Incest चीरहरण (Completed) - SexBaba
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Incest चीरहरण (Completed)

Update - 1

सुमन (43)



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अजमेर के पश्चिमी इलाके में बने पुलिस क्वाटर के छोटे से कमरे में गौतम रात को इतिहास की किताब पढ़ते हुए कब सो गया था उसे भी पता नहीं चला. सुबह जब उसकी माँ सुमन चाय का कप हाथ में लेकर आई और गौतम को अपना हाथ लगाकर नहीं जगा दिया तब तक गौतम की नींद नहीं खुली थी.

सुबह के साढ़े आठ बजे का समय हो चूका था और गौतम के पिता जगमोहन जो पुलिस में हेड कांस्टेबल थे अपनी वर्दी पहन के थाने के लिए निकल चुके थे, सुमन भी घर का सारा काम आज जल्दी निपटाकर बैठ गई थी और अब गौतम जिसे सुमन प्यार से ग़ुगु कहकर पुकारती थी जगाने आ गई गई और चाय का कप बेड के किनारे रख कर प्यार से गौतम को जगा रही थी..

गौतम - सोने दो ना माँ..

सुमन - बहुत सो चुके नवाबसाब.. अब उठो और जल्दी से त्यार हो जाओ. कल बताया था ना आज बाबाज़ी के थान पर जाना है माथा टेकने.

सुमन ने गौतम के गालो सहलाते हुए कहा और उसके बगल में जो किताब पड़ी थी उसे उठाकर साइड में स्टडी टेबल पर रख दिया.

गौतम - कब तक इन पाखंडी बाबाओ के चक्कर में रहोगी माँ. कुछ फ़ायदा नहीं है वहा जाने से, उन्हें तो बस चढावे के पैसो से मतलब है, अन्धविश्वास फैलाते है और लोगों को लुटते है.

गौतम ने तकिये को अपने सीने से लगाकर आँख बंद किये हुए ही ये बात सुमन से कही जिसके जवाब में सुमन ने गौतम के हाथों से वो तकिया खींच लिया और हाथ पकड़कर उठाते हुए बोली..

सुमन - मेरा अन्धविश्वास है तो अंधविश्वास ही सही. तुम अंदर मत जाना मैं जाकर बाबाजी को माथा टेक आउंगी. बाबाजी के कारण ही ये गृहस्थी खुशहाल चल रही है वरना ना जाने क्या होता? मेरी सुनी कोख भी तो उनके आशीर्वाद से हरी हुई थी डाक्टर तक ने जवाब दे दिया था कि मैं बाँझ ही रहूंगी पर बाबाजी के आशीर्वाद से मुझे मेरा ग़ुगु मिला और तेरे पापा जब ससपेंड हुए थे तब भी बाबाजी के करम से ही वापस उनकी बहाली हुई.

सुमन कि बातों से गौतम चिढ़ते हुए अंगड़ाई लेकर उठ गया और सुमन का हाथ पकड़ते हुए बोला..

गौतम - अच्छा ठीक है माँ आपको मानना है तो मानो पर कह देता हूँ मैं कभी ऐसे बाबा-वाबा के चक्कर में नहीं आऊंगा. आप तो वैसे भी इतनी भोली हो कि कोई भी आपको बेवकूफ बनाकर अपने उल्लू सीधा कर सकता है. गौतम ने चाय का कप लिया और एक सिप लेकर वापस कहा माँ.. सुबह सुबह आपके हाथो कि अदरक वाली चाय ना मिले तो सुबह सुबह जैसी नहीं लगती.

सुमन गौतम की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसके पास आई और एक प्यार से भरा हुआ ममतामई चुम्बन गौतम के गाल पर करके बोली - अब ये मस्का लगाना बंद कर और जल्दी से नाहधो कर त्यार होजा मैं नास्ता लगाती हूँ.

सुमन इतना कहकर कमरे से भर आ गई और गौतम चाय की चुस्की लेटे हुए खड़ा होकर खिड़की से बाहर सडक के दूसरी तरफ अपने काम से आते जाते लोगों को देखने लगा.. इतने मे गौतम की नज़र टेबल पर पड़े अपने फ़ोन पर चली गई जो साइलेंट पर था और कब से उसमे किसीका फ़ोन आ रहा था.

गौतम ने फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ उसका दोस्त आदिल था जो हड़बड़ी में था.

आदिल - भोस्डिके रंडी.. कब से फ़ोन कर रहा हूँ गांड में डालके बैठा था क्या? उठाया क्यू नहीं? क्या कर रहा था?

गौतम - तेरी अम्मी चोद रहा था घोड़ी बनाके गांडु. वैसे सुबह सुबह क्यू फ़ोन कर रहा है? गांड देने का इरादा है क्या?

आदिल - मज़ाक़ मत कर, सुन एक बिहारन भाभी है मस्त सिर्फ 4 हज़ार में फुल नाईट सर्विस देने को त्यार है. आज रात दोनों भाई मचका देते है बता क्या बोलता है? बुक करू?

गौतम - पैसे कौन तेरा कबाड़ी बाप देगा मेरी रांडबाजी के लिए?

आदिल - अबे तुझे दो हज़ार का ही तो जुगाड़ करना है सोच ले. ऐसा माल बार बार नहीं मिलता. सिर्फ दो हज़ार की बात है.

गौतम - साले 5G के जमाने मैं कीपैड वाला 2G फ़ोन इस्तेमाल कर रहा हूँ और तू बोल रहा है 2 हज़ार की बात है.

आदिल - अबे इससे ज्यादा तो तेरा बाप एक दिन में ऊपर की कमाई कर लेता होगा. तू बहनचोद फिर भी ऐसे रो रहा है.

गौतम - भाई मेरा बाप जितना भी कमाता है अपनी गांड में छुपा के रखता है मुझे दो टाइम की रोटी के अलावा कुछ नहीं देता. सो रुपए भी मांगूगा तो दस सवाल पूछेगा. मेरे पास तो पैसे नहीं है फ्री दिलाये तो बता देना.

आदिल - फ्री में मेरा लंड लेले साले भिखारी. बहनचोद हर बार का तेरा यही रंडी रोना होता है.

गौतम - लंड है तेरे पास गांडु? साले हर बार बस पांच मिनट में जड़ जाता है और फिर चोदने की जगह बस हिलाके आ जाता है. मेरे पास तो नहीं है कुछ, भी तू करावाये तो बता देना.

आदिल - हां साले बचपन से अब तक मैने ही पाला है तुझे. चल देखता हूँ पैसे का जुगाड़ हो गया तो कॉल कर लूंगा.

गौतम - थोड़ा एक्स्ट्रा जुगाड़ करना भाई बहुत दिन हो गए नवाबवाले की बिरयानी भी खाके आएंगे.

आदिल - भोस्डिके अब ऊँगली पकड़ा दी तो कंधे पर चढ़कर कान में मत मूत. पैसे का जुगाड़ हो गया तो कॉल कर दूंगा वरना हिला के सोजाना अपनी फेवरेट tisca chopda पर साले आंटी लवर.

गौतम चाय पीकर कप टेबल पर रखते हुए आदिल से कहता है

गौतम - साले सुबह सुबह उसका नाम लेना जरुरी था क्या? मेरा नाग वैसे ही खड़ा होकर फुफकार रहा है अब तो हिलना ही पड़ेगा.

आदिल हँसते हुए - साले वहशी 50 साल की बुढ़िया है वो, तेरे जैसे बच्चे को निम्बू की तरह निचोड़ देगी.

गौतम - भाई 50 की उम्र में भी पूरी माल लगती है साली. ऐसी बुढ़िया के लिए तो ख़ुशी खुशी निम्बू की तरह नीचुड़ जाऊ, अपनी मर्ज़ी से अपनी इज़्ज़त लुटवा दूँ. चल अब रखता हूँ.

आदिल - भाई पूरा हवसी है तू. ठीक है मिलते है शाम को.

आदिल का फ़ोन कटने पर गौतम टॉवल के साथ बाथरूम चला गया और पहले अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस tisca chopda को cum ट्रिब्यूट दिया और फिर नहाने लगा. सुमन नास्ता त्यार कर वापस गौतम के कमरे में आई और जब उसने देखा की गौतम अब तक नहीं नहाया है तो उसने बाथरूम का दरवाजा बजाते हुए गौतम से कहा.

सुमन - ग़ुगु.. ग़ुगु..

नहाते हुए ही गौतम ने अपनी माँ सुमन का जवाब दिया

गौतम - हां माँ..

सुमन - ग़ुगु और कितनी देर लगाएगा बाबू? जरा जल्दी कर ना. शाम से पहले वापस भी आना है.

गौतम - आ गया बस पांच मिनट और.

सुमन - अच्छा ठीक है मैं तेरे कपडे निकाल कर बेड पर रख देती हूँ तू जरा जल्दी कर.

सुमन ने बेड के सामने दिवार से सटी हुई एक पुरानी सी लड़की की अलमीरा का दरवाजा खोला और उसमे गौतम के कपडो को टटोलने लगी ज्यादातर लवर टीशर्ट ही उसे दिखी और नीचे कुछ जीन्स शर्ट भी नज़र आई सबकुछ इतना अव्यवस्थित था की सुमन को समझ नहीं आया वो कोनसे कपडे निकाले और कोनसे नहीं, इतने में उसकी नज़र नीचे इस्त्री किये हुए एक जोड़े पर पड़ी जो उसीने गौतम को दिलाई थी मगर गौतम ने एक भी बार उन कपड़ो को नहीं पहना था. सुमन ने वो डस्टी ऑफ ग्रे जीन्स और उसके साथ ही डार्क पिंक डेनिम शर्ट निकालकर बेड पर रख दी इतने में गौतम नहाकर तौलिया लपेटे बाहर आ गया और कपडे देखकर सुमन से कहने लगा..

गौतम - माँ ये पिंक शर्ट रहने दो लड़कियों वाला कलर लगता है.

सुमन - अच्छा? रंग में कब से लड़की और लड़का होने लगा? तेरे ऊपर गुलाबी रंग खिलता है इसलिए निकाला है चुपचाप पहन ले समझा?

सुमन इतना कहकर बाहर आ गयी और गौतम ने उन कपड़ो को पहनकर नीचे स्पोर्ट शूज डाल लिये और बाल बनाकर कमरे से बाहर निकलकर रसोई में आ गया.

कॉलेज के आखिरी साल में पढ़ रहे गौतम की उम्र करीब 20 साल थी, रंग सुमन के जैसा ही गोरा और नयननक्ष भी सुमन की तरह मनमोहक और आकर्षक थे कद करीब 6 फुट और बाल हलके से घूँघराले थे जो उसके चेहरे को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाने का काम कर रहे थे.. सुमन ने जब गौतम को उन कपड़ो में देखा तो देखती रह गई गौतम किसी फ़िल्मी हीरो से ज्यादा ही अच्छा लग रहा था.

सुमन ने नास्ते की प्लेट गौतम के आगे करते हुए कहा..

सुमन - लीजिये राजासाहब आपकी सल्तनत में आज ये बना है खाने को..

गौतम सुमन से नास्ते की प्लेट लेकर रसोई में बनी मार्बल की पट्टी पर उछलकर बैठ गया और सुमन की बात का जवाब देते हुए कहा..

गौतम - काहे का राजा माँ.. एक फ़ोन के लिए बोला था वो तो नहीं दिलाया अभी तक आपने? और आज भी नास्ते में पोहे बना दिए? कम से कम पराठे बना देती.

सुमन बर्तन साफ करती हुई - पराठे शाम को खा लेना और वैसे फ़ोन कितने तक का आएगा तुम्हारा?

गौतम खुश होकर - ज्यादा महँगा नहीं चाहिए बस 30-35 हज़ार तक दिला दो..

सुमन 30-35 हज़ार सुनकर चौंकते हुए बोली - इतना महंगा? बेटा इसके तो तेरे पापा से बात कर, मुझे तो चोरी करनी पड़ेगी या डाका डालना पड़ेगा तुझे उतना महँगा फ़ोन दिलाने के लिए. कोई 10-15 हज़ार वाला लेना हो तो दिला सकती हूँ..

गौतम - पापा से क्या बात करू? वो मुझे फ़ोन क्या चार्जर तक नहीं दिलाने वाले और 10-15 हज़ार वाले फ़ोन ज्यादा दिनो तक चलते नहीं है.

सुमन - फिर तो बेटू ज़ी इसी से काम चलाओ.

गौतम - माँ..

सुमन - हम्म?

गौतम - एक काम हो सकता है.

सुमन - क्या?

गौतम - आप इंस्टालमेंट पर फ़ोन दिला दो. हर मैंने 2-3 हज़ार तो आप पापा से जुगाड़ ही लोगी उसके लिए.

सुमन - बदले में मुझे क्या मिलेगा.

गौतम - बदले में मैं आपका एक अकाउंट बना दूंगा इंस्टा पर वहां आप रील्स में गाना गा कर लोगों को अपनी मीठी आवाज सुना सकती है जैसे किसी फंक्शन में आप गाती हो. लोग अगर ज्यादा फॉलो करेंगे तो उससे पैसे भी मिलते है और आप फेमस भी हो जाओगी.

सुमन - वो क्या होता है?

गौतम - एक ऐप होती है व्हाट्सप्प की तरह. बस ज्यादातर कुछ नहीं करना होता.

सुमन - चल ठीक है.. दिला दूंगी अब खुश?

गौतम - पक्का ना?

सुमन - हां पक्का, बाबाजी के से आते हुए ले लेंगे फ़ोन बस.

गौतम ख़ुशी से सुमन को गले लगाकर उसके गालो पर चुम्बन करते हुए कहता है..

गौतम - थैंक यू माँ.. यू आर बेस्ट.. ई लव यू..

सुमन शरमाते हुए - चल हट, बदमाश कहीं का. माँ को आई लव यू बोलता है.

गौतम - तो क्या हुआ सब बोलते है. इसमें क्या बुरा है.

सुमन गौतम की शर्ट का एक्स्ट्रा खुला हुआ बटन बंद करते हुए कहती है..

सुमन - हां हां अग्रेज की औलाद.. समझ गई मैं. मैंने ही तेरे पापा से ज़िद करके तुझे बड़ी वाली इंग्लिश मेडियम स्कूल में भिजवाया था. अब अंग्रेजो वाले लक्षण तो आयेंगे ही.

गौतम नास्ते की प्लेट रखते हुए मज़ाकिया ढंग से - अच्छा तो मैं अंग्रेजो की औलाद हूँ?

सुमन शरमाते हुए गुस्से में - चुप बेशर्म.. कुछ भी बोलता है. अब चल वरना आते आते पक्का शाम हो जायेगी, पाता नहीं कितनी भीड़ बैठी होगी बाबाजी के सामने.

गौतम - चलो तो..

सुमन - कमरे की खिड़की बंद है ना?

गौतम - हां

सुमन - ठीक है जाके बाइक स्टार्ट कर मैं ताला लगा के आती हूँ.

गौतम सुमन की बात मानकर घर के बाहर आ जाता है और घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दाई तरफ खड़ी एक पुरानी स्प्लेंडर को स्टार्ट के सुमन का इंतजार करने लगता है वही सुमन घर के मुख्य दरवाजे पर डबल लॉक लगा कर गौतम के पीछे बैठ जाती है और दोनों शहर से बाहर एक पहाड़ी के ऊपर बने छोटे मगर बहुत पुराने मन्दिरनुमा ढांचे पर जाने के लिए निकल जाते है.. थोड़ी दूर जाकर ही गौतम पीछे बैठी सुमन से कहता है..

गौतम - माँ..

सुमन - हां.

गौतम - पेट्रोल ख़त्म होने वाला है.

सुमन - ठीक है आगे भरवा लेना.

गौतम सुमन की बात सुनकर चुपचाप गाडी चलाता है और आगे एक पेट्रोल पंप के सामने गाडी रोक लेता है

गौतम - माँ आप यही रुको मैं तेल डलवा के आता हूँ..

सुमन एक 500 का नोट देते हुए - ठीक है ले डलवा ला.

गौतम पैसे लेकर पम्प के सामने आ जाता है.

गौतम भईया - 100 का डाल दो..

गौतम 100 का तेल डलवा कर बाकी अपनी जेब में रख लेटा है और वापस सुमन के पास आ जाता है..

गौतम - माँ बैठो..

सुमन - हां रुक.

गौतम - माँ वापस भूक लगी है आगे कोटा कचोरी वाले के रोक लूँ? कचोरी खाके चलते है.

सुमन - अच्छा ठीक है मेरे भुक्कड़ बेटू.. सुमन ने गौतम के दोनों गालो को अपने एक हाथ से पिचकाते हुए प्यार से कहा और वापस बाइक पर बैठ गई.

गौतम थोड़ा आगे चलकर बाइक को किनारे लगा देता है और सुमन से 100 रुपए लेकर दो कचोरी ले आता है.

गौतम - कैसी है माँ कचोरी?

सुमन - अच्छी है पर थोड़ा जल्दी कर ग़ुगु बाबाजी के पहुंचना भी है.

गौतम - अब वो पाखंडी बाबा इतनी दूर अपनी दूकान खोलके बैठा है तो मैं क्या करू? समय तो लगता ही है जाने मैं.

सुमन - ग़ुगु तमीज से, क्या अनाप शनाप फालतू बात कर रहा है. पागल लड़का.

गौतम - पागल मैं नहीं हूँ. पागल आपके बाबाजी सबको बनाते है. चलो अब, पता नहीं आज कोनसा टोना टोटका बताएगा वो बाबा. क़ब्र में पैर है फिर भी ये सब कर रहा है.

सुमन गौतम के पीछे बैठ गयी और अपने हाथ को आगे लेजाकर गौतम को पकड़ते हुए उसकी गर्दन पर चुम लिया प्यार से वापस बोली.

सुमन - बड़े लोग सही कहकर गए है ज्यादा पढ़ाई लिखाई मति भ्र्स्ट कर देती है. तुझे किसी छोटे स्कूल ही भेजना चाहिए था.

गौतम ने इस बार कोई जवाब नहीं दिया और बाइक को चलाने लगा. इस बार उसने पहाड़ी के नीचे एक बरगद के बड़े से पेड़ के पास बाइक रोक दी जहाँ और भी बहुत सी गाड़िया खड़ी थी. थोड़ा आगे से टूटी फूटी सीढ़िया ऊपर की तरफ जा रही थी और ऊपर एक तरह का बड़ा सा हॉल बना हुआ था जिसके चारो तरफ पत्थर की दिवार और छत पर लोहे की पट्टीया लगी हुई थी देखने से मंदिरनुमा लगने वाला ये ढांचा अंदर से खाली था बस एक तरफ एक बूढा आदमी हाथ में लकड़ी की डंडी लिए आसान पर बैठा था और बहुत से लोग कतार लगाए सामने बैठे थे और बारी बारी से अपना दुखड़ा लेकर उस बूढ़े आदमी के सामने जाते थे.

गौतम - चलो अब सीढिया चढ़ो, बहुत शोक है ना बाबाजी के पास जाने का.

सुमन ने गौतम का हाथ पकड़ा और उसकी बात का जवाब देते हुए बोली - चलना तो तुझे भी पड़ेगा मेरे साथ बिगड़ैल शहजादे..

सुमन ये कहकर गौतम के साथ सीढिया चढ़ने लगी और एक के बाद एक 250 सीढ़िया चढ़कर उस ढाचे के सामने पहुंच गई..

गौतम - लो माँ पानी..

सुमन पानी की बोतल लेकर पानी के दो घूंट लगाती है और दो चार मिनट सांस लेकर बोतल वापस गौतम को दे देती है..

गौतम - जाओ जब फ्री हो जाओ बता देना मैं यही हूँ..

सुमन मज़ाकिया अंदाज़ में - जैसी आपकी आज्ञा. और उस ढाचे के अंदर जाकर उस कतार में बैठ गई. करीब 50 लोग सुमन से आगे कतार में थे और सब अपनी अपनी बात बूढ़े आदमी को बताते थे और बूढा आदमी उनकी समस्या का निवारण करने के लिए कोई ना कोई तरतीब पर्चे पर लिखकर सुझा देता था.

गौतम बाहर टहलता हुआ वहां से बाई तरफ आ गया और पहाड़ी पर से उतरने के बने हुए दूसरे कच्चे रास्ते पर थोड़ा नीचे जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया जहा से पीछे का जंगल साफ दिखाई देता था, वहां से गौतम हर बार की तरह जंगल के अंदर बने एक तलब को देखने लगा जहा नीलगाय और बाकी जानवर पानी पी रहे थे. उसका मन वहा जाकर उस तलब को पास से देखने का होता मगर जंगल में कौन जाए? कहीं कोई जानवर सामने आ गया तो क्या होगा? और अगर उसे कुछ हो गया तो उसकी माँ सुमन का क्या हाल होगा? कितना लाड करती है वो गौतम से. गौतम यही सब सोचते हुए उस पेड़ के नीचे बैठकर जंगल की खूबसूरती देखने रहा था मगर कुछ देर बाद उसे नीचे से किसी के ऊपर पहाड़ी पर आने की आवाज सुनाई दी उसने देखा एक बूढा सा दिखने वाला आदमी जिसके तन पर एक मैली धोती लिपटी थी वो ऊपर चले आ रहा था.

बूढ़े ने गौतम को देखा तो वो वही ठहर गया और गौतम से पिने के लिए पानी मांगा. गौतम ने बिना कुछ सोचे समझें उस बूढ़े को अपने पास रखी पानी की बोतल पकड़ा दी और वापस जंगल की और देखने लगा. बूढ़े ने थोड़ा सा पानी अपनी हथेली पर लेकर अपने सर पर छिड़का और फिर थोड़ा पानी पीकर बोतल रख दी.

बूढा - यहां बैठके किसे देख रहा है? कुछ चाहिए तो जा बाबाजी से बोल वो तुझे कोई ना कोई रास्ता बता देंगे.

गौतम - तुमसे मतलब? जिसे देखो वही बाबाजी कर रहा है यहा.

बूढा हसते हुए - अच्छा ठीक है, गुस्सा क्यू करता है सच कहु मुझे भी ये बाबा ढोंगी नज़र आता है.

गौतम - तुम्हे जो लगता है उससे मुझे क्या मतलब?जाके अपना काम करो.

बूढा - वही तो करने ऊपर आया हूँ. मैंने बहुत बार तुझे इस तरह यही पर इसी पेड़ के नीचे बैठकर जंगल को देखते हुए देखा है, आज सोचा आकर तुझसे कुछ बात करू की तू क्या देखता है और क्या तेरे मन में है?

गौतम ने एक नज़र बूढ़े को ऊपर से नीचे की तरफ देखा.. मैली कुचेली धोती को बदन पर लपेटे 70 साल का देखने वाला वो बूढा सर और दादी के सारे बाल सफ़ेद करवा चूका था जिनमे से आधे से ज्यादा झड़ भी चुके थे पैरों में पुरानी सी चप्पल जो मानो एक दूसरे से बिलकुल जुदा थी शायद अलग अलग साइज की भी होंगी. बूढ़े की ऐसी हालात और उसपर उसकी जटिल बातें गौतम के सर के ऊपर से ही जा रही थी गौतम को वो बूढा कोई सठयाया हुआ पागल मालूम पड़ता था.

गौतम - देख बुड्ढे ऐसी बात है 250 सीढ़ी चढ़कर आया हूँ पहले ही दिमाग खराब है तू और मत कर. जा यहां से.

बूढा- जाता हूँ लेकिन तूने मुझे पानी पिलाया है बदले में अगर तुझे कुछ चाहिए तो बता? मैं अभी दे देता हूँ.

गौतम बूढ़े की बात सुनके ओर ज्यादा झुंझला गया, एक तो बूढा फटीचर और फटेहाल ऊपर से बाते ऐसी की किसी सल्तनत का सुल्तान हो. गौतम ने गुस्से में आकर चिल्लाते हुए बूढ़े से कहा..

गौतम - ऐसा लोडा चाहिए जो हर औरत को दीवाना बना दे. देगा? चल भाग यहां से पागल बूढा, कब से सर खाये जा रहा है.

बूढ़े ने हँसते हुए गौतम से कहा - अच्छा अच्छा गुस्सा मत कर बच्चे, मैं चलता हूँ पर वहा उस पेड़ से थोड़े जामुन तोड़कर देदे इस उम्र में मुझसे नहीं तोड़े जाते..

गौतम का मन किया की उस बूढ़े को वापस कोई उल्टा जवाब दे दे मगर उसकी हालात और देखने से साफ दिखती बदन की हड्डिया देखकर गौतम को उसपर तरस आ गया और वो जाकर जामुन तोड़ लाया और उस बूढ़े को जो धोती के छोर को झोली बनाये खड़ा था दे देता है.

बुड्ढा - एक जामुन तू भी खा ले बेटा. इस पेड़ के जामुन बहुत स्वादिस्ट है.

इस बार गौतम बुड्ढे से बहस करने के मूंड में नहीं था उसने एक जामुन उसकी झोली से उठाया और पानी से धोकर अपने मुंह में डाल लिया. बुड्ढा ये देखकर मुस्कुराते हुए वापस नीचे चला गया और गौतम उस जामुन की गुठली को थूकते हुए वापस पहाड़ी के ऊपर आ गया जहा वही के एक पुराने आदमी ने गौतम से पूछा..

आदमी - वो बड़े बाबाजी क्या बात कर रहे थे तुमसे?

गौतम - पता नहीं क्या बकवास रहा था बुड्ढा. मुझे तो पागल-वागल लग रहा था.

आदमी - लड़के जबान संभाल के. जानता है वो कौन है? वो हमारे बाबाजी के बड़े भाई है, सालों से नीचे जंगल में रहते है उनकी वही कुटिया है. बाबाजी भी उनके चरण छूते है.

गौतम - जो भी हो मुझे उनसे क्या मतलब? हालात से भिखारी लग रहे थे.

आदमी - लड़के तू किस्मत वाला है जो बड़े बाबाजी ने तुझसे बात की है वरना लोग तरसते है उनसे मिलने के लिए. बाबा जी खुद भी कई-कई दिनो तक कई बार तो महीनों तक उनसे मिलने के लिए इंतजार करते है..

गौतम आदमी की बाते सुनकर वहा से जाता हुआ - लगता है यहां सारे लोग पागल है और फिर अपनेआप से बात करता हुआ गौतम वापस वही आ जाता है जहा उसने सुमन को छोड़ा था..

सुबह ग्यारह बजे कतार में बैठी सुमन की बारी आते आते दोपहर के डेढ़ बज गए..

सुमन हाथ जोड़कर - प्रणाम बाबाजी.

बुढ़ा - बोल बिटिया अब क्या चाहिए है?

सुमन - बाबाजी आपकी कृपा से एक प्यारासा बेटा मिला है पति की नोकरी वापस मिली है और गृहस्थी भी अच्छी चल रही है बस अब एक छोटे से घर की कमी है. सालों से सरकारी क्वाटर में गुजर हो रही है जहाँ ना सामान रखने की जगह है ना रहने की. आशीर्वाद दीजिये बाबाजी घर का कोई इंतज़ाम हो जाए.

बुढ़ा - घर का संजोग इस बरस के आखिर में बनता दिख रहा है बिटिया. तुझे दो काम करने होंगे, कर पाएगी?

सुमन - मैं करूंगी बाबाजी, जो आप कहोगे वैसा ही करुँगी. बस अपना खुदका एक छोटा सा घर बन जाए बाबाजी.

बुढ़ा - तो ठीक है मैं पर्चे पर दोनों काम लिख देता हूँ तू पढ़ने के बाद पर्चा बाहर आग में जाला देना.

सुमन - जैसा आप बोलो.

बुढ़ा पर्चा लिखते हुए - अगले छः माह तक ये दोनो काम तुझे बिना रुके करने होंगे..

बुढ़ा से पर्चा लेकर सुमन उठ जाती है बाहर आकर पर्चा पढ़ने लगती है.. पर्चे में पहला काम लिखा था की सुमन को हर पूर्णिमा लाल रंग के कपडे पहनने होंगे और दूसरा उसे पूर्णिमा वाले दिन ही अपने बेटे को अपना स्तनपान कराना होगा.

सुमन ने पर्चा पढ़कर यही एक जलती गोबर के उपलों की आग में डालकर स्वाह कर दिया और गौतम को देखने लगती है जो सामने ही एक पत्थर पर बैठा नीचे की तरफ देख रहा था.

सुमन - चले?

गौतम - शुक्र है पिछली बार की तरह शाम नहीं हुई.

सुमन - हां आज भीड़ थोड़ी कम थी.

दोनों एक साथ सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए बात करने लगते है..

गौतम - तो कितना चढ़ावा दिया आज बाबाज़ी को?

सुमन - बाबाजी कहा कुछ मांगते है लोग तो अपनी इच्छा से देते है जो देना है.

गौतम - तो आज क्या इच्छा थी आपकी?

सुमन - तू भी ना बहुत उल्टी सीधी बातें करने लगा है आजकल. कोई और बात नहीं सूझती तुझे? जब देखो हर चीज में दोष निकालता रहता है. कभी किसी चीज में कुछ अच्छा नहीं दीखता?

गौतम - मुझे तो अच्छा बुरा सब दीखता है. पर आपको बस सबमे अच्छा ही दीखता है. कभी किसी बुरी चीज नहीं दिखती.

सुमन - चल अब जल्दी घर चल, तेरे पापा का फ़ोन आया था उनको सुबह कुछ साथ में ले जाना था जो घर छूट गया तू थाने जाकर दे आना..

गौतम बाइक के किक मारते हुए - छूटा नहीं होगा जानबूझ कर छोड़ गए होंगे. उन्हें तो मज़ा आता मुझे घुमाने में.

सुमन - अच्छा? तू सबको अपना दुश्मन मानता है..

गौतम - लो अब इस कबाड को स्टार्ट कर लो.. एक न्यू बाइक लेने के लिए कहा था ये सेकंड हेंड खटारा लाकर दे दी.. बिना दस लात खाये स्टार्ट होने का नाम ही नहीं लेती.

सुमन - ग़ुगु प्यार से करो हो जायेगी, देखो हो गई ना.

गौतम - माँ अब चलो बैठो इससे पहले की ये वापस अपना दम तोड़ दे..

सुमन बाइक पर बैठकर - चल. गुस्से में तेरी ऐसे लाल होती है जैसे टमाटर. और भी प्यारा लगता है मेरा बच्चा.

गौतम और सुमन शहर की गलियों में दाखिल हो जाते है और गौतम एक दूकान के आगे गाडी रोक लेता है.

सुमन - क्या हुआ?

गौतम - क्या मतलब? याद नहीं आपने क्या कहा था फ़ोन दिलाओगी?

सुमन - अरे मैं तो वो भूल ही गई थी.

गौतम - पर मुझे सब याद है.

सुमन - अच्छा चल ले ले जो चाहिए.

गौतम - आप भी चलो..

दूकान में कई फ़ोन देखने और परखने के बाद गौतम ने एक फ़ोन पसंद किया और उसे कुछ डाउनपेमेंट देकर इनस्टॉलमेंट पर खरीद लिया..

सुमन - ज्यादा महंगा नहीं ले लिया? तेरे पापा को पता चलेगा तो तेरे साथ मुझे भी कच्चा चबा जाएंगे.

गौतम - उन्हें कीमत बताएगा कौन? आप कह देना 15 हज़ार का है. उनको कोनसा पता चलेगा?

सुमन - तू मुझसे पता नहीं क्या क्या करवाएगा? अगर उन्होंने झूठ पकड़ लिया तो शामत पक्की है. कहीं देखकर ना पहचान ले की फ़ोन 15 नहीं 35 का है.

गौतम - आप अगर इस तरह हड़बड़ाकर बताओगी तो उन्हें बिना देखे पता चल जाएगा. बिलकुल वैसे कहना जैसे बुआ कहती है.

सुमन - हम्म अब वही डायन बची है नक़ल करने के लिए?

गौतम - चलो अब खोलो इस ताज़महल का दरवाजा या मैं खुल जा सिम सिम बोलू?

सुमन चाबी निकालकर - तू ना पिटेगा मुझसे पक्का.

गौतम - अंदर चलकर पिट लेना वैसे भी गब्बर सिंह का दो बार फ़ोन आ चूका है आज ना जाने कोनसी फ़ाइल भूल गए जल्दी से दे आता हूँ..

सुमन दरवाजा खोलकर - जा अलमारी में नीचे की तरफ पड़ी होगी ले आ मैं तब तक तेरे लिए एक ग्लास निम्बू पानी बना देती हूँ.

गौतम अपने माँ पापा के कमरे में चला जाता है और अलमीरा खोलके फ़ाइल देखने लगता है. कपड़ो और बाकी चीज़ो से लबालब भरी अलमीरा में जब गौतम सामने की तरफ इधर उधर देखता है तो उसे फ़ाइल नहीं मिलती और उसे याद आता है की सुमन ने उसे नीचे की तरफ फ़ाइल होने की बात कही थी मगर जैसे ही वो झुकने लगता है तब तेह किये हुए तौलिये के बीच गौतम को कुछ काला सा दिखाई देता है जिसे वो जब हाथ बढ़ाकर निकालकर देखता है तो उसकी आँखे फटी रह जाती और वो झट से उस कंडोम के पैकेट को वापस उसी जगह रख देता है और नीचे से फ़ाइल लेकर वापस बाहर आ जाता है..

सुमन - मिल गई फ़ाइल? ले निम्बू पानी पिले गर्मी में थक गया होगा.

गौतम निम्बू पानी का ग्लास लेकर एक सांस में पी जाता है और बिना कुछ बोले फ़ाइल लेकर बाहर आ जाता है. बाइक स्टार्ट कर गौतम सीधे थाने की तरफ चल देता है जहा पहुंचकर वो अपने पिता जगमोहन के साथी रामपाल से मिलता है जो उसे फ़ाइल इंचार्ज मैडम को देने के लिए कहते हुए बाहर चला जाता है..

फ़ाइल लेकर गौतम इंचार्ज मैडम रजनी के चेम्बर के बाहर आकर खड़ा हो जाता है और डोर नॉक करता है..
 
अपडेट - 2



रजनी 34

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रजनी - कम इन..

रजनी किसी फ़ाइल को देखते हुए बोली और सामने से अंदर आते हुए गौतम को एक नज़र सर उठा के देखा फिर अपनी उंगलियों में सुलगती सिगरेट का एक कश लेकर टेबल पर रखे पोट में बुझा कर बेल का बटन दबा दिया..

गौतम - मेम ये फ़ाइल..

गौतम ने फ़ाइल रजनी को देते हुए कहा और फिर सामने खड़ा हो गया, इतने में एक वर्दी पहना हवलदार

बाहर से अंदर आया और अपने दोनों हाथ बांधकर बोला.

ज़ी मैडम.

रजनी गौतम की तरफ इशारा करके - ये बच्चा कौन है?

हवलदार - ज़ी मैडम वो ये जगमोहन का लड़का है. गौतम सब ग़ुगु बुलाते है.

रजनी - ठीक है मेरे लिए एक चाय ले आओ. और तुम, क्या नाम है तुम्हारा? हां गौतम. तुम घर जाओ.

गौतम - ज़ी मेम.. गौतम पलटकर जाने लगता है मगर उसे रजनी के साथ कुछ अजीब लगता है वो एक पीछे मुड़कर देखता है तो उसे कुछ अहसास होता है और वो रुक जाता है..

रजनी गौतम को देखकर वापस कहती है - क्या हुआ? चाय पीके जाएगा?

गौतम - नहीं मेम, वो आपके गर्दन में दर्द रहता है?

रजनी हैरानी से - तुझे कैसे पता?

गौतम - नहीं वो आपके गले में सूजन है दाई तरफ तो उससे पता लग गया.

रजनी - तू डॉक्टर की पढ़ाई कर रहा है?

गौतम - नहीं पर मैं इसे ठीक कर सकता हूँ.

रजनी - 3 साल हो गए डॉक्टर से कुछ नहीं हुआ तू क्या करेगा?

गौतम - बस थोड़ी गले की मसाज करनी पड़ेगी गीले हाथों से.

रजनी - चल ठीक है तू भी कोशिश कर ले.

गौतम रजनी की चेयर के पीछे जाकर पानी से अपने हाथ गीले करता है और रजनी के कंधे और गले के जोड़ पर अपनी उंगलियां फिराते हुए मसाज करने लगता है रजनी को इस मसाज में बहुत आराम और सुकून मिलता है गौतम कुछ देर मसाज करके फिर रजनी के गले-कंधे के आस पास कुछ जगह को सहलाकर और हड्डियों के जोड़ को दबाकर उसका दर्द कुछ पलो में छूमंतर कर देता है.

गौतम - अब ठीक है मेम. अब गर्दन हिलाने में आपको दर्द नहीं होगा.

रजनी अपनी गर्दन दाए बाए ऊपर नीचे हिलाकर - अरे वाह तूने तो सच में 3 सालों का दर्द 3 मिनटों में ठीक कर दिया? कमाल है तेरे हाथों में. जादूगर है तू तो. कहाँ से सीखा ये सब?

गौतम - वो नाना ज़ी वेद्य थे सबका इलाज़ भी किया करते थे.. बचपन में कुछ साल उनके साथ रहकर ही थोड़ा बहुत हुनर सीखा.

रजनी अपने पर्स से अपना कार्ड निकाल कर - ये लो कोई भी प्रॉब्लम हो या कोई परेशान करें तो सीधा मुझे कॉल करना. ठीक है?

गौतम - ज़ी.. मेम एक बात पुछु?

रजनी - हां बोलो?

गौतम - आपकी मदर नोबल अकेडमी में टीचर थी ना?

रजनी - हां पर तुझे कैसे पता? तू नोबल अकेडमी से है?

गौतम - हां 7th & 8th standard में वही हमारी क्लास टीचर थी उसके बाद उन्होंने पढ़ना छोड़ दिया.

रजनी - हां.. वो मेरे साथ कोटा चली गई थी..

गौतम - मैं चलता हूँ.

रजनी - ठीक है पर कार्ड में घर का एड्रेस भी है कभी अपनी क्लास टीचर से मिलने का मन करें तो घर आ सकते हो.

गौतम - और आपसे मिलने का मन करें तो?

गौतम ने रजनी की बात के जवाब में ये लाइन बोल तो दी थी मगर बोलने के बाद उसे अगले ही पल अहसास हो गया था की उसने ये क्या कह दिया है मगर वो फिर भी चुपचाप खड़ा रहा और अपनी आँखे झुका ली रजनी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था की गौतम कुछ ऐसा कह जाएगा, दोनों की हालत लगभग एक सी थी और हालात अलग.

