Incest चीरहरण (Completed) - Page 6 - SexBaba
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Incest चीरहरण (Completed)

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हैप्पी नई ईयर ❤️
 
अपडेट 40

गौतम की जब आँख खुली तो उसने देखा कि उसकी मां सुमन उसके पैरों के पास बैठकर उसके लोडे को अपने मुंह में रखकर चूस रही थी और बड़े प्यार से उसके अंडकोष को हाथों से सहलाती हुई लोडे को मुंह में लेकर बार-बार ऊपर नीचे करती हुई चूसे जा रही थी..
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सुमन को देखने ऐसा लगता था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर आई है.. और ब्लाउज पेटीकोट पहन कर इसी काम को अंजाम देने में लग गई है..

सुमन के बाल गीले थे जिसे उसने अपने हाथों से ऐसे ही बाँध दिया था..

गौतम ने अपना हाथ ले जाकर सुमन के सर पर रख दिया और प्यार से दो-चार बार अपनी माँ सुमन के सर पर हाथ फेरकर उसके गीले बाल जो सुमन ने बांध रखे थे उनको खोल दिया जिससे सुमन के बाल लहरा गए और खुलकर बिखर गए..

सुमन औऱ गौतम की नजर आपस में मिली तो दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा पड़े और प्यार से मुस्कुराते हुए आँखों ही आंखों में एक दूसरे से बात करने लगे.. दोनों ही आंखों की भाषा समझने में समर्थ थे..

गौतम ने प्यार से अपना लंड चुस्ती अपनी माँ सुमन से कहा - गुडमॉर्निंग माँ..

सुमन ने लोडा मुंह से निकाल कर कहा - गुडमॉर्निंग मेरे शहजादे.. बेड के सराहने चाय रखी है पिले..

गौतम थोड़ा पीछे होकर बेड का सहारा लेकर बैठ गया औऱ मुस्कुराते हुए बोला - आज क्या बात है माँ.. छोटे ग़ुगु इतनी सेवा?

सुमन भी थोड़ा आगे आकर बैठते हुए - क्यों सिर्फ तू ही मेरी सेवा कर सकता है? औऱ फिर से लंड मुंह में लेकर गौतम को देखते हुए चूसने लगी..

गौतम ने चाय की दो-तीन चुस्की ली और फिर सिगरेट उठाकर लाइटर से जलाकर पहला कश लेते हुए सुमन को देखकर कहा - मुंह में ही लेती रहोगी या कभी चुत में भी लोगी माँ? रात को तैयार हो गई थी लेने के लिए.. अब कहो.. लोगी चुत में?

सुमन लोडा मुह से निकालकर हाथ से लंड हिलाते हुए - रात को जो तूने मुझे हद पार करने से बचा लिया उसी का इनाम है ये.. मेरे शहजादे.. कल तो बहुत ज्यादा शराब पी ली थी.. अभी भी हल्का सा सर दर्द है..

गौतम कश लेकर सिगरेट सुमन को देकर चाय पीते हुए - मैंने तो रोका था आप ही नहीं मानी..

सुमन सिगरेट का कश लेकर - कल तेरे ऊपर हद से ज्यादा प्यार आ रहा था.. इसलिए बहक गई थी..

गौतम - अच्छा अब नहीं आ रहा?

सुमन - अब थोड़ा कम आ रहा है..

ये कहकर वापस सिगरेट का कश लेकर लंड मुंह में लेकर चूसने लगी..

गौतम सुमन से सिगरेट लेकर पीता हुआ अपनी माँ सुमन के बाल पकड़ कर प्यार से उसे अपना लंड चूसाने लगा..

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कुछ ही देर में सुमन ने गौतम के लंड से अपने मुंह में वीर्य निकलवा लिया औऱ घट करके पी गई फिर लंड को चूसके साफ करती हुई बेड से खड़ी हो गई..

सुमन - नहा ले शहजादे.. आज बाबाजी के पास चलना है.. याद है ना..

गौतम - माँ..

सुमन - हम्म?

गौतम अपने फ़ोन में रूपा औऱ जगमोहन की पिक दिखा कर - पापा ने रूपा से शादी कर ली..

सुमन ये देखकर गुस्से से - लंड मुरझाये हुए पेड़ पर बेल की जैसे लटक रहा है औऱ शादी पर शादी किये जा रहा है हराम का जना.. नामर्द कहीं का..

गौतम हसते हुए - आपको गाली देना भी आता है?

सुमन - गाली नहीं दू क्या करू? औऱ ये रूपा.. मिलेगी तो इसे भी बताऊंगी मैं.. उस उजड़े हुए म्यार में क्या देख लिया उसने जो शादी कर बैठी..

गौतम - माँ सुना है अब रूपा औऱ माधुरी अब साथ रहती है..

सुमन गुस्से से - साथ रहे या चुत से चुत रगड़ के सोये मेरी बला से.. मुझे क्या? मुझे दोनों दिख गई ना तो खैर नहीं उनकी.. छोड़.. तू नहा ले.. बाबाजी के चलते है..

गौतम खड़ा होकर - माँ.. वहा रूपा औऱ माधुरी भी आ सकती है..

सुमन गुस्से से - तूने रूपा से बात की?

गौतम - अब तक नहीं.. पर क्या पता करनी पड़े?

सुमन - तू उन दोनों से बात नहीं करेगा.. समझा?

गौतम - पर वो करेंगी तो?

सुमन - वो सब मैं नहीं जानती.. मुझे मालूम है वो क्या चाहती है.. वो दोनों मिलके भी तुझे मुझसे नहीं छीन सकती..

गौतम - मुझे आपसे कोई नहीं छीन रहा माँ.. औऱ छोड़ दो ना ये गुस्सा.. मैं आप तीनो का ख्याल रख सकता हूँ.. आप तीनो आपस में बहन बनकर भी तो रह सकते हो.. हमें इस छोटे से पुलिस क्वाटर से भी आजादी मिल जायेगी..

सुमन - मुझे नहीं चाहिए आजादी.. मैं पूरी जिंदगी यहां तेरे साथ बिता लुंगी.. मगर घर की लालच में तेरा सौदा नहीं करुँगी..

गौतम - ये सौदा थोड़ी है माँ.. आप समझो ना.. देखो हम साथ में खुश रह सकते है औऱ मैं वादा करता हूँ की छोटी माँ औऱ मम्मी से आपको कोई परेशानी नहीं होगी.. मैं उनको अच्छे से समझा दूंगा कि आपको बड़ी बहन मानकर ही बात करें..

सुमन अपना पेटीकोट ऊपर करके पेंटी उतारकर फेंकती हुई बेड पर टांग चौड़ी करके लेट जाती है औऱ अपनी चुत खोलके गौतम से कहती है - तुझे मेरी चुत चाहिए ना.. ले आजा मारले मेरी चुत.. मैं नहीं रोकती तुझे.. मगर उन दोनों के साथ रहने के लिए मुझे मत मना..

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गौतम मुस्कुराते हुए पेंटी उठाता है औऱ अपनी माँ सुमन को पहनाते हुए कहता है - आप ना बहुत भोली हो माँ.. अरे वो दोनों मेरी कनिज़ बनकर पड़ी रहेंगी.. आप तो इस शहजादे की शहजादी बनकर रहना.. हफ्ते में एक - दो बार उसकी चुदाई कर भी दू तो क्या बुरा है.. फुल टाइम रहूँगा तो आपके साथ ही..

सुमन कुछ देर सोचकर - नहीं गौतम.. मुझे नहीं रहना वहा उनके साथ..

गौतम - अच्छा ठीक है.. जैसा आप बोलो.. मैं अब कुछ नहीं बोलूंगा आपको.. नहाने जा रहा हूँ नाश्ता बना दो..

गौतम समझ गया था किसी मां के मन में अब उथल-पुथल मच चुकी है.. वह कहीं ना कहीं उसके प्रस्ताव को स्वीकार करने से कुछ ही दूरी पर है.. और अब सिर्फ उसके मन को थोड़ा सा खींचने की जरूरत है और सुमन उसकी बातों पर हामी भर सकती है मगर सुमन का मन साफ साफ उसे कह रहा था की वो गौतम को रूपा औऱ माधुरी से दूर ही रखेगी...

गौतम नहाकर वापस आया तो सुमन उसके कपड़े निकल चुकी थी जिसे गौतम पहनकर रसोई की तरफ आ गया और सुमन से बोला - माँ क्या बनाया है?

सुमन - सैंडविच है.. बस बन ही गए..

गौतम - साडी क्यों नहीं पहनी? वैसे इस गुलाबी सलवार सूट में भी कयामत लग रही हो माँ.. बहुत प्यारी लग रही हो इसमें..

सुमन - लो खा लो.. औऱ तारिक़ के लिए thanks लेकिन मैं अपना मन नहीं बदलने वाली..

गौतम सैंडविच खाते हुए - आपकी मर्ज़ी.. मैं कोनसा कह रहा हूँ..

सुमन भी नाश्ता करने लगती है.. औऱ दोनों फिर घर से बाबाजी के चल देते है..

सुमन बाइक पर गौतम के पीछे उसे दोनों हाथों से जकड़ कर अपना सारा बदन गौतम के बदन से चिपकाये बैठी थी जैसे गौतम उसका बेटा नहीं बॉयफ्रेंड हो.. औऱ बार बार अपने होंठों से गौतम को कान चूमते हुए दांतो से खींच रही थी..

गौतम - माँ इतना मत प्यार करो वरना बाबाजी के जगह आपको किसी oyo में लेजाकर पटक दूंगा..

सुमन हसते हुए - चल पागल.. मैं तो बस मेरे ग़ुगु को खुश करना चाहती हूँ.. तू नहीं चाहता तो रहने देती हूँ..

गौतम - जो करना है कर लो माँ.. मैं कुछ नहीं कहता..

सुमन औऱ गौतम कुछ देर बाद पहाड़ी के नीचे बरगद के पास आकर रुक जाते है औऱ गौतम बाइक खड़ी करके सुमन के साथ सीढ़ियों की तरफ चल देता है जहा से गौतम थोड़ा दूर करीम के ऑटो रिक्शा को देखकर पहचान लेता है औऱ रुक जाता है..

सुमन - क्या हुआ बेटा? रुक क्यों गया?

गौतम - माँ आप जाओ मैं आता हूँ..

सुमन - पर क्यों तू भी चल ऊपर..

गौतम - माँ मुझे सिगरेट की तलब लगी है.. समझो ना.. मैं पीकर आता हूँ आप जाओ..

सुमन - अच्छा ठीक है.. सिर्फ एक ही पीना ज्यादा नहीं..

गौतम - ok माँ..

सुमन ऊपर जाने लगती है औऱ गौतम चुपके से करीम के ऑटोरिक्शा की तरफ बढ़ जाता है..

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गौतम जैसे ही रिक्शा के साइड में लगा पर्दा हटाता है तो उसे रिक्शा में रूपा के साथ माधुरी भी दिखाई देती है..

माधुरी औऱ रूपा जैसे ही गौतम को देखती है गौतम का हाथ पकड़कर उसे रिक्शा में खींच लेती है औऱ रिक्शा का पर्दा लगाकर गौतम को अपने बीच में बैठा लेती है..

गौतम दोनों को देखते हुए - मम्मी.. छोटी माँ.. तुम दोनों यहां.. पता है ना.. माँ ने देख लिया तो क्या कोहराम मचा देंगी..

रूपा गौतम की शर्ट के बटन खोलकर निप्पल्स चाटते हुए - ग़ुगु तुझे सिर्फ सुमन दीदी की परवाह है हमारी नहीं..
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माधुरी bही दूसरा निप्पल मुंह लेकर - हाँ गौतम.. तू सुमन दीदी को दिल से प्यार करता है.. कल से कितने फ़ोन औऱ massages किये पर तू कोई ढंग का जवाब ही नहीं देता..

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गौतम - अह्ह्ह.. बेटे को माँ अपना दूध पीलाती है खुद नहीं पीती... छोटी माँ यार.. माँ साथ में थी पूरा टाइम कैसे रिप्लाई करता.. औऱ कल ही तो आया था आज सुबह उनको सारी सच्चाई बता दी.. वो बहुत गुस्सा थी..

रूपा - तूने समझाया दीदी को?

गौतम - समझाया था पर वो माने तब ना.. तुम दोनों पर गुस्सा है औऱ मुझे सख्त हिदायत दी अगर तुम दोनों से मिला तो बहुत बुरा हाल करेंगी..

माधुरी गौतम के हाथ को पकड़कर - अब क्या करें रूपा? मैं तो गौतम के बिना नहीं रह सकती..

रूपा गौतम के दूसरे हाथ को पकड़कर - मैं कोनसा मेरे नन्हे शैतान के बिना रह लुंगी माधुरी..

रूपा करीम से - करीम रिक्शा कहीं ऐसी जगह ले चल जहा कोई ना हो..

करीम रिक्शा वहां से पहाड़ी के दाई तरफ खाली सुनसान पड़े जंगल की तरफ ले जाता है...

गौतम अपना हाथ छुड़ाकर - देखो तुम दोनों अभी ये सब रहने दो.. मैं माँ को घर छोड़ने के बाद तुम्हारे पास आ जाऊंगा..

रूपा गौतम के लंड पर हाथ रखकर - कोई तो रास्ता होगा दीदी को मनाने का.. क्या वो अपनी ज़िद नहीं छोड़ सकती?

माधुरी भी रूपा के साथ ही गौतम के लंड पर हाथ रख देती है औऱ कहती है - गौतम हमें सुमन दीदी को मनाना ही होगा..

गौतम - थोड़ा टाइम तो दो सोचने के लिए.. मैं कैसे एकदम से कुछ बताऊ?

रूपा गौतम के जीन्स का हुक औऱ चैन खोलकर लंड निकालते हुए हाथ से सहलाकर - मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती नन्हे शैतान.. तुम अच्छे से जानते हो.. तुम्हे कोई ना कोई उपाय ढूंढना ही होगा..

माधुरी भी लंड पर अपना हाथ लगा देती है औऱ रूपा के साथ लंड हिलाते हुए - हाँ गौतम.. रूपा की तरह मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.. तुम जल्दी से कोई रास्ता निकालो..

गौतम रूपा औऱ माधुरी के सर पर अपना हाथ रखकर उन दोनों का सर अपने लंड पर झुकाते हुए कहता है - मैं कुछ सोचता हूँ मेरी माताओ.. तब तक तुम दोनों मुझे थोड़ा प्यार तो करो...
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रूपा औऱ माधुरी बिना किसी संकोच के गौतम का लंड एक साथ चूसने लगती है कभी रूपा तो कभी माधुरी गौतम के लंड औऱ आंड को अपने मुंह में भरकर चूसने लगती है.. गौतम प्यार से दोनों के बाल पकड़कर दोनों से एक अद्भुत blowjob ले रहा था जिसमे उसे अतुलनीय सुख की प्राप्ति हो रही थी..

सुमन का फ़ोन आता है औऱ गौतम फ़ोन उठाकर बोलता है..

गौतम - हेलो माँ..

सुमन - पिली सिगरेट?

गौतम - नहीं माँ दो बच्चीया मिल गई थी.. लॉलीपॉप चूसने की ज़िद करने लगी तो उन दोनों को मैं लॉलीपॉप चूसाने लग गया था..

सुमन - किसकी बच्चीया मिल गई ग़ुगु? उनको उनकी माँ के पास छोड़ देना.. औऱ वो रूपा औऱ माधुरी दिखाई दे तो उनसे दूर चले जाना..

गौतम - हाँ माँ.. छोड़ दूंगा..

सुमन - मैं अंदर जा रही हूँ मुझे समय लगेगा तू मुझे बाहर ही मिलना..

गौतम - ठीक है माँ.. फ़ोन काट देता है..

गौतम - मेरी माताओ लंड ही चुस्ती रहोगी क्या आंड भी तो चाट कोई..

रूपा लंड मुंह से निकालकर आंड चाटने लगती है हुए माधुरी लंड को मुंह में भरकर चूसने लगती है..

दोनों अपने मुंह से गौतम के लंड औऱ आंड की भरपूर सेवा कर रही थी औऱ गौतम दोनों के सर पर हाथ रखकर उनके बालों को प्यार से सावंरता हुआ सर पर हाथ फिरा रहा था..

थोड़ी देर लंड चूसाने के बाद गौतम ने कहा - किसी के पास सिगरेट है?

रूपा ने झट से अपने पर्स से सिगरेट निकालकर गौतम के होंठों पर लगा दी औऱ माधुरी ने अपने पर्स से लाइटर निकालकर गौतम के होंठों पर लगी सिगरेट जलाते हुए कहा - औऱ कुछ चाहिए गौतम?

गौतम ने सिगरेट का कश लेकर वापस लंड चूसने का इशारा करते हुए माधुरी से कहा- चुत चाहिए छोटी माँ..

माधुरी औऱ रूपा फिर से मुस्कुराते हुए गौतम के लंड औऱ आंड पर टूट पड़ी औऱ पूरी मेहनत औऱ शिद्दत से उसे खुश करने में लग गई..

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गौतम ने दूसरा कश लिया ही था की आदिल का फ़ोन आ गया..

गौतम फ़ोन उठाकर - हाँ गांडु..

आदिल - अबे रंडी.. है कहा तू?

गौतम रूपा औऱ माधुरी को लंड चूसता देखकर - जन्नत में..

आदिल - क्या किस्मत है बहन के लंड तेरी भी.. पहले चुतो के लिए तरसता था अब चुतो में घुसा रहता है..

गौतम - तेरी आपा आ गई घर?

आदिल - नहीं यार.. असलम है साला.. बोला 3-4 रोज़ बाद आयएगी... तू आएगा मेरे घर? मिल लेना अम्मी से.. मौका मिले तो पेल भी देना.. मैं अब्बू को बिजी रखूँगा..

गौतम - अभी टाइम नहीं है यार.. माँ के साथ बाबा ज़ी के आया हूँ.. कल शाम को दोनों बैठते है फिर बात करेंगे..

आदिल - अच्छा भाई वो तू बोला था लंड बड़ा करवाएगा.. करवा दे यार.. अम्मी को कितना भी चोदू.. साली आराम से चुद जाती है कुछ होता ही नहीं उसको..

गौतम - शाम को बतऊँगा भाई उसके बारे में..

आदिल - भाई किसकी ले रहा है बता तो दे.. कौन है?

गौतम व्हाट्सप्प पर रूपा औऱ माधुरी की लंड चुस्ती तस्वीरे खींचकर आदिल को सेंड कर देता है जिसमे दोनों का चेहरा नज़र नहीं आता..

गौतम - देख ले..

आदिल फोटो देखकर - अबे रंडी.. एक साथ दो दो? बहनचोद तू तो पक्का रंडीबाज़ है.. भाई क्या किस्मत है यार..

गौतम - अच्छा फ़ोन रख अब.. बाद में बात करता हूँ..

आदिल - ठीक है.. (फ़ोन कट जाता है )

रूपा - कौन था?

गौतम - कोई दोस्त था मम्मी.. मिलने बुला रहा था.. अच्छा अब छोड़ दो.. बताओ पहले कौन आ रहा है लंड पर?

माधुरी अपनी साडी उठाकर गौतम के लंड पर बैठकर अपनी चुत में घुसाती हुई - पहले मैं गौतम.. बहुत खुजली चल रही है चुत में... अह्ह्ह्ह...

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गौतम रूपा से - मम्मी छोटी माँ तो सच में बहुत प्यासी है.. लंड पर झट से चिपक गई..

माधुरी लंड पर उछलते हुए - चुदने में कैसी शर्म गौतम.. औऱ जब चोदने वाला कोई होना हो तो मज़ा ही आ जाता है..

रूपा थोड़ी देर बाद चुत में ऊँगली करती हुई - जल्दी कर माधुरी मुझे भी अपनी खुजली मिटवानी है मेरी शैतान से..

माधुरी - बस रूपा.. मेरा तो होने वाला है..

गौतम रूपा से - मम्मी दूदू पिलाओ ना..

रूपा अपना ब्लाउज खोलकर एक चूची गौतम के मुंह में देती हुई - पी ले मेरी शैतान..

गौतम रूपा की चूची को मुंह में भरकर चूसता हुआ - अहह.. बहनचोद...

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माधुरी झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह... गौतम.. अहह..

माधुरी झड़ने के बाद गौतम के लंड से उतर जाती है औऱ लंड चूसते हुए साफ करने लगती है..

गौतम - छोटी माँ आप बाहर जाओ ना.. मम्मी को घोड़ी बनाके चोदना है मुझे..

माधुरी पैंटी पहनते हुए रिक्शा से बाहर उतरकर - ठीक है गौतम..

गौतम रूपा को रिक्शा में घोड़ी बनाते हुए - कोठे पर इतने साल चुदवाने के बाद भी हर बार घोड़ी बनने में नखरे करती हो मम्मी.. कितनी बार कहु.. गांड ऊपर कमर नीचे..

रूपा - सॉरी नन्हे शैतान...

गौतम लंड पकड़कर चुत में लंड घुसते हुए झटका मारकर चोदते गए - सॉरी की बच्ची ये काण्ड करने के लिए मेरा बाप ही मिला था तुम्हे?

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रूपा - अह्ह्ह्ह... शैतान.. तेरी माँ बनने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ..

गौतम रूपा की गांड के छेद में थूक लगा कर ऊँगली घुसाते हुए - कुछ भी?

रूपा - हाँ... कुछ भी...

गौतम लंड चुत से निकाल कर गांड के छेद में घुसाते हुए - तो अपनी गांड की कुर्बानी दे दे आज मम्मी...

रूपा गांड में लंड जाते ही चीख पडती है

करीम चीख सुनकर रिक्शा के पास आकर - आप ठीक है ना आपा..

रूपा मीठे दर्द में - सब ठीक है करीम..

गौतम - हाँ करीम.. तेरी आपा गांड मरवा रही है मुझसे..

माधुरी पर्दा हटा कर हसते हुए - रूपा तेरी गांड तो गई आज..

रूपा - कमीनी.. तू तो चुत में लेकर बच गई औऱ मुझे गांड देने के लिए छोड़ दिया..

गौतम गांड मारते हुए - मम्मी थोड़ा रुक.. छोटी माँ की गांड भी आज ही मारूंगा..

माधुरी - मैं गांड नहीं देने वाली..

गौतम माधुरी का हाथ पाकर अंदर खींचते हुए रूपा के ऊपर घोड़ी बना देता है औऱ उसकी साडी उठाकर गांड के चीड़ में लंड घुसाने लगता है..

माधुरी दर्द से - थूक तो लगा ले गौतम..

रूपा - बहुत हस रही थी ना.. गौतम बिना थूक के डाल इस कमीनी की गांड में.. सुबह टट्टी करके हुए तेरी याद आये इसे..

गौतम माधुरी गांड चोदते हुए - मेरी माताओ तुम दोनों की गांड तो ऐसी है जैसे ava adems औऱ brandy love एक साथ मिल गई हो.. आज तो पूरा सुखी कर दिया तुम दोनों माताओ ने अपने बेटे को..

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माधुरी - धीरे गौतम.. बहुत दर्द हो रहा है..

रूपा हसते हुए - अब पता चला ना साली..

गौतम माधुरी की गांड से लंड निकाल कर रूपा की चुत में ड़ालकर चोदते हुए - मज़ा आ गया आज तो..

रूपा थोड़ी देर चुदने के बाद वापस बैठकर लंड चुदने लगती है औऱ अब गौतम झड़ने वाला होता है..

गौतम - निकलने वाला है मेरा.. किसे पीना है..

माधुरी - दोनों को ही पीला दे गौतम...

गौतम के वीर्य की पहली 2-3 दार रूपा मुंह पर छुड़वा लेटी है औऱ बाकी माधुरी अपने मुंह पर

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फिर अच्छे गौतम के लंड औऱ टट्टे चाट कर साफ कर देती है औऱ गौतम जीन्स वापस पहन लेता है...

रूपा औऱ माधुरी अपनी अपनी लिपस्टिक ठीक करने लगती है...

रूपा - करीम वापस ले चल रिक्शा...

करीम - ज़ी आपा..

गौतम - चलो ऊपर चलते है..

रूपा - नहीं.. नहीं.. दीदी ने देख लिया तो बहुत गुस्सा होगी हमारे ऊपर..

माधुरी - हाँ गौतम.. पता नहीं क्या करेगी दीदी हमारा.. मेरे बारे में तो वो पहले से ही जानती है..

गौतम - अरे कुछ नहीं होगा.. थोड़ा कुछ बोले भी तो सुन लेना.. माँ यहां बाबाजी के पास इसलिए आती है ताकि उनको घर मिल सके.. तुम बस इतना कह देना की तुम वो घर माँ के नाम कर दोगी तो वो शायद मान जाए.. औऱ फिर मैं तुम दोनों के साथ रह सकूँ..

रूपा - कोशिश करने में क्या बुराई है माधुरी..

माधुरी - ठीक है रूपा..

माधुरी और रूप भी पहाड़ी के ऊपर जाकर बने उसे चुतुरनुमा आकृति वाले स्थान पर जाकर कतार में बैठ गई वह दोनों सुमन के पीछे इस तरह से बैठी की सुमन उन्हें ना देख सके बाबा जी के पास सुमन का नंबर आने ही वाला था और बाबा जी सुमन की बातें सुनते ही वाले थे...

माधुरी और रूपा के सुमन के पास जाने के बाद गौतम पहाड़ी के पास वही आकर बैठ गया जहां पर वह अक्सर बैठा करता था.. जहां उसे बड़े बाबा जी मिले थे और उसे बतलाया था कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. गौतम फिर से वापस इस झील को देख रहा था और यह सोच रहा था कि काश वह वहां जा सकता और उसे झील को करीब से देख सकता लेकिन उसका यह ख्याल उसकी ख्याली दुनिया का एक ख्याल बनकर ही रह गया उसे हकीकत बना नसीब नहीं हुआ.. गौतम अकेला बैठा हुआ था कि उसे नीचे से कोई आता हुआ नजर आया और वह समझ गया कि यह कोई और नहीं बल्कि बड़े बाबा जी उर्फ वीरेंद्र सिंह ही है..

गौतम ने बड़े बाबा जी को देखकर प्रणाम करते हुए उनके पैर छूने चाहे लेकिन बड़े बाबा जी ने गौतम को पैर छूने से रोक दिया और गले लगाते हुए कहा..

बड़े बाबाजी - अरे तुम तो मेरे लिए बहुत कीमती हो बेटा.. औऱ कीमती चीज पैरों से नही गले से लगाईं जाती है.. कहो सब ठीक तो है..

