Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 111 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

इनके बाद लखन वहासे चला गया ओर सीधा हवेलीपे आ गया.. ओर चारु रश्मी कुछ देरके लीये आराम करने वापस बेडपे चली गइ.. क्युकी लखनने दोनोके अ‍ेक अ‍ेक अंगको जंजोरके रखदीया था.. हवेलीपे आया तब देवायतभी आ चुका था.. फीर सबने मीलकर खाना खाया..

खानेके बाद सबलोग होलमे आगये.. वहा लखनने सबको कार्डका आल्बम दीखाया ओर सीलेक्ट कीया हुआ कार्ड भी दीखाया.. सबको कार्ड पसंद आया.. ओर देवायतने उसे जल्दसे जल्द प्रीन्ट करवानेको कहा.. फीर कुछ ओर बाते हुइ.. तब नीर्मला देवायतको लेकर रुममे आराम करने चली गइ..

तो पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करदीया.. कुछही देरमे बंध कमरेमे पुनमकी हल्कीसी सीसकारीया गुज रही थी.. आज लखन अकेला आया था तो वो बहुत ही खुस थी.. साम चार बजे तब सबलोग आराम करते रहे तबतक लखन पुनमके उपरही लेटा हुआ उनकी चुदाइ करता रहा..

साम छे बजे लखन वहासे नीकल गया.. ओर अपने कामपे लग गया.. इन प्रद्नह दिनोमे कइ बार लखन गांव ओर सहेरके बीच चकर काटता रहा.. ओर इसी बीच वंदना ओर नीशासे भी बाते करते मीलनेकी योजना बनाते काफी आगे बढा.. अ‍ेक बार तो उसे फीरसे वंदनाको ओफीसमे अकेलेमे मीलनेका मौका मीला..

तो वंदनाको लगभग दबोच ही लीया.. ओर उनके बुब्सके साथ खेलते अ‍ेक दुसरेको चुमते रहे.. वंदना बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दोनोने अकेले मीलनेका प्लान भी बनाया.. फीर उसे दो बार ब्रीन्दासे अकेलेमे मीलनेका मौका भी मील गया.. अ‍ेक अपराध बोज महेसुस करते लखन ब्रीन्दासे फीजीकल होना टालता रहा.. लेकीन दोनो बार ब्रीन्दा नही मानी..

ओर उसने जबरदस्तीसे लखनके साथ फीरसे सारीरीक सबंध बनाये.. क्युकी जब लखनसे वो पहेली बार फीजीकल हुइ.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट हुइ तबसे ही लखन उनके मनमे बस गया था.. ओर भानुके घरपे वोही लखनपे नजर गडाये अ‍ेक आस लेकर देखती थी.. की कब उसे दुबारा लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीले..

ओर इन पंद्नह दीनमे ही उसे लखनसे अकेलेमे मीलनेका दो बार मौका मील गया.. जीनका ब्रीन्दाने लखनसे चुदवाकर खुब फायदा उठाया.. क्युकी दोनो बार श्रीधर जयश्री ओर बच्चेको लेकर मायके गया हुआ था.. ओर लखन श्रीधरको कामके सीलसीलेमे मीलने जाता उसे वहा ब्रीन्दा घरपे अकेली ही मीलती..

ओर ब्रीन्दा लखनसे जबरदस्तीसे फीजीकल होने मजबुर कर देती.. वो जानती थी.. की वो श्रीधरको धोखा दे रही हे.. फीर भी उसे लखनसे चुदवानेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उन्होने खुद अपने पती श्रीधरको उनकी सास यानीकी वृन्दासे फीजीकल रीलेशनके लीये राजी कीया था.. ओर खुदभी लखनके साथ रीलेशन रखना चाहती थी..

लखनका हथीयार हमेसा खडा ही रहेता.. अब उनके लीये इतनी बीवीया ओर भाभीया थीकी लखनको कोइ तकलीफ नही थी.. इसके अलावा भी लखनके दुसरी कइ ओरतके साथ फीजीकल रीलेशन थे जो लखनको चाहती थी.. इनमे ब्रीन्दा टीना सरलाकाकीके अलावा रमा भी सामील थी..

लखन हर दिन कीसना कीसीको सारीरीक सुख देता रहा.. ओर अ‍ेक बार चारु पंचायतकी ओफीसमे थी तब वसुधाने लखनको घरपे बुला लीया.. उस दिन लखन कीसी कामसे गांवमे था तो वो वसुधाको मीलने उनके घरपे चला गया.. तब उसे वसुधाके साथ नीशाको भी चोदनेका मौका मील गया..

अ‍ेक जमानेमे नीशा ओर वसुधा.. दोनोही पती पत्नी थे.. अब जेन्डर चेन्ज करनेके बाद वसुधा भी अ‍ेक ओरत हो गइ थी.. ओर आज दोनोही लखनके साथ बीस्तर साजा कर रही थी.. वसुधा बहुत ही आसानीसे लखनको जेल रही थी.. उसने जान बुजकर नीशाकी मौजुदगीमे वसुधाको दो बार चोद लीया..

ताकी नीशा उतेजीत हो सके.. ओर हुआ बीलकुल वैसा ही.. नीशा वसुधा ओर लखनको फीजीकल होते देखती रही.. ओर अपनी चुतको सहेलाती रही.. फीर वसुधाको चोदलेनेके बाद कुछ ही देरमे नीशा आंसु बहाते मुह इधर उधर करते छटपटा रही थी.. ओर बेडपे दोनो पैर पटकते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस कर रही थी..

38229.gif


तब वसुधा नीशाके सरको सहेलाते उनके होंठ चुमने लगी.. ताकी नीशाका दर्द कम होजाये.. फीर तो बीना नीचे उतरे ही लखनने नीशाको लगातार तीन बार चोद लीया.. ओर नीशाकी हालत पतली करदी.. नीशाको लगा अबतककी सारी कशर लखनने अ‍ेक ही बारमे पुरी करदी.. फीर तीनो साथ नहाने चले गये.. तब लखनने वहा भी अ‍ेक बार खडे खडे वसुधाको चोद लीया..

