Incest चीरहरण (Completed) - Page 3 - SexBaba
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Incest चीरहरण (Completed)

अपडेट 20



सुबह नहाने के बाद जब सुमन नीचे गायत्री के पास गई तो घर औऱ शादी के काम में ऐसी उलझी की उसे गौतम से मिलने की फुर्सत ही नहीं मिली..

घर के नोकर अब्दुल की बीवी शबनम ने पहले सुमन का कमरा साफ किया औऱ फिर गौतम के कमरे में आ गई.. सफाई के दौरान जब शबनम को वीर्य से भरा हुआ रात में सुमन का गाँठ मारके रखा हुआ कंडोम मिला तो वो हैरानी से सो रहे गौतम को देखने लगी.. शबनम को लगा कि गौतम ने कंडोम में मुठ मारके गाँठ लगा कर यहां रख दिया है.. फिर उस कंडोम को कचरे में डालकर गौतम के कमरे की सफाई करके बाहर आ गई..

चाय बनते बनते सुबह के नो बज चुके थे औऱ सभी लोग नीचे बैठके शादी की तैयारियों को लेकर बातें कर रहे थे.. शबनम ने एक कप चाय का हाथ में लेकर सीढ़ियों से ऊपर जाने लगी तो पीछे से ऋतू ने उससे कहा..

ऋतू - शबनम तू कहा जा रही है..

शबनम पलटकर - ग़ुगु भईया को चाय देने..

ऋतू - मुझे दे, मैं दे आती हूँ ग़ुगु को चाय.. तू सबके लिए नास्ता बना दे..

शबनम - ठीक है दीदी..

ऋतू चाय का कप लेके ऊपर गौतम के रूम में आ जाती है जहा गौतम अब भी बेसुध सो रहा था.. ऋतू चाय बेड के ऊपर टेबल पर रख कर..

ऋतू गौतम को जगाते हुए - ग़ुगु.. ग़ुगु.. उठ जाओ.. सोते रहोगे क्या? ग़ुगु.. उठो ना..

गौतम आँखे खोल कर ऋतू को देखते हुए बेरुखी से - क्या है?

ऋतू गौतम की बेरुखी नज़रअंदाज़ करके - कब तक सोते रहोगे.. उठो ना.. चाय पिलो..

गौतम आँख बंद किये हुए ही जवाब देता है - मैं पी लूंगा, जाओ आप..

ऋतू - ग़ुगु चाय ठंडी हो जायेगी.. उठो ना..

गौतम उठते हुए बैठ जाता है..

ऋतू - कितनी देर तक सोता है.. पापा औऱ भईया से नहीं मिला ना तू.. वो कल रात औऱ अभी सुबह भी तुझे याद कर रहे थे..

गौतम चाय की एक चुस्की लेकर - मुझसे मिलकर क्या भला हो जाएगा उनका?

ऋतू गंभीर होकर - इतना भी क्या है ग़ुगु.. कल भाभी से इतनी बेरुखी से बात की औऱ अब मुझसे भी.. पता है भाभी को कितना बुरा लगा तेरी बातों का?

गौतम चाय पीते हुए - बुरा लगा तो मैं क्या करू? आप भी बुरा मान जाओ उनकी तरह..

ऋतू - तुझे ना बहुत बिगाड़ के रखा है बुआ ने अपने लाड प्यार से.. मैं कितनी प्यार से बात कर रही हूँ औऱ तू कितनी बदतमीजी से जवाब दे रहा है..

गौतम - मैंने कहा है मुझसे बात करने के लिए? मत करो.. चैन से सोने भी नहीं देते..

ऋतू - तू ना बहुत ज्यादा बोल रहा है ग़ुगु.. छोटा भाई है इसलिए तेरी बातें बर्दाश कर रही हूँ..

गौतम चाय का कप रखकर - मत करो बर्दाश्त.. वो तो माँ की ज़िद के कारण यहां आना पड़ा है वरना आता भी नहीं..

ऋतू गौतम की इस बात से उदास हो गई औऱ गौतम से बोली - मुझे लगा तू रूठा हुआ है पर तू तो नफरत करने लगा है हमसे.. तुझे नहीं पसंद तो ठीक है अब कभी बात नहीं करुँगी तुझसे..

गौतम वापस चादर ओढ़के सोते हुए - मैं किसीसे नफरत नहीं करता.. औऱ बात नहीं करोगी तो मेहरबानी होगी आपकी..

ऋतू चाय का कप जो गौतम के पिने से आधा खाली हो चूका था उठाकर कमरे से बाहर आ गई औऱ उसकी आँख से आंसू निकल पड़े जिसे उसने पोंछ लिया औऱ रसोई में कप रखकर अपने कमरे जाकर बैठ गई..

तीन घंटे बाद ऋतू की भाभी आरती ऋतू के पास आ गई औऱ उससे बोली - क्या हुआ दुल्हन? पार्लर नहीं चलना? उठो..

ऋतू - मन नहीं है भाभी आज कहीं जाने का..

आरती ऋतू की शकल देखकर - तू इतनी उदास क्यों है? किसी ने कुछ कहा है क्या? फ़ोन पर अपने दूल्हे से लड़ाई हो गई?

ऋतू - नहीं भाभी..

आरती - तो ऐसे उदास क्यों है..

ऋतू - कुछ नहीं भाभी, बस मन नहीं है बाहर जाने का..

आरती - मन को मना औऱ उठ जा दुल्हन.. पार्लर तो जाना ही पड़ेगा..

ऋतू झूठी मुस्कान होंठों पर लेकर - रुको भाभी मैं चेंज करके आती हूँ..

आरती - जल्दी मैं बाहर हूँ इंतजार कर रही हूँ..

आरती घर के बाहर आकर कार के पास खड़ी हो जाती है औऱ ऋतू का वेट कर रही होती है की गौतम नहाधो के बाहर आ जाता है गौतम ने पिंकी बुआ के गिफ्ट किये कपडे पहने हुए थे जिसमे वो किसी फ़िल्मी हीरो से कहीं ज्यादा आकर्षक औऱ स्मार्ट लग रहा था उसकी मासूम औऱ भोली सूरत उसके हट्टे कट्टे औऱ लम्बे चौड़े शारीर खिल रहा था.. आरती से गौतम को देखकर बिना उससे बात किये नहीं रहा गया औऱ जब गौतम कार की तरफ जाने लगा है तब आरती गौतम से कहने लगी..

आरती - आज किस पर बिजली गिराने का इरादा है गौतम ज़ी.. बड़े तैयार होके निकले हो.. यहां पहले दिन ही गर्लफ्रेंड बना ली क्या?

गौतम आरती औऱ उसकी बात को अनदेखा औऱ अनसुना करके कार मैं बैठ गया औऱ जैसे ही दरवाजा बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया आरती कार के गेट पर आ खड़ी हुई औऱ गौतम को देखकर मुस्कुराते हुए बोली..

आरती - बात भी नहीं करोगे आप अपनी भाभी से? इतनी बुरी तो नहीं हूँ मैं?

गौतम - आपके बुरे या भले होने से मुझे क्या मतलब? दरवाजा छोडो जाना है मुझे..

आरती मुस्कुराते हुए - अरे बड़े बदतमीज हो तुम तो देवर ज़ी.. 24 घंटे गुस्सा नाक पर ही रहता हो क्या?

गौतम - आपको समझ नहीं आती क्या? मैं नहीं करना चाहता आपसे बात.. छोड़िये दरवाजा..

आरती गौतम की बात सुनकर - जाओ नहीं छोड़ती दरवाजा... कुछ बिगाड़ लोगे अपनी भाभी का तुम? बोलो? बात करने का ढंग तो ऐसा जैसे किसी रियासत के राजकुमार हो औऱ मैं तुम्हारी दासी.. सीधे मुंह बात भी नहीं करनी आती..

गौतम - मुझे सीधे मुंह बात करनी भी नहीं आप लोगों से.. आपको नज़र नहीं आता क्या, मैं आप लोगों को पसंद नहीं करता? फिर जबरदस्ती क्यों मेरे पीछे को पड़े रहते हो.. अपने काम से काम क्यों नहीं रखते? या फिर खानदानी आदत ही खराब है आपकी?

आरती इस बार गौतम की बात से घायल हो चुकी थी उसको गौतम की बात का उतना ही बुरा लगा था जितना तीन घंटे पहले ऋतू को लगा था.. आरती गुस्से से भर गई औऱ कार का दरवाजा छोड़ते हुए बोली..

आरती - अरे ओ भिखारी.. ज्यादा ना खुदको हीरो मत समझ.. मांगी हुई गाडी में बैठकर कोई मालिक नहीं बनता.. समझा? प्यार से बात कर रही हूँ तो सर चढ़कर नाच रहा है.. खानदान पर जा रहा है.. चल निकल..

गौतम पलटकर कुछ नहीं बोलता औऱ कार का दरवाजा बंद करके वहाँ से चला जाता है जबकि गौतम के जाने के बाद आरती को महसूस होता है कि उसने गौतम से गुस्से में क्या क्या कह दिया था.. आरती को अजीब लग रहा था औऱ अपनी बातों पर पछतावा भी हो रहा था.. मगर जब ऋतू बाहर आई तो उसने इस बारे में उसे कुछ नहीं बताया औऱ उसके साथ पार्लर चली गई..

गौतम के दिल में आरती की बातें तीर की तरह चुभ चुकी थी उसे अब ऋतू के साथ आरती भी आँखों में चुबने लगी थी.. मगर गौतम ने उस बात को वही छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला किया औऱ कार को शहर के एक बड़े मॉल की पार्किंग में पार्क करके माल के अंदर आ गया फिर अपने फ़ोन में कुछ देखकर ग्राउंड फ्लोर पर ही बने एक बड़े से मार्ट में घुस गया जहा बहुत सी खाने से लेकर पहनने तक की अलग अलग चीज़े थी..

गौतम इधर उधर घूमने लगा जैसे किसी को तलाश करहा हो.. बहुत देर तक घूमने के बाद उसे एक कोने में कपडे रखती हुई एक लड़की दिखी जिसे देखकर गौतम उसके पास आ गया औऱ उसके पीछे खड़ा होकर बोला..

गौतम - मेरी साइज का कुछ मिलेगा?

लड़की ने कपडे रखना छोड़कर एक नज़र पीछे देखा औऱ बोली - क्या साइज है आपका? इतना कहकर लड़की एक टक गौतम को देखती ही रह गई..

गौतम - ज़ी एक्स्ट्रा लार्ज़..

लड़की कपडे छोड़कर खड़ी हो गई औऱ गौतम के गले लगकर गौतम से बोली - तू यहां क्या कर रहा है?

गौतम - बस आपको तलाशते हुए चले आये.. पुरे दो साल लगे है ढूंढने में..

लड़की मुस्कुराते हुए - दस मिनट में लंच होने वाला तू बाहर वेट कर मैं ये काम ख़त्म करके आती हूँ..

गौतम - पक्का?

लड़की गौतम के गाल चूमकर - पक्का मेरी जान..

गौतम बाहर चला जाता है औऱ लड़की का वेट करने लगता है साथ ही आदिल को फ़ोन करता है..

आदिल - हां रंडी.. मिल गई सलमा?

गौतम - सही एड्रेस है गांडु.. सलमा आपा यही काम करती है.. अच्छा ये बता तेरी औऱ शबाना की बात कहा तक पहुंची?

आदिल - भाई अम्मी के हॉर्न दबाने तक बढ़ गई..

गौतम - सही है मादरचोद.. साले चुचे तक तो आ गया तू.. पर जबरदस्ती तो नहीं की ना तूने?

आदिल - अरे नहीं रंडी.. अम्मी तो आगे से अपने चुचे हिला हिला कर हिंट दे रही थी..

गौतम - लगा रह गांडु फिर तो.. अच्छा बाद में बात करता हूँ.. सलमा आपा आ रही है.. गौतम फ़ोन काटकर जेब में रख लेटा है..

सलमा आकर मुस्कुराते हुए - अच्छा मुझे क्यों ढूंढ़ रहा था तू दो साल से?

गौतम - कुछ पूछना था आपसे..

सलमा - हाँ पूछो..

गौतम - यहां नहीं बाहर..

सलमा - बाहर क्यों?

गौतम सलमा का हाथ पकड़कर - चलो ना बताता हूँ..

गौतम सलमा का हाथ पकड़ कर मॉल से बाहर ले आता है औऱ पार्किंग में लाकर गाडी में बैठा देता है..

सलमा - गौतम कहा ले जा रहा है? औऱ ये कार किसकी है?

गौतम - है किसी की आपा.. आप बैठो ना.. थोड़ा घूमके आ जाएंगे..

सलमा - गौतम सिर्फ आधे घंटे का लंचटाइम है वापस आने में देर हो गई तो बहुत मारूंगी तुझे..

गौतम हसते हुए - नहीं होगी आपा आप परेशान मत हो..

गौतम गाडी को चला के एक आइसक्रीम वाले के पास रोकता है औऱ आइसक्रीम लेकर वापस गाडी चलाते हुए एक सुनसान जगह गाडी लगा देता है..

सलमा मुस्कुराकर आइसक्रीम खाते हुए - इतनी सुनसान जगह क्यों लाया है मुझे? मेरे साथ कोई ऐसी वैसी हरकत की तो तुझे बहुत मारूंगी..

गौतम मुस्कुराते हुए - ऐसी वैसी हरकत तो आप ही करती हो.. याद दिलाउ आपको?

सलमा आइसक्रीम का खाली डब्बा बाहर फेंककर मुस्कुराते हुए - मुझे सब याद है.. अब बता क्या पूछने वाला था तू? औऱ मेरा एड्रेस कैसे मिला तुझे?

गौतम - अड्रेस तो उसी गड़मरे ने लाकर दिया है जो उस दिन आपके औऱ मेरे बीच में आ गया था..

सलमा हँसते हुए - आदिल ने?

गौतम - हाँ.. पर पहले आप ये बताओ आप अचानक बिना बताये कहा चली गई थी? पता है कितना बुरा लगा मुझे?

सलमा गौतम के गाल खींचकर - अब्बू ने जल्दबाज़ी में निकाह करवा दिया था.. इसलिए जाना पड़ा..

गौतम - तो आप अब शादीशुदा हो?

सलमा - नहीं.. पिछले साल तलाक़ भी हो गया..

गौतम - क्यों?

सलमा - जिससे शादी हुई उसने किसी औऱ के चककर में मुझे छोड़ दिया..

गौतम सलमा का हाथ पकड़कर - तब भी आपने मुझसे बात नहीं की..

सलमा गौतम के करीब आकर गौतम के गाल चूमते हुए - कैसे बताती मेरी जान.. नम्बर नहीं थे ना..

गौतम - फ़ोन दो आपका..

गौतम नम्बर एक्सचेंज करके - अब से आपको कुछ भी प्रॉब्लम हो मुझे बताओगी आप.. समझी? वरना मार मार के सुजा दूंगा आपको..

सलमा हस्ते हुए गौतम के ऊपर आ जाती है औऱ उसके होंठों को अपने दांतो से खींचती हुई एक चुम्बन करके - किसे सुजाएगा मार मारके?

गौतम अपना हाथ से सलमा की चुत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगता है औऱ कहता है - इसे सुजा दूंगा आपा..

सलमा गौतम की इस बेशर्म से दंग रह जाती है औऱ उससे कहती है - हाथ हटा कमीने.. कितना बेशर्म हो गया है तू..

गौतम - अच्छा ज़ी आप करो कुछ नहीं.. मैं करू तो हंगामा?

सलमा मुस्कुराते हुए - लंच ख़त्म होने वाला है अभी टाइम नहीं इसका.. कल ऑफ ले लुंगी फिर दिनभर जो भी करना है मेरे साथ कर लेना..

गौतम - सोच लो आपा.. मैं कल कोई रहम नहीं करने वाला आपके ऊपर..

सलमा - मैं चाहती भी नहीं हूँ मेरी जान तू मुझपर रहम करें.. चल अब वापस छोड़ दे वरना मैनेजर काम से निकाल देगा..

गौतम - अभी तो दस मिनट है..

सलमा हंसकर - तो?

गौतम - तो की बच्ची.. चुपचाप किस्सी करो मुझे..

सलमा गंभीर होती हुई - शुक्रिया गौतम..

गौतम - किसलीये?

सलमा - मुझसे मिलने आने के लिए..

गौतम सलमा के होंठों को अपने होंठों से लगा देता है औऱ सलमा भी पूरी शिद्दत के साथ गौतम को चूमने लगती है..

दोनों का चुम्बन 3-4 मिनट चलता है जिसमे दोनों एकदूसरे को ऐसे चुम रहे थे जैसे खा जाना चाहते हो..

फिर सलमा चुम्बम तोड़कर कहती है - गौतम अब चल यहाँ से..

गौतम - ठीक है आपा.. पर कल मैं आपकी नहीं सुनूंगा..

सलमा गौतम के ऊपर से उतरकर अपनी सीट पर आ जाती है औऱ गौतम गाडी चलाकर वापस मॉल की तरफ आने लगता है..

सलमा - शबाना चाची का फ़ोन आया था..

गौतम - आपकी लोगों की अब तक बात होती है? वैसे क्या बोल रही थी वो?

सलमा - सब जो तू उनके साथ करके आया है.. वो भी डिटेल में..

गौतम मॉल के सामने गाडी रोककर हैरानी से सलमा को देखता हुआ - क्या..

सलमा हँसते हुए गौतम के लंड पर हाथ रखकर - क्या नहीं मेरी जान.. शबाना.. सब बताया है उन्होंने एक एक बात.. बहुत तारीफ़ कर रही थी तेरी.. बोल रही थी तेरे जैसा मर्द नहीं देखा..

गौतम - शर्म नहीं आती तुम दोनों को.. मेरे बारे ऐसी बातें करते हुए?

सलमा - तुझे शर्म नहीं आती अपने दोस्त की अम्मी को अपनी हवस का शिकार बनाते हुए?

गौतम - औऱ क्या बोला शबाना ने?

सलमा - औऱ ये बोला कि जब तक तू यहां है मैं तेरा अच्छे से ख्याल रखु?

गौतम - मतलब आपको पता था मैं यहां आपके पास आने वाला हूँ?

सलमा मुस्कुराते हुए गौतम के होंठ चूमकर - चल बाय मेरी जान..

इतना कहकर सलमा गाडी से उतर जाती है...

गौतम - अरे जवाब तो दो आपा.. आपा..

सलमा - जवाब कल मिलेगा मेरी जान..

सलमा वापस मॉल में चली जाती है गौतम गाडी स्टार्ट करके शहर घूमने लगता है.. औऱ उसे शहर घूमते घूमते शाम हो जाती है गौतम सडक के किनारे एक चाय वाले के पास बैठा हुआ था तभी उसके फ़ोन पर माधुरी का फ़ोन आता है जिसे वो कुछ दिनों से अनदेखा कर रहा था.. मगर आज गौतम ने फ़ोन उठा लिया औऱ गाडी में बैठकर बात करने लगा..

गौतम - हेलो...

माधुरी - फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा तू चार दिन से मेरा? मुझसे मन भर गया है तो साफ साफ बता दे.. साले ऐसा इंतज़ाम करूंगी कि याद रखेगा.. अब कुछ बोलेगा या मुंह बंद करके सुनता ही रहेगा तू..

गौतम - एक फोटो व्हाट्सप्प की है आपको.. देख लो.. इतना कहकर गौतम फ़ोन काट देता है औऱ माधुरी को जगमोहन औऱ सुमन के साथ अपनी फॅमिली फोटो सेंड करता है..

माधुरी जल्दी से अपना व्हाट्सप्प खोलती है औऱ फोटो देखकर चौंक जाती है बहुत देर तक वो चुपचाप उस तस्वीर को देखती रहती है उसे यकीन ही नहीं होता कि गौतम उसके पति जगमोहन की औलाद है माधुरी बिना पालक झपकाये फोटो देखती रहती है मगर फिर फोटो हटा कर गौतम को वापस फ़ोन करती है..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..

माधुरी गुस्से से - हेलो के बच्चे.. कहा है तू अभी?

गौतम - नानी के यहां आया हूँ माँ के साथ.. शादी है किसी की..

माधुरी - वापस कब आएगा?

गौतम - एक हफ्ता लग जाएगा माधुरी..

माधुरी - अब तो मुझे मेरे नाम से मत बुला कमीने.. छोटी माँ लगती हूँ तेरी.. उस रात इसीलिए तू इतने सवाल कर रहा था ना मुझसे?

गौतम मुस्कुराते हुए - सॉरी छोटी माँ..

माधुरी - सॉरी के बच्चे.. वापस आ फिर बताती हूँ तुझे तो.. शादी की पार्किंग में मेरे फ़ोन पर जगमोहन की तस्वीर देखकर सब कुछ जान गया था ना तू.. फिर भी मेरे साथ वो सब किया ना तूने..

गौतम हसते हुए - मज़ा ही इतना दे रही थी आप छोटी माँ.. कैसे रोकता अपनेआप को..

माधुरी प्यार से - जो अपनी माँ के साथ चुदाई करता है उसे पता है ना दुनिया क्या कहती है?

गौतम - पता है मादरचोद हूँ मैं.. बस अब खुश आप?

माधुरी हँसते हुए - अब बाप नामर्द हो जाए तो बेटे को ही मर्द बनकर घर की औरत को बाज़ारू बनने से बचाना पड़ता है.. इसके लिए बेटे को मदरचोद भी बनना पड़े तो कैसी शर्म?

गौतम - कोनसी सेक्स स्टोरी का डायलॉग है ये..

माधुरी - ये हमारी सेक्स स्टोरी का डायलॉग है..

गौतम - बहुत अच्छा... अच्छा छोटी माँ मैं फ़ोन रखता हूँ बाद में बात करूंगा.. माँ का फ़ोन आ रहा है..

माधुरी - अपना ख्याल रखना मेरे मादरचोद बेटे..

गौतम - आप भी अपना ख्याल रखना.. मेरी बेटाचोद छोटी माँ..

फ़ोन कट जाता है औऱ गौतम सुमन का फ़ोन उठाकर बात करने लगता है..

गौतम - हेलो..

सुमन - ग़ुगु कहा है बच्चा?

गौतम - माँ शहर घूम रहा था..

सुमन - बाकी का शहर कल घूम लेना अब घर आ जा.. खाने का समय होने वाला है..

गौतम - ठीक है माँ.. आ रहा हूँ..

गौतम फोन काटकर गाडी नानी के घर की तरफ मोड़ लेता है औऱ एक घंटे में नानी के घर पहुंच जाता है जहा गाडी घर के बाहर पार्क करके सीधा अपने कमरे में चला जाता है औऱ नहा कर एक टीशर्ट औऱ लोवर पहन लेता है.. तभी शबनम गौतम के कमरे में आकर कहती है..

शबनम - ग़ुगु भईया.. आपको मालकिन नीचे खाने के लिए बुला रहा है..

गौतम शबनम को देखकर अपनी कलाई पर बंधा धागा देखता है जो लाल हो चूका था फिर शबनम से कहता है - औऱ कौन है नीचे?

शबनम - सब है.. मालिक औऱ छोटे मालिक भी घर आ चुके है..

गौतम शबनम के बिलकुल करीब आकर - नाम क्या है तेरा?

शबनम शरमाते हुए - शबनम..

गौतम शबनम को बाहों में भरते हुए - भईया मत बोला कर मुझे.. समझी? तेरे मुंह अच्छा नहीं लगता..

शबनम शरमाते हुए - ज़ी भईया..

गौतम - फिर भईया बोल तूने?

शबनम शर्माती हुई गौतम की आँखों में देखकर - गलती से मुंह से निकल गया..

गौतम - तेरे मुंह का इलाज करना पड़ेगा..

इतना बोलकर गौतम शबनम के होंठ पर अपने होंठ लगाकर उसे चूमने लगा.. शबनम भी शर्माते हुए गौतम को चुम रही थी औऱ बेसब्री से गौतम के गले लग चुकी थी..

दोनों के बीच चुम्बन कुछ पल चला ही था की नीचे से किसी के ऊपर आने की आहट सुनकर दोनों अलग हो गए औऱ अपने आप को सँभालते हुए खड़े हो गए..

गौतम कमरे से निकलकर नीचे सीढ़ियों की तरफ आ गया जहा से शबनम का शोहर अब्दुल उसे ऊपर छत की तरफ जाता हुआ दिखा.. शबनम भी गौतम के पीछे पीछे नीचे आ गई.. गौतम ने देखा की सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए है..

संजय गौतम को देखकर - ग़ुगु.. यहां आ बेटा.. कितने साल हो गए तुझे देखे हुए.. तू तो बिलकुल बदल गया है.. मेरे पास आके बैठ..

चेतन - हाँ पापा.. पहले जब देखा था तो बिलकुल छोटा सा था अब देखो कितना बड़ा हो गया है.. बिलकुल हीरो लगता है..

कोमल - सच कहा तूने चेतन.. पता नहीं सुमन ऐसा क्या खिलाती है हमारे ग़ुगु को.. आजा ग़ुगु तू मेरे पास आके बैठ..

गायत्री - अरे सब मिलके नज़र लगाओगे क्या मेरे नाती को.. एक तो छः साल बाद आया है..

गौतम सबकी बातें सुनकर अनसुनी कर देता है औऱ सुमन के पास वाली कुर्सी पर आकर बैठ जाता है.. गौतम को सुमन के पास जाकर बैठता देखकर संजय औऱ कोमल दोनों का मुंह उतर जाता है मगर गौतम बिना किसी से कुछ भी बोले सामने रखी उल्टी प्लेट को सीधा करके चपाती औऱ सब्जी लेकर खाना खाने लगता है..

आरती औऱ ऋतू सब कुछ देख औऱ समझ रही थी मगर बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी.. गौतम ने जिस तरह अभी अभी संजय औऱ कोमल के अपने साथ बैठकर खाना खाने के प्रस्ताव को ठोंकर मारते हुए सुमन के पास बैठते हुए संजय औऱ कोमल की बेज्जती की थी उससे माहौल थोड़ा बदल गया था..

संजय गौतम से - क्या हुआ बेटा.. कुछ बोल क्यों नहीं रहे..

गौतम बिना अपने मामा संजय को देखे जवाब देता है - छाले हो रहे है मुंह में.. बोला नहीं जा रहा..

सुमन के साथ साथ ऋतू औऱ आरती गौतम के बनावटी बहाने की वजह अच्छे से जानते थे मगर अब संजय कोमल औऱ चेतन के साथ कोमल को भी गौतम के यहां पर बेमन से आने का पता चलने लगा था..

संजय या किसी औऱ ने वापस गौतम के बारे में कुछ नहीं कहा औऱ बात को किसी औऱ मुद्दे पर घुमाकर बात करने लगे औऱ खाना खाने लगे..

गौतम चुपचाप खाना खाकर बिना किसी को देखे या बात किये वापस अपने कमरे में चला गया औऱ कुछ देर अपने कमरे में रहकर फिर घर की छत पर आ गया औऱ टहलने लगा..

सबका खाना हो चूका था.. कोमल सुमन को अपने साथ लेजाकर शादी के लिए की हुई खरीददारी का सामान दिखाने लगी.. संजय औऱ चेतन बुकिंग होटल का जायजा लेने निकल पड़े था.. ऋतू अपने कमरे में अपने दूल्हे से बात करने में व्यस्त थी औऱ गायत्री टीवी देखने में.

आरती को गौतम पर गुस्सा दिन से ही चढ़ा हुआ था.. हालांकि थोड़ा सा अफ़सोस उसे अपनी बात पर भी था मगर अभी जिस तरह से गौतम ने उसके ससुर संजय औऱ बाकी लोगी के साथ बर्ताव किया था वो गौतम को फिर कुछ कड़वा सुनाना चाहती थी..

आरती गौतम के कमरे में आ गई मगर गौतम उसे वहा नहीं दिखा फिर वो गौतम को घर में इधर उधर देखने लगी.. औऱ जब आरती छत पर पहुंची तो उसे गौतम छत की दिवार पर बैठा हुआ दिख गया.. आरती गौतम की तरफ आ गई औऱ गौतम के पास बैठकर गौतम का दिल दुःखाने की नियत से बोली..

आरती - क्या देख रह है?

गौतम एक नज़र आरती की तरफ देखकर वापस सामने देखने लगता है औऱ आरती की बात का कोई जवाब नहीं देता..

आरती वापस बोलती है - बता ना? सामने इन घरों को देख रहा है क्या?

गौतम बिना आरती को देखे - हाँ..

आरती गौतम का जवाब सुनकर वापस बोलती है - देख ले ज़ी भरके.. क्युकी ऐसे घर खरीदना तो ना तेरे बाप के बस में है ना तेरे..

गौतम समझ गया था की आरती उसका दिल दुखाना चाहती है औऱ उसी के लिए यहां आई है मगर वो उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, ना ही आरती की बातों से अपनेआप को हर्ट होने देता है..

आरती की बात पर जब गौतम कोई जवाब नहीं देता तो आरती फिर गौतम का दिल दुःखाने के लिए बोलती है..

आरती - तेरा बाप पुलिस में चौकीदार है ना..

गौतम सामने देखते हुए - हवलदार..

आरती - जो भी है.. है तो छोटा सा सरकारी नोकर ही.. कितना कमा लेता होगा महीने..

गौतम उसी तरह - 35 हज़ार..

आरती हसते हुए - उससे ज्यादा तो सिर्फ मेरे पार्लर का खर्चा है महीने का.. अच्छा एक बात बता.. तेरे जैसे भिखारी के पास ये लेटेस्ट iphone कैसे आया?

गौतम - बुआ ने गिफ्ट दिया..

आरती इस बार भी हसते हुए - गिफ्ट दिया है या भीख दी है तुझे.. भिखारी?

गौतम - पता नहीं..

आरती गौतम का दिल दुःखाने का भरसक प्रयास कर रही थी मगर गौतम उसकी बात सुनकर अनसुना करते हुए सामने के खूबसूरत नज़ारे को देखे जा रहा था..

आरती को समझ नहीं आ रहा था वो ऐसा क्या बोले जिससे गौतम को बुरा लगे.. आरती ने अपनी तरफ से जो कुछ बोल सकती थी बोल रही थी.. आरती गौतम का दिल दुःखाने का प्रयास कर ही रही थी नीचे से कोमल छत पर आती हुई बोली..

कोमल - क्या बातें चल रही है दोनों देवर भाभी में?

आरती पीछे देखकर - कुछ नहीं मम्मी ज़ी.. मैं तो बस देवर ज़ी से पूछ रही थी कॉलेज में पढ़ाई कैसी चल रही है? है ना देवर ज़ी..

गौतम एक नज़र पीछे कोमल औऱ आरती को देखकर वापस उसी तरह सामने देखने लगता है..

कोमल - अरे इसमें पूछना क्या है.. हर साल अव्वल आता है हमारा ग़ुगु.. सुमन सब बता देती है.. हर चीज में फर्स्ट है..

आरती - वो तो देवर ज़ी को देखने से ही लगता है.. अच्छा मम्मी ज़ी.. कल जो आपने देवर ज़ी के लिए सूट लिया था मुझे पसंद नहीं आया..

कोमल - क्यों? अच्छा तो है पुरे 32 हज़ार का.. सुमन औऱ ऋतू को भी पसंद आया था..

आरती - पर मम्मी ज़ी सिर्फ 32 हज़ार का ही था.. मेरे एकलौते देवर ज़ी के लिए तो लाखों का सूट लेना चाहिए था..

कोमल - तू ही जाके लेले अपने लाडले देवर के लिए जो तुझे लेना है.. किसने रोका है? अच्छा मैं नीचे जाती हूँ.. ये कम्बख्त अब्दुल कहा मर गया..

कोमल के जाने के बाद आरती गोतम से - बता भिखारी कुछ चाहिए तो? कीमत की चिंता मत कर.. तेरे बाप की तरह हवलदार नहीं है यहां कोई.. मैं तो खानदानी अमीर हूँ..

गौतम दिवार से उठकर आरती के बिलकुल सामने खड़ा हो जाता है औऱ मुस्कुराते हुए कहता है..

गौतम - आपके कुछ भी बोलने से मुझे फर्क नहीं पड़ने वाला.. माँ ने अपनी कसम दी थी आने के लिए इसलिए यहां आना पड़ा.. औऱ रही बात उस सूट की तो मैं पहनना तो छोडो.. थूकू भी ना, तुम लोगों की दी हुई किसी चीज पर..

आरती गुस्से से - अबे साले भिखारी.. औकात मत भूल अपनी.. बड़ी बड़ी बातें करने से कोई बड़ा नहीं बन जाता.. हालत भिखारीयों वाली बातें नवाबो की..

गौतम मुस्कुराते हुए - कुछ सालो पहले आपके पति की मुझसे ज्यादा खराब हालत थी पूछना कभी फुर्सत में उनसे.. आपकी प्यारी ननद ने तो मेरा चोरी तक नाम लगा दिया था.. ये तो बताया होगा किसीने आपको..

आरती भी मुस्कुराते हुए - उस बेचारी की क्या गलती.. तू शकल से चोर लगता है ना इसलिए लगाया होगा..

गौतम आगे कुछ नहीं बोलता औऱ नीचे जाने के मुड़ जाता है तभी आरती कहती है..

गौतम - क्या हुआ? बुरा लगा मेरे प्यारे देवर ज़ी को?

गौतम मुड़कर मुस्कुराते हुए एक नज़र आरती को देखता है औऱ फिर नीचे अपने कमरे में आ जाता है..

आरती ने अपनी बातों से हर कोशिश की थी गौतम का दिल दुःखाने की मगर इस वक़्त उसका अपना दिल दुखने लगा था.. उसे लग रहा था जैसे उसके शब्दों से ज्यादा कड़वी औऱ नोकिली गौतम के होंठों की मुस्कान थी.. आरती भी कुछ देर बाद नीचे आ गई..

गायत्री के कमरे में महफिल सजी हुई थी गौतम को छोड़कर सभी लोग वहा मोज़ूद थे औऱ हंसी मज़ाक़ कर रहे थे.. आज सारी रात यही बैठके बिताने का प्लान था कभी फ़िल्मी गानो पर सब झूमते तो कभी क़िस्से कहानियो में खोकर खूब जोर से हँसते..

सुमन भी यहां बैठी हुई ख़ुशी से नाच गा रही थी.. उसने गौतम को आज के इस प्रोग्राम की जानकारी दे दी थी.. औऱ गौतम भी अपने कमरे में रेशमा से बहुत देर तक चैटिंग करके अब सो चूका था..

सुबह 4 बजे तक सबका नाच गाना यूँही चलता रहा औऱ फिर कई लोग थक्कर सो गए जिनकी नींद 9 बजे खुली.. शबनम चाय बना चुकी थी औऱ कुछ लोगों को छोड़कर सब चाय पीते हुए बाते करहे थे.. आने वाले मेहमानो को सीधा वेडिंग होटल के कमरों में पहुंचाया जा रहा था.. आरती एक चाय का कप उठाकर गौतम के रूम में आ गई जहा गौतम नहाकर कपडे पहने के बाद अब अपने जूते पहन रहा था..

आरती रूम में आते हुए गौतम के सामने चाय का कप रखकर - इतना सजधज के कहा जा रहा है?

गौतम - भिखारी के लिए कब से चाय लेकर आने लगी आप.. औऱ रात को पेट नहीं भरा.. सुबह भी आ गई..

आरती - क्या करू? अब तो बिना तुझे बेज्जत किये मेरा मन ही नहीं भरता..

गौतम जूते पहनकर - ठीक है फिर जल्दी मन भर लो.. मुझे जाना है..

इतना कहकर गौतम अपने बाल सही करने लगा औऱ फिर जीन्स पर बेल्ट लगाने लगा..

आरती - तू बताएगा क्या मुझे कब क्या करना है? अपनी मर्ज़ी से तुझे बेज्जत करुँगी तेरे कहने पर नही..

गौतम बेल्ट लगाकर कमरे से बाहर जाने लगता है कि

आरती गेट के सामने आ जाती है..

आरती - तुझे अपने मामा-मामी से, चेतन से ऋतू से मुझसे हम सबसे जलन होती है ना..

गौतम - हां होती है.. देखो मैं तो झलकर काला पड़ गया.. अब सामने से हटो.. मुझे बाहर जाना है..

आरती गौतम के बिलकुल करीब आती हुई - अगर नहीं हटू तो? कुछ बिगाड़ लोगे मेरा?

गौतम - भाभी दूर हटो..

आरती - अरे वाह.. पहली बार भाभी बोला तूने मुझे.. पहले पता होता तो इतनी दिल दुखने वाली बातें तो ना करती तुझसे..

गौतम - आपसे किसने कहा आपकी बातों से मेरा दिल दुखा है..

आरती गौतम के गले लगकर - मतलब तू जानता था मैं सिर्फ तेरा दिल दुखने के लिए वो सब कड़वी बातें बोल रही थी.. पता है कितना बुरा लग रहा था मुझे तुझसे वो बातें बोलकर.. तूने ऋतू को भी कितना उदास किया है.. बेचारी का कल से मुंह उतरा हुआ है..

गौतम आरती को खुदसे अलग करते हुए - हटो कहीं जाना मुझे..

आरती - कहा जाना है? औऱ इतना तैयार हुआ है पक्का किसी लड़की से ही मिलने जा रहा होगा..

गौतम - आपसे मतलब? आपके पास औऱ कोई काम नहीं है क्या?

आरती फिर से गौतम के गले लगते हुए - नहीं है..

गौतम - इतना क्यों चिपक रही हो भाभी.. छोडो ना..

आरती - पहले बता जा कहा रहा है तू?

गौतम - कहीं नहीं बस शहर घूमने जा रहा था..

आरती - चल मैं घुमाती हूँ तुझे शहर..

गौतम - मैं खुद घूम लूंगा, आप हटो..

आरती - मन नहीं कर रहा हटने का.

गौतम - भाभी अपने पति के जाकर लिपटो.. मुझे छोड़ दो..

आरती गौतम को छेड़कर हस्ते हुए - चेतन में कोई मज़ा नहीं है देवर ज़ी.. मुझे आपके जैसा चिकना खूबसूरत औऱ प्यारा मर्द चाहिए.. जैसे साली आधी घरवाली होती है वैसे देवर भी आधा घर वाला होता है.. थोड़ी बहुत मस्ती तो कर ही सकती हूँ तेरे साथ..

गौतम - सुबह सुबह मैं ही मिला हूँ क्या आपको..

गौतम इतना कहकर आरती को अपने से दूर हटाते हुए कमरे से बाहर आ जाता है और आरती पीछे से मुस्कुराते हुए कहती है.. वापस जब आओगे तब बताऊंगी तुम्हे देवर ज़ी.. मैं नहीं छोड़ने वाली तुम्हे.. गौतम अपनी कर लेकर घर से निकल जाता है..

गौतम ने शहर के एक अच्छे होटल में ओयो रूम बुक किया था जहां वह सलमा को रास्ते से पिकअप करके आ जाता है. आज सलमान ने कम से छुट्टी ले ली थी और वह जानती थी क्या आज गौतम और उसके बीच कोई नहीं आने वाला. सलमा गौतम पर पूरी तरह से लट्टू थी और गौतम भी सलमा को भोगने की नीयत से आज उसे अपनी बाहों में लेकर चूम रहा था.

सलमा गौतम इस तरह से एक दूसरे को चूम रहे थे जैसे उनका मिलन अधूरा रह गया हो वो जल्द से जल्द उसे पूरा कर लेना चाहते हो. आज सुबह बहुत आकर्षक और सुंदर लग रही थी उसने जो सिंगार किया था गौतम उसे देखकर पूरी तरह से काम भावना में डूब चुका था और सलमा को अपनी बाहों में भरकर उसके रसीले होठों का स्वाद ले रहा था. सलमा भी पूरे मन से गौतम को अपनी बाहों में कस्टे हुए उसके होठों से अपने होंठ लगाए हुए उसे चूम रही थी और ऐसे चूम रही थी जैसे उस चूमकर अपना बना लेना चाहती हो.

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गौतम चंदन के दौरान सलमा के बाद उनके उतार-चढ़ाव को अपने हाथों से महसूस कर रहा था और उसे अनुभव कर रहा था. सलमा की छाती पर उगे हुए संतरे काफी बड़े आकार के थे जिसे गौतम अपने हाथों से बार-बार दबाते हुए सलमा को काम भावना में डूबा रहा था. सलमा की चुंबन के दौरान गौतम के शरीर को अपने हाथों से तलाश रही थी और तराश रही थी. दोनों का संबंध लगातार चलता जा रहा था और इसमें दोनों कोही काम सुख की प्राप्ति हो रही थी इसी बीच दोनों एक दूसरे के पतन को अपने हाथों से हर जगह छूते हुए एक दूसरे को काम की भावना से ओतप्रोत होकर पाने की इच्छा रखते हुए अपने में समाने की भावना से भरते हुए चूम रहे थे.

गौतम ने चुंबन तोड़ते हुए सलमा की कमर में हाथ डालकर उसे दीवार से चिपका दिया और उसकी छाती पर उगे हुए संतरों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए सलमा से पूछा..

गौतम सलमा की कुर्ती उतारते हुए बूब्स मसलकर - आपा ये तो पहले से दुगुने लग रहे है.. लगता है बहुत मेहनत हुई है इन पर..

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सलमा गौतम की शर्ट निकालती हुई - मेहनत तो बहुत हुई है गौतम सिर्फ ऊपर ही नहीं नीचे भी.. पर मेरी मर्ज़ी से पहली बार होगी..

गौतम सलमा की ब्रा खींचते हुए - फ़िक्र मत करो आपा.. आज कोई मादरचोद बीच में नहीं आने वाला.. उस दिन का अधूरा काम मैं आज पूरा कर दूंगा..

सलमा घुटनो पर बैठकर गौतम की जीन्स खोलते हुए - मैं तो कब से इस मोके का इंतजार कर रही थी गौतम.. कल की रात मैंने कैसे निकाली है क्या कहु..

गौतम सलमा के बाल पकड़कर अपनी चड्डी नीचे सरकाते हुए - सब्र का फल नमकीन होता है सलमा आपा.. लो टेस्ट करो.. ये कहते हुए गौतम ने अपना हथियार सलमा के मुंह में डाल दिया और सलमा आंखें फाड़ कर सिर्फ गौतम के हथियार को देखने लगी जो इस वक्त आधा उसके मुंह में घुसा हुआ था.

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गौतम ने सलमा को रिएक्ट करने का कोई मौका नहीं दिया और सीधा उसके मुंह में अपना हथियार डालकर अपना हथियार सलमा से चूसाने लगा. सलमा भी हैरानी से चकित होकर सोच में पड़ गई कि गौतम का हथियार इतना बड़ा कैसे हुआ और वह यही सोचते हुए गौतम का हथियार चूस रही थी. गौतम तो बस सलमा की सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसके मुंह में अपना हथियार जोर-जोर से आगे पीछे कर रहा था औऱ इस पल का आनंद उठा रहा था.

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गौतम ने कुछ देर बाद अपना सारा वीर्य सलमा के मुंह में छोड़ दिया और सलमा उसे पीती हुई हांफ कर उसी तरह बैठी रही..

गौतम अपने लंड को साफ करता हुआ सलमा से थोड़ा सा दूर हो गया और बेड पर बैठ गया सलमा अपने घुटनो से खड़ी होकर अपने पैरों पर आ गई और मुस्कुराते हुए अपने होंठो को साफ कर गौतम से बोली..

सलमा - तू तो पहले से बड़ा हो गया है गौतम..

गौतम - तेरा भी साइज़ दुगुना हो गया है आपा.. सच बताओ किस किस ने मेरी सलमा पर मेहनत की है.

सलमा गौतम के करीब आकर अपने सलवार का नाड़ा उसके हाथ में देती हुई - छोड़ ना गौतम.. अब किस किस नाम बताऊ तुझे? औऱ ये मुझे आपा मत बोल अब से सिर्फ सलमा..

गौतम नाड़ा खींचकर सलवार नीचे कर देता है औऱ सलमा को अपने ऊपर गिरा लेता है औऱ कहता है - तू मेरी पहली मोहब्बत है सलमा.. औऱ मुझे जानने का पूरा हक़ है कि मेरी पहली मोहब्बत कहा कहा किस किस से चुद चुकी है..

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सलमा गौतम के ऊपर से उठ जाती है एक सिगरेट जलाकर कश मारती हुई गौतम से कहती है - गौतम क्या बताऊ तुझे.. मुझे सबसे पहले घर में अब्बू ने ही गन्दा कर दिया था.. जवानी जब अठरा साल पर पहुंची तो अम्मी का इन्तेकाल हो गया औऱ उसके बाद अब्बू ने मुझे कई बार गन्दा किया.. रोज़ नशे में रात रातभर मेरे ऊपर चढ़कर अब्बू अपनी हवस मिटाते थे.. ऐसा लगता था मैं उनकी बेटी नहीं बीवी हूँ..

गौतम सलमा का हाथ पकड़कर अपनी बाहों में जकड़ लेता है, उसे पीठ के बल बिस्तर में लेटा कर उसकी ब्रा उतार देता है औऱ सलमा के गोरे चुचो पर कड़क होकर खड़े हुए सलमा के काले चुचक अपने में लेकर चूसते हुए पूछता है..

गौतम - अब्बू के बाद?

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सलमा सिगरेट का कश लेकर गौतम को अपने चुचे चुसवाते हुए - जब अब्बू का मुझसे मन भर गया तो उन्होंने दूसरी शादी कर ली औऱ मेरा निकाह जावेद से करवा दिया.. सुहागरात को जब जावेद मेरे ऊपर चढ़ा तो उसे पता चल गया की मैं कुंवारी नहीं हूँ.. उसके बाद से वो हर बार मुझसे लड़ाई झगड़ा करता औऱ अलग अलग लड़कियों से बात करता आखिरी में उसने किसी औऱ जे चक्कर में मुझे तलाक दे दिया..

गौतम सलमा की चड्डी में हाथ डालकर उसकी चुत पकड़कर मसलते हुए - जावेद के बाद?

सलमा सिसकि लेकर सिगरेट का अगला कश लगाते हुए - जावेद से तलाक के बाद तो जैसे झड़ी लग गई लोड़ो की मेरी चुत में.. पहले रहने के लिए कमरा दिलाने वाला दलाल क़ासिम फिर कमरा देने वाला सोहन उसके बाद नौकरी दिलाने वाला राकेश औऱ अखिर में मेरा मैनेजर नीलेश.. एक बाद एक सबने मेरी इस चुत को अपनी मनमर्ज़ी से चोदा.. गांड को भी सलामत नहीं छोडा किसीने..

गौतम अपने मुंह से सलमा का चुचक निकालकर - मतलब मेरी मोहब्बत को कोठे की रांड समझकर मेरे अलावा सबने चोदा है.. तलाक़ के बाद वापस अब्बू के पास भी तो जा सकती थी..

सलमा - वहा जा कर कोनसी बच जाती वहा भी जाकर चुदना ही था..

गौतम हसते हुए - आदिल के साथ जब शराब लेने ठेके गया था तब तेरे अब्बू को देखा था मैंने.. उसने जिससे निकाह किया था वो लड़की अपने आशिक के साथ भाग गई.. तेरा अब्बू तो अब अकेला घर में हिलाता होगा अपना.. सुना है तेरे तलाक़ के बाद तेरा पता भी लगाने की कोशिश की थी उसने..

सलमा सिगरेट बुझाते हुए - मुझे ढूंढ़कर क्या मिलेगा अब्बू को..

गौतम - क्या पता तेरी वापस याद आ रही हो उसे.. एक बार जाकर मिल लो..

सलमा - मुझे किसी से नहीं मिलना..

गौतम सलमा की चुत पर आते हुए - तेरी मर्ज़ी..

ये कहते हुए गौतम सलमा की जांघों के जोड़ पर अपना मुंह लगा देता है और उसकी चुत को चाटने लगता है..

सलमा गौतम के बाल पकड़कर उसे अपनी चुत चटाते हुए - अह्ह्ह्ह... गौतम.. उफ्फ्फ.. मेरी जान..

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गौतम अपने पूरे अनुभव और प्रयास के साथ सलमा की जांघो के जोड़ पर अपना मुंह लगते हुए उसे चूस और चाट रहा था जिसमें सलमा को कामसुख की प्राप्ति हो रही थी और उसके सिसकी आप कमरे में गूंजने लगी थी.. सलमा से रहा ना गया और उसने थोड़ी सी चुसाई के बाद ही अपना पानी गौतम के मुंह पर छोड़ दिया औऱ अपने हाथ से कपड़ा लेकर गौतम का मुंह साफ करने लगी..

गौतम - बता तो देती यार.. पुरे मुंह को नहला दिया तूने..

सलमा हस्ती हुई - सॉरी मेरी जान.. तूने इतनी प्यार से किया की मुझसे रहा ही नहीं गया.. ला मैं साफ कर देती हूँ..

गौतम का मुंह साफ करने के बाद शर्मा गौतम के ऊपर चढ़ गई और उसपर चढ़ते हुए उसका लंड अपनी चुत में सेट करके घुसा ने लगी मगर वह तुमने उससे ऐसा करने से रोक दिया और उससे कहा..

गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है सलमा.. पहले मुझे तेरा वही डांस देखना है जिसके कारण मुझे तुझसे मोहब्बत हुई..

सलमा मुस्कुराते हुए - कोनसा डांस गौतम..

गौतम - वही जो तूने आफरीन के निकाह में किया था.. उसी गाने पर.. मैं सोंग प्ले करता हूँ..

गौतम उठकर सामने लगी हुई होटल की टीवी में अपना फोन कनेक्ट करके एक गाना प्ले करता है और सलमा जो की नंगी बिस्तर पर बैठी थी वह सामने आकर नाचने लगती है..

मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं

थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं

थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

मिलन होगा अभी एक रात की दूरियां है

मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं

थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

गौतम नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ अपने लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाता हुआ अपने सामने नाच रही नंगी सलमा के हिलते चुत्तड़ औऱ चुचे देखकर कामुक हो रहा था.. सलमा बिना किसी शर्म लिहाज़ के गौतम के सामने नंगी अपने चुचे और अपने चूतड़ हिलाकर गाने की धुन पर ऐसे नाच रही थी जैसे वो कोई हीरोइन हो बॉलीवुड की..

लम्बी लम्बी ते काली काली रातों में

काहे चूड़ियां खनकती है हाथों में

लम्बी लम्बी हो लम्बी ते काली काली रातों में

काहे चूड़ियां खनकती है हाथों में

ना आना तू निगोड़ी चूड़ियों की बातों में

लम्बी लम्बी ते काली काली रातों में

सलमा का नाच देखकर गौतम खड़ा हो जाता है औऱ अपना खड़ा लंड लेकर सलमा के साथ हल्का सा ठुमका लगाते हुए नाचने लगता है..

ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया

मैं नइ जाना नइ जाना तेरे साथ मुंडेया

ले जा वापस हो ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया मैं नइ जाना नइ जाना तेरे साथ मुंडेया

सतायेगा जगायेगा तू सारी रात मुंडेया

गौतम सलमा को अपनी बाहों में भरके बिस्तर पर पटक देता है औऱ उसके ऊपर चढ़ता हुआ सलमा के गर्दन औऱ चुचे चूमने लगता है.. मगर सलमा गौतम को पलट देती है, उसके ऊपर चढ़ जाती है औऱ काऊगर्ल पोजीशन में बैठके गाने के हूबहू भाव अपने चेहरे पर लाकर गौतम को देखते हुए गाने की धुन के साथ हल्का नाच दिखाते हुए अपने चुचे पकड़कर गाती है..

मेरे दर्जी से आज मेरी जंग हो गई

कल चोली सिलाई आज तंग हो गई

करे वो क्या तू लड़की थी अब पतंग हो गई

तेरे दर्जी से आज तेरी जंग हो गई

सलमा इसके आगे गौतम के दोनों हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख लेती औऱ आगे गाने के साथ गाती हुई गौतम के साथ पलटने लगती है..