गौतम - हाँ बाबा ज़ी सब ठीक है.. बस कभी कभी थकान रहने लगी है..

बड़े बाबाजी - इतनी मेहनत करोगे तो थकान होगी ही बेटा.. शरीर की अपनी सीमा होती है.. जवानी भी उसे एक हद तक ही पार कर पाती है.. मगर तु चिंता ना कर मेरे पास तेरी थकावट का उपचार है.. जिससे तू जितना चाहे उतना अपनी सीमा को बढ़ा सकता है.. तुझे कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी..

गौतम - वो क्या है बाबाजी?

बड़े बाबाजी जामुन के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए - वही.. जा तोड़ ला कुछ जामुन..

गौतम जामुन तोड़कर लाते हुए - लीजिये बाबाजी..

बड़े बाबाजी - अरे ये तेरे लिए है.. इसे खा ले.. तुझे बहुत जरुरत पड़ेगी.. औऱ अब मेरे काम का वक़्त भी नजदीक आने वाला है..

गौतम - आपका जो भी काम है बताइये बाबाजी.. मैं करने को तैयार हूँ.. कितना भी बड़ा औऱ केसा भी हो मैं करूंगा..

बड़े बाबाजी - समय पर सब पता लग जाएगा.. औऱ कुछ चाहिए तो बता..

गौतम - मैं क्या मांगू बाबाजी.. मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा.. मुझे कुछ माँगना चाहिए या नहीं.. अब तक किसी से कुछ माँगा भी नहीं है..

बड़े बाबाजी - वो पौधा देख रहा है बेटा..

गौतम - वो नीले फूल वाला?

बड़े बाबाजी - हाँ.. कोई साधारण पौधा नहीं है वो.. आज इसके बारे में किसी को भी रत्ती भर ज्ञान नहीं है.. मगर एक समय था वैश्याव्रती में इसका बहुत इस्तेमाल होता था.. समय के साथ अत्यधिक तोड़ने औऱ इस्तेमाल करने से ये पौधा लुप्त हो गया था.. सैकड़ो सालों बाद फिर से धरती ने इसे अपने गर्भ से जन्म दिया है.. इसके फूलो का लेप यदि किसी महिला की फैली हुई योनि पर रातभर लगा कर रख दिया जाए तो ये उसकी योनि को सिकोड़कर संकुचित कर देता है.. तु इसे लेजा.. जिसके साथ भी मन करें सुख भोग..

गौतम - शुक्रिया बाबाजी..

बड़े बाबाजी - जा.. अब तू ना थकेगा कभी.. ना रुकेगा कभी.. जब मेरे कार्य का समय आएगा ये धागा तुझे याद दिला देगा.. तब तक अपने यौवन का सुख भोग..

गौतम - बहुत बहुत शुक्रिया बाबाजी...

बड़े बाबाजी - औऱ हाँ.. जो सपने तुझे आ रहे है उनको आम मत समझना.. वो तेरे पिछले जन्म से जुड़े हुए है.. उन्हें अच्छे याद रखना.. मेरे कार्य के लिए बहुत जरुरी है वो बातें..

गौतम - तभी मुझे एक ही तरह के सपने बार बार आ रहे है बाबाजी.. मुझे सब याद है.. आप निश्चिंत रहिये..

बड़े बाबाजी - चल मैं चलता हूँ..

गौतम - बाबाजी एक औऱ चीज है...

बड़े बाबाजी - बता बेटा..

गौतम - आपने वरदान तो दिया है जो मेरी साथ सम्भोग करेगा मेरा दीवाना हो जाएगा मगर मैं जिनके साथ भी सम्भोग करता हूँ वो सब मेरी पीछे ही पड़ जाते है.. मैं बहुत परेशान हो गया हूँ बाबाजी.. किसके बात करू किस्से नहीं.. किसके पास जाऊ किसके नहीं..

बाबाजी हसते हुए - बेटा ये धागा तेरी उस समस्या का भी निदान कर देगा.. इसपर हाथ रखकर तू जिसका नाम 11 बार लेगा उसके मस्तिष्क से तेरी सारी यादे चली जायेगी औऱ तू उससे आजाद हो जाएगा..

गौतम धागे को देखकर - शुक्रिया बड़े बाबाजी...

बड़े बाबा जी वहां से वापस नीचे की तरफ चले जाते हैं और गौतम इस पत्थर पर बैठकर वापस जामुन खाने लगता है और सोचने लगता है कि अभी-अभी जो बाबा जी ने कहा है वह सत्य है या नहीं लेकिन उसके मन में इस बात पर शक करने की जरा भी शंका नहीं थी और ना ही कोई और कारण था वह जानता था कि बड़े बाबा जी ने जो भी कहा है वह शत प्रतिशत सत्य ही होगा.. गौतम बेटा जामुन खा रहा था और जामुन खाने के बाद वह उसे पौधे की तरफ बड़ा और उसके कई फूल तोड़कर अपनी जेब में रख लिए और फिर वापस आ गया जहां उसने देखा कि उसकी मां रूपा और माधुरी को एक साथ देखकर उन पर चिल्ला रही थी और उन्हें जोर-जोर से तने मार कर उनके किए हुए काम बताते हुए अपने बेटे से दूर रहने की सलाह दे रही थी..

सुमन - समझ क्या रखा है तुम दोनों ने.. इस तरह किसी के भी घर में डाका डाल दोगी औऱ सुखी रहोगी.. अरे पाप लगेगा तुम दोनों पाप.. रूपा मैंने तो तुम्हे दोस्त माना पर तुम तो डायन निकली..

रूपा - ऐसा नहीं है दीदी.. आप मेरी बात समझो.. मैंने ये सब आपके लिए किया.. आपने ही कहा था ना कि जगमोहन ने आपको छोड़कर माधुरी के नाम पर घर लिया है.. मैंने माधुरी को मना लिया है दीदी.. वो आपके नाम पर घर कर देगी.. हम साथ रहेंगे दीदी.

माधुरी - हाँ दीदी.. रूपा सही कह रही है.. हम एक साथ रहेंगे.. आपकी तरह ही हम भी गौतम का ख्याल रखेगे..

सुमन - अरे थू ऐसे घरपर जो मेरे फूल से बच्चे को तुम दोनों चुड़ैल के हाथों में सौंपकार मिले.. वहा ना मैं आज रहू ना कल.. आज के बाद कभी मुझे अपनी शकले मत दिखाना.. मेरा तुम दोनों से कोई वास्ता कोई रिश्ता नहीं है.. ना ही उस जगमोहन से कोई लेना देना..

रूपा रोते हुए - ऐसा मत कहो दीदी.. मैंने जो किया भूल में किया मुझे माफ़ कर दो.. मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ जैसे आप ग़ुगु को चाहती है वैसे ही मैं भी चाहती हूँ.. मेरा कोई गलत इरादा नहीं है.. मैं उसके करीब भी नहीं आउंगी.. बस दूर से हो देखकर रह लुंगी.. मगर ये बात कहकर मुझे लज्जित ना करो..

माधुरी - हाँ दीदी.. आप सब जानती हो.. मगर मैं भी आपको यक़ीन दिलाती हूँ.. आपको सच में अपनी बड़ी बहन मानकर ही आपका आदर करूंगी.. ग़ुगु से दूर रहूंगी.. उसे एक माँ की तरह ही प्यार करुँगी.. औऱ कभी अपनी हद पार नहीं करुँगी..

सुमन दोनों को देख कर - मैं कुछ नहीं जानती.. तुम दोनों मुझे औऱ मेरे ग़ुगु को अकेला छोड़ दो..

रूपा - दीदी.. हमारी बात मान लो.. मैं वादा करती हूँ हम कल ही आपके नाम वो घर औऱ अपनी वफादारी लिखकर आपको सौंप देंगे.. हमें औऱ सजा मत दो..

माधुरी - हाँ दीदी.. हम परिवार है औऱ परिवार में बिखराव अच्छा नहीं होता.. हम वादा करते है.. ग़ुगु से बस माँ बेटे वाला ही रिश्ता रखेंगे..

सुमन इस बार कुछ नहीं कहती है ग़ुगु को दूर खड़ा देखकर उससे कहती है - ग़ुगु चल.. घर जाना है..

गौतम सुमन के पीछे पीछे चल देता है औऱ रूपा औऱ माधुरी को देखकर मुस्कुराते हुए इशारे से well done.. कहता है..

गौतम नीचे आकर बाइक स्टार्ट करते हुए घर की तरफ चल देता है औऱ सुमन किसी गहरी सोच में पड़ जाती है जिसे गौतम ने उसके चेहरे पर पहले ही पढ़ लिया था.. गौतम बाइक चलाता हुआ बार-बार बैक मिरर से सुमन के चेहरे की तरफ देख रहा था और उसके चेहरे पर आते हुए भाव देखकर वह समझ गया था कि सुमन किसी बहुत गहरी और बहुत उलझी हुई सोच में गम है और कुछ तय करने का सोच रही है गौतम ने जिस तरह सुबह अपनी मां सुमन को रूपा और माधुरी के साथ रहने के लिए कन्वेंस किया था और अभी थोड़ी देर पहले पहाड़ी पर जीस तरह रूपा और माधुरी खुद सुमन को उनके साथ रहने के लिए मना रही थी और बदले में उसके नाम पर घर करने की बात कह रही थी उससे सुमन का दृढ़ संकल्प कहीं ना कहीं डगमगाने लगा था.. गौतम सुमन का चेहरा देखकर समझ गया था कि अब सुमन को मनाने में कोई परेशानी नहीं है वह खुद ब खुद कुछ ही समय में अपने आप मान जाएगी और उसके मन मुताबिक रूप और माधुरी के साथ रहने के लिए तैयार हो जाएगी.. मगर सुमन तो कुछ अलग ही सोच रही थी.. सुबह गौतम औऱ अब दोपहर में रूपा औऱ माधुरी की बातों से गौतम का मन भटका मगर अब वो संभल गई थी..

सुमन अपने ख्यालों में घूम थी और गौतम बाइक चलते हुए उसे ख्यालों में गुम देख रहा था

गौतम ने अब बाइक पर बार-बार ब्रेक मारने शुरू कर दिए जिससे सुमन की छाती गौतम की पीठ पर बार-बार टकराने लगी..

गौतम के ऐसा करने पर सुमन ख्यालों की दुनिया से बाहर आई हुई गौतम को जकड़ कर पकड़ने लगी और अपनी छाती को उसकी पीठ से सटा दिया..

गौतम और सुमन को घर आते-आते दोपहर के चार बज चुके थे और अब घर के अंदर दोनों दूसरे से इस बारे में बात कर रहे थे..

जिस तरह से रूपा और माधुरी ने सुमन से बात की थी रूपा और माधुरी की बात का सुमन पर असर तो हुआ था और वह गूगु को समझने में भी आ रहा था.. सुमन गौतम की बात पर सिर्फ इतना कह दिया था कि उसे सोचने का समय चाहिए इस पर गौतम ने आगे सुमन से कुछ नहीं कहा औऱ बाहर चला गया..

रात को जब सुमन औऱ गौतम एक साथ लिपटकर बिस्तर में सोये तो गौतम ने सुमन की चुत पर उन फूलों का लेप लगा दिया जिसे सुबह उसने सुमन के नींद में होने के दौरान ही गीले कपडे से साफ भी कर लिया औऱ देखने लगा कि क्या वाक़ई सुमन की चुत सिकुड़ी है या नहीं.. मगर अब सुमन जागने लगी थी औऱ सुमन उसे देखकर सोने का नाटक..


नेक्स्ट अपडेट ों 60 लाइक्स ❤️
 
अपडेट 41



शाम के समय कबाड की दूकान में एक टेबल के आगे कुर्सी लगा के बैठे फारूक का जब फ़ोन बजा तो वो उठ खड़े हुए और दूकान में टहलते हुए बात करने लगा.

कुछ देर बात करने के बाद फारूक ने फ़ोन काट दिया और दूकान की छत पर अपनी मामू की लड़की नरगिस से आशिक़ी लड़ाते अपने बेटे आदिल को आवाज लगाई. जब आदिल आवाज सुनकर नहीं आया तो फारूक ने अपने यहां काम करने वाले रामु को ऊपर छत पर भेजते हुए आदिल को बुलाने का कहा..

फारूक - आदिल.. आदिल.. रामु जा ऊपर देख वो हरामखोर क्या कर रहा है? बुला के ला उसे..

रामु ने अपने मालिक की बात मानकर छत की तरफ रास्ता कर लिया और छत पर आ गया.. आदिल छत के एक कोने में बैठा नरगिस के साथ फ़ोन सेक्स में बिजी था तभी वहा रामु आकर बोला..

रामु - नीचे तुम्हे तूम्हारे अब्बा फारूक मिया बुला रहे है..

आदिल रामु को देखकर - क्या रामु डरा दिया तूने तो.. चल मैं आता हूँ..

रामु वापस नीचे चला जाता है और आदिल उसके पीछे पीछे नीचे आ जाता है..

फारूक - कान में तेल डालके बैठा था क्या भड़वे? कितनी आवाजे लगाई, सुनाई नहीं दिया? चल.. अब जल्दी जा और चाचू के यहां से हिसाब की डायरी ले आ.. महीने का आखिर है सबका हिसाब करना है.. और इस बार टेंडर में सरकारी कबाड की बोली कितनी भेजनी है ये भी पूछ लेना.. पर ज़रा अकेले में, जरुरी टेंडर है..

आदिल - आज तक कोई टेंडर मिला है जो अब मिलेगा... पर ठीक है.. जाता हूँ..

आदिल दूकान से थोड़ा दूर जाकर गौतम को फ़ोन करता है..

आदिल - हेलो.. रंडी..

गौतम - हाँ गांडु.. बोल?

आदिल - दुकान के पास वाली डेयरी पर मिल.. कहीं चलके आना है..

गौतम - अभी मूड नहीं है यार.. बहुत गर्मी है..

आदिल - नाटक मत कर रंडी.. आजा जल्दी.. तेल डलवा दूंगा बाइक में..

गौतम - चल आता हूँ..

गौतम आदिल को डेयरी पर से पिकअप करके चल देता है..

गौतम - बता कहा चलना है?

आदिल - चाचू के यहां..

गौतम - क्यों? अब चाचू की लड़की रज़िया पर दिल आ गया क्या तेरा? वो तो खुश हो जायेगी सुनकर..

आदिल - अबे अब्बू ने भेजा है काम से.. रजिया पे किसका दिल आएगा.. ना शकल है ना सामान.. डायरी लाना है हिसाब की.. चाचू की दूकान से क्या क्या आया है और उनको क्या क्या गया है..

गौतम - अच्छा तो अब कबाड़ीवाले भी बनियो की तरह हिसाब रखने लगे है.. अच्छा है..

आदिल - अबे ओ ठुल्ले की औलाद.. कबाड़ी की सही पर अपनी अपनी दुकान है अब्बू की और चाचू की.. दिनभर कुर्सी पर बैठके काम करते है तेरे बाप की तरह थानेदार का लोडा मुंह में लेकर चूसते हुए ज़ी सर ज़ी सर नहीं करते..

गौतम जोर से - कबाड़ीवाले... कबाड़ीवाले...

आदिल - भोस्डिके, मुंह बंद कर ले अपना.. बकचोद साला..

गौतम - बुरा क्यों मानता है गांडु.. चल टंकी फुल करवा दे..

आदिल - भाई 100 का डाल दे..

गौतम - 100 में भड़वे वापस नहीं लाऊंगा तुझे..

आदिल - ठीक है रंडी.. 200 का डालवा ले..

गौतम - वैसे एक बात बोलनी थी तुझे.

आदिल - हाँ बोल..

गौतम - यहा नहीं, किसी चाय कॉफी की दूकान पर रोक.. बहुत सीरियस है पर मुझे कन्फर्म नहीं है..

आदिल - भोस्डिके, चाय कॉफी तो वैसे ही पीला दूंगा उसके लिए क्यों नाटक कर रहा है..

गौतम - गांडु सीरियस बात है तेरे लिए.. मेरा क्या है मत सुन.. तेरी अम्मी चुदेगी बाद में..

आदिल - वो तो तू पहले ही चोद चूका है.. अब लंड बड़ा करवा रहा है क्या? आगे उस दूकान पर रोक ले..

गौतम आगे एक रेस्टोरेंट पर रोक लेता है और आदिल के साथ अंदर जाकर एक टेबल पर बैठ जाता है..

आदिल - हां बता.. क्या बात है..

गौतम - पहले कुछ मंगवा तो ले गांडु..

आदिल - भाई दो चाय ला दे..

गौतम - दो समोसे भी ले आना..

आदिल - रंडी.. अब अपना घाघरा खोलके बोल भी दे क्या बात है?

वेटर - लो भईया.. समोसे और चाय..

गौतम - भाई एक चिप्स का पैकेट भी देना..

आदिल - भोस्डिके उस दिन बड़े पैसे थे जब मुझे दो मिनट में दो हज़ार भेजे थे.. अब क्या हुआ?

गौतम - भाई पैसे तो अब भी है औऱ इतने है की तेरे बाप की दूकान खरीदकर तेरी अम्मी के भोसड़े में डाल दू मगर खर्च करने में शर्म आती है..

आदिल - बहन के लंड.. बात क्या है वो बता..

गौतम - सुन वो तेरे मामूवाली लड़की नहीं है जिसकी तूने फ़ोन में फोटो दिखाई थी.. जिसके इश्क़ में तू पागल है.. नरगिस..

आदिल - हाँ तो उसका क्या?

गौतम - यार उसको कल हाज़ीवाले की गली में देखा था.. किसी लड़के से बात करते हुए मैंने.. उसका पता किया है, कौशल नाम है लड़के का..

आदिल - तू क्या कह रहा है? साले बहुत लॉयल है वो मेरे साथ..

गौतम फ़ोन दिखाते हुए - तू देख ले यही है ना..

आदिल - पर वो कह रही थी कल अपने खालू के यहां गई थी..

गौतम - भाई बुरा मत मानना.. पर मुझे तो यही खालू तेरी नरगिस का लालू लगता है.. मेरा दोस्त लोकेश भी इसके बारे में बता रहा था..

आदिल - क्या..

गौतम समोसे खाते हुए - छोड़ तू रोने लग जाएगा सुनकर.. यहां के समोसे मस्त है बहनचोद..

आदिल - समोसे गांड में डाल दूंगा.. रंडी.. नरगिस के चक्कर में मेरा यहां दिमाग खराब हो रहा है और तुझे समोसे की पड़ी है.. तेरे दोस्त ने क्या बोला सच बता..

गौतम - सुनना चाहता है तो तेरी मर्ज़ी सुन.. वो कह रहा था की नरगिस को उसके शोहर ने कौशल से बात करते पकड़ लिया था इसलिए तलाक़ दे कर भेज दिया.. और अब भी दोनों छुप छुप के मिलते है..

आदिल - सच कह रहा है ना.. मज़ाक़ थोड़ी कर रहा है मेरे साथ?

गौतम - समोसे की कसम भाई.. चल अब तू तो खाने से रहा.. तेरा समोसा भी मैं खा लेता हूँ..

आदिल - वो कौशल कहा रहता है? जानता है क्या? मिलना है उससे.. बात करनी है..

गौतम - रहता तो हाज़ीवाले मोहल्ले में ही है.. ये ले.. लोकेश से नंबर ले आया था उसके.. कर ले बात..

आदिल नंबर मिलाकर..

आदिल - हेलो..

कौशल - हाँ ज़ी कौन?

आदिल - कौशल बोल रहा है?

कौशल - हाँ बोल रहा हूँ बोलो क्या चाहिए?

आदिल - नरगिस को कैसे जानता है?

कौशल - कैसे जानता है मतलब? सेटिंग है मेरी.. और तू कौन है साले?

आदिल - मै तेरा बाप हूँ साले.. समझा..

कौशल - अबे ओ लोड़ू.. जबान संभालके. नरगिस के चक्कर में कई लड़के मार खा चुके है मुझसे, तेरी भी इच्छा हो मार खाने की तो आ जाना.. कौशल ने फ़ोन काट दिया और आदिल फ़ोन कटने पर उदास होकर अपना सर पकड़ कर वही नीचे की तरफ टेबल को देखने लगा और अपने चुदे हुए इश्क़ का शोक मनाने लगा..

गौतम वेटर से - तुम्हारे यहां बियर वगेरा मिलती है?

वेटर - नहीं भाईसाब..

गौतम - ठीक है एक पानी बोतल ला दे..

वेटर पानी की बोतल दे गया और गौतम आदिल के मुंह को देखने लगा जिसपर मातम छाया हुआ था..

आदिल - अम्मी ने सही कहा था भाई, मैं ही अंधा था. मुझे ही कुछ नज़र नहीं आया.. नरगिस का फ़ोन रात रातभर बिजी आने पर भी मैं समझ नहीं पाया..

गौतम - चल अब ये नरगिस वाला क़िस्सा यही दफ़न कर.. छोटे कबाड़ी के घर चलते है..

आदिल - साले चाचू है मेरे..

गौतम - एक ही बात है भाई.. चल आजा..

आदिल - बहुत दिल दुखा है यार, इस साली नरगिस को तो बताऊंगा मैं.. ऐसा रगड़ के चोदुँगा साली को की याद रखेगी..

गौतम - भाई एक राउंड मुझे भी चाहिए..

आदिल - एक बार मेरा हो जाए फिर एक क्या दो ले लेना.. बहुत शौक है साली को रंडी बनने का.. मैं बनाऊंगा इसको रंडी..

गौतम - ले भाई.. आ गया तेरे चाचू का घर.. ले आ अंदर से जो लाना है..

आदिल अंदर चला जाता है और गौतम घर के बाहर बाइक पर बैठा उसका इंतज़ार करने लगता है की एक लड़कि उसके गाल को पीछे से आकर चुम लेती है..

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गौतम पीछे देखकर - क्या कर रही है?

लड़कि मुस्कुराते हुए - किस्सी कर रही हूँ..

गौतम नाराज़गी से - मैंने कहा है तुझे किस्सी करने को? बेशर्म है क्या बिलकुल..

लड़की - इतनी भी क्या नाराज़गी.. एक किस्सी ही तो की है.. कोनसा तुम्हारा रेप कर दिया..

गौतम - तू करेगी साली मेरा रेप.. एक बार चोद दिया ना पकड़ के.. तो कई दिनों तो ठीक से चल भी नहीं पायेगी..

लड़की प्यार से - तो चोद ना गौतम.. मैंने कब मना किया है तुम्हे.. अम्मी कसम.. पूरा खुश करुँगी.. तू जैसे कहेगा वैसे..

गौतम - इतनी आग लगी है तेरे अंदर तो बोल दे कबाड़ी वाले को तेरा निकाह करवा देगा..

लड़की उदासी से - इस शकल के साथ कौन निकाह करने पसंद करेगा.. इस साल पचीस की हो जाउंगी..

गौतम लड़की का हाथ पकड़ कर - अरे उदास मत हो यार.. तेरा फ़ोन दे..

लड़की फ़ोन देते हुए - लो..

गौतम अपना नंबर देते हुए - आस पास में कोई जगह है सुनसान?

लड़की मुस्कुराते हुए गोतम की बात का मतलब समझकर गौतम का हाथ पकड़ कर उसे घर के पीछे कबाड़ के ढ़ेर से होते हुए एक कोने में लेजा कर - यहां कोई नहीं आएगा..

गौतम लड़की को बाहों में लेते हुए उसके होंठों पर kiss करके - मुंह में लेगी?

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लड़की शरमाते हुए नीचे बैठकर गौतम की जीन्स खोलती हुई उसके लंड को देखकर - गौतम ये.. ये.. तेरा इतना बड़ा?

गौतम लंड लड़की के होंठों पर रगढ़ते हुए - डर गई क्या रज़िया? ले ना..

रज़िया लंड देखकर अपनी चुत मसलते हुए - ले रही हूँ गौतम..

रज़िया जीभ बाहर निकालकर लंड चाटने लगती है और फिर धीरे धीरे मुंह में लेकर चूसने लगती है..

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आदिल फ़ोन पर - अबे रंडी कहा गया तू?

गौतम फ़ोन पर - घर के पीछे हूँ.. रज़िया को मुंह में दे रहा था..

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आदिल - अबे उस कालीकलूटी में तुझे क्या मज़ा आ रहा है..

गौतम रज़िया के बाल मुट्ठी में भीच के मुंह में लंड के झटके मारते हुए - चुप बहन के लंड.. इतनी प्यार से मुंह में लेकर चूस रही है बेचारी.. तू वेट कर..

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आदिल - जल्दी आ भाई.. मेरा दिमाग खराब है आज दारू पियूँगा..

गौतम फ़ोन काट कर - रुक आता हूँ.. रज़िया से.. रज़िया डार्लिग.. जाना पड़ेगा मुझे..

रज़िया मुंह लंड निकालकर जीरो जीरो से हिलाती हुई - फिर कब मिलेगा मुझसे?

गौतम झड़ते हुए - बहुत जल्द.. चुत भी तो लेनी है तेरी.

गौतम का मुठ रज़िया मुंह झड़वा लेटी है और पीते हुए गौतम से अपना छोटा सा बोबा दिखा कर कहती है - एक निशानी तो दे जाओ गौतम...

गौतम जीन्स पहन कर रज़िया का बोबा पूरा मुंह में भरकर चूसते हुए निप्पल्स के पास दो तीन जगह love बाईट दे देता है और रज़िया से कहता है - चलता हूँ.. फ़ोन करूँगा..

रज़िया अपनी चूची सहलाती हुई - मैं इंतजार करूंगी गौतम..

आदिल गौतम के साथ वापस चल देता है...

आदिल दूकान पर डायरी रखकर गौतम से - चल भाई.. आखिरी मंज़िल ले चल..

गौतम - पैसे है तेरे पास?

आदिल उदासी से - हाँ रंडी.. अभी अभी गल्ले से निकाले है..

गौतम - अब्बू के सामने चोरी?

आदिल - अबे अब्बू का ध्यान कहीं औऱ था..

गौतम गाडी स्टार्ट करके - चल भाई आज तो मेरा भी मन है.. आखिरी मंज़िल पर जाकर जाम छलकाते है..

गौतम और आदिल बाइक स्टार्ट करके आदिल के अब्बू फारूक की दुकान से चल पड़ता है और छोटी-मोटी गलियों से होते हुए एक पुराने जमाने वाले बार में पहुंचते हैं जिसका नाम आखरी मंजिल होता है..

