- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 98,445
अगर मैं ये भी उतार दूंगी तब तो मैं नंगी हो जाऊंगी,,,,
अरे तो क्या हो गया मा,,, इस तूफानी बारिश में इस जंगल में इस खंडार में मेरे और तुम्हारे सिवा तीसरा है कौन तीसरा है यह बेल जो कि कभी कुछ बोलने वाला नहीं है,,,
तू पागलों जैसी बात करता है,,,(बेल का नाम सुनकर मधु के होठों पर हंसी आ गई और वह हंसते हुए बोली)
मुझे देखो मैं एकदम नंगा हूं ना घर में भी शर्म करता तो मैं भी गीले कपड़े पहने रहते और बीमार पड़ जाता,,,(इतना कहने के साथ ही राजू उत्तेजित होते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल कर अपने मोटे तगड़े लंड की हाजिरी अपनी मां को महसूस कराने लगा,,,, अपने बेटे की बात और उसकी हरकत से मधु का मन विचलित हो जा रहा था वह उत्तेजित हो रही थी मदहोशी उसके बदन पर छाने लगी थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के नंगे लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर जोर-जोर से दबाए,,,)
तेरी बात कुछ और है तू लड़का है,,,
लड़का नहीं हूं पूरा मर्द बन चुका हूं मेरे लंड की ठोकर को महसूस नहीं कर रही हो क्या,,,,(राजू पूरी तरह से अपनी मां को अपने काबू में करना चाहता था अपने बस में करना चाहता था इसीलिए खुले शब्दों में अपनी मां को अपने मन की बात का इशारा दे रहा था)
सो तो हो रहा है,,,(गहरी सांस लेते हुए) लेकिन फिर भी मगर अपने कपड़े का उतार कर नंगी हो जाऊंगी तो मुझे देख कर मुझे डर है कि कहीं तेरा मन बहक ना जाए,,,,
(अपनी मां की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसकी मां भी नंगी होना चाहती है इसलिए अपनी मां को दिलासा देने का नाटक करते हुए बोला)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मां,,, मेरा मन बिल्कुल भी नहीं बहकेगा बहकना होता तो अब तक तो मैं तुम्हारा साया ऊपर करके अपने लंड को तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,
(राजू जानबूझकर अपनी मां को इस तरह की बातें करते हुए अपने मन का इरादा बता रहा था वह क्या-क्या कर सकता है वह बता रहा था और उसकी मां अपने बेटे की बातें सुनकर अंदर ही अंदर सिहर उठती थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तूफान मार रही थी)
सच कहता है ना नहीं बहकेगा,,,,
बिल्कुल भी नहीं मां विश्वास नहीं आता है तो एक बार उतार कर तो देखो,,,,,,,
लेकिन मेरी वजह से तो तेरा खड़ा हो रहा है,,,
क्या खड़ा हो रहा है,,,?(राजू सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर बोला वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था)
वही जो मेरी गांड पर चुभ रहा है,,,,
लेकिन बताओगी मुझे तो नहीं लग रहा है कि कुछ चुभ रहा है मैंने कौन सा कांटा लगा रखा है,,,,,
तू सब जानता है कि क्या चुभ रहा है और तू क्या चुभा रहा है,,,,,,,
मुझे तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा है मैं तो तुम्हें अपनी बाहों में भर कर तुम्हें सिर्फ गर्मी देने का काम कर रहा हूं,,,
हां और यह गर्मी तू कहां से दे रहा है,,,, तेरे लंड से जो कि मेरे बदौलत खड़ा हो गया है,,,
अरे ये,,,(इतना कहने के साथ ही अनजान बनता हुआ राजू अपना हाथ तुरंत नीचे लेंगे और अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की गांड पर पटकते हुए बोला,,,) यह तो मैं ऐसे ही तुम्हारे बदन की गर्मी से खड़ा हो गया है और इसमें भी तुम्हें गर्व करना चाहिए कि इस उम्र में भी तुम्हें देखकर मेरे जैसे जवान लड़कों का लंड खड़ा हो जाता है,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर मधुर चुदवासी हुए जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और वह धड़कते दिल के साथ बोली,,,)
वही तो बुद्धू जब तेरा खड़ा हो गया है तो तू आगे भी कुछ कर सकता है,,,,
तुम्हें चोदने का,,,, नहीं नहीं ऐसा मैं बिल्कुल भी नहीं करूंगा यह तो औपचारिक रूप से है कि किसी का भी खड़ा हो जाए तुम्हारी जैसी खूबसूरत जवानी देख कर लेकिन इससे आगे मैं नहीं बढुंगा,,,,
सच कह रहा है ना,,,,
बिल्कुल मा मैं एकदम सच कह रहा हूं,,,,
चल तो ठीक है मैं अपने कपड़े उतार देती हूं लेकिन तू कुछ करना नहीं,,,,( और इतना कहने के साथ ही मधु उठ कर बैठ गई और अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी ,,,,,,, राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मां अपने गले ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोल रही थी राजू का दिल जोर से धड़कने लगा था क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां अपने हाथों से अपना ब्लाउज उतार कर उसकी नंगी चूचियों का उसी दर्शन जो कराने वाली थी,,,, राजू मन ही मन तेज बारिश के लिए शुक्रिया अदा कर रहा था अगर यह तेज तूफानी बारिश ना होती तो शायद इस तरह से अपनी मां के साथ उसे समय बिताने को कभी नहीं मिलता,,,,, मधु हिचकीचा रही थी लेकिन,,, इस तरह से अपने बेटे के सामने अपने ब्लाउज उतारने में उसे आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था जैसे-जैसे मधु एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को रही थी वैसे वैसे राजू अपनी लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था और मधु तिरछी नजरों से अपने बेटे की यह हरकत देखकर पानी-पानी हो रही थी,,, देखते ही देखते मधु अपने हाथों से अपनी ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी बेलगाम चुचियों को आजाद कर दी ब्लाउज का आखरी बटन खुलते ही रबड़ के गेंद की तरह मधु की दोनों चूचियां उछल कर बाहर आ गई जो की जलती हुई आप की रोशनी में राजू को एकदम साफ नजर आ रही थी जिस पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,,, मधु अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी लेकिन उसे रोक बिल्कुल भी नहीं रही थी क्योंकि उसे भी अपने बेटे की हरकत से आनंद मिल रहा था वह तिरछी नजरों से अपने बेटे के बमपिलाट लंड को देख रही थी,,,,,,,।
मधु अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी ब्लाउज को अपने बाहों में से निकाल रही थी और देखते ही देखते मधु अपने बदन से ब्लाउज उतार कर बगल में रख दी और बोली,,,,।
ले मैंने तेरा कहां मानते हुए अपना ब्लाउज उतार दी,,, अब तो ठीक है ना,,,,(, मधु उसी तरह से बैठे हुए बोली लेकिन अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह भी उठ कर बैठ गया और अपनी मां की चुचियों को प्यासी नजरों से देखते हुए बोला,,,)
बाप रे तुम्हारी चूचियां तो कितनी खूबसूरत है मां एकदम खरबूजे की तरह गोल गोल इसमें बिल्कुल भी लायक नहीं है एकदम तन कर खड़ी है मानो कि किसी जवान लड़की की चूचियां हो,,,,(राजू अपनी मां के सामने बिना शर्म किए बेशर्म की तरह अपनी मां की छातियों की तरफ देखे जा रहा था और अपनी मां की चुचियों की तारीफ किए जा रहा था मधु को अपने बेटे के मुंह से अपनी चूची की तारीफ सुनकर बहुत ही ज्यादा गर्व का अनुभव हो रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह की बातें करते होगे और हां तुझे कैसे मालूम की लड़कीयों की चुचियां कसी हुई और तनी हुई होती है और औरतों की ढीली लचकदार हो जाती है,,,,
हां मैंने देखा है ना,,,,(अब राजू समझ गया था कि अपनी मां के सामने शर्म करने का कोई फायदा नहीं है अगर शर्म करेगा तो कर्म फूट जाएंगे इसीलिए वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाना चाहता था,,,)
तूने देखा है लेकिन किसकी देखा है,,,,(मधु भी अब थोड़ी बेशर्मी पर उतर आई थी क्योंकि उसे भी समझ में आ गया था कि बेशर्मी करने में कितना मजा आता है)
अरे अपना श्याम है ना मैं पढ़ने के लिए जाता था तो उसे घर पर बुलाने जाता था और ऐसे ही उसके घर पर पहुंच गया था तो देखते ही देखते मैं उसके घर के अंदर तक पहुंच गया और वहां देखा कि उसकी बहन झुमरी एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,
क्या एकदम नंगी होकर,,,(मधु आश्चर्य जताते हुए बोली)
हां मा एकदम नंगी होकर मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था वह मेरी तरफ पीठ करके नहा रही थी तब मंजू गोरी चिकनी उसकी गांड एकदम गोल-गोल थी,,, मैं वहां से चला जाना चाहता था लेकिन मैं वहां से ही भी नहीं पाया,,, और वह जैसे ही घूमी मेरे तो होश उड़ गए उसकी नंगी चूचियां एकदम कसी हुई थी और सच कह रहा हूं मैं तुम्हारी चूचियां देखकर मुझे यकीन हो गया है कि तुम बहुत खूबसूरत हो इस उम्र में भी झुमरी जैसी लड़कियों से पानी भरवा दो उसकी चूची और तुम्हारी चूची में जमीन आसमान का फर्क है उसकी चूचियां तो संतरे जैसी है लेकिन तुम्हारी चूचियां एकदम खरबूजे की तरह है कसम से मां तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,।
(राजू अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ गंदे शब्दों में करे जा रहा था और मधु अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर गदगद हुए जा रही थी,,,, मधु बार-बार अपनी चोर नजरों से अपने बेटे के खड़े नंदी को देखकर अंदर ही अंदर सिहर उठ रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अगर वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेगी तो उसके बेटे का लंड उसकी बुर में कहर मचा देगा,,,, वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके पति का लंड उसके बेटे के मुकाबले कुछ भी नहीं था,,,, राजू और मधु अपने अपने मन में अपनी भावनाओं के बवंडर में फंसते चले जा रहे थे और तभी बादलों की तेज गड़गड़ाहट हुई और मधु एकदम से चौकते हुए बोली,,,।
