Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance) - Page 5 - SexBaba
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Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance)

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हम लोग कोमल क घर गए वहां मुझी देख क बुआ बोहत बोहत खुश होइ और मैने घर पी फ़ोन क्र क बता दिया था और तनीषा को सब मैनेज करनी को कह दिया था...

मुझी अलग कमरा मिला सोने क लिए शाम को अंकल ए ुणस्य मिला और थोड़ी बात चीत की उनकी प्रॉब्लम क बारी में और जाने की कोशिश की क उनका और राजीव का क्या पन्गा ही यह पोछा ुँहू न्य बताया क वह उनकी कंपनी खरीदना चाहती हैं और वह मुझपी प्रेशर दाल रही हैं...

मैं कुछ देर बात क्र क कमरे में आज्ञा...

और सोचनी लगा क्या किया जाये.....

यौन hi प्लान बना क सू गया...

अगली सुबह उठा और ध्यान लगाया और तनीषा को फ़ोन किया 3 रिंग बाद hi फ़ोन उठा लिया...

मैं:- गुड मॉर्निंग मेरी जान...

तनीषा:- गुड मॉर्निंग...

मैं:- जल्दी सी सब को यथा दो...

तनीषा:- ी लव यपु ना!!..

मैं:- ी लव यपु तू!...

फ़ोन कट...

तभी मेरी कमरे का दरवाज़ा खुला बया अंदर आ गई..

मैने जल्दी सी दरवाज़ा बंद किया और उनको पाकर क बीएड पी लिटा दिया...

बुआ:- आ गई यद् मेरी बी.?

मैं:- अरे याद तो उनको किया जाता ही जिनको भूल जाये...

बुआ:- इसी लिए इतना तर्पया ही...

मैं:- अभी हप जाये...

बुआ:- हाँ अभी सबकी उतनी में टाइम ही मुझी बी बोहत खुजली हो रही ही..

मैने बुआ को होंठ चूसनी शुरू क्र diye...Phir हमारी एक्सप्रेस 1 घंटा चली फिर मैं बुआ क ऊपर hi लेट गया...

मैं:- एक बात कहूं...

बुआ:- हम्म्म..

मैं:- क्या आपकी यह मस्त गांड मिले गई.?

बुआ:- अभी नहीं मैने आज तक वहां नहीं लिया ऊँगली बी...

मैं:- बाद में तो दो गई.?

मैनी एक हाथ उनकी मस्त नंगी मामय पी रख दिया और मसल दिया..

बुआ:- अह्ह्ह मेरी राजा में पूरी तेरी हूँ.. तेरी घर जाने सी पेहली तुझी गांड दी दूँ गई...

फिर मैं और वफ साथ नहाये जल्दी सी क्यू क सबकी उतनी का टाइम होगया था

मैं कोमल और अवनि को कॉलेज चोरनी गया और निकल गया अपने प्लेन को एक्सेक्यूटे करनी...

1सत टारगेट :- मुन्नी Bai..(Kothy वाली)..

यह राजीव क कोठी को संभालती ही बल्के कोठी की आर में उसका सारा माल संभालती ही.....



लेकिन इसकी पास रात में जाना था इसी लिए मैं अभी राजीव क बंगलो क बाहिर अपनी गारी लय क खरा था और नज़र रख रहा था...

(अब आप सोच रही हों गए क हीरो क पास पावर्स हैं उसको क्यू नहीं इस्तमाल krta..lekin मैं बता दूँ पावर्स कोई बच्चों का खेल नहीं होती जब डिल चाहा खेल लिया... जब तक उनकी ज़रप्रात न पारी मेरी ख्याल सी उनको इस्तमाल करना सब सी बरी बेवकूफी होती ही अगर पावर्स पी hi निर्भर रहना ही तो इंसान अपने जिस्म को जला दी और पावर्स को hi उसे क्रय बीएस रूह सी इसी लिए जो काम का मज़ा हाथों सी करनी में ही पावर्स में नहीं...)..

खैर करीब 1 घंटी बाद राजीव और उसकी पत्नी बाहिर ए और अपनी गारी में बेथ कहीं चले गए...

मैने बी गारी उनकी पिच्य लगा ली वह लोग हॉस्पिटल ए थय भाई ए बी क्यू न उनका बीटा जो एडमिट ही...

जी हाँ बिलकुल वह सनी इसी का बीटा ही...

वह अंदर चले गए में बी उनकी पिच्य चला गया वह सीधा एक रूम में चले गए वहां सनी लेता हुवा था राजीव की पत्नी उसकी पास बेथ गई और राजीव डॉक्टर सी बात करनी लगा...

राजीव:- डॉक्टर मेरी बेटे को जल्दी सी ठीक करो..

डॉक्:- सर बोहत बुरी तर्हां मारा गया ही इनको लेकिन एक बात नहीं समझ आ रही इनकी जुबां बी ठीक और कोई और बी प्रॉब्लम नहीं मिली फिर बी यह बोल क्यू नहीं पा रही...

यह कारनामा आपकी भाई का ही मैनी उसकी जुबां को लॉक क्र दिया था...

राजीव न्य डॉक् का कालर पकड़ा और..

राजीव:- जो मर्ज़ी क्र लेकिन इसको ठीक क्र...

डॉक्:- सर हम पूरी कोशिश क्र रही हैं..

राजीव:- घर कब तक लय जा सकती हैं.?

डॉक्:- जब आप चाही मैं घर आ क इलाज करूं गए..

राजीव:- तो सारी पेपर्स रेडी करवा...

वह डॉक् वहां सी भाग गया...

फिर वह सनी को लय घर आज्ञा और मैं बी घर चला गया क्यू क दोनों को लेने बी जाना था..

रात को तकरीबन क्यू0 बाजी मैं पूरा त्यार होकय अपनी नई कापरी जो सुबह hi लय आया था पेहेन लिए और निकल गया..

मैं कोठी पी पोहंच गया वहां का बाजार रोशन था हर तरफ हुसैन और उसकी खरीदार मैं गारी वहीँ लय गया सब मेरी गारी की तरफ hi देखनी लगी मैनी मुन्नी क कोठी क सामन्य गारी रोकी...

पूरी स्लो मोशन में उतरा और कोठी की तरफ नज़र मरी सब रंडियां जो अपनी बालकनियों में खरी थी सब मेरी तरफ hi देख रही थी और उनकी पास अन्य को बोल रही थी...

मैं मुन्नी क कोठी पी ऊपर गया...

वहां रक्स चल रहा था गाने पी 2 लड़कियां नाच रही थी तमशाइये वहां पैसी लूटा रही थय..

मैं वहां गया तो सब मेरी hi तरफ देल्हनी लगी मैने मुन्नी की तरफ देखा वह अपने एक हाथ क बल बैठी पान खा रही थी...

मैं उसकी तरफ चल पारा रक्स अभी बी व्हाल रहा था...

मैं:- अदब..

अपना हाथ माथे तक लेट हुवी मैनी कहा...

मुन्नी:- अदब jnb..Apki तारीफ..

मैं:- सब कृत्य हैं वैसी न चीज़ को असद केहेती हैं...

मुन्नी:- पेहली कबि देखा नहीं आपको.?

मैं:- अरे हम तो शमा हैं हर जगह हैं बीएस देखनी वाली की नज़र होनी किये...

मुन्नी:- बातें तो अछि कृत्य हैं यहाँ किसी आना हुवा.?

मैं:- अरे मालिकाये हुसैन क पास किस लिए अत ही कोई.?

मुन्नी:- बीएस दीदार करना ही यह प्यार बी.?

मैं:- प्यार तो उनको किया जाता ही जो नज़रूँ को भाता ही और हमे तो कोहे नूर भा गया ही...

मुन्नी:- और बी हीरी हैं एक नज़र तो डालिये..

मैं:- अब कोहे नूर जैसी चमक किसी और हीरी में होती तो आज तक अंग्रेज़जों को हम न कोसती...

Muni(hehe):- जंब आपको पता बी होगा कोहे नूर की किम्मत का.?

मैं:- मुँह माँगा मिल्ली गए..

मुन्नी:- हर चीज़ पैसी सी नहीं खरीदी जाती असद साहब...

मैं:- दुनिया की ऐसी कोई चीज़ नहीं जो यह न चीज़ कोहे नूर क लिए न ला सकी..

मुनि बीएस मुस्कुरा दी और उठ क मेरा हाथ पाकर क कमरे में लय गई और उसको बंद क्र दिया..

वह मेरी करीब ै..

मुन्नी:- आज तक आपसे हसीन नहीं देखा देखती hi डिल में उत्तर गए..

मैं:- यह hi हमारा हॉल ही..

उसनी मेरी होंठ चुम लिए.. और एक हाथ सी मेरी पंत की ज़िप खोली और बेल्ट निकल क अंडरवियर नीची किया और उसकी नज़र जैसी hi लुंड पी गई.. उसनी अपने मुँह पी हाथ रख लिया..

मैं:- क्या हुवा पसंद नहीं आया क्या.?

मुन्नी:- ऐसा सच में बी होता ही मुझी तो लगा बीएस वह वीडियो में होता ही..

मैं:- कोई बात नहीं हम अपनी शमा लय क निकलती हैं...

मुन्नी:- नहीं यह तो मुझी लेना ही.

मैं:- हर चेस्ज़ की कीमत होती ही...

मुन्नी:- बोलिये क्या चाहिए...

मैने उसको पकड़ा और किश करनी लगा 10 मं तक किश किया वह किश की बिच में hi जहर गई और ऊपर निढाल गिर गई..

मैं:- इंसान को क़ाबलियत हमेशा उसको परखनय क पता चलती ही...

मुन्नी:- आज तक ज़िन्दगी में कबि बिना हाथ लगाए नहीं झरि आपके स्पर्श सी हमारा रोम रोम खरा होगया.. बोलिये क्या चाहिए...

मैं:- अपनी मेहबूब की बहून में सौदे नहीं कृत्य...

मुन्नी:- तो प्यार बी नहीं कृत्य.?

मैं:- सब मिल्ली गए सही समय पी हम कल मिल्ली गए सुबह ******होटल में..

मुन्नी:- जहाँ बुलाओ गए ाजाओं गई.

मैं खरा हुवा कापरी सही क्र क निकल गया घर की तरफ...

यहाँ मेरी जाने क बाद मुन्नी अभी बी बीएड पी लेती होइ थी उसको उठानी लड़कियां ी...

लड़की:- क्या हुवा दीदी लगता ही खूब जैम क चूड़ा ही उस चीकनी न्य अभी तक उलटी पारी हो.?

लड़की2:- है मैं बी अपनी छूट में उसका लुंड लू gi....Didi किसी चूड़ा उसनी आपको वैसी पहला आदमी ही जिसको तुमनी अपना जिस्म दिया...

मुन्नी:- ज़िन्दगी में पहली बार झरि हूँ वह बिना कुछ किये...

लड़की:- मतलब.?

मुन्नी:- पेहली शख्स था जिसनी आज मुझी चुवा...

लड़की:- दीदी एक बात नहीं समझ अति क इतनी बारी कोठी में होती हुवी बी आप आज तक कुवारी हैं.?

लड़की2:- अपनी जवानी को किस लिए संभाला ही.?

मुन्नी:- शयद इसी का इंतज़ार था...

इधर मैं गारी चलती हुवी मुन्नी क hi बारी में सोच रहा था उसको छूती hi लगा वह इस काम को अपनी मर्ज़ी सी नहीं क्र रही उसकी हस्ती और कठोर चेहेरी क पिच्य की रोटी होइ मुन्नी शायद मुझी hi दिखी.. जहाँ सब अपना जिस्म दिखा रही थय उसी जगह वह अकेली थी जिसका जिस्म ढाका हुवा था खूबसूरती की मिस्साल थी..

खैर मैं घर आ क सू गया सुबह उठ क सारी काम किया कोमल न्य शाम को घुम्मी जाने का प्लेन बनाया...

(मैं इस वक़त थोड़ा सन की तरफ तवजहा दी रहा हूँ इस लिए कोमल का ज़िकर काम ही इसका मतलब यह नहीं क उसकी यह मेरी दरमियान कुछ होगया ही..)

मैं होटल पोहंच गया यह मेरा hi होटल था सब सी बारे और ाचा कमरा त्यार करवाया और मुन्नी का इंतज़ार करनी लगा...

वह आ गई मैं नीची गया उसको गारी क अंदर सी रेसवे किया वह आज बिना कोई बज़्ज़ारो मेकअप क ै थी वह मेरी आंखों में देखती हुवी उत्तर गई गारी सी और उसका हाथ पाकर क अंदर लय आया और लिफ्ट में बी हथबपाकरी रखा वह बीएस मुझी देखी जा रही थी और मैं उसको हम कुछ नहीं बोल रही थय..

मैं उसको कमरे में लय और लॉक क्र दिया और बीएड क पास खरी होगी वह बीएड पी 2 शराब की बॉटल्स पारी थी..

मैं:- क्या हुवा कोहे नूर क्या डेल्ह रही हैं.?

मुन्नी:- यह देख रही थी..

मैं:- आपको पसंद ी क्या.?

मुन्नी:- मज़्ज़रात जंब लेकिन मैं शराब नहीं पित्ती...

मैं:- अरे भाई पी लीजिये अभी हमारी दोस्त बी आती hi होंगे उनकी लिए त्यार हो जाइये पि क...

तभी उसकी चेहरी की साडी चमक गयाब होगी और उसकी आंख चालक गई..

मैने यह बात नोट क्र ली मेरा शक यकीन में बदल गया...

मुन्नी:- हम नहीं क्र सकती किसी और को भेज डेट हैं हम..

मैं:- मुँह मांगी कीमत मिल्ली गई...

Munni(Chillate हुवी):- हम रंडी नहीं हैं जो किसी को बी अपना जिस्म दी दें...

मैं:- तो क्यू नाटक क्र रही हो आइए बने की जो आप नहीं हैं क्यू ऐसी जगह में रह क जहाँ सब हवा जा नागा नाच कृत्य हैं आप आज तक पाक हैं क्यू आज तक मेरी इलावा आपकी जिस्म को आपकी बाप तक न्य नहीं चुवा.? क्यू.? इस क्यू का जवाब ही आपकी पास.?

मुन्नी तो जैसी सकती में hi चली गई...

