Incest पहाडी मौसम - Page 9 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

(सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा हैजिससे उसकी बुर की छोटे से छेद में जाने में थोड़ी सी तकलीफ ज़रूर होगी लेकिन आराम से चला जाएगा इतना भी वह जानती थी और सोनू की चाची की बात सुनते ही सूरज अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगने लगा और ऐसा करने पर उसके लंड का सपना बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,,सूरज को भी मजा आ रहा था वह एक झटके में अपने लंड को उसकी बुर की जड़ तक घुसेड देना चाहता था,,, लेकिन अपने उत्तेजना पर और अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए था,,,। उत्तेजना की आग पूरी तरह से सूरज के बदन में लग चुकी थी,, इस समय उसे दुनिया का अनमोल खजाना मिल गया था और धीरे-धीरे वह अपने अस्तित्व को उसके अंदर उतर रहा था,,,वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी उसे सोनू की चाची चोदने के लिए मिल जाएगी,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था उम्मीद से दुगना मिल रहा था उसे,,, वह तो केवल यूं ही घूमने के लिए उसके घर पहुंच गया थाऔर जब देखा कि सोनू की तबीयत खराब है तो वहां बात हुई बातों में उसकी दवा के लिए एक वेद जी का नाम ले लिया और नतीजा देखो सोनू की चाची की चुदाई वह करने जा रहा था,,,।)





चाची क्या यह पूरा घुस जाएगा,,,!

बड़े आराम से रे बस तू धक्का लगाकर इसे अंदर तक डाल दे,,।

लेकिन तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है इसका छेद बहुत छोटा लग रहा है,,,, कैसे घुसेगा यह,,,।

आराम से घुस जाएगा,,, यही सब तो नहीं जानता औरत का यह अंग कितना कारामती है,,, बस तु अंदर डालने की सोच,,।

तुम कहती हो चाची तो सच ही होगा,,, मैं पूरा प्रयास करता हूंलेकिन ऐसा लग रहा है कि मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ही छोटे से छेद के लिए,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था इस तरह की बातें करके वह अपनी मां की बात भी सोनू की चाची को बता दे रहा था और उसकी इस तरह की बातें सुनकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी जवानी का जलवा पूरी तरह से उसके ऊपर बिखर चुका था जिसके चलते वह इस तरह की बातें कर रहा था.. सूरज की बात सुनकर सोनु की चाची बोली,,)

हां यह बात तो सच है मैं कहती थी ना तेरा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है लेकिन मैं जानती हूं कि बड़े आराम से चला जाएगा,,, बस तू डाल,,,।





ठीक है चाची मैं पूरी कोशिश करता हूं,,,(और इस बार थोड़ा जोर दिखा कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,, सूरज को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की बुर को ज्यादा ही कसी हुई है एक शादीशुदा औरत की पूरी इतनी कसी हुई होगी वह कभी सोच नहीं सकता था क्योंकि उसने मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई किया था और जैसा एहसास सूरज को मुखिया की लड़की को चोदने में हो रहा था वही ऐसा इस समय सोनू की चाची को चोदने नहीं हो रहा था,,, और इस बात की खुशी सूरज को थी,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है,,,, सूरज का कामउसकी बुर से निकलने वाला मदन रस की चिकनाहट आसान करते रही थी थोड़ी बहुत दिक्कत है सूरज को महसूस हो रही थी लेकिन वह जानता था कि उसका लंड बुर के अंदर पूरा का पूरा घुस जरूर जाएगा,,,,।





टूटी हुई मडई में सोनू की चाची की जवानी पूरे तूफान पर थी बरसों की दबी हुई प्यास आज पूरी तरह से ऊपर आई थी और उसे बुझाने का पूरा मौका उसे मिल रहा था और अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी की प्यास सिर्फ सूरज के मोटे तगड़े लंड से ही बुझ सकती है,,,, उसकी मोटी मोटी जांघें सूरज की जांघों पर चढ़ी हुई थी,,, और उसका लंड उसके गुलाबी छेद में धीरे-धीरे अंदर की तरफ घुस रहा था,,, इस तरह का कड़क और कसा हुआ एहसास उसे कभी नहीं हुआ था अपने पति के छोटे लंड से वह आज तक इस एहसास को कभी महसूस ही नहीं कर पाई थी,,, लेकिन आज उसकी औरत होना पूरी तरह से सफल होता नजर आ रहा था सूरज के लंड कीगर्मी और उसका घर्षण हुआ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों में बड़े अच्छे से महसूस कर पा रही थी,,,, और यही घर्षण और रगड़ उसे बेहद आनंदित कर रही थी,,,सोनू की चाची सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देखना चाहती थी इसलिए वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिका दी थी,,, उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,।





इस समय सूरज का लंड उसे मोटा तगड़ा सांप नजर आ रहा था और उसकी गुलाबी बुर कोई छेद नजर आ रही थी जिसमें वह प्रवेश कर रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने भतीजे की दवाई लानेके लिए वह निकली जरूरत थी लेकिन रास्ते में वह सूरज के साथ ऐसा ही कुछ करना चाहती थी और सब कुछ ऐसा हो रहा था,, सूरज के साथ चुदाई की वह बहुत बार कल्पना कर चुकी थी लेकिन उसकी यह कल्पना आज हकीकत में बदल चुकी थी सूरज भी काफी मेहनत कर रहा था जेठ की दुपहरी में जवानी की गर्मी को सहन करके वह पूरी तरह से पागल हो जा रहा था इसलिए तो उसके माथे से पसीना टपक रहा थाऔर यही हाल सोनू की चाची का भी था वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी उसकी मोटी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम पपाया के पेड़ पर पपिया की तरह लटकी हुई थी,,, देखते ही देखते सूरज धीरे-धीरे करके अपनी पूरे समुचे लंड को सोनू की चाची की गुलाबी बुर में उतार दिया था।जैसे ही सोनू की चाची को एहसास हुआ कि सूरज का लंड पूरी तरह से उसकी बुर में समा गया है वह यह देखकरखुश हो गई और यह खुशी और उत्तेजना उसके चेहरे पर साथ दिखाई दे रही थी और यही हाल सूरज का भी था सूरज भी एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)





देखो चाचा तुम सच कह रही थी सच में यह तो पूरा घुस गया हमने तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतने छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड कैसे घुस पाएगा।

है ना अद्भुत,,,!

बिल्कुल चाची,,,, लेकिन अब मुझे क्या करना है,,,?

बस अब तुझे अपनी कमर को आगे पीछे करना है और इस लंड को अंदर बाहर करना है इतना जरूर देखना की पूरा का पूरा निकल ना जाए उसका सुपाड़ा अंदर ही रहना चाहिए ताकि दोबारा डालने में तकलीफ ना हो,,, बस अब शुरू हो जा बेटा,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह तो सिर्फ जानबूझकर अपनी नादानी दिख रहा था और वह जैसा बोल रही थी वैसा ही करना शुरू कर दिया था सूरज अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लाना शुरू कर दिया था और ऐसा करने पर उसका मोटा तगड़ा लड़की सोनू की चाची की बुर के अंदर बाहर होना शुरू हो गया था इसकी रगड़ उसे पूरी तरह से मस्त कर रही थी और यही हाल सोनू की चाची का भी था,,,सूरज के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनू की चाची बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसका पूरा बदन कसमसा रहा था,,,, उसके चेहरे के हाव-भाव बड़ी तेजी से बदल रहे थे,,,इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह का सुख सोनू की चाची पहली बार भोग रही थी लेकिन वह तो इस तरह के सुख को कई बार पहुंच चुका था इसलिए वह पूरी तरह से मजा हुआ खिलाड़ी था,,,, अगर वह अपनी पर उतरा था तो उसके सामने सोनू की चाची ही पूरी तरह से अनाड़ी नजर आने लगती,, क्योंकि इस खेल में सोनू पूरी तरह से माहिर था और एक पक्का खिलाड़ी था







कैसा लग रहा है सोनू,,,(उत्तेजित स्वर में सोनू की चाची बोली)

पूछो मत चाची बहुत मजा आ रहा है,,,तुम सच कहती थी कि लंड और बुर का पेशाब करने के अलावा दूसरा भी बहुत सा काम है,,, तुम अगर नहीं बताती तो मैं तो अब तक अनजान ही रहता कितना मजा आ रहा है मैं बात नहीं सकता,,,(एकदम मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद करता हुआ सूरज बोला उसकी हालत देखकर सोनू की चाची मन ही मन बेहद प्रसन्न हो रही थी उसकी भी हालत कुछ ठीक नहीं थी वह भी पूरी तरह से उत्तेजना के घोड़े पर सवार हो चुकी थी और यह घोड़ा उसे कहां ले जा रहा था उसे खुद समझ में नहीं आ रहा थाजवानी से लेकर के इस उम्र के दौर तक उसने इस तरह का सुख कभी भोगी ही नहीं थी और ना हीं कभी कल्पना की थी,,, वह भी अपनी आंखों को बंद करके इस अपन को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी,,,, धीरे-धीरे सूरज अपनी कमर हिला रहा थालेकिन उसके धीरे-धीरे में सोनू की चाची को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे पूरा अहसास हो रहा था कि सूरज का लंड काफी देर से एकदम खड़ा का खड़ा था उसमें बिल्कुल भी ढीलापन नहीं आया था यही उसकी मर्दानगी का सबुत था। लेकिन अब समय आ गया था जब वह सुरज से कहे कि अब जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर जोर-जोर से धक्के लगा,,, इसलिए वह गरम आहे भरते हुए बोली,,,)





ओहहहहह सूरज बहुत मजा आ रहा है इससे भी ज्यादा मजा तब आएगा जब तू अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाएगा और अपने लंड को बड़ी तेजी से मेरी बुर के अंदर बाहर करेगा तब तुझे भी मजा आएगा और मुझे भी,,,,।

एकदम जोर से चाची,,,,

हां एकदम जोर से,,,,

तुम्हें चोट लग गई तो,,,

नहीं मुझे चोट नहीं लगेगी बल्कि बहुत मजा आएगा,,,,।

तो फिर मैं जोर-जोर से धक्के मारु,,,,

हां एकदम जोर-जोर से बिल्कुल भी रहम मत करना,,,।





ठीक है चाची जैसा तुम कहो,,,,(सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि अब असली खेल खेलने का समय आ चुका था अब सोनू की चाची को असली सूरज से मिलना था अभी तक तो वह एक नादान सूरत से मिल रही थी जो उसके दिशा निर्देश से ही आगे बढ़ रहा था लेकिन अब वह सोनू की चाची को दिखाएगा की एक असली मर्द से चुदवाने का क्या नतीजा होता है,,सूरज सोनू की चाची की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था क्योंकि वह जानता था उसका हर एक धक्का उसे स्वर्ग की शेर कराएगा,,,, और फिर अपने आप को व्यवस्थित करके वह एक जोरदार करारा धक्का मारा और एकदम से सोनू की चाची की चीख निकल गई क्योंकि,,,उसके लंड की ठोकर सीधे उसके बच्चेदानी से झक रही थी और यह एहसास उसे पूरी तरह से पानी पानी करती थी लेकिन उसकी चीज की आवाज को सुनकर सूरज एकदम से रुक गया था और बोला,,,)

क्या हुआ चाचा दर्द तो नहीं हुआ ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं सूरज तू तो मुझे पागल कर देगा बस ऐसे ही धक्के लगा बहुत मजा आ रहा है,,,,।

(फिर क्या था सोनू की चाची की इजाजत बातें ही सूरज शुरू पड़ गया उसका हर एक तक का सोनू की चाची को स्वर्ग की राह ले जा रहा था वह हवा में उड़ रही थी,,,, वह पागल हो जा रही थी वाकई में उसका हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था,,,,, सोनू की चाची और सूरज दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे बीछी हुई घास में दोनों काम क्रीड़ा का सुख भोग रहे थे,,,, सूरज पागलों की तरह ढके पर धक्का लगा रहा था सोनू की चाची काफी मजबूत और गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, और वह जानता था कि उसका हर एक धक्का सोनू की चाची बड़ी आराम से जेल जाएगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उसकी जांघों से टकराकर एक अद्भुत आवाज पैदा कर रही थी उसके हर एक धक्के के साथ,,ठाप ठाप की आवाज आ रही थी यह आवाज दोनों की जांघों के टकराने से आ रही थी,,,,।





सोनू की चाची मदहोशी के सागर में गोते लगा रही थी वह पागल हुए जा रही थी वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सूरज के हाथ को पकड़ लिया और उसकी दोनों हथेलियां को अपनी लहराती हुई चुचियों पर रखते हुए बोली,,,।

इसे जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगा,,,,।

फिर क्या था सूरज के हाथों में तो दसहरी आम लग चुके थे वह दोनों हाथों से उसे जोर-जोर से दबाता हुआ छक्के पर धक्का लगा रहा था,,,,सूरज के आगे सोनू की चाची जवाब दे गई थी वह चरमसुख पर पहुंचने वाली थी वह पागल हुए जा रही थी और वह तुरंतसूरज को अपनी बाहों में दबा चली थी सूरज भी समझ गया था कि वह झड़ने वाली है उसका काम तमाम होने वाला है इसलिए वह भी एकदम कस के उसे अपनी बाहों में जकड लिया था और अपनी कमर को बड़ी तेजी से ही लाना शुरू कर दिया था,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह से चरम सुख के करीब पहुंची हुई औरत की चुदाई करने पर हो वह और ज्यादा आनंद और मस्ती महसूस करती है और ऐसा ही हो रहा था सूरज की यह हरकत सोनू की चाची को और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश बना रहा था,,,,।





सोनू की चाची के मुंह से बड़ी जोरों की सिसकारी की आवाज निकल रही थीऔर वह जानबूझकर अपनी आवाज पर काबू नहीं कर पा रही थी क्योंकि वह जानते थे कि वह किस जगह पर है,,, वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज इस समय सुनने वाला वहां पर कोई नहीं था,,,, और फिर देखते ही देखते वह एकदम से झड़ने लगी वह पागल होने लगी,,,लेकिन फिर भी सूरज उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए धक्के पर धक्का लगा रहा था उसकी बुर से मदन रस की फुहार फूट रही थी जो की उसके लंड को पूरी तरह से भीगो रही थी,,,, थोड़ी ही देर वह पूरी तरह से शांत हो गई लेकिन सूरजशांत नहीं हो रहा था और यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान थी कि उसका पानी अभी तक नहीं निकला था लेकिन अब एक ही स्थिति में उसका बदन दर्द करने लगा था और अब उसका मन घोड़ी बनने को कर रहा था,,, जो कि आज तक उसके पति ने उसे नहीं बनाया था,,,,और इस बात को सोनू की चाची भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है और घोड़ी बनाकर पीछे से चुदवाने में मजा तो आता है लेकिन घोड़ी बनकर चुदवाने के लिए एक मजबूत घोड़ा भी चाहिए जो कि उसका पति बिल्कुल भी नहीं था,,, वह सूरजका खूबसूरत मासूम चेहरा अपने हाथ में पकड़ कर उसकी आंखों में देखते हुए बोली,,,।





दैया रे दैया बहुत दम है रे तेरे में मेरा तो तूने पानी निकाल दिया लेकिन अभी तक तेरा पानी नहीं निकला,,,,,।

पानी कैसा पानी चाची,,,,(नादान बनते हुए और जोर-जोर से धक्का लगाते हुए वह बोला)

अभी पता चल जाएगा रुक जा मेरे ऊपर से उतर तो,,,।

लेकिन चाची मुझे तो मजा आ रहा है,,,।

अरे बुद्धु ईससे भी ज्यादा मजा आएगा बस मेरे ऊपर से थोड़ा हट जा,,,।

(ऐसे तो सूरज अपना नहीं चाहता था क्योंकि उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सोने की चाची की बात माने ना उसके लिएबेहद जरूरी था इसलिए वह धीरे से सोनू की चाची के ऊपर से हट गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था और वह पूरी तरह से उसके मदन रस में डूबा हुआ था और बुर से निकला हुआ मदन रस उसके लंड से टपक रहा था,,,,सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था सोनू की चाची एक बार झड़ चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और सूरज के लंड की तरफ देखते हुए बोली,,)

बिल्कुल गधे के लंड की तरह है,,,,।





(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी बड़ी-बड़ी गांड को सूरज की आंखों के सामने लहराते हुए घोड़ी बन गई वह हाथ की कोहनी और घुटनों के बाल झुक गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में एकदम तोप की तरह उठा दी थी,,,उसकी यह अदा देखकर सूरज समझ गया था कि वह क्या करवाना चाहती है और इस समय वाकई में उसकी बड़ी-बड़ी गांड बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी,,,, यह देखकर सूरज से रहा नहीं किया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी हथेली को उसकी गांड पर रखकर सहलाने लगा और नादानी पन दिखाते हुए बोला,,,)

अब क्या करना होगा चाची इस तरह तो तुम बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।

(उसकी बात सुनकरसोनू की चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए पीछे की तरफ देखते हुए बोली)

तुझे वही करना है जो अभी कर रहा था लेकिन तू मेरे ऊपर चढ़कर कर रहा था लेकिन अब पीछे से करना होगा,,,,।

पीछे,,, से,,,,,।





हां पीछे से,,,(अपनी दोनों टांगों को धीरे से खोलते हुए अपना हाथ अपने दोनों टांगों के बीच से लाते हुए अपनी गुलाबी छेद पर रखते हुए बोली)

तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,।

हां चाची एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,।

बस अभी इसी में अपना लंड डाल दे और मेरी गांड पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा देखना इस तरह से चोदने में तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज को अच्छी तरह से मालूम था उसे क्या करना है और वह अपने घुटनों के पर बैठा नहीं बल्कि खड़े होकर अपनी दोनों टांगों कोफैला दिया और एक हाथ से सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से टिका दिया और दोनों गांड को पकड़ कर अपनी कमर पर जोरदार धक्का लगाया और ऐसा करने से तुरंत उसका लंड एक ही धक्के में सीधा उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,, औरसोनू की चाची सोची नहीं थी कितनी तेज सेवा धक्का मारेगा और पहली बार में ही इसलिए अपने आप को संभाल नहीं पाई थी और एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई थीलेकिन सूरज पूरी तरह से चौक करना था वह अच्छी तरह से जानता था किस तरह से धक्का मारने पर वह आगे की तरफ लुढ़क जाएगी इसलिए दोनों हाथों से उसकी कमर को थाम लिया था और एकदम से उसे संभाल भी लिया था उसकी हरकत पर सोनू की चाची एकदम से मत हो गई थीइस तरह से चोदने में तो सूरज को भी बहुत मजा आता था और थोड़ी ही देर में सोनू की चाची भी फिर से एकदम से चुदवासी हो गई,,,





सूरज पागलों की तरह धक्के पर धक्का लगा रहा था,,,सोनू की चाची पागल हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि एक बार उसका पानी निकल गया था और वहदोबारा तैयार हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी देर तक कोई मर्द चुदाई भी कर सकता है क्योंकि उसके पति का तो अंदर प्रवेश करते ही निकल जाता था लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था,, वह ना तो झड़ा था और ना ही वह थकने का नाम ले रहा था,,, सोनू की चाची की सिसकारियां एक बार फिर से गूंजने लगी,,,,और थोड़ी ही देर बाद वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच गई उसकी तेज चलती सांस और उसकी जोर-जोर से शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज समझ गया था कि वह फिर से झड़ने के करीब है,,,,इसलिए वह भी अपने धक्के तेज कर दिया और देखते ही देखते उसके मुंह से भी जोर-जोर से आवाज आने लगी और जानबूझकर इस तरह की आवाज निकल रहा था ताकि उसका नादानी पन जारी रहे,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ हो रहा है,,, बहुत अजीब हो रहा है लेकिन बहुत मजा आ रहा है,,,।

अब तेरा भी पानी निकलने वाला है जोर-जोर से धक्के लगा,,,।

और इतना सुनते ही उसके धक्को की गति और भी ज्यादा तेज हो गई,,, और फिर दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, सूरज एकदम से उसकी कमर को अपनी बाहों में लेकर उसके ऊपर पसर गया थाऔर सोने की चाची एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर ली थी वह मदहोश हो चुकी थी,,, वह भी एकदम से घास पर लेट गई थी और उसके ऊपर सूरज था,, सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था आज पहली बार सोनू की चाची चुदाई की असली सुख को प्राप्त की थी और पूरी तरह से तृप्ति के एहसास को महसूस की थी वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह का सुख उसे भी प्राप्त होगा इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो पूरा घोड़ा निकला,,, अपनी घोड़ी की क्या हालत कीया है,,,, मेरी कमर दुखने लगी अब उठ मेरे ऊपर से,,,,।

बाप रे में तो सोचा भी नहीं था कि इस तरह से मजा लिया जाता है,,,(सूरज सोनू की चाची के ऊपर से उठता हुआ बोला,,,, सोनू की चाची भी उठकर बैठ गई दोनों पूरी तरह से तृप्त हो चुकी है वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब यकीन हुआ ना,,,,,(ऐसा कहते हुए वह टूटे हुए झोपड़ी से बाहर नजर डाली तो देखेंगे शाम होने में थोड़ी देर रह गई है वह एकदम से चोंकते हुए बोली,,)

हाय दैया कितना समय हो गया,,,, हम दोनों को बहुत ज्यादा समय हो गया है,,,, बाप रे समय का पता ही नहीं चला,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एकदम से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को समेटने लगी उन दोनों को चुदाई का खेल खेलते हुए 2 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन उन दोनों को समय का पता ही नहीं चला था उन दोनों को बाजार भी पहुंचना थाइसलिए सूरज की जल्दी से उठकर खड़ा होकर और अपने कपड़े पहनने लगा थोड़ी देर में दोनों कपड़े पहनकर टूटी हुई झोपड़ी से बाहर आ गई दोनों के चेहरे पर संतुष्टि एकदम साफ झलक रही थी,,,)

अब तो शाम हो जाएगीकहीं अंधेरा हो गया तो गजब हो जाएगा जल्दी-जल्दी चल सूरज,,,(सोनू की चाची जल्दी-जल्दी चलते हुए बोल रहे थे लेकिन जिस तरह की चुदाई उसकी हुई थी वहां थोड़ा-थोड़ा लंगड़ा रही थी यह देखकर सूरज बोला,)

क्या हुआ चाची तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही है,,?

अरे हरामि ईस तरह की चुदाई करेगा तो कोई भी औरत लंगड़ा कर चलेगी,,,।

(शाम होते होते दोनों बाजार में पहुंच चुके थे लेकिन बाजार घूमने का समय उन दोनों के पास नहीं था सूरज सीधा उसे वेद के पास है क्या जहां पर वह सोने के लिए दवाई ले ली थीऔर दवाई लेकर दोनों वापस लौटने लगे थे लेकिन तब तक शाम भी ढलने लगी थी हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, यह देखकर सोनु की चाची बोली,,)

बाप रे बहुत देर हो गई है दीदी गुस्सा करेंगी क्योंकि इतनी देर तो नहीं लगना चाहिए,,,।

तो क्या हुआ चाचा बोल देना कि वेद जी दूसरे गांव गए हुए थे और वहां पर बैठना पड़ गया था इसलिए देर हो गई,,,।

(सूरज की बात सुनते ही सोनू की चाची के चेहरे की चमक बढ़ने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह सूरज तू तो बहुत चालाक है के मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,।

तुमने ही चालाक बना दि हो,,,,।

(यह सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी,,, और बोली,,,)

अच्छा हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है इस बारे में किसी को भी मत बताना तो आगे से भी तुझे ऐसा मजा देती रहूंगी,,,।

सच कह रही हो चाची,,,।

एकदम सच कह रही हूं लेकिन किसी को बताना नहीं,,,।

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा चाची भला यह सब बातें बताने की होती है क्या,,,!

सच में तु बहुत समझदार है।

(धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा था अभी भी गांव से हुआ दोनों काफी दूर थे चलते-चलते अंधेरा पूरी तरह से छा चुका था और अब गांव की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन दोपहर से सोनू की चाची पेशाब नहीं करी थी और चुदवाने के बाद तो वह पेशाबबिल्कुल भी नहीं थी इसलिए उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी और उसकी बुर में कुलबुलाहट भी होने लगी थी वह अपने मन में सोच रही थी कि अपना जाने का मौका मिलेगा,,, इसलिए वह सूरज से बोली,,,।

मुझे फिर से बड़ी जोरों की पेशाब लगी है रुक जा मै पेशाब कर लेती हूं,,,।

(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एक बड़े से पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगीअंधेरा हो चुका था इसलिए किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वह दोनों अभी भी गांव से दूर थे गांव में प्रवेश करना बाकी था और वह देखना चाहती थी कि जो कुछ भी हुआ उससेसूरज की हिम्मत बड़ी है कि नहीं इसलिए वह सूरज की आंखों के सामने अपनी सारी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी और वह पलट कर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी अब सूरज के लिए नादानी पन दिखाना सबसे बड़ी मूर्खता थी,,,सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड देखकर पल भर में उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वह तुरंत सोने की चाची के पीछे आ गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची बहुत खुश हुई लेकिन फिर भी अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी और बोली,,,)

यह क्या सूरज मुझे पेशाब तो करने दे,,,।

नहीं चाची पता नहीं क्यों मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(और ऐसा कहते हुए सूरज खुद उसकी एक टांग पड़करवहीं पास में ही एक बड़ा सा पत्थर था उसे पर रख दिया था कि वह अपने लिए जगह बना सके और जगह बनते ही तुरंत अपना पैजामा नीचे किया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके गुलाबी छेद में फिर से डाल दिया और फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दियासूरज की हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई और चुदाई का मजा लेने लगी,,,, थोड़ी देर में दोनों फिर से झड़ चुके थे और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी,,।

घर पहुंच कर सोनू की चाची ने वही बहन बताइए जो सूरज में उसे बताया था सूरज अपने घर चला गया था और उसकी बातों पर भरोसा करने के सिवासोनू की मां के पास कोई रास्ता भी नहीं था क्योंकि वह उसके ही बेटे के लिए दवा लाई थी और वाकई में वह दवा काम कर गई थी तीन-चार दिनों में सोनू एकदम ठीक हो गया था,,,,।
 
सोनू की चाची का काम बन चुका था सोनू की चाची कभी सोची भी नहीं थी किअपनी मर्यादा और संस्कार को त्याग कर उसे इस तरह का कदम उठाना पड़ेगा लेकिन अपनी किस्मत की मजबूरी और बदन की जरूरत को देखते हुए उसे वही करना पड़ा जो उसे नहीं करना चाहिए था,, लेकिन आप इसमें उसे कोई भी पछतावा महसूस नहीं हो रहा था क्योंकि जो कुछ भी हुआ था उसमें उसकी ही भलाई थी,,, सोनू की चाची मन ही मन में सोनू काशुक्रिया अदा कर रही थी और वह भी इसलिए कि अच्छा हुआ वह बीमार था और उसकी दवाई के चक्कर में हीउसे सूरज के साथ बाजार जाना पड़ा और जो कुछ भी हुआ वह उसके लिए अविस्मरणीय था जिसे वह कभी जिंदगी में भूल नहीं सकती थी,,, यह वो पल था जो पूरी तरह से उसके जीवन का यादगार पल बन गया था।





जो कुछ भी हुआ था उसके जीवन में पहली बार हुआ था शादी करने के बाद जब से वह अपने ससुराल आई थी पहली रात से ही उसे असंतुष्टि का एहसास होने लगा था,, और कुछ ही वर्षों में वह समझ गई कि यह शादी है उसके लिए पूरी तरह से अभिशाप बंद करने गई है ना तो पति का सुख और ना ही कभी मां बनने का सुख उसे मिलने वाला है,,, पहले तो वह अपनी आशा को छोड़ चुकी थी लेकिन निराशा में उसे आशा की किरण नजर आने लगी,,,अनजाने में ही गांव की औरत ने उसे किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने का परामर्श दी थी,,, पहले तो उसका यह सलाह सोनू की चाची को बड़ा अजीब लगा लेकिन इस बारे में वह सोचने लगी थी और जबसूरज की मां ही उसे एक ज्योतिष के पास ले गई और यह खुलासा उसे ज्योतिष ने किया कि उसे संतान सुख तो मिलेगा लेकिन किसी गैर मर्द से तब से उसके मन में सूरज के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा और ज्योतिष के बताए अनुसार उसे सूरज मेंगैर मर्द की खूबी नजर आने लगी जोर से शरीर सुख के साथ-साथ मां बनने का भी सुख दे सकता था।





और फिर वह सूरज के करीब आने का प्रयास करने लगी मर्दों की फितरत से तो वह अच्छी तरह से वाकिफ थी,,वह इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी का जलवा देखने के बाद सूरज तो क्या दुनिया का कोई भी मर्द उसके पास आने से बिल्कुल भी अपने आप को रोक नहीं पाएगाऔर ऐसा ही होगा थोड़ी हिम्मत दिखा कर सोनू की चाची अपनी जवानी का जलवा सूरज को दिखाने लगी और सूरज पागलों की तरह उसके करीब आने का बहाना ढूंढने लगा,,, और नतीजा यह निकला कि आज दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया,,, लेकिन इसमें सोनु की चाची की गलतफहमी थी कि यह सारा खेल उसका राजा हुआ थावह सूरज को अनाड़ी समझती थी लेकिन इस बात को वह नहीं जानती थी कि वह अनाड़ी सबसे बड़ा खिलाड़ी था वह अनाड़ी बनकर उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाना चाहता था उसमें अपना झंडा गाड़ना चाहता था,, और अनाड़ी बनकर वह अपना खेल खेल चुका था,,, सोनू की चाची को चोदने में उसे परम शांति परम आनंद का अनुभव हुआ था,,, और शराफत से उसने इस अनुभव को सोनू की चाची को भी कराया था सोनू की चाची भी सूरज से काफी संतुष्ट थी।





सच बात तुझे था की पहली बारसोनू की चाची चुदाई की असली सुखों को प्राप्त की थी एक मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलाबी छेद में लेकर उसे इस बात का एहसास हुआ था कि किसी मर्द का लंड बच्चेदानी तक भी जा सकता है,,, वरना उसने तो आज तक अपने पति के छोटे और पतले लंड से ही चुदवाने का असफल प्रयास की थी,,, लेकिन आज वह पूरी तरह से संतुष्टि थी और इस बात से खुश थी कि उसने भी दूसरी औरतों की तरह शरीर सुख को प्राप्त की हैएक औरत होने का सुख प्राप्त की है और उसे इस बात की उम्मीद भी थी कि जल्दी ही वह मां बनने का भी सुख प्राप्त कर लेगी,,,।

सूरज के द्वारा दिलाई गई दवा काम कर गई थी और 3 दिन में ही सोनू एकदम स्वस्थ हो चुका था,,, लेकिन इस बीच सोनू की चाची को सूरज से मिलने का मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि जो आग सूरज ने उसके बदन में लगाई थी उसे केवल सूरज ही बुझा सकता था,,,,बार-बार सोनू की चाची को अपनी बुर में खुजली महसूस होने लगती थी जो की उंगली से नहीं बल्कि सूरज की मोटे तगड़े लंड से ही मिटने वाली थी,,,,, सूरज से मिलने के लिएवह खेत में काम का बहाना बनाकर सुबह-शाम खेत पर भी जाती थी लेकिन सूरज का वहां कोई ठिकाना नहीं मिलता था वह रोज निराश होकर घर चली जाती थी,,, वह उदास रहने लगी थी सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए उसकी मन पूरी तरह से तड़प रहा था,,, अब उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि औरत के मन में शरीर सुख की भूख कितनी प्रबल होती है जिसे मिटाने के लिए स्त्री किसी भी हद तक जा सकती है,,,।





दूसरी तरफ सूरज सोनू की चाची की जमकर चुदाई करने के बाद,, अपने पिताजी के बारे में सोच रहा था,,, सूरज समझ गया था कि जिस आकर्षण में उसके पिताजी घर परिवार त्याग कर चले गए हैं वह आकर्षण इतनी जल्दी कम होने वाला नहीं था लेकिन इसमें उसका ही भला था एक औरत की प्यास कब तक दबी रह सकती है इस बात को वह अच्छी तरह से जानता था,, जिसका ताजा उदाहरण थी सोनू की चाचीऔर इससे पहले मुखिया की बीवी जो पति के होने के बावजूद भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझा रही थी,,,और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि एक-एक दिन उसकी मां भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकि उसकी हरकत को अपनी आंखों से देख चुका था रात को चोरी छुपे अपनी मां के कमरे में देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां अंदर ही अंदर से बहुत प्यासी है,,,, इसका एहसास भी उसे अच्छी तरह से हो गया था जब वह अपनी मां के गले लगा थाउत्तेजना में आकर वह पूरी तरह से अपनी मां को अपनी बाहों में भरकर अपनी हथेलियां को उसके नितंबों पर रखकर दबाने लगा था जिसका बिल्कुल भी विरोध उसकी मन नहीं की थी बल्कि उसकी हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी वह तो ऐन समय पर रानी आ गई थी वरना उसी दिन बहुत कुछ हो जाता हैइसलिए तो सूरज का आत्मविश्वास बढ़ चुका था और इसीलिए वह अपने मन में यही सोचता था कि उसके पिताजी घर पर वापस ना आवे तो अच्छा हो,,,।





दोपहर के समय वह अपने घर पर पहुंचा तो देखा कि उसकी मां घर पर नहीं थी पड़ोस में किसी के घर गई हुई थी घर में केवल रानी ही थी और वह भी बर्तन साफ कर रही थी अपनी बहन को देखकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह धीरे से जाकर अपनी बहन के पास बैठ गया और बोला,,,।

रानी उसे दिन जो आंवाला तोड़कर हम दोनों में लाए थे क्या मां ने तेल बना दी है,,,,।

अभी पूरा बना तो नहीं है लेकिन मां ने बनाना शुरु कर दी है,,,,।(कुछ इस तरह से सूरज उसके पास में ठीक उसके बगल में आकर बैठा था रानी केतन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और आंवले का जिक्र सुनकर तो,,,उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि आंवला तोड़ने के लिए जहां पर दोनों गए थे वहां पर क्या हुआ था,,, अपनी बहन की बात सुनकर सूरज बोला,,)





अगर और वाला की जरूरत हो तो बोलना फिर से हम दोनों चलेंगे,,,(इतना कह कर वह अपनी बहन की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा औरसूरज की यह बात सुनकर रानी के तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी और वह शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुका ली,,, और उसे शरमाता हुआ देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा तूने उसे दिन वाली बात मां को तो नहीं बताई थी ना,,,।

नहीं,,,(रानी शर्मा कर बोली,)

अच्छा हुआ तूने नहीं बताईतुझे ऐसी बहुत सी जगह है वहां भी लेकर जाऊंगा बहुत मजा आएगा,,, अच्छा सच सच बताना उस दिन नहाने में मजा आया था ना,,,।





(सूरज की आवाज सुनकर रानी कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म से शंकुचाए जा रही थी,,उसका दिन जोरों से ढक रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई इस तरह की बातें उसके साथ क्यों कर रहा है और वह भी ऐसे समय जब उसकी मां घर पर नहीं है,,,, जब रानी कुछ बोली नहीं तो सूरज फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोला,,,)

बोल नहाने में मजा आया था ना,,,।

(रानी बोली कुछ नहीं बस हां में सिर हिला दि... उसकी हामी देखकरसूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा और उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह है एकदम से मुद्दे पर आते हुए बोला,,,)

बिना कपड़ों में तु बहुत खूबसूरत लगती है,,,।

(अब तो रानी की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,,, क्योंकि उसे इतना तो समझ में आ रहा था कि उसका भाई अश्लील बातें कर रहा था जो की एक भाई को अपनी बहन से नहीं करना चाहिए था लेकिन उसने अपने भाई की हरकत को जंगल में देख चुकी थी और उसे समय उसकी हरकत उसे बेहद उन्मादक लग रही थी,,, अच्छी लग रही थी इसलिए भले ही उसके मन में थोड़ी झिझक थी लेकिन फिर भी अपने भाई की तरह की बातें उसे अंदर ही अंदर अच्छी लग रही थी फिर भी वह अपने भाई से बोली,,,)





यह कैसी बातें कर रहे हो भाई,,,।

सच कह रहा हूं,,,, तेरी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं पूरे गांव में तेरी जैसी खूबसूरत लड़की नहीं है और तू सच में बिना कपड़ों के बहुत अच्छी लगती है,,,अगर मैं तुझे उसे दिन नहाने के लिए ना बोला होता तो शायद मुझे नहीं मालूम पडता कि तू इतनी खूबसूरत है,,,,।

क्या सच में मैं बहुत खूबसूरत हूं,,,,(अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए रानी बोली वैसे भीऔरत की सबसे बड़ी कमजोरी यही होती है कि कोई अगर उसकी खूबसूरती की तारीफ कर दे तो वह बहुत जल्दी पिघल जाती है और यही रानी का भी था भला अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना उसे क्यों खराब लगता,,,, और अपनी बहन की आवाज सुनकर सूरज को लगने लगा कि वह भी जल्दी लाइन पर आ जाएगी,,, इसलिए उसकी बात का जवाब देते हुए वह बोला,,,)

हां सच में तु बहुत खूबसूरत है,,,।





(अपने भाई के मुंह से इतना सुन करो मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बाकी के बर्तन को साफ करने लगी,,,, यह देखकर सूरज पास में पड़े बर्तन को लेकर वह भी साफ करते हुए बोला,,,)

तेरे बदन की बनावट बहुत खूबसूरत है ऐसा लगता है कि जैसे भगवान ने तुझे फुर्सत में बनाया है,,।

(अपने भाई कि ईस तरह की बातों को सुनकर रानी शर्मा भी रही थी और प्रसन्न भी हो रही थी उसकी प्रसन्नता उसके चेहरे से साफ झलक रही थी जिसे देखकर सूरज की भी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घर पर आने वाली नहीं है,,,और गर्मी का भी दिन था गांव की औरतें बड़े से पेड़ के नीचे बैठकर आपस में गप्पे लडाया करती थी जिसमें काफी समय गुजर जाता था,,, इसलिए अकेलापन पाकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी थी वह अपनी बहन से और भी ज्यादा खुले शब्दों में बात करना चाहता था और देखना चाहता था कि उसके अश्लील शब्दों का उस पर क्या प्रभाव पड़ता है,,, इसलिए वह हिम्मत जुटाते हुए बोला,,,)





पहले तो मुझे लगा कि तू तालाब में नहाने के लिए तैयार नहीं होगी,,, लेकिन जब तू बड़े से पत्थर के पीछे जाकर कपड़े उतारने लगी तब मुझे यकीन हो गया कि तू भी झरने के उस ठंडे पानी में नहाने का मजा लेगी,,,।

सच कहूं तो झरने के पानी में नहाने का मेरा भी बहुत मन था लेकिन मैं कपड़े तो ले नहीं गई थी और मैं कपड़े उतार कर नहाना नहीं चाहती थी और वह भी तेरे सामने,,,।

तो अगर मेरी जगह कोई और होता तो उसके सामने कपड़े उतार कर नहाती,,,।

ऐसी बात नहीं है तू मेरा मतलब नहीं समझ रहा है भाई,,, तू मेरा बड़ा भाई है और तेरे सामने कपड़े उतारने में मुझे कितनी शर्म आती है पता है,,,।

लेकिन वहां तेरे और मेरे सिवा दूसरा कोई नहीं था,,, तभी तो मैं तुझे कपड़े उतार कर नहाने के लिए बोल रहा था,,,।





मैं तैयार नहीं होती लेकिन सच में मैं तुम्हारी बात पर गौर की तोसच में यह मौका मैं भी यहां से जाने नहीं देना चाहती थी फिर तो पहली बार में जिंदगी में इतनी खूबसूरत जगह को देख रही थी,,, और झरने में नहाने का सुख लेना चाहती थी इसीलिए मैं तुम्हारी बात मान गई थी,,,,।(बर्तन मांजते हुए वह बोली,,,)

सच में उसे दिन मजा आ गया था जैसे ही तुम बड़े से पत्थर के पीछे से बाहर निकल मैं तो तुम्हें देखकर एकदम पागल हो गया देखता ही रह गया तुमको,,, बिना कपड़ों में तुम्हारी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है,,,।

(बार-बार बिना कपड़ों वाली बात को सुनकर रानी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति अजीब सी हो चली थी,,,।लेकिन फिर भी इस अजीब स्थिति में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी जिसे वह इनकार नहीं कर सकती थी,,। शर्मा कर‌ वह अपने भाई से बोली,,,)





धत्,,,, इस तरह की बात मुझसे मत करो मुझे शर्म आती है,,,।

जो बात हम दोनों के बीच हो चुके हैं उसके बारे में बात करने से कैसी शर्म,,,,।

नहीं मुझे शर्म आ रही है,,,(ऐसा कहते हुए वह आखरी बर्तन को पानी से धोकर एक तरफ रखनी और उठकर खड़ी हो गई उसके साथ ही सूरज भी उठकर खड़ा हो गया,,, वह उसके पीछे-पीछे घूमता हुए इधर-उधर चलते हुए बोला,,,)

तू शर्मा क्यों रही है हम दोनों तो सिर्फ बातें कर रहे हैं,,,।

नहीं फिर भी मुझे शर्म आती है,,,।

अच्छा चल खाना निकाल के मुझे भूख लगी है फिर खाना खाते खाते बात करेंगे,,,।





(अपने भाई की बात सुनकर रानी उसके लिए खाना निकालने लगेऔर अपने लिए भी खाना निकालने लगी क्योंकि वह भी खाना नहीं खाई थीऔर इतना तो समझ गई थी कि उसका भाई उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं है जिस तरह से उससे बातें कर रहा है,,, आज उससे इधर-उधर की बहुत सारी बातें करने वाला है,,, थोड़ी देर में वह दो थाली में खाना परोस दी,,,, एक थाली कर अपने भाई की तरफ आगे बढ़ा दी जो ठीक उसके सामने बैठकर खान का इंतजार कर रहा था और जल्दी से हाथ आगे बढ़कर थाली थाम लिया और खाना खाने लगा धीरे-धीरे शरमाते हुए रानी भी खाना खाने लगी सूरज चोर नजरों से अपनी बहन की तरफ देख ले रहा था,,,।