लगता है आज रात भर बरसात बंद नहीं होगी,,,,(अपनी चुचियों की तरफ देखते हुए) अभी भी ठंड महसूस हो रही है,,,,
पेटीकोट भी उतार दो तब जाकर तुम्हें सही लगेगा क्योंकि पेटीकोट भी गीली है,,, और अभी तो पूरी रात बाकी है सो नहीं पाओगी,,,,
बात तो तू सच ही कह रहा है,,,,,,, लेकिन झुमरी जब तेरी तरफ घूमी थी तो क्या उसने तुझे देखी नहीं थी,,,,
मुझे देख ली थी मैं तो एकदम से घबरा गया था लेकिन मेरी नजर जीस हिस्से पर जाकर रुकी थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं,,,,
किस हिस्से पर,,,,(धड़कते दिल के साथ मधु बोली)
उसकी बुर पर,,,(राजू बेझिझक अपनी मां के सामने ही गंदे शब्दों में बोला अपने बेटे के मुंह से सीधी सपाट बुर शब्द सुनते ही मधु की खुद की बुर उछलने लगी,,,,)
क्या यह क्या कह रहा है तू,,,
हां मां मैं सच कह रहा हूं जिंदगी में पहली बार में किसी लड़की की बुर को देख रहा था इसलिए मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,,,(अपनी मां के सामने इस तरह से खुले और गंदे शब्दों में बात करते हुए राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसका लंड और ज्यादा कड़क हो गया था,,, जिसे वहां अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने हाथ से हिला दे रहा था और जिसे देखकर मधु के तन बदन में आग लग जा रही थी,,,।)
बहुत खूबसूरत थी क्या उसकी,,,,(अपनी नजरों को नीचे किए हुए वह बोली एक औरत होने के नाते औरतों के प्रति ईर्ष्या उसके मन में भी कुछ क्षण के लिए जागने लगा था क्योंकि उसका बेटा झुमरी के बुर की तारीफ कर रहा था लेकिन राजू भी चला था वह अपने जवाब में चला कि दिखाते हुए बोला)
मैंने तो पहली बार देखा था इसलिए मुझे तो बहुत खूबसूरत लग रही थी मैंने दूसरे की तो देखा नहीं हूं कि उसकी बुर से दूसरी की बुर की तुलना कर सकूं,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ किसी ना किसी बहाने अपने बेटे को अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी उसे अपनी बुर की खूबसूरती से वाकिफ कराना चाहती थी उसे पूरा यकीन था कि अगर उसका बेटा एक बार उसकी बुर को देख लेगा तो उस पर पूरी तरह से मोहित हो जाएगा,,,, इसलिए वह बोली,,,)
मुझे तो अभी भी ठंड लग रही है,,,(अपनी दोनों बाहों को आपस में मिलाते हुए अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को बाहों के घेरे में छुपाते हुए मधु बोली)
कह तो रहा हूं,,,,, पेटीकोट भी उतार दो अभी तो पूरी रात बाकी है,,,, गीली पेटीकोट में सो नहीं पाओगी,,,।
(अपने बेटे की बात सेवा पूरी तरह से सहमत थी लेकिन ऐसा नहीं था कि वह समझ नहीं रही हो कि उसका बेटा उसके फायदे के लिए नहीं बल्कि अपने मन की करने के लिए उससे पेटीकोट उतरवाकर उसे नंगी करना चाहता है,,, फिर भी वे इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि गीले पेटीकोट में उसे भी नींद नहीं आएगी और बीमार पड़ने का डर अलग से रहेगा,,,, वैसे भी जिस तरह से उसने अपने बेटे की आंखों के सामने अपना ब्लाउज के बटन खोल कर उसे उतार कर अपनी चुचियों को नंगी कर दी थी उसी तरह से वह अपनी पेटीकोट को उतार कर अपने बेटे के सामने एकदम नंगी हो जाना चाहती थी इसमें उसे अजीब सा सुख भी प्राप्त हो रहा था इसलिए वह बोली,,,,)
बात तो तो ठीक ही कह रहा है अभी तो सुबह होने में पूरी रात बाकी है और रात भर जाग भी नहीं सकते और इस गीले कपड़े में रह भी नहीं सकते,,,,, एक काम कर तू ही उतार दे मेरी कमर दुख रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,।
(अपनी मां की है बात सुनते ही राजू का लंड टन टना कर ठुनकी मारने लगा,,,, राजू का दिल खुशी से झूम उठा यह तो ऐसा ही हो गया था कि बिल्ली को ही दूध की रखवाली करने के लिए बोला जा रहा है राजू को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए वह फिर से बोला,,,)
क्या कहा मां तुमने,,,
अरे ले तू ही उतार दे,,,, मेरी कमर दर्द कर रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,
ठीक है मा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, जब तक मैं हूं तुम्हें किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,,
(अपने बेट६ की बात सुनकर मधु मुस्कुराते हुए पेट के बल लेटने लगी लेकिन तिरछी नजरों से अपने बेटे के खड़े लंड को देख रही थी उसके लंड की मोटाई लंबाई देखकर मधु की बुर पानी फेंक रही थी,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी और राजू अपनी मां की पेटीकोट की डोरी खोलने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका था ऐसा नहीं था कि जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत के पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे नंगी करने जा रहा था ऐसा वह बहुत बार कर चुका था लेकिन आज जो सुकून से अपनी मां का पेटीकोट उतारकर उसे नंगी करने में मिलने वाला था वैसा सुख उसे अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था जिसके बारे में सोच कर ही उसका दिल बलि्लयो उछल रहा था,,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी राजू एक नजर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ दौड़ाया और तुरंत अपनी नजरों को नीचे की तरफ ले जाते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों से नीचे की तरफ ले जाने लगा,,,, और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी मां की पेटीकोट की डोरी में उलझा दिया अपनी मां की गहरी नाभि और कमर देखकर उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थामकर धक्के पर धक्के लगाए,,,, राजू की उंगलियां हरकत करना शुरू कर दी थी और अपने बेटे की हरकत को देखकर मधु कसमसा रही थी उसके बदन में उत्तेजना का फुहार फूट रहा था जो कि उसकी बुर से निकल रहा था देखते ही देखते राजू अपनी मां के साए की डोरी को खोल दिया और कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां के पेटीकोट को पकड़ लिया था उसे नीचे की तरफ खींचना शुरू कर दिया था मधु यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी भारी-भरकम कान के नीचे से पेटीकोट बाहर नहीं निकल पाएगी इसलिए अपने बेटे की सहायता करते हुए वह अपनी भारी भरकम गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दी और इसी मौके की ताक में,,, राजू तुरंत अपनी मां की पेटीकोट को उसकी कमर से नीचे की तरफ खींच लिया और पलक झपका आते हैं पेटीकोट को उसकी गोरी गोरी जांघों के नीचे लाते हुए उसके पैर से बाहर निकाल दिया इस समय मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से महंगी हो चुकी थी जलती हुई आग की रोशनी में राजू भौचक्का सा अपनी मां के नंगे बदन को देख रहा,,, था ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां को नंगी देख रहा था पहले भी वह कई बार अपनी मां को नंगी और उसे चुदवाते हुए देख चुका था लेकिन आज पहली बार इतने करीब से उसके नंगे बदन को देखकर उसकी आंखें चौंधिया दिया जा रही थी,,,, अपने बेटे की आंखों में वासना का उठता हुआ तूफान देखकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी उसके चेहरे को उसकी भावनाओं को और उसके इरादों को मधु अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि बस उसके इशारे करने की देरी है उसका बेटा उसके ऊपर टूट पड़ेगा और फिर उसे अद्भुत सुख देगा,,,,,।
बरसात का जोर बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था जिस तरह से शुरुआत हुई थी उसी तरह से अभी तक बारिश का पानी गिर रहा था वही तेज हवाएं वही बिजली की गड़गड़ाहट पूरे वातावरण को भयानक बना रही थी लेकिन ऐसी भयानक तूफानी बारिश में भी खंडहर के अंदर का माहौल पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था दोनों मां बेटे एकदम नग्न अवस्था में एक दूसरे को देख रहे थे बेटा किसी भी वक्त अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी अद्भुत चुदाई कर सकता था लेकिन अपने अनुभव से राजू समझ गया था कि अब उसकी मां की बुर में लंड डालने से उसे कोई नहीं रोक सकता इसलिए वह इस खेल को थोड़ा और आगे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहता था मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पीठ के बल एकदम नंगी लेटी हुई थी और उसकी आंखों में शर्म के साथ-साथ उत्तेजना भी नजर आ रही थी वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ शर्म के मारे घूमाए हुए थे और राजू था कि,, उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम बेशर्म में बन चुका था शायद बेशर्म बनने के बाद ही जिंदगी का असली सुख मिलता है,,,,, अपनी मां के नंगे बदन को देखते हुए खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को,,,, राजू पूरी तरह से सम्मोहित हुआ जा रहा था और वैसे भी झुमरी का जिक्र आते ही जिस तरह से राजू ने उसकी बुर की तारीफ किया था उसे सुनकर मधु थोड़ा सा शक पका गई थी वह अपनी खूबसूरती के आगे किसी और की खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं कर पा रही थी वह भी खास करके अपने बेटे के मुंह से इसलिए वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी बुर करना चाहती थी और पूछना चाहती थी कि उसकी बुर कैसी दिख रही है,,,,,,,, मधु अपने बेटे से कुछ पूछ पाती इससे पहले ही राजू अपना पासा फेंकते हुए बोला,,,,।
