Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 2 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

राजू का लंड दिखाने वाली बात आई गई हो गई थी राजू इस बात को भूल चुका था,,,,,, वह फिर से अपनी मस्ती में मस्त हो गया था और हरिया उसी तरह से रोज बैलगाड़ी को रेलवे स्टेशन ले जाता है और वहां से सवारी ढोकर अपना जीवन निर्वाह कर रहा था,,,,,,,

गुलाबी अपनी जवानी के एक-एक पल को बड़ी मुश्किल से बिता रही थी उसके तन बदन में जवानी की लहर चिकोटीयां काट रही थी,,, इसमें उसका दोस्त बिल्कुल भी नहीं था एक तो उसकी उम्र शादी लायक हो चुकी थी और अभी तक उसकी शादी नहीं हुई थी ऐसे में जवानी की उफान उसके बदन में हर तरफ से बाहर की तरफ झांक रहा था और ऊपर से अपने भैया और भाभी के कमरे में से आ रही मादक चुदाई की सिसकारीयो की आवाज से वह पूरी तरह से मस्त हो जाती थी,,,,,, उसके बदन में जवानी किसी बाढ़ के पानी की तरह थी जो कि सब्र के बांध से बंधी हुई थी जिस दिन अगर यह सब्र का बांध टूट गया तो उसकी जवानी पिघल कर ना जाने कितनों को डुबा ले जाएगी,,,,,, वैसे गुलाबी इस उफान मारती उम्र में भी अपनी जवानी को किसी की नजर लगने नहीं दी थी ऐसा नहीं था कि किसी की नजर उस पर पडती नहीं थी गांव के सभी जवान लड़कों की नजर उस पर हमेशा बनी रहती थी वैसे उसकी भाभी कीमत मस्त जवानी का आकर्षण गुलाबी से एक कदम आगे ही था लेकिन फिर भी गुलाबी किसी से कम नहीं थी गोरा रंग तीखे नैन नक्श ऊपर से जवानी की दस्तखत रूपी उसके दोनों अमरूद जान लेवा थे हालांकि अब तक यह दोनों अमरुद किसी के हाथों मैं नहीं आए थे इसलिए उसके उभार कुछ ज्यादा नहीं था लेकिन आकर्षण का केंद्र बिंदु जरूर था,,,, पतली कमर कमर के नीचे का उन्नत नितंबों का उभार ज्यादा घेरा उधार नहीं था लेकिन सीमित रूप से उसका भौगोलिक आकार बेहद आकर्षक और मस्त कर देने वाला था जिसकी लचक पगडंडियों पर चलते हुए पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर उधर लुढकती रहती थी जैसे अपने दोनों हाथों में लेकर संभालने के लिए गांव के बूढ़े और जवान दोनों मचलते रहते थे,,, लेकिन गुलाबी ना किसी को आज तक ऐसा मौका नहीं दी थी,,,,,

उसके साथ के सहेलियों कि धीरे-धीरे एक-एक करके शादी होती जा रही थी,,। उसकी खुद की भतीजी जो कि उसे छोटी थी उसकी भी शादी हो चुकी थी लेकिन वह अभी तक कुंवारी थी,,, मन से भी और तन से भी,,,,,,।

धीरे-धीरे जैसे समय गुजरता चाह रहा था वैसे वैसे गुलाबी से अपनी जवानी संभाले संभल नहीं रही थी,,,,, अपनी भाभी की कसम से शिकारियों की आवाज से उसका तन बदन मचल उठता था पहचानती थी कि बगल वाले कमरे में उसका बड़ा भाई उसकी भाभी के साथ क्या कर रहा है,,,। हालांकि अभी तक उसने अपनी आंखों से अपने भैया भाभी की चुदाई देखी नहीं थी और अभी तक कोशिश भी नहीं की थी,,,,।

लेकिन आज उससे रहा नहीं जा रहा था,,, उसकी भाभी की मादक सिसकारियां उसके कानों में मधुर रस खोल रही थी साथ ही उसके तन बदन को मदहोश कर रही थी एक अजीब सा नशा उसके तन बदन को अपनी गिरफ्त में लिया जा रहा था आंखों में खुमारी छा रही थी,,,,,,,,

आहहहह आआआआहहहह,,,ऊईईईई, मां ,,,,मर गई रे आहहहह,,,आपका तो बहुत मोटा है,,,,(यह शब्द जैसे ही गुलाबी के कानों में पड़े उसके कान एकदम से खड़े हो गए और उसका रोम-रोम पुलकित हो गया,,,,वह एक नजर लालटेन की रोशनी में राजू के ऊपर डाली वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रहा था और यही उसकी खासियत भी थी जब होता था तो घोड़े बेच कर सोता था उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था कि क्या हो रहा है कहां से आवाज आ रही है या उसके साथ क्या किया जा रहा है वापस सोने में मस्त रहता था इसलिए उसके जागने की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी,,,, वह धीरे से खटिया पर से ऊठी ओर बगल वाले कमरे में देखा जा सके ऐसी जगह ढुंढने लगी,,,, आज तक उसने इस तरह की हिम्मत और हिमाकत नहीं की थी वह अपने भैया भाभी की बहुत इज्जत करती थी और इसीलिए उन्हें इस हाल में देखना उसके लिए पांच था लेकिन आज वह मजबूर हो गई थी जवानी से भरपूर है उम्र से ऐसा करने पर मजबूर कर रही थी अपने संस्कार अपनी मर्यादा को एक तरफ रख कर वह अपने बदन की जरूरत पर ध्यान देते हुए बड़ी शिद्दत से बगल वाले कमरे में देखा जा सके ऐसा कोई छेंद देखने लगी,,,,दोनों कमरों के बीच एक पतली कच्ची दीवार थी जो जगह-जगह से उसकी इंटे खिसक चुकी थी जिसमें थोड़ा-थोड़ा दरार पड़ चुका था इन दरारों पर कभी भी गुलाबी का ध्यान नहीं गया था लेकिन आज उसकी किस्मत कुछ और खेल खेलना चाहती थी,,,, इसलिए जल्दी उसे ईटों के बीच की एक पतली दरार नजर आ गई जिसमें से उसे बगल वाले कमरे की लालटेन की रोशनी नजर आ रही थी,,,, लालटेन की रोशनी नजर आते ही उसके दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि आज तक उसने किसी भी औरत मर्द की चुदाई को अपनी आंखों से नहीं देखी थी बस कल्पना भर की थी लेकिन आज वह जो करने जा रही थी अगर उसकी किस्मत अच्छी रही तो उसे हुआ नजारा भी देखने को मिल जाएगा इसके बारे में सिर्फ वह कल्पना करके अपनी जवानी को सुलगा रही थी,,,।

ईटों के बीच की पत्नी दरार के बीच मिटटी भरी हुई थी,,, जिससे अंदर का दृश्य साफ नजर नहीं आ रहा था,,,इसलिए वह अपने कमरे में लालटेन की रोशनी में एक छोटी सी पतली लकड़ी ढूंढ कर ले आई और उसे से कुरेद कुरेद कर वह मिट्टी को नीचे गिराने लगे वजह से ही पतली दरार में फंसी हुई मिट्टी नीचे गिर गई,,,,,, और मिट्टी के गिरते ही कमरे का दृश्य एकदम साफ नजर आने लगा,,,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, वह अपनी प्यासी आंखों को उस दरार से सटा दी जैसे,, एक खगोल शास्त्री नक्षत्रों का मुआयना करने के लिए टेलिस्कोप से अपनी आंखें सटा देता है,,,,,, और अगले ही पल उसे जो दृश्य नजर आया,,, उसे देखते ही उसकी प्यासी बुर कुल बुलाने लगी,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,।

उसकी आंखें जिंदगी में पहली बार ईस तरह का दृश्य देख रही थी,,,यह दृश्य देखने के बावजूद उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उसे लग रहा था कि कहीं वो सपना तो नहीं देख रही है,,,।लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखें जो कुछ भी देख रही थी वह सनातन सत्य था,,। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसके भैया और भाभी बिना कपड़ों के थी उसकी भाभी 1 दिन की खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई थी,,, उसकी साड़ी साया और ब्लाउज खटीए के नीचे बिखरे हुए थे उसके भैया भी बिना कपड़ों के एकदम नंगे थे,,,,,,, शायद एक बार वह उसकी भाभी की चुदाई कर चुके थे और दोबारा प्रदान करने की तैयारी कर रहे थे ऐसा गुलाबी सोच रही थी और जो कि सच भी था क्योंकि कुछ देर पहले उसकी भाभी की गरम सिसकारियां और आहहह आहहहह की आवाज उसके कानों में पड रही थी लेकिन इस समय उसके भैया खटिया पर नहीं थे बल्कि खटिया के पास खड़े होकर सरसों के तेल को कटोरी में से अपने खड़े लंड पर गिरा रहे थे,,,, और जैसे ही गुलाबी की आंखें अपने बड़े भैया के लंड पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए,,,, एकदम काला लंड एकदम किसी काले नाग की तरह हवा में लहरा रहा था जिस पर सरसों का तेल गिलाकर उसका भाई अपने लंड की मालिश कर रहा था,,,, यह दृश्य गुलाबी के लिए उत्तेजना की संपूर्ण पराकाष्ठा थी इसलिए तो उसकी बुर तुरंत गीली हो गई,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि मर्दों के पास इस तरह का लंड होता है,,,,। एक बार तो वह सचमुच में घबरा गई थी अपने भाई के लंड को देख करके इतना मोटा लंबा लंड छोटे से छेद में जाता कैसे होगा,,,,। वह सांसो को बांधकर अंदर के नजारे का लुफ्त उठाने लगी,,,, उसकी भाभी प्यासी नजरों से उसके भैया के लंड को देख रही थीऔर साथ में अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल भी रही थी,,,।

मैं हु ना मेरी रानी तुम अपने हाथों को क्यों तकलीफ देती हो मैं अपने हाथों से तुम्हारी चूची दबा दबा कर लाल कर दूंगा,,,(हरिया अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए बोला और अपने भाई की इतनी गंदी बात को सुनकर गुलाबी का गुलाबी गाल शर्म से लाल हो गया,,,वह कभी सोची नहीं थी किसके भैया इस तरह से गंदी बात करते होंगे लेकिन आज सब कुछ उसकी आंखों के सामने था,,,,)

आप बहुत शैतान है जी एक बार चोद चुके हो फिर भी आपका मन नहीं भर रहा है,,,,

भला औरत की बुर से कभी मन भरता है,,, अगर मर्दों का मन भर जाए तो औरत और मर्द के बीच प्यार का रिश्ता ही खत्म हो जाए,,,,,,, यही प्यास है जो हम दोनों के बीच अभी भी प्यार को बरकरार रखा हुआ है,,,,।

लेकिन आपका बहुत मोटा है दर्द करता है,,,

मोटा है तभी तो मजा आता है मेरी रानी और तभी तो तुम अभी तक जाग रही हो तुम्हें भी दुबारा लेने का मन कर रहा है तभी तो तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,

(अंदर का गरमा गरम दृश्य और साथ ही गरमा गरम वार्तालाप गुलाबी के तन बदन में मदहोशी भर रहा था,,, वह कभी सपने में नहीं सोचा थी कि वह अपनी आंखों से इस तरह का दृश्य देखेगी सब कुछ अद्भुत था,,,,गुलाबी की सांसे सिर्फ अंदर के नजारे को देखकर उनकी बातों को सुनकर बड़ी तेजी से चल रही थी,,,,)

अब देखना रानी एक बार पानी छोड़ दिया हूं अब देखना कितनी देर तक तुम्हारी चुदाई करता हूं,,,,

जोर जोर से मत करना दर्द करने लगता है,,,,(इस बार इतना कहते हुए गुलाबी की भाभी अपनी हथेली को अपनी दोनों टांगों के बीच लाकर अपनी बुर को मसलते हुए बोली तो इस नजारे को देख कर गुलाबी एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसका हाथ सलवार के ऊपर से ही बुर पर चला गया जिसे वह मसलना शुरू कर दी,,,,,)

जोर जोर से चोदने में ही मजा आता है धीरे धीरे से तो बिल्कुल भी मजा नहीं आता और तुम ही तो कहती हो और जोर से और जोर से मेरे राजा और जोर से,,,,

(इस बात पर गुलाबी की भाभी एकदम से शर्मा गई और बोली)

अच्छा अब जल्दी से आ जाओ मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है,,,,

ओहहहह ,,,,, मेरी रानी मैं जानता हूं मेरे लंड को देखकर तुम्हारी बुर में पानी आ जा रहा है,,,, लो अभी तुम्हारी इच्छा पूरी कर देता हूं,,,,(और इतना कहते ही हरिया और गुलाबी की भाभी खुद अपनी दोनों टांगों को फैला दी गुलाबी को अंदर का दृश्य साफ नजर आ रहा था अपनी भाभी का गोरा बदन उसकी गुदाज पन को देखकर खुद गुलाबी के मुंह में और बुर में पानी आ रहा था,,, उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर गुलाबी का होश खो रहा था देखते-देखते उसका भाई उसकी भाभी के दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रख दिया,,,,, सब कुछ भुला भी कोई तुम साफ नजर आ रहा था उसका सब्र अब टूटता हुआ नजर आ रहा था उसने भी आनंद खाना मैं अपनी सलवार की डोरी खोल कर अपनी सलवार को नीचे कदमों में गिरा दी और अपनी नंगी बुर पर अपनी हथेली को रगड़ना शुरु कर दी,,,,और दूसरी तरफ उसका भाई अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी भाभी की बुर में डालना शुरू कर दिया इसे देखकर गुलाबी से रहा नहीं गया और वह अपनी उंगली को अपनी बुर में डाल दी,,,,गुलाबी के लिए पहला मौका था जब वह अपनी उंगली को बुर में डाल रही थी इससे पहले वह बुर को अपनी हथेली से मसलती भर थी,,,। लेकिन आज उसे बहुत मजा आ रहा था मसलने से ज्यादा अपनी बुर में उंगली डालने में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, दूसरी तरफ उसका भाई अपना पूरा लंड उसकी भाभी की बुर में डाल चुका था,,,।

अंदर कमरे में लालटेन की रोशनी में से साफ नजर आ रहा था जिसका कारण था कि लालटेन की रोशनी कि लोग कुछ ज्यादा ही की गई थी जिसका मतलब साफ था कि हरिया को रात के अंधेरे में नहीं बल्कि रात के उजाले में चुदाई करने में ज्यादा आनंद आता था,,,,लेकिन गांव में ऐसा होता नहीं था क्योंकि गांव की औरतों को शर्म के मारे अंधेरे में ही चुदवाने में मजा आता था और अंधेरे में चुदवाती भी थी,,,,,लेकिन गुलाबी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि उसके भाई और भाभी को ऊजाले में चुदाई करने का शौक है जिसकी बदौलत वह अपनी आंखों से सब कुछ साफ-साफ देख पा रही थी,,,।

क्या जबरदस्त और मादकता से भर देने वाला नजारा था,,, बगल के कमरे में गुलाबी के भैया और भाभी चुदाई में पूरी तरह से तल्लईन हो चुके थे और बगल के कमरे में गुलाबी खुद अपनी सलवार को खोलकर अपनी बुर में उंगली पेल रही थी,,, जिसमें उसे बहुत मजा आ रहा था और दूसरी तरफ राजू घोड़े बेच कर सो रहा था अगर ऐसे में कोई और लड़का होता तो उसकी आंख खुल गई होती और अब तक तो वह अपनी बुआ की बुर में लंड भी डाल दिया होता और जो कि उस समय उसकी बुआ को भी यही पसंद भी होता,,,।

धक्कों की गति बड़ी तेजी से खटिया को चरमरा रही थी जिससे उसकी भाभी की दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह चल रही थी जो कि इस समय उसके भाई के दोनों हाथों में उसकी शोभा बढ़ा रही थी,,,।

गुलाबी के गाल शर्म के मारे और उत्तेजना से लाल हो चुके थे,,, वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसके भैया बड़ी तेजी से अपनी कमर हिला रहे थे और उसकी भाभी मस्ती भरी सिसकारी ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था जो कि उसके चेहरे से बंया हो रहा था,,,। देखते ही देखते गुलाबी का बड़ा भाई उसकी भाभी पर ढेर हो गया इसका मतलब साफ था कि दोनों का काम हो चुका था और इधर गुलाबी जोर जोर से अपनी बुर में उंगली डालकर पानी निकाल चुकी थी,,,, गुलाबी का भी गर्म लावा ठंडा हो चुका था,,,इसलिए वह नीचे झुक कर अपनी सलवार को ऊपर की ओर डोरी बांधकर वापस खटिया पर आकर सो गई,,।
 
धीरे-धीरे दिन-ब-दिन गुलाबी के हाव भाव बदलने लगे थे,,,,, अपनी आंखों से अपने भैया और भाभी को चुदवाते हुए देखकर उसके तन बदन में उस दृश्य को याद करके हलचल सी मच जाती थी और उसकी बुर पानी छोड़ने लगती थी इस उमर में उसे भी एक जवान मोटे तगड़े लंड की जरूरत महसूस होने लगी थी,,,,, लेकिन अपनी भाभी को अपने भैया से चुदवाते हुए देखकर उसकी जो हालत हुई थी और अपनी भैया के लंड को अपनी भाभी की बुर में अंदर बाहर होता हुआ देखकर वह भी पहली बार अपनी बुर के अंदर अपनी ऊंगलियो को प्रवेश करा दी थी ऐसा करने में उसे बहुत ही आनंद की अनुभूति हुई थी हालाकी उंगलियां लंड का मजा बिल्कुल भी नहीं दे सकती थी लेकिन फिर भी अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए यही एक उचित मार्ग था जो कि वह जब चाहे तब उपयोग कर सकती थी,,,,,,,, लेकिन धीरे-धीरे उसका सब्र जवाब देने लगा था उसे अपनी जरूरतों के अधीन होकर इतना यकीन हो गया था कि अगर कोई भी उसकी चुदाई करना चाहेगा तो उससे चुदवा लेगी,,,, लेकिन यह कब कैसे और कहां होगा इसके बारे में उसे भी ज्ञात नहीं था वह सब कुछ समय पर छोड़ चुकी थी,,,,।

दूसरी तरफ राजू दूसरे लड़कों की तरह चालाक और समझदार औरतों के मामले में बिल्कुल भी नहीं था वरना अब तक वह अपने लंड का सही उपयोग कर चुका होता,,, अभी तक तो उसने अपने हाथ का उपयोग करके मुठ भी नहीं मारा था जबकि गांव के उसके हम उम्र के इस क्रिया को रोज ही करते थे,,, और ज्यादातर लड़कों की कल्पना में राजू की खूबसूरत यवन से भरी हुई मादकता छलकाती हुई उसकी मां और उसकी बुआ ही रहती थी,,,,।

हरिया रोज की तरह रेलवे स्टेशन पर सवारी का इंतजार कर रहा था,,,,, और उसके बाकी साथी भी बेल गाड़ी लेकर रेलवे स्टेशन पर ही थे और हरिया और उसका एक साथी बड़े घने पेड़ के नीचे बैठकर बीडी सुलगा कर उसका कस खींच रहे थे,,,, अभी ट्रेन आने में समय था,,,,,,, हरिया के मन में उस दिन लाला के घर वाले दृश्य ही घूम रहा था,,,, वह यह जानना चाहता था कि उस दिन लाला के बिस्तर पर उसके साथ पूरी तरह से नंगी होकर कौन औरत चुदवा रही थी,,, क्योंकि जहां तक मैं जानता था लाला के घर में कोई भी औरत नहीं रहती थी लाला की बीवी थी नहीं तो आखिरकार,,, वह औरत कौन थी जो लाला एकदम नंगी होकर चुदवा रही थी,,, और उसके पहुंच जाने पर भी उसे जरा भी फर्क नहीं किया और उसी तरह से वह चुदाई में तल्लीन रही,,,, यही सोचते हुए वह बीड़ी का कश् खींच रहा था,,,, और आसमान की तरफ देखकर इसी बारे में सोच रहा था कि उसका साथी जोकि बीडी जलाकर माचिस को अपनी धोती में खोंसते हुए बोला,,,,)

क्या हुआ यार क्या बात है किस चिंता में डूबा हुआ है,,,,

यार मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,(कुछ देर सोचने के बाद बोला)

अरे क्या समझ में नहीं आ रहा है कुछ बोलेगा तभी तो पता चलेगा,,,,

यार मैं सोच रहा था कि अपने गांव में कोई ऐसी औरत है जो पैसे लेकर गंदा काम करती हो,,,,

क्या बात है यार तू यह क्यों पूछने लगा क्या भाभी अब मजा नहीं देती क्या,,,?(वो एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोला) या बाहर की औरतों से मजा लेना चाहता है,,,,

अरे ऐसी बात नहीं है यार मै कुछ और सोच रहा हूं,,,

अरे क्या सोच रहा है मुझे भी बताएगा तेरी बातों से तो यह लग रहा है कि तू मजा लेना चाहता है और जहां तक मेरा सवाल है कि भाभी बहुत खूबसूरत है और तुझे बहुत प्यार करती है फिर तू ऐसा क्यों कर रहा है,,,(जोर से बीड़ी खींचते हुए वह बोला)

अरे पागल हो गया क्या तु मैं अपने लिए नहीं पूछ रहा हूं मेरे मन में किसी को लेकर शंका जाग रही है इसलिए पूछ रहा हूं,,,,(हरिया झुंझलाते हुए बोला,,)

अच्छा ठीक है लेकिन किसके लिए यह तो बता,,,

नहीं नहीं यार मैं अभी नहीं बता सकता हो सकता है मेरा सोचना और देखना दोनों गलत हो और ऐसे में किसी की इज्जत जा सकती है इसी के मान मर्यादा खत्म हो सकती है इसलिए मैं बता नहीं सकता पहले तो मुझे बता क्या कोई ऐसी औरत है अपने गांव में या आस-पास के गांव में,,,,

लेकिन तुम मुझसे ही क्यों पूछ रहा है मैं क्या ऐसी औरतों के पास जाता रहता हूं क्या,,,,

नहीं नहीं यह बात नहीं है तू शराब के ठेके पर जाता है ना तो वहां तो तुझे कई किस्म के लोग मिलते होंगे हो सकता है उनसे सुना हो,,,,,,,

हां मिलते तो बहुत हैं,,,, लेकिन कुछ इस तरह की खबर मुझे है नहीं,,,,(तभी उसकी नजर स्टेशन मास्टर पर पड़ी जो की स्टेशन से बाहर निकल कर कच्ची सड़क के नीचे की तरफ झाड़ियां में जा रहा था,,, उस पर नजर पड़ते ही वह एकदम उत्साहित स्वर में बोला,,,)

चल उठ मेरे साथ मैं तुझे कुछ दिखाता हूं,,,,(इतना कहते हुए वह खड़ा हुआ और साथ ही हरिया का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा करने लगा,,, तो हरीया उसका सहारा लेकर खड़ा होते हुए बोला,,,)

अरे कहां ले चल रहा है क्या दिखाने ,,,,

पहले तू आ तो सही तुझे मैं कुछ दिखाता हूं शायद तेरा काम बन जाए,,,,

(और इतना कहकर वह हरिया का हाथ पकड़ कर उसे उसी दिशा में ले गया जहां पर स्टेशन मास्टर चुपके छुपाते हुए झाड़ियों के अंदर गया था,,,,,हरिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह उसे कहां ले जा रहा है और क्या दिखाना चाहता है,,, वह हरिया को झाड़ियों के अंदर ले जाने लगा हरिया को कुछ अजीब लग रहा था लेकिन फिर भी वह उसके साथ चलता चला जा रहा था,,,,,देखते ही देखते वह दोनों झाड़ियों के बीच पहुंच गए और एक मोटा सा बड़ा पेड़ के पीछे अपने आप को छुपा कर खड़े हो गए,,,,

यहां क्यों लाया मुझे ,,,(हरिया उत्सुकता जताते हुए बोला)

तेरे काम की चीज यहीं है,,,,

यहां कहां,,,?

