Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance) - Page 6 - SexBaba
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Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance)

अपडेट NO.53


आफ्टर 2 डेज...

आज पूरी 48 घंटी हो चुके थय उस घटना को मैं अब संभल चूका था लेकिन मेरी दिमाग में बीएस तनीषा और अबीरा क अलफ़ाज़ घूम रही थय जो क मुझी बोले गए थय...

मैं अपनी भाई का अंतिमसंस्कार तक न क्र सका...

मेरा दिमाग पूरा खराब था मैं चाहता तो तो सीधा जा क सेव को मार सकता था लेकिन मुझी हर उस शख्स को सजा देनी थी जिस न्य अभी क साथ यह साब किया यह बात मेरी दिमाग में अभी ी थी अभी क आखरी अल्फ़ाज़ किया थय..

"धिकाय बज़्ज़ो क धोके को देख लिया अब भरोसायमाद का भरोसा देखना"..

इसका मतलब कोई था जिसनी देव को साड़ी इनफार्मेशन दी थी...

कोण होसकता ही वह.?

मैं इस वक़त एक सुनसान जगह था जहाँ बिलकुल शांति थी बीएस छोटी सी झँपरी जो क मैने बनाई थी...

मैं:- अदि...

अदि:- जी भाई...

मैं:- मैं जो कहां करो गए.?

अदि:- जी भाई हुकम करो...

मैं:- अभी तुम मुझसी दूर चले जाओऔर मुझी ढूंढ़ने की कोशिश भी नहीं करो गए...

अदि:- भाई लेकिन.?

मैं:- मैने कहा न...

फिर शाम को मेरी दिमाग में कमिश्नर का ख्याल आया मैं तुरंत फ़ोन निकल क उसको मिलाया...

कॉम:- Hello कोण.?

मैं:- सैम ठाकुर बोल रहा हूँ...

कॉम:- सर आप अपने हमे याद किया बोलिये क्या क्र सकता हूँ आपके लिए.?

मैं:- अभी एक मुझी **** मिलिए...

फ़ोन कट...

मैने फ़ोन निकला और अपने लॉयर को लगाया..

किन:- Hello सर आफ्टर लॉन्ग time..How अरे यू.?

मैं:- फाइन किन जितनी जल्दी हॉसकय इंडिया पोहंचो...

किन:- एव्री थिंग इस फाइन सर..

मैं:- तुम जल्दी औ...

किन:- फाइन सर मैं कल Hi आ जैन गए..

मैं:- O.k...

फ़ोन सुत्त....

आफ्टर 3 हरष...

मैं उस जगह पोहंच गया जहाँ मैने कमिसीनेर को बुलाया था...

कमिश्नर वहां आ गया Hi hello क बाद वह बोलै..

कॉम:- सर उस दिन अपने फ़ोन क्र क वह नाटक करनी को क्यू कहा.?

मैं:- मैं किसी को नहीं बताना चाहता था क मैं कोण हूँ..

कॉम:- O.k सर..

मैं:- यह नंबर ********* पी *** डेट को किस किस की कॉल ै थी पता करना ही...

किम:- O.k सर 2 घंटी में डिटेल्स आपको फॉरवर्ड क्र दूँ गए...

मैं:- थैंक ु...

कमिश्नर चला गया...

मैं फिर वहीँ आ गया..

पास समुंदर की लहरें की झंगनाहट और उस दिन का सन मेरा डिल चिर रहा था..

तभी मैने एक बात नोटिस की वहां साब मौजूद थय सिवाए रत्न क मुझी यह बात नार्मल नहीं लगी..

अचानक मेरी डिल सी अजीब सी आवाज़ निकली जिस में ककी मेरा नाम दर्द सी लय रहा ही और मुसलसल लय रहा ही मैने दुःख में इस बात को िंगोरे क्र दिया लेकिन अब मुझी कन्फर्म होगया था यह रत्न की आवाज़ ही जो इस वक़त किसी मुसीबत में ही...

मैं उठ गया और आंखें बंद क्र ली और फिर खोली तो एक सुनसान सी जगह खरा था सामन्य एक बंद फैक्ट्री थी...

मैं धीरे धीरे अंदर गया दबे पाऊँ अंदर जाने का लगा वहां ज़्यादा लोग नहीं थय अंदर कुर्सी पी रत्न बंधू थी और साइड पी 4 आदमी बैठी तैश खेल रही थय...

मेरी आंखें गुस्से सी लाल होगी...

मैं भाग क रत्न क पास गया...

उसने अपनी आंखें ऊपर की टी मुझी वहां पा क रोने लगी...

मैने अपना हाथ उसके ऊपर लय जाने लगा तभी एक गोली चली जो सीधा मेरी सीने पी लगी और लगती Hi जम्में पी गिर गई...

जिससे देख क उन साब की आंखें फात गई और मैने अपनी आग में जलती होइ आंखें और उन में आंसूं सी उनकी तरफ देखा और स्पीड सी भाग क उनके हाथ पेअर टूर दिए यह काम 1 मं में Hi क्र दिया था और वापिस रत्न की तरफ आया उसकी आंखों में अभी भी ाँसों थय मैने जल्दी सी उसके हाथ खोली वह उठ क झात सी मेरी गली लग गई...

मैने अपने हाथ नहीं लगाई उसको...

वह अलग होइ और मेरी आंखों में देखनी लगी जिन में आंसूं थय उसने अपने मुँह पी सी कपड़ा हटाया...

रत्न:- क्या हुवा मैं ठीक हूँ रोइ क्यू रही हैं...

मैं कुछ नहीं बोलै और उसका हाथ पाकर क वहां सी टेलिपोर्ट होकय घर क सामन्य पोहंच गया...

रत्न:- यह साब क्या ही आप कुछ बोलते क्यू नहीं और मुझी किसने पकड़ा था.?

मैं:- अंदर जाओ...

रत्न:- आप नहीं चलो गए..

मैं:- साब पता चल जाये गए अंदर जाओ...

और मैं सीधा दुबारा वहां सी टेलिपोर्ट होकय उसी जगह पोहच गया और उन गुण्डों को पाकर क जम्में पी लिटा दिया वह दर्द सी चिल्ला रही थय...

मैं:- किसने किया यह साब.?

गुंडा..1:- आए हमे माफ़ क्र दी साहब हमे तो बीएस यहाँ रखनी को पैसी दिए थय...

मैं:- किसने दिए थय.?

ग1:- रोहन सहा न्य....

नाम सूं क मेरी टूटे ुर गए.. तभी मोबाइल की घंटी बजी..

मैने चेक किया तो कमिश्नर का मश्ग था डिटेल्स का उसमे भी लास्ट क 3 कॉल्स रोहन क नंबर क थय...

मेरा दिमाग घूम गया लेकिन मैं जाना चाहता था यह क्यू किया उसने...

मैने ग1 को रोहन को मश्ग क्र क यहाँ बुलानी को कहा...

घर पी...

जैसी Hi मैं घर सी निकला पापा साब फिर सी रोने लगी वहां पी सब मौजूद थय सिवाए रत्न k...Aur अक्षरा की तबियत थोड़ी खराब थी तो वह अपने कमरे में थी..

पापा न्य साडी तयारी की अंतिमसंस्कार की.

पापा को सब सच पता था लेकिन वह चुप थय नहीं पता क्योँ.?

तनीषा बीएस अपने कमरे में बैठी रोटी रहती थी और अबीरा बी यहीं घर में थी और H.M की फॅमिली भी आ गई थी वही सब को जब अबीरा न्य बताया साब यकीन नहीं क्र सकी...

इशिका सोच में थी किसी अभी वह कुछ बोलती तभी गारी आ क रुकी जिसमे सी कोमल और फॅमिली ै...

सब को बता दिया था कोमल हलकी नाम आंखों सी घर में एंटर होइ...

माँ सब सी गली मिली और रोइ...

कोमल:- तनीषा दी कहाँ हैं.?

माँ:- अपने कमरे में रू रही ही...

कोमल हर जगह मुझु ढूंढ रही थी शायद वह समझी मैं कमरे में होंगे इसी लिए वह वहां आ गई वहां तनीषा अकेली रू रही थी..

तनीषा कोमल को देखती Hi उसके गल्ली लग गई...

कोमल:- शांत हो जय दीदी भगवन को जो मंज़ूर था..

तनीषा:- जिसका सुहाग उसके भाई को मार दी वह किसी शांत रही तो उस सी दूर रहना मेरी बेहेन वह एक दरिंदा ही....

कोमल न्य यह जैसी hi सूना वह झात सी अलग होइ और तनीषा को ढाका दिया..

कोमल:- क्या बाक रही हो...

तनीषा:- हाँ वह एक जिस्म का भूका इंसान और पैसों लालची ही...

तभी तनीषा क मुँह पी एक ज़ोर दार थापर पारा जिसकी आवाज़ पूरी घर में गूंजी...

साब तेह सुन क भाग क उप्पेर ए...

Komal(chilla क्र):- खबर दार मेरी सैम क बारी में कुछ बकवास की हो तो...

तभी साब वहां आ गए...

माँ:- क्या हुवा....

कोमल:- यह मेरी सौम्य क बारी में उलटी सीधी बकवास क्र रही ही...

तनीषा:- जो सच ही वही बता रही हूँ वह एक बदचलन इंसान ही...

तभी एक और आवाज़ गजरे वहां....

"मैं तेरी जान लय लोन गई अगर टुन्नाय मेरी सैम क बारी में कुछ कहा."..

सब उस तरफ देखनी लगी...

यह रत्न थी सब हिरण होगये यह वही समय था जब मैं उसको घर चोर आया था..

माँ भाग क उसके पास ी..

माँ:- तू कहाँ थी हम न्य तुझी कितना ढूंढा..

रत्न:- मेरे पति क होते मुझी क्या होगा bhala...Aur कोई बी उनके बारी में उल्टा सीधा मात कहो..

अबीर:- क्योँ न कही उसी न्य मारा मेरी पति को अपने हाथों सी 2 दिन पेहली...

तभी इशिका बोली...

इशिका:- नहीं ऐसा नहीं होसकता..

अबीरा:- क्यू नहीं हो सकता उसने खुद बुलाया था अभी को एक आदमी को भेज क

आयेशा:- एक्साक्ट्ली क्या हुवा था.?

****

इशिका:- उसने नहीं मारा वह तो यहाँ था बी नहीं वह मेरी साथ अमेरिका में हमारा क्विज कम्पेशन था और उस दिन हमारी मोबाइल बी लय लिए थय उन लोगो न्य...

सब तेह सुन क हिरण होगये...

H.M:- मतलब तुम जिसके सतब गई थी. वह सैम था.?

इशिका:- हाँ और कल hi हम इंडिया वापिस ए हैं... और माँ न्य और बुआ न्य भी उसको मेरी साथ आती हुवी देखा ही..

A'maa:- हाँ हम न्य उसको देखा था इसके साथ...

आयेशा:- अगर वह यहाँ थय hi नहीं तो तारा क केहनी क मुताबिक उसके साथ ज़बरदस्ती भी उसी दिन करनी की कोशिश की..

इशिका:- नहीं यह झूट ही मैं इस बात की गवाह हूँ और वह मेरी साथ था...

तभी किसी क ज़मीन पी गिरनी की आवाज़ ी..

यह अबीरा और तनीषा दोनों थी जिनको सब सुन्न क बोहत बारे झटका लगा था.... हाला क आयेशा और अंजलि कुछ कुछ नहीं को बी थोड़े समय क लिए भय हुवा था उनकी बी कुछ वैसी hi हालत थी वह कुछ बोली नहीं थीं जब सैम को तनीषा और अबीरा बोल रही थीं..

माँ और पापा पता नहीं क्यू सब कुछ पता होने क बावजूद चुप थय....

कोमल:- उनके बारी में किसी न्य ऐसा सोचा बी किसी.? मैं तुम सब को कभी माफ़ नहीं करूं गई अंजलि दीदी खास क्र क आपको वह तो आपका बेतु था न कहा गया वह प्यार वह भरोसा जो आपको उपाय था चाही वह माफ़ बी क्र दी क्योँ क बोहत बारे डिल ही उनका लेकिन मैं कभी नहीं क्र सकूं गई...

वह यह कह क कमरे सी बाहिर चली गई और पेची चरों को पश्ताप और दुःख में चोर गई...

(उस दिन एक नुम सी तनीषा को कॉल ी थी और उसने सौम्य क बारी में पोछा क बॉस कहाँ हैं और उनका फ़ोन बंद ही और उन्होंय जो काम दिया था उसका पूरा होने का करह रही थय क)

"जैसा उन्हों न्य कहा था सब वैसा किया ही कुछ देर में आपको पता लग जाये गए..."

इधर मैं वही छुपा हुवा था क तभी रोहन वहां आ गया और कुर्सी खली देख क वहां सी भागण्य लगा...

मैं उसके सामन्य आ गया...

रोहन मुझी देख क चौंक गया और पलट क भागण्य लगा...

मैने उसकी कामर में एक ज़ोर दार लात मारी वह वही गिर गया...

रोहन:- मुझी माफ़ क्र दी मैने यह जान बूझ क नहीं किया...

मैने उसका कालर पकड़ा..

मैं:- तुझी अपना दोएत मंटा था तूने ऐसा क्यू किया...?

रोहन:- मैने जान क नहीं...

मैने एक हाथ उसके हाथ पी मारा जी से उसका बज़्ज़ो टूट गया...

रोहन:- अह्ह्ह्हह्हह...

मैं:- मुझी सिर्फ सच बता क्यू किया यह साब और तेरा देव क साथ क्या रिश्ता ही...

रोहन:- अह्ह्ह्ह बताता hun...Woh मेरी पापा हैं...

मैं:- क्याआ.? तो तू यहाँ क्या क्र रहा था..?

रोहन:- मैं यहाँ तुम पी नज़र रखनी आया था जान क तुम्हारी कॉलेज में एडमिशन लिया और तुम्हारी साथ दोस्ती की तकय चम्पी नज़र रख क टुमस्य भाई की वीडियोस और अपने चाचा की बेटी को ढून्ढ सकूं...

मैं:- तुम लोगो को किसने बताया तुम्हारी चाचा की बेटी मेरी साथ ही.?

रोहन:- क्यू क तुम्ही hi आखरी बार चची क साथ देखा था हॉस्पिटल में अगर कोई और होता उस से मार पिट क्र उगलवा लेती लेकिन तुम्हारी साथ पेहली सी दुश्मनी थी और तुम्हारी साब सी बारी ताकत तुम्हारा दोस्त था जो हमेशा तुम्ही बचा लेता था हार वॉर सी..

फिर तुम दोनों को अलग करनी क लिए हमने चल चली लेकिन फिर बी तुम्ही नहीं कुछ क्र सकी फिर अभी को अकेले में बुल्ला क...

3 दिन पेहली...

(रोहन की ज़ुबानी..)

जब तुम यहाँ सी अमेरिका गए तो मैने तुम्हारी घर पी नज़र रखना शुरू क्र दी कुछ दिनों क बाद अभी घर आज्ञा और मैं उसका पिच करनी लगा एक दिन अभी और उसकी बीवी एक होटल में खाना खा रही थय क मैं वहां गया अभी सी मिला और बोला...

रोहन:- सर आप अभी हैं.?

अभी:- जी बोलिये...

रोहन:- जी वह आपको सैम साब न्य बुलाया ही...

अबीरा:- क्या भैया आ गए.?

रोहन:- बूत उन्होंने सर को अकेले बुलाया ही अर्जेंट..

अभी:- अबीरा तुम घर जाओ मैं सैम सी मिल क अत हूँ..

उसके बाद अभी को मैं अपने फार्म हाउस पी लय गया जहाँ पापा पेहली सी मौजूद थय..

उनको देख क अभी साब समझ गया और उसने मुझु ढाका दिया और तभी एक डांडा उसके सर पी पारा और वह वही गिर गया...

देव:- हाहाहा मुझु मैरी गए अरे इतने साल चल रहा लेकिन अब तुम मारो गए...

अभी:- बुज़दिलों की तरहं वॉर करता ही..

देव:- ः बोल जो मर्ज़ी bol...Tum दोनों को एक साथ नहीं मार सकता अकेले अकेले मारों गए हाहाहा..

तभी देव न्य एक चाकू निकला और अभी मुँह पी मारा और निशान बना दिया ऐसी hi कई वार उसके जिस्म पी Kiye...Jiska बाद वह ज़मीन पी गिर गया..

अभी:- धोके बाज़ क धोके को देख लिया अब भरोसेमन्द क भरोसे को देख वह ए गए तुम साब को मारी गए...

देव:- ः तो फ़िक्र मात क्र जल्दी तेरी पिच्य ए गए वह..