बाप रे इतनी खूबसूरत बुर मैंने आज तक नहीं देखा झुमरी की बुर तो तुम्हारे बुर के आगे कुछ भी नहीं है मा,,,,,
(बस यही तो मधु अपने बेटे की मुंह से सुनना चाहती थी खासकर की झुमरी की बुर से तुलनात्मक स्थिति में उसका बेटा अपनी मां की बुर को उत्कृष्ट साबित कर रहा था इसलिए गर्व के मारे मधु गदगद हुए जा रही थी और राजू अपनी मां की बुर की तारीफ के पुल बांध रहा था)
कसम से मां मैंने आज तक इतनी खूबसूरत सुंदर बुर नहीं देखा जान पड़ता है कि जैसे किसी ने रेत में अपनी उंगली से लकीर खींच दी या हो,,,,, कसम से मां मेरी तो हालत खराब होती जा रही है तवे पर रखी हुई रोटी की तरह तुम्हारी बुर एकदम से फुल गई है,,,,,,,, मैं तुम्हारी बुर को छूकर देखना चाहता हूं मां,,(अपनी मां की तरफ देखते हुए लेकिन अपने बेटे की बात सुन तो शर्म के मारे मधु अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा ली और राजू किसी को ही अपनी मां की तरफ से इजाजत समझ लिया और अपनी हथेली आगे बढ़ाकर पूरी की पूरी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ढक लिया मानो कि जैसे वह कचोरी को अपनी हथेली में लेकर छुपा लिया हो,,,, बुर की गर्मी राजू से बर्दाश्त नहीं हो रसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)
सहहहरह आहहहहह ओहहहहह मा तुम्हारी बुर तो एकदम भक्ति की तरह चल रही है इसकी अपन मुझे अपने बदन में महसूस हो रही है तुम्हारी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,, रुको मैं कपड़े से इसका पानी साफ कर देता हूं,,,,,(पर इतना कहकर राजू पास में पड़ी अपनी मां की पेटीकोट को उठा दिया मधु की हालत एकदम खराब होते जा रही थी जिस तरह से राजू ने अपनी हथेली पर रखकर अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में भर लिया था उससे वह पूरी तरह से गरमा गई थी और पिघलने लगी थी,,,,, राजू तुरंत पेटिकोट को अपने हाथ में लेकर अपनी मां की बुर पर लगाकर उसके निकले पानी को साफ करने के बहाने एक उंगली पेटीकोट के कपड़े में फंसा कर उसे अपनी मां की बुर्के गुलाबी छेद के लकीर में नीचे से ऊपर की तरफ सर काते हुए पानी साफ करने लगा,,, मधु को साफ महसूस हो रहा था कि उसका बेटा अपनी उंगली को उसकी बुर की गहराई में डालने की कोशिश कर रहा था इससे वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)
सहहहरह आहहहरहह बेटा,,,,,।
क्या हुआ मां,,,,,
ककककक कुछ नहीं,,,,,(अपनी उफान मारती सांसो को काबू करते हुए बोली राजू समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा है इसलिए अपनी हरकत को और बढ़ाते हुए बोला)
तुम्हारी बुर बहुत पानी छोड़ रही है मां,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से कपड़े से अपनी मां की बुर को साफ करने के बहाने उसकी बुर में उंगली डालने लगा ऐसा करने से मत हो कि तन बदन में आग लग रही थी वह अपना धैर्य खो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आनंद की अनुभूति उसे पूरी तरह से अपने में समा लेना चाहती थी,,,,, राजू एक तरफअपनी हरकत को जारी किए हुए था और दूसरी तरफ अपनी मां को अपनी बातों से बहला रहा था,,,)
ओहहहह तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम ऐसी करती हो जैसे कुदरत का बनाया हुआ कोई करिश्मा हो तुम्हारी बुर लाखों में एक है मैंने आज तक ऐसी दूर नहीं देखा कसम से इस को चूमने का मन कर रहा है,,,, तुम्हारी इजाजत हो तो मैं इस पर अपने होंठ रख दूं,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मधु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी मधु को समझ में आ गया था कि अब वह पीछे हटने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि उसके बेटे की हरकत ने उसके बदन में आग लगा दिया था और वह किसी भी तरह से इस आग को बुझाना चाहती थी अपने बेटे की फरमाइश सुनकर वह शर्मा कर अपनी पलकों को नीचे झुका ली जो कि अभी तक वह उसकी तरफ देख रही थी,,,, पर झुकी हुई पलकों को राजू अपनी मां की तरफ से आमंत्रण समझ कर अपने पैसे होठों को अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा जैसे जैसे राजू अपने होंठ को अपनी मां की बुर के करीब लेकर जा रहा था वैसे वैसे मधु की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसके साथ ही उसकी चुचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,,। राजू की तमन्ना उसकी ख्वाहिश पूरी होने जा रही थी आज की रात उसकी जिंदगी की बेहद हसीन और अविस्मरणीय है रात होने वाली थी ऐसी तूफानी बारिश में उसे इस तरह का आनंद मिलेगा और वह भी अपनी मां के साथ वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था देखते ही देखते राजू कभी प्यासे होठों को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रख दिया,,, मधु एकदम से कसमसा गई,,, यह अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था एकदम तरोताजा उसके दिलो-दिमाग पर अब राजू पूरी तरह से छा चुका था राजू तो अपनी मां को सिर्फ उसकी बुर पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने की फरमाइश किया था लेकिन जैसे ही वह अपने प्यासे होठों को अपनी मां की भट्टी जैसी तपती हुई बुर पर रखा उसके इरादे पूरी तरह से पिघलने लगे,,,, पहले से ही उसकी मां ढेर सारा पानी छोड़ रही थी और राजू अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखते ही वह बड़ी चालाकी से चुंबन लेने के बहाने अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद के अंदर सरकाना शुरू कर दिया,,, उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से तड़प उठी,,, राजू अब रुकने वाला बिल्कुल भी नहीं था,,,, उसे तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी वह अपनी जीत से अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया कभी उसके फूले हुए हिस्से को चाटता तो कभी गुलाबी पत्ती को चाटता तो कभी बुर के अंदर अपनी जीभ डाल कर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दे रहा था,,,, राजू पूरी तरह से अपना अनुभव अपनी मां के ऊपर आजमा रहा था और उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से पानी पानी में जा रही थी बार-बार उसकी बुर से पानी निकल जा रहा था,,,,।
तूफानी बारिश में राजू अपनी मां की बुर चाटने में लगा हुआ था और उसकी मां अपने बेटे की बुर चटाई से पूरी तरह से मस्ती में डूबती चली जा रही थी,,, थोड़ी देर में उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी और उसे गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर राजू के हौसले और ज्यादा बुलंद होने लगे,,,, राजू अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था,,,, वह पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था वह जानता था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी मां खुद ईतनी चुदवासी हो जाएगी कि खुद ही उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठेगी,,,, देखते ही देखते राजू पागलों की तरह अपनी मां की बुर के निचले छोड़ से ऊपरी किनारे तक जीप से लपालप चाट रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे फिर से भरा हुआ कटोरा उसे मिल गया हो और वैसे भी एक तरफ स्वादिष्ट व्यंजन की थाली रखी है और एक तरफ औरत की खूबसूरत दूर रखी हो तो मर्द की पहली पसंद और आखरी सिर्फ और सिर्फ औरत की बुर ही होगी भले ही पेट से भूखा हो लेकिन तन से भूखा रहना वह कभी पसंद नहीं करेगा,,,,।
सहहहरह आहहहहह राजू यह क्या कर रहा है,,,आहहहहहहह तू तो सिर्फ चुम्मा लेने के लिए बोला था यह अपनी जीभ डाल कर क्या कर रहा है,,,,आहहहहहहह
राजू,,,,,
कुछ नहीं मां तुम्हारी बुर में मलाई ज्यादा इकट्ठी हो गई है उसे अपनी जीभ से निकाल कर जा रहा हूं और सच पूछो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,,(सिर्फ राजू अपनी मां को जवाब देने के लिए अपना मुंह अपनी मां की बुर से हटाया था और फिर वापस उसी कार्य में जुट गया था अपनी मां की बुर चाटते हुए राजू का लंड पूरी तरह से हथोड़ा की तरह कड़क हो गया था जो कि किसी भी वक्त वह अपनी मां की बुर में डालकर अपनी सारी गर्मी को शांत कर देने की ख्वाहिश रखता था लेकिन इससे पहले वह अपनी मां को पूरी तरह से गर्म कर देना चाहता था और उसकी हरकत से उसकी मां पूरी तरह से व्याकुल और चुदवासी हुए जा रही थी,,,,, राजू समझ गया था कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा उसकी मां उसे कुछ भी नहीं बोलेगी क्योंकि वहां अपनी हरकत से अपनी मां को आनंद दे रहा था इसीलिए वह अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूची को थाम लिया दशहरी आम की तरह वह अपनी मां की चूची को थामकर दबाना शुरू कर दिया यह उसके लिए पहला मौका था जब वह अपनी मां की चूची को अपने हाथों में पकड़ कर दबा रहा था उसे अपनी मां की चूची दबाने में इतना मजा आ रहा था कि अब तक गांव की जितनी भी औरतों और लड़कियों के साथ व शारीरिक संबंध बनाते हुए उनकी चूचियों का स्तनपान के साथ-साथ स्तन मर्दन किया था उनसे भी ज्यादा मजा उसे अपनी मां की चुची में आ रहा था,,,,,,
