Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 13 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

अगर मैं ये भी उतार दूंगी तब तो मैं नंगी हो जाऊंगी,,,,

अरे तो क्या हो गया मा,,, इस तूफानी बारिश में इस जंगल में इस खंडार में मेरे और तुम्हारे सिवा तीसरा है कौन तीसरा है यह बेल जो कि कभी कुछ बोलने वाला नहीं है,,,

तू पागलों जैसी बात करता है,,,(बेल का नाम सुनकर मधु के होठों पर हंसी आ गई और वह हंसते हुए बोली)

मुझे देखो मैं एकदम नंगा हूं ना घर में भी शर्म करता तो मैं भी गीले कपड़े पहने रहते और बीमार पड़ जाता,,,(इतना कहने के साथ ही राजू उत्तेजित होते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल कर अपने मोटे तगड़े लंड की हाजिरी अपनी मां को महसूस कराने लगा,,,, अपने बेटे की बात और उसकी हरकत से मधु का मन विचलित हो जा रहा था वह उत्तेजित हो रही थी मदहोशी उसके बदन पर छाने लगी थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के नंगे लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर जोर-जोर से दबाए,,,)

तेरी बात कुछ और है तू लड़का है,,,

लड़का नहीं हूं पूरा मर्द बन चुका हूं मेरे लंड की ठोकर को महसूस नहीं कर रही हो क्या,,,,(राजू पूरी तरह से अपनी मां को अपने काबू में करना चाहता था अपने बस में करना चाहता था इसीलिए खुले शब्दों में अपनी मां को अपने मन की बात का इशारा दे रहा था)



सो तो हो रहा है,,,(गहरी सांस लेते हुए) लेकिन फिर भी मगर अपने कपड़े का उतार कर नंगी हो जाऊंगी तो मुझे देख कर मुझे डर है कि कहीं तेरा मन बहक ना जाए,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसकी मां भी नंगी होना चाहती है इसलिए अपनी मां को दिलासा देने का नाटक करते हुए बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मां,,, मेरा मन बिल्कुल भी नहीं बहकेगा बहकना होता तो अब तक तो मैं तुम्हारा साया ऊपर करके अपने लंड को तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,

(राजू जानबूझकर अपनी मां को इस तरह की बातें करते हुए अपने मन का इरादा बता रहा था वह क्या-क्या कर सकता है वह बता रहा था और उसकी मां अपने बेटे की बातें सुनकर अंदर ही अंदर सिहर उठती थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर तूफान मार रही थी)

सच कहता है ना नहीं बहकेगा,,,,

बिल्कुल भी नहीं मां विश्वास नहीं आता है तो एक बार उतार कर तो देखो,,,,,,,

लेकिन मेरी वजह से तो तेरा खड़ा हो रहा है,,,

क्या खड़ा हो रहा है,,,?(राजू सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर बोला वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था)

वही जो मेरी गांड पर चुभ रहा है,,,,

लेकिन बताओगी मुझे तो नहीं लग रहा है कि कुछ चुभ रहा है मैंने कौन सा कांटा लगा रखा है,,,,,

तू सब जानता है कि क्या चुभ रहा है और तू क्या चुभा रहा है,,,,,,,

मुझे तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा है मैं तो तुम्हें अपनी बाहों में भर कर तुम्हें सिर्फ गर्मी देने का काम कर रहा हूं,,,

हां और यह गर्मी तू कहां से दे रहा है,,,, तेरे लंड से जो कि मेरे बदौलत खड़ा हो गया है,,,

अरे ये,,,(इतना कहने के साथ ही अनजान बनता हुआ राजू अपना हाथ तुरंत नीचे लेंगे और अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की गांड पर पटकते हुए बोला,,,) यह तो मैं ऐसे ही तुम्हारे बदन की गर्मी से खड़ा हो गया है और इसमें भी तुम्हें गर्व करना चाहिए कि इस उम्र में भी तुम्हें देखकर मेरे जैसे जवान लड़कों का लंड खड़ा हो जाता है,,,



(अपने बेटे की बात सुनकर मधुर चुदवासी हुए जा रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और वह धड़कते दिल के साथ बोली,,,)

वही तो बुद्धू जब तेरा खड़ा हो गया है तो तू आगे भी कुछ कर सकता है,,,,

तुम्हें चोदने का,,,, नहीं नहीं ऐसा मैं बिल्कुल भी नहीं करूंगा यह तो औपचारिक रूप से है कि किसी का भी खड़ा हो जाए तुम्हारी जैसी खूबसूरत जवानी देख कर लेकिन इससे आगे मैं नहीं बढुंगा,,,,

सच कह रहा है ना,,,,

बिल्कुल मा मैं एकदम सच कह रहा हूं,,,,

चल तो ठीक है मैं अपने कपड़े उतार देती हूं लेकिन तू कुछ करना नहीं,,,,( और इतना कहने के साथ ही मधु उठ कर बैठ गई और अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी ,,,,,,, राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मां अपने गले ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोल रही थी राजू का दिल जोर से धड़कने लगा था क्योंकि कुछ ही देर में उसकी मां अपने हाथों से अपना ब्लाउज उतार कर उसकी नंगी चूचियों का उसी दर्शन जो कराने वाली थी,,,, राजू मन ही मन तेज बारिश के लिए शुक्रिया अदा कर रहा था अगर यह तेज तूफानी बारिश ना होती तो शायद इस तरह से अपनी मां के साथ उसे समय बिताने को कभी नहीं मिलता,,,,, मधु हिचकीचा रही थी लेकिन,,, इस तरह से अपने बेटे के सामने अपने ब्लाउज उतारने में उसे आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था जैसे-जैसे मधु एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को रही थी वैसे वैसे राजू अपनी लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था और मधु तिरछी नजरों से अपने बेटे की यह हरकत देखकर पानी-पानी हो रही थी,,, देखते ही देखते मधु अपने हाथों से अपनी ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी बेलगाम चुचियों को आजाद कर दी ब्लाउज का आखरी बटन खुलते ही रबड़ के गेंद की तरह मधु की दोनों चूचियां उछल कर बाहर आ गई जो की जलती हुई आप की रोशनी में राजू को एकदम साफ नजर आ रही थी जिस पर नजर पड़ते ही उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी और वह अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया था,,,, मधु अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी लेकिन उसे रोक बिल्कुल भी नहीं रही थी क्योंकि उसे भी अपने बेटे की हरकत से आनंद मिल रहा था वह तिरछी नजरों से अपने बेटे के बमपिलाट लंड को देख रही थी,,,,,,,।



मधु अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी ब्लाउज को अपने बाहों में से निकाल रही थी और देखते ही देखते मधु अपने बदन से ब्लाउज उतार कर बगल में रख दी और बोली,,,,।

ले मैंने तेरा कहां मानते हुए अपना ब्लाउज उतार दी,,, अब तो ठीक है ना,,,,(, मधु उसी तरह से बैठे हुए बोली लेकिन अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह भी उठ कर बैठ गया और अपनी मां की चुचियों को प्यासी नजरों से देखते हुए बोला,,,)

बाप रे तुम्हारी चूचियां तो कितनी खूबसूरत है मां एकदम खरबूजे की तरह गोल गोल इसमें बिल्कुल भी लायक नहीं है एकदम तन कर खड़ी है मानो कि किसी जवान लड़की की चूचियां हो,,,,(राजू अपनी मां के सामने बिना शर्म किए बेशर्म की तरह अपनी मां की छातियों की तरफ देखे जा रहा था और अपनी मां की चुचियों की तारीफ किए जा रहा था मधु को अपने बेटे के मुंह से अपनी चूची की तारीफ सुनकर बहुत ही ज्यादा गर्व का अनुभव हो रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह की बातें करते होगे और हां तुझे कैसे मालूम की लड़कीयों की चुचियां कसी हुई और तनी हुई होती है और औरतों की ढीली लचकदार हो जाती है,,,,

हां मैंने देखा है ना,,,,(अब राजू समझ गया था कि अपनी मां के सामने शर्म करने का कोई फायदा नहीं है अगर शर्म करेगा तो कर्म फूट जाएंगे इसीलिए वह पूरी तरह से बेशर्म बन जाना चाहता था,,,)

तूने देखा है लेकिन किसकी देखा है,,,,(मधु भी अब थोड़ी बेशर्मी पर उतर आई थी क्योंकि उसे भी समझ में आ गया था कि बेशर्मी करने में कितना मजा आता है)

अरे अपना श्याम है ना मैं पढ़ने के लिए जाता था तो उसे घर पर बुलाने जाता था और ऐसे ही उसके घर पर पहुंच गया था तो देखते ही देखते मैं उसके घर के अंदर तक पहुंच गया और वहां देखा कि उसकी बहन झुमरी एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,

क्या एकदम नंगी होकर,,,(मधु आश्चर्य जताते हुए बोली)



हां मा एकदम नंगी होकर मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था वह मेरी तरफ पीठ करके नहा रही थी तब मंजू गोरी चिकनी उसकी गांड एकदम गोल-गोल थी,,, मैं वहां से चला जाना चाहता था लेकिन मैं वहां से ही भी नहीं पाया,,, और वह जैसे ही घूमी मेरे तो होश उड़ गए उसकी नंगी चूचियां एकदम कसी हुई थी और सच कह रहा हूं मैं तुम्हारी चूचियां देखकर मुझे यकीन हो गया है कि तुम बहुत खूबसूरत हो इस उम्र में भी झुमरी जैसी लड़कियों से पानी भरवा दो उसकी चूची और तुम्हारी चूची में जमीन आसमान का फर्क है उसकी चूचियां तो संतरे जैसी है लेकिन तुम्हारी चूचियां एकदम खरबूजे की तरह है कसम से मां तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,।

(राजू अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ गंदे शब्दों में करे जा रहा था और मधु अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर गदगद हुए जा रही थी,,,, मधु बार-बार अपनी चोर नजरों से अपने बेटे के खड़े नंदी को देखकर अंदर ही अंदर सिहर उठ रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अगर वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेगी तो उसके बेटे का लंड उसकी बुर में कहर मचा देगा,,,, वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके पति का लंड उसके बेटे के मुकाबले कुछ भी नहीं था,,,, राजू और मधु अपने अपने मन में अपनी भावनाओं के बवंडर में फंसते चले जा रहे थे और तभी बादलों की तेज गड़गड़ाहट हुई और मधु एकदम से चौकते हुए बोली,,,।



लगता है आज रात भर बरसात बंद नहीं होगी,,,,(अपनी चुचियों की तरफ देखते हुए) अभी भी ठंड महसूस हो रही है,,,,

पेटीकोट भी उतार दो तब जाकर तुम्हें सही लगेगा क्योंकि पेटीकोट भी गीली है,,, और अभी तो पूरी रात बाकी है सो नहीं पाओगी,,,,

बात तो तू सच ही कह रहा है,,,,,,, लेकिन झुमरी जब तेरी तरफ घूमी थी तो क्या उसने तुझे देखी नहीं थी,,,,

मुझे देख ली थी मैं तो एकदम से घबरा गया था लेकिन मेरी नजर जीस हिस्से पर जाकर रुकी थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं,,,,

किस हिस्से पर,,,,(धड़कते दिल के साथ मधु बोली)

उसकी बुर पर,,,(राजू बेझिझक अपनी मां के सामने ही गंदे शब्दों में बोला अपने बेटे के मुंह से सीधी सपाट बुर शब्द सुनते ही मधु की खुद की बुर उछलने लगी,,,,)

क्या यह क्या कह रहा है तू,,,



हां मां मैं सच कह रहा हूं जिंदगी में पहली बार में किसी लड़की की बुर को देख रहा था इसलिए मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,,,(अपनी मां के सामने इस तरह से खुले और गंदे शब्दों में बात करते हुए राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसका लंड और ज्यादा कड़क हो गया था,,, जिसे वहां अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने हाथ से हिला दे रहा था और जिसे देखकर मधु के तन बदन में आग लग जा रही थी,,,।)

बहुत खूबसूरत थी क्या उसकी,,,,(अपनी नजरों को नीचे किए हुए वह बोली एक औरत होने के नाते औरतों के प्रति ईर्ष्या उसके मन में भी कुछ क्षण के लिए जागने लगा था क्योंकि उसका बेटा झुमरी के बुर की तारीफ कर रहा था लेकिन राजू भी चला था वह अपने जवाब में चला कि दिखाते हुए बोला)

मैंने तो पहली बार देखा था इसलिए मुझे तो बहुत खूबसूरत लग रही थी मैंने दूसरे की तो देखा नहीं हूं कि उसकी बुर से दूसरी की बुर की तुलना कर सकूं,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ किसी ना किसी बहाने अपने बेटे को अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी उसे अपनी बुर की खूबसूरती से वाकिफ कराना चाहती थी उसे पूरा यकीन था कि अगर उसका बेटा एक बार उसकी बुर को देख लेगा तो उस पर पूरी तरह से मोहित हो जाएगा,,,, इसलिए वह बोली,,,)

मुझे तो अभी भी ठंड लग रही है,,,(अपनी दोनों बाहों को आपस में मिलाते हुए अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को बाहों के घेरे में छुपाते हुए मधु बोली)

कह तो रहा हूं,,,,, पेटीकोट भी उतार दो अभी तो पूरी रात बाकी है,,,, गीली पेटीकोट में सो नहीं पाओगी,,,।

(अपने बेटे की बात सेवा पूरी तरह से सहमत थी लेकिन ऐसा नहीं था कि वह समझ नहीं रही हो कि उसका बेटा उसके फायदे के लिए नहीं बल्कि अपने मन की करने के लिए उससे पेटीकोट उतरवाकर उसे नंगी करना चाहता है,,, फिर भी वे इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि गीले पेटीकोट में उसे भी नींद नहीं आएगी और बीमार पड़ने का डर अलग से रहेगा,,,, वैसे भी जिस तरह से उसने अपने बेटे की आंखों के सामने अपना ब्लाउज के बटन खोल कर उसे उतार कर अपनी चुचियों को नंगी कर दी थी उसी तरह से वह अपनी पेटीकोट को उतार कर अपने बेटे के सामने एकदम नंगी हो जाना चाहती थी इसमें उसे अजीब सा सुख भी प्राप्त हो रहा था इसलिए वह बोली,,,,)

बात तो तो ठीक ही कह रहा है अभी तो सुबह होने में पूरी रात बाकी है और रात भर जाग भी नहीं सकते और इस गीले कपड़े में रह भी नहीं सकते,,,,, एक काम कर तू ही उतार दे मेरी कमर दुख रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,।

(अपनी मां की है बात सुनते ही राजू का लंड टन टना कर ठुनकी मारने लगा,,,, राजू का दिल खुशी से झूम उठा यह तो ऐसा ही हो गया था कि बिल्ली को ही दूध की रखवाली करने के लिए बोला जा रहा है राजू को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए वह फिर से बोला,,,)

क्या कहा मां तुमने,,,

अरे ले तू ही उतार दे,,,, मेरी कमर दर्द कर रही है मैं थोड़ा लेट जाती हूं,,,,

ठीक है मा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, जब तक मैं हूं तुम्हें किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,,

(अपने बेट६ की बात सुनकर मधु मुस्कुराते हुए पेट के बल लेटने लगी लेकिन तिरछी नजरों से अपने बेटे के खड़े लंड को देख रही थी उसके लंड की मोटाई लंबाई देखकर मधु की बुर पानी फेंक रही थी,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी और राजू अपनी मां की पेटीकोट की डोरी खोलने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका था ऐसा नहीं था कि जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत के पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे नंगी करने जा रहा था ऐसा वह बहुत बार कर चुका था लेकिन आज जो सुकून से अपनी मां का पेटीकोट उतारकर उसे नंगी करने में मिलने वाला था वैसा सुख उसे अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था जिसके बारे में सोच कर ही उसका दिल बलि्लयो उछल रहा था,,,,, मधु पीठ के बल लेट चुकी थी राजू एक नजर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ दौड़ाया और तुरंत अपनी नजरों को नीचे की तरफ ले जाते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों से नीचे की तरफ ले जाने लगा,,,, और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को अपनी मां की पेटीकोट की डोरी में उलझा दिया अपनी मां की गहरी नाभि और कमर देखकर उसका मन कर रहा था कि अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थामकर धक्के पर धक्के लगाए,,,, राजू की उंगलियां हरकत करना शुरू कर दी थी और अपने बेटे की हरकत को देखकर मधु कसमसा रही थी उसके बदन में उत्तेजना का फुहार फूट रहा था जो कि उसकी बुर से निकल रहा था देखते ही देखते राजू अपनी मां के साए की डोरी को खोल दिया और कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां के पेटीकोट को पकड़ लिया था उसे नीचे की तरफ खींचना शुरू कर दिया था मधु यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी भारी-भरकम कान के नीचे से पेटीकोट बाहर नहीं निकल पाएगी इसलिए अपने बेटे की सहायता करते हुए वह अपनी भारी भरकम गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा दी और इसी मौके की ताक में,,, राजू तुरंत अपनी मां की पेटीकोट को उसकी कमर से नीचे की तरफ खींच लिया और पलक झपका आते हैं पेटीकोट को उसकी गोरी गोरी जांघों के नीचे लाते हुए उसके पैर से बाहर निकाल दिया इस समय मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से महंगी हो चुकी थी जलती हुई आग की रोशनी में राजू भौचक्का सा अपनी मां के नंगे बदन को देख रहा,,, था ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां को नंगी देख रहा था पहले भी वह कई बार अपनी मां को नंगी और उसे चुदवाते हुए देख चुका था लेकिन आज पहली बार इतने करीब से उसके नंगे बदन को देखकर उसकी आंखें चौंधिया दिया जा रही थी,,,, अपने बेटे की आंखों में वासना का उठता हुआ तूफान देखकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी उसके चेहरे को उसकी भावनाओं को और उसके इरादों को मधु अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि बस उसके इशारे करने की देरी है उसका बेटा उसके ऊपर टूट पड़ेगा और फिर उसे अद्भुत सुख देगा,,,,,।

बरसात का जोर बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था जिस तरह से शुरुआत हुई थी उसी तरह से अभी तक बारिश का पानी गिर रहा था वही तेज हवाएं वही बिजली की गड़गड़ाहट पूरे वातावरण को भयानक बना रही थी लेकिन ऐसी भयानक तूफानी बारिश में भी खंडहर के अंदर का माहौल पूरी तरह से मदहोशी से भरा हुआ था दोनों मां बेटे एकदम नग्न अवस्था में एक दूसरे को देख रहे थे बेटा किसी भी वक्त अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी अद्भुत चुदाई कर सकता था लेकिन अपने अनुभव से राजू समझ गया था कि अब उसकी मां की बुर में लंड डालने से उसे कोई नहीं रोक सकता इसलिए वह इस खेल को थोड़ा और आगे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहता था मधु अपने बेटे की आंखों के सामने पीठ के बल एकदम नंगी लेटी हुई थी और उसकी आंखों में शर्म के साथ-साथ उत्तेजना भी नजर आ रही थी वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ शर्म के मारे घूमाए हुए थे और राजू था कि,, उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम बेशर्म में बन चुका था शायद बेशर्म बनने के बाद ही जिंदगी का असली सुख मिलता है,,,,, अपनी मां के नंगे बदन को देखते हुए खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को,,,, राजू पूरी तरह से सम्मोहित हुआ जा रहा था और वैसे भी झुमरी का जिक्र आते ही जिस तरह से राजू ने उसकी बुर की तारीफ किया था उसे सुनकर मधु थोड़ा सा शक पका गई थी वह अपनी खूबसूरती के आगे किसी और की खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं कर पा रही थी वह भी खास करके अपने बेटे के मुंह से इसलिए वह किसी भी तरह से अपने बेटे को अपनी बुर करना चाहती थी और पूछना चाहती थी कि उसकी बुर कैसी दिख रही है,,,,,,,, मधु अपने बेटे से कुछ पूछ पाती इससे पहले ही राजू अपना पासा फेंकते हुए बोला,,,,।

बाप रे इतनी खूबसूरत बुर मैंने आज तक नहीं देखा झुमरी की बुर तो तुम्हारे बुर के आगे कुछ भी नहीं है मा,,,,,

(बस यही तो मधु अपने बेटे की मुंह से सुनना चाहती थी खासकर की झुमरी की बुर से तुलनात्मक स्थिति में उसका बेटा अपनी मां की बुर को उत्कृष्ट साबित कर रहा था इसलिए गर्व के मारे मधु गदगद हुए जा रही थी और राजू अपनी मां की बुर की तारीफ के पुल बांध रहा था)

कसम से मां मैंने आज तक इतनी खूबसूरत सुंदर‌ बुर नहीं देखा जान पड़ता है कि जैसे किसी ने रेत में अपनी उंगली से लकीर खींच दी या हो,,,,, कसम से मां मेरी तो हालत खराब होती जा रही है तवे पर रखी हुई रोटी की तरह तुम्हारी बुर एकदम से फुल गई है,,,,,,,, मैं तुम्हारी बुर को छूकर देखना चाहता हूं मां,,(अपनी मां की तरफ देखते हुए लेकिन अपने बेटे की बात सुन तो शर्म के मारे मधु अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा ली और राजू किसी को ही अपनी मां की तरफ से इजाजत समझ लिया और अपनी हथेली आगे बढ़ाकर पूरी की पूरी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ढक लिया मानो कि जैसे वह कचोरी को अपनी हथेली में लेकर छुपा लिया हो,,,, बुर की गर्मी राजू से बर्दाश्त नहीं हो रसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहरह आहहहहह ओहहहहह मा तुम्हारी बुर तो एकदम भक्ति की तरह चल रही है इसकी अपन मुझे अपने बदन में महसूस हो रही है तुम्हारी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी है,,,, रुको मैं कपड़े से इसका पानी साफ कर देता हूं,,,,,(पर इतना कहकर राजू पास में पड़ी अपनी मां की पेटीकोट को उठा दिया मधु की हालत एकदम खराब होते जा रही थी जिस तरह से राजू ने अपनी हथेली पर रखकर अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में भर लिया था उससे वह पूरी तरह से गरमा गई थी और पिघलने लगी थी,,,,, राजू तुरंत पेटिकोट को अपने हाथ में लेकर अपनी मां की बुर पर लगाकर उसके निकले पानी को साफ करने के बहाने एक उंगली पेटीकोट के कपड़े में फंसा कर उसे अपनी मां की बुर्के गुलाबी छेद के लकीर में नीचे से ऊपर की तरफ सर काते हुए पानी साफ करने लगा,,, मधु को साफ महसूस हो रहा था कि उसका बेटा अपनी उंगली को उसकी बुर की गहराई में डालने की कोशिश कर रहा था इससे वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहरह आहहहरहह बेटा,,,,,।

क्या हुआ मां,,,,,

कककक‌क कुछ नहीं,,,,,(अपनी उफान मारती सांसो को काबू करते हुए बोली राजू समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा है इसलिए अपनी हरकत को और बढ़ाते हुए बोला)

तुम्हारी बुर बहुत पानी छोड़ रही है मां,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से कपड़े से अपनी मां की बुर को साफ करने के बहाने उसकी बुर में उंगली डालने लगा ऐसा करने से मत हो कि तन बदन में आग लग रही थी वह अपना धैर्य खो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आनंद की अनुभूति उसे पूरी तरह से अपने में समा लेना चाहती थी,,,,, राजू एक तरफअपनी हरकत को जारी किए हुए था और दूसरी तरफ अपनी मां को अपनी बातों से बहला रहा था,,,)

ओहहहह तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम ऐसी करती हो जैसे कुदरत का बनाया हुआ कोई करिश्मा हो तुम्हारी बुर लाखों में एक है मैंने आज तक ऐसी दूर नहीं देखा कसम से इस को चूमने का मन कर रहा है,,,, तुम्हारी इजाजत हो तो मैं इस पर अपने होंठ रख दूं,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी मधु को समझ में आ गया था कि अब वह पीछे हटने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि उसके बेटे की हरकत ने उसके बदन में आग लगा दिया था और वह किसी भी तरह से इस आग को बुझाना चाहती थी अपने बेटे की फरमाइश सुनकर वह शर्मा कर अपनी पलकों को नीचे झुका ली जो कि अभी तक वह उसकी तरफ देख रही थी,,,, पर झुकी हुई पलकों को राजू अपनी मां की तरफ से आमंत्रण समझ कर अपने पैसे होठों को अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा जैसे जैसे राजू अपने होंठ को अपनी मां की बुर के करीब लेकर जा रहा था वैसे वैसे मधु की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और उसके साथ ही उसकी चुचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,,। राजू की तमन्ना उसकी ख्वाहिश पूरी होने जा रही थी आज की रात उसकी जिंदगी की बेहद हसीन और अविस्मरणीय है रात होने वाली थी ऐसी तूफानी बारिश में उसे इस तरह का आनंद मिलेगा और वह भी अपनी मां के साथ वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था देखते ही देखते राजू कभी प्यासे होठों को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रख दिया,,, मधु एकदम से कसमसा गई,,, यह अनुभव उसके लिए बिल्कुल नया था एकदम तरोताजा उसके दिलो-दिमाग पर अब राजू पूरी तरह से छा चुका था राजू तो अपनी मां को सिर्फ उसकी बुर पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने की फरमाइश किया था लेकिन जैसे ही वह अपने प्यासे होठों को अपनी मां की भट्टी जैसी तपती हुई बुर पर रखा उसके इरादे पूरी तरह से पिघलने लगे,,,, पहले से ही उसकी मां ढेर सारा पानी छोड़ रही थी और राजू अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखते ही वह बड़ी चालाकी से चुंबन लेने के बहाने अपनी जीभ को अपनी मां की गुलाबी छेद के अंदर सरकाना शुरू कर दिया,,, उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से तड़प उठी,,, राजू अब रुकने वाला बिल्कुल भी नहीं था,,,, उसे तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी वह अपनी जीत से अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया कभी उसके फूले हुए हिस्से को चाटता तो कभी गुलाबी पत्ती को चाटता तो कभी बुर के अंदर अपनी जीभ डाल कर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दे रहा था,,,, राजू पूरी तरह से अपना अनुभव अपनी मां के ऊपर आजमा रहा था और उसकी मां अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से पानी पानी में जा रही थी बार-बार उसकी बुर से पानी निकल जा रहा था,,,,।

तूफानी बारिश में राजू अपनी मां की बुर चाटने में लगा हुआ था और उसकी मां अपने बेटे की बुर चटाई से पूरी तरह से मस्ती में डूबती चली जा रही थी,,, थोड़ी देर में उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी और उसे गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर राजू के हौसले और ज्यादा बुलंद होने लगे,,,, राजू अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था,,,, वह पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था वह जानता था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी मां खुद ईतनी चुदवासी हो जाएगी कि खुद ही उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठेगी,,,, देखते ही देखते राजू पागलों की तरह अपनी मां की बुर के निचले छोड़ से ऊपरी किनारे तक जीप से लपालप चाट रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे फिर से भरा हुआ कटोरा उसे मिल गया हो और वैसे भी एक तरफ स्वादिष्ट व्यंजन की थाली रखी है और एक तरफ औरत की खूबसूरत दूर रखी हो तो मर्द की पहली पसंद और आखरी सिर्फ और सिर्फ औरत की बुर ही होगी भले ही पेट से भूखा हो लेकिन तन से भूखा रहना वह कभी पसंद नहीं करेगा,,,,।

सहहहरह आहहहहह राजू यह क्या कर रहा है,,,आहहहहहहह तू तो सिर्फ चुम्मा लेने के लिए बोला था यह अपनी जीभ डाल कर क्या कर रहा है,,,,आहहहहहहह

राजू,,,,,

कुछ नहीं मां तुम्हारी बुर में मलाई ज्यादा इकट्ठी हो गई है उसे अपनी जीभ से निकाल कर जा रहा हूं और सच पूछो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,,(सिर्फ राजू अपनी मां को जवाब देने के लिए अपना मुंह अपनी मां की बुर से हटाया था और फिर वापस उसी कार्य में जुट गया था अपनी मां की बुर चाटते हुए राजू का लंड पूरी तरह से हथोड़ा की तरह कड़क हो गया था जो कि किसी भी वक्त वह अपनी मां की बुर में डालकर अपनी सारी गर्मी को शांत कर देने की ख्वाहिश रखता था लेकिन इससे पहले वह अपनी मां को पूरी तरह से गर्म कर देना चाहता था और उसकी हरकत से उसकी मां पूरी तरह से व्याकुल और चुदवासी हुए जा रही थी,,,,, राजू समझ गया था कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है वह अपनी मां के साथ कुछ भी करेगा उसकी मां उसे कुछ भी नहीं बोलेगी क्योंकि वहां अपनी हरकत से अपनी मां को आनंद दे रहा था इसीलिए वह अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूची को थाम लिया दशहरी आम की तरह वह अपनी मां की चूची को थामकर दबाना शुरू कर दिया यह उसके लिए पहला मौका था जब वह अपनी मां की चूची को अपने हाथों में पकड़ कर दबा रहा था उसे अपनी मां की चूची दबाने में इतना मजा आ रहा था कि अब तक गांव की जितनी भी औरतों और लड़कियों के साथ व शारीरिक संबंध बनाते हुए उनकी चूचियों का स्तनपान के साथ-साथ स्तन मर्दन किया था उनसे भी ज्यादा मजा उसे अपनी मां की चुची में आ रहा था,,,,,,

इस तरह से अपने बेटे के द्वारा चूची दबाने में मधु को भी आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव हो रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी राजू अपनी हथेलियों के जोर से पलभर में ही अपनी मां की गोरी गोरी चूची को टमाटर की तरह लाल कर दिया था खुद शर्म और उत्तेजना के मारे मधु का गोरा मुखड़ा लाल हो गया था उसके मुख से लगातार गरमा-गरम सिसकारी की आवाज फूट रही थी,,, वह अपनी बेटी के साथ इस तरह के संबंध की कभी कल्पना नहीं की थी लेकिन धीरे-धीरे राजू ने अपनी हरकतों से अपनी चालाकी से अपनी मां को अपने वश में कर लिया था,,,,,

मधु पूरी तरह से आश्चर्यचकित और स्तब्ध हो चुकी थी जिस तरह से राजू उसकी बुर चाट रहा था आज तक उसके पति ने कभी इस तरह से उसकी बुर से अपने होठ लगाकर इतना प्यार नहीं किया था,,, राजू पूरी तरह से इस कार्य में मशहूर हो चुका था अपने बेटे की दीवानगी देखकर वह पूरी तरह से अपने बेटे की कायल होते जा रही थी राजू लगातार अपनी मां की बुर से अपना मुंह हटाने को तैयार ही नहीं था उसका बस चलता तो वह उसकी बुर के अंदर ऐसे ही घुस जाता मधु पूरी तरह से आनंद विभोर होकर अपनी दोनों टांगों को फैला दी थी और रह-रहकर ना चाहते हुए भी नीचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल रही थी जो कि इस हरकत की वजह से राजू के तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना का संचार हो रहा था,,,, ना कभी दोनों हाथों से अपनी मां की चूची दबाता तो कभी एक हाथ से चूची से खेलते हुए कांच को नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को मुठिया ना शुरू कर दे रहा था,,,,, राजू जानता था कि उसकी मां अब उससे पेलवाने के लिए तैयार हो चुकी है लेकिन इससे पहले वह अपने मुंह के करतब से ही अपनी मां का पानी झाड़ देना चाहता था और देखते ही देखते मधु की गरमा गरम सिसकारियां तेज होने लगी लेकिन उस तूफानी बारिश में उस खंडार में उसकी गरमा-गरम सिसकारी सुनने वाला वहां कोई नहीं था इसलिए वह खुलकर गरमा-गरम सिसकारी की आवाज निकाल रही थी,,,।

सहहहरह आहहहहह आहहहहह मेरे बेटे राजू आहहहरहह,,,,(ऐसा कहते हुए रहा करो अपनी कमर को ज्यादा ऊपर उठा दे रही थी और राजू अपनी मां की कमर था में उसकी बुर से लगातार मलाई चाट रहा था राजू समझ गया था कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है इसलिए वह अपनी मां की कमर को कस के थाम लिया था और जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डाल देने की कोशिश कर रहा था,,, और थोड़ी ही देर में एक तेज चीख के साथ मधु अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी और उसी स्थिति में कुछ पल तक स्थिर रह गई राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर को था में लगातार अपनी मां की बुर में से निकल रहे पानी को चाटना शुरू कर दिया था क्योंकि मधु झड़ चुकी थी,,,, मधु झड़ते हुए अपनी मम्मी सोच रही थी कि उसका बेटा किस मिट्टी का बना है एक तरफ वह अपनी बातों से ही उसका पानी निकाल दिया था और दूसरी तरफ अपनी जीभ का कमाल से उसे पिघला चुका था ऐसा तो आज तक उसके पति ने भी नहीं कर पाया था,,,, जब मधु की सांसे धीरे-धीरे दुरुस्त होने लगी तो राजू उसी तरह से अपनी मां की कमर था मैं उसे नीचे की तरफ जमीन पर लाकर छोड़ दिया और खुद गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की बुर से अपने होंठ को हटा लिया और अपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजरें आपस में मिली मैं तो एकदम से शरमा गई और अपनी आंखों को बंद कर ली राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची पकड़कर बोला,,,,।

तुम बहुत खूबसूरत हो जितनी खूबसूरत तुम हो उससे भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी बुर है इसकी मलाई चाटने में मुझे बहुत मजा आया,,,

(राजू की मां अपने बेटे की इस तरह की बातें सुनकर शर्म आ रही थी वह शर्म से पानी पानी में जा रही थी राजू अपनी मां की बुर की तरफ देखकर बोला)

देखो मां मैं कितना सारा पानी छोड़ी हो,,,, कसम से आज मजा आ गया,,,(जोर से अपनी मां की चूची को दबाते हुए)

आहहहह क्या कर रहा है राजू दर्द कर रहा है,,,

क्या करूं मैं तुम्हारी चूची इतनी खूबसूरत है कि जोर जोर से दबाने का मन करता है ऐसा लगता है कि दशहरी आम हो,,,

तू बहुत शैतान हो गया है,,,(इतना कहते हुए मधु हल्के से एक चपत अपने बेटे के गाल पर लगा दी तो राजू तुरंत बोला)

मां जिस तरह से मुझे प्यार कर रही हो चपत लगाकर थोड़ा इसे भी (अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए) कर देती तो मजा आ जाता,,,

(मधु अपने बेटे की हरकत और उसके टनटनाए लंड को देखकर एकदम से सिहर उठी,,, और एकदम से शर्मा गई राजू बिल्कुल भी पीछे हटने वाला नहीं था वह तुरंत घुटनों के बल आगे बढ़ा और अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रख दिया क्योंकि वह अपनी आंखों को बंद कर ली थी जैसे ही अपने होठों पर अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसकी गर्मी महसूस की वह तुरंत खबर आकर अपनी आंखों को खोल दी और बोली,,,)

यह क्या कर रहा है राजू,,,

वही जो तुम चाहती हो और जिसका यह हकदार है,,, मैं जानता हूं तुम चोरी चोरी मेरे लंड को देख रही थी और मैं औरत के मन को अच्छी तरह से जानता हूं तुम मेरे लंड को देखकर इसे अपनी बुर में लेने की कल्पना भी कर रही थी,,,

(इससे आगे मधु के लिए बोलने के लिए कुछ भी नहीं था वह जानती थी कि जो कुछ भी उसका बेटा कह रहा था उसमें शत प्रतिशत सच्चाई थी वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ना चाहती थी उसकी गर्मी को महसूस करना चाहती थी लेकिन फिर भी अपने बेटे के सामने शर्म आ रहे थे और उसके इसी शर्म को दूर करने के लिए राजू बार-बार अपने लंड को अपनी मां के गुलाबी होठों पर रख दे रहा था,,,, उसकी हरकत को देखकर मधु बोली,,)

तू करना क्या चाहता है,,?

