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अपडेट NO.34
करीब 10 मं बाद मैं नार्मल हुवा और बुआ क साइड में लेट गया और एक हाथ कमर में दाल क लेट गया..
मैं:- मज़ा आया.?
बुआ शर्मा म मुँह मेरे सीने में छुपा लिया..
मैं:- अरे वह आप शर्माती बी हो... बातो न..
बुआ न्य थोड़ा मुँह ऊपर किया और मेरी आंखों में देखनी लगी..
बुआ:- जब तेरे साथ होती हूँ तो बोहत ाचा लगता अब जब टोने मुहझि जवान का सुख दिया ही तो ाचा तो लगी गए न मैं बता नहीं पाऊँ गई लेकिन एक वडा क्रय गए.?
मैं:- बोलिये..
बुआ:- मैं तेरी बची जो जनम देना चाहती हूँ..
मैं:- दुनया को क्या कहो गई.?
बुआ:- दुनिया की नज़र में वह मेरी पति का बचा होगा....
मैं:- ठीक ही जैसी आप खुश...
बुआ मेरी गली लग गई..
बुआ:- ी लव यू आज सी और अभी सी आप मेरी पति हैं दुनिया की नज़रों में नहीं लेकिन यह डिल हमेशा आपके लिए धारकी गए. .
मैं:- चलो अब रेडी हो जाओ घोयनमनाय चलती हैं..
बुआ:- हम्म्म...
फिर हम नहंय बाथरूम में चली गए वहां बुआ और मेरी बिच एक और राउंड होवा..
फिर हम नाहा क नीचे लॉबी में आ गए वहां अक्षरा और M'P पेहली सी इ खरी थय ..
हम उनके पास गए..
मैं:- सो रेडी कहिये कहाँ जाना ही.?
बुआ:- कहीं बी जहाँ का नज़ारा बोहत ख़ूबसूरत हो.
हम लोग वहां सी टैक्सी लय क निकल गए घूमने स्विज़रलैंड की हस्सें वादियोँ और ठंडी हवा में हमे बोहत मज़ा आ रहा था
बुआ और M'P(Meera पति) और मैं और अक्षरा रक साथ थय अक्षरा मेरी बहून में बाहें दाल क चल रही थी..
मैं:- अक्षरा जी ऐसी मत कीजिये अगर कुछ होगया गलत तो.?
अक्षरा:- जो बी होगा आपके साथ होगा और आपके साथ जो बी होगा मंज़ूर होगा..
मैं:- देख लीजिये..
अक्षरा:- एक बात पॉचों.?
मैं:- जी पोछिए..
हम एक बेंच पी बैठी थय अक्षरा मेरी सी चिपक क बैठी थी..
अख्सरा:- मैं आपसे शादी तो नहु क्र सकती लेकिन क्या मैं आपके बची की माँ बन सकती हूँ आपकी निशानी चाहिए मुझी..
मैं पेहली तो देखता रहा फिर मान में अदि को याद किया..
मैं:- अदि...
अदि:- जी भाई बोहत दिनों बाद याद किया..
मैं:- हाँ यर यर्ह बुआ और अक्षरा जो कह रही हैं क्या वह सही है.?
अदि:- भाई आपकी मर्ज़ी ही वैसी कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी..
मैं:- लेकिन मैं सब को क्या बताओं गए.?
अदि:- भाई हर बात बतानी ज़रूरी नहीं होती आपकी बुवियोँ को आप पी यकीन ही बीएस आपको बी उनके प्यार पी यकीन करना चाहिए...
मैं:- ठीक ही अदि..
मैं आंटी सी...
मैं:- जैसी आप कही..
अक्षरा न्य कस क गली लगा लिया मुझी..
आपको अक्षरा बी बारी में बता दूँ उनकी उम्र करीब 30 32 साल होगी जिस्म को मैंटेन क्र क रखा ही आज बी कोई देख लय तो पागल होजायर ऐसा फिगर ही अक्षरा का..
हम घूम फिर क होटल आ गए..
कमरों में जा क फ्रेश हुवी अक्षरा नहाने चली गई मैं न्य खाना कमरे में hi मंगवा लिया..
अक्षरा नाहा क बाथरूम सी बाहिर ु तो जिस्म पी सर्फ निघ्त्य थी खुली गिल्ले बाल ुणस्य टपकता पानी क़यामत ध रही थी
भाइयोँ एक बात तो माने वाली ही जब कोई लड़की नाहा क अति ही तो जी करता ही रैगर क रख दी जिस्म सी गुरति पानी बूंदे सीधा डिल में ूआरटी हैं..
