Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 102 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

भावीका : (मुस्कुराते) यार होता हे अ‍ैसा.. कमसे कम तुजे इतना तो पता हे मेरे पीता कौन हे.. यहा तो वो भी नही पता.. बस.. अ‍ेक मां थी.. ओर जीनके साथ उनका अफैर था उनकी ओर से बहुत वीरासत मीली थी.. ओर मांने कभी नही बतायाकी मेरा बाप कौन हे.. अब तो वोभी नही हे..

पुनम : (सृतीकी ओर छुपकर नामे गरदन हीलाते) भाभी.. दील छोटा मत करो.. अब तो सब सही हेनां..? धृव भैया आपको कीतना प्यार करते हे..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. प्यार तो वो बहुत करते हे.. लेकीन कुछ ओर ही चीजोके सौकीन हे.. ओर वो भी स्पेसीयल मेरे साथ.. दीदी.. हमारे भी कुछ सपने होते हे.. अब पता चला मेने गलत आदमीका चुनाव कीया हे.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी थी..

सृती : (बातका टोपीक चेन्ज करते) भावु.. छोड ये सब.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. ये बता मेरा क्या रीजल्ट हे..? मे जो सोच रही हु.. वोही..?

भावीका : (नजरे चुराते) कमीनी तु भी डोक्टर हे.. पता तो हे तुजे.. क्या हुआ..

सृती : (अफसोस करते धीरेसे) हंम.. पता हे मुजे.. वैसे भी अब उच बच्चेसे क्या वास्ता.. मेरे अ‍ेक्स हसबन्डका था.. मुजे तो मेरे लखनकी नीशानी चाहीये.. अब जो भी बच्चे होगे मेरे लखनके..

भावीका : (हसते) लगता हे तुम लखन भैयासे बहुत प्यार करती हो..

सृती : (मुस्कुराते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. हम दोनो उनको बहुत प्यार करते हे.. लखन हम दोनोकी जान हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां देखा मेने रातको जाते समय.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे कैसे चीपकके सो रहे थे..

सृती : (मुस्कुराते) अच्छा ये बता.. तुम दोनोने कुछ फेमीली प्लानींग कीहे की नही..?

भावीका : (मायुस होते धीरेसे) नही यार.. वोही तो बता रही थी.. फीर भी दोनो बहुत कोसीस कर रहे हे.. लगता हे मुजे ही अपना टेस्ट करवाना पडेगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) सीर्फ तेरा ही क्यु..? धृव भैयाका भी करवाओ..

भावीका : (आंख गीली करते) नही.. उनका सब ओके हे.. मुजे सब पता हे..

पुनम : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. क्या आपको सब पता हे..?

भावीका : (आंखसे आंसु टपक गये) हंम.. सब पता हे..

पुनम : (रुमाल देते) भाभी.. आंसु पोछीये हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम तीनो..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) भावु.. मुजे तुमसे कुछ बताना हे.. लेकीन अभी यहा नही.. तुम मेरे घर आना.. तुजे सबकुछ बताउगी.. तेरे बारेमे..

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) मेरे बारेमे..? क्या..?

सृती : (धीरेसे) पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. लेकीन यहा नही.. हमारे घर आना.. अकेली..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे घर.. आप अकेली आना.. आपको सबकुछ बता दुगी.. आपके बारेमे.. आपके बच्चेके बारेमे.. सब कुछ.. बस इतना जानलो आपकी कीस्मत मेभी अ‍ेक बच्चा हे..

भावीका : (खुस होते मुस्कुराते) क्या सचमे..?

सृती : (मुस्कुराते) हां कमीनी सचमे.. लेकीन यहा नही.. तु घर आना..

भावीका : (मुस्कुराते) लगता हे अबतो बहुत जल्द तेरे घर आना पडेगा..

