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मैं और सुप्रिया दोनों hi अपने यौवन के मौज में मस्त थे , दो जवान नंगे जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए आनंद उठा रहे थे , तभी मैंने पाया की सुप्रिया मुस्कुराते हुए कही और hi देख रही है ..
मैंने उसकी नजर का पीछा किया तो पाया की झोपड़ी के अंदर खड़ा पुष्पक हमें देख रहा है , उसकी नजर बस सुप्रिया के जिस्म में hi जमी हुई थी …..
“तुम यंहा क्या कर रहे हो “
मैं थोड़ा गुस्से में बोलै
“तो कहा जाऊ , ये मेरी hi झोपड़ी है , रात हो चुकी है और बहार जंगली जानवर घूमते है “
उसकी बात सुनकर मुझे कुछ बोलते नहीं बना लेकिन मैंने देखा की झोपड़ी का दरवाजा अभी भी खुला हुआ था
“दरवाजा तो खुला हुआ है फिर जंगली जानवर अंदर नहीं आ जायेंगे ??”
वो कुछ सोच पता उससे पहले hi मेरी बात सच हो गयी , किसी भरी पैरो की आवाज हमें आने लगी देखा तो सामने बब्बर शेर खड़ा था और अंदर hi झांक रहा था ..
“आआ” पुष्पक की नजर जैसे hi उसपर पड़ी वो दौड़ता हुआ हमारे पीछे आ गया , सुप्रिया जल्दी से मुझसे अलग होकर पास रखे एक लकड़ी को उठा चुकी थी और हमले वाली पोजीशन बना कर कड़ी हो गयी थी ..
मैंने जीवन में ऐसा शेर पहली बार देखा था , हमारे यंहा हमने शेर बस ज़ू में देखे थे जो की थोड़े मरे हुए टाइप के होते थे , जंगल में घूमते हुए शेर की बात hi अलग थी , उसकी चमक और शरीर की बनावट hi ऐसी थी की देखकर मुझे भी पसीने आ गए ..
“ये कहा से आ गया ..??”
मैंने दबे हुए आवाज में पुष्पक से कहा
“मुझे क्या पता , आज सुप्रिया को देखने के चक्कर में alaw(aag) भी नहीं जलाया था , शायद घूमते फिरते या सूंघते हुए यंहा पहुंच गया होगा ..”
“तो इसे यंहा से भगाओ न “
“शिकारी तो तुम हो तुम भगव , मैं तो एक सामान्य सा नौकर हु वो भी वैद्य का “
हम दोनों की ये हालत देखकर सुप्रिया के चेहरे में थोड़ा गुस्सा आ गया
“चुप रहो तुम दोनों , और तुम कैसे शिकारी हो जो सहम कर बैठा है , खड़े हो जाओ और मेरे साथ इसका मुकाबला करो “
वो तो ऐसे बोल रही थी जैसे हम दोनों मिलकर इस शेर को मार hi डालेंगे
“मैं शिकारी हु लेकिन मैंने जीवन में कभी किसी जानवर का शिकार नहीं किया है , मैं लोगो से जरूर लड़ा हु लेकिन शेर से तो क्या मैं आज तक किसी कुत्ते से भी नहीं लड़ा हु “
मेरी बात सुनकर सुप्रिया हसने लगी
“तो आज लड़ लो , वंहा शेर नहीं मिलते क्या ??”
“मिलते है न लेकिन ज़ू में “
“वो क्या होता है “
“अरे चिड़िया घर “
“वो क्या होता है ??” इस बार दोनों hi एक साथ बोल उठे , अब इस समय इन्हे कैसे समझाता की चिड़िया घर क्या होता है ,
मैंने बस आसपास देखा मेरे लिए कोई भी हथियार वंहा मौजूद नहीं था ..
