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वह गाड़ी लेकर कब्रिस्तान की तरफ चल दिया। अभी वह आधे रास्ते में ही था कि उसे एकाएक ब्रेक लगाने पड़े।
वह शख्स बिल्कुल अचानक ही गाड़ी के सामने आया था।
समीर ने फुर्ती से पांव ब्रेक पर न रख दिया होता तो गाड़ी यकीनन उस शख्स पर चढ़ जाती। वो कोई फकीर था। उसक सिर के बाल लम्बे व उलझे हुए थे। मूंछ व दाढ़ी के बाल भी बेतहाश बढ़े हुए थे। उसका जिस्म एक सफेद चादर में लिपटा हुआ था। वह सांवले रंग व ऊंचे कद का आदमी था। उसकी काली आंखों में एक खास किस्त की चमक थी।
एक फकीर का यह दुस्साहस देखकर समीर को गुस्सा आया। जागीर में कौन ऐसा शख्स था, जो समीर राय से वाकिफ न था? मालिक की गाड़ी आते देखकर उसे सामने आकर रोकना तो बड़े दिलगुर्दे का आत्मघाती कदम था। समीर वैसे भी अपने आपे में नहीं था। वह उसे देखकर गुस्से से चीख उठा
"क्या है.?"
उस फकीर पर, उस ऊल-जुलूल शख्स पर समीर के गुस्से को कोई असर न हुआ। वो गाड़ी के सामने से हटकर समीर के करीब आ गया और अपनी तीखी पैनी नजरों से उसे घूरते हुए बोला
"मूर्ख, कब्रिस्तान में क्या रखा है? वहां क्यों जाता है? अरे.....जाना है तो रेगिस्तान में आ । खाली कब्रों में तुझे क्या मिलेगा...?"
इतन कहकर वह मलंग रुका नहीं। वो घूमकर गाड़ी के पीछे आया और फिर सड़क से उत्तर पेड़ों के झुण्ड में चला गया।
समीर उसकी बात सुनकर एकदम चौंका। वह फौरन गाड़ी से उतरकर बाहर आया, ताकि उस अजनबी शख्स से सवाल-जवाब कर सके, उससे पूछे सके कि उसे कैसे मालूम हुआ कि वह इस वक्त कब्रिस्तान जा रहा है? कब्रों और रेगिस्तान में तलाश से उसकी क्या मुराद थी?
उसने गाड़ी से उतरकर देखा तो मलंग, पेड़ों के झुण्ड में जा रहा था।
"ठहरो....सुनो....।" समीर उसे पुकारता हुआ उसके पीछे लपका।
लेकिन जब समीर उसके पीछे पेड़ों के झुण्ड में दाखिल हुआ तो वो रहस्यमय शख्स उसे कहीं नजर नहीं आया। इतनी देर में वो न जाने कहां छिप गया था? वो गायब हो चुका था।
समीर निराश होकर गाड़ी की तरफ लौटा व फिर गाड़ी स्टार्ट कर कब्रिस्तान की तरफ चल दिया।
समीर का दिल तो पहले ही अपने काबू में नहीं थां नमीरा की अचानक वव दर्दनाक मोत की इत्तला उसे खून के आंसू रुला रही थी। दिल का दर्द बढ़ता ही जाता था। उसे अपने बाप पर बहुत गुस्सा कि आखिर उन्होंने उससे यह खबर क्यों छिपाई थी? इसमें उसका क्या हित था? मां ने कहा था उसकी बेहतरी के लिए ही उसे यह इत्तला नहीं भेजी गई थी। उसकी क्या बेहतरी हो सकती थी? मां ने जरूर उसकी तसल्ली के लिए ही ऐसा कहा है।
समीर के जहन में सोचों के झंझावात उठने लगे।
फिर यह मलंग..? कौन था वो? अचानक सामने आया और अचानक ही गायब भी हो गया। देखने में वो भिखमंगा लगता था...लेकिन उसने भीख तो न मांगी थी?
वो तो कुछ रहस्यमय बोल बोलकर चला गया। समीर कहां जा रहा है, क्यों जा रहा है? यह कोई नहीं जानता था, फिर इस मलंग ने कैसे अंदाज लगाया? उसने खाली कब्रों का जिक्र क्यों किया ? रेगिस्तान की बात जुबान पर क्यों लगाया..? आखिर कौन था वो? क्या चाहता था?
