Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest बैलगाड़ी,,,,,

राजू और झुमरी की मुलाकात बेहद अद्भुत थी,,,राजू झुमरी से अनजान बिल्कुल भी नहीं था ना ही झुमरी राजू से अनजान थी,, बस दोनों की मुलाकात ज्यादा नहीं होती थी,,

और मुलाकात भी हुई तो ऐसे हाल में इसके बारे में दोनों ने कभी सपने में नहीं सोचा था,,,, राजू का तो अभी भी बुरा हाल था,,,पढ़ाई में उसका बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था,,।बार-बार उसकी आंखों के सामने झुमरी का नंगा बदन नजर आ जा रहा था उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी पूरी तरह से खिली हुई थी छातियों की शोभा बढ़ा रही दोनों नारंगीया,, अपने पूरे शबाब में खिली हुई थी रस से भरी हुई दोनों चुचियों को देखकर राजू का मन डोल गया था,,,, चिकना सपाट पेट चर्बी का बिल्कुल भी नामोनिशान नहीं था खेत में काम करके उसका बदन पूरी तरह से गठीला हो गया था,,, जोकि किसी भी उम्र के मर्दों को ललचाने के लिए काफी था,,,, नंगी चिकनी पीठ संगमरमर के पत्थर की तरह चमक रही थी उस पर पानी की बूंदे मोतियों के दाने की तरह फिसल रही थी और नितंबों का उभार अद्भुत तूफान उमडता हुआ नजर आ रहा था,,,, जिसमें राजू का अस्तित्व पूरी तरह से बिखरता जा रहा था,,, झुमरी की गांड की खूबसूरती को देखकर राजू मदहोश हो गया था,,,, झुमरी की गांड की बनावट बेहद कलात्मक थी जिसको देख पाना भी किस्मत की बात थी सलवार में कसी हुई गांड राजू बहुत बार देख चुका था लेकिन बिना सलवार की नंगी गांड को देखने का जो मजा है,,, वह शायद राजू से बेहतर कोई नहीं जानता था इसीलिए तो झुमरी पूरे उसके दिलो-दिमाग पर छाई हुई थी,,,, और जिस तरह से उसने खुद उसकी तरफ घूम कर अपनी नारंगी या और अपनी दोनों टांगों के बीच कुछ पतली तरह के दर्शन कर आई थी उससे राजू पूरी तरह से मदहोश हो चुका था क्योंकि वह जानता था कि झुमरी जैसी हिम्मत कोई भी लड़की नहीं दिखा सकती कोई भी लड़की अपने आप से अपने मन का बर्तन किसी अनजान लड़के को नहीं दिखाएगी,,, राजू का मन उसकी हल्के बालों वाली पतली दरार को देखकर पूरी तरह से झूम उठा था,,,तीन औरतों की चुदाई का सुख भोग चुका राजू बुर के भूगोल को पूरी तरह से समझ चुका था अच्छी तरह से समझ गया था कि किस उम्र की लड़की की बुर कितना मजा देगी,,,, कमला चाची से चुदाई करने के बाद वह संभोग की बाराखडी को समझ पाया था,,, फिर अपनी बुआ कि गुलाबी बुर में लंड डालकर उसकी गर्मी को महसूस कर पाया था लेकिन सोनी के साथ संभोग करके वह पूरी तरह से संभोग की महागाथा को कंठस्थ कर चुका था संभोग के संपूर्ण अध्याय के बारे में समझ चुका था,,,,इसीलिए वह समझ चुका था कि तुम मेरी के साथ उसे बहुत मजा आएगा लेकिन यह बात उसे बार-बार परेशान कर रही थी कि वह यह जानते हुए भी कि पीछे खड़ा होकर वा देख रहा है फिर भी उसकी तरफ घूम कर अपनी चूची और अपनी बुर क्यों दिखाई,,, राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि कहीं उसके मन में उसके लिए प्यार तो नहीं है,,,,नहीं तो कोई भी लड़की इस तरह से गैर लड़के को क्यों अपना जवान बदन दिखाएगी,,, जो कुछ भी हो उसे बेहद आनंद की अनुभूति हुई थी इस पल को वह अपने सीने में संजोकर रखा हुआ था,,,।

नहाने के वाक्ए के बाद झुमरी भी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी क्योंकि आज उसने अपना बेशकीमती खजाना खूबसूरत बदन राजू को दिखा दी थी इस बात से उसके बदन में हलचल मची हुई थी कि वह पूरी तरह से नंगी थी और वह भी राजू की आंखों के सामने जिसे वह मन ही मन पसंद करने लगी थी,,,, मैं मन ही मन भगवान को शुक्रिया अदा कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसे संपूर्ण रूप से मन की देखने के बाद राजू अपने होशो हवास में नहीं रह पाएगा उसके दिलो-दिमाग पर सिर्फ वही छाई रहेगी,,, और ऐसे में होगा उसके साथ जरूर मुलाकात करेगा,,,,। झुमरी ने कभी भी अनजाने में भी दूसरों के सामने नहाने की चेष्टा नहीं की थी और ना ही लोगों को अपना बदन देखने का मौका दी थी यह सब कुछ अनजाने में हुआ था लेकिन अनजाने में होने के बावजूद भी झुमरी अपनी तरफ से रही सही कसर को पूरी कर दी थी,,,। चुनरी और राजू दोनों को दूसरी मुलाकात का बेहद बेसब्री से इंतजार था अब वह मुलाकात किस हालात में किस समय होगा यह दोनों को पता नहीं था,,,,।

दूसरी तरफ हरिया को आज खेतों में पानी देने जाना था क्योंकि राजू घर पर नहीं था,,, और आज बैल गाड़ी लेकर निकलने का उसका मन नहीं कर रहा था,,,,,,, इसलिए वह काम कर रही मधु से बोला,,,,।

आज मैं खेतों पर चला जाता हूं पानी देने,,,,

क्यों आज रेलवे स्टेशन नहीं जाएंगे क्या,,?

नहीं आज मन नहीं है,,,,(इतना कहकर वा चलने लगा तो मधु आवाज देते हुए बोली)

खाना तो खा लीजिए,,,,

खेत पर ही भेज देना या तो खुद लेकर आ जाना मैं वही खा लूंगा,,,,( इतना कहकर वह घर से बाहर निकल गया,,, लेकिन तभी उससे चोरों की प्यास लगी और वह पास में ही नहाने के लिए बनाए गए लकड़ियों के पट्टी के गुसल खाने की तरफ आगे बढ़ गया क्योंकि वहां पीने का पानी रखा रहता है,,,, हरिया कुछ और अपने कदम बढ़ाने लगा तो उसे पानी गिरने की आवाज आने लगी,,,, उसे लगा कि कोई नहान है लेकिन फिर भी वह आगे बढ़ता रहा और जैसे ही वह 4 फीट के बने उस गुसलखाना के करीब पहुंचा और अंदर की तरफ देखा तो उसके होश उड़ गए,,,, हरिया के पूरे बदन में कपकपी सी फैलने लगी,,, छोटे से लकड़ी के टूटे-फूटे गुसल खाने में उसकी बहन गुलाबी नहा रही थी और वो भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर,,,हरिया के लिए पहला मौका था जब वह अपनी जवान बहन को पूरी तरह से नंगी देख रहा था हालांकि घर के पीछे वाले भाग में जब वह बैल को पानी पिला रहा था तब वह अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखा था उसकी हवा में लहराती हुई गुलाबी गांड को देखा था लेकिन आज उसकी किस्मत बड़े जोरों पर थी आज वह अपनी बहन को पूरी तरह से नंगी देख रहा था,,,,हरिया अपने मन में सोचने लगा कि उसके माता पिता ने उसकी बहन का नाम गुलाबी बहुत सोच समझ के रखा था क्योंकि वाकई में उसका पूरा बदन गुलाब की गुलाबी पतियों की तरह एकदम कोमल थी,,,। गुलाबी की सुडोल गांड उसे साफ नजर आ रही थी जिस पर पानी की बूंदे फिसल रही थी,,,,,,, हरिया की धोती में हलचल सी मचने लगी,,, उसकी आंखों में वासना की चमक साफ नजर आ रही थी,,,, ऐसा पहली बार नहीं था क्या अपनी बहन को देखकर उसका मन बहका ना हो इससे पहले भी वह कई मौकों पर अपनी बहन की जवानी देख कर पाए चुका था लेकिन अपने आप को संभाल ले गया था लेकिन आज उसे पूरी तरह से नंगी देखकर वह अपने होशो हवास खो बैठा था,,,, अपनी बहन को नंगी नहाते हुए देखकर धोती के ऊपर से ही वह अपने लंड को मसल रहा था,,,,,, लेकिन तभी उसे इस बात का आभास होते ही की किसी की नजर उस पर पढ़ सकती हो कि साथ में देखकर लोग क्या सोचेंगे इसलिए वह धीरे से वहां से खिसक लिया,,,,,

गुलाबी आज अपने बड़े भाई के तन बदन में आग लगा दी थी अपनी खूबसूरत मत मस्त जवानी की आंच से उसे पिघला दी थी,,,, हरिया का मन पूरी तरह से बहक गया था,,, वह खेतों में पहुंच गया और ट्यूबवेल चालू करके खेतों में पानी देने लगा लेकिन उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था,,, हरिया का खेत बीचोबीच था चारों तरफ हरियाली खेत लहलहा रहे थे,,, और मादकता की हरियाली हरिया के तन बदन में भी लहरा रही थी,,, धोती में उसका लंड बगावत पर उतर आया था घर से लेकर खेतों तक बिल्कुल भी शांत नहीं बैठा था उसी तरह से टनटनाकर खड़ा था मानो कि दुश्मन को ललकार रहा हो,,, हरिया को जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह किनारे खडा होकर अपनी धोती में से अपने खड़े लंड को निकाल कर पेशाब करना शुरू कर दिया अपने खड़े लंड को देखकर अनायास ही उसके मन में ख्याल आ गया कि काश वह अपने लंड को अपनी छोटी बहन गुलाबी की बुर में डाल सकता तो कितना मजा आता वह अपने मन में यही सोचता हुआ पेशाब कर रहा था कि उसकी बहन अभी पूरी तरह से कुंवारी है उसकी बुर एकदम संकरी होगी उसे चोदने का बहुत मजा आएगा,,,अपनी सगी बहन को चोदने के ख्याल से ही हरिया के तन बदन में आग लगने लगी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी उससे रहा नहीं जा रहा था अपने आपको संभाले नहीं जा रहा था,,,,,,वह अपने मन में यही सोच रहा था कि खाना देकर उसकी बीवी खेतों पर आएगी तो वह उसकी जमकर चुदाई करेगा क्योंकि बिना चोदे उसकी गर्मी शांत होने वाली नहीं थी और इसी इंतजार में वह खेतों के बीच में बनी झोपड़ी से खटिया को बाहर निकाला और पेड़ के नीचे घनी छांव में खटिया गिरा कर उस पर लेट गया और धोती में से अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे मुठीयाना शुरू कर दिया,,,,।

उसके ख्यालों में उसके दिलो-दिमाग पर केवल उसकी छोटी बहन को ला भी छाई हुई थी उसका गुलाबी बदन उसके तन बदन में आग लगा रहा था उसके बारे में गंदा सोचने पर मजबूर कर रहा था धीरे-धीरे लंड को सहलाते हुए उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थीहरिया अपने अनुभव से यह सीखा था कि अपने हाथ से हिला कर पानी निकाल देने पर भी उसे संतुष्टि बिल्कुल भी नहीं मिलेगी बल्कि उसकी प्यास और ज्यादा बढ़ जाएगी वह जानता था कि जब तक वह अपने लंड को किसी की बुर में डालने देता तब की गर्मी शांत होने वाली नहीं थी इसीलिए वह बड़ी बेसब्री से अपनी बीवी का इंतजार कर रहा था,,,, लेकिन अपनी बहन गुलाबी के बारे में सोच रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि कैसे गुलाबी को पटा कर अपने नीचे लाया जाए,,, गुलाबी को चोदने की वह मन में योजना बनाने लगा युक्ति तलाशने लगा,,,, हरिया गुलाबी का बड़ा भाई अपने मां-बाप को वचन दिया था कि वह गुलाबी को अपने बच्चे की तरह पाल पोस कर बड़ा करेगा और वहां अपने वादे के मुताबिक,,, गुलाबी को पाल पोस कर बड़ी तो कर दिया था लेकिन उसकी मदमस्त जवानी देख कर उसके मन में लालच आ गया था वह गुलाबी को भोगना चाहता था,,,, वासना की आग में बंद हो चुका था भाई बहन का रिश्ता उसकी आंखों के सामने धुंधलाता नजर आ रहा था,,, बार बार उसकी आंखों के सामने गुलाबी का नंगा बदन ही नजर आ रहा था,,,, उसकी खूबसूरत चिकनी पीठ के साथ-साथ उसकी खूबसूरत गांडबार-बार उसे अपनी बहन के बारे में गंदा सोचने पर मजबूर कर दें रही थी,,,।

यही सब सोचकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,, धोती में से वह अपने लंड को बाहर निकाल कर जोर जोर से मुठिया रहा था कि तभी उसे गुलाबी खाना लेकर आती नजर आई और वह तुरंत अपने खड़े लंड को धोती के अंदर छुपा लिया,,,, लेकिन अपने लंड को छुपाने में उससे जरा सी चूक हो गई थी और इस नजारे को गुलाबी दूर से ही देख ली थी,,,,।
 
हरिया की आंखों में अपनी छोटी बहन की मदहोश कर देने वाली जवानी की चमक साफ नजर आ रही थी,,, जिसे याद करके वह अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर चला रहा था,,,, लेकिन उसी समय उसे अपनी बहन गुलाबी खाना लेकर आती भी नजर आई और वह तुरंत उसे अपने धोती के अंदर छुपाने की कोशिश करने लगा लेकिन गुलाबी की तेज नजरों ने अपने बड़े भाई की इस हरकत को पलभर में ही अपनी आंखों में थाम ली,,, इस दृश्य को देखकर उसके तन बदन मैं झुरझुरी सी फैलने लगी,,,, किसी तरह से अपने आप को संभाल कर वह अपने कदम को आगे बढ़ाने लगी,,, सामने आ रही है अपनी बहन को देखकर हरिया की सांसो की गति तेज होने लगी वैसे भी वह,,, अपनी बहन को ही याद करके उत्तेजित हुआ जा रहा थाऔर ऐसे में अपनी आंखों के सामने ही अपनी बहन को देखकर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,,, वह समय की नजाकत को देखते हुए झट से अपने लंड को धोती के अंदर छुपा लिया था लेकिन यह नजारे को उसकी बहन गुलाबी अपनी आंखों से देख चुकी थी,,,,।

उसके लिए यह दृश्य कोई नया नहीं था बहुत पहले से ही वह अपने बड़े भैया के लंड को अपनी आंखों से देखते आ रही है,,,, अपने भैया भाभी को संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में देखकर उन दोनों के बीच की संभोग की असीम कला को देखकर वह खुद ना जाने कितनी बार उतेजीत होकर अपनी उंगली से ही अपनी जवानी की गर्मी को पिघलाने की कोशिश कर चुकी थी,,,, और अपनी जवानी की गर्मी को संभालना पाने की वजह से ही तो है अपने भतीजे कि दोनों टांगों के बीच अपना सब कुछ निछावर कर दी,,,, लेकिन आज उसे हैरानी ईस बात की हो रही थी कि उसके भैया खेतों पर इस तरह की हरकत क्यों कर रहे थे,,,, अपनी आग बुझाने के लिए थे उनके पास खूबसूरत औरत थी तो अभी यह सब किस लिए यह सब सवाल समझते भी गुलाबी अपने भैया के करीब पहुंच गई जहां पर हरिया,,, झोपड़ी के बाहर पेड़ के छांव के नीचे खटिया बिछा कर लेटा हुआ था,,,, गुलाबी को अपने करीब पहुंचता देखकर हरिया अपने पैरों को घुटनों से मोड़ लिया ताकि धोती में बना तंबू गुलाबी देखना है और अपनी धोती को व्यवस्थित करता हुआ वह बोला,,,।

गुलाबी तु,,,,,तो क्यों खाना लेकर आई है अपनी भाभी को भेज दी होती मैं तो उसे ही कहा था कि खाना लेकर आना,,,,

(अपने भैया की बात सुनकर गुलाबी को समझ में आ गया कि वह इसीलिए अपने लंड को सहला रहे थे चुदाई के पहले उसकी धार तेज कर रहे थे,,,,व चित्र से समझ गई कि अगर उसकी जगह की भाभी खाना लेकर आई होती तो भैया इसी समय खटिया पर लेटा कर उसकी भाभी की चुदाई कर दिए होते,,,, भाभी की चुदाई का ख्याल मन में आते ही,,, गुलाबी की बुर पनियाने लगी,,,, उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, पहले वह छोटे से छेद में से दूसरे कमरे के नजारे को देखकर वह अपने भैया से चुदाने के फिराक में रहती थी,, लेकिन अपने भतीजे राजू का नंबर मिल जाने के बाद उसकी कमी पूरी हो रही थी,, उसकी मंशा को पर लगने लगे थे वह राजू से बहुत खुश थी लेकिन आज अपने मन में अपने भैया की मनटंसा को जानकर उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी होने लगी थी,,, अपने भैया की बातें सुनकर गुलाबी खाने की पोटली को खटिए पर रखते हुए बोली,,,)

कोई बात नहीं भैया मैं आ गई हूं ना भाभी की कमी पूरी कर दूंगी,,,(अचानक ही अपनी जबान से निकले हुए शब्दों को संभालते हुए वह बोली,,) मेरा मतलब है कि तुम्हें भूखा रहना नहीं पड़ेगा मैं आपके लिए खाना लेकर आई हुं,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह खटिया के नीचे जमीन पर बैठ गई,,,, अपनी बहन की बात सुनकर हरिया बोला)

तेरी भाभी आई होती तो बात कुछ और होता,,,(गुलाबी अपने भैया के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी,,)

क्यों भैया ऐसा क्यों कह रहे हो मैं भी तो सब कुछ कर सकती हूं जो बाद ही कर सकती है तुम्हारे लिए खाना लेकर आई हूं,,, ताकि तुम खाना खाकर अपना पेट भर सको,,(गुलाबी बड़े चालाकी से अपनी बात का रुख बदलते हुए बोली इस तरह से बात करने में गुलाबी के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि उसकी भैया पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके हैं तभी तो उनका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,,,)

बात खाना खिलाने की नहीं है गुलाबी,,,, तू नहीं समझेगी,,,

अरे वाह ऐसी कौन सी बात है भैया कि मैं नहीं समझुंगई मैं भी बड़ी हो गई हूं,,,,

बड़ी तो तू हो गई है लेकिन तेरे भाभी जैसी तू मेरी सेवा नहीं कर पाएगी,,,

नहीं भैया अब तो आप गलत बोल रहे हो,,,, मुझसे बोल कर तो देखो मैं तुम्हारी हर तरह से सेवा करूंगी क्या तकलीफ है बोलो,,,,

(अपनी बहन की बात सुनकर हरिया के तन बदन में उत्तेजना के शोले धड़कने लगे अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसकी बहन उसकी मन की मनसा को समझ पाती,,,, उसके दिल में क्या चल रहा है वह उसे पढ़ पाती,,, तो शायद उसका काम बन जाता,,,, गुलाबी की बातों को सुनकर हरिया का मन कर रहा था कि बिना कुछ बोले गुलाबी को खटिया पर पटक कर उसकी चुदाई कर दे लेकिन ऐसा कर सकने कीहिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि गुलाबी उसकी छोटी बहन थी और वह उसे बड़े प्यार से पाल पोस कर बड़ा किया था,,,, इसलिए वह अपने जज्बातों को संभालते हुए बोला,,)

नहीं-नहीं गुलाबी तू रहने दे तू इतनी दूर खेतों पर खाना लेकर आई है वही बहुत बड़ी बात है,,,,, चल अच्छा तू खाना निकाल,,,,(इतना कहते हुए हरिया अपनी भावनाओं पर पूरी तरह से काबू कर पाया था और वह खटिया पर बैठते हुए गुलाबी की तरफ देखा जो कि खटिया से नीचे बैठी हुई थी,,, वह अपने भइया की बात सुनकर खाने की पोटली को खोलने लगी थी,,, हरिया की नजर सीधे कुर्ती में से झांकती उसकी दोनों चूचियों पर गया,,, अपनी बहन की दोनों गोलाइयो को देखकर पल भर में ही हरिया की सारी भावनाएं पसीना बनकर उसके माथे से टपकने लगी उसकी आंखों के सामने वह सब कुछ पल भर में चलचित्र की तरह आगे पीछे दौड़ने लगा जिस नजारे को देखकर वह अपनी बहन की तरफ आकर्षित हुआ था उसका झाड़ू लगाना और झाड़ू लगाते समय कुर्ती में से झांकती उसकी दोनों गुनाहों को पहली बार देखकर हरिया की आंखों में वासना की चमक ऊपस आई थी,,, झुकने की वजह से उसकी गोला कार गांड का अद्भुत आकार ले लेना,,,, घर के पीछे बेल को बांधते समय अनजाने में ही अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखना उसकी नंगी गांड को देखकर उसकी जवानी पर फिसल जाना और उसे नहाते हुए देखना यह सब दृश्य किसी चलचित्र की तरह उसकी आंखों के सामने घूमने जाना और एक बार फिर से उसकी आंखों में वासना की चमक नजर आने लगी उसकी बहन खाने की पोटली को खो चुकी थी लेकिन हरिया के मन में कुछ और चल रहा था वह तुरंत,, दर्द से कराहने की आवाज लिए,,,, फिर से खटिया पर लेट गया,,,,।

आहहहहहहह,,,,,,,

क्या हुआ भैया,,,,,(वह तुरंत खाने की पोटली छोड़कर अपने भैया की तरफ देखने लगी)

जांघों में बहुत दर्द हो रहा है गुलाबी इसीलिए तो कह रहा था कि तेरी भाभी आई होती तो अच्छा था,,,

तो बोलो ना भैया क्या करना है मैं कर दूंगी,,,

जांघों पर थोड़ा मालिश करना था,,, सरसों के तेल की ताकि थोड़ा आराम मिले,,,(दर्द से कराहने का नाटक करते हुए हरिया बोला,,,,)

कोई बात नहीं भैया मैं मालिश कर देती हूं लेकिन सरसों का तेल,,,,,(आश्चर्य से अपने भैया की तरफ देखते हुए बोली,,,,)

हां अंदर पड़ा है सीसी में,,,,(घास फूस की बनी झुग्गी के अंदर इशारा करते हुए बोला,,, अपने भाइया की बात सुनकर गुलाबी अपनी गांड मटकाते हुए झोपड़ी के अंदर चली गई और उसे जाता हुआ हरिया लार टपका करके देख रहा था और उसकी निगाह गुलाबी की गोलाकार गांड पर टिकी हुई थी,,, जो कि इस समय कयामत ढा रही थी,,, पल भर में गुलाबी की भी चाल बदल गई थी क्योंकि वह अपने भैया की बातों से उसके इरादों को भाप गई थी उसे ऐसा लगने लगा था कि जिसकी गरमा गरम चुदाई को फीका कर चोदने की ताकत को देखकर वह उस पर मन ही मन फिदा हो जाती थी जिसके लंड को उसकी भाभी की बुर में अंदर बाहर होता हुआ देखकर अपनी खुद की बुर को गिरी करने के लिए आज उसे अपनी बुर में रहने का मौका मिल रहा है इसलिए किसी भी तरह से इस मौके को जाने नहीं देना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि राजू से उसके भैया का लंड उन्नीस ही था और राजू का बीस,,, लेकिन अनुभव उसके भैया में कूट-कूट कर भरा हुआ था और औरतों के बदन से खेलना अच्छी तरह से जानता था कैसे उन्हें उत्तेजित किया जाता है कैसे संतुष्ट किया जाता है इसकी कला में वह पूरी तरह से पारंगत था,,,, हालांकि राजू भी कम नहीं था वह अपने अनाड़ी पन का अनुभव दिखाते हुए उसे अभी तक संतुष्ट करता रहा था और वह संतुष्ट भी थे लेकिन आज गुलाबी कुछ नया अनुभव करना चाहती थी इसलिए अपने होठों पर मादक मुस्कान लिए झोपड़ी के अंदर प्रवेश कर गई और जैसे ही वो झोपड़ी के अंदर गई हरिया से रहा नहीं गया और वह धोती के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर मसल दिया,,,,,।

हरिया के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी और उसे अपनी बहन में एक औरत नजर आ रही थी जिसके साथ वह संभोग सुख भोगना चाहता था इसलिए वह चलाकी दिखाते हुए अपनी धोती को चारों तरफ से ढीली कर दिया था ताकि बड़े आराम से उसकी छोटी बहन उसके लंड का दर्शन कर सके वह यह बात बिल्कुल भी नहीं जानता था कि उसके लंड के दर्शन वह कई बार कर चुकी थी,,,

इधर-उधर देखने के बाद जल्द ही गुलाबी की नजर सरसों के तेल से भरी सीसी पर चली गई वह झट से उसे उठा ली,,, उसे हाथ में लेकर कल्पना करने लगे कि कैसे वह इसी शीशी में से सरसों का तेल निकाल कर उसकी भैया के लंड पर मालिश कर रही है,,,, यह ख्याल उसके दोनों टांगों के बीच कपकपी सा फैला गया,,,,गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था वह तुरंत सरसों के तेल की शीशी लेकर झोपड़ी से बाहर आ गई जहां पर खटिया पर लेटा हुआ हरिया उसका बड़ा बेसब्री से इंतजार कर रहा था,,,,,।

लाइए भैया में मालिश कर देती हूं,,,,(खटिया के पाटी पर बैठते हुए गुलाबी बोली,,,,)

यहां दोनों झांगो मैं बहुत दर्द हो रहा है,,,(अपनी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़ें हुए ही वह अपनी हथेली अपनी दोनों जांघों पर रखता हुआ बोला)

कोई बात नहीं भैया मैं मालिश करके तुम्हारे दर्द को गायब कर दूंगी,,,,, लेकिन एक काम करो दोनों टांगों को फैला लो तब अच्छे से मालिश कर पाऊंगी,,,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही हरिया थोड़ी सोच में पड़ गया क्योंकि वह जानता था कि दोनों टांगों को फैला कर ही उसकी धोती में बना तंबू गुलाबी की आंखों के सामने नजर आने लगेगा वह पहले थोड़ा हिचकी चाह रहा था लेकिन अपने मन में सोचा कि अगर कुछ पाना है तो कुछ ठोस कदम उठाना ही पड़ेगा जो होगा देखा जाएगा यह मन में सोच कर वह अपनी दोनों टांगों को सीधा खटिया पर फैला लिया और ऐसा करने पर उसकी धोती खुंटे की शक्ल में खड़ी की खड़ी रह गई,,,, गुलाबी की नजर उस पर पडते ही उसकी बुर कुल बुलाने लगी,,,, वह तिरछी नजरों से अपने भैया के खुंटे को देख रही थी,, और हरिया भी पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपने कमरों को ढकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था तो उसके मन में ऐसा हो रहा था कि वह उसे खोलकर दिखाएं,,,,

यहां जगह चारों तरफ खेतों से घिरी हुई थी चारों तरफ हरे हरे खेत लहलहा रहे थे दूर दूर तक सेइस जगह को देखे जाने की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और इस समय यहां कोई आता भी नहीं था,,,, इसलिए हरिया और गुलाबी दोनों निश्चिंत थे,,,, गुलाबी अपने भैया की बड़ी इज्जत करती थी लेकिन यह इज्जत धीरे-धीरे वासना और आकर्षण में बदलने लगी थी जब से वह छोटे से छेद में से अपने भैया और भाभी को नग्न अवस्था में चुदाई करते हुए देखती थी,,, वैसे भी गुलाबी की उमर पर पूरी तरह से खुमारी छाई हुई थी वह क्या उसकी उम्र की कोई भी लड़की उस दृश्य को देख लेती तो उसका भी हाल गुलाबी की तरह ही होता,,,,,,, हरिया का शरीर ज्यादा हुष्ठ पुष्ठ नहीं लेकिन बेहद फुर्तीला था,,, इसलिए उसके शरीर में कसाव भरपूर था,,, । गुलाबी से बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था,,,वह सीसी के ढक्कन को खोल कर सरसों के तेल को अपनी हथेली पर गिराने लगी सरसों के तेल की धार को देखकर हरिया का लंड उबाल मार रहा था,,,, अब वह अपने मन में तय कर चुका था कि आज वह गुलाबी की गुलाबी बुर में अपना लंड डाल कर ही रहेगा,,,,
 
आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी दोपहर का समय था और ऐसे में हरिया खेतों पर काम करने के लिए गया था और खाना लेकर गुलाबी आई थी अपने भैया के लंड को देखकर उसकी गुलाबी 6 में हलचल सी होने लगी थी,,,,।

गुलाबी सरसो के तेल को अपनी हथेली में गिरा ली थी,,,उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आज क्या आने वाला है लेकिन इतना आभास हो चुका था कि जो भी होने वाला था बहुत ही अच्छा होने वाला था,,,



हरिया कभी सोचा नहीं था कि वह अपनी भावनाओं को इस कदर अपने अंदर बदल देगा और वह भी अपनी बहन के प्रति,,,हरिया की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी धोती के अंदर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,हरिया यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन एकदम जवान खिली हुई थी और शादी की उम्र हो चुकी थी ऐसे में उसका मन भी मचलता होगा चुदवाने को करता होगा इसलिए हरिया को अपनी सोच पर पूरा विश्वास था कि अगर एक बार वह गुलाबी को बहकाने में सफल हो जाएगा तो वह गुलाबी की दोनों टांगों के बीच का रास्ता बड़े आराम से तय कर लेगा,,,,,,

गुलाबी अपने बड़े भैया की उठी हुई धोती की तरफ देखकर सरसों के तेल को बड़े अच्छे से अपनी भैया की जांघों पर लगाने लगी और मालिश करने लगी,,,गुलाबी के कोमल हथेली और उंगली का स्पर्श पाते ही हरिया के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगे,,, सांसो की गति तेज हो गई और एक अद्भुत सुख की प्राप्ति उसे अपनी दोनों टांगों के बीच के बीच अद्भुत अौजार में महसूस होने लगी,,,, हरिया काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,, अपने भैया की जांघों की मालिश करते समय गुलाबी के तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, गुलाबी धीरे धीरे आहिस्ता आहिस्ता अपने भैया के लंड की तरफ बढ़ना चाहती थी,,, और उसे पूरा विश्वास था कि वह अपनी हथेली उंगलियों का कमाल दिखाकर वहां तक जरूर पहुंच जाएगी,,,,मालिश करते करते हो अपने भैया की तरफ देख कर मुस्कुरा दे रही थी जवाब में हरिया भी मुस्कुरा दे रहा था,,, दोनों के बीच की यह मुस्कुराहट असीम आनंद की अनुभूति करा रही थी,,, लहराते हुए खेतों के बीच दोनों संपूर्ण रूप से निश्चिंत थे,,, क्योंकि जब आप दोनों चित्रा से जानते थे कि इस समय यहां कोई आने वाला नहीं था गुलाबी भी यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी बाकी कामों में व्यस्त होगी और वैसे भी खाना लेकर खुद आई थी तो उसकी भाभी का यहां आने का सवाल ही नहीं उठता था,,,,,,

कैसा लग रहा है भैया,,,?(गुलाबी अपनी हथेली का कमाल दिखाते हुए हरिया की तरफ देख कर बोली)

थोड़ा थोड़ा आराम महसूस हो रहा है लेकिन थोड़ा ऊपर की तरफ कुछ याद आता है तो महसूस हो रहा है,,,,(हरिया भी अपने मन में यही चाहता था कि उसकी बहन उसके अौजार की तरफ आगे बढ़े उसके मुसल जैसे लंड को देखकर उसे छुने के लिए पकड़ने के लिए व्याकुल हो जाए,,,गुलाबी ने अपने भैया की मनसा को अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह अपने भैया की छेड़खानी अपनी भाभी के साथ दीवार के छेद में से देख चुकी थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि दिन मेंचरित्रवान बने रहने वाला उसका बड़ा भाई रात को किस कदर औरत के जिस्म से खेलने के लिए व्याकुल हो जाता है तड़प उठता है,,,, हरिया की व्याकुलता गुलाबी की गुलाबी बुर में हलचल को बढ़ा रही थी,,,)

कोई बात नहीं भैया तुम्हारे बदन का सारा दर्द आ जाता रहेगा आज मेरे हाथों का कमाल देखना,,,

यही देखने के लिए तो तुम्हें मालिश करने के लिए बोला हूं,,,, क्योंकि तुम्हारी भाभी बड़ी अच्छे से करती थी,,,

मैं भी बड़े अच्छे से करूंगी भैया,,,

क्या तुम पहले कभी इस तरह की मालिश की हो,,,

नहीं नहीं,,,, पहली बार आपकी ही कर रही हुं,,,

तो देखना ठीक से करना,,,,(अपने लंड के इर्द-गिर्द खुजलाने के बहाने से वह गुलाबी की तरफ की धोती को हल्का सा हटाना चाहता था ताकि गुलाबी उसके लंड को देख सकें और ऐसा हुआ भी बातों ही बातों में खुजलाने के बहाने वह अपनी धोती को हल्के से दूसरी तरफ खींच दिया था जिससे उसके लंड का जड़ वाला हिस्साबड़ी साफ तौर पर गुलाबी को नजर आने लगा था और उसके नीचे उसकी गोलाई के इर्द-गिर्द उसके झांटों का झुरमुट भी नजर आ रहा था,,, गुलाबी की दोनों टांगों के बीच इस दृश्य को देखकर कंपन सी होने लगी भले ही वह राजू के मजबूत लैंड से चुदवाने का सुख रोज प्राप्त कर दी थी लेकिन यह हर औरत और मर्द की कमजोरी होती थी कि एक ही मर्द से या एक ही औरत से उन लोगों का मन कभी नहीं भरता था भले ही वह कितने की खूबसूरत औरत हो या मर्द कितना भी ताकत से भरा हुआ हो,,,यह बात इस समय दोनों पर लागू हो रही थी हरिया और गुलाबी दोनों पर हरिया के पास उसकी खूबसूरत बीवी की जो पूरे गांव में सबसे ज्यादा खूबसूरत और गठीला बदन की मालकिन थी और गुलाबी के पास उसका भतीजा था जो मर्दाना ताकत और मर्दाना अंक की मजबूती से भरा हुआ था लेकिन फिर भी दोनों बहेक रहे थे,,,)

तुम चिंता मत करो भैया भाभी की कमी महसूस होने नहीं दूंगी इस समय मैं तुम्हारी ऐसी मालिश करूंगी कि तुम जिंदगी भर याद रखोगे,,,,

मैं भी यही चाहता हूं गुलाबी मेरे बदन में बहुत दर्द हो रहा है,,, बस थोड़ा उपर की तरफ मालिश कर वही सारा दर्द इकट्ठा हो गया है,,,,(गरम आहे भरता हुआ हरिया बोला अपने भाई की बात सुनकर उसकी मंशा पूरी तरह से साफ हो चुकी थी जो कि गुलाबी अच्छी तरह से समझ गई थी अपने भाई की हरकत और उसकी बातों को सुनकर उसकी गुलाबी गाल सुर्ख लाल होने लगे जो की गुलाबी के गुलाबी चेहरे को और ज्यादा खूबसूरत बना रही थी,,,, वो शरमाते हुए बोली,,,)

ठीक है भैया,,,(पर इतना कहकर वह सरसों के तेल की शीशी से और ज्यादा सरसों का तेल अपनी हथेली पर गिरा कर जांघो के ऊपर लगाकर मालिश करने लगी अपनी भैया की बात मानते हुए अपने दोनों हथेली को हरिया की दोनों जांघों पर रखकर उसे धोती के अंदर अपनी हथेली को सरकाने लगी थी,,,गुलाबी कि इस मदहोश कर देने वाली हरकत हरिया के तन बदन में आग लगा रही थी हरिया को ऐसा लग रहा था कि जैसे मालिश करने वाली उसकी बहन नहीं बल्कि कोई रंडी अपनी हरकतों से उसे उकसा रही है,,,,,, गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह खटिया पर अपनी गांड रख कर बैठी हुई थी,,, उसकी जांघों की मोटाई देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी सलवार फट जाएगी,,, गुलाबी की नजरें अपने भाई के लंड की जड़ की तरफ गड़ी हुई थी,,, हरिया की अनुभवी आंखें गुलाबी की नजरों को अच्छी तरह से भाग गई थी वह मन ही मन खुश हो रहा था जो दिखाना चाह रहा था वह गुलाबी बड़ी उत्सुकता से देख रही थी,,,, हरिया यह बात नहीं जानता था कि उसकी बहन उसके और उसकी बीवी के कारनामों को अपनी आंखों से कई बार देख चुकी थी लेकिन गुलाबी के लिए भी यह पहली मर्तबा था जब वह बेहद नजदीक से अपने भैया के लंड का दीदार कर रही थी,,,,गुलाबी अपने भैया के लंड को छुना चाहती थी उसे अपनी उंगलियों से स्पर्श करना चाहती थी,,,, उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी और इसीलिए हरिया‌ भी उत्सुक था वह चाहता था कि उसकी बहन मालिश करते हुए उसके लंड को पकड़ ले ताकि उसके बाद के कार्यक्रम को वह शुरू कर सके,,,, गुलाबी मालिश करते हुए बोली,,,।)

अब कैसा लग रहा है भैया,,,?