रजनी ने एक पेन उठकर एक कागज़ पर कुछ लिखा और गौतम को देते हुए कहा - मुझसे मिलने का मन करें तो इस नम्बर पर टाइम और जगह व्हाट्सप्प करना.

गौतम नम्बर सेव करके तुरंत व्हाट्सप्प पर रजनी को कुछ लिखकर सेंड करता है जिसे देखकर रजनी मुस्कुराते हुए ok बोल देती है और गौतम शुक्रिया बोलकर चेम्बर से बाहर आ जाता है और वापस अपने घर के लिए निकल जाता है.

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रजनी ने ये बात मुस्कुराते हुए नरमी भरे लहज़े में कही थी और पहले जो उसकी बात में रुखाई और सख़्ती थी वो अब पिघलकर पानी हो चुकी थी रजनी ने पहली बार गौतम के खूबसूरत और चाँद से चेहरे को गौर से देखा और उसकी आँखों में घुली ठंडक को महसूस करने लगी थी उसका मन गौतम को रोककर कुछ देर और उससे बात करने का था मगर फिर भी ना जाने क्यू वो गौतम को जाते हुए रोक ना सकी और ख़ामोशी से अपनी कुर्सी पर बैठकर उसे जाते हुए देखती रही.

रजनी 34 साल की तलाक़शुदा औरत थी जिसे मर्दो कुछ ख़ास लगाव नहीं था अपने पिता और पति की बेशर्मी भरी हरकतो ने उसके मन में मर्द की ऐसी तस्वीर बनाई थी जो कतई अच्छी नहीं कही जा सकती. चेहरे से साधारण दिखने वाली रजनी शारीरिक बनावट और कसावट में किसी हीरोइन से कम ना थी मगर किसी में उसके आगे बोलने की हिम्मत ना थी, जिस तरह का उसका बर्ताव था छोटे तो क्या बड़े अफसर तक उससे कुछ उल्टी बात करने से पहले सोच लेते थे.

आज रजनी को ना जाने क्यू गौतम के चेहरे की खूबसूरती, स्वभाव की सादगी और जुबान में घुली मिश्री सी मीठी बाते मोह गयी थी. गौतम बिलकुल वैसा ही था जैसा रजनी अपने लिए पति माँगा करती थी जब वो नई जवान हुई थी, मगर जिंदगी और हालात ने उस नाजुक लड़की को कब कठोर बना दिया उस नाजुक लड़की को भी पता नहीं चला. आज बहुत सालों बाद उसे ये अहसास हुआ था की वो एक औरत भी है और उसके अंदर करुणा स्नेह और प्रेम का विलक्षण गुण भी मोज़ूद है..

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गौतम घर पंहुचा तो उसने देखा की सुमन बेड पर लेटी हुई सो रही थी और उसने साड़ी खोलकर मैक्सी पहन ली थी..

गौतम चुपचाप जाकर सुमन के पास बेड पर बैठ गया और झुककर सुमन के गाल को चूमते हुए बोला..

गौतम - माँ थक गई?

सुमन गौतम को अपने पास बैठे देखकर - हम्म थोड़ी सी, पैरों में हल्का दर्द है..

गौतम - अच्छा? मैंने कहा था उस पाखंडी के चक्कर में कुछ नहीं रखा.. ढाई ढाई सो सीढ़िया चढ़ोगी और उतरेगी तो दर्द तो होगा ही. मैं पैरों की मालिश कर देता हूँ रुको.

सुमन - ग़ुगु रहने दे, क्यू बेवजह परेशान हो रहा है? कुछ देर आराम कर लुंगी तो ठीक हो जाउंगी.

गौतम - आप बिलकुल चुप रहो और लेटी रहो, मैं अभी मालिश कर देता हूँ..

सुमन - ग़ुगु रहने दे बेटू.. मैं ठीक हूँ.

गौतम - मैंने कहा चुप रहो आप..

गौतम एक बोतल से थोड़ा तेल अपने हाथो पर लेकर अपनी माँ सुमन के पैर की मालिश करने लगता है जिसे देखकर सुमन मुस्कुराते हुए आज ही नए ख़रीदे फ़ोन से जो बगल में पड़ा हुआ था उठाकर गौतम का वीडियो बनाने लगती है..

गौतम सुमन से - किसे दिखाओगी वीडियो बनाकर?

सुमन - पूरी दुनिया को

गौतम - वो कैसे?

सुमन - इंस्टा पर लाइव आके

गौतम - पागल हो क्या माँ? क्या कर रही हो?

सुमन - जो तुमने सिखाया था, तुमने ही तो कहा था इससे लोग फ़ॉलो करते है अकाउंट को. देखो 74 लोगों ने तो फॉलो भी कर लिया.

गौतम - ये सब नहीं दिखाना होता इंस्टा लाइव पर समझी आप? मुझे बिना बात में फेमस कर रही हो. मुझे नहीं होना फेमस.

सुमन - अच्छा अब हो गया, छोड़ दे मेरे पैर वरना मुझे पाप लगेगा..

गौतम - अच्छा जब मेरे पैरो के हाथ लगाती हो तब पाप नहीं लगता?

सुमन - फ़ोन को क्या हो गया?

गौतम - क्या हुआ?

सुमन - देखो चलते चलते रुक गया. पहले वो क्या कहते है उसे वो तुमने बताया था जो रील्स.. वो आ रही थी अब नहीं आ रही..

गौतम - कैसे आएगी 1 घंटे में तो पूरा इंटरनेट डाटा उड़ा दिया आपने..

सुमन - मतलब?

गौतम - मतलब ये की रोज का दो gb इंटरनेट डाटा मिलता है मुझे जो आपने रील्स देख देखकर और ये फ़ालतू की अप्प्स चला चला के ख़त्म कर दिया.. अब रात को बारह बजे के बाद ही अगला 2gb डाटा मिलेगा..

सुमन - अच्छा. मुझे कहा ये सब आता था..

गौतम - ये क्या फालतू की वीडियो बनाके डाली है आपने अकाउंट पर.

सुमन - अच्छी तो है तुमने कहा गाने की डालेंगे तो सब फ़ॉलो करेंगे. देखो 117 लोगों ने फॉलो भी किया है.

गौतम - पर ये बग्राउंड में कितना शोर है आपकी आवाजे ही नहीं आ रही है आप क्या गा रही है..

सुमन - वो सब मुझे नहीं पता..

गौतम - अच्छा ठीक है छोडो, कल से मैं आपकी मदद करूंगा.. आप आराम करो मैं जाता हूँ..

सुमन - ग़ुगु..

गौतम - हां?

सुमन - चाय मिलेगी?

गौतम - 200 रुपए लगेंगे.

सुमन - इतनी महगी? मैं खुदसे बना लुंगी.

गौतम - लेटे रहो मैं बनाता हूँ आप भी पापा की तरह कंजूस हो..

सुमन - अब आये ना लाइन पर, मसाले वाली बनाना एकदम कड़क.

गौतम रसोई में जाकर चाय बनाने लगता है इतने में उसका फ़ोन बजता है..

गौतम फ़ोन उठाकर - मुझे पता था तू जुगाड़ कर लेगा भाई. कुछ भी जुगाड़ने में तेरेसे बड़ा आदमी मैंने आज तक नहीं देखा. जीनियस है तू गांडु जीनियस.

आदिल - भोस्डिके इतने भी मेरे आंड मत चाट वरना शुगर हो जायेगी तुझे, 7 बजे मेरी गली के कोने पर आके मिल और लेट मत करना..

गौतम - 10 मिनट पहले पहुंच जाऊंगा भाई. चल रखता हूँ..

गौतम चाय बनाके सुमन के पास ले जाता है..

गौतम - माँ. चाय

सुमन चाय लेटे हुए - बाबाजी तेरे जैसा बच्चा सबको दे.

गौतम - माँ वो आज पढ़ाई के लिए फ्रेंड के घर जाना है रात को वही सो जाऊंगा..

सुमन - कोनसा फ्रेंड?

गौतम - कॉलेज फ्रेंड है आप नहीं जानती.

सुमन - कहीं जाने की जरुरत नहीं है घर पर ही बुला लो जिसके साथ पढ़ना है.

गौतम - यहां कैसे बुलाऊ माँ? जगह कहाँ है? आप तो जानती हो, आप कहोगी तो नहीं जाऊंगा.

सुमन - ओ ड्रामा क्वीन, तेरे ना ये नाटक अब मेरे सामने नहीं चलने वाले समझा? इमोशनल ब्लैकमेल करके रातभर गायब रहता है आज तो पक्का नहीं जाने दूंगी.

गौतम सुमन के बिलकुल नजदीक आकर उसे गले से लगा लेता है और सुमन के गाल पर 3-4 चुम्मिया करके कहता है - सचमें पढ़ाई करने जा रहा हूँ, आप चाहो तो जिसके पास जा रहा हूँ उसका अड्रेस और नम्बर दे जाता हूँ आपको यक़ीन ना हो तो कभी भी आकर चेक कर लेना.

सुमन - ठीक है पर सिर्फ पढ़ाई करना. फ़ोन में नंगी नंगी लड़कियों की देखकर बिगड़ मत जाना.

गौतम - छी, आप जानती हो मैं सिर्फ आपको देखता हूँ.

सुमन - मुझे सब पता है, मैं खाना बना देती हूँ खाके जाना.

गौतम - माँ वो अभी भूख नहीं लग रही मैं उसीके घर कुछ खा लूंगा. आप अपना ख्याल रखना.

गौतम अपनी बाइक लेकर आदिल के घर के कोने पर आ जाता है और अपनी बाइक का हॉर्न बजाकर जोर जोर से चिल्लाने लगता है..

गौतम - कबाड़ी वाले.. कबाड़ी वाले.. कबाड़ी वाले..

गौतम की आवाज सुनकर आदिल की बहन रेशमा घर की बालकनी से गौतम को देखती और खा जाने वाली नज़रो से उसे घूरती है इतने में पीछे से आदिल एक टपली मारते हुए गौतम से कहता है..

आदिल - अपने बाप की मैयत का रोना रो रहा है साले इतनी जोर से चिल्ला चिल्लाकर. और पीछे बैठ जाता है..

गौतम बाइक स्टार्ट करके - भाई कसम से तू मेरी जिंदगी में नहीं होता ना तो मैं वर्जिन ही रह जाता.

आदिल - हां तू वर्जिन रह जाता और मैं बेवा..

गौतम - अच्छा गाडी में तेल तो डलवा दे भाई.

आदिल - मूत देता हूँ भोस्डिके भर जाएगा टेंक. अब तेल भी मैं डलवाऊ तेरी गाडी में?

गौतम - छोटी छोटी बातों में तेरा मेरा कर रहा है भड़वे, मैंने आज तक तेरा मेरा किया है दोस्ती में? मत डलवा बहनचोद रिजर्व में भी चल जायेगी घर तक तो..

आदिल - रोये मत रंडी.. रोक ले पंप पर डलवा ले मूत इसमें..

गौतम पेट्रोल पंप पर बाइक रोककर - भईया 1000 का डाल दो..

आदिल - तूने एक साथ देखे है कभी 1000 रुपए? भोस्डिके. भाई तू 200 का डाल.

तेल डलवाकर गौतम और आदिल दोनों नवाब खान की दूकान के आगे बाइक रोकते है और ऊपर जाकर एक टेबल पर बैठते है..

आदिल वेटर से - भाई दो प्लेट बिरयानी लगा दे..

गौतम - और एक प्लेट पैक भी कर देना.

आदिल - घर लेके जाएगा क्या?

गौतम - नहीं बे चोदने के बाद भी भूख लगती है मुझे.

आदिल - साले चोदू पिछली बार तो तू भी ढीला पड़ गया था..

गौतम - अबे तो वो लड़की थोड़ी थी पक्की छिनाल थी, साली ने अपना हाथ अंदर डाल लिया मेरे लोडे से क्या फर्क पड़ता उसको?

वेटर बिरयानी रखकर जाने लगा तो गौतम वेटर से..

गौतम - भाई रायता भी ला दे.

आदिल - उफ्फ्फ यार बहनचोद हैदराबाद और लखनऊ तो फालतू फैमस है बिरयानी हो तो अजमेर जैसी.. इसकी माँ को चोदू खाते ही करंट आ जाता है नस नस में.

गौतम - सही बोल रहा है मेरे दोस्त, वैसे पैसो का जुगाड़ कहा से किया?

आदिल - मम्मू का गल्ला और क्या कहा से?

गौतम - भोस्डिके जिस दिन उसे पता लगा ना तू गल्ले पर बैठकर क्या करता है वो तेरी गांड मार मारके वसूलेगा..

आदिल - अबे तो क्या वो अपनी छाती पे धरके ले जाएगा पैसा? मोटा ग़ल्ला है रोज़ का, 2-3 हज़ार इधर उधर करने से उसे घंटा नहीं पता चलने वाला..

गौतम - सही कह रहा है वैसे भी तू होने वाला दामाद है.. तुझे क्या बोलेगा.

आदिल - भाई बोलने की तो बात मत कर, साला अपने बेटे तक को ना छोड़े कमीना.. मुझे तो नरगिस पसंद है इसलिए निकाह कर रहा हूँ. पहले भी अम्मी से कहकर बहुत कोशिश की पर उससे निकाह नहीं हो पाया. मामू ने टांग अड़ा दी और उस सऊदी अरब वाले हसन के साथ निकाह करवा दिया लेकिन हुआ क्या? साले ने 2 महीने के बाद ही तलाक़ देकर वापस भेज दिया.

गौतम - बस भाई अब आगे की कहानी मत सुना वरना आंसू आ जाएंगे. इससे पहले की बिरयानी ठंडी हो खाने में फ़ायदा है..

आदिल वेटर से - बियर कोनसी पड़ी है?

वेटर - सर यहां सिर्फ खाना मिलता है अल्कोहल नहीं मिलती..

आदिल - नया काम पर आया है क्या?

वेटर - हां इसी हफ्ते से..

गौतम - सुन.. अनवर के पास जा और उसको बोल वो दे देगा तुझे..

वेटर जाता है कुछ देर बाद किंगफ़िशर के दो कैन लेकर टेबल पर रख देता है..

आदिल और गौतम बिरयानी के साथ बियर पीते हुए बातें करने लगते है और आखिर में बियर और बिरयानी दोनों ख़त्म कर के टेबल से उठ जाते है..

आदिल - कितना हुआ अनवर?

अनवर - 920

गौतम बिल देखकर - अबे सब पर रेट बढ़ा दी क्या दस दिन में? परमानेंट लोगों के लिए डिस्काउंट रखा कर. बहनचोद लोग गल्लों में पैसे चुरा चुरा के बिरयानी खाने आते है तुम्हारे..

आदिल - चूतिये एक बियर में फेल हो गया क्या? क्या बकवास कर रहा है?

अनवर - यार तुम पुरानी रेट पर दे दो.. लाओ 750 हो गए..

आदिल - ये लो पैसे..

गौतम - मेरे अफीम का पैकेट कहा है?

अनवर - ले तेरी अफीम.. चम्मच भी है अंदर.. वापस मत आना चम्मच माँगने..

आदिल - भोस्डिका एक बियर में बिरयानी को अफीम बोल रहा है दूसरी पिला दी तो स्प्लेंडर को हवाई जहाज समझके उड़ा ना दे..

गौतम - चल भाई i can't wait to fuck bhabhi ji.. bhabhi ji i am coming for you..

आदिल - भोस्डिके ये तेरी नोबल अकेडमी नहीं है समझा? चल पीछे होजा मुझे चलाने दे..

गौतम - आजा मेरी घोड़ी जल्दी बैठ.. क्या गांड है तेरी.

आदिल - माँ के लोडे चिपका चिपकी मत कर.

गौतम - भाई तेरी गांड मारने का मन कर रहा है.

आदिल - पीछे हो जा भड़वे, क्यू अपनी माँ चुदा रहा है चूतिये..

गौतम - ये गांड मुझे दे दे आदिल.. ये गांड मुझे देदे..

आदिल - मादरचोद गाडी गिरा दूंगा, ढंग से बैठ जा.

गौतम - भाई तेरा बाप ऐसे ही आवाजे लगता है ना.. कबाड़ी वाले.. कबाड़ी वाले..

आदिल - चुदाईखाने चुपचाप बैठ जा वरना तेरी अफीम फेंक दूंगा. ठुल्ले की औलाद..

गौतम - नहीं नहीं ओ गांडू, मज़ाक़ कर रहा था गिरा मत देना उसको..

आदिल - बहन के लोडे एक बियर नहीं झीलती तुमसे.

गौतम - भाई और कितना दूर है यार एक घंटे से चलाये जा रहा है कार को..

आदिल - साले फालतू मज़ाक़ मत कर, दस मिनट भी नहीं हुई नवाबवाले के से निकले.. जगताल जाना है अभी टाइम लगेगा..

गौतम - जगताल? कबाड़ी की औलाद अब तू मुझे रंडीखाने में ले जाएगा.. साले दलाल..

आदिल - ज्यादा नाटक करेगा ना रंडी यही से वापस भेज दूंगा..

गौतम - अच्छा ठीक है यार, तू बुरा मान जाता है बात बात में लड़कियों की तरह, तू तो मेरा भाई है. ला एक पप्पी दे दे..

आदिल - सूअर तू मीठा बन गया क्या? कभी गांड के हाथ लगा रहा है कभी पप्पी ले रहा है..

गौतम - भाई दारू पिने के बाद तेरी गांड भी मिया खलीफा जैसी लगती है..

आदिल - भोस्डिके झांटभर की दारु पीकर ये हाल है कभी ढंग से पी लिया तो क्या होगा?

गौतम - भाई एक और बियर पीनी है.

आदिल - मेरा मूत पिले लोडे.

गौतम - रोक बहनचोद रोक बाइक, मुझे उतार दे.. एक बियर पर औकात दिखा रहा है झाँटु, जाने दे वापस मुझे. जा तू अकेला नहीं करना मुझे कुछ भी रोक..

आदिल - दिला दूंगा भड़वे चुप बैठ जा अब.

गौतम - वो ठेका आ गया सामने..

आदिल - भाई बंद है.

गौतम - नीचे से सब खुला है लोडे देख..

आदिल ठेके के सामने गाडी रोक कर - पिने के बाद परेशान नहीं करेगा..

गौतम - बोलूगा भी नहीं भाई..

आदिल - ठीक है रुक मैं लाता हूँ

गौतम - ठंडी लाना..

आदिल - चिल्ला मत रंडी..

गौतम - नमकीन हो तो वो भी..

आदिल ठेके के नीचे एक छोटे से खाने में नॉक करता है अंदर से आदमी की आवाज आती है..

आदमी - क्या चाहिए?

आदिल - एक बियर

आदमी - कोनसी?

आदिल - कोई सी भी सस्ती

आदमी - 170 रुपए

आदिल - लो.

आदमी अंदर से एक किंगफ़िशर की बोतल बाहर सरका देता है जिसे आदिल लेकर गौतम के पास आ जाता है..

आदिल - ले पीछे जाके पिले

गौतम बोतल लेकर खोलते हुए - पीछे क्यू बहनचोद सामने पिएंगे सबके. तू कार चला.

आदिल - चल ठीक है मगर कोई बकचोदी मत करियो.

गौतम बियर पीते हुए - भाई एक बात बोलू?

आदिल - बोल

गौतम - भाई तेरा बाप कबाड़ी वाले मस्त बोलता है..

आदिल - अबे ठुल्ले की औलाद वापस शुरु हो गया तू?

गौतम बियर पीते हुए - अच्छा सॉरी सॉरी. भाई अब नहीं बोलूंगा.

आदिल - भाई यार बकचोदी मत कर वैसे भी गांड फट रही है रंडीखाने जाने में..

गौतम - भाभी केसे बुक की तूने गंडमरे?

आदिल - अरे सोनू ने फोटो भेजी थी देखते ही पसंद आ गई साली..

गौतम - तो बुलवा लेता उसे..

आदिल - रूम पर आने के 10 हज़ार मांग रही थी, तेरी माँ के घेहने बेचने पड़ जाते..

गौतम - कबाड़ी वाले की औलाद साले भिखारी ऐसी गन्दी जगाह ले जा रहा है मुझे.. हाय किसी ने मेरी इज़्ज़त लूट ली तो? मेरा क्या होगा? मैं तो मुंह दिखाने लायक ही नहीं रहूँगा..

आदिल - रंडी पहुंचने वाले है अगर यहा तूने नाटक किया ना बहुत मारुंगा तुझे..

गौतम - भाई नहीं कुंगा बस एक बियर और पीला दे..

आदिल - भड़वे आँख चढ़ रही है तेरी इससे ज्यादा में यही सो जाएगा.. कभी कभार वाले के लिए इतनी बियर बहुत है.. अब चल.. वो साला सोनू कहा मर गया..

गौतम नशे में - भाई तू है तो दल्ला..

आदिल - अबे तेरे पैर छूता हूँ भाई तू अब कोई हरकते मत कर मेरी पहले फट रही है अंदर जाने में..

गौतम - क्यू डर रहा है भाई? बाप पुलिस में है मेरा इन सबकी माँ चोद देगा हवा में उछाल के..

आदिल - चूतिये उसको पता चल गया ना की तू यहां है तो सबसे पहले तेरी चोदेगा, वो भी हवा में उछाल के. अब मुंह बंद रख..

गौतम - अरे वो रहा तेरा सोनू.. ओ सोनू दल्ले.. सोनू दलाल..

आदिल - बहन के लोडे मुंह बंद रख अपना..

सोनू गौतम की आवाज सुन लेता है और उनके पास आ जाता है..

सोनू आदिल से - ये तेरा दोस्त ग़ुगु है ना..

गौतम - हां सोनू भाई मैं आदिल का दोस्त हूँ और आप चाहो तो मुझे अपना बाप बना सकते हो..

सोनू - क्या बकचोदी कर रहा है ये..

आदिल - अरे थोड़ा नशे में है बस तू वो बात कर जो अपने बीच हुई थी..

सोनू - भाई वो बिहारन तो किसी के साथ चली गई यार..

आदिल - भाई दिमाग अम्मी मत चोद, फटी गांड हाथ में लेके आया हूँ यहांपर..

सोनू - तो भाई मैं क्या करू अगली को वहा डबल पैसा मिला तो चली गई.. वैसे एक-दो भाभी ज़ी और है अगर मिले तो बता उसी रेट में.

गौतम - मिलेंगे मिलेंगे सोनू बेटा सबसे मिलेंगे..

आदिल - अबे चुप कर चूतिये.. अफीम गिरा दूंगा तेरी वरना.. सोनू भाई कोई फोटो कुछ है उनका..

सोनू फ़ोन निकाल कर भाई ये दो है लाल सूट वाली हरयाना की देसी है एकदम कड़क माल और दूसरी उप्र की है मज़ा ये भी पूरा देती है..

आदिल - भाई थोड़ी ज्यादा बड़ी नहीं लग रही?

सोनू - अबे तो तुमको कोनसी शादी करनी है? पेलना है और खेलना है रातभर बस.. पहले जों बुक की थी वो 32 की थी ये दोनों 34-35 के आस पास है बताओ करना है तो वरना मैं जाऊ?

आदिल - भाई सर्विस?

सोनू - फुल सर्विस नो एक्स्ट्रा चार्ज दोनों का.. बोलो करना है?

आदिल - अब आये है करके ही जाएंगे और क्या?

सोनू - कोनसी?

आदिल - हरयाना वाली.. पर कोई फालतू बसड नहीं चाहिए..

सोनू - बसड़ किस बात की? चलो आ जाओ मेरे पीछे पीछे..

सोनू आदिल और गौतम अपने पीछे पीछे जगताल की उन बदनाम गलियों से घूमता हुआ एक पुराने से दिखने वाले मकान के सामने ले आया और दोनों को दरवाजे पर रोक कर खुद अंदर चला गया..

गौतम नशे के सुरूर में अपने दोस्त आदिल की फटी हुई गांड को और फाड़ने का काम किये जा रहा था और आदिल मज़बूरी में उसे झेले जा रहा था गौतम को अपने साथ रखना उसकी मज़बूरी थी गौतम के अलावा उसका एक भी पक्का दोएत नहीं था जो उसके लिए खड़ा हो सकता था और वो जानता था की गौतम दिल का बुरा नहीं है यही कारण था की गौतम की इन हरकतो के बावजूद आदिल उसे भाई की तरह मानता था..

सोनू बाहर आकर - अंदर आ जाओ..

आदिल गौतम के साथ अंदर चला गया और सोनू के पीछे चलते हुए मकान की तीसरी मंज़िल पर पहुंचकर एक बड़े कमरे में पहुंच गये जहाँ 4-5 औरते एक साथ बेड पर बैठी थी और उनमे से एक औरत जो करीब 50-52 साल की थी दूसरी औरत से अपने पैर दबवा रही थी..

सोनू और उसके पीछे पीछे गौतम और आदिल भी कमरे के अंदर आ गए थे..

सोनू - रेखा काकी.. ये दोनों लड़के है. पैसे एडवांस ले लिए..

रेखा काकी आदिल और गौतम को देखकर - क्या रे नाबालिक तो नहीं हो दोनों? तू चिकने..

सोनू ने गौतम की तरफ इशारा किया..

रेखा ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा - ये तेरे हाथ में क्या है? क्या है इस थैली में?

गौतम - इसमें अफीम है खानी है?

आदिल ने अपनी फटी हुई गांड सँभालते हुए गौतम को देखा और इशारे से चुप रहने को कहा..

रेखा काकी - बेटा यहां मसखारी नहीं.. वरना इज़्ज़त लेने की जगह देनी पड़ सकती है.. समझा?

गौतम - मैं तो लेने और देने दोनों के लिए त्यार हूँ बताओ किसको देनी है और किसकी लेनी है?

कमरे में बैठे सभी लोग जोर से खिलखिलाकर हंसने लगे और रेखा भी हस्ते हुए गौतम को देखने लगी.

रेखा काकी - क्यू रे नाम क्या है इसका?

सोनू - काकी ग़ुगु..

रेखा काकी हस्ते हुए - क्या चिकने? ज्यादा जवानी चढ़ी है? कहे तो पुलिस के आदमी बुलाके उतरवा दू? जेल में जाएगा तो सारी उतर जायेगी.. ऐ नीतू जरा लगा तो फ़ोन उस ठुल्ले को..

आदिल - नहीं नहीं हमे कुछ नहीं करना पुलिस को मत बुलाओ.. हम जाते है यहां से.. ये तो बस थोड़ी दारू पी रखा है इसलिए ऐसा बोल रहा है..

गौतम - अबे क्या छोरियो की तरह रो रहा है गांडु बुलाने दे पुलिस को.. मेरा बाप पुलिस वाला है हम तो एक दो घंटे में छूट जाएंगे मगर तुम्हारे ऊपर इतने फ़र्ज़ी केस लगेंगे की गिनती भूल जाओगे..

रेखा काकी - अरे ये देखो, मुझे लगा की मेरे थोड़ा डराने से रोने लगेगा मगर ये मुझे ही धमकाता है.. बेटा तेरे बाप जैसे बहुत सारे ठुल्ले रेखा काकी के ब्लाउज में बंद है समझा? नादान बच्चा समझके माफ़ किये देती हूँ वरना तेरी ये चाँद सी सूरत अमावस जैसी करवा डालती मैं आज.. सोनू लेजा इस लाल शर्ट को और मिला दे काजल से..

सोनू - काकी ग़ुगु को

रेखा काकी - इस ग़ुगु को रूपा के कमरे में भेज, बहुत दिनों से उदास है बेचारी शायद इस ताज़ा खिले फूल का मीठा रस पीकर खुश हो जाए.. कहना काकी ने बर्थडे गिफ्ट भिजवाया है

आदिल - हमारे पास और पैसे नहीं है देने के लिए..

रेखा काकी - तुमसे मागे मैंने और पैसे? diwali ऑफर है एक के साथ एक फ्री.. चलो अब जाओ..

सोनू - चलो

सोनू गौतम और आदिल को नोचे दूसरी मंज़िल पर ले आता है और चुनी हुई लड़की के पास आदिल को छोड़कर कोने वाले कमरे में गौतम को ले जाता है जहाँ खिड़की के सामने खड़ी हुई औरत जो अपनी उंगलियों में सुलगती हुई सिगरेट लगाए कश लेकर धुआँ बाहर छोड़ रही थी को पुकारता है..

सोनू - रूपा मौसी..

रूपा - 40

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सोनू की आवाज से रूपा का सारा ध्यान खिड़की के बाहर से अंदर की ओर मुड़ जाता है रूपा दरवाजे पर खड़े सोनू को देखती है ओर सोनू आगे कहता है..

सोनू - मौसी वो काकी ने इस लड़के को भिजवाया था आपके आप, काकी बोली आपका बर्थडे गिफ्ट है.

गौतम अपने बहकते हुए कदमो पर खड़ा होकर नशीली आँखों से कमरे की सजावट देखे जा रहा था उसने इतना सजा हुआ कमरा कभी नहीं देखा था उसका ध्यान ना रूपा पर था ना सोनू पर ना ही उन दोनों की बातों पर..

रूपा - और क्या कहा दीदी ने?

सोनू - कुछ नहीं. बस यही कहा..

रूपा - नाम क्या है इसका?

सोनू - ग़ुगु..

रूपा - ठीक है तू जा..


सोनू रूपा के कहने पर वहा से चला गया और रूपा ने सोनू के जाने के बाद अपनी उंगलियों में सुलगती हुई सिगरेट का एक लम्बा कश खींचा और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया..
 
अपडेट - 3



रूपा एक 40 साल की औरत थी जो बहुत लम्बे समय से वैशावृति का काम कर रही थी लगभर 20-25 साल उसने यही इसी वैशालय में बिता दिए थे और अब बहुत कम ही किसी से मिलती थी.. देखने में रंग साफ था और बदन लचकदार चेहरा सुन्दर था और बाल नीचे कुल्हो तक लम्बे.. रूपा के देखने से लगता था किसी कुलीन घर की विवाहिता होगी मगर भाग्य के फेर ने नसीब को ऐसा बदला की तक़दीर में किसी घर की आबरू बनाने की जगह इस वैशालय में वैश्या बना दिया, धीरे धीरे रूपा ने इसे अपनी नियति समझ ली और स्वीकार करते हुए किस्मत से लड़ने लगी इस काम से उसने पैसा तो बहुत कमाया पर उसके शादी और परिवार के सपने चकना चूर हो गए, रूपा उम्र के इस पड़ाव पर बस इस वैशालय की रूपा मौसी बनकर रह गई..

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गौतम की नज़र दिवार पर लटकी कई तस्वीरों में से एक तस्वीर पर टिक गई जिसे देखकर गौतम उसमे खो सा गया, ये तस्वीर हिटलर के नरसंहार में तड़पकर मेरी उस छोटी यहूदी लड़की की थी जिसके बारे में गौतम ने इतिहास में पढ़ रखा था गौतम आधा नशा उस तस्वीर ने उतार दिया था एना फ्रेंक की उस तस्वीर ने गौतम की आँखों के सामने वापस उसी मंज़र और ताबही को लाकर खड़ा कर दिया था जिसको उसने किताबो पढ़ते हुए महसूस किया था.. गौतम उस तस्वीर में खोया हुआ था की पीछे से रूपा ने उसे बाहों में भरते हुए कहा.

रूपा - तस्वीरे पसंद है तुन्हे?

गौतम ने खुदको रूपा की बाहों में कस्ते देखा तो वो तस्वीर के फितूर से बाहर आ गया और बचे हुए हलके नशे में खुदको इखट्टा करने लगा..

रूपा को जब गौतम से कोई जवाब नहीं मिला तो वो वापस बोली..

रूपा - ध्यान कहा है मेरे नन्हे मेहमान का? तस्वीरों ने चुरा लिया लगता है. मुझसे बात भी नहीं करोगे तुम?

गौतम - अच्छी सजावट है कमरे की. लगता है बहुत पैसा खर्चा किया है तुमने इसे सजाने में.

रूपा - हां थोड़ा सा खर्चा हुआ तो था पर आज वसूल हो गया, तुम्हे सजावट पसंद जो आ गई. ये हाथ में क्या है?

गौतम - बिरयानी है तुम्हे खानी है तुम्हे?

रूपा - अपने हाथ से खिलाओगे तो जहर भी कबूल है मेरे नन्हे मेहमान.

गौतम - पर ठंडी हो गई है..

रूपा - लाओ मेरे लिए लाये हो तो मुझे दे दो.. मैं गर्म करवा देती हूँ..

गौतम के हाथ से बिरयानी का पैकेट लेटे हुए रूपा ने कहा औऱ थैले से बॉक्स निकालकर कमरे का दरवाजा खोलदिया फिर आवाज लगाती हुई बोली - कम्मो. कम्मो.

कम्मो - हां मौसी?

रूपा - लो इसे गर्म करके ले आओ.

कम्मो - अभी लाई मौसी.

रूपा ने दरवाजा लगा दिया और गौतम को देखने लगी रूपा गौतम जैसे लड़के को यहां इस कोठे पर देखकर किसी अचरज में थी मानो सोच रही हो की ये भले घर का दिखने वाला चाँद सा लड़का यह इस कोठे पर क्या कर रहा है?

गौतम - पानी है?

रूपा बेड के कोने में रखे छोटे से फ्रिज से पानी बोतल निकाल कर गौतम को देती है और गौतम एक बार में आधी बोतल खाली करके बोतल बेड के ऊपर बनी पट्टी पर रख देता है..

रूपा - शराब पी है तुमने?

गौतम - हां दो बियर पी थी मगर अब सब उतर गई..

रूपा - और पीनी है?

गौतम - है तुम्हारे पास?

रूपा उसी फ्रिज में से एक बियर की बोतल निकालकर खोलते हुए गौतम को दे देती है..

गौतम - मेरे पास पैसे नहीं है देने को इसके..

रूपा हसते हुए - पैसे देने की जरुरत नहीं है. तुम्हे चाहिए तो मुझसे ले जाना..

गौतम बियर पीते हुए - अच्छा?

दरवाजे पर कम्मो एक प्लेट में बिरयानी गर्म करवाकर ले आती है..

कम्मो -मौसी.. रूपा मौसी..

रूपा दरवाजा खोलकर कम्मो से प्लेट ले लेती है और वापस दरवाजा लगा देती है..

रूपा - लो नन्हे मेहमान आ गई बिरयानी गर्म होकर, अब खिलाओ मुझे अपने इन खूबसूरत हाथों से..

गौतम प्लेट लेकर चम्मच से रूपा को बिरयानी खिलाने लगता है और पहली ही बाईट से रूपा को बिरयानी का स्वाद दिल छू जाता है.. बिना कुछ बोले दोनों बिरयानी खाने और एकदूसरे को खिलाने लगते है..

गौतम - कैसी लगी?

रूपा - तुम्हारे जैसी..

गौतम - मतलब?

रूपा उठकर गौतम के बिलकुल नजदीक आ जाती और उसके होंठों को अपने होंठों में भरके चूम लेती है, कुछ देर यूँही गौतम के होंठ चूमकर रूपा कहती है..

रूपा - मतलब बहुत स्वादिस्ट.. अगली बार जरा ज्यादा लाना..

गौतम - जैसे तुम बोलो..

रूपा - वैसे मेरे साथ सोने में तुझे शर्म तो नहीं आएगी ना?

गौतम बची हुई बियर के आखिर 2-3 घूंट पीके बोतल बेड के नीचे रखता हुआ कहता है..

गौतम - शर्म और मुझे? मैं तो उस रेखा काकी के साथ भी सो सकता हूँ..

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रूपा - अरे इतनी सी उम्र में इतनी बेशर्मी? तुम्हे तो सबक सीखना पड़ेगा आज..

ये कहते हुए रूपा ने गौतम को अपनी बाहों में वापस जकड लिया और उसके होंठों पर दर्जनों चुम्मो की बरसात करती हुई टूट पड़ी और गौतम को बेतहाशा चूमने लगी जिससे गौतम पर कामुकता का असर छाने लगा, गौतम रूपा के इस काममय रूप से आकर्षित होने लगा और उसका पूरा साथ देने लगा.. एक लम्बा और गहरा चुम्बन दोनों के बीच हुआ जिसे टूटने में कई मिनटों का समय लग गया और टूटने पर गौतम ने रूपा से कहा..

गौतम - तुम्हारे होंठ बहुत रसीले है रूपा मौसी..

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रूपा - तो किसने रोका है तुझे इनका रस पिने से मेरे नन्हे मेहमान. जितनी मर्ज़ी है उतना पिले..

गौतम ने बिना किसी लाज-शर्म के रूपा को बिस्तर पर धकेलते हुए लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़कर रूपा के होंठो की लाली चूमने लगा. रूपा भी प्यार से गौतम का पूरा साथ निभा रही थी और उसे चूमे जा रही थी. गौतम का हाथ ना जने कब अपने आप रूपा की कमर से होते हुए उसके मस्त मोटे चुचो पर आ गया उसे भी नहीं पता लगा लेकिन रूपा को इसका सब पता था फिर भी उसने गौतम को नहीं रोका और खुदसे अपने ब्लाउज के बटन खोल दिए जिससे गौतम अंदर तक रूपा की उभारदार छतियों के पुरे मज़े ले सके.

गौतम ने कुछ देर बाद चुम्बन तोड़कर रूपा की ब्रा ऊपर सरका दी और उसके बूब्स चूसने लगा.

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रूपा भी मुस्कुराते हुए गौतम को देकर उसके सर पर हाथ फिराते हुए उसे अपने बूब्स चूसने में मदद करने लगी और बूब्स चूसते हुए गौतम का प्यारा सा मुखड़ा देखकर वो सोचने लगी की अगर उसका भी ब्याह हुआ होता तो गौतम की तरह उसकी औलाद भी उसका दूध इसी तरह पीती.. रूपा कुछ भावनात्मक रूप से बहके जा रही थी उसे गौतम में अपना ना हो सका बच्चा दिखने लगा और वो गौतम के मुंह में अपने निप्पल्स घुसा घुसा के अपना चुचा चुसवाने लगी जिसमे उसे कामरस के साथ एक माँ होने का अहसास दोनों मिल रहे थे.. रूपा ने बूब्स चूसते हुए गौतम का एक हाथ पकड़कर अपने पेट पर रख दिया और धीरे धीरे नीचे लेजाकर अपनी साडी के अंदर डालकर अपनी नंगी चुत के ऊपर रख दिया और उसकी हथेली अपनी चुत पर दबाने लगी. गौतम ने चुचा चूसते हुए ही रूपा की चुत अपनी मुठी में जोर से पकड़ ली और उसे मसलने लगा जिससे रूपा के काम की पिपासा जागने लगी. गौतम ने अपने हाथ से चुत का पूरा जायजा लेकर अपनी मिडिल फिंगर रूपा की चुत में घुसा दी और चुत में ऊँगली करने लगा जिससे रूपा की सिस्कारिया निकलने लगी और वो गौतम के बाल सहलाते हुए उसके सर को चूमने लगी..

