Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 20 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

राजू ने आज वो कर दिखाया था जिसके बारे में कभी किसी ने कल्पना भी नहीं किया था और ना ही कभी राजू ने सोचा था कि वह इतनी बहादुरी दिखा पाएगा और वह भी डाकुओं की टोली के सामने,,,,,, आखिरकार वह कहावत यहां पर सही बैठ रही थी मरता क्या न करता अगर राजू इस तरह के कदम ना उठाया होता तो आज निश्चित था कि उसके घर के सोना चांदी रुपया पैसा तो नहीं लुटता लेकिन घर की इज्जत जरूर लूटी जाती और वह भी डाकुओं के हाथ से,,,,, जवानी से भरी हुई उसकी मां जो की पूरी तरह से गदराई हुस्न की मालकिन थी उस पर नजर पड़ते ही डाकुओं की नियत डोर जाती और वह उसे लिए बिना वहां से बिल्कुल भी नहीं हीलते,,, और गुलाबी जिसकी जवानी अभी गुलाब की तरह खेलना शुरू हुई थी उससे तो वह बिल्कुल भी किसी भी हालत में छोड़ने को तैयार नहीं होते और घर की दोनों हुस्न की रानी को डाकू अपने साथ उठाकर ले जाते राजू इस बारे में सोच कर ही एकदम घबरा गया था कि अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा उसकी मां और उसकी बुआ के साथ डाकू लोग कैसा सलूक करेंगे मन में ही वह कल्पना कर चुका था और कल्पना ही इतना भयानक था कि हकीकत के बारे में सोच कर ही उसकी रूह कांपने लगती थी,,,,,।





कल्पना में वह देख चुका था कि अगर उसकी मां को और उसकी बुआ को डाकुओं की टोली उठाकर ले गई तो अपने अड्डे पर ले जाकर के डाकू रोज उन दोनों की जवानी से खेलेंगे उन दोनों की भरपूर चुदाई करेंगे और ऐसा राजू बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसीलिए तो हाथ में बंदूक उठा लिया था उसे आज तक चला गया नहीं था लेकिन फिर भी बहादुरी दिखाते हुए दो गोली से दो डाकू को ढेर कर चुका था और वह भी उसमें से एक उनका सरदार था जिस को गोली लगते ही वह लोग वहां से भाग खड़े हुए और वह डाकू जो कि उसके घर का ही दरवाजा तोड़कर घर पर प्रवेश कर चुका था गोली की आवाज और यह आभास होते हैं क्योंकि सरदार को गोली लग गई है वह तुरंत बाहर निकल आया था और अपने दोनों साथी को लेकर क्यों वहां से चंपत हो गए थे,,,,

रात में डाकुओं पर गोली किसने चलाया इस बारे में गांव का कोई भी शख्स नहीं जानता था यहां तक कि वह बूढ़ा आदमी जिसकी लड़की को वह डाकू उठा ले जाने की तैयारी में थे वह दोनों वहीं पर खड़े थे लेकिन उन दोनों को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था कि डाकुओं पर गोली किसने चलाया था,,,, रात के सन्नाटे में गोली की आवाज पूरे गांव में गूंज रही थी और गोली की आवाज सुनकर गांव के सभी लोग एकदम सन्न मार गए थे,,,,, सभी को ऐसा ही लग रहा था की गोली डाकू लोग नहीं चलाया है लेकिन जब उन्हें इस बात का पता चला कि उनके दो साथी मारे गए हैं तब उन्हें आश्चर्य हुआ कि आखिरकार गोली किसने चलाया लेकिन फिर पूरे गांव वालों का यही मानना था कि बंदूक सिर्फ लाला के पास है और ऐसा करनामा सिर्फ लाला ही कर सकते हैं,,,, इसलिए गांव वालों के दिल में लाला के लिए इज्जत और ज्यादा बढ़ गई थी,,,,, सुबह सवेरे गांव के बड़े बुजुर्ग लाला की हवेली पर पहुंच गए थे और लाला को इस बात की खबर दिए थे कि डाकू की टोली में से 2 लोगों की जान जा चुकी है और यह कारनामा खुद लाला ने हीं कर दिखाया है,,,,, गांव वालों की बात सुनकर लाला फूला नहीं समा रहा था क्योंकि जहां पर एक तरफ डाकू से लड़ने की उसकी वीरता की कहानी लोग एक दूसरे को सुना कर प्रसन्न हो रहे थे वहीं दूसरी तरफ लाला अच्छी तरह से जानता था कि अगर यह कारनामा गांव में कोई कर सकता है तो वह सिर्फ राजू है क्योंकि बंदूक राजू के ही पास थी जिसे उसने ही किया था और इसी बात से लाला बहुत खुश नजर आ रहा था,,,, जल्द ही लाला ने अपना आदमी भेज कर राजू को हवेली पर आने के लिए आमंत्रण दे दिया था,,,।



वहीं दूसरी तरफ हरिया को छोड़कर मधु और गुलाबी भी इस बात को बिल्कुल भी नहीं जानते थे कि डाकुओं को मारने वाला राजू ही है,,,, डाकुओं के जाने के बाद जैसे ही राजू अपनी मां को दरवाजा खोलकर बाहर आने के लिए बोला था वह लोग अंदर ही अंदर एकदम खुश हो गए थे लेकिन जैसे ही बाहर आने पर हरियाने मधु और गुलाबी को यह बात बताया कि डाकू को मारने वाला और कोई नहीं उनका बेटा राजू ही है तो इस बात को सुनकर मधु और गुलाबी दोनों खुशी से झूम उठे मधु की छाती गर्व से फूले नहीं समा रही थी लेकिन तभी इस बात की चिंता मधु के दिमाग में बैठ गई कि अब क्या होगा क्योंकि उसके बेटे ने डाकू को मार गिराया था अब डाकू बदला जरूर लेंगे अपनी मां को चिंतित देखकर उसे शांत करते हुए राजू बोला,,,,।

तुम फिक्र क्यों करती हो मां पिताजी को छोड़कर गांव में किसी को भी इस बात की भनक तक नहीं है की गोली किसने चलाया यहां तक कि डाकू को भी पता नहीं है कि गोली किसने चलाया है वह लोग तो उनके दो साथी को गोली लगते ही वहां से उन दोनों को लेकर रफूचक्कर हो गए और वैसे भी डाकुओं को इतना तो पता ही है कि गांव के लोग जहां खाने के लिए तरसते हैं वहां उन लोगों के पास बंदूक कंहा से आएगी,,,,





तू सच कह रहा है ना बेटा डाकू लोग बहुत खतरनाक होते हैं वह अपना बदला जरूर लेते हैं,,,,,, मुझे तो बहुत डर लगा है बेटा,,,

इसमें घबराने वाली कौन सी बात है मां मेरे पास बंदूक है तुम दोनों को दिस बात का पता नहीं था पिताजी भी अब जाकर अपने आंखों से देखें कि मेरे पास बंदूक है जो कि लाला ने मुझे दिया है,,,,, गांव वालों को तो इस बात की भनक तक नहीं है कि मेरे पास बंदूक है,,,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, और वैसे भी मां अगर आज में अपने हाथ में बंदूक ना उठाता तो आज तुम दोनों की घर पर नहीं होती बल्कि डाकुओं की अड्डे पर होती,,,,

यह क्या कह रहा है राजू,,,,

राजू बिल्कुल ठीक कह रहा है डाकू घर का मुख्य दरवाजा तोड़ चुके हैं और अंदर आने ही वाले थे कि सही समय पर राजू में बंदूक से गोली दाग दिया ओर दो डाकू मारे गए और वो डाकू तुरंत भाग खड़ा हुआ,,,, वरना आज गजब हो जाता राजू ने सही समय पर बहादुरी दिखाते हुए मेरे घर की इज्जत बचाया है,,,,,



राजू,,,, मेरे बेटे,,,(और इतना कहने के साथ ही मधु खुश होते हुए आगे बढ़ कर राजू को अपने सीने से लगा ली,,, राजू भी खुशी के मारे अपनी मां से लिपट गया मैं तुमसे ही उसकी भारी-भरकम छाती का कसाव राजू अपनी छाती पर महसूस किया वह पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया पल भर में इसके तन बदन में मदहोशी की चिंगारी फूटने लगी,,, वह अपने पिताजी के सामने ही अपनी मां को कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया था,,,,, जिस तरह का माहौल था उसे देखते हुए हरिया को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि इस तरह से पकड़ने में राजू का अपना अलग ही मतलब है,,,,,,)

सुनते हो आज आप अकेले ही सो जाइए मैं आज राजू और गुलाबी के साथ सोऊंगी,,,,

क्यों अभी मेरे साथ सोने में कोई दिक्कत है क्या,,,?

नहीं आज मेरा मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है कि मुझे थोड़ी घबराहट हो रही है डाकू के नाम से,,,,



लेकिन डाकू तो चले गए मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,?

नहीं बिल्कुल भी नहीं मुझे तो अपने बेटे पर पूरा भरोसा है देखे नहीं किस तरह से दोनों डाकुओं को मार गिराया,,,

अरे मां चिल्लाने की जरूरत नहीं है यह राज

हम लोगों के बीच में ही रहना चाहिए किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए वरना मेरे लिए मुसीबत हो सकती है,,,



तू ठीक कह रहा है बेटा,,,,, अब इस बारे में हम में से कोई भी जिक्र भी नहीं करेगा,,,,,।

(राजू के साथ सोने के नाम से ही गुलाबी के तन बदन में भी आग लगने लगी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी भाभी का अपनी बेटी के साथ सोने का मतलब था कि आज फिर से तीनों का काम बनने वाला है,,,,,, और राजू का लंड तो अपनी मां की बात सुनते ही पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और अपनी मां की बुर में जाने के लिए तड़प रहा था लेकिन हरिया का मन ना होते हुए भी उसे अपनी बीवी की बात माननी पड़ी लेकिन एक बार कमरे में जाने से पहले वह बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं है लेकिन एक बार देख तो ले कि दरवाजे की हालत क्या हुई है,,,

हां हमें दरवाजे की हालत को देख लेना चाहिए,,,(राजू की अपने पिताजी की बात में सुर मिलाता हुआ बोला,,,,, और फिर चारों अंदर का दरवाजा खोलकर मुख्य द्वार पर आजा जहां पर दरवाजा पूरी तरह से टुट चुका था,,, टूटे हुए दरवाजे को देखकर राजू बोला,,,,।)

देख रही हो मां दरवाजे की हालत,,,, तुम दोनों की इज्जत ज्यादा देर तक बची नहीं रह सकती थी,,,,

सच कह रहा है राजू तू,,, आज तो गुलाबी और तेरी मां की इज्जत लूटने ही वाली थी,,,,,

लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है मेरे बेटे के होते हुए कोई हम दोनों की तरफ आंख उठाकर तो देखें,,,,,,,

अरे ,,,, भाग्यवान मुझे भी पता है,,,, राजू के होते हुए हम लोगों का कोई कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता लेकिन तुम चिल्ला चिल्ला कर पूरे गांव में ढिंढोरा मत भेज दो ताकि हम लोगों के लिए ही मुसीबत बन जाए,,,,,