“बहार एक बहला है “ पुष्पक बोल उठा
“सेल अभी बहार जाऊ क्या , दरवाजे में तो ये खड़ा है “ मैं थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै
“ये सेल क्या होता है ??” उसने बड़े hi मासूमियत से मुझसे पूछा लेकिन मैं चुप hi रहा और ध्यान शेर पर लगा दिया ..
शेर जैसे हमारी बातो का मजा ले रहा था , बड़े hi आराम से हमें निहार रहा था उसे कोई भी जल्दबाजी नहीं थी चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे मुस्कुरा रहा हो , उसने एक जम्हाई ली जैसे जनता हो की ये पीद्दे मेरा क्या बिगड़ लेंगे और आज उसे एक नहीं बल्कि 3 हट्टे काटते लोगो का तजा मांस खाने को मिलने वाला था ..
वो बड़े hi शान से अंदर की और बढ़ा लेकिन …..
सुप्रिया ने अपने हाथ में रखे डंडे से उसपर झपट्टा मार दिया , उसने पूरी ताकत लगाई थी और डंडा घुमा कर शेर के चेहरे पर hi निशाना लगाया था लेकिन वो जैसे शेर के लिए बस कोई फूल से वार हो वो जैसे हंसा हो और उसने सर झटका दिया और जोरो की दहाड़ लगा दी सुप्रिया का तो पता नहीं लेकिन मैं और पुष्पक जरूर काँप गए थे ..
“उठो और कुछ करो वर्ण ये हमें खा जायेगा सब मिलकर लाडे तो शायद जान बच जाये “
सुप्रिया हलके से फुसफुसाई
मरता क्या न करता की तर्ज पर मैं और पुष्पक खड़े हो चुके थे
“तुम शिकारी हो तो तुम्हारे पास ताकत भी बहुत है , मेरी योनि को देखो सहलाओ और खुद का लिंग खड़ा करते हुए अपने अंदर के शिकारी को जगाओ “
सुप्रिया ने साफ साफ कहा था , मुझे याद आया की मेरे अंदर उत्तेजना आने से मेरी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है , लेकिन अभी अभी घंटो तक एक चुड़ैल से किये सम्भोग के बाद मन तृप्त हो गया था कोई उत्तेजना बाकि नहीं रह गयी थी लेकिन मैंने फिर भी कोशिस की और सुप्रिया को पास जाकर उसके योनि को सहलाने लगा ..
कुछ hi सेकंड का वक़्त लगा था मेरे लिंग को फिर से उत्तेजित होने में … मैं इतना उत्तेजित हो गया था की पीछे से hi सुप्रिया के योनि में अपना लिंग घुसाने लगा
“अभी लड़ने के लिए उत्तेजित होना था सम्भोग के लिए नहीं , कैसे शिकारी हो तुम तुम्हे किसी ने इतना भी नहीं शिखाया ..”
वो मुझे झड़ते हुए बोली लेकिन तब तक मैं दो तीन धक्के लगा चूका था ..
इतने में शेर फिर से दहाड़ा और हमारे उप्पेर hi आक्रमण कर दिया ..
लेकिन इस बार मैं जोश में था मैंने शेर के खुले हुए मुँह को पकड़ लिया और दोनों हाथो से उसे फाड़ दिया जैसे की उसका दन्त गईं रहा हु ..
शेर में अपने पंजो से मुझपर वार किया मैं उसके नाखुनो से तो बच गया थे लेकिन पंजे के गद्देदार भाग का वार भी इतना तगड़ा तह की मैं दूर जा गिरा वो सुप्रिया के उप्पेर अपने पंजो से वार करने वाला था की मैं चिल्लाया
“नहीं …”
और …
और ये क्या मैंने एक मुद्रा बनायीं जैसे मैं उसे धकेलना चाहता हु ताकि वो सुप्रिया से दूर हैट जाये और शेर सच में दूर हैट गया ..