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गौतम ने कई बार रूपा के चुचो पर अपने दाँत लगाकर निशान बना दिए और उसे लव बाईट दी मगर रूपा ने एक बार भी गौतम को ऐसा करने से नहीं रोका और उल्टा प्यार से अपना चुचा और उसके मुंह में देकर चुसवाने लगी मानो ऐसा करने में उसे परम आनंद की उपलब्धि हो रही हो..

गौतम ने धीरे धीरे रूपा की साड़ी और साया साथ में ऊपर उठा दिया और कमर तक लाकर रूपा की चुचा चूसना छोड़ दिया फिर नीचे आकर रूपा की पेंटी नीचे सरका दी और एक दम से अपना मुंह रूपा की चुत पर लगा दिया और अपनी जीब से उसकी 40 साल पुरानी हज़ारो आदमियों से चुद चुकी चुत चाटने लगा..

रूपा ने जब गौतम को ऐसा करते देखा तो उसे अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हुआ की उसकी उम्र से आधा ये 20 बरस का नोसीखिया लड़का उस जैसी खेली खाई औरत को इतना मज़ा दे सकता है.. रूपा ने अपनी दोनों टांग अच्छी तरह से चौड़ी के ली ताकि गौतम को चुद चाटने में कोई तकलीफ ना हो और बेड के ऊपर दाई तरफ वाले खाने से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए कश लेकर गोतम को प्यारभरी नज़रो से देखती हुई अपनी चुत चूसाईं का आनंद भोगने लगी..

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रूपा को गौतम में अपना बेटा नज़र आ रहा था जो कभी हुआ ही नहीं था अब रूपा गौतम की कुछ ज्यादा परवाह कर रही थी की गौतम को उसके साथ कोई तकलीफ ना हो. रूपा सिगरेट के कश लेती हुई गौतम से बात करने पर मजबूर हो गई और उससे बोली..

रूपा - ग़ुगु..

गौतम ने चुत चाटते हुए बिना रूपा को देखे ही जवाब दिया - हम्म्म?

रूपा- थोड़ा बीच में इस दाने को लीक करो ना..

गौतम ने बिना कुछ बोले रूपा की बताई जगह पर जीभ लगाकर चूसाईं वापस शुरुआत कर दी..

रूपा - हाय.. इतने सालों बाद ये सुकून मिला भी तो एक बच्चे से.. इतना कहकर रूपा ने फिर से सिगरेट का कश लिया और अपने हाथ से गौतम का सर सहलाती हुई बोली.. ग़ुगु मुझे सुसु आ रहा है मैं करके आउ?

गौतम चुत चाटना छोड़कर बोला - बाथरूम तो मुझे भी लगा है..

रूपा - ठीक है चल पहले तुझे ही सुसु करवा देती हूँ..

रूपा गौतम को कमरे में ही बने दूसरे दरवाजे के अंदर ले गई और बाथरूम पोट के पास घुटनो पर बैठकर गौतम की जीन्स का बेल्ट खोलने लगी..

गौतम - तुम्हे यहां सब मौसी क्यू बुलाते है?

रूपा - मुझे पता नहीं ग़ुगु..

गौतम - मैं तुम्हे क्या कह कर बुलाऊ?

रूपा - जो तुम्हारा दिल करें.. तुम अगर प्यार से रंडी भी बुलाओगे तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है मेरे नन्हे मेहमान.

गौतम - ठीक है फिर मैं भी मौसी ही कहकर बुलाता हूँ..

रूपा किसी सोच में डूबे जा रही थी और इसी सोच में डूबे हुए उसने गौतम की जीन्स का बेल्ट और जीन्स का हुक खोलकर ज़िप नीचे कर दी थी और जीन्स नीचे करके गौतम की वी शेप अंदरवियर के अंदर फूफाकरता हुआ उसका लंड देखकर उसके साइज का अंदाजा लगाने की कोशिश में थी मगर गौतम की बात सुनकर उसके टूटे हुए अरमान जाग गए और उसने गौतम को देखते हुए उसकी बात का जवाब दिया..

रूपा - एक बार मम्मी कहकर बुलाओ ना..

गौतम हैरानी से - क्या?

रूपा - क्या नहीं ग़ुगु मम्मी. मुझे मम्मी कहकर बुलाओ ना..

गौतम रूपा की बात सुनकर पहले मुस्कुरा दिया और फिर रूपा के गालो को प्यार से सहलाके बोला - मम्मी अब सुसु करवा दो वरना चड्डी में ही निकल जायेगी..

गौतम के मुंह से मम्मी सुनकर रूपा का दिल गौतम के लिए और भी ममता के भाव से ओत प्रोत हो गया और रूपा ने जवाब देते हुए कहा..

रूपा - ठीक है मेरे नन्हे मेहमान और गौतम की अंदरवियर नीचे सरका दी जिससे गौतम का लंड रूपा के सामने हवा में झूल गया और रूपा के साथ जब गौतम की नज़र भी अपने लंड पर पड़ी वो रूपा के साथ चौंक कर अपने लंड को देखने लगा.. गौतम के 6 इंच का लंड अचानक से 10 इंच का लगने लगा था

आधी खड़ी हालात में लंड को रूपा ने अपने हाथ से पकड़ लिया और बाथरूम पोट की तरफ कर्रे हुए लंड की लम्बाई और मोटाइ का जायजा लेने लगी.. उसने आज से पहले कभी इतना बड़ा लंड हक़ीक़त में नहीं देखा था हज़ार से ज्यादातर लोडे जो सब 3-5 इंच के ही थे रूपा ने ले रखे थे मगर इतना बड़ा तो उसने भी अपने वैश्या के धंधे में नहीं लिया था.. उसने बस फ़ोन पर ही ऐसे अफ्रीकन लंड देखे थे मगर आज उसके सामने गौतम का अफ्रीकन गोरा लंड था जिसे देखकर रूपा के मन में पानी आने लगा..

गौतम भी हैरानी से अपने लंड की तरफ देखता हुआ सोचने लगा की कैसे अचानक उसका लंड इतना बड़ा हो गया और वो कंफ्यूज सा होकर बाथरूम पोट में मूत रहा था रूपा भी मूतते हुए गौतम का लंड पकड़ कर बैठी थी और जब गौतम मूत कर फ्री हुआ तब रूपा ने बिनाकुछ बोले या सोचे समझें गौतम के लंड का टोपा अपने मुंह में भर लिया और मूत की आखिर की कुछ बुँदे अपने मुंह में गिरवाते हुए लंड को चूसकर साफ कर दिया जिससे गौतम की आह्ह निकल गई और फिर रूपा ने गौतम से बाहर जाने को कहा और खुद मूतने लगी.

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रूपा जब मूत कर वापस आई तो रात के 12 बज चुके थे और अब रूपा के मन में चुदने की तलब होने लगी थी. उसने देखा की गौतम खिड़की से बाहर देख रहा है तो उसने वही पर नीचे बैठकर वापस से गौतम का लंड मुंह में ले लिया और इस बार पूरे अनुभव से गौतम को लंड चूसाईं का मज़ा देने लगी..

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गौतम - अह्ह्ह्ह क्या चुस्ती हो तुम? इतना कहकर गौतम रूपा के बाल पकड़कर अपना लंड उसके मुंह में जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा और रूपा गौतम को खुश करने की हर मुमकिन कोशिश करने लगी.. कुछ देर बाद ही गौतम ने अपने सारा माल रूपा के मुंह में भर दिया जिसे रूपा ने गले से नीचे उतार लिया और गौतम का हाथ पकड़कर बिस्तर पर ले गई..

रूपा ने एक जगाह से कंडोम का पैकेट निकाला और उसमे से एक कंडोम निकालकर फाड़ते हुए गौतम के सामने बैठ गई और गौतम के लंड को वापस हाथ में लेकर हिलाते हुए खड़ा करने लगी फिर वापस मुंह में भरके चुस्ती हुई गौतम को देखने लगी, गौतम भी रूपा को ही देखे जा रहा था..

थोड़ी सी चूसाईं से ही लोडा वापस पूरा टाइट हो गया और रूपा ने उसपर कंडोम चढ़ा दिया फिर खुद बिस्तर पर अपनी साड़ी उठाके लेट गयी और पेंटी निकाल कर अलग कर दी..

रूपा - चलो नन्हे मेहमान.. कहो अपने अजगर से मेरे बिल में घुसकर अपना ज़हर उगल दे..

गौतम रूपा की बात सुनकर रूपा के ऊपर चढ़ गया और रूपा के होंठों को चूमकर बोला - मेरे अजगर के लिए तुम्हारा बिल छोटा लग रहा है मम्मी.. अगर घुसते टाइम कुछ टूट फुट हो जाए तो मुझसे मत कहना बाद में..

रूपा मुस्कुराते हुए - मम्मी की चिंता मत करो, अपने अजगर से कहो जितना अंदर जा सकता है चला जाए मैं नहीं रोकूंगी..

गौतम चुत के मुहाने पर लंड रगड़कर - लो फिर सम्भालो मेरे अजगर को.. कहते हुए गौतम ने अपना लंड चुत के छेद में घुसा दिया और एकजोरदार झटका देते हुए एक बार में दो-तिहाई लंड चुत में उतार दिया जिससे रूपा की आह्ह निकल गई और उसने गौतम को कसके पकड़ लिया और अपने गले से लगाते हुए चूमने लगी..

गौतम ने अब एक के बाद एक जोरदार झटके मारना शुरु कर दिया और रूपा को किसी नवविवाहित स्त्री की तरह सिसकने पर मजबूर कर दिया..

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रूपा आहे भरते हुए गौतम के होंठों को चूमे जा रही थी जिसमे उनकी जीभ आपस में कुस्ती कर रही थी और नीचे गौतम अपने लंड से रूपा की हज़ार से ज्यादा बार चुदी हुई चुत को पहली बार वाला मीठा दर्द दे रहा था..

पुरे कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी और पूरा माहौल चुदाईमय हो चूका था..

करीब 15 मिनट मिशनरी में रूपा की चुत पेलने के बाद गौतम ने रूपा को पलटकर घोड़ी बना लिया और उसके कमर तक लम्बे बालों को अपने दोनों हाथों में पकड़ते हुए उसकी चुत में वापस अपना लंड डालकर चोदने लगा.. इस बार उसे ऐसा महसूस हो रहा जैसे वो घुड़सवारी कर रहा हो. घोड़ी बनकर भी रूपा के मुंह से कुतिया वाली आवाजे ही आ रही थी. पीछे से झटके खाती रूपा का बदन ऊपर से नीचे तक पूरा तूफ़ान में हिलते पेड़ की तरह हिल रहा था..

गौतम ने कुछ देर घोड़ी बनाने के बाद रूपा को काऊ गर्ल और फिर अपने ऊपर गिरा कर चोदने लगा.. रूपा को चुत में हल्का दर्द और मीठा मज़ा दोनों एक साथ महसूस हो रहा था.. रूपा को वही मज़ा आ रहा था जो अपनी शुरुआती चुदाईयों में लड़की को आता है. रूपा को अपनी अनगिनत बार चुद चुकी चुत भी गौतम के लंड के आगे कुंवारी सी लगने लगी थी..

लगभग एक घंटे अलग अलग पोज़ में चोदने के बाद गौतम ने वापस रूपा को मिशनरी वाले पोज़ में चोदना शुरुआत कर दिया और उसे चोदते हुए बोला..

गौतम - मज़ा आ रहा है मम्मी?

रूपा आँखे बंद किये सिस्कारी लेती हुई बोली - आ रहा है ग़ुगु.. पर बहुत दर्द भी हो रहा है.. थोड़ा सा आहिस्ता चोद अपनी मम्मी को बेटा..

गौतम रूपा के मुंह से बेटा सुनकर सकपका गया और एक पल को उसे रूपा में उसकी असली माँ सुमन का चेहरा नज़र आने लगा और वो बिना रूपा से कहे उसी वक़्त उसकी चुत में झड़ गया..

रूपा भी अब तक 2 बाद झड़ चुकी थी और गौतम के झड़ते हुए उसने गौतम को अपने बाहों में कस लिया और पूरा डीप चूमने लगी.. गौतम के मन की हालात अजीब थी जो उसके साथ अभी हुआ वो क्या था? इस बात को समझने की कोशिश करते हुए वो रूपा के ऊपर से हटने लगा और जब उसने रूपा की चुत से लंड निकालकर देखा तो रूपा के साथ वो भी मुस्कुराने लगा.. कंडोम पूरा फट चूका था और गौतम ने सारा माल रूपा की चुत में गिरा दिया था मगर रूपा खुश थी उसे जो ख़ुशी मिली उसके आगे वो आज गौतम को कुछ भी दे सकती थी..

गौतम अपना लंड रूपा के बेड पर एक तरफ पड़े ब्लाउज से साफ करके उसके बदल में लेट गया और उसकी नज़र घड़ी की तरफ गई जो रात के डेढ़ बजा रही थी..

रूपा भी अपनी चुत साफ करके गौतम के सीने पर आ गई और अपना सर उसके सीने पर टिकाटे हुए बोली - क्यू नन्हे मेहमान? केसा लगा मम्मी की चुत मारके?

गौतम - मज़ा आ गया..

रूपा - पर तुम्हारे मज़े के लिए मेरी जो चुत सूज गई उसका क्या?

गौतम - बर्फ लगा देता हूँ ठीक हो जायेगी..

रूपा - कहा कहा बर्फ लगाओगे नन्हे मेहमान? ऊपर नीचे तक हर जगह घायल कर दिया तुमने तो एक ही बार में..

गौतम - गांड भी चाहिए मुझे दोगी ?

रूपा - तुम्हारे लिए तो अब मैं अपनी जान दे सकती हूँ तूने बस ये गांड मांगी है.. कर लो जो तुम्हे करना मेरे साथ..

गौतम रूपा को वापस घोड़ी बनाकर अपने लोहे जैसे सख्त हो चुके लंड को थूक लगा कर रूपा की गांड में घुसाने लगता है..

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रूपा चुत जे दर्द से अभी उभर ना पाई थी की गौतम ने उसे गांड का दर्द देना भी शुरू कर दिया औऱ धीरे धीरे बहुत से जतन करने के बाद आखिर अपना आधा लोडा रूपा की गांड के छेद में घुसेड़ ही दिया.. रूपा की हालात कुछ वैसे थी की वो ना तो गौतम को मना कर सकती थी औऱ ना उसका लंड पूरा गांड में ले सकती थी.. गौतम भी अब रूपा की हालात समझ रहा था उसने उतने ही लोडे को गांड में डाले रखा औऱ फिर धीरे धीरे रूपा की गांड मारने लगा.. रूपा को पहले से थोड़ा आराम आने लगा तब गौतम ने लंड को औऱ अंदर डालने की कोशिश में तेज़ झटके लगाए जिससे रूपा की चिंखे निकल गई औऱ आँख से दर्द के मारे आंसू भी.. गौतम ने इस बार रूपा की हालात देखकर अपना लोडा उसकी गांड से बाहर निकाल लिया औऱ रूपा को अपनी बाहों में कसकर उसके आंसू पोंछता हुआ बोला..

गौतम - तुम ठीक तो हो? मुझे माफ़ कर दो. मैं तुम्हे रुलाना नहीं चाहता था.. सॉरी..

रूपा ने बहुत लोगों को देखा था जिन्हे उसके दर्द में मज़ा आता था किसीको उसपर तरस नहीं आया जब भी उसकी हालात खराब हुई थी वो बस इतना जानती थी की मर्द कभी औरत पर तरस नहीं खाता मगर जिस तरह गौतम ने उसे अपनी बाहों में भरके उसके आंसू पोंछते हुए अपने चेहरे पर चिंता के भाव लाकर माफ़ी मांगी थी उससे रूपा को गौतम पर औऱ भी ज्यादा प्यार आने लगा था औऱ वो समझ चुकी थी की गौतम नरम दिल का लड़का है जो किसी औरत को दर्द में नहीं देख सकता..

रूपा अपनी गांड के छेड़ को सहलाती हुई गौतम से बोली - माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए तुमसे मेरे नन्हे मेहमान.. मैं तुम्हे खुश नहीं कर पाई.. एक चीज मांगी थी तुमने मैं वो भी तुम्हे नहीं दे पाई..

गौतम रूपा की बात सुनकर उसकी चुत सहलाकर मुस्कुराते हुए बोला - कोई बात नहीं.. मैं तुम्हारी इस चुत से ही काम चला लूंगा..

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रूपा गौतम की बात सुनकर मुस्कराती हुई उसे पीछे धकेल देती है जिससे गौतम बिस्तर पर पीठ के बल लेट जाता है औऱ फिर रूपा उसका लंड अपनी चुत में घुसा कर उसके ऊपर बैठ जाती है औऱ धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगती है..

रूपा - गर्लफ्रेंड नहीं है तुम्हारी?

गौतम - नहीं.. मुझे लड़कियों के नखरे नहीं पसंद. औऱ वैसे भी मुझे भाभियाँ औऱ आंटीया पसंद है.

रूपा जोर से हसते हुए - मैं पसंद आई तुम्हे?

गौतम रूपा का बोबा मसलते हुए - तुम पसंद नहीं आई होती तो अपने लंड पर थोड़ी बैठने देता..

रूपा हँसते हुए - कितने बेशर्म हो तुम.. अब तो मुझे शर्म आने लगी है..

गौतम - शरमाते हुये बिलकुल हीरोइन लगती हो तुम..

रूपा और गौतम के बीच ये सब हो रहा था वही दूसरे कमरे में काजल आदिल के लंड पर उछल रही थी दोनों के बीच ये दूसरा राउंड था और दोनों मस्ती से चुदाई कर रहे थे.. काजल हरयाना की हट्टी कट्टी जाटणी थी जो अपनी झांटे कटवाकर इस कोठे पर रंडी बन चुकी थी..

37 साल की काजल 21 साल के आदिल के लंड पर ऐसे उछल रही थी जैसे बच्चे रस्सी कूदते समय उछलते है..

देखने से लगता था की काजल को भी आदिल के साथ मज़ा आ रहा था आदिल के 6 इंच का लंड काजल की चुत में ऐसे आ जा रहा था जैसे उन दोनों की बहुत पुरानी जान पहचान हो..

आदिल ने काजल को ऊपर से नीचे ले लिया और उस हरयाणवी जाटनी के झटके मारते हुए उससे बात करनी शुरू कर दी..

आदिल - कहा से हो भाभी ज़ी?

काजल - हरयाणा से.

आदिल - हरयाना में कहा से?

काजल - रोहतक से

आदिल - यहां कब से?

काजल - 1 महीना हो गया

आदिल - भाभी ज़ी नीचे का मामला काफी टाइट है आपका नई नई भर्ती हुई हो क्या कोठे पर?

काजल - मज़बूरी ले आई भईया, वरना मर्ज़ी थोड़ी रांड बनती.

आदिल - पति शराब पिता है?

काजल - शराबी होता तो चल जाता जुआरी भी था हरामी ने रोड पर लाकर छोड़ दिया..

आदिल - बहुत दर्द भरी कहानी है भाभी ज़ी आपकी, सुनकर बहुत दुख हुआ.

काजल - तुम्हरा क्या कसूर इसमें? जब किस्मत में ही रांड बनना लिखा था..

आदिल - भाभी ज़ी एक बात पुछु?

काजल - हां..

आदिल - इतनी टाइट है आपकी बच्चा तो नहीं हुआ होगा अभी तक?

काजल - एक लड़का है.. मगर वो भी बाप की तरह नसेड़ी निकला..

आदिल - अच्छा.. कितना बड़ा है?

काजल - है 19 साल का..

आदिल - क्या? और आपकी उम्र कितनी है?

काजल - इस साल के आखिर में 38 की हो जाउंगी..

आदिल - लड़का कहा रोहतक में ही है?

काजल - हां..

आदिल - अच्छा मेरे साथ मज़ा आ रहा है?

काजल - हम्म..

आदिल - चलो भाभी अब देवर को घोड़ी बनकर दिखाओ..

काजल - लो देवर ज़ी..

आदिल - कसम से भाभी ज़ी.. आप जैसे देसी झोंटो को पेलने में जो मज़ा आता है ना वो नई लड़कियों को पेलने में भी नहीं है..

आदिल काजल को घोड़ी बनाके चोदने लगता है और उसकी आवाजे कमरे में गुजने लगती है.. काजल भी अपनी चुदाई का मज़ा ले रही थी.. ढीली बेजान लुल्लीयो के बाद आज उसे एक मस्त मजबूत जवान लंड मिला था और काजल उसका भरपूर मज़ा लेने में लगी हुई थी शर्म और लिहाज़ का पर्दा उसने यहां पहले ही उतारकर रख दिया और 21 साल के आदिल के साथ सम्भोग का मज़ा ले और दे रही थी..

रात के तीन बजे तक रूपा और गौतम के साथ साथ आदिल और काजल ने चुदाई को दो दो राउंड ख़त्म कर लिए थे अब गौतम रूपा को बाहों में भरके चोद रहा था वही आदिल अभी भी काजल को अपना लंड चुसवाये जा रहा था जो धीरे धीरे वापस खड़ा हो रहा था..

काजल फिर भी पूरी शिद्दत से आदिल का पूरा लंड मुंह में लेकर चूसे जा रही थी..

आदिल - भाभी ज़ी मन तो नहीं कर रहा आपको अपना लोडा चुसवाने का मगर क्या करू? बिना लंड मुंह में गए खड़ा भी नहीं होता..

तीसरा राउंड भी जल्दी ही ख़त्म हो गया और फिर रूपा गौतम को अपनी बाहों में गिरफत करके. गहरी नींद में सो गई और आदिल भी काजल के साथ आराम करने लगा..

गौतम - क्या देख रही हो?

रूपा - देख रही हूँ की कैसे एक 20 साल का बच्चा मेरी जैसी 20-25 चुदी हुई 40 साल की रांड को एक रात में अपने लंड के दीवाना बनाके जा रहा है..

गौतम - मैं बच्चा नहीं बाप हूँ बाप समझी?

रूपा खड़े होकर गौतम को गले लगा लेती है और उसके होंठों को खा जने की नियत से अपने होंठो में भर लेती है मगर गौतम उसके चुम्बन का जवाब उसके खुले हुए चुचे पर खड़े निप्पल्स को मसलकर देता है..

रूपा - वापस कब आओगे?

गौतम - पता नहीं..

रूपा - क्यू? मैं पसंद नहीं आई मेरे नन्हे मेहमान को?

गौतम - पसंद तो बहुत हो पर मेरे पास पैसे नहीं है ना.. मुझे तो रात को मेरा दोस्त लेके आया था यहां..

रूपा - अच्छा ज़ी तो ये बात है.. रूपा कहते हुए अपने गले में से सोने की चैन निकालकर गौतम को के गले में पहना देती है और पर्स में से कुछ पैसे निकालकर उसकी जेब में रख देती है.. और आगे कहती है.. और तो कोई बात नहीं है ना..

गौतम - पर मैं तुमसे ये सब नहीं ले सकता..

रूपा - चुप करो.. रातभर जो तुमने मुझसे प्यार किया है उसका इनाम है ये.. अब बताओ अगली दफा कब आओगे?

गौतम - इस हफ्ते मुमकिन नहीं है अगले हफ्ते ट्राय करुंगा आने की..

रूपा - तब तक क्या मैं इंतज़ार करती रहूंगी मेरे नन्हे मेहमान का?

गौतम - तो तुम आ जाना.. सिटी में काफी जगह है मेरे पास मिलने की..

रूपा - तो कल मैं तुम्हे सिटी आकर फ़ोन करुँगी..

गौतम - ठीक है..अब मैं चलू?..

रूपा - जाने देने का मन तो नहीं है.. पर जाओगे तभी तो लौटकर आओगे..

गौतम - बाए... कहते हुए गौतम रूपा के रूम से बाहर आ गया और काजल के रूम की तरफ चला गया जहा आदिल गहरी नींद में सो रहा था..

गौतम - ये कब से सो रहा है?

काजल - दो घंटे हो गए.. काजल ने बालों में कंघी करते हुए कहा.. उसे देखकर लग रहा था वो अभी नहाकर आई है..

गौतम - अबे ओ कबाड़ी की औलाद.. उठ साले..

आदिल - कौन है बे..

गौतम - तेरा असली बाप.. चल यहां से..

काजल - सो लेने दो सुबह आठ बजे तक कोई कुछ नहीं बोलेगा..

आदिल वापस मुंह तकिये में घुसाके सो गया और गौतम आदिल को एक नज़र देखकर काजल को देखने लगा.. अभी सुबह के साढ़े छः बजे थे..

काजल - क्या हुआ? ऐसे क्या देख रहे हो? वैसे तुम दोनों स्कूल में हो या कॉलेज में? इतनी सी उम्र में यहा आने में डर नहीं लगता?

गौतम ऊपर से नीचे तक काजल के बदन को घूरता है और उसकी छाती से लेकर गांड का मुआईना करने के बाद उसका हाथ पकड़कर बाथरूम में ले जाता है और आधे घंटे बाद निकलता है पीछे काजल लगड़ती हुई दिवार के सहारे बाहर आती है..

काजल - बेटा थोड़ा प्यार से नहीं कर सकता था फाड़ के रख दी मेरी चुत तूने.. गधे का लंड लेके घूम रहा है..

गौतम - ज्यादा मत बोल वरना वापस घोड़ी बना लूंगा.

काजल - बना ले लल्ला.. मैं कोनसी घिसके आधी हो जाउंगी..

गौतम - अबे दल्ले उठ ना..

आदिल - क्या हुआ?

गौतम - तेरे अब्बू का फ़ोन आया था रात को तेरी अम्मी चुद गई कबाड़ी की दूकान में गांडु.. चल यहां से अब.


गौतम आदिल को लेकर कोठे से बाहर आ जाता है और घर चल देता है.. आदिल को घर छोड़कर गौतम अपने घर के लिए निकल जाता है..
 
अपडेट - 4



गौतम आदिल को उसके घर छोड़कर जब अपने घर आया तो सुमन रसोई में पराठे बना रही थी..

गौतम - क्या बात है आज तो सूरज पच्छिम से निकला है शायद.. पोहे की जगह पराठे वो भी प्याज के? लगता है कोई खुशखबरी है. मेरा छोटा भाई या बहन तो नहीं आने वाला कहीं?

सुमन - धत.. बेशर्म.. कोई खुशखबरी नहीं है.. तू हाथ मुंह धो ले मैं नास्ता लगाती हूँ..

गौतम - दस मिनट दो मैं अभी नहाकर आता हूँ..

गौतम तौलिया उठाकर बाथरूम चला गया और ब्रश करके नहाने लगा, उसने फुर्ती से नहाकर अलमीरा में से एक लाइट ब्लू जीन्स और एक डार्क ब्लू चेक शर्ट पहन कर बाहर आ गया और फिर रसोई में आकर उसी पुरानी तरह उछलकर रसोई की पट्टी पर बैठ गया..

सुमन - नास्ता देते हुए.. कैसे रही पढ़ाई?

गौतम - बहुत मुश्किल, मगर मैंने सब मैनेज़ कर लिया..

सुमन - मेरा ग़ुगु है ही इतना स्मार्ट..

गौतम - पापा आज भी जल्दी चले गए?

सुमन - हम्म.. काम के चक्कर में उन्हें फुर्सत ही नहीं रहती..

गौतम - मुझे तो अजीब लगता है उनका बर्ताव कुछ अलग है..

सुमन - तू इतना मत सोच बेटू.. पराठा और चाहिए?

गौतम - हां एक और थोड़ा दही भी..

सुमन - लो.. आज कहीं बाहर जाने का इरादा है?

गौतम - नहीं तो. क्यू?

सुमन - नहीं बस ऐसे ही पूछा..

गौतम - चलो आपकी वीडियो बनाकर इंस्टा पर ड़ालते है गाने वाली..

गौतम ने फ़ोन निकलकर कैमरा ऑन किया और सुमन को कुछ गाने को कहा.. रसोई में काम करती सुमन उसी तरह अस्त व्यस्त हालात में एक पुराना हिंदी सोंग गुनगुनाने लगी जिसे गौतम ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और फिर थोड़ी एडिटिंग कर उसे इंस्टा पर रील्स में अपलोड कर दिया, इसी तरह 2-3 और वीडियो बनाकर रील्स पर डालकर गौतम ने फ़ोन एक तरफ रख गया और रातभर जागने के कारण महसूस होती थकावट से नींद के आघोश में चला गया.. सुमन प्यार से उसे बिस्तर पर सोता देखकर अपने आप को उसके करीब जाने से नहीं रोक सकी और गौतम के करीब आकर सुमन ने अपना हाथ उसके सर पर फेरना शुरु कर दिया.. सुमन सोते हुए गौतम का सर चूमकर कुछ सोचने लगी और फिर सुमन की आँखे खुद ब खुद नम हो गई जिसे उसने अपने साडी के पल्लू से पोंछ लिया था.

गौतम की आँख शाम को ही खुली जब उसने समय देखा तो तुरंत बिस्तर से उठकर मुंह देकर जूते पहनते हुए कमरे से बाहर आ गया..

सुमन - ग़ुगु.. आज क्या बनाऊ खाने में?

गौतम जूते पहन कर रसोई में खड़ी अपनी माँ सुमन के करीब आ गया और एक चुम्बन उसके गाल पर करते हुए कहा.. कुछ भी बना लो माँ तुम सब बेस्ट ही बनाती हो..

सुमन - ग़ुगु.. बाहर जा रहा है?

गौतम - हां कुछ काम है रात से पहले आ जाऊंगा..

गौतम सुमन को ये कहकर बाहर आ जाता है अपनी बाइक स्टार्ट करके घर से चल देता है..

शहर की गुमनाम गलियों और चौराहो से होता हुआ गौतम शहर के दूसरी तरफ की साफ सुथरी सडको पर आ गया जहाँ एक अलग ही शहर बस्ता था बड़ी साफ सड़के बड़ी बड़ी गाड़िया और महंगे कपडे पहनें दिल के छोटे लोग.. सब गौतम की आँखों के सामने था.. गौतम वहा से थोड़ा आगे जाकर एक रेस्टोरेंट के आगे रुक गया.. घड़ी की सुई साढ़े पांच बजने का इशारा कर रही थी.. गौतम ने बाइक खड़ी की और रेस्टोरेंट के अंदर आ गया.. जहा बाई तरफ एक टेबल पर रजनी अपने फ़ोन में नज़र गड़ाये कुछ देख रही थी.. दो चाय के खाली कप उसके सामने रखे हुए थे जो बता रहे थे की वो यहां लम्बे समय से बैठी थी..

गौतम नज़र बचाकर काउंटर पर गया और दो ग्लास एप्पल जूस लेकर रजनी की टेबल पर रख दिए, अचानक से हुई इस हरकत पर रजनी का ध्यान फ़ोन से निकलकर गौतम पर गया और वो अपना चश्मा उतारकार गौतम को देखने लगी. गौतम ने हलकी सी मुस्कान अपने होंठों पर बिखेर दी और रजनी से बोला..

गौतम - यहां का एप्पल जूस बहुत अच्छा है आपको ट्राय करना चाहिए..

गौतम की बात सुनकर रजनी फ़ोन में समय दिखाते हुए गौतम से बोली..

रजनी - पुरे 40 मिनट लेट आये हो तुम..

गौतम - दीदी.. वो सच कहु तो बाइक खराब हो गई थी पंचर बनवाने में टाइम लग गया.. इसलिए देरी हो गई..

रजनी गौतम को मुस्कुराकर देखती हुई एप्पल जूस का एक सिप लेकर बोली - मैडम से सीधा दीदी? दूसरी मुलाक़ात में ही ज्यादा फ्रेंक हो रहे हो तुम तो?

गौतम उसी तरह - नहीं वो बस आपको दीदी बोलने का दिल किया तो बोल दिया.. आप कहोगी तो नहीं कहूंगा वापस..

रजनी - कोई जरुरत नहीं है.. बोल सकते हो दीदी.. मैं भी तुम्हे छोटा भाई कहकर ही बुलाऊंगी.. वैसे तूने मुझे यहाँ ये एप्पल जूस पिलाने बुलाया था हम्म?

गौतम - नहीं नहीं दीदी.. उस लिए नहीं बुलाया.. लेकिन अगर मैं बुलाऊ आपको एप्पल जूस पिने बुलाऊ तो क्या आप आओगी?

रजनी - हम्म्म... ये तो अगली बार जब तू मुझे बुलायेगा तब पता चल ही जाएगा..

गौतम - ये भी ठीक है.. वैसे मैं एक बात बोलू दीदी.. आपके ऊपर ये नीला सूट बहुत जचता है..

रजनी हँसते हुए - बेटा ज़ी.. 34 की हूँ मैं.. पता है ना? ये फ़्लट करके कुछ नहीं मिलने वाला. समझा.. अपने उम्र की लड़कियों पर ये लाइन मारना. मुझपर रहने दो..

गौतम - फल्ट नहीं कर रहा दीदी मैं तो बस सच कह रहा हूँ..

रजनी - मुझे छोडो.. खुदको कभी आईने में देखा है? चाँद भी ज्यादा प्यारी सूरत है तेरी ग़ुगु.. मम्मा को बोला कर एक काला टिका लगाके घर से बाहर भेजे.. वरना नज़र लग जायेगी.. अच्छा अब पहले ये बता क्या कहने वाला तू मुझसे?

गौतम - वो आप बात कर रही थी ना कल फ़ोन पर.. की आपको किसी क़ातिल की तलाश है जिसने एक पुलिसवाले की भी जान ली है.. बिल्लू सांडा नाम है जिसका..

रजनी - हां यार ग़ुगु बहुत परेशान करके रखा है उस हरामजादे ने और ऊपर से एस पी साब का प्रेशर है जल्द से जल्द पकड़ने का.. नींद हराम हो गयी है उसके चक्कर में.. ससपेंड ना हो जाऊ बस..

गौतम - दीदी अगर में उसे आपके लिए पकड़वा दूँ तो?

रजनी हँसते हुए गौतम के गाल खींचकर प्यार से - ग़ुगु.. वो एक बच्चा नहीं है बहुत बड़ा क्रिमिनल है.. तू उससे दूर ही रहना.. समझा?

गौतम - दीदी मज़ाक़ नहीं कर रहा.. मैं जानता हूँ वो कहा मिलेगा. और अभी वो तो अकेला ही होगा..

रजनी गंभीर होते हुए - तू जनता है वो कहा मिलेगा?

गौतम - हां..

रजनी - कहा?

गौतम - वो जगताल के एक कोठे में पड़ा हुआ है जिसे रेखा काकी चलाती है.. आप रात में अचानक जाकर उसे आसानी से पकड़ सकती हो. तब उसके आदमी भी उसके साथ नहीं रहते..

रजनी -और तु ये सब कैसे जानता है?

गौतम - मुझे मेरे एक दोस्त ने बताया है उसका बड़ा भाई बल्लु के साथ ही काम करता है..

रजनी कुछ सोचकर - ग़ुगु अगर ये इनफार्मेशन गलत निकली तो एस पी साब मुझे ससपेंड भी कर सकती है..

गौतम मुस्कुराते हुए - और अगर आपने उसे पकड़ लिया तो प्रमोशन भी मिल साल सकता है.. इनफार्मेशन की गारंटी मेरी.. बिलकुल पक्की है..

रजनी - अच्छा ज़ी? चल तुझे घर छोड़ देती दूँ..

गौतम - दीदी मैं बाइक लाया हूँ..

रजनी - ठीक है..

गौतम मुस्कुराते हुए - दीदी अब अगली मुलाक़ात का डेट & टाइम व्हाट्सप्प करू?

रजनी बिल पेमेंट करके गौतम के साथ बाहर रेस्टोरेंट के बाहर आ जाती है और गौतम की बात का जवाब देते हुए कहती है..

रजनी गौतम का हाथ पकड़कर - ग़ुगु.. मैं जानती हूँ तू मुझे पसंद करता है.. तेरी आँखों मुझे सब नज़र आता है. इस उम्र में ये सब फीलिंगस आम बात है पर बेटा ज़ी, आप अपने उम्र की लड़कियों को फ्रेंड बनाओगे तो अच्छा रहेगा.. मुझसे कुछ नहीं मिलने वाला तुझे?

गौतम - दीदी मैंने कब कहा मुझे आपसे कुछ चाहिए? आपसे मिलना और बात करना अच्छा लगता है बस इसलिए वो सब कहा..

रजनी - अच्छा ठीक है बाबा.. कर दे व्हाट्सप्प.. मगर अगली बार लेट हुआ तो सजा मिलेगी.. मैं माफ़ नहीं करूंगी. समझा? कहते हुए रजनी ने गौतम को गले में हाथ डालके अपनी तरफ खींचा और उसके सर पर एक प्यार भरा चुम्मा देकर अपनी गाडी में बैठ गई, गौतम भी वही खड़ा हुआ रजनी को जाते हुए देखने लगा और तब देखा जब तक वो वहा से चली नहीं गई.. उसके बाद गौतम बाइक स्टार्ट करके वापस घर की तरफ चल दिया.. रजनी ने थाने जाकर रात में बिल्लू को पकड़ने की तयारी शुरु कर दी और रात होने का इंतजार करने लगी..

गौतम शाम के सात बजे घर पंहुचा तो उसने देखा की खाना बन चूका था और सुमन अकेली उदास अपने कमरे में एक तरफ लगे बेड पर बैठी कुछ सोच रही थी.. गौतम सुमन की उदासी समझ गया था वो सीधा सुमन के पास गया और उसे अपनी बाहों में भरकर एक किस उसके गाल पर करते हुए बोला..

गौतम - क्या हुआ माँ? आपका इतना प्यारा मुखड़ा बुझा हुआ लग रहा है, जैसे पूर्णिमा का खिला हुआ चाँद अमावस में बदल गया हो.. इतना कहकर गौतम ने अपनी माँ सुमन को गुदगुदी करना शुरु किया जिससे सुमन के उदास चेहरे पर मुस्कुराहट खिल गई और उसने गौतम को अपनी बाहों में लेकर उसका चेहरा जगह जगह चूमती हुई बोली..

सुमन - आ गया तू अपना काम करके?

