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- Dec 5, 2013
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समीर राय एक बाप था और खुल...रोशन ख्यालों वाला बाप था ।उसकी मां ने रिश्ते को छेड़कर उसकी छिपी ख्वाहिश को जगा दिया था। हिना जवानी के आंगन में कदम रख चुकी थी और अब वक्त आ गया था कि उसके लिये एक उपयुक्त वर की तलाश की जाए और वह जानता था कि उसकी बेटी के लिए कैसा लड़का होना चाहिए। हिना एक आइडियल लड़की थी..ख्वाबों की शहजादी ! वह उसके लिए वर भी वैसा ही तलाश करना चाहता था। कोई आइडियल लड़का..कोई ख्वाबों का शहजादा ।समीर राय जानता था कि यह सिलसिला अब शुरू हुआ है तो आगे भी बढ़ेगा और उसे अपने आठों मामों की दिहाती-अनपढ़ पहलवान किस्म के काले बदरंग बेटों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह एक हूर को किसी लंगूर को सौंपने के बारे में सोच भी नहीं सकता था ।समीर राय का सोशल व कारोबारी सर्कल खासा विशाल था। मुम्बई के बड़े-बड़े घरानों व लोगों से सम्बन्ध थे। अब तक उसने इस नजर से इन घरानों को नहीं देखा था, लेकिन अब वह जहां जाता, हिना को अपने साथ रखता। लड़के एक-से-एक थे...लेकिन हिना के लिए जैसे वह की कल्पना समीर राय के जहन में थी...वैसा उसे अभी तक नजर नहीं आया था ।
फिर एक दिन जब हिना ने समीर राय से अपनी सहेली हेमा के घर जाने की इजाजत चाही वह बैठे-बैठे चौंक गया। अपनी बेटी को मुस्कुराकर देखने लगा।हिना चोर-सी बन गई। अब्बू ने जाने उसकी कौन-सी चोरी पकड़ ली...लेकिन बाप तो आने ही ख्यालों में मग्न था। हेमा नाम सुनकर अचानक उसके भाई गौतम का चेहरा उसकी आंखों के सामने घूम गया ।लेकिन क्या उसे एक गैर बिरादरी में व दूसरे मजहब के लड़के के बारे में सोचना चाहिये? यह सोच भी उसके जहन में उभरी थी कि हिना ने घड़कते दिल के साथ पूछा था-"अब्बू..क्यों मुस्कुरा रहे हैं ? खैर तो है...?"
खैर ही खैर है...बेटी...।" समीर बड़ी खुशदिली से बोला-"तुम ऐसा करो ड्राइवर के साथ चली जाओ। हां...यह बताओ...तुम्हें वहां देर कितनी लगेगी..?''
"अब्बू.. | पहली बार जा रही हूं उसके घर...वह इतनी जल्दी तो जान छोड़ेगी नहीं। दो-ढाई घन्टे तो जरूर लगेंगे...।" हिना ने डरते-डरते कहा। उसे अंदेशा था कि कहीं अब्बू उसे मना न कर दें।
अच्छा..फिर ऐसा करते हैं..मैं तुम्हारे साथ चलता हूं। मैं तुम्हें छोड़कर आगे अपने एक दोस्त से मिलने चला जाऊंगा। फिर वापसी पर मैं तुम्हें ले लूंगा।
ओ.के..."अब्बू, जिन्दाबाद...।" हिना ने बच्चों की तरह ताली बजाई-"यह तो बहुत ही अच्छी बात है। हेमा आपको देखकर खुश हो जाएगी। वह आपको बहुत पसन्द करती है... । हिना ने देर नहीं लगाई। उसने फौरन हेमा को फोन किया और उसे यह भी बता दिया कि वह अपने पापा के साथ आ रही है। यह सुन हेमा वाकई खुश हो गई। हिना...फिर डिनर लेकर जाना...।""
अरे, नहीं...हेमा। पापा इतनी देर नहीं रुकेंगे। तुम बस, फर्स्ट क्लास चाय पिला देना।
"ठीक है. तुम आओ तो... ।'
"पापा को अपने किसी दोस्त के यहां जाना है। वह मुझे छोड़कर चले जाएंगे...फिर वापसी पर मुझे पिक-अप कर लेंगे। मैंने उनसे दो-ढाई घन्टे की इजाजत ली है, ठीक है ना? दो-ढाई घन्टों में तो हम दो ढाई सौ बातें कर लेंगे। क्यों मेरी हेमा मालिनी... ।'
हिना ने उसे सारा प्रोग्राम कह सुनाया। आज तो मुझे सिर्फ एक ही बात करनी है....।" हेमा हंस दी।
इतनी लम्बी बात कि दो-ढाई घन्टे तक चलेगी... ।” हिना ने पूछा ।
दो-ढाई घन्टे क्या..हो सकता है सारी उम्र चले... ।'
"ते तो अब शायरी पर उतर आई है। आखिर एक शायर की बहन है ना ?" हिना बोली ।
"वह शायर साहब आज घर पर ही हैं...।" हेमा ने जैसे सूचित किया।
"कहीं तूने उन्हें मेरे आने का तो नहीं बता दिया..?" हिना जोरों से हंसी। बताया तो नहीं.तू कहे तो बता दूं...।" हेमा ने छेड़ा।
बता दे..मुझे क्या..?" हिना ने एक खास लगावट के साथ जवाब दिया।
"भैया...वह आ रही है..?" हेमा की आवाज आई। उसने चिल्लाकर कहा था।
"ओ बेवकूफ ! क्या कर रही है...।'' हिना घबरा गई-"तुझे शर्म नहीं आती ?"