अभी:- ः वह एक ऐसी तलवार ही जिसके साथ लगती hi हार चीज़ काट क भिकार जाती ही और तूने उस तलवार की माया चुरा ली ही देव तू तो गया बेटे....

खाचक खाचक...

और अभी की सांसें बंद हो गई...

इधर जब मैं यह सुन्न रहा था मेरी आंखें नाम होगी...

मैने रोहन की गार्डन पाकर क उखाड़ क फ़ेंक दी...

और कमिशनर को फ़ोन किया...

और खुद निकल गया एक और जगह तारा क पास..

इधर तारा एक कॉफ़ी शॉप में बैठी थी तभी उसके सामन्य कोई आ क बेथ गया...

यह और कोई नहीं मैं था....

उसकी नज़ार जैसी hi मुझपी पारी वह झात सी उठी और मेरी पैरों में गिर गई...

मैं यह समझ नहीं पाया..

तारा:- मुझी माफ़ क्र दो मुझसी बोहत बरी गलती हो गई...

मैने उसको उठाया और खरा किया..

मैं:- यह सब क्यू किया तुमनी....

तारा:- अपने प्यार क लिए...

मैं:- मतलब.?

तारा:- मैं रेहान सी प्यार करती हूँ...

मैं:- वह कमिशनर का बीटा.?

तारा:- हाँ...

मैं:- तो उस से मेरा क्या कनेक्शन...

तारा:- मैं पेहली तुम्ही चाहंय लगी थी तुम्हारी पॉपुलरिटी देख क मैं तुम्ही कपङा बनाना चाहती थी लेकिन तभी एक दिन रेहान मुझी मिला उसका बात करना का अंदाज़ उसकी केयर करना मुझी पसंद आ गया आहिस्ता आहिस्ता मैं उस सी प्यार करनी लगी..

कुछ पेहली मुझी फ़ोन आया क अगर मैने ऐसा न किया तो वह लोग रेहान को मार दी गए इसी लिए मैं कुछ दिन अमेरिका चली गई फिर वहां सी खबर मिली रेहान का एक्सीडेंट होगया..

2 दिन पेहली फिर फ़ोन आया और उसने कहा क अगली बार ैसिडेंट नहीं मौर होगी..

मैं दार गई और फिर उसदिन उसके फ़ोन क बाद मैं तुम्हारी घर गई और जान क यह दारमा किया....

तारा फूट फूट क रोने लगी...

मैं:- ाचा बीएस रोना बंद करो और जो झूट बोलै उसका सच बताओ सब को..

तारा:- वफ रेहान को मार दी...

मैं:- उसको कुछ नहीं होगा मैं वडा करती हूँ...

तारा मेरी गली लग गई लेकिन मैने उसको हाथ नहीं लगाया वह खुद अलग होगी और फिर वह वहां सी चली गई....

तो बे कंटिन्यू....
 
अपडेट NO.54


व्हाट एक्चुअली हैपेंड तहत डे...



अभी और अबीरा उस दिन सी एक दिन पेहली घर वापिस ए साब खुश थय क आज यह आ गए कल सैम आ जाये गए...

उसी रात जब अभी और अबीरा घर ए थय..

अभी तनीषा क कमरे में जाता ही..

तनीषा:- अरे भैया आप आइये..

अभी जा क बीएड पी बेथ जाता ही...

अभी:- तनीषा तुम्ही तो पता ही न क हमारी साथ क्या हुवा किसी हमारी hi चाचा न्य हमारी ज़िन्दगी बर्बाद क्र दी..

तनीषा:- हाँ भाई मैं किसी यह साब भूल सकती हूँ...

अभी:- तो इसी लिए मैने एक फैसला किया ही..

तनीषा:- क्या फैसला..

अभी:- उस से पेहली एक बात बता दूँ...

तनीषा:- वह क्या.?

अभी:- तुमहकरि जान को खतरा ही यह बात पेहली सी सैम को पता thi..Aur तुम्हारी बारी में उसने मुझी बी बताया था लेकिन उसको यह नहीं पता था क तुम मेरी बेहेन हो...

तनीषा:- क्या.?

अभी:- हाँ और उसने हर तर्हां सी तुम्ही सेफ रखा..

तनीषा:- वह तो ही...

अभी:- देखो अब हमारी प्रॉपर्टी का जो केस ही वह हम दोनों क नाम ही अगर हम दोनों में सी एक को बी कुछ होगया तो साड़ी प्रॉपर्टी K♡S इन्तेर्नतिओनल्स को चली जाये गई...

तनीषा:- आप किसी बातें क्र रही हैं उनके होती हमे कुछ नहीं hoga..Aur आप उनसे बात क्र लीजिये...

अभी:- यह मुझी उस्सने hi कहा ही..

तनीषा:- फिर ठीक ही...

अभी फिर कुछ देर इधर उधर की बातें क्र क चला गया...

और अगली दिन तनीषा उठी और रेडी होकय ऑफिस क लिए निकलने लगी तो उसका फ़ोन बजा उसने कॉल रेसवे की..

तनीषा:- Hello..

Tara(Rote हुवे):- तनीषा तुम कहा हो.?

तनीषा:- तारा तुम ठीक तो हो और रू क्यू रही हो...

तारा:- तुम जल्दी**** होटल आ जाओ...

तनीषा:- O.k मैं अभी अति हूँ...

तनीषा गारी निकल क सीधा उस जगह क लिए निकल गई और अंजलि को ॉगिस जाने को कह दिया...

15 मं बाद तनीषा उस जगह पोहंच गई यह कोई फार्म हाउस टाइप था..

वह अंदर गई और अंदर कोई नहीं था वह आवाज़ देने लगी...

तनीषा:- तारा कहाँ हो.?

तभी उसको कमरे सी रोने की आवाज़ ी...

वह उसी तरफ चली गई..

और उसने अंदर देखा तो तारा बीएड पी बैठी रू रही थी वह झात सी उसके पास गई..

तनीषा:- तारा तुम क्यू रू रही हो और यह किसी हालत बनाई ही तुमनी...

तारा तनीषा क गली लाग गई..

तारा:- तनीषा उसने मेरी साथ ज़बरदस्ती करनी की कोशिश की..

तनीषा:- किसने किया यह साब.?

तारा:- नहीं तुम नहीं सूं पाओ गई..

तनीषा:- तुम बोलो कोण था उसको मैं ऐसा सबक सिखों गई सब याद रखी गए...

तारा:- सैम न्य यह साब करनी की कोशिश की...

तनीषा एक डैम अलग होइ और एक थापर तारा क गाल पी मारा..

तनीषा:- क्या बकवास क्र रही हो वह तो यहाँ ही बी नहीं..

तारा:- वह आ गया और आती hi मुझी यहाँ बुलाया...

तनीषा:- तुम अपनी बकवास बंद करो..

तभी तारा न्य अपना मोबाइल निकला और कुछ तस्सवीरें तनीषा की तरफ क्र दी...

जिन में साफ़ साफ़ सैम था जोके तनीषा क साथ hi बैठा tha..(Yeh फोटोशॉप थी...)

वह देख क तनीषा का दिमाग काम करना बाद क्र गया फिर तारा न्य एक झूटी कहानी सुन्ना दी...

उसको साथ लय क तनीषा सीधा घर आ गई और मुझी कॉल करनी लगी...

(इस वक़त मैं कम्पेशन में था और मोबाइल उनकी पास था..)

तनीषा को फिर एक नुम सी कॉल ी..

तनीषा:- Hello...

****:- सैम सर का नंबर नहीं लग रहा तो ोफ्फुस कॉल की थी उन्होंने आपका नंबर दिया..

तनीषा:- जी कहिये क्या काम ही.?

****:- मैडम आज सर न्य जो तयारी करवाई ही उसको कन्फर्म होने की रिपोर्ट देनी थी..

तनीषा:- केसा काम.?

****:- सॉरी मैडम मुझी ज़्यादा नहीं पता बीएस यह पता ही आज कोई बोहत ख़ुशी का दिन ही उनके लिए...

तनीषा:- ाचा बोल दूँ गई bye...

तभी वह घर पोहंच गए...

तनीषा की दिमाग में बोहत कुछ चल रहा था..

वह अंदर गई अंदर अबीरा और माँ और आयेशा बैठी थी..

अबीरा:- अरे भाभी आप आ बी गई और तारा बी साथ ी ही...

तनीषा:- अभी कहाँ ही.?

अबीरा:- भाई न्य बुलाया उनको...

तनीषा का दिमाग उस वक़त हिल गया जब उसे सब न्य यह कन्फर्म करवाया क सैम आ चूका ही वापिस और जो कुछ बी हो रहा ही वह hi करवा रहा ही...

माँ:- पता नहीं घर क्यू नहीं आया वह और तारा तुम ऐसी क्यू खरी हो...

तभी आयेशा को फ़ोन बजा..

आयेशा:- Hello... व्हाट....

माँ:- क्या हुवा साब ठीक.?

आयेशा तो जैसी जैम होगी..

तनीषा उसके पास जा क उसको हिलाया ताब वह होश में ी..

आयेशा जल्दी सी घर क बाहिर की तरफ भागी साब परेशान होगये और तनीषा बी गारी लय उसके पिच्य चली गई जिसके सतग अबीरा भी थी...

और उन की गई एक गुड़ावन में पोहंच गई..

और वह दोनों अंदर जाने लागि पुलिस न्य उनको रोका लेकिन वह आयेशा क साथ का कह अंदर चली गई.

अंदर चारो तरफ क्राइम का सन था आयेशा लाज़ः क पास खरी रू रही थी..

वह दोनों घबरा क यज्ञ भरी तो सामन्य... का नज़ारा उनके लिए भयंकर था क्यू क अभी की लाश पारी थी..

दोनों सूं होकय ज़मीन पी गिर गई आयेशा न्य उनको संभाला..

आयेशा ु की जम्भल रही थी क तभी एक कांस्टेबल आया..

क्यों:- मैडम यह शकल गैंग का काम hi लगता ही क्यू क ऐसे वही मरता ही....

तनीषा की तो जैसी कान खरी होगये वह एक डैम खरी होइ...

तभी उसका फ़ोन बजा...

ऑफिस का नुम था...

****:- मैडम ***** के टर्नओवर को लिंक करनी क लिए सर न्य कहा था आपके सिग्न की ज़रूरत थी...

तनीषा क हाथ सी फ़ोन गिर गया उसने बात भी नहीं पूरी सुनी..

अब उसकी नज़र क सामन्य सारी सबूत सैम क खिलाफ थय यह सन जान भुज क क्रीट करवाया गया तकय देव सैम का भरोसा टूर सकी...

उसी वक़त सैम की कॉल ै तनीषा क नंबर पी उसने अपना मोबाइल दिवार में मार दिया ज़ोर सी और यहीं उस देव की जित होगी..

एंड आफ्टर थिस व्हाट हैपेंड यू आल क्नोव..

सत्य टुन्नेद..
 
अपडेट NO.55


नेक्स्ट डे...

सब लोग अपने अपने कमरों में थय और कोमल माँ क साथ थी और सैम को फ़ोन पी फ़ोन क्र रही थी लेकिन नंबर बंद जा रहा था...

तभी घर की बेल्ल बजी...

माँ न्य गेट खोला...

सामन्य एक आदमी ब्लैक पेण्ट कोर्ट में खरा था और उसके हाथ में कुछ फाइल्स थी...

माँ:- जी.?

किन:- Hello मम I'm किन सैम सर न्य मुझी भेजा ही क्या मैं तनीषा तिवारी सी मिल सकता हूँ...

माँ:- जी आइये...

किन अंदर चला गया और माँ तनीषा न्य तनीषा को आवाज़ दी जिसको सुन्न क सब बाहिर आ गए..

कोमल:- क्या हुवा माँ कोण ही.?

माँ:- बीटा तनीषा सी मिलने ए हैं यह और सैम न्य भेजा ही..

तभी तनीषा नीची I...Uskay साथ अबीरा और इशिका दोनों थीं...

तनीषा:- जी माँ कोण आया ही...?

माँ:- यह..

किन की तरफ इशारा कृत्य हुवे...

किन:- मम यू अरे तनीषा तिवारी.?

तनीषा:- तनीषा ठाकुर!..

किन:- आईएम सॉरी माय मिस्टेक..

तनीषा:- जी कहिये क्या काम ही..

किन न्य एक पेपर निकला और तनीषा की तरफ बढ़ाया..

किन:- मम प्लीज रीड एंड सिग्न ों आईटी...

तनीषा न्य पेपर लिया..

तनीषा:- यह किस चीज़ का पेपर है.?

किन:- पावर ऑफ़ एटर्नी..

तनीषा:- व्हाट.?

किन:- यह सर न्य अपनी सारा बैंक बैलेंस एंड पावर ऑफ़ एंटेरनय ऑफ़ K♡S इन्तेर्नतिओनल्स आपके नाम क्र दी है आप सिग्न क्र क प्रॉसेस कम्पेलेट क्र सकती हैं...

सभी यह सुन्न क हिरण और परेशां होगये इस बार माँ क होश ुर गए थय...

तनीषा:- नही यह मैं नहीं क्र सकती मुझसी गलती होइ ही..

किन:- आईएम सॉरी बूत मम सर सेक्स िफ़ यू Wan't सिग्न थिस डाइवोर्स पेपर्स एंड हे सेक्स

"मुझ जैसी गलीज़ इंसान क साथ आपका कोई हक़ नहीं"...

तनीषा की तो जैसी दुनिया hi ुजार गई हो यह सुन्न क वह खरी खरी गिर गई...

सब उसको संभालनी क लिए यज्ञ ए सिवाए कोमल क...

तनीषा:- नहीं नहीं मैं अलग नहीं होसकती उनसे मेरी ज़िन्दगी मेरा हर दिन उन्ही क साथ शुरू और उन्ही क साथ ख़तम होता ही मेरा जीने का कोई हक नहीं...

माँ:- होश में औ तनीषा...

तनीषा जैसी पागल होगी वह उठी और सब सी हाथ चुरवा क बाहिर की तरफ भाग गई..

सब उसके पिच्य भाग रही थय लेकिन वह आंखों में आंसूं लिए बीएस भागती जा रही थी...

वह भागती हुवे एक सुनसान छूती पी आ गई थी जिसके यज्ञ खाई थी..

सब वही पोहंच गए थय सब की सांसें फूल गई थीं लेकिन तनीषा बीएस किनारी खरी रोये जा रही थी...

अबीरा:- नहीं दीदी ऐसा मात करना..

आयेशा:- दीदी प्लीज वापिस आ जाइये..

अंजलि:- तनीषा प्लीज ऐसा मात करो..

माँ:- नहीं बीटा प्लीज...

लेकिन उसने तो जैसी कुछ सुना hi न हो....

और तभी तनीषा न्य छलांग लगा दी.....

"Nahiiiiiiiiiiii"

इधर मैं उसी रात जब वापिस आ रहा था रोहन का मार क तभी मेरी नज़र एक गारी पी पारी जिसके अंदर वह था जिसकी मुझी तलाश थी मतलब देवनद..

मैं उसकी गारी की पिच्य पिच्य भागण्य लगा लेकिन चुप क उसकी जारी एक फॉर्महॉउस पी रुकी...

वह जल्दी सी भाग क अंदर चला गया उसके पिच्य बोहत सी गुंडे बी थय..

मैं खिरकी सी अंदर झाँकनी लगा...

अंदर ज़मीन पी एक लाश पारी थी जिसके करीब बेथ क देव रू रहा था और बोल रहा था..

देव:- नहीं मेरा बीटा नहीं मार सकता रोहन उठ उठ रोहन...

जी हाँ यह रोहन की डेड बॉडी थी जोके पुलिस न्य रिकवर क्र क यहाँ पोहंचा दी थी..

तभी देव खरा हुवा और चिल्लाया...

देव:- जाओ उसे पाकर क लाओ ज़िंदा अपने हाथों सी मारों गए उसे तो...

"इतनी तेरी औकात नहीं क तो शकल को टच क्र सकी."

तभी वह घुमा सामन्य मुझी खरा देख क उसका गुस्सा और भार गया...

देव( चिल्लाते हुवे):- ताऊ तेरी इतनी हिम्मत टुन्नाय मेर बेटे को मारा और ाचा हुवा तो खुद मेरी सामन्य आ गया आबय देख क्या रही हो मारो साली को...

तभी 2 आदमी हाथों में डंडे लिए मुझपी हमला करने ए एक ने डंडा घुमाया मैने हवा में hi रोक लिया तभी दोसरी न्य डंडा मारा मैं थोड़ा पिच्य होगया डंडा सीधा जा क उस आदमी क सर में लगा जिसे मैने पकड़ा था. वह वही गिर गया दोसरी की कमर पी एक लात मारी वह सीधा जा क देव क कदमो में गिरा उसने बी उसको लात मारी वह सीधा क टेबल सी टकराया जिसपे बॉटल्स पारी थी जो क हवा में उछाल गेन..