अब आप सोच रही होंगे क मुझी किसी पता चला भाई अब थोड़ा बोहत तो पावर्स उसे क्र hi लेती है किसी को बी छूती hi सरो जनम कुंडली निकल सकती हैं....

मुन्नी:- आपको किसी पता यह सब.?

मैं:- यह मेरी क्यू का जवाब नहीं ही...

Munni(Rote हुवे):- मैं यह सब अपनी मर्ज़ी आय नहीं क्र रही इसी पिच्य बोहत दुखी कहानी ही...

मैं मेरी माँ पापा और मेरा छोटा भाई हम सब हसी ख़ुशी ज़िन्दगी गुज़र रही थय क एक दिन राजीव की नज़र हमारी हस्ती ज़िन्दगी पी पर गई वह पापा का बुआइनेसा एम्पियर खरीदना चाहता था उसको यह न देंय क कारण उसनी मेरी माँ पापा का ऑक्सीडेंट करवा दिया..

2 साल पेहली...

मेरी माँ पापा और मेरा भाई गारी आय जा रही थय क ट्रक न्य आ क उनको टक्क्र मरी मेरी माँ पापा तो मौके पी मार गए लेकिन मेरी भाई बच तो गया लेकिन उआकी सर पी गहरी चोट लगने सी उसकी याददाश्त चली गई...

मैं बी सादमय में थी उसनी हमरी ारी प्रॉपर्टी कग्रिड ली क्यू क उसका कोई बचा नहीं था वह सनी को अपना बीटा बना क लय गया और मुझी धमकी दी अगर मैने उसको कुछ बताया तो सनी को मार दी गए...

उसनी मुझी अपना कोठा संभालनी को कहा और तब सी मैं वहां हूँ...

मैं:- मुझी सारा ाच बताओ...

मुन्नी:- सब तो बता दिया...

मैं:- मैने कहा सारा मतलब sara...Sirf कोठा नहीं और बी कुछ संभालनी को कहा.?

मुन्नी:- हाँ उसका माल अत ही जो क कोठी पी रखा जाता ही लेकिन वह क्या ही आज तक नहीं पता चला..

मैं:- और तुमनी आज तक किसी को खुद को हाथ क्यू नहीं लगानी दिया.?

मुन्नी:- बचपन में एक बार पापा न्य मुझी हाथ लगया था मेरी जिस्म में अजीब आ करंट लगा मैने पापा का हाथ पाकर क मूर दिया जिस बी आदमी न्य मुझी हाथ लगानी की कोशिश की उसको झटका लगता लेकिन किसी महिला को नहीं लेकिन जब कल आप ए मेरा डिल चीख उठा और आपके पास अन्य को कहा लेकिन आपकी छोटी hi मुझी जैसी जानत मिल गई सेहरा में पानी मिल गया ज़िन्दगी भार की खुशियां मिल गई लेकिन आपको अगर यह जिस्म hi चाहिए तो लीजिये...

उसनी अपना पालू नीची गिरा दिया और..

मुन्नी:- इसी किसी को बी सोम्पो आपकी मर्ज़ी मैं उफ़ तक नहीं करूं गई...

मैं उसकी पैसा गया और उसका पल्लो पकड़ा और ऊपर क्र दिया...

मैं:- मुझसी शादी करो गई नूर.....

जी हाँ मुन्नी उसका असली नाम नहीं ही उसनी सब सी अपना असली नाम छुपा क मुन्नी रख लिया था...

उसको तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था वह मेरी गली ऐसी लगी जैसी जन्मो सी भूकी को खाना मिल्ली..

वह लगातार रोये जा रही थी...

मैं:- बीएस करो कितना रू गई.?

नूर:- साडी ज़िन्दगी की भड़ास निकालनी ही...

मैं:- प्लीज चुप एक बोहत ज़रूरी बात बतानी ही...

नूर थोड़ा नार्मल हो गई फिर मैनी अपनी ज़िन्दगी का फ़्लैश बैक ब्लैक आमद वाइट मूवीज की तर्हां बता दिया...

मैं:- अगर अब बी तुम चाहो मन क्र सकती हो...

नूर:- मैं पागल हूँ जो अपनी जान को चूरू गई मुझी कही दूर लय चालू मुझी नहीं जाना वापिस...

मैं:- यू अरे सू बेऔतीफुल्ल...

नूर:- आप बी बोहत ख़ूबसूरत हैं दुनिया की हर लड़की क ड्रीम हस्बैंड हैं..

मैं:- लेकिन आपका तो रियल हूँ न...

नूर:- Hmmm...Im सूऊऊ लकी....

मैं:- लेकिन अभी एक काम और करना ही....

नूर:- वह क्या.?

मैं:- राजीव को barbad..Usky पपूण का गाढ़ा भार चूका ही...

नूर:- लेकिन वह...

मैं:- मुझपी भरोसा रखो...

नूर:- ठीक ही.. लेकिन आपको कुछ नहीं होना चाहिए...

मैं:- बीएस देखती जाओ...

नूर:- वैसी आपको या कोई आपके घर वळून को यह न पसंद ए क मैं कोठी पी रहती थी.?

मैं:- तुम मेरी बीवी हो बीएस आज सी तुम बीएस मेरी बीवी हो samjhi...Wesy शादी किसी होगी.?

नूर:- मतलब.?

मैं:- मतलब निक्काह क्रय गए यह फेरी.?

नूर:- आपकी मर्ज़ी ही...

मैं:- निकाह क्रय गए कल...

नूर:- सच्ची.?

मैं:- हाँ हम कल राजीव की बर्बादी जश्न देखी गए और शाम की निक्काह क्र क घर चले गए...

नूर का चेहरा खिल उठा और वह मेरी गल्ली लग गई...

मैं:- अब चले या यही रहना ही.?

नूर:- कहाँ जाओं गई.?

मैं:- मेरी साथ क्या चलो गई इस उनपरडिक्टेबले जर्नी पी.?

नूर:- मज़िल का पता होने सी इंसान कमज़ोर पर जाता ही पता चल जाता ही कहाँ जाना ही लेकिन सफर का मज़ा तब अत ही जब मंज़िल पता न हो.. किसी न्य बोहत खूब कहा ही..

"सफर ख़ूबसूरत ही मंज़िल सी भी.."
 
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मैं और नूर होटल सी निकल क सीधा बुआ क घर गए...

सब नूर सी मिल क खुश होइ कोमल उसको अपने साथ लय गई कमरे में अवनि बी साथ थी उनके..

मैं और बुआ अकेली थय नीची मैं बुआ की झंगो पी हाथ रख दिया...

बुआ:- अह्ह्ह नहीं करो न.. सब ऊपर हैं..

मैं:- एक कप चाय तो पिल्ला दो..

बुआ:- हाँ अभी लती हूँ..

बुआ उतनी लगी मैनी अपना हाथ उनकी गांड पी रख क दबा दिया...

बुआ हस्ती होइ चली गई...

मैं चाय पु क निकल गया अपने मिशन पी..

मैं सब सी पेहली उसकी फार्मेसी गया वहां जा क उसकी मेडिसिन्स को चेक किया और वहां क माहोल का जायज़ा लिया और जो मुझी मिला वह उसकी बर्बादी क लिए काफी था...

यह वही सामान यह जो नूर क पास था उसको खोला यो अंदर सी खराब मेडिसिन्स निकली जिस पी अमेरिका की स्टाम्प लगी thi..matlab यह वहां सी ी थी सब की सब एक्सपिरे थी उन्ही को निकल क नई पैकेट में दाल क बेचा जाये गए मेहंगी दामों...

मैनी उसकी फोटोज ली...

और निकल गया वहां सी...

मैं उसकी ऑफिस क बहिर्बज क अपना लैपटॉप निकला और उसकी ऑफिस का सर्वर हैक क्र लिया और उसके एकाउंट्स देखनी लगा उस्ली पास करीब 500कर का ब्लैक मनी था...

मैं वहां सी उसके घर गया वहां बाहिर उसकी हरकत पी नज़र रखनी लगा वह गारी में बेथ निकला मैं बी उसकी पिच्य पिच्य चल पारा वह शहर सी दूर एक बंद गौड़ों में जा क रोका और उत्तर क अंदर चला गया...

तभी मैने अपनी अगली चल चली जो क उसकी बर्बादी थी...

मैने आयेशा और कमिशनर को साडी डीटेल्स दी ुँहू न्य उसकी पहारमस्य और ऑफिस पी छापा मारा और उनको सीज़ क्र दिया..

यहाँ मैं उस गौड़ों में घुस चूका था और चुप क उसकी बातें सुन्न रहा था...

राजीव:- कल की साडी प्लानिंग हो गई.?

आदमी:- जी सर आज रात को hi यह सारी बम लगा दी गए...

राजीव:- और उसका क्या जो कल अन्य वला ही.?

आदमी:- उसका बी इंतज़ाम होगया ही सर वह नहीं बची गए...

राजीव:- और जिसनी मेरी बेटे की यह हालत की ही उसका कुछ पता चला.?

आदमी:- हम ढून्ढ रही हैं मिल जाये गए..

तभी राजीव का फ़ोन बजा...

राजीव:- Hello..

******..

राजीव:- नहीं यह किसी होसकता ही.?

*****

राजीव न्य फ़ोन दिवार पी मारा...

राजीव कोण ही यह जिसनी मुझी बर्बाद क्र दिया नहीं चोरो गए उसको...

तभी एक हवा का झुका आया और ढोल ूर्णय लगी वहां जब थोड़ी काम होइ एक नक़ाब पॉश ुसमय सी निकला....

राजीव:- कोण हो तुम..?

मैं:- तेरी Mout...Aur तेरी बर्बादी की वजह...

राजीव:- क्या वह तो. ही.? मरू साले को बचना नहीं चाहिए यह...

तभी कुछ आदमी भाग क मेरी पास ए वह जिस स्पीड सी ए थय उस सी डबल स्पीड में वापिस गए उर्त्य huwaye...Aur राजीव क कदमो में गिरे...

फिर कुछ इकठी ए नैन उनकी तरफ भगा और एक फ्लाइंग किक मरी जो क ुणमय सी एक को लगी वह सीधा क लोहे क स्टैंड की लगा और उसकी पथरी उसके ार पार होगी...

और जो बाकि थय उनमें सी एक को कंधी पी उठा क घुमाया और बाकियोँ क मुँह लात मरी और सब दूर जा क गिरी...

राजीव न्य गन निकल और फायर क्र दिया...

मैनी उसको यज्ञ क्र दिया जिसको कंधी पी उठाया हुवा था पूरी 6 गोलियां उसको लगी मैने उसको दूर फेंका और भाग क एक लात राजीव को मरी वह फिर उठ गया और मेरी मुँह पी मौका मारण्य लगा मैनी उसकी बिसेप पी हे एक मौका जरा वह वही बेथ गया और चीखँय लगा...

राजीव:' अह्ह्ह्हह...

मैं:- चिल्ला और चिल्ला तुझी तब दया नहीं ी जब मस्सों लोगो को मरता था..

मैनी एक हाथ में कील पाकर और उसकी हाथ की हथेली में ग़ुस्सा दी...

राजीव:- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चोर दी मुझी...

मैं:- यौन Hi ुँहू न्य माफ़ी मांगी की जिनको तूने पेट सी क्र क मार diya..Aur उन लडकियोँ न्य बी भीक मांगी होगी जिनकी तोङने इज़्ज़त लूटी...

मैनी एक लात उसकी मैं पॉइंट पी मरी..

उसकी दर्द न चीख गूँज गई पूरी गुंडों में लेकिन यह चीख उन चीखों सी बोहत काम थी जो इसने लोगो की निकली थी....

मैं:- चिल्ला और चिल्ला यह उन ासों क बराबर बी नहीं ही जो नूर की आंखों सी 2 साल तक निकलती रही उसनी तेरी वजह सी अपना अस्तित्व बदल लिया वह पाक लड़की तेरी वजह सी गुनहूँ क समुन्दर में उत्तरी उसनी खुद को मार क एक रंडी का भेस लिया सिर्फ तेरी वजह सी...

मैं:- यह वह बाद दुआ ही जो तुझी सनी क डिल सी निकली जिसको तोङने एक ऐसा भरिया बना दिया दिया जो बीएस जिस्म का भूखा ही क्या मिला तुझी.?

राजीव:- तुझी सब किसी pata.?Kon ही तो.?

मैं:- हाहाहा कोण हूँ मैं.? मैं वह दलदल हूँ जिस्मी सारी गुनहगार धस्य गए मैं वह इन्तेक़ाम हूँ जो उन लोगो पी ज़ुलम करनी का बदली तुझसी ऊपर वाले न्य लिया.....मैं जादू मैं मायाजाल दर मुझसी में हूँ SHAKAL....HAHAHAHA....



तभी मैनी एक बारे नुत जो वही पारा उसकी उठा क उसकी सर पी मारा उसके सर का खचूमर निकल गया....

मैनी अपने मुँह सी पसेना साफ़ किया और राजीव क पास पारा मोबाइल बजनी लगा तभी पुलिस सिरों की आवाज़ ी मैनी मोबाइल जेब में डाला और बाहिर निकल गया...

तभी वहां पुलिस ी और वहाब का हाल देख क सब हिरण थय...

कॉम:- यह किसनी किया.?

आयेशा:- नहीं पता सर लेकिन जिसनी बी किया बिलकुल ठीक किया हमे जो सबूत इसकी खिलाफ मिल्ली थय वैसी बी फांसी होती इसको..

कॉम:- सब जगह ाच्य सी चेक करो..

तभी एक कांस्टेबल सबको बुलाता ही और कमरे में पारी बम दिखता ही..

कॉम:- ओह्ह माय गॉड यह तो बोहत बारे सकाम hy...Sab चेक करो और प्रेस को बुलाओ... और आयेशा तुम और तजीव तुम लोग निकलो मर U.V की सिक्योरिटी तुम्हारी ज़िमेदारी ही..

दोनों:- यस सर...

वह निकल जाती हैं और इधर मैं घर पोहचा तो सब लाउन्ज में बैठी थय और खुश लग रही थय..

मैं:- क्या बात ही.? सब इतनी खुश...

अवनि:- बंदर तेरा फ़ोन क्यू बंद जा रहा था.?

मैं:- ओह्ह सॉरी वह चैगिंग काम थी अभी ों करता हूँ..

अवनि:- अब चार्ज होगया...

मैं:- डफ्फर गारी में चार्ज क्र लिया था न..

