Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 21 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

आगे भी इसी तरह से मजा जारी रहेगा

इसी तरह से रायचूर अपनी मां और बुआ दोनों की लेगा

 
वादे के मुताबिक राजू निश्चित कि हुई जगह पर पहुंच चुका था यह जगह गांव के खत्म होने के बाद शुरू होती थी और लगभग लगभग जंगल की तरह ही नजर आती थी चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ घनी झाड़ियां बड़े-बड़े घास,,,, और इनमें सांप बिच्छू का डर अलग से बना रहता था इसलिए यहां पर गांव वाले बहुत कम ही आते थे लगभग ना के बराबर ही ,,, अभी तक राजू की मां वहां पर पहुंची नहीं थे इसलिए राजू वहीं पर घोड़े से उतरकर अपनी मां का इंतजार करते हुए उसकी राह देखने लगा,,,,



राजू के मन में कुछ और चल रहा था आज गोदाम पर कोई नहीं था गोदाम पूरी तरह से खाली था सिर्फ दशहरी आम संतरे व खरबूजे ही रखे हुए थे,,,, तीनों फल की गोलाई के बारे में सोच कर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी बड़ी चूची नजर आने लगती थी पहले उसका ऐसा इरादा बिल्कुल भी नहीं था लेकिन आम संतरा और खरबूजा के बारे में सोच कर उसके मन में यही चल रहा था कि वह अपनी मां को गोदाम में लाकर जी भर कर उसकी जुदाई करें क्योंकि वहां कोई नहीं था ना देखने वाला नहीं सुनने वाला गोदाम के अंदर चुदाई का वह एक अलग अनुभव लेना चाहता था इसीलिए तो वह अपनी मां को गोदाम घुमाने के लिए तैयार हो चुका था और इसीलिए बड़ी बेसब्री से अपनी मां का इंतजार भी कर रहा था,,,,,,, बेचैनी के साथ-साथ पजामें में कैद मुसल का तनाव बढ़ता जा रहा था,,,, राजू बड़ी बेसब्री से अपनी मां का इंतजार करते हुए उसी जगह पर चहलकदमी कर रहा था और सड़क की तरफ देख रहा था जो कि पूरी तरह से घनी झाड़ियों से गिरी हुई थी किसी का आना जाना दूर से दिखाई नहीं देता था इसीलिए तो राजू अपनी मां को इस जगह पर बुलाया था ताकि गोदाम पर ले जाते समय उसे कोई देख ना सके,,,,



कुछ ही देर में उसकी इंतजार की घड़ी खत्म हो गई उसकी आंखों के सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत मुस्कुराते भी आती हुई दिखाई दी जिसके सर पर पल्लू है और उसी पल्लू से उसकी बड़ी-बड़ी छातियां छुपी हुई थी लेकिन तेज चल रही हवाओं की वजह से उसके साड़ी का पल्लू उड़ जा रहा था और उसकी घनघोर घटाओं से घिरी हुई भारी-भरकम छातियां दूर से ही नजर आने लगती थी गोलाकार नितंबों की वजह से उसकी चाल भी बेहद मादक थी जिसे देखने पर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए और यही हाल राजू का भी हो रहा था अपनी मां को अनेकों बार भोग चुका राजू इस समय भी अपनी मां को देखकर उत्तेजित वजह रहा था देखते ही देखते उसकी मां राजू के एकदम करीब आ गई,,, और राजू से बोली,,,,।

मुझे थोड़ी सी देरी हो गई क्या करूं घर का काम निपटाने में थोड़ा समय लग गया,,,

तभी मैं सोचूं कि इतनी देर कैसे लग गई मैं तो तुमसे कहा था ना कि घर का कामकाज छोड़कर समय पर चली आना मैं कब से यहां पर इंतजार कर रहा हूं,,,

अरे कोई बात नहीं बेटा आ तो गई ना बस यही बहुत है,,,,



चलो कोई बात नहीं,,,(इतना कहने के साथ ही राजू घोड़े की राशि पकड़कर उछल कर उसके ऊपर चढ़कर या देखकर हैरान होते हुए मधु बोली)

अरे यह क्या मैं कैसे चलूंगी,,,,

मेरे लंड पर तो बैठ कर चलोगी नहीं घोड़े पर ही बैठ कर जाना है,,,,

बाप रे यह मुझसे ना हो पाएगा मुझे तो बहुत डर लगता है,,,,

अरे यार कैसा मैं हूं ना,,,,

नहीं राजू पैदल ही चलते हैं,,,,

पैदल जाओगी देख रही हो घनी झाड़ियां यहां कहां पर सांप बिच्छू आएंगे दिखाई भी नहीं देगा और काट लेंगे,,, आओ डरो मत,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और मधु समझ गई कि अब राजू की बात माने बिना दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है इतनी घनी झाड़ियों में वह पैदल पैदल जा भी नहीं सकती थी,,,)

अरे लेकिन मुझे बैठना नहीं आता,,,

अरे तुम आओ तो सही मैं बताता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां का हाथ पकड़ कर वह ऊपर की तरफ उठाने लगा और बोला) पहले नीचे जो लोहे का बना है उसमें अपना पैर रखो,,,

इसमें,,,(आंख के इशारे से बताते हुए)

हां इसी में थोड़ा सा पेर ऊपर उठाओ,,,,

(इतना सुनते ही मधु अपना एक पैर ऊपर की तरफ उठाने लगी ऊंचाई कुछ ज्यादा थी इसलिए उसकी साड़ी एकदम घुटनों से ऊपर जांघ तक आ गई थी और नीचे की नंगी टांग साफ दिखाई दे रही थी वह तो अच्छा था कि यहां पर कोई देखने वाला नहीं था अपने पैर को उस लोहैं की गोलाई में रखते हुए मधु बोली,,)

बाप रे तो कुछ ज्यादा ही ऊपर है मेरी साड़ी जांघ तक आ गई,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं अगर यहां से नंगी होकर गोदाम तक जाओगी तो भी‌ देखने वाला कोई नहीं है,,,

धत् हमेशा तुझे यही सब सुझता रहता है,,,

क्या करूं तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हें देखकर ही यही सब ख्याल आते हैं,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां का हाथ कस के पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और दोनों हाथों को अपनी मां की कमर पर रख कर उसे पकड़कर थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा कर उसे अपने ठीक आगे घोड़े पर बिठा दिया ऐसा करने पर मधु एकदम से गड़बड़ा गई और बोली ,,,)

तू तो मुझे अपने आगे बिठा दिया कोई देखेगा तो क्या बोलेगा,,,,

अरे मैं तुमसे कह रहा हूं ना कि यहां से अगर बिना कपड़ों के भी जाओगी तो भी कोई देखने वाला नहीं बेफिक्र रहो जहां कोई आता जाता नहीं है,,,,,

मुझे क्या मालूम मैं यहां तक थोड़ी आती हूं,,,,

(मधु घोड़े के ऊपर अपने बेटे के ठीक आगे बैठ गई थी और उसके सट कर राजू बैठा हुआ था वह एक तरह से अपनी मां को पीछे से बाहों में पड़ा हुआ था पहले से ही उसका लंड पूरी तरह से खडा था जो कि इस अवस्था में सीधे मधु की गांड से टकरा रहा था और अपने बेटे की लंड की चुभन मधु को अच्छी तरह से अपनी गांड पर महसूस हो रही थी जिसके चलते वह भी उत्तेजित हो रही थी,,, जिंदगी में पहली बार मधु घोड़े पर सवार हुई थी इसलिए उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी फिर तो घोड़े पर बैठने का रोमांच और ऊपर से अपने बेटे के ठीक आगे ऐसा लग रहा था कि जैसे मानो राजू पीछे से उसे चोद रहा हूं इसलिए तो मधु के तन बदन में कुछ ज्यादा ही हलचल हो रही थी ठीक से अपनी मां को घोड़े पर बैठा लेने के बाद राजू बोला,,,)

आराम से बैठ गई हो ना,,,,

हां आराम से बैठ गई हूं,,,

कोई दिक्कत हो रही हो तो बोलना पीछे से तुम्हारी गांड में लंड डालकर खुंटा बना लूंगा और फिर तुम गिरोगी नहीं,,,

धत् शैतान हमेशा इसी तरह की बातें करता है,,,

Raju is tarah se apni ma ko ghode par bitha k le ja Raha tha



बातें करता नहीं चलो गोदाम पर वहां तुम्हारी जमकर चुदाई करूंगा,,,,(ऐसा कहते हुए राजू घोड़े की लगाम खींचकर उसे आगे बढ़ने का इशारा कर दिया और घोड़ा धीरे-धीरे दौड़ने लगा अपने बेटे की बात सुनकर मधु मुस्कुराते हुए बोली)

अगर गोदाम पर ले जाकर यह सब करना है तो रहने दे तु मुझे उतार दे मैं घर चली जाऊंगी,,,

आहा कह तो ऐसे रही हो कि जैसे तुम्हारी बुर तड़प नहीं रही है मेरे लंड के लिए अगर हाथ लगा कर देखुंगा तो उसमें से पानी ही निकल रहा होगा,,,

तो पानी निकलने वाली जगह ही है तो निकलेगा नहीं,,,,

लेकिन कुछ और सोच कर निकल रहा है,,,

क्या सोच कर निकल रहा है बता तो,,,

बताऊंगा नहीं गोदाम पर चलो वहीं पर दिखाऊंगा,,,,

(घोड़ा धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था और राजू का बदन भी आगे पीछे हो रहा था ऐसा लग रहा था मानो जैसे कि वह अपनी मां को घोड़े पर बैठा कर चोद रहा हो बार-बार उसका मोटा तगड़ा लेना मधु की गांड से रगड़ खाता हुआ अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था जोकि मधु को एकदम साफ महसूस हो रहा था और इसी के चलते वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,,,। राजू को बेहद आनंददायक स्थिति लग रही थी उसका बस चलता तो अपनी मां के सारे कपड़े उतार कर नंगी घोड़े पर बैठा कर उसे गोदाम तक ले जाता और खुद भी नंगा हो जाता और ऐसे हालात में घोड़े पर बैठे बैठे ही उसकी बुर में लंड डालकर घोड़े की सवारी के साथ-साथ घोड़ी की भी सवारी का मजा ले लेता,,,,

अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की रगड़ की वजह से मदद पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी उसकी बुर से वास्तव में नमकीन रस झर रहा था जिसकी वजह से उसका साया आगे से गिला होता जा रहा था,,,। उसका मन बहुत कर रहा था अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन वो जानती थी कि गोदाम तक पहुंचने तक उसे सब्र करना होगा गोदाम के पहुंचने के बाद उसे अपने बेटे से कुछ भी बिना बोले ही उसका बेटा उसे बहुत कुछ दे देगा,,,।

गोदाम पर पहुंचने की जल्दबाजी और उत्सुकता दोनों के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी,,,, घोड़े की सवारी करना मधु को बेहद रोमांचित कर रहा था उससे भी ज्यादा रोमांच से भरा हुआ था अपने ही बेटे के लंड की सवारी जोकि उसका बेटा उसे अच्छी तरह से कराता था,,,,, इस जंगल जैसी जगह से मधु कभी गुजरी नहीं थी इसलिए सब कुछ उसे नया नया लग रहा था लेकिन इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था कि अकेले आना यहां पर बिल्कुल भी ठीक नहीं था क्योंकि चारों तरफ सिर्फ झाड़ियां ही झाड़ियां थी,,,,, अगर अकेले थे आते समय कोई गलत इंसान के हाथ में पड़ जाओ तो बचाने वाला यहां कोई नहीं है,,,,, लेकिन इस समय मधु को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी इस बात को अच्छी तरह से जाती थी क्योंकि वह अपने बेटे के हाथों में थी और वह बेटा जो डाकुओं को मार भगाया था इसे बहादुर बेटे के साथ वह कहीं भी आ जा सकती थी और उसे अपने बेट पर बहुत गर्व होता था,,,।

घोड़े की सवारी करते समय राजू जिस तरह से घोड़े पर हिल रहा था उसे लग रहा था और मधु के बदन से जिस तरह से सटा हुआ था उस स्थिति में उत्तेजना के मारे राजू का लंड फटने की स्थिति में हो गया था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था लेकिन वह चाहता था कि अपनी जवानी की गर्मी वह अपनी मां की बुर गोदाम पर पहुंचने पर बड़े आराम से उतार सकता है,,,, अपनी मां को चोदने की उत्सुकता के चलते गोदाम तक की दूरी भी उसे मिलों की तरह लग रही थी,,,, आखिरकार जैसे तैसे करके व गोदाम तक पहुंच गया और वहां एक पेड़ के नीचे घोड़ा रोककर वह पहले खुद उतरा और,,,, फिर अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे उतारने की कोशिश करने लगा तो वह उतरने में डरने लगी इसलिए राजू तुरंत अपने दोनों हाथ को अपनी मां की कमर में डालकर उसे अपनी भुजाओं के बल पर घोड़े पर से नीचे उतार लिया,,,, और इसी अदा की तो मधु कायल थी वो मुस्कुराने लगी और चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी वो ठीक तरह से गोदाम के बाहर का मुआयना करना चाहती थी,,,,,,, इसलिए वह चारों तरफ नजर घुमाकर देख रही थी चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ बड़ी-बड़ी घांसे,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे का गोदाम जंगलों के बीच में बना हुआ था,,,,

आज कोई भी नहीं है,,,(चारों तरफ नजर घुमाते हुए मधु बोली)

आज कोई नहीं है तभी तो तुम्हें यहां लेकर आया हूं,,,,

तेरा इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा है,,,(अपनी आंखों को ना चाहते हुए अपने बेटे की तरफ देख कर बोली)

तुम्हें देखकर इरादा बदल जाता है,,,,

ऐसा क्यों,,,?