मैं चाहता हूं कि तुम इसे अपने मुंह में लेकर प्यार करो जी भर कर प्यार करो तुम्हारे प्यार का प्यासा है यह,,,

नहीं राजू यह गलत है हम दोनों के बीच मां-बेटे का पवित्र रिश्ता है,,,

वह तो समाज के लिए ही लेकिन इस समय इस खंडार में हम दोनों मां-बेटे नहीं बल्कि एक औरत और मर्द हैं जिसकी अपनी अपनी जरूरत है जैसा कि लाला और उसकी बहन के पीछे से अमर उसकी मां के बीच है उसी तरह से हम दोनों को भी इसी चीज की जरूरत है इस समय देखो मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,

राजू,,,(अपने बेटे की बात सुनकर मधु अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को अपनी मुट्ठी में दबोच ली अपने बेटे के लंड की गर्माहट से,,, मधु की मर्यादा की दीवार बहने लगी उसके संस्कार हवा में वास्प बनकर उड़ने लगे उसका धैर्य जवाब देने लगा,,,, अपने बेटे को वह पूरी तरह से अपनी जवानी का मजा चखाना चाहती थी वह अपने बेटे की हरकत और उसके इरादे के आगे घुटने टेक चुकी थी,,, अपने बेटे के लंड को पकड़ कर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसकी गर्माहट उसकी मजबूती को वह पल भर में महसूस कर चुकी थी इसलिए अब वह भी पीछे हटना नहीं चाहती थी और तुरंत,,, अपने पैसे होठों को अपने बेटे के लंड पर रख दी आज उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपने होठों पर रखते ही ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अमृतकलश को अपने होठों से लगा ली हो उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दुनिया का सारा सुख उसे खुद अपने होठों से लगाने के लिए तड़प रहा हो वह देखते ही देखते अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और अपने बेटे के लंड के सुपाडे को अपनी मुंह के अंदर प्रवेश कराने की इजाजत दे दी,,,, राजू इस समय अपने आप को दुनिया का सबसे खुशनसीब बेटा समझ रहा था क्योंकि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत के मुंह में उसका लंड था धीरे-धीरे मधु अपने बेटे के लंड को अंदर की तरफ लेकर उसे चूसना शुरू कर दी थी लंड को कैसे चोदा जाता है वह अच्छी तरह से जानती थी लेकिन आज उसके मुंह में उसके पति का पतला और कमजोर नहीं बल्कि उसके बेटे का दमदार मर्दाना ताकत से भरा हुआ मोटा और लंबा लंड था जिसे मुंह में भरते ही उसका मुंह पूरी तरह से खुल चुका था उसके लाल-लाल होठों का छल्ला उसके बेटे के लंड की गोलाई के आगे छोटा पड़ रहा था जैसे तैसे करके वह धीरे-धीरे अपनी बेटी के लंड को अपने गले तक लेकर चूसना शुरू कर दी थी राजू पूरी तरह से मस्त होकर घुटनों के बल ही बैठे हुए अपने आंखों को बंद की भी धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था इस समय मां बेटे की कामलीला को देखने वाला वहां पर कोई भी नहीं था सिर्फ उसके बेल के सिवा,,,, वह भी काफी देर से अपनी मालकिन और उसके बेटे की कामलीला को अपनी आंखों से देख कर ना जाने अपने मन में क्या सोच रहा होगा,,,।
 
असली तूफानी बारिश का मजा मधु को आज पहली बार मिल रहा था और राजू भी इससे पहली बार अवगत हो रहा था राजू धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह को चोद रहा था जलती हुई आप की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था उसकी मां का नंगा बदन संगमरमर की तरह चमक रहा था अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी में राजू पूरी तरह से हो चुका था वह एक तरफ लंड चुदाई का मजा लूट रहा था तो दूसरी तरफ अपने दोनों हाथों से अपनी मां की पपाया जैसी चूची को जोर जोर से दबा रहा था जिससे मधु भी अंदर ही अंदर से लौट रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में देखना चाहती थी,,,,।



बाहर बारिश अपना चोर दिखा रही थी और अंदर राजू अपना जोर दिखा रहा था दोनों मां बेटों का जोश बढ़ता चला जा रहा था दोनों को विश खंडहर में स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे यह खंडहर उन्हें दोनों के लिए बना हो,,,, दोनों शायद अपने घर में इस तरह का सुख प्राप्त नहीं कर सकते थे जितना आनंद उन्हें इस तूफानी बारिश में इस डरावने खंडहर में मिल रहा था,,,, मधु अपने मन में यही सोच रही थी कि बाप रे उसके बेटे का लंड कितना मोटा और लंबा है अगर उसकी बुर में जाएगा तो उसकी बुर फाड़ देगा,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से मजा लेता रहा और बार-बार अपनी हथेली को नीचे की तरफ झुक कर अपनी मां की बुर पर रखकर उसे जोर से मसल दे रहा था जिससे मधु खुद अपने बेटे के लंड को लेने के लिए तड़प‌ उठ रही थी,,, राजू समझ गया था कि अब उसकी मां को लंड की जरूरत है इसलिए वह हीरे से अपने लंड को अपनी मां के मुंह से बाहर निकाल लिया,,,, मधु की पूरी तरह से अपनी बेटी को आगे बढ़ने के लिए मौन स्वीकृति दे दी थी,,,।

राजू गहरी गहरी सांस ले रहा था मधु पीठ के बल लेटकर अपनी बेटी के लंड को देख रही थी जो कि उसके थूक और लार से पूरी तरह से सना हुआ था,, जलती हुई आग की रोशनी में उसके बेटे का लंड एकदम चमक रहा था जिसकी चमक में वह पूरी तरह से अपनी जवानी अपने बेटे के कदमों में निछावर करने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, राजू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे हिलाते हुए बोला,,।

बोलो तो मां मै ईसे तुम्हारी बुर में डाल दुंं,,

(अपने बेटे की बात सुनकर मुझे कुछ बोले नहीं बस शर्मा कर अपनी पलके झुका कर दूसरी तरफ मुंह फेर ली,,, यह मधु की तरफ से मौन स्वीकृति थी लेकिन राजू अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था इसलिए वह बोला,,,)



ऐसे नहीं मां तुम अपने मुंह से बोलो तभी मैं आगे बढ़ुंगा,, मैं तुम्हारी बुर में लंड डाल दूं,,,

इसमें पूछने वाली कौन सी बात है तु मुझे इतना तड़पा रहा है,,, अब जब तक तू अपने लंड को मेरी बुर में डालेगा नहीं तब तक मुझे भी चैन नहीं मिलेगा,,,

ओहहहह मां यह हुई ना बात इसे कहते हैं औरत वाली बात अब देखना मैं तुम्हारी कैसे चुदाई करता हूं पिताजी को तो तुम भूल ही जाओगी मेरा लंड एक बार अपनी बुर में लोगी तुम मस्त हो जाओगी तुम्हें ऐसा मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आगे और मधु खुद अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा फैला दी राजू अपने दोनों हाथों को अपनी मां की कमर के नीचे से ले गया और उसकी कमर थाम कर उसे अपनी जांगू पर चढ़ा लिया उसकी यादें गाना राजू की जांघों पर टिकी हुई थी राजू पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में समाने के लिए मधु की बुर पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी जिससे मोटा लंड अंदर जाने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आती और मधु की यह देखना चाहती थी कितना मोटा लंड उसकी बुर में जाने के बाद कैसा दिखता है इसलिए वह अपने हाथ की कोनी का सहारा लेकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर कर चुकी थी राजू बेशर्मी की हद पार करते हुए अपने मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर लंड के हथौड़े को अपनी मां की गुलाबी बुर पर पटकने लगा मानो कि जैसे लोहे की पाटी को अपने हथौड़े से पीट रहा है,,, लेकिन अपने बेटे की इस हरकत से मधु पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी एक बार तो वहां बुर में लंड डालने से पहले अपने लंड को उसके नीचे ले जड़ से पकड़ कर उसे पूरा का पूरा बुर के ऊपर रखकर लंबाई नापने लगा जो कि पेट तक आ रहा था यह देखकर मधु थोड़ा सा घबरा गई और राजू चुटकी लेता हुआ बोला,,।

देखना मैं मैं तुम्हारी बुर से डालूंगा और गांड से निकाल लूंगा,,,

चल देखती हूं तेरी मर्दानगी,,,

यह बात है तो यह लो,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू ढेर सारा थूक अपने मुंह में लिए हुए ही उसे अपनी मां की बुर पर गिराने लगा जिससे उसकी बुर और ज्यादा गिरी हो गई और राजू अपने मोटे लंड के सुपाडे को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रख कर उसे धीरे धीरे अंदर की तरफ सरकारने लगा,,, मधु को एकदम साफ नजर आ रहा था जलती हुई लकड़ी की रोशनी में मधु अपने बेटे के लंड को जो की बहुत मोटा था अपनी बुर के अंदर घुसता हुआ देख रही थी उसे धीरे-धीरे दर्द महसूस हो रहा था क्योंकि इतना मोटा लंड उसने आज तक अपनी बुर में नहीं ली थी इसलिए उसे थोड़ा दिक्कत आ रहा था लेकिन राजू पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था वह जानता था कि औरत को कैसे काबू में किया जाता है,,, राजू के लंड का सुपाड़ा अभी आधा ही घुसा था और मधु को थोड़ा दर्द महसूस होने लगा जो कि उसके चेहरे से लग रहा था इसलिए राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची को पकड़ लिया था और हल्के से अपनी कमर को आगे खेल दिया जिससे, भक से लंड का सुपाड़ा बुर की गुलाबी पत्तियाो को चीरता हुआ अंदर सरक गया,,,, मधु की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी राजू के लंड का मोटा से बड़ा बुर के अंदर घुस जाने के बाद राजू के लिए आगे का कार्य एकदम आसान हो चुका था वह देखते ही देखते अपने लंड को और अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया लंड की मोटाई इतनी ज्यादा थी कि मधु को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ एकदम साफ महसूस हो रही थी जिससे उसका मजा दुगना होता जा रहा था हालांकि थोड़ा बहुत दर्द का भी उसे महसूस हो रहा था लेकिन इस दर्द के आगे जो सुख मिल रहा था उसके आगे दर्द कोई मायने नहीं रख रहा था,,,,, राजू का लंड आधा उसकी मां की बुर में घुस चुका था और राजू अपने हाथ की हरकत को आगे बढ़ाते हुए कभी चूची को पकड़ ले रहा था तो कभी कमर को कस के पकड़ ले रहा था वह अपनी मां के नंगे चिकने पेट पर अपनी हथेली को सहला रहा था यह मधु को सांत्वना भी दे रहा था कि थोड़ी देर में मजा आने वाला है और देखते ही देखते राजू का पूरा लंड मधु की आंखों के सामने उसकी बुर के अंदर समा गया मधु पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी कितना मोटा लंबा लंड जिसे वह देखकर कुछ पल के लिए घबरा गई थी कि वह अंदर कैसे ले पाएगी और वह देखते ही देखते उसकी बुर की गहराई में खो चुका था इससे मधु को खुशी भी हो रही थी और जिस तरह का सुख से प्राप्त हो रहा था इस तरह का सुख उसने अपने साथी के संपूर्ण जीवन में कभी प्राप्त नहीं कर पाई थी,,, पूरे लंड को अपनी मां की गहराई में डाल देने के बाद राजू मुस्कुराता हुआ अपनी मां की तरफ देखा और बोला,,,।

Raju or Madhu



देखा मां कितने आराम से तुमने मेरे लंड को अपने बुर में ले ली,,,,

डाल तो दिया है राजू अब कुछ कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

(राजू अपनी मां के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था उसकी मां सीधे-सीधे उसे चोदने के लिए बोल रही थी इसलिए राजू एक पल की भी देरी किए बिना अपनी मां से बोला)

तुम बेफिक्र हो जाओ मां आज तुम्हें ऐसा सुख दूंगा ऐसी चुदाई करूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,

कुछ भी करना बेटा लेकिन मेरी बुर मत फाड़ देना वरना घर जाकर तेरे पिताजी को कैसे अपना बुर दिखाऊंगी मुंह देखकर तो ऐसे भी उन्हें पता नहीं चलेगा लेकिन वह देखकर तो पता ही चल जाएगा कि रात भर किसी से चुदवा कर आई है,,,।



तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो ऐसा कुछ भी नहीं होगा ,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और अपने लंड को अंदर बाहर करके अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया शुरू शुरू में मोटे लंड की वजह से अंदर बाहर होने में थोड़ी बहुत दिक्कत पेश आ रही थी लेकिन उत्तेजना के मारे मधु की बुर अंदर से पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से अंदर चिपचिपाहट सी हो गई थी और थोड़ी ही देर में राजू का लंड बड़े आराम से सटासट बुर के अंदर बाहर हो रहा था मधु पूरी तरह से मस्त हुए जा रहे थे इतना मोटा लंड जिंदगी में पहली बार वह अपनी बुर के अंदर ले रही थी इसलिए चुदाई का उसे परम आनंद प्राप्त हो रहा,,, राजू का सपना था अपनी मां को चोदना गांव भर की सारी औरतों को वह रोज चोदता रहा था लेकिन उसका सबसे बड़ा ख्वाब यही था कि वह कब अपनी मां की बुर में लंड डाले क्योंकि उसकी नजर में उसकी मां दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत ही और ऐसा था कि गांव भर में उसकी मां जैसी खूबसूरत औरत दूसरी और कोई नहीं थी उसके बदन की बनावट अभी भी जवान लड़कियों की तरह ही थी बस थोड़ा सा बदन भर गया था जिसकी वजह से वह और ज्यादा कामुक लगने लगी थी,, दो दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी चुदवाने पर ऐसा सुख प्राप्त करती थी और देती थी जिसे महसूस करके राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था ऐसा सुख तो लाला की बहन को चोदने में भी उसे नहीं आया था जैसा सुख उसे अपनी मां को चोदने में आ रहा था,,,।

तूफानी बारिश में मधु की सिसकारियां पूरे खंडहर में गूंज रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी इस तरह से खुलकर चुदाई का मजा उसने आज तक नहीं रही थी भले ही रोज वह अपने पति से चुदवाती थी लेकिन ऐसा सुख उसे आज तक प्राप्त नहीं हुआ था राजू से पूरी तरह से मस्त कर दे रहा था कभी चूचियों को दबाता तो कभी कमर को लपक लेता तो कभी नीचे की तरफ झुक कर उसके होठों को चूसने लगता यह सब बेहद अद्भुत था मधु जैसी संस्कारी औरत के लिए तो यह सब अविस्मरणीय था वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी मस्ती के सागर में वह पूरी तरह से डूब ना शुरू कर दी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह की भी जुदाई होती है इस तरह का भी आनंद औरत को प्राप्त होता है लेकिन उसे इस बात का एहसास हो गया था कि मर्द दमदार होना चाहिए जो की औरत को पूरी तरह से नहीं छोड़ कर रख दे और वही कार्य समय उसका बेटा राजू कर रहा था वह पूरी तरह से अपनी मां को अपनी आगोश में लिए हुए था और अपने तेज धक्कों से उसे तृप्त कर रहा था मधु बार-बार अपने बेटे के लंड की ठोकर को अपने बच्चेदानी पर महसूस करके धन्य हो जा रही थी आज तक उसके बच्चेदानी तक उसके पति का लंड नहीं पहुंच पाया था लेकिन उसके बेटे के लंड का हर एक ठोकर उसे अपने बच्चेदानी पर महसूस हो रहा था जिससे उसका मजा दोगुना होता जा रहा था,,,,।

ओहहहह मां तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा चोदने में इतना मजा आता है मैंने आज तक कभी सपने में भी नहीं सोचा था लेकिन आज जो सुख मुझे मिल रहा है वैसे जिंदगी में नहीं भूल पाऊंगा मेरी जिंदगी की है रात सबसे हसीन रात है या यूं समझ लो कि आज की रात मेरी सुहागरात है,,,।

(अपने बेटे के मुंह से सुहागरात वाली बात सुनते ही मधु एकदम से शर्मा कर लाल हो गई और पानी छोड़ने लगी यह देखकर राजू अपनी मां से बोला)

क्यों मैं शरमा गई क्या,,,?

तो और क्या तुझे पता है सुहागरात किसके साथ मनाई जाती है,,,

मुझे पता है अपनी पत्नी के साथ है जिसको रात भर चोदते हैं और आज की रात में तुम्हें चोद रहा हूं तो एक तरह से तुम मेरी बीवी हुई,,,

धत् पागल इस तरह की बातें कर रहा है मैं तेरे पिताजी की हूं समझा,,,

मुझे पता है,,(जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए) लेकिन आज तुम्हारी बुर में मेरा लंड गया है तुम्हें जो सुख में दे रहा हूं इस तरह से पिताजी ने भी कभी नहीं दिया होगा इसलिए अब तुम पर सबसे पहला हक मेरा है,,,.

(कोई और समय होता तो शायद अपने बेटे की इस बात पर वह उसके गाल पर थप्पड़ लगा दी होती लेकिन मौका और दस्तूर दोनों राजू के साथ था और मधु के साथ भी इसलिए राजू कि इस तरह की गंदी बातें भी मधु को अच्छी लग रही थी वह और कस के अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाकर अपने बेटे को चोदने के लिए मजबूर कर दी थी राजू पागलों की तरह अपनी मां को चोद रहा था उसकी बुर की चुदाई करके उसे तहस-नहस कर दे रहा था,,,, फुचच फुचच की आवाज लगातार मधु की बुर से आ रही थी और जांघ से जांघ टकराने से एक मधुर आवाज पैदा हो रही थी,, जो की दोनों की मदहोशी बढा रहा था,,, राजू अपने लंड को अपनी मां की बुर में पेलता हुआ बोला,,,।

सच-सच बताना मत मेरे लंड से तुम्हें ज्यादा मजा मिल रहा है ना,,,।

हारे बहुत मजा आ रहा है,,,

तुम्हारी बुर के अंदर पिताजी के लंड से ज्यादा रगड़ नहीं मिल रही हो कि कितना रगड़ मेरे लंड से मिल रही है,,,, है ना,,,,,

हा रे तु मुझे रगड़ रगड़ कर चोद रहा है,,,, मैं आज मान गई कि मैंने एक मर्द को जन्म दिया है,,,

अब तो तुम्हें डर नहीं लग रहा है ना इस खंडहर में,,,

सच कहूं तो आप तो मुझे बहुत मजा आ रहा है इस खंडरर में मैं कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से किसी जंगल में खंडहर में रात बितानी पड़ेगी,,,

यह जान लो आज की रात हम दोनों की सुहागरात है और अब तो मैं रोज तुम्हारी जुदाई करूंगा मौका मिलते ही,,

अब तो मैं खुद तेरे बिना नहीं रह पाऊंगी लेकिन यह बात किसी को पता नहीं चलना चाहिए,,,

इस बात की किसी को कानों कान भनक तक नहीं पड़ेगी,,,,

(मधु अपने बेटे की हरकत और उसकी संगत में पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी एक रंडी की तरह सवाल जवाब करते हुए अपने बेटे से चुदाई का मजा ले रही थी इस तरह का सुख उसने आज तक नहीं प्राप्त की थी जो सुख उसे उसका बेटा दे रहा था अपने बेटे के लंड की मोटाई और लंबाई से वह पूरी तरह से भाव विभोर हो चुकी थी अपने बेटे का साथ देते हुए वह खुद अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल उछाल कर अपनी बेटी के लंड को अपनी बुर में ले रही थी,,,,, तूफानी बारिश और तेज हवाओं के स्वर में मधु की कामुकता भरी मादकता भरी गरमा-गरम सिसकारी की आवाज खंडहर में ही दबकर रह जा रही थी। राजू के हर एक धक्के के साथ मधु खंडार के जमीन पर आगे की तरफ सरक जा रही थी वह तो राजू उसकी कमर को कस के थामें हुए था,,,, राजू का हर एक जबरदस्त प्रहार मधु को अंदर तक सिहरन भर दे रहा था उसकी हर एक धक्के पर उसकी गोल-गोल खरबूजे जैसी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छतियो पर लहराने लग जा रही थी,,,। देखते ही देखते मधु का बदन अकड़ने लगा राजू समझ गया कि उसकी मां का पानी निकलने वाला है और वह भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुका था इसलिए नीचे की तरफ झुक कर अपनी मां को अपनी बाहों में कस कर उसकी चूची को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया और अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा शुरू कर दिया लगभग 20-25 धक्के के बाद दोनों की सांसें एकदम से तेज चलने लगी और दोनों एक दूसरे की बाहों में एकदम से समा गए और देखते ही देखते दोनों झड़ना शुरू कर दिए,,,
 
अद्भुत अविस्मरणीय अकल्पनीय अतुलनीय संभोग की पराकाष्ठा को प्राप्त करके मधुर गहरी गहरी सांस ले रही थी इस अद्भुत सुख से वह पूरी तरह से भाव विभोर हो चुकी थी,,, मधु ने कभी भी इस तरह के संभोग की कल्पना भी नहीं की थी राजू उसके ऊपर पूरी तरह से डर चुका था और गहरी गहरी सांस लेता हुआ हांफ रहा था,,,, राजू का लंड अभी भी उसकी मां की बुर की गहराई में समाया हुआ था,,,, मधु की गहरी सांसे और उसका लाल-लाल तम तमाता हुआ चेहरा साफ बयां कर रहा था कि वह संपूर्ण रूप से तृप्ति को महसूस कर पाई थी,,, चुदाई के असली सुख से मधु आज जाकर वाकिफ हुई थी,,,,, मधु अपनी मां के नंगे जिस्म पर लेटा हुआ था उसकी बड़ी बड़ी चूचीयो पर सर टिकाएं गहरी गहरी सांस ले रहा था ,,,,,,,। मधु अपने बेटे की नंगी पीठ को सहला रही थी,,,, ,,, बाहर अभी भी बड़े जोरों की बारिश हो रही थी,,,,,, बाहर का तूफान अभी भी जारी था लेकिन अंदर का तूफान कुछ देर के लिए शांत हो गया था,,,, खंडहर के अंदर अब किसी भी प्रकार की मादकता और मदहोशी भरी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी बस केवल तेज हवाओ और तेज बारिश का शोर सुनाई दे रहा था,,,, बेल के गले में बंधी घंटी बार-बार बज‌ उठती थी।

मधु लव लगाकर अपना पानी छोड़ी थी और राजू भी अपनी गर्म लावा से अपनी मां की बुर को पूरी तरह से भर दिया था और धीरे-धीरे वह बुर से बाहर भी निकल रहा था,,,, झड़ने के बावजूद भी राजू का लंड पहले ही की तरह एकदम टनटनाकर खड़ा था,,,। उसकी मां अभी भी हैरान थी कि पानी निकल जाने के बाद भी उसके बेटे का लंड पूरी तरह से खड़ा था और उसकी बुर के अंदर अभी भी अपनी मोटाई और लंबाई के साथ-साथ रगड़ महसूस करवा रहा था,,,, जो कि रह-रहकर अभी भी झटके खा रहा था,,,,,,।

धीरे-धीरे आधी रात समय हो चुका था ऐसे में राजू अपनी मां की बुर में लंड डाले उसके ऊपर लेटा हुआ था और उसकी मां अपने बेटे की मेहनत की सराहना के रूप में उसकी पीठ थपथपा रही थी क्योंकि मधु के लिए तो उसके बेटे द्वारा किया गया यह कार्य बेहद सराहनीय था क्योंकि आज तक उसने चुदाई का असली सुख महसूस नहीं कर पाई थी जो कि आज उसके बेटे ने तूफानी रात में इस खंडहर में अद्भुत चुदाई का प्रदर्शन करते हुए उसद पूरी तरह से तृप्त कर चुका था,,,,। धीरे-धीरे दोनों अपनी सांसो को दुरुस्त कर रहे थे राजू आज बहुत खुश नजर आ रहा था ऐसा लग रहा था कि वह पूरी दुनिया का सबसे खुशनसीब बेटा है जो इतनी खूबसूरत औरत की बुर में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,, जिसके बारे में सोच सोच कर और उत्तेजित होता था और अपने लंड को हिलाता था आज उसी को अपनी अद्भुत मर्दाना ताकत के साथ चुदाई करके तृप्त कर चुका था और वह खुद भी तृप्त हो चुका था लेकिन,,, राजू की प्यास इतनी जल्दी बुझने वाली नहीं थी,,,,, वह अपनी सांसों को दुरुस्त करके अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाले हुए ही अपनी मां की आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,।

कैसा लगा मा ‌सच सच बताना,,,,,,

(राजू के कहे गए एक एक शब्द में शरारत भरी हुई थी वह अपनी मां के मन की बात को जानना चाहता था लेकिन मालूम थी कि अपने बेटे के सवाल पर एकदम से शरमा गई और अपनी नजरों को नीचे झुका ली तो राजू खुद अपनी मां के प्यासे लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया और उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने लगा,,,, मधु शर्मा कर अपने चेहरे को इधर-उधर कर रही थी लेकिन राजू कहां मानने वाला था वह तुरंत दोनों हाथों से अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को किसी फूल की भांति अपने दोनों हथेली में भर लिया और उसके लाल-लाल होठों का फिर से रसपान करना शुरू कर दिया राजू का अपनी मां के होठों पर यह पहला चुंबन था जो कि बेहद गहरा था पल भर में ही मधु पूरी तरह से मस्त होने लगी राजू अपनी मां के लाल लाल होठों का रस पी रहा था मानो कि जैसे उसमें से मध झड़ रहा हो,,,, मधु के लाल-लाल होठों का रस किसी मदिरा से कम नहीं था पल भर में ही उसका नशा राजू के तन बदन में अपना असर दिखाने लगा आंखो में खुमारी छाने लगी एक बार फिर से मधु को अपने बेटे का लंड अपनी बुर की गहराई के अंदर ही मोटा होता हुआ महसूस होने लगा,,,, मधु के लिए यह पल यह एहसास बिल्कुल नया था उसने आज तक ऐसा महसूस कभी नहीं की थी अपने पति से जब भी चुदवाती थी उसका पानी निकलने के बाद ही वह दूसरी तरफ करवट लेकर सो जाता था लेकिन राजू था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था मधु को लग रहा था एक बार फिर से उसका बेटा तैयार हो रहा है इस बात से मधु पूरी तरह से हैरान थी,,, क्योंकि उसे इस बात का एहसास था कि जब से वह खंडहर में आई थी तब से उसके बेटे का लंड टनटनाकर खड़ा हो चुका था और अभी भी चुदाई करने के बावजूद भी फिर से तैयार हो रहा था इतनी मर्दानगी उसने आज तक अपने पति में कभी नहीं देखी थी इसलिए वह पूरी तरह से आश्चर्यचकित ही थी और इस बात का उसे गर्व भी था कि उसने एक मर्द को जन्म दिया था,,,, राजू पूरी तरह से अपनी मां के लाल लाल होठों का रस पीने में मजबूर था और अपने दोनों हाथों से अपनी मां के खरबूजे जैसी चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया था यह सब मधु को फिर से उत्तेजित कर रहा था और राजू खुद उत्तेजित हो चुका था लेकिन मधु अभी तैयार नहीं थी वह थक चुकी थी और जिस तरह की चुदाई उसके बेटे ने अपने मोटे हथौड़े जैसे लंड से किया था उसकी थाप से उसकी पुर दर्द करने लगी थी लेकिन राजू की हरकत ने एक बार फिर से उसके तन बदन में मदहोशी भर दिया था अपनी नजरों को उसी अवस्था में खंडहर के बाहर की तरफ घुमाई तो अभी भी बाहर तेज बारिश हो रही थी और मन ही मन बोलने लगी कि यह बारिश कब बंद होगी ऐसी बारिश उसने आज तक नहीं देखी थी,,,, बादलों की गड़गड़ाहट तेज हवाओं का झोंका और शोर करती हुई बारिश की बूंदे सब कुछ भयानक सा माहौल पैदा कर रहे थे लेकिन इस खंडहर में उसके बेटे की वजह से जैसे कि बहार आ गई थी जंगल में पुरानी खंडहर में चुदवाने का मधु का यह पहला अवसर था जिसमें वह पूरी तरह से अपने आप को तृप्त कर चुकी थी,,,, मधु जानती थी कि उसका बेटा फिर से उसे चोदने के लिए अपने आपको तैयार कर चुका था लेकिन वह अभी इसके लिए तैयार नहीं थी वह काफी थक चुकी थी इसीलिए राजू को अपने ऊपर से हटाते हुए बोली,,,,।

हट मेरे ऊपर से दर्द कर रहा है,,,,(राजू चाहता तो अपनी मां के ऊपर से हटता नहीं और ना ही मधु उसे हटा सकती थी लेकिन फिर भी दर्द का नाम सुनकर राजू अपनी मां के ऊपर से हटने लगा और अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकालने लगा जैसे ही लंड बुर से बाहर,, निकला,,उसम से लंड को निकलते समय पुच्च की आवाज आ गई ,,, जिसको सुनकर मधु एकदम से शर्मा गई,,, और उठ कर बैठ गई राजू भी आराम से उठ कर अपनी मां की तरह बैठ गया था,,,, धीरे-धीरे लकड़ी में आग कम हो रही थी लेकिन उसकी तपन अभी भी बरकरार थी लेकिन उससे ज्यादा तपन राजू को अपनी मां के बदन से प्राप्त हुआ था वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुका था आखिरकार मेहनत जो इतना किया था,,,, मधु अपनी बुर की तरफ देखते हुए राजू से बोली,,,।

बाप रे पूरी कमर दर्द करने लगी,,,,(दोनों हाथों से अपनी कमर को पकड़ते हुए बोली तो राजू बोला,,,)

इतनी तेज धक्के जो लगाया हूं मैं यकीन से कह सकता हूं कि पिताजी इस तरह से तेज धक्के कभी नहीं लगाते होंगे,,,

(अपने बेटे की इस बात पर मधु फिर से शर्मा गई और राजू से बोली)

अच्छा जैसे तुझे मालूम है कि तेरे पिताजी कैसे धक्के लगाते हैं देखता था क्या,,,?

(राजू का मन तो कर रहा था कि बता दे कि अपने कमरे के छोटे से छेद से हर रोज तुम्हारी चुदाई देखता था लेकिन फिर भी वह इस बात को बताना ठीक नहीं समझा और बोला)

देखा तो नहीं हूं लेकिन पिताजी के शरीर को देखकर मुझे पता तो चलता है कि कितने तेज धक्के लगा सकते हैं पिताजी पास में तुम्हारी चुदाई देख पाता तो मजा आ जाता,,,,

(मधु कुछ बोली नहीं बस खामोश रहे और बाहर बारिश को देखती रही जो की पूरी तरह से रात को अपनी आगोश में लेकर जी भर के बरस रहा था जैसा कि अभी-अभी उसके बेटे ने बरसा था,,,, अपनी मां की नंगी पीठ पर हाथ रखकर उसकी चिकनी पीठ को सहला ते हुए राजू बोला,,,)

एक बात तो है मां दो दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है ऐसा लगता है कोई जवान औरत की बुर हो और किसी का लंड बुर में ली ना हो,,,,,,

(अपने जवान बेटे की मुंह से अपनी कसी हुई बुर की तारीफ सुनकर मधुर एकदम से गदगद हो गई और शर्मा कर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

जालिम है तू मार-मार के मेरी बुर को तहस-नहस कर दिया और बोलता है कि कसी हुई है,,,

दिखाओ तो कहां तहस-नहस कर दिया,,,(तुरंत अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़कर खोलते हुए) क्या पागलों जैसी बात करती हो मां अभी भी कितनी खूबसूरत लग रही है,,,(अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे रगडते हुए,,,) अभी तो रात भर चुदवाओगी तो भी तुम्हारी बुर‌ ज्यों की त्यों बरकरार रहेगी,,,,(मधु अपने बेटे की हिम्मत भरी बातें और उसकी हथेली की रगड़ को अपनी बुर के उपर महसूस करके एकदम मस्त हो गई और अपने बेटे का हाथ पकड़कर हटाते हुए बोली)

धत्,,,,, बेशर्म हो गया है तू,,, और रात भर चोदेगा कौन किस में इतना दम है,,,,!

अरे तुम्हें रात भर चोदने वाला तुम्हारे सामने ही तो बेटा है देखो, (अपने खड़े लंड को पकड़कर हीलाते हुए) कैसे खड़ा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए अभी टांग फैला दो तो अभी डाल दुं,,,

हां तू तो डाल ही देगा और तुझे काम भी क्या है सिर्फ डालना और निकालना,,,

अरे मा तुम तो ऐसी बातें कर रही हो कि तुम्हें कुछ मजा नहीं मिलता,,, तुम्हारी बुर को चाट चाट कर कितना पानी निकाला हूं उसमें कितनी मेहनत लगती है पता है ना मुझे नहीं लगता कि पिताजी इस तरह से तुम्हारी बुर को चाटते होंगे,,,

चल अब रहने दे तू अपने पिताजी की बातों को,,,,

क्यों,,,? सच तो कह रहा हूं अगर पहले भी पिताजी से इस तरह से अपनी बुर चुसवाती तो आज ईतना पानी ना फेंकती,,,,

(मधु अपने बेटे की इस तरह की बातें से एकदम मदहोश हुए जा रही थी उसकी बातों के एक-एक शब्द उसकी कानों के साथ-साथ उसकी बुर में मिश्री घोल रहे थे,,,, उसे अपने बेटे की इस तरह की बातें बहुत अच्छी लग रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे का ध्यान दूसरी तरफ करते हुए बोली,,,)

वह सब रहने दे पहले यह देख आग बुझाने वाली है इसमें लकड़ी डाल,,,,,,

मां इस बुझी हुई आग में लकड़ी डाल दूंगा तो यह फिर से जल उठेगी लेकिन तुम्हारी बुर में अगर लंड नहीं डालूंगा तो वह जल्दी ही रहेगी वह ‌बुझेगी नहीं,,,,

(मधु अपने बेटे के लंड की तरफ देखकर और उसकी बातों को सुनकर एकदम से शर्मा गई और उसे थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

चल अब रहने दे कह रही हु ना उसमें लकड़ी डाल,,,,

(राजू समझ गया था कि अब आग में लकड़ी डाले बिना काम चलने वाला नहीं है क्योंकि वाकई में लकड़ी की आग शांत हो रही थी और खंडहर में एक बार फिर से अंधेरा छाने लगा था इसलिए वह उठा और बोला,,,)

जैसी आपकी आज्ञा महारानी जी,,,,(अपने लिए महारानी की उपमा सुनकर मधु खिलखिला कर हंस दी और राजू फिर से सूखी हुई लकड़ियों को खंडार में से कट्ठा करके उसमें डालकर जलाने लगा और थोड़ी देर में फिर से पूरे खंडहर में जलती हुई आग का उजाला फैल गया मधु को जोड़ो की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह अपनी जगह से खड़ी हुई तो राजू बोला,,,)

अब क्या हुआ,,,

तु यही बैठ में आती हूं,,,

अरे नई-नई रुको मैं भी चलता हूं मैं जानता हूं तुम मुतने के लिए जा रही हो,, मुझे भी जोरों की पेशाब लगी हुई है ,,(और इतना कहकर राजू अपनी जगह से खड़ा हो गया और मधु एक बार फिर से शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसका बेटा एकदम खुले शब्दों में उसे मुतने के लिए बोल रहा था,,, मधु कुछ बोल पाती से पहले ही राजू उसके पास जाकर उसका हाथ पकड़ लिया था और उसे अपने साथ लेकर चलने लगा था मधु का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ज्यादा देर तक वो अपने पेशाब को रोक भी नहीं सकती थी,,, राजू का लंड एकदम हवा में लहरा रहा था जिसे देखकर मधु की कामना एक बार फिर से जागृत होने लगी थी,,,,,,, गणगौर बारिश के साथ घनघोर काली अंधेरे में भी जलती हुई आग की रोशनी में मधु अपने बेटे के लंड को एक बार फिर से ले रहा था वह देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी,,, उसकी जवानी अपने बेटे के सामने घुटने टेक रही थी मधु हैरान थी अपने बेटे की मर्दाना ताकत को देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अभी भी उसके बेटे का लंड टन टना कर कैसे खड़ा है,,,,, मधु मंत्रमुग्ध के साथ-साथ आश्चर्यचकित हो गई थी वह राजू को कुछ भी नहीं बोल पा रही थी और राजू उसका हाथ पकड़कर उसी जगह पर ले जा रहा था जहां पर कुछ देर पहले वह बैठकर मुत रही थी देखते ही देखते राजू उसी जगह पर पहुंच गया और अपनी मां से बोला,,,।

अब मुतो,,,,, मैंने आज तक किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा,,,।

(इतना सुनते ही मधु को बाजार वाला दृश्य में जरा आने लगा जब वह इसी तरह से चार समोसे की दुकान के पीछे जाकर झाड़ियों में बैठकर पेशाब कर रही थी वह ठीक उसके सामने उसका बेटा पेशाब कर रहा था जिस तरह से वह कह रहा था मधु को यकीन हो चला था कि उसके बेटे को उसके वहां होने की बिल्कुल भी आशंका नहीं थी लेकिन फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर वह हैरान हो गई थी शर्म से पानी पानी हो रही थी आखिरकार कैसे अपनी बेटी के सामने बैठकर पेशाब करेगी यही सोचकर वह हैरान हो रही थी,,,, इसलिए राजू को समझाते हुए बोली,,,।)

क्या बेटा तू पागलों जैसी बात कर रहा है मैं तेरे सामने बैठकर कैसे पेशाब करूंगी,,,

अरे ठीक वैसे ही जैसे कुछ देर पहले कर रही थी,,,

तू देख रहा था क्या,,,,

अगर देख नहीं रहा होता तो पानी में आ रहा सांप कैसे नजर आता,,,

(इतना सुनते ही मधु का चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन फिर भी वह बोली)

नहीं-नहीं राजू तेरे सामने मुझे शर्म आएगी,,,,,

क्या बात तुम भी,,,, अभी भी तुम्हें शर्म आएगी मेरे मोटे लंबे लंड को अपने बुर में लेकर मस्त हो गई और कहती हो कि शर्म आएगी,,, मैं नंगा खड़ा हूं तुम नंगी खड़ी हो मेरा लंड तुम साफ देख पा रही हो मैं तुम्हारी बुर देख रहा हूं तुम्हारी चूची तुम्हारी गांड सब कुछ देख रहा हूं और कहती हो शर्म आएगी,,,, मजा आएगा बस एक बार मेरा कहा मान लो,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल जोरों से धड़क रहा था और बार-बार अपने बेटे के लंड की तरफ नजर चली जाने की वजह से उसके बदन में मदहोशी भी छा रही थी,,,,,, वह खुद अपने बेटे की बात मानने के लिए अंदर ही अंदर तैयार हो चुकी थी क्योंकि वह भी इस अनुभव का आनंद लेना चाहती थी,,,, लेकिन फिर भी अपने बेटे को ना नूकुर करते हुए बोली,,,।)

नहीं नहीं बेटा मेरी बात समझने की कोशिश कर आखिरकार मैं तेरी मां हूं और तेरे सामने में कैसे बैठकर मुत सकती हूं,,,,

क्या मां इतना समझाने के बाद भी तुम समझने को तैयार नहीं हो,,,,,, रुको अच्छा मैं ही तुम्हारे सामने मुत कर दिखाता हूं उसके बाद तुम्हें मुतना होगा,,,

(मधु का दिल जोरों से धड़क रहा था उसने इतने करीब से किसी भी इंसान को पेशाब करते हुए नहीं देखी थी हालांकि बाजार में वह अपने बेटे को देखी थी लेकिन उसे अपनी आंखों के सामने पेशाब करते हुए देखने का लुफ्त उठा नहीं पाई थी लेकिन इस पल वह सारी कसर उतार लेना चाहती थी,,,.,, फिर भी अपने बेटे को ऐसा करने से रोकते हुए वह बोली,,,।)