तभी बुआ किचन सी बाहिर ी..

बुआ:- यह लय मुँह मीठा क्र...

मैं:- अरे कोई बातये गए बी क्या हुवा.?

बुआ:- तेरा एक और भाई या बेहेन अन्य वाला ही...

मैं:- मतलब.?

बुआ:- मतलब मीरा माँ बने वाली ही...

मैं यह सुन क बोहत खुश होगया मुझी यकीन नहीं हो रहा था क मैं 2 बचूं का बाप बने वाला हूँ..

मैने फ़ोन ों किया मीरा बुआ M.P और माँ तनीषा सब की मिस्ड कॉल थी...

मैने मीरा बुआ को कॉल की सब सी पेहली...

उन्हों न्य 1 रिंग में hi उठा लिया फ़ोन और मैं बाहिर गार्डन में आज्ञा...

M'Bua:- Hello किधर हैं आप कब सी फ़ोन क्र रही हूँ..

मैं:- आईएम सॉरी मोबाइल में बैटरी ख़तम थी...

M'bua:- आप बाप बने वाली हैं...

मैं:- क्या सच कह रही हो बुआ.?

M'bua:- मेरी होने वाली बची क पापा मुझी बुआ बुलाये ाचा नहीं लगी गए क्या कोई पास ही.?

मैं:- नहीं मीरा तुम्ही पता नहीं मैं कितना खुश हों...

मीरा:- तो कब आ रही हैं मेरी पास...

मैं:- बीएस अभी निकला रहा हूँ ान ी लव यू...

मीरा:- ी लव यू तू!..

फ़ोन सुत्त...

मैने माँ को फ़ोन किया..

माँ:- hello कहाँ बिजी ही कब सी फ़ोन बंद ही तुझी पता ही मीरा माँ बने वाली ही मैं तेरी पापा और दादा दादी वहां जा रही हैं तो बी अजा..

मैं:- हाँ अभी निकलता हूँ...

फ़ोन कट..

मैने तनीषा को फ़ोन किया.

उस सी बात क्र क मैं अंदर गया...

मैं:- तो किस किस को जाना ही वहां मैं जा रहा हूँ...

बुआ:- मुझी...

कोमल:- हमारे टेस्ट चल रही हैं इस लिए नहीं जा सकती...

अवनि:- सू साद...

मैं:- O.k बुआ एंड नूर रेडी हो जाओ चलते हैं...

नूर:- मैं बी जाओं गई.?

मैं:- हम्म्म बे रेडी...

मैं वहां सी कमरे में गया और अभी को कॉल की..

अभी:- Hello भाई केसा ही.?

मैं:- एक डैम बरिया तो बता हनीमून केसा जा रहा ही...

अभी:- एक डैम बरिया ले अबीरा सी बात क्र...

अबीरा:- Hello..

मैं:- Hello प्रिन्क्सेस किसी हो..

अबीरा:- एक डैम बरिया अपनी कब सी एक कॉल तक नहीं की...

मैं:- सॉरी बिजी था और तुम लोगो को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था...

अबीरा:- िसमय डिस्टर्ब वाली कोनसी बात ही..

मैं:- ाचा एक बात बतानी थी मीरा बुआ को शादी में मिली थी वह माँ बने वाली हैं..

अबीरा:- सच..

मैं:- हम्म्म तुम एन्जॉय करो o.k..

फ़ोन कट...

मैं नूर और बुआ निकल गए मीरा बुआ क घर की तरफ वह पोहंच गए थय हम बी निकल गए 1 घंटी में hi पोहच गए हम...

बुआ जल्दी सी अंदर चली गई नूर गारी सी नहीं उत्तर रही थी...

मैं:- क्या हुवा उतरिये अंदर नहीं जाना क्या.?

नूर:- क्या हमारा जाना ठीक होगा...

मैं:- आपको हम्पी भरोसा ही तो चलिए...

मैं उसका हाथ पाकर क अंदर लय गया सब बाहिर hi बैठी थय आज जैसी ईद का सा समां था उनकी घर बुआ बिच में बैठी थी और सब उनकी इर्द गिर्द..

मैं अंदर गया सबकी नज़रें मुझपी गई और नूर को सब स्वलओया नज़रों सी देखनी लगी..

मैनी सबको नूर सी मिलवाया माँ दादा दादी उस सी मिल क बोहत खुश हुवी...

मैं और बुआ एक दूसरी की आंखों में देखनी lagy...meri आंखों में पानी आज्ञा क्यू क मैं खुल क इज़हार क नहीं क्र प् रहा था जिस की कोख में मेरा बचा था उसको प्यार सी थैंक यू बी नहीं बोल सकता था..

मैं बाहिर आज्ञा और गारी क पास खरा होगया...

बुआ मेरी हालत समझ gai...Aur उठ क मेरी पिच्य hi आ गई..

उन्हों न्य मेरी कंधी पी हाथ रखा मैं पिच्य मूरा तो बुआ को देखती hi गली लगा लिया....

मीरा:- ऐसी ख़ुशी क मूकय पी क्यू रू रही हैं आप..

मैं:- यह तो ख़ुशी क आंसूं हैं...

मीरा:- मैं समझ सकती हूँ आपकी हालत लेकिन मैं वडा करती हूँ यह..

अपने पेट पी हाथ रख क..

मीरा:- सिर्फ आपको Hi बाप माने गए या मान्य गई क्या आप माने गए उसको अपना..

मैं:- पूरी दुनिया की खुशियां इसकी झोली में डालनी हैं मुझी एक नहीं 2 बच्चों की जिम्दारी ही अभी दुनिया में बी नहीं ए मुझी ऐसा लगनी लगा ही जैसी मैं अपनी दुनिया को अपने कंधी पी लय चल रहा हूँ...

मीरा:- अक्षरा किसी ही और आपका बचा..

मैं:- वह दोनों ठीक हैं आप अंदर चलिए आराम कीजिये मेरी बची को टांग मत कीजिये..

मीरा:- ाचा जी बची की फ़िक्र ही माँ की नहीं उसकी...

मैं:- उसकी माँ की तो सब सी ज़्यादा फ़िक्र ही...

मैं मीरा क साथ अंदर चला गया...

फिर शाम को हम लोग निकल गए बुआ को 6 महीने बाद दादी क घर आना था उस सी पेहली उनको ससुराल में hi रहना था.. इस लिए..

नूर माँ क साथ चली गई मैं आज क लिए बुआ क घर hi रहना वाला था क्यू क रात बोहत हो चुकी थी हम घर पोहंची तो अंकल बी आ चुके थय कोमल और अवनि सोने चले गए थय मैं बी अपने कमरे में गया..

कुछ देर में दरवाज़ा खोला मेरी कमरे का और मेरा डिल खिल उठा..

मैं:- कोमल...

कोमल:- सैम...

वह भाग क मेरी गाल लग गई..

मैं:- क्या हुवा सब ठीक न.?

कोमल:- आप कल चले जाये गए...

मैं:- आपको लय क जाने क लिए जा रही हैं.

कोमल:- अब और नहीं रह सकती मैं आपकी बिना...

मैं:- मेरी रूह मुझसी कबि दूर hi नहीं होती हमेशा मेरी पास ही.. फिर यह फसली क्या बिगड़ सकती हैं hamara..Aur यह आपका सपना ही जो मेरा बी ही पूरा करना ही...

कोमल:- हम्म्म लेकिन उसकी बाद एक पल नहीं डॉयर रहूं गई मैं...

मैं:- अरे एक सेक् नहीं अब स्माइल...

कोमल मुस्कुरा दी..

कोमल:- क्या यही सो जाओं.

मैं:- मुँह की बात चेन ली...

मैं लेट गया कोमल मेरी सीने पी सर रख क लेट gai...Aur हम सू गए...

यह ज़िन्दगी बी क्या क्या रंग दिखती ही कबि जीना सिखाती ही कभी मारण्य पी मजबूर करती ही और शायद इसी को केहत्य हैं ज़िन्दगी...

नया दिन नै सुबह...

मैं उठा और कोमल को उठाया और वह त्यार होने चली गई..

वह त्यार होगी और मैं उसको चोरनी चला गया.. और वहां सी सीधा हॉस्पिटल गया जहाँ सनी एडमिट tha..Usky सर पी एक हाथ रखा उसकी साडी परेशानी दूर की एयर उसको एक नै ज़िन्दगी दी और मैं निकल गया घर की तरफ....

3 घंटी बाद में घर पोहंचा घर पी तनीषा बाहिर hi बैठी थी मुझी देल्हती hi उछाल क मेरी गली लग गई..

तनीषा:- ी लव यू!..

मैं:- ी लव यू तू!...

तनीषा:- बोहत मिस किया...

मैं:- कॉफ़ी ko.?(haha)..

तनीषा:- हाँ और उसको बनानी वाली को...

मैं:- इतनी जुदाई क बाद कुछ को मिलना चाहिए..

तनीषा न्य मेरी आंखों में देखती हुवी अपने होंठ मेरी होठों लय रख दिए....

पूरी दुनिया का सोख प्राप्त जर्नी क बाद बी ऐसा सकूं लहिन नहीं मिलता जितना इसकी होंठों क स्पर्श सी मिलता ही..

तभी "अहम्म्म्म" की आवाज़ ी हम अलग hogaye...yeh माँ थी..

तनीषा कमरे में भाग गई और मैं माँ क सामन्य सर झुकाये खरा था..

माँ:- जा अब कमरे में चली गई ही वह...

मैं:- नहीं वह बीएस हम...

माँ:- अरे मज़ाक क्र रही थी जा फ्रेश होजा नाश्ता रेडी क्र रही हूँ अजा..

मैं माँ क गाल को चूमा और अक्षरा क कमरे की तरफ गया वह बीएड पी बैठी थी...

मैं:- क्या क्र रहा ही मेरा बचा...

अक्षरा:- अरे आप और यह माँ को टांग क्र रहा ही...

मैं उसकी पास बेथ गया और एक हाथ पेट क रखा..

फिर थोड़ी बातें क्र क कमरे में चला गया..

वहां तनीषा नूर दोनों बेथ क बातें क्र रही थी...

मैं:- डिस्टर्ब किया.?

तनीषा:- बिलकुल..

मैं:- O.k कीप गोइंग मैं तो चला नहंय...

मैं बाथरूम में घुस गया बाहिर निकला तो बीएस तनीषा की थी कमरे में और मेरी कापरी निकल क बेब रख रही थी लाल साडी में क़यामत लग रही थी..

मैं पोची सी उसको हुग क्र लिया..

तनीषा:- क्या क्र रही हैं कोई आ जाये गए...

मैं:- इतनी दिन दूर रहा कसार तो पूरी करनी दो..

मैनी उसको घुमाया और होंठों पी हल्का सा किश क्र क दरवाज़ा बंद करनी चला गया दरवाज़ा बंद क्र क मूरा तो तनीषा वही सी खरी मुस्कुरा रही थी मैं चलता हुवा उसकी पस्स गया और किश करनी लगा वह बी मेरा साथ देने लगी मैं उसको जोत चूसती हुवी साडी उत्तर दी और पिच्य सी हाथ दाल क ब्लूए बी खोल दिया और उत्तर दिया और ब्रा क उप्पर सी hi मामय को पाकर क दबा दिया..

उसकी बीएड पी सलौली सलौली लिटा दिया और उसका पति कूट निकल दिया वह अब बीएस ब्रा पेंटी में थी मैं किश और लीक करता हुवा उसका ब्रा उत्तर दिया और नीची आती हुवे. उसकी पेंटी उत्तारंय लगा तो तनीषा न्य मुझी पिच्य किया और मुझी लिटा क मेरी ऊपर आ गई..

और किश करनी लगी किश कृत्य हुवी उसी मेरी कान क पास बोलै..

तनीषा:- आज मैं आपको प्यार करूं गई..

उसनी मेरी छाती पी किश की अउ नीची टॉवल तक आ गई और एक झटकी में टॉवल निकल दिया और मेरी लुंड को पाकर लिया...

अहह उसकी नरम मुलायम हाथ उसनी मेरी लुंड पी किश किया और लीक करती होइ तूपाय को मुँह में भर लिया..

उसका यह फर्स्ट टाइम था इसी लिए उसको करना नहीं आ रहा था लेकिन मुझी मज़ा बोहत आ रहा था..

मैने उसको ऊपर किया अउ उसनी पंतय उत्तर क फ़ेंक दी और अपनी छूट मेरी मुँह पास रख दी और लुंड को फिर मुँह में भर लिया 69 पोजीशन में आ गए हम...

फिर वह अलग होइ और मेरी लुंड को पाकर क अपनी छूट पी रखा और एक झटकी में बेथ गई...

तनीषा:- अह्हह्ह्ह्हहस्सस..

मैं जल्दी सी खरा हुवा और उसको नीची किया पीयर सी कान में बोलै...

मैं:- मेरी जान को तकलीफ नहीं होनी दूँ गए.

और कान को लूह को चुम लिया और लुंड को यज्ञ पिच्य करनी लगा पूरी पीयर सी तनीषा को बोहत मज़ा आ रहा था मैने स्पीड बढ़ा दी..

तनीषा:- अह्हह्ह्ह्ह सससस मेरी जान और तीज प्याआआआआ करो हाँ ऐसी hi मेरी जान अझह्ह्ह्हहब मैं अह्ह्ह्हब गई....

करीब 30 मं बाद तनीषा जहर गई..

मैं उसको किश कृत्य हुवी उल्टा होनी को कहा और पिच्य सी लुंड उसकी चुरलत में पेलंय लगा

तनीषा:- हाँ मेरी जान ऐसी hi अह्ह्ह्हह.. हम्मम्मम्मम्म अहम्म्म्म्म...

मैं 30 मं बाद तनीषा क अंदर hi जहर गया वह बी मेरी साथ जहर गई...

मैं साइड पी गिरा गया और वह मेरी सीने पी..

दोनों सांसें नार्मल करनी लगी...

तभी अदि की आवाज़ ी..

अदि:- भाई भाभी एक रिक्वेस्ट ही..

दोनों:- बोलो..

अदि:- भाई अभी आपकी संतान जो की तनीषा भाभी सी होगी उसकी अन्य का समय नहीं हुवा क्या आप ेहतयात बरती गए.?

मैं:- लेकिन जो बुआ और अक्षरा.?

अदि:- भाई तनीषा भाबी सी जो संतान होगी उसका युग अलग ही इस लिए कहा...

