Incest चीरहरण (Completed) - Page 2 - SexBaba
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Incest चीरहरण (Completed)

अपडेट 10



शाम होने को थी सुमन आज सारा काम धाम ख़त्म करके गौतम के पास आई औऱ स्टडी टेबल के आगे चेयर पर बैठे गौतम के सर को सहला कर प्यार से उसके माथे पर चुम्बन करके बोली.. चाय बना दू?

गौतम - हां..

सुमन वहा से रसोई में आ गई औऱ चाय बनाने लगी गौतम फिर अपनी किताब बंद करके टेबल पर रखकर खड़ा हो गया औऱ अपने फ़ोन पर आपने दोस्त आदिल का फ़ोन आते देख उसे तुरंत उठा लिया औऱ बात करने लगा..

गौतम - हेलो..

आदिल - हां कहाँ है रंडी?

गौतम - वही जहाँ हमेशा रहता हूँ.. तेरी अम्मी के भोसड़े में..

आदिल - बकचोदी मत कर रंडी.. आज फ्री है तो बता?

गौतम - आज किसकी दिलवा रहा है भाई?

आदिल - माँ के लोडे हवसी, हमेशा लेने की सोचा कर तू..

गौतम - अरे तो बोल ना, क्या काम है?

आदिल - शादी में चलना है.. चलेगा?

गौतम - किसकी शादी में?

आदिल - उससे अपने को क्या करना है? शादी का कार्ड आया हुआ पड़ा है अब्बू शहर से बाहर है, घर से औऱ कोई जा नहीं रहा तो सोचा मैं ही चला जाता हूँ. तू चलेगा तो बता? दोनों भाई मिलकर लड़किया ताड़ेंगे..

गौतम - भाई बाइक में तेल डलवा देना फिर चाहे अमेरिका ले चल मुझे, मैं तो फ्री हूँ..

आदिल - ठीक है रंडी.. शाम को सात बजे घर आ जाना औऱ लेट मत करना..

गौतम - ठीक है चल, रखता हूँ..

गौतम आदिल से बात करके नहाने चला जाता है औऱ सुमन चाय लेकर कमरे में आ जाती है..

सुमन - ग़ुगु...

गौतम बाथरूम से - हाँ माँ..

सुमन - बच्चा.. नहा रहा है क्या?

गौतम - हाँ माँ..

सुमन - पर सुबह नहाया तो था ना..

गौतम - कहीं जाना है माँ..

सुमन - कहाँ?

गौतम - दोस्त के भाई की शादी है.. बुलाया है उसने..

सुमन - ठीक है मैं कपडे निकाल देती हूँ बेटू..

गौतम - माँ कोई पीला गुलाबी मत निकाल देना..

सुमन - अरे नहीं, तेरी बुआ जो लाई थी तेरे लिए उनमे निकलती हूँ..

सुमन अलमीरा खोलकर नीचे पड़े बैग से सभी कपडे औऱ जूते जो पिंकी गौतम के लिए आई थी निकालकर बेड पर पटक लेती औऱ उनमे से गौतम के लिए कपडे निकालने लगती है..

सुमन मन में - हम्म.. पिंकी कितनी भी ऐयाश औऱ कमिनी क्यू ना हो.. ग़ुगु के लिए हमेशा दिल खोल के खर्चा करती है.. अब इनमे से क्या निकालू.. ये सब अच्छे लगेंगे मेरे ग़ुगु पर.. ये ठीक रहेगा..

सुमन एक ब्लैक शर्ट औऱ लाइट ब्लू जीन्स निकाल कर बेड पर एक तरफ रख देती औऱ उसके साथ ही ब्लैक शूज भी रख देती है, बाकी कपडे औऱ जूते बैग से निकालकर अलमीरा में जमा के रख देती है फिर कमरे से बाहर चली जाती है..

गौतम नहाकर बाथरूम से बाहर निकलता है औऱ बेड के किनारे रखी चाय की चुस्की लेकर कपडे पहनने लगता है.. चाय पीते हुए कपडे पहनकर गौतम कमरे से बाहर आ जाता है औऱ रसोई में सब्जी काट रही सुमन को पीछे से बाहों में भर लेता है..

सुमन - अरे.. आज क्या बात है? बहुत प्यार आ रहा है अपनी माँ पर मेरे ग़ुगु को..

गौतम - आज मतलब? मुझे तो हमेशा आता है अपनी खूबसूरत माँ पर प्यार? अपनी माँ से प्यार करना गलत है?

सुमन - बिलकुल भी नहीं.. मैं चाहती हूँ मेरा ग़ुगु मुझसे हमेशा प्यार करें.. अच्छा ये बताओ सच में शादी में जा रहे हो ना? किसी गर्लफ्रेंड से मिलने तो नहीं जा रहे?

गौतम - एक काम करो आप साथ चलकर तस्सली कर लो.. आपको तो आजकल मेरी बातों पर विश्वास ही नहीं होता?

सुमन - अच्छा ठीक है बाबा.. वैसे अगर गर्लफ्रेंड से मिलो तो थोड़ा ख्याल रखना औऱ कुछ करो कंडोम जरूर पहन लेना.. समझें?

गौतम - पहली बात तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. औऱ दूसरी बात, आपको शर्म नहीं आती अपने जवान बेटे से इस तरह की बात करने में?

सुमन हसते हुए - जवान औऱ तु? क्या बात है? पहले मेरा दूदू पीना छोड़ दे फिर जवाँ होने की बात कहना..

गौतम - आपने ही तो पिलाया था.. मेरी क्या गलत इसमें?

सुमन हस्ते हुए - अच्छा औऱ उस दिन शाम को कौन आया था मेरे पास दूदू के लिए? माँ बस पांच मिनट पीला दो... वैसे आज बहुत अच्छी खुश्बू आ रही है कोनसा परफ्यूम लगाया है?

गौतम - पता नहीं बुआ लेके आई थी.. मैंने नेट पर सर्च किया था *** नाम है, पर माँ बहुत महँगा परफ्यूम है बुआ ने फालतू में इतना खर्चा कर दिया..

सुमन - ग़ुगु.. सिर्फ परफ्यूम ही नहीं तेरे कपडे जूते औऱ बाकी सामान ज़ी बुआ ने दिया है सबकुछ बहुत महँगा है.. चलो उस पिंकी को किसी का तो ख्याल है. तेरे लिए तो हमेशा उसकी जेब खुली रहती है..

गौतम - हाँ.. वो बात तो है माँ, जेब के अलावा भी बहुत कुछ खुला रहता है.. बिना कुछ बोले सबकुछ ले आती है मेरे लिए बुआ.. वैसे आप उनसे इतना क्यू गुरेज करती हो? वो तो आपसे बहुत प्यार करती है..

सुमन - प्यार औऱ वो? वो तो बस पैसो से प्यार करती है.. पैसो के लिए अपने से इतने बड़े आदमी से शादी करके बैठी है.. यहां भी मुझे या तेरे पापा से मिलने नहीं बल्कि तुझसे मिलने आती है. उसे बस तेरी परवाह है.

गौतम - उनको मेरी परवाह है तो फिर आप इतना बैर क्यू रखती हो बुआ से?

सुमन - क्युकी.. उसका कोई भरोसा नहीं.. हवस में अंधी होकर तेरे साथ.. मैं तो उसकी जान ही ले लू..

गौतम - आप ना इस चार दिवारी में रहकर पागल हो रही हो.. बुआ के मन में ऐसा कुछ नहीं है वो तो मुझे बच्चों की जैसे प्यार करती है.. खामखा आप गलतफेहमी पालकर रिस्ते मत खराब करो.. मैं चलता हूँ, अपना ख्याल रखना.. रात को आने में थोड़ी देर हो जायेगी..

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गौतम ये कहते हुए सुमन के गालो को वापस चुम लेता औऱ मुस्कुराते हुए उसकी आँखों में देखकर घर से बाहर चला जाता है फिर अपनी बाइक स्टार्ट करके आदिल के घर के बाहर आ जाता है वही सुमन गौतम और पिंकी के बारे जानते हुए भी दोनों से ये बात छुपाने मेंसबकी भलाई और फ़ायदा समझती है..

गौतम आदिल के घर के बाहर आकर खड़ा ही हुआ था कि उसे सामने से बुरका पहने आती हुई एक औरत दिखी जिसके बड़े और तने हुए बूब्स बुर्के में भी साफ हिलते हुए नज़र आ रहे थे.. गौतम से उसे देखकर छेड़े बिना रहा ना गया औऱ वो उस औरत को देखकर जोर से बोला..

गौतम - हिला हिला चलती हो चुचे.. क्या मार डालोगी?

जानेमन हमें नहीं चूसाओगी तो क्या आचार डालोगी?

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औरत गौतम कि बात सुनकर उसके करीब आ जाती है औऱ अपने बुर्के का पर्दा उठाकर गौतम का हाथ पकड़ते हुए बोलती है..

औरत - अंदर आजा चूसाती हूँ तुझे.. बहुत जवानी चढ़ी है.. हरामजादे..

औरत ने जैसे ही बुर्के का पर्दा उठाकर अपनी शकल दिखाई गौतम कि सिट्टी पिट्टी सब गुल हो गयी.. उसके सामने आदिल कि माँ शबाना खड़ी थी जिसे गौतम ने कोई अनजान औरत समझके छेड़ दिया था..

गौतम - आंटी आंटी माफ कर दो.. गलती से मुंह से निकल गया.. मुझे पता नहीं था आप हो..

शबाना - एक थप्पड़ पड़ेगा ना तो सब पता चल जाएगा तुझे.. अभी ठीक से दाढ़ी-मुछ भी नहीं आई औऱ लड़की छेड़ने लगे है नवाबसाब.. सूरत से इतने मासूम है औऱ सीरत से शैतान के भी अब्बा हो गए है..

गौतम - आंटी. आप इतनी सेक्सी लग रही थी आते हुए कि अपनेआप मुंह से निकल गया.. माफ़ कर दो..

शबाना - बेशर्म अपनी जबान को काबू में रख, अपने दोस्त कि अम्मी पर लाइन मारता है कमीना..

गौतम - अब आप हो ही इतनी खूबसूरत मैं क्या करू? अपनेआप आपकी तारीफ़ जुबान से निकल जाती है..

शबाना गौतम कि बातें सुनकर मन ही मन उसके प्रति आकर्षित होने लगती है, उसके बेरंग बड़े जीवन औऱ सुनेपन में आज कई बरसो बाद किसी ने मीठे शब्दों कि चाशनी मिलाई थी.. शबाना गौतम के मासूम से चेहरे औऱ उसकी शहद सी बातो पर दिल हारने लगी थी कि उसे अपने औऱ गौतम बीच का फर्क याद आ गया औऱ वो ऊपर से सख्त बनने का नाटक करके उसे जवाब देती है..

शबाना - तेरी जुबान खींचकर गले में लपेट दूंगी समझा.. बड़ा आया तारीफ करने वाला.. अभी से ये हाल है आगे नजाने क्या गुल खिलायेंगे..

गौतम - बुरा क्यू मानती हो आंटी? मैं भी तो आपके लिए आदिल जैसा हूँ.. अपना बच्चा समझके माफ़ कर दो.. वैसे कल आपने जो मटन बनाया था बेहद लज़ीज़ था.. मैंने आदिल से भी कहा अगर आंटी मेरे सामने होती तो मैं उनके हाथ चुम लेता..

ये कहते हुए गौतम ने शबाना के हाथ को पकड़के अपने होंठों से चुम लिया.. गौतम के ऐसा करने पर शबाना हैरानी से इधर उधर देखने लगी औऱ अपना हाथ खींचते हुए बोली..

शबाना - जरा भी शर्म नहीं है क्या तुझमे? तेरी अम्मी जैसी हूँ छोड़.. कोई देख लेगा तो हंगामा हो जाएगा..

गौतम - अरे देख लेगा तो देख लेने दो.. मुझमे औऱ आदिल में कोई फर्क थोड़ी है.. वैसे आंटी.. आप जितनी खूबसूरत औऱ हसीन दिखती हो उतना ही लज़ीज़ खाना भी बनाती हो.. आपके हाथों का बनाया मटन वापस खाने कि इच्छा वापस हो रही है..

शबाना अपनी तारीफ सुनकर इस बार थोड़ी नरम पड़ जाती है औऱ मुस्कुराते हुए बोलती है - मेरी छोड़ अपनी देख.. जितनी प्यारी तेरी शकल है ना, मेरी जगह कोई औऱ होती तो अपने सलवार में पूरा घुसा लेती तुझे.. औऱ मटन तो जब भी तुझे खाना हो बोल देना आदिल को, मैं बना के भिजवा दूंगी..

गौतम - मैं तो कब से तैयार बैठा हूँ आंटी कहीं घुसने के लिए.. आप मौका तो देकर देखो.. कसम से कहता हूँ काबड़ीवाले को भूल जाओगी..

शबाना गुस्से में - बेटा मेरे अंदर घुसने के लिए के लिए तुझे खुदा से अगला जन्म लेना पड़ेगा..

गौतम - हाय.. आंटी आपके लिए अभी अपनी नस काट कर मर जाऊ मैं..

शबाना गौतम का कान खींचकर - क्या?

गौतम - उफ्फ्फ आंटी.. कितनी ज़ालिम हो आप.. मुझ जैसे बच्चे पर जरा भी रहम नहीं आता आपको..

शबाना मुस्कुराते हुए - क्या हुआ? अभी तो बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे.. कान खींचते ही अकल आ गयी?

गौतम कान छुड़वाते हुए - अच्छा माफ़ कर दो.. बस? अब नहीं बोलता कुछ भी आपसे.. आदिल को बुला दो..

शबाना को गौतम की मासूमियत से भरे लहज़े में कही हुई बात सुनकर उसपर प्यार आने लगता है औऱ वो गौतम के होंठों पर लगे छोटे से चुविंगम के टुकड़े को अपनी उंगलियों से हटाकर बोलती है - आदिल घर पर नहीं है दूकान पर है.. अब जा यहाँ से.. आगे कुछ औऱ बोलेगा तो मार खायेगा मुझसे.. शबाना ने ये बात नरमी औऱ प्यार भरे लहज़े में गौतम के होंठों को अपनी उंगलियों से पकड़कर कहीं थी.. फिर वो घर के अंदर जाने लगी..

गौतम - सुनो आंटी...

शबाना घर के अंदर जाते हुए रूककर - अब क्या है बोल..

गौतम - आदिल अगर मेरा दोस्त नहीं होता तो आज मैं चूहा बनकर आपके बिल में घुस जाता..

शबाना गुस्से में - चुपचाप चला जा कमीने वरना तेरी लुल्ली पकड़ के उखाड़ लुंगी..

गौतम - लुल्ली तो काबड़ीवाले की है शबाना बेगम... मेरा तो लोडा है लोडा...

गौतम में नजाने कहाँ से इतनी हिम्मत औऱ बेशर्मी आ गई थी औऱ वो ये बात बोलकर अपनी बाइक स्टार्ट करते हुए जोर से आवाज लगता है.. कबाड़ी वाले.... औऱ शबाना को देखता हुआ वहा से चला जाता है..

शबाना भी दरवाजे पर खड़ी हुई गौतम को जाते हुए देख रही थी उसकी नज़र आज गौतम से नहीं हट रही थी गौतम पहले भी कई बार उससे मिला था लेकिन जिस तरह से आज वो शबाना से मिला उसका असर शबाना के ऊपर अलग तरह से हुआ था..

शबाना के होंठो पर मुस्कुराहट थी आज सालों बाद किसी ने उसके साथ इस तरह की मसखरी औऱ मज़ाक़ किया था जिससे उसे औरत होने का अहसास हुआ था वरना वो कब से घर की चार दिवारी में बंद किसी परिंदे सी उड़ने की कला ही भूल चुकी थी.. अपने पति के साथ उसका सम्बन्ध बिस्तर पर ख़त्म हुए कई साल बीत गए थे.. शबाना मुस्कुराते हुए घर का दरवाजा लगाकर अंदर आ गयी औऱ गौतम की कही एक एक बात उसे अजीब सी ख़ुशी दे रही थी.. उसने कई बार अपने ख्यालों को काबू करने की कोशिश की मगर उसके दिल में गौतम के लिए जगह बन चुकी थी.. औरत को मर्द से थोड़ा इश्क़ इज़्ज़त औऱ संभाल मिल जाए तो वो मर्द को अपनी पलकों पर बैठा लेती है.. शबाना के साथ भी कुछ ऐसा ही होने लगा था.. गौतम ने इस बार उसके दिल पर गहरी छाप छोड़ दी थी..

गौतम दूकान पहुँचता है - 7 बजे का कहा था ना गांडू, अब खुद लेट करवा रहा है..

आदिल - अरे यार अब्बू बाहर गए है औऱ वो रामु चुतीया अब तक बिल लेकर नहीं आया.. वो आये तो दूकान बंद करू..

गौतम - मैंने पहले कहा था साले मत रख उसको काम पर.. आलसी औऱ ढीला है बिल्किल.. अग्रवाल के यहां तो दिनभर सोता रहता था..

आदिल - अब्बू ने रखा है यार मैंने थोड़ी..

गौतम - अच्छा जाना कहाँ है औऱ किसकी शादी है ये तो बता?

आदिल - वो विपुल गोयल है ना जो हर महीने अपनी फैक्ट्री का वेस्ट माल अब्बू को बेचते है.. गाँधी नगर वाले? जिनके पास तू गया था मेरे साथ एक बार?

गौतम - अच्छा वो साला अंधालंड.. जो सीढ़ियों से गिर गया था..

आदिल - हाँ उसी के बेटे का रिसेप्शन है.. मालदार पार्टी है.. वेज नॉनवेज सब है मेनू में.. औऱ देखने लायक़ सामान भी.. तेरे लिए आंटीया भी होंगी साले मिल्फ लवर..

गौतम - अच्छा सुन.. एक काम कर दे यार..

आदिल - क्या?

गौतम - दारू पीला दे भाई..

आदिल - झांट के बाल बियर तो संभालती नहीं तुझसे दारु पियेगा तू..

गौतम - तेरी कसम भाई आज कुछ नहीं करूंगा.. बहुत तलब लग रही है.. 1-2 बियर की बात है..

आदिल - तू रहने दे यही फ़ैल जाएगा..

गौतम - आज औकात दिखा रहा है ना? बेटा मैं भी याद रखूँगा सब..

आदिल - पी लेना रंडी.. मंगाऊ किस्से वो मादरचोद रामु आये तो..

गौतम - वो आ रहा है सामने से..

आदिल - बहनचोद तेरी किस्मत जबरदस्त है कोई भी काम नहीं अटकता..

गौतम - चल अब भेज इसको जल्दी..

आदिल रामु से - बहन के लंड एक बिल लाने में सारा दिन कर दिया तूने..

रामु - अग्रवाल ज़ी ने रोक लिया था..

गौतम - क्यू उनको तेरी गांड पसंद आ गयी थी क्या? कितनी बार मरवाई?

आदिल - चल अब ठेके पर जा औऱ एक बीयर लिया जल्दी से..

गौतम - सुन... ये बाइक लेजा.. औऱ ठेके पर किसी से गांड मत मरवाने लग जाना, जल्दी आना कहीं जाना है हमें..

रामु पैसे लेकर ठेके पर चला जाता है औऱ एक बियर लेकर वापस आ जाता है..

आदिल गौतम को देते हुए - ले भाई.. पिले अंदर बहुत जगह है.. औऱ रामु तू ये सारा माल दूकान के अंदर रख.. बंद करनी है दूकान..

रामु - पर अभी तो नो नहीं बजे..

आदिल - आज तेरी जल्दी छूटी रामु..

गौतम बियर पीके ख़त्म कर देता है औऱ फिर से हलके नशे की चपेट में आ जाता है..

आदिल - चल लोडे आठ बज गए, चलते है शादी में..

गौतम - लोडे किसको बोला गांडु? अब तो अब्बू जान बोल तभी जाऊँगा तेरे साथ..

आदिल - रंडी.. आ गया ना औकात पर तू फिर से?

गौतम - अरे मज़ाक़ कर रहा हूँ भाई.. अब क्या अब्बू अपने आदिल बेटे से मज़ाक़ भी नहीं कर सकते.. चल चलते है..

आदिल - भोस्डिके तरीके से रह जा.. वहा जाकर कोई हरकत मत कर देना.. तेरा ठुल्ला बाप भी नहीं बचा पायेगा..

गौतम - अब अपने अब्बू को समझायेगा तू मादरचोद?

आदिल - हट बहनचोद.. जाना ही नहीं.. गलत बुला लिया तुझे..

गौतम - अरे मज़ाक़ कर रहा हूँ गांडु.. चल चलते है.. आज कुछ नहीं करूँगा..

आदिल - सच बोल रहा है?

गौतम - तेरी कसम..

आदिल गौतम के साथ शादी की जगह के लिए निकल पड़ता है..

गौतम - भाई यार आज मन बहुत उदास है..

आदिल - क्या हुआ रंडी.. किसकी याद आ रही है..

गौतम - भाई वो सलमा आपा नहीं रहती थी तुम्हारी किराएदार.. यार उसकी बहुत याद आ रही है..

आदिल - उसकी याद क्यू आ रही तुझे? वो तो खुद तेरी इज़्ज़त लूटने में थी ईद वाले दिन, वो तो मैं सही टाइम पर आ गया वरना तुझे तो वो कच्चा खा जाती..

गौतम - सही नहीं साले गलत टाइम पर आया था तू.. सलमा आपा मेरा पहला प्यार है.. काश सलमा आपा मेरी इज़्ज़त लूट लेती उस दिन..

आदिल - कितना वहशी है मादरचोद तू.. वैसे तूने बताया नहीं कभी उस दिन वो सब हुआ कैसे तुम्हारे बीच में..

गौतम - 1 बियऱ और लगेगी बताने में, ठेके पर रोक दोनों एक एक लेटे है...

आदिल बाइक आगे एक ठेके पर रोक कर दो बियर ले लेता है औऱ दोनों ठेके के पीछे जाकर पिने लगते है...

आदिल - बता क्या हुआ था?

गौतम - यार मैं उस दिन तुम्हारे घर की छत पर बाथरूम में हिला रहा था.. पता नहीं कहाँ से अचानक सलमा आपा वहां आ गई औऱ उसने मुझे हिलाते हुए पकड़ लिया..

आदिल - फिर क्या हुआ?

गौतम - फिर वही हुआ जो सोचके मैं हिला रहा था..

आदिल - क्या हुआ?

गौतम - रुक यार मूत के आता हूँ.. गौतम बियर ख़त्म करके मूतने चला गया फिर साइड में एक थड़ी वाले के पास जाकर एक बड़ी एडवांस सिगरेट वही लटक रहे लाइटर से जलाकर कश लेता हुआ वापस आ गया..

गौतम - 1 बियर औऱ पीनी है मुझे..

आदिल - भोस्डिके 2 हो गई तीसरी में भंड हो जाएगा और यही सो जाएगा.. आँखे देख कैसे लाल हो रही है..

गौतम कश लेता हुआ - लाना है तो ला गांडु, ज्यादा ज्ञान मत चोदे..

आदिल - चल लाता हूँ.. आदिल एक बियर औऱ लेके आ गया औऱ गौतम को देते हुए बोला.. आगे क्या हुआ फिर..

गौतम बियर की घूंठ लेकर - सलमा आपा मुस्कुराते हुए मेरे सामने बैठ गई औऱ पहली बार मुझे पता चला की लोडा चूसाने में कितना मज़ा आता है.. हाय.. आज भी याद है कितनी प्यार से सलमा आपा ने मेरे लंड को अपने मुंह में डालकर चूसा था..

आदिल - उसके बाद क्या हुआ?

गौतम बियर की औऱ दो घूंठ मारके सिगरेट का कश लेकर बोला - फिर उसके बाद तू अपनी अम्मी चुदाने आ गया था चुत की शकल के.. थोड़ी देर बाद नहीं आ सकता था कबाड़ी की औलाद..

आदिल - इस कबाड़ी की औलाद के टुकड़ो पर पल रहा है तू.. ठुल्ले के मूत..

गौतम - बुरा मत मान भाई.. बस मेरा काम कर दे..

आदिल - क्या?

गौतम - सलमा आपा कहाँ रहती है बस उनका एड्रेस कबाड के देदे यार.. कसम से ऐसी चुत दिलवाऊंगा याद रखेगा जिंदगी भर.. मेरे गुण गायेगा तू...

आदिल - सच बोल रहा है?

गौतम - इस बियर की कसम..

गौतम बियर की आखिरी घूंठ पीके ख़त्म करता है औऱ लड़खड़ाते कदमो के साथ वहा से सडक पर आ जाता है फिर दोनों बाइक स्टार्ट करके शादी वाली जगह की पार्किंग में बाइक लगा के गार्डन की तरफ आ जाते है, गार्डन के गेट पर चौकीदार ने रोककर पूछा तो आदिल ने फ़ोन में कार्ड दिखाकर गौतम के साथ एंट्री कर ली..

गौतम - बहनचोद ये शादी है या क्या है?

आदिल - वो डायलॉग है ना.. बड़े बड़े लोग बड़ी बड़ी बातें..

गौतम नशे में था मगर शादी की रौनक उसे साफ दिखाई दे रही थी..

आदिल - चल भाई नॉनवेज में कुछ चेपते है..

गौतम - तू खा भिखारी.. मैं तो चला नाचने..

आदिल - रंडी तो नाच-गाना है करेंगी..

गौतम सामने बज रहे dj के पास डांस फ्लोर पर चला जाता है वहा नाच रहे लोगों के साथ मिलकर है नाचने लगता है वही आदिल खाने पर टूट पड़ता है..

देसी देहाती औऱ बॉलीवुड के डांस नंबर पर गौतम नाचने में इतना मशगूल हो गया था की उसे पता ही है नहीं चला की वो नाचते नाचते कब एक औरत के करीब आ गया था औऱ दोनों मिलकर डांस फ्लोर पर आग लगा रहे थे..

जब दूल्हे औऱ दुल्हन की एंट्री के टाइम गाना रुका तो गौतम को अहसास हुआ की डांस में वो इतना लीन हो गया था की एक 36 की औरत के साथ बाहों में बाहे डालकर नाचने लगा था.. गाना बंद होने के बाद उस औरत ने गौतम को अपने साथ आने का इशारा किया..

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गौतम भी खुद ब खुद उसके पीछे पीछे कोने में एक खाली जगह पर आ गया जहाँ बिलकुल भीड़ नहीं थी..

औरत ने पर्स से एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगा ली औऱ लाइटर से जलाते हुए एक लम्बा कश लेकर धुआँ बाहर छोड़ते हुए गौतम को देखकर बोली - उम्र क्या है तुम्हारी?

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गौतम को सुरूर औऱ नशा था मगर थोड़ा सा होश भी.. गौतम ने जवाब में कड़क आवाज बनाते हुए कहा- 28 साल..

औरत ने वापस एक कश लेकर हँसते हुए कहा - 28 या 18? सच बताओ?

इस बार गौतम ने औरत की उंगलियों में सुलगती सिगरेट छीन ली औऱ लम्बा कश भरके असली उम्र बताते हुए कहा - 20 साल..

औरत थोड़ी हैरानी से - शराब कितनी पी रखी है तुमने?

गौतम - 3 बियर..

औऱत गौतम से वापस सिगरेट लेकर बोलती है - मेरा नाम माधुरी है.. तुम्हारा?

गौतम - गौतम..

माधुरी - सेक्स करोगे मेरे साथ..

इस बार गौतम का आधा नशा काफूर हो गया एक खूबसूरत औरत उसके सामने खड़ी हुई थी औऱ उससे इस तरह सेक्स के लिए पूछ रही जैसे लोग चाय कॉफी के लिए लोग पूछते है..

गौतम हकलाते हुए कहने लगा - ककक्या?

माधुरी हँसते हुए - बियर उतर गई?

गौतम - तुमने मज़ाक़ है ऐसा किया..

माधुरी सिगरेट का आखिरी कश लेकर फेंकती हुई कहती है - पर मैंने तो मज़ाक़ किया है नहीं..

माधुरी की बात सुनकर गौतम के चेहरे पर एक साथ इतने सारे भाव आ गए थे जिसे कहा पाना मुश्किल था..

गौतम - मतलब?

माधुरी - मतलब ये कि क्या तुम मेरे साथ सेक्स करना चहते हो?

गौतम - पर यहां जगह कहा है?

माधुरी गौतम कि बात सुनकर खिलखिलाती हुई हस्ने लगी औऱ फिर एक चूमा उसके होंठों पर करके उसका हाथ पकड़ कर कहीं ले जाने लगी..

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रिसेप्शन हॉल के दायी तरफ बनी सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर मधुरी गौतम को एक रूम में ले आई जहा आते है उसने दरवाजा लगा दिया.. औऱ गौतम के गले में हाथ डालकर बोली..

माधुरी - तुम लड़की कि तरफ से आये हो या लड़के की तरफ से?

गौतम - दोस्त की तरफ से..

माधुरी - मतलब?

गौतम - मतलब मैं किसी की तरफ से नहीं हूँ, मेरा एक दोस्त लेके आया है मुझे यहां.. आप किसकी तरफ से हो?

माधुरी - लड़की की तरफ से.. मेरी दूर की रिस्तेदार की बेटी है जिसकी ये रिसेप्शन है..

माधुरी औऱ गौतम के बीच बातचीत हो ही रही थी कि माधुरी का फ़ोन बजने लगा जिसे उठाते हुए माधुरी गौतम से थोड़ी दूर चली गई..

माधुरी - हेलो? हाँ.. बोलो.. ठीक है.. नहीं नहीं आने कि जरुरत नहीं है मैं खुद आ जाउंगी.. ठीक है काम करो तुम.. फ़ोन रखती हूँ..

गौतम - किसका फ़ोन था?

माधुरी - मेरे पति का.. ये छोडो.. ये बताओ पहले कभी किसी के साथ किया है?

गौतम - अब तक तो नहीं..

माधुरी - मतलब नोसीखिया हो.. ठीक है तुम फ़िक्र मत करो मैं तुम्हे सब सीखा दूंगी..

गौतम - एक बात पुछु, बुरा ना लगे तो?

माधुरी गौतम के ऊपर आते हुए - पूछो..

गौतम - आपके पति आपको खुश नहीं रखते?

मधुरी - मुझे क्या वो किसी को खुश रखने लायक़ नहीं है..

गौतम - क्यू?

माधुरी - कितने सवाल करते हो तुम गौतम? इतना समझा लो कि मेरे पति के हैंडपम्प से अब कोई पानी नहीं भर सकता.. अब मेरा मूंड मत खराब करो.. वैसे भी मैंने आज तक तुम्हारे जैसा कच्चा माल नहीं चखा..

गौतम - मतलब अभी तक आपके बच्चा भी नहीं है? माधुरी - नहीं है... अब आओ मुझे kiss करो..

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ये कहकर माधुरी गौतम के होंठों पर टूट पडती है औऱ गौतम भी भरपूर उसका साथ दे देता है.. दोनों एक दूसरे को ऐसे चुम रहे थे जैसे रेगिस्तान में प्यासा पानी को चूमता है.. होंठों औऱ जीभ की इस लड़ाई में माधुरी औऱ गौतम को भरपूर मज़ा आ रहा था..

माधुरी बार बार गौतम के होंठों को दांतो से खींचती हुई चूमती है औऱ फिर उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराते हुए आँख मारके उसे छेड़ती है.. गौतम भी अब तक नशे से आधा बाहर आ चूका था उसके होंठों तो माधुरी के होंठों की गिरफ्त में थे मगर गौतम ने अपने हाथ से माधुरी के आम पकड़ लिए औऱ उन्हें मसलने लगा जिससे माधुरी पर औऱ ज्यादा काम का असर होने लगा..

कुछ देर में ही दोनों ने एक दूसरे के सारे कपडे उतार दिए औऱ माधुरी गौतम का लंड देखकर हैरान हो गई.. गौतम ने उसके हैरान चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने लंड को उसके मुंह में दाल दिया..

माधुरी लंड मिलने पर पागलो की तरफ उस पर टूट पड़ी जैसे चींटी मीठे पर टूट पडती है..

गौतम को अचानक मिली इस औरत से जन्नत का मज़ा आ रहा था.. लोडा चुस्ती माधुरी गौतम को किसी अप्सरा जैसी लग रही थी गौतम का आधे से ज्यादा लंड उसके मुंह में था औऱ वो पूरी शिद्दत से लंड को चूस रही थी.. गौतम ने माधुरी के बाल पकड़ कर लंड चूसाते हुए अपना माल उसके मुंह में भर दिया जिससे माधुरी हक्कीबक्की रह गई औऱ मज़बूरी में उसे सारा माल गले के नीचे उतार लेना पड़ा..

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गौतम लंड चूसाने के बाद औऱ अपना माल माधुरी को पिलाने के बाद उसकी झाटों से विहीन चिकनी चुत पर मुंह लगाते हुए माधुरी को स्वर्ग की सेर पर ले गया जहाँ से उतारते उतारते माधुरी ने भी गौतम के मुंह में अपना सारा माल झाड़ दिया..

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गौतम ने अब देर ना करते हुए माधुरी की चिकनी चुत पर अपने लंड सेट करके एक जोरदार धक्का मार दिया जिससे माधुरी पूरी आवाज के साथ चिल्ला पड़ी लेकिन नीचे बजते dj औऱ लोगों की आवाज में उसकी आवाज दबकर रह गयी.. माधुरी मुहफट ऐयाश दिलफेंक औरत थी जिसने कई मर्दो के साथ सेक्स किया था मगर किसी में भी वो दम नहीं था जो आज उसने गौतम के अंदर देखा था.. पहले झटके में ही गौतम ने माधुरी जैसी खेली खाई औरत की चिंख निकलवा कर अपनी मर्दानगी साबित कर दी औऱ फिर माधुरी की चुत के साथ साथ उसके दिल का दरवाजा भी खोलके अंदर घुस गया..

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माधुरी आहे औऱ सिस्कारिया भरती हुई गौतम के नीचे पड़ी पड़ी ऐसे चुद रही थी जैसे गाँव के खेतो में भाभियाँ अपने देवरों से चुद जाती है.. गौतम ने कुछ देर उसी तरह माधुरी को चोदकर उसे पलट दिया औऱ घोड़ी बनाकर चोदने लगा..

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इस घुड़सावारी में गौतम को जो मज़ा आ रहा था वो अतुलनीय औऱ अद्भुत था उसके सामने एक खूबसूरत औऱ कसे हुए बदन की औरत गांड फैलाये थी औऱ वो उस औरत के बाल पकड़कर अपने लोडे से धक्के पर धक्के मारे जा रहा था जिससे उस औरत का सारा बदन किसी तार पर लटके कपडे के हवा में हिलने के समान हिल रहा था..

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माधुरी झड़ चुकी थी मगर गौतम रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.. माधुरी उस कमरे के गद्दे पर झड़ चुकी थी औऱ अभी अभी चुदाई के बीच में उसका मूत भी निकल गया था.. चुत के माल औऱ मूत से सने उस गद्दे पर अब भी माधुरी की चुदाई चल रही थी..

गौतम से रहा ना गया तो वो माधुरी को अपनी गोद में उठाकर हवा में उछालते हुए चोदने लगा.. माधुरी गौतम की चुदाई कला से आज जितनी प्रभावित हो चुकी थी उससे तय था की वो अब गौतम से दूर नहीं रह पाएगी..

एक घंटे तक चली इस चुदाई के बाद जब गौतम झड़ने को हुआ तो उसने दिवार से माधुरी को चिपका दिया औऱ उसकी दोनों टांग हाथों से उठाकर अपना सारा माल उनकी चुत में भर दिया.. माधुरी ने काम के बस में वापस गौतम को चूमना चालू कर दिया औऱ इस बार एक लम्बे चुम्बन में गौतम को बाँध लिया..

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आदिल पेट भरके खाना खा चूका था औऱ शादी में लड़किया ताड़े जा रहा था.. उसके बाद जब उसने गौतम को फ़ोन किया तो गौतम माधुरी की बाहों में था..

आदिल - भाई चलना नहीं है क्या? कहाँ है तू?

गौतम - भाई तू चला जा मैं बाद में आऊंगा..

आदिल - भोसड़ीवाले क्यू दिमाग खराब कर है? है कहाँ तू..

गौतम माधुरी का बोबा चूसता हुआ - जन्नत में हूँ गांडु.. मुझे टाइम लगेगा..

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आदिल - बहन के लंड यहां कोनसी रंडी मिल गयी तुझे? औऱ साले रंडी के चक्कर में दोस्त को औकात दिखा रहा है.. अगर तू 5 मिनट में नहीं आया तो दोस्ती ख़त्म समझ..

गौतम निप्पल्स दातो से काटते हुए - दोस्ती ख़त्म गांडु अब जा.. औऱ फ़ोन काट देता है.. आदिल फ़ोन से बाइक बुक करके घर चला जाता है..

माधुरी प्यार से छेड़ते हुए - गौतम ज़ी.. मेरे बूब्स चूसकर आपका मन भर गया हो तो मुझे घर तक छोड़ दोगे..

गौतम - बहुत मज़ा आया भाभी आपके साथ..

माधुरी - मज़ा तो मुझे दिया है तुमने.. मैं प्यार में ही पड़ गई तुम्हारे.. अब तो बार बार मिलना पड़ेगा तुमसे..

गौतम - अब चलो यार बहुत भूख लगी है मुझे तो..

माधुरी - भूख तो लगेगी ही इतनी मेहनत जो की है तुमने मुझपर, चाल ढाल सब बदल दिया मेरा.. बच्चा समझ रही थी तुमको पर तुम तो जोनी सीन्स निकले..

गौतम - आप भी कम कहा हो भाभी.. पहली मुलाक़ात में ही लंड पर बैठ गई..

माधुरी - अब मेरा तुम्हारे लंड पर बैठना उठना चलता ही रहेगा गौतम.. सच बोलती हूँ प्यार हो गया तुझसे..

गौतम - मुझसे या मेरे इस लंड से?

माधुरी - दोनों से मेरी जान..

गौतम - चलो यार भाभी नीचे चलते है.. भूक लग रही है..

गौतम औऱ माधुरी नीचे आकर बातें करते हुए खाना खाने लगते है औऱ फिर माधुरी गौतम से नम्बर एक्सचेंज करती है की तभी गौतम को माधुरी के फ़ोन पर एक तस्वीर दिखाई देती है औऱ वो चकित रह जाता है औऱ माधुरी से पूछता है..

गौतम - ये तस्वीर किसकी है?

माधुरी - अच्छा ये.. यही तो मेरे पति है.. जिसकी बात तुम कर रहे थे.. चलो अब मुझे घर छोड़ दो.. बहुत नींद आ रही है..

माधुरी को नींद आ रही थी मगर गौतम की नींद उड चुकी थी औऱ उसका सारा नशा भी हवा हो चूका था..

माधुरी - अब खड़े खड़े ये तस्वीर क्या देख रहे हो चलो..

गौतम माधुरी के साथ अपनी बाइक पर बैठकर उसे छोड़ने चल पड़ता है औऱ मन में बहुत कुछ सोचने लगता है.. उसके सारे ख्याल इधर उधर थे.. उसे बहुत गुस्सा भी आ रहा था..

माधुरी - यहां से राइट..

गौतम बिना कुछ बोले माधुरी के बताये रास्ते पर चल पड़ता है और उसके घर तक पहुँचता है..

माधुरी - अंदर आ जाओ..

गौतम रूखेपन से - नहीं मैं अब चलता हूँ.. आपके पति को अच्छा नहीं लगेगा..

माधुरी - अरे उसकी चिंता तुम मत करो.. वो शहर से बाहर गए हुए है कल आएंगे.. तुम अंदर चलो मैं तुम्हारे लिए कॉफ़ी बनाती हूँ..

गौतम - मैं चाय पिता हूँ, वैसे एक बात पुछु?

माधुरी - हम्म.. पूछो..

गौतम - आपकी शादी को कितने साल हो गए?

माधुरी - 15 साल हो गए.. वो पुलिस में थे और मैं एक कंप्लेंट लिखवाने पुलिस स्टेशन गई थी.. वही पर उसने मुझे अपने जाल में फंसा लिया और फिर शादी कर ली..

गौतम - जाल में फंसा लिया मतलब?

माधुरी - मतलब की कमीना पहले से शादी शुदा था.. एक बच्चा भी उसको.. सुना है बच्चे का नाम भी गौतम है..

गौतम - फिर आपने क्या किया, ये सब जानकार?

माधुरी - क्या कर सकती थी मैं? अकेली थी घर से भागी हुई.. वापस घर नहीं जा सकती थी तो इसे अपनी किस्मत मानकर रहने लगी.. वैसे भी ये मेरे पति अपनी सारी कमाई मुझ पर खर्चा कर देते है और ये घर भी उन्होंने मेरे लिए ख़रीदा है.. पहली पत्नी तो आज भी एक छोटे से पुलिस क्वाटर में अपने बेटे के साथ पड़ी हुई है..

गौतम - कभी मिलने की कोशिश नहीं की आपने उन लोगों से?

माधुरी - मिलकर क्या करती? जैसा चल रहा है ठीक है.. अगर कुछ करती तो सबके लिए हालात खराब ही होते..

गौतम को अपने पिता जगमोहन और माधुरी ओर गुस्सा आ रहा था वो समझा नहीं पास रहा था कि वो क्या करें? आज उसके ऊपर एक पहाड़ टुटा था आज उसे समझा आ गया था कि जगमोहन क्यों बार बार घर से इतना गायब रहता है और घर में पैसे कि कमी क्यों है.. गौतम ने कुछ देर सोच फिर माधुरी के बदन को ऊपर से नीचे तक देखकर कहा..

गौतम चाय पीते हुए - भाभी..

माधुरी - हम्म और क्या पूछना है तुम्हे..

गौतम - बेडरूम कहाँ है?

माधुरी गौतम का इशारा समझ जाती है और उसका हाथ पकड़ कर बैडरूम में ले जाती है जहाँ सुबह तक गौतम अपने बाप की दूसरी बीवी माधुरी की जमकर चुदाई करता है और इस कंडोम नहीं पहनता.. गौतम अपना सारा गुस्सा माधुरी को चोदकर ठंडा करता है वही माधुरी गौतम के लिए पूरी तरह खुल चुकी थी.. गौतम ने रातभर 3 बार माधुरी की बच्चेदानी में उसे प्रेग्नेंट करने की नियत से अपना वीर्य छोड़ा था.. सुबह होने पर दोनों का सम्भोग और पर प्रगाड़ और मधुर बन जाता है..

गौतम - अब जाने दो माधुरी..

गौतम अपने बाप की तस्वीर के सामने घुटनो पर बैठकर अपना लंड चुस्ती अपने बाप की दूसरी बीवी माधुरी से कहता है जो मुंह से लंड निकालकर गौतम को जवाब देती है..

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माधुरी - थोड़ी देर और रुक जाओ ना गौतम..

गौतम - माधुरी तुम्हारा पति आ गया तो अटैक से मर जाएगा तुम्हे इस तरह देखकर..

मधुरी मुस्कुराते हुए - मरता है तो मरने दो.. जो होगा देखा जाएगा..

गौतम - माधुरी यार अब जाने दो प्लीज.. फिर कभी आ जाऊंगा तब प्यार कर लेना जीभरके..

माधुरी - मन नहीं कर रहा गौतम तुम्हारे इस लंड को मुंह से निकालने का.. पहली बार औरत बार का अहसास दिलाया है तुमने..

गौतम मुस्कुराते हुए - रात से अब तक मन नहीं भरा तुम्हारा?

माधुरी - मेरा तो कभी मन ना भरे ऐसे लंड से..

गौतम - चलो अब जाने दो.. वरना तुम्हारा पति आ गया तो मुसीबत हो जायेगी मेरे लिए..

माधुरी मुंह से लंड निकालकर - अच्छा बाबा ठीक है.. मगर वादा करो जल्दी आओगे.. मैं massage करूंगी..

गौतम - कितनी सेक्स की भूखी हो तुम माधुरी? ठीक से चला भी नहीं जा रहा तुमसे और अब भी तुम्हे लंड लेने की पड़ी है.. अब जाने भी दो..

माधुरी - तुम्हारे मुंह से मेरा नाम कितना प्यारा लगता है.. आई लव यू.. गौतम..

गौतम हस्ते हुए - अच्छा ज़ी प्यार हो गया मुझसे? अब तो वापस जरूर मिलना पड़ेगा..

गौतम माधुरी से मिलकर उसके यहां से चल देता और अपने घर की तरफ आ जाता है जहाँ पहुंचने में उसे डेढ़ घंटा लग जाता है..

गौतम घर पहुंचकर देखता है की उसका बाप जगमोहन सो रहा है और सुमन सुबह सुबह नल से पानी भर रही है.. गोईटम को अपने बाप पर बहुत गुस्सा आता है मगर वो सच्चाई को छिपा के रखने में ही सबकी भलाई समझता है..

सुमन गौतम को देखकर गुस्से में - कहाँ था रातभर तू? और ये तेरे होंठों को क्या हुआ है? इतने लाल क्यू है.. सुमन गौतम की हालात देखकर सारा माजरा समझा जाती है की गौतम रात को किसी ना किसी लड़कि के साथ जरूर था..

गौतम - कुछ नहीं माँ.. रात को दोस्त के घर चला गया था.. मुझे नींद आ रही है, सोना है..

गौतम सुमन को अनसुना करके अपने कमरे में चला जाता है और बिस्तर पर लेटते हुए उसकी आँख लग जाती है..

सुमन का दिल बहुत जोर से दुखता है की गौतम ने रात को एक दफा भी उसे फ़ोन करके बताना जरुरी नहीं समझा.. वो अपनेआप को कोसती हुई और गौतम को बुरा भला कहती हुई घर के काम में लग गई.. सुबह जगमोहन भी नास्ता करके काम पर चला गया और अब दोपहर हो चुकी थी..

गौतम की नींद खुलती है तो वो आँख मलता हुआ रसोई में बर्तन साफ कर रही सुमन को पीछे से जाकर अपनी बाहों में भर लेटा है और उसके गाल पर एक चुम्मा कर देता है जिसके जवाब में सुमन गौतम के होंठों को जोर से अपनी उंगलियों में पकड़ कर पूछती है..

सुमन - ये किस चुड़ैल की लिपस्टिक के निशान है तेरे होंठों पर? हम्म? सुबह शराब की बू भी आ रही थी तेरे मुंह से.. शराब भी पिने लगा है तू? रातभर कहाँ मुंह काला कर रहा था अपना? एक फ़ोन भी करना जरुरी नहीं समझा मुझे?

गौतम जैसे तैसे अपने होंठों को सुमन की उंगलियों की पकड़ से छुड़वा कर सुमन से कहता है - माँ.. लिपस्टिक नहीं है मेरे होंठ तो वैसे भी लाल है.. और शराब से आप भी जानती हो मैं दूर रहता हूँ..

सुमन - झूठ भी बोलने लगा है तू अपनी माँ से? मैं ना तुझसे बात ही नहीं करुँगी अब..

गौतम - इतना गुस्सा अपने ग़ुगु से?