मैंने एक बार अपने हाथो को देखा , ये कैसी ताकत थी …
मैंने देर न करते हुए फिर से हाथो को आगे किया और इस तरह से चलाया जैसे मैं शेर को हवा में उठाना चाहता हु और सच में शेर हवा में तैर रहा था वो दहाड़े जा रहा था मैंने उसे लेते लेते hi वंहा से दूर फेक दिया ..
सुप्रिया के साथ साथ पुष्पक भी बड़े hi गौर से ये सब देख रहा था , दोनों hi आश्चर्य से भरे हुए थे ..
दोनों के मुख से एक hi चीज निकली
“शक्तिशाली शिकारी ……???”
मैंने उनके बातो पर ध्यान नहीं दिया क्योकि शेर फिर हमारी और दौड़ लगा चूका था मैंने फिर से उसे बिना छुए hi हवा में उठा दिया था …और इस बार उसे घुमाकर जोरो से फेक दिया …
“वाओ ी हैवे पावर … तो क्या माता चुड़ैल सच थी की प्यार में अपने प्रेमिका चुड़ैल से सम्भोग के बाद कुछ तकते आ जाती है ..”
मैं खुद से hi बोल पड़ा था , मुझे यद् आया की कैसे सनपोंगा वाले आराम से पानी में चल प् रहे थे वही बदरंग वाले शिकारियों के लिए ये सब करना मुमकिन नहीं था …
शेर तो भाग चूका था लेकिन ये दोनों मेरे पैरो में गिर गए थे साथ hi झोपड़ी के बहार खड़े वैद्य और उनकी पत्नी भी मुझे आश्चर्य से देख रहे थे जो शायद शेर की दहाड़ सुनाने के बाद यंहा आये थे ………
“ये तुम लोग क्या कर रहे हो ??”
मैं उनके व्यवहार से चकित था और चकित होकर मैंने वैद्य जी की टाफ देखा
“इनके समूह में एक मान्यता है की एक शक्तिशाली शिकारी आएगा जिसके पास अलौकिक शक्तिया होंगी और जो शिकारी और चुड़ैलों के नए युग का प्रारम्भ करेगा “
वैद्य जी ने बड़े hi आराम से कहा साथ hi वो आगे कहते गए
“सभी इन्हे मात्रा एक कहानी hi मानते थे लेकिन आज लगता है की तुम hi वो शिकारी हो “
“अजीब बात है इनके समाज में कितनी मान्यताये है … एक प्रमुख शिकारी की मान्यता मेरे समय में थी जिमे उन्होंने कहा था की कोई महापुरुष आएगा जो सबको प्रेम शिखायेगा और अब यंहा आकर पता चला की यंहा पहले से एक मान्यता है की कोई शक्तिशाली शिकारी आएगा “
मैंने अपनी बात वैद्य जी के सामने राखी तो वो बड़े hi प्यार से मुझे देखने लगे ……
“मैंने पहले hi कहा था की तुम्हारा यंहा आना विधि का विधान है … अभी तक यंहा कोई भी प्रमुख शिकारी का जन्म नहीं हुआ है, न hi किसी महापुरुष की मान्यता hi है … लेकिन शक्तिशाली शिकारी की मान्यता जरूर है …
मुझे तो लगता है की तुम्हारा यंहा आना उस शक्तिशाली शिकारी की मान्यता को पूर्ण करता है और तुम्हारे कारन hi प्रमुख शिकारी का जन्म होगा जो की महापुरुष की मान्यता को बनाएगा “
वैद्य जी की बात सुनकर सभी कभी मुझे तो कभी वैद्य जी को देख रहे थे ..
मुझे भी उनकी बात समझ में आ रही थी, और मैंने कई हॉलीवुड की फिल्मे भी देखि थी जिसमे मैंने ये शिखा था की टाइम ट्रेवल वर्तमान को किस तरह से इफ़ेक्ट कर सकता है ..