फीर तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. वंदनाको छोडकर लखनकी बीवीओके अलावा अब उनकी सभी भाभीया.. ओर लखनके साथ जीनका अवैध रीस्ता था.. वो सभी ओरते हमेसा लखनको अकेलेमे मीलनेके लीये मौकेकी तलासमे रहेती.. फीर चाहे दीन हो या रात.. जबभी लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीलता वो लखनके साथ फीजीकल रीलेशन बना लेती..

दीन बीतने लगे.. पता ही नही चला अ‍ेक महीना कैसे गुजर गया.. नीमंत्रण देनेका काम सबने मीलकर संम्हाल लीया.. देवायतने पुरे असी (८०) गांवको सम्हाला.. इनमे सभीके पंचायतके सदस्यो सरपंचो ओर गांवके कइ जमीनदार ओर प्रतीष्टीत व्यक्तीके साथ गांवके सभी लोग सामील थे..

सृती भावीका ओर लखनने मीलकर कइ डोक्टर उद्योगपती ओर पोलीटीशनके साथ सरकारी अधीकारीओ भी सामील थे.. पंडाल ओर भोजनका कार्य लखनके सभी दोस्तो ओर भानुके अलावा गांवके कइ युवाओने सम्हाल लीया था.. तो बाकी कुछ काम अ‍ेजन्सीको दे दीया गया था..

पंकजभाइ ओर नयनाको खुद भावीका ओर लखन उनके घरपे जाकर नीमंत्रण देकर आगये.. ओर दोनोको खास उपस्थीत रहेनेको कहा.. फीर भावीकाने अपनी बचपनकी सहेली नेहासे भी फोनपे बात करते आमंत्रीत कीया.. ठीक तीन दिन पहेले लखन सबको लेकर गांव चला गया.. इस बार साथमे दया ओर रजीया भी गइ थी..

गांवमे अ‍ेक उत्सव जैसा वातावरण हो गया.. पुरा गांव फुलो ओर जंडोसे सजाया गया था.. आजु बाजुके गांवके कइ युवा ओर सरपंचो मददके लीये आते जाते रहे.. सबकी भोजनकी व्यवस्था देवायतने अपने खेतोके पास खुले मेदानमे कीथी.. दुसरे गांवकी कइ लडकीया ओर ओरते लखनको देखकर सर्मा जाती..

ओर कइतो लखन ओर इनके सभी दोस्तोको अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस भी करती.. ओर इनका श्रीधर बंसी मुना ओर साहीलने खुब लाभ भी उठाया.. लखनके सभी दोस्तो सेटींग होतेही लडकीको लेकर अपने खेतो या अ‍ेकांत जगहपे चले जाते.. ओर वहा उसे चोदकर वापस आजाते..

लेकीन अब लखन कीसी ओरपे ध्यान नही देता था.. क्युकी उनके पास जीतनी ओरते थी वो उनके लीये पर्याप्त थी.. इसी दौरान काम करते लखनका खयाल रखनेका जीमा पुनमने नीलमको दीया था.. तो नीलम लगभग लखनके साथ ही रहेती ओर उनके काममे उनकी मदद भी करती.. ओर लखनकी सारीरक जरुरतको पुरी भी करती..

पंडाल घरसे नजदीक था तो कइ बार नीलम लखनको लेकर अपने नये घरपे आराम करनेके बहाने उपरकी मंजीलपे चली जाती.. ओर लखनके साथ फीजीकल हो जाती.. ओर कभी कभी इनका लाभ रमाको भी मीलता.. क्युकी गांवमे आनेके बाद ज्यादातर सरला भानुके साथ खेतोपे ही रहेने लगी थी.. ओर इस बातका नीलमने खुब फायदा उठाया..

ओर अ‍ेक बार दोपरको सरला काकी सो रही थी.. ओर भानु काममे लगा हुआ था.. तब नीलमने मौका देखकर लखनको रमाके कमरेमे भेज दीया.. ओर वो खुद बहार नीगरानी रखने लगी.. उनको रमाकी हल्कीसी सीसकारीया बहार तक सुनाइ दे रही थी.. वो प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे खडे खडे ही जुक गइ.. ओर लखन खडेखडे ही उनकी पीछेकी ले रहा था..

showing-his-pregnant-wife-no-mercy-001.gif


जब लखनने रमाको संतुस्ट कीया तो दोनो बहार आगये.. ओर रमा सरमाकर नीलमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर नीलम लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अ‍ेक कमरेमे चली गइ.. तो रमा हसने लगी.. वहा नीलमने लखनकी सवारीकी.. जब अ‍ेक बार जड गइ तब वो लखनके नीचे लेट गइ.. ओर लखनने नीलमको खुब रगड रगडके उनके ही घरपे चोद लीया..

38854.gif


अ‍ेक घंटे तक आराम करनेके बाद दोनो कंपलीट होकर नीचे आगये.. सरलाभी नीचे मौजुद थी.. तो लखनको देखते ही उनकी ओर कातीलाना हसने लगी.. इसी बीच नीलम सर्मसार होते रमाकी ओर देखते हस रही थी.. रमा सबकुछ समज गइ.. ओर इस बातसे बहुत खुसभी थी.. की लखनने उनको ओर उनकी बेटीको सम्हाल लीया था..

उधर श्रीधर ओर जयश्री भी अपने बच्चेको लेकर सहेर वृन्दाको मीलने गये थे.. तब वापसीमे वो वृन्दाको लेकर गांव आये थे.. अब श्रीधर हर हप्ते जयश्रीको लेकर सहेर चला जाता जीसे जयश्री भी मायके आकर बहुत खुस रहेती.. वो सोचती की श्रीधर उनका बहुत खयाल रख रहा हे.. जो उनको हर हप्ते मायके लेजाता हे..

लेकीन असली बात तो सीर्फ ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थे.. जयश्रीको आज तक पता नही चलाकी उनके पतीका अनकी मांके साथ यानीकी सास दामादके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. जयश्रीने वृन्दाको अपनी स्कुलमे नीयुक्तीकी खबर सुनाइ जीसे सुनकर वृन्दा बहुत खुस हुइ..