बार में कोने की एक टेबल पर बैठके दोनों दो बियर मंगवा लेते है औऱ पीते हुए बात करने लगते है आज आदिल उदासी से अपने दुख दर्द सुना रहा था औऱ गौतम को बता रहा था की वो नरगिस से कितना प्यार करता था औऱ उसे केसा महसूस हो रहा है..

आदिल - बहन की लोड़ी रांड.. साली.. भाई बहुत कुछ सोच रखा था मैंने उसके लिए.. मगर वो साली.. फ़ोन पर कितनी शरीफ औऱ सीधी बनती है.. असल में है छिनाल.. बहुत दर्द हो रहा है यार दिल में..

गौतम - अबे जितना दर्द तेरे दिल में है उतना उसकी चुत में देंगे ना मिलकर अपन दोनों.. तू उससे अभी कुछ मत कहना.. उसे मिलने बुला फिर साली को चोदते है दोनों जमके..

आदिल बियर पीते हुए - सही कह रहा है तू.. ऐसा चोदेग की लोग देखते रह जायेंगे..

गौतम - कबाब तो माँगा ले लोडे.. तभी तो गर्मी आएगी औऱ सारी गर्मी उस कुतिया की चुत पर निकालेंगे..

आदिल वेटर से - भाई एक प्लेट कबाब.. औऱ दो बियर औऱ.. (गौतम से) किसका फ़ोन आ रहा है?

गौतम - तेरी बहन का..

आदिल - क्या कह रही है..

गौतम - रुक पूछता हूँ.. फ़ोन उठाकर - हाँ रेशु..

रेशमा - ओ हो.. रेशमा औऱ कुतिया से सीधा रेशु.. लगता है बहुत मूंड में है मेरा कुत्ता.. क्या कर रहा है?

गौतम - तेरे भाई के साथ बार में बैठकर दारु पी रहा हूँ..

रेशमा - ज्यादा मत पीना ग़ुगु.. उस रात भी तुमने ज्यादा पी ली थी.. औऱ फिर उल्टी सीधी हरकत करने लगे थे..

गौतम - ठीक है.. क्या कर रही हो?

रेशमा - खाना बना के free हुई थी.. अब तुमसे बात कर रही हूँ.. तुमने आदिल को तो नहीं बताया ना हमारे बारे में..

गौतम - तू उसकी चिंता मत कर रेशु.. आदिल को सब पता है औऱ वो किसीसे कुछ नहीं कहेगा.. तुझे भी कुछ नहीं बोलेगा..

रेशमा हैरात से - तुमने आदिल को सब बता दिया?

गौतम - अरे दोस्त है मेरा यार.. अब उसकी बहन पटाऊंगा चोदुँगा औऱ उसे ही नहीं बताऊंगा तो बुरा लगेगा ना बेचारे को..

रेशमा - तू पागल है क्या.. कुत्ते..

गौतम - अबे कुछ नहीं बोलेगा वो.. ना तुझे ना किसी औऱ को.. अच्छा ये बता यहां कब आएगी..

रेशमा - 3-4 दिन बाद असलम को अभी फुर्सत नहीं है..

गौतम - अरे वो बहन का लंड ऐसा क्या कर रहा है जो फुर्सत नहीं है.. अपने बाप की सारी कमाई तो शराब में उड़ा दी अब साला दिनभर दूकान में गद्दे बनाकर उसपे लाठिया पीटता रहता है.. तू जल्दी से आ वरना मैं आ जाऊंगा.. याद रखना..

रेशमा - अब मैं क्या करू यार.. तुमसे सब्र नहीं होता क्या? अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ मिले.. औऱ तुम फिर से पीछे पड़ने लगे.. ऐसा करोगे तो फिर देख लेना..

गौतम - ठीक है.. नहीं पड़ता पीछे.. भाड़ में जा.. फ़ोन काटते हुए..

आदिल - अबे बहन है मेरी.. ऐसे क्यों बात कर रहा है उससे..

गौतम बियर पीते हुए - तेरी बहन है तो क्या सर चढ़ाउ?

आदिल - भोस्डिके प्यार से तो बात कर सकता है.. उस दिन तो कह रहा था दिल आ गया.. रेशमा सिर्फ मेरी रहेंगी..

गौतम बियर पीते हुए - हाँ तो..

आदिल - पहले फ़ोन उठा रंडी.. फिर बात करना..

गौतम फ़ोन उठाकर - बोलो?

रेशमा - बच्चे हो क्या बिलकुल? छोटी छोटी बातों पर नाराज़ हो जाते हो..

गौतम - तू बात ही ऐसी करती है मैं क्या करू?

रेशमा - अच्छा अब नहीं करती.. सॉरी.. वैसे एक चीज देखी है मैंने.. जब से तुमने मेरी ली है ना.. तुम्हारा एडिटूड बदल गया.. पहले मेरी किसी भी बात का गुस्सा नहीं करते थे अब मुझपर हुकुम चलाने लगे हो..

गौतम - तो? मेरी चीज है.. हुकुम नहीं चलाऊंगा?

रेशमा - चलाओ ना.. मैंने कब मना किया.. पर मेरी बात भो तो समझो.. अभी नहीं आ सकती.. मेरा बस चलता तो तुमसे दूर थोड़ी होती..

गौतम बियर पीते हुए - ठीक है रेशु..

रेशमा - शमा कैसी है?

गौतम - कौन शमा?

रेशमा - अरे वही दुल्हन.. जो भागी थी नीरज के साथ.. सुना उसकी बहुत खोज रही है.. उसका बाप तो बंदुक लेकर फिर रहा है.. देखते ही गोली मार देगा..

गौतम - देखता हूँ यार.. अभी तक तो नहीं मिला मैं उससे..

रेशमा - मिले तो कहना संभल कर रहे..

गौतम - ठीक है.. आज पता करता हूँ.. वैसे किसी कुछ पता चला..

रेशमा - नहीं.. असलम कह रहा था अभी कोई खबर नहीं मिली.. जो खत शमा छोडके गई थी उसे पढ़कर सब दिल्ली जाकर उसे ढूंढ़ रहे है..

गौतम - क्या लिखा था खत में?

रेशमा - जो तुमने उसे बताया था लिखने को.. कि वो शादी नहीं करना चाहती. अपने सपने पुरे करना चाहती है.. औऱ दिल्ली मुंबई जैसे शहर में बड़ी औरत बनना चाहती है..

गौतम - सही है.. उसका फ़ोन भी उस रात मैंने एक ट्रक में रख दिया था जो मुंबई जा रहा था.. औऱ नीरज के बारे में कोई नहीं जानता.. तो उसपर कोई शक नहीं करेगा..

रेशमा - पर तुम एक बार शमा से मिल लेना.. वो ठीक है या नहीं..

गौतम - ठीक है रेशु.. चल अब दारु पिने दे..

रेशमा - ज्यादा मत पीना.. समझा... मैं सुबह फ़ोन करुँगी..

गौतम - बाय कुतिया..

रेशमा - बाय मेरे कुत्ते.. दुबारा मेरा फ़ोन मत काटना.. समझा..

गौतम - ठीक है.. फ़ोन काटते हुए..

आदिल - तू पसंद करने लगा है.. रेशमा आपा को..

गौतम - मुझे भी ऐसा लगता है पर एक औऱ है जिसके बारे में भी मुझे यही फीलिंग आती है..

आदिल - कौन है वो?

गौतम - है कोई.. शादी में मिली थी..

आदिल बियर पीते हुए - भूल जा उसको.. रेशमा आपा जैसी नहीं मिलेगी..

गौतम - दिल टूट जाएगा यार उसका..

आदिल - बहन के लंड तो क्या मेरी बहन का दिल तोड़ेगा तू? साले इसलिए तुझे इतनी ऐश कराता हूँ रंडी.. मादरचोद दिल तोड़ेगा मेरी बहन का.. ठुल्ले का मूत..

गौतम बियर पीते हुए - तेरी बहन का दिल तोड़ू या ना तोड़ू.. तेरी गांड जरुर तोड़ दूंगा कबाड़ी की औलाद अगर तू ज्यादा बोला तो..

आदिल बियर पीते हुए - भावनाओं में बहुत गया था यार.. चल छोड़.. एक एक बियर औऱ मगाते है..

गौतम - रहने दे.. कहीं चलके आना है..

आदिल - कहाँ..

गौतम - दुल्हन से मिलके आते है.. जो भागी थी..

आदिल - कहा?

गौतम - यही पास में..

आदिल - किसी को पता चल गया तो गांड पर लठ पड़ेगी तेरे साथ मेरे भी..

गौतम - तो फिर चुप रह.. किसी को बताना मत.. अब चल..

आदिल बिल देकर गौतम के साथ चल देता है और गौतम एक बियर और हाथ में लेकर पीते हुए आदिल के पीछे बाइक पर बैठ जाता है..

आदिल बाइक चलाते हुए - बहनचोद आज बियर भी कोई असर नहीं कर रही.. नरगिस का कुछ करना पड़ेगा..

गौतम पीछे से आदिल को पकड़ते हुए उसके कंधे पर सर रखकर - शनिवार को बुला ले रात में.. बरंगीन सिनेमा दिखाते है उसको..

आदिल - अबे ज्यादा हो गई क्या रंडी? क्या रंडियो की तरह बैठा है.. औऱ रंगीन सिनेमा तो कब का बंद हो गया.. बचपन में ही सुना था उसके बारे में..

गौतम अपना हाथ आदिल के सीने पर फिराते उसे छेड़कर - अबे गवर्नमेंट औऱ पब्लिक की नज़र में बेन है.. मेरा एक कॉलेज फ्रेंड्स है वो जाता है अपनी gf के साथ.. सीक्रेट जगह चलता है औऱ अब सर्फ़ कपल एंट्री मिलती है वहा.. सब हॉल में मास्क लगा के चुदाई करते है खुलम खुला औऱ सामने ब्लू मूवी चलती है फूल आवाज में.. मगर पैसे ज्यादा लेते है सिनेमा वाले..

आदिल हाथ पकड़कर - अबे मेरी इज़्ज़त लूटेगा क्या भोस्डिके.. औऱ कितने पैसे लगते है?

गौतम - वो बता रहा था 3 हज़ार पर कपल एंट्री है..

आदिल - भाई ज्यादा हो गई क्या ठीक से बैठ ना.. और मत पी.. 3 के हिसाब से अपने हो गए 6 हज़ार.. पैसे का भी जुगाड़ कर ले तो एक लड़की औऱ कहा से लाएंगे कपल एंट्री के लिए..

गौतम आदिल की गांड पर हाथ लगाते हुए - ये भी है..

आदिल - मादरचोद हाथ काबू में रख वापस हरकते मत करें.. औऱ तू जानता है किसी को? जो चल सके..

गौतम नशे में - हाँ..

आदिल - कौन?

गौतम जोर से चिल्लाते हुए - शबाना रंडी...

आदिल स्पीड बढ़ा कर बाइक चलाते हुए - चिल्ला मत रंडी.. अम्मी घर का माल है.. घर से बाहर नहीं ले जा सकते औऱ वो जायेगी भी नहीं.. उनके साथ सीक्रेट रखना है सब..

गौतम नशे में आदिल के मज़े लेते हुए - तू अपनी गांड मुझसे मरवा ले तो मैं फ्रेंड् से बात करता हूँ लड़की के लिए.. तू बस पैसे जुगाड़..

आदिल गुस्से से - चुदाईखाने तू आदमी है या हिजड़ा है?

गौतम हसते हुए - अबे मज़ाक़ कर रहा हूँ..

आदिल - भोस्डिके.. कभी मज़ाक़ मज़ाक़ में मेरी गांड मत मार लेना.. फिर बोले मज़ाक़ में मार दी..

गौतम बियर पीके फेंकते हुए - फ़िक्र मत कर साले.. नवाबी शोक नहीं रखता.. बस तेरी गांड में उंगलि करना अच्छा लगता है..

आदिल गांड उठा कर - ले कर ले बहनचोद.. औऱ फिर उस ऊँगली को चूस भी लेना..

गौतम सच में गांड में ऊँगली कर देता है औऱ बाइक स्लीप हो जाती मगर सडक के किनारे घास में गिरती है औऱ स्पीड कम होने से किसी को चोट भी नहीं आती...

गौतम हसते हुए - गांड का छेद तो बहुत बड़ा है.. कोठे पर मरवाता है क्या?

आदिल बाइक उठाते हुए - तेरे साथ गलत दारु पी ली झांट के बाल.. तू किसी दिन मार के छोड़ेगा..

गौतम - चल अब नहीं करू कुछ भी.. पास में ही है.. उसका घर..

आदिल - साले तेरे साथ तो अब दारु नहीं पिऊंगा..

गौतम - छोटी छोटी बातों में क्या नाराज़ होता है यार अपने जीजाजी से..

आदिल - यहां से राइट या लेफ्ट?

गौतम - लेफ्ट.. अच्छा पैसे का जुगाड़ कर लेगा तू?

आदिल - मामू की अम्मी चोदनी पड़ेगी.. उसके गल्ले से पैसे निकल कर उसकी लड़की को ही चोदेगे..

गौतम हसते हुए - कितना घटिया आदमी है तू साले..अच्छा तमीज से रहना.. ऐसा ना लगे हम दारु पी रखे है..

आदिल - मेरा तो नहीं लगेगा तू खुदको संभाल पहले.

गौतम - उस पिले घर के आगे रोक..

आदिल बाइक रोककर लगा देता है औऱ आदिल औऱ गौतम एक दुसरे को देखकर वापस कहते है कोई हरकत मत करना..



प्लीज लिखे एंड कमैंट्स ❤️

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अपडेट 42



गौतम आदिल के फ़ोन से नीरज को फ़ोन करता है..

नीरज - हेलो..

गौतम भारी आवाज में - हेलो नीरज..

नीरज - ज़ी कौन बोल रहा है..

गौतम - मैं अजमेर का पुलिस कमिश्नर बोल रहा हूँ..

नीरज डरते हुए - कमीशनर साब?

आदिल फ़ोन म्यूट करके - कोनसे स्कूल गया था रंडी.. अजमेर में कोई कमिश्नर नहीं है..

गौतम फ़ोन unmute करके - हेलो..

नीरज डरते हुए - ज़ी..

गौतम - तुम्हारे घर को पुलिस ने चारो तरफ से घेर लिया है.. तुमने जिस लड़की को भगाया है उसे वापस कर दो.. अपने आप को पुलिस के हवाले..

नीरज - सररर.. हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते है..

गौतम - कितना प्यार करते हो?

नीरज - बहुत ज्यादा..

गौतम - हम कैसे मान ले..

नीरज - आप चाहो तो शमा से पूछ लो सर.. मैं उसके लिए कुछ भी कर सकता हूँ..

गौतम - क्या तुम अपने घर के बाहर आ सकते हो? मगर नंगे होकर आना.. हमें तुम्हारे पास कोई हथियार नहीं दिखना चाहिए..

नीरज - सर.. चड्डी..

गौतम - वो पहन सकते हो..

नीरज - आता हूँ सर..

गौतम फ़ोन काटते हुए - तुम हमारे निशाने ओर हो.. होशियारी मत करना..

आदिल हसते हुए - अबे इसकी तो फटी पड़ी है..

गौतम नशे में - अभी औऱ फाड़ेंगे.. वीडियो ऑन रख..

नीरज चड्डी में बाहर आता है औऱ गौतम को देखकर कहता है - तुम?

गौतम पास जाके नीरज की चड्डी नीचे सरका देता औऱ कहता है - शादी मुबारक हो मेरे भाई..

नीरज जल्दी से चड्डी पहन कर - ये क्या मज़ाक़ है.. औऱ जल्दी से अंदर चला जाता है औऱ कपडे पहन कर बाहर आता है..

नीरज - तुम कौन हो..

गौतम मुस्कुराते हुए - भूल गए मुझे? हबीबगंज में शादी का घर.. घर के पास एक खाली मकान.. मकान में अंधेरा औऱ दो अनजान.. अनजानो ने देखा प्यार का मुकाम.. औऱ भगा दिया तुम दोनों को वहा से मेरी जान..

नीरज धीरे से - वो तुम थे.. औऱ ये कौन है..

गौतम - ये मेरा साला मैं इसका जीजा.. उस दिन इसीकी बहन थी मेरे साथ.. क्यों साले साब?

आदिल - रंडी ज्यादा बोल रहा है..

गौतम नशे में - अब्सोल्युटली राइट साले साब..

नीरज गौर से देखकर - पी रखी है क्या? अंदर आ जाओ..

गौतम औऱ आदिल नीरज के पीछे उसके घर में आ जाते गई औऱ छोटे से उस घर में ऊपर पहली मंज़िल पर आगे की तरफ बने कमरे में चले जाते है..

शमा मेहमान देखकर पानी का गिलास देते हुए - पानी

गौतम शमा को देखकर - घर आज कोई नहीं? औऱ तुम अभी तक सोइ नहीं?

शमा - ज़ी?

गौतम - ज़ी नहीं शमा बेगम... जीजाजी.. कॉल मी जीजाजी.. मैं रेशमा का होने वाला यार.. जानने आया तू आपका कितना गहरा है प्यार..

शमा गौतम की बात पर हसते हुए आदिल को देखकर - भाईजान.. पानी..

आदिल पानी लेते हुए - इसकी बातों का बुरा मत मानो... ये थोड़ा दारु पी रखा है...

गौतम आदिल को देखकर - तूने क्या मेरा मूत पिया है.. तूने भी दारु पी है साले..

शमा हसते हुए गौतम से - जीजाजी.. आप बैठिये मैं चाय बनाती हूँ..

नीरज - किसीको मालूम तो नहीं हुआ ना..

गौतम नीरज से - सात देशो की पुलिस पीछे पड़ी है तुम दोनों के.. मैंने रोका हुआ है उनको..

नीरज गौतम की बात सुनकर - शमा.. चाय रहने दे.. नीबू पानी बना औऱ नीबू ज्यादा डालना..

आदिल नीरज से - इसका हर बार का ऐसा ही है.. संभाल नहीं पाता फिर भी पीता है.. बेवड़ा..

गौतम फ़ोन निकालकर रेशमा को फ़ोन करता है

रेशमा - हेलो...

गौतम रोते हुए - रेशु..

रेशमा फ़िक्र से - क्या हुआ गुगु .. तुम ठीक तो हो ना?

गौतम रोते हुए - रेशु.. रेशु...

रेशमा पूरी घबराहट से - क्या हुआ ग़ुगु.. कुछ बोलो ना.. मुझे डर लग रहा है.. मैं अभी तुम्हारे पास आ रही हूँ..

गौतम - रेशु.. तुम्हारे भाई ने मुझे बेवड़ा बोला.. ये बोलकर गौतम जोर से रोने लगता है..

रेशमा ये सुनकर अपना सर पकड़ कर बैठ जाती है औऱ कहती है - कहा था ना कुत्ते ज्यादा मत पीना.. मेरी जान निकाल के रख दी..

गौतम रोते हुए - तुम्हारी याद आ रही है रेशु..

रेशमा - फोन आदिल को दे.. मैं डाटती हूँ उसे..

गौतम आदिल को फ़ोन देते हुए - लो डांटो साले को.. जीजाजी को बेवड़ा बोलता है.. बहन का लंड..

आदिल - हलो आपा..

रेशमा - अरे किसने कहा इसे दारु पिलाने को.. नीबू चटा इसे.. और उतार इसकी शराब..

आदिल - ठीक है आपा..

शमा नीबू पानी लेकर आ जाती है..

आदिल - आपा शमा से बात करो.

शमा आदिल से फ़ोन लेकर बात करती हुई चली जाती है औऱ गौतम एक के बाद एक दोनों गिलास नीबू पानी पी जाता है..

आदिल नीरज से - सिर्फ तुम दोनों ही हो घर में? अंकल आंटी?

नीरज - वो बुआ ज़ी के गए है आज उनके कोई फंक्शन था.. शमा की तबियत खराब थी इसलिए मैं नहीं गया..

गौतम नशे से बाहर आता हुआ - अच्छा किया.. उसका बाप बन्दुक लेकर ढूंढ़ रहा है तुम दोनों को..

नीरज - तुम सच कह रहे हो?

गौतम - रेशमा ने बताया था.. शमा को घर से मत निकलने देना औऱ किसी खबर ना लगे वो यहां है.. अंकल आंटी को भी समझा देना..

नीरज - वो तो खुद नहीं चाहते किसी को पता लगे.. शमा जब से आई है घर से बाहर नहीं गई..

आदिल - अच्छा अब चलते है..

आदिल औऱ गौतम जैसे ही खड़े होते है नीचे का दरवाजा खुलता औऱ नीरज की माँ लीला घर आ जाती है आदिल औऱ गौतम को देखकर नीरज से पूछती है..

लीला - नीरज ये कौन?

नीरज - मेरे दोस्तों है माँ.

लीला - दोनों से नमस्ते बेटा..

आदिल औऱ गौतम - हलो आंटी..

गौतम लीला को देखकर मस्त हो गया औऱ बोला - आंटी आप किसी फंक्शन में गई थी?

लीला - हाँ बेटा.. नीरज ने बताया होगा ना..

गौतम - हाँ आंटी..

लीला नीरज से - बेटा तेरे पापा बुला रहे है एक बार बहु को लेजा मिल ले.. कोई वकील भी है उनके साथ..

नीरज - नहीं माँ इतना दूर नहीं जाऊ..

लीला - जरुरी काम है बेटा.. तब तक मैं खाना बना दूंगी..

गौतम - कोई बात नहीं नीरज तू मेरी बाइक ले जा..

लीला - गौतम को हैरानी से देखते हुए - नीरज..

गौतम - आंटी हमें सब पता है.. हमने ही नीरज की मदद की थी..

नीरज जाते हुए - माँ मैं जाता हूँ शमा को लेकर पापा के पास..

लीला सास में सांस लेते हुए मुस्कुरा कर - बेटा तुम भी खाना खाओगे ना..

आदिल - नहीं आंटी हम चलते है.. मुझे लेट हो रहा है

गौतम - आंटी आप बनाओगी तो मैं तो जरुर खाके जाऊंगा..

लीला - ठीक है बेटा तुम बैठो.. खाना खाके ही जाना..

लीला रसोई में चली जाती है और गौतम कुछ देर बाद रसोई के दरवाजे पर आ जाता है..

लीला गौतम को देखकर - अरे बेटा कुछ चाहिए था..

गौतम - हाँ आंटी.. थोड़ा पानी मिल जाता तो.

लीला पानी देती हुई - लो बेटा.. पिलो..

गौतम पानी पीता हुआ - आंटी वैसे आपको देखकर लगता नहीं है की आप नीरज की माँ हो.. आप तो बहुत यंग लगती हो..

लीला गौतम से गिलास वापस लेकर मुस्कुराते हुए - thanks बेटा.. कुछ औऱ चाहिए?

गौतम - नहीं आंटी बस.. मैं यही खड़ा रह सकता हूँ. अकेले बोर हो जाऊंगा..

लीला - अरे वहा क्यों खड़ा है बेटा.. रसोई के अंदर आजा..

गौतम अंदर आते हुए - thanks आंटी.. वैसे मुझे खाना बनाने का शोक है आंटी.. मैं तो घर पर बड़े चाव से खाना बनाता हूँ..

लीला - तू क्यों खाना बनाता है तेरी मम्मी नहीं बनाती?

गौतम लीला के बगल में खड़ा होकर - होगी तब बनाएगी ना आंटी.. वो तो अपने आशिक से साथ भाग गई.. जब मैं छोटा था..

लीला गौतम की शकल देखकर उसपर तरस खाते हुए गौतम को गले लगा कर - हाय.. इतने फूल से प्यारे बच्चों को छोड़ के चली गई.. कितनी पत्थर दिल होगी वो..

गौतम लीला को अपनी बाहों में जकड़के अपनी तरफ खींच लेता है औऱ उसकी गर्दन के पास होंठ से चूमते हुए इमोशनल ड्रामा करते हुए कहता है - माँ की बहुत याद आती है आंटी.. काश वो भी आपके जितनी ही अच्छी होती..

लीला गौतम के चेहरे को अपने दोनों हाथों की हथेलियों में लेकर गौतम के गाल चूमते हुए कहती है..

लीला - बेटा मैं तेरी माँ तो नहीं हूँ पर तू मुझे अपनी माँ की तरह ही समझ सकता है.. तेरी जब इच्छा हो तू यहां आकर मेरे हाथ का खाना खा सकता है. मुझसे बात कर सकता है..

गौतम मुस्कुराते हुए - शुक्रिया आंटी..

लीला - बता क्या खायेगा? क्या बनाऊ तेरे लिए?

गौतम - फिलहाल एक कप चाय से काम चल जाएगा..

लीला मुस्कुराते हुए - ठीक है बेटा..

गौतम - आपका नाम क्या है आंटी?

लीला चाय चढ़ाते हुए - लीला बेटा.. तेरा?

गौतम - गौतम आंटी..

दोनों में बातें शुरु हो जाती है औऱ जब चाय बनती है तो गौतम से रहा नहीं जाता औऱ वो लीला की गांड पर एक थप्पड़ मार देता है जिससे चाय छन्नी करती लीला का बैलेंस ख़राब हो जाता है औऱ चाय गौतम की जीन्स पर गिर जाती है..

लीला - ये क्या कर रहा है.

गौतम जीन्स पर से चाय साफ करता हुआ औऱ चाय की गर्माहट से झूझता हुआ - मच्छर था आंटी आपकी साडी पर उसे मार रहा था.. अह्ह्ह..

लीला गौतम को दर्द में देखकर - बेटा.. इधर दिखा.. बहुत जल रहा है? कहाँ जला.. दिखा जरा.

गौतम अपने लंड पर हाथ रखकर दर्द में होने का नाटक करते हुए - रहने दो आंटी आप मत देखो..

लीला गौतम का हाथ हटाते हुए - हाथ हटा ना.. दिखा तो एक बार..

गौतम औऱ नाटक करते हुए - नहीं आंटी आप मत देखो..

लीला जबरदस्ती गौतम का हाथ हटाकर जीन्स खोल देती है.. गौतम ने चड्डी पहनी नहीं थी सो गौतम का लम्बा मोटा लोडा उसके सामने आ कर लहरा जाता है जो सीधा शीला के होंठों पर टकर मारता है.

लीला लंड को देखकर सन्न रह जाती है औऱ लंड को ही देखती रह जाती है एक बार के लिए उसकी काम भावना बाहर आने लगती है जिसे वो अंदर ही दफ़न करके रह जाती है..

गौतम कुछ देर बाद वापस दर्द में होने का नाटक करते हुए - आंटी बहुत जल रहा है..