तनीषा:- मैं इंतज़ार करूं गई..

अदि की आज़म बंद होगी...

मैं तनीषा को बाथरूम में लय गया और हम दोनों साथ नहाये...

जब हमारी चुदाई चल रही थी एक शख्स साडी दास्तान सुन रहा था और उसकी हालत खराब होगी थी...

हम बाहिर ए तनीषा न्य निघ्त्य पेहेन ली और मैनी कापरी वह मेरी सीने पी फिर सी लेट गई...

मैं:- क्या हुवा.?

तनीषा:- पता नहीं बीएस मान क्र रहा ही आपकी पास रहूं सारा दिन..

मैने उसकी माथे पी किश किया और लेता लिया तभी मेरा मोबाइल बजा.. कोई अननोन नंबर था..

मैं:- Hello कोण.?

उधर:- मर सैम आईएम योर प्रिंसिपल प्लीज रिपोर्ट इन माय ॉडीके इन 30 मं..

मैं:- O.k सर...

तनीषा:- किसका फ़ोन था.?

मैं:- प्रिंसिपल न्य बुलाया ही अभी जाना हगा रत्न को बी लेनी जाना ही..

तनीषा:- जल्दी वापिस आना..

मैनी उसका गाल पी किश किया और निकल गया कॉलेज की तरफ मैं कॉलेज पोहंच गया अभी 1 घंटा था रत्न की छूती में..

मैं सीधा प्रिंसिपल ऑफिस गया

अंदर गया तो आफत पेहली सी hi मोजजोद थी मतलब इशिका...

मैं जा क साइड पी खली चेयर पी बेथ गया और जो प्रिंसिपल न्य कहा उसस्पी हमरा रिएक्शन यह था

दोनों:- नही मैं और इसकी साथ बिलकुल नहीं....

सत्य टुन्नेद....
 
अपडेट NO.45


मैं प्रिंसिपल ऑफिस गया और दरवाज़ खोला और मेरी नज़र अंदर आफत पी पारी यानि इशिका पी..

Main(man में):- अरे यर यह अब क्या नया तमाशा क्रय गई..

मैं:- मई ी के इन सर.?

प्रिं:- यस के इन...

मैं जा क इशिका क साथ वाली खली सीट पी बेथ गया मैने एक नज़र उसकी तरफ देखा उसनी ऐटिटूड दिखाया और बोली..

इशिका:- अपने क्यू बुलाया था.?

प्रिं:- देखो तुम दोनों कॉलेज क तूपर हो...

मैं:- हम्म्म..

प्रिं:- तो एक कम्पेशन ही क्विज इंटरनेशनल केप्शन ही जिस्मी तुम दोनों को पतिकिपते करना ही और तुम दोनों इंडिया को रिप्रेजेंट करो गए...

मैं:- लेकिन सर और बी तो स्टूडेंट्स हैं जो यह डेसेर्वे कृत्य हैं..

इशिका:- मैं तो डेसेर्वे करती हूँ इसका पता नहीं..

प्रिं:- सभी कॉलेजेस में सी बीएस इसी कॉलेज क 2 बची चुनने गए हैं..

मैं:- O.k सर कब होगा यह कम्पेशन और कॉलेज की ऑडिटोरिम में होगा या कहीं और.?

प्रिं:- इतस आ इंटरनेशनल कम्पेशन सो यह होगा ऑस्ट्रेला में बिकॉज़ थे लास्ट ईयर केप्शन वास् इन इंडिया इन शिमला...

मैं:- मतलब हमे ऑस्ट्रेलिया जाना होगा एक साथ.?

प्रिं:- यह..

दोनों:- नहीं मैं और इसकी साथ कभी नहीं...

इशिका:- Hello तुम कोण होती हो रेजेक्टे करनी वाली मैं रेजेक्टे करती हूँ..

मैं:- अरे तुम्हारी साथ जाये बी कोण वह तो कोई गधा Hi होगा...

इशिका:- होस डरे यू मैं कभी बी नहीं जाओं गई...

प्रिं:- शट उप बोथ ऑफ़ यू...

हम दोनों चुप होगये...

प्रिं:- अगर यज्ञ पढ़ना ही इस कॉलेज में तो तो तुम दोनों को जाना पारी गए वर्ण भूल जाओ क तुम दोनों को कहीं बी यज्ञ परहंय का मक्का मिल्ली गए..

हम दोनों शॉकेड होगये...

मैं:- सर यर्ह तो गलत ही आप ब्लैकमेल नहीं क्र सकती..

प्रिं:- That's फाइनल एंड no मोरे दिससकुशन्स..

इशिका:- मैं जाने क लिए रेडी हूँ..

मैं:- मैं बी..

इशिका:- मेरी साथ जो जाये गए वह गधा होगा न सो मर गद्य अब क्या हुवा.?

मैं:- शट उप एंड मेरी मर्ज़ी मैं जो मर्ज़ी डिसिशन लोन...

प्रिं:- अब तुम दोनों जा सकती हो.. एंड 2 दिन बाद तुम्ही निकलना होगा अपने पासपोर्ट मुझी शाम तक दी देना...

इशिका:- हहहह..

और उठ क एक नज़र मुझपी दाल क चली गई...

मैं बी बाहर निकल आया छूती का टाइम होगया था मैं बाहिर गेट पी जा क खरा होगया तभी रत्न अति होइ दिखाई दी अपनी दोस्तों क साथ उसको नहीं पता था मैं लेनी आया हूँ वह साइड में जा क खरी होगी और फ़ोन निकल क किसी को करनी लगी तभी मैं उसकी सामन्य आज्ञा

मैं:- किसका इंतज़ार ही...

उसनी जैसी hi मुझु देखा...

रत्न:- अपपपपप...!

और भाग क गली लग गई..

मैं:- सब देख रही हैं...

रत्न अलग होइ..

रत्न:- कब ए आप.?

मैं:- आज सुबह...

फिर हम बाइक पी बेथ क निकल गए घर की तरफ..

हम दोनों को 2 आंखें देख रही थी....

हम घर पोहंच गए रत्न फ्रेश होने चली मैं सोफे पी बेथ क T.v देखने लगा..

T.v एंकर...

आज की सब सी बरी खबर आज होने जा रहा ही रक ऐसा काम जो इतिहास में कभी नहीं हुवा आज इंडिया को ग़ुरबत की एक मुश्किल सी निजात पाकी ही आज होने वाली ही आर्गेनिक मेडिसिन की डील जो क हमारी लिए बोहत ख़ुशी की बात ही..

और वहीँ दूसरी और हुवा मशहूर बिज़नेस मन राजीव रद्द का क़त्ल जिनकी फार्मस्य में कल होइ थी पुलिस की राइड उनके सारी एकाउंट्स सेज़्ज़ क्र दिए गए हैं उनकी पत्नी का इंसबकी बारी में पता होने सी इंकार क्या होगा इनके इन कामो का अंजाम जाने क लिए देखती रहिये ***न्यूज़...

मैं बोहत खुश था क चालू सब ठीक होगया तभी मेरी जेब में मोबुलर बजा मैने अपना फ़ोन निकला तो ुसमय कॉल नहीं था मैनी चेक किया तो बैक पॉकेट में मोबाइल था यह तो वही मोबाइल ही जो मैने राजीव क पास सी पकड़ा था..

देखा तो कोई प्राइवेट नंबर था..

मैने फ़ोन पिक किया और कुछ नहीं बोलै...

*****:- काम आज होजायर गए क्या.? क्या तूने स्नाइपर को भेज दिया उधर उस सालयी राजीव का तो गेम बज गया और चल अपना काम पूरा क्र मेरी अभी कालिया सी बात होइ बोलै काम होजाये गए..

***:- Hello Hello तो सून रहा ही क्या.? अहहह्ज यह तेरा घटिया फ़ोन साली न्य लय लय...

फ़ोन कट....

मुझी तो जैसी सांप सूंग गया हो मुझु लगा खतरा टालल गया लेकिन मैं तो समझ रहा था राजीव hi मास्टरमाइंड ही लेकिन यह तो कोई और निकला साला...

मैं फुरण उठा और फ़ोन किया आयेशा को उसनी फ़ोन नहीं रेसवे किया ड्यूटी पी होगी..

मैं गारी ली और निकल गया होटल पैराडाइस को और मैं करीब 20 मं में पोहंचा देखा तो सिक्योरिटी बोहत टाइट थी बाहिर मैं अंदर गया और रेसप्शन पी गया...

मैं:- Hello कैन यू तेल्ल में ों रूम मर *****इस.?

रेसपेशनिस्ट..:- रूम no. 1610...

मैं लिफ्ट क पास गया और जल्दी जल्दी बटन दबनी लगा मैं उप्पेर पोहंच गया तभी 2 गोलिया चलनी की आवाज़ ी..

मैं भाग क उस कमरे की तरफ गया और वहां जा क......

AYESHAAAAAAAAAA!!
 
अपडेट NO.46


मैं लिफ्ट से बाहिर आया तो 2 गोलिया चलनी की आवाज़ ी मैं फ़ौरन स्पीड सी भागा रूम की तरफ वहां का दरवाज़ा खुला था ज़मीन पी एक पुलिस इनपेक्टोर को गोली लगी उल्टा पारा था आयेशा की तरफ देखा तो उसकी कंधी पी गोली लगी थी...

मैं:- आयेशाआ!...

मैं भाग क उसकी पास गया उसको पकड़ा और उठा क बाहिर आज्ञा बाहिर लोग इकठी होगये थय मुझी किसी की तरफ ध्यान नहीं दिया और नीची आ क अपनी गारी में बिठा क हॉस्पिटल लय गया वहां डॉक्टर्स उसको इमरजेंसी वार्ड में लय गए मैने फ़ोन क्र क सब को बता दिया सब हॉस्पिटल आ गए..

45 मं बाद डॉक्टर बाहिर आया...

डॉक्:- घबरानी की कोई बात नहीं ही गोली कंधी पी लगी थी और खून निकलनी सी बेहोश होगी थी शी इस आउट ऑफ़ डेंजर 1 घंटी तक होश आ जाये गए...

मेरी और सब की जान में जान ी..

1 घंटी बाद नर्स न्य बताया क उसको होश आज्ञा ही हम अंदर कमरे में उस सत मिलनी गए तभी कमिशनर वहां आया ब्यान लेनी सब को बाहिर जाने को कहा लेकिन आयेशा न्य मेरा हाथ पाकर क उसकी पास रहंय को कहा..

कॉम:- सो मिस आयेशा क्या हुवा था वहां.?

आयेशा:- मरस आयेशा!...

कॉम:- o.k सो मरस आयेशा क्या हुवा था वहां और अपनी तजीव पी गोली क्यू चलाई...

1 ऑवर एगो..

आयेशा:- मैं और तजीव उनकी सिक्योरिटी क लिए होटल पोहंची हमनी सब कुछ चेक किया मैं उनकी कमरे में गई वह पेपर्स सिग्न क्र रही थय तभी मेरा ध्यान खिरकी पी गया वहां सी एक लाज़र मुझी उनकी सर पी दिखाई दी मैनी ुसंक्य ऊपर जम्प किया तभी गोली चली लेकिन हम बच गए तभी दरवाज़ा खोला तजीव अंदर आया..

तजीव:- क्या हुवा.?

आयेशा:- तजीव किसिनी इंप्य गोली चलाई ही तुम चेक करो मैं इनको बाहिर लय जाती हूँ...

तजीव:- शित्त्त...

आयेशा:- व्हाट हैपेंड.?

तजीव:- उसकी गोली सी बच गए लेकिन अब मेरी गोली सी किसी बचो गई.?

तभी उसनी गन निकल क शूट क्र दी उनपे मैं उनके सामन्य आ गई और होली मेरी कंधी पी लगी उस सी पेहली वह कुछ और करता मैनी गोली सीधा उसकी सर में मार दी और वह वहीँ गिर गया और में बी बेहोश होगी...

प्रेजेंट...

कॉम:- वेल दोने आपसी इसी हौसले की उम्मीद थी आपकी Hi वजह सी आज यह डील पूरी होसकी hy..And आफ्टर यू रिकवर ज्वाइन थे ड्यूटी असप.

वह चले गए..

मेरा चेहरा उत्तरा हुवा था..

आयेशा:- क्या हुवा I'm फाइन..

मैं:- हम्मन मेरी होती तुम्ही कुछ होसकता ही भला वह अलग बात ही थोड़ा लेत होजाता हूँ..

आयेशा:- हहै.. लेकिन अब तो यह केस ख़तम न...

मैं:- मुझी नहीं लगता..

आयेशा:- मतलब तजीव मरना चाहता था उसका इंकॉन्टेर होगया..

मैं:- नहीं मैने बी यह hi गलती की थी राजीव को मास्टरमाइंड समझ क लेकिन तजीव इतना बारे खेल नहीं खेल सकता वह तो कोई और ही..

आयेशा:- कोण ही वह.?

मैं:- जो बी ही उसको चोरी गए नहीं..

तभी फिर सब अंदर आ गए मैं डिस्चार्ज पेपर्स सिग्न क्र क उसको घर लय आया वह आ क आराम करनी लगी सबको अपने कम्पेशन क बारी में बताया सब बी बोहत खुश होये सिवाए मेरी उस चोराइल क साथ जाना मतलब दिमाग की तो माँ बेहेन...

मैं रत्न और तनीषा कमरे में चले गए सोने नूर अंजलि क साथ सोने चली गई...

इधर H.M हाउस...

इशिका और बाकि सब खाना खा रही थय..

इशिका:- मुझी एक क्विज कम्पेशन क लिए चूसे किया गया ही...

Ab'bua:- अरे वह यह तो बोहत अछि बात ही..

H.M:- हाँ बीटा बोहत ख़ुशी की बात ही वैसी यह ही कहाँ.?

इशिका:- ऑस्ट्रेलिया...

A'maa:- अरे वहहह मतलब हम सब जाये गए..

इशिका:- नहीं माँ मैं जाओं गई बीएस..

H.M:- हम तुम्ही अकेली नहीं जाने दी गए...

इशिका:- अकेली नहीं एक और स्टूडेंट बी जा रहा ही...

H.M:- अकेली लरकी क साथ नहीं जा सकती बीटा...

इशिका:- मुझी बी कहाँ जाना ही उसकी साथ मगर कॉलेज और देश की वजह सी जाना पारी गए और उस सी आपका नाम ऊँचा होगा..