इसमें सबसे अच्छी मूवी तो प्रेडेस्टिनशन थी (कृपया जरूर देखे हिंदी में शायद न मिले लेकिन सुबतीतल के साथ देखकर भी समझ आ जाएगी ? ))
“मतलब की मैं hi वो शक्तिशाली शिकारी हु जो इनके समाज में कोई नया परिवर्तन लेन वाला हु “
“लगता तो ऐसा hi है , क्योकि अभी इनका समाज बहुत hi तकलीफो से गुजर रहा है , सरदार पर जानलेवा हमले हो चुके है कोई इनके विरासत को हड़पना चाहता है ऐसे में तुम्हारा आना इनके लिए सहयोगी है “
वैद्य चक्र बिलकुल डॉ. चुटिया के जैसे hi बात करते थे और उन्ही की तरह सबकी फटी में तंग अदने की भी आदत रखते थे ..
मैंने सुप्रिया और पुष्पक को देखा जो की मेरे पैरो में सर गड़ाए हुए थे
“अरे अब उठ भी जाओ “
दोनों उठे
“इसका तो समझ आता है की ये चुड़ैल है लेकिन तुम क्यों मेरे पेअर में गिर रहे हो “
पुष्पक का वयवहार देखकर मुझे हंसी आ गयी
“वो क्योकि मैंने भी ये कहानिया ाजन्य से सुनी हुई है , और जब सुप्रिया ने ऐसा किया तो मैं भी कर बैठा “
हम सभी उसकी बात सुनकर हंस पड़े थे
सभी थोड़े शाट होकर बैठे थे , वैद्य की पत्नी महाऋषि जी ने हमारे लिए एक गर्म काढ़ा बनाया था जो आज के आयुर्वेदिक चाय की तरह hi लग रहा था उसमे शहद मिलाया गया था …
रात बहुत हो चुकी थी लेकिन नींद किसी की आँखों में नहीं था ..
“अभी इस बात को बहार आने नहीं देना की शक्तिशाली शिकारी आ चुके है “
वैद्य जी ने सुप्रिया और पुष्पक से कहा
“क्यों वैद्य जी “ सुप्रिया जैसे अभी तक उस उत्तेजना से बहार नहीं आयी थी जो उसे शक्तिशाली शिकारी को देखकर हुई थी
“क्योकि अभी तुम्हरे पिता शिकारी सरदार के दुशमन बहुत hi बढ़ गए है और सबसे बड़ी बात ये है की उनका दुश्मन कौन है ये अभी तक किसी को नहीं पता … इसलिए इसका किसी भी रूप में बहार आना खतरे से खली नहीं है .. वो लोग बहुत hi चालक है , सिर्फ ाजन्य को ये बात पता होनी चाहिए और किसी को नहीं , अब तो भोर भी होने वाली है ाजन्य भी आता hi होगा तुम लोग थोड़ा आराम कर लो मैं और महाऋषि ब्रम्हामुहुर्त का स्नान करके आते है “
वैद्य जी की बात सुनकर सभी ने हामी में सर हिलाया
“तो अब मैं तुम्हे क्या बोलू शिकारी … मैं तो तुम्हे एक मुर्ख सा शिकारी समझती थी लेकिन तुम तो शक्तिशाली शिकारी निकले … अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ़ कर देना “
सुप्रिया ने हाथ जोड़े बदले में मैंने उसके योनि को हलके से सहला दिया
“तुम अब भी मेरी बहन hi हो सुप्रिया , तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है , है चाहो तो हम फिर से सम्भोग कर सकते है क्योकि शेर को भागने के वक़्त आयी उत्तेजना अभी भी काम नहीं हुई है “
मैंने अपने फनफनाते हुए लिंग की और इशारा किया , सुप्रिया जंहा मेरी बात सुनकर उछाल गयी वही पुष्पक का चेहरा थोड़ा उतरा हुआ दिख रहा था …….