लीला लंड पकड़ कर - कहा हो रहा है बेटा.

गौतम लड के टोपे पर हाथ लगा कर - यहाँ आंटी बहुत जल रहा है..

लीला लंड के टोपे पर हाथ लगाती है तो गौतम सिसकते हुए कहता है - हाथ मत लगाओ आंटी..

लीला - बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है बेटा?

गौतम - बहुत आंटी.

लीला लंड देखकर काम के सानिध्य में आ चुकी थी और गौतम का धागा लाल हो चूका था. उसने लंड पर अपनी जीभ फिरा दी और चूमते हुए कहा - अब ठीक लगा बेटा..

गौतम - हाँ आंटी.. थोड़ा सा दर्द कम हुआ..

शीला लंड मुंह लेकर टोपा चूती हुई - दर्द कम हुआ बेटा?

गौतम लीला को देखकर - हाँ आंटी.. हो रहा है..

इतना कहकर गौतम ने लीला के सर पर हाथ रखकर उसके मुंह में लंड औऱ घुसा दिया फिर धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा..

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लीला बिना कुछ बोले गौतम का साथ देने लगी औऱ उसका लंड चूसने लगी...

गौतम ने कुछ ही पलों में लीला के मुंह में वीर्य की धार छोड़ दी..

लीला गौतम का मुठ पीकर खड़ी होती हुई - तू ठीक है ना बेटा अब..

गौतम - हाँ आंटी अब बहुत आराम है

लीला भी काम भावना से गौतम को देख रही थी जिसे गौतम समझ रहा था..

गौतम - ठीक है आंटी अब मैं चलता हूँ खाना फिर कभी खा लूंगा..

लीला गौतम का हाथ पकड़कर - बेटा.. तेरी बाइक नीरज लेकर गया है तू उसे वापस लेकर ही जाना.. तब तक मैं तेरा दर्द औऱ ठीक कर देती हूँ..

गौतम भोलेपन का नाटक करते हुए - वो कैसे आंटी?

लीला गौतम को अंदर कमरे में लेजाती हुई - बताती हूँ बेटा.. चल..

गौतम मासूमियत का नाटक करते हुए - यहां क्यों लाई हो आंटी?

लीला - बेटा तूने कभी गाडी चलाई है?

गौतम - हाँ आंटी रोज़ चलाता हूँ..

लीला - वो गाडी नहीं बेटा.. जो औरत के ऊपर चढ़कर चलाते है..

गौतम जान कर भी अनजान बनता हुआ - नहीं आंटी.. मैं तो कभी किसी औरत के ऊपर चढ़ा ही नहीं..

लीला - कितना भोला है तू.. चल आज मैं तुझे गाडी चलाना सिखाती हूँ तेरा दर्द बिलकुल ख़त्म हो जाएगा.. आ लेट जा बेड पर..

गौतम पिठ के बल लेटते हुए - पर आंटी?

लीला गौतम की जीन्स नीचे करके लंड हिलती हुई - बेटा कभी मम्मी ने दूदू भी नहीं पिलाया होगा तुझे? आ मैं पीलाती हूँ..

गौतम लीला के बूब्स पकड़ कर चूसता हुआ - आपके तो बहुत बड़े बड़े है आंटी..

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लीला - अहह.. बेटा ये निप्पल्स चूस.. हाँ.. ऐसे.. आह्ह.. अच्छा लगा?

गौतम बूब्स चूसते हुए - हाँ आंटी बहुत अच्छा..

लीला - ये वाला भी चूस ले बेटा..

गौतम दूसरा बूब्स चूसते हुए - आपके दूदू आता ही नहीं है आंटी..

लीला - कैसे आएगा बेटा.. तूने दही जो नहीं डाला मेरे अंदर..

लीला गौतम के लंड को साडी उठाके अपनी फटी हुए भोसड़े में घुसाती हुई मीठे दर्द से - अहह.. बेटा..

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लीला लंडपर धीरे धीरे उछल कर चुदवाते हुए मजे लेती हुई आँख बंद कर लेटी है औऱ गौतम मुस्कुराते हुए अब लीला का हाथ पकड़कर अपने ऊपर खींच लेता है औऱ उसे पलटकर होने नीचे लेटा लेता है औऱ झटके मारने लगता है.. लीला कुछ ही झटको में झड़कर ढीली पड़ गई पर गौतम लगातर चोदता रहा..

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लीला आहे भरते हुए - अहह.. बेटा आराम से गाडी चला..

गौतम - आंटी पीछे से गाडी चलानी है..

लीला घोड़ी बनती हुई - रुक बेटा.. ले चला पीछे से गाडी..

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गौतम चुत में वापस लंड डालके चोदता हुआ - आंटी बहुत मस्त गाडी है आपकी..

लीला - तू नंबर लेजा बेटा.. जब भी गाडी चलाने का मन हो फ़ोन कर देना..

गौतम - ठीक है आंटी.. और नंबर लेने के बाद वापस तेज़ तेज़ झटके मारते हुए चोदने लगता है..

गौतम लीला की चुत में घुसा हुआ उसे चोद रहा था औऱ जब वो झड़ने वाला था तभी कमरे में नीरज अंदर आते हुए बोला - माँ पापा ने आपको भी बुलाया है.. औऱ ये कहने के बाद जैसे ही गौतम औऱ शीला को देखा उसका सर चकरा गया औऱ गौतम शीला की चुत में झड़कर ढीला पड़ गया..

नीरज गुस्से में गौतम की शर्ट का कॉलर पकड़कर से - अबे तूने मेरी माँ चोद दी? मैं तुझे जान से मार दूंगा..

लीला साडी नीचे करके - नीरज छोड़ उसे..

गौतम अपनी जीन्स ऊपर करके पहनते हुए - नाराज क्यों हो रहा है.. प्यार से बात करते है.. आंटी देखो ना...

लीला - छोड़ नीरज उसे..

नीरज गुस्से में - नहीं माँ मैं इसका खून कर दूंगा..

शीला नीरज को जमा के थप्पड़ मारती हुई - छोड़ इसे..

नीरज गौतम की गिरेबान छोड़ता हुआ - माँ इसने आपके साथ..

गौतम - आंटी मैं तो गाडी चला रहा था...

लीला - जो हुआ सो हुआ. तू किसीसे कुछ नहीं कहेगा नीरज समझा? चल तेरे पापा के पास चलते है..

गोतम नीरज से - भाई बाइक चाबी देदे मुझे भी जाना है.

लीला मुस्कुराते हुए - तू पहले नीरज औऱ मुझे छोड़ दे फिर जाना..

गौतम - है आंटी..

घर से बाहर आकर..

गौतम - नीरज तू ही चला बाइक.. चाय गिर गई थी मेरी ऊँगली में हल्का सा दर्द है..

नीरज बाइक स्टार्ट करता हुआ बैठ..

गौतम - आंटी बैठो..

लीला - मैं पीछे बैठ जाउंगी तू बैठा जा..

गौतम - गिर जाओगी आंटी आप बीच में बिठो..

लीला बीच में बैठ जाती है औऱ गौतम पीछे..

गौतम लीला के साथ छेड़खानी करने लगता है..

गौतम शीला का चुचा पकड़कर मसलता हुआ शीला के मुंह को अपनी तरफ घुमा के चूमने लगता है..

लीला भी मज़े लेती है औऱ नीरज मिरर से सब देखकर भी चुपचाप बाइक चलाता है और लीला से कुछ नहीं कहता...

गौतम नीरज और लीला को उनके कही जगह छोड़कर..

गौतम - चलता हूँ आंटी..

लीला नीरज के सामने ही गौतम का लंड दबाकर - वापस आएगा ना मिलने बेटा..

गौतम नीरज को देखकर लीला का बोबा दबाता हुआ - जल्दी आऊंगा आंटी... नीरज से शमा का ख्याल रखना..

नीरज गुस्से से लीला और गौतम को देखकर - जा यहां से..

गौतम मुस्कुटे हुए अपने घर चला जाता है..

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गौतम - इतने दिनों से बस सोच रही हो आप.. हर्ज ही क्या है आपको रूपा और माधुरी के साथ रहने में? कब से वो दोनों आपको बुला रही हैं मगर आप है की जाना ही नहीं चाहती.. ऐसी छोड़ दो माँ.. हम कब तक इस घर में रहेंगे? आप जो चाहती थी वह होने वाला है आपको एक नया घर मिलने वाला है आप घर की मालकिन बनने वाली हो मगर पता नहीं क्यों आपने अपनेआप को रोका हुआ है.. एक बार फिर से सोच लो माँ.. रूपा और माधुरी दिल की बुरी नहीं है.. वह दोनों आपको अपनी बड़ी बहन की तरह रखने को तैयार है.. आप कहेंगी तो मैं भी उन दोनों से दूरी बनाकर रखूंगा.. आप इस तरह वहां जाने से इंकार मत कीजिए..

गौतम ने समझाते हुए अपनी मां सुमन को यह सब कहा तो सुमन पलटकर गौतम को जवाब देती हुई बोली..

सुमन - मैं नहीं जानती ग़ुगु मेरा रूपा और माधुरी के साथ नहीं रहने का फैसला सही है या गलत.. मगर मैं बस इतना जानती हूं कि मैं तुझे उन दोनों के साथ अब और नहीं देख सकती.. मैं किसी भी कीमत पर रूपा और माधुरी के साथ उस घर में नहीं रहूंगी और ना ही तुझे रहने दूंगी..

गौतम सुमन की बातें सुनकर घर से निकलते हुए उसे कहता है..

गौतम - जैसी आपकी इच्छा माँ.. अगर आप नहीं जाना चाहती तो कोई बात नहीं.. मैं आपके ऊपर यहां से चलने के लिए और दबाव नहीं डालूंगा.. आपके साथ मैं यहां भी आराम से रह सकता हूं.. मैं बस आपकी ख़ुशी के लिए आपको समझा रहा था..

ये कहते हुए गौतम घर से निकल जाता है और कार लेके आदिल के चाचा के घर के पास एक मोड़ पर आकर रजिया को फ़ोन करता है और उसे बहाना बनाकर घर से बुलाकर अपने साथ कार में बैठा कर कहीं जाने के लिए निकल पड़ता है..

गौतम के फोन पर आदिल का फोन आ जाता है जो उसे एक जगह मिलने के लिए कहता है..

गौतम आदिल की बताइ किसी जगह पहुंचता है तो देखा है कि आदिल अपने मामू की लड़की नरगिस के साथ खड़ा था.

शाम के 5:00 बजे का समय था और इस वक्त आदिल नरगिस के साथ एक पार्क के पास खड़ा था साथ ही उसके करीब उसके मामा की लड़की नरगिस भी खड़ी थी जो की बुर्के में थी. गौतम रजिया को लेकर उसी पार्क के पास आदिल की खड़ी जगह आ जाता है..

आदिल रज़िया को देखता है तो वो चौंक जाता है रज़िया आदिल को सलाम करती है और आदिल गौतम से कहता है..

आदिल - अबे रज़िया ही मिली थी तुझे?

गौतम - अब तेरी अम्मी को साथ से लाने से मना कर दिया तूने.. तो और किसको लाता? एंट्री चाहिए ना..

आदिल गाडी मैं बैठते हुए - ठीक है चल..

गौतम आदिल नरगिस सबको को गाडी में बैठा लेता है और चल देता है..

आदिल - मास्क तो ले लिये ना तूने?

गौतम - हाँ.. सब है..

नरगिस - मास्क लगाकर फ़िल्म देखेंगे?

आदिल - हाँ ख़ास फ़िल्म है मज़ा आएगा तुझे..

रज़िया - गौतम.. कोनसी फ़िल्म है..

गौतम - अभी पता नहीं.. जाकर पता चलेगा..

नरगिस - कहा जाना है? नया सिनेमाहॉल खुला है?

आदिल - नहीं.. पुराना है.. बहुत ख़ास है.. आसानी से टिकट नहीं मिलती.. बड़ी मुश्किल से मिली है..

रज़िया मुस्कुराते हुए - अच्छा? फ़िल्म देखते टाइम हमारे साथ कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करोगे ना..

आदिल नरगिस की चूची पकड़ता हुआ - ज्यादा कुछ नहीं बस एक राउंड लेंगे..

नरगिस आदिल से अपनी चूची छुड़वाते हुए - क्या?

गौतम रज़िया की चुत पर हाथ लगाते हुए - ये..

रज़िया गौतम की तरफ बढ़कर उसके गाल चूमते हुए - सिर्फ एक बार ही लोगे?

गौतम रज़िया के होंठ चूमते हुए - तू एक राउंड ही संभाल लेना मुझे..

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आदिल - गौतम मेडिकल पर रोक कंडोम ले लेता हूँ..

गौतम - छोड़ यार.. ये तो तेरे घर की घोड़िया है इनके साथ भी क्या कंडोम लगा के करेंगे?

नरगिस आदिल से - नहीं.. मैं बिना कंडोम नहीं करने दूंगी..

आदिल - रोक ले यार तू.. ले आता हूँ..

गौतम मेडिकल पर ग़ाडी रोकता है और आदिल कंडोम लेने चला जाता है..

रज़िया गौतम के ऊपर चढ़कर उसके होंठो पर टूट पडती है और अपने होंठों से चूमने लगती है जिसे देखकर नरगिस कहती है..

नरगिस - रज़िया तू तो यही शुरु हो गई.. अरे जगह तो देख ले.. लोग है आस पास..

रज़िया kiss तोड़कर - क्या करू नरगिस.. जब पास में ऐसा हसीन लड़का हो तो कैसे सब्र करू..

आदिल कंडोम लेकर आ जाता है साथ अपने लिए सेक्स पावर की गोली भी ले लेता है..

रज़िया वापस सीट पर आ जाती है और गौतम गाडी को चला कर सीधा एक पुरानी ईमारत के पीछे की बेसमेंट में लगा देता है जहा कोई नहीं था सब सुनसान था..

नरगिस - यहां कोनसी मूवी चल रही है? कोई भी तो नहीं है..

रज़िया - हाँ.. यहां तो कोई नहीं है.. और ये इलाका भी बहुत सुनसान है..

आदिल - अरे ऊपर है सिनेमा हॉल..

नरगिस - इस बिल्डिंग में?

आदिल - हाँ..

रज़िया - झूठ मत बोलो आदिल भाई.. तुम दोनों हमें किसी फ्लेट में लेजाकर पेलने वाले लगते हो..

नरगिस - आदिल.. ये क्या मज़ाक़ है.. तुम्हे करना था तो वही कर लेते.. मैंने मना थोड़ी किया था..

गौतम गाडी से उतरते हुए - अरे ख़ुफ़िया फ़िल्म है.. चलो आ जाओ.. चलते है..

गौतम आदिल रजिया और नरगिस के साथ उस पुरानी बिल्डिंग के बेसमेंट में गाड़ी लगाकर आगे की तरफ आ जाता है और सीडीओ से चढ़ता हुआ तीसरी मंजिल पर पहुंचता है.. यहां तक सारा रास्ता सुनसान था और कोई भी नहीं था मगर जैसे ही वह एक दरवाजे से एंट्री लेकर अंदर घुसते हैं वहां बहुत चल पहला और शोर शराब सब कुछ था.. वहां लोगों की भीड़ लगी हुई थी और सब किसी न किसी के साथ थे.. सब ने मास्क लगाया हुआ था और यहां पर गौतम ने भी सबको मास्क लगाने के लिए कह दिया था..

वहां से एक दरवाजे पर एंट्री पॉइंट था जहां पर दो लोग खड़े हुए थे और पर कपल एंट्री कर रहे थे लोग अपनी टिकट दिखाकर अंदर हाल की तरफ जा रहे थे और अपनी-अपनी सीट पर बैठ रहे थे सामने एक बड़ा सा पर्दा था जैसे कि आमतौर पर सिनेमा हॉल में होता है..

इस हाल की खास बात यह थी कि यहां पर हर तरफ से एंटी और एग्जिट प्वाइंट बने हुए थे पूरा कमरा साउंड प्रूफ था जिससे कोई भी शोर बाहर नहीं जा सकता था. सामने का पर्दा भी बिल्कुल सिनेमा हॉल की तरह साफ सुथरा और क्लियर था जिस पर कुछ ही देर में कोई पिक्चर चलने वाली थी..

गौतम ने रजिया के साथ तो आदिल ने नरगिस के साथ एंट्री ली.. एंट्री लेकर चारों सबसे पीछे की सीट पर बैठ गए जो गौतम के फ्रेंड ने रिक्वेस्ट करके दिलवाई थी..

5:00 बजने वाले थे और 6:15 पर पिक्चर शुरू होने वाली थी जो की डेढ़ घंटे की थी.. आज पिक्चर का थीम incest पर था जिसमें पारिवारिक रिश्तों में व्यभिचार को दिखाते हुए अश्लीलता का प्रदर्शन किया जा रहा था..
फिल्म का पोस्टर देखने से ऐसा लगता था कि इसमें घर में होने होने वाले व्यभिचार को कामुकता के रंग में रंगकर परोसा गया है..

सीट पर बैठते ही गौतम ने नरगिस के गले में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों पर अपने होंठो रखते हुए उसके होठों को खींचते हुए इस तरह चुम्मा जैसे कि वह आदिल की गर्लफ्रेंड ना होकर उसकी अपनी गर्लफ्रेंड हो..
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नरगिस विरोध करना चाहती थी मगर एकदम से हुए इस हमले पर वह अपनी प्रतिक्रिया देने में असमर्थ थी और उसके होंठ गौतम के होठों के गुलाम बन गए. उसने अपने होठों के जाम गौतम को पिला दिए और जब गौतम उसके होठों को चुमकर चुत पर अपना हाथ रखता है तब नरगिस गौतम को रोक देती है और उसके साथ चुंबन को तोड़ लेती है..

आदिल ये सब देख रहा था मगर उसने गौतम को रोकने का कोई इरादा नहीं किया और ना ही उसने कोई कोशिश की.. वो बस सामने देखता हुआ पर्दे की तरफ देखने लगा..

रज़ीया ने गौतम को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके होठों पर होंठ लगाती हुई बोली..

रज़िया - मैं हूँ ना.. गौतम.. मेरे साथ करो..

गौतम ने रज़िया को चुमा और चूमते हुए उसके बदन का जायजा लेने लगा. उसके बदन और गांड पर हाथ फिरता हुआ वह रजीया को चूमे जा रहा था कि सामने पर्दे पर पिक्चर शुरू हो चुकी थी..

हॉल के अंदर बैठे हुए सभी कपल एक दूसरे के साथ चुम्माचाटी और दूसरी तरह की कामुक हरकतो में लीन हो चुके थे वही सामने फ़िल्म की शुरुआत में दिखाया जा रहा था की एक 45 के करीब की खूबसूरत औरत एक 25 साल के लड़के के आगे घोड़ी बनी हुई थी और लड़का उसे चोद रहा था.

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फ्लिम में चुत और लंड का सम्पर्क दिखाते हुए उन दोनों के चेहरे भी दिखाए जाते है.. इसीके साथ सामने दिवार पर लटकी घड़ी में रात के 2 बजे का समय दिखाया जाता है और उसके पास एक तस्वीर दिखाई जाती है जिसमे एक 50 साल का आदमी का चेहरा था जिसकी फोटो पर माला चढ़ी हुई थी.. उसी तस्वीर के करीब बाजू में एक और बड़ी सी तस्वीर थी जिसमे वो आदमी इस वक़्त चुद रही उस औरत के साथ खड़ा था और जो लड़का औरत को चोद रहा था वो उन दोनों के पैर छू रहा था.. जिससे पता चलता है की इस वक़्त जो लड़का जिस औरत को चोद रहा है वो उसकी माँ है और उसके बाप की मौत हो चुकी है..

नरगिस और रज़िया को अब पता चल गया था की ये सेक्स मूवी है.. हाल में बैठे हुए कपल में से बहुत से कपल ने अपने कपड़े साइड में रख दिए थे और अपने लंड और साथ आई लड़की की चुत और चुचो को भी नंगा कर दिया था और सेक्स की शुरुआत कर दी थी..

आदिल सेक्स की गोली खा चुका था और इस वक्त उसने नरगिस को अपनी बाहों में लेकर चूमना शुरू कर दिया था इसी के साथ ही गौतम ने भी रजीया के साथ मुंह मारना शुरू कर दिया था और अपना लंड बाहर निकाल कर रजीया के मुंह में दे दिया था जिसे रजीया बड़ी जोर से चूसते हुए मुस्कुराकर गौतम को देख रही थी..

गौतम रजिया को लंड चूसते हुए नरगिस की चुत पर हाथ रखकर उसकी चुत मसल रहा था.. काजल की बाहों में नरगिस यह समझ नहीं पा रही थी कि उसकी चुत पर किसका हाथ है और वह गौतम को अपनी चुत पर हाथ लगाने से नहीं रोक रही थी.. आदिल में जब नरगिस को अपनी बाहों से थोड़ा ढीला छोड़ तब उसे पता चला कि उसकी चुत पर आदिल का नहीं बल्कि गौतम का हाथ था और उसने गौतम का हाथ हटाने की कोशिश की मगर गौतम ने नरगिस की चुत को कस के पकड़ लिया और मसल दिया जिससे नरगिस की आह निकल गई..

नरगिस की नजर जब गौतम के लंड पर गई तब उसकी आंखें खुली की खुली रह गई और लंड चुस्ती हुई रजिया को देखने के बाद में नरगिस की नजर गौतम के चेहरे पर पड़ी जिसपर एक कातिल मुस्कान छाई हुई थी..

गौतम का लंड देखने के बाद नरगिस ने गौतम के चेहरे पर मुस्कान देखी.. नरगिस भी मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगी और इस बार उसने अपनी चुत
से गौतम का हाथ हटाने का कोई इरादा नहीं किया और गौतम को अपनी चुत से छेड़खानी करने की इज़ाज़त दे दीं. गौतम एक हाथ से नरगिस की चुत मसल रहा था दूसरे से अपना लंड चुस्ती हुई रज़िया की चुत को मसल रहा था..
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आदिल भी नरगिस के होठों को चूमते हुए उसके बूब्स दबा रहा था और नरगिस के मज़े ले रहा था..

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फिल्म मैं आगे दिखाया गया कि वह लड़का उस औरत के साथ घर के हर कोने में रोमांस कर रहा था और रोमांस करते हुए औरत को खुश रख रहा था साथ ही उसके साथ भर भर के चुदाई का काम भी कर रहा था.. दोनों की चुदाई की धमाकेदार आवाजे हॉल के स्पीकर से इतनी देर आ रही थी की हॉल में कपल की चुदाई की आवाजे उसमे दब कर रह जा रही थी..

आदिल ने नरगिस की सलवार नीचे करके उसे घोड़ी बना लिया और गौतम की तरफ नरगिस का मुंह करके पीछे से कंडोम लगाकर चोदने लगा..

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गौतम के सामने जब नरगिस का चेहरा आया तो गौतम ने नरगिस के बाल पड़कर उसका चेहरा अपने लंड पर झुका दिया और नरगिस पीछे आदिल से चुदवाते हुए आगे रज़िया की तरह गौतम के लंड को चूसने लग गई..

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गौतम के लंड पर रज़िया और नरगिस दोनों का मुंह था और दोनों बड़े चाव से लंड चूसती हुई गौतम के आंड चाट रही थी..

गौतम ने सामने हाल में देखा तो परदे की रोशनी मैं उसे कई कपल चुदाई करते हुए नज़र आ रहे थे उसके पास भी जो कपल बैठा हुआ था सेक्स करने लगा था...

गौतम को अब चुत चोदनी थी उसने नरगिस के मुंह से अपना लंड निकाल लिया और रज़िया की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने लंड पर बैठा लिया..


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गौतम ने चुत पर लंड लगाते हुए झट से रज़िया की चुत में अपना लंड घुसा दिया.. रज़िया बहुत कामुक लड़की थी उस ने अपनी चुत में गाजर मूली बैगन बैलन लोकी सब घुसाईं हुई थी तो गौतम के लंड को अंदर जाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई मगर जब आधे से ज्यादा लंड जाने लगा तो रज़िया की चीख निकल गई और गौतम ने उसे चोदना शुरु कर दिया..

रज़िया की सडक छाप कुतिया की तरह सिसकते हुए गौतम के लंड पर उछल रही थी और आदिल नरगिस के बाल पकड़ कर पीछे से उसकी चुत मार रहा था और अब वो झड़ने वाला था.. रज़िया भी गौतम का लंड लेते ही झड़ गई और अब उसकी चुत पूरी गीली थी जिससे लंड ऊपर नीचे होने में ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था.. चुदाई चरम पर थी चारो सम्भोग में सुख भोग रहे थे.. फ़िल्म भी अपनी गती से आगे बढ़ रही थी और चुदाई पर चुदाई हो रही थी हॉल में कपल खुलकर एक दूसरे को चोद रहे थे सबकी शर्म निकल चुकी थी..

आदिल भी झड़ गया और सीट पर बैठ गया.. गौतम ने रज़िया को लंड पर से उतार दिया और आगे सीट पर झुका कर पीछे से उसकी चुत मारने लगा.. इसके साथ उसने देखा की नरगिस भी सीट पर बैठकर आदिल का कंडोम बांध कर सीट के नीचे रख रही थी.. गौतम ने थोड़ी देर रज़िया को छोड़ तो वो काम के चरम पर पहुंचकर वापस झड़ गई..

गौतम ने रज़िया छोड़ दिया और नरगिस का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया.. नरगिस भी बिना कुछ कहे गौतम के ऊपर आ गई और बिना कंडोम की परवाह किये गौतम के लंड को सिसकारियों और कामुक आवाजो के साथ चुत में ले गई..

गौतम ने नरगिस को गोद में उठाकर चोदना शुरुआत कर दिया जिसे आस पास के कपल देखकर तालिया बजाते हुए शोर करने लगे... .


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फ़िल्म आधी ख़त्म हो चुकी थी और आदिल ने अब रज़िया का हाथ पकड़कर उसे सीट पर घुमा लिया और चुत में लंड डाल कर चोदने लगा रज़िया आदिल के लंड से आराम से चुद रही थी और गौतम को देख रही थी जो नरगिस को लोडे पर उछाल उछाल के चोद रहा था. नरगिस झड़ गई और हाफने लगी मगर गौतम चोदे जा रहा था.. और ताबड़तोड़ झटके माररहा था.

गौतम ने इशारे से आदिल को कुछ कहा तो वो रज़िया को छोड़कर गौतम के आगे आ गया और नरगिस के पीछे खड़ा हो गया.. गौतम ने चोदना रोका तो आदिल ने नरगिस की गांड के छेद पर अपना खड़ा लंड लगा के झटका मारा और अपना लंड नरगिस की गांड में पेल दिया..