ये कहते हुए गौतम ने फिर से सुमन को पीछे से बाहों में भरके उसके गर्दन और गाल पर अपने होंठो से चुम्बन वर्षा कर दी और पेट में गुदगुदी करने लगा जिससे सुमन खिलखिलाकर मुस्कुराने लगी...

सुमन - पहले नहा ले जाकर.. पता नहीं किस डायन के साथ था रातभर..

गौतम कोई जवाब नहीं देता और नहाने चला जाता है वही सुमन एक चाय बनाकर गौतम के रूम में आ जाती है जहाँ गौतम कपडे बदल रहा होता है.. सुमन गौतम के पीठ और सीने पर लगे दांतो और नाखुनो के निशान देखकर उसे पकड़ लेती है और पूछती है..

सुमन - ग़ुगु ये सब क्या है? पता नहीं किस डायन की नियत खराब थी तेरे ऊपर जो इतनी बुरी तरह से नोचा है मेरे बच्चे को.. सच बता किसके साथ था?

गौतम - माँ... वो एक दोस्त के साथ था..

सुमन - दोस्त लड़कि थी ना ?

गौतम नज़र नीची करके - हम्म्म...

सुमन - तूने कंडोम तो पहना था ना ग़ुगु?

गौतम शरमाते हुए - माँ...

सुमन - रातभर लड़की के साथ मुंह काला करने में शर्म नहीं आई और अब अपनी माँ से शर्मा रहा है..

गौतम - छोडो, कपडे पहनने दो..

सुमन - पहले बता.. तूने कंडोम पहन के सेक्स किया था या नहीं..

गौतम - हम्म..

सुमन - हम्म का मतलब क्या? कंडोम पहना था या नहीं?

गौतम - हाँ माँ पहना था बस अब खुश?

सुमन - लड़की कौन थी?

गौतम - यार माँ.. आप भी ना.. कहते हुए गौतम शर्ट पहन कर आस्तीन चढ़ाते हुए चाय का कप हाथ में लेकर रूम से बाहर आ जाता है..

सुमन भी उसके पीछे पीछे बाहर आ जाती है और उसे पुकारती हुई कहती है - ग़ुगु... ग़ुगु.. बता ना..

गौतम रूककर - छोडो ना मैं भी नहीं जानता.. शादी में मिली थी..

सुमन - तो पहली मुलाक़ात में ही सेक्स हो गया? तुम्हारी जनरेशन सच में वो क्या कहते है लोग.. निक्कमी है..

गौतम - पापा कहा गए?

सुमन - वो तो सुबह ही चले गए थे.. कहा रहे थे कुछ काम है do-teen दिन बाहर ही रहेंगे..

गौतम - सही है.. कभी यहां कभी वहा..

सुमन - मतलब

गौतम - मतलब कुछ नहीं.. आज मूवी देखने चलोगी आप? आपके फेवरेट हीरो की मूवी लगी है..

सुमन - रिश्वत दे रहा है अपनी माँ को?

गौतम - वही समझ लो.. लेनी है तो बोलो वरना जाने दो..

सुमन - ठीक है ज़िल्लेइलाही.. जैसा आप कहो.. कब चलना है?

गौतम - अभी... बस ये काम वाली बाई जैसे कपडे बदल लो..

सुमन - क्या पहनू?

गौतम - बिकिनी..

सुमन हँसते हुए - चल हट बदमाश कहीं का..

गौतम - कोई सूट पहन लो.. अच्छा सा..



गौतम सुमन को मूवी दिखाने ले जाता है और बाहर खाना खिला कर अपनी मां से प्यार भरी मीठी बातें करते हुए उसे हंसाने और खुश रखने का प्रयास करता है जिसका सुमन को पूरा-पूरा अंदाजा होता है और वह खुद भी गौतम के इस तरह के व्यवहार से अपने आपको तसल्ली देते हुए गौतम के साथ मुस्कुराते हुए समय बिताती है..
 
अपडेट 11



सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है

लोक-लाज और शरम से हारे

साकी ना पिने ना जीने दे है

मन मतवाला पहन दुशाला

सबको नचाये ना जीने दे है

मेरी बतिया पढ़ पढ़ रोये

प्रीत ना मारे ना जीने दे है

सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है..

कौन? कौन ये गीत गाता हुआ इधर चला आ रहा है इतनी रात में?

लगता है कोई राहगीर है. बैलगाडी की आवाज भी आ रही है..

मगर इतनी रात में? और इतने घने जंगल के रास्ते से? कोई साधारण आदमी तो नहीं जान पड़ता.

बात तो तुम सही कह रहे हो कर्मसिंह. जिस जंगल से जागीर का हर आदमी दिन के उजाले में गुजरने से डरता है वही ये आदमी रात के इस पहर इतने अँधेरे में अकेला चला आ रहा है..

मुझे तो जरूर कोई बहरूपिया लगता है वीरसिंह. देखो केसा भेस बनाया है. बड़ी बड़ी दाढ़ी कंधे तक उलझें हुए बाल और फटा पुराना शाल बदन पर लपेट रखा है..

देखने से लड़का सा लगता है. मगर इस तरह इतनी रात में यहां इसका क्या काम? रोककर पूछना तो अनिवार्य है..

हाँ मेरा भी यही मत है. इसे रोककर इसके आने का कारण तो पूछना जरुरी है.

सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है

गाँव की नादिया सावन रतिया

सखियाँ छेड़े ना जीने दे है

रंग लगाकर अंग से खेले

प्रियतम रिझाये ना जीने दे है

लम्बा रास्ता तन्हा राही

घर की यादे ना जीने दे

सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है

अरे.. रोको रोको.. कहा चले आ रहे हो आधी रात को इतनी सुरुतान में गीत गाते हुए? और ये क्या भेष बनाया हुआ है? कहाँ के हो? कौन हो? नाम क्या है? यहां आने का कारण? कहीं किसी उद्देश्य से तो नहीं आये.. इस जागीर में? पता है ना यहां का जागीरदार कौन है? वीरेंद्र सिंह.. उनके नाम से आस पास की जागीरो के सरदार और ठिकानेदार खौफ खाते है..

आदमी बैठगाड़ी रोककर जागीर की सीमा पर तैनात सिपाहियो को देखकर मुस्कुरा पड़ता है और उनकी बात सुनता हुआ अपने पास रखे घड़े में बर्तन डालकर उससे पानी पिने लगता है.. जब सिपाहियों के सवाल ख़त्म हो जाते है तब आदमी हलकी सी मुस्कान अपने होंठों पर सजा कर कहता है..

आदमी - मैं तो राही हूँ.. अफगान जा रहा था. अगर इज़ाज़त दो तो चला जाऊ? सुबह तक आपके वीरेंद्र सिंह की जागीर की सीमा से भी बाहर निकल जाऊंगा..

सैनिक - वो तो ठीक है पर उम्र से तो बहुत कम लगते हो फिर इस तरह जोगियो का भेष क्यों बनाया हुआ है? और नाम क्या है तुम्हारा?

आदमी - नाम का क्या है पहरेदार ज़ी, जो जिसके ज़ी में आता है वही कहकर पुकार लेता है. आपके जो ज़ी में आये वो आप कहकर पुकार लो.

सैनिक - हालत से तो भिखारी लगते हो.. भिखारी कहा कर बुलाऊ? तुम्हरे पास ये बैलगाड़ी कहा से आई? किसकी चुरा के लाये हो?

आदमी मुस्कुराते हुए - भिखारी ही कह लो.. वैसे भी सब भिखारी तो है इस जमीन पर.. कोई इंसान से मांगता है तो भगवान् से. बैलगाड़ी तो मेरी ही है चाहो तो इन दोनों बैलो से पूछ लो..

सैनिक - देखो ये पहेलियाँ ना बुझाओ.. साफ साफ बताओ कौन हो और कहा से आये हो..

आदमी - मैंने बता तो दिया, राहगीरी हूँ हिंदुस्तान के अलग अलग हिस्से में घूमता हूँ थोड़ा बहुत वैद्य का हुनर भी जानता हूँ अफगान जा रहा हूँ..

सैनिक - हमें यक़ीन नहीं है लौट जाओ वापस..

आदमी - मैं तो आगे के लिए आया हूँ.. पीछे मुड़कर जाना संभव नहीं..

सैनिक - अगर कहा हुआ नहीं मानोगे तो पकड़ के बंधी बना लिए जाओगे.. और जागीरदार से सजा मिलेगी..

आदमी - तो फिर क़ैद कर लो मुझे. मैं तो वापस जाने से रहा..

सैनिक - जैसा तुम चाहो.. चलो यहां से..

दोनों सैनिक उस आदमी को कैद में डाल देते हैं और उसकी बैलगाड़ी को जपत करके जागीर की सीमा में बाहर बने एक छोटे से सामान ग्रह के बाहर खड़ा कर देते हैं.. आदमी कैद कर लिया जाने पर भी उसी मुस्कान के साथ हंसता रहता है और इस शालीनता और सद्भाव के साथ दोनों सैनिकों और बाकी लोगों के साथ बात करता हुआ बंदी खाने में बैठ जाता है और वापस से वही गीत गाता है जो वह खाता हुआ जंगल के रास्ते से चला आ रहा था और जिसे सुनकर दोनों पहरेदारों ने उसे संदिग्ध मानकर बंदी गृह में डाल दिया था.

आदमी अपनी मस्ती में मस्त बंदीगृह में अकेला बैठा हुआ गीत गाता जा रहा था और अपने पास मौजूद एक पुस्तक को पढ़ता हुआ अपने गले में लटक रहे 1 ताबीज़ को छूता हुआ उसे देखे जा रहा था.. आदमी को देखने से ऐसा लगता था जैसे वह किसी की याद में खोया हुआ मुस्कुराते हुए गीत गा रहा है और अपने प्रीतम को याद कर रहा है और उसकी विरह में सुलगता हुआ अपने मन को उसकी वेदना के सागर में डूबता चला जा रहा है और उससे पार पाने का उसे कोई मन नहीं है.. जिस तरह कोई बूढ़ा अपनी जवानी के दिन याद करके रोमांचित हो उठता है और अपने बच्चों को या अपने पोते पोती हो या नाते नातीयों को अपनी जवानी के किस्से सुनाते हैं उस तरह वह आदमी कुछ याद करता हुआ मुस्कुरा रहा था और बंदी गृह में भी ऐसा लग रहा था जैसे भी आजाद है और उसे कोई कैद नहीं कर सकता..

सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है

बैरी सुख में सोये रे पंछी

सईया जागे ना जीने दे है

उठ उठ रोये रतिया जागे

विरह की राते ना जीने दे है

जग झूठा है यार ही है रब

रब मुंह खोले ना जीने दे है

सुन रे पवन संग ले चल अपने

ज़ी के सपने ना जीने दे है

अपनी मस्ती में मस्त आदमी गीत गाता हुआ गुनगुनाता हुआ और मुस्कुराता हुआ रात भर यूं ही बिता कर सुबह नींद के हवाले हो गया और उसकी नींद किसी पहरेदार के जागने पर ही खुली..

अरे उठो उठो.. कब तलक़ यूँही सोते रहोगे? रात दिन सुबह शाम की कुछ खैर खबर भी रखते हो या नहीं? दिन के इस पहर भी आँखों में रातों सा नींद का जमघट लिए पड़े हो.. जरा बदन को जोर दो उठो.. जागीरदार की बैठक में लेजाना है.. अब वही तय करेंगे तुम जागीर से आगे जाओगे या वापस..

पहरेदार की बात पर आदमी कोई जवाब नहीं देता और चुपचाप खड़ा होकर उसके साथ चलने को सज्य हो जाता है और मुस्कुराता हूआ वापस गीत गाते हुए पहले पहरेदार के साथ चल पड़ता है.. पहरेदार उसे छोटी मोटी गलियों से गुजार कर लाता हुआ महल के मुख्य भाग से दाई ओर एक कमरे की तरफ ले आता है जहां बड़े से हाल में वीरेंद्र सिंह अपनी में बैठक में बैठा हुआ होता है और जागीर में रहने वाले लोगों के साथ किसानों की समस्याओं को सुनकर उसका हल करता है..

आदमी पहरेदार के बताए अनुसार बैठक के मुहाने पर खड़ा हो जाता है और अपनी बारी का इंतजार करने लगता है आदमी वीरेंद्र सिंह को देख रहा था और मुस्कुराते हुए उसके न्याय करने के तरीके और उसके स्वभाव का जाँच रहा था मानो उसकी क़ाबिलियत का परीक्षण कर रहा हो..

समय के साथ भीड़ कम होती गई औऱ कुछ देर बाद वीरेंद्र सिंह के सामने उस आदमी को पेश कर दिया गया जिसे पहरदार ने जागीर की सीमा से कल रात पकड़ा था..

वीरेंद्र - कहो क्या बात है?

पहरेदार - सरकार इस आदमी को कल रात जागीर की सीमा पर तैनात सिपाही कर्मसिंह औऱ वीरसिंह ने पकड़ा है.. कह रहे थे ये आदमी आधी रात को जंगल के रास्ते से अकेला कोई गीत गुनगुनाता हुआ चला आ रहा था.. पूछने पर उलटे सीधे जवाब देता था.. अपना नाम भी उन पहरेदारो को नहीं बताया..

वीरेंद्र आदमी से - क्या नाम है तुम्हारा? कहा से आये हो?

आदमी - मेरा असल नाम तो अब मुझे भी याद नहीं आता हुकुम.. पर सब बैरागी कहकर पुकारते है.. छोटा सा वैद्य हूँ छोटे छोटे मर्ज़ का इलाज़ करता हूँ.. राही भी हूँ इस हुनर को यहां वहा घूमकर सीखता सीखता हूँ.. पहरेदारों से रात में मैंने कहा था मैं अफगान जा रहा हूँ.. अगर वो इज़ाज़त दे देते तो सुबह पहली किरण से पहले आपकी जागीर से बाहर भी चला गया होगा..

बीरेंद्र - वैद्य हो?

बैरागी - हुकुम..

वीरेंद्र - अफगान जाने का प्रयोजन?

बैरागी - सुना है वहा एक ख़ास किस्म का पौधा है जो स्त्री रोग में देह को आराम देता है.. बस उसी की तलाश में जा रहा था..

वीरेंद्र - स्त्री रोग में पौधे से देह को आराम? बड़े अचरज की बात है.. वैद्य ज़ी आपने कभी ऐसे पौधे के बारे में सुना है?

वैद्य - नहीं सरकार.. मुझे तो ये लड़का कोई बहरूपिया लगता है. इसकी बातें सुनकर हँसने को ज़ी चाहता है..

वीरेंद्र - जो भी हो वैद्य ज़ी.. एक बार प्रत्यक्ष में इसके हुनर कोई नमूना तो देखना चाहिए..

वैद्य - ज़ी सरकार आप सही औऱ तर्कसंगत बात करते है..

वीरेंद्र - बैरागी.. क्या तुम किसी बीमार को स्वस्थ कर सकते हो?

बैरागी - बीमार तो यहां बहुत से लोग है हुकुम.. आप बताइये किसे स्वस्थ करना है.

वैद्य - देखा सरकार.. इसे तो यहां सभी बीमार नज़र आते है.. मुझे तो लगता है इसे जागीर से बाहर कर देना चाहिए..

वीरेंद्र - युम्हे यहां कौन बीमार लगता है? औऱ बिमारी क्या है यहां लोगों को?

बैरागी - सबसे पहले तो वैद्य ज़ी की ही बात कर ली जाए हुकुम.. इनके पेट में दाई तरफ थोड़ा नीचे कई बरसो से दर्द है जिसकी वजह से ये बार बार अपना हाथ अपने पेट पर रखकर दबा रहे है औऱ एक पैर को हल्का रखकर चलते है लेकिन सालों से मौज़ूद इस दर्द ने वैद्य ज़ी को नहीं छोड़ा..

उसके बाद जो पहरेदार मुझे यहां लाया है उसे आँख से धुंधला दीखता है.. आपके दाई औऱ नीचे बैठे हुए आदमी के बदन में कम्पन की बिमारी है जो ज्यादा अमल से पैदा हुई है.. औऱ हुकुम आप.. एक बिमारी आपको भी है.. बिमारी से बड़ा भय है..

बैरागी की बात पर सब हैरान थे औऱ वैद्य की हालात पतली थी..

वीरेंद्र - मुझे क्या भय है?

बैरागी - मृत्यु का भय हुकुम..

बैरागी की बात सुनकर वीरेंद्र उसे हैरात के भाव से देखने लगा औऱ सोचने लगा की कैसे बैरागी को इतना सब मालूम हो गया वो भी एक नज़र देखने पर..

वीरेंद्र - अगर तुम्हे जो पौधा चाहिए मैं यही तुम्हे दे दू तो क्या तुमको मेरे इस भय का समाधान कर पाओगे?

बैरागी - मृत्यु तो अंतिम सत्य है हुकुम औऱ सत्य से केसा भय? आपका भय तो केवल आपके मन की उपज मात्र है इसे तो आप स्वम भी दूर कर सकते है. औऱ जो पौधा मुझे चाहिए आप यही मुझे दे दे तो मैं वापस अपनी राह लौट जाऊँगा..

वीरेंद्र - मेरे बस की बात होती तो ये भय मैंने कब का अपने मन से निकाल दिया होता बैरागी.. मैं तुझे अपनी जागीर मैं एक ऊंचा दर्जा देता हूँ.. रहने को इसी महल में अलग स्थान जहा भोग विलास की जो चीज तुझे पसंद हो वो.. अपने इन साथियो के बराबर का कद होगा तेरा. बस मेरा ये रोग ठीक कर दे.

बैरागी - इन सब का मैं क्या करूंगा हुकुम? अकेला आदमी हूँ एक घरवाली थी जिसे 3 महीने पहले बनाने वाले ने अपने पास बुला लिया. कोई संतान नहीं ना ही कोई परिजन.. मैं तो अब बंजारा हूँ हुकुम ठहरना मेरे बस कहाँ?

वीरेंद्र - तो फिर मेरे रोग के उपचार तक यहां अपना बसेरा कर लो बैरागी.. उसके बाद तुम जहा जाना चाहो जा सकते हो.. अब मना मत करना बैरागी क्युकी तुम्हारी ना तुम्हारी जीवन की रेखा मिटा सकती है..

बैरागी - मगर मैं कह चूका हूँ हुकुम आपका रोग आपके मन की उपज है जिसका उपचार करना आपके ही हाथ में है. मैं इसमें भला आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ..

वीरेंद्र - जो आदमी को देखकर उसका रोग बता दे वो रोग का उपचार भी अच्छे से जानता होगा.. औऱ ये बात मैं अच्छे से जानता हूँ बैरागी.. अभी मैं तुमसे ज्यादा बात नहीं करूंगा.. तुम जाओ.. इस जागीर के बंदीग्रह का अनुभव औऱ पीड़ा ले चुके हो अब यहां के मेहमान बनकर आराम उठाओ..

वीरेंद्र पहरेदारो से - आज से बैरागी इस जागीर के मेहमान है इनकी सेवा में कोई कमी ना रहे.. सभा बर्खास्त...

इसीके साथ बड़े बाबाजी जो अपनी कुटिया में सो रहे थे उनकी नींद खुल जाती है औऱ वो सपने में, जो आज से सैकड़ो सालों पहले सच में हुआ था उसे देखकर घबराहट के साथ उठ बैठते है. बड़ेबाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह को अपने सामने एक आदमी बैठा हुआ दिखाई देता है औऱ बड़े बाबाजी एक लम्बी सांस लेकर उस आदमी से कहते है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - कभी तो चैन से सोने दे बैरागी.. सैकड़ो सालों से तू मेरी नींद औऱ सुख छीन के बैठा है.. ना मरने देता है ना जीने.

बैरागी - आपने तो मेरी जिंदगी मुझसे छीन ली हुकुम.. कम से कम आपकी नींद औऱ सुखचैन पर तो मेरा अधिकार बनता है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - तूने भी तो वो किया था जिसे करने की इज़ाज़त मेरे अतिरिक्त किसी को नहीं थी. औऱ तू अच्छे से जानता है उस गलती की सजा केवल मौत थी फिर क्यों मुझे इतनी सजा मिल रही है?

बैरागी - ये सजा मैंने नहीं किसी औऱ ने तय की है आपके लिए हुकुम. मैं तो केवल जरिया मात्र हूँ.. मैंने कहा था मुझे वो ताबीज मेरे गले से उतार लेने दो मगर आपने मेरी एक बात ना सुनी औऱ अपनी तलवार से मेरा सर अलग कर दिया.. उस दिन से आज तक जो जो दुख दर्द औऱ पीड़ाये आपने झेली है ये उसी का परिणाम है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - मैं क्रोध की अग्नि में सुलग रहा था बैरागी.. मुझे कहा सही गलत औऱ अच्छे बुरे का ख्याल था? मगर तूने आज तक नहीं बताया उस ताबीज में ऐसा था क्या? जो तू उस दिन से आज तक इस तरह बेताल बनकर मेरे कंधे पर बैठा है.. तूने तो कहा था तू केवल वैद्य औऱ उपचार जानता है..

बैरागी - उस ताबीज मे ऐसा क्या था वो तो मुझे भी नहीं पता हुकुम. मैं तो बस इतना जानता हूँ कि आपने जो अमर होने कि लालच में प्रकृति के नियम को बदला है उसकी सजा आपको इस तरह मिल रही है.

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - सैकड़ो साल.. बड़े से बड़े तपस्वी औऱ साधुओ के पास रहकर आ चूका हूँ बैरागी.. बहुत कुछ सिखने को मिला इस प्रकृति के कुछ रहस्य भी समझ आये मगर वो नहीं पता चला जो पता करना था.. मगर अब लगता है बैरागी तेरा औऱ मेरा सफर जरूर ख़त्म हो जाएगा. अगर वो लड़का मेरे कार्य में सफल रहा तो मेरे साथ साथ तुझे भी मुक्ति मिल जायेगी..

बैरागी - समय के गर्भ में क्या छीपा है ये तो वही जानता है हुकुम..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - थोड़ी देर तो सोने दे बैरागी इतना सताना ठीक नहीं. देख मेरी आँखे किस तरह पथरा गई है जब इनमे नींद उतरती है तू आकर इनसे नींद छीन लेटा है.. उस दिन से आज तक कोई भी सुख तूने मुझे महसूस नहीं करने दिया.. इतना सब ज्ञान औऱ कलाये जानने के भी मैं तेरे औऱ मेरे लिए कुछ नहीं कर सकता..

बैरागी - मैं भी कब से आपको सुखी देखना चाहता हूँ हुकुम.. मगर मै मजबूर हूँ. कोई है जो मुझसे ये सब करवा रहा है.. जिसके बारे में मुझे भी नहीं पता..

कुटिया के दरवाजे पर खट खट की आवाज आती है तो बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह सामने बैठे बैरागी के साये से बात करना बंद करके थोड़ा तेज़ कहते है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - कौन?

किशोर - बड़े बाबाजी मैं किशोर..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - अंदर आजा..

किशोर कुटिया के अंदर आता है जहा वो बड़े बाबाजी को दण्डवत प्रणाम करके कुटिया में अकेले बैठे बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह से कहता है..

किशोर - बड़े बाबाजी भोर की पहली किरण निकल चुकी है आपके स्नान की सारी व्यवस्थाये हो चुकी है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - ठीक है चलो..



बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह किशोर के अनुरोध पर कुटिया से बाहर आ जाता है औऱ नहाने चला जाता है कुछ देर बाद सूरज जब चढ़ता है तब पहाड़ी पर लोगों के आने का ताँता लगने लगता है.. ये भीड़ बाबाजी से अपने दुखो का समाधान पूछने आये लोगों का था जो एक के बाद एक कतार में बैठ रहे थे..
 
अपडेट 12



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सुबह की पहली निकलते ही शबाना अपने बिस्तर से उठकर घर के कामों में लग गई और रोजमर्रा के काम निपटाते हुए घर में यहां से वहां घूमने लगी. शबनम की बेटी रेशमा अपने ससुराल जा चुकी थी और उसका बेटा आदिल जो अब भी घोड़े बेचकर चैन की नींद सो रहा था शोहर फारूक अपने सुबह के नियत समय पर अपने दुकान जा चुका था. थोड़ी देर बाद आदिल भी उठकर घर से बाहर निकल गया और हर दिन की तरह आवारा गर्दी करने और मोहल्ले में यहां से वहां घूमने लगा. शबाना घर पर अकेली पड़ चुकी थी जैसे वह हरदम रहती थी उसके आसपास ना तो कोई बोलने वाला था ना ही उससे बात करने वाला.

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अपने सुबह के घर के काम निपटाकर शबाना जब बिस्तर पर चैन की सांस लेते हुए दो घड़ी बैठी तब उसका फोन बजने लगा. शबाना ने फोन की तरफ देखा तो मुस्कुराते हुए उसे अपने हाथ में लेकर कुछ सोचने लगी. पिछले कई दिनों से जब से गौतम ने उस दिन शबाना से बात की थी और पूरी बेशर्मी के साथ उसे छेड़ा था तब के बाद अक्सर गौतम शबाना को फोन करके उसे मीठी-मीठी बात करता था और बातों ही बातों में अपने मन की बात कह कर शबाना को शर्मिंदा कर देता था शबाना को भी अब गौतम के फोन का इंतजार रहता और वह उससे बात करने के लिए लालायित रहती. इस बार भी कुछ वैसा ही था शबाना अपने हाथ में फोन लिया गौतम का फोन आता देखकर मुस्कुराते हुए फोन उठाना चाहती थी मगर एक दायरा और एक पर्दा जो उसके और गौतम के बीच अभी था वह शबाना को हर बार एक मुकाम पर लाकर उसे आगे बढ़ने से रोक देता..

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शबाना फ़ोन उठाकर - हेलो..

गौतम - हेलो शबाना बेगम.. कैसी हो?

शबाना - बेशर्म तेरे दोस्त की अम्मी हूँ, थोड़ा तो लिहाज़ कर अपनी और मेरी उम्र का. वरना बहुत मार खायेगा मुझसे.

गौतम - मैं तो तुम्हारे हाथों से मरने को भी तैयार हूँ शबाना.. और लिहाज़ किस बात का? प्यार की कोई उम्र थोड़ी होती है..

शबाना - बेटा तू सामने आ गया ना एक बार तो ऐसा सबक सिखाउंगी की प्यार का सारा भूत उतर जाएगा..

गौतम - अच्छा ज़ी.. ऐसा क्या करोगी बताओ जरा..

शबाना - तू सामने तो आ कमीने.. उस दिन के बाद कैसे बिग्गी बिल्ली की तरह गायब रहता है. बस फ़ोन पर ही तेरी आवाज निकलती है..

गौतम - मिलना तो मैं भी तुमसे चाहता हूँ मेरी शब्बो.. पर क्या करू बहुत काम है और कॉलेज का आखिरी साल है इम्तिहान आने वाले है तो पढ़ना भी जरुरी है.. वैसे अगर तुमको चाहिए तो मुझसे मिलने आ सकती हो.. मगर जरा फुसरत निकाल कर आना.. अब तुमसे लम्बी मुलाक़ाते करने का मन है..

शबाना - बेटा अपनी जवानी को काबू में रख वरना आदिल और आदिल के अब्बू को पता चल गया ना तू मुझसे कैसी कैसी बात करता है और क्या चाहता है तो तेरा क्या हाल होगा तू बखूबी जानता है..

गौतम - अब प्यार किया तो डरना क्या मेरी शब्बो.. तुम्हारे लिए तो ख़ुशी ख़ुशी कुर्बान हो सकता हूँ.. और मैं इतना तो जानता हूँ अगर तुम्हे किसीको बताना होता तो तुम अभी तक उनको सब बता चुकी होती..

शबाना मुस्कुराने लगती है और कहती है - बेटा बच्चा समझके छोड़ देती हूँ वरना तुझे तो कबका एक थप्पड़ में सीधा कर दू मैं..

गौतम - एक बार इस बच्चे से प्यार करके देखो शब्बो बेगम.. पहली चुदाई याद आ जायेगी..

शबाना - जलील इंसान.. कितना बेशर्म है तू? बहुत आग लगी है तुझमे? पता दे मैं अभी आकर तेरी लुल्ली का इलाज़ करती हूँ..

गौतम - शब्बो लुल्ली नहीं लोडा है मेरा.. देखते ही तेरी चुत से पानी बह जाएगा.. वीडियो कॉल कर तुझे दिखाता हूँ..

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शबाना अपने बूब्स सहलाते हुए - क्यों मेरे पीछे पड़ा हुआ है बेटा.. तेरी अम्मी जैसी हूँ मैं और तेरे दोस्त की अम्मी..

गौतम - क्या करू मेरी जान.. तेरे हुस्न के आगे ये सब बातें मायने नहीं रखती.. दिल कहता है अभी तुझे अपनी बाहों में भरके प्यार करू.. तेरे होंठों से शराब पी लू.. तेरे चुचो से दूध पीलू.. तेरे बदन से खेलु.. तेरी चुत को चाट कर साफ करु फिर अपने लंड से तेरी चुत फाड़कर तेरी जवानी का स्वाद चखु..

शबाना अपनी चुत पर उंगलिया रगढ़ती हुई किसीके आने की आहट सुनती है..

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शबाना - लगता है कोई आ रहा है. मैं बाद में बात करती हूँ.

गौतम - शबाना.. शबाना... सुन तुझे व्हाट्सप्प पर मैंने कुछ भेजा है चेक करना..

शबाना फ़ोन काट देती है और बाहर जाकर दरवाजा खोलती है सामने आदिल था.. जो बहुत बुरी हालात में था उसे देखकर ही लगता था की वो मार पिट करके आया है शबाना कि कामुकता ने गुस्से का रूप ले लिया था...

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शबाना - किससे लड़ के आ रहा है..

आदिल - कुछ नहीं छोटी सी बात हो गई थी..

शबाना - क्या छोटी सी बात? और ये चोट?

आदिल - अरे वो कुछ लड़के पप्पू हलवाई के आगे फालतू गाली बक रहे थे सालों का ऐसा इलाज़ किया है आगे कभी बोलेंगे नहीं..

शबाना - दिनभर लड़ाई झगडे औऱ कुत्ते कि तरह घूमने के सिवा कुछ और भी काम है तुझे? अपने अब्बू के साथ दूकान पर ही बैठ जाया कर..

आदिल -अम्मी पकाओ मत.. पहले ही दिमाग ख़राब हो रहा है.. औऱ मत करो..

शबाना - अरे सुन तो दवाई लगा ले चोट पर.. आदिल..

शबाना ने इतना ही कहा था की घर के दरवाजे पर आदिल का एक दोस्त नौशाद आ गया और जो देखने से लग रहा था की बहुत तेज़ी से भागता हुआ आया है उसकी साँसे ऊपर नीचे चढ़ी हुई थी वो हाफ्ते हुए बोला..

नौशाद - आदिल..

शबाना - क्या हुआ?

आदिल - क्या हो गया ऐसे क्यों हांफ रहा है?

नौशाद - अबे वो पुलिस... पुलिस आ रही है.. माज़ीद को भी उठा लिया.. अभी जिसको मारा है वो किसी बिज़निसमेन का बेटा है.. उसके बाप ने पुलिस में शिकायत की है पुलिस सबको उठा रही है..

शबाना - कितनी बार मना किया पर मानने का नाम नहीं अब पता नहीं क्या होगा.. तेरे अब्बू को फ़ोन कर..

इतनी बात हो ही रही थी की पुलिस आदिल के घर आ धमकी और आदिल और नौशाद को पकड़ के अपनी जीब में बैठा लिया.. शबाना ने बहुत कोशिश की मगर कुछ ना कर सकी.. शबाना ने अपने शोहर फारूक को फ़ोन किया और सारी बात बताई फारूक दूकान पर रामु को छोड़कर घर आ गया और शबाना को लेकर पुलिस थाने चला गया..

फारूक - साब बच्चा है गलती हो गयी माफ़ कर दो..

थानेदार - फारूक मिया एक गलती माफ़ करेंगे तो अगली गलती करेगा.. सजा तो देनी पड़ेगी.. और किसी आम आदमी के बच्चे को थोड़ी मारा है इन लोगों ने.. सेठ धनीराम के लड़के को धोया है वो भी cctv के सामने.. ऊपर से प्रेशर है.. रेपोर्ट भी लिख चुके है.. अब तो आई.पी.सी. की कई धाराओं के अंदर आपके लड़के का नाम आ चूका है.. सबूत भी पुरे पुरे है.. 2-3 साल के लिए पक्का अंदर आएगा आपका लड़का..

फारूक - थानेदार साब.. एकलौता लड़का है.. समाज में इज़्ज़त है सब आपके ऊपर है.. कुछ मदद करिये.. आप जो बोले करने को त्यार हूँ..

थानेदार - अरे फारूक मिया.. मैं अगर मदद कर सकता तो मना थोड़ी करता है.. आखिरी मैं भी तो इंसान हूँ.. मगर बात बड़ी है.. आप समझो.. मेरे बस के बाहर है..

फारुख थानेदार से बात करके आदिल को छुड़ाने में नाकाम रहता है और आखिरकार थक हार कर शबाना को लेकर वापस घर आ जाता है.. शबाना और फारूक दोनों ही घर में उदास बैठकर यह सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए और कैसे आदिल को जेल की सलाखों से बाहर निकल जाए. शबाना यह सब सो रही थी कि उसके फोन पर फोन आता है और फोन उठा कर चेक करती है तो उसे पर गौतम का फोन होता है. शबाना फोन काट देती है मगर गौतम वापस फोन करता है जिस पर शबाना छत पर आ जाती है औऱ तंग आकर गौतम से रुखे शब्दों में रहती है.

शबाना - क्या है? क्यों बार बार फ़ोन कर रहा है तू?

गौतम - उफ्फ्फ.. इतना गुस्सा? क्या हुआ मेरी शब्बो का मूंड खराब है?

शबाना - गौतम फ़ोन काट और वापस फ़ोन मत करना.. समझा? वरना अब तक तेरी हरकते मैं बच्चा समझके बर्दाश्त कर रही थी अब नहीं करुँगी..

गौतम - अच्छा बाबा ठीक है नहीं करूँगा पर तुम बताओ तो हुआ क्या है?

शबाना थोड़ा ठंडा पड़के सारी बात गौतम से कहा देती है और गौतम हसता हुआ कहता है..

गौतम - बस इतनी सी बात? इतनी सी बात के लिए मेरी शब्बो परेशान है? तुम कहो तो अभी आदिल को जेल से निकलवा कर घर बुलवा देता हूँ..

शबाना - मज़ाक़ मत कर गौतम..

गौतम - अरे बाबा मैं क्यों मज़ाक़ करूंगा? मेरी शब्बो की तकलीफ अगर मैं नहीं दूर करूंगा तो कौन करेगा?

शबाना - तू सच में आदिल को जेल से निकलवा सकता है?

गौतम - हाँ मगर मुझे भी बदले में तुमसे कुछ चाहिए..

शबाना - मैं वैसा कुछ भी नहीं करने वाली जो तू सोच रहा है.. मैं तुझे भी आदिल के जैसे अपना बच्चा मानती हूँ थोड़ी बहुत मज़ाक़ मस्ती को मेरी हाँ मत समझना..

गौतम - पर मैं तो तुम्हे अम्मी नहीं मानता.. सोच लो.. आदिल की ज़िन्दगी का सवाल है.. मुझे कुछ तो देना पड़ेगा..

शबाना - अच्छा क्या चाहिए?

गौतम - हम्म्म... अब चुत नहीं तो मुंह सही.. Blowjob दे देना..

शबाना - क्या कहा? मतलब?

गौतम हसता हुआ - blowjob का मतलब नहीं पता? कितनी भोली हो तुम.. अरे मतलब नुनु को मुंह में लेके ठंडा कर देना बस.. इतना सा..

शबाना - कमीने तेरा मुंह तोड़ दूंगी मैं.. बेशर्म कहीं का.. अपने दोस्त की अम्मी के साथ ये सब करेगा..

गौतम - फिर तुम्हारी मर्ज़ी.. अब फ़ोन नहीं करूँगा, बहुत तंग करता हूँ ना तुम्हे? बहुत नाराज़गी है तुम्हे मुझसे? अब कभी नहीं परेशान करूंगा..

शबाना - अच्छा ठीक है कुत्ते.. कर दूंगी तुझे ठंडा पर पहले आदिल को घर आने दे..

गौतम - बाद में मुकर तो नहीं जाओगी तुम?

शबाना - नहीं मुकुरूंगी.. बस..

गौतम - अच्छा वो पिक भेजी थी व्हाट्सप्प पर देखी तुमने?

शाबाना - नहीं अभी देखती हूँ..

गौतम - तुम देखके बताओ कैसी है और मैं अभी आदिल को बाहर निकलने का इंतज़ाम करता हूँ.. रखता हूँ..

शबाना व्हाट्सप्प खोलती है तो उसमे गौतम ने शबाना को अपने लंड की फोटोज सेंड की हुई थी जिसे देखकर शबाना की चुत में अजीब सी सुगबुगाहत होने लगती है वही गौतम रजनी को फ़ोन करता है..

गौतम - कैसी हो दीदी..

रजनी - मेरा छोड़ तू अपना बता छोटू.. इतने दिनों से ना massage ना कॉल.. तू इतना बिजी रहता है की अपनी दीदी से बात करने का समय नहीं मिला? याद नहीं आती मेरी?

गौतम - याद उसे किया जाता है दीदी जिसे भूल गए हो.. आप तो मेरे दिल में बस्ती हो..

रजनी - फिर भी अपने दीदी से मिलने की फुसरत नहीं मिलती?

गौतम - फुर्सत तो बहुत है दीदी, पर आपने जो आपके और मेरे बीच एक दायरा बनाके रखा उसे तोड़ने से डर लगता है.. आप तो जाती हो मैं आपको कितना पसंद करता हूँ.. जब भी आपको देखता हूँ बहकने लगता हूँ..

रजनी - ये सब ड्रामा बंद कर मैं अच्छे से जानती हूँ तुझे.. नौटकीबाज़.. बता कब मिलने आ रहा है मुझसे?

गौतम - मैं नहीं आऊंगा दी..

रजनी - अच्छा ज़ी? किस्सी मिलेगी अगर आओगे तो?

गौतम - पक्का?

रजनी - हाँ पक्का.. मेरे छोटे से आशिक..

गौतम - दीदी छः फ़ीट का हूँ आपसे लम्बा.. छोटा किसे बोल रही हो?

रजनी हसते हुए - अच्छा? छोटा बोलने पर मेरा छोटू गुस्सा होता है?

गौतम - दीदी एक बात थी..

रजनी - हाँ बोलो ना.. कुछ चाहिए था?

गौतम - हाँ..

रजनी - क्या चाहिए मेरे छोटे से आशिक़ को?

गौतम - दीदी एक दोस्त है मेरा, आदिल नाम है.. सुबह छोटा सा झगड़ा हो गया था तो पुलिस ने उठाकर जेल में डाल दिया.. **** थाने में बंद है आप कुछ मदद कर सकती हो?

रजनी - बस? अभी फ़ोन करती हूँ..

गौतम - थैंक्स दी..

रजनी - तू कब से थैंक्स बोलने लगा? और व्हाट्सप्प पर डेट और टाइम सेंड किया है टाइम से आ जाना मिलने.. वरना घर उठवा लुंगी तुझे..

गौतम - वक़्त से पहले आ जाऊंगा..

गौतम रजनी से बात करके फोन काट देता है और फिर शबाना को फोन करता है..

शबाना - हेलो..

गौतम - हेलो मेरी शब्बो बेगम.. निकलवा दिया आदिल को जेल से बाहर.. 10 मिनट में घर आ जाएगा आदिल, अब तुमको बताओ कब और कहा दोगी मुझे मेरा इनाम..

शबाना मुस्कुराते हुए - कुछ नहीं मिलेगा तुझे..

गौतम - सोच लो बात से पलट रही हो तुम..

शबाना - सोच लिया..

गौतम - यार मान जाओ ना, अपना वादा निभाने आ जाओ वरना फिर टांग उठा के चुत भी देनी पड़ेगी मुझे..

शबाना हस्ती हुई - कल सुबह 9 बजे घर आ जाना.. दे दूंगी जो कहा है..

गौतम - कंडोम का पैकेट कितने पिस का लाउ शबाना बेगम 3 या 8?

शबाना - कमीने सिर्फ blowjob ही मिलेगा.. जो तय हुआ था.. उससे ज्यादा कुछ नहीं..

गौतम - देखते है.. आज नहीं तो कल मिलेगा तो सब..

शबाना - सिर्फ ख्वाबों में..

गौतम - अच्छा लोडा केसा लगा मेरा?

शबाना हसते हुए - चुप बेशर्म...

शबाना फोन काट देती है और कुछ ही मिनट में उसके सामने उसका बेटा आदिल दरवाजे से अंदर आता होगा दिख जाता है..

अगले दिन सुबह शबाना ने घर के दरवाजे पर किसी के आने की दस्तक सुनी तो वो कामोतेजना से भरकर रोमांचित हो उठी उसे पता था की आज उसके शोहर फारूक आदिल के साथ बाहर गए है जिनको आते आते रात हो जायेगी. घर में शबाना अकेली थी और वो खुद भी गौतम का इंतजार कर रही थी उसके मन में अपनी सुनी पड़ी जिंदगी को फिर से हरा भरा करने का ख़्वाब चल रहा था.. शबाना ने दरवाजा खोलकर जब गौतम को दिखा वो शर्म से आँखे नीचे करती हो दरवाजे से पीछे हट गई और गौतम को अंदर आने की जगह दे दि. गौतम ने अंदर आते हुए दरवाजा लगा दिया. और सामने नजर झुकाए घड़ी शबाना को देखता रहा. कुछ देर दोनों इसी तरह एक दूसरे को प्यार कि नजर से देखते रहे मगर किसी में भी हिम्मत नहीं थी कि दोनों में से कोई भी आगे बढ़कर पहल करता. गौतम ने हीं सिलसिले को तोड़ा और आगे बढ़कर शबाना का हाथ पकड़ते हुए उसके झुके हुए सर को उंगलियों से ऊपर उठा दिया और उसके गुलाबी होंठ अपने होंठ में भरके चुंबन करने लगा.

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शबाना ने गौतम की हरकत का कोई विरोध नहीं किया और ना ही किसी तरह का कोई आपत्ति जाताई, वह भी अपने होठों से गौतम को शराब पिलाने लगी. घर के आंगन में खड़े गौतम और शबाना दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे थे दोनों में से किसी ने भी अब तक एक दूसरे से कोई बात नहीं की थी. शबाना गौतम की हर हरकत पर चुपचाप खड़ी हुई सहमति दे रही थी और उसे बार-बार कर चूम रही थी गौतम शबाना के बदन को अपने हाथों से नाप रहा था और हर जगह अपने हाथ ले जाकर शबाना के बदन को छू रहा था और छेड़ रहा था. गौतम के इस तरह के व्यवहार से और अपनी सुनी पड़ी जिंदगी में आई इस बहार से शबाना अभीभूत हो चुकी थी और अब उसके मन में काम इच्छा पूरी तरह से जाग चुकी थी वह अपने दोनों हाथों से गौतम का चेहरा पड़े उसे चूम रही थी और उसे अपने होठों के जाम पिला रही थी मानो वो सालों बाद मिले इस मौके को भूनाना चाहती हो और भरपूर मजा लेना चाहती हो अपनी इच्छा पूरी कर लेना चाहती हो.

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दोनों काफी देर से चुम्बन चल रहा था दोनों ही इस चुम्बन को नहीं तोड़ना चाहते थे बहुत लंबे समय से दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे दोनों एक दूसरे को चूमते चूमते खा जाना चाहते हो तभी गौतम के फोन की रिंग बजी और दोनों के बीच काफी लंबे समय से चल रहा चुंबन टूट गया..

शबाना - किसका फ़ोन है?

गौतम फ़ोन दिखाते हुए - ये साला हमेशा गलत टाइम पर फ़ोन करता है.

शबाना - तू बात कर मैं तेरे लिए चाय बना देती हूँ..

ये कहकर शबाना रसोई की तरफ चली गई और गौतम भी उसके पीछे पीछे रसोई में आ गया और फ़ोन उठाकर स्पीकर पर रख दिया और फिर से शबाना को अपनी बाहों में भरते हुए चूमने लगा..

आदिल - क्या कर रहा है रंडी?

गौतम चुम्बन तोड़कर - तेरी अम्मी शबाना का चुम्मा ले रहा था गांडु.. इतने गुलाबी होंठ है मन करता है खा जाऊ..

शबाना मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों को अपने दांतो से पकड़कर खींचती हुई काट लेटी है और गौतम की आह्ह निकल जाती है फिर शबाना गौतम के होंठों को सहलाती है..

आदिल - अबे किस रंडी को चूस रहा है लोडे.. सच बता..

गौतम - सच बोल रहा हूँ गांडु.. तेरी अम्मी है. अभी तो सिर्फ चुम्मा लिया है शबाना का, चोदना तो बाकी है..

आदिल - भोस्डिके बकवास मतकर सुबह सुबह..

गौतम शबाना की कुर्ती उतारता हुआ - अच्छा बता ना गांडु क्या काम था.. तूने तो दोस्ती ख़त्म कर ली थी ना रात को फिर कैसे फ़ोन कर लिया?

आदिल - अरे यार कल काण्ड हो गया था..

गौतम - हाँ बताया था तेरी अम्मी ने कैसे पुलिस ने तेरी गांड तोड़ी थी कल..

आदिल - उसीके लिए फ़ोन किया है भोस्डिके. आज अब्बू मुझे खालू के यहां कासपुर ले जा रहे है.. कल कोई मन्नत मांगी थी उन्होंने जिसे पूरा करने..

गौतम शबाना की कुर्ती उतारकार उसकी ब्रा देखते हुए - साले तूने बताया नहीं तेरी अम्मी की ब्रा का साइज 38 है.. देखने से 32-34 ही लगते थे.. (बूब्स दबाकर) बहनचोद कितने टाइट है यार तेरी अम्मी के चुचे..

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आदिल - बहन के लंड पागल हो गया सुबह सुबह.. कितनी पी है तूने आज.. मैं जो बोल रहा हूँ वो बता..

गौतम - चल पूछ ना गांडु..

गौतम इतना कहकर शबाना की ब्रा निकाल दी और उसके बूब्स को चाटने और चूसने लगा निप्पल्स को छेड़ने लगा शबाना भी मुस्कुराते हुए गौतम का पूरा साथ दे रही थी

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आदिल - अरे कोई जुगाड़ है क्या यहां कासपुर के पास? किसीको जानता है तू?

गौतम - जानता तो हूँ..

आदिल - बोल ना भोस्डिके.. मुंह में कुछ ले रखा है क्या?

गौतम - हाँ भाई तेरी अम्मी के गुलाबी निप्पल्स है मेरे मुंह में.. बड़े प्यार से अपने चुचे चुसवा रही है हमारी बातें सुन रही है..

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आदिल - क्यों अपनी माँ चुदवा रहा है रंडी.. बताना है तो बता दे वरना फ़ोन रख..

गौतम - रख दे साले.. मैं क्या है?

शबाना गैस पर से चाय उतारकर कप में चाय छन्नी कर लेटी है और अपना चुचा चूस रहे गौतम के मुंह से अपना बोबा निकालकर उसे चाय का कप दे देती है..