अरे यार मैं सब समझती हूं अब आप जाओ मैं भी जा रही हूं,,,,, देख नहीं रहे हो कोई गांव वाला बाहर दिखाई नहीं दे रहा है सब सदमे में है हमें भी यूं घर के बाहर खड़े नहीं रहना चाहिए,,,,

चलो मां घर में आप भी पिताजी जाकर सो जाइए,,,,।

(राजू की बातों से लग रहा था कि राजू बहुत जल्दबाजी में था अपनी मां को अपने कमरे में ले जाने के लिए क्योंकि डाकू के आने से पहले वह अपनी बुआ के खूबसूरत बदन से पूरी तरह से मस्ती कर लेने के बाद उसकी बुर में लंड डालने वाला था कि डाकू आ गए थे उसके सारे किए कराए पर पानी फिर चुका था उसका सारा मजा किरकिरा हो चुका था लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि सब कुछ सुधर गया है अब अपनी बुआ की कसर अपनी मां से उतारना चाहता था,,,, इसलिए उसने जैसे देखा कि उसके पिताजी अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिए हैं तो राजू भी तुरंत अपने कमरे में प्रवेश करके दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया था लालटेन की पीली रोशनी को थोड़ा और तेज कर दिया था ताकि सब कुछ साफ-साफ नजर आए,,, कमरे में प्रवेश करते ही गुलाबी अपनी भाभी से बोली,,,)



क्या सच में भाभी डाकू हम दोनों को उठा ले जाता,,,,

अरे तो क्या हुआ आखिर डाकू को चाहिए क्या खजाना और वह चाहे जैसे भी रूप में हो रुपया पैसा देना हो या खूबसूरत औरत उन्हें तो सिर्फ खजाना से मतलब है और तुम दोनों की टांगों के बीच जो खूबसूरत खजाना है उसे पाकर तो डाकू लोग एक दम मस्त हो जाएंगे,,,,, मैं तो यही सोच कर डर रहा था कि अगर डाकू लोग तुम दोनों को उठा ले गए तो तुम दोनों का क्या होगा बारी-बारी से सारे डाकू तुम दोनों पर चढ़ेंगे,,,,, तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देने के बाद ही छोड़ते,,,,(अपनी कुर्ते को उतारते हुए राजू एकदम बेशर्म होता हुआ बोला)

चल हट मेरी बुर में डालने से पहले में कुल्हाड़ी लेकर सभी डाकुओं के लंड को काट,, देती,,,,,

लंड काट देती तो वह बेशर्म डाकू तुम्हारी बुर में केला डालकर मजा लेते,,

उन लोगों के गंदे लंड से तो अच्छा केला ही है,,,।

हाय मेरी रानी मतलब कुछ ना कुछ बुर में जाना चाहिए,,,,(अपने पजामे को उतार कर अपनी मां और बुआ के सामने पूरी तरह से नंगा होते हुए और अपने हाथ में लंड पकड़ कर हिलाते हुए राजू बोला,,,)

तो क्या,,,,(मधु मुस्कुराते हुए राजू के मोटे तगड़े लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,)



चलो तब की तब देखेंगे अभी तो मेरे लंड को मुंह मे लेकर मुझे मस्त कर दो,,,,,।

(राजू का इतना कहना था कि मधु मुस्कुराते हुए अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर,, बेझिझक उसे अपने मुंह में ले ली और चूसना शुरू कर दी गुलाबी से इतना गरमा-गरम दृश्य अपनी आंखों से देखा नहीं जा रहा था और वहां तुरंत अपने ही हाथों से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और घुटनों के बल बैठकर अपनी भाभी के हाथ से राजू के लंड को पकड़कर उसे अपने मुंह में भर ले और चूसना शुरू कर दी भाभी और ननद बारी-बारी से राजू के लंड को अपने अपने मुंह में ले रही थी और अपनी इस प्रक्रिया से राजू को पूरी तरह से मस्त कर रही थी राजू पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था वह अपनी बुआ और अपनी मां दोनों के सर पर हाथ रखकर बारी बारी से अपने लंड को अपनी मां और अपनी बुआ दोनों के मुंह में डालकर अपनी कमर हिला रहा था,,,, दोनों एकदम मस्त हो चुकी थी,,,,।

लालटेन की पीली रोशनी सब कुछ साफ नजर आ रहा था राजू और गुलाबी दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे लेकिन अभी भी मधु के बदन पर कपड़े थे,,, लेकिन उसके साड़ी का पल्लू उसकी भारी-भरकम छातीयो से नीचे गिरा हुआ था जिसकी वजह से,,, उसके दोनों खरबूजा एकदम साफ नजर आ रहे थे जो कि छोटे से ब्लाउज में कैद थे और वह भी उसका ऊपर का बटन खुला होने की वजह से आधे से ज्यादा खरबूजा बाहर निकलने के लिए तड़प रहा था संजू से यह नजारा देखा नहीं क्या और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगा देखते ही देखते राजू के बदन में मदहोशी छाने लगी एक तो पहले से ही उसकी बुआ और उसकी मां ने मिलकर उसके लंड की हालत को खराब कर दी थी,,,, अब राजू को केवल अपनी मां की बुर चाहिए थी जिसमें अपना मोटा लंड डालकर अपने बदन की गर्मी को शांत कर सकता था,,,,,।

और इसीलिए वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते-देखते वह अपनी मां के पतन पर से ब्लाउज को उतार दिया और कमर के ऊपर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया अपनी भाभी की बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर गुलाबी के मुंह में पानी आ गया और वह खुद अपनी भाभी की चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे मुंह में भर कर पीना शुरू कर दी गुलाबी की इस हरकत से मधु के तन बदन में आग लगने लगे वह पागल होने लगी और अगले ही पल राजू अपनी मां की साड़ी को खोलते हुए उसकी पेटीकोट को भी उतार कर उसे भी नंगी कर दिया कमरे के अंदर मां बेटा और वह तीनों नंगे हो चुके थे डाकू के आने-जाने का आप बिल्कुल भी उन तीनों को होश नहीं था इतना बड़ा हादसा होते-होते रह गया था लेकिन उस हादसे का असर इन तीनों पर बिल्कुल भी नहीं था यह तीनों तो अपनी दुनिया में मस्त होकर जवानी का मजा लूटने लगे थे,,,,, मधु‌ गुलाबी को इस बात की खुशी थी कि राजू के चलते दोनों की इज्जत जाते-जाते बची थी,,,, वह दोनों यही सोच कर खुश थे कि डाकू से चुदवाने से कहीं लाख गुना बेहतर राजू से चुदवाने का,,, था,,, इसीलिए तो दोनों औरतें खुलकर राजू को मजा दे रही थी राजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी गुलाबी बुर को होठ लगाकर चाट रहा था वह गुलाबी खुद अपनी भाभी के ऊपर घुटनों के बल बैठकर उसके सर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अब ऊपर की तरफ उठाकर अपनी बुर से लगा दी थी और मधु भी बेझिझक अपनी ननद की भूल से खेल रही थी दोनों की आग बढ़ती जा रही थी दोनों एकदम चुदवासी हुई जा रही थी,,,,

कुछ देर तक तीनों इसी तरह से एक दूसरे के अंगों से खेलते रहे राजू एक साथ दो दो नंगी औरतों को देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था,,, इसीलिए वह अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर अपने मोटे तगडे लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर,,, चोदना शुरू कर दिया मधु को बहुत मजा आने लगा अपने बेटे के मर्दा ना जोश पर वह पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी,,, गुलाबी ठीक उसके सामने अपनी गांड राजू की तरफ करके अपनी बुर को अपनी भाभी के मुंह से चटवा रही थी,,, राजू अपने दोनों हाथों से अपनी बुआ की गांड को पकड़कर उसे जोर जोर से दबा रहा था कुछ देर तक अपनी मां को चोदने के बाद वह तुरंत अपनी मां की बुर में से अपना लंड निकाल कर गुलाबी की कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और घोड़ी बनाकर उसे चोदना शुरु कर दिया ऐसा वह बारी-बारी से कर रहा था कभी अपनी बुआ की बुर में डाल रहा था तो कभी अपनी मां की गोद में इस तरह से चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था और ननद और भाभी दोनों पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,,

गुलाबी और मधु दोनों को राजू के ऊपर पूरा विश्वास था कि वह अपने लंड से दोनों की गर्मी शांत कर देगा और ऐसा ही हुआ कुछ देर तक की घमासान चुदाई के बाद मधु और गुलाबी दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी राजू अच्छी तरह से जानता था कि दोनों का पानी निकलने वाला है और साथ में उसका भी कभी भी निकल जाएगा इसलिए वह अपनी बुआ की बुर में अपने लंड को बड़ी जोर जोर से धक्का देते हुए अंदर-बाहर करने लगा वह देखते ही देखते गरमा गरम सिसकारी लेते हुए पानी छोड़ने लगी,,,, गुलाबी का काम तमाम हो चुका था अब बारी थी मधु की, अब वह पूरा ध्यान अपनी मां की बुर पर देने वाला था,,, इसलिए अपने लंड के गर्म सुपाड़े को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रखकर एक करारा धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मधु की बुर के अंदर घुस गया अब राजू रुकने का नाम लेने वाला नहीं था वह ताबड़तोड़ अपनी मां की बुर में धक्के पर धक्का मारने लगा उसकी मां की चीख निकलने लगी वह पूरी तरह से मस्त होने लगी,,,,, और फिर 15‌,,,,, 20 धक्कों के बाद आराधना के साथ-साथ राजू भी झड़ गया,,,,,।

दूसरे दिन पूरे गांव में और अगल-बगल के 10 गांव में यह खबर फैल गई कि रात को इस गांव में डाकू आए थे लेकिन उनमें से उनके सरदार हो रहे एक आदमी को गोली लग गई जिसकी वजह से डाकू दुम दबाकर भाग गए थे,,, किसी को निश्चित तौर पर यह पता नहीं था कि डाकुओं पर गोली किसने चलाई लेकिन सभी को ऐसा लग रहा था कि डाकुओं को मार गिराने वाला और कोई नहीं बल्कि लाला ही थे,,,, इसलिए तो गांव के बड़े बुजुर्गों लाला को बधाई देने के लिए लाला की हवेली पर पहुंच गए थे लेकिन लाला को तो इस बात की भनक तक नहीं थी लेकिन वह कुछ बोला नहीं और गांव वालों के चले जाने के बाद अपना आदमी भेज करो राजू को हवेली पर आने के लिए बोला क्योंकि लाला यह बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर यह कारनामा कोई कर सकता है तो वह राजू और राजू के हाथ में ही उसने बंदूक सौंपी थी,,,,।
 
खबर मिलते ही राजू हवेली की तरफ निकल चुका था,,, डाका डालने आए डाकुओं के 2 साथी मारे जाने और उनके गांव छोड़कर भागने की खबर सुनकर लाला बहुत खुश हो रहा था वह सोनी से बातें कर रहा था कि,,,, यह काम राजू का ही है क्योंकि राजू को उसने की बंदूक दिया था और इस तरह का कारनामा राजू के सिवा और किसी मैं दम ही नहीं है कि वह ऐसा कारनामा कर सके,,,,, सोनी से बात करते हुए लाला बोला,,,।