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नरगिस गांड मरवा चुकी थी इससे उसकी गांड में लंड आराम से चला गया और अब वो आदिल और गोतम के बीच आगे पीछे दोनों तरफ से चुद रही थी उसकी चीखे आदिल के कानो में मिश्री बनकर पड़ रही थी.. नरगिस की हालात खराब थी वो दोनों से छोड़ने को कह रही थी मगर दोनों उसको आगे पीछे से चोदे जा रहे थे..

आदिल ने चुदाई के दौरान नरगिस को कौशल की बात बता दीं और गाली देते हुए कहा..

आदिल - मुझे धोखा देगी रंडी.. ले.. चुदाई खानी छिनाल.. लंड चाहिए ना तुझे.. चुद अब..

नरगिस पहले ही इतनी हार्ड चुदाई से थक चुकी थी और अब उसे दर्द हो रहा था वही आदिल की बात सुनकर वो शर्म से लाल हो चुकी थी और अब उसने दोनों से छोड़ने की अपील करना भी बंद कर दिया था..

रज़िया सीट पर बैठी हुई नरगिस की चुदाई देखकर घबरा गई थी और उसने अपनी चुत कपडे से पोंछकर वापस चुदने का इरादा छोड़ दिया रहा..

आदिल और गौतम के साथ नरगिस की चुदाई देखकर लोग तालिया बजाते हुए अपने अपने साथी के साथ मज़े ले रहे थे फ़िल्म में भी चुदाई का सीन चल रहा था जहा माँ रसोई में खाना बनाते हुए बेटे से चुद रही थी..

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आदिल वापस झड़ गया और नरगिस की गांड में खाली होकर सीट पर आ बैठा वही अब गौतम भी झड़ने वाला था उसने नरगिस को सीट पर पटक दिया और रज़िया के बाल पकड़कर उसके मुंह को नरगिस के मुंह के पास लाकर दोनों के मुंह के सामने अपना लंड हिलाते हुए उनके मुंह पर अपना वीर्य एक के बाद एक अपनी पिचकारी से कई धार छोड़कर झड़ गया..
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नरगिस शर्म और चुदाई से बेहाल थी वही रज़िया दो बार झड़कर संतुष्ट और खुशहाल हो चुकी थी..

फ़िल्म समाप्ति की और थी..

रज़िया ने मुंह में लेकर गौतम का लंड साफ किया और अपने मुंह अपने दुप्पटे से.. नरगिस भी उसी दुप्पटे से मुंह साफ करने लगी..

आदिल का गुस्सा शांत नहीं हुआ था वो दो बार झड़ चूका था और होली खाने से अब भी उसका लंड सख्त था उसने पहिसे नरगिस को सीट पर घोड़ी बना लिया और नरगिस शर्म के मारे बिना कुछ बोले सिसकती हुई वापस आदिल से गांड मरवाने लगी..


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थोडी देर बाद गौतम ने आदिल को नरगिस के पीछे से हटा दिया और अपना लंड नरगिस की गांड में घुसा दिया जिससे नर्गिस गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाते हुए गांड मराने लगी आदिल के दिल को सुकून मिल गया और उसने रज़िया को भी उसी तरह घोड़ी बना लिया..
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अगल बगल रज़िया और नरगिस एक जैसी पोज़ में घोड़ी बने हुए थे.. नरगिस की गांड में गौतम खलबली मचा रहा था और रज़िया की चुत में आदिल उतरा हुआ था मगर रज़िया को उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था.. रज़िया अपने दाने को छेड़ती हुई वापस कामुक हो रही थी और आदिल से चुद रही थी वही नरगिस तो ऐसे फसी जैसे रज़िया गुंडों में..

नरगिस ने हाथ जोड़कर गौतम से छोड़ने को कहा तो गौतम को तरस आ गया और उसने नरगिस की गांड से लंड निकाल लिया.. आदिल भी रज़िया के साथ वापस झड़ गया था.

गौतम के लंड पर किसी की नज़र पड़ी तो उसने गौतम को देखकर कहा.. बड़े लंड वाल.. बड़े लंड वाला.. गौतम के आस पास की 3-4 लड़की जो अपने कपल के साथ थी गौतम का लंड देखकर गौतम पर टूट पड़ी और एक साथ उसके लंड को चूसने लगी..

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गोतम को अचानक समझ नहीं आया की ये क्या हुआ.. आदिल रज़िया और नरगिस भी ये सब देख रहे थे.. गौतम सामने 4-5 लड़किया बैठकर उसके लंडपर टूट बड़ी किसी ने उसके टट्टे चाटे किसी ने लंड किसी ने जांघ किसी ने झाट वाला हिस्सा.. गौतम कामुकता से वापस भरने गया था..

फ़िल्म ख़त्म होने ही वाली थी और एक एग्जिट point खुल चूका था जहा से अब कपल बाहर जाने लगे थे.. गौतम लड़कियों के चारे के मास्क उतारे तो उसे बेहद खूबसूरत खूबसूरत लड़किया अपने लंड दिखी जो रसीसजाडीया मालूम पडती थी..

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आदिल ने गौतम से इशारे ने निकलने को कहा तो गौतम ने उसे इशारे से जाने के लिए कहा और आदिल रज़िया को इशारा करके वहा से जाने लगा आदिल के पीछे पीछे रज़िया भी लचकती हुई निकल गई और नरगिस हॉल में लगी सीट का सहारा लेते लेते बाहर निकली उसकी आज हालात खराब हो चुकी थी.. गौतम का लंड बारी बारी से सबके मुंह में जा रहा था और गौतम को लगने लगा था की अब अगर वो नहीं निकला तो लाइट on हो सकती है और फिर उसका चेहरा कोई भी देख सकता है..

गौतम ने लंड हाथ में लिया और मुठियाते हुए सामने बैठी लड़कियों के ऊपर अपना माल छोड़ दिया और हाल से अपने जीन्स पहनते हुए भागकर निकल गया..

आदिल के दिल में सुकून भर गया था उसके सामने नरगिस शर्म से पानी पानी होकर अपनी गांड पकडे खड़ी थी और रज़िया हसते हुए गौतम के लंड से मिले सुकून को महसूस करते हुए..

हॉल से निकले सब लोग आगे पार्किंग में जारहे रहे और गौतम पीछे पार्किंग में आदिल के पास आ गया..

गौतम कार मैं बैठ गया और बाकी लोग भी बैठ गए आदिल वहां से निकल गया और रास्ते में एक चाय की दूकान पर गाडी रोककर चाय वाले से चार चाय देने को कहते हुए आदिल से नरगिस का हाल पूछने को कहा..

गौतम - लगता है नरगिस नाराज़ है..

आदिल हसते हुए - कौशल की याद आ रही होगी..

नरगिस चुप थी और शर्मिंदा भी..

रज़िया - कितना रगड़ के किया था तुम दोनों ने इसके साथ... मैं तो घबरा ही गई थी कही मुझे भी इसकी तरह ना चुदवाना पड़े..

चायवाला - आपकी चाय..

सबने चायवाले से अपना अपना कुल्हड़ लेके चाय पीना शुरु कर दिया.. नरगिस को समझ नहीं आ रहा था वो क्या करें.. वो चुपचाप चाय पी रही थी..

आदिल ने गौतम के कान में कुछ कहा और गौतम ने रज़िया के कान में.. रज़िया हस्ती हुई दोनों को देखने लगी..

सबने चाय पीकर कुल्हड़ बाहर फेंक दिया.. चायवाला आकर - भाईसाब आपकी 4 चाय के 60 हो गए..

गौतम आदिल को देखकर - मेरी पास तो नहीं है आदिल तू देदे..

आदिल - मेरी पास भी नहीं है यार.. रज़िया तू दे दे..

रज़िया - तुम्हारे पास नहीं है तो मेरी पास कय होंगे... मैं भी बिना पैसे आई थी..

गौतम - नरगिस तुम पैसे दे दो..

नरगिस शर्मिंदगी से - मेरी पास भी नहीं है..

आदिल नरगिस को बिना उसका पर्स लिए ही ले आया था इसलिए वो जानता था नरगिस के पास पैसे नहीं है.. वो गौतम और रज़िया के साथ मिलकर ये नाटक कर रहा था..

चायवाला - इतनी अच्छी कार है भाईसाहब आपके पास.. 60 रुपए तो होंगे ही..

गौतम - आज भूल गया पैसे लाना यार.. कुछ और हो सकता है..

चायवाला - क्या मतलब?

आदिल - अरे भाईसाब आप पीछे आओ ना..

चायवाला पीछे कार की खिड़की में देखता हुआ - क्या?

आदिल नरगिस के चुचे पकड़ कर - भाईसाब पैसे के बदले इसके चुचे चूस लो..

चायवाला हैरानी से चुप था..

आदिल - क्या हुआ भाईसाब? आओ अंदर बैठ जाओ.. चूस लो..

चायवाला कामुकता से भर गया और गाडी के अंदर बैठ गया..

आदिल ने नरगिस के चुचे कुर्ती से बाहर निकाल दिए और चायवाला झपट कर नरगिस के बोबे चूसने लगा.. आदिल और गौतम एक दूसरे को देखकर हसने लगे वही नरगिस चुपचाप शर्मिंदा बैठी हुई चायवाले को चुचे चूसा रही थी..

आदिल - भाईसाब सिगरेट मिलेगी..

चायवाला चुचे चूसता हुआ - अभी लाया भाईसाब..

चायवाला एक बड़ी एडवांस सिगरेट और लाइटर लेके आ गया और आदिल को दे कर वापस नरगिस के चुचे चूसने लगा..

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आदिल ने एक कश लेकर सिगरेट गौतम को दे दी..

गौतम सिगरेट के कश लेते हुए चायवाले से बोला - भाईसाहब नाम क्या है आपका..

चायवाला - विनोद कुमार..

गौतम - विनोद भाई एक चाय और पीला दो..

नरगिस विनोद को अब अपने चुचे से हटा कर चुचे कुर्ती में वापस डाल लेती है और मुंह मोड़कर बैठ जाती है..

चायवाला - महगाई का टाइम है भाईसाब.. बिना वैसे कैसे चलेगा..

रज़िया विनोद के लंड पर हाथ रखकर - विनोद भाई.. पीला दो ना..

चायवाला विनोद - लता हूँ बहन जी..

आदिल हसते हुए - क्या बात है.. रज़िया रंडी..

रज़िया नरगिस से - नरगिस.. चुप क्यों है..

गौतम - ये तो कौशल बताएगा..

आदिल हसते हुए - सही कहा..

थोड़ी देर बाद चायवाल चाय लेकर आता है और आदिल और गौतम चाय पिने लगते है वही नरगिस चाय नहीं लती और मुंह बनाके बैठ जाती है रज़िया चाय की चुस्की लेकर चाय तो अच्छी बनाई है..

गौतम - हाँ इनाम तो मिलना चाहिए विनोद को..

चायवाला विनोद - क्या भाईसाहब...

गौतम रज़िया से - रज़िया मुंह में लेके thanks बोल विनोद को..

रज़िया हैरानी से - क्या?

आदिल चाय पीते हुए - बोल दे रज़िया.. तेरा क्या जाएगा बेचारे का भला हो जाएगा..

रज़िया कार का दरवाजा खोलकर इधर उधर देखती है और फिर विनोद की जीप खोलकर उसका लंड मुंह मे लेकर 2-3 बार चुस्ती है और thanks you भैया बोल देती है..

विनोद कामुकता से भरा हुआ देखता रह जाता है और सबके जाने के बाद दूकान के पीछे जाकर मुठ मारता है..

गौतम आदिल रज़िया और नरगिस को ड्राप करके वापस जब घर आया तो रात के 9 बज रहे थे..

कहा था अब तक? और फ़ोन क्यों नहीं उठाया तूने मेरा?

माँ साइलेंट था फ़ोन पता नहीं चला..

मैं यहां अकेली थी ग़ुगु..

माँ.. पुलिस क्वाटर है.. आसपास पुलिस वाले है.. इतने कैमरा और सेक्विरिटी है.. आप फिर भी डरती हो..

मुझे नहीं पता तू मुझे छोडके मत जाया कर शाम के बाद..

गौतम सुमन को बाहों में लेटा हुआ - अच्छा ठीक है मेरी शहजादी.. अब नहीं जाऊँगा शाम के बाद घर से बाहर...

सुमन मुस्कुराते हुए - खाना खा ले.. कब से इंतजार कर रही थी..

गौतम - क्या बनाया है?

सुमन - प्याज के पराठे तेरे पसंद के..

गौतम के गाल को चूमता हुआ - क्या बात है माँ.. आज तो बहुत प्यार आ रहा है अपने बेटे पर..

सुमन खाना ड़ालते हुए - तू नरकज़ तो नहीं है ना ग़ुगु मेरी फैसले से..

गौतम खाना खाते हुए - नहीं माँ.. रूपा और माधुरी के साथ रहना या ना रहना आपकी मर्ज़ी है.. मैं इसमें आपसे क्यों नाराज़ हूंगा? चलो आप भी खाओ.. मैं जानता हूँ आपने भी नहीं खाया होगा..

सुमन भी उसी प्लेट में गौतम के साथ खाना खाने लगती है और कहती है - ग़ुगु.. तू बता रहा था तेरे एग्जाम शुरु है 3 दिन बाद.. तैयारी ठीक चल रही है ना..

गौतम सुमन को खाना खिलाते हुए - आप फ़िक्र मत करो.. आज तक फ़ैल हुआ हूँ जो अब हूंगा.. टॉप करना नहीं है.. फैला होना नहीं है.. पास हो जाऊंगा..

सुमन - आज से हम अलग अलग सोयेंगे ग़ुगु..

गौतम - क्यों?

सुमन - कल रात तो तू बहक ही गया था.. अगर मैं नहीं रोकती तो तू छोटे ग़ुगु को मेरे अंदर डाल दी देता..

गौतम खाने की प्लेट देते हुए - वो तो मै मज़ाक़ कर रहा था माँ.. आप भी ना... चलो जल्दी आओ माँ मैं वेट कर रहा हूँ बिस्तर में..

सुमन मुस्कुराते हुए दिल ही दिल में गौतम को जाते देखकर मचलने लगी थी..

उसने जल्दी से बर्तन धोकर गौतम के पास की राह ले ली और उसके पास चली गई..

पिछली रात की तरह आज भी गौतम ने सुमन के बदन से चड्डी और ब्रा के अलावा सारे कपडे उतार दिए.. और खूबसूरत भी सिर्फ चड्डी में आ गया और सुमन से लिपटा हुआ थोड़ी देर उससे इधर उधर की बात करके सो गया..
 
अपडेट 44

अगले दिन दोपहर में..

लीला दरवाजा खोलकर - तू आ गया बेटा?

गौतम - बस आंटी आपका फ़ोन आते ही दौड़ा चला आया.. गाडी चालान जो सीखना था.. घर पर कोई नहीं है ना..

लीला - कोई नहीं है तू अंदर..

गौतम - कहा गये है सब?

लीला - नीरज के पापा शमा को लेके गाज़ियाबाद गए है कल नीरज और मैं भी जाने वाले है वही कोर्ट मैरिज करेंगे इन दोनों की..

गौतम - और नीरज आंटी?

लीला - अरे उसे मैंने सामान लेने भेज दिया है..

गौतम लीला को बाहों में उठा के कमरे के अंदर बिस्तर में ले जाता हुआ - आंटी आपकी सडक बहुत अच्छी है गाडी चलाने में मज़ा आ गया उस दिन..

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लीला बिस्तर में साडी उठाकर - आज सडक की सफाई की है बेटा.. और मज़ा आएगा.

गौतम पेंट खोलकर लंड चुत पर लगाने ही वाला था की नीरज आ गया और उसने ये सब देख लिया.

गौतम नीरज को देखकर लीला से - आंटी केसा गांडू बेटा पैदा किया है? हर बार गलत टाइम पर आता है..

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नीरज चौंकते हुए - साले तू फिर से मेरी माँ चोद रहा है..

गौतम - तो क्या जबरदस्ती चोद रहा हूँ गांडू? देख नहीं रहा कैसे तेरी माँ टागे खोलके पड़ी मेरी सामने चुदने के लिए..

लीला अपनी चुत को साडी से ढकती हुई नीरज से - तू इतनी जल्दी कैसे आ गया?

नीरज गुस्से से - जिस दुकान पे आपने भेजा था वो बंद है आज... और मुझे नहीं पता था मुझे दूकान पर भेजकर आप ये गुल खिलाओगी...

गौतम लीला की चुत से साडी ऊपर करके चुत चाटते हुए - अब खड़ा खड़ा क्या अपनी माँ की चुदाई देखेगा गांडू.. जा ना यहां से.. एक घंटे बाद आना..

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नीरज लीला से - माँ इसको बोलो यहाँ से चला जाए वरना मेरे हाथ से आज खून हो जाएगा इसका...

लीला सिसकी लेती हुई नीरज से - ये तो यही रहेगा.. तू जा चाय बना.. वरना ये शादी जो तू कर रहा है होने नहीं दूंगी..

नीरज लीला की बात सुनकर खड़ा खड़ा रोने लगता है.. और गौतम चुत चाटने के बाद उसमे अपने लंड पेल देता है और चोदता हुआ बोलता है..

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गौतम - अरे क्यों रो रहा है गांडू.. कोनसा तेरी माँ पहली बार चूद रही है...

लीला कामवासना से भरकर - अह्ह्ह इसे रौने दे बैठके... तू चोद मुझे बेटा...

गौतम मिशनरी में झटके मारता हुआ - मज़ा आ रहा है ना आंटी...

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लीला - हाँ.. बेटा.. आह्ह..

गौतम नीरज से - नीरज कमाल की चुत है तेरी माँ की... बहुत टाइट है यार.. उफ्फ्फ...

लीला - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... बेटा.. उम्म्म्म.. अह्ह्ह्ह..

लीला की सिस्कारिया कमरे में गूंजने लगी थी और उसी के साथ में लंड चुत के मिलन से मधुर छप छप की आवाज भी..

नीरज अपने कान पर हाथ लगाकर वही बैठा वो अपनी माँ को चुदते हुए देखकर रो रहा था और गौतम उसे देखकर लीला को जबरदस्त तरीके से चोदे जा रहा था..

गौतम ने मिशनरी के बाद घोड़ी बनाके लंड चुत में पेल दिया और पट पट की आवाज के साथ लीला को चोदने लगा और नीरज से बोला..

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गौतम - अबे क्या माल है तेरी माँ.. साले...

लीला - अह्ह्ह.. अह्ह्ह..

गौतम - आंटी आपको तो ब्लू फ़िल्म में होना चाहिए.. बहुत कमाओगी..

लीला - तू दिला दे काम बेटा.. फिल्मो में..

नीरज उठकर आंशू बहाते हुए बाहर जाने लगता है तभी गौतम उससे कहता है..

गौतम - चाय बनाने जा रहा है क्या?

नीरज पलट कर गुस्से से - तेरे लिए चाय बनाऊंगा क्या साले..

गौतम - अबे इतना गुस्सा क्यों है? शमा से चिकनी तो तेरी माँ लीला है.. एक बार चोद के देख शमा को भूल जाएगा..

लीला चुदते हुए सिसकियाँ लेकर - अह्ह्ह बेटा.. कैसी बातें कर रहा है.. आह्ह... अह्ह्ह्ह..

गौतम नीरज से - खड़ा क्या है गांडु? चाय बना रहा है या तेरी माँ को लंड पर बैठाके रसोई में ले जाऊ चाय बनवाने?

लीला - आह्ह... नीरज बना दे बेटा..

गौतम - हाँ.. चाय पीके चला जाऊंगा..

लीला झड़ते हुए - अह्ह्ह... अह्ह्ह...

नीरज रोते हुए रसोई में आकर चाय चढ़ा देता है और अपनी माँ के बारे में सोचने लगता है कि वो कितनी बड़ी वाली रांडी है..

गौतम लीला को उठाके चोदते हुए रसोई में ले आता है..

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गौतम नीरज से - भाई हां या ना बोलके बता तो देता.. चाय बना रहा है या नहीं..

फ़ालतू तेरी माँ को कमरे से रसोई में लेके आया..

नीरज रोते हुए - माँ मैं पापा को सब बता दूंगा.. आपके और इस कमीने के बारे में..

लीला चुदते हुए एक थप्पड़ नीरज के गाल पर जड़ देती है और कहती है - सूअर.. ना जाने कोनसी रंडी को उठा के यहां ले आया.. और मुझे धमका रहा है.. बता दे तेरे पापा को.. अरे उसके लंड में दम नहीं है तभी तो इसके लंड पर बैठी हुँ... तेरे लंड में दम था तो तू बैठा लेता मुझे अपने लंड पर..

गौतम लीला कि चुत में झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह.. आंटी.. आह्ह... मज़ा आ गया...

नीरज चाय कप में डालकर रख देता है और गौतम लीला को गोद से उतार कर बिना लंड पेंट में डाले चाय पिने लगता है..

गौतम चाय पीता हुआ - तेरी मा तो तेरा लेने के लिए भी तैयार है.. साले डाल क्यों नहीं देता..

लीला साडी सही करते हुए - ये क्या डालेगा डरपोक..

नीरज गुस्से में आकर अपने आंसू पोंछता है और अपनी माँ लीला कि साडी उठा कर अपना लंड लीला की चुत में पेलते हुए कहता है..

नीरज - बहुत गर्मी है ना माँ तेरी चुत में.. अब से मैं तेरी सारी गर्मी दूर करूँगा..

गौतम हसते हुए चाय पीकर रसोई की सिंक में मूतने लगता है और नीरज लीला को चोदने लगता है.. गौतम चाय पीते हुए मूत कर लंड पेंट में डाल लेता है और नीरज और लीला को देखने लगता है..

नीरज रसोई की स्लीब पर लीला को झुकाते हुए लीला को चोद रहा था और अपनी माँ को रांड छिनाल जैसे उपमा से अलंकृत करता है..

गौतम - अब बोल भोस्डिके.. है शमा तेरी माँ के आगे कुछ?

नीरज लीला को चोदते हुए - शमा की बात मत कर मैं उससे प्यार करता हूँ.. और रही बात माँ की तो इसकी चुत की सारी गर्मी अब मैं निकालूँगा..

गौतम जाते हुए - सोने मत देना रात भर आंटी को..

नीरज - इसे तो लंड पर सुलाऊंगा..

लीला मज़े से गौतम को देखकर - बाए बेटा..

गौतम - बाए आंटी...

************

कुछ दिन बाद...

रूपा झील के पास करीम की रिक्शा में बैठी हुई सडक को देख रही थी.. गौतम एक बस से उतर कर रिक्शा के पास आ गया और टेक्सी में बैठ गया..

गौतम ने बिना कुछ बोले रूपा के होंठो को अपने होंठों से लगा लिया और चूमकर रूपा से बोला..

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गौतम - माफ़ कर दो.. देरी हो गई आने में..

रूपा - करीम.. रिक्शा कहीं ले चल..

करीम - आपा वही ले चलू जहा पहली बार लेकर गया था..

रूपा - हाँ.. ले चल..

गौतम - ज्यादा टाइम नहीं है मम्मी.. रूम ले लेते है किसी होटल में..

रूपा - टाइम क्यों नहीं है..

गौतम - अरे आते आते शाम हो जायेगी.. माँ ने मना किया है शाम के बाद बाहर रहने से.. उन्हें डर लगता है अकेले..

रूपा - हम जल्दी आ जाएंगे..

गौतम - तुम कह रही थी कुछ बात करनी है तुम्हे?

रूपा - वही बैठ कर बात करेंगे..

गौतम रूपा के बूब्स पकड़कर मसलते हुए उसके चेहरे पर चुम्मिया करते हुए - ठीक है..

रूपा गौतम के सर को अपनी गोद में खींच लेती है और अपना ब्लाउज के बटन खोलकर एक चूची गौतम के मुंह पर रख देती जिसे गौतम चूसने लगता है और रूपा साडी का पल्लू गौतम के सर पर डाल कर उसका चहेरा आँचल में छुपा लेती है और रिक्शा से बाहर देखकर इतनी ख़ुशी से मुस्कुराने लगती है जैसे उसे कोई खज़ाना मिल गया हो..
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करीब सब बैक मीरर में देख रह था और उसे समझ नहीं आ रहा था की रूपा इतनी खुश क्यों है?

गौतम ने रूपा का दूसरा चुचा भी निकाल लिया और मुंह में लेकर पूरी काम भावना के साथ चुचक चूसते हुए चुचो को चाट चाट कर पिने लगा.. रूपा के बदन में झुनझुनाहट हो रही थी और वो प्यार से गौतम का सर सहला रही थी..

रूपा गौतम को प्यार भरी और ममता भरी आँखों से देखने लगी.. उसे गौतम आज जान से प्यारा लग रहा था उसका करण सिर्फ वही जानती थी..

उसी जगह वापस आने के बाद गौतम ने रूपा को अपनी गोद में बैठा लिया और उसके होंठों का रस लेते हुए बोला - अब बताओ ना मम्मी क्या कह रही थी तुम?

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रूपा फिर से गौतम के होंठ चूमते हुए - इतनी भी क्या जल्दी है पहले मुझे मेरे शैतान बच्चे के नजूक लबों को तो मन भरके चुम लेने दे..

गौतम चूमते हुए - सॉरी मम्मी.. मैं माँ को साथ रहने के लिए नहीं मना पाया..

रूपा - कोई बात नहीं नन्हे शैतान.. वैसे भी कल मैं वापस माधुरी के साथ उसी फ्लेट में रहने जा रही हूँ..

गौतम - क्यों?

रूपा पर्स से कुछ डॉक्यूमेंट निकालती हुई - हमने वो घर सुमन दीदी के नाम पर कर दिया है.. और अब मैं और माधुरी दोनों ये चाहते है की तू सुमन के साथ उस छोटे से पुलिसक्वाटर से निकलकर उस घर में रहे..

गौतम - पर इतनी मेहरबानी क्यों?

रूपा - कैसी मेहरबानी? उस घर की असली हक़दार तो सुमन दीदी ही है.. और अब तु इसे लेने से मना मत करना.. तुझे दीदी की कसम..

गौतम रूपा के ब्लाउज में हाथ डालकर - अच्छा ये सब छोडो.. प्यार करना शुरु करें?

रूपा मुस्कुराते हुए गौतम की जीन्स का हुक खोलकर चैन नीचे कर देती है और झट से उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगती है..