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मेरे सैयां किया ये बुरा काम तूने

कोरे कागज पर लिख दिया नाम तूने

कहीं का भी नहीं छोड़ा मुझे है राम तूने

मेरे सैयां किया ये बुरा काम तूने

मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है मिलन होगा अभी एक रात की दूरियां है मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं

थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

गौतम गाना ख़त्म होने के साथ ही सलमा को पलट देता है औऱ मिशनरी में आते हुए एक झटके में अपना लहंद सलमा की चुत में घुसाकर उसके होंठो को अपने होंठों में गिरफ्तार करते हुए सलमा की चुदाई शुरू कर देता है.. सलमा की खुली हुई चुत में गौतम का लंड खलबली मचाता हुआ चला गया था औऱ पहले झटको में ही सलमा इसे समझ गई थी आज उसकी चुत भोसड़ी में बदल जायेगी..

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सलमा हर झटके पर आहे भरते हुए गौतम को अपने अंदर खींचने लगी थी औऱ उसके होंठों से होंठ लगाकर मुंह का रसपान करते हुए अपनी चुदाई का वो सुख भोग रही थी जो उसे पहली बार अपनी मर्ज़ी से मिल रहा था.. सलमा को अच्छे से पता था की अब उसकी चुत चुत नहीं भोसड़ा बनने वाली है..

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मिशनरी के बाद घोड़ी बनकर सलमा गौतम के आगे झुकी हुई थी औऱ गौतम अपने चुदाई कला से सलमा को जीतने में लगा हुआ था औऱ इसमें उसने सफलता भी पा ली थी..

गौतम सलमा के बाल पकड़ कर उसे ऐसे चोद रहा था जैसे वो कोई दो टके की रंडी हो.. सलमा चुपचाप चुदाई का मज़ा लेटे हुए गौतम की हर बात माने जा रही थी..

गौतम ने सलमा का एक पैर हवा में उठा कर अपने कंधे पर ले लिया औऱ फिर उसका एक हाथ पकड़ के बिस्तर पर आड़ा पटक के चोदने लगा..

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सलमा बस आहे भरने औऱ सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर रही थी ऐसी चुदाई उसकी आज तक नहीं हुई थी औऱ अब उसे गौतम से इश्क़ हो चूका था.. सलमा गौतम को देखते हुए उससे चुदवा रही थी औऱ उसकी आँखों में गौतम के लिए अब प्यार औऱ परवाह झलकने लगी थी..

गौतम ने थोड़ी देर इसीलिए तरह सलमा को चोदकर उसे अपने ऊपर ले लिया औऱ नीचे से झटके मारते हुए चोदने लगा

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सलमा दो बार झड़ चुकी थी मगर अब भी चुदाई चालू थी सलमा की कामुकता उफान पर..

सलमा - गौतम तू तो कमाल है.. उफ्फ्फ... आज तो हलात ही ख़राब कर दी तूने..

गौतम - पहली मोहब्बत है तू सलमा.. मेरा लंड तो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा..

सलमा - चोद गौतम.. आहहह..

गौतम ने सलमा को गोद में उठाकर अच्छे से चोदते हुए अपना माल सलमा की चुत में भर दिया औऱ उसे kiss करता हुआ बोला..

गौतम - लोग कहते है किसीको अपनी पहली मोहब्बत नहीं मिलती.. गलत कहते है साले.. मुझे आज मिल गई..

सलमा - अपनी चुदी हुई मोहब्बत पाकर तू इतना खुश है.. काश मैं अपनी पहली चुदाई तेरे साथ कर पाती..

गौतम - पुरानी बातों को भूल जा सलमा औऱ अब से अपना ये खज़ाना किसी औऱ को मत देना..

सलमा - तू जैसा कहेगा वैसा ही करुंगी मेरी जान..

गौतम - मेरी माने तो सलमा तू वापस अपने अब्बू के पास चली जा.. वहा तेरा अपना घर है.. इस तरह रहने की क्या जरुरत?

सलमा - पर गौतम.. अब्बू..

गौतम - अपने अब्बू से बोल घर बेचकर शहर के किसी दूसरे हिस्से में घर ले ले औऱ वहा तुझसे निकाह करके रहे..

सलमा - अब्बू औऱ मेरा निकाह? ये कैसे मुमकिन है?

गौतम - सलमा किसी को कुछ नहीं पता चलेगा.. तू चाहे तो तेरे अब्बू से मैं बात करता हूँ.. मैं तुझे उस तरह हर किसी के आगे रंडी जैसे झुकते हुए नहीं देख सकता..

सलमा - ठीक है लेकिन मैं बच्चे सिर्फ तेरे ही पैदा करुँगी..

गौतम - उसकी चिंता तू मत कर सलमा.. ये कहते हुए गौतम फिर से सलमा को बिस्तर पर पटक देता है औऱ वापस फिर से उसकी चुदाई शुरू कर देता है औऱ वापस अपना सारा माल उसकी चुत में भरके होटल से वापस आ जाता है..

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अपडेट 21



भोस्डिके क्या लंड है तेरा दो मिनट में हो ढह गया.. इससे अच्छा तो मैं गाजर मूली डाल लू अपनी चुत में.. किसी काम का नहीं है तू..

मालकिन माफ़ कर दो फिर से खड़ा कर लेता हूँ..

साले जब तक तेरा खड़ा होगा सुबह की दोपहर हो जायेगी.. मेरी गलती है तेरे जैसे ढीले को काम पर रख लिया.. खड़ा नहीं हो रहा तो छोड़, मेरी चुत को चाटकर ही शांत के दे..

जैसा आप कहो मालकिन..

कोमल घर के नौकर अब्दुल के सामने अपनी साडी कमर से ऊपर करके बैठी थी औऱ अब अब्दुल कोमल की चुत को चाटने लगा था..

कोमल - भोस्डिके ठीक से चाट ना.. वो भी नहीं आता क्या तुझे?

अब्दुल - माफ़ करना मालकिन.. चाटता हूँ..

घर के लगभग सभी लोग वेडिंग होटल जा चुके थे औऱ घर में कुछ ही लोग बचे थे.. गौतम को सुबह जब सिगरेट पिने की तलब लगी औऱ वो छत पर आ गया जहा घर का एक्स्ट्रा सामान रखने के लिए दो कमरे बने हुए थे उसीके पीछे खाली जगह पर बाथरूम भी था.. गौतम छत पर आ गया औऱ उस कोने की तरफ जाके सिगरेट पिने की सोची मगर वहा जाते ही उसे अपनी मामी कोमल की सिस्कारी साफ साफ सुनाई देने लगी.. गौतम ने हलके से कदम बढ़ा कर कमरे में झाँक कर देखा तो उसे सामने अब्दुल औऱ कोमल दोनों साथ ही दिखाई दिए जो ऊपर लिखी हुई अवस्था में थे..

गौतम ये देखकर मुस्कुरा बैठा औऱ अपना फ़ोन निकालकर दोनों का वीडियो बनाने लगा.. वीडियो बनाते बनाते गौतम ने कमरे का दरवाजे को धक्का देकर खोल दिया औऱ कमरे में आ गया.. अब्दुल औऱ कोमल गौतम को देखकर हड़बड़ा गए औऱ अपने आपको ठीक करते हुए खड़े हो गए..

गौतम - अरे रुक क्यों गए? प्लीज कंटिन्यू.. बहुत अच्छी वीडियो बन रही है मामी..

अब्दुल औऱ कोमल एक दूसरे की तरफ देखकर चिंता औऱ फ़िक्र के भाव से भर गए फिर अब्दुल कमरे से बाहर जाने लगा तो गौतम ने उसे जाने से रोक दिया औऱ बोला..

गौतम - कहा जा रहे हो अब्दुल मिया.. रुक जाओ.. क्यों मामी? घर के नौकर के साथ ही.. मामा में दम नहीं है क्या? वैसे दम तो इसमें नहीं लगता..

कोमल गौतम के करीब आकर - ग़ुगु.. बेटा वीडियो डिलीट कर दे..

गौतम - ये तो पुरे घर को दिखाऊंगा मामी.. बहुत गर्मी है ना आपके अंदर..

कोमल गौतम को पकड़कर - ग़ुगु.. मेरी बात सुन.. मेरी बात मान बेटा.. मैं तेरी मामी हूँ ना? देख मैं कहीं की नहीं रहूंगी.. तू चाहता है मैं बर्बाद हो जाऊ?

गौतम कोमल से - ठीक है मामी.. पर पहले बताओ इस नौकर के साथ कब से चल रहा है ये सब?

कोमल - कुछ महीने हो गए बेटा.. तू तो जवाँ है समझता है औरत की जरुरत.. पर ये निकम्मा भी किसी काम का नहीं..

गोतम अब्दुल से - इधर आ..

अब्दुल करीब आता है तो गौतम खींच के एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल ओर रसीद कर देता है औऱ कहता है..

गौतम - चल निकल यहां से भड़वे..

अब्दुल अपना सा मुंह लेके नीचे चला जाता है औऱ गौतम कोमल से कहता है..

गौतम - मामी वीडियो में डिलीट नहीं करने वाला..

कोमल प्यार से - ग़ुगु मेरा अच्छा बच्चा है.. देख अपनी मामी को तू ऐसे परेशान करेगा तो तुझे पाप लगेगा..

गौतम - रहने दो मामी.. घर के नौकर के साथ ये सब कर रही हो औऱ मुझे पाप पुण्य का ज्ञान दे रही हो.. मैं ये वीडियो मामा औऱ चेतन को दिखा के ही रहूँगा..

कोमल - ग़ुगु.. देख तुझे जो चाहिए में सब दिला दूंगी पर तू इस बात को यही भूल जा बेटा..

गौतम - मामी आप भी भाभी की तरह मुझे भिखारी समझती हो ना?

कोमल - पागल हो गया है क्या तू ग़ुगु.. तू मेरे लिए चेतन जैसा है.. मैं अपने ही बच्चे के लिए ऐसा क्यों सोचूंगी भला.. देख बेटा.. मेरी बात सुन.. तू अगर बात मानेगा ना तो मैं तेरे लिए एक फूल सी लड़की देखूंगी शादी के लिए..

गौतम - माफ़ करना मामी.. पर मैं आपकी बात नहीं मानुगा.. मैं जा रहा हूँ मामा के पास..

कोमल गौतम के पैर पकड़कर - ग़ुगु देख ऐसा मत कर.. मैं कहीं की नहीं रहूंगी.. मैं तेरे आगे हाथ पैर जोड़ती हूँ बेटा..

गौतम - छोडो मामी.. अभी तो मौका मिला आपसे बदला लेने का..

कोमल - किस बात का बदला ग़ुगु? मैं जानती हूँ तू मुझसे नाराज़ है पर ये सब करके तुझे केसा बदला मिलेगा? मैं तुझे अपना बच्चा मानती हूँ ग़ुगु मेरे साथ ऐसा मत कर.. कोमल की आँखों में आंसू थे..

गौतम - मुझसे कोई उम्मीद मत करो मामी..

ये कहते हुए गौतम नीचे आने लगता है औऱ उसीके पीछे कोमल भी गौतम को पुकारती हुई आ जाती है..

गौतम नीचे हॉल में खड़े अपने मामा संजय की गरफ बढ़ता है औऱ कोमल की जैसे सांसे अटक जाती है..

गौतम संजय के करीब जाकर फ़ोन दिखाते हुएबिलकुल धीरे से कहता है - मामा ज़ी वो मामी कह रही थी की दीदी की शादी में ये वाली डेकोरेशन हो तो बहुत अच्छा रहेगा..

संजय कुछ देर गौर से गौतम के फ़ोन को देखकर कोमल की औऱ चला जाता है औऱ कोमल तो जैसे अब अपनी बर्बादी का इंतजार करते हुए नम आँखों के साथ मोन खड़ी थी..

संजय - इतनी बात के लिए आंसू को बहा रही हो..

कोमल जो कुछ सोच के खड़ी थी संजय की बात सुनकर उससे बाहर निकलती हुई - क्या..

संजय - अरे तुम जो डेकोरेशन चाहती हो वही होगा शादी में.. ग़ुगु तू वो पिक मुझे व्हाट्सप्प कर दे मैं डेकोरेशन वाले को भेज देता हूँ.. तेरी मामी की पसंद की डेकोरेशन ही होगी..

ये कहकर संजय चेतन के साथ अब्दुल को लेकर वेडिंग होटल चला जाता है औऱ कोमल से जल्दी ही तैयार होकर गौतम के साथ वेडिंग होटल आने को बोल जाता है..

कोमल गौतम को गुस्से की नज़र से देखने लगती वही गौतम मुस्कुराते हुए अपनी मामी कोमल को देखकर मुंह बनाते हुए कोमल को चिढ़ाता है..

कोमल गौतम की औऱ बढ़ती है लेकिन गौतम सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़ जाता है.. कोमल भागती हुई गौतम के पीछे पीछे उसके कमरे में चली जाती है जहा गौतम हसते हुए कोमल से कहता है..

गौतम - डर गई थी ना आप?

कोमल गौतम को पकड़कर धीरे से उसके गाल पर थप्पड़ मारकर - तूने तो जान ही निकाल दी थी मेरी.. मैं समझी तू सब बता देगा संजय को..

गौतम कोमल को बाहों में भरते हुए - वो तो मैं अब भी बता सजता हूँ.. पूरा वीडियो है आपका मेरे पास..

कोमल प्यार से - ग़ुगु डिलीट कर दे ना उसे..

गौतम - इतनी आसानी नहीं करूंगा मामी..

कोमल - तुझे क्या चाहिए बता ना.. मैं सब दिला दूंगी तुझे..

गौतम - सबसे पहले तो आपके होंठों से एक छोटा सा चुम्मा चाहिए..

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कोमल मुस्कुराते हुए - बस इतनी बात.. कोमल अपने होंठ गौतम के होंठो से मिलकर गौतम को चूमने लगती है औऱ गौतम भी इस चुम्बन का मज़ा लेने लगता है.. कुछ देर बाद गौतम चुम्बन तोड़कर मामी एक सेकंड फ़ोन आ रहा है..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..

सुमन - ग़ुगु कहाँ है तू?

गौतम - माँ मैं घर पर हूँ..

सुमन - बेटा वेडिंग होटल आने के लिए कहा था ना तुझे? अब तक घर पर है..

गौतम - वो माँ जरुरी काम आ गया था.. मैं आता हूँ..

सुमन - ठीक है तेरे मामा से बात हुई है अभी अब सिर्फ तू औऱ तेरी मामी घर पर है तू अपनी मामी को भी साथ ले आना..

गौतम- ठीक है मा.. फ़ोन कट जाता है..

कोमल वापस गौतम को चूमने के लिए बढ़ती है तो गौतम उसे रोक देता है - एक मिनट मामी.. वीडियो डिलीट कर देता हूँ..

कोमल गौतम के लंड पर उसकी जीन्स के ऊपर से हाथ फेरती हुई नीचे बैठ जाती है औऱ गौतम की जीन्स खोलने लगती है..

गौतम - मामी माँ का फ़ोन आया था सब वेडिंग होटल जा चुके है घर अब कोई नहीं है.. चलो सब बुला रहे है..

कोमल जीन्स नीचे सरकाकर - बुलाने दे ग़ुगु.. अब तो मैं तुझे खुश करके ही यहां से कहीं जाउंगी..

गौतम - सोच लो मामी.. मैं बहुत बड़ा जानवर हूँ..

कोमल चड्डी नीचे करके हस्ते हुए - कितना बड़ा जानवर है तू..

इतना कहते ही कोमल के सामने गौतम का लंड आ जाता है औऱ उसका मुंह बंद हो जाता है.. गौतम कोमल के मुंह पर लंड के थप्पड़ मारते हुए बोलता है..

गौतम - क्या हुआ मामी?

कोमल - ग़ुगु.. तो तू तो बहुत बड़ा..

गौतम कोमल के इतना कहते ही उसके मुंह में लंड डाल देता है..

गौतम - अब कुछ मत बोलो मामी..

कोमल गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगती है..

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गौतम कोमल को देखते हुए अपना हथियारों उसे चुसवा रहा था और कोमल भी बड़े चाव से गौतम का हथियार मुंह में लेकर चूस रही थी. दोनों एक दूसरे की तरफ देखे जा रहे थे और दोनों में काम इच्छा जागने लगी थी जो दोनों की आंखों में दिखाई देने लगी थी. गौतम कोमल के बाल पड़कर उसे ऐसे अपना हथियार चुसवा रहा था जैसे कोमल उसकी मामी नहीं कोई पेशेवर रंडी हो..

कुछ देर यूँही गौतम ने कोमल को अपना लॉलीपॉप चुसवा कर उसे नंगा कर दिया औऱ कखुद भी अपनी जन्मजात अवस्था में आ गया.. गौतम ने कोमल को बिस्तर पर पटक दिया और उसकी टांगे चोडी करते हुए उसकी चुत अपना हथियार सेट करने लगा..

गौतम को अपनी मामी कोमल की हालत खराब करनी थी इसलिए उसने चुत के छेद पर अपने लोडे को सेट करते हुए थूक लगाकर एक ही झटके में अपना लोडा और उसके अंदर घुसा दिया जिससे कोमल बिन पानी मछली जैसे तड़पने लगी और झटपटाने लगी..

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कोमल की चुत से रक्त की धार भी बह निकली थी जो उसके कई सालों से ना चुदने औऱ चुत के सिकुड़ जाने का प्रमाण थी.. कमल जोर जोर से चिल्ला रही थी और चिंख रही थी अगर घर में उसकी चिंख पुकार सुनने वाला कोई नहीं था.. गौतम ने अपने रूम में टीवी को फुल वॉल्यूम पर करके सोंग प्ले कर दिए थे जिससे भी कोमल की आवाजे दब रही थी.. गौतम ने कोमल के मुंह पर हाथ रखकर उसकी आवाज दबाने की कोशिश नहीं की औऱ कोमल की उस हालात को देखकर मज़े लेने लगा..

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गौतम ने एक दो झटके और जोर-जोर से मारे और अपना पूरा हथियार कमल की गुफा के अंदर फिट कर दिया.. कोमल गौतम को जोर जोर से थप्पड़ मर रही थी औऱ अपने ऊपर से हटने औऱ अपना लंड बाहर निकालने के लिए कह रही थी मगर गौतम सब कुछ सहकारी भी कोमल के ऊपर ही पड़ा रहा औऱ कोमल से बोला..

गौतम - क्या हुआ मामी? पसंद नहीं आया जानवर?

कोमल - मदरचोद रंडी की औलाद ऐसे कौन चुत में लंड घुसाता है? भड़वे जान निकाल देगा क्या मेरी?

गौतम हँसते हुए धीरे धीरे चोदना शुरू करते हुए - मामी क्या करू? कच्ची कलियों की चिंख तो सब निकलवा देते है मुझे तो आपके जैसी पुरानी मदमस्त औरतों की चिंखे सुनने में मज़ा आता है..

कोमल - आहहह... साले कमीने.. तूने तो पूरा खोल के रख दिया मुझे.. आअह्ह्ह... केसा मासूम दीखता है पर है पूरा हरामजादा..

गौतम धक्के की स्पीड बढ़ाते हुए - आपने ही कहा था आप मुझे खुश कर दोगी.. आप बोलो चोदना छोड़ देता हूँ मामी..

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कोमल - आहहह... अह्ह्ह्ह.... अब मेरी सुलगती चुत को आराम औऱ मज़ा मिलने लगा है तो छोड़ने की बात कर रहा है तू.. अह्ह्ह्ह... चुपचाप चोद मुझे वरना तुझे मार डालूंगी..

गौतम कोमल के बूब्स मसलकर उसकी चुत में जोर जोर से झटके मारते हुए - अगर पहले पता होता कि आपकी चुत इतनी टाइट है मामी, तो मैं आते ही आपको चोद के सुखी कर देता..

कोमल - तू तो वो मर्द निकला ग़ुगु जिसे जवाँ बूढ़ी सब औरत पाना चाहती है.. मैं तो पागल हो रही हूँ ग़ुगु.. ये कहते हुए कोमल झड़ जाती है..

गौतम - इतनी जल्दी झड़ गई मामी..

कोमल - जल्दी कहा है ग़ुगु आज तक सबसे लम्बा सेक्स है ये मेरा..

गौतम - अभी शुरू हुआ है..

गौतम कोमल को कुतिया बनाके उसकी चुत औऱ गांड पर थूक देता है औऱ अपना लंड वापस उसकी चुत में डाल के चोदने लगता है..

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कोमल - अह्ह्ह्ह... ग़ुगु तू तो घोड़ा है बेटा.. रुकने का नाम ही नहीं ले रहा..

गौतम - आपके ऊपर गुस्सा ही इतना है मामी कि आपको चोद चोद कर ढीला करने का मन हो रहा है..

कोमल - छोड़ ना पुरानी बातों को ग़ुगु.. भूल जा..

गौतम - कैसे भूल जाऊ मामी.. आपने भी दीदी की साइड ली थी उस दिन..

कोमल - ग़ुगु चुदाई के बीच तू क्या वो बातें लेकर आ गया बेटा..

गौतम जानभूझकर अपना लंड चुत से निकालकर कोमल की गांड के छेद पर रखकर झटके से घुसा देता है जिससे उसके लंड का टोपा कोमल की गांड के छेद में घुस जाता है औऱ कोमल वापस चीख पुकार मचाते हुए गौतम से छोड़ने की अपील करती मगर गौतम कसके कोमल को पकड़के उसकी अपील खारिज कर देता है औऱ चिल्लाती हुई अपनी मामी कोमल की गांड में औऱ जोर से झटका मारते हुए अपना आधा लंड अंदर घुसा देता है..

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कोमल की हालात ख़राब थी औऱ वो गौतम को गालिया बकते हुए उससे छुड़ने की कोशिश कर रही थी मगर गौतम की पकड़ से कोमल नहीं छूट पाती औऱ अब गौतम कोमल की गांड अपने आधे से ही चोदने लगता है..

गौतम पीछे से कोमल के गले में हाथ डालकर उसकी एक चूची पकड़ लेता है औऱ दूसरे हाथ से कोमल की जांघ पकड़के उसकी टांग उठा लेता है औऱ कोमल की गांड मारने लगता है..

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कोमल इतनी तेज़ तेज़ गौतम को गाली दे रही थी की उसकी आवाज पुरे घर में गूंज रही थी..

गौतम गांड मारते हुए - मानना पड़ेगा मामी.. आपकी जवान भले ही कड़वी हो मगर आपका बदन रसीला है.. बिलकुल चाशनी जैसा..

कोमल - साले बाज़ारू समझ रखा है क्या मुझे तूने? हरामजादे छोड़ मेरी गांड को.. मादरचोद गांड मत मार..

गौतम - आराम से चोद लेने दो मामी आपकी गांड.. कोनसा मेरे चोदने से आपकी गांड घिसकार छोटी हो जायेगी..

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कोमल - बहुत बड़ी गलती कर दी मैंने तुझे बच्चा समझके.. तू तो सांड है सांड.. पहली बार गांड मरवा रही हूँ वो भी तेरे इस गधे के लंड से.. मेरे आगे पीछे दोनों छेदो को तूने चोद चोद के कुआ बना दिया मादरचोद... आधे घंटे से चोद रहा है कुत्ते औऱ कितना चोदेगा मुझे? तेरा निकलता क्यों नहीं.. मेरी हालत खराब हो रही है..

गौतम कोमल को अपने ऊपर ले लेता है उसकी गांड फिर से चोदते हुए उसकी चुत में ऊँगली करने लगता है..

गौतम - मामी सच बताओ मज़ा आ रहा है या नहीं..

कोमल - इस मज़े के साथ कितना दर्द हो रहा है वो भी बताऊ तुझे साले भड़वे.. इतना कहते ही कोमल का मूत निकल जाता है.. मगर गौतम को फर्क नहीं पड़ता औऱ वो कोमल की गांड चोदता रहता है..

कोमल की गांड के छेद में धीरे धीरे अब गौतम का पूरा लंड जा चूका था औऱ उसे अब पहले से कम दर्द हो रहा था..गौतम जब निकलने वाला हुआ तो उसने कोमल की गांड में से लंड निकालकर चुत में घुसा दिया औऱ मिशनरी में कोमल को चोदने लगा जिससे कोमल का सारा दर्द अब एक नशे औऱ मज़े में बदल गया...

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कोमल - चोद बेटा, ऐसे ही चोद अपनी मामी को.. अह्ह्ह्ह..

गौतम - मज़ा आ रहा है ना मामी..

कोमल - बहुत मज़ा आ रहा है बेटा.. पहली बार मिल रहा है ऐसा मज़ा.. चोद अपनी मामी को..

गौतम - मामी चुत में ही निकाल दूँ ना..

कोमल - नहीं ग़ुगु.. चुत में नहीं..

गौतम कोमल की नहीं सुनता औऱ कोमल की चुत में पूरा माल भर देता है औऱ कोमल के ऊपर उसी तरह लेट जाता है दोनों कुछ देर उसी तरह पड़े रहते है..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम के गाल खिंचकर - अब तो सारी नाराज़गी दूर हो गई ना तेरी? कैसे रंडी बनाके चोदा है मुझे.. शर्म भी नहीं आई तुझे बिलकुल.. अब अपना लंड मेरी चुत से निकल ग़ुगु.. उठ जा मेरे ऊपर से.. वेडिंग हॉल भी चलना है..

गौतम अपना लंड चुत से नहीं निकालता औऱ बोलता है - थोड़ी देर साँप को बिल में ही रहने दो ना मामी..

कोमल - गांड में दर्द हो रहा है अभी भी ग़ुगु.. तुझे मेरी गांड नहीं मारनी चाहिए थी बेटा..

गौतम प्यार से - पहली बार तो दर्द ही होगा मामी.. आप फ़िक्र मत करो अगली बार प्यार से करूँगा..

कोमल - बेटा मैं करने दूंगी तब ना.. अब सिर्फ आगे से एंट्री मिलेगी तुझे पीछे से एंट्री नहीं मिलेगी, पीछे से नो एंट्री है.

गौतम - नो एंट्री में पार्किंग करना मुझे अच्छे से आता है मामी.. अब जाओ तैयार हो जाओ वेडिंग होटल चलते है..

गौतम कोमल के ऊपर से हट जाता है..

कोमल जैसे बेड से खड़ी होती है लड़खड़ाकर फर्श पर गिर जाती है जिसपर गौतम हँसने लगता है..

गौतम - क्या हुआ मामी सहारा चाहिए?

कोमल गुस्से से - कमीने हस क्या रहा है.. इतना बुरा चोदा है ठीक से चल भी नहीं पा रही..

कोमल दिवार का सहारा लेकर खड़ी होती है औऱ लंगड़ाकर धीरे धीरे अपने कमरे में चली जाती है..

गौतम भी नहाने बाथरूम में घुस जाता है..

गौतम नहाकर बाहर आ जाता है औऱ तैयार होकर कोमल के कमरे में घुस जाता है जहा कोमल भी तैयार हो चुकी थी औऱ अपने माथे पर बिंदिया लगा रही थी..

गौतम पीछे से आकर कोमल को बाहों में पकड़ते हुए आईने के सामने - सेक्सबोम्ब लग रही हो मामी.. मन कर रहा है वापस बिस्तर में ले जाऊ औऱ आपके यौवन की बारिश में वापस भीग जाऊ..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम के गाल पर चुम्मा देकर - अपनी इस घोड़ी को अब थोड़ा आराम दे ग़ुगु.. पहले ही तेरे कारण मेरी चाल ढाल सब बिगड़ चुकी है.. चलने में भी दर्द हो रहा है..

गौतम - मैंने पहले ही कहा था आपसे.. पर आप ही नहीं मानी.. अब भुगतो..

कोमल - आराम से ग़ुगु.. मुझसे चला नहीं जा रहा.. कोमल लंगड़ा कर चल रही थी तो गौतम ने कोमल को अपनी बाहों में उठा लिया औऱ घर बंद करके बाहर आ गया औऱ कोमल को कार में बैठा दिया फिर कार चलाकर वेडिंग होटल की औऱ कार चलाने लगा..

चेतन फ़ोन पर - मम्मी आप कहा रह गई.. यहां सब बुला रहे है आपको..

कोमल - बेटा ये ट्रैफिक भी ना.. इस शहर में कहीं आना जाना मतलब ट्रैफिक में फंसना..

चेतन - ठीक है मम्मी कितना समय लग जाएगा आपको आने में..

कोमल - नहीं पता बेटा.. अभी तो किसी मंत्री का काफ़िला आने वाला है उसके ट्रैफिक में रुके हुए है हम दोनों.. आधा घंटा भी लग सकता है..

चेतन - ठीक है मम्मी.. मैं पापा को बता देता हूँ..

कोमल - ठीक है बेटा.. फ़ोन कट हो जाता है..

गौतम - झूठ बोलने में तो उस्ताद हो मामी.. मंत्री का काफ़िला.. हम्म??

कोमल मुस्कुराते हुए - वो सब छोड़ बेटा अब चोद अपनी मामी को.. फिर से मेरी चुत में खुजली हो रही है..

गौतम कार की पिछली सीट पर साडी औऱ पाटीकोट कमर तक उठाकर अपनी टांग चौड़ी करके पीठ के बल लेटी अपनी मामी कोमल के सामने बैठा था.. गाडी रास्ते में सुनसान जगह पर खड़ी थी..

गौतम अपने लोडे पर थूक लगा कर वापस कोमल के अंदर घुस गया औऱ उसे चोदने लगा..

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कोमल - आह्ह.. ग़ुगु आराम से बेटा.. आराम से..

गौतम - क्या हुआ मामी.. अभी तो कह रही थी वापस चुदना है अब सिसकने लगी..

कोमल - बेटा ऐसे चोदेगा तो तेरी माँ भी सिसक सिसक कर रोयेगी.. आह्ह.. तू तो ज़ालिम है..

गौतम कोमल के बाल पकड़कर चुत मारता हुआ - आप तो मस्त हो मामी.. मेरी सारी नाराजगी को अपनी चुत देकर दूर कर दिया आपने..

गौतम ये कहकर वापस मामी की चुत में झड़ जाता है औऱ दोनों अब वेडिंग होटल की तरफ आ जाते है..

कोमल की हालत देखकर सभी लोग कोमल से उसके लंगड़आने की वजह पूछते हैं मगर कोमल बस इसे मोच का नाम देकर सबसे अपना पल्ला छुड़ा लेती है और लंगड़ाती हुई अपने होटल रूम में चली जाती है.. सुमन कोमल की हालत देखकर गौतम की तरफ देखती है और गौतम से इशारों में पूछता है की क्या हुआ?

गौतम जीन्स के ऊपर से अपने हथियार पर हाथ लगाते हुए सुमन को देखकर इशारे से कहता है.. चुद गई मामी..

सुमन गौतम का जवाब सुनकर हंसने लगती है और फिर कोमल का हाथ पकड़ते हुए उसे उसके होटल के कमरे की तरफ ले जाती है..

*********

वेडिंग होटल मैं सभी मेहमान आ चुके थे और शादी की रस्में पूरे जोर शोर और खुशी उल्लास के साथ निभाई जा रही थी सभी लोग अपनी मस्ती में मस्त शादी के माहौल में मगन थे. संजय और उसका बेटा चेतन और बाकी मेहमान जिन्हे ख़ास तौर पर आमंत्रित किया गया था वह सभी दी गई हुई जिम्मेदारियां को उठाते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लेकर इधर से उधर घूम रहे थे और होटल में खाने से लेकर रहने तक अलग-अलग व्यवस्थाओं को देख रहे थे और सभी से ठीक से कार्य करने का आदेश भी सुना रहे थे.

महिलाएं अपने एक अलग माहौल में थी वह एक बड़े से हाल में एक साथ बैठी हुई नाच गाने का प्रोग्राम कर रही थी जहां कुछ महिलाये ढोलक की ताल पर अलग-अलग गीत गा रही थी और हाथ से तालियां बजाते हुए बीच में नाच रही महिलाओं को देखकर उनका हौसला बढ़ाते हुए नाचने को उत्साहित कर रही थी. हाल में चारों ओर कई महिलाएं बैठी हुई थी और बीच में कुछ महिलाएं नाच रही थी नाचते हुए महिलाओं में एक समान भी थी जो ढोलक की ताल पर नाचते हुए अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन कर रही थी.

गौतम अभी-अभी उस हाल की तरफ बढ़ा था कि उसे खिड़की से नाचती हुई अपनी मां सुमन दिखाई दी और उसके कदम अपने आप उसी जगह रुक गए जहां से गौतम सुमन को नाचते हुए देखने लगा. गौतम अपनी नज़रें भर कर अपनी मां सुमन को नाचते हुए देख रहा था और उसकी आंखों में सुमन का यह मनमोहक और मनभावन रूप सुमन के प्रति उसकी काम भावनाओं को और भी प्रबल कर रहा था. गौतम एक प्रेमी की नजरों से आज पहली बार अपनी मां सुमन को देख रहा था सुमन के हिलते हुए उरोज और बाहर निकले हुए नितंब के साथ साथ साड़ी से साफ-साफ दिखाई देती है उसकी चिकनी कमर और उसके चेहरे की हंसी मुस्कुराहट के साथ लहराते उसकी जुल्फे गौतम के दिल पर छुरिया चल रही थी.

गौतम का मन अभी सुमन को अपना बना लेने का हो रहा था मगर इस माहौल में सुमन से अपने प्यार का इजहार करना और उसे अपने दिल की बात बताना गौतम के लिए असंभव था. गौतम अब तक सुमन को अपनी मां के रूप में ही देखता आया था मगर अब वह सुमन को अपनी बीवी या अपनी होने वाली दुल्हन के रूप में देख रहा था. वह खिड़की के बाहर खड़ा-खड़ा अंदर झाँककर सुमन को देखते हुए सोच रहा था कि वह सुमन को अपना बना कर रहेगा और इसके लिए उसे जो भी करना पड़े वह करेगा.

गौतम तब तक सुमन को खिड़की के बाहर खड़ा होकर देखता रहा जब तक कि वह अंदर ढोलक की ताल पर अपनी गांड और चूची हिलाते हुए नाचती रही. नाचने के बाद जब सुमन थक्कर चूर हो गई हो तो नीचे गद्दे पर बैठ गई और पानी पीते हुए अपनी मां गायत्री और भाभी कोमल के साथ ढोलक की ताल पर गीत गाने लगी और बीच में नाचती हुई महिलाओं का उत्साह बढ़ाने लगी.

गौतम अब भी अपनी मां को ही देखे जा रहा था जैसे उसकी नजरों को कुछ और देखने की चाह ही नहीं बची थी. कुछ देर बाद जब सुमन उठकर बाथरूम के लिए जाने लगी तब गौतम भी उसके पीछे-पीछे बाथरुम की ओर चल दिया और सुमन के साथ होटल के कोने में बने लेडिस बाथरूम में घुसते हुए गौतम ने सुमन को पकड़ कर बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया.

सुमन अचानक हुए इस हमले को देखकर चौंक गई थी मगर जैसे ही उसकी आंखों के सामने गौतम का चेहरा आया उसकी आंखों ने राहत की सांस ली और वह गौतम के गाल सहलाकर उसे डांटते हुए बोली..

सुमन - कोई देख लेगा ग़ुगु.. पागल हो गया है क्या तू..

गौतम - पागल तो आपने कर दिया है माँ.. इस तरह अपने चुचे औऱ चुत्तड़ हिला के नाचोगी तो कैसे खुदको कंट्रोल कर पाऊंगा..

सुमन हसते हुए - चल अब तंग मत कर.. बहुत जोर की सुसु आई है.. करने दे..

गौतम साडी के ऊपर सुमन की चुत सहलाते हुए - सुसु क्या होती है माँ? खुलकर बोलो ना मूतना है आपको..

सुमन गोतम का हाथ पकड़ते हुए - ग़ुगु छोड़.. क्या कर रहा है.. कोई भी आ सकता है यहां.. जा यहां से जल्दी.. मुझे जोर की आई है..

गौतम - मेरे साथ ट्रुथ एंड डेयर खेलना पड़ेगा एक बार..

सुमन - रात को जितना खेलना हो खेलना ग़ुगु अभी जा तू यहां से..

गौतम - सिर्फ एक बार माँ..

सुमन आँख मिलाते हुए - ठीक जल्दी खेल..

गौतम और सुमन अपनी नज़रे मिलाकर खेलने लगते हैं जिसमें गौतम जीत जाता है और सुमन फिर से हार जाती है..

सुमन - अच्छा अब बोलो जल्दी.. क्या करना है..

गौतम सुमन की साडी उठाते हुए - कुछ नहीं माँ.. प्यास लगी है बस आपका मूत पीला दो..

इतना कहकर गौतम अपने घुटनों पर बैठ जाता है और सुमन की साड़ी के अंदर घुस जाता है गौतम सुमन की चड्डी नीचे सरकाकर उसकी जांघों के जोड़ पर अपना मुंह लगा देता है और अपनी जीभ से सुमन के नारीत्व को चूसने चाटने लगता है..

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गौतम ने सब इतना जल्दी किया था कि सुमन को उसे रोकने का समय ही नहीं मिल पाया और सुमन गौतम के इशारों पर नाचने के लिए तैयार हो चुकी थी सुमन में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह गौतम को हटा सके या उसे मना कर सके..

गौतम लगातार सुमन की चुत को चाट रहा था जिससे सुमन के सब्र का बांध टूट गया औऱ और वह अपनी चुत से मूतने लगी.. गौतम ने सुमन की चुत से मूत की पहली बूंद आते ही सुमन के जांघो के जोड़ पर अपना मुंह चिपका दिया और अपनी माँ मूत पिने लगा..

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सुमन भी अपने काम भावनाओं को दबाने में सफल नहीं रही और उसकी काम इच्छा गौतम के सामने उजागर हो गई. सुमन गौतम के बाल पड़कर उसके मुंह में ऐसे मूतने लगी जैसे वो बाथरूम में मूत रही हो.

गौतम अपनी मां सुमन की चुत से निकलता हुआ उसका मूत ऐसे पी रहा था जैसे उसे अमृत मिल गया और वह उसकी एक बूंद भी जाया नहीं करना चाहता हूं.. सुमन का सारा मूत पीने के बाद भी गौतम ने उसकी चुत से अपना मुंह नहीं हटाया और वैसे ही उसकी चुत चाटने और चूसने लगा.

सुमन ने भी गौतम को अपनी चुत से तब तक नहीं हटाया जब तक सुमन अपने बेटे गौतम के मुंह में झड़ नहीं गई..

गौतम अपनी मां का मूत पीने के बाद अब सुमन के झड़ने पर उसका नारीत्वपान भी कर चूका था..

गौतम यह सब पीकर अपने घुटनों पर से खड़ा हो गया और अपने सामने शर्म से लाल होकर खड़ी अपनी माँ सुमन को देखकर बोला..

गौतम - आई लव यू सुमन..

सुमन अपनेआप को सही करते हुए - अब जा गौतम.. कोई देख लेगा तो हंगामा हो जाएगा..

गौतम बाहर जाते हुए - जा रहा हूँ माँ.. पर शाम पांच बजे आप होटल की छत पर आकर मिलना.. मुझे कुछ बात करनी है आपसे..

सुमन - आ जाउंगी.. तू जा अब.. बाहर देखकर निकलना.. कोई देख ना ले..

गौतम - कोई नहीं है बाहर आप चिंता मत करो..

गौतम बाथरूम से बाहर निकाल कर वेडिंग लॉन की तरफ आ जाता है और उसके पीछे सुमन कुछ देर बाद बाथरूम से निकालकर उस हाल वापस बैठ जाती है जहां लेडिस का नाच गाना चल रहा था.. सुमन का मन न जाने किस मीठी खुशी का शिकार हो गया था उसे बार-बार गौतम का चेहरा नजर आने लगा था और जो आज गौतम ने उसके साथ किया था वह एक अनोखी घटना थी जिसे याद करके सुमन गौतम की यादों में खोई हुई सोचने लगी थी कि गौतम ने आखिर ऐसी गंदी हरकत उसके साथ क्यों की.. हालांकि उसकी इस गंदी हरकत में सुमन को भरपूर मजा मिला था औऱ वो चाहती थी कि ऐसा मज़ा उसे वापस मिले..

गौतम ने अपनी मां की काम इच्छा तो जगा कर ठंडी पूरी कर दी थी मगर उसके मन में जो काम की आग जगी थी उसे अभी तक पानी नहीं मिल पाया था.. गौतम अपने खड़े हुए लंड को लेकर वेडिंग होटल से लेकर वेडिंग लोन तक इधर से उधर घूम रहा था और किसी ऐसे शिकार की तलाश कर रहा था जिसके साथ वह अपनीहवस औऱ काम इच्छा शांत कर सके..

गौतम ने वेडिंग होटल की दूसरी मज़िल पर कोमल को अपने रूम जाते देखा था वो भी उसके पीछे उसके रूम में चला गया औऱ दरवाजा बंद करते हुए कोमल को बाहों में भरके बिस्तर पर गिर गया..

गौतम ने कोमल साड़ी उठाते हुए उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया औऱ चोदने लगा.. कोमल इस हाल में थी कि उससे ना कुछ बोला जा रहा था ना ही गौतम को रोका जा रहा था वह बस किसी खिलौने की तरह गौतम की बाहों में खेल रही थी. गौतम ने सुबह कोमल कसके चोदा था और ऐसा रगड़ा था कि उसे चला नहीं जा रहा था और अब भी उसे किसी रंडी जैसे अपने नीचे लेटा कर वो रगड़ रहा था. कोमल तीसरी बार चुद रही थी उसे जैसे मज़ा और सजा एक साथ मिल रही थी..

कोमल - कमीने क्यों मेरे पीछे पड़ा है.. मुझसे क्या दुश्मनी है?

गौतम - तुझसे नहीं मामी मुझे तो तेरी चुत से दुश्मनी है.. जब इसे चोद चोद कर भोसड़ा नहीं बना दूंगा मुझे चैन नहीं मिलने वाला..

कोमल - मैंने कब मना किया है तुझे चोदने के लिए ग़ुगु.. पर प्यार से बेटा ऐसे मत रगड़ मुझे.. सुबह से चला भी नहीं जा रहा अब तो लगता है ठीक से उठ भी नहीं पाउंगी..

गौतम - मामी दोदो बच्चे निकलने के बाद भी ऐसी चुत है आपकी जैसे अभी तक बच्चा नहीं हुआ हो.. लगता है मामा दूकान के चक्कर में आपको भूल गए है..

कोमल - तेरे मामा में दम नहीं है बेटा.. तभी तो तेरे आगे घोड़ी बनके झुकी हुई हूँ..

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गौतम कमल को जमके रगड़ता है और आधे घंटे बाद उसके कमरे से निकल जाता है इस बार भी कोमल ने अपने आगे के साथ पिछवाड़ा भी गौतम को सौंप दिया था जिसके साथ गौतम ने अभी-अभी बहुत मजे किए थे. कोमल की हालत इस तरह थी जिस तरह सुहागरात के बाद कुंवारी दुल्हन की होती है.. उसकी बिगड़ी हुई चाल औऱ बिगड़ चुकी थी अब उसके लंगड़ेपन में औऱ लचक आ गई थी.. उसने सबको ये ही बताया था की उसे मोच आई थी..
 
अपडेट 22



शाम के पांच बज चुके थे होटल की छत पर गौतम सुमन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. सुमन भी छत पर आने के लिए निकल चुकी थी गौतम यह सोच रहा था कि वह आज अपनी मां से अपने प्यार का इजहार कर देगा और उसे अपनी दुल्हन बनाने का प्रस्ताव रखेगा. गौतम यह जानता था कि जो वह करने जा रहा है इसमें उसे सफलता नहीं मिलने वाली है लेकिन वह फिर भी एक बार सुमन को अपने प्यार का इजहार करके मानना चाहता था और चाहता था कि सुमन उसे अपने प्रेमी के रूप में अपना ले.. अब तक जो सुमन और गौतम के बीच में हो रहा था वह केवल सुमन के मातृत्व प्रेम के कारण हो रहा था जिसमें वह गौतम को अपना बेटा मानकर सब कुछ कर रही थी भले इसमें उसे आनंद और काम संतुस्टी की प्रति हो रही थी लेकिन वह अब तक गौतम को अपने प्रेमी के रूप में स्वीकृत नहीं कर पाई थी ना ही उसे यह अधिकार दिया था कि गौतम उसके पूरे शरीर पर अधिकार जताये..

सुमन का नारीत्व और काम इच्छा उफान पर थी जिसे वो गौतम के साथ शांत कर लेती थी मगर इस अधूरी शांति से गौतम और सुमन दोनों ही काम के शिखर पर पहुंच कर उस अद्भुत और अतुल्य सुख से वंचित ही रहे जिसे पाना दोनों के मन में लंबित था. सुमन अपने मन की आखिरी दीवार को नहीं गिराना चाहती थी. सुमन चाहती थी कि गौतम की हर इच्छा और हर मनोकामना पूरी हो लेकिन वह खुद इसके लिए अपनी चुत की कुर्बानी देने को तैयार नहीं थी. सुमन अब यही चाहती थी कि जैसे गौतम और सुमन के बीच एक रिश्ता कायम हो चुका है वह इस तरह कायम रहे और अब सुमन ना तो इससे आगे बढ़ना चाहती थी और ना ही इससे पीछे हटाना चाहती थी.

गौतम ने भी अपने मन में ये तय कर लिया था कि वह सुमन को किसी भी शर्त पर अपना बना कर रहेगा और उसके लिए वह आज पहली-पहल कर देगा. भले इसमें उसे सफलता मिले या वह असफल रहे. गौतम अब मन ही मन सुमन को पाने की चाहत में जलने लगा था और उसे आप सुमन को भोगने की इच्छा पूरी उफान ले चुकी थी. मगर वह इस बात से भली-भांति परिचित था की सुमन को भोगना और उसे पाना इतना आसान नहीं होगा और जो दीवार सुमन ने अपने मन में उसके और खुद के बीच में बना रखी है उसे गिराना भी आसान नहीं होगा. दोनों के बदनों के मिलन के बीच सुमन ने अपने मन में उसके औऱ गौतम के रिस्ते को रोड़ा बना लिया था जिसे दूर करना आसान नहीं था. मगर गौतम ने ये तय कर लिया था जो किसी भी तरह से उसके मन से इस दीवार को गिरा कर रहेगा और उसे अपना बना कर रहेगा इसके लिए भले ही उसे कुछ भी करना पड़े. गौतम और सुमन के बीच सब कुछ हो रहा था मगर बाकी था वही सबसे जरूरी था और वहीं गौतम करना चाहता था मन ही मन सुमन भी ऐसा ही चाहती थी मगर उसने अपने मन में रिश्ते की दीवार को बीच में खड़ा कर दिया था जिसे वह नहीं गिराना चाहती थी.

सुमन अकेली चुपके चुपके सीडीओ से होती हुई छत के दरवाजे तक आ पहुंची.. सुमन के मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे और अजीब सवाल वह अपने आप से पूछ रही थी जिसके जवाब खुद ही अपने आप को देती हुई वह छत के दरवाजे पर खड़ी हुई थी गौतम भी सुमन के इंतजार में छत के कोने में खाली पड़ी की जगह पर खड़ा हुआ सुमन का इंतजार कर रहा था उसके मन में भी कई बातें चल रही थी जिसे वह सोचकर सही और गलत तय करने में लगा हुआ था. गौतम ने सुमन को छत के दरवाजे पर खड़ा हुआ देख लिया और सुमन की नजर भी गौतम से मिल गई. गौतम ने सुमन को इशारे से अपने पास आने के लिए कहा औऱ सुमन गौतम के पास धीरे धीरे कदमो से चली आई..

गौतम ने उसी नज़र से अपनी माँ के बदन को ऊपर से नीचे तक देखा जिस तरह वो बाकी लड़कियों औऱ औरतों को ताड़ता था. सुमन इस नज़र को अच्छे से समझ गई थी मगर काम के भाव से भारी हुई सुमन को इस नज़र का बुरा कतई नहीं लगा.. गौतम ने सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे अपने सीने से लगाकर बाहों में भर लिया औऱ फिर अपने होंठों से सुमन के होंठ मिलाकर जंग शुरू कर दी.. इस जंग में दोनों ही एक दूसरे को हराने के लिए भर्षक प्रयास कर रहे थे और एक दूसरे के लबों को चूमते हुए खींच कर काटते हुए ऐसे चुम रहे थे जैसे उनके बीच ये प्यार का पहला चुम्बन हो..

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गौतम ने चुम्बन के दौरान एक जोरदार थप्पड़ सुमन की गांड पर मारा औऱ फिर उसकी गांड को जोर से मसलते हुए इतना तेज़ दबाया की सुमन चुम्बन तोड़कर सिसक उठी औऱ गौतम को शिकायत की नज़र से देखते हुए बोली..

सुमन - आराम से ग़ुगु.. माँ को दर्द होता है ना.

गौतम - ग़ुगु नहीं सुमन.. गौतम.. मुझे गौतम कहकर पुकारो.. मैं अब आपके इन गुलाबी होंठों से अपना नाम सुनना चाहता हूँ..

सुमन हैरानी से - तू क्या कह रहा है ग़ुगु औऱ मुझे नाम से क्यों बुला रहा है.. मैं तेरी माँ हूँ.. तू भूल गया है क्या?

गौतम - मुझे सब याद है सुमन.. (अपना हाथ सुमन की चुत पर रखते हुए) आपने 20 साल पहले मुझे अपनी इसी चुत से निकाला था.. आपने इन 20 सालों में जितना मुझे प्यार किया है उतना शायद कोई औऱ कभी ना कर पाए.. मेरी ख़ुशी के लिए आप मेरे सामने नंगी तक हो गई.. मेरी हर ज़िद पूरी की मगर अब सुमन.. मैं आपको खुश रखना चाहता हूँ.. प्यार करना चाहता हूँ.. मैं चाहता हूँ आप मुझे नाम से बुलाओ.. हर शाम घर पर मेरा इंतज़ार करो औऱ जब मैं काम से वापस आउ तो आप मुझसे लिपटकर अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दो.. मुझे गौतम ज़ी कहकर बुलाओ.. बिलकुल जैसे आप पापा को बुलाती थी..

सुमन - तू पागल हो गया है क्या गौतम? ये सब क्या बकवास कर रहा है.. तू अच्छी तरह जानता है मैं तेरे साथ ये सब नहीं कर सकती.. माँ हूँ मैं तेरी औऱ तू मेरा ग़ुगु.. समझा?

गौतम - आप सब करोगी सुमन.. मुझे यक़ीन है मेरी मोहब्बत आपको ये सब करने पर मजबूर कर देगी.. आप मुझे अपने दिल में वही जगह दोगी जो जगह तुमने पापा की दी थी..

सुमन गौतम के सामने घुटनो पर बैठकर उसकी पेंट खोलते हुए - तू ये मुझे चिढ़ाने के लिए बोल रहा है ना? पर मैं नहीं चिढ़ने वाली समझा? मैं अभी तुझे चूसकर ठंडा कर देती हूँ फिर तेरा सारा भुत उतर जाएगा औऱ तू फिर से मुझे सुमन नहीं माँ कहकर बुलायेगा..

गौतम कंडोम देते हुए - लो सुमन.. बिना कंडोम तुम्हे उल्टी हो जायेगी..

सुमन कंडोम लेकर फेंक देती है औऱ गौतम का लंड हाथ में पकड़कर उससे कहती है - उल्टी होती है तो हो जाए.. तुझे बिना कंडोम के अच्छा लगता है मैं उसी तरह तुझे खुश कर देती हूँ..

ये कहकर सुमन गौतम के लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी औऱ गौतम सुमन को प्यार से देखता हुआ उसके सर पर हाथ फेरने लगा..

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गौतम - जानती हो सुमन जब आप सुबह नाच रही तब मेरा दिल आपको देखकर क्या कह रहा था मुझसे? मेरा दिल कह रहा था कि मैं आपको अपनी दुल्हन बना लू.. औऱ जो सुख पापा आपको सालों से नहीं दे पाये वो सुख मैं आपको हर रात दू.. सुबह तो मैंने अपनी खुली आँखों से हमारे बच्चों तक के नाम सोच लिए थे.. लड़का हुआ तो निखिल लड़की हुई तो निकिता..