अरे नहीं रहने दे थोड़ा तो शर्म कर,,,,

अगर शर्म करता तो तुम्हारी बुर में लंड डालकर चोदा ना होता तुम्हें इतना मजा ना दिया होता थोड़ा और मजा देना चाहता हूं और लेना चाहता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया और बोला,,,,)

देखो मैं अब कैसे पेशाब करता हूं,,,,।

(अपने बेटे का लंड अपने हाथ में पकड़ते ही मधु की बुर एक बार फिर से पिघलने लगी,, थी,,, अपने बेटे के लंड को एक बार फिर से अपनी हथेली में महसूस करते ही उसकी गर्माहट में वह पूरे अपने वजूद को पिघलता हुआ महसूस कर रही थी और उत्तेजना के मारे अपनी हथेली को कस के दबा ली थी जिसमें उसके बेटे का लैंड और ज्यादा कड़क होने लगा था,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था आसमान में काले बादल अभी भी पूरी तरह से अपना जलवा बिखेर रहे थे तूफानी बारिश लगातार जारी थी हवाओं का तेज झोंका बदन में झनझनाहट पैदा कर दे रहा था दोनों मां-बेटे इस समय खंडार के किनारे एकदम नग्न अवस्था में खड़े होकर आनंद की पराकाष्ठा को पार करने की कोशिश कर रहे थे देखते ही देखते राजू अपनी मां के हाथ में लंड दिया मुतना शुरू कर दिया,,,, जलती हुई आग की लपटे कुछ ज्यादा ही तेज थी इसलिए यहां तक रोशनी आ रही थी जिसमें मधु अपने बेटे के लैंड को और उसमें से निकलती पेशाब की धार को एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में पिघलती जा रही थी उसे सहन नहीं हो रहा था और अनजाने में ही वह अपने बेटे के लंड को मुट्ठीयाना शुरू कर दी थी यह देख कर राजू के तन बदन में आग लगने लगे वह अपनी कमर आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया और उसकी मां अपने बेटे के लंड को मुट्ठीयाना शुरू कर दी,,,, अद्भुत नजारा बनता चला जा रहा था मधु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस कदर अपने बेटे के साथ बेशर्म बन जाएगी पहली बार किसी मर्द के लंड को अपने हाथ में लेकर उसे पेशाब करवा रही थी,,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था और एक हाथ अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी बुर को अपनी हथेली में दबोच लिया था उससे अपनी उत्तेजना काबू में नहीं हो पा रही थी राजू की इस हरकत पर मधु एकदम से सिहर उठी और उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,।

सहहहरह आहहहहहहह राजू,,,,,,ऊममममममम,,,,

(मधु पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी लेकिन अभी तक उसकी पूर्व से पेशाब की धार नहीं फूटी थी,,, इसलिए राजू अपनी उंगली को अपनी मां की गुलाबी पत्तियों के बीच रगड़ रहा था ताकि उसमें से गरमा गरम पेशाब की धार फूट पड़े लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था मधु पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी उसकी आंखें बंद हो गई थी और वह गहरी गहरी सांस ले रही थी राजू से अपनी मां की हालत देखी नहीं गई और वह आप पेशाब कर चुका था इसलिए तुरंत अपनी मां का हाथ अपने लंड पर से हटाकर घुटनों के बल बैठ गया और तुरंत अपने प्यासी होठों को अपनी मां की बुर से लगा कर उसने अपनी जीभ घुसा दिया मधु इस हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए जैसे ही उसे अपने दूर पर अपने बेटे के होंठों का स्पर्श हुआ वह तुरंत एकदम से मचल उठी और उत्तेजना के मारे अपने आप ही उसकी कमर आगे की तरफ उचक गई और राजू तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से दबोच लिया लाख कोशिश करने के बावजूद भी इस हालत में रखो अपने पेशाब की तीव्रता पर काबू नहीं कर पाई और बल बनाकर उसकी बुर से पेशाब की धार फूट पड़ी लेकिन राजू अपना मुंह बिल्कुल भी नहीं हटाया मधु हैरान थी वह मौत रही थी और उसकी बुर से उसका बेटा मुंह लगाए बैठा था,,, एक तरफ मधु को अत्यधिक उत्तेजना और मदहोशी छाई हुई थी और दूसरी तरफ वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि वह अपने बेटे के मुंह में मुत रही थी अपने बेटे का बाल पकड़कर मधु उसे हटाने की लाख कोशिश करती नहीं लेकिन मधुर से ज्यादा ताकत राजू की भुजाओं में थी और वह कसके अपनी मां की गांड को पकड़े हुए था और उसकी बुर से निकल रही पेशाब की धार को अमृत धार समझकर अपने गले के नीचे घटक रहा था,,,,, मधु या देखकर हैरान थी अपने बेटे की आकांक्षा उसकी हरकतें उसे पूरी तरह से प्रभावित कर रही थी इस तरह का सुख आज तक उसके पति ने कभी भी उसे प्रदान नहीं किया था ना ही कभी इस तरह का जिक्र ही किया था जिस तरह की हरकत राजू कर रहा था राजू की हर एक हरकत मधु के लिए मदहोशी का कारण बन रही थी उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी वह पूरी तरह से पागल हो जा रही थी उसके बदन में उत्तेजना की लहर बार-बार उसे झकझोर रही थी ,,,,, मधु का मुंह खुला का खुला रह गया था और वहां नाक से ज्यादा अपने मुंह से सांस ले रही थी उसकी गहरी चलती सांसो के साथ उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी तेज हवाओं का झोंका बारिश की बूंदों को खंडहर के अंदर तक फेंक रहा था क्योंकि दोनों के नंगे तन को भिगो रहा था लेकिन अब भीगने का डर दोनों को बिल्कुल भी नहीं था बरसात का पानी जितना दोनों को नहीं भीगा रहा था उससे ज्यादा वासना का तूफान उन दोनों को अपने अंदर डुबाए लेकर चला जा रहा था,,,,

मधु की बुर से लगातार तीव्रता के साथ उसके पेशाब की धार फूट रही थी जोकि सीधा राजू के मुंह के अंदर गिर रही थी और उसके बदन को पूरी तरह से भिगो रही थी एक तरह से राजू अपनी मां के पेशाब में नहा रहा था और यह अनुभव से और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसका लंड एकदम लोहे की रॉड की तरह खड़ा हो चुका था अपनी मां को गरमा गरम सिसकारी लेता देखकर राजू समझ गया कि वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी है राजू अपनी मदहोशी और उत्तेजना को काबू नहीं कर पा रहा था,,,, राजू का लंड एक बार फिर से अपनी मां की बुर में जाने के लिए तड़प रहा था मधु की बुर से लगातार पेशाब की धार निकल रही थी उसकी आंखें बंद हो चुकी थी वह मजा ले रही थी और पानी की बूंदे उसके पूरे तन को भिगो रही थी राजू भी भीग रहा था राजू अब एक पल भी गवाना उचित नहीं समझ रहा था इसलिए तुरंत अपनी मां की बुर पर से अपना मुंह हटा कर खड़ा हुआ और उसकी मां को समझ पाती इससे पहले ही अपनी मां की जान पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाकर अपनी कमर से लपेट लिया और अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मां की गीली चपचपाती हुई बुर में लंड सटाकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया,,, और पहले से ही राजू का लंड अपनी मां की बुर में अपने नाम का सांचा बना चुका था इसलिए फच्च की आवाज के साथ ही राजू का लंड एक झटके में उसकी मां की बुर में समा गया और जैसे ही मोटा तगड़ा लंड बहू की बोर में गिरा उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई और वह अपनी आंखों को खोल दी और जब उसे पता चला कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस गया है वह पूरी तरह से मस्त हो गई पानी में भीगने का मलाल उसे बिल्कुल भी नहीं था इस समय वह अपने बेटे के प्यार में उसकी वासना में डूब रही थी और भीग रही थी राजू अपनी मां की कमर पर हाथ रखकर उसकी एक टांग को अपनी कमर पर लपेटे हुए धीरे-धीरे खंडहर की बाहरी दीवार से उसे हटा दिया और अपनी कमर को हिला कर अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया मधु कभी सोचा भी नहीं था कि उसका बेटा इतनी तीव्रता के साथ अपने लंड को उसकी बुर में डालेगा लेकिन अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से प्रभावित होते हुए उसकी मर्दानगी ताकत के आगे घुटने टेक दी थी ,,,,,

मधु की एक टांग ऊपर उठी हुई थी और राजू के कमर पर लिपटी हुई थी राजू एक हाथ उसकी कमर पर रखकर उसे सहारा दिए हुए था और वह अपनी पीठ को खंडार की दीवार से सटाकर अपने बेटे से चुदवाने का मजा ले रहे थे राजू पहले ही धक्के से रफ्तार को बड़ी तेजी से अंदर बाहर करते हुए अपने लंड का मजा अपनी मां को दे रहा था उसका हर एक धक्का मधु की चीख निकाल दे रहा था,,,, राजू अपनी मां की गर्दन पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करते हुए अपनी कमर हिला रहा था तूफानी बारिश लगातार जारी थी जिस तरह से बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी उसी तरह से राजू भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था राजू लगातार अपनी मां की चुदाई कर रहा था मधु की बुर में बड़े आराम से राजू का लंड अंदर बाहर हो रहा था जिसमें से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,,।

आहहहह राजू मेरे लाल‌ आराम से धक्के लगा तेरा लाल कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है इतना मोटा लंड मैंने आज तक अपनी बुर में नहीं ली,,,

तभी तो मां मैं तुम्हें जुदाई का असली सुख दे रहा हूं मैं जानता हूं पिताजी का लंड मेरे से आधा भी नहीं है तुम्हें मजा नहीं आता होगा तुम्हारी जवानी का रस पिताजी बराबर जूस नहीं पाते हैं इसीलिए मैं तुम्हारी जवानी का रस पीने के लिए आया हूं देखो आज मैं तुम्हारे बुर को कैसे अपने लंड से चोद चोद कर सुजा देता हूं तुम भी आज की रात जिंदगी भर नहीं भूलोगी,,,

आहहहहह वह तो देख ही रही हूं तेरी बेशर्मी के साथ-साथ में भी बेशर्म बन गई हूं,,,,आहहररह आहहररहह ,,,,

चुदाई के मामले में बेशर्म बनने में ही ज्यादा मजा है शर्म करने से कुछ हासिल नहीं होता तो मगर बेशर्मी नहीं दिखाती तो आज मेरे लंड का मजा नहीं लेती,,, हाय कितनी कसी हुई बुर है,,,,ऊमम(अपनी मां की गर्दन को चुमते हुए राजू लगातार अपनी कमर हिला रहा था) देखो मां कितने आराम से मेरा लंड तुम्हारी बुर में जा रहा है,,,,ऊफफ तुम तो मुझे पागल कर दोगी,,,,।

(इतना कहते हुए राजू अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया पानी में दोनों का बदन पूरी तरह से भीग रहा था दोनों एक बार फिर से बारिश के पानी में नहा चुके थे लेकिन बारिश का ठंडा पानी दोनों के बदन की अपन को शांत करने में असमर्थ साबित हो रहा था दोनों पूरी तरह से गर्म आ चुके थे मधु की गर्म जवानी में राजू पूरी तरह से गर्म हो चुका था,,,,, मधु की खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां राजू की छाती के नीचे दबी हुई थी और राजू अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मां को चोद रहा था कुछ देर तक राजू अपनी मां को इसी अवस्था में चोदता रहा वह जानता था कि उसकी मां की टांगे दर्द कर रही होगी इसलिए वह अपनी मां की टांग को अपनी कमर से हटाकर सीधी कर दिया और एक बार अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाल लिया मधु को लगा कि शायद उसका पानी निकल गया है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था मधु कुछ कह पाती को समझ पाती इससे पहले ही राजू अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे खंडार की दीवार की तरफ घुमा दिया और उसकी कमर को अपनी तरफ खींच कर उसकी गोल-गोल गांड को अपने आगे परोश लिया मधु समझ गई थी कि अब उसका बेटा क्या करने वाला है वह भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी गोल-गोल भारी भरकम गांड को थोड़ा सा और ऊपर की तरफ उठा दे ऐसा लग रहा था कि दुश्मनों को दोस्त करने के लिए सेनापति ने तोप लगा दी हो लेकिन सामने के दल का सेनापति और ज्यादा चला था दुश्मनों की तोप का जवाब अपनी बंदूक से देना जानता था इसलिए राजू तुरंत अपनी मां की उठी हुई तोप को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी बंदूक की नाल तोप के छेद में डाल दिया जिसमें से गर्म लावा उसे पिघलाने के लिए निकलने वाला था,,, एक बार फिर से राजू पूरा मोर्चा संभाल लिया था अपनी मां की कमर थाम कर वह फिर से अपने लंड को अपनी मां की गुलाबी छेद में डालकर हिलाना शुरू कर दिया था पीछे से चुदवाने में मधु को भी बहुत मजा आता था इसलिए उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज और तेज हो गई थी राजू कभी अपनी मां की कमर थाम लेता तो कभी अपनी मां की चूची को दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए अपनी कमर हिलाता,,, लेकिन उसका गरम लावा फूटने का नाम ही नहीं ले रहा था अपने बेटे की मर्दाना ताकत के आगे वह पूरी तरह से वशीभूत हो चुकी थी मंत्रमुग्ध थी वह उसी अवस्था में अपनी गांड को हवा में उठाएं अपने बेटे से चुदवाने का मजा लूट रही थी,,,,।

मधु अपने मन में सोचने लगी कि सच में उसका बेटा चुदाई की कला में पूरी तरह से महारत हासिल किया हुआ है तभी तो हर तरीके से उसे परमआनंद दे रहा है,,,, बरसात की बोल दे दोनों केतन को भी हो रही थी और मधु की चिकनी पीठ पर फिसलती हुई पानी की बूंदों को राजू अपना जीभ लगाकर चाट रहा था और अपनी कमर हिला कर लगातार अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,,

अब कैसा लग रहा है मेरी रानी,,,।

(अपने बेटे के मुंह से अपने लिए रानी शब्द सुनते ही मधु अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और भलभलाकर उसका पानी निकलना शुरू हो गया,,,, उसे अपने बेटे की बात पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं आ रहा था उसे तो इस तरह का संबोधन उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था अभी अपने बेटे के सुर में जवाब देते हुए बोली,,,)

बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा तेरे जैसा लंड तो मैंने आज तक नहीं देखी तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर मैं धन्य हो गई हूं,,,

ओहहहह मेरी रानी मेरा लंड तेरे लिए ही बना है अब देखना दिन रात तेरी बुर में डालकर मैं ऐसी चुदाई करूंगा तो मस्त हो जाएगी,,,

ओहहहहह मेरे राजा और जोर जोर से धक्के लगा,,,,

साले तू बहुत मस्त पेलवाती है,,, तेरी बुर को चोद‌चोद कर में भोसड़ा बना दुंगा भोसड़ाचोदी,,,,,

(राजू अपनी मां से प्यार की बातें करते करते गाली गलौज पर उतर आया था वह जानता था कि चुदाई करते समय गाली गलौज करने में और ज्यादा मजा आता है और इस बात को मधु भी अच्छी तरह से जानती थी वह तो पहले थोड़ा हैरान हुई अपने बेटे के मुंह से गाली सुनकर लेकिन ना जाने क्यों अपने बेटे के मुंह से इस समय गाली उसे बहुत अच्छी लग रही थी और वह भी अपने बेटे को जवाब देते हुए बोली)

अरे मादरचोद मैं भी देखना चाहती हूं तेरे में कितना दम है,,, मैं भी तो देखूं कैसे तुम्हारी बुर का भोसड़ा बनाता है मादरचोद,,,

अरे मेरी भोसड़ा चोदी मेरी रंडी तेरी बुर पर मेरा नाम लिख गया है,,,, अब तेरी बुर पर मेरा ही राज चलेगा देख अब कैसे तुझे मस्त करता हूं,,,।

(दोनों पूरी तरह से वासना की आग में लिप्त हो चुके थे दोनों को सही गलत का पहचान बिल्कुल भी नहीं था मां-बेटे का पवित्र रिश्ता टूट चुका था और दोनों में मर्दों और औरतों का रिश्ता पनप गया था इसलिए दोनों एक दूसरे से आनंद लेते हुए एक दूसरे को गाली गलौज कर रहे थे और मजा ले रहे मधु ने आज तक इस तरह की चुदाई की कभी कल्पना भी नहीं की थी जिस तरह की चुदाई राजू कर रहा था राजू बिना रुके बिना थके एक ही लए में अपने लंड को अपनी मां की बुर के अंदर बाहर कर रहा था देखते ही देखते हैं मधु दो बार और अपना पानी छोड़ चुकी थी और तीसरी बार की तैयारी थी लेकिन आंसू अभी एक भी बार अपना पानी नहीं निकाला था लेकिन इस बार वह भी पूरा चरम सुख के करीब पहुंच रहा था और ऐसे में उत्तेजित अवस्था में वह अपनी मां की चूची को दोनों हाथों से पकड़कर दशहरी आम की तरह जोर-जोर से दबाते हुए धक्के लगा रहा था और देखते ही देखते दोनों का एक साथ पानी निकल गया दोनों जोर जोर से हांफने लगे,,,, कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे से अलग हुए दोनों पानी में पूरी तरह से भीग चुके थे,,,,।

मधु और राजू दोनों खंडार के किनारे खड़े थे जहां पर पानी की बूंदे उन दोनों को भिगो रही थी मधु तुरंत थोड़ा खंडार के अंदर आ गई और अपने बदन से पानी को अपनी हथेली से साफ करते हुए बोली,,।

तू बहुत हारामी है रे आखिर अपनी मनमानी कर ही लेता है मुझे पूरा भिगो दिया,,,

भी तो मैं भी गया हूं मैं लेकिन मजा कितना आया बहुत मजा आया ना,,,,(इतना कहते हुए राजू अपना कुर्ता लेने के लिए नीचे झुका और उसे लेकर अपनी मां के बदन से पानी को साफ करने लगा थोड़ी ही देर में दोनों अपने बदन से पानी सुखा कर आगे के आगे बैठे हुए थे मधु पूरी तरह से थक चुकी थी सुबह होने में भी अभी काफी देर थी लेकिन अब उसे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि दमदार जुदाई के बाद अक्सर मर्द और औरत दोनों को नींद आ जाती है दिन भर सफ़र की थकान और रात को चुदाई की मेहनत से दोनों थक चुके थे इसलिए राजू अपनी मां की साड़ी को वही जलती हुई आग के किनारे बिछा कर अपनी मां को अपनी आगोश में लेकर सो गया,,,, सुबह जब राजू की नींद खुली तो धीरे-धीरे सुबह हो रही थी काले बादल छोड़ चुके थे धीरे-धीरे हल्का-हल्का उजाला हो रहा था लेकिन उसकी मां अभी भी पूरी तरह गहरी नींद में सोई हुई थी राजू अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर सो रहा था उसकी पीट उसकी छाती से सटी हुई थी लेकिन लंड पर गौर किया तो उसका लंड मधु की गांड के छेद के एकदम करीब अपना डेरा डाला हुआ था जो की चेतना में आने की वजह से धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था एक बार फिर से अपनी मां की नंगी गांड का स्पर्श पाते ही राजू के तन बदन में आग लग गई और वह अपनी मां को नींद से उठा के बिना ही धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गया और हाथों से ही टटोलकर अपनी मां की गीली बुर पर हाथ रखकर अपने लंडके सुपाड़े को उस पर टिका दिया और हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ सरका दिया जैसे कोई सांप बिल देखकर अपने आप अंदर की तरफ सरकने लगता है उसी तरह से राजू का लंड भी अपनी मां की गुलाबी बिल देखकर अंदर की तरफ सरकने लगा देखते ही देखते राजू ने निद्रा अवस्था में ही अपनी मां की बुर में अपना लंड डाल दिया और हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया मधु पूरी तरह से गहरी नींद में थी लेकिन उत्तेजना के मारे राजू के बदन में गर्मी और ताकत दोनों बढ़ती जा रही थी इसलिए वह अपना हाथ अपनी मां की चूची पर रख कर जोर से दबाना शुरू कर दिया और चूची को जोर से दबाने की वजह से मधु की नींद खुल गई और जब उसे एहसास हुआ कि उसकी बुर में पूरी तरह से उसके बेटे का लंड समाया हुआ है तो वह एकदम से गन गना गई वह भी पूरी तरह से मदहोश हो गई और अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली,,,।

क्या राजू रात भर तो चुदाई किया फिर से शुरू हो गया,,

क्या करूं मा तुम्हारी नंगी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था,,,,

चल यहां इस जंगल में तो ठीक है लेकिन घर पर अपने आप पर काबू में रखना वहां पर ऐसा नहीं कि मेरी गांड देखकर सबके सामने शुरू पड़ जाए,,,

क्या करूं हो भी सकता है तुम्हें देखकर मुझ पर काबू नहीं रह जाता,,,।

(इतना सुनते ही हैरान होते हुए मधुर अपने बेटे की तरफ देखी तो राजू हंसते हुए बोला)

मजाक कर रहा था,,,,

(और इतना कहने के साथ ही अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया मधु एक बार फिर से हैरान थे कि इस तरह से लेटे लेटे वह उसे बड़े आराम से चोद रहा था जबकि उसके पति से इस तरह से होता ही नहीं था एक बार फिर से मधु के तन बदन में खुमारी छाने लगी आंखों में मदहोशी छाने लगी,,, राजू भाई आराम से पीछे से अपनी मां की चुदाई कर रहा था देखते ही देखते एक बार फिर से दोनों की सांसे तेज हो गई दोनों एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर लिए थोड़ी ही देर में उजाला होने लगा दोनों लग्न अवस्था में ही खंडार के किनारे खड़े होकर बाहर का नजारा देख रहे थे चारों तरफ पानी भरा हुआ था लेकिन अब पानी कम था जिसमें से आराम से दोनों बेल गाड़ी लेकर जा सकते थे,,,,, हल्के हल्के उजाले में राजू और उसकी मां दोनों नंगे ही खंडार के अंदर तेरा जो अपनी मां के नंगे बदन को देखकर मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

तुम सच में आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,,

चल अब रहने दे,,,(इतना कहने के साथ ही मधु नीचे बिछी हुई साड़ी को उठाकर शर्म के मारे अपने बदन को ढकने की कोशिश करने लगी तो राजू फिर से हंसते हुए बोला)

मेरे सामने अब इसकी कोई जरूरत नहीं है तुम्हारी हर एक अंग से मैं वाकिफ हो चुका हूं और सच कहूं तो तुम्हारे बदन का हर एक अंग खरा सोना है जिसकी आभा में मैं पूरी तरह से नहा चुका हूं,,,,,(इतना कहते हुए राजू अपनी मां के हाथ मैं पकड़ी हुई साड़ी को पकड़ लिया और उसे खींचने लगा तो राजू की मां बोली)

अब रहने दे मुझे पहन लेने दे अब चलना है सुबह हो रही है,,,

अभी नहीं,,,

क्यों,,,?(अपने बेटे की बात सुनकर आश्चर्य जताते हुए मधु बोली)

अपने बदन पर देखो कितनी धूल मिट्टी लगी हुई है ऐसे जाओगी तो सब क्या कहेंगे कि कहीं गिर गई थी क्या,,,

(इतना सुनकर मधुर अपने बदन की तरफ देखी तो वास्तव में धूल मिट्टी लगी हुई थी वह अपने हाथ से अपनी धूल मिट्टी साफ करने की कोशिश करने लगी तो राजू बोला,,,)

यह सब करने को रहने दो चलो नहा लेते हैं,,,

यहां कहां नहाएंगे,,,,?

चलो मैं बताता हूं,,,,(इतना कहते हुए वह अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और उसे खंडहर के अंदर से ही पीछे की तरफ हाथ का इशारा करके दिखाते हुए बोला,,)

वह देखो खंडगर के छत से पानी गिर रहा है और वह एकदम साफ है,,, इसी के नीचे खड़ी होकर नहा लो मैं भी नहा लेता हूं,,,

यहां,,,? लेकिन यहां कोई आ गया तो,,,

क्या मां तुम भी इस जंगल में इस वीराने में इतनी सुबह कौन आएगा और वैसे भी यहां दिन में भी कोई नहीं भटकता चलो जल्दी से नहा लेते हैं,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां का हाथ पकड़े हुए खंडार के पीछे छत से गिर रहे पानी के नीचे ले जाकर खड़ा कर दिया चारों तरफ घने घने पेड़ थे जंगली झाड़ियां थी यहां का दृश्य और भी ज्यादा मनोरम में लग रहा था मधु गिरते हुए पानी के नीचे एकदम नंगी खड़ी होकर नहा रही थी राजू अपनी मां को नहाते हुए देख रहा था जो कि बेहद खूबसूरत लग रही थी,,,,

इस तरह से खुले में कभी नंगी होकर नहाई हो,,,

Madhu khandhar k piche nangi nahati huyi





कभी नहीं आज पहली बार तेरे साथ इस वीराने में इस तरह से नहाने का मजा ले रही हुं,,,,(और इतना कह कर वो खिलखिला कर हंसने लगी और नहाने का मजा लेने लगी नंगी नहाते हुए मधु और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी अपनी मां की नंगी गांड पर गिरता हुआ पानी देखकर राजू की उत्तेजना फिर से बढ़ने लगी थी और उसका लंड एक बार फिर से खड़ा होने लगा था वह भी अपनी मां के पास जाकर गिरते हुए पानी में नहाने का मजा लेने लगा लेकिन आपस में दोनों का बदन टकरा जा रहा था राजू का लंड कभी उसकी मां की बुर्सेट अगर आता तो कभी उभरी हुई गांड से रगड़ जा रहा था इस तरह से मधु के भी तन बदन में आग लग रही थी बार-बार अपनी गांड से अपने बदन से अपने बेटे का लैंड स्पर्श हो जाने की वजह से उसके बदन में गर्माहट आ गई थी और वह अपने आपको ज्यादा देर तक रोक नहीं पाई और तुरंत अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसकी आंख में देखने लगी,,,,



मधु इस रूप में पूरी तरह से बिस्तर में लग रही थी और पूरी तरह से उत्तेजना से भरी हुई,,, राजू अपनी मां की आंखों में वासना का तूफान देख रहा था मधु उसी तरह से अपने बेटे के लंड को पकड़े हुए उसकी आंखों में देखते हुए अपने लाल-लाल होठों को अपने दांत से हल्के से काटकर नीचे की तरफ झुकने लगी और देखते ही देखते घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को तुरंत मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी राजू अपनी मां की इस हरकत से पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया,,, और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया राजू पहली बार देख रहा था कि उसकी मां की आंखों में सर में बिल्कुल भी नहीं था वह पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी और ऐसी औरतों के साथ राजू को और ज्यादा मजा आता था मधु‌ पूरी तरह से अपना अनुभव दिखाते हुए अपने बेटे का लंड चूस कर उसे मजा दे रही थी दोनों एक बार फिर से तैयार हो चुके थे राजू तुरंत अपनी मां की बांह पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाया और देखते ही देखते अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर उसे अपनी गोद में उठा लिया एक बार फिर से अपने बेटे की ताकत से मधु मंत्रमुग्ध हो गई अपनी गोद में उठाए हुए ही राजू अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को अपनी मां के गुलाबी छेद पर लगा दिया और हल्के से अपनी कमर को धक्का दिया और एक बार फिर से राजू का लंड उसकी मां की बुर में समा गया राजू अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसे चोदना शुरू कर दिया ऊपर से पानी गिर रहा था और नीचे राजू पानी में भीगते हुए अपनी मां को चोद रहा था,,,, मधु अपने बेटे की चोदने की ताकत से पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गई थी उसके आगे वहां घुटने टेक चुकी थी अपने बेटे की लंड की ताकत पर उसे गर्व होने लगा था,,,।

एक बार फिर से दोनों की सांसे तेज चलने लगी और दोनों एक साथ अपना पानी छोड़ कर गहरी सांस लेने लगे शांत होने के बाद राजू अपनी मां को अपनी गोद से नीचे उतारा दोनों लगातार गिरते हुए पानी में नहा रहे थे मधु पानी से अपनी पुर को साफ की और राजू अपने लंड को और थोड़ी ही देर में दोनों उसी जगह पर आ गए थे और अपने अपने कपड़े पहन चुके थे जो कि सूख चुके थे,,, अपने बेटे से असीम संभोग का सुख प्राप्त करके मधु अपनी साड़ी पहनकर शर्मा रहे थे साड़ी उतरने के बाद वह पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी लेकिन साड़ी पहनने के बाद एक बार फिर से वह मां बन चुकी थी इसलिए उसे अपने बेटे के सामने शर्म महसूस हो रही थी राजू बिना कुछ बोले बेल को खंडार में से बाहर लाया और उसे फिर से बैलगाड़ी में जोड़ दिया और दोनों फिर से गांव की तरफ निकल गए,,,।
 
राजू की बैलगाड़ी घर की तरफ निकल पड़ी,,, राजू आज बहुत खुश था क्योंकि आज उसे वह मिल गया था जिसके बारे में सिर्फ कल्पना किया करता था ,,, राजू कैसा महसूस हो रहा था कि जैसे आज उसे दुनिया का सबसे बेशकीमती खजाना हाथ लग गया हो और अब वह उसका मालिक बन गया हो लेकिन मधु की हालत खराब थी रात भर की जमकर चुदाई करने के बाद उसे अपनी दोनों टांगों के बीच बुर में दर्द महसूस हो रहा था,,, ऐसा तो उसे अपनी सुहागरात पर भी दर्द नहीं हुआ था अपने बेटे की मर्दानगी को वहां रात भर में ही अच्छी तरह से देख चुकी थी और उसे अपने बेटे पर गर्व भी हो रहा था,,, जहां एक बार में ही उसका पति ध्वस्त हो जाता था वही उसका बेटा लगातार रात भर खुद भी जाता रहा और उसे भी जगह तरह ना खुद सोया ना उसे सोने दिया,,,,,,,, सुबह हो चुकी थी चारों तरफ सूर्य की रोशनी अपना उजाला फैला रही थी खेतों में पानी भरा हुआ था लेकिन कच्ची सड़क पर पानी नहीं था जिससे बेल गाड़ी आराम से आगे बढ़ रही थी ऐसी गजब की बारिश ना तो मधु ही देखी थी और ना ही राजू ही ऐसा लग रहा था कि यह बारिश शायद उन दोनों के मिलन के लिए ही बरस रही थी,,,, बेल गाड़ी चलाते समय भी रह-रहकर राजू अपनी मां की खूबसूरती में खो जाता था उसकी आंखों के सामने कभी उसकी मां का नंगा बदन उसकी नंगी चूचियां उसकी बड़ी बड़ी गांड तो उसकी बुर में घुसता हुआ अपना लैंड नजर आता था,,,, राजू इस बात से हैरान था कि दो दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी अभी भी उसकी मां की पूरे तुम कैसी हुई थी मानो कि जैसे जवान औरत इसीलिए तो वह रात भर अपनी मां को जमकर चोदे बिना नहीं रह पाया था और अपनी मां की मदमस्त जवानी देख कर बार-बार उसका लंड खड़ा भी हो जा रहा था,,,, अपनी मां के बारे में सोचते हुए अभी भी उसका लंड खड़ा हो गया था अगर उसकी मां इजाजत देती तो बैलगाड़ी में ही वह अपनी मां की अभी भी चुदाई कर देता क्योंकि राजू का मन अपनी मां के मादक सौंदर्य से भरा नहीं था और ना ही कभी भरने वाला था,,,, मधु के अंग अंग से मधुर रस टपकता था जिसका रस वह रात भर कभी अपने होठों से तो कभी अपने लंड से पीता रहा,,,,,

रात को जो कुछ भी हुआ था उससे मधु एकदम शर्मिंदा हो चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रात को जो कुछ भी उन दोनों के बीच हुआ वह सही था या गलत इसका फैसला करने में वह बिल्कुल भी सक्षम नजर नहीं आ रही थी क्योंकि रात को जो कुछ भी हुआ था समाज की नजर में वह एक अपराध था रिश्तो को कलंकित कर देने वाला था लेकिन एक औरत के नजरिए से रात को जो कुछ भी हुआ था वह उन दोनों की अपनी अपनी जरूरत थी जिसमें दोनों अपनी जरूरत को पूरा करते हुए एक दूसरे को संपूर्ण संतुष्टि का अहसास दिला चुके थे और आज तक मधु ने इस तरह का सुख नहीं भोग पाई थी,,,, और इस अद्भुत सुख की प्राप्ति के एवज में उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे से घृणा करें या उसके इस उपकार के बदले अपना अस्तित्व पूरी तरह से उसके कदमों में रख दें ऐसे भी रात को वह अपने संपूर्ण अस्तित्व को अपनी जवानी को अपने बेटे के कदमों में निछावर कर चुकी थी जिसके बदले में उसके बेटे ने उसकी मादक अद्भुत खूबसूरती को अपनी बाहों में लेकर उसका रसपान किया था,,,,,,, मधु बीते हुए रात के बारे में सोच कर एक-एक पल के बारे में सोच कर पूरी तरह से फिर से मस्त हुए जा रही थी उसे सब कुछ सपना सा लग रहा था उसे लग रहा था कि वह एक बेहद खूबसूरत सपना देख रही थी लेकिन उसने सपने जैसी जिंदगी को जी चुकी थी अपने बेटे के लंड की लंबाई और मोटाई को अपनी बुर की गहराई में महसूस कर चुकी थी उसका हर एक धक्का वह अपने बच्चेदानी पर अच्छी तरह से महसूस कर चुकी थी,,,, अपने बेटे की मजबूत बाहों में आकर उसका संपूर्ण वजूद एक गुड़िया की तरह ही लग रहा था जिसे उसके बेटे ने जी भर कर प्यार किया था,,,। मधु कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाएगी,,, लेकिन कभी-कभी सोच से विपरीत और भी ज्यादा खूबसूरत होता है जैसा कि उसके साथ हुआ था,,,,, रात को अपने बेटे की आंखों के सामने बैठकर पेशाब करना उसकी आंखों के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाना यह सब मधु के लिए बिल्कुल नया था लेकिन बेहद अद्भुत सुख प्रदान करने वाला था किसी जवान लड़के के सामने कपड़े उतार कर देंगी होने में भी एक अपना मजा होता है जिसे वह अच्छी तरह से महसूस कर पाई थी वरना यह सुख उससे पूरी तरह से अधूरा ही था,,,,,, अपने बेटे की बाहों में नग्न अवस्था में सोना उसके बदन की गर्मी से वातावरण की ठंडक को दूर करना यह सब सोचकर मधु पूरी तरह से गर्म हुई जा रही थी,,,, रात भर चोदने के बाद जिस तरह से सुबह में दोनों खंडार के पीछे जाकर नहाए थे वह पल मधु के लिए बहुत खास था क्योंकि आज तक उसने खुले में कभी इस तरह से सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहीं आई थी और वह भी अपने बेटे के साथ मधु को अपनी खूबसूरत बदन पर अपनी जवानी पर गर्व होने लगा था कि इस उम्र के दौर में भी वह अपने जवान बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह से कामयाब हो चुकी थी और उसकी गर्म जवानी से उसके बेटे की प्यास बुझ ही नहीं रही थी जोकि रात भर उसे पेलता रहा,,, उस पल को याद करके मधु की आंखों में एक बार फिर से शर्म उतार आई जब वह खंडार के पीछे नंगी होकर नहा रही थी और उसका बेटा भी उसका साथ देने के लिए आ गया था अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी गांड पर अपनी बुर पर महसूस करके वह खुद इतना ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई थी और अपने बेटे के लंड को खुद ही पकड़ ली थी और घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर उसे अद्भुत सुख प्रदान की थी,,, अपनी हरकत से अपने बेटे को एक बार फिर से गर्म करके वह अपने बेटे को खुद को चोदने पर मजबूर कर देते और उसका बेटा भी अपनी मर्दानगी की सारी ताकत दिखाता हुआ एक बार फिर से उसकी बुर में समा गया था,,,

यह सब ख्याल मधु को एक बार फिर से गर्म कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी बेटी के साथ शारीरिक संबंध के इस रिश्ते को आगे बढ़ाए यहीं खत्म कर दे क्योंकि यह बात वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह का सुख उसके बेटे ने उसे दिया था उस तरह का सुख उसे अब कभी नहीं मिलने वाला है बिना उसके बेटे का क्योंकि वह अपने पति की ताकत को अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि बरसो उन्हीं से चुदवाती आ रही थी,,,, समाज का डर उसके मन में भी था उसे भी इस बात का डर था कि अगर घर में किसी को इस बात की भनक लग गई तो क्या होगा उसकी इज्जत का क्या होगा उसके सम्मान का क्या होगा और अगर गांव में किसी को पता चल गया तब क्या होगा वह तो गांव में किसी को मुंह दिखाने के काबिल ही नहीं रह जाएगी यही सब सोचकर व थोड़ा परेशान भी हो रही थी कि तभी राजू बोला,.