मैं अक्षरा को घूरता रहा...
अक्षरा शर्मा गई..
मैनी उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ khicha..Woh मेरी गॉड में बेथ गई..
मैं:- केहर ध रही हौं आप यह हुसैन पागल क्र दी गए मुझी...
अक्षरा:- यह तान और मान बीएस आपका ही...
मैनी अपने होंठ अख्सरा क होंठो पी रख दिए.. नरम नरम होंठों का रस पीने में बोहत मज़ा आ रहा था मैनी अपनी जुबां अक्षरा क मुँह में दाल दी वह बी चूसने लगी उसनी बी अपनी जुबां मेरे मुँह में दाल दी..
मैं न्य अपना एक हाथ अख्सरा क बूब्स पी रख दिया बुआ क मुक़ाबले अक्षरा क बूब्स छूती थय लेकिन बोहत नरम थय मुझी बोहत मज़ा आ रहा था दबाने में मैनी एक हाथ सी निघ्त्य की गिरा खोल दी किश कृत्य हुवे hi निघ्त्य खोल दी..
मैनी अक्षरा की गर्दन को लीक करना शुरू क्र दिया और नीचे बूब्स तह आ गया क्या बूब्स थय दूध की तर्हां सफ़ीद और ऊपर कला निप्पल मैनी मुँह में भर लिया और फिर अक्षरा की छूट छाती वह तो जैसी पागल इ हो गेन थी
अक्षरा:- अह्ह्ह्हह क्या हो रहा ही अह्हह्ह्ह्ह और चूसो खा जावूओ अह्ह्ह्हह्हह...
मैं न्य अपना लुंड छूट पी सेट किया और किश कृत्य हुवे लुंड को छूट में दाल दिया अक्षरा को कदर दर्द पेहली तो काम लेकिन जब दोस्सरे ढाका मारा तो उसकी एक ज़ोर दर चीख निकल गई और आंखों सी आंसू बी निकल गए...
40 मं की धुवां दर चुदाई होइ अक्षरा की तो हालत खराब हो गई..
मैं उनको उठा क बाथरूम लय गटा वह 10 मं में फ्रेश होकय बाहिर ी मैं बी फ्रेश हो क बाहिर आज्ञा..
लेकिन अक्षरा अभी बी ऐसी बैठी थी..
मैं:- आप ने कपड़े क्यू नहीं पहने.?
अक्षरा:- आप ने कहा इ नहीं मुझी लगा आप को अभी और करना ही....
मैं:- नहीं आपकी हालत पेहली खराब हो गई ही..
अक्षरा:- आपके सामने तो कोई बाज़ारो बी हर मान लय...
मैनी निघ्त्य उठाई और अक्षरा पहना दी और माथे पी किश क्र क पास बेथ गया खाना ठंडा होगया था..
मैं:- दोस्सरे मंगवा लय.?
अक्षरा:- नहीं खाना वास्ते हो जाये गए खा लेती हैं लेकिन फिर बी मंगवाना ही तो मंगवा लीजिये..
मैं:- नहीं हम यह hi खाये गए..
हम दोनों न्य खाना ख्य और अक्षरा को बहून में भर क सू गए...
सुबह मेरी आंख थोड़ी देर सी खुली मैं फ्रेश होवा अक्षरा पेहली इ उठ चुकी थी वह थोड़ा सा लंगड़ा क चल रही थी..
मैं:- क्या हुवा.? ऐसी क्यू चल रही हैं..
अक्षरा मुस्कुराई और बोली..
अक्षरा:- जैसी आपको पता hi नहीं..
मैनी रक पैन किलर अक्षरा को दी और बुआ क कमरे में जा क नाश्ता किया फिट हम घूमने चली गए हम एक हिल पी थय मैनी बुआ हाथ पाकर क पीछे खेंचा और पत्थर क पीछे लय गया और जाती इ किश करनी लगा और बूब्स को प्रेस करने लगा
बुआ:- कोई आ जायर गए होटल जा क जितना करना ही क्र लेना..
मैनी कुछ नहीं बोलै और लगा रहा फिर बुआ न्य विरोध करना बंद क्र दिया और मेरा साथ देने लगी..
अचानक बुआ न्य मुझी ढाका दिया और सीधी खरी सेहम गई..