बहुत अच्छा लग रहा है ,,, बस इसी तरह से मालिश करती रहो,,,,,,





हां भैया तुम्हें एकदम आराम हो जाएगा,,,,,(इतना कहते ही गुलाबी अपनी उंगलियों को आगे बढ़ाने का क्या देखते ही देखते गुलाबी अपने भैया की टांगों के बीच पहुंचने लगी,,,, उसकी उंगलियां हरिया के लंड से दो अंगूल दूर ही थी,,, हरिया को इसका आभास हो गया था उसका पूरा बदन में चल रहा था उसके लंड की एेंठन बढ़ती जा रही थी,,,,और गुलाबी पानी पानी हो रही थी,, हरिया को लग रहा था कि उसकी बहन की उंगली उसके लंड पर अब छुई कि तब छुई,,, ठंडी ठंडी हवा कह रही थी जो कि गुलाबी की रोशनी बालों को इधर-उधर लहरा रही थी और वह बार-बार अपनी उंगली का सहारा देकर अपनी उलझती लटो को सुलझाने की कोशिश कर रही थी,,,।)

अच्छा हुआ भैया कि तुमने यहां सरसों के तेल की शीशी रखे थे वरना उसे लेने के लिए घर जाना पड़ता,,,,



हां मैं जानता हूं तभी तो है सरसों की तेल की शीशी रखे रहता हूं क्योंकि तुम्हारी भाभी यहां मेरी मालिश कर देती है,,,

मैं भी भैया भाभी की तरह कर रही हु ना,,,

हां अभी तक तो ठीक कर रही हो लेकिन आगे देखते हैं तुम अपनी भाभी की तरह कर पाती हो कि नहीं,,,,

जब ना कर पाऊं तो बताना,,,,(उत्सुकता और उत्तेजना का मिश्रण गुलाबी के गुलाबी चेहरे पर साफ नजर आ रहा था वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी दो अंगूर की दूरी पर उसके सपनों का खजाना खड़ा हुआ था,,,, जिसे पकड़ने के लिए वह उतावली हुए जा रही थी,,,, आखिरकार अपनी हिम्मत को बढाते हुए वह अपनी उंगलियों को थोड़ा और आगे सरकाई और उसकी उंगलियां दोनों तरफ से एक साथ हरिया के लंड की जड़ पर स्पर्श होने लगी हरिया के लिए यह मौका काफी था वह इसी मौके की तलाश में था जैसे ही उसकी उंगलियों का पोर,, लंड की जड़ों में झांटों की झुरमुटो मे से होकर स्पर्श हुई,,,, हरिया जानबूझकर अपने मुंह से हल्की सी चीज की आवाज निकालते हुए बोला,,,,।)

आहहहहह ,,, मां,,,,,,ओहहहहहहहहह,,,,, बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

क्या हुआ भैया क्या हुआ इतनी जोर से क्यों चिल्ला रहे हो,,,,

बहुत दर्द हो रहा है गुलाबी,,,

लेकिन अभी तो आराम हो रहा था,,,,

हां लेकिन जहां तुम्हारी उंगली स्पर्श हुई है वहां बहुत तेज दर्द हो रहा है,,,,

कहां पर स्पर्श हुई मुझे भी बताओ मैं अच्छे से मालिश कर दूंगी,,,,(गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी जो कुछ भी हो रहा था इसमें दोनों की सहमति थी बस दोनों अनजान बनने का नाटक कर रहे थे,,,, गुलाबी समझ गई थी किसके भैया के मन में कुछ और चल रहा था)

अरे वहीं पर जहां पर अभी अभी तुम्हारी उंगली छुकर गुजरी है,,,,

कहां यहां,,,,(गुलाबी जानबूझकर अपनी उंगली को इधर-उधर घुमा कर बता रही थी)

नहीं,,,,

यहां,,,,

नहीं नहीं गुलाबी थोड़ा ऊपर कि तरफ,,,,,,,(दर्द से कराहने का नाटक करते हुए बोला,,)

यहां पर,,,,

थोड़ा और ऊपर की तरफ बीच में उंगली लाओ,,,,

(गुलाबी अच्छी तरह से जानते थे कि उसके भैया उसे उसका लैंड पकड़ने के लिए बोल रहे थे लेकिन गुलाबी जानबूझकर अनजान बन रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके भैया उसे सीधी-सादी लड़की समझते थे,,,, अपने भैया की बात मानते हुएजैसे पहले वह अपनी उंगली का इस पर अपने भाई के लंड की जड़ पर कराई थी उसी तरह से इस बार और उसी तरह से अपने दोनों हाथों की उंगलियों का स्पर्श अपने भाई के लंड पर धोती के अंदर से कराते हुए बोली,,,,)

यहां पर,,,

आहहहहह,,,,,, हां गुलाबी यहीं पर,,,,औहहहह बहुत दर्द हो रहा है,,,,,,,

(गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें जबकि उसका भाई उसे पूरी तरह से इशारा कर चुका था लेकिन फिर भी,,,गुलाबी अपने भैया की नजर में एक संस्कारी लड़की थी जो मर्यादा से और संस्कारों से गिरी हुई थी इस तरह से खुलकर अपने भाई के अनुसार उसके लंड पर मालिश करना उसके लिए उचित नहीं था इसलिए वह असमंजस में पड़ गई थी,,, वह सोचने लगी थी वह हरिया की उठी हुई धोती की तरफ देख रही थी जहां से उसके लंड की जड़ एकदम साफ नजर आ रही थी उसके लंड की जड़ की मजबूती और गोलाई को देखकर,,,, उसकी बुर बर्फ की तरह पिघल रही थी,,, हरीया अपनी बहन की तरफ देख रहा था,,, उसकी असमंजसता को हरिया अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बोला,,,)

क्या हुआ गुलाबी क्या सोच रही हो मुझे बहुत दर्द हो रहा है,,,।

लेकिन भैया,,,,,,

लेकिन क्या गुलाबी,,,,

मेरी उंगली तो,,,,(इसे आगे कहने की हिम्मत गुलाबी में जरूर थी लेकिन वह अपने भैया के सामने खुलकर बोला नहीं चाहती थी इसलिए अपने शब्दों को वही रोक दी)

हां मैं जानता हूं गुलाबी तुम्हारी उंगली मेरे उस पर छु रही है,,,लेकिन मुझे उसी जगह पर बहुत दर्द हो रहा है मुझे मालिश की बहुत जरूरत है इसीलिए तो कह रहा था कि तुम्हारी भाभी होती तो मुझे कोई चिंता करने की जरूरत नहीं थी,,,,।

तो क्या भाभी,,, उसी जगह पर मालिश,,,

तो क्या,,,,, मैंने इसीलिए तो उसे यहां आने के लिए बोला था,,,,, और तुम कहती हो कि भाभी की कमी पूरी कर दूंगी,,,, जाओ तुम से नहीं होगा अपनी भाभी को भेजो,,,,

(गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था उसका भाई उसे जाने के लिए बोल रहा था लेकिन वह जाने के लिए तैयार नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि इस तरह का मौका बार-बार आने वाला नहीं था अगर एक बार वह अपने भैया के साथ चुदवा लेती है तो घर में ही उसे दो दो मर्दों का साथ मिल जाएगा और उसकी बुर कभी प्यासी नहीं रहेगी,,, उसकी प्यास हमेशा बुझती रहेगी और रोज-रोज संभोग कला में नयापन महसूस करेगी,,,, इसलिए वह बोली,,,)

क्या सच में ज्यादा दर्द कर रहा है,,,,

तो क्या इसीलिए तो आज में रेलवे स्टेशन नहीं गया,,,, क्योंकि ठीक से बैठा नहीं जा रहा था,,,,

(अपने भैया की बात कसम तरवा पूरी तरह से निश्चिंत हो गई थी कि उसके भैया सच में आज उसके साथ चुदाई करने का सपना देख रहे थे,,,जो कि अगर वह भी आगे बढ़ेगी तो यह सपना हकीकत में बदल जाएगा जैसा कि वह खुद चाहती थी उसे इस तरह से ख्यालों में खोया हुआ देखकर हरिया फिर से बोला)

तुझे विश्वास नहीं होता है तो धोती हटा कर देख क्या हालत हुई है,,,,

मैं,,,(अपने पिया की बात पर एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

तो क्या पगली,,,,

लेकिन भैया,,,,

अरे किसी को कानों कान खबर नहीं पड़ेगा वैसे भी यहां पर देखने वाला कौन है यहां पर कोई आता भी नहीं है,,,,

(हरिया पूरी तरह से इस कोशिश में जुटा हुआ था कि उसकी बहन गुलाबी किसी भी तरह से मान जाए उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ ले बस उसके बाद का रास्ता व खुद तय कर लेगा,,,,) क्या सोच रही हो गुलाबी क्या तुम मुझे इसी तरह से दर्द में देखना चाहती हो,,,,

नहीं नहीं भैया,,,,,

तो फिर क्या सोच रही हो धोती हटा कर देख लो उसकी हालत को,,,,



(अपनी भैया की बात सुनकर गुलाबी अपने मन में सोचने लगी कि सती सावित्री बने रहने में कोई भला ही नहीं है और उसका भैया भी यही चाहता है तो वह क्यों ना नूकुर कर रही है उसे कदम लेने का कोई भी फायदा नहीं नजर आ रहा था आखिरकार संभोग सुख से अच्छी तरह से वाकिफ तो उसका खुद का भतीजा ही कराया था एक बार फिर से वह अपनी जवानीअपनी भैया के हाथों में सौंप देगी तो क्या हो जाएगा आखिरकार उसके भैया के हाथों से उसकी जवानी और ज्यादा निखर जाएगी,,,, किस लिए वह अपने मन में ठान ली थी कि जो होगा देखा जाएगा और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर कांपती उंगलियों से अपने भाई की धोती को पकड़ कर,,,उसे एक तरफ कर दी और अगले ही पल उसकी आंखों के सामने उसके भाई का लहराता हुआ लंड नजर आ गया,,,,, जो की पूरी तरह से काले काले बालों के झांटो की झुरमुटो से घिरा हुआ था,,, गुलाबी की आंखों में चमक आ गई थी आज पहली बार अपने भैया के लंड को बेहद करीब से देख रही थी,,,गुलाबी लंड को देख रही थी हरिया अपनी बहन की खूबसूरत चेहरे के बदलते हाव भाव को देख रहा था उसकी अनुभवी आंखें अपनी बहन की आंखों में आई चमक को बड़े साफ तौर पर देख रही थी,,, हरिया की आंखों में बसना की चमक बढ़ने लगी थी,,, अपनी बहन की जवानी देख कर उसके अंदर हवस आ गई थी,,, अब पीछे कदम हटाना दोनों के बस में नहीं था,,,,

उत्तेजना के मारे हरिया का लंड लार टपका रहा था जोकि उसके लिंग के छोटे से छेद में से बुंद बनकर उसके लंड की संपूर्ण लंबाई को नाप ते हुए उसकी जड़ को भिगो रहे थे,,,,)

Gulabi or hariya



देख रही है गुलाबी,,,,(अपनी अंदरूनी शक्ति से अपने लंड को आगे पीछे बिना छुए हिलाते हुए) देख कर सब इधर-उधर हो रहा है इसे बहुत दर्द हो रहा है,,,

इसे शांत करने का इलाज क्या है भैया,,,,

इसे शांत करने का इलाज सिर्फ तेरे पास है,,,

मेरे पास,,,,(गुलाबी अपने भाई साहब के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी बस अनजान बनने का नाटक कर रही थी)

मेरा मतलब है कि तू इसकी मालिश करेगी तो अपने आप शांत हो जाएगा,,,,

क्या सच में ऐसा होगा यह नीचे बैठ जाएगा,,,,

हां यह नीचे बैठ जाएगा तब इसे पूरा आराम मिल जाएगा,,,, तू करेगी ना मालीश,,,,

हां भैया करूंगी लेकिन मालिश क्या पूरे,,,,, सबकी करनी पड़ेगी,,,(अपने भाई के सामने लंड शब्द कहने में उसे शर्म आ रही थी इसलिए उसकी शर्म को दूर करते हुए हरिया बोला)

Hariya Gulabi dono ekdam nange hone k bad



हां गुलाबी पूरे लंड पर तेल की मालिश करनी होगी,,,

(यह पहला मौका था जब हरिया अपनी बहन के सामने गंदे शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, ऐसा वह समझ रहा था लेकिन गुलाबी इससे भी ज्यादा गंदी गंदी बातें अपने भैया भाभी दोनों के मुंह से सुन चुकी थी लेकिन यह सब हरिया को नहीं मालूम था और गुलाबी भी अपनी भैया के मुंह से लंड शब्द सुनकर पूरी तरह से ऊतेजना से गदगद हो गई थी,,,।)

लेकिन भैया कोई देख लिया तो,,,

अरे पगली यहां कौन देखने वाला है,,,,, कोई नहीं देखेगा,,,, यहां पर ऐसे भी आता ही कौन है,,,,।(हरिया अपनी बहन गुलाबी को समझाने की पूरी कोशिश कर रहा था वैसे भी गुलाबी सबको समझ गई थी बस ना समझने का नाटक कर रही थी उसकी निगाह बार-बार अपने भाई के खड़े लंड पर जो कि आसमान की तरफ आंख उठा कर देख रहा था उसकी तरफ बार-बार चली जा रही थी,,,,गुलाबी अपने जीवन में पहली मर्तबा अपने भाई का ही लंड देखी थी भले ही दूर से लेकिन उसके भाई का ही लंड उसकी जिंदगी में पहला लंड था,, जिसके भूगोल से आकार से वह पूरी तरह से वाकिफ हुई थी,,,, हरिया को तो मौका मिल ही गया था अपने बहन के नंगे पन का दर्शन करने का तभी तो उसके मन में अपनी बहन के ही प्रति वासना ने जन्म लिया,,,, धीरे-धीरे हरिया अपनी धोती को अपनी कमर से अलग कर चुका था कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा था,,,,और अपनी बहन की हालत को बढ़ाने के लिए वह बार-बार रह रह कर अपने लंड की जड़ को पकड़ कर उसे हिला दे रहा था और अपने भाई के हिलते हुए लंड को देखकर गुलाबी डामाडोल हो रही थी,,,,बुर से निकल रहे काम रस की वजह से उसकी सलवार गीली हो चुकी थी,,,।)

अब सोच क्या रही हो गुलाबी,,,,, मालिश करो मुझे दर्द से छुटकारा दो,,,,

(गुलाबी अच्छी तरह से जानती है कि उसके भैया किस दर्द की बात कर रहे हैं,,,, गुलाबी भी अपने भाई की बात मानते हुए सरसों के तेल की शीशी वापस उठा ली और इस बार वह तेल को अपनी हथेली पर ना गिरा कर सीधे सीसी से तेल की धार को लंड की धार पर गिराने लगी,,,, हरिया पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूबता चला जा रहा था अपनी खूबसूरत बीवी के साथ ना जाने कितनी बार बार वर्षों से चुदाई करता चला आ रहा था लेकिन आज गुलाबी की वजह से जिस तरह का उत्तेजना कांड हो उसे अपने बदन में हो रहा था इस अनुभव उसे कभी नहीं हुआ था,,, और ना तो आज तक उसने इस तरह की मालिश करवाई थी,,,,, देखते ही देखते हरिया का लंड सरसों के तेल में पूरी तरह से डूब गया,,,,सरसों के तेल की शीशी का ढक्कन लगाकर होगा उसे खटिया के नीचे रखते हुए बोली,,,)

अब,,,,,

अब क्या मालिश करो,,,,

मतलब कि कैसे,,,,,

तुम्हें सब कुछ सिखाना पड़ेगा दोनों हाथ से इसी तरह से तो की जाती है मालिश,,,,

ठीक है भैया,,,

कर लोगी ना,,,, देखो तुमने मुझसे वादा की हो की मुझे तुम्हारी भाभी की कमी महसूस नहीं होने दोगी,,,,

बिल्कुल नहीं भैया भाभी से भी अच्छी तरह से मालिश करूंगी,,,,

तो देर किस बात की है शुरू हो जाओ ताकि जल्द से जल्द मैं इस दर्द से निजात पा सकूं,,,,

ठीक है भैया,,,,(और इतना कहने के साथ ही गुलाबी अपने कांपते हाथों को आगे बढ़ा कर अपनी भैया के लैंड को दोनों हाथों से थाम ली और उसे हल्के हल्के मालिश करने लगी गुलाबी का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है अपनी भैया की चुदाई भले ही वह देखा करती थी लेकिन कभी सोची नहीं थी कि इस तरह से वह अपने भैया के लंड की मालिश कर पाएगी,,,,, उत्तेजना से गुलाबी की बुर का हाल बुरा था,,,. धीरे-धीरे गुलाबी बड़े अच्छे से मालिश करने लगी थी हरिया के लंड की मोटाई वह अपनी पूरी हथेली महसूस कर रही थी उसके लंड की गर्मी से उसकी बुर पिघल रही थी,,,,,,, हरिया का पूरा वजूद मस्ती के सागर में गोते लगा रहा था वह पूरी तरह से अपनी मां को सातवें आसमान में उड़ता हुआ महसूस कर रहा था,,,,, वह कभी सोचा नहीं था कि उसकी बहन उसे इतना मजा देगी,,,,आज वह गुलाबी के हाथों की हरकत को महसूस करके अपनी खूबसूरत बीवी को भूल चुका था,,,,, रिश्ते नातों को वह एक तरफ रख कर मर्द और औरत का खेल खेल रहा था,,,।

अपने भाई के लंड की मालिश करने में गुलाबी को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,, वह अपनी दोनों हथेली में ऊपर नीचे करके अपने भाई के लंड को पकड़े हुए थी अपने मन में यही सोच रहे थे कि राजू का लंड भले ही इससे थोड़ा मोटा और लंबा है लेकिन उसके भैया का भी लंड लाजवाब है,,,। गुलाबी अपने मन में यही सोच रही थी कि,,, यहीं लंड उसकी भाभी की बुर में जाता है वह कितना मस्त हो जाती हैं,,, कितने मजे लेने कर इसी लंड को अपनी बुर में लेती है,,,, जरूर उसके भैया उसकी भाभी को पूरी तरह से मजा देते हैं,,,, और यही मजा गुलाबी खुद लेना चाहती थी,,,, और इस समय वह पूरी तरह से हकदार भी थी ,,,,।



हरिया का लंड पूरी तरह से सरसों के तेल में सना हुआ था,, सरसों का तेल पाकर हरिया का लंड और ज्यादा बलवान हो गया था,,,, हरिया को अपने ऊपर पूरी तरह से विश्वास था वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी बहन उसके लिए अपनी दोनों टांगे खोल देगी तो वह अपने लंड से उसे पूरी तरह से मस्त कर देगा,,,, और अभी तक वह अपनी बहन की सहमति को देखते हुए उसे विश्वास हो गया था कि उसकी बहन जरूर उसे आज मस्त कर देगी,,,, गुलाबी की हाथों में हरीया को जादू सा महसूस हो रहा था,,,, इसलिए उसके मुंह से ना चाहती हुए भी हल्की-हल्की मस्ती भरी सिसकारी की आवाज फुट पड रही थी जिसे सुनकर गुलाबी और ज्यादा मस्त हुई जा रही थी,,,,।

आहहहहहहह आहहहहहह ओहहहहहहह,,, गुलाबी तुम्हारे हाथों में तो जादू है,,,,

क्यों भैया,,,,,

बहुत आराम मिल रहा है,,,,

मैं कहती थी ना भाभी से भी अच्छा मालिश करूंगी,,,, मैं कर तो रही हूं ना,,,,

हां गुलाबी तुम अपनी भाभी से भी अच्छा कर रही हो,,,, ऐसा आराम तो मुझे कभी नहीं मिला,,,,,आहहहहहहह,,,,,,

(सरसों के तेल में सना हुआ हरिया का लंड और ज्यादा चमक रहा था गुलाबी उत्तेजना के मारे अपनी भैया के लंड को अपनी हथेली में जोर जोर से दबा दे रही थी,,,, मुसल जैसे लंड को अपनी हथेली में पकड़ कर गुलाबी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे उसकी बुर कुल बुला रही थी उसे अपने अंदर लेने के लिए,,,, उसका मन कर रहा था कि अपनी सलवार उतार कर अपनी भैया के लंड पर अपनी गुलाबी बुर रख दे और उसे अपने अंदर ले ले,,,, और शायद उसका यह करना उसके भैया को जरा भी हैरानी महसूस नहीं होने देता क्योंकि उसका भाई भी यही चाहता था लेकिन इस तरह की हिम्मत करने कि उसे अभी जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी वह नहीं चाहती थी कि उसकी भैया को किसी भी प्रकार की भनक हो की वह खुद इस खेल को खेलना चाहती है,,, इसलिए वह अपने भैया के लंड की मालिश करते हुए बोली,,,।

Gulsbi hariya par puri tarah se cha gayi thi



इससे ऐसा कौन सा काम कर दिए थे भैया की इतना ज्यादा दर्द कर रहा था,,,,,(गुलाबी मुस्कुराते हुए अपने भैया के लंड की मालिश करते हुए बोली,,)

क्या बताऊं गुलाबी जाने दे बताने जैसा नहीं,, है,,

क्यों भैया बताने जैसा क्यों नहीं है

वह कुछ और बात है तुझसे कहा नहीं जाता,,,

वाह भैया,,,, अपने इसकी मालिश करवा रहे हो और बता नहीं पा रहे हो,,,,

बता तो दो लेकिन तू मेरे बारे में गलत समझेगी तो,,,

नहीं समझूंगी,,,, अगर ऐसा कुछ होता तो मैं मालिश नहीं करती चली जाती,,,,,

तो बता दु किस वजह से मेरा लंड दुख रहा है,,,,।

(हरिया पूरी तरह से बेशर्म बन चुका था अपनी बहन के सामने लंड शब्द कहने में उसे जरा भी झिझक महसूस नहीं हो रही थी क्योंकि वह जल्द से जल्द अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच के खजाने को पा लेना चाहता था,,,,, अब दोनों तरफ बराबर से लगी हुई थी हरिया बताने के लिए मचल रहा था और गुलाबी सुनने के लिए तड़प रही थी,,,।)

हां भैया बताओ ना,,,, इतना दर्द क्यों होता है,,,(गुलाबी अपने भैया के लंड के सुपाड़े पर बराबर से तेल लगाकर मसलते हुए बोली,,, जिससे हरिया की आह निकल गई,,,)

तू जिद कर रही हो तो बता देता हूं,,, वो क्या है ना कि तेरी भाभी को धीरे-धीरे बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,,,।

(अपने भैया के मुंह से इतना सुनते ही गुलाबी का दिल जोरो से धड़कने लगा वह समझ गई थी किसके भैया किस बारे में बात कर रहे हैं,, फिर भी अनजान बनते हुए बोली,,)

धीरे धीरे मैं कुछ समझी नहीं भैया,,,,

अरे पगली इसीलिए तो कह रहा था कि तू नहीं समझेगी,,,

अरे भाई ऐसे कैसे नहीं समझूंगी मैं भी बड़ी हो गई हूं शादी करने लायक हो गई हुं,,, आखिरकार भाभी भी तो एक औरत है और मूवी एक औरत हम तो भला एक औरत एक औरत की बात क्यों नहीं समझेगी,,,,

(गुलाबी की बातें सुनकर हरिया हंसने लगा वह अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी बहन कितनी भोली है जबकि वह नहीं जानता था कि उसकी बहन सारे खेल खेल चुकी है,,,,)

हां पगली मैं जानता हूं तू अब बड़ी हो गई है,,, लेकिन अभी भी तू उन सब बातों को समझने लायक नहीं है,,,,

क्या भैया समझाओगे तो क्या नहीं समझूंगी,,,,,(उत्तेजना के मारे गुलाबी अपने भैया के लंड को कस के अपनी मुट्ठी में दबाकर ऊपर की तरफ खींचते हुए बोली गुलाबी की यह हरकत हरिया की उत्तेजना को बढ़ा रही थी)

समझ तो तु जाएगी,,,, लेकिन मुझे डर है कहीं तो कहीं यह बात किसी को बता ना दे अपनी भाभी को ना बता दे,,,,

नहीं नहीं भैया मैं समझदार हूं बेवकूफ थोड़ी हूं जो किसी को भी यह सब बात बता दुं,,,

मतलब तू सच में बड़ी हो गई है,,,

और क्या,,,(गुलाबी इतराते हुए बोली,,)

अच्छा ठीक है तू कहती है तो मैं बता देता हूं,,,,, तेरी भाभी को धीरे-धीरे से चुदवाना पसंद नहीं है,,,,,

(इस बार हरिया एकदम खुलकर बातें करने लगा और अपने भैया के मुंह से चुदाई वाली बात सुनकर गुलाबी उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी,,,, हरिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अब समझ में आया,,,,

जवाब में गुलाबी बोली कुछ नहीं बस हल्के से शरमा गई उसका इस तरह से शर्माना देखकर हरिया की उत्तेजना बढ़ने लगी हरिया का रंग गुलाबी की हथेली में कस्ता चला जा रहा था,,,, अपनी भैया के मुंह से चुदवाना शब्द सुनकर वह कुछ ज्यादा ही जोर से अपने भैया के लंड को दबाना शुरु कर दी थी,,,,गुलाबी अंदर ही अंदर पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी अपने भैया के लंड को लेने के लिए उसकी बुर बार-बार कामरस छोड़ रही थी,,,,।

लगता है तू सब कुछ समझ गई,,,,

नहीं नहीं भैया अभी भी कुछ कुछ रह गया है,,,

मतलब,,,,

मतलब यही कि,,,, धीरे-धीरे से मतलब,,,

अरे पगली,,, तेरी भाभी अपनी बुर में मेरा लंड धीरे धीरे से अंदर बाहर नहीं बल्कि एकदम रफ्तार से अंदर बाहर लेना पसंद करती है और इसी चक्कर में मेरा लंड दर्द करने लगता है,,,,

(इस बार तो अपनी भैया के मुंह से एकदम खुले शब्दों में लंड और बुर शब्द सुनकर उसकी बुर अमृत की बूंद टपका दी उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,, अपने भैया से नजर मिलाने की ताकत उसमें नहीं थी लेकिन अपनी प्रतिक्रिया वह अपने भैया के लंड को जोर जोर से दबा कर दे रही थी गुलाबी के हथेली का कसाव अपने लंड पर महसूस करके हरिया इतना तो समझ गया था कि उसकी बहन भी मजा ले रही है उसे भी मन करने लगा है,,,,)

अब तो तुझे समझ में आ गया होगा ना,,,

हां भैया,,,,(दूसरी तरफ शर्म के मारे मुंह करके मुस्कुराते हुए बोली) लेकिन भैया भाभी को जोर-जोर से क्यों मजा आता है,,,,

पता नहीं क्यों हो सकता है सभी औरतों को जोर-जोर से ही मजा आता हो,,,,, तूने भी तो कभी,,,,, मजा ली होगी,,,,(इस बार हरिया अपने सारे पत्तों को खोल देना चाहता था इसलिए अपनी बहन से ना करने वाली बात वाकई रहा था अपने भाई के मुंह से अपनी इस तरह से खुले शब्दों में बातें सुनकर गुलाबी की बुर फुदकने लगी थी यह बात सच है कि वह भी मजा ले चुकी थी लेकिन अपने भैया से खुलकर कैसे कह दें इसलिए वह अनजान बनते हुए बोली,,)

नहीं नहीं भैया मैंने आज तक ऐसा वैसा कुछ कि नहीं हूं,,,

लेकिन गुलाबी तुम जवान हो शादी लायक हो तुम्हारा मन भी तो करता होगा,,,,(अपनी भैया की यह बात सुनकर बार बोली कुछ नहीं बस खामोश रही तो हरिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) अच्छा सच सच बताना गुलाबी देखो यह राज हम दोनों के बीच ही रहेगा,,,,(अपनी भैया की यह बात सुनकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था उसके भैया क्या कहने वाले हैं,,) मेरा लंड तुम्हें कैसा लग रहा है,,,,(हरिया की बात सुनकर गुलाबी खामोश रही उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बोलें,, और कुछ बोल नहीं रही थी इसलिए हरिया फिर बोला,,,) देखो गुलाबी डरने वाली बात नहीं है तुम जोर जोर से मेरा लंड दबा दे रही हो मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हें भी मजा आ रहा है और हां तुम मालिश तो बहुत अच्छी करती हो मेरा पूरा दर्द खत्म हो गया है,,,, बोलो कैसा लग रहा है,,,

अच्छा,,,,,

पहली बार देख रही हो या पहले भी देख चुकी हो,,,,लंड,,,

पहली बार,,,,(गुलाबी हरिया की तरफ देखे बिना जवाब दे रही थी वह दूसरी तरफ मुंह घुमा कर उत्तर दे रही थी और जोर-जोर से अभी भी अपने भैया के लंड को दबा रही थी,,,)

क्या सच में गुलाबी तुम इतनी खूबसूरत हो जवान हो तो क्या सच में तुम पहली बार लंड देख रही हो,,,

हां भैया में पहली बार देख रही हुं।

(गुलाबी की बातें सुनकर हरिया का सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था गुलाबी की बातें उसे उत्तेजित कर रही थी और यह जानकर कि वह पहली बार एक मर्द का लंड देख रही है वो और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,)

तुम्हें डर तो नहीं लग रहा है ना,,,

नहीं भैया बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है बल्कि ना जाने क्यों अच्छा लग रहा है,,,

ऐसा ही होता है गुलाबी तुम एक जवान लड़की हो इसलिए लंड को पकड़ना तुम्हें अच्छा लग रहा है,,,, लेकिन क्या तुम्हें जरा भी डर नहीं लग रहा है,,,,