रात को कैसा लगा मां,,,

(अपने बेटे के सवाल का जवाब देने के लिए वह तैयार नहीं थी आखिर वह अपने बेटे से क्या कहती कि उसे मजा आया उसके लंड से चोदने में उसे बहुत आनंद मिला ऐसा कहने में उसे शर्म भी महसूस हो रही थी इसीलिए वह खामोश रही उसकी ख़ामोशी को देखकर राजू फिर बोला)

बोलो ना बा कैसा लगा,,,, मुझे तो बहुत मजा आया क्योंकि दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत की चुदाई जो मैंने किया है सच कहूं तो तुम्हें चोदने की सिर्फ कल्पना ही कर सकता था मुझे नहीं मालूम था कि यह हकीकत में हो जाएगा अच्छा हुआ कि पिताजी ने दवा दिलाने के लिए तुम्हें मेरे साथ भेज दिए और यह तूफानी बारिश का तुम्हें अपने दिल से लाख-लाख बार शुक्रिया अदा करूंगा क्योंकि यह बारिश ना होती तो शायद हम दोनों एक ना होते,,,

बस राजू जो हो गया सो हो गया अब आगे बिल्कुल भी नहीं होगा,,,

ऐसे कैसे नहीं होगा मेरा लंड तो तुम्हारी एक बुर में जाने के लिए अभी भी तड़प रहा है तुम्हारी खूबसूरत जवानी का रस रात भर पीता रहा हूं लेकिन यह प्यास है कि बुझने का नाम नहीं ले रही है,,, कसम से मां इस उम्र में भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है मेरा तो लंड दर्द करने लगा,,,

तू भी तो तू कहां मान रहा था जब मन कर रहा था तब डाल दे रहा था यह भी नहीं सोचता था कि मुझे कैसा लग रहा है,,,

क्यों तुम्हें मजा नहीं आया क्या कसम से बताओ तुम्हें मेरी कसम,,,

अब क्या बताऊं,,,, मुझे भी बहुत मजा आया लेकिन डर लगता है कि किसी को यह बात पता चल गई तो क्या होगा,,,

क्या मां तुम भी पागलों जैसी बात करती हो हम दोनों के बीच की इस बात को भला कैसे लोगों को पता चलेगा यह तो तुम जानती हो और मैं जानता हूं और इस रात को घने जंगल में इस खंडार में अपने इस बेल के सिवा और कोई नहीं जानता और यह बेल है कि बोल नहीं पाएगा और ना जरूरी अपने मालिक को बता देता कि मालिक मालिक रात भर तुम्हारी बीवी की चुदाई तुम्हारा बेटा किया है,,,,।

(इतना सुनते ही मधु की हंसी छूट गई और वह खिलखिला कर हंसने लगी अपनी मां को इस तरह से हंसता हुआ देखकर राजू बोला)

देखना मां हंसते हुए तुम और ज्यादा खूबसूरत लगती हो,, तुम्हें हंसता हुआ देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है,,, अगर इजाजत हो तो इसी समय बैलगाड़ी में तुम्हारी बुर में डाल दुं,,,,

चल चल रहने दे अब तेरा मुझे नहीं डलवाना है रात भर डाल डाल कर पूरा सुजा दिया है,,,,

क्या सुजा दिया है,,,,?(राजू सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर बोला क्योंकि वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था)

अरे वही जिसमें तू डाल रहा था,,,(मधु शर्माते हुए पूरी उसे मालूम था कि उसका बेटा उसके साथ शरारत कर रहा है और उसके शरारत में उसे भी मजा आ रहा था)

क्या मां ठीक ठीक से बोलो ना क्या सूज गया और मैं क्या डाल रहा था,,,

चल तुझे सब कुछ मालूम है,,,

हां वह तो है मुझे सब कुछ मालूम है लेकिन तुम्हारे मुंह से सुनने में मुझे बहुत मजा आएगा,,,

क्यों रात भर जो मजा लिया वह कम था क्या,,,

अरे पूछो मत वह मजा तो मेरी जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा था तुम्हारी तरफ से लेकिन अपने मुंह से अगर साफ साफ शब्दों में कहोगी तो मुझे और मजा आएगा,,,

क्या,,,?

वही कि क्या सोच गया और मैं क्या डाल रहा था,,,

(अपनी बेटे की बात सुनकर मधु को शर्म महसूस हो रही थी उसे शर्म भी आ रही थी और मजा भी आ रहा था वह भी अपने बेटे के सामने खुले शब्दों में बोलने में लाल आई तो थी और वैसे भी रात भर में उसके बेटे ने उसे खुद अपने हाथों से नंगी करके उसकी चुदाई भी किया था और उसे मजा भी दिया था तो ऐसे में अपने बेटे से शर्म करने का कोई मतलब नहीं था इसलिए वह शरमाते हुए बोली)

तू अपना लंड मेरी बुर में डाल डाल कर सुजा दिया है,,,

आहहह आहहरह‌ क्या बात है कितनी मधुर आवाज है देखी तुम्हारे मुंह से यह शब्द कितने अच्छे लगते हैं बुर और लंड,,,

तुम मुझे सच में बेशर्म बनाता जा रहा है,,,

लेकिन बेशर्म बनने में कितना मजा है ना मां अगर तुम बेशर्म ना बनती तो मेरी आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी ना होती मेरे सामने बैठकर पेशाब ना करती मेरे लंड को अपने मुंह में ले लेती और ना ही मुझे अपनी चूची पीने देती ना अपनी बुर का रस पिलाती और ना ही मेरे लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाने का अद्भुत सुख प्राप्त कर पाती,,,

(अपने बेटे की इन बातों को सुनकर मधु के तन बदन में फिर से आग लगने लगी थी अपने बेटे के लैंड की रबड़ को अभी भी अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों में महसूस कर पा रही थी)

बहुत बेशर्म हो चुका है तू,,,

क्या मा फिर से अभी-अभी तो तुम्हें बेशर्म होने का फायदा बताया हूं कहो तो थोड़ी और बेशर्मी दिखा दु,,,।

अब इससे ज्यादा बेशर्मी तू और क्या दिखाएगा,,,

अरे पूछो मत इससे भी ज्यादा बेशर्म बन्ना मुझे आता है अगर इससे भी ज्यादा बेशर्म बन गया ना तो कसम से यह सड़क पर इसी बैलगाड़ी में तुम्हें नंगी करके चोदना शुरू कर दूंगा,,,

हाय दैया,,, इतना हरामि हो गया है तू तेरे में जरा भी शर्म नहीं रह गई है,,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत हो वीरान सड़क हो तो ऐसे में कोई भी मेरी तरह बेशर्म बन जाएगा कसम से तुम्हारे बदन की खुशबू मुझे और ज्यादा मस्त कर देती है,,,

चल अब रहने दे बैलगाड़ी को जल्दी आगे बढ़ा,,,,

देखो ना मां ,,,दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा है और अभी भी गांव बहुत दूर है कहो तो यहीं पर एक बार और तुम्हारी चुदाई कर दुंं मेरा लंड पूरी तरह से तैयार है,,,,

लेकिन मेरी बुर बिल्कुल भी तैयार नहीं है,,,,(मधु हल्की सी मुस्कुराहट के साथ शरमाते हुए बोली)

ऐसा हो ही नहीं सकता तुम्हारी बुर भी एकदम तैयार है मुझे मालूम है तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही होगी यकीन ना आए तो हाथ लगा कर देख लो,,,

चल अब रहने दे बदतमीज इस तरह की बातें करेगा तो किसी की भी बुर पानी छोड़ने लगेगी,,,, तू बकवास बंद कर और जल्दी जल्दी चल,,,,,

सोच लो मां यहां पर जिस तरह का मौका मिल रहा है घर पर पता नहीं मौका मिलेगा कि नहीं वहां मेरे लंड के लिए तरस जाओगी अपनी बुर में लेने के लिए क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि अब तुम्हें पिताजी के लंड से बिल्कुल भी मजा नहीं आएगा,,,,

कोई बात नहीं तू अब अपना मुंह बंद रख,,,,,

(मधु फिर से शरमाते हुए बोली दोनों मां बेटे पूरी तरह से आपस में खुल चुके थे मधु बहुत खुश नजर आ रही थी बस उसे इस बात का डर था कि दोनों के बीच के संबंध के बारे में किसी को भनक ना लग जाए,,,, और राजू के इस बात पर भी वह गौर कर रही थी कि वास्तव में घर पर इधर की तरह उसे मौका नहीं मिल पाएगा अगर उसका मन बहक गया और उसे अपने बेटे का लैंड लेने की तड़प जाग गई तो वह क्या करेगी,,,, किसी तरह से वह अपने मन को समझा रही थी,,,,,,, घर पर पहुंचते-पहुंचते दोपहर हो चुकी थी रात को जिस तरह की तूफानी बारिश हो रही थी उसे देखते हुए मधु को ऐसा ही लग रहा था कि आज भी बारिश होगी लेकिन आसमान पूरी तरह से साफ हो चुका था धूप पूरी तरह से गर्मी भी खेल रही थी घर पर पहुंचकर राजू बैलगाड़ी को घर के सामने खड़ी कर दिया और वहीं पेड़ के सहारे बेल को बांध दिया,,,, राजू तुरंत बेल गाड़ी के पीछे आकर अपनी मां को उतरने में मदद किया और दोनों दरवाजे पर पहुंचे तो दरवाजा बंद था,,,,)

लगता है कोई घर पर नहीं है,,,,( मधु चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखते हुए बोली)

लगता है खेत में गए होंगे,,,,,

(घर पर कोई नहीं है इस बात का ख्याल आते ही राजू का शैतानी दिमाग फिर से दौड़ना शुरू कर दिया राजू के पजामे में हरकत होना शुरू हो गया मधु दरवाजा खोल कर घर में प्रवेश की और पीछे पीछे राजू भी आ गया जिस तरह से हाथ में आई मौके का फायदा राजू और मधु पूरी तरह से उठाकर रात भर मस्ती किए थे उसी तरह से उन दोनों के घर से जाते ही हरिया और उसकी छोटी बहन आपस में जुदाई का अद्भुत खेल खेल रहे थे और वह खेल लगातार जारी था रात भर और दिनभर की चुदाई के बाद हरिया और गुलाबी दोनों खेत में थोड़ा काम करने के लिए चले गए थे और घर पर कोई नहीं था घर में प्रवेश करते ही राजू ने तुरंत दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया था और अपनी मां को तुरंत वह कुछ समझ पाती उससे पहले अपनी गोद में उठा लिया था और गोद में उठाए हुए ही वह उसे उसके कमरे की तरफ ले जा रहा था,,,,)

अरे अरे राजू यह क्या कर रहा है छोड़ मुझे मैं गिर जाऊंगी नीचे उतार,,, अरे पागल हो गया क्या कोई देख लिया तो,,,

अरे यहां कोई देखने वाला नहीं है ना पिताजी और बुआ दोनों खेत पर काम करने गए हैं क्यों ना इस मौके का फायदा उठा लिया जाए,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी उसे समझते देर नहीं लगी कि राजू फिर से उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो चुका है लेकिन मधु उसे ऐसा करने से रोकती नहीं लेकिन वह माना नहीं हो अपनी गोद में उठाए हुए राजू अपनी मां को उसके ही कमरे में ले गया और खटिया पर ले जाकर पटक दिया,,,,)

अरे नहीं राजू पागल हो गया क्या तू तेरे पिताजी आ गए तो गजब हो जाएगा,,,

अरे जब तक वो लोग आएंगे तब तक अपना काम पूरा हो जाएगा और वैसे भी दरवाजा बंद है आने से पहले हमें भी पता चल जाएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां के साथ मनमानी करते हैं उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा मधु से रोकने की पूरी कोशिश करती रही लेकिन राजू नहीं माना और देखते ही देखते अपनी मां के ब्लाउज का सारा बटन खोल कर उसकी नंगी चूची को आजाद कर दिया,,,,)

नहीं पागल ऐसा मत कर अगर किसी ने देख लिया तो हम दोनों बदनाम हो जाएंगे,,,

कोई नहीं देखने वाला है मां,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की दोनों चूची को अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से दबाता हुआ अपने प्यासे होठों को अपनी मां के लाल लाल होठों पर रखकर चुंबन करने लगा आखिरकार रात भर की जबरदस्त चुदाई के बाद एक बार फिर से मधु की बुर पानी छोड़ना शुरू कर दी थी,,, उसे अपनी बुर में दर्द महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी राजू की हरकत ने उसे फिर से उत्तेजित कर दिया था देखते ही देखते राजू पूरी तरह से अपनी मां के होठों को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया था और मधु की भी हालत खराब हो रही थी,,, राजू अपने मुंह को तुरंत अपनी मां के होठों से हटाकर उसकी चूची पर रख दिया और उसे पीना शुरू कर दिया राजू की हरकतें मधु के तन बदन में जवानी का जोश भर रही थी,,, राजू पर पूरी तरह से वासना का भूत सवार हो चुका था घर में किसी की मौजूदगी ना होने पर हुआ इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था और वह अपनी मां की नंगी जवानी पर पूरी तरह से टूट चुका था उसकी दोनों चूचियों को पकड़ पकड़ कर दबाते हुए उसे मुंह में लेकर पी रहा था आखिरकार मधु कब तक अपने सब्र को काबू में कर पाती वह भी अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,, उससे भी रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर पजामे के ऊपर से यह अपने बेटे के खड़े लंड को टटोलने लगी वाकई में राजू का लैंड पूरी तरह से लोहे की छड़ की तरह हो गया था,,, जिसे अपनी हथेली में महसूस करके उसकी गुरबाणी फेंक रही थी,,,, पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए मधु बोली,,)

हाय दैया तेरा तो पूरा खड़ा हो गया है,,,

तुम्हारी बुर में जाने के लिए मचल रहा है,,,(इतना कहते ही राजू अपनी मां की साड़ी की गिठान को खोलने लगा उसकी साड़ी उतारने लगा तो उसे रोकते हुए मधु बोली)

नहीं साड़ी मत उतार कोई आ गया तो पहनने में दिक्कत हो जाएगी,,,

कुछ नहीं होगा वैसे भी चोदने का मजा पूरी तरह से नंगी करने के बाद ही आता है,,,

(मधु अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे की आगे अब उसकी एक भी चलने वाली नहीं है और राजू देखते ही देखते अपनी मां की साड़ी उतार कर पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे नीचे की तरफ एक झटके में ही खींच दिया और मधु भी अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी भारी-भरकम गांव को ऊपर की तरफ उठाती थी ताकि उसका बेटा आराम से उसके पेटीकोट को उतार सके देखते-देखते मधु खटिया में एकदम नंगी हो गई राजू अपनी मां की नंगी जवानी को दिन के उजाले में देखकर और भी ज्यादा मस्त हो गया और तुरंत अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया अपने बेटे के खड़े लंड पर नजर पड़ते ही मधु के होश उड़ गए वह भी अपने बेटे के लंड को दिन के उजाले में देख रही थी और अंदर ही अंदर मचल रही थी,,, राजू इस बार अपनी मां की दोनों टांगों को फैलाने की जगह एक साथ पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और साथ में पकड़े हुए ही जाकर उसकी छाती से उसके घुटने लगा दिया जिससे कमर के नीचे मधु की गोल गोल गाना मटके की तरह नजर आने लगी और राजू तुरंत अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, मधु पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी मस्ती उसकी आंखों में साफ झलक रही थी इस तरह से दोनों टांगों को सता कर चोदने में राजू को और भी ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि इस तरह करने से पहले से ही मधु की बुर कसी हुई थी लेकिन इस स्थिति में उसकी बुर और ज्यादा सख्त और कसी हुई नजर आ रही थी जिससे राजू का लंड उसकी मां की बुर में थोड़ी दिक्कत के साथ लेकिन पूरा आनंद देते हुए अंदर बाहर हो रहा था,,,,।

मधु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा उसके ही कमरे में उसके ही खटिया पर उसकी चुदाई करेगा दोनों पूरी तरह से नंगे थे दोनों के बदन की गर्मी दोनों के लावा को पिघलाने के लिए तैयार थी,,, तकरीबन इस अवस्था में 20-25 मिनट के घमासान चुदाई के बाद मधु की सांसें तेज चलने लगी और यही स्थिति राजू की भी थी राजू तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां को अपनी बांहों में कस लिया और जोर जोर से धक्का लगाने लगा खटिया से चरर चरर की आवाज आ रही थी मधु को इस बात का डर था कि कहीं राजू के तेज झटकों की वजह से खटिया ना टूट जाए लेकिन राजू पूरी तरह से मस्ती में चूर था वह धक्के पर धक्के लगा रहा था देखते ही देखते दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और दोनों एक साथ झड़ गए एक बार फिर से राजू ने अपनी मां की मदमस्त जवानी पर काबू पा लिया था मधु भी अपने बेटे की इस अफरा तफरी भरी चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी,,,

राजू तुरंत खटिया पर से उठा और अपने कपड़े पहन लिया मधु भी धीरे से खटिया पर से उठी और अपने कपड़ों को ढूंढने लगी उसे अपनी बुर में दर्द महसूस हो रहा था वह अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी बुर की स्थिति को देखी तो थोड़ा सा घबरा गई क्योंकि बुर सुजी हुई थी,,, जैसे तैसे करके वह अपने कपड़े पहन कर दुरुस्त हो गई थोड़ी ही देर में हरी और गुलाबी भी घर पर आ गए और उन दोनों को देखकर दोनों खुश हो गए हालांकि यह खुशी ऊपर से ही थी क्योंकि वह लोग और मजा करना चाहते थे वैसे तो गुलाबी को अपने भाई से ज्यादा राजू के साथ मजा आता था लेकिन क्या करें वह अपने भाई को भी पूरा मस्ती देना चाहती थी ताकि दोनों की चोरी पकडे जाने पर दोनों एक दूसरे पर उंगली ना उठा सके,,,,।

रात को सोते समय मधु हल्दी वाला दूध एक गिलास गट गटाकर पी गई क्योंकि वह जानती थी कि इससे उसके दर्द में राहत मिलेगी,,,, रात को जब हरिया ने मधु के कपड़े उतार कर लेंगी करने की कोशिश किया तो मधु ने उसे इंकार कर दी क्योंकि मैं तू जानती थी की सूजी हुई बुर अगर उसका पति देखेगा तो जरूर मन में शंका करेगा,,, थके होने और तबीयत खराब होने का बहाना करके मधु अपने पति को समझा कर सो गई और राजू भी पूरी तरह से थक चुका था इसलिए खटिया पर पडते ही सो गया,,,।
 
मधु 2 दिनों तक ठीक से चल नहीं पा रही थी हल्दी वाला दूध पी पी करवा है अपनी बुर की सूजन और दर्द को कम कर दी थी ऐसा लेकिन पहली बार हुआ था जब उसे अपनी बुर में इस तरह की सूजन और दर्द महसूस हो रहा था जिसकी वजह था उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड लेकिन अपने बेटे को थोड़ा अद्भुत अविस्मरणीय चुदाई का सुख भोग कर वह पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह से भी कोई चोद सकता है,,,, मधु आंगन में झाड़ू लगा रही थी और गुलाबी सब्जी काट रही थी आज तो बहुत राहत था मधु को तभी और ठीक से झाड़ू लगा पा रही थी वरना झुकना भी उसका मुश्किल हो गया था इतनी तेज कमर की दर्द कर रही थी क्योंकि संजू के जबरदस्त धक्को का प्रहार वह पता नहीं कैसे उस समय झेल ले रही थी लेकिन उसका आंसर उसे अब देखने को मिल रहा था,,,,

क्या भाभी अब कमर का दर्द कैसा है,,,,(सब्जी काटते हुए गुलाबी बोली)

अब जा कर रहा था हुआ है वरना बेल गाड़ी में बैठ कर इतना लंबा सफर तय करना मेरे लिए तो बहुत मुश्किल हो गया था इसीलिए मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था,,,,

(मधु जानबूझकर अपने बदन के दर्द का कारण बैलगाड़ी का सफर बता रही थी अब वह यह कैसे खुलकर कह दे कि अपने ही बेटे से चुदवाकर अपने बदन का दर्द मोल ले ली थी,,,, मधु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

मैंने तो आज तक ऐसी तूफानी बारिश कभी नहीं देखी थी,,, इतना आंधी तूफान तेज हवा बादलों का गर्जना सबकुछ कितना भयानक था,,,

हां भाभी तुम सच कह रही हो लेकिन तुम रुकी कहां थी,,, भैया और मुझ को कितनी चिंता हो रही थी पता है,,,।

(गुलाबी भी बहाना बनाते हुए बोल रही थी क्योंकि वह भी रात भर तूफानी बारिश का मजा अपने भाई से चुदवा कर ले रही थी,,,)

अरे वह तो अच्छा हुआ कि गांव से निकलने ही वाले थे कि बारिश शुरू हो गई वरना रास्ते में दिक्कत हो जाती सर छुपाने की जगह नहीं मिलती,,,

अच्छा हुआ भाभी तुम गांव में ही रुक गई,,,

गुलाबी वैद्य जी की पत्नी ने हमें रुकने का प्रबंध कर दिया था तब जाकर हम लोग शांति से रात बिता पाए थे वरना गजब हो जाता,,,,

(इतना कहते हुए मधु अपने आप से ही बोली अरे पूछ मत गुलाबी रात को क्या-क्या हुआ इतना मजा आया कि बता नहीं सकती)

अच्छा भाभी अब तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना,,,

हां धीरे-धीरे आराम हो जाएगा वेद जी ने कहा था कि 15 20 दिन लगेंगे लेकिन एकदम ठीक हो जाओगी,,,

चलो अच्छा है,,,,

(इतना कहकर गुलाबी वापस सब्जी काटने लगी और मधु घर की सफाई करने में जुट गई और दूसरी तरफ,,, राजू आज बेल गाड़ी लेकर नहीं गया था उसके पिताजी गए थे इसलिए वह गांव में इधर-उधर घूम रहा था कि तभी कपड़ों का ढेर लेकर झुमरी उसे खेतों की तरफ जाती हुई दिखाई दी,,,वह, पीछे पीछे जाने लगा,,,,,, झुमरी की चाल बड़ी मतवाली थी,,, ऊंची नीची पगडंडियों पर पैर रखते हुए उसके नितंबों का आकार कभी बढ़ जाता तो कभी सिमट कर रह जाता,,, यह देख कर राजू के तन बदन में झनझनाहट हो रही थी झुमरी से‌ वह सच्चा प्रेम करता था,, और चुनरी के लिए उसके मन में अजीब सी चाहत थी,,, चुनरी के बारे में वह कभी अपने मन में गंदे ख्याल आता नहीं था लेकिन उसको देखकर उसके तन बदन में हलचल जरूर होती थी उसकी खूबसूरती उसके बदन का बनावट राजू को उसकी तरफ हमेशा आकर्षित करती थी,,,,

राजू को लग रहा था कि झुमरी कपड़े धोने के लिए नदी की तरफ जा रही है लेकिन वह खेतों की तरफ घूम गई तो वह भी खेत की तरफ जाने लगा यहां पर किसी का आना-जाना बिल्कुल भी नहीं था चारों तरफ खेत लहलहा रहे थे और बीच की पगडंडी से झुमरी अपनी गांड मटकाते मस्तानी चाल लिए चली जा रही थी,,,, चारों तरफ देखकर तसल्ली कर लेने के बाद राजू पीछे से उसे आवाज लगाते हुए बोला,,,,।

झुमरी ये झुमरी रुको तो कहां चली जा रही हो,,,

(जानी पहचानी आवाज सुनते ही झुमरी माई खड़ी हो गई और पीछे नजर कर कर देखी तो राजू को अपने पीछे पाकर वह एकदम खुश हो गई क्योंकि काफी दिनों बाद दोनों मिल रहे थे राजू लगभग दौड़ता हुआ उसके करीब गया और बोला,,,)

अरे कहां जा रही हो झुमरी,,,?

देख नहीं रहा है कपड़े धोने जा रही हूं तुझे भी चलना है तो बोल,,,,

अरे क्यों नहीं तुम्हारे साथ तो मैं दुनिया के किसी भी कोने में जाने के लिए तैयार हूं,,,

(राजू की यह बात सुनकर झुमरी मन ही मन में मुस्कुराने लगी और बोली)

अच्छा यह बात है मेरे साथ तू कहीं भी चल सकता है,,,

हां क्यों नहीं कहो तो मैं तुम्हारी परछाई बन जाऊं,,,,

परछाई भी तो रात में साथ छोड़ देती है,,,,

तुम्हें तुम्हारी सांसे बन जाऊंगा,,,,

अरे वाह बहुत बड़ी-बड़ी बातें करता है,,, यह सब नहीं करना है लेकिन चलो मेरे साथ कपड़े धोने में मेरी मदद कर दो,,,

अरे इतनी सी बात,,, तुम्हारे खेत में ही चलना है ना ट्यूबवेल के पास,,,

हां वही चलना है,,,,।

(इतना सुनते ही राजू झुमरी के हाथों से कपड़ों का ढेर ले लिया और आगे आगे चलने लगा झुमरि यह देख कर मुस्कुराने लगी झुमरी राजू को पहले से ही पसंद करती थी लेकिन जिस दिन से दूसरे गांव में उसने उसकी इज्जत बचाई थी तब से राजू के लिए उसके मन में प्यार और सम्मान दोनों और ज्यादा बढ़ गया था,,,, देखते ही देखते दोनों लहलहाते खेतों के बीच आ गए ट्यूबवेल के पास राजू कपड़ों का ढेर रखते हुए बोला,,,,)

रुको मैं मशीन चालू कर देता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही राजू पास में ही घास फूस की बनी झोपड़ी के अंदर गया और मशीन चालू कर दिया देखते ही देखते बड़ी सी पाइप में से पानी निकलना शुरू हो गया और झुमरी मुस्कुराते हुए वहां जाकर बैठ गई और कपड़े धोने लगी और तुरंत राजू उसके सामने आकर बैठ गया और कपड़े लेकर दोनों शुरू कर दिया यह देखकर झुमरी उसे रोकते हुए बोली,,,)

अरे यह क्या कर रहा है मैं तो मजाक कर रही थी धोना नहीं है मैं धो दुंगी,,,,

तुम मजाक कर रही थी लेकिन मैं थोड़ी ना मजाक कर रहा था तुम्हारा साथ देने का वादा किया हूं तो पीछे नहीं हटने वाला हूं,,,,

(और इतना कहकर कपड़े धोने लगा,,, झुमरी राजू को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी वह बहुत खुश हो रही थी राजू का भोलापन उसे बहुत अच्छा लगता था,,,, कपड़े धोते हुए राजू झुमरी से बात करते हुए बोला,,,)

और झुमरी चाची का क्या हाल है तबीयत तो ठीक है ना,,,

हां वह तो एकदम ठीक है,,,।

(चाची का जिक्र छेड़ते ही राजू की आंखों के सामने सब कुछ वह सब साफ नजर आने लगा जो कुछ महीने पहले राजू ने किया था श्याम और उसकी मां को रंगे हाथ पकड़ना जिसके बारे में उसकी मां को बिल्कुल भनक तक नहीं थी और उसी का फायदा उठाकर शाम को विश्वास में लेकर उसकी मां के साथ चुदाई करना और श्याम और राजू दोनों का मिलकर श्याम की मां की चुदाई करना बेहद अद्भुत और रोमांचक कारी कांड था जिसके बारे में वह झुमरी को बिल्कुल भी बताना नहीं चाहता था क्योंकि वह इसी राज के चलते श्याम को पूरी तरह से अपने वश में किया हुआ था जैसा वह बोलता था श्याम वैसा ही करता था,,, राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

चाची बहुत अच्छी है ,,,,

हां सो तो है,,,,,,,

अरे राजू तू तो बैलगाड़ी भी चलाने लगा है स्टेशन पर जाता है सवारी ढोने के लिए,,,,

हां पिताजी ने मुझे भी सिखा दिया है,,,

बहुत मजा आता होगा ना दिन भर इधर-उधर घूम लो और पैसे भी कमा लो,,,

हां बहुत मजा आता है रोज नए नए लोग मिलते हैं रेलवे स्टेशन देखने का रोज मौका मिलता है तुझे बताऊं झुमरी जब ट्रेन आती है ना तो छुक छुक की आवाज आती है ऊपर से काला काला धुआं निकलता है इतना मजा आता है उसे देखने में कि पूछो मत मन करता है कि स्टेशन पर ही रह जाऊं,,,,

मेरा भी बहुत मन करता है इधर-उधर घूमने का स्टेशन देखने का मैं कभी स्टेशन नहीं देखी हूं तू कभी गाड़ी में बैठा है,,,

नहीं तो और वैसे भी हमें कौन सा दूसरे शहर जाना है,,,

हां यह भी है,,,,,

तुम रेलवे स्टेशन देखना चाहती हो बैलगाड़ी में बैठना चाहती हो,,,

हां राजू लेकिन कौन दिखाएगा कौन बैठाएगा ,,,,

अरे मैं हूं ना झुमरी तुम चिंता क्यों करती हो मैं तुम्हें बैलगाड़ी पर लेकर घुमाऊंगा स्टेशन के दिखाऊंगा और गाड़ी भी दिखाऊंगा देखना बहुत मजा आएगा,,,,

सच राजू,,,,

कसम से झुमरी मैं तुमसे कभी झूठ नहीं बोलता,,,,

राजू मैं बहुत खुश हूं कि तू मेरा इतना ख्याल रखता है,,,,

(इतना कहकर वह वापस कपड़े धोने लगी और राजू उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया नाक में छोटी सी नथनी पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसका चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत होता है बालों की लट है उसके खूबसूरत चेहरे पर बार-बार अठखेलियां कर रही थी जिसे वह बार-बार अपनी हथेली का सहारा लेकर उसे अपने कान के पीछे कर देती थी लेकिन वापस हवा के झोंके में उसकी बालों की लटे उसके चेहरे पर आ जाती थी,,,, ट्यूबवेल में से जोरो से पानी के गिरने की वजह से उसकी बौछार उसकी कुर्ती को भिगो रही थी जो कि कुर्ती के आगे वाला भाग लिख रहा था और कुर्ती के भीगने की वजह से उसकी दोनों नौरंगिया उभरकर साफ नजर आ रहे थे क्योंकि कपड़ा उससे चिपक गया था यह देखकर राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी राजू बार-बार अपनी नजरों को उधर से हटाना चाहता था लेकिन झुमरी के खूबसूरत बदन का आकर्षण इतना जबरदस्त था कि राजू अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और बार-बार उसकी नजर उसकी दोनों नारंगी ऊपर चली जा रही थी इस बात का आभास झुमरी को बिल्कुल भी नहीं,,, था,,,,,।

देखते ही देखते कपड़े धोते समय पानी में राजू के भी कपड़े गीले होने लगे थे उसका पैजामा पूरी तरह से भीग चुका था,,, राजू कपड़ों के ढेर में से अनजाने में ही झुमरी की सलवार को लेकर जो रहा था झुमरी जब उसके हाथों में अपनी सलवार देखी तो शर्म से पानी पानी हो गई उसे बड़ा अजीब लग रहा था कि एक जवान लड़का उसकी सलवार को अपने हाथों से धो रहा है,,,, झुमरी उसके हाथ से अपनी सलवार को वापस ले लेना चाहती थी लेकिन ऐसा करने में उसे शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि अगर वह ऐसा करती तो राजू उसके बारे में क्या सोचता शायद उसकी सलवार के बारे में सोच कर उसे भी इस बात का एहसास होता की सलवार की वजह से वह शर्मा रही है,,,, इसलिए राजू के हाथ में से सलवार लेने की उसकी हिम्मत नहीं हुई और राजू देखते देखे उसकी सलवार को एकदम धोकर पानी से भरी बाल्टी में डाल दिया था,,, झुमरी की सलवार को राजू भी अच्छी तरह से पहचानता था इसलिए उसकी सलवार धोते समय उसके बदन में भी उत्तेजना का एहसास हो रहा था सलवार के ऊपरी हिस्से पर साबुन लगाते समय राजू इस तरह की कल्पना कर रहा था कि मानो कि जैसे वह उसकी सलवार पर नहीं बल्कि झुमरी की गांड पर साबुन लगा रहा हो,,, क्योंकि राजू जानता था कि इसी सलवार के अंदर झुमरी अपना बेशकीमती खजाना छुपाती है जिसके बारे में सोचकर वह पूरी तरह से मस्त हो जाता है,,,,

खड़ी दुपहरी में खेतों के बीच ट्यूबवेल के नीचे कपड़े धोने का सिलसिला लगातार जारी था पानी में रहने की वजह से राजू का पैजामा पूरी तरह से गिला हो चुका था और राजू दूसरे कपड़े लेने के लिए जैसे ही खड़ा हुआ झुमरी की नजर राजू के गीले पर जाने पर पड़ी और पजामे के अंदर टनटनाए हुए उसके लंड पर जोकि पैजामा पूरी तरह से गीला होने की वजह से राजू के लंड का आकार उसका अक्स एकदम साफ नजर आ रहा था जिसे देखकर खुद झुमरी के तन बदन में आग लगने लगी झुमरी ने अभी तक जवान लंड के दर्शन नहीं किए थे लंड के आकार के बारे में उसने सिर्फ कल्पना ही की थी उसे देखी नहीं थी लेकिन आज पहली बार राजू के पजामे में खड़े लंड को देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच अजीब सी हलचल होने लगी थी वह तुरंत अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी और राजू को भी इस बात का आभास नहीं था वह भी कपड़े लेकर वापस नीचे बैठकर कपड़े धोना शुरू कर दिया था,,,,

अभी तक झुमरी के लिए सब कुछ सही चल रहा था लेकिन संजू के लंड का नजारा देखकर वह असहज महसूस कर रही थी,,, देखते ही देखते झुमरी का भी कुर्ती पूरी तरह से पानी में गीला हो गया था और उसमें से भी झुमरी की लाजवाब गोल-गोल नारंगी एकदम साफ नजर आने लगी थी जिस पर बार-बार राजू की नजर चली जा रही थी कपड़े धोते समय झुमरी चोर नजरों से राजू की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपनी छातियों की तरफ पाकर वो एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई वह अपनी नजरों को नीचे छुड़ाकर अपनी छातियों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए उसकी चूची एकदम साफ झलक रही थी उसका आकार कुर्ती में होने के बावजूद भी एकदम साफ नजर आ रहा था जिसे राजू अपनी प्यासी आंखों से देख रहा था अब झुमरी के लिए यह राजू का देखना असहनीय होता जा रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी ऐसा लग रहा था कि मानो राजू अपनी नजरों से उसके बदन में चीकोटी काट रहा हो वह कसमसा रही थी,,,, झुमरी अपनी छातियों को ढक लेना चाहती थी लेकिन राजू की आंखों के सामने ऐसा करने से वह और भी ज्यादा शर्म का अनुभव करने लगती है इसलिए ऐसा करने से हिचकी आ रही थी वह ऐसा जता रही थी कि मानो राजू की हरकत का उसे अंदाजा ही नहीं है,,,, देखते ही देखते सारे कपड़े दोनों ने मिलकर धो दिए थे अब उन्हें सूखने के लिए डालना था और इसीलिए राजू फिर से खड़ा हो गया और इस बार गीले पजामे में से राजू के लंड का आकार एकदम साफ नजर आने लगा एक बार फिर से झुमरी उस दृश्य को देखकर गनगना गई,,,, राजू को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि झुमरी उसके पजामे में उसके टनटन आए हुए लंड को देख रही है वह अपनी ही मस्ती में मशगूल था वह गीले कपड़ों को लेकर सूखने के लिए डालने लगा जंगली झाड़ियां उगी हुई थी उसी पर वह एक-एक करके सारे कपड़ों को डाल रहा था और झुमरी भी उसके साथ में उसका हाथ बंटा रही थी,,, दोनों करीब-करीब एकदम पास में ही खड़े थे बस दोनों के बीच 2 फुट की ही दूरी थी राजू भी गीले कपड़ों को सूखने के लिए डाल रहा था और झुमरी भी गीले कपड़ों को सूखने के लिए जा रही थी लेकिन उसकी तिरछी नजर राजू के पजामे पर टिकी हुई थी जिसमें उसका मोटा तगड़ा लंड झुमरी के होश उड़ा रहा था राजू को इस बात का आभास तक नहीं था लेकिन जैसे ही वह झुमरी की तरफ देखा और उसकी झुकी हुई नजरों को अपने पजामे की तरफ देखा तो उसके भी तन बदन में आग लग गई उसे अब जाकर इस बात का अहसास हुआ कि पजामे के अंदर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका है,,,, झुमरी के सामने उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह झुमरी की नजरों से अपने लंड को छुपाए या इसी तरह से सब कुछ चलने दे,,,,, झुमरी की आंखों के सामने अपने टनटनाए लंड को ढकना यह हरकत झुमरी को शर्मिंदा कर सकती थी इसलिए राजू इस तरह की हरकत करना नहीं चाहता था इसलिए जैसा चल रहा है वैसा ही वह अनजान बनकर चलने देना चाहता था राजू को अब मजा आने लगा था क्योंकि झुमरी उसकी मर्दानगी की तरफ देख रही थी झुमरी के तन बदन में और ज्यादा आग लगाने के लिए राजू अपने गीले हो चले कुर्ते को झुमरी की आंखों के सामने ही उतार दिया और कुर्ते को उतारते ही राजू की चौड़ी छाती एकदम नंगी हो गई और यह देखकर झुमरी के बदन में हलचल सी होने लगी,,,,,,,,, राजू की चौड़ी नंगी छाती सुनहरी धूप में चमक रही थी,, राजू की नंगी चौड़ी छाती की तरफ देखकर झुमरी शर्मा रही थी,,, राजू अपने कुर्ते को अपने हाथों में लेकर उसका पानी गारते हुए बोला,,,।

मैं भी पूरा भीग गया इसे भी सुखाने के लिए डालना पड़ेगा,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने खिले कुर्ते को झाड़ियों पर रखकर सूखने के लिए छोड़ दिया झुमरी वापस उसी जगह पर आ गई थी उसे नहाना था,,,, लेकिन राजू की मौजूदगी में उसे नहाने में शर्म आ रही थी हालांकि पहली मुलाकात में ही राजू है झुमरी को संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में नहाते हुए देखा था लेकिन इस बात से उस समय झुमरी अनजान थी इसलिए उस समय उसे शर्म का एहसास नहीं हुआ था लेकिन आज राजू से उसे शर्म आ रही थी राजू की उसी जगह पर आ गया था जानबूझकर राजू झुमरी की आंखों के सामने ही खड़ा था ताकि झुमरी की नजर उसके तने हुए लंड पर चला जाए और ऐसा ही हो रहा था झुमरी चोर नजरों से राजू के पजामे की तरफ देख रही थी और उसे देख कर अंदर ही अंदर सिहर उठ रही थी,,,,। झुमरी को इस तरह से खड़ी देखकर राजू बोला,,,।

अब बोलो झुमरी क्या करना है,,,?