H.M:- अरे लेकिन ऐसी किसी क बी साथ किसी.?

A'maa:- अरे जाने दीजिये न लेकिन उस सी दूर रहना लरकी सी और हॉसकय तो कोई अमीर गोरा देख क फसा lio(haha).

H.M:- किसी माँ हो बेटी को किसी मशहुरी दी रही हो..

A'maa:- मज़ाक क्र रही थी..

Ab'bua:- जाने दीजिये भैया अब बरी होगी ही ध्यान रख लय गई अपना..

इशिका:- हाँ प्लीज पापा एंड मैं अपना ट्रेवल व्लॉग बी बनो गई..

H.M:- ठीक ही बीटा लेकिन अपना ख्याल रखना...

इशिका:- थैंक ु थैंक यू सू मच पापा ुमाः...

अगली सुबह..

मैं उठा ध्यान लगा क माँ और तनीषा को कफ दी सब अपने कामो पी चले गए में और रत्न कॉलेज आ गए वह अपने कैंपस में चले गई मैं अपने बाइक स्टैंड लगा क कैंटीन चला गया वहां रोहन मिला..

मैं उसकी साथ बेथ गया..

मैं:- केसा ही और यह मुँह क्यू लटका ही.?

रोहन:- एक बात पोचून सच बताये गए.?

मैं:- हम्म पॉच न..

रोहन:- तेरा और रत्न का क्या रिलेशन ही सच सच बता..

मैं:- यह क्या पॉच रहा ही..

रोहन:- भाई ऊपर वाली सी हमेशा यह hi माँगा क जो मेरी लिए बेहतर हो उसनी सब ाचा दिया बीएस एक भाई की कमी थी तुझसी मिला वह कमी बी पूरी होगी तूझपी जान वार सकता हूँ अगर मुझी सच्चा दोस्त मन ही तो सच बता..

मैं:- रोहन प्लीज ऐसी मत कह तुझी सच्चा दोस्त मन ही हमेशा भली hi हम कुछ देर पेहली मिल्ली हों लेकिन तुझसी मिलती कभी ऐसा नहीं लगा हम अब मिल्ली हैं हमेशा लगा बचपन सी जनता हूँ tujhy..Aur रही बात मेरी और रत्न की रिलेशन की तो वह..

रोहन:- बोल भाई...

मैं:- वह मेरी बीवी ही....

रोहन मुस्कुरा दिया....

मैं हैरान था क उसको झटका लग्न चाहिए था लेकिन यह तो..

मैं:- भाई तो ठीक hy..Dekh बात यह ही क..

रोहन:- तुझी पता ही यह बात मुझी किसी पता चली हिम्मत क्र क उसकी एक दोस्त सी उसकी बारी में पोछा तो उसनी बताया क कुछ दिन पेहली उसकी शादी हो चुकी ही और उसकी मांग मून सिन्दूर और गली में मगलसूत्र देख यकीन होगया मैं एक डैम टूट गया तभी कल मैनी उसकी तेरी गली लगता देखा मैं समझ गया क उसकी शादी तेरी साथ होइ ही और पता नहीं क्यू डिल को अलग सकोंन एक अलग ख़ुशी मिली लेकिन दिमाग शांनत नहीं था उसनी आज तुझसी पोचनय बी मजबूर क्र दिया अगर आज तो झूट बोलता मैं समझ जाता तो उसकी क लिए सही नहीं ही लेकिन तूने मुझी सच बताया और यह पता होने क बावजूद क मैं कुछ बी रियेक्ट क्र सकता हूँ तुझी या खुद की नुक्सान पोहंचा सकता हूँ मैं बोहत खुश हूँ मेरी यार बोहत खुश....

मैं रोहन क गली लगा वह सच में खुश था...

मैं:- और एक बात तो बताना hi भूल गया..

फिर कम्पेशन वाली बात उसको बताई वह बी खुश था..

फिर क्लास गए इशिका न्य हमेशा की तर्हां ऐटिटूड दिखाया फिर कॉलेज ख़तम हुवा हम घर चले गए..

एक बात नोटिस की क तारा कॉलेज नहीं आ रही माँ सी पता चल क वह कुछ दिन क लिए अपने पापा क पास गई ही...

फिर कुछ ख़ास नहीं हुवा पैकिंग रत्न और तनीषा न्य मिप्ल क क्र दी नूर बी सब क साथ घुल मिल गई थी..

नेक्स्ट मॉर्निंग...

मैं उठा और सब सी मिला और निकल गया एयरपोर्ट की तरफ मैं तस्य सी गया था क्यू क मैं किसी को तकलीफ नहीं देना चाहता था हमारी पासपोर्ट हमे वहीँ सी मिलनी thy..main अंदर गया और दोनों पासपोर्ट रेसवे किये और अपना पासपोर्ट जेब में दाल दिया क्यू क मैं नहीं चाहता था क इशिका यह देखी क्यू मेरी पास ब्रिटिश पासपोर्ट था..

तभी मोहतरमा की ेंटरी होइ फ़िल्मी स्टाइल जीन्स T-Shirt जैकेट बाल खुली और आंखों पी चश्मा और एक छोटा सा बाग़ जिसकी घसीट क लय क आ रही थी...

तो बे कंटिन्यू....

नेक्स्ट Part:- ऑस्ट्रेलिया स्पेशल...
 
अपडेट NO.47


इशिका मेरी पास ी और बोली..

इशिका:- मेरा पासपोर्ट..

मैने उसको दी दिया..

मैं:- तुम पहली बार लहिन बाहिर ट्रेवल क्र रही हो.?

इशिका:- जी नहीं मैं बोहत बार प्लेन में बेथ चुकी हूँ..

मैं:- लेकिन पसरत पी तो पहला वीसा लगा ही...

इशिका:- Ha..Han वह मेरा पासपोर्ट गम गया था नया बनवाया टुमस्य मतलब.?

मैं:- मैं तो गेनेराल्ल्य पॉच रहा था और वैसी बी तुम जो मर्ज़ी करो मुझी क्या...

तभी अण्णोस्मेंट होइ..

इशिका यज्ञ चलनी लगी उसनी अपना पासपोर्ट दिखाया और चेकिंग करवा क चली गई यज्ञ मैं बी पासपोर्ट चेक करवाया..

इंस्पेक्टर:- सर आप इतना ट्रेवल कृत्य हैं.?

मैं:- बीएस भाई यह hi काम ही समझ लो..

तभी मेरी नज़र इशिका की तरफ गई वह गलत गेट की तरफ जा रही थी..

मैं जल्दी सी उसकी पास गया..

मैं:- ओह्ह hello मैडम इस तरफ जाना ही..

इशिका न्य ऊपर देखा और बोली..

इशिका:- Voo..woh मैं बीएस देख रही थी मुझी पता ही कहाँ जाना ही..

मैं:- ाचा चलो अब..

फिर उसको क मैं प्लेन की तरफ चला गया हम प्लेन में एंटर होये एयर होस्टेस हामी सीट दिखा दी..

इशिका:- मुझी विंडो की तरफ बैठना ही..

मैं:- वजह मेरी सीट ही वह..

इशिका:- कहाँ न बैठना ही तो बैठना ही मुझी..

मैं:- ओह्ह hello मेरी सीट ही..

इशिका:- वैसी तुम मेरी साथ आना बी नहीं चाहती थय न तू मर गद्य अब जाओ मुझी बेथनी दो..

मैं:- ए मुझी गुस्सा मत दिलाओ वर्ण..

इशिका:- वर्ण क्या.?

मैनी बटन दबाया एक एयर होस्टेस आ गई..

A'h:- हाउ मई ी हेल्प यू सर..

मैं:- कैन यू प्लीज चेंज माय सीट...

A'H:- सॉरी सर फिल्घ्त इस फुल..

इशिका:- हाहाहा..

तभी प्लेन चला और इशिका विंडो सीट पी बेथ गई मैं बी उसकी साथ बेथ गया फिर प्लेन रनवे पर चलनी लगा..

इशिका न्य मेरा हाथ पी अपना हाथ रख दिया मैने उसकी तरफ देखा वह बोहत घबरा रही थी..

मैं:- ः क्या हुवा अब.?

तभी प्लेन टेक ऑफ हुवा और इशिका न्य घबरा क अपना मुँह मेरी कंधी पी छुपा लिया..

फिर 10 मं बाद मैनी उसकी कंधी पी ऊँगली मारी..

मैं:- अब होचुका ही टेकऑफ..

वह सीधी होइ एक नज़र मुझपी डाली और एक फिर विंडो सी बाहिर देखा..

इशिका:- वाओ पता बी नहीं चला..

मैं:- ः तुम तो बोहत दार्फूक हो .

इशिका:- जी नहीं बीएस वैसी hi...

मैं:- ाचा ाचा बीएस..

इशिका बाहिर देखनी लगी और वीडियो बनानी लगी..

मैं:- आंखों सी देखो न..

इशिका:- मैं इंस्टा स्टोरी बना रही हूँ..

मैं:- O.k..

फिर कुछ घंटून क बाद हमारी फ्लाइट लैंड होइ और तब बी उसनी मेरा हाथ पकड़ा हुवा था..

हम दोनों बाहिर ए और बाहिर एक सरदार जी मेरी नाम का बोर्ड लय क खरी थय..

मैं:- ससरिएकाल पाजी मैं हूँ..

सरदार:- ओह्ह औ पाजी और यह मैडम बी साथ हैं.?

मैं:- जी जी चलिए..

हम लोग गारी की तरफ चले गए फिर गति सी होटल पोहंच गए और रस्त्य में वह मुसलसल वीडियो hi बना रही थी बीएस और कभी स्टोरी बना रही थी..

मैं सरदार जी सी बातें करता हुवा होटल पोहच गए..

सरदार जी:- अरे पाजी तुस्सी बारी वाडिया बैंडी ो.. यह मेरा नंबर ही जहाँ बी जाना हो मुझी कॉल क्र देना बीएस..

मैं:- अरे पाजी बोहत बोहत शुक्रिया.. आपकी पैसी..

सरदार जी:- अरे अपने छोटी पारा सी भला हम पैसी किसी लय सकती हैं..

मैं:- अरे पाजी आपकी मेहनत की कमाई ही बोलिये जितनी लेने हैं..

सरदार जी:- जितना आपका डिल क्रय..

मैं उनको पैसी दिए और और सामान बाहिर निकला और साइड पी खरी सेल्फी लेती होइ इशिका क पास गया..

मैं:- ओह्ह hello मैडम क्या तब सी वीडियोस फोटोज खिड़ बी एन्जॉय क्र लो...

इशिका:- हहहहह मेरी फंस इसका वेट कृत्य हैं..

मैं:- चलो अंदर फंस..

मैं अपना और उसको बाग़ उठा क अंदर लय आया रिसेप्शन पी पता चला क बीएस एक जी रूम ही हम दोनों का..

इशिका:- No मैं तुम्हारी साथ रूम नहीं शेयर क्र सकती...

मैं:- मम कैन यू चेक अन्य काइंड ऑफ़ रोमं अवायब्ले और नॉट...

रेकप:- No सर सॉरी आल रूम्स अरे रेसवेर्ड..

मैं:- O.k थैंक्स..

इशिका:- क्या थैंक्स मैं नहीं रहूं गई तुम्हारी साथ...

मैं:- रूम तक तो चलो..

मैं चाबी लय क रूम की तरफ चला गया रूम काफी बारे था..

इशिका:- अब क्या क्रय गए.?

मैं:- तुम आराम करो मैं कुछ करता हूँ...

मैं सामान रख क बाहिर आया hi था क मेरा फ़ोन बजा..

मैं:- Hello..

इशिका:- क्या तुम वापिस आ सकती हो..

मैं वापिस चला गया..

इशिका:- वो वह.. यह मुझी वाशरूम किसी उसे कृत्य हैं बताओ गए अगर पता ही..

मैं उसको बता क बाहिर आज्ञा मेरा डिल नहीं किया उसकी खिल्ली ुरानी का..

मैं बाहिर आया और रूम का इंतज़ाम करनी क लिए फ़ोन किया और वह जो बी गया लेकिन वह यहाँ सी बोहत दूर था लेकिन मैं इशिका को अकेला यहाँ चोर क नहीं जा सकता था..

मैं होटल क बाहिर बेंच पी बेथ गया..

इधर इशिका नाहा क बाहिर ी और कपड़े चेंज क्र क बेथ गई और वेट करनी लगी मेरा वह बाहिर विंडो क पास ी और बाहिर देखनी लगी उसकी नज़र मुझपी पारी मैं बेंच पी बैठा कुछ सोच रहा था ऊपर सी स्नो फॉल हो रही थी शाम को वक़त था ठण्ड बी बोहत थी..

वह नीची ी और बाहिर मेरी पास आ क खरी होगी वह ठंड सी कम्प रही थी..

मैं:- तुम आराम करना था न.?

इशिका:- इतनी ठंड में क्यू बैठी हो.?

मैं:- कहाँ ठंड ही.?

इशिका:- तुम पागल हो बम्मर होजाओ गए..

मैं:- तुम आराम करो..

इशिका:- क्या होइ और रूम मिला.?

मैं:- हम्म मिल गया वही जा रहा हूँ...

इशिका:- फिर ठीक ही...

वह चली गई मैं वहीँ बैठा रहा पता नहीं क्यू बूत मैं उसको यहाँ अकेली चूर्ण नहीं चाहता था..

इशिका कमरे में गई और लेट गई बीएड पी वह जल्द hi नींद की वादियोँ में चली गई..

4 घंटी बाद वह उठी रात हो रही थी वह फ्रेश होकय बाहिर ी तो डेल्हा मेरा सामान अभी बी उसकी कमी में hi ही वह भाग क विंडो क पास ी मैं अभी बी उधर hi बैठा था..

वह भाग क नीची ी..

इशिका:- तुम पागल हो.?

मैं:- अरे तुम.?

इशिका:- चलो कमरे में...

मैं:- अरे नहीं तुम जाओ..

इशिका:- मैनी कहा न चलो..

वह मेरी हाथ पाकर क उठाया जैसी उसनी मुझी चुवा मेरी जिस्म में अलग सी लेहेर धूरि..

मैं बिना किसी विरोध क उसकी पिच्य चलनी लगा रूम में आ उसकी टॉवल ला क मेरा सर साफ़ किया और बोली..