मैनी पीछे देखा तो अक्षरा खरी थी..
मैने कुछ नहीं बोलै और बुआ को जैसी हालत खराब हो गई थी..
मैने अक्षरा को हाथ पकड़ा और अपने पास खिंच लिया और किश करने लगा वह बी मेरा साथ देने लगी बुआ आंखें फर फर क यह सन देख रही थी..
मैं अलग हुवा और बुआ की तरफ देखा..
मैं:- क्या हुवा बुआ दर व गई यह बी आपकी hi तर्हां हैं..
और आंख मर di..Aur बुआ का बी हाथ पकट लिया और खेंच लिया..
बुआ और अक्षरा दोनों मेरी गली लगी होइ थीं
मैं:- अब चलो होटल जा क क्रय गए जो करना ही..
फिर वहां घूम फिर क हम होटल चले गए होटल जाती hi दोनों की एक साथ जैम क चुदाई की दोनों की हालत खराब क हम सू गए...
आफ्टर 1 वीक
इस पूरे हफ्त्य में दोनों की जैम क चुदाई की आज हम वापस जा रही थय करीब शाम क 5 बाजी हम लोग घर पोहंचे पेहली बुआ को घर छोरा उन्हों ने रोकने को कहा लेकिन मैनी मन क्र दिया और हम घर की तरफ आ gai.Akshra को बी साथ लय आया घर..
मैने दूर नॉक किया और अंजलि न्य दरवाज़ा खोला मुझु देखती इ फ़ौरन गली लग गई .
मैं:- ी मिस यू मेरी जान..
अंजलि:- आईएम मिस यू तू एंड ी लव यू...
मैं:- ी लव यू तू...
मैं अंजलि को छोरा और अक्षरा को अंदर लय क अंदर आ गया वह बी चुप चाप अंदर आ गई सब बाहिर हॉल मरीन बैठी थय..
शिखा:- भैया...
वह भगति होइ आ क गली लग गई..
मैं बी नीची बेथ क उसको हुग क्र लिया..
मैं:- किसी ही मेरी गुड़िया .
शिखा:- अब आप आ गई तो अछि hi हों गई...
मैं सब को गली मिला.. पापा न्य पॉच लिया...
पापा:- बीटा यह कोण हैं.?
मैं:- पापा वह बात यह ही क..
फिर साडी कहानी बता दी अक्षरा की माँ न्य उनको गली लगाया..
माँ:- आज सी तुम यहीं रहो गई मेरी बेहेन बन क
अक्षरा न्य बी माँ को गली लगा लिया..
अक्षरा:- दीदी...
फिर अक्षरा को कमरा दिखा दिया और मैं बी अपने कमरे आ गया और फ्रेस होने चला गया बाहिर आया तो मेरी डिल की फरकन सामने कापरी निकल रही थी बैग सी..
मैनी उसको पीछे सी गली लगा लिया और सर उसकी कंधी क रख क दिया लेकिन मैं कुछ नहीं बोल रहा था..
तनीषा:- क्या हुवा आप ठीक तो हैं..
उसने हाथ मेरी मुँह पी रख तो फ़ौरन प्लाट गई..
इस वकत मेरी आंखों में अनसूब थय..
तनीषा तो जैसी पागल इ हो गई thi..usnay मेरी हाथ पाकर लिए आंसूं पोछने lagi..Aur खुद बी रोने लगी..
तनीषा:- क्या हुवा क्यू रू रही हैं प्लीज चुप हो जाइये क्या मुझसी गलती होइ कोई प्लीज चुप हो जाइये.
मैने कुछ नहीं बोलै और उसकी आंखों सी आंसूं साफ किये और गली लगा लिया..
मैं:- बोहत मिस किया तुमसे दूर नहीं रह सकता यह टुमस्य दूर रह क पता चला..
तनीषा:- दूर कहाँ थय हर वक़त मेरी डिल में बीएस आप hi थय हर वक़त आप मेरी साथ थय और होते हैं..
मैं:- नहीं नहीं हूँ तुम्हारी इस प्यार क मैं काबिल तुम्हारी पवित्र प्यार क सामने मेरा यह नापाक प्यार....
तनीषा न्य मेरी मुँह पी हाथ रख दिया तकरीबन चिल्लाते होवय बोली..