करना क्या है मुझे नहाना है,,,

तो नहाओ ना,,,

तुम्हारे सामने नहीं नहीं तुम जाओ मैं नहा लूंगी,,,

अब क्यों शर्मा रही हो जानती हो ना मैं तुम्हें नहाते हुए देख चुका हूं और वह भी एकदम नंगी,,,

(राजू के मुंह से अपने लिए नंगी शब्द सुनकर झुमरी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,,, फिर भी वह जानबूझकर राजू के शब्दों पर गौर ना करने का बहाना करते हुए सहज रूप से बोली,,,)

अरे वह तो अनजाने में ही लेकिन अभी तो मैं सब कुछ जान रही हो ना अभी चले जाओ मुझे शर्म आ रही है,,,

तुम्हें शर्म आ रही है लेकिन मुझे तो अच्छा लग रहा है एक बार फिर से मैं तुम्हें उसी हालत में देखना चाहता हूं जैसा कि मैं पहली बार देखा था मेरी आंखें फटी की फटी रह गई थी तुम्हारे नंगे बदन को देख कर,,,,,(राजू झुमरी के साथ थोड़ा खोलना चाहता था इसलिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहा था और ऐसा शब्दों का प्रयोग झुमरी के सामने करते हुए उसके लंड का कड़क पन और ज्यादा बढ़ रहा था जिस पर बार-बार झुमरी की नजर चली जा रही थी और उसे देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल हो रही थी,,,,)

वह तो अनजाने में उस समय की बात कुछ और थी अभी चले जाओ,,,

झुमरी तुम खामखा शर्म कर रही हो और वह भी मेरे सामने तुम जानती हो मैं तुमसे प्यार करता हूं और वह भी सच्चा प्यार झुमरी मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं तुम्हारे साथ अपना जीवन को जानना चाहता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि तुमसे अच्छी खूबसूरत मुझे दूसरी जीवनसाथी नहीं मिल सकती क्या तुम मुझसे शादी करना चाहोगी,,,,

यह क्या कह रहे हो राजू,,,,(झुमरी शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमाते हुए ) मुझसे इस तरह की बात मत करो मुझे शर्म आती है,,,, तुम यहां से चले जाओ,,,

चला जाऊंगा लेकिन पहले एक बात का खुलासा कर दूं क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो या नहीं या फिर मैं खामखा तुम्हारे पीछे अपना समय बर्बाद कर रहा हूं,,,

(राजू के मुंह से प्यार का इजहार सुनकर झुमरी के तन बदन में उत्तेजना के साथ-साथ आनंद की फुहार फूटने लगी वह राजू के मुंह से यही सुनना चाहती थी क्योंकि वह भी राजू से विवाह का सपना देखने लगी थी लेकिन अपने प्यार का इजहार करने में उसे शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी हिम्मत करते हुए वह बोली)

राजू मैं भी तुमसे प्यार करती हूं अब और मुझसे मत पूछो चले जाओ यहां से मुझे शर्म आ रही है,,,

(राजू झुमरी के मुंह से यह सुनकर एकदम खुशी से चूमने लगा और एकदम प्रसन्न होते हुए बोला)

बस बस झुमरी मुझे मेरे सवाल का जवाब देकर तुमने मुझे खुश कर दी हो मैं चला जाता हूं तुम नहा लो लेकिन उस दिन की तरह ही नहाना एकदम नंगी होकर क्योंकि तुम नंगी होकर जब भी नहाती हो बहुत खूबसूरत लगती हो ऐसा लगता है कि स्वर्ग से कोई अप्सरा नीचे धरती पर उतर आई हो,,,।

(राजू के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर झुमरी अंदर ही अंदर बेहद प्रसन्न होने लगी और राजू इतना कहकर जाने लगा झुमरी उसे रोक लेना चाहती थी उसे अपनी आंखों के सामने बैठ आना चाहती थी और उसकी ही बातों को मानते हुए अपने कपड़े उतार कर उसके सामने नंगी रहना चाहती थी लेकिन ऐसा करने में उसे शर्म महसूस हो रही थी वह कैसे भला राजू को रोक लेती है और उसकी आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाती इसलिए वह उसे जाते हुए देखती रही थोड़ा दुख से हो रहा था लेकिन फिर भी अपने मन को इस बात से मना ली थी कि राजू उससे प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है देखते ही देखते राजू उसकी आंखों से ओझल हो गया और वह राजू के ख्यालों में खो कर धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार कर नंगी होने लगी,,,, अपनी गीले कपड़ों को उतारते हुए वह बार-बार उसी दिशा में देख ले रही थी जहां से राजू गया था,,,
 
राजू का यूं चले जाना झुमरी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था,,,,, ना जाने क्यों अब उसके मन में यह भावना जागने लगी थी कि काश राजू उसकी आंखों के सामने खड़ा होता और वह उसकी आंखों के सामने अपने बदन से एक-एक कपड़े उतार कर उसके सामने नंगी होती लेकिन ऐसा नहीं हो पाया था राजू को वो खुद जाने के लिए बोली थी क्योंकि उसे शर्म का एहसास हो रहा था आखिरकार वह कैसे कह दे कि तुम खड़े हो मैं अपने कपड़े उतार कर नंगी होती है एक लड़की के लिए यह पल बेहद अजीब होता है और वैसे भी झुमरी और राजू आपस में इतने खुले भी नहीं थे भले ही दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे लेकिन दोनों के बीच अभी भी एक दूरी थी जो कि बेहद सीमित रूप से थी दोनों के बीच, भले ही प्रेम संबंध का रिश्ता पनप रहा था लेकिन इस तरह का खुलापन बिल्कुल भी नहीं था कि दोनों एक दूसरे के सामने कुछ भी करने को तैयार हो जाए लेकिन एक प्रेमिका होने के नाते झुमरी को अपने प्रेमी को इस तरह से नाराज नहीं करना चाहिए था यह सा महसूस हो रहा था और उसे दुख भी हो रहा था,,,,,, मन मसोसकर झुमरी अपने बदन से एक-एक करके कपड़ों को उतारना शुरू कर दी थी चिलचिलाती धूप में खेतों के बीच ट्यूबवेल के पास झुमरी राजू के ख्यालों में खोई हुई नंगी होने की तैयारी कर रही थी हालांकि वह अपने सारे कपड़े उतार कर कभी भी नंगी होकर इस तरह से खेत में नहीं आती थी लेकिन आज राजू की बात सुनकर ना जाने क्यों अपने बदन से एक-एक करके सारे कपड़ों को उतार दी चली जा रही थी ‌ पहले कुर्ती कुर्ती के उतारते हैं उसकी मदमस्त कर देने वाली दोनों नौरंगिया अपना जलवा बिखेरने लकी छातियों की शोभा बढ़ा रही उसकी दोनों नौरंगिया बहुत ही सीमित आकार में थी लेकिन बेहद जानलेवा आकर्षक नजर आ रही थी,,,,,, अपनी चुचियों की तरफ नजरे नीचे करके देखने पर झुमरी को अफसोस हो रहा था कि क्या फायदा अगर राजू की नजर इस पर ना पड़े तो यही सोचकर वह अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी वह अपने मन में यह सोच रही थी कि कहां सर आज उसकी आंखों के सामने खड़ा होता है तो उसके सामने कपड़े उतारने में कितना मजा आता भले ही वह शर्म से शर्मिंदा हो रही होती लेकिन फिर भी एक अद्भुत सुख उसके तन बदन में हिचकोले खा रहा होता,,,,, वह राजू के ख्यालों में खोई हुई धीरे-धीरे अपनी सलवार की डोरी खोल रही थी इस बात से अनजान की राजू भले ही उसकी आंखों के सामने से ओझल हो गया था लेकिन घूम कर वह ठीक उसके पीछे मोटे से पेड़ के पीछे आकर खड़ा हो गया था और वहां खड़े होकर झुमरी की गतिविधियों को देखकर मस्त हो रहा था राजू अपनी आंखों से उसे कुर्ती उतारता हुआ देख लिया था उसकी नंगी चिकनी पीठ देखकर राजू अंदर ही अंदर उत्तेजित हुआ जा रहा था दूसरी तरफ झुमरी की नाजुक उंगलियां उसकी सलवार की डोरी में उलझी हुई थी जिसे व खींचकर अपनी सलवार को ढीली कर चुकी थी सलवार के ढीली होते ही राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा वह जानता था कि किसी भी पल झुमरी अपनी सलवार उतार कर नंगी हो जाएगी और उसके नंगे बदन को एक बार फिर से राजू अपनी आंखों से देख कर मस्त हो जाएगा,,,, झुमरी अपनी सलवार को उतारने के लिए थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गई और सलवार को नीचे की तरफ खींचने लगी और देखते ही देखते उसकी उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली गांड सुनहरी धूप में चमकने लगी यह देखकर राजू के तन बदन में आग लगे हुए झुमरी की गांड की दोनों फांकें एकदम जलवा बिखेर रही थी गांड की बीच की फांक इतनी गहरी थी कि राजू का मन उसमें डूब जाने को कर रहा था,,, देखते ही देखते झुमरी अपने बदन पर से सलवार उतार कर एकदम नंगी हो गई नंगी होने का भी एक अपना अलग मजा होता है जिसका एहसास झुमरी को अच्छी तरह से हो रहा था यह दूसरा मौका था जब राजू झुमरी को पूरी तरह से नंगी देख रहा था,,,,,।

Jhumari



झुमरी की खूबसूरत जवानी से छलकती हुई नंगा बदन देखकर राजू का लैंड अपने आप ही खड़ा होने लगा था हालांकि वह झुमरी से गंदा नहीं बल्कि सच्चा प्यार करता था लेकिन फिर भी अपनी आंखों के सामने अपनी प्रेमिका को लगना अवस्था में देखकर उसकी भावनाएं अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी वह ना चाहते हुए भी उसका लंड खड़ा होने लगा था आखिरकार कर भी क्या सकता था राजू अपने मन पर काबू कर सकता था लेकिन उसका लंड बिल्कुल भी नहीं क्योंकि लंड की बेहद पसंदीदा और खूबसूरत चीज उसकी आंखों के सामने थी एक खूबसूरत लड़की की गांड हालांकि अभी तक ना तो राजू ने और ना ही उसके लंड ने झुमरी की बुर के दर्शन नहीं किए थे लेकिन फिर भी इस बात का एहसास उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर दे रहा था कि उसकी आंखों के सामने झुमरी पूरी तरह से नंगी है उसकी खूबसूरत बेशकीमती खजाने को छुपाने के लिए उसके पास कपड़े का एक रेशा तक नहीं है,,,,,, क्योंकि अपने बदन से उतारे हुए कपड़े भी वह पानी में गिरा कर उसे गिला कर चुकी थी और सूखे कपड़े घास फूस की बनी झोपड़ी में रखे हुए थे वहां तक जाने के लिए भी उसे नंगी ही जाना पड़ता ऐसे हालात में राजू का उसकी आंखों के सामने आ जाना बेहद उत्तेजनात्मक स्थिति को पैदा कर सकता था लेकिन राजू अभी अपने आप को रोके हुए था मोटे से पेड़ के पीछे छुप कर वह अपने पूरे अस्तित्व को छुपा लिया था झुमरी को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसके ठीक पीछे ही बड़े से पेड़ के पीछे है राजू छुपा हुआ है उसके नंगे बदन को अपनी आंखों से देख रहा है अगर शायद यह उसे पता चल जाता तो उसकी बुर से मदन रस टपकने लगता,,,,।

खेतों के बीच का यह स्थान पूरी तरह से मदहोशी में गर्म होता चला जा रहा था वातावरण की गर्मी से ज्यादा राजू को झुमरी की मदमस्त कर देने वाली जवानी की गर्मी महसूस हो रही थी,,, देखते ही देखते राजू का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,, झुमरी अपनी गोलाकार गांड को वहीं रखे बड़े से पत्थर पर रखकर बैठ गई और ट्यूबवेल की पाइप से गिर रहे पानी को अपने हाथों में लेकर अपने बदन पर गिराने लगी बदन की गर्मी ठंडे पानी से थोड़ी बहुत राहत महसूस करवा रही थी लेकिन झुमरी को बिल्कुल भी सुकून नहीं था वह एकदम से गिरे पानी के नीचे सर रखकर बैठ गई और देखते-देखते पानी ने पूरी तरह से झुमरी को अपनी बाहों में लेकर उसे अपने शीतलता में भिगो दिया,,, झुमरी का बदन पूरी तरह से पानी में गीला हो गया उसके खुले हुए बाल पानी में भीग कर और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगे अभी तक राजू को सिर्फ उसकी पीठ ही नजर आ रही थी और झुमरी तुरंत साबुन लेने के लिए राजू की तरफ घूम गई और राजू को उसकी गोल-गोल चूचियां नजर आने लगी हालांकि वह उस समय भी बैठे हुई थी इसलिए उसकी बुर को कितनी दूरी से देख पाना नामुमकिन सा लग रहा था क्योंकि पानी भी लगातार उसके बदन पर गिर रहा था जिससे उसकी बुर वाली जगह पानी की धार के पीछे छि‌प सी गई थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे पानी की धार भी झुमरी की मदद करते हुए राजू को तड़पाने में अपना अहम भूमिका निभा रही हो,,,, साबुन को पाते ही झुमरी फिर से सामने की तरफ मुंह करके बैठ गई और अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू कर दी अपनी गीले बालों पर साबुन लगाकर उसके झाग में नहाई हुई जो मरी और भी ज्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी देखते ही देखते झुमरी अपने पूरे बदन पर साबुन लगा दी थी लेकिन पीठ तक उसका हाथ पहुंचने पा रहा था वह बार-बार कोशिश कर रही थी लेकिन ठीक तरह से उसका हाथ पीठ पर पहुंच नहीं पा रहा था इसलिए राजू किस बात का एहसास हो गया था कि यही उसके पास मौका है झुमरी की आंखों के सामने आने का इसलिए वह चोर कदमों से उस बड़े से पेड़ के पीछे से बाहर निकला और धीरे-धीरे झूमर की तरह बाकी बढ़ने लगा और ठीक उसके पीछे पहुंचकर बोला,,,।

तुम्हें दिक्कत ना हो तो मैं लगा दूं साबुन,,,

(इतना सुनते ही झुमरी एकदम से चौक गए वह एकदम से घबरा गई और पीछे मुड़कर देखी तो उसके ठीक पीछे राजू खड़ा था राजू को अपने पीछे खड़ा देखकर उसकी जान में जान आई लेकिन उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से नंगी होने के नाते वह अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी वह अपने आप में ही सिमटने लगी,,, झुमरी की मर्जी जाने बिना राजू ठीक उसके पीछे बैठ गया और उसके हाथ से साबुन लेकर उसकी नंगी चिकनी पीठ पर लगाना शुरू कर दिया एक मर्दाना हाथों को अपने बदन पर झुमरी पहली बार महसूस कर रही थी झुमरी का रोम-रोम एकदम झनझना जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, उसके सपनों का राजकुमार ठीक उसके पीछे बैठकर उसकी नंगे बदन पर साबुन लगा रहा था यह एहसास ही उसके लिए बहुत ज्यादा मायने रखता था एक अद्भुत सुख उसके पूरे बदन में घर कर गया था,,,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की हालत खराब होती जा रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि पानी की धार में भी उसकी बुर पानी फेंक रही थी राजू अपने आप को खुश किस्मत समझता हुआ झुमरी के गोरे नंगे बदन पर साबुन ऊपर से नीचे की तरफ लगा रहा था वह जिस पर पत्थर पर बैठी हुई थी उस पर बैठने की वजह से उसकी गोलाकार शुगड गांड थोड़ी सी फैली हुई नजर आने लगी थी और उसके बीच की पतली दरार का ऊपर का बिंदु साफ नजर आ रहा था जिसे देखकर राजू का लंड तना जा रहा था,,,,,।

चिलचिलाती धूप में भी शीतल हवा बह रही थी जिससे राजू और झुमरी दोनों को राहत महसूस हो रही थी,,, झुमरी एकदम शांत हो चुकी थी अपने व्यक्तित्व से विरुद्ध वह कुछ भी नहीं बोल पा रही थी वह कभी भी शांत रहने वाली नहीं थी वह कभी भी किसी को कुछ भी बोल देती थी खास करके उन लड़कों को जो उससे इधर-उधर की गंदी बातें कर देते थे उन्हें वह झाड़ देती थी लेकिन इस समय वह एकदम मूक हो चुकी थी क्योंकि इस समय वह अपने प्रेमी के आगोश में थी अपने प्रेमी के हाथ को अपने नंगे बदन पर महसूस कर रही थी और इसी का फायदा राजू पूरी तरह से उठा देना चाहता था झुमरी को कुछ भी ना बोलता देखकर और ना ही उसका विरोध करता देखकर राजू की हिम्मत बढ़ने लगे बस तुरंत अपने दोनों हाथों को साबुन लगाने के बहाने पेट से होते हुए आगे की तरफ लाया और उसकी नंगी चूचियों पर साबुन लगाने के बहाने अपनी दोनों हथेली में उसकी दोनों नारंगीयो को लेकर दबाना शुरू कर देना,,, झुमरी के लिए यह सब कुछ नया था उसके तन बदन में राजू की हरकत से आग लग गई उसके बदन से उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू इस तरह की हरकत कर देगा लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उससे ना जाने क्यों झुमरी कमजोर पड़ती जा रही थी राजू का विरोध करने की उसमें बिलकुल भी हिम्मत नहीं थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह खुद ही राजू को आगे बढ़ने की इजाजत दे रही हो,,,, साबुन के झाग फिसलती हुई झुमरी की नंगी चूचियां राजू की हथेली में सामान ही रही थी ऐसा नहीं थी कि झुमरी की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी हो थी तो वह नारंगी जैसी ही गोल-गोल लेकिन साबुन के झाग की फिसलन की वजह से वह राजू की हथेली में ठीक से आ नहीं रही थी,,,,, राजू झुमरी की चुचियों को उत्तेजना के मारे कसकस कर दबाना चाहता था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था लेकिन उसकी यह हरकत झुमरी के तन बदन में उत्तेजना की फुहार भर दे रही थी जो कि उसकी गुलाबी छेद से बाहर आ रही थी,,,। धीरे-धीरे झुमरी की सांसे गर्म हो रही थी क्योंकि लगातार राजू झुमरी की चूची को दबा रहा था साबुन लगाने के बहाने उसके बदन से छेड़छाड़ ले रहा था और इसका विरोध झुमरी बिल्कुल भी नहीं कर रही थी क्योंकि उसके जवान बदन में जवानी की तरंगे उठ रही थी उसे पहली बार मर्द के स्पर्श का अनुभव हो रहा था उससे मिलने वाले आनंद को वह अपने अंदर महसूस करके एकदम मदहोश हुए जा रही थी,,,,।

राजू ईसमौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था,,, उसकी हथेलियां बड़ी तेजी से झुमरी की चुचियों पर चल रही थी झुमरी की चूचियां दबाने मुझे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी क्योंकि उसकी चूचियां छोटी होने के बावजूद भी उसकी हथेली में ठीक से आ नहीं रही थी,,,, राजू की हरकत की वजह से उसके मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी,,,।

सहरहहहह आहहहरहह राजू यह क्या कर रहा है,,,,ऊममममम

कुछ नहीं झुमरी तुम्हारी खूबसूरत चूची का नाप ले रहा हूं ताकि जब हम दोनों का विवाह होगा तो तुम्हारे नाप का ब्लाउज सिलवा सकूं,,,

आहहहहह राजू क्या सच में तू मुझसे शादी करेगा,,,

हां झुमरी मैं तुझसे प्यार करता हूं सच्चा प्यार करता हूं मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं और तुझसे ही शादी करके रहूंगा,,,,(वास्तविकता यही थी कि राजू सच में झुमरी से शादी करना चाहता था अपना घर गृहस्ती बसाना चाहता था लेकिन इस समय राजू विवाह का वास्ता देकर झुमरी को पूरी तरह से अपने वश में कर लेना चाहता था क्योंकि वह सुम्मरी के व्यक्तित्व से अच्छी तरह से वाकिफ था,,,,)

ओहहहह राजू छोड़ मुझे कोई देख लेगा,,,

यहां कोई नहीं आने वाला झुमरी इतनी खड़ी दुपहरी में गांव के लोग घर में ही सोते हैं उन्हें फुर्सत नहीं होती खेतों में आने की,,,,,(ईतना कहने के साथ ही राजू झुमरी के गर्दन के ऊपरी हिस्से पर चुंबन की बारिश कर दिया राजू को इस बात की अच्छी तरह से पता था कि औरतें कान और गले के बीच में चुंबन करने से और ज्यादा उत्तेजित हो जाती है और यही हो रहा था झुमरी के तन बदन में आग लग रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था एक तरह से झुमरी ने किसी के आने का बहाना देकर राजू को और भी आगे बढ़ने की इजाजत दे दी थी क्योंकि उसमें उसकी भी हा थी,,,, झुमरी की सांसें फूल रही थी फिर भी वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

कोई आ गया तो राजू,,,,

कोई नहीं आने वाला झुमरी मेरा विश्वास करो ,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी दहकती हुई बुर पर रख दिया,,, अपनी बुर पर राजू की हथेली का स्पर्श होते ही वह एकदम से चौक गई क्योंकि उसके जीवन का यह पहला मौका था जब किसी मर्दाना हाथ को वह अपनी बुर पर महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से बौखला गई थी उत्तेजना के चलते उसकी सांसे और ज्यादा तेजी से चलने लगी थी,,, और वह अपनी उखडती हुई सांसो के साथ राजू से बोली,,,)

ओहहहह राजू है क्या कर रहा है मैं पागल हो जाऊंगी,,,

कुछ नहीं अपनी होने वाली बीवी से प्यार कर रहा हूं,,

(राजू के मुंह से अपने लिए बीवी शब्द सुनकर झुमरी के तन बदन में खुशी के साथ-साथ उत्तेजना की लहर और ज्यादा उठने लग रही थी,,,,)

आहहहहह राजू ऐसा ना करो मैं मर जाऊंगी,,,,

(इतना कहते हुए झुमरी मदहोशी के हालत में पूरी तरह से अपनी पीठ को राजू की छाती से टिका दी थी वैसे भी राजू कमर के ऊपर से पूरी तरह से लगा था नंगी पीठ का स्पर्श अपने बदन पर होते ही राजू का लंड और ज्यादा टनटना गया जो कि सीधे पजामे में होने के बावजूद भी झुमरी की पीठ पर ठोकर मार रहा था,,, जोकि बिल्कुल भी अनुभव ना होने के बावजूद भी झुमरी को इस बात का एहसास तो हो गया था कि उसकी पीठ पर क्या चुप रही है और इस बात का एहसास सेवा पूरी तरह से उत्तेजना के मारे गनगना गई थी और देखते ही देखते वह अपने संपूर्ण वजूद को राजू की नंगी छाती पर टिका दी थी,,,, राजू लगातार एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी बुर की हालत खराब कर रहा था,,,,, और ऊपर से ट्यूबवेल की पाइप में से पानी गिर रहा था जो कि दोनों के बदन को भी हो रही थी दोनों एक साथ ट्यूबवेल के पानी के नीचे नहा रहे थे और आनंद ले रहे थे,,,,, झुमरी की हालत को देखते हुए राजू समझ गया था कि अब झुमरी पूरी तरह से लाइन पर आ गई है और देखते ही देखते वह अपनी एक उंगली को उसकी बुर के अंदर घुसेडना शुरू कर दिया बुर पहले से ही पानी छोड़ रही थी इसलिए देखते ही देखते राजू अपनी उंगली को उसकी बुर के अंदर प्रवेश कराना शुरू कर दिया था और,,, जैसे ही झुमरी को इस बात का एहसास हुआ वह तुरंत अपना हाथ राजू के हाथ पर रख कर उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,,)

नहीं राजू नहीं,,,,, मुझे शर्म आ रही है,,,

झुमरी मेरी रानी अपने होने वाले पति से शर्माने की जरूरत नहीं है अगर शर्म आओगी तो अपने पति से मजा कैसे ले पाओगी,,,

(राजू अपनी बातों में झुमरी को पूरी तरह से उलझा रहा था और झुमरी राजू की इस तरह की बातें सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,, देखते ही देखते राजू अपनी मनमानी करते हुए झुमरी की बुर में अपनी एक उंगली को अंदर तक प्रवेश करा दिया अंदर उंगली जाते हैं राजू को इस बात का अहसास हो गया कि झुमरी की जवानी बहुत ज्यादा गर्म है क्योंकि उसकी बुर के अंदर उसकी उंगली पूरी तरह से तप रही थी,,,, राजू को मजा आ रहा था राजू एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसकी बुर से खेल रहा था जिस पर झुमरी ने आज तक किसी की नजर तक नहीं पड़ने दी थी हाथ लगाने की तो बात ही दूर थी लेकिन राजू की किस्मत बड़े जोरों पर थी क्योंकि झुमरी मन ही मन राजू को पसंद करती थी उसे पति के रूप में देखना चाहती थी इसलिए राजू को अपने बदन से खेलने की इजाजत दे रही थी वरना उसकी जगह कोई और होता तो हंसीया से उसका हाथ काट देती,,,,

राजू को इस खेल में मजा आने लगा था खड़ी दुपहरी में खेतों के बीच यहां और कोई नहीं था खुले में कुछ और ज्यादा आनंद की अनुभूति हो रही थी झुमरी का तो यह पहली बार था इसलिए उसके तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी जिसे संभालना उसके लिए नामुमकिन सा होता जा रहा था बार-बार उसकी बुर पानी फेंक दे रही थी और राजू तो इस खेल में पूरी तरह से माहिर हो चुका था उसे इस बात का अच्छी तरह से ज्ञान था कि औरतों को कैसे खुश किया जाता है कैसे उन्हें अपने बस में किया जाता है और वही सारा तरीका वहां झुमरी के पक्ष में लगा रहा था और झुमरी भी उसके तरीकों से पूरी तरह से मदहोश ‌हुए जा रही थी,,,,,, राजू अपनी उंगली को झुमरी की बुर में डाल कब से अंदर बाहर कर रहा था एक तरह से वह झुमरी की चुदाई करना शुरू कर दिया था यह चुदाई करने से पहले प्रारंभ का सबक था जिसमें औरत या लड़की को पूरी तरह से अपने वश में करने का यही एक बेहद सक्षम तरीका होता है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है जिस पर मेहनत करके राजू पार हो चुका था देखते ही देखते राजू अपनी उंगली का सहारा लेकर झुमरी की बुर में अपने लिए जगह बना रहा था क्योंकि इस बात से वह भी अच्छी तरह से वाकिफ था कि झुमरी पहली बार चुदाई के लिए तैयार हो रही है और उसका लंड मोटा और लंबा है ऐसे हालात में उसकी बुर में सीधे-सीधे डाल देना उचित नहीं था,,,, इसलिए राजू समझदारी और चालाकी से काम ले रहा था झुमरी पूरी तरह से अपनी नंगी पीठ को राजू की नंगी छाती पर टिकाए हुए थी झुमरी की हालत को देखकर राजू समझ गया था कि झुमरी पूरी तरह से उसके पास में हो चुकी है इसलिए धीरे से उठा और ठीक उसके सामने आकर खड़ा हो गया,,, पानी में पैजामा पूरी तरह से भीग चुका था झुमरी की नजर जैसे ही भीगे हुए पजामे के अंदर छुपे उसके मोटे टनटनाते लंड पर पड़ी वह एकदम से घबरा गई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वहां इंसान का नहीं बल्कि गधे का लंड देख ली हो,,,, झुमरी की घबराहट राजू ने उसके चेहरे से पढ़ लिया था इसलिए झुमरी से बोला,,,।

क्या हुआ झुमरी मेरी रानी ऐसे क्यों देख रही हो,,,

(राजू की बात सुनते ही वह नजर उठा कर राजू की तरफ देखी और वापस पजामे की तरफ देखने लगी उसके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे वह शर्मा भी रही थी और उत्सुक भी थी राजू के लंड को देखने के लिए और वह भी एकदम नंगा,,, झुमरी की खामोशी में ही उसकी हा थी इस बात को राजू अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए उसकी आंखों के सामने ही वह अपना पजामा उतारना चाहता था लेकिन तभी उसे कुछ याद आया वह झुमरी को और ज्यादा गर्म कर देना चाहता था इसलिए पैजामा उतारे बिना ही वह अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी दोनों टांगों को घुटनों से पकड़ कर उसे फैलाने लगा ऐसा करने से झुमरी एकदम से सकते में आ गई और अपने दोनों टांगों को आपस में हटा दी क्योंकि वह समझ गई थी कि राजू क्या देखना चाहता है,,,,,)

नहीं राजू मुझे शर्म आ रही है,,,,

पहली बार तो शर्म आती है मेरी जान लेकिन फिर धीरे-धीरे मजा आने लगता है और वैसे भी किसी गैर के सामने तुम अपनी टांगें थोड़ी खोल रही हो मैं तो तुम्हारा होने वाला पति हूं तुमसे शादी करके तुम्हें अपने घर लेकर आऊंगा तब तो रोज तुम्हारी चुदाई करूंगा तब क्या करोगी,,,

(राजू के मुंह से चुदाई करने वाली बात सुनकर झुमरी एकदम से शर्मा गई और शर्मा कर दूसरी तरफ अपनी नजर कुमारी और इसी पल का फायदा उठाते हुए राजू ने तुरंत उसके दोनों घुटनों को एक दूसरे के विरुद्ध फैला दिया उसकी टांगे खुलते ही राजू को उसकी गुलाबी फूल और वह भी एकदम कचोरी की तरह फूली हुई नजर आने लगी,,, राजू के लिए नजारा उसका देखे गया सबसे बेहतरीन हजारों में से एक था क्योंकि वह झुमरी से प्यार करता था उसकी गुलाबी बुर को देखना उसका सपना का इसलिए इस समय वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया झुमरिया देखकर अंदर ही अंदर गदगद हुए जा रही थी कि राजू उसकी बुर को प्यासी नजरों से देख रहा है झुमरी कुछ कर पाती या कुछ बोल पाती इससे पहले ही राज उसकी दोनों टांगों को अपने हाथों से खोलते हुए अपने प्यासे होठों को उसकी गीली बुर पर रख दिया और ऐसा करते ही झुमरी के तन बदन में आग लग गई उसे समझ में नहीं आया कि यह राजू ने क्या किया क्योंकि उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि मर्द औरत की बुर भी चाटते हैं क्योंकि उसने आज तक ना तो इस बारे में कभी सोची थी ना ही कभी अपनी आंखों से उसे यह सब देखने का मौका मिला था इसलिए उसके लिए सब कुछ नया था राजू पलभर में ही झुमरी को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लिया वह पूरी तरह से ध्वस्त होने लगी राजू की मर्दानगी के आगे घुटने टेकने लगी उसकी टांगे कांपने लगे यह अवसर उसके लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,,।

गर्मी के दिन में जब पूरा गांव अपने घर में आराम कर रहा था तब झुमरी और राजू खेतों में कपड़े धोते-धोते कब काम क्रीड़ा का आनंद लेने लगे दोनों को पता ही नहीं चला राजू पूरी तरह से अपनी जीभ का जादू झुमरी की‌ बुर के ऊपर चला रहा था और राजू का जादू काम भी कर रहा था बुरी तरह से झुमरी गहरी गहरी सांस ले रही थी वह आनंद के सागर में गोते लगाना शुरू कर दी थी उसे मजा आने लगा था वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह के खेल में इतना मजा आता है वह पागलों की तरह गहरी गहरी सांस लेते हुए गरम सिसकारी ले रही थी जो कि इस समय उसकी गर्म सिसकारी को सुनने वाला वहां कोई नहीं था,,,, राजू पूरी तरह से झुमरी की गर्म जवानी का रस अपनी जीभ से निचोड़ रहा था और अपने गले में गटक रहा था,,,,, झुमरी पागलों की तरह अपना सर इधर उधर भटक रही थी वह भी बड़े से पत्थर पर बैठे हुए थी जिस पर बैठने की वजह से उसकी गांड थोड़ी चौड़ी नजर आने लगी थी और राजू उसकी कमर थामें हुए अपनी जीभ अंदर तक डाल रहा था,,, झुमरी की बुर लगातार पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से वह चिपचिपी हो गई थी उसके चिपचिपे पन का फायदा उठाते हुए राजू कब उसकी बुर में अपनी एक ऊंगली डाल दीय५उसे पता ही नहीं चला और उसे अंदर बाहर कर बुर को चाटने आनंद लेने लगा,,,।

झूमरी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी जिसकी गहरी सांस एस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से आनंद के सागर में गोते लगा रही हो ईसी पल का राजू को इंतजार भी था हुआ समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से गरम हो चुका है उस पर थोड़ा चलाना जरुरी है इससे तुरंत अपना मुंह उसकी बुर से हटाकर खड़ा हो गया राजू का लंड पजामे के अंदर पूरी तरह से टनटना गया था जो कि पानी में गीला होने के बावजूद भी अपना असर दिखा‌ रहा था उसे देख झुमरी की बुर फिर से पानी छोड़ने लगी,,,, झुमरी को चोदने के लिए राजू उसकी इजाजत मांगना जरूरी नहीं समझ रहा था क्योंकि वह जानता था कि वह इंकार करेगी लेकिन अंदर से वह भी उसके लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है,,,, इसलिए राजू झुमरी के ऊपर अपना आखिरी पाशा फेंकने जा रहा था वह तुरंत झुमरी की आंखों के सामने अपने पजामे को उतारने लगा झुमरी शर्मा रही थी उसकी तरफ देखने से कतरा रही थी,,, देखते ही देखते राजू झुमरी की आंखों के सामने एकदम नंगा हो गया उसका लंड हवा में लहरा रहा था आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था जब देखा कि झुमरी उसकी तरफ नहीं देख रही है तो राजू उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में भर लिया और उसकी नजरों को अपने लंड की तरफ करते हुए बोला,,,।

शर्मा क्यों रही हो मेरी रानी तुम्हारा ही है तुम्हारे लिए ही तो खड़ा हुआ है तुम मुझसे प्यार नहीं करोगी तो कौन करेगा क्या तुम चाहती हो कि मैं किसी और लड़की से प्यार करूं किसी और को यह सुख दूं,,,,

(झुमरी शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद किए हुए थे और राजू की बात सुनकर ना में सर हिला रहे थे यह देखकर राजू मन ही मन बहुत खुश हो रहा था और फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

चलो मेरी रानी जिस तरह से मैंने तुम्हारी बुर से प्यार किया हूं तुम भी मेरे लंड से प्यार करो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह झुमरी कि खूबसूरत चेहरे को अपने हाथों में लिए हुए ही अपने लंड की तरफ आगे बढ़ाने लगा झुमरी को बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि राजू क्या करने वाला है और देखते ही देखते जैसे ही अपने होठों पर राजू के गर्म लंड का स्पर्श हुआ वह एकदम से चौक गई और अपनी आंखों को खोल दी,,,)

यह क्या कर रहे हो राजू,,,

तुम्हें प्यार करना सिखा रहा हूं,,,

ऐसे कोई प्यार होता है क्या,,,

क्यों मैंने भी तो तुम्हारी बुर से प्यार नहीं किया अपने हॉट से लगाकर ऐसे ही तो मर्द और औरत प्यार करते हैं,,,

क्या सच में ऐसा होता है,,,

हां झुमरी मेरी रानी एक बार इसे मुंह में लेकर चूसने देखो कितना मजा आता है,,,

नहीं मुझे गंदा लगता है,,,

कुछ गंदा नहीं है बस एक बार इसे मुंह में लो फिर तुम खुद ही से नहीं छोड़ोगी,,,

(इतना कहते हो राजू अपनी लैंड के गरम सुपाड़े को झुमरी के लाल-लाल होठों पर रगड़ना शुरु कर दिया इनकार करने के बावजूद भी झुमरी के तन बदन में आग लगने लगी और अपने आप ही उसके लाल लाल होंठ खुल गए और मौका देखते ही राजू अपने लंड के सुपाड़े को उसके लाल-लाल होठों के बीच डाल दिया,,,, पहले तो झुमरी को थोड़ा अजीब लगा लेकिन फिर जैसे-जैसे राजू ने बताया उस पर जीभ घुमाते हुए उसे मजा आने लगा और देखते ही देखते राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया कुछ ही देर में झुमरी को इतना आनंद आ रहा था कि पूछो मत वह खुद ही राजू की लंड को पकड़ कर उसे मुंह में लेकर चूसने आई थी देखते ही देखते उसकी शर्म हवा में फुर्र हो गई थी,,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था झुमरी को चोदने की ललक उसकी आंखों में साफ दिखाई दे रही थी वह तुरंत झुमरी के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसकी दोनों टांगों को उसी स्थिति में फैलाना शुरू कर दिया या देखकर झुमरी बोली,,,।

नहीं राजू यहां नहीं मुझे शर्म आ रही है कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,

(राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह जल्द से जल्द अपने खड़े लंड को झुमरी की बुर में डाल देना चाहता था इसलिए गहरी सांस लेते हुए बोला,,)