सुमन लंड को पूरी मेहनत औऱ काम कला के साथ चूस रही थी मगर गौतम कि बात सुनकर वो बोली..

सुमन मुंह से लोडा निकालकर - गौतम तूने अब एक औऱ शब्द अपने मुंह से निकाला तो अच्छा नहीं होगा.. मैं तेरी माँ हूँ और माँ ही रहूंगी.. मुझे अपनी दुल्हन बनाने का ख्याल अपने दिल औऱ दिमाग से निकाल दे..

गौतम - मैं आप से प्यार करता हूँ सुमन..

सुमन - जितना तू मुझसे करता है उससे कहीं ज्यादा प्यार मैं तुझसे करती हूँ बेटू..

गौतम - सुमन मैं आपको अपनी माँ नहीं अपनी दुल्हन की तरह प्यार करता हूँ..

सुमन - ये ज़िद छोड़ दे ग़ुगु.. ये मुमकिन नहीं है.. मैं तुझे कभी भी वो सब नहीं दे सकती..

ये कहकर सुमन गौतम के लंड को वापस मुंह में भर लेती है औऱ चूसने लगती है

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मगर अब गौतम सुमन के मुंह से अपना लंड निकाल लेता है औऱ अपनी पेंट पहनने लगता है लेकिन सुमन गौतम के हाथ पकड़ कर उसे पेंट पहनने से रोक देती है औऱ कहती है.

सुमन - गौतम ये ज़िद छोड़ दे.. मैंने तेरी हर बात मानी है मगर ये बात मैं नहीं मान सकती.. तू चाहता है मैं अपनी ही नज़रो में गिर जाऊ? कभी खुदसे आँख भी ना मिला पाउ? कैसी जिद पर तू अड़ गया है गौतम.. तू चाहता है तो मैं आज से तुझे तेरे नाम से बुलाऊंगी.. तेरे मुंह से माँ की जगह सुमन भी सुन लुंगी.. मगर ये ज़िद छोड़ दे मेरे शहजादे..

गौतम सुमन से अपने हाथ छुड़वाकर अपनी पेंट पहन लेता है औऱ छत की रेलिंग के पास जाकर सुमन से कहता है..

गौतम - आप नीचे जाओ माँ.. मुझे अब आपसे कुछ नहीं चाहिए.. शादी एन्जॉय करो..

सुमन अपने घुटनो पर से पैरो पर खड़ी हो जाती है औऱ गौतम के पास आकर अपने ब्लाउज में सिगरेट का पैकेट निकालकर एक सिगरेट गौतम के होंठों पर लगा देती है औऱ लाइटर से जलाते हुए कहती है..

सुमन - मुझे माफ़ कर दे गौतम मैं तेरी ये इच्छा पूरी नहीं कर सकती.. तू चाहे तो मुझे अभी नंगा कर दे मैं उफ़ तक नहीं करुगी मगर मेरे शहजादे अपनी माँ को इस तरह जलील मत कर..

गौतम सिगरेट का एक लम्बा कश लेकर अपनी माँ के मुंह पर धुआँ छोड़ते हुए - माफ़ तो आप मुझे कर दो माँ.. मैं हमारे रिस्ते को भूल गया था.. पर अब आप भरोसा रखो मैं आपसे इस बारे में कुछ नहीं कहने वाला...

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के लंड पर पेंट के ऊपर से हाथ रखते हुए - चल गौतम.. मैं अपने छोटे ग़ुगु को थोड़ा प्यार कर लेती हूँ.. नीचे ना सही ऊपर से तो मैं तेरी हर ख्वाहिश पूरी कर सकती हूँ..

गौतम सिगरेट का कश लेकर सुमन का हाथ लंड पर से हटाते हुए - रहने दो माँ.. छोटा ग़ुगु सो चूका है.. आप जाओ नीचे..

सुमन गौतम के हाथ से सिगरेट लेकर कश लेती है औऱ गौतम के लंड को इस बार जोर से हाथों में पकड़कर मसलते हुए गौतम से कहती है..

सुमन - छोटे ग़ुगु को नींद से जगाना औऱ खड़ा करना मुझे अच्छे से आता है.. तू फ़िक्र मतकर मैं छोटे ग़ुगु को खुश करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगाउंगी..

सुमन कहते हुए अपने घुटनों पर बैठ जाती है गौतम की पेंट उतारने लगती है लेकिन गौतम सुमन के हाथों से अपनी पेंट छुड़वाते हुए उसे कहते हैं..

गौतम - मन नहीं माँ.. रहने दो..

सुमन गुस्से से - मैं अच्छी तरह जानती हूँ तेरा मन क्यों नहीं है? तू मुझसे नाराज़ है ना.. मैंने तेरी ज़िद पूरी नहीं की इसलिए? तूने अगर अपनी ज़िद नहीं छोडी तो मैं यही से नीचे कूद कर अपनी जान दे दूंगी..

ये कहते हुए सुमन छत की रेलिंग की तरफ बढ़ती है और उससे पार करने की कोशिश करने लगती है मगर पीछे से गौतम उसका हाथ पकड़ कर सुमन को अपनी तरफ खींच लेता है और एक जोरदार थप्पड़ सुमन के गाल पर मरता हुआ उसे अपनी बाहों में भर लेता है औऱ सुमन से कहता है..

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गौतम - अगली बार मरने की बात भी की, तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझी आप?

सुमन थप्पड़ खाकर भी मुस्कुरा पडती है औऱ गौतम के होंठों को चुमकर कहती है - अपनी माँ के गाल पर इतना जोर से थप्पड़ मारना जरुरी था?

गौतम अपनी माँ सुमन को बाहों में भरके छत पर बने फालतू सामान से भरे कमरे की तरफ उठाकर ले जाते हुए - अभी तो सिर्फ एक ही पड़ा है अगली बार ऐसा कुछ किया ना आपने तो बहुत पिटोगी आप..

इतना कहते हुए गौतम सुमन को कमरे में एक चारपाई पर बैठा देता है औऱ सुमन का पल्लू हटाकर उसकी ब्लाउज के सारे बटन खोलकर ब्रा ऊपर सरकातें हुए सुमन के कबूतर आजाद कर देता है औऱ फिर अपनी पेंट खोलकर लंड को लहराते हुए सुमन के मुंह में घुसा देता है औऱ सुमन भी मुस्कुराते हुए गौतम के लंड को बिना कंडोम लगाए चूसने लगती है औऱ लंड चूसते हुए गौतम को देखने लगती है..

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गौतम अपनी माँ के इस रूप से उत्तेजित औऱ कामुकता के शिखर पर जा चूका था उसे झड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा औऱ उसने सारा वीर्य सुमन के मुंह में भरके उसे अपना वीर्यपान करवा दिया औऱ सुमन न चाहते हुए भी गौतम को खुश करने के लिए उसका वीर्य पी गई...

गौतम झड़ने के बाद सुमन के बगल में बैठ जाता औऱ औऱ गले में हाथ डाल कर सुमन की एक चूची पकड़कर मसलते हुए कहता है..

गौतम - काश आप मेरी माँ नहीं बीवी होती सुमन.. मैं आपको बिस्तर से उठने ही नहीं देता..

सुमन हसते हुए गौतम का लंड साफ करती हुई - ये नहीं होने वाला बच्चू.. तेरे नसीब मेरे ऊपर का छेद है नीचे का नहीं.. चल अब जाती हूँ..

वरना तू फिर से शुरू हो जाएगा..

सुमन जैसे ही उठने लगती है गौतम सुमन को अपनी गोद में बैठा लेता है औऱ कहता है - थोड़ी देर बैठो ना माँ मेरे साथ.. नीचे जाकर क्या करोगी.. कितनी भीड़ औऱ शोर है नीचे..

सुमन - शादी में भीड़ औऱ शोरगुल तो होता ही है.. जब तेरी शादी होगी तब भी इतना ही ऐसे ही भीड़ औऱ शोर होगा..

गौतम - नहीं होगा माँ.. मेरी शादी में सिर्फ दो लोग ही रहेंगे.. एक मैं औऱ दूसरी आप.. हमारी शादी ख़ास होगी..

सुमन - गौतम देख तू वापस वही बात मत शुरू कर देना.. मैं तुझे अपना फैसला बता चुकी हूँ..

गौतम - मैं तो मज़ाक़ कर रहा था मेरी प्यारी सी सेक्सी सुमन..

सुमन सिगरेट सुलगाते हुए - रूपा का फोन आया था कह रही थी तेरा फ़ोन बंद है..

गौतम - हाँ अब इतने चाहने वाले है मेरे.. किस किस से बात करता तो सोच कुछ बंद ही कर देता हूँ..

सुमन सिगरेट का कश लेकर सिगरेट गौतम को देती हुई - एक बार बात कर ले बेचारी बहुत परवाह करती है तेरी..

गौतम कश लेकर - पता है माँ.. वापस जाकर रूपा मम्मी के साथ ही रहेंगे हम दोनों..

सुमन - मम्मी? माँ सिर्फ मैं हूँ तेरी औऱ कोई नहीं.. समझा?

गौतम - आप माँ हो रूपा मम्मी औऱ माधुरी छोटी माँ.. मैंन छोटी माँ को सब बता दिया..

सुमन - फिर क्या कहा उसने?

गौतम - पहले तो कुछ नहीं बोली मगर फिर थोड़ा डांटने लगी औऱ बोली आपसे बात करनी है उसे..

सुमन - बात करवा ना फिर..

गौतम - वापस चलकर बात कर लेना माँ सीधा घर चले जाएंगे उनके..

सुमन - उनका घर कैसे हुआ? तेरे पापा ने लिया है घर.. हमारा भी हक़ है उसपर.. मैं तो जाकर उससे यही बात करुँगी औऱ तेरे पापा से भी यही बात कहूँगी..

गौतम - पर हम खुश है ना वहा भी..

सुमन - खुश? उस शुरू होते ही ख़त्म होने वाली जगह में रहकर खुश है तू? मैं खुश नहीं हूँ.. मेरा हक़ कोई औऱ चुड़ैल नहीं खा सकती..

गौतम सिगरेट सुमन को देते हुए - गुस्से में कितनी प्यारी लगती हो माँ..

सुमन कश लेकर - तेरा भी हक़ है उस घर पर.. हम वापस जाकर रूपा नहीं माधुरी के साथ रहेंगे.. देखती हूँ वो कैसे रोकती है हमें..

गौतम - वो क्यों रोकने लगी माँ.. वो तो शायद यही चाहती है औऱ इसीलिए आपसे बात भी करना चाहती है.. वैसे मेरे लिए भी अच्छा है.. आप तो अपनी चुत को छुपा के रखो.. छोटी माँ तो मुझे अच्छे से प्यार करेंगी उस घर में..

सुमन गुस्से में - चुत के चककर में अपनी माँ की सौतन से प्यार करेगा तू..

गौतम मुस्कुराते हुए - सौतन होगी आपकी मेरी तो छोटी माँ है.. कैसे भी चोदू बुरा नहीं मानती उल्टा बराबर का साथ देती है..

सुमन उदासी से - देख रही हूँ उस डायन ने मेरा पति तो छीन ही लिया है मेरा बेटा भी मुझसे छीन रही है..

गौतम सुमन की उंगलियों में सुलगती सिगरेट को अपनी उंगलियों में लेकर सुमन के होंठों पर सिगरेट लगाते हुए - ऐसा नहीं है मेरी सेक्सी सुमन.. आपसे मुझे कोई नहीं छीन सकता..

सुमन सिगरेट का कश लेकर गौतम को देखते हुए - भाभी का बहुत बुरा हाल किया है तूने.. बेटी की शादी में चलने ठीक से लायक नहीं छोड़ा..

गौतम - कुछ सीखो अपनी भाभी से माँ.. आप आगे के लिए मना कर रही हो मामी तो आगे पीछे दोनों तरफ ले गई थी मेरा..

सुमन चौंकते हुए - तूने भाभी की गांड..

गौतम हस्ते हुए - हाँ.. मारी है मैंने आपकी प्यारी भाभी की गांड..

सुमन - भाभी ने मना नहीं किया? बहुत दर्द हुआ होगा उनको तो..

गौतम - मना तो किया पर.. बदले में गांड मारना तो जायज था.. सुबह यहां आने के बाद भी एक बार औऱ मरवाई थी मामी ने..

सुमन - तभी ये हाल है भाभी का.. तुझे शर्म नहीं आई.. इतना सब करते हुए...

गौतम मुस्कुराते हुए - भाभी तो फिर भी चल पा रही है माँ..एक बार आप हाँ कर दो फिर देखना आपको तो चलने लायक भी नहीं छोडूंगा.. वैसे माँ मुझे तो इस शादी में कई चुत मिल जायेगी.. आप कहो तो आपकी इस चुत के लिए लोड़ो का बंदोबस्त करू?

सुमन हसते हुए - अपनी माँ का दल्ला बनेगा तू.. बेशर्म..

गौतम - जब आप मेरी ख़ुशी के लिए ये सब कर सकती हो तो में क्यों नहीं कर सकता.. मुझसे नहीं चुदना तो किसी औऱ से चुदलो.. मैं बुरा नहीं मानुगा..

सुमन जोर से हँस्ती हुई - अब नीचे जाने दे वरना तू मुझे सच में किसीसे चुदवा देगा..

गौतम सुमन के दोनों चुचे अपने हाथों में पकड़कर मसलते हुए - आपके जैसी खूबसूरत औरत बिना चुदे अपने दिन बिताये ये तो बहुत गलत बात है माँ..

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सुमन - कितना जोर से दबाता है तू गौतम मेरे बोबो को.. अब तो सारे ब्लाउज औऱ ब्रा भी टाइट हो गई है.. लगता है तूने दबा दबा के मेरे बोबो का साइज बढ़ा दिया है.. अब नए ब्रा औऱ ब्लाउज बनवाने पड़ेगे.. बाबाजी से तेरी शिकायत करनी पड़ेगी.. छोड़ अब..

ये कहकर सुमन नीचे चली जाती है औऱ गौतम छत पर ही ठहलने लगता है फिर कुछ देर बाद वो भी नीचे आ जाता है..

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फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे?

सो रहा था..

इतनी देर तक सो रहे थे? ऐसा क्या कर रहे थे रातभर?

अरे यार.. बताया था ना कल फंक्शन था यहां.. इतना शोर गुल था नींद ही नहीं आई.. सुबह 4 बजे सोया था..

तो बताना चाहिए था ना मुझे.. मैं अपनी बाहों में भरके सुला लेती तुम्हे..

ओह हो.. फिर अगर मैंने तेरे बदन को इधर उधर से पकड़कर छू लिया होता औऱ तेरे साथ जोर जबरदस्ती करने की कोशिश की होती, तब तू क्या करती?

तब मैं तुम्हे चुम लेती औऱ कहती कि अगर तुमने मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की तो मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर लुंगी.. औऱ फिर तुम्हारी इज़्ज़त लुटकर अपनी हवस मिटा लेती..

अच्छा ज़ी.. 4 दिनों में ही इतनी मोहब्बत हो गई मुझसे?

एक बार मिलने तो आओ मुझसे तुम.. फिर बताउंगी ये कबाड़ी वाले की बेटी कितनी मोहब्बत करती है तुमसे..

2-3 दिन की औऱ बात है रेशमा.. फिर देखना तेरा ये आशिक कैसे तेरी चुत की खुजली मिटाता है..

मुझसे तो रहा ही नहीं जा रहा तेरे बिना मेरे कुत्ते.. मन कर रहा है इस फ़ोन में घुसके तेरे पास आ जाऊ औऱ तुझे अपने गले से लगा लू..

अच्छा ये चैटिंग छोड़ वीडियो कॉल कर ना रेशमा.. देखना है तुझे..

एक मिनट.. हाँ.. कॉल कर रही हूँ..

गौतम वीडियो कॉल उठाके - आज तो बहुत प्यारी लग रही हो..

रेशमा हस्ते हुए - कुछ पहन तो लो.. कैसे नंगे होके बैठे हो..

गौतम केमेरा में अपना रेशमा को लंड दिखाकर - देखो ना ये बेचारा तुमसे मिलने की आस में कैसे खड़ा है.. बोलता है जब तक तुझसे नहीं मिलेगा तब तक नहीं बैठेगा..

रेशमा अपनी कुर्ती उतारकर अपने चूचियाँ मसलते हुए - गौतम इससे कहो कि ये खड़ा हुआ ही अच्छा लगता है.. जब हमारी मुलाक़ात होगी तब अगर ये बैठ गया तो बहुत मार खायेगा मुझसे..

गौतम - रेशमा तुम तो कह रही थी असलम बात तक नहीं करता तुमसे फिर तुम्हारे चुचे इतने कैसे बड़े होते जा रहे है? कोई औऱ तो इनपर मेहनत नहीं कर रहा ना?

रेशमा - कमीने फ़ोन पर बड़े लग रहे होंगे तुझे.. तीन साल से ब्रा का साइज वही है..

गौतम - फ़िक्र मत कर मेरी फुलझड़ी.. बहुत जल्दी तेरी चूची औऱ चुत्तड़ का साइज बढ़ने वाला है..

रेशमा अपनी चुत में ऊँगली करती हुई - गौतम देखो ना.. कैसे ये कमीनी तुम्हे देखकर गीली हो गई है.. लगता है तुमसे दुरी इसे भी बर्दाश्त नहीं है..

गौतम - तो तुम ही क्यों नहीं आ जाती मुझसे मिलने यहां? परसो की शादी है.. औऱ कोनसा तू दूर रहती है.. दो घंटे का ही तो सफर है..

रेशमा - पर आउ किसके साथ? क्या कहूँगी असलम से?

गौतम - बोल देना तेरी सहेली की शादी है.. कार्ड मैं तुझे व्हाट्सप्प कर देता हूँ..

रेशमा - ठीक है मैं बात करके देखती हूँ असलम से.. वैसे उम्मीद तो बहुत कम वो मेरी बात मानेगा..

गौतम - वैसे रेशमा.. एक बात बताऊ.. मैंने आदिल के फ़ोन से तेरे नंबर नहीं लिए थे.. आदिल ने खुद मुझे तेरे नम्बर दिए थे..

रेशमा चुत में ऊँगली करती हुई - क्यों दिए थे उसने तुझे मेरे नंबर?

गौतम - ताकि मैं तेरी चुत की खुजली को मिटा सकूँ..

रेशमा झड़ने लगती है फिर संभलकर कहती है - तूने अब तक हमारे बीच जो हुआ वो आदिल को तो नहीं बताया ना..

गौतम - अभी तक हुआ ही क्या है हमारे बीच.. जो मैं किसी को बताऊंगा.. पहले कुछ हो तो जाए..

रेशमा मुस्कुराते हुए - होने के बाद भी अगर तुमने किसी से कुछ कहा तो बहुत मार खाओगे देखना..

गौतम - अच्छा अब रखता हूँ.. नहाना है मुझे..

रेशमा - आई लव यू मेरे कुत्ते..

गौतम - आई लव यू मेरी कुत्तिया.. फ़ोन कट हो जाता है..

गौतम नहाने लगता है और नहा कर जब बाहर आता है तो उसे अपने सामने खड़ी हुई आरती कप मैं चाय लिए दिखती है जो गौतम को सिर्फ टावल में देखकर अपनी आँखे सेकती हुई बार-बार गौतम को ऊपर से नीचे तक देख कर अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए उसे आंखों से अश्लील इशारे कर रही थी जिसे गौतम अच्छे से समझ रहा था और आरती के मन की दशा भी उसे अब अच्छे से समझ आ रही थी...

गौतम में नाराज होने का नाटक करते हुए आरती से चाय का कप नहीं लिया और अपने गीले बाल सुखाने लगा.. आरती ने चाय का कप टेबल पर रखते हुए गौतम के हाथ से तोलिया ले लिया और उसे बेड पर बिठाते हुए अपने हाथ से उसके बाल सुखाने लगी.. गौतम को आरती से इस तरह की कोई उम्मीद नहीं थी मगर जिस तरह से आरती उसके सर के बाल जो गीले थे उन को तौलिये से सुखा रही थी.. गौतम जान रहा था कि आरती पूरी तरह से गौतम के ऊपर लट्टू है और गौतम से आकर्षित है.. आरती बहाने बहाने से गौतम के बदन को छू रही थी और गौतम आरती से बचते हुए ऐसा दिखा रहा था जैसे वह आरती से दूर जाना चाहता हो मगर आरती उसे अपने से दूर नहीं करना चाहती थी..

आरती - क्या बात है देवर ज़ी? गले औऱ सीने पर इतने निशान.. लगता है कई बिल्लीओ ने आपका ये हाल किया है..

गौतम आरती से तौलिया लेकर - रहने दो भाभी मैं सूखा लूंगा अपने बाल..

आरती - अरे अरे.. नहीं बताना तो मत बताओ.. देवर ज़ी.. पर ऐसे क्या करते हो.. अपनी भाभी को कम से कम इतना तो करने दो..

यह कहते हुए आरती गौतम के बेहद करीब आ जाती है और उसके होठों से अपने होंठ लगभग लगाते हुए उसके बाल साफ करने लगती है मगर गौतम अपना चेहरा मोड़ते हुए आरती से मुंह फेर लेता है औऱ आरती से कहता है.

गौतम - भईया याद कर रहे होंगे आपको भाभी.. अब रहने दो.. मैं कर लूंगा..

आरती उदासी से - तुम्हारे भईया ही तो याद नहीं करते मुझे.. देवर ज़ी.. वो तो बस दूकान ही सँभालते है मुझे सँभालने के लिए उनके पास ना तो वक़्त है ना उनमे इतनी ताकत..

गौतम बाल बनाते हुए - तभी मेरे पीछे पड़ी हो आप.. पर ये ख्याल छोड़ दो भाभी.. मैं नहीं पटने वाला..

आरती अपना पल्लू गिराकर गौतम के करीब आते हुए - अरे देवर ज़ी.. पटाना अभी शुरू ही कहा किया है मैंने आपको.. शादी का माहौल है.. सबकी इच्छा पूरी हो रही है.. मेरी मुराद भी पूरी हो जाए तो आपका क्या बिगड़ जाएगा.. इतनी बुरी भी नहीं है आपकी भाभी.. आपके गले औऱ सीने पर कुछ निशान छोड़ने का हक़ तो आपकी इस भाभी का भी है..

ये कहते हुए आरती ने गौतम की कमर पर बंधे हुए तोलिया को अपनी उंगली के दबाव से एकदम से झटके से खोल दिया और गौतम को इसका अंदाजा भी नहीं था. गौतम ने अभी तौलिये के नीचे अंडरवियर नहीं पहना था जिससे तोलिया हटाने पर वह पूरी तरह अपनी प्राकृतिक अवस्था में आ गया और आरती के सामने उसका विशालकाय हथियार लहराते हुए झूलने लगा.. गौतम का हथियार देखकर आरती के जैसे रोंगटे खड़े हो गए और वह कामुकता से भर्ती हुई सन रह गई उसने आज से पहले इस तरह की कोई चीज नहीं देखी थी आरती अश्लील फिल्में देखने की शौकीन थी और अक्सर वह फिल्मों में इस तरह के लंड देखती थी मगर आज उसने हकीकत में ऐसा कुछ देख लिया था और उसे देखकर उसकी आंखें खुली की खुली रह गई थी और वह हैरत से गौतम को देख रही थी.

गौतम का आरती से ऐसा कुछ करने की उम्मीद नहीं थी मगर आरती ने जब ऐसा कुछ कर दिया तो उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें वह पहले तो एक दो पल के लिए भूत बना हुआ खड़ा रहा मगर फिर अपने तोड़ने को फर्ष से उठाकर वापस अपनी कमर पर बांध लिया और आरती पर गुस्सा होते हुए चिल्लाते हुए कहा..

गौतम - भाभी पागल हो क्या? ये क्या हरकत है?

आरती तो जैसे अभी तक गौतम के हथियार में ही खोई हुई थी उसे तौलिये के ऊपर से भी गौतम के हथियार की हल्की झलक मिल रही थी जो अभी तक सोया हुआ था.. आरती के कानों में गौतम की आवाज पड़ी ही नहीं और वह बस गौतम के लंड पर अपनी नजर डालें खड़ी हुई सिर्फ गौतम के लंड की ओर देख रही थी, गौतम ने आरती को ऐसा करते हुए देखा तो फिर से चिल्लाकर उसका कंधा पकड़कर झकझोरते हुए कहा..

गौतम - भाभी... भाभी...

आरती - देवर ज़ी.. आपका इतना बड़ा..

गौतम शरमाते हुए - भाभी आप जाओ यहां से..

आरती वापस अपने हाथ से गोतम का तौलिया खींचने लगती है मगर इस बार गौतम आरती का हाथ पकड़ लेता है..

गोतम - भाभी पागल हो गई हो क्या आप.. क्या कर रही हो..

आरती उत्सुकता से - देवर ज़ी बस एक बार वापस देख लेने दीजिये.. मैं चली जाउंगी..

गौतम - दरवाजा खुला हुआ है भाभी, कोई देख लेगा आप जाओ यहाँ से..

आरती - कोई नहीं देखेगा ग़ुगु.. मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ..

आरती दरवाजा बंद करने के लिए मुड़ जाती है और दरवाजा बंद करने लगती है आरती के दरवाजा बंद करते ही बाहर हाल में डीजे की आवाज बजनी शुरू हो जाती है जिसमें आज शादी का महिला संगीत था.. डीजे पर पहला गाना बजते ही होटल में चारों तरफ शोर गुल मच जाता है जिसमें हर किसी को एक दूसरे की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी हर कोई एक दूसरे से जोर से कहकर बात कर रहा था और एक दूसरे को इशारों से अपनी बात समझ रहा था इसका फायदा उठाकर आरती ने दरवाजा बंद कर वापस गौतम के पास आ गई और उसका तोलिया खींचने की नीयत से अपना हाथ बढ़ा दिया..

गौतम हाथ पकड़ते हुए - भाभी क्या मज़ाक है.. जाओ आप यहां से..

आरती अपना हाथ छुड़ाकर अपनी साडी उतारते हुए - देवर ज़ी आज तो चाहे कयामत आ जाए.. मैं यहां से नहीं जाने वाली..

आरती जब अपनी साड़ी उतार रही होती है गौतम की नजर आरती के ब्लाउज में चली जाती है जहां दो मस्त-मस्त मौसम कड़क होकर सामने की तरफ तनी हुई थी और उनको देखने से लगता था कि उन पर अब तक किसी के हाथ नहीं पड़े हैं और ना ही आरती ने इन पर किसी और को हुकूमत करने का आदेश ही दिया था..

गौतम का सोया हुआ लैंड धीरे-धीरे उठने लगता है और वह आरती को अपने कपड़े उतारते हुए देखने लगता है आरती साड़ी के बाद अपना ब्लाउज और फिर पेटिकोट उतार कर ब्रा औऱ पेंटी में आ जाती है और फिर गौतम की ओर बढ़ने लगती है.. इस बार गौतम ने आरती से बिना किसी शर्म और लिहाज़ के मिलने का निश्चय कर लिया था और वह अपनी और आती हुई आरती को कामुक नजरों से देखने लगा था..

गौतम ने अपनी और आती हुई आरती को देखते हुए अपना तोलिया अपने हाथों से ही हटाकर साइड में रखे सोफे पर फेंक दिया और आरती की कमर में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचते हुए उठाकर एक साथ बिस्तर पर पटक दिया... वहां से गौतम आरती के ऊपर चढ़ा और उसे छूने लगा.. आरती भी गौतम के इस व्यवहार से हक्की बक्की रह गई और चौंकते हुए वह गौतम को चूमने लगी और उसकी आंखों में देखी हुई अपनी आंखों के इशारों से उसे पूछने लगी कि एकदम से उसे यह क्या हुआ है मगर गौतम ने उसकी आंखों के इशारे का कोई प्रति उत्तर नहीं दिया और चुपचाप आरती के होठों का स्वाद लेने लगा दोनों के होंठ आपस में इस तरह मिल रहे थे जैसे दो बिछड़े हुए दोस्त लिपटकर एक साथ मिल जाते हैं दोनों के बीच होठों की जंग जुबानी हो चुकी थी गौतम और आरती ने एक दूसरे की जीभ को अपने-अपने मुंह से निकाल कर एक दूसरे की जीभ से लड़ाना और मिलना चालू कर दिया था..

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आरती को जो सुख अपने पति चेतन से नहीं मिल पाया था वह गौतम से पा लेना चाहती थी और किसी नियत से गौतम को चूम रही थी..

चुंबन के दौरान गौतम ने आरती की ब्रा निकाल कर फेंक दी जिससे उसके नुकीले सूचक गौतम के सीने पर चुभने लगे और इसमें गौतम को एक अजीब और मीठा अहसास होने लगा, उसकी कामुकता और ऊपर उठने लगी और हवाओं में तैरने लगी..

गौतम चुम्बन तोड़कर आरती से कहा - भाभी एक बार फिर सोच लो.. कल दीदी की शादी है औऱ एक बार मेरे साथ ये सब करने के बाद आप कुछ दिन ठीक से चल भी नहीं पाओगी.

आरती - मुझे फर्क नहीं पड़ता देवर ज़ी.. आप बस मुझे ऐसा रगड़ के रख दो कि मैं तृप्त हो जाऊ..

गौतम - जैसा आप चाहो भाभी..

गौतम इतना कह कर आरती कि छाती की तरफ आ जाता है और उसकी छतिया पर खड़े हुए चूचक अपने मुंह में लेकर चूसने लगता है और अपने हाथों से उन्हें मसलने और दबाने लगता है जिससे आरती के मनोभावों में कामुकता कि हवा में घूमती महक की तरह उठकर फैलने लगती है और तैरने लगती है जिससे आसपास का वातावरण काममई हो जाता है..

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आरती गौतम का चेहरा पकडे हुए उसे अपनी छाती के उभार का मज़ा देने लगती है.. आरती के कड़क उठे हुए और तीर की तरह चुभने वाले चुचक गौतम अपने मुंह में लेकर इस तरह चूस रहा था जैसे वह बच्चे बचपन में अपनी माँ की चूची पकड़ के उनमे से दूध चूसते हैं...

आरती सीस्कारियां लेते हुए गौतम के चेहरे को पकड़े हुए उसके बालों में हाथ फिराती हुई उसे अपनी छाती का पूरा मजा दे रही थी और वह चाहती थी कि गौतम उसकी छाती से भरपूर मजे लेकर उसपर लट्टू हो जाए, उससे खेले जिससे उसकी ब्रा का साइज औऱ उसकी मादकता दोनों बढ़ जाए..

गौतम आरती के चुचे से खेलते हुए एक हाथ से उसकी पेंटिंग नीचे सरकार कर उतार देता है और फिर उसकी टांगों के बीच में आ जाता है और उसकी टांगें खोलकर उसकी जांघों की जोड़ पर अपना हाथ रखकर आरती की चुत को मसलने लगता है जिससे आरती अब खुलकर सिसकने औऱ आहे भरने लगती है..

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आरती की चुत से गौतम के हाथ लगाते ही पानी निकलने लगा था औऱ वो झड़ गई थी मगर फिर गौतम ने अपने लंड पर थूककर अपने लंड को आरती की चुत में घुसने के लिए सेट कर दिया औऱ धक्का देने लगा..

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आरती को चेतन ने सुहागरात से लेकर अब तक एक बार भी तृप्त नहीं किया था ना ही उसके साथ अच्छे से संभोग किया था जिससे आरती काम की अग्नि में जल रही थी और उसने शादी के इतने सालों तक अपनी चुत को घर में रखें गाजर मूली बैंगन यहां तक की बेलन से भी ठंडा किया था इसलिए उसकी चुत खुल तो चुकी थी मगर चुदी नहीं थी..

गौतम का लोहे की तरह मजबूत औऱ ठोस लंड अपनी पूरी औकात में खड़ा होकर आरती की चुत में घुसने लगा था औऱ आरती की सिस्कारिया अब उसकी चिंखो में बदलने लगी थी मगर यहां उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था.. ऊपर से उसकी आवाज नीचे बज रहे dj के शोर में इस तरह खो गई थी जैसे भुंसे के ढेर में सुई खो जाती है.

गौतम ने आरती पर रहम करते हुए अपना हथियार धीरे-धीरे उसकी गुफा में गुस्सा आया था मगर अब आधा हथियार अंदर जाने के बाद गौतम को आरती की शक्ल देखने में मजा आने लगा..

आरती की सूरत इस तरह की थी जैसे कोई बिन पानी मछली की होती है आरती की शक्ल देखते हुए गौतम को उसकी कही हुई हर बात याद आने लगी कि किस तरह से आरती कुछ दिनों से गौतम का दिल दुखाने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी हालांकि आरती उन बातों को मीन नहीं करती थी ना ही उसने वह बात जानबूझकर कही थी..

उसका मकसद सिर्फ गौतम का दिल दुखाना था जिसमें वह कामयाब भी नहीं हो पाई थी मगर गौतम को आप सब याद आ रहा था और वह आरती के चेहरे पर उभरते इस भाव को देखकर सुकून महसूस कर रहा था कि अब आरती का सारा घमंड और सारी अकड़ चकनाचूर हो चुकी है..

गौतम - क्या हुआ भाभी अभी तो आधा ही अंदर गया है औऱ आप तड़पने लगी..

आरती सिसकते हुए - देवर ज़ी मैं कोई रांड थोड़ी हूँ जो इतना बड़ा लोडा एक बार में ले जाउंगी..

गौतम - चिंता क्यों करती हो भाभी.. मैं हूँ ना आपका देवर.. आपको अपने लंड से चोदकर पक्का रांड बना दूंगा..

आरती - ग़ुगु धीरे धीरे करना.. अब दर्द भी होने लगा है..

गौतम - ऐसा लगता है तीन साल में चेतन भईया ने आपको हाथ तक नहीं लगाया.. बिलकुल नाजुक हो आप तो.. देखो सील टूट गई आपकी...

आरती - उसे तो सिर्फ खाना औऱ सोना है.. साला सो किलो का ढ़ोल है.. दूकान पर बैठने के अलावा कुछ नहीं आता..

गौतम - ये बात तो है भाभी.. चेतन आप जैसी हसीन नाजुक औऱ प्यारी लड़की के लायक़ नहीं है..

आरती धीरे धीरे अपनी गांड उठाकर चुदवाते हुए - तो देवर ज़ी.. आप क्यों नहीं बना लेटे मुझे अपना.. ले चलो अपनी भाभी को भगा के.. मैं मना थोड़ी करुँगी..

गौतम धीरे धीरे आधे लंड से चोदते हुए - रहने दो भाभी.. ये ऐश औऱ आराम छोड़कर जाना आपके बस की बात नहीं है..

आरती - ऐसा नहीं है देवर ज़ी.. मैं तो आपके साथ फुटपाथ पर भी रह लुंगी. बस आप अपने इस लंड से मेरी चुत की सर्विस टाइम से करते रहना..

गौतम एक जोरदार धक्का मारके आरती की चुत में अब पूरा लंड घुसा देता है औऱ आरती चिल्लाते हुए गौतम से लिपटकर सिसकियाँ लेने लगती है..

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गौतम - भाभी दर्द तो नहीं हुआ ना..

आरती - देवर ज़ी आपने तो आज असली में सील तोड़ दी..

गौतम मिशनरी पोज़ में आरती की चुदाई करता है और फिर आरती को अपने आगे घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करने लगता है..

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आरती खुलकर गौतम के साथ अपनी हवस बुझा रही थी उसे अब किसी की फिक्र नहीं थी आरती खुल के गौतम को अपना चुकी थी और उसके साथ मजाक मस्तियां करते हुए कामसुख भोग रही थी..

गौतम ने घोड़ी के बाद आरती को अपनी गोद में उठा लिया औऱ उठा उठा के चोदने लगा..

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आरती ने गौतम का बराबर साथ दिया औऱ चुदाई लीला में गौतम को भी पूरा मज़ा मिलरहा था.. आरती बार बार गौतम के होंठों को चूमकर उससे अपने प्यार का इज़हार कर रही थी औऱ चुदाई के चरम पर पहुंचकर झड़ चुकी थी.. इस चुदाई में कई बार चुत से झड़ने के बाद आरती ने गौतम को अपनी चुत में घुसा कर लंड पर दबाब बनाते हुए गौतम को भी अपने अंदर अपना पानी निकालने पर मजबूर कर दिया औऱ दोनोंअपनी इस चुदाई के महासंगम के महामिलन से तृप्त होकर एक दूसरे की बाहों में लेट गए थे..

आरती - देवर ज़ी.. आप तो बहुत बुरे हो..

गौतम - क्यों भाभी.. मज़ा नहीं आया आपको?

आरती - प्यार से प्यार करने को कहा था मैंने औऱ आपने.. एक झटके में अपना ये अजगर मेरी बिल में घुसा दिया.. देखो कितनी फ़ैल गई है मेरी चुत..

गौतम - भाभी ऐसी फैली हुई चुत तो हमारे प्यार की निशानी है..

आरती मुस्कुराते हुए - बड़े आये प्यार की निशानी देने वाले.. मैं जानती हूँ तुमने मेरी बातों का बदला लिया है मुझसे..

गौतम - भाभी आपसे बदला? आप किस बात का बदला लूंगा मैं? मैं जानता था कि आप बस मेरा दिल दुखाने के लिए ही बोल रही थी जो आपने बोला.. मैं तो आपसे कभी नाराज़ था ही नहीं..

आरती मुस्कुराते हुए - अच्छा देवर ज़ी.. अब जाने दीजिये.. मौका मिलते ही वापस प्यार झरने आउंगी आपसे.

गौतम - जैसा आप चाहो भाभी.. आपका देवर हमेशा आपकी सेवा के लिए तरयार रहेगा...

आरती बेड से खड़े होते ही लड़खड़ा जाती है हसते हुए गौतम को देखती है..

गौतम सिगरेट सुलगाते हुए - मैंने तो पहले ही कहा था भाभी.. चुदने के बाद ठीक से चल भी नहीं पाओगी..

आरती लड़खड़ाकर दो कदम चलती है उसके मन में वापस चुदने की तलब थी मगर जुबान से इस बात को कहना आरती के बस में अब नहीं था वो कमरे के दरवाजे पर रूकते हुए मुस्कुराते हुए गौतम से कहती है - देवर ज़ी मुझे मेरे रूम तक छोड़ दोगे?

गौतम सिगरेट का एक कश लेकर आरती से कहता है - ये भी तो आपका रूम है भाभी यही आराम कर लो.. शाम तक तो वैसे भी कोई नहीं है पूछने वाला..

आरती लड़खड़ाती हुई वापस बेड के करीब आ जाती है जहाँ गौतम आरती का हाथ पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लेता है औऱ आरती गौतम के ऊँगली में सुलगती सिगरेट लेकर एक लम्बा सा कश भरती है औऱ फिर सिगरेट बुझाकार गौतम को फिर से चूमने लगता है..


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अपडेट 23

माँ बहुत मन कर रहा है चलो ना मेरे साथ..

अभी नहीं गौतम.. अभी बहुत सारा काम पड़ा हुआ है भाभी कीहालत तो तूने खराब ही कर दी.. अब मुझे ही उनका सारा काम करना पड़ रहा है, शाम को बारात भी आने वाली है.. मुझे ऋतू के पास ही रहना होगा आज..

माँ मैं ज्यादा टाइम नहीं लगाऊंगा, आओ ना..

गौतम समझा कर ना.. अभी मेरे पास वक्त नहीं है उन सब चीजों के लिए.. तू बाथरूम जाकर अपना हीला क्यों नहीं लेता.. सिर्फ आज आज की बात है..

सुमन अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगे तो मैं तुम्हारी मां चोद दूंगा..

सुमन हसते हुए - जा चोद दे मेरे शहजादे मेरी माँ को.. पर आज मुझे माफ़ कर..

गौतम - ठीक है फिर बाद में आप मत कहना कि ये तूने क्या किया..

सुमन गौतम की बात को मज़ाक़ में लेटे हुए - नहीं कहूँगी.. अब काम करने दे.. सारा सामान इधर उधर है.. बहुत टाइम लगेगा ये सब समेटने में..

गौतम सुमन के रूम से बाहर आ जाता है औऱ नीचे सामान रखकर वापस आ रही गायत्री को अपनी गोद में उठा कर ऊपर सीढ़ियों की तरफ चल देता है..


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गायत्री - क्या कर रहा है ग़ुगु.. नीचे उतार मुझे..

गौतम - कुछ नहीं नानी.. बस सोच रहा हूँ आपकी जवानी का पानी पी लूँ..

गायत्री - बेशर्म कोई देख लेगा.. कहा ले जा रहा है मुझे?

गौतम - कहीं नहीं नानी.. बस अपने कमरे में ले जा रहा हूँ.. औऱ सब तो नीचे नाच गाने में बिजी है आपको औऱ मुझे देखने वाला कोई है ही नहीं यहां..

गायत्री - इतनी जवान औऱ खूबसूरत लड़कियों को छोड़कर तू मेरे पीछे ही क्यों पड़ा है ग़ुगु.. मुझ बुढ़िया में तुझे क्या दिख गया...

गौतम गायत्री को बिस्तर पर पटकते हुए - आपको बुढ़िया होने में औऱ पचीस साल लगेंगे नानी.. अभी तो आपकी जवानी बहुत बाकी है..

गायत्री - दरवाजा तो बंद कर दे ग़ुगु..

गौतम अपनी शर्त उतारते हुए - छोडो ना नानी.. वैसे भी कौन आने वाला है यहां.

गायत्री उठकर दरवाजा बंद करते हुए - किसीने देख लिया तो कोई तुझे कुछ नहीं कहेगा.. सब मुझे ही दोषी समझेंगे.. इस उम्र में अपनी नाती से नाजायज सम्बन्ध बना रही हूँ..

गौतम गायत्री की साडी निकालते हुए - नानी क्या बार बार अपनी उम्र को याद जर रही हो आप.. अभी देखना कैसे कुंवारी लड़कियों की तरह चीख निकलवाता हूँ आपके मुंह से मैं..

गायत्री अपने ब्लाउज के बटन खोलकर - अब क्या मुझे पूरा नंगा करेगा ग़ुगु? ऐसे ही घाघरा उठा के कर ले ना जो तुझे करना है..

गौतम - ऐसे ही करना होता तो किसी रंडी के साथ कर लेता नानी.. आपको अपने बिस्तर पर क्यों लाता? जब आपके औऱ मेरे ऊपर से नीचे तक अंग से अंग मिलेंगे तब ही तो हमारा मिलन यादगार रहेगा..

गायत्री - मिलन यादगार बनाने के चक्कर में अपनी नानी को ज्यादा दर्द मत दे देना..

गौतम गायत्री के बदन पर से आखिरी कपड़ा उतारते हुए - फ़िक्र मत करो नानी.. इतनी प्यार से करूँगा कि प्यार भी शर्मा जाएगा..

गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम को अपनी तरफ खींचकर - ग़ुगु.. चूमेगा नहीं अपनी नानी को..

गौतम गायत्री के सफ़ेद हो चुके बाल पकड़कर - बिना चुम्माचाटी चुदाई की शुरूआत कैसे होगी नानी.. आपके इन रसीले होंठों के जाम पिए बगैर मुझे चुदाई का नशा भी नहीं चढने वाला.. अब जल्दी से अपने होंठो को मेरे होंठों के हवाले कर दो नानी.. औऱ मुझे अपने मुंह का मीठा मीठा रस पीला दो..

गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम को बेड पर पीठ के बल लेटाते हुए उसके सीने पर अपनी छाती टिका कर अपने होंठ गौतम के होंठों के करीब लाकर कहती है..

गायत्री - पिले ग़ुगु.. अपनी नानी के मुंह का सारा रस पिले बेटा.. कब से मैं विधवा की तरह बस घर के एक कोने में पड़ी हूँ.. सबने बस मुझे अकेला छोड़ दिया है..पर ग़ुगु तूने अपनी नानी को अकेला नहीं छोड़ा..

गौतम प्यार से गायत्री के होंठों ओर अपने होंठ रखकर उसके होंठों का एक चुम्मा लेकर गायत्री की चूची पकड़कर कहता है..

गौतम - आज भी आपके चुचक कितने कड़क औऱ नुकिले है नानी.. आपके दोनों चुचक मेरे सीने में ऐसे चुभ रहे है जैसे किसीने चाकू चुभा रखा हो.. आपकी पतली कमर औऱ ये फूली हुई गांड.. माँ कसम.. किसी भी लंड को खड़ा करने के लिए काफी है..

गायत्री गौतम के होंठ अपनी उंगलियों से पकड़कर - तू भी कहा पीछे है मेरे छोटे से बच्चे.. सिर्फ बीस बरस का है औऱ अपनी प्यारी बातों औऱ भोली सूरत से अपनी साठ बरस की नानी को नंगा होकर चुदवाने पर मजबूर कर दिया.. सच कहती हूँ ग़ुगु.. अब तो मैं खुद तुझसे चुदवा चाहती हूँ बेटा..

गौतम मुस्कुराते हुए - प्यार औऱ चुदाई में उम्र नहीं देखी जाती नानी.. वो गाना है ना.. ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन.. जब प्यार करें कोई तो देखे केवल मन..

गायत्री हसते हुए - मेरा ग़ुगु तो बहुत समझदार हो गया.. चल अब अपनी नानी से प्यार भी करेगा या ऐसे ही मुझे अपनी बाहों में नंगा रखने का इरादा है सारा दिन..

गौतम - लगता है आपको बहुत जल्दी है नानी.. कहीं जाने का इरादा है?

गायत्री - नहीं मेरे प्यारे बच्चे.. मैं तो बस थोड़ी सी फ़िक्र में हूँ कि कोई आ ना जाए..

गौतम - आ जाए तो आ जाने दो नानी.. आप क्यों फ़िक्र करती हो, जो भी आएगा मैं उसे वापस भेज दूंगा.. लेकिन जल्दबाज़ी के चक्कर में मैं आपके जैसी रसमलाई को आधा अधूरा नहीं चखना चाहता..

गायत्री मुस्कुराते हुए - रसमलाई तो तू है मेरे छोटे से बच्चे.. मन कर रहा है अभी तुझे खा जाऊ..

गौतम गायत्री के होंठों से होंठ लगाते हुए - तो खा जाओ ना नानी.. किसने रोका है आपको..

गायत्री और गौतम का चुंबन शुरू हो चुका था और दोनों एक दूसरे को प्यार से बहुत प्यार से चूम रहे थे और एक दूसरे के होठों को इतना कसके अपने होंठों में दबा दबा के चूस रहे थे जैसे दोनों इस चुम्बन के लिए सदियों से बेताब थे.. गायत्री औऱ गौतम के मुंह की लार आपस में मिल रही थी औऱ दोनों एकदूसरे की लार पी लेना चाहते हुए.. गौतम ने अपने मुंह की जीभ गायत्री के मुंह में उतार दी थी जिसे गायत्री की जीभ ने प्रतिउत्तर देते हुए अपनी जीभ से मिला लिया था औऱ दोनों की जीभ आपस में पहलवानो की तरह कुश्ती खेलने लगी थी.. आज गायत्री की कामुकता गौतम के ऊपर भरी थी.. गायत्री अपने दोनों हाथों से गौतम के मुंह को पकड़ कर इस तरह से चूम रही थी जैसे वह गौतम को ये बता देना चाहती हो कि वो गौतम से कितना प्यार करती है.. लम्बे समय तक चुम्बन यूँ ही चलता रहता है..

गौतम चुम्बन तोड़कर - आह्ह... नानी.. आहिस्ता.. चूमते हुए दांतो से कितना काटती हो आप..

गायत्री - क्या हुआ ग़ुगु? ज्यादा तेज़ काट लिया तेरे होंठो को मैंने? माफ़ करना मुझे बेटा..

गौतम - नानी मैं तो माफ़ कर दूंगा पर अगर माँ ने मेरे होंठों ओर आपके काटने के निशान देख लिए तो वो माफ़ नहीं करेंगी आपको..

गायत्री गौतम के होंठ सहलाते हुए - अब नहीं काटूंगी ग़ुगु.. मैं थोड़ा बहक गई थी बेटा..

गौतम वापस गायत्री के होंठों को चूमने लगता है औऱ इस बार गायत्री बहुत आराम से औऱ बिना दांतो से होंठों को काटे चुम रही थी.. गौतम भी प्यार से गायत्री को चूमकर उसके बदन पर उभार औऱ उतार चढ़ाव को अच्छे से महसूस करते हुए अपने दोनों हाथों से तलाश रहा था..

गौतम गायत्री के चुचे पकड़ के दबाते हुए कड़क हो चुके चुचक मसलकर गायत्री से चुम्बन तोड़कर बोला..

गौतम - नानी 36 की ब्रा पहनती हो ना..

गायत्री - नहीं लल्ला.. 34 की ब्रा आती है मुझे..

गौतम - पर नानी आपके ये चुचे तो बहुत मोटे है.. देख कर लगता है 36-38 की ब्रा आती होगी..

गायत्री मुस्कुराते हुए - लल्ला तू अगर मेरे चुचो ओर मेहनत करेगा तो तेरी नानी 36 तो क्या 40 की भी ब्रा पहन लेगी..

गौतम गायत्री के चुचे पर उभर कर खड़े चुचक को मुंह में डालकर चूसते हुए - आप जितनी बोलो मैं उतनी मेहनत करूंगा नानी..

गायत्री - आहहह.. लल्ला.. तू अपने होंठ मेरे ऊपर लगाए या नीचे.. बदन में पूरी मादकता भर जाती है बेटा.. चूस अपनी नानी के चुचे लल्ला.. सोलहा सतरह साल हो गए किसी ने इन पर ध्यान नहीं दिया.. तू अच्छे से पकड़ कर मसल दे मेरी छाती के दोनों कबूतरों को मेरे बच्चे.. चूस लल्ला..

गौतम बारी बारी से गायत्री के दोनों चुचे अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसलता हुआ औऱ चूसता हुआ - मानना पड़ेगा नानी.. आपके आम लटक चुके है मगर अब भी बहुत रसीले है..


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गायत्री गौतम के ऊपर आकर - लल्ला अब अपनी नानी को भी अपने चुचे चुसवा दे.. कितना चौड़ा औऱ गठिला सीना है तेरा.. औऱ तेरे ये निप्पल्स तो कितने गुलाबी है.. इन्हे देखते ही मेरे मुंह में पानी आ रहा है..

गौतम - आओ ना नानी.. आप भी अपनी इच्छा पूरी कर लो..

गायत्री - लल्ला इनपर तो मैं दाँत लगाने वाली हूँ.. तूने मेरी चूचियों पर इतनी लव बाईट दी है अब मेरी बारी..

गायत्री ये कहते हुए गौतम के सीने पर निप्पल्स को अपने मुंह में भरके चूसने औऱ चाटने लगती है..

गौतम गायत्री की जुल्फ संवारते हुए उसे अपनी मरदाना चूची चुसवाता हुआ कहता है - आराम से चूस लो नानी मेरी चूची.. मेरा दूध ख़त्म नहीं होने वाला.. लो ये वाली भी चुसो..

गायत्री दांतो से निप्पल्स खींचते हुए - लल्ला थोड़ा काट लू ना.. तुझे दर्द तो नहीं होगा..

गौतम - आपकी ख़ुशी के लिए हर दर्द को सह जाऊँगा नानी.. आपको जितना काटना है काट लो.. मेरे सीने पर कुछ निशान आपके भी तो होने चाहिए..

गायत्री - मैं तुझसे यही पूछने वाली थी लल्ला.. इतने निशान किसने दिए तुझे?

गौतम - नानी इनमे से कुछ आपकी बहु के दिए हुए है औऱ कुछ आपकी बहु की बहु के..

गायत्री - हाय लल्ला तूने कोमल औऱ आरती के साथ..

गौतम - मैंने कुछ नहीं किया नानी.. उन दोनों ने ही मेरे साथ जबरदस्ती की थी..

गायत्री - तेरे साथ जबरदस्ती की थी तो तूने रोका नहीं उनको..

गौतम - अब कोई औरत किसी मर्द से चुदना चाहे तो मर्द मना थोड़ी करेगा नानी..

गायत्री - तभी दोनों की एक सी चाल है..