ओर जयश्रीने उसे भी उत्सवमे आनेका न्योता दीया.. तो वृन्दा साथ चलनेको तैयार होगइ.. ओर दो पहोर जब खानेके लीये जीतुलाल घरपे आया तो वो जीतुको कुछ दिन अकेला खानेका प्रबंध करलेनेको कहेकर श्रीधर जयश्रीके साथ गांव जानेको तैयार होगइ.. तो श्रीधर जीतुलालकी ओर देखते कातील मुस्कान करता हे..

जीसे जीतुलाल मन ही मन श्रीधरसे ओर चीडने लगा ओर मनमे गालीया देने लगा.. जयश्री नोकरी मीलनेकी वजहसे बच्चीको अपनी मांके पास छोडकर जागृतीके साथ स्कुलमे मदद करने चली जाती.. तब दोनो बहेने खुब बाते करते बच्चीको सम्हालती.. जीसे दोनो बहेने ओर करीब आगइ.. ओर अपनी अंतरंग बाते भी सेर करने लगी..

अ‍ेक दिन बसंती भी ब्रीन्दाको जबरदस्तीसे मदद करनेका बहाना बनाकर साथ लेकर चली गइ.. तब श्रीधरको मौका मील गया.. वो सबके साथ कामपे जयश्री ओर ब्रीन्दाको देखकर छुपकेसे मुनाको कामका बहाना बनाकर घरपे चला गया.. वहा जाकर देखा तो घरपे सीर्फ वृन्दा बच्चीको जुलेमे जुला रही थी..

घरमे श्रीधरको देखते ही वृन्दा सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. श्रीधरने घरमे आकर धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. तो वृन्दा सबकुछ समज गइ.. उनकी चुत पानीयाते पानी छोडने लगी.. ओर सरमाकर श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..

वृन्दा : (धीरेसे सरमाकर) आगया मेरा आसीक.. क्या वोदो वहा हे..? देखना कही वो दोनो आना जाये..

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही डार्लींग.. वो दोनो वहा काममे बीजी हे.. इसीलीये तो मौका देखकर आया हु.. यहा की रुमके अंदर..?

वृन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) नही.. अंदर होगे ओर कोइ आगया तो हमपे सक करेगा.. यही करलो.. मे यही लेट जाती हु..

श्रीधर : (वही बेठते होठोको चुमते) डार्लींग.. तुमने क्या जादु करदीया.. तुम्हारी लेनेके लीये तो तरसता हु..

54.gif


कहेते श्रीधरने वही सोफेपे वृन्दाको दबोच लीया.. ओर उसे नंगी करके खुदभी नंगा हो गया.. कुछ ही देरमे वृन्दाकी कामुक सीसकारीया होलमे गुंजने लगी.. उन्होने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके दोनो पैर श्रीधरकी कमरपे आटी लगाये हुअ‍े थे.. ओर श्रीधर होले होले वृन्दाको चोद रहा था..
 
ओर इसी बातका बंसी ओर मुनाने भी फायदा उठा लीया था.. मौका मीलते ही कामके बहाने मुनाभी गीताको अ‍ेक दुरके लास्ट वाले क्लासमे लेकर चला गया.. ओर गीताको वही खडे खडे चोदलीया.. तो सांती जागृती सबकी मदद करनेमे बीजी थी तब बंसीने भी छुपकेसे इसारा करते बीन्दीयाको घरपे आनेका इसारा कीया.. तो बीन्दीया भी बहाना बनाकर वहासे सरक गइ..

वो अपने घरपे चली गइ.. देखा तो बनवारी लाल भी सबके साथ पंडालमे बैठे गपे लगा रहे थे.. बीन्दीयाने घरपे जाकर अंदरसे लोक करदीया.. ओर धीरेसे घरकी सीडीथोकी ओर देखने लगी.. तब बंसी उनकी छतसे होते बनवारीलालके घरमे घुस गया.. देखा तो बीन्दीया अपने बेडरुममे कंपलीट होते बंसीका इन्तजार कर रही थी..

25039.gif


ओर कुछही देरमे दोनो अ‍ेक होगये.. बीन्दीयाकी अपने ही घरपे बंसीने जमकर चुदाइ कर डाली.. जबसे बीन्दीयाके गर्भमे बंसीका बच्चा पल रहा था तबसे बीन्दीया बंसीको दीलसे प्यार करने लगी थी.. मंजु ओर पुनमने रीस्तोमे बदलावकी चलाइ मुहीम काफी रंग लाइ.. सबलोग सेक्सका मजा लेते काम करते रहे..

श्रीधर वृन्दा जैसे कइ रीस्ते गांवमे ही नही.. बल्की आजु बाजुके कइ गांव मे पनप रहे थे.. ओर अब इनकी हवा सहेरमे भी फैलने लगी थी.. जीनकी मीसाल धृवके जैसे कइ परीवार थे.. जहा अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे अवैध रीस्ता पल रहा था.. धृवकी मम्मी ओर उनकी बहेनके अलावा धृवका रीस्ता उनकी मौसी.. यानीकी उनकी बहेनकी सासके साथ भी ओर गहेरा हो गया था..

मंजुकी मुहीम ओर उनकी अंतीम विदाइसे देवायतका गांव पुरे भारतमे मसहुर हो गया था.. ओर उद्घाटनमे मुख्यमंत्रीके आनेकी वजहसे अ‍ेक बार फीर इस गांव चर्चाकी सुर्खीयोपे आगया.. उद्घाटनके ठीक अ‍ेक दिन पहेले ही इनकी नेशनल न्युजपे डीबेट सुरु होगइ.. ओर आखीर वो दिन भी आगया..

भावीका लखनने डोक्टर उद्योगपती ओर खास महेमानोके लीये वीसेस व्यवस्था कीथी.. पंकजभाइ ओर नयनाको भावीकाने अपनी हवेलीमे ही ठहेराया था.. नयना हवेली देखकर ही दंग रेह गइ.. वो बार बार विडीयो कोलपे अपनी बेटी नेहाको सबकुछ दीखाती रही.. जीसे देखकर नेहा भी खुस थी.. अ‍ेक बार उसने भावीकासे भी बातकी..