मैं आगे बढ़ा और 2 बॉटल्स उठा क 2 आदमियों क सर में मारी और एक फ्लाइंग किक एक आदमी क सीने पी..

फिर 4 आदमी ए मैं भगा और हवा में और क 2 आदमियों क सिनाय पी लात मार क एक आदमी क मुँह पी मक्का मारा और जो एक बचा था उसको उठा क एक साइड फेंका जहाँ 5 गुंडे खरी थय...

ऐसी Hi सब की चटनी बनती हुवे मैं यज्ञ बढ़ता रहा..

और आखिर मैं देव तक पोहंच गया और उसका गिरेबान पाकर क उप्पेर उठा लिया...

मैं:- मेरी भाई को मारा तूने तेरी ज़िन्दगी तो तभी ख़तम होगी थी जब अभी की सांसें रोकी थी यर्ह तो तेरी भीक की ज़िन्दगी थी जो जी रहा था...

देव:- तुझी नहीं चोरो गए..

मैं:- अबे तेरु यह रात सी टांग आज्ञा हूँ मैं लय पाक मुझी..

मैने उसको चोर दिया वह खाण्संय लगा..

और खरा होकय एक डांडा उठा क मुझी मारा दानंदा लग क टूट गया मुझसी..

मैं हल्की हल्की कदम क साथ उसकी तरफ बढ़ा..

वह बी पिच्य हैट ता गया..

तभी उसने एक चाकू निकला यह वही चाकू था जिस से इसने अभी को मारा था..

उसने चाकू मुझपी चलाया मैने उसका हाथ हवा में Hi रोक लिया..

और उसके हाथ को ज़ोर सी दबा दिया उसने चाकू चोर दिया मैने दोस्सरी हाथ सी कैच किया और उसके सीने पी वार किया..

वह चिल्लाता हुवा ज़मीन पी गिर गया...

मैने चाकू लिया और उसका हाथ पकड़ा और उसके हाथ पी 3 वार लगता किये...

वह दर्द सी चिल्ला रहा था...

मैं:- चिल्ला और चिल्ला... तुझी पता ही मैं तेरी आँखों में यह hi मूट का दर देखना चाहता..

मैं एक वार उसकी गर्दन पी करने वाला था क बिच में hi रोक गया उसने अपनी आंखें बंद क्र ली लेकिन जब नहीं लगा तो खोली..

मैं:- दार गया..? मुझी बारे मज़ा अत ही जब कोई गुनहगार डरता ही पता चलता ही उसे अपनी ज़िन्दगी की परवा hy...Are भाई ज़िन्दगी इतनी प्यारी ही तो गलत काम कृत्य क्यू हो.? लेकिन तेरी साथ मटर अलग ही..

मैने एक चाकू क वार सी उअसकी एक ऊँगली काट दी...

देव:- Ahhhhhhhhhh मार दी मुझी लेकिन यह दर्द नहीं सहा जा रहा...

मैं:- अरे भाई भलाई का तो ज़माना hi नहीं मैं तेरी कर्मो की सजा यही दी रहा हूँ और तो ही क मुझी hi बूल रहा ही That's नॉट फेयर हाँ...

मैं:- वह क्या ही न क देव बाबू शराफत और हमारी कभी बानी hi नहीं लेकिन दुनिया को दिखानी क लिए शरीफ बना परता hy...Hahaha

देव:- मार डग मुझी..

मैं:- जैसी तेरी ीचा...

मैने चंकू उसकी गर्दन क आर पार क्र दिया..

"मैं जादू मैं मायाजाल दार मुझसी मैं हूँ शकल".

मैं वहां सी बाहिर निकला और और आंख बंद क एक हाथ उस तरफ घुमाया पूरा फार्म हाउस जलनः लगा...

बिलकुल मेरी डिल की तरहं... उस वकत मेरा डिल चिल्ला क बोलै..

"महज़ बीएस एक तमाशा था.

वह प्यार जो बेतहाशा था."

स्टे टुन्नेद..
 
अपडेट NO.56


तनीषा खाई क किनारे खरी थी उसके पिच्य माँ कोमल अबीरा आयेशा अंजलि और इशिका थी सब उसका वापिस अन्य का कह रही थी लेकिन उसको तो जैसी बीएस खाई क सिवा कुछ नहीं दिखाई दी रहा था और उसी को देखती हुवे उसने छलांग लगा दी.....

अभी वह हवा में Hi थी क तभी उसका किसी न्य हाथ पकड़ा और वापिस खेंच लिया जैसी किसी पतंग को हवा सी पकृत्य हैं बिलकुल वैसी..

सबकी जो सांसें रुक गई थी वह फिर चलनी लगी लेकिन सामन्य देख क किसी का डिल खिल उठा और किसी को गलनि...

तनीषा न्य जब अपनी आंसूं सी भीगी आंखें खोली और अपना हाथ पकरणय वाली को देखा उसकी तो जैसी जान में जान आ गई और कुछ देर पेहली उसके चेहरी पी मौत का खूफ था अब प्यार और पश्ताप में बदल चूका था..

लेकिन शायद आप न्य सुन्ना होगा..

"अब पछताव का हॉट जब चिड़िया चुग गई खीत".

उन साब की नज़रूँ क सामन्य मैं था...

मैने तनीषा का हाथ पकड़ा था और जो वह अभी करनी वाली थी उस सी मेरा डिल जैसी बाहिर निकलनी को आ गया था मेरी आंखें भीगीं थी शायद मेरी इस कठिन फैसली सी. यह सच था क उसने जो कुछ भी उस सी मेरी डिल को तकलीफ पोहंची थी लेकिन आज जो वह करनी जा रही थी उस से मेरी रूह को तकलीफ पोहंची थी..

गलतियां तो सब्ज़ी होती हैं इंसान है hi गलती का पुतला लेकिन इंसान को ज़िन्दगी में उसकी की गई एक भी गलती की सजा न मिली तो वह इंसान उस गलती को भरवा दी देता है मेरी हालत कुछ ऐसी hi थी..

मेरा डिल छह रहा था क उसको अभी गली लगा लून और जी भार क प्यार करूं उसकी आंखों क आंसूं अपने होठों सी पि लून और उसके कम्पटी हुवे हाथों को थाम क कहो क मैं तुम्हारी पास हूँ..

लेकिन उसनी जो किया वह गलत ज़रूर था लेकिन गुन्नाह नहीं था जिसकी माफ़ी न हॉसकय...

तनीषा मुझी देखती होइ उठी और जिस हाथ को मैनी पकड़ा हुवा था उसके उप्पेर अपना हाथ रख दिया..

तभी मैने अपना हाथ उसके बिच सी निकल बाहिर किया...

तनीषा मेरा हाथ दोबारा पकरणय क लिया थोड़ी यज्ञ होइ लेकिन मैं पिच्य हाट गया तनीषा की हालत अब ऐसी होगी थी जैसी कोई बची सी उसकी मान पसंद चीज़ चीन लय...

तनीषा और ज़्यादा रोने लगी..

तनीषा:- मुझी माफ़ क्र दीजिये मुझसी बोहत बारी गलती होगी....

उस सी ज़्यादा बोलने की शायद उसकी हिम्मत नहीं थी वह लरखरा क पैरों में गिर गई...

इस वक़त तनीषा की हालत बोहत खराब थी उसकी ाँकूँ क नीची हल्की पारी होवय थय उसकी कमज़ोरी साफ़ नज़र आ रही थी क वह न सोइ ही और न hi कुछ खाया ही उसने मेरा डिल कम्प उठा उस वक़त और मेरी आंखें पाकलूं तक को भीगती हुवे बंद होगी..

तभी मेरी पेअर पर किसी का हाथ मह्सूस हुवा और मैने आंखें खोली तो यह अबीरा थी..

मैने अपना पाऊँ उस सी पिच्य क्र लिया अचानक आस्मां का रंग बदलनी लगा अबीरा न्य अपनी नज़र उठाई और मेरी तरफ देखा..

अबीरा:- मुझी माफ़ क्र दो भईई!...

तभी मेरी कंधी पी एक हाथ आया मैने देखा तो यह मेरी जान मेरी रूह मेरा सब कुछ थी मतलब कोमल थी..

मैं उसकी तरफ देखा hi था क आस्मां में बिल्जी कार्की और बारिश शुरू होगी और समय एक दाम रुक गया और मेरी राइट साइड एक रोशिनी चमकी जो उसी दिन चमकी थी.

जिसमे सी वही आदमी निकला मैं अपने आप उसके करीब चला गया और परनाम क्र क पाऊँ छू लिए..

बाबा:- कुश रहो बचा..

मेरी ाँकूँ में अभी बी पानी था..

मैं:- खुश किसी रहूँ बाबा आपको जो साब पता होगा मुझपी मेरी भाई की हत्या का इलज़ाम लगा...

बाबा:- किसी.? हत्या...

तभी बाबा क पिच्य सी एक रौशनी निकली और धीरे धीरे वह आकर लेनी लगी और जब पूरी होइ मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था मेरा भाई मेरी आंखों क सामन्य था...

मैं उसकी तरफ भगा और गली लगा लिया..

मैं:- भाई कहाँ चला गया था तो..

अभी:- आबय मैं कहाँ जाओं गए और साली मैं तेरी माशूका थोड़ी हूँ जो मिस क्र रहा था..

मैं अलग हुवा और बोलै..

मैं:- भाई ही तो मेरा..

अभी:- मज़ाक क्र रहा था अजा...

उसनी मुझी फिर गली लगा liya...kuch देर बाद हम अलग हुवे..

मैं:- अब मैं तुझी कहीं नहीं जाने दूँ गए..

अभी:- मैं कहीं गया hi नहीं था हमेशा यहीं था...

मेरी डिल पी हाथ रख क..

बाबा:- बीटा अब मेरी बात गुर सी Suno..Jeevan में इंसान क सामन्य हर तर्हां की पीढ़ा अति ही उस सी किसी ख़तम करना ही यह इंसान पी निर्भर ही और तुम्हारी लिए कोई बी मुश्किल कभी बी मुश्किल नहीं रही जब तुम्हारी साथ प्रेम था बीएस अपना प्रेम बचा क रखना यह क़ुदरत बोहत सी खेल राच्य गई बीएस अपने पीयर पी भरोसा रखना अगर रक़ि बराबर बी नफरत डिल में ी उसका मतलब होगा तुम्हारा प्यार सच्चा नहीं था..

मैं:- लेकिन मेरी प्यार को धुतकारा गया ही बाबा..

बाबा:- यह बात अपने डिल सी पोचो अब किन्तु मैं तुम्ही एक बात बता दूँ यह जो तुम्हारी साथ हुवा उसमे किसी की गलती नहीं ही और न hi किसी का प्यार झोटा ही...

मैं:- तो फिर क्यू मेरी प्यार पर ऊँगली उठी..

बाबा:- क्या तुम्ही यह महसूस हुवा क तुम ुणस्य नफरत करनी लगी हो.?

मैं:- हाँ..

बाबा:- उसका वॉर इतना ताकतवार ही तुम्हारी उप्पेर इतना असर किया तुमनी सिर्फ महसूस किया लेकिन वह साधारण इंसान हैं इस लिए उपाय इतना असर हुवा उसका...

मन:- क्या.? किसका वार.?

बाबा:- डरहम!..

मैं:- क्या वह आज़ाद होगया.?

बाबा:- नहीं.. लेकिन बोहत जल्द होजाये गए यह वह उसकी ताक़त ही जी की वजह सी B'Raja न्य उसको अपने ग्रहों सी दूर रखा अगर वह उनकी अस्सपस्स बी होता तो पूरा गृह तभा होजाता...

मैं:- मतलब उसको मेरी बारी में पता ही.?

बाबा:- नहीं लेकिन उसकी शक्ति को पता ही और तुम्ही उसकी शक्ति को खतम करना होगा...

मैं:- मैं किसी करों गए.?

बाबा:- यह उसकी शक्ति का एक परसेंट भी नहीं ही और अगर उसके आज़ाद होने क बाद यह शक्ति उसके पास वापिस चली गई तो आनर्त होजाये गए..

मैं:- मैं किसी मैरून गए शक्ति को और किस रूप में मिल्ली गई यह मुझी...

बाबा:- मनुष्य रूप में और अपने लॉकेट की मदद सी उसका मार सको गए..

मैं:- लेकिन लॉकेट पूरा नहीं ही..

बाबा:- शक्ति बी पूरी नहीं ही और तुम्ही उसकी शक्ति ग्रहण करनी क लिए दूरी बी ज़रूरी चाहिए hogi..Aur एक बात लॉकेट किस शक्ति 2 गुनाह होजाये गई अगर इसको देंय वाली साथ hogi...Ab मैं चलता हूँ और अपना ख्याल रखना...

बाबा चले गए..

फिर अभी बोलै जो काफी देर सी चुप खरा था...

अभी:- भाई मेरी बेहेन का ख्याल रखनी का वडा किया था tunnay..Uski हालत देख..

मैं:- मुझी माफ़ क्र दी मेरी भाई तेरी सी वडा किया पूरा न क्र सका..

अभी:- नहीं अब मेरी बेहेन की नाखून में आंसूं नहीं अन्य चाहिए.. समझे जीजा जी..

मैं:- हाँ सालयीय समझ गया..

अभी:- आज सी तो हम दोनों क लिए जिए गए अगर तुझसी कुछ मांगू दी गए.?

मैं:- तो हुकम क्र..

अभी:- अबीरा को अपना लरना मेरी बाद वह भिकार गई ही..

मैं:- आबय पागल ही क्या वह मेरी बेहेन क जैसी hy...Aur वैसी बी वह उन में सी नाह..

अभी:- हाँ पता ही यह उन 8 में सी नहीं ही लेकिन तो उसको मेरी लिए नहीं अपना सकता वह कभी किसी की तरफ नहीं देखी गई तेरी सिवा..

Main:-kyaa.?

अभी:- हाँ उसने मुझी कहा था वह तुझी पसन् करती थी लेकिन उसने देखा क तो शादी शुदा ही तो अपने पापा की मर्ज़ी सी रिश्ता क्र लिया और फिर तो उसको मिला तो तूने उसको बेहेन बना लिया तो उसने भी भाई मान लिया क्यू क उसका कोई भाई नहीं था...

मैं:- लेकिन हम तो बीएस 2 बार मिली थय एक बार लड़ाई होइ एक बार बेहेन बन गई...

अभी:- उसदिन तुझी देखनी क बाद वह तेरा पिच्य केनी लगी गाओं तक गई और उस दिन जब टुन्नाय अन्नोउंस किया था तनीषा को अपनी पत्नी तब भी वह वहां थी...

मैं:- लेकिन अभी..

अभी:- मेरी लिए नहीं क्रय गए.?

मैं:- तेरी लिए जान हाज़िर भाई...

उसको गली लगाया Hi था क समय वापिस चालू होगया....

"मतलब अदावतोओं न्य हामी हौसला दिया.

मतलब मुहबतून सी हमारा बीएस डिल टूटा.."

स्टे टुन्नेद..

NOTE:-Sorry फॉर शार्ट उपदटेस तबियत खराब की वजह सी इतना hi लिख प् रहा हूँ जैसी hi सही होता हूँ नार्मल उपदटेस ए गए..
 
अपडेट NO.57


उस वक़त मेरी नज़र सिर्फ तनीषा पी थी जो क बस अपने मुँह पी हाथ रख क रू रही थी..

मैं हल्के हल्के कदमो क साथ उसके पास गया अपना गुठनी मूर क उसके पास बैठा और उसके हाथों को पकड़ा जैसी Hi उसको चुवा मेरा डिल झुंझला उठा वह इस वक़त बोहत गरम थी मतलब उसको बुखार था..

लेकिन जैसी hi तनीषा को उसके हाथ पी मेरा हाथ मह्सूस हुवा उसने अपनी झील सी नीली आंखें जिन में पानी का जबरन बह रहा था खोली और नज़र सामन्य पारी तो उसके Dill-e- वीरान में जैसी हरयाली च गई उसका डिल ख़ुशी सी भर गया और उसका जिस्म उसका साथ नहीं दी पा रहा था वह छह रही थी क वह बीएस उठी और मेरी सीने सी लाग जाये और खूब रोये और अपने किये की माफ़ी मांगे लेकिन उसकी हिम्मत जवाब दी गई थी शायद इस वक़त यह उसके कर्म जो उसने किये थय उनका फॉल था..

मैं उसके हाथ को अपने हाथ में लय क उसकी आंखों में देख क बोलै..