कहेते भावीका अ‍ेक नजरसे पुनमकी ओर देखती रही.. तीनोने कुछ ओर बाते की.. फीर भावीका अपनी केबीनमे चली गइ.. सुबह नौ बजे देवायत मंजु नीमर्लाको लेकर होस्पीटल आगया.. ओर उसने लखन ओर पुनमको घर फ्रेस होने भेज दीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. कलसे तुम दोनो यही हो.. घर जाकर दोनो थोडा फ्रेस होजाओ.. ओर कुछ देर आराम भी करलो.. दोपहोरको टीफीन लेकर आना.. तबतक हम यही हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) यस मोम..

लखन ओर पुनम घर चले गये.. ओर दोनो उपर अपने बाथरुममे अ‍ेक साथ ही घुस गये.. दोनोही अ‍ेक दुसरोको मीलनेमे लीये तडप रहे थे.. अंदर जाते ही पुनम लखनकी बाहोमे सीमट गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. कुछ ही देरमे लखन पुनमकी खडे खडे पीछेसे चुदाइ कर रहा था..





जब लखनने पुनमकी चुतमे अपना माल उडेल दीया तो पुनम मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. पुनमने लखनको अपने कपडे दीये ओर खुद भी तैयार होने लगी.. वैसे भी लखन रात ओर दीन आराम कर रहा था तो उनको कोइ खास नींद नही आइ..

पुनम : (मुस्कुराते अपने बाल जटकते) लखन.. आपको सोना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही बेबी.. वैसे भी तुम्हारे बीना नींद कहा आती हे.. तुजे सोना हे..?

पुनम : (मुस्कुराते बाल पोछते) जानु.. मेरा भी कुछ तम्हारी तराह ही हे.. हम रातमे हमारा कोटा पुरा कर लेगे.. अब सृतीदीकी तो दो महीनेकी छुटी हे.. दो महीना उसे हाथ भी मत लगाना..

लखन : (मुस्कुराते बाल बनाते) डार्लींग.. दो महीने कुछ ज्यादा नही हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. राधु दीदी हे.. रजु हे.. ओर वैसे आजकल भावना भाभी भी इधर ही हे.. आप कहोतो इसे भी यही बुलालु.. ओर वैसे भी आपकी सीक्रेट बीवी तो हे ही..

लखन : (मुस्कुराते) कौन नीलु..?

पुनम : (हसते धीरेसे) हां वोही.. आज कल दोनो काफी दीनोसे मीले भी नही हो..

लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी घरपे सबलोग हे.. मुजे तो बस आप चाहीये..

पुनम : (मुस्कुराते बाल बनाते) भाइ.. देखो अब पेट काफी नीकल चुका हे.. अब आगे प्रोबलेम होती हे.. मे तो अब पीछे ही दे सकती हु.. तीन चार महीने पीछेसे ही काम चलाना पडेगा.. जबतब मेरा बेबी नही आजाता.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..
 
लखन : (बेडपे बैठते) हां बोलो..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) सृतीदीका बच्चा गीर गया हे.. ओर इस बातका उसे कोइ अफसोस भी नही हे.. आज कहेती थी मेरे अ‍ेक्स हसबन्डका बच्चा था.. अब मे मेरे लखनके बच्चे पैदा करुगी..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये सही हे..? ज्यादा सेक्सकी वजहसे हुआ हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते अपनी बींदी लगाते) नही.. उनकी कीस्मतमे लीखा था.. वो भी मनसे इस बच्चेको नही चाहती थी.. अब आपको अ‍ेक ओरकी कोख भरनी हे.. बीलुकल नइ.. आपपे बहुत लटु हे.. उसे बच्चा देदो..

लखन : (सामने देखते) यार.. मे क्या बच्चा देनेका मशीन हु..? कौन हे वो..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हमारे धृव भैयाकी बीवी.. भावीका..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..?

पुनम : (सींदुरकी डीबी लेकर पास आते) नही.. मत भुलो आप ओर हम कौन हे.. ओर ये सब आपके मजेके लीये नही हे.. वो हमारे वीजयके लीये हे.. तो आपको जीतना कहा जाये उतना करते जाइअ‍े.. लीजीये मांग भर दीजीये..

लखन : (खडा होते मांग भरते) हां ये तुम ओर सृती नही भुलती.. अब अपने आप भरलो..