वह देख सामने,,,,(वह हाथ की उंगली से इशारा करते हुए हरिया को बोला और हरिया उसके उंगली के ईसारे की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए,,,,)

अरे यह तो अपने स्टेशन मास्टर है,,,,,,, लेकिन वह औरत कौन है बाप रे,,,,, यह क्या हो रहा है,,,,,

देखता जा,,, और पहचानने की कोशिश कर,,,,

(हरिया उस झाड़ी के अंदर के दृश्य को देखकर पूरी तरह से रोमांचित हो उठा था उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था स्टेशन मास्टर तकरीबन 52 वर्ष के आदमी थे हरिया को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि वह स्टेशन मास्टर एक औरत की चुदाई कर रहे थे,,,औरत साड़ी को कमर तक उठाकर पेड़ पकड़कर झुकी हुई थी और की बड़ी-बड़ी गांड हवा में लहरा रही थी जिसे स्टेशन मास्टर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपना लंड उसकी बुर में पेल रहा था,,,,,,,, हरिया को समझ में नहीं आ रहा था कि वह औरत कौन है इस समय हरिया की नजर सिर्फ उसकी परी परी कहां पर टिकी हुई थी जो कि स्टेशन मास्टर के हाथों में थी और उसका लंड उसकी बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,,, हरिया रोमांचित तो हुआ ही था लेकिन काफी हद तक आश्चर्यचकित भी था क्योंकि उसे स्टेशन मास्टर से इस तरह की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी क्योंकि स्टेशन मास्टर बहुत ही कड़क इंसान था और वह बेवजह स्टेशन में किसी को भी प्रवेश करने नहीं देता था खासकर के बैल गाड़ी वालों को,,,,,,जिस रफ्तार से उसे स्टेशन मास्टर की कमर आगे पीछे हो रही थी हरिया को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई इतनी तेजी से कमर हिलाता होगा,,,लेकिन यह बात शायद मैं भूल गया था कि चुदाई के मामले में इंसान अगर बिस्तर भी पकड़ा हो तो उठ कर खड़ा हो जाता है,,,,,,हरिया के कानों में उस औरत की आवाज साफ सुनाई दे रही थी जो कि स्टेशन मास्टर के हर धक्के पर ओहह बाबुजी,,,,आहहहह बाबुजी कर रही थी,,,,

हरिया को यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में भी स्टेशन मास्टर उस औरत की इतनी जबरदस्त चुदाई कर रहा है कि उसकी आहहह निकल जा रही है,,,,।,,)

देख रहा है हरिया कितना जबरदस्त ने जा रहा है इस उम्र में भी स्टेशन मास्टर बड़ी कुर्ती दिखा रहे हैं,,, और उस औरत को देख कितने मजे ले रही है,,,,।

हां यार देख तो रहा हूं लेकिन वह औरत है कौन,,,?

अरे ठीक से उसका चेहरा तो देख,,,,

अरे हां यार यह तो वही औरत है जो स्टेशन पर मुरमुरे बेचती है,,,,,

हां अभी पहचाना उसको देख कर कुछ समझ में आ रहा है,,,, कहीं तु ईसी औरत के बारे में तो बात नहीं कर रहा था,,,

नहीं नहीं यार यह वह औरतनहीं है जिसको मैं देखा था वह तो खानदानी लग रही थी और एकदम गोरी चिट्टी भरे बदन की थी और उम्र भी उसकी कम थी मतलब कि इस औरत से कम थी,,,,, और यह तो हल्की सांवले रंग की है,,,, लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिरकार यह औरत ऐसा गंदा काम क्यों करवा रही हैं,,,,

अरे उसकी मजबूरी होगी,,,,

ऐसी कैसी मजबूरी बड़े आराम से तो मुरमुरे बेचती है,,,,

बेचती तो है लेकिन,,,, देखता नहीं है बेझिझक स्टेशन के अंदर बाहर आती जाती रहती है,,,,स्टेशन मास्टर की कृपा है तभी तो ऐसा करती है और पैसों की जरूरत भी होगी जोकि स्टेशन मास्टर कुछ पैसे दे देता होगा,,,,, और वैसे भी सांवली है तो क्या हुआ इसका बदन भी तो भरा हुआ है बड़ी-बड़ी चूचियां,,,, जब मुरमुरे खरीदने जाता हूं तो जी भर कर उसकी चूचियां देखता हूं,,,,

तू भी कितनी गंदी सोच रखता है,,,,(हरिया उसे थोड़ा सा डांटते हुए बोला)

अच्छा मैं गंदी सोच रखता हूं,,,,

तो जरा अपने पजामे की तरफ देख,,,, खड़ा क्यों हो गया है,,,

(उसकी बात सुनते ही हरिया अपने पजामे की तरफ देखा तो शर्मा गया,,,, और बोला कुछ नहीं बस फिर से उस नजारे को देखने लगाअभी स्टेशन मास्टर जोर-जोर से उस औरत की गांड पर चपत लगा रहा था और उस चपत को खा कर ऐसा लग रहा था कि उस औरत की मस्ती और बढ़ जा रही थी,,,,,)

आहहहहह ,,,,,,आहहहहहहह बाबुजी,,,,, क्या कर रहे हैं,,,।

कुछ नहीं मेरी रानी मजे ले रहा है ऐसे ही मुझे मजा दिया कर पूरा स्टेशन तेरे नाम कर दूंगा,,,,

ओहहहह,,,,, मजे तो आपको बहुत देती हूं बाबूजी,,,, आजकल पैसो की बड़ी तंगी है,,,

तू चिंता मत कर मेरी रानी मैं हूं ना बस ऐसे ही रोज मुझसे चुदवा लिया कर पैसों की बिल्कुल भी कमी नहीं होगी,,,,आहहहहह आहहहहहह मेरी रानी,,,,

बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा और जोर जोर से धक्के लगाओ,,,,

(पैसों की बात सुनते ही उस औरत की मस्ती और ज्यादा बढ़ गई थी और वह और मजे से लेकर उसे सेशन मास्टर से चुदवाने लगी थी,,,,, हरिया की भी हालत खराब हो रही थी और उस साथी की भी दोनों का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका थाहरिया का मन कर रहा था कि वह भी बीच में कूद जाए और उस औरत की बुर में अपना लंड डालकर अपनी गर्मी शांत कर ले,,,, सभी उसका साथी बोला,,,,)

चल हरीया आज अपना काम भी बना लेते हैं,,,

अब क्या करने जा रहा है तू,,,,

हम दोनों का काम बनाने देखता नहीं है हम लोगों को वह स्टेशन में घुसने भी नहीं देता,,,,

तो वहां जाकर क्या होगा,,,,

तू आ तो सही,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह हरिया का हाथ पकड़कर पेड़ के पीछे से बाहर आ गया और उसे स्टेशन मास्टर को आवाज देते हुए उसकी तरफ बढ़ने लगा)

अरे वह बड़े बाबू यह क्या हो रहा है,,,,,

(इतना सुनते ही वह एकदम से हड़बड़ा गया उसको तो जैसे सांप सूंघ गया हो और वह औरत पूरी तरह से सक पका गई,,,, स्टेशन मास्टर को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका लंड अभी भी उस औरत की बुर में घुसा हुआ था और वह घबराया हुआ हरिया और उसके साथी को ही देख रहा था,,,,)

अरे रुक क्यों गए बड़े बाबू अपना काम जारी रखिए,,,,(हरिया का साथी बड़े इत्मीनान से अपनी बात कह रहा था और वह औरत शर्म के मारे अपना मुंह छुपाने की कोशिश कर रही थी तो वह बोला)

मुंह छुपाने की जरूरत नहीं है हम तुम्हें पहचानते हैं,,, और बड़े बाबू आप चुदाई जारी रखिए,,,,,

देखो मैं तुम दोनों के हाथ जोड़ता हूं यहां जो कुछ भी हो रहा है इसके बारे में किसी को कुछ मत कहना,,,,( वह स्टेशन मास्टर हाथ जोड़ते हुए बोला,,,,, स्टेशन मास्टर को इस तरह से हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता हुआ देखकर हरिया बोला,,,)

बिल्कुल भी चिंता मत करिए हम दोनों यह बात किसी को नहीं बताएंगे ,,(तभी उसका साथी बीच में बोल पड़ा)

लेकिन इसमें हमारा क्या फायदा होगा,,,,

क्या चाहते हो तुम दोनों,,,,

देखिए हम दोनों कुछ नहीं,,,,(तभी वह बीच में ही हरिया की बात काटते हुए बोला)

हम दोनों को बेझिझक स्टेशन में घुसकर सवारी लेने की इजाजत देना पड़ेगा हमें कोई रोकेगा नहीं,,,,,,(अपने साथी के पास चलकर हरिया उसकी तरफ अच्छे से देख लेना क्योंकि जो बात हुआ स्टेशन मास्टर से मंगवाना चाहता था इसमें उन दोनों का बहुत फायदा था इससे वह दोनों बेझिझक स्टेशन के अंदर घुस कर सवारी ढो सकते थे और उनसे थोड़ा किराया भी ज्यादा ले सकते थे,,,, यह तो हरिया के लिए सोने पर सुहागा जैसा था,,,, इसलिए बीच में कुछ बोला नहीं,,,) बोलो बड़े बाबू मंजू है कि हम लोग बाहर जाकर सबको बता दें,,,,

नहीं नहीं ऐसा मत करना नहीं तो मैं बदनाम हो जाऊंगी,,,,( वह औरत रुंआसी होते हुए बोली,,,)

ठीक है तुम दोनों को मैं मंजूरी देता हूं,,,, अब कर लु,,(स्टेशन मास्टर उस औरत की गांड पकड़ते हुए बोला,,,)

ठीक है कर लो ट्रेन आने वाली है क्या हम लोग स्टेशन के अंदर जा सकते हैं,,,,

जा सकते हो जो कोई रोके तो मेरा नाम बता देना,,,,

ठीक है बड़े बाबू जी,,,,(इतना कहने के साथ ही वह हंसता हुआ हरिया का हाथ पकड़ लिया और जाने लगा हरिया जाते-जाते मोड़ कर एक बार उन दोनों पर नजर डाला तो स्टेशन मास्टर फिर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,,)

देखा ना आज एक फायदा हो गया,,,,

हां तु ठीक कह रहा है इसमें हम दोनों का ही फायदा है,, चल जल्दी ट्रेन आने वाली है,,,,

(इतना कहकर दोनों स्टेशन के अंदर चले गए,,, फायदा होने के बावजूद भी हरिया का मन अभी भी उदास था क्योंकि लाला के साथ वाली औरत के बारे में उसे अभी भी कुछ भी पता नहीं था,,,)
 
रात को हरिया मधु के साथ लेटा हुआ था मधु दिन भर की थकान से सो चुकी थी,,,, और हरिया बीड़ी पीते हुए लाला के घर में जो दृश्य देखा था उस बारे में सोच रहा था,,,, उस समय अपनी आंखों से जो दृश्य हरिया ने देखा था उस दृश्य से ज्यादा वह इस बारे में सोच कर ही रहा था कि आखिरकार लाला के साथ वह औरत कौन थी,,, घोड़ी बनकर चुदवाते हुएउसकी बड़ी-बड़ी चूचियां जिस तरह से दशहरी आम की तरह लटक रही थी उस बारे में सोचते ही हरिया का लंड खड़ा हो जा रहा था,,, उस पर लाला की जबरदस्त पकड़ मानो ऐसा लग रहा था जैसे दशहरी आम को दबोच कर पिचका डालेगा,,,, जिस तरह से गर्म सिसकारी की आवाज उस औरत के मुंह से आ रही थी,,, उस सिसकारी के आवाज के बारे में सोच कर वह मन ही मन परेशान था कि आखिरकार वह औरत थी कौन,,,, जिसके बारे में हरिया अभी तक समझ नहीं पाया था वह गांव की थी या गांव से बाहर की,,, क्योंकि अगर यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि लाला की हवेली में कोई भी स्त्री नहीं थी,,,, अगर कोई नौकरानी औरत होती तो भी हरिया समझ सकता था कि लाला उस औरत को भोग रहा है लेकिन उस औरत का मांसल मखमली बदन किसी नौकरानी का बिल्कुल भी नहीं हो सकता था,,,, इसी बारे में सोचते हुए हरिया को,,, दोपहर वाली घटना के बारे में याद आ गया और उसकी आंखों के सामने सब कुछ साफ नजर आने लगा कि किस तरह से रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर स्टेशन मास्टर झाड़ियों में चला गया और उससे मुरमुरे बेचने वाली औरत की जबरदस्त चुदाई कर रहा था हरिया हैरान था क्योंकि स्टेशन मास्टर की उम्र ढलने के कगार पर थे लेकिन फिर भी एक औरत की नंगी जिस्म नंगी गांड को देखकर जिस तरह से वह धक्के पर धक्के पेल रहा था,,,,, वह दृश्य हरिया के सोच के बिल्कुल परे था,,,,,,,लेकिन वह मन में यह सोच कर पूरी तरह से निश्चिंत था कि स्टेशन मास्टर को रंगे हाथ पकड़ कर उन दोनों का फायदा हुआ था अब वह दोनों कभी भी स्टेशन में प्रवेश करके निश्चिंत होकर सवारी ढो सकते थे,,,।

लाला और स्टेशन मास्टर की चुदाई का गरमा-गरम दृश्य जेहन में आते ही हरिया कहीं ना पूरी तरह से हो चुका था वह एक नजर अपनी बीवी के ऊपर डाला वह निश्चिंत होकर सो रही थी उसकी सांसो की गति के साथ उसकी ऊपर उठती और नीचे गिरती हुई चुचियों को देख कर उसके मुंह में पानी आ गया,,,, हरिया जानता था कि जब उसकी बीवी गहरी नींद में होती है तो किसी भी हाल में जाकर चुदवाने के लिए तैयार नहीं होती लेकिन इस समय उसके तन बदन में चुदाई की गर्मी सवार हो चुकी थी इसलिए वह अपना एक आगे बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से अपनी बीवी की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,,।

ऊमममम,,,, क्या कर रहे हैं आप सोने दीजिए,,,,(बिना आंख खुले ही गहरी नींद में वह बोली)

तो सो जाओ तुम्हें उठा कौन रहा है,,,,(हरिया गहरी नींद में सो रही अपनी बीवी के ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला,,,,, हरिया की सांसो की गति तेज होने लगी थी उसकी आंखों के सामने उसकी बीवी की नंगी चूचियां थी जिसे देख कर हरीया के मुंह में पानी आ रहा था,,,,बरसों से वह अपनी बीवी के खूबसूरत नंगे बदन से खेलता रहा था लेकिन यह प्यार थे कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेती थी और आखिरकार,, मर्दों और औरतों के बीच का यही आकर्षण तो है जो उन्हें एक साथ जोड़ कर रखता है उम्र में प्यार भी बढ़ाता है नफरत भी बढ़ाता है,,,,किसी पर मर मिटने की चाहत होती है तो इसी आकर्षण के चलते किसी को मारने की भी तैयारी हो जाती है,,,,, कुछ भी हो मर्द और औरत के बीच का यह आकर्षण जन्मों से चलता चला रहा है और चलता ही रहेगा,,,,।

गर्मी का मौसम अपने उफान पर था लेकिन रात की शीतलता रात को और ज्यादा खूबसूरत बना रही थी मधु की उम्मीद चुचियों पर पसीने की बूंदें मोती के दाने की तरह चमक रही थी जिसे देखकर हरिया के मुंह में पानी आ रहा था और इस समय मधु की उन्नति चूचियां किसी और की तरह नजर आ रही थी जो कि अपने आकर्षण के गोले से हरिया के मजबूत इरादों को ध्वस्त कर रही थी,,, हरिया पूरी तरह से अपनी बीवी की मदमस्त जवानी के आगे घुटने देख चुका था,,,, इसीलिए तो मधु के गहरी नींद में होने के बावजूद भी वह अपनी प्यास बुझाने के लिए अग्रसर था,,,,ब्लाउज का बटन खुलते ही अपनी बीवी की नंगी चूचियों को दोनों हाथों में लेकर किसी दशहरी आम की तरह दबा दबा कर उसे मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,, उत्तेजना के मारे हरिया के हथेली का दबाव चुचियों परकुछ ज्यादा ही बढ़ जाता था जिससे नींद में होने के बावजूद भी दर्द का अहसास होते ही मधु के मुंह से हल्की आह की आवाज निकल जाती थी,,,,,,, लेकिन यह हल्की आह की आवाज चिंगारी को भड़काने का काम कर रही थी,,,हरिया पागलों की तरह कभी दांई तो कभी बाईं चूची को अपने मुंह में भर कर बारी बारी से पीना शुरू कर दिया,,,,,,,,, हरिया को अपनी बीवी की बड़ी-बड़ी चूचियां दशहरी आम से कम नहीं लग रही थी बल्कि दशहरी आम तो अपने मौसम में मिल ही जाती हैं लेकिन मधु की मदमस्त चूचियां किस्मत वालों को ही मिलती हैं,,,।

हरिया के दिलों दिमाग पर वैसे भी लाला और बड़े बाबू का कामुक दृश्य छाया हुआ था,,, इसलिए ,, कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो चुका था,,,।

रहने दीजिए क्या कर रहे हैं,,,, रोज-रोज करना जरूरी है क्या,,,,?(आंखों को बंद किए हुए ही मधु नींद में बोली)

अरे तुम सोओ ना तुमहे कौन जगा रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए हरिया,, अपना हाथ नीचे की तरफ लाया और अपनी बीवी की साड़ी को खोलने लगा,,,, लेकिन अगले ही पल मधुर अपना हाथ आगे बढ़ाकर हरिया का हाथ पकड़ ली और बोली,,,)

नहीं जी आज नहीं मुझे नींद आ रही है,,,,,

तुम्हें उठने को कौन कह रहा है,,,,

नहीं तो साड़ी मत उतारो,,,,

तो ठीक है ऊपर तो उठा सकता हूं,,,,,

आप परेशान बहुत करते हैं,,,,

क्या करूं रानी तुम्हारी चुचियों को देखकर,,, रहा नहीं जाता,,,

जाग रही थी तभी कर लेना चाहिए था ना,,,,

अब छोड़ो भी मुझे उतारने दो साड़ी,,,,,

नहीं ऐसा मत करिए मैं बहुत थकी हुई हूं,,,,

(मधु आंखों को बंद किए हुए ही अपने पति को रोकते हुए बोली,,)

ठीक है अच्छा नहीं उतारता हूं,,, लेकिन तुम्हें चोदे बिना आज मेरा मन नहीं मानेगा,,,,, तो आज भी ना कपड़े उतारे ही कर लेता हूं,,,,(और ऐसा कहते हुए हरिया अपनी बीवी के साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,यही बात मैं तुमको बहुत अच्छी लगती थी कि उसका पति उसके साथ जबरदस्ती कभी भी नहीं करता था वरना वह अपनी सहेलियों से गांव की औरतों से कई बार सुन चुकी थी कि उनका पति उनके साथ जबरदस्ती कर लेता है,,, आंखों को बंद किए गहरी नींद में फिर से साफ महसूस हो रहा था कि उसका पति उसके साथ कमर की तरफ उठा रहा था और उसका पति जैसे ही साड़ी को जानो तक ले आया तो मधु खुद ही अपनी भारी-भरकम काम को कमर से ऊपर की तरफ उठा ले ताकि सारी को कमर तक ले जाने में दिक्कत बिल्कुल भी ना हो और यही बात हरिया को मदहोश कर देती थी कि हर हाल में उसकी बीवी उसका साथ जरूर देती थी,,,,हरिया भी तुरंत अपनी बीवी की साड़ी को कमर से उठा दिया और उसकी आंखों के सामने लालटेन की रोशनी में मधु की बुर चमक उठी,,, जिसे देखते ही उसका लैंड उठक बैठक करने लगा,,,,, औरैया तुरंत अपनी बीवी की दुल्हन टांगों के बीच आकर अपनी धोती को उतार फेंका और तुरंत अपने खड़े लंड को अपनी बीवी के गुलाबी बुर के छेद पर रखकर कमर को आगे की तरफ धकेला,,, तभी मधु के कराहने की आवाज निकल गई,,,।

आहहहहह,,,, क्या कर रहे हैं थोड़ा थुक तो लगा लिए होते,,,,

माफ करना रानी थोड़ा जल्दबाजी में था,,,,(और इतना कहने के साथ ही हरियां ढेर सारा थूक अपने लंड पर लगाया और फिर उसे अपनी बीवी की बुर लगाकर उसे भी गीला कर लिया,,, और फिर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया हालांकि अभी भी मधु कह रही नींद में थी लेकिन फिर भी उसे अहसास हो रहा था कि उसके पति का मोटा लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा है इसलिए उसके मुंह से हल्की सिसकारी की आवाज भी निकल रही थी,,,,,