किस बात का डर भैया,,,,

अरे मेरा मतलब है कि मेरे लंड की मोटाई और लंबाई तो तुम देख रही हो और इसमें कोई शक नहीं है कि तुम अपनी बुर का छेद भी अच्छी तरह से जानती हो,,,,(हरिया अपनी बहन की बुर का नाम अपने होठों पर लाते हैं वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और यही हाल गुलाबी का था क्योंकि वहां सीधे-सीधे उसकी बुर के बारे में बोल रहा था,,,,, गुलाबी अच्छी तरह से समझ गई थी कि अब पूरी तरह से खुलने में ही मजा है शर्म आने से काम चलने वाला नहीं है,,,, हरिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) लंड की तुलना में तुम्हारी बुर का छेद बहुत छोटा है,,,, छोटा है ना गुलाबी,,,,

हां भैया,,,,,

तो तुम्हें डर नहीं लग रहा है कितना मोटा लंड तुम्हारी बुर के छोटे से छेद में जाएंगा कैसे,,,

मैं भी यही सोच रही थी,,,,, मेरी उसका छेद बहुत छोटा है,,,,

खुल कर बोलो ना गुलाबी जैसे मैं कह रहा हूं किस का छेद छोटा है,,,,

(गुलाबी बोली कुछ नहीं बस खामोश रही)

क्या हुआ चुप क्यों हो बोलो ना किस का छेद छोटा है,,,

(गुलाबी अच्छी तरह से समझ गई थी कि आज दूसरी बार उसकी पुल का उद्घाटन उसके ही बड़े भैया के लंड से लिखा है इसलिए सरमाया सब कुछ त्यागना होगा तभी वह मजा ले पाएगी इसलिए वह बोली,,,)

मेरी बबबबब,, बुर का,,,,

आहहहहहह,,,, देखो तुम्हारे मुंह से बुर शब्द सुनकर कितना मजा आ जाता है,,,,

लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही है,,,,

शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है गुलाबी,,,, अच्छा तुम देखना चाहती हो कि मोटा लंड छोटे से छेद में जाता कैसे हैं,,,,

हां देखना चाहती हूं,,,, लेकिन कैसे,,,,

इसके लिए तुम्हें मेरा साथ देना होगा,,,,



मैं कुछ समझी नहीं,,,,

(गुलाबी सब कुछ समझ रहे थे लेकिन ना समझने का सिर्फ नाटक कर रही थी उसे भी बहुत मजा आ रहा था वह इस खेल में आगे बढ़ना चाहती थी अभी भी उसके भाई का लंड उसके हाथ में था जिसे वह अब हीलाना शुरू कर दी थी,,,)

समझ जाओगी,,,, लेकिन पहले बोलो मेरा साथ दोगी कि नहीं,,,,

दूंगी,,,,

तो सच सच बताना मेरे लंड की मालिश करते हुए तुम्हारी बुरा पानी छोड़ रही है कि नहीं,,,,

मुझे नहीं पता,,,(गुलाबी शरमाते हुए बोली वह अपनी बुर की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,,)

लेकिन मुझे पता है,,,,

तुमको कैसे पता भैया,,,,

आखिरकार मैं एक मर्द हूं और एक औरत के बदन में क्या क्या बदलाव कब होता है यह अच्छी तरह से जानता हूं,,,

लेकिन मुझे तो नहीं लग रहा है कि तुम जो कुछ भी कह रहे हो वह सच है,,,,

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं उसमें बिल्कुल सच्चाई है देखना चाहती हो,,,,

दिखाओ,,,,(गुलाबी अब पूरी तरह से मैदान में उतर जाना चाहती थी इसलिए वह अपनी तरफ से पूरी छूट दे रही थी)

लेकिन यह बात किसी को भी मत बताना,,,

नहीं बताऊंगी,,,,,

तो फिर अभी बताता हूं कि मैं कितना सच कह रहा हूं,,,( इतना कहने के साथ ही हरिया उठ कर बैठ गया और अपने हाथ को सीधे अपनी बहन को लाडी की दोनों टांगों के बीच डालकर सलवार के ऊपर से ही उसकी बुर को टटोलने लगा,,,, उसकी सलवार पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और बुर से निकले काम रस का गीला पन उसे अपनी उंगलियों पर भी महसूस होने लगा था,,,, वह अपनी गिरी उंगली को वापस खींच कर उस पगली को गुलाबी की आंखों के सामने लाते हुए बोला,,,) देख गुलाबी तेरी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,,

(गुलाबी अपनी भैया की उंगलियों में लगी अपने काम रस को देखकर एकदम शर्म से पानी-पानी हो गई,,, और शर्मा कर मुस्कुराते हुए दूसरी तरफ नजर फेर ली और बोली)

धत मुझे शर्म आ रही है,,,,

इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है यह तो प्राकृतिक रूप से होता है सब को होता है लेकिन अभी भी तुम्हारी शंका दूर नहीं हुई है ना,,,

कौन सी शंका भैया,,,

यही कि तुम्हारे छोटे से छेद में इतना मोटा लंबा लंड जाएगा कैसे,,,

हां यह शंका तो अभी भी दूर नहीं हुई,,,

दूर करना है,,,,

हां,,,,, लेकिन कैसे ,,,?

हम दोनों को झोपड़ी में चलना होगा,,,,,

कोई आ गया तो,,,(किसी की आने की शंका को जताकर गुलाबी अपनी तरफ से पूरी स्वीकृति दे दी थी और हरिया अपनी बहन के सामान तरण को पूरी तरह से समझ रहा था इसलिए बोला,,)

तुम चिंता मत करो यहां कोई आने वाला नहीं है,,,, बस तुम यह बताओ की झोपड़ी में चलने के लिए तैयार हो की नहीं,,,

तैयार हु,,,(अब गुलाबी पूरी तरह से मजा लेने के लिए तैयार थी,,, राजू से तो रोज ही चुदवा कर मजा ले रही थी लेकिन आज अनुभवी हाथों में अपनी जवानी देना चाहती थी,,, अपनी बहन का जवाब सुनते ही हरिया जिस हाल में था उसी हाल में खटिया पर से नीचे उठा और तुरंत अपनी बहन के पास पहुंचकर उसे अपनी गोद में उठा लिया गुलाबी इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए वह पूरी तरह से हैरान हो गई और वह उसे गोद में उठाए हुए झोपड़ी के अंदर जाने लगा हरिया का लंड लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था,,, इसलिए सलवार के ऊपर से ही गांड पर ठोकर मारने लगा अपनी गांड पर अपनी भैया के लंड की ठोकर महसूस करके वह पूरी तरह से पानी छोड़ रही थी देखते ही देखते हरिया उसे झोपड़ी के अंदर लेकर आ गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी कि अब झोपड़ी के अंदर कौन सा खेल शुरू होने वाला है,,,, गुलाबी जवान खूबसूरत लड़की थी और हरिया इस खेल में पूरी तरह से माहिर गुलाबी को पूरा यकीन था कि उसका भाई अपने अनुभव से उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा,,,, झोपड़ी के अंदर पहुंचते ही हरिया गुलाबी को अपनी गोद में से नीचे उतारा और उसे अपनी बाहों में भर कर उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया गुलाबी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अपने भैया के हाथ को का पूरे बदन पर महसूस कर रहे थे सलवार के ऊपर से ही वह अपनी बहन की गांड को जोर जोर से दबा रहा था उसके लंड की ठोकर उसे अपनी टांगों के बीच में सो रही थी जिससे उसकी उत्तेजना चरम शिखर पर पहुंचते चली जा रही थी,,, थोड़ी ही देर में हरिया अपनी हथेली को अपनी बहन के साथ खूबसूरत बदन के कोने-कोने तक पहुंचा रहा था वह कुर्ती के ऊपर से अपनी बहन की चूचियों पर हाथ रखकर जोर जोर से दबा कर उसके गुलाबी होठों का आनंद ले रहा था,,,, स्तन मर्दन की मदहोश कर देने वाली अनुभूति सेवा पूरी तरह से उत्तेजित होने जा रहे कोई और ना चाहते हुए भी एक बार फिर से अपने भाई के लंड को पकड़ कर दबा रही थी उसका मन तो कर रहा था कि खुद ही अपनी सलवार उतार कर अपने भाई के लंड पर सवार हो जाए लेकिन ऐसा कर सकने से वह बच रही थी,,,,)

आहहहह भैया,,,,

क्या हुआ बहना दर्द कर रहा है क्या,,,

हां भैया,,,

तू चिंता मत कर मजा भी बहुत आएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही वह सलवार की डोरी को खोलने लगा,,, हरीया अपनी बहन की सलवार की डोरी को खोल कर उसे उसी स्थिति में छोड़ दिया और पल भर में ही गुलाबी की सलवार उसके कदमों में जाकर ई कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई हरिया औरत की खूबसूरत बदन से खेलना अच्छी तरह से जानता था इसलिए अगले ही पल वाकई हथेली को अपनी बहन की देखती हुई बुर पर रखकर सहलाने लगा जो की पूरी तरह से पानी पानी हुई थी उसकी हथेली भी पूरी तरह से गुलाबी के काम रस में डूब गई,,,, गुलाबी को बहुत मजा आ रहा था,,,।

आहहहहह भैया,,,

कैसा लग रहा है गुलाबी,,,

बहुत अच्छा लग रहा है भैया,,,

अभी तो और मजा आएगा,,,,

(और इतना कहने के साथ ही वह खुद अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी बहन के दोनों टांगों को ऊपर कैसे खोलकर एक नजर भर कर अपनी बहन की गुलाबी बुर को देखने लगा जो कि बहुत खूबसूरत थी,,,, हरिया का मन कर रहा था कि उसे खा जाएं उसकी खूबसूरती उसे भा गई थी,,, हरिया अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच के खजाने को देख रहा था और गुलाबी अपने भैया को देख रही थी दोनों की स्थिति एक जैसी ही थी दोनों उतावले थे,,, लेकिन हरिया मैं सब्र पूरी तरह से था वह जानता था कि किस तरह से मजा लिया जाता है और मजा दिया जाता है इसलिए अगले ही पल अपने होठों को अपनी बहन की बुर पर रख दिया,,,गुलाबी को इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई और इसी के साथ उसकी कमर भी आगे की तरफ बढ़ गई जिसे हरिया अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसके नितंबों को अपने दोनों हथेली में जोर से थाम लिया और भूखे की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,,,।

ऊमममममममम,,,,,,आहहहहहहहहह,,,ऊमममममममम,,,सहहहहहहहरह,,,ओहहहहह भैया,,,,(गुलाबी के सब्र का बांध टूट चुका था वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपने भैया के सिर पर हाथ रख दिया और उत्तेजना के मारे खुद ही उसे अपनी दोनों टांगों के बीच खींचने लगी हरिया बहुत खुश हो रहा था क्योंकि उसकी हरकत की वजह से गुलाबी को बहुत मजा आ रहा था और यही तो मैं चाहता था बड़े आराम से और उसकी दोनों टांगों के बीच विजय प्राप्त कर लिया था,,,, अपनी जीभ से गुलाबी गुलाबी बुर से खेल रहा था,,, अपनी जीभ की नोक से उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों को कुरेद रहा था,,, जिससे गुलाबी को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, हरिया यही समझ रहा था कि उसकी बहन का यह पहली बार है वह इस बात से पूरी तरह से अनजान था कि उसकी बहन उसके ही बेटे से चुदवा रही थी,,, हरिया बहुत खुश था कि उसके हाथ एक कुंवारी खूबसूरत जवान लड़की लगी थी जिसकी जवानी को वह होले होले से पी रहा था,,, जितना हो सकता था हरिया अपनी जीभ को बुर के अंदर डालकर उसकी मलाई चाट रहा था,,,, घास फूस की बनी झोपड़ी में पल भर में ही गुलाबी की गरम सिसकारियां गुंजने लगी उसे बेहद आनंद आ रहा था,,,,।

Apne anubhaw se hariya Gulabi ko puri tarah se mast kar raha tha



हरिया अपनी बहन की बुर को जीभ से चाटते हुए अपने लंड के लिए रास्ता बनाने के लिए अपनी उंगली को उसकी बुर में प्रवेश कर दिया उसे ऐसा लग रहा था कि वह अपने लिए रास्ता बना रहा है लेकिन वह यह नहीं जानता था कि उससे भी मोटा और लंबा लंड उसकी बुर की गहराई को रोज नाप रहा था,,,। अपने भैया की ऊंगली को अपनी बुर के अंदर महसूस करके गुलाबी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी हरिया अपनी उंगली को बुर के अंदर गोल गोल घुमा रहा था जिससे गुलाबी को समझते देर नहीं लगी थी कि उसका भैया अपने अनुभव का पूरा उपयोग दिखा रहा है,,,, गुलाबी गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,।





कुछ देर तक झोपड़ी के अंदर हरिया अपनी बहन की जवानी का रस चूसता रहा,, उसे लगने लगा था कि उसने अपने लिए रास्ता बना लिया है इसलिए खड़ा होकर उसकी कुर्ती को भी उतारने लगा और उसका साथ देते हुए गुलाबी भी अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दी ताकि वह उसकी कुर्ती को आराम से निकाल सके अगले ही पर गुलाबी पूरी तरह से उसकी आंखों के सामने नंगी खड़ी थी,,,, यह पहला मौका था जब हरिया अपनी बहन को अपनी आंखों के सामने एकदम नंगी देख रहा था अपनी बहन की मदमस्त कर देने वाली जवानी देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था उसका लंड लार टपका रहा था,,,, छातियों की शोभा बढ़ाने उसके दोनों नारंगी यों को देखकर उसकी प्यास बढ़ने लगी और अगले ही पल का अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की एक नारंगी को अपनी हथेली में दबाते हुए बोला,,,।

गुलाबी तेरी चूची में बहुत रस भरा हुआ है,,,,

(इतना सुनकर गुलाबी के गुलाबी गाल सुर्ख लाल हो गए वह कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म आने लगी,,)

अब कैसा लग रहा है गुलाबी,,

बहुत मजा आ रहा है भैया,,,,,

इस खेल में बहुत मजा आता है,,,, बस इस बारे में तुम किसी को कुछ भी मत कहना,,,

मैं किसी को कुछ भी नहीं कहूंगी,,,,

तुम बहुत अच्छी लड़की हो,,,(और इतना कहने के साथ ही एक हाथ से एक चूची दबाते हुए दूसरी चूची पर अपना मुंह ढक दिया और उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,, गुलाबी की सूचियों की निप्पल अंगुर के दाने की तरह रस से भरी हुई थी और एकदम कड़क हो गई थी,, जिसे हरिया बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर उसका स्वाद ले रहा था,,,,

सरहहह आहहहहहह ऊईईईईईई मां,,,,,ऊहहहहहहह,,,

( झोपड़ी के अंदर गुलाबी की गरमा गरम सिसकारियां गूंज रही थी और उसकी सिसकारियां की आवाज सुनकर हरिया की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह बारी बारी से है गुलाबी की नारंगी ओ का रस पी रहा था,,,,)

भैया तुम भाभी के साथ भी इसी तरह से करते हो क्या,,,

तो क्या इसी तरह से तेरी भाभी को बहुत मजा आता है,,,

लेकिन भाभी की तो चूचियां बहुत बड़ी-बड़ी है,,,,

पहले थोड़ी थी जब शादी करके आई थी तो तेरे जैसी ही थी वह तो हमें उस पर इतनी मेहनत करके जोर जोर से दबा दबा कर पीकर उसे एकदम मस्त कर दिया हूं,, अब देखना तेरी भी बड़ी-बड़ी हो जाएगी,,,(अपनी भैया की बात सुनकर गुलाबी शर्माने लगी,,,, हरिया अपनी बहन की नंगी जवानी से पूरी तरह से खेलना चाहता हूं दोपहर का समय था इस समय सब लोग अपने घरों में आराम कर रहे होते हैं और ऐसे में हरिया अपनी बहन की जवानी से खेल रहा था वह भी खेत के बीचो बीच,,,,,,अपनी बहन की नंगी जवानी से खेलने के लिए हरिया भी अपना कुर्ता उतार कर फेंक दिया दोनों एकदम नंगे हो गए,,,, हरिया अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए बोला,,,)

अब देखना गुलाबी मेरा लंड तुम्हारी गुलाबी 6 दिन में कैसे आराम से घुस जाता है,,,,

क्या तुम सच कह रहे हो भैया,,,(लंड की तरफ देखते हुए)मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कितना मोटा लंड मेरी छोटे से छेद में जाएगा कैसे,,,

चला जाएगा गुलाबी बड़े आराम से चला जाएगा बस एक बार तुम इसे मुंह में लेकर चुस लो इसे गीला कर दो तब देखना कितने आराम से जाता है,,,,

(गुलाबी का भी मन अपने भैया के लंड को मुंह में लेकर चूसने को कर रहा था लेकिन वह इतनी जल्दी तैयार कैसे हो सकती थी इसलिए जानबूझकर नाटक करते हुए बोली,,)



धत् ,,,,,ऐसा कहीं किया जाता है क्या,,,,

अरे तो क्या तेरी भाभी भी तो ऐसा करती है वह तो अपने आप ही मुंह में लेकर चूसना शुरू कर देती है,,,क्योंकि वह जानती है कि ऐसा करने पर बड़े आराम से बुर में घुसजाता है,,,

क्या सच में ऐसा होता है,,,

हां रे पगली मैं तुझसे झूठ थोड़ी बोलूंगा,,,, बस एक बार इसे मुंह में लेकर गिला कर दे फिर देख कितना मजा आता है तुझे भी और मुझे भी,,,,

ठीक है तुम कहते हो तो,,,(इतना कहकर गुलाबी नीचे घुटनों के बल बैठ गई,,, और अपने भाई के लंड को पकड़कर उसे धीरे-धीरे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, उसे भी मजा आ रहा था उसके परिवार का दूसरा लंड उसके मुंह में था,,, हरिया पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था उसकी आंखों में नशा सा छा रहा था,,,, उसकी कमर अपने आप ही आगे पीछे हीलने लगी,,,, थोड़ी ही देर में हरिया का लंड पूरी तरह से उसके थूक से गीला हो गया,,,,गुलाबी की खेती जवानी की मदहोशी में कहीं उसका लंड पानी में छोड़ दे इस डर से वह अपने लंड को बाहर खींचते हुए बोला,,)

बस बस गुलाबी अब देखना कितने आराम से जाता है,,,,

(गुलाबी के मुंह से लंड बाहर निकलते ही वह गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,,, दोनों के बीच की सारी दीवारें गिर चुकी थी भाई-बहन का पवित्र रिश्ता मर्द और औरत में तब्दील हो गया था,,,, हरिया ढेर सारी घास को झोपड़ी के पीछे पीछे रखकर उस पर अपनी धोती बिछा दिया और उसे लेटने के लिए बोला गुलाबी अपनी भैया की बात मानते हुए पीठ के बल लेट गई लेकिन शर्म के मारो अपनी दोनों टांगों को आपस में सटाई हुए थी,,, यह देखकर हरिया मुस्कुराने लगा और अपने लिए जगह बनाते हुए उसकी दोनों टांगों को फैलाते हुए बोला,,,)

टांगों को खोलोगी नहीं तो मजा कैसे ले पाओगी,,,,(और इतना कहते हुएहरिया अपनी बहन की दोनों कामों को खोल दिया उसकी आंखों के सामने हल्के हल्के रेशमी बालों से सुशोभित गुलाबी की गुलाबी बुर नजर आ रही थी जिसे देखकर हरिया के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,, जिसकी तारीफ किए बिना वह रह नहीं सका और वह बोला)

वाह ऐसा लगता है कि भगवान ने खुद अपने हाथों से तुम्हारी बुर की रचना की है तभी तो इतनी खूबसूरत दिख रही है,,,(अपने बड़े भाई के मुंह से अपनी पुर की तारीफ सुनकर शरमा और लज्जा से वह दूसरी तरफ मुंह फेर ली और हरिया अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा और अपनी जांघों पर रख दिया ऐसा करने से गुलाबी की बुर उसके लंड के ठीक सामने और एकदम करीब आ गई हरिया की हर एक हरकत से गुलाबी मस्त ‌हुए जा रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसके भैया मैं अनुभव कूट-कूट कर भरा हुआ है,,,,,)

अब देखना गुलाबी कैसे तुम्हारे लिए नामुमकिन कार्य मुमकिन हो जाता है,,,,( और इतना कहने के साथ ही हरिया अपना लंड हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी बहन की गुलाबी छेद पर रख दिया और उसके गीले पन का फायदा उठाते हुए धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरकाने लगा,,,गुलाब यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसके भैया से भी मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की शेर कर चुका है इसलिएउसे अपनी तरफ से कलाबाजी दिखानी होगी ताकि उसके भैया को बिल्कुल भी शक ना हो इसलिए जैसे-जैसे लंड अंदर की तरफ सड़क रहा था वैसे वैसे जानबूझकर गुलाबी दर्द से तिलमिलाने का नाटक कर रही थी,,, पुरुष का दर्द है देखकर हरिया बार-बार उसे सांत्वना देते हुए बोल रहा था,,,)

बस बस मेरी बहना है बस एक बार अंदर जाने दो फिर मजा ही मजा है,,,

आराम से डालना भैया दर्द हो रहा है,,,

अरे पगली मैं तुझे बिल्कुल भी दर्द होने नहीं दूंगा देखना एकदम आराम से जाएगा,,,,(और इतना कहकर हल्के हल्के अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल रहा थागुलाबी की बुर तो पहले से ही मोटा तगड़ा लंड ले चुकी थी इसलिए अंदर जगह बनी हुई थी लेकिन हरिया को बिल्कुल भी शक नहीं हो रहा था क्योंकि गुलाबी नाटक ही कुछ ऐसा कर रही थी वह चेहरे पर ऐसी भावना रही थी कि मानो उसे बहुत दर्द हो रहा है उसके दर्द को कम करने के लिए हरिया बार-बार उसकी चूची को पकड़ कर मसल ने लगता था आखिरकार देखते ही देखते आखरी धक्के में हरिया नेअपने लंड को अपनी बहन की बुर की गहराई में डाल दिया और इस बार अपने नाटक को आखरी मोड देते हुए वह जोर से चीखी,,,,।

हाय दैया मर गई रे भैया मुझसे रहा नहीं जा रहा है बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी मुझ पर रहम करो बाहर निकालो,,,

(गुलाबी को दर्द बिल्कुल भी नहीं आ रहा था लेकिन उसकी कलाबाजी बेहद लाजवाब थी उसके माथे पर पसीने की बूंदें टपक रही थी जो कि उत्तेजना की वजह से थी बढ़िया को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके लंड की मोटाई को वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है,,,लेकिन एक बात बिल्कुल सच है कि भले ही गुलाबी नाटक कर रही थी लेकिन उसे अपनी भैया के लंड से मजा भी आ रहा था अपनी बहन को इस तरह से दर्द में तड़पता हुआ देखकर हरिया उसी तरह से रुक गया और वह बोला,,,)

कुछ नहीं कुछ नहीं गुलाबी कुछ नहीं,,, बस थोड़ा सा सब्र रख,,, अभी देखना कितना मजा आता है,,(पर इतना कहने के साथ है कि वह आगे की तरफ झुक कर अपनी बहन की चूची को मुंह में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया वह इस तरह से उसे आनंद देने की कोशिश कर रहा था ताकि वह फिर से उत्तेजित होने लगी और बारी-बारी से उसके दोनों कश्मीरी सेव को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दियागुलाबी को अभी भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन थोड़ी देर बाद वह ऐसा नाटक करने लगे कि उसे अपनी भैया की चूची चटाई पर बहुत मजा आ रहा है और वह धीरे-धीरे गरम सिसकारी लेने लगी और उसकी गर्म सिसकारी को सुनकर लहरिया बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है गुलाबी,,,

बहुत अच्छा लग रहा है भैया,,,

मैं कहता था ना बहुत मजा आएगा,,,, बोलो तो आगे बढ़ु वरना निकाल लो,,,।

नहीं नहीं भैया ऐसा मत करना निकालना नहीं,,,

तो बोलो ना अब क्या करूं,,,

वही जो भाभी के साथ करते हो,,,

भाभी के साथ क्या करता हूं जरा अपने मुंह से तो बताओ,,,

चुदाई,,,,(गुलाबी एकदम परिसर में बनते हुए बोली क्योंकि से बहुत मजा आ रहा था और अपने भैया के तेज झटकों को अपनी बुर के अंदर महसुस करना चाहती थी,,, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,) चोदो भैया मुझे चोदो,,,,

अपनी बहन की मदहोशी और उसकी बात सुनकर हरिया के होठों पर मुस्कान आ गई और वह बोला,,,

यह हुई ना बात अब देखना कितना मजा आता है,,,

(और इतना कहने के साथ ही हरिया अपने लंड को अंदर बाहर करके अपनी बहन की चुदाई करना शुरू कर दिया झोपड़ी के अंदर भाई-बहन का पवित्र रिश्ता तार-तार हो रहा था लेकिन इस रिश्ते के बारे में अब दोनों को बिल्कुल भी परवाह नहीं थी बस आप वह दोनों भाई बहन नहीं बल्कि एक मर्द और औरत हो चुके थे,,,,हरीया धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,, बार-बार वह अपनी बहन की चूची को मसलते हुए उसे मुंह में लेकर पीना शुरु कर दे रहा था,,, गुलाबी को बहुत मजा आ रहा था भले ही राजू से उसके पीछा कर लेंगे थोड़ा पतला हो थोड़ा छोटा था लेकिन अनुभव से भरा हुआ था,,,,,

फच फच की आवाज से पूरी झोपड़ी गुंज रही थी,,,, गुलाबी अपने भाई का साथ देते हुए अपने हाथ को आगे बढ़ा कर उसकी जनों को सहला रही थी और बार-बार थोड़ा ऊपर नजर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच देख ले रही थी,,,वह बड़े आराम से अपनी बुर में अपने भैया का लंड अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी,,,,। हरिया रह रह कर बड़ी तेजी से धक्के लगाता था और फिर एकाएक अपनी रफ्तार को कम कर दे रहा था वह यह जताना चाहता था कि औरतों को तेज धक्के में ही ज्यादा मजा आती थी,,,,।बगुला पीके खूबसूरत चेहरे को जो कि पसीने से पूरी तरह से तरबतर हो चुका था उसे देखते हुए बोला,,,।

बोलो मेरी बहन कैसा लग रहा है,,,

बहुत अच्छा लग रहा है भैया ऐसा सुख मैं कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे मिलेगा,,,,(हरिया जानबूझकर धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था इसलिए गुलाबी बोली) धीरे-धीरे नहीं भऐया जोर जोर से धक्के लगाओ,,,

(इतना सुनते ही हरिया मुस्कुराने लगा और बोला)

देखी मैं कहता था ना तेज धक्के में ही ज्यादा मजा आता है,,,।

हां भैया तुम सच कहते थे देशभक्तों में ही ज्यादा मजा आता है लेकिन कहीं तुम्हारा लंड फिर से दुखने लगा तो,,,

कोई बात नहीं तू है ना मालिश कर देगी,,,

(इस बात पर दोनों हंसने लगे दोनों को बहुत मजा आ रहा था हरिया एक ही स्थिति में है अपनी बहन की जबरदस्त चुदाई कर रहा था गुलाबी को यकीन नहीं हो रहा था किसी से तेरे से को बाहर छोटे से छेद से देख कर मस्त हो जाती थी और अपनी भाभी की जगह अपने आप की कल्पना करती रहती थी वह दृश्य इस कदर वास्तविक में बदल जाएगा,,)

और गुलाबी में कहता था ना कि देखना तेरे छोटे से छेद में मेरा मोटा लंड आराम से चला जाएगा,,,

हां भैया तुम सच कहते थे मुझे तो इस बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था लेकिन तुम मुझे लगता है धीरे-धीरे सब कुछ सिखा दोगे,,,

तू चिंता मत कर मैं तुझे धीरे-धीरे इस कला में माहिर खिलाड़ी बना दूंगा,,,,(और इतना कहकर जोर जोर से धक्के लगाने लगा,,,)

भैया धक्का लगाते हुए मेरी चूची को पियो मुझे और मजा आता है,,,।

क्या बात है गुलाबी ले तेरी ख्वाहिश अभी पूरी कर देता हुं,,,( और इतना कहने के साथ ही वह अपनी बहन पर झुक गया और उसकी चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया साथ ही अपने धक्कों को भी जारी रखा,,,,इस दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी लेकिन दूसरी बार वह झड़ने के बेहद करीब पहुंच चुकी थी जिसकी वजह से उसकी गरम सिसकारियां की आवाज और ज्यादा तेज हो गई और उसके बदन अकड़ने लगा,,,)

ओहहह भैया मुझे कुछ हो रहा है,,,आहहहह और जोर जोर से धक्के लगा ओ,,,आआआाहहहहहह,आहहहहहह

(हर यह समझ गया था किसकी बहन का पानी निकलने वाला है इसलिए अपने धकको को तेज कर दिया था क्योंकि वह भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुका था,,, और वह भी देखते ही देखते जबरदस्त दो चार धक्कों के बाद दोनों का पानी एक साथ निकल गया,,, हरिया अपना पानी निकालते समय अपनी बहन को जोर से अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया था और गुलाबी भी अपनी बाहों का कसम अपने भैया की पीठ पर बढ़ा दी थी दोनों एक साथ झड़ने लगे थे और हरिया अपनी बहन के ऊपर ढेर हो गया,,,,गुलाबी पूरी तरह से मस्त हो चुकी हरिया भी ईस नए पन से पूरी तरह से मदहोश हो चुका था,,, थोड़ी देर बाद हरिया उठा और अपने कपड़े पहनने लगा,,, वासना का तूफान थम चुका था इसलिए शर्म के मारे अपने भैया से नजर नहीं मिला पा रही थी हरिया गुलाबी कि मनो स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बिना कुछ बोले झोपड़ी के बाहर निकल गया,,,गुलाबी जल्दी से अपने कपड़े पहने लगी वह मन ही मन मुस्कुरा दे रहे थे क्योंकि अब घर में ही उसे दो लंड मिल चुके थे जिससे वह जब चाहे तब अपनी प्यास बुझआ सकती थी,,,, वह कपड़े पहन कर झोपड़ी से बाहर निकली और बिना रुके जाते-जाते बोली,,,।

भैया खाना खा लेना और बर्तन लेकर आना मैं जा रही हूं,,,

(हरिया चित्र से समझ रहा था कि उसकी बहन शर्मा रही है इसलिए रुकना नहीं चाहती और वह कुछ बोला भी नहीं,,, गुलाबी के चले जाने के बाद वह खाना खाकर कुछ देर तक वही आराम किया और वापस घर आ गया,,।)
 
गुलाबी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने बड़े भैया से चुदवाएगी,,, क्योंकि वह अपने बड़े भैया की बहुत इज्जत करती थी उसके बड़े भैया भी उसका हर तरह से ख्याल रखते थे एक अपनी बेटी की तरह ही उसका पालन पोषण करके उसे बड़ा किए थे इसलिए गुलाबी के मन में अपने भैया के लिए बहुत इज्जत थी,,,, लेकिन वक्त और हालात के साथ रिश्ते भी बदलते रहते हैं ऐसा ही गुलाबी के साथ भी हुआ था,,। वह वक्त ,,माहोल और अपनी उपासना के अधीन होकर,,, अपने बड़े भैया के साथ शारीरिक संबंध बना ली थी जिसने उसे अत्यधिक आनंद की अनुभूति हुई थी,,,,,पहले अपनी भतीजी के साथ और सिर्फ अपने बड़े भैया के साथ शारीरिक संबंध बना कर वो पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी,,,



जिस अद्भुत काम क्रीडा को वह दीवार के क्षेंद से देख कर आनंदित होती थी और अपने हाथों से अपनी प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करती थी अब उसी काम क्रीड़ा का वह भरपूर मजा लूट रही थी,,,,,,,

हरिया का मन कभी-कभी अपनी छोटी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद कुंठित होने लगता था वह अपने आप पर गुस्सा करने लगता था,,, वह अपने मनोस्थिति को समझ नहीं पा रहा था,,, बार बार सोचता था कि आखिरकार वह ऐसा क्यों किया,,,, उसके मन में डर पैदा होने लगा कि अगर यह बात किसी को पता चल गई तो समाज में उसकी क्या इज्जत रह जाएगी वह तो कहीं का नहीं रहेगा,,,,फिर ऐसी गलती नहीं करेगा ऐसी कसम खाकर वहां अपनी दिनचर्या में लगा हुआ था,,,। धीरे-धीरे दिन गुजरने लगे थे,,,शुरु शुरु में तो वह गुलाबी से नजर तक नहीं मिला पाता था उससे बात करना छोड़ दिया था उसे इस बात का डर था कि कहीं वह अपनी बहन के सामने आएगा तो कहीं उसका मन फिर ना बदल जाए क्योंकि वह अपनी बहन की खूबसूरती का रस पहले ही पी चुका था वह अपनी बहन की खूबसूरती से अच्छी तरह से वाकिफ था वह अपनी बहन के बदन के हर एक अंग से वाकिफ हो चुका था उसमें से झड़ रहे मदन रस का वह रसपान कर चुका था,,,, इसलिए उसे इस बात का डर था कि कहीं वह दोबारा,, अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध ना बना ले,,, इसलिए वह गुलाबी से कतराता रहता था,,,।



