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भावीका : (मुस्कुराते) यार होता हे अैसा.. कमसे कम तुजे इतना तो पता हे मेरे पीता कौन हे.. यहा तो वो भी नही पता.. बस.. अेक मां थी.. ओर जीनके साथ उनका अफैर था उनकी ओर से बहुत वीरासत मीली थी.. ओर मांने कभी नही बतायाकी मेरा बाप कौन हे.. अब तो वोभी नही हे..
पुनम : (सृतीकी ओर छुपकर नामे गरदन हीलाते) भाभी.. दील छोटा मत करो.. अब तो सब सही हेनां..? धृव भैया आपको कीतना प्यार करते हे..
भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. प्यार तो वो बहुत करते हे.. लेकीन कुछ ओर ही चीजोके सौकीन हे.. ओर वो भी स्पेसीयल मेरे साथ.. दीदी.. हमारे भी कुछ सपने होते हे.. अब पता चला मेने गलत आदमीका चुनाव कीया हे.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी थी..
सृती : (बातका टोपीक चेन्ज करते) भावु.. छोड ये सब.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. ये बता मेरा क्या रीजल्ट हे..? मे जो सोच रही हु.. वोही..?
भावीका : (नजरे चुराते) कमीनी तु भी डोक्टर हे.. पता तो हे तुजे.. क्या हुआ..
सृती : (अफसोस करते धीरेसे) हंम.. पता हे मुजे.. वैसे भी अब उच बच्चेसे क्या वास्ता.. मेरे अेक्स हसबन्डका था.. मुजे तो मेरे लखनकी नीशानी चाहीये.. अब जो भी बच्चे होगे मेरे लखनके..
भावीका : (हसते) लगता हे तुम लखन भैयासे बहुत प्यार करती हो..
सृती : (मुस्कुराते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. हम दोनो उनको बहुत प्यार करते हे.. लखन हम दोनोकी जान हे..
भावीका : (मुस्कुराते) हां देखा मेने रातको जाते समय.. दोनो अेक दुसरेसे कैसे चीपकके सो रहे थे..
सृती : (मुस्कुराते) अच्छा ये बता.. तुम दोनोने कुछ फेमीली प्लानींग कीहे की नही..?
भावीका : (मायुस होते धीरेसे) नही यार.. वोही तो बता रही थी.. फीर भी दोनो बहुत कोसीस कर रहे हे.. लगता हे मुजे ही अपना टेस्ट करवाना पडेगा..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) सीर्फ तेरा ही क्यु..? धृव भैयाका भी करवाओ..
भावीका : (आंख गीली करते) नही.. उनका सब ओके हे.. मुजे सब पता हे..
पुनम : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. क्या आपको सब पता हे..?
भावीका : (आंखसे आंसु टपक गये) हंम.. सब पता हे..
पुनम : (रुमाल देते) भाभी.. आंसु पोछीये हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम तीनो..
सृती : (सामने देखते धीरेसे) भावु.. मुजे तुमसे कुछ बताना हे.. लेकीन अभी यहा नही.. तुम मेरे घर आना.. तुजे सबकुछ बताउगी.. तेरे बारेमे..
भावीका : (आस्चर्यसे देखते) मेरे बारेमे..? क्या..?
सृती : (धीरेसे) पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. लेकीन यहा नही.. हमारे घर आना.. अकेली..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे घर.. आप अकेली आना.. आपको सबकुछ बता दुगी.. आपके बारेमे.. आपके बच्चेके बारेमे.. सब कुछ.. बस इतना जानलो आपकी कीस्मत मेभी अेक बच्चा हे..
भावीका : (खुस होते मुस्कुराते) क्या सचमे..?
सृती : (मुस्कुराते) हां कमीनी सचमे.. लेकीन यहा नही.. तु घर आना..
भावीका : (मुस्कुराते) लगता हे अबतो बहुत जल्द तेरे घर आना पडेगा..
कहेते भावीका अेक नजरसे पुनमकी ओर देखती रही.. तीनोने कुछ ओर बाते की.. फीर भावीका अपनी केबीनमे चली गइ.. सुबह नौ बजे देवायत मंजु नीमर्लाको लेकर होस्पीटल आगया.. ओर उसने लखन ओर पुनमको घर फ्रेस होने भेज दीया..
मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. कलसे तुम दोनो यही हो.. घर जाकर दोनो थोडा फ्रेस होजाओ.. ओर कुछ देर आराम भी करलो.. दोपहोरको टीफीन लेकर आना.. तबतक हम यही हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) यस मोम..
लखन ओर पुनम घर चले गये.. ओर दोनो उपर अपने बाथरुममे अेक साथ ही घुस गये.. दोनोही अेक दुसरोको मीलनेमे लीये तडप रहे थे.. अंदर जाते ही पुनम लखनकी बाहोमे सीमट गइ.. ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. कुछ ही देरमे लखन पुनमकी खडे खडे पीछेसे चुदाइ कर रहा था..

जब लखनने पुनमकी चुतमे अपना माल उडेल दीया तो पुनम मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. पुनमने लखनको अपने कपडे दीये ओर खुद भी तैयार होने लगी.. वैसे भी लखन रात ओर दीन आराम कर रहा था तो उनको कोइ खास नींद नही आइ..
पुनम : (मुस्कुराते अपने बाल जटकते) लखन.. आपको सोना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) नही बेबी.. वैसे भी तुम्हारे बीना नींद कहा आती हे.. तुजे सोना हे..?
पुनम : (मुस्कुराते बाल पोछते) जानु.. मेरा भी कुछ तम्हारी तराह ही हे.. हम रातमे हमारा कोटा पुरा कर लेगे.. अब सृतीदीकी तो दो महीनेकी छुटी हे.. दो महीना उसे हाथ भी मत लगाना..
लखन : (मुस्कुराते बाल बनाते) डार्लींग.. दो महीने कुछ ज्यादा नही हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही.. राधु दीदी हे.. रजु हे.. ओर वैसे आजकल भावना भाभी भी इधर ही हे.. आप कहोतो इसे भी यही बुलालु.. ओर वैसे भी आपकी सीक्रेट बीवी तो हे ही..
लखन : (मुस्कुराते) कौन नीलु..?
पुनम : (हसते धीरेसे) हां वोही.. आज कल दोनो काफी दीनोसे मीले भी नही हो..
लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी घरपे सबलोग हे.. मुजे तो बस आप चाहीये..
पुनम : (मुस्कुराते बाल बनाते) भाइ.. देखो अब पेट काफी नीकल चुका हे.. अब आगे प्रोबलेम होती हे.. मे तो अब पीछे ही दे सकती हु.. तीन चार महीने पीछेसे ही काम चलाना पडेगा.. जबतब मेरा बेबी नही आजाता.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..
पुनम : (सृतीकी ओर छुपकर नामे गरदन हीलाते) भाभी.. दील छोटा मत करो.. अब तो सब सही हेनां..? धृव भैया आपको कीतना प्यार करते हे..
भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. प्यार तो वो बहुत करते हे.. लेकीन कुछ ओर ही चीजोके सौकीन हे.. ओर वो भी स्पेसीयल मेरे साथ.. दीदी.. हमारे भी कुछ सपने होते हे.. अब पता चला मेने गलत आदमीका चुनाव कीया हे.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी थी..
सृती : (बातका टोपीक चेन्ज करते) भावु.. छोड ये सब.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. ये बता मेरा क्या रीजल्ट हे..? मे जो सोच रही हु.. वोही..?
भावीका : (नजरे चुराते) कमीनी तु भी डोक्टर हे.. पता तो हे तुजे.. क्या हुआ..
सृती : (अफसोस करते धीरेसे) हंम.. पता हे मुजे.. वैसे भी अब उच बच्चेसे क्या वास्ता.. मेरे अेक्स हसबन्डका था.. मुजे तो मेरे लखनकी नीशानी चाहीये.. अब जो भी बच्चे होगे मेरे लखनके..
भावीका : (हसते) लगता हे तुम लखन भैयासे बहुत प्यार करती हो..
सृती : (मुस्कुराते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. हम दोनो उनको बहुत प्यार करते हे.. लखन हम दोनोकी जान हे..
भावीका : (मुस्कुराते) हां देखा मेने रातको जाते समय.. दोनो अेक दुसरेसे कैसे चीपकके सो रहे थे..
सृती : (मुस्कुराते) अच्छा ये बता.. तुम दोनोने कुछ फेमीली प्लानींग कीहे की नही..?
भावीका : (मायुस होते धीरेसे) नही यार.. वोही तो बता रही थी.. फीर भी दोनो बहुत कोसीस कर रहे हे.. लगता हे मुजे ही अपना टेस्ट करवाना पडेगा..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) सीर्फ तेरा ही क्यु..? धृव भैयाका भी करवाओ..