देखी नहीं थी सोनी जिस दिन राजू ने हम दोनों को हमबिस्तर हुए रंगे हाथ पकड़ा था उसकी आंखों में जरा भी डर नहीं था हम लाला है जमीदार हैं हम चाहे उसका कुछ भी करवा सकते हैं लेकिन वह बिल्कुल भी घबराया नहीं था बल्कि हिम्मत दिखाते हुए मुझे कैसे धमका रहा था मैं उस दिन ही समझ गया था कि राजू बहुत बड़े काम की चीज है,,,,

हां भैया उस दिन तो मैं भी पूरी तरह से घबरा गई थी राजू किस तरह से हम दोनों को धमका रहा था और सही मायने में राजू ने उसी दिन अपनी मर्दानगी का परिचय दे दिया था वरना गांव भर में ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जो आप से ना डरता हो लेकिन राजू की आंखों में बिल्कुल भी डर नहीं था,,,, और तो और भैया अगर राजू की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो शायद उस समय उस मौके का गलत फायदा उठा कर ना जाने और क्या कर दिया होता,,,।

(सोनी की बात सुनकर लाला तिरछी नजरों से सोने की तरफ देखते हुए कुछ सोच कर बोला)





मैं जानता हूं सोनी तुम क्या कहना चाह रही हो मैं भी तो हैरान था कि अगर राजू की जगह कोई और होता और इतनी हिम्मत दिखाया होता तो जरूर वह तुम्हारे साथ हमबिस्तर होने की शर्त रखा होता और तुम्हारे साथ हम बिस्तर भी हुआ होता लेकिन राजू ऐसा लड़का बिल्कुल भी नहीं है वह सिर्फ इज्जत और रुतबे का भूखा है ना कि एक औरत के जिस्म का,,,,(अपने भाई की बात सुनकर सोनी मन ही मन मुस्कुराते हुए अपने आप से ही बोली,,, तुम्हें क्या मालूम भैया कि राजू किस चीज का भूखा है खूबसूरत औरत मिल जाए तो घंटों तक रोंदता रहता है वह तो पहले से ही मेरे बदन से मजा ले चुका था इसलिए उस दिन इस तरह की शर्त नहीं रखा वरना राजू ऐसे मौके का फायदा उठाना अच्छी तरह से जानता है,,,) और उसके कहे अनुसार ही,,,, मेरे बदौलत आज उसकी इज्जत पूरे गांव में बहुत ज्यादा है उसे सब इज्जत की नजर से देखते हैं और उससे डरते भी हैं,,,, उसे आज बहुत लोग जानते हैं और यह जानकर उसकी और इज्जत करते हैं कि वह लाला का आदमी है लाला का खास है,,,,

तुम सच कह रहे हो भैया राजू को बहुत कुछ मिला है,,,

यही तो मैं कह रहा हूं सोनी मेरी बदौलत अगर राजू को इतना कुछ मिला है तो उसका भी तो फर्ज बनता है मेरे लिए कुछ करने का,,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,,



जिस बहादुरी से उसने गांव में से डाकुओं को मार भगाया उसकी बहादुरी देखते हुए मेरे मन की लालच बाहर आ गई है,,,,

तुम क्या कहना चाहते हो भैया,,,,

मैं चाहता हूं कि राजू विक्रम सिंह से हम लोगों की रक्षा करें,,,

लेकिन क्या राजू कर पाएगा,,,

कर तो लेगा सोनी लेकिन सवाल यह है कि क्यों करेगा आखिर इतना बड़ा खतरा कौन अपने सर पर उठाएगा और वह भी बेवजह,,,,,

बात तो सही है भैया,,,, बिना लालच के इतना बड़ा खतरा कोई अपने सर पर ले भी नहीं सकता क्योंकि बिना किसी लालच के कोई काम करता नहीं है,,,,

यही तो बात अटक जा रही है सोनी,,,,(मेहमान घर में अपने आसन पर बैठकर हुक्का गुड गुडाते हुए लाला बोला,,,)



उसे भी रुपया पैसा की लालच दो,,,

तुम्हें क्या लगता है सोनी थोड़े से रुपया पैसे की लालच में आकर वह इतना बड़ा खतरा उठाएगा,,,

फिर,,,,(सोनी आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखते हुए बोली)

जर जमीन और जोरु यही तीन चीज ऐसी है जो इंसान से कुछ भी करवा सकती है,,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे इसमें समझना क्या है,,,, हम लोग राजू को विक्रम सिंह से मुकाबले के लिए लालच देंगे,,,

लालच किस बात की लालच,,,,

वैसे भी राजू अपने गोदाम का कारोबार देखता ही है अगर उसे गोदाम का आधा हिस्सा दे दें और उसके नाम पर आम का बगीचा कर दें फिर तो वह इतना बड़ा खतरा अपने सर पर लेने के लिए तैयार हो जाएगा वैसे भी राजू बहुत दिमाग का तेज है वह जरूर कोई ना कोई रास्ता निकाल लेगा,,,,,



और अगर फिर भी ना माना तो,,,,(सोनी चिंतित स्वर में बोली)

अगर राजू फिर भी नहीं माना तो फिर एक ही रास्ता है,,,

वह क्या,,?

तुम,,,,

मैं कुछ समझी नहीं भैया,,,,

सोनी तुम जवान हो खूबसूरत हो गोरे बदन की मालकिन हो तुम्हारा अंग अंग खरा सोना है तुम्हें पाने के लिए दुनिया के सभी मर्द पागल हुए रहते हैं,,,,



मैं अभी भी कुछ नहीं समझी भैया,,,,

सोनी अब तुम ही इस मुसीबत से बचा सकती हो,,,,, राजू पूरी तरह से जवान है मेरे साथ तुम्हें लग्न अवस्था में संभोग रत देख चुका है,,,

तो,,,,,

तो क्या जवान होने के नाते उसके मन में भी तो कोई अरमान होंगे औरत को लेकर और तुम्हारे नंगे बदन को देख कर जरूर उसका मन डोला होगा लेकिन उस समय वह कुछ कर नहीं पाया,,,, औरत की खूबसूरती तो बड़े-बड़े तपस्वी को भी उनकी तपस्या भंग कर देती है तो राजू की क्या बिसात है,,,,, मैं चाहता हूं सोनी कि तुम राजू के साथ प्रेम संबंध बढ़ाओ अपनी अदाओं से अपनी खूबसूरती से उसे रिझावो,,,,

यह क्या कह रहे हो भैया,,,,?



मैं सच कह रहा हूं सोनी राजू को तुम अपनी मादक अदाओं से अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हो गई तो समझ लो अपना काम बन गया,,,,

तुम तो भैया मुझे,,,, विक्रम सिंह के हाथ से बचाकर राजू के हाथ में सौंप रहे हो,,,

सोनी समझने की कोशिश करो राजू और विक्रम में जमीन आसमान का फर्क,,, है,,, विक्रम सिंह तुम्हारे बदले में हमारी जमीन जायदाद हमें वापस नहीं लौटाएगा जमीन जायदाद तो लेगा ही लेगा और ब्याज के तौर पर तुम्हारी जवानी से भी खेलेगा लेकिन राजू के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है राजू अगर तुम्हारे प्यार में तुम्हारी जवानी के पीछे पागल हो गया तो वह है जमीन जा जात में हिस्सा लिए बिना ही विक्रम सिंह से अकेले भिड जाएगा,,,,

(अपने भाई की है बातें सुनकर सोनी का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,, सोनी तो अपने भाई के इस प्रस्ताव को सुनकर ही अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि अगर ऐसा हो गया तो उसके लिए भी सब कुछ आसान हो जाएगा,,,, वह जब चाहे तब राजू के साथ अपनी जिस्मानी भूख को मिटा सकेगी वैसे भी राजू के साथ चुदाई करने का जो मजा उसे बहुत दिनों से वह अपने अंदर महसूस करके पागल हुए जा रही थी अपने भाई के इस प्रस्ताव पर तो उसे उम्मीद की किरण नजर आने लगी थी,,,) सोनी तुम्हें मेरी यह बात माननी पड़ेगी,,,,।



लेकिन भैया इसमें इज्जत का बहुत बड़ा सवाल है अगर राजू ने किसी को यह बात कह दिया तो,,,

नहीं सोनी राजू ऐसा लड़का बिल्कुल भी नहीं है,,,, मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारे साथ संबंध बनाने के बाद वह इस राज को राज रखेगा,,,,,

फिर भी भैया,,,,

अब कुछ मत कहो सोनी तुम तो अच्छी तरह जानती हो किस अवस्था में राजू ने हम दोनों को देखा था अगर वह चाहता था तब से ही तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बना लिया होता लेकिन उसने ऐसा नहीं किया वह एक इज्जत दार लड़का है,,,,

वही तो मैं कह रही हूं भैया वह एक लड़का है भला एक पराई औरत के साथ इस तरह की हरकत‌ वह कैसे कर पाएगा,,,,



क्यों नहीं कर पाएगा मैं भी तो तुम्हारा बड़ा भाई हूं आप दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता होना ही नहीं चाहिए बल्कि इस तरह के रिश्ते के बारे में सोचना भी पाप है लेकिन मैं तुम्हारी खूबसूरती से पागल हो क्या तुम्हारी अदाओं को देखकर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और हम दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता होने के बावजूद भी मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो गया,,,, फिर तुम्हारे और राजू के बीच तो किसी भी तरह का रिश्ता नहीं है तुम दोनों की हर मर्द और औरत है और औरत और मर्द के बीच यह रिश्ता होना लाजमी है,,,,

लेकिन भैया,,,,,!