गौतम - सही कहा नानी.. उनके पैरों में मोच नहीं लगी, उनकी चुत में मेरे लंड की चोट लगी है.. देखना कुछ महीनों में दोनों का साथ में पेट फुलेगा..

गायत्री हसते हुए नीचे जाकर गौतम का लंड मसलते हुए - लल्ला इस रफ़्तार से तू सबको अपने नीचे लेगा तो कुछ दिनों में सब तेरी रखैल बनकर रह जायेगी.

गौतम लोडा गायत्री के मुंह में देते हुए - ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा नानी.. कम से कम मैं खुलकर तो आप सबकी चुदाई कर पाऊंगा.. हर बार किसीके आने का या किसके देख लेने का डर लगा रहता है..

गायत्री लोडा चूसते हुए - लल्ला जरा पानी दे गला सुख रहा है..

गौतम गायत्री के बाल पकड़कर - कमाल करती हो नानी.. हैंडपम्प मुंह में है औऱ पानी माँग रही हो.. थोड़ी मेहनत करो इसी में से पानी आ जाएगा..

गायत्री लंड चूसते हुए मुस्कुरा कर - अपनी नानी को सुसु पीलायेगा तू ग़ुगु?

गौतम - आपको नहीं पसंद तो लो ये पानी पी लो..

गायत्री पानी लेकर साइड में रख देती है गौतम से कहती है - अब तो तेरा सुसु पीकर ही प्यास बुझेगी मेरे बच्चे..

गायत्री ये कहकर जोर जोर से गौतम का लंड चुस्ती है औऱ कुछ देर बाद गौतम गायत्री के मुंह में पेशाब करने लगता है जिसे गायत्री गंगाजल मानकर पी जाती है..

गायत्री - अब तो तू खुश है ना लल्ला.. अपनी नानी को अपना सुसु पिलाकर...

गौतम गायत्री के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लेता औऱ फिर पलटकर गायत्री को अपने नीचे ले लेता है औऱ उसकी चुत पर थूक लगाकर गायत्री से कहता है..

गौतम - ख़ुशी तो नानी मुझे तब मिलेगी जब मैं आपकी इस चुत से अपने लंड की लड़ाई करवा कर आपकी चुत को हरा दूंगा..

गायत्री गौतम को अपनी तरफ खींचती हुई उसका लंड पकड़ कर अपनी चुत पर सेट करके - तो फिर जल्दी से शुरू कर दे ये लड़ाई लल्ला.. हरा दे अपनी नानी की चुत को.. बना दे मेरी चुत का भोसड़ा ग़ुगु..

गौतम झटका मारते हुए - तो संभालो नानी.. पहले की तरह रोने ना लग जाता.. ये कहते हुए कि मैं नहीं ले पाउंगी मुझे माफ़ कर दे.. आज तो मैं आपको हर हाल में चोद के रहूँगा..

गायत्री - तब से अब तक कई बार गाजर मूली औऱ खिरो से अपने सिकुड़ चुके चुत के छेद को खोल चुकी हूँ लल्ला.. तू दबा के चोद मुझे.. इस dj कि आवाज में मैं चिंखु तो भी किसीको कुछ सुनाई नहीं देने वाला..

पहले झटके में लंड आधा चुत में चला गया औऱ गायत्री सिसकती हुई आह भरने लगी..

गौतम - क्या हुआ नानी पहले झटके में ही सिसकने लगी आप तो..

गायत्री - तू चोद ना लल्ला... चोदते हुए मुझ बुढ़िया को छेड क्यों रहा है?

गौतम धीरे धीरे झटके मारता हुआ - चुदाई का असली मज़ा सिर्फ चोदने में नहीं आता नानी.. चुदाई में थोड़ी छेड-छाड़ भी जरुरी है..

गायत्री - आह्ह.. लल्ला तू तो सच में कामदेव का अवतार है.. चुदने में इतना सुकून तो मुझे जवानी में भी नहीं मिला.. तू भी मज़ा आ रहा है ना ग़ुगु..

गौतम - नानी गाडी 1st औऱ 2ंnd गियर में चले तो गाडी को ही मज़ा आता है.. ड्राइवर को तो गाडी 4th या 5th गियर में चलाने में मज़ा आता है.. आप सुकून से मज़ा लेलो.. मेरा मज़ा उसके बाद शुरू होगा..

गायत्री - लल्ला डाल दे आगे के गियर बेटा.. तेरी गाडी तैयार है टॉप स्पीड में चलने के लिए..

गौतम झटको कि स्पीड पूरी बढ़ाकर अपना लगभग पूरा लोडा गायत्री की चुत में डालकर उसे चोदने लगता है औऱ कहता है - अब शुरू होगी ना असली चुदाई नानी..

गायत्री गौतम के फुल स्पीड से चोदने पर जोर से चिल्लाते हुए - आहहह... लल्ला.. आहहह.. हाय दइया.. मर गई रे... अह्ह्ह्ह.. ओ माँ.. मर गई मैं आज तो.. आहहह.... लल्ला.. झटका जरा हल्का रख.. आहहह... ग़ुगु.. स्पीड धीरे कर बेटा वरना गाडी की माँ चुद जायेगी.. आहहह..

गौतम चोदने की रफ़्तार जरा सी धीरे करता है औऱ चोदते हुए गायत्री से कहता है - अब तो मुझे भी ये लगता है नानी.. गाडी पुरानी हो चुकी है.. थोड़ा देर तेज़ चलाते ही शोर करने औऱ रुकने लगती है..

गायत्री - लल्ला ये गाडी 16-17 साल से बंद पड़ी थी इतने सालों बाद पहली बार में ही स्टार्ट हो गयी वो देख ना तू.. एक दो बार लल्ला धीरे चला ले इस गाडी को.. सर्विस होने के बाद तू चाहे गाडी को हवाई जहाज की तरह उड़ा देना मैं मना नहीं करुँगी..

गौतम - ठीक है नानी.. इस बार कम से कम गाडी में गियर तो डला.. पिछली बार तो वो भी नहीं डला था..

गायत्री - आह्ह.. लल्ला.. अच्छे से चला इस गाडी.. जल्दबाजी या हड़बड़ी में कहीं एक्सीडेंट मत कर देना..

गौतम - फ़िक्र मत करो नानी बहुत एक्सपीरियंस ड्राइवर हूँ.. गाडी को करोच तक नहीं आने दूंगा..

गायत्री - लल्ला गाडी चलाने में मज़ा तो आ रहा है ना तुझे?

गौतम झटके मारते हुए - हाँ नानी.. बस एक बार गाडी स्पीड में चलाने लायक हो जाए फिर मज़ा दुगुना हो जाएगा..

गायत्री - वो भी जल्दी हो जाएगा लल्ला..

गौतम - नानी एक बात सच बताओगी.. आज तक जितने भी मर्दो से चुदी हो मुझसे ज्यादा मज़ा दिया है किसने?

गायत्री - नहीं मेरे बच्चे.. तू तो सबसे ज्यादा ख़ास है मेरे लिए... तू जितना सुकून औऱ सुख दे रहा है उतना तो आज तक नहीं मिल पाया मुझे..

गायत्री औऱ गौतम का सम्भोग किसी योग की तरह खींचता ही जा रहा था.. दोनों धीरे धीरे चुदाई करते औऱ बीच में रुक कर बातें करने लगते औऱ फिर से चुदाई शुरू कर देते.. दोनों की चुत लंड की लड़ाई होते होते दोपहर हो चुकी थी.. गौतम का लंड गायत्री की चुत में था औऱ गायत्री अपनी जीभ बाहर निकालकर गौतम की जीभ से अपनी जीभ लड़ा रही थी औऱ गौतम धीरे धीरे से गायत्री को चोद रहा था..

गौतम - नानी..

गायत्री - हाँ लल्ला..

गौतम - अंदर निकाल दूँ..

गायत्री - निकाल दे लल्ला.. अब इस उम्र में मैं कोनसा माँ बन जाउंगी..

गौतम अपना वीर्य गायत्री की चुत में भर देता है..

गायत्री - तूने तो मुझे काम तृप्ति का सुख दे दिया मेरे बच्चे.. मैं तो पूरी तरह से तृप्त हो गई..

गौतम गायत्री के ऊपर से हटकर बगल में लेट जाता है.. औऱ गायत्री लचक खाते हुए उठकर अपने कपडे पहनने लगती है..

गौतम - सिगरेट पिओगी नानी..

गायत्री - नहीं लल्ला.. मुझे सिगरेट पीना नहीं आता..

गौतम लोडा मसलता हुआ - पर मेरा ये सिगार तो बहुत अच्छे से पीती हो आप..

गायत्री हसते हुए - अब तेरे सिगर की बात ही अलग है.. ग़ुगु.. देखते ही मुंह में पानी आ जाता है..

गौतम - चुत में नहीं आता?

गायत्री मुस्कुराकर साडी पहनते हुए - वहा भी आता है..

गौतम अपना फ़ोन उठाकर गायत्री के पास आ जाता है औऱ गायत्री को बाहों में लेकर उसकी चूची दबाते हुए नंगा ही गायत्री के साथ कुछ सेल्फी लेता है फिर गायत्री अपनी साडी ठीक करके गौतम के रूम से लड़खड़ाती हुई चली जाती है औऱ गौतम वापस बेड पर लेटकर सो जाता है..

**************

गौतम की जब आँख खुली शाम के 7 बज चुके थे.. और उसे बाहर के शोर से पता चल गया था कि सभी लोग कितने उत्साहित है और बारात की स्वागत की तैयारी में लगे हैं.. गौतम उठकर नहाने चला गया और काफी देर तक बाथरुम में ही बैठा रहा.. उसकी आंखों में आप भी हल्की सी नींद बाकी थी जिसे वह खोल रहा था.. सुमन गौतम के कमरे में आए तो उसने देखा कि गौतम कमरे में कहीं नहीं था और बाथरूम का दरवाजा बंद था.. सुमन ने बाथरूम का दरवाजा बजाते हुए गौतम को आवाज लगाइ और कहा..

सुमन - ग़ुगु.. अभी तक तैयार नहीं हुआ तू बच्चा.. सब लोन की तरफ जा रहे है.. मैं भी वही जा रही हूँ.. तू भी जल्दी तरयार होकर नीचे लोन में आ जाना बेटा..

सुमन इतना कह कर मुड़ी ही थी की गौतम ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर सुमन का हाथ पकड़ते हुए उसे अपनी और खींच लिया और सुमन को बाथरूम के अंदर खींचकर बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया..

सुमन - क्या कर रहा है ग़ुगु.. तू अभी नहाया भी नहीं.. सब लोन में जा चुके है औऱ तू अभी तक ऐसे ही है..

गौतम - इस साडी में बहुत खूबसूरत लग रही हो माँ..

सुमन - मेरी तारीफ़ बाद में कर लेना पहले नहा ले.. औऱ तैयार हो जा.. सब लोग लोन में जा चुके है.. एक हम दोनों ही यहां बाकी है..

गौतम - कोई बात नहीं माँ.. तुम तो जानती हो मुझे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता.. पांच मिनट दो मैं नहा के तैयार हो जाता हूँ.. तब तक आप एक सुट्टा मार लो..

सुमन मुस्कुराते हुए - चल ठीक है.. मैं तेरा सूट निकाल देती हूँ..

गौतम - ठीक है माँ..

गौतम नहाने लगता है और सुमन उसका सूट निकालकर बेड पर रख देती है और फिर एक सिगरेट जलाकर पिने लगती है.. गौतम 2-4 मिनट के अंदर ही नहा कर बाहर आ जाता है औऱ पूरा नंगा अपनी माँ सुमन के सामने खड़ा होकर तौलिये से अपना गिला बदन पोंछने लगता है.. सुमन सिगरेट के कश लेती हुई अपने सामने नंगे खड़े अपने बेटे के गठिले औऱ मसक्युलर बदन को निहारते हुए गौतम से कहती है..

सुमन - आज दिनभर क्या कर रहा था तू?

गौतम - तुम्हारी माँ चोद रहा था..

सुमन हस्ते हुए - सपनो में..

गौतम फ़ोन में उसकी औऱ गायत्री की चुदाई के बाद ली गई सेल्फी सुमन को दिखाकर - हक़ीक़त में.. लो खुद देख लो..

सुमन फोटोज देखकर गुस्से में सिगरेट फेंकती हुई गौतम से बोली - हरामजादे मैं समझी तू मज़ाक़ कर रहा है मेरे साथ मगर तू तो.. तुझे बिलकुल शर्म नहीं आई अपनी नानी के साथ ये सब करते हुए? अरे अपनी औऱ नानी की उम्र तो देख लेता..

गौतम सूट पहनते हुए - जब उनको शर्म नहीं है तो मैं शर्म क्यों करू? वैसे भी चुदाई में बदन देखे जाते है माँ.. उम्र को कौन पूछता है..

सुमन गुस्से में - तूने अपनी नानी के साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं की ना?

गौतम - मैं किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता माँ.. नानी तो खुद भरी हुई बैठी थी.. चुदने के बाद बोली.. बेटा तूने तो मुझे तृप्त कर दिया.. चाहो तो फ़ोन पर पूछ लो..

सुमन का गुस्सा काफूर हो गया औऱ वो गौतम की शर्ट के बटन बंद करते हुए बोली - वैसे नानी झेल गई तेरे इस शैतान को? मुझे तो यकीन ही नहीं होता.. पता नहीं कैसे डाला होगा तूने..

गौतम सुमन को बेड पर गिराते हुए उसकी साडी उठाकर - इसमें क्या बड़ी बात है माँ.. लो अभी तुम्हारे अंदर भी डालके बता देता हूँ.. कैसे नानी के अंदर डाला था..

सुमन हसते हुए - छोड़ मुझे.. बेशर्म कहीं का..

गौतम - इसमें शर्म की क्या बात माँ?

सुमन - अच्छा अब अपना ये ब्लेजर पहन औऱ बाल कंघी कर ले.. मैं तबतक तुझे ठंडा कर देती हूँ..

ये कहकर सुमन अपने घुटनों पर बैठने लगी और गौतम के लोडे को पकड़कर मुंह में लेने लगी मगर गौतम ने सुमन को रोक दिया..

गौतम - रहने दो माँ.. ये तो आज किसी ना किसी का शिकार करके ही ठंडा होगा..

सुमन उठते हुए - इतने शिकार करके मन नहीं भरा तेरा जो अब भी शिकार करना है..

गीतम सुमन को बाहों में भरके - मेरा असली शिकार तो तुम हो माँ.. जब तक तुम तैयार नहीं होती तब तक ये सिलसिला चलता ही रहेगा..

सुमन - मतलब तू मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा..

गौतम - इस जन्म में तो मुमकिन नहीं है माँ..

सुमन - मैं भी देखती हूँ तू कब तक मेरे पीछे पड़ा रहता है..

गौतम - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.. वैसे में अपनी ज़िद्दी नहीं छोड़ने वाला.. अब चलो..

सुमन - एक सेकंड.. तू इतना प्यार लग रहा है कहीं किसी की नज़र ना लग जाए तुझे.. काला टिका लगा देती हूँ..

गौतम सुमन का हठ पकड़कर - कान के पीछे क्यों माँ.. काला टिका लगाना है तो मेरे लंड ओर लगाओ..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के लंड पर काला टिका लगा देती है औऱ गौतम भी सुमन को पकड़कर कहता है - प्यारी तो आप भी बहुत लग रही हो माँ.. एक काला टिका तो आपको भी लगाना पड़ेगा.. गौतम ने सुमन की साड़ी उठाकर उसकी चुत पर काला टिका लगा दिया.. फिर दोनों वेडिंग लोन की तरफ आ गए जहा सुमन कोमल औऱ आरती के पास चली गई औऱ गौतम लोन में घूमने लगा..

बारात अपने नियत समय पर 7:30 बजे पहुंच चुकी थी लोग हंसते गाते हुए नाच गाना कर रहे थे और स्टेज पर रितु और उसके होने वाले पति राहुल दोनों अगल-बगल एक साथ बैठे हुए थे..

गौतम लोन में टहलता हुआ घूम था था की उसकी नज़र एक बेहद हसीन औऱ खूबसूरत लड़की पर पड़ गई जिसे देखकर वो बस उस लड़की को देखता ही रह गया.. गौतम एक तक बस उस लड़की को देख रहा था की किसी लड़के ने पीछे से गौतम को उस लड़की को देखते देखा तो वो गौतम से बोल पड़ा..

लड़का - मत देखे.. नहीं पटेगी..

गौतम पीछे उस लड़के को मुड़कर देखते हुए बोला - कैसे नहीं पटेगी.. क्या फिगर है बहनचोद.. इसको जरूर पटाऊंगा आज.. औऱ इसी होटल के रूम में लेजाकर पेलुँगा..

लड़का कॉफी का सीप लेकर - कोशिश करके देख ले.. अगर पट जाए तो..

गौतम - लगी हज़ार की..

लड़का - दो हज़ार की लगी..

गौतम - अभी नम्बर लेकर आता हूँ..

लड़का कॉफ़ी पीते हुए - बेस्ट ऑफ़ लक..

गौतम उस लड़की के करीब आ जाता है औऱ बहाने से उस लड़की पर गिरता हुआ कहता है..

गौतम - सॉरी.. वो नीचे पैरों सीढ़िया आ गई थी.. दिखा नहीं.. आपको लगी तो नहीं ना.. आप ठीक है..

लड़की अपने ऊपर से गौतम को उठाकर खुद उठते हुए - देखकर भी नहीं चल सकते क्या?

गौतम नीचे से लड़की का पर्स उठाकर देते हुए - सॉरी..

लड़की पर्स लेकर बिना कुछ कहे जाने लगती है..

गौतम पीछे से - आप बारात में आई है ना..

लड़की मुड़कर एक नज़र गौतम को देखते हुए - ज़ी..

लड़की वापस जाने लगती है कि गौतम वापस कहता है - मैं लड़की का भाई हूँ.. गौतम नाम है मेरा.. आप?

लड़की इस बार अपनी जगह ठहरकर गौतम को ऊपर से नीचे तक देखने लग जाती है औऱ गौतम के नजदीक आकर कहती है - मेरा नाम सिमरन है.. दूल्हा मेरा दूर का भाई लगता है.. औऱ कुछ?

गौतम हक्कलाते हुए - ज़ी वो.. आप डांस करेंगी मेरे साथ? सब किसी ना किसी के साथ डांस कर रहे है तो सोचा आपसे पूछ लू..

सिमरन - शुक्रिया लेकिन मुझे नाचना बिलकुल पसंद नहीं..

गौतम - खाना खा सकते है साथ में..

सिमरन - मुझे भूख नहीं है..

गौतम - साथ थोड़ा घूम सकते है?

सिमरन - मेरे पैरों में दर्द है.. औऱ कुछ बोलना है?

गौतम थोड़ा ठहर कर - दारु भी पी सकते है अगर बोलो तो..

सिमरन गौतम कि बात सुनकर हलकी सी मुस्कुरा पडती है लेकिन फिर उसी अंदाज़ में कहती है - फिलट कर रहे हो मेरे साथ..

गौतम मुस्कुराते हुए - ज़ी कोशिश कर रहा हूँ करने की..

सिमरन - नाम क्या बताया था तुमने अपना..

गौतम - गौतम...

सिमरन - गौतम.. पुराना नाम है तुमपर सूट नहीं करता..

गौतम - तो क्या नाम सूट करता है आप बताओगी..

सिमरन - ठरकी, लौंडियाबाज़, दिलफेंक टाइप कुछ..

गौतम - नहीं बात करना चाहती तो सीधा भी बोल सकती हो.. इतना सब फालतू बोलने की क्या जरुरत है.. इतनी भी कोई हूर की परी नहीं हो समझी..

सिमरन मुस्कुराते हुए - बुरा लगा मेरे बाबू को.. अब फल्ट नहीं करोगे?

गौतम गुस्से में - कोई कालाकलूटा, भुण्डे सी शकल का गांड मारेगा ना तब याद करना मुझे..

ये कहते हुए गौतम वहा से चला जाता है औऱ सिमरन गौतम को देखते हुए मुस्कुराने लगती है फिर स्टेज की औऱ चली जाती है.. गौतम वापस उसी जगह आ जाता है जहा वो लड़का खड़ा था..

गौतम लड़के को शर्त के पैसे देते हुए - तू कैसे जानता था वो नहीं पटेगी..

लड़का पैसे लेकर - बहन है मेरी..

गौतम हैरानी से - क्या..

लड़का - इतना क्यों चौंक रहा है..

गौतम - सॉरी यार.. वो कुछ गलत बोल दिया तेरी बहन के बारे में..

लड़का - छोड़.. यहां सब सूखा ही है क्या.. दारू का कोई इंतज़ाम नहीं है..

गौतम - सब इंतज़ाम है बस रास्ते पता होने चाहिए मंज़िल के.. कौनसा ब्रांड चाहिए बता.. सारा स्टॉक है..

लड़का - मुझे तो कुछ भी चलेगा.. वो कहावत है ना.. बिस्तर में लड़की औऱ टेबल पर दारु.. जैसी भी मिले ले लेनी चाहिए..

गौतम - अरे वाह.. लगता है तू भी अपनी किस्म का आदमी है.. चल..

गौतम औऱ लड़का लोन में पीछे की तरफ जाने लगते है कि रास्ते में सिमरन मिल जाती है जो लड़के से कहती है - मनोज भईया ये आपका दोस्त है?

मनोज गौतम को देखकर - हां सिम्मी.. पर क्यों पूछ रही है.. तू जानती है इसे?

सिम्मी - हाँ.. अभी अभी अपना दिल लेके आया था मेरे पास..

मनोज - फिर तूने क्या किया दिल का..

सिम्मी - करना क्या था.. तोड़ के टुकड़े टुकड़े कर दिए..

मनोज गौतम को देखकर - बेचारा..

गौतम मनोज से - बात ख़त्म हो जाए तो पीछे आ जाना..

सिम्मी - क्या है पीछे..

गौतम - तुझे बताना जरुरी नहीं है..

मनोज - अब छोडो भी यार ये आपस की नाराज़गी.. सिम्मी पीछे शराब की व्यवस्था है.. मैं जा रहा हूँ गौतम के साथ..

सिम्मी - मैं भी चलती हूँ भईया.. वैसे भी यहां बोर हो रही हूँ..

मनोज - ठीक है.. पर पहले मेरे दोस्त को सॉरी तो बोल दे.. बेचारे का मूंड खराब कर दिया तूने..

गौतम - मेरा कोई मूंड खराब नहीं है.. छोडो उस बात को अब...

सिम्मी - भईया इसे बताया नहीं आपने..

मनोज - तू ही बता दे..

गौतम - क्या बताना है..

सिम्मी - कुछ नहीं.. छोडो.. वैसे एक बात तो कहनी पड़ेगी.. हैंडसम तो बहुत हो तुम..

गौतम सिम्मी की बात को अनसुना करके मनोज से - इधर से ऊपर.. गौतम मनोज औऱ सिमरन को लेकर अपने रूम में आ जाता है..

गौतम अलमीरा खोलकर - देख ले भाई क्या लेना है..

मनोज अलमीरा में देखकर - क्या बात है इतना सब?

गौतम - हाँ सुबह शराब की जितनी बोतल आई थी मैंने उनमे से 3-4 अपने पास रख ली.. तुम्हे जो पसंद है निकाल लो..

मनोज - सिम्मी कोनसी?

सिम्मी गौतम को देखकर - भईया आपको जो पसंद है वो ले जाओ.. मुझे गौतम से कुछ पर्सनल बात करनी है..

गौतम रूखेपन से - क्या पर्सनल बात करनी है?

सिम्मी गौतम के करीब जाकर - वो अभी पता चल जाएगा..

गौतम ने कलाई का ढाका लाल देखा तो सब समझा गया औऱ मनोज की तरह देखने लगा..

मनोज - ठीक जैसा तु कहे.. मेरे दोस्त को ज़्यदा परेशान मत करना..

सिम्मी - आप चिंता मत करो.. टूटे हुए दिल को जोड़ना मुझे अच्छे से आता है..

मनोज चला जाता है औऱ सिम्मी कमरे का दरवाजा बंद करके - अच्छा तो गौतम ज़ी अब बताइये.. कितना पसंद करते है आप मुझे?

गौतम - तुम दोनों भाई बहन मिलके कोई प्रेँक वरेंक तो नहीं कर रहे हो ना मेरे साथ?

सिम्मी अपना दुप्पटा निकालकर - तुझे क्या लगता है?

गौतम अपना कोट उतारते हुए - अगर परेंक हुआ तो भी तू नहीं बचेगी मुझसे..

सिम्मी अपनी कुर्ती उतारते हुए - बचना भी कौन चाहता है तेरे जैसे रसगुल्ले से..

गौतम अपनी शर्ट उतारकार सिम्मी को अपनी बाहों में भर लेता है औऱ उसके होंठों को चूमने लगता है फिर झटके से उसकी ब्रा उतारकार नीचे फेंक देता है औऱ सिम्मी को उठाकर बिस्तर में लाते हुए अपने नीचे लेता कर चूमने लगता है..

गौतम - कितना नाटक कर रही थी बहन की लोड़ी.. अब कैसे नीचे लेटी हुई है.. हाय... कितने टाइट औऱ सर्क्स बूब्स है तेरे.. मन करता है कहा जाऊ साली तुझे..

सिम्मी - तो किसने रोका है तुझे.. खा जा ना.. आ..

सिम्मी गौतम के होंठों को चूमने लगती है औऱ गौतम चूमते हुए सिम्मी के बूब्स दबाने लगता है..

गौतम चुम्मा तोड़कर सीधा सिमरन के बूब्स पर हमला कर देता है औऱ किसी प्यासे की तरह सिमरन के निप्पल्स मुंह में भरके चूसने औऱ चाटने लगता है.. सिमरन काम की नदी में बहने लगी थी उसने गौतम को पकड़कर अच्छे से अपने बूब्स चुसवाना शुरू कर दिया औऱ गौतम से बोलने लगी..

सिम्मी - चुसो गौतम.. खा जाओ मेरे बूब्स को आज.. कितने प्यारे हो तुम.. चुसो.. काट लो दांतो से दोनों बूब्स को..

गौतम - आह्ह... साली जितनी खूबसूरत है तू उतनी ही जंगली भी.. शकल से अभी भी छोटी लगती है.. तू नाबालिक तो नहीं है ना..

सिम्मी - 19 साल की हूँ मेरे रसगुल्ले.. अब तो सरकार भी चुदने औऱ चोदने की इज़ाज़त दे चुकी है मुझे..

गौतम सिमरन के दोनों बूब्स अपने हाथों में लेकर जोर से मसलने लगता है औऱ कहता है - बहुत हसीन है यार तू.. Gf बन जा मेरी.. बाद में शादी भी कर लेंगे..

सिमरन हसते हुए गौतम को पलट कर उसके ऊपर आ जाती है औऱ फिर रखा kiss करके बोलती है - सोच ले मेरे रसगुल्ले... बाद में मुकरने नहीं दूंगी.. मुझे छोड़ के गया तो जान ले लुंगी..

गौतम - तुझ जैसी को कौन छोडके जाएगा मेरी लैला.. तुझे तो दिल में बसा कर औऱ लंड से लगा कर रखूँगा..

सिम्मी धीरे धोरे नीचे जाकर गौतम की पेंट खोलती है औऱ उसकी चड्डी नीचे सरकाने लगती है - तो फिर अब तू मेरा बॉयफ्रेंड औऱ मैं तेरी गर्लफ्रेंड.. रसगुल्ले अगर तू इस बात से मुकरा तो बहुत बुरा होगा..

चड्डी नीचे करके - ये क्या है.. रसगुल्ले तू?

गौतम - क्या हुआ डर गई मेरी गर्लफ्रेंड? अपने बॉयफ्रेंड का लोडा देखकर ही डर गई.. जब अंदर जाएगा तब क्या होगा..

सिमरन मुस्कुराते हुए - तू तो बहुत छुपा रुस्तम है. शकल बिलकुल बच्चों जैसी मासूम औऱ लोडा ऐसा कि ताबही मचा दे..

गौतम लंड हिलाते हुए - वैसे एक बात समझ नहीं आई..

सिम्मी - क्या?

गौतम - हर भाई अपनी बहन की रक्षा करता है उसे चुदने से बचाता है औऱ एक तेरा भाई है.. तुझे चुदने के लिए मेरे पास छोड़ गया..

सिमरन हसते हुए - तुझे तो खुश होना चाहिए.. पर लगता है आसानी से मिली हुई चीज की परवाह नहीं है तुझे?

गौतम लोडा सिमरन के मुंह की तरफ करता हुआ - परवाह तो बहुत है मेरी रसमलाई.. पर मुझे जाताना नहीं आता..

सिम्मी लोडे को होंठो से चूमते हुए - कमीने पहली मुलाक़ात में क्या क्या करवा लेगा मुझसे...

गौतम - ले लो ना यार क्यों नखरे कर रही हो.

सिमरन गौतम को केमेरा ऑन करके अपना फ़ोन देते हुए - ले रही हूँ कमीने.. सिम्मी ये बोलकर गौतम के लंड को धीरे धीरे चूसने लगती है औऱ फिर अपने चूसने की रफ़्तार बढ़ाने लगती है..

गौतम सिमरन का blowjob वीडियो बनाने लगता है औऱ बोलता है - उफ्फ्फ्फ़ सिम्मी... आई लव यू यार.. तू तो सच में कमाल की है.. आहहह...

सिमरन गौतम का लोडा औऱ लोडे के नीचे दोनों टट्टे चूसते औऱ चाटते हुए कैमरे में देखकर कहती है - आई लव यू टू मेरे रसगुल्ले... औऱ फिर लोडा हिलाते हुए टट्टे चूसते हुए गौतम को देखती है..

गौतम सिमरन के बाल पकड़कर - निकलने वाला है मेरी जान...

सिम्मी लोडा मुंह में लेकर जोर जोर से चूसते हुए गौतम का सारा माल अपने मुंह में झड़वा लेती है औऱ उसके वीर्य की एक एक बून्द गले के नीचे उतार लेती है औऱ लोडे को अच्छे से चूसकर साफ कर देती है..

गौतम बिस्तर पर पीठ के बल शांत होकर तेज़ तेज़ साँसे लेता हुआ सिमरन को देखता है जो बिस्तर से उठकर बेड के पास पड़ी सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए एक दो कश लेकर गौतम के सामने खड़ी हो जाती है औऱ कहती है..

सिमरन - मज़ा आया मेरे रसगुल्ले को?

गौतम - सच में यार.. तू वाकई कमाल है.. अब जल्दी से चुत भी देदे... औऱ मुझे अपना गुलाम बना ले...

सिमरन सिगरेट का कश लेकर - इतनी भी क्या जल्दी है मेरे रसगुल्ले... मेरी एक शर्त है..

गौतम - क्या?

सिमरन - मुझे अलग तरह से सेक्स करना है तुम्हारे साथ.. तुम्हे बाँधकार..

गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा.. बड़ी fantasy है तेरी.. लेकिन ठीक है अब अपनी गर्लफ्रेंड की fantasy पूरी नहीं करूँगा तो किसकी करूँगा..

सिमरन सिगरेट का एक लम्बा कश लेकर सिगरेट गौतम को दे देती है औऱ अपने दुपट्टे से होतम को पेट के बल लेटा कर उसके दोनों हाथ बाँध देती है..

गौतम - उल्टा क्यों किया है तूने सिम्मी..

सिम्मी - तू चुप रह मेरे रसगुल्ले.. अब कुछ मत बोल..

सिमरन औऱ कपडे लेकर गौतम के दोनों पैरों को भी बाँध देती है औऱ फिर अपना फ़ोन एक जगह रखकर कैमरा चालु कर देती है औऱ फिर अपनी सलवार भी नीचे सरका देती है..

गोतम सिगरेट के कश लगाते हुए सामने देख रहा था औऱ पीछे से सिमरन उसकी गांड पकड़ के गौतम की गांड के छेद को अपने मुंह से चाटने लगती है..

गौतम - आहहह... सिम्मी तू तो बिलकुल गन्दा वाला सेक्स करती है यार.. गांड के छेद को क्यों चाट रही है..

सिमरन गौतम के गांड के छेद को चाट कर उसपर थूक देती है औऱ गौतम को जवाब देती है - ताकि तुझे ज्यादा दर्द ना हो मेरे रसगुल्ले...

गौतम ये सुनकर आश्चर्य में पड़ जाता है सिम्मी से बोलता है - मतलब?

सिमरन गौतम से सिगरेट लेकर आखिरी के एक दो कश लेती है औऱ फिर सिगरेट बुझाकार गौतम के पीछे आकर कहती है - अभी पता चल जाएगा मेरे रसगुल्ले..

ये कहकर सिम्मी एक डिलडो हाथ में लेकर गौतम की गांड के छेद पर रखकर गौतम की गांड में घुसाने लगती है..

गौतम को कुछ अजीब लगता है औऱ वो पीछे मुड़कर देखता है तो उसे सिमरन के हाथ में डिलडो दिखाई देता है जिसे वो पहनकर गौतम की गांड में घुसा रही थी..


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गौतम - सिम्मी तू...

सिमरन झटका देकर गौतम की गांड में अपना लंड ड़ालते हुए - हाँ मेरे रसगुल्ले मैं मरवाने से पहले तेरी मारना चाहती हूँ.. औऱ आज तेरी इस सेक्सी गांड का उद्घाटन करने वाली हूँ..

गौतम - तेरी माँ चोद दूंगा साली.. खोल मुझे.. बहन की लोड़ी.. छोड़ मेरी गांड को..

गौतम झटपटा रहा था मगर सिमरन ने गौतम के बाल पकड़कर पीछे से एक जोरदार झटका देकर डिलडो गौतम की गांड में घुसा दिया जिससे गौतम की चिंख निकल गयी..


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सिमरन धीरे धीरे गौतम की गांड मारती हुई - माफ कर देना मेरे रसगुल्ले..

गौतम गुस्से में - साली एक बार हाथ खुलने दे.. फिर बताऊंगा तुझे.. तुझे इतना मारूंगा ना याद रखेगी तू..

सिमरन - मेरे रसगुल्ले.. प्यार करता है ना तू तो मुझसे.. शादी करने वाला है.. अपनी गर्लफ्रेंड पर हाथ उठाएगा तू..

गौतम - बहन की लोड़ी रांड.. साली छोड़ मुझे..

सिमरन - बस मेरे रसगुल्ले.. औऱ कुछ देर.. बहुत मज़ा आ रहा है.. फिर तू अपना सारा गुस्सा मेरी चुत को चोदके निकाल देना..

सिमरन दोनों हाथों से गौतम के कंधे पकड़के डिलडो से गौतम की गांड मारे जा रही थी..

गौतम - तेरी माँ को चोदू रंडी.. इस डिलडो से कितना चोदेगी मुझे?

सिमरन - मेरी मारनी है तो पहले मरवा ले रसगुल्ले... बोल.. आह्ह... आहहह...

गौतम - साली तू औऱ तेरा भाई दोनों पीटेंगे मेरे हाथों से आज...

सिमरन - बोल मेरे रसगुल्ले.. अब पता चला कितना दर्द होता है चुदने में?

गौतम - खोल साली मेरे हाथ...

सिमरन गौतम को एक जबरदस्ती वाला kiss करती है औऱ फिर आई लव यू बोलकर उसके हाथ खोल देती है..

गोतम हाथ पैर खुलते हुए सिमरन को एक थप्पड़ मारके अपने कपडे पहनते हुए कमरे से बाहर चला जाता है..

सिमरन - रसगुल्ले मेरी बात तो सुन.. अरे कहाँ जा रहा है...

गौतम जाते हुए - हट साली..


सिमरन भी कपडे पहन कर अपना फ़ोन उठाती है औऱ उसने दोनों वीडियो सेव करके कमरे से बाहर आ जाती है..
 
अपडेट 24

गौतम को आता देखकर मनोज मुस्कुराते हुए उसे आवाज देकर बुलाता है - गौतम...

गौतम मनोज को देखकर उसकी तरफ आता है औऱ एक थप्पड़ उसके गाल पर मारकर बोलता है - बहन के लंड.. तेरी पागल वागल है क्या?

मनोज थप्पड़ खाकर भी हसने लगता है औऱ कहता है - लगता है लेने की जगह देकर आ रहा है..

गौतम मनोज के हाथों से पेग लेकर एक घूंट में खींच जाता है..

मनोज - अरे धीरे धीरे एक बार में ख़त्म कर जाएगा क्या? औऱ गुस्सा क्यों कर रहा है? इतनी खूबसूरत लड़की से गांड मरवाई है तुझे तो खुश होना चाहिए.. औऱ कोनसा असली लंड से मरवाई है.. नकली होगा..

गौतम - तेरी माँ चोद दूंगा.. माँ के लोडे अब औऱ कुछ बोला तो.. साले नवाबो वाले शोक नहीं है मेरे.. असली हो या नकली मुझे मरना पसंद है मरवाना नहीं..

पीछे से सिमरन आती हुई - बात तो ऐसे कर रहे हो जैसे मरवाने के बाद तुम्हारी गांड किसी काम की ही नहीं रही हो.. इतना जोर का थप्पड़ मारके आये हो देखो मेरे गाल पर उंगलियां छप गई तुम्हारी..

गौतम - तुम दोनों भाई बहन ना मुझसे दूर रहना.. समझें? ये कहते हुए गौतम वहा से चला जाता है..

गौतम यहां से सीधा वेडिंग हॉल में आ जाता है औऱ एक टेबल पर बैठी हुई सुमन के करीब आकर बैठ जाता है जहा सुमन वेटर से दो गिलास जूस लेकर एक गौतम के सामने रख देती है औऱ एक खुद पीते हुए गौतम से पूछती है..

सुमन - क्या हुआशहजादे मुंह क्यों लटकाया हुआ है?

गौतम जूस पीते हुए - कुछ नहीं.. बस मूंड थोड़ा खराब है..

सुमन - क्यों किसी ने कुछ कहा है क्या?

गौतम - नहीं माँ.. बस ऐसे ही..

सुमन - तो थोड़ा मुस्कुरा ना ग़ुगु.. चल मुस्कुरा दे अब. इतने प्यारे चेहरे पर उदासी अच्छी नहीं लगती..

सिमरन आते हुए - वही तो मैं भी समझा रही थी आंटी.. मगर गौतम समझने को ही तैयार नहीं है..

ये कहते हुए सिमरन गोतम के बगल में आकर बैठ जाती है..

सुमन - तुम?

सिमरन - आंटी मैं गौतम की गर्लफ्रेंड.. मतलब फ़्रेंड हूँ..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर - गर्लफ्रेंड.. ओ हो.. लगता है लड़ाई हो गई है दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड में..

सिमरन - लड़ाई कहाँ आंटी.. यही मुझे सता रहा है.. देखो कितना जोर का थप्पड़ मार दिया इसने मुझे...

सुमन सिमरन का गाल देखकर - ग़ुगु? तूने हाथ उठाया इसपर? मैंने ये सिखाया है तुझे? कितनी फूल सी प्यारी बच्ची है..

सिमरन - देखो ना आंटी.. छोटी सी बात पर थप्पड़ मार दिया इसने.. औऱ फिर भी मुंह फुला के बैठा है..

गोतम गुस्से से सिमरन को देखता हुआ - तुझे कहा था ना दूर रहना.. क्यों आ गई पीछे पीछे?

सिमरन रोने का नाटक करते हुए - आंटी इसने शादी का वादा किया है मुझे गर्लफ्रेंड बनाया है अब मुझे छोड़ने की बात कर रहा है..

सुमन - अरे तुम दोनों में जो हुआ है मुझे उससे दूर रखो.. अपना मसला खुद हल करो.. मुझे छोड़ दो.. गौतम अब हाथ नहीं उठाना इस बच्ची पर...

सिमरन - सिमरन.. आंटी.. सिमरन नाम है मेरा..

सुमन - हाँ.. सिमरन पर हाथ मत उठाना औऱ प्यार से बात करना..

सुमन ये कहते हुए आरती के पास चली जाती है औऱ सिमरन गोतम को मुस्कुराते हुए देखकर कहती है - देखो चुपचाप मेरे साथ चलो औऱ जो काम तुमने अधूरा छोड़ा है उसे पूरा करो वरना..

गौतम - वरना क्या?

सिमरन फ़ोन निकालकर - वरना पुरे शहर में तुमको फेमस कर दूंगी.. कहो तो नेट पर वायरल कर दू तेरा मेरा mms?

गौतम गुस्से में - तू बहन की लोड़ी.. मरेगी मेरे हाथ से.. डिलीट कर उसे..

सिमरन - पहले बोल आई लव यू..

गौतम - लव यू.. अब डिलीट कर उन वीडियो को..

सिमरन - चलो मेरे साथ..

गौतम - कहाँ?

सिमरन - वही यहां से मुझे अकेला छोड़ के आ गए थे..

गौतम - देख मुझे अब तेरेमे इंट्रेस्ट नहीं है..

सिमरन - मुझे तो तुम पसंद हो.. औऱ मैं अब तुम्हारा पीछा तो किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. अब चलो वरना मेरा पागलपन तुम नहीं जानते.. मुझे अपनी बिलकुल परवाह नहीं है..

गौतम - अब वहां जाकर क्या करना है? तुमने मार तो ली मेरी गांड अपने उस नकली लोडे से.. अब क्या साडी पहन लु तेरे सामने?

सिमरन - मैंने नकली से मार ली तो तुम असली से मार लो मेरी? बदला ले लो..

गौतम - मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है समझी.. अब ये वीडियो डिलीट करो..

सिमरन गुस्से में - अगर 15 मिनट में तुम उसी जगह वापस नहीं आये तो मैं ये वीडियो वायरल कर दूंगी.. समझा?

ये कहकर सिमरन चली जाती है..गौतम को सिमरन पर गुस्सा आ रहा था जिस तरह से सिमरन ने धोके से नकली लंड लगाकर गौतम कि गांड का स्वाद लिया था वो गौतम को पसंद नहीं आया था जिसे उसने खुले तौर पर सिमरन से बयाँ कर दिया था.. मगर mms के वायरल होने का डर उसे वापस सिमरन के पास खींच ले गया औऱ गौतम वापस होटल के रूम में जाकर दरवाजा लगाते हुए सिमरन से गुस्से में बोला..

गौतम - देख सिम्मी चुपचाप सीधी तरह वीडियो डिलीट कर वरना अच्छा नहीं होगा.. तू मुझे भी नहीं जानती ठीक से..

सिमरन गौतम को गले लगाकर बेड पर गिराती हुई - कर दूंगी डिलीट.. पर इतनी भी क्या जल्दी है.. पहले थोड़ा प्यार तो कर लो मुझसे..

गौतम - मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं है तुम्हारे अंदर.. समझी..

सिमरन - इंट्रेस्ट नहीं था तो मेरे पास क्यों आये थे तुम? तब तो बहाने बहाने से बात करने की कोशिश कर रहे थे.. अब जब मैं बाहों में हूँ तो इस तरह मुंह फेर रहे हो.. ये तो बहुत दिल दुःखाने वाली बात है गौतम.. क्या मुझे प्यार करने का हक़ नहीं है? तुम कितनी प्यार से बात कर रहे थे.. मेरे होंठों से लेकर चुचो तक सब तुम्हे पसंद आ रहा था.. मेरा फिगर पसंद है ना तुम्हे? फिर क्यों मुझसे इस तरह रूखेपन से बात कर रहे हो..

गौतम - सिम्मी.. तू जो बोलोगी मैं वो सब कर लूंगा तुम्हारे साथ.. पर पहले वो वीडियो डिलीट करो..

सिमरन - इतनी पागल तो मैं भी नहीं हूँ.. वीडियो डिलीट कर दूंगी तो तूम मेरे बाहों से निकलकर कहा गायब हो जाओगे मुझे पता भी नहीं चलेगा.. उस वीडियो के कारण ही तुम यहां मेरे साथ हो.. डिलीट करते ही नहीं रहोगे..

गौतम - ऐसा नहीं है.. मुझ पर भरोसा कर.. देख मुझे तू पसंद है पर तूने धोके से नकली लंड लगाकर मेरी मारी है ना.. मेरी मर्दानगी को बुरा लगा है..

सिमरन - ओ हो बड़े आये मर्द.. इतने प्यारे औऱ क्यूट हो.. बिलकुल मेरे टाइप के.. देखो आज तक मैं डर डर के जीती आई हूँ किसी को करीब नहीं आने दिया... भईया से ही अपने दिल की बातें करती आई हूँ.. औऱ उन्होंने ही मुझे संभाला है.. तुम मुझे पहली नज़र में पसंद आ गए हो.. मेरे रसगुल्ले मैं अपने इस दिल को कैसे समझाऊ जो तुझे देखकर इतना जोर से धड़ककर उछल रहा है जैसे अभी बाहर आकर तुमसे अपना हाल कह देगा.. मेरे प्यार को मत ठुकराओ गौतम.. मुझे अपना बना लो.. मैं तुम्हारी हर बात मानुँगी.. जो तुम बोलोगे वही करुंगी बस मेरे दिल को ऐसे मत तोड़ो..

गौतम - मेरे हाथ पैर बाँध कर अपनी नकली लंड से मेरी गांड मारने के बाद अब ये इमोशनल ड्रामा करते हुए तुम्हे शर्म नहीं आती? पक्की ड्रामेबाज़ है तू.. अब जल्दी बता तू क्या चाहती है मुझे वापस नीचे लोन में जाना है औऱ शादी एन्जॉय करना है..

सिमरन - तुम बताओ तुम्हे क्या करना है.. मेरे होंठों से बदला लोगे या चुचो से खेलोगे? Blowjob दूँ या मेरे रसगुल्ले को मेरी चुत चाहिए?

गौतम मुस्कुराते हुए - सिम्मी सच कहु तो मैं पहली नज़र में तेरे प्यार में ही पड़ गया.. पर क्या करू.. मर्द हूँ.. औऱ मर्द को मरवाने का शोक नहीं रहता.. अपने अलवा किसी औऱ का लंड चाहे नकली क्यूना हो देखकर मुंह से सिर्फ गाली नकलती है.. तूने जो मेरे साथ वो बहुत गलत था..

सिमरन गौतम को चूमते हुए - तो उसका बदला भी तो लोगे तुम अभी.. अपने इतने मोटे लंड से मेरी चुत मारोगे.. पता नहीं क्या हाल होगा मेरी चुत का.. मुझे तो बहुत दर्द दोगे तुम.. मैं कैसे सह पाउंगी वो सोचा है तुमने.. होंठों से होंठ मिलाकर चूमने जितना आसान थोड़ी है चूत मराना.. मेरी तो छोटी सी थी तुम्हे तो पता भी नहीं चला होगा.. पर मेरा क्या होगा..

गौतम सिम्मी की सलवार कुर्ती उतारते हुए - ये तो पहले सोचना चाहिए था.. वैसे फिगर सच बहुत सेक्सी है तेरा.. तू तो गई साली आज..

सिमरन मुस्कुराते हुए - मुझे तो लगा था तुम मानोगे ही नहीं.. पर थोड़ा सा इमोशनल होकर दो मीठी बात क्या की.. तुम तो मोम की तरह पिघल गए.. जितना सुन्दर चेहरा है उतना ही सुन्दर दिल भी है तुम्हारा मेरे रसगुल्ले.. तुम किसी को रोते हुए नहीं देख सकते ना..

गौतम सिम्मी के बूब्स मसलकर दबाते हुए - गलत.. मुझे तो तुम्हारे जैसी खूबसूरत कालिया बिस्तर में रोते हुए देखना बहुत पसंद है.. थोड़ी देर बाद तुम भी रोने लगोगी..

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सिमरन मुस्कुराते हुए गौतम का सर चूमकर - ऐसे रोने के लिए तो कब से तरस रही हूँ मेरे रसगुल्ले.. हमेशा सोचती थी कौन होगा जो मुझे अपना बनाएगा.. तुम्हारे लिए तो मैं ख़ुशी खुशी अपनी चुत को क्या जान भी कुर्बान कर दू.. कुछ देर की मुलाक़ात ने मेरे दिल में तुम्हारी वो जगह बना दी है जो सालों के बाद भी लोग नहीं बना पाते.. मेरी लाइफ के पहले मर्द हो तुम.. औऱ अब लगता है आखिरी भी..

गौतम चुचे मसलकर अब चुचे पर अपना मुंह लगा देता है औऱ सिम्मी के तने चुचो पर खड़े हुए चुचक चूसते हुए कहता है - बातों की तो जादूगरनी है तू.. जितनी प्यारी शकल है उतनी प्यारी बातें भी करती है.. पर मुझसे ज्यादा लगाव मत कर लेना.. मैं आवारा हवा का झोका हूँ.. पल दो पल के लिए ठहरता हूँ..

सिमरन मुस्कुराते हुए गौतम का सर अपने हाथों में पकड़ कर उसे अपने चुचे चुसवाती हुई कहती है - तुम चिंता मत करो गौतम.. मैं कभी तुमपर कोई दबाब नहीं बनाउंगी.. म मैं तुम्हे हर तरह से संतुष्ट कर सकती हूँ.. औऱ जोर जबरदस्ती से तुम्हे हासिल करके भी तुमसे दूर ही रह जाउंगी.. इसलिए बस तुमसे थोड़ा सा प्यार चाहती हूँ औऱ कुछ नहीं.. आह्ह.. रसगुल्ले.. आराम से.. आहहह... दांतो से तो मत काट मेरे निप्पल्स को.. कितना जोर से चूसता है तू.. बचपन में आंटी को तो बहुत दर्द होता होगा तुझे दूध पिलाने में.. दांतो से बहुत तेज़ काटता होगा तू तो उनके निप्पल्स को बचपन में..

गौतम मुस्कुराते हुए - मैं तो अब भी बहुत तेज़ काटता हूँ औऱ वो मुझे अब भी प्यार से अपना दूध पिलती है.. मगर तेरी तरह हल्का सा दाँत लगने पर आह्ह.. उह्ह्ह.. नहीं करती..

सिमरन गौतम के बालों में हाथ फेरती हुई - अब आज पहली बार कोई मर्द मेरे चुचो को चूस रहा है, वो भी दांतो से खींचते हुए काट कर.. मुंह से आह्ह तो निकलेगी ही.. औऱ आंटी आज भी तुम्हे अपना दूध पीलाती है? सच में?

गौतम सिम्मी के कूल्हे पकडकर मसलते हुए - शर्त लगाती हो?

सिमरन - मुझे नहीं लगानी शर्त वर्त.. जितने प्यारे तुम हो ना.. तुम्हे तो कोई भी अपना दूध पीला सकता है..

गौतम सिमरन की आँखों में देखकर - सिम्मी..

सिमरन - हम्म्म...

गौतम - मुझे हमारे लिए सच में बुरा लग रहा है.. अब बहुत बुरा हाल होने वाला है तेरा.. ऊपर से नीचे तक पारियों जैसा हुस्न आज लूटने वाला है..

सिमरन गौतम के निचले होंठ को अपने दांतो से खींचकर चूमती हुई - हमारा मिलन पूरा है मेरे रसगुल्ले.. मैंने जब भी ऊपर वाले से दुआ की, तब यही माँगा कि मुझे एक प्यारा सा लड़का अपना ले.. मैं जैसी हूँ वैसी ही मुझे अपनी बना ले औऱ कभी मेरा साथ नहीं छोड़े.. औऱ देखो आज मुझे तुम मिल गए.. 19 साल की मैं हूँ औऱ तुम भी मुझे 18-19 साल के ही लगते हो..

गौतम - तुमसे एक साल बड़ा हूँ मैं.. पुरे बीस साल का..

सिमरन - हरकतो औऱ चेहरे से तो बिलकुल भी नहीं लगते..

गौतम - अच्छा औऱ कोई ख्वाहिश है? बता दो आज तुम्हारी सब ख्वाहिस पूरी होने वाली है...

सिमरन कुछ सोचकर - तुम सच में करोगे मेरी ख्वाहिश पूरी?

गौतम - 100 परसेंट..

सिमरन - सोच लो बाद में मुकर तो नहीं जाओगे? बहाने बनाने लगो कहीं.. ये नहीं कर सकता.. मुझसे नहीं होगा? मर्द जात हो.. कहीं तुम्हरा ego हर्ट हो जाये..