मैं और सुप्रिया दोनों hi अपने यौवन के मौज में मस्त थे , दो जवान नंगे जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए आनंद उठा रहे थे , तभी मैंने पाया की सुप्रिया मुस्कुराते हुए कही और hi देख रही है ..
मैंने उसकी नजर का पीछा किया तो पाया की झोपड़ी के अंदर खड़ा पुष्पक हमें देख रहा है , उसकी नजर बस सुप्रिया के जिस्म में hi जमी हुई थी …..
“तुम यंहा क्या कर रहे हो “
मैं थोड़ा गुस्से में बोलै
“तो कहा जाऊ , ये मेरी hi झोपड़ी है , रात हो चुकी है और बहार जंगली जानवर घूमते है “
उसकी बात सुनकर मुझे कुछ बोलते नहीं बना लेकिन मैंने देखा की झोपड़ी का दरवाजा अभी भी खुला हुआ था
“दरवाजा तो खुला हुआ है फिर जंगली जानवर अंदर नहीं आ जायेंगे ??”
वो कुछ सोच पता उससे पहले hi मेरी बात सच हो गयी , किसी भरी पैरो की आवाज हमें आने लगी देखा तो सामने बब्बर शेर खड़ा था और अंदर hi झांक रहा था ..
“आआ” पुष्पक की नजर जैसे hi उसपर पड़ी वो दौड़ता हुआ हमारे पीछे आ गया , सुप्रिया जल्दी से मुझसे अलग होकर पास रखे एक लकड़ी को उठा चुकी थी और हमले वाली पोजीशन बना कर कड़ी हो गयी थी ..
मैंने जीवन में ऐसा शेर पहली बार देखा था , हमारे यंहा हमने शेर बस ज़ू में देखे थे जो की थोड़े मरे हुए टाइप के होते थे , जंगल में घूमते हुए शेर की बात hi अलग थी , उसकी चमक और शरीर की बनावट hi ऐसी थी की देखकर मुझे भी पसीने आ गए ..
“ये कहा से आ गया ..??”
मैंने दबे हुए आवाज में पुष्पक से कहा
“मुझे क्या पता , आज सुप्रिया को देखने के चक्कर में alaw(aag) भी नहीं जलाया था , शायद घूमते फिरते या सूंघते हुए यंहा पहुंच गया होगा ..”
“तो इसे यंहा से भगाओ न “
“शिकारी तो तुम हो तुम भगव , मैं तो एक सामान्य सा नौकर हु वो भी वैद्य का “
हम दोनों की ये हालत देखकर सुप्रिया के चेहरे में थोड़ा गुस्सा आ गया
“चुप रहो तुम दोनों , और तुम कैसे शिकारी हो जो सहम कर बैठा है , खड़े हो जाओ और मेरे साथ इसका मुकाबला करो “
वो तो ऐसे बोल रही थी जैसे हम दोनों मिलकर इस शेर को मार hi डालेंगे
“मैं शिकारी हु लेकिन मैंने जीवन में कभी किसी जानवर का शिकार नहीं किया है , मैं लोगो से जरूर लड़ा हु लेकिन शेर से तो क्या मैं आज तक किसी कुत्ते से भी नहीं लड़ा हु “
मेरी बात सुनकर सुप्रिया हसने लगी
“तो आज लड़ लो , वंहा शेर नहीं मिलते क्या ??”
“मिलते है न लेकिन ज़ू में “
“वो क्या होता है “
“अरे चिड़िया घर “
“वो क्या होता है ??” इस बार दोनों hi एक साथ बोल उठे , अब इस समय इन्हे कैसे समझाता की चिड़िया घर क्या होता है ,
मैंने बस आसपास देखा मेरे लिए कोई भी हथियार वंहा मौजूद नहीं था ..