"कोण कहता है नफरतों मैं दर्द है.

कुछ मोहब्तें बी बरी ैज़ेट नक् होती हैं".

तनीषा की तो जैसी जान निकल गई उसके मुँह सी बीएस यह निकला

"न जाने कोनसी मंज़िल पे आ पोहचा है प्यार अपना

न है

हम को ीेटबार अपना न आप को ीेटबार हमारा"

मैं और कुछ उस वक़त बोल नहीं सकता था मेरी आंखों सी बी आंसू निकल रही थय और तनीषा की हालत बी नहीं देखि जा रही थी मैं उठा और तनीषा का बाज़ू पकड़ा और एक हाथ उसकी गर्दन क पिच्य डाला और एक हाथ सी उसकी टांगें पकरि और उठा लिया..

सब वहीँ खरी देख रही थय सब बोहत कुछ बोलना चाहती थय लेकिन कोई बी अभी कुछ नहीं बोल रहा था कोमल न्य अबीरा को उठाया और चोर दिया इशिका यज्ञ आ क अबीरा क साथ खरी होगी उसको पाकर क वह बी बोहत रू रही थी लेकिन इस वक़त मेरा ध्यान सिर्फ तनीषा पी था जिस की हालत खराब थी..

मैं उसको उठा क पिच्य मूरा तो सब खरी थय..

मैं:- आप सब घर जाइये...

माँ:- तुम बी चलो..

मैं:- मैं आ जाओं गए...

फिर कोई कुछ नहीं बोलै मैने कोमल की तरफ एक नज़र देखा वह बी रू रही थी..

मैं:- कोमल आप मेरी साथ चलिए..

कोमल को जैसी बीएस इसी का इंतज़ार था..

मैं वहां सी लग भाग भागता हुवा रोड तक पोहंचा और टैक्सी को रोका और उसमें बेथ गए हम तीनो..

तनीषा बीएस मेरी तरफ देख रही थी और आंखों सी आंसूं बहा रही थी..

मैं:- अगर अब एक बूँद बी आंसूं निकला न तो ाचा नहीं होगा...

तभी उसके आंसूं रोक गए जैसी वह hi नहीं रही थी...

इतने में हम हॉस्पिटल पोहंच गए मैं जल्दी सी तनीषा को वार्ड में लय गया और डॉक्टर उसको चेक उप क लिए अंदर लय गए...

और उसके अंदर जाती hi मेरी हिम्मत जवाब दी गई और मैं सीधा जा क दिवार सी टकराया और बेथ क रोने लगा...

कोमल भाग क मेरी पास ी..

मैं उसके गली लग गया और फिर रोने लगा..

कोमल:- प्लीज चुप हो जाइये Please...Apko पता ही न आपके रोने सी मुझी तकलीफ होती ही..

मैं:- अपने देखा उसकी हालत क्या होगी ही हमेशा हसने वाला चेहरा आज मुरझा gya...meri वजह सी...

कोमल न्य मुझी थोड़ा ऊपर उठाया और बोली..

कोमल:- आपकी वजह सी.? सच में आप इंसान नहीं हैं जिस शख्स न्य आप पी इतना घिनोना इलज़ाम लगाया उसके लिए इतनी मोहबात.?

मैं:- नहीं जनता क्यू मुझी उसकी इस हालत क सामन्य सब फीका लगता Hy...Usko जो दिखाया गया उसने वही देखा..

कोमल:- मतलब.?

फिर मैने कोमल को साडी बात बता दी...

कोमल:- मतलब जो भी हुवा उसकी मैं वजह वह शक्ति ही जो आपको सब सी दूर करना चाहती ही..

मैं:- हम्म्म..

कोमल:- उसको अब जल्दी पकड़ना होगा वर्ण आनर्त होजाये गए..

मैं:- बोहत जल्द वह बी मेरी शिकंजी में होगी...

तभी डॉक्टर बाहिर आया और बोलै..

डॉक्:- नाउ शी इस फाइन मैने इंजेक्शन लगा दिया ही उन्होंय बोहत दिनों सी कुछ खाया बी नहीं ही आप उनको कुछ खिल्ला क घर लय जा सकती हैं...

मैं:- थैंक ु डॉक्टर...

फिर मैं कोमल क साथ कैंटीन गया वहां सी खानत को लाया और कमरे में गया...

मैं दरवाज़ा खोल क अंदर गया तनीषा बीएड पी लेती होइ थी मैं हल्के हल्के कदमो क साथ उसके पास गया....

उसको मह्सूस हुवा क कोई आया ही उसने आंखें खोली और मुझी देख क खरी होने लगी और चेहेरी पी फिर वही गलनि वाली एक्सप्रेशन आ गए..

मैं जा क बीएड क पास खरा होगया और खाना सामन्य रखा और एक निवाला बना क उसके मुँह की तरफ किया उसने बिना कुछ कही या निरोड क मुँह खोल दिया और मैने पूरा खाना उसको खिल्ला क बाहिर आया डिस्चार्ज पेपर्स सिग्न क्र क मैं तनीषा को वापिस गॉड में उठा क टैक्सी तक लाया और फिर हम तीनो घर आ गए..

घर आती Hi मैं तनीषा को सीधा कमरे में लय गया और लिटा दिया बीएड पी और उसकी ऊपर चादर दाल दी और उसके पास बेथ गया और लिह्य बंद क्र दी और हल्का हल्का उसका सर सेहलानी लगा..

न मैं न वह कुछ बोल रही थी हम दोनों बिलकुल चुप थय शायद इस वक़त कुछ केहनी को था नहीं दोनों क पास..

कुछ hi देर वह सू गई...

मैं वहां सी सीधा नहाने चला गया नाहा क नीची आया तो शायद सब सू गए थय कोई बी नहीं था बाहिर शायद बोहत दिनी बाद सब सकूं सी सोये थय..

मैं अक्षरा क कमरे की तरफ गया वह बीएड पी लेती होइ थी और आराम क्र रही thi..Aur नूर बी उसके पास बैठी थी रत्न भी साथ चेयर पी बैठी थी...

जैसी Hi रत्न की नज़र मुझ पी पारी वह भाग क मेरी पास ै और गली लग गई फिर नूर सी मिला और अक्षरा को भी मिला वह बी बोहत खुश होइ वापिस मुझी घर में देख क...

मैं कुछ देर बाद उनके कमरे सी निकल क बाहिर गार्डन की तरफ जा hi रहा था क माँ मिल गई..

माँ:- अब किसी ही तनीषा.?

मैं:- अब ठीक hy...Maa एक बात पॉचों.?

माँ:- हाँ ज़रूर..

मैं:- माँ आपको तो साब पता था फिर आप कुछ व नहीं बोली और न hi Papa...Agr आप सच बता देती यह साब नहीं होता..

माँ:- यह जुंग तुम्हारी और तुम्हारी प्यार क बिच में थी जिस में सी तुम्हारा प्यार विजय रहा..

मैं:- मतलब.?

माँ:- यह वार कोई मामूली नहीं था अगर किसी साधारण इंसान पी होता तो वह इंसान उस शख्स सी इतनी नफरत करता क नफरत में कतल क्र देता लेकिन यह तुम्हारी प्यार की hi ताकत बीएस कुछ समय की चल क बाद सब कुछ ठीक होगया..

मैं:- वह तो ही.. वैसी अंजलि और आयेशा कहाँ हैं.?

माँ:- अंजलि क कमरे में हैं दोनों तुम्हारा सामना करनी सी दर रही हैं..

मैं:- ुणस्य मिल्क क अत हूँ..

माँ:- और शिखा भी कल आ जाये गई गाओं सी..

मैं:- हाँ पता चल गया था आपको छोटी hi..

माँ:- फिर तो बोहत कुछ पता चल गया होगा....

माँ एक कातिल मुस्कान क साथ चली गई जिसका अर्थ शायद मैं जनता था..

मैं अंजलि क कमरे में गया दोनों मुझी देख रोने लगी उनका थोड़ा समझा भुझे क और सोने का कह क मैं फिर बाहिर गार्डन में चला गया और बेंच पी बेथ अपनी सोचूँ में गम होगया...

मेरी डिल में अजीब सा दर बेथ गया था अब मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी तनीषा सी सही तर्हां बात करनी की..

तभी कोई मेरी पास आ क खरा होगया...

मैने देखा तो यह इशिका की थी जो क काफी शर्मिंदा थी...

मैं:- कुछ कहना है.?

इशिका:- सॉरी और थैंक्स...

मैं:- दोनों एक साथ.?

इशिका:- देखो अभी जो बी हुवा उसके बाद यह कहना ठीक नहीं होगा...

मैं:- बोलो तुम मैं सुन रहा हूँ..

इशिका:- एक्चुअली सॉरी इस लिए क मैने तुम्ही नींद की गोली दी उस दिन...

मैं:- कोई बात नहीं तुम्हारा हक़ था जितना तुम जीत गई..

इशिका:- तुमनी जान भुज क सही जवाब नहीं लिखा न.?

मैं:- तुम जीत गई हो मूव ों..

इशिका:- नहीं होसकती....

यह कह क वह वहां सी चली गई आज उसका तून पेहली वाली इशिका सी चेंज था...

आज उस दिन को एक महीना बीत गया था इस बेच कोमल वापिस चली गई थी अंजलि और आयेशा गाओं गई थी कुक्सह दिन क लिए और मेरी और तनीषा क बिच एक भी बात नहीं होइ थी हम एक hi कमरे में सत्य थय फिर बी..

आज मैं ऐसी Hi बाहिर निकला था अकेला क एक धाबी पी बाइक रोकी और खाना कहानी लगा क कुछ लोग वहां आ गए और मेरी साथ बेथ गए उन में सी दो लोग ताली थय वह लोग मुझसी बातें क्र रही थय बीएस ऐसी hi इधर इधर का हसी मज़ाक शुरू होगया था एक आदमी न्य मुझी गलास दिया..

मैं:- ओह्ह नहीं मैं नहीं पिता...

आदमी;- ओह्ह यार बीएस एक गिलास कुछ नहीं होता..

फिर सब बोलने लाग गए और मैने वह पि लिया उसके बाद फिर गिलास पी गिलास फिर मैं नाशय में झूमनी लगा मुझी पता Hi नहीं चला कब मैं वहां सी उठा और संसाब रस्ते पी चलने लगा हाथ में पूरी बोतल थी मेरी...

अचनाक एक गारी की रौशनी मेरी मुँह पी पारी...

मैं:- ओह्ह्ह कोण ही बे अन्धान क्रय गए क्या हूहः..

तभी उसके अंदर सी लड़की निकली...

मैं:- ओह्ह सॉरी लेडीज स्टाफ आईएम सॉरी..

और लरखरता हुवा साइड में होकय चलनी लगा तभी वह लड़की मेरी सामन्य आ खरी होगी..

मैं:- मैडम सूर्य बोलै अब क्यू रास्ता रोक रही हैं.?

लड़की:- आपकी हालत सही नहीं ही मैं आपको चोर देती हूँ..

मैं:- आप चोरो gi..hunnn...

लड़की:- हाँ क्यू.?

मैं:- थैंक ु madam..Wesy एक बात बोलों..

मैं अचानक लरखरा gya..usny अचानक मुझी पाकर लिया..

मैं:- थैंक ु. थैंक ु. हाँ एक बात बोलूं..

लड़की:- हम्म..

मैं:- आपकी शकल न मेरी एक बोहत ख़ास सी मिलती ही..

लड़की:- कोण ही वह आपकी ख़ास.?

मैं:- किसी को बाटना मात..

लार्कक:- नहीं बताओं गई...

मैं:- वह न मेरी जान ही दोस्सरी...

लड़की:- दोस्सरी क्यू.?

मैं:- पहली तो कोमल ही.. आप कोमल को नहीं जानती.?

लड़की:- हम्म जानती हूँ दोस्सरी कोण ही जिस की शकल मिलती ही.?

मैं:- हाँ दोस्सरी लेकिन प्यार एक जैसा ही एक डैम डीटू दोनों sy..Woh मेरी बीवी hy...Par एक प्रॉब्लम ही...

लड़की:- क्या वह आपको पसंद नहीं.?

मैं:- नहीं ऐसी बात नहीं ही Woo...Woh हम एक दोस्सरी सी बात नहीं क्र रही....

लड़की:- क्या उसी लिए पि ही.?

मैं:- ना नाह आज पहली बार पि ही लेकिन उसकी कसम आज क बाद नहीं पियोँ गए...

फिर शराब की बोतल फेक क मारी..

मैं:- कमी log...Ab तुम खुश हो.. है हाँ एक बात उसको माय बताना मैं पि थी उसको बिलकुल पसंद नहीं...

लड़की:- उस सी इतना प्यार कृत्य हो.?

मैं:- बोहत बोहत ज़्यादा....

लड़की:- तो बात क्यू नहीं कृत्य.?

मैं:- मैं तो रोज़ बात करता हूँ ससष्ठ किसी को बाटना maat...Jb वह सोजती ही खूब बातें करता हूँ उसके साथ अबू बी मेरी पास ही..

लड़की:- कहाँ ही.?

मैं अपने डिल पी हाथ रख क..

मैं:- यहाँ...

फिर उस लड़की को पता नहीं क्या हुवा वह मेरी तरफ लपकी और मेरी होंठों को अपने होंठों में कैद क्र लिया...

तभी मेरा सारा नशा एक दम फुर्र्र होगया क्यू क यह वह स्पर्श था जैसी मैं कभी नहीं भूल सकता यह वह सपर्श था जिसकी मिलती hi मेरी रूह तक खिल जाती ही और ऐसी रसीली होंठ जिनके यज्ञ अमृत भी फीका लगी यह वही था यह वही था...

मतलब यह मेरी जान तनीषा Hi थी....

हम एक दोस्सरी सी बिलकुल चिपके थय मेरी होंठों उसके होंठों में कैद थय...

फिर मैने 15 मं बाद किश तूरी और अलग हुवा..

तनीषा मेरी सीने सी लग गई और रोने लगी..

तनीषा:- क्यू इतना तारपा रही हो क्यू मुझी मूट सी भी बदत्तर सजा दी रही हो क्यू.?

मैं:- जो खुद गुनहगार हों वह दोस्स्रों को सजा क्या दें गए....

तनीषा अलग होइ और मेरी आंखों में देखनी लगी..

तनीषा:- अपने मुझत आज टाक माफ़ नहीं किया..

मैने अपना एक हाथ उसकी गर्दन में डाला और अंघूटी सी गाल सेहलती हुवे बोलै..

मैं:- आपसे नाराज़गी का तसावर भी जान निकल देता ही फिर नाराज़ होना बोहत दूर की बात hy..Maaf खुद को नहीं क्र पाया और शायद न क्र सकूं जब तक आप न माफ़ क्र दें...

तनीषा:- यह आप क्या बोल रही हैं.?

मैने साडी बात तनीषा को बता दी जोके बाबा न्य बताई थी...

तनीषा:- मतलब सब खेल उसने रचा मोहरा देव को बना क..

मैं:- हम्म..

तनीषा:- िसमय आपकी क्या गलती ही जो माफ़ नहीं क्र सकती खुद को...

मैं:- मैं उस वक़त आपको अकेला चोर आया जब वह नापाक शक्ति आपकी इर्द गिर्द थी अगर आपको कुछ होजाता To...Usi का पश्ताप मुझी नहीं जीने दी रहा....

तनीषा का तो जैसी कलेजा मुँह को उभार आया मतलब पैरों टॉय ज़मीन खिसक गई..

जब उसनी अपने लिया इतना प्यार देखा और उसको खुद सी गहन आ रही थी क ऐसी इंसान को उसनी ऐसा कहा...

तनीषा:- मात कीजिये इतना प्यार मैं उस लाइक नहीं...

मैं:- नहीं उस मोह्हबत की कोई हद जो हम आपसी करती चाही जिस्म चाही जुड़ा होजाये रूह कभ8 जुड़ा न हो पाए गई..

तनीषा:- ी लव यू िलोवे यू सैम ...................

स्टे टुन्नेद....

नोट:- होप सब क गिली दूर होजाये गए इस अपडेट सी कील सपोर्टिंग में गाइस थैंक ु सू मच फॉर 3 लाच प्लस Views..And 700+ लाइक्स....
 
अपडेट NO.58


तनीषा मुझसी अलग होइ और बोली...

तनीषा:- घर चले..

लेकिन मैने आज इतनी दिनों बाद उस से बात की थी तो मेरा डिल नहीं क्र रहा था उस सी अलग होने का..

मैं:- नहीं अभी घर नहीं जाना..

तनीषा:- रात क 1 बज रही हैं सब वेट क्र रही हों गए..

मैने उसकी कमर में हाथ डाला और अपने करीब खेंचा..