गौतम मुस्कुराते हुए - चुत चटवानी है?

सिमरन हैरत हुए - तुम्हे कैसे पता?

गौतम - तुम्हारी आँखों से..

सिमरन - तो बोलो.. चाटोगे?

गौतम सिम्मी के नीचे जांघो के जोड़ आते हुए - इसे तो चाट चाट के कहा जाऊंगा मेरी चाशनी..

सिमरन - गौतम सिगरेट दो ना एक..

गौतम सिम्मी की चुत सहलाते हुए - मैं जेब में थोड़ी लेके घूमता हूँ.. वहा पीछे बेड के बगल की ड्रावर में होगी..

सिमरन सिगरेट निकालकर सुलगती है औऱ एक लम्बा कश मारकर धुआँ छोड़ते हुए गौतम से कहती है - अगर मन नहीं है तो छोड़ दे रसगुल्ले.. मत कर.. मैं जबरदस्ती नहीं करुँगी.. मैं नहीं चाहती तुम बिना मन के कुछ भी मेरे साथ करो..

गौतम सिमरन की चुत का दाना चूमकर उसको मुंह में लेते हुए - ड्रामा बंद कर साली.. बस मुंह में मत झड़ना..

सिमरन मुस्कुराते हुए सिगरेट का कश लेकर - काश तू सच में जिंदगी भर के लिए मेरा हो जाए रसगुल्ले..

गौतम चुत चूसता हुआ - ताकि तू हर रात नकली लंड से मेरी गांड मार सके..

सिमरन हसते हुए - तो क्या हुआ.. प्यार से मारूंगी.. औऱ बदले में तुम्हारा इतना बड़ा भी तो झेलूंगी हर रात.. तुम्हे जैसी बीवी चाहिए बिलकुल वैसी बनकर दिखाउंगी..

गौतम - रहने दो.. तेरा निकलने वाला हो तो बता देना..

सिमरन सिगरेट के कश लेती हुई गौतम का सर अपनी चुत पर दबाती हुई - आह्ह गौतम.. मज़ा आ रहा है.. तुम्हारी जगह मैं होती तो शर्म से पानी पानी हो जाती.. तुम तो कैसे बेशर्म होकर चूस रहे हो..

गौतम - मर्द हूँ साली.. शर्माना मेरा काम नहीं..

सिमरन सिगरेट का कश लेकर धुआँ गौतम के ऊपर छोड़ती हुई - आह्ह गुतम.. तुम तो पुरे बेशर्म हो.. मेरे मुंह में अपना लंड दिया था तब कैसे बोल रहे थे.. ऐसे नहीं ऐसे चुसो.. ये करो.. वो करो.. औऱ ना जाने क्या क्या.. मेरी चाट रहे हो तो अच्छे से चाटो.. (गौतम के जीभ चुत में घुसाते हुए) चुसो चुपचाप..आहहह... रसगुल्ले... ऐसे.. अहह.. अहह..

सिमरन सिगरेट के कश लेते हुए अपनी चुत गौतम के मुंह में पूरी तरह घुसा कर उसे चूसा रही थी औऱ कामुक निगाहो से गौतम का चेहरा देखकर मन ही मन उसके प्यार में डूबती जा रही थी.. कुछ ही देर के बाद सिमरन झड़ने लगी तो गौतम ने चुत से मुंह से निकाल दिया मगर फिर भी सिमरन की चुत से निकली एक दो धार तो गौतम के मुंह में गिर ही गई थी जिसे गौतम थूकता हुआ टेबल पर से पानी की बोतल उठाकर कुल्ला करने लगा..

गौतम - साली तुझे कहा था ना.. निकलने वाला हो तो बोल देना..

सिमरन - तुमने अपना माल निकालने से पहले बोला था जो मुझसे उम्मीद रखते हो. मेरे तो मुंह में पूरा माल गिरा दिया औऱ गले से नीचे भी उतार दिया.. तब तो तुम बड़े खुश हो रहे थे. अब क्या हुआ? मुझे तो अपना माल पीलाया था तुमने..

गौतम सिम्मी को देखकर अपनी पेंट नीचे करके लंड निकालकर हिलाते हुए - मेरा माल तो साली तू अब भी वापस पीयेगी... ये कहते हुए गौतम सिमरन के बाल पकड़कर उसके मुंह में अपना लोडा घुसा देता है.. औऱ उसे अपना लंड चूसाने लगता है..

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सिमरन - आह्ह आराम से ना.. गौतम.. आराम से.. आह्ह..गुगुगुगुगुगुगु...

सिम्मी गौतम के लंड को मुंह में लेकर चुस्ती हुई गौतम को देखती है औऱ गौतम सिमरन को देखकर बोलता है..

गौतम - बहुत बोलना आ रहा था ना तुझे.. अब बोल.. मुझसे चुत चूसाएगी साली... अब खुद चूस.. बहन की लोड़ी.. मुंह में निकालेगी.. अब ले ना मुंह में पूरा.. क्या हुआ? आ नहीं रहा क्या मेरा लोडा मुंह में? साली ये मर्द का लंड है तेरी जैसी कमसिन कली के मुंह में नहीं आयगा.. तू मुझे चुत चटवाएगी साली.. अब लंड चूस.. तुम लड़कियों का यही काम है
.. हमारा काम तुम्हे अपना लंड चुसवाना है.. समझी? मैंने इमोशनल होकर थोड़ा सा चूस क्या लिया खुदको तुरम खा समझने लग गई तू तो.. मेरे मुंह में निकालेगी बहन की लोड़ी.. चूस.. ले मुंह में..

सिमरन - ले तो रही हूँ जितना मुंह में आ रहा है.. तुम तो जबरदस्ती करने पर उतारू हो गए.. मुझे ज्यादा मर्द बनके दिखाओगे ना तो दांतो से लंड पर ऐसा काट के खाऊंग्गी की याद रखोगे..

गौतम सिम्मी को पलटकर बेड पर झुकाते हुए - जबरदस्ती की कहा है मेरी फुलझड़ी.. जबरदस्ती तो अब होगी..

ये कहकर गौतम सिम्मी की चुत पर थूक देता है औऱ हाथों से सिमरन की चुत के छेद पर थूक लगाने लागता है..

सिमरन सिर मोड़कर गौतम को देखते हुए - मेरा पहली बार है रसगुल्ले.. मुझे ख़ुशी है की मेरी पसंद का कोई लड़का मेरे साथ ये सब कर रहा है..

गौतम सिम्मी की कमर पकड़कर उसकी चुत के छेद पर अपना लंड सेट करके दबाब बनाते हुए - पहली बार शायद थोड़ा दर्द होगा सिम्मी.. संभाल लेना..

सिमरन मुस्कुराते हुए - इस दर्द के लिए तो कब से इंतजार कर रही थी.. मेरी चिंता मत करो गौतम तुम अपनी मर्ज़ी से मेरे बदन का मज़ा लो.. मैं तुम्हे हर तरह से खुश कर देना चाहती हूँ..

गौतम सिम्मी की बात सुनकर अपना लोडा उसकी चुत में घुसा देता है जिससे उसके लंड का टोपा लंड के थोड़े से हिस्से के साथ सिमरन की चुत में घुस जाता है औऱ सिमरन की पहली दर्द औऱ काम से मिश्रित चिंख निकल जाती है मगर बाहर लोन में चलते dj की आवाज में सिम्मी की चिंख दब चुकी थी..

गौतम कुछदेर स्थिर रहकर धीरे धीरे अपना लंड सिमरन की चुत में धकेलने लगता है औऱ कड़ी मेहनत औऱ मशक्कत के बाद अपना आधे से थोड़ा सा ज्यादा लंड सिमरन की चुत में डाल देता है.. सिम्मी की चुत से हल्का सा खून आकर गौतम को उसके कुंवारे पन का प्रमाण देता है.. सिमरन गौतम के लंड को झेल गई थी उसकी चुत में होता दर्द औऱ गौतम को सुख देने की प्रबल इच्छा उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी..

गौतम भी सिमरन का पूरा ख़याल रखते हुए उसकी चुत का उद्घाटन करने मे लगा हुआ था.. गौतम ने बहुत धीरे धीरे सिमरन की चुत को अपने लंड से खोल दिया था औऱ अब धीरे धीरे बिस्तर उल्टी पड़ी हुई सिमरन को पीछे से चोदने में लगा हुआ था..

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सिमरन की काममय सिस्कारीया पुरे कमरे में सुनाई दे रही थी मगर कमरे से बाहर dj की आवाज में वो सिस्करीया कहीं दब रही थी..

गौतम ने सिमरन को घोड़ी बनाके पीछे से उसके दोनों बूब्स पकड़ कर सिमरन की चुत मारना शुरू कर दिया औऱ सिमरन अब काम शक्ति से परिचित होकर आँख बंद किये सिसकियाँ ले रही थी औऱ गौतम से चुदवा रही थी.. सिमरन को इस मिलन में अदभुद सुख मिल रहा था..

गौतम ने बूब्स छोड़कर सिमरन के बाल पकड़ लिए औऱ जोरदार 5-6 धक्के मारे जिससे गौतम का सारा लंड सिमरन की चुत में घुस गया औऱ सिमरन के गले से जोरदार चिंख निकल गई जो कमरे बाहर dj की आवाज में कहीं खो गई.. सिमरन को अपनी चुत के गोदाम बनने की खुशखबरी मिल चुकी थी जिसे वो जोर जोर से चिल्लाती हुई सबको बताना चाहती थी मगर वहा सिमरन को सुनने वाला कोई था ही नहीं..

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गौतम - उफ्फ्फ.. सिम्मी.. मान गए यार.. क्या चुत है तेरी.. मज़ा आ रहा है तेरी चुत मारने में..

सिमरन हलकी सी रोती हुई - कमीने एक दम से क्या हो गया तुझे.. धीरे कर ना.. औऱ मज़ा आएगा ही ना.. सील जो तोड़ दी तूने आज मेरी..

गौतम - सिम्मी बहुत प्यारी है यार तू सच में.. पहली बार ऐसा हुआ है चोदने के कुछ देर में ही मेरा झड़ने का मन हो रहा है..

सिमरन - मुंह में झाड़ना मेरे रसगुल्ले.. मुझे तेरा रस पिना है..

गौतम जोर के झटके मारके चुत चोदते हुए - पीला दूंगा यार.. उफ्फ्फ कयामत है तू तो..

सिमरन सिसकियाँ लेते हुए - गौतम आराम से बहुत दर्द हो रहा है मुझे.. आह्ह.. धीरे..

गौतम लगातार तेज़ तेज़ चोदते हुए - थोड़ा सा दर्द नहीं सह सकती तू अपने रसगुल्ले के लिए?

सिमरन चिल्लाते हुए - गौतम आराम से यार..

गौतम - धीरे ही चोद रहा हूँ.. अभी तो टॉप गियर डाला ही नहीं..

सिमरन - तुम तो बहुत दर्द देते हो गौतम.. मेरी जान निकाल दोगे..

गौतम हल्का धीरे होते हुए - सिमरन बहुत मस्त चुत है तुम्हारी मन करता है पूरी रात चोदता रहु..

सिमरन - तू कुछ भी कर मेरे रसगुले तुझे सब आजादी है.. बस मुझे औऱ ज्यादा दर्द मत दे.. पहला मिलन इतना भी यादगार मत बना की याद करते ही गंद में दर्द होने लगे..

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गौतम चुत मारते हुए - आई लव यू सिमरन.. तेरे मेरे पहले का कोई नाता जरुर है..

सिमरन - पहले का तो पता नहीं रसगुल्ले.. पर अब आगे जरूर हमारा रिश्ता होगा.. प्यार का रिश्ता.. आह्ह..

गौतम गांड मारना बंद करके लोडा सिमरन के मुंह की तरफ करके - होने वाला है सिम्मी.. आजा लेले मेरा लंड मुंह में..

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सिमरन लोडा मुंह में लेकर चूसने लगती है औऱ कुछ पलों में गौतम सिमरन के मुंह में झड़ जाता है जिसे सिमरन पी जाती है औऱ गौतम को गले से लगाकर kiss करते हुए कहती है..

सिमरन - तू दिल में बस गया रसगुल्ले... सच्ची मोहब्बत हो गई तुझसे..

गौतम सिमरन के होंठों को चूमकर - चल अब शादी भी इंजॉय कर लेते है थोड़ा.. 9.30 बजने वाले है..

सिमरन - तुम जाओ.. मुझे थोड़ा समय लगेगा आने में..

गौतम - ठीक है तुम्हारी मर्ज़ी.. पर जल्दी आना.. औऱ वीडियो डिलीट कर देना..

सिमरन - वो तो कब का कर दिया चाहो तो फ़ोन देख लो..

गौतम सिमरन का बोबा पकड़ कर चूसते हुए - सच में डिलीट कर दिया ना? साली तेरी माँ चोद दूंगा अगर झूठ बोला तो तूने?

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सिमरन गौतम के होंठ चूमकर - मुझे चोद कर मन नहीं भरा जो अब मेरी माँ भी चोदनी है तुम्हे.. वीडियो सच में डिलीट कर दिए मैंने.. मैं अपनी मोहब्बत को बदनाम थोड़ी कर सकती हूँ...

गौतम - चोदने लायक हुई तो तेरी माँ भी चोद दूंगा.. मुझे तो सब पसंद है.. मिल्फ ज्यादा पसंद है..

सिमरन हस्ती हुई - अब कपडे पहन लो .. तुमको ऐसे देखकर मेरा मूंड वापस बन रहा है.. जा मैं आती हूँ..

गौतम अपने कपडे पहनकर लोन की तरफ निकल जाता है औऱ सिम्मी अपने आपको ठीक करके बदन में आ चुकी लचक को काबू करने लगती है...

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मनोज - क्या हुआ भाई? मज़ा नहीं आया क्या मेरी बहन के साथ?

गौतम - साले तेरी बहन है या मिया खलीफा? कितनी वहशी है..

मनोज - उसकी गलती नहीं है भाई.. तू है ही इतना चिकना वो भी क्या करें? वैसे कैसी लगी ये बता?

गौतम - तू नहीं जानता कैसी है वो?

मनोज - भाई बहन है मेरी.. हमारे बीच सिर्फ अच्छी दोस्ती है.. ऐसा वैसा कुछ नहीं.. मैंने आज तक उसे छुआ तक नहीं..

गौतम - लगता है सिर्फ बेलन से ही काम चलाया है उसने आज तक..

मनोज - पूरा मोहल्ला आगे पीछे घूमता है सिम्मी के.. पर किसी को भाव तक नहीं देती..

गौतम - देगी कैसे डरती होगी कोई नकली लंड गांड मरवाने से मना ना कर दे...पर आज चुत
में जन्नत मिल गई मुझे तो.. ऊपर से इतना सेक्सी फिगर है घोड़ी बनाने के बाद तो नशा ही हो गया था मुझे..

मनोज - जरुरत से ज्यादा तो नहीं पेला ना तूने? अभी तो बेचारी 19 साल की फूल सी बच्ची है..

गौतम - भाई तेरी फूल सी बहन को अच्छे से खिला दिया मैंने.. मेरे साथ जबरदस्ती कर रही थी.. मैंने थोड़ी सी की तो अकल आ गई उसे..

मनोज - पर है कहाँ वो? साथ क्यों नहीं आई..

गौतम - ठीक से चला जाएगा तब साथ आयगी ना.. अब तो चाल में लचक आ गई उसके.. देख वो आ रही.. कैसे बलखाते हुए आ रही है..

मनोज - अरे बहनचोद तूने तो रगड़ दिया लगता है.. मम्मी पापा देख लेंगे तो बहुत सुनाएंगे इसे..

गौतम - कुछ भी बोल देना यार.. क्या परेशान हो रहा है..

सिम्मी आकर अपने भाई के सामने गौतम को kiss कर लेती है औऱ प्यार से कहती है - चल रसगुल्ले... खाना खाते है साथ में.. भईया आप भी चलो..

मनोज - अभी रहने दे.. बहुत भीड़ है खाने पर.. थोड़ी कम हो जाए फिर चलते है खाने.. तब तक एक एक पेग औऱ ले लेते है.. चल.. स्टेज के पीछे खाली जगह वहा चलते है..

गौतम - वहां मत जा.. रांडे चुद रही है वहा पर...

मनोज - अरे कोई नहीं था अभी तो..

गौतम - भाई तब रांडे नाच रही थी.. अब नाच गाना ख़त्म हो गया तो सारी रंडिया स्टेज के पीछे खाली जगह में मेहमानो के लोडे खा रही है.. सब घराती बराती मिलकर चोद रहे है.. भईया के दोस्त औऱ अंकल के यार लोग सब मिलके पेल रहे है.. रंडियो को घोड़ी बनाकर..

मनोज - तूने नहीं चोदी रांड?

गौतम सिम्मी के गले में हाथ डालकर उसकी चूची मसलते हुए - तेरी बहन चोद रहा था ना.. औऱ मुझे रंडी चोदने का ज्यादा शोक भी नहीं है.. कोई घरेलु मिल जाए तो बात अलग है..

मनोज - तू तो मेरी बहन की ले रहा है मैं किसकी लू यार..

सिम्मी - सच में.. रसगुल्ले.. मेरे भाई के लिए भी कुछ कर ना.. बेचारा अपने हाथों से काम चलाता है..

गौतम फ़ोन निकालते हुए - करता हूँ तेरी व्यवस्था..

सिम्मी मुस्कुराते हुए अपनी चूची पर से गौतम का हाथ हटा कर - भईया के सामने मत कर..

गौतम - शर्मा क्यों रही है मेरी जान... साला है मेरा.. इसके सामने तेरे चुचे दबाउ या गांड मारु.. ये कुछ नहीं बोलने वाला..

गौतम फ़ोन पर - हेलो.. चेतन भईया?

चेतन - हाँ ग़ुगु..

गौतम - भईया वो एक बात करनी थी आपसे..

चेतन - हाँ बोल ग़ुगु.. क्या बात है..

गौतम - भईया नचाने वाली औरते आई है ना..

चेतन - हाँ..

गौतम - भईया उनमे से जो नीली साडी में थी ना.. उससे मिलना है...

चेतन - नहीं ग़ुगु.. बुआ या माँ-पापा को पता लगा तो बहुत सुनाएगे मुझे.. वो सब रंडिया है तू अभी बच्चा है इन सब से दूर रह..

गौतम - भईया सब एन्जॉय कर रहे है मुझे छोड़कर.. औऱ पता कैसे चलेगा.. आप थोड़ी बताओगे.. ना मैं बताने वाला.. प्लीज भईया.. बहुत मन हो रहा है..

चेतन - अच्छा ठीक है नीली साडी वाली तो अंकल ज़ी के साथ है कोई दूसरी भेज रहा हूँ तेरे रूम में.. जल्दी से काम करके वापस लोन में आ जाना.. किसी को पता ना चले..

गौतम - ठीक है भाईया.. जैसा आप कहो..

चेतन - औऱ कंडोम याद से लगा लेना.. ये सब रंडिया है रोज़ किसी ना किसी से चुदवाती है.. चल रखता हूँ..

गौतम - ले साले.. तेरा जुगाड़ भी करवा दिया.. जा मेरे रूम में वहा आ जायेगी तेरे लिए कोई ना कोई रांड..

मनोज - तू भी चल ना..

गौतम सिमरन को देखकर - नहीं मैं यही ठीक हूँ तू जा..

सिम्मी - भईया वापस जाना है जरा जल्दी आना.. पापा का फ़ोन आया था बुला रहे थे..

मनोज - ठीक है..

मनोज गौतम के रूम में चला जाता है औऱ वहा कुछ देर बाद एक रांड आ जाती है मनोज औऱ उस रांड में कुछ देर चुदाई होती है फिर 15-20 बाद मनोज वापस लोन में आ जाता है औऱ सिम्मी को लेके वापस जाने लगता है..

गौतम - सिम्मी आज रात मेरे पास नहीं रुक सकती? मन नहीं कर रहा तुझे अपने दूर करने का..

सिमरन - मन तो मेरा भी नहीं है रसगुल्ले तुझसे दूर जाने का.. पर क्या करू.. पापा बहुत स्ट्रिक्ट है नहीं मानेगे मुझे छोड़ने के लिए.. मैं फ़ोन करुँगी..

गौतम - अपना ख्याल रखना सिम्मी..

सिमरन गौतम को चूमते हुए - तुम भी अपना ख्याल रखना रसगुल्ले..

मनोज दोनों का चुम्बन देखकर - अरे यहां मैं भी हूँ कुछ तो शर्म करो.. यही सब करना है अकेले में कहीं जाकर कर लो..

सिम्मी चुम्बन तोड़कर - चूमने दो ना भईया.. बड़ी मुरादो के बाद तो मुझे मेरा रसगुल्ला मिला है.. मन तो कर रहा है इसे भी अपने साथ ले जाऊ..

मनोज - पापा का फ़ोन आ रहा है सिम्मी चल..

गौतम मनोज से - साले इसका ख्याल रखना.. ये मेरी है..

मनोज - उसकी चिंता मत कर भाई.. बस मेरी बहन से जल्दी मिलने आना.. बेचारी बहुत अकेले रही है.. अब इसे प्यारकी जरुरत है..

सिमरन वापस गौतम को चूमते हुए - बाए मेरे रसगुले.. इंतजार करूंगी तुम्हारा.. जल्दी मिलने आना..

गौतम - बाय जान..

मनोज गौतम से गले मिलता हुआ - चल भाई.. चलता हूँ..

गौतम - अपनी बहन का ख्याल रखना यार.. बहुत प्यारी है..

मनोज सिमरन को साथ लेकर पार्किंग की तरफ चला जाता है औऱ एक वाइट कार में अपने माँ पापा के साथ बैठ जाता है.. कार वहा से चली जाती है गौतम मुस्कुराते हुए कार को जाते हुए देखता रहता है..
 
अपडेट 25



बुआ बहुत अच्छा नाचती हो आप तो.. देखो कैसे सारे मर्द आपको देखकर कुत्ते की तरह जीभ बाहर निकाल रहे है..

आरती ने नाचकर अभी अभी बगल वाली कुर्सी पर बैठी सुमन से कहा तो सुमन खिलखिलाती हुई हसने लगी औऱ आस पास खड़े मर्दो को देखने लगी जो उसी के ऊपर नज़र गड़ाये खड़े थे..

सुमन अच्छे से समझ रही थी मर्दो की नज़र उसके बदन पर कहा कहा पड़ रही है औऱ वो सब क्यों इतने हवस भारी नज़रो से उसे देख रहे है..

रात के दस बज चुके थे औऱ सुमन को अब तक कई milflover लड़को औऱ उसकी हम उम्र आदमियों ने नंबर देने की कोशिश की थी मगर सुमन ने एक भी आदमी को भाव नहीं दिया औऱ अपनी मस्ती में मस्त होकर शादी का पूरा मज़ा लेती रही..

सुमन - निकालने दो जीभ बाहर.. कोनसा जीभ बाहर निकालने से खाने को हड्डी मिल जायेगी इन कुत्तो को..

आरती औऱ सुमन इस बात पर जोर से हँसने लगती है..

आरती - मानना पड़ेगा बुआ.. पुरानी शराब हो.. हम नई नई जवान औरतों से ज्यादा नशा देती हो.. मुझसे ज्यादा तो सब आपको ही देख रहे है.

सुमन - चुप कर अब तू.. चल अब बहुत नाच गाना हो गया कुछ खा लेते है बहुत भूक लगने लगी है मुझे तो..

आरती - बुआ आप खाओ खाना मुझे तो अभी इन मर्दो का पानी भी निजालवाना है.. आज तो बहुत लोगों ने आपके औऱ मेरे नाम से पानी निकाला होगा..

सुमन हस्ती हुई - कितना बेशर्म हो गई है तू.. औऱ इस लंगड़ी चाल से कब तक नाचेगी? चल अब मैं तो जाती हूँ बहुत नाच लिया..

कोमल आते हुए - सुमन ग़ुगु को कहीं देखा तूने?

सुमन - क्यों भाभी क्या हुआ?

कोमल - सुमन पंडित ज़ी ने फेरो के लिए जो सामान मंगवाया था वो तो घर ही रह गया है.. तू ग़ुगु को बोल ना जाकर ले आये फ़ोन भी नहीं उठा रहा वो..

सुमन - यही कहीं होगा.. भाभी मैं देखती हूँ..

कोमल - जल्दी देख सुमन.. आज का ही शुभ समय है.. पूर्णिमा का दिन है.. अगर 12 बजे के बाद फेरे पड़े तो अशुभ घड़ी शुरू हो जायेगी..

सुमन - आज पूर्णिमा है?

कोमल - हाँ.. लेकिन तू इतनी फ़िक्र में क्यों है?

सुमन - कुछ नहीं भाभी.. मैं ग़ुगु के साथ घर जाती हूँ औऱ सामान लेकर आती हूँ..

कोमल - लो सुमन चाबी.. जल्दी आना..

सुमन - चिंता मत करो भाभी अभी समय है..

सुमन कोमल से चाबी लेकर लोन में गौतम को ढूंढने लगती है.. औऱ कुछ देर बाद गौतम सुमन को अकेला कहीं बैठा हुआ अपने फ़ोन में किसी से चैटिंग करते हुए दिखाई देता है..

सुमन - ग़ुगु चल.. घर चलना है..

गौतम - क्यों?

सुमन - चल ना रास्ते में बताती हूँ..

गौतम उठकर सुमन के साथ पार्किंग की तरफ जाते हुए - क्या हुआ माँ.. सब ठीक है ना इतनी जल्दी में क्यों हो..

सुमन - अरे वो भाभी कुछ सामान भूल गई है घर पर.. वही लेकर आना है.. फेरो के लिए पंडित ज़ी को जरुरत है उसकी..

गौतम - ये बात है क्या.. मुझे लगा आज मैं लकी होने वाला हूँ.. आप शायद मान गई हो..

सुमन हसते हुए - ग़ुगु तू.. हर दम वही सब सोचता रहता है?

गौतम - अब आपके जैसी खूबसूरत माँ हो तो औऱ क्या सोचूंगा.. मैं भी देख रहा था कैसे लोग आपको नाचते हुए देख रहे थे.. कई लोगों ने तो नंबर भी दिये है..

सुमन - वो सब मैंने नहीं लिए.. मुझे किसी में दिलचस्पी नहीं है.. तू जल्दी से गाडी चला औऱ घर चल.. एक औऱ काम है तुझसे..

गौतम - औऱ वो क्या है..

सुमन - अकेले में बताऊंगी..

गौतम - यहां पार्किंग में कौन है बता दो...

सुमन - नहीं.. तू चल..

गौतम गाडी स्टार्ट करके घर की तरफ मोड़ लेता है रात के सुनसान रास्ते औऱ खाली सडक से घर पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता...

सुमन का दरवाजा खोलकर अंदर आ जाती है गौतम भी उसके पीछे पीछे अंदर आकर घर का दरवाजा लगा देता है औऱ सुमन से कहता है..

गौतम - अब तो बता दो दूसरा कम क्या है..

सुमन मुस्कुराते हुए - थोड़ा सब्र कर शहजादे.. इतनी बेसब्री अच्छी नहीं पहले सामान देख लेती हूँ कहा रखा है भाभी ने..

गौतम - अपने रूम में रखा होगा..

सुमन - नहीं ग़ुगु सारा सामान भाभी ने इसी रूम में रखा था..

गौतम - रुको मैं फ़ोन करके पूछता हूँ..

सुमन - हाँ ये ठीक रहेगा.. पूछो कहा रखा है सामान..

गौतम फ़ोन पर - हेलो मामी.. सामान कहा है रखा है जो आप छोड़ गए थे?

सुमन - अरे बेटा.. गलती हो गई.. तेरे मामा वो सामान ले तो आये पर अपनी गाडी की डिक्की से निकाला ही नहीं.. सामान यही गाडी में है.. मैंने तेरे मामा को कहकर मंगवा लिया.. तुम्हे बिना काम ही घर जाना पड़ा..

गौतम - कोई बात नहीं मामी.. फ़ोन कट जाता है..

फ़ोन स्पीकर पर था सुमन भी सारी बातें सुन रही थी..

सुमन - भाभी भी ना.. ऐसा नहीं कि पहले भईया से पूछ ले.. फालतू ही यहां आये..

गौतम सुमन को बाहों मे भरते हुए - फ़ालतू क्यों माँ.. हम यहां खुलकर रोमांस कर सकते है.. अब बताओ औऱ क्या काम था मुझसे..

सुमन - पहले छोड़.. मुझे कुछ काम है..

गौतम सुमन को छोड़ते हुए - लो छोड़ दिया...

सुमन मुस्कुराते हुए - अपने कमरे में जाके बैठ मैं पांच मिनट में आती हूँ..

गौतम - जल्दी आना माँ.. वरना मैं आ जाऊँगा..

सुमन गौतम की बात पर हसते हुए अपने कमरे में चली जाती है औऱ अपने साड़ियों में से एक लाल कलर की साडी पहन लेती है.. औऱ गौतम के कमरे में आती है..

गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा तो याद आ ही गया आपको आज पूर्णिमा है.. मगर जब तक मेरी मांग पूरी नहीं होगी मैं आपका दूध नहीं पिने वाला..

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम की गोद में आकर बैठती हुई अपना ब्लाउज खोलकर - मेरे इन दोनो कबूतरों को देखकर आज बहुत सारे मर्दो ने इन्हे पाने की कोशिश की थी.. औऱ एक तू है.. इतनी प्यार से मिन्नतें करके.. हाथ जोड़कर.. तुझे अपने बोबे चुसवाती हूँ फिर भी तू नखरे करता है..

गौतम - मैं नखरे करता हूँ या आप नखरे करती हो.. कब से बोल रहा हूँ सेक्स करते है पर आप हो की सुनती ही नहीं.. हम दोनों के बीच अकेले में इतना सब होता है.. सेक्स भी हो जाएगा तो कौन पूछने वाला है? आपको चाहिए तो कंडोम पहन के चोद लूंगा मुझे कोई परेशानी नहीं है उसमे.. बस आप हाँ कर दो बहुत प्यार करुंगा माँ आपको..

सुमन - बेशम.. भला कोई बेटा भी अपनी सगी माँ चोदता है? तू तो ऐसी बात कर रहा है जो आज तक कहीं नहीं हुई..

गौतम - हर दूसरे घर में होती है माँ.. पर आप मानने को ही तैयार नहीं हो..

सुमन - कहा होती? तेरे सपनो में? कुछ भी मत बोल.. चुपचाप अब मेरे बोबे चूस.. वापस भी चलना है..

गौतम - नहीं चूसने माँ मुझे आपके बोबे.. हर बार बोबे चूसा कर लंड खड़ा कर देती हो फिर खड़े लंड पर चोट करके चली जाती हो.. औऱ आप नहीं मानती इसका मतलब ये नहीं कि दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता.. दुनिया में बहुत कुछ होता है औऱ इंडिया में तो औऱ भी ज्यादा.. कहीं किसी घर कोई बेटा अपनी माँ चोद रहा है तो कहीं कोई बाप अपनी बेटी.. भाई बहन तो हर दूसरे घर में चुदाई कर रहे है.. लोग इसपर बात करने से डरते है इसलिए अब तक ये सब छीपा हुआ है.. इंटरनेट जानती हो ना.. उस पर कई ऐसे समाचार पत्र आते है जिनमे घर में होने वाली चुदाई के समाचार आते है वो भी पूरी डिटेल के साथ.. मगर आपको क्या पता.. आपको तो ये सब बकवास औऱ कोरी बातें लगती है..

सुमन - अच्छा होनसा अखबार छापता ऐसी खबर.. बता जरा..

गौतम - डार्क वेब करके कुछ होता है उस पर आते है.. मेने एक साइट को सब्सक्राइब किया है उसमे इंडिया की incest न्यूज़ आती है.. "भारत की पारिवारिक चुदाईया" नाम से आता है समाचार... हर वीकेंड पर.. पढ़ोगी..

सुमन कुछ पल रूककर -पढ़ा जरा.. मैं भी तो देखु तू सच कह भी रहा है या नहीं..

गौतम अपना फ़ोन निकालकर - लो पढ़ो ये पिछले वीकेंड का न्यूज़ पेपर है..

सुमन - तू ही पढ़ के सुना.. मुझसे फ़ोन में नहीं पढ़ा जाएगा.. आँखे कमजोर हो गई है मेरी..

गौतम फ़ोन दिखाते हुए - सुनो.. पहली खबर - बंगाल के सिलीगुड़ी में एक बाप पिछले 1 साल से कर रहा था अपनी बेटी के साथ गलत काम.. बेटी के प्रेग्नेंट होने पर आस पास के लोगों को इस बात का पता चला.. बेटी ने पुलिस से कहा की उसके बाप ने उसकी मर्ज़ी से उसके साथ सम्बन्ध बनाये थे औऱ अब वो अपने बाप के साथ ही रहना चाहती है..

दूसरी खबर - बिहार के मधुबनी में भाई ने रचाई अपनी ही बहन के साथ शादी.. दोनों का चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था.. घर में ही दोनों करते थे रात रातभर चुदाई.. एक बार बच्चा भी गिरा चुके है.. लड़की ने कहा.. पति शराब पीके मारपिट करता था इसलिए ससुराल छोड़कर अकेले रह रहे छोटे भाई के घर रहने आई थी.. घर आने के कुछ दिनों में ही लड़की को अपने छोटे भाई से प्यार हो गया औऱ दोनों में रात दिन चुदाई होने लगी.. पहला बच्चा तो समाज के डर से गिरा दिया मगर दूसरे बच्चे को वो पैदा करना चाहती है औऱ इसलिए दोनों भाई बहनो ने आपस में शादी करके साथ रहने का निर्णय लिया है..

तीसरी खबर - हरियाणा के रोहतक में अपने पति के कहने पर बाप की जायद में अपना हिस्सा मांग रही औरत को उसके दोनों भाइयो औऱ पांचो भतीजो ने हिस्सा देने के बदले 21 दिनों तक खूब चोदा.. औरत का कहना है की उसे जायदाद में हिस्सा लेने के लिए 21 की जगह 121 दिन भी चुदना पड़ता तो वो चुदने को तैयार थी.. भतीजो ने कहा कि बुआ की चुत बहुत टाइट थी सबको बुआ की चुत मारने में मज़ा आया..

चौथी ख़बर - उतर प्रदेश के शहर बरेली में एक शराबी बेटे के पास जब रांड चोदने के पैसे नहीं बचे तो उसने घर आकर अपनी ही माँ का घाघरा उठा दिया.. बीमार बाप की गैरमोज़ूदगी में शराबी बेटे ने रातभर में 4 बार अपनी माँ की चुत चोदकर माँ की चुत में अपना माल झाड़ दिया.. नशा उतरने पर बेटे ने माँ से पैर छूकर माफ़ी मांगी औऱ शराब छोड़ देने का वादा भी किया.. माँ का कहना है कि.. जो हुआ सो हुआ.. एकलौता जवान लड़का है औऱ ऊपर से घर चलाने वाला भी.. अगर फिर से बेटा चोदना चाहेगा तो वो अपनी मर्ज़ी से चुदवाएगी...

पाँचवी खबर - महाराष्ट्र के औरंगाबाद से सटे ग्रामीण इलाके में दो भाइयो का विवाद तब सुर्खियों में आ गया जब दोनों ने एकदूसरे पर अपनी अपनी पत्नियों को पेलने का आरोप लगाते हुए अपनी अपनी बात कही.. बड़े भाई का कहना था कि छोटा भाई उसकी पत्नी को खेतो में बुलाकर चोदता है तो छोटे भाई का कहना था कि बड़ा भाई उसकी पत्नी को छत पर बुला के चोदता है.. आखिर में पंचायत ने दोनों को पत्नियां अदला बदली करनी कि सलाह दी. दोनों भाइयो ने अपनी पत्नी को तलाक़ देकर एकदूसरे की पत्नी से शादी कर ली..

छटी खबर - उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रहने वाले जुनेद आलम नाम के शख्स को अपनी तलाक़शुदा बहन जमीला से तब निकाह करना पड़ गया जब जमीला को चोदते हुए उसे पड़ोसियों ने देख लिया.. जमीला का कहना है की जुनेद उसे हर तरह से खुश रखता है औऱ वो जुनेद के साथ निकाह करके खुश है..

सातवीं खबर - मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के लूलीपुर गाँव में एक 18 साल की युवती मीना को उसके 32 साल के मामा रघुवर से ऐसा इश्क़ हुआ कि लड़की ने घरवालों से मामा के साथ शादी करने की ज़िद पर अड़ गई.. परिवार ने चोरी छिपे लड़की की शादी करवाकर उसको उसके मामा के साथ शहर भेज दिया.. जहाँ दोनों एक किराए के घर में रहते है..

आठवीं खबर - छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहने वाले मज़ीद अली नाम के शख्स ने हवस में अंधे होकर अपनी माँ औऱ बहन को तब चोद डाला जब दोनों एक साथ सो रही थी..

बहन का कहना है की भाई ने पहले उसकी अम्मी चोदी औऱ जब भाई को अम्मी की चुत ढीली लगी तो भाई ने उसकी सलवार उतार कर उसकी चुत मारी.. माँ का कहना है की बेटा ब्लू फिल्मो का शौकीन है उसे ava adams कहकर बुलाता था औऱ बेटी को mia khalifa..

नवी खबर - बिहार के समस्तीपुर के छोटे से गाँव कुला में भाई बहन 2 साल से बना रहे थे सम्बन्ध.. पिता को पता लगने पर दोनों को घर से निकाला.. लड़का अपनी बहन के साथ पटना अपने दोस्तों के घर किराए पर रहने आ गया औऱ वही अपनी बहन से शादी करके रहने लगा..

दसवीं खबर - दिल्ली में अपने ही बेटे पर आ गया एक माँ का दिल.. 44 साल की सुशीला अपने 26 साल के बेटे संस्कार के साथ प्यार में ऐसी पड़ी कि समाज की मर्यादा तोड़कर अपने बेटे के साथ भाग निकली.. पति का कहना है कि सुशीला उसके सो जाने के बाद संस्कार के कमरे में जाकर चुदवाती थी.. बेटे के साथ आपत्तिजनक तस्वीर भी खिचवाती थी.. मना करने के बाद भी सुशीला ने अपने नाजायज सम्बन्ध अपने बेटे संस्कार से नहीं तोड़े औऱ घर में खुलकर गंद मचाने लगी.. कई बार उसने अपने बीवी बेटे को रंगरलिया मनाते हुए रंगे हाथ पकड़ा मगर समाज औऱ बदनामी के डर से कुछ बोल ना सका.. शुशीला जब संस्कार से प्रेग्नेंट हुई तो घर से सारा केश औऱ गहने के साथ संस्कार को लेके भाग निकली..

सुमन - हाय.. कैसी औरत होगी.. अपने ही बेटे को भगा के ले गई..

गौतम - तो.. सब क्या आपके जैसी डरपोक है? अभी औऱ भी बहुत सी खबर है.. एक तरफ सुशीला है औऱ एक तरफ आप.. आप तो कंडोम लगा के भी नहीं चोदने देती... चुत पूरी तरह गीली है मगर फिर भी चुदवाना नहीं है..

सुमन - तू मेरी मजबूरिया क्यों नहीं समझता शहजादे.. मेरी चुत औऱ गांड तुझसे बढ़कर थोड़ी है.. चल अब अच्छे बच्चे कि तरह मेरे दोनों बोबो को चूस वरना माँ नाराज़ हो जायेगी..

गौतम सुमन के दोनों बूब्स पकड़कर उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेटा देता है औऱ बोबे मसलते हुए कहता है - बचपन से देख रहा हूँ आपको.. थोड़ी देर मेरी शकल ना दिखे तो बेचैन हो उठती हो आप.. कितनी भी बड़ी गलती कर दूँ कभी कुछ नहीं कहती.. बड़ी आई नाराज़ होने वाली..

सुमन - एकलौता सुकून है मेरी आँखों का तू ग़ुगु.. तुझसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..

गौतम सुमन के निप्पल्स चाटते हुए - तो फिर ले चलो मुझे भी भगा कर.. कहीं दूर पहाड़ो में.. एक छोटा सा घर होगा.. उसमें सिर्फ आप मैं औऱ एक बिस्तर.. दिन महीने साल बदल जायेगे पर हम दोनों वही उसी बिस्तर पर हमारे मिलन के सुख को भोगते रहेंगे..

सुमन मुस्कुराते हुए - खुली हुई आँखों से इतने बड़े बड़े औऱ पुरे नहीं होने वाले सपने मत देख मेरे शहजादे.. मैं तेरी माँ हूँ औऱ माँ बनकर ही तेरे साथ रहूंगी हमेशा..

गौतम निप्पल्स चूसते हुए - होगा माँ.. हर सपना पूरा होगा.. देखना एक दिन ऐसे ही किसी मुलायम बिस्तर पर आप इसी तरह मेरे नीचे लेटी रहोगी औऱ अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चुत में घुसाती हुई बोलोगी.. गौतम ज़ी.. आज जरा धीरे करना.. अभी अभी आपके बच्चे को दूध पीलाके सुलाके आई हूँ.. अगर वो कल की तरह उठ गया तो हिलाके ही सोना पड़ेगा आपको...

सुमन जोर से हसते हुए - हट बेशर्म.. कुछ भी उल्टा सीधा बोलता है.. कितना कुछ सोच रखा है तूने.. तू जितना प्यारा है उतना ही शैतानी दिमाग भी है तेरा... अब चल वापस चलते है..

गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है माँ.. कोनसी हमारे बिना शादी रुक जायेगी.. चलो थोड़ी देर ट्रुथ एंड डेयर खेलते है..

सुमन - नहीं ग़ुगु... तू ना बहुत गंदे गंदे सवाल पूछता है औऱ गंदे गंदे काम करवाता है मुझसे..

गौतम - तो आप भी पूछ लेना ना.. औऱ जो मन हो वो डेयर दे देना मैं मना नहीं करूँगा..

सुमन - ठीक है मगर इस बार आँख झपकाने वाला गेम नहीं चलेगा उसमे हर बार तू ही जीत जाता है..

गौतम - तो कोनसा गेम खेले?

सुमन - कोई भी दूसरा..

गौतम - अच्छा ठीक है.. मैं अलार्म सेट करता हूँ फ़ोन में जो एक मिनट होने पर बजेगा.. औऱ ये चिविंगम आप खा लो.. मैं आपके मुंह से आपको चूमकर चिविंगम निकालने की कोशिश करूँगा.. अलार्म बजते ही जिसके मुंह में चिविंगम होगी वही जीतेगा...

सुमन - ठीक है.. इस बार देखती हूँ तू कैसे जीतता है.. आओ चूमो मुझे औऱ अलार्म सेट कर दो.. एक मिनट क्या दस के बाद भी तू मेरे मुंह से चिविंगम नहीं निकाल पायेगा बच्चू...

गौतम - वो अभी पता चल जाएगा माँ..

गौतम औऱ सुमन का चुम्मा शुरू होता है गौतम अपनी जीभ से सुमन के मुंह में इधर से उधर चिविंगम तलाश करता है.. मगर अलार्म बजने पर सुमन के मुंह से गौतम चिविंगम निकालकर अपने मुंह में लेने में नाकाम रहता है..

सुमन अलार्म बजने पर चुम्मा तोड़कर - अब बोल बच्चू? बहुत गेम खेलने का शोक है ना तुझे..

गौतम मुस्कुराते हुए - बताओ क्या करू? डेयर लेता हूँ मैं..

सुमन थोड़ी देर सोचकर - हम्म.. अपने फ़ोन का पासवर्ड बताओ.. औऱ लोक चेंज मत करना..

गौतम - माँ नहीं यार.. ये बहुत पर्सनल है मैं भी तो आपके फ़ोन का पासवर्ड नहीं पूछता..

सुमन मुंह मोड़ते हुए - नहीं करना छोड़ दो.. वैसे भी तुम मेरी तरह डेयर तो कर नहीं सकते..

गौतम सुमन को देखते हुए - ताना मार रही हो मुझे.. आपकी डेट ऑफ़ बर्थ है मेरे फ़ोन का पासवर्ड.. अब खुश..

सुमन मुस्कुराते हुए - मेरी डेट ऑफ़ बर्थ? ग़ुगु तू भी ना.. तेरी इन्ही हरकतों की वजह से मुझे इतना प्यार आता है तुझ पर..

गौतम - अच्छा अब चिविंगम दो.. इस बार आप मेरे मुंह से निकालना..

सुमन अपने मुंह की चिविंगम गौतम के मुंह में डाल देती है औऱ गौतम अलार्म सेट करके फिर से सुमन को चूमने लगता है सुमन भी अपनी पूरी कोशिश करती है मगर गौतम के मुंह से चिविंगम अपने मुंह में लेने में असफल रहती है.. औऱ हार जाती है..

गौतम - बताओ मेरी सेक्सी माँ.. क्या लोगी ट्रुथ या डेयर?

सुमन - तूने जो लिए मैं भी वही लुंगी.. बता क्या करना है..

गौतम - एक काम करो.. अपना फ़ोन उठाओ औऱ पापा को फ़ोन करके उनसे झगड़ा करो गन्दा वाला औऱ पापा को एक दो गाली भी दे देना..

सुमन - इस वक़्त?

गौतम - अभी तो सिर्फ साढ़े दस हुए है..

सुमन अपना फ़ोन उठा कर - ठीक है..

सुमन फ़ोन स्पीकर पर डालकर - हेलो..

जगमोहन - हेलो.. हाँ बोलो..

सुमन - तुम शादी में आने वाले थे ना.. कल भी तुम्हे फ़ोन करके कहा था मैंने औऱ तुमने हां करी थी..

जगमोहन - सुमन अभी इंचार्ज साब के साथ गस्त पर आया हुआ हूँ बाद में बात करूँगा..

सुमन - इंचार्ज के साथ हो या अपनी उस रखैल माधुरी के साथ? मुझे छोटे से पुलिस क्वाटर में रखा है उस महारानी के लिए बड़ा मकान बनवाया है.. एक बार वापस आ जाऊ फिर देखती हूँ तुम दोनों को..

जगमोहन - तु अब वापस शुरू मत हो जाना.. कहा है ना मैंने. बात कर रहा हूँ माधुरी से.. जल्दी ही उसे मनाकर तुझे भी वहा से बुला लूंगा..

सुमन - उसकी परमिशन से आउंगी क्या मैं? वो होती कोन है हां या ना करने वाली.. मर्दानगी तो ख़त्म हो ही चुकी है तुम्हारे अंदर अब लगता है शर्म भी ख़त्म हो गई है..

जगमोहन - सुमन जबान संभाल के.. अपनी हद को मत भूल.. औऱ घर उसके नाम पर है उससे तो बात करनी पड़ेगी..

सुमन - वाह.. बहन दुगुनी उम्र के बूढ़े से शादी करके बैठी है औऱ भाई अपनी पत्नी को छोड़कर रखैल के नाम पर घर ले रहा है.. थोड़ी बहुत शर्म हो तो चुल्लू भर पानी में डूब जाओ..

जगमोहन - अपनी जबान को लगाम दे सुमन.. वरना घर छोड़ उस पुलिस क्वाटर से भी जायेगी.. हर महीने खर्चा भेज रहा हूँ उसे खुश किस्मती समझ..

सुमन - खर्चा भेजते हो तो अहसान करते हो क्या.. औऱ होता क्या है तुम्हारे भेजे 15 हज़ार रुपए में.. अपने बेटे की छोटी मोटी जरुरत भी पूरी नहीं कर पाती.. अब तो मेरे बेटे ने मुझसे कुछ माँगना भी छोड़ दिया है.. नपुंसक तो थे ही अब बेशर्म भी हो गए..

जगमोहन - मेरा तुझसे लड़ाई का कोई मूंड नहीं है फोन रख..

सुमन - औऱ कर भी क्या सकते हो फ़ोन रखने के अलावा? चोद तो मुझे पाओगे नहीं.. ढीला लंड एक मिनट में झड़ जाएगा.. पता नहीं उस डायन को क्या पसंद आया तुम्हारे अंदर? जो अब तक तुम्हारे साथ है..

जगमोहन - साली वो कम से कम मुझे इंसान मानकर तो बात करती है तेरी तरह ताने तो नहीं मारती.. जब तेरे पास आता हूँ.. तू मुझे हर बार मेरी नामर्दानगी का अहसास दिला देती है.. बेटे पर जादू किया हुआ है.. मेरी तो आज तक कोई बात नहीं मानी उसने.. औऱ तेरे साथ शादी में चला गया..

गौतम अपनी माँ औऱ बाप की बातें सुनता हुआ सुमन के चुचे चूस रहा था औऱ फिर एक सिगरेट जलाते हुए कश लेकर सुमन को मुस्कुराते हुए देखने लगा..

सुमन गौतम से सिगरेट लेकर कश मारके कहती है - मेरा बेटा है मेरी नहीं सुनेगा तो क्या तुम्हारी उस रखैल की सुनेगा? तुम्हारी बहन तो बदचलन थी ही.. उसके साथ साथ तुम्हे भी बाहर मुंह मारने की आदत है..

गौतम सुमन से सिगरेट लेकर कश मारता हुआ अपना लंड सुमन के मुंह के आगे ले आता है जिसे सुमन पकड़ते हुए धीरे धीरे मुंह में लेकर चूसने लगती है..

जगमोहन - तुझे किसने मना किया है साली.. तू भी बाहर किसी से गांड मरवा ले.. पर मुझे रोज़ रोज़ फ़ोन करके परेशान मत कर.. मैं तंग आ गया तुझसे..

सुमन लंड चूसते हुए - तुम्हारी बहन के जैसी रांड नहीं हूँ मैं जो बाहर गैर मर्दो से चुदवाती फिरू.. इज़्ज़तदार घरेलु औरत हूँ औऱ एक जवान बेटे की माँ.. बाहर मुंह मारना मेरी आदत नहीं है.. इतना कहते ही सुमन फिर से गौतम का लंड चूसने लगती है..

जगमोहन - तुझे जो करना है कर.. मुझे माफ़ कर.. मेरे पास तेरे घरवालों के लिए टाइम नहीं है..

सुमन धीरे धीरे लंड चूसते हुए गौतम से सिगरेट लेकर कश मारते हुए - हाँ.. आई ज़ी.. डीआईज़ी लगे हो ना तुम तो.. सिर्फ एक हेड कांस्टेबल हो.. देसी भाषा में ठुल्ला..

जगमोहन फ़ोन काटते हुए - हट बहनचोद.. तेरा फ़ोन ही नहीं उठाना चाहिए था..

गौतम सुमन के बाल पकड़कर अपना लोडा चुसवाता हुआ सिगरेट का कश लेकर - माँ बुआ के बारे में कुछ मत बोला करो.. आपकी तरह उनको भी बहुत प्यार करता हूँ मैं...

सुमन गुस्से में - सब जानती हूँ कितना प्यार करता है औऱ कैसे प्यार करता है तू अपनी बुआ को.. उस रात सब अपनी आँखों से देखा था मैंने...

गौतम - माँ कहा छुपा रखा था अपने अपना ये रूप.. पापा से जैसे बात की औऱ मुझसे कर रही.. गुस्से में कभी देखा नहीं आपको.. गुस्सा अच्छा लगता है आपके ऊपर.. मुझ पर भी किया करो..

सुमन मुस्कुराते हुए - तेरा तो आधे घंटे से पहले नहीं निकलने वाला.. चल अब वापस चलते है वरना बहुत देर हो जायेगी.. बहुत भूक भी लगी है मुझे तो..

गौतम - जैसा आप कहो..

सुमन - रुक मैं साडी बदल कर आती हूँ..

गौतम - रहने दो ना अच्छा लग रहा है आपके ऊपर ये भी..

सुमन - अच्छा चल ठीक है..

***********

इतना समय कैसे लग गया सुमन? औऱ ये साडी क्यों बदली है तूने..

भाभी वो कुछ गिर गया था साड़ी पर इसलिए बदल ली.. मैं गौतम के साथ खाना खाने जा रही हूँ..