हरिया अपनी बीवी की चुदाई करने में पूरी तरह से मस्त था उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि बगल वाले कमरे में दीवाल में बने हल्के से सुराग से उसकी जवान बहन इस गरमा गरम नजारे को देखकर पूरी तरह से गर्म हो चुकी है,,,, गुलाबी शुरू से अपने भाई और अपनी भाभी की गरमा गरम बातों को सुनकर पूरी कर से गर्म हो चुकी थी और थोड़ी मेहनत से ढूंढे गए उस छोटे से सुराग से अंदर के दृश्य को देख रही थी,,,,गुलाबी अपने मन में यही सोच कर खुश हो रही थी कि अच्छा हुआ कि वह अंदर के नजारे को देखने के लिए यह सुराग ढूंढ ली थी,,,, वह अपने भाई की कामाग्नि को देखकर और अपनी भाभी को गहरी नींद में होने के बावजूद भी उसे चोदने की इच्छा देखते हुए उसकी खुद की हालत खराब हो रही थी और उसकी सलवार कब उसके पैरों में जा गिरी थी उसे इस बात का पता ही नहीं चला था उत्तेजना के मारे वहां अपनी भाभी की चुदाई को देखकर अपनी हथेली में जोर से अपनी बुर को दबा रही थी,,, जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ रही थीअपने भाई को देख कर उसके लंड को देखकर वह अपने मन में अनजाने में यह कल्पना करने लगी थी कि जैसे उसके बिस्तर पर उसकी भाभी नहीं बल्कि वह खुद नंगी लेटी हुई है और अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपने बड़े भाई के लंड को अपनी बुर में लेकर बड़ी मस्ती से चुदवा रही है,,,ये एहसास यह कल्पना ही गुलाबी के तन बदन में आग लगा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था,,,, चुदवाने की खुजली उसके अंदर बढ़ती जा रही थी लेकिन कैसे किससे यह सवाल एक पहाड़ की तरह था,,,,,,,

हरिया अपनी बीवी की चुदाई करके शांत हो गया था और उसके बगल में गहरी सांस लेते हुए सो चुका था लेकिन गुलाबी की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी इसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बुर के अंदर खुजली बढ़ती जा रही थी,,,,,,, वह बिना सलवार पहने खटिया पर आ गई और अपने भतीजे राजू के बगल में लेट गई,,,,, आज अच्छा बुरा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसकी नजर अपने भतीजे राजू के पजामे की तरफ गई जो कि आगे से अच्छा खासा उठा हुआ था उसे देखकर उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,, वह हिम्मत बढाकर अपना हाथ आगे बढ़ाने लगी ,,,, उसके दिल की धड़कन जोरों से धड़क रही थी लेकिन एक लालच उसके मन में बसेर ले चुकी थी लंड को अपने हाथ से छुने का उसे पकडने का,,,, और देखते ही देखते गुलाबी अपनी हथेली को अपने भतीजे राजू के पजामे के ऊपर उठे भाग पर रख दी,,,,, एक गजब की मदहोशी उसके तन बदन को अपनी गिरफ्त में ले ली यह पहला मौका था,, जब गुलाबी किसी जवान लंड को अपने हाथ से पकड़ रही थी,,,यह एहसास उसकी बुर को पूरी तरह से गीली कर रहा था,,,, गहरी सांस लेते हुए गुलाबी कभी हल्के से तो कभी कसके पजामे के ऊपर से ही राजू के लंड को पकड़ रही थी और उसकी तरफ देखती रही थी जो कि उसमें जरा भी हलचल नहीं हो रही थी वह गहरी नींद में सो रहा था यह देखकर उसकी हिम्मत बढने लगी थी वह बेहद नजदीक से करीब से किसी जवान लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे देखना चाहती थी लेकिन उसे डर भी लग रहा था कहीं राजु जाग ना जाए,,, लेकिन उसे मजा बहुत आ रहा था राजू के लंड की मोटाई से उसकी पूरी हथेली भर चुकी थी,,,,,राजू गहरी नींद में सो रहा था इसलिए उसकी इच्छा हो रही थी कि उसके पजामे को खसका कर देखा जाए,,,, इसलिए वो उठ कर बैठ गई और धीरे-धीरे पजामे को नीचे की तरफ सरका ने लगी ऐसा करने में उसे बहुत डर लग रहा था दिल की धड़कन वह खुद महसूस कर रही थी पूरे कमरे में केवल उसके दिल की धड़कन और गहरी सांस की आवाज ही सुनाई दे रही थी धीरे-धीरे वह अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगी और देखते ही देखते हो पजामे को काम भरता नीचे करने में सफल हो गई ताकि उसे ऊपर भी किया जा सके लेकिन राजू का लंड मोटा और लंबा था इसलिए पजामे के बाहर आ नही पा रहा था,,,, गुलाबी को समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बाहर निकाला जाए,,, और अभी तक राजू के बदन में किसी भी तरह की कसमसाहट हलचल नहीं हुई थी जिससे गुलाबी की हिम्मत थोड़ा बढ़ने लगी थी और वैसे भी अभी तक वह हिम्मत ही दिखा रहे थे उसके मन में यह लालच देकर कर थोड़ा और हिम्मत दिखा लेगी तो वह एक नंगे जवान लंड के दर्शन कर पाएगी,,, इसलिए कांपते हाथों से वह अपना हाथ धीरे से पजामे के अंदर डाल कर अपने भतीजे के लंड को पकड़ ली,,, बस इतने मात्र से ही उसकी बुर से पानी की बूंदे टपकने लगी,,उसकी सांसों की गति तेज हो गई लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था वह अपने भतीजे के लंड को मुट्ठी में दबाए हुए थी और अपने भतीजे के चेहरे की तरफ देख रही थी जो कि बिल्कुल शांत था गहरी सांस लेते हुए वह अपने भतीजे के लंड को बाहर की तरफ खींची ताकि पजामे से बाहर आ जाए,,, और जैसे ही बाहर आया उसे देखते ही गुलाबी की हालत खराब हो गई,,, क्योंकि जैसा उसने सोची थी उससे भी कहीं ज्यादा जबरदस्त राजू का लंड था,,,,पहली बार गुलाबी इतनी नजदीक से जमाने लड़ने के दर्शन कर रही थी जिसे पाकर वह धन्य हो चुकी थी,,,,लंड की गर्माहट उसे अपनी हथेली के अंदर साथ में सो सो रही थी और उसकी गर्मी जैसे मानो तुरंत उसकी हाथों से होते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार में पहुंच रही थी जहां से उसका गर्म लावा पिघलने लगा था,,,, गुलाबी को उस लंड को अपनी बुर में लेने की इच्छा कर रही थी लेकिन यह अभी बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था,,,,।

वाह राजू की तरफ देखते हुए धीरे-धीरे अपने भतीजे के लंड को हिलाना शुरू कर दी जिसे हिलाने में से बहुत मजा आ रहा था,,,। वह अपने भतीजे के लंड कै सुपाड़े को खोल कर अच्छी तरह से देख रही थी जो कि आलूबुखारे की शक्ल का नजर आ रहा था,,, जिसे देखते ही उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी,,,, गुलाबी से यह बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था वह चाहती थी कि अपने भतीजे को इसी समय चबाकर अपनी दोनों टांगें फैला दें ताकि उसका भतीजा अपने मोटे लंड को उसकी बुर में डाल कर,,, उसकी गर्म जवानी को ठंडा कर दे लेकिन गुलाबी जानती थी कि है इतनी जल्दी सच होने वाला नहीं था इसलिए वह अपने भतीजे के लंड को हिलाना शुरू कर दी थी,,,,साथ ही अपनी हथेली को अपनी दोनों टांगों के बीच रखकर अपनी पुर को मसल ना शुरू कर दी थी और साथ ही अपनी उंगली को अपनी बुर में डाल दी थी,,,, गुलाबी की गर्मी बढ़ती जा रही थी और साथ ही उसकी हथेली का कसावराजू के लंड पर बढ़ता जा रहा था लेकिन राजु को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन उसकी सांसे धीरे-धीरे तेज हो रही थी,,,।,,,

गुलाबी उसी लय में लंड को मुठीया रही थी और अपनी बुर में उंगली पेल रही थी,,, देखते ही देखते उसकी बुर के पानी के साथ-साथ राजू के लंड में पानी छोड़ दिया और उसकी पिचकारी ऊपर तक उठी जिसे देखकर खुद गुलाबी हैरान रह गई,,।,, सारी पिचकारी खुद राजू के ऊपर गिरी थी जिसे गुलाबी कपड़े से अच्छी तरह से साफ कर दी थी और उसे पजामे को उपर कर दी थी,,,, और खटिए पर से उठ कर अपनी सलवार उठाई और उसे पहन कर सो गई,,,।

सुबह जब राजू की नींद खुली तो उसे इस बात का एहसास और भनक तक नहीं हुआ कि रात को उसके साथ क्या हुआ था,,,।
 
गुलाबी का मन अब काम में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था,,, उसकी जवानी चुदास की मदहोशी छाती चली जा रही थी,,,

अब तक जो भी वह अपने कानों से सुनती आ रही थी और देखते आ रही थी,,, और अब रात को अपने हाथों से अपने भतीजे के मदमस्त मोटे तगड़े लंबे,,लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसकी गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस कर के चित्र की उत्तेजना का अनुभव उसने की थी इस तरह का अनुभव से अब तक नहीं ले पाई थी उसके लिए पहला मौका था जब वह इतने पास से अपने ही भतीजे के लंड के दर्शन कर रहे थे उस पल का अनुभव उसके लिए बेहद अनमोल और मदहोशी भरा था और पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी प्यासी बुर में उंगली का सहारा लेकर अपना पानी निकाल दी थी,,,,,

राजू ने कभी अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मुठीआया नहीं था,,, जो कि उसके उम्र के लड़के हमेशा ही करते हैं लेकिन वह इस ज्ञान से पूरी तरह से अज्ञान था लेकिन,,, उसकी बुआ ने यह शुभ काम अपने हाथों से की थी लेकिन इस बात का एहसास और भान राजू को बिल्कुल भी नहीं था उसके लिए यह सब ना होने के बराबर था जो कि उसके साथ हो चुका था,,,,,, राजू गहरी नींद में सोता है यह बात तो गुलाबी अच्छी तरह से जानती थीलेकिन इतनी गहरी नींद में सोता है यह उसे रात को ही पता चला था कि उसके साथ कुछ भी कर लो तो उसे पता नहीं चलता,,,,,

गुलाबी को पहली बार इस बात का आभास हुआ कि बरसों के लंड से इतनी तेज पिचकारी निकलती है,,, जिसे देखकर गुलाबी का पूरा वजूद हिल गया था उसकी बुर में जिस तरह की सुरसुराहट अपने भतीजे के लंड से निकलती पिचकारी को देखकर हुई थी उस तरह की सुरसुराहट अपने भैया और भाभी की चुदाई देख कर भी नहीं हुई थी,,,,,,,लंड से निकले लावा को वह अपने हाथों से साफ की थी उसकी गर्माहट उसे अभी तक महसूस हो रही थी,,,,उसकी चिकनाहट को महसूस करके उसे इस बात का आभास हो चुका था कि जब कभी भी वहां अपने भतीजे के पजामे को साफ करती थी तो उसमें कभी-कभी इस तरह की चिकनाहट महसूस होती थी,,,,,,

गुलाबी का मन अब चुदवाने के लिए पूरी तरह से बहकने लगा था,,, उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जाता था,,, जिस तरह से वह रात को गरमा गरम दृश्य देखी थी जिसमेंउसकी भाभी गहरी नींद में होने के बावजूद भी उसके भैया उसे चोदने के लिए लालायित नजर आ रहे थे यह देखकर गुलाबी अपने मन में यही सोच रही थी कि उसके भैया एक नंबर के चुडक्कड़ इंसान है,,,, दिन भर एकदम एकदम सीधे साधे इंसान बने रहते हैं और रात होते ही उन्हें सिर्फ भाभी की बुर नजर आती है,,,, गुलाबी अपने मन में ही यह बातें सोच कर एकदम गरम हो रही थी,,,,,,,,

रात वाली बात को सोचकर वह खाना बना रही थी तवे पर रोटी रखी हुई थी जो कि ख्यालों में खोने की वजह से उसकी रोटी जल रही थी जिस पर उसका बिल्कुल भी ध्यान नहीं था तभी बाहर से पानी की बाल्टी भर कर लाती हुई मधु की नजर से तौर पर पड़ी तो वह जोर से चिल्लाई,,,।

अरे महारानी कहां खोई हुई हो,,,, देख नहीं रही हो रोटी जल रही है,,,,(इतना कहते हुए मधु बाल्टी नीचे जमीन पर रख दी और कमर पर मुट्ठी बांधकर हाथ रखकर खड़ी हो गई इस रुप में मधु एकदम काम देवी लग रही थी,,, जिस तरह से गाना कमर पर मुट्ठी बांध कर खड़ी हुई थी,, उसकी भरावदार उठी हुई गांड और ज्यादा बड़ी लग रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पपाया की तरह तनी हुई थी,,।अपनी भाभी की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागी हो इस तरह से चोंकते हुए तवे पर देखने लगी तो वाकई में रोटि जलकर काली हो गई थी,,,।)

बाप रे,,,(और ईतना कहने के साथ ही वह जली हुई रोटी उतार कर नीचे रख दी,,)

ध्यान कहां है तुम्हारा,,,,(मधु अपनी साड़ी को कमर में खोंसते हुए बोली,,,)

अरे भाभी आंख लग गई थी,,,,

आंखें ही लगी है ना कहीं किसी से दिल तो नहीं लगा ली,,,

धत्,,, भाभी कैसी बातें करती हो,,,,

चलो अच्छा उठो,, तुम रहने दो तुम दूसरा काम कर लो मैं रोटियां बना देती हुं,,,,

ठीक है भाभी,,,,( इतना कहकर गुलाबी वहां से खड़ी हो गई और मधु उसकी जगह बैठकर रोटियां बनाने लगी और गुलाबी दूसरे काम करने लगी,,,,,,,, हर पल मधु की खूबसूरती में चार चांद लगा रहता था,,, बनाने वाले ने मधु को बड़ी फुर्सत से बनाया था,,,, थोड़ी ही देर में दोनों का काम पूरा हो गया था,,,,।

दोपहर का समय हो रहा था और राजू अपने दोस्तों के साथ तालाब पर खेल रहा था,,,,,, श्याम भी वहां मौजूद था,,, राजू को देखते ही वह उस पर फब्तियां कसने लगता था,,, ऐसे ही वह राजु का मजाक उड़ाते हुए बोला,,,)

क्यों राजू गया कि नहीं कमला चाची के पास,,,, तुझे बहुत याद करती है,,,। (कपड़े के बने गेंद से खेलने के बाद थक कर सभी लोग घने पेड़ के नीचे बैठे हुए थे,,, श्याम की बात सुनकर राजू बोला)

मैं क्यों जाऊं कमला चाची के पास,,,, मुझे भला उनसे क्या काम है,,,,

अरे कमला चाची तू से चुदवाना चाहती है तुझे इतना भी समझ नहीं आता,,,,(श्याम के मुंह से चुदवाना शब्द सुनते ही राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, वह कुछ बोला नहीं फिर भी शयाम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

तेरा पसंद आ गया है कमला चाची को,,,,, तेरे लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है,,,,लेकिन मुझे तो लगता है तो से कुछ होने वाला नहीं है इसीलिए तो कमला चाची के पास जा नहीं रहा है कसम से मुझे अगर ऐसा मौका मिला होता ना तो तुमने चाची की बड़ी बड़ी गांड को अपने लंड डालकर फाड दिया होता,,,, लेकिन साली को तेरा पसंद आ गया है जिसके पास कुछ है ही नहीं,,,,(श्याम की बातों को सुनकर सभी हंसने लगे राजू को बुरा बहुत लग रहा था लेकिन आज आने की उसकी बातों को सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिससे धीरे-धीरे उसका लंड खड़ा होना था और पास में ही खड़ा राजू का दोस्त मिलना उसे इशारा करके उस आ रहा था कि वह अपना पजामा उतार कर अपना लंड उसे दिखा दे लेकिन उसे शर्म आ रही थी,,,, श्याम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

यार राजू तुझे तो मौका मिल रहा है औरत चोदने का हम लोगों को तो मौका ही नहीं मिलता ,,,, वरना अपने लंड की ताकत कब का दिखा दिए होते,,, और एक तू है पकवान से भरी हुई थाली को ठुकरा दे रहा है,,,,

देख श्याम मुझे यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं है उस दिन की तारा तू आज फिर शुरू हो गया,,,,

शुरू क्यों ना होऊं,,,,आखिरकार तो मेरा दोस्त जो है और दोस्त की इतनी बड़ी बेइज्जती में बर्दाश्त कैसे कर पाऊंगा कल को अगर तेरे पिताजी को पता चला कि उनका बेटा मार दे ही नहीं है तो वह गांव वालों को क्या मुंह दिखाएंगे अपने पोते पोते को कैसे खिला पाएंगे,,, और अब तो मुझे लगने लगा है कि तेरी शादी भी नहीं होगी और अगर हो भी कहीं तो तेरी औरत मेरे पास जरूर आएगी,,,,।

श्याम जबान संभाल कर बात कर,,,,( राजु एकदम से क्रोधित स्वर में बोला,,,,)

बीवी के बारे में बोलते ही कैसा गुस्सा हो गया,,,,,,, लेकिन उस समय क्या करेगा जब सुहागरात को तेरी बीवी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाएगी और इसे बाजार में अपनी दोनों टांगे फैला देगी की मेरा पति अपना खड़ा लंड मेरी बुर में डालकर मेरे साथ सुहागरात मनाएगा,,,,, और सोच जब तेरा खड़ा ही नहीं होगा तब तेरी औरत सुहागरात कैसे मनाएगी तु उसे संतुष्ट कैसे कर पाएगा,,,, और तू शायद नहीं जानता की बुर की प्यास कैसी होती है जब तेरी बीवी को बड़े बड़े लंड की आवश्यकता पड़ेगी तब तेरा ना पाकर वह कहां जाएगी हम जैसे नौजवान लड़कों के पास ही आएगी,,,,,,,,(श्याम को इस तरह की गद्दीपति करने में बहुत मजा आता था और उसका मजा दूसरे लड़के भी उठा रहे थे वह भी जोर जोर से हंस रहे थे,,,, मुन्ना बार-बार उसे उकसा रहा था कि कुछ बोले लेकिन वह कुछ भी बोल नहीं रहा था वह बस गुस्सा किया जा रहा था,,,, गंदे शब्दों में जवाब ना देने का कारण यह भी था कि उसने आज तक इन शब्दों का कभी प्रयोग नहीं किया था और ना ही इस तरह की गंदी बातों ने कभी रुचि दिया था लेकिन वक्त के साथ धीरे-धीरे बड़ा होने लगा था जो कि इस तरह की बातों को सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना कि नहीं पाती थी और उसके बाद कभी भी इस तरह की बातें करने की मंजूरी नहीं दी क्योंकि बचपन में ही किसी को गाली दे दिया उसकी गाली सुनकर उसकी मां और उसके बाबुजी उसे बहुत मारे थे,,,,तब से लेकर आज तक वह कभी गद्दे शब्दों का प्रयोग नहीं किया था लेकिन श्याम उसे बार-बार उकसा रहा था उसकी मर्दानगी पर सवाल उठा रहा था जो कि यह बात मुन्ना भीअच्छी तरह से जानता था कि राजू वरदान की से भरा हुआ था और उसके जैसी मर्दाना ताकत शायद ही गांव में किसी के पास हो,,,। लेकिन फिर भी मुन्ना हैरान था कि इतना कुछ सुनने के बाद भी राजू अपना दिखाता क्यों नहीं,,, श्याम की बातों को सुनकर राजू गुस्से में बोला,,,)

कोई अगर तेरी मां के बारे में गंदी गंदी बातें बोले तो तुझे कैसा लगेगा,,,,

यहां किसी की हिम्मत ही नहीं है कि मुझे कोई भला बुरा बोलें,,,,,

अगर मैं तेरी मां के बारे में गंदी गंदी बातें बोलु तो,,,,(राजू गुस्से में बोला और उसकी बातें सुनकर श्याम कुछ देर तक शांत रहने के बाद और कुछ सोचने के बाद वह हंसते हुए बोला,,,)

तू बोल कर भी क्या कर पाएगा,,,,, तेरे से कुछ होने वाला भी नहीं है अगर होने वाला होता तो अब तक कमला चाची की बुर में लंड डाल दिया होता,,,,

देख श्याम मैं कहता हूं शांत हो जा अगर मैं बोलना शुरू किया तो सुनकर तु शर्म से मर जाएगा,,,,,,,,

देख रहा हूं जैसा मैं बोलता हूं वैसा तू भी बोलेगा जैसे कि मैं तेरी मां को चोदना चाहता हूं,,,, और अगर मौका मिला तो मैं तेरी खूबसूरत मां को चोद भी लुंगा और मेरी चुदाई से तेरी मां खुश भी हो जाएगी लेकिन सोच तू अगर मेरी मां को चोदना चाहेंगा तो भी नहीं चोद पाएगा,,, पता है क्यों क्योंकि तेरे पास है ही नहीं,,,,, और मेरे पास देख,,,,(इतना कहने के साथ ही श्याम अपना पजामा नीचे करके अपने लंड को पिलाना शुरू कर दिया,,,,,श्याम की बेशर्मी भरी हरकत पर बाकी के लड़के जोर जोर से हंस रहे थे उन्हें मजा आ रहा था लेकिन राजू को गुस्सा आ रहा था,,,, गांव के लड़कों की आवारागर्दी और गंदी बातों को दूर झाड़ियों के पीछे छुप कर सोनी और उसकी सहेलियां देख रही थी,,,, लाला की बहन दोपहर के समय सौच करने आई थी और सोच करने के बाद वह अपनी सहेली के साथ घर जाने को हुई थी कि लड़कों की बातें सुनते ही बाहर खड़ी हो गई थी और झाड़ियों के पीछे सोनी और उसकी सहेलियां छुपकर उन लड़कों की बातें सुन रही थी और उनकी गंदी गंदी बातें सुनकर मुस्कुरा रही थी और उन्हें मजा भी आ रहा था,,,, लेकिन इस समय सोनी और उसकी सहेलियों की नजर श्याम के लंड पर थी जो कि ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन पूरी तरह से सख्त हो चुका था,,,जिसे देखकर सोनी और उसकी सहेलियों के तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,,, सोनी जोकी पति के देहांत के बाद से बेहद प्यासी थी और अपनी प्यास अपने बड़े भाई के लंड से बुझाती आ रही थी लेकिन उसे भी एक जवान लंड की जरूरत थी,,,, इसीलिए तो उसकी नजर श्याम के लंड पर एकदम से चिपक गई थी,,,, जिसे श्याम जोर जोर से हिला रहा था,,,,,)

देखा राजू तेरी मां की प्यास में अपने लंड से बुझा सकता हूं,,, और मुझे बहुत मजा आएगा जब तेरी मां अपनी दोनों टांगें फैलाकर मेरे लंड को अपनी बुर में लेगी,,,, लेकिन तुझ से कुछ नहीं हो पाएगा,,,,,,,