तनीषा:- खबरदार जो मेरी प्यार को नापाक कहा तो यह प्यार मेरी रूह सी बी पाक ही अरे दुनिया ट्रस्टी ही ऐसी प्यार और प्यार करने वाली को जो खुदा न्य मुझी दिया ही आपको हमेशा ऐसा क्यू लगता ही आप हमारी साथ धोका क्र राहय हैं धोका वह होता जो पीठ पीछे कृत्य हैं वह नहीं जो आप बता क्र कृत्य हैं आपका प्यार सब क लिए है हमारा अकेली किसी का बी नहीं ही..
और वह मेरी सीने लग क रोने लगी...
मैनी उसकी पीठ को सहलाया और हम बीएड पी बेथ गई..
मैं:- आईएम सॉरी रोना बंद करो प्लीज..
तनीषा:- पेहली वडा क्रय आज क बाद ऐसी बात नहीं क्रय गए..
मैं:- बिलकुल नहीं करूं गए प्रॉमिस..
तनीषा फिर सी गली लग gai..Aur फिर उसको अलग किया और उसकी आंखों में देखनी लगा..
तनीषा:- सच में इतना मिस किया..
मैं:- बोहत बता नहीं सकता..
तनीषा मुस्कुरा दी. मैनी उसके डिंपल पी किश क्र दिया..
मैं:- सब सी ज़्यादा इसको मिस किया..
तनीषा:- इसने बी बोहत मिस किया आपको..
मैं:- ाचा जी.. एक चीज़ लाया हूँ..
मैने एक ताजमहल का सैंपल निकला और तनीषा को दिया..
मैं:- यह ही तो छोटा पर मेरी प्यार को जतनी क लिए बोहत ही..
तनीषा न्य उसको पकड़ा और किश क्र क हमारी फोटो जो साइड टेबल पी पारी थी उसके साथ रख दिया..
तनीषा:- आपको पता ही सब सी ज़्यादा मिस मैने अपनी मॉर्निंग कॉफ़ी को किया..
मैं:- अरे अब नहीं क्रय गई अब आपके यह सेवक आ गए हैं ना..
Tanisha(muskurate हॉवे.):- हाँ तुम्हे उसकी कसार पूरी तो करनी पारी गई..
तनीषा हल्का सा मेरा करीब ी और अपने गुलाबी पंखुरी जैसी होंठ मेरी होंठो पी रख दिया..
किश करने का एहसास जो अपनी बीवियों क साथ अत था वह किसी को बी नहीं अत था अलग इ दुनिया मैं चला जाता था..
10 मं बाद अलग हुवाये हम..
मैं तनीषा की गॉड में सर रख क लेट गया वह मेरे सर को सहलाने लगी..
मैं:- अक्षरा जी क बी मामले को देखना ही अभी मुझी..
तनीषा:- अभी दुनिया की बातों को छोड़िये. और आराम कीजिये..
मैने अपना हाथ तनीषा की गर्दन पी रखा और नीचे झुका क उसकी होंठ को चूमा और अलग क्र दिया..
तनीषा:- यू अरे सो नॉटी..
मैं:- अब जिसकी बीवी इतनी ख़ूबसूरत हो नॉटी तो बनानी होगा न..
तनीषा न्य मेरी नाक की पाकर क भींच दिया और उसपे किश क्र दिया..
वह ऐसी इ सर सेहलानी लगी और हम एक दोस्सरी की आंखों में देखने लगी पता इ नहीं चला कब मेरी आंख लग गई.. मैं अभी बीएस ट्रॉउज़र में इ लेता हुवा था सोनक बाद माँ कमरे में खाने क लिए बुलानी ए..
माँ:- तुम दोनों ए नहीं कब सी आवाज़..
तनीषा:- शठ माँ सू रही हैं यह...
माँ:- सोने सी पेहली कापरी तो पूरे पहना देती..
तनीषा:- थकी हुवे थय न तो सू गए..
माँ:- चल तो खा लय..
तनीषा:- नहीं आप खा लो मैं यहीं बैठी हूँ...
माँ न्य तनीषा क सर पी हाथ फेरा और मेरे माथे पी किश क्र क चली गई..
मैने सट्टे हुवे एक ऐसा नज़ारा देखा जिससे देख क मेरी हालत खराब होगी और मैं चिल्लाए क उठ गया
Nahiiiiiiiiiii........
नोट:- भाई थैंक्स फॉर थे फर्स्ट सेंचुरी सपोर्ट बनाये रखिये ऐसी hi..