अरे खाना मेरे साथ खा लेना.. कहा गौतम के पीछे पीछे घूम रही है अब वो बच्चा नहीं मर्द बन चूका है..

ठीक है भाभी चलो..

अधिकांश मेहमान वापस जा चुके थे और लोन में अब बहुत कम ही लोग बचे थे रात के 11:00 का समय था और अब स्टेज पर रितु और राहुल भी सभी मेहमानों के साथ तस्वीर खिचवा चुके थे..

लोन में खाली टेबल पर एक आदमी नशे में बैठा झूलता हुआ एक वेटर से अनाप-शनाप गाली-गलौज कर रहा था..

आदमी - भोस्डिके क्या मंगवाया था औऱ क्या लेके आया है तू?

वेटर - सॉरी सर.. अभी ला देता हूँ..

गौतम उसके नजदीक जाकर.. टेबल पर बैठता हुआ..

गौतम - बहुत ख़ास मेहमान लग रहे हो..

आदमी - तू कौन है..

गौतम झूठ बोलता हुआ - केटरिंग मेरी है.. मेरे ही आदमियों से आप बदसूलुकी कररहे थे..

आदमी - अरे समझाओ अपने वेटर को साला कहता कुछ हूँ करता कुछ है.

गौतम - नासमझ है साला.. कई बार पिट भी चूका है.. खैर छोडो.. मेरा नाम गौतम है.. आप?

आदमी - विक्रम..

गौतम - विक्रम ज़ी बराती लगते हो..

विक्रम - नहीं यार.. ना घराती ना बराती.. हम है अपनी मर्ज़ी के मेहमान..

गौतम - मतलब?

विक्रम - मतलब कि मैं वो हूँ जो इस शादी को दो मिनट में ख़राब कर सकता हूँ.

गौतम - अच्छा? कोई महान हस्ती लगते हो?

विकर्म - हाँ बेशक़.. दुल्हन का बॉयफ्रेंड हूँ मैं..

गौतम हैरानी से - क्या? पर मैंने तो सुना है दुल्हन बहुत भोली भाली शरीफ है..

विकर्म फ़ोन निकालते हुए - अरे मेरा लंड शरीफ है साली.. लपक लपक के लोडे लेती है मादरचोद.. थोड़ी देर पहले पीछे बाथरूम में चोद के आया हूँ रंडी को ये देख सबूत..

गौतम फोन में विकर्म औऱ ऋतू कि चुदाई का वीडियो देखकर - अरे बहनचोद.. लगता है बहुत टाइम से पेल रहे हो इस लड़की को.. फिर शादी क्यों नहीं कि?

विकर्म - रडियो से शादी नहीं करते छोटे भाई.. बस चोदके मज़े लेते है..

गौतम - समझा नहीं..

विकर्म - ये साली रांड मुझसे पहले औऱ कई लोगो से चुद चुकी है.. सबने एक एक करके चोदा है इसको..

गौतम - बड़े भाई.. खाना छोडो यार दारु पीते है औऱ.. आओ मेरे साथ चलो.. हर ब्राड है अपने पास..

विक्रम हसते हुए - लगता है तुझे भी इसकी लेनी है.. चिंता मत कर मैं दिलवा दूंगा..

गौतम विक्रम हो अपने रूम में जाता है औऱ दो पेग बनाकर एक बैठ जाता है..

गौतम - लकी तो हो यार आप.. मगर ये लड़की शादी के दिन भी आपसे चुदवा रही है.. कुछ तो बात है.

विकर्म पेग पीकर- अरे इसके बहुत वीडियो है मेरे पास.. एक बार बुलाने पर भाग के चली आती.. (बोतल लेकर पीते हुए) मैं कहता हूँ नहीं आएगी तो mms लीक कर दूंगा.. साली को आना ही पड़ता है..

गौतम - क्या बात है.. बहुत पहुचे हुए खिलाड़ी हो.. आप तो..

विक्रम हसते हुए बोतल से एक साथ बहुत सारी दारु पिता हुआ बेड पर गिर जाता है औऱ गौतम विकर्म के गिरने पर उसे बेड पर अच्छे से लेटा देता है औऱ उसके फोन को लेकर विकर्म कि ऊँगली से लॉक खोलकर ऋतू के सारे वीडियो अपने फ़ोन में ट्रांसफर करके विकर्म के फ़ोन से ऋतू के वीडियो डिलीट कर देता है.. इसके बाद गौतम चेतन को फ़ोन करता है..

गौतम - भईया?

चेतन - हाँ ग़ुगु?

गौतम - भईया उस आदमी के नम्बर दोगे जिसने रांडे बुलाई थी?

चेतन - तुझे क्यों चाहिए उसके नम्बर?

गौतम - अर्जेंट है भईया.. आप दो ना..

चेतन - ग़ुगु एक दो लड़की अभी यही है तुझे चाहिए तो भेज देता हूँ..

गौतम - भईया आप भेजो ना यार नम्बर.. लड़की नहीं चाहिए मुझे..

चेतन - ठीक है व्हाट्सप्प कर रहा हूँ.. पैसे मत देना मैं दे दूंगा..

गौतम - ठीक है भईया..

गौतम चेतन के भेजे हुए नम्बर डायल करके - हेलो

दलाल - हैल्लो..

गौतम - कालू ज़ी बोल रहे है..

दलाल - हाँ.. आप कौन?

गौतम - मैं चेतन का भाई हूँ.. आपने आज 11 औरते भेजी थी ना नाचने के लिए..

कालू - हाँ.. औऱ कुछ चाहिए तो बताओ? भेजना है औऱ किसी औरत को?.

गौतम - हाँ.. पर औरत को नहीं मर्द चाहिए जिसे लड़के पसंद हो..

कालू हसते हुए - अच्छा है आजकल लड़के भी डिमांड में है.. कितने भेजू?

गौतम - 1 ही भेज दो.. जितना बदसूरत हो उतना अच्छा..

कालू - 10 मिनट में आ जाएगा.. इस नम्बर के कांटेक्ट सेंड कर रहा हूँ. फ़ोन उठा लेना.. वसीम नाम है आदमी का..

गौतम - ठीक है..

हेलो ..

वसीम - ज़ी मैं पहुंच गया हूँ..

गौतम - लेफ्ट साइड में वाइट बिल्डिंग दिख रही है.. फर्स्ट फ्लोर पर रूम नम्बर 26 में आजा..

वसीम रूम में आकर गौतम से - आपने बुलाया है?

गौतम - हाँ ये आदमी दिख रहा है..

वसीम - मरा हुआ है क्या?

गौतम - अबे नशे में है..

वसीम - तो..

गौतम - तो क्या.. चोद इस आदमी को..

वसीम - पर आप वीडियो क्यों बना रहे है..

गौतम - बना नहीं रहा बनाऊंगा.. तुझे दिक्कत है वीडियो बनाने से?

वसीम - हाँ.. मैं वीडियो नहीं बना सकता..

गौतम - अबे डबल रेट दिलवा दूंगा..

वसीम कुछ सोचकर - मेरा फेस तो नहीं आएगा ना..

गौतम - अबे रुमाल बाँध ले.. चल अब शुरू कर फ़िल्म...

वसीम विकर्म को नंगा कर के खुद्द भी नंगा हो जाता है औऱ विक्रम के साथ चूमाचाटी करते हुए विक्रम के मज़े लेने लगता है.. विकर्म नशे में पूरी तरह से चूर हिलता दुलता हुआ वसीम को अपने ऊपर से हटाता है मगर वसीम विकर्म की गांड में थूक लगा कर अपने लंड से उसे चोदने लगता है.. विकर्म नशे में चूर था उसे सब दिखाई दे रहा था मगर वो कुछ नहीं कर पास रहा था.. गौतम विक्रम के फ़ोन से ही उसका mms बना रहा था..

विक्रम चुद चूका था औऱ उसका वीडियो उसी के फ़ोन में बन चूका था जिसे गौतम ने अपने फ़ोन में ट्रांसफर भी कर लिया था.. वसीम विकर्म को चोदकर निकल चूका था औऱ विकर्म आहे भरता हुआ अपनी गांड के हाथ लगा के लेता था उसकी हालात ऐसी थी की वो कुछ नहीं कर सकता था.. नशे में चुर विक्रम कुछ देर बाद गहरी नींद में सो गया.

गौतम ने विकर्म के फ़ोन से उसका mms बनाकर फ़ोन विक्रम के पास ही पटक कर रूम से बाहर आ गया.. विक्रम का mms गौतम के पास था औऱ अब विक्रम के पास ऋतू का एक भी वीडियो नहीं था..
 
अपडेट 26



गौतम जब नीचे आया दूल्हे औऱ दुल्हन का खाना लग चूका था.. आरती ने गौतम का हाथ पकड़ कर उसे भी अपने साथ खाने की मेज पर बैठा लिया औऱ बोली..

आरती - क्यों देवर ज़ी.. आज तो अपनी भाभी से मिलने की फुर्सत ही नहीं मिली आपको.. कितना ढूंढा पर आप कभी यहां तो कभी वहा.. आज तो हवा की तरह बह रहे थे.. अब पकड़ में आये हो..

कोमल - अरे आरती क्यों तंग रही है ग़ुगु को..

सुमन भी खाने की टेबल पर बैठी थी उसने कोमल से कहा - अरे भाभी.. आप देवर भाभी के बीच क्यों बोलती हो.. अब आरती अपने देवर से हंसी मज़ाक़ नहीं करेंगी तो किस्से करेंगी.. आपसे?

आरती - सही कहा बुआ.. औऱ देवर जब इतना प्यारा हो तो मज़ाक़ के साथ साथ औऱ भी बहुत कुछ करना पड़ता है..

आरती की बात पर सब हँसने लगते है..

गौतम - भाभी छोडो मुझे.. मुझे दीदी के साथ बैठके खाना है आज.. बहुत सताया है मैंने दीदी को..

(गौतम उठकर ऋतू के साथ वाली कुर्सी पर बैठकर) दीदी जीजा ज़ी के हाथ से बाद में खाना पहले मेरे हाथ से खाओ..

ऋतू मुस्कुराते हुए गौतम का गाल चूमकर - ग़ुगु.. सच में बहुत सताया तूने मुझे..

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गौतम - मैंने जितना सताया उसका बदला आप ससुराल जाकर जीजाजी को सताकर पूरा कर लेना..

ऋतू हसते हुए गौतम को गले लगा कर - मेरा प्यारा भाई..

कोमल - अब खाना भी खालो.. दोनों भाई बहन क्या बात ही करते रहोगे..

गौतम - हाँ मामी.. मुझे तो बहुत भूख लगी है..

आरती - ऋतू जरा राहुल ज़ी को भी तो खिला अपने हाथो से..

सुमन - अब तो इसे सारी उम्र यही करना है आरती..

आरती - ये सच कहा बुआ आपने.. अब तो देवर ज़ी बचे है.. उनके लिए भी लड़की देखनी पड़ेगी..

गौतम - आप हो ना भाभी.. कोई औऱ लड़की देखने की क्या जरुरत है..

आरती - देख रही हो बुआ.. पहले तो बोलने से भी बात नहीं करता था.. अब केसे कैंची की तरह जुबान चलाने लगा है आपका ग़ुगु..

सुमन खाना खाते हुए - तुम अपनी देवर भाभी की बातों में मुझे मत खींचो..

गौतम - दीदी ये स्वाद है.. इसे लो ना..

आरती - देवर ज़ी हमें भी दे दो क्या स्वाद बना है.. आप तो अपनी दीदी से ही चिपके हुए हो..

गौतम अपनी जगह से उठकर आरती के पास जाता है औऱ एक निवाला उसे खिलाकर कहता है- लो कहा लो.. बस?

कोमल - अब तो खुश हो आरती? देवर ने अपने हाथों से भी खिला दिया..

आरती - मैं कल ही खुश हो गई थी देवर ज़ी से मम्मी ज़ी..

गौतम आरती को देखता हुआ - मतलब?

आरती - कल देवर ज़ी आपने गन्ने का जूस पिलाया था ना.. उसके बारे में बात कर रही हूँ..

गायत्री - जूस तो ग़ुगु ने आज मुझे भी पिलाया था..

कोमल - आप दोनों से पहले ग़ुगु मेरे पास आया था.. जूस लेकर.. मुझे तो दो दो बार पिलाया था.. जूस पीते पीते ही तो मेरे पैर में मोच आई थी..

संजय - ग़ुगु.. ये क्या बात हुई सिर्फ अपनी नानी मामी औऱ भाभी को ही तुमने जूस पिलाया.. हमसे क्या दुश्मनी है तुम्हारी?

गौतम - मामाजी.. वो एक ही गन्ना था.. बेचारे से कितना जूस निकालता.. मैंने तो अभी तक माँ औऱ ऋतू दीदी को भी नहीं पिलाया..

सुमन - छोडो ना भईया.. क्या गन्ने के पीछे पड़ गए सब लोग.. आज हमारी ऋतू कितनी प्यारी लग रही है..

गौतम - माँ सही कह रही हो.. दीदी तो बिलकुल चाँद जैसी लग रही है..

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ऋतू - चाँद तो तू है.. मेरा प्यारा सा ग़ुगु..

सुमन - अब ये प्यार अपने पति को करना ऋतू.. भाई को नहीं.

ऋतू - बुआ.. बड़ी मुश्किल से ग़ुगु मुझसे बात करने लगा है औऱ आप कह रही हो प्यार ना करू.. ग़ुगु को तो मैं बहुत प्यार करुँगी.. शादी होने से बदल थोड़ी जाउंगी..

गौतम खड़ा होता हुआ - मेरा तो खाना हो गया..

कोमल - इतनी जल्दी?

गौतम - औऱ भूख नहीं है मामी.. ये कहते हुए गौतम हॉल से बाहर निकल कर बाथरूम की तरफ चला जाता है..

गौतम बाथरूम करके बाथरूम के बाहर खड़ा हो जाता है औऱ सिगरेट सुलगा कर पहला कश लेता ही है की पीछे से आरती आकर उसे अपनी बाहों में भर लेती है..

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आरती - आज तो बहुत तड़पाया आपने देवर ज़ी..

गौतम मुड़कर आरती की बाहों से अपने आप को छुड़वाता है औऱ आरती का हाथ पकड़कर कहता है..

गौतम - भाभी यहां कोई देख लेगा.. इस तरफ आओ..

गौतम आरती को बाथरूम के दाई तरफ हलवाई के लिए बने कमरे के पीछे खाली जगह ले आता है.. जहा हलकी सी रौशनी के अलावा कुछ नहीं था..

आरती गौतम से सिगरेट लेकर कश मारती हुई - बताओ देवर ज़ी.. अपना लंहगा मैं उठाउ या इतनी मेहनत आप खुद कर लोगे?

गौतम लुहंगा उठाते हुए - देवर के होते हुए भाभी मेहनत करें.. ये तो गलत बात है..

गौतम अपनी पेंट चड्डी सहित नीचे करके अपने लंड को आरती की चुत में डाल देता है औऱ दिवार से लगा कर धीरे धीरे आरती को चोदने लगता है..

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आरती सिगरेट के कश लगाती हुई चुदते चुदते कहती है - देवर ज़ी आप तो जोनी सिंन्स के भी बाप हो.. आप चले जाओगे तो कैसे ज़ी पाउंगी मैं आपके बिना..

गौतम चोदते हुए - अब तो आना जाना लगा ही रहेगा भाभी.. क्यों चिंता करती हो..

आरती सिगरेट का कश लेकर अँधेरे में किसीको खड़ा देखकर - कौन? कौन है तू?

एक 25-30 साल का दुबला पतला सीधा साधा आदमी - ज़ी.. मैं बिरजू..

आरती गुस्से में - क्या कर रहा है चुतिया यहां खड़ा खड़ा.. निकल यहां से..

गौतम - अरे रुक रुक.. इधर आ..

बिरजू - ज़ी..

गौतम आरती का बोबा पकड़कर चूसते हुए - लड़की मस्त है ना..

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बिरजू आरती को देखकर हाँ में सर हिलता है ..

गौतम - ये पीछे कमरे में कौन है?

बिरजू धीरे से - कोई नहीं है.. मैं अकेला रहता हूँ.. लोन की देखरेख करता हूँ..

गौतम - देख बिरजू ये मेरी भाभी है.. औऱ मैं इसे तसल्ली से चोदना चाहता हूँ.. कोई जगह है तो बता.. तेरी तनख्वाह बढ़वा दूंगा..

आरती बिरजू का लंड उसके पज़ामे के बाहर से पकड़ कर सिगरेट का कश लेती हुई - देखो बिरजू भईया.. मुझे अपनी बहन समझो.. औऱ इनको अपने जीजाजी.. आपकी बहन आपके जीजाजी से चुदना चाहती है.. अंदर कमरे में कोई गद्दा वद्दा पड़ा है जिसपर आपकी ये बहन आराम से चुदवा सके तो बता दो..

बिरजू - गद्दा तो नहीं है.. एक खाट पड़ी है बस..

गौतम आरती से सिगरेट लेकर एक कश मारता है औऱ सिगरेट फेंककर बिरजू से कहता है - चल दिखा..

बिरजू गौतम औऱ आरती को पीछे कमरे में ले आता है जहा धीमी रौशनी वाला बल्ब जल रहा था औऱ एक पुरानी खाट पर चटाई बिछी हुई थी..

गौतम ने आरती को खाट पर बिठा दिया औऱ अपनी शर्ट निकालता हुआ बिरजू को एक 500 का नोट देकर बोला - बाहर जाकर खड़ा रह.. मैं तेरी ये बहन चोद ना दू तब तक कोई अन्दर नहीं आना नहीं चाहिए.. समझा..

बिरजू बाहर चला जाता है औऱ खिड़की से अंदर झांकने लगता है वही गौतम आरती को खाट पर लेटा कर लहंगा उठाते हुए अपना लोडा आरती की चुत में फिट करके आरती को चोदने लगता है...

गौतम के झटको पर आरती जोर जोर से खुलकर आहे भरने लगती है औऱ बाहर बिरजू आरती की कामुक सिस्कारिया सुनकर अपना लंड हिला कर मुठ मारने लगता है...

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आरती - आह्ह..देवर ज़ी यही रह जाओ ना.. मेरे पास.. बहुत प्यार दूंगी आपको.. अपनी इस चुत में घुसा के रखूंगी..

गौतम - आपके पास रह जाऊँगा भाभी तो आपकी उन बहनो का क्या होगा जो अपनी टाँगे चौड़ी करके मेरे इंतजार में लेटी है..

आरती - अब तक कितनी लड़कियों को दीवाना बना चुके हो देवर ज़ी?

गौतम चोदते हुए - लड़किया नहीं भाभी ऑन्टीया.. औऱ उनकी तो गिनती करनी पड़ेगी..

आरती चुदवाते हुए - देवर ज़ी सिगरेट..

गौतम चोदते हुए - पेंट में है भाभी..

आरती आवाज लगाते हुए - बिरजू भईया.. ओ बिरजू भईया..

बिरजू एक बार झड़ चूका था औऱ अब दूसरी बार लंड हिला रहा था.. आरती की आवाज सुनकर वो लंड पजामे में डालाकर अंदर आ गया.

बिरजू चुदवाती हुई आरती को देखकर - ज़ी दीदी..

आरती चुदवाते हुए प्यार से- बिरजू भईया.. आपके जीजाजी की पेंट वहा पड़ी है उसमे से सिगरेट का पैकेट औऱ लाइटर दो अपनी इस बहन को..

बिरजू गौतम की पेंट से दोनों चीज निकालकर आरती को दे देता है औऱ जाने लगता है तभी गौतम चोदते हुए कहता है..

गौतम - बिरजू यही बैठा जा.. किसी औऱ चीज की भी जरुरत पड़ सकती है..

आरती एक सिगरेट सुलगाकर बिरजू से - बिरजू भईया आप पिओगे सिगरेट?

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बिरजू नीचे सर करके - मैं नहीं पिता दीदी..

आरती सिगरेट का कश लेकर गौतम से चुदवाते हुए - देखो ना बिरजू भईया आपके जीजाजी अपकी बहन को कैसे चोद रहे है.. आप बच्चाओगे नहीं अपनी बहन को चुदने से..

गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - बिरजू तो तिरछी नज़रो से आपके बूब्स देख रहा है.. लगता आपके दोनों कबूतर देखने की इच्छा है बिरजू की..

आरती सिगरेट पीते हुआ - सच में बिरजू भईया? अब देखो मैं चोली तो उतार नहीं सकती आप चोली के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाना चाहो तो दबा लो..

गौतम - ले भाई बिरजू.. दे दीं परमिशन तुझे.. दबा ले अपनी बहन के बोबे..

बिरजू खाट के पास ही बैठा था उसने डरते हुए अपना रखा हाथ आरती के चुचे पर रख दिया औऱ धीरे से दबा दिया..

आरती सिगरेट के कश लेकर मुस्कुराती हुई - डर क्यों रहे हो बिरजू भईया.. खुलके दबाओ अपनी बहन के बोबे..

गौतम - दबा ना बिरजू.. क्यों शर्मा रहा है..

बिरजू पूरी ताक़त से आरती का बोबा अपने पंजे में लेकर मसल देता है जिससे आरती की आह निकल जाती है..

गौतम बिरजू से - मज़ा आया?

बिरजू - ज़ी..

आरती सिगरेट पीती हुई - इतना भी जोर से मत दबाओ बिरज्जू भईया थोड़ा धीरे..

गौतम - बोल बिरजू है ना मस्त मोटा बोबा तेरी बहन का..

बिरजू मुस्कुराते हुए - ज़ी भईया..

गौतम चोदते हुए - बिरजू ये बड़े घर की बेटी है इनके बोबे औऱ भोसड़े दोनों बड़े होते है..

आरती झड़ चुकी थी औऱ अब गौतम भी कुछ ही झटको में आरती की चुत में झड़ गया..

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आरती गौतम के सर को पकड़कर चूमने लगती है..

दोनों का चुम्बम ख़त्म होने पर गौतम खाट से खड़ा हो जाता है मगर आरती गौतम के रुमाल से अपनी चुत साफ करने लगती है..

गौतम चुपचाप बैठे हुए बिरजू को धीरे धीरे पज़ामे के ऊपर से अपना लंड मसलता देखकर - चोदेगा क्या बिरजू अपनी बहन को?

बिरजू शर्माते हुए कोई जवाब नहीं देता औऱ आरती उसे देखकर हँसने लगती है औऱ खाट से खड़ी होती हुई कहती है - बेचारा.. चलो देवरजी.. लगता है फेरे शुरू होने वाले है..

गौतम - हाँ भाभी.. आप जाओ.. मैं थोड़ी देर में आता हूँ..

आरती जाते हुए - ठीक है.. बाय बिरजू भईया..

आरती वहा से चली जाती है...

बिरजू - भईया ज़ी भाभी बहुत खूबसूरत है..

गौतम - तू अकेला ही रहता है यहां..

बिरजू - ज़ी भईया ज़ी..

गौतम - सुन.. रात में हो सकता है मैं औऱ भी किसी लड़की को यहां लेके आउ.. तू जागता रहना आज रात..

बिरजू - भईया ज़ी आप चिता मत करिये मैं पूरी रात जागता रहूँगा.. आप चाहे जितनी लड़की यहां ले आइये..

गौतम - साले लड़की के सामने जुबान नहीं खुली तेरी अब कैसे पक पक बोल रहे है.

बिरजू - वो भईया ज़ी.. मैं लड़की के सामने थोड़ा शरमाता हूँ.

गौतम - अबे शर्माना लड़कियों का काम है.. अच्छा याद रखना रात को आ सकता हूँ..

बिरजू - चिंता मत करिये भईया ज़ी.. आप कभी भी आइये.. हम जागते रहेंगे..
 
अपडेट 27



विवाह समपन्न हुआ आज से आप पति पत्नी..

संजय - आओ बेटी.. चलो.. चेतन.. ये सामान कमरे में पंहुचा दे..

चेतन - ठीक है पापाज़ी...

गायत्री - संजय बेटा.. दामाद ज़ी औऱ ऋतू को एक साथ ही ले जा.. कोमल तू भी साथ में जा...

आरती - मम्मी ज़ी अब तो अकेले छोड़ दो दामाद ज़ी औऱ ऋतू को.. सब हँसने लगते है..

गायत्री - रात के डेढ़ बज चुके है औऱ तू अभी भी मज़ाक़ मस्ती में लगी हुई है.. चल अब तू भी चेतन के साथ चली जा.. अब थोड़ा आराम कर लेते है.. कल विदाई में बहुत काम है..

संजय - सही कहा माँ.. आज का दिन बहुत थका देने वाला था..

कोमल - तुम तो रोज़ ही थके हुए लगते हो.. कोनसी नई बात है..

बात करते हुए सब अपने अपने रूम में चले गए थे..

राहुल औऱ उसके दो दोस्त अब साथ थे औऱ दोस्त राहुल को इशारे से बुला रहे थे..

एक दोस्त - क्या बात है साले.. शादी होते ही हमारी बात नहीं सुन रहा..

राहुल अलग जाकर - अबे तुम भी जाकर सो जाओ क्यों भूत की तरह सर पर घूम रहे हो..

दूसरा दोस्त - भाई तेरी नींद का जुगाड़ तो हो गया हम अकेले कैसे सोये?

राहुल - एकदूसरे की गांड मार लो.. अब चल.. जाने दे मुझे..

दोस्त - अभी से डरने लगा तू तो अपनी बीवी से..

राहुल - अबे टाइम देख अब तुम भी सो जाओ जाकर..

दोस्त हसते हुए - अरे यार थोड़ी सी दारु तो पिले.. बिल्ली कैसे मारेगा.. वरना..

राहुल - ठीक है मैं बोलके आता हूँ तुम रूम में जाओ..

दोस्त - हाँ हाँ बोलके आ.. अब तो परमिशन लेनी ही पड़ेगी तुझे..

राहुल ऋतू से थोड़ी देर दोस्तों के साथ बैठने की बात बोलके दोस्तों के साथ रूम में बैठकर शराबखोरी करने लगता है औऱ ऋतू अकेली अपने कमरे में सोफे पर बैठी हुई दिनभर की थकान से चूर होकर एक सिगरेट जलाकर कश लेने लगती है.. ऋतू ने अपने भारी भरकम दुल्हन वाले कपडे बदल लिए थे औऱ सादा सूट पहन लिया था.. ऋतू बैठी ही थी कि उसके फ़ोन पर अनजान नम्बरो से व्हाट्सप्प पर एक वीडियो आया औऱ नीचे टेक्स्ट आया - छत पर मिलो...

ऋतू वीडियो देखकर समझ गई कि ये विकर्म ने भेजा है क्युकी वीडियो में ऋतू औऱ विक्रम कि चुदाईलीला थी.. ऋतू समझ गई की विक्रम वापस उसे चोदने के लिए बुला रहा है इसलिए ऋतू सिगरेट का पैकेट लाइटर औऱ कंडोम का पैकेट लेकर छत पर चली गई.. छत पर अँधेरा था औऱ लोन की भी लगभग सभी लाइट बंद हो गई थी लोन की एक्का दुक्का लाइट से छनकर आती मामूली रोशनी छत के अँधेरे को दूर नहीं कर रही थी.. पूर्णिमा का चाँद निकला हुआ था मगर बदलो ने उसे ढक लिया था.. छत पर अंधेरा था औऱ किसीका चेहरा देख पाना मुश्किल था..

ऋतू को छत पर बने एक कमरे के बाहर परछाई दिखी जिसे उसने विकर्म समझ लिया औऱ ऋतू बोली - बोला था ना.. अब मत मिलना मुझसे.. तुम ब्लैकमेल करना बंद क्यों नहीं कर देते मुझे.. मेरी शादी हो चुकी है विक्रम..

परछाई में विकर्म नहीं गौतम था जिसने मुंह पर मास्क लगाया हुआ था औऱ गौतम ने कुछ नहीं कहा तो ऋतू फिर से बोली - मेरी लेने आये हो ना वापस? लो ये कंडोम औऱ जल्दी से मुझे चोदकर निकल जाओ यहां से.. मेरी गलती थी जो तुमको वीडियो बनाने दिया उस रात..

गौतम कंडोम लेकर ऋतू को पलट देता है औऱ उसे झुकाते हुए उसकी पज़ामी का नाड़ा खोलकर पज़ामी नीचे कर देता है, पेंटी भी नीचे सरकाते हुए कुर्ती ऊपर करके अपने लंड पर कंडोम पहन लेता है औऱ पीछे से ऋतू की चुत पर लोडा लगाते हुए एक जोरदार झटके के साथ अपनी बहन ऋतू की चुत चिरते हुए अपना लंड ऋतू की चुत में घुसा देता है...

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ऋतू चिल्लाते हुए - अह्ह्ह्ह... ये क्या है.. विक्रम..?? आहहह... इतना बड़ा..

गौतम लंड घुसते ही एक हाथ से ऋतू के बाल पकड़कर झटके पर झटके मारना शुरू कर देता है जिससे ऋतू सिसकती हुई चिल्लाने लगती है औऱ छत पर ऋतू की चुदाई का संग्राम शुरू हो जाता है..

गौतम पीछे से ऋतू की चुत चोदे जा रहा था जिसमे ऋतू भी अब पूरी तरह शामिल हो चुकी थी उसे चोद रहे आदमी पर शक हो रहा था मगर उसे मज़ा आने लगा था औऱ अब वो काम सुख की हवा में बहकर गौतम को विकर्म समझती हुई उससे बात भी करने लगती है जो सिर्फ एक तरफा थी..

गौतम ऋतू की बात का कोई रिप्ली नहीं दे रहा था..

ऋतू - विकर्म क्या हो गया है आज तुम्हे... आहहह... औऱ ये तुम्हारा लंड.. ये आज इतना बड़ा कैसे लग रहा है... आहहह... तुम बदले बदले कैसे लग रहे हो.. विक्रम.. अह्ह्ह्ह.. मज़ा आ रहा है.. चोदो मुझे ऐसे ही चोदो.. अह्ह्ह्ह... फाड़ दो मेरी चुत..

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गौतम बिना रुके धक्के पर धक्के लगाता हुआ ऋतू को पीछे से चोद रहा था औऱ चोदते चोदते गौतम ऋतू को छत पर उसी सामान से भरे हुए कमरे में ले आता है जहा उसने सुमन के साथ बातें की थी..

कमरे में घनघोर अँधेरे था औऱ बस लोन में लगे एक बल्ब से हलकी सी रौशनी आ रही थी.. ऋतू औऱ गौतम वहां चुदाई कर रहे थे औऱ चुदाई की आवाज यहां घूंज रही थी..

गौतम ने ऋतू को पलट कर अपनी तरफ मोड़ लिया औऱ दिवार से ऋतू की पीठ लगाते हुए उसकी एक टांग उठा कर उसकी चुत में अपना लंड घुसा कर फिर से तेज़ तेज़ झटको से चोदने लगा जिसमे ऋतू भी काम के वाशीभूत होकर आनंद उठा रही थी.. उसे परवाह नहीं रह गई थी कि उसे चोदने वाला विक्रम है या कोई औऱ..

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ऋतू को चुदाई के दौरान मिले रहे आंनद के बीच शक था कि उसे चोदने वाला विकर्म नहीं है.. औऱ अब वो अपने शक को यकीन में भी बदल लेना चाहती थी मगर उसे मिल रहे सुख ने उसे काफ़ी देर तक रोके रखा औऱ फिर चुदाई के बीच ऋतू ने अपने हाथ से गौतम का मास्क उतार दिया औऱ अँधेरे में बड़ी गौर से उसका गौतम का चेहरा देखा तो वो चौंक पड़ी..

ऋतू का कामसुख गुस्से में बदल गया औऱ वो बोली - ग़ुगु तू... शर्म नहीं आई तुझे अपनी बहन के साथ..

गौतम नीचे से किसी के आने कि आहट सुनकर चुदाई रोकते हुए - दीदी कोई आ रहा है.. चुप रहना वरना हम पकडे जाएंगे..

कमरे के अंदर खिड़की के पास ऋतू औऱ गौतम थे जो एकदूसरे से लिपटे हुए थे गौतम का लंड ऋतू की चुत में अभी भी तनकर खड़ा था वही छत पर एक औरत आकर उसी कमरे की खिड़की के करीब बाहर की तरफ खड़ी हो गई.. गौतम औऱ ऋतू दोनों ही औरत को नहीं देख पाए.. लेकिन फिर एक आदमी आता दिखा औऱ ऋतू औऱ गौतम को आदमी की चाल से औऱ उसकी आवाज से पता चल गया था की ये ऋतू का बाप संजय है..

संजय उस औरत के करीब आकर - क्यों नाराज़ होती हो.. जानबूझकर नहीं कहा कोमल ने वो सब.. तुम तो जानती हो कोमल की जबान कैसी है? वो कभी भी कुछ भी बोल देती है..

औरत रोते हुए - मैं अच्छी तरह जानती हूँ भईया भाभी की जबान कैसी है? एक तो अपनी ही बेटी की शादी में मेहमान बनकर आई हूँ ऊपर से भाभी मुझे अपने अहसान गिनाते हुए ताने मार रही है.. मेरे ग़ुगु को छीनना चाहती है.. ग़ुगु सही कह रहा था.. हम यहां नहीं आते तो ही अच्छा था..

गौतम औऱ ऋतू को आवाज से पता चल चूका था की ये औरत औऱ कोई नहीं गौतम की माँ सुमन है..

संजय - अरे तुम भी कैसी बातें लेकर बैठ गई सुमन.. आज भी बात बात पर नाराज़ होती हो.. कोमल ने हमारी ऋतू को कभी पराया नहीं समझा.. अपनी सगी बेटी समझकर पाला है.. हमारी कितनी मदद की है कोमल ने.. तुम तो सब जानती हो..

सुमन - भईया.. मदद की है तो फ़ायदा भी उठाया है भाभी ने.. ऋतू मेरी बेटी थी जिसे भाभी ने मुझसे छीन लिया..

संजय - छिना नहीं था मदद की थी हमारी.. शादी से पहले जो लड़की माँ बने उसे समाज क्या कहता है जानती हो ना?

ऋतू - ये बात तब याद नहीं थी आपको.. जब आप भाभी को अकेला छोड़कर रात रातभर मेरे साथ सोते थे? मैंने कितना समझा आपको ये सब गलत है पर आप नहीं माने..

संजय - पुरानी बातों पर मिट्टी डाल सुमन.. तू जानती है मैं जितना कोमल से प्यार करता हूँ उससे कहीं ज्यादा तुझसे करता हूँ.. मैं कब से तेरी मदद करने की कोशिश कररहा हूँ पर तू मानती ही नहीं..

सुमन - नहीं चाहिए भईया आपका अहसान.. मैं मेरे ग़ुगु के साथ उसी हाल में खुश हूँ..

संजय - सुमन.. ग़ुगु मेरा भी कुछ लगता है.. उसके लिए मैं कोई अहसान नहीं कर रहा हूँ.. पर मेरी मदद लेने में तो तेरी नाक नीची हो जायेगी ना..

गौतम औऱ ऋतू संजय औऱ सुमन की बात सुनकर ये जान चुके थे कि वो दोनों सुमन की औलादे है.. गौतम ये बात जानकार औऱ भी उत्तेजित हो चूका था कि ऋतू उसीकी बहन है जिसे सुमन औऱ संजय के व्यभिचार से जन्म मिला है.. औऱ ये बात जानने के बाद गौतम के लंड ने ऋतू की चुत में प्यार की पहली बरसात भी कर दी थी जिसे ऋतू महसूस कर सकती थी..

गौतम ने झड़ने के बाद भी ऋतू की चुत से लंड नहीं निकाला औऱ ना ही ऋतू ने गौतम को ऐसा करने का इशारा किया वो दोनों संजय औऱ सुमन की बात सुनने में लीन थे..

सुमन - भाभी तो चाहती नहीं थी कि मेरे कोई औलाद रहे.. तभी तो उस आदमी से मेरी जबरदस्ती शादी करवा दीं.. पहले भाभी ने मेरी ऋतू को मुझसे छीन लिया औऱ फिर मेरे ग़ुगु को भी मुझसे छीनने कि पूरी कोशिश की थी..

संजय - सुमन क्यों गड़े मुर्दे उखाड़ रही हो.. उन बातों को भूल जाओ.. जो हुआ सो हुआ.. अब उन बातों का क्या फ़ायदा..

सुमन - ये बात आप भाभी को क्यों नहीं समझाते.. वो खुद बच्चा पैदा नहीं कर सकती इसमें मेरी गलती थोड़ी है.. पहले माँ से चेतन को छिना.. फिर मुझसे ऋतू को.. फिर ग़ुगु को छीनने की कोशिश की औऱ अब मुझे ही हर दम ताने मारती रहती है.. बता दूँ चेतन को कि वो आपका बेटा नहीं छोटा भाई है? माँ ने कभी कोई शिकायत नहीं कि पर मैं अब बर्दास्त नहीं करुँगी भईया.. अब अगर भाभी ने कुछ औऱ कहा तो मैं भी चुप नहीं रहूंगी.. वो बाँझ है इसमें हमारा क्या दोष?

संजय - सुमन.. पागलपन छोड़.. मैं कोमल से बात करुँगा.. उसने जो कहा गलत था पर तू भी समझती है वो कैसी है फिर उसकी बात को दिल पर क्यों लगाती है..

सुमन गुस्से में चिल्लाकर - क्यों ना लगाऊ दिल से.. ग़ुगु मेरा बच्चा है.. मेरे जीने मरने का सहारा.. भाभी उसे अब मुझसे छीनना चाहती है.. बचपन में उसका मंसूबा कामयाद नहीं हुआ तो अब वापस से उन्होंने कोशिश शुरू कर दीं.. मुझे पैसो का लालच देती है.. मेरे ग़ुगु के लिए मैं सारे जहान कि दौलत छोड़ सकती हूँ..

संजय - क्या फर्क पड़ता है सुमन.. ग़ुगु यहां रहे या वहा.. तू तो जानती है मैंने जो कुछ कमाया है उसे चेतन अकेले नहीं संभाल पायेगा..

सुमन - भईया ग़ुगु को मैंने जन्म दिया है मैंने पाला है.. मैं उसे यहां नहीं छोड़ने वाली. आप भाभी को समझा दीजिये कि वो मेरे ग़ुगु से दूर रहे औऱ उसका ख्याल छोड़ दे..

ये कहकर सुमन नीचे चली जाती है औऱ उसके पीछे पीछे संजय भी नीचे चला जाता है..

सुमन औऱ संजय के नीचे जाने के बाद ऋतू अपने फ़ोन की फलेशलाइट ऑन करके गौतम का चेहरा देखती है औऱ उससे गुस्से में कहती है..

ऋतू - वो वीडियो कहा से आया तेरे पास?

गौतम फ्लशलाइट अपने चेहरे की तरफ से हटाकर - आपके उस आशिक विक्रम ने फ़ोन में दिखाया था..

ऋतू - तू उसे कैसे जानता है?

गौतम - शादी में मिला था आपके बारे में अनाप शनाप बक रहा था.. उसने आपका वीडियो दिखाया औऱ बाथरूम के पीछे जो आपके साथ किया वो बताया..

ऋतू - तो अब तू भी मुझे ब्लैकमेल करने लगा उसके साथ मिलकर? शर्म नहीं आई तुझे ये सब करते हुए?

गौतम ऋतू की चुत से लंड निकालकर - नहीं दीदी.. मैंने तो उसके फ़ोन से आपके सारे वीडियो डिलीट कर दिए.. औऱ नशे में उसका वीडियो बना लिया.. ये देखो.. मैं आपको सेंड करता हूँ.. अगली बार वो आपको ब्लैकमेल नहीं कर पायेगा.. आप चाहो तो उसे कर सकती हो.. उसका वीडियो भी वायरल कर सकती हो.. मैं तो बस आपको ये बताने के लिए छत पर बुलाया था..

ऋतू फ़ोन साइड में रख कर - बताने के छत पर बुलाया था तो मेरी लेने क्यों लगा?

गौतम सर झुकाकर - आपने ही कंडोम देकर कहा था मैं क्या करता? आप सेक्सी भी लग रही थी..

ऋतू मुस्कुराते हुए - सर ऊपर कर बुद्धू.. तूने विक्रम के साथ ये सब मेरे लिए किया?

गौतम - आप बड़ी बहन हो मेरी.. कोई आपको तंग करें मैं कैसे सहन कर सकता हूँ..

ऋतू हसते हुए - अच्छा तो फिर तुमने क्यों तंग किया अभी मुझे?

गौतम - मैंने कहा किया दीं.. अपने ही बोला था चोदने के लिए.. देखो मेरा तो आपकी चुदाई में कंडोम भी फट गया..

ऋतू हसते हुए घुटनो पर बैठकर गौतम के लंड से कंडोम उतारते हुए - भला कोई कंडोम पहन के भी अपनी बहन चोदता है? ग़ुगु तेरा ये लंड.. कितना बड़ा औऱ मजबूत है.. मुझे तो दर्द हो रहा था इससे चुदवाते हुए..

गौतम - दीदी यार आपकी चुत तो भाभी से भी ज्यादा चौड़ी है.. मेरा लंड तो आसानी से अंदर चला गया.. विक्रम सही कह रहा था पक्की रांड हो आप तो..

ऋतू धीरे धीरे गौतम का लंड हिलाती हुई - सगी बहन को रांड बोलता है.. तुझे तो सबक सीखना पड़ेगा ग़ुगु..

गौतम - अब रांड को रांड ही बोला जाता है दीदी.. यहां बिस्तर नहीं है मुझे सबक सिखाने के चक्कर में आपके गोड़े छील जाएंगे..

ऋतू सिगरेट सुलगाते हुए - छील जाए तो छील जाने दे ग़ुगु.. सुहागरात तो आज तेरी बहन तेरे साथ ही मनाएगी.. पहली बार कोई टक्कर का मर्द मिला है..

गौतम - फिर जीजाजी क्या करेंगे? वो क्या सारी रात हिलाएंगे अपना?

ऋतू - उसकी चिंता तू मत कर ग़ुगु.. वो साला ढीला है.. 2-4 मिनट में थक्के झड़ जाता है.. मैं 5-10 मिनट में उसको निपटा के तेरे पास आ जाउंगी..

गौतम हसते हुए - औऱ वो?

ऋतू - उसे नींद की गोली दे दूंगी.. पक्की खिलाड़ी हूँ मैं भी.. आज तो मेरी रात औऱ मेरी जवानी अपने भाई के नाम है..

गौतम - मत हिलाओ दीदी अब इसे खड़े होने में थोड़ा वक़्त लगेगा.. आज बहुत सारी चुते चोदी है इसने..

ऋतू सिगरेट के कश लेती हुई खड़ी होकर - इसे तो आज पूरी रात खड़ा रहना है..

गौतम - अब नीचे चलते है दीदी.. वरना कोई फिर से ऊपर आ जाएगा.. यहां किसी को चैन नहीं है..

ऋतू कश लेती हुई - सिगरेट तो ख़त्म हो जाए ग़ुगु.. फिर चलते है.. वैसे एक बात बता तुझे कैसे पता आरती भाभी की चुत का.. मुझसे ज्यादा टाइट है उनकी? सच सच बताना तूने कब चोदा भाभी को?

गौतम - कल दोपहर में दीदी.. औऱ आज भी भाभी लहंगा उठा के पीछे ही पड़ गई इसलिए अभी आपके फेरे होने से जस्ट पहले भी चोदना पड़ा..

ऋतू - भाभी तो बहुत चालु निकली.. देवर के साथ ही रासलीला शुरू कर दी..

गौतम - दीदी अब भाभी है.. देवर पर हक़ तो उनका भी है..

ऋतू सिगरेट का कश लेकर - दीदी नहीं ग़ुगु.. नाम से बुलाया कर.. 3-4 साल ही तो बड़ी हूँ तुझसे..

गौतम - जैसा आप कहो ऋतू ज़ी..

ऋतू - आप नहीं तूम.. अब से कोई फॉर्मेलिटी नहीं समझा.. औऱ अब नाराज़ हुआ तो बहुत मारूंगी..

गौतम ऋतू से सिगरेट लेकर फेंकता हुआ - ठीक है ऋतू.. अब चल नीचे..

ऋतू मुस्कुराते हुए - तू अपने कमरे में जा मैं राहुल को सेट करके आती हूँ..

गौतम - मेरे कमरे में तो तेरा पुराना यार लेता हुआ है नशे में धुत होकर.. सारे रूम्स भी फूल है.. अब क्या करें?

ऋतू - एक काम करते है गौतम.. मैं राहुल को सुलाने के बाद तुझे बुलाऊंगी तू मेरे रूम में आ जाना..

गौतम - ठीक है पर मुझे मेरी बहन दुल्हन की तरह सजी हुई चाहिए.. ऐसे सादा सलवार सूट में नहीं..

ऋतू - जैसा तू चाहे ग़ुगु..

ऋतू गौतम से ये कहकर अपने रूम में आ जाती है जहा कुछ देर बाद राहुल भी आ जाता है जो अपने दोस्तों के साथ शराब पिने के करण नशे में था.. राहुल को ऋतू पानी में नींद की दवा देकर जल्दी ही सुला देती है.. इधर गौतम जब अपने कमरे में पहूचता है तो देखता है कि विक्रम उसी तरह नधे में सो रहा है गौतम नहाने चला जाता है औऱ नहाने के बाद जैसे बाथरूम से बाहर आता है उसके कुछ देर बाद ऋतू का फ़ोन आ जाता है औऱ ऋतू गौतम को अपने रूम में आने के लिए कहती है..

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गौतम ऋतू के कमरे में आकर - बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू.. (राहुल को देखकर) बेड पर क्यों सुलाया है इसे?

ऋतू - खुद सो गया..

गौतम राहुल को बेड से उठाकर सोफे पर पटक देता है औऱ ऋतू को बाहों में भरके फूलो से सजी सेज पर आ ऋतू के साथ गिरता है..

ऋतू एक गोली गौतम के मुंह में डाल कर - इसे खा लो गौतम..

गौतम - मुझे इसकी जरुरत नहीं है ऋतू..

ऋतू - खा लो ना ग़ुगु मेरे लिए.. अपनी बहन कि बात नहीं मानोगे?

गौतम - थोड़ी देर बाद तुम ही पछताओगी...

ऋतू - अब बातें ही करते रहोगे क्या कुछ करोगे भी? मेरी चुत में बहुत जोरो से खुजली मचने लगी है ऊपर से तुम्हारा लंड भी ऐसा है कि चुत में लेने कि तलब हो रही है..

गौतम - ऋतू अगर मुझे पहले पता होता कि मेरी बहन इतनी चुदक्कड़ है तो कब का तुझे चोद चूका होता..

ऋतू - गौतम अगर मुझे भी मुझे पहले पता होता कि मेरे भाई के पास इतना बड़ा लंड है तुझे पहले ही अपनी चुत में घुसा लेती.. कितने प्यारे होंठ है तेरे.. बच्चों जैसे..

गौतम - चूमो ना ऋतू.. मेरे ये होंठ कब से तुम्हारे होंठों से मुलाक़ात करना चाहते थे..

ऋतू गौतम को चूमती हुई - आई लव यू गौतम..

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गौतम और रितु एक दूसरे के साथ बिस्तर पर लिपटे हुए थे और एक दूसरे को चूम रहे थे जिससे दोनों के मुंह की लार एक दूसरे में घुल रही थी और दोनों को इसमें बहुत ही स्वाद और मजा आ रहा था रितु आज किसी भी कीमत पर गौतम को पा लेना चाहती थी और यही हाल गौतम का था गौतम भी किसी भी कीमत पर आज अपनी बहन ऋतु के साथ वह सब कर लेना चाहता था जो वह सोच चुका था..

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कुछ देर इसी तरह एक दूसरे को चूमने के बाद गौतम और रितु एक दूसरे के गले पर और चेहरे पर अपने अपने प्यार की अपनी-अपनी चुम्मिया बरसने लगे और एक दूसरे को इस बात का एहसास दिलाने लगी कि वह एक दूसरे से कितना आकर्षित है और कितना वह एक दूसरे को पढ़ने की ख्वाहिश रखते हैं..

गौतम और रितु ने एक दूसरे के बदन से एक-एक करके सारे कपड़े उतार कर बिस्तर के एक तरफ फेंक दिए और फिर दोनों लगभग एक सी अवस्था में नंगे होकर एक दूसरे के बदन को चूमने और चाटने लगे..

गौतम की तुलना में ऋतु का हाल और भी ज्यादा बुरा था मुझे तो बिल्कुल पागलों की तरह गौतम को अपनी बाहों में भरे हुए झूम रही थी और उसे अपने मुंह का सारा रस पिलाना चाहती थी.. गौतम रितु के इस व्यवहार से बहुत उत्तेजित हो चुका था और वह भी भर भर के अपने मुंह से ऋतु के मुंह का रस पी रहा था और अपनी बहन की हर इच्छा पूरी कर रहा था.. गौतम पर धीरे-धीरे गोली का नाश होने लगा था मगर उसे अब लगने लगा था कि कहीं ना कहीं जो ऋतू ने भी एक गोली खा ली है और यह उसी का असर है कि कामोतेजना से भरकर उसे चुम औऱ चाट रही है..

ऋतू ने काम उत्तेजना के वशीभूत होकर गौतम के होंठों को इतना जोर से अपने दांतों से काटा की गौतम की चीख निकल गई और वह ऋतु के दांतों से अपने होठों को छुड़वाकर रितु से बोला..

गौतम - पागल हो गई है क्या तू?

ऋतू वापस चूमती हुई - सॉरी छोटे भाई पर आज रात अपनी बहन को माफ़ कर देना..

गौतम रितु की हालत देखकर समझ गया था कि अब रितु काम के शिखर पर पहुंच चुकी है और जब तक उसकी उत्तेजना शांत नहीं हो जाती और उसकी चुत से बरसात का पानी निकाल कर बह नहीं जाता तब तक वह किसी भी बात को समझने और सोचने की हालत में नहीं आएगी इसीलिए गौतम ने अब रितु की काम उत्तेजना को ठंडा करने के लिए उसे अपने नीचे ले लिया..

गौतम ने रितु की टांग चोडी करते हुए उसकी चुत पर अपना लंड सेट करके की झटके में अंदर घुसा दिया अगर ऋतू पर गोली का असर ना होता तो वो चिल्ला पडती मगर इस वक़्त वो मज़े से चुदवाने लगी थी.. गौतम धीरे-धीरे चोदते हुए ऋतु के भारी भरकम चुचे पड़ककर मसलने लगा..

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ऋतू किसी रंडी की तरह सिसकियाँ लेते हुए चुदवाने लगी और उसकी सिस्कारिया पूरे कमरे में गूंजने लगी..

गौतम चोदते हुए ऋतु के चुचो को चूसने और चाटने लगा, मसलते हुए ऋतु के तनकर खड़े हुए चुचक को चूसने लगा..

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गौतम की चोदने की रफ्तार के साथ रितु की सिसकारियां और चीख भी तेज होने लगी थी उसकी आवाज और कमरे से बाहर जाने लगी थी और कोई अगर कमरे के आसपास से गुजरता तो ऋतू की आवाज उसके कान में पढ़ जाती..

ऋतू की चुदी हुई चुत में गौतम इतनी जोर जोर से झटके मार रहा था कि अब रितु को भी चुदवाने में दर्द होने लगा था और रितु दर्द और सुख के मिश्रित अनुभव को अनुभव करते हुए गौतम से लिपट गई थी..

दोनों जवान थे और दोनों में सेक्स की गोली खाई थी जिससे दोनों की चुदाई को चलते हुए अब तक एक घंटा हो गया था जिसमें कई बार रितु की नदी बह चुकी थी मगर गौतम अब तक उसी तरह ऋतु की नदी में बाढ़ पर बाढ़ लाये जा रहा था

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गौतम ऋतु को पोजीशन बदल बदल कर चोद रहा था कभी वह रितु को अपनी गोद में उठता

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तो कभी बिस्तर पर लेटाता

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कभी घोड़ी बनता

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तो कभी दीवार से चिपकाकर चोदता..

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रितु गौतम की हर बात मानते हुए उसके बताए गए हर पोज़ में चुदवा रही थी और गौतम अपनी बहन ऋतू को पिछले एक घंटे से चोदे जा रहा था..