तुम्हारे दशहरी आम तरबूज इसी बड़ी-बड़ी गांव और लहसुन की कली जैसी तुम्हारी बुर किसी के भी ईमान डोलाने के लिए काफी है,,,,

मेरे दशहरी आम के बारे में छोड़ मुझे गोदाम के आम दिखा ताकि घर पर भी ले जा सकूं,,,,

सब तुम्हारा यह मां पूछने की जरूरत नहीं है जितना हो सकता है उतना ले जा सकती हो,,,,

हां मुझे मालूम है अब तो बहुत बड़ा व्यापारी बन चुका है सौदा करना चाहता है मेरे दशहरी आम को लेकर गोदाम के दशहरी आम देना चाहता है ना,,,

तुम बहुत चालाक हो मा,,, बहुत जल्दी समझ गई सच कहूं तो तुम्हारी दशहरी आम के आगे यह पेड़ पर उगने वाले आम की कोई कीमत नहीं है तुम्हारा दशहरी आम जिसे मिल जाए तो वह अपना पूरा गोदाम देदे सिर्फ तुम्हारे दशहरी आम के चलते,,,,(गोदाम के बड़े से दरवाजे को खोलते हुए राजू बोला और दरवाजा आवाज करता हुआ खुल गया दरवाजा के खुलते ही मधु की नजर गोदाम में पड़ी तो वह देखती रह गई ,,,गोदाम बहुत बड़ा था चारों तरफ संतरे खरबूजे और दशहरी आम पड़े थे और चारों तरफ लकड़ी की पट्टी के डिब्बे जिसमें फल भरकर शहर भेजा जाता था,,,, गोदाम के अंदर प्रवेश करते हुए मधु का मुंह आचार्य से खुला का खुला रह गया था वह एकदम आश्चर्य जताते हुए बोली)

बाप रे इतना बड़ा गोदाम इसमें तो पूरा गांव बैठकर खाना खाए फिर भी गोदाम खाली का खाली ही दिखेगा,,,

तो क्या ना कम से कम 50 बारात आकर रुक सकती है इतना बड़ा गोदाम है ये,,,,

क्या सच में तू इतने बड़े गोदाम का मालिक बन गया है,,,

तो क्या मैं सब कुछ अपना ही है मेरे हाथ के नीचे कम से कम 30 40 मजदूर काम करते हैं,,,,

वाह बेटा तेरी तो शान बन गई,,,(गोदाम के अंदर गोल गोल घूम कर मधु गोदाम को देख रही थी और राजू अपनी मां के भारी-भरकम गोदाम को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था)

आओ मैं तुम्हें दशहरी आम दिखाता हूं,,,,(ऐसा कहते हुए राजू गोदाम के बीच से होता हुआ अंदर की तरफ जाने लगा जहां पर दशहरी आम की पेटी रखी हुई थी और उसमें बड़े-बड़े आप रखे हुए थे,,,, उन पेटीयों में से दो बड़े-बड़े आम निकालकर अपनी मां की तरफ दिखाते हुए बोला,,,)

देख रही हो मैं कितने बड़े बड़े हैं लेकिन तुम्हारे दशहरी आम से बड़े नहीं हैं,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर अचानक ही उसकी नजर अपनी छाती पर चली गई और वह मुस्कुरा कर अपनी चुचियों को और फिर राजू की तरफ देख कर बोली,,,)

बहुत शैतान हो गया है तू क्या इनमें से एक पेटी घर पर ले जा सकते हैं,,,,

1 पेटी,,,, अरे मां सारी की सारी पेटी घर पर ले जा सकती हो,,,

क्या तु सच कह रहा है,,,,(आश्चर्य से बोली)

हा मा में एकदम सच कह रहा हूं,,,,

ओहहहह राजु तूने तो हम लोगों की जिंदगी ही बदल दिया,,,,(ऐसा कहते हुए मधु बहुत खुश हो रही थी और घूम घूम कर आम की सभी बेटियों को देख रही थी और मैं पढ़े बड़े-बड़े आम को देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था लेकिन राजू तो अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची को देखकर ललचा रहा था अपनी मां की चूची को देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था अभी भी बड़े-बड़े दोनों दशहरी आम उसके हाथ में ही थे जिसे दबा दबा कर वह ईस बात का एहसास कर रहा था कि अपनी मां की चूची को हाथ में लेकर इसी तरह से दबाएगा,,,, आखिरकार उसके मन की बात उसके होठों पर आ ही गई और वह अपनी मां को बोला,,,)

मां पहले तुम अपना ब्लाउज खोलो देखो तो सही तुम्हारी चूची से बड़ी है या छोटी यह दशहरी आम,,,

बड़ी ही होगी,,,(अपने बेटे की हथेली में दशहरी आम को देखते हुए बोली)

नहीं ऐसे नहीं पहले अपने ब्लाउज के बटन खोलो और मुझे अपनी चूची दिखाओ तब समझ में आएगा,,,

कितनी बार देख चुका है फिर भी तुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मेरी चूची कितनी बड़ी है,,,,

हां यह बात तो है लेकिन इस समय समझ में नहीं आ रहा है इस समय मेरा दिमाग चकरा रहा है इसलिए तो कह रहा हूं जल्दी से अपने ब्लाउज का बटन खोलो,,,,



हाय दैया तू ऐसे बिल्कुल भी नहीं मानेगा,,,,

(और ऐसा कहते हुए वो खुद अपने ब्लाउज के बटन कौन है ना कि ऐसा नहीं था कि उसका मन नहीं कर रहा था अपनी ब्लाउज के बटन खोल कर अपने बेटे को अपनी नंगी चूची दिखाने का वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी अपने बेटे को अपना नंगा बदन इस गोदाम में दिखाने के लिए ताकि उसका बेटा अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी जवानी की गर्मी को शांत कर सके,,,, इसीलिए वह एक-एक करके अपने ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दी गोदाम में इस समय कोई भी मजदूर नहीं था इसलिए राजू पूरी तरह से निश्चिंत था और वहां अपनी मां की कामुक हरकत को देखकर मस्त हो रहा था,,,,
 
राजू अपनी मां को अपना काम दिखाने के लिए गोदाम पर ले कर आया था और यहां पर उसकी कामलीला की शुरुआत हो चुकी थी जिसमें उसकी मां खुद उसका साथ दे रही थी क्योंकि वह भी यही चाहती थी,, दोपहर का समय था चारों तरफ सुनसान था वैसे भी जंगल के जैसे पेड़ पौधों से घिरा हुआ यह जगह जैसा ही लगता था और आज का दिन राजू के लिए भी बहुत खास था क्योंकि आज काम करने वाले मजदूर छुट्टी पर थे गोदाम पर कोई नहीं था गोदाम पर क्या गोदाम के आसपास की जगह पर भी कहने के लिए भी इंसान नहीं थे चारों तरफ सुनसान था इसीलिए तो राजू पूरी तरह से निश्चिंत था और गोदाम में अपनी मां को ले जाकर के बड़े-बड़े आम दिखाते हुए उसे अपने ब्लाउस उतारने के लिए कह रहा था ताकि वह अपनी मां की चूची से और दशहरी आम की गोलाई से अच्छी तरह से नाप ले सके,,,, और उसकी मां भी उसकी बात मानते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोलना शुरू कर दी थी,,,।



धीरे-धीरे गोदाम का वातावरण पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था फिर तो पहले से ही घोड़े की सवारी करके राजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और गोदाम में वह अपनी मां को अपने ब्लाउज उतारने के लिए बोल रहा था और मधु भी अपने बेटे की बात मानते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोल रही थी जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खुलता जा रहा था वैसे वैसे राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी ,,,,,, और जैसे-जैसे ब्लाउज के बटन खोल रहा था वैसे वैसे मधु की लाजवाब रसीली चूचियों की झलक मिलती जा रही थी और उस झलक को पाकर उत्तेजना के मारे राजू अपने हथेली में लिए दोनों हाथों को कस के दबाता जा रहा था,,, मधु मुस्कुरा रही थी उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान थी उसके तन बदन में भी हलचल में चली थी अपने बेटे के सामने इस तरह से गोदाम के अंदर अपने ब्लाउज के बटन खोलने में वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी,,,,,

गोदाम पर किसी के ना होने का भाव दोनों मां बेटों के चेहरे पर एकदम साफ झलक रहा था दोनों पूरी तरह से निश्चिंत देते किसी बात का डर उन्हें बिल्कुल भी नहीं था ना तो किसी के आने का और ना ही किसी के देखे जाने का इसलिए दोनों बेफिक्र होकर एक दूसरे से मजा लेने की तैयारी कर रहे थे और इसी की शुरुआत करते हुए मधु अपने बेटे की आंखों के सामने ही उसे अपनी चूची के दर्शन कराने के लिए अपने ब्लाउज के बटन को रही थी और देखते ही देखते अपने ब्लाउज का आखिरी बटन खोल कर वह अपने दोनों कबूतरों को अपने ब्लाउज के कैद से एक दम से आजाद कर दी,,,,



दोनों चूची के नंगे होते हैं इस अद्भुत नजारे को देखकर राजू की आंखें फटी की फटी रह गई ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां की लंबी चुचियों को देख रहा है लेकिन नई जगह पर नए माहौल में पहले जैसे हालात भी पूरी तरह से बदले हुए और नयापन लिए हुए होते हैं और यही हाल है इस समय राजू का भी था अपनी मां की चूची से जी भर के खेल लेने के बाद भी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चूची को पहली बार देख रहा हो आश्चर्य से अपनी मां की सूचियों को देखते हुए वह‌ बोला,,,।

बाप रे बहुत खूबसूरत हैं,,,,

(अपने बेटे के मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर मधु गदगद हुए जा रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, और राजू अपनी दोनों हथेलियों में लिए हुए दशहरी यहां जो कि वह भी आकार में कुछ ज्यादा ही बड़े थे उन्हें अपनी मां को दिखाते हुए बोला,,,)

देखो मैं दशहरी आम इतने बड़े बड़े होने के बावजूद भी तुम्हारी चूची के आगे कितने छोटे हैं,,,(दोनों दशहरी आम को अपनी मां की दोनों चुचियों से सटाते हुए बोला,,,)



हारे मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है दशहरी आम को देखकर मुझे नहीं लग रहा था कि मेरी चूची ईससे भी बड़ी होगी,,,,

सच में मां मुझे भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन सब कुछ आंखों के सामने ही देख लो तुम्हारी चूची इस दशहरी आम से भी ज्यादा लाजवाब है मैं कहता था ना तुम्हारी दशहरी आम के आगे तो गोदाम का बड़ा सारा दशहरी आम फीका पड़ जाए,,,,(ऐसा कहते हुए राजू दशहरी आम के ऊपरी हिस्से के उस छोटे से छेद को खोलने लगा और गोल-गोल घुमाते हुए उसे उंगली के सारे से खोलकर उसे पूरी तरह से चूसने के लिए तैयार कर दिया और अपनी मां को दशहरी आम थमाते हुए बोला,,,)

लो मा तुम इस दशहरी आम का मजा लो तुम्हें बहुत पसंद है ना और मैं तुम्हारी इस,,(अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों की तरफ देखते हुए) दशहरी आम को चूसने का मजा लेता हूं,,,।





(अपने बेटे की बात मानते हुए मुस्कुरा कर मैं तो अपने बेटे के हाथ से बड़े से दशहरी आम को थाम ली और अपनी छाती को अपने बेटे की तरफ आगे कर दी और राजू भी बेइज्जत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चुचियों को थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाता हुआ अपनी मां की तरफ देखा और फिर धीरे से अपने होठों को अपनी मां के किसमिस पर रखकर चूसना शुरू कर दिया अपने बेटे की हरकत से मधु पूरी तरह से सीहोर उठी और अगले ही पल वह भी दशहरी आम को अपने मुंह से लगाकर उसके मीठे रस का आनंद लेने लगी,,,, राजू अपनी मां की चूचियों को पाकर पूरी तरह से उत्तेजित और आनंदित हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और अपनी मां को भी पूरी तरह से मस्त कर रहा था वह दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह लेकर दबा दबा कर दोनों का दूध पी रहा था,,,, और उत्तेजित अवस्था में मधु दशहरी आम को अपने मुंह में लेकर जोर-जोर से चुस रही थी,,,,,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से काम पिपासा हो चुके थे राजू अपनी मां की दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह दबा दबा कर उस का रस निकालकर पी रहा था वह रह रह कर जितना हो सकता था उसने अपनी मां की चुची को अपने मुंह में लेकर पीने की कोशिश कर रहा था,,,, उसका मन तो कर रहा था कि पूरा का पूरा अपने मुंह में लेकर पी जाए लेकिन ऐसा कर सकना उसके बस में नहीं था क्योंकि उसकी मां की सूचियों का आकार उसके मुंह से कुछ ज्यादा ही बड़ा था और विशाल तौर पर था,,,, लेकिन फिर भी राजू हार नहीं मान रहा था दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था,,,,, और अपने बेटे की हरकत पर मधु के मुंह से गरमा गरम सिसकारियां निकल रही थी वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए दशहरी आम को बड़ी जोर जोर से अपनी हथेली में लेकर दबा दबा कर चुस रही थी,,,, अत्यधिक उत्तेजना के चलते वह दशहरी आम को इतनी जोर से दबा देती थी कि आम का रस उसके होठों से निकलकर उसके से होकर बहने लगता था जो कि सीधे उसकी चुचियों के बीचो बीच पहुंच जा रहा था क्या देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,,



राजू से रहा नहीं जा रहा था और मधु के मुंह में से टपक रहे आम के रस को वह उसकी चुचियों के बीचो बीच से अपनी जीभ लगाकर चाट रहा था,,,, इससे मधु की उत्तेजना और मदहोशी दोनों बढ़ती जा रही थी वह अपने बेटे से अपनी चूची चूसाई का अत्यधिक आनंद लूट रही थी,,,,, दोनों हाथों को चूची पर रखकर जोर-जोर से मसलते हुए राजू अपनी जी बाहर निकाल कर आम के रस को अपनी जीभ से लपेट तेरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था जैसे-जैसे मधु के मुंह में से आम का रस टपक कर जिस जिस रंगों से होकर गुजर रहा था राजू उसी अंगों को अपने होठों से चाटता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था और देखते ही देखते राजू अपनी मां के लाल लाल होठों के करीब आ गया और अगले ही पल अपनी मां के हाथ में से दोनों दशहरी आम को लेकर उन्हें दूर फेंक दिया और अपनी मां की हथेली को अपनी हथेली में भरकर अंगुलियों को अंगुलियों से सटाकर इतनी कसके दबाया की मधु के मुंह से आह निकल गई और इसी आह के साथ राजू अपने प्यासे होठों को अपनी मां के रस भरे हो तो पर लगा दिया और उसका रसपान करना शुरू कर दिया,,,,





राजू की यह हरकत इतनी कलात्मक और उत्तेजना तमक थी कि मधु के तन बदन में आग लग गई उसकी बुर से पानी का रस टपक में लगा हुआ पूरी तरह से मदहोश हो गई और एकदम से अपने बेटे की छाती से सट गई,,,, हालात अब दोनों मां बेटों के काबू में बिल्कुल भी नहीं था,,,, गांव से दूर जंगल जैसे स्थल के बीचो-बीच बने गोदाम में मां बेटे दोनों पूरी तरह से काम बइह्वल होकर,,, एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे,,,,, देखते ही देखते राजू अपने दोनों हाथेली को अपनी मां की हथेलियों से छुड़ाकर अपनी हथेली को ठीक अपनी मां के पीछे लाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड पर जमा दिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया ऐसा करने पर पीछे से तो उसे मजा मिल ही रहा था लेकिन आगे से भी मधु को आनंद प्राप्त होने लगा क्योंकि आगे से दोनों टांगों के बीच उसकी दूर पर सीधे-सीधे उसके बेटे के लंड की रगड़ महसूस हो रही थी जो कि अभी भी पजामे के अंदर केद था,,, बार-बार हो रही लंड की दस्तक को अपनी बुर के ऊपर महसूस करके,,, मधु से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वहां अपना हाथ सीधे अपने बेटे के पजामे में डाल दिया और उसके नंगे लंड को अपने हथेली में पकड़कर दबा दी,,,, मधु अपने अंदर कितनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी या उसकी हथेली का दबाव ही बता रहा था जिससे राजू के मुंह से हल्की सी आह निकल गई थी और इसी आह के साथ राजू अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया था,,,, और देखते ही देखते वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड पर अपनी दोनों हथेलियों की रगड़ बढ़ाना शुरू कर दिया नंगी गांड पर हथेली घुमाने का मजा ही कुछ और होता है इस बात को राजू से बेहतर कौन जान सकता था राजू पागलों की तरह अपनी मां की नंगी गांड से खेल रहा था,,,,

ओहहह मां,,,,आहहहहह तेरी गांड कितनी मस्त है रे मन करता है ऐसे दिन भर चाटता रहूं,,,

ओहहहह मेरे राजा बेटा तो तुझे रोका किसने है मेरा भी तो मन करता है कि तेरे लंड को दिन-रात मुंह में लेकर चुस्ती रहूं कितना मोटा और लंबा है,,,,, तेरी लंड को मैं अपनी बुर में लेकर में एकदम धन्य हो जाती है,,,,आहहहहह कितना गर्म है यह तो मेरा पानी निकाल देगा,,,,



ओहहहह मेरी छिनार लंड का तो काम ही है औरत का पानी निकालना ,,,, देखना अभी मैं कैसे तेरा पानी निकलता हूं तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,आहहहहहह ,,(एक हाथ आगे की तरफ लाकर अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसे अपनी हथेली से झगड़ते हुए गर्म करने लगा जो की पूरी तरह से काम रस से चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अपनी बुर पर अपने बेटे की हथेली को महसूस करते हैं मधु की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसके मुख से बड़ी जोर जोर से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सुनसान जगह पर और वह भी गोदाम के अंदर उसकी गरमा-गरम सिसकारी सुनने वाला और कोई नहीं था इसलिए वह दिल खोलकर गरमा गरम सिसकारी लेकर मजे ले रही थी,,,,।

कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां के अंगों से खेलता रहा और पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगा रहा था लंड की आदत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह अपनी औकात में आ चुका था वह किसी भी वक्त अपनी मां की बुर में जाने के लिए तड़प रहा था अपनी मां की बुर की अंदरूनी दीवारों की गर्मी और उसकी रगड़ को पाकर मस्त होना चाहता था,,,,, राजू अपने लंड की बेताबी को अच्छी तरह से समझता था लेकिन उसकी जरूरत भी पूरी करना उसके लिए प्रमुख था इसलिए वह बिना कुछ बोले अपनी मां के कदमों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ दबाव देने लगा मधु जो की पूरी तरह से परिपक्व थी वह अपने बेटे की हरकत और उसके सारे को अच्छी तरह से समझती थी और वैसे भी वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने के लिए तड़प रही थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे के दबाव के तहत धीरे-धीरे नीचे की तरफ झुकने लगी और देखते ही देखते वह एकदम से झुककर घोड़ी बन गई वह घुटनों के बल नहीं थी लेकिन झुकी हुई थी और तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने बेटे के पजामे को एक झटके से खींचकर उसके घुटनों तक पहुंचा दी,,,,



मधु का दिल जोरों से धड़क रहा था गोदाम के अंदर इस तरह की हरकत का मजा लेने का यह पहला अनुभव था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव कर रही थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर उसकी बुर से काम रस अमृत की भूत बनकर टपक रही थी,,,, अपनी बेटी के लंड को अपने लाल-लाल होठों को खोल कर उसे अंदर लेने से पहले वह अपनी नजर उठा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी राजू भी अपनी मां को ही देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकराई और दोनों एकदम से मदहोश हो गए और अगले ही पल मधु अपने लाल-लाल होठों के बीच अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को लेकर उसे चूसते हुए अंदर की तरफ ले जाने लगी,,,, और राजू इस अनुभव में पूरी तरह से डूबता हुआ अपनी आंखों को बंद कर लिया और हल्की-हल्की सांसे लेता हुआ अपनी मां के इस नेक कार्य में हाथ बढ़ाता हुआ अपनी कमर को आगे की तरफ खेल रहा था जिससे उसकी मां उसके समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर उसकी चूसाई कर सके क्योंकि राजू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि लंड को उसकी मां की बुर के अंदर डालने से पहले उसकी सेवा सत्कार होना बेहद जरूरी था ताकि वह बोर के अंदर जाकर पूरी तरह से तबाही मचा सके,,,

राजू से शारीरिक संबंध बनाने से पहले लंड चुस्ती में मधु को इतनी ज्यादा काबिलियत प्राप्त नहीं हुई थी क्योंकि उसे चूसने के लिए उसके पति का छोटा सा लंड मिलता था जिसे मुंह में लेकर उसे महसूस नहीं होता था कि वह लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने ही है उसे तो ऐसा ही लगता था कि जैसे बबूल की टहनी तोड़कर वह मुंह में लेकर अपना दांत साफ कर रही है लेकिन राजू का लंड प्राप्त होते ही उसके दर्शन मात्र से ही वह पूरी तरह से धन्य हो चुकी थी और उसे मुंह में लेने के बाद तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि मर्द का असली लंड कैसा होता है और सही मायने में मर्द कैसा होता है,,,, वैसे भी अब उसकी नजर में राजू भी असली मर्द का हकदार था जो कि पूरी तरह से उसे अपनी भुजाओं में रहकर उसकी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,



देखते ही देखते मधु अपने बेटे के लंड को अपने गले तक उतार कर चुसाई का आनंद ले रही थी और उसे दे‌ भी रही थी,,,, राजू को पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वैसे जिस तरह से मधु अपने बेटे के लंड की बुलाई पर अपने लाल-लाल होठों का दबाव बनाकर गोल सा छल्ला बनाई थी राजू को तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां के मुंह में नहीं बल्कि उसकी बुर में अपना लंड डाला हुआ है इसीलिए तो वह अपनी कमर को होले होले हिलाता हुआ अपनी ही मां के मुंह को चोद रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद खुद मधु की हालत खराब होने लगी उसकी बुर में चीटियां रेंगने लगे वजह से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे के कहने से पहले ही अपनी बेटी के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल ली और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी साड़ी को उसी तरह से उठाए हुए खड़ी हो गई और अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी हथेली को पहले जीभ से चाट कर उसे अपनी बुर पर लगाकर उसे जोर-जोर से रगड़ते हुए बोली,,,,।

सहहहह आहहहहह मेरे राजा अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरी बणर तेरे लंड़ के लिए तड़प रही है अब जल्द से जल्द अपने लंड को मेरी बुर में डालकर मेरी प्यास बुझा दे,,,,आहहहहह मेरे राजा,,,आहहहहहह,,,,।

(मधु पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी वह उसी तरह से अपनी हथेली को अपनी बुर पकड़ते हुए अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी और अपनी मां की इस हालत को देखकर राजू से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह पूरी तरह से मतवाला हो चुका था अपनी मां पर चढ़ने के लिए इसीलिए वह तुरंत पेड़ का सहारा देकर अपने पजामे को उतार फेंक दिया हूं कुर्ते को भी निकाल कर एकदम नंगा हो गया लेकिन अभी भी उसकी मां साड़ी में थी,,,,, राजू का भी मन कर रहा था कि अपनी मां की बुर में लंड डालकर लेकिन उसकी बुर की हालत देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था वह अपनी मां की बुर के काम रस को पीना चाहता था,,,, इसलिए वह आगे बढ़ा और तुरंत घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां की हथेली को अपने हाथ से पकड़ कर हटाने लगा और दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी बुर पर अपने होंठ रख कर जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को बुर की गहराई में डाल कर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,



दोनों मां बेटों की इस तरह की हरकत से हालात बद से बदतर हुआ जा रहा था दोनों कि तन बदन में चुदाई की लहर उठ रही थी दोनों एक दूसरे में सामान्य के लिए तड़प रहे थे लेकिन राजू था कि अपनी मां की प्यास को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,,, लेकिन जल्द ही वह पल आ गया जब लंड और बुर का संगम होने वाला था लेकिन इस संगम से पहले राजू ने अपनी मां के बदन पर बचे हुए कपड़े को भी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया बड़े से कोई धाम के अंदर मां बेटे पूरी तरह से नग्न अवस्था में हो चुके थे,,,,, राजू ने अपनी मां की चुदाई करने के लिए जमीन पर बिस्तर नहीं लगाया ना कोई चटाई बिछा या वह सीधे अपनी मां को गोद में उठाकर नारंगी के ढेर में ले गया और उसी पर लेटा कर अपनी मां की दोनों टांगों को फैला दिया और फिर अपने मोटे तगड़े लंड को एक झटके में ही अपनी मां की बुर में डालकर उसे बच्चेदानी तक पहुंचा दिया जिससे मधु के मुंह से जोर की चीख निकल गई लेकिन इस चीज की परवाह किए बिना राजू तुरंत अपनी मां की दोनों चूचियों को हथेली में भरकर थाम लिया और उस का सहारा लेकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, मधु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा इस तरह से बेरहमी से उसकी चुदाई करेगा लेकिन इस बेरहमी में भी उसका प्यार झलक रहा था वह पूरी तरह से अपनी बेटी की चुदाई का मजा लेते हुए मस्त हुए जा रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका पति इस तरह की जबरदस्त चुदाई कभी नहीं कर पाता जिस तरह कि उसका बेटा उसे चोद रहा है,,,,,।

आहहह आहहहह बेटा मेरे लाल तेरा लंड मेरे बच्चेदानी तक पहुंच रहा है,,,,,,,



, पहुंचने दे मेरी रानी जितनी बार तेरे बच्चेदानी से लंड टकराएगा तुझे उतना ज्यादा मजा आएगा देखना आज मैं तुझे ऐसा जो दूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेंगी ,,,,,,

आहहहह आहहहहह ऊफफफ,,,,,आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है मेरे बेटे मेरे राजा तेरा लंड पाकर में धन्य हो गई हुं,,,

मैं भी तेरी बुर पआकर मस्त हो गया हूं,,,आहहहह कितनी गर्म है तेरी बुर,,,,,,

(राजू जबरदस्त प्रहार कर रहा था उसका हर एक धक्का मधु के नीचे पड़े संतरे को दबा दे रहा था जिससे संतरे दबकर उसका रस बाहर निकल जा रहा था लेकिन इसकी परवाह राजू को बिल्कुल भी नहीं थी,,,, संतरे के ढेर पर लेटी हुई मधु को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही थी लेकिन उसका हर एक धक्का हर बार दो-तीन संतरो का रस बाहर निकाल रहा था मधु की बुर से रस निकलने से पहले संतरे का रस निकल जा रहा था,,,,, संतरे के ढेर पर चुदवाने का मजा ही कुछ और था इस बात का एहसास मधु को अच्छी तरह से हो रहा था नीचे चटाई बिस्तर या गद्दे से ज्यादा मजा संतरे पर आ रहा था राजू पागलों की तरह अपनी मां को चोद रहा था कभी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधे पर रख लेता तो कभी जांघों को पकड़कर उसे चौड़ा कर दे रहा था तो कभी छातियों पर के दोनों गुब्बारों को जोर से पकड़ कर दबा दे रहा था जिस तरह की मेहनत राजू अपनी मां के ऊपर कर रहा था उसी तरह का साथ मधु कि अपने बेटे को दे रहे थे क्योंकि जिस तरह से राजू बेरहमी से अपनी मां की चुदाई कर रहा था अगर मधु की जगह दूसरी कोई औरत होती तो उसे अपना लंड बाहर निकालने के लिए बोल देती लेकिन मधु की हिम्मत थी कि वह अपने बेटे का साथ बराबर दे रही थी और इस पल का बराबर मजा ले रही थी,,,,।

बुर की अंदरूनी दीवारों पर राजू का लंड हर बार रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा था जिससे मधु की बुर से लगातार काम रस बाहर निकल रहा था,,,,,,, राजू की मेहनत लग रही थी मधु के चेहरे का रंग लाल गुलाबी होता जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबती चली जा रही थी और देखते-देखते आधे घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद मधु के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज बड़ी तेज हो गई वह चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुकी थी और यही हाल राजू का भी था राजू जोर जोर से धक्के लगा रहा था क्योंकि किसी भी वक्त उसका लंड पानी पी सकता था और यही हाल था इसलिए उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में भर कर उसे अपने सीने से लगा लिया और अपनी कमर को मशीन की तरह के पीछे करने लगा इतनी तेज आगे पीछे हो रही थी कि उसकी ठाप से जांघ से चांघ टकराने की आवाज बड़ी ही मादकता बिखेर रही थी,,,,, आखिरकार दोनों की मेहनत रंग लाई और दोनों एक साथ झड़ना शुरू हो गए दोनों पसीने से तरबतर हो चुके दोनों एकदम मदहोश हो चुके थे राजू अपने लंड को अपनी मां की बुर में तब तक धंसाय रहा जब तक की उसका लावा पूरी तरह से उसकी मां की बुर में खाली ना हो गया,,,,, इसके बाद गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की बुर में से अपना लंड बाहर निकाल कर उसके बगल में ढेर हो गया दोनों कुछ देर तक बिना कुछ बोले गोदाम के ऊपरी हिस्से को देख रहे थे दोनों की सांसें दुरुस्त हुई तो दोनों एक दूसरे को देखने लगे राजू अपनी मां को चोद कर मस्त हो चुका था,,,,,।

मधु धीरे से उठ कर बैठ गई,,,, और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

सच में राजू तू बहुत मजा देता है,,,



तुम भी मुझे बहुत मजा देती हो,,,,(राजू भी धीरे से उठते हुए बोला,,,,,, यह सुनकर मधु मुस्कुराने लगी और अपने पीछे नजर घुमा कर देखी तो बहुत सारे संतरे दब चुके थे जिसमें से उसका रोशनी कर गया था उसे देखकर मधु मुस्कुराने लगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर राजू बोला,,,)

तुम्हारी बुर की तरह इनका भी पानी निकल गया है,,,

निकालने वाला तू भी है मेरा भी और संतरे का भी,,,,,(धीरे से उठते हुए) चल मैं भी देखूं तो कैसे काम होता है,,,,

(ऐसा कहते हुए मधु उठकर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठाकर अपने बदन से लपेटने को हुई ही थी कि राजू उसके हाथ से साड़ी खींच कर फेंक दिया और बोला)

बिना कपड़ों के एकदम नंगी होकर,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराने लगी और बोली)

कोई आ गया तो,,,,

कोई नहीं आएगा तभी तो कह रहा हूं,,,,,(और इतना कहते हुए राजू लकड़ी की आम की पेटी के पास गया जो कि खाली थी,,, और बड़े-बड़े आम को लेकर तराजू पर रखने लगा और अपनी मां से बोला,,,)

लाओ तराजू पर आम को रखो जब 10 किलो हो जाए तो उसे 10 किलो आम को उस आपकी खाली पेटी में रखना है हर एक पेटी में 10 किलो आम होता है,,,

(इतना सुनते ही मधु नीचे झुककर बड़े-बड़े आम को उठाकर तराजू पर रखने लगी आज मधु के साथ-साथ राजू को भी एक हजरत अनुभव हो रहा था नंगे होकर काम करने का और अभी एक औरत के साथ और वह औरत खुद की सगी मां होने के नाते राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसकी मां जब जब नीचे झुककर आम उठा रही थी,,,, के बड़े-बड़े तरबूज और भी ज्यादा बाहर निकल कर राजू के आनंद को बढ़ा दे रहे थे राजू को बहुत मजा आ रहा था अपनी मां को इस अवस्था में काम करते थे खबर देखते ही देखते उसकी मां लगभग 5 पेटी को आम से भर चुकी थी और कुछ दशहरी आम को जो की बहुत ही अच्छे अच्छे थे उन्हें अलग निकालनी थी घर ले जाने के लिए लेकिन काम करते-करते उसे बड़े जोरों की पेशाब लग गई थी तो वह इधर उधर देख रही थी यह देखकर राजू बोला,,,,।

क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो,,,?

मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,

Raju godaam me apni ma k sath



तो इसमें क्या हुआ चलो मैं बताता हूं कहां करना है,,,,,

(इतना कहने के साथ ही नग्न अवस्था में ही वह अपनी मां को गोदाम के पीछे वाली जगह पर ले गया वहां का दरवाजा थोड़ा छोटा था उसे खोलकर व गोदाम से बाहर आ गया चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ घनी झाड़ियां थी किसी के देखे जाने का डर यहां बिल्कुल भी नहीं था और सामने ही नदी बह रही थी यह देख कर मधु एकदम से उत्साहित हो गई और बोली)

हाय भैया यहां तो नदी भी है कितना खूबसूरत नजारा है,,,

सो तो है और इस खूबसूरत नजारे को और भी ज्यादा खूबसूरत तुम ने बना दी हो एकदम नंगी होकर,,,,, मुझे तो गर्मी लग रही है मैं नहाने जा रहा हूं तुम पेशाब कर लो,,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू नंगा ही नदी की तरफ आगे बढ़ने लगा और मधु अपने बेटे को जाते हुए देख रही थी उसकी गांड को देख रही थी और अपने बेटे के गांड को देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि चाहे जैसी भी औरतों की गांड ही सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती है और इतना सोचते हुए वह वहीं पर बैठ गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकल रही पेशाब की धार के साथ-साथ सीटी की आवाज राजू के कानों में पड़ी तो है पीछे मुड़ कर देखने लगा और अपनी मां को के साथ करता हुआ देखकर वह मुस्कुराने लगा,,,, और राजू को मुस्कुराता हुआ देखकर मधु शर्मा गई,,,, ऐसा नहीं था कि मधु पहली बार अपने बेटे के सामने पेशाब कर रही थी वह कई बार अपने बेटे के साथ पेशाब करके चुकी है और उसके सामने भी कर चुकी है इसलिए उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन नजर से नजर मिलने से वो शर्मा गई थी देखते ही देखते राजू नदी में उतर गया था अपने बेटे को नदी में उसके ठंडे पानी में नहाता देखकर मधु से भी रहा नहीं गया क्योंकि वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी और संतरे का रस उसके बदन पर लग चुका था इसलिए थोड़ा असहज महसूस कर रही थी इसलिए वह भी सुनसान जगह का फायदा उठाते हुए धीरे से नदी में उतर गई और अगले ही पर मां बेटे दोनों नदी के पानी में नहाना शुरू कर दिए दोनों एक दूसरे के बदन से खेल भी रहे थे राजू बार-बार अपनी मां को अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में लेकर उसके बदन को दबा दे रहा था उसे चूम ले रहा था उसकी चूची को मुंह में लेकर पी रहा था दोनों बड़े उत्साहित होकर अलग-अलग तरीके से नदी में नहाने का मजा ले रहे थे देखते ही देखते दिन गुजरने वाला था दोनों नदी में से बाहर निकले और राजू तुरंत अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया,,,,





अरे यह क्या कर रहा है,,,,?

