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- Dec 5, 2013
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अपडेट 81
देव की बात सुन शीतल चादर के अंदर गुस्से कर अपनी निघ्त्य निकल देती है
देव भी निचे किसक कर दोनों के बिच में चादर में लेट जाता है
कुछ देर बात करने के बाद देव ने शीतल के गाल पे गुड नाईट किश किया फिर चंचल के गाल पे भी आवर अपनी आँखे बंद कर के लेट गया
कुछ 15,20 मिंट में हे दोनों सो गया
देव इस बात से अनभिज्ञ की उसकी बगल में एक खूबसूरत चंचल लड़की पूरी नुदे हो कर सोये हुए है ............
अब आगे .........
सुबह जब शीतल की आँखे खुली तो उसकी आँखे खुली की खुली हे रह गई
क्युकी देव शीतल के पीछे से चिपका हुआ था आवर शीतल को बाँहों में भर रखा था देव का हाथ अपनी बूब्स पे महसूस करते हे शीतल की नींद ुध गई आवर उसकी आँखे खुली गई
( शीतल ......ही एकलिंग जी ये क्या होगा रहा है प्रिंस मेरे बूब्स को पकड़ रखा है )
शीतल डेरी से अपनी गर्दन गुमना कर देखते तो देव को सोया हुआ प् कर उसको कुछ रहत मिलती है
पर जैसे उसका ध्यान अपनी गांड के हॉल पे कुछ गरम गरम चिंता है तो शीतल की सांसे तेज होने लगी
शीतल जल्दी से अपनी बूब्स पे से देव का हाथ हटा कर बाथरूम की आवर भाग जाती है
देव बीएड पे हुए हलचल से सिदा लेट जाता है
कुछ 15 ,20 मिंट बाद जा शीतल फ्रेश hi कर बहार निकली तो सामने कुछ आवर हे सीन था
सामने चंचल पूरी नंगी थी आवर देव चंचल के नंगे जिसम से लिप्त हुआ पीछे से आराम से सो रहा था
देव का हाथ चंचल की 34 की चूचियों पे था
आवर चंचल का हाथ देव की गांड पे
शीतल ......बस यही देखने बाकि था प्रिंस ने दी की चूचियों भी दबा दी आवर ये दी भी देखो कैसे पूरी नंगी चिपका हुए है इनसे
शीतल ने दोनों पे चादर डाला आवर देव को जगाने लगी
शीतल .....प्रिंस उठो सुबह होते गई है आप आपको ध्यान नहीं करना है
शीतल के 2,3 बार हिलने से देव भी उठ जाता है
अपने हाथो में किसी कोमल नरम स्पंच जैसे नरम चीज़ का अहसास होते हे देव समाज जाता की ये क्या
शीतल भी गबरा गई थी क्युकी देव के हिलता हुआ हाथ का रुकना काफी था की देव को चंचल के माँगा सोने का पता चल गया
देव ......दी मैं अपने रूम में जा रहा हूँ
कह कर देव बिना कुछ बोले निकल गया
देव को ये तक नहीं पता था की सुबह के मॉर्निंग इरेक्शन के कारन उसका लैंड हार्ड हो कर बहार भी अपनी ोकत दिखा रहा है
देव के रूम से जाते हे शीतल रूम को लॉक कर पुरे गुस्से से चिलाती चंचल पे
किसी आवर ने ये शीतल को ऐसे चले देखा होता तो कोई यकीं नहीं करता की ये शीतल होगी
क्युकी शीतल अपने नाम की तरह बहुत शांत रहती है
चंचल हड़बड़ाते हुए उठी सामने गुस्से में शीतल का चेहरा देख चंचल की हवा खुश्क होने लगी
शीतल ......देख लिया अपनी बेहूदगी का नतीजा आपने
चंचल .......शीतल दी मैंने क्या किया है जो आप गुस्सा हो गई
शीतल चंचल के सरीर से चादर खिंच कर अलग करती है
शीतल .......ये किया है आपने आपको पता है रात को प्रिंस यही सोये थे