गौतम - हम्म.. पर आप क्यू उदास हो? किसी ने कुछ कहा है?

सुमन - कोई कहने सुनने वाला है ही कहा घर में? बस एक तू ही है मेरा फूल सा बच्चा, मेरा कितना ख्याल रखता है.. कहते हुए सुमन ने गौतम के चेहरे को अपनी छाती से लगा लिया और उसके सर को चूमती हुई बालों में हाथ फेरने लगी..

गौतम सुमन के लाड प्यार का आदि था उसे जितना प्यार सुमन करती थी उतना कोई और नहीं कर सकता था.. गौतम का चेहरा सुमन ने जब अपनी छातियों में छुपा लिया तो गौतम सुमन के बदन की खुशबु से सराबोर हो गया.. उसके नाक में सुमन के बदन से उठती अलाहिदा खुशबु भरने लगी थी.. गौतम ने उसी तरह रहते हुए सुमन से पूछा?

गौतम - पापा आज भी लेट आएंगे?

सुमन - उनका फ़ोन आया था.. कह रहे थे तबादला हो गया है एक दूर के थाने में आज घर नहीं आ पाएंगे..

गौतम - अच्छा तो इसलिए मुंह उतरा हुआ है मेरी परी जैसी माँ का? पर मैं हूँ ना आपके पास आपका ख्याल रखने के लिए. आप फ़िक्र मत करो..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के ललाट पर वापस चुम लेती है और उससे कहती है..

सुमन - देख रही हूँ बहुत मीठी मीठी बातें कर रहा अपनी माँ के साथ.. कुछ चाहिए तुझे?

गौतम - हां चाहिए ना.. आपके इन गुलाबी होंठों पर हंसी.. और इन कारी कारी काली कजरारी आँखों में चमक बस.. और कुछ नहीं..

सुमन - अच्छा ज़ी.. लगता है मेरा ग़ुगु सयाना हो चूका है.

गौतम - हां हो गया हूँ कोई शक है आपको..

सुमन - नहीं.. चल अब खाना खा ले.. भूख लगी होगी ना मेरे ग़ुगु को?

गौतम - हां बहुत तेज़ से लगी है.. मैं कपडे बदलकर आता हूँ..

गौतम सुमन की गोद से अपना सर उठाकर अपने कमरे में चला गया और कपडे बदल कर बाहर आ गया..

गौतम - क्या बात है माँ? आज कुछ ख़ास है? इतना सब बनाया है आपने?

सुमन - क्यू जब कुछ ख़ास होगा तभी मैं अपने ग़ुगु के लिए कुछ बनाउंगी? कहते हुए सुमन ने खाने की थाली गौतम को परोस दी और गौतम वही रसोई की पट्टी पर बैठके खाना खाने लगा..

सुमन - तू कल नॉनवेज खाने गया था? सुमन ने मुस्कुराते हुए पूछा..

गौतम हड़बड़ते हुए - नहीं तो आपको किसने कह दिया.. और पैसे कहा है मेरे पास जो मैं वो सब खाने जाऊँगा..

सुमन मुस्कुराते हुए - अच्छा ज़ी तो बिल तेरी जीन्स में कोई भूत डालके गया है..

गौतम ने पिछली रात जो अपने दोस्त आदिल के साथ नवाब के यहां बिरयानी खाई थी उसका बिल देते हुए सुमन ने फिर से गौतम से कहा..

सुमन - और नॉनवेज से साथ साथ अब ये बियर भी पीने लगे हो.. हम्म?

गौतम नज़र चुराते हुए - माँ वो मेरा दोस्त जबरदस्ती ले गया था बिरयानी खिलाने मैं तो जाना भी नहीं चाहता था. आप तो जानती हो मुझे. और सिर्फ एक बियर ही पी थी उससे ज्यादा नहीं..

सुमन - ग़ुगु.. तू जानता है ना तेरे पापा को. वो इन चीज़ो से कितना दूर रहते है. नॉनवेज और शराब के नाम से नफरत है उन्हे.. फिर भी तू चुपके ये सब करता है? अगर उन्हें पता चला तो वो बहुत दुखी होंगे..

गौतम - सॉरी माँ.. मैं जानता हूँ आप और पापा इन चीज़ो बहुत दूर रहते हो.. मैं भी खुदको दूर रखने की बहुत कोशिश करता हूँ पर मुझसे कंट्रोल नहीं हो पाता.. खाने की इच्छा कर जाती है..

सुमन - अच्छा.. ऐसा क्या ख़ास है उसमे जो इतनी इच्छा होती है तुम्हारी नॉनवेज खाने की?

गौतम - बोलकर कैसे बताऊ? कहीं आप खुद खाके देख लेना..

सुमन - छी.. बेशर्म कैसी बात कर रहा है.. इस घर में कभी नॉनवेज नहीं बनेगा. समझा..

गौतम - मैं बनाने के लिए थोड़ी कह रहा हूँ मैं खाने के लिए कह रहा हूँ.. एक बार नवाबवाले की बिरयानी खाके देखो बार बार खाने का मन करेगा..

सुमन - मैं यहां तुझे समझा रही थी और तू मुझे ही समझाने लगा.. मुझे नहीं खाना कुछ भी.. और आगे से तू भी इन चीज़ो से दूर रहना.. मैं नहीं चाहती मेरा ग़ुगु बिगड़ जाए..

गौतम खाने की प्लेट रखकर - अच्छा ठीक है मेरी समाज सुधारक माँ.. अब नहीं पिऊंगा बियर.. बस.. खुश अब तो?

सुमन - और नॉनवेज भी नहीं खायेगा कभी..

गौतम - हम्म्म्म.. कभी कभी तो खा सकता हूँ? प्लीज..

सुमन - अच्छा ठीक है पर तेरे पापा को पता नहीं चलना चाहिए..

गौतम - जैसा आप बोलो माँ.. ये कहते हुए गौतम ने सुमन के माथे पर एक हल्का सा प्यारा चुम्बन कर दिया और अपने रूम में चला गया, जहाँ वो अपना फ़ोन लेकर सुबह इंस्टा अकाउंट पर डाली हुई सुमन के गाने की रील्स का रिस्पांस देखने लगा..

उसने जो सुबह सुमन के गाने की तीन रील्स डाली थी उसे एक के बाद एक देखने लगा.. पहली और दूसरी रील्स पर कोई ख़ास रिस्पॉन्स नहीं आया रहा और व्यूज भी कम थे मगर तीसरी इंस्टा रील्स जो उसने डाल थी जिसमे सुमन की साड़ी का पल्लू थोड़ा नीचे सरका हुआ था और उसका हल्का सा क्लीवेज दिख रहा था उसपर अच्छा खासा रिस्पॉन्स था..

सुमन गा रही थी..

पहली-पहली बार मोहब्बत की है

कुछ ना समझ में आए, मैं क्या करूँ

इश्क़ ने मेरी ऐसी हालत की है

कुछ ना समझ में आए, मैं क्या करूँ

पहली-पहली बार मोहब्बत की है

कुछ ना समझ में आए, मैं क्या करूँ

इस रील पर 32 हज़ार व्यूज और 284 कमैंट्स आ चुके थे और अभी सिर्फ 10 घंटे हुए थे रील्स को डाले हुए.. उस रील के कारण अकाउंट को ढाई हज़ार लोगों ने फॉलो कर लिया था सुबह से अब तक..

गौतम ने रिस्पांस देखकर सोचा की अभी सुमन को ये बात बता दे मगर फिर जब उसने घर का काम ख़त्म करके बेड पर चैन से सोइ हुई अपनी माँ को देखा तो गौतम ने ये ख्याल सुबह के लिए टाल दिया और वापस अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेटते हुए रील्स पर आये कमैंट्स पढ़ने लगा..

1st कमेंट - भाभी ज़ी थोड़ा और नीचे पल्लू सरका दो तो मज़ा आ जाए..

2nd - uffff यार क्या आवाज है तुम्हारी लगता है रोज़ मुंह में लेती हो..

3rd - रंडी सिर्फ गाने मत सूना थोड़ा नाचके भी दिखा..

गौतम को अपनी माँ के लिए ऐसे ऐसे गंदे कमेंट पढ़कर बुरा लगा लेकिन ना जाने क्यू उसका लंड अपनेआप कमैंट्स पढ़ते हुए खड़ा हो गया और उसे कमैंट्स पढ़ने में अजीब सा अहसास होने लगा जो उसे हल्का मज़ा दे रहा था जिसे समझ नहीं पाया लेकिन उसे कमैंट्स पढ़ने का मन कर रहा था.. गौतम ने उठकर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वापस बिस्तर में आकर कमैंट्स पढ़ने लगा..

4th - massage चेक करो..

गौतम ने मसेज बॉक्स चेक किया तो वहा कई लोगों के massage आये हुए थे जिसमे उसने कमैंट करने वाले का इनबॉक्स खोला.. उसमे लिखा रहा.. भाभी ज़ी फुल नाईट सर्विस चाहिए कितना चार्ज करती हो आप? हम 4 लोग है मैं 25 हज़ार दे सकता हूँ अगर आप चाहो तो.. अगर मिलना चाहो तो रिप्लाई देना.. होटल नाईटमून मैं..

गौतम massage पढ़ते हुए कब अपने लंड को बाहर निकलकर मसलने लगा उसे भी पता नहीं चला.. उसे अपनी माँ के लिए आये ये गंदे और भद्दे कमैंट्स पढ़ने में मज़ा आने लगा था.. एक के बाद एक उसने लगभग सारे कमेंट पढ़ डाले और massage को भी पढ़ लिया.. रात के दो बजे उसने सब करके अपने लंड पर नज़र डाली तो उसका लोडा छात की तरफ मुंह करके लोहे जैसा सख्त बनकर खड़ा था.. गौतम ने कुछ सोचा और फिर बेड के नीचे से एक कोने में उसने जो सिगरेट का पैकेट और लाइटर छीपा रखा था वो निकालकर अपना फ़ोन लिए बाथरूम में आ गया..

गौतम ने बाथरूम की दिवार पर बने छेद में फ़ोन को रखा और उसमे सुमन की वही रील चलाकर सिगरेट जला ली और पीते हुए अपनी माँ सुमन की रिल देखकर मुठ मारने लगा.. गौतम के अंदर की छिपी हुई हवस जाग चुकी थी और उसने सुमन को अपना निशाना बनाया था वो अपनी माँ की उसी रील को बार बार देखते हुए उसे चोदने की सोचने लगा और सिगरेट के कश लेटे हुए जोर जोर से अपना लंड मुठियाने लगा.. थोड़ी देर बाद उसका सारा माल बाथरूम की दिवार पर जा गिरा और उसके अजीब सा गिल्ट होने लगा.. गौतम ने फ़ोन बंद करके मुठ ओर पानी डाल दिया, सिगरेट को बाथरूम पोट में फ़्लश कर दिया और वापस बिस्तर में आके कुछ सोचने लगा...

गौतम को सुमन के ऊपर मुठ मारने का गिल्ट हो रहा था मगर उसे जो मज़ा आया था वो भी अद्भुत था जिसके आगे गिल्ट कमजोर पड़ रहा था.. अपनेआप से कुछ बात करते हुए वो कुछ गहरा सोचने लगा फिर नींद के हवाले हो गया..

सुबह जब गौतम की नींद खुली तो उसे रात की अपनी हरकत पर शर्म आ रही थी लेकिन साथ ही उसका मन सुमन की नई रील्स बनाकर इंस्टा अकाउंट पर डालने का भी कर रहा था. आज सुमन ने एक लाल रंग की महीन साडी पहनी थी और वो किसी अप्सरा की जैसी खूबसूरत और दिलकश लग रही थी.. गौतम ने सुबह सुबह रसोई में चाय बनाती अपनी माँ सुमन के पीछे से जाकर सुमन को अपनी बाहों में कस लिया और गाल पर एक kiss करते हुए बोला.. गुडमॉर्निंग माँ.. आज क्या बात है नई साडी.. कहीं बाहर जाने का इरादा है आपका?

सुमन ने गौतम को एक नज़र देखा और बिना उसकी बाहों से खुदको आजाद करवाये गौतम के kiss के जवाब में पलटकर उसके गाल पर kiss करती हुई बोली..

सुमन - मुझे अब बाहर ले जाने वाला है ही कौन? तु भी जब देखो मुझे घर में छोड़कर अकेला ही घूमता रहता है.. तुझे शर्म आती है अपनी माँ के साथ कहीं बाहर जाने में? बूढ़ी हो गई हूँ ना मैं.. अब तो तेरे पापा भी ज्यादा बात नहीं करते..

गौतम - मुझे क्यू शर्म आएगी वो आपके साथ. और हां आप अभी बूढ़ी नहीं हुई है.. आपको बूढ़े होने में अभी 50-60 साल और लगेंगे.. समझी? आपको कहाँ जाना है बोलो आज ही चलते है..

सुमन हस्ते हुए - चल झूठा कहीं का.. जब देखो मेरी झूठी तारीफ़ करता रहता है.. और मुझे कहीं बाहर नहीं जाना.. कहते हुए सुमन मुड़कर गैस ऑफ कर देती है और चाय छन्नी करने लगती है..

गौतम - माँ चलो गाना गाओ.. गौतम फ़ोन निकालकर वीडियो बनाते हुए बोलता है.. सुमन एक पुराना गाना गाने लगती है..

गौतम - ये नहीं कोई नया वाला.. और इधर देखो..

सुमन - अच्छा ठीक है..

सुमन नया गाना सुनाने लगती है.. गौतम जानबूझ कर चाय लेटे हुए सुमन की आँख बचाकर उसका पल्लू नीचे कर देता है जिससे सुमन का आधा ब्लाउज दिखाने लगता है और फिर गौतम उसी तरफ से सुमन के गाने के 3-4 वीडियो बना लेटा है और फिर चाय पीकर एडिटिंग करने लगता है.. सुमन के बूब्स देखकर गौतम का फिर से लंड अकड़ने लगता है और वो उन वीडियोस को इंस्टा पर रील्स बनाके डाल देता है..

तभी गौतम का फ़ोन बजने लगता है..

गौतम फ़ोन उठाकर- हेलो..

रूपा - कहा हो मेरे नन्हे मेहमान?

गौतम - मैं तो आपके दिल में हूँ..

रूपा - अच्छा ज़ी? सच कह रहे हो?

गौतम - हम्म्म... एक दम सच..

रूपा - मिलने का वादा था आज याद है?

गौतम - मैं कैसे भूल सकता हूँ?

रूपा - तो फिर आधे घंटे में झील के किनारे आ जाना नन्हे मेहमान अपना वादा निभाने..

गौतम - उससे पहले ही आ जाऊंगा मेरी रूपा मम्मी.. कहकर गौतम फ़ोन काट देता है और नहाने चला जाता है..

नहाने के बाद जब वो वापस आता है तो अपनी माँ सुमन को सामने खड़ा देकर हैरानी से कहता है..

गौतम - क्या माँ? कुछ चाहिए आपको?

सुमन - नहीं कुछ नहीं.. लाओ में तुम्हारे कपडे निकाल देती हूँ अलमारी से..

गौतम - रहने दो आप मुझे वही पीला गुलाबी पहना दोगी..

सुमन - ग़ुगु तू प्यारा लगता है पर उन रंगों में.

गौतम - माँ मुझे मर्द लगना है.. bachha नहीं..

सुमन जोर से हस्ती हुई कपडे निकालकर कहती है - बड़ा आया मर्द बनने वाला.. कुछ साल पहले तक तो मुझसे से चिपक के सोता था.. कहता था माँ मुझे अकेले सोने में डर लगता है और अब मर्द बनने का भूत चढ़ा है सर पर मेरे छोटे से ग़ुगु को..

गौतम - माँ 20 साल का हो गया हूँ मै.. ये ग़ुगु कहकर मत बुलाया करो.. और वापस ये लड़कियों वाला कलर निकाला है आपने..

सुमन - 20 साल का हो गया तो क्या माँ की बराबरी करेगा.. रहेगा तो मेरा ग़ुगु ही.. वैसे तुझ पर बहुत प्यारा लगेगा ये कलर पहन के देख..

गौतम - सिर्फ आपकी ख़ुशी के लिए पहन रहा हूँ.. वरना ऐसी शर्ट मुझे बिलकुल पसंद नहीं.. गौतम एक ब्लैक जीन्स और येल्लो चेक शर्ट पहन कर त्यार हो जाता है वही उसकी माँ वही बेड बैठकर कुछ सोचने लगती है..

आज पूर्णिमा थी और जैसा बाबाजी ने बताया था सुमन ने लाल कपडे पहने और अब वो अपने बेटे गौतम को अपना स्तनपान करवाना चाहती थी मगर गौतम से ये बात करते हुए उम्र के फेर ने उसे भी शर्माने पर मजबूर कर दिया था.. सुमन सोच रही थी की कैसे वो गौतम से ये बात करें तभी गौतम ने उदास गहरी सोच में डूबी होनी माँ को देखकर उसके पास आ गया और उससे पूछने लगा..

गौतम - क्या हुआ? मेरी बात का बुरा लग गया?

सुमन अपनी गहरी सोच के समंदर से उभरकर बाहर आ गयी और गौतम के प्यारे चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़के अपने करीब ले आई और उसके दोनों गालो पर चुम्बन करके उसे देखने लगी और बोली..

सुमन - ग़ुगु.. एक बात करनी है पर तुम वादा करो नाराज़ नहीं होंगे अपनी माँ से और ना ही अपने पापा को इसके बारे में बताओगे..

गौतम - मैं कभी नाराज़ हुआ हूँ आपसे? और में किसी को कुछ नहीं बताने वाला.. अब बोलो क्या बात है? जिसको लेकर मेरी माँ के इतने प्यार चेहरे पर उदासी की ये चादर बिछी हुई है? हम्म?

सुमन मुस्कुराते हुए - ग़ुगु.. मैंने हमारे नये घर के लिए बाबाजी से कहा था और बाबाजी ने पर्चा दिया था.. उसमें बाबाजी ने लिखा था मुझे अपने प्यारे ग़ुगु को दूध पिलाना होगा..

गौतम - इतनी सी बात? लाओ दो दूध का गिलास मैं अभी पी लेटा हूँ..

सुमन - ग़ुगु.. ऐसे नहीं.. जैसे बचपन में पिलाती थी वैसे..

गौतम सुमन की बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाता है..

गौतम - माँ आप होश में हो ना? मैंने कहा था उस पाखंडी के चक्कर में मत आओ.. उसके चक्कर में घर तो छोडो वो घर का दरवाजा भी नहीं मिलेगा.. हर बार अजीब अजीब तरकिब बताता है.. कभी क्या कभी क्या..

सुमन गौतम की बातें सुनते हुए उसका सर प्यार से अपनी गोद में रखकर उसे बेड पर लेटा देती है और गौतम के होंठों पर ऊँगली रखकर कहती है - ग़ुगु.. चुप.. अब कुछ नहीं बोलना.. इतना कहकर वो अपनी साड़ी का पल्लू हटाकर अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगती है.. अपनी माँ को ऐसा करते देखकर गौतम के गले का पानी सुख जाता है और एक टक सुमन के छाती पर उभरदार चुचो को देखने लगता है जिसे सुमन उसके सामने बेपर्दा कर रही थी.. सुमन का जोबन अभी ढीला नहीं पड़ा था ये बात गौतम को सुमन के तने हुए चुचे देखकर समझा आ गई थी उसने भी शर्म और झिझक छोड़ने का मन बना लिया था.. सुमन ने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और फिर ब्रा को ऊपर करके अपने एक बोबे को गौतम के मुंह में देकर बोली - ग़ुगु.. लो.. पिलो..

गौतम ने बिना देर किया बोबा मुंह में ले लिए और उसके गुलाबी निप्पल्स चूसने लगा.. वही गौतम का मुंह लगते ही सुमन के सारे बदन में करंट दौड़ गया और वो गौतम का सर जोर से पकड़के अपना बोबा चुसवाने लगी.. गौतम किसी प्यासे की तरह अपनी माँ सुमन के निप्पल्स चाट चाट के चूस रहा था और मौका मिलने पर दांतो से भी काट रहा था जिसपर सुमन गौतम को कुछ नहीं कह रही थी और अपने बोबे चुसवाते हुए गौतम को देखकर जो सुख उसे मिल रहा था उसका आनंद ले रही थी..

सुमन ने एक के बाद दूसरा बोबा भी उसी तरफ गौतम को चूसने के लिए दे दिया जिसे भी गौतम छाव से चूसने लगा.. दोनों को जो मज़ा आ रहा था उसमे उन्हें पता ही नहीं चला की ये सब करते हुए आधा घंटा बीत चूका है..

सुमन की नज़र जब टेबल के किनारे पड़े सिगरेट के पैकेट और लाइटर पर गई तब उसने अपना बोबा गौतम के मुंह से बाहर निकाल लिया और गुस्सा दिखाते हुए बोली - ग़ुगु.. तू सिगरेट पिने लगा है?

गौतम स्वर्गलोग से कब गिरा था उसे मालूम नहीं पड़ा.. वो अचानक से सुमन के मुंह से ये बात सुनकर हक्का बक्का रह गया और सुमन को देखते हुए बोला - माँ.. वो मेरी नहीं है.. किसी और की है गलती है मेरे पास रह गई..

दरवाजे पर किसी के आने की दस्तक हुई तो सुमन ने अपनी ब्रा नीचे करके ब्लाउज के बटन बंद कर लिए और पल्लू ठीक करके खड़ी हो गई.. गौतम भी सुमन के साथ ही बेड से खड़ा हुआ, दरवाजे से जगमोहन की आवाज सुनाई दी.. सुमन ने सिगरेट का पैकेट और लाइटर अपने ब्लाउज में डालके छुपा लिया और कमरे से बाहर जाने लगी..

गौतम - माँ पापा से मत कहना प्लीज..

सुमन - ठीक है कुछ नहीं कहूँगी पर तू ये आदते छोड़ दे ग़ुगु..

गौतम सुमन का हाथ पकड़कर - thanks माँ.. वैसे बाबाजी को भी thanks कहना.. सुमन गौतम की बात का मतलब समझ गई और झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोली..

सुमन - चल हट बदमाश कहीं का.. मार खायेगा मुझसे..

गौतम सुमन के गाल चूमता हुआ - आप सिर्फ बोलती हो.. आज तक कभी थप्पड़ भी मारा है मुझे? बाहर से जितनी सख्त बनती हो अंदर उतनी ही नाजुक सी हो..

सुमन - तुझे दर्द देने के लिए थोड़ी पैदा किया है मैंने.. चल अब हट तेरे पापा देख लेंगे तो चिल्लायेंगे..

सुमन जब जाने लगती है गौतम उसका हाथ पकड़ लेटा है और प्यार से करीब आकर कहता है - माँ आई लव यू.. आप बहुत प्यारी हो..

सुमन - लव यू तो बच्चा.. चल अब छोड़ मुझे..

सुमन कमरे से चली जाती है जगमोहन से कहती है..

सुमन - चाय बना दू..

जगमोहन कपडे बदलते हुए - हां..


सुमन चाय बनाने रसोई में आ जाती है गौतम जूते पहनकर घर से भर चला जाता है और बाइक स्टार्ट करके झील की तरफ चल देता है..
 
Update 5

शहर में बनी झील के किनारे फुटपाथ पर चलते लोग औऱ सडक के किनारे खड़े वाहनों को देखती रूपा एक ऑटोरिक्शा में बैठी हुई सिगरेट के कश लेटे हुए गौतम का इंतजार कर रही थी.. तय समय से दो घंटा ऊपर हो चूका था मगर गौतम अभी तक रूपा से मिलने नहीं पंहुचा था.. रूपा की हालात में अब उदासी औऱ बेचैनी बढ़ रही थी की आगे बैठे करीम ने कहा..

करीम - बाजी.. मुझे लगता है वो लड़का नहीं आएगा.. ये सब स्कूल कॉलेज वाले लड़के है कहते कुछ है करते कुछ.. इनपर भरोसा करना मुश्किल है.. बारह बज चुके अब तो भूक भी लगने लगी है..

रूपा का ध्यान करीम की बातों से भंग हो गया औऱ वो सिगरेट का अगला कश लगाकर रिक्शा में आगे ड्राइविंग सीट पर बैठे 28 साल के पतले दुबले कम हाइट के सामान्य से भी कम दिखने वाले करीम से बोली..

रूपा - 10-15 मिनट औऱ इंतजार कर लू करीम फिर वापस चलते है..

करीम - जैसा आप कहो बाजी पर मेरी मानो उस लड़के का ख्याल छोड़ दो..

करीम की बात सुनकर रूपा का दिल दुखने लगा था मगर उसने अपने जज्बात जाहिर करना सही नहीं समझा.. उसे करीम की बातों पर धीरे धीरे यक़ीन हो रहा था मगर वो चाहती थी उसका ये यक़ीन गलत साबित हो.. रूपा ने पिछले दो घंटे में 20 से ज्यादा बार गौतम को फ़ोन किया था मगर गौतम ने एक बार भी उसके फ़ोन का रिप्लाई नहीं किया..

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रूपा के दिल में अलग अलग ख्याल आ रहे थे की शायद कुछ बुरा ना हुआ हो शायद कोई काम आ गया हो शायद गौतम को याद ना रहा हो मगर फिर करीम की बात याद आती तो वो सब ख्याल भूल जाती औऱ सोचती की क्या उसके साथ उस लड़के ने ये सही किया?

एक रात मिलकर गौतम ने रूपा के दिल में उसके लिए माँ की ममता औऱ प्रियतम का लगाव दोनों जगा दिए थे मगर अब रूपा को उसका दुख औऱ मलाल हो रहा था. उसे लग रहा था की उसने एक मक्कार लड़के पर भरोसा किया.. आखिर वो उस 40 साल की औरत से वापस क्यू मिलने आएगा?

इधर गौतम को सुबह जो स्वर्ग की सेर उसकी माँ सुमन ने करवाई थी उसके चलते औऱ रास्ते में जो उसकी बाइक खराब हो गई थी उसके करण उसे इतनी देरी हो गई थी. फ़ोन तो रात को गौतम ने अपनी माँ की रील्स पर मुठ मारते हुए साइलेंट कर लिया था जो अब तक साइलेंट ही था..

गौतम जब अपनी बाइक बनवाने के लिए दूकान पर छोड़कर झील पर पंहुचा तो उसने सामने ही रूपा को रिक्शा में बैठा दिख लिया औऱ फिर धीरे से नज़र बचाकर सामने एक हलवाई की दूकान से एक गरमा गर्म समोसा लेकर चुपचाप छुपते हुए अचानक रिक्शा के अंदर आ बैठा औऱ रूपा से बोला..

गौतम - माफ़ कर दो जरा सी देरी हो गई.. वो बाइक बिगड़ गई थी.. ई ऍम सॉरी.. देखो में क्या लाया हूँ तुम्हारे लिए? यहां का समोसा बहुत फेमस है.. तुम खाओगी तो उंगलियां चाटती रह जाओगी..

करीम तो गौतम के आने पर खामोश होकर चुपचाप आगे देखने लगा औऱ रूपा जो मानो गौतम के ना आने पर अपनी आँख से आंसू छलकाने वाली थी गौतम को देखकर उसकी जान में जान आ गई उसने फिर से अपने जज्बातो पर संयम रखा औऱ अपनी फीलिंग जाहिर नहीं होने दी..

रूपा ने गौतम की बात का कोई जवाब नहीं दिया औऱ रिक्शा में आगे ड्राइवर औऱ पीछे पेसेंजर की सीट के बीच लटका पर्दा खींचकर लगा दिया, इसके साथ ही अपनी उंगलियों में सुलगती सिगरेट को फेंक कर गौतम को अपनी औऱ खींच लिया औऱ समोसे की जगह उसके होंठों को चूमचुम कर खाने लगी.. गौतम भी रूपा को अपने होंठों का रस पिलाकर रूपा के होंठो की मदिरा पिने लगा. 5-7 मिनट के इस चुम्बन ने रूपा के सारे गीले सिकवे औऱ गौतम से नाराज़गी ख़त्म कर दी औऱ फिर से उसकी आँखों में गौतम के लिए वही ममता औऱ प्यार उतर आया जो वो उस रात से महसूस कर रही थी..

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करीम - बाजी कहीं चलना है या यही खड़े रहने दू रिक्शा को?

करीम की बात सुनकर चुम्बन दोनों का टूट गया औऱ गौतम रूपा को देखते हुए बोला..

गौतम - कनकपुरा के आगे जंगल की तरफ ले चल..

करीम - ठीक है.. कहते हुए रिक्शा स्टार्ट कर चलाने लगा..

रूपा - फ़ोन क्यू नहीं उठाया तुमने?

गौतम फ़ोन निकाल कर - साइलेंट पर है शायद.. अरे इतने फ़ोन कर दिए तुमने? यार रूपा सॉरी...

गौतम के मुंह से अपना नाम सुनकर रूपा को एक अजीब अहसास हुआ उसे फिर से अपनी बाली उम्र की याद आने लगी.. बहुत सालों के बाद किसीने उसे उसके नाम से बुलाया था वरना वो तो अब रूपा मौसी या बाजी.. सुनने की ही आदि थी..

रूपा ने गौतम से आगे उसके लेट होने की वजह के बारे में नहीं पूछा औऱ उसके हाथ से समोसा लेकर खाने लगी.. औऱ गौतम रूपा के बेहद नज़दीक आकर उसके कंधे गले को चूमते हुए रूपा की जुल्फों में आती खुशबु को सूंघता हुआ रूपा से छेड़खानी करने लगा जिसमे रूपा मुस्कुराते हुए गौतम का पूरा साथ दे रही थी औऱ प्यार से बीच बीच में उसके मासूम चेहरे को देख रही थी..

गौतम - बहुत प्यारी लग रही हो आज..

रूपा - पऱ तुम तो हमेशा प्यारे लगते हो..

गौतम - टट्टू बनवाया है?

रूपा - हम्म्म.. तुम्हारे नाम का..

गौतम - सच में? दिखाओ जरा..

रूपा अपनी साडी का पल्लू सरका कर ब्लाउज के दो तीन हुक खोलकर अपने राइट बूब्स पर लिखा गौतम के नाम का टट्टू उसे दिखाने लगती है.. गौतम के नाम के साथ एक दिल का छोटा सा निशान औऱ साथ में रूपा का नाम लिखा हुआ था.. गौतम टट्टू देखकर रूपा के बूब्स पर चुम लेता है..

गौतम - एक रात में इतनी मोहब्बत मुझसे?

रूपा - मोहब्बत तो एक नज़र में हो जाती है तुमसे तो पूरी रात लगी है होने में..

करीम - बाजी पहुंच गए..

गौतम - थोड़ा आगे से लेफ्ट लेना जंगल में.. गाडी आराम से निकाल जायेगी..

करीम रिक्शा जंगल में मोड़ लेता है औऱ थोड़ा आगे एक चट्टान के पास रोक लेटा है दिन के एक बज चुके थे..

रूपा - करीम तुम जाकर कुछ खा लो.. वापस यही आकर इंतजार करना..

गौतम वहा से रूपा को लेकर चट्टान के दूसरी तरफ चल पड़ता है..

थोड़ी दूर जाकर गोतम रूपा को एक घुफानुमा जगह के करीब ले आता है जहाँ से सामने का नज़ारा मनमोहक लग रहा था.. जंगल में खड़े बड़े बड़े पेड़ औऱ पेड़ो की छाव में पनप रहे पौधों पर खिले हुए फूल को देखकर रूपा की आँखों उनमे ही खो गई थी, छोटे छोटे खरगोश गीलेहरी औऱ बाकी जानवर उसकी आँखों के सामने स्वच्छन्द यहां से यहां उछाल कूद मचा रहे थे.. हिरन औऱ उसके जैसे दिखने वाले जानवर के साथ परिंदे पेड़ पर बने घोंसलों से अपनी मीठी आवाज में तराने सूना रहे थे.. रूपा ये सब देखकर उन्ही में खो सी गई थी, उसने आज से पहले कभी इस तरह का नज़ारा नहीं देखा था वो ऐसे ही गौतम के साथ बैठी हुई उसकी बाहे अपने हाथ से पकडे सामने देखे जा रही थी वही गौतम भी रूपा की हालात समझकर उसे अपने बाहों में समेटकर प्यार से उसकी जुल्फों को संवार रहा था..

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गौतम - जगह पसंद आई?

रूपा - बहुत खूबसूरत है.. पर तुमसे कम मेरे नन्हे मेहमान..

गौतम - नाम लेकर बुलाओ ना.. इतना छोटा नहीं हूँ मैं.

रूपा मुस्कुराते हुए - एक शर्त पर नन्हे मेहमान..

गौतम - औऱ वो क्या है?

रूपा गौतम के अंदर अपने ना बस सके परिवार को तलाश रही थी उसे गौतम में अपना ही बच्चा दिखाने लगा था औऱ वो चाहती थी की कोई हो जो उसे माँ कहकर बुलाआये औऱ उससे बात करें.. परिवार की चाहत उसे आज भी उतनी ही थी जितनी की पहले..

रूपा - तुम्हे भी मुझे मम्मी कहकर बुलाना होगा..

गौतम - ठीक है मेरी प्यारी मम्मी.. चलो अब अपने बेटे को प्यार तो कर लो थोड़ा सा..

रूपा अपना आँचल गिरा कर - आजा मेरे पास पहले तुझे अच्छे से दूध तो पीला दू.. ये कहते हुए रूपा ने भी सुमन की तरह ही गौतम के सर को अपनी गोद में रख लिया औऱ उसे अपना बोबा चूसाने लगी..

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गौतम ने भी पूरी कामुकता के साथ रूपा का बोबा चूसना चालू कर दिया अपने हाथो से मसलना भी. जिससे रूपा काम के सागर में उतरने लगी थी.. रूपा ने पास में रखे अपने पर्स से एक सिगरेट निकालकर लाइटर से जला ली औऱ कश लेते हुए कभी प्यार से गौतम को देखती तो कभी सामने के नज़ारे को.

गौतम ने जब रूपा के बूब्स पर तने हुए निप्पल्स को दांतो से काटा तो रूपा के मुंह से आह निकाल गई औऱ वो गौतम को देखकर बड़े प्यार से बोली..

रूपा - इतना तेज़ मत काटो ना गौतम.. मम्मी को दर्द होता है..

गौतम - सोरी मम्मी.. आपके दूध बहुत अच्छे है अनजाने में बाईट हो गई..

रूपा - कोई बात नहीं बेबी.. अच्छा अब तुमने मम्मा का दूदू चूस लिया तो मम्मा भी तुम्हारा दूदू चूसेगी..

गौतम अपने शर्ट उतारकर - पर मम्मी मेरे दूदू में दूध नहीं आता..

रूपा - कोई बात नहीं बेबी.. मम्मा को बस थोड़ा सा चूसना है..

गौतम - आओ ना मम्मी.. लो सकिंग कर लो..

रूपा - क्या बेबी..

गौतम - सकिंग मम्मी.. चूसने को इंग्लिश में सकिंग बोलते है अब आओ..

रूपा अपने होंठ गौतम के सीने के निप्पल्स पर लगा देती है प्यार से उसे चूसने चाटने लगती है..

गौतम - आह्ह. मम्मी.. कमाल हो यार तुम..

रूपा गौतम के निप्पल्स चूस रही थी औऱ गौतम को पूरा मज़ा दे रही थी कुछ देर बाद रूपा ने अपनी जीभ से गौतम के सीने को चाटने लगी रूपा पर चढ़ते काम के नशे को गौतम साफ साफ देख सकता था, रूपा उसके गले से लेकर पेट तक हर जगह चूमते हुए पागलो की तरह चाट रही थी आज गौतम उसे नहीं चोद रहा था बल्कि रूपा पर गौतम की चुदाई का भूत सवार होने लगा था..

रूपा ने गौतम की पेंट खोल दी औऱ उसके लंड को झट से अपने मुंह में लेकर चूसने लगी गौतम को रूपा वो सुख दे रही थी जो उसे बहुत कम मिला था..

गौतम ने रूपा को देखा वो इस तरह से उसका लंड मुंह में भरके चूस रही थी जैसे लॉलीपॉप हो.. इसमें गौतम को रूपा पर प्यार आने लगा था.. गौतम ने कुछ देर रूपा को प्यार से देखा तो उसे रूपा में अपनी असली माँ सुमन की शकल दिखाई देने लगी औऱ अचानक उसका माल रूपा के मुंह में छूट गया औऱ वो झड़ गया..

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रूपा सारा माल पीके - आज क्या हुआ मेरे बच्चे के हथियार को. जल्दी निकल गया..

गौतम ने बिना कुछ बोले रूपा का हाथ खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया औऱ उसके होंठ चूमने लगा..

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कुछ मिनटों में वापस उसका लंड उसी तरह खड़ा हो गया जैसे पहले था गौतम ने रूपा को ऊपर से नीचे ले लिया औऱ साडी के साथ साया उठाकर कमर तक ले आया औऱ फिर नीचे जाकर रूपा की चुत चाटने लगा.. रूपा काम के सागर की गहराई में उतर चुकी थी औऱ यहां उसे भरपूर आनंद मिल रहा था.. गौतम ने चाटने पर कुछ ही पलो में उसने भी चुत से झरना बहा दिया जिसे गौतम ने रुमाल से साफ कर दिया..

गौतम - मम्मी?

रूपा - क्या?

गौतम - लोगी अपने बेटे का अपने अंदर?

रूपा शरमाते हुए - हाँ...

गौतम अपना लोडा एक बार में आधे से ज्यादा अंदर उतारकार रूपा की चुदाई शुरु करता है औऱ रूपा घास में आँखे बंद करके गौतम को अपनी बाहों में भरे कामसुख भोगने लगती है..

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अगले कुछ घंटे दोनों का मिलन यहां के परिंदे औऱ जानवर देखते है औऱ रूपा गौतम दोनों दो बार प्रेम की बारिश में नहा चुके होते है..

गौतम घास में चट्टान का सहारा लिए नंगा बैठा अपनी गोद में नंगी बैठी रूपा की चूत के आस पास उगे बालों/झांटो में उंगलियां घुमा रहा था औऱ रूपा सिगरेट के कश लेते हुए सामने देख रही थी..

गौतम - मम्मी, मुझे भी पिलाओ एक कश..

रूपा अपने हाथ से सिगरेट गौतम के होंठों पर लगा देती है औऱ एक कश पीला के कहती है..

रूपा - अच्छा अब फिर वापस कब मिलने आउ मैं अपने बेटे से?