कुछ नहीं तुम्हें गोद में उठाना मुझे बहुत अच्छा लगता है,,,,

(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को गोद में उठाए हुए यही गोदाम के एक छोटे से दरवाजे से अंदर प्रवेश किया और अपनी मां को गोद में लिए हुए ही वह दरवाजे को बंद कर दिया,,,, मधु अपने बेटे की गोद में ही थी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

चल बहुत समय हो गया शाम होने वाली है अब हमें घर चलना चाहिए,,,,

Raju apni ma k sath nadi me



मैं भी यही सोच रहा था लेकिन तुम्हें नहाता हुआ देखकर तुम्हारी गांड देखकर मेरा मन बहक गया है,,,

तो,,,,(इतना कहकर मधु मुस्कुराने लगी तो राजू उसे तुरंत अपनी गोद में से नीचे उतारा और उसे आम की पेटी के सामने खड़ा कर दिया,,,, मधु भी उसी तरह से खड़ी हो गई उसे लगा कि राजू पीछे से आज उसकी लेने वाला है इसलिए उसके बदन में भी हलचल मच रही थी,,,, राजू ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हो गया और उसकी दोनों टांगों को फैला कर घुटनों के बल बैठ गया और उंगली से उसकी बुर को कुरेदेते हुए अगले ही पल अपने होठों को अपनी मां की गांड के छोटे से छेद से लगा दिया और उसे जी से चाटना शुरू कर दिया अपनी गांड के छेद पर अपने बेटे की जीभ को महसूस करते हैं उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ गई पल भर में मधु को इस बात का एहसास होगा कि उसका बेटा गलत इरादे से उसकी गांड को चाट रहा है,,,, वह समझ गई कि उसका बेटा क्या करने वाला है वह बहुत बार अपने पति से गांड मरवा चुकी थी और यह सुख वह अपने बेटे को भी दे चुकी थी लेकिन उसके पति के लेने में उसके बेटे के लंड में जमीन आसमान का फर्क था उसके पति का लंड उसकी गांड के छेद में बड़े आराम से अंदर बाहर हो जाता था लेकिन उसके बेटे का लंड बड़ी मशक्कत करने के बाद गांड के अंदर घुसता था और बवाल मचा देता था इसीलिए उसे होने वाले दर्द का अहसास होने लगा और उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी लेकिन वह बेटे को इनकार नहीं कर सकती थी बहुत दिन हो भी चुके तो उसे गांड मरवा इसलिए आज वह इस गोदाम में गांड मराई का सुख भोग लेना चाहती थी इसीलिए अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी दोनों टांगों को कुछ ज्यादा ही खोल दी,,,

Raju apni m k sath maja kartA huA



राजू पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छोटे से छेद को जीभ से चाट रहा था उसकी जीभ का गांड के छोटे से छेद पर इधर-उधर घूमना मधु के बदन में अंगारे भर रहा था वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी गांड मरवाने के लिए,,,, कुछ देर तक अपने थूक और अपने जीभ से अपनी मां की गांड के छोटे से छेद को पूरी तरह से चिकनाहट से भरते हुए वहां धीरे से खड़ा हुआ और अपनी मां की गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाने लगा था कि उसके गांड का छेद ग्राम आराम से दिखाई दे और अगले ही पल राजू अपने लंड को आगे बढ़ाते हुए अपने से बड़े को गांड के छोटे से छेद पर लगाकर अपनी मां से बोला,,,।

राजू अपनी मां को उठाकर ले जाता हुआ



अब तैयार हो जा मेरी जान अब तुझे बहुत मजा आने वाला है,,,,

संभाल कर राजा बहुत दुखता है,,,,

चिंता मत कर आज बड़े आराम से करूंगा,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने लंड को पकड़ तो उसके सुपाडे को अपनी मां की गांड के छोटे से छेद के अंदर डालना शुरू कर दिया,,, थुक से सनी हुई गांड का वो छोटा सा छेद चिकनाहट लिए हुए था इसलिए धीरे-धीरे करके राजू के लंड का सुपारा मधु की गांड के छेद में उतरता चला गया और देखते ही देखते राजू पसीने से तरबतर होकर अपने फ्रेंड को अपनी मां की गांड में डालने में कामयाब हो गया और जैसे ही पूरा का पूरा लंड मधु की गांड की गहराई में उतर गया वैसे ही राजू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपनी मां की कमर पकड़ लिया और बोला,,,,)

अब आएगा असली मजा,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह अपनी मां की गांड मार रहा था मधु को भी बहुत मजा आ रहा था अपने पति के लंड को अपनी गांड की गहराई में महसूस नहीं कर पाती थी लेकिन अपने बेटे के लैंड को अपनी गांड की गहराई के साथ साथ वह उसकी मजबूती को भी अपनी गांड में महसूस कर पाती थी उसे ऐसा लगता था कि कहीं उसके बेटे के लंड के कारण उसकी गांड फट ना जाए,,,, देखते देखते मधु की गांड कैसे छोटा सा छेद राजू के लंड की गोलाई का छल्ला बन जाए और बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा मधु और राजू दोनों पूरी तरह से नंगे थे राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची पकड़कर उसे दबाते हुए अपनी कमर हिला रहा था उसे अपनी मां की गांड मारने में बहुत मजा आ रहा था ऐसा नहीं था कि अपनी मां की बुर में उसे मजा नहीं आता था अपनी मां की बुर में तो उसे अत्यधिक मजा आता था लेकिन कभी-कभी गांड मारने का शुख भी वह भोग लेता था,,,,,।



पूरे गोदाम में मधु की गरमा गरम सिसकारी की आवाज गूंज रही थी शाम ढल चुकी थी लेकिन अभी अंधेरा नहीं हुआ था मधु को गोदाम में आए काफी समय हो चुका था और इस दौरान राजू ने अपनी मां को जबरदस्त मदहोशी और आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव कराया था मधु पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे के साथ गोदाम पर आना एकदम सफल हो चुका था मधु पागलों की तरह अपने बेटे से अपनी गांड मरवा रही थी और राजू अपने मोटे लंड से अपनी मां की गांड मार रहा था,,,,, देखते ही देखते दोनों चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन मधु की चीखें बहुत दूर-दूर तक पहुंच रही थी,,,,, और देखते ही देखते दोनों एक से ज्यादा झड़ना शुरू हो गए लेकिन जैसे ही दोनों के अंगों से गर्म पानी का फव्वारा फुटा वैसे ही गोदाम का दरवाजा खुल गया जिसे बंद करते समय राज्य में कड़ी नहीं लगाया था और जैसे ही गोदाम का दरवाजा खुला मधु और राजू दोनों की नजरें गोदाम के दरवाजे पर पहुंची और देखेगी वहां पर एक आदमी खड़ा था उसे पहचानते राजू को बिल्कुल भी देर नहीं लगी वह कोई और नहीं बल्कि विक्रम सिंह था और विक्रम सिंह गोदाम के अंदर के नजारे को देखकर पूरी तरह से पागल हो गया उसकी आंखों के सामने एक जवान लड़का एक खूबसूरत औरत की चुदाई कर रहा था हालांकि विक्रम सिंह को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि वह जवान लड़का कौन है और औरत कौन है और उसे यह भी नहीं मालूम था कि इस समय वह जवान लड़का उस औरत की गांड मार रहा था ना की बुर,,,, विक्रम सिंह कहने से ही औरतों के मामले में ढीला था वह पतलून का बिल्कुल ही ढीला था एक खूबसूरत औरत को एकदम नंगी अवस्था में चुदवाते हुए देखकर उसका ईमान डोल गया उसके बदन में हरकत होने लगी उसका लंड एकदम खड़ा हो गया और वो एकदम से गोदाम के अंदर प्रवेश करते हुए जोर से चिल्लाया,,,,

यह सब क्या हो रहा है,,,,।

(गोदाम का दरवाजा खुलते ही और उस अनजान इंसान को देखते ही मधु की हालत एकदम से खराब हो गई थी वो एकदम से चौक गई थी,,,, क्योंकि मधु उस अनजान आदमी के सामने पूरी तरह से नंगी थी और अपने ही बेटे से चुदवाया ही थी उस अनजान इंसान ने सब कुछ देख लिया था जिस राज पर आज तक पर्दा डाला हुआ था आज वह राज खुल चुका था मधु एकदम से घबरा गई थी राजू दरवाजे पर विक्रम सिंह को देखते ही अपने लंड को बाहर निकाल दिया था लेकिन लंड में से पानी की पिचकारी अभी भी निकल रही थी मधु बिल्कुल भी देर किए बिना तुरंत आगे बढ़ी और अपने कपड़े लेकर उससे अपने नंगे बदन को ढकने की कोशिश करने लगी,,, लेकिन राजू चरम सुख की प्रक्रिया से गुजर रहा था इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें विक्रम सिंह की आंखों के सामने ही उसके लंड से पाने की पिचकारी निकल रही थी,,,,, जोकि विक्रम सिंह एकदम साफ तौर पर देख रहा था,,,, विक्रम सिंह चिल्लाकर थोड़ा आगे बढ़ा तब तक राजू के लंड से पानी की पिचकारी निकल चुकी थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह किस हालात में और तुरंत अपने कपड़े को उठाना और उसे पहनते हुए बोला,,,)

तुम कौन हो यहां क्या कर रहे हो,,,,,(राजु यह बिल्कुल भी जताना नहीं चाहता था कि उसे मालूम है कि यह इंसान कौन है इसलिए अंजान बनता हुआ वह बोला,,,)

पहले तू बता तू जहां क्या कर रहा है मजदूरी करने आते हो और यहां पर यह काम करते हो एक औरत को मजदूरी पर लाकर उसको चोद रहे हो,,,,

(विक्रम सिंह की बात को सुनकर राजू को थोड़ी तसल्ली हुई कि विक्रम सिंह यह नहीं जानता था कि दोनों मां बेटे हैं इसलिए वह निश्चिंत और निडर होकर बोला)

तुम्हें ईससे कोई मतलब,,,,,

Madhu ekdam mast hoti huyi



मेरा नाम विक्रम सिंह है और यह सब बहुत जल्द मेरा होने वाला है,,,,, हरामजादे मेरे होने वाले गोदाम में औरत को लाकर उसे चोदता है,,,(मधु की तरफ देखते हुए विक्रम सिंह डोला राजू समझ गया था कि विक्रम की नजर उसकी मां के ऊपर है उसकी खूबसूरती पर है क्योंकि जिस हालात में है वह उसकी मां को देखा था राजू को समझते देर नहीं लगी थी कि विक्रम सिंह का ईमान डोल गया था)

तुम कोई भी हो मैं तुम्हें नहीं जानता लेकिन हम लोग क्या कर रहे हैं तुम्हें से कोई वास्ता नहीं होना चाहिए,,,,

मामूली सा मजदूर मुझसे जबान लडाता है,,,हैई औरत तू इधर आ और हां कपड़े नीचे फेंक दे नंगी ही आ,,,,।

(अपनी मां के लिए विक्रम सिंह के मुंह से इस तरह की बात सुनकर राजू का खून खोलने लगा था राजू बावरा हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से क्रोधित हो गया था और विक्रम सिंह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)

तू चाहे जो भी हो लेकिन है मस्त करारी तुझे देखकर ही मेरा लैंड खड़ा हो गया तेरी गोरी गोरी गांड एकदम गोल-गोल देखकर तो मेरे लंड की हालत खराब होने लगी है इतनी मामूली औरत होने के बावजूद भी तुझ में खूबसूरती कुट कूट कर भरी हुई है,,,,(राजू गुस्से में विक्रम सिंह की तरफ देख रहा था और मधु विक्रम सिंह की बातों से शर्म से पानी-पानी हो जा रही थी वह विक्रम सिंह से घबरा भी रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका वजन अभी भी पूरी तरह से नंगा था वह सिर्फ अपने कपड़ों से अपने नंगे पन को ढकी हुई थी जिसे विक्रम सिंह हटाने के लिए बोल रहा था अगर वह ऐसा कर देती तो वह विक्रम सिंह की आंखों के सामने एक बार फिर से नंगी हो जाती और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि वह आज तक अनजान मर्द के सामने कभी नंगी नहीं हुई थी)

विक्रम सिंह तुझे एक औरत के बारे में इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए,,,,

Raju apni ma ko Puri tarah se mast karta hua



हरामजादे तेरी हिम्मत मेरा नाम लेता है तेरी औकात क्या है वह तो इस औरत की वजह से मेरा मुंह बंद है वरना तेरा सर धड़ से अलग कर दिया होता इस औरत की खूबसूरती ने मुझे पागल कर दिया है अच्छा ही हुआ कि मैं आज इधर आ गया और तुझे इस औरत को चोदते हुए देख लिया वरना इतना खूबसूरत चीज में कभी नहीं देख पाता इसे तो मेरे महल में होना चाहिए मेरी रानी बनकर रोज मेरा बिस्तर गर्म करना चाहिए देख नहीं रहा इसकी चुची दशहरी आम से भी बड़ी बड़ी है,,,,। साली एकदम छिनार लगती है,,,,

(राजू अपने मन में कुछ सोच रहा था वरना एक अनजान आदमी को अपनी मां के लिए इतनी गंदी गंदी बात करते हुए देख कर वह अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाता लेकिन वह आगे का कुछ सोच रहा था विक्रम सिंह वही था जिसके बारे में लाला ने बताया था और जिसके आने पर लाल आपकी खुद की हालत खराब हो गई थी इसलिए राजू समझता था कि विक्रम सिंह कोई मामूली इंसान बिल्कुल भी नहीं है इसीलिए उसे इस तरह से टक्कर लेना ठीक नहीं था और इसी इंसान से छुटकारा भी पढ़ा था इसलिए अपने मन में कुछ सोच रहा था और इसीलिए वह अभी तक अपनी मां के लिए उसके मुंह से इस तरह की गंदी गंदी बातें सुन रहा था लेकिन अब धीरे-धीरे विक्रम सिंह राजू की मां की तरफ आगे बढ़ रहा था उसके नंगे बदन को देख कर उसकी आंखों में वासना के दौरे साफ नजर आ रहे थे वह किसी भी कीमत पर राजू की मां को चोदना चाहता था क्योंकि उसकी बड़ी-बड़ी दशहरी आम जैसी चूची देख कर उसका मन ललित गया था उसकी गोरी गोरी गोर गोर गाल देखकर उसकी हालत खराब हो गई थी,,,, अगर शायद राजू की मां को वहां कपड़ों में देखता है तो शायद इस तरह से उसकी हालत इतनी खराब ना होती लेकिन वहां उसे चुदवाते हुए एकदम नंगी देख चुका था इसलिए वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था और राजू के सामने ही उसकी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था इस बात से अनजान की राजू और भारत के बीच किस तरह का संबंध है दोनों मां बेटे हैं और इस बात राजू को भी राहत है कि विक्रम सिंह नहीं जानता था कि वह दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता है वह विक्रम सिंह के लिए अनजान था उसकी मां अनजान थे वह दोनों गोदाम में काम करने वाले मजदूर ही थे विक्रम सिंह की नजर में इसलिए राजू कुछ सोच रहा था कुछ आगे का सोच रहा था इसीलिए खामोश था,,,। और विक्रम सिंह आगे बढ़ रहा था उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी उसे लगने लगा था कि आज वह इस खूबसूरत औरत की चुदाई करके ही रहेगा अपनी बदन की गर्मी को शांत करके ही रहेगा इसलिए वह आगे बढ़ रहा था क्योंकि वह पूरी तरह से निश्चिंत कावा जानता था कि यह मजदूर लोग उसका कुछ नहीं कर पाएंगे और उसकी बात मान लेंगे लेकिन वह नहीं जानता था कि उसका पाला किस से पड़ा है,,,)