आजु बाजुके सभी गांव वाले होस्पीटल ओर स्कुल देखने घरसे नीकल गये थे.. देवायतको भी इतनी संख्या होनेकी उमीद नही थी.. मुख्यमंत्री खुद इतनी मेदनी देखकर खुस होगये.. उन्होने स्कुल ओर होस्पीटलका उद्घाटन कीया ओर अंदर देखने चले गये.. ओर देखती ही दंग रेह गये.. क्युकी स्कुलमे बहुत ही आधुनीक सुवीधा थी..

हर क्लासमे इलेक्ट्रोनीक्स डीस्पलेय बोर्डके साथ कोम्टुटर थे.. स्टुडन्टके लीये बैठनेकी बहुत ही आधुनीक सुवीधाये थी.. ओर होस्पीटलमे भी बहुत ही आधुनीक मशीनररी लगी हुइ थी.. मुख्यमंत्रीने सोचा थाकी की गांवकी कोइ छोटी मोटी स्कुल ओर होस्पीटल होगी.. लेकीन इसके बजाये ये सब देखकर वो दंग रेह गये..

फीर मंचपे आकर उन्होने जब भासण दीया.. ओर विसेस अ‍ैसी सुवीधाके लीये भावीका चारु वंदना ओर रश्मी वसुधाके साथ पुनमका भी सन्मान कीया तो पंकजभाइ ओर नयनाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. ओर मुख्यमंत्रीने होस्पीटल ओर स्कुलके लीये वीसेस फंड देनेके साथ गांवको तालुकाका दरजा देनेकी घोसज्ञा की..

जीनकी उमीद देवायत पुनम चारु ओर रश्मीको भी नही थी.. तो पब्लीकमे तालीओकी गडगडाट होने लगी.. ओर लोग मुख्यमंत्रीके जयकारेकी घोस करने लगे.. फीर मुख्यमंत्रीने सभी आवेदनकर्ता जीनको सरकारी नोकरीया मीली थी उन सभीको नीचुक्ती पत्र अर्पण कीया.. तब गीताके साथ वीनोद बहुत खुस था..

आज आधीकारीक रुपसे सबको सरकारी नोकरीया मील गइ थी.. ओर जीनको नोकरी मीली उनके परीवार वालेभी बहुत खुस थे.. फीर महेमानोके लीये वीसेस जगाहपे भोजनकी व्यवस्था की गइ थी.. मुख्यमंत्रीने पुरे कार्यक्रमके दौरान देवायतको अपने साथ ही रखा ओर उनका आभार जताया..

फीर देवायतने कुछ उद्योगपतीके साथ पंकजभाइको भी मीलवाया तो पंमजभाइ बहुत खुस हो गये.. सबको अपने बीजनेस बढनेकी उमीद जग गइ.. ओर कइ डोक्टरने वहा आकर मुफ्तमे सेवा देनेकी पेसकस की.. जीसे सुनक भावीका ओर सृती बहुत खुस हो गइ.. फीर वसुधाने सबका कोन्टेक्ट नंबर लेलीया..

गांव वालोभी स्कुल होस्पीटल देखने लगे.. ओर साथमे भोजन करते देवायत लखनसे भी मीलते उनकी सराहना करने लगे.. ओर अपने अपने गांवकी ओर चल पडे.. पुरा घटनार्कम मीडीयाने अच्छेसे कवर कीया.. पुरे गांवमे अ‍ेक उत्सव जैसा माहोल हो गया था.. ओर आखीर ये कायर्कम सम्पन हुआ..

जाते समय पंकजभाइ ओर नयना भावीकाको गले मीलते लगभग रोही पडे.. उन्होने लखन ओर भावीकाको खुब आशीर्वाद दीये.. ओर घरपे आनेका न्योता देकर फीर चले गये.. सभी कार्यकर्ताने बहुत महेनत कीथी.. तो सामको देवायतने इनके लीये वीसेस भोजनकी व्यवस्था कीथी.. इनमे कार्यकर्ताके रुपमे कुछ दुसरे गांवके लडका लडकीया सामील थे..

सबके भोजनके पहेले देवायतने सबको अ‍ेक साथ बीठाया.. ओर सबका आभार जताया.. तब कीसीको पता नही थाकी उनके लीये अ‍ेक सरप्राइज हे.. जीनकी व्यवस्था लखन पुनम ओर सृतीने मीलकर कीथी.. पुनमने अ‍ेक अ‍ेक कार्यकर्ता ओर जीन्होने इनमे महेनतकी थी.. सबके लीये उपहार लीये थे..

तब पुनमने सबका आभार जताते धोसणा की तो सबके चहेरेपे खुसीकी लहेर दौड गइ.. ओर पुनमने ये उपहार देवायत ओर नीर्मलाके हाथोसे दीलवाया.. जीनमे लडके ओर लडकीओके लीये अलग अलग अ‍ेक गोल्डन घडी थी.. जीसे देखकर सबलोग खुस होगये.. फीर सबके लीये भोनज हुआ.. ओर सबलोग अपने अपने घर चले गये..

उस रात जीनको भी नोकरी मीलीथी सबने अपने अपने पार्टनरके साथ सेलीब्रेट कीया.. जीनमे ज्यादातर जोडे सगे भाइ बहेन ओर भाभी देवर ही थे.. तो कइ कजीन भाइ बहेन.. ओर अ‍ेक जोडा अ‍ैसा था.. जीनका इस दुनीयामे कोइ नही था.. वो लडका जो उनकी विधजा मांके साथ रेह रहा था..

लडकेको उनकी मांने अपना मंगलसुत्र बेचकर ओर गांवके दुसरे घरोमे बर्तन मांजनेके साथ दुसरेके खेतोमे मजदुरी करके पढाया लीखाया.. ओर अपने लडकेको पढाकर बादमे नर्सींगका कोर्स करवाया.. जीनकी वजहसे वो लडका उनकी मांको बहुत प्यार करता था.. गरीबीकी वजहसे सादीके बारेमे सोचता भी नही था..