इस तरह से अपने बेटे के द्वारा चूची दबाने में मधु को भी आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव हो रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी राजू अपनी हथेलियों के जोर से पलभर में ही अपनी मां की गोरी गोरी चूची को टमाटर की तरह लाल कर दिया था खुद शर्म और उत्तेजना के मारे मधु का गोरा मुखड़ा लाल हो गया था उसके मुख से लगातार गरमा-गरम सिसकारी की आवाज फूट रही थी,,, वह अपनी बेटी के साथ इस तरह के संबंध की कभी कल्पना नहीं की थी लेकिन धीरे-धीरे राजू ने अपनी हरकतों से अपनी चालाकी से अपनी मां को अपने वश में कर लिया था,,,,,
मधु पूरी तरह से आश्चर्यचकित और स्तब्ध हो चुकी थी जिस तरह से राजू उसकी बुर चाट रहा था आज तक उसके पति ने कभी इस तरह से उसकी बुर से अपने होठ लगाकर इतना प्यार नहीं किया था,,, राजू पूरी तरह से इस कार्य में मशहूर हो चुका था अपने बेटे की दीवानगी देखकर वह पूरी तरह से अपने बेटे की कायल होते जा रही थी राजू लगातार अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को तैयार ही नहीं था उसका बस चलता तो वह उसकी बुर के अंदर ऐसे ही घुस जाता मधु पूरी तरह से आनंद विभोर होकर अपनी दोनों टांगों को फैला दी थी और रह-रहकर ना चाहते हुए भी नीचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल रही थी जो कि इस हरकत की वजह से राजू के तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना का संचार हो रहा था,,,, ना कभी दोनों हाथों से अपनी मां की चूची दबाता तो कभी एक हाथ से चूची से खेलते हुए कांच को नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को मुठिया ना शुरू कर दे रहा था,,,,, राजू जानता था कि उसकी मां अब उससे पेलवाने के लिए तैयार हो चुकी है लेकिन इससे पहले वह अपने मुंह के करतब से ही अपनी मां का पानी झाड़ देना चाहता था और देखते ही देखते मधु की गरमा गरम सिसकारियां तेज होने लगी लेकिन उस तूफानी बारिश में उस खंडार में उसकी गरमा-गरम सिसकारी सुनने वाला वहां कोई नहीं था इसलिए वह खुलकर गरमा-गरम सिसकारी की आवाज निकाल रही थी,,,।
सहहहरह आहहहहह आहहहहह मेरे बेटे राजू आहहहरहह,,,,(ऐसा कहते हुए रहा करो अपनी कमर को ज्यादा ऊपर उठा दे रही थी और राजू अपनी मां की कमर था में उसकी बुर से लगातार मलाई चाट रहा था राजू समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है इसलिए वह अपनी मां की कमर को कस के थाम लिया था और जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डाल देने की कोशिश कर रहा था,,, और थोड़ी ही देर में एक तेज चीख के साथ मधु अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी और उसी स्थिति में कुछ पल तक स्थिर रह गई राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर को था में लगातार अपनी मां की बुर में से निकल रहे पानी को चाटना शुरू कर दिया था क्योंकि मधु झड़ चुकी थी,,,, मधु झड़ते हुए अपनी मम्मी सोच रही थी कि उसका बेटा किस मिट्टी का बना है एक तरफ वह अपनी बातों से ही उसका पानी निकाल दिया था और दूसरी तरफ अपनी जीभ का कमाल से उसे पिघला चुका था ऐसा तो आज तक उसके पति ने भी नहीं कर पाया था,,,, जब मधु की सांसे धीरे-धीरे दुरुस्त होने लगी तो राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर था मैं उसे नीचे की तरफ जमीन पर लाकर छोड़ दिया और खुद गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की बुर से अपने होंठ को हटा लिया और अपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजरें आपस में मिली मैं तो एकदम से शरमा गई और अपनी आंखों को बंद कर ली राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची पकड़कर बोला,,,,।
तुम बहुत खूबसूरत हो जितनी खूबसूरत तुम हो उससे भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी बुर है इसकी मलाई चाटने में मुझे बहुत मजा आया,,,
(राजू की मां अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर शर्म आ रही थी वह शर्म से पानी पानी में जा रही थी राजू अपनी मां की बुर की तरफ देखकर बोला)
देखो मां मैं कितना सारा पानी छोड़ी हो,,,, कसम से आज मजा आ गया,,,(जोर से अपनी मां की चूची को दबाते हुए)
आहहहह क्या कर रहा है राजू दर्द कर रहा है,,,
क्या करूं मैं तुम्हारी चूची इतनी खूबसूरत है कि जोर जोर से दबाने का मन करता है ऐसा लगता है कि दशहरी आम हो,,,
तू बहुत शैतान हो गया है,,,(इतना कहते हुए मधु हल्के से एक चपत अपने बेटे के गाल पर लगा दी तो राजू तुरंत बोला)
मां जिस तरह से मुझे प्यार कर रही हो चपत लगाकर थोड़ा इसे भी (अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए) कर देती तो मजा आ जाता,,,
(मधु अपने बेटे की हरकत और उसके टनटनाए लंड को देखकर एकदम से सिहर उठी,,, और एकदम से शर्मा गई राजू बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह तुरंत घुटनों के बल आगे बढ़ा और अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रख दिया क्योंकि वह अपनी आंखों को बंद कर ली थी जैसे ही अपने होठों पर अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसकी गर्मी महसूस की वह तुरंत खबर आकर अपनी आंखों को खोल दी और बोली,,,)
यह क्या कर रहा है राजू,,,
वही जो तुम चाहती हो और जिसका यह हकदार है,,, मैं जानता हूं तुम चोरी चोरी मेरे लंड को देख रही थी और मैं औरत के मन को अच्छी तरह से जानता हूं तुम मेरे लंड को देखकर इसे अपनी बुर में लेने की कल्पना भी कर रही थी,,,
(इससे आगे मधु के लिए बोलने के लिए कुछ भी नहीं था वह जानती थी कि जो कुछ भी उसका बेटा कह रहा था उसमें शत प्रतिशत सच्चाई थी वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ना चाहती थी उसकी गर्मी को महसूस करना चाहती थी लेकिन फिर भी अपने बेटे के सामने शर्म आ रहे थे और उसके इसी शर्म को दूर करने के लिए राजू बार-बार अपने लंड को अपनी मां के गुलाबी होठों पर रख दे रहा था,,,, उसकी हरकत को देखकर मधु बोली,,)
तू करना क्या चाहता है,,?
मैं चाहता हूं कि तुम इसे अपने मुंह में लेकर प्यार करो जी भर कर प्यार करो तुम्हारे प्यार का प्यासा है यह,,,
नहीं राजू यह गलत है हम दोनों के बीच मां-बेटे का पवित्र रिश्ता है,,,
वह तो समाज के लिए ही लेकिन इस समय इस खंडार में हम दोनों मां-बेटे नहीं बल्कि एक औरत और मर्द हैं जिसकी अपनी अपनी जरूरत है जैसा कि लाला और उसकी बहन के पीछे से अमर उसकी मां के बीच है उसी तरह से हम दोनों को भी इसी चीज की जरूरत है इस समय देखो मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,
राजू,,,(अपने बेटे की बात सुनकर मधु अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को अपनी मुट्ठी में दबोच ली अपने बेटे के लंड की गर्माहट से,,, मधु की मर्यादा की दीवार बहने लगी उसके संस्कार हवा में वास्प बनकर उड़ने लगे उसका धैर्य जवाब देने लगा,,,, अपने बेटे को वह पूरी तरह से अपनी जवानी का मजा चखाना चाहती थी वह अपने बेटे की हरकत और उसके इरादे के आगे घुटने टेक चुकी थी,,, अपने बेटे के लंड को पकड़ कर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसकी गर्माहट उसकी मजबूती को वह पल भर में महसूस कर चुकी थी इसलिए अब वह भी पीछे हटना नहीं चाहती थी और तुरंत,,, अपने पैसे होठों को अपने बेटे के लंड पर रख दी आज उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपने होठों पर रखते ही ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अमृतकलश को अपने होठों से लगा ली हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दुनिया का सारा सुख उसे खुद अपने होठों से लगाने के लिए तड़प रहा हो वह देखते ही देखते अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और अपने बेटे के लंड के सुपाडे को अपनी मुंह के अंदर प्रवेश कराने की इजाजत दे दी,,,, राजू इस समय अपने आप को दुनिया का सबसे खुशनसीब बेटा समझ रहा था क्योंकि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के मुंह में उसका लंड था धीरे-धीरे मधु अपने बेटे के लंड को अंदर की तरफ लेकर उसे चूसना शुरू कर दी थी लंड को कैसे चोदा जाता है वह अच्छी तरह से जानती थी लेकिन आज उसके मुंह में उसके पति का पतला और कमजोर नहीं बल्कि उसके बेटे का दमदार मर्दाना ताकत से भरा हुआ मोटा और लंबा लंड था जिसे मुंह में भरते ही उसका मुंह पूरी तरह से खुल चुका था उसके लाल-लाल होठों का छल्ला उसके बेटे के लंड की गोलाई के आगे छोटा पड़ रहा था जैसे तैसे करके वह धीरे-धीरे अपनी बेटी के लंड को अपने गले तक लेकर चूसना शुरू कर दी थी राजू पूरी तरह से मस्त होकर घुटनों के बल ही बैठे हुए अपने आंखों को बंद की भी धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था इस समय मां बेटे की कामलीला को देखने वाला वहां पर कोई भी नहीं था सिर्फ उसके बेल के सिवा,,,, वह भी काफी देर से अपनी मालकिन और उसके बेटे की कामलीला को अपनी आंखों से देख कर ना जाने अपने मन में क्या सोच रहा होगा,,,।