शीतल की बात सुन कर चंचल को ख़ुशी हुए पैर अबले हे पल शीतल की बात सुनते हे उसकी सकल रोने वाली हो गई
शीतल .......प्रिंस को आपके माँगा हो कर सोने का पता चल गया वो बिना कुछ बोले नाराज़ hi कर अपने रूम में चले गए
आपकी वजह से वो मुझसे भी बात नहीं की
चंचल .....सॉरी दी मुझे माफ कर दीजिये मुझसे गलती हो गई
चंचल फुट फुट कर रोने लगी
शीतल को भी अब अपनी बहन को रोटी हुए देख कर बुरा लग रहा था
शीतल ......सॉरी दी पैर मैं क्या करती आप जानती है न मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ पैर आपसे से कही ज्यादा प्रिंस से वो आज आपके कारन नाराज़ हो गया उन्होंने गुड मॉर्निंग तक विश नहीं किया
डेरी डेरी शीतल की आँखों में भी आंसू बहते हुए शीतल के खूबसूरत चेहरे को बीघाट हुए निचे गिरने लगे
चंचल अपनी बहन को गले से लगाती है
चंचल ......सॉरी दी मैं प्रिंस से माफी मांग लुंगी आप रोये नहीं प्लेसेस
कुछ टाइम बाद शीतल नार्मल हो जाती है
डेरी से शीतल चंचल की चुकी को पकड़ कर सहलाने देती है
चंचल ....िस्ससाहहह दी ये क्या था आप कब से
शीतल .....ऐसा कुछ नहीं है वो तो मैं देख रही थी के प्रिंस को कैसा लगा होगा इनको पकड़ कर
चंचल शीतल की बात सुन कर चौंक गई
चंचल .....क्या सच में दी उन्होंने इनको चूहा था
शीतल ....है दी अब आप जल्दी से फ्रेश हो कर कपडे पहनो कही आप पे मेरी नियत न ख़राब hi जाये
प्रिंस का पता नहीं क्या हुआ होगा
चंचल मस्ती करते हुए
शीतल की दोनों चूचियों को सहला कर बैग जाती है जाते हुए
चंचल .......दी कभी प्रिंस को पकड़ ने का मौका दीजिये आपको भी पता चल जायेगा कैसा लगा होगा मुझे आवर उनको हेहेहे
देव अपने रूम में जब पंहुचा तो सीधा बाथरूम में गुस्स गया
देव ......क्या चंचल दी मेरे साथ में नुदे हो कर सोई थी
आवर मुझे पता भी नहीं चला शीतल दी मेरे बारे में क्या सोच रहे होगी के कैसा भाई हूँ मैं जो अपनी हे बहन के साथ
सहित मैंने ध्यान क्यों नहीं दिया मेरा ये भी तो खड़ा था जब मैं उठा था
इसका मतलब उन्होंने देख लिया आवर चंचल दी तो नंगी मेरे बाँहों में थी उसका मतलब उनको भी पता होगा
मुझे दी को सॉरी बोलना चाइये
देव फटाफट रेडी hi कर निकला पर बहार में निधि उस से टकरा गई
निधि .....क्या हुआ प्रिंस इतने जल्दी में किदार चले आप सुबह सुबह
देव .....सॉरी दी मेरा ध्यान कही आवर था
कुछ नहीं वो शीतल दी के पास जा रहा हूँ कुछ काम था उनसे
निधि .......अगर काम जरूरी न हो तो मेरे साथ चलिए आप
देव .....हम्म्म ठीक है चलिए आप
निधि देव को ले कर अपने रूम में चली गई
देव .....बोलिये दी क्या बात है
निधि अपनी अलमारी खोलती है आवर उसमे से कुछ नई ड्रेसेस निकल कर देव के सामने रखनी है
निधि .....प्रिंस मैं चाहती हूँ की आप मेरी ड्रेस सेलेक्ट करे की मैं कोनसी ड्रेस पह्नु
देव ......क्या दी अआप इतनी खूबसूरत है कोई भी ड्रेस आप पहनो आप पे सब खूबसूरत हे लगेंगी
क्युकी खूबसूरत कपडे में नहीं इंसानो में होती है
निधि ......थैंक्स प्रिंस पैर आप सेलेक्ट करो न प्लेसेस