ओर अपने बेटेकी इस तकलीफसे उनकी मांको अपने बेटेकी चीन्ता होने लगी.. फीर इस रीस्तोके बदलावके बारेमे सुनकर धीरे धीरे आगे बढते दोनो मां बेटे आपसी रीस्तोके बंधनमे बंध गये.. उनकी मां अपने बेटेके तनकी जरुरतको पुरी करने लगी.. जीसे वो अपनी प्यास भी बुजाते खुस रहेने लगी..

रातके अंधेरेमे बंध कमरेमे दोनो अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे थे.. जीनके बारेमे आजतक कीसीको कुछ पता नही चला.. सबकुछ अ‍ेक कीरायेकी रुममे ही चल रहा था.. ओर आज सरकारी नोकरी मीलनेकी वजहसे सबसे ज्यादा वो दोनो खुस थे.. दोनो घर जाकर अ‍ेक दुसरेसे लीपटकर खुब रोये.. ओर खुसीसे आंसु बहाये..

फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेको मीठाइ खीलाकर मुह मीठा कीया.. फीर दोनोके होठ मील गये.. बादमे लडकेने उसी दिन अपनी माको दुसरोके यहा काम करनेको मना करदीया.. ओर उनके लीये वो रात कभी ना थमने वाली रात साबीत हुइ.. उस रात मांने अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार कीया.. ओर अपने बेटेको अ‍ेक पत्नीका खुब सुख दीया..

दुसरे ही दिन गांवका माहोल बदल गया.. सबलोग अपनी अपनी नोकरीपे आने लगे.. दो दिन तक स्कुल ओर होस्पीटलका बहार वालेके लीये कार्य बंध रखा गया.. ताकी अंदरकी व्यवस्था बहाल हो सके.. सुबह सुबह चाइ नास्तेके बाद सबलोग कामपे लग गये.. सृती भावीकाके साथ पुनम ओर लखन भी होस्पीटल पहोंच गये.. तो वहा पहेलेसे ही वसुधा ओर नीशा आ चुकी थी..

रश्मी वंदना चारु जयश्री ओर जागृती बीन्दीया ओर गीता स्कुलपे पहोंच गइ.. ओर सबने मीलकर स्कुलका सेड्युल तैय कर लीया.. होस्पीटलमे डीपार्टमेन्टके हीसाबसे सबको जीम्वेवारीया बांटदी गइ.. मुनाको मेडीकल स्टोर सम्हालनेका स्वतंत्र हवादा देदीया गया.. वसुधा भावीकाने मीलकर अलग अलग डोक्टरोका सेड्युअल तैय करलीया..

नीशा बर्खाने मीलकर सभी नर्सोकी ड्युटी ओर दुसरी व्यव्सथा तैय करली.. आरतीको दर्दीके केस रीसेपनीस्ट सम्हालने देदीया.. इन दो दिनमे सबकुछ तैय होगया.. अब भावीकाको हमेसाके लीये यही रहेना था.. आरती ओर उनकी बुढी मां.. ओर भावीकाकी दो स्टाफकी नर्सोके लीये पुनमने रश्मीके पुराने घरपे रहेनेकी व्यवस्था करदी.. जो घर बहुत बडा था..

सबकुछ तैय होनेके बाद लखन सृती राधीका नीलमके साथ दया ओर रजीयाको लेकर सहेर जानेको तैयार हो गया.. तो चंदा भी अब सहेरमे लखनके साथ जाना चाहती थी.. तो लखन सबको लेकर सहेर चला गया.. ओर सब लोग अपने अपने काममे बीजी होगये.. अब सृती पहेलेकी तराह अकेली ही अपनी क्लीनीकपे जाने लगी.. वहा उनको अब भावीकाके पेसन्ट भी मील गये थे..

वृन्दा कार्यक्रम समाप्त होनेके बाद अ‍ेक दिन ओर रुक गइ.. तभी उसे अपने दिमागमे अ‍ेक योजना बनाइ.. उन्होने सुबह नास्तेके साय श्रीधरको अब घरपे छोडनेके लीये कहा.. ओर कुछ लीगल पेपरको सही करनेके लीये उसे दो तीन दीन श्रीधरकी मदद हे कहेते ब्रीन्दासे श्रीधरको तीन दिन लेजानेकी पेसकस की..

र्ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ थी.. फीर भी वो श्रीधरको वृन्दाके साथ भेजनेको राजी होगइ.. ओर जयश्री जोबपे जानेसे पहेले वृन्दाको गले लग गइ.. ओर बच्चीको ब्रीन्दाके सहारे छोडकर नइ स्कुलकी नोकरीपे चली गइ.. फीर चाइ नास्तेके बाद वृन्दाने अपना सामान बटोरा ओर ब्रीन्दाको गले मीलकर दोनो कार लेकर नीकल गये..

सहेर पहोचते दोनोने पुरे रास्ते मस्तीया की.. अभी जीतुलाल अपने धंधेपे था.. तो घर पहोंचते ही वृन्दाने फटाफट अ‍ेक बेग पेक करना सुरु करदीया.. ओर उनमे अपने कुछ लेटेस्ट कपडे डाले.. श्रीधर पुरे रास्ते उनसे छेडछाड कर रहा थातो उनसे रहा नही गया.. ओर वृन्दाको वही बेडपे गीराते दबोच लीया..

38659.gif


वृन्दा बहुत ही कामुन नीगाहोसे श्रीधरको देखते उनका साथ देने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो अ‍ेक हो गये.. श्रीधर बहुतही जोसमे वृन्दाको चोद रहा था.. ओर वृन्दा वासनाभरी नजरोसे श्रीधरको देखते उनका तगडा लंड जेलती रही.. आखीर दो बार चुत भरनेके बाद श्रीधर सांत हुआ तब वृन्दाने बम फोड दीया..
 
