सकतिया त्रिकाल का सरीर जलते हे वो साडी सकतिया रुद्रदेव में समाहित हो गई

रुद्रदेव ने एक बार शैतान को मूर्ति को देखा उस मूर्ति को रूद्र ने पहचान लिया

रूद्र कुछ तो तामसिक सक्तियो के कारन गुस्सा था

जैसे हे उस शैतानी मूर्ति को पहचाना रूद्र का गुस्सा अपने चरम सिमा लांग गया

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रुद्रदेव का पूरा सरीर गुस्से के अग्नि में जलने लगा

उसके सरीर से बहुत तेज़ अग्नि की लपटे निकलने लगी

trikal....ye तुमने क्या किया मूरख मेरा सरीर हे नस्ट कर दिया कितनो की बलि दे कर मैंने अपने सरीर को इतना ताकतवर बनाया था

तुमने एक पल में उसको नस्ट कर दिया

रुद्रदेव .....त्रिकाल तुमने मेरी सौपनीका ...के बलि चढ़ाने का घोर पाप किया तुम्हे उसकी सजा जरूर मिलिगे

रुद्रदेव ने गुस्से से अपनी आखो से अग्नि शैतान की मूर्ति पर फेंकी

पल भर में मूर्ति फंगल लार मिटी में मिल गयी

त्रिकाल ....ये तुमने क्या किया ...अह्ह्ह्हह बचचो मुझे कूऊईई तो बचावू

महामहिम मेरी रखशा करो

अपने गुलामममम को इस दर्द से बच्छाउओ

रुद्रदेव ....कोई नै आएगा तुम्हे बचने वाला

थे वह पे तांत्रिक गुरुदेव को आत्मा प्रकट हुयी रुद्रदेव के सरीर से

( भाई लोगो कन्फ्यूज्ड न होना ये वही अंश है जो तांत्रिक गुरुदेव ने रुद्रदेव को रक्षा कवच के रूप में प्रदान किया था )

t.aatma....trikaal मैंने तुजसे खा था मेरा दिया हुवा सराफ आवस्य उचित समय पे तुम्हारी साडी सकतिया जो पाप करके तुमने शीतन से प्राप्त की है है सब चीन जाएगी

आज वो समय आ गया है तुम्हारे मृत्यु रद ( रुद्रदेव का पूरा नाम नै लिया गुरुदेव ने )

के हाथो हे लिखी है

किन्तु तुम्हारे सरीर नस्ट हो जाने के कारन

तुम जब तक किसी अन्य सरीर (किसी आवर मेरिट सरीर ) को दर्जन नै करते तब तक मेरा सराफ पुराण रूप से फलित नै हो सकता

तब तक भटकते रहे अतृप्त आत्मा बन कर

t.gurudev....Rd अबे इसकी मरतु ला समय नै आया है इस से इसकी आत्मा से जुडी समस्त तामसिक सकतिया इस से चीन लो

रुद्रदेव .....जो आज्ञा गुरुदेव

(गुरुदेव .रुद्रदेव में फिर से समां गए )/

रुद्रदेव के मस्तिष्क में कुछ मन्त्र बताया t.gurudev ने

जैसे हे रुद्रदेव ने मंत्रो का उच्चारण किया

त्रिकाल ..की आत्मा चीख पुकार मचने लगे

त्रिकाल ...मुझे माफ कर दो गुरुदेव

मुज पापी पे ध्या करो

अह्हह्ह्ह्ह रूद्र मुझे छोड़ दो मुझे जाने दो मई फिर कबे तुम्हारे रस्ते नै आऊंगा

त्रिकाल तब तक चिलता रहा जब तक उसकी आत्मा से आखरी कटरा तक न उसकी आत्मा से विलख हो गया

साडी तामसिक सकतिया रुद्रदेव में समां गई इस से रुद्रदेव को पीड़ा होने लगे दिव्या आवर तामसिक सक्रिय एक दूसरे से विपरीत होती है एक दूसरे को ख़तम करना चाहती थी आवर इन सब में दर्द तकलीफ देव के सरीर में हो रहे थी

t.gurudev ..रुद्रम के मंद में

संत हो जाओ रुद्रदेव खुद को एकाग्र करो

ध्यान में जाओ आवर अपनी खुडलिनी शक्तियों को जाग्रित करो

अब तक गुरुदेव आर्य यहाँ पूछ चुके थे...

( दोस्तों जब तांत्रिक गुरुदेव का जिकरा होगा तब ...t.gurudev likhunga...our गुरुदेव आर्य को ...गुरुदेव ..)

गुरुदेव ....देव खुद को संत करो ध्यान में जाओ आवर अपनी कुण्डलिनी सकती को जागृत करो थे तुम इन सक्तियो पे आवर खुद की पीड़ा पे कण्ट्रोल कर पाओगे अन्यथा ये सकतिया तुम पे हावी हो जाएगी

रुद्रदेव ...दर्द में तड़पते हुए जो आज्ञा गुरुदेव

आवर वही ध्यान में बेथ जाता है

गुरुदेव लड़किया की आवर देख कर अपनी सकती से उनको उनके रूम में पहुंचा देता है

अब उनको क्या पता चला क्या नै सुबह जब उठेंगी थे पता चलेगा ..

सुबह के लगभग 5 बजे देव ध्यान से उठा अबे वो पुराण रूप से संत स्थ किन्तु थोड़ा थका हुवा

इस वांट देव कुछ ऐसा लग रहा था

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देव ने आगे बढ़ कर गुरुदेव को परनाम किया

गुरुदेव ...कायण हो पुत्र सदैव विनय भाव

गुरुदेव ...तामसिक सक्तियो को अपने सरीर में कैसा महसूस कर रहे हो

( ये सब गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए खा जैसे के वो जानते हो इन शक्तियों का प्रभाव क्या होगा )

देव ...सरमते हुए ...गुरुदेव थोड़ी थकन हो रहे है आवर थोड़ी उत्तेजना बे महसूस कर रहा हु विचित्र प्रकार की

कुछ बे ठीक से समाज नै आ रहा

है

गुरुदेव ....पुत्र हम जानते है आपकी मनोदशा

हम आपकी सहायता बे करना कहते है किन्तु हम नै कर सकते

तुम इस वैस्य में अपनी गुरुमा से चर्चा करना वो आपको उचित मार्ग बता देंगी

देव ...जैसा आप कहे गुरुदेव

अब घर चले गुरुदेव

गुरुदेव ...है चलो सूर्यौदय हो चूका है

देव ...जी गुरुदेव आज तो मेरी युद्ध ाब्याश का समय बे निकल चूका है

गुरुदेव ..उचित खा अब कुछ समय योध ायश की जगह ध्यान में ज्यादा समय लगो आवर अपने परिवार को समय दो

कुछ समय बाद दोनों राणा मेंशन में थे .......

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नेक्स्ट अपडेट कल सां तक आएगा दोस्तों .......
 
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