देव 3,4 ड्रेस में से सबसे अच्छी ड्रेस सेलेक्ट करके निधि को देता है जो की ब्लैक कलर्स में थी देव ने निधि के कलर को ध्यान में रख कर ये ड्रेस स्लेक्टे की थी
निधि .......आप यही रुकना मैं अभी आई चेंज करके
देव ....OK बूत जल्दी आना आप दी
निधि अपनी ड्रेस आवर मैचिंग अंडर गारमेंट्स ब्रा पंतय ले कर चली गयी
कुछ 10 मिंट बाद बाथरूम से निकली
निधि ......कैसे लग रही हूँ मैं प्रिंस
देव .....बहुत खूबसूरत सच कहु दी तो आप कोई भी ड्रेस तरय करो आप पे सब खूबसूरत हे लगेगी
आपसे ड्रेस की खूबसूरती बढ़ जाती है
नदी ......थैंक्स प्रिंस ुम्मम्हा
देव .....उम्म्म्मः दी किसी की नज़र न लगे आपको
ok मैं चलती हूँ दी
देव वह निकल कर शीतल के रूम में पंहुचा पैर तब तक दोनों बहने त्यार hi कर रूम से निकल गई थी
देव जब हलकी में पंहुचा तो वह पहले से हे सब त्यार थे
रतन फॅमिली भी पहुंच चुकी थी रतन सिंह आवर रघुवीर को छोड़ कर
देव ने सब का आशीर्वाद लिया सब से गले मिला तभी वह सोनिया समय की फॅमिली भी पहुंच गई
सब से मिलने के बाद माँ सा ने चलने की तयारी एक बार फिर से देखने को कहा
वहीँ शालिनी आवर रुपाली आज पहली बार राणा मेंशन को देख रही थी
माया देवी .....देव बीटा अपनी बस को अपना महल नहीं दिखाओगे क्या
दिव्या आगे बढ़ी पर मोहिनी के न में गर्दन हिलने पे रुक गई
देव .....क्यों नहीं माँ सा चलिए बस सा आप दोनों मेरे साथ चलिए
शालिनी आवर रुपाली दोनों हे ख़ुशी ख़ुशी देव का हाथ ताम चली लगी जिस से दिव्या को गुस्सा आने लगा
मोहिनी .....दिव्या बीटा आप मेरा साथ आये कुछ सामान रह गया है रूम में
दिव्या ......जी माँ
दिव्या मोहिनी के साथ चली गई दादा ये सब देख कर कुछ चिंतित हो गई
क्युकी उन्होंने दिव्या का वो रूप पहले भी देखा था जिस से सवयं माँ सा भी डर्टी है
माँ सा .....मैं अभी आई माया
माँ सा भी मोहिनी के रूम की आवर चल दी
मोहिनी .....बेटी दिव्या ऐसा गुस्सा नहीं करते मैंने आपको पहले भी कहा था न
दिव्या .....माँ आपने देखा न उन्होंने क्या किया
मोहिनी .....बेटी उनका भी हक़ है देव पे वो बुआ है देव की आप भुला रही है आपने क्या कहा था
दिव्या .......सॉरी माँ पैर हम खुद को रोक नहीं लेट है जब प्रिंस को किसी आवर के साथ देखते है
माँ सा .......तो फिर एक काम करो भुला जाओ प्रिंस को क्युकी वो कभी भी किसी एक का नहीं hi सकता है
तुम्हे इतना सा देखने पे गुस्सा आ गया तो जब सचाई पता चलेगा तो क्या करोगी
दिव्या .....क्या मतलब है माँ सा
माँ सा .....जैसे आप प्रेम करती जो वैसे बहुत से लड़किया या आपकी बहने है सब देव से प्रेम करती है खुद मोहिनी नंदिता रेणुका तुम्हारी दोनों बुआ सोनिया आवर समय किस किस को देव से दूर करोगी या उनको देख कर गुस्सा करोगी
ये एक ऐसा बोम फोड़ा था माँ सा ने जिसने चपेट में खुद मोहिनी भी आ गई
आवर हैरान भी थी की माँ सा को कैसे पता चला की रेणुका आवर नंदिता भी देव से प्रेम करती है
दिव्या तो किसी स्टेचू के तरह माँ सा को देख रही थी
मोहिनी ......ये आप क्या कह रही है माँ सा