ऋतू की चुत में दर्द अब ख़त्म हो चूका था औऱ जलन शुरू हो चुकी थी.. गौतम का लंड लेने का सुख उस जलन के मुक़ाबले में अतुलनीय था.. ऋतू बिलकुल रांड की तरह गौतम की हर बात मानकर चुदवा रही थी.. गौतम ने लगभग सवा घंटे चोदकर ऋतू की चुत में अपना माल भर दिया फुल ac ने भी दोनों पसीने से तर होकर पानी पानी थे..

ऋतू पेट बल बिस्तर पर लेटी हुई थी औऱ गौतम ऋतू के ऊपर उसकी चुत में लंड गुसाये हुए झड़ने के बाद भी ऋतू को चोद रहा था..

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ऋतू - गौतम..

गौतम - हाँ.. बहना...

ऋतू - शुक्रिया भाई.. मेरी सुहागरात को याद गार बनाने के लिए.. ऐसा मज़ा तो आज तक कभी नहीं मिला.. एक बार में इतनी बार कभी नहीं झड़ी..

गौतम - शुक्रिया केसा बहन? तेरा सगा भाई हूँ.. जो तु बोलोगी वो तो मुझे करना ही पड़ेगा..

ऋतू - छोटे भाई .. ये सच्चाई माँ पापा ने हम दोनों से छिपाई है.. चेतन भईया औऱ भाभी को भी इसका नहीं पाता.. इसे छिपी ही रहने देना.. हम जैसे ज़ी रहे है वैसे ठीक है.. मेरी असली माँ कौन है ये सच्चाई कई घर तोड़ सकती है.

गौतम ऋतू की चुत से लंड निकालकर - मुझे फर्क नहीं पड़ता ऋतू कौन क्या है.. मैं बस इतना जानता हूँ की मैं अपनी माँ का दिल नहीं दुखा सकता.. औऱ अब जब मुझे आता चल चूका है की तू भी मेरी सगी बहन है.. तु भी मेरे दिल में उतर चुकी हो..

ऋतू - किस्मत भी कितनी अजीब है गौतम.. हम दोनों सगे भाई बहन है औऱ फिर भी एकदूसरे को इतना पसंद है कि साथ सो रहे है..

गौतम बिस्तर से उठता हुआ - इसमें किसका कसूर है ऋतू.. किसे दोष दे..

ऋतू उठती हुई - छोडो ना छोटे भाई.. हमें एक दूसरे कि जरुरत है.. अब कोई भी रिश्ता हमें एक दूसरे के साथ मिलने से नहीं कोई रोक सकता.. अब तक जो हुआ उसे भूल जाते है.. तुम्हारी नाराजगी ने तुमको इतने साल मुझसे दूर रखा.. पता है कितना कोसा है मैंने अपने आपको तुम्हारे लिए?

गौतम ऋतू का बोबा पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए - ऋतू मैं मर्द हूँ किसी बात को दिल से लगा लू तो आसानी से नहीं मानता..

ऋतू - मर्द के साथ साथ भाई भी तो हो मेरे.. मेरी गलती को माफ़ नहीं कर सकते थे तुम?

गौतम ऋतू को दिवार से चिपका कर उसकी एक टांग उठाते हुए - मुंह से माफ़ी मांगी थी तुमने.. अगर चुत से मांगी होती तो कब का माफ़ कर देती मैं तुम्हे बहना..

ऋतू गौतम का लंड पकड़ कर अपनी चुत में घुसाती हुई - लो अब मांगती हूँ अपने छोटे भाई से चुत खोलकर माफ़ी.. करोगे कबूल अपनी बहन को माफी?

गौतम ऋतू की दोनों टांग उठाकर पहला झटका मारते हुए अपना पूरा लंड घुसाकर - कबूल है ऋतू.. तुम्हारे छोटे भाई को तुम्हारी माफ़ी कबूल है..

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ऋतू सिसकियाँ लेती हुई - आराम से ग़ुगु.. ये तुम्हारी बहन की छोटी सी चुत है, चम्बल का मैदान नहीं.. एक बार में पूरा घुसा दिया.. हाय.. वापस से दर्द होने लगा है मुझे तो..

गौतम धीरे धीरे धक्के मारते हुए - छोटी सी कहाँ है बहना? तेरी चुत को तो तेरे आशिक़ो ने चोद चोद के चौडा कर दिया है.. मुझे सच में ऐसा लग रहा है जैसे मैं कोई रांड चोद रहा हूँ.. पता नहीं इस गांडु ने तुझे इस फटी हुई चुत के साथ कैसे पसंद कर लिया औऱ शादी कर ली?

ऋतू चुदवाते हुए - दहेज के लालची चुत की सील नहीं पैसो की डील देखते है छोटे भाई..

गौतम मुस्कुराते - ये तो सही कहा बहना.. चल बचपन की तरह अंतराक्षरी खेले?

ऋतू गीतम को चूमती हुई - चुदाई के बीच अंतराक्षरी खेलनी है तुझे?

गौतम - खेलते है ना ऋतू.. चल पहले तू गा..

ऋतू चुदते हुए - मुन्नी बदनाम हुई डार्लिग तेरे लिए.. मैं झंडुबाम हुई डार्लिंग तेरे लिए.. मुन्नी के गाल गुलाबी होंठ शराबी चाल नवावी रे.. मैं आइटम बम हुई डार्लिंग तेरे लिये..

गौतम ऋतू को बेड ओर लेटा कर धीरे धीरे चोदते हुए - ये शाम मास्तानी मदहोश किये जाए.. मुझे चुत तेरी खींचे मेरा लंड लिए जाये.. ये से गा ऋतू..

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ऋतू चुदते हुए - ये गलिया ये चोबारा यहां आना ना दोबारा.. अब हम तो भये परदेसी की तेरा यहां कोई नहीं. कि तेरा यहां कोई नहीं.

गौतम ऋतू को बैठा देता है औऱ अपना लोडा उसके मुंह में देकर गाता है - होंठों से छू लो ऋतू, मेरा लंड अमर कर दो.. बन जाओ रांड मेरी, मुझे गांड भी दे दो..

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ऋतू मुंह से लंड निकालकर अपने बूब्स के बीच रखकर गौतम को titjob देती हुई - दिल दीवाना ना जाने कब खो गया.. तूने ऐसे चोदा कि कुछ हो गया.. कुछ हो गया.. कुछ हो गया.. कुछ हो गया मेरी जा..

गौतम ऋतू को पीछे धकेल कर उसकी टांग फैलाते हुए उसकी चुत में लंड सेट करके धक्का मरते हुए - जिसका मुझे था इंतजार, जिसके लिए लंड था बेक़रार.. वो घड़ी आ गई आ गई.. आज चुत में तेरी उतर जाना है.. चोद देना है तुझको या चुद जाना है..

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ऋतू सिसकियाँ लेते हुए - हर ग़म उठा लूँ तन्हा अकेली.. तेरे लिये भाई लोडा भी झेली.. इतना तुझे प्यार दू.. कपडे उतार दूँ.. चोद लो भईया.. चुत भी वार दूँ..

गौतम चोदने कि रफ़्तार बढ़ाते हुए - तुझको ना चोदू तो दिल घबराता है.. चोदके तुझको बहना मुझको चैन आता है.

ऋतू - आराम से ग़ुगु जलन हो रही है..

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गौतम लगातार मिशनरी में चोदता हुआ. - सॉरी ऋतू..

गौतम औऱ ऋतू की चुदाई इस बार भी चलती रही औऱ तब तक नहीं रुकी जब तक गौतम ने ऋतू की चुत को चोद चोद कर सुज्जा नहीं दिया.. ऋतू की चुत लाल हो चुकी थी जलन औऱ सूजन भी चुत पर आ चुकी थी डबल रोती की तरह फूली हुई चुत हो चुकी थी ऋतू की...ऋतू की चाल में औऱ ज्यादा लचक आ गई थी..

सुबह के साढ़े पांच बज चुके थे औऱ ऋतू गौतम की बाहों ने नंगी लेटी हुई मुस्कुराते हुए गौतम को देख रही थी.. जो एक हाथ में ऋतू का बोबा पकड़कर ऋतू को अपनी बाहों में जकड़े हुए था औऱ दूसरे हाथ से सिगरेट के कश लगा रहा था.. राहुल अब भी बेसुध सोफे पर पड़ा था.

गौतम सिगरेट बुझाकार - बहना अब मुझे चलना चाहिए.. सुबह होने वाली भीड़ बढ़ जायेगी.. कोई भी तेरे कमरे से निकलते हुए देख सकता है.

ऋतू गौतम के होंठ चूमकर - दिल औऱ चुत लेकर जा रहे हो छोटे भाई.. ख्याल रखना मेरे दिल का..

गौतम उठकर कपडे पहनते हुए - तु भी मेरे दिल का ख्याल रखना ऋतू.. बहुत नाजुक है जल्दी टूट जाता है..

ऋतू मुस्कुराते हुए - एक बार तोड़ चुकी हूँ अब वो गलती नहीं करुँगी..


गौतम रूम से चला जाता है औऱ ऋतू नहाने चली जाती है..
 
अपडेट 28



गौतम जब अपने रूम में पहुंचा तो उसने देखा कि विक्रम वहां से कहीं जा चुका था और रूम में अब कोई नहीं था. गौतम ने थोड़ी देर बिस्तर पर आराम करने के बाद में फिर से शावर लिया औऱ फिर कुछ देर इधर-उधर घूमने लगा. होटल की छत से लेकर वेडिंग हॉल तक और फिर वेडिंग लॉन तक गौतम यहां से वहा टहलता रहा..

मेहमान अब उठने लगे थे और होटल में चहल पहल बढ़ने लगी थी मगर अब भी कुछ लोग रात को देर से सोने के कारण सो रहे थे सुबह के 6:30 बज चुके थे और मेहमानों को अब चाय की चुस्की लेने में आनंद आने लगा था.. कोई रात को अपने साथ हुए किस्से और कहानियों का जाएका एक दूसरे को चाय की चुस्कीया लेते हुए सुना रहा था तो कोई हमेशा की तरह शादी में कमी और खामी निकल रहा था.

गौतम के अंदर गोली का असर अभी बाकी था और वह अभी अपने लिए किसी शिकार की तलाश कर रहा था उसने हर जगह टहलती हुई लड़कियों और औरतों को देखा मगर उसे कहीं भी अपने लायक माल नहीं मिला और ना ही नानी मामी या भाभी अकेली मिली. गौतम की कामुकता बरकरार थी और वह सुमन के कमरे की ओर जाने लगा मगर बीच में ही उसने चाय के दो कप अपने साथ ले लिए थे. सुमन रात को देर से सोई थी इसलिए उसकी नींद अभी भी नहीं खुली थी सुबह के 6:30 पर भी वह इत्मीनान से सो रही थी.

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रात को सुमन आरती के साथ ही सोई थी मगर आरती अब कमरे से बाहर जा चुकी थी और कमरे में सिर्फ सुमन अकेली ही बिस्तर पर नींद में थी. गौतम ने रूम में घुसते हुए कैमरे का दरवाजा बंद कर दिया और चाय के दोनों कप लेकर होटल में एक तरफ रखी टेबल पर रख दिया. गौतम ने कप उठकर चाय की तीन-चार चुस्की ली और फिर अपनी मां सुमन को देखने लगा. सुमन नींद में किसी हसीन ख्वाब में खोई थी और गौतम को सुमन परियों की तरह लग रही थी.

गौतम ने अपने हाथ से चाय का कप टेबल पर रख दिया और धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ बढ़ गया. गौतम ने सो रही सुमन की साड़ी धीरे-धीरे कमर तक उठा दी और उसकी चड्डी नीचे करते हुए सुमन की जांघों के जोड़ पर अपने होंठ लगा दिये.. गौतम ने अपनी जीभ सुमन की जांघोँ के जोड़ पर लगाकर उसके नारीत्व को छेड़ना शुरू कर दिया था और अपनी जीभ से सुमन की चुत को चाटने और चूसने लगा था.

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गौतम ने सुमन की दोनों टांगें फैलाकर उसकी चुत को चूसना और चाटना शुरू कर दिया था जिससे सुमन नींद के आगोश से बाहर निकलने लगी थी और उसकी नींद कमजोर पढ़ने लगी थी. गौतम ने अपनी जीभ को सुमन की चुत में डाल दिया था और जितना अंदर घुस सकता था घुसा कर अपनी जीभ से सुमन के नारीत्व को छेड़ने लगा था जिससे सुमन कामुक होती हुई नींद से बाहर आ गई थी और उसने अपनी आंख खोलकर गौतम को अपने साथ छेड़खानी करते हुए देख लिया.

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सुमन की जैसे ही नींद खुली उसकी कामुकता अपने शिखर पर थी और उसने ना चाहते हुए भी गौतम के मुंह में ही अपने पानी की पिचकारी को छोड़ दिया जिसे गौतम ने अमृत समझकर पीते हुए सुमन की चुत को वापस से चाट कर साफ कर दिया और फिर मुस्कुराते हुए सुमन को देखकर बोला..

गौतम - गुडमॉर्निंग माँ.. चाय पी लो..

सुमन अपनी चड्डी पहनती हुई अपनी साडी के पल्लू से गौतम के गीले होंठो को साफ करती हुई बोली - गुडमॉर्निंग बेटा.. मुझे जगा लेता ना.. नींद में ही तू ये सब करने लगा.. दरवाजा तो बंद किया है ना तूने?

गौतम - दरवाजा बंद है माँ.. आप फ़िक्र मत करो.. मैं इतना भी लापरवाह नहीं हूँ..

सुमन मुस्कुराते हुए चाय का कप लेकर चाय पीते हुए - रात को सोया नहीं ना तू.. आँखे बिलकुल लाल है तेरी..

गौतम - दिन में सो जाऊँगा माँ.. रात को नींद ही नहीं आई..

सुमन गौतम की गोद में बैठकर चाय की चुस्कीया लेती हुई - रात को नींद नहीं आई या किसी ने सोने नहीं दिया मेरे शहजादे को? हाय रे.. तेरे गले पर तो कितने निशान है.. कल तो नहीं थे.. सच बता? गर्लफ्रेंड के साथ था ना तू जो कल मिली थी.. उसीने दिए है ना ये निशान.. कितना बुरे नाख़ून लगाती है.. तूने रोका नहीं उसे?

गौतम सुमन की जांघ सहलाते हुए - किसीको प्यार करने से थोड़ी रोका जाता है माँ..

सुमन चाय का कप रखकर - थोड़ा कम प्यार करा कर ग़ुगु.. तू बहुत बिगड़ गया है आज कल.. हर दम बस यही सब चलता है तेरे दिमाग में..

गौतम सुमन के चेहरे पर लटक रही जुल्फ को उसके कान के पीछे करता हुआ सुमन के गाल पर चुम्बन देकर कहता है - मैं तो सुधर जाऊ माँ पर आपका ये छोटा ग़ुगु नहीं सुधारता.. जहाँ भी खड्डा देखता है अपनेआप उसमे कूद जाता है.. औऱ पानी निकाल कर ही बाहर निकलता है..

सुमन गौतम की बात पर हस्ती हुई - कल चल वापस घर.. तेरे इस छोटे ग़ुगु की शिकायत करती हूँ बाबाजी से.. बेलगाम हो गया है बहुत.. लगाम लगानी पड़ेगी इस पर..

गौतम सुमन की गर्दन को अपनी जीभ से चाटता हुआ - बाबाजी को शिकायत करने से कुछ नहीं होगा.. एक बार आप हाँ कर दो.. अपने आप लगाम लग जायेगी छोटे ग़ुगु पर..

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सुमन गौतम की गोद में से खड़ी हो जाती है औऱ कहती है - एक बार कह दिया ना ग़ुगु.. तू क्यों फालतू ज़िद करता है..

गौतम उठकर सुमन को बाहों में भरते हुए - अच्छा सॉरी माँ.. अब नहीं कहता कुछ.. आप जेसा चाहोगी वैसा होगा..

सुमन गौतम के लंड पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए - लगता बहुत देर से खड़ा है छोटा ग़ुगु.. पूरी खुराख़ मिली नहीं इसे..

गौतम सुमन के कंधे पर हाथ रखकर सुमन को नीचे बैठाते हुए - रात को सेक्स की गोली खा ली थी अब तक असर बाकी है..

सुमन गौतम की जीन्स खोलकर लंड पकड़ते हुए - तुझे कब से गोली की जरुरत पड़ने लगी ग़ुगु..

गौतम सुमन के बाल पकड़कर उसके चेहरे पर लंड रगढ़ते हुए - मैंने किसी के कहने पर खा ली.. छोडो उस बात को.. आप जल्दी से ठंडा कर दो छोटे ग़ुगु को..

सुमन गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसने ही लगी थी की दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई..

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गौतम गुस्से में - पता किसकी माँ चुद गई.. साला कौन है..

सुमन मुस्कुराते हुए - रुक मैं देखती हूँ..

गौतम लंड पेंट में डालकर बेड पर बैठ जाता है औऱ सुमन दरवाजा खोलती है.

सिमरन सुमन से - आपको मालिक औऱ मालकिन बुला रहे है..

सुमन - मैं आती हूँ तू जा.. (वापस दरवाजा बंद करके) ग़ुगु जाना पड़ेगा बेटा..

गौतम सुमन को बाहों में भरके - कोई बात नहीं माँ.. आप जाओ औऱ मामी से किसी बात पर लड़ाई झगड़ा मत करने लग जाना..

सुमन मुस्कुराते हुए - भला मैं भाभी से क्यों झगड़ने लगी..

गौतम सुमन के होंठ चूमकर - आई लव यू माँ..

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सुमन वापस गौतम के होंठ चूमकर - आई लव यू टू बेटा.. अच्छा अब जाने दे वरना औऱ भी कोई बुलाने आ जाएगा.. मुझे बहुत तेज़ सुसु भी लगा है..

गौतम नीचे बैठकर सुमन की साडी उठाते हुए चड्डी नीचे सरकाकर - माँ पहले बताना था ना.. मुझे भी प्यास लगी थी.. ये कहकर गौतम सुमन की साडी उठाकर चुत पर अपना मुंह लगा देता है औऱ चूसने लगता है सुमन भी शर्माती हुई गौतम के बाल पकड़ कर गौतम के मुंह में मूतने लगती है..

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गौतम सुमन का पेशाब पी जाता है औऱ अपना मुंह चुत पर से तब तक नहीं हटाता जब तक पेशाब की आखिरी बून्द नहीं पी जाता.. सुमन भी गौतम को अपना मुंह हटाने के लिए नहीं कहती..

मूत पिने के बाद गौतम चुत से मुंह हटाकर खड़ा हो जाता है सुमन मुस्कुराते हुए फिर से अपनी साडी के पल्लू से गौतम का मुंह साफ कर देती है.. औऱ कमरे से बाहर चली जाती है..

गौतम अपने रूम में आकर रेशमा को फ़ोन करता है..

रेशमा - हेलो..

गौतम - तू आई नहीं ना कुत्तिया कल शादी में?

रेशमा - माफ़ कर दे मेरे कुत्ते.. मैंने कोशिश तो बहुत की पर असलम माना ही नहीं.. मैं करती भी क्या, ना आने के सिवा..

गौतम - अकेली नहीं आ सकती थी?

रेशमा - अकेली कैसे आती? इतनी बंदिश है मेरे ऊपर.. घर निकल भी जाऊ तो आफत आ जाती है सवालों की.. तू लड़का है इसलिए नहीं समझ पायेगा.

गौतम - ज्यादा ना ज्ञान मत चोदे रेशमा.. नहीं मिलना तो बता दे..

रेशमा - थोड़ा औऱ सब्र कर ले मेरे कुत्ते.. दो तीन दिन बाद अब्बू के घर आ जाउंगी तब जितना मिलना हो मुझसे मिल लेना.. मैं रोकूंगी नहीं तुझे..

गौतम - खाना खा लिया?

रेशमा - इतनी सुबह कौन खाना खाता है? अभी तो खाना बनाउंगी.. फिर खाउंगी.. जब तुझसे मिलूंगी तब तू अपने हाथों खिला देना खाना..

गौतम - मुझसे मिलते ही लंड खाएगी तू..वो भी अह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह... करके..

रेशमा हसती हुई - तू जो खिलायेगा वो खा लुंगी मेरे कुत्ते.. मेरा भी बहुत मन है तुझसे मिलने का..

गौतम - मन क्या है साली.. सीधा बोल ना तेरी चुत में खुजली चल रही है.. चुदवाना है तुझे भी..

रेशमा - हाँ चल रही है तू मिटायेगा ना मेरी खुजली..

गौतम - एक बार मिल रेशमा.. ऐसा चटूंगा ना तेरी चुत को.. तेरी साली खुजली मिट जायेगी...

रेशमा चुत में ऊँगली करते हुए - उफ्फ्फ.. मेरे कुत्ते.. तू चाटेगा ना मेरी चुत को, अपनी बात से मुकर तो नहीं जाएगा..

गौतम - चाटूँगा भी चोदुँगा भी.. चुत औऱ गांड दोनों.. कुतिया बच्चा नहीं हो रह ना तेरे.. एक बार में प्रेग्नेंट ना कर दिया तो कहना..

रेशमा ऊँगली करती हुई - आई लव यू मेरे कुत्ते.. अब तो मुझसे भी सब्र नहीं हो रह.. मन कर रहा है उड़ के आ जाऊ तेरे पास..

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गौतम - अच्छा शोहर कहा है तेरा? आज सुबह सुबह चला गया क्या?

रेशमा - छोड़ ना बेबी.. गया होगा हराम का जना अपनी अम्मी चुदवाने... तू मीठी मीठी बात कर ना मुझसे.. बता मिलूंगी तो क्या क्या करेगा तू मेरे साथ?

गौतम हस्ते हुए - चुत में ऊँगली कर रही है ना तू मेरी कुतिया?

रेशमा - लड़कियों से ऐसी बातें नहीं पूछते..

गौतम - अच्छा दरवाजे पर कोई आया है मैं बाद में बात करता हूँ..

रेशमा - कुत्ते फ़ोन मत काटना.. जो भी आया है भगा उसे.. औऱ बात कर मुझसे..

गौतम ने फ़ोन बिना काटे टेबल पर रख दिया औऱ कानो में इयरबड्स लगाकर बात करते हुए रेशमा से कहा..

गौतम - ठीक है रुक दो मिनट मैं देखता हूँ कौन है..

गौतम ने दरवाजा खोला तो सामने शबनम हाथ में एक ट्रे लेकर खड़ी थी जिसमें एक चाय का कप और कुछ खाने का सामान था.. शबनम ने गौतम को देखते हुए उसकी आंखों से आंखें मिलाकर कहा - ग़ुगु भैया आपकी मम्मी ने आपके लिए नाश्ता भिजवाया है.. गौतम ने बिना कुछ कहे इशारे से शबनम को नाश्ते की ट्रे टेबल पर रखने को कहा और दरवाजा अंदर से बंद करके शबनम के पीछे-पीछे आ गया औऱ शबनम को अपनी तरफ घुमा कर उसके मुंह पर हाथ रखते हुए फ़ोन म्यूट करके शबनम से बोला...

गौतम - तुझे समझाया था ना भईया मत बोला कर..

शबनम मासूमियत से गौतम का हाथ हटा कर - गलती हो गई..

गौतम शबनम के बूब्स पर हाथ फेरकर - अब गलती की है तो फिर से सजा मिलेगी..

शबनम अपने बूब्स पर गौतम का हाथ देखकर - छोटे मालिक आप ये क्या कर रहे है? कोई देख लेगा?

गौतम - कोई नहीं आएगा औऱ अब तू मुंह से आवाज मत निकालना.. सेटिंग से बात कर रहा हूँ.. उसे तेरी आवाज ना सुनाई दे.. मैं कुछ भी करू तू चुप रहना बिलकुल..

शबनम - पर छोटे मालिक.. मालकिन को पता चला तो मेरी जान ले लेगी..

गौतम - तू बतायेगी? नहीं ना.. फिर? औऱ ये छोटे मालिक बहुत चूतिया लगता है सुनने में.. मैं कोई मालिक नहीं हूँ यहाँ पर.. तू भईया ही बोल वो फिर भी ठीक है..

शबनम गौतम की तरफ देखती हुई - ज़ी.. ग़ुगु भईया..

गौतम शबनम को चुप रहने का इशारा करते हुए फ़ोन का म्यूट खोलकर इयरबड्स हटा देता है औऱ फ़ोन स्पीकर पर डाल कर कहता है - हेलो..

रेशमा - हाँ मेरे कुत्ते.. चला गया जो आया था?

गौतम शबनम को बाहों में भरकर बिस्तर पर आता हुआ - हम्म..

रेशमा - तो अब बता क्या क्या करेगा जब मिलूंगी तब?

गौतम शबनम के होंठों को चूमता हुआ - सबसे पहले तो मैं तेरे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में गिरफ़्तार कर लूंगा औऱ तेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर तेरे पुरे मुंह की तलाशी लूंगा..

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रेशमा ऊँगली करते - अहह... कुत्ते.. फिर..

गौतम शबनम के चेहरे औऱ गले को चूमकर चाटता हुआ - फिर तेरे चेहरे औऱ सुराही जैसी गर्दन पर अनगिनत चुम्बन करके lovebite दूंगा..

रेशमा - हाय.. मैं भी अपने कुत्ते को जीभर के चुमूँगी औऱ lovebite दूंगी.. उसके बाद क्या करोगे बेबी?

गौतम शबनम का बोबा अपने हाथ में पकड़कर मसलते हुए शबनम की आँखों में देखकर - फिर मैं तेरा दूध निकाऊंगा..

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रेशमा ऊँगली करते हुए - बेबी आराम से ज्यादा तेज़ मत दबाना मेरे चुचो को.. वरना दूध फट जाएगा..

गौतम शबनम की कुर्ती उतारकर ब्रा खींचकर निकालते हुए - फिर तेरे बोबो को बच्चों की तरह चूसूंगा मेरी कुतिया..

शबनम से अब रहा ना गया औऱ वो भी कामुकता के सागर में कश्तिया हाँकने लगी थी उसने अपने दोनों हाथों से गौतम के सर को पकड़कर गौतम को अपना बोबा चुसवाना शुरू कर दिया था..

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रेशमा - हाये अम्मी.. मैं भी तुझे बच्चों की तरह अपना दूध चुसवाउंगी मेरा बच्चा बनाकर.. पी लेना मेरा सारा दूध अपने मुंह से कुत्ते..

गौतम शबनम की आँखों में देखकर अपने हाथ में शबनम के बोबे पर कड़क होकर खड़े हुए चुचक को अपनी ऊँगली से पकड़ कर जोर से मरोड़ता हुआ - फिर मैं तेरे बोबे के दाने को मसलकर तुझे दर्द दूंगा रेशमा...

शबनम गौतम की आंखों में देखी हुई उससे अपने बोबे पर खड़े हुए चूचक को छोड़ने की आँखों से अपील कर रही थी. शबनम आह भरना चाहती थी मगर गौतम को बुरा ना लगे इसलिए उसने अपनी आवाज को अपने गले में ही दबा लिया और गौतम की आंखों में देखती हुई अपने चेहरे पर दर्द भरे भाव ला रही थी. गौतम से शबनम की हालत ज्यादा देर तक देखी नहीं गई और उसने बोबे पर खड़े हुए शबनम के चुचकों को मरोड़ना और मसलना बंद करके अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया..

रेशमा चूत में ऊँगली करती हुई - मैं जोर से चिंख पड़ूँगी बेबी अगर तू करेगा तो.. ज्यादा दर्द देगा ना तो अपने दांतो से तेरे होंठ काट खाउंगी..

शबनम रेशमा की बात सुनकर कामुकता से गौतम के होंठों को चुम लेती औऱ अपने दाँत से जोर से काट लेटी है.

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गौतम शबनम को हैरानी से देखता हुआ - साली काटती है.. रुक तुझे अभी बताता हूँ..

शबनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगती है औऱ उसकी शर्ट के बटन खोलने लगती है वही गौतम को शबनम के बर्ताव से शबनम पर प्यार आने लगा था.. गौतम उसके बूब्स को मसलता हुआ चूसने लगता है..

रेशमा - अब क्या कर रहे हो जानु?

गौतम शर्ट उतार कर शबनम की चुत सहलाता हुआ - तेरी चुत को तैयार कर रहा हूँ..

शबनम अपनी चुत गौतम से सहलवाती हुई अपने एक हाथ से गौतम की जीन्स का बटन खोलकर उसकी जीन्स नीचे सरका देती है औऱ अपने पैरों की मदद से गौतम की जीन्स पूरी नीचे तक उतार देती है जिसे गौतम खुद पैरों से निकालकर अब सिर्फ चड्डी में आ जाता है..

रेशमा ऊँगली करते हुए - धीरे सहलाना जानू मेरी चुत को.. कहीं अभी ही ना झड़ जाए.. आहहह... अब मेरी सलवार खोल दो ना बेबी?

गौतम रेशमा की बात सुनकर शबनम की सलवार का नाड़ा खोलने लगता है पर गौतम से शबनम की सलवार का नाड़ा नहीं खुलता जिस पर शबनम गौतम को देखती हुई दबी हुई हंसी हँसने लगती है..

रेशमा फ़ोन पर - खोल दी क्या जानू मेरी सलवार..

गौतम - यार ये नाड़ा नहीं खुल रहा..

रेशमा फ़ोन पर - लाओ बेबी मैं खोल देती हूँ..

रेशमा की बात सुनकर शबनम अपना एक हाथ बढ़ाकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल देती है औऱ अपनी सलवार नीचे सरका देती है.. औऱ मुस्कुराते हुए गौतम की आँखों में देखकर इशारे से वही कहती है जो रेशमा फोन पर बोलती है..

शबनम इशारे से औऱ रेशमा फ़ोन पर - खुल गया जानू..

गौतम मुस्कुराते हुए शबनम की चड्डी नीचे सरकाकर शबनम की चुत देखकर - कितने सारे बाल है यार तुम्हारी चुत पर.. काट तो लेती इन्हे..

शबनम मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों से अपने दोनों कान पकड़कर गौतम से इशारे में बिना आवाज किये बोलती है - सॉरी..

रेशमा फ़ोन पर - अगली बार साफ कर लुंगी जानू.. आज माफ़ कर दो..

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शबनम गौतम की चड्डी नीचे सरकाकर उसके लंड को देखते ही हैरानी से कुछ बोलने ही वाली थी की गौतम ने शबनम के मुंह पर हाथ रखकर शबनम की चुत पर अपने लंड को रगढ़ते हुए रेशमा से कहा.

गौतम - चुत पर लंड रगड़ रहा हूँ रेशमा..

रेशमा ऊँगली करती हुई इस बार झड़ गई औऱ बोली - जानू तुमने तो रगड़ कर ही झड़वा दिया.. मैंने अंदर तक लेने का सोच लिया था..

गौतम धीरे से शबनम के मुंह से हाथ हटाकर उसे चुप रहने का इशारा करते हुए रेशमा से कहा - झड़ भी गई.. अब मेरा क्या होगा? मुझे तो चुत चाहिए थी..

रेशमा हसते हुए - फोन पर लेकर क्या करोगे जानू? जब मिलूंगी तो रियल में ले लेना.. अच्छा अब रखती हूँ खाना भी बनाना है.. बाय मेरे कुत्ते..

गौतम फ़ोन काटते हुए - ठीक है मेरी कुत्तिया...

शबनम फ़ोन कटने पर - ग़ुगु भईया आपका तो बहुत बड़ा है..

गौतम मुस्कुराते हुए - डर लग रहा है लेने में? नहीं लेना तो मना कर दो. मैं नाराज़ नहीं हूंगा..

शबनम थोड़ा थूक लगाकर गौतम का लंड पकड़ते हुए अपनी चुत में घुसाती हुई - मैं तो कब से लेना चाहती हूं ग़ुगु.. तभी तो कब से आगे पीछे घूम रही हूं..

गौतम - क्या बात है शबनम? ग़ुगु भईया से सीधा ग़ुगु?

शबनम अपनी गांड उठाकर धीरे धीरे गौतम का लंड चुत में अंदर लेती हुई - 10 साल छोटे हो तुम मुझसे.. इतना तो मै बोल ही सकते हूँ.

गौतम मिशनरी में पहला तेज़ झटका मारते हुए शबनम की चुत में अपना आधे से ज्यादा लंड घुसा देता है औऱ शबनम से कहता है - मुझे बड़ी औरते चोदने में बहुत मज़ा आता है शबनम..

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शबनम आह्ह करती हुई - इतनी जोरआजमाइश क्यों कर रहे हो ग़ुगु? तुमको जो चाहिए वो दे तो रही हूँ.. प्यार से नहीं ले सकते मेरी?

गौतम सॉरी बोलते हुए - तुम ठीक तो हो ना शबनम?

शबनम सिसकियाँ लेती हुई - अब तक तो ठीक हूँ पर आगे का पता नहीं.. तुम क्या हाल करोगे मेरा..

गौतम बिलकुल धीरे धीरे झटके मारकर चोदते हुए - दो बच्चे है तुम्हारे तो.. फिर भी इतनी टाइट है... अब्दुल लेता नहीं है क्या?

शबनम गांड उठाकर चुदाई में गौतम का बराबर साथ देती हुई - चुत का क्या है ग़ुगु.. कुछ टाइम ना चुदे तो सिकुड़ जाती है.. औऱ तुम्हारा इतना बड़ा है तुमको तो छोटी लगेगी ही..

गौतम झटको की रफ़्तार बढ़ाते हुए - सच सच बताना शबनम.. दोनों बच्चे अब्दुल के है या किसी औऱ के?

शबनम कामुक आहे भरती हुई - एक तो अब्दुल का..

गौतम झटके मारते हुए - औऱ दूसरा?

शबनम - दूसरा आरती भाभी के पापा का है..

गौतम हैरानी से - आरती का बाप कब चोद गया तुझे?

शबनम - चोद के नहीं गया ग़ुगु.. मैं औऱ अब्दुल पहले आरती भाभी के घर ही काम करते थे.. वहा अंकल ज़ी ने बहुत बार मेरा फ़ायदा उठाया था.. आरती भाभी से कहकर मैं यहां उनके पास आ गई..

गौतम - चोदने वाला अगर अपनी पसंद का आदमी ना हो तो कितना बुरा लगता है समझ सकता हूँ शबनम..

शबनम मुस्कुराते हुए - छोटी सी उम्र में कितनी समझदारी वाली बात करते हो गुगु.. अब जल्दी जो चाहिए वो लो औऱ मुझे जाने दो.. मैं नहीं मिलूंगी तो मालकिन हल्ला मचा देगी..

गौतम शबनम की चुत में पूरा लंड घुसाकर रुक जाता है औऱ शबनम के होंठ चूमकर कहता है - तुम्हारी मालकिन को मैं देख लूंगा.. तुम चिंता मत करो शबनम..

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शबनम कामुक निगाहो से गौतम को देखती हुई - कल शादी में बहुत प्यारे औऱ हैंडसम लग रहे थे तुम?

गौतम - तू छुप छुप के देख रही थी मुझे?

शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों पर उंगलियां फेरती हुई - जब से आये तो मेरी निगाहे तो तुम्ही पर है..

गौतम - अच्छा इतना पसंद आय तुम्हे.. बहुत चालक हो..

शबनम कुछ कहती इससे पहले दरवाजा बज गया..

गौतम - हर बार कोई ना कोई अपनी माँ चुदाने आ ही जाता है... तू रुक मैं देखकर आता हूँ..

शबनम बाथरूम में चली जाती है औऱ अपने कपडे अपने हाथ में पकड़कर बाथरूम में एक तरफ रख देती.. वही गौतम तौलिया लपेटकर दरवाजा खोलता है सामने कोमल थी..

कोमल - बेटा.. तूने शबनम को कहीं देखा है? मिल नहीं रही..

गौतम कोमल को बाहों में भरके उसका बोबा मसलते हुए - शबनम को नहीं देखा मामी पर आपको आज बिस्तर में नंगा देखने की बहुत तलब है..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का कान खींचकर - रात ने देख लेना बेटा.. अभी घर जाना है तेरी बहन की विदाई भी होनी है.. ऊपर से वो शबनम भी नहीं मिल रही..

गौतम कोमल का बोबा ब्लाउज से बाहर निकाल कर चूसते हुए - शबनम को मैंने बाजार भेजा है मामी.. उसे आने में समय लगेगा.. कुछ काम है तो बोलो मैं कर देता हूँ..

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कोमल गौतम से अपना बोबा छुड़वा कर वापस ब्लाउज में डालती हुई - ये सब रात में कर लेना ग़ुगु अभी बहुत काम है.. शबनम वापस आये तो मेरे पास भेज देना..

गौतम - मामी एक kiss तो दे जाओ..

कोमल गौतम के होंठो को अपने होंठो में भरके एक लम्बा औऱ गिला चुम्मा करके - चल अब अपना ख्याल रख बेटा.. मैं जाती हूँ..

गौतम अपना तौलिया हटाकर अपना लंड हिलाते हुए - बाय मामी..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का लंड देखकर - बाय बेटा...

कोमल के जाने के बाद गौतम दरवाजा बंद कर देता है औऱ बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर पोट पर बैठी हुई शबनम से कहता - पोट्टी कर रही हो क्या?

शबनम खड़ी होकर - नहीं तो.. कौन था?

गौतम - मामी थी तेरे बारे में पूछ रही थी..

शबनम - तो? क्या कहा तुमने?

गौतम शबनम को बाहों में भरते हुए - मैंने कहा.. तुम्हे टाइम लगेगा.. बहुत जरुरी काम कर रही हो मेरा..

शबनम मुस्कुराते हुए - मालकिन ने क्या कहा?

गौतम - मामी ने कहा.. जब काम पूरा हो जाए तो भेज देना..

शबनम - सच में?

गौतम शबनम को बाहों से आजाद करते हुए - औऱ क्या मैं झूठ बोलूंगा?

शबनम मुस्कुराते हुए टेबल पर पड़ी सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए - ऐसा मैंने कब कहा?

गौतम - तु सिगरेट पीती है?

शबनम - जब इतनी सी उम्र में तुम पी सकते हो तो मैं तो तीस साल की हूँ.. मैं नहीं पी सकती?

गौतम बेड पर बैठके - सिर्फ सिगरेट ही पीना आता है मेरा ये सिगार भी पीना जानती हो..

शबनम गौतम के आगे फर्श पर बैठकर सिगरेट का कश लगाकर उसके लंड को पकड़ते हुए - मुझे सिगरेट पीते हुए सिगार पीना अच्छे से आता है ग़ुगु.. ये कहते हुए शबनम सिगरेट के कश लगाकर गौतम का लोडा मुंह में लेकर चूसने लगी..

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गौतम - उफ्फ्फ.. शबनम.. अहह..

शबनम थोड़ी देर लोडा चूसकर - मज़ा आ रहा है ना ग़ुगु? तुम्हारा तो झड़ने का नाम ही नहीं लेता.. इतनी देर में तो अब्दुल 4 बार अंकल ज़ी 6 बार झड़ जाते..

गौतम - ये मर्द का लंड है शबनम.. आसानी से नहीं झडेगा..

शबनम - ग़ुगु एक बात बोलू.. बुरा तो नही मानोगे?

गौतम - खुलके बोल शबनम.. बुरा मान जाऊंगा तो तुझे चोदके बदला भी ले लूंगा..

शबनम मुंह से लंड निकालकर - ग़ुगु मैं घर की नोकरानी हूँ.. कभी मालकिन नहीं बन सकती.. पर लाइफ में एक बार मुझे मालकिन बनकर चुदाई करनी है अपने नोकर की.. मैं चाहती हूँ कोई मेरा नौकर बनकर रहे.. मेरा हर हुकुम माने..

गौतम शबनम के होंठ चुम्मा कर - इतनी सी बात?

(गौतम अपनी पेंट से अपना बेल्ट निकालकर अपने गले में पहन लेता है औऱ बिलकुल किसी कुत्ते की तरह उसका पट्टा शबनम के हाथ में देकर कुत्ते की तरह फर्श पर अपने हाथ पैर रखकर kutta बनते हुए शबनम से कहता है..

गौतम - लो हाज़िर है तुम्हारा गुलाम या कुत्ता.. दो हुकुम अपने इस गुलाम को मालकिन..

शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के सर को चूमकर - गुगु बुरा तो नहीं मानोगे ना तुम.. मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है..

गौतम - अगर तुने अपनी fantasy पूरी नहीं की तो जरूर बुरा मान जाऊँगा.. जो करना है करो.. समझी.. अब शुरू करो.. मुझे भी बहुत बोर हो गया था सिर्फ चुदाई करते हुए.. अब roleplay करके थोड़ा मज़ा लेता हूँ... भो भो.. मालकिन क्या हुकुम है अपने कुत्ते के लिए?

शबनम मूंड में आती हुई पट्टा अच्छे से पकड़ कर - क्या नाम है तेरा मेरे कुत्ते?

गौतम भोंकते हुए - ग़ुगु मालकिन..

शबनम बेड पर बैठकर अपने पैर का अंगूठा गौतम के मुंह में देती हुई - मालकिन के पैर की उंगलियां चूस मेरे कुत्ते..

गौतम अंगूठा औऱ उंगलियां चूसते हुए - ज़ी मालकिन..

शबनम कामुकता के अर्श पर थी उसने कहा - जीभ लगा के चूस.. मादरचोद..रंडी के बच्चे.. मालकिन नाराज़ हो गई तो जानता है ना क्या होगा?

गौतम रोने का नाटक करते हुए - चूसता हूँ मालकिन.. आप गुस्सा मत करो..

शबनम - रो मत साले कुत्ते.. चाट मेरे परो को अच्छे से.. जीभ लगा लगा के..

गौतम पैर चाटते हुए - जैसा आप बोलो मालकिन..

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शबनम पैर चटवाने के बाद पट्टा खींचते हुए गौतम का मुंह अपनी चुत के करीब लाती हुई उसे गाली बकती है - साले ग़ुगु मादरचोद, बहन के लोडे, रंडी के मूत, चुदाईखाने, भोस्डिके भड़वे.. चाट अपनी मालकिन की चुत को.. बाहर निकाल अपनी जीभ..

गौतम अपनी जीभ बाहर निकालकर चुत पर फिराते हुए - मालकिन बदबू आती है आपकी चुत से..

शबनम गौतम को एक थप्पड़ मारकर - तुझसे पूछा मैंने कुत्ते? चाटने के बोला है ना.. तो फिर चाट अच्छे.. साला नौकर मुझसे जबान लड़ायेगा..

ये कहते हुए शबनम अपनी दोनों टाँगे औऱ अच्छे से खोलकर बेड पर लेट गई औऱ ग़ुगु के बाल पकड़कर उसके मुंह को जबरदस्ती अपनी चुत पर लगाती हुई उसे चुत चटवाने लगी..

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इसके साथ ही शबनम ने एक सिगरेट जलाकर कश लेते हुए धुआँ ग़ुगु के मुंह पर छोड़ दिया.. औऱ बोली..

शबनम - अब आ रही है बदबू तुझे? साले नौकर.. छोटा सा होके अपनी मालकिन से जुबान लड़ायेगा.. चाट मादरचोद.. ठीक से चाट वरना काम से निकाल दूंगी औऱ झूठा केस लगाकर पुलिस स्टेशन में बंद भी करवा दूंगी..

गौतम रोते हुए - मालकिन नहीं आ रही बदबू.. मैं चाट रहा हूँ आपकी चुत को.. प्लीज मुझे पुलिस में मत देना.. पुलिस बहुत मारती है.

शबनम सिगरेट का कश लेकर मुझे मूतना है मेरे कुत्ते चल मेरे साथ बाथरूम में..

गौतम - ज़ी मालकिन...

शबनम बेल्ट का पट्टा पकड़ कर गौतम को बाथरूम ले जाती है औऱ गौतम कुत्ते की तरह ही अपने हाथ पैरों पर कुत्ते की तरह चलते हुए बाथरूम में चला जाता है..

शबनम पट्टा खींचते हुए गौतम को घुटनो पर बैठाकर एक थप्पड़ औऱ जमाती हुई - मुंह खोल साले नौकर.. तेरे मुंह में मूतेगी आज तेरी मालकिन..

गौतम मुंह खोलकर - लीजिये मालकिन..

शबनम एक हाथ से सिगरेट के कश लेकर दूसरे हाथ से गौतम के बाल पकड़कर उसके मुंह में मूतती हुई - पी साले कुत्ते.. गरीब.. तू मेरा मूत पिने लायक़ ही है..

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गौतम शबनम का सारा मूत पी जाता है औऱ चाट कर उसकी चुत भी साफ कर देता है..

शबनम - मुंह खोल मेरे कुत्ते.. मालकिन को थूकना है..

गौतम मुंह खोलकर - लो मालकिन थूक दो मेरे मुंह में..

शबनम गौतम के मुंह में थूक देती है फिर शबनम सिगरेट पोट में फेंककर फ्लश करती है औऱ पट्टा खींचकर वापस गौतम को कुत्ते की तरह बिस्तर पर ले आती है औऱ कहती है - आजा मेरे कुत्ते.. अपनी मालकिन के दोनों बोबो को चूस के सारा दूध निकाल दे..

गौतम शबनम के बोबे चूसता हुआ - ज़ी मालकिन.. बहुत बड़े बड़े दूदू है आपके.. आह्ह.. मालकिन आपका दूदू बहुत मीठा है.. बहुत स्वादिस्ट है..

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शबनम एक पल मुस्कुराते हुए गौतम को बेहद प्यार भरी नज़र से देखती है औऱ फिर गौतम के लंड को अपनी चुत में डाल कर कहती है - बहुत हो गई चूसाईं अब कर अपनी मालकिन की चुदाई मेरे कुत्ते..

गौतम लंड घुसते ही धमाकेदार धक्के मारना शुरू कर देता है - ज़ी मालकिन..
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शबनम एकदम से सिसकती हुई - आह्ह.. कुत्ते थोड़ा धीरे.. मालकिन को धीरे चोद.. मालकिन को दर्द हो रहा है...

गौतम गले से पट्टा निकालकर - मालकिन की माँ की चुत.. साली..

शबनम कामुक सिसकियाँ लेते हुए - आहहह.. ग़ुगु थोड़ा आराम से..

गौतम मिशनरी में शबनम की चुत को कुछ देर चोदकर रुक जाता है औऱ शबनम झड़ जाती है मगर फिर भी कामुकता से भरी हुई आँखों से गौतम को देखती है और कहती है..

शबनम आहे भरती हुई - क्या हुआ ग़ुगु? करो ना..

गौतम चुत से लंड निकालकर - पोजीशन चेंज करनी है..

शबनम - बोलो ना.. क्या बनु? कुतिया या घोड़ी?

गौतम बेड से शबनम को उठाकर दिवार की तरफ मुंह करके खड़ा करते हुए पीछे से उसकी एक टांग उठाकर अपना लंड उसकी चुत में ड़ालते हुए कहता है - छिपकली...

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शबनम दोनों हाथ दिवार पर लगाकर पीछे से गौतम के झटके खाती हुई सिसकती - अहह.. ग़ुगु.. आहिस्ता थोड़ा करो ना...

गौतम कुछ देर उसी तरह चोदकर शबनम को अपनी गोद में उठकर चोदता हुआ कहता है - अंदर ही निकाल दू ना मालकिन..

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शबनम गौतम को चुमकर - जहा तुम्हारा मन हो ग़ुगु ..

गौतम शबनम चोदता हुआ बिस्तर पर पटककर शबनम की चुत में 8-10 धक्के पूरी ताकत से मारता हुआ झड़ जाता है औऱ अपना सारा माल शबनम की चुत में छोड़ देता है..

शबनम भी चीखती हुई गौतम से लिपटकर झड़ जाती है औऱ गीतम के होंठों को लगातार चूमने लगती है.. बहुत लम्बे समय तक दोनों उसी तरह से बिस्तर पर पड़े हुए एकदूसरे को चुम रहे थे..

गौतम चुम्बन तोड़कर - हैप्पी?

शबनम मुस्कुराते हुए - वैरी हैप्पी... थैंक्यू ग़ुगु भईया... औऱ सॉरी भी.. मैंने तुम्हारे इतने प्यारे चेहरे पर थप्पड़ मारा औऱ जो कुछ भी किया.. मगर तुम भी ना.. लंड घुसते ही औऱ छिपकली बनाके इतना कस के चोदा है मुझे कि क्या कहु.. बदला निकाल रहे थे ना जानू?

गौतम - बदला औऱ तुमसे? नहीं यार..

शबनम बेड से उठकर कपडे उठाकर पहनते हुए - अह्ह्ह्ह... हाय क्या हलात कर दी मेरी.. अब क्या जवाब दूंगी मालकिन को? कैसे प्यारे से दिखते हो पर बिलकुल शैतान हो शैतान.. पहली चुदाई से दस गुना ज्यादा दर्द दिया है तुमने..

गौतम बिस्तर पर लेटा हुआ - बुलाऊगा तो वापस आओगी ना..

शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के लंड को मुंह में लेकर साफ करती हुई - बस इशारा कर देना..

शबनम कमरे से जाने लगती है तो गौतम कहता है - शबनम लाइट बंद कर देना जाते हुए..


शबनम लाइट ऑफ करके चली जाती है औऱ गौतम सुबह 10 बजे गहरी नींद में सो जाता है औऱ एक सपना देखने लगता है...
 
अपडेट 29

सपने में गौतम देखता है....

रानी सा.. आपने बुलाया?

हाँ.. जयसिंह ज़ी.. गढ़ पर जाने की तैयारी कीजिये.. रुक्मा (18) की सखी कुशाला का विवाह सकुशल संपन्न हो चूका है.. तीन दिवस के भीतर ही कुशाला की विदाई भी हो जावेगी.. अब गढ़ से रुक्मा को लिवाने के लिए प्रस्थान करना उचित होगा..

जयसिंह - किन्तु रानी सा.. हुकुम का आदेश है कोई भी सैनिक जागीर छोड़कर कहीं नहीं जाए.. औऱ आप तो भली भाति जानती है आज कल खतरा कितना बढ़ चूका है? कल ही जागीर कि सीमा में पड़ने वाले तीन गाँव में हुकुम के छोटे भाई गजसिंह ने बागियों औऱ डाकुओ के साथ मिलकर लूट की है.. ऐसे में महल छोड़कर गढ़ जाना वो भी हुकुम के आदेश की अवहेलना करते हुए.. माफ़ कीजिये रानी सा.. मैं ऐसा कदापि नहीं कर सकता..

सुजाता उर्फ़ रानी माँ (44)

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सुजाता (44)- जयसिंह ज़ी.. आप हुकुम के आदेश की चिंता मत कीजिये.. मैंने उनसे बात कर ली है औऱ उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी है.. कल प्रातः आप कुम्भसिंह को साथ लेकर गढ़ के लिए निकल जाए..

जयसिंह - रानी सा.. कुम्भसिंह कि यहां ज्यादा आवश्यकता है.. हुकुम की सुरक्षा औऱ महल की रखवाली कुम्भसिंह की ही जिम्मेदारी है.. मैं किसी औऱ सैनिक को अपने साथ ले जाऊँगा..

सुजाता - ठीक है जयसिंह ज़ी.. आप समर को भी अपने साथ ले जाइये.. वैसे भी उस जैसे कुशल योद्धा को महल के जनाना हिस्से की रक्षा मात्र तक सिमित रखना सही नहीं है..

जयसिंह - जैसी आपकी इच्छा रानी सा.. अनुभव में भले ही समर कुम्भसिंह से कमतर हो किन्तु युद्ध कौशल में समर बेजोड़ है.. मैं कल सुबह सूरज की पहली किरण निकलने से साथ गढ़ के लिए प्रस्थान कर दूंगा औऱ कुमारी रुक्मा को गढ़ से वापस महल ले आऊंगा..

सुजाता - सावधान रहिएगा जयसिंह ज़ी.. गजसिंह कपटी औऱ धूर्त है...

जयसिंह - रानी सा.. आप निश्चिन्त रहिये.. मैं राजकुमारी को पहाड़ी की तल्हाटी से गुजरे वाले गुप्त रास्ते से शीघ्र ही वापस ले लाऊंगा..