पुनम : (जुठे गुस्सेसे देखते) क्यु.. आपको मांग भरनेमे कोइ तकलीफ हो रही हे..? चुपचाप भरदो.. अब आपकी बीवी हु.. आप जब बोलते हो मे देती हु.. मेने कभी आपको मना कीया..?

लखन : (बाहोमे भीचते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. माइ स्वीट हार्ट.. नाराज क्यु होती हे.. क्या भावीका भाभीसे कोइ बात हुइ..?

पुनम : (दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) देखा..? नही चुतके लीये कैसे मचल रहे हो.. कोइ बात नही हुइ.. ओर वो कुछ आगे बढना चाहे तो मना मत करना.. आगे बढना..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये धृव भैयाके साथ धोखा नही हे..? वो तो बच्चे देनेमे भी सक्षम हे..

पुनम : (सामने देखते) ओर तुम्हारा धृव भैया उनकी बहेन ओर उनकी मां को ठोकते उनकी बीवीको धोखा दे रहा हे वो..? ओर पता हे..? मुजे लगता हे ये बात भावीकाको भी पता चल गइ हे.. अब मीलेगी तब बात होगी.. फीर कुछ ओर वजह भी हे.. जीसे भावीका आपका बच्चा ही चाहती हे..

लखन : (सामने देखते) ठीक हे पुनो.. सायद उनकी बहेन पुजा दुबारा प्रेगनेन्ट होगइ हे.. उनका पहेला बच्चा भी धृव भैयाका हे.. ओर अब ये दुसरा..

पुनम : (मुस्कुराते) दुसरा नही तीसरा.. आप भुल गये.. पहेले बच्चेकी वजहसे ही उनका अपने पहेले पतीसे डीवोर्स हुआ था.. फीर उनकी दुसरी सादी हुइ.. तब ओलरेडी उनके गर्भमे धृव भैयाका दुसरा बच्चा था.. वो भी अपने भाइके पीछे पागल हे.. मेरी तराह.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) कमीने मेरे सभी दोस्त अ‍ैक जैसे ही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बात ओर बताउ.. धृव भैयाने दो बार उनकी मम्मीका भी अ‍ेबोर्सन करवाया हे.. कमीनी वो भी अपने बेटेके पीछे पागल हे..

लखन : (मुस्कुराते) बेचारी क्या करेगी..? अंकल उनपे ध्यान नही हेते होगे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. वो कहेते हेनां.. घरकी मुर्गी दाल बराबर.. कमीना वो भी बहुत चुदाइका सौकीन हे.. अपनी पार्टीकी कइ ओरते ओर लडकीयाको चोद चुका हे.. ओर कुछ तो परमेनेन्ट होगइ हे.. जीनको कइ बार प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. ओर सबका ओब्रेसन भावीका भाभीसे करवाता हे..

लखन : (आस्चर्यसे सुनते) क्या..? खुद अपने बेटेकी बहुसे..? इतना ठरकी हे कमीना..? उनको अपनी बहुसे डर नही लगता क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) डर..? क्युकी वो कमीना जानता हेकी भाभी इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम करती हे.. ओर दो बार वो भी भाभीके पीछवाडेका लाभ ले चुका हे.. धृव भैयाकी तराह उनका बाप भी भावीका भाभीके पीछवाडेका सौकीन हे.. ओर भाभी मजबुरीके कारण कुछ नही बोलपाती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? साला हरामी.. भाभीकी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. सायद ये बात भाभी जानती होगी इसीलीये उसने अलग मन बनालीया होगा..

पुनम : (मुस्कुराते) बीलकुल सही सोचा हे आपने.. अब चलो नीचे.. सबलोग नीचे इन्तजार करते होगे..

लखनने पुनको बाहोमे भीचते उनके होठोको चुम लीया.. फीर दोनो साथ नीचे आगये.. वहा भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. तो लखनकी ओर देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने पलुसे आचलको ढकते लखनकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी..