अरे तो क्या हो गया मा,,, इस तूफानी बारिश में इस जंगल में इस खंडार में मेरे और तुम्हारे सिवा तीसरा है कौन तीसरा है यह बेल जो कि कभी कुछ बोलने वाला नहीं है,,,
तू पागलों जैसी बात करता है,,,(बेल का नाम सुनकर मधु के होठों पर हंसी आ गई और वह हंसते हुए बोली)
मुझे देखो मैं एकदम नंगा हूं ना घर में भी शर्म करता तो मैं भी गीले कपड़े पहने रहते और बीमार पड़ जाता,,,(इतना कहने के साथ ही राजू उत्तेजित होते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल कर अपने मोटे तगड़े लंड की हाजिरी अपनी मां को महसूस कराने लगा,,,, अपने बेटे की बात और उसकी हरकत से मधु का मन विचलित हो जा रहा था वह उत्तेजित हो रही थी मदहोशी उसके बदन पर छाने लगी थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के नंगे लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर जोर-जोर से दबाए,,,)
तेरी बात कुछ और है तू लड़का है,,,
लड़का नहीं हूं पूरा मर्द बन चुका हूं मेरे लंड की ठोकर को महसूस नहीं कर रही हो क्या,,,,(राजू पूरी तरह से अपनी मां को अपने काबू में करना चाहता था अपने बस में करना चाहता था इसीलिए खुले शब्दों में अपनी मां को अपने मन की बात का इशारा दे रहा था)
सो तो हो रहा है,,,(गहरी सांस लेते हुए) लेकिन फिर भी मगर अपने कपड़े का उतार कर नंगी हो जाऊंगी तो मुझे देख कर मुझे डर है कि कहीं तेरा मन बहक ना जाए,,,,
(अपनी मां की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसकी मां भी नंगी होना चाहती है इसलिए अपनी मां को दिलासा देने का नाटक करते हुए बोला)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मां,,, मेरा मन बिल्कुल भी नहीं बहकेगा बहकना होता तो अब तक तो मैं तुम्हारा साया ऊपर करके अपने लंड को तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,
(राजू जानबूझकर अपनी मां को इस तरह की बातें करते हुए अपने मन का इरादा बता रहा था वह क्या-क्या कर सकता है वह बता रहा था और उसकी मां अपने बेटे की बातें सुनकर अंदर ही अंदर सिहर उठती थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तूफान मार रही थी)
सच कहता है ना नहीं बहकेगा,,,,
बिल्कुल भी नहीं मां विश्वास नहीं आता है तो एक बार उतार कर तो देखो,,,,,,,
लेकिन मेरी वजह से तो तेरा खड़ा हो रहा है,,,
क्या खड़ा हो रहा है,,,?(राजू सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर बोला वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था)
वही जो मेरी गांड पर चुभ रहा है,,,,
लेकिन बताओगी मुझे तो नहीं लग रहा है कि कुछ चुभ रहा है मैंने कौन सा कांटा लगा रखा है,,,,,
तू सब जानता है कि क्या चुभ रहा है और तू क्या चुभा रहा है,,,,,,,
मुझे तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा है मैं तो तुम्हें अपनी बाहों में भर कर तुम्हें सिर्फ गर्मी देने का काम कर रहा हूं,,,
हां और यह गर्मी तू कहां से दे रहा है,,,, तेरे लंड से जो कि मेरे बदौलत खड़ा हो गया है,,,
अरे ये,,,(इतना कहने के साथ ही अनजान बनता हुआ राजू अपना हाथ तुरंत नीचे लेंगे और अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की गांड पर पटकते हुए बोला,,,) यह तो मैं ऐसे ही तुम्हारे बदन की गर्मी से खड़ा हो गया है और इसमें भी तुम्हें गर्व करना चाहिए कि इस उम्र में भी तुम्हें देखकर मेरे जैसे जवान लड़कों का लंड खड़ा हो जाता है,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर मधुर चुदवासी हुए जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और वह धड़कते दिल के साथ बोली,,,)
वही तो बुद्धू जब तेरा खड़ा हो गया है तो तू आगे भी कुछ कर सकता है,,,,
तुम्हें चोदने का,,,, नहीं नहीं ऐसा मैं बिल्कुल भी नहीं करूंगा यह तो औपचारिक रूप से है कि किसी का भी खड़ा हो जाए तुम्हारी जैसी खूबसूरत जवानी देख कर लेकिन इससे आगे मैं नहीं बढुंगा,,,,
सच कह रहा है ना,,,,
बिल्कुल मा मैं एकदम सच कह रहा हूं,,,,
चल तो ठीक है मैं अपने कपड़े उतार देती हूं लेकिन तू कुछ करना नहीं,,,,( और इतना कहने के साथ ही मधु उठ कर बैठ गई और अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी ,,,,,,, राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मां अपने गले ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोल रही थी राजू का दिल जोर से धड़कने लगा था क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां अपने हाथों से अपना ब्लाउज उतार कर उसकी नंगी चूचियों का उसी दर्शन जो कराने वाली थी,,,, राजू मन ही मन तेज बारिश के लिए शुक्रिया अदा कर रहा था अगर यह तेज तूफानी बारिश ना होती तो शायद इस तरह से अपनी मां के साथ उसे समय बिताने को कभी नहीं मिलता,,,,, मधु हिचकीचा रही थी लेकिन,,, इस तरह से अपने बेटे के सामने अपने ब्लाउज उतारने में उसे आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था जैसे-जैसे मधु एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को रही थी वैसे वैसे राजू अपनी लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था और मधु तिरछी नजरों से अपने बेटे की यह हरकत देखकर पानी-पानी हो रही थी,,, देखते ही देखते मधु अपने हाथों से अपनी ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी बेलगाम चुचियों को आजाद कर दी ब्लाउज का आखरी बटन खुलते ही रबड़ के गेंद की तरह मधु की दोनों चूचियां उछल कर बाहर आ गई जो की जलती हुई आप की रोशनी में राजू को एकदम साफ नजर आ रही थी जिस पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,,, मधु अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी लेकिन उसे रोक बिल्कुल भी नहीं रही थी क्योंकि उसे भी अपने बेटे की हरकत से आनंद मिल रहा था वह तिरछी नजरों से अपने बेटे के बमपिलाट लंड को देख रही थी,,,,,,,।
मधु अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी ब्लाउज को अपने बाहों में से निकाल रही थी और देखते ही देखते मधु अपने बदन से ब्लाउज उतार कर बगल में रख दी और बोली,,,,।
ले मैंने तेरा कहां मानते हुए अपना ब्लाउज उतार दी,,, अब तो ठीक है ना,,,,(, मधु उसी तरह से बैठे हुए बोली लेकिन अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह भी उठ कर बैठ गया और अपनी मां की चुचियों को प्यासी नजरों से देखते हुए बोला,,,)
बाप रे तुम्हारी चूचियां तो कितनी खूबसूरत है मां एकदम खरबूजे की तरह गोल गोल इसमें बिल्कुल भी लायक नहीं है एकदम तन कर खड़ी है मानो कि किसी जवान लड़की की चूचियां हो,,,,(राजू अपनी मां के सामने बिना शर्म किए बेशर्म की तरह अपनी मां की छातियों की तरफ देखे जा रहा था और अपनी मां की चुचियों की तारीफ किए जा रहा था मधु को अपने बेटे के मुंह से अपनी चूची की तारीफ सुनकर बहुत ही ज्यादा गर्व का अनुभव हो रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह की बातें करते होगे और हां तुझे कैसे मालूम की लड़कीयों की चुचियां कसी हुई और तनी हुई होती है और औरतों की ढीली लचकदार हो जाती है,,,,
हां मैंने देखा है ना,,,,(अब राजू समझ गया था कि अपनी मां के सामने शर्म करने का कोई फायदा नहीं है अगर शर्म करेगा तो कर्म फूट जाएंगे इसीलिए वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाना चाहता था,,,)
तूने देखा है लेकिन किसकी देखा है,,,,(मधु भी अब थोड़ी बेशर्मी पर उतर आई थी क्योंकि उसे भी समझ में आ गया था कि बेशर्मी करने में कितना मजा आता है)
अरे अपना श्याम है ना मैं पढ़ने के लिए जाता था तो उसे घर पर बुलाने जाता था और ऐसे ही उसके घर पर पहुंच गया था तो देखते ही देखते मैं उसके घर के अंदर तक पहुंच गया और वहां देखा कि उसकी बहन झुमरी एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,
क्या एकदम नंगी होकर,,,(मधु आश्चर्य जताते हुए बोली)
हां मा एकदम नंगी होकर मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था वह मेरी तरफ पीठ करके नहा रही थी तब मंजू गोरी चिकनी उसकी गांड एकदम गोल-गोल थी,,, मैं वहां से चला जाना चाहता था लेकिन मैं वहां से ही भी नहीं पाया,,, और वह जैसे ही घूमी मेरे तो होश उड़ गए उसकी नंगी चूचियां एकदम कसी हुई थी और सच कह रहा हूं मैं तुम्हारी चूचियां देखकर मुझे यकीन हो गया है कि तुम बहुत खूबसूरत हो इस उम्र में भी झुमरी जैसी लड़कियों से पानी भरवा दो उसकी चूची और तुम्हारी चूची में जमीन आसमान का फर्क है उसकी चूचियां तो संतरे जैसी है लेकिन तुम्हारी चूचियां एकदम खरबूजे की तरह है कसम से मां तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,।
(राजू अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ गंदे शब्दों में करे जा रहा था और मधु अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर गदगद हुए जा रही थी,,,, मधु बार-बार अपनी चोर नजरों से अपने बेटे के खड़े नंदी को देखकर अंदर ही अंदर सिहर उठ रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अगर वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेगी तो उसके बेटे का लंड उसकी बुर में कहर मचा देगा,,,, वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके पति का लंड उसके बेटे के मुकाबले कुछ भी नहीं था,,,, राजू और मधु अपने अपने मन में अपनी भावनाओं के बवंडर में फंसते चले जा रहे थे और तभी बादलों की तेज गड़गड़ाहट हुई और मधु एकदम से चौकते हुए बोली,,,।