(राजू का गुस्सा बढ़ता जा रहा था आज पहली बार एक लड़के के मुंह से अपनी ही मां के बारे में गंदी बातें सुन रहा था और उसकी गंदी बातें सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर बढ़ती जा रही थी और लंड का आकार बढ़ता जा रहा था,,,,,, अभी तक राजू एक दूसरे की मां के बारे में गाली गलौज सुनता आ रहा था लेकिन आज शाम के मुंह से उसकी मां के बारे में गंदी बात को सुनकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी और उसका लंड कुछ ज्यादा उछाल मारने लगा था,,,इस बार उससे रहा नहीं गया क्योंकि वह सारी हदों को पार कर चुका था उसकी मां के बारे में बेहद गंदी बातें बोल चुका था इसलिए अब उसके सब्र का बांध टूट चुका था और उसे अपनी मर्दानगी दिखाना बेहद जरूरी हो चुका था ताकि वह हमेशा के लिए उसका मुंह बंद कर सके,,,राजू को अपनी मर्दानगी दिखाना ही नहीं था बल्कि उसकी मां के बारे में गंदी गंदी बातों को बोल कर अपनी सारी भड़ास निकाल लेना चाहता था इसलिए वह बोला,,,)

मादरचोद श्याम,,,, तेरी मां की चुदाई मैं ही अच्छे से करूंगा देखना चाहिए अपना लंड डालूंगा तेरी मां की बुर में पर जोर जोर से चिल्ला उठेगी और मुझे अपना लंड बाहर निकालने के लिए मिन्नतें करेगी फिर भी मैं अपना लगा नहीं निकालुंगा और तेरी मां की बुर में धकाधक पेलता रहूंगा,,,,

(सोनी राजू की बातों को सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी लड़कों के मुंह से एक दूसरे की मां के बारे में गंदी से गंदी बातों को सुनकर उसकी बुर कुल बुलाने लगी थी,,,, वह देखना चाहती थी कि वह क्या करता है,,,इसलिए झाड़ियों के पीछे छुप कर अपनी सहेलियों के साथ होना अपने कान खड़े करके उन लोगों की बातों को सुन रही थी लेकिन राजू की बातों को सुनकर श्याम जोर जोर से हंस रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि वास्तव में राजु के पास मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड है ही नहीं,,,)

तेरी बातों का मुझे बुरा नहीं लग रहा है राजू बल्कि मुझे तो तुझ पर तरस आ रहा है,,,।

तरस तो तुझे अपनी मां पर आएगा,,, जब मैं अपना मोटा और लंबा लंड तेरी मां की बुर में धीरे-धीरे डालूंगा,,, तेरी मां जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर देगी,,,, मेरा मोटा लंड पाकर तेरी मां एकदम मस्त हो जाएगी देखना,,,

(श्याम राजू की कही बातों को हल्के में ले रहा था जोर जोर से हंस रहा था लेकिन मुन्ना को पूरा यकीन था क्योंकि इसलिए कह रहा था अगर ऐसा हो सकता तो एक-एक कही हुई बात सच निकलती जोर जोर से हंसते हुए श्याम बोला)

पर डालेगा क्या मेरी मां की बुर में,,, लंड तो तेरे पास है नहीं,,,, बैगन डालेगा,,,,,

(राजू और श्याम की बातों को सुनकर सोनीकी बुर गीली हो रही थी गांव के लड़कों को इस तरह से गंदी बातें करते हुए देखकर उनकी बातों को सुनकर उसके होश उड़ गए थे,,,श्याम का इस तरह से जोर जोर से हंसना उसकी बातों को सुनकर राजू एकदम से तैश में आ गया और बोला,,,)

तेरी मां की बुर में पैदा नहीं डालूंगा डालूंगा तुम्हें इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड ही,,, पर देखना चाहेगा रुक दिखाता हुं तुझे मादरचोद,,,(इतना कहने के साथ ही राजू एकदम से जोश से भर गया था और तुरंत अपने दोनों हाथ सपने पजामे को पकड़ करएक झटके से नीचे कर दिया और जैसे ही पहचाना उसके कुछ बताया वैसे ही होगा उसका लंबा मोटा लंबा लंड लहरा उठा जिस पर नजर पड़ते ही सबके होश उड़ गए श्याम तो देखता ही रह गया यकीन नहीं हो रहा था कि पजामे के अन्दर राजू इतना दमदार लंड छुपाया हुआ था,,,। सोनी की तो आंखें फटी की फटी रह गई सोनी ने अभी तक इस तरह का दमदार मोटा लंबा लंड कभी नहीं देखी थी,,,, पल भर में ही राजू के लंड के दीदार से ही उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी,,,, उसकी सहेली अभी आश्चर्य से देखे जा रही थी और राजू एक आंख से अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके ही जाना शुरू कर दिया था यह पहला मौका था उसके लिए जब वह अपने ही हाथ में लंड पकड़ कर हीला रहा था,,,। श्याम के पास बोलने लायक कुछ नहीं था,,, वह बस आंकड़े राजू के लंड को देखे जा रहा था,,,,)

क्यों क्या हुआ हरामी मादरचोद देख ले यही डालूंगा और तेरी मां की बुर फट जाएगी,,,,

(श्याम क्या बोलता है श्याम के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे उसका खड़ा लंड राजू कितने के सामने नुनु साबित हो रहा था,,,,, बहुत शर्मिंदा हो गया था वह तुरंत अपने पजामे को ऊपर करके वहां से चलता बना,,,, लेकिन सोनी के दोनों टांगों के बीच हलचल मच गई थी,,,, अजीब सी हालत हो गई थी उसकी अपनी सहेली से उस लड़के के बारे में पूछा तो पता चला कि बेल गाड़ी चलाने वाले हरिया का लड़का था उसे तुरंत याद आ गया कि यह उसी हरिया का लड़का है जो उस दिन ब्याज के पैसे देने घर पर आया था और उसे चुदवाते हुए पकड़ लिया था लेकिन वह पहचान नहीं पाया था,,,,,,,क्योंकि उस समय सोने के घने बाल उसके चेहरे को ढके हुए थे और कोई नंगे बदन को देख कर चेहरा पहचान ले ऐसा हो नहीं सकता था और वैसे भी हरिया ने उसे पहले कभी देखा भी नहीं था,,, अपने मन में ठान ली थी कि राजू से मुलाकात करनी ही पड़ेगी,,,।
 
देखते ही देखते कई दिन गुजर गए थे श्याम अब राजू से उसकी मर्दानगी के बारे में मजाक नहीं गाया करता था बल्कि उसकी मर्दानगी भरे अंग को देखकर मन ही मन में जल उठता था क्योंकि वह जानता था कि औरतों को लंबा और मोटा लंड ही पसंद होता है,,,,,, इस बात को वहां भली भांति जानता था कि कमला चाची को लेकर जिस तरह से उस पर कब किया कर रहा था अगर वह कमला चाची के पास चला गया तो कमला चाची उसे लेकर मस्त हो जाएगी कि वह तो राजू की गुलाम ही बन जाएगी इसलिए वह नहीं चाहता था की कमला चाची राजू के साथ संभोग करें,,,,,,

श्याम के साथ-साथ दूसरे लड़के भी राजू के लंड को देखकर अचंभित हो चुके थे,,,,, वह लोग तो मजाक मजाक में श्याम को कह भी देते थे कि,,,।

श्याम उसकी तो तो उसकी बात पर पहुंचता है ना अगर सोच अगर ऐसा हो गया कि सच में उसे मौका मिले तेरी मां को चोदने का तो तेरी मां उसकी दीवानी हो जाएगी,,,

(और अपनी मां के बारे में अपनी ही दोस्तों से इस तरह की गंदी बात सुनकर भड़क ऊठता था और झगड़ा करने लगता था,,,,,,दूसरी तरफ सोने की भी हालत खराब थी दिन-रात ना उसके ख्यालों में केवल राजू के लंड की ही छवि घूमती रहती थी सोनी जल्द से जल्द राजू से मुलाकात करना चाहती थी,,, क्योंकि सोनी अभी पूरी तरह से जवान थी गदराई जवानी की मालकिन थी हरी भरी जवानी में ही उसका पति उसे छोड़कर स्वर्ग सिधार गया था अपनी जवानी की आग और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे अपने भाई की शरण लेना पड़ा था जहां से उसकी सारी जरूरतें पूरी भी हो रही थी,,,, पेट की भी और तन की भी लाला भी कोई कसर नहीं छोड़ता था सोनी को चोदने का,,,ऐसा नहीं था कि लाना से उसे संतुष्टि नहीं मिलती थी ,,, लाला चुदाई में उसे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास कराता था,,,, लेकिन फिर भी सोने की उम्र में एक जवान लंड की जरूरत होती है राजू के लंबे तगड़े मोटे लंबे लंड को देखकर सोनी की इच्छा कुछ ज्यादा ही प्रज्वलित हो चुकी थी,,, जो कि राजू से मिलने के बाद ही मुझे सकती थी लेकिन उससे कैसे मिला जाए सोनी को समझ में नहीं आ रहा था,,, तभी उसे ख्याल आया कि वैसे भी वह समय व्यतीत करने के लिए गांव के लड़के और लड़कियों को पढ़ाया करती थी,,,।अपने मन में सोचने लगी कि क्यों ना राजू को भी पढ़ने के लिए अपने पास बुलाया जाए,,,अगर ऐसा हो गया तो उसके मन की इच्छा पूरी हो जाएगी,,,। लेकिन ऐसा होगा कैसे क्या वह पढ़ने आएगा यह बात उसके मन में आते ही वह परेशान हो गई थी,,,, लेकिन कुछ तो उपाय सोचना पड़ेगा और अपने मन में एक दिन जरूर राजू के घर जाकर उसे पढ़ने के लिए अपने घर बुलाएगी,,, यह बात मन में सोचते ही उसके खूबसूरत होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,,

दूसरी तरफ हरिया और उसका साथी बेरोकटोक स्टेशन के अंदर घुसकर सवारी ढो रहे थे जिससे उसकी आमदनी अच्छी खासी बढ़ गई थी,,,,, लेकिन दिन रात उसके जेहन में एक ही सवाल उठता रहता था कि लाला के घर में लाला के साथ नंगी होकर चुदवाने वाली औरत कौन थी,,,।,,, यही सवाल सोच सोच कर वह बीड़ी पर बीड़ी फुंकता जा रहा था जिससे उसकी खांसी भी बढने लगी थी,,,,,,,

मधु की जिंदगी बड़े अच्छे से कट रही थी,,, अपनी घरेलू और संस्कारी जीवन में अभी तक उसने आकर्षण और वासना की गंदगी आने नहीं दी थी इसीलिए तो वह अपने पति के साथ बहुत खुश थी,,,,,,,,,

ऐसे ही एक दिन राजू दोपहर के समय गांव में इधर उधर भटक रहा था कि तभी कमला चाची के घर से गुजरने को हुआ तो उसे ख्याल आया कि क्यों नहीं पर कमला चाची से मिल लिया जाए,,,क्योंकि वैसे भी कमला चाची उसे एक बार मिलने के लिए बोली ही थी,,,,,, राजू कमला चाची के घर के दरवाजे के पास पहुंच कर दरवाजे के बाहर से आवाज लगाता हुआ बोला,,,,।

कमला चाची,,,,,ओ,,,, कमला चाची घर पर हो कि नहीं,,,,,।

(राजू की आवाज सुनते ही कमला चाची के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, वह घर के आंगन में नहा रही थी,,,,कमला चाची के घर का आंगन बड़ा था और खुला हुआ था और चारों तरफ से दीवार से घिरा हुआ था जिससे घर के आंगन में हेड पंप लगा था जहां पर वह नहा रही थी,,,, और वैसे भी गांव में इक्का-दुक्का लोगों के पास ही हैंडपंप था बाकी सभी लोग नदी पर ही नहाया करते थे ,,,वह अभी नहाते समय अजीब कशमकश में थी कि तभी बाहर से फिर आवाज आई,,,।)

,,, कोई बात नहीं मैं फिर कभी कमला चाची से मिल लुंगा,,, लेकिन बता जरुर देना कि मैं आया था वरना कमला चाची नाराज होंगी,,,(राजू को लगा कि कमला चाची घर पर नहीं है और उनकी बहू घर पर है जो कि जवाब नहीं दे रही है इसलिए वह ऐसा बोलकर जाने ही वाला था कि तभी अंदर से आवाज आई,,,।)

आजा दरवाजा खुला ही है,,,,,,,

(अंदर से कमला चाची की आवाज सुनते ही राजू को इत्मीनान हुआ और वह दरवाजे को हल्का सा धक्का देकर अंदर प्रवेश कर गया लेकिन अंदर प्रवेश करते ही आंगन में बने हेड पंप चला रही कमला चाची पर नजर पड़ते ही राजू के तो होश उड़ गए,,,,,, क्या करें आंखों के सामने का नजारा ही कुछ ऐसा था कमला चाची की पीठ राजू की तरफ से जो कि वह जानबूझकर खड़ी हो गई थी राजू के आने के पहले वह बैठकर ही ना रहे थे और इसलिए खड़ी हुई थी कि राजू को उसकी बड़ी-बड़ी कारण बराबर दिखाई दे जो कि इस समय पानी में भीगने की वजह से उसका पेटीकोट जो कि वह सारे कपड़े उतार कर केवल पेटीकोट को अपनी दोनों चुचियों पर लपेट कर उसकी डोरी से बात करते हुए थी और पानी में भीगने की वजह से वह पूरी तरह से उसके गोरे बदन पर चिपक गया था और इसीलिए पानी में भीगी पेटीकोट बदन पर चिपकने की वजह से उसकी भारी-भरकम गांड एकदम साफ तौर पर अपना भूगोल लिए हुए नजर आ रही थी,,,। राजू तो बस देखता ही रह गया,,,, और कमला चाची जानबूझकर उसी अंदाज में हेडपंप चलाते हुए अपनी भारी-भरकम गांड को थिरका रही थी जिसकी थीरकन पर राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,,,

कमला चाची अच्छी तरह से जान रही थी कि जिस तरह से मारपीट दरवाजे की तरफ की है खड़ी हो कर काम चला रही थी ऐसे में राजू की नजर उस की भारी-भरकम खान पर जरूर करेगी और यही निश्चित करने के लिए वह अपनी नजर पीछे घुमा कर देखी तो उसके होठों पर काम अब मुस्कान तैरने लगी वाकई में राजू की नजर अपनी गांड पर घूमती हुई पाकर वह उत्तेजित हुए जा रही थी,,, अपनी चूचियों पर पेटीकोट चढ़ाकर बांधने की वजह से पेटिकोट उसकी मोटी मोटी जांघों को बिल्कुल भी ढक पाने पर असमर्थ थी जिसकी वजह से राजू को,, कमला चाची की मोटी मोटी गोरी जाम है एकदम साफ नजर आ रही थी और यह राजू के लिए पहला मौका था जब औरत को इस अवस्था में देख रहा था,,,,पहली बार राजु ने एक औरत की मोटी जांघों को देख रहा था और पहली बार यह एहसास हुआ कि औरत की जांघें कितनी खूबसूरत होती है,,,,,,, जिस पर पानी की बूंदे मोती के दाने की तरह फिसल रही थी,,,,,,,,।

दूसरी तरफ अपने अर्ध नग्न शरीर का प्रदर्शन करते समय खेली खाई कमला चाची जो की बहू वाली हो गई थी फिर राजू के सामने इस अवस्था में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, एक अजीब सा सुख उसे प्राप्त हो रहा था,,, राजू कोवह इस समय मौके को देखते हुए अपना सब कुछ दिखा देना चाहती थी लेकिन वो जानती थी कि उसकी बहू घर में मौजूद है और ऐसा करना ठीक नहीं है लेकिन फिर भी वह अपनी खूबसूरती बदन के आकर्षण के केंद्र बिंदु को राजू को दिखाकर उसे धराशाई कर देना चाहती थी ताकि वह जब उसे बुलाए तो वह खींचा चला आए इसीलिए वह,,,,कुछ ऐसा कर देना चाहती थी जिसकी शायद राजू को उम्मीद भी नहीं थी लेकिन कैसे वह भी पहुंच कशमकश में थी बाल्टी भर जाने के बावजूद भी वह नल चला रही थी,, और राजू जैसे कि सब कुछ भूल चुका हूं उस तरह से दरवाजे पर ठिठक कर खड़ा रह गया था वह भी काफी देर से कमला चाची के बदन के खूबसूरत भूगोल को अपनी आंखों से नाप रहा था,,,,।

कमला चाची जानती थी कि किसी भी वक्त कमरे से बाहर उसकी बहू आ जाएगी और उसकी मौजूदगी में वह ऐसा कुछ कर नहीं सकती थी इसीलिए जल्द से जल्द अपने वतन की झलक राखी को दिखा देना चाहती थी हालांकि आधा नंगा बदन पीछे से उसका नजर आ ही रहा था और पेटीकोट पानी में पूरी तरह से गीली होने की वजह से बदन का कटाव भी साफ तौर पर नजर आ रहा था लेकिन कपड़ों में और नंगे पर में जमीन आसमान का फर्क होता है वह जानती थी कि राजू अगर उसके नंगे बदन को देखेगा तो और ज्यादा उत्तेजित और उत्सुक हो जाएगा और वह खुद काफी उत्सुक थी अपनी हरकत को अंजाम देने के लिए,,,,, इसलिए वह पेटिकोट को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर हल्के से उसे झाड़ने के बहाने कमर तक उठा‌दी और तुरंत उसे नीचे करते हुए बोली,,,।,,

आ गया तू दरवाजा तो बंद कर दे ,,,,(और ऐसा कहते हुए नीचे बैठ गई,,, लेकिन इतने से ही राजू के होश उड़ गए थे राजू को कमला चाची की गोरी गोरी बड़ी गांड के दर्शन हो चुके थे,, पल भर के लिए ही एक झलक भर थी लेकिन राजू के लिए इतना काफी है जवान हो रहा राजू कमला चाची की नंगी गांड को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और उसकी उत्तेजना उसकी दोनों टांगों के बीच पजामे में साफ झलक रही थी,,,,,,, कमला चाची की गांड को नजर भर कर देखना चाहता था,,। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया बस झलक भर देख पाया था लेकिन फिर भी यह राजू के लिए बहुत था उसके कोमल मन पर कमला चाची की नंगी गांड भारी पड़ रही थी,,,। राजू अभी भी पूरी तरह से मदहोशी में था होश उसे बिल्कुल भी नहीं था,,,,,, किसी भी प्रकार का जवाब ना आता देखकर कमला चाची पीछे नजर घुमाकर देखी तो अभी भी राजू आश्चर्य से आंखें फाड़े उसे देख रहा था तो यह देखकर कमला चाची के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,।)

अरे राजू ऐसे क्या देख रहा है दरवाजा तो बंद कर दे,,,

(कमला चाची की आवाज सुनकर जैसे वह होश में आया हो इस तरह से लड़खड़ा दरवाजा बंद किया और वापस उसी जगह पर खड़ा होकर कमला चाची को देखने लगा,,, तो फिर कमला चाची बोली,,)

अरे मेरे पीछे मत खड़ा रे,,,, सामने जो लोटा पड़ा है ना लाकर मुझे दे,,, नहाना है,,,,

(कमला चाची जानबूझकर उसे लौटा लाने के लिए बोली थी क्योंकि कमला चाची उसे अपना बदन आगे से दिखाना चाहती थी,,,पीछे से जलवा दिख कर उसे पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर चुकी थी अब आगे का जलवा दिखा कर उसे पूरी तरह से धराशाई करना चाहती थी,,,,,, पानी में भीग कर भी कमला चाची की बुर राजू को अपने बदन का जलवा दिखाते हुए गीली हो रही थी,,,,,, राजू तुरंत आगे की तरफ जा कर लौटा उठा लिया और कमला चाची को थमाने लगा,,, लेकिन कमला चाची के पास पहुंचते ही राजू का दिल और जोरो से धड़कने लगा,,, क्योंकि राजू को लोटा लेकर आने से पहले ही कमला चाची अपने पेटिकोट की दूरी को छातियों पर से थोड़ी ढीली कर चुकी थी जिससे उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां आधे से ज्यादा पेटिकोट के बीच से नजर आ रही थी और उस पर नजर पड़ते ही राजू के होश उड़ गए,,,, राजू कमला चाची को लौटा उसके हाथ में थमाते हुए उसकी भारी-भरकम गोलाकार चुचीयों को ही देख रहा था और यह बात कमला चाची से छिपी नहीं रह सकी वह राजू की नजरों को देखकर समझ गई थी कि उसकी नजर उसकी चुचियों पर है और अपनी युक्ति काम आते ही उसका मन हर्षोल्लास से भर उठा,,,,,,, और कमला चाची की नजर उसके पजामे पर पड़ी तो उसकी बुर फुदकने लगी,,,,,,,, उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर कमला चाची समझ गई थी कि पजामे के अंदर घमासान मचाने वाला औजार हैं,,,,। राजू पूरी तरह से मंत्रमुग्ध और मदहोश हो चुका था पेटिकोट की डोरी के बीच वाली खुली जगह के बीचो बीच में से ऐसा लग रहा था कि मानो एक साथ दो दो चंद्रमा अपनी अर्ध कला दिखा रहे हो,,, हालांकि चुचियों के निप्पल पेटिकोट की आड़ में छुपी हुई थी लेकिन फिर भी उसकी नुकीली नोक पेटीकोट के भीगे होने की वजह से साफ उपसी हुई नजर आ रही थी,,,,।

कमला चाची अंदर ही अंदर बेहद खुश और उत्तेजित हुए जा रही थी कमला चाची मन ही मन यह चाह रही थी कि राजू की नजर से दोनों के पीछे की तरफ जाए जहां पर वह खुद अपने हाथों से पेटीकोट उठाकर अपनी बुर को नंगी छोड़ रखी थी ताकि राजू को उसकी बुर अच्छे से नजर आए,,,,,,, और वह बाल्टी में से लोटा भर भर कर अपने ऊपर डालने लगी,,,, लेकिन राजू अभी भी उसकी चूचियों की तरफ देख रहा था,,, और अपने ऊपर पानी डालते हुए कमला चाची अपने मन में ही बड़बड़ा रही थी कि,,,, ऊपर क्या देखता है हरामजादे नीचे देख तुझे और मजा आएगा,,,,,,,, लेकिन जब कमला चाची की खुद की नजर अपनी दोनों टांगों के बीच गई तो वहनिराश हो गई पानी डालने की वजह से उसका पेटीकोट वापस सरक कर उसकी दोनों टांगो के बीच की उस पतली दरार वाली जगह को छुपा दिया था,,,,, जिसे दिखाने के लिए कमला चाची इतना तर कट रची थी,,,, लेकिन जो कुछ भी दिख रहा था राजू के लिए उत्तेजना से भरपूर था वह रह रह कर अपनी नजर को कमला चाची के दोनों टांगों के बीच भी डाल देता था जहां पर दोनों टांगों के बीच उसे पेटीकोट का कपड़ा ढका हुआ नजर आ रहा था जो निराशा कमला चाची को हाथ लगी थी वही निराशा राजू को भी महसूस हो रही थी क्योंकि एक लड़का और वह भी जवान होने के नाते उसे इतना तो पता ही था कि औरत की दोनों टांगों के बीच खास चीज होती है जिसके लिए लड़के पागल रहते हैं,,,,,

कमला चाची वापस किसी बहाने से अपने पेटिकोट को उठाकर अपनी बुर दिखाना चाहती थी और इसके लिए वह अपनी पूरी तैयारी भी कर चुकी थी,,,, और राजू को एक बहाने से नल चलाने के लिए बोल भी दी थी,, और राजू भी नल चलाने लगा था,,,लेकिन कमला चाची अपनी हरकत को अंजाम देती है इससे पहले ही अंदर कमरे में से उसकी करो बाहर निकल कर और कमला चाची के साड़ी को हाथों में लिए बाहर आई और बोली,,,)

माजी आप जल्दी से नहा लो कपड़ों को वैसे ही छोड़ देना मैं धो दूंगी,,,,,(ऐसा कहते हुए कमला चाची की बहू खटिया पर साड़ी रख दी,,, और खड़ी हो गई और राजू की तरफ देखने लगी जो कि नल चला रहा था,,, और वह बोली,,)

यह कौन है मा जी,,,?