“बहार एक बहला है “ पुष्पक बोल उठा
“सेल अभी बहार जाऊ क्या , दरवाजे में तो ये खड़ा है “ मैं थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै
“ये सेल क्या होता है ??” उसने बड़े hi मासूमियत से मुझसे पूछा लेकिन मैं चुप hi रहा और ध्यान शेर पर लगा दिया ..
शेर जैसे हमारी बातो का मजा ले रहा था , बड़े hi आराम से हमें निहार रहा था उसे कोई भी जल्दबाजी नहीं थी चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे मुस्कुरा रहा हो , उसने एक जम्हाई ली जैसे जनता हो की ये पीद्दे मेरा क्या बिगड़ लेंगे और आज उसे एक नहीं बल्कि 3 हट्टे काटते लोगो का तजा मांस खाने को मिलने वाला था ..
वो बड़े hi शान से अंदर की और बढ़ा लेकिन …..
सुप्रिया ने अपने हाथ में रखे डंडे से उसपर झपट्टा मार दिया , उसने पूरी ताकत लगाई थी और डंडा घुमा कर शेर के चेहरे पर hi निशाना लगाया था लेकिन वो जैसे शेर के लिए बस कोई फूल से वार हो वो जैसे हंसा हो और उसने सर झटका दिया और जोरो की दहाड़ लगा दी सुप्रिया का तो पता नहीं लेकिन मैं और पुष्पक जरूर काँप गए थे ..
“उठो और कुछ करो वर्ण ये हमें खा जायेगा सब मिलकर लाडे तो शायद जान बच जाये “
सुप्रिया हलके से फुसफुसाई
मरता क्या न करता की तर्ज पर मैं और पुष्पक खड़े हो चुके थे
“तुम शिकारी हो तो तुम्हारे पास ताकत भी बहुत है , मेरी योनि को देखो सहलाओ और खुद का लिंग खड़ा करते हुए अपने अंदर के शिकारी को जगाओ “
सुप्रिया ने साफ साफ कहा था , मुझे याद आया की मेरे अंदर उत्तेजना आने से मेरी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है , लेकिन अभी अभी घंटो तक एक चुड़ैल से किये सम्भोग के बाद मन तृप्त हो गया था कोई उत्तेजना बाकि नहीं रह गयी थी लेकिन मैंने फिर भी कोशिस की और सुप्रिया को पास जाकर उसके योनि को सहलाने लगा ..
कुछ hi सेकंड का वक़्त लगा था मेरे लिंग को फिर से उत्तेजित होने में … मैं इतना उत्तेजित हो गया था की पीछे से hi सुप्रिया के योनि में अपना लिंग घुसाने लगा
“अभी लड़ने के लिए उत्तेजित होना था सम्भोग के लिए नहीं , कैसे शिकारी हो तुम तुम्हे किसी ने इतना भी नहीं शिखाया ..”
वो मुझे झड़ते हुए बोली लेकिन तब तक मैं दो तीन धक्के लगा चूका था ..
इतने में शेर फिर से दहाड़ा और हमारे उप्पेर hi आक्रमण कर दिया ..
लेकिन इस बार मैं जोश में था मैंने शेर के खुले हुए मुँह को पकड़ लिया और दोनों हाथो से उसे फाड़ दिया जैसे की उसका दन्त गईं रहा हु ..
शेर में अपने पंजो से मुझपर वार किया मैं उसके नाखुनो से तो बच गया थे लेकिन पंजे के गद्देदार भाग का वार भी इतना तगड़ा तह की मैं दूर जा गिरा वो सुप्रिया के उप्पेर अपने पंजो से वार करने वाला था की मैं चिल्लाया
“नहीं …”
और …
और ये क्या मैंने एक मुद्रा बनायीं जैसे मैं उसे धकेलना चाहता हु ताकि वो सुप्रिया से दूर हैट जाये और शेर सच में दूर हैट गया ..