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गौतम रूपा के पर्स में से सिगरेट लाइटर निकलकर सिगरेट सुलगाते हुए एक दो कश लेकर अपना लंड चुस्ती रूपा को सिगरेट देते हुए कश लेने के लिए कहता है तो रूपा मना कर देती है और लंड चूसने में फिर से मग्न हो जाती है..

गौतम - क्या हुआ मम्मी?

रूपा - मैने सिगरेट छोड़ दी..

गौतम - क्यों?

रूपा - डॉक्टर ने कहा है..

गौतम - डॉक्टर ने क्यों मना किया है?

रूपा - बच्चे को परेशानी होती है..

गौतम - मुझे क्या परेशानी होगी?

रूपा मुंह से लंड निकालकर गौतम को देखते हुए - तुझे नहीं मेरे नन्हे शैतान.. तेरे होने वाले बच्चे को जो मेरे अंदर पल रहा है..

गौतम स्तब्ध भाव से - क्या..

रूपा - क्या नहीं हाँ.. मेरे होने वाले बच्चे के पापा जी..

गौतम - मैं पापा बनने वाला हूँ? बहनचोद.. तुमने बच्चे रोकने वाली पिल्स नहीं ली थी..

रूपा लंड वापस चूसते हुए - तू फ़िक्र मत कर.. मैं संभाल लुंगी.. और मैं ही नहीं माधुरी का भी यही हाल है वो डॉक्टर के पास गई है.. मुझे उस दिन जब हम बाबाजी के पास से आ रहे थे तब पता चला मै पेट से हूँ और माधुरी को आज सुबह..

गौतम मुस्कुराते हुए - यार.. सब माँ बनती है तुम दोनों सीधा दादी बनगी..

रूपा टांग खोलते हुए - अच्छा अब धीरे धीरे चोदना.. पहले वाला शैतान नहीं अब प्यारा वाला शैतान बनकर रहना पड़ेगा तुझे..

गौतम चुत में लंड घुसाकार धीरे धीरे पेलता हुआ - पर तुम जानती हो मम्मी..

रूपा चुदवाते हुए - मैंने कहा ना मैं सभाल लुंगी.. तुझे फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है.. बस मिलने जरुर आना.. हम दोनों ने जगमोहन से भी रिश्ता तोड़ दिया है..

गौतम रूपा ब्लाउज खोलकर उसके कबूतर आजाद कर देता है और अपनी टीशर्ट उतारकर रूपा के छाती से अपना सीना सटा देता है और होंठों के करीब होंठ लाकर रूपा की साँसों को महसूस करते हुए उसी तरह चोदते हुए कहता है - मुझे जब भी मौका मिलेग मैं मिलने आऊंगा मम्मी.. छोटी माँ से भी कहना.. आप दोनों अपना और बच्चे का अब और ज्यादा ख्याल रखना..

रूपा चुत में झटके खाकर मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों को चुम लेती है और कहती है - हाँ शैतान...

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रूपा और गौतम के मिलन में सिर्फ उनके बदन ही नहीं मिल रहे थे बल्कि उनकी आत्मा भी उनके शरीर से निकलकर एक दूसरे को का लेना चाहती थी और इसी उद्देश्य को अपने मन में लिए दोनों एक दूसरे को भोग रहे थे..

प्रेम की जितनी कला रूपा को आती थी वह अपनी कलाओं में गौतम को अपने शरीर का सुख दे रही थी..

गौतम घास में पीठ के बल लेटा हुआ था और रूपा उसके लंड पर बैठकर अपने कबूतरों को मसलती हुई और अपने चेहरे पर कामुकता के भाव लाती हुई इठलात हुई मुस्कुराती हुई गौतम को देखकर आंख मारती हुई और उसे छेढ़ती हुई गौतम के लंड को चुत में लेकर गांड हिलाती हुई सम्भोग और प्रेम के नए आयाम से परिचित करवा रही थी रूपा आज कई बार झड़ी थी उसी तरह जैसे पहली बार गौतम की चुदाई से झडी थी.. और आखिर में गौतम ने भी रूपा की चुत में झटके मारते हुए अपना पानी निकाल दिया..

गौतम - मम्मी...

रूपा - हाँ?

गौतम गांड पकड़ते हुए - प्लीज...

रूपा - अच्छा लेले.. आज गांड भी...

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गौतम - मम्मी यार गांड उची करो ना अपनी.. लंड आराम से घुस जाएगा गांड में..

रूपा - धीरे... आहिस्ता घुसाना..

गौतम - फ़िक्र मत करो ज्यादा तकलीफ नहीं दूंगा..

गौतम गांड में लंड का टोपा फंसा कर गांड मारते हुए - लगता है आपसे सच्चा प्यार हो गया है..

रूपा - आहहह ग़ुगु धीरे ना.. बच्चा..

गौतम धीरे धीरे गांड मारते हुए - पता है उस जब उस रात तुम्हे और माँ को साथ में देखा था तब मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था तुम पर मगर फिर माँ के चेहरे पर ख़ुशी देखी तो तुम पर प्यार आने लगा था ..

रूपा - तुम्हारे प्यार ने ही तो मुझे इस तरह झुका रखा है ग़ुगु.. अब तेरे अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए..

गौतम - बहुत टाइट है मम्मी.. बहुत मज़ा आ रहा है अपनी गांड मारने में.. मम्मी आपकी चुत जन्नत तो गांड स्वर्ग का द्वार है सच में.. मेरा निकलने वाला है..

रूपा - ग़ुगु मुंह में देदे..

गौतम - लो मम्मी... आहहह...

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रूपा लंड मुंह में लेकर चूसने लगती है.. और कुछ ही पलो में गौतम रूपा के मुंह में झड़ जाता है..

दोनों सम्भोग समाप्त हो चूका था और अब गौतम एक पेड़ के सहारे बैठा हुआ था वही रूपा भी गौतम की गोद में उसके सीने का सहारा लिए बैठी थी..

गौतम - पता है मम्मी जब पहली बार मैं तुमसे मिला था और तुमने वापस आने के लिए अपनी सोने की चैन मुझे दे दी थी तब मुझे लगा था कि तुम बेवकूफ हो.. मगर बाद में समझ आया कि तुम मेरे मोह में पड़ गई थी..

रूपा - मैं तुझे देखते ही समझ गई थी नन्हें शैतान.. कि तू जैसा भी हो दिल का बुरा नहीं है.. ऊपर से तेरी प्यारी सूरत मेरे मन में तेरे लिए ममता भी जगा रही थी..

गौतम अपने वॉलेट से एक मगलसूत्र निकालकर - ये वही चैन है मम्मी.. जो तुमने मुझे कोठे के उस कमरे में दी थी मैंने इसका मगलसूत्र बनवाया है.. अब मैं इसे अपने हाथों से तुम्हारे गले में पहनाना चाहता हूँ..

रूपा आँखों में आंसू लेकर - गौतम...

गौतम मगलसूत्र पहनाकर पास पड़ी कटीली झाडी के एक कांटे से अपना अंगूंठा लगाकर खून की दो बून्द निकाल लेता है और उस अंगूठे के खून से रूपा की मांग भरके कहता है - लो मम्मी अब से तुम पूरी तरह मेरी हुई..

रूपा की आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़ते है.. और वो गौतम को गले लगा कर अपने पुरे जीवन के सारे दुख दर्द पीड़ा को भुलाकर नए सपने आँखों में सजा लेती है.. और गौतम के गले लग कर ख़ुशी से रोने लगती है..
 
अपडेट 45

ये कब हुआ?

सुबह 5 बजे के करीब हुआ था भाई.. जब तक हॉस्पिटल लड़कर पहुचे अब्बू जा चुके थे..

गौतम - बुरा हुआ आदिल..


आदिल - हाँ भाई.. पता नहीं था अचानक से इतना सब हो जाएगा..

गौतम ने आदिल से बात करके शबाना की तरफ कदम बढ़ा फिया औऱ एक कोने उदास खड़ी शबाना का हाथ पकड़ कर संतावाना देना लगा..

शबाना उदास थी मगर इतनी भी नहीं वो गौतम के आगे फुट फुट के रोती..

उदास मत हो अम्मी.. मैं औऱ आदिल है आपका ख्याल रखने के लिए..

शबाना ने उदासी के परदे हटा कर एक नज़र गौतम को देखा औऱ फिर उसके गले से लगती हुई बोली..

शबाना - पता नहीं था ऐसे चले जाएंगे..

गौतम शबाना को गले से लगाकर - अब किसको पता होता है अम्मी.. आप उदास मत हो..

शबाना उदासी से - कल तक तो ठीक थे बेटा.. फिर एकदम से...

गौतम आदिल से - मैं तेरी अम्मी को घर लेकर जा यह हूँ.. यहां रहेगी तो उदास रहेंगी ... तू बाइक की चाबी रख ले.. कोई जरुरत हो तो फ़ोन कर देना..

आदिल - ठीक है भाई.. जैसे हॉस्पिटल से बॉडी मिलती है मैं भी घर आ जाऊँगा.. मैं सबको फ़ोन कर रहा हूँ..

गौतम - चलो अम्मी...

गौतम शबाना को लेकर हॉस्पिटल के बाहर आ जाता है औऱ एक रिक्शा पकड़ कर उसे घर ले आता है..

गौतम - अम्मी उदास मत हो..

शबाना - फारूक बहुत अच्छे इंसान थे बेटा..

गौतम - जानता हूँ अम्मी.. मगर अब होनी को कौन टाल सकता है? जो होना था सो हो गया.. अब आप खुदको उदास मत करो..

शबाना - कैसे ना करु बेटा.. 25 साल से साथ थे..

गौतम शबाना के करीब आकर उसे बाहो में भरकर उसके आंसू पोंछते हुए - अम्मी.. मैं जानता हूँ फारूक मिया एक अच्छे इंसान थे.. मगर अब आपको आगे देखना है.. औऱ जीना है..

शबाना गौतम के कंधे पर सर रखकर उदासी से - बेटा.. ये सब क्या हो गया.. अब हमारा क्या होगा?

गौतम शबाना को बिस्तर पर बैठाते हुए - कुछ नहीं होगा अम्मी.. मैं हूँ ना.. चलो अब मुस्कुरा दो.. जीना तो हसके चाहिए ना..

शबाना हलकी सी मुस्कान चेहरे पर ले आती है..

गौतम शबाना की जांघ पर हाथ रखकर - अम्मी आप चाहो तो मैं..

शबाना गौतम के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए - नहीं बेटा.. आज नहीं..

गौतम अपने होंठ शबाना के होंठों के करीब लाकर - किसीको पता नहीं चलेगा अम्मी.. मैं जानता हूँ आप बहुत उदास हो औऱ मैं आपकी उदासी नहीं देख सकता..

शबाना गौतम के होंठों पर एक हल्का सा चुम्बन करके - नहीं बेटा.. कम से काम मैं आज ऐसा कुछ नहीं कर सकती.. आज फारूक के खातिर मैं अपनी हद पार नहीं कर सकती..

गौतम खड़ा होता हुआ - ठीक है अम्मी जैसा तुम कहो.. अभी मैं जाता हूँ.. फारूक मिया को जब ले जाएंगे तब आऊंगा..

शबाना गौतम का हाथ पकड़ कर - थोड़ी देर रुक जा ना बेटा.. मैं तेरे लिए चाय बना देती हूँ..

गौतम वापस बैठता हुआ - रहने दो अम्मी.. आप यही मेरे साथ बैठी रहो...

गौतम शबाना को गोद में बैठाकर बाहों में भर लेटा है औऱ शबाना गौतम के गले में हाथ डालकर उदासी से उसके बाहों में कसी हुई बैठी रहती है..

कुछ देर बाद
दरवाजे पर दस्तक होती है..

आदिल गौतम से - भाई तेरी चाबी..

गौतम चाबी लेते हुए - सबको फ़ोन कर दिया?

आदिल - हाँ.. कर दिया.. सब आने वाले होंगे.. आस पड़ोस के लोग भी खबर लगते ही जमा हो जाएंगे..

गौतम - मैं घर जाके आता हूँ.. जब जाने का टाइम तो बता देना..

आदिल - ठीक है.. मैं फ़ोन कर दूंगा.. दोपहर तक ले जाएंगे..

गौतम - वैसे भाई समझ नहीं आया.. एक दम से ऐसा क्या हुआ की हार्ट फ़ैल हो गया.. लोगों को तो एक दो हार्ट अटैक आते पर वो बच जाते है..

आदिल झेपते हुए - पता नहीं..

गौतम - कुछ तो बात है.. चल बात में बात करेंगे इस बारे में.. अभी चलता हूँ..

आदिल - भाई एक काम है..

गौतम - बोल ना..

आदिल - यार वो असलम साला नहीं आ रहा.. रेशमा आपा अकेली आ रही है तू जाकर उनको ले आएगा?

गौतम - ये कोई कहने की बात है.. मैं पहले रेशमा को है ले आता हूँ.. तू बाकी काम देख ले..

आदिल - ठीक है भाई..

गौतम - हेलो रेशु...

रेशमा - गौतम...

गौतम -
कहा हो?

रेशमा - यहां से बस में बैठी हूँ.. आधे घंटे में पुरानाकांटा पहुंच जाउंगी.. फिर घर के दूसरी बस पकड़ूँगी.. डेढ़ घंटा लग जाएगा आने में..

गौतम - पुराना कांटा पहुँचो. मैं लेने आ रहा हूँ..

रेशमा - मैं आ जाउंगी गौतम..

गौतम - मैं आ रहा हूँ ना..

रेशमा - ठीक है..

रेशमा बस से उतरकर गौतम से - तू आ भी गया?

गौतम - सुबह का टाइम है ना.. खाली सडक थी.. चलो बैठो..

रेशमा - वैसे अब्बू ठीक तो है ना.. आदिल ने बताया था अटैक आया है उनको..

गौतम - औऱ कुछ नहीं बताया आदिल ने?

रेशमा - नहीं.. फिर फ़ोन काट दिया था..

गौतम रेशमा का हाथ पकड़कर - रेशु.. तेरे अब्बू का इंतेक़ाल हो गया.. हार्ट फ़ैल हो गया उनका..

रेशमा उदासी से - तू मज़ाक़ तो नहीं कर रहा ना baby.. मुझे ऐसा मज़ाक़ अच्छा नहीं लगता..

गौतम रेशमा के गले लगकर - मैं ऐसा मज़ाक़ नहीं करता..

रेशमा उदासी से गौतम को गले लगाकर - अचानक ऐसा क्या हुआ?

गौतम - मुझे नहीं पता रेशु.. सुबह फ़ोन आया तो पता चला.. हॉस्पिटल जाने पर पता चला.. चलो..

रेशमा गौतम के पीछे बैठकर - अब्बू को घर ले आये?

गौतम - हाँ..

गौतम रेशमा को घर छोड़ कर चला जाता है औऱ फिर दोपहर में फारूक के आखिरी मुकाम पर पहूँचने के बाद अगले दिन शाम को आदिल के साथ उसके घर की छत पर आकर बैठ जाता है..

गौतम - साले अब बता सच सच..

आदिल - क्या?

गौतम - फारूक मिया के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो लम्बे है हो गए..

आदिल - भाई क्या बात कर रहा है..

गौतम - अबे गांडु मुझे मत सीखा तुझे अच्छे से जानता हूँ मैं.. सच बता.. वरना तू जानता है मुझे..

आदिल - भाई तू बताएगा नहीं किसी को..

गौतम - ऐसी बातें बटाइ जाती है क्या गांडु.. मुझे बस जानना है.. औऱ कुछ नहीं..

आदिल - ठीक है बताता हूँ..

गौतम - बोल..

आदिल - रात को अब्बू औऱ अम्मी सो रहे थे.. तब मैंने अम्मी के कमरे में चला गया..

गौतम - फिर?

आदिल - फिर क्या भाई.. मुझे लगा अम्मी ने अब्बू को नींद की गोली दे दी होगी पर वो भूल गई.. अब तूने जो लेप दिया था वो मैंने अम्मी की चुत पर लगाया था और सच में अम्मी की चुत सिकुड़ गई थी.. मैं करने लगा और अम्मी सिस्कारिया भरने लगी... अम्मी की सिस्कारिया सुनकर अब्बू जाग गए औऱ अचानक हमारी तरफ देखने लगे..

गौतम - तभी बहनचोद...

आदिल - हाँ.. जब अब्बू ने देखा तो अम्मी मेरे आगे घोड़ी बनी हुई थी नंगी.. वो देखकर अब्बू ने अपना दिल पकड़ लिया औऱ बेड से जमीन पर गिर गए..

गौतम एक पल के हंसा फिर हंसी रोक कर बोला - साले.. तभी मैं सोचु..

आदिल - किसीको बताना मत तू.. ना ही अम्मी से इस बारे में जिक्र करना..

गौतम - तू उसकी फ़िक्र मत कर.. मेरी बात सुन.. आज रात मैं यही रुक जाता हूँ.. शबाना औऱ रेशमा दोनों उदास है.. तू शबाना की उदासी दूर कर दे मैं रेशमा की उदासी दूर कर देता हूँ.. तेरे रास्ते का रोड़ा हट गया.. अब तू दिन रात शबाना के करीब रह सकता है..

आदिल - अब्बू था मेरा रंडी.. क्या बोले जा रहा है.

गौतम - भाई फारूक मिया को जाना था वो चले गए.. अब क्या?

आदिल - तो क्या एक दिन मातम भी नहीं मनाऊं?

गौतम - भाई कल पुरे दिन मातम ही तो बना रहा था. अब छोड़ उन बातों को.. नई शुरुआत कर.. तुझे दूकान औऱ तेरी अम्मीजान दोनों को संभालना है..

आदिल - ठीक है..

गौतम - मैं घर कॉल कर देता हूँ.. औऱ रेशमा को लेके ऊपर वाले कमरे में जाता हूँ तू नीचे शबाना को संभाल ले.. कोई बात हो तो फ़ोन कर देना..

आदिल - भाई चुपचाप करना..

गौतम - फ़िक्र मत कर..

गौतम रेशमा से - चल ना रेशु.. तू भी क्या उदास होके बैठ गई..

रेशमा - baby.. रहने दे ना.. अब्बू चले गए है..

गौतम - ठीक है कुछ नहीं करता पर मेरे साथ सो सकती है..

रेशमा गौतम के साथ कमरे में आते हुए - ठीक है baby..

गौतम रेशमा को लेके ऊपर कमरे के बेड पर बाहों में बाहे डाले लेट गया था औऱ नीचे कमरे आदिल शबाना के साथ बेड पर लेटा हुआ था..

आदिल - मुझे लगा था आपने गोली दे दी होगी अब्बू को..

शबाना - मैंने तो दूध में मिला दी थी.. पर मुझे क्या आता था तेरे अब्बू दूध ही नहीं पिएंगे.. औऱ मेरा ध्यान भी नहीं गया उसपर..

आदिल शबाना के ऊपर आते हुए - छोडो अम्मी.. अब से हमें किसीका डर नहीं है..

शबाना - नहीं आदिल अभी नहीं.. मैंने कल गौतम को भी मना कर दिया इसके लिए..

आदिल - तुमने मना कर दिया तो वो रेशमा के पास चला गया.. दोनों का चक्कर चल रहा है..

शबाना हैरानी से - कब से औऱ तुझे कैसे पता?

आदिल - तुम जानती हो असलम को.. किसी काम का नहीं है साला.. रेशमा को कितना परेशान करता है.. औऱ रेशमा गौतम को पसंद करती थी तो मैंने दोनों की सेटिंग करवा दी..

शबाना - अच्छा है.. कम से कम रेशमा खुश तो रहेंगी गौतम के साथ..

आदिल - अम्मी अब खोलो ना सलवार.. अब्बू की जगह मैं हूँ ना..

शबाना - ठीक है.. सलवार सरका दे नीचे औऱ धीरे धीरे कर ले.. उनको पता ना चले..

आदिल - तुम फ़िक्र मत करो अम्मी.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा..

आदिल सलवार सरका कर शबाना की चुत में लंड घुसा देता है औऱ धीरे धीरे चोदने लगता है चुत में लंड जाते ही शबाना भी फारूक को भूलकर आदिल को बाहों में भर लेती है औऱ चुदवाते हुए कहती है..

शबाना - बेटा अब तुझे ही सब संभालना होगा.

आदिल - फ़िक्र मत कर अम्मी.. मैं सब संभाल लूंगा..

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इधर शबाना की चुदाई शुरु हो गई थी उधर गौतम ने भी रेशमा को चुदने के लिए तैयार कर लिया था..

रेशमा सलवार खोलकर - इतनी नौटंकी करने की जरुरत नहीं है.. कर लो जो करना चाहते हो.. मैं तैयार हूँ..

गौतम मुंह बनाकर - तेरा मन नहीं है तो रहने दे.. मैं सब्र कर सकता हूँ..

रेशमा गौतम का लंड पकड़ कर चुत के मुहाने पर लगाती हुई - फिर पता नहीं कब मिलना होगा.. अब्बू तो चले गए.. उनके जाने में तुम्हारा क्या गुनाह.. लो आओ..

गौतम लंड घुसते हुए - शुक्रिया रेशु.. तू ऐसे माहौल में भी मेरे लिए इतना कर रही है.. मैं कभी नहीं भूलूंगा..

रेशमा सिसकती हुई - ग़ुगु आराम से ना.. चुत दीखते ही पता नहीं क्या हो जाता है तुम्हे..


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गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - तुम्हारी टाइट है रेशु.. मैं क्या करू? तुम्हारी अम्मी तो अब आराम से झेल जाती है एक बार में..

रेशमा - तूने अम्मी के साथ भी किया है?

गौतम झूठमुठ कहानी बनाकर कहता है - मैं क्या करता? तेरी अम्मी पीछे ही पड़ गई थी मेरे.. एक दिन नंगी होकर मेरे ऊपर चढ़ गई.. अब मैं भी मर्द जात हूँ कितना कण्ट्रोल करता..

रेशमा सिसकियाँ भरते हुए - उनकी क्या गलती? पहली बार तुझे देखकर मेरा दिल आ गया तुझपर.. उनका भी आ गया होगा.. सालों से अब्बू औऱ अम्मी के बीच कुछ हुआ भी तो नहीं था.. उसके बाद तो तेरे पीछे पड़ गई होगी अम्मी..

गौतम - पड़ी थी मगर मैंने आदिल को सब बता दिया..

रेशमा हैरानी से - फिर?

गौतम चोदते हुए - फिर क्या? तेरी अम्मी को आदिल सँभालने लगा औऱ मेरी जान छूटी..

रेशमा - मतलब आदिल औऱ अम्मी के बीच..

गौतम रेशमा के बूब्स मसलकर - हाँ रेशु.. मुझे तो लगता है अब भी कमरे में दोनों साथ चुदाई कर रहे है.

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रेशमा चुत से लोडा निकालकर सलवार पहनती हुई - मुझे देखना है.

गौतम - रेशु पहले मुझे कर तो लेने दो..

रेशमा - बाद में कर लेना रात पड़ी है पूरी... पहले मुझे देखकर आना है मुझे.. क्या हो रहा है नीचे..

गौतम जीन्स पहनकर - क्या करोगी देखकर?

रेशमा - कुछ नहीं बस देखना है..

गौतम - चलो..

गौतम औऱ रेशमा नीचे आकर शबाना औऱ आदिल की चुदाई का नज़ारा खिड़की की दरार से देखकर एक दूसरे को देखते है.. आदिल शबाना को घोड़ी बनाये हुए था.

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गौतम दबी हुई आवाज में - बस देख लिया? अब चले..

रेशमा हैरान होकर - चल..

गौतम औऱ रेशमा वापस ऊपर कमरे में आ जाते है..

गौतम रेशमा को बाहों में भरते हुए - क्या हुआ?

रेशमा - कुछ नहीं.. बस यकीन नहीं हो रहा..

गौतम - छोडो ना.. रेशमा.. शबाना औऱ आदिल दोनों खुश है..

रेशमा गौतम को चूमकर - गांड चाहिए थी ना तुम्हे.. आज मार लो.. कुछ नहीं कहूँगी..

गौतम - सच?

रेशमा नंगी होकर बेड पर घोड़ी बन जाती थी औऱ सरसो का तेल गांड के छेद पर लगाकर गौतम के लंड पर भी लगा देती है.. गौतम लंड सेट करके धीरे धीरे अंदर डालने लगता है..

लंड का टोपा अंदर घुसने पर गौतम - दर्द तो नहीं हो रहा ना रेशु..

रेशमा - मैं सब दर्द सह लुंगी जानू तुम मेरी फ़िक्र मत करो.. घुसाओ.. अंदर..

गौतम लंड घुसाने लगता है औऱ बड़ी मसक्कत के बाढ़ आधा घुसा देता है औऱ आधे से ही धीरे धीरे रेशमा की गांड मारने लगता है..

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गौतम - thanks रेशु...

रेशमा कराहती हुई - तुम्हारे लिए कुछ भी जान..

गौतम थोड़ा औऱ लंड अंदर घुसा देता है औऱ रेशमा को स्पीड हलकी सी बढ़ा कर चोदने लगता है तभी आदिल का वीडियो कॉल आता है..

गौतम फोन उठाकर - बोल..

आदिल - क्या कर रहा है?

गौतम - रेशमा की गांड मार रहा था.. तू क्या कर रहा है?

रेशमा - कौन है...

गौतम - तेरा भाई..

आदिल - अम्मी की चुत मार रह था..

गौतम - बात करवा अम्मी से..

शबाना - बेटा..

गौतम रेशमा की गांड मारते हुए - अम्मी कल मुझे
मना कर दिया अब आदिल का ले रही हो.. रेशमा ने तुमको देख लिया अभी अभी.. वो सब जान गई है..

शबाना - बेटा कल सुबह बहुत उदास थी. अभी तो तू भी आजा.. मना नहीं करुँगी..

रेशमा - ग़ुगु आराम से..

शबाना - बेटा धीरे.. रेशमा नहीं सह पाएगी..

आदिल - भाई नीचे आजा साथ में करते है..

गौतम - सुन तू अम्मी को लेके आजा ऊपर.. मैं नहीं आ सकता अभी..

आदिल - ठीक है.. फ़ोन कट जाता है..


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गौतम - रेशमा.. थोड़ी गांड उठा यार फिर ठीक से अंदर जाएगा..

रेशमा - लो.. डाल दो.. कर दो मुझे बर्बाद..

गौतम कमर को ठीक से पकड़ कर झटके मारता हुआ - thanks रेशु..

