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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २९६
इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया.... अब आगे
लखन सबको लेकर घरपे आगया.. ओर होलमे बेठे बाते कर रहे थे तब भावीकाने लखनको अब भी थोडा डर लगनेकी बात कही.. तो लखनने थोडी सेखी मारी.. ओर सबके सामने अैसे ही धृवको हाल चाल जाननेके लीये फोन कीया.. जब फोन लगा तो सबको चुप रहेनेका इसारा करते फोन स्पीकरपे करदीया..
लखन : (मुस्कुराते) सब चुप रहेना.. अभी आपका डर खतम कर देता हु..
धृव : (फोन लगते ही) अरे भाइ.. कैसे हो..? बडी भाभीका सब कार्य संप्पन होगया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. कल ही होगया.. सब खतम करके आज ही सहेर वापस आगया.. तो सोचा तुजे फोन करु.. बोल.. क्या हालचाल हे..? तेरे पापाका सब कार्य कंपलीट होगया..?
धृव : (फोनपे) हां भाइ.. मे मीलने आया उनसे बहुत दीन पहेलेही कर दीया.. सबकुछ पांच दीनमे ही नीपटा दीया.. आपतो जानते हो हमारे यहा कोइ रीस्तेदार नही हे.. बस.. हम ओर पुजाके ससुरलाल वाले.. हम सब हरीद्वर जाकर काम नीपटाके आगये.. ओर आते ही वहाका सब प्रोपर्टी ओर बीजनेसको समेट लीया.. ओर यहा गांधीनगर रहेने आगये..
लखन : (मुस्कुराते) हां.. वहा पुजाका घर भी नजदीक होगया.. आंटीकी तबीयत तो ठीक हेनां..?
धृव : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) भाइ.. आपने कहाथानां..? सायद हमने भी आपके गांवके नीयम अपना लीये हे..
लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?
धृव : (धीरेसे) भाइ.. वहा कीसीको कहेना नही.. पापाका कार्य खतम होते ही मेने मोमसे सादी करली हे.. भाइ हमारा अफैर चल रहा था.. इसी वजहसे भावुने मुजे छोड दीया था.. वो बहुत ही अच्छी थी..
लखन : (मुस्कुराते) कमीने वो इतनी अच्छी थी तो फीर तुमने उसे छोडा क्यु..?
धृव : (धीरसेसे) भाइ.. मैने नही.. उन्होने हमे छोडा हे.. उन्होने मुजे ओर मम्मीको सेक्स करते देख लीया.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. पुजाकी दुसरी सादीसे पहेले ही मे ओर मम्मी रीलेशनमे आगये थे.. वो पापाके बीजी रहेनेकी वजहसे मुजसे बहुत प्यार करने लगी थी.. मोमने पापासे सभी उमीदे छोड दीथी..
लखन : तो फीर तुमने भावीकासे सादी क्युकी..? सम्हाल लेते पुजा ओर तेरी मम्मीको..
धृव : नही यार.. पुजाने अपनी सादीके लीये सर्त रखीथी.. की मे कीसी लडकीसे सादी करलु.. तब पुजाको मेरे ओर मोमके रीलेशनके बारेमे नही पता था.. फीर भावुसे बार बार मीलनेकी वजहसे मुजे अच्छी लगती थी.. तो सादी करली.. लेकीन मे मोम ओर पुजाके बीचमे ही फसा हुआ था.. तो भावुकी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया.. तो अच्छा हुआ हमारा डीवोर्स होगया..
लखन : (भावीकाकी ओर मुस्कुराते) यार मेने सुना हे डीवोर्सके बाद उन्होने अपना क्लीनीक बंध करदीया हे..? सायद तेरे डरकी वजहसे ये सहेर छोडकर चली गइ हे..
धृव : (गहेरी सास लेते) यार बहुत गलत हुआ.. उनको लगा होगाकी पापाकी पोलीटीकल पोजीसनकी वजहसे हम उनको परेसान करेगे.. लेकीन सच कहु..? जबसे पापा चले गये तबसे मेने सबकुछ छोड दीया हे.. उन सहेरको भी.. मेने अपनी सभी अयासीया छोडदी.. ओर जीजुके साथ उनके बीजनेसमे उनका हाथ बटाता हु.. वो भी सीर्फ टाइम पास.. वो भावुको डरनेकी जरुरत नही थी.. चालु रखती अपना क्लीनीक..
लखन : (मुस्कुराते) ओर तेरी मम्मी ओर पुजादी.. वो अब खुस हे..?