लगता है आज रात भर बरसात बंद नहीं होगी,,,,(अपनी चुचियों की तरफ देखते हुए) अभी भी ठंड महसूस हो रही है,,,,
पेटीकोट भी उतार दो तब जाकर तुम्हें सही लगेगा क्योंकि पेटीकोट भी गीली है,,, और अभी तो पूरी रात बाकी है सो नहीं पाओगी,,,,
बात तो तू सच ही कह रहा है,,,,,,, लेकिन झुमरी जब तेरी तरफ घूमी थी तो क्या उसने तुझे देखी नहीं थी,,,,
मुझे देख ली थी मैं तो एकदम से घबरा गया था लेकिन मेरी नजर जीस हिस्से पर जाकर रुकी थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं,,,,
किस हिस्से पर,,,,(धड़कते दिल के साथ मधु बोली)
उसकी बुर पर,,,(राजू बेझिझक अपनी मां के सामने ही गंदे शब्दों में बोला अपने बेटे के मुंह से सीधी सपाट बुर शब्द सुनते ही मधु की खुद की बुर उछलने लगी,,,,)
क्या यह क्या कह रहा है तू,,,
हां मां मैं सच कह रहा हूं जिंदगी में पहली बार में किसी लड़की की बुर को देख रहा था इसलिए मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,,,(अपनी मां के सामने इस तरह से खुले और गंदे शब्दों में बात करते हुए राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसका लंड और ज्यादा कड़क हो गया था,,, जिसे वहां अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने हाथ से हिला दे रहा था और जिसे देखकर मधु के तन बदन में आग लग जा रही थी,,,।)
बहुत खूबसूरत थी क्या उसकी,,,,(अपनी नजरों को नीचे किए हुए वह बोली एक औरत होने के नाते औरतों के प्रति ईर्ष्या उसके मन में भी कुछ क्षण के लिए जागने लगा था क्योंकि उसका बेटा झुमरी के बुर की तारीफ कर रहा था लेकिन राजू भी चला था वह अपने जवाब में चला कि दिखाते हुए बोला)
मैंने तो पहली बार देखा था इसलिए मुझे तो बहुत खूबसूरत लग रही थी मैंने दूसरे की तो देखा नहीं हूं कि उसकी बुर से दूसरी की बुर की तुलना कर सकूं,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ किसी ना किसी बहाने अपने बेटे को अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी उसे अपनी बुर की खूबसूरती से वाकिफ कराना चाहती थी उसे पूरा यकीन था कि अगर उसका बेटा एक बार उसकी बुर को देख लेगा तो उस पर पूरी तरह से मोहित हो जाएगा,,,, इसलिए वह बोली,,,)
मुझे तो अभी भी ठंड लग रही है,,,(अपनी दोनों बाहों को आपस में मिलाते हुए अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को बाहों के घेरे में छुपाते हुए मधु बोली)
कह तो रहा हूं,,,,, पेटीकोट भी उतार दो अभी तो पूरी रात बाकी है,,,, गीली पेटीकोट में सो नहीं पाओगी,,,।
(अपने बेटे की बात सेवा पूरी तरह से सहमत थी लेकिन ऐसा नहीं था कि वह समझ नहीं रही हो कि उसका बेटा उसके फायदे के लिए नहीं बल्कि अपने मन की करने के लिए उससे पेटीकोट उतरवाकर उसे नंगी करना चाहता है,,, फिर भी वे इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि गीले पेटीकोट में उसे भी नींद नहीं आएगी और बीमार पड़ने का डर अलग से रहेगा,,,, वैसे भी जिस तरह से उसने अपने बेटे की आंखों के सामने अपना ब्लाउज के बटन खोल कर उसे उतार कर अपनी चुचियों को नंगी कर दी थी उसी तरह से वह अपनी पेटीकोट को उतार कर अपने बेटे के सामने एकदम नंगी हो जाना चाहती थी इसमें उसे अजीब सा सुख भी प्राप्त हो रहा था इसलिए वह बोली,,,,)
बात तो तो ठीक ही कह रहा है अभी तो सुबह होने में पूरी रात बाकी है और रात भर जाग भी नहीं सकते और इस गीले कपड़े में रह भी नहीं सकते,,,,, एक काम कर तू ही उतार दे मेरी कमर दुख रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,।
(अपनी मां की है बात सुनते ही राजू का लंड टन टना कर ठुनकी मारने लगा,,,, राजू का दिल खुशी से झूम उठा यह तो ऐसा ही हो गया था कि बिल्ली को ही दूध की रखवाली करने के लिए बोला जा रहा है राजू को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए वह फिर से बोला,,,)
क्या कहा मां तुमने,,,
अरे ले तू ही उतार दे,,,, मेरी कमर दर्द कर रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,
ठीक है मा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, जब तक मैं हूं तुम्हें किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,,
(अपने बेट६ की बात सुनकर मधु मुस्कुराते हुए पेट के बल लेटने लगी लेकिन तिरछी नजरों से अपने बेटे के खड़े लंड को देख रही थी उसके लंड की मोटाई लंबाई देखकर मधु की बुर पानी फेंक रही थी,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी और राजू अपनी मां की पेटीकोट की डोरी खोलने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका था ऐसा नहीं था कि जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत के पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे नंगी करने जा रहा था ऐसा वह बहुत बार कर चुका था लेकिन आज जो सुकून से अपनी मां का पेटीकोट उतारकर उसे नंगी करने में मिलने वाला था वैसा सुख उसे अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था जिसके बारे में सोच कर ही उसका दिल बलि्लयो उछल रहा था,,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी राजू एक नजर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ दौड़ाया और तुरंत अपनी नजरों को नीचे की तरफ ले जाते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों से नीचे की तरफ ले जाने लगा,,,, और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी मां की पेटीकोट की डोरी में उलझा दिया अपनी मां की गहरी नाभि और कमर देखकर उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थामकर धक्के पर धक्के लगाए,,,, राजू की उंगलियां हरकत करना शुरू कर दी थी और अपने बेटे की हरकत को देखकर मधु कसमसा रही थी उसके बदन में उत्तेजना का फुहार फूट रहा था जो कि उसकी बुर से निकल रहा था देखते ही देखते राजू अपनी मां के साए की डोरी को खोल दिया और कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां के पेटीकोट को पकड़ लिया था उसे नीचे की तरफ खींचना शुरू कर दिया था मधु यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी भारी-भरकम कान के नीचे से पेटीकोट बाहर नहीं निकल पाएगी इसलिए अपने बेटे की सहायता करते हुए वह अपनी भारी भरकम गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दी और इसी मौके की ताक में,,, राजू तुरंत अपनी मां की पेटीकोट को उसकी कमर से नीचे की तरफ खींच लिया और पलक झपका आते हैं पेटीकोट को उसकी गोरी गोरी जांघों के नीचे लाते हुए उसके पैर से बाहर निकाल दिया इस समय मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से महंगी हो चुकी थी जलती हुई आग की रोशनी में राजू भौचक्का सा अपनी मां के नंगे बदन को देख रहा,,, था ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां को नंगी देख रहा था पहले भी वह कई बार अपनी मां को नंगी और उसे चुदवाते हुए देख चुका था लेकिन आज पहली बार इतने करीब से उसके नंगे बदन को देखकर उसकी आंखें चौंधिया दिया जा रही थी,,,, अपने बेटे की आंखों में वासना का उठता हुआ तूफान देखकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी उसके चेहरे को उसकी भावनाओं को और उसके इरादों को मधु अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि बस उसके इशारे करने की देरी है उसका बेटा उसके ऊपर टूट पड़ेगा और फिर उसे अद्भुत सुख देगा,,,,,।
बरसात का जोर बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था जिस तरह से शुरुआत हुई थी उसी तरह से अभी तक बारिश का पानी गिर रहा था वही तेज हवाएं वही बिजली की गड़गड़ाहट पूरे वातावरण को भयानक बना रही थी लेकिन ऐसी भयानक तूफानी बारिश में भी खंडहर के अंदर का माहौल पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था दोनों मां बेटे एकदम नग्न अवस्था में एक दूसरे को देख रहे थे बेटा किसी भी वक्त अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी अद्भुत चुदाई कर सकता था लेकिन अपने अनुभव से राजू समझ गया था कि अब उसकी मां की बुर में लंड डालने से उसे कोई नहीं रोक सकता इसलिए वह इस खेल को थोड़ा और आगे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहता था मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पीठ के बल एकदम नंगी लेटी हुई थी और उसकी आंखों में शर्म के साथ-साथ उत्तेजना भी नजर आ रही थी वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ शर्म के मारे घूमाए हुए थे और राजू था कि,, उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम बेशर्म में बन चुका था शायद बेशर्म बनने के बाद ही जिंदगी का असली सुख मिलता है,,,,, अपनी मां के नंगे बदन को देखते हुए खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को,,,, राजू पूरी तरह से सम्मोहित हुआ जा रहा था और वैसे भी झुमरी का जिक्र आते ही जिस तरह से राजू ने उसकी बुर की तारीफ किया था उसे सुनकर मधु थोड़ा सा शक पका गई थी वह अपनी खूबसूरती के आगे किसी और की खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं कर पा रही थी वह भी खास करके अपने बेटे के मुंह से इसलिए वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी बुर करना चाहती थी और पूछना चाहती थी कि उसकी बुर कैसी दिख रही है,,,,,,,, मधु अपने बेटे से कुछ पूछ पाती इससे पहले ही राजू अपना पासा फेंकते हुए बोला,,,,।