माँ सा .....बेटी इन निधि आँखों ने दुनिया देखि मुझसे कुछ नहीं छुपा है
आवर कोई भी जो देव के साथ कुछ वक़्त बिताएगा वो उस से न चाहते हुए भी प्रेम कर बैठेगा उसका जनम हे इस लिया हुआ है
मोहिनी आगे कुछ न बोल पाई
दिव्या .....माँ सा हम क्या करे हम प्रिंस को किसी आवर के साथ देख खुद पे काबू नहीं रख पते है
माँ सा दिव्या के आंसू पिंच खुद के गले लगा लेती है
माँ सा .....चिंता न कर बेटी बहुत जल्दी मैं गुरुदेव से बात करती हूँ पैर बीटा ऐसा गुस्सा करने से तुम खुद देव को अपने से दूर कर रही हो
कुछ देर मोहिनी आवर माँ सा के समजने से दिव्या का गुस्सा shan't होते जाता है
देव दोनों को अच्छे से गमाता है तभी शालिनी का फ़ोन बहने लगता है तो वो फ़ोन ले कर कुछ अलग चली गई
रुपाली जो अब तक एकांत देख रही थी उसको मौका मिल गया देव से अकेले में कुछ बात करने का
रुपाली ......तो आपने क्या सोचा है देव
देव ....किस बारे में बुआ सा
रुपाली .....बुआ सा नहीं रुपाली अभी तो हम अकेले है
देव .....OK रुपाली
रुपाली ......मुझे अपने बच्चे की माँ कब बना रहे हो
देव .....उदयपुर चल कर बताता हूँ आपको अभी यहाँ तो कुछ हाउ नहीं सकता आपकी इच्छापूर्ति उदयपुर आवर में हे होगी
देव की बात सुनते हे रुपाली उछाल कर देव के कमर में अपनी रेंज मैश काश कर किश करने लगी
देव ने भी रुपाली का पूरा साथ दिया 3,4 मिंट बाद किसी के खस्ने से इन दोनों का ध्यान टुटा तो सामने देखते हे दोनों के चेहरे सफ़ेद पद गए ........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........
देव की बात सुन शीतल चादर के अंदर गुस्से कर अपनी निघ्त्य निकल देती है
देव भी निचे किसक कर दोनों के बिच में चादर में लेट जाता है
कुछ देर बात करने के बाद देव ने शीतल के गाल पे गुड नाईट किश किया फिर चंचल के गाल पे भी आवर अपनी आँखे बंद कर के लेट गया
कुछ 15,20 मिंट में हे दोनों सो गया
देव इस बात से अनभिज्ञ की उसकी बगल में एक खूबसूरत चंचल लड़की पूरी नुदे हो कर सोये हुए है ............
अब आगे .........
सुबह जब शीतल की आँखे खुली तो उसकी आँखे खुली की खुली हे रह गई
क्युकी देव शीतल के पीछे से चिपका हुआ था आवर शीतल को बाँहों में भर रखा था देव का हाथ अपनी बूब्स पे महसूस करते हे शीतल की नींद ुध गई आवर उसकी आँखे खुली गई
( शीतल ......ही एकलिंग जी ये क्या होगा रहा है प्रिंस मेरे बूब्स को पकड़ रखा है )
शीतल डेरी से अपनी गर्दन गुमना कर देखते तो देव को सोया हुआ प् कर उसको कुछ रहत मिलती है
पर जैसे उसका ध्यान अपनी गांड के हॉल पे कुछ गरम गरम चिंता है तो शीतल की सांसे तेज होने लगी
शीतल जल्दी से अपनी बूब्स पे से देव का हाथ हटा कर बाथरूम की आवर भाग जाती है
देव बीएड पे हुए हलचल से सिदा लेट जाता है
कुछ 15 ,20 मिंट बाद जा शीतल फ्रेश hi कर बहार निकली तो सामने कुछ आवर हे सीन था
सामने चंचल पूरी नंगी थी आवर देव चंचल के नंगे जिसम से लिप्त हुआ पीछे से आराम से सो रहा था
देव का हाथ चंचल की 34 की चूचियों पे था