अरे रमा बहु अपने हरिया का लड़का है राजू बहुत ही सीधा साधा है,,, जा जाकर इसके लिए,,,,, गुड़ और पानी ले आ,,,।

नहीं नहीं चाची इसकी क्या जरूरत है,,,, नमस्ते भाभी (कमला चाची की बहू रमा को हाथ जोड़ते हुए) आप रहने दीजिए भाभी इसकी जरूरत नहीं है,,,,)

अरे कैसी बात कर रहे हो पहली बार इधर आए हो,,,, बैठो मैं पानी लेकर आती हूं,,,(इतना कहकर कमला चाची की बहू अंदर कमरे में पानी और गुड़ लेने चली गई लेकिन कमला चाची का मन उदास हो क्या आज वह राजू को अपनी बुर दिखा देना चाहती थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया लेकिन इस बात की तसल्ली उसे अच्छी तरह से थी कि राजू अब उसके नंगे बदन को देख कर मदहोश हो चुका था,,, इस उमर में उसके लिए यही काफी था,,,, राजू खटिया पर जाकर बैठ गया था लेकिन फिर भी वह कमला चाची को चोर नजरों से देख ले रहा था और यह देखकर कमला चाची को भी अच्छा लग रहा था,,,,, औरत की खूबसूरत नंगे बदन को देख कर पहली बार उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर जागरूक हुई थी,,,, इसलिए उसे अपने तन बदन में उत्तेजना की लहर की यह हलचल बहुत ही सुखदाई लग रही थी,,,। कमला चाची के पास अपना बदन दिखाने का मौका बिल्कुल भी नहीं था थोड़ी ही देर में रामा एक कटोरी में गुड़ का टुकड़ा और हाथ में गिलास दिए हुए बाहर आ गई और राजू तो हम आने लगी राजू गुड़ का एक टुकड़ा खाकर रमा के हाथों से पानी का गिलास लेने लगा तो अनजाने में ही उसकी उंगली रमा की नाजुक उंगलियों से रगड़ खा गई,,, और यह रगड़ राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर गई और यह हलचल रमा को भी अपने बदन में महसूस हुई,,रामु का भोलापन और उसका मासूम चेहरा रमा को भा गया था,,,।

अब ज्यादा देर तक वहां बैठे रहना राजू के लिए उचित नहीं था इसलिए वह कमला चाची की और उसकी बहू को नमस्ते कहकर घर से बाहर आ गया,,,,लेकिन जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखा था उसे तेरी कसम उसकी दोनों टांगों के बीच की हल-चल अभी भी शांत नहीं हुई थी,,,

गांव में इधर-उधर घूम कर वह अपने मन को शांत करने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में खेलकूद के चक्कर में वह कुछ देर पहले की बात को भूल चुका था,,,।
 
ऐसे ही 1 दिन मधु रात के समय खाना बना रही थी,,,,, और मधु गुलाबी को घर के पीछे से इंधन के लिए लकड़ियां लाने के लिए बोली,,,,,, और गुलाबी जो की सब्जियां काट रही थी वह ,,,,बोली,,,।

जा रही हूं भाभी पहले सब्जियां काट लु तब जाती हुं,,,,(ऐसा कहते हुए वह सब्जियां काटती रही तो मधु बोली,,)

अरे गुलाबी देर हो रही है और यहां लकड़ियां खत्म हो गई है,,, तेरे भैया आ गए होंगे जल्दी जाकर लकड़िया ले आ मैं सब्जी काट देती हूं,,,,

ठीक है भाभी लो तुम सब्जी काट लो मुझे जोर की पेशाब भी लगी है,,,

अरे तुझे कितनी पेशाब लगती है खाना बनाने से पहले ही तो मेरे साथ गई थी और फिर से तुझे लग गई,,,,

हा भाभी पता नहीं क्यों मुझे बार बार जोरों की पेशाब लग जाती है,,,,

पता नहीं तेरी बुर में कितनी पेशाब भरी हुई है,,,

धत्,,, भाभी कैसी बातें करती हो,,,,(गुलाबी शरमाते हुए बोली)

अरे सच कह रही हूं तुझे चोर चोर की पेशाब लगती है ना बार-बार अब तुझे दूल्हे की जरूरत है,,,,

लो अब इसमें दूल्हा क्या करने वाला है,,,?(गुलाबी ईतरातें हुए बोलि,,,)

अरे पगली जब तेरा दूल्हा अपना मोटा लंड तेरी बुर में डाल कर रात भर चोदेगा तो खुद ही तेरे बदन की गर्मी चुदाई से निकल जाएगी,,,, फिर यह बार-बार मुतना बंद हो जाएगा,,,(मधु हंसते हुए बोली,,,)

क्या भाभी तुम भी लगता है भैया से शादी करने के बाद तुम्हारा भी बार-बार मुतना बंद हो गया,,,

हां रे तू सच कह रही है जब नई नई मैं इधर आई थी तो मुझे भी बार-बार पेशाब लग जाती है लेकिन तेरे भैया का लंड बुर में जाते ही तकलीफ दूर हो गई,,,,( मधु एकदम बेशर्म बन कर अपनी ननदसे बोली वैसे भी भाभी और ननद का रिश्ता ही हंसी मजाक का होता है और हंसी मजाक में कितनी गंदी बातें एक दूसरे को बोलते ही रहते हैं,,,)

मुझे इस तरह से तकलीफ दूर नहीं करवाना है,,,(इतना कहकर वह चलने लगी तो मधु पीछे से ही आवाज लगाते हुए बोली,,,)

अरे तू चाहे या ना चाहे शादी के बाद तेरा दूल्हा तेरी बुर में डालेगा ही डालेगा,,,,

(अपनी भाभी की बातें सुनकर गुलाबी शर्म से लाल हो गई थी और उत्तेजित भी हो गई थी,,, अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को वह देख चुकी थी और उसे अपनी भाभी की बुर में अंदर बाहर होता हुआ भी देख चुकी थी और अपने भाई से भी ज्यादा दमदार लंड उसे अपने भतीजे राजू का लगा था,,,,भले ही वह अपने मुंह से बोल कर आई थी कि इस तरह से अपनी तकलीफ दूर नहीं करवाना है लेकिन एक मोटे गर्लफ्रेंड को अपनी बुर में लेने की उत्सुकता उसके चेहरे के हाव भाव से सांप पता चल रही थी,,,। लकड़ी लेने के लिए पेशाब करने के लिए घर के पीछे पहुंच गई थी जहां पर ढेर सारी सूखी लकड़ियां रखी हुई थी और पास में ही बेल के लिए घास फूस की झोपड़ी बनी हुई थी जिसमें रोज उसके भैया बैल को बांध दिया करते थे,,,,। गुलाबी सूखी सूखी लकड़ियों को उठाने लगी मन में यह सोच कर कि लकड़ी को भाभी के पास रखकर वह बाद में पेशाब करने आएगी लेकिन लकड़ी को उठाते हुए उसके पेट में जोड़ों का दर्द होने लगा जो कि पैसाब की वजह से ही हो रहा था वह समझ गई कि ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं है,,,, इसलिए वह तुरंत लकड़ियों को नीचे पटक दि और दो कदम की दूरी पर जाकर अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी इस बात से अनजान की थोड़ी देर पहले ही उसका बड़ा भाई हरिया बेलगाडी को लेकर घर आ चुका था और बैल को उस घास फूस की झोपड़ी में बाधकर वहीं बैठ गया था और बीड़ी सुलगा कर पी रहा था जब वहां गुलाबी आई थी तो वह जानता था वह लकड़ी ले जाने में उसकी मदद करने के लिए झोपड़ी से बाहर आना चाहता था लेकिन बीड़ी का आखिरी तक खींचने के लिए वहीं बैठ गया था लेकिन इतनी देर में गुलाबी लकड़ियों को पटक कर दो कदम आगे जा चुकी थी और इसीलिए हरिया उत्सुकता वश बैठा रहा था यह देखने के लिए की आखिरकार वह लकड़ी को उठा कर क्यो नीचे फेंक दी,,,, उसे आवाज भी लगाने वाला था की लकड़ियों को क्यों पटक दी लेकिन जैसे ही पर दो कदम की दूरी पर जाकर अपने दोनों हाथों को अपने सलवार की डोरी पर ले जाकर उसे खोलने को हुई की हरिया का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी बहन गुलाबी क्या करने जा रहे हैं वह पीछे से आवाज लगाना चाहता था लेकिन लगा नहीं पाया उसे समझ में नहीं आ रहा कि वह क्या करें क्योंकि उसकी बहन ठीक उसके सामने खड़ी थी ऐसे में वह इधर उधर भी नहीं हो सकता था क्योंकि उसके इधर-उधर होने से आवाज आ सकती थी और उसकी बहन की निगाह उस पर पढ़ सकती थी और ऐसे हालात में उसका इस तरह से पकड़े जाना अपनी ही बहन के नजर में शायद शक के दायरे में खड़ा कर देना जैसा होता उसकी बहन को ऐसा ही लगता कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देख रहा है हालांकि अभी गुलाबी पेशाब करना शुरू नहीं की थी बस अपनी सलवार की डोरी खोलने जा रही थी इतने से ही हरिया की हालत खराब हो गई थी,,,, हरिया दूसरे लोगों की तरह बिल्कुल भी नहीं था वह शर्म से गड़े जा रहा था क्योंकि वह जानता था कि कुछ ही देर में उसकी बहन अपने सलवार को नीचे सरका देगी और इस अवस्था में वह अपनी बहन को देखना गवारा नहीं समझ रहा था,,,,,,

और हरिया मन में उठ रही कशमकश को दबाते हुए नजर को दूसरी तरफ फेर लिया,,,,, हरिया एक काफी सुलझा हुआ इंसान था मान मर्यादा इज्जत उसके लिए सब कुछ थी,,,, मान मर्यादा संस्कार के मामले में वह खरा सोना था,,,,रिश्तो को वह अच्छी तरह से समझता था उसकी आंखों के सामने तो उसकी खुद की बहन गुलाबी थी,,,, लेकिन सारे रिश्ते नाते को ताक पर रखकर सबसे पहले वह एक मर्द था,,,,और उसकी आंखों के सामने ,,, 5 कदम की दूरी पर जो लड़की खड़ी थी वह हरिया की बहन से पहले एक औरत थी,,,, और दुनिया में मर्द और औरत के प्रति आकर्षण और खींचाव का रिश्ता कभी खत्म होने वाला नहीं था और इसीलिए एक मर्द होने के नाते हरिया अपने आपको लाख बनाने के बावजूद भी अपने मन को अपने वश में नहीं कर पा रहा था और उसकी नजर बार-बार उसकी बहन गुलाबी की तरफ चली जा रही थी जो कि अभी भी अपनी सलवार की डोरी को खोलने में उलझी हुई थी,,,,,,,

और बार-बार हरिया अपनी बहन गुलाबी की तरफ देख ले रहा था और फिर वापस नजर को दूसरी तरफ फेर ले रहा था,,,, ऐसा वह बार-बार कर रहा था,,,, काफी मेहनत करने के बाद गुलाबी आखिरकार सलवार की डोरी खोलने में कामयाब हो चुकी थी जो कि वह जल्दबाजी में कसकर बांध ली थी,,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी जो की इस बात से ही समझ में आ जा रहा था कि वह बार-बार अपने पैरों को पटक रही थी,,,।अपनी बहन को लाबी की हरकत और उसकी चलेगा जी को देखकर हरिया के तन बदन में अजीब सी उत्तेजना का एहसास हो रहा था और वह इस उत्तेजना से अपने अंदर में भी महसूस कर रहा था लेकिन वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रहा था,,,

चारों तरफ अंधेरा छा चुका था लेकिन फिर भी चांदनी रात होने की वजह से हरिया को सब कुछ साफ नजर आ रहा था और वह इस बात के लिए भगवान को धन्यवाद भी दे रहा था जोकि अपने मन में चांदनी रात के लिए भगवान को धन्यवाद देते हुए वह शर्मिंदगी का अहसास भी कर रहा था,,,।देखते ही देखते गुलाबी सलवार एक झटके में अपने घुटनों तक सरकारी प्रेशर करते हुए वह आगे की तरफ से जो कभी गई थी जिसकी वजह से उसकी मदमस्त गोरी गोरी गदराई गांड आसमान में चमक रहे चांद की तरह नजर आने लगी,,,,,,अपनी बहन की गोरी गांड देखते ही हरिया के मुंह में पानी आ गया साथ ही उसकी धोती में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो,, गया,,,,,, उत्तेजना के मारे हरिया का गला सूखता चला जा रहा था और दूसरी तरफ गुलाबी इस बात से बेखबर कि ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसका बड़ा भाई उसकी मदमस्त गांड के दर्शन करके मस्त हो रहा है,,,,वह तो नीचे बैठते ही अपनी गुलाबी बुर से पेशाब की धार मारने लगी क्योंकि बड़ी तेज सीटी की आवाज के साथ घर के पीछे के वातावरण में पूरी तरह से घुलने लगा,,, और इस मधुर मादक दूर से निकल गई सीटी की आवाज सुनते ही हरिया का मन डोल उठाऔर वह ना चाहते हुए भी धोती के ऊपर से ही अपने लंड को हाथ में पकड़ कर मसलने लगा,,,।

हरिया के लिए यह पहला मौका था जब वह इंसान बहन की नंगी गांड को अपनी आंखों से देख रहा था और साथ ही उसे पेशाब करते हुए भी देख रहा था यह उसके लिए सोने पर सुहागा था कामोत्तेजना के परम शिखर पर पलभर में ही वह विराजमान हो चुका था इतनी उत्तेजना सहन कर पाना उसके पास में बिल्कुल भी नहीं था हालांकि एक खूबसूरत बीवी का पति होने के नाते वह रोज अपनी खूबसूरत बीवी की चुदाई करता था और उसमें तृप्त हो जाता था लेकिन मर्द तो आखिर मर्द ही रहता है घर की मुर्गी दाल बराबर का कथन उसके ऊपर बराबर बैठ रहा था क्योंकि उसकी बीवी मधु बेहद खूबसूरत औरत की और बेहद खूबसूरत मादक जिस्म की मालकिन भी थी जिसको जब चाहे वह भोग सकता था,,, और गुलाबी उसकी बीवी मधु से ज्यादा खूबसूरत बिल्कुल भी नहीं थी,,,,लेकिन मर्दों का आकर्षण हमेशा से औरतों के नंगे बदन खास करके उन की गोरी गोरी कांड उनकी बुर और उनकी चूची पर हमेशा टिकी रहती थी और उसी प्रचलन के चलते हरिया भी अपने आप को संभाल नहीं पाया था,,,,, वह अपनी उत्तेजना को संभालना सकने के कारण दूसरी बीडी को धीरे से सुलगा कर उसे फूक रहा था,,,। बीड़ी से ज्यादा अपनी बहन की नंगी गांड और उसे इस तरह से पेशाब करते हुए देख कर वह खुद सुलग रहा था,,,,।

बीड़ी पीते हुए हैं वह इस बात का शुक्रगुजार था कि अभी तक उसे खांसी नहीं आई थी वरना उसका भांडा फूट जाता और वह शर्मिंदा हो जाता,,,,,,, गुलाबी भी अपनी हरकतों से अपने बड़े भाई हरिया पर अनजाने में ही बिजलियां गिरा रही थी,,। वह बार-बार अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी गोरी गोरी गांड को ऐसे थाम ले रही थी मानो जैसे किसी खरबूजे को थाम ले रही हो,,,।,, यह देखकर हरिया का मन लालच जा रहा उसके मन मेंहो रहा था कि वह खुद आगे बढ़कर अपनी बहन की गांड को अपनी दोनों हथेली में भरकर जोर-जोर से दबाए,,,, लेकिन ऐसा करना उचित नहीं था,,,,

लेकिन आंखों के सामने का मादक दृश्य उसे पूरी तरह से मदहोश किए जा रहा था वह जोर-जोर से धोती के ऊपर से अपने लंड को दबा रहा था,,,,, उसे आज अपनी बहन की गांड देखकर अपना लंड कुछ ज्यादा ही फूला हुआ महसूस हो रहा था,,,। उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका पानी ना निकल जाए,,,,उसकी बहन की बुर से लगातार पानी की धार फूट रही थी और उसमें से मधुर संगीत रूपी सीटी की आवाज कानों में गूंज रही थी,,, पैसा नहीं था कि वह पहली बार किसी औरत को पेशाब करते हुए देखना वह अपनी बीवी को बहुत बार पेशाब करते हुए देखकर मस्त भी हो चुका है और पेशाब करने की अपने अंदर जाग रही मदहोश माता पिता के पास होकर वह अपनी बीवी को पेशाब करते करते उसकी चुदाई भी किया है लेकिन आज की बात कुछ और थी आज उसकी आंखों के सामने उसकी बहन के साथ कर रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो गया था और अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,। उसका मन अपनी बहन को चोदने के लिए बहुत कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि शुरू के दिनों में जब उसकी नई नई शादी हुई थी तब उसकी बीवी की बहुत ही टाइट और संकरी थी,,, जिसमें उसका लंड बड़ी मुश्किल से जाता था,,, इसलिए अपने मन में सोच रहा था कि इस समय उसकी बहन की भी बुर बहुत ही टाइट और उसकी गलियारी एकदम संकरी होगी जिसमें उसे लंड डालने में बहुत मजा आएगा,,,,, यह सोचकर वह अपने तन बदन में मदहोशी का रस घोल रहा था,,,,,,,, उसका मन आगे बढ़ने को कर रहा था वह इसी समय अपनी बहन को घर के पीछे ही चोदना चाहता था लेकिन उसके मन में यह डर भी था कि कहीं उसकी बहन इस बात से बुरा मान गई और अपनी भाभी को बता दी तो क्या होगा वह तो कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएगा डूब मरने वाली बात उसके लिए होगी इसलिए काफी कशमकश के बाद वह अपने कदमों को वही टिका कर रखा था,,,,,

देखते ही देखते पेशाब की धार कमजोर पड़ने लगी और पेशाब करने के बाद गुलाबी उठ खड़ी हुई और अपनी सलवार को ऊपर कमर तक चढ़ाकर अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी,,,।पेशाब करते समय अपनी भाभी के द्वारा कही गई बात को याद करके काफी उत्तेजना का अनुभव भी कर रही थी जिससे उसके तन बदन में अजीब सा एहसास हो रहा था अपनी भाभी की बातों को सुनकर उसका मन बहुत करता था अपनी बुर में लंड लेने के लिए लेकिन वह जानती थी कि उसकी बुर की किस्मत मे अभी लंड नहीं लिखा था,,,,।

इसलिए जल्दी-जल्दी अपने सलवार की डोरी बांधकर सूखी लकड़ियों को उठाकर वापस चली गई और हरिया अपनी बहन को जाते हुए देखता रह गया,,,, उसका ध्यान जब अपनी धोती पर गया तो वह हैरान रह गया क्योंकि धोती से कब उसका लंड बाहर आ गया और कब वह उसे पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया था उसी को पता नहीं चला,,,, अपनी बहन की मादक गांड के उत्तेजना में वह इस कदर डूब गया कि अपनी बहन की कल्पना करते हुए अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया ,,,इसे अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था पहले भी वह लूटमार चुका था लेकिन तब उसके ख्यालों में उसकी खूबसूरती रहती थी और जब कभी भी वह मायके जाती थी तभी लेकिन आज उसके ख्यालों में उसकी खूबसूरत बहन गुलाबी थी जिसकी कल्पना करके वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रहा था,,,,

और थोड़ी ही देर में देखते ही देखते उसके लंड से पानी की पिचकारी छुट पड़ी,,,,,,, तब जाकर उसे शांति मिली,,,,,,,।

कुछ देर तक वह इधर-उधर घूमता रहा और थोड़ी देर बाद घर पहुंचा तो खाना तैयार था,,,वह गुलाबी सी नजर नहीं मिला पा रहा था,,,,कुछ देर पहले जो कुछ भी उसने देखा था और करा था उससे उसे शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था लेकिन गुलाबी को इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं था कि उसे पेशाब करते हुए उसका भाई देख रहा था और अपना लंड हीला रहा था,,,, गुलाबी अपने हाथों से खाना परोस कर अपने भाई को खिला रही थी और अपनी भाभी को भी राजू भी पास में ही बैठा हूं थोड़ी देर बाद गुलाबी भी बैठ कर खाने लगी,,,,।

रात को सोते समय अपनी बहन की गांड और उसे पेशाब करता हुआ देखकर जो उत्तेजना का अनुभव से नहीं किया था वह सारी कसर अपनी बीवी से उसकी चुदाई करके उतार रहा था और गुलाबी दीवार के उसी छेद में से उस नजारे को देख रही थी और उत्तेजित हो रही थी सलवार उतार कर वह अपनी भाभी की बात को याद करके की शादी के बाद उसकी बुर में उसके दूल्हे का लंड जाएगा तब बार-बार पेशाब लगने वाली आदत छुट जाएगी,,, इस बात को याद करके और अपनी भैया भाभी की चुदाई बेटे करो पूरी तरह से फिट हो गई थी और अपनी बुर में उंगली डालकर अंदर बाहर कर रही थी,,,, थोड़ी देर में उसके भैया भाभी के साथ वो खुद शांत हो गई और खटिए पर आकर राजू के पास बिना सलवार पहने ही सो गई,,,,।
 
