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मुझे बेहद अच्छा लगा एक छुपा हुआ पाठक बाहर तो आया.
काश कवि को पैसे देकर बुलाया गया होता तब तो आप उसकी अपेक्षाओं को गलत या सही ठहरा सकते थे परंतु यहां तो कवि स्वयं चौराहे पर खड़ा होकर गाना गा रहा था दर्शक इकट्ठा होते गए तालियां बजती रही और कविता चलती रही जब दर्शक के हाथ में मेहंदी लगी और उन्होंने तालियां बजाना बंद की कवि ने काव्य पाठ बंद कर दिया.
यह तो मैं उन पाठकों की बात कर रहा हूं जो कहानी के प्रति अपने विचार अच्छे या बुरे परंतु दिए जरूर हैं परंतु उन पाठकों का क्या करूं जो बोरा ओढ़ कर तथा स्वयं को छुपाकर कहानी पढ़ रहे हैं...
आशा है आप मेरा आशय समझ रहे हैं.
काश कवि को पैसे देकर बुलाया गया होता तब तो आप उसकी अपेक्षाओं को गलत या सही ठहरा सकते थे परंतु यहां तो कवि स्वयं चौराहे पर खड़ा होकर गाना गा रहा था दर्शक इकट्ठा होते गए तालियां बजती रही और कविता चलती रही जब दर्शक के हाथ में मेहंदी लगी और उन्होंने तालियां बजाना बंद की कवि ने काव्य पाठ बंद कर दिया.
यह तो मैं उन पाठकों की बात कर रहा हूं जो कहानी के प्रति अपने विचार अच्छे या बुरे परंतु दिए जरूर हैं परंतु उन पाठकों का क्या करूं जो बोरा ओढ़ कर तथा स्वयं को छुपाकर कहानी पढ़ रहे हैं...
आशा है आप मेरा आशय समझ रहे हैं.