झरने के पानी में वह अपनी बहन के साथ पूरी तरह से नंगा होकर नहा चुका था अपनी बहन की मस्त-मस्त जवानी के दर्शन में कर चुका था उसकी संतरे जैसी चूचियां उसका गठीला बदन और सुगठित नितंबों का उभार अभी तक उसकी आंखों में बसा हुआ था,,, वह खाना खाते हुए फिर से वही बात छेढ़ते हुए बोला,,,।

अच्छा तो जब कुछ देर के लिए गायब हो गई थी तब तो मैं एकदम से घबरा गया था,,,,(गायब होने वाली बात को सुनकर रानी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह समझ गई थी कि उसका भाई कौन सी बात का जिक्र करने वाला है वह शर्म के मारे अपनी नजर को नहीं उठा रही थी बस अपने भाई की बात सुन रही थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) मुझे तो लगा जैसे कोई जंगली जानवर तुझे उठा ले गया हैअगर आइंदा मेरे साथ चलना तो हमेशा मेरे साथ ही रहना क्योंकि वहां पर जंगली जानवर सियार भेड़िया घूमते रहते हैं,,,,।

(जंगली जानवर सियार भेड़िया का जिक्र सुनकर रानी के मन में थोड़ी दहशत होने लगी और वहआश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अगर तुझे जोरों की पेशाब लगी हुई थी तो मुझे बताना चाहिए था ना अनजाने में ही मैंने तुझे पेशाब करते हुए देख लिया जबकि मुझे देखना नहीं चाहिए था,,,, सच कहूं तो कुछ पल के लिए तो भले हीमुझे डर लग रहा था कि कहीं तुझे जंगली जानवर उठाने लेकर आओ लेकिन जब मैं तुझे पेशाब करते हुए देखा तेरी नंगी गांड देखकर तो मैं तुझे देखता ही रह गया,,,,,(अब तो अपने भाई के मुंह से नंगी और गांड जैसी शब्दों को सुनकर उसकी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,, उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा,,,। वह कुछ बोल सके की स्थिति में नहीं थी बसहाथ मिलाने वाला लेकर इस तरह से आंखों को नीचे करके अपने भाई की बात को सुनते चली जा रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका भाई और क्या बोलता है,,, सूरज अच्छी तरह समझ रहा था कि उसकी बहन के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लेकिन सच में जंगल में बहुत मजा आया,,, अच्छा हुआ कि मैं किसी और को साथ नहीं लिया था सिर्फ हम दोनों थे,,,(निवाला मुंह में डालते हुए बोला) अच्छा एक बात बता जब तू तालाब में मेरे साथ नहा रही थी तो तुझे मछली से डर लग रही थी,,, तु अपने हाथ में क्या पकड़ कर रखी थी,,,।

(इतना सुनकर तो रानी की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसकी स्थिति उत्तेजना से स्वरूप और होने लगी उसकी बुर से मदन रस का बहाव होना शुरू हो गया क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि तालाब के अंदर जिसको वह कोई जानवर समझ रही थी वाकई में वह क्या था,,,,वह भी अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका भाई एकदम खुले शब्दों में बोल दिया,,,)

तू अनजाने में मेरा लंड पकड़ ली थी,,,,।

(रानी के कानों में यह शब्द पढ़ते हैं उसके बदन में उत्तेजना का रस घुलने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, उसे अपनी बुर उत्तेजना में फूलती और पिचकती हुई महसूस हो रही थी,,,, अपने भाई के मदद कर देने वाले शब्दों को सुनकर वह खाना खाना भूल चुकी थी उसकी सांसों की गति के साथ उसके छोटे-छोटे अमरुद भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था,,,,सूरज भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसे आगे बढ़ाना है तो इस तरह की बातें करना ही होगा तभी वह मुखिया की लड़की की तरह रानी के साथ भी मजे ले पाएगा इसलिए अपनी बात को वह आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

क्या सच में मेरा लंड ज्यादा बड़ा और मोटा था जिसकी वजह से तू घबरा गई थी,,,।

यह कैसी बातें कर रहे हो भाई क्या इस तरह की बातें मुझे करना तुम्हें अच्छा लग रहा है कोई सुन लेगा तो क्या रहेगा क्या सोचेगा हम दोनों के बारे में,,,।

अरे कोई सुनेगा कैसे घर में सिर्फ में और तू ही तो है,,, और इस तरह की बातें करने में तो मजा आता है और मुझे पूरा यकीन है कि ईस तरह की बातें सुनकर तुझे भी मजा आ रहा होगा,,,।

नहीं मुझे मजा नहीं आ रहा है मुझे बड़ा अजीब लग रहा है अगर मां को पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,।

मां को कैसे पता चलेगा तू बताएगी मां को अगर बताना होता तो तू कब से बता दी होती है लेकिन तूने नहीं बताई इसका मतलब है कि तुझे भी अच्छा लग रहा है,,,।

नहीं मैं इसलिए नहीं बताई कि आइंदा फिर मुझे तेरे साथ कहीं मां जाने नहीं देंगी,,,।

लेकिन सच बता तुझे भी मजा आ रहा है ना,,,।

(सूरज की बात सुनकर रानी कुछ बोली नहीं बस खामोश बैठी रही,,, रानी को इस तरह से खामोश बैठी देखकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और वहां फिर से और भी ज्यादा खुले शब्दों में बोला,,,)

तू बात नहीं रही लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि तेरी बुर में से भी पानी निकल रहा होगा तेरी बुर पानी छोड़ रही होगी,,,।

(अपने भाई कि ईस तरह की बातें सुनकररानी उत्तेजना से मेरी जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह गहरी सांस लेते हुए अपने भाई की तरफ देख रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी हालत खराब हो रही थीउसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तीव्र गति से हो रहा था उसके पैर उत्तेजना से कांप रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका भाई खुले शब्दों में उसकी बुर के बारे में बोल रहा था,,,रानी को अपने भाई की नियत पर शक होने लगा था भलाई भाई अपनी बहन के साथ इस तरह की बातें कैसे कर सकता है लेकिन उसका भाई तो एकदम खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था जरूर उसके मन में कुछ गंदा ही चल रहा था लेकिन फिर भी न जाने क्यों रानी अपने भाई की बातों की तरफ आकर्षित होती जा रही थी वह आनंदित हुए जा रही थी। अपने भाई की तरफ देखते हुए वह मदहोशी भरे शब्दों में बोली,,,)

भाई तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह की बातें कर रहा है,,,।

शर्म कैसी मैं तो सच कह रहा हूं,,,अगर तुझे मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तो अपनी सलवार खोल कर देख तेरी बुर पानी छोड़ रही होगी,,,।

नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती,,,।

(रानी की हालत को देखकरसूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी बहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गई हैवह अपने आप से ही बोला भले ही समय इनकार कर रही है लेकिन बहुत जल्दी वह खुद अपने हाथों से अपनी सलवार खोलकर मजा लेगी,,,कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही सूरज खाना खा चुका था लेकिन रानी की थाली में अभी भी भोजन पड़ा था वह खाना नहीं खा रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका पेट सूरज की अश्लील बातों से ही भरत चला जा रहा है कुछ देर की खामोशी के बाद सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा एक बात बता तालाब के अंदर तुझे मेरा लंड बहुत ज्यादा मोटा और लंबा लग रहा था ना लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस समय मेरा लंड बहुत छोटा है,,, उसे दिन तुझे भ्रम हुआ था,,,(इस तरह की बातें करके सूरज किसी न किसी बहाने से रानी को अपना लंड दिखाना चाहता था जो कि इस समय ज्यादा उत्तेजित अवस्था में नहीं था लगभग शीथील अवस्था में था,,,, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,) तुझे यकीन ना हो तो तुझे दिखा दु की कितना छोटा है,,,,।

(रानी समझ गई थी किसके भाई के मन में कुछ और ही चल रहा है इसलिए वह बड़ी हिम्मत करके अपनी जगह से उठते हुए बोली,,,)

नहीं मैं जा रही हूं मुझे बहुत काम है,,,।

(उसे अपनी जगह से उठता हुआ देखकर सूरज भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और रानीचलते हुए आंगन में पहुंच गई थी जहां पर सूरज उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया और बोला,,,)

देख तो ले पहले तेरा भ्रम दूर हो जाएगा नहीं तो किसी को बता दीजिए मेरा लंड ज्यादा मोटा और लंबा है तो,,, लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे,,,।

भला मैं क्यों बताने लगी यह सब,,,।

इसलिए तो कह रहा हूं देख ले एक बार,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही सूरज फुर्ती दिखाता हुआ तुरंत अपने पजामा को खींचकर नीचे कर दिया और अपने लंड को बाहर निकाल दिया जो कि वास्तव में इस समय उत्तेजित अवस्था में नहीं था वह एकदम ढीला डाला और झूल रहा था,,,पहले तो जैसे ही सूरज अपनी पहचाने को नीचे करने लगा रानी शर्मा कर अपनी नजरों को दूसरी तरफ घूम ली थी लेकिन फिर सूरज हिम्मत दिखा कर उसके सर पर अपना हाथ रख दिया औरउसे अपने लंड की तरफ घूमाते हुए उसे दिखाते हुए बोला,,,)

ले देख ले कितना छोटा सा है,,,(रानी देखना नहीं चाहती थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन सूरज जैसे जबरदस्ती दिख रहा था और रानी भी अपने मन में यही चाहती थी कि वह अभी एक बार फिर से अपने भाई के लंड को देखें इसलिए वह भी ज्यादा ना नूकर ना करते हुए,,, वह भी अपनी नजरों को नीचे की तरफ करके अपने भाई के लंड को देखने लगी,, और वाकई में अपने भाई के लंड को देखकर वह एकदम सोच में पड़ गई थी,,, उसे समयजिस तरह का लंड उसने अपनी आंखों के सामने देखी थी उसे तरह का तो बिल्कुल भी नहीं था इस समय उसके भाई का लंड एकदम छोटा था,,,यह रानी के लिए हैरानी वाली बात थी इससे वह काफी हैरान भी हो गई थी वाकई में उसे ऐसा लग रहा था कि क्या सच में उसे दिन उसे अपनी आंखों का भ्रम हुआ था,,,, लेकिन यह कैसे हो सकता है,,,।इस बात से वह काफी परेशान लग रही थी और सूरज अपने बहन की परेशानी को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपने झूलते हुए लंड को हाथ में लेते हुए बोला,,,।

देख ली ना कैसा है उस दिन तुझे भ्रम हुआ था,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी कभी अपने भाई की तरफ तो कभी उसके लंड की तरफ देख रही थी अपनी बहन की स्थिति को समझते हुए सूरज गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

लेकिन यह फिर से उस दिन की तरह मोटा और लंबा हो सकता है,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी फिर से आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे हुआ इस बात से हम जानते हैं की मर्द का लंड उत्तेजना की वजह से कड़क होकर टनटना जाता है,और इस बात का ज्ञान न होने की वजह से ही इस समय उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी अपनी बहन की स्थिति को देखते हुए सूरज बोला,,,)

क्या फिर से उसे दिन की तरह देखना चाहती हो मोटा और लंबा एकदम कड़क,,,।

(रानी क्या बोलते बोलते के लिए उसके पास शब्द नहीं थे वह सिर्फ आश्चर्य से मुंह खुला रखकर कभी उसकी दोनों टांगों के बीच तो कभी उसके चेहरे की तरह देख रहे थे इसलिए सूरज ही अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला)

अगर देखना चाहती है तो इसे हाथ में पकड़ कर हिला देख सच में उसे दिन की तरह हो जाएगा,,।

(अपने भाई की बात सुनकर उसके दिल की धड़कन और तेज चलने लगी,,, क्योंकि सीधे-सीधे उसका भाई उसे उसका लंड पकड़ने के लिए बोल रहा था,,,,वह अपने मन में ही बोल रही थी कि कितना बेशर्म भाई है जो अपनी बहन सिस्टर की हरकत करने के लिए कह रहा है लेकिन फिर उसका दूसरा मन यह कह रहा था कि पकड़ ले या मौका दोबारा मिलने वाला नहीं है,,,और वैसे भी भले ही यह सब उसे बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन इससे उसे आनंद की मिल रहा था जिससे वह इनकार नहीं कर पा रही थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी तो,, सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और सूरज बिना कुछ खोल उसका हाथ पकड़ लिया और,,,उसकी हथेली को अपने लंड पर रख दिया और उसकी हथेली पर खुद अपना हथेली रख दिया ताकि वह हटा ना सके,,,यह स्थिति रानी के लिए बेहद शर्मसार कर देने वाली थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वह अपनी नजरों को एकदम से नीचे झुकाए हुएइस स्थिति को देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन पल भर के लिए उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उत्तेजना से उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा है वह मदहोश हुए जा रही थी कुछ उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,,।

वह कुछ बोल पाती ईससे पहले ही सूरज अपनी हथेली को कस के उसकी हथेली पर पकड़ करऊपर नीचे करके हिलाने शुरू कर दिया और इसका असर बड़ी तेजी से उसके लंड की नसों में होने लगा उसने बड़ी तीव्रता से लहू काप्रसार होने लगा और देखते ही देखे उसमें गर्मी बढ़ने लगी और वह धीरे-धीरे कड़क होने लगा यह सब रानी अपनी हथेली में बड़े अच्छे से महसूस कर रही थी और यह सब उसके लिए अचंभित कर देने वाला थाउसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन हथेली में लंड की गर्माहट उसके मदन रस को पिघला रहा था,,,,सूरज पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा था वह अपने मन में सोच रहा था कि अगर सब कुछ सही हुआ तो इसी समय वह संभोग का सुख प्राप्त कर लेगा,,।

देखते ही देखते सूरज का लंड एकदम विकराल स्वरूप लेने लगा,,, उसकी गर्माहट और मोटाई बढ़ती जा रही थी उसकी लंबाई भी बढ़ती जा रही थी,, यह सबरानी को आश्चर्यचकित कर रहा था लेकिन वह इन सब में मदहोश में जा रही थी अपने आप को बोलती चली जा रही थी उसकी खुद की हथेली अपने भाई के लंड के इर्द गिर कसती चली जा रही थी जिसका एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो रहा था,,, हालात बद से बत्तर हुए चले जा रहे थे,,,घर के आंगन में अपनी मां की गैर मौजूदगी में सूरज अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहता था जिसके चलते वह अपने कदम को आगे बढा चुका था और उसका साथ उसकी बहन एकदम बराबर दे रही थी,,, सूरज जानता था कि उसकी बहन को भी मजा आ रहा है,,,।

और देखते ही देखते सूरज का लंड पूरी तरह से तन तन कर खड़ा हो गया एकदम पहले की तरह झरने में जिस तरह रानी अपने भाई के लंड को देखी थी,,,ठीक उसी तरह के लंड को अपनी मुट्ठी में महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,सूरज मौके की स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था वह उसकी हथेली पर अपनी हथेली को रखकर आगे पीछे करके मुठिया रहा था,,, लेकिन जिस तरह का उत्तेजना का संचार उसकी बहन के बदन में हो रहा थावह धीरे से अपनी हथेली को उसकी हथेली पर से हटा दिया और देखा कि उसकी बहन खुद अपने आप से ही उसके लंड को पकड़ कर मुठिया रही थी यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा और वह धीरे से बोला,,,,।

आंख खोल कर देख रानी पहले की तरह हो गया है,,,,।

(रानी की हालत खराब हो रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी सूरज की बात सुनकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था वह अपनी आंखों से एक बार फिर से अपने भाई के लंड को देखने जा रही थी और वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर अपने भाई के लंड को देखने लगी जो कि उसकी मुट्ठी में पूरी तरह से भरा हुआ था,,यह देख कर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई खुली आंखों से देखने के बावजूद भी वह अपनी हथेली में उसे मुखिया रही थी यह दर्शा रहा था कि वह कितनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और इसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपने प्यास होठों को धीरे से उसके लाल लाल तैरते हुए होठों की तरफ ले जाने लगा लेकिन उसकी बहन बिल्कुल भी अपने होठों को पीछे लेने की कोशिश नहीं की,,,, और अगले ही पल वह अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होंठों का रसपान करने लगाजिसमें रानी को भी आनंद की अनुभूति होने लगी वह पूरी तरह से मत होने लगी उसकी बुर से पानी भल भला कर बहने लगा,,,,।

इस स्थिति में वह अपने भाई के लड को बिल्कुल भी छोड़ नहीं रही थी उसे कस के दबोचे हुई थी और सूरज इस मौके का फायदा उठाते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का लगातार रसपान करते हुए अपने दोनों हाथों को,, उसके गोलाकार नितंबों पर रख दिया और उसे जोर-जोर से दबाने लगा,,, सूरज दो तरफ सेअपनी बहन की जवानी पर हमला कर रहा था एक नीचे से और एक पीछे सेएक तो उसके हाथ में अपना लंड थमा दिया था और दूसरा उसकी गांड को दोनों हाथों से दबा रहा था जिससेरानी की हालत और भी ज्यादा खराब होती चली जा रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो होती चली जा रही थी उसके चेहरे का रंग लाल सुर्ख हो चुका था,,,,।

दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे सूरज इसी मौके का फायदा उठाना चाहता था और उसके नितंबों पर से अपना एक हाथ हटाकर वह धीरे से अपनीहथेली को उसकी दोनों टांगों के बीच की उसकी बुर पर रख दिया और सलवार के ऊपर से ही बुर की स्थिति का जायजा लेने लगा,, और अगले ही पल उसे एहसास हो गया कि उसकी बहन कितना पानी छोड़ रही है,,, वह अपनी हथेली को उसकी सलवार में डालकर उसकी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखना चाहता थाऔर ऐसा करने के लिए वह अपना हाथ उसकी दूर पर से हटाकर उसकी सलवार के ऊपर रखकर अपनी उंगलियों को उसमें अंदर प्रवेश करने ही जा रहा था कि तभी उसे बाहर दरवाजा खोलने की आवाज आई यह आवाज दोनों के कानों में पड़ी थी और दोनों एकदम से एक दूसरे से अलग हो गए,,,,।

रानी एकदम से घबरा गई थी और वह तुरंत रसोई में जाकर बैठ गई थी क्योंकि अभी भी उसकी थाली में भोजन था,,,, और सूरज तुरंत अपने पजामा को ऊपर करके अपने लंड की स्थिति को छुपाने के लिए अपना झूठा बर्तन लेकर दूसरी तरफ बैठ गया था जहां बर्तन मांजा जाता था,,, और यह कार्य दोनों एकदम ठीक समय पर किए थे इसलिए जैसे उसकी मां रसोई घर की तरफ आई उसे बिल्कुल भी शक नहीं हुआ और वह सूरज को इस तरह से बर्तन मांजते हुए देखकर बोली,,,।

अरे आज क्या बात है खुद अपने हाथों से बर्तन साफ कर रहा है ऐसा क्यों,,,?

मैं अभी अभी-अभी खाना खाया हूं और कुछ देर पहले ही रानी ने सारे बर्तन को साफ की थी इसलिए मुझे लगा कि मेरा बर्तन मुझे खुद साफ करना चाहिए,,,।

क्या बात है तू तो एकदम समझदार हो गया है,,, और रानी तू अभी खाना खा रही है,,,।

क्या करूं घर का काम करते-करते भूख नहीं लगी थी और जब सारा काम कर ली तो भूख लगने लगी इसलिए खाना खाने बैठ गई,,,,।

चल कोई बात नहीं,,,,।

(इतना कहकर हुआ अभी वहीं पर बैठ गई और इधर-उधर की बातें करने लगेरानी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा होगा कि दरवाजा खोलने की आवाज आ गई और अच्छा हुआ कि उसने दरवाजा बंद कर दी थी खुला छोड़ दी होती तो उसकी मां बिना आवाज के अंदर आ गई होती और उन दोनों कोई स्थिति में देखी तो गजब हो जाता यही सोचकर वह अपने मन में सोच रही थी कि सही समय पर दरवाजा खुलने की आवाज आ गई वरना आज जवानी का बुखार एकदम से उतर जाता,,,)



 
सूरज और रानी दोनों अपनी उत्तेजना के चरम शिखर पर पहुंचे ही थे किउसकी मां आ गई थी जिससे दोनों एकदम से अलग हो गए थे वरना सूरज आज अपनी बहन को भी जवानी का मजा चढ़ा दिया होता और वैसे भी उसकी हरकतों से उसकी बहन रानी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो चुकी थीक्योंकि सूरज ने हरकत ही कुछ ऐसी की थी उससे पहले अपनी बातों में उलझा कर पूरी तरह से गर्म कर दिया था और गर्म करने के बाद उसकी गर्माहट पर तड़का लगाते हुए उसके हाथों में अपना लंड दे दिया था,,,यह हरकत किसी भी लड़की के लिए पूरी तरह से उत्तेजित कर देने वाली साबित होती है और ऐसा रानी के साथ भी हो रहा था,,,। वैसे भी रानी पूरी तरह से जवान हो चुकी थी इसलिए इस तरह के खेल का आनंद लेने की इच्छा उसके मन में भी जागरूक होने लगी थी।





वैसे तो रानी ऐसी नहीं थी लेकिन इस तरह की इच्छा उसके मन मेंसूरज ही जागरूक किया था अगर वह अपने साथ उसे अांवला तोड़ने के लिए ना ले गया होता और उसे तालाब में नहाने के लिए मजबूर ना किया होता तो शायद यहां तक दोनों भाई बहन नहीं पहुंच पाते सूरज के मन में तो पहले से हीरानी को लेकर आकर्षण पैदा हो चुका था जब वह पहली बार उसे घर के बगल में पेशाब करते हुए देखा था उसकी गोरी गोरी जवानी से भरी हुई गांड को देखकर की मर्दानगी पूरी तरह से जागरूक होने लगी थी,,, इससे पहले वह कभी अपनी बहन को इस नजरिया से नहीं देखा था लेकिन मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई कर लेने के बाद उसकी मां हर औरत में आकर्षण और हर एक रिश्ते में औरत को ढूंढने लगा था जिसमें उसकी मां और बहन दोनों शामिल थे,,, अब तो उसकी मर्दानगी का स्वाद सोनू की चाची ने भी चख ली थी,,और वह बड़ी सफलतापूर्वक सोनू की चाची को संतुष्ट करने में कामयाब हो गया था जिसके चलते उसका विश्वास बढ़ता चला जा रहा था और इसी विश्वास के चलते वह अपनी बहन रानी पर हाथ आजमानेकी सोच रहा था और अपनी सोच को पूरा भी कर लिया था अगर सही समय पर उसकी मां आ गई होती तो दूसरी औरतों की तरह और रानी को भी चोद चुका होता,,,।





कुछ दिन तक दोनों भाई बहनको इतना मौका ही नहीं मिला कि दोनों एक दूसरे से बात कर सके और अपनी अधूरे खेल को पूरा कर सकें वैसे जितनी चाहत और उत्सुकता सूरज के मन में थी इस अधूरे खेल को पूरा करने की उतनी उत्सुकता रानी के मन में भी होने लगी थीऔर होती भी कैसे नहीं वह भी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी हथेली में लेकर जिस तरह के आनंद की अनुभूति उसने की थी ऐसा अनुभव और आनंद उसने कभी भी नहीं महसूस की थी पहली बार तो उसे एहसास हो रहा था कि करने का लंड इतना लंबा और मोटा होने के साथ-साथ इतना गरम भी होता है,,,लंड की गर्माहट वह महसूस तो अपनी हथेली में कर रही थी लेकिन इसका सीधा असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में महसूस हो रही थी जिसमें से उसका लावा पिघल रहा था,,,रानी भी पूरी तरह से महसूस करने लगी थी उसके भाई का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका है पहले वाला सूरज अब वह बिल्कुल भी नहीं रह गया था,,, अगर पहले वाला सूरज होता तो इस तरह की हरकत ही ना करता।





लेकिन जहां एक तरफ अपने भाई की हरकत से हैरान थी वही उसकी इस तरह की हरकत से वह पूरी तरह से मंत्र मुग्ध भी थी क्योंकि उसने अपनी हरकतों से उसे अद्भुत आनंद का एहसास जो कराया था,,,वैसे तो वह भी अपने भाई के साथ एकांत ढूंढती थी लेकिन ऐसा कोई मौका ही नहीं मिलता था कि दोनों को एकांत में कुछ पल बिताने को मिल जाए जिससे सिर्फ उसका भाई आगे क्या होता है इस बारे में उसे कुछ सीख सके उसे अनुभव कर सके क्योंकि उसे दिन से उसकी मां भी दोपहर में बाहर नहीं जाती थी उसका कहना था कि गर्मी बहुत है बाहर बैठी रहो तो गर्म लू बहती है,,, उसकी मां का भी कहना ठीक था लेकिन रानी को यह पसंद नहीं आ रहा था । क्योंकि उसका मन भी इस बात से बेहद खुश था की बनेगी आज वहअपनी इच्छा की पूर्ति नहीं कर पाई लेकिन ऐसा मौका तो रोज मिलने वाला था क्योंकि इसी समय तो उसकी मां हमेशा घर से बाहर रहती थी लेकिन उसकी आशा पर पानी फिर चुका था,,,।





दूसरी तरफ सूरज के पिताजी पूरी तरह से शराबी बन चुके थे शराब की लत ऐसी लगी थी कि शराब को वह नहीं बल्कि शराब उन्हें पी रही थी,, यह सब बदमाश कल्लु की वजह से हो रहा था,,, वह दोनों शराब की दुकान पर बैठे हुए थे दो बोतल शराब खत्म भी कर चुके थे लेकिन सूरज के पिताजी का मन और ज्यादा शराब पीने को कर रहा था इसलिए वह कल्लु से बोले,,,।

यार कल्लु तू ही एक मेरा सच्चा साथी है,,, लेकिन जितना शराब अभी पिया हूं उससे बात नहीं बन रही है दो बोतल और खरीद ले तो मजा आ जाए,,,।

तु कितना पीने लगा है,,, अभी-अभी तो दो बोतल खत्म किया और तुझे और चाहिए,,,।

क्या करूं दोस्त चार-पांच बोतल जब तक पी ना लो तब तक मजा नहीं आता,,,

चल कोई बात नहीं अभी खरीदे देता हूं,,,,।

(इतना कहकर कल्लु दो बोतल और खरीद कर ले आया,, और बोला,,)

ले पकड़ मेरा तो हो गया है तेरा ही पूरा नहीं पड़ता,,,।





अरे मेरे दोस्त तू ही तो एक सहारा है तू ना होता तो पता नहीं मेरा क्या होता,,,(अपना हाथ आगे बढ़कर कल के हाथ में से शराब की दो बोतल थामते हुए वह बोला,,,)

कुछ नहीं होता बस तू बेकार पड़ा होता,,।

सच कह रहा है यार तू तेरे साथ तो जिंदगी एकदम जन्नत हो गई है शराब शबाब और कबाब ,,तेरे साथ ही रहकर तो जिंदगी का असली मजा मिल रहा है,,,बोतल का तो इंतजाम हो गया लेकिन खाने का भी इंतजाम हो जाता तो मजा आता और फिर खाना खाने के बाद कमला मिल जाती तो रात गुजारने में और आसान हो जाती,,,।

कमला का बंदोबस्त तो नहीं हो पाएगा वह कुछ दिन के लिए अपने बच्चों को लेकर मायके गई हुई है,,, लेकिन खाने का इंतजाम हो जाएगा,,,।

कहां पर,,?(दारू के नशे में आश्चर्य जताते हुए वह बोला)

राजा साहब के वहां,,,,।

सच में वहां इंतजाम हो जाएगा,,,।





बिल्कुल हो जाएगातेरा शहर मैं हूं और हम दोनों का सहारा राजा साहब है लेकिन एक बात बोल दु वहां तमीज से पेश आना, अगर राजा साहब को जरा भी बुरा लगा तो फिर हम दोनों का हुक्का पानी बंद हो जाएगा,,,।

अरे बिल्कुल भी नहीं राजा साहब तो मैं आप है भला उनके सामने ऐसी वैसी हरकत करके अपने अच्छे दिन खत्म थोड़ी करने हैं,,,।

तो चल उठ राजा साहब के वहां चलते हैं,,,,,।

(ऐसा कहते हुए कलसूरज के पिताजी का हाथ पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा और थोड़ी देर में सूरज के पिताजी उठकर खड़े हो गए और दोनों एक दूसरे का सहारा लेकर राजा साहब के घर की तरफ चल दिए अभी तक सूरज के पिताजी राजा साहब से नहीं मिले थे बस उनके बारे में कल्लु के मुंह से सुने भर थे,,,इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था जो कि कल नहीं बताया था कि राजा साहब थोड़ा अय्याश किस्म के थे,,, नहीं-नई औरतें उन्हें अपनी बिस्तर पर बहुत अच्छी लगती थी,,, जिसका इंतजाम कभी कभार कल्लु कर देता था जिसके एवज में कल्लु को अच्छा खासा पैसा और राजा साहब के नाम का सहारा मिल जाता था,,, और यही वजह थी कि कल्लु की तरफ कोई आंख उठा कर नहीं देख पाता था,,,। थोड़ी ही देर में दोनों राजा साहब के कोठी पर पहुंच चुके थे,,,।





राजा साहब की कोठी बड़ी आलीशान थी,, क्योंकि 20 25 गांव के वह जमींदार थे ,,, आम का बगीचा अमरूद का बगीचा गाने की खेती से लेकर के हर अनाज उनके खेतों में होता था और हर तरह के फल भी उनके बगीचों में होता था जिसे शहर बेचकर वह अच्छी खासी आमदनी कमाते थे और जमीदार का धंधा तो चली रहा था सब कुछ सही था बस एक ही गलत आदत थी सबाब और शराब की,,, खुद की बीवी हुस्न की मल्लिका थी खूबसूरती में चांद का टुकड़ा थी लेकिन फिर भी घर की मुर्गी दाल बराबर राजा साहब समझते थे इसलिए तो भले ही औरत सुंदर ना हो लेकिन बिस्तर पर नई नई औरत उन्हें चाहिए थी,,, जिसका जुगाड़ बहुत बार कल्लु कर चुका था और उसमें से एक कमला भी थी जिसकी चुदाई वह खुद और सूरज के पिताजी मिलकर किया करते थे,,,।





शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था और राजा साहब अपनी कोठी के बाहर कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुडगुडा रहे थे और उसी समय कल्लु और सूरज के पिताजी वहां पहुंच चुके थे,,,,, राजा साहब को हुक्का पीते देखकर कल एकदम से झुक कर नमस्कार करते हुए बोला।

राजा साहब की जय हो,,,,।

(कल्लु के मुंह से यह शब्द सुनकर सूरज के पिताजी भी समझ गए की यही राजा साहब है इसलिए वह भी कल्लु की तरह ही झुक कर बोले)

राजा साहब की जय हो,,,।

(राजा साहब जो हुक्का पीने में एकदम मस्त था वह दो बार राजा साहब की जय सुनकर नजर उठा कर देखने लगा तो सामने कल और सूरज के पिताजी को देखकर वह बोला)





अरे आओ कल्लु,,, आज लगता है रास्ता भूल गए हो,,,,

(कल समझ गया था कि राजा साहब व्यंग कस रहे थे क्योंकि वाकई में ज्यादा दिन हो गए थे राजा साहब की कोठी पर है इसलिए वह एकदम से मुस्कुराते हुए बोला)

कैसी बात कर रहे हैं राजा साहब आप तो हमारे माई बाप हैं भला माई बाप को कौन भूल सकता है,,,,।

तो इतने दिन कहां थे,,,।

बीवी की तबीयत थोड़ा नादुरस्त थी इसलिए यहां आ नहीं पाया,,,,।

(सूरज के पिताजी कल्लु की बातें सुनकर उसे आश्चर्य से देखने लगे क्योंकि वह जानते थे कि ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन उन्हें भी समझते देर नहीं लगी थी कि कल्लु बहाना बना रहा था,,, इसलिए कुछ बोल नहीं पाए और कल की बात सुनकर राजा साहब हुक्के को एक तरफ रखते हुए बोले,,)





तबीयत खराब थी,,, अब कैसी तबीयत है,,, कुछ पैसों की जरूरत हो तो बताना तुम्हारे लिए तो सब कुछ हाजिर है,,,।

अरे राजा साहबतुम्हारे सिवा किसी और का द्वारा मैं थोड़ी जानता हूं मैं जानता हूं की कितनी भी जरूरत होगी आपके द्वार पर आऊंगा तो सब पूरी हो जाएगी,,,।

लेकिन तुमने मुझे बहुत निराश किए हो,,, कोई अच्छी चिड़िया दिखाए नहीं,,,।

सही कहूं तो मालिक अभी आपके लायक कोई ऐसी चिड़िया दिखाई नहीं दी इसीलिए मैं यहां पर नहीं आ पा रहा था लेकिन अब मेरी नजर में एक चिड़िया है बस जाल में फंसने की देरी है,,, फिर उसके बाद तो उसका धागा तुम्हारे बिस्तर पर ही खुलेगा,,,।

(देर में सही लेकिन अब जाकर सूरज के पिताजी को पता चला कि दोनों किस बारे में बात कर रहे थे कल की बात सुनकर राजा साहब मुस्कुराते हुए बोले,,,)





बातें तुम बहुत अच्छी करते हो कल्लु इसीलिए मेरे दिल में तुम्हारे लिए बहुत जगह है,,,।

बस मालिक यह जगह बनाए रखना,,,,।

अच्छा बैठ जाओ खाना खाए हो कि नहीं,,,।

नहीं मालिक अभी तक तो नहीं खाना खाए,,,।

चलो कोई बात नहीं सही समय पर आए हो,,, हाथ मुंह धो मैं तुम्हारे लिए भी खाना मंगवाता हूं,,, और हां यह तुम्हारे साथ कौन है इन्हें पहले तो मैंने कभी नहीं देखा,,,।

यह मेरा दोस्त है मालिक अब समझ लीजिए ये भी तुम्हारा ही आदमी है,,,।

तो इन्हें भी बता देना कि अच्छी चिड़िया का बंदोबस्त हो तो इधर जरूर लेकर आना,।

जी मालिक में सब समझा दूंगा,,,।

(अब यह सब बात हो ही रही थी कि तभी एक 40 वर्ष ही खूबसूरत औरत गहनों से लदी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी राज्य की महारानी हो खूबसूरती तो कूट-कूट कर भरी हुई थी,,, वहचलती हुई वहां आई और उसके चलने से वातावरण में उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की झलक एकदम साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर सूरज के पिताजी एकदम से नजर उठाकर उसे देखने लगे और उसे पास में आता देखकर कल एकदम से यहां से छोड़कर झुकते हुए बोला,,,)

महारानी की जय हो,,,,

(कल्लु की देखा देखी सुनकर सूरज के पिताजी भी महारानी की जय बोलकर हाथ जोड़कर खड़े हो गए,,, दोनों को इस तरह से जय-जय कर करते हुए देखकर राजा साहब की बीवी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)





खुश रहो कल्लु बहुत दिनों बाद दिखाई दिए हो,,,।

की मालकिन थोड़ा उलझ गया था,,,।

मैं भी यही कह रहा था भाग्यवान,,,।

आप तो कहते ही रहते हैं चलिए उठीए भोजन का समय हो गया है,,,।

अभी उठकर चलता हूं लेकिन भाग्यवान इन दोनों के लिए भी खाना भिजवा देना यह लोग अभी तक खाना नहीं खाए हैं,,,।

कोई बात नहीं इनके लिए भी नौकर से कह कर खाना भिजवा देती हुं,,,,।

(इतना कहकर राजा साहब और उनकी बीवी कोठी के अंदर की तरफ जाने लगे,,,और जैसे ही बजाना थोड़ी-थोड़ी पर पहुंचे सूरज के पिताजी से रहने की आवाज धीरे से कल्लु से बोले,,)





यार राजा साहब को चिड़िया की क्या जरूरत है इनके पास तो खुद ही इतनी अच्छी चिड़िया है रात दिन मजा लूटते रहेंगे तो भी मन नहीं भरने वाला,,, कसम से स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा ही लग रही हैमैं तो यह सोच रहा हूं कि जब अपने कपड़े उतार कर नंगी होती होगी तो कितनी गजब की लगती होगी,,।

अरे चुप कर हरामी अगर किसी ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा हुका पानी सब बंद हो जाएगा इसलिए तुझे कह रहा था की तमीज से पैश आना,,,।

अरे तो मैं कहां जोर-जोर से बोल रहा हूं तेरे कान में ही तो कह रहा हूं सच कहूं तो मुझे रहा नहीं गया इसलिए कह रहा हूं मैं तो महारानी को देखा ही रह गया सच में किसी रियासत की महारानी लग रही है और ऐसी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी राजा साहब दूसरी औरतों के पीछे पागल है,,।

अरे पूछो तेरी बीवी तो किसी अप्सरा से कम नहीं लगती पता लगती है कि नहीं।

हां बात तो सही है,,।

लेकिन फिर भी तो कमला के पीछे पागल है ना।

हां,,,,।





बस यही बातहम सभी मर्दों को लागू होती है दूसरों की बीवी हमें बहुत अच्छी लगती है घर की मुर्गी दाल बराबर यही हर राजा साहब का भी है बिस्तर पर इतनी गरम और खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी राजा साहब गांव की औरतों में सुख ढूंढते हैं और यह अपने दोनों के लिए अच्छा भी है यह शौक राजा साहब का हम लोगों का शौक पूरा करती हैसमझ में आया तुझे अगर राजा साहब को यह सब आदत ना होती तो हम दोनों उनके सामने खड़े भी ना रहे थे तू ही बात हम दोनों की राजा साहब के सामने खड़े रहने की हैसियत है नहीं ना लेकिन फिर भी बस उनकी आदत की वजह से राजा साहब हम दोनों को गले लगाए हुए हैं,,,।

(अभी यह सब दोनों बातें कर ही रहे थे कि तभी जल्दी-जल्दी राजा साहब उन दोनों के पास आए और कल्लु को धीरे से बोले,,,)

कल्लु तू खाना खाकर कहीं जाना नहीं तेरे लिए काम है,,।

जी राजा साहब कहीं नहीं जाऊंगा,,,,।

ठीक है अभी नौकर खाना लेकर आएगा तुम दोनों खाना खा लो और मेरा काम करने के बाद मन करे तो घर जाना वरना यही सो जाना,,।

ठीक है राजा साहब,,,,,।





(राजा साहब वापस चले गए और कल्लु सूरज के पिताजी से बोला)

इसलिए कहता हूं सोच समझ कर बोलना वरना सच में तु हुक्का पानी बंद करवा देगा,,,।

अरे यार इसमें क्या है मैं तो सच ही बोला था,,,।

चल अब रहने दे चल हाथ मुंह धो लेते हैं,,,।

(इतना कहकर वह दोनों हेड पंप की तरफ जाने लगे,,, और कल्लु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

पता नहीं खाने में क्या होगा,,,लेकिन जो भी होगा स्वादिष्ट होता आखिरकार राजा साहब के घर का खाना है,,,।

मटन मुर्गा मिल जाता तो मजा आ जाता,,,।(सूरज के पिताजी भी सुर में सुर मिलाते हुए बोले,,,)

वह तो देखने पर ही पता चलेगा चल जल्दी से नल चला,,,।

(सूरज के पिताजी नल चलाने लगे और कल्लु हाथ में धोने लगा,,, और फिर से सूरज के पिताजी बोले,,,)

यार तेरे मन में राजा साहब की बीवी को देखकर कुछ-कुछ नहीं होता तु तो बहुत बार देखा होगा बहुत बार मिला होगा,,,।

तु फिर चालू हो गया,,,,मैं भी अच्छी तरह से जानता हूं कि राजा साहब की बीवी अप्सरा की तरह दिखती है पहली बार जब देखा था तो मेरे मन में भी बहुत कुछ होता था लेकिन इतना भी पता होना चाहिए कि वह किसकी बीवी है महारानी है महारानी और राजा साहब को जब पता चला कीउनकी बीवी को देखकर मन ही मन में मजा ले रहे हो तो काट कर फेंकवा देंगे पता भी नहीं चलेगा,,,। आइंदा से इस बारे में बात भी मत करना,,,।





चल ठीक है अब पानी चला मैं भी हाथ में धो लूं मेरा तो सारा नशा उतर गया राजा साहब की बीवी को देखकर,,,

फिर से तो शुरू हो गया,,,।

अच्छा नहीं बोलता यार तू नल तो चला,,,,।

(कल्लु नल चलाने लगा और सूरज के पिताजी हाथ में होने लगे उनका नशा सच में उतर चुका था राजा साहब की खूबसूरत बीवी को देखकर पल भर के लिए तो सूरज के पिताजी की आंखें चौंधिया गई थी,,, राजा साहब की बीवी वाकई में सर से लेकर पांव तक खूबसूरती के नशे में डूबी हुई थी,,, इसीलिए तो सूरज के पिताजी का नशा पूरी तरह से उतर चुका था,,, हाथ मुंह लेने के बाद दोनों वापस उसी जगह पर आ गए वहां पर लकड़े का तख्ता रखा हुआ था उसी पर दोनों बैठ गए और इंतजार करने लगे भोजन का,,, थोड़ी ही देर में एक नौकर आया उसके दोनों हाथों में थाली थी और जैसे ही वह थाली को दोनों के सामने रखा तो सूरज के पिताजी और कल थाली में देखकर प्रसन्न हो गए क्योंकि दोनों के लिए मुर्गा आया था,,,, सूरज के पिताजी तो एकदम खुश हो गए और एक बोतल कल्लु की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोले,,)

ले मार ले अब आएगा खाने का मजा,,,।

(कल्लु भी हाथ आगे बढ़ाकर बोतल को थाम लिया और ढक्कन खोलकर एक ही सांस में घट घट गया भले ही कल्लु कुछ बोल नहीं रहा था लेकिन उसके नजरों में भीराजा साहब की बीवी बसी हुई थी उसकी खूबसूरती उसका गदराया बदन पूरी तरह से उसके होश उड़ा देता था लेकिन वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी को कानो कान खबर पड़ गया कि राजा साहब की बीवी पर गंदी नजर है तो बिल्कुल भी खैर नहीं होगी इसलिए कल्लु की हिम्मत नहीं होती थी राजा साहब की बीवी की तरफ नजर उठा कर देखने की,,,।





थोड़ी ही देर में दोनों खाना खा चुके थे और वहीं पर हाथ धोकर राजा साहब के आने का इंतजार कर रहे थे और थोड़ी ही देर में राजा साहबजल्दी-जल्दी दोनों की तरफ आने लगे सूरज के पिताजी देख कर समझ गए थे कि राजा साहब नजर बचाकर उन दोनों की तरफ आ रहे हैं,,,, राजा साहब को देखकर कल्लु और सूरज के पिताजी अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए,,, और जैसे ही राजा साहबउन दोनों के करीब आए एक बार फिर से दोनों ने राजा को नमस्कार किया और राजा साहब कल्लु से बोले,,,।

तुम तो अच्छी तरह से जानते हो तो मैं क्या करना है,,, यही पास में ही आम का बगीचा होगा वहीं पर जाना गांव की एक औरत खड़ी होगी उसे लेकर जहां पर पहले औरतों को लेकर आते थे वहीं पर लेकर आ जाना मैं तुम्हारा वही इंतजार करूंगा,,, लेकिन वहां पहुंचने में मुझे थोड़ा समय लग जाएगा क्योंकि रानी साहिबा अभी तक जाग रही है,,, उनके सोने के बाद में तुरंत वहां आ जाऊंगा,,, हो जाएगा ना,,,।





बिल्कुल राजा साहब यह पहली बार थोड़ी है,,, जाओ जल्दी करो कहीं ऐसा ना हो कि डर के मारे वह औरत अपने घर चली जाए,,,।

ठीक है राजा साहब हम दोनों अभी जाते हैं,,,,(ऐसा कहकर दोनों चलने को हुए की तभी राजा साहब उन दोनों को रोकते हुए बोले,,,) रुको तुम तुम दोनों कुछ पैसे ले लो काम आएंगे,,,(इतना कहकर राजा साहबउन दोनों को कुछ रुपए दे दिए जिसे पाकर वह दोनों एकदम खुश हो गए और एक बार फिर सेनमस्कार करके वह दोनों राजा साहब के बताए पते पर पहुंच गए,,,.