लखनने भुकीका का हाल चाल जाना.. फीर सबलोग बाते करते रहे.. खाना बन गया तो सबलोग खानेपे बैठ गये.. फीर लखन ओर पुनम टीफीन लेकर होस्पीटलपे चले गये.. सृती अब काफी बेहतर लग रही थी.. तो लखनने देवायतको घर जानेके लीये केह दीया..

मंजु देवायत साम तक रुके.. भावीकाने कल छुटीका केह दीया तो मंजुने सृतीको उनकी मम्मीके यहा आराम करनेकी सलाह दी.. फीर सबलोगोकी इजाजत लेकर देवायत भानु ओर मंजु चले गये.. लखनके घर जाकर अपना सामान लेकर सीधे गांवकी ओर नीकल गये..
 
इसी दौरान भावीका अपने पेसन्ट देखकर सृतीकी देखभाल करती रही.. इसी बीच लखनसे दयाइआ मंगवाते रीपोर्टके सील सीलेमे बार बार मीलती रही.. ओर बात करनेकी कोसीस करती रही लेकीन सबके होनेकी वजहसे अपने दीलकी बात नही केह पाइ..

अ‍ेक बार उसने बहार लखनको देखा तो उनके दीलकी धडकन बढ गइ.. ओर उसी टाइम कोइ पेसन्ट भी नही था.. तो भावीकाने हीमत करते लखनको इसारा करते अपनी केबीनमे बुला लीया.. जैसे ही लखन उनकी ओफीसमे गया भावीकाने धीरेसे दरवाजा लोक करलीया.. ओर लखनको बैठनेको कहेते सामने बैठ गइ..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कहीये.. कुछ काम था..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. आप उस दीन बात करके गये फीर आप हमारे घर आये नही.. क्या अपना दोस्त घरपे होगा तोही आओगे..? अपनी भाभीको मीलने नही आ सकते..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अ‍ैसी बात नही हे.. दरसल मे सचमे बहुत बीजी था..

भावीका : (मुस्कुराते धीरेसे) क्या आपको अपने दोस्तके बारेमे कुछ पता हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. आज ही घरपे पुनोसे सब बात हुइ.. आपके बारेमे जानकर बहुत दुख हुआ..? आपकी मजबुरी भी समज सकता हु.. आप बहुत हीमंत वाली हे..

भावीका : (आंख गीली करते) हीमंत वाली..? की मजबुर..? मे अपना दुख कीसीसे बांट भी नही सकती.. अ‍ेक दोस्त हेतो अभी इनकी हालत भी ठीक नही हे.. मे अपना दुखडा कीसको सुनाउ..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वैसे तो मे सब जानता हु.. लेकीन अगर मुजपे भरोसा कर सकती हेतो मुजसे बात कर लीजीये.. सायद मे आपके दीलका बोज कुछ हल्का कर सकु..

भावीका : (आंख पोछते मुस्कुराते) इसीलीये तो आपको मैने बुलाया हे.. मे आपको अच्छी तराह जानती हु.. आप अ‍ेक नेक दील इन्सान हे.. क्या हम दोस्त बन सकते हे..?

लखन : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) वाइ नोट..? स्योर.. आजसे हम पके वाले दोस्त..

भावीका : (मुस्कुराते) थेन्क्स.. बस.. अभी कुछ दीन इसी बातका खयाल रखना.. हमारी दोस्तीके बारेमे फील हाल सृतीको पता ना चले.. ओर नाही धुवको.. बाकी बाते हम बादमे करेगे.. तब पता चलेगा आपका धृव क्या क्या कारनामे करता हे.. ओर मेरी भी मजबुरी हे.. की मे उसे छोड भी नही सकती..

फीर बाते करते भावीका लखनसे नजदीकीया बढाती रही.. दोनोने अपना मोबाइल नंबर भी अ‍ेक्सचेन्ज करलीया.. तब भावीकाने लखनसे फोनपे बात करनेकी ओर वोट्सअ‍ेप चेट करनेकी बात करली तो लखन भी हां कहेते खुस होगया.. ओर उसे जल्द कोफी सोपपे मीलनेका वादा कीया.. ओर बहार नीकलनेसे पहेले भावीकाने लखनको हग करलीया..