करीब 10 मं बाद मैं नार्मल हुवा और बुआ क साइड में लेट गया और एक हाथ कमर में दाल क लेट गया..
मैं:- मज़ा आया.?
बुआ शर्मा म मुँह मेरे सीने में छुपा लिया..
मैं:- अरे वह आप शर्माती बी हो... बातो न..
बुआ न्य थोड़ा मुँह ऊपर किया और मेरी आंखों में देखनी लगी..
बुआ:- जब तेरे साथ होती हूँ तो बोहत ाचा लगता अब जब टोने मुहझि जवान का सुख दिया ही तो ाचा तो लगी गए न मैं बता नहीं पाऊँ गई लेकिन एक वडा क्रय गए.?
मैं:- बोलिये..
बुआ:- मैं तेरी बची जो जनम देना चाहती हूँ..
मैं:- दुनया को क्या कहो गई.?
बुआ:- दुनिया की नज़र में वह मेरी पति का बचा होगा....
मैं:- ठीक ही जैसी आप खुश...
बुआ मेरी गली लग गई..
बुआ:- ी लव यू आज सी और अभी सी आप मेरी पति हैं दुनिया की नज़रों में नहीं लेकिन यह डिल हमेशा आपके लिए धारकी गए. .
मैं:- चलो अब रेडी हो जाओ घोयनमनाय चलती हैं..
बुआ:- हम्म्म...
फिर हम नहंय बाथरूम में चली गए वहां बुआ और मेरी बिच एक और राउंड होवा..
फिर हम नाहा क नीचे लॉबी में आ गए वहां अक्षरा और M'P पेहली सी इ खरी थय ..
हम उनके पास गए..
मैं:- सो रेडी कहिये कहाँ जाना ही.?
बुआ:- कहीं बी जहाँ का नज़ारा बोहत ख़ूबसूरत हो.
हम लोग वहां सी टैक्सी लय क निकल गए घूमने स्विज़रलैंड की हस्सें वादियोँ और ठंडी हवा में हमे बोहत मज़ा आ रहा था
बुआ और M'P(Meera पति) और मैं और अक्षरा रक साथ थय अक्षरा मेरी बहून में बाहें दाल क चल रही थी..
मैं:- अक्षरा जी ऐसी मत कीजिये अगर कुछ होगया गलत तो.?
अक्षरा:- जो बी होगा आपके साथ होगा और आपके साथ जो बी होगा मंज़ूर होगा..
मैं:- देख लीजिये..
अक्षरा:- एक बात पॉचों.?
मैं:- जी पोछिए..
हम एक बेंच पी बैठी थय अक्षरा मेरी सी चिपक क बैठी थी..
अख्सरा:- मैं आपसे शादी तो नहु क्र सकती लेकिन क्या मैं आपके बची की माँ बन सकती हूँ आपकी निशानी चाहिए मुझी..
मैं पेहली तो देखता रहा फिर मान में अदि को याद किया..
मैं:- अदि...
अदि:- जी भाई बोहत दिनों बाद याद किया..
मैं:- हाँ यर यर्ह बुआ और अक्षरा जो कह रही हैं क्या वह सही है.?
अदि:- भाई आपकी मर्ज़ी ही वैसी कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी..
मैं:- लेकिन मैं सब को क्या बताओं गए.?
अदि:- भाई हर बात बतानी ज़रूरी नहीं होती आपकी बुवियोँ को आप पी यकीन ही बीएस आपको बी उनके प्यार पी यकीन करना चाहिए...
मैं:- ठीक ही अदि..
मैं आंटी सी...
मैं:- जैसी आप कही..
अक्षरा न्य कस क गली लगा लिया मुझी..
आपको अक्षरा बी बारी में बता दूँ उनकी उम्र करीब 30 32 साल होगी जिस्म को मैंटेन क्र क रखा ही आज बी कोई देख लय तो पागल होजायर ऐसा फिगर ही अक्षरा का..
हम घूम फिर क होटल आ गए..
कमरों में जा क फ्रेश हुवी अक्षरा नहाने चली गई मैं न्य खाना कमरे में hi मंगवा लिया..
अक्षरा नाहा क बाथरूम सी बाहिर ु तो जिस्म पी सर्फ निघ्त्य थी खुली गिल्ले बाल ुणस्य टपकता पानी क़यामत ध रही थी
भाइयोँ एक बात तो माने वाली ही जब कोई लड़की नाहा क अति ही तो जी करता ही रैगर क रख दी जिस्म सी गुरति पानी बूंदे सीधा डिल में ूआरटी हैं..