मैंने एक बार अपने हाथो को देखा , ये कैसी ताकत थी …
मैंने देर न करते हुए फिर से हाथो को आगे किया और इस तरह से चलाया जैसे मैं शेर को हवा में उठाना चाहता हु और सच में शेर हवा में तैर रहा था वो दहाड़े जा रहा था मैंने उसे लेते लेते hi वंहा से दूर फेक दिया ..
सुप्रिया के साथ साथ पुष्पक भी बड़े hi गौर से ये सब देख रहा था , दोनों hi आश्चर्य से भरे हुए थे ..
दोनों के मुख से एक hi चीज निकली
“शक्तिशाली शिकारी ……???”
मैंने उनके बातो पर ध्यान नहीं दिया क्योकि शेर फिर हमारी और दौड़ लगा चूका था मैंने फिर से उसे बिना छुए hi हवा में उठा दिया था …और इस बार उसे घुमाकर जोरो से फेक दिया …
“वाओ ी हैवे पावर … तो क्या माता चुड़ैल सच थी की प्यार में अपने प्रेमिका चुड़ैल से सम्भोग के बाद कुछ तकते आ जाती है ..”
मैं खुद से hi बोल पड़ा था , मुझे यद् आया की कैसे सनपोंगा वाले आराम से पानी में चल प् रहे थे वही बदरंग वाले शिकारियों के लिए ये सब करना मुमकिन नहीं था …
शेर तो भाग चूका था लेकिन ये दोनों मेरे पैरो में गिर गए थे साथ hi झोपड़ी के बहार खड़े वैद्य और उनकी पत्नी भी मुझे आश्चर्य से देख रहे थे जो शायद शेर की दहाड़ सुनाने के बाद यंहा आये थे ………
“ये तुम लोग क्या कर रहे हो ??”
मैं उनके व्यवहार से चकित था और चकित होकर मैंने वैद्य जी की टाफ देखा
“इनके समूह में एक मान्यता है की एक शक्तिशाली शिकारी आएगा जिसके पास अलौकिक शक्तिया होंगी और जो शिकारी और चुड़ैलों के नए युग का प्रारम्भ करेगा “
वैद्य जी ने बड़े hi आराम से कहा साथ hi वो आगे कहते गए
“सभी इन्हे मात्रा एक कहानी hi मानते थे लेकिन आज लगता है की तुम hi वो शिकारी हो “
“अजीब बात है इनके समाज में कितनी मान्यताये है … एक प्रमुख शिकारी की मान्यता मेरे समय में थी जिमे उन्होंने कहा था की कोई महापुरुष आएगा जो सबको प्रेम शिखायेगा और अब यंहा आकर पता चला की यंहा पहले से एक मान्यता है की कोई शक्तिशाली शिकारी आएगा “
मैंने अपनी बात वैद्य जी के सामने राखी तो वो बड़े hi प्यार से मुझे देखने लगे ……
“मैंने पहले hi कहा था की तुम्हारा यंहा आना विधि का विधान है … अभी तक यंहा कोई भी प्रमुख शिकारी का जन्म नहीं हुआ है, न hi किसी महापुरुष की मान्यता hi है … लेकिन शक्तिशाली शिकारी की मान्यता जरूर है …
मुझे तो लगता है की तुम्हारा यंहा आना उस शक्तिशाली शिकारी की मान्यता को पूर्ण करता है और तुम्हारे कारन hi प्रमुख शिकारी का जन्म होगा जो की महापुरुष की मान्यता को बनाएगा “
वैद्य जी की बात सुनकर सभी कभी मुझे तो कभी वैद्य जी को देख रहे थे ..
मुझे भी उनकी बात समझ में आ रही थी, और मैंने कई हॉलीवुड की फिल्मे भी देखि थी जिसमे मैंने ये शिखा था की टाइम ट्रेवल वर्तमान को किस तरह से इफ़ेक्ट कर सकता है ..