वृन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. चलो फटाफट कंपलीट होजाओ.. तेरे बापके आनेसे पहेले हमे यहासे नीकलना हे.. कपडेतो पेक हो गये सीर्फ तैयार होना हे..

श्रीधर : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हम कही जा रहे हे..? वो लीगल पेरपके लीये..?

वृन्दा : (कातील मुस्कानसे) नही.. कोइ लीगल पेपर नही.. मेने र्बीन्दासे जुठ बोला था.. ताकी हम दोनो अकेलेमे दो तीन दिन कही टाइम स्पेन्ड कर सके.. समजलो ये हमारा छोटासा पहेला हनीमुन हे.. तुम समज गयेनां..? चलो फटाफट रेडी होजाओ..

श्रीधर : (सामने देखते) लेकीन..

वृन्दा : (बीचमेही बात काटते) लेकीन वेकीन कुछ भी नही.. अगर तुम्हारा बाप आगया तो लफडा होजागा.. वैसेभी ये बच्चेकी वजहसे सकतो हम दोनोपे पहेलेसीहे करता हे.. अगर हम दोनोको इस वक्त साथ देखलीया तो हंगामा करेगा.. इनको कुछ मालुम पडे इनसे पहेले ही हमे यहासे नीकलना हे..

श्रीधर : (सामने देखते) यार उसे पता तो चलही जायेगा.. चलो घरपे तुमने मम्मीको बहाना बनाकर समजा दीया.. लेकीन पापाको क्या कहोगी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते फोन हाथमे लेते) तुमभी नां..? बहुत चीन्ता करतेहो उनकी.. तेरीमांकी चीन्ता नही हे.. हम भी तेरी मांको ओर तेरे बडे पापाको चकमा देकर अ‍ैसेही नीकल जाते थे.. ओर वोभी पुरे अ‍ेक हप्तेके लीये.. ठहेर.. मे तेरे सामनेही उसे फोन करके बता देती हु..

वृन्दा : (जीतुलालको फोन लगाते) हां जीतु.. मे वृन्दा बोल रही हु.. हमारी जयश्रीको सरकारी स्कुलमे नोकरी मील गइ हे.. बस.. उनके बच्चेके लीये मुजे दो तीन दिन ओर यहा रुकना पडेगा.. फीर श्रीधर मुजे घर छोडदेगा..

जीतुलाल : (थोडा चीडते) यार कीतने दिन होगये..? ओर मुजे फोन करना.. मेही तुजे वहा लेने आउगा..

वृन्दा : (थोडी नाराजगीसे) क्यु..? अगर श्रीधर मुजे छोडने आ रहा हे.. तो तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अपनेही बेटेपे सक कर रहे हो..?

जीतुलाल : (थोडा चीडते) यार सक नही कर रहा.. बस.. वो हमेसा तुमसे चीपका रहेता हे.. ओर तुजे जीस नजरोसे देखता हे तो मुजे अच्छा नही लगता.. इसीलीये केह रहा हु..

वृन्दा : (थोडी सख्तीसे) क्यु..? भुल गया तु सबकुछ..? जब तेरे बडे भाइ ओर तेरी पत्नीके होते हुअ‍े भी तु मौका देखकर मेरे उपर चड जाता था.. तबतो कोइ सक नही था.. तबतो सब कुछ अच्छा था.. ओर मत भुल.. वो मेरे बेटेके साथ मेरा भांजा भी हे.. ओर अबतो हमारा दामाद हो गया हे..

जीतुलाल : (चीडते) यार तु मेरे साथ बहेस मत कर.. धंधेपे ध्यान देने दे.. तुजे जैसा मन करे कर.. मे मेरे खानेका इन्तजाम करलुगा.. चल फोन रखदे..

कहा तो वृन्दा फोन काटते ही श्रीधरकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. वृन्दाने पुरी तराह जीतुको अपने वसमे करलीया था.. इसे जीतुका कोइ डर नही था.. ओर वो अब खुलकर श्रीधरके साथ जींदगी जीना चाहती थी.. लेकीन वृन्दाको पता नही थाकी सबकुछ उनके मुताबीक नही उनकी बहेन ब्रीन्दाके मुताबीक हो रहा था..

फीर दोनो घरको ताला लगाकर वहासे नीकल गये.. दो दिन थातो ज्यादा दुर जाना मुमकीन नही था.. वृन्दाके कहेनेपे दोनो दिवकी ओर नीकल गये.. ओर वहा दोनोने अ‍ेक बडीयासी होटेलमे अ‍ेक अ‍ेसी कमरा बुक करलीया.. वहा जातेही फ्रेस होतेही दोनो अ‍ेक होगये.. ओर श्रीधरने वृन्दाको जमकर दो बार चोद लीया..

तब वृन्दाको पता नही थाकी श्रीधर उनकी हर बाते ब्रीन्दाके साथ सेर करता हे.. वहा पहोंचतेही श्रीधरने ब्रीन्दाको अपना लोकेशन सेर करदीया था.. तो ब्रीन्दा कातील मुस्कान करने लगी.. दिवमे वृन्दा ओर श्रीधरने खुब अ‍ेन्जोय कीया.. मुस्कीलसे ही दोनो बहार नीकलते थे.. पुरा दिन ओर रात सीर्फ कमरेमे..

बच्चे देनेकी वजहसे वृन्दा श्रीधरके साथ सेलीब्रेट करना चाहती थी.. ओर इस सेलीब्रेटमे उन्होने जमकर खुब श्रीधरके साथ सेक्स कीया.. ओर उसे पता भी नही चलाकी उनकी सेक्स करते विडोयो फील्म बन रही हे.. जो श्रीधरने वृन्दासे छीपकर अपना मोबाइल सेट कीया था.. फीर दोनो दो दिन मजे करके वापस आगये.. ओर श्रीधर वृन्दाको घर छोडकर वापस गांव चला गया..

तो अब राधीका पेट बढनेकी वजहसे कभी कभार ही होस्टेलपे जाती.. वो ज्यादातर बच्चो ओर घर सम्हालती.. ओर उनमे चंदा विजय ओर अपनी बच्चीको सम्हालते राधीकाका हाथ बटाती.. क्युकी अब वहा दया ओर रजीयाने प्रेगनेन्ट होनेके बावजुद मीलकर पुरी होस्टेल सम्हाल लीया था..