आदिल - भोस्डिके क्यों भाव खा रहा है? बता दे ना..

गौतम चाय लेटे हुए - चल ठीक है मगर कुछ करना पड़ेगा उसके लिए पहले..

ये कहते हुए गौतम ने शबाना के सर पर हाथ रख दिया और उसे नीचे बैठने का इशारा किये जिसे शबाना अच्छे से समझा गई और अपने घुटनो पर बैठकर गौतम की जीन्स पर लगा बेल्ट खोलने लगी फिर जीन्स खोलकर नीचे सरका दी..

आदिल - क्या करना है जल्दी बोल रंडी..

गौतम - बहुत रंडी रंडी बोलता है ना मुझे गांडु.. चल अब अब्बू बोल फिर नंबर दूंगा..

शबाना गौतम की बात सुनकर दबी हुई हंसी हँसने लगी और शरारत भरे अंदाज़ से गौतम की टीशर्ट ऊपर करके उसके नाभि पर प्यार से चूमकर अपने दांतो से काट लिया..

आदिल - मादरचोद औकात मत दिखा अपनी.. देना है तो दे वरना माँ चुदा..

गौतम - तेरी मर्ज़ी..वैसे आज तो तेरी अम्मी चुदने वाली है..

आदिल फ़ोन काट देता है..

शबाना - बिलकुल बेशर्म है तू. थोड़ी भी शर्म नहीं है तेरे अंदर..

गौतम - शर्म होती तो तुम इस तरह मेरे सामने बैठकर मेरी चड्डी नहीं उतार रही होती शब्बो बेगम..

शबाना हस्ते हुए - इस तरह से तो मत बुला कमीने.. मुझे शर्म आने लगती है..

गौतम चाय पीते हुए - शर्म ही तो औरत का गहना होता है शब्बो..

शबाना गौतम से नज़र चुरा लेती है और उसकी चड्डी भी नीचे सरका देती है.. जैसे ही गौतम की चड्डी नीचे सरकती है शबाना का मुंह खुला का खुला रह जाता है..

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शबाना सोच रही थी की कल जो फोटोज गौतम ने व्हाट्सअप की थी वो फेक है मगर अब उसके सामने गौतम का झूलता लंड था और शबाना उसे देखकर हैरात से आँखे बड़ी कर चुकी थी.. शबाना को समझा नहीं आ रहा था की कैसे गौतम के पास इतना बड़ा और मोटा लम्बा लंड है ये असाधारण बात थी..

शबाना बिना कुछ बोले बस लंड को देखे जा रही थी और गौतम चाय पीते हुए सारा नज़ारा देखकर मुस्कुरा रहा था..

शबाना ने एक नज़र ऊपर करके गौतम को देखा तो गौतम ने मुस्कुराते हुए कहा..

गौतम - पसंद आया मेरी शब्बो को मेरा लंड?

गौतम के सवाल पर शबाना शर्म से पानी पानी हो गई और फिर आँखे नीचे करके फर्श को देखने लगी मगर गौतम ने शबाना के चेहरे को ऊपर उठाते हुए उसके मुंह में अपना अंगूठा डाल दिया जिसे शबाना शरमाते हुए चूसने लगी.. थोड़ी देर अंगूठा और उंगलियां चूसाने के बाद गौतम ने शबाना को से कहा..

गौतम - इतना शर्माओगी तो कैसे काम चलेगा शब्बो?

गौतम के इतना कहते ही शबाना औऱ शर्म से लाल पड़ गई..

गौतम - यार शब्बो तेरा बेटा पता नहीं क्या चाहता है.. बार बार फ़ोन कर रहा है.. एक मिनट इससे बात कर लू..

गौतम फ़ोन उठाकर - हाँ गांडु बोल?

आदिल - भाई क्यों नखरे कर रहा है देदेना नम्बर..

गौतम - दे तो रहा हूँ.. तू बोल ही नहीं रहा..

आदिल - अच्छा.. अब्बू.. बस बोल दिया अब दे जल्दी.

गौतम - ऐसे नहीं गांडू.. बोल अब्बुजान मेरी अम्मी के मुंह में लोडा डाल दो.

आदिल धीरे से- अब्बूजान मेरी अम्मी के मुंह में लोडा डाल दो.. बस अब दे जल्दी..

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गौतम शबाना के मुंह में लोडा डाल डेता है.

शबाना शरमाते हुए औऱ मुस्कुराते हुए लंड मुंह में ले लेती है औऱ चूसने लगती है..

गौतम - उफ्फ्फ आदिल क्या चुस्ती है तेरी अम्मी यार..

आदिल - मज़ाक़ मत कर रंडी अब दे दे जल्दी नम्बर..

गौतम - व्हाट्सप्प कर रहा हूँ रुक.. फ़ोन कट जाता है..

शबाना रुक शब्द सुनकर लोडा चूसना बंद कर देती है औऱ गौतम को देखती मगर गौतम नम्बर सेंड करके शबाना से कहता.. तुझसे नहीं बोला मेरी जान, तू चुस्ती रह. केसा है मेरा लंड?

शबाना - लज़ीज़ है..

गौतम शबाना के बाल पकड़ कर उसे अपना लोडा अंदर तक चूसाता हुआ - तो पूरा लोना मेरी जान..

शबाना कामुक होती हुई गौतम के लंड को चूस रही थी औऱ उसे देखकर मुस्कुरा रही थी मानो कहा रही हो तुम कितने बेशर्म हो गौतम.. गौतम शबाना के सर पर हाथ रखकर उसे अपना लोडा ऐसे चुसवा रहा था मानो कहा रहा हो आज तो तेरे मुंह के साथ चुत भी सुज्जा दूंगा शबाना..

कुछ देर बाद शबाना के मुंह की गर्माहट औऱ लार से गौतम चरम पर पहुंच जाता है औऱ वो शबाना के मुंह में अपना सारा माल छोड़ कर फारीक हो जाता है.. शबाना मज़े से लंड का माल पीते हुए मुस्कुराती है औऱ फिर चाट चाट के गौतम के लंड को साफ करके खड़ी हो जाती है..

गौतम - क्या चुस्ती हो यार शब्बो, मज़ा आ गया..

शबाना मुस्कुराते हुए सारी शर्म छोड़ देती है औऱ अपनी सलवार का नाड़ा खोलते हुए गौतम से कहती है - अब तुम्हारी बारी.. चलो..

शबाना ने इतना कहकर गौतम के कंधे पर हाथ रखकर नीचे बैठने को इशारा किया मगर गौतम शबाना का मन समझा चूका था औऱ नाटक करते हुए बोला - शब्बो वादा सिर्फ blowjob का था अब आगे मेरा कुछ करने का मूड नहीं है..

शबाना ने गौतम का एक हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया औऱ बोली - मूंड बनाने के लिए मैं हूँ ना बेटा..

गोतम शबाना के बूब्स के निप्पल्स जोर से मसलते हुए - पर मैं आगे कुछ नहीं करने वाला.. बहुत नखरे चोद रही थी ना तुम.. अब मेरी बारी है..

शबाना - पूरा सुलगा कर जलता छोड़ रहा है.. बिना तेरी इज़्ज़त लुटे यहां से जाने नहीं दूंगी तुझे? चुपचाप लाइन पर आजा..

गौतम - नहीं तो क्या करेगी?

शबाना - चिल्ला दूंगी.. इस हालात में जब सब देख लेंगे तो पता है क्या हाल करेंगे?

गौतम - सिर्फ मेरा हाल थोड़ी बुरा होगा?

शबाना - मुझे अपनी परवाह नहीं है.. तू अपनी सोच..

गौतम शबाना का मुंह पकड़ कर - बहुत बोलना आ रहा है ना तुझे?

शबाना - क्या कर लेगा तू?

गौतम - तेरा मुंह बंद कर दूंगा..

शबाना - हिम्मत है तुझमे मेरा मुंह बंद करने की?

गौतम शबाना की बात सुनकर उसके मुंह से अपना मुंह लगा लेता औऱ शबाना को चूमने लगता है जिससे शबाना भी मस्ती से भरकर गौतम के गले में अपने हाथ डाल देती औऱ उसके नाजुक लबों को अपने मोटे औऱ गुलाबी लबों से चूमने लगती है...

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शबाना चूमते हुए गौतम को लेकर अपने बेड रूम में आ जाता है औऱ बिना चुम्बन तोड़े दोनों बिस्तर पर गिर जाते है..

शबाना डोमिनट करती हुई गौतम को पीठ के बल लिटा देती है औऱ उसके ऊपर आकर उसके चेहरे को बार बार चूमने लगती है औऱ गौतम के चेहरे गर्दन औऱ सीने पर अपने होंठों के साथ जीभ से भी चुम्बन अंकित कर देती है.. शबाना पूरी मस्ती में गौतम के सीने पर उसके निप्पल्स को अपने मुंह में भरके चूसने लगती है जैसे उसका दूध निकालकर छोड़ेगी गौतम को भी इसमें बहुत काम सुख मिल रहा था शबाना ने दांतो से उसके निप्पल्स काटने शुरू कर दिया जिसमे गौतम को थोड़ा दर्द होने लगा.. शबाना ने गौतम के बदन पर लव बाईट की झड़ी लगा दी..

शबाना वापस नीचे आगई औऱ गौतम के लंड को मुंह में लेकर वापस उसे चूसना शुरू करदिया..

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शबाना को सालों बाद कोई बिस्तर पर मिला था जो उसे काम सुख देने वाला था शबाना गौतम को अपनी चुदाई कला से रिझाना चाहती थी जिसके लिए वो गौतम को पूरी तरह खुश करने में लगी थी..

गौतम ने किसी रंडी की तरह शबाना के बाल पकड़ लिए औऱ उसके मुंह में झटके मारने लगा.. शबाना किसी रंडी की तरह अपना मुंह चुदवा रही थी.. उसके मुंह में गौतम का लंड आधे से ज्यादा घुस रहा था..

गौतम ने कुछ देर ऐसे ही शबाना का मुंह चोदकर उसके बाल खींचता हुआ उसे ऊपर ले आया औऱ अपने हाथ से शबाना की चड्डी उतारकर उसकी चुत को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया औऱ उसकी चुत का जायजा लेने लगा.

गौतम - ऊपर से कितने नखरे कर रही थी औऱ नीचे सारे बाल साफ करके बैठी.. मेरे लिए काटी है ना झांटे?

शबाना पूरी बेशर्मी से - हाँ तेरे लिए काटी है.. पहले कह देता तुझे बालों वाली चुत पसंद है तो नही काटती..

गौतम - उफ्फ्फ अम्मीजान मार डोलोगी तुम तो..

शबाना - तुम्हारे मुंह से अम्मीजान कितना प्यारा लगता है..

गौतम - अच्छा.. तो बस आज के बाद आपको अम्मीजान कहकर ही बुलाऊंगा..

शबाना हस्ते हुए - चुप बेशर्म..

गौतम - अम्मीजान अब अपनी चुत का रस पीलाओ..

गौतम उठकर शबाना की टांग चौड़ी कर लेता है औऱ उसके जांघो के जोड़ पर अपने मुंह लगा के उसकी चुत सूंघता है जिसकी खुशबु से गौतम काम की हवा में बहने लगता है..

गौतम जैसे ही अपने होंठ शबाना की चुत पर रखता है शबाना काम में डूबी हुई एक आह भारती है औऱ गौतम के सर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसका सर अपनी चुत पर जोर से दबा लेती है..

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तभी गौतम का फ़ोन बजता है जिसे शबाना देखती है औऱ उसपर आदिल का नाम देखकर गुस्से में कहती है - ये अपनी अम्मी नहीं चुदने देगा आज.. गँड़मरा बार बार फ़ोन करके परेशान कर रहा है..

गौतम हसते हुए - इसकी अम्मी चुदने से तो आज इसका बाप भी नहीं रोक सकता..

शबाना हसते हुए फ़ोन गौतम को दे देती है.. गोतम फ़ोन उठाकर शबाना की चुत चाटने लगता है..

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आदिल - क्या कर रहा है?

गौतम - तेरी अम्मी की चुत चाट रहा हूँ..

आदिल - क्यों मज़ाक़ कर रहा है रंडी..

गौतम - रुक फोटो भेजता हूँ.. गौतम सिर्फ चुत की फोटो खींचकर आदिल को व्हाट्सप्प कर देता है.. देख ले खुद चाट रहा हूँ..

आदिल - अबे सच बता किस रंडी की ले रहा है? मुझे नहीं दिलवायेगा?

गौतम हस्ते हुए - अबे तेरी सगी अम्मी है..

आदिल - बहन के लोडे फालतू मज़ाक़ नहीं.. बहुत हो गया तेरा.. औऱ वो जो तूने नंबर दिए थे पैसे ज्यादा मांग रहा है..

गौतम - कितने कम पड़ रहे है?

आदिल - अबे 4 हज़ार मांग रहा है वो भी दो घंटे के.. मैं दो हज़ार देने को त्यार हूँ..

गौतम शबाना को देखकर - बाकी दो हज़ार में सेंड कर रहा हूँ मज़े कर.. औऱ वापस कॉल मत करना शाम तक..

आदिल - बहन के लंड.. होश में है? मेरे टुकड़ो पर पलता है तू.. पैसे कहाँ से आये तेरे पास?

गौतम - बाद में बताऊंगा अभी तेरी अम्मी को चोदना है.. चल रखता हूँ.. पैसे ऑनलाइन कर दिए..

फ़ोन कट हो जाता है..

शबाना - आदिल रडीयों के पास जाता है?

गौतम - कभी कभी जाना पड़ता है अम्मी.. गौतम फिर से शबाना की चुत चाटना शुरू कर देता है.. शबाना भी आगे कुछ नहीं बोलती औऱ अपनी चुत चूसाईं का आनंद भोगने लगती है..

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गौतम पूरी ईमानदारी औऱ स्वाद लेकर शबाना की चुत चाट रहा था औऱ उसकी चुत से निकलता रस पिए जा रहा था.. औऱ शबाना भी सालों बाद मिल रहे सुख का मज़ाक़ उठने लगती है और थोड़ी सी देर बाद ही गौतम में मुंह में झड़ जाती है.. झड़ने के बाद शबाना शर्म से गौतम के सीने में अपने सर छीपा लेती है..

कुछ देर बाद गौतम - शुरू करें?

शबाना शरमाते हुए - हाँ.. मगर संभालके.. 7 साल से कुछ नहीं किया.. औऱ तुम्हारा बहुत बड़ा है..

गौतम मिशनरी पोज़ में आते हुए - तो फिर खुद ही अंदर कर लो..

शबाना कामुक हावभाव के साथ - लंड पकड़कर अपनी चुत के मुहाने पर सेट करती है औऱ हल्का सा गौतम की कमर पर हाथ रखकर अपनी औऱ खींचती है जिससे लंड का टोपा शबाना की गीली चुत में चला जाता है..

शबाना गौतम के देखती हुई उसके होंठो को अपनी क़ैद में कर लेटी है औऱ चूमते हुए लंड को धीरे धीरे चुत में घुसाने की कोशिश करती है मगर गौतम को एक शरारत सूझती है औऱ वो एक जोरदार झटका मार देता है.. झटका इतना तेज़ था की आधे से ज्यादा लंड एक बार में चुत को चिरता हुआ उसमे घुस जाता औऱ शबाना की चिंख निकल जाती मगर घर के बाहर पड़ोस में बज रहे dj की आवाज में उसकी आवाज दब जाती है औऱ शबाना खुद अपने मुंह पर हाथ रख लेती है मगर उसकी आँखों से आंसू औऱ चुत से हल्का खून बह जाता है..

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शबाना गौतम को देखती हुई सिसकी भरने लगती है औऱ गोतम के नीचे से निकलने की नाकाम कोशिश करने लगती है मगर गौतम शबाना को नीचे से निकलने नहीं देता औऱ शबाना को प्यार से चुप कराकर वापस चूमने लगता है..

शबाना सिसकती हुई - पहली बार में ही मेरी चुत का भोसड़ा बना देगा क्या हरामजादे.. कहा था ना प्यार से करना..

गौतम - माफ़ कर दो अम्मी.. बहक गया था.. बाहर निकलूं?

शबाना - नहीं बेटा अब रहने दे ऐसे ही..

कुछ देर बाद जब शबाना शांत होती है गौतम फिर से शबाना को उसी मूंड में आने की कोशिश करने लगता है औऱ शबाना जल्दी ही गौतम की छेड़ खानी से कामुक हो उठती है..

गौतम शबाना के कामुक होने पर धीरे धीरे अपने लंड को उसकी चुत में आगे पीछे करने लगता है औऱ शबाना सिस्कारिया लेटी हुई अपनी चुदाई का सुख भोगने लगती है शबाना इसतरह गौतम को पड़के हुए थी जैसे उसे अपने आप में समाज लेना चाहती हो दोनों के होंठ अब भी आपस में मिलकर एक दूसरे को गिला कर रहे थे..

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मिशनरी के बाद बाल पकड़के डॉगी स्टाइल, काऊ गर्ल औऱ फिर गोद में उठाकर गौतम ने शबाना को रंडी बनाके चोदा.

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शबाना को ऐसा लग रहा जैसे उसे जन्नत मिल गई हो.. गौतम भी अपने दोस्त की अम्मी चोदते हुए पूरा जोश में था औऱ शबाना को नंगा करके बेशर्मी से अपने लंड पर उछाल रहा था.

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शबाना चुदवाते हुए मीठे दर्द औऱ असीम ख़ुशी से कराह रही थी औऱ गौतम को चूमे जा रही थी.. शबाना की चुत से वापस झरना बह चूका था..

शबाना को ऐसा लग रहा जैसे आज वो अलग ही दुनिया में हो उसको आजतक जो नहीं मिल पाया था गौतम ने आज उसे दिला दिया था शबाना के अंग अंग में तरंग की लहर उमड़ पड़ी थी वो गौतम के लिये या उसके कहने पर आज कुछ भी कर सकती थी..

गौतम ने शबाना को वापस बिस्तर पर पटक दिया औऱ मिशनरी में चोदने लगा.. इस बार लम्बे समय से चोदते आ रहे गौतम का झरना भी बह जाना चाहता था औऱ पिछले एक घंटे से शबाना पूरी तरह संतुष्ट होकर गौतम के नीचे पड़ी हुई चुद रही थी.. गौतम ने अपना वीर्य शबाना की चुत में ही भर दिया जो बच्चे दानी में पूरी तरह चला गया..

शबाना - उफ्फ्फ.. ये क्या तूने? अंदर क्यों छोड़ा.

गौतम - मेरी मर्ज़ी अम्मी.. मैं जहा चाहूंगा वही अपना मार निकालूँगा..

शबाना - मैं प्रेग्नेंट हो गयी तो?

गौतम - वही तो मैं चाहता हूँ मेरी जान.. कम से कम एक बच्चा तो तूम मेरा भी अपनी चुत से निकाल सकती हो.

शबाना - अगर तेरा बच्चा मैंने पैदा किया तो मुझे क्या मिलेगा?

गौतम - तुझे क्या चाहिए?

शबाना - तू मुझे छोड़कर नहीं जाएगा कभी.. जब भी बुलाऊंगी आना पड़ेगा मुझसे मिलने..

गौतम - वादा करता हूँ..

गौतम बेडशीट पर खून देखकर- ये कहा से आया?

शबाना हसते हुए - तूने ही तो निकाला है मेरी चुत से.. एक झटके में लोडा अंदर डालेगा तो क्या जूस निकलेगा? सफ़ेद से लाल हो गई बेडशीट..

गौतम - चोदने के बाद बहनचोद भूख बहुत लगती है.. यार कुछ खिला दो अम्मी..

शबाना लड़खड़ाते हुए उठती है औऱ गौतम से मुस्कुराते हुए कहती है - क्या खाओगे क्या बनाऊ?

गौतम भी खड़ा हो जाता है औऱ कहता है - परांठे बना दो..

शबाना - अभी बनाके लाती हूँ..

ये कहते हुए शबाना अपने कपड़े पहनने लगती है मगर गौतम उसे कपडे नहीं पहनने देता औऱ कहता है - रहने दे ना अम्मी.. खाने के बाद वापस उतारना पड़ेगा.. बिना कपड़ो के वैसे भी कमाल लगती है..

शबाना - ब्रा पेंटी तो पहनने दे बेटा..

गौतम - शाम तक कोई कपड़ा नहीं मिलेगा.. चल रसोई में..

गौतम शबाना को उठाके रसोई में ले आता है औऱ शबाना वहा परांठे बनने के लिए आटा लगाने लगती है..

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गौतम शबाना को पीछे से पकड़ लेटा है औऱ उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथो में भरके उसी तरह मसलने लगता है जैसे शबाना आटा मसल रही थी..

शबाना - खाना तो बना लेने दे..

गौतम - तो बना ना अम्मी.. तेरे बोबे पकडे है हाथ थोड़े पकडे है..

गौतम ये कहते हुए अपना लंड भी उसकी चुत में डाल देता है..

शबाना - आह.. आहिस्ता...

गौतम - अम्मी बहुत मस्त चुत है तुम्हारी..

शबाना - एक बात पुछु?

गौतम - हाँ.. पूछ ना..

शबाना - मैं कैसी लगी तुझे?

गौतम - सच बताऊ?

शबाना - हाँ

गौतम - रंडी जैसी..

शबाना - क्या.. रंडी जैसी क्यों?

गौतम - बोल रही थी अगला जन्म लेना पड़ेगा.. 4 दिनो में टांग खोल के नीचे लेट गई.. साली रांड..

शबाना मुंह बनाके - चुद गई तो रंडी हो गई? वरना पिछले 4 दिन से हूर रानी परी शहजादी बोल रहा था.. सच में कमीना है.. ले खा ले..

गौतम शबाना को पलटके अपनी औऱ घुमा लेटा है औऱ उसकी चुत में फिर से लंड डालके बोलता है..

गौतम - तूम अपने हाथ से खिलाओ ना अम्मी..

शबाना - रंडी के हाथ से खायेगा?

गौतम - तूम मेरी पर्सनल रंडी हो तुम्हारे हाथ से तो ज़हर भी खा लू..

शबाना मुस्कुराते हुए गौतम को खाना खिलाती है खाना खाने के बाद गौतम - बाथरूम कहा है?

शबाना - क्यों?

गौतम - क्यों क्या? बाथरूम लगा है..

शबाना नीचे बैठकर गौतम का लोडा पकड़ते हुए आँख मारके - तेरी रंडी है ना.. मेंरे मुंह में कर दे.. औऱ गौतम का लोडा अपने मुंह में डाल लेती है..

गौतम शबाना के सर पर हाथ फेरता हुआ उसके मुंह में मूतना शुरू कर देता जिसे शबाना बड़े आराम से पी लेती है..

शबाना को अपना मूत पिलाने के बाद गौतम रसोई से बाहर आ जाता है.. उसके पीछे पीछे शबाना भी बाहर आ जाई है...

गौतम ने शबाना को अपनी बाहों में भर लिया और उसे उठाकर बिस्तर पर ले गया जहां पहले उसे चुम्मा और उसके बाद उसकी चुत को चाटते हुए गांड के छेद आ गया.. शबाना को अपनी गांड के छेद चटवाने में बहुत मजा मजा आ रहा था और गौतम बड़े चाव से शबाना की गांड के छेद को चाट रहा था.. थोड़ी देर शबाना की गांड की छेद को चाटने के बाद गौतम ने छेद में उंगलि डाल दी औऱ उंगलि से शबाना की गांड चोदने लगा.. थोड़ी देर इसी तरह करने के बाद गौतम ने गांड के छेद पर थूक दिया औऱ अपना लोडा लगा दिया..

शबाना को जब इस बात का एहसास हुआ वह मुड़कर पीछे देखने लगी और गौतम से ऐसा नहीं करने के लिए इशारे में मना करने लगे मगर गौतम ने शबाना की एक न सुनी और अपने लंड का दबाव बनाकर गांड की छेद को चोडा करते हुए अपने लोडे का टोपा गांड के अंदर घुसा दिया.. शबाना आहे भरने लगी औऱ सिसकियाँ लेने लगी और वह बार-बार गौतम से गांड के छेद को छोड़ देने की अपील करने लगी मगर गौतम उसकी अपील नकारते हुए शबाना की गांड में अपना लंड घुसाने को बेताबी से अपना जोर लगा रहा था...

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कुछ पलो में ही उसको सफलता भी मिल गई.. शबाना ने पहले भी अपनी गांड मरवाई थी मगर गोतम के बड़े लंड से मारवाने के कारण उसे दर्द भी हो रहा था लेकिन गौतम की ख़ुशी के कारण शबाना ने अपनी गांड की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया था..

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गौतम अपने दोस्त की अम्मी चोद चूका था औऱ अब बारी गांड की थी जिसे वो चोद रहा था.. आधे घंटे बाद शबाना बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी औऱ उसके ऊपर गौतम शबाना की गांड में लोडा घुसाये लेटा हुआ उसे चोद रहा था..

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शबाना ख़ुशी खुशी अपनी गांड भी गौतम के नाम कर देती है औऱ फिर से गौतम गांड चोदकर लंड का माल शबाना की चुत में भर देता है शबाना की चाल ढाल औऱ हाल सब बदल चूका था.

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दिन के चार बज चुके थे औऱ गौतम शबाना को बाहों में लिये बिस्तर पर लेटा हुआ था तभी वापस आदिल का फ़ोन आता है..

गौतम - कैसी औलाद पैदा की है यार तूने? साला दिन में दस बार फ़ोन करता है..

शबाना - अब तो तूने इसकी अम्मी चोद ली अब क्यों नाराज़ है इससे?

गौतम फ़ोन उठा कर - गांडु बोला था ना शाम तक फ़ोन मत करना फिर क्यों कर रहा है?

आदिल - भाई जरुरी बात है..

गौतम - बोल क्या जरुरी मात है?

आदिल - ऐसे नहीं पार्टी देनी पड़ेगी?

गौतम शबाना को देखकर - अपनी अम्मी के चुदने की पार्टी मांग रहा है क्या?

आदिल - बार बार अम्मी पे मत आ साले..

गौतम शबाना के बूब्स मसलकर - वरना क्या कर लेगा तू? साले इतने मोटे औऱ टाइट बूब्स है तेरी अम्मी के देखते ही मसलने का मन करता है.. पूरी मिया खलीफा दीखती है रांड.

आदिल - औकात में रह भोसड़ीवाले.. वरना मुझसे भी कुछ सुन लेगा..

गौतम - अच्छा क्या जरुरी बात है बता?

आदिल - फ़ोन पर नहीं.. एक घंटे बाद मेरे घर पर मिलना..

गौतम हैरानी से - पर तू तो कासपुर गया था ना?

आदिल - भाई मेरा काम पूरा हो गया तो अब्बू को वही छोड़कर मैं सीधा वापस आ गया.. एक घंटे में घर पहुंच जाऊंगा.. तू भी आ जा..

गौतम - ठीक है..

शबाना - अच्छा हुआ तूने फ़ोन उठा लिया वरना ये भड़वा आज तुझे औऱ मुझे रंगे हाथ पकड़ लेता.. सूअर है पूरा..

गौतम - एक घंटा है.. चल..

गौतम शबाना को अपने आगे झुका लेता है औऱ लंगड़कर चलती हुई शबाना के बाल पकड़ कर शबाना को चोदते चोदते कमरे से बाहर ले आता है औऱ शबाना के साथ बाथरूम में घुस जाता है आधे घंटे बाद जब दोनों बाथरूम से बाहर निकलती है तो शबाना गौतम की गोद में होती है औऱ गौतम शबाना को बैडरूम में ले आता है उसके बाद दोनों अपनेआप को तैयार करते है औऱ आज हुई घमासान चुदाई के सारे सबूत मिटा देते है. शबाना चुदाई के कारण ऐसे चल रही थी जैसे उसके पैरो में मोच आ गई हो.

गौतम - अम्मी अगली बार कब मिलेगी तुम्हारी चुत?

शबाना - मैं फ़ोन करके बताउंगी अब जल्दी हट आदिल आने वाला होगा..

गौतम हसते हुए - अब क्या डर? उसकी अम्मी तो चुद गई..

शबाना - केसा कमीना है तू..

गौतम - देखना एक दिन आदिल के सामने चोदुँगा तुझे..

शबाना - चुप अब.. चाय पीनी है?

गौतम - हम्म्म पीला दो..

शबाना रसोई में चाय बनाके गौतम को पिलाती है औऱ गौतम चाय पिता हुआ आदिल का इंतजार कर रहा होता है.. कुछ देर बाद आदिल भी घर आ जाता है औऱ गौतम को लेकर कहीं चला जाता है..

 
अपडेट 13

आदिल गौतम को लेके एक बार में आ जाता है औऱ दोनों कोने में एक टेबल पर बैठ जाते है..

गौतम - अब बता भोस्डिके क्या बता रहा था तू?

आदिल - भाई ऐसे नहीं आज दारू पीला पहले..

गौतम - ठीक है साले.. मंगवा ले..

आदिल वेटर से - भाई दो बियर...

गौतम - बता ना अब..

आदिल - भाई सलमा आपा का अड्रेस मिल गया..

गौतम - कहा से मिला?

आदिल - अरे मिल गया कहीं से बस..

गौतम - तो बता ना भोस्डिके.. रांडो की जैसे नखरे क्या कर रहा है..

आदिल - भाई जयपुर रहती है सलमा औऱ किसी मॉल में जॉब करती है.. व्हाट्सप्प पर पूरा एड्रेस भेजा है तुझे देख..

गौतम फ़ोन देखकर - सच बोल रहा है ना गांडु?

आदिल - अम्मी कसम भाई..

गौतम - अम्मी से याद आया.. भाई तेरी अम्मी है मस्त माल बहनचोद.. पूरी मिया खलीफा है साली.. पूरा ठंडा कर दिया मुझे आज..

आदिल - बहन के लोडे हद में रह.. क्या बोल रहा है..

गौतम - सच में भाई.. बुरा मत मान यार, तेरी अम्मी पसंद आ गई मुझे..

आदिल - भोस्डिके पागल हो गया क्या? अम्मी है मेरी.. क्यों फ़ालतू बकवास कर रहा है.. बिना पिए ही चढ़ गई क्या तुझे?

गौतम - अरे नहीं यार, सच बोल रहा हूँ थोड़ी सी हेल्प कर दे भाई.. तेरी अम्मी की चुत तुझे भी दिलवा दूंगा..

आदिल - चुदाईखाने अम्मी पर मत जा वरना बुरा हो जाएगा.. सबको रांड समझ लिया क्या तूने?

गौतम - क्या बुरा हो जाएगा गांडु? एक चुत के लिए साले औकात दिखा रहा है.. बचपन से कितनी मदद की है तेरी औऱ तू इतनी सी मदद नहीं कर सकता? बदले में तुझे भी तो दिलवा दूंगा..

आदिल - भाई अम्मी का ख्याल दिमाग से निकाल दे..

गौतम - कैसे निकाल दू भाई.. आगे औऱ पीछे का सामान देखा है तूने शबाना का.. देखते ही रगड़ने का मन करता है बहन की लोड़ी को, शकल देखते ही लंड खड़ा हो जाता है मादरचोद..

आदिल - अम्मी को गाली मत दे भोस्डिके, अब औऱ कुछ बोला तो सच में दोस्ती ख़त्म समझ..

वेटर बियर लाकर टेबल ओर रख डेता है औऱ चला जाता है..

गौतम - अच्छा गाली नहीं दूंगा पर सच बोल रहा हूँ.. बहुत पहले से मैं तुझे ये बात बताना चाहता था, यार मैं पागल हो रहा हूँ शबाना के लिए.. लंड खड़ा है देख..

आदिल बियर पीते हुए - तो बहन के लंड हिला ले ना जाके.. अम्मी नहीं यार.. अम्मी को छोड़ दे..

गौतम - देख भाई मैं जानता हूँ तुझे अगर शबाना की चुत मिले तो तू उसे भी नहीं छोड़ेगा.. भाई मेरा वादा है मेरा मन भरने के बाद तुझे भी तेरी अम्मी की चुत दिला दूंगा.. साले ऐसे रांड चोद के कहा तक काम चलायेंगे औऱ कहा से इतने पैसे लाएंगे? भाई सोच अगर हमें चुदाई करनी हो औऱ तेरी माँ फ्री हमसे चुदती रहे तो हमारा कितना फ़ायदा होगा..

आदिल थोड़ी देर चुप रहकर - अब्बू जान से मार देगा भोस्डिके..

गौतम - अबे पता कैसे चलेगा तेरे अब्बू को? तू बताएगा?

आदिल - छोड़ भाई.. जाने दे यार.. अम्मी को रहने दे..

गौतम - भड़वे ऐसे माल को चोदने की जगह छोड़ने की बात कर रहा है.. तू हाँ कर बस.. बाकी सब मुझपर छोड़ दे.. शबाना को बीच में लेके चोदेगे अपन दोनों.. सैंडविच की तरह.. आगे में लूंगा पीछे से तू लेना.. सोच ले.

आदिल - पर पटायेगा कैसे अम्मी को?

गौतम बियर ख़त्म करके - भाई उसकी फ़िक्र मत कर.. पटाया हुआ है.. बस सही टाइम का वेट कर.. कोई फोटो है शबाना की तेरे पास?

आदिल - फोटो तो बहुत है क्यों?

गौतम - चल बताता हूँ..

आदिल - कहा चलू?

गौतम - लंड के मेल.. ज्यादा सवाल मत कर.. चुपचाप चल..

आदिल गौतम के पीछे पीछे चल देता है औऱ दोनों जेंट्स टॉयलेट में आ जाते है जहा गौतम एक केबिननुमा बाथरूम में घुस जाता है औऱ आदिल को भी अंदर आने को कहता है आदिल के अंदर आते है गौतम उसका दरवाजा बंद कर लेटा है औऱ दिल से कहता है..

गौतम - फोटो दिखा शबाना रंडी की..

आदिल फ़ोन निकालकर - भाई क्या कर रहा है?

गौतम - तेरी अम्मी शबाना रंडी पर लंड हिलाएंगे आज दोनों भाई मिलके.. कोई सेक्सी फोटो दिखा तेरी अम्मी की.. बहन की लोड़ी सस्ती मिया खलीफा..

आदिल फोटो निकालकर - देख ये ठीक है?


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गौतम - अबे कोई ऐसी फोटो दिखा ना जिसमे इसके चुचे दिखे अच्छे से बिना बुरखे के..

आदिल - ले बहन के लोडे ये देख.. है ना मस्त..


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गौतम - मादरचोद कहा छुपा रखी थी ऐसी तस्वीर? क्या माल लग रही है रंडी.. चुचे देख साली के. फोटो ज़ूम कर..

आदिल - हाँ यार.. अम्मी को चोदने का मन तो मेरा भी बहुत है पहले से.. बस डर लग रहा था..

गौतम - क्या अम्मी अम्मी बोल रहा है मदरचोद.. रंडी है अपनी..

आदिल लोडा बाहर निकालकर - भाई इस रंडी की दिलवा दे यार. अब तो तूने मेरे लंड में भी आग लगा दी शबाना के नाम की.. इसे चोदे बिना चैन नहीं मिलेगा.

गौतम अपना लंड निकालकर - चोद दे पटक के तेरे तो घर में ही रहती है साली..

आदिल गौतम का लंड देखकर - अबे इतना बड़ा कैसे हो गया तेरा?

गौतम - जामुन खाकर हो गया भोस्डिके..

आदिल - मुझे खिला दे वो जामुन भाई..

गौतम - पहले तेरी अम्मी को चोद दू तेरे सामने फिर खिला दूंगा..

आदिल - चोद लेना रंडी को भाई मैं कोनसा मना करने वाला हूँ तुझे.. पर मेरा लंड भी अपने जैसा करवा दे..

गौतम - टाइम आने पर सब हो जाएगा तू चिंता मत कर.. अभी तो इस रंडी पर माल निकाल..

आदिल - हिला बहन की लोड़ी पर.. साली रंडी..


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गौतम औऱ आदिल दोनों आदिल के फ़ोन पर शबाना की तस्वीर को देखते हुए मुठ मारने लगते है औऱ आदिल अपना माल उस तस्वीर पर गिरा देता है मगर गौतम अपना माल नहीं गिराता..

आदिल - क्या हुआ निकल नहीं रहा क्या?

गौतम - फोटो पर नहीं भाई, रियल में निकलेगा मेरा..

आदिल फ़ोन उठा लेता है औऱ उसके बाद आदिल अपने फ़ोन की स्क्रीन को गीले रुमाल से साफ करके गौतम के साथ बाहर आ जाता है औऱ दोनों वापस टेबल पर बैठकर एक एक बियर औऱ आर्डर कर देते है..

गौतम - रेशमा का क्या सीन है?

आदिल - कुछ नहीं यार.. निकाह को चार साल हो गये अभी तक बच्चा नहीं हुआ.. जीजा तलाक़ के देने की बोल रहा है..

गौतम - बच्चा नहीं हुआ मतलब कोई कमी है रेशमा में?

आदिल - पता नहीं मुझे जीजा ढीला लगता है..

गौतम - नंबर दे रेशमा के मैं बात कर लूंगा..

आदिल - तू नम्बर का क्या करेगा भाई?

गौतम - भाई तेरी अम्मी के साथ तेरी आपा को भी लंड के नीचे से निकाल दू तो तूझे कोई परेशानी थोड़ी है.. ले नंबर दे..

आदिल नंबर देकर - भोस्डिके चोदने के बाद मुझसे भी चुदवाएगा.. ऐसा ना हो की तू पलट जाए..

गौतम - भाई मेरे बाद तेरा ही नम्बर है.. मेरा मन भर जाए फिर तेरे ही लंड के नीचे रहेंगी दोनों..

आदिल - भाई लंड केसा बड़ा किया बता ना..

गौतम - बताया तो था साले.. जामुन खाकर..

आदिल - मुझे भी खिला दे यार..

गौतम - भाई वो जामुन ख़ास है बहुत दूर एक ख़ास जगह मिलते है ले चलूँगा तुझे कभी..

आदिल - ठीक है भाई.. जल्दी ले चलना..

गौतम - चल अब घर चलते है.. मैं तुझे घर छोड़ देता हूँ..

आदिल - हाँ.. चल..

गौतम आदिल को लेकर उसके घर आ जाता है औऱ घर के बाहर आदिल से कहता है..

गौतम - फारूक कब तक आएगा?

आदिल - अब्बू को आने में 10 बज जायेंगे..

गौतम - अभी 8 बज रहे है.. सुन तेरी अम्मी दरवाजा खोले तो सीधा अंदर जाकर सो जाना. मैं तेरी अम्मी को पटाने के लिए थोड़ी देर तेरी अम्मी से बात करूंगा.. समझा..

आदिल - ठीक है समझ गया..

आदिल दरवाजा बजाता है औऱ कुछ पलो में शबाना लंगड़ाती हुई आकर दरवाजा खोल देती है..

आदिल शबाना के दरवाजा खोलते ही अंदर जाकर अपने कमरे में चला जाता है औऱ गौतम दरवाजे से थोड़ा अंदर आकर दरवाजा लगा देता है..

शबाना - क्या कर रहा है.. आदिल अंदर है

गौतम - तो?

शबाना - देख लेगा.. जा यहां से

गौतम - वो नहीं आएगा.. बस एक चुम्मा लेना है..

शबाना - कुत्ते मेरी चाल बिगाड़ दी औऱ अब चूमा लेने आया है.. जा यहां से मैं फ़ोन करके बुलाऊंगी.

गौतम - बिना चुम्मे नहीं जाऊंगा..

शबाना - चुम्मे के बहाने तू कुछ भी करने लग जाएगा..

गौतम - सिर्फ चुम्मा लूंगा..


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शबाना पीछे आदिल के कमरे की तरफ देखती है औऱ गौतम का हाथ पकड़ कर उसे रसोई के पीछे खाली जगह पर ले जाती है..

शबाना - ले जल्दी कर..

गौतम शबाना के चुचे पकड़के अपनी औऱ खींचता है औऱ उसे अपने गले से लगा लेता है फिर चूमने लगता है.. करीब 2-3 मिनट के चुम्बन के बाद शबाना चुम्बन तोड़ देती औऱ कहती है..

शबाना - अब जा ना बेटा.. कोई देख लेगा तो आफत हो जायेगी..

गौतम अपना लोडा बाहर निकाल लेता है औऱ शबाना के कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे बैठने का इशारा करता है औऱ कहता है..

गौतम - इसे शांत कर दो अम्मी फिर चला जाऊंगा.

शबाना गुस्से से - कितना बेसब्री है तू.. आदिल अंदर है.. तू जा यहां से.. कहा ना बाद में सब कर दूंगी.. मेरा भी मन है मगर.. तू समझता नहीं है..

गौतम शबाना का बोबा पकड़ लेटा है औऱ मसलकर कहता है - इसे तो चूसना पड़ेगा अम्मी... वरना मैं यहां से नहीं जाने वाला..

शबाना - बेटा मान जा ना..

गौतम शबाना के बाल पकड़कर उसे नीचे घुटनो पर बैठा देता है औऱ अपना लंड शबाना के मुंह में डाल कर उसे लंड चूसाने लगता है..

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गौतम - आदिल की चिंता मत कर, तू बस अच्छे से चूस अम्मी.. आदिल नहीं आने वाला..

शबाना बार बार इधर उधर देखकर जोर जोर से गौतम का लंड चूसने लगती है औऱ थोड़ी देर बाद गौतम शबाना के मुंह में झड़ जाता है..


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शबाना गौतम का माल पीकर - अब जा यहां से औऱ फ़ोन करू तभी ही आना..

गौतम शबाना को अपने फ़ोन में कुछ फोटोज जिनमे आदिल ने कुछ देर पहले शबाना की फोटो ओर मुठी मारी थी दिखाकर कहता है - देख तेरे आदिल ने आज तेरी तस्वीर के साथ क्या किया है.

शबाना हैरानी से - तू करवाया होगा उससे ये सब..

गौतम - मैं क्यों करवाने लगा? वो खुद तुझे चोदने की फिराक में है..

शबाना - सच सच बता तेरे आदिल के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है..

गौतम - खिचड़ी क्या पैकेगी अम्मी.. बताया तो मैंने आदिल भी तेरी लेना चाहता है..

शबाना - तूने बताया तो नहीं ना उसे हमारे बारे में?

गौतम - मैंने तुम्हारे सामने ही सब बता दिया.. अब पता नहीं उसने विश्वास किया या नहीं..

शबाना - ठीक है अब जा यहां से.. औऱ सुन..

गौतम - हाँ..

शबाना गौतम को चूमकर - अपना ख्याल रखना..

गौतम जैसे ही घर से बाहर निकलता है उसके फ़ोन पर आदिल का फ़ोन आ जाता है..

आदिल - भाई 15-20 मिनट रसोई के पीछे अम्मी के साथ क्या क्या किया बता तो दे..

गौतम - यार चुम्माचाटी की है बस..

आदिल - चुम्मा हो गया? बहनचोद इतनी जल्दी अम्मी मान गई? साली रांड ही है..

गौतम - बूब्स देख गांडू तेरी अम्मी के जाके बहुत सारी लव बाईट देके आया हूँ..

आदिल - बूब्स पर? वाह भाई मज़े ले रहा है मेरी अम्मी के..

गौतम - चल फ़ोन रख बाद में बात करता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

********

गौतम जब रात को घर आया तो उसने देखा की सुमन औऱ जगमोहन के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा था जिसका कारण वो नहीं जानता था. गौतम के आने पर सुमन अपनेआप को काबू में करती हुई चुप हो गई औऱ जगमोहन भी बिना कुछ बोले हाथ में एक बेग लिए घर से बाहर की तरफ आ गया. गौतम ने अपने पापा जगमोहन से बात करने की कोशिश की मगर जगमोहन किसी की भी सुनने के मूंड में नहीं था वो तुरंत घर से बाहर निकल गया औऱ सुमन अपने कमरे में बेड पर बूत बनी बैठी जगमोहन को जाते हुए देखने लगी वही गौतम के पास दो रास्ते थे एक तो ये कि वो जगमोहन को रोककर उससे पूछता कि वो कहा जा रहा है औऱ उसकी माँ सुमन के साथ झगड़ा क्यों कर रहा था तो दूसरा ये कि वो बेड पर बैठी आंसू बहा रही है औऱ सुमन को अपने गले से लगा कर चुप करवाता औऱ उससे इस झगडे कि वजह जानता..

गौतम ने दूर रास्ते को चुना औऱ जोगमोहन को जाने दिया वही सुमन के पास आकर उसके आंसू पोंछते हुए उसे अपने गले से लगा लिया औऱ उसके आँसुओ का कारण पूछने लगा जिसपर सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया. गौतम बार बार सुमन से पूछे जा रहा था औऱ सुमन चुपचाप गौतम को देखकर उसके चेहरे को चूमती औऱ कुछ नहीं बोलती..

गौतम - हुआ क्या है माँ? आखिर कुछ तो कहो.. ऐसे क्यों चुप बैठी हो.

सुमन - कुछ नहीं ग़ुगु.. तू जा अपने कमरे में, मैं तेरे लिए कुछ खाने को बना देती हूँ..

गौतम - खाना वाना छोडो यार माँ, मैं यहां फ़िक्र से आधा हुआ जा रहा हूँ पहले मुझे पूरी बात बताओ तभी मैं यहां से जाऊंगा वरना यही जमकर बैठा रहूँगा..

सुमन - ग़ुगु तू अभी छोटा है इन सब बातों में मत उलझ, जाने दे.

गौतम - अगर नहीं बताओगी तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा औऱ ना ही आपका कहा मानूंगा. आपको मेरी कसम सच सच पूरी बात बताओ मुझे..

गौतम के अपनी कसम देने पर सुमन कुछ नरम सी पड़ गई औऱ गौतम को अपने गले से लगा कर जोर जोर से रोने लगी. उसके सब्र का बाँध टूट चूका था औऱ वो अपने आंसू बहा देना चाहती थी. गौतम ने बड़े ही प्यार से अपनी माँ के आंसू को पोंछा औऱ उसे ढांधस बंधाते हुए सुमन से फिर से पूछने लगा तो सुमन ने सब बताने का फैसला कर लिया औऱ बोली..

सुमन - ग़ुगु.. तेरे पापा अब हमारे साथ नहीं रहेंगे..

गौतम - पर क्यों?

सुमन गौतम को देखते हुए - ग़ुगु.. तेरे पापा ने दूसरी शादी भी की है.. औऱ अब वो वही उसी चुड़ैल के साथ रहेंगे कह रहे थे बस महीने एक बार आएंगे वो भी खर्चा देने.. ये कहते हुए सुमन फिर से रोने लगी..

गौतम - माँ.. पापा नहीं है तो क्या हुआ मैं हूँ ना आपका ख्याल रखने के लिए, चलो चुप हो जाओ औऱ अब ये रोना धोना बंद करो.. वैसे भी वो कोनसा यहां रहते ही थे. मैं तो पहले से जानता था कि वो बाहर किसी औऱ के चक्कर में है आपको नहीं बताया क्युकी मुझे डर था आपको बुरा लगेगा..

सुमन - तू जानता था? पर कैसे?

गौतम - वो छोडो.. आप मिली हो उस चुड़ैल से?