इशिका:- तुम जा नाहा लो..

मैं जा क गरम पानी सी महानी लगा और इशिका क बार्ट मेंपता नहीं क्यू बीएस उसी क बारी में सोच रहा था..

मैं 20 मं बाद बाहिर आया..

वह बाहिर बेथ क बीएड पी एक डिब्बे में सी निकल क कुछ खा रही थी..

मुझी लगा कोई ड्रग्स वगैरा ही...

मैं कुछ नहीं बोलै बीएस बाहिर जाने लगा रूम सी..

इशिका:- कहाँ जा रही हो.?

मैं:- बाहिर तुम आराम सी रहो यहाँ..

इशिका:- तुम यहाँ रह सकती हो..

मैं:- नहीं तुम आराम करो..

इशिका:- तुम कहीं नहीं जाओ गए और मुझी भूक लगी ही..

मैं:- तो आर्डर क्र दो...

इशिका:- तुम क्र दो प्लीज..

मैनी खाना आर्डर किया फिर खाया और हम दोनों थकी थय..

मैं सोफे पी और वह बीएड पी सू गई...

अगली दिन हम सुबह उठी दरवाज़ी पी नॉक कुवा..

मैने जा क खोला तो सामन्य एक लड़की खरी थी मिनी स्कर्ट में..

मैं:- यस.?

जूली:- Hi आईएम जूली योर कम्पेशन ओर्गनइजेर..

मैं:- Hi..

मैने उसकी साथ हरह मिलाया तभी इशिका आ गई..

इशिका:- यह कोण ही.?

फिर यंत्रो करवाया..

जूली:- आपकी कम्पेशन में 1 वीक ही तब तक आप लोग घूमो फिरो एंड एन्जॉय और किसी बी चीज़ की ज़रूरत हो मुझी याद करना यह मेरा नंबर ही..

उसनी यह मेरी तरफ देखती हुवी कहा और पर्ची मेरी तरफ Ki...Ishika न्य जल्दी सी उसको पाकर लिया और बोली..

इशिका:- ज़रूर याद क्रय gy..(Pheki स्माइल क साथ)

फॉर उसनी दरवाज़ा बंद क्र दिया..

मैं:- अरे बात तो करनी देती..

इशिका:- नहीं कोई ज़रूरत नहीं तुम उस सी बात नहीं करो गए..

मैं:- वह क्यू.?

इशिका:- Woo..Woh मुझ सही नहीं लगती इस लिए..

मैं:- अभी तो मिली हो..

इशिका:- मुझी कुछ नहीं पता..

उसनी कार्ड फर दिया और वाशरूम में चली गई..

मेरी चेहेरी पी दौब्त्फुल्ल एक्सप्रेशन थय इसको क्या हुवा.?

फिर मैं नहाया एयर नाश्ता किया हमनी..

तो बे कंटिन्यू
 
अपडेट NO.48


मैं:- तो क्या प्लान कहीं जाना ही घूमनी..

इशिका:- मुझी शूट करवाना ही उसकी क लिए फोटोग्राफर सी मिलना ही..

मैं:- O.k...

वह त्यार होकय आ gai..Aur बिना कुछ बोली चली गई मुझी इस लड़की की समख नहीं लगती कभी लगती ही बोहत मस्सों ही कभी लगती ही नकचरी..

खैर मैं बी बाहिर निकल गया और सरदार जी फ़ोन किया..

वह 10 मं में hi आ गए..

सर्द जी:- और पुत्तर की हॉल.?

मैं:- मैं वाडिया सरदार जी आप सुनने किसी हो.?

सरदार जी:- बीएस पुत्तर कद रय ान ज़िन्दगी..

मैं गारी में बेथ गया..

सरदार जी:- तुस्सी दसो किथ्य जाना.?

मैं:- बीएस जी लय चलिए कहीं बी जो देखनी लाइक हो..

सरदार जी:- मतलब.?

मैं:- अरे चलिए तो सही आज क लिए हमारी साथ घूमिये..

सारदा जी:- ठीक ही पुत्तर..

हम निकल गए घूमनी..

इधर इशिका सीधा टैक्सी लय क एक कैफ़े में जाती ही और वहां जा क कॉफ़ी का आर्डर देती ही और किसी का इंतज़ार करती ही तभी एक अँगरेज़ उसकी पास अत ही..

मिछ:- ही और यू इशिका.?

इशिका:- यह अमन सेंत यू.?

मिछ:- यह हे सेक्स यू वांट बेस्ट फोटोशूट..

इशिका:- यह..

इशिका उस्ली साथ बाहिर चली जाती ही..

इधर हम बातें क्र रही थय और सरदार जी बोहत दिलचस्प इंसान थय..

मैं:- आप अपनी फॅमिली क बारी में बताइये...

सरदार जी:- बीएस मैं मेरी बीवी और मेरा बीटा जो अभी 10 साल का ही..

मैं:- वह बी यहीं हैं.?

सरदार जी:- हाँ वह बी इधर hi हैं..

मैं:- बोहत ाचा लगा आपसी मिल क बोहत इंट्रेस्टिंग बैंडी हैं आप..

सरदार जी:- बीएस जी यह hi हामी अट्टा ही..

तभी हम एक जगह पी पोहंची मेरी नज़र वहां गई..

इधर इशिका उसकी साथ भैर निकल क तस्सवीरें क्लिक करनी वह उसको एक गली में लय गया उसकी पिक्स क्लिक करनी तभी वह उसकी बॉडी को टच करनी लगा लगा..

मिछ:- स्टैंड लिखे थिस..

वह उसको जान जान क टच क्र रहा था..

इशिका:- ी थिंक थॉट्स आईटी..

मिछ:- व्हाट हैपेंड बेबी...

उसनी जाती होइ इशिका का हाथ पाकर लिया...

तभी उसकी मुँह पी एक लात पारी...

यह कोई और नहीं मैं hi था और मैने यह hi देखा था क एक आदमी उसको टांग क्र रहा है मैं भाग क उसकी पास गया और एक ज़बरदस्त लात उसकी मुँह पी मारी वह उड़ता हुवा दूर जा क गिरा...

इशिका भाग क मेरी पिच्य आ गई वह फिर उठा..

मिछ:- हु अरे यू आईएम गोंना किल यू..

वह मेरी तरफ आया उसको मैने गिरेबान सी पकड़ा और पटक दिया नीची और उसकी मुँह पी मौका मारा वह मुझी ढाका दी क भाग गया..

मैं खरा हुवा और उसकी तरफ पलटा..

मैं:- कोण था यह.?

इशिका:- वो वह अपना शूट करवाना था तो मेरी एक फ्रेंड न्य इसको भेजा..

मैं:- न जान न पहचान किसी क साथ बी चली जाओ गई और अकेली अन्य की क्या ज़रूरत थी.?

इशिका:- तुम तो ए नहीं..

मैं:- तुमनी बुलाया hi नहीं..

इशिका:- तुम्ही नहीं पता क आ जाओं अकेली मैं बाहिर निकली..

मैं:- तुम बोल नहीं सकती थी..

इशिका:- मैं क्यू हर बात बोलों कुछ तुम खुद नहीं समझ सकती..

मैं:- अब मुझी क्या पता था..

इशिका:- अब मेरी शूट का क्या होगा.?

मैं:- स्यापा होगा..

मैं गारी की तरफ जाने लगा वह बी बाग़ उठा क पिच्य पिचग आ गई..

मैं सरदार जी क साथ बेथ गया वह पिच्य बेथ गई.

हमको उन्हों न्य होटल छोरा और निकल गए..

तो बे कंटिन्यू...

नोट:- फ्रेंड्स मुझी थोड़ा ब्रेक चाहिए.. इसी लिए नेक्स्ट अपडेट विल बे ों वीकेंड Next...Thank यू
 
अपडेट NO.49

हम दोनों कमरे में गए मैं सीधा बाथरूम जा क नहाया और बाहिर आया तो वह बीएड पी बेथ क उसी डीबी सी कुछ गोलियां खा रही थी मैं इग्नोर क्र क सीधा कॉल क्र खाना मंगवा क खाया और सोने क लिए लेट गए...

अगली सुबह...

मेरी आंख खुली मैं फ्रेश होकय बाहिर गार्डन में चला गया जॉगिंग करनी मैने स्लीवलेस शर्ट पहनी थी ुसमय सी मेरी बॉडी काफी वैया हो रही thi..sab मुझी hi घूर रही थय कुछ लड़कियां तो hi Hello क्र क बी जा रही थी..

मैं फारिग होकय ऊपर अपने रूम में आया तो इशिका उठी होइ Thi...Aur बीएड पी बेथ क घूर रही थी मुझी..

इशिका:- ऐसी क्यू गए बाहिर.?

मैं:- किसी.?

इशिका:- यह आधी शर्ट पेहेन क...

मैं:- तो इस में क्या ही.?

इशिका:- सब तुम्ही देख रही थय...

मैं:- तो देखनी दो तुमको क्या.?

इशिका खरी होइ और बोली..

इशिका:- यू अरे राइट मुझी क्या.?

तभी दरवाज़ा नॉक हुवा मैने खोला तो जूली थी..

जूली:- Hi हैंडसम..

मैं:- ओह्ह Hi जूली मैं एक डैम बरिया..

जूली:- वाओ योर बॉडी इस सो हॉट...

तभी वह बेच में आ गई..

इशिका:- आप को कोई काम था.?

जूली:- ओह्ह यह थिस इस योर सचेडुअल एंड रूल्स फॉर थे कम्पेशन...

इशिका न्य पेपर पकड़ा...

इशिका:- थैंक्स यू मई जो नाउ..

जूली न्य एक नज़र मुझपी डाली और चली गई..

मैने और उसनी रूल्स पारी...

फर्स्ट राउंड जनरल कनौलेगे..

सेकंड राउंड साइंस एंड टेक..

थर्ड राउंड कॉमन सेंस..

लास्ट राउंड ब्र्रिटेन Test(Is राउंड में आपका कम्पेशन अपने पार्टनर्स सी होगा और यह राउंड लास्ट 2 जोरियोँ क बिच होगा..)

लास्ट राउंड में कोई किसी क सारः नहीं होगा सब इंडीविदुले होंगे और एक Hi विनर होगा...

हम दोनों फिर फ्रेश होकय ब्रेकफास्ट क्र क बाहिर घुम्म्न्य चले गए...

अगली सुबह...

आज सिम्पेटिओं का फर्स्ट राउंड था...

जनरल कनौलेगे राउंड...

हम लोग ऑडिटोरियम में पोहंची वहां काफी लोग थय हम अंदर गए वहां हमे जूली मिल गई..

जूली मुझसी गली लग क मिली...

जूली हमे अपनी जगह पी बिठा क चली गई कुछ देर में सब आ गए सामन्य स्टेज पी तीन जजस बैठी थय..

10 टीम्स थी जो क वहां मौजूद thi..jin में सी आज 8 आगे जाये गई मतलब 2 बाहिर..

(टीम्स को टीम1 टीम2 लिखों गए)..

एक लड़की स्टेज पी ी उसनी मिछ पकड़ा था..

लड़की:- टुडे इस थे फर्स्ट राउंड ऑफ़ थिस कम्पेशन टुडे वे स्टार्ट थिस जर्नी ऑफ़ कनौलेगे...

फिर उसके बाद हम सब की टेबल्स पी बिठा दिया गया उस टेबल पी बज़्ज़ेर लगा हुवा था.. मतलब यह एक बुजजीर राउंड था..

हंसय क्वेश्चन हुवा पहला..

क्वेश्चन:- हाउ फार इस मून फ्रॉम एअर्थ...

सब क बज़्ज़ेर बाजी...

बूत सब सी पहले हमारी चींटी न्य बजाय बजर

इशिका:-384,400 कम

ज:- इन मीटर्स.?

इशिका चुप होगी तभी मैं बोलै..

मैं:- 384.4 मिलियन म

ज:- करेक्ट...

फिर ऐसी hi क्वेश्चन हुवे जिसकी हमने और बाकि लोगों न्य बी जवाब दिए बजर पी इशिका का हाथ tha..Wesy हर क्वेशन का आंसर अत था मुझी बूत बजर टाइम पी नहीं बजता था..

हम दोनों फर्स्ट No. पी थय और लास्ट व टीम्स को एवेक्ट क्र दिया था..

हम दोनों स्टेज सी नीची ए तो जूली न्य फिर मुझी गली लगा क कॉंग्रट्स किया और हमारी शेरनी की नाक पी गुस्सा च गया.. और वह वहां सी बाहिर जाने लगी मैं बी उसके पिच्य चल पारा बिना कुछ बोले...

हम होटल आ गए...

आज क लिए इतना hi..

नोट:- सॉरी फ्रेंड्स इतना वेट करवानी क लिए एंड नाउ I'll अपडेट यू डेली...
 
अपडेट NO.50


हम रूम में ए इशिका फ्रेश होकय बेथ गई और अपने मोबाइल में कुछ करनी लगी मैने घर कॉल क्र क बी बताया सब बोहत खुश हुवी..

मैं इशिका क पास गया..

मैं:- वैसी ाचा खेला तुमनी आज..

इशिका:- लेकिन मुबारक तो तुम्ही मिल रही थी...

मैं:- मतलब.?

इशिका:- हाँ अब तो कुछ पता hi नहीं बारे चिपक रही थी वह 2 मुँह वाली छिपकली...

मैं:- अरे वह तो बीएस कॉंग्रट्स क्र रही थी..

इशिका:- हहहह बरी ी...

उसनी मुँह अजीब सा बनाया मुझी बोहत क्यूट लगी डिल किया अभी उसके गाल चुम लोन...

तभी वह बोली..

इशिका:- मेरी साथ कुछ ाचा नहीं हो रहा न मेरा शूट.. एक मं क्या तुम शूट क्र सकती हो.?

मैं:- मैं मुझी तो कैमरा चलना नहीं अत....

इशिका:- वह मैं बता दूँ गई बदली में पैसी दूँ गई..

मैं:- अब तो बिलकुल नहीं...

इशिका:- 2000 डॉलर्स..

मैं:- नहहह..

इशिका:- 5000 डॉलर्स..

मैं:- नहहहह..

इशिका:- 20000 डॉलर्स दूँ गई...

मैं:- नाहीइ बोलै न..

इशिका:- ुह्ह्ह्ह तो कितनी चाहिए..