तो नीलम भी कोइ बहाना बनाकर हर सेटरडे सन्डे धिरेनके घरपे चली जाती.. ओर उनकी पत्नी होनेका हक अदा करती.. अब धिरेन भी नीलमको हमेसाके लीये घर आनेका फोर्स करने लगा.. जो नीलम उनकी ग्रेज्युअ‍ेशन खतम होने तक ना आनेका बहाना बनाकर बातको टाल देती.. ताकी उसे लखनके घरपे रहेते लखनका प्यार मील सके.. सबकी लाइफ रुटीन हो गइ.. समय बीतने लगा..

लखन अ‍ेक दिन सहेरमे ओर अ‍ेक दिन गांवमे रहेता.. ओर हप्तेके कइ सेटरडे सन्डे सबको लेकर गांव चला जाता.. वहा लखनकी सभी बीवीया ओर भाभीया मीलकर रातमे लखनको सोने तक नही देती.. ओर दिनमे भी मौका मीलतेही चारु रश्नी नीशा वंदना लखनको पकड लेती.. ओर स्कुल होस्पीटलके खाली कमरेमे लेकर चली जाती..

अब देवायतकी सभी बीवीओने लखनको अपने पतीकी तराह अ‍ेक्सेप्ट करलीया था.. स्कुलके उद्घाटनके ठीक अ‍ेक महीनेके बाद वंदनाको मौका मील गया.. नीशा चारु वसुधा ओर रश्मीका लखनके साथ अनुभव सुना था इसीलीये उन्होने दो दिनकी छुटी लेली.. ताकी दुसरे दिन वो आराम कर सके..

ओर हुआ भी वही.. फोनपे बात होनेके बाद लखन सीधाही रश्मीके घर चला गया.. उस दिन वंदना अ‍ेक दुल्हकी तराह सजके लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर दोनोने पुरा दिन अ‍ेक नये सादी सुधा जोडेकी तराह बीताया.. जब लखन वहासे नीकला तब वंदनाकी हीलनेकी भी स्थीती नही थी..

लखनने वंदनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग जंजोरके रख दीया था.. वंदना भाभीके साथ उनकी दोस्त भी थी.. तो लखन वंदना दोनोको जोस कुछ ज्यादाही चडा हुआ था.. ओर पहेले मीलनमे ही लखनने बीना नीचे उतरे वंदनाको जमकर चार बार चोद लीया.. ओर चारो बार उनकी चुतको पुरी भरके फीरसे हरी भरी करदी..

विजयके साथ चंदा पुनम भावनाकी बच्चीया भी बडी होने लगी.. सहेरमे अब चंदा राधीका ओर सृती नीलम ही थी.. जब सेटरडे सन्डे नीलम घरका बहाना बनाकर धिरेनके घर चली जाती तब सृती चंदाको भी अपने साथ सोनेके लीये बुला लेती.. पहेलेतो चंदा बहुत ही सरमाइ.. फीर सबकुछ रुटीन होगया.. ओर लखन तीनोको अच्छी तरनह संतुस्ट करता..

गांवमे अब स्कुल ओर होस्पीटल धम धमने लगी.. आजु बाजुके गांवसे स्कुलमे बच्चे आर पेसन्ट आने लगे.. वहा कइ महीलाओका पेट अब काफी बढ गया था.. तो कीसीका डीलीवरीना वक्त भी आगया था.. अ‍ैसेही सांती ओर सलमाकी डीलीवरी गांवकी होस्पीटलमे ही होगइ.. सांतीने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया था.. तो सलमाने भी अ‍ेक बच्चेको जन्म दीया..

जीसे दो महीनेके लीये फीरोजको सलमासे दुर रहेना था.. तो अब फीरोज जरीनाके साथ सोनेकी जीद करने लगा.. तो जरीनाने भी अपनी प्रेगनन्सीकी वजहसे फीरोजको छुनेसे मना करदीया.. जीसे फीरोज बहुत ही चीड गया.. ओर अपना रातका समय भी ज्यादातर खेतोपे ही बीताने लगा.. ताकी वो अपनी मजदुरके साथ अपनी सारीरीक जरुरतको पुरा कर सके..

लेकीन उनको कभी पता नही चलाकी जरीनाकी प्रेगनन्सी सीर्फ अ‍ेक बहाना थी.. क्युकी सलमाकी डीलीवरीकी वजहसे अब ज्यादातर जरीनाको ही साहीलका खयाल रखना था.. ओर मौका मीलतेही साहीलसे दिनमे भी अपनी प्यास बुजा लेती.. ओर जब फीरोज रातपे खेतपे रुकता तब जरीना पुरी रात साहीलके साथ उनका बीस्तर गरम करती..

अब जरीनाने साहीलको पुरी तराह अपना पती मानलीया था.. ओर उसे जो मजा साहीलसे मील रहा था वो मजा कभी फीरोज ओर कादीरसे नही मीला.. वही हाल सहेरमे सायराका था.. वो अब पतीके रुपमे कादीरसे ज्यादा साहीलको तवजो देने लगी थी.. उनको साहीलके साथ सेक्स करनेमे बहुत मजा आ रहा था..

तो साहील भी रेग्युलर सहेर जाकर सायराको मीलकर आता.. ओर कभी कभी कादीरकी टुरकी वजहसे वही दो तीन दीनके लीये रुक जाता.. तब साहील सायरा मीया बीवीकी तराह रहेते खुब मजा करते.. अब हर तीन चार महीनेमे सबाना भी साहीलको बेंगलोर बुला लेती.. ओर अपनी प्यास बुजवाने लगी..