अब लेकिन वेकिन कुछ नहीं,,,,,,(सोनी को बीच में ही रोकते हुए लाला बोला) घर की इज्जत मान मर्यादा को दांव पर लगाकर आज परसों की बापदादा आजा पुरखो की जमीदारी और जमीन जायदाद बचाने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है सोनी,,,,, वरना सब कुछ हाथ से चाहता रहेगा और अगर ऐसा हो गया तब तो मैं मर जाऊंगा और तुम भी दरबदर ठोकर खाती फिरोगी,,, या फिर विक्रम सिंह की रखैल बन कर रह जाओगी,,,,

(सोनी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भाई जो कुछ भी कह रहा है वह बिल्कुल सच कह रहा है अगर राजू इस मामले में नहीं पड़ेगा तो वाकई में सोनी विक्रम सिंह की रखैल बन जाएगी और विक्रम सिंह रोज उसे रोदेगा,,,, वैसे भी अपने भाई की बात मान लेने में सोनी को बिल्कुल भी इंकार नहीं था बल्कि वह तो मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि उसके और राजू के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध स्थापित हो चुके थे और वह इस रिश्ते से बेहद खुश थी लेकिन वह डरती भी थी कि कहीं उसके भैया को इस बात का पता ना चल जाए लेकिन यहां तो उसका भाई खुद उसे राजू के साथ हमबिस्तर होने के लिए बोल रहा था यह सुनकर तो सोनी का दिल खुशी से झूम उठा था लेकिन फिर भी जानबूझकर अपने भाई के सामने चरित्रवान होने का नाटक कर रही थी,,,,)



मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूं भैया लेकिन मुझे नहीं लगता है कि राजू इस तरह की बात मानेगा या मेरे साथ हमबिस्तर हो जाएगा,,,,

जरूर होगा मुझे तुम्हारी जवानी पर पूरा विश्वास है तुम्हारी गदराई जवानी की झलक देखकर ही वह पागल हो जाएगा,,,,

पूरी तरह से नंगी तो देखा है फिर भी तो उस पर कोई असर नहीं हुआ,,,

हो सकता है हम जमीदार हैं इसलिए वह तुम्हारे साथ कुछ किया नहीं लेकिन तुम्हें नंगी देखकर जरूर अपने हाथ से हिला कर अपनी गर्मी शांत किया होगा,,,,

यह तो मालूम नहीं,,,,

लेकिन अब तुम्हें उसे मजबूर करना होगा अपने साथ हमबिस्तर होने के लिए ताकि तुम्हारी जवानी का कायल होकर तुम्हारी मतलब से जवानी के आगे घुटने टेक कर वह कुछ भी करने को तैयार हो जाए,,



भैया मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी,,,,।

(हालात पूरी तरह से बदल चुके थे लाला गांव का जमीदार था ऐसे में उसकी बहन बेटियों की तरफ किसी की आंख उठाने की हिम्मत नहीं होती थी लेकिन हालात के हाथों मजबूर होकर लाला आज अपनी ही घर की इज्जत अपनी बहन को गांव के एक नौजवान लड़के को सौंपने के लिए तैयार हो चुका था ताकि वह नव जवान लड़का ढाल बनकर उन लोगों की हिफाजत कर सकें,,,,, थोड़ी ही देर बाद राजू हवेली पहुंच चुका था और हवेली के अंदर मेहमान कक्ष में प्रवेश करते हुए वह द्वार से ही लाला के सामने हाथ जोड़कर बोला,,,)

नमस्कार लाला,,,,



अरे राजू मेरे सामने हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है तुमने जो कारनामा कर दिखाया है उसे देखते हुए तो हमें तुम्हारे सामने हाथ जोड़ना चाहिए,,,(लाला अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला)

यह क्या बात कर रहे हैं लाला,,,,, वर्षों से समाज में चले आए इस दस्तूर को बदला थोड़ी जा सकता है आप हमारे मालिक हैं और हम आपके नौकर हैं हाथ जोड़ना हमारा फर्ज है,,,,

यह तो तुम्हारा बड़प्पन है राजू,,,(लाला जल्दी से राजू के करीब पहुंच गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे अपने आसन की तरफ लाते हुए बोला,,)

वैसे लाला आपको किसने कह दिया कि कल रात को जो कारनामा हुआ है वह मैंने किया हूं,,,

राजू,,,, यह बात हमसे किसी ने कही नहीं है लेकिन हम जानते हैं कि कल रात को जो कुछ भी हुआ जो कारनामा हुआ है उसमें तुम्हारा ही हाथ है मुझे तुम पर पूरा भरोसा है राजू तुमने हमारी दी हुई बंदूक का सही उपयोग किया है,,,,

लाला इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे बंदूक दिया वरना कल रात को अनर्थ हो जाता,,,,, वैसे लाला इस बात को आप किसी से कहना नहीं,,,

वह क्यों राजू,,,(सोनी बीच में बोली) तुमने जो हिम्मत दिखाई है मर्दों वाला काम किया है उसके बारे में तो पूरे गांव वालों को खबर होनी चाहिए ताकि पूरे गांव में तुम्हारी जय जयकार हो,,,,

नहीं नहीं मालकिन ऐसा गजब बिल्कुल भी मत करना अगर इस बारे में किसी को पता चल गया और यह खबर उड़ते उड़ते डाकूओं के कान में चली गई तो मेरे परिवार के लिए मुश्किल हो जाएगा इसलिए इसका जिक्र भी कभी मत करना,,,,

चलो छोड़ो यार आओ पहले बैठो,,,,(जहां पर लाला बैठा हुआ था वहीं पर उसने राजू को भी अपने बगल में ही बिठा लिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी होगी तुम्हारी मर्दानगी देखकर मेरा इंतजार एकदम खत्म हो गया,,,,

इंतजार कैसा इंतजार,,,,(आश्चर्य जताते हुए राजू बोला)

अरे बताता हूं थोड़ा सब्र तो करो सोनी जाओ पहले चाय नाश्ता लेकर आओ,,,,।

जी भैया,,,(इतना कहकर सोनी अपनी जगह से उठी और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की तरफ जाने लगी लेकिन आज उसकी चाल में एक मादकता थी एक नशा था जो कि आज एकदम साफ नजर आ रहा था राजू की नजर सोनी पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया सोनी जानबूझकर सीढ़ियां चढ़ते हुए जब अपने पैर ऊपर की तरफ उठाती थी तो अपनी गांड के ऊभार को कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकाल देती थी,,,, और राजू सोनी की बड़ी बड़ी उभरी हुई गांड देखकर पागल हुआ जा रहा था वैसे भी बहुत दिन हो गए थे सोने की मद मस्त जवानी को नंगी देखे हुए,,,, राजू तब तक सोनी को देखता रहा जब तक कि सोनी अपनी मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ी पर नहीं चढ़ गई,,, लाला अपनी बहन की कामुक हरकत और राजू की नजर को अच्छी तरह से पढ़ने की कोशिश कर रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था,,,,।
 
अपनी बहन की मादकबदन और उसकी मतवाली चाल देखकर राजू की आंखों में वासना की चमक यह सब लाला को अंदर ही अंदर बहुत खुश कर रही थी क्योंकि लाला जैसा चाह रहा था वैसा ही शुरुआत हो चुका था,,,, लाला को किसी भी हालत में अपनी पुश्तैनी जमीन जायदाद और इज्जत बचाने की इसके लिए वह अपनी बहन की इज्जत दांव पर लगाने के लिए तैयार हो गया वैसे तो विक्रम सिंह लाला की बहन की इज्जत से खेलना चाहता था लेकिन लाला चाहता था कि सोनी राजू से अपनी इज्जत का सौदा करें क्योंकि विक्रम सिंह और राजू में जमीन आसमान का फर्क था,,,, राजू कर सोने की इज्जत से खेलता तो उसकी जमीन जा जात बचाने के लिए और विक्रम सिंह जमीन जा जात ले लेने के बाद उसकी इज्जत से खेलता,,,,,,



सोनी जानबूझकर अपने भाई के सामने राजू को दिखाते हुए अपनी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड को मटका कर चल रही थी और सीढ़ियां चढ़ते हुए तो उसकी मादक नितंबों की चाल बेहद जानलेवा नजर आ रही थी,,,, और राजू आंखें फाड़े सोने की मतवाली चाल को देखकर अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रहा था ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार सोने की मदमस्त जवानी के जलवे को देख रहा था वह तो महीनों से लाला की बहन सोनी की जवानी से खेल रहा था लेकिन आज बात कुछ और थी,,,,, देखते ही देखते सोनी राजू की आंखों से ओझल हो गई तो वह लाला से मुखातिब होते हुए बोला,,,।

गोदाम का काम बहुत अच्छा चल रहा है लाला जी आप समय निकालकर हिसाब किताब देख लीजिएगा,,,,



अरे राजू तुझ पर मुझे पूरा भरोसा है अब कहां तो हिसाब किताब की बात कर रहा है मैं तो सोच रहा हूं कि व्यापार में तुझे अपना साथी बना लूं क्योंकि तू तो जानता ही है मेरी कोई औलाद नहीं है मेरे बाद इस जमीन ज्यादा स्कोर देखने वाला और कोई नहीं है एक तू ही है जो भरोसे के लायक है और अच्छे से व्यापार को चला भी रहा है और उसकी रखवाली भी कर रहा है,,,,

आप क्या कहना चाहते हो लाला जी मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,

समझ जाओगे राजु बेटा,,,,, लो सोनी भी आ गई पहले चाय नाश्ता कर लो फिर मैं तुम्हें बताता हूं,,,,,,

(उसका इतना कहना था कि सोनी चाय नाश्ता लेकर हाजिर हो गई और जैसे ही टेबल पर चाय की प्लेट रखने को हुई,,,, वैसे ही उसकी साड़ी का पल्लू उसके कंधे से सीधे नीचे गिर गया और उसकी मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी गोल गोल चुचियां एकदम से ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर नजर आने लगी यह नजारा देखकर राजू का लंड एकदम से तन गया,,,, ना जाने कितनी बार सोनी की चूची को अपने मुंह में लेकर पीने का आनंद ले चुका राजू इस समय सोनी की मदमस्त जलवे को देखकर पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था,,,, साड़ी का पल्लू कंधे से गिरा तो गिरा लेकिन ब्लाउज का उत्तर का एक बटन पूरी तरह से खुला हुआ था जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल बड़ी बड़ी चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकलने के लिए फड़फड़ा रही थी जिसे आंखें फाड़े राजू देखता ही रह गया जो कि इस हरकत को सोनी जानबूझकर की थी वह जानबूझकर अपने कंधे से साड़ी को गिराई थी ताकि राजू की नजर उसकी भारी-भरकम छातियों पर टिकी रह जाए,,,, सोनी अपने भाई के सामने जानबूझकर इस तरह की हरकत को कर रही थी ताकि उसके भाई को ऐसा ही लगेगी पहली बार सब कुछ हो रहा है क्योंकि उसका भाई इस बात को बिल्कुल नहीं जानता था कि उसकी पीठ पीछे उसकी बहन राजू के साथ ना जाने कितनी बार चुदाई का आनंद लूट चुकी है,,, और तो और हवेली में अपने कमरे में ही राजू को बुलाकर जमकर चुदाई का आनंद ले चुकी थी,,,,



राजू एकटक सोनी की मदमस्त गोरी गोरी चूचियों को देखता ही रह गया उसे लाला की मौजूदगी का बिल्कुल भी आभास नहीं हुआ था वह निश्चिंत होकर सोने की मदमस्त कर देने वाली चूची का रसपान अपनी नजरों से कर रहा था लाला राजू की हालत देखकर बहुत खुश हो रहा था हालांकि अपनी बहन की इस तरह की अदाकारी को देखकर वह खुद उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,, कुछ छण तक का यह नजारा राजू को पूरी तरह से उत्तेजित कर गया था,,,, चाय की प्लेट और नाश्ते को टेबल पर रख कर वह तुरंत अपनी साड़ी के पल्लू को उठाकर वापस कंधे पर रखकर अपनी गोल-गोल छातियों को पर्दे में कर दी तब जाकर राजू की तंद्रा भंग हुई,,,,,, और वह लगभग लगभग हक लाते हुए बोला,,,।

अरे अरे इसकी क्या जरूरत थी,,,,, मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं,,,,



अरे राजू मेहमान तुम बिल्कुल भी नहीं हो क्योंकि अब तो तुम इस हवेली के सदस्य बनने वाले हो,,,,(सोने की बात सुनकर लाला मुस्कुरा रहा था लेकिन राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह आश्चर्य से राजू की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख रहा था यह देखकर लाला बोला)

तुम निश्चिंत होकर पहले चाय नाश्ता तो कर लो फिर मैं तुम्हें बताता हूं,,,

क्या बताता हूं लालाजी मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है छोटी मालकिन क्या कह रही है,,,

अरे तुम चाय शुरु तो करो,,,,

पहले आप लीजिए लालाजी,,,(इतना कहने के साथ ही चाय का प्याला लेकर राजू लाला की तरफ आगे बढ़ाकर उसे पकड़ाने लगा जिसे लाला एकदम संभाल कर राजू के हाथ से अपने हाथ में दे दिया सोनी वहीं पर कुर्सी को अपनी तरफ खींच कर बैठ गई थी,,,, और लाला गर्म चाय की चुस्की लेने लगा,,,,, राजू को चाय पीने की आदत बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह चाय पीता ही नहीं था लेकिन आज औपचारिक रूप से वह चाय को अपने हाथ में लेकर गरम चाय को फूंक-फूंक कर उसे ठंडा कर रहा था यह देखकर सोनी मुस्कुराने लगी और राजू सोनी की तरफ देख कर बोला,,,)





छोटी मालकिन आप क्यों मुस्कुरा रही हैं,,,?