बाप रे इतनी खूबसूरत बुर मैंने आज तक नहीं देखा झुमरी की बुर तो तुम्हारे बुर के आगे कुछ भी नहीं है मा,,,,,
(बस यही तो मधु अपने बेटे की मुंह से सुनना चाहती थी खासकर की झुमरी की बुर से तुलनात्मक स्थिति में उसका बेटा अपनी मां की बुर को उत्कृष्ट साबित कर रहा था इसलिए गर्व के मारे मधु गदगद हुए जा रही थी और राजू अपनी मां की बुर की तारीफ के पुल बांध रहा था)
कसम से मां मैंने आज तक इतनी खूबसूरत सुंदर बुर नहीं देखा जान पड़ता है कि जैसे किसी ने रेत में अपनी उंगली से लकीर खींच दी या हो,,,,, कसम से मां मेरी तो हालत खराब होती जा रही है तवे पर रखी हुई रोटी की तरह तुम्हारी बुर एकदम से फुल गई है,,,,,,,, मैं तुम्हारी बुर को छूकर देखना चाहता हूं मां,,(अपनी मां की तरफ देखते हुए लेकिन अपने बेटे की बात सुन तो शर्म के मारे मधु अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा ली और राजू किसी को ही अपनी मां की तरफ से इजाजत समझ लिया और अपनी हथेली आगे बढ़ाकर पूरी की पूरी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ढक लिया मानो कि जैसे वह कचोरी को अपनी हथेली में लेकर छुपा लिया हो,,,, बुर की गर्मी राजू से बर्दाश्त नहीं हो रसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)
सहहहरह आहहहहह ओहहहहह मा तुम्हारी बुर तो एकदम भक्ति की तरह चल रही है इसकी अपन मुझे अपने बदन में महसूस हो रही है तुम्हारी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,, रुको मैं कपड़े से इसका पानी साफ कर देता हूं,,,,,(पर इतना कहकर राजू पास में पड़ी अपनी मां की पेटीकोट को उठा दिया मधु की हालत एकदम खराब होते जा रही थी जिस तरह से राजू ने अपनी हथेली पर रखकर अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में भर लिया था उससे वह पूरी तरह से गरमा गई थी और पिघलने लगी थी,,,,, राजू तुरंत पेटिकोट को अपने हाथ में लेकर अपनी मां की बुर पर लगाकर उसके निकले पानी को साफ करने के बहाने एक उंगली पेटीकोट के कपड़े में फंसा कर उसे अपनी मां की बुर्के गुलाबी छेद के लकीर में नीचे से ऊपर की तरफ सर काते हुए पानी साफ करने लगा,,, मधु को साफ महसूस हो रहा था कि उसका बेटा अपनी उंगली को उसकी बुर की गहराई में डालने की कोशिश कर रहा था इससे वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)
सहहहरह आहहहरहह बेटा,,,,,।
क्या हुआ मां,,,,,
ककककक कुछ नहीं,,,,,(अपनी उफान मारती सांसो को काबू करते हुए बोली राजू समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा है इसलिए अपनी हरकत को और बढ़ाते हुए बोला)
तुम्हारी बुर बहुत पानी छोड़ रही है मां,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से कपड़े से अपनी मां की बुर को साफ करने के बहाने उसकी बुर में उंगली डालने लगा ऐसा करने से मत हो कि तन बदन में आग लग रही थी वह अपना धैर्य खो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आनंद की अनुभूति उसे पूरी तरह से अपने में समा लेना चाहती थी,,,,, राजू एक तरफअपनी हरकत को जारी किए हुए था और दूसरी तरफ अपनी मां को अपनी बातों से बहला रहा था,,,)
ओहहहह तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम ऐसी करती हो जैसे कुदरत का बनाया हुआ कोई करिश्मा हो तुम्हारी बुर लाखों में एक है मैंने आज तक ऐसी दूर नहीं देखा कसम से इस को चूमने का मन कर रहा है,,,, तुम्हारी इजाजत हो तो मैं इस पर अपने होंठ रख दूं,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मधु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी मधु को समझ में आ गया था कि अब वह पीछे हटने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि उसके बेटे की हरकत ने उसके बदन में आग लगा दिया था और वह किसी भी तरह से इस आग को बुझाना चाहती थी अपने बेटे की फरमाइश सुनकर वह शर्मा कर अपनी पलकों को नीचे झुका ली जो कि अभी तक वह उसकी तरफ देख रही थी,,,, पर झुकी हुई पलकों को राजू अपनी मां की तरफ से आमंत्रण समझ कर अपने पैसे होठों को अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा जैसे जैसे राजू अपने होंठ को अपनी मां की बुर के करीब लेकर जा रहा था वैसे वैसे मधु की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसके साथ ही उसकी चुचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,,। राजू की तमन्ना उसकी ख्वाहिश पूरी होने जा रही थी आज की रात उसकी जिंदगी की बेहद हसीन और अविस्मरणीय है रात होने वाली थी ऐसी तूफानी बारिश में उसे इस तरह का आनंद मिलेगा और वह भी अपनी मां के साथ वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था देखते ही देखते राजू कभी प्यासे होठों को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रख दिया,,, मधु एकदम से कसमसा गई,,, यह अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था एकदम तरोताजा उसके दिलो-दिमाग पर अब राजू पूरी तरह से छा चुका था राजू तो अपनी मां को सिर्फ उसकी बुर पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने की फरमाइश किया था लेकिन जैसे ही वह अपने प्यासे होठों को अपनी मां की भट्टी जैसी तपती हुई बुर पर रखा उसके इरादे पूरी तरह से पिघलने लगे,,,, पहले से ही उसकी मां ढेर सारा पानी छोड़ रही थी और राजू अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखते ही वह बड़ी चालाकी से चुंबन लेने के बहाने अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद के अंदर सरकाना शुरू कर दिया,,, उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से तड़प उठी,,, राजू अब रुकने वाला बिल्कुल भी नहीं था,,,, उसे तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी वह अपनी जीत से अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया कभी उसके फूले हुए हिस्से को चाटता तो कभी गुलाबी पत्ती को चाटता तो कभी बुर के अंदर अपनी जीभ डाल कर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दे रहा था,,,, राजू पूरी तरह से अपना अनुभव अपनी मां के ऊपर आजमा रहा था और उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से पानी पानी में जा रही थी बार-बार उसकी बुर से पानी निकल जा रहा था,,,,।
तूफानी बारिश में राजू अपनी मां की बुर चाटने में लगा हुआ था और उसकी मां अपने बेटे की बुर चटाई से पूरी तरह से मस्ती में डूबती चली जा रही थी,,, थोड़ी देर में उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी और उसे गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर राजू के हौसले और ज्यादा बुलंद होने लगे,,,, राजू अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था,,,, वह पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था वह जानता था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी मां खुद ईतनी चुदवासी हो जाएगी कि खुद ही उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठेगी,,,, देखते ही देखते राजू पागलों की तरह अपनी मां की बुर के निचले छोड़ से ऊपरी किनारे तक जीप से लपालप चाट रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे फिर से भरा हुआ कटोरा उसे मिल गया हो और वैसे भी एक तरफ स्वादिष्ट व्यंजन की थाली रखी है और एक तरफ औरत की खूबसूरत दूर रखी हो तो मर्द की पहली पसंद और आखरी सिर्फ और सिर्फ औरत की बुर ही होगी भले ही पेट से भूखा हो लेकिन तन से भूखा रहना वह कभी पसंद नहीं करेगा,,,,।
सहहहरह आहहहहह राजू यह क्या कर रहा है,,,आहहहहहहह तू तो सिर्फ चुम्मा लेने के लिए बोला था यह अपनी जीभ डाल कर क्या कर रहा है,,,,आहहहहहहह
राजू,,,,,
कुछ नहीं मां तुम्हारी बुर में मलाई ज्यादा इकट्ठी हो गई है उसे अपनी जीभ से निकाल कर जा रहा हूं और सच पूछो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,,(सिर्फ राजू अपनी मां को जवाब देने के लिए अपना मुंह अपनी मां की बुर से हटाया था और फिर वापस उसी कार्य में जुट गया था अपनी मां की बुर चाटते हुए राजू का लंड पूरी तरह से हथोड़ा की तरह कड़क हो गया था जो कि किसी भी वक्त वह अपनी मां की बुर में डालकर अपनी सारी गर्मी को शांत कर देने की ख्वाहिश रखता था लेकिन इससे पहले वह अपनी मां को पूरी तरह से गर्म कर देना चाहता था और उसकी हरकत से उसकी मां पूरी तरह से व्याकुल और चुदवासी हुए जा रही थी,,,,, राजू समझ गया था कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा उसकी मां उसे कुछ भी नहीं बोलेगी क्योंकि वहां अपनी हरकत से अपनी मां को आनंद दे रहा था इसीलिए वह अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूची को थाम लिया दशहरी आम की तरह वह अपनी मां की चूची को थामकर दबाना शुरू कर दिया यह उसके लिए पहला मौका था जब वह अपनी मां की चूची को अपने हाथों में पकड़ कर दबा रहा था उसे अपनी मां की चूची दबाने में इतना मजा आ रहा था कि अब तक गांव की जितनी भी औरतों और लड़कियों के साथ व शारीरिक संबंध बनाते हुए उनकी चूचियों का स्तनपान के साथ-साथ स्तन मर्दन किया था उनसे भी ज्यादा मजा उसे अपनी मां की चुची में आ रहा था,,,,,,