गौतम रेशमा की गांड मार ही रहा था की दरवाजे किसीने बजा दिया..

गौतम - आ जाओ अंदर खुला ही है..

आदिल औऱ शबाना अंदर आते है औऱ शबाना गौतम औऱ रेशमा को देखकर कहती है - हाय.. आराम से.. तूने तो पूरा डाल दिया गांड में..

आदिल - भाई आपा को उस तरफ से कर.. मैं इस तरफ से अम्मी को करता हूँ..

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गौतम बेड के दाई तरफ रेशमा को लाकर चोदने लगता है औऱ आदिल शबाना को बाई तरफ लाकर चोदने लगता है..

रेशमा शबाना के होंठ चुम लेती है औऱ चुदवाते हुए शबाना को kiss करने लगती है..

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शबाना झड़ जाती है औऱ आदिल भी झड़ जाता है दोनों कमरे में एक तरफ रखी चेयर पर बैठ जाते है वही रेशमा सिस्कारी लेती हुई गांड मरवाने का कार्यक्रम चलू रखती है झड़ वो भी चुकी थी मगर गौतम के लिए अब भी गांड मरवा रही थी..

रेशमा की गांड का छेद अब अच्छी तरह खुल गया था जिसमे लंड आसानी से आ जा रहा था.. गौतम ने अब जोर के झटके मारने शुरु कर दिए औऱ रेशमा की आवाजे कमरे में घूंजने लगी.. रेशमा अपनी गांड पकड़कर गौतम से छुड़ाने लगी तो शबाना आगे आ गई औऱ गौतम से बोली - हाय कितना जोर कर रहा है बेटा तू..

गौतम ने रेशमा की गांड से लंड निकालकर उसे हटा दिया औऱ शबाना को घोड़ी बनाकर गांड में सीधा लंड अंदर तक डाल दिया..

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शबाना भी एक दम से गांड में पूरा लंड जाने उचक पड़ी लेकिन गौतम ने बाल पकड़ कर शबाना की गांड मारना शुरु कर दिया..

रेशमा अपनी गांड सहलाती हुई बेड से नीचे गिर पड़ी जिसे आदिल ने अपनी बाहों में उठा लिया.. दोनों नंगे ही थे..

आदिल का लंड वापस खड़ा हो चूका था उसने रेशमा को वापस बेड पर पटक कर टांग खोलते हुए कहा - आपा बड़े लंड से दर्द होता है तो छोटा ले लो..

ये कहते हुए आदिल ने रेशमा की गांड में लंड घुसा दिया जिससे वापस रेशमा गांड मरवाने लगी.. मगर वो आदिल को न देखकर सामने शबाना औऱ गौतम को देखने लगी जो उसकी आँखों के सामने गांड मराई का खेल खेल रहे थे..

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गौतम आदिल से - मादरचोद बोला था ना रेशमा मेरी है हाथ मत लगाना..

आदिल - माफ़ कर दे भाई पर.. एक बार तो लेकर रहूँगा रेशमा आपा की.. ये कहते हुए आदिल ने रेशमा को पलट दिया औऱ उसकी चुत मारने लगा.. कुछ ही देर में रेशमा वापस झड़ गई औऱ बेड से लचकती हुई नीचे उतर गई..

गौतम - गांडू इधर आ.. तेरी अम्मी का सैंडविच बनाते है..

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गौतम पीछे से शबाना की गांड मार रहा था औऱ अब्ब आदिल शबाना की चुत में घुस गया.. दोनों एक टाइम पर शबाना को चोद रहे थे औऱ शबाना खुलकर सिसकियाँ भरते हुए चुदवा रही थी..

आदिल - भाई आगे आ ना मुझे पीछे से करना है.

गौतम - शबाना तू ही पलट जा... औऱ शबाना को घुमा के अपनी तरफ कर लेटा है..

दोनों शबाना को एक साथ चोदते हुए मज़े लेते है..

शबाना आदिल औऱ गौतम के बीच ऐसे फसी हुई थी जैसे बर्गर में टिकिया..


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आदिल वापस झड़ गया औऱ शबाना का पानी भी फिर से निकल गया था मगर गौतम अब भी मजबूती से मोर्चा संभाले हुए खड़ा था..

उसने आखिर में रेशमा औऱ शबाना को एक साथ घुटनो पर बैठा दिया औऱ लंड चूसाने लगा..


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आदिल थोड़ी देर बाद बेड से खड़ा हुआ औऱ कमरे से बाहर चला गया..

रेशमा औऱ शबाना बिना एक दूसरे से शर्म किये गौतम के लंड को चूस औऱ चाट रहे थे..

आदिल बाहर से आया तो उसके हाथ में शराब की आधी खाली बोतल थी जिसमे से उसने दो पेग बना दिए औऱ एक पेग गौतम को देकर बोला - भाई कब झाड़ेगा? अम्मी औऱ आपा का मुंह दुखने लगा होगा अब तो..

गौतम पेग पीकर गिलास वापस देते हुए - यार लंड चूसते हुए कितनी अच्छी लगती है तेरी अम्मी औऱ बहन..

आदिल- अब झाड़ भी दे.. हमारा दो बार हो गया तू एक बार भी नहीं निकाला..

गौतम - ठीक है यार..

गौतम लंड शबाना के मुंह से निकलकर अपने हाथ में पकड़ लेटा है औऱ दोनों को सामने मुंह खोलकर बैठने को बोलता है फिर लंड मुठियाते हुए दोनों के मुंह पर अपने वीर्य की एक के बाद एक लम्बी लम्बी धार मारता है औऱ झड़ जाता है..

आदिल - तूने झाड़ा है या नहलाया है मेरी अम्मी और आपा को..

गौतम - छोड़ ना यार नींद आ रही है..

रेशमा औऱ शबाना मुंह साफ करके खड़ी हो जाती है शबाना गौतम से कहती - चल में सुलाने देती हूँ..

रेशमा - नहीं अम्मी मेरे साथ सोयेगा गौतम.. चल जानू में सुलाती हूँ तुझे लोरी सुनाके..

आदिल शबाना को पकड़कर - तू मुझे सुला दे ना अम्मी..

चारो उसी बेड पर एकदूसरे की बाहों में बाहे डाले औऱ एकदूसरे से लिपटकर नंगे लेट जाते है..

आदिल - असलम साला कल आया नहीं..

गौतम - रेशमा तू असलम से तलाक़ लेले..

रेशमा - फिर?

गौतम - फिर क्या? सलमा ने जैसे घर बदल कर अपने अब्बू के साथ रह रही है वैसे तू आदिल से निकाह करके अपने भाई के साथ रह.. और मैं तो तेरे साथ हूँ ही..

शबाना - घर बेच कर दूसरी जगह जाना पड़ेगा..

आदिल - इसमें हर्ज़ ही क्या है? यहां हमें सब जानते है..


गौतम - शबाना सलमा से बात कर.. वो मदद करेगी..

आदिल - आपा आप करोगी मुझसे निकाह?

रेशमा - कर लुंगी पर गौतम को नहीं छोडूंगी..

गौतम - पहला निकाह होगा जो अकेले में होगा..

आदिल - हाँ.. और हम जल्दी ही यहां से कहीं और चले जाएगे.. दूकान मैं संभाल ही लूंगा..


************

पहाड़ी के पीछे नीचे की तरफ बड़े बाबा जी अपने ध्यान में मग्न थे और उनके पास ही बैरागी की आत्मा भी बैठी हुई उन्हें देख रही थी..

बैरागी जानता था कि बड़े बाबा जी ध्यान कर सकते में अब उतने समर्थ नहीं है उसनका ध्यान भटक रहा है...

जब से गौतम बड़े बाबा जी से मिला था उनका ध्यान डगमगाने लगा था और उनका मन त्रस्त हो चुका था उनके मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे थे और उथल-पुथल मचने लगी थी..

थोड़ी देर ध्यान में बैठने के बाद बड़े बाबा जी एकदम से अपनी आंख खोलकर सामने देखने लगे उनके चेहरे पर आने वाले हाव-भाव यह बताने में बिल्कुल सटीक थे कि उनका ध्यान डगमगा गया है और वह जो देखना चाहते थे वह नहीं देख पाए हैं..

बड़े बाबा जी का इस तरह आंख खोल कर सामने देखना और विचलित हाव-भाव देखकर बैरागी समझ गया था कि वीरेंद्र सिंह जो देखना चाहता है वह नहीं देख पाया है..

वीरेंद्र सिंह ने सामने देखकर एक नजर अपने पास में बैठे बैरागी को देखा और उसकी आंखों में देखते हुए वह समझ गया कि बैरागी को इस बात का अनुमान हो चुका है कि वीरेंद्र सिंह अब ध्यान करते वक्त अपना मन स्थिर नहीं रख पाता और विचलित हो जाता है..

बैरागी और वीरेंद्र सिंह एक दूसरे को देख रहे थे और मन ही मन वह दोनों जानते थे कि वीरेंद्र सिंह ध्यान में क्या देखने की कोशिश कर रहा था और वह क्यों ध्यान करते हुए विचलित हो रहा था बैरागी इस बात से भी पुणता परीचित था कि बड़े बाबा जी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह गौतम का पिछला जन्म देखने के लिए आतुर है और वह इस लिए ध्यान करने बैठे हैं मगर बार बार उनका उचट जाता है...

बैरागी - क्या हुआ हुकुम.. कुछ दिनों से आपका ध्यान बार बार उचट रहा है.. कोनसा ख्याल आपका मन अस्थिर कर रहा है?

वीरेंद्र सिंह - बहुत सारे ख्याल है बैरागी.. किस किस के बारे में बताऊ? मगर जो मेरी समस्या की जड़ में बैठा है वो ख्याल है की आखिरी गौतम पिछले जन्म में कौन था.. धुप सिंह ने किस बंजारन से प्रेम किया था?

बैरागी - इसका जवाब तो आप मुझसे भी पूछ सकते थे हुकुम.. व्यर्थ ही कब से अपने आपको इतनी पीड़ा देने का कार्य कर रहे थे...

वीरेंद्र सिंह आश्चर्य से - क्या तू जानता है बैरागी आखिर गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था?

बैरागी - हां हुकुम... मैं जानता हूं गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था और कहां था.. और मैं उससे मिल भी चूका हूं..

वीरेंद्र सिंह - तु उससे मिल चुका है.. मगर कहां बैरागी? क्या धूपसिंह का असली पुत्र महल के ही किसी भाग में है या महल के आसपास?

बैरागी - नहीं हुकुम... ना तो वह महल में है ना ही महल के आसपास.. वह आपकी जागीर की सीमा के भीतर आने वाले जंगल के मुहाने पर बसी हुई बंजारा बस्तियों का बशिंदा था जिसे जंगल में मैंने देखा था..

वीरेंद्र सिंह - तू उसे कब कैसे मिला बैरागी.. आखिर तूने उसे कहां देखा और क्या बात की?

बैरागी - मैं आपको सब बताता हूं हुकुम.. मैं आपसे कुछ भी नहीं छुपाना चाहता..

वीरेंद्र सिंह - बताओ बैरागी... जल्दी बताओ मैं बहुत आतुर हुआ जा रहा हूं यह सुनने के लिए की गौतम पिछले जन्म में कौन था? और कहां था? मेरी मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले तुम अब मुझे बताओ कि मुझे इस जीवन से मुक्ति दिलाने वाला आखिर अपने पिछले जन्म में था कौन?

बैरागी - तो सुनिए हुकुम.. जब मैं अपने उद्देश्य के लिए निकला था तब आपकी जागीर में आने से पहले जंगल के रास्ते पर था.. जहां जंगल के मुहाने पर बसी हुई बस्तियां थी और मैं उनके पगडंडियों वाले मार्ग पर चलता हुआ आपके जागीर की सीमा के भीतर प्रवेश कर चुका था.. जब मैं उस बंजारा कबिले के पास पहुंचा तो मेरी मुलाकात काबिले के सरदार डाकी से हुई..

डाकी कबिले के पुराने सरदार लाखा को द्वन्द युद्ध में मारकर सरदार बना था औऱ लाखा की दोनों पुत्री मुन्नी औऱ शीला को अपनी दासी बनाकर उनका स्वामी... कबले की परम्परा के मुताबिक लाखा की पत्नी को भी डाकी की पत्नी बनना पड़ता मगर लाखा की पत्नी बहुत पहले चल बसी थी औऱ उस वक़्त की कोई पत्नी नहीं थी..

वीरेंद्र सिंह - ये सब मैं जानता हूँ बैरागी.. तू ये बता इन सब में से गौतम का पिछला जन्म कौन था? साफ-साफ बता? आखिर उस कबीले में कौन था जो गौतम का पिछला था..

बैरागी - हुकुम... गौतम का पिछला जन्म और कोई नहीं लाखा की बड़ी पुत्री मुन्नी का एकलौता बेटा हाक़िम था..

वीरेंद्र सिंह - हाक़िम?

बैरागी - हां हुकुम.. हाक़िम.. जब मैं कबीले के सरदार डाकी से मिलकर वापस आने के लिए निकला तब जंगल के रास्ते में एक पेड़ के नीचे मेरी मुलाक़ात हाक़िम से हुई..

गौतम आज इस जन्म में जितना आत्मविश्वास से भरा हुआ निडर निर्भीक और जांबाज है अपने पिछले जन्म में उतना ही कमजोर और डरपोक था..

नाजायज संतान होने के कारण उसे कई बार कबीले के ताने सुनने पड़े. और किसी ने उसका साथ नहीं दिया.. लाखा ने भी हाक़िम को कभी नहीं अपनाया.. हाक़िम पर बस उसकी माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला ही अपने प्रेम की वर्षा करती थी.. और शीला की पुत्री उर्मि भी हाक़िम को अपने दिल में पसंद करती थी मगर जब सरदार बदला और नया सरदार बना तब हकीम का अपनी मां मुन्नी और मौसी शीला से भी मिलना कम हो गया हाक़िम से वो लोग छुप छुप कर मिलते थे..

डाकी ने हाक़िम को काबिले से निकाला दे दिया औऱ हाक़िम की माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला को अपने साथ रखकर भोग विलास करने लगा..

हाक़िम कबीले से दूर जंगल में अपने दिन गुजरने लगा और यह सोचने लगा कि अगर वह कमजोर ना होता इतना डरपोक ना होता और लड़ना जानता तो वह डाकी से लड़कर अपनी माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला को उसके चंगुल से आज़ाद करवा लेता.. उसे कबीला नहीं छोड़ना पड़ता उसे कबीले से नहीं निकाला जाता..

हाक़िम जब मुझसे मिला तब उसने अपना दिल खोल कर मेरे सामने रख दिया था हुकुम.. वह अपने मन की हर एक गहराइयों में छुपी हुई बातों को मेरे सामने प्रकट करके मुझे मदद की उम्मीद कर बैठा और मैंने भी उससे मदद करने का वादा किया था..

हुकुम अब आप जान गए हैं कि गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था और क्या था अब समय आने वाला है कि आप उसे उसके पिछले जन्म में भेज कर अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.. मगर आप अच्छी तरह जानते हो कि वह यहां से अपने पिछले जन्म में जितनी भी चीज ले जाएं मगर वहां से एक ही चीज वापस ला सकता है.. अगर वो जड़ी बूटी के अलावा कुछ और लेकर आता है तो फिर आपकी और मेरी मुक्ति अगले बचे हुए 500 सालों तक नहीं हो पायेगी हुकुम..

वीरेंद्र सिंह - तू सही कह रहा है बैरागी.. गौतम अगर जड़ीबूटी के अलावा कुछ और लेकर आ गया तो मेरे साथ साथ तुझे भी मुक्ति मिले बिना ही रह जाएगी.. उसे वापस आने के लिए औऱ कार्य ठीक से करने के लिए कोई ठोस वजह देनी होगी और यह भी तय करना होगा कि वह सिर्फ जड़ीबूटी ही लेकर आए और कुछ नहीं..

बैरागी - वजह तो उसे मिलने वाली है हुकुम.. वह वापस जरूर आएगा मगर क्या वह जड़ी बूटी लेकर आएगा या कुछ और? यह सोचने का विषय है.. अगर आप उसे इस बात पर अडीग कर ले कि वह सिर्फ जड़ी-बूटी लेकर आएगा तब आपका कार्य सिद्ध हो सकता है और हमें मुक्ति मिल सकती है आप जल्दी से उसे इस कार्य के लिए सज्य करें वक्त आने वाला है जब हमें एक साथ मुक्ति मिलेगी और आपका जीवन इस पीड़ा से इस कष्ट से और बंधन से आजाद हो जाएगा..
 
अपडेट 46

केसा गया इम्तिहान?

जैसा हर बार जाता है..

मतलब इस बार भी पास हो जाएगा..

उसमे आपको कोई शक है?

नहीं.. मैं तो बस पूछ रही थी.. आखिरी इम्तिहान भी ख़त्म अब फ्री..

तो? अब आपको कोई औऱ काम है मुझसे?

अरे इतना क्यों बिगड़ता है ग़ुगु..

मैं कहा बिगड़ रहा हूँ माँ.. आप ही कब से कितने फालतू सवाल पूछ रही हो.. हटो मुझे नींद आ रही है..

ग़ुगु अभी तो दिन है औऱ दिन में ही तुझे सोना है?

रातभर जाग कर रिवीज़न कर रहा था.. सुबह एग्जाम देने चला गया अब सोना है.. आप तो आज मेरे पीछे ही पड़ गई माँ..

अच्छा ठीक है सो जा.. शाम को कहीं जाना है..

कहाँ जाना है शाम को?

मेरी एक सहेली है उसने invite किया है 25th एनिवर्सरी मना रही है आज अपनी शादी की..

आपकी कोनसी सहेली आ गई.. आज तक तो किसी से बात करते नहीं देखा आपको.. अब अचानक से ये कौन पैदा हो गई..

अरे है एक सहेली.. तू नहीं जानता.. कभी मेरी साथ मार्केट आता तो जानता.. मगर तू चलता ही नहीं.. कुल्लू दर्जी की दूकान के पास सलून है उसका.. मिसेस झांटवाली नाम है..

गौतम हसते हुए - क्या? झांटवाली ? ये केसा नाम है.. औऱ वो झांटवाली है तो आप क्या बिना झांटवाली हो? आपकी भी तो कितनी लम्बी लम्बी झांटे थी. पहली बार तो मेरी मुंह में ही आ गई थी..

सुमन - मज़ाक़ नहीं.. शाम को 7 बजे हम चल रहे है मतलब चल रहे है..

गौतम - ठीक है चल चलेंगे.. अब सोने दो औऱ शाम को उठा देना..

सुमन - अच्छा मेरी शहजादे..

ग़ुगु कब तक सोता रहेगा बेटा? देख साढ़े छः बज गए.. चल उठ जा.. कब से सो रहा है.. इम्तिहान ख़त्म हुए तो क्या सोता ही रहेगा?

उठ रहा हूँ यार माँ..

उठा जा.. बच्चा.. चल आँख खोल..

चाय बना दो ना एक कप..

कोई चाय वाई नहीं है ग़ुगु.. जल्दी से बाथरूम जा औऱ मुंह हाथ धोकर तैयार हो जा.. जाना है..

माँ छोडो ना.. कहा जाना है.. आप भी किसी ने एक बार बुलाया औऱ जाने को तैयार हो गई...

ग़ुगु एक बार नहीं कई बार बोला है कार्ड भी व्हाट्सप्प किया है.. बेटा अच्छा नहीं लगता ऐसे बार बार बुलाने पर ना जाए तो.. सलून जाती हूँ तो मुझसे पैसे भी कम लेती है.. अगर नहीं गई तो कहीं नाराज़ ना हो जाए..

गौतम उठकर बाथरूम जाते हुए - अच्छा ठीक है.. कपडे निकाल दो.. मैं नहा के आता हूँ..

सुमन - ठीक है.. निकालती हूँ..

गौतम बाथरूम से - आप भी जो करना है कर लो.. फिर मुझे तैयार करके खुद आईने के सामने बैठी रहोगी..

सुमन मुस्कुराते हुए कपडे निकालकर बेड पर रखती हुई - जैसा तेरा हुकुम.. मेरे दिल के चोर..

गौतम नहाने के बाद कपडे पहन के परफ्यूम लगाते हुए - आपके सात बज गए माँ.. मैं तो तैयार हूँ आप हुई या नहीं?

सुमन - बस थोड़ी देर.. होने ही वाली हूँ..

गौतम जूते पहनते हुए - कितना टाइम?

सुमन - बस 10 मिनट ग़ुगु..

15 मिनट बाद..

गौतम - माँ यार औऱ कितना टाइम?

सुमन - हो गया बेटा.. सिर्फ काजल लगा रही हूँ..

गौतम कमरे में आते हुए सुमन को देखकर - साडी भी नहीं पहनी आपने अभी तक?

सुमन - बस पहनने ही वाली हूँ ग़ुगु. तू तो जानता है औरत को तैयार होने में कितना टाइम लगता लगता है बेटा..

गौतम बेड पर बैठते हुए - क्यों हो रही हो इतना तैयार? सोना तो चुत में ऊँगली करके ही है.. फिर ये मेहनत किसलिए?

सुमन मुस्कुराते हुए - तू भी ना ग़ुगु... अब इतने बड़े फंक्शन में जा रहे है. थोड़ा तैयार तो होके ही जाना पड़ेगा.. तेरी तरह फट से तैयार तो नहीं हो सकती ना मैं.. मेकअप करने में टाइम तो लगता ही है ना..

गौतम - तो क्यों करना है मेकअप? मेकअप के बाद आपको देखकर मेरे दिल पर जो छुरिया चलती है उसका क्या? छोटा ग़ुगु तो बेचारा खड़ा का खड़ा ही रह जाता है.. पता नहीं कब उसे आपका खज़ाना मिलेगा..

सुमन हसते हुए आईने के सामने से उठकर साडी उठाकर पहनती हुई - छोटे ग़ुगु को समझाओ कि इस पार्किंग में ये गाडी पार्क नहीं हो सकती..

गौतम - समझें तब ना माँ.. कब से ज़िद पर अड़ा हुआ है.. गाडी तो इसी पार्किंग में लगेगी..

सुमन साडी पहनती हुई - तो अपने से दुगुनी उम्र कि जो तूने दोस्त मनाई है उनकी पार्किंग में गाडी पार्क कर दे..

गौतम - उनमे औऱ आपमें फर्क है माँ...

सुमन साडी पहनकर कुछ सोचती हुई - तो फिर एक ही रास्ता है तुझे दो में एक को चुनना होगा..

गौतम - किन दो में से?

सुमन - मैंने बहुत सोचा औऱ अब अपने मन को समझा लिया है गौतम.. मगर तुझे मेरी औऱ अपनी सभी रखैल में से एक को चुनना होगा.. या मुझे अपना बना ले या उन सब औरतों को जिसके साथ तूने सम्बन्ध बनाये है.. फैसला तेरा है.. मैं ये नहीं बर्दास्त कर सकती जो मेरा हो वो किसी औऱ का भी हो...

गौतम - माँ क्या कह रही हो? वो सब अकेली औऱ प्यार की भूखी है उन्हें मैं प्यार नहीं करूँगा तो कौन करेगा?

सुमन लिपस्टिक लगाते हुए - वो सब मुझसे क्यों पूछता है? मैंने थोड़ी कहा था इतनी सारी औरतों के साथ अपना ये चाँद सा गोरा मुंह काला कर.. अब चल.. पहुंचते हुए आठ बज जाएंगे...

गौतम सुमन के साथ घर से निकलता हुआ - अरे ये क्या बात हुई? समंदर देने के बदले मुझसे मेरी नादिया ही छीन रही हो आप तो..

सुमन दरवाजे पर ताला लगती हुई - सोच ले मेरे कच्चे बादाम.. तुझे जो चाहिए वो मिल जाएगा पर कीमत चुकानी पड़ेगी..

गौतम कार मैं बैठते हुए कार स्टार्ट करके चलाना शुरु करते हुए - कोई औऱ उपाय नहीं है क्या? ये तो बहुत दुविधा में डाल रही हो आप.. मेरे ऐसा करने पर कितनो का दिल टूटेगा पता है ना आपको?

सुमन खिड़की से बाहर देखते हुए - मुझे कुछ नहीं पता.. तुम सोच सकते हो आज रात तक का समय है तुम्हारे पास..

गौतम - इसमें सोचना क्या है.. आप मेरा फैसला जानती हो.. पर आप कैसे मुझसे ये करवा सकती हो माँ.. ऐसा करते हुए मुझे खुद बहुत बुरा फील होगा..

सुमन एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगाकर सुलगाती है औऱ एक कश लेकर कहती है - जब मेरी चुत में अपना लंड डालके मुझे चोदेगा तब तुझे केसा फीलिंग होगा?

गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा मंज़ूर है.. पर एक शर्त मेरी भी है..

सुमन सिगरेट के कश लेती हुई - क्या?

गौतम ठेके के आगे गाडी रोककर - बताता हूँ.. रुको..

गौतम ठेके पर जाकर एक 2 बियर के केन ले आता है औऱ वापस गाडी चलते हुए सुमन को एक बियर का केन खोलकर देते हुए कहता है - आपके अलावा मुझे दो औरत औऱ चाहिए..

सुमन सिगरेट के साथ बियर पीती हुई - नहीं..

गौतम अपनी केन खोलकर उसमे से बियर पीते हुए - इतना तो रहम करो माँ.. बच्चा हूँ आपका.. तरस खाओ मुझपर..

सुमन सिगरेट का कश लगाकर - ठीक है एक.. पर उससे भी कभी कभी वाला रिलेशन रखना पड़ेगा..

गौतम बियर पीते हुए कुछ देर सोचकर - ठीक है..

सुमन - तो बोलो.. कौन होगी वो? कोमल, आरती, रजनी, माधुरी, रूपा, शबाना या शबनम?

गौतम - इनमे से कोई नहीं..

सुमन हैरानी से - तो औऱ कौन है?

गौतम मुस्कुराते हुए - आपकी ननद.. औऱ मेरी बुआ..

सुमन हसते हुए - पिंकी?

गौतम शरमाते हुए - हम्म्म...

सुमन बियर का आखिरी घूंट पीकर केन खिड़की से बाहर फेंकते हुए - एक बार फिर सोच लेना ग़ुगु.. मैंने मज़ाक़ नहीं कर रही..

गौतम - मैंने भी मज़ाक़ नहीं कर रहा.. उन सब से कैसे दूर रहना है मैं अच्छे से जानता हूँ..

सुमन - यही वाला गार्डन है शायद.. नाम पढ़ो जरा..