गुलाबी अपनी जवानी को संभाल पाने में धीरे-धीरे असमर्थ होती जा रही थी दिन-ब-दिन उसके बदन की प्यास उसे तड़पा रही थी,,,, उम्र के मुताबिक यह सब कुछ औपचारिक ही था क्योंकि गुलाबी उम्र के उस दौर से गुजर रही थी जिस दौर में लड़कियों की शादी हो जाएगा करती थी,,,, लेकिन गुलाबी अभी तक कुंवारी थी,,,, इसलिए तो उसकी बुर में ज्यादा खुजली हो रही थी,,,,। और इस उमर में गरमागरम नजारा देखकर उसकी इच्छा और ज्यादा प्रज्वलित होती जा रही थी,,,।,,, दीवार की दरार में से अपने भैया भाभी के कमरे में उन दोनों की घमासान चुदाई देखना उसकी आदत बन चुकी थी अपनी भाभी की गरमा गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर उसकी मादक जवानी को अपने लंड से रोंदता हुआ अपने बड़े भाई को देख कर इतना तो वह जानती होते कि इस खेल में बहुत ज्यादा मजा आता है,,,, इसलिए इस खेल को खेलने के लिए वह भी तड़प रही थी,,,।लेकिन उसे मौका नहीं मिल पा रहा था क्योंकि ऐसा खेल खेलने के लिए उसे 1 साथी की जरूरत थी और वह साथी कौन होगा इस बारे में उसे भी बिल्कुल भी पता नहीं था,,,यह बात गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी कि बाहर इस तरह का खिलाड़ी खेलने में मजा तो आएगा ही लेकिन बदनाम होने का डर भी है इसलिए वह अपने कदम आगे बढ़ाना नहीं चाहते थे लेकिन बदन की जवानी की गर्मी उसके मन को विचलित कर रही इसीलिए तो अपने भैया भाभी की गरमा गरम जुदाई को देखकर भाई अपनी उंगली को अपनी पूर्व में पहन कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर चुकी थी और अपने भतीजे के बगल में बिना सलवार पहने ही सो गई थी,,,,।

बड़े सवेरे ही जल्दी राजू की नींद खुल गई उसे जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,, वह आलस को मारता हुआ खटिया पर उठ कर बैठ गया आंखों में नींद अभी भी छाई हुई थी,,,।

उठने का मन है उसका बिल्कुल भी नहीं कर रहा था वीडियो सोना चाहता था लेकिन जोरो की पेशाब लगी हुई थी इसलिए उठना जरूरी था,,। सुबह की पहली पहर होने की वजह से बाहर अभी भी अंधेरा छाया हुआ था,,, कमरे में लालटेन की रोशनी अपनी आभा बिखेर रही थी,,,, राजू खटिया पर से उठने ही वाला था कि उसकी नजर गुलाबी की टांग पर घुटनों के नीचे की तरफ पहले पड़ी,,,,

राजू को तो पहले सब कुछ सामान्य ही लगा उसे लगा कि साथ सलवार घुटनों तक चढ गई होगी लेकिन उत्सुकतावश अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाने लगा तो जैसे जैसे उसकी नजर ऊपर की तरफ आ रही थी वैसे वैसे उसे अपनी बुआ की नंगी टांग और भी ज्यादा नंगी होती हुई नजर आने लगी जब उसकी नजर घुटने तक पहुंच गई फिर भी उसे सलवार की किनारी नजर नही आई तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा कि वहां क्या करें संस्कारी होने की वजह से वह अपनी बुआ की बहुत इज्जत करता था और उसकी नंगी टांगों को देखना भी उसके लिए गवारा नहीं था वह इसी कशमकश में था कि अपनी नजरों को और ऊपर उठाए या उसी तरह से बाहर चला जाए,,,,, उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था तभी उसे सुबह जो उसकी आंखों के सामने कमला चाची के अर्ध नग्न बदन के दर्शन हुए थे वह नजारा नजर आने लगा,,, उस दृश्य को याद करके उसके बदन में उत्तेजना की लहरें दौड़ने लगी,,,। अपने बदन में उत्तेजना की लहर को महसूस करके वह वहां से चला जाना चाहता था लेकिन अपने मन को बहलाने में वह नाकामयाब रहा अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ तो सो रही है अगर ऐसे में कुछ देख भी लेगा तो उसकी बुआ को कहां पता चलने वाला है इसलिए वह वहीं रुका रहा,,,, अपनी नजरों को ऊपर की तरफ धीरे-धीरे बढ़ाने लगा,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,

इस बात को लेकर कभी भी वह अपने वतन में उत्तेजना महसूस नहीं किया कि 1 जवान खूबसूरत लड़की जो कि उसकी बुआ ही है वह उसके साथ एक ही खटिया पर सोती है,,,,,,,,, लेकिन पलभर में ही उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उसके बगल में जवानी से भरपूर उसकी बुआ सोती है,,,, धीरे-धीरे अपनी नजरों को ऊपर की तरफ ले जा रहा था लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था रात भर लालटेन इसी तरह से चलती रहती थी क्योंकि अंधेरे में राजू को नींद नहीं आती थी यह उसकी शुरु से आदत थी,,, गुलाबी की मक्खन जैसी चिकनी टांग देखकर राजू की हालत खराब हो रही थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है वह धड़कते दिल से अपनी नजरों को उपर की तरफ ले जा रहा था,,,

और उसकी बुआ गुलाबी निश्चिंत होकर अपनी जवानी की गर्मी निकाल कर खटिया पर सोई हुई थी अपनी पुर की गर्मी शांत करने के बाद उसे इस बात का भी होश नहीं था कि वह सलवार नहीं पहनी है और वह उसी अवस्था में सो गई थी,,,,,।

राजू का दिल जोरो से धड़कना शुरू हो गया था क्योंकि उसकी नजर अपनी बुआ की इतनी मांसल जांघों पर पहुंच चुकी थी और जांघों वाला बदन भी नंगा ही था,,, अनायास उसके मन में यह ख्याल आ गया कि जिस अंग को वह सुबह कमला चाची को नहाते हुए नहीं देख पाया था शायद वह अभी देख ले,,,,, लेकिन यह ख्याल मन में आते ही राजू के तन बदन में हलचल सी होने लगी लेकिन एक मन उसका यह भी कह रहा था कि जो वह सोच रहा है वह गलत है अपनी बुआ के बारे में इस तरह के ख्याल लाना पाप है,,,, लेकिन एक मन की सद्बुद्धि वाली बातें उसके दिमाग के पल्ले नहीं पड़ रही थी लेकिन दूसरे मन की कुबुद्धि वाली विचार उसके मन को जकड़े हुए थी,,,, जिसके पास में वह पूरी तरह से हो गया था,,,,,

अपनी तो बुआ की चिकनी मांसल जांघों को देखकर उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और उत्तेजना के मारे उसकी पेशाब भी रुक गई थी,,,, आखिरकार नजरों ने अपनी मंजिल को ढूंढ ही लिया था बस पहुंचना बाकी था और देखते ही देखते राजू अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाते उठाते एकदम ऊपर पहुंच गया जहां का नजारा देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसके होश उड़ गए और पल भर में उसके चेहरे का रंग बदलने लगा,,,,

राजू की नजर इस समय उसकी पुकाकी दोनों टांगों के बीच टिकी हुई थी उसकी कुर्ती कमर से ऊपर थी,,,,और राजू को गुलाबी के बदन का वह अंग नजर आ रहा था जिसके बारे में उसने अभी तक कल्पना भी नहीं किया था उसकी सांसों की गति पलभर में ही तेज हो गई थी,,,। उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,,,,वह एक नजर अपनी बुआ के चेहरे की तरफ जाना और वापस उसकी दोनों टांगों के बीच अपना ध्यान केंद्रित करने लगा उसकी बुआ अभी भी गहरी नींद में सो रही थी इस बात से बेखबर कि वह सलवार नहीं पहनी है उसकी कुर्ती ऊपर चढ़ी हुई है,,,,।

वह बड़े गौर से अपनी बुआ गुलाबी की पूरी देख रहा था जो कि एक पतली दरार की शक्ल में थी और उसके इर्द गिर्द वाली जगह तवे पर फुली हुई रोटी की तरह फुली हुई थी,,,,,,और उस पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जो कि उसकी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा रहे थे,,,,, राजू अभी तक औरतों के इस अंग के भूगोल से पूरी तरह से अनजान था,,,,, इसलिए तो पहली बार अपनी बुआ की बुर देखते ही उसके तन बदन में मादकता भरे सितार बजने लगे थे,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था,,,,,,, औरतों की भजन के भूगोल से पूरी तरह से अनजान राजू इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था आखिरकार वह भी एक मर्द था इसलिए तो औरत के खूबसूरत बुर जो कि वह बुर से बिल्कुल अनजान था फिर भी उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था और होता भी क्यों नहीं आखिरकार मर्दों का औरतों के ईस अंग से जन्मो जन्म का नाता जो है,,,,।

राजू के मुंह में अपनी बुआ की कुल देखकर पानी आ रहा था साथ ही उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी,,, वह अपनी औकात से ज्यादा फूल चुका था,,,राजू को अपना मोटा तगड़ा लंड बगावत करता हुआ महसूस होने लगा तो वह अपने हाथ से अपने पजामे के ऊपर से अपने लंड को पकड़ लिया,,,। राजू के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी नंगी बुर को देखकर अपने लंड को पकड़े हुआ था,,।

राजू के लिए यह पल बेहद अद्भुत था,,,। राजू ने कभी सपने में भी नहीं देखा था कि वह कभी इस तरह से बुर के दर्शन कर पाएगा हालांकि एक मर्द होने के नाते इतना तो पता ही था कि औरतों के दोनों टांगों के बीच ही बुर होती है लेकिन किस तरह की होती है यह पहली बार देख रहा था और समझ रहा था,,,, उसे अपनी दुआ की बुर की बनावट बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी केवल पतली दरार नजर आ रही थी अब वह दरार के अंदर कैसी है यह उसे पता नहीं था,,,,

सुबह का वक्त होने के बावजूद भी उत्तेजना के मारे उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,,वह अपनी बुआ की बुर को अपने हाथ से छूना चाहता था,,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी सुबह-सुबह कमला चाची उसे अपनी गांड चुची के साथ-साथ अपनी बुर भी दिखाना चाहती थी लेकिन बुर दिखा नहीं पाई थी जिसका मलाल कमला चाची को बहुत था,,,,लेकिन शायद राजू की किस्मत में कमला चाची की नहीं अपनी खूबसूरत और जवान बुर पहले देखना दिखा था इसीलिए तो आज उसे बिना किसी मशक्कत के बुर के दर्शन हो गए थे,,,।

राजू का दिमाग काम नहीं कर रहा था लंड पूरी तरह से अकड चुका था,,,। अब उसे पेशाब का जोर और बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था उससे वहां और ज्यादा देर ठहर पाना सहन नहीं हो पा रहा था और इसीलिए वह अपने आप पर गुस्सा भी कर रहा था क्योंकि वह इस नजारे को और देर तक देखना चाहता था जो कि लालटेन की रोशनी में साफ नजर आ रही थी,,,वह अपने मन में यह सोचने लगा कि अच्छा हुआ उसकी बुआ करवट लेकर नहीं सोई हुई थी वरना उसे आज अपनी बुआ की बुर के दर्शन नहीं हो पाते और वह औरत के इस खूबसूरत अंग के बारे में इतनी जल्दी जान नहीं पाता,,,। गुलाबी पीठ के बल लेटी हुई थी राजु उसके खूबसूरत चेहरे को देख रहा था तभी उसकी नजर उसकी चूचियों पर गई लेकिन वह कुर्ती पहनी हुई थी,,,।कुर्ती पहनी हुई थी तो कर राजू को निराशा हाथ लगी लेकिन फिर भी आज उसकी आंखों ने बहुत कुछ देख लिया था जोरो की पेशाब लगी हुई थी इसलिए बर्दाश्त नहीं हुआ,,,, वह खटिया से नीचे उतरने लगा खटिया से नीचे उतर कर एक बार फिर से वह अपनी बुआ की दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार को देखने लगा और अपने लंड को जोकी पजामे में तंबू बनाए हुए था,,,, पजामे में बने तंबू को देखकर खुद राजू भी हैरान हो गया था,,,, क्योंकि एकदम खूंटे की तरह था और वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर इस पर कपड़े टांग दिया जाए तो आराम से टंगा रह जाएगा,,,,,मुझे सोच कर कमरे से बाहर निकलने ही वाला था कि उसके मन में ख्याल आया कि अगर उसकी बुआ जाग गई और उसे खटिया पर ना पाकर और अपनी स्थिति को देखकर यही समझेगी कि वह उसकी बुर को जरूर देख रहा होगा और वह ऐसा नहीं चाहता था इसलिए जाते जाते वहां लालटेन बुझा देना चाहता था ताकि कमरे में अंधेरा रहे और उसकी बुआ को यही लगेगी लालटेन अपने आप बुझ गई थी कमरे में धूप्प अंधेरे को देख कर उन्हें ऐसा ही लगेगा तो मैंने कुछ देखा नहीं हूं,,,, राजू अपने मन में यह सोचता हुआ लालटेन को बुझा दिया,,,, लेकिन बुझाने से पहले उसे दीवार के किनारे अपनी बुआ की सलवार नजर आई,,, तो अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ने सलवार निकालकर इधर क्यो फेंकी हैं लेकिन इसे कोई समझ नहीं आ रहा था अपने मैंने उसे लगा कि शायद गर्मी ज्यादा होने की वजह से निकाल दी होंगी और वह घर से बाहर निकल गया,,,, पेशाब करने के बाद भी वह घर वापस नहीं गया क्योंकि धीरे-धीरे उजाला होने लगा था,,,,

लेकिन उजाला होने से पहले गुलाबी की नींद खुल गई थी कमरे में चारों तरफ अंधेरा था उसे ऐसा लगा कि राखी उसके पास सोया हुआ है इसलिए अपने बगल में हाथ रखकर टटोलने लगी तो वहां कोई नहीं था उसे तभी अपनी हालत का अहसास हुआ तो वह झट से उठ खड़ी हुई,,,,,,

उसे याद आ गया कि वह जल्दबाजी में सलवार पहनना भूल गई थी और बिना सलवार के भी सो रही थी और वह सोचने लगी कि उसका भतीजा राजू इससे पहले उठकर कमरे से चला गया था तो जरूर उसकी नजर उसकी बुर पर पड़ी होगी,,,,,लेकिन उसे इस बात का एहसास हुआ कि लालटेन बंद होने की वजह से कमरे में अंधेरा था वैसे मैं उसे कुछ नजर नहीं आया होगा क्योंकि वह अपनी तसल्ली के लिए कमरे के चारों तरफ और अपने आपको खुद को देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन इतना ज्यादा दे रहा था कि उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था तो जाकर उसे इत्मीनान हुआ और वह तुरंत खटिया से नीचे उतर कर अपनी सलवार उठा कर पहनने लगी,,,, और अपने मन में सोचने लगी कि उसका भतीजा अगर उसे इस हाल में देख लेता तो क्या होता ,,,,,,,,, और ऐसा सोचते हुए वह कमरे से बाहर निकल गई और दिनचर्या में लग गई,,।
 
गुलाबी को ऐसा ही लगता था कि अंधेरे की वजह से उसका भतीजा राजु,,, कमर के नीचे उसके नंगे पन को नहीं देख पाया है इसलिए थोड़ा इत्मीनान था लेकिन इस बात से सकते में आ गई थी कि वह ऐसे कैसे अपनी सलवार पहनना भुल गई थी,,,,, बार-बार उसके मन में यही ख्याल आ रहा था किरात को अपने गुलजार भाई की गरमा गरम चुदाई देखकर खुद अपनी पूर्व में उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत की थी जहां से खड़ी होकर अपने भैया और भाभी की चुदाई देख रही थी वहीं पर अपनी सलवार उतार कर फेंक दी थी और शायद,,,अपने बदन की गर्मी शांत करके संतुष्टि भरे एहसास के साथ वह खटीया पर पड़ी और गहरी नींद में सो गई और शायद इसीलिए बार-बार पहनना भूल गई थी लेकिन इस बात के लिए वह बार-बारभगवान को धन्यवाद दे रही थी कि अंधेरे की वजह से उसका भतीजा उसका कुछ देख नहीं पाया था,,,,। लेकिन फिर अपने मन में यह सोचने लगे कि अगर उसका भतीजा कमर के नीचे उसके नंगे पन को देख भी लेता तो क्या होता क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि रांची दूसरे लड़कों की तरह आवारा नहीं था तो शायद उसकी नजर अगर उसकी नंगी बुर पर भी पड़ जाती तो राजू कुछ नहीं करता,,,,,,,।

यह ख्याल मन में आते ही वह अपने ही मन से सवाल कर रही थी कि ऐसा खयाल उसे क्यों आ रहा है,,,, अच्छा ही तो हुआ राजू ने कुछ देखा नहीं,,,, लेकिन देख लेता तो शायद मर्द होने के नाते एक खूबसूरत नौजवान लड़की की वर देखने की वजह से उसका लंड खड़ा हो जाता तो क्या उसका चोदने का मन नहीं करता,,,, जरूर करता,,,, अगर ऐसा हो जाता तो कितना मजा आता बाहर कहीं भी मुंह मारने की जरूरत ही नहीं पड़ती और राजू उसके वश में रहता पूरी तरह से,,, इस बात की किसी को कानों कान खबर भी नहीं पड़ती और जवान लड़का होने के नाते डाई करने में उसे परम आनंद की अनुभूति होती और यह आनंद वह खोना नहीं चाहता,,,,,

गुलाबी के मन में ऐसे ख्याल आते ही उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, उसे ऐसा महसूस होने लगा था कि जो कुछ भी हो सोच नहीं है वह सच हो जाएगा,,,, और इस बात का भी इसे तसल्ली थी कि उसके भतीजे का लंड उसके भाई हरिया से भी तगड़ा था,,,।जिस की गर्मी को वह अपने हथेली में लेकर महसूस कर चुकी थी और जिस तरह सेउसके लंड में पिचकारी छोड़ी थी उसे देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच में हलचल सी मच गई थी,,,,,,, यह सब ख्याल आते ही गुलाबी का मन बहकने लगा था,,, वह कुछ कर गुजरने की सोच रही थी वह अच्छी तरह से चाहती थी कि राजू जवान होता हुआ लड़का है और वह खुद एक जवान खूबसूरत लड़की,,,, और उसका भतीजा जरूर उसकी तरफ आकर्षित होगा,,,,, गुलाबी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी लेकिन उसे डर भी था कि कहीं उस्ताद आओ उल्टा ना पड़ जाए वरना वह किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएगी,,,,, यही सब सोचते हुए गुलाबी घर का काम कर रही थी,,,,,,,,

हरिया नहा धोकर बेल गाड़ी ले जाने के लिए तैयार था,,, बस जाते समय रोटी ले जाने का इंतजार कर रहा था,,, उसकी बीवी मधु उसके लिए भोजन तैयार करके उसे एक बर्तन में रखकर कपड़ा बांधकर उसे थमा देती थी जिसे हरिया अपने साथ ले जाता था और दोपहर के समय जब उसे भूख लगती थी तो खा लेता था,,,, अपने बेल को चारा पानी से तैयार करते हैं अपने बेल पर हाथ रख कर उसे सहलाते हुए वह बोला,,,।

अरे सुनती हो भोजन तैयार होगा कि नहीं बहुत देर हो रही है स्टेशन पहुंचना है वरना ट्रेन आ गई तो,,,, मेरे पहुंचने से पहले ही सवारी निकल जाएगी तब कोई फायदा नहीं रहेगा,,,,

थोड़ा रुकिए तैयार हो गया है बस बांध रही हूं,,,,,(रोटी को साफ कपड़े में बांधते हुए)

अरे खुला भी सुन तो जैसे जल्दी से अपने भैया को दे कर आ जा उन्हें बहुत देर हो रही है,,,,(गुलाबी ख्यालों में खोई हुई वहीं पास में कपड़े धो रही थी लेकिन उसे मधु की आवाज सुनाई नहीं दी तो मधु फिर जोर से बोली,,)

अरे सुन रही है या बहरी हो गई है,,,, ना जाने कौन से ख्याल में खोई हुई है,,,,,(मधु कीबातों का असर गुलाबी पर बिल्कुल भी नहीं हो रहा था वह अपनी ही धुन में थी इसलिए मधु को खड़ा होना पड़ा और वह कपड़े धो रही गुलाबी के कंधे को पकड़कर उसे जोर से झगझोरते हुए बोली,,,।)

अरे गुलाबी कौन से ख्यालों में खोई हुई है तुझे कुछ समझ में आ रहा है मैं कब से आवाज लगा रही हूं,,,,।

(मधु के द्वारा इस तरह से झकझोरे जाने पर गुलाबी एकदम से हड़बड़ा कर खड़ी हो गई मानो की किसी ने नींद में से उसे पानी डालकर जगाया हो,,,)

ककककक,,,, क्या हुआ भाभी,,,?(गुलाबी एकदम से हडबडाए हुए स्वर में बोली,,,,)

अरे हुआ कुछ नहीं तू सो गई थी इसलिए तुझे इस तरह से जगाना पड़ा,,,, रात भर जाग रही थी क्या,,,,?