वहां पर काफी अंधेरा था और सूरज के पिताजी को लग रहा था इतनी अंधेरे में भला गांव की कोई औरत कैसे आएगी वह तो डर के ही वापस चली जाएगी,,,, इसलिए वह कल्लु से बोले,,,।

यार मुझे नहीं लगता किआम के बगीचे में कोई औरत केले खड़ी होगी इंतजार करते हुए की कोई उसे लेने आएगा देख नहीं रहा है कितना दे रहा है अकेले में तो हम लोग ही डर जाए,,,।

अरे यार राजा साहब बोले हैं तो जरूर वह औरत आई होगी या तो आने वाली होगी रुक जा थोड़ी देर इंतजार करते हैं आखिरकार राजा साहब पैसे भी तो दिए हैं खाली हाथ जाएंगे तो ठीक नहीं लगेगा,,,।





बात तो तु ठीक कह रहा है,,, चल थोड़ा इंतजार कर लेते हैं अगर लालटेन लेकर आए होते तो और अच्छा होता,,,।

सही कह रहा है,,,, चल जाने दे थोड़ी देर इंतजार कर लेते हैं,,,।

(थोड़ी देर इंतजार करने के बाद दोनों को एक तरफ से पायल की आवाज सुनाई देने लगी और उसे आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

उस तरफ से लगता है कोई आ रहा है,,,।

हां यार पायल की आवाज तो सुनाई दे रही है लेकिन कोई दिखाई नहीं दे रहा है कौन है वहां,,,(जोर से कल्लु आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

वाकई में गांव की औरत उसी तरफ से आ रही थी लेकिन कल्लु की आवाज सुनकर वह एकदम से डर गई उसे लगा कि कोई चोर उचक्का होगा इसलिए वह भी घबरा कर एकदम से रुक गई और एक पेड़ के पीछे छुप गई,,,कल्लु दो-तीन बार आवाज लगाया लेकिन अब तो पायल की आवाज भी आना एकदम से बंद हो गई थी,,, यह देखकर सूरज के पिताजी बोले।

यार सच में कोई था कि हम दोनों के कान बज रहे थे कहीं ऐसा ना हो कि कोई चुड़ैल हो,,,।

नहीं यार ऐसा कैसे हो सकता है पायल की आवाज तो एकदम साफ आ रही थी ऐसा लग रहा था कि कोई औरत उसी तरफ चलती चली आ रही है,,,। कुछ देर की खामोशी के बाद सूरज के पिताजी एकदम जोर से आवाज लगाते हुए बोले,,,।

हम दोनों को राजा साहब ने भेजा है,,,।

(इतना सुन कर वह औरत समझ गई की उसे ही लेने के लिए वह दोनों आए हैं इसलिए वह औरत पेड़ के पीछे से बाहर आई ऐर वहीं से आवाज लगाते हुए बोली,,,)

मुझे ही राजा साहब अपने वहां बुलाए हैं,..

ठीक है आ जाओ,,,,(सूरज के पिताजी जोर से आवाज लगाते हुए बोले,,, कुछ पल के लिए तो वह भी घबरा गए थे उन्हें लगा कि वाकई में कोई चुड़ैल होगी लेकिन उसकी आवाज सुनकर जान में जान आई थी थोड़ी देर में हुआ औरत चलते हुए उन दोनों के पास आ गई और बोली,,,)

चलो कहां चलना है,,,,।

राजा साहब की कोठी पर और कहां,,,?(सूरज के पिताजी बोले और उस औरत को साथ लेकर चलने लगे,,,)





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गांव से आई हुई औरत उन दोनों के साथ में चलने लगी हालांकि चलते समय वह घुंघट से अपने चेहरे को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे पहचाने इसलिए तो वह रात में आई थी,, और वैसे भी अंधेरा इतना घना था कि चाह कर भी उसका चेहरा देखा नहीं जा सकता था बस उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की जनक की आवाज से उसके होने का अंदेशा हो रहा था, और वैसे भी चूड़ियों की खनक बता देती है औरतों की खूबसूरती,, चूड़ियों की खनक से मर्द की उत्तेजना बढ़ जाती है और इस समय सूरज के पिताजी के साथ भी ऐसा हो रहा था,,, सूरज के पिताजी उसे औरत का नाम गांव पूछने की बिल्कुल भी जेहमत नहीं कर रहे थे,, लेकिन कल्लु उसे औरत के बारे में जानने की मंशा जताते हुए उसे औरत से बोला,,,





नाम क्या है तुम्हारा,,,?

जानकर क्या करोगे वैसे भी मैं नाम बताने वाली नहीं हूं,।

अगर नाम बता देगी तो तेरा कुछ बिगड़ जाएगा क्या,,,?

मैं राजा साहब से पहले ही बोल चुकी हूं कि मेरा नाम गांव और मेरे बारे में सारी बातें गुप्त होनी चाहिए तभी तो मैं यहां आने के लिए तैयार हूं और वैसे भी तुम दोनों जानते होंगे कि मैं यहां किस लिए आई हूं राजा साहब ने मुझे इतनी रात को क्यों बुलाया है,।

इसमें कोई शक नहीं है हम लोगों का काम ही यही है राजा साहब के इशारे पर गांव की खूबसूरत औरतों को उनके पास ले जाना,,,,(कल्लू मुस्कुराता हुआ बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि तुम्हारे बारे में किसी ने बताया था या राजा साहब खुद तुमसे मिले थे,,,।





यह सब जानकर क्या करोगे,,,,(उसे औरत ने सीधा और सपाट उत्तर दिया यह सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

जाने दे यार क्यों परेशान कर रहा है अगर वह अपने बारे में कुछ नहीं बताना चाहती तो क्यों उससे पूछ कर अपना ही दिमाग खराब कर रहा है उसकी कोई मजबूरी होगी,,,, तभी तो हुआ इतनी रात को राजा साहब के पास जाने के लिए तैयार हुई है अब ज्यादा परेशान मत कर,,,,।

देखा तुमसे ज्यादा समझदार तो यह है,,, अपने काम से काम रखते हैं,,,,।

चल रहने दे अब ज्यादा उड़ मत थोड़ी देर में राजा साहब तेरा कबूतर उड़ा देंगे,,,,(बेशर्मी से बेशर्मी भरी बातें करके कल्लू हंसने लगा,,, उस औरत के पास कल्लू की बदतमीजी का कोई जवाब नहीं था,,, क्योंकि वह काम ही कुछ ऐसा करने जा रही थी अब वह मजबूरी में करने जा रही थी आप किसी शौक से या किसी दबाव में आकर यह तो वही जानती थी लेकिन अपने इस कार्य के लिए वह सफाई नहीं दे सकती थी इतना तोता इसलिए वह कुछ बोली नहीं बस चुपचाप चलती रही,,,, थोड़ी ही देर में तीनों राजा साहब की कोठी पर पहुंच चुके थे लेकिन कहां पर लेकर जाना है उसे औरत को यह सूरज के पिताजी को नहीं मालूम था इसलिए वह खड़ा होकरबोला,,,।





आप कहां ले जाना है कल्लु,,,।

यहां नहीं जाना है कोठी के पीछे जाना पड़ेगा वही राजा साहब औरतों की चुदाई करते हैं,,,(कल्लु जानबूझकर चुदाई शब्द का प्रयोग कर रहा था,,,, उसे औरत को उसकी बात पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और वैसे भी वह राजा साहब के साथ हम बिस्तर होने के लिए बड़ी मजबूरी में आई थी,,, उसे पैसों की जरूरत थी और उसके पास पैसे नहीं थे पति शराबी था वह बिल्कुल भी कमाता नहीं था,,,, उस औरत के ऊपर उधारी भी हो चुकी थी और उसकी जमीन भी गिरवी पड़ी थी जिसके चलते उसे इस कार्य को करने के लिए अपने मन को मनाना पड़ा वरना वह इस तरह का काम करने के लिए कभी तैयार नहीं थी और वैसे भी उधारी की रकम को ज्यादा नहीं थी इसीलिए तो राजा साहब तैयार हो गया था उसे रकम देने के लिए अगर ज्यादा रकम होती तो इस काम के लिए वह कभी इतना ज्यादा रकम नहीं देता,,, कल्लू की बात सुनकर सूरज के पिताजी बोले,)





तू आगे आगे चल,,, हम तेरे पीछे चलते हैं क्योंकि मुझे नहीं मालूम कि कहां जाना है,,,।

ठीक है,,(और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगा सूरज के पिताजी उस औरत के साथ पीछे-पीछे चलने लगे सूरज के पिताजी को इतना तो समझ में आ रहा था कि एक माना जाना जमीदार पैसे वाला इस कार्य के लिए अपनी बीवी की मौजूदगी में अपने कोठी का उपयोग तो बिल्कुल भी नहीं करेगा वैसे सूरज के पिताजी को इतना तो मालूम था कि इस तरह की अय्याशी करने के लिए गांव के बाहर एक गोदाम था जिसमें अब वह खुद कल्लु के साथ मिलकर अय्याशी किया करता था,,, लेकिन इस समय उस गोदाम का उपयोग होने वाला नहीं था अगर ऐसा होता तो कल उसे औरत को उस गोदाम पर ही लेकर जाता यहां कोठी पर लेकर नहीं आता,,,,, तीनों चलते हुए कोठी के पीछे के मकान में पहुंच चुके थे जो की ईंधन रखने के काम में आता था और पशुओं के लिए घास जा रहा है रखे जाने के लिए उपयोग में लिया जाता था,,, इस जगह पर राजा साहब दूसरी औरतों के साथ अय्याशी करते होंगे इस बारे में तो महारानी को भी भनक तक नहीं होगी,, यह राज राजा साहब के कुछ खास लोग ही जानते थे जिनमें से कल्लु एक था और अब सूरज के पिताजी भी उनमें से एक बन चुके थे,,।





थोड़ी ही देर में तीनों कोठी के पीछे वाले मकान पर पहुंच चुके थे लेकिन अभी तक जहां पर राजा साहब का कोई पता ठिकाना नहीं था,,,, यह देखकर कल्लु बोला,,,।

यार अभी तक राजा साहब नहीं आए काफी देर हो गई है मुझे तो लगा आ गए होंगे,,,।

समय तो लगेगा ही आखिरकार बिस्तर पर जवानी से भरी हुई महारानी जो है उसकी प्यास बुझाने में समय तो लगता ही होगा,,,(सूरज के पिताजी मुस्कुराते हुए बोले तो उसकी बातें सुनकर कल्लु फिर से इधर-उधर देखने लगा और बोला,,,)

यार फिर से तो शुरू हो गया तू सच में मरवाएगा तुझे कितनी बार बोला हूं कि इस बारे में बिल्कुल भी बात मत किया कर,।





आप क्या करूं यार महारानी है इतनी खूबसूरत क्यों उसे देखा हूं तब से मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया है मुझे तो समझ में नहीं आता की मर्द की जात क्या होती है अप्सरा जैसी औरत बिस्तर पर होने के बावजूद भी हुआ है दूसरी औरतों के साथ मजा लूटने के लिए पागल हुआ जा रहा है,,,।

अरे बुद्धू मैंने कुछ देर पहले ही तेरा ही उदाहरण दिया हूं ना तेरी बीवी भी तो अप्सरा से काम नहीं है लेकिन तू बाहर मुंह मारता है कि नहीं,,,।

छोड़ यार महारानी जैसी खूबसूरत नहीं है,,,।

अरे बेवकूफ तभी तो वह महारानी है और तेरी बीवी गांव की रानी है,,,। अब इन सब के बारे में छोड़ काफी देर हो रही है,,, कहीं ईस औरत को नींद आ गई तो राजा साहब का मजा किरकिरा हो जाएगा और लंड खड़ा का खड़ा रह जाएगा,,,।

(इतना कहकर फिर से हुआ हंसने लगा और वह औरत उसकी बात पर फिर से गुस्सा होने लगे लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अपने मन में सोच की राजा साहब तो क्या एक साथ तुम तीनों की प्यास बुझाने के लिए मैं काफी हूं और वैसे भी उसका यह बात अपने मन में सोचना लाजमी था क्योंकि वाकई में वह भी भला की खूबसूरत थी घूंघट में होने के बावजूद भी उसकी बनावट लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह लालटेन घर के पीछे वाले मकान के बाहर ही टंगी हुई थी और जल रही थी,, सूरज के पिताजी लालटेन की पीली रोशनी में तिरछी नजरों से उसे औरत को भी देख ले रहे थे और सूरज के पिताजी का इस तरह से उसे औरत को देखने का मतलब साफ था कि उसे औरतों में भी आकर्षक और जवानी कुट-कूट कर भरी हुई थी,,,, अगर यह राजा साहब के लिए तोहफा ना होता तो इस तोहफे का पूरा उपयोग वह खुद कर लेता,,,, लेकिन वह मजबूर था क्योंकि उसका मन भी बेहद उत्तेजित था,,,,।





थोड़ी देर बाद और खड़े रहने के बाद राजा साहब छुपाते छुपाते हुए उसे तरफ आते हुए दिखाई दिए उन्हें देखकर सूरज के पिताजी बोले,,,)

वह देखो राजा साहब आ गए,,,,।

(सूरज के पिताजी की बात सुनकर वह औरत और कल्लु दोनों उस दिशा में देखने लगे,,, सूरज के पिताजी और कल तो राजा साहब को देखकर सहज थे लेकिन उस औरत के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, क्योंकि उसके जीवन का यह पहला क्षण था जब वह किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने जा रही थी और वह भी बड़ी मजबूरी में अगर उसकी मजबूरी ना होती तो शायद वह इस तरह के कम कभी ना उठाती इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था थोड़ी ही देर में राजा साहब उन तीनों के करीब आ गए और उसे औरत को देखकर मुस्कुराते हुए बोले,,,)





अरे रानी अब घूंघट की क्या जरूरत है घूंघट उठा दो,,,।

माफी चाहती हूं राजा साहब लेकिन मे यह घूंघट सिर्फ आपके ही सामने उठाऊंगी,,,।

ओहहहहह ,,,, लाज शर्म,,,,, मुझे तुम्हारा यह अंदाज बहुत अच्छा लगा और वैसे भी लाज शर्म वाली औरत को छोड़ने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,(राजा साहब एकदम उत्साहित होते हुए बोले लेकिन उनके द्वारा कहां गया यह शब्द उसे औरत के दिल पर हथौड़े की तरह चल रहा था,,,, अगर उसकी मजबूरी ना होती तो वह राजा साहब को भी लात मार कर चली गई होती लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी और राजा साहब ने भी उसकी इस मर्यादा की लाज को रखते हुए बोले)

कोई बात नहीं जैसी तुम्हारी मर्जी,,,, थोड़ी देर बाद ही तुम्हारे बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं होगा घूंघट तो दूर की बात है तब मैं तुम्हारी खूबसूरत चेहरे को तुम्हारे चेहरे के हाव-भाव को देखता हुआ मजा लूटुंगा,,,, अब तुम दोनों जा सकते हो,,,,,।





ठीक है मालिक लेकिन इस औरत को छोड़ने जाना पड़ेगा,,,,(कल्लु दोनों हाथ जोड़े हुए राजा साहब से बोला,,,)

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मैं इसके साथ ज्यादा समय बिताऊंगा और सुबह होने से पहले यह खुद अपने घर चली जाएगी क्यों चली तो जाओगी ना या इन लोगों को तुम्हारे साथ भेजना होगा,,,।

जी नहीं राजा साहब में चली जाऊंगी,,,,।

ठीक है अब तुम दोनों जाओ अगर घर जाना हो तो घर चले जाना वरना वही सो जाना,,,,

ठीक है मालिक,,,,(इतना कहकर कल्लु और सूरज के पिताजी दोनों वहां से चलते बने अब घर जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए उन दोनों ने वही तख्ते पर सोने का फैसला किया था,,,, राजा साहब उसे औरत का हाथ पकड़ कर मकान के अंदर ले जाने लगे और बाहर जल रही लालटेन को अपने हाथ में लेकर कमरे में प्रवेश कर गए जहां पर चारों तरफ ईंधन और घास फूस रखा हुआ था,,, वह औरत शर्म से पिघलती चली जा रही थी,,,।





दूसरी तरफ तख्ते पर लेटे हुए दोनों कुछ देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे और थोड़ी देर बाद कल्लु गहरी नींद में सो गया और उसके सो जाने का ही इंतजार सूरज के पिताजी कर रही थी क्योंकि सूरज के पिताजी के मन में कुछ और चल रहा था वह उठकर बैठ गई और जब देखे की कल्लु गहरी नींद में सो रहा है तो वह धीरे से तख्ते पर से उठकर खड़े हो गए और दबे पांव कोठी की तरफ आगे बढ़ने लगे,,,, सूरज के पिताजी के मन में बहुत कुछ चल रहा था,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,, सिर्फ कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और कोठी के अंदर नौकर नौकरानी भी गहरी नींद में सो रहे थे।

इधर-उधर देखते हुए सबसे नजर बचाते हुए यह तसल्ली कर लेने के बाद कोई उसे देख तो नहीं रहा है वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश करने लगे कोठी का दरवाजा सिर्फ बंद किया हुआ था उसकी कड़ी खुली हुई थी यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल झूम उठा और वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश कर गए कोठी के अंदर प्रवेश करते ही वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगे वाकई में बेहद आलीशान कोठी बनी हुई थी कोठी में बहुत ही बेस्ट कीमती सजावट के सामान रखे हुए थे जिसे कोठी की सुंदरता और ज्यादा बढ़ गई थी,,,।





जगह-जगह पर रोशनी के लिए रोशनदान बने हुए थे कोटी के बीचो-बीच से सीढ़ी ऊपर की तरफ जाती थी इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था कि अब उसे क्या करना है वह धीरे से सीढ़ियां चढ़ने लगी जैसे-जैसे सीढ़ियां चढ़ रहे थे वैसे-वैसे उनके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी उन्हें मालूम नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं लेकिन अपने मन पर वह काबू नहीं कर पाए थे जिसके चलते उन्हें न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ रहा था,,, धीरे-धीरे करके सूरज के पिताजी सारी सीढ़ियां चढ़कर दूसरे मंजिले पर पहुंच चुके थे,,, दूसरे मंजिले पर भी सजावट की बहुत अच्छी व्यवस्था थी चारों तरफ कीमती सजावट का सामान रखे हुए थे,,, और यह देखकर सूरज के पिताजी अपने मन में सोचने लगे कि राजा साहब के आगे तो मुखिया कुछ भी नहीं है राजा साहब के आगे मुखिया को एक नौकर ही लगेगा,,,, मुखिया की याद आते हैं सूरज के पिताजी के मन में मुखिया की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,, और मुखिया की बीवी के चेहरे के बाद राजा साहब की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,।





मुखिया की गुलामी वह कर चुका था और अब बारी थी राजा साहब की,,, लेकिन दोनों की गुलामी में अंतर यह था कि वह मुखिया की बीवी की रोज चुदाई करता था गुलामी के साथ-साथ मुखिया की बीवी का मजा भी रोज लेता था लेकिन अभी राजा साहब की गुलामी का यह पहला दिन था और सूरज के पिताजी अपने मन में यही सोच रहे थे कि काशी यहां भी मुखिया की बीवी की तरह राजा साहब की बीवी भी चोदने के लिए मिल जाए तो उसे अच्छी किस्मत वाला दुनिया में कोई नहीं होगा,,,, यही सब सोचते हुए सूरज के पिताजी एक तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे जहां पर ढेर सारे कमरे थे धीरे-धीरे सभी कैमरे के आगे से सूरज के पिताजी गुजरते चले जा रहे थे और जाते-जाते हर एक कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश करते थे लेकिन सभी दरवाजे बंद थे।





लेकिन तभी सूरज के पिताजी एक कमरे के पास पहुंच गए दरवाजा तो बंद था लेकिन उसकी खिड़की खुली हुई थी और खुली हुई खिड़की को देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और वह समय धीरे-धीरे चलते हुए बस खुली हुई खिड़की के करीब पहुंच गए और उसे खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगे अंदर रोशनदान से रोशनी किया हुआ था और उसे पीली रोशनी में पहले तो सूरज के पिताजी को कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन थोड़ी कोशिश करने के बाद खिड़की से अंदर कमरे का दृश्य धीरे-धीरे साफ होने लगा और दृश्य साफ होने के बाद जो नजर सूरज के पिताजी को दिखाई दिया उसे देखकर उनका दिल जोरो से धड़कने लगा।





वह नजारा था ही कुछ ऐसा कि अगर सूरज के पिताजी की जगह दुनिया का कोई भी मर्द होता तो उसका भी दिल जोरो से धड़कने लगता और उसका मन बेकाबू हो जाता,,,, सूरज के पिताजी ने अपनी आंखों से बहुत देख लिया जिसकी देखने की तमन्ना दिल में लिए वह इतना बड़ा खतरा मोड लेकर राजा साहब की कोठी में दाखिल हुए थे आखिरकार उनके मन का नजारा उनकी आंखों के सामने था सामने बिस्तर पर राजा साहब की बीवी मतलब महारानी एकदम नंगी पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी बड़ी-बड़ी उबारी हुई गांड नरम नरम गद्दे पर भी एकदम बराबर नजर आ रही थी,,,, महारानी को एकदम नग्नअवस्था में देख कर और महारानी की बड़ी-बड़ी बाहर देखकर सूरज के पिताजी के अंदर वासना का शैतान जागने लगा जो की पूरी तरह से सूरज के पिताजी को अपनी गिरफत में ले चुका था,,,।





राजा साहब की बीवी का आकर्षण सूरज के पिताजी के मन में इस तरह से बढ़ गया था कि उसे देखने की चाह में वह इतना बड़ा कदम उठा चुके थे जो कि खतरे से खाली नहीं था अगर किसी की भी नजर पड़ जाती तो इसके बदले में सूरज के पिताजी की जान जानी तय थी,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि अपने मन की इच्छा पूरी करने के लिए सूरज के पिताजी को इस खतरे को उठाना ही इस समय जरूरी हो गया था कुछ देर तक वह खिड़की से खड़े होकर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत को नंगी लेटे हुए देख रहे थे वह पूरी तरह से नींद की आगोश में थी,,,, वह गहरी नींद में होने के कारण गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसके बदन में एक अद्भुत कामुक हलचल भी हो रही थी उसे कामुक हलचल के चलते उसके भारी भरकम नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के पिताजी का ईमान पूरी तरह से डगमगा गया था।





राजा साहब की बीवी को नंगी बिस्तर पर सोते हुए देख कर सूरज के पिताजी अपने मन में अनुमान लगाने वालों की राजा साहब इसकी जमकर चुदाई करने के बाद ही उसे औरत के पास गए हैं तभी तो यह है बिना कपड़ों के सो रही है एकदम नंगी होकर इसकी प्यास बुझाने के बाद ही राजा साहब अपनी प्यास बुझाने के लिए सूरज के पास गए और सुबह तक वापस लौटकर आने वाले नहीं है,,, यह सब सोते हुए सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा वह अपने मन में सोचने लगे कि अगर राजा साहब अपनी बीवी को बिना बताए कमरे से बाहर गए हैं तो कमरे का दरवाजा खुला ही होगा भले ही बाहर से बंद है लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगी होगी,,,, इस बारे में ख्याल आते ही सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और उनके चेहरे पर कामुक मुस्कान देने लगी,,,, जागने से पहले वह कुछ सोच नहीं थे कि यहां पर आने के बाद उन्हें क्या करना है लेकिन जो ख्याल उनके मन में आ रहा था वह बेहद खतरनाक था अगर पकड़े गए तो और अगर पकडे नहीं गए तो स्वर्ग का सुख बस उनसे तीन-चार मीटर की दूरी पर ही बिस्तर पर लेटी हुई थी।





ऐसे में सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से काम करता था वह तुरंत दरवाजे के पास आए और उसे खोलने की कोशिश करने लगे और पहले ही कोशिश में दरवाजा हल्का सा शोर करता हुआ खुल गया यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने के लिए अपने आप को तैयार करने लगे उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगर पकड़े गए तो क्या होगा लेकिन इस बात का एहसास जरूर था कि अगर इस महारानी के साथ शरीर सुख प्राप्त कर लिया तो दुनिया का कोई सुख इसके आगे कोई मायने नहीं रखना इस बात का एहसास सूरज के पिताजी को हो गया था। और यही सोच कर वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गए और उसी तरह से दरवाजे को बंद कर दिए लेकिन कड़ी लगाना बिल्कुल भी नहीं भूले क्योंकि हो सकता है कि कोई आ जाए और दरवाजा खुला हो तो बना बनाया काम बिगड़ जाए।





कमरे के अंदर रोशनी बरकरार थी दो रोशन दान जगमगा रहे थे,,, उसे रोशनी में वह जी भरकर महारानी के नंगे बदन का दर्शन कर लेना चाहते थे क्योंकि आगे क्या करना है वह अच्छी तरह से जानते थे जी भरकर महारानी के नंगे बदन को देख लेने के बाद उसके बदन की बनावट को देख लेने के बाद जो कि वाकई में बेहद गजब की बनावट थी बदन में हर कटाव बड़े सोच समझ कर बना हुआ था और वह भी इस बदन के बनावट को दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो शायद बिना संभोग किए हुए उसका पानी निकल जाए उसे तो राजा साहब पर तरस आ रहा था कि इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर वह बेवजह गांव की दूसरी औरतों के पीछे पागल बना है,,,, सूरज के पिताजी का दिल जोर से धड़क रहा था और पजामे में तंबू पूरी तरह से बन चुका था,, जिसे हाथ से दबे हुए वाहन धीरे से जाकर महारानी के बिस्तर पर बैठ गए महारानी के बिस्तर पर बैठना भी सूरज के पिताजी के लिए किसी राजा की किस्मत से काम नहीं था इस समय वह अपने आप को राजा ही समझ रहे थे क्योंकि वह महारानी के बिस्तर पर बैठे हुए थे और उस बिस्तर पर महारानी अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,,,।





पीली रोशनी में सूरज के पिताजी को सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और यह भी दिखाई दे रहा था की महारानी के बुरे से निकलने वाला मदन रस उनकी जांघो तक बहा हुआ था,,, उस मदन रस को देख कर तो सूरज के पिताजी की हालत एकदम खराब होने लगी उनकी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा वह पागल होने लगे वह एक औरत को काबू करना अच्छी तरह से जानते थे वह कुछ देर बिस्तर पर बैठकर नंगी लेटी हुई महारानी को देखते हुए आगे क्या होगा और अगर पकड़े गए तो क्या होगा इसके बारे में सोते हुए आगे की प्रक्रिया के बारे में सोच रहे थे उन्हें अच्छी तरह से मालूम था कि एक औरत को काबू में कैसे किया जाता है एक औरत को किस तरह से आनंद के सागर में डुबाया जाता है। सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि ऐसे में अगर वह कुछ भी बोलेंगे तो महारानी को समझते देर नहीं लगेगी कि उनके बिस्तर पर महाराज नहीं बल्कि कोई और है इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठाना था और इन सब के बारे में शायद सूरज के पिताजी बहुत अच्छे से सोच चुके थे,,,।





इसलिए धीरे से महारानी के बिस्तर पर से उठकर खड़े हो गए,,, सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि अब जो कुछ भी करना है पूरी तरह से अंधेरे में ही करना है अगर जरा भी उजाला हुआ तो पकड़े जाने की गुंजाइश पूरी तरह से बढ़ जाएगी इसलिए वह धीरे से रोशनदान के पास पहुंचे और फूंक मार के रोशनी को बंद कर दिए और यही वह दूसरी रोशनदान के पास के और वह पर भी फूंक मार कर रोशनी को बंद कर दिया कमरे में पूरी तरह से अंधेरा जा चुका था और महारानी एक बार चुदवाने के बाद घोड़े बेचकर सो रहे थे,,,, सूरज के पिताजी जानते थे की औरत भले ही कितनी गहरी नींद में हो अगर उसके कोमल अंग पर हाथ रख दे तो तुरंत उसकी नींद खुल जाती है और ऐसा होना यहां पर भी मुमकिन था और इसके लिए अंधेरा करना बेहद जरूरी था और बेहद उत्तेजनात्मक स्थिति में भी खामोश रहना भी बहुत जरूरी था,,,।





कमरे में पूरा अंधेरा करने के बाद सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर के पास पहुंचे और वैसे भी अब अपने हाथों से महसूस करके महारानी की जवानी का आनंद लूटना था और बिस्तर पर बैठकर हल्के सेवा अपने हथेली महारानी की उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली जवानी से भरी हुई गांड पर रख दिए,, हथेली गांड पर रखते ही सूरज के पिताजी के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा उन्हें एहसास होने लगा कि वाकई में महाराज की महारानी कितनी गर्म औरत है उसकी गांड की गर्मी सूरज के पिताजी अपनी हथेली में महसूस कर रहे थे,,, और हल्के हल्के उसे सहला रही थी वाकई में इस समय महारानी की गांड रुई से भी ज्यादा मुलायम और नरम महसूस हो रही थी,,,, महारानी की गांड को सहलाने में सूरज के पिताजी को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उन्हें बहुत मजा आ रहा था पर निश्चित थे क्योंकि जानते थे कि महाराज इतनी जल्दी आने वाले नहीं है,,,,।





गांड को सहलाते हुए सूरज के पिताजी पजामे के ऊपर से अपने लंड को भी दबा रहे थे क्योंकि वह बेकाबू हुआ जा रहा था,,,, देखते ही देखते हथेली का दबाव महारानी के नितंबों पर बढ़ने लगा और इसकी वजह से महारानी के बदन में कसमाशाहट भी महसूस होने लगी और जैसे ही सूरज के पिताजी अपने हथेली को अपनी उंगलियों को गांड के बीचों बीच की पतली दरार में प्रवेश करने लगे वैसे ही महारानी के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, और वह धीरे से अपनी जांघों को हल्का सा खोल दी सूरज के पिताजी यही चाहते ही थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी की उंगलिया महारानी के बदन के सबसे बेशकीमती खजाने पर पहुंच चुकी थी,, महारानी की बुर पर उंगली का स्पर्श होते ही सुरज के पिताजी की हालत एकदम से खराब होने लगी उम्मीद से कहीं ज्यादा तपन महारानी की बुर में महसूस हो रहा,, सूरज के पिताजी की हालत खराब होने लगी उनसे रहा नहीं जा रहा था वह महारानी की बुर को अपनी हथेली में दबोच लेना चाहते थे,,,, लेकिन ऐसा तुरंत करने पर महारानी की नींद एकदम से टूट सकती थी,,,, और ऐसे में बना बनाया काम भी कर सकता था और सूरज के पिताजी ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे वह पूरी तरह से नींद में होने के बावजूद भी महारानी को गर्म कर देना चाहते थे।





और ऐसा ही हुआ यहां पर सूरज के पिताजी का अनुभव बहुत काम आ रहा था वह अपनी उंगलियों से ही महारानी की बुर को कुरेद रहे थे,,,, जिससे महारानी के बदन में उत्तेजना का एहसास हो रहा था भले ही वह गहरी नींद में थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा करते हुए एक हाथ से सूरज के पिताजी अपनी कमीज उतार कर एक तरफ रख दिए थे,,,,,,, धीरे-धीरे उत्तेजना का एहसास महारानी के बदन में बढ़ता जा रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी,,,,, और देखते ही देखते सूरज के पिताजी महारानी की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर प्रवेश कर कर उसे अंदर बाहर कर रहे थे ऐसे में महारानी का मजा बढ़ता जा रहा था अब वह धीरे-धीरे नींद से बाहर आ रही थी,,,, क्योंकि महारानी के मुंह से हल्की-हल्की अब सरकारी की आवाज आ रही थी और यही तो सूरज के पिताजी चाहते थे वह समझ गए थे कि उनकी हरकत का महारानी और पूरी तरह से मजा ले रही थी,,,।





लेकिन अभी भी वह हल्की नींद में थी और पूरी तरह से नींद से बाहर लाने के लिए अभी भी सूरज के पिताजी को काफी मशक्कत करना था वह अपनी हथेली को महारानी की नंगी चिकनी पीठ पर रखकर उसे हल्के से सहलाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को लगातार महारानी की बुर के अंदर बाहर कर रहे थे इस तरह से सूरज के पिताजी को भी मजा आ रहा था और महारानी भी आनंद के सागर में डूबती चली जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपनी दूसरी उंगली को भी उसकी बुर की गहराई में उतार कर अंदर बाहर करने लगे थे वह काफी चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अब महारानी आनंद के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार होती जा रही थी क्योंकि वह पूरी तरह से नींद से जाग चुकी थी लेकिन अपनी आंखों को अभी भी बंद किए हुए थे क्योंकि सूरज के पिताजी की उंगलियां उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी जिससे वह अपनी आंखों को खोल नहीं पा रही थी,,,,।





सूरज के पिताजी लगातार अपनी उंगलियों को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे वह पागल हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुख से निकल रही शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,, और अगले ही पर सूरज के पिताजी अपने प्यासे होठों को उसकी गांड की दरार के बीचों बीच रखकर ऊपर से ही उसे पर चुम्मा लेने लगे,,,, जैसे ही महारानी को एहसास हुआ कि उनकी गांड के उपर होठ का स्पर्श हो रहा है,, वह और भी ज्यादा बावली होने लगी। महारानी का बदन कसमसाने लगा,,, वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को कसमाशाहट भरी हलनचलन करवा रही थी,,, यह उत्तेजना का असर था सूरज के पिताजी समझ गए थे की महारानी को मजा आ रहा है,,, बस यही वह चाहते थे की महारानी बिस्तर पर लेटे-लेटे बस गरमा गरम शिसकारी लेते रहे गरम आहे भरते रहे बस बोले कुछ नहीं,,,,,, कमरे में राजा साहब की बीवी की मदहोश कर देने वाली शिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी,, सूरज के पिताजी उसकी किसी कार्य की आवाज सुनकर मदहोश हुए जा रहे थे अत्यधिक उत्तेजना का अहसास उन्हें होने लगा था क्योंकि इस तरह की गरमा गरम सिसकारी की आवाज अभी तक वह किसी भी औरत के मुंह से नहीं सुन पाए थे राजा साहब की बीवी की बात ही कुछ और थी,,।





अभी तक सूरज के पिताजी नितंबों के ऊपर ऊपर ही चुंबन कर रहे थे अभी तो निचले स्थान पर जाना बाकी था जहां पर जीवन का असली सुख छुपा हुआ था संभोग का केंद्र बिंदु था,,, जब सूरज के पिताजी को लगने लगा कि राजा साहब की बीवी के बदन में कम से हाथ बढ़ने लगी थी ऐसे में वह कुछ भी बोल सकती थी तो वह धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ले जाने लगे,,,, अब सूरज के पिताजी को लगने लगा था कि वाकई में राजा साहब की बीवी की गांड को ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है क्योंकि उसका उठाओ कुछ ज्यादा ही था और नीचे अपने होंठ को ले जाते समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी खाई में अपने होठों को ले जा रहे हैं,,,, महारानी की हालत खराब है जा रही थी आंखें मदहोशी में पूरी तरह से बंद थी,, इसलिए महारानी को एहसास ही नहीं हो रहा था कि कमरे में रोशनी है या नहीं अगर वह आंख खोल भी देती तो पता नहीं चलता कि उनके बिस्तर पर कौन है वह तो अभी तक राजा साहब को ही समझ रही थी,,,।





और वैसे भी महारानी के पास शंका करने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि वह राजा साहब को अच्छी तरह से जानती थी उनके कक्ष में किसी गैर मर्द का प्रवेश करना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन था यही सब वजह थी की महारानी को शंका करने की कोई वजह नहीं मिली थी कि एक बार चुदाई करने के बाद भी दूसरी बार उसके महाराज उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए कैसे तैयार हो गए वैसे यह वर्षों के बाद हुआ था इसीलिए रानी पूरी तरह से उत्तेजित और बेहद खुश नजर आ रही थी वह पूरी तरह से नींद से बाहर आ चुकी थी लेकिन आंख खोलने में बिल्कुल भी समर्थ नहीं थी,,,, सूरज के पिताजी अपना पूरा अनुभव जो झोंक दे रहे थे। गहरी गहरी सांसों के साथ-साथ महारानी के गोलाकार नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे और सूरज के पिताजी धीरे-धीरे उसकी दोनों जांघों के बीच अपने मुंह को लेते चले जा रहे थे जैसे-जैसे वह महारानी की गुलाबी छेद के करीब पहुंच रहे थे वैसे-वैसे उसमें से मादक खुशबू सूरज के पिताजी के नथुनों में प्रवेश कर रही थी और वह खुशबू उन्हें एकदम बावला बना रही थी उन्हें इस बात का एहसास था कि कुछ देर पहले राजा इसी बुर में अपने लंड को डालकर चुदाई किया था महारानी के बदन रस के साथ-साथ राजा के लंड से निकला पानी में उसमें मिश्रित होगा लेकिन अब यह सब जानकर भी सूरज के पिताजी को पीछे कम लेना भारी पड़ सकता था और इस बात को जानते हुए वह ऐसी गलती कभी नहीं करना चाहते थे और वैसे भी रानी की मदमस्त कर देने वाली जवानी की मदहोशी में वह पूरी तरह से डूब चुके थे इसलिए अब कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कुछ देर पहले रानी की बुर में किसका लंड घुसा हुआ था,,,,।





ओहहहहह मेरे राजा यह क्या हो गया है तुमको,,,,(ऐसा कहते हुए महारानी अपने एक हाथ को पीछे की तरफ लाते हुए सूरज के पिताजी के मजबूत कंधों पर रख दी,,, महारानी के मुंह से निकला यह शब्द सूरज के पिताजी की उत्तेजना को तो बड़ा ही रहा था लेकिन उनके किए कराए पर पानी भी फेर सकता था रानी की बोलती बंद करने का अब एक ही रास्ता था जो की सूरज के पिताजी के होठों के ठीक सामने था सूरज के पिताजी जानते थे की औरत की बोलती कि वक्त बंद हो जाती है अगर वह इस समय उसे युक्ति को नहीं आजमाएंगे तो महारानी बात करना शुरू कर देगी और ऐसे में सूरज के पिताजी का भांडा फूट सकता है,,,, इसलिए सूरज के पिताजी बिल्कुल भी तेरी नहीं करना चाहते थे और ना ही कोई गलती करना चाहते थे बहुत तुरंत अपने पैसे होठों को महारानी की दहकती हुई बुरके ऊपर एकदम से सटा दिए और उसे पर चुंबन करने लगे,,,।

महारानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और कभी सोचा भी नहीं थी कि राजा साहब उसकी बुर पर इस तरह से चुंबन करेंगे,,,,, क्योंकि बरसों बीत चुके थे महारानी से इस तरह से राजा साहब प्यार नहीं किए थे बड़े उसकी चुदाई करते थे लेकिन उसकी बुर पर चुंबन करना छोड़ दिए थे,,,, इसलिए तो महारानी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, और इसलिए उसकी बोलती भी एक दम से बंद हो गई थी,,, सूरज के पिताजी अपने होठों को दबाओ उसकी गुलाबी छेद पर बढ़ते हुए अपनी जीत निकाल कर उसमें प्रवेश कर कर उसे चाटना शुरू कर दिए थे सूरज के पिताजी की इस हरकत को महारानी पूरी तरह से बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और तुरंत सूरज के पिताजी के कंधे पर से अपने हाथ को हटाकर आगे की तरफ ले आई और तकिया को जोर से दबोच कर पकड़ ली थी और गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी थी,,,, इस बीच सूरज के पिताजी अपने बीच वाली उंगली को लगातार उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे जिसमें से मदन रस बार-बार बाहर की तरफ झटक दे रहा था,,,,। और सूरज के पिताजी बड़े चावल से उसे मदन रस को अपने गले के अंदर गटक जा रहे थे।





सूरज के पिताजी कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि वह किसी महारानी के बिस्तर पर इस तरह से मजा लूटेंगे और वह भी महारानी के साथ कुछ देर पहले ही वह एकदम शराबी घर फटे हालत में थे और कुछ देर बाद देखो वहां महारानी के बिस्तर पर महारानी के साथ ही रंगरेलियां बना रहे थे यह थी किस्मत,,, महारानी की गुलाबी बुर इस समय दुनिया की सबसे हसीन और बेश कीमती खजाना जान पड़ रहा था जो सूरज के पिताजी की मुट्ठी में कैद हो चुका था इस खजाने को वह अपने आप से दूर नहीं करना चाहते थे इस खजाने का पूरा मजा लेना चाहते थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी पागलों की तरह महारानी की बुर को चाटना शुरू कर दिया महारानी मदहोश में जा रही थी वह बिस्तर पर करमा जा रहे थे बिस्तर पर किसी चादर को दोनों मुट्ठी में जोर से पकड़ कर वह अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था महारानी के बदन की कसमसाहट खास करके उसके नितंबो से प्रतीत हो रही थी,,। उसमें कुछ ज्यादा ही थिरकन थी,, जिसे सूरज के पिताजी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में करने की कोशिश कर रहे थे इसमें महारानी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ने में भी एक अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, महारानी की गांड तेरी बड़ी थी कि उसकी दोनों फांको के बीच सूरज के पिताजी का चेहरा एकदम ढंक सा गया था। महारानी बिस्तर पर तड़प रही थी मदहोश हो रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने राजा के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,।





ओ मेरे राजा मैं तो पागल हो जाऊंगी आज क्या हो गया है आपको कुछ खा लिए हो क्या अभी कुछ देर पहले तो चुदाई करके गए थे फिर से तुम्हारा मन हो गया,,,, लेकिन आप मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे राजा जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डाल दो मेरी प्यास को बुझा दो ,,,आज तो आपने कमाल कर दिया है,,आहहहहहहह राजा मेरे महाराज,,,,,ओहहहहहबह,,,।

महारानी कि ईस तरह की बातें सुनकर सूरज के पिताजी मदहोश हुए जा रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर घबरा भी रहे थे की कही रानी को जवाब ना देना पड़ता है अगर ऐसा हो गया तो रानी को पता चल जाएगा कि उसके बिस्तर पर उसके राजा नहीं बल्कि कोई गैर मर्द है,,,, और वैसे भी महारानी को रत्ती भर शक नहीं हो रहा था कि उनके बिस्तर पर उसके महाराज नहीं बल्कि गांव का कोई गरीब आदमी है मजदूर आदमी है अगर ऐसा वह जान जाए तो इसी समय उसकी जान ले ले लेकिन सूरज के पिताजी काफी चालाक नजर आ रहे थे और बेहद चालाकी भी दिखा रहे थे,,,, एहसास हो गया की महारानी पूरी तरह से तड़प रही है चुदवाने के लिए तो वह बिल्कुल भी देर किए बिना एक हाथ से अपनी धोती को उतार कर एक तरफ रख दिए ताकि जाते समय बड़े आराम से उसे पहन कर जा सके,,,,, एक हाथ से वह अपनी धोती उतार कर पूरी तरह से नंगा हो चुका था जैसा की महारानी बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी,,,,।





देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने लिए जगह बनाने लगे और उसके बड़ी-बड़ी गांड के नीचे इस स्थिति में वह पेट केवल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को उसकी मोटी मोटी जांघो को खोलकर उसके बीच में रखते हुए अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर धीरे-धीरे अंदर की तरफ धक्का मारने लगे,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी का लंड महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,, इस समय सूरज के पिताजी को ऐसा एहसास हो रहा था कि मानो जैसे वह स्वर्ग के अंदर प्रवेश कर रहे हो क्योंकि महारानी उनकी सोच से भी दूर थी वह कभी महारानी के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे क्योंकि वह अपनी हैसियत को जानते थे लेकिन आज अपनी हैसियत से आगे निकल चुके थे आज वह महारानी के कच्छ में उसके ही बिस्तर पर उसकी ही चुदाई कर रहे थे। वाकई में अगर इंसान को उम्मीद से दुगना मिल जाए तो वह अपनेआप को महाराजा समझने लगता है और वही स्थिति ईस समय सूरज के पिताजी की थी।





देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने पूरे लंड को महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करा दिए थे और महारानी की बड़ी-बड़ी और नरम नरम गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिए थे इस स्थिति में महारानी की चुदाई करने में सूरज के पिताजी को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रहे थे इतना मजा उन्हें आज तक अपनी बीवी के साथ नहीं आया था और वैसे भी किसी औरत के साथ कितना ज्यादा मजा मिलता है यह मर्द की सोच पर और हालात स्थान और पद पर आधारित होता है,,, मतलब की औरत का पद क्या है,,,, इस समय बिस्तर पर सूरज के पिताजी जिसकी चुदाई कर रहे थे वह महारानी थी इसलिए सूरज के पिताजी की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई थी और उन्हें ऐसा ही महसूस हो रहा था की महारानी के साथ ही ज्यादा मजा मिल रहा है और ऐसा कभी क्योंकि महारानी का बदन भी एकदम मांसल और गदराया हुआ था,,,,।





सूरज के पिताजी की हर धक्के का माया महारानी ले रही थी इस तरह का मजा उन्हें अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि राजा के साथ पहले कभी नहीं प्राप्त हुआ था इस समय वह अपने बिस्तर पर चुदाई करने वाले इंसान को अपना पति ही समझ रही थी इसलिए उन्हें इस बात से थोड़ा अचंभित हो रहा था कि राजा इतने अच्छे से कैसे चुदाई कर रहा है,,,, लेकिन इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहती थी पीछे से चुदवाने में महारानी को कुछ ज्यादा ही मजा आता था सूरज के पिताजी दोनों हाथों से उसकी भारी भरकम गांड को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगा रहे थे,,,, कुछ देर तक सूरज के पिताजी इसी तरह से महारानी की चुदाई करते रहे और महारानी भी पूरी तरह से मजा लूट रही थी और पानी छोड़ रही थी जिसके चलते महारानी की बुर पूरी तरह से गली और चिपचिपी हो गई थी जिसमें बड़े आराम से सूरज के पिताजी का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज के पिताजी अपना आसन बदलना चाहते थे जिस तरह से महारानी मजा लूट रही थी वह समझ गए थे कि अभी कुछ बोलने वाली नहीं है और वैसे भी कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था एक दूसरे का चेहरा देखना नामुमकिन था लेकिन इस बात का डर था कि अगर महारानी उत्तेजित अवस्था में उसे अपनी बाहों में भर लेंगे तो शायद राजा के बदन की बनावट और उसके बदन की बनावट में भेद पता चलने लगेगा और ऐसे में उसके पकड़े जाने का डर बना रहा था लेकिन फिर भी सूरज के पिताजी अपने मन में युक्ति सोचने लगे और धीरे से अपने लंड को महारानी के पिछवाड़े से बाहर निकले और उसकी स्थिति को बदलने लगे उसे पीठ के बल लेट आने लगे,,, स्थिति को देखकर महारानी भी पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे सूरज के पिताजी उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी गुदाज कमर में अपने दोनों हाथ को डालकर से अच्छी तरह से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी नंगी बड़ी-बड़ी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिए,,,, और फिर एक बार अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर धक्का लगाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से झुकने लगे और उसके दोनों हाथों को पकड़कर वह बिस्तर से सटा दिए ताकि वह उन्हे अपनी बाहों में ना भर सके।

सूरज के पिताजी महारानी की दोनों कलाइयों को पकड़ कर धक्के पर धक्कालग रहे थे,,, महारानी की हालत खराब होती जा रही थी वह पागल हुए जा रही थी इतनी गजब की इतनी जबरदस्त चुदाई आज तक राजा साहब ने उसकी नहीं किए थे इसलिए तो वह एकदम मस्त भेज रही थी आज वह राजा साहब पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसे चोदने वाला उनका पति नहीं बल्कि गांव का मजदूर है इसीलिए शायद मजदूर होने के कारण उसमें दम खम ज्यादा है,, आखिरकार महारानी अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी और उसकी शिसकारी की आवाज एकदम से बढ़ने लगे सूरज के पिताजी उसके लाल लाल होठों का चुंबन करना चाहते थे लेकिन ऐसा करना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए अपनी इच्छा को वह अपने अंदर दबा लिए क्योंकि इस समय भी उन्हें बहुत कुछ मिल चुका था किस्मत उन पर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी अब थोड़े से लिए वह खतरा मोल नहीं लेना चाहते थे सूरज के पिताजी भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे इसलिए उनके धक्के एकदम तेज हो चुके थे,,,, और देखते ही देखते दोनों का एक साथ पानी निकल गया सूरज के पिताजी इसके बावजूद भी महारानी के बदन पर पसर नहीं गए थे बल्कि अपने आप को एकदम से रोके रह गए थे और जब तक पूरा पानी महारानी की बुर में उत्तर नहीं दिया तब तक अपने लंड को उसके घर से बाहर नहीं निकाले,,,,।

सूरज के पिताजी का मन अभी भरा नहीं था वह महारानी की और भी ज्यादा चुदाई करना चाहते थे लेकिन अब यहां पर ज्यादा देर रुकना उचित नहीं था वैसे तो राजा साहब सुबह होने से पहले आने वाले नहीं थे लेकिन फिर भी अगर ज्यादा देर रुकना होगा तो दोनों के बीच से बातचीत होना लाजमी है ज्यादा देर तक वह चुप नहीं रह सकते थे क्योंकि उनकी खामोशी महारानी के मन में शंका पैदा कर सकती थी इसलिए वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर वहीं बिस्तर पर कुछ देर के लिए बैठ गए क्योंकि वह जानते थे की महारानी की भारत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह एकदम मस्त हो चुकी थी और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी स्थिति को संभाल रही थी,,,,।

इतनी संतुष्टि भरी चुदाई करवा कर महारानी को बिल्कुल भी होश नहीं था वह अपनी आंखों को बंद किए हुए गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, एकदम संतुष्ट होने की वजह से कुछ ही देर में वह नींद की आंखों में चली गई और यही मौका था महारानी के कमरे से बाहर निकलने का और यही मौका देकर सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर पर से उठे और अपने कपड़े ढूंढ कर पहनकर धीरे से इस तरह से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई और बाहर आकर तख्ते पर कल के साथ एक अद्भुत मुस्कान के साथ सो गए,,,।



 
सूरज की किरणें धरती पर चारों तरफ फैल कर रोशनी भी कहती उससे पहले ही गांव की औरत राजा साहब के साथ संतुष्टि भरा संभोग करके और तय की हुई कीमत लेकर वहां से चली गई थी और वह इस बात से कुश्ती की राजा साहब को छोड़कर किसी और ने उसके चेहरे को नहीं देखा था,,,, और राजा साहब भी रात भर उस औरत की चुदाई करके ना तो खुद सोया था और नहीं उसे औरत को सोने दिया था इसलिए तो सुबह होने से पहले ही वह औरत अपने घर की तरफ रवाना हो गई थी और राजा साहब चुपचाप जाकर अपने कमरे में रानी के बगल में आकर लेट गए थे,,, लेकिन कमरे में प्रवेश करते हैं जिस तरह का अंधेरा कमरे में छाया हुआ था उसे देखकर थोड़ी बहुत हैरानी राजा साहब को हो रही थी कि कमरे में अंधेरा क्यों है,,, फिर मन में यह ख्याल आया कि शायद रानी पुरी तरह से निर्वस्त्र होकर सो रही थी इसलिए खुद ही रोशनी बुझा दी होगी,,, राजा को नींद नहीं आ रही थी क्योंकि कुछ देर पहले ही रात भर वह गैर औरत के साथ मस्ती भरी रात गुजार कर आया था,, राजा साहब को देखकर वाकई में घर की मुर्गी दाल बराबर वाली कहावत एकदम सही बैठ जाती है और यह कहावत शायद राजा साहब के लिए ही बनी हुई थी बगल में अप्सरा जैसी खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी गांव की साधारण सी महिला के साथ रात गुजारने की आदत पड़ चुकी थी,,,।





और इसी आदत की वजह से राजा साहब जैसी शख्सियत की मुलाकात कल्लू जैसे बदमाश से हो गई थी,, जो आए दिन नई-नई औरतों का प्रबंध राजा साहब के लिए करता रहता था और अपने जीवन निर्वाह के लिए पैसे भी प्राप्त करता रहता था सही मायने में देखा जाए तो यही उसकी आजीविका बन चुकी थी,, और इसमें वह खुशभी था।

राजा साहब अपने कमरे में रानी के बगल में लेटे हुए रानी की बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर सहला रहे थे उन्होंने कमरे में वापस रोशनी करने के बारे में नहीं सोचा क्योंकि थोड़ी ही देर में उजला होने वाला था लेकिन राजा साहब की हरकत से उनकी बीवी की आंख खुल गई और अपने नितंबों पर अपने पति के हथेली का स्पर्श पाकर वह फिर से उत्तेजित होने लगी रात वाली घटना अभी भी महारानी के जेहन में एकदम ताजा थी वह बहुत खुश थी की वर्षों के बाद उसके पति ने उसकी बुर पर अपने होठ रखे थे,,,, अपने पति की हथेली को महसूस करके महारानी के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, वह नींद से जागते हुए बड़े प्यार से अपने पति से बोली।

रात को आपने ऐसी चुदाई की है कि मैं एकदम गहरी नींद में सो गई लेकिन आप इतनी जल्दी क्यों उठ गए,,(बिना करवट लिए हुए ही वह राजा साहब की तरफ देखते हुए बोली वैसे तो कमरे में अभी भी अंधेरा था लेकिन खिड़कियों से अब हल्का-हल्का उजाला कमरे में महसूस होने लगा था अपनी पत्नी की बात सुनकर राजा साहब बोले)

हां आज जल्दी आंख खुल गई,,, तुम बिना कपड़े पहने ही सो गई,

आप कपड़े कहां पहनने देते हैं,,,,(रानी मुस्कुराते हुए बोली,,, और उसकी बात सुनकर राजा साहब उसका दिल रखने के लिए बोले)

क्या करूं मेरी रानी तुम्हारी जवानी मुझे पागल बना देती है तुम बिना कपड़ों की कुछ ज्यादा ही सुंदर लगती हो इसलिए तुम्हें कपड़े पहने नहीं देता,,,

ऊमममम,,, रहने दीजिए झूठी तारीफ करने को,,, लेकिन कल रात आप क्या खा लिए थे जो जमकर मेरी चुदाई किए हो,,,,।

तुम्हारा प्यार,,(महारानी का दिल बहलाने के लिए राजा साहब बोले और अपने पति की बात सुनकर महारानी के तन-बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, महारानी के अरमान मचलने लगे वह अपने मन में सोचने लगी की रात कुछ इस तरह का प्यार उसके पति ने किया है अगर इस समय भी वही प्यार मिल जाए तो पूरा दिन सुधर जाए और यही अपने मन में सोच कर रानी धीरे से उठकर बैठ गई और,,, राजा साहब कुछ समझ पाते इससे पहले ही घुटनों के बाल होकर वह एक घटना अपने पति के दाएं चेहरे पर और दूसरा घुटना बांए सिरे पर रख दी और दोनों हाथों से अपने पति के सर को पकड़ ली और उनके चेहरे पर अपनी बुर को रगड़ने लगी,,,, राजा साहब को समझ पाते इससे पहले ही उनकी बीवी दो-चार बार अपनी बुर को उनके होठों से रगड़ दी थी और एकदम से गर्म हो गई थी,,,, लेकिन जैसे ही राजा साहब को एहसास हुआ कि उनकी बीवी अपनी मनमानी कर रही है तो वह तुरंत दोनों हाथों से अपनी मद-मस्त बीवी को पकड़ कर अपने से अलग करती है और एकदम से क्रोधित होते हुए बोले,,,)

यह क्या बदतमीजी है तुम्हें अच्छी तरह से मालूम है कि मुझे यह नहीं पसंद है,,,।

लेकिन मेरे राजा रात को तुम कितने प्यार से मेरी चाट रहे थे,,,,।

पागल हो गई हो क्या कोई सपना तो नहीं देख रही हो बरसों बीत गए हैं तुम्हारी बुर से मैंने होठ नहीं लगाया,,,, आइंदा से यह बदतमीजी मेरे साथ मत करना मुझे यह बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,,।।

लेकिन रात को तो,,,।

रात को मैंने सिर्फ तुम्हारी चुदाई किया था तुम्हारी बुर को चाटा नहीं था मुझे कोई शौक नहीं है तुम्हारी बुर को चाटने का,,,,, लगता है तुम सपना देख रही थी तभी गहरी नींद में सो रही हो,,,।

(अपने पति के इस बर्ताव से महारानी को एक बड़ा सा धक्का लगा था,,,, क्योंकि अपने पति के द्वारा यह एक तरह का अपमान ही था जिसे सहन कर पाना इस समय महारानी के लिए मुश्किल हुआ जा रहा था,,,, महारानी अपने मन में सोच रही थी कि क्या कमी है उसके में उसके जैसी आसपास की 25-50 गांव में भी खूबसूरत औरत नहीं है और उसका पति उसकी जवानी को इस तरह से धिक्कार दिया,,,, महारानी को यह बात दिल पर लग गई थी और राजा साहब इस समय अपना कच्छ छोड़कर बाहर निकल गए थे महारानी बिस्तर पर बैठे-बैठे रात की घटना के बारे में सोच रही थी,।

बहुत सोचने के बाद महारानी को एहसास हुआ कि वह सपना तो बिल्कुल भी नहीं था जो कुछ भी रात में हुआ था वह हकीकत था फिर वह अपने मन में सोचने लगी कि कहीं ऐसा तो नहीं राजा साहब की जगह कोई गैर मर्द कमरे में आ गया हो और उसके साथ मनमानी करके चला गया हो, इस तरह का विचार जैसे ही मन में आया रात वाली घटना उसकी आंखों के सामने एकदम तरोताजा होने लगी,,,, रात में उसके साथ जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में वह गहरी सोच में पड़ गई थी,,, वह सोचने लगी कि रात को जिस तरह से अपनी बुर पर राजा साहब के होठों का स्पर्श महसूस की थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि राजा साहब ऐसा कर सकते हैं पल भर के लिए तो वह अपने आप में पूरी तरह से खो चुकी थी ऐसा लग रहा था की पूरी दुनिया उसकी बाहों में आ गई हो।

अब धीरे-धीरे महारानी को एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके साथ कुछ गलत हुआ है उसे रात वाली गंध महसूस होने लगी जो उसके कमरे में से आ रही थी और वैसी गंध वह खेत में काम करने वाले मजदूरों के कपड़े में से आती हुई महसूस की थी,,,, धीरे-धीरे उसके दिमाग की बत्ती जलने लगी थी उसे समझ में आने लगा था कि रात को जिसे वह अपना पति समझ रही थी और कोई और इस बात का एहसास महारानी को हमसे ही उसके बदन में एक डर का भाव पैदा होने लगा,,,, उसे सब कुछ समझ में आने लगा वह समझ गई कि वाकई में रात को उसकी दोनों टांगों के बीच उसका पति नहीं बल्कि कोई गैर मर्द था वरना उसका पति उसकी बुर कभी नहीं चाटता,,,, इतना मजा उसे अपने पति के साथ नहीं मिला था जितना रात को उस गैर मर्द के साथ उसे आया था,,,,।

अब उसे सब कुछ समझ में आने लगा था जितनी देर तक उस गैर मर्द ने उसकी चुदाई किया था इतनी देर तक उसका पति नहीं कर पाता था रात को उसे गौर करने उसे चांद तारे दिखा दिया था ऐसा उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था,,, उसे अब ख्याल आ रहा था कि रात को उसके कमरे में पूरी तरह से अंधेरा था बिल्कुल भी रोशनी नहीं थे जो कि उसे अनजान आदमी ने जानबूझकर रोशनी बुझा दिया था ताकि वह उसे पहचान ना सके उसके बारे में जान ना सके,,, अब महारानी पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी क्योंकि आज तक ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ था कोई गैर मत उसकी तरफ नजर उठा कर भी नहीं सकता था लेकिन रात भर में सब कुछ बदल गया था कोई अनजान मर्द जाकर उसकी जमकर चुदाई करके चला गया था उसे शक नहीं हुआ था तभी उसे ख्याल आया कि वह रात को बात भी कर रही थी लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि उसके एक भी बात का जवाब वह नहीं दिया था वह खामोश था इसका मतलब साफ है।

रात को कोई गैर मर्द उसके कमरे में आकर उसकी चुदाई कर गया था अगर उसका पति होता तो उसकी बातों का वह जरूर जवाब देता और वह जवाब इसलिए नहीं दिया था क्योंकि अगर वह मुंह खोलता तो वह जान जाती ,,,, तभी उसे ख्याल आया कि जब वह गैर मर्द उसे पीठ के बल लिटा कर उसकी चुदाई कर रहा था तब बस की दोनों हथेलियां को अपने हाथों से पकड़ कर बिस्तर से सटा रखा था,,,, और वह भी इसलिए कि वह गैर अंजान मर्द जानता था किस तरह की मुद्रा में औरत मर्द को अपनी बाहों में भर लेती है अगर ऐसा हो जाता तो उसकी काया की बनावट को भी वह पहचान जाती इसलिए वह ऐसा नहीं करने दिया बड़ा ही साथ ही आदमी था,,,। लेकिन अब महारानी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था इस बारे में वह किसी को बता भी नहीं सकती थी अगर किसी तरह से भरोसा करके अपने पति को बताती है कि जो कुछ भी वह अनजाने में हुआ तो भी उसे पर बेशर्मी और रंडी होने का ठप्पा लग जाता जो अपने पति की गैर मौजूदगी में गैर मर्दों को अपने कमरे में बुलाकर अपनी हवस की आग बुझाती है।

इस बात का ख्याल मन में आते ही महारानी को अच्छी तरह से एहसास हो गया था कि इस बारे में किसी से ना कहने मे हीं भलाई है,,, और एक बात और उसके मन में कांटे की तरह चुभ रही थी कि अगर कमरे में उसके साथ कोई गैर मर्द सु उसे समय उसके पति कहां थे क्योंकि उसे गैर मर्द को कमरे में कुछ ज्यादा ही समय लग गया था और इतनी देर उसके पति क्या कर रहे थे इस बारे में भी सोच कर उसका दिमाग घूम रहा था।कुछ देर तक महारानी अपने बिस्तर पर बैठी रही तब तक पूरी तरह से उजाला हो चुका था और वह धीरे से अपनी बिस्तर से नीचे पैर रखी और कमरे से बाहर की तरफ जाने लगी लेकिन महारानी को अपनी कमर में दर्द का एहसास हो रहा था मीठा दर्द जिनके एहसास के लिए हर एक औरत तड़पती है रात को जिस मर्जी ने उसकी चुदाई किया था,,,वाकई में उसने पूरा जोर लगाया था और उसे बिस्तर के ऊपर औरत को किस तरह से खुश रखा जाता है उसे साड़ी कला मालूम थी संभोग की साड़ी कला में वह महारत हासिल किया था तभी तो वह महारानी को बोलने तक का मौका नहीं दिया था यही सब सोचते हुए वह अपने कमरे से बाहर निकल गई थी और बिना कुछ किसी को बताएं अपनी दिनचर्या में लग गई थी,,,,,।

दूसरी तरफ सूरज के पिताजी और कल्लु भी सूरज निकलने से पहले वहां से निकल गए थे सूरज के पिताजी रात में जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में कुछ भी कल्लू से कहना कुछ इतना नहीं समझ रहे थे क्योंकि वह जानते थे कि इसका कोई भरोसा नहीं है वह समय आने पर सब कुछ बता भी सकता है और ऐसे में लेने के देने पड़ जाएंगे और वैसे भी रात को जो कुछ भी हुआ था उसे बारे में बात कर कौन सा पुरस्कार हासिल करना है रात को जो कुछ भी सूरज के पिताजी को प्राप्त हुआ था वह किसी पुरस्कार से काम नहीं था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था। रानी के मखमली बदन का एहसास सूरज के पिताजी को अपने बदन में अच्छी तरह से महसूस हो रहा था वाकई में वह सोच रहे थे कि अगर औरत को तो महारानी की तरह जो बिस्तर पर मर्दों को चारों खाने चित कर दे,,,,।

दूसरी तरफ मुखिया के खेतों में काम बढ़ता जा रहा था और ऐसे में सूरज के पिताजी का कोई ठिकाना न था,,, सूरज के पिताजी का मुखिया के खेतों में होना बहुत ज्यादा जरूरी था मुखिया इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर वह रहता था तो खेतों का काम हुआ अच्छी तरह से संभाल लेता था लेकिन उसका कहीं भी अता-पता नहीं था इसलिए उसका पता लगाने के लिए मुखिया खुद चलते हुए सूरज के घर पर पहुंच गए और बाहर से ही आवाज लगाते हुए बोले।

भोला औ भोला,,, कहां हो भाई,,,,,।

(किसी अनजान आदमी की आवाज सुनकर सुनैना जो कि घर की सफाई कर रही थी वह एकदम से रुक गई और अपने मन में सोचने लगी कि यह कौन आ गया,,, तभी वह सूरज से बोली जो सामने खटिया पर बैठा हुआ था,,,,)

सूरज जरा देखकर बाहर कौन आया है तेरे बाबूजी को आवाज लगा रहा है,,,

ठीक है,,,(इतना कहकर सूरज खटिया पर छोड़कर खड़ा हो गया और दरवाजे की तरफ जाने लगा,,,,,, उसे भी नहीं मालूम था कि दरवाजे पर कौन खड़ा है और वह जैसे ही दरवाजे पर खड़ा तो सामने मुखिया जी को पाकर वह एकदम से हाथ जोड़ते हुए बोला।)

नमस्कार मुखिया जी आप यहां,,,, रुकिए में खटिया लाता हूं,,,।

अरे रहने दो उसकी कोई जरूरत नहीं है,,,।

जरूर कैसे नहीं है मालिक आप गांव के माई बाप हैं,,, पहली बार हमारे घर आए हैं रुकीए में अभी आता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज घर में चला गया और अपनी मां से बताया कि उसके घर पर मुखिया जी आए हैं इस बात को सुनकर सुनैना भी हैरान हो गई की ऐसी कौन सी बात हो गई की मुखिया जी को उसके घर पर आना पड़ा वह भी एकदम से हक्की रह गई और सूरज को बोली)

तो जल्दी से खटिया बाहर लेकर जा मैं चाय पानी का इंतजाम करती हूं,,,,।

ठीक है मां जल्दी करना,,,,(इतना कहना सूरज खटिया लेकर घर के बाहर की तरफ जाने लगा और उसकी मां चाय पानी का इंतजाम करने लगी,,,,,, थोड़ी देर में सूरज खटिया लेकर घर के बाहर पहुंच गया और पेड़ के नीचे खटिया लगा दिया,,, सूरज को इस तरह से खातिर भाव करते देखकर मुखिया जी बोले।)

अरे इसकी क्या जरूरत थी।

जरूर कैसे नहीं है मालिक आखिरकार आप हमारे मालिक हैं,, जितना हो सकता है उतना तो सेवा भाव बनता है आप इस पर बैठ जाइए तब तक चाय पानी का इंतजाम हो जाता है।

बिल्कुल अपने बाबूजी जैसे हो,,,,.(इतना कहकर मुखिया खटिया पर बैठ गए और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले,,) आजकल तुम्हारे बाबूजी नहीं दिखते उन्हीं के सिलसिले में मैं यहां पर आया हूं,,,,.

(अपने पिताजी का जिक्र मुखिया के मुंह से सुनकर सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बोले वह कैसे कह दे की उसके पिताजी पूरी तरह से शराबी हो गए हैं किसी गैर औरत के चक्कर में अपना घर बार छोड़ दिया ऐसा कहना उचित नहीं था इसलिए थोड़ी देर कुछ सोचने के बाद सूरज बोला)

हां पिताजी एक रिश्तेदार के साथ कहीं बाहर गए हैं,,,, कुछ काम के सिलसिले से और वैसे भी मुखिया जी अब गुजारा नहीं होता है आप तो जानते ही हैं मेरी एक बहन है उसका भी तो विवाह करना है कुछ जुटाना पड़ेगा तभी तो विवाह हो पाएगा,,,, और गांव में मजदूरी करके सिर्फ खाना पीना ही हो पता है बचत कुछ भी नहीं हो पाती,,,,

बात तो तुम ठीक कह रहे हो सूरज लेकिन फिर भी काफी दिन हो गया इसलिए पूछ रहा था और वैसे भी खेतों में कटाई का समय हो गया है तुम्हारे बाबूजी रहते थे तो सब संभाल लेते थे अब समझ में नहीं आ रहा था कि यह जिम्मेदारी किसको दूं,,,,।

(मुखिया जी की बातें और अपने बेटे की बातों को सुनैना दीवार के पीछे छुपकर सुन रही थी वह अपने बेटे की चालाकी पर बहुत खुश थी कि उसके बेटे ने सोच समझ कर जवाब दिया था और रही बात खेतों में कटाई की तो खेतों में काम करने से बहुत बिल्कुल भी पीछे नहीं हटती थी उसके खेतों में भी काम बाकी था लेकिन फिर भी वहां एकदम से हाथ में चाय का गिलास लेकर घर से बाहर घूंघट में आई और बोली)

मलिक अगर ऐसा है तो हम लोग खेतों में काम कर लेंगे,,,,।

तुम,,,?(आश्चर्य जताते हुए मुखिया जी बोले)

तो क्या मालिक खेतों में हम ही लोग तो काम करते हैं सूरज के बाबूजी तो आपके वहां काम करते हैं। बाकी अपने खेतों का काम हम खुद ही कर लेते हैं क्यों सूरज,।

जी मालिक मां ठीक कह रही है,,,, मैं और मां मिलकर आपके खेतों में काम कर लेंगे अगर और किसी मजदूर की जरूरत पड़ेगी तो वह भी इंतजाम में कर लूंगा आप बिल्कुल भी चिंता ना करें,,,,।

जब आप लोगों ने जुबान दे दिया है तो मुझे किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है और वैसे भी आप लोगों को मैं बरसों से जानता हूं,,, आप लोग मेहनती हो ईमानदार हो इसलिए खेतों की जिम्मेदारी देने में मुझे जरा भी हिचकीचाहट नहीं होगी,,,।(इतने में सूरज अपनी मां के हाथ में से चाय का गिलास लेकर खुद मुखिया को थमाने लगा मुखिया भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर चाय का गिलास अपने हाथ में ले लिया और चाय की चुस्की लेने लगा चाय की चुस्की लेने के बाद एकदम प्रसन्न होते हुएबोला,,,)

बहुत दिनों बाद इतनी अच्छी चाय मिल रही है,,,।

मां बहुत अच्छी चाय बनाती है,,,(एकदम खुश होते हुए सूरज बोला,,,)

तब तो लगता है रोजा आना होगा,,।

आपका ही घर है जब मन करे तब आईए,,,,,,, (घूंघट को एक हाथ से पकड़े हुए सुनैना बोली,,,,,, उसकी बात सुनकर मुखिया जी बहुत खुश है इन सबके बावजूद सूरज आज एक नई बात पर ध्यान दे रहा था आज वह पहली बार अपनी मां को घूंघट में देख रहा हूं और अपनी मां को घूंघट में देखकर उसके बदन में अजीब सी उत्तेजना का लहर उठ रहा था, अपनी मां को घूंघट में देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंखों के सामने कोई नई नवेली दुल्हन खड़ी हो,,,,,, मुखिया दो-तीन दिन में काम शुरू करने का कहकर वहां से चले गए और सुनैना भी प्रसन्न मुद्रा में घर के अंदर प्रवेश कर गई,,, उसके पीछे-पीछे सूरज भी घर में दाखिल हो गया,,,सूरज बहुत खुश नजर आ रहा था मुखिया के खेतों में काम मिलने की खुशी में नहीं बल्कि उसकी खुशी का राज कुछ हो रही था और वह एकदम से अपनी मां से बोला,,,)

तुम तो आज घूंघट में नई नवेली दुल्हन लग रही हो मैं आज पहली बार तुम्हें घूंघट में देख रहा हूं और सच में तुम बहुत खूबसूरत लगरही हो,,,।

(सूरज का इतना कहना था कि उसकी बातों को सुनकर सुनैना शर्म से पानी पानी होने लगी,,, अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी अपनी उत्तेजना अपने हाव-भाव को छुपाते हुए वह बोली,,,)

यह कैसी बातें कर रहा है कोई अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करता है क्या,,,?

बेवकूफ होते हैं वह लोग जो अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ नहीं करते मैं तो जो कुछ भी है सच कह रहा हूं आज सच में तुम्हें घूंघट में देख कर मुझे तुम्हारे अंदर एक नई औरत देखने को मिल रही है,,,,,,,,,,

कैसीऔरत,,,,(एकदम प्रसन्न होते हुए सुनैना बोली)

एक नई नवेली औरत जो अपने जीवन का शुरुआत करने जा रही है,,,,(सूरज जानबूझकर अपनी मां से इस तरह की बातें कर रहा था,,, क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां अंदर ही अंदर एकदम प्यासी औरत है उसे एक मर्द की जरूरत है और वह कमी वह खुद पूरी कर सकता है और वैसे भी उसे वहां पर अच्छी तरह से याद था जब वह एक रात घर से गया था और सुबह में पहुंचने पर उसकी भाव से एकदम से अपने गले से लगा ली थी और एकदम से भाव भीबोर हो गई थी और एकदम से उत्तेजित भी होने लगी थी जिसके चलते वह खुद अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ज़ोर से दबाया था उसकी मां पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी यह उसके प्यासेपन का ही नतीजा था उसे दिन तो रानी के आ जाने की वजह से आगे का कार्यक्रम स्थगित हो गया था लेकिन सूरज को लगने लगा था कि अब इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाना चाहिए,,,,, इसलिए वह अपनी मां से इस तरह की बातें कर रहा था क्योंकि वह जानता था की औरतों से इस तरह से बातें करने पर वह बहुत जल्दी पिघलती है। अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली)

जीवन की शुरुआत तू सच में पागल हो गया है अनाप शनाप बकते रहता है,,,, घूंघट में देख लिया तो मेरे अंदर कोई और औरत आ गई वह तो मुखिया जीत है इसलिए घूंघट में आनाजरूरी था,,,।

लेकिन फिर भी मन तुम बहुत खूबसूरत लग रही थी,,,,।

चल इन सब बातों को रहने दे दो दिन बाद मुखिया के खेतों में काम शुरू करना है याद रखना,,,,।

ठीक है हो जाएगा,,,,।

(सुनैना अपने बेटे के करीब रहने से डरने लगी थी एक अजीब सा डर उसके मन में बैठ गया था क्योंकि उसे भी वह दिन याद था जब अपने बेटे को गले लगाई थी और उसके बेटे ने उस पल का गलत मतलब निकालते हुए उसके नितंबो पर अपना हाथ रख दिया था जिसके चलते वह खुद उत्तेजित हो गई थी,,,, बेटे के द्वारा इस तरह की हरकत उसे अच्छी तो नहीं लगी थी लेकिन उसकी हरकत उसके बदन में पूरी तरह से मदहोशी भर दी थी जिससे वह इनकार नहीं कर सकती थी,,,,,, सुनैना फिर से घर की सफाई में लग गई थी लेकिन सूरज उसे ही देख रहा था वह झाड़ू लगाते समय झुक जाती थी तो उसके नितंबों को प्यासी नजरों से देखा था क्योंकि कई हुई साड़ी में उसके नितंबों का आकार कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता था और तिरछी नजर से अपने बेटे की हरकत को सुनैना भी देख रही थी और उसकी नजर को अच्छी तरह से समझ कर उसके बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,,।

इस बात से वह भी इनकार नहीं कर सकती थी अगर उसे दिन सही समय पर उसकी बेटी ना आ जाती तो जरूर कुछ ना कुछ दोनों के बीच हो जाता,,,, इसलिए तो वह अपने बेटे से दूरी बनाकर रहने लगी थी,,,, लेकिन इस समय उसकी बातों ने उसके बदन में उत्तेजना का रस घोल दिया था,,,, ना चाहते हुए भी न जाने क्यों अपने आप ही हो अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी गांड मटका मटका कर झाड़ू लगा रही थी वह एक तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी और ऐसा वह कब करने लगी उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो वह मारे शर्म से पानी पानी होने लगी,,, खैर जैसे तैसे करके वह पूरे घर में झाड़ू लगाकर घर की सफाई कर दी और फिर खाना बनाने लगी,,, सूरज का तो जाने का मन नहीं कर रहा था लेकिन फिर भी वह घर से बाहर चला गया,,,, इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी कि दो दिन बाद मां खेतों में अपनी मां के साथ अकेले ही काम करेगा,,,,।

और इस बात का डर सुनैना के मन में था कि दो दिन बाद उसे अपने बेटे के साथ खेतों में काम करना होगा अगर उसके बेटे की हरकत इसी तरह से जारी नहीं तो वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाएगी और जो नहीं होना चाहिए वह हो जाएगा,,,, क्योंकि कहीं ना कहीं उसे भी अपने बेटे की बातें अच्छी लगती थी, उसकी हरकतें उसकी नज़रें उसके बदन में उत्तेजना का नशा घोल देता था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि दो दिन बाद जब अपने बेटे के साथ खेत में अकेले काम करेगी तब वह उसके सामने कैसे रह पाएगी क्योंकि वह अपने बेटे की नजरों को समझ गई थी अब वह खुले तौर पर उसके अंगों को घूरने लगा था और उसका इस तरह से घूरना एक अजीब सी हलचल उसके बदन में पैदा कर देता था।

इन सब बातों को सोचते हुए सुनैना खाना बनाने लगी थी,,,, और सूरज खेतों की तरफ निकल गया था,,,, और वही सामने से उसे रानी आती हुई दिखाई दी,,,, रानी को देखकर सूरज समझ गया था कि वह सोच जाकर आ रही है इसलिए उसके करीब पहुंचने के बाद बोला,,,,।

अभी आ रही है,,,, कहां थी अब तक कितनी देर लगा दी,,,।

क्यों क्या हो गया भैया ऐसे क्यों बोल रहे हो,,,?

कुछ नहीं मुखिया जी घर पर आए थे पिताजी को ढूंढते-ढुढते लेकिन पिताजी तो ना जाने कहां है,,।

लेकिन पिताजी को क्यों ढूंढते हुए मुखिया जी आए थे,,,।

अरे पगली पिताजी मुखिया के खेतों में काम करते थे और काम करवाते थे और इस बार पिताजी है नहीं इसलिए उनको ढूंढते हुए आए थे मैंने तो मुखिया जी से कह दिया कि पिताजी किसी रिश्तेदार के साथ बाहर कमाने के लिए गए हैं,,,।

कमाने के लिए लेकिन तुम्हें कैसे पता चला भाई,,,।

अरे बुद्धु मैं तो मुखिया जी से झूठ कहां हूं,,, और क्या कहते हैं मुखिया जी से कि हम लोगों को पता नहीं की पिताजी कहां चले गए ऐसा कहना भी तो ठीक नहीं था मैं तो कह दिया कि,,, इतनी सी कमाई में पूरा नहीं पड़ता है और वैसे भी रानी की शादी करना है पैसे इकट्ठा करना है,,,।

(अपनी शादी की बात अपने भाई के मुंह से सुनकर रानी शर्मा गई और शरमाते हुए बोली,,,)

धत् भैया ऐसा क्यों बोले,,, ऐसी तो कोई बात नहीं है,,,।

अरे लेकिन बात तो सही है ना तेरी शादी तो करना पड़ेगा ना अब तो पूरी तरह से जवान हो गई है,,,।

(इस बात को सुनकर रानी एकदम से शर्मा गई और वहां से भाग चली ,,, सूरज उसे आवाज लगता रहा लेकिन वह रुकी नहीं,,,।

दिन भर रानी के दिमाग में उसके भाई की ही बात घूम रही उसका भाई एकदम खुले तौर पर उसके सामने कह रहा था कि वह पूरी तरह से जवान हो चुकी है जिसका मतलब साफ था कि वह सच में शादी के लायक हो गई है और छुपे शब्दों में कहो तो अब वह पूरी तरह से चुदवाने के लिए तैयार हो गई है,,, यह ख्याल मन में आते ही रानी की दोनों टांगों के पीछे अजीब सी हलचल होने लगती थी,,,, खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सुनने के लिए गई थी उसकी आंखों में नहीं थी पर करवट पर करवट बदल रही थी उसके भाई की हरकत उसकी बातें एक-एक करके उसे याद आ रही थी जो उसके तन बदन में आग लगा रहा था उसकी हालत को खराब कर रहा था,,,,। यही हाल सूरज कभी था सूरज अपनी बहन से इस तरह की बातें जान-दूर किया था वह उसके चेहरे के हाव भाव को देखना चाहता था,,, और अपनी बहन के चेहरे के हवाओं को देखकर सूरज समझ गया था कि वह भी पूरी तरह से तैयार है। उसे भी नींद नहीं आ रही थी,,,, रानी को बड़े जोरों की पेशाब लगी थी लेकिन राज ज्यादा होने की वजह से उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन जब पेशाब की तीव्रता बढ़ने लगी तो उसे रहने की जरूरत धीरे से उठकर खड़ी हो गई और दरवाजा कोखोलने लगी,,, पास वाले ही कमरे में सूरज भी बेचैन नजर आ रहा था उसकी आंखों में नींद नहीं थी जब उसे एहसास हुआ कि उसकी बहन के कमरे का दरवाजा खुला तो वह भी धीरे से उठकर खड़ा हो गया और अपने भी कमरे का दरवाजा खोलकर आंगन में आ गया आंगन में देखा तो उसकी बहन खड़ी थी कमर पर हाथ रखकर उसे तरह से खड़े देखकर वह बोला,,।

क्या हुआ इतनी रात गए यहां क्यों खड़ी है,,,,?