हरामजादी कितनी खूबसूरत है रे तू गांव की होने के बावजूद महलों की रानी लगती है तेरा अंग एकदम खरा सोना है तेरे अंग अंग से मधुर रस बह रहा है तेरी चूची से तेरी बुर ,,,,से आज तेरी बुर में अपना लंड डालकर अपनी गर्मी शांत करूंगा,,,

(विक्रम सिंह के मुंह से अपनी मां के लिए इतनी गंदी गंदी बातें सुनकर राजु को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके कानों में कोई कर्म लोहा पिघलाकर डाल रहा हो वह गुस्से से अपनी मुट्ठी को भींच लिया था,,,, देखते ही देखते विक्रम सिंह मधु के एकदम करीब पहुंच गया था मधु शर्म से पानी पानी में जा रही थी कि अनजान मर्दों को अपनी करीब वह पहली बार महसूस कर रही थी और एकदम नंगी अवस्था में उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और से इस बात का अचंभा हो रहा था कि उसका बेटा कुछ कर‌ क्यों नहीं पा रहा है,,,,)



हाय मेरी रानी तू कितनी खूबसूरत है तुझे यह लड़का कितना देता होगा ₹2 ₹3 या यह दशहरी आम की पेटी मेरे साथ रहेगी तो रानी बनाकर रखूंगा अपनी हवेली में तुझे जगा दूंगा बस एक बार अपनी जवानी का रस मुझे पिला दे,,,,(पर ऐसा कहते हुए विक्रम सिंह अपना हाथ आगे बढ़ाकर मधु ने जिस कपड़े से अपने नंगे बदन को ढकी हुई थी उस कपड़े को अपने हाथ से पकड़ कर उसे एक झटके से खींच लिया और राजू की मां को नंगी कर दिया मधु एक बार फिर से उस अनजान आदमी के सामने एकदम से नंगी हो गई हो एकदम से घबरा रही रोने लगी और उसके मुंह से जोर से चीख निकली,,,)

राजु,,,,,ऊऊऊऊऊऊऊऊ,,,,,

(राजू का खून खोल गया राजू की आंखों के सामने विक्रम सिंह उसकी मां के कपड़े को खींचकर उसे नंगी कर दिया था विक्रम सिंह की आंखों के सामने एक बार फिर से मधु के नंगी होते ही और उसकी चीख सुनकर राजु से बिल्कुल भी नहीं रहा गया और वह अपनी मुट्ठी को भींचते हुए चिल्लाया और जोर से विक्रम सिंह की तरफ दौड़ लगा दिया,,,)

विक्रम सिंह हरामजादे,,,,,,(और फिर दौड़ते हुए विक्रम सिंह कुछ समझ पाता उसे अपने कंधे पर उठा लिया और उसे वहीं जमीन पर उठाकर पटक दिया पहले ही बार में विक्रम सिंह एकदम चारों खाने चित हो गया था राजू की पकड़ और उसकी पटाखे इतनी जबरदस्त थी कि विक्रम सिंह को तारे नजर आने लगे राजू पूरी तरह से क्रोधित अवस्था में था क्योंकि आज विक्रम सिंह ने उसकी मां की इज्जत पर हाथ डाला था राजू तुरंत उसके सीने पर सवार हो गया और उसके मुंह पर अपनी मुट्ठी से वार करने लगा राजू उसे पागलों की तरह मार रहा था उसके मुंह से खून निकलने लगा वह उसका पैर पकड़कर इधर से उधर घसीट दे रहा था विक्रम सिंह को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि राजू जैसे छोकरी में इतनी हिम्मत हो कि वह पूरी तरह से चारों खाने चित हो गया था,,,,,,,,, राजू का गुस्सा देखकर मधु एकदम से घबरा गई थी वह नंगी ही राजू को रोकने की कोशिश करने लगी,,,)

जाने दे जाने दे छोड़ ईसे मर जाएगा यह,,, खामखा बात का बतंगड़ बन जाएगा,,,

नहीं मैं इसे बिल्कुल भी नहीं छोडूंगा जिसे जान से मार डालूंगा इसलिए तुम्हारी इज्जत पर हाथ डाला है,,,

(मैं तो समझ गई कि राजू रोकने वाला नहीं है और जिस तरह से वहां उसकी पिटाई कर रहा है वह उसे मार डालेगा इसलिए वह जोर से चिल्लाते हुए बोली,,,)

राजू तुझे मेरी कसम छोड़ दीजिए,,,,

(कसम सुनते ही राज एकदम से रुक गया वह अपनी मां की कसम तोड़ना नहीं चाहता था इसलिए अपने गुस्से पर एकदम काबू करते हुए वह विक्रम सिंह के गिरेबान को छोड़ दिया और अपनी जगह पर खड़ा होकर गहरी गहरी सांस लेने का वह अपनी मां की तरफ देखा उसे छुड़ाने के चक्कर में मधु एक बार फिर से पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, राजू विक्रम सिंह की तरफ देखा हुआ है एकदम से बेहोश हो गया था,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि विक्रम सिंह को इस हालात में गोदाम पर छोड़ देना अच्छी बात नहीं है इसलिए वह अपनी मां से बोला)

तुम अपने कपड़े पहनो मैं इसे ठिकाने लगा कर आता हूं,,,

ईसे मारना नहीं नहीं तो यह मर जाएगा,,,

तुम चिंता मत करो मैं थोड़ी ही देर में इसे दूर कहीं छोड़ कर आता हूं वरना लाला के सर पर मुसीबत आ जाएगी,,,।

(और इतना कहने के साथ ही राजू विक्रम सिंह को घसीटा हुआ गोदाम से बाहर ले गया और घोड़े पर किसी तरह से चढ़ा कर उसे घोड़े पर सवार होकर उसे दूर घनी झाड़ियों में जाकर छोड़ दिया और वापस आकर अपनी मां को वापस घोड़े पर बैठा कर घर की तरफ ले जाने लगा लेकिन इससे पहले वह गोदाम को बंद करके और अपनी मां के द्वारा पसंद किए गए आम की पेटी को एक बड़े से थैले में भरकर उसे घोड़े के एक साइट पर लटका दिया,,, और फिर घर की तरफ निकल गया,,,)
 
राजू अपनी मां को सही सलामत घर पर लेकर आ गया था उसकी मां कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके साथ इस तरह का हादसा होगा वह एकदम से घबरा गई थी लेकिन रास्ते भर राजू ने उसे समझा-बुझाकर उसे शांत रहने के लिए कहा था गोदाम पर जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में तो वैसे भी मधु किसी को बताने वाली नहीं थी क्योंकि जिस हालत में वह गोदाम में उस आदमी के द्वारा पकड़ी गई थी वह बेहद शर्म शार कर देने वाला था,,,, मधु नहीं जानती थी कि गोदाम में जिस आदमी ने उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ा था वह कोई और नहीं बल्कि जमीदार विक्रम सिंह था,,,, वैसे भी उसे कुछ सोचने समझने का समय नहीं मिला था वह तो एकदम से घबरा गई थी,,,,



एक संस्कारी और मर्यादा सील औरतों के लिए उसकी इज्जत ही सब कुछ होती है और वैसे भी मधु के लिए उसकी इज्जत जान से बढ़कर थी भले ही वह घर में ही अपने ही बेटे के साथ मर्यादा की दीवार लांग चुकी थी लेकिन फिर भी वह पराए मर्दों के लिए तो अभी भी संस्कारी और मर्यादा से भरी हुई एक सुशील औरत थी इसलिए किसी गैर मर्द के सामने उसके बदन का एक झलक भी दिख जाना उसके लिए शर्मसार कर देने वाला था और उस आदमी ने तो उसे संपूर्ण रूप से एकदम नंगी देख लिया था उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था और उस समय के हालात भी कुछ और थी उस समय राजू का लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई नाप रहा था,,, सही शब्दों में कहा जाए तो उस आदमी ने उसे चुदवाते हुए देख लिया था और वह भी उसके ही सगे बेटे के साथ वह तो गनीमत था कि उसे यह नहीं मालूम था कि उसके और राजू के बीच किस प्रकार का संबंध है वरना गजब हो जाता,,,,





मधु घर पर पहुंचने के बाद यही सब सोच रही थी अभी भी उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी वह यह सोच कर और घबराई हुई थी कि अगर उसका बेटा बलशाली ना होता हिम्मतवाला ना होता तो वह आदमी जरूर उसकी इज्जत लूट लिया होता क्योंकि वह एकदम ललचाए आंखों से उसके नंगे बदन को देख रहा था बार-बार मधु को वह पल याद आ जा रहा था जब वह आदमी उसके हाथों से उसकी साड़ी खींच कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था और उसे पूरी तरह से फिर से नंगी कर दिया था उस हालत के बारे में सोच कर उसके बदन में डर फेल जा रहा था,,,,, वह सोच कर और शर्म से गाड़ी जा रही थी कि आज तक उसने अपने बदन का एक भी हिस्सा किसी गैर मर्द को दिखाई नहीं थी और ना ही किसी ने अनजाने में ही देखा था लेकिन उस आदमी ने उसे नग्न अवस्था के साथ साथ संभोग रत देख लिया था,,,,,,, घर पर आराम से बैठी होने के बावजूद भी उस हादसे के बारे में सोच कर उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी वह घबरा जाती थी,,,,,, लेकिन उसे अपने बेटे पर गर्व था जिस बहादुरी से राजू ने उस बलशाली विक्रम सिंह से मुठभेड़ किया था और उसे मार गिराया था उसे देखते हुए वह पूरी तरह से राजू जैसे बेटे को पाकर गदगद हुए जा रही थी,,,। अगर वह अपनी कसम देकर उसे रोकी ना होती तो शायद राजू उसकी जान ले लेता लेकिन ऐसा कुछ भी मधु नहीं चाहती थी इसलिए अपने बेटे को कसम देकर उसे रोक ली थी,,,,,,,,





गोदाम से घर तक मधु अपनी नजरों को शर्म से नीचे करके ही पहुंची थी वह शर्म के मारे अपनी नजरों को उठा नहीं पा रही थी,,,, गोदाम पर अपने बेटे के साथ आने में उसे पछतावा भी हो रहा था लेकिन गोदाम पर आने पर जिस तरह के आनंद की अनुभूति वह अपने अंदर महसूस की थी उसे लेकर वह पूरी तरह से संतुष्ट भी थी बस आखरी में ही विक्रम सिंह ने गोदाम में आकर सारा मजा किरकिरा कर दिया था वैसे तो उसी समय ही मधु अपने बेटे की जबरदस्ती चुदाई से झड़ चुकी थी और उसका बेटा भी अपना पानी निकालते हुए विक्रम सिंह को देखकर अपने लंड को अपनी मां की गांड में से बाहर निकाल दिया था लेकिन निकालते निकालते भी उसके लंड से पिचकारी फूट रही थी जिसे देखकर विक्रम सिंह पूरी तरह से वासना से लिप्त हो चुका था एक तो उसकी आंखों के सामने दुनिया का सबसे खूबसूरत मंजर जो था,,, एक खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत को एकदम नंगी देखकर किसी भी मर्द का ईमान डोल जाए इसमें कोई शक नहीं था और यही विक्रम सिंह के साथ भी हुआ था वैसे तो विक्रम सिंह सिर्फ गोदाम का जायजा लेने आया था वह समय-समय पर लाला के व्यापार पर ध्यान देता था कि कितना व्यापार फल फूल रहा है लड़की नाच शायद राजू की किस्मत खराब थी जो अपनी मां को लेकर गोदाम पर आया था वह अपनी मां के नंगे बदन का दर्शन विक्रम सिंह जैसे हरामि को करा दिया था,,,,





जैसे तैसे करके राजू ने अपनी मां को मना लिया था और वह इस हादसे को पूरी तरह से भूलने की कोशिश कर रही थी और इसी कोशिश में दो-तीन दिन गुजर चुके थे दो-तीन दिनों के भीतर राजू ने अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध बनाना उचित नहीं समझा था वह अपनी मां को पूरी तरह से उस हादसे से ऊभर जाने देना चाहता था जो कि धीरे-धीरे हो भी रहा था,,,,

विक्रम सिंह की जमकर पिटाई करने के बाद राजू को भी अपने मन में थोड़ा सा भी महसूस हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि विक्रम सिंह उसे भले ही मजदूर समझता है लेकिन अपने आदमियों के साथ वह गोदाम पर जरूर आएगा और फिर उसकी हालत खराब कर देगा,,,, इसी के चलते राजू ने लाला से एक और बंदूक मांग कर उसे अपने साथ ही लिया रहता था और राजू की हर एक बात मानते हैं लाला उसे बंदूक भी दे दिया था क्योंकि राजू की काबिलियत लाला पूरी तरह से परिचित था दूसरी तरफ विक्रम सिंह दूसरे दिन होश में आने के बाद लड़खड़ाते हुए जैसे तैसे करके अपनी हवेली पहुंचा था वहां पर विक्रम सिंह की हालत देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गई थी लेकिन विक्रम सिंह ने बड़ी चालाकी से असली बात छुपाते हुए जंगली सूअर का हमला हुआ है उसका कहकर बात को टाल दिया था आखिरकार वह अपने घरवालों को बताता भी तो क्या बताता रंजीत सिंह की जैसी हालत उसकी भी हो चुकी थी रंजीत सिंह ने जैसे असली बात को छुपा ले गया था उसी तरह से विक्रम सिंह भी अपने साथ हुए असलियत को छुपा ले गया था और उसे जंगली सुअर के हमले का कारण बताकर बात को टाल दिया था अगर वह हकीकत बता देता तो गजब हो जाता जमींदार की इज्जत पानी में मिल जाती,,,, क्योंकि आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई थी हवेली की तरह पर हवेली में रहने वालों की तरफ कोई भी आंख उठाकर देखा और यहां तो विक्रम सिंह की जमकर पिटाई हो गई थी इसलिए बड़ा हंगामा खड़ा हो जाता है इसलिए विक्रम सिंह किसी को असलियत नहीं बताया था लेकिन राजू की सक्ल उसे याद रह गई थी,,,,,,



जमकर मार खाने के बावजूद भी विक्रम सिंह की आंखों के सामने मधु का खूबसूरत नंगा बदन नाचने लगता था जिंदगी में पहली बार उसने इतनी सुगठित खूबसूरत औरत को बिल्कुल नंगी देखा था हालांकि वह कई औरतों को भी चुका था लेकिन मधु की बात ही कुछ और थी मधु को देखते ही उसके लंड में जो सुरसुराहट महसूस हुई थी उस पल को याद करके अभी भी उसके बदन में हलचल मच जाती थी,,,, क्योंकि विक्रम सिंह ने आज तक कितनी खूबसूरत बदन वाली औरत को नहीं देखा था उसका खूबसूरत बदन एकदम घटिया चुचियों का साइज एकदम खरबूजे की तरह गोल गोल जरा भी लटकन नहीं था और नितंबों की गोलाई तो एकदम जानलेवा थी,,,,, विक्रम सिंह का मधु एक सपना परी की तरह लगती थी जिसे याद करके जब चाहे तब उसका लंड खड़ा हो जाता था अपने मन में यह सोच रहा था कि अगर वह लड़का बीच में ना आता तो उसी दिन उसकी जवानी का स्वाद चख लिया होता लेकिन इस बात का भी एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था कि उस औरत के चक्कर में ही एक जमीदार होने के बावजूद भी गांव के लड़के से वह मार खा गया था और जब जब उसे यह बात याद आती थी उसका खून खोलने लगता था लेकिन करें भी तो क्या करें उस लड़के को मतलब कि राजू को वहां ठीक तरह से जानता भी नहीं था कौन है कहां रहता है इस बारे में उसे बिल्कुल भी अंदाजा भी नहीं था और तो और मधु के बारे में भी कुछ नहीं जानता था अगर वह इतना जान जाता है कि मधु कहां रहती है तो शायद मधु को वह कब से अपने आदमियों से उठा लेता है और उसकी जवानी से जी भर कर खेलता,,,, खैर राजू के होते विक्रम सिंह के मन की बिल्कुल भी नहीं चली थी इसीलिए तो वह आग बबूला हो गया था,,,