देख रही हूं कि तुम चाय पीना बिल्कुल भी नहीं जानते,,,

हां छोटी मालकिन है बिल्कुल सच है सच कहूं तो मैं चाय पीता ही नहीं हूं मैं तो सुबह सुबह खाना खाकर घर से निकल जाता हूं चाय हमारे घर में बनती भी नहीं है,,,,

तुम्हारी आदत अच्छी है राजू वैसे भी चाय सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है लेकिन अब क्या करें आदत पड़ चुकी है इसलिए मजबूरी है,,,, लेकिन तुम पियो पहली बार में आदत नहीं बन जाएगी,,,



जी लाला जी,,,(और इतना कहकर राजू चाय के प्याले को अपने होठों से लगाकर बड़े संभाल कर उसकी चुस्की लेने लगा जो कि अभी भी थोड़ी गर्म थी,,,, सोनी बड़े गौर से है राजू की तरफ देख रही थी और लाला सोनी की तरफ देख रहा था लाला मन ही मन में सोच रहा था कि सोनी उसकी बात मान कर उस पर एहसान कर रही है लेकिन लाला यह बात कहां जानता था कि सोनी मन ही मन में राजू से प्रेम करती थी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करती थी इसलिए राजू को बड़े गौर से देख रही थी कि यह लड़का उसके भाई के सामने कैसे छोटी मां की छोटी मालकिन कह कर बुलाता है,,,, अगर अकेले मिल जाऊं तो पागलों की तरह नोचने खरोच ने लगता है बुर में मोटा लंड डालकर बुर फाडने की कोशिश करता है और अभी देखो भैया के सामने कितना सीधा बंद कर देता हूं मतलब ऐसा की औरतों के बारे में कुछ जानता ही नहीं है,,,, सोनी राजू को देख रही थी और राजू चाय की चुस्की लेते हुए सोनी को देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकरा रही थी और दोनों एक दूसरे की नजरों में डूब जाना चाहते थे ना जाने क्यों लाला के सामने सोनी को उत्तेजित अवस्था में निहारने में राजू को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,

लाला की बहन सोनी कुछ इस तरह से



देखते ही देखते पहले लाला ने और फिर राजू ने चाय को खत्म करके प्याला को टेबल पर रख दिया और लाला कुछ देर सोचने के बाद बोला,,,।

राजू तुम तो अच्छी तरह से जानते हो कि हमारा व्यापार कितना है कहां तक है और कितना फैला हुआ है इसका हिसाब किताब तुम्हारे हाथों में है लेकिन कब तक,,, हमारी तो कोई संतान नहीं है,,,(लाला बोले जा रहा था और राजू बड़े गौर से सुनता चला जा रहा था),,, हमारे बाद इस हवेली को खेत खलियान जमीदारी और व्यापार को कौन देखेगा बस इसी की चिंता खाई जाती है,,,,,

लालाजी कोई तो होगा आपका रिश्तेदार जिस पर आपको भरोसा हो,,,

सोनी अपने भाई को मस्त करते हुए





नहीं ऐसा कोई भी नहीं है लेकिन मुझे अब लगता है कि मेरी समस्या का हल मुझे मिल गया है,,,

कैसे,,,?(राजू आश्चर्य से लाला की तरफ देखते हुए बोला)

राजू तुम पर विश्वास करके मैंने कोई गलती नहीं किया हूं तुमने जिस तरह से व्यापार को आगे बढ़ाने में और से संभाल लेना मेरी मदद किए हो मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतनी जल्दी मेरे व्यापार को संभाल लोगे,,,,,,

लाला चाहिए तो आपका बड़प्पन है कि आपने भरोसा करके मुझे अपना कारोबार की देखभाल करने के लिए चुना है,,,,,

सोनी की रसीली बुर को लाला चाटते हुए



यह तो ठीक है राजू लेकिन अब समय आ गया है कि मैं तुम्हें इससे भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपु,,,,

कैसी जिम्मेदारी,,,,

इस हवेली की कारोबार के जमीदारी ,,,, जैसे एक बेटा अपने बाप के कारोबार को संभालता है ठीक उसी तरह से वह भी मजदूरी की तौर पर नहीं मालिक के तौर पर,,,,

(लाला की बात सुनकर राजू आश्चर्य से कभी लाला की तरफ तो कभी सोने की तरफ देख रहा था सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह बड़े आश्चर्य से दोनों की तरफ देख रहा था तो लाला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अपनी बहन को मस्त करता हुआ लाला



राजू तुम तो जानते ही हो कि मेरी कोई संतान नहीं है और मेरे बात इस हवेली को कारोबार को देखने वाला कोई नहीं है मैं जानता हूं कि मेरे बात सब कुछ बर्बाद हो जाएगा हवेली से लेकर कारोबार तक किसी दूसरे के हाथों में चला जाएगा हमारे बाप दादा की बनाई हुई सल्तनत सब मिट्टी में मिल जाएगी इसलिए मैं चाहता हूं कि एक बेटे की तरह तुम मेरा कारोबार में साथ दो बदले में मजदूरी नहीं बल्कि,,, मालिक बनकर मतलब मेरा बेटा बनकर सब कुछ तुम्हारा,,,,, गोदाम का कारोबार तुम्हारा आम का बगीचा खेत खलियान सबकी देखरेख तुम्हारी जिम्मेदारी,,,,

क्या कह रहे हैं लाला जी इतनी बड़ी जिम्मेदारी,,,,

जिम्मेदारी नहीं बल्कि मालीकी,,,, राजू तुम मेरे बेटे की तरह हो और तुम से ज्यादा भरोसा में किसी पर नहीं कर सकता इसलिए तुम पर यह जिम्मेदारी सौंप रहा हूं,,,,

यह तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है लाला जी मैं तो यह सुनकर पागल हुआ जा रहा हूं मजदूर बनकर और मालिक बनने में जमीन आसमान का फर्क है,,,,

तभी तो मैं कह रहा हूं राजू तुम्हें सब कुछ एक मालिक की तरह संभालना होगा क्या तुम तैयार हो,,,,,(लाला राजू की तरफ देखते हुए बोलकर सोने की तरफ तिरछी नजर करके देख ले रहा था सोनी भी बहुत खुश हो रही थी राजू के चेहरे पर आई खुशी को देखकर लाला को अपना काम बनता हुआ मालूम पड़ रहा था)

बिल्कुल मैं तैयार हूं लालाजी,,,,,

लाला अपनी बहन की जमकर चुदाई करता हुआ



तुमने बहुत सही फैसला लिए हो बेटा,,,(इतना कहने के साथ ही लाना राजू की हथेली को अपनी हथेली में लेकर गर्मजोशी से दबाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तुमने मेरे सर से बहुत बड़ी जिम्मेदारी को अपने सर पर ले लिया है इसके लिए तुम्हें ढेर सारी बधाई,,,,,

जी लाला जी यह तो मेरा सौभाग्य है,,,,,(सोनी की तरफ देखते हुए राजू बोला और लाला राजू की निगाहों को बड़े गौर से देख रहा था राजू बार-बार सोने की तरफ देख ले रहा था इस बात से लाला भी बहुत खुश था तो वह जानता था कि राजू खुशी-खुशी पूरी जिम्मेदारी अपने सर पर ले लिया है लेकिन हो सकता है विक्रम सिंह वाला खतरा अपने सर पर वरना भी ले और उस खतरे को अपने सर पर लेने के लिए सोनी को अपनी खूबसूरती का मायाजाल राजू पर बिछाना ही होगा राजू को अपने बस में लेना ही होगा तभी वह इस जिम्मेदारी को अपना समझ कर निभाएगा,,,,)

राजू मेरे लिए आज बहुत खुशी की बात है क्यों सोनी,,,

लाला और सोनी दोनों राजु की आंखों के सामने मजा लेते हुए



हां भैया आप ठीक है कह रहे हो यह तो हमारे लिए भी बहुत खुशी की बात है,,,,,

तो राजू आज से, तुम इस हवेली में रहोगे तुम्हारे रहने का बंदोबस्त में हवेली के कमरे में कर देता हूं,,,,

(लाला की बात सुनते ही और रात को यहां रुकने की बात से पलभर में ही राजू की आंखों के सामने उसकी खूबसूरत मां और उसकी बुआ का नंगा बदन उसकी आंखों के सामने नाचने लगा वह अपनी मां और अपनी बुआ को छोड़कर रात यहां नहीं बता सकता था क्योंकि रोज रात को वह अपने घर पर स्वर्ग का मजा लूटता था इसलिए कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोला)





नहीं लाला जी ऐसा नहीं हो सकता मुझे घर पर भी रहना बहुत जरूरी है कब मेरी जरूरत पड़ जाए पता नहीं लेकिन मैं कभी कबार यहां पर रुक जाऊंगा,,,

कभी कबार क्यों आज ही रुक जाओ आज की रात तुम यहां रुक जाओ कल से भले अपने घर पर रुक जाना,,,,,

जैसी आपकी मर्जी लालाजी आज की रात में यही रुक जाता हूं,,,,,

(लाला जानबूझकर आज की रात राजू को हवेली में रुकने का न्योता दे रहा था क्योंकि वह जानता था कि सोनी अपनी जवानी से भरे हुए जिस्म का जलवा दिखाकर राजू को संभोग के लिए ललाईत कर देगी,,,, और यही लालच एक औरत को भोगने का सुख राजू को विक्रम सिंह से बचाने में मदद करेगा,,,,,,,, राजू सोनी की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था अब वह भी इस हवेली का मालिक बन चुका था,,,, राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी वफादारी उसके काम को देखकर लाला उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी और हवेली के साथ-साथ कारोबार का भाव उसके कंधों पर डाल दिया है और वह भी एकदम मालिक की तरह और इस बात का उसे अंदाजा तक नहीं था कि लाला अपनी जरूरत की पूर्ति और विक्रम सिंह से रक्षा के लिए राजू को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप रहा था हालांकि लाला के मन में राजू से किसी भी प्रकार की दगाबाजी करने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था वह वास्तव में राजू को अपने कारोबार का हिस्सेदार बना रहा था क्योंकि इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि उसके बाद इस हवेली और कारोबार को संभालने वाला कोई भी नहीं होगा और विक्रम सिंह से बचाने वाला भी कोई नहीं है विक्रम सिंह वैसे भी उसी से सब कुछ वापस ले लेने वाला था और इसी के चलते लाला अपने मन में सोच रहा था कि विक्रम सिंह के हाथों लूटने से अच्छा है कि राजू जैसे ईमानदार लड़के को अपने व्यापार का हिस्सेदार बनाकर इस व्यापार और जमीदारी की रक्षा भी कर सकेगा,,,,,,, थोड़ी देर इसी तरह से बातचीत चलती रही दोपहर का समय था राजू लाला की बात मानकर हवेली में ही दोपहर के समय आराम कर रहा था और सोनी अपने भाई के कमरे में उससे बातें कर रही थी,,,,)