गुलाबी कोअपनी और अपने बड़े भैया के बीच की शारीरिक संबंध को लेकर किसी भी प्रकार का मलाल नहीं था,,, वह तो इस रिश्ते के चलते बहुत खुश थी वरना वह आपने शादी का इंतजार कर रही थी कि कब उसकी शादी हो और कब उसे रोज चुदवाने को मिले लेकिन अब घर में ही दो दो लंड का बंदोबस्त हो चुका था हालांकि अपने भैया के साथ एक ही बार शारीरिक संबंध बनाए थे लेकिन रोज रात को अपने जवान भतीजे के साथ अपनी बुर की गर्मी शांत करती थी,,,,,,,।

राजू और सोनी के बीच चुदाई का खेल बिना किसी रूकावट के जारी था ,,, जिसकी भनक अब तक किसी को भी नहीं थी,,,, लेकिन राजू के मन में झुमरी बस गई थी,,,,,, उसका सादगी पर उसका भोलापन पूरी तरह से उसे अपना दीवाना बना दिया था,,,, दिन-रात राजू के जेहन में केवल झुमरी ही नाच रही थी,,, राजू बार-बार उस दृश्य को याद करके मस्त हो जाता था जब वह श्याम को बुलाने के लिए उसके घर पहुंचा था उसे अंदाजा नहीं था कि श्याम के घर पर उसे बेहतरीन नजारा देखने को मिलेगा,,,,। बार-बार झुमरी का नंगा बदन राजू के जेहन में उत्तेजना की लहर दौडा रहा था,,, राजू कभी सोचा भी नहीं था कि उसे इस तरह का दृश्य देखने को मिलेगा,,,,,, झुमरी से उसकी मुलाकात बहुत ही कम होती थी लेकिन तब उसका नजरिया एकदम साफ सुथरा था लेकिन जब से औरतों की संगत में पड़ा था तब से उसका औरतों लड़कियों को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल गया था,,,। झुमरी को एकदम नंगी नहाता हुआ देख कर पहली बार से ऐसा हुआ था कि झुमरी बिना कपड़ों के बेहद खूबसूरत लगती है उसका अंग-अंग तराशा हुआ था,,,। खास करके उसकी गोलाकार खरबूजे जैसी मदमस्त कर देने वाली गांड जो कि बेहद नपे तुले आकार में थी,,,। जिसे देखते ही राजू की आंखों की चमक बढ़ गई थी,,। राजू का मन उस समय झूमरी की नंगी गांड को अपने दोनों हाथों ने दबोचने को कर रहा था,,,लेकिन ऐसा कर सके नहीं कि उसने हिम्मत उस समय बिल्कुल भी नहीं हो रही थी काफी देर तक झुमरी उसी अवस्था में नंगी नहाती रही उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि पीछे खड़ा राजू उसके खूबसूरतयौवन का रस अपनी आंखों से पी रहा है,,,।



राजू के कानों में बार-बार उसके कहे गए शब्द मिश्री से भूल जाते थे जब वह उसे से कही थी कि देख लिया ना अब जा,,,लेकिन राजू उसके कहे गए गई इन शब्दों का मतलब समझ नहीं पा रहा था,,, दिन रात वह झुमरी के उन शब्दों का मतलब को ढूंढता रहता था लेकिन उसे किसी भी प्रकार का निष्कर्ष नहीं मिल पा रहा था,,,, लेकिन वह अपने मन में यही विचार करता था कि,,, अगर उसकी जगह कोई और लड़की होती तो उसे भला-बुरा कहती उसे डांटती उसे धमकाती,,, क्योंकि वह उसे नग्नावस्था में देख रहा था,,,लेकिन उसका यह कहना कि देख लिया ना अब जा इसी के मतलब को वह समझ नहीं पा रहा था,,,,वह फिर अपने ही मन में यही सोचता रहता कि क्या झुमरी जानबूझ कर उसे अपने नंगे बदन का दर्शन करा रही थी,,,, क्योंकि जब वह उसे नहाते हुए देखा था तब उसकी पीठ दरवाजे की तरफ से और चेहरा सामने की तरफ ऐसे में सिर्फ उसके मदमस्त कर देने वाली चिकनी पीठ के साथ-साथ उसकी खूबसूरत गांड नजर आ रही थी,,, लेकिन राजू की तरफ देखने पर भी वह अपने बदन के किसी भी हिस्से को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं की थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वो जानबूझकर अपने दोनों नारंगीयो के साथ-साथ अपनी लहसुन को दिखा रही हो,,, और राजू भी इस भरपूर नजारे का पूरा मजा लेते हुए उसके बदन के हर एक अंग के नाप को अपनी आंखों से नाप लिया था ,,,। उसके नाम लाल होठ उसकी खूबसूरत मुस्कान सब कुछ राजू अपने आंखों में और अपने दिल में कैद कर लिया था,,,। इसलिए तो जब जब झुमरी की याद आती थी उसके पहचानने में तंबू बन जाता था और इस समय भी उसका यही हाल था,,,वह किसी ना किसी बहाने शाम के घर जाने लगा था लेकिन उसे झुमरी कहीं नजर नहीं आती थी,,,, उत्तेजना के मारे उसके बदन में आग लगी हुई थी,,, इसीलिए वह कमला चाची के घर पहुंच गया,,,। क्योंकि इस समय कमला चाची ही उसके बदन की गर्मी को शांत कर सकती थी वैसे भी,,, राजू की संभोग गाथा में सर्वप्रथम कमला चाची का ही वर्णन था और वही उसे संभोग कला सिखाने मैं मदद की थी,,,,।



थोड़ी ही देर में राजू कमला चाची के घर के बाहर दरवाजे पर पहुंच गया और बाहर से ही आवाज लगाते हुए बोला,,,।

कमला चाची वो कमला चाची घर पर हो कि नहीं,,,।

(इस आवाज को कमला चाची की बहू रमा अच्छी तरह से पहचानती थी,,, वह समझ गई कि राजु आया है,,, उसके बदन में गुदगुदी होने लगी क्योंकि वह अच्छी तरह से समझती थी कि उसका घर पर आने का क्या मकसद होता है वह जरूर सासु मां को चोदने है इस ख्याल से ही उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी,,,वह गेहूं साफ कर रही थी,,,, इस समय घर पर उसकी सांस नहीं थी इसलिए वह मन ही मन खुश होने लगी,,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें,,,, फिर से आवाज आई,)

कमला चाची,,,,,, कमला चाची,,,,,,।

(तभी दरवाजा खुला और सामने कमला चाची की बहू रमा नजर आई वह बड़ी हिम्मत जुटाकर दरवाजा खुली थी क्योंकि उसे इस बात का अहसास था कि राजू उसकी सास की चुदाई करने के लिए ही आया है और इस समय उसकी सास नहीं है पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा होगा,,, अपनी सास की गैरमौजूदगी में रमा का दिल जोरों से धड़क रहा था उसके भी अरमान मचल रहे थे क्योंकि महीनों गुजर गए थे उसका पति घर पर नहीं था ऐसे में उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होना जायज था,,,,)

माजी तो घर पर नहीं है,,,,

कहां गई है चाची,,,,

किसी काम से गई हैं समय लग जाएगा,,,,

ठीक है तो मैं चलता हूं फिर कभी आ जाऊंगा,,,,(बड़े गौर से घूंघट के अंदर के खूबसूरत चेहरे को देखने की कोशिश करता हुआ राजू बोला लेकिन घूंघट की वजह से उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था लेकिन उसकी गोलाकार छातियां जवानी की पूरी किताब के पन्ने पलट रही थी जिसे ऊपर से ही पढ़ कर राजू मस्त हुआ जा रहा था,,,,)

कोई काम था क्या,,,?



नहीं ऐसे ही चाची से बस मिलने आया था यहीं से गुजर रहा था तो अब नहीं है तो फिर कभी आ जाऊंगा,,,

अरे ऐसे कैसे जा रहे हो,,, मैं तो हूं ना,,,,,अगर मां जी को पता चला कि तुम आए थे और बिना रुके चले गए तो हो सकता है मुझ पर नाराज हो जाए इसलिए पानी पी कर ही जाना,,,,,,,।

ठीक है भाभी तुम इतना कहती हो तो पी लेता हूं,,,,

आ जाओ,,,,(इतना कहने के साथ ही रमा एक तरफ खड़ी हो गई ताकि राजू अंदर आ सके और राजू भी कमरे के अंदर प्रवेश कर गया,,,, राजू के कमरे में प्रवेश करते ही रमा दरवाजा बंद कर दि,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, घर में केवल रमा और राजू ही थे,,,और रमा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि वैसे ही उसकी गैरमौजूदगी में उसकी सांस उसे घर में अपने कमरे में बुलाकर जबरजस्ती दवाई थी जिसे वह अपनी आंखों से देख कर पानी पानी हो गई थी रमा अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसकी सास उम्र दराज होकर भी एक जवान लड़के का लंड लेकर ईतनी मस्त हो गई थी,,तो वह तो अभी पूरी तरह से जवान है उसके साथ राजू क्या करेगा,,,,। इस बात को सोच कर ही उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, धड़कते दिल के साथ रमा दरवाजा बंद कर दी,,,,, और राजू खुद ही खटिया गिरा कर उस पर बैठ गया,,, जब वह दरवाजा बंद कर रही थी तो राजू की प्यासी नजरें उसकी उभरी हुई गांड पर ही टिकी हुई थी,,,, औरतों की संगत में अब राजू को हर एक औरत में केवल अपनी प्यास बुझाने का सामान ही नजर आता था,,, रमा की उभरी हुई गांड राजू के पजामे में हलचल मचाने लगी,,,, दरवाजा बंद करके वह राजू की तरफ देख कर घूंघट के अंदर ही मुस्कुराने लगी और घर के अंदर चली गई,,,।

रमा केअंदर जाते ही राजू अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसे कमला चाची की बहू चोदने को मिल जाती तो बहुत मजा आ जाता,,,,,,और कमरे के अंदर पहुंचकर रामा यह सोच रही थी कि ऐसा क्या किया जाए कि राजू उसे चोदने के लिए मजबूर हो जाए क्योंकि सामने से यह कहना कि वह चुदवाना चाहती है यह उसके लिए शर्म की बात होती लेकिन उसके बदन की जरूरत इस समय राजू के प्रति आकर्षित कर रही थी,,,,वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जब राजू जैसा जवान लड़का उम्रदराज औरत को इतनी मस्ती के साथ चोद सकता है तो वह तो पूरी तरह से जवान है उसे चोदने के लिए वह तो तडप उठेगा बस हल्का सा इशारा करने की देरी है,,,, बस फिर क्या था रमा अपने अंदर की औरत को जगाने लगी और किसी भी तरह से राजू से संभोग सुख प्राप्त करने के लिए मचल उठी और उसके जुगाड़ में लग गई,,,,,,,।



राजू बाहर खटिया पर बैठा हुआ बड़ी बेसब्री से रमा भाभी का इंतजार कर रहा था उसकी एक झलक पाने के लिए,,, तड़प रहा था,,,,, और यही हाल रमा का भी था,,, इसलिए वहएक गिलास में ठंडा पानी और एक कटोरी में थोड़ा सा गुड लेकर कमरे से बाहर आई,,,अभी भी उसने घूंघट पूरी तरह से नहीं उठाई थी केवल उसके लाल लाल होंठ नजर आ सके बस इतना ही घूंघट ऊपर की तरफ उठाई थी,,,। रमा को गुड़ और पानी लाता देखकर,,, राजू औपचारिक रूप से बोला,,,।

अरे इसकी क्या जरूरत थी भाभी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो इतनी खातिरदारी कर रही हो,,,

नहीं-नहीं राजू मुझे इतना तो करना ही होगा वरना माजी को पता चलेगा तो वह क्या बोलेंगी,,,,,,,

अरे भाभी कुछ नहीं बोलूंगी कमला चाची बहुत अच्छी है,,,

मैं तो जानती हूं कमला चाची बहुत अच्छी है,,,,(रमा अपने मन में ही बोली चुदवाती है इसीलिए,,,) इसीलिए तो उन्होंने मुझको सहेज के रखा है कि जब भी कोई द्वार पर आ गई तो उसे यूं ही वापस नहीं भेजना चाहिए,,,

वाह भाभी, कमला चाची के विचार बहुत ही उच्च कोटि के है,,,,,

(काम भी उच्च कोटि के हैं रमा अपने मन में ही बोली,,, राजू कटोरी में से गुड़ का एक टुकड़ा उठाकर उसे मुंह में डालकर खाने लगा,,,, और घूंघट में झांकने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

बहुत ही मीठा गुड़ है भाभी,,,,,

अपने खेत के गन्ने के रस से बना हुआ पुल है इसलिए बहुत स्वादिष्ट है,,,

सच में कमला चाची के रस से बना गुड़ बहुत मीठा है,,,

कमला चाची के रस से नहीं गन्ने के रस से बना गुड़ है,,,(रमा व्यंग कसते हुए बोली,,,)

हा हा,,, वही,,,, आप मजाक बहुत करती हो भाभी,,,

तुम जैसे देवर होंगे तो भाभी तो मजाक करेगी ही,,,

चलो यह तो अच्छा है कि तुम मुझे अपना देवर मानती हो,,,

पूरे गांव भर में तुम ही अच्छे लड़के हो जिसे मैं देवर का दर्जा दे रही हुं,,,,

तब तो मैं बहुत खुश नसीब हु भाभी,,,





खुशनसीब तो मैं हूं जो तुम जैसा देवर मिला है,,,,

(राजू को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि एक ही दिन में जिससे इतना जान पहचान भी नहीं है वह इतना अपनापन क्यों दिखा रही है लेकिन कुछ भी हो रामा की बदन की बनावट उसका गोरा रंग राजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को हवा दे रहा था,,,, रमा भी उसके खूबसूरत चेहरे को बड़े गौर से देख रही थी वाकई में राजू के चेहरे पर मासूमियत और भोलापन दोनों बराबर मात्रा में थी और बदल उसका बेहद गठीला था रमा उसके मासूमियत भरे चेहरे को देखकर,,, यकीन नहीं कर पा रही थी कि जो उस दिन अपनी आंखों से देखी थी वह सच था,,, क्योंकि जिस तरह से वह तेज-तेज अपनी कमर हीलाते हुए धक्के लगाकर उसकी सासु मा को चोद रहा था वह मासुम बिल्कुल नहीं हो सकता,,, रमा की आंखों ने अपनी सास की चुदाई करते हुए जो कुछ भी देखा थाउसने बिल्कुल की रहने की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि उसकी कमर ताबड़तोड़ चल रही थी,,,, उसके तेज धकको का उसकी सास भी बड़ी बेशर्मी से मजा ले रही थी,,,। उस दृश्य के बारे में सोच कर रमा की बुर गीली हो रही थी,,,, राजू की नजर उसकी छातियों की गोलाईयों पर थी जिसे अपने हाथों में दबोच कर उसे दबाने का मन कर रहा था उसके लाल-लाल होठों पर अपने होठों पर रखकर पीने को हो रहा था,,, वह अपने मन में यही सोच रहा था कि जब कमला चाची इतना मजा दे सकती है तब रामा कितना मजा देगी,,,, दूसरी तरफ रमा भी पूरी जुगाड़ में थी,,,,पता नहीं आज के जैसा उसे मौका मिल पाता या नहीं इसलिए वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी क्योंकि उसकी सास शादी की रस्म में पड़ोस में गई हुई थी,,,,जोकि ज्यादा देर के लिए नहीं गई थी वह कभी भी आ सकती थी लेकिन रमा के पास इतना तो समय था कि वह अपनी बदन की प्यास राजू से बुझा ले,,,,,,, इसलिए वह राजु के ऊपर अपनी जवानी का जलवा बिखेर देना चाहती थी,,,, ओर इसीलिए वह पानी के ग्लास को नीचे रखने के बहाने झुकी और उसके झुकते ही,,,,उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचियों का नजारा राजु की आंखों से बच नहीं सका,,, रामा ने पहले से ही अपनी चुचियों का नजारा दिखाने के उद्देश्य से ही अपने ब्लाउस के उपर के दो बटन को खोल दी थी जिसकी वजह से उसके झुकते हुए उसके दोनों खरबूजे एकदम से आधे से ज्यादा बाहर को लटक गए,,,,।

ब्लाउज में से बाहर झांकते उसके दोनों कबूतरों को देखकर,, राजू के खुद के पर फड़फड़ाने लगे उसके पजामे में हलचल होने लगी,,, वह कभी सोचा नहीं था कि इतनी आसानी से उसे रमा भाभी की चूचीया देखने को मिल जाएगी,,,,,, उसकी चुचियों के साथ-साथ दोनों सूचियों की शोभा बढ़ा रहे उसके दोनों अंगूर भी नजर आ रहे थे जिसे मुंह में लेकर चबा जाने की इच्छा हो रही थी,,,।

रमाअपनी चुचियों का भरपूर मजा आ रहा है उसे दिखा देना चाहती थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अगर दोनों के बीच कुछ हो सकने की संभावना को बढ़ा सकती है तो उस समय इसलिए किया ही नहीं जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ जाएगा और वह उसके साथ चुदाई करने के लिए तड़प उठेगा,,,,,, राजू की आंखें फटी की फटी रह गई थी बेहद खूबसूरत चुचियां उसके हौसले को बढा रही थी,,, राजू पानी पीना भूल गया था और उसकी हालत को देखकर रामा को शर्म तो आ ही रही थी लेकिन उसके तन बदन की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसे लगने लगा था कि अब जरूर कुछ,,,वह अपने मन में ठान लेते कि जब उम्र नाराज होकर भी उसकी सासू मां ने जमा लड़के से चुदाई का भरपूर मजा लूट रही है तो वह क्यों नहीं वैसे भी,,, उसका पति कुछ महीनों से बाहर गया हुआ था,,, इसलिए उसकी भी दोनों टांगों के बीच गर्मी कुछ ज्यादा बढ़ गई थी जिसे शांत करना बेहद जरूरी हो गया था,,,,।,,

भ,,,भ,,,भ,, भाभी,,, तुम्हारी चुचीया तो बाहर आ गई,,,।

(राजू आंखें फाड़े उसकी चूचियों की तरफ देखते हुए बेशर्मी भरे शब्दों में बोला वह बिल्कुल भी अपने शब्दों को छुपाने की कोशिश नहीं किया था क्योंकि वहां अच्छी तरह से जानता था कि रमा कुछ महीने से अकेले ही हैं पति की संगत उसे प्राप्त नहीं हुई है और ऐसे में वह प्यासी जरूर होगी,,,, कुछ इस तरह से वह अपनापन दिखाते हुए उससे बातें कर रही थी राजू को लगने लगा था कि यहां पर भी जरूर उसकी दाल गल जाएगी,,,और औरतों की संगत में रहकर औरत के मन में क्या चल रहा है इसकी पहचान उसे होने लगी थी वह समझ गया था कि यह रामा प्यासी है,,,,राजू किस तरह की बातें सुनकर रामा एकदम से शर्म आ गई थी क्योंकि इस तरह की बातें उससे आज तक किसी ने नहीं किया था,,,, लेकिन अंदर ही अंदर वह भी तो यही चाहती थी,,,,,, राजू के मुंह से चूची शब्द सुनकर उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी,,,, वह एकदम शरमाते हुए बोली,,,,,,)

हाय दैया,,,, यह भी बड़ी बेलगाम हो गई है कहीं भी निकल जाती है,,,(अपने साड़ी के आंचल से उसे छुपाने की कोशिश करते हुए बोली तो राजू बोला)

लगता है तुम्हारी चुचीया बड़ी बड़ी है इसलिए ब्लाउज में नहीं समा पाती,,,,,,(राजू एकदम खुलकर बातें कर रहा था)

हाय भैया कैसी बातें करते हो,,, तुम्हें लाज नहीं आती,,,

लाज कैसी भाभी जो सच है वही तो बोल रहा हूं,,,, तुम्हारी चूचियां सच मे बड़ी-बड़ी है,,,,

नहीं नहीं इतनी भी बड़ी नहीं है जैसा तुम बोल रहे हो,,,

नहीं भाभी मैं सच कह रहा हूं बड़ी बड़ी है तभी तो अपने आप ब्लाउज के बटन खोल कर बाहर आ गई उसका वजन तुम्हारे ब्लाउज से संभाला नहीं जा रहा है,,,,।

(राजू की उत्तेजना भरी बातें सुनकर रमा की बुर गीली होने लगी थी,,, वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि राजू बातों का जादूगर है उसके शब्दों में बहुत ज्यादा उत्तेजना होती है तभी तो वह जिस तरह से बातें कर रहा था उस तरह से उसके पति ने भी बातें नहीं किया था रमा अपने मन में सोचने लगी कि वह तो अपनी बातों से ही उसकी बुर को पूरी तरह से गीली कर दिया है,,,।)

नहीं-नहीं राजू,,,,, इस तरह से बातें मत करो मुझे शर्म आती है पानी पी लो,,,,।

(राजू अब तक के अनुभव से यही सीखा था कि औरतों के नानू कर में ही उसकी हामी होती हैअच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी बात है उसे बुरी लगती तो वहां कब से उसे यहां से जाने के लिए कह चुकी होती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं कह रही थी बस शर्मा रही थी इसलिए राजू को लगने लगा था कि अब उसके दोनों हाथ में फिर से लड्डू आ गया है,,,, और वह भी बेहद स्वादिष्ट,,,)

अब तो मेरी प्यास पानी से नहीं बुझने वाली भाभी,,,

यह क्या कह रहे हो राजू इस तरह से बातें मत करो,,,(घूंघट में ही अपनी खूबसूरत चेहरे को छिपाए हुए रमा बोली)

जो भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं भाभी मेरी एक-एक बात में सच्चाई है तुम बहुत खूबसूरत है मैंने आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,,।

(राजू की इस तरह की बातें सुनकर रामा मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि वह उसकी खूबसूरती की प्रशंसा कर रहा था और दुनिया में ऐसी कौन सी औरत है कि जो अपनी खूबसूरती की प्रशंसा नहीं सुनना चाहेगी उसे राजू की बातें अच्छी लग रही थी लेकिन ना जाने क्यों से डर लगने लगा था इसलिए वह उससे बोली,,,)

नहीं नहीं राजू इस तरह से बातें मत करो तुम पानी पी कर चले जाओ वरना मेरी सांस आ जाएगी,,,

तुम्हारी सास आ जाएगी तो क्या हुआ,, मै पराया थोड़ी हूं और वैसे भी,,,तुम ही ने अभी मुझे अपना देवर बनाया है और देवर का इतना तो हक होता ही है,,,(इतना कहते हुए राजू उसका हाथ पकड़ लिया और वह एकदम से शर्मा कर सिहर उठी,,, उसके पति के बाद आज किसी और ने उसकी कलाई थामी थी,,, और इसीलिए एक मर्दाना हाथों में अपनी कलाई पाते ही वह एकदम से सिहर उठी,,,)

आहहहहह,,,राजु,,,, मेरी कलाई दुखने लगी है कितनी जोर से पकड़े हो,,,(अपने हाथ को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली)

मेरा तो मन कर रहा है कि तुम्हारे हाथ को जिंदगी भर ना छोडु,,,।

आहहहह,,, राजू तू बड़ा बेशर्म है अभी जा यहां से,,,।

(ना जाने क्यों अब रमा को डर लगने लगा था उसे शर्म आ रही थी अब तक वह राजू से सब कुछ करवा देने के जुगाड़ में लगी हुई थी और सब कुछ होता देख कर ना जाने क्यों उसके मन में घबराहट हो रही थी,,,, लेकिन राजू भी औरतों की संगत में पक्का खिलाड़ी बन चुका था रमा के मन की बात को वह अच्छी तरह से समझ रहा था,,, रमा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

राजू तु पानी पी और जा यहां से कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,,

ठीक है भाभी तुम कहती है तो मैं चला जाऊंगा लेकिन उसके पहले तुम्हें मेरी बात सच है कि गलत यह दिखाना होगा ,,

,कौन सी बात,,,,,?

यही कि तुम्हारी चूचियां छोटी-छोटी है या बड़ी बड़ी,,,

धत्,,,, पागल हो गया है क्या,,,

हां भाभी में पागल हो गया हूं तुम्हारी खूबसूरती देखकर तुम्हारा उसने देख कर मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूं,,,।

(रमा को डर भी लग रहा था और राजू की बातें सुनकर उसे प्रसन्नता भी हो रही थी उसे मजा भी आ रहा था किसी जवान लड़के ने पहली बार उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था,,,,)

नहीं-नहीं राजू जो तू कह रहा है वह ठीक नहीं है तू जा यहां से,,,

तो चलो ठीक है मैं भी यहीं बैठा रहता हूं कोई आएगा तो कह दूंगा कि भाभी ने हीं मुझे बुलाई थी,,,।

(इतना सुनते ही रमा के तो होश उड़ गए और वह बोली)

कितना बेशर्म और हटिला है तू,,,

चला जाऊंगा बस दिखा दो एक बार,,,,

तो बहुत जिद कर रहा है,,,(इतना कहते ही राम अपने मन में सोचने लगी कि वह है क्या कर रही है और शिकार हुआ अभी तो उसे अपना सब कुछ सोचना चाहती थी और इसीलिए तो वह उसे अंदर बुलाई थी और आज जब सब कुछ सही होने जा रहा है तो वह खुद ही इंकार कर रही है ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके अंदर से ही आवाज आ रही थी कि रमैया क्या कर रही है ऐसा अच्छा मौका तुझे फिर कभी नहीं मिलने वाला है और वैसे भी अगर तेरी सास देख भी जाती है तो तू भी तो कह सकती है कि वह खुद ही राजू के साथ चुदवाती है और वह अपनी आंखों से भी देख चुकी है दोनों का राज राज ही रह जाएगा ना उसे कोई शिकायत रहेगी ना तुझे कोई भी ऐसा मौका हाथ से जाने मत देन रमा इस मौके का फायदा उठा,,, रमा अपने मन की बात को सुनते हुए बोली)

ठीक है अच्छा मैं तुझे दिखा देती हूं लेकिन इसके बाद तु चले जाना,,,( रमा यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि अगर वह राजू को अपनी चूचियां दिखा देंगे कि किसी भी हारने वाला बिना उसकी चुदाई कीए वहां से जाने वाला नहीं है और यही वह चाहती भी थी,,,)

वाह भाभी मेरी अच्छी भाभी,,,(इतना कहने के साथ ही राजू खटिया पर से खड़ा हो गया और रमा घुंघट में अपने खूबसूरत चेहरे को छिपाए हुए अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी रमा का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह किसी गैर मर्द के सामने अपने कपड़े उतार रही थी,,,उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल बढ़ने लगी थी और देखते ही देखते उत्तेजना के मारे राजू के पजामे में तंबू बन गया था जिस पर रमा की नजर पड़ी तो उसके होश उड़ गए अब उसका मन मचलने लगा राजू के लंड को बुर में लेने के लिए,,,, धीरे-धीरे करके रमा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी और ब्लाउज के दोनों आंखों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अलग करते हैं अपनी मदमस्त कर देने वाली चुचीयों को राजू की आंखों के सामने नुमाइश करने लगी,,,, गोल गोल तनी हुई चुचियों को देखते ही राजू के मुंह में पानी आ गया,,, अब राजू को किसी के इजाजत की जरूरत नहीं थी क्योंकि एक तरह से रामा की तरफ से उसे निमंत्रण मिल गया था,,, अपने ब्लाउज के बटन खोल ना यह रमा की तरफ से राजू के लिए आमंत्रण ही था जिसे शहर से स्वीकार करते हुए फटी आंखों से राजू उसकी गोल-गोल चुचियों को देखे जा रहा था,,और इस तरह से अपनी चूचियों को दिखाते हुए रमा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, थोड़ी देर बाद वह बोली,,,)

बस अब हो गया ना अब जा यहां से,,,,(रमा चाहती तो बिल्कुल भी नहीं थी कि राजू वहां से चला जाए लेकिन फिर भी वहां औपचारिक रूप से उसे जाने के लिए कह रही थी लेकिन मन में यही चाहती थी कि वह रुका रहे और भला राजू कैसे जाने वाला था क्योंकि उसके आंखों के सामने खड़ा करते हुए दो कबूतर जो नजर आ रहे थे जिसका शिकार किए बिना वह वापस जाने वाला नहीं था,,, इसलिए राजू अपना कदम आगे बढ़ाते हुए बोला))

अब कैसे चला जाऊं भाभी मीठा गुड़ खिला दी हो,,, तो पानी कौन पिलाएगा लेकिन अब पानी नही ,,, मेरी प्यास तो तुम्हारा दूध पीकर ही बुझेगी,,,,

(इतना सुनकर रमा कुछ समझ पाते इससे पहले भी फुर्ती दिखाते हुए राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपने दोनों हाथों में धर्म की दोनों चूचियों को थाम लिया था और तुरंत उस पर मुंह लगाकर पीना शुरू कर दिया था यह रमा के लिए बिल्कुल असहनीय था वह ईसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी,,, वह छटपटाती इससे पहले ही वह पूरी तरह से राजू के काबू में आ गई थी,,, औरतों को कैसे काबू में किया जाता है यह कला राजू अच्छी तरह से जानता था बहुत भारी बारिश है बिना रुके उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था पल भर में ही रमा के मुंह से सिसकारी की आवाज निकालने लगी उसे मजा आने लगा था क्योंकि इस तरह से उसके पति ने कभी भी उसकी चुचियों को मुंह में लेकर पीया नहीं था,,, इसलिए यह हरकत रमा के लिए बेहद उत्तेजना कारक थी,,,,।

सससहहहह आहहहहहहहहह,,, राजू यह क्या कर रहा है,,,

तुम्हारी सेवा कर रहा हूं भाभी,,,

आहहहहहह यह कैसी सेवा है रे,,,

भाभी या भाभी की देवर के द्वारा की जाने वाली सेवा तुम्हारा कोई देकर नहीं है ना इसलिए तुम्हें अब तक इस सेवा से वंचित रहना पड़ा लेकिन आज तुम मुझे अपना देवर बना दिया अब तुम्हें इस तरह की सेवा बराबर मिलती रहेगी,,,(इतना कहने के साथ ही राजू दोनों हाथों से उसकी जोर-जोर से चूचियां दबाते हुए उसके अंगूर को मुंह में लेकर चूस रहा था,, वह जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी वह राजू के बाल को जोर से पकड़ कर उसे अपने दोनों चूचियों के बीच दबा रही थी,,,, और मजे लेते हुए सिसकारी की आवाज निकाल रही थी,,)

सससहहहह ,,आहहहहहहह,,,,,, राजू,,, चला जा यहां से किसी भी वक्त माजी आ जाएंगी,,,

तो क्या हुआ भाभी,,,,आज तो मैं कह कर लिया हूं कि तुम्हारी सेवा किए बिना मैं यहां से नहीं जाऊंगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर उसकी गोल-गोल कांड को अपने दोनों हथेलियों में दबाकर जोर-जोर से साड़ी के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया,,,, रमा के ऊपर दोनों तरफ से हमला हो रहा था और वह इस प्यार के लिए हमले को संभाल नहीं पा रही थी उसकी सिसकारी की आवाज बढ़ते ही जा रही थी दोनों चूचियां बारी-बारी उसके मुंह में आ रही थी और वह अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को जोर जोर से दबा रहा था,,,।

आहहहहहह राजु आहहहहहहह,,,,,ऊमममममममम,,,

(उसकी गरमा गरम शिकारियों की आवाज सुनकर राजू समझ गया था कि उसे भी मजा आ रहा है इसलिए वह बोला,,,)

कैसा लग रहा है भाभी,,,,

बहुत अच्छा लग रहा है राजू कि मुझे डर भी लग रहा है कहीं माजी आ गई तो गजब हो जाएगा,,,

ओहहहह भाभी कुछ नहीं होगा तभी तो कह रहा हूं जल्दी-जल्दी करने दो,,,,, तुम्हारी चूचियां बहुत रसीली है भाभी,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह रमा की साड़ी को खोलने लगा,,,)

औहहहह यह क्या कर रहा है राजू मेरी साड़ी क्यों उतार रहा है,,,

साड़ी उतारने के बाद ही तो मैं तुम्हारी अच्छी तरह से सेवा कर पाऊंगा भाभी,,,देवर भाभी की सेवा तकरीर अच्छी तरह से कर पाता है जब वह उसे अपने हाथों से नंगी करता है,,,।

(पर इतना कहने के साथ ही धीरे-धीरे राजू मामा की शादी को खोलकर नीचे जमीन पर गिरा दिया रमा भी उसे रोक नहीं रही थीक्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानते थे कि साड़ी उतार कर नंगी होने के बाद ही मजा ज्यादा आता है,,, राजू एक झटके में उसके साया का नाड़ा खोल दिया,, उसका साया भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरा,,,, पल भर में हीकमला चाची की बहू उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी खड़ी थी केवल ब्लाउज ही था जो की पूरी तरह से खुला हुआ था और उसे भी पीछे से अपनी बाहों में लेकर उसका ब्लाउज भी उतार दिया और पीछे से उसे अपनी बाहों में करते हुए उसकी दोनों चूचियों को दबा कर उसकी गर्दन पर चुंबन की बारिश कर दिया,,,,, राजू की हरकत से रमा पूरी तरह से पानी पानी हो गई,,,।