सुमन - नहीं.. कभी नहीं देखा उसे.. पता नहीं क्या जादू किया है उस चुड़ैल ने तेरे पापा पर..

गौतम - कोई जादू नहीं किया माँ, औऱ वैसे भी पापा के वहा रहने से या यहां रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता.

सुमन - ऐसा क्यों बोल रहा है..

गौतम - क्युकी मैं जानता हूँ उनकी बन्दूक को जंग लग चुकी है औऱ अब वो अपनी बन्दुक से गोली नहीं चला सकते..

सुमन गौतम कि बात सुनकर हैरानी औऱ हास्य से मुस्कुरा पडती है औऱ कहती है - शर्म नहीं आती तुझे पापा के बारे में ऐसी बात करते हुए?

गौतम सुमन के होंठों के बिलकुल करीब गाल पर चुम्मा करते हुए दांतो से गाल काट लेटा है औऱ सुमन गौतम कि इस हरकत पर हलकी सी आह निकालकर उसके होंठों को अपनी उंगलियों से पकड़ लेती है औऱ कहती है..

सुमन - देख रही हूँ तू भी दिन ब दिन बहुत बिगड़ता जा रहा है.. कितना जोर से काटा है.. कहा था पुरे दिन आज?

गौतम - कहीं नहीं यार माँ, वो एग्जाम आने वाले है तो उसकी तैयारी के लिए दोस्त के साथ पढ़ाई कर रहा था लाइब्रेरी में बैठकर..

सुमन - चल खाना बना देती हूँ..

गौतम - रहने दो.. आज कहीं बाहर खाने का मन है.. आप अपना मूंड ठीक कर लो फिर चलते है..

सुमन मुस्कुराते हुए - ठीक है.. जैसा मेरा ग़ुगु कहे..

गौतम सुमन की जाँघ पर हाथ रखकर सहलाते हुए - माँ मैं चेंज करके आता हूँ आप कपडे बदल लो..

गौतम अपने रूम में आ जाता है और कपड़े बदलने लगता है तभी उसके फोन पर माधुरी का फोन आता है और माधुरी गौतम से बात करते हुए गौतम को अपनी दशा का बयान करते हुए कहती है कि उसे आज गौतम की सख्त जरूरत है. गौतम माधुरी को मना कर देता है और माधुरी गौतम से मिलने की ज़िद करने लगती है गौतम के बार-बार समझाने पर भी माधुरी उससे मिलने पर अड़ी रहती है और गौतम उसे समझा नहीं पता, आखिर में थक हारकर गौतम माधुरी को एक एड्रेस भेजता है जिसमें किसी होटल का पता होता है माधुरी उसे होटल में मिलने को कहती है गौतम और माधुरी के बीच यह बातचीत होकर फोन कट हो जाता है और गौतम कपड़े बदलकर बाहर आ जाता है कुछ देर में सुमन भी अपने कमरे से बाहर हो जाती है और गौतम के साथ घर से निकल पड़ती है.

गौतम सुमन के साथ किसी होटल के रेस्टोरेंट में जाता है जहां उसने माधुरी को बुलाया था और एक टेबल पर सुमन के साथ बैठ जाता है जहां दोनों आमने-सामने बैठकर खाने का ऑर्डर दे देते हैं आज सुमन ने आगे से नॉनवेज आर्डर किया था और खुद भी बड़े चाव से खा रही थी गौतम को देखकर लग रहा था कि वह आश्चर्य में है और सुमन के व्यवहार पर उसे हैरानी हो रही है मगर वह कुछ नहीं पूछता और सुमन के साथ खाना खाने लगता है. गौतम ने कुछ बाईट ही खाइ थी फिर उसे माधुरी याद आ गई और वह बहाना बनाते हुए सुमन से कहने लगा कि उसे प्रेशर आया है और उसे फ्रेश होने की जरूरत है, यह कहकर गौतम टेबल से उठ गया और रेस्टोरेंट से निकलकर होटल के एक कमरे में पहुंचा जहां माधुरी थी.. माधुरी ने जैसे दरवाजा खोला गौतम माधुरी के लबों से चिपक गया और दरवाजा बंद करते हुए माधुरी को अपने आगोश में लेकर बिस्तर पर ले गया और वहां दोनों का संभोग शुरू हो गया गौतम और माधुरी एक दूसरे को पाने की नीयत से चूम रहे थे और दोनों एक दूसरे को कम सुख देने की भरपूर प्रयास कर रहे थे माधुरी तो जैसे काम के शिखर पर थी उसे तो बस गौतम की कमी खल रही थी जो अब पूरी हो चुकी थी और वो गौतम को अपने से अलग नहीं करने देना चाहती थी.

सुमन ने जब गौतम को बाथरूम की जगह सीडीओ की तरफ जाते देखा तो वह अचरज में पड़ गई और वह सोच लगी कि गौतम फ्रेश होने की बोलकर सीडीओ की तरफ क्यों जा रहा है जबकि बाथरूम तो वही नीचे की तरफ बना हुआ है सुमन को कुछ ठीक नहीं लगा और उसे शक हुआ तो वह गौतम के पीछे-पीछे जाने लगी और पता करने की नीयत से सीडीओ पर आ गई. औऱ सोचने लगी कि गौतम कहां जा रहा है.. सीढ़िया चढने के बाद गौतम उसकी आंखों से ओझल हो गया और सुमन गौतम को यहां वहां देखने लगे मगर गौतम कहीं नहीं मिला.

सुमन ने नीचे वापस जाने का निर्णय लिया तभी उसे ऊपर की तरफ एक आदमी अपना काम करते हुए दिखा जो की होटल का स्टाफ मालूम पड़ रहा था सुमन ने उससे पूछा कि उसने एक लड़के को यहां से आते हुए देखा है क्या? बदले में उस आदमी ने सुमन को जवाब दिया कि एक लड़का अभी-अभी 402 रूम नंबर में गुस्सा है सुमन ये सुनकर थोड़ी सी परेशान हो गई और सोचने लगी कि गौतम 402 रूम नंबर में क्या करने गया होगा. वह रूम के सामने आ गई और रूम के अंदर झांकने की कोशिश करने लगी लेकिन रुम के अंदर देखने का कोई जरिया नहीं था सुमन अंदर झांकने की कोशिश कर ही रही थी कि उस आदमी ने जिसे अभी-अभी सुमन सुमन एड्रेस पूछा था उसने सुमन को अंदर झाँकते हुए देख लिया और उसके पास आकर बोला - ऐसे अंदर कुछ नहीं दिखेगा और एक पीन देते हुए सुमन से कहा कि इसे चाबी की सुराख़ में लगाकर अंदर का नजारा देखा जा सकता है..

सुमन ने पीन लेकर चाबी की सुराग में लगा दिया और घुटने पर बैठ गई अंदर देखने लगी जैसे सुमन ने अंदर का नजारा ददेखा तो उसके पैरों की जमीन हिल गई अंदर गौतम और माथुर के बीच संभोग चल रहा था जिसमें गौतम माधुरी को बिस्तर पर घोड़ी बनाएं चोद रहा था


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सुमन यह नजारा देखकर सोचने लगी कि गौतम उससे बहाना बनाकर यह सब क्यों कर रहा है और जो औरत उसके आगे घोड़ी बनी हुई थी उसकी शक्ल देखते ही सुमन समझ गई कि उसकी उम्र 35 से ऊपर है मगर गौतम को इतनी बड़ी-बड़ी औरतें क्यों पसंद है सुमन ने पहले गौतम को पिंकी के साथ देखा था और अब वह गौतम को माधुरी के साथ देख रही थी जिस तरह से गौतम अपने लंड से माधुरी की प्यास बुझा रहा था उसे देखकर सुमन के दिल में भी हल्का-हल्का दर्द होने लगा और उसकी चुत से हल्की-हल्की पानी के बुँदे बाहर आने लगी उसके दिल में भी अब काम के प्यास आजाद होने लगी थी और सुमन अब यह सोचने की जगह की उसका बेटा क्या कर रहा है और किसके साथ कर रहा है वह खुद का कामोतेजना से ओतप्रोत होकर भरने लगी थी.

गौतम माधुरी के बाल पड़कर उसे बिस्तर पर आडा पटक के चोद रहा था


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ये नज़ारा देखकर सुमन बाहर घुटनों पर बैठी हुई अपने मन को काबू में करती हुई सब देख रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि गौतम अपने से इतनी बड़ी औरत और इतनी खेली खाई लगने वाली औरत को इतनी आसानी से बिस्तर पर चोद-चोद कर रुला रहा था. गौतम ने माधुरी के बाल पड़कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और उसे अपना लंड चूसाने लगा. यह देखकर सुमन की चुत से पानी बहने लगा और वह दरवाजे के बाहर खड़ी हुई गौतम के लंड को निहारने लगी और उसे आंखों में बसने लगी उसने पिंकी के साथ गौतम की चुदाई के दौरान भी गौतम का लंड देखा था मगर आज उसे और भी ज्यादा साफ नजारे के साथ गौतम के लंड के दर्शन हो रहे थे.. गौतम का लंड बहुत ही सुंदर बलिस्ट और परिपूर्ण लग रहा था जिसे देखकर सुमन की चुत में खुजली चलने लग गई थी मगर वह कुछ नहीं कर सकती थी. सुमन चाहती तो दरवाजा खुलवा कर अंदर जा सकती थी और गौतम और माधुरी को पड़कर हंगामा खड़ा कर सकती थी मगर उसने ऐसा कुछ नहीं किया और वह चुपचाप घुटनों पर बैठकर अंदर रूम में झांकती हुई दोनों की चुदाई देखने लगी.

गौतम ने माधुरी को जिस तरह अपने बस में करके चोदा था उससे माधुरी गौतम की गुलाम हो चुकी थी और आज भी गौतम के कहे अनुसार हर पोज में गौतम को काम संतुष्टि देकर अपने भी मन की इच्छा पूरी करवा रही थी

थोड़ी देर माधुरी को चोदने के बाद गौतम ने माधुरी को घुटने पर बैठा दिया और उसके मुंह पर अपना लंड हिलाते हुए सारा माल उसके मुंह पर निकाल दिया..


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यह देखकर सुमन काम की इच्छा से भर गई और वहां से उठकर वापस नीचे आ गई रेस्टोरेंट में बने लेडीज टॉयलेट में जाकर सुमन ने अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाने का निर्णय किया और कुछ ही देर में उंगली करके बाहर आ गई फिर से वह अपनी टेबल पर बैठ गई और गौतम का इंतजार करते हुए सोचने लगी कि गौतम किस तरह से इतनी अच्छी चुदाई कर लेता है और यह औरत कौन थी जो गौतम से चुद रही थी? देखने से तो वह भी गौतम की मां की बराबर ही लगती थी लेकिन गौतम किस तरह रंडी बनाकर उस औरत को चोद रहा था. आखिर थी कौन? औऱ कैसे गौतम के संपर्क में आइ? और गौतम से अपनी इच्छा या कहो काम इच्छा पूरी करवा रही थी.

गौतम और माधुरी दोनों ही काम के सागर में डुबकी लगाकर बाहर आ चुके थे और अब दोनों ही अपने-अपने कपड़े पहन कर खड़े हो चुके थे और साथ में नीचे आ गए..

गौतम टेबल पर बैठकर सुमन से माधुरी का परिचय करवाते हुए - माँ ये मेरी टीचर है..

सुमन झूठी मुस्कान के साथ - हेलो..

माधुरी भी उसी टेबल पर बैठके - हेलो.. कैसी हो आप..

सुमन - अच्छी..

माधुरी - गौतम बहुत तारीफ़ करता है आपकी.. मेरी माँ ऐसी है मेरी माँ वैसी है.. आज आपसे मिलने का मौका भी मिल गया..

सुमन - ग़ुगु ने कभी आपके बारे में नहीं बताया..

गौतम खाने में तनलीन था..

माधुरी मुस्कुराते हुए - कैसे बताएगा आपने कभी पूछा ही नहीं होगा.

सुमन - आपके गले पर ये निशान? लगता है किसी ने जोर से काटा है आपको..

माधुरी गौतम को देखते हुए - हाँ बहुत जोर से काटा है.. पर इसमें भी मज़ा है आप तो जानती होगी.. आपसे क्या छुपाना..

सुमन - आप यहां अकेली आई है?

माधुरी - हाँ कुछ काम था, पूरा हो गया तो अब चलती हूँ.. आप दोनों अपना खाना एन्जॉय कीजिये..

सुमन - ज़ी..

माधुरी गौतम और सुमन से विदा लेकर बाहर आ जाती है और माधुरी रेस्टोरेंट से निकल जाती है जबकि सुमन माधुरी को जाते हुए तब तक देखने लगती है जब तक कि वह उसकी आंखों से दूर नहीं हो जाती.. सुमन की आंखों में क्रोध और जलन साफ-साफ दिखाई दे रही थी गौतम से माधुरी का मिलन सुमन को जरा भी नहीं भाया था लेकिन सुमन गौतम और माधुरी को पड़कर या उनसे बात करके कि वह दोनों यह सब क्यों कर रहे हैं? नहीं पूछना चाहती थी..

सुमन जानती थी कि गौतम को उसकी बातों का बुरा लगेगा और अगर वह भी उससे रूठ गया तो सुमन कैसे गौतम के बिना जी पाएगी. मगर न जाने क्यों सुमन को अब पहले से ज्यादा गौतम पर लाड और प्यार आने लगा था वह चाहती थी कि गौतम खुश रहे और उसे दुनिया की हर खुशी मिले.. उसके मन में यह भाव अब और ज्यादा उमड़ रहे थे. यह भाव ममता से कहीं ज्यादा आगे के थे सुमन गौतम की ख़ुशी के लिए अब और भी ज्यादा जतन करने का इरादा करती थी.

गौतम - माँ खाना केसा है?

सुमन - बहुत अच्छा..

गौतम - लो ना.. ये मटन खाओ.. बहुत स्वाद बना है..

सुमन खाते हुए - हम्म.. अच्छा है..

गौतम और सुमन दोनों खाना खाने के बाद टेबल से खड़े हो जाते हैं और गौतम बिल पे करके सुमन के साथ रेस्टोरेंट से बाहर आ जाता है जहां गौतम पार्किंग में लगी अपनी बाइक निकाल कर सुनसान पड़ी सड़क पर बाहर आ जाता है और सुमन उसके पीछे बैठने लगती हैं. गौतम थोड़ी देर बाइक चला कर रास्ते में एक सुनसान पड़ी सड़क जहां किसी भी इंसान का कोई नामो निशान नहीं था उसके किनारे अपनी बाइक रोक लेता है और गौतम के बाइक रोकने पर सुमन से पूछता है कि क्या हुआ तब गौतम कहता है कि उसे बाथरूम आया है गौतम बाइक से उतरकर सड़क के किनारे बाथरूम करने लगता है और सुमन बाइक से उतरकर गौतम को बाथरूम करते हुए देखने लगती है गौतम का लंड उसकी आंखों के सामने था मगर सुमन के सामने गौतम के पीठ होने के कारण उसे देख नहीं पा रही थी.. सुमन के मन में उसे देखने की इच्छा थी मगर वह क्या कर सकती थी वह खुलकर गौतम से उसका लंड दिखाने के लिए का भी नहीं सकती थी और गौतम यह जान भी नहीं पा रहा था कि उसकी मां सुमन उसके लंड को देखने के लिए बेताब है और उसे मन ही मन में चाहने लगी है कुछ देर बाद गौतम बाथरूम करके वापस बाइक के पास आ गया जहां उसकी मां समान खड़ी थी सुमन गौतम को देखे जा रही थी और उसमें ही कोई हुई थी..

गौतम - माँ सिगरेट लाई हो?

सुमन अपने पर्स से सिगरेट का पैकेट औऱ लाइटर गौतम को देते हुए - लो..

गौतम एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगा लेता औऱ सुमन गौतम के हाथ से लाइटर लेकर अपने हाथ से मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों पर लगी सिगरेट सुलगा देती है गौतम अपनी माँ के इस व्यवहार से चकित था मगर उसने कुछ नहीं कहा..

गौतम दो कश लेकर सिगरेट सुमन को दे देता है और सुमन भी दो तीन कश लेकर वापस से सिगरेट गौतम को दे देती है दोनों के बीच इस दौरान कोई बात नहीं होती मगर आंखों ही आंखों में बहुत सी बातें एक दूसरे को समझ आ जाती है जो बातें मुंह से कहने में दोनों को ही शर्म आ रही थी..

सिगरेट के खत्म होने पर गौतम वापस अपनी बाइक स्टार्ट करके उसे पर बैठ गया और सुमन भी उसके पीछे बाइक पर बैठ गई और दोनों वापस घर आ गए..

सुमन और गौतम अपने-अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी कर रहे थे और दोनों ने हीं अपने-अपने कपड़े बदल दिए थे रात के 11:00 बज रहे थे गौतम को जब अपने कमरे में नींद नहीं आई तो वो सुमन के कमरे में आ गया और उसने देखा कि सुमन भी आंखें खोलकर बिस्तर पर करवटें बदलती हुई इधर-उधर देख रही है अब तक दोनों में कोई बात नहीं हुई थी मगर सुमन ने गौतम को कमरे के दरवाजे पर खड़ा देखा तो वह हैरानी से बोली..

सुमन - क्या हुआ ग़ुगु?

गौतम - माँ मैं आपके साथ सो जाऊ?

सुमन मुस्कुराते हुए - इसमें पूछने की क्या बात है बेटा आजा.. सुमन ने अपनी दोनों बाहे फैला कर ऐसा कहा था औऱ गौतम आगे बढ़कर सुमन के गले से लग गया औऱ बिस्तर पर सुमन औऱ गौतम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भरे लेट गए..

गौतम सुमन के चुचे पर हाथ रखकर - माँ..

सुमन जानती थी गौतम उससे क्या पूछने वाला है इसलिए सुमन खुद ही गोतम से बोली - दूदू पीना है..

गौतम की आँखों में चमक आ गई औऱ वो बोला - हम्म..

सुमन ने अपना ब्लाउज औऱ ब्रा उतार कर बिस्तर के कोने पर रख दी औऱ गौतम को चुचे चुसवाने की नियत से इशारा कर दिया गौतम ने भी अपनी टीशर्ट उतारकार साइड में रख दी औऱ दोनों माँ बेटे कमर से ऊपर पूरी तरह नंगे होकर बिस्तर पर अपनी मर्यादा भूल रहे थे..

गौतम सुमन के चुचे पकड़कर मसलते हुए उनका दूध पी रहा था औऱ बार बार निप्पल्स को मरोड़ कर सुमन की काम पिपासा बढ़ा रहा था. आज गौतम जिस तरह से सुमन के बूब्स पर लव बाईट दी थी उससे सुमन को साफ पता चल गया था की अगर गौतम को उसकी चुत मिल जाए तो वो उसे भी चोद देगा.. मगर सुमन गौतम की मनमानिया सहते हुए अपने बूब्स को चुसवाने औऱ उनपर होने वाली लव बाईट का मज़ा ले रही थी..

करीब आधे घंटे गौतम ने सुमन के चुचो का स्वाद चखा औऱ उनपर अपने प्यार की छाप छोड़ी फिर सुमन ने गौतम से कहा..

सुमन - ग़ुगु.. अब तक मन नहीं भरा तेरा?

गौतम - क्यों.. आपको नींद आ रही है माँ?

सुमन - नहीं बस ऐसे ही पूछा बेटा.. तुम जितना चाहो मम्मा का दूदू पी सकते हो..

गौतम - माँ एक गेम खेलोगी मेरे साथ? ट्रुथ एंड डेर वाला..

सुमन - ठीक पर कोई फालतू सवाल या काम नहीं बताना मुझे समझा?

गौतम सुमन के ऊपर आता हुआ - पक्का माँ.. अच्छा पहले eye कोंटेक्ट करते है जिसने पहले पलके झुका ली वो हार जाएगा..

सुमन - ठीक है.. चलो..

बिस्तर पर सुमन पीठ के बाद लेटी हुई थी और सुमन के ऊपर गौतम लेटा हुआ था गौतम के सीने में सुमन के निपल्स कड़क होकर इस तरह चुब रहे थे जैसे कोई तीर चुभ रहा हो जिसमें गौतम का बहुत आनंद आ रहा था सुमन भी इस बात से पूरी तरह वाकिफ थी और जानती थी कि गौतम को उसके ऊपर इस तरह लेटने में मजा आ रहा है.. सुमन औऱ गौतम दोनों कमर से ऊपर नंगे थे.. सुमन ने अपने दोनों हाथ गौतम के गले में डाल दिया और उसकी आंखों में देखने लगी.. सुमन ज्यादा देर तक अपनी आंखें खोल पाने में सफल नहीं रही और उसने अपनी पलके झुका कर झपका दी.. जिससे वो हार गई..

गौतम मुस्कुराते हुए - बताओ माँ ट्रुथ या डेर?

सुमन - ट्रुथ..

गौतम - शादी पहले कितने बॉयफ्रेंड थे आपके?

सुमन - ये क्या सवाल है.

गौतम - इतना आसान सवाल तो है.. बताओ ना..

सुमन - 2 थे.. एक स्कूल में एक बाहर..

गौतम - सेक्स किया था आपने उनके साथ?

सुमन - ग़ुगु एक ही सवाल करना था वो हो गया..

गौतम - माँ बताओ ना.. वही सवाल है अभी..

सुमन शरमाते हुए - हम्म किया था.. अब चलो वापस आँख मिलाओ.. वापस खेलते है..

सुमन और गौतम वापस से आई कॉन्टेक्ट खेलने लगे जिसमें वापस से सुमन की हार हो गई..

गौतम - बोलो.. ट्रुथ या डेर?

सुमन - तुम पता नहीं क्या पूछोगे.. इस बार डेर..

गौतम - अच्छा तो आपका डेर ये है की आप मुझे 2 मिनट लीप kiss करोगी..

सुमन हँसते हुए - सीधा बोल ना तुझे मेरे बोबो के बाद होंठ चाहिए चूसने के लिए.. बहुत बिगड़ गया है तू.. जवानी चढने लगी है तुझे..


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सुमन बातें कर रही थी कि गौतम ने सुमन के होठों को अपने होठों में ले लिया और उसे चूमने लगा सुमन ने उसका कोई विरोध नहीं किया और प्यार से हंसते हुए मुस्कुराकर गौतम को अपने होंठ चूसाने लगी.. गौतम और सुमन के बीच चुंबन बहुत गहरा हो चुका था दोनों ही एक दूसरे को भर भर के अपने लबो के जाम पिला रहे थे और एक दूसरे के होंठों से मदिरा का प्याला पी रहे थे, 2 मिनट लंबा होने वाला चुंबन कब 10 मिनट से ऊपर हो गया दोनों को पता ही नहीं चला और दोनों आप एक दूसरे के मुंह का स्वाद लेने में और देने में लगे थे दोनों की जीभ वापस में ऐसे लड़ रही थी जैसे कुश्ती के अखाड़े में पहलवान लड़ते हैं. सुमन काम के सागर में इतनी डूब गई थी कि उसने गौतम के लबो को चूमते हुए और चूसते हुए उसपर एक जोर की लव बाईट कर ली जिससे गौतम की आवाज निकल गई और दोनों का चुंबन टूट गया..

सुमन - तू ठीक है ना ग़ुगु? गलती से काट लिया बेटा.. माफ़ कर दे मम्मा को.. देखा मुझे..

गौतम - कुछ नहीं हुआ माँ.. सब ठीक है..

सुमन - सॉरी बेटू.. इतना जोर से काट लिया तेरे होंठों को..

गौतम सुमन के निप्पल्स मसलते हुए - कोई बात नहीं माँ.. वैसे किसिंग बहुत अच्छा करती हो आप.. कहा से सीखा बताओ ना?

सुमन आह भरते हुए - कहीं नहीं बेटा.. तू भी बहुत अच्छा चूमता है.. दो मिनट से कब दस मिनट हो गए पता ही नहीं चला.

गौतम - आओ माँ वापस खेलते है..

सुमन - नहीं अब नहीं.. ना जाने तू क्या क्या पूछेगा औऱ क्या क्या करवा लेगा मुझसे..

गौतम सुमन की गांड पर हाथ रख देता है औऱ गांड मसलते हुए कहता है - प्लीज ना माँ..

सुमन भी काम की अग्नि में जल रही थी उसने गौतम का हाथ अपनी गांड से नहीं हटाया औऱ गोतम से बोली - ग़ुगु तू ना बहुत शैतान हो गया है.. आजकल बिलकुल भी मेरा कहा नहीं मानता.. चल ठीक ही मिला ले आँखे.. इस बार मैं तुझे हरा के रहूंगी..

गौतम और सुमन फिर से ऑइ कांटेक्ट करते हैं और इस बार वापस गौतम सुमन को हरा देता है

गौतम - बड़ी आई थी आप मुझे हराने वाली.. चलो बताओ क्या लोगी..

सुमन मुस्कुराते हुए - ट्रुथ..

गौतम - अच्छा तो बताओ पापा औऱ आपके बीच कब से सेक्स नहीं हुआ..

सुमन प्यार से गौतम के होंठ पकड़कर - कैसे कैसे सवाल पूछ रहा है, लगता है मार खाने का इरादा है मेरे ग़ुगु आज..

गौतम उदास मुंह बनाकर - नहीं बताना तो ठीक है जाने दो, सो जाते है..

सुमन ने गौतम का चेहरा अपने हाथ में ले लिया औऱ उसके होंठों पर एक के बाद एक 8 चुम्मे कर डाले औऱ फिर प्यार से बोली - आठ साल हो गए.. बस.. अब चल अच्छे बच्चे की तरह सो जा.. औऱ कोई ऐसी वैसी शरारत मत करना वरना बहुत मारूंगी तुझे...

गौतम - ठीक है जैसा आप कहो.. एक बात बोलू..

सुमन - हम्म..

गौतम बूब्स पकड़कर निप्पल्स से खेलते हुए - आपके बूब्स पर टैटू बहुत अच्छा लगेगा..

सुमन - तू कहेगा तो बनवा लुंगी.. पर बनता कहा है टेटू?

गौतम- उसकी फ़िक्र आप मत करो मैं आपको ले चलूँगा मैं जानता हूँ जो ये बनाता है..

सुमन - अच्छा ठीक है पर कोई सस्ता वाला देखना..

गौतम - उसकी चिंता आप मत करो.. वैसे आपके इंस्टा अकॉउंट का क्या हुआ?

सुमन - वो मैंने डिलीट कर दिया..

गौतम - पर क्यों? इतने सारे फॉलोअर थे आपके..

सुमन - बस ऐसे ही ग़ुगु.. लोग बहुत गंदे massage करते थे..

गौतम - कब डिलीट किया

सुमन - एक हफ्ता हो गया..

गौतम - कोई बात नहीं.. आपका मन हो तो वापस बना लेना.

सुमन - हम्म.. चलो अब मम्मा को गुड नाईट किस दो औऱ सो जाओ..

गौतम सुमन के होंठ चूमने लगता है औऱ सुमन गौतम के चेहरे को पकड़ के चूमती हुई अपनी जीभ वापस गौतम के मुंह में डाल देती है औऱ उसे चूमने लगती है.. दोनों एकदूसरे को चूमने के बाद एक दूसरे से लिपटकर सो जाते है..


नींद आते ही गौतम को सपने में एक गाँव दीखता है जहाँ दो औरत तेज़ी से कहीं जा रही थी.. गौतम को ऐसा लग रहा था जैसे उसे ये गाँव औऱ जगह देखी हुई है औऱ वो उन औरतों को जानता है.. गौतम सपने में आगे जो देखता उससे वो नींद में बड़बड़ाने लगता है..
 
अपडेट 14



बिस्तर पर चादर के नीचे सुमन और गौतम कमर के ऊपर नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए एकदूसरे को बाहों में भरकर सोने लगे थे. सुमन प्यार से गौतम का चेहरा अपने सीने से लगाकर उसके सर के ऊपर हाथ फेर कर उसके बाल सहलाती हुई उसे सुला रही थी जिससे गौतम को कुछ ही देर में नींद आ गई और वह सपनों के सागर में खो गया.. वह सपना देखने लगा औऱ सपने में उसने देखा की एक औरत जो करीब 60 साल की है जल्दी में दूसरी औरत से बात करती हुई कहीं जा रही थी..

अरे कहा था ना ताई वही रुक जाओ.. अब देखो कैसी हालात हो गई है लता की..

तू ज्यादा बात मत कर शान्ति.. जल्दी से गर्म पानी करवा के ले आ.. लगता है कुछ ही देर में बच्चा होने वाला है..

शान्ति - ठीक है ताई.. अभी करवा के लाती हूँ..

शांति ताई को अंदर लता के पास छोड़कर खुद बाहर आ जाती है और बाहर परेशानी में इधर-उधर घूम रहे लता के पति धूपसिंह से कहती है कि उसे गर्म पानी चाहिए धूपसिंह शांति को चूल्हे की तरफ इशारा करते हुए कहता है गर्म पानी किया हुआ पड़ा है.. लता चूल्हे से गर्म पानी का भगोना उठा कर कमरे के अंदर आ जाती है और लल्ली ताई को पानी का भगोना दे देती है..

कुछ देर बाद लता एक जुड़वा भाई बहन को जन्म देती है जिसे हाथ में लेकर ताई शांति को देखती और शांति भी ताई को देखने लगती है..

लता बच्चों को जन्म देकर बेहोश हो चुकी थी और उसे हो रहे दर्द से थोड़ा आराम मिल गया था..

शान्ति - ताई.. मैं धुप भाईसाब को बता के आती हूँ..

लल्ली ताई - अरे रुक कम्भख्त..

शांति - क्या हुआ ताई इतनी ख़ुशी की खबर है धुप भाईसाब कुछ ना कुछ इनाम जरूर दे देंगे खुश होकर..

लल्ली ताई - अरे इनाम से कब तक काम चलेगा?

शान्ति - तो ताई?

लल्ली ताई - एक काम कर.. इस बच्ची को तू पीछे के दरवाजे से बाहर ले जा औऱ घर में रख, 11 कोस पर जो नोगी गाँव है वहा के साहूकार के यहां बच्चा नहीं है उसने कहा भी था बच्चा लेने के लिए.. वो बड़ी औऱ मोटी रकम देगा. जिससे हम आराम से बैठके खा पी सकते है..

शान्ति - सही कह रही हो ताई.. वैसे भी कोनसा धुप भाईसाब औऱ लता को पता लगने वाला है इस बात का.. लाओ दो मुझे बच्ची मैं अभी पीछे के रास्ते से उसे ले जाती हूँ..

लल्ली ताई - संभालके.. बहुत ध्यान से कोई देख ना ले.. बड़ी जिम्मेदारी का काम है.. मैं बच्चे को धुप सिंह के पास बाहर ले जाती हूँ.. थोड़ी देर में लता को भी होश में आ जायेगी..

शांति - हां ताई.. चलो..

लल्ली ताई हाथ में बच्चा लिए कमरे से बाहर आ जाती है और दूर पेड़ के नीचे दांतों में उंगलियां दबाए इधर से उधर घूम रहे धूप सिंह को बुलाते हुए कहती है..

लल्ली ताई - अरे ओ धुपया.. आ जाओ.. लल्ला हुआ है लल्ला.. देख केसा चाँद खिला है तेरे आँगन में..

धुपसिंह लल्ली ताई के पास आ कर मुस्कुराते हुए बच्चे को अपनी गोद में ले लेता है औऱ अपने हाथ से सोने की अंगूठी निकालकर लल्ली को दे देता है..

लल्ली ताई - अरे इस अंगूठी से क्या होगा धुपया.. पहली बार में लल्ला हुआ है कुछ औऱ भी दिओ..

धुपसिंह बच्चे को देखता हुआ - क्या चाहिए ताई..

लल्ली ताई - अब तुझे क्या कहु धुपया.. तू जानता है मेरी हालात ना खाने को है ना पहनने को.. इस अंगूठी से कुछ दिन काम चल जाएगा मगर फिर वही हालात होगी.. तू तो जागीरदार के दिए खेत भी जोतता है.. 3-4 महीने का अनाज दे दे तो बरसात के दिन आराम से कटे..

धुपसिंह - 3-4 महीने क्यों ताई तू साल भर का अनाज लेजा..

लल्ली ताई - तेरा भाला हो धुपया.. आज तेरे माँ बापू जिन्दा होते तो बहुत खुश होते.. अब जा अपनी लुगाई के पास.. थोड़ी देर में वो होश में आ जायेगी.. अब तुझे ही ख्याल रखना है माँ बेटे दोनों का..

इतना कहकर ताई वहां से चली जाती है और धूपसिंह कमरे के अंदर जाकर लता के करीब बैठ जाता है और बच्चे को खिलाता हुआ लता के होश में आने का इंतजार करता है कुछ ही पलों में लता भी होश में आ जाती है और दर्द से राहत पाकर मुस्कुराती हुई धूपसिंह और उसके गोद में बच्चे को देखती हैं.

धुपसिंह - बेटा हुआ है लता.. शकल तेरे ऊपर गई है..

लेता - मैंने कहा था मैं माइके से किसीको बुला लेती हूँ आपको कितना कस्ट हो रहा है मेरे कारण..

धुपसिंह - तू आराम कर.. ये बातें फिर कभी करना..

दूसरी ओर जैसे ही शांति बच्चों को लेकर घर के पिछले दरवाजे से निकली वह इधर-उधर से छुपती छुपाती हुई जंगल के मुहाने पर पहुंच गई. शान्ति को सामने से जागीरदार के सैनिक करते हुए दिखाई दिए तो वह थोड़ा सा जंगल के अंदर आ गई और वहीं से किनारे किनारे अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चलने लगी.. मगर शांति को पता ही नहीं चला कि वह जंगल के अंदर किनारे किनारे नहीं बल्कि थोड़ा सा और अंदर आ चुकी है जहां जंगल के जानवर उसके आसपास मंडरा रहे थे और परिंदे रात के इस पहर जंगल को अपनी आवाजों से और भयानक कर रहे.

शांति ने रात के अंधेरे में भी अपने से थोड़ा सा दूर एक बाघ को देख लिया जिसकी आंखें चमक रही थी मगर उस बाघ का ध्यान कहीं और था. शांति की हालत खराब हो गई उसके बदन में कंपन होने लगा और उसे डर था की कहीं बच्ची अब रो ना दे.. क्योंकि अगर उसने रोना शुरू कर दिया तो बाघ निश्चित ही उसके यहां होने का अनुमान लगा लगा और अपने नुकीले पंजों और दातों से उसकी हत्या करके उसे खा जाएगा..

शांति धीरे-धीरे पीछे हटने लगी और पीछे हटते हुए उसका पर एक पत्थर से टकरा गया जिससे वह जमीन पर गिर गई और बच्ची भी नीचे गिर गई और रोने लगी.. बच्ची की आवाज करने पर शांति डर से तिलमिला गई और अपनी जान बचाने के लिए बच्ची को वहीं छोड़कर पीछे की ओर भागने लगी.

शांति तब तक भागती रही जब तक उसके पैरों ने उसका साथ नहीं छोड़ दिया.. शांति भगते भगते जंगल से बाहर आ चुकी थी और सड़क से एक किनारे आकर एक जगह बैठ गई औऱ लम्बी लम्बी सांस लेने लगी.. शांति की साँसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी और उसका मन घबराहट के मारे उथल-पुथल हो रहा था. शांति अपनी जान बचाकर भाग आई थी मगर उसे यह ध्यान नहीं था कि वह उस बच्ची को वहीं छोड़कर आ चुकी है और बाघ उसकी आवाज सुनकर उसके निश्चित ही करीब आ जाएगा और उसे मार डालेगा.

शांति ये सोच सोच कर रोने लगी थी कि उसने एक बच्ची को मौत के मुंह में डाल दिया है और वह खुद डरपोक की भांति अपनी जान बचाकर भाग आई है.

लल्ली ताई जब धूपसिंह के घर से निकली और अपने घर आ रही थी तभी उस रास्ते में शांति डगर के किनारे बैठी हुई रोती हुई दिखाई पड़ी.. ताई ने आगे बढ़कर शांति से उसके रोने की वजह पूछी और उसे चुप करते हुए क्या हुआ बताने को कहा तो ताई के पूछने पर शांति ने साफ-साफ शब्दों में अपने साथ जो कुछ हुआ उस कहानी को बयां कर दिया जिससे ताई भी शांति के साथ में वही बैठ गई और जो कुछ हुआ उसपर अफसोस करने लगी. दोनों ने काफी देर तक वहीं बैठकर एक दूसरे को संभाला और फिर दोनों ने एक मत होकर वापस जंगल में जाकर उसे बच्ची को तलाशने की सोची.. दोनों डरते-डरते धीरे-धीरे जंगल में कदम बढ़ाती हुई जा रही थी..

शांति के बच्ची को छोड़कर भाग जाने के बाद बाघ के कानों में जब बच्ची के रोने की आवाज पड़ी तब बाघ उस बच्ची के करीब आने लगा और जब बाघ ने उस बच्ची को जमीन पर पड़ा रोता हुआ देखा तो उस बाग ने बच्ची जिस कपड़े में थी उस कपड़े को अपने मुंह से पकड़ लिया और कपडे के साथ बच्ची को उठाकर थोड़ा सा दूर जंगल की जमीन पर बेसुध होकर सो रहे एक आदमी के पास ले आ गया..

आदमी मटमेली जमीन पर इस तरह लेटा हुआ सो रहा था जैसे कोई राजा मखमली बिस्तर पर सोता है. बच्ची के रोने की आवाज से उस आदमी की नींद नहीं खुली मगर बाघ के पंजों की छुअन से उस आदमी की नींद टूटी गई.. आदमी ने जब बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो वह उठ कर बैठ गया और अपने पास रखें एक पानी के भरे सुराही जैसे चमड़े के अंदर से पानी निकाल कर अपने मुंह पर मरता हुआ अपने सामने खड़े बाग और बगल में जमीन पर पड़ी रोती हुई बच्ची को देखने लगा..

आदमी ने बाघ को देखते हुए उससे पूछा - यह किसे अपने साथ ले आया बालम.. और फिर उस बाघ के सर पर हाथ रखकर अपनी आंखें बंद करते हुए जो कुछ घटा था सारा दृश्य देख लिया औऱ माजरा समझ लिया..

आदमी के बदन पर फटे पुराने मट मेले कपड़े थे सर औऱ दाढ़ी पर बाल बड़े-बड़े और देखने से लगता था कि आदमी कई दिनों से नहीं नहाया है हालत से दिन हीन लगने वाला ये आदमी इतने भयानक जंगल में अकेला एक कुटिया बनाकर रहता था और उसने जिस बाघ को पाला हुआ था उसका नाम बालम रखा था.. जिस तरह से उस आदमी ने बाघ के सर पर हाथ रखकर बाग के दिमाग की याददास्त देख ली थी उससे यह आदमी कोई साधारण व्यक्ति नहीं मालूम पड़ता था.. कद काठी और चेहरे से साधारण औऱ सामान्य से भी कम दिखने वाला यह आदमी जिस तरह से इतनी बेपरवाही और निडरता से इतने बयानक जंगल में विहार कर रहा था उससे लगता था कि यह कोई चमत्कारी आदमी है..

आदमी ने बच्ची को उठा कर लिया और अपनी गोद में लेकर अपनी कुटिया की तरफ आ गया जहां पीछे-पीछे बाघ भी उसके साथ आ चूका था.. उस कुटिया और उसके आसपास की जगह को देखने से ऐसा लगता था जैसे वह आदमी कई बरसो से कोई कठोर साधना कर रहा है और उसी में तनलीन रहता है.. आदमी को कुछ भी कहा जा सकता था लेकिन कोई भी संज्ञा उसके लिए परिपूर्ण नहीं थी वह तांत्रिक अघोरि या औघड़ कुछ भी हो सकता था.

लल्ली ताई औऱ शान्ति उस जगह तक आ गए जहां बच्ची गिरी थी लल्ली ताई और शांति को बच्ची कहीं नहीं मिली.. काफी देर तक ढूंढने के बाद दोनों ने यह समझा कि वह बाघ उस बच्ची को उठाकर ले गया है और उसको मार के खा चुका है वापस जंगल से बाहर आ गई और इस बारे में किसी से भी बात न करने और कुछ भी नहीं बोलने का निश्चय किया और एक दूसरे से वादा करते हुए इस बात को यहीं पर भूल जाने का निर्णय किया.

वही आदमी ने बच्ची को अपने साथ रख लिया और उसे अपने बच्चे की तरह पढ़ने लगा. बच्ची जैसे-जैसे बड़ी हुई वो उस आदमी को बाबा कहकर पुकारने लगी और अपना असली बाप समझती थी. बच्ची ने उस आदमी से उसकी विद्या सीख ली.. दोनों जंगल में किसी कुटिया में रहने लगे थे और हंसी खुशी से अपना जीवन जी रहे थे आदमी ने बच्ची को एक नाम भी दिया था.. आदमी बच्ची को उसके शीतल स्वाभाव के कारण मृदुला कह बुलाता था.. मृदुला ने कुटिया को महल की तरह सजाया था औऱ अब उस आदमी जिसे बाप वो मानती थी उसको रोज़ नहाने धोने औऱ साफ रहने को मजबूर करती थी.. आदमी भी अपने जीवन में मृदुला के आने से बहुत खुश था उसकी साधना पहले से अच्छी होने लगी थी औऱ उसने मृदुला को अपनी बेटी मानकर जीना शुरू कर दिया था उसने मृदुला को बहुत कुछ ऐसा सीखा दिया था जिससे मृदुला अकेली ही पूरी फौज का काम तमाम कर सकती थी औऱ बड़े बड़े भूत प्रेत को अपनी मुट्ठी में कर सकती थी..

दिन गुजरते गए, मौसम बदलते गए, साल दर साल बीतते गए औऱ मृदुला का जोबन खिलने लगा.. उसके अंग इस तरह खिलकर फूटने लगे जैसे गुलाब की कली खिलकर फुटती है.. मृदुला के उतार चढाव कामदेवी का वरदान थे जो अब मृदुला के मन को काम की औऱ बढ़ाने लगे थे.. वो अब अपनी उम्र के अठरवे साल पर आ चुकी थी..

आदमी को इसकी बिल्कुल भी भनक नहीं थी वह इसी तरह अपनी साधना में तनलीन रहता और सुबह शाम मृदुल के हाथ का पकाया भोजन खाकर आराम करता.. मृदुला ने अक्सर उस आदमी से जंगल के बाहर की दुनिया देखने के लिए आग्रह किया.. मगर आदमी अपनी साधना अधूरी छोड़कर जाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था और हर बार मृदुला को कुछ ना कुछ कह कर या बहाना बनाकर उसकी बात को टाल देता.

एक दिन जब मृदुल पानी का घड़ा लिए नदी की तरफ जा रही थी तभी उसने अपने जीवन में पहली बार अपने पिता के अतिरिक्त किसी आदमी को देखा जो नदी के मुहाने पर बैठा हुआ पानी पी रहा था. रंगरूप और कदकाटी में हसीन तरीन दिखने वाला यह लड़का मृदुला के मन को पहली नज़र में ही भा गया था..

लड़का देखने से करीब 22 साल का लगता था चेहरे पर दाढ़ी मूछ नहीं थी चेहरा साफ औऱ खिला हुआ था और कंधे तक लंबे बाल थे एक नई सी शाल उसने ओढ़ रखी थी.. अपनी हथेलियों में नदी का पानी भरके पिता हुआ वह लड़का मृदुला के मन को लुभा रहा था. मृदुला 18 साल की हो चुकी थी और अब उसे कामइच्छा औऱ प्रेम का भाव परेशान करने लगा था.

मृदुला ने जब उसे लड़के को पानी पीकर नदी से दूर जाने के खड़ा होता देखा तब वह उस लड़के के पास आ गई और उसके पीछे कुछ दूर खड़ी होकर कर बोली..

मृदुला - कौन हो तुम?

लड़का हैरानी से - तुम कौन हो औऱ इतने घने के बीच यहां क्या कर रही हो? तुम्हे पता नहीं यहां कितने खूंखार जानवर रहते है.. (लड़का मृदुला के जोबन को देखकर उसपर मोहित हो चूका था मगर उसके अंदर हैरत भी थी)

मृदुला - यहां पहली बार आये हो?

लड़का - हाँ पर तुम अकेली यहां क्या कर रही हो?

मृदुला - मैं यही रहती हूँ अपने बाबा के साथ.

लड़का हैरानी से - इस जंगल में?

मृदुला - हाँ.. तुम कहा रहते हो?

लड़का - मैंरा तो कोई ठिकाना नहीं.. यहां वहा घूमता हूँ.. गलती से जंगल में आ गया औऱ रास्ता भूल गया. प्यास लगी थी तो पानी पिने लगा..

मृदुला करीब आते हुए - नाम क्या है तुम्हारा?

लड़का - रागी..

मृदुला हसते हुए - नाम रागी है औऱ बैरागी सा भेस बनाया है..

लड़का मुस्कुराते हुए - तो फिर बैरागी ही कहकर पुकार लो.. तुम्हारा नाम क्या है?

मृदुला - मेरा नाम मृदुला है बैरागी..

बैरागी - ठीक है मृदुला चलता हूँ.. अगर वापस कभी मिलना हुआ जरूर मिलूंगा.

मृदुला - पर तुमने तो कहा कि तुम्हारा कोई ठिकाना नहीं है.. फिर कहा जा रहे हो..

बैरागी - बंजारा हूँ एक जगह ज्यादा देर तक रुकू तो ज़ी उचटने लगता है.. जाना तो पड़ेगा..

मृदुला के चेहरे पर ख़ुशी का जो भाव था वो अब गंभीर हो गया था.. उसने बैरागी के औऱ करीब आते हुए कहा - अगर मैं ना जाने दू तो?

बैरागी मुस्कुराते हुए - मुझे यहां रोक कर क्या करोगी.. मैं तुम्हारे किस काम आ सकता हूँ?

मृदुला - बाबा ने बताया था इस जंगल के बाहर लोग शादी ब्याह करके साथ रहते है.. तुम मुझसे ब्याह कर लो.. फिर हम भी साथ रहेंगे..

बैरागी हसते हुए - तुम्हे शर्म नहीं आती लड़की होकर ऐसी बात करते हुए?

मृदुला - शर्म क्यों आएगी.. मैंने कुछ गलत तो नहीं किया..

बैरागी - ठीक है.. मेरे तो आगे पीछे कोई नहीं है.. तुम्हारे तो बाबा है उनसे तो पूछ लो..

मृदुला - चलो साथ में चलकर पूछते है..

बैरागी - अगर मैंने झूठ बोलकर तुम्हारे बाबा को मना लिया तो?

मृदुला - तुम मेरे बाबा के सामने झूठ बोल ही नहीं सकते..

बैरागी - ऐसा क्यों?

मृदुला - मेरे बाबा आँख पढ़कर अतीत जान लेते है.

बैरागी - ऐसी बात है तो चलो.

मृदुला जब बैरागी को अपने साथ लेकर अपनी कुटिया के बाहर आई तब उसे उसके पिता कहीं जाने की तैयारी करते हुए दिखे.