भैया तुमने तो राजू को कारोबार का हिस्सेदार बना कर विक्रम सिंह से रक्षा करने का पूरा इंतजाम कर लिए हो,,,

हां मेरी बहन राजू को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर मैं ठीक ही किया हूं मैं जानता हूं कि राजू ही एक ऐसा शख्स है जो विक्रम सिंह से लड़ सकता है उससे हमारी जमीन जा जात के कागजात वापस ले सकता है लेकिन बिना लालच के नहीं अब वह हमारे व्यापार को अपना भी व्यापार समझकर काम करेगा और कोई अगर आंख उठाकर देखेगा तो वह उसकी आंखों को नोच सकने में पूरी तरह से समर्थ भी है,,, लेकिन आगे का काम तुम्हें ही करना होगा सारी जिम्मेदारी अब तुम्हारे ऊपर भी है तुम्हें अपनी जवानी का जलवा दिखा कर राजू को अपनी तरफ से रीझाना होगा उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना होगा,, एक बार अगर राजू तुम्हारी बुर देख लेगा,,,(साड़ी के ऊपर से ही अपनी बहन की बुर पर हाथ लगाते हुए) तब वो जिंदगी भर तुम्हारा दीवाना हो जाएगा,,,,, और फिर विक्रम सिंह से हमारे जमीन जा जात के साथ-साथ तुम्हारी जवानी की रक्षा भी करेगा,,,,



बात तो तुम ठीक ही कह रहे हो भैया,,,, तुम्हारी बात मान कर अब मैं भी पूरी तरह से बेकरार हो गई हूं राजू को अपनी जवानी दिखाने के लिए मैं भी देखना चाहती हूं कि एक औरत की जवानी उसके नंगे बदन को देख कर एक जवान लड़का जो कि एकदम सीधा साधा है कैसे अपनी राह भटक कर औरत का दीवाना बन जाता है,,,,।

(सोनी जानबूझकर अपने भाई के सामने इस तरह की बातें कर रही थी वह तो पहले से ही राजू की दीवानी हो चुकी थी राजू पहले से ही उसके बदन को भोगता आ रहा था,,, अपनी बहन की बात को सुनकर खुश होता हुआ लाला बोला,,,)

हाय मेरी रानी राजू को बाद में देना लेकिन पहले मुझे दे दो अब मुझसे रहा नहीं जा रहा,,, है,,,(इतना कहने के साथ ही डाला अपनी बहन की कलाई को पकड़कर उसे अपने बिस्तर पर खींच लिया और अगले ही पल सोनी अपने भाई के ऊपर उसके बदन के ऊपर लेट गई थी और लाला अपनी बहन के लाल लाल होठों का रसपान करते हुए साड़ी के ऊपर से ही उसकी गोल-गोल गांड को दोनों हाथों से जोर जोर से दबा रहा था देखते ही देखते लाला अपनी बहन के बदन से उसकी साड़ी को उतारने लगा और पलक झपकते ही वह अपनी बहन के बदन से सारे कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,, लाला अपनी बहन के कसे हुए बदन का पूरी तरह से दीवाना था लाला को अपनी बहन की चूची उसकी गांड उसकी बुर सब कुछ अच्छी लगती थी क्योंकि बुर का कसाव अभी भी बरकरार था चूचियों का कड़ापन उसे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता था और गांड का उभार एकदम जानलेवा था जो कि लाला को हमेशा परास्त कर देता था,,,,,,,



लाला अगले ही पल अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच झुक कर उसकी बुर को अपने होठों से चाट रहा था अपनी जीभ उसकी बुर की गहराई में डाल रहा था और सोनी बिस्तर पर मचल रही थी कुछ देर तक अपनी बहन की बुर की सेवा करने के बाद लाला अपने लंड को अपनी बहन के मुंह में डालकर अंदर-बाहर करते हुए उसके मुंह को ही चोदना शुरु कर दिया,,,,,,, एक तरफ हवेली के कमरे में भाई अपनी बहन की चुदाई कर रहा था और दूसरी तरफ राजू जोकि लाला के कमरे से दो-तीन कमरा छोड़कर आराम कर रहा था सुबह से ही आज हवेली में था,,,, उसे किस तरह से हवेली में कमरे में कैद रहना अच्छा नहीं लग रहा था और इसीलिए वह अपने कमरे से बाहर आकर लैला से इजाजत मांग कर गोदाम पर जाना चाहता था वहां का कारोबार देखना चाहता था अब तो उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि वह मालिक हो गया है इसीलिए वह गोदाम के काम में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतना चाहता था अपने कमरे से बाहर आ गया और लाला के कमरे की तरफ जाने लगा लेकिन लाला के कमरे के करीब पहुंचते ही उसे लाला के कमरे से गरमा गरम सिसकारी की आवाज आने लगी और उस गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राजू का लंड खड़ा होने लगा क्योंकि वह जानता था कि लाला के कमरे में क्या हो रहा है और किसके साथ हो रहा है,,,,, राजू पहले भी लाना और सोनी को दोनों भाई बहन को रंगे हाथ पकड़ चुका था इसलिए राजू के मन में भी किसी भी प्रकार की झिझक नहीं थी और वह तुरंत दरवाजे पर खड़ा हो गया और अपने हाथ को छाती से बांधकर बड़े आराम से उस नजारे को देखने लगा जो कि बिस्तर पर लाला पीठ के बल लेटा हुआ था और सोनी एकदम नंगी होकर अपने भाई के लंड पर कूद रही थी,,,, लाला की नजर जैसे ही राजू पर पड़ी लाला बिल्कुल भी घबराया नहीं वह एकदम सहज होकर बोला,,,,।

ओहहह राजू तुम जल्दी उठ गए,,,

हां मुझे नींद नहीं आ रही थी,,,,।

(सोनी भी पीछे पलटकर राजू की तरफ देखने लगी और मुस्कुराने लगी राजू सोने की गोल गोल गांड को ही देख रहा था जो कि अपने भाई के लंड पर कूद रही थी,,, पहली बार जब राजू ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ा था तो दोनों एकदम घबरा चुके थे एकदम हक्के बक्के रह गए थे लेकिन अब राजू का इस हवेली से गहरा नाता हो चुका था इसलिए दोनों में किसी भी प्रकार की शर्म नहीं थी इसलिए तो लाला अपनी बहन की चुची को दोनों हाथों से दबाते हुए राजू से बोला,,,,।)

ओहहहह राजू अब तुमसे क्या छुपाना तुम तो अब ईस हवेली के सदस्य बन चुके हो,,,, और जल्दबाजी में दरवाजा बंद करना भूल गया तुम तो जानते हो राजू सोनी की जवानी देख कर मुझसे भी रहा नहीं जाता,,,,, क्या करूं सोनी इतनी खूबसूरत है कि देखने वालों का लंड खड़ा हो जाता है साली की बुर इतनी कसी हुई है कि ऐसा लगता है कि जैसे एक जवान लड़की को चोद रहा हूं,,,,(लगा जानबूझकर इस तरह की लुभावनी बातें राजू के सामने कर रहा था क्योंकि वह चाहता था कि इस तरह की बातें सुनकर राजू सोनी को चोदने के लिए तड़प उठे,,,,,)

वह तो देख रहा हूं लालाजी तुम्हारा लंड छोटी मालकिन की बुर में एकदम सटासट जा रहा है,,,,(दरवाजे पर कंधे को सटाए खड़े राजू का लंड भी खड़ा होने लगा था जिस पर लाला की नजर पड़ चुकी थी और वह बोला)

राजू तुम्हारा भी पैजामा तन रहा है,,,।

(इतना सुनकर राजू थोड़ा सा सक पका गया,,, अगर वो चाहता तो इसी समय इस खेल में शामिल होकर लाला की आंखों के सामने ही सोनी की बुर में लंड डालकर चुदाई कर दिया होता लेकिन वह इस समय ऐसा नहीं करना चाहता था,,, इसलिए वह बोला)

लाला और उसकी बहन सोनी



पता नहीं लाला जी ऐसा क्यों हो रहा है तुम अपना काम करो मैं थोड़ा बाहर घूम कर आता हूं,,,,।

ठीक है राजू जाते समय दरवाजा बंद कर देना,,,,।

(और इतना सुनते ही राजू कमरे का दरवाजा बंद करके पजामे के ऊपर से अपने लंड को दबाता हुआ हवेली से बाहर निकलकर राजू की उत्तेजना देखकर लाला बहुत खुश हो रहा था और सोनी को बिस्तर पर पीठ के बल लेटाते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी बुर में अपना लंड डालकर कमर हिलाते हुए बोला,,,)

देखी सोनी तुम्हें नंगी देखकर राजू का भी लंड खड़ा होने लगा था मुझे पूरा यकीन है कि अपना काम बन जाएगा,,, आज राजू हवेली में रुकेगा और आज की रात तुम से पूरी तरह से मस्त कर देना फिर देखना वह रोज रात को हवेली में रुकेगा अगर नहीं रुकेगा तो भी हवेली के चक्कर रोज लगाएगा तुम्हारी खातिर,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भैया मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करुंगी,,,,।

जैसे तैसे शाम होने लगी और राजू सोनी के नंगे बदन को देखकर बुरी तरह से उत्तेजित हो चुका था इसलिए इधर-उधर घूमने के बाद वह शाम को अंधेरा होने के बाद हवेली पर आया वह जानता था कि आज की रात उसे हवेली पर रुकना है और आज की रात हुआ सोनी से पूरी तरह से मस्ती करना चाहता था,,,,, और लाला भी उन दोनों को पूरा मौका मिले इसलिए जानबूझकर राजू से बोला,,,,।

राजू मैं एक जमीदार के घर शादी है वहां जा रहा हूं अच्छा हुआ कि तुम आज रात को ही रुक रहे हो,,, क्योंकि सोनी भी अकेली रहती है,,,,।

(लाला की शादी में जाने की बात सुनकर राजू मन ही मन खुश होने लगा और खुश होता हुआ बोला)

ठीक है आप निश्चिंत होकर चाहिए मैं हूं ना किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,

ठीक है राजू सोनी को मैं तुम्हारे भरोसे छोड़कर जा रहा हूं,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही लाला सोनी की तरफ नजर डालकर मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया)
 