राजू अपने दोनों हथेलियों को उसके पूरे बदन पर इधर से उधर घुमाने लगा रमा को मजा आ रहा था उसका मजा बढ़ता जा रहा था धीरे-धीरे राजू की हथेली उसके पेट के नीचे की तरफ जा रही थी और रमा अच्छी तरह से समझती थी इसलिए अपनी दोनों टांगों को आपस में सटाकर अपने लहसुन को छुपाने की कोशिश करने लगी लेकिन राजू कहां मानने वाला था,,,, राजू भी ताकत दिखाते हुए अपने हाथों से उसकी टांग को खोल कर अपनी हथेली को उसकी दहकती हुई बुर पर रख दिया,,,,और उसे मसलने लगा,,, रमा एकदम से तिलमिला उठी,,,, राजू का लंड पजामे के अंदर पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया था जो कि बार-बार उसकी गांड के बीचोबीच रगड़ खा रहा था,,,। मोटे तगड़े लंबे लंड की रगड अपनी गांड पर महसुय करते ही उसकी राही सही शर्म भी जाती रही इतना तो अच्छी तरह से समझ गई थी कि राजू का लंड उसके पति से बहुत ज्यादा दमदार था,,, इसलिए बहुत तुरंत अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उसके पजामे में अपना हाथ डाल दी और उसके खाली लंड को पकड़ ली,,, उत्तेजना के मारे राजु का लंड बहुत गर्म था,,, जिसकी वजह से रमा की हालत खराब होने लगी राजू अच्छी तरह से समझता था कि रामा को क्या चाहिए इसलिए तुरंत अपने पजामे को उतार कर फेंक दिया,,, और नंगा ही उसके पीछे सट गया,,,



अब राजू का लंबा लंड बड़े आराम से उसकी गांड के बीचोबीच रगड़ खा रहा था और रमा पानी पानी हुए जा रही थी,,,। राजू भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि उसके हाथों में नई नवेली शादीशुदा औरत जो हाथ लग गई थी जिसकी खूबसूरती है उसकी मादकता भरी खुशबू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,। राजू धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके खिला रहा था मानो कि जैसे उसकी चुदाई कर रहा है और इस हरकत की वजह से रमा मदहोश हुए जा रही थी अभी भी उसके हाथ में राजू का लंड था जिसे वो धीरे-धीरे मुठिया रही थी,,,,। राजू उसकी पूर्व पर अपनी हथेली रखकर उसकी गुलाबी पत्तियों को मसलते हुए अपनी बीच वाली उंगली को उसकी बुर के अंदर डाल दिया और जैसे उसकी उंगली बुर के अंदर प्रवेश के वैसे ही उसकी दर्द भरी कराह फूट पड़ी,,,।

आहहहहह,,,,,,, धीरे से दुख रहा है,,,

क्या भाभी उंगली से इतना दर्द कर रहा है तो मेरा लंड कैसे लोगी,,,

जो भी करना आराम से करना,,,,।

(और इतना सुनते ही राजू का जोश दोगुना हो गया और वह जल्दी-जल्दी अपनी ऊंगली को उसकी बुर के अंदर बाहर करने लगा,,,, रमा पानी पानी हुए जा रही थी,,,, और थोड़ी देर बाद राजू रमा के ठीक सामने घुटने के बल बैठ गया और उसकी एक टांग उठाते हुए उसे अपने कंधे पर रख दिया ऐसा करने पर रमा की बुर सीधे उसके मुंह पर आ गई उर्वशी भी निकाल कर उसकी गुलाबी बुर के मदन रस को चाटना शुरू कर दिया,, रमा की मदहोशी और उत्तेजना बढ़ने लगी उसके मुख से बड़े तेजी से सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,।

ओहहहहह ,,,, राजू है क्या,,,आहहहहह,,,,आहहहहहह,,(रामा की उत्तेजना और मदहोशी बढ़ जाना जायस था क्योंकि उसके पति ने अब तक उसकी बुर को कभी चांटा नहीं था इसलिए राजू की इस हरकत पर वह पूरी तरह से मस्त हो गई मानो कि जैसे हवा में उड़ रही हो और राजू लगातार बार-बार अपनी जीभ को उसकी पुर की गहराई में अंदर बाहर करता हुआ उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, बिना चोदे ही राजू ने उसे 2 बार झाड़ चुका था,,,

रामा एकदम काम विह्वल होते जा रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी जल्द से जल्द उसकी बुर में लंड डालना जरूरी हो गया था,,,,।इसलिए राजू तुरंत खड़ा हुआ और एक बार उसके कंधों को पकड़कर उसे नीचे की तरफ बैठाने लगा क्योंकि जो क्रिया कुछ देर पहले वह कर रहा है वही किया हुआ चाहता था कि रमा भी करें,,,, लेकिन रमा उसका इरादा समझते ही थोड़ा आनाकानी कर रही थी,,,लेकिन राजू के समझाने पर वह मान गई और कुछ ही देर बाद बहुत बड़े मजे लेकर लॉलीपॉप की तरह राजू के लंड को मुंह में लेकर चूस‌ रही थी,,,,कमल चाचा की बहू कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस तरह से आनंद ले पाएगी और वह भी खुलकर अपने घर के आंगन में जो कि आसमान पूरी तरह से खुला हुआ था और केवल दीवाल से घिरा हुआ आंगन और दरवाजा लगा हुआ था और दरवाजा बंद था इस तरह से खुले में वह कभी मजा नहीं ली थी इसलिए उसका मजा और दुगुना होता जा रहा था,,,।

नई नवेली दुल्हन के गुलाबी होठों के बीच अपना लंड पाकर राजू अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए डर रहा था कि कहीं उसका पानी में निकल जाए इसलिए वह तुरंत अपने लंड को बाहर निकाला,,, और रमा को उसका कंधा पकड़ कर उठाने लगा,,,,।

कहां पर करोगे,,,

यही खटिया पर,,,

माजी आ गई तो,,,

आ गई तो क्या हुआ दरवाजा तो बंद है दरवाजा खुलने से पहले कपड़े पहन लेना,,,

ठीक है जल्दी करना,,,

तुम चिंता मत करो भाभी,,,

(राजू की बात सुनते हीउतावलापन दिखाते हुए खटिया पर पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को फैला दी,,, उसका सहयोग देखकर राजू बोला,,,)

यह हुई ना बात,,,(इतना कहने के साथ ही बाहर खटिया पर चढ़कर रमा की दोनों टांगों के बीच में जगह बना कर नीचे अपना दोनों हाथ ले जाकर उसकी गांड को पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींच कर अपने लिए व्यवस्था करने लगा और अगले ही पल अपने लंड के मोटे सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखकर हल्का सा धक्का लगाया बुर पहले से ही मिली थी इसलिए चिकनाहट पाकर,,, मोटा सुखाड़ा अंदर की तरफ सरकने की कोशिश करने लगा,,, लेकिन सुपाड़ा मोटा था और अब तक रमा अपने पति के पतले लंड से चुदते आ रही थी इस बार उसका किसी असली मर्द से पाला पड़ा था इसलिए उसके चेहरे पर दर्द के भाव नजर आने लगे,,, राजू संभोग क्रिया का पक्का खिलाड़ी बन चुका था इसलिए वो धीरे धीरे कोशिश करते हुए आगे बढ़ने लगा और आखिरकार कामयाबी पाते हुए रामा की गुलाबी बुर के छेद में अपना मोटा सुपाड़ा प्रवेश करा ही दिया,,,, रमा के मुंह से दर्द भरी कराह टूट पड़ी,,,।

आहहहहहह,,,,,

बस बस भाभी हो गया,,,(और इतना कहने के साथ ही धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर की तरफ सरकाना शुरू कर दिया,,,, इसके बाद तो देखते ही देखते राजू का लंड रामा की बुर के अंदरूनी सारी अड़चनों को दूर करता हुआ आगे बढ़ता चला गया राजू का लंड ईतना मोटा था कि धमाकों अपनी बुर की अंदर की दीवारों पर उसकी रगड़ साफ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसका आनंद बढ़ता जा रहा था,,,



और इस बार राजू अपना सारा अनुभव काम में लगा था वह एक करारा झटका मारा और इस बार उसका नंबर पूरी तरह से विजई पताका लेना था वह उसकी बुर की गहराई में गड गया,,,,,, इस बार राजू का लंड रमा के बच्चेदानी को छू गया था ईसलिए रमा के तन बदन में उत्तेजना कि वह फुहार उठने लगी जैसा कि उसने अभी तक अनुभव भी नहीं की थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,राजू को समझते देर नहीं लगी कि जब सब कुछ हाथ में है इसलिए वह अब हल्के हल्के धक्के लगा कर रमा की चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,।

ओहहहह भाभी अब कैसा लग रहा है ,,, ( अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को थाम कर उसकी चुदाई करता हुआ बोला,,,)

ओहहहहह मेरे प्यारे देवर बहुत मजा आ रहा है बहुत अच्छा लग रहा है,,,,

ओहहहह भाभी तुम्हारी खुशी में तो मेरी खुशी है भाभी,,, देखना अब यह देवर तुम्हारी कैसी सेवा करता है,,,(और इतना कहने के साथ ही अपना दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर उसकी चुचियों को थाम लिया और जोर जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया,,, फच फच की आवाज से पूरा आंगन गूंज रहा था,,, लेकिन उस आवाज को इस खडई दुपहरी में सुनने वाला कोई नहीं था,,,‌,,, चरर,,,मरर की आवाज खटिया भी करने लगी थी,,,।रामा को डर लग रहा था कि कहीं राजू के तेज झटकों की वजह से खटिया टूट ना जाए इसलिए उसे आराम से करने के लिए बोल रही थी लेकिन राजू यह बात अच्छी तरह से जानता था कि आराम से करने में मजा नहीं आता तेजी से ही धक्के लगाने में मजा आता है,,,,और आज उसको भी स्वर्ग का सुख मिल रहा था क्योंकि उसका पति कभी भी तेज रखो के साथ इस की चुदाई कर नहीं पाता था तुरंत ही झड़ जाता था लेकिन राजू बिना झड़े उसकी दो बार पानी निकाल चुका था और तीसरी बार की तैयारी में लगा हुआ था,,,।

स्तन मर्दन की वजह से उसकी दोनों चूचियां टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,, उसकी सांसे गहरी चल रही थी,,, राजू के तेज धक्के उसे आनंद की परिभाषा समझा रहे थे,,,, और देखते ही देखते रमा की सांसे तेज चलने लगी उसके बदन की अकड़न बढ़ने लगी राजू को समझते देर नहीं लगी कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसे अपनी बाहों में कस लिया और जोर जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,,,,।

राजू उसकी चुचियों पर सर रखकर जोर जोर से हांफ रहा था,,,, मदहोशी के आलम में रमा अपने आंखों को बंद करके इस एहसास में पूरी तरह से डूब जाना चाहती थी,,, इस तरह का आनंद उसे कभी नहीं आया था,,,, थोड़ी देर बाद राजू उसके ऊपर से उठा और खटिया से नीचे उतर कर अपने कपड़े पहने लगा रमा अभी भी खटिया पर नंगी लेटी हुई थी,,,।



क्या भाभी नंगी ही रहना है क्या उठकर कपड़े पहन लो कमला चाची कभी भी आ जाएंगी,,,।

( इतना सुनते हैं जैसे वह होश में आई हो तीन खटिया पर से उठ कर अपना ब्लाउज जमीन पर से उठाकर उसे पहनने लगी और देखते ही देखते अपने सारे कपड़े पहन कर एकदम व्यवस्थित हो गई,,,)

कैसा लगा भाभी,,,

(इतना सुनते ही रमा शर्मा गई और तुरंत शर्मा कर अंदर कमरे की तरफ भाग गई और राजू खुश था कि आज उसके हाथ एक और खूबसूरत औरत लग गई थी,,, राजू भी वहां से चलता बना,,,)
 
आहहहहह,,,, रमा तृप्त हो चुकी थी,,,,,, उसे इस बात की संतुष्टि और खुशी थी की,, राजू जैसा जवान लड़का,,, उसके खूबसूरत जवानी के रस को अपने हाथों से मैं छोड़ कर उसे संतुष्ट कर दिया और इस बात का दुख भी था कि उसका पति राजू के जैसा गठीला बदन वाला क्यों नहीं है और उसमें राजू की तरह मर्दाना ताकत क्यों नहीं है,,,,,, निश्चित रूप से रमा को इस बात का अफसोस था कि उसके पति का लंड राजू के लंड की तरहमोटा तगड़ा और लंबा क्यों नहीं है , जिसमें उसे पहली बार संभोग के असली सुख से वाकिफ कराया,,,,,,,।

Shyam ki ma



अनजाने में ही रमा राजू के द्वारा अपनी सास की चुदाई देखी थी और इस तरह से राजू ताबड़तोड़ धक्के लगा रहा था उसी समय उसकी मर्दाना ताकत से वह पूरी तरह से वाकिफ हो चुकी थी बस उसे महसूस करना बाकी था और हम अपनी आंखों से साफ तौर पर देखी थी कि जब-जब राजू जोर-जोर से अपने लंड को उसके साथ की बुर में पेल रहा था और वह भी पीछे से खड़ा होकर तब तक उसके साथ की भारी-भरकम गांड नदी के पानी की तरह लहरा उठती थी,,, और बस उसी अनुभव के लिए उस पल को महसूस करने के लिए रमा पूरी तरह से तड़प उठी थी,,,,।

लेकिन इतने आराम से राजू के मर्दाना ताकत को अपने अंदर महसूस करने को उसे मिल जाएगा इस बारे में उसने कभी सोचे नहीं थी उसे लगा था कि राजू को वह उसके सास के साथ के शारीरिक संबंध के संदर्भ में राजू के साथ खुद संभोग सुख प्राप्त करेगी लेकिन यह सब करने की भी जरूरत नहीं पड़ी थी बस हल्का सा अपनी जवानी का जलवा दिखाई और सब कुछ अपने आप ही हो गया,,,,,।

Shyam ki ma kapde utarne k bad





राजू की जिंदगी में रोज एक चांद जुडता जा रहा था,,, तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी में इतनी सारी औरतें आएंगी और अभी एक से बढ़कर एकवह पहले ही सोचता था कि उसे यह सुनहरा मौका शादी के बाद अपनी बीवी के साथ ही मिल पाएगा और इसके लिए उसे सब्र भी था लेकिन जो सिलसिला शुरू हुआ तो वह अब भी जारी था,,,।

श्याम अपनी मां के साथ खाना खा रहा था,,, घर पर उन दोनों के सिवा और कोई नहीं था क्योंकि झुमरी घर पर नहीं थी खाना खाते हुए श्याम अपनी मां से बोला,,।

क्यों मा मौका बहुत अच्छा है,,, बस तुम्हारे साड़ी उठाने की देरी है,,,

चल चुपचाप खाना खा,,,, बडा आया है साड़ी उठवाने वाला,,,, तेरी जल्दबाजी में किसी दिन हम दोनों पकड़े जाएंगे,,,।

ऐसा क्यों कह रही हो मां,,,(अपना हाथ बढ़ा कर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की चूची दबाते हुए बोला,,,)

आहहहह,,,हट ,,,रहने दे,,,,,,, देखा नहीं उस दिन तेरा दोस्त कैसे खेत पर आ गया था अच्छा हुआ कि उसने देखा नहीं वरना उसी दिन हम दोनों पकड़े जाते ,,,, और मुझे तो डर था कि कहीं अपना मुंह चुप रखने के एवज में वो भी मेरी चुदाई ना कर देता,,,,,,

क्या मां तुम भी खामखा डरती हो,,,, ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला,,,

Shyam apni ma ko is haalat me dekhkar mast ho gaya tha



नहीं नहीं मैं कहती हूं अगर हो गया होता तो क्या करता,,,(अपनी मां की बात सुनकर श्याम खामोश रहा क्योंकि वह जानता था कि रंगे हाथ पकड़े जाने पर वह भी कुछ नहीं कर सकता था उसकी मां अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) अगर सोच वह हम दोनों को चुदाई करते हैं देख लिया होता और हम दोनों के रिश्ते के बारे में तुम्हें जानता ही है ऐसा गंदा काम वह अपनी आंखों से देख लिया होता तो,,, जाहिर है कि ,,, तुझे चुदाई करता हुआ देखकर उसका भी मन बहकना लगता अगर ऐसे में वह‌ अपना मुंह बंद करने के लिए यह कहता की ,,, जो कुछ भी अपनी आंखों से देखा है वह किसी को भी नहीं कहेगा बदले में मेरी चुदाई करना चाहता तब तू क्या कहता इंकार कर देता,,,,(श्याम अभी भी चुप था) नहीं कर पाता,,,, इसीलिए कहती हूं सोच समझकर किया कर,,,, कहीं भी शुरू पड़ जाता है।।

तुम तो ऐसै कह रही हो मां,,, कि जैसे तुम्हारा मन बिल्कुल भी नहीं था,,, आखिर खेतों में हम दोनों ने कितनी बार चुदाई किया है कभी पकड़े गए क्या,,, और तुम्हारा भी तो मन बहुत करता रहता है,,,। तुम नहीं कहती रहती हो अाज मेरी बुर में बहुत खुजली हो रही है,,,यह खुजली मिटा दे,,,

(अपने बेटे की मुंह से यह सुनकर वह एकदम से शर्म आ गई और बोली,,,)

अच्छा यह बात है ना,,, कोई बात नहीं अब मैं बिल्कुल भी नहीं कहूंगी की मेरी बुर में खुजली हो रही तब हीलाते रहना अपने हाथ से,,,,(श्याम की मां गुस्सा करते हुए दूसरी तरफ मुंह करके बैठ गई या देखकर श्याम एकदम से घबरा गया क्योंकि वह अपनी मां की चुदाई करते हुए अपनी गर्मी शांत करता था और से अच्छा भी लगता था अगर उसकी मां उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं रखेगी तो उसे अपने हाथ से ही हीलाना पड़ेगा,,, आए र इसके सिवा उसके पास कोई दूसरा जुगाड़ नहीं था,,, इसलिए वह अपनी मां को मनाते हुए बोला,,,)

क्या मां तुम भी नाराज हो गई,,,, तुम तो जानती हो तुम्हारे बिना मेरा मन कही नहीं लगता,,,,,, और इस तरह से नाराज हो जाओगी तब तो मैं मर ही जाऊंगा,,,,



तो जा कर मर जा,,, मुझे क्या इस तरह से इल्जाम लगाते हुए तुझे शर्म नहीं आती,,,

क्या मां जो कुछ भी कहा सच तो था,,, क्या तुम्हें मजा नहीं आता,,, अपने बेटे से चुदवाने में,,,(श्याम की मां कुछ बोल नहीं रही थी बस मुंह फुला कर बैठी थी,,, श्याम अपनी मां को मनाने की लाख कोशिश कर रहा था,,,,, श्याम की मां अपने बेटे से नाराज नहीं होना चाहती थी लेकिन उसकी बात से उसे गुस्सा आ गया था,,,,,यह बात उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि अपने बेटे के साथ चुदवाने में उसे भी बहुत मजा आता है और यह सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो अब तक जारी था,,, श्याम के पिताजी तीन चार साल पहले ही गुजर गए थे,,, श्याम की मां खेतों में काम कर कर के अपने बदन की बनावट और गठीलेपन को बरकरार रखे हुए थी,,,अभी भी श्याम की मां जवान थी इसलिए उसकी दोनों टांगों के बीच गर्मी महसूस होना लाजमी था,,, संभोग सुख की तृष्णा से वह पूरी तरह से ग्रस्त हो चुकी थी पति के ना होने पर उसकी यह प्यास बढ़ती जा रही थी उसे अपनी बुर में लंड लेने की प्यास कुछ ज्यादा ही तड़प दिखा रही थी और ऐसे ही एक दिन दोपहर में अपनी प्यास को अपने हाथ से ही बुझाने की कोशिश करते हुए खेतों में से एक मोटा तगड़ा बैंगन लेकर आई,,, उस समय घर पर कोई नहीं था और उसकी बुर में पूरी तरह से मस्ती छाई हुई थी चींटियां रेंग रही थी जल्द से जल्द में अपनी खुजली को मिटाना चाहती थी इसलिए जल्दबाजी में दरवाजा बंद करना भूल गई और कमरे में आकर अपने सारे वस्त्र निकालकर एकदम नंगी हो गई और बैगन के आगे ढेर सारा सरसों का तेल लगा कर उसे अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगी और उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,, और उसी समय खेल कर श्याम अपने घर पर आ गया दरवाजा तो पहले से ही खड़ा था इसलिए बिना कुछ बोले अंदर कमरे में प्रवेश कर गया और अंदर का नजारा देखते ही उसके होश उड़ गए उसकी आंखों के सामने उसकी मां एकदम नंगी नीचे चटाई बिछाकर,,,,,अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी बुर में बैगन डालने की कोशिश कर रही थी,, यह देखते हैं शयाम को तो होश उड़ गए,,, साथ मे श्याम की मां भी एकदम हड़बड़ा गई,,वह अपने आप को छुपाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन आप उसके लिए कोशिश नाकाम हो चुकी थी उसकी हरकत उसके बेटे की आंखों में वासना की चमक को जगा गई थी वह अपनी मां के नंगे बदन को देखकर पूरी तरह से मस्त हो गया था जिंदगी में पहली बार किसी औरत को एकदम नंगी देख रहा था और वह भी खुद की अपनी मां को,,,वह प्यासी नजरों से अपनी मां की चूचियों को देख रहा था उसकी दोनों टांगों के बीच के मुस्कुरा भी छेद को देख रहा था जिसमें वह अभी भी उस बैगन को लगाए हुए थी,,,,,,,, उस समय शयाम की मां कुछ बोल नहीं पाई,,, दोनों की अपनी-अपनी जरूरत थी दोनों तरफ खामोशी छाई हुई थी,,,, पल भर में ही श्याम की मां ने निर्णय ले ली की अब वह अपनी प्यास अपने बेटे से बुझाएगी इसलिए अपने बदन के अंगों को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी,,,। श्याम की मां मुस्कुराने लगी अपनी मां की तरफ आकर्षित होता चला गया और उस दिन वह,,, दोनों अपने पवित्र रिश्ता को तोड़ कर एक दूसरे में समा गए और तब से यह सिलसिला आज तक जारी था,,, श्याम की मा भी अच्छी तरह से जानती थी कि शाम के बिना उसे भी अच्छा लगने वाला नहीं है,,, लेकिन फिर भी झूठ मुठ का गुस्सा दिखा रही थी,,, श्याम अपनी मां को समझाते हुए बोला,,,)

चलो अच्छा ठीक है तुम्हें देखकर मेरा ही लंड खड़ा हो जाता है बस,,,, अब तो खुश,,,।

(अपने बेटे की बात सुनते ही शयाम कि मा मुस्कुराने लगी,,, और बोलो,,,)





दरवाजा बंद कर दे,,, अब कोई गलती नहीं,,,।

(इतना सुनते ही श्याम जल्दी से उठा और दरवाजा बंद कर दिया और तब उसकी मां कोने में खड़ी होकर अपनी साड़ी कमर तक उठा दी और उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर श्याम का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और वह तुरंत अपनी मां के पीछे आ गया और अपने पजामे को उतारकर अपना लंड,, पीछे से अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, श्याम के पास सर्वप्रथम यही जरिया था अपनी मर्दानगी दिखाने का,,, और इसी के चलते ही वह राजू का मजाक उड़ाया करता था क्योंकि राजू बहुत शर्मिंदा लड़का था और श्याम चुदाई का अनुभव अपनी मां से ले चुका था,,, इसलिए औरतों के मामले में,,अपने दोस्तों में राजू में वह अपना हाथ ऊपर रखना चाहता था भले ही वह अपनी मां के साथ ही चुदाई करता था लेकिन फिर भी उसके अंदर चुदाई के मामले में आत्मविश्वास था,,,, श्याम को अभी भी ऐसा ही लगता था कि सिर्फ उसके हमउम्र लड़कों में वही चुदाई का सुख भोग रहा है,,,, बाकी सब अपने हाथ से काम चला रहे हैं जिसमें उसे लगता था कि , राजू भी वैसा ही होगा लेकिन वह कहां जानता था कि राजू उससे चार कदम आगे था,, अपनी मां की चुदाई करते हुए श्याम अपने मन में यही सोच रहा था कि जो कुछ भी उसकी मां बोल रही थी उसमें सच्चाई थी अगर वाकई में राजू उन दोनों को उस हाल में देख लिया होता तो शायद अपना मुंह बंद करने के एवज में वह भी वही चीज मांगता है जो वह कर रहा था अगर ऐसा हो जाता तो राजू पूरी तरह से उसकी मां पर छा जाता,,, क्योंकि राजू के लंड से श्याम अच्छी तरह से वाकिफ हो चुका था और जिस तरह का प्यासा पन उसकी मा में था,,,शयाम को पक्का यकीन था कि उसकी मराजो की दीवानी हो जाती और उसका पत्ता साफ हो जाता,,, यही सोचकर वह घबरा गया था लेकिन इस समय अपनी मां की बुर की गर्मी को शांत करने में लगा था,,,,)

दूसरी तरफ झुमरी नदी के किनारे मटकी लेकर पानी भरने गई थी वह कपड़े धोने भी गई थी वह कपड़े धो रही थी उसका पूरा दिन कपड़े धोने में लगा हुआ था और धीरे-धीरे उसकी मटकी नदी के पानी में आगे बढ़ रही थी,,, राजू भी किस्मत से वही अपनी गाय और बकरियों को पानी पिला रहा था तभी उसकी नजर झुमरी पर पड़ी तो उसकी आंखों में चमक आ गई और वह तुरंत उसके पास पहुंच गया,,, झुमरी कपड़े धोने में पूरी तरह से लीन हो चुकी थी,,, और राजू उसके पास पहुंचकर बोला,,,।

झुमरी तुम यहां क्या कर रही हो,,,

अब लगता है कि दिखाई भी नहीं दे रहा है,,, जैसा उस दिन बिना बोले कमरे में घुस आए थे,,,,।

देखो झुमरी उस दिन के लिए मैं तुमसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं,,, उस दिन जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था मुझे नहीं मालूम था कि तुम नहा रही हो,,,,

Jhumri kapde utarkar nangi hone k bad





लेकिन बाहर खड़े होकर बोलना तो चाहिए था घर में कोई है कि नहीं तुम तो बिना कुछ बोले ही अंदर आ गए,,, ( झुमरी कपड़े धोते हुए बोली,,, राजू भी उसके पास बैठ गया और कपड़ों को वह भी बात बात में धोने लगा,,,, ठुमरी यह देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, राजू का इस तरह से उसके पास बैठकर कपड़ों को धोना अच्छा लग रहा था,,,)

मुझे क्या मालूम था मुझे लगा कि श्याम अंदर ही होगा इसलिए बिना बोले आ गया था,,,

चलो कोई बात नहीं लेकिन आइंदा से आना तो दरवाजा खटखटा कर ही आना,,,,

आइंदा से ऐसा ही करूंगा,,,,

(दोनों के बीच फिर से खामोशी छा गई झुमरी कपड़े धोने में लगी हुई थी और राजू चोर नजरों से उसकी खूबसूरती का रस पी रहा था झुमरी उसे अच्छी लगने लगी थी,,, नदी पर इस समय कोई भी नहीं था क्योंकि दोपहर का समय था और चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था शीतल हवा बह रही थी,,, और ऐसे में नदी के किनारे बड़े-बड़े पत्थरों पर बैठकर कपड़े धोने का मजा ही कुछ और था यह एहसास राजू को पहली बार हो रहा था,,,, चुप्पी तोड़ते हुए राजू बोला,,,)

बुरा ना मानो तो एक बात कहूं,,,

कहो,,,,

तुम,,,, तुम मतलब की,,,,

अरे तुम तो नहीं कहते रहोगे कि कुछ बोलोगे भी,,,,

मेरा मतलब है कि ,,, तुम हमेशा अपने सारे कपड़े उतार कर नहाती हो,,,

Jhumri k dashahari aam



हां तो क्या हुआ,,,, मैं हमेशा से ही अपने सारे कपड़े उतार कर नहाती हु,(झुमरी एकदम बेझिझक होकर बोली,,, क्योंकि उसका स्वभाव ही यही था वह किसी चीज से शर्म नहीं करती थी जो मन में आता था वह बोल देती थी लेकिन ऐसा नहीं था उसका स्वभाव इस तरह का था तो उसका चरित्र भी इस तरह का हो,,,,,,आज तक उसने अपने चरित्र पर दाग नहीं लगने दी थी ना ही किसी को अपने बदन को स्पर्श करने दी थी,,,,,, क्योंकि कुछ महीने पहले ही जब वह खेतों में पानी दे रही थी तो अंधेरा हो गया था उसने गांव के दो मनचले लड़केमौके का फायदा उठाने की पूरी कोशिश किए थे तो उनका पूरी तरह से विरोध करते हुए झुमरी घास काटने वाली हसीया से उन दोनों पर वार कि थी और वह दोनों जान बचाकर भागे थे,,,,,,, झुमरी का इस तरह से बेझिझक होकर बोलना राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहे थे,,,,)

तुम्हें चाची कुछ नहीं कहती की कपड़े पहन कर क्यों नहीं नहाती कोई देख लेगा तो,,,, श्याम ही कभी मेरी जगह आ जाता तो,,,

मुझे कोई नहीं कहता और हां मेरा भाई तो बिल्कुल नहीं आ सकता क्योंकि मैं उसे चेतावनी दे चुकी हूं कि अगर ऐसा कभी हुआ तो मैं उसकी जान ले लूंगी और मेरे गुस्से से वह अच्छी तरह से वाकिफ है,,,,।

लेकिन फिर भी तो दरवाजा बंद करके नहाना चाहिए था,,,

अरे मुझे पता था कि मां और भाई दोनों खेत पर गए हैं तो कोई आने वाला नहीं था,,, मुझे क्या मालूम था कि तुम आज आओगे,,,।

मैं तो अनजाने में आ गया था कोई जानबूझकर नहीं आया था,,,

हां मैं जानती हूं लेकिन चले जाना चाहिए था ना,,, तू तो बस देखता ही रह गया,,,(कपड़े धोते हुए राजू की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली उसकी मुस्कुराहट में राजू का अपनापन लग रहा था इसलिए वह भी जवाब देते हुए बोला)

क्या करूं मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया,,,

क्यों समझ में नहीं आया,,,,,,

नजारा ही कुछ ऐसा था,,, मैं तो बस देखता ही रह गया,,,(राजू आप अपने दिल की बात बताने की ठान लिया था)

क्यों कभी देखा नहीं था क्या,,,

मां कसम पहले कभी भी मैंने इस तरह का दृश्य नहीं देखा था,,,,(राजू की बातें सुनकर कपड़े धोते हुए भी झुमरी मन ही मन खुश होने लगी) पहली बार में किसी लड़की को एकदम नंगी देखा था,,,,(राजू नंगी शब्द पर ज्यादा जोर देते हुए बोला और इस शब्द का असर झुमरी पर भी हो रहा था वह मंद मंद मुस्कुरा रहे थे उसको मुस्कुराता हुआ देखकर राजू की हीम्मत बढ़ने लगी थी,,,)

देख कर चले जाना चाहिए था ना वहां रुका क्यों रह गया था,,,।

भला कोई जवान लड़का जवान लड़की को एकदम नंगी और वह भी एक दम नहाती हुई देख ले तो क्या वहां चला जाएगा बिल्कुल भी नहीं जाएगा उसकी तो सुध बुध सब खो जाएगी,,, एक जवान खूबसूरत लड़की को नंगी देख कर बिना पिए ही 4 बोतलों का नशा हो जाएगा,,,, कसम से मेरा तो दिमाग काम करना ही बंद कर दिया था,,,

क्यों,,,?