गौतम - जब भी तुम्हारी इस चुत में खुजली चले मम्मी तब आ जाना.. मैं मिटा दूंगा..

रूपा - बेबी एक बात बोलू, तुम मुझसे एक वादा करोगे?

गौतम - हम्म बोलो ना.. अब तो मम्मी भी बोलने लगा हूँ तुम्हे..

रूपा - सिर्फ मम्मी बोलने से काम नहीं चलेगा.. मुझे अपनी माँ की तरह मानना भी होगा.. मुझसे बात करनी होगी.. अपना अच्छा बुरा सब बताना होगा.. तुम्हे जो चाहिए मुझसे माँगना होगा.. मैं तुझे सब दूंगी.. मेरे जिस्म के साथ साथ मेरे मन को भी तुम्हे सुकून देना होगा मुझे अपना मानकर..

गौतम रूपा की बातें सुनकर - अच्छा ठीक हैमेरी जान.. अब कपडे पहनो चलते यहां से वरना मेरे प्यारी मम्मी को वापस जगताल पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो जाएगा..

रूपा - जैसे उतारे है वैसे पहना भी दो..

गौतम - मम्मी मुझे सिर्फ उतारना आता है.. कहते हुए गौतम ने रूपा की चुत के बाल हलके से खींच लिए जिससे रूपा का आह निकल गई..

रूपा - आह्ह.. शैतान कहीं का.. अगली बार मिलूंगी तो झांट साफ कर लुंगी सब.. तब खींचना मेरे बाल..

गौतम औऱ रूपा कपडे पहन कर वापस करीम के रिक्शा की तरफ आ जाते है.. औऱ उसमे बैठकर वापस शहर की तरफ चल देते है.. जहा गौतम रूपा से विदा लेकर अपनी बाइक दी हुई दूकान पर जाता है औऱ अपनी ठीक हो चुकी बाइक को लेके घर निकल पड़ता है..

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गौतम - माँ पापा कहाँ गए?

सुमन - उनको कुछ काम था इसलिए जल्दी चले गए..

गौतम - सालों से देखकर रहा हूँ.. घर पर तो रुकते ही नहीं है वो.

सुमन - बहुत मेहनत करनी पडती है तेरे पापा को इसलिए..

गौतम - काहे की मेहनत माँ.. कब इस पुलिस क्वाटर में रखा हुआ.. अब तक तो घर बना लेना चाहिए था.. पाता नहीं कहा छुपा के रखते है खज़ाना.. पता चल जाए लूट लू मैं..

सुमन - खज़ाना बाद में लूटना ग़ुगु.. पहली ले ये चाय पी ले..

गौतम - चाय नहीं माँ ? अब तो दूदू पिने का मन कर रहा है..

सुमन - अब मेरे ग़ुगु को माँ का दूदू अगली पूर्णिमा को मिलेगा.. औऱ कल याद से जल्दी उठ जाना बाबाजी के वापस माथा टेकने चलना है..

गौतम - सिर्फ पांच मिनट ना माँ.. फिर नहीं बोलूंगा..

सुमन - अब ऐसी प्यारी सूरत बनाकर बोलेगा तो कैसे माना करुँगी मैं आपने ग़ुगु को? चल कमरे में जा मैं आती हूँ रसोई का काम खत्म करके फिर पीला दूंगी.. बस..

गौतम - thanks माँ..

गौतम आपने रूम में आकर नहाने लगता है औऱ फिर एक स्लीवलेस्स टीशर्ट औऱ पज़ाम पहनकर फ़ोन देखने लगता है..

वो जैसे ही इंस्टा अकाउंट खोलता है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है.. सुमन की रील्स पर लाखों में व्यूज आ गए थे औऱ हज़ारो में कमैंट्स.. फॉलोर्स की संख्या भी 4 हज़ार से 24 हज़ार के पार हो गई थी.. ना जाने कितने ही मैसेज उसके इनबॉक्स में आ गए थे.. गौतम एक बार के लिए फ़ोन बंद कर दिया औऱ कुछ सोचने लगा कि इतने में सुमन गौतम के कमरे में आ गयी औऱ उसके सामने बैठते हुए मुस्कुराकर उसका माथा चुम लिया..

सुमन - ले आजा ग़ुगु.. पिले जितना मन है.

गौतम के सामने बैठके सुमन ने ब्लाउज के हुक खोलकर सुबह कि तरह अपनी काली ब्रा ऊपर करके आपना बोबा उसके मुंह की तरफ बढ़ा दिया जिसे गौतम ने लपक के आपने मुंह में लेकर चूसना शुरु कर दिया.. सुमन अपना स्तनपान करवाकर एक मीठे सुख के अहसास में डूब रही थी औऱ प्यार से गौतम के सर पर अपना हाथ फेर रही थी जैसे उसे अपना दूध पिने का आशीर्वाद दे रही हो..

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गौतम ने भी एक एक करके अपनी माँ सुमन के दोनों बोबे चूसने चाटने शुरु कर दिए जिससे उसके दिल में अपनी माँ सुमन के प्रति जागरत हो चुकी काम इच्छा को औऱ बल मिल गया औऱ वो सुमन के प्रति औऱ कामुकता का भाव रखने लगा..

सुमन को होता मीठा मीठा अहसास जब उसकी चुत को गिला कर गया औऱ उसे जब आपने बेटे के प्रति आसक्ति महसूस हुई तो उसने घड़ी की तरफ देखा जो रात के आठ बजा चुकी थी सुमन की नज़र घड़ी से हटी तो गौतम के पज़ामे में खड़े घंटे पर जा टिकी जो पज़ामे के ऊपर ही देखने से लम्बा औऱ मोटा लग रहा था..

सुमन पांच मिनट के नाम पर पिछले पचीस मिनट से गौतम को अपना स्तनपान करवा रही थी, गौतम ने सुमन जे बूब्स पर कई गहरे निशान अपने दाँटों से काट काट कर बना दिए थे सुमन ने एक बार भी गौतम को बूब्स पर काटकर निशान बनाने से नहीं रोका अब दोनों के मन में काम की प्यास जागरत हो रही थी सुमन ने इस अहसास को समझ लिया औऱ गौतम के सर को सहलाती हुई बोली..

सुमन - औऱ कितनी देर पियेगा ग़ुगु? मन नहीं भरा मम्मी के दूदू से?

गौतम - माँ के दूध से कभी बच्चे का मन भरता है भला? माँ आज यही सो जाओ ना.. मेरे पास..

सुमन - हम्म ताकि तू मेरे रातभर मेरे दूदू पिता रहे.. क्यू?

गौतम - नहीं.. देखो आपकी रील्स पर बहुत सारे लोगों ने like कमैंट्स किये है.. औऱ 24 हज़ार लोगों ने फॉलो भी किया है आपकी रील वायरल हो रही है.. जल्दी ही अकाउंट मोनेटीज़ भी हो जाएगा..

सुमन - चल ठीक है.. आज में आपने ग़ुगु के पास ही सो जाती हूँ.. पर मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा तू क्या कह रहा है..

गौतम अकाउंट खोलता है औऱ इनबॉक्स के मैसेज दिखाने लगता है जहाँ कई लोगों ने कोलाब औऱ कई लोगों ने प्रमोशन के लिए massage किया था साथ बहुत से लोगों ने भद्दे भद्दे massage भी डाले थे..

गौतम - लो देखो आप.. Massage.. मैं बाथरूम जाके आता हूँ तब तक..

सुमन - इनबॉक्स के massage औऱ रील्स के कमैंट्स पढ़ने लगी तो उसे शर्म आ गयी. लोगों ने ऐसी बातें लिखी थी जिसे सुमन पढ़ने में शर्मा रही थी औऱ उसे लग रहा था की इन सबसे अच्छा तो ये की वो रील्स ही ना बनाये.. अकाउंट बंद कर दे.. जब गौतम बाथरूम से आया तो सुमन ने रूखे पन से कहा.. सुमन - कैसी कैसी बात लिखते है लोगों को बिलकुल शर्म नहीं है.. आपने घर की कोई होती तो भी ऐसे ही बातें करते ये लोग?

गौतम समझा गया की क्या माज़रा है औऱ वो सुमन को गले लगाते हुए बोला - अरे छोडो ना सब फालतू लोग है औऱ कोई काम. नहीं है उनको आप क्यू ध्यान देती हो.. आपने ये massage पढ़ा?

सुमन - क्यू क्या ख़ास है इसमें?

गौतम - बहुत ख़ास है मेरी प्यारी माँ.. जो MK ज्वेलर्स है ना.. उसीका massage है.. न्यू ब्रांच खोल रहा है शहर में इस इतवार को औऱ चाहता है आप उसकी मॉडल बने.. देखो.. क्या अमाउंट चार्ज करती हो पूछ रहा है.. नंबर भी दिया हुआ है..

सुमन - क्या.. सच में.. पर मुझे मॉडलिंग कहा आती है?

गौतम - अरे मेरी भोली माँ.. बस गहने पहनकर दो-चार फोटो खिचवानी है.. जिसकी पिक वो अपनी ब्रांच में लगाएगा, बस वही होती है..

सुमन - बस इतनी सी बात के लिए वो पैसे देंगे?

गौतम - हाँ.. आप तैयार हो तो मैं कॉल करू उन्हें?

सुमन - पर तेरे पापा?

गौतम - उनसे आप पूछ लेना.. इतनी बात के लिए मना थोड़ी करेंगे..

सुमन - कितने पैसे दे रहे है वो लोग?

गौतम - ये हमें बताना पड़ेगा.. आप बताओ कितना बोलू?

सुमन - एक काम कर दस-पंद्रह तो हज़ार बोल ही दे..

गौतम - आप भी ना माँ.. रुको मैं बात करता हूँ..

गौतम - हेलो MK ज्वेलर्स से बात कर रहे है? ज़ी अच्छा.. वो आपने सुमन ज़ी को इंस्टा पर massage डाला था. ज़ी.. वही वही.. मैं उनकी तरफ से बात कर रहा है.. ज़ी.. नहीं नहीं फ्री है इतवार को, कोई प्लान नहीं है आगे बन जाए कह नहीं सकते.. ज़ी.. हाँ बस वही डिसकस करने में लिए फ़ोन किया था आप कितना अमाउंट ऑफर कर रहे हो इसके लिए सुमन ज़ी को? अच्छा अच्छा.. ज़ी.. नहीं नहीं.. वो सब ठीक है लेकिन अभी सुमन ज़ी उदयपुर गई हुई है तो उनसे बात नहीं हो पाएगी औऱ जो अमाउंट आप बोल रहे हो उसमे तो उनका आना मुश्किल है.. अरे नहीं.. मैं पूरी कोशिश करूंगा.. ज़ी.. ठीक है मैं उनसे बात करके आपको बताता हूँ लेकिन पेमेंट एडवांस करनी होगी आपको.. नहीं उसकी चिंता आप मत करिये.. वो सब हमारी जिम्मेदारी है..

सुमन - क्या हुआ?

गौतम - 20 हज़ार देने को त्यार है..

सुमन ख़ुशी - क्या? जल्दी से हाँ बोल दे..

गौतम - रुको थोड़ा सब्र करो..

थोड़ी देर बाद वापस गौतम फ़ोन मिलता है..

हेलो.. ज़ी.. हाँ वो सुमन ज़ी से बात हो गयी है मैडम आने को त्यार पर 30 से कम में नहीं हो पाएगा.. ज़ी आप जैसा सही समझें.. ठीक है.. नहीं नहीं.. इसी नम्बर पर पेमेंट करना होगा में कॉन्फ्रेंस पर आपकी बात करवा देता हूँ.. ज़ी एक मिनट मैं सुमन ज़ी को लाइन पर लेता हूँ..

फ़ोन म्यूट करके..

गौतम - माँ वो मान गए बस आप थोड़ा कॉन्फिडेंस से बात करना.. ठीक है मैं म्यूट खोल रह हूँ..

गौतम -हेलो.. ज़ी.. वो मैडम कॉन्फ्रेंस पर है..

सुमन - हेलो.. ज़ी गुड इवनिंग.. नहीं आपसे बात कर ली होंगी ना उन्होंने? हाँ तो ठीक है आप पेमेंट कर दीजिये, मैं आ जाउंगी. ज़ी.. चलिए मैं बाद में बात करती हूँ..

गौतम - हेलो.. ज़ी अब तो तसल्ली हो गई आपको? ठीक है.. ज़ी कोई बात नहीं पेमेंट सुबह करवा दीजियेगा.. उसमे क्या बड़ी बात है.. ठीक है..

फ़ोन कट जाता है..

सुमन - क्या हुआ?

गौतम - वो त्यार है सुबह ऑनलाइन पेमेंट करवाने का बोला है.. आप तो अब सुपरस्टार बन गयी..

सुमन - सच वो लोग इतने से काम के इतने वैसे देंगे?

गौतम - माँ ये बड़े बड़े लोग इंस्टा सेलिब्रेती है वो सब लाखों में पैसे लेटे है.. आपके जितने ज्यादा फॉलोवर होंगे उतना ज्यादा पैसा मिलेगा..

सुमन - अच्छा.. फिर जल्दी से औऱ रील्स बना दे मेरी ताकि जल्दी से फोल्लोवेर्स बढ़ जाए..

गौतम - ठीक है पर आपने ही कहा था लोग गलत कमेंट करेंगे.. फिर मत बोलना..

सुमन - करने दो जिसको जो करना.. लोग तो वैसे भी कुछ भी बोलते है..

गौतम - ठीक है पर थोड़ा सा शोओफ भी करना पड़ेगा माँ अपनेआप को.. उसके बिना किसी को आपकी रील्स पसंद नहीं आएगी..

सुमन - शो.. क्या..

गौतम - शोओफ माँ.. आपको थोड़ा सा खुदको दिखाना होगा..

सुमन - मतलब क्या? कैसे दिखाना होगा?

गौतम - कितनी भोली हो आप.. मेरा मतलब है आपको हलके से अपने बूब्स दिखाने होंगे.. लोगों को अट्रैक्ट करने के लिए.. तभी लोग फ़ॉलो करेंगे..

सुमन - पर तेरे पापा ने देख लिया तो? मुश्किल हो जायेगी..

गौतम - उनके पास बाबाआदम के ज़माने का फ़ोन है.. उन्हें कैसे पाता चलेगा?

सुमन - ठीक है.. पर थोड़ा ख्याल रखना.. कुछ ज्यादा ना दिख जाए.. बिलकुल थोड़ा सा..

गौतम - जैसा आप बोलो.. औऱ कोई न्यू सोंग गाना जो ट्रेडिंग में हो.. गौतम फ़ोन का कैमरा ऑन करके..

सुमन - कोनसा गाना ग़ुगु?

गौतम थोड़ा सोचकर ये वाला..

सुमन गाना देखकर -थोड़ा वैसा नहीं है..

गौतम.- माँ इस तरह के ही सोंग गाने पड़ेंगे अगर जल्दी फोल्लोवेर्स चाहिए..

सुमन - ठीक है..

गौतम - माँ थोड़ा पल्लू सरका दो औऱ ब्रा की स्टेप्स ब्लाउज से बाहर कर दो..

सुमन - ग़ुगु.. थोड़ा ज्यादा नहीं हो जाएगा?

गौतम - कुछ नहीं होगा माँ.. गौतम कहते हुए सुमन का पल्लू हल्का हटा देता है औऱ ब्लाउज के अंदर से ब्रा की स्टेप्स कंधे पर कर देता है जिससे सबको हलकी सी ब्रा दिख सके.. चलो माँ गाना शुरु करो..

सुमन -

1st रिल..

रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा रिंगा रिंग

खटिये पे में पड़ी थी और गहरी नींद बड़ी थी

आगे क्या मैं कहूं सखी रे

एक खटमल था सायना

मुझपे था उसका निशाना

चुनरी में गुस गया धीरे धीरे

कुछ नहीं समझा वो बुद्धू कुछ नहीं सोचा

रेंग के जाने कहा पंहुचा

रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा रिंगा रिंग

2nd रिल..

कितना में तदपि थी

कितना में रोई थी

मैं तो थी अच्छी भली

क्यों भला सोई थी

निगोड़े ने मुझको चैन लेने ना दिया

रोना भी चाहा तो मुझको रोने ना दिया

ओ हो

ऐसी थी उस हरजाई की मक्कारी

मेरे तन बदन में थी लगी चिंगारी

ओ हो अरे हैया हैया हो

रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा रिंगा रिंग

रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा, रिंग रिंग रिंगा रिंगा रिंग

गौतम - माँ अब दूसरे सोंग पर..

सुमन - कोनसे?

गौतम - ये वाले..

सुमन - ठीक है..

गौतम - औऱ थोड़ा इस तरफ आ जाओ बैकग्राउंड चेंज कर लो.. एक जैसा अच्छा नहीं लगेगा..

सुमन - ठीक है ग़ुगु.. अब ठीक है?

सुमन - अच्छा ठीक है.. गौतम ने फ़ोन का कैमरा ऑन कर देता है औऱ सुमन से गाने के लिए कहता है..

3rd रिल

आ रे प्रीतम प्यारे

बन्दुक में ना तो गोली मेरे

आ रे प्रीतम प्यारे

सब आग तो मेरी चोली में रे

ज़रा हुक्का उठा, ज़रा चिलम जला

पल्लू के नीचे छुपा के रखा है

उठा दूँ तो हंगामा हो

पल्लू के नीचे दबा के रखा है

उठा दूँ तो हंगामा हो

4th

जोबन से अपने दुपट्टा गिरा दूँ तो

कमले कुवारों का चेहरा खिले

हाय मैं आँख मारूँ तो नोटों की बारिश हो

लख जो हिला दूँ तो जिल्ला हिले

ज़रा टूटी बजा, ज़रा ठुमका लगा

पल्लू के नीचे दबा के रखा है

उठा दूँ तो हंगामा हो

गौतम - सच में माँ कहर छाने वाला है इंस्टा पर तो, आपकी ये रील्स देखकर लोग दीवाने होने वाले है..

सुमन - चल पागल कुछ भी कहता है..

गौतम - माँ भूख लगी है आज क्या बनाया है?

सुमन - तेरे इस रिल औऱ दूदू के चक्कर में खान बनाना तो भूल ही गई.. रुक मैं बना देती हूँ..

गौतम - छोडो ना.. चलो बाहर चलते है आज खाना खाने..

सुमन - अभी पैसे नहीं आये ग़ुगु.. घर में ही खाले जब आएंगे तब चलेंगे.

गौतम - पैसो की चिंता छोडो आप.. आज मेरी तरफ से ट्रीट है मेरी प्यारी माँ को.. चलो मैं चेंज कर लेता हूँ आप भी त्यार हो जाओ..

सुमन - पर ग़ुगु..

गौतम - कोई पर वर नहीं.. अब चुपचाप चलो वरना मैं उठा के ले जाऊंगा आपनी बाहों में भरके आपको ..

सुमन - अच्छा ठीक है.. मैं आती हूँ..

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गौतम सुमन को लेकर शहर के एक महंगे औऱ नामी रेस्टोरेंट में चला गया जिसकी चकाचोध औऱ सजावट देखकर सुमन गौतम से कहती है - ग़ुगु.. बहुत महँगा लग रहा है.. किसी औऱ जगह चलते है..

गौतम - अब ऐसी जगह की आदत डाल लो माँ. औऱ सस्ते महंगे की चिंता मत करो.. अब चलो..

रेस्टोरेंट की खाली टेबल पर गौतम सुमन के सामने बैठ जाता है.. तभी एक वेटर आकर कहता है..

वेटर - सर.. हाउ कैन ई हेल्प यू..

गौतम - ब्रिंग अ वाटर बोतल फर्स्ट देन ई विल टेल यू..

वेटर - ok सर..

गौतम - माँ बताओ क्या खाना है?

सुमन - कुछ भी माँगा लो..

गौतम - यहां की चिकेन करी फमस है खाना है?

सुमन - ग़ुगु.. पागल हो क्या?

गौतम - अरे इसमें क्या मैं वही खाऊंगा. बहुत पसंद है मुझे..

सुमन - ठीक है पर मेरे कुछ मांगवाना..

वेटर - सर योर वाटर बोतल.. एनीथिंग एल्स?

गौतम - वन चीकेन करी without बोन, वन मलाई कोपता एंड वन दाल फ्राई तड़का.. एंड... फुल्का द तवा रोटी.. टु बटर मिल्क विथ बूदी मसाला..

वेटर - ok सर..

गौतम - माँ कुछ औऱ मँगवाना है?

सुमन - नहीं..

कुछ देर बाद वेटर ऑडर लेकर आ गया औऱ टेबल पर लगा दिया..

गौतम में मस्ती में चीकेन करी की प्लेट सुमन के सामने रख दी औऱ बोला - लो आपका मलाई कोपता.. मैं अपनी चीकेन करी खा लेता हूँ..

सुमन ने बिना कुछ सोचे समझें प्लेट से रोटी लेकर चीकेन करी के साथ रोटी खाने लगी औऱ चीकेन के बोनलेस पीस को मज़े से स्वाद लेकर मलाई कोपता मानकर खाने लगी..

गौतम मुस्कुराते हुए मलाई कोपते औऱ दाल के साथ खाना खाने लगा औऱ सुमन को चीकेन खाते देखने लगा..

गौतम - माँ है ना यहां खाना टेस्टी?

सुमन - सच में बहुत टेस्टी है ग़ुगु.. आज तक नहीं खाई ऐसी मलाई कोपते की सब्जी..

गौतम - कहा था ना.. मैं एक प्लेट औऱ मंगवा देता हूँ आपके लिए रुको..

गौतम वेटर को इशारे में वापस एक प्लेट बोनलेस चीकेन करी लाने का बोलता है जो वेटर लाकर टेबल पर रख देता है..

गौतम - माँ लो आपका मलाई कोपता.. मेरी चिकन टेस्ट करनी है बताओ?

सुमन - नहीं खानी तू ही खा उसे.. कहते हुए सुमन ने चीकन करी की दूसरी प्लेट भी उंगलियां चाट कर खाते हुए ख़त्म कर दी..

खाने के बाद वेटर बिल लेकर आ गया..

वेटर - सर योर बिल..

गोतम - ok..

गौतम बिलकर पैसे उस बिल के ऊपर रख देता है औऱ वेटर को दे देता है..

सुमन - ग़ुगु.. कितना हुआ?

गौतम - कुछ माँ मैंने पे कर दिया..

सुमन - दिखा तो..

गौतम - रहने दो..

सुमन वेटर से - भाईया दिखाओ मुझे..

वेटर ने बिल सुमन की तरह बढ़ा दिया जिसमे सुमन रेट देखकर चौंक पड़ी पर कुछ नहीं बोली लेकिन जब उसने देखा की बोनलेस चीकन करी 2 लिखा हुआ ही तो वो वेटर से बोली..

सुमन - भाईसाब ये चिकेन करी का बिल डबल क्यू जोड़ा है आपने हमने तो एक बार ली है..

वेटर - मैडम डबल आई है डबल ही ऐड होगी बिल में.. आपने ही तो मंगवाई औऱ खाई भी है.. इतना कहकर वेटर बिल लेकर चला गया औऱ गौतम सुमन से नज़र बचाने लगा..

सुमन गुस्से में धीरे से - ग़ुगु तूने मुझे नॉनवेज खिला दिया?

गौतम - माँ मैं तो मज़ाक़ कर रहा था आपके साथ, आप खाने लगी फिर मैं क्या करता? वैसे आप ही तो बोल रही थी बहुत टेस्टी है.. आपको पसंद आई..

सुमन - ग़ुगु.. तुझे पता था ना मैं औऱ तेरे पापा शराब औऱ नॉनवेज नहीं खाते फिर भी तूने ये मज़ाक़ किया?

गौतम - सॉरी माँ.. पर आज खाने में इतना खो गई की मैं रोक ही नहीं पाया..

सुमन - कितना बुरा लग रहा है मुझे.. पाता नहीं तेरे पापा को पता लगेगा तब मैं क्या जवाब दूंगी? मैं ना अब तुझसे बात ही नहीं करूंगी..

गौतम - माँ अगर आप ऐसा करोगी तो मैं घर छोड़कर कहीं दूर चला जाऊंगा..

सुमन - दुबारा घर छोड़ने की बात की तो थप्पड़ खायेगा मुझसे समझा? एक तो तेरी सब करतूत पर पर्दा डालू औऱ उसपर तुझसे नाराज़ भी नहीं हो सकती..

गौतम - अच्छा माँ अब चलो घर मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है..

सुमन - चल.. मेरी नींद उड़ाकर अब खुद नींद लेना चाहता है..

घर पहुंचने पर गौतम ने मटके से पानी पिया औऱ अपने बेड ओर जाकर लेट गया.. सुमन को नॉनवेज खाने का गिल्ट हो रहा था मगर वो अब क्या कर सकती थी खाते वक़्त उसे इतना स्वाद लगा की वो समझा ही नहीं पाई की ये बिना हड्डी का चीकन है..

कुछ देर गिल्ट में रहने के बाद सुमन आपने बेड ओर लेट गयी औऱ सोने की कोशिश करने लगी मगर नींद उसकी आँखों से उतनी दूर थी जितना दूर धरती से चाँद होता है..

सुमन कुछ देर तो आँखे बंद करके लेटी रही फिर जब उसे नींद नहीं आई तो उसने आँखे खोल ली.. उसे दरवाजे पर गौतम खड़ा दिखा तो वो उसे देखकर बोली -

सुमन - ग़ुगु.. क्या हुआ.. यहां क्यू खड़ा हो?

गौतम - मैं बस देखने आया था आप ठीक तो हो?

सुमन - पहले आपने मन की करके मेरा दिल दुखता है फिर पूछता है ठीक तो हो.. नहीं हूँ मैं ठीक..

गौतम - अच्छा तो ठीक करने के लिए क्या करना पड़ेगा मुझे? पैर दबा दू या सर में तेल की मालिश करू?

सुमन मुस्कुराते हुए - इधर आ..

गौतम सुमन के पास चला जाता है बेड पर बैठ जाता है..

सुमन - आजा.. कुछ मत कर.. बस आज रात मेरे पास यही सोजा..

गौतम - जैसा आप बोलो.. होउत्तम कहते हुए बेड ओर लेट गया औऱ सुमन का हाथ पकड़ कर आँखे बंद कर सोने लगा.. सुमन ने भी प्यार से गौतम को आपने से लगा लिया औऱ उसका सर अपनी छातियों में छुपाकर सोने लगी.. इस बार उसे हलकी हलकी नींद आने लगी औऱ जो नॉनवेज खाने का गिल्ट उसके मन में था वो सब गायब हो गया.. दोनों को कब एक दूसरे के साथ नींद आई उनको पता ही नहीं लगा..

 
अपडेट - 6



पहाड़ी पर बने उस मन्दिरनुमा हाल के भीतर लोगों की समस्याओ को सुनकर उसका निवारण करने के उपाय बटाने वाले बाबाजी एक कोने में चटाई बिछकार अपनी पत्नी कजरी के साथ भोग में लिप्त थे की तभी एक सेवक ने आकर दरवाजे पर दस्तक दी जिससे बाबाजी के भोग में विघ्न पड़ गया औऱ वो भोग से उठकर बैठ गए औऱ कजरी भी अपने नंगे बदन को चादर से ढककर बैठ गई. बाबाजी ने बाहर जाकर उस सेवक से इस विघ्न की वजह पूछने लगे..

बाबाजी - क्या हुआ किशोर? इस तरह आधी रात को यहां आने का क्या कारण है?

किशोर अपने घुटनो पर बैठ गया औऱ दंडवत प्रणाम कर बोला - बाबाजी बात ही कुछ ऐसी है कि मुझे जंगल छोड़कर यहां इस वक़्त आपके पास आना ही पड़ा..

बाबाजी - ऐसा क्या हो गया किशोर कि सुबह तक का इंतजार करना भी तेरे लिए मुश्किल हो गया?

किशोर - माफ़ी चाहता हूँ बाबाजी पर बड़े बाबाजी ने अविलम्ब आपको उनके समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है..

बाबाजी हैरानी से किशोर को देखते है एक शॉल को कंधे पर लपेटकर - अचानक उनका मुझे बुलाना.. जरूर कोई बात है.. चल किशोर..

बाबाजी किशोर के साथ हॉल से निकल जाते है औऱ कच्चे रास्ते से होते हुए पहाड़ी के पीछे जंगल की ओर नीचे उतरने लगते है.. वही कजरी अपने वस्त्रो को वापस बहन लेती है और असमंजस में अचानक बाबाजी के जाने का कारण सोचने लगती है..

बाबाजी - कुछ ओर भी कहाँ था उन्होंने?

किशोर - नहीं बस साधना से निकले तो तुरंत आपको बुलाने का हुक्म दे दिया..

बाबाजी - किसी सेवक से कोई चूक तो नहीं हुई उनकी सेवा में?

किशोर - चूक कैसी बाबाजी? सब जानते है चूक का परिणाम क्या हो सकता है. हर दिन जैसा ही सब कुछ आज भी हुआ, पर साधना से उठते ही उनके चेहरे पर अजीब भाव थे.

बाबाजी - अच्छा चल..

बाबाजी ओर किशोर पहाड़ी से नीचे उतरकर जंगल में आ गए जहाँ आने से कोई भी डर सकता था.. और किसी का आना वहा सामान्य भी नहीं था. जंगल के अंदर कुछ दूर जाकर एक कुटिया दिखाई पड़ी जिसके बाहर दो लोग पहरा दे रहे थे. बाबाजी किशोर के साथ उस कुटिया तक आ पहुचे फिर बाबाजी ने किशोर को रुकने का कहा और कुटिया के अंदर जाने के लिए दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोले - गुरुदेव..

बड़े बाबाज़ी - अंदर आजा विरम..

बाबाजी कुटिया में प्रवेश करते हुए कुटिया में एक तरफ बैठकर चिल्लम पीते बड़े बाबाज़ी के चरणों में अपना मस्तक रखकर सामने अपने दोनों पैरों पर उसी तरह बैठ गए जिस तरह सुबह सुबह खेतो में गाँव के लोग अपना मल त्यागने के लिए पानी का लोटा लेकर बैठते है..

बाबाजी - आधी रात को अचानक बुलावाया है गुरुदेव. जरूर कोई बहुत बड़ा कारण होगा. आदेश करें गुरुदेव आपका ये शिष्य आपकी किस तरह सेवा कर सकता है?

बड़े बाबाजी - विरम.. वक़्त आने वाला है.. सेकड़ों सालों पहले मेरे किये गलत निर्णय को बदलने का.. मुझे कोई मिल गया है जो मेरा काम कर सकता है..

बाबाजी - ऐसा कौन है गुरुदेव? मैंने इतने सालों में लाखों लोगों के माथे की लकीरें पढ़ी है.. इसी उम्मीद में की काश कोई आये जो अपने पिछले जन्म में जाकर आपकी मदद कर सके.. पर आज तक ऐसा नहीं हुआ..

बड़े बाबाज़ी - जो मुझे 300 सालों से कहीं नहीं मिला वो मुझे इसी कुटिया मैं बैठे बैठे मिल गया विरम.. बस कुछ दिनों का इंतज़ार और..

बाबाजी - पर क्या वो आपका काम कर पायेगा?

बड़े बाबाजी - अगर कारण हो तो आदमी सब कुछ कर गुजरता है विरम.. बस उसे एक वजह देनी होगी, मैं जल्दी ही उसे सब समझाकर इस काम के लिए सज्य कर लूंगा.. उसके मासूम चेहरे और सादगी भरे स्वाभाव से लगता है वो जरूर आसानी से अपने पिछले जन्म में जाकर मेरी गलती को सुधार सकता है. मेरे लिए बैरागी को ढूंढ़ सकता है. और मेरे हाथों उसका क़त्ल होने से बचा सकता है.

बाबाजी - इस अंधियारे में जो रौशनी आपने दिखाई है गुरुदेव, उससे नई उम्मीद मेरे ह्रदय के अंदर पनपने लगी है.. जिस जड़ीबूटी को अमर होने की लालच में अमृत मानकर आपने ग्रहण किया था अब उसी जड़ीबूटी से आपकी मुक्ति भी होगी..

बड़े बाबाजी - लालच नर्क की यातनाओ के सामान है विराम.. मेरे अमर होने के लालच ने मुझको उसकी सजा दी है.. मैं भूल बैठा था की जीवन और मृत्यु प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार है जिसे रोकने पर प्रकृति की मर्यादा भंग होती है..

बाबाजी - आप सही कह रहे है गुरुदेव. जिस तरह पहले आप पर अमर होने का लालच हावी थी अब मृत्यु का लालच हावी है.. लेकिन गुरुदेव? जिसे आपने ढूंढा है वो अपने पिछले जन्म कौन था? उसका कुल गौत्र और लिंग क्या था? वो आपके जागीर की सीमा के भीतर का निवासी था या बाहर का? अपने उसका पिछला जन्म तो देखा होगा?

बड़े बाबाजी - वो मेरी ही जागीर की सीमा के भीतर का निवासी है विरम. मैंने अभी उसका पिछला जन्म देखा है. वो हमारी ही सेना में एक सैनिक धुप सिंह का पुत्र समर है.. मगर एक अड़चन है विरम..

बाबाजी - क्या गुरुदेव? कैसी अड़चन?

बड़े बाबाजी - प्रेम की अड़चन विरम.. मुझे साफ साफ दिखाई दिया है की उसे किसी से प्रेम हो सकता है जो हमारे कार्य के लिए अड़चन बन सकती है.. वो वही का होकर रह सकता है.. और बैरागी को ढूंढने से मना करके जड़ीबूटी लेकर वापस आने से भी इंकार कर सकता है..

बाबाजी - इसका उपाय भी तो हो सकता है गुरुदेव, अगर उसके पास वापस आने की बहुत ठोस वजह हो तो? अगर उसे वापस आना ही पड़े तो?

बड़े बाबाजी - इसीके वास्ते तुझे याद किया है विरम..

बाबाजी - मैं समझा नहीं गुरुदेव..

बड़े बाबाजी - बड़े दुख की बात है विरम की जो तुझे खुद से समझ जाना चाहिए वो तू मुझसे सुनना चाहता है.. मैंने पिछले 40 साल में तुझे इस प्रकर्ति के बहुत से रहस्य बताये है जिनसे तूने हज़ारो लोगों की मदद की. लेकिन तू अपनी मदद नहीं कर पाया. जब तू 16 साल की उम्र में घर से मरने की सोचके निकला था तब से लेकर आज तक मैंने हर बार तेरा मार्गदर्शन किया है. एकलौता तू ही है जिसे मैंने अपना रहस्य भी बताया है. पूरी दुनिया के सामने अपना छोटा भाई बनाकर रखा है.. मैंने अपनी पिछले 350 की जिंदगी में जितने भी रहस्य इस धरती और प्रकर्ति के बारे में जाने है उनमे से जो तेरे जानने लायक थे लगभग सही तुझे बता दिए है.. उनसे तो तुझे मालूम होना चाहिए था की मैं क्या कहा रहा हूँ..

बाबाजी - गुरुदेव. ये सत्य है की आज से 40 साल पहले जब मुझे मेरे घर से निकाल दिया गया था तब से लेकर आज तक आपने मुझे संभाला है. रास्ता दिखाया है. इस बार भी इस नादान को बताये गुरुदेव. मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए?

बड़े बाबाजी - विरम मैं जिस लड़के की बात कर रहा हूँ उसकी माँ तेरे मठ में आती है. तुझे उसे एक काम के लिए मनाना होगा.. क्युकी उसके बिना उस लड़के का वापस आना मुश्किल है..

बाबाजी - आप बताइये गुरुदेव, क्या करने के लिए मनाना होगा मुझे उस औरत को?

बड़े बाबाजी - ठीक है विरम, सुन..

बड़े बाबाज़ी अपनी बात कहना शुरुआत करते है जिसे बाबाजी उर्फ़ विरम ध्यान से सुनता है और समझ जाता है.. उसके बाद बड़े बाबाजी से विदा लेकर वापस मठ की और चला जाता है..

बड़े बाबाज़ी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह 325 साल पहले अजमेर की एक जागीर के जागीरदार थे और उनका अपना एक महल था सैकड़ो नौकरचाकर और इसीके साथ राजासाब की सेना की एक टुकड़ी भी हर दम बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह के महल की सुरक्षा में तनात रहती थी. 1699 में वीरेंद्र सिंह इस महल में एक राजा की तरह ही राज कर रहा था. वीरेंद्र सिंह का रुझान हकीमी और जादू टोने में बहुत ही ज्यादा था.. उसने सबसे छुपकर कई लोगों से इसका ज्ञान भी लेना शुरू कर दिया था और वैध की औषधियों के बारे में भी जानना जारी रखा..

बैरागी नाम के एक मुसाफिर आदमी की मदद से वीरेंद्र ने एक ऐसे पौधे को जमीन से उगवाया जो हज़ार साल में एक बार ही उग सकता है, जिससे आदमी अपनी उम्र के 11 गुना लम्बे समय तक ज़िंदा रह सकता है.. और अमर होने की लालच में आकर वीरेंद्र सिंह ने उस पौधे से मिली जड़ीबूटी का सेवन कर लिया..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह ने जड़ीबूटी का सेवन तो कर लिया मगर उसकी उम्र बढ़ना नहीं रुकी. जब उसने जड़ीबूटी खाई थी तब उसकी उम्र 35 साल थी और उसे लगा था की अब वो अमर हो जाएगा मगर.. धीरे धीरे उसकी उम्र बढ़ती गई जिससे वीरेंद्र सिंह को लगा की इस जड़ीबूटी का कोई असर नहीं हुआ और ये उसे अमर नहीं कर पाई.. वीरेंद्र सिंह ने गुस्से में आकर जड़ीबूटी बनाने वाले आदमी जिसे सब बैरागी के नाम से जानते थे को मरवा दिया.