मैं अक्षरा को घूरता रहा...
अक्षरा शर्मा गई..
मैनी उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ khicha..Woh मेरी गॉड में बेथ गई..
मैं:- केहर ध रही हौं आप यह हुसैन पागल क्र दी गए मुझी...
अक्षरा:- यह तान और मान बीएस आपका ही...
मैनी अपने होंठ अख्सरा क होंठो पी रख दिए.. नरम नरम होंठों का रस पीने में बोहत मज़ा आ रहा था मैनी अपनी जुबां अक्षरा क मुँह में दाल दी वह बी चूसने लगी उसनी बी अपनी जुबां मेरे मुँह में दाल दी..
मैं न्य अपना एक हाथ अख्सरा क बूब्स पी रख दिया बुआ क मुक़ाबले अक्षरा क बूब्स छूती थय लेकिन बोहत नरम थय मुझी बोहत मज़ा आ रहा था दबाने में मैनी एक हाथ सी निघ्त्य की गिरा खोल दी किश कृत्य हुवे hi निघ्त्य खोल दी..
मैनी अक्षरा की गर्दन को लीक करना शुरू क्र दिया और नीचे बूब्स तह आ गया क्या बूब्स थय दूध की तर्हां सफ़ीद और ऊपर कला निप्पल मैनी मुँह में भर लिया और फिर अक्षरा की छूट छाती वह तो जैसी पागल इ हो गेन थी
अक्षरा:- अह्ह्ह्हह क्या हो रहा ही अह्हह्ह्ह्ह और चूसो खा जावूओ अह्ह्ह्हह्हह...
मैं न्य अपना लुंड छूट पी सेट किया और किश कृत्य हुवे लुंड को छूट में दाल दिया अक्षरा को कदर दर्द पेहली तो काम लेकिन जब दोस्सरे ढाका मारा तो उसकी एक ज़ोर दर चीख निकल गई और आंखों सी आंसू बी निकल गए...
40 मं की धुवां दर चुदाई होइ अक्षरा की तो हालत खराब हो गई..
मैं उनको उठा क बाथरूम लय गटा वह 10 मं में फ्रेश होकय बाहिर ी मैं बी फ्रेश हो क बाहिर आज्ञा..
लेकिन अक्षरा अभी बी ऐसी बैठी थी..
मैं:- आप ने कपड़े क्यू नहीं पहने.?
अक्षरा:- आप ने कहा इ नहीं मुझी लगा आप को अभी और करना ही....
मैं:- नहीं आपकी हालत पेहली खराब हो गई ही..
अक्षरा:- आपके सामने तो कोई बाज़ारो बी हर मान लय...
मैनी निघ्त्य उठाई और अक्षरा पहना दी और माथे पी किश क्र क पास बेथ गया खाना ठंडा होगया था..
मैं:- दोस्सरे मंगवा लय.?
अक्षरा:- नहीं खाना वास्ते हो जाये गए खा लेती हैं लेकिन फिर बी मंगवाना ही तो मंगवा लीजिये..
मैं:- नहीं हम यह hi खाये गए..
हम दोनों न्य खाना ख्य और अक्षरा को बहून में भर क सू गए...
सुबह मेरी आंख थोड़ी देर सी खुली मैं फ्रेश होवा अक्षरा पेहली इ उठ चुकी थी वह थोड़ा सा लंगड़ा क चल रही थी..
मैं:- क्या हुवा.? ऐसी क्यू चल रही हैं..
अक्षरा मुस्कुराई और बोली..
अक्षरा:- जैसी आपको पता hi नहीं..
मैनी रक पैन किलर अक्षरा को दी और बुआ क कमरे में जा क नाश्ता किया फिट हम घूमने चली गए हम एक हिल पी थय मैनी बुआ हाथ पाकर क पीछे खेंचा और पत्थर क पीछे लय गया और जाती इ किश करनी लगा और बूब्स को प्रेस करने लगा
बुआ:- कोई आ जायर गए होटल जा क जितना करना ही क्र लेना..
मैनी कुछ नहीं बोलै और लगा रहा फिर बुआ न्य विरोध करना बंद क्र दिया और मेरा साथ देने लगी..
अचानक बुआ न्य मुझी ढाका दिया और सीधी खरी सेहम गई..