धृव : (मुस्कुराते) बहुत.. यार मम्मीने तो अब मुजे पुरी तराह अपना पती मानलीया हे.. ओर साथमे मे ओर पुजा भी अब ज्यादा नजदीक आगये हे.. दोनो सौतन मुजे खुब प्यार देती हे..
लखन : (हसते) कमीने भावु भी कम नही थी.. तुने ध्यान ही नही दीया.. कास अगर मुजे मील जाये.. तो मे उसे सादी कर लेता.. हें..हें..हें..
धृव : (जोरोसे हसते) तो कमीने ढुढले उनको.. ओर करले सादी.. वैसे भी तुम लोगोमे कीतनी भी सादीया करलो.. सब चलता हे.. वो ज्यादा दुर नही होगी.. सृतीभाभीकी बेस्ट फ्रेन्ड हेनां..? उनके कोन्टेक्टमे रहेती होगी.. जरा भाभीसे जानले..
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?
धृव : (हसते) यार मुजे अब क्यु बुरा लगेगा..? हमारा तो डीवोर्स हो गया हे.. बस.. अेक बार मीले तो मे उनकी माफी मांग लुगा.. ताकी दीलमे कोइ गील्टी ना रहे..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. वो मीलेगी तो तेरी बात जरुर पहुचाउगा.. चल.. मीलते हे..
धृव : (मुस्कुराते) हंम.. यार कभी इधर आना हुआ तो मुजे मीलना.. मे अेड्रेस सेन्ड करता हु.. चल बाय..
लखन : (फोन कट करतेही भावीकाको) बोलो.. अब डर लगता हे..?
भावीका : (सरमाकर हसते) नही यार.. आपने डर भी खतम करदीया.. ओर हमारी बात भी रखली..
सृती : (मुस्कुराते) भावु.. अब तु बीन्दास्त मेरी क्लीनीकपे चल.. वहा हम दोनो सम्हाल लेगे.. अब कहा हमे पैसोके लीये काम करना हे..
भावीका : (मुस्कुराते) सृती आज नही.. कलसे आउगी.. अभी खाना खाकर कुछ देर आराम करगे.. ओर साम पांच बजे वो वकील अंकलकी अेपोइटमेन्ट हे.. तो मे ओर लखन वही जा रहे हे..
सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. वो जरुरी हे.. तुम अपना सब काम आरामसे नीपटालो.. बादमे आना.. ओर हां.. तेरी वो आरती ओर तेरे जरुरी स्टाफको भेजदे..
भावीका : (मुस्कुराते) ओल मोस्ट सबको छुटी देदी हे.. बस.. सीर्फ ओटीपीकी दो ओरत.. ओर अेक आरती.. तीनो ही आयेगे.. आरतीको मेने फोन करके सब बता दीया हे.. वो घरपे ही हे..
फीर दो पहोरका खाना राधीका ओर नीलमने मीलकर बना लीया.. लखन चंदा सृती ओर भावीका बाते करते रहे.. चंदा वीजयके साथ खेलते बाते करती रही.. ओर बार बार लखनकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंखोसे रुमकी ओर इसारा करती रही.. ओर ये बात सृतीने नोटीस करली..
इतने दीन भावीकाने हवेलीपे रहेकर इस खानदानके बारेमे मंजु ओर पुनमसे काफी कुछ जानलीया था.. घरमे अब कीसीके भी साथ लीप कीस आम बात होगइ थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. सृती राधीका लखनके साथ अगल बगलमे बैठ गइ..ओर चंदा भावीका ओर नीलम इन तीनोके सामने बैठ गये..
सभी खाना टेबलके बीच था.. सब लोग अपने हाथोसे लेने लगे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी लखन नीचेसे पैरोसे नीलम ओर चंदाको छेड रहा था.. नीलम सरमके मारे सर जुकाते अपने होठोको दातोसे दबाके लखनकी हरकत बरदास्त कर रही थी.. ओर लखन अेक ही पैरोसे दोनोकी चुतको बारी बारी छेड रहा था..
नीलम अपनी सांसके साथ बैठी थी.. तब उनको भी नही पता थाकी जो हाल उनका हो रहा हे वोही हाल उनकी सासका हो रहा हे.. चंदाकी सांस भारी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनकी हरकत बरदास्त करती रही.. उनकी चुत पानी छोडने लगी..