अब तनीषा का और मेरा चेहरा बिलकुल आम्नाय सामन्य था बीएस कुछ इंच की डोरी पर हम एक दोस्सरी की सांसूं तक को मह्सूस क्र सक रही थय..

और तनीषा की सांसें एक डैम तेज़्ज़ चलनी लगी थी..

मैं:- इतने दिनों सी जो मैं इंतज़ार क्र रहा था...

तनीषा मेरी आंखों में देखते होइ बोली..

तनीषा:- आज सारी गिली शिकवे दूर क्र दूँ गई..

और हल्का सा मेरी होंठों को चुम लिया और फिर बोली..

तनीषा:- पेहली घर चली...

मैं:- घर जाना ज़रूरी ही.?

यह मैने एक डैम बच्चों जैसा पोछा था जिस सी तनीषा के चेहरी पी स्माइल आ गई..

तनीषा:- अब इस तर्हां खुली रोड पी Hi शिकवे थोड़ी डोर होंगे...

मैं:- O.k तो घर चलती हैं...

मैं और तनीषा गारी की तरफ आ गए और तनीषा गारी चला रही थी और मैं साथ बैठा था..

हम करीब 30 मं में घर पोहंच गए थय.

मैने दरवाज़ा खोला के से..

और हम कमरे की तरफ चले गए सब सू गए थय रत्न अक्षरा क पास सो रही थी और नूर शिखा क साथ...

मैं कमरे में ग़ुस्सा और घूसस्ते Hi दरवाज़ा बंद क्र दिया..

तनीषा जा क बीएड पी बेथ गई..

उसने पिंक साडी पहनी होइ थी विथ मैचिंग ब्लाउज...

मैं हल्का हल्का चल क तनीषा क पास गया और उसके करीब जा क उसके कंधी सी पाकर क बीएड पी लिटा दिया और उसके शरबती होंठों का रस चूसनी लगा...

तनीषा मेरा भरपूर साथ दी रही थी मैं किश करता हुवा एक हाथ तनीषा की राइट बूब पर लय गया..

जिस सी उसका जिस्म थोड़ा जोश में आ गया और हमारी किश थोड़ी वाइल्ड होने लगी मैने तनीषा क साडी का पल्लो नीची क्र दिया...

और थोड़ा ऊपर क्र क उसका ब्लाउज उत्तर दिया और ब्रा bhi..is बेच भी किश क्र रही थय हम...

मैं किश करता हुवा उसके होठों की चूमता हुवा उसके गल्ल पी आ गया और गाल सी लीक करता हुवा उसके बूब्स पी आ गया और राइट बूब को मुँह में लय क लेफ्ट को दोस्सरी हाथ सी सेहलानी लगा...

तनीषा की हालत खराब हो रही थी...

मैं किश करता हुवा उसके नैवेल तक आ गया और हाथोह सी उसका पेटीकोट उत्तर दिया और अब उसके जिस्म पी सिर्फ पेंटी थय..

मैं पेंटी उत्तारंय लगा क तनीषा न्य हाथ रख सिया पेंटी पी..

मैं थोड़ा उप्पेर हुवा और सवालिया नज़रों सी उसकी तरफ देखनी लगा...

तनीषा:- वह नीची गन्दा ही शेव नहीं किया....

मैं हल्का सा मुस्कुरा क खरा हुवा और अपने कापरी उत्तर दिए और बिलकुल नंगा होकय तनीषा क उप्पेर आ गया और फिर सी होंठ उसके में रख दिया और अपने दोस्सरी हाथ सी अपने लुंड को पाकर क तनीषा की पंतय थोड़ी साइड क्र क एडजस्ट क्र क थोड़ा सा ढाका मारा और थोड़ा लुंड अंदर चला गया तनीषा और गरम होगी और मुझी कस क पाकर लिया और किश करनी लगी..

मैं 2 3 ढकूँ में पूरा लुंड तनीषा की छूट में दाल दिया...

ज़िन्दगी भार का सकूं मिल गया ऐसा मह्सूस होता ही जब भी में तनीषा क साथ जिस्मानी तलूक बनता हब मेरी रूह तक इस में शामिल होती ही और सकूं ढूंढ़ती...

मैं हल्का हल्का यज्ञ पिच्य होने लगा तनीषा और गरम होगी..

तनीषा:- अह्ह्ह्हस्सस्सह्ह्ह हाँ ऐसी Hi हनन और ज़ोर सी मेरी जान बोहत दिन दूर रही आपसे मेरी जान आप मुझी इतना मात तर्पया करो मेरी ज़िन्दगी हो आप अह्हह्ह्ब्हस्सश्ठ अह्ह्ह्हह्हह...

मैने अपने ढकी तीज क्र दिए और वह भी अपनी कमर नीची सी हिलनी लगी तनीषा और मेरी यह प्रेम कथा 40 मं तक चली फिर में तनीषा की अंदर जहर गया....

और इस बेच तनीषा 3 बार झार गई..

और मैं तनीषा क उप्पेर hi गिर गया और इस आनंद को महसूस करनी लगा..

तनीषा और मेरी हम दोनों की आंखें बंद थी मैं 5 मं बाद उसके उप्पेर सी उतनी लगा तो मेरी कमर पी उसके दोनों हाथ बोहत कस क बंधी ठग जैसी मैं उसको चोर क न भाग जाओं.

मैने उसकी तरफ देखा तो वह सू गई थी और उसके चेहरी पी एक बोहत खूबसूरत स्माइल थी..

मैं एक हाथ सी उसके हाथ बारी आराम सी अलग किया और तनीषा क उप्पेर सी उठा और तनीषा को सीधा किया और एक चादर दोनों पी दाल क तनीषा को गली लगा क नंगा hi सो गया...

सुबह मेरी आंख खुली तो तनीषा अब तक सू रही थी और और उसके चेरी पी वह स्माइल अभी तक थी मैने टाइम देखा तो 11 बज रही थय सुबह क..

मैं हैरान था लाइफ में इतनी देर तक नहीं सोया था मैं शायद इस सब चकरून में नींद नहीं पूरी हो रही थी आज तनीषा क साथ सोया तो दुनिया भार को भूल क बीएस उसको मह्सूस क्र क सोया था...

मैने तनीषा क चेरी पी हाथ फेरा और उसके चेरी पी जो बाल आ रही थय उनको पिच्य किया...

तनीषा की भी आंख खुल गई उसनी उसी मुस्कुराण सी मेरी तरफ देखा..

मैं:- गुड मॉर्निंग...

तनीषा थोड़ा उप्पेर होइ और मेरी होंठ पी एक हल्का सा किश क्र क बोली..

तनीषा:- गुड मॉर्निंग मेरी जान...

तनीषा न्य भी घरी देखि और हैरान होकय बोली..

तनीषा:- अरे बाप रय 11 बज गए इतनी देर तक सोइ मैं..

मैं:- हम दोनों इतनी देर तक सोये..

तनीषा:- आज इतने दिनों बाद आपके साथ सोइ थी न तो इस लिए..

मैं:- हम्म अब उठो फ्रेश होजाओ..

तभी तनीषा को एहसास हुवा वह नंगी ही...

तनीषा:- मैं ऐसी किसी सू gai..Aur कपड़े..

मैने उसकी तरफ सवालिया नज़रों सी देखा..

तभी उसको रात वाला सारा सन याद आ गया और उसके गाल लाल होगये.. और वह मेरी बहून में चुप क षर्मान्य लगी...

मेरी चेरी पी एक स्माइल आ गई..

मैने उसकी सर पी एक किश किया और उठ क अलमारी सी तनीषा की निघ्त्य निकल क उसको दी दी..

मैने शॉर्ट्स पहनी हुवे थय...

तनीषा पूरी चादर में लिपटी होइ थी अपने जिस्म को छुपा क..

मैं उसके हाथ में निघ्त्य दी क घूम क खरा होगया...

तभी मुझी कंधी पी उसका हाथ मह्सूस हुवा...

मैं घूमा तो तनीषा अभी भी पूरी नंगी थी और उसकी हाथ में निघ्त्य थी और आंखों में आंसूं..

मैं:- रू क्यू रही हो आप आईएम सॉरी मैं बाहिर चला...

मैं अभी कुछ बोलता उस सी पेहली तनीषा मेरी गली लाग गई..

तनीषा:- आपको बुरा लगा न मेरी आपसी जिस्म छुपाना मैं नहीं छपाओं गई लो यह भी नहीं पहनो गई....

मैने तनीषा को थोड़ा अलग किया और उसके हाथ सी निघ्त्य लय क उसको पहना दी और जिस्म धक् दिया उसका....

मैं:- लाज और शर्म औरत का गहना होती ही बेशर्म तो जानवर होती हैं..

तनीषा न्य नज़रें झुका ली..

मैं:- हमेशा एक बात याद रखना कोई भी मरद नहीं चाही गए उसकी बीवी बेशर्म हो...

तनीषा फिर गली लग गई...

फिर हम दोनों बरी बरी फ्रेश होकय क एक साथ नीची आ गए अभी नीची उत्तरी hi थय क सामन्य अबीरा और तारा और इशिका तीनो बैठी थी माँ क साथ...

मैं उनको देखती hi थोड़ा सा डिम होगया पटक नहीं क्यू बूत में उनके पास नहीं जाना छह रहा था..

वैसी मेरी दिलक में कोई बात नहीं थी फिर भी मैं तनीषा क साथ उनके पास गया..

मैं:- गुड मॉर्निंग..

माँ:- गुड मॉर्निंग क बची 12 बज रही हैं सुबह क..

मैं:- वह केहत्य हैं न जब जागो तब सवेरा...

माँ:- नाश्ता लगाती हूँ में..

तनीषा:- मैं लगाती हूँ तुम लोग भी खाओ गए न...?

माँ:- हाँ बीटा सब क लिए बना लेना नूर किचन में hi ही..

मैं:- माँ रत्न कहाँ ही.?

माँ:- कॉलेज गई ही तुम सू रही थय तो तुम्हारी पापा क साथ चली गई दोनों..

मैं:- इशिका तुम नहीं गई कॉलेज..

इशिका:- गई थी बूत वापिस आ गई दी.. क पास अन्य का डिल क्र रहा था...

Main:-Hmmm

मैं तारा और अबीरा दोनों को फुल इग्नोर क्र रहा था..

मैने अबीरा सी भी उस दिन क बाद बात नहीं की थी बीएस कासुअल Hi बात करता था जिस पी सवाल अबीरा का और जवाब मेरा बीएस..

आज उसकी नज़रूँ में कुछ अजीब सा था जो मैं समझ नहीं पा रहा था और न hi समझनी की मैं कोशिश क्र रहा था..

तभी नूर वहां आ गई..

नूर:- खाना रेडी ही आ क खा लीजिये...

हम सब डाइनिंग टेबल की तरफ चले गए और खाना खाने लगी तनीषा भी आ गई थी वह बोहत खुश लाग रही थी बिलकुल एक नई गुलाब जो अभी खिल्ला हो..

फिर हम न्य खाना पूरा किया तो मैं बाहिर लॉन में जा क बेथ gaya...Aur किसी सोच में गम था क किसी न्य हिलाया तो होश aya..yeh माँ थीं...

मैं:- अरे माँ आप आइये बैठिये....

माँ:- किन सोचों में गम हैं हम्र्य महराज...

मैं माँ को बिठा क अपना सर उनकी गॉड में रख क लेट गया..

मैं:- कुछ नहीं बीएस ऐसी hi इधर उधर की सोच...

माँ:- मैं जानती हूँ किस बारी में सोच रही हो...

मैं:- किस बारी में.?

माँ:- अबीरा क बारी में..

मैं:- हाँ शायद उसी बारी में जो अभी न्य कहा वह मैं किसी...

माँ:- देखो मैं एक बात बता दूँ तुम कोई साधारण इंसान हो एक आम आदमी की ज़िन्दगी में एक लड़की अति ही वह उसकी साथ ज़िन्दगी गुज़जर देता hy..lekin तुम्हारी ज़िन्दगी बिलकुल साधारण नहीं ही...

मैं:- लेकिन वह उन 8 में सी नहीं ही..

माँ:- तुम्हारी वह बीवियां 8 हैं जिन क पास लॉकेट ही लेकिन यह उन्ही तक सिमित नहीं ही और कई कन्या ए गई..

मैं:- काया यह सही होगा मैं किसी को वक़त नहीं दी पाऊँ गए हर किसी को प्यार की ज़रूरत होती ही...

माँ:- मैं समझती हूँ अब एक बात btao...Sach सच कोमल सी कब सी प्यार कृत्य हो.?

मैं:- बचपन सी..

माँ:- तनीषा सी..

मैं:- 3 साल सी..

माँ:- सच बताना क्या अभी क लिए तनीषा और कोमल में सी एक को चुनना पारी तो.?

मैं:- मैं नहीं चुन सकता एक को वह दोनों मेरी जान हैं...

माँ:- ाचा तो दोनों को रख क बक्क अंजलि आयेशा और रत्न और नूर को चूर्ण पारी तो.?

मैं:- माँ यह काया बात क्र रही हैं.?

माँ:- बताओ चूर दो गए.?

मैं:- नहीं..

माँ:- तुम्हारा प्यार सब क लिए एक जैसा ही और तुम किसी को भी खोना नहीं चाहती और जैसी जैसी प्यार करो गए प्यार का समुन्दर भरता जाये गए...

मैं:- लेकिन..

माँ:- वक़त बोहत बारे राज़ ही अपने अंदर काया छुपा क रखा ही कोई नहीं जनता...

मैं:- जैसी आपकी Agya..Mahrani जी...

माँ:- बिलकुल महराजा ji...Aur बाँदा दरवाज़ा तो बंद क्र लेता ही और काम सी काम कापरी तो पेहेन क सोता ही...

मैं एक डैम शॉक होगया..

मैं:- आप कमरे में आइये थी.?

माँ:- जी आइये थी और आपके हाल ऐसी देख लूट आइये.. गुस्से सी..

मैं:- गुस्सा क्यू.?

माँ:- Na...Naahi गुस्सा नहीं गभरा क बोलै..

मैं:- नहीं अपने गुस्सा बोलै आप गुस्सा क्यू होइ.?

माँ:- न नहीं ऐसी बात नहीं ही..

मैं:- सच आपको मेरी कसम..

माँ:- नहीं प्लीज मैं नहीं बोल पाऊँ gi....Hey भगवन......

अपने माथे पी हाथ रख क बोलै..

तो बे कंटिन्यू....

नई CHAPTER इस ों थे वे...
 
अपडेट NO.59


मैं उस वक़त उठ क बेथ गया और माँ की आंखों में देख बोलै..

मैं:- क्यू आया आपको उस वक़त गुस्सा बताइये..

माँ:- प्लीज नहीं बता सकती..

मैं:- क्या नहीं बता सकती क सब क मान की ीचा पूरी करता हूँ आपकी क्यू नहीं.?

माँ:- हाँ..

मैं:- तो वह ीचा अटल ही जो आपकी आंखों में ही..

माँ न्य सर झुका लिया...

मैने माँ का मुँह थोड़ी सी पाकर क ऊपर किया..

माँ की आंखें अभी बी झुकी होइ थी...

मैं उनका हाथ पाकर क उठाया और उनको अंदर लय क जाने लगा तनीषा और बाकि सब शायद बाहिर चली गई थी कहीं मैं और माँ घर में अकेले थय मैं माँ क कमरे में लय आया माँ को और अंदर सी दरवाज़ा लॉक क्र दिया और पलट गया...

जैसी Hi पलटा माँ भाग क मुझसी लिपट गई और मेरी चेरी पी चुम्बन की बारिश करनी लगी..

मैं:- लगता ही आज मेरी खैर नहीं...

माँ:- आज तो कच्चा खा जाओं गई तुझी कितना तर्पया ही टुन्नाय मुझी...

मैं कुछ नहीं बोलै और माँ क होंठ अपने होठों में लय लिए और अपना एक हाथ पिच्य छात्रों पी लय गया और उनके भारी हुवे चुतरों को मसलने लगा माँ न्य मेरा एक हाथ पाकर क अपने एक बूब पी रख दिया...

अह्ह्ह क्या नरम और बारी बारी बूब्स थय...

मैं उनको मसलता हुवा कापरी उत्तारंय लगा ब्रा तक उत्तर क मैं न्य किश ख़तम किया और उठा क बीएड पी लय आया और उनके जिस्म को लीक करता हुवा छूट तक पोहंच गया और पेंटी उत्तर क उसको लीक करनी लगा और उसके अंदर जीब फेरनी लगा..

माँ न्य एक हाथ मेरी सर पी रख दिया और दबनी लगी...