मैनी पीछे देखा तो अक्षरा खरी थी..
मैने कुछ नहीं बोलै और बुआ को जैसी हालत खराब हो गई थी..
मैने अक्षरा को हाथ पकड़ा और अपने पास खिंच लिया और किश करने लगा वह बी मेरा साथ देने लगी बुआ आंखें फर फर क यह सन देख रही थी..
मैं अलग हुवा और बुआ की तरफ देखा..
मैं:- क्या हुवा बुआ दर व गई यह बी आपकी hi तर्हां हैं..
और आंख मर di..Aur बुआ का बी हाथ पकट लिया और खेंच लिया..
बुआ और अक्षरा दोनों मेरी गली लगी होइ थीं
मैं:- अब चलो होटल जा क क्रय गए जो करना ही..
फिर वहां घूम फिर क हम होटल चले गए होटल जाती hi दोनों की एक साथ जैम क चुदाई की दोनों की हालत खराब क हम सू गए...
आफ्टर 1 वीक
इस पूरे हफ्त्य में दोनों की जैम क चुदाई की आज हम वापस जा रही थय करीब शाम क 5 बाजी हम लोग घर पोहंचे पेहली बुआ को घर छोरा उन्हों ने रोकने को कहा लेकिन मैनी मन क्र दिया और हम घर की तरफ आ gai.Akshra को बी साथ लय आया घर..
मैने दूर नॉक किया और अंजलि न्य दरवाज़ा खोला मुझु देखती इ फ़ौरन गली लग गई .
मैं:- ी मिस यू मेरी जान..
अंजलि:- आईएम मिस यू तू एंड ी लव यू...
मैं:- ी लव यू तू...
मैं अंजलि को छोरा और अक्षरा को अंदर लय क अंदर आ गया वह बी चुप चाप अंदर आ गई सब बाहिर हॉल मरीन बैठी थय..
शिखा:- भैया...
वह भगति होइ आ क गली लग गई..
मैं बी नीची बेथ क उसको हुग क्र लिया..
मैं:- किसी ही मेरी गुड़िया .
शिखा:- अब आप आ गई तो अछि hi हों गई...
मैं सब को गली मिला.. पापा न्य पॉच लिया...
पापा:- बीटा यह कोण हैं.?
मैं:- पापा वह बात यह ही क..
फिर साडी कहानी बता दी अक्षरा की माँ न्य उनको गली लगाया..
माँ:- आज सी तुम यहीं रहो गई मेरी बेहेन बन क
अक्षरा न्य बी माँ को गली लगा लिया..
अक्षरा:- दीदी...
फिर अक्षरा को कमरा दिखा दिया और मैं बी अपने कमरे आ गया और फ्रेस होने चला गया बाहिर आया तो मेरी डिल की फरकन सामने कापरी निकल रही थी बैग सी..
मैनी उसको पीछे सी गली लगा लिया और सर उसकी कंधी क रख क दिया लेकिन मैं कुछ नहीं बोल रहा था..
तनीषा:- क्या हुवा आप ठीक तो हैं..
उसने हाथ मेरी मुँह पी रख तो फ़ौरन प्लाट गई..
इस वकत मेरी आंखों में अनसूब थय..
तनीषा तो जैसी पागल इ हो गई thi..usnay मेरी हाथ पाकर लिए आंसूं पोछने lagi..Aur खुद बी रोने लगी..
तनीषा:- क्या हुवा क्यू रू रही हैं प्लीज चुप हो जाइये क्या मुझसी गलती होइ कोई प्लीज चुप हो जाइये.
मैने कुछ नहीं बोलै और उसकी आंखों सी आंसूं साफ किये और गली लगा लिया..
मैं:- बोहत मिस किया तुमसे दूर नहीं रह सकता यह टुमस्य दूर रह क पता चला..
तनीषा:- दूर कहाँ थय हर वक़त मेरी डिल में बीएस आप hi थय हर वक़त आप मेरी साथ थय और होते हैं..
मैं:- नहीं नहीं हूँ तुम्हारी इस प्यार क मैं काबिल तुम्हारी पवित्र प्यार क सामने मेरा यह नापाक प्यार....
तनीषा न्य मेरी मुँह पी हाथ रख दिया तकरीबन चिल्लाते होवय बोली..