गौतम पार्किंग में गाडी लगाता हुआ - यही है माँ..

गौतम - चलो.. अंदर चलते है..

सुमन - रुको..

गौतम - क्या हुआ?

सुमन - ग़ुगु अब जब सब होने वाला है तो कुछ बातें साफ साफ कर लेना चाहती हूँ..

गौतम - कोनसी बात माँ..

सुमन - है कुछ बात ग़ुगु.. पहली तो ये की तू मुझे माँ सिर्फ लोगों के सामने कहेगा.. अकेले में सुमन कहकर ही बुलायेगा..

गौतम सुमन की जांघ पर हाथ रखकर सहलाते हुए - जैसा आप कहो सुमन...

सुमन गौतम के हाथ पर अपना हाथ रखकर -औऱ दूसरी की तू मुझे आप नहीं.. तुम या तू ही कहकर बात करेगा..

गौतम हाथ जांघ से चुत पर लेजाकर - जैसा तू कहेगी वैसा ही करूँगा सुमन.. औऱ कुछ..

सुमन - हाँ.. तेरा जब भी कुछ गन्दा कहने का मन हो या गाली देने का मन हो तू दे देगा.. खुदको रोकेगा नहीं..

गौतम - पर मैं गाली नहीं देता..

सुमन - मैंने सब जानती हूँ तू कितनी गाली देता है कैसे गाली देता है..

गौतम - पर सुमन...

सुमन - गौतम अगर तुझे मंज़ूर है तो बोल.. वरना कोई बात नहीं..

गौतम - अच्छा ठीक है.. यार.. औऱ कुछ?

सुमन शरमाते हुए - बिस्तर में बताउंगी..

गौतम मुस्कुराते हुए - तो वापस घर चले?

सुमन हसते हुए - पहले अंदर चलकर मिसेस झांटवाली से मिल तो ले औऱ खाना खा ले..

गौतम गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए - ठीक है. जब इतना सब्र किया है तो कुछ देर औऱ सही..

सुमन भी गाडी से उतरती है गौतम के साथ अंदर आ जाती है..

गौतम चकाचोध देखकर - काफी मालदार पार्टी लगती है..

सुमन - हाँ.. झांटवाली बता रही उसके हस्बैंड का ट्रांसपोर्ट का बीजनेस..

गौतम - अच्छा है.. मैं तो खाना खाऊंगा.. तुम मिल लो जिससे मिलना है...

सुमन - साथ में खाएंगे ग़ुगु.. अभी चल मेरे साथ..

गौतम - यार सुमन..

सुमन - ज्यादा नखरे मत कर.. चल..

गौतम - ठीक है चलो..

गौतम औऱ सुमन झांटवाली से मिलके वापस आ जाते है औऱ खाना खाने लगते है..

गौतम - मेरा तो हो गया.. आप खाओ मैं बाथरूम जाके आता हूँ..

सुमन - ठीक है..

गौतम बाथरूम में जाता है औऱ मूतने लगता है कि उसके फ़ोन पर जगमोहन का फ़ोन आता है..

गौतम - हेलो..

जगमोहन - कहाँ हो बेटा? घर ताला क्यों लगा है.. औऱ सुमन फ़ोन क्यों नहीं उठा रही है?

गौतम - माँ अपनी किसी सहेली के एनिवर्सरी फंक्शन में लेकर आई थी.. औऱ नाराज़ है आप से इसलिए फ़ोन भी नहीं उठा रही होगी..

जगमोहन - बात करवा अपनी मम्मी से..

गौतम वापस जाते हुए - रुको करवाता हूँ..

गौतम - लो बात करो..

सुमन - कौन है?

गौतम - पापा..

सुमन गुस्से से - बोलो.. क्या बात है?

जगमोहन - सुमन.. मेरी बात सुनो.. कल सुबह गाँव से माँ के साथ बृजमोहन और मानसी आने वाले है..

सुमन - तो? मैं क्या करू? औऱ इतने साल बाद तुम्हारे घरवालों को अचानक कैसे याद आ गई? अब क्या चाहिए उनको? जमीन औऱ घर को तो हड़प कर ही गए अब क्या हड़प करना चाहते है?

जगमोहन - सुमन.. फालतू बात मत करो.. बटवारे में पापा की नोकरी के बदले मैंने ही भईया को वो सब रखने को कहा था.. औऱ गौतम को सुबह घर पर ही रखना.. मैं सुबह जल्दी घर आ जाऊंगा..

सुमन - नहीं रहेगा वो घर पर..औऱ तुम अपने घरवालों से कहदो आने की कोई जरुरत नहीं है.. अब 18 साल बाद क्या लेने आ रहे है वो?

जगमोहन - अरे तुमसे तो बात करना बेकार है.. कोई बात नहीं समझती..

सुमन - मैं नहीं समझती तो अपनी उन रखैलो को समझा दो.. पहले तो एक ही थी अब तो दो-दो हो गई.. वो दोनों तुम्हारी बात अच्छे से समझ जायेगी..

जगमोहन - देख सुमन तेरी बातों के करण मैं घर दूर हूँ.. ऐसा करेंगी तो जिंदगी से भी दूर चला जाऊँगा..

सुमन - कल के जाते आज जाओ मेरी बला से.. मुझे क्या सुनाते हो..

जगमोहन - मुझे कुछ औऱ बात नहीं करनी.. कल वो लोग आ रहे है.. तू माँ औऱ बृजमोहन मानसी से कोई कड़वी बात नहीं करेगी.. (फ़ोन काटते हुए)

गौतम सुमन से - कौन आ रहा है? औऱ इतना क्यों गुस्से में हो?

सुमन - तेरी दादी औऱ चाचा चाची आ रहे है..

गौतम हैरानी से - पर पापा का कोई रिश्तेदार नहीं है.. आपने ही तो बताया था.. अब अचानक से ये लोग कहा से पैदा हो गए?

सुमन - पुरानी बात है ग़ुगु.. छोड़..

गौतम - बताओ ना.. क्या मुंह में दही जमा के बैठी हो तुम भी..

सुमन उठकर - चल घर चलते है...

गौतम साथ में चलते हुए - बात क्या है कुछ बताओगी?

सुमन पार्किंग जाते हुए - घर चल बताती हूँ..

गौतम कार में बैठकर - नहीं यही बताओ.. क्या बात है औऱ मुंह क्यों लटक गया तुम्हारा?

सुमन सिगरेट सुलगा कर कश लेती हुई - गौतम.. 18 साथ पहले तक तेरे पापा औऱ मैं गांव में तेरे पापा के परिवार के साथ रहते थे.. तेरे दादा दादी औऱ चाचा ब्रजमोहन चाची मानसी भी साथ रहते थे..

गौतम - कहा? कोनसा गाँव?

सुमन - सलामपुर.. यहां से 3 घंटे का रास्ता है..

गौतम - फिर क्या हुआ?

सुमन - एक दिन तेरे दादा मंगुलाल की मौत हो गई.. उसके बाद जमीन औऱ घर के बटवारे को लेकर तेरे चाचा चाची औऱ हमारे बीच मनमुटाव होने लगा.. तेरे पापा ने तेरे दादा की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर तेरे चाचा को दे दिया.. औऱ हम गाँव से यहां आ गए.. तेरे पापा ने एक छोटी सी हवलदार की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर दे दिया.. तेरे चाचा ब्रजमोहन ने अपने नशे की लत औऱ ऐश पूरा करने के लिए जमीन साहूकार को बेच दी..

गौतम - फिर क्या हुआ माँ?

सुमन सिगरेट का कश खींचती हुई धुआँ छोड़कर - होना क्या था ग़ुगु.. 18 साल हो गए मैंने आज तक पलटकर वापस उस गाँव में कदम नहीं रखा ना ही जगमोहन और पिंकी से तुझे इस बारे में बात करने औऱ बताने को कहा.. मैं तुझे सबसे दूर रखना चाहती थी.. मगर अब ना जाने क्यों वो लोग यहां आ रहे है..

गौतम सुमन के चेहरे से जुल्फ हटाते हुए - अरे इतनी सी बात.. तुम चिंता मत करो.. आ रहे है तो आने दो आकर चले जाएंगे.. तुम नहीं चाहती तो मैं उनसे नहीं मिलूंगा..

सुमन मुस्कुराते हुए सिगरेट का अगला कश लेकर - तू कितना अच्छा है ग़ुगु..

गौतम भी मुस्कुराते हुए - तू भी तो बहुत प्यारी है सुमन..

सुमन सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट फेंक देती है औऱ गौतम के लबों पर अपने लब रखकर गौतम के होंठ चूमते हुए कहते है - अब घर ले चल अपनी माँ को..

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गौतम सुमन को खींचकर अपनी गोद में बैठा लेता है औऱ गाडी स्टार्ट करके चलाते हुए - हमारी पहली चुदाई होने वाली है सुमन आज.. कुछ चाहिए तुझे बदले में?

सुमन गौतम को देखकर - तेरा लंड तो मैं ले ही लुंगी.. बाकी जो तुझे देना हो दे देना. तेरा फ़ोन आ रहा है ग़ुगु..

गौतम फ़ोन देखकर - रहने दो बाद मैं बात कर लूंगा.

सुमन - फ़ोन किसका है?

गौतम - अरे कोई स्टेज डायरेक्ट है.. पीछे पड़ा हुआ है कब से..

सुमन - क्या कह रहा है?

गौतम - अरे एक कंडोम कंपनी के प्रमोशन के लिए एक स्टेज नाटक कर रहा है दिल्ली में.. औऱ मुझे लीड एक्टर लेना चाहता है..

सुमन - तो क्या परेशानी है ग़ुगु.. कर ले.. पैसे भी दे रहे होंगे वो..

गौतम - पैसे तो दे रहा है मगर नाटक में सेक्स है भी करना पड़ेगा हीरोइन के साथ.. औऱ ये कोई आम नटाक नहीं है माँ.. सीक्रेट नाटक है 200 लोगों के सामने करना होगा.. इसके बारे में किसीको पता नहीं है.. सब लोग अँधेरे में शो में आते है नाटक देखकर निकल जाते है..

सुमन - अच्छा.. ऐसा क्या सीक्रेट नाटक है?

गौतम - वही.. Incest है.. एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स करता है शो में.. औऱ इस कंपनी का कंडोम लगाता है जिससे दोनों HIV से बच जाते है..

सुमन - ये सब होता है? कैसे कैसे नाटक बनने लगे है.. वैसे पैसे कितने मिल रहे है..

गौतम - एक शो के 2 लाख देने को कह रहा था..

सुमन - अच्छा.. इतने देने को कह रहे है?

गौतम - हाँ.. हीरोइन को तो 5 लाख मिलते है.. शो के बाद डायरेक्ट प्रोडूसर से चुदवाना भी पड़ता है उसको.. पर छोडो.. हमें क्या.. कोनसी हमें पैसो की कमी है..

सुमन गौतम को देखती हुई - अच्छा... बहुत पैसे है तेरे पास?

गौतम - हम्म.. सब बुआ की मेहरबानी है.. बाइक फिर कार... बिना मांगे सब दे देती है.. बहुत प्यारी है..

सुमन जलन से - मैं प्यारी नहीं हूँ?

गौतम घर के आगे गाडी लगाते हुए - ये जानने के लिए तो बिस्तर में चलना पड़ेगा माँ..

सुमन मुस्कुराते हुए - मैंने तो हामी भर दी है मेरी दिल के टुकड़े... अब तू अपनी माँ को घर के बिस्तर में लेटाकर चोद या सडक के किनारे फुटपाथ पर.. मैं मना नहीं करने वाली...

गौतम सुमन को उठाकर घर के अंदर लता है औऱ बेड पर लेटा कर उसकी साडी उठाकर चुत चाटता हुआ चुत गीली करके अपना लंड को चुत पर टिका देता है मगर सुमन एक कंडोम गौतम के लंड पर पहना देती है औऱ अब घुसाने को कहती है.

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गौतम - माँ यार अब क्या कंडोम का नाटक कर रही हो तुम? मैं कल प्रेगनेंसी रोकने की गोली लाकर दे दूंगा..

सुमन लंड पकड़कर अपनी चुत पर रगडती हुई - जब ले आओ तब कर लेना.. अभी तो ऐसे ही करना पड़ेगा..

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गौतम सुमन के ऊपर आकर - जैसा तू बोले मेरी मेरी लोडे की ठंडक.. चल घुसा भी ले.. कब तक बस रगढ़ती रहेगी?

सुमन लंड को चुत के छेद पर टिका कर घुसाती हुई - आहहहहह... ग़ुगु कितना बड़ा है तेरा जा ही नहीं रहा अंदर... अह्ह्ह्ह...

गौतम दबाव डालकर लंड का टोपा घुसा देता है औऱ सुमन सिसकियाँ लेने लगती है दर्द से मचल उठती है..

गौतम - अभी तो सिर्फ टोपा गया है औऱ तू तड़पने लगी? चुदाई में क्या होगा?

सुमन सिसकते हुए -अह्ह्ह्ह.. ग़ुगु पता नहीं कैसे सिकुड़कर इतनी टाइट हो गई मेरी चुत? बहुत दर्द हो रहा है बेटा...

गौतम थोड़ा दबाब डालकर लंड अंदर डालने लगता है औऱ कहता है - माँ पूरी टाँगे फैला लो.. दर्द कम होगा..

सुमन टाँगे पूरी चौड़ी करके - बेटा धीरे धीरे घुसाना..

गौतम थूक लगा कर दबाब डालने ही लगता है की घर का दरवाजा बज जाता है...

गौतम गुस्से में - इस वक़्त कौन आ गया मादरचोद?

सुमन चुत पर से गौतम का लंड हटाकर साडी नीचे करके - देख तो ज़रा कौन है?

गौतम लंड पर से कंडोम उतारकर सुमन के ब्लाउज में डालता घुसा देता है औऱ लंड जीन्स में डालकर गेट खोलने जाता है...

आप?

क्या हुआ ग़ुगु?

कुछ नहीं..

आज आखिरी एग्जाम था ना..

हाँ..

ठीक गया?

हाँ पास हो जाऊँगा..

सुमन कहा है?

कमरे में है सो रही है..

ठीक है तू भी जाके सो जा..

सुमन बाहर आते हुए - यहां क्या लेने आये हो? रखैलो ने निकाल दिया किया?

जगमोहन - सुमन.. वापस ड्रामा शुरु करने की जरुरत नहीं है.. कमरे में चलो बैठके बात करते है..

सुमन - कमरे क्यों यही बात करो..

जगमोहन - गौतम सुन रहा है सुमन..

सुमन - तो सुनने दो.. उससे क्या छिपा है? तुम्हारी सारी करतूते तो वो पहले से ही जानता है..

जगमोहन सुमन का हाथ पकड़कर कमरे में ले जाता है औऱ गौतम अपने कमरे के बाथरूम में घुस जाता है औऱ अपने बाप जगमोहन को गाली देते हुए अपनी माँ सुमन की टाइट चुत को याद करके लंड हिलाने लगता है..

गौतम मन में - इस बहन के लोडे को भी अभी आना था.. सुबह नहीं आ सकता था साला.. इतने दिनों से फ़ोन तक नहीं किया औऱ अब अचानक आ धमका.. आज तो माँ चुदने ही वाली थी.. लंड का टोपा घुसते ही मचलने लगी.. जब लंड अंदर जाएगा तो क्या हालत होगी माँ की.. उफ्फ्फ बहनचोद.. सोचकर ही दिमाग खराब हो रहा है.. जिस चुत से पैदा होके निकला हूँ उसी चुत को चोद चोदकर मैंने अपनी माँ को नहीं रुला दिया तो लानत है मेरे मर्द होने पर.. उफ्फ्फ यार.. घोड़ी बनके चुदेगी तो कितना मज़ा देगी मेरी माँ.. कितनी कसी हुई चिकनी कमर है माँ की औऱ गांड तो जैसे मीसर के पिरामिड है.. बिलकुल परफेक्ट.. गोद में उठाके लंड के ऐसे ऐसे झटके मारूंगा ना कि माँ खुद बोलेगी.. बेटा धीरे.. आह्ह.. बेटा धीरे.. इतना माल भरूंगा माँ की चुत में कि पहली बार में ही बच्चा लग जाएगा.. अह्ह्ह..

गौतम ये सब सोचते हुए सुमन कि एक तस्वीर अपने फ़ोन में देखकर अपना लंड हिला रहा था उधर सुमन जगमोहन से झगड़ रही थी..

सुमन - अरे खड़ा होता नहीं तो क्यों शादी पर शादी किये जा रहे हो तुम? औऱ मेरी सहेली ही मिली थी शादी के लिए?

जगमोहन - अब कैसे समझाऊ तुझे? मैं फंसा हुआ था.. मेरी पास औऱ कोई चारा नहीं था.. अगर शादी नहीं करता तो हाथ से ये घर औऱ नोकरी दोनों चली जाती..

सुमन - जाती तो चली जाती.. कोनसा मेरी औऱ मेरे ग़ुगु के काम ही आ रही थी.. घर तो तुमने अपनी रखैलो के लिए बनाया था ना..पता क्या दिल बदला दोनों का और मुझे ये घर इतनी आसानी दे कर चली गई दोनों..

जगमोहन - सुमन रूपा ने मुझे पर दबाव बनाया था शादी का मैं नहीं करना चाहता था.. औऱ अगर किसी को पता चला कि मैंने तेरे अलावा माधुरी औऱ रूपा से शादी कर रखी है तो नोकरी गई समझो..

सुमन - वो सब तुम जानो.. मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है.. तुमसे अच्छी तो तुम्हारी वो बहन पिंकी है.. उसे मैंने कितना भला बुरा कहा.. उसके लिए कितना ज़हर दिल में रखा लेकिन वो जितना मेरी ग़ुगु के लिए करती है उतना तो तुमने अब तक नहीं किया होगा..

जगमोहन - मैं तुमसे लड़ने झगड़ने नहीं आया सुमन..

सुमन - तो क्या अपने मरियल लंड की प्रदर्शनी लगाने आये हो मेरे सामने?

जगमोहन - सुमन.... ये मत भूलो मैं अब भी तुम्हारा पति हूँ औऱ गौतम का बाप..

सुमन - सिर्फ नाम के लिए.. औऱ अब 18 साल बाद क्यों आ रहे है वो लोग? एक छोटी सी नोकरी के बदले इतनी सारी जमीन हड़प कर ली घर भी रख लिया.. अब क्या चाहिए उन लोगों को हमसे?

जगमोहन - पुरानी बातों को छोडो सुमन.. कल जब मम्मी के साथ बृजमोहन आएगा तब पता चल ही जाएगा.. गौतम भी पहली बार अपनी दादी औऱ चाचा चाची से मिल लेगा..

सुमन - कोई जरुरत नहीं है गौतम को उनसे मिलने की.. मेरा बेटा किसीसे नहीं मिलेगा.. समझें तुम..

जगमोहन - वो मेरा भी बेटा है.. तेरे कहने पर मैंने उसे कुछ नहीं बताया.. मगर अब उसे एक बार तो अपने गाँव जाकर सबसे मिलना चाहिए..

सुमन - तुम्हे जाना है चले जाओ.. मैं गौतम को नहीं भेजूंगी.. ना खुद वहा जाउंगी..

जगमोहन - सुमन अब अगर तुम चुप नहीं हुई तो मेरा हाथ उठ जाएगा..

सुमन - हाथ तो नामर्द का भी उठ जाता है.. मर्द हो तो लंड उठा के बताओ.. तब जो कहोगे वो मानुँगी...

जगमोहन बेड पर बैठकर - मुझसे औऱ बहस नहीं होगी.. नींद आ रही है आज यही सोऊंगा..

सुमन लाइट बंद करके तकिया खींचकर बेड पर लेटते हुए - सोने के अलावा कर भी क्या सकते हो..

जगमोहन आगे कुछ नहीं कहता औऱ सो जाता है.. सुमन अपने ब्लाउज में से गौतम का पहना हुआ कंडोम निकालकर अपनर मुंह में डाल लेटी है औऱ चविंगम की तरह चबाने औऱ उसका स्वाद लेने लगती है वही गौतम अब अपनी माँ के नाम पर मुट्ठी मारके बाथरूम से बाहर आ चूका था औऱ अपने धागे को देखकर अब बारी बारी उसने बड़े बाबाजी के बताये अनुसार गायत्री, कोमल, शबनम, पूनम, सलमा, शबाना, रेशमा, आदिल, नरगिस, रज़िया, सिमरन, मनोज के मन से अपनी मनोरम औऱ मधुर मिलन की यादे और बाकी सारी बातें मिटा दी.. औऱ दुखी मन से सबकी तस्वीर देखते हुए अब अपनी माँ सुमन के साथ ही रहने का फैसला करते हुए बेड पर लेट गया.. उसने रूपा और माधुरी को भी छुपके मिलने का फैसला किया.. ऋतू और आरती से भी अपना रिश्ता परदे के पीछे वाला ही रखने का निर्णय लिया..

गौतम का मन दुखी था उसने पिंकी के अलावा लगभग सबके मन से अपनी यादे मिटा दी थी..

उसकी आँखों में नींद नहीं थी औऱ वो सोच रहा था की क्यों सुमन औऱ जगमोहन ने कभी उसे गाँव औऱ बाकी चीज़ो के बारे में नहीं बताया..

गौतम उदासी से पिंकी को फ़ोन कर दिया..

कैसी हो बुआ?

मैं अच्छी हूँ.. तेरा फ़ोन आने औऱ भी ज्यादा अच्छी हो गई बाबू.. आज अचानक इतनी रात को फ़ोन किया है जरुर कुछ बात होगी? कुछ चाहिए? एटीएम कार्ड में पैसे ख़त्म हो गए क्या? मैं अभी डालती हूँ..

अरे नहीं बुआ.. मैंने तो अभी तक एटीएम इस्तेमाल भी नहीं किया है.. औऱ उसमे इतना सारा पैसा है की मेरे इस्तेमाल करने से ख़त्म भी नहीं होगा...

पिंकी - तो ग़ुगु.. फिर क्या बात है? औऱ तेरी आवाज इतनी रूखी क्यों है? तू उदास है?

गौतम - नहीं बुआ.. मैं ठीक हूँ..

पिंकी - सच सच बता बाबू.. मैं अभी तेरे पास आ जाउंगी.. मेरे ग़ुगु को कोई परेशानी है?

गौतम - ऐसा कुछ नहीं है बुआ.. बस आपसे बात करने का मन हो रह था.. इसलिए फ़ोन कर लिया..

पिंकी छेड़ते हुए - अच्छा? गन्दी बातें करनी है मेरी साथ? चुत लंड वाली? मुझे याद करके हिला तो नहीं रहा तू.. वीडियो कॉल कर मुझे दिखा जरा.. मेरा ग़ुगु कैसे नाम की मुट्ठी मार रहा है..

गौतम - बुआ यार.. क्या कुछ भी बोल रही हो आप? मैंने बस नोर्मल्ली बात करने के लिए फ़ोन किया था.. रहने दो..

पिंकी - अच्छा सॉरी बाबू.. बोल.. खाना खाया?

गौतम - हाँ.. आपने खा लिया?

पिंकी - मैंने भी खा लिया बाबू.. बार बार उल्टी हो रही पाता नहीं क्या हुआ है मुझे सुबह डॉक्टर के जाउंगी... अभी बस सोने की तैयारी में थी.. तू पास होता तो लिपटकर सोती..

गौतम - आप पास होती तो मैं सोने कहाँ देता बुआ आपको? रातभर जगा के रखता.. औऱ बहुत तंग करता.. वैसे उल्टी क्यों हो रही है? कुछ गलत तो नहीं खा लिया?

पिंकी - नहीं कुछ गलत नहीं खाया.. और ऐसे तंग होने के लिए तो मैं कब से मरी जा रही हूँ.. तू जीतना तंग करेगा मैं उतना प्यार करूंगी..

गौतम - बुआ कुछ बात करती थी आपसे..

पिंकी - बोल ना बाबू.. क्या बात है?

गौतम - गाँव के बारे में.. कल गाँव से दादी औऱ चाचा चाची आने वाले है..

पिंकी - तुझे किसने बताया..

गौतम - पापा ने.. मगर आज तक उनके बारे में मुझे किसी ने नहीं बताया.. ना आपने ना माँ ने.. ना पापा ने..

पिंकी - बाबू तेरी माँ ने मना किया था सबको.. औऱ वैसे भी क्या फर्क पड़ता है.. गाँव में अब बचा भी क्या है? जितना कुछ था वो तो ब्रजमोहन भईया ने अपने शोक पुरे करने में गवा दिया.. मानसी भाभी ने भी उन्हें नहीं रोका... ले दे के अब एक घर औऱ एक छोटा सा खेत बचा है.. तू सोचना छोड़ दे ग़ुगु उस बारे में..

गौतम - बुआ कुछ बताओ ना स्वभाव केसा है सबका?

पिंकी - मुझे भी कितने साल हो गए बाबू गाँव छोड़े हुए.. मैं क्या बताऊ.. इतने सालो में कुछ बदल गया हो तो..

गौतम - हम्म्म..

पिंकी - तू कल मिलके खुद ही जान लेना..

गौतम - माँ मिलने कहाँ देगी? वो तो कह रही है सुबह जल्दी घर से कहीं चले जाता ताकि वो लोग मुझसे मिल ना पाए.. माँ बहुत नाराज़ लगती है..

पिंकी - नाराज़ तो होगी ही ना.. उनका हक़ जो छीन लिया था औऱ तेरे पापा ने भाईचारा निभाते हुए सारा कुछ दे भी दिया..

गौतम - मुझे गाँव जाने की इच्छा हो रही है बुआ.. आप भी आओगी ना..

पिंकी - नहीं ग़ुगु.. वहा मेरा क्या काम.. मैं तो पहले ही बदनाम हूँ.. वहा ना जाने कैसी कैसी बातें होती है मेरे बारे में..

गौतम - बुआ...

पिंकी - क्या बाबू..

गौतम - गीली वाली चुम्मी चाहिए..

पिंकी हसते हुए - उम्म्महा.. ले खुश? इस बार आना बहुत सारी चुम्मी करूंगी मेरे बाबू को..

गौतम - जल्दी आऊंगा बुआ.. आप तो अब आदत बन चुकी हो..

पिंकी - अच्छा अब सोना है या रातभर बातें ही करनी है.. नींद भी जरुरत है ना बाबू..

गौतम - ठीक है बुआ सोता हूँ.. गुडनाइट..

पिंकी - गुडनाइट बाबू.. बुआ loves you...


गौतम - i love you too बुआ..
 
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