आवर चंचल का हाथ देव की गांड पे
शीतल ......बस यही देखने बाकि था प्रिंस ने दी की चूचियों भी दबा दी आवर ये दी भी देखो कैसे पूरी नंगी चिपका हुए है इनसे
शीतल ने दोनों पे चादर डाला आवर देव को जगाने लगी
शीतल .....प्रिंस उठो सुबह होते गई है आप आपको ध्यान नहीं करना है
शीतल के 2,3 बार हिलने से देव भी उठ जाता है
अपने हाथो में किसी कोमल नरम स्पंच जैसे नरम चीज़ का अहसास होते हे देव समाज जाता की ये क्या
शीतल भी गबरा गई थी क्युकी देव के हिलता हुआ हाथ का रुकना काफी था की देव को चंचल के माँगा सोने का पता चल गया
देव ......दी मैं अपने रूम में जा रहा हूँ
कह कर देव बिना कुछ बोले निकल गया
देव को ये तक नहीं पता था की सुबह के मॉर्निंग इरेक्शन के कारन उसका लैंड हार्ड हो कर बहार भी अपनी ोकत दिखा रहा है
देव के रूम से जाते हे शीतल रूम को लॉक कर पुरे गुस्से से चिलाती चंचल पे
किसी आवर ने ये शीतल को ऐसे चले देखा होता तो कोई यकीं नहीं करता की ये शीतल होगी
क्युकी शीतल अपने नाम की तरह बहुत शांत रहती है
चंचल हड़बड़ाते हुए उठी सामने गुस्से में शीतल का चेहरा देख चंचल की हवा खुश्क होने लगी
शीतल ......देख लिया अपनी बेहूदगी का नतीजा आपने
चंचल .......शीतल दी मैंने क्या किया है जो आप गुस्सा हो गई
शीतल चंचल के सरीर से चादर खिंच कर अलग करती है
शीतल .......ये किया है आपने आपको पता है रात को प्रिंस यही सोये थे
शीतल की बात सुन कर चंचल को ख़ुशी हुए पैर अबले हे पल शीतल की बात सुनते हे उसकी सकल रोने वाली हो गई
शीतल .......प्रिंस को आपके माँगा हो कर सोने का पता चल गया वो बिना कुछ बोले नाराज़ hi कर अपने रूम में चले गए
आपकी वजह से वो मुझसे भी बात नहीं की
चंचल .....सॉरी दी मुझे माफ कर दीजिये मुझसे गलती हो गई
चंचल फुट फुट कर रोने लगी
शीतल को भी अब अपनी बहन को रोटी हुए देख कर बुरा लग रहा था
शीतल ......सॉरी दी पैर मैं क्या करती आप जानती है न मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ पैर आपसे से कही ज्यादा प्रिंस से वो आज आपके कारन नाराज़ हो गया उन्होंने गुड मॉर्निंग तक विश नहीं किया
डेरी डेरी शीतल की आँखों में भी आंसू बहते हुए शीतल के खूबसूरत चेहरे को बीघाट हुए निचे गिरने लगे
चंचल अपनी बहन को गले से लगाती है
चंचल ......सॉरी दी मैं प्रिंस से माफी मांग लुंगी आप रोये नहीं प्लेसेस
कुछ टाइम बाद शीतल नार्मल हो जाती है
डेरी से शीतल चंचल की चुकी को पकड़ कर सहलाने देती है
चंचल ....िस्ससाहहह दी ये क्या था आप कब से
शीतल .....ऐसा कुछ नहीं है वो तो मैं देख रही थी के प्रिंस को कैसा लगा होगा इनको पकड़ कर
चंचल शीतल की बात सुन कर चौंक गई
चंचल .....क्या सच में दी उन्होंने इनको चूहा था
शीतल ....है दी अब आप जल्दी से फ्रेश हो कर कपडे पहनो कही आप पे मेरी नियत न ख़राब hi जाये
प्रिंस का पता नहीं क्या हुआ होगा
चंचल मस्ती करते हुए
शीतल की दोनों चूचियों को सहला कर बैग जाती है जाते हुए