तनीषा:- खबरदार जो मेरी प्यार को नापाक कहा तो यह प्यार मेरी रूह सी बी पाक ही अरे दुनिया ट्रस्टी ही ऐसी प्यार और प्यार करने वाली को जो खुदा न्य मुझी दिया ही आपको हमेशा ऐसा क्यू लगता ही आप हमारी साथ धोका क्र राहय हैं धोका वह होता जो पीठ पीछे कृत्य हैं वह नहीं जो आप बता क्र कृत्य हैं आपका प्यार सब क लिए है हमारा अकेली किसी का बी नहीं ही..
और वह मेरी सीने लग क रोने लगी...
मैनी उसकी पीठ को सहलाया और हम बीएड पी बेथ गई..
मैं:- आईएम सॉरी रोना बंद करो प्लीज..
तनीषा:- पेहली वडा क्रय आज क बाद ऐसी बात नहीं क्रय गए..
मैं:- बिलकुल नहीं करूं गए प्रॉमिस..
तनीषा फिर सी गली लग gai..Aur फिर उसको अलग किया और उसकी आंखों में देखनी लगा..
तनीषा:- सच में इतना मिस किया..
मैं:- बोहत बता नहीं सकता..
तनीषा मुस्कुरा दी. मैनी उसके डिंपल पी किश क्र दिया..
मैं:- सब सी ज़्यादा इसको मिस किया..
तनीषा:- इसने बी बोहत मिस किया आपको..
मैं:- ाचा जी.. एक चीज़ लाया हूँ..
मैने एक ताजमहल का सैंपल निकला और तनीषा को दिया..
मैं:- यह ही तो छोटा पर मेरी प्यार को जतनी क लिए बोहत ही..
तनीषा न्य उसको पकड़ा और किश क्र क हमारी फोटो जो साइड टेबल पी पारी थी उसके साथ रख दिया..
तनीषा:- आपको पता ही सब सी ज़्यादा मिस मैने अपनी मॉर्निंग कॉफ़ी को किया..
मैं:- अरे अब नहीं क्रय गई अब आपके यह सेवक आ गए हैं ना..
Tanisha(muskurate हॉवे.):- हाँ तुम्हे उसकी कसार पूरी तो करनी पारी गई..
तनीषा हल्का सा मेरा करीब ी और अपने गुलाबी पंखुरी जैसी होंठ मेरी होंठो पी रख दिया..
किश करने का एहसास जो अपनी बीवियों क साथ अत था वह किसी को बी नहीं अत था अलग इ दुनिया मैं चला जाता था..
10 मं बाद अलग हुवाये हम..
मैं तनीषा की गॉड में सर रख क लेट गया वह मेरे सर को सहलाने लगी..
मैं:- अक्षरा जी क बी मामले को देखना ही अभी मुझी..
तनीषा:- अभी दुनिया की बातों को छोड़िये. और आराम कीजिये..
मैने अपना हाथ तनीषा की गर्दन पी रखा और नीचे झुका क उसकी होंठ को चूमा और अलग क्र दिया..
तनीषा:- यू अरे सो नॉटी..
मैं:- अब जिसकी बीवी इतनी ख़ूबसूरत हो नॉटी तो बनानी होगा न..
तनीषा न्य मेरी नाक की पाकर क भींच दिया और उसपे किश क्र दिया..
वह ऐसी इ सर सेहलानी लगी और हम एक दोस्सरी की आंखों में देखने लगी पता इ नहीं चला कब मेरी आंख लग गई.. मैं अभी बीएस ट्रॉउज़र में इ लेता हुवा था सोनक बाद माँ कमरे में खाने क लिए बुलानी ए..
माँ:- तुम दोनों ए नहीं कब सी आवाज़..
तनीषा:- शठ माँ सू रही हैं यह...
माँ:- सोने सी पेहली कापरी तो पूरे पहना देती..
तनीषा:- थकी हुवे थय न तो सू गए..
माँ:- चल तो खा लय..
तनीषा:- नहीं आप खा लो मैं यहीं बैठी हूँ...
माँ न्य तनीषा क सर पी हाथ फेरा और मेरे माथे पी किश क्र क चली गई..
मैने सट्टे हुवे एक ऐसा नज़ारा देखा जिससे देख क मेरी हालत खराब होगी और मैं चिल्लाए क उठ गया
Nahiiiiiiiiiii........
नोट:- भाई थैंक्स फॉर थे फर्स्ट सेंचुरी सपोर्ट बनाये रखिये ऐसी hi..