मृदुला ने अपने पिता से पूछा कि वो कहां जाने की तैयारी में है उसके पिता ने सामने खड़े बैरागी और मृदुल को साथ में देखकर सारा माजरा समझ लिया और उनसे कहा की उनकी साधना का ये चरण पूरी हो चुकी है और उन्हें अपनी साधना की आखिरी चरण पूरी करने के लिए यहां से बहुत दूर जाना पड़ेगा.

इसीके साथ उन्होंने यह भी कहा कि वह बैरागी और मृदुला दोनों के मन से सहमत है और वो आज शाम जाने से पहले पुरानी रीती से दोनों ब्याह करवा देगा..

उस बूढ़ा हो चुके आदमी ने मृदुला और बैरागी का ब्याह एक पुरानी रीति से करवा दिया और खुद कुटिया से जरूरी सामान लेकर एक रास्ते चल दिया.. बूढ़े आदमी ने मृदुला से वापस मिलने का वादा किया और उसे भरोसा दिया कि वह जहां भी रहेगा मृदुला से मिलने जरूर आएगा.. मृदुला ने भी रोते हुए अपने पिता को विदाई दी और अपना नया जीवन शुरू करने के लिए बैरागी के साथ उस कुटिया में रहने लगी..

एक दोपहर के उजाले में जब कुटिया के अंदर बैरागी और मृदुला प्रेम प्रसंग कर रहे थे तब उन्हें कुछ लोगों के आने की आहट सुन दी और दोनों प्रेम करना छोड़कर बाहर आ गए.. दोनों ने देखा की कुटिया के आसपास बहुत सारे डाकू इकट्ठा थे जिनमें से कई डाकू के बदन पर घाव के निशान थे औऱ उनके पास लूट का सामान भी था डाकू की संख्या करीब 20-25 होगी..

डाकूओ ने भी दोनों को देख लिया और मृदुला बैरागी औऱ डाकू आमने सामने खड़े हो गए. डाकुओं के मुखिया ने जैसे ही मृदुला को देखा वह उसे पर लट्टू हो गया और कामुकता से भरकर बैरागी से कहा कि है उस लड़की को उनके हवाले कर दे और वहां से चला जाए. बैरागी ने जवाब में पास में पड़े गंडासे को उठाकर उस डाकू के ऊपर फेंक दिया.. गंडासा डाकू की छाती में धंस गया औऱ डाकू एक पल में ही प्राण त्याग कर जमीन पर गिर गया. अपने मुखिया की मौत देखकर बाकी सारे डाकू गुस्से से दिलमिला गए और चिल्लाते हुए बैरागी को मारने के लिए जपटे मगर जैसे ही सारे डाकू एक साथ बैरागी को करने के लिए झपटे मृदुला ने जमीन की मिट्टी उठाकर उन डाकुओ पर फेंक दी.. जैसे मृदुला ने जमीन की मिट्टी उठाकर डाकूओ पर फ़ेंकी मृदुला की फ़ेंकी मिट्टी का एक-एक कण एक एक प्रेत में बदल गया औऱ उन प्रेतो ने एक पल में ही सारे डाकुओ के सर उनके कंधे से उतार दिए औऱ वापस मिट्टी बनकर जमीन पर गिर पड़े.. बैरागी ने जब इस तरह से मृदुला को क्रोध में देखा औऱ उसके द्वारा की गई इस भयावह घटना को देखा वो आश्चर्य डर औऱ जिज्ञासा के भाव से भरते हुए मृदुला को देखने लगा..

मृदुला ने जब बैरागी को तरह से खड़ा हुआ देखा तो उसने अपने गले से एक ताबीज निकाल कर बैरागी को पहना दिया और कहा ये ताबिज़ उसे चोट पहुंचाने वाले इंसान को कभी चैन से जीने नहीं देगा..

20 साल बीत जाने के बाद धुपसिंह औऱ लता को इस बात की भनक तक नहीं लगी थी कि लता ने उस रात जुड़वा भाई बहनों को जन्म दिया था जिसमें से बच्ची को लल्ली औऱ शांति ने चुरा लिया था जो अभी बैरागी के साथ जंगल में उस कुटिया में रहती थी.. धुपसिंह औऱ लता ने अपने बेटे का नाम समर रखा था औऱ समर अब अपने पिता कि तरह ही जागीरदार की हिफाज़त में लगी राजा की सेना की टुकड़ी में था..

बैरागी और मृदुला को उस कुटिया में रहते 2 साल हो चुके थे औऱ अब मृदुला 8 माह की गर्भवती थी उसका बच्चा होने वाला था बैरागी ने मृदुला से बार बार जंगल बाहर चलने औऱ किसी गाँव में रहने की गुहार की मगर मृदुला ने मना कर दिया औऱ बैरागी के साथ जंगल से बाहर जाने को इंकार कर दिया बैरागी ने बार बार मृदुला को समझया था कि उसे इस्त्री रोग औऱ बच्चे के जन्म का उपचार नहीं आता मगर मृदुला ने उसकी एक ना सुनी औऱ जंगल ना छोड़ने की अपनी ज़िद पर अड़ी रही..

आखिरकार वही हुआ जिसका बैरागी को डर था बच्चा पैदा करने के दौरान मृदुला औऱ उसके बच्चे दोनों की मौत हो गई और बैरागी फिर से अकेला हो गया. उसके मन में एक बार फिर से दुख दर्द तकलीफ का बसेरा हो गया.. बैरागी मृदुला औऱ बच्चे का अंतिम संस्कार करके जंगल छोड़ दिया और पागलों की तरह भटकने लगा. बैरागी किसी फकीर की तरह दिन बताने लगा और भूख लगने पर भिखारी की तरह मांग कर खाने लगा.. 2 महीना इसी तरह बिताने के बाद जब उसने गांव में इसी तरह एक और महिला को मारते देखा तो उसने इस रोग का इलाज करने के लिए दवा बनाने का निश्चय किया. उसे शरीर की समझ थी उसके मुताबिक जदिबूती से लोगों का इलाज़ करने लगा औऱ घूम घूम के जदिबूती औऱ इलाज़ की खोज करने लगा..

बैरागी ने मृदुला के साथ रहकर बहुत सी चीज सीखी थी जो उसके इस कार्य में उसकी बहुत मदद कर रही थी बैरागी ना गांव-गांव घूम कर बहुत से लोगों का इलाज किया और बहुत सी आज के समय छोटीमोटी कही जाने वाली बीमारी को ठीक किया. बदले में कुछ लोगों ने उसे भरपेट खाना खिलाया तो कुछ लोगों ने वहीं रहने के लिए जमीन देनी चाहिए लेकिन बैरागी ने एक जगह रहने से इनकार कर दिया और अपना मकसद पूरा करने के लिए एक बैलगाड़ी ले ली और उस पर बैठकर गांव गांव घूमते हुए स्त्री रोग का इलाज ढूंढने निकल पड़ा

बैरागी को अब किसी बात की फ़िक्र नहीं थी वह अपने आप में मस्त अपनी पत्नी मृदुला को याद करते हुए प्रेम से भरे गीत गाते हुए और अपनी पत्नी के साथ बिताये प्रेम से परिपूर्ण उन पलों को याद करते हुए मुसाफिरों की तरह घूमने लगा और बीमारियों का इलाज ढूंढने लगा किसी एक पुराने वैद्य के कहने पर उसने एक खास किस्म की जड़ीबूटी तलाश करने का निर्णय किया जिसके लिए वह बहुत दूर सफर पर निकल पड़ा लेकिन रास्ते में ही वीरेंद्र सिंह के पहरेदारो ने उसे पकड़ कर क़ैद कर लिया..

सुबह के 4:00 बजे गौतम इस सपने से बाहर निकल आया और अपने सपने की हकीकत को झूठ मानते हुए यह बस उसका एक वहम समझ कर इसे भूल जाने का निर्णय कर वापस सो गया..
 
अपडेट 15



गौतम - माँ.. माँ..

सुमन - क्या हुआ ग़ुगु?

गौतम - मेरा फ़ोन देखा आपने? मिल नहीं रहा..

सुमन - हाँ.. पर अगर मैंने बता दिया तो मुझे क्या मिलेगा?

गौतम - मैं क्या दे सकता हूँ आपको? मेरे पास तो कुछ भी नहीं है आपको देने के लिए..

सुमन - मुझे कुछ चाहिए भी नहीं.. बस तू मेरे साथ तुम नानी के चल.. मैं तुझे अकेला छोड़कर नहीं जा सकती..

गौतम - यार माँ.. मैं नहीं जाऊ वहा.. आप जानती हो ना मामी केसा बर्ताव करती है हमारे साथ?

सुमन - पर नानी तो तुझे बहुत प्यार करती है.. अभी फ़ोन आया तब भी कह रही थी ऋतू की शादी में ग़ुगु को लेके ही आना..

गौतम - मैं नहीं जाऊ.. आप मत बताओ फ़ोन कहा है..

सुमन - अपनी माँ की बात नहीं मानेगा? मेरे लिए भी नहीं जाएगा?

गौतम - आप ना ये इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दो मुझपे कोई असर नहीं होने वाला इसका.. समझें?

सुमन - ठीक है.. वैसे भी इस घर में मेरा है ही कोन जो मेरी बात सुने और मुझसे प्यार करें? सबको अपने मन की करनी है तो करो सब.. मुझे क्या?

गौतम सुमन की बात सुनकर उसके पास आता है और उसे अपने बाहों में भरके गाल पर चूमता हुआ कहता है - अब ये ड्रामा बंद करो मेरी ड्रामा क्वीन माँ.. मैं नहीं जाने वाला मतलब नहीं जाने वाला..

सुमन मुस्कुराते हुए - बिना ड्रामा के तू मानता कहा है?

गौतम - अच्छा फ़ोन पता है कहाँ है मेरा?

सुमन - बाथरूम में तो नहीं भूल गया?

गौतम - अरे यार माँ.. आप ना सच में जीनियस हो.. वही रखकर भूल गया शायद..

सुमन - पर तू बाथरूम में फ़ोन क्यू लेके जाता है?

गौतम हस्ते हुए - ये राज़ की बातें है बताई नहीं जाती.. नज़र लग जाती है..

सुमन - सब पता है मुझे तेरी राज़ की बातें.. क्यू इतनी देर बाथरूम में लगती है तुझे? थोड़ा कण्ट्रोल.. समझा

गौतम - शर्म नहीं आती बच्चे से ऐसी बात करते हुए..

सुमन - तुझसे और शर्म? बिलकुल भी नहीं.. अच्छा चाय बना दूँ?

गौतम - गर्मी देख रही हो आप? चाय पिलाओगी..

सुमन - ठीक है फिर जूस बना देती हूँ मेरे ग़ुगु के लिए..

गौतम फ़ोन लेने बाथरूम की तरफ चल देता है और जब वो फ़ोन देखता है तो उसमे रजनी के 6 मिस्ड कॉल आये हुए थे.. गौतम कॉल बैक करता है..

गौतम - हेलो.. दीदी..

रजनी - काहे की दीदी? तुम दीदी का फ़ोन उठाते नहीं हो..

गौतम - वो फ़ोन कहीं रखा हुआ था दी और साइलेंट पर था तो पता नहीं चला.. वैसे आपने उस क्रिमिनल को पकड़ लिया?

रजनी - हम्म.. पकड़ भी लिया और जेल में भी डाल दिया.. तुमने जो बताया था सब सही था.. सब बहुत खुश है उसके पकडे जाने से..

गौतम - और मेरा इनाम?

रजनी - तुम्हारा इनाम?

गौतम - हाँ.. क्या तय हुआ था भूल गई आप?

रजनी - सब याद है छोटे भाई.. व्हाट्सप्प चेक करो औऱ समय पर आ जाना..

गौतम - बाए दी..

रजनी - बाए छोटे भाई..

सुमन - लो जूस..

गौतम - आपका ग्लास कहाँ है?

सुमन - मैं बाद में बना के पी लुंगी.. तु पिले..

गौतम - बाद वाद कुछ नहीं.. इसीमे से आधा ख़त्म करो.. चलो..

सुमन - कितनी ज़िद करता है ग़ुगु तू?

गौतम - ज़िद है तो ज़िद है.. लो पीओ..

सुमन - बस बस.. अब तुम पिलो..

गौतम - माँ..

सुमन - बोलो..

गौतम - वो आज एक फ़्रेंड के घर फंक्शन है इसने बुलाया है..

सुमन - ठीक है तो जाओ.. मगर रात को जल्दी आ जाना..

गौतम - माँ थोड़ा दूर है उसका घर.. रात को देर हो सकती है..

सुमन - ये वही फ़्रेंड तो नहीं है जिसने तेरे होंठ लाल किये थे अपनी लिपस्टिक से? और जिसके कारण तू बाथरूम में इतना वक़्त लगता है?

गौतम - माँ.. क्या कुछ भी बोल रही हो? नार्मल फ़्रेंड है बस सब दोस्त आ रहे तो बस मुझे भी जाना है..

सुमन - ठीक है पर याद रखना.. वापस वैसा कुछ हो तो कंडोम जरूर पहन लेना.. और अपने दोस्त से कहाना कभी घर भी आये..

गौतम - आप भी ना, कुछ भी बोल रही हो.. चलो.. मैं चलता हूँ..

गौतम रजनी के दिए एड्रेस पर जाता है औऱ बहुत देर तक उसका वेट करके रजनी से मिलने पुलिस स्टेशन पहुंच जाता है..

मैडम आपसे कोई मिलने आया है..

रजनी - बैठने को कहो..

ज़ी मैडम..

रजनी किसी मुक़दमे की फ़ाइल में आँखे गड़ाये बैठी थी औऱ बड़ी बारीकी से फ़ाइल को पढ़ रही थी मानो बहुत बड़ा औऱ जरुरी केस हो.. रजनी को बैठे बैठे डेढ़ घंटा हो गया था औऱ उसने फ़ाइल से जुडी हुई सारी डिटेल औऱ कहानी जान ली थी.. वो इस काम को करने में इतनी डूब गई थी की उसके दिमाग से ये भी निकल गया था कि कोई उसका इंतजार कर रहा है.. रजनी का फ़ोन साइलेंट पर था.. फाइलों से जब रजनी का ध्यान हटा तो उसने बेल बजाकर किसी को बुलाया और उससे चाय के लिए.. कुछ देर बाद एक हवलदार चाय का कप लेकर रजनी के चेंबर में टेबल पर रख देता है और रजनी से कहता है..

मैडम काफी देर हो गई उस लड़के को आपका इंतजार करते हुए..

रजनी झट से बोली - कौन लड़का?

हवलदार - मैडम वो बताया था ना आपको कोई आपका वेट कर रहा है.. डेढ़ घंटा हो गया अभी तक आपके बुलाने का वेट कर रहा है..

रजनी चाय का कप लेते हुए - अंदर भेजो.. देखु कौन है..

गौतम चम्बर के गेट पर नॉक करता हुआ - अंदर आ सकता हूँ मैडम?

रजनी चाय का कप रखकर खड़ी होती हुई - छोटू.. आई ऍम सो सॉरी... प्लीज मुझे माफ़ कर दे.

रजनी कि बातों से ऐसा लग रहा जैसे उसे कोई बात याद आ गई हो जिसमे उसकी गलती थी औऱ वो उस गलती कि माफ़ी मांग रही थी..

गौतम - कोई बात नहीं मैडम.. आप लोगों की हिफाज़त का काम करती हो. छोटी मोटी बात आपको कहा याद रहेगी?

रजनी गौतम को गले लगाकर - मुझे ताने मार रहे हो? हम्म? औऱ इतने नाराज़ हो कि अपनी दीदी को वापस मैडम बोलने लगे.. प्लीज माफ़ कर दो..

गौतम एक छोटा सा पेपरबॉक्स देकर - कोई बात नहीं.. लो.. हैप्पी बर्थडे दीदी.. केक लाया था..

रजनी मुस्कुराते हुए बॉक्स लेकर टेबल पर रख देती है औऱ गौतम के होंठों पर अपने होंठ रखकर बड़े प्यार से एक चुम्मा अंकित कर देती है मानो अब तक गौतम के किये इंतज़ार का इनाम उसे दे रही हो.

गौतम रजनी के चुम्बन से स्तब्ध था उसे एकदम से अपने साथ हुई इस प्यार भरी औऱ मज़ेदार घटना का अंदाजा भी नहीं था.. गौतम ने भी प्यार से रजनी के चुम्बन को स्वीकार कर लिया औऱ अपने होंठों को लेकर रजनी के होंठों से लड़ाई करने लगा.. कुछ सेकंड के बाद ही रजनी ने चुम्मा तोड़ लिया औऱ मुस्कुराते हुए गौतम से बोली - किस्सी का वादा था मैंने पूरा किया..

गौतम - बस इतनी सी देर?

रजनी - इससे ज्यादा देर में तुम बहक जाओगे.. मैं अच्छे से जानती हूँ..

गौतम - आपकी मर्ज़ी..

रजनी - चलो आज पार्टी करते है..

रजनी गौतम को लेकर पुलिस स्टेशन बाहर आ जाती है और गौतम को पुलिस की कार में आगे बैठाकर खुद कार को कर ड्राइव करने लगती है दोनों कार में अकेले कहीं जाने के लिए निकल जाते है..

रजनी गौतम को लेकर लॉन्ग ड्राइव पर निकल चुकी थी और पुलिस की गाड़ी को उसने हाईवे पर चढ़ा दिया था हाईवे पर रजनी गाड़ी चलती हुई गौतम से इधर-उधर की बातें करने लगी और गौतम से मजाक मस्ती करने लगी मजाक मजाक में गौतम भी पूरी तरह खुलकर रजनी से अपने मन की बात करने लगा था..

रजनी - मेरे आशिक तू बहुत छोटा है.. मैं तेरे साथ प्यार नहीं कर सकती.. तू समझता क्यों नहीं..

गौतम - दीदी बहाने बनाना बंद करो.. मैं जानता हूँ आप भी मुझे पसंद करती हो..

रजनी - तू है ही इतना प्यारा, पसंद तो करूंगी ही.. तुझे मिलकर मुझे राहत भी मिलती है औऱ सुकून भी.. पर तेरे इस प्यारे से मासूम चेहरे के पीछे जो बुरा दिमाग है ना, जिसमे तू हमेशा मेरी लेने के बहाने ढूंढता है उससे डर लगता है..

गौतम - पुलिसवाली होकर मुझ जैसे कमजोर लड़के से डरती हो दीदी..

रजनी गाडी सडक के किनारे लगाकर - अरे अरे कमजोर औऱ तुम.. शकल दिखाओ जरा अपनी.. कितने भोला बनता है तू..

गौतम - बनने की क्या जरुरत है. मैं कोई आपको चालक लगता हूँ दीदी?

रजनी जेब से सिगरेट निकालकर सुलगाते हुए - लगता नहीं है पर तू है चालक.. कुत्ते की जैसे मेरे पीछे पड़ा हुआ है लेने के लिए..

गौतम - तो दे क्यों नहीं देती आप.. छोटा भाई बोलती हो ना मुझे? अपने छोटे भाई के लिए इतनी सी कुर्बानी नहीं दे सकती..

रजनी गौतम का हाथ पकड़कर अपने चुचो पर रख देती है औऱ उससे कहती है - मेरे चुचो के साथ खेलना है तो खेल सकता है पर मेरी चुत का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे समझा.

गौतम - ऊपर से क्या खेलु दीदी.. थोड़ा खोल के दिखाओ ना..

रजनी सिगरेट का कश लेकर - बहुत बड़ा वाला कमीना है तू.. औऱ सिगरेट गौतम को पकड़ने के लिए दे देती औऱ अपनी वर्दी के बटन खोलकर गौतम से कहती है - ले.. खेले जितना खेलना है तुझे..

गौतम सिगरेट का कश लेकर - ब्रा तो हटाओ दीदी.

रजनी ब्रा खोलकर पीछे रख देती है औऱ गौतम को सिगरेट पिता देखकर कहती है - सिगरेट मत पी मेरी तरह आदत लग जायेगी तुझे?

गौतम रजनी के निप्पल्स पकड़कर मसलते हुए - आदत तो आपके दूदू पिने की भी लग जायेगी दीदी..

गौतम इतना कहकर रजनी के बूब्स पर झुक जाता है औऱ रजनी के निप्पल्स किसी प्यासे की तरह चूसने लगता है.

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रजनी सिगरेट के कश लेती हुई गौतम के बालों में हाथ फेरकर अपने चुचे औऱ चुचक चूसाईं का सुख महसूस करने लगी.. उसे गौतम के इस तरह बूब्स चूसने से अतुलनीय आनंद की अनुभूति हो रही थी औऱ वो गौतम के बाल पकड़ कर सिगरेट पीते हुए बारी बारी से उसे अपने चुचे चुसवा रही थी..

रजनी - इतना तेज़ मत काट छोटू, दर्द होता है..

गौतम अपने मुंह से निप्पल्स निकालकर - दीदी यहां कोई देख लेगा आपको.. कहीं औऱ चले..

रजनी गाडी स्टार्ट करके आगे हाईवे से नीचे ले लेती है औऱ सुनसान पड़ी जगह पर लगा देती है औऱ फिर पुलिस की वर्दी उतारते हुए गौतम से कहती - ले मेरे छोटू से भाई पिले दीदी के दूदू..

गौतम बूब्स मसलते हुए - दीदी साइज क्या है आपका?

रजनी - 34 है क्यों?

गौतम - नीचे का पूछा था दीदी..

रजनी हसते हुए - साइज जानकार क्या करेगा? 38 है.. वैसे भी मैं देने वाली तो हूँ नहीं तुझे..

गौतम प्यार से - देनी तो पड़ेगी दीदी.. औऱ आप खुद दोगी.

रजनी - इतना कॉन्फिडेंस?

गौतम आँख मारके - हाँ.. मैं बाथरूम करके आता हूँ.. ये कहते हुए गोतम कार से नीचे उतर जाता है औऱ रजनी भी बिना वर्दी पहने कार से नीचे उतर आती है. कमर से ऊपर पूरी तरह नंगी हो चुकी रजनी एक औऱ सिगरेट सुलगा लेती है कश लेती हुई गौतम को मूतते देखती है..

गौतम - दीदी..

रजनी - क्या हुआ छोटू..

गौतम लंड की तरफ इशारा करके - हथियार देखोगी मेरा..

रजनी मुस्कुराते हुए सिगरेट का कश लेकर - नहीं देखनी तेरी छोटी सी पिस्तौल मुझे..

गौतम मूतता हुआ रजनी की तरफ मुड़ जाता है औऱ रजनी से कहता है - पिस्तौल नहीं दीदी AK47 है मेरे पास.. अब कहो? दोगी या नहीं.

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रजनी गौतम का लंड देखकर खड़ी की खड़ी रह जाती है औऱ हैरानी के साथ नज़र फाड़ कर गौतम के लंड को देखती रह जाती है.. जैसे ही कुछ देर रजनी गौतम के लंड को घूरती उसकी चुत में खुजली चलने लगती है औऱ रजनी के दिल में प्यार की सुगबुगाहत उठने लगती है..

गौतम मूतने के बाद बिना लंड को पेंट में वापस किये रजनी के पास आ जाता है औऱ लंड को हाथ में लेकर हिलाता हुआ पूछता है - बोलो ना दीदी.. लोगी अपने छोटू का लंड अपने अंदर?

गौतम की बात सुनकर रजनी का ध्यान उसके लंड से टूट जाता है औऱ गौतम की कलाई के धागे के साथ शर्म से रजनी का चेहरा भी लाल हो जाता है.

गौतम अपने कलाई पर बंधे धागे को लाल देखकर रजनी का मन समझ जाता है औऱ रजनी के हाथ से सिगरेट लेकर उसके बाल पकड़ कर जबरदस्ती नीचे बैठाते हुए रजनी के मुंह पर अपना लंड रगड़ने लगता है..

रजनी - छोटू बाल मत खींच ना..

गौतम - मुंह खोलो दीदी..

रजनी गोतम को देखकर - शकल से लगता है साँप भी नहीं होगा तेरे पास, पर तू कमीना चड्डी में अजगर लिए बैठा है.

गौतम सिगरेट का कश लेकर - अब इसे मुंह में भी गुसा लो दीदी..

रजनी मुस्कुराते हुए - पहले स्वाद तो लेलु..

रजनी गौतम के लंड को चूसने लगती है औऱ गौतम के लंड पर भूखी शेरनी की तरह टूट पडती है.. रजनी के मुंह की गर्माहट औऱ लार से गोतम स्वर्ग के सुख भोगने लगा था.

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गौतम कश लेकर - दीदी बिलकुल रांड लगती हो..

रजनी मुंह से लंड निकाल कर - आज तो तुझे कच्चा खा जाउंगी छोटू.. औऱ फिर से लोडा चूसने लगती है..

गौतम फ़ोन निकाल कर रजनी के लंड चूसने की वीडियो बनाने लगता है औऱ रजनी से कहता है - दीदी कहो तो फेमस कर दू आपको.. FHD में वीडियो बन रही है आपकी..

रजनी मुंह से लंड निकाल कर अपने बूब्स के बीच लंड लेकर बूब्स से लंड रगड़ने लगती है औऱ गौतम से कहती है - लग रही है ना तेरी दीदी पोर्नस्टार छोटू? अच्छे से वीडियो बना अपनी दीदी की..

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गौतम - क़यामत हो दीदी आप तो..

रजनी - कब से हिला रही हूँ कब निकलेगा तेरा?

गौतम - मेरा तो आपकी चुत में ही निकलेगा दी.. आओ.. गौतम रजनी की पेंट खोलकर गाडी के अंदर पटक देता है औऱ अपने भी कपडे उतार देता है. उसके बाद रजनी को कार के बोनट पर बैठाकर टांग खोलते हुए रजनी की चुत में उंगलियां करने लगता है..

रजनी - छोटू अब तू डाल दे मेरे अंदर भाई.. मुझसे रहा नहीं जा रहा..

गौतम - अभी तो आपकी चुत चुसनी बाकी है दीदी..

इतना कहकर गौतम रजनी की चुत चूसाईं के लिए अपना सर उसकी चुत पर लगाने के लिए आगे बढ़ता है औऱ रजनी खुद अपनी गांड उठाकर गौतम के मुंह के आगे अपनी चुत कर देती है.. गौतम के होंठ जैसे ही रजनी की गीली चुत पर लगते है वो काम के आसमान में उड़ने लगती है औऱ सिस्कारी भरने लगती है

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गौतम बड़ी ही ईमानदार औऱ चाव से रजनी की चुत के चटकारे ले रहा था औऱ रजनी तो गौतम के चूसने पर उसके मुंह में दो मिनट के अंदर ही झड़ गई.. गौतम बड़ी बेशर्मी से रजनी की चुत का बहता पानी पिने लगा औऱ रजनी गौतम के सर पर हाथ रखकर अपने साथ घट रही इस अनोखी औऱ काममयी घटना का मज़ा लेने लगी औऱ कुछ पलो में झड़ गई..

गौतम चुत चाट कर मुंह पोछता हुआ रजनी की चुत अपनी मुट्ठी में पकड़कर मसलता हुआ बोला - बोलो थानेदारनी ज़ी.. चोद दिया जाए या छोड़ दिया जाए आपको..

रजनी सिस्कारी लेती हुई - चोद दिया जाए छोटे भाई.. छोड़ दोगे तो उठाके जेल में बंद कर दूंगी..

गौतम - जैसा आपका आदेश थानेदारनी ज़ी..

गौतम रजनी को गाडी के बोनट से नीचे उतार लेता औऱ गाडी के बोनट पर झुका कर पीछे से रजनी की चुत पर अपना लंड सेट करके कहता है..

गौतम - घुसा दू दीदी?

रजनी - घुसा दे छोटू..

गौतम - दर्द होगा..

रजनी - होने दे दर्द..

गौतम - चुत फट जायेगी..

रजनी - फट जाने दे..

गौतम - हफ्ते तक ठीक से चल नहीं पाओगी..

रजनी - कोई बात नहीं..

गौतम - कंडोम लगाऊ?

रजनी - तू कंडोम लाया है?

गौतम - हाँ दीदी..

रजनी - लगा ले पर कुत्ते तू कैसे जानता था मैं मान जाउंगी?

गौतम - क्युकी आप भी मुझसे प्यार करती हो दीदी.. आपके चेहरे पर दीखता है आप मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो.

रजनी - इतना सब जानता है तो अब क्यों सता रहा है अपनी दीदी को? घुसा दे ना..

गौतम - कंडोम तो पहन लू दीदी..

रजनी - रहने दे छोटू बस अंदर मत छोड़ना..

गौतम - जैसा आप कहो.. लो सम्भालो अपने छोटू का पहला धक्का..

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गौतम के पहले धक्के से साथ ही रजनी की चुत से चररर की आवाज के साथ रजनी के मुंह से जोर की चिंख बाहर निकल पडती है औऱ पहले धक्के में ही गौतम रजनी के चुत का दरवाजा तोड़कर चुत के अंदर घुस जाता है औऱ अपने लंड से उसकी चुत के साथ जंग छेड़ देता है जिसमे हल्का सा खूनखराबा भी हो जाता है मगर ना रजनी को इसकी परवाह थी ना गौतम को. गौतम रजनी की चुत में ऐसे झटके मार मार के चोद रहा था जैसे अमीर घर की बिगड़ी हुई औलादे सडक से सस्ती रांड उठा कर चोद देते है..

गौतम रजनी को गाड़ी के बोनट पर झुकाकर उसके बाल पकड़ के पीछे से धक्के पर धक्का मार रहा था और उसके झटके खाते हुए रजनी ऐसे हिल रही थी जैसे गाँव में सुहागरात को चुदाई के दौरान खटिया हीलती है.

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गौतम चोदते हुए - उफ्फ्फ यार दीदी कितनी टाइट है आपकी.. ऐसा लग रहा है कोई कच्ची कली चोद रहा हूँ..

रजनी - थोड़ा धीरे भाई.. बहुत दर्द हो रहा है..

गौतम - दो इंच के छेद में दस इंच का लंड घुसेगा तो दर्द होगा ही ना दीदी.. चिंता मत करो इस चुदाई के बाद बड़े से बड़े लंड आसानी से झेल जाओगी.

रजनी - अंदर मत निकालना भाई..

गौतम रजनी को लगातार चोदते हुए उसके बाल खींचकर ऐसे धक्के मार रहा था जैसे वो घुड़सावारी कर रहा हो.

गौतम ने रजनी को अपनी तरफ घुमा लिया औऱ गाड के बोनट पर लेटा के उसकी चुत में वापस लंड डाल दिया औऱ चोदने लगा.. रजनी की कोठे की सस्ती रांड सी आह्ह अह्ह्ह्ह.. कर रही थी औऱ सिस्कारी भरते हुए गौतम की चुदाई का सुख अनुभव मर रही थी. आज रजनी के मन में पुरुषो के लिए मज़ूद नफरत का अंत हो चूका था औऱ उसके मन में छुपी सादगी औऱ नारी ममता का पुनर्उदय हो चूका था..

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गाडी के बोनट पर कुछ देर रजनी को रंडी बनाके चोदने के बाद गौतम ने रजनी को अपनी गोद में उठा लिया औऱ उछाल उछाल के चोदते हुए उसकी चुत का चुबारा बनाना शुरू कर दिया.. रजनी इतनी जोर जोर से चिल्लाते हुए चुद रही थी की उसकी आवाज बहुत दूर से सुनी जा सकती थी मगर वो दोनों ऐसी जगह चुदाई कर रहे थे जहा दूर दूर तक आदमी का नमोनिशान तक ना था.

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गौतम ने थोड़ी देर के बाद रजनी को नीचे उतार दिया औऱ बोनट का सहारा लेकर उसकी एक टांग उठाके रजनी की चुत वापस चोदने लगा..

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रजनी तो जैसे पिछले एक घंटे से अपनी चुदती हुई चुत से पानी पर पानी बहा रही थी औऱ कई बार झड़ चुकी थी एक बार बीच में उसने चुदाई के दौरान मूत भी दिया था..

गौतम ने टांग उठाके चोदने के बाद रजनी को गाडी में बैठा दिया औऱ उसकी चुत जो चुदाई के कारण अब खिलकर फ़ैल चुकी थी में वापस अपना लंड घुसा कर वापस चोदना चालु कर दिया रजनी तो जैसे तृप्त होकर चुदवा रही थी औऱ गौतम के झड़ने का इंतजार कर रही थी उसे मालूम ही नहीं हुआ कब गौतम के साथ चुदाई में पिछला एक घटा बीत चूका था..

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आखिर में रजनी को अपनी गोद में अपनी तरह मुंह करके बैठा लिया औऱ सीट पर बैठे बैठे रजनी को चोदने लगा.. औऱ अपना सारा माल रजनी की चुत में भर दिया.. रजनी निढाल हो कर गौतम पर गिर चुकी थी.. दोनों पसीने से तर बतर थे..

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गौतम - मज़ा आया दीदी?

रजनी लम्बी लम्बी सांस लेते हुए - मैं तो पागल हो गई.. तू बस नाम का छोटू है भाई, मैंने तो सोचा भी नहीं था चुदाई में इतना मज़ाक़ मिलता है..

गौतम - दीदी अब तो ये मज़ाक़ आप कभी भी ले सकती हो.. मैं आपको मना नहीं करूँगा..

रजनी - तूने तो मेरी फाड़ के रख दी गौतम.. लगता है ठीक से चल भी नहीं पाउंगी..

गौतम - मैंने तो पहले ही कहा.. आप ही मुझे बच्चा समझ रही थी..

रजनी गौतम को चूमते हुए - तू बच्चा नहीं जोनी सीन्स का बाप है छोटे भाई..

गौतम औऱ रजनी आपस में ये बातें कर रही रहे थे की किसी ने चोरी छिपे आकर उनके मुंह पर रुमाल रख दिया जिसमे बेहोश करने की दवा मिली हुई थी..

गौतम औऱ रजनी दोनों तुरंत बेहोश हो गया औऱ उनकी जब आँख खुली तो वो दोनों किसी सुनसान जगह पुराने कारखाने में एक कमरेनुमा जगह में थे औऱ एक बड़े से बिस्तर पर अगल बगल दोनों नंगे लेटे हुए थे..

दोनों के हाथ पैर ऊपर नीचे रस्सी से बांधे जा चुके थे औऱ एक लड़की गौतम के पास बैठकर उसका लोडा मुंह में लिए चूस रही थी..

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रजनी लड़की को देखकर - कामिनी कौन है तू? छोड़ दे मेरे भाई के लंड को वरना तुझे जान से मार दूंगी..

लड़की रजनी की बात पर ध्यान नहीं देती औऱ गौतम का लोडा चुस्ती रहती है...

रजनी गुस्से से - बहन की लोड़ी रांड.. छोड़ दे मेरे भाई के लंड को..

लड़की रजनी को अनदेखा करते हुए अपनी चड्डी नीचे सरका कर गौतम के लंड को अपनी चुत में लेटे हुए गौतम के लंड पर बैठ जाती है औऱ चरर की आवाज के साथ गौतम का लंड अपनी चुत में घुसा लेती है औऱ गीतम के लंड पर उछलने हुए जोर से आहे बरने लगती है जिसे देखकर रजनी गुस्से से तिलमिला जाती औऱ उस लड़की को गौतम से दूर करने की नियत से उसकी औऱ उठने की कोशिश करती है मगर रस्सी से बंधे होने के कारण कुछ नहीं कर पाती औऱ पीठ के बल ही लेटे हुए लड़की को गालिया देने लगती है जबकि गौतम लड़की के दिए blowjob औऱ अपने लंड पर उछलने से कामुक हो चूका था औऱ चुपचाप ये सब होता देख रहा था..

रजनी - साली छिनाल रंडी है कौन तू.. औऱ हमें यहां क्यों लेकर आई है? बहन की लोड़ी मेरे हाथ खोल मैं अभी तेरी जान ले लुंगी.. कुतिया साली छोड़ मेरे भाई को.. बता ना रंडी.. कौन है तू..

बिल्लू अंदर आते हुए - ये मेरी बहन है बबली भोसड़ीवाली..

रजनी - कमीने तू.. तू जेल से कब छूटा?

बिल्लू - जेल की संलाखे बिल्लू सांडा को नहीं रोक सकती पुलिसवाली रांडी.. मुझे पकड़ के खुदको बहुत बड़ी तोप समझ रही थी तू.. मैंने बोला था ना मैं तुझे नहीं छोडूंगा.. (पिस्तौल निकालकर) आज तुझे बताऊंगा कि मैं क्या चीज हूँ..

रजनी - भड़वे तेरी बहन तेरे सामने किसी औऱ के लंड पर उछलकर चुद रही है तुझे शर्म नहीं आ रही..

बिल्लू हस्ते हुए - चुदने शर्म कैसी रंडी.. मेरी बहन मेरी रखैल है.. मेरी बहन तो रात में मेरे औऱ मेरे इन दोनों साथियों के लंड पर भी उछलती है.. वैसे साली तू भी कम नहीं, अपने भाई के साथ गाडी में चुदवा रही थी.. अब हम भी तेरी इस चुद का मज़ा लेंगे..

ये कहते हुए बिल्लू ने कंडोम पहन लिया औऱ रजनी पर चढ़ गया औऱ अपना लंड उसकी चुत पर सेट करते हुए अंदर धकेलने लगा..

गौतम - बिल्लू छोड़ दे मेरी बहन को वरना तुझे बहुत बुरी मौत दूंगा..

बिल्लू ने अपनी पिस्तौल बेड पर रख दी औऱ गौतम को एक के बाद एक दो तीन जोरदार थप्पड़ मारके - चुप बहन के लोडे.. वरना एक गोली में यही ढेर कर दूंगा.. तेरी बहन तो आज मुझसे औऱ मेरे साथियो से चुदकर रहेगी..

रजनी - मादरचोद हाथ काट दूंगी अगर मेरे भाई को हाथ लगाया तो..

बिल्लू अपना लंड रजनी कि चुत में ड़ालते हुए - उफ्फ्फ जानेमन.. बोलती है तो कितनी मस्त लगती है तू.. पुलिस वाली को चोदने का मज़ा ही अलग है.. बिल्लू रजनी को चोदने लगा मगर रजनी गौतम के लंड से चुद चुकी थी तो उसे बिल्लू के लंड के अंदर आने वाले पर कोई दर्द तकलीफ महसूस नहीं हुई औऱ वो बिल्लू को गालिया देते हुए चुदवाती रही..

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बबली - बिल्लू भईया देखो ना ये साला चूजा मुझे kiss नहीं कर रहा..

बिल्लू रजनी को चोदते हुए रजनी को एक थप्पड़ मार देता है - साली अपने भाई को बोल चुपचाप मेरी बहन की हर बात माने वरना अच्छा नहीं होगा..

गौतम - साले मेरी बहन पर हाथ उठाया तो हाथ उखाड़ दूंगा तेरा..

बिल्लू रजनी को दूसरा थप्पड़ मारकर - ले साले क्या कर लेगा तू..

रजनी - एक बार मेरे हाथ खोल दे फिर बताती हूँ तुझे मैं क्या चीज हूँ..

बबली गौतम के होंठों को चूमते हुए उसके लंड पर आगे पीछे होने लगती है एक ही बिस्तर पर बिल्लू औऱ उसकी बहन गौतम औऱ रजनी के साथ चुदाई कर रहे थे..

बिल्लू थोड़ी देर में ही झड़कर रजनी के ऊपर से हट जाता है.. बिल्लू के बाद बारी बारी उसके साथी कंडोम लगा कर रजनी की चुदाई करते है औऱ आधा घंटा बीत जाता है जबकि गौतम रजनी की चुदाई होते हुए देखकर गाली देने औऱ चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर पाता.. गौतम का मन बबली को अच्छे से चोदने का भी था मगर वो सिर्फ लेटे हुए अपने लंड के ऊपर बैठी बबली को धीरे धीरे आगे पीछे होता देखकर चुप ही पड़ा था..

रजनी को बिल्लू औऱ उसके साथियो के सामान्य लंड से चुदकर कोई फर्क ही नहीं पड़ा वो वैसे ही लेती रही जैसे पहले थी.. बबली को आज परम सुख मिल रहा था एक तो इतना बड़ा लंड ऊपर से इनता स्टेमिना की आधे घंटे से ज्यादा का समय बीत जाने पर भी गौतम का नहीं झड़ना..

बबली - भईया ये लड़का तो कमाल है.. कब से उछल रही हूँ मगर इसका निकलता ही नहीं..

बिल्लू - जल्दी कर बबली अब इन दोनों को निपटा के यहां से जाना भी है..

रजनी - तू हमारी जान लेगा कमीने.. तुझे पुलिस नहीं छोड़ेगी..

बिल्लू हस्ते हुए - छोड़ेगी तब जब पकड़ेगी.. औऱ तुम दोनों की तो लाश भी किसीको नहीं मिलेगी..

गौतम बबली से चुम्बन तोड़कर धीरे से कान में - मुझे औऱ मेरी बहन को बचा ले बबली.. तुझे ऐसा मज़ा दूंगा तू खुश हो जायेगी..

बबली भी धीरे से - वादा करता है?

गौतम - कसम खाता हूँ..

बबली नज़र बचा कर गौतम के दोनों हाथ खोल देती है औऱ बेड पर पड़ी बिल्लू की पिस्तौल उठाकर बिल्लू औऱ उसके पास बैठकर शराब पीते दोनों साथियों को एक के बाद एक गोली मार देती औऱ मौत के घात उतार देती है..

गौतम बबली को अपने लंड पर से हटा कर रजनी की औऱ अपने पैरों की रस्सी खोल दोनों को पूरी तरह आजाद कर देता है.. रजनी गौतम से लिपट जाती है औऱ दोनों एक दूसरे से नंगे बदन चिपक जाते है..

बबली पिस्तौल फेंककर गौतम से - बहन का मिलन ख़तम हो गया हो तो अब मेरी चुत की खुजली मिटा दे..

रजनी गुस्से से बबली की तरफ बढ़ती हुई - साली कामिनी मैं बताती हूँ तुझे तो.. ये कहते हुए रजनी बबली के गाल ओर एक थप्पड़ जड़ देती है औऱ फिर बबली भी गुस्सा होकर रजनी को थप्पड़ जड़ देती है औऱ दोनों एक दूसरे से लड़ने लग जाते है..

रजनी औऱ बबली दोनों गौतम के लिए नंगी बिस्तर पर लड़ाई करते हुए एक दूसरे को नाखुनो से नोच रही थी जबकि गौतम बिस्तर से खड़ा होकर थोड़ी दूर टेबल रखी पानी की बोतल से पानी पिता हुआ दोनों को लड़ते हुए देख रहा था..

रजनी बबली दोनों थक्कर चूर हो चुकी थी औऱ जोर जोर से हांफ रही थी दोनों की हालात ख़राब थी.. दोनों जैसे लड़ाई के बीच में दो मिनट का बीच में गेप लिया हो ऐसा लग रहा था दोनों थोड़ी शांत होकर एक दूसरे को देख रही थी फिर गौतम की आवाज सुनकर उसे देखने लगी..

गौतम दूर खड़ा हुआ - लड़ना क्यों बंद कर दिया?

बबली औऱ रजनी ने एक नज़र गौतम को फिर एकदूसरे को देखा.. फिर जैसे इशारे से कुछ फैसला करके दोनों बिस्तर उतर कर गौतम के करीब आ गई औऱ गौतम को बिस्तर पर गिरा कर एक साथ उसके लंड पर टूट पड़ी..

गौतम - अह्ह्ह्ह.. आराम से यार...

रजनी औऱ बबली दोनों गौतम के लंड औऱ गोटे मुंह में लेकर चूस रही थी औऱ गौतम को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी..

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गौतम ने रजनी औऱ बबली दोनों के बाल पकड कर दोनों के मुंह आपस में भिड़ा दिए औऱ दोनों के होंठों में से अपने लंड को गुज़ारने लगा..

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गौतम थोड़ी देर बाद दोनों को घोड़ी बना लेता औऱ कभी रजनी तो कभी बबली की चुत मारता है...

रजनी औऱ बबली गौतम के साथ थ्रीसम कर रही थी औऱ उसका मज़ा ले रही थी.. गौतम ने बबली औऱ रजनी दोनों को ही रगड़ के चोदा औऱ दोनों के मुंह पर अपना वीर्य छोड़कर उनका फेसियल कर दिया..

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रजनी की तो चाल में लंगड़ा पन आ चूका था मगर बबली तो बहूत चुदी हुई थी उसे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई औऱ वो अपनी चुत को शांत करवा कर हलकी सी लचक औऱ दर्द के साथ उठ गयी..

गौतम - तूमने तो अपने भाई को गोली मार दी?

बबली - साले ने रखैल बनाके रखा था.. जब देखो किसी से भी चुदवा देता था.. मैं कब से उसे मारना चाहती थी..

रजनी - अच्छा किया बबली.. कपडे कहा है हमारे?

बबली - बाहर रस्सी पर..

रजनी - इन लाशों का क्या करें?

बबली - करना क्या है. केरोसिन डालके आग लगा देती हूँ कमीनो की लाश के..

रजनी - इस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा.. वैसे अब तक तू अपने भाई की रखैल बनकर रह रही थी अब कहा जायेगी?

बबली - पता नहीं.. जहा किस्मत ले जाए.. वही चली जाउंगी..

रजनी - ऐसा कर मेरे साथ चल.. मेरे घर में काम कर लेना..

बबली - मैं वहा क्या करुँगी?

रजनी बबली के बूब्स पकड़के मसलते हुए - देख ये मेरा मुंह बोला भाई है मेरे साथ नहीं रहता.. तू साथ रहेगी तो इसकी कमी मुझे कम खलेगी.. औऱ तुझे भी भी रहने को छत मिल जायेगी..

बबली रजनी की चुत पर हाथ लगा कर सहलाते हुए - ठीक है रजनी..

गौतम - क्या बात है दीदी.. आपको तो एक औऱ मिल गई..

रजनी हसते हुए - कपडे पहन अब चलते है यहां से..

रजनी बबली औऱ गौतम तीनो वहा से गाडी लेकर निकल गए और रजनी से गौतम को उसके घर छोड़कर बबली को अपने साथ अपने घर ले गई..

गौतम घर आ कर सुमन से बिना बात किये ही खाना खा कर उसजे साथ सो गया जो सुमन को अजीब लगा.. लेकिन सुमन ने गौतम से कुछ नहीं पूछा औऱ सोने दिया मगर उसके फ़ोन को अपने हाथ में लेकर उसका फ़ोन खोलते हुए चेक करने लगी.. गीतम ने व्हाट्सप्प से लेकर इंस्टा तक सब अप्प पर लॉक लगाया हुआ था मगर गैलरी में उसने लॉक नहीं लगाया था औऱ सुमन ने गैलरी में आज का बनाया हुआ उसकी औऱ रजनी की चुदाई का वीडियो देख लिया औऱ सुमन गौतम को गुस्से औऱ काम की निगाहो से देखने लगी...



सुमन सोच रही थी की गौतम कितना बिगड़ चूका है की अपने इतनी बड़ी बड़ी औरतों के साथ ये सब बिना शर्म के ही करने लगता है...
 
अपडेट 16



बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - कौन? कौन है बाहर?

किशोर - बड़े बाबाजी.. मैं किशोर..

बड़े बाबाजी - किशोर.. तुम.. आज दोपहर मैं ही आ गए.. कहो कैसे आना हुआ?