मुझे बाहर जाना है,,,

तो चली जाना खड़ी क्यों है,,,,।

(सूरज सारा मामला समझ गया था इसलिए देखना चाहता था कि उसकी बहन क्या करती है इसलिए वह इससे ज्यादा कुछ बोला नहीं और उसकी बात सुनकर रानी कसमसाते हुए बोली,,,)

रात ज्यादा हो गई है इसलिए अकेले बाहर जाने में डर लग रहा है अगर तुम भी साथ चलते तो,,,।

लेकिन बाहर करने क्या जाना यह तो बता,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन बाहर इतनी रात को क्यों जा रही है लेकिन फिर भी वह उसके मुंह से सुनना चाहता था... रानी भी अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका भाई अनजान बनने की कोशिश कर रहा है उसे भी सब कुछ मालूम है लेकिन फिर भी उसके मुंह से सुनना चाहता है लेकिन अपने भाई से यह बात कहने में उसे शर्म महसूस हो रही थी इसलिए वह बोली)

तुम चलो तो भाई,,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

(ऐसा कहते हुए वह पेशाब की तीव्रता को रोक नहीं पा रही थी और उसे किसी भी तरह रोकने की कोशिश करते हुए अपने पैर के पंजों पर खड़ी हो जा रही थी उसकी हालत को देखकर सूरज मुस्कुराने लगा और बोला)

अच्छा तो तुझे पेशाब लगी है तो ठीक से कहती क्यों नहीं इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है,,,, चल मैं भी चलता हूं,,,(मन ही मन में खुश होते हुए सूरज आगे आगे चलने लगा और पीछे-पीछे रानी दोनों थोड़ी देर में घर के बाहर निकल गए)
 
रात काफी हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा अंधेरा छाया हुआ था इसलिए घर से बाहर निकलने में रानी को डर लग रहा था वैसे तो वह इतनी रात को कभी भी पेशाब करने के लिए घर से बाहर नहीं निकलती थी क्योंकि वह सोने से पहले ही पेशाब करके सोई थी ताकि रात को उसे परेशानी ना हो अगर कभी बहुत ज्यादा दिक्कत हो जाती थी तो घर के आंगन में ही जहां पर बर्तन साफ किया जाता है वहीं बैठ जाती थी लेकिन वहां बैठने की उसकी आदत नहीं थी इसलिए पेशाब की तीव्रता को देखते हुए उसे घर से बाहर ही जाना था और सही समय पर सूरज भी अपने कमरे से बाहर आ गया था,, अपनी बहन रानी को इतनी रात को घर के आंगन में खड़ी देखा तो वह थोड़ा हैरान हुआ लेकिन जल्दी से पता चल गया कि उसकी बहन को बड़े जोरों से पेशाब लगी है और वह घर के बाहर जाना चाहती है लेकिन अंधेरे की वजह से डर रही है।





पेशाब लगने की बात से सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी और वह अपनी बहन के साथ घर के बाहर जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, वैसे तो अगर ज्यादा दिक्कत होती तो रानी घर के आंगन में ही बैठ जाती लेकिन इस समय पर उसका भाई भी जाग गया था और उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गया था इसलिए ना चाहते हुए भी उसे हां कहना पड़ा था और वैसे भी उसके दिल में भी अब कुछ कुछ होने लगा था,,,, रानी से पहले भी अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब कर चुकी थी और वह भी जंगल जाते समय लेकिन वह जानबूझकर अपने भाई की आंखों के सामने बैठकर पेशाब नहीं कर रही थी वह तो बड़े से पत्थर के पीछे बिना बताए पेशाब कर रही थी उसका भाई उसे ढूंढता ढूंढता वहां पहुंच गया था,,,, और आज तो उसका भाई खुद उसके साथ चल रहा है उसे पेशाब करवाने के लिए इस बात से ही उसका दिल जोरो सेधड़क रहा था।





इस बात को रानी नहीं जानती थी कि उसका भाई उसे पहले भी पेशाब करते हुए देख चुका था और वह भी घर के बगल में ही जहां पर गाय भैंस बांधी जाती है तभी से तो वह रानी के जवानी का दीवाना हो चुका था,,,,, और वैसे भी दोनों के बीच बहुत कुछ जारी था जिसे बस आगे बढ़ाने की देरी थी जाने अनजाने में उत्तेजना बस रानी अपने भाई के लंड को पकड़ चुकी थी उसकी गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस करके अपनी बुर से मदन रस टपका चुकी थी,,, इसलिए अपने भाई की उपस्थिति में उसके बदन में भी अजीब सी लहर उठने लगी थी। आखिरकार वह भी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी उसके बदन में भी उसके खूबसूरत अंगों पर उभार आना शुरू हो गया था,,, अपने भाई की हरकतों की वजह से उसे भी औरत और मर्द के बीच के रिश्ते के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,,।





अपने भाई के द्वारा किए गए स्तन मर्दन की मीठी चुभन अभी तक उसे अपने बदन में महसूस होती थी जिसे उसके अंदर आनंद की फुहार उठने लगती थी कोई और समय होता तो शायद वह अपने भाई के साथ इतनी रात को घर से बाहर हो भी पेशाब करने के लिए कभी ना जाती लेकिन न जाने की उसके मन के कोने में भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसका भाई जो भी उसके साथ करता है उसमें आनंद ही आनंद है इसीलिए वह अपने भाई के साथ बाहर जाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, थोड़ी देर में सूरज धीरे से दरवाजा खुला होता घर के बाहर आ गया और उसके पीछे से पीछे उसकी बहन भी घर से बाहर निकल आई बाहर वास्तव में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,। इतना अंधेरा था कि दो-तीन मीटर की दूरी पर देखने पर कुछ भी दिखाई नहीं देता था,,, आधी रात से ज्यादा समय होने की वजह से चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था सिर्फ रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी,,,,।





घर से बाहर निकालने के बाद सूरज चारों तरफ नजर घुमा कर देख रहा था कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और यही काम रानी भी कर रही थी उसे तो इस बात का डर था की कही भूत प्रेत दिखाई ना दे,,, इसलिए उसके मन में डर बसा हुआ था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण विवाह कुछ देर तक इसी तरह से खड़ी होकर चारों तरफ नजर घुमा कर देती रही तो उसका भाई सूरज बोला।

क्या हुआ क्या देख रही हो यही बैठकर कर लो,,,,( हाथ के इशारे से पास में ही बैठने के लिए बोला जो की ठीक उसके घर के दरवाजे के सामने ही था इसलिए रानी बोली,,)

पागल हो गए हो क्या दरवाजे के सामने ही,,,।

तो क्या हो गया इतनी रात को कौन देखने वाला है,,,।

अरे भले कोई देखने वाला नहीं है लेकिन फिर भी अच्छा थोड़ी ना लगता है ऐसे तो फिर मुझे घर में अपने ही कमरे में बैठ जाना चाहिए था।

यह भी सही है इतनी रात को घर से बाहर निकलने से तो अच्छा ही है,,,।

क्या भैया तुम भी,,,,।





चल अच्छा जल्दी कर जहां बैठना ही बैठ जा कहीं ऐसा ना हो कि तो जगह ढूंढती रह जाएे और तेरी सलवार गीली हो जाए,,,।

(अपने भाई की इस तरह की बातें सुनकर वह शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, वैसे अगर उसका भाई है बात कभी और कहां होता जब दोनों के बीच इस तरह का आकर्षण ना था तब उसे थोड़ा अपने भाई की बात से ऐतराज होता लेकिन उसकी हरकत को देखकर रानी को हैरानी नहीं हुई थी लेकिन फिर भी शर्म से उसके गाल लाल हो गए थे। अपने भाई की बात पर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

क्या भैया मुझसे इस तरह की बात करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,।





अब कैसी शर्म तुझे पता है ना तालाब में हम दोनों एकदम नंगे होकर नहाए थे और तु तालाब मै मछली समझ कर मेरे लंड को पकड़ ली थी,,, और घर में भी मैं तुझे अपना लंड पकड़ा चुका हूं इसलिए अब शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है,,,।

(अपने भाई की बेशर्मी भरी बातें सुनकर रानी समझ गई थी कि अपने भाई से बहस करना उचित नहीं है इसलिए वह कुछ बोली नहीं लेकिन अपने भाई के लिए इस तरह की बातें उसे अच्छी लग रही थी और उसे उत्तेजित कर रही थी क्योंकि इससे पहले वह लंड जैसे शब्दों को बहुत कम ही सुनी थी और वह भी गांव में जब कभी झगड़ा हो जाता था तब एक दूसरे को गाली देते समय लेकिन उसका भाई खुलकर उसके सामने ईस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए इस शब्द को सुनकर उसके बदन में हलचल सी मचने लगती थी,,, अपने भाई से बिना कुछ बोले वह घर के बगल वाली जगह पर जाने लगी जहां पर गाय भैंस बांधी जाती थी,,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन वहीं पर पेशाब करती थी,,,, कुछ देर सूरज उसे घर के बगल वाले हिस्से में जाते हुए देखा रहा लेकिन फिर धीरे से उसके पीछे चल दिया और रानी भी यह देखना चाहती थी कि उसका भाई उसके पीछे आता है कि नहीं इसलिए पीछे नजर घूमर उसकी तरफ देख रही थी और उसके देखने के बाद ही सूरज मुस्कुराता हुआ उसके पीछे चल दिया था।





रानी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका भाई उसके साथ ही है और उसकी हरकत को वह जरुर देखेगा उसे पेशाब करते हुए जरुर देखेगा इसलिए उसे शर्म महसूस हो रही थी दो बार तो अनजाने में उसका भाई देख चुका था लेकिन इस बार तो सब कुछ उसकी आंखों के सामने ही होना था इसलिए उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी और बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी,,,, देखते देखते रानी अपने निश्चित जगह पर पहुंच चुकी थी चारों तरफ अंधेरा गहराया हुआ था इसलिए उसके मन में भी यही हो रहा था कि उसके भाई को वह ठीक तरह से नहीं दिखाई देगी। वह नजर घुमा कर देखी तो उसका भाई उसे तीन चार कदम की ही दूरी पर खड़ा था इसलिए वह बोली।

भैया तू तो इतने पास खड़ा है मुझे शर्म आती है थोड़ा दूर जाकर खड़े हो जा और हां मेरी तरफ देखना नहीं,,,।

अरे मैं बिल्कुल भी नहीं देखूंगा लेकिन अगर मैं डर जाऊंगा तो तू डर जाएगी देखा तो सही कितना अंधेरा है कहीं भूत चुड़ैल आ गए तो तो क्या करेगी,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन रानी भूत प्रेत से ज्यादा घबराती थी इसलिए उसकी बात सुनते ही,,, वह घबराते हुए बोली,,,)





अच्छा,,, ठीक है भैया तू दूर मत जा लेकिन मेरी तरफ मत देखना मुझे बहुत शर्म आती है,,,।

ठीक है नहीं देखुंगा तु जल्दी कर,,, मुतने में बहुत समय लगा रही है,,,।

(एक बार फिर से सूरज ने अपनी बहन पर शब्दों के बाण चलाया था,,, और यह बाण रानी को अपनी दोनों टांगों के बीच लगता हुआ महसूस हो रहा था क्योंकि अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच सुरसुराहट बढ़ने लगी थी,,,, इस बार वह अपने भाई से कुछ बोल नहीं पाई,,,, और अपने भाई से थोड़ी दूरी बनाकर अपने सलवार की डोरी को खोलने लगी यह देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगे क्योंकि,,, उसकी आंखों के सामने उसकी बहन उसकी जानकारी में ही अपने सलवार की डोरी खोलकर कुछ ही देर में अपनी नंगी गांड दिखाने वाली थी।

यह पल और भी ज्यादा अद्भुत और उत्तेजनात्मक होता है जब सामने वाले को पता हो और उसके सामने ही कपड़े उतारा जाए,,,, रानी का दिल तो जोरो से धड़क रहा था,,, एक अजीब सा एहसास उसके बदन को अपनी आगोश में ले रहा था वह जानती थी कि वह अपने भाई की आंखों के सामने क्या करने जा रही है लेकिन वह अपने आप को रोक भी नहीं सकती थी ना ही इनकार कर सकती थी क्योंकि वह मजबूर थी पेशाब की तीव्रता उसे मजबूर कर रही थी अपने भाई की आंखों के सामने ही पेशाब करने के लिए,,,, लेकिन जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था अपने भाई के सामने पेशाब करने में वहीं दूसरी तरफ उसकी उत्सुकता भी इस बात से और ज्यादा बढ़ती जा रही थी कि अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब करने में कैसा महसूस होता है।





वैसे तो वह अनजाने में अपने भाई के सामने पेशाब कर चुकी थी लेकिन वह समय कुछ और था वह अपने भाई को ठीक तरह से जानती नहीं थी उसके अंदर क्या चल रहा है इस बारे में उसे नहीं मालूम था,,, लेकिन वह धीरे-धीरे अपने भाई को समझने की वह समझ गई थी कि उसका भाई भी दूसरे गंदे लड़को की तरह हो चुका है जो किसी न किसी बहाने औरत के अंगों को देखने और उन्हें झांकने की कोशिश में लगे रहते थे लेकिन इससे वह परेशान नहीं थी बल्कि न जाने क्यों खुश थी। इसलिए वह भी इस अद्भुत अनुभव से गुजरना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि जब उसकी बुर से पेशाब की धार के साथ सिटी की आवाज निकलती है तब उसके भाई पर उसका कैसा प्रभाव पड़ता है। यही सब सो कर उसके मन की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

सलवार की डोरी उसके दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों में आ चुकी थी लेकिन फिर भी उसे खींचकर ढीली करने में वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,, वास्तव में एक भाई के सामने एक बहन का यही हाल होता है जब उसकी आंखों के सामने अपनी सलवार की डोरी खोलकर पेशाब करने पर मजबूर हो जाती,,, और यही कार्य तब और भी ज्यादा मादकता और मदहोशी का रूप धारण कर लेता जब दोनों के बीच में सारे आकर्षण के साथ-साथ शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तब यह उत्तेजना और आकर्षक और भी ज्यादा मदहोशी में बदल जाता,,,, लेकिन इससे अद्भुत अनुभव के लिए अभी दोनों एक कदम पीछे थे,,,, मंजिल अभी भी दूर और दोनों को नजर भी आ रही थी लेकिन यह सफर कितना लंबा चलता है यह दोनों को अंदाजा नहीं था।





कुछ समय बीतने के बाद जब सूरज ने देखा कि उसकी बहन सलवार की डोरी पर सिर्फ हाथ रखकर खड़ी है उसे खोल नहीं रही है तो वह बोला,,,,।

क्या कर रही है रानी कितना देर लगेगी सलवार खोलने में,,,,।

(उसकी बात सुनकर हैरान होते हुए रानी बोली,,,)

क्या भैया तुम मुझे देख रहे हो क्या,,,?

अरे देख नहीं रहा हूं लेकिन फिर भी इतना समय लग रहा है तो पता तो चल ही जाएगा ना,,,, जल्दी करो पूरी रात यही बीताओगी क्या,,,,!

(अपने भाई किस तरह की बातें सुनकर रानी के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, लेकिन करना तो था ही,,, इसलिए अपने मन को मजबूत करके,,, रानी अपनी सलवार की डोरी को खींचकर ढीली कर दी,,,, रानी के हाथों की हलचल पीछे खड़ा सूरज अच्छी तरह से देख रहा था और उसकी सरकार से उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि थोड़ी ही देर में,, उसकी बहन अपनी सलवार उतार कर उसे अपनी नंगी गांड दिखाएगी,,, सूरज की भी हालत खराब हो रही थी उसका भी दिल जोरो से धड़क रहा था और देखते ही देखते रानी अपनी सलवार को जो उसकी कमर से अभी भी कई हुई थी अपनी उंगली का सहारा लेकर उसे ढीली कर दी और अपनी हथेली में पकड़े हुए ही,,, उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,, रानी जो एक तरफ शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी वहीं दूसरी तरफ,, उसके मन में भी अपने भाई को अपनी नंगी गांड दिखाने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,, क्योंकि इस तरह के नजारे को देखने के बाद ही उसका भाई उसे आनंद देता था।





सलवार को दोनों हाथों में पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी सलवार को नीचे की तरफ सरकाने लगी और जैसे-जैसे उसकी सलवार नीचे जा रही थी वैसे-वैसे उसके नितंबों का उभार भी उजागर होता जा रहा था,,, और सूरज की हालत खराब होती जा रही थी देखते-देखते रानी अपनी सलवार को अपने घुटनों से खींच दी थी उसकी नंगी गांड एकदम से दिखने लगी थी अंधेरी रात में भी उसकी गोरी गोरी गांड चमक रही थी जिसे देखकर सूरज के मुंह में और उसके लंड में पानी आ रहा था,,, इतने से ही सूरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन भी उसकी हरकतों का आनंद लेती है इसीलिए उसे पक्का विश्वास था कि अगर वह अपनी बहन के साथ कुछ ऐसा वैसा करेगा तो उसकी बहन उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी बल्कि उसकी हरकतों का मजा लेगी यह विश्वास उसके मन में आते ही उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,‌

सलवार को घुटनों तक खींचकर रानी अपने भाई की तरफ देखे बिना ही बोली।

तुम मेरी तरफ देखा तो नहीं रहे हो ना भैया,,,।





नहीं बिल्कुल भी नहीं वैसे भी मैं तेरी गांड को पहले भी देख चुका हूं इसलिए अभी नहीं देख रहा हूं,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए एकदम बेशर्मी भरे लहजे में बोल रहा था ताकि उसके शब्दों का असर रानी पर पड़े और वाकई में सूरज के अश्लील शब्दों का प्रयोग रानी पर हथौड़े की तरह चल रहा था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और वह कुछ बोल नहीं पाई और धीरे से उसी तरह से बैठ गई,,, उसके और उसके भाई के बीच केवल तीन-चार कदमों की ही दूरी थी या यूं कह लों की उसका भाई ठीक उसके पीछे ही खड़ा था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण बैठते ही रानी के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम से फूट पड़ी और पेशाब की धार के साथ उसमें से एक अद्भुत सीटी की आवाज निकालने लगी जो कि तुरंत ही सूरज के कानों में मदहोशी का रस घोलने लगी उस ध्वनि को सुनकर सूरज की हालत खराब होने लगी वह उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगा,,, भले ही वह अपनी बहन से बोल रहा था कि वह उसकी तरफ नहीं देख रहा है लेकिन उसकी नजर एकदम बराबर उसकी गोलाकार नितंबों पर ही टिकी हुई थी जो की रात के अंधेरे में भी एकदम साफ दिखाई दे रही थी।





रानी भलभला कर पेशाब कर रही थी,,, वाकई में उसे बड़ी जोरों के पेशाब लगी थी,,,,, जहां एक तरफ पेशाब की ध्वनि और उसमें से निकल रही सिटी की आवाज को सुनकर सूरज अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था हमारी दूसरी तरफ रानी को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से एक ध्वनी निकल रही है जो उसके भाई को भी साफ सुनाई दे रही होगी और यही सोच कर वह शर्म से पानी पानी हो रही थी,,, रानी बहुत कोशिश की कि उसकी बुर से पेशाब की तीव्रता आराम से बाहर की तरफ निकले और सीटी की आवाज दब जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि यह सब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था वह इसीलिए उत्तेजना से कसमसा रही थी,,, वह अपने मन में यह सोचकर परेशान हो रही थी कि उसका भाई बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज सुनकर क्या सोच रहा होगा,,,,।





सूरज तो अपनी बहन की नंगी गांड देखकर पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था वह मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहा था बंद तो कर रहा था कि इसी समय चुप करो अपनी बहन की नंगी गांड पर चुंबनों की बौछार कर दें,,, लेकिन किसी तरह से अपने आप को रोक कर रखा था लेकिन अपनी बहन को पेशाब करता हुआ देखकर उसे भी बड़े चोरों की पेशाब लग गई थी लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था,,,, वह तुरंत अपने पजामे में से अपने मोटे-तगडे लंड को बाहर निकाल दिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,, उसे हाथ में पड़े हुए ही वह अपनी बहन से बोला।

वाह रानी तेरी गांड कितनी गोरी है और बेहद आकर्षक मेरा तो मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है इस पर से अपनी नजर हटाने को,,,(अपने भाई कि ईस तरह की बातें सुनकर रानी एकदम से शकपका गई,,,, उसकी हालत खराब हो रही है उसे समझ में आ गया था कि उसका भाई उसकी गांड की तरफ ही देख रहा है फिर भी वह थोड़ी हिम्मत जुटा कर नाराजगी जताते हुए बोली,,,,)

Rani peshaab karti huyi





यह क्या कर रहे हो भैया मैं तुम्हें बोली थी ना कि यहां मत देखना,,,,(अपने भाई की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)

अरे पगली इतना खूबसूरत नजारा बना कोई देखे बिना रह सकता है क्या मैं क्या मेरी जगह कोई और होता तो वह भी यही देखा सच में तेरी गांड बहुत खूबसूरत है,,,,,

भैया,,,(एकदम शरमाते हुए वह बोली अभी की वह बेठी हुई थी,,,, अपने भाई के मुंह से अपनी खूबसूरत गांड की तारीफ सुनकर वह मन ही मन शर्माने लगी थी,,,, हालांकि अभी भी उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार रह रहकर बाहर निकल रही थी,,, इस मौके को सूरज अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह बोला,,,।)

तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी बड़ी जोरों की पेशाब लग गई है,,,,,(सूरज अपने लंड को हिलता हुआ बोला,,,,, लेकिन पेशाब लगने वाली बात सुनकर रानी की दोनों टांगों के बीच के उस पतली दरार में हलचल सी मचने लगी थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और उसका भाई क्या करने वाला है यह भी उसे नहीं मालूम था देखते ही देखते सूरज अपने लंड को हिलता हुआ ठीक अपनी बहन के बगल में जाकर खड़ा हो गया रानी अपने भाई को अपने बगल में खड़ा देखा कर एकदम से परेशान हो गई,,, लेकिन अभी तक वह अपने भाई की तरफ देखी नहीं थी,,, उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे हिला रहा है,,,,, अपने भाई की हरकत को देखते हुए वह एकदम से शर्म से पानी पानी होते हुए दबे स्वर में बोली,,,)





यह क्या भैया थोड़ा दूर जाकर करो ना मेरे पास ही क्यों खड़े हो,,,।

क्योंकि तुझे देख कर ही मुझे पेशाब लगी है,,,,, देख तो सही इसकी हालत क्या हो गई है,,,,(सूरज इस तरह से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को हिलाते हुए बोला और उसकी बातें सुनकर रानी एक नजर अपने भाई की तरफ डाली तो वह देखते ही रह गई उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर अपने हाथ में लेकर हिला रहा है इस नजारे को देख कर रानी की हालत एकदम से खराब होने लगी है उसके बदन में उत्तेजनात्मक कंपन होने लगा वह एक टक अपने भाई के लंड को देखती ही रह गई,,, कुछ पल के लिए रानी को कुछ समझ में नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी आंखों के सामने उसका भाई अपना लंड हिला रहा है तो इस बात का अहसास होते ही वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, रानी की हालत को देखकर सूरज समझ गया था कि उसके मन में भी कुछ कुछ हो रहा है इसलिए वह उसे उकसाते हुए बोला,,,)





क्या हुआ शर्मा गई,,,, शर्माने से काम नहीं चलेगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए पेशाब करने लगा,,, उसके पेशाब की धार किया आवाज उसके कानों में एकदम साफ तरह से गूंज रही थी जिसे सुनकर वह एकदम से गनगना गई थी,,,, सांसों की गति एकदम भारी हो चली थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह समझ गई थी कि उसका भाई पूरी तरह से आज मनमानी करने पर उतारू हो चुका है लेकिन इस पर भी रानी को डर नहीं लग रहा था बल्कि उसका मन उत्साहित हुआ जा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी। क्या करे क्या ना करें, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उसे अपने घुटनों में कंपन महसूस हो रही थी उससे ठीक से बैठा नहीं जा रहा था‌ इस समय उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वैसे तो उसके मन में अपने भाई की हरकत को देखने की बहुत ही इच्छा हो रही थी लेकिन वह शर्म के मारे अपनी नजर को ऊपर उठा नहीं पा रही थी लेकिन तभी जैसे उसकी इस इच्छा की पूर्ति के लिए सूरज बोला,,,,।)





देखने के लिए मैं यह कर रहा हूं और तू है कि शर्म से नजर नीचे झुकाई है एक बार देख तो सही,, मुझे मालूम है कि तू इस नजारे को पहले कभी नहीं देखी होगी,,, अगर अच्छी भी होगी तो इतनी नजदीक से नहीं देखी होगी देख तो सही तेरी बुर से इतनी तेज धार नहीं निकलती जितना मेरे लंड से धार निकल रही है,,,(सूरज पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था और वैसे भी वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर मजा लेना है तो बेशर्म बनना पड़ेगा इसलिए इस तरह की बातें कर रहा था अपने मुंह से अपनी बहन के सामने लंड बुर जैसे शब्दों का प्रयोग करके वह उसकी भावनाओं को उकसाना चाहता था उसे उत्तेजित करना चाहता था और उसकी अवधारणा सही साबित हो रही थी अपने भाई के मुंह से लंड बुर जैसे शब्दों को सुनकर रानी की हालत एकदम खराब होने लगी उसके बाद में उत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिखने लगा वह इस बार अपने आप को अपने भाई की हरकत देखने से रोक नहीं पाई और तुरंत ही नजर उठा कर अपने भाई की तरफ देखने लगी,,,,।





और ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज ईसी पल का इंतजार कर रहा था जैसे ही उसकी बहन उसकी तरफ देखी वह अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा,,,, यह नजारा वास्तव में रानी के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, इस तरह के नजारे को उसने पहले कभी नहीं देखी थी,,,, इसलिए तो वह इस दृश्य को देखकर मदहोश हुइ जा रही थी,,, और होती भी कैसे नहीं इस तरह के नजारे को देख कर तो विवाहित औरत तीन चार बच्चों की मां अपना आपा खोदे मदहोश होकर उसके बदन से लिपट जाए,,, और यहां तो अभी-अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाली रानी थी इस तरह के नजर इस तरह की बातों को लेकर तो उसके मन में पहले से ही उत्सुकता बनी रहती थी इसलिए वह पूरी तरह से भाव विभोर हो चुकी थी।,, सूरज अपनी बहन की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बोला,,,,,)

देखने से ज्यादा पकड़ने में मजा आएगा एक बार पकड़ कर देख,,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में झनझनाहट बढ़ने लगी क्योंकि वह अभी यही चाहती थी क्योंकि इससे पहले भी अपने भाई के लैंड को पकड़ चुकी थी और वाकई में उसे पकड़ने में जिस तरह की उसे देना का एहसास उसे होता था वह बेहद आनंद आया था इसलिए वह अपने भाई की बात सुनकर अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी और अपना हाथ अपने भाई के लंड की तरफ आगे बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में दबोच ली ऐसा करने पर उसकी बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,, यह पाल रानी के लिए भी बेहद अद्भुत था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, उसकी पेशाब की धार एकदम से टूट चुकी थी रह-रह कर उसकी गुलाबी छेद में से पेशाब की बूंदे बाहर टपक जा रही थी,,,, लेकिन उसके भाई के लंड से अभी भी पेशाब की धार निकल रही थी हालांकि अब वह इतनी तेज नहीं थी फिर भी यह बेहद अद्भुत नजारा था,,,, इस बार फिर से सूरज अपनी बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,)





कैसा लग रहा है रानी,,,,,।

(अपने भाई के मुंह से अपना नाम सुनकर इस बार उसे ऐसा नहीं लगा कि वह उसका नाम लेकर बुला रहा है बल्कि उसे ऐसा लग रहा था कि जब मरद उत्तेजित अवस्था में हो जाते हैं तो शायद इसी तरह से अपने साथी को बुलाते हैं इसलिए उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन उसके चेहरे के हाव-भाव सब कुछ बता रहे थे कि इस समय उसे कैसा लग रहा था और सूरज को अपने लंड पर अपनी बहन की हथेलियों का कसाव भी बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था जिससे साफ साबित हो रहा था कि उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, इस अद्भुत आनंद के साथ ही सूरज की पेशाब कर चुका था लेकिन अब वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था इस समय उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी और पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था।

अपनी बहन की भावनाओं का लाभ उठाते हुए वह उसके कंधे को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा वह अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे वह भी नंगी है और उसका भी पजामा घुटनों तक है इसलिए वह तुरंत अपनी बहन को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों पर अपने होठ रखकर एक बार फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा,, ऐसा हुआ पहले भी कर चुका था लेकिन इस बार की क्रिया में बहुत ज्यादा बदलाव था क्योंकि कमर के नीचे से दोनों नंगे थे दोनों का खूबसूरत कोमल अंगूर सूरज का मर्दाना कड़क अंग एकदम से उजागर थे और रानी को अपनी बाहों में लेते हैं उसका मर्दाना अंग उसके कोमल पर रगड़ खाने लगा जिसका एहसास रानी को पूरी तरह से कम कर दिया था वह मदहोश हुए जा रही थी और कसमसा रही थी लेकिन इस कसमसाहट में अपने आप ही उसकी बुर सूरज के लंड की तरफ दबाव देने लगी थी जिसे सूरज अत्यधिक उत्तेजना और अपनी बहन के मन की बात को अच्छी तरह से समझने लगा था,,,,।

वह इस रगड़ को और ज्यादा बनाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रख दिया और उसे अपनी दोनों हथेलियां में कसकर दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींचने लगा ऐसा करने से उसके लंड का सुपाड़ा रानी के गुलाबी छेद के अग्रभाग पर और भी ज्यादा रगड़ और ठोकर मारने लगा,,,, सूरज के तरफ से यह हरकत रानी के लिए बेहद असहनीय होते जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसका भाई इस तरह की हरकत करके उसे पूरी तरह से मस्ती कर देगा उससे यह मस्ती बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, वह जानती थी कि समय वह दोनों कौन सी जगह पर है आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था और ऐसे में वह दोनों घर के बगल में ही जहां गाय भैंस बांधी जाती है उस जगह पर मदहोशी की सारी सीमाएं को पार कर रहे थे,,,, रानी को इस बात का अच्छी तरह से भान था कितनी रात को कोई देखेगा नहीं लेकिन एक बात की शंका उसके मन में थी कि अगर उसकी मां को पेशाब लग गई और वह भी बाहर ईसी जगह पर आ गई तो और दोनों को ईस हालत में देखेगी तो गजब हो जाएगा,,,,,, यही सोचकर वह धीरे से बोली,,,।

कोई आ जाएगा,,,।

(रानी का इतना कहना था कि उसके कहने के मतलब को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि वह भी पूरी तरह से तैयारी आगे बढ़ने के लिए इसलिए अंदर ही अंदर खुश होते हुए वह कुछ बोला नहीं,,,, तुरंत उसे अपनी गोद में उठा ले उसके हरकत को देखकर रानी एकदम से घबराते हुए बोली,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो नीचे उतरो में गिर जाऊंगी,,,,।

मैं तुम्हें गिरने दूंगा तब ना,,,,,(और ऐसा कहते हुए वहां रानी को गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा उसकी सलवार घुटनों तक थी वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी और वह खुद कमर के नीचे नंगा था उसका पजामा घुटनों में अटका हुआ था लेकिन वह जानता था कि अब जो कुछ भी करना है उसके लिए कपड़े उतारना ही होगा फिर पहनने की जरूरत ही क्या है और वैसे भी इतनी रात को कोई देखने वाला तो था नहीं इसलिए वह पूरी तरह से मस्ती में उसे गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा देखते देखते वह दरवाजे तक पहुंच चुका था और दरवाजा धीरे से खोलकर धीरे से उसे बंद भी कर दिया लेकिन इस दौरान उसने अपनी बहन को नीचे नहीं उतरा यही देखकर रानी एकदम गदगद हुए जा रही थी और देखते-देखते वह अपनी बहन के कमरे तक पहुंच गया,,,,, धीरे से कमरे के दरवाजे को धक्का देकर वह भी अपनी बहन को गोद में लिए हुए ही कमरे में प्रवेश कर गया उसकी बहन मारे शर्म से पानी पानी हो रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अब क्या होने वाला है इसलिए उसकी बोलती बंद हो चुकी थी लेकिन अंदर ही अंदर उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कमरे में पहुंचकर सूरज धीरे से उसे अपनी खोज से नीचे उतरा और दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगा दिया,,,)
 
अपनी बहन को आधी रात को घर के बाहर पेशाब करवाने के बाद वह उसे अपनी बाहों में लेकर पूरी तरह से गर्म कर चुका था अपने लंड की रगड़ को उसकी बुर पर उसे अच्छी तरह से महसूस करवा कर उसे पानी पानी कर दिया था,,,, अपने भाई की हरकत पर रानी भी मस्त हो चुकी थी मदहोश हो चुकी थी,,, उसकी भी उत्सुकता बढ़ गई थी इससे आगे बढ़ने के लिए,,, सूरज अपनी बहन के मन में क्या चल रहा है अच्छी तरह से समझ गया था उसका यह कहना कि कोई देख लेगा यह उसके लिए सारे दरवाजे खोल देने जैसे थे,,, रानी के मुंह से कही गए यह शब्द आमंत्रण पत्र था वह खुले तौर पर अपने मुंह से तो कह नहीं सकती थी कि हमें तैयार हूं उसके यह शब्द ही उसकी हामी के लिए काफी थे।





तभी तो सूरज मन ही मन बहुत खुश हो गया अपनी बहन के मुंह से यह सब सुनकर और उसे उसी अवस्था में अपनी गोद में उठा लिया जिस अवस्था में वहां पेशाब कर रही थी उसकी सलवार घुटनों में फंसी हुई थी और उसका खुद का पजामा घुटनों में अटका हुआ था,,, और उसी अवस्था में वह अपनी बहन को गोद में उठाए हुए घर में भी लेकर और उसके कमरे में भी ल गया,,, जिस तरह से सूरज उसे गोद में उठाया हुआ था और उसे लेकर चल रहा था यह देखकर रानी को अपने भाई की ताकत पर गर्व होने लगा था क्योंकि वह बड़े आराम से अपनी गोद में लेकर बेझिझक बिना लड़खड़ाए चल रहा था,,,, देखते देखते वह अपनी बहन के कमरे में आ चुका था और उसे धीरे से नीचे उतरकर दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगा दिया था,,, अपने भाई की ईस हरकत पर रानी का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि उसके द्वारा दरवाजा बंद करने का मतलब बिल्कुल साफ था कि अब वह उसके साथ मनमानी करने वाला है लेकिन इस मनमानी में रानी की खुद की हामी थी उसे भी अच्छा लग रहा था उसे भी मजा आ रहा था,,,,,,।





दोनों कमरे में खड़े थे दरवाजा बंद हो चुका था लालटेन कमरे में टंगी हुई थी लेकिन उसकी लौ बहुत कम थी जिससे कमरे में उजाला बहुत कम था,,,, यह देखकर सूरज बिना कुछ बोले अपना खुद का पजामा पूरी तरह से निकाल कर एक तरफ रख दिया,,, अपने भाई को इस तरह से अपना पैजामा निकाल कर नंगा होता हुआ देखकर रानी की हालत खराब होने लगी वह शर्म से पानी पानी होने लगी लेकिन इस नजारे को देखने से अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी लालटेन की धीमी रोशनी में उसे हल्का-हल्का दिखाई दे रहा था वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसके भाई का लंड पूरी तरह से खड़ा था और यह देखकर उसकी बुर में अजीब सी हलचल होने लगी थी,, अपना पजामा उतार कर वह कमर के नीचे से पूरी तरह से नंगा हो चुका था,,, वह कमरे के एक कोने में टंगी लालटेन की तरफ आगे बढ़ते हुए बोला,,,,।

रोशनी बहुत कम है मजा नहीं आएगा,,,,।

लेकिन भैया अगर रोशनी कर दोगे तो मुझे शर्मआएगी,,,।





अब शर्म की कोई जरूरत ही नहीं है अगर शर्मा करोगी तो मजा नहीं ले पाओगी और मजा लेने के लिए तुम्हें शर्म को दूर करना होगा,,,।

(इतना कहने के साथ ही सूरज लालटेन के पास पहुंच गया और उसकी रोशनी बढ़ाने लगा ताकि कमरे में तेरी रोशनी में वह अपनी बहन की नंगी जवान को अच्छी तरह से देख सके,,,, जैसे ही कमरे में रोशनी फैलने लगी वैसे ही रानी नीचे झुक कर अपनी सलवार को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर उठा दी क्योंकि उसे शर्म महसूस हो रही थी,,,, रोशनी बढ़ाने के बाद अपनी बहन की तरफ देखने लगा उसकी हरकत को देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगा और मुस्कुराते हुए उसकी तरफ आगे बढ़ने लगा उसका लंड चलते हुए झूल रहा था जो कि उसकी परछाई में उसका लंड और भी ज्यादा लंबा और मोटा दिखाई दे रहा था जिसे देखकर रानी की बुर कुलबुलाने लगी थी,,,, देखते देखते वह रानी के करीब पहुंच गया और उसके दोनों हाथों को पकड़ कर उसके हाथ से सलवार को छुड़ाते हुए बोला,,)





अगर शर्म करोगी तो मजा कैसे लोगी,,,,(और इतना कहने के साथ ही सलवार पर से उसके दोनों हाथ को हटा दिया और अगले ही पल उसकी सलवार फिर से उसके कदमों में जा गिरी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसे अपनी बहन को पूरी तरह से चुदवासी करना है तो पहले उसे पूरी तरह से गर्म करना होगा,,, जैसे खाने को पूरी तरह से गर्म करने के बाद ही स्वादिष्ट और मजा देता है इस तरह से औरत भी तभी ज्यादा मजा देती है जब वह खुद पूरी तरह से गर्म हो जाती है,,,, इस बात को जानते हुए वह अगले ही पर उसके दोनों हाथों को पकड़े हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी बाहों में भरकर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा एक बार फिर से रानी के बदन में गनगनाहट फैलने लगी,,, और इस दौरान एक बार फिर से उसके भाई का लंड उसकी बुर पर दस्तक देने लगा ठोकर मारने लगा,,, अपनी बुर पर अपने भाई के लंड को महसूस करते ही वह फिर से पानी पानी होने लगी,,,, सूरज अपनी बहन के लाल लाल होठों का रसपान किया जा रहा था और नीचे से अपनी हरकत को बढ़ावा दे रहा था वह पूरी तरह से अपनी बहन को मदहोश बना देना चाहता था ताकि वह खुद उसके लंड को पकड़ कर अपनी बुर पर रख दे,,,।





कमरे के एक कोने में चारपाई बिछी हुई थी उस पर नजर पडते ही,, सूरज कुछ देर तक अपनी बहन के लाल-लाल होठों का रसपान करने के बाद तेरे से अपने होठों को अलग किया और नीचे की तरफ झुकने लगा और उसकी सलवार को पकड़कर उसके पैरों में से बाहर निकालने लगा और उसका सहकार देते हुए बारी-बारी से रानी अपने पैरों को उठाकर अपने पैरों में से सलवार को निकलवाने में मदद करने लगी अगले ही पर सूरज अपनी बहन की सलवार को उतार कर एक तरफ रख दिया था कमर के नीचे अब वह भी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसके नंगे पन का एहसास ही सूरज की उत्तेजना को बढ़ा रहा था,, अपने भाई की आंखों के सामने एक बार फिर से नंगी हो जाने के बाद हालांकि वह भी पूरी तरह से नंगी नहीं हुई थी लेकिन वह जानती थी की औरत का कौन सा अंग उसके लिए बेशकीमती है अगर वह मर्द के सामने उस अंग को खोल दे तो उस समय उसकी क्या स्थिति होती है,,, इस समय वही स्थिति रानी के सामने भी उपस्थित हो चुकी थी और वह दोनों हाथों से अपनी बुर को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी यह देखकर उसका भाई मुस्कुराता हुआ,,, बोला,,,,।





अब ईसे छिपाने का कोई मतलब नहीं है,,,,(और इतना कहने के साथ है एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में भरकर धीरे-धीरे चलते हुए उसे चारपाई के करीब ले जाने लगा,,, सूरज के होंठ एक बार फिर से उसकी बहन के लाल लाल होठों का रस पान करने लगे थे जिसमें उसकी बहन अब खुद उसका साथ दे रही थी अपनी होठों को खोलकर अपने भाई के होठों को आमंत्रण दे रही थी दोनों एक दूसरे के होठों का रस पी रहे थे,,,, इस दौरान फिर से रानी अपनी बुर पर अपने भाई के लंड का रगड़ महसूस करने लगी,,,, धीरे-धीरे इसी अवस्था में सूरज अपनी बहन को चारपाई के करीब ले गया और उसे बाहों में भरे हुए ही उसे चारपाई पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया कुछ देर तक इसी तरह से अपनी बहन के होठों का रस पीने के बाद,, सूरज अपने हाथों से अपनी बहन की कमीज को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी बहन उसका सहकार देते हुए धीरे से अपने भजन को हल्का सा चारपाई से ऊपर उठे और अगले ही पल सूरज अपनी बहन के बदन पर से उसकी कमीज़ उतार कर एक तरफ फेंक दिया अब वह चारपाई पर पूरी तरह से नंगी थी ,,,,