भावीका : (आंख गीली करते) नही.. उनका सब ओके हे.. मुजे सब पता हे..
पुनम : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. क्या आपको सब पता हे..?
भावीका : (आंखसे आंसु टपक गये) हंम.. सब पता हे..
पुनम : (रुमाल देते) भाभी.. आंसु पोछीये हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम तीनो..
सृती : (सामने देखते धीरेसे) भावु.. मुजे तुमसे कुछ बताना हे.. लेकीन अभी यहा नही.. तुम मेरे घर आना.. तुजे सबकुछ बताउगी.. तेरे बारेमे..
भावीका : (आस्चर्यसे देखते) मेरे बारेमे..? क्या..?
सृती : (धीरेसे) पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. लेकीन यहा नही.. हमारे घर आना.. अकेली..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे घर.. आप अकेली आना.. आपको सबकुछ बता दुगी.. आपके बारेमे.. आपके बच्चेके बारेमे.. सब कुछ.. बस इतना जानलो आपकी कीस्मत मेभी अेक बच्चा हे..
भावीका : (खुस होते मुस्कुराते) क्या सचमे..?
सृती : (मुस्कुराते) हां कमीनी सचमे.. लेकीन यहा नही.. तु घर आना..
भावीका : (मुस्कुराते) लगता हे अबतो बहुत जल्द तेरे घर आना पडेगा..
कहेते भावीका अेक नजरसे पुनमकी ओर देखती रही.. तीनोने कुछ ओर बाते की.. फीर भावीका अपनी केबीनमे चली गइ.. सुबह नौ बजे देवायत मंजु नीमर्लाको लेकर होस्पीटल आगया.. ओर उसने लखन ओर पुनमको घर फ्रेस होने भेज दीया..
मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. कलसे तुम दोनो यही हो.. घर जाकर दोनो थोडा फ्रेस होजाओ.. ओर कुछ देर आराम भी करलो.. दोपहोरको टीफीन लेकर आना.. तबतक हम यही हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) यस मोम..
लखन ओर पुनम घर चले गये.. ओर दोनो उपर अपने बाथरुममे अेक साथ ही घुस गये.. दोनोही अेक दुसरोको मीलनेमे लीये तडप रहे थे.. अंदर जाते ही पुनम लखनकी बाहोमे सीमट गइ.. ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. कुछ ही देरमे लखन पुनमकी खडे खडे पीछेसे चुदाइ कर रहा था..

जब लखनने पुनमकी चुतमे अपना माल उडेल दीया तो पुनम मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. पुनमने लखनको अपने कपडे दीये ओर खुद भी तैयार होने लगी.. वैसे भी लखन रात ओर दीन आराम कर रहा था तो उनको कोइ खास नींद नही आइ..
पुनम : (मुस्कुराते अपने बाल जटकते) लखन.. आपको सोना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) नही बेबी.. वैसे भी तुम्हारे बीना नींद कहा आती हे.. तुजे सोना हे..?
पुनम : (मुस्कुराते बाल पोछते) जानु.. मेरा भी कुछ तम्हारी तराह ही हे.. हम रातमे हमारा कोटा पुरा कर लेगे.. अब सृतीदीकी तो दो महीनेकी छुटी हे.. दो महीना उसे हाथ भी मत लगाना..
लखन : (मुस्कुराते बाल बनाते) डार्लींग.. दो महीने कुछ ज्यादा नही हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही.. राधु दीदी हे.. रजु हे.. ओर वैसे आजकल भावना भाभी भी इधर ही हे.. आप कहोतो इसे भी यही बुलालु.. ओर वैसे भी आपकी सीक्रेट बीवी तो हे ही..
लखन : (मुस्कुराते) कौन नीलु..?
पुनम : (हसते धीरेसे) हां वोही.. आज कल दोनो काफी दीनोसे मीले भी नही हो..
लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी घरपे सबलोग हे.. मुजे तो बस आप चाहीये..
पुनम : (मुस्कुराते बाल बनाते) भाइ.. देखो अब पेट काफी नीकल चुका हे.. अब आगे प्रोबलेम होती हे.. मे तो अब पीछे ही दे सकती हु.. तीन चार महीने पीछेसे ही काम चलाना पडेगा.. जबतब मेरा बेबी नही आजाता.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..