किशोर - बड़े बाबाजी वो बाबाजी पूछ रहे थे कि क्या वो आपसे मिल सकते है?

बड़े बाबाजी - अचानक विरम को मुझसे क्या काम पड़ गया?

किशोर - बड़े बाबाजी सेठ धनीराम भी है बाबाजी के साथ.. आपसे मिलने कि आज्ञा चाहते है.. पूछ रहे थे जब आप उचित समझें तब वो आ जाए..

बड़े बाबाजी - किशोर विरम से बोल कि वो अभी मुझसे मिलने आ सकता है.. मैं मिलने को सज्य हूँ..

किशोर - जैसे आप कहे बड़े बाबाजी..

किशोर - बाबाजी बड़े बाबाजी ने अभी मिलने के लिए कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - किशोर तू सच कह रहा है? आज मिल सकते है हम..

किशोर - ज़ी बाबाजी.. बड़े बाबाजी ने अभी ही आपको सेठ धनीराम के साथ उपस्थित होने को कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - अच्छा तो फिर हमें बिना देरी किये यहां से गुरुदेव के पास पहुंचना चाहिए..

धनीराम - आज तो नसीब पुरे उफान पर लगता है बाबाजी.. वरना दिन हफ्ते या महीने ना जाने कितना टाइम लगता बड़े बाबाजी के दर्शन करने के लिए..

बाबाजी उर्फ़ विरम, धनिराम औऱ धनिराम के पीछे एक नौकर अपने हाथ में कई डब्बे लिए हुए चल देते है..

बाबाजी - इन डब्बो में क्या ले आये हो धनिराम...

धनिराम - इनमे शहर के सबसे नामी हलवाई के दूकान की ताज़ा बनी मिठाईया है बाबाजी.. आपके लिए जो लाया तो वो नोकर से कहकर आपकी धर्मपत्नी के पास भिजवा दी औऱ ये बड़े बाबा ज़ी के लिए है..

किशोर - मगर बड़े बाबाजी तो ताज़ा मिठाई छोडो ताज़ा दाल रोती तक नहीं खाते.. सन्यासी इतने बड़े है कि क्या बताया जाए? कल जो बना था आज खाते है औऱ आज जो बना है वो कल खाते है.. हमेशा बासी खाना ही खाते है बड़े बाबाजी..

बाबाजी उर्फ़ विरम, धनीराम औऱ किशोर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह की कुटिया के बाहर आ जाते है..

बाबाजी उर्फ़ वीरम आवाज लगाते हुए - गुरुदेव...

अंदर से बड़े बाबाजी - आजा वीरम.. ले आ धनिराम को..

बाबाजी औऱ धनीराम कुटिया में आते हुए - प्रणाम बाबाजी.. प्रणाम गुरुदेव..

बड़े बाबाजी - कहो धनिराम.. इस बार क्या चाहते हो..

धनीराम नोकर को इशारे से मिठाई के डब्बे बड़े बाबाजी के सामने रखने के लिए कहता है औऱ नौकर धनीराम के कहे अनुसार बड़े बाबाजी के सामने मिठाई के डब्बे रख देता है जिसमे से उठती महक उस मिठाई की गुणवत्ता औऱ किस्म को उजागर कर रही होती है..

बड़े बाबाजी - मैं तो रूखी सुखी खाने का आदि हूँ धनिराम मुझे ये सब लालच क्यों दे रहा है.. तू बता तुझे क्या चाहिए?

धनिराम - बाबाजी.. आप तो जानते ही है सब.. फिर मेरा सवाल भी जानते ही होंगे तो आप ही बता दीजिये.. क्या मैं जो नया काम शुरू करने जारहा हूँ वो मेरे हित में रहेगा या मुझे नुकसान पहुचायेगा?

बड़े बाबाजी - हित तेरे धैर्य पर निर्भर है औऱ नुक्सान तेरी अधीरता पर.. अभी उचित समय की प्रतीक्षा कर धनिराम.. तेरी पुत्रवधु के गर्भ से अगले माह कन्या जन्म लेगी जिसके हाथ से तू जो भी कार्य शुरू करेगा सब फुले फलेगा.. कुछ चाहता है तो बता नहीं तो अब जा यहां से..

बड़े बाबाजी के कहने पर बाबाज़ी औऱ धनीराम कुटिया से बाहर आकर वापस पहाड़ी ओर जाने लगते है औऱ इधर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह सामने रखी मिठाईया देखकर मुंह से लार टपकाने लगता है औऱ बाबाजी औऱ धनिराम के जाने के बाद डब्बे में से मिठाई निकालकर जल्दी से अपने मुंह में भर लेता है मगर जैसे ही बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह मिठाई अपने ने मुंह में डालता है मिठाई राख़ में बदल जाती है औऱ बड़े बाबाजी जोर जोर से थूकते हुए घड़े से पानी निकाल कर पिने लगता है औऱ अपने बगल में लेटे वैरागी के साये से कहता है..

बड़े बाबाजी - एक टुकड़ा तो खाने दे बैरागी.. कितना समय बीत गया बस बासी खाना ही खा रहा हूँ.. बहुत मन करता है कुछ स्वादिस्ट खाने का..

बैरागी - पर मैंने तो आपको कभी कुछ खाने से रोका ही नहीं हुकुम..

बड़े बाबा उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - याद है बैरागी जब हमने एक साथ भोजन किया था.. तब तूने मुझसे क्या कहा था..

बैरागी - मुझे तो आज भी एक एक पल याद है हुकुम.. मुझे जब आपके पहरेदार उस बैठक से एक आलीशान कश में ले गए थे औऱ मैं वहा टहल रहा रहा.....

फलेशबैक शुरू

पहरेदार बैरागी को वीरेंद्र सिंह की बैठक से अपने पीछे पीछे महल के एक अलीशान कमरे में ले आता है जो काफ़ी बड़ा औऱ सुन्दर था साथ में ही पहरेदार बैरागी के लिए साफ कपडे औऱ नहाने की व्यवस्था भी कर देता औऱ बढ़ेबाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह का संदेसा सुनाते हुए बैरागी से कहता है की जागीरदार ने उसे शाम के भोजन पर आमंत्रित किया है. बैरागी को नहाने औऱ हज़ाम से अपनी हज़ामत करवाने का कहकर पहरेदार उसके कमरे के बाहर आकर दो लोगों को पहरेदारी करने के लिए लगाता है औऱ खुद वापस वीरेंद्र सिंह के बैठक की तरफ चला जाता है..

बैरागी कई हफ्तों से नहीं नहाया था औऱ आज उसके नहाने औऱ अपने बड़े बड़े बाल औऱ दाढ़ी मुछ कटवाने औऱ वीरेंद्र सिंह के भिजवाए वस्त्र पहनकर उसका रूप पहले की तरह खिल उठा था.. उसके चेहरे से उसके दर्द का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था औऱ उसकी पीड़ा को भाँपना मुश्किल था..

बैरागी ने दिन में उसके सामने लाया गया भोजन करने से इंकार कर दिया था औऱ स्वच्छन्द भाव से अपने कमरे से बाहर आ गया औऱ महल के बाग़ की तरफ टहलने लगा..

बाग़ में खिले हुए फूल औऱ उन फूलों से उठती हुई महक बाग़ के आस पास का वातावरण को अपनी खुशबु से सराबोर कर रही थी..

बैरागी महल से बाग़ में उतरती सीढ़ियों पर बैठ गया औऱ सामने खिलते हुए फूलों का जोड़ा देखकर अपने औऱ मृदुला के साथ बिताये उन हसीन तरीन पलो को याद करने लगा जिसमे दोनों ने साथ में जीवन के उस सुख को अनुभव किया था जिसे परमात्मा ने मनुष्य को वरदान के रूप में दिया है..

बैरागी बैठा हुआ अपने अतीत के पन्ने बदल रहा था की उसके कानो में मिठास घोल देने वाली मधुर आवाज सुनाई देने लगी औऱ वो अपने अतीत से वर्तमान में आ गया.. किसी औरत के गाने की इस आवाज ने बैरागी को अपनी जगह से उठने पर मजबूर कर दिया औऱ बैरागी आवाज का पीछा करते हुए बाग़ को पार करके एक मंदिर के पास आ गया मगर मंदिर के अंदर जाने की हिम्मत उसकी नहीं हुई औऱ वो मंदिर के बाहर ही खड़ा होकर उस गाने को सुनने लगा..

औरत ने बैरागी के मंदिर तक आने के कुछ देर बाद गाना बंद कर दिया. औरत के हाथ में थाली थी जिसमे पूजा का सामान रखा हुआ था औऱ साथ में प्रसाद.. औरत ने मंदिर में खड़े लोगों को प्रसाद बाँटा औऱ अपनी सेविकाओं को साथ लेकर मंदिर से बाहर आ गई..

औरत का नाम सुजाता था जो जागीरदार वीरेंद्र सिंह

की पत्नी थी.. सुजाता ने मंदिर से बाहर आने के बाद बैरागी को बाहर खड़े देखा तो सुजाता की सेविका ने सुजाता को बैरागी के बारे मे बताते हुए कहा कि बैरागी वीरेंद्र सिंह के मेहमान है औऱ आज ही महल में अतिथि बनकर आये है..

सुजाता अपनी सेविका से ये जानकार बैरागी की औऱ बढ़ी औऱ अपने साथ से प्रसाद देने लगी औऱ बोली..

सुजाता - मंदिर के बाहर खड़े होकर क्या कर रहे हो? मंदिर के अंदर क्यों नहीं आये? सब लोगों ने भगवान के दर्शन किये एक तुम ही उनके दर्शन से वंचित रह गए..

बैरागी ने सुजाता के पहनावे औऱ भाषा की शालीनता औऱ मुख पर तेज़ देखते हुए पहचान लिया कि ये इस जागीर के मालिक वीरेंद्र सिंह की पत्नी है..

बैरागी प्रसाद लेने से मना करते हुए - माफ़ करना रानी माँ.. मैं ईश्वर की परिकल्पना में विश्वास नहीं करता इसलिए ये प्रसाद मेरे लिए केवल मिठाई मात्र ही है.. मैं इसे प्रसाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता.. औऱ रही बात मेरे मंदिर के अंदर आने की है तो मैं पहले ही आपको अपने कुल गौत्र से अवगत करवा देता हूँ.. मैं एक नीच जाती मैं पैदा हुआ हूँ जिसका छुआ आप खाना भी पसंद नहीं करते..

सुजाता मुस्कुराते हुए अपने हाथों से बैरागी को प्रसाद खिला देती है औऱ कहती है - जात पात औऱ उच नीच तो समाज में रहने वाले लोगों के बनाये जाल है बेटा.. ईश्वर के सामने तो क्या राजा क्या रंक सभी सामान है.. मैंने प्रसाद समझकर दिया है तू मिठाई समझकर खा ले..

बैरागी हाथ फैलाते हुए - अगर ऐसी बात है तो एक औऱ लड्डू खिला दो रानी माँ.. कई दिन हो गए पेट में अन्न डाले.. अब तो जैसे बदन में खून सूखने लगा है..

सुजाता बैरागी के हाथ में लड्डू देते हुए - इतनी सी उम्र में ये मायूसी? कोई बात है जो दिल में चुबती है? बता दे.. बताने से मन हल्का हो जाएगा..

बैरागी लड्डू खाते हुए - अपनी पीड़ा औऱ दुख मनुष्य अगर अकेला भोग ले तो अच्छा है.. बताने से व्यथा बन जाती है जिसे सुन पाना सबके बस में नहीं होता..

सुजाता - तेरी आँखों में विराह का दुख नज़र आता है.. कोई ऐसा छोड़कर चला गया है जिसका वापस पाना संभव है.. सही कहा ना मैंने?

बैरागी - छोड़कर जाने वाले की विराह में जलना तो बहुत साधारण बात है रानी माँ.. मेरी प्रीत तो गंगा के पानी की तरह पवित्र है जो मेरे प्रियतम को हमेशा मेरे साथ रखती है.. मैं जब चाहु उससे बात करता हूँ.. उससे रूठता हूँ उसे मनाता हूँ..

सुजाता की सेविका - आपको अब महल में वापस चलना चाहिए.. हुकुम ने आपसे शीघ्र आने का आग्रह किया था..

सुजाता बैरागी से - प्रेम अंधे की आँख है बेटा.. प्रेम तो वासना को जानता भी नहीं.. प्रेम से वासना लाखों कोस दूर ही रहती है.. मैं तेरे अंदर झांककर देख सकती हूँ कि तू अपने प्रेमी से अब भी कितना प्रेम करता है..

बैरागी - प्रेम तो अविरल चलने वाली हवा का नाम है रानी माँ.. वक़्त के साथ कम ज्यादा होना प्रेम नहीं.. मेरा प्रेम मेरी मृदुला के लिए मेरे अंत तक ऐसे ही बना रहेगा.. इसे कोई भी मेरे ह्रदय से नहीं निकाल सकता..

सुजाता मुस्कुराते हुए - मृदुला.. जिसके स्वभाव में शालीनता हो.. हम्म्म.. मैं तेरी पीड़ा तो नहीं मिटा सकती.. ना ही तेरी मृदुला को ये बता सकती हूँ कि तू उससे कितना प्रेम करता है.. पर इतना जरूर कर सकती हूँ कि आज रात रात्रिभोज पर अपने हाथ से खाना पका कर खिलाऊ.. रात्रिभोज पर प्रतीक्षा रहेगी..

बैरागी - रानी माँ..

बैरागी सुजाता के रास्ते से परे हट जाता है औऱ सुजाता महल की औऱ चली जाती है उसके पीछे पीछे सुजाता की सेविकाऐ भी चली जाती है औऱ बैरागी मंदिर से वापस बाग़ की तरफ आकर बाग़ पार करते हुए महल में घूमने लगता है जहा गलती से वह कोषागार की तरफ आ जाता है औऱ उसमे प्रवेश करने वाला होता है की तभी पीछे से एक लड़का उसके कंधे पर हाथ रखकर बैरागी को पीछे खींच केता है औऱ दिवार से सटा के अपनी तलवार बैरागी के गले पर रख देता है..

लड़का - कौन है तू? और यहा क्या कर है?

बैरागी लड़के की सूरत देखकर हैरान हो गया था उसे जैसे अपनी आँखों पर यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि वो क्या देख रहा है.. औऱ जो वो देख रहा है, वो सच है भी कि नहीं..

लड़का- बता.. वरना अभी तेरे कांधे से सर उतार लूंगा..

बैरागी मुस्कुराते हुए - साधारण सा आदमी हूँ.. दिखाई नहीं देता?

लड़का - मसखरी बंद कर नहीं तो तेरी जीवन लीला यही समाप्त हो जायेगी..

एक पहरेदार आते हुए - समर छोड़ उसे.. समर.. ये तो हमारे हुकुम के मेहमान है आज ही पधारे है.. छोड़ समर...

पहरेदार समर के हाथों की तलवार से बैरागी को बचा लेता है मगर पहरेदार के समर को पीछे धकेलने पर समर की तलवार की हलकी सी खरोच बैरागी के गले पर लग जाती है जिससे बैरागी के गले से खून की एक बून्द निकल पडती है.. पहरेदार बैरागी को वहा से बाहर ले जाता है मगर समर जैसे वही जम जाता है.. समर चाहकर भी अपनी जगह से नहीं हिल पाता औऱ अचरज से इधर उधर देखने लगता है, उसके आस पास कोई नहीं था मगर उसे महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके सर पर मंडरा रहा है.. समर ने फिर से अपनी तलवार मजबूत पकड़ ली औऱ अपनी पूरी ताकत से अपनी जगह से हिलते हुए पीछे घूम गया जहा उसे एक परछाई दिखी.. समर ने आगे बढ़कर परछाई के पास जाने की कोशिश की मगर समर ने जैसे ही उस परछाई के पास जाने के लिए पहला कदम बढ़ाया एक हवा का झोंखा समर को पीछे उड़ा के ले गया औऱ समर दिवार से टकरा गया जिससे उसके सर से हल्का सा खून निकलने लगा..

परछाई समर के करीब आने लगी औऱ समर भी अपने आप को सँभालते हुए फिर से खड़ा होने लगा मगर इस बार परछाई में समर को एक लड़की की छवि दिखी औऱ उसके हाथों की तलवार उठने की जगह अपनेआप नीचे झुक गई.. समर ने गौर से उस छवि को देखा तो उसे उस छवि में अपना ही अक्स दिखाई दिया.. बिलकुल उसीके जैसे नयन नक्श औऱ चेहरा परछाई की छवि में समर को दिखा.. परछाई ने आगे बढ़कर जैसे समर को जान से मारने की नियत से प्रहार करना चाहा बैरागी वापस आते हुए समर का हाथ पकड़ कर समर को उसकी जगह से खींच लेता है औऱ परछाई का वार बेकार हो जाता है..

इससे पहले की परछाई अपना दूसरा वार करती बैरागी परछाई के पास जाता है औऱ उसे अपने गले से लगाकर अपने आप में समाहित कर लेता है औऱ वो परछाई लुप्त हो जाती है..

समर अभी तक उस परछाई की सूरत में ही अटका हुआ था उसे अपने सामने हो रही किसी भी चीज का कोई होश नहीं था.. उसने अभी अभी कुछ ऐसा देखा था जो देखना किसी भी आम इंसान के लिए संभव नहीं था उसके सामने एक परछाई थी जिसने लगभग उसके प्राण ले ही लिए थे. मगर एन मोके पर बैरागी ने आकर उसके प्राण बचा लिए..

बैरागी परछाई को अपने आप में समाकर वापस समर के करीब आ जाता है औऱ उसे सहारा देते हुए उठा कर वहा से बाहर ले आता है जहा दूसरे पहरेदार समर को देखते ही उसे एक जगह बैठा देते है.. बैरागी समर के सर पर गली चोट को देखते हुए उसका उपचार करने लगता है तभी उसे समर की गर्दन पर वैसा ही तिल नज़र आता है जैसा उसने प्रेम प्रसंग के समय मृदुला की गर्दन पर देखा था.. बैरागी कै मन में उसी तरह कई प्रश्न घूम रहे थे जैसे समर के मन में घूम रहे थे दोनों को ही अपने सवाल के जवाब नहीं मिले.. बैरागी सोच रहा था क्यों समर की शकल सूरत मृदुला से इतनी मेल खाती है औऱ उसके गर्दन पर वो तिल के निशान जो मृदुला के भी थे कैसे बने हुए है? बैरागी ने समर का उपचार कर दिया औऱ वहां से चला गया समर भी अपनी जगह बैठा रहा औऱ बैरागी कब वहा से गया उसे पता ही नहीं चला..

बैरागी अपने कमरे में था की एक पहरेदार ने उसके कमरे के दरवाजे पर दस्तक देते हुए रात्रिभोज के लिए साथ आने का कहा.. जिसपर बैरागी उस पहरेदार के साथ साथ होकर चल दिया.. पहरेदार उसे लेकर जागीरदार के निवास स्थान पर ले आया जहा एक बड़े से कमरे में जागीरदार वीरेंद्र सिंह सामने की तरफ एक बड़े से आसान पर बैठा हुआ था..

वीरेंद्र सिंह - आओ बैरागी बैठो..

वीरेंद्र सिंह ने वैरागी को अपने सामने कुछ दूर नीचे जमीन पर बिछी चटाई पर बैठने को कहा जहा चौकी पर खाली खाने की थाली रखी हुई थी..

बैरागी उस थाली के सामने बैठ जाता है तभी वीरेंद्र सिंह पहरेदार को कुछ इशारा करता है औऱ पहरेदार समर को उस बड़े से कमरे में ले आता है.. समर के हाथ में बेड़िया थी औऱ उससे उसकी तलवार भी छीन ली गई थी..

वीरेंद्र सिंह - कोषागार में इस पहरेदार ने तुम्हारे साथ जो किया उसकी सुचना हमे मिल चुकी है.. तुम्हारा दोषी तुम्हारे सामने है बैरागी जो सजा इसे देना चाहो दे सकते हो.. चाहो तो इसकी तलवार से इसका सर अलग कर दो..

बैरागी अपनी जगह से खड़ा हो कर समर के करीब जाता है औऱ वीरेंद्र सिंह से कहता है..

बैरागी - मेरे साथ जो हुआ वो मेरी भूल का परिणाम था हुकुम.. मगर ये तो अपना कर्तव्य का निर्वाहन कर रहा था.. इसे इस तरह बाँध कर लाना तो आपका न्याय नहीं हो सकता..

सुजाता कमरे में प्रवेश करते हुए - बिलकुल सही कहा तुमने.. जिसका सम्मान होना चाहिए उसका अपमान करना उचित नहीं..

समर औऱ बैरागी झुककर प्रणाम करते हुए - रानी माँ..

वीरेंद्र सिंह - मगर इसने हमारे अतिथि के गले पर अपनी तलवार रखी है.. सजा तो इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता समर के हाथों की बेड़िया खोलती हुई - अतिथि अगर वर्जित जगह पर प्रवेश करें तो पहरेदार का कर्तव्य है उस अतिथि को सही रास्ता दिखाए.. इससे जो कुछ हुआ वो भूलवश हुआ अगर इसे पता होता की ये आपका अतिथि है तो कभी ऐसी भूल नहीं करता..

बैरागी - रानी माँ.. सत्य कहती है हुकुम.. समर से जो कुछ हुआ वो उसके अज्ञान औऱ मेरी भूल के कारण हुआ.. जिसका फल हम दोनों को मिल चूका है.. इस तरह इसे सजा देना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?

वीरेंद्र सिंह - अज्ञान में ही सही मगर इस लड़के ने हमारे अतिथि पर तलवार उठाई है कुछ तो सजा इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता - आपके अतिथि के अपमान की सजा, हम इस लड़के को देते है.. आज ये लड़का कोषागार की पहरेदारी से हटाकर महल के उस हिस्से की पहरेदारी करेगा जहा हम निवास करते है.. अब से ये हमारी रक्षा करेगा..

वीरेंद्र सिंह - ये तो कोई सजा नहीं हुई..

सुजाता अपने साथ आई सेविकाओ को खाना परोसने का इशारा करते हुए - एक योद्धा से उसकी जगह छीन लेना उसकी जान लेने से ज्यादा कहीं बड़ी सजा है.. आप तो अच्छे से जानते है.. अब भोजन करिये..

वीरेंद्र सिंह आगे कोई औऱ बात नहीं करता औऱ सेविकाओं के द्वारा परोसा गया भोजन बैरागी को खाने के लिए बोलकर स्वम भी खाने लगता है..

सुजाता समर को उसकी तलवार लोटा देती है औऱ समर सुजाता के पीछे पीछे उस कमरे से बाहर आ जाता है औऱ थोड़ा दूर सुजाता के पीछे चल कर सुजाता से कहता है..

समर - मेरी जान बचाने के लिए धन्यवाद रानी माँ...

सुजाता मुस्कुराते हुए - इसमें धन्यवाद केसा? तू अपना कर्तव्य का पालन कर रहा था.. तेरी जान लेना जागीरदार का पाप होता औऱ मैं कैसे ये पाप होने दे सकती थी..

वीरेंद्र सिंह - तुम्हारे सामने खाने की कितनी ही स्वादिस्ट वस्तुए पड़ी है बैरागी.. मगर तुम हो की बस ये साधारण सी चीज खाये जा रहे हो..

बैरागी - मेरा भोजन तो मेरे प्रियतम के बिना अधूरा है हुकुम.. मेरे भोजन करने का उद्देश्य मात्र इतना की मैं अपने शारीर को तब तक जिन्दा रख सकूँ जब तक मुझे वो नहीं मिल जाता जिसे में खोज रहा हूँ.. मेरे लिए इन सब व्यंजनो का कोई महत्त्व नहीं..

वीरेंद्र सिंह - जैसा तुम चाहो बैरागी.. कल मैं तुम्हे कुछ ऐसा दिखाऊंगा जिसकी तुम्हे तलाश है.. मगर अभी मुझे भोजन का स्वाद लेने की इच्छा है.. इस तरह का स्वादिस्ट भोजन सबके भाग्य में नहीं...

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम ऐसा भोजन सबके भाग्य में कहा.. आप आराम से भोजन करिये.. आगे भविष्य के घर्भ में क्या छीपा है किसको पता?

फ़्लैशबैक ख़त्म

भविष्य के गर्भ में क्या छीपा है किसीको क्या पता...

बड़े बाबाजी उफ़ वीरेंद्र सिंह - सही कहा था तूने बैरागी.. मुझे कहा पता था कि भविष्य ने मेरे लिए अपने गर्भ में क्या छीपा रखा था.. रोज़ पचासो तरह के व्यंजन खाने का अभ्यास मैं साधारण खाने के एक निवाले को भी तरस जाऊँगा.. रोज़ बासी खाना खाते हुए सैकड़ो साल बीत गए मगर मेरी ये सजा है की ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती.. मृत्यु मोक्ष लगने लगी है वैरागी..

बैरागी - अगर आपने वो जदिबूती नहीं खाई होती तो मैं ही आपको मुक्ति दे देता हुकुम.. मुझसे भी आपकी ये दशा नहीं देखी जाती.. आपके साथ ही मेरी मुक्ति भी जुडी हुई है.. मैं भी कब से आपके साथ आपकी परछाई बनकर रहता आया हूँ..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - एक बात सच बताऊ बैरागी.. उस दिन जब तू मेरे सामने चटाई पर बैठकर सारा भोजन छोड़कर सिर्फ सादा खाना खाने लगा था तब मैंने सोचा था कि तू बस कुछ दिन ही अपनी पत्नी का शोक मनायेगा औऱ आनंद से जीवन बिताएगा.. मगर तु तो आज साढ़े तीन सो साल बीत जाने के बाद भी अपनी पत्नी को ऐसे याद करता है जैसे तेरी विराह अभी शुरू हुई हो.. तेरे गीत सुनकर तो मुझे भी सुजाता की याद आने लगती है.. कितना उज्वल प्रकाश से भरा हुआ चेहरा था उसका..

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम.. रानी माँ की करुणा सब पर बनी हुई थी.. आपके लिए उन्होंने अपने प्राण तक दे दिए..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - उसी बात का तो मुझे अब भी दुख है बैरागी.. काश उसदिन मेरे ही प्राण चले गए होते..



बैरागी - बार बार उस पाल को याद करके क्यों उदास हो रहे हो हुकुम.. चलिए जंगल में चलते है.. खुली हवा में सांस लोगे तो अच्छा लगेगा..
 
अपडेट 17



गौतम की सुबह जब आँख खुली तो उसके सामने सुमन का चेहरा था, सुमन बिस्तर के किनारे बैठी हुई प्यार से गौतम को जगा रही थी. सुमन के जागने से ही गौतम की आंख खुली और उसने सामने अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को दिखा. सुमन अपने साथ चाय का कप लाई थी जो उसने बेड के ऊपर की तरफ किनारे पर रख दिया था गौतम ने सुमन को देखते ही अपनी तरफ खींच लिया और बाहों में भर के सुमन को चूमने लगा.. सुमन प्यार से गौतम को अपने होठों का जाम पिलाकर बोली..

सुमन - उठ जा मेरे शहजादे.. संडे है तो क्या पूरा दिन सोता ही रहेगा? चल जा कर नहा ले..

गौतम - माँ आज चले टेटू बनवाने? छूटी का दिन है..

सुमन - ठीक है जैसा तू कहे मेरे शहजादे..

गौतम बिस्तर से उठ खड़ा होता है और चाय का कप हाथ में लेते हुए चाय की चुस्कियां लेते हुए सुमन को देखने लगता है जो वापस रसोई की तरफ जाकर अपने काम में लग जाती है. गौतम सुमन को ऊपर से नीचे तक कई बार देखता है और उसके बदन को निहारने लगता है गौतम को सुमन के ऊपर पूरी तरह से काम भाव पैदा हो रहा था जिसे वह खुद बखूबी की जानता था..

सुमन के बदन के उतार चढ़ाव बहुत ऊंचे नीचे थे जिससे उसकी सुंदरता में चार चांद लगते थे

गौतम उसीके जाल में फसता चला जा रहा था औऱ अब गौतम सुमन पर पूरी तरह से लड्डू था.. चाय पीने के बाद गौतम बाथरूम चला गया और नहाने लगा, नहाने के बाद गौतम ने कपड़े पहन लिए जो सुमन अभी-अभी निकल कर बिस्तर पर रख गई थी.

गौतम - माँ चले?

सुमन - पहले कुछ खा तो ले ग़ुगु..

गौतम - क्या बनाया है?

सुमन - तेरी मन पसंद बिरयानी..

गौतम - शकल दिखाओ जरा अपनी.. आप तो नॉनवेज छूना भी पसंद नहीं करती थी.. औऱ अब खाने के साथ बनने भी लगी हो..

सुमन - मेरे ग़ुगु के लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ..

गौतम - तो फिर खिला भी दो अपने हाथो से..

गौतम और सुमन ने खाना खाया और फिर दोनों ही घर को ताला मार कर घर से बाहर आ गए.. गौतम ने बाइक स्टार्ट की और सुमन उसके पीछे बैठ गई. सुमन बार-बार गौतम से कह रही थी कि टैटू में फालतू ज्यादा पैसे लग जाएंगे लेकिन गौतम बार-बार सुमन को समझा रहा था कि वह चिंता ना करें गौतम सब संभाल लेगा..

शहर की पुरानी गलियों से गुजरते हुए गौतम सुमन को एक वीराने से मकान के सामने ले आया जहां आसपास छोटी-छोटी गलियां गुजर रही थी और निकलने की कम ही जगह बची थी जगह को देखने से ऐसा लगता था जैसे यह जगह शहर से बिल्कुल इतर एक अलग ही दुनिया है पुराना शहर है जिसका अस्तित्व आप धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है.

सुमन - ग़ुगु कहा ले आया.. यहां कोनसी टेटू की दूकान है..

गौतम - माँ यार आप कितने सवाल करती हो.. चलो ना मेरे साथ.. सब पता चल जाएगा.. मैंने एक पुराने दोस्त से बात की थी उसने यहाँ का पता दिया है.. आप आओ मेरे साथ..

गौतम सुमन को लेकर उस मकान के अंदर दाखिल हो जाता है और सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर एक दरवाज के बाहर आकर, दरवाजे पर नॉक करता है..

गौतम के दरवाजा बजाने पर अंदर से एक आदमी निकाल कर दरवाजा खोलता है और सामने सुमन और गौतम को देखकर पूछता है कि उनको क्या काम है? आदमी के सवाल के जवाब में गौतम अपनी बात कहता हुआ बोलता है कि उसे टैटू बनवाना है और उसे किसी ने यहां का एड्रेस दिया था.. क्या उसका नाम अनवर है? आदमी हाँ में सर हिलता हुआ दोनों को कमरे के अंदर आने के लिए कहता है. कमरे में दाखिल होते ही गौतम और सुमन दोनों कमरे को देखकर हैरान हो जाते है.

साधारण से दिखने वाली इस जगह पर अनवर कमरे में टैटू बनाने का पूरा कारखाना खोले हुए था. अनवर की उम्र करीब 32 साल की लगभग थी और वह टैटू बनाने में एक्सपर्ट आदमी था.

अनवर - ज़ी किसे बनवाना है टेटू?

गौतम - मेरी माँ को बनवाना है..

अनवर हैरानी से सुमन को देखकर - केसा टैटू बनाना है भाभी ज़ी?

गौतम फ़ोन से एक पिक दिखाते हुए - ये वाला..

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अनवर - ठीक है भाभी ज़ी आप यहां लेट जाइये मैं तैयारी करता हूँ.. हाथ पर ही बनवाना है ना..

गौतम - हाथ पर नहीं.. बूब्स पर बनवाना है..

अनवर एक पल के लिए शॉक हुआ मगर फिर बोला -

ठीक है... भाभी ज़ी आप यहां लेट जाओ आकर..

सुमन अनवर के कहे अनुसार उसकी बताई हुई जगह लेट जाती है और अनवर टैटू बनाने की तैयारी करने लगता है.. फिर सुमन के दाई औऱ आकर एक राउंड चेयर ओर बैठ जाता है वही गौतम बाई औऱ खड़ा रहता है..

अनवर - भाभी ज़ी ये साड़ी हटा दो..

गौतम सुमन का पल्लू हटाकर - ब्लाउज उतार दो माँ..

टेटू बनाने में आसानी रहेगी.

सुमन अनवर के सामने थोड़ा झिझकते हुए - बटन खोलके काम नहीं चलेगा?

अनवर - चल जाएगा भाभी पर बूब्स पर टेटू के लिए ब्लाउज को पूरा ओपन करना पड़ेगा.

गौतम सुमन के ब्लाउज के बटन खोलते हुए - मैं खोल देता हूँ माँ.. आप लेटी रहो.. गोतम सुमन का ब्लाउज उतार देता है औऱ सुमन कमर से ऊपर सिर्फ ब्रा में आ जाती है. सुमन को अनवर के सामने शर्म आ रही थी मगर गौतम पूरा बेशर्म बना हुआ था.

अनवर बूब्स को हल्का सा छूकर - यहां बनाना है?

गौतम - नहीं अनवर भाई.

अनवर - तो कहा?

गौतम सुमन की ब्रा को ऊपर खिसका कर उसके दोनों बूब्स आजाद कर देता है औऱ एक बूब्स के चुचक पकड़कर अनवर से कहता है - निप्पल्स के बगल में इस तरफ. सुमन गौतम की हरकत पर शर्म से आधी हो जाती है मगर उसे कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती.

अनवर भी खुलने लगता है औऱ सुमन के बूब्स को बेझिझक पकड़ कर गौतम की बताई जगह पर टेटू बनाने लगता है.

गौतम सिगरेट पिने कमरे से बाहर आ जाता है वही अनवर सुमन के बूब्स के पुरे मज़े लेकर उसपर टैटू बनाने लगता है. सुमन अनवर की हरकत पहचान रही थी औऱ शर्म के कारण अनवर से कुछ भी नहीं बोल रही थी.. अनवर टैटू बनाने के बहाने सुमन के निप्पल्स को बार बार पकड़कर मसालार मरोड़ रहा था जिससे सुमन हलकी सी सिसक पडती थी.. अनवर का लंड औऱ सुमन के निप्पल्स दोनों कड़क होकर खड़े हो चुके थे.. गौतम बाहर खड़ा होकर सिगरेट के कश लगा रहा था औऱ अंदर अनवर बिना शर्म किया सुमन के बूब्स दबा रहा था औऱ टेटू बनाते हुए सुमन के मज़े ले रहा था.. अनवर ने सुमन से अब बात करना शुरू कर दिया था..

अनवर - भाभी ज़ी बूब्स तो बहुत टाइट है आपके. जिम जाती होंगी..

सुमन - नहीं.. बस घर का काम ही करती हूँ..

अनवर - भाभी ज़ी एक टेटू नीचे भी बनवा लो..

सुमन - नीचे फिर कभी बनवा लुंगी आप अभी यही बना दो..

अनवर ऐसे ही सुमन के मज़े लेटे हुए टेटू बनाता है औऱ सुमन के बूब्स पर टेटू बन जाता है, गौतम जब अनवर को टेटू के पैसे देता है तो अनवर टेटू के पैसे लेने से मना कर देता है फिर गौतम सुमन के साथ वहा से वापस आने के लिए निकल पड़ता है.

वापस आते हुए रास्ते में गौतम गाड़ी को एक ठेके के सामने रोकता है और सुमन ठेके के सामने गाड़ी रूकती देखकर सुमन गौतम से पूछता है कि उसने गाड़ी क्यों रोक है तो गौतम सुमन को ठेके की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि एक बॉटल लेते हुए घर चलते हैं, इस पर सुमन गौतम को गुस्से की नजरों से देखती है मगर गौतम सुमन को प्यार से कहता है कि उसने कई बार सुमन और रूपा को एकसाथ शराब पीते हुए देखा है और सुमन उसके सामने भी शराब पी सकती है उसे कोई परेशानी है. सुमन गौतम की बातों से लरज जाती है औऱ कुछ नहीं बोलती वही गौतम ठेके से ब्लैक डॉग शराब की एक बोतल ले आता है औऱ फिर सुमन के हाथों पकड़ा कर बाइक स्टार्ट करते हुए घर आ जाता है.

गौतम - माँ यार चाय बना दो.

सुमन शराब की बोतल को रसोई में ऊपर छिपा कर रख देती है औऱ चाय बनाने लगती है तभी उसके फ़ोन ओर फ़ोन आता है..

सुमन फ़ोन उठाकर - हेलो

गौतम - माँ किसका फ़ोन है?

सुमन - संजू मामा (45) का.. सुमन बात करती हुई.. हाँ भईया..

संजू मामा उर्फ़ संजय - सुमन तू कल सुबह तक आ जायेगी ना?

सुमन - कल सुबह तक? भईया कल सुबह तक तो नहीं आ पाऊँगी..

संजय - सुमन तू तो जानती है शादी का घर है कितना काम होता है अगर लड़की (ऋतू 25) की बुआ भी एक हफ्ता पहले नहीं आएगी तो फिर काम कैसे होगा? औऱ कौन जिम्मेदारियां संभालेगा? तेरी भाभी का तुझे पता ही है..

सुमन - भईया मैं कोशिश करूंगी जल्दी आने की..

संजय - कोशिश नहीं सुमन आना है. ले माँ से बात कर..

गायत्री (62) - हेलो सुमन..

सुमन - कैसी हो माँ?

गायत्री - मैं ठीक हूँ बेटी तू कैसी है औऱ ग़ुगु केसा है?

सुमन - हम दोनों ही अच्छे माँ..

गायत्री - बेटी तू जल्दी आजा.. कितना टाइम हो गया तुझे देखे..

सुमन - माँ मैं तो आ जाऊ पर ग़ुगु का यहां कौन ख्याल रखेगा?

गायत्री - अरे तो ग़ुगु वहा क्यों छोड़ना है उसे लेके आ ना..

सुमन - माँ आप जानती तो हो उसे.. कितना ज़िद्दी है.. 6 साल हो गए तब तक पुरानी बात नहीं भुला.. अभी भी अपनी दीदी औऱ मामी से नाराज़ है..

गायत्री - बेटी तू समझा ना उसे. देख तू नहीं आएगी तो कितना सुना लगेगा घर..

सुमन - मैं तो कब से समझा रही हूँ माँ पर ग़ुगु समझता ही नहीं.. बस पहले की बात को दिल से लगाके बैठा है.. कहता है वापस चेहरा तक नहीं देखा किसीका..

गायत्री - सुमन बेटी तू कैसे भी करके ग़ुगु को ले आ बस.. शादी बार बार नहीं होती औऱ वो कब तक अपनी मामी औऱ दीदी से नाराज़ रहेगा? चेतन (26) औऱ आरती (24) की शादी मैं भी नहीं आया था ग़ुगु..

सुमन - मैं देखती हूँ माँ..

गायत्री - सुमन मैं कुछ नहीं जानती कल सुबह अगर तू नहीं आई तो मैं फिर तुझसे बात नहीं करुँगी..

सुमन - ठीक है माँ.. मैं मनाती हूँ ग़ुगु को.. फ़ोन कट जाता है..

गौतम - माँ आप चली जाओ मैं रह लूंगा अकेला.. मेरी चिंता मत करो..

सुमन - तू जब तक मेरे साथ नहीं चलेगा मैं कहीं नहीं जाने वाली समझा..

गौतम - माँ आप जानती हो मुझे उन लोगों की शकल तक नहीं देखनी..

सुमन - बेटा कितनी पुरानी बात है तू भूल क्यों नहीं जाता? आखिर तेरी मामी औऱ दीदी ने ही तो तुझे डांटा था.. कोई पराया तो नहीं था..

गौतम - चोरी का नाम लगाकर, क्या कुछ नहीं बोला था उन दोनों ने मुझे.. आप वहा होती तो क्या सहती ये सब? बहुत घमंड है उन लोगों को अपनी रइसी पर, उनको उनके घमंड में रहने दो.. मैं तो नहीं जाने वाला..

सुमन - मगर बेटा पर उस दिन मामी औऱ दीदी ने तुझसे माफ़ी भी तो मांगी थी..

गौतम - हाँ जब उनको पर्स औऱ सामान उनके पास ही मिल गया था तब मांगी थी.. वो भी कितनी आसानी सॉरी बोलकर खिसक गई थी.. कितना रोब झड़ती है मामी अपनी रइसी का.. जाते ही वापस अपने गहने औऱ कपडे की कीमत बताकर निचा दिखाने लगेगी.. मैं नहीं जाने वाला माँ..

सुमन - छः साल हो गए उस बात को ग़ुगु.. अगर तू सुबह मेरे साथ नहीं चला तो मैं तुझसे रूठ जाउंगी..

गौतम मुस्कुराते हुए - आप औऱ मुझसे रूठ जाओगी? ठीक है रूठ जाओ..

सुमन - ग़ुगु चल ना.. मुझे भी 2 साल हो गए भईया और माँ से मिले.. आखिरी बार चेतन औऱ आरती की शादी में मिली थी.. मेरे लिए इतना नहीं कर सकता.. अब क्या मैं हाथ जोड़कर तुझसे कहु?

गौतम - माँ क्यों मुझे वहां ले जाना चाहती हो.. मेरा मन नहीं है.. आप चली जाओ ना..

सुमन मुंह बनाकर - ठीक है मैं भी नहीं जाती.. तुझे नहीं माननी ना मेरी बात तो ठीक है.. मैं वैसे भी कोनसी तेरे लिए जरुरी हूँ जो तू मेरी बात मानेगा..

गौतम सुमन की बात सुनकर उसे बाहों में भरते हुए - अच्छा ठीक है मेरी माँ.. आप ना बहुत नाटक करने लगी हो..

सुमन गौतम का चेहरा चूमकर - सब तुझ से ही सीखा है मेरे दिल के टुकड़े.. चल पैकिंग कर ले सुबह जल्दी जाना है..

गौतम - आराम से कर लेना माँ.. छोटा सा ही तो रास्ता है.. अजमेर से जयपुर कोनसा दूर है?

सुमन - तेरे कपडे मैं पैक करुँगी.. वरना तू कुछ भी, जो मिलेगा वो पैक कर लेगा..

गौतम - कर लो.. पर पहले चाय तो पीला दो.. कब से उबाल मार रही है..

सुमन चाय कप में डाल कर गौतम को दे देती है..

सुमन - लो मेरे गौतम ज़ी आपकी चाय..

गौतम - थैंक्यू सुमन..

सुमन - बेशर्म नाम से बुलाता है अपनी माँ को..

गौतम चाय पीते हुए - आपने भी तो नाम से बुलाया..

सुमन - बहुत बातें बनाना सिख गया है.. चल मैं पैकिंग करती हूँ फिर खाना भी बनाना है..

सुमन पैकिंग पूरी कर लेती है और उसके बाद खाना बनाकर गौतम के साथ खाना खा लेती है और रात को गौतम के साथ इस तरह जिस तरह वह पहले कुछ राते सो रही थी सोने लगती है.. गौतम सुमन आज भी कमर से ऊपर पूरी तरह निर्वास्त्र होकर एकदूसरे के साथ लिपटे हुए लेटे थे.. सुमन बच्चों की तरह गौतम के सीने पर लेटी हुई थी उसे नींद आ चुकी थी औऱ नींद की गहरी खाई में उतर चुकी थी मगर गौतम की आँखों में नींद का कोई अक्स नहीं था वो सुमन की जुल्फ संवारता हुआ सुमन का चेहरा देखे जा रहा जैसे जोहरी हिरे को देखता है..

सुमन का फ़ोन बजा तो गौतम ने सुमन को जगाने की कोशिश की मगर सुमन गहरी नींद में थी गौतम ने उसे जगाने की ज्यादा कोशिश नहीं की औऱ सुमन का फ़ोन उठा के देखा जिसमे रूपा का फ़ोन आ रहा था..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..

रूपा - कैसे हो मेरे नन्हे शैतान..

गौतम - वैसा ही जैसा आपने कल देखा था..

रूपा - आज क्यों नहीं आये मिलने.. औऱ दीदी कहा बिजी है?

गौतम - माँ तो सो गई.. औऱ आज थोड़ा बिजी था..

रूपा - अभी तो सिर्फ 10 ही बजे है.. दीदी को अभी नींद आ गई..

गौतम - हाँ वो कल मामा के यहां जाना है शादी में.. आपको तो बताया होगा माँ ने..

रूपा - पर तू तो नहीं जाने वाला था ना ग़ुगु..

सुमन - मैं तो अब भी नहीं जाना चाहता मम्मी.. पर माँ ने अपनी कसम दे रखी है.. कैसे मना करू?

रूपा - शादी एक हफ्ते बाद है ना..

सुमन - हाँ.. आप भी चलो ना.. साथ में मज़ा आएगा..

रूपा - नहीं ग़ुगु.. मैं नहीं आ सकती.. तुम जाओ औऱ खूब मज़े करना, औऱ दीदी से कहना तुम्हारा ख्याल रखे..

गौतम - माँ को ये कहने की जरुरत है? वो तो हमेशा मेरा ख्याल रखती है.. पापा के जाने के बाद तो औऱ भी ज्यादा..

रूपा - हम्म.. बताया था दीदी ने.. ग़ुगु तुम दीदी से कहो ना यहां आकर मेरे साथ रहने के लिए.. मैं कल से समझा रही हूँ पर वो है की मानने को त्यार नहीं..

गौतम - पर..

रूपा - क्या पर.. हम्म? मैंने कहा था तुम्हे मुझे अपना मानो.. पर लगता है तुम भी मुझे पराया समझते हो..

गौतम - ठीक है मम्मी.. मैं बात करूंगा माँ से इस बारे में.. औऱ उन्हें राजी करूंगा आपके साथ रहने के लिए..

रूपा - ग़ुगु..

गौतम - हाँ..

रूपा - याद आ रही है तुम्हारी..

गौतम - आपने ही मना किया था..

रूपा - हाँ वो बाबाजी ने कहा है दूर रहने के लिए..

गौतम - अब इसमें मेरी क्या गलती? मैं आपके लिए हमेशा तैयार हूँ..

रूपा - अच्छा.. सुबह कितनी बजे निकलोगे?

गौतम - 8 बजे वाली बस से..

रूपा - बस से क्यों?

गौतम - इतनी दूर बाइक चलाने में मुझे नींद आती है..

रूपा - तो मुझे कहना था ना ग़ुगु.. मैं कल सुबह घर पर कार भिजवा दूंगी.. उसे लेकर चले जाना..

गौतम - पर आपके पास कार कहा है?

रूपा - तू अभी अपनी मम्मी को ठीक से जानता नहीं है मेरे नन्हे शैतान..

गौतम - अच्छा ज़ी.. ऐसी बात है? फिर तो कोशिश करूँगा जल्दी जान जाऊ..

रूपा - मन कर रहा है तुझे फ़ोन में घुस कर अपने गले से लगा लू.. बहुत याद आ रही है तेरी..

गौतम - मुझे भी..

रूपा - चल अब रखती हूँ.. तू भी सोजा..

गौतम - गुडनाइट मम्मी...

रूपा - गुडनाईट मेरे नन्हे शैतान..