अध्याय - २९६
इनमे ब्रीन्दा बसंतीके साथ बनवारीलालकी बहु बींदीया.. ओर साथमे नीशा वसुधाभी सामील होगये.. चारु रश्मी ओर वंदना तो पहेलेसे ही पंचायतकी सदस्य थी.. अैसा लगता था पुरा गांव अब महीला प्रधान होगया हो.. सभी महीलाओने अब पुरे गांवकी कमान अपने हाथोमे लेनेकी ठानली.. ओर चारुने पुनमकी अगवाइमे गांवका ओर ज्यादा वीकास करनेपे जोर दीया.... अब आगे
लखन सबको लेकर घरपे आगया.. ओर होलमे बेठे बाते कर रहे थे तब भावीकाने लखनको अब भी थोडा डर लगनेकी बात कही.. तो लखनने थोडी सेखी मारी.. ओर सबके सामने अैसे ही धृवको हाल चाल जाननेके लीये फोन कीया.. जब फोन लगा तो सबको चुप रहेनेका इसारा करते फोन स्पीकरपे करदीया..
लखन : (मुस्कुराते) सब चुप रहेना.. अभी आपका डर खतम कर देता हु..
धृव : (फोन लगते ही) अरे भाइ.. कैसे हो..? बडी भाभीका सब कार्य संप्पन होगया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां भाइ.. कल ही होगया.. सब खतम करके आज ही सहेर वापस आगया.. तो सोचा तुजे फोन करु.. बोल.. क्या हालचाल हे..? तेरे पापाका सब कार्य कंपलीट होगया..?
धृव : (फोनपे) हां भाइ.. मे मीलने आया उनसे बहुत दीन पहेलेही कर दीया.. सबकुछ पांच दीनमे ही नीपटा दीया.. आपतो जानते हो हमारे यहा कोइ रीस्तेदार नही हे.. बस.. हम ओर पुजाके ससुरलाल वाले.. हम सब हरीद्वर जाकर काम नीपटाके आगये.. ओर आते ही वहाका सब प्रोपर्टी ओर बीजनेसको समेट लीया.. ओर यहा गांधीनगर रहेने आगये..
लखन : (मुस्कुराते) हां.. वहा पुजाका घर भी नजदीक होगया.. आंटीकी तबीयत तो ठीक हेनां..?
धृव : (थोडा हीचकीचाते धीरेसे) भाइ.. आपने कहाथानां..? सायद हमने भी आपके गांवके नीयम अपना लीये हे..
लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?
धृव : (धीरेसे) भाइ.. वहा कीसीको कहेना नही.. पापाका कार्य खतम होते ही मेने मोमसे सादी करली हे.. भाइ हमारा अफैर चल रहा था.. इसी वजहसे भावुने मुजे छोड दीया था.. वो बहुत ही अच्छी थी..
लखन : (मुस्कुराते) कमीने वो इतनी अच्छी थी तो फीर तुमने उसे छोडा क्यु..?
धृव : (धीरसेसे) भाइ.. मैने नही.. उन्होने हमे छोडा हे.. उन्होने मुजे ओर मम्मीको सेक्स करते देख लीया.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. पुजाकी दुसरी सादीसे पहेले ही मे ओर मम्मी रीलेशनमे आगये थे.. वो पापाके बीजी रहेनेकी वजहसे मुजसे बहुत प्यार करने लगी थी.. मोमने पापासे सभी उमीदे छोड दीथी..
लखन : तो फीर तुमने भावीकासे सादी क्युकी..? सम्हाल लेते पुजा ओर तेरी मम्मीको..
धृव : नही यार.. पुजाने अपनी सादीके लीये सर्त रखीथी.. की मे कीसी लडकीसे सादी करलु.. तब पुजाको मेरे ओर मोमके रीलेशनके बारेमे नही पता था.. फीर भावुसे बार बार मीलनेकी वजहसे मुजे अच्छी लगती थी.. तो सादी करली.. लेकीन मे मोम ओर पुजाके बीचमे ही फसा हुआ था.. तो भावुकी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया.. तो अच्छा हुआ हमारा डीवोर्स होगया..
लखन : (भावीकाकी ओर मुस्कुराते) यार मेने सुना हे डीवोर्सके बाद उन्होने अपना क्लीनीक बंध करदीया हे..? सायद तेरे डरकी वजहसे ये सहेर छोडकर चली गइ हे..
धृव : (गहेरी सास लेते) यार बहुत गलत हुआ.. उनको लगा होगाकी पापाकी पोलीटीकल पोजीसनकी वजहसे हम उनको परेसान करेगे.. लेकीन सच कहु..? जबसे पापा चले गये तबसे मेने सबकुछ छोड दीया हे.. उन सहेरको भी.. मेने अपनी सभी अयासीया छोडदी.. ओर जीजुके साथ उनके बीजनेसमे उनका हाथ बटाता हु.. वो भी सीर्फ टाइम पास.. वो भावुको डरनेकी जरुरत नही थी.. चालु रखती अपना क्लीनीक..