"बस, हिम्मत दे गई जवाब ।'
''हां, भई ऐसी बहादुरी में क्या रखा है। अच्छा, हेमा..तो मैं आ रही हूं..।"
"जल्दी आ..हम तेरा इंतजार कर रहे हैं...तेरी राह में पलकें बिछाये...।" हेमा के लहजे में शरारत थी।
हिना ने 'खुदा हाफिज' कह कर रिसीवर रखा
और बाथरूम में घुस गई। आज वह खास तवज्जो के साथ तैयार हुई। जब वह तैयार होकर कमरे से निकली तो उसे सितारा राहदारी में आती नजर आई । वह चाय की ट्रे लिये हुये थे।सितारा ने पहले तो हिना को बड़ी दिलचस्पी से देखा...फिर अर्थपूर्ण अंदाज में खांसी व बोली-"माशा अल्लाह, आज क्या इरादे हैं बीवी ?'
"मैं जरा हेमा के घर जा रही हूं...।'' हिना ने बताया।"
और इस चाय का क्या होगा..?" सितारा ने पूछा।
"तू पी ले...।" मैं अब चाय हेमा के यहां पीऊंगी...।'
"अच्छा...।'' सितारा ने उसे एकटक देखते हुये कहा, फिर बोली-"बीवी जरा एक मिनट रुक जाएं। मैं अम्मा को बुला लाऊं... ।
'"क्या मतलब.?" किस लिये..?" हिना की समझ में नहीं आया था।
आपकी नजर उतार देंगी...मिर्चे उतार कर, अल्लाह ! इतनी सोहणी लग रही हैं...मुझे डर है किसी की नजर न लग जाए।"
"चल, बेवाकूफ...।" कहती हुई हिना, पापा के कमरे की बढ़ गई-"सितारा, टेलीफोन का ध्यान रखना।'
"आप बेफिक्र रहें बीवी...।" सितारा बोली-"मैं सबके नाम नोट कर रखूगी...।
फिर एक दिन जब हिना ने समीर राय से अपनी सहेली हेमा के घर जाने की इजाजत चाही वह बैठे-बैठे चौंक गया। अपनी बेटी को मुस्कुराकर देखने लगा।हिना चोर-सी बन गई। अब्बू ने जाने उसकी कौन-सी चोरी पकड़ ली...लेकिन बाप तो आने ही ख्यालों में मग्न था। हेमा नाम सुनकर अचानक उसके भाई गौतम का चेहरा उसकी आंखों के सामने घूम गया ।लेकिन क्या उसे एक गैर बिरादरी में व दूसरे मजहब के लड़के के बारे में सोचना चाहिये? यह सोच भी उसके जहन में उभरी थी कि हिना ने घड़कते दिल के साथ पूछा था-"अब्बू..क्यों मुस्कुरा रहे हैं ? खैर तो है...?"
खैर ही खैर है...बेटी...।" समीर बड़ी खुशदिली से बोला-"तुम ऐसा करो ड्राइवर के साथ चली जाओ। हां...यह बताओ...तुम्हें वहां देर कितनी लगेगी..?''