तब,,,,,,

झोपड़ी में चलते हैं,,,

(झुमरी के मुंह से यह सुनकर आज एकदम खुश हो गया क्योंकि उसकी काम क्रीडा की हरकत पूरी तरह से काम कर चुकी थी झुमरी खुद अब चुदवाना चाहती थी इसलिए झुमरी को देखकर राजू मुस्कुराने लगा और वह कुछ समझ पाते इससे पहले ही वह आगे बढ़ कर उसे गोद में उठा लिया झुमरी एकदम से घबरा गई ,,, झुमरी उसे लगातार नीचे उतारने के लिए बोल रही थी लेकिन राजू उसे गोद में लिए हुए झोपड़ी की तरफ चला जा रहा था झुमरी हैरान थी राजू की ताकत को देखकर क्योंकि वह बिना डगमगाए बड़े आराम से उसे गोद में उठाए हुए चला जा रहा था यहां तक कि झुमरी का वजन थोड़ा ज्यादा था लेकिन फिर भी उसे जरा भी फर्क नहीं पड़ रहा था यह देखकर झुमरी के तन बदन में और ज्यादा मदहोशी जाने लगी थी झुमरी को इस बात का डर था कि राजू उसे गिराना दे लेकिन राजू का आत्मविश्वास देखकर वह खुद करके रोए जा रही थी देखते-देखते राजू उसे गोद में उठाए हुए ही झोपड़ी के अंदर लेकर आया और घास फूस की ढेर में उसे लाकर पटक दिया अब राजू के लिए रोक पाना अपने आप पर काबू कर पाना असंभव था वह देखते ही देखते झुमरी कि दोनों टांगों को फैला दिया और,,, जैसे ही राजू को झुमरी की गुलाबी बुर नजर आई उसके मुंह में पानी आ गया और वहां अपने आप को रोक नहीं पाया घुटनों के बल बैठकर झुमरी को अपनी तरफ खींचा और उसकी आदि गांड को अपने घुटनों पर रख दिया झुमरी के लिए पहला मौका था जब वह किसी के लंड को अपनी बुर में लेने जा रही थी इसलिए उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसके मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर जाने पर कैसा लगेगा और इसी कशमकश में वह अपनी आंखों को बंद कर चुकी थी,,,,

Raju or jhumari jhopdi me



झुमरी के चरित्र को देखकर राजू अच्छी तरह से जानता था कि जो मेरी पूरी तरह से कुंवारी लड़की है उसकी बुर में लंड डालना बड़ी मेहनत का काम है इसलिए मैं धीरे-धीरे ढेर सारा थूक लगाकर झुमरी की बुर पर अपने लंड के सुपाड़े को रखकर उसे धीरे-धीरे अंदर की तरफ ठेलने लगा,,, अभी सुपाड़ा मात्र एक अंगूर अंदर घुसा था कि झुमरी को दर्द महसूस होने लगा राजू समझ गया कि बड़े सावधानी से आगे बढ़ना है इसलिए वह अपने हाथों को आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया उसको उत्तेजित कर रहा था उसी उत्साह रहा था देखते ही देखते वह अपनी कमर का भी असर उसे दिखा रहा,,, था,,, झुमरी की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनते ही वह अपनी कमर को आगे की तरफ तेरा और आधा सुपाड़ा झुमरी की बुर में,, समा गया उसे दर्द हो रहा था लेकिन वह अपने दर्द को जेल गई थी उसे नहीं मालूम था कि आगे और भी दर्द होगा क्योंकि उसकी बुर में पहली बार लड़ने जा रहा था देखते ही देखते राजू ने थोड़ा सा और धक्का लगाया और लंड का पूरा सुपड़ा बुर की अंदर घुस गया अब जाकर झुमरी को दर्द का एहसास होने लगा उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई और राजू तुरंत आगे बढ़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिया और उसे चूसना शुरू कर दिया और उसी स्थिति में रुका रह गया वह जानता था कि झुमरी का पहली बार होने की वजह से हुआ है बर्दाश्त नहीं कर पाएगी और अगर एक बार उसने लंड बाहर निकाल लिया तो झुमरी फिर उसे दोबारा डालने नहीं देगी,,, इसलिए उसे समझाते हुए बोला,,,

Jhumri ki chudai karta hua raju



बस बस मेरी जान हो गया देखना इतना मजा आएगा कि तुम खुद मेरे लंड पर कुदोगी,,,,(और इतना कहते हुए उसकी चूची को से लाते हैं और उसके लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए फिर से अपनी कमर को सहमत दिया और उसे धक्का मार कर आगे की तरफ फेंक दिया इस बार राजू का आधा लंड उसकी बुर के अंदर घुस गया अब झुमरी को और दर्द करना शुरू हो गया झुमरी अपना सर पटकने लगी अपना पाव इधर-उधर फेंकने लगे लेकिन राजू उसे अपने नीचे लिए हुए उसे काबू में रखे हुए था और उसकी चूची को पकड़कर दबा रहा था ताकि उसका दर्द कम हो जाए,,,)

बस बस हो गया मेरी जान बहुत खूबसूरत हो तुम झुमरी तुम्हारी खूबसूरती देखकर मैं पागल हो गया हूं इसीलिए तुम्हें बीवी बनाने का मैंने कब से उठा लिया था जबसे तुम्हें पहली बार नंगी नहाता हुआ देखा था उसी दिन मैंने निश्चय कर लिया था कि मेरे घर में बीवी बनकर आएगी तो सिर्फ झुमरी,, तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की पूरे गांव में तो क्या अगल-बगल के 10 गांव में मैंने आज तक नहीं देखा तुम जानती हो दिन भर में बैलगाड़ी लेकर इधर-उधर घूमता रहता हूं लेकिन तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की मैंने आज तक नहीं देखा इसलिए तो मैं तुम्हारा दीवाना हूं मेरी जान,,,

(राजू की बातों का जादू झुमरी के ऊपर छाने लगा था उसका दर्द कम होने लगा तो राजू अपनी बात को जारी रखते हुए बोला,,,)

तुम नहीं जानती झुमरी तुम्हें चोदने का मैं कबसे कल्पना करता था सपने देखता था ख्वाब देखता था मैं यही सोचता था कि तुम जिस दिन मेरे घर पर दुल्हन बन कर आओगे सारी रात तुम्हें प्यार करूंगा तुम्हें कपड़े पहनने नहीं दूंगा सारी रात तुम्हें नंगी करके रखूंगा और रात भर तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर रखूंगा,,,,(राजू की बातों में शहद खुला हुआ था मदहोशी भूली हुई थी मादकता छाई हुई थी जो कि पूरी तरह से झुमरी को अपनी आगोश में ले रही थी राजू के मुंह से निकला एक-एक शब्द झुमरी के बदन में आग लगा रहे थे इसलिए तो वह सिसकारी देना शुरू कर दी थी और यही मौका देखकर राजू ने फिर से जोर लगाया और पूरा का पूरा लंड झुमरी की बुर में गाड़ दिया,,,, एक बार फिर से झुमरी की चीज बड़ी जोरों से निकले लेकिन उस सुनसान खेतों में उसकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था राजू जानता था कि थोड़ी ही देर में उसे मजा आ जाएगा इसलिए अपनी बातों का सिलसिला जारी रखते हुए वह बोला,,,)





ओहहहह झुमरी बस हो गया मेरी जान तू नहीं जानती तुम जब चलती हो तो तुम्हारी गांड इधर-उधर जब मटकती है ना देखकर लड़के का मन हो जाता है मैं तो तुम्हारी चाल पर एकदम फिदा हो गया हूं लेकिन देखना जब तुम मुझसे शादी कर लो कि जब तुम मेरी बीवी बन जाओगी तो तुम्हें चलने नहीं दूंगा तुम्हें घर पर रख लूंगा रानी बनाकर तुम्हें खेतों में नहीं जाना पड़ेगा काम नहीं करना पड़ेगा तुम दिन भर रात भर मेरी पलकों पर बैठी रहोगी क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी खूबसूरती को गांव का कोई मर्द अपनी आंखों से पी ए क्योंकि मैं जानता हूं कि तुम्हें देखकर ना जाने कितने लोग अपने मन में गंदे विचार लाते होंगे,,, तुम्हारी खूबसूरती का रस पीने के लिए लालायित होते होंगे,,, और मेरी किस्मत कितनी अच्छी है कि तुम मुझे अपने पति के रूप में स्वीकार करना चाहती हो और मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूं,,,

(राजू की मिश्री घुली बातें झुमरी के दर्द पर असर कर रही थी उसका दर्द कम हो रहा था असहनीय पीड़ा को वह राजू की बातों से झेल ले जा रही थी थोड़ी देर में सब कुछ सही हो गया राजू अपने हाथ का करामत दिखाते हुए उसके नारंगी को पकड़कर जोर जोर से दबा रहा था जिसके चलते हैं उसके चेहरे का रंग फिर से बदलने लगा और वह मदहोशी में आहें भरने लगी और इसी मौके की तलाश में राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह झुमरी को चोदना शुरू कर दिया था राजू के लिए झुमरी पर काबू पाना बहुत ही बड़ा सफर तय करके मंजिल तक पहुंचने जैसा था आखिरकार राजू झुमरी की मां के साथ साथ झुमरी की भी चुदाई कर रहा था,,,।

थोड़ी देर में राजू का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से झुमरी की बुर की गहराई नापना शुरू कर दिया था,,, लेकिन झुमरी की बुर की अंदर की दीवारों पर राजू का लंड रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे झुमरी के आनंद में बढ़ोतरी होती जा रही थी और ‌ उसकी पुर बार-बार पानी छोड़ रही थी,,,, राजू लगातार अपनी कमर हिला रहा था उसकी गर्दन उसके हो उसके गाल पर चुंबनो की बारिश कर रहा था,,, जिससे झुमरी को और ज्यादा मजा आ रहा था थोड़ी ही देर में झुमरी की बुर से चप्प चप्प आवाज आना शुरू हो गई जिससे वातावरण पूरी तरह से गर्मा रहा था और झुमरी की गरम सिसकारियां राजू के तन बदन में और ज्यादा मदहोशी भर रही थी,,,,

झुमरी अपनी नजरें उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच राजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर के अंदर बाहर होता हुआ देखकर आश्चर्यचकित हुए जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतना मोटा तगड़ा लंड इतने आराम से उसकी बुर के अंदर अंदर बाहर हो रहा है,,,, झुमरी के चेहरे को देखकर राजू समझ गया कि वह क्या सोच रही है इसलिए राजू मुस्कुराता हुआ बोला,,

बोला था ना मेरी रानी बहुत मजा आएगा अब कैसा लग रहा है बताओ,,,

बहुत अच्छा लग रहा है,,,(शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा कर बोली)

अभी तो देखना और मजा आएगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू जोर जोर से धक्का लगाना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ झुमरी के मुंह से आह निकल जा रही थी लेकिन दर्द से ज्यादा उसे मजा आ रहा था,,, थोड़ी देर तक इस स्थिति में चुदाई करने के बाद राजू अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसे घोड़ी बनने के लिए बोला मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है इसलिए राजू ने खुद ही उसे अपने हाथों से घुटने मोड़कर उसकी हाथ की कोहनी मोड़ कर उससे घोड़ी बना दिया और उसकी गांड को अपने हाथों से हवा में उठा दिया,, मदहोशी से भरी हुई झुमरी राजू के इशारे पर नाच रही थी और जैसा वह कर रहा था वैसे ही होती जा रही थी देखते ही देखते राजू पीछे से झुमरी की गांड को पकड़कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और फिर से चोदना शुरू कर दिया इस स्थिति में झुमरी के तन बदन में आग लग गई उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा आनंद उसने कभी महसूस तक नहीं की थी और ना ही कभी ऐसे आनंद के बारे में वह सोची थी,,

कुछ ही देर में झुमरी के मुंह से गरमा गरम सिसकारियां फूटने लगी और उन गरम सिसकारियां को सुनकर राजू की मदहोशी और बढ़ती जा रही थी गर्मी का महीना होने की वजह से राजू और झुमरी दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था इतनी मेहनत जो दोनों कर रहे थे लेकिन जितनी मेहनत कर रहे थे उससे 10 गुना आनंद भी प्राप्त कर रहे थे देखते ही देखते झुमरी की सांसें तेज चलने लगी राजू समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए राजू तुरंत उसकी गोल गोल सुडोल गांड को कस के अपने दोनों हाथों से पकड़कर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए राजू पीछे से झुमरी को पकड़े हुए सूखी हुई घास पर एकदम पसर गया ,,,,,।
 
राजू अपने सपनों की रानी जिसके बारे में वह सपने बना करता था जिसके साथ जीवन यापन करने का ख्वाब देख रहा था ऐसी खूबसूरत झुमरी की जवानी पर वह पूरी तरह से काबू पा चुका था झुमरी की बुर को हासिल कर लेने के बाद वह अपने आप को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत लड़का समझने लगा था और वास्तव में ऐसा ही था झुमरी ने आज तक किसी पराए मर्द को अपने बदन को हाथ भी लगानी नहीं दी थी और राजू को वह अपना सर्वस्य सौंप चुकी थी,,,,,, राजू झुमरी के साथ ऐसा करना नहीं चाहता था लेकिन झुमरी के करीब रहकर उसकी मदहोश कर देने वाली खुशबू को अपने अंदर महसूस करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी आंखों के सामने झुमरी को अपने कपड़े उतार कर नंगी होता हुआ देखकर उसकी मदमस्त कर देने वाली कौन कौन था उसकी नारंगी जैसी चूचियां और शरबती रस से भरी हुई उसकी रसीली बुर दूर यह सब राजू को मजबूर कर दी थी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए,,,, और इस काम क्रीड़ा में जितना मजा राजू को प्राप्त हुआ था उससे कहीं ज्यादा मजा झुमरी को मिल रहा था इसीलिए तो वह सुखी हुई घास पर ढेर हो गई थी और गहरी गहरी सांस ले रही थी राजू उसके ऊपर ही लेटा हुआ था और अभी तक उसका मोटा तगड़ा लंड झुमरी की बुर में घुसा हुआ था जिसे झुमरी अपनी बुर में महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी राजू कैलेंडर से उसका गर्म लावा बूंद बूंद करके झुमरी की बुर की तलैया को भर रहा था,,,,,,,।



झोपड़ी मैं और झोपड़ी के बाहर असीम शांति छाई हुई थी केवल दोनों की गहरी चल रही सांसो की आवाज ही आ रही थी कुछ देर तक राजू झुमरी की नंगी चिकनी पीठ पर लेटा रहा और अपने लंड को उसकी बुर की गर्माहट देता रहा झड़ जाने के बावजूद भी उसका लंड ज्यों का त्यों खड़ा था झुमरी को इस तरह का अनुभव पहले कभी नहीं था इसलिए वह बिल्कुल भी अंदाजा लगाने की हालत में नहीं थी,,, झड़ने के बाद लंड की स्थिति क्या होती है,,,, राजू झुमरी के गर्दन पर अपने होठों का चुंबन लेते हुए बोला,,,।

कैसा लगा मेरी रानी,,,,

(जवाब में वह कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली,,,, राजू को लड़कियों और औरतों का इस तरह से शर्मा ना ही उसकी उत्तेजना का सर्वप्रथम कारण बन जाता था,,, झुमरी केवल इतना ही बोल पाई,,)

अब बाहर निकाल लो,,,

(झुमरी के मुंह से यह सुनकर राजू एकदम मस्त हो गया,,, और झुमरी की बात मानते हुए अपने मोटे तगड़े लग गई अंडकोष उमरी की कसी हुई बुर से बाहर खींचते हुए वह अपने लंड को बाहर निकाल दिया और उसके बगल में पेट के बल बैठ गया झुमरी पेट के बल लेटी हुई थी और वह पीठ के बल दोनों एक दूसरे को देख रहे थे दोनों की नजरें आपस में टकराई और झुमरी शर्म से पानी पानी होने लगी,,,,)



आज मैं बहुत खुश हूं झुमरी,,, तुमने मुझे दुनिया का सबसे हसीन सुख दिया है जिसके बारे में सिर्फ मैं कल्पना किया करता था लेकिन तुमने आज मेरे ख्वाब को हकीकत में बदल दि‌ हो,,, मैंने आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की को नहीं देखा बाहर से तुम कितनी खूबसूरत हो बिना कपड़ों के तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगती है कसम से ऐसा लगता है कि जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा नीचे उतर आई हो,,,।

(राजू झुमरी के लिए तारीफ के पुल बांध रहा था झुमरी अपनी खूबसूरती की तारीफ राजू के मुंह से सुनकर गदगद हुए जा रही थी हालांकि उसे शर्म भी बहुत महसूस हो रही थी क्योंकि इस समय भी वह पूरी तरह से नंगी ही थी,,, मैं सिर्फ मंद मंद मुस्कुरा रही थी और राजू तारीफ पर तारीफ किया जा रहा था,,,)

तुम मुझे जाने के लिए कही थी लेकिन मैं भला कैसे जा सकता था तुम्हें यहां पर अकेला छोड़ कर और वह भी ऐसे माहौल में जबकि हम दोनों मिलकर साथ में कपड़े धो रहे थे,,, सच झुमरी जब तुम अपने हाथों से एक-एक करके अपने बदन पर से कपड़े उतार कर नंगी हो रही थी कसम से उस समय का दृश्य देखने लायक था दुनिया में इस तरह का नजारा शायद कोई नहीं देखा होगा जब एक लड़की एक लड़के के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी होती है मैं पेड़ के पीछे छुप कर सब कुछ देख रहा था तुम्हारा सलवार की डोरी खोलना सलवार उतारना कुर्ती उतारना तुम्हारी नंगी गांड देखकर तो मेरी हालत खराब हो गई थी तुम्हारी गांड भी कितनी खूबसूरत है झुमरी,,,(लेटे हुए ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर झुमरी की गांड पर रखते हुए और से हल्के हल्के से लाते हुए ऐसा करने से झुमरी के तन बदन में झनझनाहट सी दौड़ने लगी थी) मैं तो तुम्हारी गांड को बस देखता ही रह गया एकदम सुगठित सुडौल है,,, सच कहूं तो तुम्हारी खूबसूरती की परिभाषा तुम्हारी गांड खुद है,,, कोई अगर तुम्हारे चेहरे को ना भी देखें और तुम्हारी गांड को भले ही सलवार में कैद हो उसकी उन्नत उभार को देखकर ही सही अंदाजा लगा लेगा कि गांड इतनी खूबसूरत है तो तुम कितनी खूबसूरत होगी,,,



राजू,,ऊमममम, कैसी बातें कर रहे हो मुझे शर्म आ रही है,,,(झुमरी शर्म से पानी पानी होते हुए बोली)

क्या झुमरी मुझसे शर्म करने की अब कोई जरूरत नहीं है ,,,, तुम मेरी होने वाली बीवी हो,,,(झुमरी की उम्र की गांड को अपनी हथेली में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए) मुझसे शर्म करोगी तो फिर आगे कैसे काम चलेगा अब तो तुम्हें मेरे सामने रोज अपनी टांगें खोलना है,,,,(झुमरी कभी भी इस तरह की बातें नहीं सुनी थी खास करके अपने लिए इसलिए राजू की बातें उसे शर्मसार किए जा रही थी ना चाहते हुए भी उसके बदन में अजीब सी झनझनाहट हो रही थी और उसकी बुर से एक बार फिर से मदन रस टपकने लगा था,,,, फिर भी वह शंका जताते हुए बोली)

झूमरी और राजु



राजू इस बारे में किसी को पता चल गया तो,,,

अरे किसको पता चलेगा यहां पर तुम्हारे और मेरे सिवा है कौन किसी को पता नहीं चलेगा और किसी को पता भी चल गया तो मैं नहीं डरता वैसे भी तुम्हें मैं अपनी बीवी बनाना चाहता हूं,,,, और तुम तो जानती हो बीवी को दिन-रात चोद सकते हैं,,,

राजू इस तरह की बातें मत किया करो मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,,

और तुम्हारे ईसी शर्माने की वजह से मेरा मन फिर से मचलने लगता है देखो तो सही,,(अपने लंड को हाथ से पकड़ कर ही लाते हुए) मेरा लंड फिर से तैयार हो गया है तुम्हारी बुर में घुसने के लिए,,, अब मैं फिर से तुम्हें चोदने जा रहा हूं,,,,,

(इतना सुनते ही उत्तेजना के मारे झुमरी का गला सूखने लगा उसके बदन में कसमसा हाइट बढ़ने लगी क्योंकि राजू जी इस तरह की बातें कर रहा था उसे लगने लगा था कि कुछ ही देर में राजू फिर से उसकी बुर में अपना लंड डाल देगा परिवार फिर से उसे पूरी तरह से मस्त कर देगा,,, फिर भी व राजू से अपनी शंकाओं को दूर करने के लिए बोली,,)

राजू तुम मुझसे सच में शादी करोगे ना,,,,

(इतना सुनते ही राजू झुमरी की तरफ देखकर जोर-जोर से हंसने लगा झुमरी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस तरह से क्यों हंस रहा है जो मेरी भी मुस्कुरा रही थी लेकिन फिर जोर जोर से हंसते हुए राजू बोला)



तुम बहुत भोली हो झुमरी किसी की भी बात में आ जाती हो,,, मैं तो तुम्हारी बुर को पाने के लिए सिर्फ तुमसे शादी का नाटक कर रहा था तुमसे प्यार का नाटक कर रहा था,,,

(इतना सुनते ही झुमरी की आंखें आश्चर्य से चोडी होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि राजू यह क्या कह रहा है और राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।) तुम्हें क्या लगा झुमरी में तुम्हारे साथ शादी कर लूंगा,,,, तुम खूबसूरत हो लेकिन इतनी भी खूबसूरत नहीं हो कि मैं तुम्हारे पीछे दीवाना हो जाऊं और तुम से शादी कर लु मेरे लिए तो कहीं मेरा इंतजार कर रही होगी मेरी सपनों की रानी,,, यह सब नाटक तो मैं सिर्फ तुम्हें चोदने के लिए ही किया था तुम्हें पता है जिस दिन से मैं तुम्हें तुम्हारे घर में नंगी नहाते हुए देखा हूं तब से मैं तुम्हारे पीछे पागलों की तरह घूम रहा हूं पता है क्यों सिर्फ तुम्हें चोदने के लिए,,,

झूमरी की चुदाई करते हुए राजु



हरामजादे यह क्या कह रहा है तू,,,,

मैं सच कह रहा हूं मेरी रानी तेरा नंगा बदन तेरी नंगी गांड तेरी चूची तेरी बुर देखकर मैं उसी दिन से पागल हो गया था इसीलिए तो मैं तुझे पाना चाहता था,,, मेरी ख्वाहिश सिर्फ इतनी थी कि मैं तेरी बुर में अपना लंड डालकर अपनी गर्मी शांत कर सकूं और देख आज मैं अपना सपना सच कर लिया हूं,,,,

क्या कहा तूने हरामजादे नीच तूने मेरे जज्बातों के साथ खेला,,, तू मेरे साथ नाटक करता रहा और मैं तुझ से सच में प्रेम कर बैठी,,,(इतना कहते हैं वह उठ कर बैठ गई वह गुस्से से लाल हुए जा रही थी और गुस्से में उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज्यादा गुलाब की तरह चमक रहा था उसकी नंगी चूचियां सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर राजू के तन बदन में फिर से आग लग रही थी,,,,) और तूने मेरे प्रेम का यह सिला दिया मेरे जिस्म के साथ खेला मेरी इज्जत के साथ खिलवाड़ किया मैं तुझे कभी नहीं छोडूंगी,,,,

झुमरी तू सच में बोलते हुए लेकिन तू खूबसूरत है इसलिए तो तेरे लिए मेरा लंड खड़ा हो जाता है देख फिर से खड़ा हो गया है,,,(अपने लंड को पकड़कर झुमरी को दिखाते हुए और जो मेरी उसके लंड की तरफ देखकर अपने मन में यह सोच रही थी क्या कर उसके हाथ में कुल्हाड़ी होती तो इसी समय एक ही बार में उसका लंड काट के गिरा देती) बस एक बार झुमरी फिर से मुझे चोदने दे मजा आ जाएगा,,,

हरामजादी सच में तो कितना हारामी है मेरी इज्जत से खिलवाड़ करने के बावजूद भी तो फिर से मेरी इज्जत से खेलना चाहता है,,,

क्या झुमरी फिर से पागलों जैसी बात कर रही हो एक बार तुम्हारी बुर में घुस चुका है फिर उसके बाद बार-बार जाए फर्क क्या पड़ेगा तुम्हें भी तो आखिर मजा मिल रहा था तुम भी तो एकदम मस्त हो गई तुम्हें भी तो आनंद आया,,,

मैं तुझे अपना पति मानकर तुझे अपना मान और तन दोनो सौंप दी और तू मेरे साथ खिलवाड़ कर रहा है,,,,

देख झुमरी मान जा एक बार फिर से मुझे चोदने दे वरना मैं पूरे गांव में बता दूंगा कि तू चुदवाने के लिए मुझे अपने खेत पर ले गई थी,,,,।

(इतना सुनते ही झुमरी की आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी वह राजू के लिए क्या-क्या सपने देखे थे और राजू ने एक ही पल में उसके सपनों को चकनाचूर कर दिया था लेकिन वह गुस्से से लाल पीली हुए जा रही थी और लाल-लाल बड़ी बड़ी आंखें दिखाते हुए बोली)



हरामजादे तू मुझे बदनाम करेगा मुझे बदनाम करने की धमकी देता है अरे मुझे बदनाम करने से पहले मैं अपनी जान दे दूंगी लेकिन उससे पहले मैं तेरी जान ले लूंगी हरामजादे कुत्ते आज मैं तुझे नहीं छोडूंगी,,,

(इतना कहने के साथ ही सु में खड़ी हुई और नग्न अवस्था में ही अपने बदन की स्थिति को देखे भी नहीं राजू की तरफ से पड़ने लगी राजू भी तुरंत खड़ा होकर झोपड़ी से बाहर आ गया और झुमरी की तरफ देखकर हंसते हुए इधर-उधर भागने लगा झुमरी उसके पीछे-पीछे उसे पकड़ने के लिए दौड़ने लगी अद्भुत नजारा बना हुआ था जिसका आनंद राजू पूरी तरह से ले रहा था एक लड़की को और भाभी नंगी दौड़ते हुए वह पहली बार देख रहा था तोड़ते हुए झुमरी की दोनों नारंगी हवा में उछल रही थी उसके नितंबों का उछाल उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था लेकिन इस समय झुमरी को बिलकुल भी होश नहीं था कि वह बिना कपड़ों के दौड़ रही है वह खेत के बीचो-बीच इधर-उधर राजू के पीछे दौड़ रही थी और राजू उसे दौड़ा रहा था कभी पेड़ के पीछे तो कभी ट्यूबवेल के पीछे कभी झोपड़ी के चारों तरफ चक्कर लगाने लगता था झुमरी उसे पकड़ नहीं पा रही थी हालांकि दौड़ते हुए वह पत्थर उठा उठा कर उसे मार रही थी लेकिन उसे एक भी पत्थर लग नहीं पा रहा था राजू दौड़ते हुए पीछे देख कर झुमरी के नंगे बदन को देखकर मस्त हुआ जा रहा था,,,,, राजू तब तक इधर-उधर भागता रहा जब तक कि झुमरी थक कर चूर ना हो गई हो और पूरी तरह से नंगी थी लेकिन गुस्से में उसे इस बात का अहसास तक नहीं हो रहा था कि वह इस तरह से नंगी भाग रही है और वह भी एक नंगे जवान लड़की के पीछे अगर यह नजारा कोई और देख ले तो उसके मन में तरह-तरह के सवाल पैदा हो जाए,,,,।

जब राजू को लगा कि झुमरी एकदम थक चुकी है तो वह एकदम से रुक गया और चुनरी सीधे आकर उसके सीने से आकर लग गई और इसी मौके का फायदा उठाते हुए राजू से अपनी बाहों में भर लिया,,,।

छोड़ हरामजादे छोड़ मुझे कुत्ते कमीने तेरे जैसा नीच इंसान मैंने आज तक नहीं देखी छोड़ मुझे आज तेरी खेर नहीं है या तो तू नहीं या तो मैं नहीं,,,,

क्या कर लोगी मेरा,,,

(एकदम शांत स्वर में राजू बोला और झुमरी अपने साथ हुए अन्याय के चलते रोने लगी एकदम से टूट गई थी उसे रोता हुआ देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह तुरंत उसे चुप कराते हुए बोला,,,)

अरे अरे यह क्या तुम रोने लगी अरे पगली मैं तो मजाक कर रहा था,,,,(राजू की बात पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था वह रोए जा रही थी) अरे सच में पगली मैं मजाक कर रहा था,,, तुम्हें अपनी बीवी बनाने का सपना में उसी दिन से देख रहा जिस दिन से मैं तुम्हें पहली बार नहाते हुए देखा था अभी जो कुछ भी मैंने कहा वह तो तुम्हें गुस्सा दिलाने के लिए कहा था मैं देखना चाहता था कि तुम किस हद तक जा सकती हो लेकिन तुम बहुत अच्छी हो तुम बहुत हिम्मत वाली हो और मुझे ऐसी ही बीवी चाहिए थी,,,,

(इतना सुनकर झुमरी आश्चर्य से राजू की तरफ देखने लगी और बोली)

नहीं तुम झूठ बोल रहे हो तुम्हें सिर्फ मेरा बदन चाहिए था,,,

हां वह तो चाहिए था लेकिन शादी करने के बाद लेकिन मैं अपने आप को रोक नहीं पाया जब तुम्हें आज कपड़े उतारते हुए नंगी देखा तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया जैसा कि अभी भी खड़ा हो रहा है,,,,(इतना सुनते ही झूमर जिज्ञासा बस नीचे नजर करके देखे तो सच में राजू का लंड खड़ा हो चुका था और उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था यह नजारा देखते ही झुमरी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी) मैं तुम्हें सच में बहुत प्यार करता हूं झुमरी अपनी जान से भी ज्यादा,,,

सच राजू तुम मुझे धोखा तो नहीं दोगे ना,,,

मां कसम,,,,, मरते दम तक मैं तुम्हें कभी धोखा नहीं दूंगा,,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने प्यासे होठों को झुमरी के लाल-लाल होठों पर रखकर उसके रसपान करने लगा दो पल भर में ही उत्तेजित होने लगे राजू अपनी दोनों हथेली को झुमरी की सुगठित गांड पर रखकर दबाना शुरू कर दिया झुमरी भी उत्तेजित होने लगी थी राजू उसे चोदने की तैयारी करने लगा था वह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर उसकी बुर की दरार में ऊपर नीचे करके रगड़ रहा था यह देखकर झुमरी बोली,,)

नहीं राजू अब नहीं,,,

ऐसे कैसे नहीं मेरा मन थोड़ी भरने वाला है,,,

(मन तो झुमरी का भी बहुत कर रहा था लेकिन इस तरह से खुले में उसे डर लग रहा था इसलिए वह बोली)

तो यहां नहीं चलो फिर से झोपड़ी में,,,

नहीं मेरी रानी अब तो तुम्हें यही चोदूंगा,,,,

नहीं नहीं राजू ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,

अरे अब मेरा मन थोड़ी मानने वाला है,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू झुमरी की कमर पकड़कर घुमा दिया और उसे ट्यूबवेल की दीवाल पकड़कर झुकने के लिए बोला झुमरी का भी मन बहुत कर रहा था राजू के लंड को एक बार फिर से अपनी बुर में लेने के लिए इसलिए ना चाहते हुए भी राजू की बात मानते हुए वह झुक गई और राजू उसकी कमर पकड़ कर उसकी गांड को थोड़ा और ऊपर उठा दिया अब झुमरी की गांड का वह छोटा सा गुलाबी छेंद राजू की आंखों के ठीक सामने था,,, जिसमें से मदन रस टपक रहा था यह देखकर राजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ गया राजू का लंड पूरी तरह से तैयार हो चुका था और राजू तुरंत अपने लंड को पकड़कर झुमरी के गुलाबी छेंद से सटा दिया,,, एक बार फिर से राजू के गरम लंड के सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करके झुमरी गनगना गई,,,, राजू एक झटके में ही अपने पूरे लंड को झुमरी की बुर में अंदर तक डाल दिया एक हल्की सी चीख झुमरी के मुंह से निकली और सब कुछ शांत हो गया,,,, एक बार फिर से झुमरी पूरी तरह से मत हो सो चुकी थी राजू उसकी कमर पकड़कर धक्के लगाना शुरू कर दिया था खुले आसमान के नीचे खेतों के बीच चुदाई करने का अपना एक अलग मजा था जिसका आनंद दोनों इस समय ले रहे थे देखते ही देखते राजू की कमर रफ्तार से आगे पीछे होने लगी झुमरी मदहोश हो जा रहे थे जिंदगी में पहली बार इस तरह से चुदाई का मजा ले रही थी और एक ही दिन में दो दो बार इसलिए वह पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,।

थोड़ी ही देर में दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,,, कुछ देर बाद दोनों जब शांत हुए तो झुमरी फिर से नहाने लगी क्योंकि झोपड़ी के अंदर हूं धूल मिट्टी लग चुकी थी वह नहा कर फिर से अपने कपड़े पहन लिए और तब तक कपड़े भी सूख चुके थे वह कपड़ों को लेकर फिर से घर की तरफ जाने लगी पीछे-पीछे राजू की जाने लगा लेकिन गांव का मोड़ आने पर राजू दूसरी तरफ चला गया था कि किसी को शक ना हो,,,,।

राजू को अभी तक दोबारा अपनी मां को चोदने का मौका नहीं मिला था वह तूफानी बारिश में जी भर कर अपनी मां की चुदाई किया था और घर पर आकर जब उसके पिताजी और उसकी बुआ घर पर नहीं थी तब मौके का फायदा उठाता हुआ अपनी मां की चुदाई किया था लेकिन उसके बाद से उसे मौका नहीं मिला था और ना ही मधु को ही मौका मिला था दोनों एक दूसरे के संसर्ग के लिए तड़प रहे थे क्योंकि मधु अब समझ चुकी थी कि मर्दाना ताकत किसे कहते हैं वह अपने बेटे से जी भर कर चुदवाने के बाद अपने बेटे के लंड की दीवानी हो गई थी,,,,, अब उसे अपने पति से चुदवाने में इतना मजा नहीं आता था क्योंकि उसकी बुर में उसके बेटे के लंड का सांचा जो बन गया था,,,,।

लाला के गहरे राज का राजदार बनने के बाद से राजू की किस्मत जोरों पर थी उसके अनाज के गोदाम का सारा काम राजू को ही संभालने को मिल गया था जिससे आमदनी उसकी अच्छी होने लगी थी गोदाम पर जाकर राजू,, दूसरे बैल गाड़ियों में अनाज का बोरा भरवा ता था और उन्हें गंतव्य स्थान तक पहुंचाने का हिदायत दे देता था कुछ बैलगाड़ी से तो रेलवे स्टेशन अनाज उतरता था और उसमें रेलगाड़ी में डालकर दूसरे शहर भेजा जाता था इसी तरह से लाला का कारोबार चलता था ऐसे ही 1 दिन राजू गोदाम पर अनाज के बोरे भरवा रहा था और तभी गोदाम में काम करने वाला एक मजदूर जोर जोर से चिल्लाता हुआ आया,,,

मालिक ,,,,मालिक,,,,, ओ मालिक,,,

(वह मजदूर इतना जोर से चिल्लाते हुए आया था कि सब लोग उसी को ही देख रहे थे यहां तक कि लाला भी एकदम गुस्से में आकर जोर से चिल्लाते हुए बोला)

क्या हो गया है जो मालिक मालिक चिल्ला रहा है कुछ आगे बोलेगा भी,,,

अरे मालिक,,,,, जमीदार विक्रम सिंह आ रहे हैं,,,।

(इतना सुनना था कि लाला के तो पसीने छूटने लगे एकदम परेशान नजर आने लगा और अपनी जगह से खड़ा होते हुए बोला)

विक्रम सिंह,,,,

(राजू यह देखकर हैरान था कि विक्रम सिंह ऐसी कौन सी बला है कि जिसका नाम सुनकर लाला के पसीने छूट रहे थे)
 
लाला की हालत को देखकर खुद राजू सोच में पड़ गया था वही लाला की हालत पर हैरान था उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह विक्रम सिंह है कौन जिसका नाम सुनते ही लाला की हालत खराब हो गई,,,। यही जानने के लिए राजु वही एक कोने में जाकर खड़ा हो गया और सब कुछ अपनी आंखों से देखने लगा,,, लाला अपनी जगह से खड़ा हो गया था उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी और दूर से घोड़ों की टॉप की आवाज सुनाई दे रही थी,,,,,।

देखते ही देखते घोड़ा गाड़ी और साथ में 2 घुड़सवार जिनके कंधों पर दो नाली वाली बंदूक टंगी हुई थी वह दोनों घोड़े पर से पहले उतरे और घोड़ा गाड़ी के करीब जाकर खड़े हो गए ,,, थोड़ी ही देर में विक्रम सिंह नीचे उतरा,,, तकरीबन 6 फुट का हट्टा कट्टा चौड़ी छाती वाला आदमी देख कर ही कोई भी समझ जाएगी यह जमीदार ही हैं,,, उसका व्यक्तित्व था ही उस लायक,,, बड़ी-बड़ी मूछें उम्र तकरीबन 45 के करीब फिर भी अपने कद घाटी के हिसाब से 35 साल का ही नजर आता था,,,,,,, विक्रम सिंह घोड़ा गाड़ी से नीचे उतरा ही था कि खुद लाला अपनी जगह से दौड़ता हुआ उसके करीब गया और हाथ जोड़ते हुए उसका अभिवादन करते हुए बोला,,,।





अरे विक्रम सिंह आपने क्यों कष्ट उठाया खबर भिजवा दीए होते तो मैं खुद चला आता,,,,,,

वह तो मैं देख ही रहा हूं लाला,,,, पर तुम भी अच्छी तरह से जानते हो कि समय भी पूरा हो गया है लेकिन तुम्हारी कोई खोज खबर नहीं मिल रही थी तो हमें खुद आना पड़ा,,,,,