लखन : (मुस्कुराते) ओर तेरी मम्मी ओर पुजादी.. वो अब खुस हे..?
धृव : (मुस्कुराते) बहुत.. यार मम्मीने तो अब मुजे पुरी तराह अपना पती मानलीया हे.. ओर साथमे मे ओर पुजा भी अब ज्यादा नजदीक आगये हे.. दोनो सौतन मुजे खुब प्यार देती हे..
लखन : (हसते) कमीने भावु भी कम नही थी.. तुने ध्यान ही नही दीया.. कास अगर मुजे मील जाये.. तो मे उसे सादी कर लेता.. हें..हें..हें..
धृव : (जोरोसे हसते) तो कमीने ढुढले उनको.. ओर करले सादी.. वैसे भी तुम लोगोमे कीतनी भी सादीया करलो.. सब चलता हे.. वो ज्यादा दुर नही होगी.. सृतीभाभीकी बेस्ट फ्रेन्ड हेनां..? उनके कोन्टेक्टमे रहेती होगी.. जरा भाभीसे जानले..
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?
धृव : (हसते) यार मुजे अब क्यु बुरा लगेगा..? हमारा तो डीवोर्स हो गया हे.. बस.. अेक बार मीले तो मे उनकी माफी मांग लुगा.. ताकी दीलमे कोइ गील्टी ना रहे..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे यार.. वो मीलेगी तो तेरी बात जरुर पहुचाउगा.. चल.. मीलते हे..
धृव : (मुस्कुराते) हंम.. यार कभी इधर आना हुआ तो मुजे मीलना.. मे अेड्रेस सेन्ड करता हु.. चल बाय..
लखन : (फोन कट करतेही भावीकाको) बोलो.. अब डर लगता हे..?
भावीका : (सरमाकर हसते) नही यार.. आपने डर भी खतम करदीया.. ओर हमारी बात भी रखली..
सृती : (मुस्कुराते) भावु.. अब तु बीन्दास्त मेरी क्लीनीकपे चल.. वहा हम दोनो सम्हाल लेगे.. अब कहा हमे पैसोके लीये काम करना हे..
भावीका : (मुस्कुराते) सृती आज नही.. कलसे आउगी.. अभी खाना खाकर कुछ देर आराम करगे.. ओर साम पांच बजे वो वकील अंकलकी अेपोइटमेन्ट हे.. तो मे ओर लखन वही जा रहे हे..
सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. वो जरुरी हे.. तुम अपना सब काम आरामसे नीपटालो.. बादमे आना.. ओर हां.. तेरी वो आरती ओर तेरे जरुरी स्टाफको भेजदे..
भावीका : (मुस्कुराते) ओल मोस्ट सबको छुटी देदी हे.. बस.. सीर्फ ओटीपीकी दो ओरत.. ओर अेक आरती.. तीनो ही आयेगे.. आरतीको मेने फोन करके सब बता दीया हे.. वो घरपे ही हे..
फीर दो पहोरका खाना राधीका ओर नीलमने मीलकर बना लीया.. लखन चंदा सृती ओर भावीका बाते करते रहे.. चंदा वीजयके साथ खेलते बाते करती रही.. ओर बार बार लखनकी ओर कातील स्माइल करते उनको आंखोसे रुमकी ओर इसारा करती रही.. ओर ये बात सृतीने नोटीस करली..
इतने दीन भावीकाने हवेलीपे रहेकर इस खानदानके बारेमे मंजु ओर पुनमसे काफी कुछ जानलीया था.. घरमे अब कीसीके भी साथ लीप कीस आम बात होगइ थी.. सबलोग खाना खाने बैठ गये.. सृती राधीका लखनके साथ अगल बगलमे बैठ गइ..ओर चंदा भावीका ओर नीलम इन तीनोके सामने बैठ गये..
सभी खाना टेबलके बीच था.. सब लोग अपने हाथोसे लेने लगे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी लखन नीचेसे पैरोसे नीलम ओर चंदाको छेड रहा था.. नीलम सरमके मारे सर जुकाते अपने होठोको दातोसे दबाके लखनकी हरकत बरदास्त कर रही थी.. ओर लखन अेक ही पैरोसे दोनोकी चुतको बारी बारी छेड रहा था..
नीलम अपनी सांसके साथ बैठी थी.. तब उनको भी नही पता थाकी जो हाल उनका हो रहा हे वोही हाल उनकी सासका हो रहा हे.. चंदाकी सांस भारी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उनकी हरकत बरदास्त करती रही.. उनकी चुत पानी छोडने लगी..