समर पास ही खड़ा हुआ जयसिंह औऱ सुजाता की बात सुन रहा था..

************

लता उर्फ़ लीलावती (40)

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इतनी सुबह कहां निकालना है समर?

माँ.. रानी मां का आदेश है आज जयसिंह ज़ी के साथ गढ़ प्रस्थान करना है राजकुमारी रुकमा को गढ़ से वापस लीवाना है..

लता (40) - पर उसके लिए तो सकुशल योद्धा और अनुभवी योद्धाओं की अलग टुकड़ी जाती है रानी ने तुझे क्यों इस काम के लिए नियुक्त किया है..

समर (20) - वो तो मुझे नहीं पता माँ... आप तो जानती हैं रानी मां ने जागीरदार के हाथों मुझे मरने से बचाया है, उनका कहा तो मानना ही पड़ेगा..

लता - तेरी बात बिल्कुल सही है समर, पर महल से गढ़ और गढ़ से वापस महल आने में बहुत खतरा है.. रामप्यारी बता रही थी कि अभी कुछ दिनों पहले ही उसके गांव में बागी औऱ डाकुओं ने लूट की है.. ऐसे में तेरा गढ़ जाना मुझे तो बहुत चिंता हो रही है..

समर - रामप्यारी जो कह रही थी वह सत्य है मां.. गजसिंह डाकुओं के साथ मिल चुका है और अब वही जागीर के गांव में लूटपाट मचा रहा है..

लता डर से काँपते हुए - गजसिंह?

समर अपनी माँ लता को बाहों में थामकर गले लगाते हुए - आप चिंता मत करो माँ.. मुझे कुछ नहीं होगा.. इस बार अगर गजसिंह सामने आया तो मैं उसका सर अपनी तलवार से काट लूंगा औऱ आपके सामने लाकर रख दूंगा.. वैसे भी जब तक मैं आपके अपमान का बदला और पिताजी की मौत का बदला नहीं ले लेता मुझे चैन नहीं मिलने वाला..

लता - समर तू ऐसा कुछ नहीं करेगा.. तु मुझसे वादा कर कि तू गजसिंह और उसके साथियों से दूर रहेगा और अपना बदला लेने का संकल्प मन से निकाल देगा.. जो कुछ हुआ उसे भूल जायेगा औऱ कभी उस गजसिंह औऱ उसके साथियो के पास नहीं जाएगा..

समर - जो कुछ हुआ उसे आप भूल सकती है माँ.. मगर मैं उसे नहीं भूल सकता.. मुझे आज भी याद है जब उस रात जगसिंह ने मुझे बाहर बाँध कर यहां भीतर आपके साथ गलत काम किया था.. वह सब आज भी मेरी आंखों के सामने घूमता है माँ.. मैं आज भी रातों में उस पापी को याद करके चैन से सो नहीं पाता और हर बार यही सोचता हूं कि कैसे मैं उससे आपके अपमान का और पिताजी की मौत का बदला लूंगा..

लता - मैं तेरे पिताजी को खो चुकी हूं समर.. अब मैं तुझे नहीं खोना चाहती.. गजसिंह बहुत खतरनाक है और अब तो उसके साथ सुना है डाकुओं की टोली भी जुड़ गई है.. उसकी ताकत बढ़ती जा रही है ऐसे में तू अगर उसके पास जाएगा तो निश्चित ही वह तुझे मार डालेगा.. मैं तुझे नहीं खोना चाहती तुम मुझसे वादा कर कि तू ऐसा कुछ नहीं करेगा.. राजकुमारी को लिवाने के बाद तू सीधा वापस आएगा.. गजसिंह से बदला लेने का संकल्प त्याग देगा..

समर - कैसे मैं अपना संकल्प त्याग दूंगा माँ.. उस रात मेरे हाथ पांव रस्सीयो से बांधकर उसने इसी कमरे में आपको निर्वस्त्र किया था औऱ इसी जगह आपके साथ गलत काम किया था.. मैं कितना चीख और चिल्ला रहा था और उस दानव से आपको छोड़ने की कितनी विनती कर रहा था मगर मेरे आंसू औऱ चीख पुकार का उसपर कोई असर नहीं हुआ.. मैं उसे नहीं छोड़ने वाला माँ.. उसके कई लोगों को मैंने मौत के घाट उतारा है उसी तरह उसे भी उतार दूंगा..

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लता समर के चेहरे को अपने हाथो से पकड़कर - उस बात को 4 साल हो चुके हैं बेटा.. वह सब बातें अपने मन से निकाल दे.. आगे दुश्मनी रखने से किसी का भला नहीं होगा.. तेरे पिता ने गजसिंह से दुश्मनी की उसके कारण ही हमें वो सब झेलना पड़ा.. अब तू इसे आगे मत बढ़ा..

समर - धोखे से पिताजी को मारकर और मेरे सामने आपका मान सम्मान सब कुछ उतार कर, आपके साथ जबरन अपनी हवस मिटाकर वो गजसिंह अब तक बेखौफ घूम रहा औऱ आप कह रही है मैं अपना बदला भूल जाऊ? यह नहीं हो सकता माँ.. मैं अपने साथ हुई हर चीज भूल सकता हूं मगर आपके साथ और पिताजी के साथ गजसिंह ने जो किया उसे नहीं भूल सकता..

लता - तेरे सिवा मेरा है ही कौन जिसे मैं यह बात समझाऊं.. कई बार सबकुछ भूल जाने में ही सबकी भलाई होती है बेटा.. छोड़ दे ये हठ.. तू साधारण रास्ते से जाएगा औऱ वहा गजसिंह औऱ उसके साथी डाकुओ के साथ मिलके तुम पर हमला कर देंगे.. मेरा क्या होगा..

समर - मैंने आपका दूध पिया है माँ और आपके दूध का ऋण मैं जरूर चुका के रहूँगा.. मैं सब कुछ भूल जाने का वादा तो नहीं करता.. मगर यह वादा जरूर करता हूँ कि मैं गजसिंह का सर आपके कदमो में लाकर जरूर रख दूंगा.. हम साधारण रास्ते से जाएंगे जरूर पर आना हमारा गुप्त रास्ते से होगा.. जो पहाड़ की तल्हाटी से गुजरता है.. जाने की आज्ञा दीजिये..

समर ये कहते हुए लता के पैरों में झुक गया औऱ अपना सर लेता के पैरों में रखकर आशीर्वाद लेने लगा..

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लता समर को उठाकर अपनी छाती से लगा लेती है औऱ कहती है - जल्द लौटना बेटा.. मैं तेरी प्रतीक्षा करुँगी..

समर अपनी मां से आशीर्वाद लेकर वहां से चला जाता है और जयसिंह के साथ राजकुमारी रुकमा को लीवाने के लिए गढ़ की और प्रस्थान करता है..

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रुक्मा उर्फ़ राजकुमारी (18) सुजाता औऱ वीरेंद्र की बेटी

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अरे अरे ऐसे क्यों चेहरा उदास किया है मेरी सखी ने? अब तो सब तुम्हे राजकुमारी नहीं, रानी कहकर पुकारेंगे.. अजमेर से भी बड़ी रियासत में विवाह हुआ है तुम्हारा.. सुना बहुत सुन्दर स्थान है जहा तुम जाने वाली हो..

क्या तुम भी सबकी तरह मुझे छेड़ने लगी.. रुक्मा.. अब क्या विदाई से पहले के कुछ मैं अपने अतीत के उन लुभावने पलों को याद भी नहीं कर सकती जिन्हे मैंने यहां बिताये है? मैं उदास नहीं हूँ रुक्मा बस निराश हूँ कि आगे का जीवन मैं यहां से कहीं दूर बताने वाली हूँ..

रुक्मा (18) - विवाह का नियम तो औरत के त्याग का परिचायक है कुशाला.. हर औरत को इस डगर से निकलना पड़ता है.. माँ कहती है कि औरत का मन औऱ ह्रदय धरती की तरह शांत औऱ सहनशील होता है अहिंसा, स्नेह, बलिदान, सहजता औऱ संवेदना ही औरत को औरत बनाती है.. काम, क्रोध, क्रूरता, कपट, हिंसा औऱ असंवेदना पुरुषो में होती है.. औरत का उससे कोई नाता नहीं.. तुम जल्द ही नए बदलाव में ढल जाओगी औऱ अब की बातें तब तुम्हे हसने वाली प्रतीत होगी.

कुशाला (19) - तुम तो बड़ी सयानी बात करने लगी हो रुक्मा.. पता ही नहीं चला हम कब छोटे से बड़े हो गए..

रुक्मा - कुशाला अब उठो औऱ चलो विदाई का समय हुआ जा रहा है..

कुशाला - विदाई तो आज तुम्हारी भी है रुक्मा..

रुक्मा - मैं समझी नहीं कुशाला..

कुशाला - माँ ने बताया है कि तुम्हे लिवाने के लिए जागीर से जयसिंह काका आये है..

रुक्मा - इसका अर्थ है कि आज आप यहां से अपने ससुराल जायेंगी औऱ मैं वापस अपने माता पिता के पास..

कुशाला - सही कहा सखी..

रुक्मा कुशाला से गले मिलते हुए - जीवन के ये अठरा वर्ष जो हमने हंस खेलकर एकदूसरे से रूठकर औऱ एकदूसरे को मनाकर बिताये है वो हमेशा याद रहेंगे सखी..

कुशाला - सही कह रही हो सखी.. किन्तु मैं खत लिखूँगी.. औऱ अगली बार जब हम मिलेंगे तब मेरे हाथों कि मेहंदी तुम्हारे हाथों में होनी चाहिए.. मैं भी अब तुम्हारे विवाह मैं तुमसे मिलूंगी..

रुक्मा औऱ कुशाला दोनों सखियों की आँखों में आंसू थे औऱ दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में कसके पकड़ा हुआ था जो ये बता रहा कि जैसे दोनों को ही अब ये चिंता हो की आगे वो अब कहा औऱ कैसे मिलेंगे.. मिल भी पाएंगे या नहीं.. नियति ने आगे उनके लिए क्या तय किया है.. दोनों की विदाई आज तय थी औऱ दोनों ही इस जगह को नहीं छोड़ना चाहती थी ना ही एकदूसरे को नहीं छोड़ना चाहती थी.. मगर जो होना है सो होकर ही रहता है.. कुशाला बरात के संग अपने ससुराल तो रुक्मा जयसिंह के साथ जागीर की तरफ जाने के लिए मुड़ गई..

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गढ़ से जागीर तक वापसी का दो दिन का ये सफर शुरू हो चूका था औऱ रुक्मा घोड़ागाडी मैं बैठी हुई अपनी सखी कुशाला को याद कर रही थी औऱ उसके साथ बिताये उन पलों को याद कर रही थी जिसमे दोनों बचपन से खेलकर बड़ी हुई थी.. दो दिनो के सफर में आधे दिन का सफर ख़त्म हो चूका था औऱ रास्ते में एक बड़े से बड़ के पेड़ के नीचे जयसिंह ने कुछ देर घोड़ो को सुस्ताने के लिए अपना काफ़िला रोका औऱ रुक्मा को इसकी खबर करके खुद भी पेड़ के नीचे बैठकर साथ लाया हुआ भोजन खाने लगा.

सभी लोग खाना खाने में व्यस्त थे पर समर का ध्यान खाने में नहीं था वो कई दिनों से बस उस परछाई के बारे में ही सोच रहा था जिसे उसने बैरागी से निकलते औऱ उसीमें लीन होते देखा था..

रुक्मा घोड़ा गाडी से नीचे उतर चुकी थी औऱ अपने साथ अपनी दासीयों को लेकर बड़ के पेड़ के पीछे जाकर थोड़ा ठहलने लगी. रुक्मा जयसिंह की आँखों के सामने ही थी इसलिए उसने रुक्मा को वहा टहलने से नहीं रोका औऱ खाना खाते हुए अपने बाकी सैनिको के साथ बात करने लगा.. समर आधा अधूरा खाने के बाद उठ गया था औऱ उसने अपने हाथ पानी से धोकर वापस अपनी तलवार हाथ में पकड़ ली थी औऱ वही पर इधर उधर मंडराने लगा था..

रुक्मा औऱ उसकी दासिया हंस बोल कर इधरउधर टहल रहे थे की उन्हें सामने से खूंखार भेड़िया भागता हुआ उन्ही की तरफ आता हुआ दिखाई दिया औऱ एक साथ रुक्मा औऱ उसकी दासिया चिल्लाते हुए वापस बड़ के पड़ की तरफ भागने लगी. जयसिंह औऱ बाकी सैनिक उठकर अपनी अपनी तलवार संभालते हुए रुक्मा की तरफ दौड़े लेकिन वो लोग बहुत दूर थे.. भेड़िया रुक्मा औऱ उसकी दासियों पर झपटा मारने ही वाला था कि समर ने वहा आकर एन मोके पर अपनी तलवार के एक वार से उस भेड़िये के दो टुकड़े कर दिए औऱ भेड़िये को मार डाला..

जयसिंह ने समर को ऐसा करते देखकर अपनी सांस में सांस ली औऱ रुक्मा को वापस घोड़ा गाडी में बैठाकर आगे का रास्ता शुरू कर दिया..

रुक्मा औऱ उसकी दासिया इस हादसे से कुछ देर के लिए सहम गई थी मगर समर की बहादुरी औऱ उसके रूप पर मोहित होकर रुक्मा ने समर को उसी वक़्त अपने ह्रदय में प्रेमी का स्थान दे दिया था.. घोड़ागाडी मैं बैठी रुक्मा दासीयों से बात करने लगी थी औऱ उससे समर के बारे में पूछने लगी थी..

रुक्मा - ये क्या कह रही हो सुधा? मैं तो बस यूँही पूछ रही थी..

सुधा(दासी 21) - मैंने कई साल आपके साथ बिताये है राजकुमारी.. मैं आपका मन अच्छे से पढ़ सकती हूँ.. जिस पल उस योद्धा ने आपकी औऱ हम दोनों बहिनों की जान बच्चाई उसी वक़्त आपने उस योद्धा को अपने मन में उतार लिया था.. क्यों लीला..

लीला (दासी 22) - सही कहा सुधा.. राजकुमारी को जब से उस योद्धा ने भेड़िये के वार से बचाया है राजकुमारी की आँखे बस उसी योद्धा पर टिकी है.. मगर याद रहे राजकुमारी.. आप जागीरदार की पुत्री हो एक साधारण योद्धा से प्रेम करना आपके लिए उचित नहीं.. आपके प्रेम को जागीरदार कभी स्वीकृति नहीं देंगे..

रुक्मा - तुम दोनों क्या बेतुकी बातें कर रही हो.. ऐसा कुछ नहीं है.. मैंने बस ऐसे ही उसका नाम पूछा था.. नहीं बताना तो मत बताओ..

सुधा - राजकुमारी हमें भी उतना ही पता है उस योद्धा के बारे में जितना आप जानती हो.. मगर आप निश्चिन्त रहिये आगे जैसे ही गढ़ की सीमा पर कुए से पानी लेने के लिए कुछ देर हम रुकेंगे मैं उस योद्धा के बारे में सब सुचना जुटा कर ले आउंगी..

रुक्मा मुस्कुराती हुई परदे से बाहर समर को देखने लगती है जो आगे घोड़े पर सवार था..

गढ़ की सीमा पर से काफिला औऱ घोड़ा गाडी रुकी और पानी लेने के लिए कुछ लोग कुए की बढे.. सुधा घोड़ागाडी से उतर गई औऱ एक सैनिक के पास जाकर कुछ देर बात करके वापस आ गई सभी लोग वापस आगे के लिए बढ़ने लगे..

रुक्मा - कुछ पता चला सुधा?

लीला - देखा सुधा.. कुछ समय पहले तक तो राजकुमारी कह रही थी कि ऐसा कुछ नहीं है मगर अब कितनी उत्सुकता से उस योद्धा के बारे में जानने के लिए लालायित है.. इसे अब प्रेम ना कहा जाए तो क्या कह कर पुकारा जाए?

सुधा मुस्कुराते हुए - अब जान बचाने वाले के बारे में जानना प्रेम थोड़े हुआ लीला.. राजकुमारी ज़ी तो बस यूँही उस योद्धा के बारे में जानना चाहती है.. उस योद्धा से प्रेम थोड़ी हुआ है राजकुमारी ज़ी को.. सही कहा ना राजकुमारी ज़ी.

रुक्मा - मैं अच्छे से समझ रही हूँ जो खेल तुम दोनों बहिने मिलकर मेरे साथ खेल रही हो.. लौटने दो वापस पिताज़ी से कहकर खूब खबर लुंगी तुम्हारी..

सुधा औऱ लीला - अरे नहीं नहीं.. राजकुमारी..

लीला - राजकुमारी हम तो बस यूँही हंसी ठिठोली कर रहे थे आपके साथ..

सुधा - ज़ी राजकुमारी.. आप पूछिए जो आपको पूछना है.. मैंने सबकुछ पता लगा लिया है उस योद्धा के बारे में..

रुक्मा जिज्ञासा से - तो बताओ जो पूछा था मैंने.. नाम?

सुधा - समर सिंह.

रुक्मा - समर... रुक्मा सुधा को अधीरता से देखती हुई.. औऱ?

सुधा - कुछ दिनों पहले तक कोषागृह का पहरेदार था.. हुकुम के मेहमान का अपमान किया था.. हुकुम ने मौत का फरमान सुनाया था औऱ उस मेहमान से समर को मारकर अपने अपमान का प्रतिशोध लेने को कहा मगर मेहमान की दया औऱ रानी की कृपा से बच गया.. रानी ने जनाना महल का पहरेदार बनाया था मगर इस बार जयसिंह के साथ आपको लिवाने भेज दिया..

रुक्मा - घर-परिवार के बारे में?

सुधा - राजकुमारी ज़ी.. पिता भी राजाजी की सेना में थे मगर उस गजसिंह औऱ उसके साथियो ने धुपसिंह को मार डाला.. घर में बस उसकी माँ है.. एकलौता है.. औऱ कोई नहीं.. मगर एक भ्रान्ति है, पता नहीं इसमें कितना सच है औऱ कितना झूठ.

रुक्मा - कैसी भ्रान्ति?

सुधा - भ्रान्ति ये है राजकुमारी ज़ी कि समर के जन्म के वक़्त लल्ली ताई औऱ शान्ति धुपसिंह के घर पहुंची थी मगर उसके कुछ देर बाद शान्ति अकेले किसी बच्चे को लेकर जंगल की औऱ जाती हुई गाँव के एक बुजुर्ग को दिखाई दी थी.. लोग कहते थे वो बुढ़ा मंदबुद्धि था.. मगर वो बुढ़ा कहता था की उसने सच में शांति को बच्चा लेकर जंगल में जाते हुए देखा था औऱ उस दिन लता ने एक नहीं बल्कि दो बच्चों को जन्म दिया था.. कुछ सालों बाद वो मर गया, उसके कुछ सालों बाद लल्ली ताई भी चल बसी.. अब सिर्फ शान्ति बच्ची है जो बूढ़े को मंदिबुद्धि कहकर ही इस भ्रान्ति को खारिज कर देती है..

रुक्मा - समर इस बारे में क्या कहता है..

सुधा - उसे तो फर्क ही नहीं पड़ता राजकुमारी ज़ी.. वो शान्ति की बात को सही मानकर उस बूढ़े को गलत समझता है...

लीला - रात होने वाली है राजकुमार ज़ी.. लगता है जयसिंह ज़ी ने चाल धीरे करने को कहा है.. आसपास ही अब रात के विश्राम हेतु रुका जाएगा..

रुक्मा - तुमने सही कहा लीला..

****************

समर से राजकुमारी रुकमा को वापस लीवाने की सूचना पाकर लता घर से निकल पड़ती है और जंगल के छोटे-मोटे रास्तों से होती हुई एक सुनसान जगह पहुंचती है जहां कई लोगों ने डेरा डाला हुआ था..

लता उसके पास पहुंचकर पहरेदारी कर रहे एक आदमी से कहती है..

लेता - सरदार से मिलना है.. औऱ इतना कहकर लता अपने घाघरे को ऊंचा करके अपनी गांड पर एक निशान पहरेदार को दिखाती है..

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पहरेदार लता की गांड पर निशान देखकर उसे अपने पीछे पीछे एक गुफा की तरफ ले आता है औऱ बाहर खड़ा होकर कहता है..

पहरेदार - सरदार.. आपकी एक रखैल आपसे मिलने आई है..

गुफा के अंदर गजसिंह किसी वैश्या से अपना लोडा चुसवा रहा था.. औऱ लोडा चुसवाते चुसवाते ही गजसिंह ने पहरेदार से रखैल को अंदर भेजने को कहा..

लेता पर्दा हटाकर गुफा में आगई औऱ वापस पर्दा लगाकर गजसिंह के सामने खड़ी होकर अपने हाथ जोड़कर गजसिंह से बोली..

लता - छोटे हुकुम..

गजसिंह ने अपना लंड चूस रही लड़की को वहा से जाने का इशारा किया औऱ लता से करीब आने का इशारा किया.. लता गजसिंह का इशारा समझ कर उसके करीब आ गयी औऱ उसी जगह बैठ गई जहा लड़की बैठी थी..

गजसिंह अपने करीब रखे मदिरा के प्याले को उठाकर मदिरा पीते हुए - क्या बात है लीलावती.. तू अपने छोटे हुकुम को भूल ही गई.. कितने समय बाद आई है..

लता उर्फ़ लीलावती - आपको कैसे भूल सकती हूँ छोटे हुकुम.. आपने ही तो इस वैश्या को वैश्यालय से निकालकर अपने साथ रखा है.. मेरा नाम लीलावती से लता करके मेरा विवाह धुपसिंह से करवाया ताकि मैं आपको जागीर से जुडी हुई गुप्त सुचना दे सकूँ औऱ आप अपने भाई वीरेंद्र सिंह को हराकर जागीरदार बन सके.. मेरी जैसी कितनी वैश्या को आपने नई जिंदगी दी है छोटे हुकुम.. ये कहकर लता गजसिंह का लोडा मुंह में भरके चूसने लगती है..

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गजसिंह बाल पकड़ कर लंड चुसवाते हुए - समर का क्रोध शांत किया तूने या नहीं.. पिछली बार भी मेरे 4 साथियो को उसने मौत के घाट उतार दिया.. सिर्फ तेरे कहने पर मैंने उसे अब तक जीवित छोड़ा है..

लता मुंह से लंड निकालकर - उसकी रगो में आपका ही खून है छोटे हुकुम.. इतनी आसानी से कैसे ठंडा हो जाएगा.. अब तक उस रात जो हुआ उसे याद करके क्रोध से भर जाता है.. मैंने आपसे कहा था छोटे हुकुम मैं आपके पास जंगल में आ जाउंगी आप यहां कुछमत कीजिये.. मगर आप धुपसिंह से इतने क्रोधित थे कि आपने तो समर के सामने मेरे ही ऊपर चढ़ाई करके मेरे साथ अपनी हवस मिटाइ.. बेचारा अपनी माँ के साथ जो कुछ हुआ उसे नहीं भूल पाया है..

गजसिंह - धुपसिंह ने आखिरी मोके पर मुझे वीरेंद्र को मारकर जागीरदार बनने से रोक दिया था लीलावती.. मैं उस आग में जल रहा था.. मुझे औऱ कुछ नहीं सूझ रहा था.. मैं अपने हाथों से धुपसिंह को मारना चाहता था.. मगर तूने मुझसे वो मौका भी छीन लिया..

लता - मैं क्या करती छोटे हुकुम.. धुप सिंह को मेरे बारे में सब सच पता चल गया था औऱ वो मुझे मारने के लिए हाथों में तलवार उठाने ही वाला था.. मैं अगर उस कटार से धुपसिंह को नहीं मारती तो वो मुझे मार देता.. फिर मैं आपके किसी काम की नहीं रहती.. ना ही आपको कोई औऱ सुचना दे पाती..

गजसिंह लता के बाल पकड़कर - तो बता लीलावती.. इस बार क्या गुप्त सुचना लेकर आई है तू? या फिर इस बार भी मेरे साथ बस रात बिताकर मुझे खुश करने के लिए आई है?

लता मुस्कुराते हुए - सुचना तो बहुत गुप्त है छोटे हुकुम.. मगर पहले आपको मुझसे एक वादा करना होगा..

गजसिंह - केसा वादा लीलावती..

लता (लीलावती) - आप समर को कुछ नहीं करेंगे.. औऱ उसके प्राण बक्श देंगे..

गजसिंह - ये वादा मैंने पहले भी तुझसे किया है औऱ वापस करता हूँ लीलावती.. तू जानती है गजसिंह अपने वादे का कितना पक्का है.. अब बता क्या गुप्त सुचना है..

लता (लीलावती) - जागीरदार ने राजकुमारी रुक्मा को गढ़ से लिवाने के लिए एक 40 सैनिको की टुकड़ी भेजी है..

जागीरदार - इतना तो मुझे मेरा पहरेदार भी बता सकता है लीलावती.. कुछ औऱ बताना हो तो कहो..

लता (लीलावती) - मगर हर बार आप नाकाम रहे है छोटे हुकुम.. इस बार मुझे उनके वापसी के रास्ते का भी पता है..

गजसिंह - इतनी गोपनीय सुचना तुझे कैसे मिली लीलावती..

लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. समर ने जाने से पहले मुझसे बात कर रहा था.. मैंने बातों बातों में उससे ये सुचना उगलवा ली.. वो लोग वापसी में पहाड़ी की तल्हाटी वाले रास्ते से आएंगे.. छोटे हुकुम आप राजकुमारी को वहा से अगुवा कर वीरेंद्र सिंह से जागीरदारी छीन सकते है.. राजकुमारी को अगुवा कर आप सभी सैनिको को ख़त्म कर सकते है किन्तु समर को जीवित जाने देंगे..

गजसिंह लता के चुचे पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए - वाह.. लीलावती आज तूने सिद्ध कर दिया कि तू मेरी असली रखैल है.. जब मैं जागीरदार बन जाऊँगा तब तुझे महल में साथ रखूँगा..

लता - आराम से छोटे हुकुम.. चोली फट जायेगी..

गजसिंह चोली फाड़कर उसका घाघरा खोल देता है औऱ लता को नंगा करके अपने नीचे लेटा कर उसकी चुत में अपना लोडा डालकर लता को चोदने लगता है..

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गजसिंह - लीलावती तेरी योनि तो आज बहुत मज़ा दे रही है मुझे..

लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. आठ माह हो गया.. पिछली बार भी आपने ही मुझे अपने नीचे लेटाया था.. तब से अब तक किसीने मेरे साथ कुछ नहीं किया..

गजसिंह लता को पीठ के बल लेटाते हुए - लीलावती तू अब वैश्या नहीं लगती.. ऐसा लगता है सच में किसी घर कि घरेलु औरत है..

लता (लीलावती) - ये आपका बड़प्पन है छोटे हुकुम.. मुझे वैश्या को इतना सम्मान देने के लिए..

गजसिंह पैर फैलाकर लता को चोदते हुए - समर को समझा लीलावती.. अपनी हठ छोड़ दे.. मैं बार बार उसके प्राण नहीं बक्शऊँगा.. उसने अब तक मेरे 26 आदमी मार दिए औऱ मैं बस तेरे कारण हर बार उसे माफ़ कर देता हूँ..

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लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. समर मुझ वैश्या की कोख से पैदा हुआ है तो क्या हुआ.. है तो आपका अपना खून.. आपने एक बेटे के सामने उसकी माँ का चीरहरण किया था.. वो कैसे ये सब भूल जाएगा.. पर छोटे हुकुम मैं आपसे वादा करती हूँ.. मैं जल्द ही समर को लेके यहां से दूर चली जाउंगी.. औऱ जब आप जागीरदार बन जाएंगे तब समर को किसी भी तरह समझाकर मना लुंगी..

गजसिंह लता को घोड़ी बनाकर चोदता हुआ - ठीक है लीलावती.. इस बार मैं नहीं चुकने वाला.. वीरेंद्र से जागीरदारी छीनकर ही रहूँगा..

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गजसिंह लता को चोदकर उसकी चुत से लोडा निकालकर उसके बदन पर अपना माल झाड़ते हुए गुफा से बाहर आ गया औऱ लता अपनी फ़टी हुई चोली औऱ घाघरा पहन कर रात के अँधेरे में छुपते छुपाते अपने घर वापस आ गई..

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वीरेंद्र सिंह - आओ बैरागी.. इतनी सुबह बुलवा लिया तुम्हे.. तुम्हारी नींद में विघ्न पड़ा होगा..

बैरागी - मुझे रातों में नींद नहीं आती हुकुम.. मैं तो बस अपने प्रियतम से ही बात करके अपनी राते गुज़ारता हूँ.. कहिये आपने जिस उद्देश्य से मुझे बुलवाया है उसका क्या प्रयोजन है? मैं आपके क्या काम आ सकता हूँ?

वीरेंद्र सिंह - तुम अच्छे से जानते हो बैरागी मैं तुमसे क्या चाहता हूँ.. फिर भी तुम मुझसे पूछ रहे हो तो मैं वापस तुम्हे बता दू.. मेरे डर औऱ चिंता को दूर करो बैरागी..

बैरागी - मैंने आपसे पहले भी कहा था हुकुम.. आपका डर केवल आपके मन की उपज मात्र है जिसे आप स्वम ही ठीक जर सकते है..

वीरेंद्र सिंह - अगर मेरे बस में होता तो मैं कई सालों से इस तरह बावरा बनकर अपना उपचार नहीं कर रहा होता बैरागी.. तुम कोई ना कोई उपाय तो जरूर जानते होंगे.. मुझे तुम्हारी क़ाबिलियत का अनुमान है.. तुम बस मुझे मेरा उपचार बताना नहीं चाहते..

बैरागी - ऐसा नहीं है हुकुम.. प्रकृति ने सब बहुत सोच समझ कर बनाया है.. उसके नियम हमारे नियमो से बहुत ऊपर है.. उसके साथ हेरफेर करना प्रकृति की संरचना को ललकारने जैसा है.. इसमें किसी का हित नहीं है हुकुम..

वीरेंद्र सिंह - बैरागी मुझे उपदेश नहीं उपचार चाहिए.. मैं तुम्हे जो भी चाहिए दे सकता हूँ.. हर वो पौधा जो इस जमीन पर वरदान बनकर उगा है, भले ही किसी किस्म का हो मेरे पास उपलब्ध है..

बैरागी - इस जमीन पर उगने वाली औषधि का समस्त भण्डार आपके पास होना.. ये तो बहुत विचित्र बात है हुकुम..

वीरेंद्र सिंह -चलो बैरागी मैं तुम्हे महल का वो हिस्सा दिखाता हूँ जो सिर्फ मेरे लिए ही सिमित है.. औऱ तुम्हारा संशय अभी दूर किये देता है..

बैरागी - अगर ऐसा है तो मैं भी आपके साथ उस हिस्से को देखने के लिए उत्सुक हूँ हुकुम..

वीरेंद्र सिंह बैरागी को अपने साथ महल के बीच एक हिस्से में ले आते है जहा किसी को आने की अनुमति नहीं थी औऱ एक बड़े से जमीनी हिस्से पर उगे हुए पौधे औऱ जड़ो को दिखाता हुआ बैरागी से कहता है..

वीरेंद्र सिंह - लो बैरागी.. देख लो अपनी आँखों से.. यहां 5 सो से ज्यादा अलग अलग किस्म के पौधे है जो किसी ना उपचार में काम आते है.. सबकी अपनी पहचान है.. मैं तो कुछ पौधों के बारे में ही जान पाया हूँ अभी तक..

बैरागी - राजा महाराजा जागीरदार ठिकानेदार सब धन दौलत सम्पति अर्जित करते है औऱ उन्हें पहरे में रखते है.. पर आपने तो इन पौधों को पहरे में रखा हुआ है..

वीरेंद्र सिंह - धन से ज्यादा जरुरी देह होती है बैरागी.. तुझे जिस किसी औषधि औऱ पौधे की जरुरत है तू यहां से ले जा सकता है मगर मेरा भय ख़त्म होने के पश्चात..

बैरागी - आपका भय मृत्यु से जन्मा है हुकुम...

वीरेंद्र सिंह - तो कुछ ऐसा प्रबंध कर कि मेरी मृत्यु कभी हो ही ना बैरागी..

बैरागी - धरती पर अमर तो ईश्वर भी नहीं रहे हुकुम.. उन्होंने भी प्रकृति के नियम नहीं बदले..

वीरेंद्र सिंह - जो ईश्वर नहीं कर पाए उसे मैं करना चाहता हूँ बैरागी.. मैं मरना नहीं चाहता.. हमेशा अमर रहना चाहता हूँ.. अगर तू मेरी मदद कर दे तो.. मैं इस जगह को तुझे सौंप दूंगा.. फिर तू इन पौधों औऱ औषधियौ से किसी भी उपचार की दवा बनाकर अपने उद्देश्य में सफलता पास सकता है..

बैरागी उस जगह उगे हुए पौधे औऱ औषधियों को देखकर - ठीक है हुकुम.. अगर आपकी यही शर्त है तो मुझे मंज़ूर है.. मैंने जो कुछ भी सीखा औऱ पाया है उससे मैं आपका ये भय दूर कर दूंगा..

वीरेंद्र सिंह मुस्कुराते हुए - अब तुमने मेरे ह्रदय को जितने वाले मधुर शब्द बोले है बैरागी.. आज से ये जगह तुम्हारी.. तुम्हे जो कुछ चाहिए पहरेदार लाकर देगा.. बस जल्दी से मुझे अमर कर दो..

बैरागी उस जगह पर घूमते हुए - सवान की पहली बारिश जब दूर पश्चिम की रेतीली जमीन पर गिरती है तो उस रेतीली जमीन से एक अलग किस्म की पिली खरपतवार निकलती है. जिसकी जड़ में सफ़ेद दानेदार बेल भी लगती है.. अगर वो बेल उगने के 3 दिवस में मुझे मिल जाए तो मैं आपको अपके जीवन से 11 गुनाह लम्बे समय तक जीवित रख सकता हूँ..

वीरेंद्र सिंह - सावन की पहली बारिश तो कभी भी बरस सकती है बैरागी.

बैरागी - फिर तो आपको देर नहीं करनी चाहिए हुकुम.. इस वक़्त पश्चिम के लिए किसी सैनिक को भेजना चाहिए..

वीरेंद्र सिंह उस जगह से बाहर जाते हुए - मैं अभी कुछ सैनिकों को इस काम के लिए भेजता हूँ वैरागी..

***********

कुछ देर बाद जागीर की सीमा पर पहुंचकर जयसिंह के इशारे पर सभी लोग पहाड़ी की तल्हाटी में एक समतल जगह देखकर घोड़ा गाडी औऱ बाकी की बैलगाड़ी रोक देते है औऱ घुड़सवार सैनिक भी घोड़े से नीचे उतर कर अपना घोड़ा खुटा गाड के बाँध देते है समर भी यही करता है.. सभी साथ लाये भोजन को ही खाने लगते है.. रुक्मा भी भोजन करने लगती है औऱ उसकी दोनों दासिया भी रुक्मा के कहने पर उसीके साथ बैठकर भोजन करती है..

खाना खाने के बाद लगभग आधे लोग पहरेदारी के लिए तैनात हो जाते है बाकी के आधे आराम करते है..

रात आधी बीत चुकी थी औऱ अब पहरेदार बदल चुके थे जो लोग अब तक आराम कर रहे थे वो लोग अब पहरेदारी करने लगे थे औऱ जो अब तक पहरेदारी कर रहे थे वो लोग आराम के लिए लेट गए थे..

समर खाना खाने के बाद लगातार एक पत्थर पर जलती हुई आग के सामने बैठकर किसी ख्याल में घूम था.. उसकी आँखों में नींद नहीं थी औऱ नींद तो रुक्मा की आँखों में भी नहीं थी.. रुक्मा अपना दिल समर पर हार चुकी थी.. रुक्मा ने दिन के हादसे के बाद से समर से अपनी नज़र नहीं हटाइ थी औऱ अब वो समर को ही देखे जा रही थी..

लाली औऱ सुधा दोनों को नींद आ चुकी थी.. आधी रात से ज्यादा का समय हो चूका था..

पहाड़ी के पीछे से गजसिंह डाकुओ के मुखिया कर्मा के साथ जयसिंह के इस काफ़िले को देख रहा था जो इस वक़्त रुका हुआ था..

कर्मा - अब किस बात की प्रतीक्षा सरदार.. मुट्ठी भर सैनिक ही तो है.. चलिए रोंध देते है इन सबको औऱ राजकुमारी का अपहरण कर लेते है.. उसके बाद तो वीरेंद्र सिंह अपने हथियार त्याग ही देगा..

गजसिंह - अभी नहीं कर्मा.. हमला सूरज की पहली किरण निकलने के साथ होगा.. इस अँधेरे में अगर कहीं रुक्मा को हानि होती है तो इस हमले का कोई मतलब नहीं रह जाएगा..

कर्मा - मगर सरदार सुबह की पहली किरण पर तो सभी सैनिक फिर से पहरे पर होंगे.. अभी आधे सैनिक नींद में है..

गजसिंह - तुझे कितने सैनिक दिखाई देते है कर्मा?

कर्मा - आग की रौशनी में देखने से लगता है लगभग 20 होंगे सरदार.. औऱ इतने ही सैनिक सोये हुए लगते है..

गजसिंह - तो क्या तुझे लगता है की हमारे 200 लोगो का मुकाबला ये 40 लोग कर सकते है?

कर्मा - वो बात नहीं है सरदार मुझे इस जयसिंह का डर है.. पिछली बार जब भिड़ंत हुई थी इसने अकेले ही मेरे बारह आदमियों को मार गिराया था.. बहुत सख्त जान है..

गजसिंह - इस जयसिंह का मुक़ाबला मुझसे होगा कर्मा.. मैं खुद जयसिंह को हराकर उसके अभिमान को परों से कुचल दूंगा.. तू अपने सभी आदमियों को समझा दे.. राजकुमारी रुक्मा औऱ उस आग के पास बैठे योद्धा समर को एक भी खरोच नही आनी चाहिए..

कर्मा - उस योद्धा को क्यों सरदार..

गजसिंह - कर्मा अभी ये तेरे जानने का समय नहीं है.. तू बस तेरे हर आदमी को ये समझा दे.. उन दोनों में से किसी को भी कुछ नहीं होना चाहिए.. औऱ सब सूरज की पहली किरण पर मेरे इशारे पर एक साथ हमला करेंगे..

कर्मा - जैसा आप कहे सरदार..

गजसिंह ने अपने बागियो औऱ कर्मा ने अपनी डाकुओ से राजकुमारी रुक्मा औऱ समर को छोड़कर सभी को जान से मार डालने का आदेश सुना दिया औऱ हमले के लिए त्यार रहने को कहा..

भोर होने में बहुत थोड़ा समय था गजसिंह का हमला होने वाला था.. समर आँख कुछ पल के लिए लगी थी जो अपने आसपास किसी के होने की आहट पाकर खुल गई थी.. समर ने देखा की राजकुमारी रुक्मा उसके समीप खड़ी हुई उसे देख रही थी..

समर झट से उठकर सर झुकाते हुए - राजकुमारी..

रुक्मा - बहुत कच्ची नींद है तुम्हारी.. राजकुमार.. रातभर इस पत्थर पर बैठकर पहरेदारी करते रहे औऱ कुछ पल आँख लगी तो मेरी आहट पर तुरंत ही नींद भी टूट गई..

समर - मैं कोई राजकुमार नहीं हूँ राजकुमारी.. बस एक साधारण सैनिक हूँ..

रुक्मा समर के थोड़ा नजदीक आकर - मुझे पता है तुम कौन हो.. मैंने तुम्हे उस नाम से बुलाया है जो मैं तुम्हे बनाना चाहती हूँ.. अब से तुम मेरे पहरेदार हो.. अब से मेरी अंतिम सांस तक मेरी रक्षा तुम्हारी जिम्मेदारी है.. मेरे प्राण बचाने के लिए आभार.. तुम्हारी बहादुरी औऱ सुंदरता मेरे मन को भा गई है..

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समर - राजकुमारी.. ये आप क्या कह रही है.. जीवनभर आपकी रक्षा मेरे जिम्मेदारी? मैं एक साधारण योद्धा हूँ.. सूर्यउदय होने वाला है.. आपको वापस जाकर अपनी दासियों के साथ बैठना चाहिए..

रुक्मा - मुझे तुमसे प्रेम हो गया है राजकुमार.. अपनी राजकुमारी की रक्षा तो अब तुम्हे ही करनी पड़ेगी..

जयसिंह - क्या हुआ राजकुमारी.. कोई गलती हो गई इस योद्धा से?

रुक्मा - नहीं.. काका.. मैं तो बस कल मेरे प्राण बचाने के लिए आभार कहने आई थी.. औऱ अपनी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध करने..

जयसिंह - आपकी रक्षा के लिए तो सभी प्रतिबद्ध है राजकुमारी.. महल तक आपको सकुशल पंहुचा कर ही हम चैन से बैठेंगे.. भोर होने वाली सूरज की पहली किरण के साथ महल की औऱ आगे बढ़ेंगे.. आप जाकर घोड़ागाड़ी मैं बैठ जाइये..

रुक्मा - जैसा आप कहे.. काका..

पहली किरण के साथ ही चारो तरफ से गजसिंह कर्मा के साथ मिलकर काफ़िले पर हमला कर देता है औऱ जयसिंह अपने सैनिको के साथ गजसिंह औऱ कर्मा के साथ उनके लोगों से मुक़ाबला करने लगता है.. समर अपनी जगह छोड़कर रुक्मा के करीब आ जाता है औऱ रुक्मा के करीब आने वाले हर सैनिक को अपनी तलवार के एक ही वार से काट कर मार डालता है..

जयसिंह के साथ 40 लोग थे औऱ गजसिंह के साथ दो सो.. मगर फिर भी मुक़ाबला कड़ा हो रहा था.. जयसिंह के 22 आदमी मर चुके थे मगर अब तक गजसिंह भी अपने 90 से ज्यादा आदमी खो चूका था.. जयसिंह ने अकेलेपन ही 30 से ज्यादा आदमियों को मार गिराया था औऱ समर भी अब तक 22 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चूका था.. गजसिंह औऱ कर्मा का जो भी साथी रुक्मा की तरफ बढ़ता समर अपनी तलवार से उसके प्राण हरण कर लेता.. गजसिंह के कहे अनुसार उसके औऱ कर्मा के किसी भी साथी ने समर पर हमला नहीं किया जिसकी कीमत उन सबको अपनी जान देकर चुकानी पड़ी..

देखते ही देखते.. लाशों का जमघट लग गया औऱ औऱ उस स्थान पर रक्त ही रक्त बिखरा हुआ नज़र आने लगा.. आखिर में घोड़ागाड़ी में बैठी रुक्मा औऱ उसकी दासिया के अलावा जयसिंह औऱ समर ही जिन्दा बचे रह गए.. वही गजसिंह की तरफ से गजसिंह औऱ कर्मा के साथ उनके 3 औऱ साथी ज़िंदा बचे रह गए थे.. बाकी सब जमीन पर अपनी जान गवा कर पड़े हुए थे..

समर के सामने जैसे ही गजसिंह का चेहरा आया वो क्रोध से भर गया औऱ गजसिंह की तरफ भागते हुए उस पर हमला कर दिया.. गजसिंह इस हमले से बच गया लेकिन उसके दो साथी जो इस हमले को रोकने के लिए बीच में आये थे उनको जान गवाना पड़ा..

गजसिंह औऱ कर्मा अब पीछे हट गये थे औऱ मुड़कर घोड़े पर बैठकर भागने लगे..

समर का सर गजसिंह का चेहरा देखकर क्रोध औऱ बदले की अग्नि से फटा जा रहा था.. समर ने भी अपने घोड़े की लगाम खींची औऱ उस पर बैठकर गजसिंह का पीछा करने लगा..

जयसिंह भयानक रूप से घायल हो चूका था मगरफ़िर भी उसने आखिर में बचे गजसिंह के एक आखिरी साथी को मार गिराया और खुद भी उसके वार से जमीन पर गिरकर लहूलुहान हो गया..

समर गजसिंह का पीछा करते हुए पहाड़ी के दूसरी तरफ आ गया जहा से खाई शुरू होती थी. समर ने कर्मा डाकू को अपनी तलवार के एक ही वार से मार डाला.. पहाड़ी पर आगे रास्ता ख़त्म हो चूका था भागने की जगह नहीं थी.. औऱ समर अब गजसिंह के सामने खड़ा था..

गजसिंह घोड़े से उतर कर - बहुत बड़ी गलती की मैंने तुझे ज़िंदा छोड़कर.. मुझे अगर पता होता की तू आज मेरा जागीरदार बनने का सपना चकनाचूर कर देगा तो मैं पहले ही तुझे मार डालता..

समर - गलती तो तूने की गजसिंह.. मगर मुझे ज़िंदा छोड़कर नहीं बल्कि मेरे पिता को मारके औऱ मेरी माँ का अपमान करके..

गजसिंह जोर से हसते हुए - तेरा पिता? कौन तेरा पिता समर? वो धुपसिंह? अरे वो तेरा पिता नहीं था.. तेरा पिता तेरे सामने खडा है.. औऱ कोनसे अपमान की बात कर रहा है तू? तेरी माँ का अपमान? अरे उसको मैं तब से जानता हूँ जब तू इस धरती पर आया भी नहीं था.. दिल्ली के एक वैश्यालय में वैश्यवर्ती करती थी तेरी माँ.. औऱ सिर्फ तेरी माँ ही नहीं औऱ भी कई औरतों को मैंने उस वैश्यालय से खरीद कर उनका विवाह वीरेंद्र सिंह की रक्षा में तैनात सैनिको से करवाया था ताकि मुझे उन वैश्याओं से वीरेंद्र के बारे में गुप्त सुचना मिलती रहे..

समर - अपनी मौत को सामने देखकर कहानी बना रहा है गजसिंह.. मगर आज मैं अपनी तलवार से तेरा सर काटकर अपने पिता की मौत का बदला जरूर लूंगा..

गजसिंह हसते हुए - कितनी बार कहु तुझे.. तेरा बाप धुपसिंह मैं हूँ.. यकीन ना हो तो जाकर पूछ ले अपनी माँ से.. जिसे वैश्यालय की लीलावती से साधारण घरेलु लता बनाकर मैंने धुपसिंह से विवाह करवाया था. औऱ धुपसिंह की हत्या मैंने नहीं बल्कि तेरी माँ लीलावती ने अपने हाथों से की थी.. क्युकी धुपसिंह लीलावती के वैश्या होने रहस्य औऱ उसके कूल्हे पर मेरी निशानी का अर्थ वो जान गया था..

समर क्रोध से - चुपकर गजसिंह.. तुझे क्या लगता है मैं तेरी इन बातों पर विश्वास कर लूंगा? औऱ तू मुझे मुर्ख बनाकर यहां से निकल जाएगा? आज तेरा बचना संभव नहीं है गजसिंह..

गजसिंह अपने बाजू पर बनी निशानी दिखाते हुए - अगर मेरी बात पर विश्वास नहीं है तो जा औऱ जाकर अपनी माँ के दाए कूल्हे को देख.. ऐसी ही एक निशानी तुझे तेरी माँ के दाए कूल्हे पर भी दिखाई देगी जो मेरी हर बात सही सिद्ध कर देगी कि तेरी माँ मेरी रखैल है.. तुझे औऱ एक बात बताऊ? राजकुमारी को जयसिंह किस रास्ते से वापस जागीर ला रहा है ये गुप्त सुचना भी तेरी माँ ही मुझे देने आई थी.. औऱ जब आई थी तो सुचना के साथ अपना रूप औऱ जोबन भी देकर गई थी मुझे.. जिसके निशान उसकी छाती औऱ गले पर अब तक होंगे जा जाकर देख.. बदले में तुझे ज़िंदा छोड़ने वादा लिया था उसने मुझसे, इसिलए आज मेरे किसी आदमी ने तेरे ऊपर प्रहार नहीं किया.. राजकुमारी को किस गुप्त रास्ते से लाया जा रहा है.. तूने ही लीलावती को बताया था ना इस बारे में? लाल घाघरा चोली पहनी थी ना तेरी माँ ने उस दिन? अब भी कहेगा की मैं मनगढंत बात बना रहा हूँ? अरे तुझे तो उस रात से लेकर अब तक कई बार लीलावती मेरे हाथों मरने से बचा चुकी है.. कभी सोचा तूने कि मेरे इतने साथी मारे पर मैं कभी तुझे मारने क्यों नहीं आया? क्युकी तेरे अंदर मेरा भी खून है औऱ मैंने लीलावती से वादा किया तुझे ना मारने का..

समर का मन उथल पुथल था - गजसिंह.. अगर तेरी बातें सच हुई तो भी क्या मैं तुझे यहाँ से जीवित जाने दूंगा?

गजसिंह - मुझे मारकर तुझे कुछ हांसिल नहीं होने वाला समर.. वीरेंद्र सिंह पूछेगा भी नहीं तुझे.. उसके लिए तू बस एक प्यादा है जिसके होने या ना होने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता.. मेरी बात मान जा समर.. मुझे रुक्मा का हरण करने दे.. मैं वीरेंद्र सिंह को जागीरदारी से हटाकर खुद जागीरदारी संभाल लूंगा औऱ फिर तुझे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दूंगा.. तू जानता मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं है..

समर आगे बढ़ते हुए - बात अगर वीरेंद्र सिंह की होती तो शायद में अपना मन बदलने के बारे में सोचता.. मगर गजसिंह तूने ये कैसे सोच लिया कि मैं तुझे राजकुमारी रुक्मा का हरण करने दूंगा..

इतना कहकर समर ने गजसिंह का सर अपनी तलवार से काट दिया औऱ गजसिंह का सर लेकर वापस उसी जगह आ गया जहा गजसिंह औऱ जयसिंह के बीच लड़ाई हुई थी..

समर जब वापस आया तो उसने देखा कि जयसिंह पत्थर का सहारा लेकर बैठा हुआ है औऱ रुक्मा औऱ उसकी दासिया जयसिंह के जख्मो पर कपड़ा बाँध रही है..

समर ने गजसिंह का सर एक कपडे में लपेटकर घोड़ागाड़ी पर लटका लिया औऱ जयसिंह को घोड़ागाड़ी पर लादकर राजकुमारी रुक्मा औऱ उसकी दासियों से वापस घोड़ागाड़ी में बैठने को कहा.. फिर खुद उस घोड़ागाडी को चलाकर जागीर की सीमा पर तैनात सिपाहीयों तक ले आया.. जहा समर ने तैनात सैनिको को सुबह हुई लड़ाई के बारे में बताया औऱ जयसिंह के प्राथमिक उपचार का कार्य किया.. औऱ कुछ सैनिको को वहा जाकर पड़ी हुई लाशों को लाने का कहा औऱ स्वम राजकुमारी रुक्मा औऱ उसकी दासियो को लेकर सीमा पर तैनात कुछ सैनिको को साथ लेकर सांझ होने तक महल आ पंहुचा..

महल पहुंचने पर वहा के सैनिको ने जयसिंह को घोड़ागाड़ी से उतरा औऱ वैध के पास ले गए.. रुक्मा समर को मुस्कुराते हुए एक नज़र देखकर महल में चली गई औऱ बाकी सैनिक वापस सीमा की तरफ चले गए..

समर घोड़ागाड़ी महल में छोड़कर गजसिंह का सर लेकर महल से चला गया.. उसने किसी से भी कर्मा औऱ गजसिंह की मौत की बात नहीं की थी..


वीरेंद्र सिंह को जब इसका पता चला तो वो क्रोध में आग बबूला हो गया औऱ अपने सैनिको से हर जगह गजसिंह औऱ डाकुओ के मुखिया कर्मा को ढूंढने औऱ उसके ठिकानो का पता लगाने का आदेश सुना दिया वही खुद भी इस काम को करने के लिए महल से निकलने लगा पर सुजाता के समझाने पर रुक गया..
 
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