क्योंकि पहले भी मैं तुम्हें देख चुका हूं लेकिन कपड़ों में पहली बार मैंने बिना कपड़ों के देखा तो मुझे पता चला कि तुम कितनी खूबसूरत हो,,,(अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर जो मेरे मन ही मन और ज्यादा प्रसन्न होने लगी,,,, झुमरी से इस तरह की बात करके राजू के भी तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,,,)

चल झूठा,,,

नहीं नहीं सच कह रहा हूं जल्दी तुम बहुत खूबसूरत हो उस दिन पहली बार मुझे एहसास हुआ जब तुम्हें पूरी तरह से नंगी नहाते हुए देखा,,,(इस तरह की बातें राजू को करते हुए झुमरी रोक देना चाहती थी लेकिन उसकी बातों में उसकी खूबसूरती की तारीफ की थी इसलिए वहां उसे रोक नहीं पा रही थी और राजू की हिम्मत इसलिए बढ़ती जा रही थी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) सच कहूं तो तुम्हारी पहली बार में किसी खूबसूरत लड़की की गांड को देखा था नहीं तो गांड के बारे में मैंने कभी कल्पना भी नहीं किया था कि बिना कपड़ों के गांड इतनी खूबसूरत दिखती है,,, तुम्हारी खूबसूरत खरबूजे जैसी गोल गोल गांड देखकर मेरी हालत खराब हो गई,,,।

(अपनी कांड की तुलना खरबूजे से होते ही उसकी हंसी छूट गई और वह हंसते-हंसते बोली)

किसके जैसी,,,

खरबूजे जैसी,,,

खरबूजे जैसी,,,,( और इतना कहकर जोर जोर से हंसने लगी,,,हंसते हुए चोरी और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन हंसने का कारण राजु को पता नहीं चल रहा था कि वह हंस क्यों रही है इसलिए राजू बोला,,,)

तुम हंस क्यों रही हो,,,,

हंसो नहीं तो और क्या करूं कोई उसकी तुलना खरबूजे से करता है क्या,,,।

मुझे खरबूजा सबसे ज्यादा अच्छा लगता है इसलिए तो खरबूजे की तरह बोला,,,,।

क्या तुझे सच में मेरी खरबूजे जैसी लगी,,,,,,

हां सच में,,,,

पागल है तू,,,

तुम हो ही इतनी खूबसूरत पागल तो हो ही जाऊंगा,,,,,

चल कोई बात नहीं लेकिन इतना देखने के बाद भी तू चला क्यों नहीं गया,,, चले जाना चाहिए था ना,,,

जाने वाला ही था,, लेकिन तभी तुम मेरी तरफ घूम गई और फिर जो नजर आया उसे देखकर मेरी सांसे बंद हो गई,,,।

(इस बार राजू के कहने का मतलब को जोड़ी अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसके चेहरे पर शर्म की लाली मचाने लगी किन फिर भी वह राजू से और ज्यादा सुनना चाहती थी उसकी खूबसूरती की तारीफ सुनना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,)

क्या नजर आया,,,?(झुमरी उत्सुकता दिखाते हुए बोली,, राजू को लगने लगा था कि झुमरी भी बहुत जल्दी उसकी बाहों में आने वाली है,,,, इसलिए वह बोला,,)

तुम्हारी खूबसूरत छाती,,,, तुम्हारी छातियों की शोभा बढ़ाती दोनों दशहरी आम,,,,ऊफफफ,,, मेरे तो मुंह में पानी आने लगा था,,,,

दशहरी आम,,,,(इतना कहकर झुमरी फिर से हंसने लगी,,, उसे फिर से हंसता हुआ देखकर राजू बोला,,)

अब क्यों हंस रही हो,

हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,,दशहरी आम,,,, तुझे दशहरी आम भी पसंद है,,,,।

कोई खास नहीं लेकिन,,, तुम्हारी छातियों को देखकर मुझे दशहरी आम याद आ गया और सच कहूं तो पल भर में ही मुझे दशहरी आम भी सबसे प्रिय लगने लगा,,,,।

लेकिन दशहरी तो बड़े बड़े होते हैं लंबे लंबे,,,, और मेरे तो,,,(इतना कहकर झुमरी रुक गई,,,)

हां मैं जानता हूं,,,दशहरी आम बड़े बड़े होते हैं तुम्हारे छोटे छोटे हैं लेकिन जब बड़े होंगे तो एकदम दशहरी आम की तरह और भी ज्यादा खूबसूरत और रसीले हो जाएंगे,,,।

(इस बार अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर झुमरी शर्म से पानी पानी हो गई राजू के कहे अनुसार अभी सच में उसकी सूचना दशहरी आम की तरह बड़ी-बड़ी नहीं थी लेकिन फिर भी बेहद आ कर सकते इतना तो अच्छी तरह से जानती थी शर्म के मारे झुमरी इससे ज्यादा नहीं बोल पाई तो राजू खुद ही उसकी तारीफ के पुल बांधते हुए बोला,,)

और जब मेरी नजर तुम्हारी चिकनी कमर के नीचे नाभि के सीधे नीचे की तरफ गई तो मेरे तो होश उड़ गए,,,,,,,

क्यों,,? (उत्तेजना के मारे झुमरी कांपते स्वर में बोली)

नाभि के नीचे ही तो असली खजाना दोनों टांगों के बीच,,, तुम्हारी वह पतली दरार,,,, लहसुन की कली कि तरह लग रही थी,,,।

(राजू की बातों को सुनकर झुमरी अपने अंदर उत्तेजना का अनुभव करने लगी इस तरह की बातें उसी से आज तक किसी ने भी नहीं की थी इसलिए इस तरह की मादक बातें उसके तन बदन में आग लगा रही थी,,,, उसे लगने लगा कि वह बहुत रही है इसलिए राजू को तुरंत रोकते हुए बोली,,)

बस कर अब बहुत हो रहा है,,,(तभी वह अपनी नजर नदी की तरफ घुमाई तो उसकी मटकी दूसरे किनारे पर जा पहुंची थी,,, और वह एकदम से बड़बड़ाते हुए बोली,,,)

हाय दैया मेरी मटकी तो वह जा लगी,,,, अब क्या होगा मां तो मुझे मार ही डालेगी,,,,(झुमरी एकदम घबराते हुए बोली और उसको इस तरह से घबराता हुआ देखकर राजु उसे समझाते हुए बोला,,,)

अरे अरे तुम चिंता मत करो मैं लेकर आता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही वो अपना कुर्ता निकाल कर वहीं पास में रख दिया उसके गोरा और गठीला बदन देखकर झुमरी के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वो शरमा कर दूसरी तरफ नजर घुमा‌ ली औरराजू तुरंत नदी में छलांग लगा दी और तैरता हुआ दूसरे किनारे पर पहुंच गए और वहां से मटकी लेकर आ गया,,, और झुमरी को मटकी थमाते हुए बोला,,,।)

जब तक मैं हूं तब तक तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,,

(राजू की यह बात सुनकर की झुमरी मुस्कुराने लगी और तभी उसकी नजर सामने की तरफ गई तो वह हंसते हुए बोली,,,)

जाओ संभालो तुम्हारी बकरी और गाय वह देखो दूसरे के खेतों में जा रही है,,,।

(इतना सुनते ही राजू एकदम से चिल्लाता हुआ और भागता हुआ बोला,,)

अरे बाप रे,,,, अरे रुक जा बस वहीं रुक जा आगे मत बढ़ना,,,(ऐसा कहते हुए राजू भागता हुआ गाय और बकरी के पीछे जाने लगा और उसका चिल्लाना और उसका भागना देखकर झुमरी जोर-जोर से हंसने लगी और नदी का पानी मटकी में भरकर वहां से वापस घर को लौट गई,,, झुमरी और राजू के प्रेम प्रकरण की शुरुआत हो चुकी थी,,।)

Jhumari ki madmast chaal

 
धीरे-धीरे राजू झुमरी के प्यार में पागल हो गया था,,, उसे हर जगह सोते जागते उठते बैठते सिर्फ झुमरी ही नजर आती थी,,, झुमरी से‌ वह सच्चा वाला प्यार करने लगा था,,,,,, उसके साथ किसी भी तरह से बना वक्त बिताना चाहता था लेकिन मौका ही नहीं मिलता था,,,। लेकिन रात को अपनी बुआ की रोज चुदाई करता था,,,,और बुआ भी दिन भर की थकान राजू के मोटे लंड को अपनी बुर में लेकर मिटा देती थी,,,,,,,,,,, लेकिन गुलाबी का मन अपने बड़े भैया से भी चुदवाने का करता था क्योंकि उसे भी अपनी बुर में कुछ अलग अलग अनुभव चाहिए था,,,, रोज रोज एक ही लंड बुर में डलवाकर उसे कुछ नयापन महसूस नहीं हो पा रहा था और वैसे भी,,, अपने बड़े भैया के लंड को अपनी बुर में बड़े आराम से ले सकती थी,,,,,,क्योंकि उसके बड़े भैया और गुलाबी दोनों के बीच में किसी भी प्रकार की चीजें नहीं थी एक बार शारीरिक संबंध बनाने के बाद गुलाबी अपने बड़े भैया से पूरी तरह से खुल चुकी थी लेकिन बड़ा भाई होने के नाते हरिया को अपनी गलती पर पछतावा होता था उसे अपने आप पर बुलाने महसूस होती थी,,,, इसलिए वह अपनी छोटी बहन से कतराता रहता था,,,। लेकिन स्वाद तो गुलाबी की गुलाबी बुर का उसे भी लग गया था,,,,।

Madhu,,,,





ऐसे ही एक दिन शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था और,,, मधु चूल्हे के आगे बैठकर रोटियां सेक रही थी ,,,,,, गर्मी का महीना होने की वजह से मधु का तन बदन पसीने से तरबतर हो चुका था पसीने से उसका ब्लाउज पूरी तरह से भीग चुका था,,,,,,,, तभी गुलाबी अपनी भाभी की मदद करने के लिए उधर आई और बोली,,।

लाओ भाभी गर्मी बहुत है मै रोटियां बेल देती हूं,,,,,,(इतना कहते हुए गुलाबी वहां बैठने ही वाली थी कि अभी उसकी भाभी बोली,,,)

नहीं नहीं मैं कर लूंगी तू जा कर देख तेरे भैया अभी तक आए कि नहीं,,,, और हां आए हो तो एक बाल्टी पानी लेकर चली जाना बेल को पानी देना है,,,।

Gulabi ki khubsurat gaand



ठीक है भाभी,,,,(इतना कहकर वह उठ खड़ी हुई जाने के लिए कि तभी उसकी भाभी फिर बोली)

और हां जाते-जाते,,, राजू को इधर भेज देना लालटेन जलाने के लिए अंधेरा बहुत है,,,

ठीक है भाभी,,,,,,(और इतना कहकर गुलाबी घर के बाहर चली गई और बाहर ही उसे राजु नजर आ गया और वह राजू से बोली,,,)

जा तुझे भाभी बुला रही है,,,

किस लिए,,,,

आज भाभी का मन तेरा लेने को कर रहा है इसलिए,,,

धत्,,,, कैसी बातें करती हो,,,

Gulabi or raju



अरे तो क्या और कैसी बातें करूं वहां जाएगा तब ना पता चलेगा कि भाभी तुझे किस लिए बुलाई है,,, मैं बुलाती तो तेरा लेने के लिए ही बुलाती,,,।

बुर में ज्यादा खुजली हो रही है क्या बुआ,,,?

सच कहूं तो आप तो सारा दिन खुजली होती रहती है मेरा बस चले तो तेरा अपनी बुर में लेकर पड़ी रहुं,,,,(गुलाबी अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,,, अपनी बुआ की गरम बातों को सुनकर राजू के पजामे में तंबू बनना शुरू हो गया था इसलिए अंधेरे का फायदा उठाते हुए राजू अपना हाथ आगे बढ़ा कर तुरंत सलवार के ऊपर से अपनी बुआ की बुर पर रखकर उसे दबाते हुए बोला,,,)

रात को मिलना आज सारी खुजली मिटा दूंगा,,,

रोज रात को तो मिलती हूं,,,, फिर भी कसर रह जाती हैं,,,

आज नहीं रह जाएगी,,, आज सारी कसर उतार दूंगा,,,,,

रमा



वह तो रात को ही पता चलेगा,,,,,,

(इतना कहकर गुलाबी आगे बढ़ गई,,, राजू घर के अंदर चला गया,,, अभी तक उसके भैया नहीं आए थे इसलिए वह वहीं बैठ कर अपने भैया का इंतजार करने लगी और अपने मन में सोचने लगे कि एक बार की चुदाई के बाद उसके भैया उसके ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है जबकि उसके भैया उसकी भाभी की तो रोज लेते हैं,,,,,,गुलाबी को इसीलिए समझ में नहीं आ रहा था कि उसमें कौन सी कमी है कि उसके भैया दोबारा उसके बदन को स्पर्श तक नहीं किए,,, वह अपने मन में यही सोच कर वही खड़ी रह गई ,, वह आज अपने भैया से पूछना चाहती थी कि उसमें कौन सी कमी है जो दोबारा उन्होंने उसकी चुदाई नही कीए है ,,जबकि आज उसका मन बहुत कर रहा था अपने भैया से चुदवाने का,,,,,

मधु की खूबसूरत गांड



दूसरी तरफ रसोई घर में पहुंचते ही राजू अपनी मां से बोला,,,।

क्या हुआ मां,,,?

अरे कुछ नहीं बेटा लालटेन तो जला दे एकदम अंधेरा छाया हुआ है,,,

ठीक है मां,,,, दियासलाई कहा है,,?

राजु अपनी मां के साथ कल्पना करते हुए





अरे चुल्हे में से आग लेकर जला दे बेवजह दियासलाई की तिल्ली खराब करेगा,,,,,,,(तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली,,,,अपनी मां के लिए बातें सुनकर राजु कुछ बोला नहीं औरनीचे बैठ कर अपना हाथ आगे बढ़ाया है और चूल्हे में जल रही पतली लकड़ी को निकालने लगा कि तभी उसकी नजर अपनी मां की भरी हुई छातियों पर पड़ी जिस पर पसीने की बूंदें मोती के दाने की तरह चमक रही थी,,,,ब्लाउज में से झांकती अपनी मां की दोनों चुचियों को देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया,,,,,,,यह दूसरी बार था जब रसोईघर में अपनी मां की छातियों को प्यासी नजरों से घुर रहा था,,,। राजू पूरी तरह से अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली छातियों के आकर्षण में खो गया,,, उसे इतना भी होश नहीं रहा कि उसे लालटेन जलाना है,,,, गर्मी ज्यादा होने की वजह से मधु ने पहले से ही अपने ब्लाउज का ऊपर वाला बटन खोल रखी थी जिससे उसके ब्लाउज में कैद उसके दोनों कबूतर बड़े आराम से अपने पंख फड़फड़ा रहे थे,,,,, राजू का मन अपनी मां के दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में दबोचने को करने लगा,,,,। पल भर में ही राजू की हालत खराब होने लगी क्योंकि वह जानता था कि भले ही उसके हाथों में बहुत सारी चुचीयां आ चुकी थी जिसे मुंह में लेकर वह पी भी चुका था लेकिनउसकी मां की चूचियों की बात ही कुछ और थी जिसे देखते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगती थी,,,,,, रोटियां बेलते समय जैसे ही मधु की नजर अपने बेटे पर पड़ी तो उसकी नजरों को देखकर वह एकदम से सिहर उठी,,, उसे समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा उसकी चूचियों को निहार रहा है वो एकदम से दंग रह गई,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, सीधे सीधे अपने बेटे को बोलने में भी उसे शर्म का आभास हो रहा था इसलिए वह बात को घुमाते हुए बोली,,,।

अरे लालटेन जलाएगा कितना अंधेरा है,,,।

हां,,, हां,,,, जलाता हूं,,,,(अपनी मां की बात सुनते ही राजू हडबडाते हुए बोला,,, और तुरंत चूल्हे में से जलती हुई लकड़ी लेकर उसे से लालटेन को जलाने लगा और थोड़ी देर में अंधेरे को चीरता हुआ उजाला पूरे कमरे में फैल गया,,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, उसे लग रहा था कि जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो,,,, लेकिन फिर भी उसकी मां उसे कुछ बोल नहीं रही थी इसलिए उसे लगने लगा कि उसकी मां का ध्यान उसके हरकत पर नहीं गई है,,,, और अपनी गलती को सुधारते हुए वह आंगन में पड़े खटिया पर जाकर लेट गया,,,, लेकिन मधु के दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से देख रही थी और समझ रही थी कि उसके बेटे का ध्यान उसकी चूचियों पर ही था और इसलिए वह अपने बेटे की इस तरह की हरकत से हैरान थी,,, पहले भी अपने बेटे की इस तरह की हरकत को पकड़ चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा आखिरकार ऐसी हरकत क्यों कर रहा है क्यों उसके बदन को प्यासी नजरों से घूरता रहता है,,,, क्या वह जवान हो गया है,,, अपने इस सवाल का जवाब खुद ही देते हुए अपने मन में बोली,,, हां जवान तो वो हो गया है,,, और जिसका अनुभव हुआ कुवे पर ले भी चुकी थी,,, उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड की दरार के बीच बीच महसूस भी कर चुकी थी,,,,,। अपने बेटे की इस तरह की हरकत को याद करके उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी,,,,उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसका बेटा भी है पूरी तरह से जवान हो गया है और दूसरे लड़कों की तरह ही औरतों मैं दिलचस्पी लेने लगा है तभी तो वह अपनी मां की खूबसूरत बदन को चोरी-छिपे देखते रहता है,,,,।

मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की इस तरह की हरकत परवाह गुस्सा करें कि उसे समझाएं क्योंकि उसकी हरकत की वजह से उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बदन में अजीब सी हलचल क्यों होने लगती थी अभी रोटी बनाते समय भी इस हरकत के चलते उसे अपनी बुर गीली होती महसूस होने लगी थी,,,, जैसे तैसे करके वहां अपना ध्यान रोटी बनाने में लगाने लगी और दूसरी तरफ बैलों के पेरो में बंधे घुंघरू की आवाज को सुनकर,,, गुलाबी के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की हलचल बढ़ने लगी,,,, वह बड़ी बेसब्री से अपने भैया के पास आने का इंतजार करने लगी,,,पर थोड़ी ही देर में घूम रही आवाज एकदम पास आने लगी और देखते ही देखते हरिया अपने बेल गाड़ी को लेकर घर पहुंच गया,,,, उसका भैया अभी बैलगाड़ी से उतरा नहीं था कि तभी गुलाबी बोली,,,।

हरीया और गुलाबी



क्या भैया आज बड़ी देर लगा दी,,,

हां,,, हां गुलाबी आज सवारी बहुत अच्छी मिल गई थी दो चार पैसे की ज्यादा आमदनी हो गई है इसलिए तो आज मैं गरमा गरम जलेबी या ले कर आया हूं,,,,

Hariya or Madhu





अरे वाहहह जलेबियां मेरा तो सुनकर ही मुंह में पानी आने लगा,,,,

(जलेबी का नाम सुनकर गुलाबी की हालत को हरिया की तरह से समझ रहा था क्योंकि उसे जलेबी बहुत पसंद थी लेकिन जिस अदा से उसने मुंह में पानी आने वाली बात की थी,,,, उसकी बात को सुनकर हरिया की धोती में हलचल होने लगी थी,,,)
 
जलेबी वाली बात सुनते ही,,, गुलाबी के मुंह में पानी आ गया था और उसके बोलने की अदा को देखते हुए हरिया की धोती में हलचल होने लगा था,,, अपनी धोती में हो रही हलचल को देखकर हरिया अपना मन दूसरी तरफ करना चाहता हूं वह नहीं चाहता था कि जो वह गलती कर चुका है उसे दोबारा करें,,,, वह अपनी छोटी बहन के साथ दोबारा शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहता था,,,, इसलिए वह गुलाबी से बोला,,,।

गुलाबी की गांड



गुलाबी तू जलेबी का‌ पडीका लेकर घर में जा,,, मै बेल को बांधकर आता हूं,,,,।

(अपने बड़े भाई की बात सुनकर गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर वहां जलेबी कापरीका लेकर घर में गई तो वह ज्यादा समय घर के बाहर व्यतीत नहीं कर पाएगी इसलिए वह अपने भैया से बोली,,,)

ठीक है भैया तुम बैल को लेकर पीछे चलो मैं बाल्टी में पानी भर कर लाती हु,,,,(इतना कहकर वह बाल्टी लेकर कुवे पर चली गई और हरिया बैलगाड़ी में से बैल को अलग करके घर के पीछे की तरफ ले जाने लगा उसके मन में,,,, अजीब अजीब से ख्याल घूम रहे थे,,,,,,एक बार की चुदाई के बाद से वह अपनी बहन से नजर नहीं मिला पाता था लेकिन उसकी बहन बिल्कुल सहज होकर उससे बात करती थी और यही हरिया को समझ में नहीं आता कि उसकी बहन को जो कुछ भी हो उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था,,,,, वह अपने मन में ही सोच रहा था की क्या उसकी बहन गुलाबी को बिल्कुल भी ग्लानी नहीं है,,,, उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा वह तो बिल्कुल सहज है जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं,,,, ऐसा सोचते हुए हरिया बेल को बांधने लगा,,,,,,।



तो दूसरी तरफ कुए में से पानी निकालते हुए,,, गुलाबी अपने मन में फैसला कर चुकी थी कि,,, आज भी वह अपने भाई से चुदवाएगी ,,,,,, कुएं में से पानी निकाल कर वह बाल्टी लेकर घर के पीछे की तरफ जाने लगी जहां पर पहले से ही हरिया बेल को खूंटे से बांध रहा था,,,,,, अंधेरा हो चुका था लेकिन शिरडी हल्का हल्का नजार आ रहा था,,,गुलाबी पानी से भरी बाल्टी को उठाकर अपनी भाई के करीब पहुंच गई और उसे बेल के आगे रखते हुए बोली,,,।)

मधु





भैया तुम मुझसे नाराज हो क्या,,,?

नहीं तो मैं भला क्यों नाराज होने लगा,,,,(हरिया नजर चुराते हुए बोला,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) तुझे ऐसा क्यों लगने लगा कि मैं तुझसे नाराज हु,,,

मधु का कसा हुआ बदन





उस दिन से तुम मुझसे ठीक से बात नहीं करते इसके लिए,,,,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जो कुछ भी उस दिन हुआ था वह हम दोनों के बीच नहीं होना चाहिए लेकिन मै तुझसे नाराज नहीं हूं,,,,(बेल की रस्सी को खूंटे में कस के बांधते हुए बोला,,,)

उस दिन जो कुछ भी हुआ भैया उसके लिए अफसोस क्यों करना,,,वो बात केवल तुम और मैं जानती हूं,,, इसलिए उस बारे में चिंता करने की कोई भी जरूरत नहीं है,,,।

(गुलाबी को लगने लगा था कि उस दिन की घटना को लेकर उसके भैया परेशान हैं,,,, लेकिन उसे तो बिल्कुल भी कोई भी परेशानी नहीं है बल्कि वह तो दोबारा वही संबंध स्थापित करना चाहती हैं और अगर उसके भैया का यही रवैया रहा तो वह दुबारा संबंध कैसे बना पाएगी इसी बारे में सोच कर वह परेशान हो रही थी,,,,)

तु बहुत समझदार है गुलाबी,,, मैं तो तुझे नादान समझता था लेकिन तू सच में बड़ी हो गई है,,,,।

क्या भैया तुम भी बड़ी ना होती तो क्या तुम्हारा मोटा लंबा लैंड ले पाती,,,,(गुलाबी जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रही थी वह अपने भैया को जाना चाहती थी और ऐसा जताना चाहती थी कि जैसे अपने ही कही गई बात से वह एकदम से चौंक गई है इसलिए वह दांतो तले उंगली दबाते हुए बोली) हाय दैया मेरे मुंह से क्या निकल गया,,,,,, अनजाने में निकल गया भैया क्या करूं उस दिन की बात मैं भूल नहीं पाती,,,।

गुलाबी हरीया के लंड से खेलती हुई





नहीं-नहीं गुलाबी तू जो कुछ भी कह रही है वह गलत है तुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए जो कुछ भी हुआ हम दोनों की नादानी थी अब तुझे वह बात भूल जानी चाहिए,,,

मैं जानती हूं भैया , जो कुछ भी हम दोनों के बीच हुआ वह गलत है लेकिन क्या करूं उस दिन की बात में भूल नहीं पाती,,,, पहली बार मुझे वो तन का सुख मिला था जो तुमने दिया था,,, मैं भला कैसे भूल पाऊंगी,,,, ,, सच कहूं तो भैया मैं तुम्हारे उसको देख कर डर गई थी कि ईतना मोटा मेरे अंदर घुसेगा कैसे,,,, लेकिन तुम बड़ी होशियारी से मेरा डर दूर करती हूं पर मुझे जो सुख दिए हो शायद उसके बारे में मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,।

(गुलाबी की मादक बातें पूरे वातावरण में मदहोशी का नशा घोल रही थी,,, हरिया के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी वह अपनी बहन से इसीलिए कतराता था क्योंकि वह दोबारा उस गलती को दोहराना नहीं चाहता था,,, लेकिन गुलाबी की इतनी गंदी बातें सुनकर हरिया अपनी भावनाओं को फिर से बहकता हुआ महसूस कर रहा थाउसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी बहन इस तरह से खुले शब्दों में उससे बात करेंगीऔर शायद गुलाबी इस तरह की बातें कभी अपने भाई से ना करती लेकिन आज उसका मन बहक रहा था आज और फिर से अपने भाई से जुड़ना चाहती थी जिसके लिए उसका इस तरह से गंदी बात करना बेहद जरूरी था कि कि वह अपने भाई के मनसा को समझ गई थी वह दुबारा उस तरह की गलती नहीं करना चाहता था और वह खुद उस गलती को दोहराना चाहती थी,,,। अंधेरा होने के बावजूद भी थोड़ा-थोड़ा सब कुछ नजर आ रहा था गुलाबी अपने बड़े भैया को देख रही थी वह झुक कर अभी भी रस्सी में उलझा हुआ था जबकि वह रस्सी बांध चुका था,,,,गुलाबी भी कभी सोची नही थी कि वह ईस तरह से अपने भैया से गंदी गंदी बातें करेगी और वह भी एकदम बेशर्म होकर,,,क्या करें इसमें उसका की कोई दोष नहीं था आखिरकार जवानी का जोश ही कुछ ऐसा होता है कि इसमें इंसान होशो हवास सब को देखना है सही गलत का फैसला कर सकने की क्षमता बिल्कुल भी नहीं रह जाती इसीलिए तो गुलाबी छोटी होने के बावजूद भी अपने बड़े भैया से इस तरह से गंदी बातें करके उसे उकसा रही थी,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही तो इस खामोशी को गुलाबी ही तोड़ते हुए बोली,,,।

राजू और रमा



मुझे वह पल बहुत याद आता है भैया,,,,मुझे यकीन नहीं होता कि मैंने अपने बड़े भैया के साथ इस तरह के अद्भुत सुख को प्राप्त की हुं,,,,

(इन सब बातों को सुनकर हरिया की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, उसके अंदर अजीब सी हलचल मची हुई थी,,, उसी समझ में नहीं आ रहा था कि वहां क्या करें वह इसीलिए गुलाबी से नजरें में चाहता है उसके करीब आने से डरता था क्योंकि वह जानता था कि गुलाबी की खूबसूरती उसे फिर से वही गलती दोहराने पर मजबूर कर देगी लेकिन इस बार हरिया कमजोर नहीं होना चाहता था,,,,,,,इसलिए वह अपनी छोटी बहन की गंदी गंदी बातों को सुनकर मदहोश होने के बावजूद भी अपने आप को संभालते हुए बोला,,,।)

गुलाबी अपनी चूची दीखाते हुए



अब हमें चलना चाहिए काफी देर हो गया है,,,

चलती हूं रुको तो सही बैल को पानी तो पिला दुं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही,, गुलाबी पानी भरी बाल्टी को उठाकर बेल के थोड़ा और करीब रखने लगी,,,,, लेकिन ऐसा करते समय वह जानबूझकर झुकते समय अपनी गोलाकार गांड को अपने बड़े भाई के ठीक आंखों के सामने कर दी और पानी पिलाने के बहाने झुकने की वजह से अपनी गांड को थोड़ा और ज्यादा हवा में लहराने लगी,,,,, गुलाबी की मदमस्त कर देने वाली कौन कौन कौन सलवार में छिपे किसी तोप से कम नहीं थी जिससे दुश्मनों के हौसलों को अपनी आंखें ध्वस्त कर सके और यही काम गुलाबी की गांड भी कर रही थी,,,, गुलाबी की तोप नुमा गांड को देखकर हरिया के सब्र का बांध टूटने लगा,,,,,, उसके इरादे ध्वस्त होने लगे,,,,,, जो अब तक अपनी भावनाओं पर पूरी तरह से काबू करके बैठा था अब वह भावनाओं के भंवर में बहने लगा था,,,,हरिया की आंखों के सामने उसकी सबसे बड़ी कमजोरी लहरा रही थी और गुलाबी भी जानबूझकर पानी पिलाने के बहाने अपने काम को दाएं बाएं खिला कर अपने भाई को अपनी जवानी की तरफ आकर्षित कर रही थी,,,,।

गुलाबी की गोल-गोल गांड और हरिया के चेहरे के बीच केवल चार अंगूर की ही दूरी थी जिसकी वजह से गुलाबी की गांड से उठ रही माधव खुशबू हरिया के नथुने से होकर उसके फेफड़े तक पहुंच रही थी जो कि उसे पूरी तरह से मदहोशी की तरफ ले जा रही थी,,,बिना पिए ही हरिया को 4 बोतलों का नशा होने लगा था उसकी आंखो में खुमारी छाने लगी थी,,,।,,, अपनी बहन की जवानी का रस पीने के लिए उसका मन तड़प उठा था,,,,,,,।

हरीया एक बार फिर से गुलाबी को अपनी बाहों में भर लिया





चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन नजदीक से सब कुछ साफ देखा जा सकता था और यही तेरे से थोड़ी दूरी से देखने पर नजर नहीं आता था जिसका फायदा गुलाबी पूरी तरह से उठाना चाहती थी,,, उसकी कामरस छोड़ रही थी,,, क्योंकि उसके भाई के चेहरे से उसकी गांड केवल 4 अंगुल की ही दूरी पर थी,,, जिसका एहसास उसे पूरी तरह से उत्तेजित किया जा रहा था,,,,। हरिया अपने आप से किए गए वचन से वह पूरी तरह से बंधा हुआ था भविष्य में फिर दोबारा गलती नहीं करेगा इस बात का उसने कसम खाया था लेकिन अपनी बहन की हरकत को देखते ही मुझे लगने लगा था कि सारे कसम वादे नाते टूटने वाले हैं,,,, आखिरकार यह बात अच्छी तरह से हरिया भी जानता था कि उसकी बहन गुलाबी बहुत खूबसूरत है और सबसे बड़ी कमजोरी हरिया के लिए थी तो वह उसकी बहन की गांड थी जो की पूरी तरह से सुडोल जवानी की आभा बिखेर रही थी,,,,,,,,, हरिया का मन ललच रहा था,,, वह अपने दोनों हाथों से बनाकर अपनी बहन की गांड को लपक लेना चाहता था और यही गुलाबी भी चाहती थी,,,,। गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी छोटी बहन होने के नाते ही उसका भाई अपनी तरफ से मनमानी नहीं कर रहा है वह तो ना जाने खेतों में क्यों पूरी तरह से काम उत्तेजित हो गया था और,,, उसके साथ चुदाई का सुख प्राप्त किया,,,,,,दीवार के छोटे से छेद से वह अपने भाई के सारे काम लेना को देखते आ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि रात को उसका शरीफ इज्जत दार भाई अपनी बीवी के साथ कैसा गंदा बन जाता है,,,, कैसे अपनी बीवी की हर तरह से चुदाई करते हैं और उसके मना करने के बावजूद भी नहीं रुकता,,,,

हरीया गुलाबी को चोदने की तैयारी करने लगा





लेकिन अभी अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत नहीं कर रहा है और इस बात से गुलाबी को गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी और समय भी ज्यादा नहीं था क्योंकि वह काफी देर से घर से बाहर निकली थी उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई आना चाहे और उसके किए कराए पर पानी ना फिर जाए इसलिए अपनी तरफ से ही थोड़ा और हिम्मत बढ़ाते हुए गुलाबी अपनी लहराती भी काम को थोड़ा पीछे की तरफ ले गई और इस बार गुलाबी की गांड हरिया की नाक से स्पर्श हो गई,,,।

और फिर क्या था हरिया बहुत देर से अपनी भावनाओं को दबा कर रखा हुआ था और अपनी बहन की इस हरकत की वजह से उसकी भावनाओं का बांध टूट पड़ा और बाकी ना कुछ बोले ही अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की गांड को अपनी हथेली में दबोच लिया,,,।

आहहहहह,,,,भैया,,,,(उत्तेजना के मारे हरिया ने इतनी जोर से अपनी बहन की गांड को दबाया था कि गुलाबी की कराह भरी आह निकल गई थी,,,और, उसकी इस आवाज को सुनकर हरिया की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और वह सलवार के ऊपर से ही अपनी नाक को उसकी गांड की दोनों आंखों के बीच डालकर जोर से सांस अंदर की तरफ खींचने लगा उसकी मादकता को वहां पूरी तरह से अपने अंदर उतार लेना चाहता था,,,।

ऊमममममममम,,,,,ओहहहहह गुलाबी,,,,,,

ओहहहह भैया,,,,,,(गुलाबी उत्तेजित स्वर में बोली,,,, गुलाबी उसी तरह से झुकी रह गई उसकी मदमस्त गांड सलवार के ऊपर से ही पकड़ कर हरीया उस पर अपना मुंह रगड़ने लगा,,। गुलाबी कि दूर से काम रस बहने लगा,,, गुलाबी के पास वक्त बहुत कम था यह बात हरिया भी जानता था गुलाब इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि जलेबी मे से उस का रस उतना नहीं तो पकड़ा था जितना गुलाबी की बुर से काम रस चु‌ रहा था,,,, अपना चेहरा अपनी बहन की गांड पर रगड़ता हुआ हरिया बोला,,,।)

ओहहहह गुलाबी तूने मुझे पागल कर दिया है मैं तुझसे दोबारा संबंध नहीं बनाना चाहता था लेकिन तूने मुझे मजबूर कर दी है,,,(इतना कहते हुए हरिया खड़ा हुआ और झुकी हुई गुलाबी की कमर पकड़कर सलवार के ऊपर से ही धोती में तना हुआ अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ने लगा,,,, एक बार फिर से अपने भाई की लड़की को अपनी गांड पर महसूस करते ही गुलाबी के तन बदन में आग लगने लगी,,, और वह अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर धोती के ऊपर से ही अपने भाई के लंड को पकड़ लि और बोली,,।)

जल्दी करो भैया समय बहुत कम है कोई भी आ सकता है,,,,।

ओहहहह मेरी गुलाबी,,,, जल्दी से अपनी सलवार की डोरी खोल मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है,,,,

वो तों तुम्हारे लंड की चुभन देखकर ही लग रहा है भैया,,,(इतना कहने के साथ ही गुलाबी खड़ी हो गई और उसके खडे होने के साथ हीहरिया अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपने पैसे की चूची को कुर्ती के ऊपर से ही पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया हरिया यह बात अच्छी तरह से जानता था कि संभोग करने से पहले औरतों का स्तन मर्दन करने से औरत और आदमी दोनों को अत्यधिक उत्तेजना का एहसास होता है जिससे वह दोनों चुदाई के खेल को अच्छी तरह से खेल पाते हैं,,,। पूरी ताकत लगाकर हरिया अपनी बहन के संतरो को दबा रहा था और गुलाबी जल्द से जल्द अपनी सरकार की डोरी खोल कर अपनी बुर को अपने भैया के सामने पेश कर देना चाहती थी,,,।