माँ:- हाँ ऐसी Hi मेरी लाल हाँ बिलकुल ऐसी hi और आह्ह्हह्ह्ह्ह सषहसाआठ...

मैं कुछ देर में खरा हुवा और अपने कापरी उत्तर क अपनक लुंड जो फुल सलामी देता हुवा खरा था छूट पट सेट करनी लगव तो माँ न्य रोक दिया...

और खरी होकय उसका टोपा अपने मुँह में लय क उसको अपने जीब सी लीक करनी लगी फिर उसकी गिल्ला क्र क खुद अपनी छूट पी सेट किया..

मैं झुक क उनके होंठ चुमन्य लगा और नीचग सी झटकी देंय लगा मुझी एक अलग hi एक्सिटमेंट हो रही थी..

मैं फुल जोश में छोड़ रहा था माँ को वह भी फुल मज़ा लय रही थीं और उनके बूब्स उछाल रही थय जो मुझी ज़यादा आकर्षित क्र रही थय मैं उनको पाकर क दबा रहा था..

15 मं बाद वह झार gai...mainay पोस्टिव चेंज क दोगिस्टीले में छोड़नी लगा वह पोरी जोश में चिल्ला रही थी..

30 मं की धुवां धार चुदाई क बाद मैं माँ क अंदर झार गया और उनके उप्पेर hi गिर गया...

अचानक कमरे में एक रौशनी होइ जिस सी न्य एक दूरी रूप लिया जो काफी मूर्ति थी और सोने सी चमक रही थी शायद hi मैने ऐसी कोई वहंति चीज़ देखि थी सोने की..

वह ुर क मेरी गली में कूद बा खुद आ क बांध गई और तभी एक और रौशनी क साथ वह लॉकेट का पीस उस दूरी सी आ क लकग गया...

मेरी जिस्म में एक अलग Hi झटका लगा जिस सी मैं थोड़ा दूर हुवा जिस क बाद मैं नार्मल हुवा और सब कुछ नार्मल होगया और मुझी मेरी जिस्म में एक अजीब सी ताकत महसूस हो रही थी...

फिर मुझी माँ क ख्याल आया जो इस वक़त मेरी सामन्य बैठी थी और हैरान हो रही थी...

मैं:- क्या हुवा आप हिरण क्यू हो रही हैं.?

माँ:- यह सब क्या था यह दूरी मेरी जिस्म में किसी.?

मैं हिरण परेशां होगया यह सुन क मुझी लगा शायद माँ को पता होगा इस बारी में लेकिन मैं बिलकुल हकबका रह गया...

मैं:- आपको नहीं पता सच में.?

माँ;- नहीं तभी तो पोछा..

मैं:- यह वह दूरी ही जिस्मी सारी लॉकेट पीससे इकठी होंगे...

माँ:- तुम्हे पता ही तुम काया कह रही हो..

मैं:- जो सच ही...

माँ:- इस लॉकेट सी हर जोरि चीज़ बीएस तुम्हारी बीवियों क पास होगी ऐसा तुम्हारी पापा न्य बताया था...

मैं:- नहीं लेकिन अदि न्य तो...

तभी एक रौशनी जो क कमरे में होइ और एक साइड सी होल बन गया और मैने जल्दी सी दोनों क जिस्मो पर कपड़े दाल दिए...

उसमें सी खुद पापा Niklay...Main हिरण था...

पापा:- तुम लोग हिरण क्यू हो रही हो.?

मैं:- आप उन बाबा जैसी क्यू ए हो.?

माँ शर्मिंदा खरी थी सुदे पी शायद उनको लग रहा था उन्होंने पापा क साथ धोका किया...

पापा:- मुझी नहीं पहचान बचा.?

मैं हिरण होगया अब वह उन बाबा की आवाज़ में बात क्र रही थय...

फलश बैक..

वह दिन जब अदि न्य दूरी बारी में बताया था जब पहली बार यह रौशनी होइ थी...

मैं उस रौशनी में अंदर गया टी सामन्य एक बाबा बैठी थय..

बाबा:- औ पटर किसी हो.?

मैं:- आप कोण हैं और यहाँ किसी...

बाबा:- वह चोरो यह सब जो तुम्हारी साथ हो रहा ही न तुम्ही उन स्वाळून का जवाब देंय आया हूँ..

मैं:- काया आपकी पास जवाब हैं..

बाबा:- शायद..

मैं:- मेरी परः आप समझ सकती हैं.?

बाबा:- मैं तुम्ही बीएस इतना कहां गए जो हो रहा ही तुम्हारा मुक़दर ही और उसको टीम बदल नहीं सकती...

मैं:- यह केसा मुक़दर जिस्मी प्यार बाटना पारी और अपनी Hi माँ की साथ...

बाबा:- पुत्तर जिस वक़त तुम्हारा जनम हुवा था सब सी उचित मार्ग था और उस वक़त अगर वह शक्तियां जो तुम्हारी हैं किसी और क हाथ उनका 1% भी लग जाता ही तो दुनिया को तबाह होने सी कोई नहीं रोक सकता और उन शक्तियोँ को पाने क लिए बोहत सी दुष्ट आत्मा भटक रही हैं और शायद यह सब सी उचित था इस वक़त क तुम्हारी प्यार को बाँट हिस्सों में क्र दिया जाये और शक्ति को भी बाँट दिया जाये और जिस सी वह मेहफ़ूज़ और भी ज़्यादा बढ़ जाये...

मैं:- लेकिन यह उचित होगा.?

बाबा:- जितना जल्दी हॉसकय कपङे अस्तित्वे को समझ लो उतना बेहतर ही जो मार्ग मिल्ली उसे स्वीकार kro...Aur रही बात रिश्तों की वह डिल सी होते हैं जिस्म बीएस एक ज़रूरत ही...

तभी रौशनी ख़तम होगी और मैं खुद अपने बिस्टेर पी लेट क सू गया..

फ़्लैश बैक एन्ड...

मैं:- पापा आप hi वह बाबा हैं.?

पापा:- हाँ बीटा मैं जान क तुम्हारी सामन्य नहीं आया था और तुम क्यू शर्मिंदा हो रही हो...

माँ:- मैने यह ठीक नहीं किया...

पापा:- यह तो किस्मत hy...Aur अगर नहीं होता तो शायद हमारा सफर कभी पूरा न होता...

माँ:- लेकिन यह सब अपने बताया क्यू नहीं.? और जो बात सैम क बारी में कही थी वह.?

पापा:- वह सब सच था और अभी इन बातून का उचित समय नहीं ही इस वक़त तुम्ही सैम की हिम्मत बना होगा...

तभी माँ की नज़र मुझपी पारी मैं इस वक़त एक अजीब सी जलन और शक्ति का शिकार था जिस सी मेरा जिस्म जल रहा था...

पापा:- इसी अपनी दोनों शक्तियोँ की ज़रूरत ही तनीषा कहाँ ही.?

माँ:- पता नहीं लेकिन इसको काया हो रहा ही...

पापा:- मैं तनीषा को बुल्ला क लता हूँ वर्ण अनर्थ होजाये ga..Aur तब तक तुम्ही उसको अपने होठों का सपर्श देना होगा...

यह कह क पापा चली गए बाहिर और माँ भाग क मेरी पास ै और मेरी होंठों को अपने होंठों में कैद क्र liya...Tab मेरी जिस्म को कुछ सकूं मिला...

तभी दरवाज़ा खुला तनीषा अंदर ी उसकी आंखों में आंसूं थय वह भाग क मेरी पास ी और माँ अलग होगी तनीषा न्य जैसी अपने होंठ मेरी होंठों पी रखी मेरी जिस्म को एक झटका लगा मैं तनीषा क उप्पेर hi बेहोश होगया..

नेक्स्ट मॉर्निंग..

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट NO.60


नेक्स्ट मॉर्निंग..



अगली सुबह मेरी आंख खुली तो टाइम देखा तो 9 बज रही थय उस वक़त मेरा सर बोहत दर्द क्र रहा था जैसी अभी पहात जाये गए मैं अपनी हीलिंग पावर उसे करनी की कोशिश क्र रहा था लेकिन उस सी भी नहीं सही हो रहा था...

मैं हिम्मत क्र वाशरूम तक गया और जा क फ्रेश हुवा और शावर क नीची जा क खरा हुवा जब पानी मेरी सर पी पारा थोड़ा सकूं मिला...

मैं 20 मं तक नाहा क बाहिर निकला तो मेरी कपड़े सामन्य बीएड पी पारी थय लेकिन कमरे में कोई नहीं था शायद तनीषा होगी जो रत्न और नूर तो कॉलेज गई hongi...(Norr न्य भी अपनी पढ़ाई पूरी करनी क लिए कॉलेज ज्वाइन क्र लिया था उसनी भी रत्न वाला क्रूसे लिया था..)..

मैं इस बात पी गुर नहीं किया और कापरी पेहेन क नीची चला गया...

घर में ऐसा लग रहा था कोई नहीं ही लेकिन टेबल पी गरम गरम खाना पारा था मैं किचन की तरफ देखा तो लगा माँ होंगी..

खैर मैं बेथ गया खाना कहानी तभी किचन सी अबीरा बाहिर ै....

जैसी देख क मुझी कुछ अजीब लगा यह काम क्यू क्र रही ही इसी तो आराम करना chahiye...Aur माँ कहाँ हैं.?

लेकिन मैं कुछ नहीं बोलै बीएस चुप चाप खाना खता रहा...

तभी वह मेरी पास आ क खरी होगी और बोली..

अबीरा:- आपको कुछ चाहिए?

मैने बिना उसकी तरफ देखी ना में सर हिल्ला दिया वह फिर बोली...

अबीरा:- वह तनीषा और माँ सुबह सुबह कहीं चली गए थय इस लिए मैने नाश्ता बनाया और आपकी कापरी निकल दिए...

उसको लगा मैं अब कुछ बोलों गए लेकिन मुझी कुछ न बोलता देख क उसका मुँह रोने जैसा बन गया और पलटी अपने कमरे में जन्य क लिए...

तभी मेरी दिमाग में एक झटका लगा जिस सी मेरी जान Hi निकल गई और मेरी मुँह सी बेसाख्ता एक चीख निकल गई...

मैं:- अह्हह्ह्ह्ह

और मैं सर को दोनों हाथों में पाकर क नीची बेथ गया...

अबीरा न्य जैसी hi यह सुन्ना भाग क मेरी तरफ ै जैसी तकलीफ मुझी नहीं उसको हो रही हो...

Abira(Rote huway):-Kya हुवा आपको आप ठीक तो हैं कोई है...

लेकिन मेरी हालत में कोई बदलाव नहीं आ रहा था मेरा सर वैसी hi दर्द क्र रहा था क अचानक अबीरा न्य अपना हाथ मेरी सर पी रखा और चीखती होइ बोली..

अबीरा:- आप ठीक तो हैं...

उसकी छूती मुझी एक अजीब सी एहसास न्य घेर लिया जो क उस वक़त मुझपी हावी होना एक मिरिकाले hi था..

मेरी सर का दर्द बिलकुल ठीक होगया मेरी जिस्म जो क पेहली कमज़ोर लग रहा था बिलकुल पेहली जैसा होगया और मुझपी एक अलग hi नशा हावी हो रहा था मेरी एनकेएन भरी हो रही थी...

मैने अपनी आंख उप्पेर क्र क अबीरा की तरफ देखा तो उसकी आंखों में आंसूं थय जो मेरी यह हालत देख क आ गए थय..

मैने अपना एक हाथ उठाया और उसकी अंकन साफ़ की और बोलै..

मैं:- मुझी कमरे तक लय जाओ...

अबीरा जल्दी सी खरी होइ एक हाथ मेरा अपने कंधी पी दाल क मुझी सहारा दी क कमरे तक लय ै और मैं लेटती Hi होश नहीं रहा...

तभी मेरी आंखों क सामन्य अभी आज्ञा...

अभी:- तुझी मेरी बात नहीं माननी थी तो मन क्र देता..

मैं:- नहीं भाई मैं तेरी नहीं तो किसकी बात मानूँ गए...

अभी:- तो तू क्यू क्र रहा ही ऐसा अबीरा क साथ बेचारी रात रात भर रोटी रहती ही और कोई उसकी आंसूं पोचनय वाला नहीं ही..

मैं:- अभी यह इतना आसान..

अभी:- मुझी कुछ नहीं सुना अब मैं तुझसी तब hi मिलूं गए जब तो यह पूरा क्रय गए...

फिर अभी गायब होगया...

और मेरी मुँह सी बीएस यह निकला..

मैं:- ाभीईई...

और मैं उठ क बेथ गया..

मेरी सामन्य अबीरा खरी थी आंख में आंसूं लय क और मेरी साथ तनीषा बैठी थी और दोस्सरी साइड माँ थी...

माँ:- क्या हुवा कोई बूरा सपना देखा क्या...

मैं कुछ नहीं बोलै और सिचुएशन को समझनी लगा मैने घरी देखि तो उसमें 12 बज रही थय मतलब 2 घंटी अभी मैं बेहोश था..

तनीषा:- क्या हुवा आपको आप छू क्यू हैं और ऐसी क्यू चिल्लाये..

मैं:- कुछ नहीं बुरा सपना था...

मैं उठा तनीषा न्य मेरी हाथ पकड़ा मैं वाशरूम चला गया फिर सी नाहा क बाहिर आज्ञा अब बीएस तनीषा Hi बैठी थी बीएड पी..

मुझी देखती hi वह उठ क ै..

तनीषा:- अब किसी ही तबियत बाबा न्य कहा लॉकेट की शक्ति को बर्दाश्त करनी क लिए थोड़ी तकलीफ होगी..

मैं कुछ नहीं बोलै बीएस तनीषा सी नज़रें चुरा रहा था उसनी यह नोट किया और वह मेरी सामन्य आ क खरी होगी..

मैं उसकी तरफ नहीं देख रहा था..

तनीषा न्य अपनी दोनों हाथों में मेरा चेहरा पकड़ा और उठा क बोली..

तनीषा:- काया बात ही जो आप मुझसी नज़रें तक नहीं मिला पा रही...

इसकी 2 कारण थय एक अबीरा और दोस्सरे माँ...

मैं कुछ नहीं बोलै बीएस नज़रें झुका क खरा था...

तनीषा:- बोलिये मेरी जान कोई ऐसा काम नहीं क्र सकती जिस सी उन्ही नज़रें छुपानी पारी...

मेरी आंखों में सी आंसूं निकल गए...

तनीषा न्य मुझी पकड़ा और बीएड पी ला क बिठा दिया और मेरी सामन्य बेथ गई...

तनीषा:- आप क्यू रू रही हैं मैं नहीं डेल्ह सकती मेरा डिल रोक जाये गए आपका रोना रुकनी सी पेहली...

तभी मैनी कपङा हाथ उसकी होंठों पी रख दिया और उसको गली लगा दिया और सब कुछ विस्तार में बता दिया..

मैं:- मैं मजबूर हूँ इन सब क लिए यह ज़िन्दगी भी ख़तम नहीं क्र सकता और इस सच सी भी नहीं भाग सकता...

तनीषा न्य मेरी दोनों हाथ पनाय हाथ में लय क बोली...

तनीषा:- एक बार मैं आपसी दूर रह क देख चुकी हूँ मूट उस सी बेहतर ही और मैं अकेली नहीं जो भी आपसी दूर होगा उसका यह hi हाल hoga..Aur रही बात माँ की तो मैं आपसी पेहली भी कहा था आपकी ज़िन्दगी में जो मर्ज़ी ए उस सी हामी कोई फरक नहीं पारी गए...

मैं:- मैं वजह अबीरा की ही शायद मैं उसी नज़रें भी नहीं मिला पाऊँ गए अगर यर्ह बात उस सी की तो और जिस नज़र सी उसी देखा शायद मैं आज भी उसको उसी नज़र सी जी भार क देखता और बातें करता उसको रातून को रोने नहीं देता एक भाई होने का फ़राज़ पूरा करता लेकिन शायद उस नज़र सी मैं उसकी तरफ डेल्ह तक न पाऊँ...

तभी कमरे में कोई एंटर हुवा...

मैने नज़र उठाई तो यह H.M और उसकी पत्नी थी मैं खरा होगया..

मैं:- नमस्ते अंकल आइये..

वह दोनों आ क बेथ गए साइड पी सोफे पी..

तनीषा:- मैं कुछ खाने को लती हूँ...

H.M:- कोई ज़रूरत नहीं बेटी हम तो ीनस्य एक विनती करनी ए हैं...

मैं:- अरे अंकल आप विनती नहीं आर्डर दीजिये..

तनीषा कमरे सी बाहिर चली गई...

H.M:- आज कोई H.M नहीं एक बाप तुम्हारी सामन्य बैठा ही..