अरे विक्रम साहब,,,(अपने चारों तरफ नजर घुमा कर इधर-उधर देखते हुए) यहां बड़ी धुप है,,चलो हवेली पर चलकर बात करते हैं,,,,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला भी विक्रम सिंह की घोड़ा गाड़ी में उसके साथ बैठ गया और वह लोग लाला की हवेली की तरफ निकल गए,,,, लेकिन जाते-जाते राजू को अच्छे से काम देखने के लिए बोल कर गया था इसलिए बाकी का काम राजू ने वही खड़े-खड़े सबसे करवाया लेकिन वह सोच में पड़ गया थी आखिरकार यह विक्रम सिंह है कौन सी बला और किस समय की बात कर रहा था यह सब राजू के सोच के परे था लेकिन राजू को हैरान कर देने वाला था क्योंकि वह अभी तक यही सोच रहा था कि लाला ही पूरे गांव का मुखिया और रुबाबदार पैसे वाला इंसान है लेकिन यहां तो शेर को सवा शेर मिल गया था,,, फिर आ जाओ अपने मन में सोचा अपने कोई से क्या मतलब लाला जाने उसका काम जाने और यह सोचकर वह सारे काम करा कर वापस घर लौट आया,,,, मधु अपने बेटे के साथ चुदाई का असीम सुख पाकर अपने बेटे के लंड के लिए तड़प रही थी वह भी मौके की तलाश में ही रहती थी लेकिन उसे किसी भी प्रकार से मौका नहीं मिल पाता था हालांकि एक दो बार घर में कुछ पल के लिए दोनों अकेले मिले जरूर थे लेकिन आगे बढ़ने की हिम्मत मधु में बिल्कुल भी नहीं थी वह डर के मारे आगे नहीं बढ़ पाई और राजू पूरी तरह से निश्चिंत हो चुका था क्योंकि वह जानता था कि वह जब चाहे मौका मिलते ही अपनी मां की चुदाई कर सकता है और जो सुख उसे अपनी मां की बुर से मिला था वह सुख उसे आज तक किसी की भी बुर से नहीं मिल पाया था,,,,,





ऐसे ही 1 दिन घर में काम कुछ ज्यादा था गेहूं की सफाई भी करनी थी और खेतों में काम भी था खाना बनाते समय मधु अपने मन में कुछ सोच रही थी तभी वह गुलाबी से बोली,,,।

गुलाबी,,

जी भाभी,,,

ऐसा करना कि तुम खाना खा लेने के बाद गेहूं की सफाई कर लेना और मैं खेतों में काम कर लूंगी क्योंकि खेत में काम करना भी बहुत जरूरी है,,,

जी भाभी मैं गेहूं साफ कर लूंगी,,,

(इतना कहना था कि तभी वहां पर राजू भी आ धमका और उसे देखकर मधु की बुर फुदकने लगी,,,,, आते ही राजू अपनी मां से बोला,,,)

मां खाना तैयार हो गया क्या,,,,(राजू अपनी मां के बेहद करीब जाकर खड़ा हो गया था जहां से राजू को अपनी मां के ब्लाउज में से उसके दोनों खरबूजे साफ नजर आ रहे थे और इस बात का आभास मधु को हो गया तो वह बोली)

हां तैयार तो हो गया है लेकिन तुझे खाना क्या है,,,,

(इतना कहते हुए वह राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा कर बोली) यह तो बता दे,,,,



मुझे तो मां गरम गरम रोटी बहुत पसंद है और वह भी फूली हुई जब तवे पर गर्म होती है ना तो एकदम फुल जाती है वही रोटी मुझे सबसे ज्यादा पसंद है,,,

(राजू फूली हुई रोटी की उपमा अपनी मां की बुर से कर रहा था और इस बात का एहसास मधु को हो चुका था इसीलिए उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और वह अपनी सांसो को दुरुस्त करते हुए बोली)

कभी कभी रोटी फूलती नहीं है तो क्या खाएगा नहीं,,,

तुम बस रोटी को तवे पर रख दो उसे फुलाना मेरा काम है क्योंकि फुलाए बिना ना तो रोटी देखने में अच्छी लगती है और ना ही उससे भूख मिटाने में मजा आता है,,,,

(अपने बेटे की दो अर्थ वाली बातों को सुनकर मधु की बुर पानी पानी हो रही थी,,, गुलाबी को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि मां बेटे दोनों दो अर्थ में गंदी बातें कर रहे हैं वह तो अपने काम में बस बोलते क्योंकि उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि दोनों मां बेटों के बीच खिचड़ी पक चुकी है,,,,)





तू चिंता मत कर आज तुझे मालपुआ खिलाऊंगी और वह भी रस टपकता हुआ,,,

वाह क्या बात है मां तुमने तो मेरी भूख (गुलाबी से नजर बचाकर पजामे के ऊपर से अपने लंड को दबाते हुए) बढ़ा दी,,,(अपने बेटे को इस तरह की हरकत करता हुआ देख कर मधु एकदम से सिहर उठी,,,, उसकी बुर की प्यास और ज्यादा बढ़ने लगी उसे अपनी बुर में अपने बेटे के लंड देने की चाहत और ज्यादा प्रबलित होने लगी,,, राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) सच कह रही हो ना ना भूल तो नहीं जाओगी,,,

बिल्कुल भी नहीं भूलूंगी लेकिन तुझे खेतों में मेरा हाथ बंटाना पड़ेगा,,,,

बुआ भी चलेंगी खेत पर,,,

नहीं,,,(उत्तेजना के मारे अपने निचले हो तो को दांत से काटते हुए) मैं और तू बस हम दोनों चलेंगे बुआ घर का काम करेंगी,,,

(इतना सुनते ही राजू का लंड तन गया उसे समझ में आ गया था कि आज उसकी मां कुछ और सोच कर रखी है राजू के होठों पर मुस्कान तेरने लगी,,,,)

रुक मैं तुझे खाना निकाल कर देती हूं,,,,,

(मधु खाना बनाने बैठी थी और गर्मी की वजह से वह अपनी साड़ी को घुटनो तक उठा कर बैठी हुई थी जिससे राजू बार-बार उसके साड़ी के अंदर झांकने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह कुछ देख नहीं पा रहा था अपने बेटे की हरकत को मधु अच्छी तरह से समझ रही थी और उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी तो राजू भी मौका देखकर अपनी बुआ से नजर बचाकर अपने हाथ की 2 उंगलियों को बुर की मुद्रा में बनाकर उसे दिखाने के लिए बोल रहा था अपने बेटे की हरकत से मधु के तन बदन में आग लगी हुई थी उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी काफी दिन हो गए थे अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लिए इसलिए अपने बेटे की हसरत को देखते हुए वह भी गुलाबी की तरफ देखी तो दूसरी तरफ मुंह करके काम कर रही थी और मौका देखते ही मधु तुरंत अपनी साड़ी को थोड़ा सा खोलकर अपने दोनों टांगों को फैला दी और अपने बेटे को अपनी रसीली बुर के दर्शन करा दी अपनी मां की बुर को देखते ही राजू से रहा नहीं गया और वह गहरी सांस लेते हुए कसके पजामे के ऊपर से यह अपने लंड को दबोच लिया,,,,।





बस अब खेत में,,,(मधुर एकदम से धीमे स्वर में बोली और अपनी मां की बात सुनते ही उसके तन बदन में खुशी की लहर दौड़ने लगी वह तुरंत वहीं बैठ कर खाना खाने लगा और थोड़ी ही देर में मधु भी खाना खा ली और राजू से पहले ही खेत में चली गई और राजू को आने के लिए बोली थी ,,,,,,, थोड़ी देर में गुलाबी खाना खाकर घर के काम में लग गई तो मौका देखकर राजू भी खेत की तरफ निकल गया,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां खेतों के बीचो बीच में काम कर रही होगी जहां पर छोटी सी झोपड़ी बनी हुई है और देखते ही देखते राजू उस जगह पर दबे पांव पहुंच गया वह देखना चाहता था कि उसकी मां कर क्या रही है,,,,,,,, राजू समय से थोड़ा जल्दी ही खेत पर पहुंच गया था और मधु थोड़ा बहुत काम करके उसे बड़े जरूर की पेशाब लगे हुई थी और वह घनी झाड़ियों के बीच धीरे-धीरे जा रही थी तभी राजू की नजर अपनी मां पर पड़ गई और वह दबे पांव उसके पीछे-पीछे नजर बचाकर जाने लगा वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या करती है,,,, वैसे तो वहां अपनी मां के साथ आप कुछ भी कर सकता था लेकिन उसकी हार एक क्रिया उसकी हरकत राजू के तन बदन में आग लगा देती थी और वही देखने के लिए उत्सुक भी था क्योंकि जिस तरफ उसकी मां जा रही थी उसे अंदेशा हो रहा था कि उसकी मां पेशाब करने जा रही है और ऐसा ना जा रहा हूं अपनी आंखों से कैसे जाने दे सकता था देखते ही देखते हो ठीक है अपनी मां के पीछे एक पड़े से पेड़ के पीछे छुप गया जैसा कि झुमरी को नंगी देखने के लिए किया था,,,

Madhu is tarah se pesaab karne k liye Beth gayi



मधु को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह तुरंत अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दे और एक बार फिर से राजू की आंखों के सामने उसकी उत्तेजना बढ़ा देने वाला उसका सबसे पसंदीदा अंग उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड नजर आने लगी और वह भी एकदम नंगी,,,, मधु को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए साड़ी उठाने के साथ ही वह तुरंत नीचे बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी है नजारा देखकर राजू के दिलों दिमाग पर बद‌हवासी और मदहोशी छाने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, राजू पेड़ के पीछे छुप कर अपनी मां की गोल गोल चिकनी गांड को देख रहा था जो कि कुछ ज्यादा ही बड़ी नजर आ रही थी और पेशाब करने की वजह से उसकी बुर से निकल रही सीटी की आवाज पूरे वातावरण को अपनी मधुर ध्वनि में डूबा दे रही थी उस सीटी की आवाज को सुनकर राजू से रहा नहीं गया और वह धीरे से पेड़ के पीछे से निकलकर ठीक है अपनी मां के पीछे खड़ा होकर बोला,,,।

Madhu





क्या मा अकेले अकेले मुत रही हो मुझे भी तो साथ ले ली होती,,,।

(अपने पीछे से आ रही आवाज को सुनकर पल भर के लिए मधु एकदम से चूक गए लेकिन जैसे उसे इस बात का आभास हुआ कि उसका बेटा उसके ठीक पीछे खड़ा है तब जाकर उसे राहत हुई लेकिन अपने बेटे के सामने खड़ी दोपहरी में दिन के उजाले में इस तरह से पेशाब करने में उसे बहुत शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी वह धीरे से बोली,,,,)

इसके लिए भी किसी को आमंत्रण दिया जाता है क्या,,,,।

(इतना सुनते ही राजू से रहा नहीं गया उसे भी जोड़ों की पेशाब लगी हुई थी और वह भी पजामे को घुटनो तक नीचे खींच कर अपनी मां की तरह ही बैठ गया यह देख कर मधु के तन बदन में आग लग गई क्योंकि वह औरतों की तरह बैठकर पेशाब करने जा रहा था और यह नजारा देखना उसके लिए भी किसी अद्भुत नजारे से कम नहीं था वह अपनी नजरों को हटा नहीं पाई और वहां अपनी नजरों को थोड़ा सा आगे की तरफ झुक कर अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच देखने लगी जैसे कि एक मर्द एक औरत की दोनों टांगों के बीच देखता है,,, अपनी मां की उत्सुकता के बीच राजू मुतना शुरू कर दिया,,,, उसके लंड से पेशाब की धार दूर तक जा रही थी जहां तक कि उसकी मां की पेशाब की धार नहीं पहुंच पा रही थी,,,,, और पेशाब की धार को और दूर मारते हुए बेशर्मी की हद पार करते हुए राजू अपनी मां से बोला,,,)

देखी मा मेरे लंड की ताकत,,, तुमसे दूर तक मुत रहा हूं,,,



तू मेरे से दूर तक मुतेगा ही ना तेरा लंड भी तो पाइप की तरह है और मेरे पास क्या है एक छोटा सा छेद है जिसमें से कितनी दूर तक जाएगा,,,,

(मधु भी एकदम रंगीन होती जा रही थी उसके शब्द उसकी बातें भी अश्लील होती जा रही थी और उसके मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर राजू पूरी तरह से मस्त वाला हुआ जा रहा था और वह अपना हाथ अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी बुर पर रखते हुए बोला,,)

सच में मां तुम्हारी चिकनी बुर से ज्यादा दूर तक पेशाब नहीं जा सकता,,,, और तुम चाहोगी तो भी नहीं कर सकती,,,(इतना कहते हैं राजू अपनी मां की गुलाबी छेद पर अपनी हथेली को रगड़ रहा था और उसकी हरकत मधु के तन बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रही थी वह पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी,,,, उत्तेजना के मारे मधु का गला सूखने लगा था और राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मेरे लंड को पकड़ कर थोड़ा सा और ऊपर उठाओ देखो कितनी दूर तक जाता है,,,.



(राजू अपनी कामुक मदहोश कर देने वाली बातों से अपनी हरकतों से अपनी मां को पूरी तरह से चुदवासी कर दिया था उसके बदन में उत्तेजना भर दिया था,,, एक तरह से अपने बेटे की गुलाम बन चुकी थी और उसकी बात मानते हुए तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़े दी काफी दिनों बाद वह अपने बेटे के लंड को पकड़ रही थी उसकी गर्मी उसे सहन नहीं हो रही थी और उसकी‌ तपन उसे अपनी बुर पर महसूस होने लगी थी,,,, मधु अपने बेटे के मोटे और लंबे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा ही और राजू ने फिर से पेशाब करना शुरू कर दिया और पेशाब की धार और ज्यादा दूर तक गिरने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे पौधों को पानी दे रहा हो यह देख कर मधु की बुर पानी फेंक रही थी इस तरह का नजारा वह कभी देखी नहीं थी और ना ही इस तरह की हरकत करने की कभी वह सोची थी लेकिन राजू के चलते वह पूरी तरह से बदहवास हो चुकी थी वह अब अच्छे बुरे के बीच फर्क करना भूल गई थी वह मां बेटे के बीच के पवित्र देशों के बीच इस तरह के शारीरिक संबंध को अब गलत नहीं समझ रही थी वह एक दूसरे की जरूरत को ही समझ रही थी और इस समय मधु को भी जरूरत थी और राजू को भी एक दूसरे की,,,,,,,।



दोनों मां बेटे बैठकर पेशाब कर रहे थे,,, मधु ने आज तक किसी लड़के को इस तरह से बैठकर पेशाब करते हुए नहीं देखा था लेकिन आज उसे अपने बेटे को इस तरह से पेशाब करते हुए देखकर उसकी बुर पानी-पानी हो रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और वह भी एक दूसरे के अंगों से खेल भी रहे थे,,, राजू अपनी मां की बुर को सहला रहा था और मधु अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दी थी,,,,,,, देखते ही देखते दोनों एकदम गर्म होने लगे,, मधु की नाराम नाराम हथेली में राजू का लंड और भी ज्यादा कड़क होने लगा था और राजू की हथेली में बार-बार मधु की बुर से पानी के छींटे बाहर निकल रहे थे जो कि उसका मदन रस था और यह मदन रस राजू के लिए अमृत की धार से कम नहीं था,,,, कड़ी धूप में दोनों बैठे हुए थे झाड़ियों के बीच और चारों तरफ हरे हरे खेत लहरा रहे थे कोई देखना चाहे तो भी किसी को दोनों नजर ना आए इस तरह से यह जगह झाड़ियों से गिरी हुई थी और इसी का फायदा उठाते हुए राजू और मधु दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और दोनों एक दूसरे की आंखों में डूबने लगे थे देखते ही देखते राजू अपने पैसे होठों पर अपनी मां के लाल लाल होठों पर करीब ले जाने लगा और मधु भी अपने तपते हुए हो उसको अपने बेटे के होठ से लगाने के लिए आगे बढ़ने लगी और दोनों के हाथ अपनी-अपनी क्रिया कर ही रहे थे,,, और देखते ही देखते दोनों के होंठ कब एक हो गए दोनों को पता ही नहीं चला राजू पूरी तरह से मदहोश हो चुका था अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होठों से लगाकर उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह शराब की बोतल को पूरा का पूरा अपने होठों से लगा लिया हो पल भर में उसके तन बदन में नशा छाने लगा था आंखों में खुमारी छाने लगी थी और यही हाल मधु का भी था,,, मधु कभी सपने में नहीं सोचा थी कि वह अपने बेटे की संगत में इस तरह से निर्लज्ज हो जाएगी कि अपने ही बेटे के साथ रंगरेलियां मनाने पर उतारू हो जाएगी,,, क्योंकि खेत पर बुलाने का उसका ही बहाना था वह अपने बेटे के साथ एक बार फिर से चुदाई का खेल खेलना चाहती थी क्योंकि उससे रहा नहीं जा रहा था अपने पति के साथ अब उसे मजा नहीं आता अपने बेटे के मोटे लंड़की रगड़ उसे अपनी बुर के अंदर फिर से महसूस करना था,,,

राजू भी अपनी मां को अपने रंग में रंग लिया था दोनों मां-बेटे के सर पर वासना का तूफान छाया हुआ था जो कि अपना असर दिखा रहा था मधु अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे के लिए खुल चुकी थी और राजू अपनी जीभ को अपनी मां के मुंह में डालकर उसके लार को चाट रहा था,,,, इस तरह के चुंबन का सुख आज तक उसके पति ने नहीं दिया था और ना ही इस तरह से कभी चुंबन किया था लेकिन राजू उसे एक अद्भुत चुंबन की भाषा सिखा रहा था जिसमें औरत और मर्द दोनों कैसे एक दूसरे में खो जाते हैं राजू एक तरह से मधु के लिए संभोग के अध्याय का शिक्षक था जो उसे नए-नए क्रियाकलापों से अवगत करा रहा था और उन क्रियाकलापों का उसे भरपूर आनंद भी दे रहा था,,,,

देखते ही देखते अपनी मां की बुर को सहला रही उंगलियों को कब उसने अपनी मां की बुर में डाल दिया यह मधु को पता ही नहीं चला और वह अपनी उंगली को अपनी मां की बुर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया देखते ही देखते चुंबन में लीन मधु के मुख से गरमा गरम सिसकारियां निकलने लगी चौकी इस समय इस तरह के खुले वातावरण में उन दोनों के सिवा सुनने वाला और कोई नहीं था अपनी मां की गरमा गरम सिसकारियों को सुनकर राजू के तन बदन में आग लग रही थी,,,, मधु से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था मधु के तन बदन में अकड़न बढ़ने लगी थी ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसकी बुर से पानी का फव्वारा फूट पड़ेगा और इसीलिए वह तुरंत अपनी जगह से खड़ी हुई और अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही ठीक अपने बेटे के सामने आ गई उसका बेटा अभी भी पेशाब करने की मुद्रा में बैठा हुआ था और राजू को समझ पाता इससे पहले ही मधु अपने दोनों हाथों से राजू के बाल को पकड़कर उसके प्यासे होठों को अपनी बुर से सटा ली अपनी मां की यह कामुक मदहोश कर देने वाली हरकत देखते ही रह चुके तन बदन में आग लग गई और वह तुरंत अपनी जीत को बाहर निकालकर अपने मां के गुलाबी छेद में डाल दिया और उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,।

सहहहरह आहहहहह आहहहहहहह राजू मेरे बेटे पूरी जीभ डालकर चाट,,,,(ऐसा कहते हुए मधु पूरी तरह से मदहोश और उत्तेजित होकर अपनी कमर को हिला रही थी और ऐसा करने से राजू अपनी जगह पर ठीक से बैठ नहीं पा रहा था,,, अपनी मां की योग्यता भरी उत्तेजना को देखकर राजू भी अत्यंत उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, और वह तुरंत अपनी स्थिति को बदलते हुए घुटनों के बल बैठकर अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया और तुरंत अपने दोनों हाथ को साड़ी में डालते हो अपनी मां की कमर को थाम लिया और उसकी नरम नरम गांड पर अपनी उंगलियों को रखकर दबाव देते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया और जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को बुर में डालकर चाटना शुरू कर दिया,,,,,।

मधु की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसकी गरमा गरम सांसे तेज होती जा रही थी उसकी सिसकारियां की आवाज से पूरा खेत गूंज रहा था,,, शायद खुलकर इस तरह की गरमा गरम शिसकारियों का आनंद हुआ खुद पहली बार ले रही थी,,,, इस तरह से खुले खेतों के बीच इस तरह की काम क्रीड़ा के बारे में वह कभी सोची भी नहीं थी और ना ही उसके पति ने कभी इस तरह का मौके का फायदा उठाते हुए उसके साथ इस तरह की काम क्रीड़ा का खेल खेला था लेकिन उसके बेटे ने उसे अद्भुत सूखी देते हुए खेतों के बीचो बीच उसकी बुर चाटते हुए उसे मदहोश कर रहा था,,,, उत्तेजना बस अपने आप ही मधु की कमर एक मर्द की भांति आगे पीछे हो रही थी ऐसा लग रहा था कि वह अपने बेटे के मुंह को चोद रही हो बुर से निकला बदन रस की चिपचिपाहट से राजू का पूरा चेहरा गिला हो चुका था और उसमें से आ रही मादक खुशबू से राजू के तन बदन में आग लगी हुई,,,, मधु इतना ज्यादा उत्तेजित हो जा रही थी कि अपना एक पाव उठाकर अपने बेटे के कंधे पर रख दे रहे थे उसे अपनी बुर से दबा ले रही थी,,, इस तरह की उत्तेजना और काम चेस्टा वह पहले कभी नहीं की थी,,,, उसके जीवन का यह पहला अवसर था जब वह अपने बेटे के साथ मनमानी कर रही थी,,,,,।

राजू औरत को खुश करने का हुनर अच्छी तरह से जानता था इसलिए जितना हो सकता था आपने जीव को उसकी बुर की गहराई में उतार दे रहा था और लगातार अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर दबा रहा था,,, मदहोशी भरे आनंद के सागर में गोते लगाते हुए रह-रहकर मधु के हाथों से उसकी साड़ी छूट जा रही थी जिससे राजू पूरी तरह से अपनी मां के साड़ी के अंदर आ जा रहा था और और उसी स्थिति में मधु अपनी कमर हिला कर अपनी बेटे के मुंह को ही चोद रही थी,,,, लेकिन इस तरह से साया के अंदर आ जाने से राजू को बहुत ज्यादा गर्मी का एहसास होने लगता था वह तो वह खुद ही अपनी मां की साड़ी उठाकर फिर से कमर तक कर देता था और फिर वापस उसी क्रिया में लग जा रहा था,,,, राजू अपनी जीभ का करामत दिखाते हुए अपनी मां को स्वर्ग का सुख दे रहा था इस तरह का सुख की कल्पना कभी मधु ने नहीं की थी,,,,,,,,

राजू और मधु दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे क्योंकि दोनों एकदम धूप में खड़े थे लेकिन जिस तरह का शुभ दोनों को मिल रहा था उससे उन दोनों को धूप गर्मी का एहसास बिल्कुल भी नहीं हो रहा था भले ही दोनों का बदन पसीने से भीगा हुआ था आखिरकार दोनों मेहनत भी तो उसी तरह की कर रहे थे इसलिए पसीना बहना लाजमी था,,,, देखते ही देखते मधु का बदन अकड़ने लगा उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और वह अपने बेटे के बाल को कस के पकड़ कर अपने बुर से उसके होंठ को कच कचा के सटाकर झड़ना शुरू कर दी उसकी बुर से गर्म लावा बाहर निकलने लगा और राजू बेहद उत्साहित और उत्सुक था वह जीभ लगाकर अपनी मां की बुर से निकले हुए मदन रस को अमृत की धार समझकर अपने गले के नीचे घटक ने लगा कसैला स्वाद भी उसे मधुर लग रहा था और देखते ही देखते वह तब तक अपनी मां की बुर में चिप डालकर जागता रहा जब तक की बुर से निकला पानी साफ नहीं हो गया,,,

मधु अभी भी गहरी गहरी सांस लेते हुए अपने बेटे के मुंह पर कमर का झटका मार रही थी,,,,,,, राजू की पूरी तरह से मस्त हो चुका था लेकिन वह जानता था यह तो शुरुआत है अभी तो खेतों में काम बहुत बाकी है और वह जानता था कि खेत में इस तरह का काम करने में बहुत मजा आने वाला है,,,।
 
मधु अपनी बुर को अपने बेटे के मुंह पर र करते हुए एक अद्भुत चर्मसुख को प्राप्त करते हुए झड़ चुकी थी और उसकी बुर से निकला हुआ मदन रस का एक-एक बूंद राजू अपनी जीभ से चाट कर अपने गले के नीचे घटक गया था,,, बिना लंड को अपनी बुर में ले झड़ जाने का एक अपना अलग ही मजा होता है और इस अनुभव को राजू की संगत में मधु बार-बार महसूस कर रही थी,,,,, राजू ही था जो अपनी मां को बिना शारीरिक संबंध बनाए हैं सिर्फ हरकतों से ही गर्म करके पानी निकाल देता था और इससे मधु बेहद खुश भी थी खुले आसमान के नीचे घने खेतों के बीच मधु पहली बार इस तरह की सुख का अनुभव कर रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अभी भी संजू घुटनों के बल बैठा हुआ था और अपनी मां की गांव को दोनों हाथों से दबाए हुए अभी भी वह अपनी मां के बुर को अपने होठों से लगाया हुआ था,,,, क्योंकि अभी भी झड़ते हुए मधु अपनी कमर का झटका लगा दे रहे थे झढ़ते समय मधु का चेहरा देखने लायक होता था उसका गोरा मुखड़ा लाल टमाटर की तरह तमतमाने लगता था आंखें अपने आप ही बंद हो जाती थी,,, हॉट खुले के खुले रह जाते थे और सांसे की गति इतनी तेज की छातियों की शोभा बढ़ा रही दोनों खरबूजा जैसी चूचियां ऊपर नीचे होते हुए उसकी मदहोशी की कहानी खुद ही बयां कर रही होती,,,,,, राजू और मधु के नजरिए से देखा जाए तो इस तरह का नजारा बेहद कम होते जना से भरपूर और मदहोश कर देने वाला था लेकिन सामाजिक नजरिए से देखा जाए तो यह नजारा बेहद शर्मसार कर देने वाला था बेहद शर्मनाक दृश्य बना हुआ था समाज के नजरिए से एक अपनी साड़ी को कमर तक उठाए खड़ी थी और उसका बेटा घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को हथेली में दबाते हुए उसकी बुर पर अपना होंठ लगाकर चाट रहा था,,,,।

Raju or uski ma khet me kuch is tarah se



वासना का तूफान कुछ देर के लिए थम चुका था मधु अपनी सांसो को दुरुस्त करने में लगी हुई थी राजू भी अपने होठों को अपनी मां की रसीली बुर से हटाकर घुटनों के बल बैठा हुआ अपनी मां की तरफ देख रहा था मधु भी अपने बेटे की तरफ देखकर गहरी गहरी सांस ले रही थी दोनों मां-बेटे पूरी तरह से मदहोशी के सागर में गोते लगाने को एक बार फिर से तैयार थे,,,, मधु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने ही सगी बेटी के साथ इस तरह कदर खुल जाएगी कि उसके साथ बेशर्मी की सारी हदें पार कर देगी लेकिन बेशर्मी की हद पार करने में ही जिंदगी का असली मजा था इस बात का एहसास उसे होने लगा था वह राजू की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी राजू भी मुस्कुरा रहा था और राजू मुस्कुराते हुए बोला,,

सच में मां तुमने आज मुझे एकदम खुश कर दी अपना पानी पिला कर,,,,

(अपने बेटे की बातें सुनकर माध्यम से शरमा गई और बिना कुछ बोले कमर तक उठाए हुए अपनी साड़ी को एक झटके में नीचे गिरा दी और एक अद्भुत खूबसूरत नजारे पर पर्दा गिरा दी,,,, राजू भी अपनी जगह पर खड़ा होता हुआ बोला,,,) सच में मां तुम पेशाब करते हो इतनी खूबसूरत लगती हो जैसे कि स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा बैठकर मुत रही हो,,,,



क्या मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हुं,,,(इतना कहने के साथ ही पेशाब की हुई जगह पर अपने पैर बचाकर वापस झोपड़ी की तरफ लौटते हुए वह बोली)

मत पूछो तुम मुझे कितनी खूबसूरत लगती हो मेरा बस चलता तो मैं तुमसे शादी कर लेता और फिर जिंदगी भर तुम्हारी बुर में लंड डालकर पड़ा रहता,,,

वह तो तू अभी भी कर सकता है,,,

हां कर तो सकता हूं लेकिन फिर किसी का डर नहीं रहता ना,,,

हां यह बात तो है,,,,(इतना कहने के साथ ही मधु झोपड़ी के पास आ गई हो खटिया को अपने हाथों से गिरा कर उस पर बैठ गई उसके पास में राजू भी बैठ गया,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से बैठे रहे मधु रह रह कर मुस्कुरा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपने बेटे के साथ नहीं बल्कि अपने प्रेमी के साथ बैठी हो,,, अपनी मां के चेहरे की तरफ देखते हुए राजू बोला)

चलो थोड़ा काम कर लेते हैं उसके बाद फिर खेल शुरू करते हैं,,,

कौन सा काम,,,?(मधु अपने होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए बोली)

खेत का काम और कौन सा इसीलिए तो तुम मुझे यहां पर बुलाई थी ना,,,,

अरे बुद्धू तुझे खेत जोतने के लिए नहीं बल्कि (दोनों टांगों के बीच उंगली से इशारा करते हुए) अपना खेत जोतने के लिए एक बहाने से बुलाकर लाई हूं,,,

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू एकदम से खुशी से झूम उठा और बोला)

क्या सच में तुम एकदम चुदवासी हो गई हो,,,,

हा रे कई दिन हो गए थे तेरे लंड को अपनी बुर में लिया कसम से तू सच कहता था कि मैं तेरी गुलाब बन जाऊंगी और ऐसा ही हो रहा है पता है अब तो तेरे पिताजी से चुदवाने में मुझे बिल्कुल भी मजा नहीं आता और तू सच कहता है कि तेरे लंड से आधा ही है तेरे पिताजी का लंड और जो हो रखते लंड को एक बार अपनी बुर में ले ले फिर पतले लंड से उसकी प्यास कहां बुझने वाली है,,,,

मुझे मालूम था मेरी रानी मेरे नीचे आने के बाद तुम भी पागल हो जाओगी दोबारा लेने के लिए,,,,

तुझे अपने लंड पर सच में इतना ज्यादा भरोसा था,,,

तो क्या जब भी खड़ा होता है तो मैं समझ जाता हूं कि जिसकी भी बुर में घुसेगा उसे पूरी तरह से मस्त करके ही बाहर निकलेगा,,,,,,,

Raju apni ma ki boor sahlaate huye



हां सो तो है तेरे लंड की मोटाई और लंबाई देखकर ही मैं समझ गई थी कि अगर यह मेरी बुर में गया तो रगड़ रगड़ कर पानी निकालेगा,,,, तुझे पता है अब तो तेरे पिताजी का लंड मेरी बुर में जाता है तो मुझे पता ही नहीं चलता है कि अंदर गया है लेकिन तेरा लंड जैसे ही अंदर जाता है ना अंदर की दीवारों को पूरी तरह से रगड़ रगड़ कर‌ नीचोड निचोड़ कर पानी निकाल देता है,,,,,,,

मुझे बहुत खुशी है कि मैं तुम्हें खुश करने में कामयाब हो गया वरना अगर जिस तरह से मैं तुम्हारे पीछे पड़ा था अगर डालते ही पानी निकल जाता तो तुम शायद मुझे फिर कभी अपने बदन को हाथ नहीं लगाने देती,,,

हां सो तो है मर्द उसे थोड़ी ना कहते हैं कि औरत को गर्म करके बीच मझधार में ही छोड़कर अपना किनारा पकड़ ले मर्द तो उसे कहते हैं जो औरत को पूरी तरह से अपनी बाहों में जकड़ कर उसे पूर्णतः संतुष्टि का अहसास दिखाएं और उसे खुश करने के बाद किनारे पर पहुंचे,,,, लेकिन मानना पड़ेगा तेरे में बहुत ताकत है रात भर तूने मेरी जमकर चुदाई किया और सुबह सुबह नहाते हुए भी दो बार चोद दिया और तो और घर पर पहुंचने के बाद भी तूने मेरी जमकर चुदाई किया कसम से मैं कभी सोच नहीं थी कि एक आदमी इतनी बाहर जो देख सकता है क्योंकि तेरे पिताजी एक बार में ही ढेर हो जाते थे और वह भी शुरू से यही आदत थी,,, तुझे पता है तेरे से चुदवाने के बाद 2 दिन तक में ठीक से चल नहीं पाई थी मेरी बुर सूजी हुई थी हल्दी वाला दूध 2 दिन पी तब जाकर आराम हुआ,,,



क्या करूं मेरी जान पहली बार जो तुमने सेवा करने का मौका दी थी इसलिए किसी भी तरह का कसर नहीं बाकी रखना चाहता था,,,

धत् मजा तो देता है लेकिन तकलीफ भी तु बहुत देता है,,,

क्या मैं फिर तुमको चुदाई ही क्या जिसमें तकलीफ ना हो आराम से डाला और निकाला और झड़ गया इतने से क्या मजा आता है क्या जब तक औरत ऊहहहह ऊहहहहह आरहहह ना कर दे तब तक चोदने का मजा ही नहीं आता,,,,।

(मधु एक बार झड़ चुकी थी लेकिन अपने बेटे की बातों को सुनकर फिर से उसका बदन कर्म हमें लगा था वह बार-बार अपने बेटे के पजामे की तरफ देख रही थी और उसे राह नहीं किया तो वह खुद आप आगे बढ़ाकर पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़ कर बोली)

बाप रे देख तो सही कैसे लोहे की तरह खड़ा है,,

खड़ा तो रहेगा ही ना तुमने इसकी सेवा ही कहा कि हो बस अपना पानी निकालती लेकिन इसका कौन निकालेगा,,,

अरे मैं हूं ना,,, मेरे रहते अब तुझे प्यासा रहने की जरूरत नहीं है चल उठ खड़ा हो और मेरे सामने आजा,,,,(पजामे के ऊपर सही अपने बेटे के लंड को पकड़े हुए ही राजू को उठाई और लंड को पकड़े हुए हैं उसे ठीक अपने सामने लाकर खड़ा कर दी राजू पूरी तरह से अपने आपको अपनी मां के हाथों में सौंप दिया था वह अपने दोनों हाथों को छाती पर बांध कर खड़ा हो गया था और मधु मदहोश होते हुए बेशर्मी दिखाते हुए अपने बेटे के पजामी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच दी है और जैसे ही राजू का लंड पजामे की कैद से आजाद हुआ वह खुली हवा में सांस लेता हुआ ऊपर नीचे करके हिलने लगा जिसे देखकर मधु की बुर पानी छोड़ने लगी,,,,)

बाप रे ऐसा लगता है कि पहली बार ही देख रही हूं,,,(इतना कहने के साथ ही मधु अपनी बेटी के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगी)

Raju or uski ma



सच कहूं तो मां तुम मेरे लंड को अच्छी तरह से पहली बार ही देख रही हो दिन के उजाले में वरना रात भर चुदवाने के बाद भी तुमने ठीक से मेरे लंड को देख नहीं पाई थी क्योंकि खंडार में रात का अंधेरा था और जलती हुई लकड़ी की रोशनी में ठीक से नजर नहीं आता था लेकिन फिर भी मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मेरे लंड के दर्शन करके तुम्हारी बुर पानी छोड़ दी होगी,,,

इसमें भी कहने वाली बात है क्या मेरी क्या कोई औरत भी देखती तो उसका भी पानी छूट गया होता,,,,

हाय मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरी मां इतना तड़प रही थी मेरे लंड के लिए अगर पता होता तो बैलगाड़ी में ही चोद दिया होता,,,,



तो अब कौन सा तू बाकी रख रहा है इसी काम के लिए तो तुझे यहां लेकर आई हूं ,,(अपनी नरम में कम हथेली में अपने बेटे के लंड को पकड़कर आगे पीछे करके मुठीयाते हुए बोली राजु अपनी मां की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो जा रहा था वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे पिलाना शुरू कर दिया था आगे कुछ और बोल पाता या उसकी मां कुछ बोल पाती इससे पहले ही अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां के सर को पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे अपने लंड की तरफ नीचे की तरफ जाने लगा और देखते ही देखते मधु अपने बेटे की प्यास बुझाने का जिम्मा अपने सर पर उठाते हुए अपने बेटे के लंड को अपने लाल-लाल होठों को खोल कर उसे अपने अंदर ले ली और उसे चाटना शुरू कर दी,,, मधु इतने चाव से अपने पति के लंड को मुंह में लेकर प्यार नहीं करती थी लेकिन राजू की बात कुछ और थी राजू ने उसे मुंह में लेकर चूसने का एक नया कला और आनंद से अवगत कराया था जिसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और वह उसी आनंद की प्राप्ति के लिए अपने बेटे के लंड को धीरे-धीरे करके अपने गले तक उतार ले रही थी हालांकि उसे सांस लेने में दिक्कत आ जाती थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के लंड को छोड़ना नहीं चाहती थी,,,।

सहहहरह आहहहरहह कितना मजा आ रहा है तू सच में मां लंड को बहुत अच्छे से चुस्ती है बस ऐसे ही पूरा मुंह में लेकर चूस आहहहहह आहहहहह मेरी रानी तूने मुझे बहुत मस्त कर दी है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी कमर को धीरे-धीरे खिलाना शुरू कर दिया था मानो कि जैसे वह अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा हो और मधु भी जानबूझकर अपने लाल-लाल होठों को गोल करके दबा ली थी ताकि उसके बेटे को उसकी कसी हुई बुर जैसा ही मजा मिले,,, झोपड़ी के बाहर बिछी हुई खटिया पर मधु गांड पसार कर बैठी हुई थी और राजू की उसके सामने खड़ा था उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड मुंह में गले तक चला जा रहा था और मधु अपने बेटे की हिलती हुई कमर के साथ-साथ अपना मुंह भी आगे पीछे कर रही थी जिससे राजू को और ज्यादा मजा आ रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था अपनी मां के मुंह में लंड पेलते हुए वह थोड़ा सा नीचे झुका और अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोल कर उसके नंगी चूचियों को आजाद कर दिया और दोनों चुचियों को दोनों हाथों में लेकर दबाते हुए बोला,,,।