इस तरह से अपने बेटे के द्वारा चूची दबाने में मधु को भी आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव हो रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी राजू अपनी हथेलियों के जोर से पलभर में ही अपनी मां की गोरी गोरी चूची को टमाटर की तरह लाल कर दिया था खुद शर्म और उत्तेजना के मारे मधु का गोरा मुखड़ा लाल हो गया था उसके मुख से लगातार गरमा-गरम सिसकारी की आवाज फूट रही थी,,, वह अपनी बेटी के साथ इस तरह के संबंध की कभी कल्पना नहीं की थी लेकिन धीरे-धीरे राजू ने अपनी हरकतों से अपनी चालाकी से अपनी मां को अपने वश में कर लिया था,,,,,
मधु पूरी तरह से आश्चर्यचकित और स्तब्ध हो चुकी थी जिस तरह से राजू उसकी बुर चाट रहा था आज तक उसके पति ने कभी इस तरह से उसकी बुर से अपने होठ लगाकर इतना प्यार नहीं किया था,,, राजू पूरी तरह से इस कार्य में मशहूर हो चुका था अपने बेटे की दीवानगी देखकर वह पूरी तरह से अपने बेटे की कायल होते जा रही थी राजू लगातार अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को तैयार ही नहीं था उसका बस चलता तो वह उसकी बुर के अंदर ऐसे ही घुस जाता मधु पूरी तरह से आनंद विभोर होकर अपनी दोनों टांगों को फैला दी थी और रह-रहकर ना चाहते हुए भी नीचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल रही थी जो कि इस हरकत की वजह से राजू के तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना का संचार हो रहा था,,,, ना कभी दोनों हाथों से अपनी मां की चूची दबाता तो कभी एक हाथ से चूची से खेलते हुए कांच को नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को मुठिया ना शुरू कर दे रहा था,,,,, राजू जानता था कि उसकी मां अब उससे पेलवाने के लिए तैयार हो चुकी है लेकिन इससे पहले वह अपने मुंह के करतब से ही अपनी मां का पानी झाड़ देना चाहता था और देखते ही देखते मधु की गरमा गरम सिसकारियां तेज होने लगी लेकिन उस तूफानी बारिश में उस खंडार में उसकी गरमा-गरम सिसकारी सुनने वाला वहां कोई नहीं था इसलिए वह खुलकर गरमा-गरम सिसकारी की आवाज निकाल रही थी,,,।
सहहहरह आहहहहह आहहहहह मेरे बेटे राजू आहहहरहह,,,,(ऐसा कहते हुए रहा करो अपनी कमर को ज्यादा ऊपर उठा दे रही थी और राजू अपनी मां की कमर था में उसकी बुर से लगातार मलाई चाट रहा था राजू समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है इसलिए वह अपनी मां की कमर को कस के थाम लिया था और जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डाल देने की कोशिश कर रहा था,,, और थोड़ी ही देर में एक तेज चीख के साथ मधु अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी और उसी स्थिति में कुछ पल तक स्थिर रह गई राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर को था में लगातार अपनी मां की बुर में से निकल रहे पानी को चाटना शुरू कर दिया था क्योंकि मधु झड़ चुकी थी,,,, मधु झड़ते हुए अपनी मम्मी सोच रही थी कि उसका बेटा किस मिट्टी का बना है एक तरफ वह अपनी बातों से ही उसका पानी निकाल दिया था और दूसरी तरफ अपनी जीभ का कमाल से उसे पिघला चुका था ऐसा तो आज तक उसके पति ने भी नहीं कर पाया था,,,, जब मधु की सांसे धीरे-धीरे दुरुस्त होने लगी तो राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर था मैं उसे नीचे की तरफ जमीन पर लाकर छोड़ दिया और खुद गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की बुर से अपने होंठ को हटा लिया और अपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजरें आपस में मिली मैं तो एकदम से शरमा गई और अपनी आंखों को बंद कर ली राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची पकड़कर बोला,,,,।
तुम बहुत खूबसूरत हो जितनी खूबसूरत तुम हो उससे भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी बुर है इसकी मलाई चाटने में मुझे बहुत मजा आया,,,
(राजू की मां अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर शर्म आ रही थी वह शर्म से पानी पानी में जा रही थी राजू अपनी मां की बुर की तरफ देखकर बोला)
देखो मां मैं कितना सारा पानी छोड़ी हो,,,, कसम से आज मजा आ गया,,,(जोर से अपनी मां की चूची को दबाते हुए)
आहहहह क्या कर रहा है राजू दर्द कर रहा है,,,
क्या करूं मैं तुम्हारी चूची इतनी खूबसूरत है कि जोर जोर से दबाने का मन करता है ऐसा लगता है कि दशहरी आम हो,,,
तू बहुत शैतान हो गया है,,,(इतना कहते हुए मधु हल्के से एक चपत अपने बेटे के गाल पर लगा दी तो राजू तुरंत बोला)
मां जिस तरह से मुझे प्यार कर रही हो चपत लगाकर थोड़ा इसे भी (अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए) कर देती तो मजा आ जाता,,,
(मधु अपने बेटे की हरकत और उसके टनटनाए लंड को देखकर एकदम से सिहर उठी,,, और एकदम से शर्मा गई राजू बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह तुरंत घुटनों के बल आगे बढ़ा और अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रख दिया क्योंकि वह अपनी आंखों को बंद कर ली थी जैसे ही अपने होठों पर अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसकी गर्मी महसूस की वह तुरंत खबर आकर अपनी आंखों को खोल दी और बोली,,,)
यह क्या कर रहा है राजू,,,
वही जो तुम चाहती हो और जिसका यह हकदार है,,, मैं जानता हूं तुम चोरी चोरी मेरे लंड को देख रही थी और मैं औरत के मन को अच्छी तरह से जानता हूं तुम मेरे लंड को देखकर इसे अपनी बुर में लेने की कल्पना भी कर रही थी,,,
(इससे आगे मधु के लिए बोलने के लिए कुछ भी नहीं था वह जानती थी कि जो कुछ भी उसका बेटा कह रहा था उसमें शत प्रतिशत सच्चाई थी वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ना चाहती थी उसकी गर्मी को महसूस करना चाहती थी लेकिन फिर भी अपने बेटे के सामने शर्म आ रहे थे और उसके इसी शर्म को दूर करने के लिए राजू बार-बार अपने लंड को अपनी मां के गुलाबी होठों पर रख दे रहा था,,,, उसकी हरकत को देखकर मधु बोली,,)
तू करना क्या चाहता है,,?
मैं चाहता हूं कि तुम इसे अपने मुंह में लेकर प्यार करो जी भर कर प्यार करो तुम्हारे प्यार का प्यासा है यह,,,
नहीं राजू यह गलत है हम दोनों के बीच मां-बेटे का पवित्र रिश्ता है,,,
वह तो समाज के लिए ही लेकिन इस समय इस खंडार में हम दोनों मां-बेटे नहीं बल्कि एक औरत और मर्द हैं जिसकी अपनी अपनी जरूरत है जैसा कि लाला और उसकी बहन के पीछे से अमर उसकी मां के बीच है उसी तरह से हम दोनों को भी इसी चीज की जरूरत है इस समय देखो मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,
राजू,,,(अपने बेटे की बात सुनकर मधु अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को अपनी मुट्ठी में दबोच ली अपने बेटे के लंड की गर्माहट से,,, मधु की मर्यादा की दीवार बहने लगी उसके संस्कार हवा में वास्प बनकर उड़ने लगे उसका धैर्य जवाब देने लगा,,,, अपने बेटे को वह पूरी तरह से अपनी जवानी का मजा चखाना चाहती थी वह अपने बेटे की हरकत और उसके इरादे के आगे घुटने टेक चुकी थी,,, अपने बेटे के लंड को पकड़ कर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसकी गर्माहट उसकी मजबूती को वह पल भर में महसूस कर चुकी थी इसलिए अब वह भी पीछे हटना नहीं चाहती थी और तुरंत,,, अपने पैसे होठों को अपने बेटे के लंड पर रख दी आज उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपने होठों पर रखते ही ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अमृतकलश को अपने होठों से लगा ली हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दुनिया का सारा सुख उसे खुद अपने होठों से लगाने के लिए तड़प रहा हो वह देखते ही देखते अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और अपने बेटे के लंड के सुपाडे को अपनी मुंह के अंदर प्रवेश कराने की इजाजत दे दी,,,, राजू इस समय अपने आप को दुनिया का सबसे खुशनसीब बेटा समझ रहा था क्योंकि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के मुंह में उसका लंड था धीरे-धीरे मधु अपने बेटे के लंड को अंदर की तरफ लेकर उसे चूसना शुरू कर दी थी लंड को कैसे चोदा जाता है वह अच्छी तरह से जानती थी लेकिन आज उसके मुंह में उसके पति का पतला और कमजोर नहीं बल्कि उसके बेटे का दमदार मर्दाना ताकत से भरा हुआ मोटा और लंबा लंड था जिसे मुंह में भरते ही उसका मुंह पूरी तरह से खुल चुका था उसके लाल-लाल होठों का छल्ला उसके बेटे के लंड की गोलाई के आगे छोटा पड़ रहा था जैसे तैसे करके वह धीरे-धीरे अपनी बेटी के लंड को अपने गले तक लेकर चूसना शुरू कर दी थी राजू पूरी तरह से मस्त होकर घुटनों के बल ही बैठे हुए अपने आंखों को बंद की भी धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था इस समय मां बेटे की कामलीला को देखने वाला वहां पर कोई भी नहीं था सिर्फ उसके बेल के सिवा,,,, वह भी काफी देर से अपनी मालकिन और उसके बेटे की कामलीला को अपनी आंखों से देख कर ना जाने अपने मन में क्या सोच रहा होगा,,,।