सामको नीर्मला भुमीका ओर रजीया आइ.. लखनने उसे सबकुछ बतादीया.. फीर दुसरे दीन सृतीको छुटी देदी गइ.. लखन सृती नीर्मला भुमीकाको लेकर सीधा भुमीकाके घर ही चला गया.. सृतीको नीचे वाले रुममे रखा.. ओर नीर्मला भुमीका पास वाले रुममे ही थे..

भावना उपरकी मंजीलपे अपनी बच्चीके साथ रहेने लगी.. लखन पुनमको लेकर सुबह नीर्मलाके घर चला जाता.. फीर सृतीका हाल चाल पुछकर अपने कामपे चला जाता.. ओर सामको वापस सृतीको मीलकर पुनमको लेकर वापस अपने घर आजाता..

तब भावना सबसे छुपकर लखनको उपर अपने रुममे आनेका इसारा करती.. क्युकी वो काफी दीनोसे यहा थी.. ओर लखन भी अपनी बीवीओसे घीरा रहेता.. ओर अ‍ेक दीन दो पहोरको उसे मौका मील गया.. तो लखनने बीना नीचे उतरे दो बार भावनाकी जबरदस्त चुदाइ करली..





दीनमे राधीकाकी होस्टेलपे जाता.. वहा राधीकाको जमकर पेलता.. नीलम स्कुलसे आते ही रजीयाका काममे हाथ बटाती.. ओर सामको लखन राधीकाको होस्टेलसे लेकर पुनमको लेने भुमीकाके घर चला जाता.. वहा अ‍ेक दो घंटे सबलोग बैठकर बाते करते फीर लखन पुनम ओर राधीकाको लेकर घर आजाता..

रातमे लखन रजीया ओर राधीकाको दो दो बार बजाकर पुनमके साथ खुब प्यार करता.. लेकीन पीछेसे.. क्युकी अब पुनमका पेट काफी नीकल गया था.. तो पुनमने आगेसे करनेको मना कर दीया था.. इसी बीच लखन ओर भावीकाके बीच फोनपे बात होने लगी..

अ‍ेक दीन मौका मीलते ही दोनो अ‍ेक कोफी सोपमे मीले.. भावीकाने अपनी पुरी स्टोरी लखनको सुनादी.. उस दीनसे दोनो काफी नजदीक आ गये.. ओर दोनो चेटपे भी बाते करने लगे.. अब बाते बहुत आगे बढ चुकी थी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ फ्लर्ट करने लगे थे..

अ‍ेक दीन मौका मीला तो लखन अ‍ेक बार फीर दीयाकी जमकर बजाकर आगया.. तो अ‍ेक दीन नीलमने स्कुलपे छुटी लेली थी.. तो दो पहोरको घरपे सीर्फ नीलम रजीया ओर लखन ही थे.. तो खाना खानेके बाद आराम करते नीलमको अपने साथ ही बेडरुममे बुला लीया..





ओर वहा पहेली बार लखनने रजीयाकी बजाकर नीलमको रजीयाके सामने ही चोद लीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी लखनने पहेली बार उसे अपनी बीवीके सामने खुलकर चोदलीया था.. ओर रजीया हसती रही.. फीर तो लखनने अ‍ेक बार फीर नीलमको कीचनमे खडे खडे चोद लीया..





अ‍ैसे ही समय नीकलता गया.. अब मंजुको भी कमजोरी महेसुस होने लगी थी.. तो साथमे देवायतका जोस भी कम होने लगा था.. तो दुसरी ओर सेक्स ना करनेकी वजहसे चंदाकी वासना बढती ही जा रही थी.. वो देवायतसे भावनात्मक रुपसे काफी दुर होने लगी थी.. देवायतकी अनदेखीकी वजहसे उनकी चुतमे वासनाके कीडे उधम मचा रहेथे.. अब वो सेक्सके बीना पागल हो रही थी.. लेकीन कुछ बोल नही पा रही थी....

कन्टीन्यु
 
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