समीर इन्हीं तपती सोचों के साथ गाड़ी ड्राइव करता रहा।
फिर उसे दूर से कब्रिस्तान का गेट नजर आया। गेट बन्द था। उसने गेट बन्द देख गाड़ी का हॉर्न बजाना शुरू कर दिया और गाड़ी की रफ्तार भी कम कर ली।
वह शख्स बिल्कुल अचानक ही गाड़ी के सामने आया था।
समीर ने फुर्ती से पांव ब्रेक पर न रख दिया होता तो गाड़ी यकीनन उस शख्स पर चढ़ जाती। वो कोई फकीर था। उसक सिर के बाल लम्बे व उलझे हुए थे। मूंछ व दाढ़ी के बाल भी बेतहाश बढ़े हुए थे। उसका जिस्म एक सफेद चादर में लिपटा हुआ था। वह सांवले रंग व ऊंचे कद का आदमी था। उसकी काली आंखों में एक खास किस्त की चमक थी।
एक फकीर का यह दुस्साहस देखकर समीर को गुस्सा आया। जागीर में कौन ऐसा शख्स था, जो समीर राय से वाकिफ न था? मालिक की गाड़ी आते देखकर उसे सामने आकर रोकना तो बड़े दिलगुर्दे का आत्मघाती कदम था। समीर वैसे भी अपने आपे में नहीं था। वह उसे देखकर गुस्से से चीख उठा
"क्या है.?"
उस फकीर पर, उस ऊल-जुलूल शख्स पर समीर के गुस्से को कोई असर न हुआ। वो गाड़ी के सामने से हटकर समीर के करीब आ गया और अपनी तीखी पैनी नजरों से उसे घूरते हुए बोला
"मूर्ख, कब्रिस्तान में क्या रखा है? वहां क्यों जाता है? अरे.....जाना है तो रेगिस्तान में आ । खाली कब्रों में तुझे क्या मिलेगा...?"
इतन कहकर वह मलंग रुका नहीं। वो घूमकर गाड़ी के पीछे आया और फिर सड़क से उत्तर पेड़ों के झुण्ड में चला गया।
समीर उसकी बात सुनकर एकदम चौंका। वह फौरन गाड़ी से उतरकर बाहर आया, ताकि उस अजनबी शख्स से सवाल-जवाब कर सके, उससे पूछे सके कि उसे कैसे मालूम हुआ कि वह इस वक्त कब्रिस्तान जा रहा है? कब्रों और रेगिस्तान में तलाश से उसकी क्या मुराद थी?
उसने गाड़ी से उतरकर देखा तो मलंग, पेड़ों के झुण्ड में जा रहा था।
"ठहरो....सुनो....।" समीर उसे पुकारता हुआ उसके पीछे लपका।
लेकिन जब समीर उसके पीछे पेड़ों के झुण्ड में दाखिल हुआ तो वो रहस्यमय शख्स उसे कहीं नजर नहीं आया। इतनी देर में वो न जाने कहां छिप गया था? वो गायब हो चुका था।
समीर निराश होकर गाड़ी की तरफ लौटा व फिर गाड़ी स्टार्ट कर कब्रिस्तान की तरफ चल दिया।
समीर का दिल तो पहले ही अपने काबू में नहीं थां नमीरा की अचानक वव दर्दनाक मोत की इत्तला उसे खून के आंसू रुला रही थी। दिल का दर्द बढ़ता ही जाता था। उसे अपने बाप पर बहुत गुस्सा कि आखिर उन्होंने उससे यह खबर क्यों छिपाई थी? इसमें उसका क्या हित था? मां ने कहा था उसकी बेहतरी के लिए ही उसे यह इत्तला नहीं भेजी गई थी। उसकी क्या बेहतरी हो सकती थी? मां ने जरूर उसकी तसल्ली के लिए ही ऐसा कहा है।
समीर के जहन में सोचों के झंझावात उठने लगे।
फिर यह मलंग..? कौन था वो? अचानक सामने आया और अचानक ही गायब भी हो गया। देखने में वो भिखमंगा लगता था...लेकिन उसने भीख तो न मांगी थी?
वो तो कुछ रहस्यमय बोल बोलकर चला गया। समीर कहां जा रहा है, क्यों जा रहा है? यह कोई नहीं जानता था, फिर इस मलंग ने कैसे अंदाज लगाया? उसने खाली कब्रों का जिक्र क्यों किया ? रेगिस्तान की बात जुबान पर क्यों लगाया..? आखिर कौन था वो? क्या चाहता था?
समीर इन्हीं तपती सोचों के साथ गाड़ी ड्राइव करता रहा।
फिर उसे दूर से कब्रिस्तान का गेट नजर आया। गेट बन्द था। उसने गेट बन्द देख गाड़ी का हॉर्न बजाना शुरू कर दिया और गाड़ी की रफ्तार भी कम कर ली।