जैसे तैसे करके चार-पांच दिन गुजर गए स्थिति एकदम सामान्य हो गई मधु भी गोदाम वाले हादसे को भूल चुकी थी,,,,,,, राजू अब अपनी मां से अपनी और झुमरी की शादी की बात करना चाहता था लेकिन कैसे करें उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,, वह अपनी मां को किसी भी तरह से झुमरी से शादी करने के लिए मना लेना चाहता था वैसे तो उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां उसकी पसंद था बिल्कुल भी इनकार नहीं करेगी लेकिन फिर भी वह,,, शादी की बात करने के लिए कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहता था इसलिए अपनी मां को अपने पक्ष में लेने के लिए वह उसके लिए सोने के दो झुमके बनवाया था,,,,,,, झुमके बहुत खूबसूरत बने हुए थे दो दो मोती झुमके की शोभा बढ़ा रहे थे,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां झुमके देखकर एकदम खुश हो जाएगी और झुमरी से शादी करने के लिए तैयार हो जाएगी और साथ में खुशी की मारा चोदने भी देगी,,,, इसलिए अपने पहचाने की जेब में झुमके को रखकर खुश होता हुआ राजू अपनी मां से शादी की बात करने के लिए अपने घर की तरफ निकल चुका था ,,,,अंधेरा हो चुका था,,,, गांव में सभी घर के चूल्हे जल चुके थे अक्सर इस समय गांव के लोग गांव की औरतें खाना ही बनाती थी इसलिए उसे भी पक्का यकीन था कि उसकी मां भी खाना बना रही होगी वह आज अपनी मां को झुमके दिखा कर अपनी शादी की बात और पूडी और खीर बनवाना चाहता था,,,।





राजू बहुत खुश था अंधेरा धीरे-धीरे गहरा चुका था और वह अपने घर पर पहुंचा तो घर में प्रवेश करता है इससे पहले ही घर के पीछे से गाय की आवाज आने लगी जोकि जोर जोर से चिल्ला रही थी राजू एक बाल्टी में पानी लेकर घर के पीछे की तरफ जाने लगा राजू अच्छी तरह से जानता था कि गाए जा इस तरह से आवाज करती थी तो जरूर उसे चारा पानी चाहिए होता था इसलिए घर में जाने से पहले वह घर के पीछे की तरफ चल दिया एक हाथ में बाल्टी लेकर और दूसरे हाथ में हरी हरी घास का बोझा लेकर वह जैसे ही घर के पीछे पहुंचा तो उसे अजीब सी आवाज आने लगी वह कान लगाकर उस आवाज को सुनने लगा कि वह आवाज आप कौन से दिशा से रही है,,,,, धीरे-धीरे वह करीब जाने लगा और वह आवाज एकदम स्पष्ट हो गई राजू उस आवाज को अच्छी तरह से पहचानता था उस आवाज को अच्छी तरह से जानता था कि ऐसी आवाज कम निकलती है राजू के कानों में गरमा गरम सिसकारी की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर उसका लंड खड़ा होने लगा था,,,,, हालांकि गरमा गरम संस्कारी की आवाज से वह निश्चित नहीं कर पाया कि वह गर्मागर्म सिसकारी की आवाज कौन निकाल रहा है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद उसकी मां होगी और उसके पिताजी होंगे जो कि घर के पीछे मौका पाकर उत्तेजित हो गए होंगे और चुदाई का खेल खेल रहे होंगे,,,, और यही सोच कर राजू वहां से जाना चाहता था और जाने के लिए अपने कदम को पीछे भी ले लिया था कि उसके कानों ने कभी आवाज सुनाई दी जिसे सुनकर वह एकदम से चौक गया,,,,।



ओहहहह गुलाबी मेरी बहन की बुर एकदम कसी हुई है तेरी बुर में डालने में बहुत मजा आता है,,,,

(इतना सुनते ही राजू के कान के साथ-साथ उसका लंड की खड़ा हो गया इस आवाज को राजू अच्छी तरह से जानता था क्योंकि यह आवाज उसके पिताजी की थी और उनकी बातों में उसकी बुआ का जिक्र था राजू को समझते थे नहीं लगी कि उसके पिताजी अपनी ही सगी बहन को चोद रही है पल भर के लिए उसका मौत है एकदम से थाना गया तभी उसके कानों में फिर से आवाज आई,,,)

आहहहह भैया जल्दी करो कहीं भाभी आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे जोर जोर से धक्के लगाओ,,,,।

(यह आवाज गुलाबी की थी राजू के बुआ की राजू इस आवाज को सुनकर पूरी तरह से चौक गया था वह समझ गया था कि एक भाई अपनी बहन को चोद रहा है जैसा कि वह खुद अपनी बुआ और अपनी मां के साथ साथ अपनी बहन की चुदाई कर चुका है,,,,,,,, पहले तो वह अपने पिताजी की हरकत पर पूरी तरह से गुस्से से आगबबूला हो गया,,,, लेकिन तभी अपनी मां और अपनी बुआ के साथ-साथ अपनी बड़ी बहन का ख्याल आते ही उसका गुस्सा हवा में फुर्ररर हो गया क्योंकि अपने मन में कौन सोचने लगा कि अगर उसके पिताजी गलत कर रहे हैं तो वह कौन सा सही कर रहा है,,,, अपनी बुआ अपनी मां अपनी पहली बहन घर में तीनों की को चुदाई करता रहा है और तो और अपनी बड़ी बहन को अपनी चुदाई अपनी मर्दानगी के चलते गर्भवती भी कर दिया है,,,,, इस तरह का ख्याल आते ही राजू एकदम से सोचने लगा और अपना दिमाग दौड़ाने लगा वजह सोचने लगा की झोपड़ी के अंदर उसके पिताजी और उसकी बुआ दोनों चुदाई का मजा लूट रहे हैं अगर इसी समय बाद झोपड़ी में चला जाता है तो उसके पिताजी एकदम से घबरा जाएंगे और उसकी बुआ भी,,, उसके पिताजी डर जाएंगे घबरा जाएंगे तो फिर वाह अपने मन की बात अपने पिताजी को बताकर अपनी मनमानी कर सकता है यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,,



अब उसे अपने पिताजी के साथ नाटक करना था जैसा कि वह अपनी बुआ के कहने पर अपनी मां के साथ नाटक कर रहा था,,,, और उसकी मां भी सब कुछ जानते हुए उस नाटक में सहभागी होकर अपनी ननद को पूरी तरह से अपने पक्ष में ले रही थी अब वही खेल इधर राजू को खेलना था इसलिए वो धीरे से हरी हरी घास का ढेर और बाल्टी को जमीन पर रखा है और दबे पाव झोपड़ी में एकदम से प्रवेश कर गया जहां पर उसके पिताजी लालटेन की रोशनी में अपनी छोटी बहन की चुदाई कर रहे थे जैसे ही झोपड़ी के अंदर राजू ने प्रवेश किया तो देखा कि उसकी बुआ सलवार खोल कर झोपड़ी के बीच का बंबू पकड़ कर झुकी हुई है और पीछे से उसके पिताजी उसे चोद रहे हैं अंदर प्रवेश करते ही राजू एकदम से चौंक ने का नाटक करते हुए बोला,,,,)

यह क्या हो रहा है,,,?

(राजू को झोपड़ी के अंदर और उसकी बात सुनकर हरिया और गुलाबी दोनों एकदम से चौक गए हरिया का चौक ना तो बेहद लाजमी था लेकिन गुलाबी भी चौक गई थी जो कि राजू के हर कारनामे में उसकी सहभागी थी लेकिन राजू इस बात से अनजान था कि उसकी बुआ अपने ही बड़े भाई के साथ चुदवाती है इसलिए वह भी एकदम से घबरा गई थी हरिया का तो गला ही सूख गया था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी वह एकदम से राजू की तरफ देखने लग गया था उसकी कमर एकदम से स्थिर हो चुकी थी उसका लंड अभी भी गुलाबी की बुर में घुसा हुआ था,,,, हरीया और गुलाबी दोनों कुछ भी बोल नहीं पाए बस आश्चर्य से एक दूसरे की तरफ देख रहे थे तो राजू फिर से जोर से बोला,,,)



मैं पूछता हूं यह क्या हो रहा है,,,,।

(इतना सुनते ही जैसे हरिया को होश आया होगा तुरंत अपने लंड को अपनी बहन की बुर में से बाहर निकाल कर बगल में पड़ी धोती उठा लिया और उसे अपनी कमर पर लपेट लिया मौका देखकर गुलाबी भी शर्म से नजर को नीचे झुका कर खुद नीचे झुकी और अपनी सलवार उठाकर उसे कमर तक लाकर उसकी डोरी को बांधना शुरू कर दी,,,,)

मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है कि तुम दोनों इस तरह की नीच हरकत कर सकोगे,,,, बुआ तुम तभी शादी की बात से नाराज हो गई थी तुम्हें शादी करके इस घर से इसलिए नहीं जाना था क्योंकि घर में ही तुम्हारी जरूरत पूरी हो रही है,,,,



नहीं राजू ऐसी बात नहीं,,,

तुम चुप रहो बुआ,,,(बीच में ही गुलाबी को चुप कराते हुए राजू जोर से बोला,,,) मुझे तुमसे भी इस तरह की उम्मीद नहीं थी तुम्हारी कितनी भी इज्जत करता था और तुम पिताजी तुम्हें तो मैं देवता की तरह पूछ रहा था लेकिन तुम इतने गिरे निकल गए कि अपनी ही बहन को चोद रहे हो,,,

बबब,,,,बेटा,,,,

मत कहो मुझे बेटा तुम्हारे मुंह से यह शब्द अच्छे नहीं लगते,,,, तुम्हें पता है कि ताजी अगर यह बात मां को पता चले कि तुमने कितना दुख होगा वह तो जीते जी मर जाएगी वह तो तुम्हें भगवान मानती हैं तुम्हारे सिवा और किसी को देखना गवारा नहीं समझती और तुम हो कि अपनी बहन के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा रहे हो,,,, अरे बदन में इतनी गर्मी थी तो मां कहां दूर थी वह तो तुम्हारी हर जरूरत पूरी करती है तो फिर तुम्हें ऐसा करने की क्यों सुझी,,,,,

(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर हरिया एकदम से रोने लगा राजू पहली बार अपने पिताजी को रोते हुए देख रहा था इसलिए उसके मन में अपने पिताजी के लिए दया उमर रहा था वैसे भी जिस तरह के रिश्ते वह अपने घर में बनाते आ रहा था उसे देखते हुए अपने पिताजी की यह हरकत कोई बड़ी बात उसे नहीं लगी थी लेकिन फिर भी पल भर के लिए वह क्रोधित हो गया था लेकिन अपने पिताजी की हरकत पर उसे एक युक्ति भी सुझ गई थी इसीलिए वह नाटक कर रहा था,,,,)

Hariya apni bahan gulabi k sath



मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा है क्या यह सच में जो कुछ भी नहीं देख रहा हूं हकीकत है यह सब कुछ गलत है सपना है,,,,, नहीं यह सपना नहीं हो सकता यह बहुत भयानक है अगर मां को इस बारे में जरा भी भनक लगेगा तो मैं तो जीते जी मर जाएगी वह कैसे बर्दाश्त कर पाएगी कि जिसे वह भगवान की तरह मानती है जिसकी पूजा करती है वह इंसान अपनी ही बहन को चोद रहा है,,,,,

(राजू अपनी बातों के जाल में अपने पिताजी को पूरी तरह से फंस रहा था और अपनी बुआ की तरफ देख कर आंख मार कर इशारा भी कर दिया था कि जो कुछ भी वह कर रहा है वह सब कुछ एक नाटक है,,,,)

नहीं नहीं राजू ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,, भैया के बारे में अगर भाभी को पता चल गया तो पूरा घर बिखर कर रह जाएगा,,,, जो कुछ भी हुआ भले ही इसमें भैया की मर्जी थी लेकिन मेरी गलती है राजू मुझे ही भैया की बात नहीं मानना चाहिए था,,,

मैं सब कुछ समझता हूं बुआ लेकिन मां को कौन समझाएगा,,,

Hariya apni bahan k sath kuch is tarah se



लेकिन उन्हें पता ही कैसे चलेगा,,,(गुलाबी राजू की आंखों में देखकर आंख मारते हुए बोली)

मैं बताऊंगा मां को पिताजी की इतनी बड़ी गलती को मैं छुपा नहीं सकता मुझे बताना होगा,,,,(राजू की बात सुनते हरिया जोर जोर से रोने लगा उसे रोता हुआ देखकर गुलाबी राजू को आंख मारते हुए बोली,,,)

नहीं-नहीं राजू ऐसा मत करना नहीं तो गजब हो जाएगा भैया का घर भी कर कर रह जाएगा और भाभी मायके चली जाएगी,,,,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने दूंगी,,,,,

तुम कर क्या लोगी बुआ मैं तो मां को बता कर ही रहूंगा पिताजी ने मां के साथ खिलवाड़ जो किया है उसकी भरपाई तो पिताजी को देनी होगी,,,,

भरपाई,,,,,,(कुछ देर सोच कर) भरपाई अगर मैं कर दूं तो,,,,

(इतना सुनते ही राजू जानबूझकर चौक ने का नाटक करते हुए आश्चर्य से अपनी बुआ की तरफ देखने लगा और हरिया भी गुलाबी की तरफ देखने लगा क्योंकि कुछ-कुछ हरिया अपनी बहन के कहने का मतलब को समझ रहा था)

Raju is tarah se apni ma ka petticoat utarte huye



भरपाई,,, तो पिताजी को करनी होगी तुम कैसे करोगी तुम्हारी तो आज नहीं तो कल शादी हो जाएगी अपने घर चली जाओगी सब कुछ बात आई गई हो जाएगी लेकिन मां के लिए तो यह कलंक बनकर रह जाएगा,,,

तुम समझ नहीं रहे हो राजू मैं किस भरपाई की बात कर रही हूं तुम जवान हो खूबसूरत हो और मुझे पूरा यकीन है कि औरतों को देख कर,,,(अपने भाई की तरफ देखते हुए) तुम्हारा भी खड़ा होता होगा,,,

कककक,,,, कहना क्या चाहती हो तुम बुआ,,,,

मैं यही कहना चाहती हूं राजू,,,,(मादक चाल चलते हुए राजू के बेहद करीब आए और उसके गले में अपनी बाहों का हार डालते हुए बोली,,,) तुम भी मेरे साथ वही कर लो जो भैया कर रहे थे,,,,

(अपनी बुआ की बात सुनते ही राजू उत्तेजना से गहरी सांस लेते हुए अपने पिताजी की तरफ देखा जो कि उन दोनों को ही देख रहे थे और बोला,,,)

नहीं नहीं यह कैसे हो सकता है तुम मेरी बुआ हो,,,

Raju rat me kamre me apni ma k sath



पर मैं भी तो भैया की छोटी बहन हूं,,,,

(गुलाबी की बातें सुनकर हरिया को भी उम्मीद की किरण नजर आने लगी और वह भी उत्साह दिखाते हुए बोला)

राजू हो सकता है तुम्हारी तो हुआ है लेकिन मेरी तो बहन है फिर भी मेरे साथ ऐसा हो गया,,,,

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकता,,,(अपनी बुआ के बाहों के हार को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने गले में से निकालकर अलग करते हुए बोला,,,)

Raju or madhu



मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं राजू,,,,, मुझ पर रहम करो अपनी मां को इस बारे में बिल्कुल भी मत बताना गुलाबी के साथ तुम भी वैसा ही करो जैसा मैं कर रहा था मुझे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा,,,,।

(अपने पिताजी की बात सुनकर उनकी हालत को देखकर राजू अंदर ही अंदर खुश हो रहा था उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसके पिताजी अब उसकी बात मानने के लिए तैयार हो गए हैं तो वह अपने असली मकसद पर आते हुए बोला,,)

मैं बुआ को नहीं चोद सकता,,,(अपने पिताजी के सामने एकदम खुले शब्दों में बात करते हुए)

क्यों नहीं कर सकते राजू,,,,(हरिया बोला और उसके सुर में सुर मिलाते हुए गुलाबी बोली)