हाय मेरी जान तेरी चूचियां कितनी लाजवाब है एकदम खरबूजा की तरह बड़ी बड़ी,,,आहहहहह तेरी चूची,,, पिताजी को तूने बहुत मजा दे अब मेरी बारी है,,,,ऊममममम (अपने सूखे हुए होठों पर अपनी जीभ फिराते हुए राजू बोला,,,,,,, मां बेटे पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे मां बेटे के पवित्र रिश्ते की दीवार को दोनों ने मिलकर गिरा दिए थे दोनों के बीच मां बेटी का नहीं बल्कि एक मर्द औरत का रिश्ता बन चुका था जोकि धीरे-धीरे और गहरा होता जा रहा था,,,, अपनी मां की खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी गोरी गोरी चूचियों को दबा दबा कर राजू ने टमाटर कि तरह लाल कर दिया था,,, एक बार फिर से मधु की बुर अपने बेटे के लंड के लिए तड़प उठी थी हालांकि अभी तक राजू ने अपनी मां की बुर में लंड डाला नहीं था कि उसे अपनी जीभ से ही झाड़ दिया,,, था,,,,, मधु मदहोशी और चुदासी की हालत में अपने बेटे के लंड को जोर-जोर से मुंह में लेकर अंदर बाहर करने थे यह देखकर राजू समझ गया था कि उसकी मां पूरी तरह से गर्म हो चुकी है इसलिए वो धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला,,, मुंह में से लंड के बाहर निकलते ही मधु गहरी गहरी सांस लेने लगी ऐसा लग रहा था कि राजू का इस तरह से मधु के मुंह में से लंड को बाहर खींच लेना मधु को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था,,,, थूक और लार से सने हुए अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए राजू बोला,,,।



हाय मेरी जान तूने तो अपना थूक लगा लगा कर मेरे लंड को अपनी बुर में डालने के लिए तैयार कर दि है अब देखना इसका कमाल कैसा तुम्हारी बुर में धमाल मचा ता है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की कंधों को पकड़कर उसे खटिया पर लेट जाने के लिए इशारा किया और उसकी मा भी उत्तेजना बस अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए पीठ के बल खटिया पर लेट गई और राजू खटिया पर घुटनों के बल चढ़कर अपने लिए जगह बनाने लगा देखते ही देखते ना जो अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया मधु ने खुद अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ खींच कर कमर पर इकट्ठा करती थी और अपनी नंगी बुर को अपने बेटे के सामने परोस दी थी अपनी मां की पानी से चिपचिपाती हुई बुर को देखकर राजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ गया राजू से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था लंड पूरी तरह से धड़क रहा था और वह अपनी मां की तपती हुई बुर में घुसने के लिए तैयार हो चुका था देखते ही देखते राजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच एकदम से जगह बनाते हुए अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपनी मां की बड़ी-बड़ी आधी गांड को अपनी जांघों पर रख लिया,,, मधु की रसीली पुर पुर राजू के लंड का सुपाड़ा दोनों बेहद करीब आ चुके थे वह आज दोनों में एक अंगुल का ही फासला था जिसकी वजह से बुर की तपन जोकि भट्टी की तरह गर्म हो चुकी थी उसकी गर्माहट राजू अपने लंड पर एकदम साफ महसूस कर रहा था जिसकी वजह से वह और ज्यादा उत्तेजित हो गया देखते ही देखते राजू रोकड़े लंड की मोटे सुपारी को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रख दिया और हल्के से अपनी कमर को धक्का दिया और पहले प्रयास में ही पूरा का पूरा आलूबुखारा के माप का सुपाड़ा मधु की बुर में समा गया और जैसे ही वह बुर के गुलाबी पत्तियां नुमा दरवाजे को खोलकर अंदर प्रवेश किया वैसे ही मधु के मुंह से हल्की सी चीख निकल पड़ी लेकिन यह चीज उसकी आनंद की परिभाषा दें और पल भर में ही दूसरे ही प्रयास में राजू ने अपना आधा लंड अपनी मां की बुर में घुसा दिया था,,, तूफानी बारिश वाली रात से लेकर के अब जाकर मधु और राजू को एक होने का मौका मिला था इसलिए फिर से ऐसा लग रहा था कि दोनों के बीच पहली बार जुदाई हो रही है इसलिए तो उत्तेजना और उत्साह में मधु पूरी तरह से गदगद हो चुकी थी ब्लाउज खुला होने की वजह से उसकी नंगी चूचियां छाती पर लहरा रही थी लेकिन उसे अपने हाथों में पकड़ने के लिए अभी ठीक समय नहीं था क्योंकि वह अभी अपने पूरे लंड को अपनी मां की बुर में घुसा देना चाहता था और देखते ही देखते अपनी मां की कमर को थामे हुए राजू ने अगला धक्का एकदम कचकचा कर लगाया और लंड बुर की अंदरूनी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे बच्चेदानी से जा टकराया और एक बार फिर से मधु के मूंह से चीख निकल गई,,,,।)



ओहहहहह मा मर गई रे,,,

बस बस हो गया मेरी रानी अब देख कितना मजा आता है,,,

अरे तेरे मजा के चक्कर में मेरी बुर फट जाएगी,,,

नहीं मेरी जान मैं ऐसा नहीं होने दूंगा,,, क्योंकि अब तेरी बुर पर मेरा हक है,,,,और मैं तेरी खुबसूरत बुर को ईस‌ तरह से फटने नहीं दुंगा,,, क्योंकि इसमें ही तो डाल कर मुझे अपनी प्यास बुझानी है,,, अब देख मैं तुझे कैसे चोदता हूं,,,।

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते राजू का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर में अंदर बाहर होना शुरू हो गया और उसके अंदर बाहर होने के साथ ही मधु के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों से उसका मदन रस पसीजने लगा,,,, देखते ही देखते मधु को एक बार फिर से मजा आने लगा अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेकर वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसे अपनी बाहों में लेकर हवा में उड़े लेकर चला जा रहा है उसे स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था हर एक धक्के ने उसकी चीख निकल जा रही थी लेकिन हर एक चीज के पीछे बेशुमार आनंद छुपा हुआ था जिसके मदहोशी में वह पूरी तरह से भीग जा रही थी,,,

राजू के हर धक्के के साथ उसकी बड़ी बड़ी चूचियां पानी पर गुब्बारे की तरह छाती पर लौट रही थी,,, जिसे राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में दबा लिया और दशहरी आम की तरह जोर-जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्के लगाने लगा ,,, वैसे भी मर्दों को सबसे ज्यादा मजा औरतों की चूची पकड़कर धक्के लगाने में आता है और वही सुख राजू अपनी मां से प्राप्त कर रहा था मधु की बड़ी-बड़ी चूचियां ऐसा लग रहा था कि राजू के लिए लगाम का काम कर रही थी जिससे वह अपनी मां को पूरी तरह से अपने काबू में किया हुआ था,,,,।

सहहहरह आहहहहह राजू मेरे बेटे तेरा लंड को ज्यादा ही मोटा है बहुत मजा आ रहा है बेटा इसी तरह से धक्का लगा तेरी जुदाई में तो मुझे स्वर्ग का सुख मिल रहा है अब तक तो तेरे पिताजी के छोटे लंड से चुदाई कर मुझे पता ही नहीं चला कि कोई इस कदर भी अपने लंबे लंड से चुदाई कर सकता है और वह भी इतनी देर तक बहुत मजा आ रहा है बेटा रुकना नहीं,,,,आहहहहह ,,,,

तू चिंता मत कर मेरी रानी मेरे लिए समय तो एकदम थोड़ी हो गई और मैं तेरे ऊपर सवार हो गया हूं इसे अपनी मंजिल तक पहुंचाने के बाद ही तुझे छोड़ुगा,,,आहहररह मेरी जान तेरी कसी हुई दूर बहुत मजा देती है ऐसी तो जवान लड़कियों की भी नहीं होगी जैसा कि तेरी बुर‌ है,,,

आहहहह तो पूरा मजा लेना हरामि पूरा मादरचोद हो गया है तू,,,

तूने ही तो मुझे मादरचोद बनाई है भोसड़ा चोदी तेरी भोंसड़ी के चक्कर में ही मादरचोद बन गया,,, लेकिन तेरा भोंसड़ा मुझे बहुत मजा दे रहा है,,,

तो घुस जा फाड़ कर अंदर,,,

अरे छिनार मेरा बस चलता तो सही में तेरी भोंसड़ी में जाकर बैठ जाता,,,,

तो चलाना अपना बस,,,, तेरे आगे मेरी कहां चल रही है,,, चला,,,,,

ले भोसडा चोदी मादरचोद रंडी एकदम छिनार हो गई है तू देख मैं तेरी कैसी प्यास बुझाता हूं अपने लंबे लंड से मेरा लंड तेरी बुर में ही जाने के लिए बना है,,,।

(और राजू ताबड़तोड़ घोड़े की लगाम अपने हाथों में लिए हुए उसे दौड़ाना शुरू कर दिया दोनों मां-बेटे के बीच अब किसी भी प्रकार का शर्म नहीं बचा था दोनों एक दूसरे को तू तड़ाका के साथ-साथ गंदी गालियों से बात कर रहे थे जिससे दोनों का मजा बढ़ता जा रहा था दोनों पूरी तरह से जोश में आ चुके थे राजू ऊपर से धक्के लगा रहा था और मधु कोशिश करते हुए नीचे से अपनी कमर उतार रही थी और कामयाबी हो रही थी अपनी मां को इस तरह से कमर उछलता हुआ देखकर राजू का जोश और ज्यादा बढ़ गया था और वह अपनी मां की चूची को पकड़कर जोर-जोर धक्के लगा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह सच में अपनी मां का भोसड़ा फाडकर उसमें घुस जाएगा,,, मधु के साथ साथ खटिया की भी हालत खराब होती जा रही थी उसमें से लगातार चरण चरण की आवाज आ रही थी मधु को इस बात का डर था कि कहीं खटिया टूट ना जाए क्योंकि राजू के धक्के बड़े तेजी और एकदम बलशाली थे उसके हर एक धक्के पर मधु की चीख निकल जा रही थी देखते ही देखते मधु पूरी तरह से मदहोश हो गई थी,,,, लेकिन खटिया टूट जाने का डर उसके अंदर पूरी तरह से भर गया था और वह बोली,,,।

बस बस जोर से नहीं खटिया टूट जाएगी,,,

खटिया टूटे या फिर तेरी दूर फटे आज में रुकने वाला नहीं हूं,,,,(इतना कहते हो राजू फिर से अपनी कमर जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया खटिया से लगातार चरण चरण की आवाज आ रही थी इस बात का अंदेशा राजू को भी हो गया था लेकिन वहां रुकना नहीं चाहता था लेकिन मधु उसे कसम देकर रोक दी और बोली ,,,,)

Jhopdi k andar raju apni ma k sath



नहीं नहीं राजू खटिया टूट जाएगी तो खामखा इसे बनाने की जहमत उठानी पड़ेगी,,,, चल झोपड़ी में लेकर चल मुझे वहीं पर मुझे चोदना,,,,।

(खटिया टूटने का डर दोनों के रंग में भंग डाल चुका था लेकिन राजू इस रंग में भंग नहीं पड़ने देना चाहता था इसलिए वह धीरे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया और उसकी बुर में लंड डाले हुए ही धीरे-धीरे उठना शुरू कर दिया और देखते ही देखते वह खटिया से नीचे उठ कर खड़ा हो गया लेकिन अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया था और अपने लंड को उसकी बुर से बाहर नहीं निकाला था अपने बेटे की ताकत देखकर मधु भी एकदम हैरान हो चुकी थी लेकिन पूरी तरह से आनंद में सराबोर हो चुकी थी राजू खड़ी-खड़ी अपने आप को चोदना शुरू कर दिया था और चोदते हुए उसे झोपड़ी के अंदर ले जा रहा था राजू की ताकत बहुत ही प्रभावशाली थे जो कि मधु को पूरी तरह से अपने घुटने टेकने पर मजबूर कर दी थी,,,,



थोड़ी देर में राजू झोपड़ी के अंदर प्रवेश कर गया और उसी तरह से सूखी हुई घास में अपनी मां को बैठाकर उसे चोदना शुरु कर दिया थोड़ी देर तक उसके ऊपर सवार होने के बाद वह खुद पीठ के बल लेट गया और अपने ऊपर अपनी मां को ले लिया उसकी मां को पता था कि क्या करना,,,, है,,, वह अपनी भारी भरकम बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर भटकना शुरू कर दी उसे अपने बेटे के लंड की ताकत का अंदाजा अच्छी तरह से था इसलिए वह जानती थी कि उसकी बड़ी बड़ी गांड पटक ने पर भी उसका बेटा हार नहीं मानेगा और नीचे से वह अपनी कमर उछाल रहा था दोनों पूरी तरह से मदहोश में जा रहे थे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,, दोपहर के समय जब लोग अपने घर में आराम कर रहे थे तो दोनों मां-बेटे खेत में काम करने के बहाने से एक दूसरे की प्यास बुझा रहे थे कुछ देर तक राजू अपनी मां को अपने ऊपर लिए हुई आनंद लेता था लेकिन उसका पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था इसलिए वह फिर से अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़े हुए भी उसी स्थिति में फिर से उसे नीचे कर दिया और खुद पर आ गया और फिर से धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया इस बार उसका हर एक धक्का मधु को मदहोशी की तरफ ले जा रहा था वह पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और देखते देते उसका बदन अकड़ने लगा उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राजू समझ गया था कि उसका पानी निकलने वाला है वह भी अपनी मां के साथ ही जुड़ना चाहता था और वह अपने धक्कों की रफ़्तार और ज्यादा बढ़ाते हुए देखते ही देखते अपनी मां के ऊपर ही हांफने लगा दोनों मां बेटे एक साथ झड़ चुके थे,,, कुछ देर तक दोनों उसी स्थिति में लेटे रहे दोनों आराम कर रहे थे लेकिन राजू का लंड अभी भी मधु की बुर में था तकरीबन 1 घंटे तक दोनों उसी स्थिति में लेटर ही आराम करते रहे फिर मधु धीरे से राजू को अपने ऊपर से उठाने लगे और राजू अपनी मां के ऊपर से उठते हुए अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर खींच लिया,,,,।



तूफानी बारिश के बाद एक बार फिर से दोनों ने जमकर चुदाई का आनंद लिया था और फिर मधु बोली,,,

चलो थोड़ा काम कर लेते हैं वरना अगर गुलाबी खेत पर आएगी तो कुछ ना काम देख कर ना जाने क्या सोचेगी,,,,

ठीक है तुम बैठो मैं काम कर देता हूं,,,

(इतना कहकर राजू फरसा उठाकर जिस नाली से पानी ज्यादा था वहां की मिट्टी को इकट्ठा करने लगा और थोड़ी देर में मधु भी हल्की सी चाल बदलते हुए उसके करीब आ गई क्योंकि जिस तरह की चुदाई राजू ने किया था उससे अपनी कमर में दर्द महसूस हो रहा था,,, राजू उसी तरह से काम करता रहा देखते ही देखते शाम होने को आ गई,,, मधु भी अपने बेटे के आगे झुक कर हरी हरी घास उखाड़ रही थी गाय भैंस के लिए लेकिन अपनी मां को इस तरह से झुका हुआ देखकर उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से राजू के पजामें मे हरकत होने लगी,,, राजू फरसा को एक तरफ रख कर ठीक अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी मां कुछ बोल पाती समझ पाती इससे पहले ही साड़ी को उठाते हुए उसकी कमर तक साड़ी उठा दिया और उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया मधु एकदम से चौक गई और बोली,,,।

बाप रे तेरी प्यास अभी तक नहीं बुझी,,,

तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से मऐ प्यासा हो गया हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही अपनी मां की इजाजत पाए बिना ही राजू अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल कर एक बार फिर से अपनी मां की बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, मधु भला क्यों इंकार करती वह तो अपने बेटे से बहुत खुश थे और एक बार फिर से दोनों मजा ले करके अपने घर की तरफ चल दिए,,,।)
 
राजू की जिंदगी बड़े अच्छे तरीके से चल रही थी,,,,, वह जिस उम्र के दौर से गुजर रहा था इस उम्र के लड़के केवल बुर और औरत के अंगों की मात्र कल्पना ही करके अपने हाथ का सहारा लेकर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करने में लगे रहते थे लेकिन राजू अपने हम उम्र के लड़कों से कहीं आगे था,,, इस उम्र में वह रोज नई-नई बुर का स्वाद चख रहा था,,,,,, जिसमें अब उसकी खुद की मां भी शामिल हो चुकी थी,,, और राजू तो अपनी मां की खूबसूरत मखमली बुर पाकर और ज्यादा बलवान होता चला जा रहा था,,,,,,,,।



जमीदार विक्रम सिंह के नाम का खौफ वह लाला के चेहरे पर अच्छी तरह से देख चुका था वह कई बार अपने मन में सोचा कि इस बारे में वह लाला से बात करके देखे लेकिन वह पूछ नहीं पाया ना जाने क्या मामला था,,,, जोकि लाला विक्रम के सामने नजरे झुकाए खड़ा था और तुरंत उसे लेकर अपनी हवेली पर चला गया था,,,। राजू अपने मन में ही सोचता था कि खैर जो भी हो उसका काम तो अच्छी तरह से चल रहा था,,, गोदाम का सारा देखभाल उसके ही सिर पर था जब से विक्रम सिंह आकर वापस गया था तब से तो लाला गोदाम का सारा कारभार राजू के ही हाथों में सौंप दिया था और राजू भी अपने इस फर्ज को बखूबी निभा रहा था,,,, देखते ही देखते मजदूरों में राजू की इज्जत बढ़ने लगी थी राजू को उनमें से कई लोग साहब कहकर ही बुलाते थे,,,,,,,, राजू भी मजदूरों का बहुत ख्याल रखता था इसलिए मजदूरों में राजू पूरी तरह से लोकप्रिय हो गया था उसकी एक आवाज पर सब लोग खड़े हो जाते थे,,, लाला से सभी मजदूर डरते थे लेकिन राजू से प्यार करते थे,,,, क्योंकि राजू आए दिन उनकी मजदूरी में से कुछ ज्यादा पैसे देकर उनकी मदद भी करता था,,,,,,, जिस तरह से राजू ने गोदाम के काम को बड़ी होशियारी से और अपनी इमानदारी से संभाला था उसे देखते हुए लाला भी राजू से बहुत खुश रहता था,,,,,,।



ऐसे ही 1 दिन राजू गोदाम पर काम कर रहा था,,,, और लकड़ी के बने छोटे-छोटे बक्सों में आम भरवा रहा था जो कि शहर जाना था,,,,, यही देखने के लिए लाला गोदाम पर आया हुआ था और साथ में सोनी भी आई हुई थी,,,,,, सोनी की नजर राजू पर पडते ही सोनी शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका दे क्योंकि जिस दिन से राजू ने अपनी आंखों के सामने उसे अपने भाई से ही चुदवाते हुए देखा था तब से सोनी की हिम्मत नहीं होती थी राजू से नजर मिलाने की राजू को दोनों भाई-बहन के बीच के रिश्ते से कोई भी गलतफहमी बिल्कुल भी नहीं थी,, रिश्तो के बीच में हु इस तरह के संबंध को वह‌ व्यवहारिक रुप से सही मानने लगा था क्योंकि उसका खुद का संबंध अपनी ही बुआ और अपनी मां के साथ साथ अपनी सभी शादीशुदा बहन के साथ भी था जिसके पेट में उसका ही बच्चा पल रहा था,,,,,

सोनी को देखते ही राजू लाला के सामने हाथ जोड़कर अभिवादन करने के बाद सोने की तरफ मुखातिब होता हुआ बोला,,,



आईए छोटी मालकिन,,, धूप में क्यों खड़ी है अंदर आ जाइए,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू एक कुर्सी खींचकर सोनी की तरफ कर दिया और सोनी बिना कुछ बोले उस पर बैठ गई थी,,,,,, राजू ने तुरंत लाला और उसकी छोटी बहन सोनी के लिए मिठाई और पानी का बंदोबस्त किया,,,, सोनी बार-बार तिरछी नजरों से राजू की तरफ देख ले रही थी और राजू भी सोनी को देख कर मुस्कुरा दे रहा था,,,, राजू के खुशमिजाज व्यवहार को देखते हुए सोनी को लगने लगा था कि राजू उससे नाराज नहीं हैं,,, कटोरी में रखी हुई मिठाई खाए बिना पानी का गिलास उठा कर पीना चाही तभी राजू बीच में टोकते हुए बोला,,,।

अरे अरे छोटी मालकिन है क्या कर रही है मिठाई तो खाइए,,, खास करके आपके लिए ही मंगवाया,,,

(राजू की बात सुनकर लाला का भी इस और ध्यान गया तो हम भी राजू के सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,)

अरे हां सोना मिठाई तो खाओ,,,,, खाली पेट पानी पियोगी तो पेट में दर्द होने लगेगा,,,

जी भैया,,,(इतना कहकर सोनी छोटे से मिठाई के टुकड़े को लेकर खाने लगी और फिर पानी पीने लगी ,,, यह देखकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि घर के चारदीवारी के बाहर यह दोनों सच में समाज के लिए एक भाई बहन हैं लेकिन चारदीवारी के अंदर एक मर्द और औरत बन कर कैसे एक दूसरे की आंखों से खेलते हुए अपनी प्यास बुझाते हैं जैसा कि वह खुद अपने ही घर में करता रहा था,,,,दूसरी तरफ लाला अपनी जगह से खडा हो गया और राजू से बोला,,,)

राजू आमों को शहर में भेजने का क्या इंतजाम किए हो,,,

सब कुछ हो गया सर जी बस उसे लकड़ी के बक्सों में भरा जा रहा है,,, चलिए चल कर देख लीजिए,,,,

तुम यहीं बैठो सोनी,,,, मैं इंतजामत देख कर आता हूं,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला राजू के साथ गोदाम के अंदर वाले हिस्से में चला गया जहां पर पके हुए आम को लकड़ी के बक्से में रखा जा रहा था लाला यह देखकर बहुत खुश हुआ कि मजदूर बड़ी लगन से काम कर रहे थे और राजू हमसे अच्छा काम निकलवा रहा था,,,,)

बहुत अच्छे राजू मुझे तुमसे यही उम्मीद थी तुम मेरे काम को बढ़िया अच्छे से संभाल लिए हो,,,,

जी शेठ जी,,, मैं आपका काम अपना ही काम समझकर करता हूं,,,,

तुमसे मैं बहुत खुश हूं तभी तो इतने बड़े गोदाम का कार्यभार मैंने तुम्हें सौंप दिया है,,,।

(लाला बहुत खुश नजर आ रहा था और उसे इस तरह से खुश होता देखकर राजू के मन में आया कि विक्रम सिंह के बारे में पूछे लेकिन फिर कुछ सोच कर वह कुछ बोला नहीं,,, लाला और राजू दोनों वहीं बैठे रह गए और गोदाम के बाहर वाले इस समय सोनी बैठ कर इंतजार कर रही थी देखते ही देखते शाम ढलने लगी थी अंधेरा होने की शुरुआत हो रही थी,,,,)

अब मुझे चलना चाहिए राजू,,, 2 दिनों में तो आम लकड़ी के बक्सों में एक हो जाएगा ना,,,

अरे नहीं नहीं मालिक अभी कुछ घंटों में ही सारा का सारा हम लकड़ी के बक्सों में धरती आ जाएगा और सुबह होते ही मैं इन्हें बैलगाड़ी में भरवा कर स्टेशन तक पहुंचा दूंगा,,,

क्या आज पूरा हो जाएगा,,(क्यों नहीं शेठ,,)

मजदूर देर तक काम करेंगे,,,,

हां जरूर करेंगे कैसे काम करवाना है मुझे अच्छी तरह से आता है,,,

तब तो यह बड़ी अच्छी बात है राजू,,,, तुम पर विश्वास करके मैंने कोई गलत काम नहीं किया है,, अच्छा अब मैं जा रहा हूं तुम सारा काम करवा कर गोदाम मैं ताला लगा देना,,,

जी सेठ जी,,,,।

(इतना कहने के साथ ही दोनों गोदाम के आगे वाले हिस्से पर आ गए,,, तभी सोनी अपनी जगह से खड़ी होते हुए बोली)

क्या भैया कितनी देर लगा दीए,,,,

सोनी वो क्या है ना कि आम को सही समय पर शहर भेजना है वरना सड जाएंगे,,,,

(लाला का इतना कहना था कि तभी एक आदमी आया और बोला)

नमस्ते लाला जी,,, आपके परम मित्र ने आपके लिए निमंत्रण भिजवाया है,,

निमंत्रण कैसा निमंत्रण,,,,

आज उनके घर जश्ने है और आपको उस जश्न में शामिल होने के लिए बुलावा भेजा है,,,

अभी,,,

जी जमीदार साहब,,,

(अपने परम मित्र के द्वारा भेजे गए इस निमंत्रण के मतलब को हलाला अच्छी तरह से समझता था मांस मदिरा और शबाब का पूरा इंतजाम था इसलिए जमीदार ना भी नहीं बोल पा रहा था लेकिन उसे एक चिंता थी कि सोनी को घर भी पहुंचाना था वह सोच में पड़ गया था और बोला)

अभी चलना है,,,

जी मालिक,,,,

लेकिन सोनी को घर भी पहुंचाना जरूरी है मुझे घर जाकर वापस जाना होगा,,,,

आप बिल्कुल भी चिंता मत करो सेठ जी,,,,,, मैं छोटी मालकिन को हवेली तक पहुंचा दूंगा,,,

तुम पहुंचा दोगे राजू,,,

जी मालिक मैं पहुंचा दूंगा सही सलामत,,,

अरे वाह तब तो यह बहुत अच्छा हुआ,,, लेकिन रुको,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला घोड़ा गाड़ी के करीब गया और घोड़ा गाड़ी में रखी हुई अपनी दो नाली वाली बंदूक को बाहर निकाला और राजू को थमा ते हुए बोला,,)

यह लो राजू रात का समय है तुम दोनों की सुरक्षा के लिए,,,

(राजू उस बंदूक को पकड़ते हैं एकदम उत्साहित हो गया उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह बंदूक अपने हाथों में पकड़ कर इधर-उधर देखते हुए बोला,,)

क्यों सच में मालिक मैं रख लु इसे,,,

हां राजू अब इसकी तुम्हें जरूरत है क्योंकि तुम्हारा भी नाम आस-पास के गांव में प्रख्यात होने लगा है और अब तो व्यापारी भी तुम्हारा नाम जानने लगे हैं इसलिए तुम्हारी सुरक्षा और तुम्हारे ओहदे के सम्मान के लिए तुम्हारा बंदूक रखना जरूरी हो चुका है,,,,।

(राजू बहुत खुश नजर आ रहा था ,, उसने अब तक बंदूक को दूर से देखा बता लेकिन आज से अपनी हाथ में लेकर वह बहुत उत्साहित नजार‌ आ रहा था यह देखकर लाला बोला)

इसे चलाने भर की हिम्मत तो है ना,,,

सेठ जी हिम्मत की बात कर रहे हो मेरी हिम्मत आप अच्छी तरह से देख चुके हो,,,

(राजू की बात सुनते ही लाना को उस दिन की सारी घटना याद आ गई और वह कुछ बोल नहीं पाया राजू ने भले ही पहली बार बंदूक हाथ में लिया था लेकिन इसे कैसे चलाना है इसका अंदाजा उसे अच्छी तरह से था,,,,)

ठीक है राजू मैं चलता हूं तुम थोड़ी देर में निकल जाना,,,

ठीक है मालिक आप चाहिए वैसे भी हवेली ज्यादा दूर नहीं है अच्छे से पहुंच जाएंगे,,,,।

(थोड़ी देर में लाला घोड़ा गाड़ी में बैठकर उस आदमी के साथ चला गया,,, और सोनी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह काफी दिनों बाद राजू के साथ अकेली थी राजू सोनी से बोला,,,)

तुम यहीं रुको मैं अभी आता हूं,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू अंदर के और मजदूरों को सारा काम समझा कर उन्हें गोदाम की चाबी देकर वापस आ गया और वहीं पर टंगी हुई लालटेन को अपने हाथ में ले लिया और बंदूक को अपने कंधे पर टांग लीया बंदूक को अपने कंधे पर टांग लेने के बाद कैसा लग रहा था उसकी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई थी,,, सोनी और राजू दोनों हवेली की तरफ निकल गए थे पैदल ही जाना था उस पैदल का सफर राजू को बहुत अच्छा लग रहा था चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था हाथ में लालटेन लिए उसकी रोशनी ने राजू आगे बढ़ रहा था साथ में सोने भी धीरे धीरे चल रही थी दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी सोनी अभी भी शर्मिंदा थी इसलिए वह कुछ बोल नहीं पा रही थी बात की शुरुआत करते हुए राजू बोला,,,।)

तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो,,,

राजू जो कुछ भी तुमने उस दिन देखा उसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूं,,,

अरे तो क्या हुआ सोनी मुझे कोई दिक्कत नहीं है मैं जानता हूं तुम्हारी मजबूरी को और तुम्हारी बड़े भैया के जरूरत को,,, इसलिए उस दिन के लिए मुझसे शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है,,,,

ओहहहह राजू तुम बहुत अच्छे हो मुझे तो लगा था कि तुम मुझे माफ‌ ही नहीं करोगे,,,,

नहीं सोनी इसमें तुम्हारी कोई भी गलती नहीं है मैं अच्छी तरह जानता हूं बल्कि उस दिन जो कुछ भी मैंने अपनी आंखों से देखा उससे मुझे फायदा ही हुआ है,,,

फायदा कैसा फायदा,,,,

अरे देख नहीं रही हो तुम्हारे भैया ने सारे गोदाम का कार्यभार मुझे सौंप दिया है और साथ ही यह बंदूक भी दे दिए हैं और तो और मेरा सारा कर्जा उतर गया है अब तुम ही सोचो उस दिन की बात के लिए मेरे मन में कोई मलाल रहेगा क्या,,,,,,

सही कह रहे हो लेकिन मुझे इसी बात का डर था कि तुम इस तरह के रिश्ते को कैसे देखोगे जो कि सब कुछ अपनी आंखों से देख चुके थे मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं तुम ने सबको बता दिया तो मेरा तो जीना दूभर हो जाएगा,,,

नहीं मैं मरते दम तक यह राज किसी को नहीं बताऊंगा क्योंकि लाला का तो पता नहीं लेकिन तुम मेरे लिए बहुत खास हो,,,

(राजू के मुंह से अपने लिए यह बात सुनकर सोनी का दिल गदगद हुए जा रहा था वह इस बात से खुश थी कि राजू उसके राज को राज ही रखा हुआ था ,,,,,चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ तेज हवा के झोंकों से लहलहा रहे थे ऊंची नीची कच्ची सड़क से दोनों चले जा रहे थे इस तरह के एकांत में सोनी का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, राजू लालटेन की रोशनी में सोनी के गोल गोल पिछवाड़े को देखकर उत्तेजित हो जा रहा था उससे रहा नहीं गया तो वह चलते हुए ही सोनी की गांड पर हाथ रखते हुए बोला,,,,)

तुम्हारे भैया तो निमंत्रण में गए हैं आज की रात तुम्हारे कमरे में,,,

नहीं नहीं राजू भैया ने दो दरबान दरवाजे पर रखे हुए हैं जो दिन-रात पहरा भरते हैं,,, अगर तुम मेरे साथ भैया की गैर हाजिरी ने आओगे और कुछ देर बाद जाओगे तो हो सकता है उन लोगों को शक हो जाए और ऐसा में बिल्कुल भी नहीं चाहती,,,

इसका मतलब हैरानी कि हमें यही करना होगा,,,

नहीं अब तो यहां भी नहीं कर सकते ,,,

क्यों,,,?

बातों ही बातों में पता नहीं चला वह देखो हवेली का दरवाजा नजर आने लगा है और वहां खड़े दोनों दरबार जहां की हरकत के बारे में जरा भी आभास होगा तो दौड़ते हुए यहां तक आ जाएंगे,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मेरी जान,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने कंधे पर लटका ली हुई बंदूक को उतारकर पेड़ के सहारे खड़ा कर दिया और लालटेन की लौ को एकदम धीमा करके उसे भी पेड़ के पीछे रख दिया ताकि उसकी रोशनी दूर तक नजर ना आए सोनी राजू के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसके तन बदन में आग लगने लगी थी उसकी दोनों टांगों के बीच की गुलाबी छेद में काम रस इकट्ठा होने लगा था और देखते ही देखते राजू ने उसे अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसका चुंबन करने लगा रात के अंधेरे में दूर-दूर तक यहां देखने वाला कोई नहीं था हवेली के दरवाजे पर खड़े दो दरबान भी अंधेरे में यहां तक नहीं देख पा रहे थे,,, राजू सोनी को अपनी आगोश में लेकर ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया था पल भर में ही सोनी की बुर से काम रस टपक ना शुरू कर दिया,,,।

ओहहहह राजू बहुत दिन हो गए तुम्हारे बिना मुझे भी चैन नहीं आता,,,

मैं भी तुमसे दूर रहकर बहुत तड़पता हूं सोनी आज मौका मिला है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू सोनी के कंधों को पकड़कर दूसरी तरफ घुमा दिया और उसे पेड़ की तरफ झुका नहीं लगा सोनी खेली खाई औरत थी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसे क्या करना है वो खुद अपने हाथों से पेड़ का सहारा लेकर झुकते हुए एक हादसे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और अपनी बड़ी बड़ी नंगी गांड को राजू के सामने परोस दी,,,, सोनी की गांड ईतनी गोरी थी कि अंधेरे में भी एकदम चमक रही थी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा होगा तुरंत अपने पजामे को नीचे करके अपने टनटनाए हुए लंड को बाहर निकाल लिया और अंधेरे में ही अपनी उंगली से सोनी की बुर को टटोलते हुए अपने लंड के सुपाडे को उस क्षेंद से सटा दिया बुर पूरी तरह से कामराज छोड़ रही थी इसलिए उसके गीले पन का सहारा लेते ही एक ही झटके में राजू ने अपना आधा लंड सोनी की बुर में डाल दिया बहुत दिनों बाद सोनी राजू के लंड को अपनी बुर में ले रही थी इसलिए थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन आनंद की पराकाष्ठा क्या होती है यह भी उसे महसूस हो रहा था वो एकदम से गदगद हो गई थी राजू तुरंत अंधेरे में सोने की कमर थाम कर एक और झटका मारा और पूरा का पूरा लंड सोनी की बुर में समा गया,,, लाला सोने की रखवाली उसकी खासियत करने के लिए राजू को उसके साथ भेजा था लेकिन ऐसा भला हो सकता है कि दूध मलाई से भरी हुई कटोरी की रखवाली खुद बिल्ली कर रही हो,,,, राजू इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए सोने की हवेली के ठीक सामने ही अंधेरे का फायदा उठाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया था सोनी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट रही थी,,, राजू के लंड को अपनी बुर में महसूस करके वह पूरी तरह से गदगद हुए जा रही थी और राजू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए तुरंत अपना दोनों हाथ आगे ले गया और अंधेरे में ही अंगुलियों से टटोल टटोलकर उसके ब्लाउज का सारा बटन खोल दिया और उसकी नंगी चूचियों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,

सोनी को इस बात का एहसास अच्छी तरह से ताकि राजू से अच्छा उसे चर्मसुख कोई नहीं प्राप्त कर आ सकता था इसीलिए तो राजू की बाहों में वह पूरी तरह से समर्पित हो जाती थी,,, राजू भी सोनी के समर्पण भाव को देखते हुए पूरा दम लगा देता था उसका रस निचोड़ने में,,, राजू की कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी राजू का मोटा तगड़ा लंड बुर की अंदरूनी दीवारों पर रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे सोनी के तन बदन में आग लग रही थी वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,।

बड़े से पेड़ का सहारा लेकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपनी गांड हवा में लहराते हुए छुपकर खड़ी थी और उसकी गांड को दोनों हाथों से थाने राजू उसकी चुदाई कर रहा था साथ ही उसकी चूची को भी जोर जोर से दबा रहा था इस तरह की चुदाई के लिए वह तड़प उठती थी और राजू से मिलते ही उसकी बुर हमेशा पानी छोड़ने लगती थी,,,, सोनी की बुर का कसाव अपने लंड की गोलाई पर महसूस करके राजू की उत्तेजना और बढ़ती चली जा रही थी देखते ही देखते रह चुके धक्के तेज होते जा रहे थे और साथ ही सोने की सांसे भी बड़ी तेजी से चल रही थी सोने का बदन अकड़ने लगा था वह किसी भी वक्त चरमसुख के करीब पहुंचने वाली थी और इसी को देखते हुए राजू अपने धक्कों की रफ्तार को तेज कर दिया था,,, फच फच की आवाज से पूरा वातावरण गूंज रहा था जांघों से जांघ टकराने की ठप ठप की आवाज दोनों के बदन में और ज्यादा उत्तेजना फैला रहा था देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ना शुरु हो गए,,,,।

थोड़ी ही देर में सोनी अपनी साड़ी को नीचे करके अपने ब्लाउज के बटन बंद करने लगी और राजू कि अपने पजामे को ऊपर करने लगा और बोला,,,

लालाजी मुझसे ज्यादा मजा देते हैं क्या,,,

तुम तो देखे हो राजू तुम्हारे से आधा ही है तो ज्यादा मजा का तो सवाल ही नहीं उठता बस मजबूरी है,,,,

चलो कोई बात नहीं मैं तो हूं ना,,,।

(और इसके बाद राजू फिर से बंदूक को अपने कंधे पर रखकर और लालटेन की लौ बढ़ाकर सोनी को हवेली के दरवाजे तक छोड़ दिया और फिर वहां से अपने घर की ओर चला गया वह घर पर पहुंचकर बंदूक को घर के लकड़ी के बने छत के ऊपर जहां घास फूस रखी जाती है उसी में छुपा दिया वह जानता था कि अगर उसकी मां बंदूक देखेगी तो घबरा जाएगी इसीलिए वह किसी को कुछ बताए बिना वह अपने कमरे में आकर सो गया क्योंकि रात काफी हो चुकी थी,,,)
 
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