चंचल .......दी कभी प्रिंस को पकड़ ने का मौका दीजिये आपको भी पता चल जायेगा कैसा लगा होगा मुझे आवर उनको हेहेहे
देव अपने रूम में जब पंहुचा तो सीधा बाथरूम में गुस्स गया
देव ......क्या चंचल दी मेरे साथ में नुदे हो कर सोई थी
आवर मुझे पता भी नहीं चला शीतल दी मेरे बारे में क्या सोच रहे होगी के कैसा भाई हूँ मैं जो अपनी हे बहन के साथ
सहित मैंने ध्यान क्यों नहीं दिया मेरा ये भी तो खड़ा था जब मैं उठा था
इसका मतलब उन्होंने देख लिया आवर चंचल दी तो नंगी मेरे बाँहों में थी उसका मतलब उनको भी पता होगा
मुझे दी को सॉरी बोलना चाइये
देव फटाफट रेडी hi कर निकला पर बहार में निधि उस से टकरा गई
निधि .....क्या हुआ प्रिंस इतने जल्दी में किदार चले आप सुबह सुबह
देव .....सॉरी दी मेरा ध्यान कही आवर था
कुछ नहीं वो शीतल दी के पास जा रहा हूँ कुछ काम था उनसे
निधि .......अगर काम जरूरी न हो तो मेरे साथ चलिए आप
देव .....हम्म्म ठीक है चलिए आप
निधि देव को ले कर अपने रूम में चली गई
देव .....बोलिये दी क्या बात है
निधि अपनी अलमारी खोलती है आवर उसमे से कुछ नई ड्रेसेस निकल कर देव के सामने रखनी है
निधि .....प्रिंस मैं चाहती हूँ की आप मेरी ड्रेस सेलेक्ट करे की मैं कोनसी ड्रेस पह्नु
देव ......क्या दी अआप इतनी खूबसूरत है कोई भी ड्रेस आप पहनो आप पे सब खूबसूरत हे लगेंगी
क्युकी खूबसूरत कपडे में नहीं इंसानो में होती है
निधि ......थैंक्स प्रिंस पैर आप सेलेक्ट करो न प्लेसेस
देव 3,4 ड्रेस में से सबसे अच्छी ड्रेस सेलेक्ट करके निधि को देता है जो की ब्लैक कलर्स में थी देव ने निधि के कलर को ध्यान में रख कर ये ड्रेस स्लेक्टे की थी
निधि .......आप यही रुकना मैं अभी आई चेंज करके
देव ....OK बूत जल्दी आना आप दी
निधि अपनी ड्रेस आवर मैचिंग अंडर गारमेंट्स ब्रा पंतय ले कर चली गयी
कुछ 10 मिंट बाद बाथरूम से निकली
निधि ......कैसे लग रही हूँ मैं प्रिंस
देव .....बहुत खूबसूरत सच कहु दी तो आप कोई भी ड्रेस तरय करो आप पे सब खूबसूरत हे लगेगी
आपसे ड्रेस की खूबसूरती बढ़ जाती है
नदी ......थैंक्स प्रिंस ुम्मम्हा
देव .....उम्म्म्मः दी किसी की नज़र न लगे आपको
ok मैं चलती हूँ दी
देव वह निकल कर शीतल के रूम में पंहुचा पैर तब तक दोनों बहने त्यार hi कर रूम से निकल गई थी
देव जब हलकी में पंहुचा तो वह पहले से हे सब त्यार थे
रतन फॅमिली भी पहुंच चुकी थी रतन सिंह आवर रघुवीर को छोड़ कर
देव ने सब का आशीर्वाद लिया सब से गले मिला तभी वह सोनिया समय की फॅमिली भी पहुंच गई
सब से मिलने के बाद माँ सा ने चलने की तयारी एक बार फिर से देखने को कहा
वहीँ शालिनी आवर रुपाली आज पहली बार राणा मेंशन को देख रही थी
माया देवी .....देव बीटा अपनी बस को अपना महल नहीं दिखाओगे क्या
दिव्या आगे बढ़ी पर मोहिनी के न में गर्दन हिलने पे रुक गई
देव .....क्यों नहीं माँ सा चलिए बस सा आप दोनों मेरे साथ चलिए
शालिनी आवर रुपाली दोनों हे ख़ुशी ख़ुशी देव का हाथ ताम चली लगी जिस से दिव्या को गुस्सा आने लगा
मोहिनी .....दिव्या बीटा आप मेरा साथ आये कुछ सामान रह गया है रूम में