हां राजू तुम मुझे क्यों नहीं चोद सकता अगर भैया चोद सकते हैं तो,,,,

समझने की कोशिश करो बुआ मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है तुम्हारी बुर में जाएगा तो तुम्हारी बुर फट जाएगी और एक दो महीने में तुम्हारी शादी हो जाएगी अगर तुम अपने पति के घर जाओगी,,, अगर पहली रात में ही तुम्हारे पति को शक हो गया तो तुम्हारी जिंदगी भी खराब हो जाएगी,,,,(राजू जानबूझकर अपने पिताजी के सामने एकदम खुले शब्दों में बोल गया था और इस बात को सुनकर गुलाबी भी जानबूझकर चौक ने का नाटक करते हुए बोली)



हां यह बात तो है,,,,, लेकिन तू झूठ बोल रहा है राजू ईतना मोटा और लंबा किसी का नहीं होता,,,,

मेरा है बुआ यकीन करो,,,, पिताजी का तो तुम बड़े आराम से ले लेती हो लेकिन मेरा ले नहीं पाओगी,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर हरिया राजू की तरफ आश्चर्य से देखने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू जो कुछ भी कह रहा है उसमें जरा भी सच्चाई है,,,)

चल झूठा हम लोगों को इस हालत में देख लिया इसलिए बातें बना रहा है अब तुझे इतना अच्छा मौका दे रही हूं अपना मुंह बंद रखने का मेरे साथ जो कुछ भी करना है कर ले तो बहाना मार रहा है,,,,

नहीं बुआ मैं सच कह रहा हूं,,,

अब रहने दे राजू मेरी हालत पर तरस खाओ मेरा बसा बसाया घर उजड़ जाएगा तू अपनी बुआ के साथ कुछ भी कर ले मेरी बहन होने के नाते भी मैं कुछ नहीं कहूंगा,,,



तुम दोनों की यकीन नहीं आ रहा है,,,, तो देखो,,,(इस तरह की बातें करते हुए पहले से ही राजू का लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था इसलिए वह तुरंत अपने पजामे को नीचे कर लिया और अपने लंड को बाहर निकाल दिया,,,, उसका नंबर तुरंत हवा में लहराने लगा जिस पर नजर पड़ते ही हरिया की हालत खराब हो गई वाकई में उसके बेटे का लंड उससे दोगुना था,,,, गुलाबी और राजू हरिया की तरफ देख रहे थे हरिया की आंखें फटी की फटी रह गई थी इस मौके को अपने हाथ से ना जाते हुए कि सोचकर गुलाबी तुरंत बोली,,,)

बाप रे इतना मोटा और लंबा यह तो सच में मेरी बुर में जाएगा तो मेरी बुर फट जाएगी,,,,

हां राजू तो सच कह रहा है,,,,(हरिया भी आश्चर्य से देखते हुए बोला और फिर राजू तुरंत पैजामा को ऊपर कर लिया और अपने लंड को पजामे के अंदर छुपा लिया)



तो अब क्या करें भैया राजू जो कुछ भी कह रहा है उसमें सच्चाई है मेरी बुलाकर फट गई तो सुहागरात को मुसीबत खड़ी हो जाएगी और अगर ऐसा हो गया तो मेरा घर बसने से पहले ही उजड जाएगा,,,, तो राजू तु क्या करेगा,,,

मैं तो मां से बता दूंगा और अभी जाकर बता देता हूं,,,

नहीं नहीं राजू ऐसा बिल्कुल भी मत कर मैं तेरे हाथ जोड़ता हूं,,,,,,

राजू एक बेटा होने के नाते तुझे अपनी पिताजी की बात को सुनना चाहिए,,,,

नहीं मैं किसी की बात नहीं सुन लूंगा मैं जा रहा हूं,,,,



अगर भाभी की मिल जाए तो,,,,,

(गुलाबी असली पाशा फेंकते हुए बोली,,,, यह सुनकर हरिया एकदम आश्चर्य से गुलाबी की तरफ देखने लगा उसे थोड़ा गुस्सा भी आया लेकिन अगले ही पल गुलाबी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भैया समझने की कोशिश करो भाभी दो बच्चों को पैदा कर चुकी उनकी बुर ज्यादा लचीली होगी जो कि राजू के मोटे तगड़े लंड को बड़े आराम से ले लेगी,,,, इतना सुनते ही राजू के मन की हो रही थी इसलिए वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए बोला,,)

हां जी ठीक है मां की बुर में मेरा मोटा तगड़ा लंड़‌ बड़े आराम से चला जाएगा,,,,

अरे बदतमीज वह तेरी मां है और अपनी मां के बारे में ही ऐसी बातें कर रहा है,,,(हरिया थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,)

तो क्या हुआ बुआ भी तो तुम्हारी बहन है अभी तो उसकी शादी भी नहीं हुई है फिर भी आप उसके साथ गलत कर रहे हैं,,,,



राजू की बात मानने के सिवा तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है यह जाकर भाभी को बता दिया तो सब काम कर बढ़ हो जाएगा मेरा क्या है मेरा तो कल विवाह हो जाएगा मैं अपने घर चली जाऊंगी लेकिन तुम दोनों को साथ में जिंदगी गुजारना है अगर भाभी से बिगाड़ हो गया तो जिंदगी भर वह तुम्हें हाथ भी नहीं लगाने देती और फिर तुम्हें अपने हाथ से हिला कर ही काम चलाना पड़ेगा,,,,,

लेकिन गुलाबी ये अपनी मां के बारे में,,,,

इस समय भैया तुम सब कुछ भूल जाओगी कौन मा‌ है कौन बैठा है कौन बहन है मेरे साथ भी तो तुम भूल जाते हो ना कि मैं तुम्हारी बहन हूं मुझ में सिर्फ तुम्हें एक औरत नजर आती है उसी तरह से राजू को भी भाभी के साथ कुछ करने दो ताकि तुम्हारा राज राज रह सके और सोचो अगर राजू और भाभी के बीच शारीरिक संबंध हो गया तो तुम्हें भी खुला दौर मिल जाएगा तुम्हें मेरे साथ जब चाहे तब कुछ भी कर सकते हो,,,,।

(गुलाबी की बात सुनकर हरिया सोच में पड़ गया उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था अगर वह इंकार करता है तो राशि तुरंत जाकर यह बात मधु को बता देना और फिर सारा मामला बिगड़ जाएगा और ऐसा हरिया बिल्कुल भी नहीं चाहता था और जिस तरह से गुलाबी उसे बता रही थी कि अगर राजू और उसकी मां का सारी संबंध स्थापित हो गया तो वहां भी कभी भी गुलाबी के साथ शारीरिक संबंध बना सकता है मजे ले सकता है,,,)

बुआ सही कह रही है पिताजी,,,



राजू क्या तू अपनी मां को चोदेगा,,,!(आश्चर्य जताते में हरिया बोला तो राजू भी जवाब देते हुए बोला)

पहले तो मैं ऐसा सपने भी नहीं सोचता था लेकिन तुमको और बुआ को एक साथ देख कर और बुआ के मुंह से मां के बारे में सुनकर अब मेरा भी मन करने लगा है मां को चोदने का क्योंकि मैं जानता हूं कि मां की बुर में मेरा लंड आराम से चला जाएगा मां की गांड बड़ी-बड़ी है और बुर भी थोड़ा ज्यादा लचीली होगी,,,,

राजू अपनी मां के बारे में ऐसी बातें कर रहा है,,,,(हरिया आश्चर्य जताते हुए बोला)

तो कोई बात नहीं मैं जा रहा हूं मां को बताने,,,,(इतना क्या कर रहा है जो पीछे कदम लिया ही था कि गुलाबी तुरंत आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ ली और उसे रोकते हुए बोली,,,)

क्या कर रहे हो भैया मेरे साथ तो बड़े आराम से कर लेते हो और भाभी की बात आई तो इधर-उधर हो रहे हो इस समय अपने परिवार में कोई रिश्तेदारी की नजर से मत देखो बस यह देखो कि कौन औरत है और कौन मर्द है और औरत और मर्द के बीच किस तरह का रिश्ता होता है या तुम अच्छी तरह से जानते हो तो हो जाने दो भाभी और राजू के बीच इससे तुम्हारा राज भी बना रहे जाएगा वरना राजू अगर अपना मुंह खोल दिया तो सब कुछ बिगड़ जाएगा,,,,





लेकिन मधु क्या मान जाएगी,,,(कुछ देर सोचने के बाद हरिया बोला)

मान जाएगी कि नहीं मानेगी यह राजू को देखना है अगर नहीं मानेगी तो राजू तुझे ना तो हम दोनों का राज भाभी से बताना है और ना ही फिर उनके पीछे पड़ना है समझ गया ना मंजूर है तुझे,,,,

ठीक है बुआ की बात मैं मान जाता हूं मैं एक ही बार प्रयास करूंगा अगर मां नहीं मानी तो मैं फिर ऐसा करने की दोबारा सोचूंगा भी नहीं और ना ही तुम दोनों का राज किसी को बताऊंगा,,,,,

ठीक है,,,,(इस बात से हरिया थोड़ा मुस्कुराते हुए बोला उसे पूरा यकीन था कि उसकी बीवी अपने ही बेटे के साथ चुदवाने के लिए कभी भी तैयार नहीं होगी इसलिए वह थोड़ा निश्चिंत हुआ जा रहा था,,,)

और हां बुआ और पिताजी तुम दोनों भी सुन लो मैं झुमरी को पसंद करता हूं और झुमरी के साथ विवाह करना चाहता हूं,,,, मैं इस बारे में मां से बात करने के लिए आया था लेकिन सही समय पर घर के पीछे आ गया और तुम दोनों को देख लिया अब शायद मेरा भी उद्धार हो जाएगा,,,

झुमरी के साथ विवाह ओ जो अपने गांव के नुक्कड़ पर रहती है वही ना,,,, अब यह क्या नया झमेला है,,,,(हरिया आश्चर्य जताते हुए बोला गुलाबी भी राजू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी तो राजू बोला)

पहले तो मुझे बताने में शर्म आ रही थी लेकिन तुम दोनों की हालत देखकर अब मुझ में भी हिम्मत आ गई है हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करने के लिए तैयार हैं उसकी माफी शादी के लिए तैयार है बस अपने घर की हमें चाहिए थी और अब तुम दोनों की हालत देखकर जिस तरह से मेरे पकड़ में आए हो मुझे यकीन है कि आप मेरे विवाह में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी और वैसे भी बुआ के चले जाने के बाद कोई तो चाहिए मां का हाथ बंटाने के लिए,,,,

राजू तू अपने लिए खुद लड़की देख लिया,,,,

तो क्या हुआ बुआ तुम भी तो मजा कर रही हो ना मुझे भी तो कुछ चाहिए,,,,

अब भाभी की तो दिला ही रहे ना फिर भी,,,,

अरे तुम्हें भी तो भैया का मिल रहा है ना तो क्या जिंदगी भर यही रहोगी शादी करके अपने घर तो जाओगी ना,,,

चल ठीक है मैं तैयार हूं लेकिन अभी भी तुझ से हाथ जोड़कर बोलता हूं अपनी मां से कुछ भी मत बताना,,,

तुम चिंता मत करो पिताजी यह राजू की जुबान है,,,, पूरे गांव में मेरी इज्जत है ईसलिए निश्चिंत हो जाओ मैं मां से कुछ भी नहीं बताऊंगा,,,,, लेकिन मां की लेने के बारे में सोच कर ही मेरा लंड खड़ा हुआ जा रहा है,,,

चल ज्यादा मत सोच वह तुझे लात मार कर ही भगा देगी,,,,

हां राजू,,,, भाभी को ऐसी वैसी औरत मत समझना तेरी दाल गलने वाली नहीं है,,,,, और हां फिर उसके बाद अपना वादा याद रखना वैसे भी तू आता जमीदार बन चुका है और जमीदार अपने वादे के पक्के होते हैं समझ लेना हम दोनों का राज राज ही रहना चाहिए,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बुआ अगर में असफल रहा तो मां को कभी नहीं बताऊंगा,,,,।
 
राजू अपनी आंखों से,,,, अपने पिताजी को अपनी छोटी बहन की चुदाई करता देखकर थोड़ा बहुत गुस्सा तो आया था लेकिन उस नजारे को देखकर उसके मन में युक्ति भी सुझ गई थी,,,, और इसी का फायदा उठाते हुए राजू अपने पिता को विश्वास में ले लिया था और अब वह अपने पिताजी की जानकारी में अपनी मां की चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार था लेकिन हरिया को इस बात का विश्वास था कि उसकी बीवी जो की पूरी तरह से चरित्रवान है वह कभी भी अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाएगी और इसी के चलते वह राजू से भी वादा ले चुका था कि अगर उसकी मां उसके साथ सोने के लिए तैयार नहीं हुई तो फिर वह उसके और गुलाबी के राज को अपने सीने में राज बनाकर दफन कर लेगा,,,,, और इस शर्त को राजू भी मान चुका था अपनी ही मां के साथ सोने के लिए गुलाबी भी राजू का साथ दे रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि राजू और उसकी मां के बीच पहले से ही सारे संबंध स्थापित हो चुके हैं इसलिए आगे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी,,,,,

खाना खाने के बाद जब हरिया बीड़ी पीने के लिए घर से बाहर गया था तब मधु बर्तन मांज रही थी और राजू अपनी मां के करीब जाकर बैठ गया और बोला,,,

मां मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं,,,

क्या बात है,,,(बर्तन को पानी में डालकर धोते हुए)

वह बात ऐसी है कीमा मैं गांव की लड़की से बहुत प्यार करता हूं और उससे शादी करना चाहता हूं,,,,

(इतना सुनते ही मधु बर्तन को धोना भूल कर राजू की तरफ आज फिर से देखने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

कौन है वो,,,,?