,, लाला अपनी बहन सोनी को आंख से इशारा करके मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया था,,,,, अपनी बहन को आंख से इशारा करने का मतलब साफ था कि अपनी जमीन जा जात जमीदारी बचाने के लिए लाला किसी भी हद तक गुजरने को तैयार था लेकिन उसे विक्रम सिंह के हाथों अपनी जमीन जायदाद या अपने हवेली की इज्जत लूटने देना किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था इसीलिए तो वह राजू को मना लिया था जमीन दारी व्यापार मैं हिस्सेदारी देकर लेकिन अभी भी लाला का कार्य पूरा नहीं हुआ था जब तक उसकी बहन अपनी जवानी का जलवा दिखा कर राजू को अपनी तरफ आकर्षित करके उसे संभोग सुख प्रदान ना कर दे क्योंकि लाला का भी यही मानना था कि जब तक मर्दों में औरतों को पाने की लालच नहीं होती तब तक वह लोग किसी भी तरह का बेवजह दूसरों के लिए खतरा उठाने के लिए तैयार नहीं होते,,,,, और राजू को इस खतरे में उतारने के लिए व्यापार में हिस्सेदारी का लालच और दैहिक सुख देना बहुत जरूरी था इसलिए लाला इस बहाने से हवेली से बाहर निकल गया था इस बात से अनजान की सोनी का तो पहले से ही राजू से शारीरिक संबंध स्थापित है और वह दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे से खूब मजा भी करते हैं,,,,



सोनी चाहती तो अपने भाई को अपनी और राजू की हकीकत को बता सकती थी लेकिन वह ऐसा करना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसके भाई को किसी भी प्रकार का दुख पहुंचे कि उसकी पीठ पीछे उसकी बहन अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा करने के लिए किसी के भी साथ सोने के लिए तैयार हो जाती है रिश्ता तो अब जाकर राजू से मजबूत हुआ था पहले तो वह हवेली से बिल्कुल अनजान था हवेली वालों के लिए बिल्कुल पराया था,,,, भले ही लाला सोने की हकीकत जानने के बाद नाराज ना होता लेकिन उसके मन में एक बात की कसक रह जाती कि सोनी से उसे ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए सोनी खामोश थी,,,,



लेकिन लाला की मंजूरी से सोनी को खुला दौर मिल चुका था अब वह राजू के साथ जब चाहे तब शारीरिक संबंध बनाकर अपनी जवानी की प्यास बुझा सकती थी,,,, लाला के हवेली से बाहर जाते हैं राजू आगे बढ़ा और दरवाजा बंद कर दिया राजू की हरकत देखकर सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि राजू क्या करने वाला है,,,,, राजू तुरंत सोनी के पास आया और उसे अपनी बाहों में भर कर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया उसके होठों का रस पीने के बाद वह बोला,,,,।

सोनी मेरी जान मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि लाला ने मुझ पर इतना बड़ा एहसान कर दिए हैं,,,

तुम नहीं जानते राजू भैया का दिल बहुत बड़ा है तुम्हारी ईमानदारी तुम्हारी मेहनत और लगन देखकर भैया ने यह फैसला किया है,,,,।



ओहहहह सोनी,,,,(खुश होता हुआ वह तुरंत सोनी को उसको नितंबों के आसपास अपनी भुजाओं का घेरा बनाकर उसे उठाते हुए) आज मैं बहुत खुश हूं सच में मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं इस हवेली का मालिक हूं और यहां की हर एक चीज मेरी है यहां तक कि तुम भी,,,

वह तुम्हें तुम्हारी यूं ही देखे नहीं भैया कैसे हम दोनों को अकेला छोड़ कर हवेली से बाहर चले गए,,,,

मैं कुछ समझा नहीं,,,,

अरे बुद्धू पहले नीचे उतारो तो बताती हूं,,,,

(इतना सुनते ही राजू सोनी को नीचे उतारते हुए उसकी तरफ आश्चर्य से देखने लगा) सुनो राजू एक तुम ही हो जो मेरे और भैया के बीच क्या चल रहा है जो सब कुछ जानते हो और आज तुमने देख ही लिए तुम्हारे सामने भैया बिल्कुल भी शर्म किए बिना कैसे मुझे चोद रहे थे,,,

हां वह तो है,,,,



अरे बुद्धू इसका मतलब साफ है कि तुम भी मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो आखिरकार तुम हमारे राज के राजदार जो हो इसलिए तुम्हें भी तो थोड़ा सुख देना चाहिए ताकि तुम भी अपना मुंह बंद रखो भैया यह चाहते हैं,,,,

क्या लाला ने ऐसा अपने मुंह से कहें,,,,

तो क्या बुद्धू तभी तो तुम्हारी आंखों के सामने ही मेरी चुदाई कर रहे थे और तुमसे बिलकुल भी घबरा भी नहीं रहे थे और इस बात का डर उनके मन में बिल्कुल भी नहीं था कि कल जान जवान लड़के के सामने अपनी ही बहन को चोद रहे हैं,,,,,

ओहहहह मेरी जान अब मुझे समझ में आएगा तभी मैं सोचु कि लाला इतने बेशर्म कैसे हो गए वरना औपचारिक रूप से कोई भी होता तो उस तरह के हालात में एकदम से घबरा जाता लेकिन लाला के चेहरे पर घबराहट बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम सहज थे,,,,,



तो सोचो राजू आज भैया की तरफ से तुम्हें दो दो उपहार मिले हैं एक तो व्यापार जमीदारी में हिस्सेदारी एकदम मालिक की तरह हो और दूसरी में जिसे पाकर तुम धन्य हो जाओगे,,,,

ओहहह मेरी जान तुम्हें पकड़ तो मैं सचमुच में धन्य हो गया हूं,,,,, फिर देर किस बात की है जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का,,,।

(राजू की यह बात सुनकर सोनी हंसने लगी और उसे हंसता हुआ देखकर राजू बोला)

तुम हंसते हुए स्वर्ग की परी लगती हो,,,,

चल झूठा,,,,अब, मैं चली खाना बनाने,,,,

खाना बनाने,,,(इतना कहने के साथ ही सोने की कलाई पकड़ कर उसे रोक लिया)

तो क्या खाना नहीं खाना है क्या,,,?



तुम्हें देखकर ही मेरा पेट भर गया है अब तो बदन की भूख है पेट कि नहीं जो कि तुम्हें चोदने के बाद ही मिटेगी,,,,

अरे बुद्धू अभी तो बहुत समय है,,,, सुबह तक का समय हम दोनों के पास है और अभी तो रात की शुरुआत हुई है अभी तो खाना बनाने का समय है जाकर तुम्हारे लिए थोड़ा पकवान बना लो उसके बाद मजा करेंगे,,,,

सोनी की नंगी गांड से खेलता हुआ राजु



मेरी बात समझ में नहीं आती जमींदार होकर भी इतनी बड़ी हवेली के मालिक होकर भी खाना बनाने वाली नौकरानी नहीं रख सकते,,,,

नहीं रख सकते पता है क्यों,,,, क्योंकि मेरे और भैया के बीच जो संबंध है तुम देख ही चुके हो अगर घर में नौकरानी रहेगी तो औरतों की आदत तुम जानते हो हमेशा नजर गड़ाए रहती हैं और अगर हम दोनों का राज खुल गया तो पूरे गांव में हल्ला मच जाएगा इसीलिए भैया खाना बनाने वाली कोई नौकरानी नहीं रखते भले ही नौकर रखते हैं और वह भी हवेली के बाहर पहरेदारी करने के लिए हवेली के अंदर नहीं,,,,

ओहहह अब मुझे समझ में आया,,,,

समझ में आ गया ना मेरे राजा अब मुझे जाने दो खाना बनाने के बाद जितना चाहे उतना प्यार कर लेना,,,,

चलो कोई बात नहीं लेकिन एक शर्त पर,,

क्या,,,?

राजू और सोनी



तुम्हें अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर खाना बनाना होगा और सुबह तक बिना कपड़ों के रहना होगा,,,,

पागल हो गए हो क्या,,,(हंसते हुए सोनी बोली तो राजू एक झटके से उसकी कलाई पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसे सीने से लगा लिया पलभर में ही राजू के तन बदन में मदहोशी जाने लगी उसकी आंखों में नशा सा छाने लगा और वह सोनी की आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,)

हां पागल हो गया हूं,,,(सोनी के खूबसूरत चेहरे पर अपनी उंगली को ऊपर से नीचे तक घुमाते हुए) तुम्हारे हुस्न में,,,, तुम्हारी खूबसूरती में,,,,(और तुरंत अपने दोनों हाथ को सोनी के पीछे ले जाकर उसकी गोल-गोल खान को अपनी हथेली में जोर से दबोच कर अपनी तरफ सटाते हुए,,) तुम्हारी गांड देखकर पागल हो गया हूं,,,,(संजू की इस तरह की हरकत से सोनी के तन बदन में भी आग लगने लगी उसकी आंखों में भी खुमारी छाने लगी वह मदहोश होने लगी वह भी राजू की आंखों में आंखें डाल ते हुए जवाब देते हुए बोली)



तुम्हें जैसा पसंद होगा मैं वैसा ही करूंगी,,,,,।

(और इतना सोनी के मुंह से सुनना था कि राजू ने तुरंत उसकी दोनों बाहों को पकड़कर घुमा दिया और उसे पीछे से अपनी बांहों में भरते हुए सीधे अपने दोनों हथेलियों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर रखकर दबाते हुए उसकी गर्दन पर चुंबन करने लगा राजू की इस हरकत से सोनी के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुट में लगी वह मदहोश होने लगी उसकी गोल-गोल कांड पर राजू का लंड चुभ रहा था जिसे वह खुद अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए राजू के लंड की चुभन को अपनी गांड पर महसूस करने लगी,,,,और सिसकारी भरते हुए बोली,,,)

सहहहह ओहहहहह राजु,,,,ऊममममम,,,

(राजू मदहोश होकर सोने की बड़ी बड़ी चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा और साथ ही अपने तने हुए लंड को जोकी पर जाने के अंदर कैद था उसे बार-बार उसके नितंबों के बीच गडाने लगा,,, राजू की हरकत से पलभर में ही सोनी के पसीने छूटने लगे उसकी बुर से मदन रस का रिसाव होने लगा और देखते ही देखते राजू एक-एक करके सोने के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और अगले ही पल उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज की कैसे दम आजाद हो गई और खुली हवा में सांस लेते भी ऊपर नीचे होने लगी जिसे राजू तुरंत अपने हाथों में दबोच कर उसका रस नीचोड़ने लगा,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से सोनी की चूची से खेलता रहा और फिर ब्लाउज को उसकी दोनों बाहों में से पीछे की तरफ खींचते हुए निकालनी शुरू कर दिया और सोनी भी उसका साथ देते हुए अपने बदन को एकदम ढीला छोड़ दी और अगले ही पल राजू सोनी का ब्लाउज उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया,,,, और फिर उसकी कमर में ठुंशी हुई उसकी साड़ी की गठान को खींचकर उसे खोलना शुरू कर दिया और साड़ी की किनारी को पकड़कर धीरे-धीरे खींचने लगा और सोनी एकदम मस्त होकर अपने हाथों को ऊपर की तरफ उठाकर गोल गोल घूमने लगी जैसे जैसे साड़ी को खींच रहा था साड़ी के साथ सोनी गोल-गोल घूम रही थी एक अद्भुत दृश्य हवेली के अंदर नजर आ रहा था जिसे देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था बेहद अद्भुत और उन मादक से भरा हुआ या दृश्य मदहोश कर देने वाला था राजू जो कि गांव का लड़का था और यह सामान्य सा लड़का हवेली की इज्जत की साड़ी उतार रहा था,,,, और देखते ही देखते राजू सोनी के बदन से साड़ी को भी उतार कर फेंक दिया और सोनी इस समय उसकी आंखों के सामने सिर्फ पेटीकोट में खड़ी थी,,,,