दिव्या ......जी माँ
दिव्या मोहिनी के साथ चली गई दादा ये सब देख कर कुछ चिंतित हो गई
क्युकी उन्होंने दिव्या का वो रूप पहले भी देखा था जिस से सवयं माँ सा भी डर्टी है
माँ सा .....मैं अभी आई माया
माँ सा भी मोहिनी के रूम की आवर चल दी
मोहिनी .....बेटी दिव्या ऐसा गुस्सा नहीं करते मैंने आपको पहले भी कहा था न
दिव्या .....माँ आपने देखा न उन्होंने क्या किया
मोहिनी .....बेटी उनका भी हक़ है देव पे वो बुआ है देव की आप भुला रही है आपने क्या कहा था
दिव्या .......सॉरी माँ पैर हम खुद को रोक नहीं लेट है जब प्रिंस को किसी आवर के साथ देखते है
माँ सा .......तो फिर एक काम करो भुला जाओ प्रिंस को क्युकी वो कभी भी किसी एक का नहीं hi सकता है
तुम्हे इतना सा देखने पे गुस्सा आ गया तो जब सचाई पता चलेगा तो क्या करोगी
दिव्या .....क्या मतलब है माँ सा
माँ सा .....जैसे आप प्रेम करती जो वैसे बहुत से लड़किया या आपकी बहने है सब देव से प्रेम करती है खुद मोहिनी नंदिता रेणुका तुम्हारी दोनों बुआ सोनिया आवर समय किस किस को देव से दूर करोगी या उनको देख कर गुस्सा करोगी
ये एक ऐसा बोम फोड़ा था माँ सा ने जिसने चपेट में खुद मोहिनी भी आ गई
आवर हैरान भी थी की माँ सा को कैसे पता चला की रेणुका आवर नंदिता भी देव से प्रेम करती है
दिव्या तो किसी स्टेचू के तरह माँ सा को देख रही थी
मोहिनी ......ये आप क्या कह रही है माँ सा
माँ सा .....बेटी इन निधि आँखों ने दुनिया देखि मुझसे कुछ नहीं छुपा है
आवर कोई भी जो देव के साथ कुछ वक़्त बिताएगा वो उस से न चाहते हुए भी प्रेम कर बैठेगा उसका जनम हे इस लिया हुआ है
मोहिनी आगे कुछ न बोल पाई
दिव्या .....माँ सा हम क्या करे हम प्रिंस को किसी आवर के साथ देख खुद पे काबू नहीं रख पते है
माँ सा दिव्या के आंसू पिंच खुद के गले लगा लेती है
माँ सा .....चिंता न कर बेटी बहुत जल्दी मैं गुरुदेव से बात करती हूँ पैर बीटा ऐसा गुस्सा करने से तुम खुद देव को अपने से दूर कर रही हो
कुछ देर मोहिनी आवर माँ सा के समजने से दिव्या का गुस्सा shan't होते जाता है
देव दोनों को अच्छे से गमाता है तभी शालिनी का फ़ोन बहने लगता है तो वो फ़ोन ले कर कुछ अलग चली गई
रुपाली जो अब तक एकांत देख रही थी उसको मौका मिल गया देव से अकेले में कुछ बात करने का
रुपाली ......तो आपने क्या सोचा है देव
देव ....किस बारे में बुआ सा
रुपाली .....बुआ सा नहीं रुपाली अभी तो हम अकेले है
देव .....OK रुपाली
रुपाली ......मुझे अपने बच्चे की माँ कब बना रहे हो
देव .....उदयपुर चल कर बताता हूँ आपको अभी यहाँ तो कुछ हाउ नहीं सकता आपकी इच्छापूर्ति उदयपुर आवर में हे होगी
देव की बात सुनते हे रुपाली उछाल कर देव के कमर में अपनी रेंज मैश काश कर किश करने लगी
देव ने भी रुपाली का पूरा साथ दिया 3,4 मिंट बाद किसी के खस्ने से इन दोनों का ध्यान टुटा तो सामने देखते हे दोनों के चेहरे सफ़ेद पद गए ........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........