नननन,,,नहीं,,,,नहीं,,,, नहीं तो,,,,, बस थोड़ा सा आंख लग गई थी,,,।(गुलाबी घबराहट के मारे हक लाते हुए बोली,,)

रात भर तेरे भैया मुझे सोने नहीं देते और सुबह तुझे नींद आती है,,,,

भला भैया क्यों तुम्हें सोने नहीं देते,,,,

इतनी ही जानने की उत्सुक है तो जाकर अपने भैया से क्यों नहीं पूछ लेती,,, मुझे सोने क्यों नहीं देते,,,,(रोटी और सब्जी रुमाल में बांदीकुई गुलाबी को थमाते हुए बोली,,,)

जा जाकर अपने भैया को दे कर आ कब से इंतजार कर रहे हैं और पूछ भी लेना कि मुझे रात भर सोने क्यों नहीं देते,,।

(अपनी भाभी की ऐसी बात सुनकर गुलाबी मुस्कुराने लगी क्योंकि अपनी भाभी के कहने का मतलब अच्छी तरह से समझती थी और अपनी आंखों से देख भी चुकी थी भले ही उसके भैया रात भर उसकी भाभी को जगाते हैं लेकिन साथ में उसके भैया की वजह से वो खुद जागती रहती है,,, अब इस बात को वह अपनी भाभी को तो बता नहीं सकती थी,,,,)

भाभी तुम्हारी समस्या है तुम ही पूछो,,,(इतना कहते हो वह खाना लेकर के पास आ गई ,,, उसके भैया बैलगाड़ी पर सवार हो चुके थे,,,,, और गुलाबी को खाना लेकर आते देखकर वह बोले)

ला जल्दी कर गुलाबी बहुत देर हो रही है,,,,

लो भैया समय पर खा लेना,,,,,(इतना कहते हुए गुलाबी कपड़ों में बंधा हुआ खाना अपने भाई हरिया को समाने लगी और हरी अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे थामने लगा कि तभी उसकी नजर गुलाबी की कुर्ती पर गई जो कि कपड़े धोने की वजह से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और भीगे हुए कुर्ती में से गुलाबी कि दोनों चूचियां एकदम साफ झलक रही थी,,,। और जिस तरह के गंदे कपड़े धोते समय गुलाबी के मन में आ रहे थे उन उत्तेजक ख्यालों की वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ ने लगी थी जिसकी उत्तेजना उसकी दोनों टांगों के बीच की दरार और उसकी चुचीयों में साफ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसकी चूची की निप्पल तन कर खड़ी हो गई थी,,,, अपनी बहन की झलकती हुई चुची और उसकी कड़ी निप्पल को देखते ही,,, हरिया की धोती में खलबली मचने लगी,,, उसका लंड मुंह उठाकर देखने लगा,,,, हरिया भोजन को थाम ते हुए अपनी आंखों को अपनी बहन की छातियों पर गड़ाए हुए था पहले तो गुलाबी को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जैसे ही अपने बड़े भाई की नजर के सिधान को वह अपनी छातीयो पर महसूस की,,,उस बात को महसूस क्योंकि उसकी कुर्ती पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और गीली कुर्ती में से उसकी चूचियां साफ़ झलक रही थी उसकी निप्पल साफ झलक रही थी ,,, अपने भैया के नजर को भांपते ही वह एकदम शर्म से पानी पानी हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, और वह अपनी भाई की प्यासी नजरों को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,,,, क्योंकि वह इसी तरह से अपने भैया को अपनी चुचूयों को देखते हुए देखी थी,,,,,,

पल भर में ही गुलाबी की सांसे भारी हो गई,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,,, उसके लिए यह पल बेहद कशमकश भरा हुआ था,,,,उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन इतना तो जानती थी कि उसका भाई उसकी चुचियों को देखकर स्तब्ध रह गया है,,,, ऐसा उसके साथ कभी भी नहीं हुआ था कभी भी उसने अपने भाई को इस तरह से गंदी नजरों से देखते नहीं पाई थी,,,, लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा था वह कोई स्वप्न या कल्पना नहीं था ,,,, हकीकत था,,,,, अभी भी गुलाबी उसी तरह से रोटी की पोटली को आगे बढ़ाई हुई थी और उसका भाई हरिया उसे था में हुए था वह पूरी तरह से जडवंत मूर्ति बन चुका था,,,,,,,

हरिया के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ उठी थी,,, यापन उसके लिए भी बेहद अतुल्य और लुभावना लग रहा था क्योंकि आज तक उसने इतने नजदीक से कभी भी अपनी बहन के खूबसूरत अंगो को देखा नहीं था,,,, उसकी आंखों के सामने उसकी खूबसूरत बहन गुलाबी के संतरे नजर आ रहे थे हालांकि वह कुर्ती के अंदर थे लेकिन कुर्ती के किले होने की वजह से उसका आकार और उसका हल्का का रंग साफ नजर आ रहा था,,,,,,, हरिया के लिए तो यह मौका मानो कि अनजाने में भी पुस के ढेर में रसीले आम नजर आ जाने के बराबर था,,,,इसलिए तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी और उसकी आंखों में वासना की चमक साफ नजर आ रही थी,,,, हरिया के लिए यह दूसरा मौका था जब अपनी बहन की खूबसूरत अंगों को देख कर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था,,,रात को ही उसने अनजाने में ही अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखा था उसकी नंगी में गोल गोल गांड को देखकर जिस तरह से उसका लंड ऊबाल मार रहा था उसे अपनी जवानी का दिन याद आ गया था,,,,,, उस समय हरिया अपने आप को किसी तरह से संभाल ले गया था वरना उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़े और अपनी बहन की गोरी गोरी गांड को अपने दोनों हाथों से थाम कर उसे जी भर कर प्यार करें,,,,,,,,

इस हालात में गुलाबी के तन बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी वह समझ नहीं पा रही थी कैसे हालत में वह क्या करें वह अपने भैया की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी उसका भाई पूरी तरह से उसकी चूचियों की तरफ आकर्षित हो चुका था,,,,,,, गुलाबी को इस बात का डर था कि जिस लालच भरी निगाहों से उसका उसकी चूची को देख रहा था कहीं वहां अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूचीयो को थाम न ले,,,, इसलिए गुलाबी खुद ही इस आकर्षण के भंवर को तोड़ते हुए बोली,,,।

भैया समय मिले तो जल्दी खाना खा लेना,,,,

(गुलाबी की आवाज सुनते ही जैसे हरिया की तंद्रा भंग हुई होगा इस तरह से हर बढ़ाते हुए अपना हाथ पीछे खींच लिया और बिना कुछ बोले और बिना नजर मिला ही बस हां ठीक है बोलकर बैलगाड़ी को आगे की तरफ हांक दिया,,, गुलाबी कुछ देर तक वहीं खड़े अपने भाई को जाकर भी देखती रही और फिर जब एक नजर अपनी छातियों पर घुमाई तो वो खुद शर्मिंदा हो गई क्योंकि उसकी गोल-गोल चूचियां एकदम साफ झलक रही थी,,,, गुलाबी का दील अभी भी जोरों से धड़क रहा था वह वापस घर में आ गई और इस बार मधु की नजर उसकी छातियों पर पड़ी तो वह जोर जोर से हंसने लगी,,,, अपनी भाभी को इस तरह से हंसता हुआ देखकर गुलाबी बोली)

तुम क्यों हंस रही हो तुम्हें क्या हो गया,,,,

अरे मुझे कुछ नहीं हुआ है लेकिन अपनी हालत तो देख तेरी कुर्ती देख पूरी तरह से गीली हो चुकी है और तेरी चूची दिख रही है,,,

(अपनी भाभी के मुंह से चुची सबसे सुनकर गुलाबी गनगना गई,,,,,,)

अरे यह तो कपड़े धोते समय गीला हो गया,,,,(अपनी कुर्ती को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे झाड़ते हुए बोली)

तेरे भैया ने तो देख ही लिया होगा तेरी चूची,,,,

नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,,,

अरे पगली तू नहीं जानती तेरे भैया को चूचियां बड़ी अच्छी लगती है,,,,, देख नहीं रही है मेरी चूची को क्या हाल किए है दबा दबा कर,,,,,(मधु अपनी चूचियों की तरफ नजर डालते हुए बोली,,,,)

अरे भाभी भैया को तो बड़ी-बड़ी चूचियां पसंद होगी ना मेरी तो अभी संतरे जैसी है,,,,

अरे बुद्धू मेरी भी पहले संतरे जैसी ही थी तेरे भैया ने दबा दबा कर मेहनत की है तभी तो खरबूजे जैसी हो गई है,,,,(मधु हंसते हुए बोली)

क्या भाभी तुम भी,,,,(इतना कहकर गुलाबी फिर से कपड़े धोने बैठ गई)

लगता है तेरे भैया ठीक से तेरी चुची को देखे नहीं वरना,,,,,(इतना कहकर मधु चुप हो गई,,,)

वरना क्या भाभी,,,,(गुलाबी कपड़े धोते हुए बोली गुलाबी और जानना चाहती थी इसलिए हो सकता हूं बस अपनी भाभी को बोली थी,, ताकि उसकी भाभी उसे आगे की बात बता सके गुलाबी का दिल जोरो से,,, धड़क रहा था,,,, खास करके उसके भैया से जुड़ी बातें ना जाने क्यों अच्छी लग रही थी,,,, गुलाबी की बात सुनकर मधु बोली,,,,)

वरना क्या ,,,अरे तेरे भैया बैलगाड़ी छोड़कर तुरंत तेरी कुर्ती उतार कर फेंक देते और तेरी चुची दबा दबा कर मुंह में भर कर पीना शुरू कर देते,,,,

धत् भाभी कैसी बातें करती हो,,,,(गुलाबी एकदम से शरमा गई और शर्माते हुए बोली,,,,)

अरे सच कह रही हूं तेरे भैया को तु जानती नहीं है,,,, एक बार मौका देकर देख अपना मोटा तगड़ा लंड तेरी बुर में डालकर तेरी चुदाई करने से भी नहीं चूकेंगे,,,,,

(अपनी भाभी की इस तरह की गंदी बातें सुनकर गुलाबी पूरी तरह से उत्तेजना से गनगना गई,,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी बातें उसके भैया को लेकर इतनी गंदी बात बोलेगी लेकिन गुलाबी को इसमें मजा आ रहा था उसकी बुर पनिया रही थी,,, अपनी भाभी की बातें सुनकर गुलाबी भी अपनी भाभी को चिढ़ाने के उद्देश्य से बोली,,,)

भाभी अगर भैया मेरे पीछे पड़ जाएंगे तो तुम्हारा क्या होगा तूमे तो भूल ही जाएंगे,,,,

अरे भगवान का लाख-लाख शुक्र होगा जो तेरे भैया मुझे छोड़ कर तेरे पीछे पड़ जाएंगे तो मेरी जान तो बचेगी नही तो रात भर सोने नहीं देते फिर तु झेलना अपने भैया को,,,,

(इतना कहकर गुलाबी काम करने लगी और गुलाबी अपनी भाभी की बातों को कल्पना का रूप देने लगी,,,,, कि कैसे उसके भैया अपने हाथों से उसकी कुर्ती निकाल कर उसके संतरे जैसी चूची को अपनी हथेली में भर भर कर दबा रहे हैं और उसे मुंह में भरकर पी रहे हैं इसके बाद अपनी गोद में उठाकर खटिया पर लेटाते हुएसलवार की डोरी को अपने हाथों से खोल कर उसकी सलवार उतार कर खटिया से नीचे फेंक दिया और अपने मोटे तगड़े लंड को हिलाते हुए खटिया पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाते हुए अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिए इस कल्पना को करते हुए गुलाबी कपड़े धोना भुल गई और इस कल्पना में इस कदर खोई की उसकी बुर से पानी निकल गया
 
हरिया बैलगाड़ी को हांक कर सीधे रेलवे स्टेशन पर ही खड़ा हुआ,,,बेल गाड़ी पर बैठ कर आया था लेकिन फिर भी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इस कदर अपनी बहन की मस्ताई चुचियों को प्यासी नजरों से देख रहा था,,,,हरिया अपने मन में सोच कर हैरान हो रहा था कि यह उसे क्या हो रहा है उसके अंदर अपनी बहन को देखकर बदलाव क्यों आ रहा है जबकि वह अपनी बहन को जान से भी ज्यादा मानता था उसके बारे में कभी भी गंदे विचार उसके मन में नहीं आए थे लेकिन कुछ दिनों से हालात कुछ और ही बयां कर रहे थे उसके ना चाहते हुए भी अनजाने में ही उसकी आंखों के सामने ऐसे तेरे से नजर आ जा रहे थे कि लाख मनाने के बावजूद भी उसका मन बहक जा रहा था,,,, ऐसा उसके साथ कभी भी नहीं हुआ था हरिया स्टेशन के बाहर बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे उस दिन की घटना से अब तक के उस दृश्य को याद करने लगा जो अचानक ही उसकी आंखों के सामने आए थे और उन पर उसको देखना उसके जेहन में उसके दिलो-दिमाग पर अपनी बहन के बारे में ही गंदे विचार आने लगे थे,,,,,,हरिया के दिमाग में पहली बार की घटना याद आ रही थी जब वह खटिया पर बैठकर दातुन कर रहा था और उसकी आंखों के सामने उसकी बहन गुलाबी घर की सफाई करते हुए झाड़ू मार रही थी,,, झाड़ू मारने की वजह से वह झुकी हुई थी जिसकी वजह से उसकी गोलाकार गांड उभर कर हरिया की आंखों के सामने अपने आप ही प्रदर्शित हो रही थी जिसे देख कर हरीया की धोती में खलबली मच गई थी,,, हरिया के लिए वह पहला मौका था जब वह अपनी बहन को दूसरी नजरों से देख कर उत्तेजित हो रहा था अपने जनपद में में उत्तेजना महसूस किया था किसी भी तरह से अपने आप को हरिया ने संभाल लिया था और आगे ना बढ़ने का अपने आप से ही वादा किया था अपनी इस हरकत पर उसे खुद भी गुस्सा आया था,,,, दूसरी मर्तबा घर के पीछे बेल को बांधते हुए अनजाने में ही उसकी बहन उसकी आंखों के सामने आ गई थी,,,उस समय हरिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसकी बहन अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी थी उसकी पीठ हरिया की तरफ थी लेकिन उसकी बहन नहीं जानती थी कि उसकी पीठ पीछे उसका भाई का है हरिया अजीब सी कशमकश महसूस कर रहा था और देखते ही देखते उसकी पहन अपनी सलवार की डोरी खोल कर के साफ करने के लिए बैठ गई अपने आपको लाख संभालने के बावजूद भी हरिया अपनी बहन की नंगी काम को देखने की लालच को रोक नहीं पाया था और उसे प्यासी आंखों से देख रहा था,,,, उसने हरिया के मन में क्या चल रहा था उससे हरिया पूरी तरह से वाकिफ था,,,,, और हरिया अपने मन पर काबू नहीं कर पाया था और अभी-अभी पानी में भीगी हुई अपनी बहन की कुर्ती में से झांक रही उसकी दोनों गुलाबी चुचियों को देखकर हरिया का मन पूरी तरह से लोटपोट हो चुका था,,, वह पूरी तरह से अपनी बहन की चूचीयो की तरफ आकर्षित हो गया था,,,,,,, जैसे ही अपनी बहन की चुचियों के आकर्षण के मंत्रमुग्ध माया में से बाहर निकला वह पूरी तरह से हड़बड़ा गया था और बैलगाड़ी को सीधा हांक कर रेलवे स्टेशन पर खड़ा हुआ था,,,, उन सब वाक्ए के बारे में सोच कर इस समय हरिया के दिल की धड़कन बढ़ गई थी और उसकी धोती में पूरी तरह से बवंडर उठ रहा था,,,, कि तभी उसका दोस्त उसका हाथ पकड़कर झकझोरते हुए बोला,,,।

अरे कहां खोया है ट्रेन आ चुकी है जल्दी चल वरना सवारी हाथ से निकल जाएगी,,,,।

(अपने दोस्त की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो एकदम से हड़बड़ा गया,,,)

सो रहा था क्या भाभी लगता है रात भर सोने नहीं देती,,,,

अरे नहीं यार ऐसे ही चल जल्दी चल,,,

(और इतना कहने के साथ ही हरिया बैलगाड़ी से नीचे उतरा और सीधे रेलवे स्टेशन की तरफ दौड़ लगा दिया)

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए,,,,,, राजू के मन में अपनी बुआ की बुर देखने की चाहत बढ़ने लगी थी,,, इसलिए वह सुबह जल्दी जागने की कोशिश करता था लेकिन ऐसा हो नहीं पाता था और गुलाबी भी लोक लाज के डर से मन होते हुए भी सलवार पहनकर सोती थी,,,,,,, उस समय तो हालात को देखते हुए और शर्म के मारे गुलाबी यही सोचकर संतुष्ट थी कि उसके भतीजे ने उसकी नंगी बुर को देखा नहीं थालेकिन अब जैसे-जैसे उसकी बुर की प्यास बुर की गर्मी बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे अपने मन में यही सोच रही थी कि काश उसका भतीजा राजु उसकी बुर को देख लिया होता तो शायद उसके मन और तन की प्यास बुझने का कोई तरीका निकाल आता,,,, लेकिन उसी तरह से अपनी बुर दिखाने की हिम्मत उसकी नहीं हो रही थी,,, उसके मन में इस बात का डर बराबर बना हुआ था कि अगर वहां कैसे सलवार उतार कर सोएगी और उसका भतीजा उसे उस हाल में देख लेगा तो कहीं ऐसा ना हो कि वह अपनी मां से बता दे कि वह बिना सलवार पहने सोती है तब क्या होगा क्योंकि वह अपने भतीजे राजू की नादानियत को अच्छी तरह से जानती थी,,,, भले ही वह शरीर से लंबा तंबा हो गया था लेकिन औरतों के मामले में उसका दिमाग ज्यादा नहीं चलता था,,,, अगर वह भी दूसरे लड़कों की तरह होता तो शायद ही खूबसूरत लड़कि के साथ एक ही खटिया पर सोने की वजह से वह अब तक उसके अंगो से छेड़खानी जरूर किया होता,,, और उसे चोदने का अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया था लेकिन ऐसाआज तक नहीं हुआ था कि जाने अनजाने में ही वह उसके अंगों को स्पर्श किया हो इसलिए गुलाबी को डर लगता था बिना सलवार पहने सोने में,,,,,,। हालांकि वह रोज अपने भैया और भाभी की चुदाई देखकर पूरी तरह से मस्त हो जाती थी उसकी आदत सी पड़ गई थी अपनी बुर मे उंगली करके सोने की,,,, ऐसे ही एक रात को राजू की नींद खुल गई उसने जोरों की प्यास लगी थी ,,,, वह नींद से उठकर खटिया पर बैठ गया,,, तो देखा कि उसकी बुआ खटीए पर ना होकर दीवार के पास खड़ी होकर कुछ देख रही थी राजू को कुछ समझ में नहीं आया वह अभी भी नींद में ही था बस प्यास लगने की वजह से जाग गया था,,,,,, वह अपनी बुआ की तरफ देखते हुए बोला,,,

बुआ मुझे प्यास लगी है,,, तुम वहां क्या कर रही हो,,,?

(अपने भतीजे की आवाज सुनते ही गुलाबी एकदम से चौक गई क्योंकि कमरे में लालटेन चल रही थी पूरे कमरे में लालटेन की रोशनी और उस समय गुलाबी दूसरे कमरे में अपने भैया भाभी कीगरमा गरम चुदाई को देखकर सलवार के ऊपर से अपनी बुर को मसल रही थी,,, राजू की आवाज कानों में पडते ही वह झट से अपने हाथ को पीछे की तरफ खींच ली,,,,सारा मजा किरकिरा हो गया था क्योंकि अंदर गुलाबी का भाई अपने लंड को उसकी भाभी की बुर में डालने ही वाला था,,,)

ककककक,,, क्या हुआ,,,?(एकदम से राजू की तरफ देखते हुए हक लाते हुए बोली)

मुझे प्यास लगी है बुआ,,,

रुक अच्छा दे रही हुं,,,(इतना कहकर वह तुरंत कमरे में ही कोने पर रखे हुए मटके में से गिलास भर कर पानी निकाल कर राजू को थमाते हुए बोली,,,)

ले पी ले,,,, रात रात को जाग कर पानी पीता है,,,

(राजू पानी का गिलास लेकर पानी पीने लगा गुलाबी की हालत खराब हो रही थी उत्तेजना के मारे उसकी बुर से पानी निकल रहा था,,।वह अपनी शर्मा की दुल्हनिया खोलकर अलीपुर में उंगली डालने की तैयारी में थी कि तभी उसकी आवाज आ गई थी इसलिए उसके सारे मजे पर पानी फिर गया था,,, गुलाबी मन ही मन में राजू पर गुस्सा कर रही थी,,, राजू पानी पीकर ग्लास को अपनी बुआ को थमाते हुए बोला,,)

लो बुआ रख दो,,,,(गुलाबी गिलास थामकर उसे वापस भटके के पास रख दी और खड़ी हो गई उसे लगा कि राजू अभी सो जाएगा लेकिन राजू बुआ की तरफ देखते हूए बोला)

दीवाल के अंदर क्या देख रही थी बुआ,,,?

(राजू के इस सवाल पर गुलाबी एकदम से झेंप गई और हकलाहट भरे स्वर में बोली)

ककककक,,, कुछ तो नहीं वो क्या है ना कि छिपकली आ गई थी इसलिए मैं उसे भगा रही थी और वह दीवाल में चली गई,,,

ओहहहह ,,,,,,, अच्छा हुआ बुआ तुम छिपकली को भगा दी मुझे छिपकली से डर लगता है,,,, अब आओ जल्दी से सो जाओ,,

तू सो जा मुझे नींद नहीं आ रही है,,,

मुझे भी नहीं आ रही है बुआ,,,,

(राजू की बात सुनकर गुलाबी को और ज्यादा गुस्सा आने लगा लेकिन कर भी क्या सकती थी वह जानते थे कि उसके जागते हैं वह अंदर के दृश्य को नहीं देख पाएगी,,, इसलिए ना चाहते हुए भी उसे सोना पड़ा,,, थोड़ी ही देर में दोनों को नींद आ गई,,,)

दूसरी तरफ कमला चाची जानबूझकर राजू को अपना अंग दिखाने की कोशिश करते हुए जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव की थी उससे वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, बहू वाली हो जाने के बावजूद भी इस उम्र में कमला चाची की उत्तेजना बरकरार थी,,,, इसीलिए तो वहां मन ही मन में अपने आपको राजू को समर्पित करने की ठान ली थी क्योंकि वह जानती थी जवान लंड को अपनी बुर में लेने से अत्यधिक आनंद आएगा,,,,,, कमला चाची पूरी तरह से तैयार थी लेकिन उन्हें कोई मौका नहीं मिल रहा था,,,,,,

ऐसे ही एक दिन वह अपने घर पर बैठी हुई थी उनकी बहू खाना बना रही थी कमला चाची को भूख लगी थी खाना बनने में थोड़ी देर थी उसी समय राजू अपने मन में एक आस लेकर कि आज के कुछ देखने को मिल जाएगा इसलिए वह कमला चाची के घर पर आया,,, तो दरवाजे पर खड़ा होकर दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला,,,।

चाची घर पर हो कि नहीं,,,,

(राजू की आवाज कानों में पड़ते ही कमला चाची का तन बदन में आनंद की लहर दौड़ में लगी लेकिन अपनी बहू की मौजूदगी में उन्हें खुशी नहीं हुई लेकिन फिर भी राजू की आवाज सुनते ही वह बोली,,,)

हां घर पर ही हूं आ जा,,,,

(कमला चाची की आवाज सुनते ही राजू दरवाजे को थोड़ा धक्का दिया तो दरवाजे अपने आप ही खुल गया और अंदर कदम रखते ही व कमला चाची को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और खाना बना रही उनकी बहू को भी नमस्ते भाभी बोल कर उनका अभिवादन किया,,,, राजू को एक बार फिर से अपनी आंखों के सामने खड़ा देखकर कमला चाची की बहू रमा उसे एकटक देखने लगी रामा को राजू अच्छा लगने लगा था उसका भोलापन उसे भा गया था,,,)

आ बैठ,,,,,(कमला चाची खटिया पर बैठने का इशारा करते हुए बोली,,,,,,, लेकिन राजू कम ने चाची को खटिया पर बैठा हुआ देखकर और धमाके उपस्थिति को देखते हुए उसका मन उदास हो गया उसे ऐसा था कि आज भी कमला चाची नहा रही हो तो मजा आ जाए,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था इसलिए कमला चाची की बात सुनते ही वो बोला,,)

नहीं नहीं चाची बैठने में नहीं आया हूं बस यहां से गुजर रहा था तो सोचा आप से मिलता चलु,,,।

ठीक कीया राजू,,, जो तु मिलने आ गया,,, तू अच्छा लड़का है,,,,,

(कमला चाची की :ऐसी बात सुनकर राजु मन ही मन प्रसन्न हो गया और मुस्कुराते हुए बोला,,,,)

ठीक है चाची मे चलता हूं खेतों में थोड़ा काम है,,,,,,,

(इतना कहकर वह जैसे ही चलने को हुआ तुरंत कमला चाची बोली,,,)

अरे रुक मैं भी चलती हूं मुझे भी खेतों में थोड़ा काम है,,,,

(इतना कहकर कमला चाची खटिया पर से खड़ी हो गई तो उनकी बहु रमा बोली,,)

अरे मा जी खाना तो खाते जाइए बस थोड़ी देर रह गई, है,,..