अपनी बहन को नंगी कर देने के बाद,,,वह धीरे से अपनी हथेली को अपनी बहन की नारंगी जैसी चुची पर रख दिया,,, और उसे हल्के से दबाने लगा और जैसे ही रानी अपनी चूची को अपने भाई की हथेली में महसूस की एक बार फिर से उसका पूरा बदन गनगनाने लगा,,,,। उसकी सांस ऊपर नीचे होने लगे लेकिन वह पूरी तरह से अपने आप को अपने भाई के हाथों में सौंप दी थी,,, अपनी बहन की नारंगी जैसी नाजुक चुची को पाकर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने लगा था और वह देखते ही देखे अपनी बहन की चूची को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था उसके इस तरह से दबाने से रानी को दर्द महसूस हो रहा था लेकिन इस दर्द में एक अजीब सा मजा था जिसका एहसास भी उसे अच्छी तरह से हो रहा था इसलिए वह अपने भाई को रोक नहीं रही थी और अगले ही पर अपनी बहन की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए सूरज अपनी बहन की चूची को अपने मुंह में भर लिया और उसकी किशमिश के दाने को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,,।

यह एहसास रहने के लिए बेहद अद्भुत था वह पागल हुए जा रही थी,,,, उसका बदन कसमसा रहा था लेकिन वह अपने भाई के बदन के नीचे दबी हुई थी और उसके दोनों टांगों के बीच में उसका मोटा तगड़ा लंड बार-बार ठोकर मार रहा था जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी,,, लेकिन जब जब वह अपने भाई के मोटे तगड़े गरमा गरम सुपाड़े को अपनी बुर पर रगड़ता हुआ महसूस करती तब तब न जाने क्यों रानी का मन उसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए तड़प उठता था और यही तो सूरज चाहता था,,,, औरतों की उत्तेजना बढ़ाने में स्तन मर्दन एक अहम भूमिका निभाता है और इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था और इसीलिए तो अपनी बहन की नंगी जैसी चूचियों पर टूट पड़ा था एक हाथ से दबा रहा था और दूसरे चुची को मुंह में लेकर पी रहा था और यह क्रिया वह बारी-बारी कर रहा था,,,, कभी दाएं चुची को मुंह में लेता तो कभी बाएं,,,,, और इस क्रिया के दौरान उसका टनटनाया हुआ लंड रानी की बुर पर बार-बार दस्तक दे रहा था,,,, सूरज अपनी हरकतों से और अपने अनुभव से रानी को पूरी तरह से मदहोश कर रहा था उसे चुदवासी बना रहा था,,,, और उसकी यह हरकत रानी को पूरी तरह से दिवस कर रही थी मचलने के लिए जिसके चलते वहां उत्तेजना बस जो कुछ देर पहले अपनी बुर को शर्म के मारे छुपाने की कोशिश कर रही थी और अब धीरे से अपनी टांगों को खोल रही थी,,,,।

रानी अपनी दोनों टांगों को हल्के से खोल चुकी थी और सूरज उसकी दोनों टांगों के बीच उसके ऊपर लेटा हुआ था और उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसके गुलाबी छेद के ऊपर किसी ढक्कन की तरह जम गया था यह एहसास सूरज के लिए तो मदहोश कर देने वाला ही था लेकिन रानी को पूरी तरह से पानी पानी कर रहा था अपनी बर के ऊपर मोटे तगड़े लंड की गरमाहट को पकड़ उसके अंदर का लव पिघल कर बाहर आ रहा था,,,, मदहोशी में उसकी आंखें बंद हो चली थी लेकिन वह अपनी आंखों को हल्के से खोलकर अपने भाई की हरकत को देख रही थी उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसका भाई एक हाथ से उसकी चूची को दबाता हुआ दूसरे च को मुंह में लेकर पी रहा था यह उसके लिए बेहद शर्म से पानी पानी कर देने वाला था क्योंकि इस बारे में कभी वह सोची ही नहीं थी कि उसके साथ कभी ऐसा हो सकता है और यह क्रिया करने वाला कोई गैर नहीं बल्कि उसका खुद का बड़ा भाई होगा।

इस खेल की अहमियत और इसके आनंद को रानी धीरे-धीरे समझ गई थी तभी तो अपने आप को वह अपने भाई के हाथों में सौंप दी थी वह जानती थी कि उसका भाई उसके खूबसूरत बदन के साथ उचित न्याय कर पाएगा,,,,,,, रानी का बदन कसमसा रहा था और उसकी कसमसाहट के साथ उसकी चारपाई भी चरर मरर कर रही थी,,, सूरज तो बहुत खुश नजर आ रहा था,,, उसकी प्रसन्नता और उसकी उत्तेजना का कोई ठिकाना न था मुखिया की लड़की के साथ मौज मस्ती करने के बाद अपनी बहन की नंगी गांड देखकर जिस तरह का उत्तेजना का अनुभव किया था,,, वह समझ गया था कि मैं एक दिन वह अपनी बहन को भी मुखिया की लड़की की तरह चोदने में कामयाब हो जाएगा लेकिन इतनी जल्दी यह सब होगा यह नहीं मालूम था,,,, उसे नहीं मालूम था कि उसकी बहन का उसे इतना सहकार मिलेगा और वह इतनी जल्दी मान जाएगी,,, सबकुछ सपने जैसा लग रहा था,,,, और इस सपने की दुनिया में सूरज पूरी तरह से खो जाना चाहता था।

रानी की दोनों चूचियों को चुस चुस कर लाल कर चुका था और उत्तेजना के मारे उसके आकार में थोड़ी वृद्धि हो चुकी थी,,,,, रानी भी अपने भाई की ईस हरकत पर पूरी तरह से वशीभूत हो चुकी थी,,, उसका दिन जोरों से धड़क रहा था बदन में उत्तेजना भरी कंपन थी,, अपने ही कमरे में वह अपने भाई के साथ नग्न अवस्था में थी,,, मन में इस बात का डर था कि कहीं इस बारे में उसकी मां को पता ना चल जाए लेकिन यह भी जानती थी कि सुबह होने में अभी काफी समय बाकी था अभी तो रात गहरी हो रही थी और वह अच्छी तरह से जानती थी कि इस दौरान उसका भाई जो पाठ उसे पढ़ाना चाहता है,,, वह पाठ उसे कंठस्थ हो जाएगा,,,, अपने भाई की हरकत का मजा देते हुए रानी अपनी बाहों का घेरा अपने आप ही उसके गले में बना दी थी जो कि इस बात का सबुत था कि उसके भाई की हरकत से उसे भी संपूर्ण आनंद की प्राप्ति हो रही है थी।

आधी रात का समय हो चुका था भाई बहन दोनों एक ही कमरे में जवानी का मजा लूट रहे थे इस समय उन दोनों को रोकने वाला वहां कोई नहीं था क्योंकि सुनैना अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि ठीक उसके बगल के कमरे में उसकी बेटी अपने ही भाई के साथ रंगरेलियां मना रही है,,,, गर्मी का महीना होने की वजह से,,,, गर्मी पहले से ही बहाल कर रही थी ऊपर से दो जवान बदनकी गर्मी दोनों की हालत और ज्यादा खराबकर रही थी,,,, सूरज पूरी तरह से अपनी बाहों में लेकर अपनी बहन की दोनों चुचियों का मजा लूट रहा था,,, रह रहकर रानी के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकल जा रही थी और यह कैसे हो जा रहा है यह खुद उसे नहीं मालूम हो रहा था,,, लेकिन आनंद की कोई सीमा नहीं थी वह पूरी तरह से मदहोश हुई जा रही थी उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,,।

काफी देर तक अपनी बहन की चूचियों से खेलने के बाद धीरे से अपने मुंह में से रानी की चूचियों को अलग करते हुए वह अपनी उंगली और अंगूठे के बीच रानी के चूची के किशमिश के दाने को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ खींचते हुए बोला,,,

देखो रानी तुम्हारा छुहारा कितना कड़क हो गया है,,,.

(अपने भाई की बातें सुनकर वह शर्मा कर अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा दे यह देखकर उसका भाई मुस्कुराता हुआ बोला)

शर्माने से काम नहीं चलेगा,,,(इतना क्या करवा अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपनी हथेली में लेकर उसे फिर से अपनी तरफ घूम लिया और बोला)

मेरी एक हरकत को तुम्हें अपनी आंखों से देखना होगा तभी तुम ज्यादा मजा ले पाओगी,, वरना तुम्हें पता कैसे चलेगा कि मैं तुमसे कितना प्यार किया हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज फिर से उसके छुहारे को अपनी उंगली में दबाकर ऊपर की तरफ खींचने लगा यह देखकर रानी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वैसे तो वह शर्म के मारे अपनी नजर को घूम लेना चाहती थी लेकिन उसके भाई ने उसे हिदायत दिया था कि उसकी हर एक हरकत को अपनी आंखों से देखोगी तभी मजा आएगा और यही सोच कर वह अपनी नजर को घुमा नहीं पा रही थी और वाकई में इस नजारे को देखने में उसे भी आनंद आ रहा था,,,, वह अपनी गोल-गोल चूचियों को देख रही थी जिसका आकार थोड़ा सा बढ़ चुका था यह उसके लिए हैरत की बात थी वह देख रही थी कि उसका भाई उसकी चूची से कैसे खेल रहा है आपसे पहले उसे नहीं मालूम था कि एक मर्द औरत की चूची से इतना खेलता है वरना अब तक वह च केवल उसके बदन की खूबसूरती ही बनी थी लेकिन पहली बार उसे पता चल रहा था कि मर्द चुची को पाकर कितना मगन हो जाता है,,,,

सूरज इस क्रिया को बार-बार दोहरा रहा था उसकी दोनों चूचियो के साथ उसे हल्का सा दर्द हो रहा था लेकिन दर्द से ज्यादा उसे मजा आ रहा था,,,और ईस, मजे को पाने के लिए वह इस समय कोई भी कीमत अदा करने के लिए तैयार थी,,, उत्तेजना के मारे रानी का अपनी सांसों की गति पर बिल्कुल भी काबू नहीं था वह कभी तेज चलने लगती तो कभी गहरी चलने लगती थी जिसके साथ उसके चुचियों का उठाव और बैठाव उसके हिसाब से हो रहा था,,,,। एक तरफ सूरज की हरकतें और दूसरी तरफ नीचे उसके लंड का खुरापात रानी के लिए असहनीय होता जा रहा था लंड की हरकत की वजह से तो उसकी बुर पानी पर पानी छोड़ रही थी। सूरज अपनी स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था उसका लंड बावला हो रहा था उसकी बहन की बुर में घुसने के लिए लेकिन वह जानता था की पूरी तरह से अपनी बहन को गर्म कर लेने के बाद ही वह आगे बढ़ सकता है और वैसे भी उसकी बहन पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी लेकिन वह जानता था कि उसके लंड की मोटाई और लंबाई उसकी बहन की गुलाबी उचित नहीं थी,,,, इसके लिए उसे अभी थोड़ा और समय व्यतीत करना था उसकी बुर को अपने लंड के लिए उचित आकार में लाना था,,,, और फिर वह धीरे से अपनी बहन के ऊपर से उठा और उसके बगल में लेट गया और उसकी नंगी चूचियों पर अपनी हथेली को घुमाने लगा,,,,।

रानी को मर्द की इस तरह की क्रियाओं के बारे में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था,,,, वह नहीं जानती थी कि संभोग के पहले मर्द इसी तरह से कामक्रीड़ा का सुख भोगते हैं,,, उसे ऐसा ही लगता था कि मर्द केवल औरत को नंगी करके उसकी बुर में लंड डालकर अंदर बाहर करके मजा लेते हैं लेकिन आज उसे एहसास हो रहा था कि सुख को प्राप्त करने का और अपने साथी को सुख देने का और भी कई तरीका है संभोग से पहले और इस क्रिया का वह भी पूरा आनंद ले रही थी,,,, सूरज धीरे-धीरे अपनी हथेलियां को उसकी चिकने पेट पर घूम रहा था,,, और धीरे-धीरे उसकी हथेलियां रानी के नाभि के नीचे की तरफ जा रही थी जहां से उसकी उंगलियों से ज्यादा दूर नहीं थी लेकिन इसका एहसास उसे अपनी बुर में हो रहा था उसे अपनी बुर में सनसनाहट होता हुआ महसूस हो रहा था,,, जिससे उसका बदन कसमसा रहा था,,, आगे बढ़ने से पहले वह रानी की राय जान लेना चाहता था वैसे तो उसे पता नहीं था कि उसकी हर कसम का मजा उसकी बहन बराबर ले रही थी और उसे मजा भी आ रहा था लेकिन फिर भी इसके लिए के दौरान बातचीत करने में सूरज को ज्यादा मजा आता था इसलिए वह अपनी हथेलियां को एकदम से अपनी बहन की बुर के एकदम करीब ले जाते हुए बोला,,,,,।

अब कैसा लग रहा है रानी,,,,,।

बहुत बढ़िया,,,,(इतना कहकर वह गहरी सांस लेने लगी और हल्के से अपनी दोनों टांगों को आपस में सटाने लगी,,, यह देखकर उसका भाई मुस्कुराते हुए बोला,,,,)

बढ़िया लग रहा है तो अपनी टांगों को,,,(उसकी जांघों के बीच अपनी हथेली डालकर उसे खोलते हुए) सटा क्यों रही हो इस खोलो तब ज्यादा मजा आएगा,,,,,(इतना कहने के साथ है अपनी हथेली को उसकी दहेज की हुई बुर पर रख दिया जो की पानी से पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी यह देखकर अपनी हथेली को अपनी बहन के बुरे पर से अलग करते हुए उसे हथेली को अपनी बहन की आंखों के सामने लाते हुए बोला) देखो तो सही तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ रही है लगता है लंड लेने के लिए मचल रही है,,,,(सूरज पूरी तरह से अपनी बहन के सामने बेशर्म हो जाना चाहता था और उसकी इस तरह की बेशरम में भरी बातें सुनकर रानी सर में से एक बार फिर से अपनी आंखों को बंद करके लेकिन सूरज बिना कुछ बोले फिर से अपनी हथेली को उसकी बुर पर रख दिया और अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर एक बार फिर से उसके होठों का रस पीना शुरू कर दिया और अपनी हथेली को उसकी बुर पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,,.

रानी के लिए यह सूरज की तरफ से दोबारा हमला था नीचे से भी और ऊपर से भी ऊपर से वह उसके होंठों का रसपान कर रहा था और नीचे से वह अपनी हथेली उसकी बुर पर रगड़ रगड़ कर उसका पानी निकाल रहा था,,,, सूरज औरतों की संगत में पूरी तरह से काम कला हमें पारंगत हो चुका था,,, उसे अपने आप पर पूरा विश्वास था कि वह किसी भी औरत को संतुष्ट करने में पूरी तरह से कामयाब हो जाएगा और वाकई में ऐसा होता भी था उसे अपनी मर्दाना ताकत पर पूरा भरोसा था,,,, अपनी बहन के होठों का रसपान करते हुए वह जोर-जोर से अपनी हथेली को अपनी बहन की बुर पर रगड़ रहा था,,,, और वाकई में उसे इस बात का एहसास भी हो रहा था कि उसकी बहन की बुर कुछ ज्यादा ही गर्म हो रही थी,,,, इस क्रिया के दौरान अपनी बहन की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा देना चाहता था और इसलिए वह उसके होंठों का रस पीते हुए अपनी हथेली को उसकी बुर पर रगड़ते हुए दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ लिया वह शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद किए हुए थे इसलिए उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई उसका हाथ पकड़ कर क्या करेगा लेकिन अगले ही पर सूरज उसकी हथेली को अपनी हथेली में लेकर उसे सीधा अपने लंड पर रख दिया जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर तप रहा था,,,,।

अपने भाई के लंड को अपनी हथेली में महसूस करके वह एकदम से मस्त हो गई लेकिन डर के मारे वह अपनी हथेली को तुरंत अपने भाई के लंड पर से हटा दी,,,, लेकिन सूरज फिर से उसकी हथेली को अपनी हथेली में लेकर अपने लंड पर रख दिया और उसकी हथेली को अपनी हथेली में दबोच कर अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,, अब रानी हटाना भी चाहती तो उसका भाई ऐसा करने नहीं दैता,,, लेकिन थोड़ी ही देर में रानी का खुद से मन नहीं कर रहा था अपने भाई के लंड पर से अपनी हथेली को हटा ले,,, वह पूरी तरह से गर्म होती चली जा रही थी सूरज इस तरह से अपनी बहन की हथेली को अपनी हथेली में लेकर अपने लंड पर रखकर उसे ऊपर नीचे कर रहा था लंड की गर्मी रानी अपनी हथेली में महसूस करके अपनी बुर की गुलाबी छेद से मदन रस बहा रही थी,,, इस क्रिया को बार-बार दोहराते हुए रानी के होठों पर से अपने होठों को हटाकर सूरज मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,।

अब कैसा लग रहा है रानी लंड को मुठीयाने में,,,

ओहहहहह भाई,,, ऐसा लग रहा है कि कोई लोहे का गरम रोड मेरे हाथ में दे दिया हो,,,।

क्या सच में ज्यादा गर्म है,,,,।

ओर क्या बहुत ज्यादा गर्म है,,,।

इसका गर्म रहना भी ज्यादा जरूरी है गर्म रहेगा तभी तो तुम्हारी बुर में जाकर तुम्हारे लावा को पिघलाएगा,,,,।

धत्,,,, तुम तो भैया एकदम बेशर्म हो गए हो,,,(सूरज की बात सुनकर एकदम से शरमाते हुए बोली)

अरे बुद्धु अगर मैं बेशर्म नहीं होता तो क्या हम दोनों इस तरह से मजा ले पाते,,,, और अच्छा हुआ कि मैं बेशर्म हूं वरना तु नहीं जानती कि तू इतनी खूबसूरत है कि गांव का कोई लड़का तुझे प्यार के जाल में फंसा कर तेरे साथ यह सब करता,,,(रानी की पर को हथेली से मसलते हुए वह बोला,,,)

धत् मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं,,,(रानी इतराते हुए बोली)

वह तो मैं जानता हूं कि तु दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है लेकिन जो हरकत में तेरे साथ कर रहा हूं,,, उसे हरकत का आनंद किसी भी औरत को पागल बना देता है और वह विवस हो जाती है उस मर्द के साथ मजा लेने के लिए,,,, अच्छा यह बता क्या तूने कभी सोची थी कि मैं तेरे साथ यह सब करूंगा,,।

बिल्कुल भी नहीं, (बुर मर्दन की वजह से मदहोश होते हुए बोली,,,)

मैं भी तेरे साथ यह सब नहीं करता अगर मैं तेरी असली खूबसूरती से वाकिफ न होता तो मैं तुझे एक बार पेशाब करते हुए देखा था और तेरी नंगी गांड देखकर तुरंत मेरा लंड खड़ा हो गया था उसे दिन से मैं तेरे बारे में ही सोचता आ रहा हूं और जंगल में नहाते समय जब तू अपने सारे कपड़े उतार कर तालाब में उतरी थी तभी मेरा मन तुझे चोदने के लिए तड़प रहा था,,,।

क्या सच में तुम मेरे पीछे पहले से पड़े हो,,,(अपने भाई की बात सुनकर हैरान होते हुए रानी बोली)

हां हां,,, मैं बहुत पहले से ही तेरे पीछे पड़ा हूं मैं जानता हूं कि तू पूरी तरह से जवान हो चुकी है तेरी गांड का उभार मुझे पागल बना देती है,,,, इसीलिए तो मैं तुझे चोदना चाहता हूं,,,,,।

(बार-बार अपने भाई के मुंह से चोदने शब्द सुनकर रानी शर्म और उत्तेजना के मारे पानी पानी हुई जा रही थी,,, अपने भाई की बात सुनकर मदहोश हुई जा रही और इस बात से और ज्यादा उत्सुक थी कि उसका भाई कुछ ही देर में उसे चोदने वाला है,,,, वह देखना चाहती थी महसूस करना चाहती थी की चुदाई कैसे होती है कैसा महसूस होता है कैसा लगता है,,,, अपने भाई की बात सुनकर वहां शंका जताते हुए बोली,,,)

लेकिन भैया कहीं मां को पता चल गया तो,,,!

कौन बताएगा मां को तो बताइए कि मैं बताऊंगा घर के अंदर चार दिवारी के अंदर क्या हो रहा है यह कैसे पता चलेगा जब तक बताया नहीं जाएगा और ना तो मैं बताने वाला हूं ना तो अपनी चुदाई की कहानी मां से बताएगी इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत कर बस जवानी का मजा लुट,,,,,आज मैं तुझे ऐसा मजा दूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेगी और बार-बार मेरे लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठेगी,,,,(अपने भाई की इस तरह की बातें सुनकर एक बार फिर से रानी शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अब देख मैं तुझे कैसे मजा देता हूं....

इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी जगह से उठकर चारपाई पर बैठ गया और अपनी बहन की दोनों टांगों को दोनों हाथों से खोलते हुए वह टांगों के बीच आ गया,,, उसकी बहन का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि अब उसका भाई अपने लंड को उसकी बुर में डालेगा,,,, लेकिन औरतों की संगत में उनकी चुदाई करके सूरज अच्छी तरह से जानता था की कब क्या करना है और वह अभी जानता था कि उसकी बहन का यह पहला संभोग है उसके बुरे का छेद अभी छोटा है उसे उसके लंड के लायक बनाना होगा इसलिए वह धीरे से अपनी बहन की जांघो को दोनों हाथों से पकड़कर,, उसे थोड़ा सा हाल कैसे ऊपर की तरफ उठाया और उसे एक दूसरे के विरुद्ध दिशा में खोल दिया जिससे उसकी गुलाबी बुर एकदम से उभर कर सूरज की आंखों के सामने दिखाई देने लगी,,, अपनी बहन की पनियाई बुर देखकर सूरज के मुंह में पानी आने लगा और उसने बिल्कुल भी देर नहीं किया अपनी बहन की बुर से अपने होठों को लगाने में,,,,।

लेकिन अपने भाई कि ईस क्रिया पर रानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और हैरान हो गई और वह शर्म के मारे अपने बदन को ऊपर की तरफ खींचने लगी लेकिन तभी उसका भाई उसकी कमर पकड़ कर उसे एकदम से स्थिर कर दिया था रानी कुछ बोलना चाहती थी लेकिन कुछ ही पल में सूरज अपनी जीभ से उसे पूरी तरह से पागल बनाने लगा हुआ मदहोश होने लगी और कुछ बोल नहीं पाई अपने भाई की हरकत को देखकर उसके मन में यही सवाल उठ रहे थे कि एक मर्द एक औरत की बुर को अपने होठों से कैसे लगा सकता है,,, यह उसके लिए हैरान का देने वाली बात थी ,,, लेकिन इस बात को वह नहीं जानती थी की मर्द को औरत की बुर चाटने में कितना मजा आता है,,, यह सब रानी के साथ पहली बार हो रहा था इसलिए वह हैरान हो चुकी थी जैसा कि सूरज भी पहली बार मुखिया की बीवी की बुर चाटने मैं थोड़ा हैरान हो गया था क्योंकि उसे भी नहीं मालूम था कि औरत की बुर जाता जाता है लेकिन मुखिया की बीवी जोर देते हुए उसे बुर चाटने के लिए मजबूर कर दी थी और थोड़ी ही देर बाद उसे इस क्रिया में इतना आनंद आने लगा कि यह उसकी आदत बन चुकी थी,,,,,।

लेकिन रानी खामोश हो चुकी थी वह अपने भाई को रोकना चाहती थी उसे ऐसा करने नहीं देना चाहती थी,,,, लेकिन उसका भाई सूरज अपनी जीभ की कला दिखाते हुए अपनी अद्भुत कार्य शैली को दिखाते हुए रानी का मुंह बंद कर दिया था उसकी बोलती बंद कर दिया था अब रानी कुछ भी पूछने लायक नहीं थी क्योंकि उसे भी इस क्रिया में इतना मजा आ रहा था कि वह बात नहीं सकती थी और मदहोशी में अपनी आंखों को बंद कर दी थी सूरज पागलों की तरह अपनी बहन की बुर की मलाई चाट रहा था,,,, उसकी बुर एकदम लाल लाल हो चुकी थी उत्तेजना से फुल कर कचोरी हो गई थी उसमें से मदन रस लगातार बह रहा था जिसकी हर एक बूंद को सूरज अपनी जीभ से चाट कर अपने गले के अंदर गटक रहा था,,,।

रानी की मदहोशी उसे पागल बना रही थी वह तड़प रही थी उसकी तड़प को बढ़ाते हुए सूरज अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे गोल-गोल घूमाना शुरू कर दिया था और इस क्रिया को करने में सूरज को जितना मजा आ रहा था उससे ज्यादा मजा रानी को आ रहा था,,, रानी पागल हो जा रही थी उसे अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह चारपाई पर बीछी चादर को अपने दोनों मुट्ठी में दबोच कर अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी,,,, और सूरज था कि अपनी ईस हरकत से उसे चुदवासी तो बना ही रहा था और अपने लिए जुगाड़ भी बना रहा था अपने लंड के लिए जगह बना रहा था। वह रानी की बुर चाट रहा था और उसमें उंगली डालकर उसे गोल-गोल घुमा भी रहा था,,, यह पल यह उत्तेजना रानी के लिए असहनीय था वह पागल हो जा रही थी वह किसी भी तरह से अपनी उत्तेजना पर काबू कर पाने में नाकाम साबित हो रही थी वह बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी जिसे सूरज अपने दोनों हाथों से उसकी कमर दबोच कर उसे स्थिर किए हुए था वह अपनी बहन की स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसे मोटे तगड़े बड़े लंड की जरूरत है लेकिन उसकी बुर में घुसने के लिए जगह भी तो बनाना जरूरी था।

जब सूरज ने देखा तो उसकी बहन पूरी तरह से व्याकुल में जा रही है तो वह धीरे से अपनी दूसरी उंगली भी अपनी बहन की बुर में डाल दिया और उसे गोल-गोल घूमाने लगा,,, इस क्रिया से रानी की तड़प और ज्यादा बढ़ने लगी वह पागल होने लगी वह मचलने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसके साथ-साथ उसकी नंगी जैसी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे कभी कभार अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज उसे दबोच ले रहा था,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी उंगलियों को गोल-गोल बुर में घूमाता रहा और अपने लंड के लिए जगह बनाता रहा,,,, अपनी बहन की तड़प और लंड लेने की ललक को देखकर सूरज समझ गया था कि अब यह लंड लेने लायक बिल्कुल तैयार हो चुकी है,, इसलिए धीरे से अपने होठों को अपनी बहन की बुर पर से हटाया और गहरी सांस लेते हुए रानी की तरफ देखने लगा उसके होठों से उसकी बुर से निकला हुआ मदन ट्रस्ट पक रहा था जिसे देखकर रानी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी और सूरज मुस्कुराते हुए बोला।)

रानी देख तेरी बुर का पानी आज तूने मेरी प्यास बुझा दी है,,,, कोई से भी ज्यादा मीठा तेरी बुर का पानी है,,,,,(सूरज किस तरह की गंदी बातें रानी के कानों में रस घोल रही थी लेकिन,,, अपने भाई की बातों को सुन करो शर्म से लज्जित भी हो रही थी,,,, क्योंकि वह कभी सोच ही नहीं थी कि उसका भाई उसके साथ इस तरह की हरकत करेगा इस तरह की बातें करेगा यह सब कुछ उसके लिए बिल्कुल नया सा था लेकिन इस नएपन में उसे आनंद ही आनंद दिखाई दे रहा था जिसे प्राप्त करने के लिए वह खुद तड़प रही थी,,,,,, सूरज बहुत उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था वह रानी की दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ चुका था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था जिसे वह अपने हाथ में पकड़ कर हिला रहा था,,,,, सूरज के मन में कुछ और चल रहा था और रानी के मन में कुछ और चल रहा था रानी सोच रही थी कि अब उसका भाई अपने लंड को उसकी बुर में डालेगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था सूरज अभी कुछ और करना चाहता था इसलिए घुटनों के बाल ही वह चलते हुए अपनी बहन की कमर के ईर्द गिर्द घुटना रखकर आगे बढ़ने लगा रानी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसका लहराता हुआ लंड लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, जिसे देखकर उसका दिल तो धड़क ही रहा था साथ में उसकी बुर भी फुदक रही थी,,,।

देखते ही देखते सूरज घुटनों के ऊपर उसकी छाती के ईर्द गिर्द घुटना रखते हुए उसके बेहद करीब पहुंच गया था,,, अपनी आंखों के सामने अपने भाई के खडे लंड को देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा तो कि उसका भाई क्या करने वाला,,,, लेकिन अगले ही पर अच्छी तरह से समझ गई उसका भाई क्या करना चाहता है क्योंकि अगले ही पल उसका भाई अपने हाथ में अपने लंड को पकड़ कर उसके सुपाडे को उसके होठो से सटाने लगा,,, यह देखकर रानी थोड़ा घबरा गई और अपने चेहरे को दूसरी तरफ घुमा दी उसके इस व्यवहार पर सूरज बोला,,,,)

क्या हुआ,,,?

यह क्या कर रहे हो भैया,,,,?

अरे तुझे खुश कर रहा हूं रानी बहुत मजा आएगा एक बार इसे अपने मुंह में लेकर चुस इतना मजा आएगा कि पूछो मत,,,,।

नहीं नहीं मुझे अच्छा नहीं लग रहा है इसमें से तो पेशाब करते हो,,,,।

अरे पगली तो क्या हुआ तू भी तो बुर में से पेशाब करती है फिर भी तो मैंने उसे होठों से लगाकर चाटा,,,,, और तुझे भी तो मजा आया अरे ऐसे ही तो मर्द औरत के साथ प्यार करता है और औरत मर्द के साथ प्यार करती है यही तो प्यार जताने का तरीका है,,,,,।

नहीं मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है,,,,

अरे इसमेंअजीब क्या है,,,(दोनों हाथों से रानी के खूबसूरत चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घूमाते हुए,,,) देखना कितना मजा आएगा बस एक बार अपना होठ खोल दे,,,(इतना कहकर सूरज खुद ही अपने लंड को पकड़ कर उसके मोटे सुपाड़े को अपनी बहन के होठों पर रगड़ने लगा,, सुपाड़े की गर्माहट और उसमें से उठ रही मादक खुशबू रानी को मजबूर कर दिया अपने होठों को खोलने के लिए और वहां अपनी होठों को खोलकर हल्के से उसे अपने होठो के बीच रख दी,,,, और इसी पल का बड़ी बेसब्री से सूरज इंतजार कर रहा था,,, अपनी बहन के होठों को खुलते ही सुरज तुरंत अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया देखते ही देखते सूरज का आधा लंड रानी के मुंह में चला गया,,,, रानी को थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन अपने भाई की आग्रह पर धीरे-धीरे उस पर अपनी जीभ घूमाने लगी और थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा,,,, और देखते-देखते वह अपने होठों को लंड की सतह पर दबोच कर धीरे-धीरे उसे अंदर की तरफ लेने लगी और फिर बाहर करने के लिए ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, सूरज भी यह देख कर बहुत खुश हो रहा था,,,, रानी के हाथों में तो जैसे कोई खिलौना आ गया हो इस तरह से वह मस्त होकर खेल रही थी उसे चुस रही थी।

रानी की मदहोशी सूरज के हौसलों को बढ़ा रही थी सूरज होने अपनी कमर पर के पीछे करके हिला रहा था एक तरह से वह रानी की बुर से पहले उसके मुंह को ही चोद रहा था,, सूरज की उत्तेजना बढ़ने लगी थी,,वह रह रहकर कभी-कभी अपने लंड को पूरी तरह से उसके गले तक उतार देता और फिर उसे वापस खींच लेता था सूरज की हरकत पर रानी के सांस ऊपर नीचे हो जाती थी लेकिन उसे बड़ा अच्छा लग रहा था लेकिन अब समय आ गया कहां से लेकर खेलने का इसलिए थोड़ी देर और वह अपनी कमर हिलाने के बाद धीरे से अपने लंड को रानी के मुंह में से बाहर निकाल लिया,,,,।

आप सूरज पूरी तरह से तैयार था अपनी बहन को छोड़ने के लिए वह धीरे से अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बना लिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर उसकी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया,,,,, रानी अपने भाई की हरकत को देखकर गदगद हुए जा रही थी क्योंकि कुछ ही देर में वह जानती थी कि उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई नापने वाला है,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है कैसे आगे बढ़ाना है वह अपनी बहन के गुलाबी छेद और अपने लंड की मोटाई को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि शुरू-शुरू में उसकी बहन को थोड़ी दिक्कत होगी लेकिन इसके बाद वह बहुत मजा लुटेगी,,,, देखते ही देखते सूरज अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया था,,,, रानी की तरफ देखते हुए वह बोला,,,,)

अब तैयार है ना रानी,,,,,(जवाब में रानी कुछ बोली नहीं बस शर्मा गई,,,, और सूरज ढेर सारा थुक अपनी बहन की बुर पर गिरा दिया और उसे अपने हाथों से और भी ज्यादा चिपचिपा और गिला करने लगा और अपने लंड पर भी लगा दिया ताकि अंदर जाने में आराम रहे,,,,, उत्तेजना के मारे रानी की सांस बहुत गहरी चल रही थी लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, सूरज अपने लंड को पकड़ कर उसके मोटे से बड़े को अपनी बहन के छोटे से छेद पर रख दिया,,,, अपने भाई के लंड के सुपाड़े की गर्माहट अपनी बुर पर पाकर वह मदहोश होने लगी और उसकी बुर मदन रस बहाने लगी,,, सूरज गहरी सांस लेकर अपने लंड की सुपाड़े अपनी बहन की बुर के छेद में डालना शुरू कर दिया,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसका सुपाड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा है लेकिन एक बार यह सुपर अंदर घुस गया तो पूरा लंड आराम से घुस जाएगा,,,।

सूरज औरतों की संगत में उनके साथ मजा लौटकर समझ गया था कि यहां पर उसे संयम बरतनी की जरूरत है जल्द बाजी में सारा काम बिगड़ सकता है,,,, इसलिए सूरज अपने हाथ से ही लंड को पड़कर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा,,,, सूरज को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में उसकी बहन की बुर का छेद ज्यादा ही छोटा है और उसे अपनी बहन के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि अभी तक कुछ नहीं उसके अंदर अपनी उंगली भी नहीं डाली थी,,, लेकिन इसके विपरीत मुखिया लड़की का छेड़ थोड़ा बड़ा था जिसमें थोड़ी मदद करने के बाद सूरज का लंड बड़े आराम से चला गया था। लेकिन सूरज समझ गया था कि यहां पर उसे थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी,,,,।

पर कुछ देर तक अपनी बहन के छोटे से छेद में लंड को भिडाए रहने के बाद उसे उम्मीद की किरण नजर आने लगी थी धीरे-धीरे उसके लंड का से बड़ा अंदर की तरफ सरकने लगा था,,,,, इस बात की खुशी सूरज के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी लेकिन रानी की हालत खराब थी उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में उसके भाई का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,, हालांकि अपने भाई के लंड से पहले हुआ किसी और मर्द का लंड देखी भी नहीं थी फिर भी उसे थोड़ी घबराहट हो रही थी,,, इसलिए वह शंका जताते हुए अपने भाई से बोली,,,,

क्या हुआ भैया घुस नहीं रहा है क्या,,,?