लेकिन जब धीरे धीरे बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह 73 साल का हुआ तो उसकी उम्र बढ़ना रुक गई और फिर उसे समझ आया की उस जड़ीबूटी का असर आदमी के मरने की उम्र गुजरने के बाद शुरू होता है और जितने साल उसकी जिंदगी होती है उसके गयराह गुना साल आगे वो और ज़िंदा रह सकता है.. वीरेंद्र पहले तो ये सोचके बहुत ख़ुशी हुई की अब वो अपनी उम्र 73 साल के 11 गुना मतलब लगभग 800 साल ज़िंदा रहेगा मगर कुछ दिनों बाद ही उसे समझ आ गया की बैरागी को मारवा कर उसने बहुत गलत किया है.. 73 साल इस उम्र में उसका 800 साल ज़िंदा रहना वरदान नहीं अभिश्राप था.. ना तो भोग कर सकता था ना ही जीवन के वो सुख भोग सकता था जो जवानी आदमी को भोगने का अवसर देती है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह अब अपने फैसले पर बहुत दुखी हुआ और फिर उसने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया की उसे वही जड़ी बूटी वापस बनाकर अपनी ये जिंदगी समाप्त करनी है.. इसके लिए सालों साल वीरेंद्र सिंह उर्फ़ बड़े बाबाजी ने बड़े बड़े सिद्ध महात्मा, अघोरी और तांत्रिक की सेवा कर उनसे ज्ञान और रहस्य की जानकारी ली और हमारी धरती के बारे में बहुत सी बातें जानी. यहां जो आयाम है उसके बारे में जाना और बहुत बार भेस बदलकर लोगों से मिलते हुए वीरेंद्र सिंह ने इतनी जानकारी और ताकत हासिल कर ली और इस प्रकृति के कुछ रहस्य जान गया. वह अब ये जान गया था कि अगर कोई आदमी जिसका पिछला जन्म उसी वक़्त हो जब वीरेंद्र वो जड़ी बूटी बनवाने वाला था.. तभी उसका काम हो सकता है.. और वो इस अभिश्राप से बच सकता है..

वीरेंद्र सिंह उर्फ़ बड़े बाबाज़ी ने गौतम को ढूंढ़ लिया था गौतम पिछले जन्म में वीरेंद्र सिंह के सिपाही का लड़का था.. अब वीरेंद्र सिंह उर्फ़ बड़े बाबाजी यह चाहते थे कि गौतम अपने पिछले जन्म में जाकर बैरागी को ढूंढे और उससे वो जड़ीबूटी बनवा कर उसे वर्तमान में लाकर दे दे.. ताकि 350 सालों से इस उम्र में अटके बड़े बाबाजी के प्राण बह जाए और उनकी मुक्ति हो..

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सुबह जब गौतम की आँख खुली तो सामने का नज़ारा देखकर उसका लंड रबर के ढीले पाईप से लोहे की टाइट रोड जैसा तन गया जिसे उसने सोने का नाटक करते हुए छीपा लिया..

आज गौतम की आँख औऱ दिनों के बनिस्पत जल्दी खुल गई थी औऱ उसने अभी अभी नहाकर आई अपनी माँ सुमन की टाइट बाहर निकली हुई नंगी गोरी गांड देखी जिसे सुमन ने चड्डी पहनकर अब ढक लिया था औऱ बाकी कपडे पहनने लगी थी.. गौतम सोने का नाटक करते हुए सारा नज़ारा देखने लगा जब सुमन कपडे पहन कर बाहर चली गई तो आपने लंड को मसलते हुए सुमन की गांड याद करने लगा.. करीब आधे घंटे वैसा ही करने के बाद गौतम उठ गया औऱ कमरे में जाकर बाथरूम करके वापस आपने बेड पर सो गया जिसे एक घंटे बाद चाय लेकर आई सुमन ने बड़े लाड प्यार औऱ नाजुकी से उठा दिया..

सुमन - उठ जा मेरी सल्तनत के बिगड़ैल शहजादे.. बाबाजी के भी चलना है.. चाय पीले औऱ नहा ले जाकर..

गौतम अंगड़ाई लेकर उठ खड़ा होता है औऱ चाय पीकर उसी तरह खिड़की से बाहर देखता है.. तभी उसका फोन बजने लगता है..

गौतम - हेलो.. ज़ी? MK ज्वेलर्स से? हां बोल रहा हूँ.. अच्छा अच्छा.. ज़ी रात को बात हुई थी.. मगर.. नहीं वापस बात कर सकते है उस बारे में.. सुनिए.. हेलो..

फ़ोन कट गया था..

गौतम मन में - अरे यार किस्मत में लोडे लिखें है. एक ऑफर आया था वो भी गया नाली में..

गौतम जैसे ही फ़ोन काटता है उसके फ़ोन पर किसी औऱ का फ़ोन आने लगता है..

गौतम - हेलो..

सामने से कोई औरत थी - हेलो ग़ुगु..?

गौतम - हाँ.. पिंकी बुआ बोलो..

पिंकी -35

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पिंकी - ग़ुगु.. पापा कहाँ है?

गौतम - वो तो अभी थाने में है.. आजकल नाईट शिफ्ट है औऱ पोस्टिंग घर से थोडी दूर ग्रामीण इलाके में है तो घर देर से आते है.. 10 बजे तक आ जायेंगे..

पिंकी - ग़ुगु.. भईया से कहना मैं शाम को घर रही हूँ..

गौतम - क्यू मतलब कब? आज शाम की ट्रैन से?

पिंकी - ट्रैन से नहीं मेरे ग़ुगु.. गाडी से.. पर तू खुश नहीं है क्या मेरे आने से? लगता बहुत उल्टी सीधी पट्टी पढ़ा दी तेरी माँ ने तुझे अपनी बुआ के बारे में..

गौतम - अरे बुआ आप क्या बच्चों वाली बात कर रही हो.. मुझसे ज्यादा कोई खुश हो सकता है आपके आने पर? जल्दी से आ जाओ, आपसे ढेर सारी बात करनी है..

पिंकी - ओहो मेरा ग़ुगु इतना याद करता है अपनी बुआ को? पहले पता होता तो पहले आ जाती.. बता तुझे क्या चाहिए? क्या लाऊँ तेरे लिए?

गौतम - मुझे कुछ नहीं चाहिए बुआ? आप जल्दी से आकर मुझे मेरे गाल पर मेरी किस्सीया देदो उतना काफी है मेरे लिए..

पिंकी - ओह... मेरे ग़ुगु को हग भी मिलेगा औऱ किस्सी मिलेगी.. गाल पर भी औऱ लिप्स पर भी. तेरी बुआ कोई पुराने जमाने की थोड़ी है..

गौतम - बुआ माँ से बात करोगी?

पिंकी - अरे नहीं.. रहने दे ग़ुगु.. तेरी माँ पहले ही मुझसे चिढ़ती है.. तेरी माँ को तो मैं खुद आकर सरप्राइज दूंगी..

गौतम - सरप्राइज ही देना बुआ.. अटैक मत दे देना.. चलो मैं रखता हूँ,

पिंकी - ग़ुगु.. तू बस एड्रेस massage कर दे मुझे.. सरप्राइज तो देना है तेरी माँ को..

गौतम - ठीक है बुआ.. अभी करता हूँ..

पिंकी - ग़ुगु.. मन कर रहा है अभी फ़ोन में घुसके तुझे किस्सी कर लू..

गौतम - मैं वेट कर लूंगा शाम तक आपकी किस्सी का.. आप आराम से आ जाओ.. बाय बुआ..

पिंकी - बाये ग़ुगु.. अपना ख्याल रखना..

गौतम फ़ोन काटकर नहाने चला जाता है औऱ नहाकर एक डार्क नवी ब्लू शर्ट एंड लाइट ब्लू जीन्स के साथ वाइट शूज दाल लेटा है जिसमे आज बहुत प्यारा औऱ खूबसूरत लग रहा था.. उसे देखकर कोई भी कह सकता था की ग़ुगु आज भी स्कूल ही जाता होगा.. गौतम इतना मासूम औऱ मनभावन लग रहा था की सुमन ने आज घर से बाहर निकलने से पहले उसे कान के पीछे काला टिका लगा दिया था.. दोनों बाइक पर बैठके बाबाजी के पास चल पड़े थे..

सुमन - आज पेट्रोल नहीं भरवाना?

गौतम - नहीं माँ, है बाइक में तेल..

सुमन - अच्छा ज़ी.. औऱ कुछ खाना नहीं है रास्ते में?

गौतम - भूख नहीं है आपको खाना है?

सुमन - अगर मेरा ग़ुगु खायेगा तो मैं भी खा लुंगी..

गौतम थोड़ा आगे उसी कोटा कचोरी वाले की दूकान ओर बाइक रोक देता है औऱ जाकर कचोरी लेने लगता है तभी उसका फ़ोन बजता है..

गौतम - हेलो..

रूपा - मेरा बच्चा कहा है?

गौतम - अरे यार वो बाबाजी नहीं है *** पहाड़ी वाले? उनके पास जा रहा हूँ माँ को लेकर..

रूपा - अच्छा ज़ी माँ को लेकर जा रहे हो औऱ अपनी इस मम्मी से पूछा तक नहीं चलने के लिए?

गौतम - मैं नहीं मानता किसी बाबा-वाबा को.. माँ मुझे लेकर जा रही है.. वैसे सुबह सुबह कैसे याद कर लिया?

रूपा - अरे ये क्या बात हुई भला? अब मैं अपने बच्चे को याद भी नहीं कर सकती?

गौतम - मम्मी यार रास्ते में हूँ पहुँचके फ़ोन करता हूँ..

रूपा - अरे सुनो तो..

गौतम - जल्दी बोलो..

रूपा - कुछ नहीं रहने दो जाओ..

गौतम - ठीक है बाद में बात करता हूँ..

गौतम फ़ोन काट कर कचोरी ले आता है..

गौतम - माँ लो..

सुमन गौतम से कचोरी लेकर खाने लगती है औऱ कहती है..

सुमन - क्या बात है? कल रात को खाने का बिल औऱ आज गाडी में तेल फुल? कचोरी के पैसे भी नहीं मांगे तुने मुझसे? कोई लाटरी लगी है तेरी?

गौतम - कुछ नहीं माँ वो पुरानी कुछ सेविंग्स थी मेरे पास तो बस..

सुमन - अच्छा ज़ी? पर सेविंग तो आगे के काम के लिए बचा के रखते है ना? तू खर्चा क्यू कर रहा है?

गौतम - अब नहीं करुंगा माँ.. कितने सवाल पूछती हो आप इतनी छोटी बात के लिए?

सुमन - छोटी सी बात? तेरे छोटी बात होगी मेरे लिए नहीं है.. मुझे मेरा वही ग़ुगु चाहिए.. जो पेट्रोल से लेकर कचोरी तक चीज पर कमीशन खाता है..

गौतम - अच्छा ठीक है मेरी माँ.. अब चलो वैसे भी आज ज्यादा भीड़ मिलेगी आपके बाबाजी के.. अंधभगतो की गिनती बढ़ती जा रही है इस देश में..

सुमन - ठीक है मेरे ग़ुगु महाराज.. चलिए..

गौतम सुमन को बाइक पर बैठाकर बाबाजी की तरफ चल पड़ता है वही रूपा के मन में भी गौतम को देखने की तलब मचने लगती है और वो करीम को फ़ोन करती है..

रूपा - हेलो करीम..

करीम - सलाम बाजी..

रूपा - कहा है तू?

करीम - बाजी, सवारी लेने निकला हूँ स्टेशन छोडके आना है..

रूपा - आज तेरी बुक मेरे साथ है.. सबकुछ छोड़ औऱ कोठे पर आ जल्दी.. कहीं जाना है..

करीम - जैसा आप कहो बाजी.. अभी 5 मिनट में हाज़िर होता हूँ..

रूपा करीम से बात करके आईने के सामने खड़ी होकर आपने आपको निहारने लगती है.. सर से पैर तक बदन पर लदे कीमती कपडे औऱ जेबरात उसे ना जाने क्यू बोझ लगने लगे थे. आज उसका दिल कुछ साधारण औऱ आम सा पहनने का था. उसने अपने कमरे की दोनों अलमीराओ का दरवाजा खोल दिया औऱ कपडे देखने लगी, कुछ देर तलाशने के बाद उसे एक पुराना सूट जो कई बरस पहले करीम की इंतेक़ाल हो चुकी अम्मी ने उसे तोहफ़े में दिया था रूपा ने निकाल लिया औऱ अपने कीमती लिबास औऱ गहनो को उतारकर वो सूट पहन लिया.. फिर एक साधारण घरेलु महिलाओ की तरह माथे पर बिंदिया आँखों में काजल औऱ होंठों पर हलकी लाली लगाकर बाल बनाना शुरु कर दिया..

इतने में करीम का फ़ोन आ गया औऱ उसने नीचे खड़े होने की बात कही..

रूपा जब अपने कमरे से निकल कर बाहर जाने लगी तो रेखा काकी ने उसके इस रूप को देखकर अचंभित होते हुए कहा..

रेखा काकी - कहो रूपा रानी.. आज विलासयता त्याग कर ये क्या भेस बनाई हो?

रूपा - दीदी वो आज एक साधु बाबा के यहां जा रही हूँ तो सोचा कुछ साधारण पहन लू.

रेखा काकी - साधारण भी तुझपर महंगा लगता है रूपा रानी.. तेरा रूप तो इस लिबास में औऱ भी खिल कर सामने आ गया.. आज भी याद है, पहले पहल जब तू यहां आई थी तब इसी तरह के लिबास में अपने रूप से लोगों का मन मोह लिया करती थी.. मेरी चमक को कैसे तूने अपने इस हुस्न से फीका कर दिया था.

रूपा - आपकी चमक तो आज भी उसी तरह बरकरार है दीदी, जिस तरह जगताल के कोठो की ये बदनाम गालिया.. मैं तो कुछ दिनों की चांदनी थी अमावस आते आते बुझ गई..

रेखा काकी - ऐसा बोलकर मुझे गाली मत दे रूपा... मैं तेरा मर्ज़ तो जानती थी पर कभी तेरे मर्ज़ का मरहम तुझे नहीं दे पाई.. जो सपना तेरा है वो मैं भी कभी अपनी आँखों से देखा करती थी.. पर तवायफ के नसीब में सिर्फ कोठा ही होता है..

रूपा - मेरा सपना तो बहुत पहले टूट चूका है दीदी, कब रूपा रानी से रूपा मौसी बन गई पता ही नहीं चला.. अच्छा चलती हूँ आते आते शायद शाम हो जाएगी.

रूपा रेखा से विदा लेकर कोठे के बाहर करीम की रिक्शा में आ जाती है यहां करीम सादे लिबाज़ में रूपा को देखकर हैरात में पड़ जाता है मगर कुछ नहीं बोलता..

करीम - कहाँ चलना है बाजी?

रूपा - *** पहाड़ी पर कोई बाबा है उसके यहां..

करीम - पर आप तो मेरी तरह ऐसे बाबाओ औऱ खुदा पर यक़ीन ही नहीं करती थी..

रूपा - यक़ीन तो आज भी नहीं करीम.. पर सोचा मांग के देख लू शायद कोई चमत्कार हो जाए..

करीम - जैसा आप बोलो..

रूपा - करीम.

करीम - हाँ बाजी..

रूपा - तुझे बुरा तो नहीं लगा मैंने अचानक तुझे बुला लिया..

करीम - बुरा किस बात का बाजी, ये ऑटोरिक्शा आपने ही तो दिलवाया है अब आपके ही काम नहीं आएगा तो फिर इसका क्या मतलब? वैसे बाजी ये साधारण सा सूट भी आपके ऊपर बहुत खिल रहा है..

रूपा - हम्म.. कुछ साल पहले मुझे तोहफ़े में मिला था.. पाता है किसने दिया था?

करीम - नहीं.

रूपा - तेरी अम्मी ने. आज भी बहुत याद आती है वो.



करीम औऱ रूपा दोनों करीम की अम्मी खालीदा को याद करके भावुक हो चुके थे.. खालीदा भी उसी कोठे पर तवयाफ थी करीम को बहुत दिल से पाला था उसने. खालिदा की मौत के बाद करीम का ख्याल रूपा ने ही रखा था औऱ उसे ये ऑटोरिक्शा दिलाकर चलाने औऱ कोठे पर रंडियो की दलाली से दूर रहने के लिए कहा था.. थोड़ी सी रंजिश में करीम को उसीके दोस्तों ने नामर्द बना दिया था अब करीम अकेला था मगर खुश था.. उसे किसी चीज की जरुरत होती तो रूपा उसे मदद कर देती बदले में रूपा ने करीम की वफादारी खरीद ली थी..
 
अपडेट 7



गौतम ने बाइक उसी बरगद के नीचे लगा दी औऱ सुमन से बोला..

गौतम - चलो माँ.. चढ़ो वापस सीढ़िया..

सुमन - चलो.. चढ़नी तो मेरे ग़ुगु को भी पड़ेगी..

गौतम ने जैसे ही पहला कदम बढ़ाया उसके बगल से होते हुए करीम का रिक्शा आगे जाकर एक किनारे रुक गया जिसे गौतम ने पहचान लिया था.. रिक्शे से रूपा उतरकर एक नज़र गौतम पर डालती है औऱ फिर उसका हाथ पकडे खड़ी सुमन को देखती है..

रूपा को पहली बार किसी औरत से जलन हो रही थी मगर वो कुछ नहीं कर सकती थी.. रूपा के मन में जलन से ज्यादा इर्षा भरी हुई थी वो बनना चाहती थी उसके सामने था..

गौतम ने रूपा को देखकर भी अनदेखा कर दिया औऱ सुमन का हाथ थामे सीढ़ियों की औऱ बढ़ने लगा तभी रूपा सुमन से बोली..

रूपा - दीदी सुनिए..

सुमन रुककर - ज़ी.. बोलिये..

रूपा - वो आपका पर्स बाइक पर ही रखा हुआ है..

सुमन - अरे मैं भी कितनी भुल्लककड़ हो गई हूँ. जा ग़ुगु पर्स ले आ. आपका शुक्रिया बताने के लिए..

रूपा - शुक्रिया केसा दीदी.. छोटी सी तो बात है.. ये आपका बेटा है..

सुमन - हाँ.. ये मेरा ग़ुगु है..

रूपा - बहुत खूबसूरत है.. बिलकुल आपकी तरह.

सुमन - ज़ी शुक्रिया.. आप भी बाबाजी के पास आई है?

रूपा - हाँ वो कुछ मन्नत थी सोचा शायद यहां आकर पूरी हो जाए..

सुमन - चलिए चलते हुए बात करते है.

रूपा - ज़ी चलिए.. मेरा नाम रूपा है..

सुमन - ज़ी मेरा नाम सुमन..

रूपा - बड़ा ही प्यारा नाम है आपका.. सचमुच में आप सुमन जैसी खिली हुई खुश्बू से भरी हुई हो..

सुमन मुस्कुराते हुए - नाम तो आपका भी आप पर बहुत जचता है.. जैसा रूप वैसा नाम..

रूपा - आप इसी शहर में रहती है?

सुमन - हाँ.. ग़ुगु के पापा पुलिस में तो पुलिस क्वाटर में ही रहते है.. और आप?

रूपा - ज़ी वो मेरा तलाक़ हो चूका है.. कोई बच्चा तो है नहीं, इसलिए अकेली ही शहर के बीच एक फ्लेट में रहती हूँ..

सुमन - तलाक़ क्यों?

रूपा - अब मर्द जात क्या भरोसा दीदी, कोई और मिल गई तो छोड़ गए. मैंने भी नहीं रोका और तलाक़ ले लिया..

सुमन हमदर्दी से - बहुत गलत हुआ है आपके साथ..

रूपा - छोड़िये दीदी ये सब.. आपने ये साडी कहा से ली? बहुत खूबसूरत है..

सुमन - ये तो मुझे तोहफ़े में मिली थी. मेरी ननद ने दी थी..

रूपा - आप के ऊपर बहुत खिल रही है दीदी..

सुमन - शुक्रिया.. वैसे इस सूट में आप का मुक़बला करना भी बहुत मुश्किल है.. साधारण सूट को भी आपके इस रूप ने ख़ास बना दिया..

रूपा हस्ती हुई - क्या दीदी आप भी मज़ाक़ करती हो..

गौतम रूपा औऱ सुमन के बीच खड़ा था औऱ दोनों की बात सुन रहा था. रूपा अनजान बनने का नाटक बखूबी निभा रही थी औऱ गौतम समझ चूका था की रूपा सुमन से दोस्ती करना चाहती है मगर उसने भी अनजाने बनते हुए दोनों के बीच से किनारा ले लिया औऱ चुपचाप सीढ़िया चढने लगा..

रूपा सुमन से कई बातें उगलवा चुकी थी औऱ बहुत सी सही गलत बातें अपने बारे में भी बता चुकी थी.. सीढ़िया चढ़ते चढ़ते दोनों में अच्छी बनने लगी थी औऱ बाबा के दरवाजे पर पहुंचते पहुंचते दोनों आपसमे बात करते हुए खिल खिलाकर हसने लगी थी..

गौतम हमेशा की तरह बाहर ही रुक गया औऱ रूपा को आज साधारण लिबास में देखने लगा आज रूपा उसे बहुत आकर्षक लग रही थी..

रूपा का मकसद सुमन से दोस्ती करने का था औऱ वो उसी के साथ कतार में बैठ गई.. भीड़ ज्यादा थी मगर दोनों की बातचीत से समय का पता ही नहीं लगा.. सुबह ग्यारह बजे कतार में बैठी सुमन औऱ रूपा की बारी आते आते 2 बज गए थे तब तक दोनों पक्की सहेलियों की तरह बात करने लग गई थी..

सुमन की बारी आई तो वो बाबाजी को प्रणाम करके सामने बैठ गयी..

सुमन - बाबाजी आपने काम बताया था वो मैंने शुरु कर दिया है, बस अब जल्दी से अपना घर बनवा दो..

बाबाजी - बिटिया जो कहा था करते जा औऱ बाबा के सामने हाज़िरी लगाते जा.. सब हो जाएगा.. और याद रख तुझे घर से बढ़कर मिलेगा लेकिन उसके लिए तुझे एक कार्य करना होगा..

सुमन - बताइये बाबाजी..

बाबाजी - वक़्त आने पर तुझे पता चल जाएगा.. अभी उचित समय नहीं है..

सुमन - ज़ी बाबा ज़ी.. कहते हुए सुमन सामने से हट गयी औऱ रूपा बाबाजी के सामने बैठ गई..

बाबाजी - बोल बिटिया क्या चाहिए तुझे?

रूपा - मुझे जो चाहिए मैं कहकर नहीं बता सकती बाबाज़ी आप मेरे मन की बात समझो औऱ कोई उपाय बताओ उसे हासिल करने का..

बाबाजी - तुझे जो चाहिए वो तुझे जरूर मिलेगा लेकिन बटाइ में.. मैं पर्चा लिख देता हूँ तू अगर वैसा कर देगी तो जो तू मांग रही है तुझे जरूर मिल जाएगा..

रूपा - अगर ऐसा है तो बाबाजी.. मैं अपना सबकुछ आपको देने के लिए त्यार हूँ..

बाबाजी - मुझे तो खाने के लिए अन्न चाहिए बिटिया बाकी सब तू अपने पास रख.. ले पढ़कर आग में जला दे बाहर ये पर्चा.. जा..

रूपा ने पर्चा पढ़ा तो उसमें लिखा था की गौतम को अपने बेटे के रूप में हासिल करने के लिए उसे महीने में सिर्फ बार ही उसके साथ सम्भोग करना होगा उससे ज्यादा नही. रूपा ने पर्चा पढ़कर जला दिया..

गौतम हमेशा की तरह वही पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया औऱ वापस उसे नज़ारे को देखने लगा जिसे वो बहुत बार देख चूका था.. आज फिरसे उसे नीचे कोई आता हुआ दिखा औऱ वो समझा गया की ये वही पागल है जिसे उसने पिछली बार जामुन तोड़कर दिए थे औऱ जिसे वो आदमी बड़े बाबा कहकर बुला रहा था..

बूढ़ा ऊपर आकर वापस गौतम से पानी माँगने लगा औऱ गौतम ने उसपर तरस खाकर वापस पानी दे दिया, बूढ़े ने उसी तरह कुछ बून्द हथेली में लेकर अपने सर पर दाल दी औऱ पानी पीकर बोतल वापस गौतम के पास रख दी..

बड़े बाबाज़ी - वापस आ गया तू?

गौतम - देख बुड्ढे मैं तेरे साथ बकचोदी करने के मूंड में नहीं हूँ.. तुझे चाहिए तो जामुन तोड़कर ला देता हूँ तू चला जा लेकर वापस नीचे चुपचाप..

बड़े बाबाज़ी - गुस्सा क्यू करता है बेटा.. मैं कुछ देने ही आया था तुझे पिछली बार की तरह..

गौतम - अबे ओ ढोंगी.. क्या लिया था मैंने तुझसे पिछली बार?

बड़े बाबाज़ी- अरे तूने ही तो बोला था ऐसा लिंग चाहिए जिसकी दीवानी हर औरत बन जाए.. भूल गया? वो तवयाफ जो अभी मठ के अंदर तेरी माँ के साथ बैठी है तेरी दीवानी बनी या नहीं.. बता? कहता है तो वापस ले लेता हूँ जो तुझे दिया है..

इस बार बाबाज़ी की बात सुनकर गौतम का सर चकरा गया औऱ वो बड़ी बड़ी आँखों से बाबाजी को देखने लगा, उसे अपने कानो पर यक़ीन नहीं आ रहा था..

बड़े बाबाजी - ऐसे क्या देख रहा है?

गौतम सकपका कर - आप कौन हो और ये सब कैसे जानते हो?

बड़े बाबाजी - मैं वीरेंद्र सिंह हूँ, और तेरे बारे में सब जानता हूँ.. बता कुछ चाहिए तो वरना मैं नीचे जाऊ?

इस गौतम हाथ जोड़कर - मुझे माफ़ कर दो..

बड़े बाबाजी - मैं तो तुझसे नाराज़ ही नहीं हूँ बेटा.. माफ़ क्यू मांगता है.. मुझे तो ये भी पता है वो तवायफ अभी तेरी माँ के साथ अंदर बैठी हुई तुझे होने बेटे के रूम में मांग रही है..

गौतम - मैं अपने किये पर शर्मिंदा हूँ बाबाजी.. आप सच में बहुत अन्तर्यामी हो.. मैं अगर आपके कोई काम आ सकता हूँ तो बता दो मैं जरूर काम आऊंगा..

बड़े बाबाजी - काम तो बहुत बड़ा है और बहुत मुश्किल है क्या तू कर पायेगा?

गौतम - आप कहकर देखिये बाबाजी मैं कुछ भी कर जाऊँगा..

बड़े बाबाजी - अभी तू मेरा काम करने को त्यार नहीं है.. जब होगा तब कह दूंगा.. अब तू अपनी जवानी का सुख भोग.. कुछ चाहिए तो मुझे बता.. मैं दे देता हूँ तुझे..

गौतम - मुझे कुछ नहीं चाहिए बाबाजी..

बड़े बाबाजी - अच्छा ठीक है फिर में चलता हूँ.. जब तू काम करने लायक़ हो जाएगा तब जरूर बताऊंगा..

ले धागा कलाई पर पहन ले जब ये काले से सफ़ेद हो जाए तब यहां आ जाना.. तब बताऊंगा मुझे क्या चाहिए.. औऱ हाँ जिस औरत का भी तेरे साथ सम्भोग करने का मन होगा, उसके सामने आते ही ये धागा लाल रंग का हो जाएगा..

गौतम - ठीक है बाबाजी..

बाबाजी ज़ी ये कहते हुए वापस नीचे चले गए औऱ गौतम उठकर वापस वही आ गया जहा से उसने रूपा औऱ सुमन को छोड़ा था.. उसने देखा कि रूपा सुमन के साथ खड़ी हुई आपस में हाथ पकडे हंसकर बातें कर रही थी..

गौतम - माँ चलना नहीं है?

सुमन - हाँ ग़ुगु.. चलते है, पर तू पहले आंटी का नम्बर फ़ोन में सेव कर ले.. बहुत पटेगी हमारी..

गौतम - ठीक है करता हूँ अब चलो.. आपके लिए एक सरप्राइज भी है..

सुमन - क्या?

गौतम - वो तो घर चलकर पता चलेगा..

रूपा - बुरा ना मानो नीचे साथ में एक एक कप चाय पीकर चले?

सुमन - हाँ हाँ क्यू नहीं..

सीढ़िया उतर कर सब वही पास में बनी एक चाय कि स्टाल पर आ गए.. औऱ चाय पिने लगे..

रूपा - कल आप क्या कर रही है?

सुमन - कुछ नहीं क्यू?

रूपा - तो फिर दीदी घर आइये ना ग़ुगु के साथ.. हम मिलकर खूब सारी बात करेंगे, एक साथ डिनर भी करेंगे और कोई अच्छी सी मूवी भी साथ बैठकर देखेंगे..

सुमन - ठीक है रूपा.. जैसा तुम कहो.. क्यू ग़ुगु.. चलोगे आंटी के घर मेरे साथ?

गौतम - हाँ हाँ क्यू नहीं.. ये भी तो घर की ही है..

सुमन - अच्छा अब इज़ाज़त दीजिये.. घर पर बहुत सा काम पड़ा है..

रूपा - हाँ बिलकुल.. पर याद रहे दीदी संडे को ग़ुगु के साथ घर आना होगा.. मैं कोई बहाना नहीं सुनूंगी..

सुमन - ज़ी पक्का..

गौतम औऱ सुमन रूपा से विदा लेकर घर की तरफ आ गए औऱ रूपा करीम की रिक्शा में बैठके वापस कोठे के लिए निकल पड़ी..

करीम - क्या हुआ बाजी.. पहली बार में ही मिल गया क्या जो चाहिए था?

रूपा - नहीं करीम.. पर लगता है मिल जाएगा.. अच्छा वो शहर वाला फ्लेट कब से बंद है जो कांति सेठ ने मेरे नाम किया था?

करीम - बाजी.. पहले तो किसी को किराए पर दिया था पर 3 साल से कोई औऱ आया नहीं वहा रहने.. तभी से बंद है..

रूपा पैसे देते हुए - अभी वहा की सारी साफ सफाई करवा दे.. मैं कल से अब वही रहूंगी..

करीम - जैसा आप बोले बाजी..

रूपा अपना फ़ोन देखती है तो गौतम का massage आया होता है..

गौतम - सूट में तुम बहुत प्यारी लग थी मम्मी.. अगर साथ में माँ नहीं होती तो इतना प्यार करता की याद रखती..



रूपा मुस्कुराते हुए मैसेज पढ़कर रिक्शा से बाहर देखने लगी.. और एक सिगरेट सुलगा कर गौतम को याद करते हुए मंद मंद मुस्कान अपने चेहरे पर सजा कर गौतम को याद करने लगती है..
 
अपडेट 8



सुमन - अच्छा बता तो दे क्या सरप्राइज है ग़ुगु.. अब तो घर भी आ गए..

गौतम - कुछ देर में अपनी आँखों से देख लेना ना..

सुमन - कोई आने वाला है?

गौतम - हाँ..

सुमन - कौन आने वाला है ग़ुगु?

गौतम - बताने के लिए माना किया माँ सॉरी..

सुमन - अपनी माँ से भी छुपायेगा?

गौतम - हाँ छुपाना पड़ेगा माँ.. सॉरी..

सुमन - ठीक है मत बता मैं भी तुझसे नाराज़ हो जाउंगी..

गौतम - अगर बता दिया तो भी नाराज़ हो जाओगी माँ..

सुमन - अच्छा ऐसा है.. चल फिर रहने दे, मैं बाजार जा रही हूँ. कुछ लाना तेरे लिए?

गौतम - नहीं.. आप जल्दी आ जाना आपको हमेशा मार्किट घूमने में मज़ा आता है.. देर कर देती हो..

सुमन - अच्छा तो तू भी चल ना साथ में, मेरी मदद करवा देना..

गौतम - नहीं नहीं मैं नहीं जाऊ, आप के साथ मार्किट जाना मतलब फ़ालतू का झंझट.. आप ही जाओ..

सुमन - अच्छा ठीक है.. तू यही रुक मैं जाती हूँ.. आज बहुत सा सामान खरीदना है..

कहते हुए सुमन घर से चली जाती है औऱ गौतम दरवाजा बंद करके बेड पर आ जाता है..

गौतम थोड़ी देर लेटा ही था की दरवाजे पर दस्तक हुई..

गौतम ने उठकर दरवाजा खोला तो सामने पिंकी बुआ थी..

पिंकी अंदर आकर गौतम को गले से लगा लेती है औऱ उसके गाल औऱ होंठों पर कई चुम्मे कर देती है..

गौतम - बुआ आराम से.. खा जाओगी क्या?

पिंकी - हाँ खा जाउंगी मैं मेरे ग़ुगु को..

गौतम ने अपने कलाई पर बंधा धागा लाल देखा तो वो समझ गया की पिंकी के मन में क्या है औऱ वो मुस्कुराते हुए पिंकी से बोला..

गौतम - अंदर चल कर खा लेना बुआ यहाँ कोई देख लेगा.. मैं दरवाजा बंद कर देता हूँ..

पिंकी - ठीक है मेरे ग़ुगु ज़ी..

गौतम ने घर का दरवाजा बंद कर दिया औऱ अंदर अपने रूम में पिंकी के बेग रखकर बोला..

गौतम - बुआ चाय बनाऊ आपके लिए..

पिंकी - चाय वाई रहने दे तू इधर आ.. अपनी बुआ के पास.. 1 साल से तुझे ठीक से नहीं देखा.. अभी भी वैसा का वैसा ही है..

गौतम - आप भी कहा बदली हो बुआ.. पहले भी मेरे पीछे पड़ी रहती थी अब भी पड़ी हो..

पिंकी - ओह हो.. अब ग़ुगु ज़ी को बातें भी सूझने लगी है.. पहले तो एक शब्द नहीं निकलता था जुबान से.. वैसे तेरी माँ कहाँ है उन्हें तो सरप्राइज तो दू..

गौतम - मार्किट गई है आने थोड़ी देर लगेगी उन्हें..

पिंकी - ठीक है इधर आ.. तब तक तू अपनी बुआ की प्यास बुझा दे..

गौतम - काटना मत पिछली बार की तरह..

पिंकी - चल ठीक है मेरे दिल के टुकड़े.. नहीं काटूंगी.. अब इन लबों को मेरे हवाले कर दे..

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पिंकी बड़े चाव से गौतम के होंठों को चुम रही थी जैसे उसे कोई खिलौना मिल गया हो खेलने को. गौतम भी पिंकी का पूरा साथ देते हुए उसके लबों का रस पिने में मशगूल था और अब उसे ये अहसास हो रहा था की वो आगे कुछ एयर भी कर सकता है.

पिंकी गौतम को अपनी बाहों में लेकर चूमने लगती है तभी गौतम अपना हाथ पिंकी के बूब्स पर लेजाता है औऱ हलके से पिंकी के बूब्स दबाने लगता है जिसका मीठा अहसास पिंकी को जब होता है वो चुम्बन तोड़कर मुस्कुराती हुई गौतम से कहती है.. दबाना है तो ठीक से दबा ना, मैं मना थोड़ी करुँगी अपने ग़ुगु को किसी चीज के लिए.. रुक मैं कुर्ती उतार देती हूँ फिर अच्छे से कर लेना जो करना है तुझे?

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गौतम - बुआ सोच लो.. अब मैं बच्चा नहीं रहा.. कुछ भी हो सकता है..

पिंकी - सोचना क्या है? तू मेरे साथ जो करना चाहता है कर ले. तुझे तो सब माफ़ है..

गौतम - सोच लो फूफा ज़ी को जवाब नहीं दे पाओगी बाद में.. क्या हुआ था औऱ किसने किया था?

पिंकी - उसकी चिंता छोड़.. वैसे भी जो बात मेरे मन में थी और मैं कहना चाहती थी तूने खुद ही बोल दी.. अब किस बात का इंतजार है आजा अपनी बुआ के पास..

कहते हुए पिंकी ने गौतम को अपने ऊपर खींच लिया औऱ उसके होंठों को वापस पागलो की तरह चूमने लगी जैसे उसे कोई रस मिल रहा हो गौतम के लबों से.. गौतम भी पूरा साथ देते हुए ब्रा के अंदर हाथ डालकर पिंकी के विकसित उन्नत उरोजो को मसलने लगा.. पिंकी की सिसकारियों से कमरे का माहौल कामुक हो रहा था..

गौतम चुम्बम तोड़कर बोला - बहुत प्यारे होंठ है बुआ आपके..

पिंकी - औऱ ये जो तूने मेरी ब्रा के अंदर पकड़े हुए है उनका क्या? कैसे है मेरे बूब्स?

गौतम - अभी चख के बताता हूँ बुआ.. गौतम थोड़ा नीचे आ गया औऱ पिंकी का बॉब्स मुंह में लेकर चूसने लगा.. पिंकी ने अपनी ब्रा उतार दी औऱ गौतम को बड़े प्यार अपने बूब्स चूसाते हुए छेड़ने लगी..

पिंकी - बता ग़ुगु.. किसका दूदू ज्यादा मीठा है मेरा या तेरी माँ का? हम्म? अब क्यू नहीं बोलता.. तब से बड़ी जुबान चला रहा था तू..

गौतम ने पिंकी की बात का जवाब न देते हुए उसका बोबा चूसना जारी रखा औऱ बीच बीच में उसके बूब्स पर लव बाइट भी कर दी जिससे पिंकी की कामुकता बढ़ती गई.. पिंकी ने गौतम को किसी भी हरकत पर नहीं रोका उल्टा उसके सर को सहलाते हुए उसे और भी आगे बढ़कर कुछ और करने का कहने लगी.

गौतम - बुआ बहुत मीठा दूध आता आपके इन चुचो से.. मज़ा आ गया पीके..

पिंकी - बुआ का दूध पीके तूने तो मज़ा ले लिया अब मुझे भी तो मज़ा चाहिए.. मेरा ग़ुगु का रस मुझे भी पीना है..

गौतम पिंकी का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखते हुए कहता है..

गौतम - बुआ आपका मज़ा यहां है, जितनी मर्ज़ी चाहो अपना मज़ा लेलो मैं रोकूंगा नहीं आपको..

इस बार पिंकी भी गौतम की बेशर्मी पर शर्मा गई लेकिन एक उत्तेजना उसके बदन में दौड़ गई..

पिंकी एक 35 साल की औरत थी जिसकी शादी एक 56 साल के आदमी के साथ हो गई थी क्युकी वो पैसे वाला था.. पिंकी को भोगविलास की वस्तु तो बहुत मिली पर जिस्मानी सुख से वो अब तक अनजान थी.. लोगों से हंसी ठिठोली करना उसके लिए आम था औऱ एक दो लोगों के साथ उसके नाजायज सम्बन्ध भी बने लेकिन सब शीघ्रपटन वाले थे, पिंकी की काम पिपासा जाग्रत हो चुकी थी..