गुलाबी देखते ही देखते अपनी सरकार की डोरी खोल कर उसे घुटनों तक नीचे खींच दी वह पूरी तरह से अपनी सोमवार को नहीं निकालना चाहती थी ताकि अगर कोई आ जाए तो वह झट से पहन सके,,,जैसे ही गुलाबी अपनी सलवार को खींचकर घुटनों तक कि अंधेरे में भी चमक रही अपनी बहन की गांड को देखकर हरिया के मुंह में पानी आ गया और वो झट से अपने दोनों हाथी को अपनी बहन की चुचियों पर से हटा कर सीधे अपनी बहन की गोरी गोरी नंगी गांड पर रखकर उसे दबाने का आनंद लेने लगा,,,

आहहहह गुलाब तेरी गांड़ कितनी चीकनी है रे,,,,

भैया किसी और समय मेरी गांड की चिकनाहट से खेलना अभी समय बहुत कम है जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दो,,,,

बहुत जल्दबाजी है तुझे,,,

क्या करूं तुम्हारा लंड ही ऐसा है कि मन मचल उठता है,,,

ओहहहह दीवानी हो गई है तो मेरे लंड की,,,

दासी हो गई हु अब जल्दी कीजिए भैया,,,

बस हो गया मेरी रानी,,,,,( और इतना कहने के साथ ही हरिया धोती में से अपने खड़े लंड को बाहर निकाल कर निशाना लगाकर अपनी बहन की गुलाबी छेद पर रखा और उसकी कमर थाम कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया,,, पहले भी एक बार अपने बहन के लंड को अपनी बुर में ले चुकी बुलाकर बड़े आराम से इस बार भी अपने भाई के लंड को अपनी बुर की गहराई में उतार ली,,, और फिर क्या था,,, हरिया अपनी बहन की कमर थाम कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,,, वह रात के अंधेरे में घर के पीछे बैल बांधने के बहाने अपनी बहन की चुदाई कर रहा था अपने आप से किया गया वादा कसम सब कुछ तोड़ चुका था अपनी भावनाओं पर वह ज्यादा देर तक अपनी बहन की कामुक हरकतों की वजह से काबू नहीं कर पाया और एक बार फिर से अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा,,,। गुलाबी की संकरी और चुस्त बुर हरीया को अत्यधिक आनंद प्रदान कर रही थी,,,। गुलाबी उसी तरह से झुकी हुई थी और हरिया धक्के पर धक्के लगा रहा था वह भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह भी बिना रुके एक ही लय में अपने मोटे तगड़े लंड को अंदर बाहर कर रहा था,,,।

हरीया ताबड़तोड़ गुलाबी को चोदना शुरू कर दिया



गुलाबी की मनसा एक बार फिर से पूरी हो रही थी देखते ही देखते उसकी सांसों की गति तेज होने लगी बड़े जल्दी ही वह चरम सुख की करीब पहुंचती जा रही थी और हरिया भी यही चाहता था इसलिए उसके धक्के बिल्कुल भी तेज नहीं हो रहे थे और देखते ही देखते वह भी चरम सुख की भी करीब पहुंचने लगा तो अपने दोनों हाथों को अपनी बहन की चुचियों पर रख उसे जोर जोर से दबाते हुए अपनी कमर हिलाने लगा,,,, और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,,,,

गुलाबी जल्दी से अपनी सलवार पहनकर अपने भैया से पहले ही जलेबी का पडीका लेकर घर में प्रवेश करते हुए बोली,,।

भाभी आज भैया जलेबी या लाए है,,, खाने के साथ इसे भी परोस ना,,,,।

(जलेबी का नाम सुनते ही,,, मधु के चेहरे पर शर्म की लालीमा छाने लगी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जिस दिन घर में जलेबी आती है उस दिन हरिया रात भर मधु को सोने नहीं देता,,,)
 
जलेबी की मिठास मधु की बुर में नमकीन रस घोल रही थी,,,घर पर जलेबी आने का मतलब को अच्छी तरह से समझती थी क्योंकि जब से वह शादी करके घर आई थी तब से निरंतर यह चलता ही आ रहा था,,,।इसलिए रह रह कर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लग रही थी और शर्म से उसके गाल लाल हुए जा रहे थे,,,, आज उसकी जमकर सेवा होने वाली थी,,,। गुलाबी अपनी मंशा को पूरी कर चुकी थी इस तरह से चोरी-छिपे चुदवाने में जो आनंद आता है उसका लुफ्त उठा कर गुलाबी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,, अपनी रस भरी जवानी पर उसे पूरा विश्वास था क्योंकि वह जानती थी कि अपनी खूबसूरती से वह अपने भैया को अपनी तरफ आकर्षित कर लेगी क्योंकि उसका भाई एक बार संबंध बनाने के बाद उससे कतराने लगा था और ऐसा वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,पहले अपनी बातों से गर्म करने के बाद अपनी कामुक हरकतों से वह अपने बड़े भैया को पूरी तरह से अपनी जवानी के रस में घोलकर उसके साथ दुबारा शारीरिक संबंध बना ही ली और गुलाबी की कामुक हरकत की वजह से हरिया भी,,अपने कदमों पर अपने वचन पर कायम नहीं रह पाया और सब कुछ एक तरफ रख कर वह अपनी बहन की मद भरी जवानी में खो गया,,, हरिया चलेगी इसीलिए ही खरीदा था कि घर पर चलकर अपनी बीवी को जलेबी खिला कर रात भर उसकी जवानी का रस चखेगा लेकिन उससे पहले ही उसकी बहन ने ही उसे अपनी जवानी का रस पिला दी,,, जिससे उसका हौसला और बुलंद हो गया था,,,। घर के किसी भी सदस्य को कानों कान इस बात का अहसास तक नहीं हुआ कि घर का जिम्मेदार सदस्य घर के पीछे अपनी बहन की चुदाई कर रहा है,,,,।

खाना खाने के बाद,,, मधु और हरिया अपने कमरे में चले गए,,,,, गुलाबी राजू के आने से पहले भी कमरे में जाकर खटिया पर लेट गई थी वह राजू से चुदवाना चाहती थी,,, लेकिन राज्यों के आने से पहले ही उसकी आंख लग गई और वह सो गई राजू जब कमरे में प्रवेश किया तो देखा कि उसकी बुआ गहरी नींद में सो रही है,,,, राजू को इस बात का इत्मीनान था कि वह कभी भी अपनी बुआ की चुदाई करके संतुष्ट हो सकता है इसलिए अपनी बुआ को जगाना हुआ उचित नहीं समझा लेकिन खटिया पर लेटे लेटे उसे नींद नहीं आ रही थी,,,। क्या किया जाए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था रह-रहकर उसे झुमरी की याद आ रही थी दिन का समय होता तो वह झुमरी से मिलने के लिएउसके घर चला गया होता लेकिन रात का समय था इसलिए जाना उचित नहीं था लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि बहुत दिन हो गए हैं बगल वाले कमरे में तांक-झांक कीए क्यों ना आज फिर से वही काम किया जाए जिसे देखकर ही जवानी का मजा लूट रहा है,,, यही सोचकर वह खटिया पर से नीचे उतरा और उसी छोटे से छेद वाली जगह पर पहुंच गया,,,, खाना बनाते समय में अपनी मां की चुचीयों की घेराइयों को देखकर पहले ही वह उत्तेजित हो चुका था इसलिए इस समय उसके मन में अपनी मां को नंगी देखने की इच्छा प्रबलीत हो रही थी वह अपनी मां को एक बार फिर से नंगी देखना चाहता था उसके हर गम को को अपनी आंखों से उसके मदन रस को पीना चाहता था,,,,,,। आज भी उसे अपनी मां नंगी देखने को मिलेगी इसी आज के साथ हुआ छोटे से छेद से अपनी आंख टीका दिया,,, तो सामने ही उसकी मां नजर आई जो छोटे से कमरे में बनी छोटे से गुसल खाने मैं जहां पर पीने का पानी रखा जाता है और रात के समय उसकी मां पेशाब करने के लिए उसी का इस्तेमाल करती थी वहीं पर देखा कि उसकी मां खड़ी थी और मटके में से पानी निकाल कर पी रही थी बगल वाले कमरे में भी लालटेन अपनी पूरी रोशनी बिखेर रहा था जिससे कमरे का हर एक कोना नजर आ रहा था,,,,,,, अपनी मां को पानी पीता देखकर ना जाने क्यों इतने सही राजू उत्तेजित होने लगा,,,, राजू की मां पानी पीने के बाद ग्लास को वही रख कर हरिया की तरफ देखी और मुस्कुराने लगी हरिया हमेशा की तरह खटिया पर पीठ के बल लेटा हुआ था लेकिन उसके बदन पर पूरा वस्त्र था उसने अभी अपने कपड़े निकाले नहीं थे,,,,।

Hariya or Madhu



अरे वही खड़ी देखती ही रहोगी कि आओगी भी,,,,।

अरे आ रही हूं थोड़ा सब्र कीजिए आप तो एकदम उतावले हो जाते हैं,,,।

क्या करूं मेरी जान इसीलिए तो आज जलेबी लेकर आया था कि आज सारी रात तुम्हारी लेकर मस्त हो जाऊंगा,,,

रोका किसने है आप जलेबी लेकर आए थे तभी मैं समझ गई थी और रात भर की तैयारी के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी,,,। तुम्हारा जलेबी लाने के मतलब को मैं अच्छी तरह से जानती हूं,,,(मधु वही खड़ी खड़ी मुस्कुराते हुए बोल रही थी राजू को भी अब जलेबी लाने के पीछे का मकसद पता चलने का वह समझ गया कि उसके पिताजी घर पर जलेबी लाकर उसकी मां को जलेबी खिला कर रात भर उसकी चुदाई करते हैं,,। राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर तोड़ने लगी वह अपनी मां को जल्द से जल्द नंगी देखना चाहता था उसकी चूचियों को खास करके वहां नंगी देखने के लिए मचल रहा था,,, तभी राजू ने जो देखा उससे उसके लंड का तनाव बढ़ने लगा,,,, उसकी मां उसी छोटे से बने खुसर खाने में खड़ी थी और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते-देखते राजू की आंखों के सामने ही उसकी मां ने अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और नीचे बैठकर मुतना शुरू कर दी,,,। राजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी उठने लगी,,, उसके लंड की नसों में उसकी मां की मदहोशी बहने लगी,,,। राजू की सांसे पल भर में गहरी चलने लगी राजू की आंखों के सामने भले ही मधु इस बात से अनजान थी कि उसका बेटा उसे चोरी छुपे देखता है वह निश्चिंत होकर मुत रही थी,,,उसकी मौत ने की वजह से उसकी पूजा दी पत्तियों के पीछे से जो मधुर संगीत निकल रही थी वह राजू के कानों तक पहुंच रही थी जिसे देखकर पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था ऐसा नहीं था कि वह पहली बार किसी औरत को पेशाब करते हुए देखना था वह पहले भी औरतों को पेशाब करते हुए टिकट और उसका सुख प्राप्त कर चुका था लेकिन अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने में जो सुकून मिलता था उससे वह अपने शब्दों में बयां नहीं कर पाता था जिसे देखकर पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगता था उस पल में पूरी तरह से डूब जाना चाहता था और यही हो भी रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए मुत रही थी और जिसे देखकर राजू के लंड में हरकत होना शुरू हो गया था,,,,,, राजू इस दृश्य की मादकता को बर्दाश्त कर सकने में असमर्थ था वहीं दूसरी तरफ उसका बाप बड़े आराम से इस दृश्य को देख रहा था और धोती के ऊपर से ही अपने लंड को सहला रहा था,,,, हरिया बड़े आराम से शहर जो करिश्मा रखता परिदृश्य को इसीलिए शायद देख रहा था क्योंकि वह उस औरत को रोज चोदता था उस पर उसका पूरा हक था जिसे जब चाहे तब उसकी चुदाई कर सकता था और राजू इस दृश्य को देखकर इसलिए असहज हो रहा था क्योंकि,,, राजू के लिए उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने वाली औरत पर उसका उस तरह का हक नहीं था कि वहां जब चाहे तब उसे बिस्तर पर ले जाकर उसकी चुदाई कर दे उसके साथ संभोग सुख प्राप्त कर सके इसलिए यह दृश्य राजू के लिए बेहद कामुकता भरा था,,,।

Hariya or maddhu



देखते ही देखते राजू की मा उसकी आंखों के सामने मुत कर खडी हो गई,,,लेकिन वह खड़ी होने के बावजूद भी कमर से अपनी शादी तो नीचे नहीं गिरा है बल्कि उसी तरह से कमर से अपनी साड़ी को पकड़े हुए ही अपनी नंगी गांड को मटकाते हुए राजू के पिताजी के करीब जाकर खड़ी हो गई राजू एक बार फिर से मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था,,, ऐसा नहीं था कि वह पहली बार अपनी मां को इस रूप में देख रहा हो,, वह पहले भी अपनी मां को इस रूप में देख चुका था नंगी चुदवाते हुए,,, लेकिन फिर भी यह कसक ऐसी थी कि जब-जब राजू अपनी मां को इस रूप में नंगी देखता था तुम से ही लगता था कि वह पहली बार देख रहा है और उसकी उत्तेजना हर बार बढ़ती ही जाती थी,,,,।

राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह पूरी तरह से चुदवाया हो गया था,,, उसका मन कर रहा था कि नींद में ही सही अपनी बुआ की चुदाई कर दे,,, लेकिन शायद खुद चुदाई करने से ज्यादा सुख उसे अपनी मां को इस रूप में देखने से प्राप्त हो रहा था इसलिए वह इस लालच में वही रुक आ रहा और अपनी मां की गंदी हरकत को देखकर मस्त होता रहा उसके पिताजी खटिया पर लेटे हुए ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी नंगी गांड को सहलाने लगे और बोले,,,,,,

Madhu or Gulabi



आज तो बहुत मजा आएगा,,,( और इतना कहने के साथ ही वह मधु को अपनी तरफ खींच कर अपने ऊपर लेटा लिया,,, और उसकी नंगी गांड को जोर-जोर से अपनी हथेली में लेकर दबाने लगा,,,। इस तरह का दृश्य हर बार देखने पर राजू के तन बदन में मदहोशी की ताजगी भर देती थी,,,, हरीया पूरा जोर लगा कर अपनी बीवी की गांड अपनी हथेली में दबोच ते हुए दबा रहा था और राजू की मां को बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फुट रही थी,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे,,, राजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़क रहे थे,,, वह बार-बार अपनी बुआ गुलाबी की तरफ देख ले रहा था,,, क्योंकि वह अपने मन में सोच रहा था कि,,, अगर उसकी बुआ की नींद खुल जाए तो वह भी अपनी सारी गर्मी अपनी बुआ की बुर में निकाल दे,,, लेकिन फिर भी जो कुछ भी अपनी आंखों से देख रहा था उसके लिए बहुत था,,, क्योंकि जब भी वह दीवार के छोटे से छेद में से बगल वाले कमरे में जाता था तब तक उसे कुछ सीखने को ही मिलता था एक तरह से बगल वाला कमरा उसके लिए एक पाठशाला हो गई थी जिसमें संभोग का हर एक अध्याय के हर एक पन्ने को वह अपनी आंखों से पढ़ रहा था और उसे कुछ सीख रहा था,,,, उसके पिताजी और उसकी मां उसके लिए अध्यापक का काम कर रहे थे,,,,, की मां की खूबसूरत बदन में कितनी गर्मी है राजू अपनी आंखों से कई बार देख चुका है लेकिन यह देखने की प्यास थी कि बुझती ही नहीं थी,,,,,,।

मधु अपने पति के जांघों पर बैठ गई और अपनी ब्लाउज का बटन खोलने लगी,,,,, राजू कि सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,अपनी मां का यह रूप उसे बेहद कामुक लगता था ऐसा लगता था कि जैसे खुद काम देवी उसकी आंखों के सामने बैठी हो,,, चूची के आकार से कम नाथ का ब्लाउज होने के नाते मधु का ब्लाउज पूरी तरह से कसा हुआ होता था ऐसा लग रहा था कि जैसे दो खरबूजे उसके ब्लाउज में ठुंस ठुंस कर भरे हुए हो,,,ऐसा नहीं था कि मधु की चूचियां छोटी थी उसका वास्तविक रूप ही खरबूजे की तरह था जिसे देख कर दुनिया के हर एक मर्द के मुंह में पानी आ जाता था देखते ही देखते राजू कि मैं आपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी और ब्लाउज के खुलते ही उसके दोनों खरबूजे उसकी छातियों की शोभा बढ़ाते हुए लटक गए हालांकि उसकी चुचियों में लटकन बिल्कुल भी नहीं था एकदम तनी हुई दुश्मन को आंख दिखाती हुई नजर आ रही थी,,,, हरिया अपनी बीवी की चूचियों को जी जान से प्यार करता था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बीवी की चूचियां लाखों में एक थी,,, और अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली चूचियों के आकार और उसके आकर्षण से राजू भी वाकीफ था क्योंकि उसके जीवन में भी धीरे-धीरे करके बहुत सी औरतें आती जा रही थी लेकिन जो आकर्षण उसे अपनी मां की चुचियों से प्राप्त हो रहा था एक ऐसा आकर्षण उसे अभी तक किसी भी औरत की चुची में नजर नहीं आया था इसीलिए तो इस समय भी अपनी मां की चूची को देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,।राजू की लालच को और ज्यादा बढ़ाते हुए उसके पिताजी अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर राजू की मां की दोनों चूची को पके हुए पपीते की तरह थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,,, अपने पिताजी की हरकत को देखकर राजू के तन बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,,अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उसके पिताजी की जगह वो होता तो ओर ज्यादा मजा आता,,,,।

लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,राजू के पिताजी उसकी मां की चूचीयो में व्यस्त थे और उसकी मां अपने ब्लाउज को अपनी बाहों में से निकाल कर अलग कर रही थी,,, देखते ही देखते राजू की मां अपने ब्लाउस निकालकर खटिया के नीचे फेंक दी और यही हाल होता है,,, जब कामुकता और उत्तेजना बदन में पूरी तरह से

असर कर जाती है तो यही होता है,,, औरत और मर्द दोनों एक दूसरे में समाने की जल्दबाजी में अपने कपड़े उतार उतार कर फेंकना शुरू कर देते हैं और यही हाल मधु का भी था अपना ब्लाउज उतारकर खटिया के नीचे फेंक दी,,,।

स्तन मर्दन का मजा राजू की माफी पूरे जोश के साथ लेती थी,,, चूची दबाने में जितना मजा मर्दों को आता है उससे कहीं ज्यादा मजा औरतों को आता है,,, इसीलिए तो राजू की मां गरमा गरम सिसकारी के साथ चूची दबवाने का आनंद लूट रही थी,,,।

सहहहहह आहहहहहहहहह,,,ऊईईईई, मां,,,,ऊमममममम,,,।

इस तरह की गरमा गरम आवाज को सुनकर राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,,, वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबाना शुरू कर दिया था,,,। थोड़ी देर बाद हरिया अपने ऊपर बैठे अपनी बीवी की साड़ी की गांठ को खोलने लगा और अगले ही पल वह अपनी बीवी की कमर पर से साड़ी को धीरे धीरे उतारना शुरू कर दिया,,,, देखते ही देखते हरिया मधु की साड़ी,, उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया,,,धीरे-धीरे राजू अपनी मां को नंगी होता हुआ देख रहा था उसके बदन पर केवल उसका पेटीकोट नहीं किया था जिस की डोरी को पकड़कर उसके पिताजी खींच दीए थे,,,,, और अपने पति का साथ देते हुए मधु उसी अवस्था में खड़ी हो गई,,,,और अपनी कमर से कसी हुई पेटीकोट को ढीली करके उसे यूं ही छोड़ दी राजू अपनी आंखों से मादकता भरे नजारे को देखकर पूरी तरह से मस्त हो गया,,, राजू की मां खटिया पर एकदम नंगी खड़ी थी,,, लालटेन की पीली रोशनी में उसका वजन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था,,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,। राजू का लंड पूरी तरह से मचल रहा था अपनी मां की बुर में जाने के लिए,,, लेकिन शायद अभी उसकी किस्मत में यह नहीं लिखा था,,,, केवल देखकर ही वह संतोष प्राप्त कर रहा था,,,,,।

सच कहूं तो मधु तुम नंगी होने के बाद स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा की तरह नजर आती हो,,,।

अप्सरा देखे हैं क्या आप,,,?( बारी बारी से एक एक टांग ऊपर करके अपने पेटिकोट को अपनी टांगों में से निकलते हुए बोली,,,)

तुम्हें देख लिया तो स्वर्ग की अप्सरा को भी देख लिया इतना तो मैं जानता हूं कि स्वर्ग की अप्सरा भी तुमसे ज्यादा खूबसूरत नजर नहीं आती होगी,,,।

हटीए,,,, बेवजह बातें बनाते हैं,,,(मधु शर्माते हुए बोली,,,)

सच कह रहा हूं मेरी रानी,,,,(नंगी चिकनी मांसल पिंडलियों को सहलाता हुआ हरिया बोला,,,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी मां खटिया पर खड़ी थी और अपने हाथों से अपनी चुचियों को मसल रही थी,,, शायद यह घर पर जलेबी लाने का असर था जो भी दोनों को पूरी तरह से मदहोश किए जा रहा था,,,,)

अपने कपड़े उतारो कि सिर्फ मेरे ही उतरवा लिए,,,

अरे मेरी जान चिंता क्यों करती हो बिना कपड़े उतारे मजा लेने वाला नहीं हूं कपड़े उतार कर ही मजा आता है,,,।

(इतना कहने के साथ ही हरिया अपनी धोती को खोलने लगा और अगले ही पल धोती को उतार कर नीचे फेंक दिया उत्तेजना के मारे उसका लंड खड़ा था कुछ देर पहले ही वह अपनी बहन की चुदाई कर चुका था,,, लेकिन फिर भी उसका लंड खड़ा था जिसका एक ही कारण था मधु,,, मधु की खूबसूरत मदहोश कर देने वाली जवानी देखकर मुर्दे में भी जान आ जाए,,, अपने पति के खड़े लंड को देखकर मधुर मुस्कुराने लगी यह देख कर राजू को जलन होने लगी क्योंकि वह जानता था कि उसका लंड उसके पिताजी से कई मायने में जबरदस्त मोटा तगड़ा और लंबा है और उसकी मा है की ,,, उसके बाप के आधे लंड को देखकर,,, खुश हो रही है राजू अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसकी मां उसके लंड को देख लेगी तो तब तो खुद ही उसके लिए साड़ी उठा देगी,,,, फिर अपने मन में मां यह सोचने लगा कि अभी तक उसने अपनी मां को अपने लंड के दर्शन नहीं कराए हैं वरना उसकी मां ना जाने कब का उसे दे दी होती,,,,। यही सोचता हुआ राजू अपने लंड को पजामे के ऊपर से जोर जोर से दबा रहा था,,,,,,देखते ही देखते हरिया अपना कुर्ता भी उतार दिया और खटिया पर दोनों एकदम नंगे हो गए,,,,।राजू को लगा कि आप उसका बाप उसकी मां की चुदाई करना शुरू कर देगा लेकिन ऐसा नहीं था राजू की मां खटिया पर बैठ गई और हरिया खटिया पर से नीचे उतरा और कोने में रखी सरसों के तेल की कटोरी हाथों में ले लिया,,,, जिसे देखकर राजू की मां शर्मने लगी राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या होने जा रहा है,,,, हरिया तेल की कटोरी देकर खटिया के पास आकर खड़ा हो गया,,,, और एक हाथ से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,।

उसमें नहीं डालोगे तो क्या मजा नहीं आएगा,,,

मेरी जान कभी कभी तो मौका मिलता है,,, तुम्हारी गांड में डालने का,,,,,

गांड मारने में तुम्हे ईतना मजा आता है,,,

सच कहूं तो बहुत मजा आता है कभी-कभी तुम्हारी दूसरे छेद का भी मजा ले लेना चाहिए,,,।

(राजू को सारा मामला समझ में आ गया था राजू तो यह सुनकर पूरी तरह से सन्न रह गया था उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन उसकी आंखें और कान दोनों झूठ नहीं बोल रहे थे अपनी मां की बात सुनकर और पूरी तरह से उत्तेजना से सिहर उठा था बड़ी सहज होकर उसकी मां गांड मारने की बात कर रही थी जिस की तैयारी में उसका बाप लगा हुआ था,,,,गांड मारने के बारे में राजू ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की औरतों की गांड भी मारी जाती है आज वह अपनी आंखों से देख रहा था,,,, संभोग कला का एक बार अपनी आंखों से देख कर सीखने जा रहा था,,,, अपने मन में सोचने लगा कि अच्छा ही हुआ कि आज वह फिर से इस छोटे से छेद में से झांकने का सौभाग्य प्राप्त कर लिया वरना यह अद्भुत नजारा और अकल्पनीय अध्याय सीखने को नहीं मिलता वह देखना चाहता था कि क्रिया कैसे होती है,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, वह यह देखने के लिए उत्सुक थी कि आगे क्या होता है,,,, हाथ में कटोरी लिए हुए उसके पिताजी बोले,,,।

मेरी रानी अब पेट के बल लेट जाओ,,, तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड की सेवा करने का समय आ गया है,,,।

(अपने पिताजी की बातें सुनकर और वह भी अपनी मां के लिए राजु के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी,,, राजू टकटकी लगाए सारे दृश्य को अपने दिमाग में कैद किए जा रहा था उसके पिताजी की बात सुनते ही मुस्कुराते हैं उसकी मां पेट के बल लेट गई खटिया पर पेट के बल लेटे होने के बावजूद भी उसकी बड़ी-बड़ी गांड बेहद खूबसूरत और उठी हुई लग रही थी,,,, उसके नितंबों का उभार पहाड़ की तरह नजर आ रहा था,,, जिस पर चढ़ने के लिए किस्मत का साथ होना बेहद जरूरी था और इस समय ऐसी किस्मत सिर्फ उसके पिताजी की थी,,, इस हालत में कोई अगर मधु को देख ले तो शायद उसका पानी निकल जाए क्योंकि वह इस समय खटिया पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और अभी पेट के बाद उसकी नंगी चिकनी पीठ के साथ-साथ उसके नितंबों का उभार जानलेवा नजर आ रहा था,,। एक नजर अपनी नंगी बीवी के बदन पर डालते हुए बोला,,,।

हाय मेरी जान भगवान ने मेरी किस्मत अपने हाथों से लिखा था जो तुम्हें मेरी किस्मत में लिख दिया था,,,, आज तो जी भर कर तुम्हारी लूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही हरिया खटिया पर बैठ गया और कटोरी मे रखे हुए सरसों के तेल की धार को मधु की गांड पर गिराना शुरू कर दिया,,, थोड़ी ही देर में राजू की मां की गांड सरसों के तेल में और ज्यादा चमकने लगी राजू की सांसे उत्तेजना के मारे उखडती चली जा रही थी,,,,,, अपनी गांड पर तेल की धार पड़ने पर मधु एकदम मस्त भेजा रही थी उसके चेहरे पर संतुष्टि और उत्तेजना के भाव साहब झलक रहे थे उसे मालूम था कि अब आगे क्या होने वाला है इसलिए मन ही मन अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी,,,,।

हरिया सरसों के तेल की कटोरी को नीचे रखकर अपनी दोनों हथेलियां अपनी बीवी की गांड पर रखकर उसे मसलना शुरू कर दिया एक तरह से वह अपनी बीवी की गांड की मालिश कर रहा था,,,, हां जोर जोर से अपनी हथेली में जितना हो सकता था आप अपनी बीवी की गांड को दबोच कर उसकी मालिश कर रहा था,,,, अपनी मां की गांड की मालिश होता हुआ देखकर राजू का मन ललचा रहा था,,,,इस तरह का दृश्य देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना का कामज्वर बढ़ता जा रहा था,,,,राजू के पिताजी एकदम उत्तेजित होने जा रहे थे वहां रह रहे कर जोर से राजू की मां की गांड पर चपत लगा देंगे जिससे राजू की मां के मुंह से आह निकल जा रही थी और यह आहह की आवाज उत्तेजना पूर्ण थी,,,,राजू की मां को भी अपनी गांड पर चपत लगाना बहुत ही अच्छा लग रहा था,,, देखते ही देखते राजू की मां की गोरी गोरी गाल टमाटर की तरह लाल हो गई,,,,राजू को साफ नजर आ रहा था कि जब जब उसके पिताजी उसकी मां की गांड पर जोर से चपत लगा दी थी तब तक उसकी नरम नरम बड़ी बड़ी गांड नदी के पानी की तरह लहरा उठ रही थी जिसे देखकर राजू का मन कर रहा था कि वह भी अंदर घुस जाए और अपने पिताजी का साथ दें,,,,, क्योंकि इस तरह का मादकता भरा दृश्य उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,,पजामे के अंदर उसका नंबर बगावत पर उतर आया था ऐसा लग रहा था कि जैसे पजामा फाड़कर उसका लंड बाहर आ जाएगा,,,, जिसे बड़ी मुश्किल से अपनी हथेली में पकड़ कर राजू दबोचे हुए था,,,।

कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,

आहहहहह,,, बहुत सुकून मिल रहा है,,,,रोज इसी तरह से मालिश किया कीजिए दिन भर की थकान दूर हो जाती है,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर राजू अपने मन में कहने लगा कि उसे भी एक बार यह मौका दे कर देखो दिन-रात मालीस ही करता रहेगा,,,)

मैं तो रोज तुम्हारी मालिश करूं लेकिन क्या रोज गांड मारने दोगी,,,।

ना बाबा बिल्कुल नहीं,,,, इसीलिए तो मैं तुमसे जलेबी नहीं मंगवाती,,,।

हां सच कह रही हो तभी तो मुझे ही खरीद कर लाना पड़ता है,,,।

(अपनी मां और पिताजी की बात सुनकर राजू समझ गया था कि जलेबी उन दोनों के बीच होने वाले इस रिश्ते का इशारा था लेकिन जलेबी घर में आती थी समझ लो की उसकी मां की गांड चुदने वाली होती थी,,,,,,, हरिया पूरा जोर लगा कर राजू की मां की गांड की मालिश कर रहा था,,,, और फिर धीरे से खडा हुआ और अपने लंड को हवा में लहराता हुआ अपनी बीवी के सिहरीने आया और बोला,,,)

अब ईसे मुंह में लेकर गिला कर दो ताकि आराम से जा सके,,,,।

(और बिना ना नकुर किए,, मधु धीरे से उठी और हरिया के लैंड को मुंह में लेकर बड़े आराम से चूसना शुरु कर दी क्योंकि शायद वह भी जानती थी कि लंड का गीला होना बेहद जरूरी है,,, थोड़ी देर तक राजू की मां अपने पति के लैंड को मुंह में लेकर चुस्ती रही और फिर उसे बाहर निकाल दी,,,उसकी मां की इस हरकत पर राजू उत्तेजना के मारे अपनी आंखों को बंद कर ले रहा था और अपने पिताजी की जगह अपने आपको रखकर कल्पना कर रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके पिताजी का है बड़े आराम से उसकी मां के मुंह में चला जा रहा था लेकिन उसका लंबा लंड उसके गले तक उतर जाएगा जिसे आराम से चूस पाना बहुत मुश्किल होता है,,,, लेकिन यह बात को अच्छी तरह से जानता था कि जिस दिन यह मौका मिलेगा उसे बहुत मजा आएगा,,,, अपने पति के लंड को मुंह में से बाहर निकलने के बाद वह बोली,,,।)

देखना आराम से करना और सरसों का तेल थोड़ा छेद पर ज्यादा लगा लेना वरना अंदर जाने में तकलीफ होगी,,,।

( अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर राजू उत्तेजना से पूरी तरह से गदगद हो गया,,, और उसकी बात सुनकर उसके पिताजी बोले,,,)

तो फिर कोई चिंता मत करो मेरी रानी तुम्हारी गांड का छेद मेरे लिए अनमोल तोहफा है इसे मैं बिल्कुल भी तकलीफ नहीं पहुंचाऊंगा,,,, बस थोड़ा सा गांड़ ऊपर की तरफ उठा दो तो तुम्हे पेलने में आसानी होगी,,,





(और इतना सुनते ही मधु आज्ञाकारी बीवी की तरह अपनी भारी-भरकम गोल गोल गांड को ऊपर की तरफ हवा में उठा दी मानो की दुश्मन को दागने के लिए कोई तोप निशाना लगा रहा हो,,,, यह नजारा देखकर राजु तो चारों खाने चित हो गया क्योंकि गांड उपर की तरफ उठाने पर राजू को उसकी मां की कौन कौन कौन एकदम सामने नजर आने लगी उसका गुलाबी छेद उसके भूरे रंग का छेद सब कुछ लालटेन की रोशनी में नजर आने लगा था,,, जिसे देखकर राजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आना शुरू हो गया था,,,,अब आगे क्या होने वाला है इसके बारे में सोच कर राजू के बदन में उत्तेजना के मारे कंपन होना शुरू हो गया था,,, जवानी से भरा हुआ उसका लंड अंगड़ाई ले रहा था,,,।राजू के पिता से एक बार फिर से नीचे रखी सरसों के तेल की कटोरी उठा लिए,,, और एक हाथ से मधु की कमर पर दबाव देते हुए उसे अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाने का इशारा किया राजू की मां अपने पति के इसे सारे को समझ गई और अपनी भारी-भरकम गोलाकार गांड को थोड़ा सा और ऊपर की तरफ उठा दी,,,, अब राजू को उसकी मां की गांड का छेद इधर साफ नजर आ रहा था,,,, जिस पर उसके पिताजी कटोरी से तेल की धार गिरा रहे थे,,, और गांड के छेद पर सरसों के तेल की धार गिरने पर राजु की मां कसमसा रही थी,,, यह सब देख कर राजू इतना तो समझ गया था कि यह पहली बार का नहीं था उसकी मां बहुत बार गांड मरवा चुकी थी अपनी मां की इस हरकत पर और पूरी तरह से,,, समझ गया था कि उसके बाप के साथ-साथ उसकी मां भी इस मामले में बेहद शौकीन किस्म की औरत है भले ही दिन भर कितनी भी संस्कारी बनकर रहती हैं लेकिन रात को उसके अंदर की असली औरत जाग जाती है,,, और उसकी यही आदत राजू के लिए उसकी दोनों टांगों के बीच का फासला तय करेगी ऐसा उसे पूरा विश्वास हो गया था,,,,,।