मैं:- हर चीज़ पैसा नहीं होती ज़िन्दगी बोहत छोटी और ख़ूबसूरत ही मैं यह दिखाना चाहता हूँ तुम्ही मैं तुम्हारी ज़िन्दगी क 60 मं चाहता हूँ बोलो दी सकती हो.?

इशिका:- मतलब.?

मैं:- 60 मं कल.?

इशिका:- अभी बी तो साथ hi हैं...

मैं:- ः हम बोहत डोर हैं अगर हाँ ही तो सुबह बता देना...

मैं यह कह क सोफे पी जा क लेट गया और सू गया...

अगली सुबह मेरी आंख खुली मैं फ्रेश होकय जॉगिंग करनी गया आज एक उप्पेर पहनी थी...

वापिस रूम में आज्ञा और फ्रेश होकय बाहिर आया तो इशिका बैठी थी खाना लगा क...

मैं:- अरे वह आज तो खुद मंगवा लिया..

इशिका:- मुझी मंज़ूर ही लेकिन फोटो अछि अणि चाहिए..

मैं:- हाँ.?

इशिका:- अरे कल जो 60 मं मैंगी थय उसका कह रही हूँ...

मैं:- Ok सो लास्ट डे सी एक दिन पेहली...

इशिका:- O.k...

फिर नाश्ता किया और चले गए केप्शन क लिए आज क राउंड में 4 टीम्स एविक्ट होइ...

ऐसी Hi 2 दिन और निकल गए अब सिर्फ 2 टीम्स बाकि थी मतलब विनर एक कंट्री होगी लेकिन उसको रिप्रेजेंट एक पर्सन क्रय गए...

कल कम्पेशन का लास्ट राउंड था और कल की hi हमारी फिल्घ्त थी वापसी की...

आज मैं उठा फ्रेश होकय जॉगिंग क्र क होटल आया फिर हम बाहिर चले गए मैं इशिका की पिक्स क्लिक क्र रहा था बिच बिच में वह सेल्फी बी क्लिक क्र रही थी मेरी साथ...

फिर हम होटल ए मैं उसका कुछ देर क कह क बाहिर चला गया और सीधा मॉल गया वहां सी ड्रेस ली और बाकि चेजजें ली और 2 3 कॉल्स क्र क वापिस होटल आज्ञा...

इशिका:- सो 60 मं होये.?

मैं:- 6:00 बजी यह पेहेन क रेडी रहना...

मैने एक पैकेट उसको दिया...

इशिका न्य वह लिया और खोल क देखा ड्रेस एक दम सिंपल कुरता पजामा था...

उसनी एक नज़र मुझपी डाली..

मैं:- व्हाट.?

इशिका:- यह यहाँ पहना ही.?

मैं:- अब यह तो पहना पारी गए चाही फीस समझ लो या गिफ्ट...

यह कह क मैं बाहिर आ गया...

6:00pm....(Story बी थर्ड पर्सन)

शाम की हवा अपनी अबू ताब पी थी सुरसुराती पंछी आज शाम एक अजीब hi मंज़र पेश क्र रही थी हर तरफ हरियाली...

होटल क बाहिर एक तांगा कुछ लोग फूल लय क खरी थय तभी होटल का दरवाज़ा खुलता ही अंदर सी हुसैन की देवी प्रकट होती ही पंजाबी कुर्ती पजामी में कानो में झुमकी नीली आंखें बाल खुली हलकी हलकी हवा में लेहराती हुवी. बाहिर अति ही और तभी एक साइड सी गैब्रो जवान ब्लैक करता नीची पजामा स्लीव्स आधी फोल्ड ऊपर चारि होइ चेरी पी एक अलग hi तेज आंखें नीली कातिल करनी वाला हुसैन उस लरकी में वह ऐसा हुसैन रखता था जिसकी हुसैन सी हर इंसान उसको घूर्णी का फ़र्ज़ ऐडा क्रय...

(स्टोरी बी हीरो.)

मैं यज्ञ भर क इशिका का हाथ पकड़ा उसकी नज़र मुझपी पारी वह बीएस एक तक मुझी Hi देखती रह गई जैसी पहली दफा देख रही हो..

क्योँ क पेहली मैं उसकी सामन्य अपनी आंखों पी ऐनक लगता था और सर क बाल बिखरी रखता था...

इशिका मेरी आंखों में घूरती रही..

मैं:- मैडम चलें पेहली hi बीएस 60 मं हैं.?

वह होश में ी..

इशिका:- क्या तुम सैम.?

मैं:- अरे अभी तो टाइम भी पूरा नहीं हुवा इतनी जल्दी पचनय सी बी इंकार क्र दिया.?

इशिका कुछ नहीं बोली और मेरी साथ यज्ञ भरी मैं उसको एक तांगा नुमा बागी क पास गया और ुसमय बेथ गए और साथ hi एक आदमी आया और उसनी फूलों का गुलदस्ता इशिका को दिया...

बागी हमें एक जगग ला क रूक गई मैं उत्तरा और दूसरी साइड सी जा क इशिका को उत्तरा वह बिना कुछ बोली मेरी साथ आ गई..

हम उस जगह क अंदर गए अंदर पूरा गाओं का माहोल था अंदर दरमियान में एक टेबल और उसकी साइड में दो चारपाई राखी थी...

मैं इशिका को वहां लय गया और बैठा दिया..

एक आदमी गरम साग और सरसों की रोटी लय क आया..

मैं:- खाइये...

इशिका न्य एक बार गोइर सी देखा और छोटी सी बाईट लय क खाया और उसकी बाद उसनी ाच्य सी उसको खाया और वह साथ साथ बातें बी क्र रही थी...

फिर उसकी बाद 2 लस्सी क गिलास लय क आया एक वेटर उसनी उसको बी पहला चखा और फिर सारा पि गई...

फिर मैं उसको उठा क बाहिर लय आया और एक जगह पी आदमी पान लगा रहा था उसकी पास जा क पान लगवाया और उसको पान कहिल्या..

इशिका:- उम्म्म्म इतस सू टेस्टी...

मैं:- ाजी हम्र्य पान की क्या बात ही..

इशिका:- ः किसी बात क्र रही हो..

मैं:- ाजी हम तो ऐसी बात क्र रही थय चलिए टाइम बीएस 15 मं रह गया ही...

मैं इशिका को तांगा तक लय आया और ुसमय बिठा क हम एक एक उच्च8 जगह आ गए मैं इशिका को एक बेंच पी बिठा दिया..

इशिका:- यहाँ क्या ही.?

मैं:- वह देखो..

सामन्य का नज़ारा बोहत ख़ूबसूरत था शाम ढल क रात होने को सूरज दिन भार अपनी आबो ताब सी रोशन होकय अपनी मज़िल की तरफ जा रहा था पहरों क पिच्य अपनी दुनिया की दोस्सरी or...pahar वाली इलाकून ऐसा सन बोहत काम देखनी को मिलता ही...

इशिका:- वाओ व्हाट ा व्यू...

इशिका न्य मोबाइल निकला और सेल्फी लेनी लगी..

मैनी उसकी मोबाइल पी हाथ रखा...

मैं:- हर चीज़ हर किसी को नहीं शेयर कृत्य कुछ चीज़ें हमारी दोनों क लिए रहंय दो....

इशिका एक टाक मेरी तरफ देखती रही और मैं बी उसकी आंखों में झांक क कुछ खूजन्य लगा...

तभी टीई टी की आवाज़ ी..

मैं:- टाइम उप....

इशिका अभी बी वैसी hi बैठी थी...

मैं:- आपका टाइम ख़तम एंड थैंक्स फॉर योर Time..And ओने लास्ट गिफ्ट फॉर यू...

मैनी कुछ पेपर्स निकल क उसको दिए..

इशिका:- यह क्या ही.?

मैं:- कल क राउंड क लिए इसको रेडी क्र लेना..

मैं उसको लय क होटल आ गया और आती hi फ्रेश होकय सोग्य...

नेक्स्ट मॉर्निंग 9:00ऍम..

इशिका भागी होइ एक जगह जा रही थी और उसकी कान पी फ़ोन था..

इशिका:- मुझी कुछ नहीं पता मुझी फर्स्ट आना था तो जो मुझी सही लगा मैं न्य किया...

****

इशिका:- अबे यर नींद की गोली hi तो दी थी उसको शाम तक जाग जाये गए और ताब तक मैं विनर बा चुकी होंगी.....

तभी वह एक हाल नुमा कमरे में एंटर होती ही और उसकी नज़र जैसी Hi सामन्य जाती ही उसकी हीरानी का कोई ठिकाना नहीं रहता.......

तो बे कंटिन्यू.....
 
अपडेट NO.51


इशिका फ़ोन पी बात करती होइ ऑडिटोरिम में एंटर होइ अंदर काफी क्राउड था और स्टेज पी तीनो जज बैठी थय और 3 टेबल्स पी कंटेस्टेंट एक पी टीम2 थी और एक पी मैं बैठा था उसको यकीन नहीं होवा जिसको वह नींद की गोलियां दी क ै थी उसको अपनी नज़रूँ क सामन्य बैठा देख उसको हीरानी होइ...

तभी अनोउसमेंट होइ वह जल्दी आ क मेरी साथ बेथ गई वह मुझसी नज़रें नहीं मिला रही थी..

ज:- सो आल यू क्नोव थे अरे थे फाइनल लिस्ट्स एंड टुडे थे कपट विथ ओने another...And आफ्टर सीइंग थे प्रीवियस राउंड्स मर सैम ी थिंक हु कैन स्लोवे व्हाट वे प्रॉब्लम हैवे एंड थिस इस योर प्रॉब्लम तो स्लोवे इन 30 मीन्स...

एक एक पेपर हामी मिला और साथ लैपटॉप दिया गया यह एक कोडन का सवाल था सब लिखना स्टार्ट क्र दिया..

आफ्टर 30 मं..

उन्हों न्य हंसी पेपर्स और लैपटॉप कलेक्ट किये...

मैं:- इजी था न.?

इशिका:- हम्म्म...

मैं:- इतनी घबरा क्यू रही हो ाचा नहीं गया क्या.?

इशिका:- मैं कहाँ घबरा रही हूँ.?

तभी तीनो जज स्टेज पी ए...

ज:- आज का रिजल्ट अनएक्सपेक्टेड था हमनी शयद गलत उम्मीद लगाई थी बूत नाउ वे हैवे आवर रियल विनर सो लेडीज एंड जेंटलमेंस वे हैवे आवर विनर मिस इशिका फ्रॉम इंडिया प्लीज गिव उस ा राउंड ऑफ़ ापलूसे....

हर तरफ तालियां बजनी लगी इशिका हिरण परेशान बैठी थी उसको यकीन नहीं हो रहा था...

तभी मैनी उसको हिलाया वह उठ क गई और ट्रॉफी रेसवे की लेकिन उसकी आंखों में शर्मिंदगी क नज़्ज़ारी थय उसका चेहरा मुरझा गया था...

अचानक मेरी डिल में एक अजीब सा दर्द मह्सूस हुवा मैं समझ नहीं पाया और उठ क बाहिर आज्ञा और सोचनी लगा मुझी नहीं पता क्यू बूत मैनी फ़ोन निकल क तनीषा को मिलाया

फ़ोन की रिंग जा रही थी अचानक फ़ोन स्वीकत ऑफ होगया मेरा दिमाग हिल गया मैं जल्दी सी एयरपोर्ट की तरफ निकालनी लगा..

तभी पिच्य सी इशिका आ गई..

मैं:- मैं वापिस जा रहा हूँ अभी तुम्ही चलना ही.?

इशिका:- हमारी फिल्घ्त तो रात की ही..

मैं:- तुम चल रही हो क नहीं.?

इशिका मुझी गुस्से में देख क दर गई और फिर हम होटल गए वहां जा क हम सामान लय क सीधा एयरपोर्ट चले गए और 1 घंटी में फ्लाइट ुर गई मेरा डिल बेचैन था जैसी कोई अपना दूर जा रहा हो इशिका न्य उसकी घर फ़ोन क्र दिया..

कुछ घंटी बाद फ्लाइट लैंड होइ हम बाहिर मैं लगभग भागता हुवा बाहिर निकला इशिका बी मेरी पिच्य आ रही थी और पॉच रही थी सब ठीक ही.?

इशिका को बिना कुछ बोली मैं टैक्सी में बेथ क घर की तरफ चला गया..

इधर इशिका को लेनी उसकी माँ और बुआ दोनों ी थी..

वह उनके पास गई..

A'maa:- वह तेरी साथ क्या क्र रहा था.?

इशिका:- कोण.?

A'maa:- वह अभी और अबीरा का सो कॉल्ड भाई...

यह बात उसकी उप्पेर किसी बम सी काम नहीं थी वह उसी क साथ घूम रही थी जिसकी पर्सनालिटी सी वह प्यार करती थी..

Ab'bua:- वह चोर यह बता ट्रॉफी कहाँ ही.?

ट्रॉफी का नाम सुन क उसको साडी बात याद ा गई उसको खुद सी घिन सी अन्य लगी फिर वह मुँह लटका क कार में बेथ गई...

इधर मैं टैक्सी सी घर पोहंच गया मेरा डिल बेचैन था मेरी टांगें कम्प रही थी मैं टैक्सी वाली को पैसी दी क भागता हुवा अंदर गया..

अंदर का नज़ारा देख क मेरी तो जैसी जान निकल गई जैसी किसी न्य पैरों क नीची सी ज़मीन खेंच ली क्यू क सामन्य का नज़ारा Hi मुझी मारण्य क लिए काफी था...

सामन्य मेरा जिगर मेरी जान मेरी पहचान मेरा भाई मेरा सब कुछ खून में लात पात पारा था मतलब अभी की लाश जिसकी जिस्म पी हर तरफ घाव थय तनीषा और अबीरा पास बैठी ज़ोर ज़ोर सी रू रही थी बाकि उसको संभालनी में लागत थय..

मैं बूट बन गया था मुँह सी एक लफ्ज़ नहीं निकल रहा था पूरी जान लगा क मैं चिल्लाया...

मैं:- Abhiiiiiiiiiiiiiiiii

और बाग़ फ़ेंक क भगा उसकी तरफ और पास पोहंच क उसको शून्य लगा मेरा डिल रो रहा था और चिल्ला रहा था यह एक सपना ही..