पहली बार है ना इसलिए थोड़ी दिक्कत आ रही है बस थोड़ी देरऔर,,,,(इतना कहते हुए वह अपनी कमर पर जोर देने लगा और उसकी मेहनत रंग लगाने लगी धीरे-धीरे उसका आधा सुपाड़ा अंदर की तरफ प्रवेश कर गया था लेकिन इतने में सूरज के माथे पर पसीना टपकने लगा था,,,,, आधा सुपाड़ा घुस जाने के बाद वह रानी की तरह देखना है उसका खूबसूरत चेहरा उत्तेजना से तमतमा रहा था लालटेन के पीली रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था,,,, रानी का खूबसूरत उत्तेजना से तमतमाता हुआ चेहरा उसकी उत्तेजना का सबब बन गया था और वह फिर से जोर लगाकर कोशिश करने लगा और इस बार बुर के अंदरूनी गीलेपन को पाकर सूरज के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे करके पूरा समा गया,,,, लेकिन रानी के चेहरे का हाव भाव बदलने लगा कुछ देर पहले उसके चेहरे पर उत्तेजना के भाव नजर आ रहे थे लेकिन आप एकदम साफ दिखाई दे रहा था कि उसे दर्द हो रहा था दर्द की रेखा उसके चेहरे पर झलक रही थी लेकिन फिर भी न जाने क्यों अपने दर्द को रोके हुई थी,,,,, और सुरज उसे दिलासा देते हुए और आगे बढ़ते हुए बोला,,,)

बस बस हो गया है सूपाड़ा घुस गया अब आराम से घुस जाएगा तुम चिंता मत करो,,,(ऐसा करते हुए सुरज फिर से अपनी कमर पर जोर लगाने लगा,,,, सूरज इस कला में पूरी तरह से पारंगत हो चुका था इसलिए वह जानता था कि उसे क्या करना है वह बिल्कुल भी जल्दबाजी दिखाना नहीं चाहता था,,, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था,,,, सुपाड़ा पूरी तरह से प्रवेश करने के बाद कुछ बाकी नहीं रह जाता बस औपचारिकता ही रह जाती है,,, सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि उसके लंड का सुपाड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था जिसे अंदर घुसने में तकलीफ तो आती है और वह तकलीफ रानी के चेहरे पर दिखाई दे रही थी,,,, रानी के चेहरे पर दर्द की लकीरें झलकने लगी थी लेकिन वह किसी तरह से अपने दर्द को अपने अंदर ही दबाई हुई थी,, शायद इसलिए कि उसे विश्वास था कि इस दर्द के बाद मजा ही मजा है,।

सूरज को बहुत अच्छे से महसूस हो रहा था की रानी की बुर का छेद बहुत छोटा है लेकिन इतना भी छोटा नहीं है कि उसका लंड पूरी तरह से घुस ना सके,, बस थोड़ी सी मस्सकत करना बाकी था,,,,, गर्मी के महीने में इस अद्भुत कार्य को करने में सूरज के पसीने छूट रहे थे रानी दोनों टांगे ऊपर उठाए हुए अपने भाई के लंड को अपनी बुर में प्रवेश करता हुआ देख रही थी उसकी भी हालत खराब थी उसके भी माथे पर पसीना उपस रहा था,,, इस समय रानी को अपनी बर के छेद में अपने भाई का लंड जाता हुआ देखकर बड़ा अद्भुत और उत्तेजनात्मक लग रहा था लेकिन साथ में उसे डर भी लग रहा था क्योंकि उसे अब एहसास हो रहा था कि वाकई में उसके भाई का लंज कुछ ज्यादा ही मोटा है,,,,, सूरज एक बार फिर से चिकनाहट बढ़ाने के लिए,,, ढेर सारा थुक फिर से अपनी बहन की बुर पर गिराने लगा,,,, और फिर उसे अपनी उंगलियों से पूरी तरह से चुपड़ कर फिर से कोशिश करने लगा उसकी यह युक्ति कामयाब साबित हो रही थी धीरे-धीरे उसका लंड अंदर की तरफ सरकता हुआ आगे बढ़ने लगा,,,, यह देखकर रानी के चेहरे पर भी दर्द के साथ साथ प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,।

सूरज को पूरा विश्वास था कि वह यहां भी अपना झंडा गाड़ कर रहेगा,,,, सूरज अपनी बहन की पतली चिकनी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था,,,ं और अपनी कमर को आगे की तरफ खेल रहा था देखते ही देखते उसका आधा लंड रानी की बुर में प्रवेश कर गया था यह देखकर गहरी सांस लेता हुआ सूरज अपनी बहन से बोला,,,, जो कि रानी भी नजर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच ही देख रही थी,,,)

देख रानी कितने आराम से जा रहा है ना जब यह पूरा घुस जाएगा तब देखना कितना मजा देता है,,,।

आराम से भाई मुझे दर्द हो रहा है,,,,।

तू चिंता मत कर दर्द के बाद ही असली मजा है,,,,(और ऐसा कहते हुए अपनी कमर को और जोर लगाने लगा,,, देखते ही देखते रानी के बुर में एक तिहाई लंड प्रवेश कर गया था बस चौथा भाग ही रह गया था,,,,, सूरज की भी सांसे उपर नीचे हो रही थी,,, ऐसी हालत में वह अच्छी तरह से जानता था कि क्या करना है,,,, इसलिए वह अपनी दोनों हथेलियों का दबाव रानी की कमर पर,,, एकदम से बढ़ा दिया था और फिर अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके एकदम से कच कचा कर धक्का लगाया,,,, यह आखिरी प्रयास के साथ आखिरी प्रहार था अपनी मंजिल तक पहुंचने का,,, और इसी प्रहार के साथ वह अपनी मंजिल पर पहुंच चुका था उसका पूरा लंड रानी की बुर में डूब चुका था,,,, लेकिन इसका प्रभाव रानी पर बहुत गहरा पड़ा था रानी एकदम दर्द से बिलबिला उठी थी उसके मुंह से दर्द की चिख निकलने वाली थी कि सूरज एकदम से उसके ऊपर छोड़ गया था और उसके होठों को अपने मुंह में लेकर उसके होठों का रिस्पांस करने लग गया था वह जानता था कि ऐसे हालात में उसे क्या करना चाहिए,,,, रानी की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी क्योंकि बिना ईतला किए सूरज ने यह प्रहार किया था,,,, बुर के अंदरूनी अडचनो को चीरता हुआ सूरज का लंड रानी की बुर की गहराई में घुस चुका था जिससे दर्द होना लाजिमी था,,,,,।

लेकिन सूरज रानी को ईस दर्द से उबारना अच्छी तरह से जानता था,,,,, रानी के होठों का रसपान करते हुए वह रानी की चूची पकड़ कर उसे धीरे-धीरे मसल रहा था लेकिन अभी भी रानी को दर्द हो रहा था इसलिए उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी केवल वह दर्द से कराह रही थी इसलिए सूरज अपने लंड को इस स्थिति में रानी की बुर में घुसा रहने दिया कुछ देर तक रानी के होठों का रसपान करते हुए उसकी चूची को मसलता रहा और इसका असर यह हुआ की रानी एक बार फिर से मजा आने लगा ,,,वह दर्द से उभर कर आनंद के सागर में डूबने लगी,,, और इसका एहसास सूरज को तब हुआ जब उसके मुंह से दर्द के करने की जगह मदहोशी भरी शिसकारी की आवाज निकलने लगी,, इस आवाज को सुनकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह आज बड़ी समझदारी से कम लिया था और उसकी यह समझदारी रंग ला रही थी,,, रानी की चूचियों को दबाता हुआ सूरज धीरे से बोला,,,,)

अब कैसा लग रहा है रानी,,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,,,, अब अच्छा लग रहा है लेकिन इतनी जोर से धक्का मारने की क्या जरूरत थी मुझे तो लगा कि आज मेरी जान ही निकल जाएगी,,,,।

ऐसा कैसे हो सकता है,,,,(इस दौरान अपनी कमर को धीरे-धीरे ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) रानी मैं तुम्हें बोला तो था दर्द के बाद ही असली मजा आता है,,,अब देखो तुम्हे कितना मजा आता है,,,,,,।

(ऐसा कहते हुए सूरज फिर से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भर लिया और उसका रस पीते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वह रानी की चुदाई करना शुरू कर दिया था सूरज को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बहन की बुर मुखिया की लड़की की बुर से भी ज्यादा कसी हुई थी,,,, इसलिए सूरज को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, सूरज अभी धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रहा था वह जानता था कि उसकी बहन की बुर ज्यादा कसी हुई है। बुर की अंदरुनी दीवारें रगड़ रगड़ कर एकदम आनंद की फुहार छोड़ रही थी,,,।

रानी के होठों का रसपान करने के बावजूद भी रानी के मुंह में से शिसकारी की आवाज निकल रही थी,, इसलिए सूरज अपने मुंह से रानी के होठों को आजाद किया और एक बार फिर से अपने घुटनों के बाल होकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,, अब बड़े आराम से सूरज का लंड रानी की बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,, यह देख कर सुरज तो खुश हो ही रहा था,, रानी की भी खुशी का ठिकाना न था क्योंकि कुछ देर पहले उसे भी इस बात की आशंका देखी उसके भाई का लंड उसकी बुर में प्रवेश कर पाएगा कि नहीं लेकिन अब बड़े आराम से वह अपने अंदर ले रही थी,,,,,,,,,,

रानी गहरी गहरी सांस ले रही थी उसे मजा आ रहा था उसके चेहरे का हाव भाव अब आनंद की गाथा गा रहा था और सूरज के भी धक्के अब तेज होने लगे थे क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी बहन उसके तेज धक्कों को अब सहने लायक हो चुकी है,,,, लेकिन उसके हर धक्के के साथ खटिया चरर मरर कर रही थी,,,, यह देखकर रानी बोली,।

थोड़ा धीरे-धीरे करो कहीं ऐसा ना हो की खटिया टूट जाए,,।

टूट जाए तो टूट जाए मेरी रानी लेकिन मजा कम नहीं होना चाहिए,,,,।

लेकिन मन को क्या जवाब दूंगी,,,।

बोल देना अपने आप टूट गई मां को कहां पता चलने वाला है कि रात भर चुदवाकर खटिया तोड़ी हो,,,,,।

(सूरज की बात सुनकर रानी को थोड़ी शात्वना होना प्राप्त हुई, और वह भी चुदाई का मजा लेने लेगी,, सूरज अब खुल चुका था अब उसके लिए कोई सीमा ही नहीं थी कोई बाधारुप नहीं था,,, इसलिए वह अपने धक्को को पूरी तरह से तेज करता जा रहा था,, लेकिन रानी की हालत खराब होने लगी थी वह एकदम चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बदन में यह बदलाव कैसा आ रहा है,,, इसलिए वह अपने भाई से बोली,,,)

ओहहह ,,, भाई मुझे पता नहीं क्या हो रहा है ऐसा लग रहा है कि मैं हवा में उड़ रही हूं,,,, भाई मुझे पकड़ ले,,,आहहहहहह,,,, यह क्या हो रहा है मुझे,,,,।

(रानी कि ईस तरह की बातें सुनकर सूरज समझ में करके उसकी बहन झढ़ने वाली है और वह खुद भी झड़ने की बेहद करीब पहुंच चुका था,, इसलिए वह मौके की नजाकत को समझते हुए अपने दोनों हाथों को रानी की पीठ के नीचे की तरफ डालकर उसे कसके अपनी बाहों में दबोच लिया,,,, और बड़ी जोर-जोर से अपनी कमर ही रहना शुरू कर दिया,,,,, रानी मदहोश हुए जा रही थी पागल में जा रही थी वह भी अपने बहू के हर को अपने भाई के गले में डालकर उसे कसके दबोच ली थी,,, और फिर दोनों झढ़ना शुरू हो गए,,, रानी के जीवन का यह पहला चुदाई का झड़न था जिसे वह पूरी तरह से मदहोश होकर प्राप्त की थी,,,।
 
दोनों अद्भुत चरम सुख प्राप्त करनेके बाद एक दूसरे की बाहों में गहरी सांस लेने लगे,,, सूरज बहुत खुश था क्योंकि आज उसने अपनी बहन की सफलतापूर्वक चुदाई कर लिया था और उसे इस खेल में पूरी तरह से शामिल कर लिया था इस बात से वह और भी ज्यादा उत्साहित था कि आप जब भी मन करेगा वह घर में ही चुदाई कर लेगा,,,, और उसकी बहन इस बात से खुश थी की वाकई में चुदाई में कितना मजा आता है,,, वह भी गहरी गहरी सांस कह रही थी वह भी आनंद के सागर में गोते लगाकर किनारे पर पहुंच रही थी,,,, अद्भुत फल को जी लेने के बाद वह पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी उसके चेहरे पर संतुष्टि और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आ रहे थे,,,, सूरज धीरे से अपनी बहन के ऊपर से उठने लगा और अपने लंड को अपनी बहन की बुर में से बाहर निकाला लेकिन बाहर निकालने के बावजूद भी उसका कड़कपन बरकरार था,,, सूरज मुस्कुराते हुए अपनी बहन के बगल में लेट गया,, दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे लेकिन जवानी का नशा उतारने के बाद रानी के चेहरे पर शर्मिंदगी के भाव नजर आने लगे उसे शर्म महसूस होने लगी।

और वह मुस्कुरा कर अपने चेहरे को छुपाने लगी,, इस रूप में वह और भी ज्यादा खूबसूरत और कामुक लग रही थी,, यह देखकर सूरज मुस्कुराते हुए फिर से उसकी चूची पर अपना हाथ रख दिया उसे हल्के हल्के से दबाना शुरू कर दिया सूरज जानता था कि अभी उसकी प्यास बुझी नहीं है,,, और इसके लिए उसे अपनी बहन के बदन में फिर से चुदाई की प्यास जगाना होगा इसलिए वह अपनी बहन की चूची को मसलते हुए बोला,,,,।

कैसी लगी चुदाई,,,।

धत्,,(एकदम शरमाते हुए) यह भी कोई पूछने की बात है तुम्हें इस तरह की बात पूछते हुए शर्म नहीं आती,,,.

अब हम दोनों में शर्म कैसी,,, अब हम दोनों के बीच की सारी दीवारें गिर चुकी है अब हम दोनों इसी तरह से रोज रात को मजा लेंगे,,,।

और कहीं मां को पता चल गया तो,,,।

फिर वही पागलों वाली बात,,,, बताया ना मा को कैसे पता चलेगा तो बताएगी की मां कों,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी ना में सर हिला दी,,, उसका जवाब सुनकर सूरज मुस्कुराते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

जब तू नहीं बताएगी मैं नहीं बताऊंगा तो मा को पता कैसे चलेगा,,,,,, रात को जब मां सो जाएगी अपने कमरे में तब में धीरे से तेरे कमरे में आ जाऊंगा या तू मेरे कमरे में आ जाना,,,,

नहीं मैं नहीं आऊंगी तुम ही आ जाना,,,।

चल ठीक है मैं ही आजाऊंगा,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज उत्तेजित में लगा था और एक बार फिर से अपनी हथेली को अपनी बहन की बुर पर रख दिया था जो कि उसके मदन रस से पूरी तरह से चिपचिपा गई थी,,, अपनी बुर पर अपने भाई की हथेली को महसूस करके वह बोली,,,)

अब छोड़ो मुझे जाना है,,,(ऐसा कहते हुए वह उठकर बैठने लगी तो उसका भाई बोला,,)

अब कहां जाना है,,,?

वही जहां कुछ देर पहले गएथे,,,

मुतने,,!(आश्चर्य के साथ सूरज बोल तो वह मुस्कुराकर हां में सर हिला दी यह देखकर सूरज चुटकी लेटा हुआ बोला,,,)

तुझे बड़ी जल्दी-जल्दी पेशाब लग जाती है,,,।

अब क्या करूं लग जाती है तो,,,,( ईतना कहकर वह चारपाई पर से उठकर खड़ी हो गई और अपनी सलवार ढूंढने लगी यह देखकर सूरज भी चारपाई पर उठकर बैठ गया और रानी से बोला,,,,)

एक काम कर बाहर मत जा जहां बर्तन धोती है वहीं बैठ जा और वैसे भी रात काफी हो चुकी है और कपड़े पहनने की जरूरत नहीं है क्योंकि वापस आने पर फिर से कपड़े उतारना ही होगा,,।

(अपने भाई की बात सुनकर वह एकदम से हैरान हो गई और हैरानी जताते हुए बोली)

क्यों कपड़े उतारने होंगे,,!

अरे अब चुदवाएगी नहीं क्या,,,,,!

तो अभी तुम्हारा पूरा नहींहुआ,,,

अरे बुद्धु यह खेल कभी खत्म होता है क्या,,,, सुबह तक चलेगी,,,।

(अपने भाई की इस तरह की बेशर्मी भरी बातें सुनकर रानी के बदन में भी कुछ-कुछ होने लगा था और इस बात से वह और ज्यादा उत्साहित हो चुकी थी कि उसका भाई अभी उसके कमरे से जाने वाला नहीं था अभी उसकी और चुदाई करने वाला था,,,, सूरज चारपाई पर से उठकर खड़ा हो गया और नग्न अवस्था में ही उसे कमरे के बाहर जाने के लिए बोला,,,, लेकिन रानी तैयार नहीं हुई क्योंकि उसे बहुत शर्म आ रही थी और उसे इस बात का डर भी था कि कहीं उसकी मां जग गई तो इस हालत में देखेगी तो गजब हो जाएगा,,, इसलिए वह अपने भाई की बात रखते हुए बोली,,,,)

नहीं मैं ऐसे नहीं जाऊंगी चादर डाल लेती हुं,,,,(इतना कहते हुए वह बिस्तर पर बीछी चादर को ले ली और उसे अपने बदन पर डाल ली और धीरे से कमरे के बाहर निकलने लगी पीछे-पीछे सूरज बिना कुछ पहने,,, कमरे के बाहर निकल गया और यह देखकर उसकी बहन एकदम से घबरा गई और धीरे से बोली,,,)

यह क्या कर रहे हो भाई जल्दी से कमरे में चले जाओ अगर मा उठ गई तो गजब हो जाएगा,,,,,,।

तू चिंता मत कर रात का तीसरा पहर चल रहा है मां गहरी नींद में सो रही होगी,,, तु चल,,,,।

तुम तो फसवा दोगे,,,।

ऐसा कुछ भीनहीं होगा,,,,।

(रानी इधर-उधर देखते हुए बर्तन धोने वाली जगह पर पहुंच गई वह अपने बदन पर चादर डाली हुई थी और पेशाब करने के लिए बैठने से पहले चादर को दोनों हाथों से पड़कर उसे अपनी कमर तक ऊपर उठा दी ताकि नीचे जमीन पर गंदा ना हो जाए और पेशाब करने लगी पीछे खड़ा सूरज अपनी बहन की नंगी गांड देखकर फिर से उत्तेजित होने लगा था उसका लंड खड़ा होने लगा था वह अपनी बहन को पेशाब करता हुआ देखकर अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी बहन की बातें सुनकर उसे पूरी तरह से लगने लगा था कि उसकी बहन भी इस खेल को आगे जारी रखने के लिए पूरी तरह से तैयार है,,,,, रानी की बुर से सिटी की आवाज निकल रही थी जिससे सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, वैसे तो सूरज को भी पेशाब लगी थी लेकिन इस समय वह अपनी बहन की गांड देखने में पूरी तरह से व्यस्त था,,,

हर मर्दों की यही कहानी है कुछ देर पहले सूरज अपनी बहन की जमकर चुदाई किया था लेकिन उसकी प्यास थी कि पूजने का नाम ही नहीं ले रही थी और इस समय अपनी बहन की गांड को देखकर वह उत्तेजित हो रहा था मानों जैसे वह उसे भोगा ही ना हो,,,, थोड़ी ही देर में रानी पेशाब करने के बाद खड़ी हो गई और नीचे छुपाकर पानी गिर रही थी कि तभी पीछे से सूरज उसे अपनी बाहों में कस लिया उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था और उसकी गांड की दरार के बीचों बीच जाकर फिर से एक बार उसके गुलाबी छेद पर ठोकर मारने लगा,,,, इस जगह पर अपने भाई किस तरह की हरकत को देखकर रानी एकदम से घबरा गई थी और उससे अलग होने की कोशिश करती हुए बोली,,,)

यह क्या कर रहे हो भाई मां आ गई तो गजब हो जाएगा छोड़ो मुझे जो भी कुछ करना है कमरे में चलकर करो,,, छोड़ो मुझे,,,,।

बिल्कुल भी नहीं आज तो तेरी यही चुदाई करूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज जल्दबाजी दिखाता हुआ उसे एकदम से दीवार से सटा दिया और उसकी कमर में दोनों हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच कर उसे घोड़ी बना दिया रानी कुछ कर पाते इससे पहले ही सूरज अपने लंड को पकड़ कर उसके गुलाबी छेद से सटा दिया और अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया,,, रानी को समझ पाती या कुछ करती अपने भाई से अलग होने के लिए इससेपहले ही उसे अपनी बुर में अपने भाई का लंड प्रवेश होता हुआ महसूस होने लगा और अगले ही पाल रानी मजबूर हो गई अपने भाई से वहां चुदवाने के लिए,,, वाकई में इस समय डर और उत्तेजना का जो मिला-जुला मिश्रण था उससे जो आनंद प्राप्त हो रहा था वह रानी के लिए बेहद अद्भुत था,,, सूरज घोड़ी बनाकर अपनी बहन की चुदाई कर रहा था उसका लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था यह पल रानी के लिए भी मदहोश कर देने वाला था,,, एक तरफ उसके मन में अपनी मां को लेकर घबराहट हो रही थी दूसरी तरफ सूरज की हरकतों से वह पूरी तरह से उत्तेजित और मदहोश हो चुकी थी,,

रानी के मुंह से गरमा गरम सीसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी,, सूरज धक्के पर धक्का लगा रहा था क्योंकि उसे भी मालूम था कि जरा सा शोर अगर होगा तो उसकी मां जग जाएगी और वह नहीं चाहता था कि ऐसा कुछ हो इसलिए वह इस खेल को जल्दी खत्म करना चाहता था,,,, रानी के बदन पर से चादर को वह लेकर नीचे जमीन पर रख दिया था और पूरी तरह से उसे नंगी करके चोद रहा था,,, सूरज की मेहनत रंग ला रही थी वह अपनी बहन को हर एक रंग में ढाल दे रहा था वरना हुआ इस जगह पर चुदाई करवाने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी,,, और थोड़ी ही देर बाद दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,,

चुदाई करने के बाद सूरज धीरे से अपने लंड को अपनी बहन की बुर में से बाहर निकाला,,,, सूरज के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे रानी एकदम शर्म से पानी पानी हो जा रही थी रानी अब जल्दी से जल्दी कमरे में चले जाना चाहती थी इसलिए वह नीचे गिरी चादर को भी उठाने की तस्दी नहीं ली और लगभग भागते हुए अपने कमरे में चली गई सूरज मुस्कुराता हुआ वहीं खड़े होकर पेशाब करने लगा,,,, और फिर धीरे से चादर उठाकर अपनी बहन के कमरे के पास पहुंच गया उसे ऐसा था कि कमरे का दरवाजा बंद होगा लेकिन उसके आश्चर्य के बीच कमरे का दरवाजा खुला हुआ था यह देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और यह सिलसिला सुबह तक चला और वह सुबह होने से पहले धीरे से उठकर अपने कमरे में चला गया।
 
मुखिया के खेतों में सूरज और उसकी मां को काम शुरू करना था गेहूं की कटाई करनी थी पर दोनों इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि खेतों की जिम्मेदारी लेना बड़ा मुश्किल काम है लेकिन यह जिम्मेदारी उन दोनों को लेना ही था क्योंकि जब से सूरज के पिताजी घर छोड़कर बाहर रंगरेलियां बना रहे हैं तब से घर में थोड़ी बहुत पैसों की किल्लत होने लगी थी वैसे तो खाने की कोई कमी नहीं थी क्योंकि उनका खुद का भी खेत था और गाय भैंस बकरियां भी थी जिसे अनाज और दूध पानी मिल ही जाता था लेकिन फिर भी योग्य समय पर रानी का विवाह करना था इस बात की चिंता सूरज की मां को अच्छी तरह से था और इसीलिए सूरज की मां खेतों में काम करने के लिए तैयार हो गई थी,,,,,, सूरज के पिताजी जब तक यह जिम्मेदारी अपने सर पर लिए हुए थे तब तक सूरज की मां को खेतों में बिल्कुल भी काम नहीं करना पड़ता था अपने खेतों में भले कम कर ले लेकिन दूसरे के खेतों में वह बिल्कुल भी काम नहीं की थी लेकिन वक्त के साथ हालात बदल जाते हैं और इंसान को ऐसा होना भी चाहिए जैसे हालात हो उसके मुताबिक चलना चाहिए आज सूरज के घर आर्थिक तंगी थी जिसके चलते उन दोनों को काम करना ही था,,,,।

सुनैना घर का काम जल्दी से निपटा कर खाना बना रही थी क्योंकि जल्दी से खाना बनाकर वह खेतों पर निकल जाना चाहती थी काम करने के लिए और जल्दी घर वापस आ जाना चाहती थी,,,, रानी रात की दमदार चुदाई के बाद एकदम मस्त हो चुकी थी एक ही रात में उसकी जवानी पूरी तरह से खेल चुकी थी और वह घर के आंगन में झाड़ू लगा रहे थे उसके मन में रात वाली बात घूम रही थी रात को जो कुछ भी उसके साथ हुआ था वह बेहद उन्मादक था,,, रानी को अभी भी अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हल्का-हल्का मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था,,, क्योंकि यह उसके जीवन की पहली चुदाई थी और चुदाई करने वाला उसका बड़ा भाई था,,,,,, झाड़ू लगाते लगाते वह उसी स्थान पर पहुंच गई जहां पर बर्तन मजा जाता था,,, उस जगह पर पहुंचते ही रानी के चेहरे पर मस्ती भरी मुस्कान करने लगी क्योंकि यह वही जगह थी जहां पर वह बिना कपड़े पहने एकदम नंगी होकर केवल अपने बदन पर एक पतली सी चादर डालकर पेशाब करने के लिए आए थे और यहां पर पेशाब करने के लिए उसे खुद उसके भाई नहीं मजबूर किया था वरना तो वह घर के बाहर जाना चाहती थी,,,,।

रात की घटना के बारे में सोचकर उसके चेहरे पर शर्म की लकीरें साफ झलकने लगी थी पल भर में यह उसका चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपने भाई के सामने बैठकर पेशाब की थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि कुछ दिनों में कितना कुछ बदल गया था जहां वह अपने भाई के सामने कपड़े तक नहीं बदलती थी वही उसके सामने सारे कपड़े उतार कर उससे चुदाई का आनंद लूट रही थी उसके सामने पेशाब कर रही थी यह सब इस समय रानी को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन उसके बदन में उत्तेजना की झनझनाहट भी हो रही थी,,,, पल भर में ही रानी की सांस गहरी चलने लगी थी वह उसे जगह पर खड़ी होकर रात की घटना के बारे में सोचते हुए अपने बारे में भी सोच रही थी कि वह अपने भाई के सामने इतनी बेशर्म कैसे बन गई,,,।। लेकिन इस बात को भी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका इस तरह से बेशर्म बन जाने के पीछे उसके भाई का ही हाथ है,,,, वरना वह अपने भाई के सामने इस तरह की हरकत करने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी,,,,। रात के हर एक घटना उसकी आंखों के सामने किसी हकीकत नाटक की तरह घूम रहा था उसे सब कुछ अच्छी तरह से याद था,,,, और यह जगह तो उसे और भी अच्छी तरह से याद हो चुकी थी ऐसा लग रहा था कि इस कोने से उसका नाता जुड़ चुका था।

कभी सपने में नहीं सोची थी कि वह अपने भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाएगी उसके साथ चुदवाने का मजा लुटेगी,,, उसे अच्छी तरह से याद था कि वह अपनी चादर को थोड़ा सा ऊपर उठकर बैठ गई थी ताकि चादर गंदी ना हो जाए लेकिन उसके इसी हरकत की वजह से उसकी नंगी गांड उसके भाई के सामने उजागर हो गई थी और इसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि कुछ देर पहले वह उसके पूरे बदन से मजा लूट चुका था,,, और थोड़ी ही देर में फिर से वह पागल हो गया था,,,, ऐसा सोचते हुए वह आंगन के उसे कोने में खड़ी खड़ी आसमान की तरफ देखने लगी,,, और पल भर में उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि वह भले ही चार दिवारी के अंदर थी लेकिन घर के आंगन में वह खुले आसमान के नीचे चुदाई के अद्भुत आनंद को प्राप्त की थी,,, उसका भाई इतना निर्लज्ज और बेशर्म होगा इस बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी,,, उसे संभलने का मौका भी नहीं दिया था और यह जानने के बावजूद भी उसकी मां पेशाब लगने पर कमरे के बाहर निकल सकती है वह बिना डरे उसे घोड़ी बनाकर पीछे से डाल दिया था इस बात का ख्याल आते ही उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,

काफी देर से रानी को इस तरह से उसे कोने में खड़ी पाकर उसकी मां बोली,,,,।

क्या हुआ क्या सोच रही है बड़ी देर से वही खड़ी है बाकी का काम नहीं करना है क्या,,,,?

(अपनी मां की बात सुनते ही वह एकदम से चौंक गई क्योंकि वह वाकई में ख्यालों में खो चुकी थी जागते हुए भी खड़े-खड़े सपना देखने लगी थी इसलिए वह हड़बड़ाते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तुझे सोच रही हूं कि आज इतनी जल्दी खाना क्यों बना रही हो,,,!(रानी एकदम से बात को बदलते हुए बोली,,,)

अरे हां तुझे बताना तो भूल ही गई मैं और सूरज मुखिया के खेतों में काम करने के लिए जा रहे हैं और वहां से आने में देर हो जाएगी इसलिए जल्दी-जल्दी खाना बना रही हूं,,,, और हा तेरे हिस्से का खाना रख दूंगी तू खा लेना हम दोनों खेत पर ही खाना खा लेंगे,,,,(रोटी को तवे पर रखते हुए सुनैना बोली,,,,)

खेत पर काम करने जाना है,,,,,!(रानी एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोली थी,,,, उसकी बातें सुनकर सुनैना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अरे हां काम करने जाना है थोड़े पैसे भी तो इकट्ठे करने होंगे आखिरकार अब तो भी शादी लायक हो गई है शादी भी तो करना है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर रानी के चेहरे पर मुस्कान देने लगी थी और वह एकदम से शर्मा गई थी अपनी मां से तो कुछ नहीं बोली लेकिन अपने मन में सोचने लगी की शादी के पहले ही सुहागरात मना चुकी हूं,,,, चलो कोई बात नहीं माया पहले बाद में शादी अपने मन में यह सोचकर वह मुस्कुराने लगी और बिना कुछ बोले फिर से झाड़ू मारने लगी,,,,,,

थोड़ी ही देर में सुनैना खाना बना चुकी थी और थोड़ा बहुत इधर-उधर काम करके वह नहाने जा रही थी,,,, वैसे तो उसे नदी पर नहाने में अच्छा लगता था लेकिन घर पर भी एक छोटा सा गुसलखाना बनाई थी जो कि चारों तरफ मोटी मोटी लकडीयों को खड़ा करके पुरानी साड़ी लपेटकर दीवार की तरह कर देती ताकि कोई देख ना सके,,, और बीच में हैंडपंप था वैसे इसका उपयोग बहुत ही काम करते थे जब जल्दबाजी रहती थी तभी इसका उपयोग करते थी,,, वरना नदी और कुएं का ही ज्यादातर उपयोग करते थे बारिश में हैंडपंप का ज्यादा उपयोग करते थे क्योंकि बारिश के मौसम में वह नदी पर नहीं जाती थी,,,, आज खेत पर काम करने जाने की जल्दबाजी थी इसलिए वह हैंडपंप पर ही नहाने वाली थी,,,,,,, इसलिए वह जल्दी से गुसलखाने में पहुंच गई और अपने हाथों से हेड पंप चलाकर बाल्टी को पानी से भरने लगी,,,, वह अपने मन में यही सोच रही थी कि आज उसे अपने बेटे के साथ खेत में काम करने जाना है इस तरह से खेतों में काम करके वह कुछ पैसे जुटा सकती है। यही सब सोते हुए वह अपने बदन पर से अपनी साड़ी को धीरे-धीरे से खोलने लगी और देखते-देखते वह अपनी साड़ी को उतार कर इस घुसल खाने में रख दी,,,, अब वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी,,, नदी पर तो उसे सारे कपड़े उतार कर लेंगे नहाने का शौक था और ईसी शौक के चलते वह अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगे वह जानते थे कि गुशल खाने के तरफ कोई नहीं आएगा,,,।

सुनैना निश्चिंत थी,,,, इसलिए वह एक-एक करके अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी और ब्लाउज को भी अपने हाथों से उतार कर,,, वहीं पास में रहती उसकी चूचीया एकदम से नंगी हो गई,,,, वह अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियों की तरह देखकर मुस्कुराने लगी और धीरे से दोनों को अपनी हथेलीयो में पकड़ कर मानो उसे पुचकार रही हो,,, और फिर अपने पेटिकोट की डोरी खोलने लगी,,, उसकी यही आदत थी क्योंकि बिना सारे कपड़े उतार कर नहाने में ही उसे मजा आता था,,, और जब तक पूरे कपड़े उतार कर नहीं नहाए तब तक उसे लगता ही नहीं था कि वह नहाई है,,, अपनी पेटिकोट की डोरी खोलने के बाद वह धीरे से अपनी पेटीकोट को भी अपनी कमर पर से ढीली करके उसे अपने हाथों का सहारा देकर उसे एकदम से नीचे छोड़ दी और उसकी पेटिकोट उसके कदमों में जा गिरी अगले ही परिवार गुसलखाने के अंदर पूरी तरह से नंगी थी,,,, क्योंकि वह निश्चित थई की इस तरफ कोई नहीं आएगा,,, और नहाना शुरू कर दी,,,,।

इसी बीच सूरज इधर-उधर से घूमता हुआ आया वह भी अपनी मां से यह बताने आया था कि खेत पर जाने का समय हो रहा है जल्दी से खाना खाकर और थोड़ा खाना लेकर खेत पर चले लेकिन जब वह घर पर गया तो घर के अंदर उसकी मां नहीं थी और रानी भी घर पर मौजूद नहीं थी क्योंकि वह नित्य क्रम से निपटने के लिए मैदान गई हुई थी,,, इधर-उधर ढूंढने के बाद जब घर पर उसे कोई नहीं दिखाई दिया तो वह रसोई घर में देखा था भोजन तैयार था और वह समझ गया कि उसकी मां को याद है कि खेत में जाना है लेकिन उसे बड़े जोरों की प्यास लगी हुई थी और घर पर पानी नहीं था इसलिए वह खुद ही पानी पीने के लिए हेड पंप की तरफ चल दिया,,, क्योंकि वह जानता था कि इस तरह की स्थिति में उसे हेडपंप पर ही पानी मिल सकता है वरना कुएं पर ज्यादा तो कुएं में से पानी निकालना पड़ता,,, और समय हो जाता इसलिए समय के अभाव को देखकर वह हेडपंप की तरफ चल दिया था उसे नहीं मालूम था कि हेडपंप पर उसकी मां नहा रही है और वह भी बिना कपड़ों की,,,।

कगुशल खाने में सुनैना निश्चिंत होकर नहा रही थी वह पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और अपने बदन पर ठंडा पानी डाल रही थी,,,,, सुबह का समय होने के बावजूद भी गर्मी का एहसास हो रहा था और इस गर्मी के एहसास में हेड पंप से निकला ठंडा पानी उसके बदन को राहत प्रदान कर रहा था,,,, वह बच्चे को रोकर नहा रही थी उसकी क्या मालूम था कि उसका बेटा पानी पीने के लिए उसी की तरफ आ रहा है,,,, और वह कोई गीत भी खुशी के मारे गुनगुना रही थी,,, कुछ देर तक वह बैठ कर नहा रही थी,,,, लेकिन वह नहा चुकी थी बस खड़े होकर एक दो लोटा अपने ऊपर डालना था और वह खड़ी हो गई थी,,,, सुनैना खड़ी होने के बावजूद भी गुसलखाने के लंबे लकड़ी से बंधी हुई साड़ी के बाहर नजर नहीं आ रही थी,,, क्योंकि सुनैना,,, चाहे जैसे भी हो काम चलाउ गुसलखाने का निर्माण इस तरह से की थी कि अंदर कोई नहा रहा भी हो तो बाहर आते-जाते किसी को पता ना चले,,, इसीलिए तो सुनैना पूरी तरह से निश्चित,,, वह नहा चुकी थी बस कपड़े पहनने की दे रही थी,,,,।

इस बात से अनजान सूरज की उसकी मां गुसलखाने में नहा रही है वह जल्दबाजी में इस तरफ अपने कदम बढ़ाए चला जा रहा था और उसकी मां अपने हाथ से ही अपने बदन पर से पानी को साफ कर रही थी कि तभी अचानक सूरज एकदम से ठीक उसकी आंखों के सामने आ गया उसे नहीं मालूम था कि कुशल खाने में उसकी मां नहा रही है और वह भी बिना कपड़ों के वह फसल खाने में जैसे ही नजर घुमाया तो सामने का नजारा देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,, उसे साफ तौर पर दिखाई दे रहा था कि उसकी मां गुसलखाने में बिना कपड़ों के नहा रही थी एकदम नंगी होकर यह नजारा सूरज के लिए मदहोश कर देने वाला था,,,, उत्तेजित कर देने वाला था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कुछ देर तक तो उसे समझ में नहीं आया कि उसे करना क्या है वह देख क्या रहा है लेकिन जैसे ही उसे यह एहसास हुआ कि उसकी आंखों के सामने उसकी मां नंगी होकर ना आ रही है वह पूरी तरह से मंत्र मुग्ध हो गया था,,, अपनी मां की नशीली जवानी में पूरी तरह से खो चुका था।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि वह अपनी मां को पहली बार निर्वस्त्र अवस्था में देख रहा है वह अपनी मां को निर्वस्त्र अवस्था में कई मौका पर देख चुका था नदी पर नहाते हुए कमरे में अकेलापन पाकर अपने हाथों से अपनी जवानी की प्यास बुझाते हुए,,, और खुद अपने पिताजी को अपनी मां की चुदाई करते हुए देखा था लेकिन हर बार की तरह इस बार भी नंगी होने के बावजूद भी उसकी मां अद्भुत एहसास कर रही ऐसा लग रहा था कि जैसे कहना चाह रहा सूरज पहली बार देख रहा हो,,,। और सुबह-सुबह इस तरह का नजारा देखकर उसके दिन की शुरुआत हुई थी इसलिए वह अंदर ही अंदर उत्तेजित और प्रसन्न हुआ जा रहा था,,,, इस समय जिस तरह की हालत सूरज की थी उसी तरह की हालत उसकी मां की भी हो चुकी थी,,,,। यूं एकाएक सूरज को अपनी आंखों के सामने देखकर वह भी हक्की-बक्की रह गई थी,,,, वह भी कुछ समझ नहीं पाई थी और कुछ क्षण तक अपने बेटे की तरफ ही देख रही थी,,, क्योंकि इस तरह के हालात में पूरी तरह से दिमाग काम करना बंद कर देता है दिमाग को कुछ समझ में ही नहीं आता कि उसकी आंखों के सामने क्या हो रहा है और जब तक कुछ समझ में आता है तब तक देर हो चुकी होती है।

और यही सुनैना के साथ भी हुआ अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को देखकर वह एकदम से घबरा गई थी उसे को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें पहले तो उसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ कि उसका बेटा उसकी आंखों के सामने खड़ा है और वह जिस तरह के हालात में खड़ी थी उसे और भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें वह पूरी तरह से हैरान थी इस बीच वह हैरानी में अपनी खूबसूरत अंगों को ढंकने का या छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी,,, जिस तरह से सूरज फटी आंखों से उसकी तरफ देख रहा था उसी तरह सुनैना भी हैरानी से अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,, और जब से इस बात का एहसास हुआ कि वह किस अवस्था में है तो वह तुरंत अपने एक हाथ से अपनी दोनों चूचियों को और दूसरे हाथ से अपनी बुर को छुपाने की कोशिश करने लगी,,,, और हड़बड़ाहट में दोनों अंगों को छुपाने के चक्कर में वह एकदम से अपने बेटे की तरह पीठ करके घूम गई और अनजाने में पीठ के साथ-साथ उसकी गांड भी सूरज की आंखों के सामने उजागर हो गई वह हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोल रही थी,,,।

तू यहां क्या कर रहा है,,,?

मैं तो पानी पीने आया हूं,,,,(अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली गोल-गोल गांड की तरफ देखते हुए हो बोला,,,, अपने बेश कीमती खजानो को छुपाने के चक्कर में वह अपनी खूबसूरत हवेली दांव पर लगा चुकी थी,,, हवेली की हालत को देखकर ही सूरज अंदाजा लगा लिया था की हवेली की महारानी कितनी खूबसूरत है,,,, सूरज तो अपनी मां की मदद कर देने वाली गांड को देखे जा रहा था अपनी मां की गांड को वह बिना कपड़ों के कई बार देख चुका था लेकिन हर बार ऐसा ही लगता था कि मानो जैसे वह पहली बार देख रहा हो,,,, सूरज की बात सुनकर सुनैना बोली,,,)

घर में पानी नहीं था जो यहां आ गया,,,,।

घर में नहीं मिला तभी तो यहां आ गया हूं मुखिया के खेतों पर जो जाना है देर हो रही थी,,,, लेकिन तुम तो नदी पर नहाती थी यहां कैसे नहाने लगी,,,,(सूरज थोड़ी हिम्मत दिखा कर अपनी मां के सामने खड़ा ही रहा और उस सवाल पूछ रहा था इस दौरान उसकी नजर अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ उसकी मदमस्त बलखाती हुई कमर के साथ-साथ उसके उभारदार नितंबो पर घूम रही थी,,,,,)

खेत पर जाना था ना इसलिए मुझे देर हो रही थी इसलिए यहां नहाने लगी,,,।

चलो कोई बात नहीं यहां नहाने लगी लेकिन बिना कपड़ों के पूरे कपड़े उतार कर नहाने की क्या जरूरत थी,,,,(सूरज हिम्मत दिखा रहा था वह अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझता था वह रात को छुपकर दरवाजे की दरार में से अपनी मां के कमरे में उसकी बेबसी को अपनी आंखों से देख चुका था मर्द के बिना उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी,,, इसलिए वह वहां से बिल्कुल भी अपने कदम को पीछे नहीं ले रहा था,,,, सूरज की बात को सुनकर सुनैना थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

मैं कैसे भी नहाउं,,, मेरी मर्जी है,,, लेकिन तुझे यहां नहीं आना चाहिए था,,,,,(सुनैना थोड़ी घबराहट भरे स्वर में बोल रही थी,,,, क्योंकि वह अपने बेटे की हरकत को जानती थी वह जानती थी ,,, कि ऐसे हालत में उसके बेटे की भावनाएं कितनी बेकाबू हो जाती हैं सुनैना को वह पल याद आ गया जब रात भर सूरज घर नहीं आया था और सुबह उसे देखकर वह पूरी तरह से खुश होकर उसे अपने गले से लगा ली थी अपने सीने से सटा ली थी लेकिन उसका बेटा सूरज उसके दुलार को वासना का रूप देने लगा और उसे भी अपनी बाहों में भरकर उसके नितंबों को दोनों हथेलियां में लेकर दबाने लगा था,,,, अपने बेटे की हरकत पर वह समझ सकती थी कि इस समय उसके बेटे के मन में क्या चल रहा होगा,,,।

और उसे भी जल्द ही यह एहसास हुआ कि वह अपनी गांड अपने बेटे के सामने परोस चुकी है उसकी आंखों के सामने उजागर कर चुकी है इस बात से वह और भी ज्यादा शर्मिंदगी महसूस करने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अगर अपनी गांड छुपाने के लिए वह अपने बेटे की तरफ घूम जाती है तो उसकी नंगी चूचियां और उसकी बुर जरूर दिखाई देगी,,, लेकिन वह जानती थी कि वह अपनी चूची और अपनी बुर को अपने हाथ से ढंक चुकी है लेकिन, फिर भी उसका बेटा उसके दोनों अंगों को देखने की भरपूर कोशिश करेगा इस बात का अहसास होते ही उसके बदन में भी अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,, अपने बेटे की हरकत पर इस समय उसे गुस्सा आ रहा था वह यह सोच रही थी कि अब तक तो उसे चले जाना चाहिएथा कोई औरत को इस हालत में नहाते हुए देख लेता है तो तुरंत अपनी नजर को घुमा लेता है उसके बेटे की तरह घूरता नहीं रहता है। अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

मुझे क्या मालूम था कि तुम नंगी होकर नहा रही हो वरना मैं यहां आता ही नहीं,,,,(सूरज जानबूझकर अपनी मां के सामने नंगी शब्द का प्रयोग कर रहा था और उसकी मां को हैरानी भी हो रही थी कि उसका बेटा कितना बदल गया है,,, सूरज की बात को सुनकर सुनैना बोली,,,,)

चल ठीक है बाद में पानी पी लेना अभी यहां से चला जा मुझे कपड़े पहनने हैं,,,,,,।

ठीक है लेकिन कपड़े पहनने के बाद मेरे लिए पानी लेकर आना और जल्दी से मुखिया के खेत पर चलना है देर हो रही है,,,।

मैं जानती हूं अब तू जा मैं पानी लेकरआऊंगी,,,,।

ठीक है,,,,(इतना कहकर सूरज अपनी मां की नंगी गांड पर एक नजर मार कर वहां से चलता बना इस दौरान उसके पजामे में तंबू बन चुका था,,, वह घर के आंगन में खटिया गिरा कर उस पर बैठ गया,,,, जैसे ही सुनैना को एहसास हुआ कि उसका बेटा चला गया है तो वह जल्दी से अपने सुख कपड़े अपने हाथ में ले ली उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसे बड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि वह अपने बेटे के सामने पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में आ चुकी थी,,,, फिर पता नहीं क्या हुआ उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आई और वह मुस्कुराते हुए अपने कपड़े पहनने लगी,,,

इस दौरान सौच क्रिया से निपट कर रानी वापस आ चुकी थी और जैसे ही घर के आंगन में पहुंची तो सामने चारपाई पर अपने भाई को देखकर उसकी आंखें शर्मिंदगी से नीचे झुक गई और अपनी आंखों के सामने अपनी बहन रानी को देखकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह जल्दी से उठाओ और अपनी बहन की तरफ आगे बढ़ गया यह देख कर रानी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह अपने भाई की फितरत को अच्छी तरह से समझ चुकी थी,,,, वह अपने कदम को पीछे लेना चाहती थी लेकिन सूरज फुर्ती दिखाता हुआ उसके एकदम करीब पहुंच चुका था और उसकी कमर में अपना हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया था और अपने पजामे में बने ताजे ताजे उभार को अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच उसकी बुर पर रगड़ने लगा उसके ही हरकत से रानी के बदन में भी उत्तेजना की लहर दोड़ने लगी,,, अपने भाई के लंड की चुभन को अपने दोनों टांगों के बीच बुर पर महसूस करके वह शरमाते हुए बोली,,,)

क्या भाई तुम्हारा तो फिर सेखड़ा है,,,!