अपने गांव के नुक्कड़ जिसका घर है ना झुमरी,,,

झुमरी आईईईई,,,, क्या पसंद है रे तेरी,,,,

क्या वह तुझे पसंद करती है,,,,

हां मां वह मुझे पसंद करती है शादी करने के लिए तैयार भी हैं और उसकी मां भी शादी करने के लिए तैयार है बस तुम्हारी हां मिलना जरूरी है,,,,

अगर मैं ना कह दूं तो,,,

नहीं मां मैं तुम्हें जानता हूं तुम इतनी निर्दयी नहीं हो सकती,,,

हां यह बात तो सही है कि मैं इतनी निर्दई नहीं हो सकती लेकिन जब सवाल तेरे पर आकर रुक जाए तो मुझे होना ही पड़ेगा,,,

मैं कुछ समझा नहीं,,,

तू इतनी खूबसूरत लड़की को पसंद किया है उससे शादी कर लेगा तो दिन रात उसे ही चोदता रहेगा मेरे पर तो तु ध्यान ही नहीं देगा,,,, और इसीलिए मुझे यह रिश्ता बिल्कुल भी पसंद नहीं है क्योंकि मैं तेरे से अलग नहीं होना चाहती,,,

Madhu apni peticoat utarkar nangi hoti huyi



कैसी बात कर रही हो मां दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत तुम हो तुम्हारे बात सब है वह तो औपचारिक रूप से मुझे तो विवा तो करना ही होगा क्योंकि सी ऐसी वैसी लड़की की जगह झुमरी मुझे बहुत अच्छी लगती है इसीलिए कह रहा था बाकी तो भले ही झुमरी से शादी हो गई लेकिन शादी वाली रात को सबसे पहले मैं सुहागरात तुम्हारे साथ मनाऊंगा,,,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु मुस्कुराने लगी अपनी मां को मुस्कुराता हुआ देखकर राजू अपनी जगह पर खड़ा हुआ और अपनी पजामे में से कान के झुमके निकालकर हथेली ले लिया और उसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)

यह लो मां तुम्हारे लिए लाया था,,,।

(अपने बेटे की हथेली में कान के झुमके देखते ही वह एकदम से खुश हो गई और तुरंत अपने हाथ को अपनी साड़ी से साफ करके अपने बेटे की हथेली में से कान के झुमके ले लिया और उसे दोनों हाथ की अंगुलियों में हल्के से पकड़कर गोल गोल घुमाने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

क्या यह सच में मेरे लिए हैं,,,,

तो क्या मां मैं तुम्हारे लिए ही लाया था क्योंकि मैं जानता था कि तुम मेरी बात जरुर मानोगी और इसी खुशी में मैं तुम्हारे लिए झुमके बनवा कर लाया था,,,,

बहुत समझदार हो गया मेरा बेटा,,,,, मुझे कोई एतराज नहीं है आखिरकार एक ना एक दिन तो तेरी शादी करनी पड़ेगी,,,, झुमरी जैसी बहू का कर मुझे भी अच्छा लगेगा,,,,

(राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके इस प्रस्ताव को बिल्कुल भी नहीं ठुकराएगी बस थोड़ा से ही डर था कि एक औरत होने के नाते एक औरत की ईर्षया उसके मन में जरूर होगी और उसकी मन की बात मधु के होठों पर भी आ गई थी ,,, लेकिन मधु की अच्छी तरह से जानती थी कि चाहे कुछ भी हो जाए उसका बेटा उसे शादी के बाद भी संतुष्ट करता रहेगा इसलिए वह भी इस रिश्ते से मान गई थी वह साथ में राजू के हाथों कान के झुमके भी पा गई थी जो कि उसके लिए तो एक सपना ही था,,,,,,,,

हरिया बहुत परेशान नजर आ रहा था उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि वह अपने बेटे के द्वारा रंगे हाथ पकड़ा कैसे गया,,,,, उसे इस बात का डर था कि अगर उसके बेटे ने अपनी मां से उसके और गुलाबी के बीच के रिश्ते के बारे में बता दिया तो क्या होगा गजब हो जाएगा और ऐसा बाहर करना चाहता था,,,,, हरिया अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था और उसकी बीवी मधु भी अपने पति हरिया को बहुत प्यार करती थी लेकिन इस प्यार के बीच में वासना आ चुकी है जो कि एक खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी जवानी की गर्मी मिटाने की कोशिश कर रहा था वहीं दूसरी तरफ मधु का भी यही हाल था ऐसा नहीं था कि पहले वह अपने पति से संतुष्ट नहीं थी वह पहले भी अपने पति से पूरी तरह से संतुष्ट थी क्योंकि जिंदगी में वह अपने पति के अलावा किसी दूसरे के मन को अपनी बुर में जाने की इजाजत नहीं दी थी इसीलिए उसकी बुर उसके पति के लंड सांचे में ढल चुकी,,,,,‌

लेकिन अनजाने में और वासना के वशीभूत होकर अपने बेटे के साथ सारी संबंध बना लेने के बाद उसे इस बात का एहसास हुआ था कि उसके पति का लंड उसके बेटे के लंड के आगे कुछ भी नहीं था,,,, पहली बार अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के बाद,,, उसे महसूस हुआ कि वाकई में मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड किसे कहते हैं,,,, राजू की अपनी मां के साथ अपना मर्दाना जोश दिखाते हुए अपने पिता के द्वारा खींची गई लकीर को बिना मिटाएं उससे भी बड़ी लकीर बना दिया था जो कि उसकी मां की बुर में पूरी तरह से खलबली मचा दिया था,,,,्और अब मधु की बुर भी राजू के लंड की आदी हो चुकी थी,,,,,,,

हरिया का डर बिल्कुल जायज था,,, क्योंकि वह बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि उसकी बीवी का संबंध उसके ही बेटे के साथ हो जाए क्योंकि अगर ऐसा हो गया तो समाज में अगर किसी को पता चल गया तो किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएंगे लेकिन जिस हालात में राजू ने हरिया और गुलाबी को पकड़ा था उसे देखते हुए राजू के अपनी मां को इस बात को बता देने की जिद के आगे हरिया हथियार डाल दिया था और राजू को खुली छूट दे दिया था कि वह अपनी मां के साथ कुछ भी कर सकता है हालांकि एक शर्त भी थी कि अगर पहली बार में ही उसकी मां उसके साथ संबंध बनाने के लिए नहीं मानी तो वह सब कुछ भूल जाएगा,,,,। यही सब सोच सोच कर हरिया का दिमाग खराब हो रहा था वह अपने कमरे में गया तो देखा कि मधु गहरी नींद में सो चुकी थी और वह उसके बगल में जाकर ले लिया और फिर ना जाने क्यों अपने आप ही उसके मन में कल्पना आने लगा कि कैसे उसका ही बेटा अपनी मां को चोद रहा है वैसे भी राजू ने अपने पिता को बेशर्म बनकर अपने लंड की झलक दिखाया था और हरिया भी अपने बेटे के लंड को देखकर पूरी तरह से हासिल चकित हो गया था,,,, और उसके मन में इस बात का डर बैठ गया था कि अगर मधु अपने बेटे के लंड को देख लेगी तो एक औरत होने के नाते जरूर उसे खुद को अपनी जवानी पर गलती हुई महसूस होने लगी थी और वह मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठेगी,,,,

यहीं सब ख्याल उसके मन में भी आ रहा था और उसके मन में कल्पना भी अपना संपूर्ण रूप लिए हुए थे कि किस तरह से राजू अपनी ही मां की साड़ी को अपने हाथों से उतारकर उसे नंगी करने मैं जुड़ा हुआ है कैसे वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी बड़ी बड़ी चूची को हाथ में लेकर मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया है फिर कैसे पेटीकोट की दूरी को एक झटके से खोल कर उसकी पेटीकोट को कदमों में गिरा कर उसे पलभर में ही नंगी कर दिया है,,,, यही वह खुद के साथ करते हुए अपने कपड़ों को अपने हाथों से उतारकर पल भर में ही अपनी मां के सामने पूरी तरह से नंगा हो गया और उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर मधु के तन बदन में आग लग गई और वह खुद आगे बढ़कर घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी और अपनी मां की इस हरकत पर राजू पूरी तरह से मस्त हो गया और आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांसे लेने लगा,,,,

इस तरह की कल्पना करते हुए हरिया पूरी तरह से परेशान हो गया था उसकी आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी वह सोने की कोशिश करता लेकिन आंख बंद करते ही उसकी आंखों के सामने सब कुछ नजर आने लगता था कि कैसे राजू अपनी मां को अपनी गोद में लेकर खटिया पर ले गया और खटिया पर उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी बुर पर अपने होठ लगाकर उसके काम रस को चाटने शुरू कर दिया और अपने बेटे की इस हरकत पर मधु पूरी तरह से मस्त होकर गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछालने लगी,,,,, और फिर देखते ही देखते राजू अपनी मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर के मुहाने पर रखकर धीरे-धीरे धक्का लगाते हुए पूरा का पूरा लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया और अपने बेटे की चुदाई से मस्त होकर मधु गहरी गहरी सांस लेने के साथ साथ गरमागरम सिसकारी लेते हुए अपने बेटे से चुदवाने का मजा लूटने लगी,,,,,

यही सब कल्पना करके हरिया की हालत खराब हो चुकी थी एक तरफ उसे बुरा लग रहा था लेकिन अपने बेटे और अपनी बीवी की कल्पना करके उसका लंड तनने लगा था,,,,, और वह करवट लेकर अपने खड़े लंड को अपनी बीवी की गांड में दर्शाते हुए उसे अपनी बाहों में लेकर सोने की कोशिश करने लगा और कब उसे नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला,,,, और दूसरी तरफ राजू अपनी बुआ के कपड़ों को उतारकर से पूरी तरह से नंगी कर दिया था और उसे गाली देते हुए बोला,,,।

तू तो पूरा एकदम छिनार हो गई है अपने भाई को भी नहीं छोड़ी उसका भी लंड अपनी बुर में ले ली,,,,

जैसा कि तू मेरी जवानी देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और मेरे साथ संबंध बना लिया वैसे भैया भी मुझे नंगी देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पाए और मुझे अपनी बाहों में लेकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को तार-तार करते हुए उसे चोद डाला,,,,,

तो क्या पिताजी तेरी रोज लेते हैं,,,,

नहीं नहीं रोज तो नहीं लेते क्योंकि इतनी जल्दी मौका नहीं मिलता कल बेल को बांधने के चक्कर में मुझे थोड़ा सा लेट हो गया और भैया पीछे पहुंच गए अकेलापन एकांत देखकर उनसे रहने की और मुझे चोदना शुरू कर दिया और तुम देख लिया,,,,

तो अच्छा ही हुआ ना कि मैंने देख लिया,,,(खटिया पर गुलाबी की दोनों टांगों को चौड़ा करते हुए,,) वरना तुम दोनों की काम दिला के बारे में मुझे पता कैसे चलता मुझे तो ऐसा ही लग रहा था की तुम मुझे ही सिर्फ देती हो लेकिन भैया को भी दे रही हो मुझे पिताजी से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,,,

राजू तुझे क्या लगता है कि बुर देखकर सिर्फ तेरी ही नियत डोलती है दुनिया में ऐसा कोई भी मर्द नहीं है जो औरत की बुर देखकर फिसलना चाहता हो और फिर वह चाहे बुरा किसी की भी हो उसकी मां की बहन की चाची की भाभी की किसी की भी,,,,

हां बात तो तुम सही कह रही हो बुआ तुम्हारी बुर है इतनी खूबसूरत थी किसी का भी मन बहक जाए,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी बुआ की बुर के गुलाबी छेद पर अपना लंड सटाया और पहले धक्के में ही पूरा का पूरा लंड अपनी बुआ की बुर में डाल दिया,,, और उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, चुदवाने का मजा लेते हुए गुलाबी बोली,,,)

बाकी तूने अपने ही पिताजी के साथ खेल खेल गया भैया को कहां मालूम है की भाभी तुझ से चुदवाती है उन्हें तो ऐसा ही लगता है कि उनकी बीवी एकदम सती सावित्री है इसीलिए तो बोल दी है कि अगर पहली बार में ही अगर वह नहीं मानी तो तो दोबारा कोशिश नहीं करेगा,,,,, सच में राजू मुझे तो भैया पर तरस आ रहा था क्योंकि वह पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरे हुए थे कि उनकी बीवी अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होगी लेकिन उन्हें थोड़ी पता है कि उनकी ही बीवी अपने ही बेटे के सामने टांगें खोलकर पसर जाती है,,,,

Raju raju ki maa or raju ki bua



तभी तो बुआ अब इस खेल में बहुत मजा आएगा अब मैं बेझिझक कभी भी जुदाई कर सकता हूं,,,,,

हारे राजू जो कुछ भी हुआ ठीक हुआ,,,,,,,, अब तो बहुत मजा आने वाला है,,,,,

(इतना कहने के साथ ही गुलाबी राजू के लंड का मजा लेने लगी और राजू जोर-जोर से हुमच हुमच कर अपनी कमर हिला ता हुआ अपनी बुआ को चोदने लगा,,,,,

दूसरे दिन हरिया का मन उदास था उसे इस बात का विश्वास जरूर था कि उसकी बीवी राजू की बात मानेगी नहीं लेकिन इस बात का डर भी था कि राजू के लंड को देखकर कहीं उसका मन डोल ना जाए,,,,, आखिरकार सुबह की दिनचर्या से निपट कर हरिया बेल गाड़ी लेकर जाने लगा तो राजू को इशारा करते हुए बोला,,,,





मां बेटे दोनों खेत में जाकर थोड़ा काम कर लेना,,,,

जी पिताजी,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपने पिताजी की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा और हरिया अपने बेटे को मुस्कुराता हुआ देखकर मन ही मन में उसे गाली देता हुआ वहां से चला गया हरिया के जाने के बाद ही राजू गुलाबी की उपस्थिति में ही अपनी मां से बोला,,,,)

ओहहह मां आज तो मैं बहुत खुश हूं,,,(इतना कहने के साथ ही उसे गोद में उठाकर इधर-उधर घूमने लगा तो मधु बोली)

अरे कुछ बोलेगा भी या ऐसे ही गोद में उठाए इधर-उधर भागता रहेगा,,,,

अरे मां क्या कहूं बात ही कुछ ऐसी है,,,,

लेकिन बता तो सही हुआ क्या,,,,,?

(इतना सुनते ही राजू अपनी मां को अपनी खुद से उतार कर जमीन पर उसके पैर रखते हुए बोला,,,)



कल मैंने रात को बुआ और,,,(गुलाबी की तरफ देखते हुए) पिताजी को रंगे हाथों पकड़ लिया,,,,,

इसमें कौन सी बड़ी बात है भाभी को सब पता है,,,(गुलाबी बीच में ही बोल पड़ी)

क्या तुम्हारी और पिताजी के बीच में जो कुछ भी चल रहा है मां को सब कुछ पता है,,,,

हां मुझे सब पता है लेकिन यह बात मैंने तेरे पिताजी को इसलिए नहीं बताया कि कभी तेरे पिताजी को हम दोनों के बीच के रिश्ते के बारे में पता चले तो हमें उनके और गुलाबी के रिश्ते के बारे में बता कर उनका मुंह बंद करवा सकूं और अब तू भी यह राज जान चुका है,,,,(अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर राजू एकदम हैरान था इस बात से कि उसकी मां को सब कुछ पता होने के बावजूद भी उसने आज तक इस बात की भनक उसे खुद को लगने नहीं दी थी,,,)

लेकिन भाभी राजू ने जो कारनामा कर दिखाया उसे सुनोगी तो तुम भी खुश हो जाओगी,,,

ऐसा कौन सा कारनामा कर दिया है राजू ने,,,,

अरे भाभी भैया को मेरे साथ जब राजू ने देख लिया तो जानबूझकर तुम्हें बताने का नाटक करने लगा और इसी बात पर भैया एकदम से घबरा गए और सच कहूं तो रोने लगे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि मेरे और भैया के बीच में जो कुछ भी चल रहा है तुम्हें इस बात का जरा भी भनक लगे,,,,, और अपना मुंह बंद करवाने के लिए पता है राजू ने क्या कहा,,,

क्या कहा,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए मधु बोली)

अपना मुंह बंद करने के एवज में राजू ने अपने ही पिताजी से अपनी मां को चोदने की शर्त रख दिया है तभी वह अपना मुंह बंद करेगा वरना तुम्हें बता देगा,,,।

(इतना सुनते ही मधु हैरान होकर अपने मुंह पर हाथ रख ली और आश्चर्य से राजु की तरफ देखते हुए बोली)

हाय दैया तुझे शर्म नहीं आई अपने ही बाप से इस तरह की बात करते हुए,,,,

अरे मां तुम्हें तो खुश होना चाहिए हम लोगों का रास्ता एकदम साफ हो गया अब जब चाहे तब चुदाई का खेल खेल सकते हैं,,,

क्या तेरी सर्त तेरे पिताजी ने मान गए,,,,

हां मा मान तो गए हैं लेकिन एक शर्त पर,,,

इसमें भी एक शर्त है,,,,

हां यही कि अगर पहली बार में तुम मुझसे चुदवाने के लिए तैयार नहीं हुई तो सब कुछ मुझे भूल जाना होगा,,,, पिताजी को तुम पर बहुत भरोसा है कि तुम अपने ही बेटे से चुदवाओगी नहीं,,,,,

हां यह बात तो सही है लेकिन जब तक तेरा लंड नहीं देखी थी तब तक अब तो तेरे लंड के बिना मुझे रहा नहीं जाता,,, सच में राजू तूने तो कमाल कर दिया अपने ही पिताजी को बेवकूफ बना दिया,,,,

तो क्या मैं इसी बात पर हो जाए,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां को अपनी तरफ खींच कर अपनी बाहों में ले लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा और देखते ही देखते तीनों उत्तेजित होते हुए एक दूसरे के बदन से कपड़े उतारने लगे हो और पल भर में ही घर के अंदर तीनों एकदम नंगे हो गए राजू का लंड मधु अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और गुलाबी अपनी बुर को राजू के मुंह पर रखकर उसे जोर जोर से रगड़ रही थी और कुछ ही देर में राजू अपने मोटे तगड़े लंड से,,, दोनों औरतों की गुलाबी चूत की गर्मी बाहर निकाल दिया,,,,,

रात को जब हरिया घर पर पहुंचा तो वह बहुत उत्सुकता जानने के लिए कि आखिरकार हुआ क्या,,,?
 
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