A'maa:- हामी माफ़ क्र दो तुम्ही हमनी गलत समझा.. जिस इंसान की पूजा करनी चाहिए उसको गलत समझा हमनी..

मैं:- आंटी आप प्लीज ऐसा मात खाइये मैं भी तो आपकी बच्चों जैसा हूँ...

H.M न्य हाथ जोर लिए..

मैं न्य जल्दी सी उनके हाथ पी अपना हाथ रख दिया..

मैं:- अंकल प्लीज यह सब मात कीजिये मैं साडी बातें भूल चूका हूँ...

H.M:- हम यह इस लिए नहीं क्र रही बल्कि हम तुमसे अपनी बेटी की ज़िन्दगी की भीक मांगनी ए हैं..

मैं:- मैं कुछ समझा नहीं...

H.M:- अबीरा की ज़िन्दगी जो क वह बर्बाद करनी पी टोली ही हर वक़त बीएस रोटी रहती ही और न hi हम्र्य साथ चलती ही..

मैं:- अंकल मैं काया क्र सकता हूँ मुझसी भी उसका यह दुःख नहीं देखा जाता...

A'maa:- उसी अपना लो बीटा वर्ण यह समझ उसको जीने नहीं दी गए..

मैं यह सुन क खरा होगया और उनकी तरफ सी पथ क्र क खरा होगया और अपनी आंखों को साफ़ किया और लम्बी सां ली...

तभी फिर सी वह बोली...

H.M:- लचर माँ बाप बीएस टुमस्य यह hi मांगनी ए हैं बदली में जो बोली गए हम करनी को त्यार हैं...

मैं पलटा और बोलै..

मैं:- प्लीज अंकल शर्मिंदा मात कीजिये...

A'maa:- तो बीटा क्या तुम उसी अपना लोगी.?

मैं:- आंटी लेकिन उसकी भी तो मर्ज़ी जानिए....

H.M:- उसी क केहनी पी हमनी यह फैसला किया ही...

मैं:- क्या.?

H.M:- हाँ बीटा...

मैं:- लेकिन अंकल आप नहीं जानती कुछ भी मेरी बारी mein...Meri पेहली...

H.M:- शादी हो चुकी ही तनीषा सी लेकिन लेकिन हम फिर भी अपनी बेटी क हथून मजबूर हैं..

मैं यज्ञ कुछ बोल नहीं सकता था और कुछ बोलनी को ही hi नहीं था मेरी पास..

मैं मुँह नीची क्र क खरा होगया..

H.M:- हम इसका मतलब हाँ समझी.?

मैं फिर कुछ नहीं बोलै बीएस फीका सा मुस्कुरा दिया...

H.M न्य मुझु गली लगा लिया और A'maa भी मेरी दुहाइयाँ लेनी lagi..Aur दोनों बाहिर चली गए...

मैं वहां सी बालकनी में आज्ञा...

तभी वहां एक रौशनी होइ और अभी आया..

अभी:- शुक्रिया मेरी भाई...

मैं:- आबय साली स्नाति क्यू हो रहा ही...

अभी:- सन्ति नहीं हो रहा वैसी तेरी दिमाग में यह सब चल रहा ही न क क्यू मैं तुझी इतना फाॅर्स क्र रहा था उसकी लिए और क्यू इतनी पावर होने क बावजूद H.M तुझसी ऐसी इल्तजा क्यू क्र रहा ही.?

मैं:- हम्म्म..

अभी:- सब पता चल जाये गए बीएस वक़त क साथ चल

"वक़त" बोहत बारे राज़ ही

यज्ञ क्या होगा किसी को पता नहीं सिवाए "वक़त" क....


तो बे कंटिन्यू...

नोट:- सॉरी दोस्तों इतना HI लिख पाया था एक और अपडेट आज रात 11 बजी तक ए गए एंड अगेन सॉरी फॉर लेट एंड शार्ट UPDATES..BHAI लाइफ कभी कभी ऐसी लगाती ही क कुछ समझ नहीं अत बीएस समझ लो क अभी लगी पारी हैं...
 
अपडेट NO.60


मैं अभी अपनी सोचों में Hi गम था क मुझी किसी क अपने पिच्य होने का एहसास हुवा मैं न्य पिच्य मोर क देखा तो अबीरा खरी थी मैं उसको देख क सीधा खरा होगया और अपनी आंखें फेर ली..

अबीरा आंखें नीची किये अपने दोनों हाथों को आपस में मसलती हुवे वही खरी थी..

उस वक़त हर जगह ख़ामोशी चाय होइ थी...

अबीरा न्य hi Hi ख़ामोशी को तोरा और बोली...

अबीरा:- क्या आप अभी भी मुझसी नाराज़ हैं...

मैं:- मैं नाराज़ था hi नहीं टुमस्य..

अबीरा:- तो फिर मुझसी बात क्यू नहीं क्र रही थय.?

मैं कुछ नहीं बोलै इस बात पी..

अबीरा:- मैं जानती हूँ यह आसान नहीं होगा आपकी लिए खुद को प्रेपर करना..

मैं:- शायद!..

अबीरा 2 कदम यज्ञ ी...

अबीरा:- क्या आप मुझी क़बूल क्रय गए.?

मैं:- Hmmm...Woh तो क्र लिया hy...Lekin एक बात पॉच सकता हूँ.?

अबीरा:- आप जो कुछ मर्ज़ी पोछिए...

मैं:- तुम्हारे सामन्य पूरी ज़िन्दगी पारी ही कोई भी ाचा लड़का मिल जाये गए फिर यह क्यू.?

अबीरा न्य अपनी आंखें उप्पेर की और मेरी आंखों में देखती होइ बोली...

अबीरा:- मुझी कोई भी नहीं आप चाहिए जब सी अभी चोर क गए हैं मुझी न जाने क्या होगया ही बीएस हर वक़त मेरी डिल ो दिमाग पी आप छाए रेहटी हैं हर वक़त आपकी बारी में सोचना और आपसे नाराज़गी दूर करना बीएस यह hi सोचती thi..Mery पापा मुझी यहाँ सी लय क जाना चाहती थय लेकिन मेरा डिल नहीं चाहा क आपको चोर क जाओं....

मैं:- मैं तुम्ही डिल सी बेहेन मन था हमेशा बीएस उस बात को नहीं भुला सकता इतनी आसानी सी मैं बीएस कुछ समय चाहता हूँ टुमस्य क्या दी पाओ गई.?

अबीरा:- जितना समय चाहिए लय ली जिए...

मैं:- अभी अंकल की और तुम्हारी माँ की हालत ठीक नहीं तुम कुछ दिन क लिए घर चली जाओ उनके साथ मैं तुम्ही जल्द Hi लेनी ाओं गए...

अबीरा:- आप ए गए न.?

मैं:- भरोसा रखो अपने प्यार पी...

अबीरा:- एक बार आपकी गली लग सकती हूँ.?

मैं न्य अपनी बाहें पहला दी...

वह भाग क मेरी गली लग गई और कस क मुझी पाकर लिया...

कुछ 5 मं तक गली लगी रहंय क बाद वह अलग होइ और खुशु ख़ुशी नीची चली गई...

और फिर मैं भी नीची आज्ञा और फिर अबीरा अपने माँ बाप क साथ चली गई...

फिर कुछ ख़ास नहीं हुवा कुछ दिन यौन hi बेट गए मैं कॉलेज भी जाना शुरू क्र दिया था...

आज 1 महीना हो चूका था..

लाइफ फिर नार्मल रोटीने पी आ रही थी मैं कॉलेज जाना शुरू क्र दिया tha..Anjili और आएशा भी गाओं सी वापिस आ गई थीं और अक्षरा भी अपना पूरा ख्याल रख रही थी और सभी उसका ख्याल क्र रही थय..

शिखा भी अपने एक्साम्स की वजह सी पढ़ाई क्र रही थी और नूर और रत्न भी कॉलेज में थोड़ा बिजी थी...

मैं सुबह उठा और डेली रूटीन क्र कॉलेज की चला गया नूर और रत्न क साथ...

मुझी आज अबीरा को लेनी जाना था उसके घर सी इस लिए मैं कॉलेज सी जल्दी घर आ गया घर में बीएस माँ और अक्षरा hi थी..

मैं उनके पैसा जा क बेथ गया..

माँ:- आज जल्दी आ गए.?

मैं:- हाँ बीएस अबीरा को लेनी जाना ही आज...

माँ:- हाँ उसको भी जल्दी औ...

मैं:- हम्म O.k मैं त्यार होकय अत हूँ...

मैं कमरे में चला गया और 1 घण्टु बाद सब काम पूरा क्र क नीचु आज्ञा आज मैं काफी दिनों बाद ाच्य सी त्यार हुवा था और अपनी आंखों क लेंज़ उत्तरी थय और दरी बी सेट की थी

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फुल कमल लुक में नीची उत्तरा तो नीची रत्न और नूर अभी अभी कॉलेज सी ै hi थी....

जैसी Hi उनकी नज़र मुझपी पारी वह दोनों बीएस आंखें फर फर क देखि जा रही थी और उसी जगह खरी रहीं...

मैं उनकी पास गया और आंखों क सामन्य चटकी बजे..

मैं:- कहाँ खो गई.?

दोनों होश में ी...

रत्न:- क्यू लडकियोँ को ककल करनी ही ऐसी बाहिर जा क..

नूर:- कसम सी चश्मे बदूर लग रही हैं आप..

मैं:- अब इतना भी नहीं कुछ ख़ास लग रहा..

रत्न:- मैं कला टिका लगा दूँ किसी की नज़र न लग जाये..

और उसनी अपनी आंखों क काजल को मेरी गर्दन पी लगा दिया....

मैं हल्का सा किश उसके गाल पी किया और नूर को भी किश क्र क मैं बाहिर निकल गया...

और गेराज में जा क नई रेंज रोवर निकली

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और निकल गया H.M क घर क की तरफ...

कुछ देर में hi मैं वहां पोहंच गया और बाहिर सिक्योरिटी न्य मुझी रोक लिया..

मैं:- H.M सब सी कहो सैम आया ही..

सिक्योरिटी:- सॉरी सर तकलीफ क लिए मैं अभी वेरिफीय क्र क अत हूँ..

वह अंदर चला गया..

2मं बाद H.M खुद बाहिर आया मेरी पास मैं गारी सी बाहिर निकला और उनकी पेअर चुवे..

H.M:- सॉरी बीटा इनको नहीं पता था तुम कोण..

मैं:- कोई बात नहीं अंकल मैं वैसी भी पहली बार आया हूँ आपकी घर तो यह किसी जन्य गए..

अंकल:- यह गारी पार्क क्र दो और तुम औ Beta..Aur अन्य सी पेहली इन्फॉर्म भी नहीं किया..

मैं:- सोचा सरप्राइज दी दूँ..

हम घर क अंदर पोहंच गए वह मुझी लाउन्ज में लय गए और खुद आवाज़ देती हुवे बाहिर चली गए..

तभी मेरा फ़ोन बजा देखा तो M'Bua का कॉल था.

मैं:- Hello आगे हमारी याद..

बुआ:- याद उन को कृत्य हैं जिन को भूलती हैं हम हमेशा आपको याद कृत्य हैं..

मैं:- हम भी वैसी तबियत किसी ही और केसा ही मेरा बचा..

बुआ:- बिलकुल ठीक हूँ और आपकी बेटे का भी ध्यान रख रही हूँ..

मैं:- ाचा मीरा ज़रा मैं कहीं बाहिर आया हूँ घर जा क बात करता हूँ..

बुआ:- O.k Bye एंड लव यू..

मैं:- लव यू तू!..

फ़ोन सुत्त होगया तभी मुझी A'maa अबीरा Ab'bua और इशिका अति होइ नज़र ै..

मैं खरा होगया और यज्ञ भर क अबीरा की माँ और बुआ पाऊँ चुवाये..

Ab'bua:- किसी हो बीटा.?

मैं:- ाचा हूँ आप बताइये किसी हैं...

अबीरा और इशिका बीएस मुझी देखि जा रही थी..

अबीरा की चेहरी पी ख़ुशी और इशिका क चेहेरी पी अजीब सी बेबसी साफ़ नज़र आ रही थी..

A'maa:- बीटा बता क आजाती हम कुछ इंतज़ाम क्र लेती..

मैं:- नहीं आंटी कोई तकल्लुफ की ज़रूरत नहीं.. और बीएस अबीरा को लेनी आया हूँ अगर आपकी इजाज़त हो..

H.M:- बीटा हम क्यू रोकी गए बेटी अपने घर hi अछि लगती ही..

Ab'bua:- बिलकुल सही और बीटा तुम खुद hi ए बोहत ाचा लगा वर्ण यह तो बीएस तुम्हारा hi इंतज़ार करती रहती थी..

अबीरा न्य शर्म सी सर नीची क्र लिया और सब हसने लगी..

फिर थोड़ी देर इधर उधर की बातें क्र क मैं जाने की इजाज़त मांगी और अबीरा अपना सामान लेनी चली गई..

इस दुर्रन इशिका कुछ नहीं बोल रही थी बीएस या तो मुस्कुरा रही तजि फीका सा या मेरी तरफ बीएस देख रही थी...

खैर उन सब सी विदा लय हम लोग गारी में बेथ गए और मैं गारी ड्राइव करता हुवा एक झील क करीब रोक गया..

अबीरा:- क्या हुवा रोकी क्यू.?

मैं:- कुक्सह बात करनी ही प्लीज बाहिर आना.

मैं गारी सी उत्तरा और अबीरा भी मेरी पिच्य पिच्य आ गई..

मैं उसको साइड पी लय गया और उसका हाथ अपने हाथों में पाकर क उसको साडी सचाई बता दी..

जैसी सुन क उसकी चेरी पी अजीब सी ख़ुशी और शॉकेड क मिल्ली झुलय अस्सृत थय..

मैं:- अब तुम्ही जो भी मंज़ूर होगा वही मेरा भी फैसला होगा..

अबीरा:- मैं तो पेहली सी hi आपकी हो चुकी Hun..Aur मेरी मांग में आपके नाम का सिन्दूर ही..

मैं:- मैं कुछ समझा नहीं..

अबीरा:- जिस दिन बेहोश हुवे थय मैं आपको आपकी कमरे तक लय क जा hi रही थी क आपका हाथ एक लोही की चीज़ सी टकरा गया और आपकी अंगूठी सी खून निकलनी laga..aur जब मैं आपको बीएड पी लेतंय लगी तो आपका वह अंगूठा जो ज़ख़्मी था मेरी मांग में लगता हुवा उपजा हाथ नीची उत्तर गया और मैं उस वकत गुर नहीं क्र पाई ापमय सिवा कुछ नहीं दिख रहा था मुझी और मैं जब बाथरूम गई और मैनी यह देखा तो शॉक होगी और पानी सी अपणु मांग को साफ़ करनी लागि लेकिन जैसी hi पानी की मांग करीब लय क ै मेरा हाथ खुद hi रुक गया और मैं खूब रोने लगी फिर काफी देर बाद पापा ए और अपने साथ चली को कहा तो मेरा डिल देहल गया और मैं न्य उनको आपसी बात करनी को कहा..

मैं:- खुद क्यू नहीं ी.?

अबीरा:- हिम्मत नहीं होइ अन्य की अगर आप मन क्र देती तो मैं जीती जी मर जाती.. और आज आपकी लिए मेरा प्यार और बढ़ गया ही और मैं एसपी कभी दूर नहीं जाओं गई..

और वह मेरी गली लग गई और कस क मुझी पाकर liya..Thori देर बाद हम घर आ गए...

1 वीक ऐसी Hi निकल गया क्यू क मेरी कॉलेज क एक्साम्स हो रही थय वैसी तो मुझु इतना पढ़ना नहीं पारा लेकिन फिर भी मैं पढ़ाई क्र रहा था..

मैं अपना लास्ट एग्जाम दी क बाहिर निकला तो रत्न अभी बाहिर नहीं ै तजि आज नूर कॉलेज नहीं ी थी उसकी तबियत खराब थी..

मैं उसकी कैंपस में चला गया और कैंटीन की तरफ गया तो मेरी जान hi निकल गई क्यू क रत्न वहां बेथ क रू रही थी..

मैं भाग क उसकी पास गया और बोलै..

मैं:- क्या हुवा क्यू रू रही हो.?

रत्न अचानक चौंक गई और आंसूं साफ़ क्र मेरी तरफ देखती होइ मेरी गली लग गई और फिर टोने लगी...

तो बे कंटिन्यू...

नोट:- भाई लोगो आपकी लिए आज hi अपडेट लिख दिया ताकि आप नाराज़ न हूँ...
 
