Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता. - Page 30 - SexBaba
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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

मुझे बेहद अच्छा लगा एक छुपा हुआ पाठक बाहर तो आया.

काश कवि को पैसे देकर बुलाया गया होता तब तो आप उसकी अपेक्षाओं को गलत या सही ठहरा सकते थे परंतु यहां तो कवि स्वयं चौराहे पर खड़ा होकर गाना गा रहा था दर्शक इकट्ठा होते गए तालियां बजती रही और कविता चलती रही जब दर्शक के हाथ में मेहंदी लगी और उन्होंने तालियां बजाना बंद की कवि ने काव्य पाठ बंद कर दिया.

यह तो मैं उन पाठकों की बात कर रहा हूं जो कहानी के प्रति अपने विचार अच्छे या बुरे परंतु दिए जरूर हैं परंतु उन पाठकों का क्या करूं जो बोरा ओढ़ कर तथा स्वयं को छुपाकर कहानी पढ़ रहे हैं...

आशा है आप मेरा आशय समझ रहे हैं.
 
यूं ही इस पटल पर आकर अपनी उपस्थिति का एहसास कराते रहें मुझे इस तरह आकर आपका सलाह देना अच्छा लगा कम से कम आप आए तो
 
कुछ समय के लिए फोरम पर और कहानियां पढ़ते रहिए मेरी इस कहानी में शायद अब दम नहीं बचा और मैं भी अभी इस कहानी पर अपने उत्साह में कमी महसूस कर रहा हूं यह लेखन समय आने पर दोबारा चालू होगा या नहीं यह मैं नहीं जानता परंतु आप के इंतजार के लिए शुक्रिया
 
आपकी इतनी विस्तृत प्रतिक्रिया देखकर मैं खुद को उत्तर देने से रोक नहीं पाया...

मैं इस फोरम पर उस समय आया था जब मैं अपनी पहली कहानी " छाया" लिख चुका था जिसमें सेक्स तो था परंतु मर्यादा के आवरण में इस कहानी को मैंने पूरे मन से लिखा था उस कहानी को इस फोरम पर पोस्ट करते समय मुझे कई अच्छे और संजीदा पाठकों का साथ मिला और निश्चय ही उनकी प्रतिक्रियाएं उत्साहवर्धक थी मेरी नजर में भी वह कहानी अच्छी थी परंतु इस फोरम के कई पाठक या यूं कहूं अधिकतर पाठक कहानियों में सेक्स और मेरी नजरों में वाहियात सेक्स को ज्यादा प्रधानता देते हैं मैंने अपने इस कहानी में पाठकों की इच्छा को ध्यान में रखकर सेक्स को प्रधानता दी और कहानी के मर्म को धीरे धीरे आगे बढ़ाता रहा ..

सुगना और सरयू सिंह के आगे निश्चित ही कोई किरदार अभी टिक नहीं पा रहा है इसका कारण भी स्पष्ट है इन दोनों किरदार पर कहानी के लगभग 80% भाग लिखे गए हैं जबकि बाकी किरदारों पर अभी कहानी अपनी रफ्तार ही पकड़ रही है कुछ किरदार जैसे राजेश और रतन ऐसे हैं जिनका कहानी में आगमन एक गेस्ट कलाकार के रूप में ही हुआ है परंतु इनका औचित्य कहानी के चरम पर पहुंचने पर ही समझ में आएगा।।

मैं इस कहानी के अगले 8- 10 भाग लिख चुका हूँ और अपने खाली समय में इस कहानी को पूरा भी करूंगा परंतु यह कहानी आने वाले समय में उन्हीं पाठकों तक पहुंचेगी जिनको इसका इंतजार है मैंने पहले भी एक दो बार यह करने की कोशिश की थी परंतु मेरी एक प्रिय पाठिका कोमल रानी और कुछ चुनिंदा पाठकों की सलाह पर मैंने कहानी वापस फोरम में पोस्ट करना शुरू कर दिया।