पिंकी गौतम को बचपन से बड़ा लाड प्यार करती थी औऱ उसके साथ छेड़खानी भी करती थी.. उसके लिए गौतम उसका सबकुछ था.. पिंकी जैसे बेपरवाह को अगर किसी की परवाह थी तो वो बस गौतम ही था.. पिंकी औऱ सुमन की तो जैसे पुराने जन्म की दुश्मनी थी.. सुमन जानती थी की पिंकी उसके बेटे को गौतम को बिगाड़ रही है इसलिए वो पिंकी को ताने मारने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी पिंकी भी वैसा ही कुछ करती थी..

गौतम - क्या हुआ बुआ? पसंद नहीं आया?

पिंकी ने जैसे ही गौतम की पेंट नीचे की उसकी आँखे फटी की फटी रह गई वो बूत बनकर गौतम के खड़े लंड को देख रही थी जैसे उसने कोई अजूबा देख लिया हो..

गौतम - सिर्फ देखती ही रहोगी क्या बुआ? मुंह लो ना..

गौतम की आवाज से पिंकी का ध्यान टुटा औऱ उसने गौतम को देखकर कहा..

पिंकी - ग़ुगु.. ये क्या है? इतना बड़ा? तू कोई इंजेक्शन वगैरह तो नहीं लेता ना? बहुत गलत असर होता है बाद में..

गौतम - बुआ सब नेचुरल है मैं कुछ नहीं लेता.. चलो अब अच्छे बच्चे की तरह मुंह खोलो अब, वरना मुरझा गया तो आप ही शिकायत करोगी मुझसे..

गौतम ये कहते हुए पिंकी के सर पर हाथ रख दिया मानो उसे आशीर्वाद दे रहा हो और अपने लंड उसके मुंह के पास ले जाता है जिसे पिंकी अपने हाथों से पकड़ कर मुस्कुराते हुए ग़ुगु को देखकर चूमने लगती है..

कुछ देर चूमने और ग़ुगु के लोडे पर अनगिनत चूमिया करने के बाद पिंकी ग़ुगु के लंड को अपने मुंह में भरने लगती है और धीरे-धीरे उसके लोडे को मुंह से सहलाने लगती है.

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गौतम पिंकी के मुंह की गर्माहट औऱ लार अपने लंड पर महसूस कर जन्नत के अंदर पहुंच जाता है औऱ पिंकी के सर को दोनों हाथोंसे पकड़ कर अपना लोडा चुसवाने लगता है औऱ पिंकी भी अपने मुंह में जितना लंड ले सकती थी लेकर पूरी ईमानदारी के साथ चूस रही थी..

गौतम - एक बात तो कहनी पड़ेगी बुआ.. लंड चूसने में तो माहिर हो आप.. फूफाजी का तो मुंह में लेटे ही झड़ जाता होगा.. आअह्ह्ह... कमाल चुस्ती हो बुआ यार.. जब से आपके आने की खबर मिली है तब से खड़ा है आपके इंतजार में, अब चैन आया है इसे भी..

पिंकी - मुझे पता नहीं था मेरा ग़ुगु इतना बड़ा हो गया है वरना मैं अपने ग़ुगु के लिए कब का अपना मुंह खोल देती..

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गौतम - बुआ सिर्फ मुंह से काम नहीं चलेगा कुछ औऱ भी खोलना पड़ेगा आपको आज..

पिंकी - तुझे अपनी बुआ का जो खुलवाना है खुलवा ले ग़ुगु.. बस आज मुझे ठंडा कर दे..

गौतम - तो फिर आ जाओ बुआ खोल लो अपनी टाँगे इससे पहले माँ बाजार से वापस आ जाए..

पिंकी - ठीक है ग़ुगु.. ले आजा अपनी बुआ के ऊपर.. बहुत बाल है ना मेरी चुत पर?

गौतम - मुझे बालों वाली चुत पसंद है बुआ.. अब देखना कैसे आपकी और मेरी झांट आपस में उलझ कर आग लगाती है...

गौतम पिंकी की चुत को अपनी मुट्ठी में भर लेटा है औऱ फिर से पिंकी के होंठों को चूमने लगता है.. गौतम झांटो से भरी चुत को मुट्ठी में पकड़े सहलाने लगता है औऱ एक उंगलि चुत के अंदर दाल देता जहाँ से चिपचिपा पानी बाहर आ रहा था.. अपनी बुआ की गीली हो चुकी चुत को गौतम अपनी मुट्ठी में पकडे उसे चुम रहा था..

गौतम - बुआ त्यार हो होने ग़ुगु को अपनी इज़्ज़त देने के लिए?

पिंकी - अपनी बुआ को पूरा नंगा करके अपने नीचे लेटा रखा है तू औऱ पूछ रहा है त्यार हो? अब जल्दी अंदर डाल दो वरना मैं ही पकड़ के दाल लुंगी तेरे इस लंड को अपने अंदर..

गौतम - बुआ एक गाली दू आपको? बुरा ना मानो तो..

पिंकी - ग़ुगु.. सो गाली दे, नाम से बुला मुझे पर अपनी बुआ की अब चुदाई भी शुरु कर दे.. मुझसे रहा नहीं जा रहा..

गौतम - ठीक है मेरी जान पिंकी.. थोड़ी सी गांड उठा के खोल पैर को..

पिंकी - लो.. अब आ जाओ अंदर..

गौतम - मादरचोद रंडी.. ठीक से खोल..

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गौतम थूक लगा के अपना लंड पिंकी चुत में पेल देता है औऱ पिंकी एक दर्द की एक मीठी राह पर निकल पडती है जहाँ का सफर आज वो हर हाल में पूरा कर लेना चाहती थी.. अपने भाई के बेटे के साथ उसका व्यभिचार कई सालों से उसके मन में पनप रहा था जो आज जाके पूरा हुआ था.. गौतम अपने लंड औऱ चुदाई कला से पिंकी का दिल जितने में सफल रहा था औऱ जैसा बाबाजी ने आशीर्वाद दिया था वैसा ही हुआ.. आज दूसरी औरत गौतम के लंड की दिवानी बन चुकी थी.. पिंकी के मन पर गौतम ने ऐसी छाप छोडी जो पिंकी खुद भी नहीं उतार सकती थी..

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गौतम के हर झटके पर पिंकी हवा में पेड़ के पत्ते की जैसे हिलती औऱ उसके बोबे उछल उछल कर ऊपर से नीचे गिरते..

पिंकी - ई लव यू ग़ुगु.. फाड़ दे अपनी बुआ की चुत आज अपने लंड से.. बना दे मेरी चुत का भोसड़ा बेटा.. बर्बाद कर दे मुझे.. तहस नहस कर दे मेरी इस चुत को.. इस बहन की लोड़ी ने बहुत परेशान कर रखा था मुझे.. आज जाके चैन मिला है ग़ुगु.. निकाल दे मेरी सारी गर्मी बेटा..

गौतम - रंडी कहा छुपा रखी थी तूने इतनी टाइट चुत.. आज जाके मिली है मुझे.. इसे तो मैं जबतक सुज्जा नहीं देता तब तक नहीं छोडूंगा..

पिंकी - सुज्जा दे ग़ुगु.. अपनी रंडी बुआ की इस चुत को बेटा.. मिटा दे इसकी सारी खुजली.. आहहह अह्ह्ह्ह...

आधे घंटे से चुदाई चालू थी औऱ पिंकी दो बार झड़ चुकी थी मगर ग़ुगु उसे रंडी मानकर चोदे जा रहा था..

गौतम - बुआ.. कहा निकालू पिंकी?

पिंकी - अंदर ही निकाल दे ग़ुगु..

गौतम - ठीक है..

कहते हुए गौतम ने अपना सारा माल चुत में दाल दिया औऱ पिंकी के ऊपर ही गिरकर उसके साथ वापस जापानी चुम्मा चाटी करने लगा..

गौतम - सोरी बुआ.. आपको रंडी बोला. नाम से भी बुलाया.

पिंकी - तूने तो एक बार में मुझे अपना गुलाम बना लिया ग़ुगु.. अब चाहे मुझे गाली दे या थप्पड़ मार लेकिन लोडा तो अब तेरा ही चाहिए मुझे..

गौतम - आपका ही है बुआ.. जब मन करें तब आकर पकड़ लेना मैं कुछ नहीं बोलूंगा..

पिंकी - तूने तो मेरी चाल बिगाड़ दी आज.. पूरी हालात खराब कर दी.. कितना काटा है मेरे बूब्स को जगह जगह दांतो के निशान छोड़ दिए.. बस देखने में बच्चा है अंदर से पूरा मर्द है मर्द..

गौतम - अच्छा अब खुदको सम्भालो बुआ.. माँ आने वाली होंगी..

गौतम औऱ पिंकी कपडे पहनकर फ्रेश हो जाते है तभी दरवाजे पर सुमन बेल बजती है औऱ गौतम दरवाजा खोलकर सुमन से कहता है..

गौतम - आज भी इतनी देर लगा दी माँ आपने.. कोई कब से आपका वेट कर रहा है..

सुमन मुस्कुराते हुए - अच्छा कौन है वो? ज़रा देखु तो..

सुमन जैसे ही पिंकी को देखती है उसकी ख़ुशी मातम में बदल जाती है..

पिंकी क़ातिल हंसी के साथ - कैसी हो भाभी? बड़े दिनों बाद मिलने का मौका मिला है.. आप तो दिन ब दिन औऱ खूबसूरत होती जा रही हो.. भईया ठीक से ख्याल रखते है शायद..

सुमन व्यंग से - मेरा ख्याल तो तेरे भईया ठीक से रखते है पर तेरा क्या पिंकी? कोई मिला ख्याल रखने वाला या अब तक ढूंढ़ रही है.. हर घट का पानी पीना सही नहीं है.

पिंकी - भाभी कैसी बात कर रही हो? शादीशुदा हूँ..

सुमन - तेरी उस बुड्ढे से शादी की वजह सब जानते है.. औऱ ये भी की तू शिकार की तलाश में रहती है.. कोई फंसा या नहीं अब तक..

पिंकी - क्या बताऊ भाभी.. इस बार तो मैं ही फंस गई.. ऐसा शिकारी मिला है कि मत पूछो.. पूरा निचोड़के रख देता है..

सुमन - चल अच्छा.. कम से कम तू घरवालों को छोड़ देगी..

पिंकी - क्या मतलब भाभी?

सुमन - कुछ नहीं..

गौतम अंदर से आता हुआ कहता है- माँ केसा लगा सरप्राइज?

सुमन आँखे दिखाकर - बहुत जोर का लगा है ग़ुगु.. ये सामान रख दे.. मैं चाय बनाती हूँ..

गौतम - आप बुआ के साथ बैठो ना.. मैं बनाता हूँ चाय..

पिंकी - हाँ भाभी चलो ना ढेर सारी बात करनी है आपसे.. और तोहफ़े भी है आपके लिए

पिंकी सुमन को उसके कमरे में लेजाकर बेड पर बिठाती हुई कहती है..

पिंकी - ये आपके लिए.. आपके ऊपर लाल रंग बहुत खिलता है भाभी.. पिंकी के मन में भले ही सुमन के लिए कुछ भी हो मगर मुंह से चाशनी ही टपक रही थी..

सुमन साड़ी लेते हुए - बहनोई ज़ी नहीं आये?

पिंकी - आये है ना भाभी पर अपने एक दोस्त से मिलने कि ज़िद की औऱ निकल गए.. कहा सुबह आ जाएंगे..

गौतम - बुआ चाय.. माँ लो..

पिंकी औऱ सुमन ने चाय लेली औऱ गोतम भी चाय लेकर दिवार के सहारे पीठ करके खड़ा हो गया..

पिंकी - भाभी ये भईया के लिए.. इसे पहनकर बिलकुल थानेदार लगेंगे भईया..

सुमन - औऱ इस बेग में क्या है?, बड़ा भारी लग रहा है.

पिंकी - इसमें? इसमें मेरे ग़ुगु के लिए कपडे औऱ जूते है.. औऱ हाँ ये फ़ोन भी है मेरे ग़ुगु के लिए..

गौतम - क्या बात है बुआ iphone? औऱ वो भी लेटेस्ट मॉडल...

सुमन - ये तो बहुत महंगा लग रहा है पिंकी..

पिंकी - मेरे ग़ुगु से कुछ भी महंगा नहीं है भाभी.. आप तो जानती हो मैं ग़ुगु को अपने बच्चे की तरह ही प्यार करती हूँ.. मेरी तो कोई औलाद है नहीं है तो जो कुछ मेरे पास है वो मेरे ग़ुगु का ही तो हुआ..

सुमन - वो सब ठीक है पर.. एक बार तेरे भईया से तो बात कर लेती..

पिंकी - बात क्या करनी इसमें? आप तो दिल दुःखाने वाली बात कर रही हो भाभी..

गोतम - माँ.. रहने दो ना ये बातें.. वैसे बुआ मुझे गिफ्ट बहुत पसंद आये.. थैंक्स..

सुमन - अचानक आने का प्लान कैसे बना पिंकी?

पिंकी - भाभी उदयपुर घूमने का प्लान था इनका.. जयपुर से निकले तो सोचा आपसे मिलते चले..

सुमन - अच्छा किया.. तू आराम कर मैं खाना बनाती हूँ..

सुमन अपने कमरे से निकलकर गौतम के कमरे में आ जाती है औऱ बेड पर बैठे गौतम के पास बैठ जाती है..

गौतम - क्या हुआ माँ?

सुमन - कुछ नहीं.. तू बस दूर रहना इस चुड़ैल से.. कहीं कीमती तोहफ़े देकर तेरे साथ कुछ उल्टा सीधा ना करने लगे..

गौतम - माँ.. तुम भी ना.. कुछ भी सोचती हो. कल सुबह तो बुआ चली जायेगी..

सुमन गौतम के होंठों पर गौर करके देखती है..

सुमन - यहां आ जरा.. ये तेरे होंठ लाल क्यू है इतने औऱ ये... उस डायन ने चूमा है तुझे?

गौतम - माँ क्यू इतना नाटक कर रही हो.. बुआ ने बस एक छोटा सा किस ही किया था.. उसकी का निशान होगा..

सुमन - होंठों पर? मैं अच्छे से समझ रही हूँ उसकी चालाकियाँ.. मैं जानती हूँ वो डायन कैसी है.. अभी बता के आती हूँ उसे..

गौतम - माँ.. बुआ एक साल बाद आई है औऱ सिर्फ एक रात की बात है.. जाने दो ना.. एक छोटी सी किस ही तो है.. आओ आप भी कर लो..

सुमन - मुझे जब तुझे चूमना होगा मैं चुम लुंगी पर ऐसे लोगों पहले तुझे बचा लूँ..

गौतम - वैसे माँ पिंकी बुआ मुझे बहुत अच्छी लगती है.. मैं खुद भी उनसे नहीं बचना चाहता..

सुमन - चुप बदमाश.. कुछ भी कहता है..

गौतम - माँ आप भी ना.. अब जल्दी से कुछ बना दो.. बहुत भूख लगी है.. अगर कल की तरह चिकेन करी खानी है तो बताओ बाहर चलते है..

सुमन - चुप कर पागल लड़का.. मैं खाना बनाती हूँ..

सुमन रसोई में खाना बनाने चली जाती है औऱ पिंकी गौतम के पास आ जाती है..

पिंकी - केसा लगा गिफ्ट?

गौतम - बहुत टाइट था बुआ मन कर रहा है वापस खोलके देखु..

पिंकी - उस गिफ्ट की बात नहीं कर रही.. इसकी बात कर रही हूँ.. मेरे घोड़े.. बिलकुल बेशर्म हो गया है तू..

गौतम - ये भी अच्छा पर उसकी बात ही अलग थी..

पिंकी - सब्र कर अब उसके लिए, वरना तेरी माँ मेरी जान ले लेगी गला घोंट कर..

गौतम - जान तो मैं ही लूंगा वो भी बिस्तर में..

पिंकी - थोड़ा सा सब्र कर ग़ुगु.. रात में सब मिलेगा..

कुछ देर में जगमोहन भी घर आ जाता है औऱ गौतम सबके साथ खाना ख़ाकर अपने बेड पर आ जाता है जहाँ पिंकी भी उसके साथ सोती है वही सुमन जगमोहन के साथ लेटी हुई गौतम औऱ पिंकी के बीच कुछ गलत ना हो जाए सोचने लगती है..

सुमन को नींद नहीं आ रही थी वह चाहती थी कि एक बार जाकर गौतम को और पिंकी को देख ले. उसे यूं ही लेटे लेटे रात की 2 बज चुके थे. सुमन उठकर अपने कमरे से बाहर निकली और गौतम के कमरे के पास आ गई. उसने दरवाजे को हाथ लगा कर देखा तो दरवाजा अंदर से बंद था सुमन का दिल जोरो से धड़क रहा था और उसके मन में कुछ अजीब होने का या कुछ गलत होने की आशंका उत्पन्न हो रही थी. उसके मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे उसे लग रहा था कि कहीं पिंकी उसके बेटे गौतम के साथ कुछ गलत ना कर दे. उसका मन एक बार गेट खोलकर अंदर गौतम को देख लेने का था मगर गेट बंद था गेट के साथ खिड़कियां भी अच्छे से बंद की हुई थी जिससे यह साफ जाहिर था कि अंदर पिंकी और गौतम के बीच कुछ ना कुछ जरूर गलत हो रहा है.

सुमन के मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे और वह सोच रही थी कि वह कैसे अंदर गौतम को और पिंकी को देखे. वह खिड़की के पास आ गई और खिड़की के आसपास अंदर झांकने की जगह तलाश करने लगी. सुमन को हल्का सा एक छेद खिड़की में मिल गया है जो ऊपर था सुमन एक स्टूल अपने पैरों के नीचे रखा और उसे पर चढ़ के खिड़की के पास आ गई और खिड़की में बने उसे कछेद से अंदर झांकने लगी..

अंदर का नजारा देखकर उसके पैरों तले की जमीन है खिसक गई. सुमन ने देखा कि अंदर रात के 2:00 बजे इस वक्त पिंकी अपने घुटनों पर बैठकर गौतम के भीमकाय लड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप के जैसे चूस रही थी और गौतम सिगरेट के कश लेटे हुए पिंकी को अपना लोडा चुसवा रहा है.. दोनों बिल्कुल नग्न अवस्था में थे. दोनों के बीच ये व्यभिचार देखकर सुमन का दिल जोरो से धड़कने लगा और उसकी धड़कन तेज होकर रुकने के करीब आ चुकी थी. सुमन यह देख रही थी कि कैसे पिंकी उसके बेटे गौतम का लंड मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसे जा रही थी और गौतम को कामसुख देने के भरसक प्रयास कर रही थी.

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सुमन गुस्से से लाल पिली होकर आग बबूला थी पर जैसे ही उसकी नजर गौतम के लड पर गई तब सुमन के गले का तुक भी सूख गया वह यह सोचने लगी कि कैसे गौतम के पास इतना बड़ा और भीमकाय लड है. सुमन को जो गुस्सा पिंकी पर आ रहा था वह अब आश्चर्य में बदल गया वह एक टक अंदर झांकती हुई यही सोचने लगी कि गौतम के पास इतना बड़ा और आकर्षक लड कैसे आ गया. सुमन ने आज तक किसी के पास इतना बड़ा और उतना आकर्षक मोटा लैंड नहीं देखा था उसके मन में आ रहा था कि वह अंदर जाए और अच्छे से एक बार गौतम के उसे लड की जांच करें. गौतम का लड देखकर सुमन की चुत गीली हो चुकी थी और उसे यह महसूस हो रहा था कि उसकी जांघों से चुत का पानी बह रहा है और उसकी चुत गीली हो चुकी है. सुमन को जो पिंकी पर गुस्सा आ रहा था वह अब जलन और ईर्ष्या में बदल चुका था वह यह सोचकर जल रही थी कि कैसे पिंकी इतने बड़े और आकर्षक मोटे लंड का स्वाद ले रही है और वह खुद इतने सालों से कम अग्नि में जल जा रही है.

सुमन अपने पति की नामर्दानगी जानती थी और वह यह भी जानती थी कि अब जगमोहन उसकी प्यास नहीं गुजार सकता इसलिए वह प्यासी ही थी. सुमन कई सालों से अपने जिस्म की प्यास खरे मूली गाजर बेलन जैसे सामानों से बुझती थी.

सुमन का मन था कि वह दोनों का यह पनपता वह विचार रोक दे और दोनों को सही रास्ते पर लाकर सही रास्ता दिखाएं पर उसकी खुद की हालत ऐसी थी जैसे बिना पानी मछली की होती है वह दोनों को रोकने में असमर्थ थी वह खिड़की से उतर गई और रसोई में जाकर खीरा उठा लिया. सुमन खीर लेकर बाथरूम में चली गई और गौतम के लैंड को देखकर जो पानी उसकी चुत में भर गया था और जो काम इच्छा उसके मन में उतर आई थी वह उसे खरे से शांत करने लगी. धीरे-धीरे सुमन खीरा चुत में अंदर बाहर करने लगी और आहे भरते हुए गौतम के मोटे लंबे लंड को याद करके सोचने लगी कि काश वह उसे मिल पाता.

सुमन के मन में अपने बेटे गौतम के लिए जो प्रेम था और जो स्नेह भरा हुआ था वह अब काम के साथ घुलने लगा था. सुमन का पवित्र प्रेम अब मैला होने लगा था सुमन के मन में गौतम को लेकर बहुत से ख्याल आने लगे थे जो एक औरत को एक मर्द के बारे में तब आते हैं जब वह उसे पति के रूप में पाना चाहती हो या अपने प्रीतम के रूप में प्रेम करना चाहती हो.

थोड़ी देर बाद ही सुमन के चुत से पानी की धार बह निकली और सुमन को जो आनंद मिला वह उसकी कल्पना करके अभिभूत हो गई और उठ खड़ी हुई उसके मन में उसके मन में पश्चाताप का बोध भी उत्पन्न हुआ जिससे वह शर्मा रही थी और अपने आप पर गुस्सा कर रही थी कि वह कैसे अपने बेटे के लिए ऐसे ख्याल अपने मन में ला सकती है और कैसे वह उसे अपने पति या प्रेमी के रूप में सोच कर इस तरह का काम कर सकती है. सुमन जब झड़कर फ्री हो गई तब उसने एक बार फिर से स्टॉल पर चढ़कर खिड़की के अंदर झांकने का सोची और वैसा ही किया.

सुमन जब अंदर का नजारा देखा तब पाया कि अब तक गौतम ने पिंकी को अपने गोद में उठा रखा है और किसी खिलौने की तरह वह खड़ा हुआ पिंकी को गोद में उठाकर चोद रहा है. पिंकी भी आहे भर्ती हुई अपनी जवानी के पूरे मजे ले रही थी और गौतम का पूरा रस पी रही थी वह दोनों ऐसे लग रहे थे जैसे काम देवता और काम देवी के साक्षात अवतार हो. दोनों के बीच चल रहे इस असीम प्रेम को देखकर सुमन का दिल फिर से जलन की आग में तपने लगा और वह पिंकी को मन ही मन गालियां देने लगी और उसे बुरा भला कहने लगी. मगर इसी के साथ सुमन का पूरा ध्यान गौतम के ऊपर था जो अपनी हुआ पिंकी को अपनी गोद में उठा किसी खिलोने की तरह चोद रहा था और उसकी जवानी निचोड़ रहा था इस तरह से पिंकी को अपने गोद में उठा काम के सागर में डूबा हुआ था जैसे कि उसे इसका पूरा अनुभव हो.

सुमन सामने का नजारा देखते हुए कब अपनी जांघों के बीच उंगलियां फेरने लगी उसे भी पता नहीं चला वह साड़ी के अंदर हाथ डालकर अपनी जांघों के जोड़ पर ऐसे उंगलियां कर रही थी जैसे कोई दोस्त गांड में उंगली करता है. सुमन ने आगे देखा कि गौतम ने पिंकी को बिस्तर पर पटक दिया है और उसे घोड़ी बनाकर उसकी गांड के छेद पर अपना लंड लगाते हुए अंदर घुसने की कोशिश कर रहा है सुमन की चुत से पानी फिर बाहर निकाला और वह एक बार फिर झड़ गई इसी के साथ गौतम ने अपना लंड एक साथ आधा पिंकी की गांड में उतार दिया जिससे पिंकी की एक चीज निकल गई जो सुमन के कान में साफ सुनाई दी. सुमन इस तरह अपने बेटे को अपनी बुआ को चोदते देखकर एक बार फिर से झड़ चुकी थी और यह सोचने को मजबूर थी कि कैसे उसका बेटा उसकी बुआ के साथ संबंध बन सकता है और उसकी पिंकी भी उसके बेटे गौतम के साथ इस तरह का काम कर सकती है?

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सुमन का मन दोनों को रोकने का था मगर वह अब क्या कर सकती थी उसके मन में था कि वह दोनों को जाकर रोक दे और समझाएं कि यह सब गलत है मगर वह खुद ही इस जाल में अब फंस चुकी थी उसने खुद ने अभी-अभी अपने बेटे और अपनी ननद के बीच चल रहे इस व्यभिचार को देखकर अपनी चुत सहलाई थी और अपनी चुत का पानी निकला था सुमन चाहती थी कि यह सब बंद हो जाए मगर वह कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं थी. सुमन स्टूल से नीचे उतर गई और वापस अपने कमरे में आकर जगमोहन के पास बिस्तर पर लेट गई वह सोच रही थी कि कैसे गौतम इतना अनुभवी और इतना बेशर्म और इतना बदकार हो गया कि वह अपनी ही बुआ के साथ यह सब कर रहा है.

सुमन बिस्तर पर लेटी हुई यह सब सो रही थी और उसे नींद नहीं आ रही थी और उसे नींद आ भी कैसे सकती है जिसने अभी-अभी अपने बेटे को अपनी ननद के साथ सेक्स करते हुए देखा हो. सुमन का हाल बहुत बुरा था वह ना तो सो सकती थी ना हीं जाकर उनके सामने आ सकती थी वह बिस्तर पर लेटी हुई यही सब सो रही थी कि कैसे यह सब अचानक उसके घर में हो रहा है और हो सकता है?

सुमन को लेटे-लेटे सुबह के 5 बज चुके थे और अब तक उसे नींद नहीं आई थी उसने सोचा कि क्यों ना एक बार और वह गौतम के रूम मे झांक कर देखें कि आखिर वह दोनों सोए या नहीं. सुमन के मन में अभी बहुत से उल्टे सीधे और सही गलत ख्यालात चल रहे थे जिन्हें चाहकर भी अपने मन से उतर नहीं पा रही थी. उसके मन की जो हालत थी वह कोई जोगन ही समझ सकती थी. सुमन अपने कमरे से निकाल कर वापस उसी तरह गौतम के कमरे के बाहर स्टूल लगाकर उसकी खिड़की के ऊपर बने क्छेद से अंदर झांकने लगी और इस बार भी उसे वही सब देखने को मिला जो वह पहले देख चुकी थी मगर इस बार गौतम पिंकी को बाहों में भरे उसके होंठों पूरा स्वाद ले रहा था. इस बार भी सुमन की आंखें गौतम के लैंड पर ही टिक गई वह देखने लगी कि किसीके पास कैसे इतना बड़ा लैंड हो सकता है?

गौतम के लैंड को देखते ही सुमन की चुत एक बार फिर से पानी छोड़ने लगी और उसे एहसास हुआ कि उसकी जांघों के बीच की चुत से पानी बह रहा है उसकी चुत फिरसे पूरी तरह गीली है सुमन को अब पिंकी के साथ-साथ खुद पर भी गुस्सा आ रहा था कि वह कैसे अपने ही बेटे को देखकर कामुकता से भर सकती है. सुमन खिड़की से उतर गई और वापस बाथरूम में जाकर एक बार और अपनी भावनाओं में बहते हुए गौतम को याद करके गली पड़ी अपनी चुत में उंगलि करने लगी और गौतम के लैंड को याद करके कामइच्छा से भरने लगी.

सुमन के मन में अलग-अलग ख्याल चल रहे थे वह बिस्तर पर लेटे हुए यही सोच रही थी कि कैसे पिंकी और गौतम के बीच यह सब शुरू हो गया और मैं उन्हें रोक नहीं पाई मगर अब वह खुद भी इसी तरह के आनंद को अनुभव करना चाहती थी और चाहती थी कि अब कोई उसे भी इसी तरह का आनंद अनुभव कराये. सुमन को आज नींद नहीं आई थी वह सुबह जाकर घर के कामों में व्यस्त हो गई और जब गौतम का दरवाजा खुला तो वह उन्हें देखकर सामान्य ही व्यवहार करने लगी उसने यह तय किया कि जो कुछ अंदर उनके बीच हुआ वह ना तो उसके बारे में उन दोनों से कोई बात करेगी और ना ही उसके बारे में और ज्यादा सोचेगी. सुमन ने सोच लिया था की वह दोनों से सामान्य बर्ताव करेगी.

जगमोहन के जागने से पहले ही पिंकी अपने पति के आने पर उसके साथ गाड़ी में बैठकर उदयपुर के लिए रवाना हो गई और घर में अब सुमन जगमोहन और गौतम ही बाकी रह गए जगमोहन तो अभी भी नींद के आगोश में था. वही सुमन रसोई में चाय बनाने लगी थी उसके मन में रात की ही सारी बातें घूम रही थी और वह उसी के बारे में सोच जा रही थी मगर उसके दिल में हिम्मत नहीं थी कि वह इसके बारे में किसी से भी खुलकर कोई बात कर सके और वह गौतम को इसके बारे में समझा सके. सुमन भी ये नहीं चाहती थी कि गौतम और पिंकी एक दूसरे से इस तरह का रिश्ता रखें लेकिन जिस तरह से उसने रात को दोनों के चेहरे पर सुख देखा था और काम तृप्ति देखी थी उसे लग चुका था कि दोनों अब खुदपर नियंत्रण नहीं रख सकते है और वह अब इस रिश्ते को आगे भी जारी रखेंगे इसलिए सुमन ने दोनों को इसके बारे में कुछ भी ना बोलने का तय किया और जैसे सामान्य दिन चल रहे थे वैसे ही जीने का फैसला किया.

गौतम सुबह बाथरूम से वापस आया तो रसोई में जाकर सुमन को पीछे से पढ़ते हुए गाल पर एक चुंबन देते हुए कहने लगा..

गौतम - गुडमॉर्निंग माँ?

आज गौतम की पकड़ और चुम्बन ने सुमन को अजीब अहसास हो रहा था मगर सुमन ने भी सामान्य दिनों की तरह ही गौतम को देखकर पीछे मोड़ते हुए उसके गाल पर एक चुंबन करते हुए उसकी बात का जवाब दिया..

सुमन - गुडमॉर्निंग मार्निंग बेटा.. उठ गया.. ले चाय पिले..

गौतम चाय लेकर अंदर चला गया और पीते हुए उसी खिड़की पर आकर बाहर देखने लगा.. सुमन गौतम के पीछे-पीछे उसके रूप में आ गई और गौतम को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए बोली..

सुमन - बाहर क्या देखता है तू?

गौतम - कुछ नहीं माँ.. बस सुबह सुबह ये रास्ता कितना अच्छा लगता है सोचता हूँ.. आते जाते हुए लोगो को देखता हूँ बस..

सुमन अपने हाथ से एक कागज गौतम को देती हुई बोलती है

सुमन - ले.. जाते हुए तेरी बुआ दे गई थी.. कह रही आज शोरूम जाकर डिलेवरी लेने को..

गौतम - माँ पर इसकी क्या जरुरत है? आपने मना नहीं बुआ को?

सुमन - मैं क्यों मना करू? तू ही मना कर दे.. वैसे भी तुझे नई बाइक चाहिए थी.. तू ही बात कर ले अपनी बुआ से..

गौतम पिंकी को फ़ोन करके - बुआ यार.. बाइक की क्या जरुरत थी..

पिंकी - ज्यादा सवाल जवाब मतकर, चुपचाप जाकर शोरूम से ले आ. मेरी मर्ज़ी में कुछ भी दू तुझे.. भाभी के जितना ही हक़ है तुझपे मेरा.. समझा? अपना ख़याल रखना जल्दी वापस आकर मिलूंगी..

गौतम - ठीक है..

सुमन - ये लिखा हुआ है? रॉयल इंफील्ड..

गौतम - हाँ वही है..

सुमन - बहुत महँगी है?

गौतम - महँगी तो है..

सुमन - अच्छा क्या खायेगा मेरा ग़ुगु... बता मैं बना देती हूँ..

गौतम - पराठे ही खिला दो..

सुमन मुस्कुराते हुए - ठीक है.. ये गर्दन पर क्या हुआ तेरी? निशान केसा है?

गौतम के गले पर लव बाईट के निशान देखकर..

गौतम - वो माँ लगता मच्छर ने काट लिया..

सुमन - हम्म्म.. बहुत लम्बे दातो वाला था मच्छर.. पूरा लाल कर दिया.. चल मैं खाना बनाती हूँ तू नहा ले..



गौतम सुमन के कहे अनुसार नहाने के लिए चला जाता है और सुमन रसोई में जाकर उसके लिए खाना पकाने लगते हैं. जगमोहन जाग चुका होता है और नहा कर अपनी पुलिस की वर्दी पहनकर जाने को तैयार हो गया होता है..
 
अपडेट 9



शाम के 6 बजे का वक़्त था और सुमन बेड पर बैठी हुई गौतम के घर आने का इंतज़ार कर रही थी. कुछ पलो में ही गौतम घर के दरवाजे पर आ चूका था और अंदर आ रहा था..

सुमन - कब का गया हुआ है. इतनी देर कैसे लगी तुझे?

गौतम - माँ वो दोस्त मिल गए थे, उनके साथ बैठ गया.. बाइक कैसी है..

सुमन बाइक देखकर मुस्कुराते हुए - मेरे ग़ुगु जैसी.. चल अब जल्दी से कपडे बदल.. रूपा आंटी के चलना है..

गौतम - माँ यार मैं थक गया, आप चली जाओ ना..

सुमन - पूरा दिन दोस्तों के साथ आवारागर्दी करेगा तो थकेगा ही.. मैं कुछ नहीं जानती.. कपडे निकाले हुए है जाकर बदलो.. और चलो मेरे साथ.. कितने प्यार से बुलाया है उसने.. नहीं जाएंगे तो बुरा लगेगा..

गौतम - वही नीला पीला निकाला होगा आपने..

सुमन - अब जल्दी कर.. सुबह भी फ़ोन किया था रूपा ने..

गौतम - हम्म देख रहा हूँ.. दो दिन में जादू कर दिया आप पर.. थोड़ा बचके.. चुड़ैल लगती है मुझे तो वो रूपा आंटी..

सुमन - कुछ भी बोलता है बदमाश.. चल अब..

सुमन गौतम के साथ रूपा के घर जाने को निकल पडती है..

सुमन - ग़ुगु रास्ते में स्वीट का डब्बा भी लेना है याद से किसी दूकान पर बाइक रोक लेना..

गौतम - स्वीट का क्या करना है अब?

सुमन - पहली बार किसी के घर जा रहे है ऐसे खाली हाथ जाएंगे तो अच्छा नहीं लगेगा बेटू..

गौतम - जैसा आप बोलो माँ.. पर वैसे मुझे रूपा आंटी कुछ ख़ास पसंद नहीं आई..

सुमन - क्यों? इतनी अच्छी तो है वो.. तुझे क्यों पसंद नहीं आई?

गौतम - अब पहली मुलाक़ात में ही कोई किसीको अपने घर थोड़ी बुला लेटा है.. और डाइवोर्स भी हुआ है उनका.. मुझे तो कुछ अजीब लगती है..

सुमन हस्ते हुए - तू भी ना बिलकुल बुद्धू है.. मुझे तो रूपा दिल की साफ लगी.. कितनी प्यार से बात कर रही थी हमसे..

गौतम - हमसे कहाँ माँ? वो तो आपसे ही बात कर रही थी मुझपर तो ध्यान भी नहीं था आंटी का..

सुमन - तो इसलिए मेरे ग़ुगु को रूपा आंटी अजीब लग रही है.. चलो मैं उससे कहती हूँ तुझसे भी दिल खोल कर बात करें..

गौतम - मुझे नहीं करनी बात वात.. और मैं बस आपके कहने पर साथ आया हूँ.. वरना मेरा मूंड भी नहीं था आने का..

सुमन - अच्छा ज़ी..

स्वीट शॉप के आगे बाइक रोक कर..

गौतम - बताओ क्या लेना है?

सुमन पैसे देते हुए - कुछ भी जो तुझे पसंद हो.. ले..

गौतम दूकान से एक स्वीट का डब्बा लेकर वापस आ जाता है और दोनों फिर से रूपा के घर की और चल पड़ते है..

सुमन - ग़ुगु.. रास्ते से एक गुलदस्ता भी लेले?

गौतम - अब इस वक़्त शाम को गुलदस्ता कहा मिलेगा? और वैसे आप ज्यादा नहीं सोच रही रूपा आंटी के बारे में? देख रहा हूँ कल जब से वो आपसे मिली है आप पर जादू कर दिया है उन्होंने.. फ़ोन पर आपकी काफी बात होने लगी है.. मेरा तो ध्यान भी नहीं आपको.. कल से बात तक नहीं की ठीक से..

सुमन गौतम की गर्दन चूमकर - अच्छा ज़ी.. इसीलिए मेरे ग़ुगु को रूपा आंटी पसंद नहीं आ रही.. चलो इस बार माफ़ कर दो अपनी माँ को.. अब मैं अपने ग़ुगु का पूरा ख्याल रखूंगी..

गौतम - माँ वैसे एक बात पुछु? रूपा आंटी इतनी क्यों अच्छी लगी आपको?

सुमन - अच्छे लगने की कोई वजह थोड़ी होती है. वैसे भी तेरे अलावा मेरा है की कौन जिससे मैं अपने दिल की बात कर सकूँ? एक भी तो दोस्त नहीं है मेरा यहां.. पहली बार किसी ने इतने अपनेपन से और इतनी मीठी बातें की है.. लगता है जैसे रूपा मेरी बहुत पुरानी सहेली हो..

गौतम - अच्छा अच्छा बस बस.. मुझे और नहीं सुनना. मुझे तो अब डर लगने लगा है कहीं वो औरत मुझसे आपको छीनकर ना ले जाए..

सुमन हसते हुए - चल पागल कहीं का.. कभी ऐसा भी हो सकता है भला.. तू तो मेरी जान है.. तेरे लिए सो गुनाह भी माफ़ है..

ये कहते हुए सुमन गौतम के कंधे पर एक चुम्बन कर देती है और प्यार से उसका कन्धा सहलाती है..