"अब्बू.. | पहली बार जा रही हूं उसके घर...वह इतनी जल्दी तो जान छोड़ेगी नहीं। दो-ढाई घन्टे तो जरूर लगेंगे...।" हिना ने डरते-डरते कहा। उसे अंदेशा था कि कहीं अब्बू उसे मना न कर दें।
अच्छा..फिर ऐसा करते हैं..मैं तुम्हारे साथ चलता हूं। मैं तुम्हें छोड़कर आगे अपने एक दोस्त से मिलने चला जाऊंगा। फिर वापसी पर मैं तुम्हें ले लूंगा।
ओ.के..."अब्बू, जिन्दाबाद...।" हिना ने बच्चों की तरह ताली बजाई-"यह तो बहुत ही अच्छी बात है। हेमा आपको देखकर खुश हो जाएगी। वह आपको बहुत पसन्द करती है... । हिना ने देर नहीं लगाई। उसने फौरन हेमा को फोन किया और उसे यह भी बता दिया कि वह अपने पापा के साथ आ रही है। यह सुन हेमा वाकई खुश हो गई। हिना...फिर डिनर लेकर जाना...।""
अरे, नहीं...हेमा। पापा इतनी देर नहीं रुकेंगे। तुम बस, फर्स्ट क्लास चाय पिला देना।
"ठीक है. तुम आओ तो... ।'
"पापा को अपने किसी दोस्त के यहां जाना है। वह मुझे छोड़कर चले जाएंगे...फिर वापसी पर मुझे पिक-अप कर लेंगे। मैंने उनसे दो-ढाई घन्टे की इजाजत ली है, ठीक है ना? दो-ढाई घन्टों में तो हम दो ढाई सौ बातें कर लेंगे। क्यों मेरी हेमा मालिनी... ।'
हिना ने उसे सारा प्रोग्राम कह सुनाया। आज तो मुझे सिर्फ एक ही बात करनी है....।" हेमा हंस दी।
इतनी लम्बी बात कि दो-ढाई घन्टे तक चलेगी... ।” हिना ने पूछा ।
दो-ढाई घन्टे क्या..हो सकता है सारी उम्र चले... ।'
"ते तो अब शायरी पर उतर आई है। आखिर एक शायर की बहन है ना ?" हिना बोली ।
"वह शायर साहब आज घर पर ही हैं...।" हेमा ने जैसे सूचित किया।
"कहीं तूने उन्हें मेरे आने का तो नहीं बता दिया..?" हिना जोरों से हंसी। बताया तो नहीं.तू कहे तो बता दूं...।" हेमा ने छेड़ा।
बता दे..मुझे क्या..?" हिना ने एक खास लगावट के साथ जवाब दिया।
"भैया...वह आ रही है..?" हेमा की आवाज आई। उसने चिल्लाकर कहा था।
"ओ बेवकूफ ! क्या कर रही है...।'' हिना घबरा गई-"तुझे शर्म नहीं आती ?"
"बस, हिम्मत दे गई जवाब ।'
''हां, भई ऐसी बहादुरी में क्या रखा है। अच्छा, हेमा..तो मैं आ रही हूं..।"
"जल्दी आ..हम तेरा इंतजार कर रहे हैं...तेरी राह में पलकें बिछाये...।" हेमा के लहजे में शरारत थी।
हिना ने 'खुदा हाफिज' कह कर रिसीवर रखा
और बाथरूम में घुस गई। आज वह खास तवज्जो के साथ तैयार हुई। जब वह तैयार होकर कमरे से निकली तो उसे सितारा राहदारी में आती नजर आई । वह चाय की ट्रे लिये हुये थे।सितारा ने पहले तो हिना को बड़ी दिलचस्पी से देखा...फिर अर्थपूर्ण अंदाज में खांसी व बोली-"माशा अल्लाह, आज क्या इरादे हैं बीवी ?'
"मैं जरा हेमा के घर जा रही हूं...।'' हिना ने बताया।"
और इस चाय का क्या होगा..?" सितारा ने पूछा।
"तू पी ले...।" मैं अब चाय हेमा के यहां पीऊंगी...।'
"अच्छा...।'' सितारा ने उसे एकटक देखते हुये कहा, फिर बोली-"बीवी जरा एक मिनट रुक जाएं। मैं अम्मा को बुला लाऊं... ।
'"क्या मतलब.?" किस लिये..?" हिना की समझ में नहीं आया था।
आपकी नजर उतार देंगी...मिर्चे उतार कर, अल्लाह ! इतनी सोहणी लग रही हैं...मुझे डर है किसी की नजर न लग जाए।"
"चल, बेवाकूफ...।" कहती हुई हिना, पापा के कमरे की बढ़ गई-"सितारा, टेलीफोन का ध्यान रखना।'
"आप बेफिक्र रहें बीवी...।" सितारा बोली-"मैं सबके नाम नोट कर रखूगी...।