कहानी के व्यूज़ देख कर मैंने अंदाज लगाया है की इस कहानी को पढ़ने वाले लगभग 1500 से ढाई हजार पाठक हैं बड़े अफसोस का विषय है कि इन पाठकों में से मेरे आग्रह करने के बाद भी उन्होंने इस कहानी पर अपने विचार नहीं रखें इतना तो तय है की यदि वह कहानी अब तक पढ़ रहे हैं तो निश्चित ही उन्हें यह कुछ हद तक पसंद अवश्य आ रही होगी ऐसे पाठक अपने विचार अच्छे या बुरे देकर इस कहानी को और परिमार्जित कर सकते थे परंतु न जाने उनकी क्या मजबूरियां है वही जाने...

मेरे लिए इस कहानी को इस फोरम पर डालने का एकमात्र प्रलोभन पाठकों की प्रतिक्रियाएं पढ़ना था जिसमें कुछ पाठकों को छोड़कर बाकी पाठकों ने गुपचुप तरीके से इस कहानी का आनंद लिया है...

खैर शिकवा शिकायत का वक्त खत्म हो चुका है मैं आज भी अपनी कहानी पर उन पाठकों की तलाश में आता हूं जो हिम्मत दिखाकर अपने विचार अच्छे या बुरे साझा कर रहे हैं।

समय आने पर इस कहानी के बाकी अपडेट भी मेरे पाठकों तक आएंगे जरूर बशर्ते वह पढ़ना चाहें

मैंने अभी कुछ समय के लिए चौराहे पर खड़े होकर गाना छोड़ दिया है। जब महफिल सजेगी मैं फिर हाजिर हो जाऊंगा... तब तक के लिए अपने उन चुनिंदा पाठकों से क्षमा प्रार्थी हूं जिन्होंने इस कहानी से अपना जुड़ाव दिखाया है और अपडेट का इंतजार कर रहे हैं..
 
आप की विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद काश कि आपका साथ मुझे कुछ समय पहले से मिला होता तो शायद पात्रों के चरित्र निर्माण में आपकी भूमिका भी अहम होती आपने भी कहानी को सरसरी तौर पर पढ़कर भी कहानी का मर्म समझ लिया है और अपने एक संजीदा पाठक होने का परिचय दिया है ऐसे पाठकों का लगातार साथ ही लेखक की ऊर्जा होती है जुड़े रहे।
 
इस कहानी पर आप दोनों की पहली प्रतिक्रिया देख कर अच्छा लगा...जुड़े रहें
 
सुगना का राजेश से गर्भवती होना कहानी की मांग थी या तो वह राजेश से संभोग कर गर्भवती होती या फिर जिस तरह से कहानी में दिखाया गया है मैंने दोनों की तैयारी की हुई थी ज्यादातर पाठकों का रुझान सुगना को व्यभिचारी बनने से रोक रहा था इसलिए यह उचित या अनुचित विधि अपनाई गयी।

प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद
 
प्रसाद जी जिस तरह आपने चंद लाइने लिखकर अपने जुड़ाव का संकेत दिया है यही मैं हर उस पाठक से चाहता हूं जो इस कहानी से जुड़ा हुआ है। मैं तारीफ की उम्मीद नहीं करता परंतु चंद लाइनों की उम्मीद जरूर करता हूं अभी भी मैं पाठकों का इंतजार ही कर रहा हूं आपको धन्यवाद साहस दिखाने के लिए
 
धन्यवाद प्रतीक जी। सच कह दिनों से आपकी भी प्रतिक्रिया नहीं आ रही मुझे लगा शायद आपकी निगाहों में कहानी में अपना औचित्य को दिया है मेरे पुराने पाठकों की बेरुखी भी कहानी के ठहराव का मुख्य कारण रही है जुड़े रहे शीघ्र ही कहानी आगे बढ़ेगी परंतु यह अपने सभी पाठकों तक पहुंचेगी या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा
 
जरूर.. साथ बनाये रहिये...
 
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