समयके साथ अब सृती राधीका भावीका ब्रीन्दा वृन्दा बसंती जरीना गीता जागृती बीन्दीयाके साथ रजीया ओर दयाका पेट भी काफी बढ गया था.. होस्पीटलपे अब भावीका बहुत बीजी होगइ थी.. उन्होने दो ओर सहायक लेडी डोक्टरको रख लीया था.. वो हर दिन चारसे पांच डीलीवरी करती.. ओर लेडीसको चेक करती.. वसुधाने जनरल डोक्टरका काम सम्हाल लीया था.. वहा ओथोपेडीक वोर्ड भी था..

राधीका दयाका पेट बढ गया था तो अ‍ेक फ्राइडे सामको राधीकाको लेबर पेइन हुआ. ओर सृतीने उनकी डीलीवरीकी.. राधीकाने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. तब कुछ दिनके लीये पुनमने लताको वही सहेर भेज दीया.. अब लता काफी कंपलीट होगइ थी.. ओर उनको भावीकाने सेक्स करनेकी छुट देदी थी..

सहेर ओर गांवमे अब बच्चोकी कीलकीलाट सुनाइ देने लगी थी.. पहेले विजय फीर चंदाकी बच्ची ओर अब राधीकाकी बच्ची.. लता ओर चंदा राधीकाका बहुत खयाल रखती.. ओर मौका मीलतेही लखनके साथ बीस्तर गरम करती.. अब उन सबके लीये सेक्स करना आम बात होगइ थी.. कभी कभी सबके होते हुअ‍े भी चंदा सृती ओर लताकी कुटाइ अ‍ेक साथ अ‍ेकही बीस्तरपे हो जाती..

तो स्कुलमे अब काफी संख्या हो गइ थी.. गीता हर दिन गांवसे अपडाउन करती.. कभी कभी मोका मीलता तो मुना उसे गांव छोडने चला जाता.. ओर गीताको संतुस्ट करते वापस आजाता.. सबका अफैर चलता रहा.. अ‍ैसेही अ‍ेक साल बीत गया कीसीको पता भी नही चला.. ओर इन अ‍ेक सालमे ना जाने क्या क्या हुआ..

सृतीका पेट बढ गया तब चंदा ओर लताने लखनको सम्हाल लीया.. जबसे राधीकाकी डीलीवरी हुइ तबसे लता सहेरमे रुक गइ थी.. ताकी लखनको कोइ तकलीफ ना हो.. विजय अब बडा होगया थातो चंदाको ही अपनी मां मानकर मम्मी कहेकर बुलाने लगा.. ओर चंदा भी विजयका अपने बेटेकी तराह खयाल रखती..

ज्यादातर विजय चंदाके साथ ही सोता.. ओर कभी कभी चंदा अपनी बेबीको दुध पीलाती तो दुसरी ओर विजय भी चंदाका दुध पीनेकी जीद करता.. ओर चंदा उसे अपना दुध पीलाती.. विजय अब थोडा बडा होगया तो कभी नीलमके साथ तो कभी सृती राधीकाके पास सो जाता.. तब लखन नीचे चंदाके रुममे चला जाता.. वहा चंदा ओर लता दोनो ही लखनका इन्तजार करती..

लखन दोनोको दो दो तीन तीन बार जमकर पेलता ओर दोनोको संतुस्ट करते वही सो जाता.. तो कभी कभी लखन चंदा लताकी वजहसे हप्तेमे तीन चार बार दिनमे अ‍ेक बार कोलेजसे बंक मरवाते या छुटीके दिन नीलमको लेकर भुमीका वाले घरपे चला जाता.. ओर नीलमको जमकर पेलता.. जीसे नीलम भी बहुत खुस रहेती..

अ‍ेक सालमे समयके साथ सबकी डीलीवरी हो चुकी थी.. सृतीकी कोखमे फीरसे भुमीका जन्म लेकर आगइ थी.. तो भावीकाने भी अ‍ेक बच्चीको जन्म दीया था.. दयाको अ‍ेक लडका तो रजीयाने अ‍ेक लडकी पैदा करली थी.. ओर दोनोमे समजोता भी करलीयाकी अपने बच्चोकी आपसमे सादी करवायेगी..

गांवमे रमा भी अ‍ेक बच्चीको जन्म देती हे.. भानुको आजतक पता नही चला की वो बच्ची लखनकी हे.. वो आज भी अपनी मां सरला ओर रीटाके पीछे पागल हे.. अब उमरकी वजहसे सरला भानुको कम ही हाथ लगाने देती हे.. लेकीन लखनसे मौका मीलते ही आज भी अपनी प्यास बुजा लेती हे.. ओर रमाको आज भी लखनका प्यार रेग्युलर मील रहा हे..

सलमाने अपने बच्चेको जन्म देनेके बाद फीर सात महीनेके बाद जरीनाने भी अ‍ेक बच्चीको जन्म दीया.. जो बच्ची अपने ही बेटे साहीलकी थी.. ओर इस बारेमे फीरोजको आज भी नही पता ये राज सीर्फ सरलमा जरीना ओर साहील ही जानते थे.. तो समयके साथ बसंतीने भी अ‍ेक सुंदर लडकेको जन्म दीया..

बखेडा तो तब हुआ जब अ‍ेक दिन सुबह सुबह श्रीधर वृन्दाको लेने सहेर गया था.. तब जीतुलाल भी घरपे था.. सुबह सुबह श्रीधरको देखते ही वृन्दाके चहेरेपे अ‍ेक अलग ही खुसी छागइ.. ओर वो दोडकर श्रीधरको गले लग गइ.. फीर श्रीधरके गालको चुम लीया.. ओर श्रीधरको कुछ अलग ही नजरोसे देखने लगी..

जो वो अपनी जवानीमे जीतुके साथ अफैर हुआ तब देखती थी.. फीर हाथ पकडकर उसे चाइ नास्तेके लीये अपने बगलमे ही बीठा दीया.. फीर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर अ‍ेक नीवाला श्रीधरको खीलाया.. तो जीतुलाल दोनोकी ओर देखता ही रेह गया.. ओर मनही मन श्रीधर वृन्दाको कोसने लगा.. वृन्दा ओर ब्रीन्दाके बीच अगले ही दिन फोनसे बातचीत हो चुकी थी.. तब बैठते ही..

कन्टीन्यु
 
Back
Top