तभी किसी न्य मेरा हाथ पाकर लिया मैने देखा तो यह तनीषा थी.

मैं:- तनीषा यह क्या होगया मेरा भाई मुझसी बात नहीं क्र रहा इसी...

"चटाक " "चटाक"

तनीषा न्य मेरी मुँह पी मैरी..

मैं तो जैसी हिल गया...

तनीषा:- मात कह अपनी गन्दी जुबां सी मेरी भाई को अपना भाई कोई दरिंदा मेरा पति और मेरी भाई का दोएत नहीं होसकता...

मेरी तो जैसी होश और गए और डिल तो जैसी चली होगया..

मैं:- यह क्या बोल रही हैं आप...

फिर दोस्सरी साइड सी एक थापर पारा मुझी यह अबीरा थी...

अबीरा:- क्यू मेरी सुहाग की उजारा तूने चाँद पैसों क लिए...

तनीषा:- मस्सों औरतों का फ़ायदा उठती हो और तारा तुम्हारी साथ इस सब क लिए नहीं मणि तो उसकी इज़्ज़त पी हाथ डाला गलीज़ दरिंदे...

अबीरा:- और मेरी पति की पैसों की खातिर हत्या की तुमनी...

यह बात मेरी रूह पी असर होइ मेरा वह बेलौस प्यार इतनी इंतहा की मोहबत इतनी बंदगी पी आज पैसों का दाग लग गया कभी किसी क जिस्म को बुरी नज़र सी न देखनी वाले इंसान पी एक रेपिस्ट की मुहर लग गई..

तभी एक और आवाज़ ी..

तारा:- मैं इसी की वजह सी यहाँ सी दूर चली गई थी िसंय मेरी साथ..

यह कह क वह रोने लगी...

तनीषा:- निकल जा मेरी नज़रूँ सी दूर..

आयेशा अंजलि और अक्षरा और माँ भी रू रही थी रत्न वहां नहीं थी...

मैं खरा हुवा और एक नज़र अभी की तरफ देखा और लरखरता हुवा बाहिर चला गया...

तो बे कंटिन्यू..
 
अपडेट NO.52


मेरी आंखों क यज्ञ अँधेरा ता रात का समय था मेरी आंखों सी आंसूं बह रही थय और आसमान में बिजलियाँ करक रही थी तभी मेरा हाथ किसी न्य पकड़ा..

मैं भीगी आंखों सी देखा तो नूर थी...

नूर:- कहाँ जा रही हैं मुझी अकेले चोर क...

मैं:- मुझी नहीं पता आज और तुम बी मुझी चोर दो वर्ण कहो गई मैने इज़्ज़त पी हार डाला...

नूर झट सी मेरी गली लग गई..

मुझी शायद इस वक़त ज़रूरत थी इसकी...

मैं:- मैं कागज़ क टुकड़ों क लिए अपने भाई को नहीं मार सकता अपनी जान उसकी क लिए दी सकता था नहीं चोरो गए जिसनी किया उसकी ज़िन्दगी बर्बाद क्र दूँ गए...

मैं नूर सी अलग हुवा...

मैं:- आज मेरा मान टूट गया नूर दुनिया में जिनको सब सी ज़्यादा प्यार किया उनका मुझसी भरोसा उठ...

नूर:- नहीं मुझी यकीन ही आप पी आपकी प्यार पी..

मैनी उसकी बलून क पास हाथ रखा और चेहरा सेहलती हुवी बोलै..

मैं:- तुम अंदर जाओ मैं ाओं गए वापिस मुझपी यकीन बनाये रखना बीएस मैं वापिस ज़रूर ाओं गए...

नूर:- नहीं मुझी आपकी साथ जाना ही...

मैं:- मैं नहीं जनता अभी मैं कहाँ जाओं गए मैं वादा करता हूँ अपने भाई की जान का बदला और अपने बेगुनाही साबित करूं गए..

नूर:- नहीं प्लीज....

मैं:- तुम्ही मेरी कसम..

मैं उठा और वहां सी निकल गया मेरी आंखों में खून सवार था अस्समान रात क वक़त बी लाल पार गया था..

तभी मेरा फ़ोन बजा कोई उनकों नंबर था..

मैने उठा क कान सी लगाया..

******:- टिक टिक टिक....

मैं:- कोण....

*****:- इतनी जल्दी भूल गए Mujhy..(haha)..

मैं:- कोण ही दिमाग खराब न क्र...

*****:- जाना नहीं चाहो गए क्या हुवा तुम्हारी साथ न तीर न तलवार फिर भी तेरी ज़िन्दगी पी गहरा वार....

मैं:- टूउउ......

फ़्लैश बैक....

सम इयर्स बैक....

मैं अपनी लाइफ सकूं सी जी रहा था था क एक अंजना तूफान मेरी ज़िन्दगी की तरफ आया..

मेरी फाइट क कुछ समय बाद Hi जब मैने बिज़नेस स्टार्ट क्र दिया था मेरा फोकस उस तरफ था...

उन्ही दिनों रूचि दीदी एक लरकी क साथ प्यार क्र बैठी हर आशिक़ मिज़्ज़ाज़ लरकी की तर्हां उसनी अपने प्यार क दैवीय किये हमेशा उसी सी फ़ोन पी बात करना और मिलना लगा रहता था वह कुछ दिनों सी दीदी बिलकुल घर पी टाइम नहीं देती थी..

मैने उनका पीछा किया तो मुझी जमी क बारी में पता चला वह दिखनी में ाचा और शरीफ लड़का था मैने बी ज़्यादा टांग नहीं अरे उनके बिच उनका प्यार परवान चर्ता गया..

कुछ समय बाद दीदी की चेहरी की साडी रौनक गायब होगी हमेशा हस्ती मुस्कुराती रहने वाली मुरझा सी गई थी वह ज़्यादा वक़त अपने कमरे में बंद रहंय लगी मैं उस बात को नोट क्र रहा था लेकिन वह दिन बा दिन और मायूस होती जा रही थी..

एक रात मैं दीदी क रूम में गया वह बीएड पी उलटी लेती होइ थी..

मैं:- दीदी...

रूचि:- हम्म्म सैम तू यहाँ इस वक़त कोई काम था.?

मैं:- नहीं आपसी कुछ बात करनी थी...

रूचि:- अभी नहीं सुबह...

मैं:- प्लीज एक बार यहाँ तो देखो..

मैने उनके कंधी सी पाकर क उठाया तो उनकी आंखों में आंसूं थय मेरा कलेजा मुँह को आज्ञा...

मैं:- आप रू रही हैं क्या बात ही.?

रूचि:- नहीं वह बीएस ऐसी hi..

मैं:- क्या बात ही.?

रूचि:- नहीं कुछ नहीं...

मैं:- आपको मेरी कसम...

रूचि:- नहीं ऐसा मात क्र मैं नहीं बोलल पाऊँ गई...

मैं:- अब कसम टूर्नी ही तो मात बोलो...

रूचि:- नहीं.. वह मैं एक लरकी सी प्यार करती थी उसनी बी मुझसी प्यार का झूठा नाटक किया..

मैं:- सच सच बताइये...

रूचि:- आज सी 20 दिन पेहली हम मिल्ली तो उसनी मुझी उसके... उसके साथ सोने को कहा मैने मन क्र दिया लेकिन उसनी कहा हम शादी तो क्रय गए लेकिन मैने मन क्र दिया फिर 5 दिन बाद रात को उसने मुझसी मेरी मेरी....

मैं:- बोलिये........

रूचि:- तू वडा क्र किसी को नहीं बताये गए..

मैं:- नहीं बताओं गए...

रूचि:- उसने मेरी नुदेस मैंगी और मैने उसे मन किया बूत उसने मुख्य कन्वेन्स क्र क लय लिए अब मुझी वह धमकी दी रहा ही अगर मैं उसके साथ नहीं सोइ तो वह सब कुछ इंटरनेट पी अपलोड क्र दी गए...

यह बता क्र वह रोने लगी....

मेरी आंखों में गुस्सा उभर आया तभी बाहिर आसमान में बिल्जी कार्की...

मैं:- आप चिंता नहीं करो सब ठीक होजाये गए..

कुछ देर क बाद मैं उनको सुल्ला क घर सी बाहिर निकला और अभी को फ़ोन क्र क बुलाया...

अभी गारी लय क आज्ञा और हम निकल गए जमी क घर की तरफ हम उसको उसके कमरे सी निकल क ले गए उस जगह जहाँ पी मेरा ऑफिस बन रहा था...

अगली सुबह....

जब जमी को होश आया उसनी खुद को किसी जगह बंधा हुवा पाया तो वह हिलने लगा और चिल्लाने लगा...

तभी दरवाज़ा खुल्ला और 2 लरकी अंदर ए...

जमी:- कोण हो तुम जानती हो मेरी पापा कोण हैं...

मैं:- शहहहहह.... बारे शोक ही न तुझी दोस्स्रों की इज़्ज़त क साथ कजेलंय का चल आज तेरी इज़्ज़त क साथ खेलती हैं मज़ा ए गए (ः)...

तभी मैने एक बटन दबाया तो स्क्रीन पी एक वीडियो प्ले होगी जिस्मी कुछ निग्गस और जिमि क प्यार की निशानी thi..matlab उसकी गांड मरवाती की वीडियो....

जिमि:- नहीं यह किसी को मत दिखाना मैं बर्बाद होजाओं गए....

मैं:- किसी की माँ बेहेन की इज़्ज़त क साथ खेलती हुए यह एहसास नहीं हुवा..

अभी:- तेरी इज़्ज़त तुझी प्यारी बाकियोँ की नहीं...

जिमि:- नहीं मैने जो बी किया माफ़ क्र दी पर यह देलेट क्र दो...

मैं:- चल सब सी पेहली बता टुन्नी साडी तस्सवीरें कहाँ राखी हैं.?

जिमि:- मेरी लैपटॉप में मैं अभी देलेट क्र दूँ गए...

मैं:- और कहाँ हैं.?

जिमि:- बीएस वही हैं...

मैं:- सच बोल.....

जिमि:- माँ कसम बस...

मैने अभी को इशारा किया उसनी एक बाग़ सी लटोप निकला और उसको ऊपर हथोड़ी ेंट मार मार क उसके टुकड़ी क्र दिया हार्ड डिस्क को सर्तक क्र क टूर दिया इन्शोर्ट सब ख़तम....

मैं:- चल अपने बाप को फ़ोन लगा..

मैने अभी सी उसके हाथ खोलनी कहा और फ़ोन दिया उसनी फ़ोन लगाया...

जिमि:- Hello पापा मुझी बचा लो...

मैं उस सी फ़ोन खेंचा...

मैं:- नमस्ते सर आपको एक ाड्र्स भेज रहा हूँ वहां आइये 15 मं में...

आदमी:- कोण हो तुम...

मैं:- ा क मिल लो न sir..Tik टिक टिक....

और फ़ोन सुत्त क्र दिया....

15 मं में एक गारी उस जागब ै उस में सी एक आदमी nikla....Aur भागता हुवा उस जगह आया...

मैं वही साइड में खरा था...

आदमी:- कोण ही किसनी किया यह सब..

तभी में यज्ञ आया...

आदमी:- तुम तुमनी किया यह सब....

मैं:- अरे देव साहिब अपनी तो पुराणी जान पहचान ही बेथ क बात कृत्य हैं..

देव:- देखो तुम यह साब नहीं क्र सकती..

मैं:- वह क्या ही न देव साहिब मैं अपनी फॅमिली सी और मेरी फॅमिली मुझसी बोहत प्यार करती hy...To आपकी लाड़ली न्य मेरी फॅमिली को हर्ट किया शुक्र मन क वह ज़िंदा ही..

देव:- आईये तेरी...

मैं:- फालतू की फूटिगे नहीं बीएस मुदाय की बात ही तो और तेरा बीटा मेरी फॅमिली सी दूर रहना वर्ण यह काम मैने बोहत ाच्य सीखा ही क दोषमान को किसी मारना ही...

तभी एक कर्क आवाज़ में डाइलॉगे आया आपके भाई का....

मैं जादू मैं मायाजाल दर मुझसी में हूँ SHAKAAL...HAHA...

मैं और अभी वहां सी चली गए और कुछ आदमी उन्दोनो को गारी तक लय जा क बिठा क रवाना क्र दिया उसके बाद मेरी उस से कभी मुलाकात नहीं होइ...

फ़्लैश बैक.. एन्ड...

देव:- पहचान लिया तूणी...

मैं:- गलत पन्गा लय लिया देव...

देव:- Haha..Panga तो टुन्नाय गलत लिया था जिस फॅमिली क प्यार पी अकर्ता था उसी सी ज़लील करवा क बाहिर निकलवा दिया (ः)...

मैं:- समय आ नामर्द चुप क मारा मेरी भाई को शेर का शिकार आसान नहीं था घटक वार किया टुन्नाय..

देव:- उसकी मौत तो निश्चित थी अब तेरी बारी उसकी बाद उस की जिसका इंतज़ार मैं कब सी क्र रहा हूँ...

मैं:- तेरी इतनी औकात नहीं क तू मुझी मार सकी अपनी मौत का फैसला मैं खुद करूं गए और तेरी मौत का फैसला भी मैं hi करूं गए और तेरी मौत तैय Hy...TIK टिक

देव:- तू उंगलियों पी गईं दिन और हाँ तेरी वह सो दोस्त उसके आखरी अलफ़ाज़ सुनने गए...

तभी एक आवाज़ प्ले होइ..

"धोके बज़्ज़ो क धोके को देख लिया अब भरोसे वाले की भरोसे को देखना वह ए तुम सब चुन चुन क मैरी गए किसी को नहीं चोरी गए.." "खसक"..

मैं:- आआआआआ टुन्नने आज मेरी उस मैरी हुवे शकल को जगा दिया जैसी मैने मार दिया तो देख तेरा वह हश्र होगा क सैम ठाकुर की तरफ देखनी सी लोग कम्प्य गए तू जहाँ कहीं बी ही तुझी वहीँ आ क मारों गए याद rakhna....Sab को मूट मिले गई

"मैं जादू मैं मायाजाल दार मुझसी मैं हूँ शकल"...

देव:- हाहाहा तू मुझी मरययय गए...

मैने फ़ोन सुत्त क्र दिया....

और वहीँ चिल्लाया.......

"AHHHHHHHHHHHHHHHHHHH"

तो बे कंटिन्यू...
 
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