अपडेट NO.61


रत्न मेरे गली लगी रू रही थी और मैं परेशां हो रहा था क उसको क्या हुवा..

मैं:- क्या हुवा रू क्यू रही हो..

रत्न थोड़ा अलग होइ और भीगी आंखों सी मेरी तरफ देख क बोली..

रत्न:- मैने एक बात छपाई ही आपसी...

मैं:- वह जो भी हो पेहली रोना बंद करो प्लीज...

मैने अपने हाथों सी उसकी आंसूं साफ़ किये और एक लरकी को बोल क पानी की बोतल मंगवा ली..

रत्न न्य पानी पिया और फिर मैं उसको सीधा बिठा दिया...

मैं:- अब बोलो क्या बात ही.?

रत्न:- पेहली प्रॉमिस क्रय नातज़ नहीं होंगे..

मैं:- मैं भला अपनी जान सी क्यू नराज़ होंगे..

रत्न:- मैं न्य और बाबा न्य यह झूट बोलै था क हमारा कोई परिवार नहीं ही...

मैं कुछ नहीं बोलै बीएस उसकी तरफ देखता रहा..

रत्न:- देखा मुझी पता था आपको बुरा लगी गए..

मैने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और मुस्कुरा क बोलै..

मैं:- मुझी तो ख़ुशी ही तुम्हारा परिवार ही अगर यह बात काका न्य छुपाई उसकी कोई वजह होगी...

रत्न:- बोहत बरी वजह ही..

मैं:- क्या.?

रत्न:- मेरी बाबा की परिवार में मेरी बाबा उनके 2 भाई और उनकी 2 बेहेनी हैं मेरी बाबा सब्ज़ी बारी थय हम्र्य गाओं की दुश्मनी दोस्सरी गाओं सी चल रही ही जो क पिछली 70 सलून सी चल रही ही..

जब मेरी बाबा बारी हुवे और घर की ज़िमेदारी ुंपी ी तो उन्होंने यह दुश्मनी खतम करनी की कोशिश की बाबा कभी नहीं चाहती थय क वह और उनके किसी भी घर वळून को कोई भी खतरा हो..

लेकिन मेरी दोनों चाचा न्य ुणस्य बिलकुल उल्टा सोचा वह हमेशा सी दुश्मनी यज्ञ ब्रह्ना चाहती थय और उन्होंने किया भी ऐसा hi और एक दिन जब सब घर पर सू रही थय बोहत सी लोगों न्य घर पी हमला क्र दिया और दोनों क बिच बोहत लड़ाई होइ इस लारी में मेरी माँ मुझी बचती हुवाये अपनी जान गवा bethi...Mery बाबा को यह सदमा लगा लेकिन मेरी चाचा ुणस्य बदला लेनी क लिए कह रही थय उसी वक़त मेरी बाबा मुझी लय क शहर आ गए और फिर हम आपकी पापा क पास रहंय लगी..

मेरी वहां एक बेहेन काम सहेली भी थी जो क मस्र्य चाचा की बेटी ही उस सी मैं कुक्सह सलून बाद मिली थी फिर हम हर संडे को मिलती थय लेकिन जब इस बार वह मुझी मिली तो वह बोहत उदास थी..

क्यू क उसके पापा न्य उसका रिश्ता किसी गुंडे सी तय क्र दिया ही लेकिन उसनी दादा जी क साथ मिल क एक झूट बोल दिया क वह शहर में किसी सी प्यार करती ही और अब उसके पापा उस सी मिलना चाहती hain..Aur मैं उसके लिए कुछ नहीं क्र सकती..

रत्न फिर सी रोने लगी..

मैं यज्ञ भर क उसको गली लगाया और चुप करवाया..

मैं:- क्यू मदद नहीं क्र सकती एक काम होसकता ही..

रत्न खुश होती हुवाये..

रत्न:- क्या.?

मैं:- अगर हम तुम्हारी चाचा को लड़का दिखा दें और फिर वह तुम्हारी बेहेन क साथ सगाई क्र क सेहर लय ए फिर तुमहति बेहेन बाहिर परहंय चली जाये और घर झूट बोल्दै क मेरी उस सी लारी होगी ही और हम अलग होगये हैं और होसकता ही तब तक कोई और ाचा लड़का उसी मिल जाये...

रत्न:- वाओ ी लव यू... अपनी मेरी एनसीओं दूर क्र di..Lekin हम किसी उसके साथ भेजी गए.?

मैं:- देख लय क कोई न कोई मिल जाये गए...

रत्न:- ऐसा कोई जो मेरी चाचा को झेल पाए ऐसा तो बीएस एक hi ही..

मैं:- कोण.?

रत्न मेरी तरफ देखती होइ मुस्कुरा दी...

मैं:- नहीं नहीं कोई और मैं नहीं...

तभी रत्न न्य मुँह लटका लिया..

मैं:- प्लीज न..

रत्न:- आप मेरी लिए इतना नहीं क्र सकती.?

मैं:- गम सब मेरी जान लय रहो गई...

रत्न:- मैं कल hi उसको बुलाती हूँ..

तभी वह मेरी गली लग गई और मेरी गाल पी किस्सेस की बौछार लगा दी...

मैं:- सब देख रही हैं...

रत्न:- देखनी तो मेरा पति है जो मर्ज़ी करों..

मैं:- और तुम अपने पति को किसी और का B.F बना क भेज रही हो...

रत्न मुझी फिर सी हुग क्र क बेथ गई हम वहां सी निकल क घर आ गए..

जब हम घर पोहंच तो सब बाहिर Hi बैठी थय इशिका भी ी होइ थी..

मैं:- Hi क्या बात ही साब ऐसी क्यू बैठी हो.?

माँ:- तेरा hi इंतज़ार क्र रही है.?

मैं:- मेरा.? वह क्यू.?

तनीषा:- सब को शोपिंग पी जाना ही..

मैं:- ओहहक तभी वेट हो रहा ही कोई बात नहीं चलती हैं..

तनीषा:- आप फ्रेश होजाइये फिर चलती हैं...

मैं रूम में जा क नहाया और कापरी चेंज क्र क नीची आ गया और सब को मॉल लय गया..

और सभी जाती hi लूट मार शुरू क्र दी मतलब शोपिंग...

मैं जा क रेस्टुरेंट सी एक आइस क्रीम शकर लय आया और पिता हुवा लेडीज सेक्शन में चला गया वहां इशिका एक ड्रेस डीडे करनी में बिजी थी यभी मेरी नज़र क्र एक डफेस पी गई मैं न्य वह ड्रेस जा क पाकर और इशिका क हाथ में रख दी और यज्ञ चला गया..

वह मेरी तरफ देखनी लगी और हलकी सी मुस्कुराहट क साथ ट्रेल रूम की तरफ चली गई..

इधर मैं जब यज्ञ आया तो नूर को ट्रेल रूम में जाती देखा तो मैं भी चुपके सी उसकी पिच्य घुस गया..

उसको जब यह एहसास हुवा कोई पिच्य ही वह चीकनी लवी मैनी उसकी मुँह पी हत्ब फख दिया जैसी hi उसनी मुझी देखा सांस में सांस ी उसकी..

मैने हाथ पिच्य क्र दिया..

नूर:- द्र दिया अपनी मुझी और आप यहाँ क्यू ए हैं कोई देख लय गए. आप जाओ बाह....

इस सी पेहली वह कुछ बोलती मैं न्य उसी होंठ अपने होंठों में कैद क्र दिए...

5 मं बाद हम अलग होवै..

मैं:- कितना बोलती हो...

नूर:- तेह ाचा तरीका ही चुप करवानी का ऐसी तो मैं और बोलूं गई आगे रू....

मैं न्य फिर सी किश शुरू क्र दी फिर इस बार जब दरवाज़ा नॉक हुवा हम अलग हुवाये..

बाहिर सी अंजलि की आवाज़ थी..

अंजलि:- नूर कब सी तरय क्र रही ही..

नूर:- हाँ बीएस ी...

फिर मुझज पिच्य क्र क..

नूर:- अब जाओ...

मैं भी मुस्कुरा क क सब की नज़रूँ सी बच क निकल गया बाहिर...

मैं तनीषा क पास चला गया मैं उसकी तरफ जा hi रहा था क किसी न्य मेरा हाथ पाकर क ुसपय कुछ रख दिया..

मैं न्य देखा तो तेह एक जैकेट थी और यह इशिका न्य राखी थी...

मैं हल्का सा मुस्करा क उसकी तरफ देखा वह बिलकुल मेरी तर्हां यज्ञ को चलती गई एक नज़र मुझी देख क मुस्कुरा क चली गई...

मैं जैकेट लय तनीषा क पैसा आ गया..

मैं:- किसी ही.?

तनीषा:- बोहत अछि hy...kis न्य लय क दी..

मैं:- खुद hi ली ही अब हमारी जान तो अपनी शोपिंग में बिजी हैं...

तनीषा न्य मुस्कुरा क एक हल्का सा थापर मेरी मुँह पी मारा और फिर शोपिंग करनी में लग गई..

करीब शाम क 6 बाजी हम घर पोहंची आज मौसम भी बोहत खराब सा था कभी भी बारिश शुरू होसकती थी...

हम घर पोहंच गए तो अबीरा न्य बोलै आप इशिका को घर चूर ए गए.?

मैं:- हाँ क्यू नहीं...

मैं इशिका क साथ गारी में बेथ क निकला hi था क बारिश शुरू होगी..

हम दोनों चुप thy...phir इशिका न्य Hi चुप तूरी..

इशिका:- तुमनी वह ड्रेस क्यू ली मेरी लिए.?

मैं:- मुझी लगा तुम्ही पसंद ए गई..

इशिका:- मुझी तो बोहत अछि लगी वैसी चॉइस अछि ही तुम्हारी...

मैं:- तुम्हारी भी अछि ही...

इशिका मेरी तरफ देखनी लगी..

मैं:- चॉइस जैकेट अछि थी..

इशिका:- ओह्ह हाँ...

अभी वह कुछ और बोलती तभी उसका फ़ोन बजा.. उसनी पिक किया..

इशिका:- Hello जी माँ...

****

इशिका:- क्या किसी मैं अभी आ रही हूँ...

फोबे कट..

मैं:- आल O.k.?

इशिका:- बुआ की तबियत बोहत खराब ही उनको बोहत तीज फीवर ही और पापा भी घर नहीं हैं..

मैं:- Don't वोर्री हम बीएस पोहंच गए बीएस..

मैं गारी तीज चलनी लगा हम 5 मं में उनके घर पोहंच गए बारिश बोहत तीज होरही थी जिसकी वजह सी लाइट ऑफ होगी थी हम घर क अंदर गए तो सामन्य hi दोनों बैठी थी A'maa क चेरी पी परेशानी साफ़ थी..

हम उनकी पास गए और उनको चेक किया तो वाक़ई फीवर हाई था..

मैं:- आपको होस्पिगल लय क जाना होगा..

Ab'bua:- नहीं बीटा ठीक हूँ मैं..

मैं:- अरे नहीं हम चलती हैं इशिका तुम आंटी क साथ घर hi रहो मैं हॉस्पिटल लय क जाता हूँ..

इशिका:- ठीक ही..

मैं बुआ को गारी में बिठा हॉस्पिटल लय गया हर तरफ पानी hi पानी था..

हम हॉस्पिटल चली गए डॉक्टर ु को अंदर लय गई...

फिर 20 मं बाद बाहिर ी..

मैं:- She's आल राइट..

डॉक्:- यह बूत..

मैं:- बूत व्हाट.?

डॉक्:- यह उनकी बॉडी की हीट ही no उनकी ब्रेन को इफ़ेक्ट क्र रही ही..

मैं:- मतलब.?

डॉक्:- मतलब क्या उनके पति ज़िंदा हैं.?

मैं:- नहीं वह 15 साल पेहली hi...

डॉक्:- अभी तो इन्हेक्शन दी दिया ही फिर सी प्रॉब्लम होइ तो फिर इन्हेक्शन लगा दूँ गई..

मैं:- कोई सलूशन.?

डॉक्:- रेडके हेर हीट थे ओनली सलूशन फॉर थिस प्रॉब्लम..

डॉक् चली गई...

मैं उनको लय क गारी में बेथ गया लेकिन हम अभी रस्त्य में hi थय क ट्रैफिक जाम होगी हर तरफ पानी hi था बीएस...

मैं:- हम फास गए अब तो...

Ab'bua:- अब जय करें.?

मैं:- यह ट्रैफिक तो सुबह तक hi खुली गए बारिश बोहत तीज होरही ही अगर आप बुरा न मान्य तो कुछ बोलूं..

Ab'bua:- मैं क्यू बुरा मनो गई बोलो..

मैं:- किसी होटल में आज की रात गुज़र लेती hain..Apki तबियत भी नहीं ठीक...

Ab'bua:- जैसी तुम ठीक समझो..

मैं गारी को हल्का हल्का लय जा क एक होटल क सामन्य रोक दी लेकिन पार्किंग फुल थी मैं न्य गारी बाहिर hi खरी क्र दी और हम बाहिर निकली और होटल की तरफ गए तो हम फुल गिल्ले होगये थय...

मैं रिसेप्शन पी गया..

मैं:- एक्सक्यूज़ में 2 रूम्स प्लीज...

रेस:- सॉरी सर इस वक़त एक Hi रूम खली ही..

मैं न्य Ab"bua की तरफ देखा उन्होंने आंखों सी एक hi रूम लेनी की इजाज़त दी दी...

मैं चेक इन क्र रूम की तरफ चला दिया Ab'bua ठंड सी कांप रही थी..

मैं रूम में आ क उनको बिठाया और वॉर्डरोब सी निघ्त्य निकल क Ab'bua को दी और उनको बाथरूम में चेंज करनी लिए भेज दिया मैं न्य भी अपनी गिली ककपरी उत्तर क एक ट्रॉउज़र और शर्ट जो क मैं न्य ुणस्य माँगवा ली थी पेहेन ली...

Ab'bua अभी बी कम्प रही थी मैं उनको बिस्तर तक लय आया और उनकी उप्पेर ब्लैंकेट दाल दिया और खिरकी बांड क्र दी रूम में हीटर नहीं था...

मुझ उनकी फ़िक्र होने लगी...

मैं:- बुआ जी आईएम सॉरी लेकिन मुझी यह मजबूरी में करना पार रहा ही आपकी जान सी ज़्यादा कुछ नहीं ही...

Ab'bua कम्पटी हुवे मुझी देखनी लगी..

मैं अपनी शर्ट निकल क उनके ब्लैंकेट में घुस गया और उनको अपने साथ छपिता लिया और उनको अपने जिस्म की हीट देंय लगा...

मैं अपना जिस्म उनके जैसी रैगर रहा था उनका एक हाथ मेरी कमर पी और एक मेरी झंगोक पी था..

थोड़ी देरी में रूम में गफमी पैदक होगी बुआ क हाथ मेरी झांगू पी चलनी लगा और वह मेरी आंखों में देखनी लगी..

मैं भी उनकी आंखों में देखनी लगा फिर अचानक बुआ न्य मुझी किश करना शुरू क्र दिया और अपना हाथ मेरी लुंड पी गई मैं पेहली शॉक था फिर जो होगा देखि जाये गई यह सोच मैं भी उनका साथ देंय लगा...

फिर हमारी जिस्म क सारी कापरी अलग होगये उनकी बरी बरी चूचियों को मैं मुँह में लय क चूसनी लगा बुआ क मुँह सी सिसकियाँ निकलनी लगी..

मैं न्य उनको बीएड पी सीधा लिटा दिया और अपना लुंड उनकी छूट पी सेट क्र दिया..

मैं:- क्या आप इसकी लिए त्यार हैं.?

Ab'bua:- हाँ बोहत टर्पी हूँ प्लीज और मत तरपओ प्लीज..

मैं न्य भी देर न कृत्य हुवे लुंड छूट में डालना शुरू क्र दिया उनके मुँह सी दर्द और माज़ी दोनों की चीखें निकलनी लगी जब लुंड उनको चोइट में गया ऐसा लग रहा था गरम लोही की भाटी में फल दिया ho..Mujhy एक अलग hi मज़ा रहा था मैं फुल जोश सी उनको चूड रहा था और उनकी चूचियों को चूड और काट रहा था...

करीब 30 मं की चुदाई क बाद मैं उनकी अंदर hi झा क उनकी ऊपर लेट गया बुआ न्य मेरी पथ को अपनी हाथों में पाकर लिया कस और मेरी हाथ झन्णी लगी..

कुछ देर बाद मैं अलग हुवा तो वह सू चुकी thi..shayad इग्ण्य दिनों बाद वह सकूं पा सकीय थीं..

मैं भी उनकी साइड में hi सू गया...

तो बे कंटिन्यू..
 
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