गौतम - चलो आ गए आपकी सहेली के घर.. इसी बिल्डिंग की चौथी मंज़िल पर रहती है आपकी रूपा..

सुमन - जगह तो काफी अच्छी है.. बिल्डिंग भी सुन्दर है.. ग़ुगु..

गौतम - हाँ?

सुमन - मेरी साडी अच्छी लग रही है ना..

गौतम - साडी के साथ आप भी बहुत अच्छी लग रही हो अब चलो.. इतना शर्माओ मत.. आपके लिए लड़का देखने नहीं आये आपकी फ़्रेंड से मिलने आये है..

शहर के बीच बसी एक रिहायशी कॉलोनी में एक 11 मंज़िला ईमारत के नीचे गौतम अपनी बाइक लगा कर अपनी माँ सुमन का हाथ पकडे उसके साथ सीढ़ियों की तरफ आ जाता है और ऊपर चढ़ने लगता है.. सुमन सीढ़िया चढ़ते हुए अपने आप को देखे जा रही थी कभी अपना पल्लू ठीक करती कभी बाल कभी कुछ और जिसे देखकर गौतम मुस्कुराते हुए उसे छेड़ रहा था.. गौतम जब सुमन के साथ बिल्डिंग की चौथी मंज़िल पर पंहुचा तब सुमन ने गौतम का हाथ पकड़ कर रोक लिया और उसकी शर्ट और बाल ठीक करती हुई बोली..

सुमन - आंटी से कोई उल्टी सीधी बात मत कह बैठना.. समझा..

गौतम - ठीक है अब डोरबेल बजा दू?

सुमन - हम्म.. काफी महंगा फ्लेट लगता है..

गौतम बेल बजाकर सुमन से - सही औरत से दोस्ती की है अपने. एक दिन किडनेप करके सारा पैसा लूट लेने आंटी का..

सुमन - चल बदमाश.. कुछ भी बोलता है..

रूपा बेसब्री से सुमन और गौतम का इंतज़ार कर रही थी. उसने सुबह ही अपना सारा सामान इस फ्लेट में शिफ्ट कर लिया था और 2BHK के इस फ्लेट को अच्छे से सजा लिया था.. रूपा की आम घेरलु महिला की तरह ही साडी पहनें अपने ख़्वाब को पूरा करने के ख्यालों में खोई हुई थी और आज का सारा दिन उसने इसी तयारी में गुज़ार दिया था की सुमन और गौतम जब शाम को आएंगे तब वो क्या क्या करेगी.. जितनी बेसब्री सुमन को थी उससे कहीं ज्यादा रूपा को थी..

शाम के 7 बजे जैसे ही घर की डोरबेल बजी रूपा की साँसे तेज़ हो गई.. वो हॉल में सोफे पर से खड़ी हुई और दरवाजे की तरफ बढ़ गई.. एक लम्बी गहरी सांस दरवाजे के अंदर खड़ी रूपा ने ली तो उसकी तरह बाहर ख़डी सुमन ने भी वही किया.. रूपा ने दरवाजा खोलके सामने देखा तो सामने गौतम और रूपा थे.

आज संजोग से दोनों ने हूबहू एक ही रंग की एक जैसी साडी पहनी थी.. रूपा ने साडी को जयपुर के किसी शोरूम से ख़रीदा था जबकि सुमन को वो साडी उसकी ननद पिंकी ने जयपुर के उसी शोरूम से खरीद कर तोहफ़े में दिया था..

दरवाजा खुलने के बाद सुमन और रूपा एक दूसरे को बड़ी हैरानी और अचरज के भाव चेहरे पर लाकर देख रहे थे उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा था लेकिन गौतम ने दोनों को यूँ बूत बनकर खड़े देखा तो वो कदम बढाकर घर अंदर आता हुआ बोला..

गौतम - खुशबु तो बहुत अच्छी आ रही है क्या बनाया है?

गौतम की बात से सुमन और रूपा दोनों का ध्यान टूट गया और दोनों जमीन की तरफ देखकर अपने बाल कान के पीछे करने लगी.. रूप ने सुमन को घर के अंदर बुलाया और दरवाजा बंद करते हुए गौतम की बात का जवाब दिया.

रूपा - बिरयानी बनाई है.. दीदी बता रही थी तुम्हे बहुत पसंद है..

गौतम - मुझे तो बहुत पसंद है पर माँ को पसंद नहीं.. वो नॉनवेज नहीं खाती..

रूपा - ये भी उन्होंने मुझे बताया है.. तुम चिंता मत करो बिरयानी के अलावा भी बहुत कुछ है..

गौतम - ओह.. तो अब आप दोनों के बीच ये सब बातें भी होने लगी है.. बड़ी फ़ास्ट हो आप तो..

सुमन स्वीट का डब्बा देते हुए - रूपा ये..

रूपा - दीदी इसकी क्या जरुरत थी?

सुमन - जरुरत कैसे नहीं थी? पहली बार आई हूँ खाली थोड़े ही आती.

रूपा - शुक्रिया दीदी.. आप आइये ना बैठिये..

रूपा सुमन और गौतम को हॉल में रखे एक बड़े से सोफे पर बैठती है और खुद रसोई की तरफ चली जाती है.. सुमन हाल में बैठी हुई घर को देखने लगती है और सोचने लगती है कि काश उसके पास भी ऐसा ही एक अपना घर होता.. गौतम सुमन के मन की बात उसकी आंखों से पढ़ लेता है और उसके करीब आकर उसके कंधे पर हाथ रखता हुआ गाल चुमकर कहता है..

गौतम - क्या हुआ?

सुमन - कुछ नहीं.. घर बहुत अच्छा है..

गौतम - हम्म.. आपके लिए इससे अच्छा घर खरीदूँगा.. प्रॉमिस..

ये कहकर गौतम सुमन के गाल पर वापस एक प्यारी सी चुम्मी कर देता जो रूपा रसोई से देख रही होती है और सुमन और गौतम के इस माँ बेटे के प्यार से नाचाहते हुए भी जलन की आग में झूलस जाती है.. रूपा एक पल को सुमन की जगह अपने आप को सोचने लगती है और गौतम के मासूम चेहरे को चूमने का ख्वाब अपनी खुली आँखों से देखने लगती है तभी उसकी ख़्वाब भरी आँखे फ्रिज पर पडती है और वो अंदर से पानी की बोतल निकालकर दो ग्लास में पानी भरते हुए रसोई से बाहर आ जाती है.. रूपा सुमन और गौतम को पानी देते हुए..

रूपा - क्या हो रहा है माँ बेटे के बीच? हम्म?

गौतम - कुछ नहीं.. मैं तो अपनी माँ को बस किस्सी कर रहा था..

सुमन पानी लेते हुए - अरे तुम इसे छोडो, ये तो कुछ भी बोलता है.. और ऐसे ही मुझसे चिपका रहता है..

रूपा - अब अपनी माँ को गले नहीं लगाएगा तो किसे लगाएगा दीदी? इतना प्यारा बेटा दिया ऊपर वाले ने आपको.. काश मुझे भी दिया.. मैं भी अपने गले से लगाकर रखती..

गौतम उठकर रूपा के गले लगता हुआ - मैं हूँ ना.. आंटी..

रूपा गौतम की बात सुनकर मुस्कुराते हुए सुमन की तरफ देखती है. सुमन गौतम की इस हरकत पर शर्मिंदा होती हुई उसका हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लेती है और रूपा से कहती है..

सुमन - रूपा ये तो पागल है.. तुम इसका बुरा मत मानना..

रूपा मुस्कुराते हुए सुमन के पास बैठकर - बुरा किस बात का दीदी? मुझे तो अच्छा लगा ग़ुगु ने मुझे अपनी माँ कहकर मुझे गले लगाया.. मैं भी तो उसकी माँ और आपकी बहन जैसी हूँ..

सुमन मुस्कुराते हुए - तुम सही कह रही हो रूपा.. वैसे घर बहुत अच्छा है तुम्हारा.. महंगा लगता है काफी..

रूपा - हाँ दीदी वो डाइवोर्स लेते हुए मेरे पति ने मेरे नाम किया था.. और हर महीने खर्चा भी भेजते है..

सुमन - मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा रूपा.. तुम्हारे जैसी इतनी प्यारी और खूबसूरत बीवी को कोई कैसे छोड़ सकता है..

रूपा उदासी - ये बातें छोडो दीदी, आप बताओ.. जीजा को साथ क्यों नहीं लाई?

सुमन - रूपा वो इनकी ड्यूटी होती है ना.. सरकारी नोकर है घर पर भी बहुत कम ही रहते है.. सुबह ही किसी सरकारी काम से शहर से बाहर गए है 2-3 दिन बाद आएंगे..

रूपा - आप बहुत लकी हो दीदी.. इतना अच्छी फॅमिली है आपके पास.. एक प्यारा सा बेटा और पति.

सुमन - हम्म.. बेटा तो बहुत प्यारा है मेरी जान है.. पर पति..

रूपा - क्या दीदी? आप सुबह भी फ़ोन पर कुछ कहते कहते रुक गई थी..

सुमन - कुछ नहीं रूपा.. छोडो..

रूपा - दीदी अब मुझे अपना कह दिया है तो अपना मान भी लो.. अपना दुख मुझसे तो बाँट ही सकती हो..

सुमन - कुछ नहीं रूपा.. बस इतना समझ लो तुम्हारे पति तुम्हरे साथ नहीं है और मेरे होकर भी नहीं है..

रूपा - मतलब दीदी.. मैं समझी नहीं..

सुमन - रूपा.. कई सालों से मेरे और उनके बीच कुछ नहीं हुआ.. अब वो बस काम ही करते है.. उसका होना उसके ना होने जैसा ही है..

रूपा - दीदी.. अगर कुछ प्रॉब्लम है तो उसका इलाज़ भी हो सकता है..

सुमन उदासी से - छोडो इन बातों को रूपा.. अरे गौतम कहा गया?

रूपा - यही होगा मैं देखती हूँ.. दीदी वो रहा..

गौतम रसोई में रूपा और सुमन की बातों से बेखबर फ़ोन पर किसीसे बात करते हुए बिरयानी खाने में मशगूल था..

सुमन मुस्कुराते - भूख तो बर्दाश्त ही नहीं होती इसे..

रूपा भी मुस्कुराते हुए - बच्चा है दी.. बच्चे तो ऐसे ही होते है.. खाना खाते हुए कितना प्यारा लगता है आपका ग़ुगु.. बिलकुल आप पर गया है..

सुमन - अब तो यही है मेरे पास..

रूपा - दीदी आओ ना मेरे साथ..

सुमन - कहा?

रूपा - अपना कमरा दिखाती हूँ आपको..

रूपा सुमन का हाथ पकड़कर अपने साथ रूम में ले जाती जहाँ पीछे पीछे गौतम भी आ जाता है..

गौतम - माँ..

रूपा और सुमन एक साथ उसकी बात का जवाब देते हुए कहती है..

सुमन और रूपा - हाँ..

फिर दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा बैठती है और सुमन गौतम से कहती है..

सुमन - क्या हुआ ग़ुगु..

गौतम - मेरा एक फ्रेंड पास में रहता है मैं उससे मिलके आता हूँ..

सुमन - मगर ग़ुगु..

रूपा - जाने दो ना दीदी.. फ्रेंड से मिलकर अच्छा लगेगा ग़ुगु को..

सुमन - ठीक है मगर ज्यादा देर मत करना..

गौतम - ठीक है माँ..

गौतम सुमन और रूपा को वही रूम में छोड़कर घर से बाहर आ जाता है और कहीं जाने लगता है, वही रूपा अलमारी में से वोटका की बोतल निकाल कर सुमन से कहती है..

रूपा - दीदी एक-एक हल्का लेते है..

सुमन - नहीं मैं शराब नहीं पीती रूपा.. तुम पीती हो?

रूपा - अकेली औरत का दुख शराब के नशे से गहरा होता है दीदी.. एक छोटा सा ले लो कुछ नहीं होगा.. ग़ुगु भी बाहर गया है..

सुमन - पर रूपा मैंने कभी शराब नहीं पी..

रूपा - तो क्या हुआ दीदी.. आज पहली बार अपनी इस छोटी बहन का साथ देने के लिए पी लो.. 1-2 पेग में तो कुछ होता भी नहीं है..

सुमन - जैसा तुम कहो..

रूपा अपने और सुमन के लिए एक एक पेग बनाकर हाथ में लेले थी और सुमन से बात करते हुए पिने लगती है.. सुमन भी रूपा के साथ खुलकर बातें करने लगी थी जिससे दोनों के बीच अब झिझक ख़त्म सी होने लगती है और रूपा दूसरा पेग बनाकर वापस सुमन को देती हुई कहती है..

रूपा - दीदी.. एक बात पुछु?

सुमन बिना किसी ना नुकुर के पेग हाथ में ले लेती है और पीते हुए कहती है..

सुमन - पूछो ना.. अब कैसी झिझक..

रूपा - अगर जीजा ज़ी आपसे सालों से दूर है तो आपका मन नहीं किया कभी कहीं बार किसी और के साथ कुछ करने का..

सुमन - रूपा.. तुम भी औरत हो और जानती हो इस उम्र में हर औरत का कितना मन करता है की कोई उसे प्यार करें उसका ख्याल रखे.. बच्चों की तरह उसे संभाले.. मेरे मन में बहुत बार ऐसे ख्याल आ चुके है पर मैं नहीं चाहती मेरे ग़ुगु पर इसका असर पड़े.. इसलिए मैंने उन ख्यालों को मन में ही जला के राख़ कर दिया..

सुमन की बात के साथ साथ उसका दूसरा पेग भी ख़त्म हो गया और उसकी आँखों के साथ उसके बर्ताव और बदन में भी नशा घुलता हुआ रूपा ने देख लिया..

रूपा मुस्कुराते हुए सुमन को देखने लगी - सही कहा रही हो दीदी.. कई बार अपनों के लिए अपनी चाहत का गला घोंटना ही पड़ता है..

ये कहते हुए रूपा ने बेड के किनारे रखे दराज में से एक सिगरेट का पैकेट और लाइटर निकाल लिया और उसमे से एक सिगरेट अपने होंठों ओर लगा कर सुलगा ली और एक कश लेकर सिगरेट सुमन की तरफ बढ़ाते हुए कहा..

रूपा - लो.. दीदी.. अपने दुखो को आज धुए में उड़ा कर हवा कर दो..

सुमन ने नशे में रूपा से सिगरेट लेकर होने होंठों से लगा ली और एक कश लिया मगर पहली बार सिगरेट पिने के कारण सुमन के मुंह से खासी निकल गयी..

रूपा ने सुमन को सँभालते हुए उसे सिगरेट पिने का तरीका बताया और फिर सुमन अगले कश से सिगरेट ऐसे पिने लगी जैसे वो बहुत पहले से पीती आ रही हो..

सुमन - रूपा तुमने तलाक़ के बाद किसीसे कुछ..

रूपा हसते हुए - नहीं दीदी.. अब धोखा खाने की हिम्मत नहीं है..

सुमन ने सिगरेट का कश लेकर रूपा को पकड़ा दी और बोली - काश तुम मुझे पहले मिली होती रूपा..

रूपा कश लेकर - हाँ दीदी मुझे भी इस बात का दुख है.. काश मैं आपसे पहले मिली होती.. रूपा की साडी का पल्लू सरक चूका था जिससे उसके ब्लाउज और बोबे पर बना टट्टू थोड़ा सा रूपा को दिख गया..

सुमन - टट्टू बनवाया है तुमने?

रूपा अपना ब्लाउज लूज़ करके अपना टट्टू सुमन को दिखाती हुई - हाँ दीदी देखो.. केसा है? बहुत पहले बनवाया था..

सुमन - गौतम..

रूपा सिगरेट का आखिर कश लेकर सिगरेट बुझाते हुए - हाँ दीदी.. मेरे पति का नाम भी गौतम था.. उसको खुश करने के लिए ही बनवाया था..

सुमन नशे - रूपा सच मुझे तुम्हारे लिए दुख हो रहा है.. कितना पत्थर दिल होगा वो आदमी..

रूपा और सुमन बेड पर करीब करीब जुड़कर ही बैठे थे और रूपा समझ चुकी थी की अब सुमन को नशा हो चूका है.. रूपा सुमन के गले में हाथ डाल लेती है और उसका चेहरा अपनी तरफ करके कहती है..

रूपा - दीदी आप दिल की बहुत साफ हो.. इस लिए आपको किसी और का दुख भी चुबता है..

सुमन रूपा की बात सुनकर मुस्कुरा देती है और रूपा की आँखों में देखती है उसी पल रूपा सुमन के लबों को अपने लबों को क़ैद में गिरफ्तार कर चूमने लगती है जिससे सुमन सन्न रह जाती है और उसे समझ नहीं आता की वो अब क्या करें? नशे में उसे रूपा की इस हरकत पर कुछ भी करने का होश नहीं था.. मगर रूपा ने इस प्यार से सुमन के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूमना शुरू कर दिया था की सुमन भी अपने आप को उस प्यार में बहकने से नहीं रोक पाई..

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रूपा ने चूमते हुए सुमन के पुरे मुंह का स्वाद लेकर उसे अपना स्वाद चखा दिया था सुमन को भी इसमें असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी उसे नहीं लगा था की किसी औरत के साथ वो कभी कुछ ऐसा भी करेगी और उसे उतना सुख मिलेगा.. कुछ ही पलो के बाद सुमन ने भी रूपा का साथ निभाना शुरू कर दिया और भर भरके रूपा के लबों को चूमने लगी जिससे रूपा सुमन की मानोभावना को समझ गई और मन ही मन में मुस्कुराते हुए इस पल का मज़ा लेने लगी..

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रूपा ने चूमते हुए सुमन के कपडे उतरना शुरू कर दिया उसकी साडी के बाद उसके ब्लाउज के बटन भी खोल दिए सुमन ने रूपा को मना नहीं किया और खुद भी उसके साथ काम के सागर में गोते खाने लगी. रूपा ने सुमन को चूमते हुए उसके गर्दन और उसके गाल से लेकर उसके पूरे चेहरे को चूमते हुए उसके बूब्स को अपने हाथों से मसलते हुए दबाने लगी जिसे सुमन पुरी जोश में आ गई और वह भी रूपा के अंगों के साथ खेलने लगी. काफी लंबे समय से चल रहे इस चुम्बन को रूपा ने तोड़ दिया और अपने पर्स को उठाकर उसमें से एक गोली निकलते हुए अपने मुंह में रख ली और उसे गोली को अपने मुंह में रखकर वापस सुमन को अपने होठों से लगा लिया और उसके होंठ चूसने लगी दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते हुए दोनों एक दूसरे को चूमते हुए उसे गोली को चाटने और चूसने लगे धीरे-धीरे दोनों ने उसे गोली को चाट चाटकर आधा-आधा अपने अंदर उसका रस ले लिया जिससे उनके काम की प्यास और बढ़ गई और दोनों एक दूसरे में समा जाने को आतुर हो गई.

रूपा ने इस बार सुमन को देरी ना करते हुए पूरा नंगा कर लिया और बिस्तर पर लेटा दिया और खुद भी उसके ऊपर आ गई अपने कपड़े उतार कर रूपा ने नीचे नंगी पड़ी सुमन को वापस अपने आगोश में ले लिया और चूमने लगी उसकी गर्दन पर हल्के हल्के दांतों से निशान छोड़ने लगी जिसमें सुमन को अकाल्पनीय आनंद की प्राप्ति होने लगी और वह रूपा को अपनी बाहों में भरकर खुद भी ऐसा ही करने लगी जिससे रूपा को सुमन की मन की हालत पता चल गई और वह सुमन को अपने बाहों में भरकर और प्यार करने लगी.

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रूपा ने चुंबन के बाद में सुमन की छाती को अपना शिकार बना लिया और अपने दांतों से सुमन के निपल्स को काटते हुए चूसने लगी और मसलने लगी सुमन आहे भर्ती हुई नशे में मस्त होकर रूपा को अपने और खींचने लगी और उसे भर भर के अपने बूब्स चूसने लगी. सुमन रूपा को अपनी और खींच रही थी और उसे अपने अंदर समा लेना चाहती थी वह चाहती थी कि आज रूपा उसे संतुष्ट कर दे नशे के मारे सुमन क्या कर रही थी उसे खुद भी नहीं पता था मगर जो वह कर रही थी उसे उसे बहुत आनंद मिल रहा था और वह सोच रही थी कि काश यह पल यही थम जाए.

सुमन ने पिछली रात जो गौतम और पिंकी को एक साथ देखा था उसके बाद से वह कामुक हो गई थी और उसी का असर अब तक उसके अंदर बाकी था जिससे उसे रूपा के साथ बहकने में मदद मिली थी. वह अपने काम की तृप्ति रूपा के द्वारा आज कर लेना चाहती थी सुमन रूपा को किसी भी चीज के लिए नहीं रोक रही थी और दोनों एक दूसरे को इस तरह से अपने आगोश में लिए हुए चुंम और चाट रहे थे एक दूसरे के उरोजो को दबा के कस रहे थे जैसे दोनों जन्मो के प्यासे हो और एक दूसरे के लिए बने हो. कल रात से जो आग सुमन के अंदर जल रही थी उसे रूपा ने और बढ़ा दिया था और दोनों उस आग में झुलस चुके थे रूपा ने सुमन के नीचे आते हुए अपने होंठ उसकी टांगों के जोड़ पर लगा दिया और एक बार सुमन को देखकर मुस्कुराती हुई उसके नारीत्व को अपने मुख से चूमने लगी..

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रूपा के होंठ जैसे ही सुमन के नारीत्व/चुत पर लगे सुमन के मुंह से बाहर निकल पड़ी और वह बिस्तर पर चादर को अपनी दोनों हथेलियां में पकड़ कर मुट्ठी बंद करते हुए सिसकियाँ लेने लगी. रूपा सुमन को देखकर मुस्कुराते हुए बड़े मजे के साथ उसके जांघों के जोड़ पर अपने मुंह को लगाए हुए उसकी चुत को चाट रही थी. रूपा की कामकला से सुमन कुछ ही देर में अपने झरने को बहा बैठी और झड़कर फारीक हो गइ. उसके बाद रूपा ने फिर से सुमन को अपने आगोश में लेकर चुमना शुरू कर दिया और इस बार वापस सुमन रूपा को चूमने लगी. इस बार सुमन ने रूपा के नारीत्व पर प्रहार किया और उसकी चुत को अपने होठों में भरने का प्रयास करने लगी. सुमन के ऐसा करने पर रूपा ने सुमन के सर पर हाथ रखकर उसका सर अपने चुत पर दबा लिया. और उसे अपनी चुत चूसाने का आनंद भोगने लगे. कुछ ही देर बाद रूप ने भी अपने नारीत्व से झरना बहा दिया और वह भी झाड़कर साफ हो गई.

इतना होने के बाद जब दोनों ने एक दूसरे को देखा तो सुमन शर्म से आंख चुराते हुए मुस्कुराने लगी और हंसते हुए रूपा बिस्तर से उठ खड़ी हुई और सुमन को देखने लगी. सुमन भी रूपा को देखे जा रही थी. दोनों की आंखों ही आंखों में जो बात हो रही थी वह कहना लफ्जों में मुश्किल है. दोनों पर गोली का असर था असर था नशे का खुमार.. रूपा ने मुस्कुराते हुए यह मोन तोड़कर सुमन से अगला पैक बनाने के लिए पूछा तो सुमन ने हां में सर हिला दिया और फिर रूप ने वोडका के और दो पैक बनाएं और एक समान को देखकर एक खुद पीने लगी. दोनों के जिस्म पर अभी एक भी कपड़ा नहीं था और दोनों ने अब शर्म उतार दी थी दोनों के बीच की दोस्ती जो कल शुरू हुई थी वह आज बिस्तर पर और प्रगाड़ हो चुकी थी दोनों को एक दूसरे के साथ इतना आनंद मिला जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी सुमन तो जैसे रूपा की दीवानी हो चुकी थी वह रूपा में अपनी सहेली और अपने गम की साथी दोनों तलाश करने लगी थी.

रूपा सिगरेट जलाते हुए एक काश लेकर सिगरेट को सुमन की तरफ बढ़ा दिया जिसे इस बार सुमन ने बिना किसी नानुकुर के अपने उंगलियों में थाम लिया और अपने होठों से लगाकर एक लम्बा कश लेकर रुपा को देखने लगी. रूपा और सुमन दोनों पर ही गोली का असर था. और दोनों के अंदर की आग भड़क रही थी सुमन तो अपने अंदर इतनी गर्मी महसूस कर रही थी जिसको उसे आज तक एहसास नहीं हुआ था. सिगरेट के दो-तीन कश लेकर सुमन ने सिगरेट वापस रूपा को दे दी और अपना पैक खत्म करते हुए बिस्तर से खड़ी हो गई रूपा के करीब आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया. रूप ने सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट बुझा दी और फिर सुमन को अपने होठों का जाम पिलाकर वापस उसे बिस्तर पर पटक दिया और उसकी आंखों में देखने लगी. रूपा को सुमन की आंखों में काम की प्यास साफ दिखाई दे रही थी..

रूपा सुमन की चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी जिससे घर्शन पैदा हो रहा था और दोनों को ही आंनद आ रहा था जिससे दोनों आँख बंद करके महसूस कर रही थी.

कुछ देर के बाद रूपा ने सुमन को वहीं छोड़ दिया और बिस्तर से उठकर उसे देखने लगी. सुमन इस तरह बीच में ही रूपा को उठा देखकर हैरानी से उसे अपने पास बुलाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया मगर रूपा उसे देखती हुई खड़ी ही रही.. दोनों की नजरों में काम की प्यास थी मगर सुमन इस बात को अपने होठों से नहीं कह सकती थी. रूपा ने सुमन की प्यास को पढ़ लिया था और अब वह बिस्तर से उठकर दूर जाते हुए एक अलमारी खोलकर ऊपर से कुछ सामान उतारने लगी.

रूपा को देखकर सुमन की आंखें फटी की फटी रह गई और वह एकटक रूपा को देखने लगी रूपा अलमारी से समान उतार कर अपने बदन पर कुछ पहने लगी जिसे देखकर सुमन हैरान थी और काम से भरा होने के कारण उसकी आंखों में शर्म जो होनी चाहिए थी वह कहीं गुम थी. रूपा ने एक सेक्स टॉय अपने कमर पर बांध लिया था और अब वह बिस्तर पर आ चुकी थी. रूपा ने चूमते हुए सुमन को वापस वैसे ही लेटा दिया और सेक्स टॉय को सुमन की चुत पर रगड़ने लगी. सुमन को इसमें सुख मिल रहा था वह रूपा को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए चूम रही थी और अपने पैर को फेलाकर उसे सेक्स टॉय को अपनी चुत पर रगड़वा रही थी. रूप ने ज्यादा देर ना करते हुए सुमन की गीली हो चुकी चुत पर उसे सेक्स टॉय को सेट किया और धक्का देते हुए उसे अंदर घुसने लगी जिसमें सुमन को दर्द होने लगा और वह सिसकियाँ लेती हुई तिल मिलाकर रुपा से लिपट गई.

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रूपा ने अपना काम जारी रखा और सुमन की चुत में सेक्स टॉय घुसने का प्रयास करती रही. कुछ पलों में रूपा को अपने काम में सफलता मिल गई और आधे से ज्यादा सेक्स टॉय सुमन की चुत में घुस चुका था. सुमन कई सालों बाद इस तरह अपनी चुत में लंड जैसा सेक्स टॉय लेकर आहे भरती हुई सुख भोग रही थी.. धीरे-धीरे रूपा ने सुमन को सेक्स टॉय की मदद से चोदना शुरू कर दिया. सुमन सिसकियाँ लेती हुई रूपा के नीचे लेटकर सेक्स टॉय की मदद से चुदवाती हुई मजे लेने लगी. उसे आज कई सालों बाद में इस तरह का मजा मिल रहा था सुमन आज अपनी प्यास बुझा लेना चाहती थी.

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कुछ ही देर के बाद में रूपा ने सुमन को घोड़ी बना लिया और घोड़ी बनाकर उसकी चुत में सेक्स टॉय को पेलते हुए चोदने लगी.. रूपा कैसा करने पर सुमन की हालत ऐसी थी जैसे कई सालों बाद चुद रही किसी लड़की की होती है उसे जो मजा मिल रहा था वह खुद भी बयान नहीं कर सकती थी और रूपा चाहती भी यही थी कि वह सुमन के साथ इतना गहरा रिश्ता कायम कर ले कि उसे और गौतम को फिर सुमन की चिंता ना करनी पड़े. इस वक्त जिस नशे और काम सुख के अंदर सुमन डूबी हुई थी उसे गौतम का बिल्कुल भी ख्याल नहीं था वह यह भी भूल गई थी कि गौतम वापस भी आ सकता है वह तो बस रूपा के माध्यम से अपनी प्यास बुझा देना चाहती थी और वैसा ही कर भी रही थी वह अब खुलकर रूपा का साथ देने लगी थी और खुद भी रूपा को अपनी प्यास बुझाने के लिए बोल रही थी.

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दोनों ने काम के अभीभूत होकर एक दूसरे को अपना लिया था और एक दूसरे की जरूरत समझते हुए एक दूसरे को अपना सहारा बना लिया था.

दोनों का यह संभोग रात भर चलता रहा और दोनों ही रात भर एक दूसरे को बिस्तर में हारने का प्रयास करती रहे जबकि इस प्रयास में दोनों को ही सुख मिल रहा था सुमन तो इस तरह इस सुख में डूबी हुई थी कि उसे याद ही नहीं रहा कि कब रात के 3:00 चुके थे. कई बार झड़ने और नशे के साथ गोली का असर कम होने के बाद जब सुमन की काम की भूख कम हुई तब उसे गौतम का ख्याल आया और वह तुरंत अपने कपड़े पहन कर रूपा से गौतम के बारे में बात करने लगी जिसपर पर रूपा ने मुस्कुराते हुए उसके लबों को चूम कर उसे शांत होने को कहा और फिर गौतम को फोन करने लगी. गौतम का फोन करने पर कमरे में गौतम के फोन के रिंग की आवाज आने लगी जिससे वह दोनों समझ गई कि गौतम वापस आ चुका है सुमन ने कपड़े पहनकर कमरे से बाहर देखा तो पाया कि गौतम बाहर सोफे पर ही लेटा हुआ सो रहा था और उसका फोन सोफे के सामने पड़ी टेबल पर रखा हुआ बज रहा था जिससे सुमन की जान में जान आई और वह रूप को देख कर मुस्कुराती हुई वापस उसके गले से लिपट गई.

रूपा - दीदी आप भी फिज़ूल चिंता कर रही थी.. देखो कितने प्यार से ग़ुगु सो रहा है.. कितना प्यारा लग रहा है सोते हुए.

सुमन - रूपा दीदी नहीं.. मुझे सुमन ही कहकर पुकारो.. और आप वाप छोडो गैरों जैसा लगता है तुम कह कर बुलाओ रूपा..

रूपा - जैसा तुम बोलो.. अब इधर आओ.. मुझे थोड़ा सा प्यार और करना है तुमको..

सुमन - सच में रूपा, तुम कोई जादूगरनी हो.. दो दिनों में ऐसा असर कर दिया है लगता है पिछले जन्म की सखी हो..

रूपा - तुम हो ही इतनी अच्छी दीदी.. तुम्हे देखते है मन बहकने लगता है.. मन करता है तुम्हे अपनी बाहों में लेकर प्यार करती रहु..

सुमन - तो करो ना रूपा.. मैं तो कब से प्यार की प्यासी हूँ.. मैं तुम्हे रोकूंगी नहीं.. और वापस दीदी?

रूपा - माफ़ करना.. पर मैं तुम्हे दीदी ही बुलाऊंगी..

सुमन - अच्छा ठीक है मेरी रूपा..

दोनों पर गोली का असर अभी था और दोनों अभी काम की आग में सुलग रही थी कई बार झड़ने के बाद भी बची हुई इस हवास को पूरा करने के लिए रूप ने सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे बिस्तर पर पटक लिया और उसके ऊपर चढ़ते हुए वापस उसकी गर्दन को चूमने लगी और सेक्स स्टोरी की मदद से वापस उसे चोदने लगी. सुमन मैं भी रूपा के बाद उसे सेक्स टॉय से चोदने का प्रयास किया मगर गौतम का लंड ले चुकी रूपा को 6 इंच के उस सेक्स टॉय से चुदकर कहा शांति मिलती? फिर भी वो सुमन की खातिर ऐसा कर रही थी और पुरे मज़े दे रही थी..

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सुबह की पहली किरण निकल चुकी थी और रूपा अभी भी सुमन के साथ बिस्तर में लिपटी हुई थी.. इस बार रूपा नीचे और सुमन उसके ऊपर थी और बड़े चाव से रूपा की मुंह का रस पी रही थी.. सुमन एक रात में ही रूपा के साथ इतनी खुल चुकी थी की उसे अब रूपा के साथ किसी भी बात को कहने या सुनने में कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही थी.. दोनों में प्रेम भी बढ़ चूका था और सुमन तो रूपा से पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी..

सुमन ने कुछ देर बाद चुम्बन तोड़ दिया और रूपा से बोली - सुबह हो गई रूपा.. अब मुझे चलना चाहिए..

रूपा - दीदी .. थोड़ी देर और नहीं ठहर सकती तुमको?

सुमन मुस्कुराते हुए - रूपा मेरा मन तो बहुत है रुकने का पर अगर ग़ुगु ने हमें ऐसी हालात में देख लिया तो ना जाने क्या सोचेगा..

रूपा - अच्छा ठीक है.. चलो नहा लेते है..

सुमन - हम्म.. तुम नहा लो मैं तुम्हारे बाद नहा लुंगी..

रूपा - बाद में नहीं दीदी.. मेरे साथ नहाना पड़ेगा.. चलो..

सुमन मुस्कुराते हुए - अच्छा ज़ी.. चलो तो फिर.. एक साथ नहाते है..

रूपा सुमन को बाथरूम में ले जाती है और अपने हाथ से नहलाने लती हैं सुमन भी अपने अंग पर रूपा के हाथ का स्पर्श पा कर उत्तेजित होने लगती है और बदले में रूपा के बदन को मसलने और चूमने लगती हैं. रूपा एक बार फिर से सुमन को हल्का करने में कामयाब रहती है और दोनों कुछ देर बाद नहा कर बाथरूम से निकल जाते हैं.

ग़ुगु.. ग़ुगु.. यहां क्यों सो गए? अंदर सो जाते ना.. रूपा ने ग़ुगु को जगाते हुए कहा..

ग़ुगु अपनी आँखे मलता हुआ उठा तो उसने देखा की उसके सामने रूपा बैठी है और उसकी माँ सुमन रसोई में चाय बना रही है..

वो रात को बहुत नींद आ रही थी तो बस लेटते ही नींद आ गई..

सुमन चाय लाते हुए.. अच्छा ज़ी नींद आ गई थी? कबतक बाहर था तू.. कहा था ना जल्दी आ जाना. फिर भी देर हो गई थी..

गौतम चाय लेते हुए - माँ वो खाना ज्यादा हो गया था इसलिए कब नींद आई पता ही नहीं चला.. रात को बिरयानी बहुत अच्छी मनाई थी आंटी ने..

रूपा - ऐसी बात है तो मैं वापस गर्म कर देती हूँ तेरे लिए..

सुमन हस्ते हुए गौतम के बाल सहला कर - मेरा भुक्कड़ बेटा..

गौतम - आप दोनों ने रात भर क्या क्या बातें की?

रूपा मुस्कुराते हुए - हमने क्या क्या किया है वो तुझे क्यों बताये? वो तो हमारा सीक्रेट है..

सुमन - हाँ.. तू किस दोस्त के पास गया था तूने बताया हमें? फिर हम क्यों बताये?

गौतम - अच्छा ठीक है मत बताओ मुझे जानने का शोक भी नहीं है.. मैं तो बस वैसे ही पूछ रहा था..

कहते हुए गौतम वही का कप टेबल पर रख कर बाथरूम चला जाता है और सुमन खाली कप लेकर रसोई की तरफ. सुमन के पीछे पीछे रूपा भी रसोई में चली जाती है और उसे कसके अपनी बाहों में भरती हुई वापस चूमने लगती है..

सुमन - रूपा ग़ुगु यही है.. देख लेगा तो जवाब देते नहीं बनेगा..

रूपा - आप हो ही इतनी प्यारी दीदी... मुझसे रहा ही नहीं गया..

गौतम के आने की आहट से दोनों एकदूसरे से थोड़ा दूर खड़े हो जाते है..

गौतम - मुझे वापस भूक लगी है.. आपने बिरयानी गर्म नहीं की अभी तक?

रूपा - अरे बाबा अभी गर्म कर देती हूँ..

सुमन - तुम्हे तो जरुरी फ़ोन करना था ना रूपा.. तुम पहले वो कर लो मैं कर देती हूँ गर्म..

रूपा - ठीक है दीदी.. मैं आती हूँ..

गौतम - वाह क्या बात है आपको नॉनवेज देखना भी पसंद नहीं था अब ये क्या है?

सुमन - मेरे ग़ुगु के लिए कुछ भी चलेगा..

गौतम - अच्छा तो फिर थोड़ा सा खाना भी पड़ेगा अपने ग़ुगु के साथ.. बोलो खाओगी?

सुमन - छी..

गौतम - छी.. क्या? रहने दो फिर चलते है मुझे भी नहीं खाना..

सुमन बिरयानी प्लेट पर ड़ालते हुए - लो अब नाटक मत करो..

गौतम - केसा नाटक? आप मेरे साथ खाओगी तभी मैं खाऊंगा वरना वापस रख दो इसे...

सुमन - अच्छा बाबा एक चम्मच खिला दे ला..

गौतम - बिरयानी चम्मच से नहीं खाते माँ.. लो मुंह खोलो.. आ करो..

सुमन - उम्म्म्म...

गौतम - कैसी लगी?

सुमन मुंह से छोटी सी हड्डी निकलती हुई - ये क्यों खिलाया..

गौतम - माँ आप भी ना अब बिरयानी में पीस तो अता है.. लो एक और खाओ..

सुमन - आराम से ग़ुगु... तुमको भी खाओ अब..

गौतम - खा रहा हूँ ना.. कैसी लगी आपको? अच्छी है ना?

सुमन - हाँ.. बहुत अच्छी है..

कुछ देर के बाद सुमन गौतम को लेकर रूपा से विदा लेती हुई उसके घर से निकल जाती है और अपने घर आ जाती है.

 
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