थोड़ी ही देर में उसकी मां की गांड का छेद पूरी तरह से सरसों के तेल से लबालब चिकना हो गया जिसे उसके पिता उसे अपनी खेती से मसलकर और ज्यादा फैला रहे थे और थोड़ा सा सरसों का तेल अपने लंड पर भी लगा कर उसकी धार को और तेज कर रहे थे,,,,।

Hariya or raju ki ma



अब तैयार हो जाओ मेरी जान तुम्हें चांद पर ले जाने का समय आ गया है,,,,।

(अपने पिताजी के मुंह से इतना सुनते ही राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,, क्योंकि अब वह नजर आने वाला है जिसका उसे बेसब्री से इंतजार था,,,, देखते ही देखते उसके पिताजी उसकी मां की गांड के पीछे आ जाए राजू की मां का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी कि शुरू शुरू में थोड़ा दर्द होता है लेकिन उसके बाद मजा भी बहुत आता है और इसी दर्द के लिए अपने आपको तैयार कर रही थी,,,, राजू के पिताजी अपने लंड का सुपाड़ा राजू की मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर लगा दिए जो कि पहले से ही पूरी तरह से गिला हो चुका था और तेल की वजह से लसलसा हो गया था,,,,, हरिया‌ने थोड़ा सा अपनी कमर को धक्का लगाया,,, और गीलापन पाकर हरिया के लंड कैसे पड़ा धीरे से राजू की मां की गांड के छेद में सरक गया,,, और हल्की सी कराहने की आवाज राजू की मां के मुंह से निकल गई,,, राजू समझ गया कि उसके पिताजी का लंड उसकी मां की गांड में प्रवेश कर गया है,,,,



और देखते ही देखते हरियाली अपना पूरा लंड धीरे-धीरे करके राजू की मां की गांड में डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर,,, अपनी कमर को आगे पीछे करके राजू की मां की गांड मारना शुरू कर दिया,,,, राजु ने चुदाई के बहुत सारे दिन से देखे थे लेकिन गांड मारने वाला तेरे से पहली बार देख रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां गांड मरवा रही है,,,,सोचने में ही यह बेहद अद्भुत और उत्तेजना पुण्य लगता है लेकिन तराजू तो अपनी आंखों से देख रहा था बड़े आराम से उसके पिताजी का भी उसकी मां की गांड के छोटे से छेद में अंदर बाहर हो रहा था,,,, देखते ही देखते पूरे कमरे में सिसकारी की आवाज गूंजने लगी इस इस कार्य की आवाज सुनकर राजू से रहा नहीं जा रहा था और वह पजामे को नीचे करके अपनी लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया था,,,,,, अंदर का दृश्य और भी ज्यादा गर्माहट पकड़ रहा था,,,क्योंकि राजू के पिताजी राजू की मां की गांड पर जोरदार चपत लगाते हुए उसकी गांड मार रहे थे,,, हर धक्के के साथ राजू की मां की बड़ी बड़ी गांड नदी के पानी कि तरह लहरा जा रही थी,,, यह दृश्य बेहद अद्भुत था,,। राजू की मां का गदराया बदन इस अवस्था में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था खटिया से चरर चररर की आवाज आ रही थी,,, जो कि दोनों की कामलीला का जीता जागता सबूत था,,,, राजू के पिता जी बड़े आराम से राजु की मां की गांड मार रहे थे,,,दोनों को बहुत मजा आ रहा था राजू को भी लगने लगा था कि शायद गांड मारने में बहुत मजा आता है इसलिए वह भी इस अनुभव से गुजारना चाहता था,,,, ऐसे में उसका जुगाड़ केवल उसकी बुआ ही थी जिस पर वह किसी भी प्रकार से मनमानी कर सकता था,,,, वैसे तो उसकी यादी में कमला चाची और उसकी बहू के साथ साथ लाला की बहन सोनी भी थी,,,दोनों लाला की बहन सोनी और कमला चाची अनुभव से भरी हुई थी लेकिन कभी भी उन दोनों ने गांड मारने वाली बात नहीं की थी इसलिए राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था इस बारे में वह केवल अपनी बुआ से ही बात कर सकता था और ऐसा करने के लिए वह मन में ठान लिया था,,,,



बगल वाले कमरे में उसके पिताजी के धक्के तेज हुए जा रहे थे हर धक्के के साथ उसकी मां आगे की तरफ लहरा उठ रही थी जिसे उसके पिताजी ने कमर से कसके थाम रखा था इसलिए संभले हुए थी,,, देखते ही देखते राजू के पिताजी की कमर बड़ी तेजी से हीलने लगी,,, और कुछ ही दिनों में वह अपना पूरा गर्म लावा उसकी मां की गांड में गिरा दिया,,,, और उसकी पीठ पर लेट गया,,,, इस गरमा-गरम दृश्य का साक्षी केवल राजू ही था जो अपनी मां और पिताजी की गरमा गरम चुदाई के साथ आज गांड मारने वाला भी दृश्य देख लिया था,,,,,,,

बगल वाले कमरे की गरमा गरम द्शय को देखकर,, राजू का हाथ भी बड़ी तेजी से चल रहा था थोड़ी देर बाद उसका भी पानी,, निकल गया,,,,,, अब आगे उसे कुछ भी देखने की जरूरत नहीं थी,,।
 
पंछियों की सु मधुर आवाज के साथ राजू की नींद खुली तो,, देखा कि गुलाबी अकेली गहरी नींद में सो रही थी उसकी खूबसूरत चेहरे को राजू देखता ही रह गया,,, और मन ही मन अपनी बुआ को धन्यवाद देने लगा क्योंकि भले ही शुरुआत कमला चाची से हुई हो लेकिन सबसे ज्यादा तन का सुख उसकी बुआ ही उसे प्रदान कर रही थी,,, कुछ देर तक राजू एक टक अपनी बुआ की खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया सोते समय वहां और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी उसकी बालों की लटे उसके गालों पर लोट रही थी,,,,,,राजू अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी रेशमी बाल की लटो को अपनी ऊंगलियों से सहारा देकर उसके कान के पीछे ले गया,,, तो गुलाबी की आंख खुल गई,,,,,, तो वह अंगड़ाई लेते हुए बोली,,,।

बाप रे सुबह हो गई क्या,,,?

हां सुबह तो हो गई है लेकिन अभी उतनी सुबह नहीं हुई है कि तुम घर के बाहर जाकर काम कर सको,,,,

हममममम,,,,(फिर से अंगड़ाई लेते हुए उठ कर बैठ गई) बाप रे रात को तो एकदम से गहरी नींद में सो गई,,।

वही तो मैं देख रहा हूं कि रात को तुमने मुझे दी नहीं,,, जलेबी खा कर ऐसी सोई की सोती ही रह गई,,,।

हां तू सच कह रहा है मीठा खाने के बाद नींद भी बहुत गहरी आती है,,,,(गुलाबी पहले से ही अपने बड़े भैया से चुदवा कर थक चुकी थी इसलिए खटिया पर लेटते ही सो गई थी,,, अब वह राजू से तो सच्चाई बता नहीं सकती थी इसलिए बहाना बताने लगी लेकिन राजू बोला,,,)

अच्छा हुआ बुआ कि तुम कल जल्दी सो गई,,,

क्यों अच्छा हुआ,,, तु कमजोर पड़ने लगा है क्या,,?

नहीं हुआ ऐसी बात नहीं है घर में जलेबी आने के मतलब को तुम समझती हो,,,।

इसमें क्या हुआ जब भैया खुश होते हैं अच्छी आमदनी होती है तो जलेबी लेकर आते हैं,,,।

नहीं बुआ पहले मैं भी यही समझता था लेकिन ऐसा नहीं है घर में जलेबी आने का मतलब कुछ और ही है,,,।

मैं तेरी बात कुछ समझ नहीं रही हूं,,,

अरे घर में जलेबी तभी आती है जब मां और पिताजी का कुछ और ही कार्यक्रम होता है घर में जलेबी आना मां के लिए इशारा होता है,,,।

कैसा इशारा पहेलियां मत बुझाओ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,

तुम्हें पता है बुआ पिताजी घर में जलेबी तभी लाते हैं,,, जब वह मां की गांड मारने वाले होते हैं,,,,

तू क्या बोल रहा है तुझे कुछ समझ में आ रहा है,,,(गुलाबी आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

हां मैं सब कुछ समझ गया हूं तभी तो तुम्हें बता रहा हूं,,,,वो क्या है कि कल रात तुम जल्दी सो गए वैसे तो कल रात तुम्हारी जुदाई का पूरा बंदोबस्त कर के रखा था लेकिन मेरे आने से पहले ही तुम सो गई थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा,,,मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं सोचा कि चलो आज बगल वाले कमरे में झांक कर ही देखते हैं,,, और बुआ मेरी तो किस्मत तेज थी तभी तो मैं मां पिताजी की सारी बातों को सुना और पिताजी को मां की गांड मारते हुए देखा,,,,।

हाय दैया क्या तू सच कह रहा,,, है,,,

हां बुआ सर की कसम मैं एकदम सच कह रहा हूं जो कुछ भी मैंने देखा वही तुम्हें बता रहा हूं,,,।

बाप रे बाप मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि भैया भाभी की गांड भी मारते होंगे,,,,।

क्या भाभी उस काम के लिए मान गई,,,

मान गई,,,,अरे बुआ यह पहली बार का थोड़ी था उन दोनों के बीच निरंतर समय-समय पर यह कार्यक्रम चलता रहता है यह सब मैं अपने कानों से सुना था मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन,,, मेरे जो कुछ भी देखा एक दम सच था,,,।

लेकिन राजू गांड के छोटे से छेद में इतना मोटा लंड घुसा कैसे,,,,,,( हैरानी के भाव गुलाबी अपने चेहरे पर लाते हुए बोली,,)

अरे बड़े आराम से चला गया,,, पिताजी ढेर सारा सरसों का तेल मां की गांड पर लगाकर उनके छोटे से छेद पर ढेर सारा तेल जो पढ़कर और खुद अपने लंड पर लगाकर एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड मां की गांड में डाल दिए,,,,

तब तो तेरी मां चिल्ला रही होगी,,,

बिल्कुल भी नहीं मां तो गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकाल रही थी जैसा कि तुम अपनी बुर में लेने पर निकालती हो,,,, सच पूछो तो उन दोनों को बहुत मजा आ रहा था मैं तो सब अपनी आंखों से देखा था इसलिए बता रहा हूं पहले तो मुझे भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन अपनी आंखों से देख कर मुझे पक्का यकीन हो गया कि गांड मारने में और मरवाने में बहुत मजा आता है,,,,

(राजू की बातों को सुनकर गुलाबी कुछ देर तक सोच में पड़ गई उसे इस तरह से विचार मगन होता देखकर राजू अपने लिए रास्ता साफ करते हुए बोला)

मैं तो कहता हूं बुआ मां पिताजी की तरह हम दोनों की इस कार्यक्रम का मजा लूट लेते हैं हम भी तो देखें इसमें कितना मजा आता है,,,,,।

नहीं नहीं मुझे तो डर लगता है,,,

मां को डर नहीं लगता और तुम्हें डर लगता है कुछ नहीं होगा मैं तो अपनी आंखों से देखा हूं बड़े आराम से मां पिताजी के लंड़ कों की गांड के छेद में ले ली थी,,,।

भैया का तेरे से छोटा ही है समझा और तेरा मोटा तगड़ा है,,, मेरे छोटे से छेद में जाएगा कैसे,,!(गुलाबी आश्चर्य था तेरी बॉडी हालांकि राजु की बातों को सुनकर उसका भी मन मचलने लगा था,,,, लेकिन मन में डर भी था और राजू की औरत की गांड मारने के सुख को भोगने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था,,, इसलिए वो किसी भी तरह से अपनी बुआ को मनाना चाहता था,,,)

बड़े आराम से चला जाएगा वह सरसों के तेल की चिकनाहट पाकर तुम्हारी गांड के छेद में मेरा लंड बड़े आराम से चला जाएगा और फिर उसके बाद देखना इतना मजा आएगा कि तुम रोज गांड उठाकर मुझे दोगी,,,।

हाय राजू तेरी बातें सुनकर तो मेरी बुर पसीना छोड़ रही है,,,

Raju or Gulabi



तो क्यों ना हो जाए बुआ अभी उजाला ठीक से हुआ नहीं और अभी एक मां और पिताजी भी सो रहे हैं,,,,।

ठीक है लेकिन जल्दी करना,,,(और इतना कहने के साथ ही गुलाबी खुद अपनी सलवार की डोरी खुलने लगी नौकरी पर अपने सलवार की डोरी खोल कर अपनी सलवार उतार कर नीचे फेंक दी और कमर के नीचे एकदम से नंगी हो गई रात को जो नजारा राजू ने देखा थाउसे हर एक पल को याद करके राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था इसलिए बिना देरी किए,,,, राजू अपनी बुआ की दोनों टांगों को फैला कर उसके बीच आ गया और,, अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को अपनी बुआ की गुलाबी चेहरे पर रखकर हल्का सा धक्का मारा और पूरा लंड एक ही बार में गुलाबी के बुर में समा गया,,,, रात की मदहोशी का पूरा नशा उतारते हुए राजू बिना रुके बड़े रफ्तार के साथ अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी बुआ की चुदाई करना शुरू कर दिया गांड मारने वाली बात पर उसकी बुआ भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी इसलिए तुरंत राजू को अपनी बाहों में कस कर उसके हर एक धक्के का आनंद लूटने लगी,,,,

Raju or Gulabi



आहहह आहहहह आहहहह की आवाज से पूरा कमरा गूंजने लगा और थोड़ी ही देर बाद उत्तेजना के चरम सुख पर पहुंचते हुए दोनों झड़ गए,,,,। दोनों एक दूसरे को बाहों में लेकर हांफ रहे थे कि तभी बगल वाले कमरे का लकड़े का दरवाजा आवाज करता हुआ खुला तो गुलाबी हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोली,,,।





बाप रे भाभी उठ गई है,,,, मुझे भी अब जाना चाहिए,,,।

(और इतना कहने के साथ ही गुलाबी खटिया पर से नीचे उठेगी और नीचे गिरी अपने सलवार को उठाकर अपनी लंबी लंबी टांगों में डालकर उसे पहनने लगी और अगले ही पल बाकी कमरे से बाहर निकल गई और तुरंत झाड़ू लेकर सफाई करना शुरू कर दी तब तक राजू अंदर ही लेटा रह गया और गांड मारने के कार्यक्रम के बारे में सोचने लगा,,,, वह भी अच्छी तरह से जानता था कि गुलाबी की गांड का छेद छोटा था इसलिए उसे बड़े आराम से काम लेना था ताकि सब कुछ कुशल मंगल तरीके से हो जाए,,,, और थोड़ी देर बाद वह भी कमरे से बाहर आ गया,,,,,,

सुबह का नाश्ता पानी करके,,, हरिया भी बेल गाड़ी लेकर रेलवे स्टेशन की तरफ निकल पड़ा आज उसे ब्याज की रकम देनी भी जाना था इसलिए वह जल्दी निकला था ताकि कुछ आमदनी ज्यादा हो जाए,,,,।

सूरज सर पर चढ़ आया था गर्मी का समय होने की वजह से,,, राजू इस समय नदी में नहाने के लिए गया था और वह अपने सारे कपड़े उतार कर नदी में कूद गया था क्योंकि इस समय नदी के आसपास कोई भी नहीं था और ना ही कोई होता था क्योंकि गर्मी कुछ ज्यादा ही पड़ती थी लेकिन राजू को दिनभर गांव में इधर उधर घूमने में ही मजा आता था इसलिए मैं इस समय नदी में नहा रहा था कि तभी कमला चाची की बहू हाथ में मटका लिए नदी पर पानी भरने के लिए आ गई,,,।

कमला चाची की बहू को देखते हैं राजू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,, कमला चाची की बहू एकदम करीब आ गई थी और राजू को नहाता हुआ देखकर वह भी खुश हो गई थी,,, मटके में नदी का पानी भरते हुए बोली,,,।

इतनी दोपहर में नदी में क्या कर रहा है,,,

नहा रहा हूं भाभी,,,,

इतने से में कोई नहाता है,,,

मेरा तो यही समय है नदी पर आकर नहाने का क्योंकि ईस समय यहां कोई नहीं होता,,, लेकिन तुम इतनी दोपहर में यहां क्या कर रही हो नल से पानी भर ली होती,,,

मुझे ठंडा पानी चाहिए था इसलिए यहां आ गई,,,

किनारे पर ठंडा पानी थोड़ी मिलता है किनारे पर तो गरम पानी ही मिलेगा और वह भी गंदा ,,,ठंडा पानी का मजा लेना है तो बीच में आकर पानी भरना होगा,,,

नहीं मैं बीच में नहीं आ सकती,,,

अरे आ जाओ भाभी नहा भी लोगी पूरा बदन ठंडा हो जाएगा और पानी भी भर लोगी,,,

नहीं नहीं मैं नदी में नहीं आऊंगी तू ही बीच में से भर कर ले आ,,,

जैसी तुम्हारी मर्जी भाभी,,,, लेकिन मैं किनारे नहीं आऊंगा मटके को पानी में रखकर आगे की तरफ भेजो,,,

क्यों बाहर नहीं आएगा,,,

मैं अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा होकर नदी में उतरा हूं,,,।

(राजू की यह बात सुनकर रमा के चेहरे पर शर्म की लालीमा छाने लगी,,, राजू नदी में पूरी तरह से नंगा है यह जानकर कमला चाची की बहू की दोनों टांगों के बीच सुरसुरी सी दौड़ गई,,,, राजू की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

नंगा होने में तुझे बहुत मजा आता है ना,,,

मजा तो आता है भाभी लेकिन नंगी करने में और ज्यादा मजा आता है,,,।

(राजू के कहने के मतलब को वह अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह शरमा गई,,, और शरमाते हुए बोली)

किसको नंगी किया है,,,

तुमको भाभी,,, तुमको नंगी करने में जितना मजा आया था मैं बता नहीं सकता,,, जैसे भी तुम बहुत खूबसूरत हो भाभी एकदम गोरी चिट्टी गोल गोल चूचियां बड़ी बड़ी गांड देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,(राजू एकदम खुले शब्दों में बोल रहा था क्योंकि वह एक बार उसकी चुदाई कर चुका था इसलिए दोनों के बीच किसी भी प्रकार की शर्म आया नहीं थी और राजू की यह बातें कमला चाची की बहू को उत्तेजित कर रही थी वह बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन इतनी दुपहरी में वहां कोई आने वाला नहीं था,,,,)

चल अच्छा यह सब बातें मत कर मुझे प्यास लगी है जल्दी से मटका भर दे,,,,(और इतना कहने के साथ ही कमला चाची की बहू नीचे बैठकर मटके को पानी में रखकर उसे धीरे-धीरे पानी को हाथ से हिलाते हुए मटके को आगे बढ़ाने लगी और देखते ही देखते उसका मटका राजू के हाथों में चला गया और राजू मटके को हाथ में लेकर थोड़ा और बीचों-बीच जाकर पानी भरने लगा जहां का पानी वास्तव में बेहद ठंडा था कुछ देर तक वह बीच में नहाता रहा और मटके को लेकर बाहर आने लगा उसके मन में बहुत सारी बातें चल रही थी वह नदी के सुनसान पन का फायदा उठा लेना चाहता था,,,वैसे भी कमला चाची की बहू को देखते ही नदी में होने के बावजूद भी उसका लंड पूरी तरह से खाना हो चुका था और वह जानता था कि एक बार अगर उसकी बहू ने फिर से उसके लंड को देख ली तो फिर से चुदवा लेगी और वैसे भी वह प्यासी थी,,, इसलिए राजू मटके को बाहर लाते चले अपने मन में तय कर लिया था कि वह पूरी तरह से नदी से बाहर आ जाएगा और वह भी एकदम नंगा,,,।

Raju or kamla chachi ki bahu



दूसरी तरफ कमला चाची की बहू का भी दिल जोरों से धड़क रहा था वह राजू को पूरी तरह से नंगा देखना चाहती थी और वह भी इस तरह से खुले में लेकिन यह बात बहुत से कहने में शर्म महसूस कर रही थी,,, वह बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी जहां की पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था,,,और वैसे भी जिस जगह पर मैं खड़ी थी वह जगह झाड़ियों से गिरी हुई थी इसलिए दूर से भी वहां पर किसी की नजर पहुंच नहीं सकती थी,,, धीरे धीरे राजू मटका लेकर बाहर आने लगा और किनारे पर आते ही वह एकदम से खड़ा हो गया और जैसे ही वह खड़ा हुआ कमला चाची की बहू की नजर उसकी दोनों टांगों के बीच खड़े लंड पर पड़ी तो वहां दांतो तले उंगली दबा ली उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था जिसे देखते ही रमा कि बुर में चीटियां रेंगने लगी,,,, उसके मुंह से अचानक ही निकल गया,,,।

बाप रे इतना मोटा और लंबा,,,

क्या भाभी तुम तो ऐसा कह रही हो जैसे पहली बार देख रही हो जबकि इसे अपनी बुर में ले भी चुकी हो फिर भी,,,।

Kamla chachi ki bahu ko bahot maja aa raha tha



( ईतने खुले शब्दों में राजू के मुंह से बोल शब्द सुनकर रमा शर्म से पानी पानी हो गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले वह एक बार फिर से राजू के लंड को अपनी पूरी लेना चाहती थी वह प्यासी नजरों से उसकी दोनों टांगों के बीच ही देख रही थी,,उसकी हालत को देखकर राजू समझ गया था कि उसे क्या चाहिए इसीलिए वह मटके को नीचे रख कर अपने चारों तरफ नजर घुमाया व जानता था कि समय यहां कोई नहीं आता है फिर भी एहतियात के तौर पर वह कोई गलती नहीं करना चाहता था,,,और तुरंत आगे बढ़ा कमला चाची की तो कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसे अपनी गोद में उठा लिया,,, और एकदम झाड़ियां के बीच लेकर आ गया,,,राजू जिस तरह से बड़े आराम से से गोद में उठाकर यहां तक लाया था उसकी ताकत को देखकर कमला चाची की बहू एकदम कायल हो गई उसकी ताकत पर वह पूरी तरह से न्योछावर हो गई,,, राजू ने दमखम था इस बात का सबूत और पहले ही देख चुकी थी,,,,।

Kamla chachi ki bahu ki khubsurat gasnd





अपनी गोद से उतारने के बाद,,, राजू उसकी साड़ी उतारने लगा तो वह उसे रोकते हुए बोली,,,।

नहीं नहीं यहां पर साड़ी मत उतार ऐसे ही कर ले कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,(हालांकि कमला चाची की बहू का भी मन यहीं कर रहा था किराजू उसके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करके चोदे लेकिन फिर भी उसके मन में डर था कि कहीं कोई आ जाएगा तो गजब हो जाएगाराजू अपना पूरा मन बना लिया था कि वह तुमने चाची की बहू के सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करके चोदेगा इसलिए वह बोला,,,)

तुम बिल्कुल की फिक्र मत करो भाभी यहां कोई नहीं आने वाला है क्योंकि मैं यहां रोज आता हूं और मेरे सिवा यहां पर केवल परिंदे ही रहते हैं और कोई नहीं रहता इसलिए निश्चिंत रहो,,,(और इतना कहने के साथ ही वह कमला चाची की बहू के बदन पर सितारे कपड़े उतारने लगा उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा और देखते ही देखते हैं उसके पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,,, और उसे अपनी बाहों में लेकर उसके पूरे बदन पर चुंबन की बौछार कर दिया,,, खुले में खूबसूरत औरत के नाम से खेलने का पहला अवसर था इसलिए ज्यादा उत्तेजित था वह तुरंत नीचे बैठकर कमला चाची की बहू की एक टांग उठा कर उसे अपने कंधे पर रख दिया और उसकी गुलाबी बुर पर अपने प्यासे होंठ को रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,,, कमला चाची की बहुत दम से मदहोश हो गई,,,वो कभी सपने में नहीं सोचा थी कि इस तरह से गांव में खुले में वह इस तरह का आनंद लूटेगी जिसके लिए वह पूरी तरह से तैयार नहीं थी,,,,इसके लिए उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी राजू की हरकत की वजह से उसकी आंखें एकदम से बंद हो गई और वहां अपने दोनों हाथों को राजू के सिर पर रख कर और जोर से अपनी बुर पर दबाने लगी,,,।

Nadi k kinare maje karte huye



ओहहहह ,,,राजु,,,,,आहहहहहहहहह,,,,(उसके मुख से मादक सिसकारियां फूटने लगी जिसको वहां सुनने वाला राजू के सिवा कोई नहीं था राजू की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी राजू पागलों की तरह जितना हो सकता था अपनी जीभ को उसकी बुर में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, कमला चाची की बहू पानी पानी हुए जा रही थी,,,, उसकी गर्म सिसकारियों की आवाज सुनकरराजू समझ गया कि अब वह लंड देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है इसलिए अपने होठों को उसकी गर्म बुर से हटाकर खड़ा हुआ और उसके कंधों पर जोर देते हुए उसे नीचे की तरफ बैठने का इशारा किया,,,, और देखते ही देखते कमला चाची की बहू एकदम नंगी अपने घुटनों के बल बैठ गई और राजू के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,यह जगह पूरी तरह से सुनसान थी चारों तरफ इस समय कोई भी नजर नहीं आ रहा था झाड़ियों के बीच होने की वजह से दोनों पूरी तरह से निश्चिंत थे दोनों की उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था ऐसा लग रहा था कि जैसे वहां कमला चाची की बहू के मुंह को ही चोद डालेगा,,,,। लेकिन कुछ देर तक इस तरह से मजा लेने के बाद राजू पेट के बल नीचे उसकी साड़ी बिछा कर लेट गया,,, राजू कमला चाची की बहू तो उसके लंड पर बैठने के लिए बोला तो वह समझ गई कि उसे क्या करना है वह राजू के कमर के इर्द गिर्द अपने घुटनों को रखकर अपनी गोल-गोल गांडउसके लंड पर रखने लगी और पीछे से उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपने गुलाबी छेद पर लगाने लगी,,,और धीरे-धीरे अपने भारी-भरकम गांड का बजन उसके लंड पर बढ़ाने लगी,,,

और देखते ही देखते राजु मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर की गहराई में छुपा ली,,,,,,, और फिर अपनी गांड को राजू के लंड पर पटकना शुरू कर दी,,,,राजू की अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी दोनों चूचियों को थामकर उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,।

Gulabi ki Gulabi chut



अद्भुत सुख की अनुभूति दोनों को हो रही थी इस तरह से खुले में चुदाई का मजा ही कुछ और होता है यह एहसास दोनों को पहली बार हो रहा था चारों तरफ पंछियों की आवाज आ रही थी मंद मंद शीतल हवा दे रहे थे और ऐसे में दोनों अपने अंदर की गर्मी को मिटाने की पूरी कोशिश कर रहे थे कमला चाची की बहू पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी बहुत जोर जोर से अपनी कहां को राजू के लंड पर पटक रही थी मानो की जैसे हथोड़ा चला रही हो,,,,।

कमला चाची की बहू की कामुक हरकत की वजह से राजू का भी आनंद बढ़ता जा रहा था पचच पचच की आवाज बड़े जोरों से आ रही थी,,,, जो कि पूरे वातावरण में गूंज रही थी कुछ देर तक कमला चाची की बहू इसी तरह से मेहनत करती रही लेकिन उसे आराम देते हुए राजू तुरंत उसकी कमर में अपना हाथ डाला और अपने लंड को उसकी बुर में से निकाले बिना ही पलटी मार दिया अब राजू ऊपर था और कमला चाची की बहू नीचे अब राजू अपना पूरा जोर दिखाने वाला था और उसके कंधे को पकड़कर जोर जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया वह इतनी जोर से कमर हिला रहा था कि मानव जैसे कोई मशीन चल रही है कमला चाची की बहू भी हैरान थी,,,, राजू की ताकत को देखकर उसके लंड की ताकत से वह पानी पानी हुई जा रही थी,,,राजू इतने जोरो से धक्के लगा रहा था कि उसका पूरा बदन हवा में लहरा रहा था जिसकी वजह से वह कुछ बोलना भी चाह रही थी तो ऐसा लग रहा था कि हकला के बोल रही हो,,,तुमने चाची की बहन को बहुत मजा आ रहा था राजू का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी गुलाबी छेद में अंदर बाहर हो रहा था जिसे देखने के लिए तुमने सांची की बहू अपनी नजरों को उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर कर दी थी और बड़े हैरानी से इतने मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलाबी बुर के छोटे से छेद में अंदर बाहर होता देख रही थी,,,।

राजू पूरी मस्ती के साथ उसके दोनों दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,,हर धक्के पर हमला चाची की बहू के मुंह से आह निकल जा रही थी,,, ऐसा अद्भुत संभोग सुख उसने पहले कभी नहीं प्राप्त की थी,,, राजू कमला चाची कीबहू की खूबसूरत गोरे बदन के साथ पूरी मस्ती का लुफ्त उठा रहा था कभी चूचियों को पकड़ से तो कभी कंधों को तो कभी उसकी चिकनी कमर को जोर से हथेली में दबाकर धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,,।

राजू थकने का नाम नहीं ले रहा था,,लेकिन इस दौरान वह कमला चाची की बहू की चुदाई करते हुए उसका दो बार पानी निकाल चुका था और धीरे-धीरे कमला चाची की बहू तीसरे चरण सुख की तरफ आगे बढ़ रही थी और यही हाल राजू का भी था उसका भी पानी निकलने वाला था इसलिए वह नीचे झुककर अपने दोनों हाथ को कमला चाची की बहू के पेट के नीचे रखकर उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते वहां कमला चाची की बहू की बुर में झड़ना शुरू हो गया,,,,।

Nadi k kinare raju se chudwate huye



वासना का तूफान थम चुका था कुछ देर तक राज्य उसे अपनी बांहों में लिए हुए उसके ऊपर ही लेटा रहा,,,कमला चाची की बहुत ही उसका हौसला बनाते हुए उसकी पीठ को सहला रही थी क्योंकि संभोग का असली सुख उसे राजू से ही प्राप्त हो रहा था,,,,कमला चाची की तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से खुले में गांव के नदी पर उसे एक जवान लड़का चोदेगा और ना हीराजू ने इस तरह की कल्पना किया था कि नदी पर उसे खूबसूरत औरत की चुदाई करने का सुख प्राप्त होगा,,, खड़ी दोपहरी में यहां आना उसका सफल हो चुका था,,, कुछ देर बाद वह कमला चाची की बहू के बदन पर से ऊपर उठा और जान बुझ कर,, कमला चाची की बहू का ब्लाउज उठाकर उस पर अपने लंड पर लगा पानी पोछने लगा तो यह देख कर करना चाहती कि बहु बोली,,,।

हाय भैया यह क्या कर रहा है गंदा लगा दिया,,,

मेरे प्यार की निशानी है भाभी,,,(और इतना कहने के साथ ही मुस्कुराते हुए ब्लाउज को कमला चाची की बहू के चेहरे के ऊपर फेंक दिया और लंड का गीलापन ब्लाउज पर लगे होने की वजह से उसे अपने गाल पर लंड का पानी लगता हुआ महसूस हुआ तो वह मुंह बनाने लगी,,, लेकिन यह देखकर राजू मुस्कुराने लगा,,,, कमला चाची की बहू भी कुछ नहीं बोली और अपने कपड़े पहन कर झाड़ियों से बाहर आ गई,,,,, राजू उसी तरह से बिना शर्माए नंगा ही बाहर आ गया मटके का पानी उठाकर कमला चाची की बहु बोली ,,,।

अबतो यह फिर से गर्म हो गया है,,, जा फिर से भरकर लेकर आ,,,

जो आज्ञा भाभी जी,,,( और इतना कहने के साथ ही फिर सेराजू मटका लेकर नदी के बीचो-बीच चला गया और फिर से ठंडा पानी लेकर बाहर आ गया लेकिन इस समय पर वह पूरी तरह से मांगा था तो उसके खड़े लंड तरफ देख कर मुस्कुराते हुए कमला चाची की बहु बोली,,,)

कुछ पहन लिया कर ऐसे ही लंड दिखाते हुए नंगा मत घुमा कर,,,।

क्यों भाभी,,,?

क्योंकि तेरा इतना मोटा और लंबा है कि तेरी मां की नजर पड़ गई तो तेरी मां भी तुझ से चुदवाए बिना नहीं रह पाएगी,,,,(और इतना क्या करवा मुस्कुराते हुए कमर पर मटका रख कर चलती बनी राजू से तब तक देखता रहा जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गई इसके बाद वह अपने कपड़े पहन कर गांव की तरफ चल दिया,,,।)
 
Back
Top