इसमें सबसे अच्छी मूवी तो प्रेडेस्टिनशन थी (कृपया जरूर देखे हिंदी में शायद न मिले लेकिन सुबतीतल के साथ देखकर भी समझ आ जाएगी ? ))
“मतलब की मैं hi वो शक्तिशाली शिकारी हु जो इनके समाज में कोई नया परिवर्तन लेन वाला हु “
“लगता तो ऐसा hi है , क्योकि अभी इनका समाज बहुत hi तकलीफो से गुजर रहा है , सरदार पर जानलेवा हमले हो चुके है कोई इनके विरासत को हड़पना चाहता है ऐसे में तुम्हारा आना इनके लिए सहयोगी है “
वैद्य चक्र बिलकुल डॉ. चुटिया के जैसे hi बात करते थे और उन्ही की तरह सबकी फटी में तंग अदने की भी आदत रखते थे ..
मैंने सुप्रिया और पुष्पक को देखा जो की मेरे पैरो में सर गड़ाए हुए थे
“अरे अब उठ भी जाओ “
दोनों उठे
“इसका तो समझ आता है की ये चुड़ैल है लेकिन तुम क्यों मेरे पेअर में गिर रहे हो “
पुष्पक का वयवहार देखकर मुझे हंसी आ गयी
“वो क्योकि मैंने भी ये कहानिया ाजन्य से सुनी हुई है , और जब सुप्रिया ने ऐसा किया तो मैं भी कर बैठा “
हम सभी उसकी बात सुनकर हंस पड़े थे
सभी थोड़े शाट होकर बैठे थे , वैद्य की पत्नी महाऋषि जी ने हमारे लिए एक गर्म काढ़ा बनाया था जो आज के आयुर्वेदिक चाय की तरह hi लग रहा था उसमे शहद मिलाया गया था …
रात बहुत हो चुकी थी लेकिन नींद किसी की आँखों में नहीं था ..
“अभी इस बात को बहार आने नहीं देना की शक्तिशाली शिकारी आ चुके है “
वैद्य जी ने सुप्रिया और पुष्पक से कहा
“क्यों वैद्य जी “ सुप्रिया जैसे अभी तक उस उत्तेजना से बहार नहीं आयी थी जो उसे शक्तिशाली शिकारी को देखकर हुई थी
“क्योकि अभी तुम्हरे पिता शिकारी सरदार के दुशमन बहुत hi बढ़ गए है और सबसे बड़ी बात ये है की उनका दुश्मन कौन है ये अभी तक किसी को नहीं पता … इसलिए इसका किसी भी रूप में बहार आना खतरे से खली नहीं है .. वो लोग बहुत hi चालक है , सिर्फ ाजन्य को ये बात पता होनी चाहिए और किसी को नहीं , अब तो भोर भी होने वाली है ाजन्य भी आता hi होगा तुम लोग थोड़ा आराम कर लो मैं और महाऋषि ब्रम्हामुहुर्त का स्नान करके आते है “
वैद्य जी की बात सुनकर सभी ने हामी में सर हिलाया
“तो अब मैं तुम्हे क्या बोलू शिकारी … मैं तो तुम्हे एक मुर्ख सा शिकारी समझती थी लेकिन तुम तो शक्तिशाली शिकारी निकले … अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ़ कर देना “
सुप्रिया ने हाथ जोड़े बदले में मैंने उसके योनि को हलके से सहला दिया
“तुम अब भी मेरी बहन hi हो सुप्रिया , तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है , है चाहो तो हम फिर से सम्भोग कर सकते है क्योकि शेर को भागने के वक़्त आयी उत्तेजना अभी भी काम नहीं हुई है “
मैंने अपने फनफनाते हुए लिंग की और इशारा किया , सुप्रिया जंहा मेरी बात सुनकर उछाल गयी वही पुष्पक का चेहरा थोड़ा उतरा हुआ दिख रहा था …….