(लेकिन अपनी बहु की बात अनसुनी करते हुए कमला चाची उसके पीछे पीछे चल दी,,, कमला चाची की बहू को लगा कि शायद खाना मैं देर हो जाने के कारण हम गुस्सा कर चली गई है इसलिए वह जल्दी जल्दी बनाने लगी,,, कमला चाची को अपने पास आता देखकर राजु को अंदर ही अंदर खुशी हो रही थी,,,क्योंकि नहाते समय जिस तरह से कमला चाची अपनी अंगो का प्रदर्शन की थी उसे देखकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहरों में लगी थी और उसी अंगप्रदर्शन की लालच की वजह से ही राजू कमला चाची के पास दोबारा आया था वरना कमला चाची के पास भटकने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी,,,। और यह हकीकत ही था कि,,, कमला चाची के अंगों को देखकर ही उसके बारे में पता चला था और रही सही कसर राजू ने अपनी बुआ की बुर देखकर पूरी कर ली थी,,,।
 
राजू को ऐसे तो कोई भी काम नहीं था बस वह एक बहाना बनाया था कमला चाची से मिलने के लिए,,,, और उसका यह बहाना कामयाब भी हो चुका,,,,एक औरत से इस तरह से मिलने कि राजु में बिल्कुल भी हिम्मत नहीं होती थी,,, लेकिन जब से वहां कमला चाची के अंगों को अपनी जवान और उत्सुक आंखों से टटोला था और अपनी खूबसूरत बुआ की बुर के दर्शन किया था तब से औरतों के अंगों को ऐसी नजरों से देखने में उसे अधिक आनंद की अनुभूति होती थी और इसी आनंद की अनुभूति के लिए बहाना बनाकर कमला चाची से मिलने आया था,,,,,, और कमला चाची भीकहां संस्कारी होना थी वह तो खुद राजु को अपने अंगों को बड़ी अच्छे से दिखाना चाहती थी,,,,, और वही कमला चाची के अंगो का जादू ही था जो वो खुद बहाना बना कर उससे मिलने के लिए आया था,,,,,



मुझे भी थोड़ा कोई तो मैं काम है सोच रही हूं तु साथ रहेगा तो जल्दी से हो जाएगा,,, तू साथ देगा ना मेरा,,,,

हां चाची क्यों नहीं तुम्हारा साथ में बराबर दूंगा,,,,

तू बहुत अच्छा लड़का है गांव में सबसे अच्छा लड़का तु ही है और तुझे ही मैं अच्छा मानती हूं,,,, बाकी सारे लड़के तो आवारा है,,,,(ऐसा कहते हुए कमला चाची राजु के बराबर चलने लगी थी,,,,।)

नहीं चाची ये तो आपका बड़प्पन है,,,, वरना मैं भी दूसरों की तरह ही हूं,,,

नहीं नहीं तु दूसरों की तरह नहीं तु सबसे अलग है,,,( ऐसा कहते हुए कमला चाचीकदमों को जल्दी से आकर पढ़ाने लगी क्योंकि मैं रांची से आगे चलना चाहती थी क्योंकि अब खेत शुरू हो रहा था और पगडंडी काफी संकरी थी जिसपे एक साथ दो लोग नहीं चल सकते थे 1 को आगे तो दूसरे को पीछे चलना पडता थाऔर इसीलिए कमला चाची राजू से आगे चलना चाहती थी ताकि वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को उसकी आंखों के सामने मटका सके जिसे देखकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगे,,,, और कमला चाची राजू से एक कदम आगे पहुंच चुकी थी,,, और शायद राजू भी मन में यही चाहता था,,,। क्योंकि कमला चाची को अपनी आंखों के सामने अपनी गांड मटका कर चलती हुए देखकर राजू के तन बदन में हलचल सी होने लगी क्योंकि कमला चाची की गांड चलते ही बड़े मादक तरीके से हील रहीं थी,,,। कमला चाची अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)





इसीलिए तो मैं तुझे पसंद करती हूं और दूसरे लड़के को हमेशा डांटती रहती हूं,,, लेकिन तू ही है कि मुझसे भागता रहता है,,,, पता नहीं आज कैसे मुझसे मिलने के लिए आ गया,,,,(कमला चाची आगे चलते हुए पीछे नजर घुमाकर राजू की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,,कमला चाची को मुस्कुराता हुआ देखकर राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,. और वह बोला)

ऐसा नहीं है मैं हमेशा से आपकी इज्जत करता हूं उस दिन आपके घर में ले आया था ना इसलिए सोचा कि फिर से आपसे मिलने चलु,,,

(राजू की बातें सुनकर कमला चाची समझ गई थी कि वह किस उद्देश्य से उसके घर पर मिलने के लिए आया था उस दिन जिस तरह का दृश्य उसने राजू को दिखाकर आकर्षण जमाई थी वही देखने के लिए और यह बात का आभास होते ही कमला चाची के तन बदन में भी हलचल सी होने लगी,,,,,, राजू की बातें सुनकर कमला चाची मन ही मन में खुश हो रही थी खेत शुरू हो चुका था,,,राजू की नजर कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड के ऊपर टिकी हुई थी जिसकी थिरकन को देखकर उसका मन डोल रहा था,,, कमला चाची के नितंबों के ऊपर की गहरी बाकी बेहद आकर्षक नजर आ रही थी,,, कमला चाची का बदन गोरा था,,, और इस उम्र में भी बेहद मादकता से भरी हुई खूबसूरत लग रही थी इस उम्र में औरत का आकर्षण इतना अत्यधिक नहीं होता है,, लेकिन कमला चाची की बात कुछ और ही थी,,,,,,आगे आगे चलती हुई अपनी गांड मत खा कर सपने अंगो का प्रदर्शन करते हुए कमला चाची को देखकर बार-बार राजू के मन में वही दृश्य बार-बार नजर आ रहा था चाची के घर पर पहुंचने पर कमला चाची नहा रही थी और पेटीकोट को इधर-उधर करके अपने नितंबों का प्रदर्शन कर रही थी,,,,,, उन दृश्यों को याद करके राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी औरतों के प्रति इस तरह का आकर्षण राजू को पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन उसके हावभाव बदलने लगे थे भले ही कमला चाची तो खूबसूरत साड़ी के अंदर था लेकिन फिर भी साड़ी के ऊपर से उसके बदन के कटाव का नाप लेकर मस्त हो रहा था,,,,,,, एक तरह से करमला चाची के पीछे चलने में राजू का ही फायदा था,,, कमला चाची उससे 3 फीट की दूरी पर आगे आगे चल रही थी और इतनी दूरी पर पहली बार राजू किसी औरत के बदन को निहार रहा था,,,।





और कमला थी कि अपने बदन की चाल को बेहद मादक बना रही थी वह जानती थी कि ,,, ऊंची नीची टेंढी मेढी पगडंडियों से चलते हुए उसकी कमर बलखा जा रही है जिसकी वजह से उसकी भारी-भरकम गांड की लचक कुछ ज्यादा ही मचक दे रही है,,,,,,। कमला चाची आगे आगे चलते हुए अपने मन में ही कहीं युक्तियों को जन्म दे रही थी कि किस तरह से वह राजू के सामने अपने अंग का प्रदर्शन करें जिसकी वजह से राजू पूरी तरह से उत्तेजना पास होकर उसके साथ संभोग सुख प्राप्त करें और उसे इस उम्र में भी जवानी का मजा चखा दे,,, और इस बात को भी वह चित्र भी जानती थी कि राजु पूरी तरह से औरतों के साथ खेले जाने वाले खेल में अनाड़ी है उसे धीरे-धीरे सिखाना भी पड़ेगा,,,, लेकिन एक शिक्षिका के भांती संभोग के बाराखडी में कमजोर अपने विद्यार्थी को संभोग का संपूर्ण अध्ययन कराने के लिए वह बेहद उत्सुक थी,,,,,,, और गुरु दक्षिणा के रूप में वह राजू से संपूर्ण संतुष्टि चाहती थी,,,।

देखते ही देखते दोनों घने खेतों के बीच पहुंच चुके थे,,,,,, खेतों के बीच पहुंचते ही कमला चाची बेहद उत्सुकता दिखाते हुए राजू की तरफ घूम गई और उससे बोली,,,,।



राजू हमें यह हरी हरी घास जो दिख रही है ना इन्हें उखाड़ कर एक तरफ रखना है ताकि यह जगह एकदम साफ हो जाए और हम इस पर अनाज लगा सके,,,,,,

(लेकिन शायद कमला चाची की बात कर राजू का ध्यान नहीं गया वह एकदम सन्न होकर एकटक कमला चाची की विशाल छातियों की तरफ देख रहा था,,,और देखता भी क्यों नहीं आखिरकार उसकी आंखों के सामने कमला चाची की छातियों का नजारा है कुछ अद्भुत और आकर्षक था कमला चाची राजू के आगे आगे चलते हुए मन में युक्ति सोचते हुए वह जानबूझकर अपने ब्लाउज के ऊपर के 2 बटन को खोल दी थी ताकि उनमें से उसकी चुचियों का अधिकांश भाग राजु को दिखाई दे और ऐसा ही हो रहा था,,, कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयां आधे से ज्यादा बाहर को झलक रही थी ऐसा लग रहा था कि कमला चाची के ब्लाउज बड़े-बड़े दशहरी आम रखे हुए हैं और वह पक कर बाहर आने के लिए मचल रहे हैं,,,, राजू की तो सांसे उपर नीचे हो रही थी क्योंकि करना चाहती थी चूचियों के निप्पल तो नहीं लेकिन निप्पल के इर्द-गिर्द भूरे रंग का घेराव साफ नजर आ रहा था,,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी कमला चाची मन में युक्ति सोचकर जिस तरह का प्रहार राजू के ऊपर की थी उससे वह खड़े खड़े ढेर हो चुका था क्योंकि खेतों में काम करने के बारे में जिस तरह का निर्देश कमला चाची बता रही थी उस पर राजू का बिल्कुल भी ध्यान नहीं था और राजू अपनी फटी आंखों से कमला चाची की छातियों को बोल रहा था यह देखकर कमला चाची के तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी,,,। कमला चाची को अपनी युक्ति कामयाब होती नजर आ रही थी,,,। राजू के मुंह से एक भी शब्द नहीं फुट रहे थे,,,, कमला चाची ही उसका ध्यान भंग करते हुए बोली,,,)



कहां खो गया मैं तुझसे कुछ कह रही हूं,,,,,

(कमला चाची की आवाज कान में पडते ही जैसे वह होश में आया हो इस तरह से हड़बड़ा गया,,,)

ककककक,, क्या करना है चाची,,,,



अरे मैं कह रही हूं कि खेतों में से घास उखाड़ कर एक बगल में रखना है,,,,

ठीक है चाची,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह नीचे झुककर हरी हरी घास दोनों हाथों से उखाड़ना शुरू कर दिया,,, कमला चाची वहीं पास में खड़ी मुस्कुरा रही थी वह जानती थी कि उसकी युक्ती पूरी तरह से काम कर रही थी,,,,,,, उसके मन में अभी भी कुछ और युक्ति चल रही थी वह ठीक उसके सामने खड़ी हो गई और नीचे झुककर घास उखाड़ने को हुई ही थी कि,,,आधे से ज्यादा बाहर झांक रही उसकी दोनों चूचियां गप्प से ब्लाउज से बाहर निकलकर दशहरी आम की तरह झूलने लगी,,,,,,,कमला चाची अच्छी तरह से जानती थी कि उसके इस तरह से छुप जाने की वजह से उसकी भारी-भरकम खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में ठहर नहीं पाएंगी और लचक कर लटक जाएंगी,,, जैसे ही उसकी दोनों चूचियां पके हुए आम की तरह ब्लाउज में से बाहर झूल गई वैसे ही उसके मुंह से आह निकल गई,,,,)



आहहहहहह,,, यह क्या हो गया,,,,(कमला चाची यह सब तो जानबूझकर पहुंची थी ताकि वह राजू का ध्यान अपनी और कर सके क्योंकि वह जानती थी कि वह नजर मिला पानी में शर्म महसूस कर रहा थाकमला चाची के नाम से इतना निकलते ही राजू आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा तो उसकी रही है सही ताकत भी एकदम क्षीण हो गई,,,, उसकी आंखों के सामने कमला चाची की दोनों खरबूजा जैसी चूचियां उसकी छाती पर लटक रही थी मानो के जैसे कोई पपिया का फल पपिया के पेड़ पर झूल रहा हो,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूखने लगा वह नीचे झुका हुआ ही कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयों को देख रहा था,,, जिंदगी में पहली बार राजू किसी नंगी चूची को देख रहा था,,,, इसके लिए उसकी सांसे ऊपर नीचे हो चली कमला चाची जानती थी कि राजू की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इतना काफी था इसलिए,,, वह अपनी दोनों चुचियों को मादक अंदाज में अपने दोनों हाथेली में पकड़कर उठाते हुए खुद भी खड़ी होते हुए बोली,,,)

कमला चाची की बड़ी बड़ी चूची हो तो देख कर राजू का मन कर रहा था कि वह खुद कमला चाची के ब्लाउज के बटन को खोले



अरे दैया यह तो बाहर निकल गई,,,, बड़ी बेशर्म है किसी का भी लिहाज नहीं करती,,,(कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली औरअपनी दोनों चुचियों को बारी-बारी से अपने हाथ से पकड़ कर ब्लाउज में ठुसने लगी,,,, राजू के लिए उसके कोमल उम्र की तुलना में यह दृश्य असहनीय था,,,।कमला चाची अपनी कामुक हरकत की वजह से ही राज्यों के तन बदन पर अपनी कामुकता का वार पर वार कर रही थी,, और राजू के लिए कमला चाची का हर एक वार घातक सिद्ध हो रहा था राजू की उमंग मारती जवानी और ज्यादा मचल उठ रही थी,,,,,, कमला चाची जानबूझकर अपनी चाची को जोर जोर से दबाते हुए और राजू को दिखाते हुए अपने ब्लाउज मे भर रही थी वह जानती थी कि ऐसा करके वह राजू के तन बदन में आग लगा रही है और यही तो वह चाहती ही थी कमला चाची की हरकत को देखकर राजू जोकि इस खेल में बिल्कुल भी अनजान था वह अपने मन में सोचने लगा कि कास कमला चाची की चूचियां उसके हाथ में होती तो कितना मजा आ जाता ,,,,

कमला चाची की कामुक हरकत को देखकर राजू का मन कमला चाची की चूचियों को दबाने का कर रहा था,,



राजू की आंखों के सामने ही कमला चाची अपनी चुचियों को बारी-बारी से अपने ब्लाउज में भरकर बटन बंद कर ली इस बार केवल एक ही बटन खुला रखी क्योंकि वो जानती थी कि अगर दोनों बटन खुला रखी थी तो फिर से दोनों बाहर निकल आएगी और जितना वह राजू को दिखा चुकी थी उतना काफी था राजू के पजामे में उसके समझ के परे ही तंबू बन चुका था जिस पर कमला चाची की नजर पड़ चुकी थी और उस तंबू को देखकर कमला चाची की बुर गीली होने लगी थी,,,। राजू अपने सूखे गले को थूक निगल कर गिला करने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

यह कैसे हो गया चाची,,,,

अरे बटन खुला था ना इसलिए,,,,(इतना कहते हुए कमला चाची अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर कमर में खुश ले जिससे उसकी साड़ी उसकी पिंडलियों तक उठ गई और उसकी चिकनी मोटी मांसल पिंडलिया साफ दीखने लगी,,,)

बटन बंद कर लेना चाहिए था ना चाची,,,,

कोई बात नहीं कहां किसी गैर ने देख लिया है तू ही तो देखा है,,,,(इतना कहकर कमला चाची मुस्कुराने लगी और कमला चाची की बात सुनकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई वह वापस नीचे झुक कर घास तोड़ने लगा,,,, और कमला चाची भी घास उखाड़ने लगी,,,, राजू अपने मन में सोच रहा था कि कमला चाची के घर देखने को छोड़ आया था लेकिन कमला चाची तो उससे भी ज्यादा दिखा दीराजू अपने मन में सोचने लगा कि कमला चाची की चूचीया कितनी बड़ी बड़ी है,,, दबाने में बहुत बहुत मजा आएगा,,, इस तरह की बातों को राजू पहली बार अपने मन में ला रहा था जिस पर उसका भी बस नहीं था,,,,,अपनी लटकती हुई चूचियों को दबा दबा कर अपने ब्लाउज में भरने की वजह से और राजू को दिखाकर उकसाने की वजह से कमला चाची की भी हालत खराब हो रही थी,,,,। कमला चाची के मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह राजु को मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी बुर दिखाना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि बुरे के लिए इंसान कुछ भी कर सकता है,,, लेकिन कैसे दिखाएं उसे समझ नहीं आ रहा था,,,,

कुछ देर ऐसे ही गुजर गए दोनों घास उखाड़ उखाड़ कर घास का ढेर लगा चुके थे राजू के मन में वही दृश्य बार-बार घूम रहा था कमला चाची की चींटियां उसके होश उड़ा चुकी थी,,,,, वह अपने मन में यही सब सोच रहा था कि तभी कमला चाची अपनी साड़ी पकड़कर जोर-जोर से उछलने लगी,,,।

हाय ,,,, दैया काट ली रे,,,,हाय मैं मर गई बहुत जोर से काट रही है मुझे दर्द कर रहा है,,,(कमला चाची उछलते हुए अपने साडी को जोर-जोर से झटक रही थी,,, राजू के समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है कमला चाची जोर-जोर से उछल रहे थे मानो कि जैसे उनकी साड़ी में बिच्छू घुस गया हो,,,)

क्या हुआ चाची क्या हुआ क्या काट लिया,,,,,

अरे लगता है चींटी काट लई बहुत जोर से दर्द कर रहा है,,,,

चींटी लाल वाली चींटी तब तो चाची सूजन आ जाएगी,,,, जल्दी से उसे दूर करो नहीं तो और ज्यादा काट लेगी,,,,

(राजू को लग रहा था कि सही में कमला चाची को चींटी काट रही है वह यह नहीं जानता था कि कमला चार्ज की बस एक बहाना कर रही थी उसे अपनी बुर दिखाने के लिए,,,,)

आहहहहह,,,ऊईईईई , मां,,,,,,,,,,आहहहहहहह,,,,,दैया रे,,,,

(ऐसा कहते हुए कमला चाची जानबूझकर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह को हथेली में भरकर दबाने लगी,,,,)

आहहहहहह ,,,, बहुत दर्द कर रहा है,,,,, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है राजू,,,,,

(कमला चाची का दर्द राजु से देखा नहीं जा रहा था जो कि बनावटी दर्द था,,,, वह इस बात से अनजान था कि कमला चाची सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रही है,,,,,लेकिन उसका ध्यान बार-बार कमला चाची के उतरने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूची हो तो जा रहा था क्योंकि बड़े गेंद की तरह ब्लाउज में उछल रहा था,,, कमला चाची की उछलती हुई चुचियों को देख कर राजू का लंड अकड रहा था,,,,, उस नजारे पर वह पूरी तरह से मर मिटा था,,,,, तेज चलती सांसों के साथ,,,,, अपना चाची का उछलना देख रहा था,,,, कमला चाची इंतजार में कि कि राजू कुछ करें या कुछ बोले तभी राजू बोला,,,)

चाची को झाड़ी के पीछे जाकर चींटी निकाल दो नहीं तो ज्यादा दिक्कत हो जाएगी,,,,,

(राजू की इस बात पर कमला चाची को मन ही मन बहुत गुस्सा आया वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर राजू की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो इस मौके का जरूर फायदा उठाता हूं और खुद ही उसकी साड़ी उठाकर चींटी निकालने के बहाने उसकी बरर को प्यासी नजरों से देख कर उससे छेड़खानी करता,,, लेकिन राजू बेवकूफ का बेवकूफ ही है,,, लेकिन कमला चाची इतनी जल्दी हार मानने वाली नहीं थी इसीलिए वह उसी तरह से उछलते हुए बोली,,,,)

नहीं राजू मुझसे नहीं हो पाएगा तु ही कुछ कर,,,, मुझे तो लग रहा है कि चींटी अंदर घुसश रही है,,,,

अंदर ,,,,,,अंदर कहां चाची,,,?(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

अरे तू ही क्यों नहीं देख लेता,,,,(कमला जान बुझकर दर्द दायक चेहरा बनाते हुए बोली,,,)

ममममम,,,, में,,,, मैं कैसे चाची,,,,(राजू एकदम हैरान होते हुए बोला,,,)

हां तु,,, देख कर निकाल दे वरना यह चींटी ना जाने कहां कहां काटेंगी,,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि कमला चाची जी जिस बारे में बात कर रही थी इस तरह की उम्मीद राजू को कभी भी नहीं थी इसलिए वह हैरान था,,,,, पर आश्चर्य से कमला चाची के चेहरे की तरफ और उसकी उछलती हुई चुचियों की तरफ देखे जा रहा था,,,।)
 
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