क्या करूं रानी तुझको देखे ही इसको ना जाने क्या हो जाता है और खड़ा हो जाता है,,,(ऐसा कहते हुए उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ कर कुर्ती के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा,,,, रानी को अपने भाई की हरकत से मजा तो आ रहा था लेकिन वह मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि यह समय यह सब करने का बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि किसी भी वक्त उसकी मां आ सकती थी इसलिए वह अपने भाई को समझाते हुए बोली,,,)

छोड़ो मुझे मुझे घर का बहुत सा काम करना है और कहीं मा ने देख लिया ना तो गजब हो जाएगा,,,,।

कुछ नहीं होगा कल रात को भी तु यही कह रही थी लेकिन कुछ हुआ कुछ भी नहीं लेकिन हम दोनों के बीच बहुत कुछ हो गया,,,, मैं तो कहता हूं जल्दी से सलवार की डोरी खोलकर सलवार को नीचे कर दे,,,,(आंगन के कोने वाली जगह की तरह देखते हुए) और जल्दी से दीवार पकड़ कर घोड़ी बन जा और मजा आएगा,,,,

(सूरज किस तरह की बातें सुनकर रानी के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अपने भाई की बातें सुनकर आंगन के कोने की तरफ देखी तो उसका चेहरा सुर्ख लाल होने लगा वह शर्म से पानी पानी होने लगी और यह शर्मा का पानी उसके गुलाबी छेद से बाहर आने लगा और वह अपने भाई से अलग होने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

छोड़ो मुझे पागल हो गए हो क्या कहीं भी शुरू हो जाते हो मां नहाने गई है और किसी भी वक्त आ सकती है,,,

(रानी की बात सुनकर सूरज का मन हुआ कि उसे बता दे कि अभी-अभी वह अपनी मां को नंगी देखकर आ रहा है और वह गुसलखाने में नहा रही लेकिन ऐसा कहना ठीक नहीं था इसलिए वह मुस्कुराता रहा और मुस्कुराते हुए फिर से उसे अपनी बाहों में जकडते हुए बोला,,,)

कुछ नहीं होगा जल्दी से खत्म हो जाएगा जल्दी से अपनी सलवार की डोरी खोल,,,।

नहीं कुछ भी नहीं,,, अभी तो मैं बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी,,,,(अभी दोनों के बीच इस तरह की नोक झोक चली रही थी कि तभी बाहर बाल्टी का दीवार से टकराने की आवाज हुई और दोनों एकदम से अलग हो गए सूरज जल्दी से चारपाई पर जाकर बैठ गया और रानी रसोई घर के अंदर जाकर बैठ गई और थाली में अपने लिए खाना परोसने लगी,,,, तब तक सुनैना आंगन में बाल्टी में पानी भर कर पहुंच चुकी थी,,,, कुछ देर पहले जिस तरह के हालात मां बेटे के बीच पैदा हुए थे उसे देखते हुए सुनैना की हिम्मत नहीं हो रही थी सूरज से नजर मिलाने की वह कुछ बोली नहीं बस बाल्टी को इस तरह से रख दी और अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,, सूरज की नजर अपनी मां की चिकनी कमर पर थी और वह अपनी मां की चिकनी कमर को देखकर अपने मन में सोच रहा था कि कितना मजा आएगा जब इसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर पीछे से चुदाई करूंगा,,,,

कमरे का दरवाजा बंद हुआ और थोड़ी देर बाद खुला और सुनैना तैयार थी मुखिया के खेत पर चलने के लिए लेकिन अपने कमरे से बाहर निकलते हुए भी वह सूरज की तरफ देखने में शर्म महसूस कर रही थी इसलिए सूरज ही बोला,,,।

थोड़ा खाना लेकर चलना पड़ेगा क्योंकि भूख लगेगी तब खाने के लिए घर आने में दिक्कत हो जाएगी,,,।

मुझे मालूम है तभी तो रानी से खाना बांधने के लिए बोली हूं,,,।

तब तो एकदम ठीक है,,,,,।

चल अब तु पानी पी ले अगर खाना खाना हो तो खाना भी खा ले तब तक रानी खाना बांंध देती है,,,(इस बार वह बड़ी हिम्मत करके सूरज की तरफ देखी तो सूरज मुस्कुरा रहा था उसकी मुस्कुराहट में बहुत कुछ छुपा हुआ था उस०की मुस्कुराहट देखकर सुनैना शर्मसार होने लगी और वह फिर से अपनी नजर को नीचे झुका ली अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला)

कोई बात नहीं दो रोटी खा लेता हूं और तुम भी दो रोटी खा लो अच्छा रहेगा,,,।

नहीं मुझे भूख नहीं लगी है,,,।

क्या भूख नहीं है खेत में चार-पांच बार फरसा चलाओगी तो पेट में चूहे दौड़ने लगेंगे इसलिए कहता हूं खा लो,,,, रानी मां के लिए भी तो रोटी निकाल और सब्जी,,,,।

ठीक है भैया,,(इतना क्या करवा सूरज और अपनी मां के लिए भी खाना निकालने लगी और अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ सही समय पर मान गई वरना भाई का भरोसा नहीं है वह तो किसी भी समय शुरू पड़ जाएंगे यही सब सोचते हुए वह दो हाथ में थाली लेकर एक अपने भाई को दे दी और एक अपनी मां को थमा दी,,, सुनैना भी चारपाई पर बैठकर खाना खाने लगी और अपने मन में सोचने लगेगी उसका लड़का कितना बदल गया है पूरी तरह से जवान हो चुका है,,, उसकी नजरों में प्यास नजर आती है औरत की प्यास जब घर में यह हाल है तो उसके साथ तो मुझे काम करना है वहां पर ऐसी वैसी हरकत किया तो क्या होगा यही सब सोते हुए वह खाना खत्म कर दी,,, और सूरज खुद एक लोटा पानी लेकर अपनी मां के सामने खड़ा हो गया और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए उसे लौटा थमाने लगा,,, खाना खाने के बाद सुनैना को भी प्यास लगी थी इसलिए वह अपने बेटे के हाथ से लौटा ले ली और पानी पीने लगी लेकिन इस बीच वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,,,।

रानी खाना बंद कर सूरज को दे दी थी दोनों खेत पर जाने के लिए तैयार हो चुके थे और सुनैना रानी को हिदायत देते हुए घर से बाहर खेतों की तरफ जल्दी लेकिन खेत पर जाने से पहले सूरज जानता था कि उसे मुखिया से एक बार मिलना होगा काम के बारे में सही जानकारी लेनी होगी इसलिए वह अपनी मां को लेकर मुखिया के घर की तरफ चल दिया।।
 
सूरज अपनी मां को लेकर खेत में जाने से पहले मुखिया के घर जाकर एक बार मुलाकात कर लेना चाहता था,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था की मुखिया तो नहीं लेकिन मुखिया की बीवी उसे जरूर कुछ पैसे और थोड़ी बहुत मदद कर देगी जिससे वह भी खुश हो जाएगा और उसकी मां भी खुश हो जाएगी,,, क्योंकि सूरज को ऐसा लगता था कि जो कुछ भी कुछ देर पहले गुसलखाने में हुआ था उससे उसकी मां उससे थोड़ा बहुत नाराज है क्योंकि सूरज अच्छी तरह से जानता था कि अगर कोई और औरत होती तो शायद उसकी ईस हरकत पर इतना असामान्य व्यवहार ना करती लेकिन कहीं ना कहीं उसकी मां को यह सब गलत लगा था और वह भी नहीं जानता था कि गुसलखाने में उसकी मां नहा रही है वह तो पानी पीने के लिए गया था,,, इसलिए किसी भी तरह से अपनी मां को खुश करना चाहता था।

रास्ते भर उसकी मां कुछ बोल नहीं रही थी एकदम खामोश थी क्योंकि उसे इस बात का रंज था कि वह अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नग्न अवस्था में नहा रही थी,,,, लेकिन इस बात को कहा बिल्कुल भी नहीं जानती थी कि उसे कई बार पूरी तरह से नग्न अवस्था में उसका बेटा देख चुका है नहाते हुए कपड़े बदलते हुए यहां तक की चुदवाते हुए भी देख चुका है,,, लेकिन यह सब सुनैना को नहीं मालूम था,,, और वह एक संस्कारी और मर्यादा में रहने वाली औरतें इसलिए अपनी आदत पर उसे गुस्सा आ रहा था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है और उसके जवान होने का सबूत वह भावनाओं में बहते हुए एक बार महसूस कर चुकी थी,,, इसलिए वह अपने बेटे के सामने ऐसी कोई भी गलती नहीं करना चाहती थी जिससे उसके बेटे को आगे बढ़ने का मौका मिले या वह उसकी अनजाने में हुई हरकत को कुछ और समझ कर अपनी हरकतों को बढ़ाने लगे। सूरज में अपनी मां से किसी भी तरह की बात नहीं कर रहा था,, क्योंकि वह अपनी मां के मन की हालत को समझ रहा था, वैसे इस बात की खुशी उसे अच्छी तरह से थी कि आ जाओ अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख लिया था और वह भी एकदम करीब से,,,।

ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए सुनैना की भरावदार गांड ऊपर नीचे हो रही थी और किसी भी साड़ी में गांड की दोनों बड़ी-बड़ी फांकें आपस में रगड़ खा रही थी लेकिन इस अद्भुत मादकता भरे नजारे को सूरज नहीं देख पा रहा था क्योंकि वह आगे आगे चल रहा था और इस बात का मलाल उसे भी था कि उसे अपनी मां के पीछे रहना चाहिए था लेकिन उसकी मां मुखिया का घर नहीं देखी थी इसलिए उसे ही आगे आगे चलना पड़ रहा था,,,, कच्ची सड़क के किनारे खेतों में गांव के लोग काम कर रहे थे,,, सुनैना कोई इस बात की भी फिक्र थी कि आज वह समय पर खेत पर नहीं पहुंच पाई थी वरना अभी तक तो बहुत काम हो चुका होता,, क्योंकि गर्मी के महीने में खेतों में सूरज सर पर आ जाए काम नहीं हो पाता इसलिए वह जल्दी से काम खत्म करना चाहती थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि आज का दिन बिगड़ गया था,,, वह चलते हुए सूरज को देख रही थी और ना चाहते हुए उसके मन में यही ख्याल रहता है कि वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो चुका है अपने बेटे के गठीले बदन और उसकी लंबी कद काठी को देखकर एक अजीब सा आकर्षण सुनैना की आंखों में दिख रहा था जिससे वह भी परेशान हुए जा रही थी,,,। रह रहकर सुनैना हल्के से अपनी साड़ी पकड़ कर उसे थोड़ा सा ऊपर उठाकर ऊंची नीची पगडंडियों से आगे बढ़ने की कोशिश करती थी जिससे उसकी खूबसूरती में चार चांद लग जाते थे,,, गहरी सांस लेते हुए वह एक बड़े से घने पेड़ के नीचे रुक गई और अपनी साड़ी के पल्लू से हवा देते हुए अपने बेटे को आवाज लगाते हुए बोली,,,।

रुक जा अभी कितनी दूर है मुखिया का घर मैं तो अभी से ही थक गई हूं,,,,,।

(अपनी मां की आवाज सुनकर सूरज एकदम से रुक गया और पीछे मुड़कर देखा तो उसकी मां पेड़ की छांव के नीचे खड़ी थी और अपनी ही पल्लू से हवा दे रही थी वह धीरे से कदम बढ़ाते हुए अपनी मां के करीब आया और इस हालत में उसकी नजर अपने आप ही सुनैना की मदमस्त कर देने वाली छातियों पर चली गई,,, और सूरज अपनी मां की चूचियों को घुरते हुए बोला,,,)

बस आ ही गया यह बड़े-बड़े पेड़ खत्म होने के बाद ही मुखिया का घर दिखाई देने लगेगा,,,,।

लेकिन,,,,(इतना कहते ही सुनैना का ध्यान अपने बेटे की नजर पर गई तो वह एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई और अपनी उभरी हुई छातीयो को अपने बेटे की नजर से छुपाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोली,,,) मैं तो एकदम से थक गई हूं,,,.

(अपनी मां की हरकत को देखकर सूरज भी अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया था और बोला,,)

क्या मां तुम अभी से थक गई तो खेतों में काम कैसे कर पाऊंगी,,,,।

अरे मैं भी तो यही सोच रही हूं गर्मी कुछ ज्यादा ही है,,,,(पल्लू से अपनी माथे पर उपसे हुई पसीने को पोछते हुए वह बोली,,, और उसके इस हरकत पर उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा ऊपर उठ जाने की वजह से उसकी चूचियों की गहरी दरार एकदम से साफ नजर आने लगी जिस पर फिर से सूरज की नजर चली गई और उसके मुंह में पानी आ गया,,, सूरज को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की चूचियां जवानी से भरी हुई थी और एकदम गदराई हुई थी,,, अपनी मां की चूचियों को देखकर सूरज को पूरा विश्वास था कि अगर मौका मिल जाए तो वाकई में उसकी मां की चूचियां उसे बहुत ज्यादा मजा देंगी,,, सुनैना ने इस बात पर बिल्कुल भी गौर नहीं की थी कि उसकी हरकत की वजह से उसकी चूचियों की पतली गहरी लकी एकदम साफ दिखाई दे रही है वह पेड़ की तरफ देख रही थी और सूरज अपनी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था और उसकी चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं जब तक मन करे तब तक काम करना बाकी मैं तो हूं सब संभाल लूंगा,,,,।

(सूरज अपनी मां को दिलासा देने वाली बात कर रहा था और उसकी मां अपने बेटे की इस बात से मन ही मन प्रसन्न हो रही थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसके बेटे की नजर इस समय कहां पर है और जैसे ही वह अपनी नजरों को नीचे की तो एक बार फिर से वहां सर में से पानी पानी हो गई वह तुरंत अपने साड़ी के पल्लू से अपनी चूचियों को ढक ली,,, सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसे इस तरह से गंदी नजरों से क्यों देखता है,,, बेटे को तो बिल्कुल भी ऐसा नहीं करना चाहिए तो फिर सूरज दूसरी मर्दों की तरह क्यों बर्ताव कर रहा है यह सुनैना कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन वह अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरत रही थी,,, कुछ देर छाव में खड़े रहने के बाद,,, सूरज अपनी मां से बोला,,,)

आज का दिन तो लग रहा है कि ऐसे ही चला जाएगा चलो मुखिया से मिल लेते हैं और उनके खेतों को देख लेते हैं खेत को देख लेंगे तो काम के बारे में अच्छे से समझ में आ जाएगा,,,।

तो ठीक कह रहा है आज का दिन सच में ऐसे ही चला गया हमें और जल्दी घर से निकल जाना चाहिए,,,।

तुम ठीक कह रही हो मां,,,, लेकिन अभी चलो मुखिया के घर अगर वहां मुखिया की बीवी होगी तो कुछ पैसे मिल जाएंगे और थोड़ी बहुत सब्जियां भी,,,।

तो क्या मुखिया की बीवी पैसे दे देंगी,,,!(सुनैना आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

तो क्या मुखिया की बीवी मुझे बहुत मानती है,,,, अब हमें चलना चाहिए,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज फिर से आगे आगे चलने लगा उसके पीछे-पीछे सुनैना चलने लगी। सुनैना चलते चलते सूरज के बारे में सोच रही थी उसने एक बात पर बहुत ध्यान दिया था कि कुछ दिनों से सूरज की नजर पूरी तरह से बदल चुकी थी उसका देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका था,,, इस समय भी वह उसकी चूचियों को ही घुर रहा था,,, इन सब बातों से जहां वह हैरान हो रही थी वही न जाने क्यों उसके बदन में अपने बेटे की गंदी नजर की वजह से अजीब सी हलचल महसूस होने लगती थी और यह हलचल उसे भी बड़ी अजीब लगती थी क्योंकि वह जानती थी कि सूरज उसका बेटा है और मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कभी संभव नहीं हो सकता उसे यह भी याद है कि एक बार वह खुद भावनाओं में बह गई थी इसीलिए अपने आप को बहुत संभाले हुए थी,,, और उसे इस बात का डर भी लगता था कि कहीं उसके पैर ना बैठ जाए कहीं वह फिर से भावनाओं में ना बह जाए,,, यही सब सोचते हुए वह सूरज के पीछे-पीछे चल रही थी,,, अपने बेटे के साथ वह पहली बार मुखिया के घर जा रही थी उसने आज तक मुखिया का घर नहीं देखी थी,,,

सूरज के कहे अनुसार वाकई में बड़े-बड़े पेड़ खत्म होते ही मुखिया का घर नजर आने लगा जो की काफी बड़ा घर था,,, सूरज अपनी मां को उंगली के इशारे से दिखाते हुए बोला,,।

वह देखो मां मुखिया जी की हवेली वैसे तो यह हवेली नहीं है लेकिन हवेली से कम भी नहीं है,,,

सच कह रहा है रे तु कितना बड़ा घर है,,,(दूर से ही देखते हुए सुनैना बोली,,,।)

थोड़ी देर में दोनों मुखिया के घर के बाहर खड़े थे,,, मुखिया घर के बाहर ही बड़े से नीम के पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठा हुआ था और दूसरे मजदूरों को कम के बारे में समझा रहा था,, सूरज और उसकी मां को देखते ही वह एकदम खुश होता हुआ बोला,,,।

आओ सूरज बेटा,,,,।

जी नमस्कार मुखिया जी,,,।

नमस्कार नमस्कार,,,, एकदम समय पर आ गए हो,,, आओ बैठो,,,,(सामने लकड़े के बने तख्ते की तरफ इशारा करते हुए मुखिया जी बोले,,, और उनका इशारा पाकर सूरज उसे पर जाकर बैठ गया लेकिन सुनैना नहीं बैठी क्योंकि वह इस तरह से किसी गैर मर्द के सामने बैठी नहीं थी इसलिए खड़ी ही रही और घूंघट से चेहरे को ढंक ली थी,,, सुनैना को कड़ी देखकर कर मुखिया जी बोले,,,)

तुम भी बैठो,,,।

नहीं मुखिया जी मैं ठीक हूं,,,।

चलो कोई बात नहीं,,,, चाय बन चुकी है,,, चाय पीकर खेतों पर जाना,,,।

जी मुखिया जी हम लोग चाय नहीं पीते,,,,(सुनैना एकदम मधुर ध्वनि बिखेरते हुए बोली,,, अपनी मां के सुर में और मिलाता हुआ सूरज भी बोला,,,)

मां सही कह रही है मुखिया जी हम लोग सुबह-सुबह गाय का ताजा दूध पीते हैं,,,।

(इसी बीच मुखिया की बीवी भी वहां पर आ पहुंची सुनैना को देखकर उसे आश्चर्य हुआ आश्चर्य इस बात के लिए हुआ कि उसने इतनी खूबसूरत औरत गांव में पहले कभी देखी नहीं थी,,,, मुखिया की बीवी कुछ बोलती है इससे पहले मुखिया सूरज की मां के बारे में बताते हुए बोले,,,)

यह भोला की बीवी है सूरज की मां,,,,।

ओहहहह,,, तो तुम सूरज की मां पहली बार मैं तुम्हें देख रही हूं,,,।

जी मैं यहां पहली बार आई हुं,,,।

सच कह रही है भोला कहीं अपने दोस्तों के साथ कमाने के लिए चला गया है अगर वह होता तो मां बेटे की जरूरत ही नहीं पड़ती वह खुद सारा काम संभाल लेता लेकिन उसकी गैर हाजिरी में सूरज और उसकी मां सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लिए हैं,,,,।

(मुखिया की बीवी मुखिया की बातों पर बिल्कुल भी गौर नहीं कर रही थी वह सुनैना को ही देखे जा रही थी वाकई में उसके बदन की बनावट उसके बदन का उठाव और कटाव बेहद आकर्षक था,,, एक औरत होने के नाते मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से मालूम था कि सूरज की मां के बदन की बनावट और आकर्षण मर्दों की हालत खराब कर देती होगी वह एक बहाने से सूरज की मां का चक्कर लगाते हुए उसके नितंबों का उभार देख रही थी क्योंकि उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि मर्दों की उत्तेजना औरत के कौन से अंग को देखकर सबसे ज्यादा भड़क जाती है,,,, और जैसे ही मुखिया की बीवी सूरज की मां की गांड की तरफ देखी तो वह खुद उसके आकर्षण में डूबने लगी और वह अपने मन में ही अपने आप से बोली,,,।

वाह क्या गांड है,,, दुनिया का भला कौन सा ऐसा मर्द होगा जो ऐसी औरत को भोगना नहीं चाहेगा,,, इतनी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी इसका आदमी मेरी जवानी के पीछे पागल था पागल था या देखो कुछ समझ में नहीं आ रहा है पागल ही होगा वरना ऐसी खूबसूरत औरत छोड़कर कोई दूसरी औरतों के पीछे क्यों भागेगा,,,, शायद ऐसा भी हो सकता है कि घर की मुर्गी दाल बराबर अपनी बीवी को तो वह कभी भी चोद सकता था,,, दूसरों की बीवी चोदने का मजा ही कुछ और होता है,,, और शायद इसीलिए भोला घर का खाना कम बाहर का खाना ज्यादा खाता था। कसी हुई साड़ी में बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा आकर्षक और उपसी हुई लग रही थी,,, एक नजर सूरज की मां की गांड पर डालकर वह फिर से अपनी जगह पर आ चुकी थी। वह मुखिया की बातों को बिल्कुल भी नहीं सुनी थी और ना हीं ध्यान दी थी,,, फिर भी सुनैना की तरफ देखते हुए बोली।

तुम खेतों में काम कर लोगी,,,,।(सुनैना की खूबसूरती को देखकर मुखिया की बीवी ऐसा बोल रही थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि उसकी खूबसूरती और बदन की कसावट खेतों में काम कर करके ही बनी थी मुखिया की बीवी की बातें सुनकर सूरज की मां बोली,,,)

बिल्कुल मालकिन हमारे लिए खेतों में काम करना कोई बड़ी बात नहीं है हम दोनों तो खेतों में ही दिन रात काम करते हैं,,,।

ओहहहह ,,, तुम्हें देखकर लगता नहीं की तुम एक जवान लड़के की मां हो,,,,,(सूरज की तरफ देखते हुए वह वाली सूरज की जवानी का मजा वह ले चुकी थी और उसे नहीं मालूम था कि सूरज की मां अभी भी जवानी से भरी हुई होगी इसलिए उसे हैरानी भी हो रही थी और न जाने क्यों उसे अंदर ही अंदर सुनैना से एक अजीब सी जलन होने लगी थी,,,, मुखिया की बीवी के इस बात का जवाब सुनैना के पास बिल्कुल भी नहीं था और उसकी बातों को सुनकर सूरज अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था क्योंकि एक तरह से मुखिया की बीवी उसकी मां की जवानी की उसके खूबसूरत बदन की प्रशंसा कर रही थी तारीफ कर रही थी। इस बीच मुखिया को जैसे कुछ याद आया हो वह एकदम से बोले,,,,)

अरे हां,,, यह दोनों तो चाय पीते नहीं है थोड़ा सा दूध हि लाकर दे दो,,,।

जी मुखिया जी मैं खाना खाकर आई हूं,,,,(सुनैना को किसी दूसरे के घर पर दूध पीना गवारा नहीं था उसे शर्म महसूस हो रही थी इसलिए वह बहाना करते हुए बोली,,, सुनैना का जवाब सुनकर मुखिया की बीवी अपनी आंखों को नचाते हुए सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,)

तू तो पिएगा ना सूरज,,,,

जी जरूर,,,,(सूरज मुस्कुराते हुए बोला,,,, उसका जवाब सुनकर मुखिया की बीवी हल्की सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए बोली,,,)

गरम करने को रखी हूं चल वहीं पर पीले और एक दो आलू की बोरी है उसे थोड़ा उठाकर दूसरी तरफ रख दें और थोड़ी बहुत सब्जीया अपने घर के लिए ले लेना,,,,।(इतना कहकर मुखिया की बीवी अपनी गांड मटकाते हुए आगे आगे चलने लगी उसके मन में इस समय कुछ और चल रहा था,,, सुनैना घूंघट की आड़ में से मुखिया की बीवी को देख रही थी और उसे यह भी दिखाई दे रहा था कि मुखिया की उम्र अपनी बीवी को खुश करने वाली बिल्कुल भी नहीं थी मुखिया की बीवी की जवानी अभी भी बरकरार थी बदन में अभी भी अल्हड़ पन था और जिस तरह से अपनी गांड मटका कर गई थी वाकई में देखने वाले की हालत खराब हो जाए,,,, मुखिया की बीवी का इशारा पातें ही,,,, सूरज अपनी मां के कान में धीरे से बोला,,,,)

तुम्हें बैठो मां मैं अभी आता हूं और कुछ पैसे लेकर आता हूं,,,,।

(सूरज की बात मानकर वह वहीं रुक गई लेकिन मुखिया के सामने तख्ते पर नहीं बैठी,,, तब तक दूसरे मजदूर भी वहां आकर मुखिया से काम के बारे में बातें करने लग गए,,, तभी अचानक सुनैना अपना जवान बेटा और मुखिया की बीवी की मदद कर देने वाली जवानी के बारे में याद आ गया सूरज की बदलती नजरे उसका जवानी के दहलीज पर कदम रखना यह सब सुनैना को परेशान करने लगा वह अपने मन में सोचने लगी कि जब सूरज उसे खुद प्यासी नजरों से घूरता रहता है तो मुखिया की बीवी तो पराई औरत है उसे किस नजरिए से देखता होगा,,,, इस बारे में सोच कर सुनना एकदम परेशान होने लगी,,, मुखिया की उम्र और मुखिया की बीवी की भरी हुई जवान को देखकर उसे कुछ-कुछ शंका के साथ घबराहट होने लगी।

एक औरत के मन को वह अच्छी तरह से समझती थी उसे इस बात का एहसास होने लगा था की मुखिया की उम्र हो चली थी उनके शरीर में इतना दम नहीं था कि वह किसी औरत को खुश कर सके और मुखिया की बीवी अभी भी पूरी तरह से जवान थी ऐसे में मुखिया की बीवी होने से पेट की आज तो पूछी जाती है लेकिन शरीर की आग भोजन से नहीं बुझती शरीर की आग को बुझाने के लिए एक मर्द की जरूरत होती है जो औरत को अपनी बाहों में जकड़ कर उसके रस को निचोड़ दे,,, और मुखिया की बीवी को देखकर लगता नहीं है कि वह अपनी प्यास को अपनी जरूरत को दबा ले जाएगी,, इसलिए अब उसे अपने बेटे सूरज को लेकर घबराहट होने लगी थी उसे इस बात का डर सताने लगा था कि कहीं मुखिया की बीवी उसके बेटे को अपनी जवानी के जाल में तो नहीं फसा लेगी,,, वैसे भी सुनैना की यह शंका बिल्कुल जायस थी क्योंकि सूरज का खुद अपनी मां के साथ जिस तरह का व्यवहार था जिस तरह से वह प्यासी नजरों से देखा था तो घर के बाहर दूसरी औरतों के साथ मौका मिलने पर कुछ भी कर सकता था इस बात का एहसास सुनैना को अच्छी तरह से था। जब वह उसके गले लगी थी अगर सही समय पर रानी ना आ जाती तो उसे दिन उसका बेटा अपनी हरकत को न जाने कौन सी शक्ल दे देता।

सुनैना बार-बार जी और मुखिया की बीवी और सूरज गया था वही देख रही थी अगर उसका वश चलता तो वह उठकर उसी दिशा में चल देती,,,, दूसरी तरफ देखते ही देखते मुखिया की बीवी सूरज को घर के दूसरी और ले आई थी जहां पर एक बार वह सूरज से चुदाई का मजा ली थी,,,, दोनों घर के पीछे वाली जगह पर पहुंच चुके थे मुखिया की बीवी इधर-उधर नजर घूमाकर तसल्ली कर लेने के बाद,,, थोड़ा गुस्से में सूरज से बोली,,,।

क्यों रे दूध पिएगा,,, बहुत तेरा मन दूध पीने को कर रहा है,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं है बल्कि मुखिया जी चाय पीने के लिए आग्रह कर रहे थे तो मां ने ही बोलेगी हम चाय नहीं दूध पीते हैं,,,,।

ओहहह तो यह बात है,,,,(मुखिया की बीवी अपनी नजरों को गोल-गोल नचाते हुए बोली,,,, घर के पीछे आते ही सूरज ने देखा कि एक तरफ चूल्हा जल रहा था और उसे पर बड़ा सा पतीला रखा हुआ था जिसमें दूध पक रहा था,,,, मुखिया की बीवी दूध की तरफ अच्छी और फिर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बिना कुछ बोले तुरंत अपने ब्लाउज का बटन खोले बिना ही नीचे से अपने ब्लाउस को ऊपर की तरफ खींच दी और अपनी चूची को हाथ में लेकर बाहर निकाल दी यही वह अपनी दूसरी चूची के साथ भी की और दोनों चूचियों को हाथ में लेकर सूरज की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

ले बहुत दूध पीने का मन कर रहा है ना तेरा,,,, ले बिल्कुल भी देर मत कर,,,,(मुखिया की बीवी की यह अदा देखकर सूरज पूरी तरह से मदहोश हो गया और एकदम से आगे बढ़कर एक हाथ मुखिया की बीवी की चिकनी कमर में डाला और उसे अपनी तरफ एकदम से अपने लंड से सटा लिया और अगले ही पल मुखिया की बड़ी-बड़ी चूची को अपने प्यास होठों के बीच रखकर पीना शुरू कर दिया मुखिया की बीवी एकदम से उत्तेजना से गदगद हो गई,,,, सूरज पागलों की तरह बारी-बारी से मुखिया की बीवी की दोनों चूचियों को पी रहा था,,,, मुखिया की बीवी गरमा गरम सिसकारी लेते हुए बोली,,,)

सहहहहह आहहहहहह,,, हरामजादे अब बात क्यों नहीं है रे मेरे पास तेरी याद में कितनी रात ऐसे ही गुजार दी,,,, कहीं ऐसा तो नहीं अपनी मां का दूध पीने लगा है,,, देखी,,, बहुत बड़ी-बड़ी चूची है तेरी मां की,,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मां का जिक्र सुनते ही उसकी उत्तेजना एकदम से बढ़ने लगी और वह अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर जोर से दबाते उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसकी चूची को पागलों की तरह पीना शुरू कर दिया,,,, सूरज की कामुक हरकत को देखकर ,,,उसकी उत्तेजना देखकर मुखिया की बीवी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

मुझे तो लगता था कि तेरी मन बुढी होगी लेकिन तेरी मां तो एकदम जवान है बड़ी-बड़ी गांड है बड़ी-बड़ी चूची है,, यह सब घर में ही देख कर तेरा लंड तो बार-बार खड़ा हो जाता होगा,,,,,,,,(मुखिया की बीवी के मुंह से अपनी मां के लिए तरह की बातें सुनकर सूरज को गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी मुखिया की बीवी की कही बातें आग में घी का काम कर रही थी सूरज इन सब बातों को सुनकर और भी ज्यादा उत्तेजित होता हुआ मुखिया की बीवी की जवानी से खेलने लगा था वह दोनों चूचियों को दोनों हाथ से पकड़ लिया था उसे जोर-जोर से दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथ में मुखिया की बीवी की चूचियां नहीं बल्कि दसहरी आम आ गया हो,,,, और यह सब मुखिया की बीवी को बहुत अच्छा लग रहा था,,,,,।

सूरज अपने मुंह में से मुखिया की बीवी की चूचियों को निकालने के लिए तैयार नहीं था दाईं चूची को बाहर निकालता तो बाईं चूची को मुंह में भर लेता,,, ऐसा करते हुए खुद भी मजा ले रहा था और मुखिया की बीवी को भी मजा दे रहा था। मुखिया की बीवी को लग रहा था कि जैसे सूरज गाय का दूध नहीं बल्कि उसके ही दूध के बारे में बोल रहा था इसलिए तो दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, मुखिया की बीवी अपनी बातों से उसकी उत्तेजना और जोश दोनों को बढ़ा रही थी सूरज की इस तरह की हरकत को देखकर वह बोली।

कहीं इसी तरह से अपनी मां की चूची को दबा दबा कर तो नहीं पीता है,,, और वैसे भी तेरी मां की चुची है भी एकदम खरबूजे की तरह,,, तुझको तो मजा आ जाता होगा,,,,।

(मुखिया की बीवी एक तरह से उसकी मां के बारे में इस तरह की बातें करके उसे उकसा रही थी क्योंकि जैसे-जैसे वह उसकी मां के बारे में गंदी बातें बोल रही थी वैसे-वैसे सूरज की हरकतें उसकी उत्तेजना उसका जोश उसके बदन पर बढ़ता जा रहा था,,,,, इस बार वह दोनों हाथों से उसकी साड़ी पड़कर एकदम कमर तक उठा दिया था और उसकी नंगी गांड पर जोर-जोर से चपत लगाता हुआ उसे मसल रहा था,,,, मुखिया की बीवी पूरी तरह से आनंद विभोर होती चली जा रही थी उसे अत्यधिक उत्तेजना और आनंद का एहसास हो रहा था वह मस्त हो रही थी। वह फिर उसकी मां के बारे में गंदी बात बोलते हुए बोली।)

मुझे तो लगता है कि तेरी मां तुझे ही चुदवाती है तभी उसकी गांड बड़ी बड़ी हो गई है क्योंकि काफी दिनों से तेरे पिताजी तो घर पर है ही नहीं और तेरी मां की जवानी पूरी भी लगा में एकदम गदराई घोड़ी की तरह है और उसकी जवानी की आग बुझाने के लिए तेरे जैसा बेलगाम घोड़ा ही चाहिए तेरी मां को तेरी मां तो मत हो जाती होगी तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,,,, जोर-जोर से उछलती होगी बोलती होगी और जोर से सूरज बेटे और जोर से तभी तो मेरे पास नहीं आता,,,, सर अपनी अपनी मां की बुर में गिरा देता है,,,,।

(मुखिया की बीवी कि इस तरह की गंदी बातें सुनकर सूरज पूरी तरह से जोश में आ गया था उसका लंड अकड़ कर लोगे का रोड बन गया था और वह जल्दी से जल्दी मुखिया की बीवी की बुर में अपना लंड डाल देना चाहता था,,, इसलिए वह, धीरे से अपने पजामे को एक हाथ से पकड़कर, उसे एकदम से खींच कर घुटनों तक कर दिया उसका लंड अपनी औकात में आकर एकदम से खड़ा हो गया था और वह जोश में भरता हुआ बोला,,,)

बताऊ किसकी बुर में पानी गिराता हुं(इतना कहने के साथ ही सूरज अपना जोश में भरा हुआ ताकत दिखाते हुए मुखिया की बीवी को एकदम से गोद में उठा लिया और उसे गोद में उठाए हुए ही ले जाकर दीवार से सटा दिया उसकी दोनों टांग उसके हाथों में फंसी हुई थी वह उसके हाथों में लहरा रही थी वह पूरी तरह से उसकी गोद में थी और फिर सूरज अपने एक हाथ से धीरे से सहारा लेकर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में टिका दिया और जोरदार धक्का मारा लंड पूरी तरह से ताकत दिखता हुआ मुखिया की बीवी की बुर को फैलाता हुआ एकदम जाकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,,, मुखिया के बच्चे की चीख निकलते निकलते रह गई लेकिन पल भर के लिए वह दर्द से कराहने लगी,,, क्योंकि मुखिया की बीवी सूरज के ही हमले के लिए अपने आप को बिल्कुल भी तैयार नहीं की थी लेकिन थोड़ी ही देर में सूरज अपनी सूझबूझ से मुखिया की बीवी को एकदम मस्त करने लगा।

थोड़ी ही देर बाद मुखिया की बीवी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूटने लगी वह मदहोश होने लगी सूरज पागलों की तरफ उसे दीवार से सटाकर अपनी गोद में लिए हुए उसकी बुर में धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,, हर धक्के के साथ मुखिया की बीवी का वजूद हल जा रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था और सूरज अपनी रफ्तार को बिल्कुल भी कम नहीं कर रहा था क्योंकि वह जल्दी से जल्दी अपना पानी निकाल देना चाहता था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि किसी को भी शक हो कि उसके और मुखिया की बीवी के बीच में कुछ चल रहा है,,, क्योंकि यहां पर दोनों को ज्यादा समय हो गया था। सूरज की मेहनत रंग ला रही थी दोनों चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे मुखिया की बीवी अपनी बाहों का हर सूरज के गले में डाल दी थी और पागलों की तरह उसके होठों पर होंठ रखकर चुंबन कर रही थी,,,, और फिर सूरज के जोरदार धक्कों के साथ दोनों का एक साथ पानी निकल गया,,,,।

मुखिया की बीवी बहुत खुश थी क्योंकि काफी दिनों के बाद उसे फिर से चुदाई का मजा मिला था,,,, मुखिया की बीवी खुश होकर एक ठेले में कुछ सब्जियों भर कर सूरज के हाथों में थमा दी,,, सब्जियों को लेकर सूरज मुस्कुराते हुए मुखिया की बीवी से बोला,,,,।

अगर कुछ पैसे मिल जाते तो,,,,,।

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और बोली)

रुक अभी आई,,,(और इतना कहकर घर के अंदर गई और थोड़ी देर में वापस आकर वह सूरज के हाथों में कुछ रुपए थमा दी जिसे देखकर सूरज खुश हो गया,,,, और जाने से पहले गर्म दूध के पतीले में हल्की सी उंगली डालकर उसकी मलाई अपनी उंगली पर लगा लिया या देखकर मुखिया की बीवी आश्चर्य जताते हुए बोली,,,,)

दूध पीकर तेरा मन भरा नहीं क्या,,,?

तुम्हारी चूची से पीने के बाद भला मन भर सकता है क्या मेरे पास समय होता तो फिर से तुम्हारी चूची को मुंह से लगा लेता,,,,(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और सूरज भी खुश होते हुए अपनी उंगली में लगी हुई मलाई को अपने होंठ के किनारी पर लगा लिया यह देखकर मुखिया की बीवी फिर से हैरान होते हुए बोली,,,)

यह क्या कर रहा है तु,,,?

अरे मालकिन कोई देखेगा तो समझ जाएगा कि मैं दूध पीने के लिए गया था और यह गर्म दूध लगा रहेगा तो किसी को शक नहीं होगा कि मैं तुम्हारा दूध पी कर आया हूं,,,,।

ओहहहह बहुत हारामी है तू,,,, अब जा जल्दी और अपनी मां को जरूर दिखाना की कौन सा दूध पीकर आया है तेरी मां को कुछ ज्यादा ही शक होगा कि कहीं मैंने अपना दूध तो नहीं पिला दी,,,,,(मुखिया की बीवी है बात सोच समझ कर बोली थी एक औरत होने की नाते उसे इतना तो मालूम ही था कि एक जवान लड़के को लेकर एक औरत कौन-कौन सी धारणाएं अपने मन में बना लेती है और वैसे भी सूरज की मां उसके बारे में जो भी शंका करेगी वह हकीकत ही होगा बस फर्क ईतना होगा कि वह साबित नहीं कर पाएगी,,,, सूरज हाथ में थैला लिए हुए घर से बाहर निकल गया था और उसे आता हुआ देखकर उसकी मां की प्रसन्न नजर आ रही थी क्योंकि इस बीच उसके मन में बहुत सी बातें चल रही थी बहुत सारी शंकाए जन्म ले रही थी,,,, दोनों खेत की तरफ निकल गए थे हाथ में इतना बड़ा थैला देखकर उसकी मां बोली,,,)

यह थैला क्यों उठा लाया,,,!

अरे मैं इसमें ढेर सारी सब्जियां हूं मुखिया की बीवी नहीं दी है,,,।

ओहहह तब तो बहुत अच्छी बात है और पैसे,,,,

(पैसे का नाम सुनकर सूरज बीच सड़क पर ही रुक गया और अपने कुर्ते की जेब में से पैसे निकाल कर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

यह देखो उन्होंने पैसे भी दी है,,,,।

(सूरज की हथेली में पैसे देखकर सुनैना की आंखों में चमक आ गई और वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे की हथेली में से पैसे ले ली तभी उसकी नजर सूरज के होठों पर गई जिस पर हल्का सा दूध लगा हुआ था,,, यह देखकर सुनैना का दिमाग बड़ी तेजी से काम करने लगा उसे इस बात का डर था की कही सूरज मुखिया की बीवी का दूध पीकर तो नहीं आ रहा है जो जल्दबाजी में उसके होंठों पर लगा रह गया हो,,,, इसलिए वह एकदम से अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के होठों पर लगे दुध को अपनी उंगली से करेद कर देखने लगी,,, लेकिन जल्दी ही सुनैना को एहसास हो गया कि उसके होठों पर लगा दूध पकाया हुआ था उस पर क्योंकि मलाई जमी हुई थी यह देखकर उसे राहत हुई,,,)

अरे मां दूध है,,,, मुखिया की बीवी गरमा गरम दूध पिला दी,,,,।

ओहहहह मैं तो कुछ और ही समझ रही थी,,,।

मैं कुछ समझा नहीं क्या समझ रही थी,,,।

कुछ नहीं अब जल्दी खेतों पर चल बहुत देर हो गया आज का दिन तो ऐसे ही निकल गया,,,,।

हा मां आज का दिन तो लगता है कुछ काम होने वाला नहीं है,,, लेकिन कम भले नहीं हुआ लेकिन आज का दिन काम तो बहुत आया,,,।

वह कैसे,,,?

सब्जीया भी मिल गई और पैसे भी,,,।

हां यह बात तो है,,,,(इतना कहकर दोनों खेतों की तरफ चले जा रहे थे और सूरज अपनी मां के मन में उठ रहे शंका को अच्छी तरह से समझ रहा था और उसे मुखिया की बीवी की बात याद आने लगी जो जाते समय बोली थी वह समझ गया कि इसी के लिए मुखिया की बीवी बोल रही थी कि अपनी मां को बता देना कि गाय का दूध पीकर आ रहा हूं वरना वह यही समझेगी की मुखिया की बीवी का दूध पीकर आ रहा है और अपने मन में इस तरह का ख्याल आते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,)
 
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