सुबह हो चुकी थी औऱ सुमन नहाने के बाद काले पेटीकोट औऱ ब्लाउज को पहनकर रसोई में चाय बना रही थी उसके बाल गीले थे जिसे उसने तौलिये से बाँधा हुआ था उसे देखने से लगता था वो अभी अभी नहा के आई है औऱ चाय बनाने लगी है.. गौतम भी अभी अभी बाथरूम से नहाके निकलकर अपने कपडे पहन चूका था.. गौतम रसोई में आकर पीछे से सुमन को अपनी बाहों में भरते हुए सुमन की गर्दन चुम लेता है कहता है..

गौतम - गुडमॉर्निंग माँ..

सुमन - गुडमॉर्निंग मेरे बच्चा.. क्या बात है आज तो जगाने बिना ही उठ गया तू.. औऱ नहा भी लिया..

गौतम - आप कहो तो वापस सो जाता हूँ..

सुमन - कोई जरुरत नहीं है.. मैंने तेरा बैग पैक दिया है कुछ औऱ चीज लेनी हो तो तू अभी रख ले.. बाद में तू मत बोलना.. आपने ये तो पैक ही नहीं किया.

गौतम - नहीं बोलूंगा.. अच्छा रात को आपकी रूपा रानी का massage फ़ोन आया था..

सुमन - ग़ुगु वो भी तेरी माँ जैसी है.. रेस्पेक्ट से नाम लिया कर उनका बेटू..

गौतम - इतना प्यार से नाम ले रहा हूँ.. रूपा.. रानी.. औऱ कितनी रेस्पेक्ट करू उनकी.. वैसे एक बात बोलू.. मुझे बहुत सेक्सी लगती है आपकी रूपा रानी.. कहो तो बहु बनाके ले आउ आपकी रूपा को..

सुमन गौतम के कान पकड़ते हुए - देख रही हूँ बहुत बदमाश हो रहा है तू.. तुझे बस बड़ी औरत ही पसंद आती है, है ना? वैसे क्या कह रही थी रूपा?

गौतम अपना कान छुड़वाते हुए - आई लव यू बोल रही थी मुझे.. कह रही थी मेरी याद आती है उनको.. नींद भी नहीं आती मेरे बिना..

सुमन - तूने आज मार खाने का इरादा कर लिया है क्या?

गौतम - मज़ाक़ कर रहा था माँ.. रूपा आंटी गाडी भिजवा रही है.. बोल रही थी बस से मत जाना..

सुमन - तूने मना नहीं किया रूपा को? औऱ तुझे कार चलाना आता है?

गौतम - मना किया था पर वो मानी नहीं, बोली.. अगर मुझे अपना समझते हो तो मना मत करना.. औऱ आप तो जानती हो मैं रूपा आंटी को कितना अपना समझता हूँ.. औऱ माँ कार क्या आपका ग़ुगु ट्रक भी चला सकता है..

सुमन - हम्म.. सब पता है मुझे.. तू किसको क्या समझता है.. ले चाय पिले मैं साडी पहन लेती हूँ..

गौतम - माँ कोई अच्छी साडी पहना..

सुमन - चल ही बता दे क्या पहनू..

गौतम - मैरून अच्छा लगेगा आप पर..

सुमन - मैरून कलर की साडी पहन लेती हूँ.. बस..

गौतम चाय की चुस्कीया लेने लगता है और कुछ औऱ चीज़े अपने बेग में डाल लेता है.. सुमन अंदर जाकर साड़ी पहन लेती है, इतने में कोई आदमी बाहर दरवाजे पर बेल बजाता है और गौतम बाहर जाकर देखता है तो एक आदमी उसे कार की चाबी दे देता है औऱ चला जाता है.. गौतम देखता है की रूपा ने वाइट कलर स्विफ्ट कार भिजवाई है.. वो चाबी लेकर अंदर आ जाता है औऱ सुमन ने जो बेग पैक किये थे उन्हें कार में रख देता है..

गौतम - माँ कितना टाइम लगेगा? साडी पहन रही हो या बना रही हो..

सुमन - बस ग़ुगु 5 मिनट..

गौतम - आधा घंटा हो गया आपकी 5 मिनट ख़त्म नहीं हो रही..

सुमन - बेटू बस आ गई..

गौतम - 5 मिनट में आप बाहर नहीं आई तो मैं अंदर आ जाऊंगा साडी पहनाने..

सुमन हस्ते हुए - तुझे रोका किसने है अंदर आने से बेटू..

गौतम 5 मिनट बाद कमरे में घुस जाता है देखता है की सुमन आईने के सामने बैठकर अपने होंठों पर लिपस्टिक लगा रही है.. उसने आज अद्भुत श्रृंगार किया था उसका चेहरा चाँद की लालिमा के सामान प्रजव्वल था माथे पर बिंदिया आँखों में काजल औऱ होंठों पर लाली के साथ साथ.. सुमन ने पहनी मेरून साडी भी उसके रूप को औऱ बढ़ा रही थी..

सुमन - बस ग़ुगु.. हो गया चलते है..

गौतम सुमन को बस देखे जा रहा था..

सुमन - चल ना ग़ुगु अब खड़ा क्यों है..

गौतम - कमाल लग रही हो माँ आज.. लगता है आफत आने वाली है.. मन कर रहा है आपको अपनी दुल्हन बना लू..

सुमन मुस्कराते गौतम का मुंह पकड़कर हुए - माँ को दुल्हन बनाएगा बेशर्म.. चल.. अब लेट नहीं हो रहा?

गौतम सुमन को बाहों में भरते हुए - लिपस्टिक ख़त्म तो नहीं हुई ना माँ आपकी?

सुमन - क्यों?

गौतम - क्योंकि जो लिपस्टिक आपने अपने होंठों पर लगाईं है उसे तो मैं खाने वाला हूँ..

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इतना कहकर गौतम सुमन के होंठों पर टूट पड़ता है औऱ सुमन को बेतहाशा चूमने लगता है जिससे सुमन हक्कीबक्की रह जाती है औऱ गौतम को चूमने से नहीं रोक पाती औऱ चुपचाप खड़ी रहकर गौतम के चुम्बन का मोन समर्थन कर देती है.. गौतम सुमन को बाहों में जकड कर चूमे जा रहा था औऱ लम्बे समय बाद सुमन के मना करने पर चुम्बन तोड़ देता है..

सुमन - ग़ुगु.. तू भी ना..

गौतम - सॉरी माँ.. आप इतनी प्यारी लग रही है कण्ट्रोल नहीं कर पाया आपको चूमने से..

सुमन रुमाल से गौतम के होंठों पर लगी अपने होंठों कि लिपस्टिक साफ करती है औऱ अपने होंठों कि लिपस्टिक ठीक कर गौतम से चलने के लिए कहती है.

गौतम औऱ सुमन कार मैं बैठ जाते है औऱ जयपुर के लिए निकल जाते है..

रास्ते में पड़ने वाली कच्ची सडक पर हिलती गाडी में सुमन के हिलते चुचे देखकर गौतम का मन काम कि भावना से भरने लगता है औऱ वो अपना एक हाथ सुमन के चुचे पर रखकर दबाता हुआ सुमन से पूछता है..

गौतम - माँ ब्रा नहीं पहनी क्या आपने?

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सुमन - ग़ुगु ये ब्लाउज बहुत टाइट था तो नहीं पहन पाई..

गौतम - दूसरा ब्लाउज पहन लेती ना माँ.. ब्रा नहीं पहनोगी तो आपके बूब्स ढीले होकर लटक जाएंगे.. औऱ मैं नहीं चाहता आप अभी से ढीली पड़ो..

सुमन - ग़ुगु इस साड़ी पर यही ब्लाउज मैचिंग था तो पहन लिया.. मामा के घर बदल लुंगी..

गौतम - मामा के घर क्यों माँ.. रास्ते में कहीं बदल लेना..

सुमन - रास्ते में कहा जगह मिलेगी बेटा?

गौतम - उसकी चिंता आप मत करो.. आगे हाईवे से गाडी नीचे उतार लूंगा.. वहा दूर दूर तक कोई भी नहीं है..

सुमन - बेटा पर खुले में?

गौतम - मैंने कहा ना माँ वहा कोई नहीं आता जाता आप चिंता मत करो..

गौतम गाडी को कुछ देर हाईवे पर चला कर एक कट से नीचे उतार लेता है जहा जंगल जैसी जगाह थी.. थोड़ा आगे गाडी चला कर एक पेड़ के नीचे रोक देता है..

गौतम - आप ब्लाउज बदल लो माँ मैं बाथरूम कर लेता हूँ..

इतना कहकर गौतम गाडी से नीचे उतर जाता है औऱ गाडी के पास ही पेड़ के नीचे मूतने लगता है सुमन बेग से दूसरा ब्लाउज निकालकर पहनने लगती है मगर सुमन का ध्यान गौतम के लंड पर था जिसे गौतम जानभूझ गाडी के बिलकुल पास सुमन को दिखाते हुए मूत रहा था.. सुमन औऱ गौतम दोनों के मन में चुदाई कि काम इच्छा फलने फूलने लगी थी..

गौतम मूतने के बाद अपने लंड को दो चार बार ऐसे हिलता है जैसे वो मुठ मार रहा हो फिर लंड को पेंट में कर लेता है औऱ गांड़ी में आकर बैठ जाता है.. सुमन ये देखकर औऱ भी कामुक हो उठी थी..

गौतम सुमन के पर्स में से सिगरेट निकालकर सुलगा लेता औऱ एक कश मारके सुमन का ब्लाउज देखकर कहता है - ध्यान कहा है माँ आपका?

सुमन - क्यों.. क्या हुआ ग़ुगु?

गौतम सिगरेट का अगला कश लेकर - ब्लाउज उल्टा पहना है आपने..

सुमन हसते हुए अपना ब्लाउज खोल देती है औऱ उसे सीधा करने लगती है गौतम सुमन के हाथो से ब्लाउज ले लेता है औऱ सुमन को सिगरेट देते हुए कहता है - बाद में पहन लेना माँ.. क्या जल्दी है..

सुमन सिगरेट लेकर कश मारती हुई गौतम से कहती है - तेरा बस चले तो तू मुझे नंगा ही कर दे.. बहुत बिगड़ गया है तू.. तेरा कॉलेज ख़त्म होते ही तेरी शादी करवा दूंगी अच्छी सी लड़की देखकर..

गौतम सुमन के सामने अपना लंड मसलते हुए - पर मुझे तो आपके अलावा कोई औऱ पसंद ही नहीं आता माँ.. आप ही कर लो ना मुझसे शादी.. बहुत खुश रखूँगा में आपको.. कभी छोडके नहीं जाऊंगा.. हमेशा प्यार करूंगा आपसे..

सुमन सिगरेट का कश लेकर धुआँ छोडते हुए मुस्कुराकर - माँ हूँ मैं तेरी.. मुझसे ऐसी बातें करेगा तो एक थप्पड़ खायेगा तू.. देख रही हूँ बहुत आग लगी हुई है तेरे अंदर..

गौतम सुमन से सिगरेट लेकर कश मारता हुआ - आप तो हमेशा दिल तोड़ने कि बातें करती हो माँ.. अब आग लगी हुई तो इसमें क्या दोष? मैं अपने मन से थोड़ी जवान हुआ हूँ.. आपको देखकर मेरे दिल में कुछ कुछ होता है तो इसमें मेरी क्या गलती?

सुमन मुस्कुराते हुए - मैं समझती हूँ मेरे शहजादे.. पर मैं माँ हूँ तेरी.. तेरे साथ कुछ भी वैसा नहीं कर सकती..

गौतम सुमन को सिगरेट देते हुए - मैं कब कह रहा हूँ कि आप मेरे साथ सेक्स करो माँ.. पर आप अपने हाथो से तो कभी कभी मुझे प्यार कर सकती हो..

सुमन गौतम का इशारा समझ गई थी औऱ उसके चेहरे पर हलकी शर्म लिहाज़ औऱ गौतम के लंड को साफ साफ देखने कि बेसब्री साफ दिखाई दे रही थी..

सुमन सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट बाहर फेंक देती है औऱ दो घूंट पानी पीकर गौतम से कहती है - ठीक है ग़ुगु.. अगर तू चाहता है तो मैं अपने हाथों से तुझे ठंडा कर देती हूँ, लेकिन तू भी मुझसे वादा कर कि ये बात किसी को नहीं बताएगा औऱ मेरी हर बात चुपचाप मानेगा..

गौतम सुमन का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख देता है औऱ दबाते हुए कहता है - आप जैसा बोलोगी मैं वैसा ही करूगा माँ.. बस आप उसे ठंडा कर दो.. बहुत परेशान करता है ये मुझे...

सुमन मुस्कुराते हुए - नीचे कर अपनी जीन्स..

गौतम एक झटके मैं जीन्स औऱ चड्डी नीचे सरका देता है औऱ सुमन के सामने साफ साफ अपने खड़े लंड को नंगा कर देता है.. सुमन पहले भी गौतम का लंड देख चुकी थी मगर अब उसके सामने मात्र कुछ इंच दूर ही गौतम का लंड पूरा खड़ा हुआ था जिसे देखकर सुमन के मन में सावन कि बारिश होने लगी औऱ मोर नाचने लगे..

सुमन - हाय दइया ग़ुगु..

गौतम - पसंद आया माँ?

सुमन शर्मा जाती है औऱ अपने हाथ में गौतम का लंड पकड़ कर उसे नापते हुएधीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगती है गौतम भी सुमन कि ब्रा निकाल देता है औऱ उसके चुचे दबाते हुए सुमन को अपनी तरफ खींचकर चूमने लगता है..

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सुमन गौतम के ऊपर झुकी हुई उसे अपने होंठों का स्वाद चखा रही थी वही गौतम सुमन के चुचे औऱ खड़े चुचक मसलते हुए सुमन से हस्तमैथुन का मज़ा ले रहा था बहुत देर तक ये कार्यक्रम ऐसे ही चलता रहा..

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सुमन - कब निकलेगा ग़ुगु? कब से हिला रही हूँ..

गौतम - माँ मुंह में लेके ट्राय करो ना जल्दी निकल जाएगा..

सुमन इतराते हुए - मैं मुंह नहीं लुंगी.. मुझे अजीब लगता है

गौतम - ले लो ना माँ.. कुछ नहीं होता.. आगे आपको जूस पीला दूंगा.. सब ठीक हो जाएगा..

सुमन - नहीं ग़ुगु.. हाथों से ही हिला दूंगी.. मैंने कभी मुंह में नहीं लिया.. मुझे उल्टी आती है..

गौतम - माँ हाथों से तो बहुत टाइम लग जाएगा.. कब तक हिलाती रहोगी? एक करो मैं कंडोम पहन लेता हूँ फिर मुंह में लेके निकाल दो..

सुमन शरमाते हुए - ग़ुगु नहीं ना..

गौतम - प्लीज ना माँ.. कंडोम से मान जाओ..

सुमन - कंडोम है तुम्हारे पास?

गौतम अपने बटुए से कंडोम निकालते हुए - बहुत सारे है माँ.. आपको कोनसा फ्लैवर पसंद है?

सुमन शरमाते हुए - कोई सा भी देदे..

गौतम - स्ट्रॉबेरी लेलो माँ.. ज्यादातर औरतो को वही पसंद आता है.. लो पहना दो..

सुमन कंडोम लेकर गौतम के लंड पर पहना देती है..

गौतम सुमन के सर पर हाथ रख देता है औऱ उसे लंड पर झुकाते हुए कहता है - बच्चों जैसे क्या शर्मा रही हो माँ आप भी.. चलो अब ले भी ली मुंह में.. कुछ नहीं होता..

सुमन गौतम के लंड को मुंह में भरने लगती है औऱ गौतम अपनी माँ के मुंह में लंड जाने से औऱ भी ज्यादा उत्तेजित होने लगता है..

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गौतम सुमन के पर्स से एक औऱ सिगरेट निकाल कर लाइटर से सुलगा लेता है औऱ सिगरेट के कश लेटे हुए लंड चुस्ती अपनी माँ सुमन को देखने लगता है..

गौतम सुमन के सर पर दबाव डालकर - माँ थोड़ा अंदर लेकर चुसो ना.. आप तो बस मेरे लंड के टोपे को ही चूस रही हो..

सुमन गौतम के लंड को मुंह में औऱ भरकर चूसे जा रही थी औऱ अपने हाथ से गौतम के दोनों टट्टे सहला रही थी..

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गौतम को तो जैसे सुमन ने अफीम खिला दी थी गौतम उतना नशे में मदहोश होने लगा था औऱ सिगरेट के कश लेता हुआ सुमन के blowjob से तृप्त होने लगा था.

सुमन ने मुंह लेकर बस 5 मिनट के अंदर ही गौतम का माल निकाल दिया.. औऱ उसके लंड से कंडोम उतार कर कंडोम के गाँठ लगाकर गाडी से बाहर फेंक दिया..

सुमन - बस हो गई तेरी इच्छा पूरी? हो गया ठंडा?

गौतम - आई लव यू सुमन..

सुमन हसते हुए - मुझे नाम से मत बुला बेशर्म..

गौतम - माँ छोटे ग़ुगु को साफ तो कर दो..

सुमन गौतम का लंड पकड़ कर अपनी साडी के पल्लू से लंड का चिपचिपापन साफ कर देती है औऱ अपनी ब्रा औऱ ब्लाउज पहनने लगती है औऱ गौतम से कहती है - अब मेरे इस छोटे ग़ुगु को अंदर तो डाल ले..

गौतम लंड अंदर करता हुआ - छोटा ग़ुगु तो नाराज़ है आपसे..

सुमन - क्यों मज़ा नहीं आया मेरे छोटे ग़ुगु को?

गौतम - मज़ा कैसे आता? अपने छोटे ग़ुगु को छाता जो पहना दिया..

सुमन गौतम कि बात पर जोर से हँसने लगी औऱ फिर गौतम से बोली - अगली बार मेरे छोटे ग़ुगु को बिना छाते के मुंह में ले लुंगी बस..

गौतम सुमन कि जांघ पर हाथ रखकर सुमन कि जांघ सहलाते हुए - माँ अपने तो मेरी आग बुझा दी.. अब मेरी बारी..

इतना कहते हुए गौतम सुमन कि साडी को ऊपर करता हुआ उसकी चुत पर हाथ लगा देता है जिससे सुमन सिसक उठती है औऱ गौतम को मना करने लगती है मगर गौतम सुमन कि बात नहीं सुनता औऱ सुमन की चड्डी के अंदर हाथ डाल कर उसकी चुत को मुठी में भर लेता औऱ मसलने लगता है..

सुमन - ग़ुगु नहीं.. छोड़ दे.. ग़ुगु.. बेटा छोड़ दे ना..

गौतम - छोड़ दूंगा माँ.. बस थोड़ी देर चुप रहो औऱ मज़े लो..

इतना कहकर गौतम सुमन की चड्डी नीचे सरका देता है औऱ उसकी चुत पर अपना मुंह लगा देता है जिससे सुमन की सिसक सिसकारियों में बदल जाती है औऱ वो गौतम के सर को पकड़ कर अब खुदसे अपनी चुत पर दबाने लगती है..

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गौतम कुत्ते की तरह सुमन की चुत चाट रहा था औऱ बिना शर्म किये सुमन की चुत फैला कर अपनी जीभ अंदर तक डाल रहा था..

सुमन भी कुछ ही मिनटों में अपनी नदी बहा देती है जिसे गौतम बिना शर्म किये अपने मुंह में भरकर पी लेता है औऱ चाट चाट कर सुमन की झांटो से भारी हुई गुलाबी चुत साफ करके अपनी सीट पर आराम से बैठ जाता है..

सुमन को तो जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था की उसके साथ अभी अभी गौतम ने क्या किया है सुमन झड़ने के बाद इतना हल्का महसूस कर रही थी जैसे हवा मैं परिंदे महसूस करते है.. सुमन शर्म से पानी पानी हो रही थी औऱ गौतम से नज़र तक मिलाने में शर्मा रही थी उसने अपनी चड्डी वापस पहनी औऱ एक नज़र प्यार से गौतम की तरह देखा.. गौतम भी प्यार की नज़र से सुमन को ही देख रहा था..

सुमन ने अब शर्म का पर्दा हटाकर गौतम के होंठों पर चिपका अपनी झांट का एक बाल अपने हाथ से हटाकर साफ कर दिया औऱ अपनी सीट से उठकर गौतम के ऊपर चढ़ गई औऱ बिना कुछ कहे उसके मुंह से लग गई..

दोनों की जापानी चुम्मा चाटी वापस शुरू हो चुकी थी जिसे गायत्री के फ़ोन ने तोड़ा..

सुमन फ़ोन उठाकर - हाँ माँ..

गायत्री - सुमन कहा है अभी तक आई नहीं..

सुमन - बस माँ रास्ते में है..

गायत्री - कहा तक पहुंची औऱ ग़ुगु भी आ रहा है ना?

गौतम फ़ोन लेकर - आधे रास्ते आ गए नानी.. मैं भी माँ के साथ आ रहा हूँ..

गायत्री - ग़ुगु.. केसा है मेरा बच्चा? नानी से भी नाराज़ है तू? कभी बात भी नहीं करता..

गौतम - नहीं नानी.. आपसे कैसी नाराज़गी.. मैं आ रहा हूँ ज़ी भरके आपसे बात करूंगा.. ठीक है?

गायत्री - आजा मेरा बच्चा.. नानी बहुत इंतजार कर रही है तेरा..

गौतम - ठीक है नानी रखता हूँ.. फ़ोन कट हो जाता है..

सुमन - अब चल यहां से ग़ुगु..

गोतम - पहले मुझे आई लव यू बोलो..

सुमन गौतम को चूमकर - आई लव यू बेटू.. अब चल ना..

गौतम गाडी को वापस हाईवे पर चढ़ा देता है औऱ दोनों दो घंटे बाद जयपुर पहुंच जाते है जहा एक रिहायशी कॉलोनी में आ जाते है..

गौतम - क्या एड्रेस था माँ..

सुमन फ़ोन दिखा कर - ये वाला..

गौतम बाहर देखकर - जगह तो बहुत महँगी लगती है..

सुमन - हाँ.. माँ बता रही थी तेरे मामा ने बहुत महँगी जमीन ख़रीदी थी औऱ घर भी बड़ा बनवाया है..

गौतम - सही है.. देखना अब मामी कैसे हर चीज की रेट बता कर हमें जलाने की कोशिश करेंगी..

सुमन - ग़ुगु तुझे मेरी कसम जो तूने किसीको यहां उल्टा सीधा कुछ भी बोला था तो..

गौतम सुमन की जांघ पर हाथ रखकर - बेफिक्र रहो माँ.. मैं किसीसे कुछ नहीं कहने वाला..

सुमन - शायद वो वाला घर लगता है ग़ुगु..

गौतम फ़ोन में एड्रेस देखकर - वही है माँ.. चलो..

 
अपडेट 18



सुमन दोनों कार पार्क करके नीचे उतर जाते है जहा गेट पर ही उनको संजय की पत्नी कोमल खड़ी दिखाई दे जाती है जो किसी डिलेवरी बॉय से कुछ ले रही होती है सुमन कोमल के पास चली आती है औऱ गौतम गाडी में सामान उतारने लगता है.

कोमल (44) सुमन को देखते ही - अरे सुमन.. तुम अब आ रही हो.. अब भी आने की क्या जरुरत थी? सीधा शादी में ही आ जाती.. कितने फ़ोन करवाए तुम्हारे भईया से, मगर तुम तो जैसे यहां ना आने की कसम खाकर बैठी हो..

सुमन - नहीं भाभी.. घर में काम ही इतना रहता है की कहीं आने जाने की फुर्सत ही नहीं रहती..

कोमल - अरे उस छोटे से पुलिस क्वाटर में कितना काम होता होगा सुमन.. तुम तो बहाने बनाने लगी हो..

सुमन - भाभी ग़ुगु का कॉलेज भी तो था.. औऱ अभी तो एक हफ्ता बच्चा है ना ऋतू की शादी को.. सब काम आराम से हो जाएगा..

कोमल - ग़ुगु आया है तेरे साथ?

सुमन - हाँ वो सामान उतार रहा है..

गौतम हाथ मे अपना औऱ सुमन का बेग लेकर कोमल औऱ सुमन के पास आ जाता है जहा कोमल देखते ही गौतम को अपनी छाती से लगा लेती है औऱ कहती है..

कोमल - ग़ुगु.. कितना बड़ा हो गया है तू.. कब से नहीं देखा तुझे.. बिलकुल चाँद सी शकल हो गई है तेरी.. सुमन क्या खिलाती हो इसे..

गौतम चुपचाप खड़ा रहता है औऱ कुछ देर बाद बोलता है..

गौतम - बॉक्स में क्या है?

कोमल - ये? ये तो मैंने शूज मांगवाए है जॉगिंग के लिए.. वो पुराने वाले एक महीने पुराने हो गए थे ना इसलिए.. (सुमन को देखकर) सिर्फ 15 हज़ार के है..

सुमन - भाभी माँ कहा है..

कोमल - अरे मैं भी ना.. आओ अंदर आओ.. ग़ुगु बेग यही रख दो.. नौकर ले आएगा.. (नौकर को आवाज लगाकर) अब्दुल.. सामान ऊपर पीछे वाले रूम रख दे.. आओ सुमन..

सुमन औऱ गौतम गायत्री से मिलते है औऱ फिर सुमन बाकी लोगों से मिलने लगती है लेकिन गौतम नौकर से कमरा पूछकर कमरे में आ जाता है..

गौतम - दूसरा बेग कहा है?

अब्दुल - भईया वो मैडम के कहने पर बगल वाले रूम में रख दिया है..

गौतम - ठीक है..

अब्दुल - कुछ लाना है?

गौतम - नहीं तुम जाओ..

गौतम रूम देखकर मन में - बहनचोद मामा ने घर नहीं महल बनवाया है.. बिस्तर तो साला ऐसा है दसवी मंज़िल से भी गिरो तो बचा लेगा..

गौतम ये सब सोच ही रहा था कि पीछे से गौतम को गौतम के मामा संजय औऱ मामी कोमल की बेटी ऋतू (24) ने ग़ुगु को आवाज दी..

ऋतू - ग़ुगु..

गौतम ने पीछे मुड़कर ऋतू को देखा औऱ चुपचाप खड़ा रहा.. उसने ऋतू से हेलो हाय करने की कोई कोशिश नहीं की, ऋतू ने कुछ देर ठहर कर आगे बात शुरू की..

ऋतू - अब तक नाराज़ है?

गौतम - मैं क्यों नाराज़ होने लगा?

ऋतू - तो फिर मुझे देखकर इतना रुखा रिएक्शन क्यों दिया? ना हाथ मिलाया ना गले लगा..

गौतम - मेरे जैसे चोर के गले लगने या हाथ मिलाने का शोक आपको कबसे होने लगा?

ऋतू - तू अब भी नाराज़ है ना.. 6 साल हो गए.. अब तक उस बात को नहीं भुला.. मुझसे गलती हो गई थी ग़ुगु.. मुझे तेरा झूठा चोरी ना नाम नहीं लगाना चाहिए था.. माफ़ नहीं करेगा..

गौतम - मैं कौन होता हूँ माफ़ करने वाला आपको.. वैसे बहुत बड़ा घर बनवाया है आप लोगों ने.. इसके एक कमरे की जगह में तो हमारा आधे से ज्यादा घर आ जाएगा..

ऋतू - मैं भाभी के साथ बाहर जा रही हूँ तू चल मेरे साथ.. तूझे शहर घूमाती हूँ..

गौतम - मुझे कहीं नहीं जाना..

ऋतू के पीछे उसकी भाभी औऱ संजय कोमल के बेटे चेतन की बीवी आरती (26) कमरे के अंदर आती हुई - ऋतू चल ना आने में देर हो जायेगी.. तुझे वैसे भी शॉपिंग में बहुत समय लगता है.. (गौतम को देखते हुए) ये सुमन बुआ का बेटा गौतम है ना..

ऋतू उदासी से - हम्म..

आरती गौतम के नजदीक आते हुए - हाय.. कितना सुन्दर चेहरा है.. पहली बार देख रही हूँ.. मेरी औऱ चेतन की शादी में क्यों नहीं आये तुम?

गौतम - मन नहीं था आने का..

आरती - इतने रूखेपन से क्यों बात कर रहे हो.. मैं कोई पराइ तो नहीं हूँ..

ऋतू - भाभी छोडो ना.. ग़ुगु सफर से आया है, थक गया होगा..

आरती - ठीक है.. ग़ुगु तू भी चल.. शादी की शॉपिंग करनी है.. तुझे जो खरीदना हो मैं दिलवा दूंगी..

गौतम - मेरे पास मेरी जरुरत का हर सामान है.. मुझपर अहसान करने की जरुरत नहीं..

आरती को गौतम का बर्ताव समझ नहीं आता कि क्यों गौतम उससे इस तरह रूखेपन औऱ परायेपन से बात कर रहा है मगर ऋतू को सब पता औऱ वो चाहती थी कि आरती गौतम से ज्यादा बात ना करें औऱ वहा से चली जाए..

ऋतू - भाभी चलो ना.. फिर आप ही बोलोगी कितनी देर लगा दी...

आरती का खिला हुआ चेहरा गौतम से बात करके थोड़ा उतर चूका था.. उसे लगा था वो गौतम के साथ हंसी मज़ाक़ औऱ हंसी ठिठोली कर सकती है औऱ देवर भाभी वाला एक मजबूत रिश्ता कायम कर सकती है मगर गौतम ने उसे अपनी दो चार बातों से ही इतनी दूर कर दिया था कि आरती वापस गौतम से बात करने में हिचक महसूस हो रही थी.. आरती ऋतू के कहने पर गौतम को अकेला छोड़कर ऋतू के साथ कमरे से बाहर आ गई औऱ अपनी सास कोमल औऱ सुमन के साथ ऋतू को शॉपिंग करवाने कार लेकर निकल पड़ी..

गौतम थोड़ी देर आराम करने के बाद अपने कमरे से निकल कर नीचे आ गया औऱ अपनी नानी गायत्री के कमरे में आ गया जहा गायत्री टीवी पर किसी सीरियल को देखते हुए उसमें ध्यान लगाए बैठी थी..

गौतम अपनी नानी के करीब आकर उसकी गोद में अपना सर रखकर लेट गया जिससे गायत्री का ध्यान टीवी से टूट गया औऱ वो गौतम के सर को सहलाती हुई गौतम को लाड प्यार करने लगी..

गायत्री - कम से कम अपनी नानी से तो मिलने आ सकता था ना ग़ुगु..

गौतम - आ गया ना नानी...

गायत्री - हाँ पुरे छः साल बाद.. एक दो साल औऱ देर करता तो नानी भगवान को प्यारी हो जाती..

गौतम - कैसी बातें कर रही हो नानी.. आप तो अभी भी जवान हो.. अभी से कहा भगवान् को याद कर रही हो..

गायत्री हसते हुए - 62 बरस की हो गई बेटा..

गौतम प्यार से गायत्री के गाल चूमकर - नानी दिखने में तो आज भी आप 22 साल से एक साल ज्यादा की नहीं लगती.. ऐसे लगता है मामी आपकी बहु नहीं सास है औऱ आप मामी की सास नहीं बहु हो..

गायत्री हस्ते हुए - तू इतनी बातें करना कब से सिख गया ग़ुगु? पहले तो बहुत चुपचाप औऱ अपने आप में रहता था अब देखो.. लग ही नहीं रहा तू मेरा पहले वाला ग़ुगु है..

गौतम - समय के साथ तो सबको बदलना पड़ता है ना नानी.. वैसे आप चाहो तो मैं फिर से वही आपका ग़ुगु बन सकता हूँ..

गायत्री - कोई जरुरत नहीं है बेटा.. सच कहु तो तू ऐसे ही हँसता खेलता ज्यादा अच्छा लगता है..

गौतम - नानी आप नहीं गई शॉपिंग पर?

गायत्री - तू तो जानता है तेरी मामी को, उसके साथ शॉपिंग पर जाने का मेरा बिलकुल मन नहीं था..

गौतम - क्यों?

गायत्री - तू तो जानता है उसका स्वाभाव केसा है.. अपनी अमीरी झाड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ती.. ऐसा लगता है हर चीज की कीमत बताने की नौकरी करती हो..

गौतम - तो क्या हुआ? उनके पास पैसे है तो वो अपने पैसो का रोब झाड़ती है.. आप भी ये सब कर सकती हो..

गायत्री - मुझे तो इन सब दिखावे औऱ ढकोसले से दूर रहने दे बेटा.. मैं तो जैसी हूँ ठीक हूँ.. मुझे तो सुमन के लिए बुरा लगता है कोमल कहीं अपनी अमीरी दिखाने के चक्कर उसका दिल ना दुखा दे.. चल छोड़ इन बातों को ये बता.. इतना खूबसूरत औऱ जवाँ हो गया है तू.. कितनी गर्लफ्रेंड बनाई तूने?

गौतम - क्या फ़ायदा नानी इस शकल.. एक भी नहीं बनी..

गायत्री - हट झूठा... सच सच बता किसी को नहीं बताऊंगी..

गौतम - सच में नानी.. मुझे कोई लड़की पटती ही नहीं है.. पता नहीं क्या कमी है मुझमे..

गायत्री - कमी.. कमी तो है ही नहीं मेरे ग़ुगु में.. सब खूबी ही खूबी है.. तू बोल मैं बनवा देती हूँ तेरी गर्लफ्रेंड..

गौतम गायत्री के गले में हाथ डालकर - नानी आप ही बन जाओ ना मेरी गर्लफ्रेंड..

गायत्री प्यार से गौतम के गाल चूमकर - तू तो बहुत चालक हो गया है.. मुझे ही फंसाने के चक्कर में है..

गौतम गायत्री के गले में हाथ डालकर - नानी अब आप हो ही इतनी ब्यूटीफुल.. मैं क्या करू?

गायत्री हसते हुए गौतम का हाथ पकड़ कर चूमते हुए - लगता है अभी से लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी तेरे लिए..

गौतम गायत्री को अपनी तरफ खींचकर गले लगाते हुए - ढूंढने की क्या जरुरत है नानी.. आप हो ना..

औऱ फिर से गायत्री के गाल पर चुम्बन कर देता है..

गायत्री को विधवा हुए 15 साल से ऊपर का समय बीत चूका था औऱ उसके बाद से उसे कभी किसी पुरुष का स्पर्श नहीं मिला था आज गौतम ने जैसे गायत्री से बात की थी औऱ उसे छुआ था उससे गायत्री

के मन में हलचल होने लगी थी औऱ उसके अंदर सालों से छुपी हुई औरत का वापस उदय होने लगा था गायत्री के साथ जिस तरह से मीठी बातें गौतम कर रहा था उससे गायत्री को अजीब सुख मिलने लगा था औऱ वो चाहने लगी थी गौतम उससे इसी तरह औऱ बातें करें..

गायत्री प्यार से - चल पीछे हट.. बदमाश कहीं का.. कुछ भी बोलता है.. बहुत बेशर्म हो गया है तू..

गौतम गायत्री को अपनी बाहों में औऱ कस लेता है - मैं तो आगे बढ़ना चाहता हूँ नानी, आप तो पीछे हटाने लगी..

गायत्री हसते हुए - न जाने तुझे मुझ बुढ़िया मैं क्या नज़र आ गया.. चल अब छोड़ मुझे कोई देख लेगा तो बात बनायेगा..

गौतम गायत्री को बिस्तर पर धकेल देता है औऱ उसके साथ खुद भी गिर जाता है औऱ कहता है - सब तो शॉपिंग गए है नानी.. हम कुछ भी करें.. हमें देखने वाला यहाँ बचा ही कौन है?

गायत्री - छी.. कैसी गन्दी बात कर रहा है तू.. छोड़ मुझे..

गौतम ने आगे कुछ भी ना बोलकर गायत्री के होंठों को अपने होंठों में भर लिया औऱ चूमने लगा.. गायत्री हैरान होकर बेसुध लेटी रही औऱ गौतम गायत्री को चूमता रहा साथ ही उसने अपना रखा हाथ गायत्री के साडी के अंदर डाल कर उसकी चुत को अपने हाथों के पंजे से पकड़ लिया औऱ मसलते हुए गायत्री की चुत में उंगलियां करने लगा जिससे गायत्री की काम इच्छा सुलग उठी.. औऱ वो भी धीरे धीरे गौतम के चुम्बन का प्रतिउतर चूमकर देने लगी..

गौतम ने पहले ही अपनी कलाई का धागा लाल होते देखकर गायत्री को अपने जाल में ले लिया था औऱ उसे भोगने की नियत से अपने आप को गायत्री के अनुरूप ढालते हुए उसके बदन को छेड़ने औऱ उससे खेलने लगा..

गायत्री की 62 साल पुरानी चुत गौतम के हाथ लगने पर 62 सेकंड में ही सुलगने लगी औऱ उसमे भारी गर्मी गौतम को अपने हाथ पर महसूस होने लगी.. गौतम ने कुछ मिनट में ही गायत्री चुत से नदी बहा दी जिससे गायत्री गौतम से लिपटकर गौतम को चूमने औऱ चाटने लगी उसे मालूम नहीं रहा की वो अपनी बेटी के बेटे के साथ ऐसा कर रही थी..

गौतम ने गायत्री के हाथ में अपना लंड रख दिया औऱ अपने हाथ से गायत्री का हाथ पकड़कर गायत्री के हाथ से अपना लंड हिलवाने लगा.. गायत्री के हाथ में जैसे ही गौतम का लंड आया वो चूमना छोड़कर एक नज़र गौतम के लंड पर डालकर उसे देखने लगी लेकिन अगले ही पल गौतम ने गायत्री के बाल पकड़ कर वापस अपने होंठों से उसे लगा लिया.. गायत्री को चूमकर उसने गायत्री को बेड पर बैठा दिया औऱ खुद फर्श पर खड़ा हो गया..

गायत्री कुछ समझ पाती इससे पहले ही गौतम ने उसके पककर सफ़ेद हो चुके बाल पकड़ कर उसके मुंह में अपने लंड का प्रवेश करवा दिया औऱ अपनी नानी गायत्री को अपना लोडा चूसाने लगा..

गायत्री के मन में उथल पुथल मची हुई थी औऱ उसके चेहरे पर रोमांच, डर, कामुकता, बेबसी, बेसब्री औऱ रिश्तो के मेले होने का दुख एक साथ झलक रहा था..

गायत्री ने गौतम के लंड को मुंह से नहीं निकाला औऱ धीरे धोरे चूसने लगी. गौतम ने भी कोई जल्दी नहीं की औऱ गायत्री को आराम आराम से लोडा चूसाने का सुख भोगने लगा..

गायत्री औऱ गौतम के बीच ये सब चल ही रहा था की उन दोनों को ऊपर से किसी के नीचे आने की आहट सुनाई दी.. औऱ गायत्री ने फ़ौरन गौतम का लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया औऱ अपनेआप को ठीक करने लगी गौतम ने भी परिस्थिति समझते हुए अपना लंड पेंट में डाल लिया औऱ कमरे से बाहर आ गया जहा उसे घर का नोकर अब्दुल दिखाई दिया जो सीधा गायत्री के कमरे की तरफ चला गया औऱ उससे बोला..

अब्दुल - चाय बना दू बड़ी मालकिन...

गायत्री - नहीं.. तू रहने.. आज मैं खुद चाय बना लुंगी..

गायत्री ये कहते हुए बेड से उठ जाती है औऱ रसोई की तरफ चली जाती है..

गायत्री की मनोदशा को बयाँ करना मुश्किल था उसे अभी अभी जो सुख गौतम ने दिया था गायत्री उसे वो भूल ही चुकी थी.. सालों से बंजर होकर पड़ी जमीन पर अकाल के बाद जैसे बारिश के पानी से पौधे खिल उठते है उसी तरह सालों से गायत्री की वीरान औऱ अकेली जिंदगी में भी आज गौतम के कारण मादकता औऱ कामुकता ने अपने बीज को बोकर पौधे में बदल दिया था..

गायत्री का एक मन उसे कोस रहा था औऱ ये समझा रहा था की वो अपने नाती के साथ कैसे इस तरह की जलील हरकत कर सकती है औऱ उसके साथ जिस्मानी सम्भन्ध बनाने का प्रयास कर सकती है.. गायत्री चाय बनाते हुए अपनेआप को बुरा भला कहे जा रही थी.. मगर गायत्री का दूसरा मन चोरी छिपे गायत्री को बहका रहा था औऱ अब्दुल को गालिया देते हुए कोस रहा था कि क्यों वो बीच में आ गया.. क्या उसे आने में देर नहीं हो सकती थी? गायत्री की काम इच्छा ने तो उसके मन में दूसरा जन्म ले लिया था औऱ उसके दिमाग में चल रही बातों ने पहले मन को हरा दिया था.. गायत्री अब गौतम के करीब जाना चाहती थी औऱ सालों से सुखी पड़ी जिंदगी को थोड़ा काम के रस से गिला कर लेना चाहती थी..

गायत्री की चाय उसकी बची हुई जवानी के साथ उबाल मार चुकी थी औऱ उसने फैसला कर लिया था.. गायत्री ने चाई एक कप में छन्नी की औऱ कप लेकर गौतम के कमरे की तरह आने लगी..

दरवाजे पर पहुंचकर एक बार गायत्री रुकी जैसे कुछ सोच रही हो फिर गायत्री आगे बढकर दरवाजे के अंदर आ गई जहा गौतम बेड पर ऐसे बैठा हुए था जैसे गायत्री का ही इंतजार कर रहा हो.. आगे कुछ पहल करने की हिम्मत गायत्री में नहीं थी इसलिए उसने चाय को बेड की साइड टेबल पर रख दिया औऱ एक नज़र गौतम से मिलाकर वापस नज़र चुराते हुए उसे चाय पिने का बोलकर वापस जाने लगी..

गायत्री ने मुश्किल से दो कदम बढ़ाये होंगे की गौतम ने बेड से उठकर गायत्री की तरफ बढ़ते हुए अपना सीधा हाथ गायत्री की कमर में डालकर उसे अपने गले से लगा लिया औऱ दूसरे हाथ से दरवाजे को कुंदी मारकर गायत्री के साथ बिस्तर में कूद गया औऱ फिर से गायत्री औऱ गौतम का चुम्बन शुरू हो गया..

इस बार गायत्री अपने पुरे मन के साथ गौतम को ऐसे चुम रही थी जैसे गौतम उसका नाती नहीं पति हो..

गौतम ने थोड़ी देर चूमने के बाद वापस गायत्री की ड्यूटी अपने लंड पर लगा दी औऱ उसे बिस्तर पर झुकाते हुए अपना लंड चूसाने लगा..

गौतम - आहहह... नानी.. दाँत मत लगाओ यार.. आहहह... बहनचोद क्या मस्त मज़े देती हो नानी अभी भी.. (गायत्री के चुचे दबाते हुए) उफ्फ्फ नानी कितनी बड़ी औऱ मस्त है आपकी चूचियाँ.. ढीली पड़ने के बाद भी कहर ढा रही है..

गायत्री गौतम की बातें सुनती हुई उसके लोडा चूसे जा रही थी औऱ गौतम की वासना अपने चरम पर आने लगी थी वो लोडा चुस्ती गायत्री को देखकर बहकने लग गया था औऱ जल्दी ही झड़ने की कगार पर भी आ पंहुचा था..

गौतम - नानी.. आने वाला है चुसो जोर से थोड़ा.. आहहह... ऐसे ही नानी... हाय... आहहह...

गौतम गायत्री के मुंह में झड़ जाता है औऱ गायत्री बिना संकोच किये उसका वीर्यपान कर लेती है फिर गौतम का लंड साफ करके जाने लगती है मगर गौतम गायत्री को वापस बिस्तर पर गिरा देता है औऱ गायत्री की चुत के दर्शन करने के इरादे से उसकी साडी पकड़ के ऊपर कमर तक उठा देता है.. वो देखता है की गायत्री ने चड्डी नहीं पहनी थी.. औऱ उसके बालों से भरी चुत साफ सामने थी जो अब हलकी काली पड़ गई थी.. गौतम ने बिना किसी झिझक के गायत्री की चुत को अपने मुंह में भर लिया औऱ चूसने औऱ चाटने लगा.. जिस तरह से गौतम गायत्री की चाट रह था गायत्री को परम सुख की प्राप्ति होने लगी थी..

गायत्री गौतम के बाल पकड़ के जोर जोर उसे अपनी चुत चटवा रही थी औऱ अब उसने भी शर्म की चादर हटाते हुए बात करना शुरू कर दिया था..

गायत्री - चाट ग़ुगु.. जोर से चाट अपनी नानी की चुत को.. 16 साल हो गए किसी ने मेरी इस चुत की चिंता नहीं की.. तू ही पहला है ग़ुगु.. चाट बेटा.. आहहह... उम्म्म्म.. अह्ह्ह्ह..

गौतम गायत्री की बात सुनकर मन ही मन मुस्काता हुआ उसकी चुत को अपने मुंह से ठंडी करने लगा.. गायत्री तो जैसे हक़ीक़त औऱ ख़्वाब के बीच कहीं आँख बंद किये प्रकृति से मिले इस अदभुद सुख को भोग रही थी..

गौतम ने गायत्री की गांड में उंगलि करते हुए चुत को चाटना जारी रखा औऱ अपनी जीभ उसकी चुत में डाल उसे चाटने लगा.. गौतम चाहता था की वो गायत्री को शर्म लिहाज़ औऱ रिश्तो के बंधन से बाहर ले आये जिसमे वो सफल भी हो चूका था..

गायत्री अब वापस झड़ने वाली थी औऱ इस बार उसने बिना किसी झिझक के गौतम के मुंह में अपना पानी निकाल दिया औऱ उसके बालों को जोर से खींच कर गौतम को अपने ऊपर लेटा लिया औऱ फिर से गौतम औऱ गायत्री चुम्बन के मीठे अहसास को महसूस करने लगे..

कुछ देर बाद गौतम चुम्बन तोड़कर गायत्री से - मज़ा आया नानी..

गायत्री - तू तो जादूगर है ग़ुगु.. मैंने आज तक ऐसा कुछ महसूस नहीं किया..

गौतम अपना लंड गायत्री की चुत पर रगढ़ते हुए - असली मज़ाक़ तो आपको चुदाई में आएगा नानी.. आप बोलो तो डाल दू अंदर..

गायत्री - नहीं नहीं ग़ुगु.. तेरा बहुत बड़ा है औऱ मेरी चुत बहुत छोटी.. मैं झेल नहीं पाउंगी बेटा..

गौतम - मैं धीरे धीरे डालूंगा नानी.. सब आपकी मर्ज़ी से होगा.. आपको पसंद नहीं आये तो मैं कुछ नहीं करूँगा..

गायत्री - ठीक है बेटा.. पर बहुत ध्यान से मेरी चुत बिलकुल सिकुड़ चुकी है..

गौतम - ठीक है नानी..

गौतम अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर गायत्री की चुत में उठेल देता है औऱ हल्का सा दबाब बनाता जिससे उसके लंड का टोपा गायत्री की चुत में घुस जाता है औऱ गायत्री की चिंख निकल जाती है औऱ वो जल बिन मछली जैसे तड़पने लगती है.. गौतम लंड का टोपा वापस बाहर निकाल लेता है औऱ गायत्री से कहता है..

गौतम - नानी सॉरी.. आप ठीक हो ना..

गायत्री - हाय मेरी माँ.. ग़ुगु मैं नहीं झेल पाउंगी बेटा.. माफ़ कर मुझे..

गौतम - कोई बात नहीं नानी.. मेरी गलती है आपके साथ ज़िद कर बैठा..

गायत्री उठकर अपने कपडे सही करते हुए - चाय ठंडी हो गई ग़ुगु.. मैं अभी दूसरी बना लाती हूँ..

गौतम पूरी बेशर्मी से गायत्री को देखकर अपना नंगा लोडा मसलते हुए - रहने दो नानी.. वैसे भी मेरा चाय पिने का नहीं सुट्टा फुकने का है..

गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर - तेरा मन नहीं भरा ना बेशर्म..

गौतम बेड से उठकर अपने सामान से भरे बेग की तरफ जाता है औऱ उसमे से सिगरेट का पैकेट औऱ लाइटर निकालकर एक सिगरेट जलाते हुए गायत्री से कहता है..

गौतम - मेरा मन तो तभी भरेगा नानी जब मेरे इस लंड से आपकी चुत पिटेगी..

गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम के नज़दीक आकर - ग़ुगु मैं अगर तेरी ये इच्छा पूरी कर पाती तो मुझे बहुत ख़ुशी होती.. पर तू समझ ना..

गौतम सिगरेट का कश लेकर धुआँ गायत्री के मुंह पर छोड़ते हुए - आज नहीं तो कल मेरी इच्छा पूरी जरूर हो जायगी नानी.. आप उदास मत हो.. बस अब आप चुत में गाजर मूली डालना शुरू कर दो.. थोड़ा बड़ा हो जाएगा आपका छेद तो मेरे लंड को घुसने में आसानी होगी..

ये कहते हुए गौतम गायत्री के कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे बैठा लेता है औऱ उसके मुंह में अपना लंड वापस डाल देता है औऱ गायत्री के बाल पकड़ कर सिगरेट के कश लेटे हुए उसे लोडा फिर से चूसाने लगता है..

गौतम अपनी नानी गायत्री को अपने सामने घुटनो पर बैठाकर सिगरेट के कश मारते हुए अपना लंड चुसवा ही रहा था की उसका फ़ोन बजने लगा..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो माँ...

सुमन - क्या कर रहा है ग़ुगु..

गौतम - कुछ नहीं माँ नानी के साथ थोड़ी सी मस्ती कर रहा था..

सुमन - अपनी नानी को परेशान तो नहीं कर रहा ना ग़ुगु तू?

गौतम - परेशान क्यों करूँगा माँ.. नानी तो अपने आप से ही मेरी हर बात मान लेती है..

सुमन - क्या कर रही है नानी..

गौतम - कुल्फी चूस रही है माँ...

सुमन - कुल्फी?

गौतम - हाँ माँ.. बाहर कुल्फी वाला आया था तो मैंने लेकर नानी को दे दी वो मेरे सामने चूस रही है बैठके...

सुमन - बेटा नानी को ज्यादा कुल्फी मत चूसाना वरना उनको ठंड लग जायेगी..

गौतम - उसकी चिंता आप मत करो ना.. मैं हूँ ना..

सुमन - अच्छा तुझे पिंक ज्यादा पसंद है या येल्लो?

गौतम - पहले बताओ क्यों पूछ रही हो? कुछ खरीद रही हो ना मेरे लिए?

सुमन - क्यों शादी में मेरा ग़ुगु जीन्स शर्ट ही पहनेगा क्या? एक सूट पसंद आया है.. जल्दी से कलर बता कोनसा लूँ?

गौतम सिगरेट का कश लेकर गायत्री के मुंह में लोडा आगे पीछे करते हुए - रहने दो माँ क्यों किसी औऱ का अहसान ले रही हो..

सुमन - अरे अहसान की क्या बात है इसमें? मैं अपने पैसो से ले रही हूँ.. तू बस कलर बता औऱ ज्यादा बात मत कर..

गौतम - ब्लैक.. पर साइज कैसे पता चलेगा आपको, सही है या नहीं?

सुमन - रोज़ अपनी छाती से लगा के सोती हूँ तुझे.. तेरी ऊपर से नीचे तक की नाप मुझे मुंह जबानी याद है..

गौतम सिगरेट का आखिरी कश लेकर - अपने लिए क्या ले रही हो?

सुमन - मेरे लिए क्या? मेरे पास तो पहले से इतना कुछ है..

गौतम - अगर अपने लिए कुछ नहीं ले रही हो तो मेरे लिए भी मत लेना.. मैं नहीं पहनूंगा समझी?

सुमन - अच्छा ठीक है मेरे शहजादे.. ले लुंगी अपने लिए भी कुछ..

गौतम - कुछ नहीं.. कुछ अच्छा लेना.. वरना मुझे जानती हो आप..

सुमन हस्ते हुए - अच्छा मेरे छोटे से ग़ुगु ज़ी.. ले लुंगी कुछ अच्छा सा.. तेरे लिए भी औऱ मेरे लिए भी..

गौतम - ठीक है आई लव यू माँ..

सुमन - लव यू मेरा बच्चा..

फ़ोन कट हो जाता है औऱ फिर गौतम दोनों हाथों से गायत्री के सफ़ेद बाल पकड़ कर उसके मुंह में लोडा जोर जोर से आगे पीछे करने लगता है जिससे थोड़ी देर बाद गायत्री के मुंह में गौतम झड़कर हल्का हो जाता है औऱ इस बार भी गायत्री बिना झिझक सारा वीर्य पी कर खड़ी हो जाती है..

गौतम - मज़ा आ गया नानी.. मुंह के साथ अलगी बात चुत भी चाहिए आपकी..




 
अपडेट 19



तुझमे मज़ा ही नहीं है बहनचोद.. हट.. तेरी शकल देखकर लंड भी खड़ा नहीं होता मेरा.. ये कहते हुए असलम बिस्तर से खड़ा हो जाता है औऱ अपने सामने टांग खोले लेटी रेशमा को दो-चार औऱ गालिया देकर साइड टेबल पर पड़ा शराब का एक पेग एक घूंट में ख़त्म करता है औऱ फिर सिगरेट सुलगा कर कश लेता हुआ कमरे से बाहर चला जाता है औऱ रेशमा चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रहती है, असलम के कमरे से बाहर जाने के बाद अपनी सलवार पहनकर बिस्तर पर अपने दोनों पैरों को साथ में जोड़ कर अपना सर अपने घुटनो में रखकर रोने लगती है..

आदिल की बहन रेशमा की शादी कुछ साल पहले असलम से हुई थी असलम औऱ रेशमा की शादीशुदा जिंदगी सही नहीं चल रही थी दोनों में प्यार था ही नहीं.. असलम बहुत शराब औऱ सिगरेट पिने का आदि थी औऱ शादी के वक़्त तक उसका लंड ढीला पड़ चूका था.. शादी के बाद कुछ महीने तो उसने ढीले लंड से ही रेशमा के साथ सम्भोग किया जिसमे हर बार रेशमा मज़बूरी में असलम के साथ ये सब करती मगर फिर असलम का लंड खड़ा होना भी बंद हो गया जिससे वो बस रेशमा से छेड़खानी ही करता उसके अलावा कुछ नहीं.. असलम भी बखूबी अपनी कमजोरी जानता था इसलिए उसने उसने अपने घरवालों के ताने मारने औऱ रेशमा को बाँझ कहने पर भी उसे शादी के चार साल बाद भी तलाक नहीं दिया औऱ रेशमा को बस एक चीज समझने लगा था.. रेशमा को शादी के बाद कभी असलम से जिस्मानी सुख नहीं मिला..

रेशमा अपना सर घुटनो में दिए बैठी थी की उसके व्हाट्सप्प नम्बर कोई massage आया जिसके नोटिफिकेशन से उसका ध्यान अपने दुख से फ़ोन की तरफ चला गया..

रेशमा ने देखा की उसके व्हाट्सप्प पर किसी अनजान नम्बर से कुछ massage आया है जिसकी DP में एक बच्चे की स्माइल इमोजी थी..

हेलो..

रेशमा ने रिप्लाई किया - कौन?

आपका आशिक..

रेशमा ने गुस्से से फ़ोन नम्बर ब्लोक करके वापस नीचे रख दिया औऱ उसी तरह बैठ गई..

कुछ देर बाद वापस रेशमा के फ़ोन पर अलग नम्बर से व्हाट्सप्प नोटिफिकेशन आया औऱ उसने इस बार जब DP देखी तो उसने देखा की उसपर गौतम की एक प्यारी सी तस्वीर लगी थी..

गौतम - हेलो..

रेशमा गौतम की तस्वीर देखकर थोड़ी हैरान हुई लेकिन फिर उसने गौतम के massage का रिप्लाई किया..

रेशमा - बोलो..

गौतम - आई लव यू..

रेशमा ने जब ये मैसेज देखा उसके दिल में अजीब सी हलचल होने लगी, उसे पहले गुस्सा आया मगर फिर उसका गुस्सा मीठी से अहसास में बदल गया.. आज तक किसीने उसे आई लव यू नहीं बोला था औऱ असलम से ये उम्मीद करना बेईमानी थी..

रेशमा कुछ पल ठहर कर रिप्लाई किया - पहले वाला massage भी तूने किया था ना? थप्पड़ खाने का इरादा है क्या? बोलू अब्बू को?

गौतम - बोल दे.. तेरी ख़ुशी के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ..

रेशमा - कमीने सुधर जा.. आदिल की बहन हूँ मैं.. औऱ तुझे मेरा नम्बर कहा से मिला?

गौतम - नम्बर तो आदिल के फ़ोन में देख लिया था.. औऱ सुधरने के लिए बिगड़ा ही कहा हूँ मैं.. बस तुमसे प्यार करता हूँ.. पहले बोल नहीं पाया तो अब बोल रहा हूँ..

रेशमा - बड़ा आया प्यार करने वाला.. 4 साल बड़ी हूँ तुझसे.. औऱ घर के सामने आकर .. जोर जोर से कबाड़ी वाले चिल्लाने में शर्म नहीं आती तुझे?

गौतम - शर्म नहीं मज़ा आता है जानू.. औऱ 4 बड़ी हो तो क्या हुआ? इतना दम है कि बिस्तर में रुला दूंगा..

रेशमा को अब गौतम से चैट करने में मज़ा आने लगा था औऱ सोच रही थी उसका दिनभर खाली पड़ा समय गौतम से बात करके आराम से गुजर सकता है..

रेशमा - बड़ा आया रुलाने वाला.. ये आशिक़ी ना कहीं औऱ जाकर झाड़ना.. मेरे पास देने के लिए सिर्फ थप्पड़ है.. खाना हो तो बताना..

गौतम - हाँ खाना है.. बताओ कहाँ आना पड़ेगा खाने के लिए?

रेशमा मुस्कुराने लगी औऱ रिप्लाई किया - लगता है तेरे घर आकर आंटी से शिकायत करनी पड़ेगी तेरी.. बहुत ज्यादा बिगड़ गया है तू.. कमीना अपने दोस्त कि बहन को ही नहीं छोड़ रहा..

गौतम - बहन छोडो मैं तो अम्मी के चक्कर में भी हूँ.. देखता हूँ मेरे दोस्त आदिल की अम्मी ज्यादा मस्त है या बहन..

रेशमा - कुत्ते तू पक्का पीटने वाला है मेरे हाथों से.. 5-6 दिन बाद जब घर आउंगी तब बताऊंगी तुझे..

गौतम - इतना लम्बा इंतजार करना पड़ेगा तुम्हारा?

रेशमा गौतम का रिप्लाई देखकर मन ही मन मुस्कुराते हुए सोचने लगी थी गौतम कैसे इतनी बेशर्मी से उससे बात कर रहा है औऱ उससे इसमें क्यों एक अजीब सुकून मिल रहा है..

रेशमा - गर्लफ्रेंड नहीं है तेरी?

गौतम - ये क्यों पूछ रही हो?

रेशमा - पहले बता है या नहीं..

गौतम - नहीं है..

रेशमा - तभी तू अपने दोस्त की बहन के पीछे पड़ा है कमीने.. चुपचाप सुधर जा वरना अच्छा नहीं होगा.. कुत्ता कमीना..

गौतम - अच्छा वरना क्या कर लोगी तुम? औऱ बार बार कुत्ता मत बोलो समझी? तुम खूबसूरत हो इसका मतलब ये नहीं कि मैं तुमसे कुछ भी सुन लूंगा..

गौतम से अपनेआपको खूबसूरत होने की बात सुनकर रेशमा के मन में गौतम के लिए आकर्षण पैदा होने लगा था औऱ वो इसमें एक ख़ुशी को महसूस कर रही थी.. उसका मन अब गौतम से औऱ बात करने का हो रहा था..

रेशमा - हो तुम कुत्ते, औऱ कुत्ते ही नहीं कमीने भी हो.. बेशर्म भी हो औऱ बेवकूफ भी.. समझें?

गौतम - रेशमा देखो मैं तुम्हे पसंद करता हूँ औऱ तुम हसीन औऱ प्यारी हो इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ भी सुनूंगा.. अब अगर मुझे कुछ बोला तो फिर देखना..

रेशमा वापस गौतम की बात सुनकर मीठे अहसास से भरी जा रही थी उसे लगने लगा था की गौतम उसके अकेलेपन को काटने का जरिया हो सकता है..

रेशमा - नहीं तो क्या करोगे? मम्मी से शिकायत करोगे मेरी.. अरे मेरा बाबू.. इतनी बात पर रोने लगा..

गौतम - ज्यादा ना मेरे मज़े मत ले.. वरना बाद में ऐसा रुलाऊंगा ना याद करेगी..

रेशमा - जाके कार्टून देख टीवी में, बड़ा आया रुलाने वाला.. शकल देखने से लगता है तू लड़का नहीं लड़की है.. प्यार करेगा मुझसे.. कुत्ता..

गौतम - अपनी माँ चुदा.. नहीं करूँगा अब massage... बार बार कुत्ता बोल रही है..

रेशमा - गाली देना भी आती है तुझे? मैं समझी अभी भी मम्मा का दूदू पिता होगा..

रेशमा को इस बार अपने massage का रिप्लाई नहीं मिला तो उसने वापस massage किया..

क्या हुआ? नाराज़ हो गया मेरा कुत्ता.. इतनी जल्दी प्यार का भूत उतर गया?

इस massage को भी गौतम ने seen करके छोड़ दिया औऱ रिप्लाई नहीं दिया..

रेशमा वापस - बोल ना कुछ अब.. अभी तो प्यार मोहब्बत की बातें कर रहा था.. अब चुप हो गया..

वापस massage को गौतम ने seen करके छोड़ दिया औऱ रिप्लाई नहीं दिया अब रेशमा हलकी सी बेचैन होने लगी थी..

रेशमा - सच में बुरा लगा? अच्छा सॉरी.. अब तो रिप्लाई कर..

गौतम ने इसे भी seen करके छोड़ दिया औऱ कुछ रिप्लाई नहीं दिया तो रेशमा गुस्से औऱ बेचानी से भर गई उसने सीधा नम्बर डायल करके गौतम को फ़ोन लगा दिया..

गौतम फ़ोन उठाके - हेलो..

रेशमा - हेलो के बच्चे.. रिप्लाई करने में उंगलियां घिस जाती हो तेरी? जवाब क्यों नहीं दे रहा?

गौतम - तूने ही तो कहा.. सुधर जा.. मैं सुधर गया.. औऱ वैसे भी मुझे बार बार खूबसूरत लड़कियों से कुत्ता सुनने का शोक नहीं है..

रेशमा - अच्छा ज़ी.. फ़ोन में घुसके ऐसा थप्पड़ मारूंगी ना होश ठिकाने आ जाएंगे तेरे.. चुपचाप व्हाट्सप्प पर बात कर मुझसे.. समझा? औऱ कुत्ता तो तू है, मैं बोलूंगी तुझे कुत्ता..

गौतम - बाद में बात करूंगा, मुझे नींद आ रही है.. सोना है..

रेशमा - सच में तू लड़की ही है.. कुत्ते.. कितने नखरे कर रहा है..

गौतम - मैं नखरे कर रहा हूँ? औऱ तू क्या कर रही है?

रेशमा - मैं करुँगी ही.. तू आया है मेरे पास, मैं नहीं आई..

गौतम - गलती हो गई मेरी जो मैं आ गया.. वापस नहीं आऊंगा..

रेशमा - वापस आने के लिए मैं तुझे जाने दूंगी तब ना.. बहुत शोक है ना तुझे अपने दोस्त की बहन पटाने का? तुझे तो मैं अपना कुत्ता बनकर रखूंगी अब..

गौतम - मुझे कोई शोक नहीं है कुत्ता बनने का, अपने शोहर को बनाना.. मुझे माफ़ कर.. सुबह बहुत काम है, सोना है मुझे..

रेशमा फ़ोन पर kiss देते हुए - उम्म्महां... सो जा मेरे कुत्ते.. सुबह बात करूंगी तुझसे..

गौतम हसते हुए - मैं नहीं करूँगा...

रेशमा किसी के आने की आहट सुनकर..

रेशमा - कोई आ रहा है.. रखती हूँ.. बाय बेबी...

रेशमा फ़ोन काट देती है औऱ बिस्तर पर उसी उदासी के साथ बैठ जाती है कि सामने दरवाजे से असलम नशे में चूर होकर लड़खड़ाते हुए आकर बिस्तर पर गिर जाता है औऱ थोड़ी देर में खराटे भरने लगता है वही रेशमा के मुंह से बेबी सुनकर गौतम को अजीब अहसास होने लगता है.. औऱ वो मुस्कुराते हुए बिस्तर में उल्टा लेट के रेशमा को याद करता हुआ मुस्कुराने लगता है..

रेशमा गौतम का नम्बर Kutta🐀򖀽𲰠नाम से सेव कर लेती है औऱ उसकी व्हाट्सप्प DP को देखते हुए कुछ सोचकर मुस्कराने लगती है फिर एक के बाद एक कई चुम्मे गौतम की तस्वीर पर कर देती है औऱ उसे अपने सीने से लगाकर मीठे सपनो में खोकर सो जाती है..

रात के साढ़े गयराह का समय हो चूका था औऱ गौतम अभी अभी रेशमा से बात करके सोने के लिए लेटा था

वही सुमन की चुत सुलग रही थी वो बिस्तर पर करवट बदलते हुए सोने की नाकाम कोशिश कर रही थी उसकी चुत ना जाने क्यों अपने आप गीली हुई जा रही थी औऱ उसके सामने आज सुबह की हसीन यादे आने लगी थी जब गौतम ने उसकी चुत को चाट कर उसकी चुत से अमृत वर्षा की थी.. सुमन का दिल वापस उसी वर्षा में भीगने को आतुर हो रहा था औऱ वो चाहती थी की गौतम उसे वापस वही सुख दे जो उसने सुबह उसे दिया था. सुमन की हालत एक ऐसी प्रियतमा की हो चुकी थी जिसे ना तो मिलन चाहिए था ना ही जुदाई.. सुमन से रहा ना गया तो वो बाथरूम में घुसकर अपनी चुत को उंगलि से ठंडा करने की कोशिश में लग गई मगर उसकी चुत में अब गौतम के मुंह का जाइका लग चूका था औऱ वो चाहती थी की गौतम उसकी सुलगती चुत को चूसकर ठंडा कर दे..

सुमन ने बाथरूम में उंगलि करनी बंद कर दी औऱ अपनी साडी को कमर से ऊपर उठाकर अपनी लम्बी लम्बी झांटो को साफ झरने में लग गई.. कुछ पलों में उसकी चुत के आस पास के सारे बाल साफ हो गए औऱ उसकी गुलाबी चुत निखर कर औऱ भी ज्यादा आकर्षक बनकर सामने आ गई.. सुमन अपनी गुलाबी चुत देखकर बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए उस पर हाथ फेरकर गौतम को याद करने लगी औऱ अब उसने गौतम से वापस अपनी चुत शांत करवाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था मगर जब उसने दिवार पर लटक रही घड़ी देखी तो कुछ असमंजस में पड़ गई.. रात के बारह बज चुके थे औऱ इस वक़्त गौतम के पास जाना उसे अजीब लग रहा था.. उसे लग रहा था की गौतम सो चूका होगा औऱ अब वो अपनी इच्छा को पूरी नहीं कर पाएगी, सुमन उदासी से वापस बिस्तर पर आ गई औऱ अपनी सुलगती हुई चुत को सहलाते हुए गौतम को याद करने लगी..

सुमन इसी तरह कुछ देर लेटी रही औऱ अपने ख्यालों में खोकर गौतम औऱ उसके बीच सुबह हुआ प्यार की पहली उपलब्धि को याद करते हुए काम की आग में सुलगने लगी.. इसी तरह लेटे लेटे आधा घंटा औऱ बीत चूका था मगर सुमन को ना नींद आ रही थी ना सुकून मिल रहा था औऱ ना ही अपनी सुलगती चुत से छुटकारा मिल रहा था.. उसने गौतम के पास जाने का वापस सोचा मगर घड़ी में समय औऱ गौतम को नींद से जगाने का ख्याल उसे रोकने लगा..

सुमन ने अपना फ़ोन उठाकर गौतम को व्हाट्सप्प पर massage करने की सोची जिससे वो पता लगा सके की गौतम जाग रहा है या नहीं.. सुमन ने व्हाट्सप्प पर गौतम को massage किया औऱ उसके रिप्लाई का इंतजार करने लगी..

गोतम अभी भी रेशमा की यादो में खोया हुआ था मगर फ़ोन पर नोटिफिकेशन बीप की आवाज सुनकर उसका ध्यान रेशमा की यादो से उचट गया औऱ उसने अपने फ़ोन को हाथ में लेकर उसमे आये सुमन के massage को देखा..

सुमन - ग़ुगु सो गया क्या?

गौतम अपनी माँ का massage औऱ घड़ी में समय देखकर समझ गया की सुमन के मन में क्या चल रहा है.. गौतम massage देखकर मुस्कुराने लगा औऱ सोचने लगा कि अब उसकी माँ सुमन भी उसके लिए तैयार है.. गौतम ने तुरंत रिप्लाई करने का ख्याल दिमाग से निकाल दिया औऱ थोड़ा इंतेज़ार करने लगा..

इधर सुमन बेसब्री से गौतम के रिप्लाई का इंतजार कर रही थी मगर जब उसे दस मिनट गुजरने के बाद गौतम का रिप्लाई नहीं मिला तो वो निराश होकर फ़ोन बिस्तर पर पटक दिया औऱ एक तकिये को अपनी छाती से लगाकर बिस्तर ओर बैठ गई औऱ नाउम्मीदी से उदास हो गई.. सुमन ऐसी बैठी ही थी कि उसके फ़ोन पर नोटिफिकेशन की आवाज हुई औऱ सुमन ने फ़ोन हाथ में कर उसमे गौतम का massage देखा..

गौतम - नहीं माँ.. आप भी नहीं सोइ अभी तक?

सुमन की सारी उदासी हवा हो गई औऱ वो ख़ुशी से भर गई सुमन ने रिप्लाई किया..

सुमन - बेटू मुझे नींद नहीं आ रही?

गौतम - मुझे भी नींद नहीं आ रही माँ..

सुमन - नई जगह है ना शायद इसलिए.. एक दो दिन में आदत लग जायेगी..

गौतम - वो भी है पर आप जानती हो मुझे आपके साथ सोने की आदत लग चुकी है..

सुमन मुस्कुराते हुए - जानती हूँ बेटू.. पर यहां साथ नहीं सो सकते.. किसीने देख लिया तो बात का बतंगड़ बना देंगे..

गौतम - सही कह रही हो माँ.. किसीने देख लिया तो सोचेंगे हमारे बीच अफेयर चल रहा है..

सुमन - बेटू..

गौतम - हां माँ...

सुमन - तेरे रूम का सामने वाला दरवाजा बंद है क्या?

गौतम - हां क्यों?

सुमन - कुछ नहीं.. मैंने भी अपने रूम का सामने वाला दरवाजा बंद कर रखा है..

गौतम - तो?

सुमन - तो मेरे ग़ुगु ज़ी.. मैं पीछे हम दोनों के रूम की कॉमन बालकनी से तेरे रूम में आ रही हूँ.. पीछे बालकनी वाला दरवाजा खुला रखना..

गौतम - आ जाओ माँ.. खुला ही है..

गौतम ने अपनी टीशर्ट औऱ लोवर निकाल दिया औऱ सुमन का इंतज़ार करने लगा.. दो मिनट बाद सुमन भी अपनी साडी निकालकर सिर्फ ब्लाउज औऱ पेटीकोट में पीछे बालकनी के दरवाजे से गोतम के रूम में आ गई औऱ दरवाजा लगा दिया..

सुमन - बेशर्म कुछ पहन तो ले..

गौतम अपनी वी-शेप चड्डी के ऊपर से लंड को मसलते हुए - चड्डी पहन तो रखी है माँ.. औऱ इतना कहकर गौतम आगे बढ़ गया औऱ सुमन को अपनी बाहों में भर लिया..

सुमन - आराम से ग़ुगु.. कितना कसके पकड़ता है तू..

गौतम - आप ना चुप रहो.. समझी? मैं कब से आपका वेट कर रहा था औऱ आपने massage किया तो रात के पौने एक बजे..

सुमन - माफ़ कर बेटू.. मुझे लगा तू सो गया होगा..

गौतम सुमन का ब्लाउज खोलते हुए - माँ आप जानती तो हो आपका दूध पिए बिना मुझे नींद नहीं आती, आपके बिना कैसे सो सकता हूँ मैं?

सुमन - सॉरी बेटू.. माफ़ कर दे.. कल से इतनी देरी नहीं करुँगी..

गौतम ब्लाउज उतार कर ब्रा खोलते हुए - कोई बात नहीं माँ.. आपके लिए सब माफ़ है..

सुमन अपनी चूचियाँ गौतम को दिखाती हुई - देख तूने इनका क्या हाल किया था सुबह.. पुरे बूब्स पर तेरे काटने से कितने निशान बन गए.. भाभी पूछ रही थी इतनी ढक कर क्यों साडी पहनी है.. अब उनको क्या बताऊ? मेरा ग़ुगु मेरे बदन पर जगह जगह काटने के निशान छोड़ता है..

गौतम सुमन के पेटीकोट के नाड़े को खींचकर खोलता हुआ - किस बेशर्म का नाम ले रही हो माँ इस वक़्त.. सच कहु तो उसकी शकल देखकर मुझे गुस्सा आने लगता है..

पेटीकोट उतरने से सुमन भी गौतम की तरह चड्डी में आ जाती है औऱ कहती है..

सुमन - ऐसा क्यों बोलता है बेटू.. मामी है तेरी, औऱ इस बार तो तुझे बहुत प्यार भी कर रही है.. देखा नहीं कैसे आते ही तुझे अपने गले से लगाया था भाभी ने औऱ तेरे लिए कितना प्यारा औऱ महंगा सूट लिया है उन्होंने.. खाने के समय भी तो अपने हाथ से तुझे खाना खिला रही थी औऱ तुझे चुम रही थी..

गौतम सुमन को बाहों में उठाकर उसके साथ बिस्तर में गिरते हुए - प्यार नहीं कर रही माँ.. मामी लेना चाहती है मेरी.. सुबह जब मेरे गले लगी थी तब उनका हाथ आपके छोटे ग़ुगु पर था.. आप तो बातों में खोई हुई थी आपको पता भी नहीं चला.. मामी ने अच्छे से मेरे लंड को दबा के मसला था औऱ उसके बाद से मेरे पीछे पड़ी हुई है.. खाने के समय भी मामी अपने पैर से मेरे पैर को रगड़ रही थी.. मैं तो बस आपके कहने पर चुप हूँ वरना मामी को ऐसा सबक सिखाऊ की याद रखे वो रंडी..

सुमन गौतम के होंठ अपनी ऊँगली से पकड़कर - ग़ुगु चुपकर.. मामी को गाली देता है.. कितनी बड़ी है तुझसे वो.. औऱ थोड़ा बहुत तुझे इधर उधर छू लिया तो क्या हो गया उसमे..

गौतम - मामी की तरफदारी इसलिए कर रही हो ना क्युकी वो अब तमीज में बात कर रही है? मुझसे बढ़कर हो गई आपके लिए मामी?

सुमन गौतम के सीने के ऊपर आकर उसे चूमते हुए बोली - अच्छा ज़ी.. बाहर जब बड़ी उम्र की औरतों के साथ मुंह काला करता है तब तुझे शर्म नहीं आती.. औऱ घर की किसी औरत ने जरा छू लिया तो गुस्सा आ गया मेरे शहजादे को..

गौतम सुमन के कूल्हे मसलकर - किसके साथ मुंह काला किया मैंने.. जरा बताओगी आप?

सुमन गौतम की चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को मसलते हुए - मेरा मुंह मत खुलवा मेरे शहजादे.. मैं सब जानती तूने किस किसको अपने लंड पर खिलाया है..

गौतम सुमन के होंठों को चूमकर - तो बताओ ना.. ऐसे पहेलियाँ क्या बुझाती हो..

सुमन गौतम के चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़कर एक लम्बा औऱ गहरा चुम्मा करते हुए - पिंकी के साथ उस रात तूने क्या क्या किया था मैं सब जानती हूँ.. उसके बाद होटल के रूम नम्बर 402 में तेरी वो टीचर क्या नाम बताया था तूने उसका माधुरी.. उसके साथ तूने जो गुल खिलाये थे वो भी मुझे मालुम है.. औऱ उस पुलिसवाली रजनी को खुलेआम जो तूने रगड़ा था ना उसका वीडियो भी मैंने तेरे फ़ोन में देखा पूरा देखा है.. इसके बाद तेरे फ़ोन में जो बुर्केवाली औरत की तस्वीरे है उसे देखकर लगता है तूने उसके साथ भी अपना ये गोरा मुंह काला किया हुआ है.. बेशर्म इतनी बड़ी बड़ी औरत के साथ मुंह काला करने के बाद अपनी सगी मामी के थोड़ा सा छूने पर मुझसे बच्चों की तरह मामी की शिकायत कर रहा है..

गौतम सुमन से ये सब सुनकर हैरान औऱ शर्म से लाल हो चूका था उसे समझ नहीं आ रहा था आगे सुमन से क्या कहे औऱ क्या करें.. सुमन गौतम के मनोदशा समझ रही थी औऱ सुमन ने ही गौतम से आगे बात करना शुरू किया..

सुमन प्यार से गौतम के चेहरे को अपनी तरफ करके - क्या हुआ मेरे शहजादे.. हो गई बोलती बंद? तेरी माँ हूँ मैं.. समझा?

गौतम - आप सब जानती हो फिर मुझसे कुछ नहीं बोली..

सुमन - क्या बोलती? वैसे भी अगर तुझे बड़ी औरत पसंद है तो इसमें क्या बुराई है? तेरी ख़ुशी के आगे तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. तुझे अगर रूपा आंटी भी पसंद है बता मैं उसे मना लुंगी तेरे लिए..

गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा.. अब मेरे लिए दलाली भी करोगी आप?

सुमन हंसकर - तेरी लिए वो भी कर लुंगी..

गौतम - मुझे रूपा आंटी पसंद है पर आप रहने दो मैं खुद ही उन्हें मना लूंगा..

सुमन के लंड को मसलते हुए - मामी अगर छोटी मोटी छेड़-छाड़ी करें तो बुरा मत मानना ग़ुगु..

गौतम सुमन के निप्पल्स मरोड़ते हुए - आप फ़िक्र मत करो.. मामी को अब मैं बताऊंगा.. औऱ ऐसा बताऊंगा की मामी जिंदगी भर याद रखेगी..

सुमन हंसकर - वैसे एक बात कहूं बेटा..

गौतम सुमन के खड़े हुए चुचक मुंह में लेकर चूसते हुए - बोलो ना माँ..

सुमन - कोमल भाभी को ऐसे पेलना कि वो ऋतू की शादी तक ठीक से चल भी ना पाए..

गौतम हँसते हुए सुमन को देखकर - आप चिंता मत करो माँ.. मामी की ऐसी माँ चोदुँगा साली शादी के बाद भी लगड़ाकर ही चलेगी..

सुमन हस्ते हुए - गाली भी कितनी प्यारी लगती है तेरे इस मुंह से..

गौतम - आप कहो आपके लिए भी दो चार गाली अपने मुंह से निकाल दू..

सुमन - तू मुझे जो गाली देना चाहे दे सकता है ग़ुगु.. पर अब मेरा एक काम कर दे..

गौतम सुमन की चड्डी में हाथ घुसाते हुए - मैं जानता हूँ माँ आप किस काम से आई हो.. मैं अभी आपको खुश कर देता हूँ.. आपने चुत के सारे बाल साफ कर दिए?

सुमन - मेरे ग़ुगु के मुंह में आते थे ना इसलिए साफ कर दिए..

गौतम - उफ्फ्फ माँ.. कितनी चिकनी हो गई आपकी चुत..

सुमन - अब मेरी चुत पर अपना हाथ ही फेरता रहेगा या अपने इन प्यार से नाजुक होंठों का कमाल भी दिखायेगा?

गौतम - माँ.. पहले 1-1 पेग हो जाए?

सुमन - नहीं ग़ुगु..

गौतम - रूपा आंटी के साथ तो मना नहीं करती आप..

सुमन - अच्छा ठीक है पर यहां शराब क्या है?

गौतम - उसकी चिंता आप मत करो मैं साथ लाया था..

सुमन - ग़ुगु तू ना बहुत कमीना हो गया है..

गौतम अलमीरा खोलकर बेग से शराब की बोतल निकालता है औऱ दो प्लास्टिक के ग्लास निकालकर दोनों का एक एक पेग बनाता है औऱ सुमन के साथ चेस करते हुए एक सांस में सुमन के साथ पेग पी जाता है..

गौतम - माँ एक औऱ..

सुमन - नहीं ग़ुगु.. अब नहीं..

गौतम - अच्छा एक शर्त लगाते है..

सुमन - क्या?

गौतम - अगर मैंने 5 मिनट में आपको खुश कर दिया तो आप एक औऱ पेग मेरे साथ पिओगी..

सुमन - ठीक है लगी शर्त..

गौतम बेड के साइड टेबल से सिगरेट का पैकेट निकालकर एक सिगरेट अपनी माँ सुमन के गुलाबी होंठों पर लगा देता है औऱ फिर लाइटर से अपनी माँ के होंठों पर लगी सिगरेट जलाकर, सुमन की चड्डी नीचे सरकाते हुए उसकी चुत पर अपने होंठ लगा देता है जिससे सुमन के मुंह से सिस्कारी निकल जाती है औऱ वो एक हाथ से सिगरेट के कश लेटे हुए दूसरे हाथ से गौतम के बाल पकड़कर गौतम का सर अपनी चुत पर दबा लेती है औऱ चुत चटाई का अतुलनीय अद्भुत अकल्पनीय सुख भोगने लगती है..

गौतम किसी कुत्ते की तरह सुमन की चुत चाटे जा रहा था औऱ सुमन सिगरेट के कश लेते हुए सिसकारिया भरती हुई गौतम को वासना की नज़रो से देखे जा रही थी.. सुमन इतनी काम की आग में जल रही थी की पांच मिनट तो दूर उसके उंगलियों में सुलगती सिगरेट आधी ख़त्म होने से पहले ही उसकी चुत ने अपना पानी गौतम के मुंह में छोड़ दिया औऱ सुमन चरम सुख को अनुभव करती हुई निढाल हो गई.. गौतम ने चुत का पानी पीते हुए अच्छे से सुमन की चुत चाट कर ऊपर आ गया औऱ सुमन के हाथ से सिगरेट लेकर एक लम्बा कश मारके सिगरेट बुझा देता है औऱ सुमन से बोलता है..

गौतम - माँ लगता बहुत देर से रोके हुए थी आप अपनेआपको..

सुमन थोड़ा रूककर बिस्तर से उठकर दोनों के लिए शराब का दूसरा पेग बना लेती है औऱ एक पेग गौतम के हाथ में दे देती है औऱ दूसरा खुद पीकर कहती है..

सुमन - तू ना बहुत गन्दा है ग़ुगु.. ऐसी बुरी आदत लगा दी है एक दिन में कि बस.. अब तो लगता है बिना अपनी चुत चटवाए नींद ही नहीं आएगी..

गौतम पेग पीकर - तो क्या हुआ माँ.. मैं हूँ ना आपके पास.. आपकी इस पगुलाबी चुत को चाट चाटकर ठंडा करने के लिए..

सुमन को नशा होने लगा था..

सुमन - आजा ग़ुगु.. मैं भी तुझे खुश कर देती हूँ..

गौतम सुमन को कंडोम देकर - लो माँ लगा दो.. मैं समझ सकता हूँ आपको blowjob देने में उल्टी आती है.. मैं जबरदस्ती आपसे कुछ नहीं करवाना चाहता..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम से कंडोम लेकर फाड़ते हुए गौतम के लंड पर लगा देती है औऱ कहती है - तेरी इन्ही प्यारी प्यारी औऱ मीठी बातों के कारण कभी कभी मुझे लगता है कि मैं तुझे अपनी चुत भी दे दूँ.. मगर फिर तेरा औऱ मेरा रिश्ता बीच में आकर मेरे मन को पिंजरे में डाल देता है..

गौतम - माँ..

सुमन - हां ग़ुगु?

गौतम - क्या मैं आपको आपके नाम से बुला सकता हूँ अभी के लिए?

सुमन मुस्कुराते हुए - हम्म.. जैसा तु चाहे..

गौतम अपने लंड को सुमन के मुंह में ड़ालते हुए - एक बात बोलू सुमन..

सुमन लोडा मुंह में लेकर चूसते हुए गौतम को देखकर - हम्म.

गौतम - मुझे पापा से जलन होती है.. कश पापा की जगह आप मुझे मिली होती.. मैं आपको कभी वो दुख नहीं देता जो पापा ने आपको दिए है.. हमेशा आपको प्यार करता औऱ खुश रखता..

सुमन मुंह से एक पल के लिए लंड निकालकर नशे में हसते हुए - अच्छा हुआ नहीं मिली वरना मैं अगर तेरे पापा की जगह तुझे मिली होती तो तू सुहागरात में ही मेरी इस छोटी सी चुत को अपने इस लंड से फाड़कर उसका भोसड़ा बना देता..

गौतम सुमन के मुंह में वापस लंड डालकर उसे लोडा चुसवाते हुए - मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा सुमन.. मुझे जगमोहन से बहुत जलन होती है औऱ उसपर हंसी भी आती है.. साले के लंड में जरा सा भी दम नहीं है मगर दोदो जन्नत की हूर जैसी बीवी रखी हुई है..

सुमन मुंह से लंड निकालकर - तू जानता है उस दूसरी बीवी को ग़ुगु.. मिला है कभी उस औरत से?

गौतम वापस लोडा मुंह में डालकर चुसवाते हुए - हां जानता हूँ सुमन औऱ मिला भी हूँ.. आप भी मिली है उससे..

सुमन लोडा चूसते चूसते - कौन है वो..

गौतम - पहले वादा करो आप गुस्सा नहीं करोगी.. सुमन लोडा चूसते हुए - नहीं करुँगी.. बता ना..

गौतम - सुमन उस रात होटल के रूम नम्बर 402 में आपने जिस औरत को मेरे साथ देखा था वो मेरी टीचर नहीं बल्कि आपकी सौतन माधुरी थी..

सुमन ये सुनकर गौतम के लंड को चूसना बंद करके उसके लंड को अपने दातो से पकड़ लेती है..

गौतम आह भरके - सुमन दर्द हो रहा है.. आह्ह.. छोडो ना सुमन..

सुमन थोड़ा औऱ अपने दातो की पकड़ गौतम के लंड पर मजबूत कर लेती है औऱ गौतम के चेहरे पर झलकता दर्द देखने लगती है..

गौतम फ़रियाद करता हुआ - माँ दर्द हो रहा है.. छोडो ना..

सुमन अपने मुंह से लंड निकालकर गुस्से से - उस डायन के साथ मुंह काला करते शर्म नहीं आई तुझे? तू जानता है उसके कारण हमें कितना दुख सहना पड़ा है.. फिर भी उसके साथ तूने सब कुछ किया..

गौतम अपने लंड को संभालता हुआ - उसका क्या दोष माँ इसमें.. पापा ने धोके से फसाया था उसे.. औऱ सच कहु तो आपसे ज्यादा गुस्सा मुझे उसपर आया था.. मगर वो भी आपकी तरह ही खूबसूरत औऱ हसीन थी.. मेरी नफरत कब प्यार में बदल गयी पता नहीं चला..

सुमन गुस्से से - मेरी तरह?

गौतम - सॉरी माँ.. आपसे थोड़ी कम..

सुमन - वो हमारे बारे में सच जानती है?

गौतम - नहीं अभी बताया नहीं उसे.. उस दिन आपके पूछने पर आपको बताया था ना शादी में लड़की मिली थी.. जिसके साथ पहली मुलाक़ात में सब हो गया था..

सुमन - वो माधुरी ही थी?

गौतम शरमाते हुए - हाँ.. पापा ने उसे घर भी दिलवाया है शहर के बीच पोश कॉलोनी में.. काफी अच्छा औऱ बड़ा है..

गौतम के लंड पर लगा कंडोम सुमन के दांतो की पकड़ से फट चूका था..

सुमन गौतम के लंड पर लगा कंडोम उतारते हुए - मुझे उससे बात करनी है.. तू कल उसे सारी सच्चाई बता देना..

गौतम - पर माँ सच्चाई जानने के बाद वो मुझे ठरकी समझेगी.. मैं पहले ही 3 दिन से उसका फ़ोन नहीं उठा रहा..

सुमन दूसरा कंडोम फाड़कर गौतम के लंड पर पहनाती हुई - वो तो तू है ही.. मैं भी तुझे कितना मासूम औऱ भोला समझती थी मगर तेरी इस भोली सी शकल के पीछे एक शैतान है..

इतना कहकर सुमन गौतम का लंड वापस चूसने लगती है...

गौतम सुमन के सर पर हाथ रखते हुए - ठीक है मेरी सुमन, जैसा आप कहो..

सुमन अब जोर जोर से औऱ पूरी मेहनत के साथ गौतम का लंड चूस रही थी उसे लोडा चूसते हुए बहुत देर हो चुकी थी मगर गौतम अपनेआप को बहुत कण्ट्रोल किये हुए सुमन को प्यार से देख रहा था औऱ blowjob का सुख ले रहा था.. सुमन पिछले 20 मिनट से गोतम के लंड को चूसकर उसका पानी निकालने की कोशिश कर रही थी मगर उसे सफलता नहीं मिल सकी थी.. गौतम समझ सकता था की सुमन का मुंह अब दर्द करने लग रहा होगा इसलिए उसने सुमन से कहा..

गौतम - माँ एक पेग औऱ बनाउ? लास्ट..

सुमन ने गौतम के लंड को मुंह से निकाल दिया औऱ हाँ में सर हिला दिया..

गौतम दो पेग बनाकर ले आया औऱ एक सुमन को देते हुए दूसरा खुद पिने लगा.. गौतम ने एक सिगरेट भी जला ली थी जिसके कश लगाते हुए वो अपने सामने घुटनो पर बैठी अपनी माँ सुमन को देख रहा था.. सुमन ने एक झटके में पूरा पेग ख़त्म कर दिया औऱ फिर वापस गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.. इस बार सुमन नशे में पूरी तरह उतर चुकी थी औऱ खुलकर गौतम का लोडा चूस रही थी गौतम चाहता तो अब अपने लंड पर से कंडोम हटाकर अपनी माँ से अपना लंड चुसवा सकता था मगर उसने ऐसा नहीं किया औऱ अपना पेग ख़त्म करके एक हाथ से सिगरेट के कश लगाता हुआ दूसरे हाथ से अपनी माँ के बाल पकड़ कर उसके मुंह में अपना लोडा तेज़ी दे अंदर बाहर करने लगा.. कुछ मिनटों बाद ही गौतम झड़ गया. सुमन गौतम के लंड पर से कंडोम उतार कर गाँठ लगाती हुई कंडोम को बेड के किनारे फर्श पर रखकर खड़ी हो गई औऱ गोतम के हाथ सिगरेट लेकर कश मारती हुई गौतम को देखने लगी गौतम भी तृप्त होकर सुमन के सामने खड़ा हुआ उसे ही देखे जा रहा था.. दोनों माँ बेटे एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे औऱ एकदूसरे को देख रहे थे..

गौतम ने कुछ देर इसी तरह खड़े रहकर सुमन के हाथ से सिगरेट लेकर बुझा दी औऱ सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचकर गले लगाते हुए चुम लिया औऱ दोनों वापस बिस्तर में गिर गए..

दोनों का ये चुम्बन बहुत देर तक चला औऱ जब टुटा तो दिवार पर लटकी घड़ी रात के दो बजने का फरमान सुना रही थी..

सुमन की आँखे नशे में होने का संकेत दे रही थी औऱ गौतम भी सुरूर में था.. मगर गौतम सुमन को उसके नशे का फ़ायदा उठाकर उसके साथ सम्भोग करना नहीं चाहता था.. इसलिए गौतम ने सुमन को अपने गले से औऱ कसके लगाते हुए प्यार से उसकी जुल्फ संवार कर उसके चेहरे को देखते हुए, सुमन के कंधे पर अपने हाथो से थपकिया देकर सुलाने की कोशिश करने लगा..

नशे में डूबी सुमन की आँख खुली हुई थी वो बस गौतम को देख रही थी.. उसका दिमाग अभी भी सब देख सुन रहा था, सुमन को अहसास हो रहा था कि कैसे गौतम उसे अपनी बाहों में भरके बच्चों की तरह सुलाने की कोशिश कर रहा था.. सुमन मुस्कुराते हुए अपनी आँख बंद कर लेती है औऱ कुछ पल बाद गहरी नींद में चली जाती है..

सुमन के नींद में जाने के बाद गौतम को अहसास होता है की उसका लंड अभी भी पूरी औकात में खड़ा था.. औऱ ऐसा होना स्वाभाविक भी था गौतम की बाहों में एक हसीन औऱ बेहद खूबसूरत औरत नंगी लेटी हुई थी भले वो गौतम की खुदकी माँ थी मगर उसके रूप ने गौतम के मन की सरहद पार कर दी थी..

गौतम सुमन को सुलाकार बिस्तर से उठ गया औऱ एक कंडोम पहनकर अपनी सोती हुई माँ के हुस्न को देखकर उसे चोदने के ख़्वाब देखता हुआ मुठ मारने लगा.. झड़ने के बाद गौतम अपनी माँ को फिर से बाहों में लेकर सो गया..

सुबह साढ़े छः बजे सुमन की आँख जब खुली तो उसने देखा की गौतम उसे बच्चों की तरह अपनी बाहों में लेकर सो रहा था. सुमन को गौतम पर रात की बात याद करके औऱ अभी सोता देखकर बहुत प्यार आ रहा था.. वो धीरे से गौतम की बाहों से निकली औऱ उठकर अपने कपडे पहनते हुए कमरे की हालत ठीक करके वापस बालकोनी से अपने कमरे में आ गई.. गौतम उसी तरह सोता रहा..

 
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