उत्तेजना के मारे सोने की सांसे बेहद गहरी चल रही थी और वह अपनी आंखों में 4 बोतलों का नशा लिए राजू की तरफ देख रही थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे राजू को कच्चा चबा जाएगी क्योंकि इस कदर उसकी आंखों में मदहोशी छाई हुई थी उसका बस चलता तो इसी समय राजू को जमीन पर पटक कर उसके लंड पर अपनी गांड पटकना शुरू कर देती,,,,, पेटीकोट में खड़ी सोनी को देखकर राजू बोला,,,।

वाह मेरी जान बहुत खूबसूरत लग रही हो तुम्हारे बदन से कपड़े उतारना भी एक कला है जिसका सुख केवल एक किस्मत वाला ही भोग सकता है और इस समय वह किस्मत वाला मैं हूं,,,,(जवाब में बिना कुछ बोले सोनी केवल गहरी गहरी सांस ले रही थी और अगले ही फल राजू उसकी तरफ आगे बढ़ा और उसकी पेटीकोट की डोरी को अपनी उंगली में पकड़कर खींचने वाला था कि सोनी उसकी तरफ देख कर बोली,,,,)

लेकिन तुम्हें भी मेरी बात माननी पड़ेगी राजू,,,,

बोलो मेरी जान तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूं,,,,,

तुम्हें भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा ही रहना होगा तुम अगर मेरे अंगों को देखोगे तो मैं भी तो तुम्हारे लंड को देखूंगी,,,,,

कोई बात नहीं मेरी जान तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूं,,,,, लेकिन जिस तरह से मैं तुम्हारे बदन से कपड़े उतार रहा हूं उसी तरह से तुम्हें भी मेरे कपड़ों को अपने हाथों से उतार कर मुझे नंगा करना होगा,,,।

ठीक है मेरे राजा ,,,(सोनी मुस्कुराते हुए बोली)

और फिर राजू पेटीकोट की दूरी को एक झटके से खींचकर कमर से बनी हुई पेटीकोट को एकदम खिला कर दिया और अगले ही पल पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर थोड़ा सा खोल कर ढीला किया और कमर से ही सोने की पेटीकोट को अपने हाथ से नीचे छोड़ दिया और पेटीकोट तुरंत भरभरा कर सोनी के खूबसूरत कदमों में ढेर हो गया,,,, हवेली के अंदर हवेली की शोभा बढ़ा रही सोनी पल भर में ही पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी एकदम निर्वस्त्र कपड़े का रेशा तक उसके बदन पर नहीं था,,,,,

सोनी अपनी अवस्था पर थोड़ा सा शर्मा रही थी और यह देखकर राजू बोला,,,,

तुम शर्मा रही हो मेरी रानी मुझे यकीन नहीं हो रहा है,,,,

क्यों शर्मा नहीं सकती क्या,,,,?

तभी तो आश्चर्य की बात है दिन-रात मेरे लंड को अपनी बाहों में लेकर मस्त होने वाली औरत आज शर्मा रही है,,,,

क्या करूं मेरे राजा थोड़ा बहुत तो शर्म अभी भी मेरे में बाकी है वरना भैया के सामने ही तुम्हारे लंड पर चढ़ गई होती,,,,

अच्छा हुआ ऐसा नहीं कि वरना तुम्हारे भैया के अनजाने पन का मजा कैसे लिया जाता,,,,

ठीक कह रहे हो राजू,,,,

मैंने तो अपना काम कर दिया,,,(सोनी की गांड को अपनी हथेली में कस के दबाते हुए,,) अब तुम भी अपना काम करो मेरी जान,,,,

(इतना कहने के साथ ही सोनी मुस्कुराने लगी और राजू की तरफ एक कदम आगे बढ़ा कर अपने होठों को उसके होंठ पर रखकर चुंबन करने लगी और फिर राजू के होठों पर चुंबन करते हुए ही वह राजू के कुर्ते को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी राजू जी सोनी का साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर करके अपना कुर्ता निकलवाने में सोने की मदद करने लगा और अगले ही पल सोनी राजू के कुर्ते को उतार कर फेंक दी कुर्ते के उतरते ही राजू की चौड़ी छाती एकदम से चमकने लगी राजू की छाती देख कर ही औरत इस बात का अंदाजा लगा लेती थी कि राजू के मर्दाना अंग में कितना जान है और इस समय सोनी जोकि अंदाजा नहीं बल्कि महसूस कर चुकी थी वह एक बार फिर इसे एहसास भी डूबने लगी कि राजू का लंड उसकी बुर में जाएगा तो कितना मजा आएगा,,,

सोनी की आंखों में मदहोशी छा रही थी सोनी अपने होठों को राजू की छाती पर रखकर उसकी छाती का चुंबन करने लगे और उत्तेजना के मारे उसकी एक छाती को औरत की छाती की तरह अपनी हथेली में दबोच कर दबा दी जिससे राजू एकदम से चौक कर हल्का सा चीख पड़ा लेकिन अगले ही पल उसे इस बात का एहसास हुआ कि सोनी उसके बदन से खेल रही है इसलिए मैं कुछ बोला नहीं और सोनी अपनी मादक अदाओं बिखेरते हुए अपने होठों को संजू की छाती से रगडते हुए नीचे की तरफ आने लगी,,,,,,, देखते ही देखते अपने घुटनों के बल बैठ कर राजू के पजामी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगी और अगले ही पल राजू का मुसल जैसा लंड पजामे की कैद से एकदम आजाद हो गया राजू का लहराता हुआ लंड देखकर सोनी के मुंह में पानी आ गया क्योंकि बहुत दिनों बाद वह राजू के लंड को देख रही थी इसलिए उससे रहा नहीं गया और वह हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को पकड़ ले और उसे अपनी मुट्ठी में दबाने लगी,,,, यह देखकर राजू बोला,,,)

सहहहह आहहहहह सोनी मेरी जान दबाने से अच्छा है कि अपने मुंह में ले लो,,,,

मेरा भी मन बहुत कर रहा है राजा लेकिन खाना बनाने के बाद,,,

ओहहहह सोनी तुम तो एक ही बात पर अटक गई हो चलो छोड़ो अच्छे से मुंह में एक बार लेकर निकाल दो बार मुझे भी थोड़ा सुकून मिल जाएगा,,,,,।

(इस बार राजू की बात मानते हुए राजू की तरफ देखते हुए उसकी आंखों में आंखें डाल कर उससे इस आरोही सहारे में बातें करते हुए सोनी लंड की जड़ को अपनी दो उंगलियों से पकड़कर राजू की लंड के सुपाड़े को अपने होठो के बीच दबाकर उसे अपने अंदर लेने लगी सोनी अपने होठों का कसम और दबाव राजू के लंड पर पूरी तरह से बढ़ाते हुए उसे अंदर की तरफ ले रही थी और राजू को ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उसका मोटा तगड़ा लंड सोनी के मुंह में नहीं बल्कि उसकी बुर में घुस रहा हो राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था और उसकी आंखें मदहोशी में बंद हो चुकी थी और देखते ही देखते सोनी राजू के समूचे लंड को अपने गले में उतार कर उसे पूरी तरह से मस्त करते हुए कुछ पल तक उसी अवस्था में रुकी रही जब उसे एहसास हुआ कि उसकी सांस अटक रही है तो वह फिर उसी तरह से ही अपने होठों का दबाव उस पर बनाए हुए उसे धीरे-धीरे करके अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और जैसे ही लंड मुंह में से बाहर निकला राजू एकदम से मस्त होते हुए अपनी आंखों को खोल दिया और सोनी की तरफ देखते हुए बोला,,,।

निकाल कर दी मेरी जान बहुत मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि तुम्हारे मुंह में नहीं बल्कि तुम्हारी बुर में जा रहा है,,,,

सोनी राजू के मोटे तगड़े लंड से खेलती में



अभी नहीं खाना बनाने के बाद,,,(और इतना कहने के साथ ही सोनी अपनी जगह से खड़ी हुई और अपनी गांड मार खाते हुए रसोईघर की तरफ जाने लगी और उसकी गोल गोल गांड को देखकर राजू बोला,,,)

रुको मैं भी आता हूं,,,,
 
राजू की बात मानते हुए सोनी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी और वादे के मुताबिक रात भर सोने को बिना कपड़ों के नंगी ही रहना था यह एहसास सोनी के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था,,,,,, एक अद्भुत अनुभव के लिए वह भी तैयार हो चुकी थी लेकिन अपने कपड़े उतारने के बाद उसने राजू को भी बिना कपड़ों के हवेली में घूमने के लिए बोली थी,,, जिसमें राजू को किसी बात का एतराज नहीं था वह भी जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया था और राजू को निर्वस्त्र अवस्था में देखकर सोनी मुस्कुराते हुए अपनी गोल-गोल गांड को पानी भरे गुब्बारे की तरह हिलोरे मारते हुए खाना बनाने के लिए जाने लगी,,,, सोनी की गदराई गांड को देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह भी,,, सोनी के पीछे पीछे चल दिया,,,,।



इतनी बड़ी हवेली में सोनी और राजू के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था लाला पहले से ही दोनों को समय देने के लिए एक बहाने से हवेली से बाहर निकल गया था राजू की खुशी का ठिकाना ना था लाला ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी में उसे हिस्सेदारी जो दे दिया था अब वह भी लाला से कम नहीं था वह भी मालिक ही बन गया था और तो और जमीन जायदाद के साथ-साथ सोनी के रूप में जोरु भी मिल गई थी,,,, इसलिए उसकी खुशी दोगुनी हो चुकी थी खुशी के मारे वह काफी उत्तेजित भी था आज की रात में सोने के साथ खूब मजे करने वाला था,,,,।

देखते ही देखते सोनी रसोई घर में पहुंच गई संपूर्ण नग्न अवस्था में एकदम नंगी पहली बार उसे इस बात का अनुभव हो रहा था कि घर में नंगी घूमने पर कैसा महसूस होता है वह काफी उत्तेजित और अच्छा महसूस कर रही थी,,,,,,, सोनी को कुछ ज्यादा बना नहीं था सिर्फ थोड़ी सी खीर और थोड़ी सी पूरी बनाना था 2 दिन के लिए इसलिए वह जल्दी से चूल्हा जलाई हो उस पर खीर रख दी,,,, भले ही सोनी हवेली में रहती थी लेकिन,,, खाना बनाने का जुगाड़ चूल्हे पर ही था और रसोईघर हवेली से सटकर हवेली के पीछे की तरफ था जो कि पूरी तरह से दीवार से घिरा हुआ था,,,,, राजू पीछे-पीछे रसोई घर में पहुंच गया था जहां पर सोनी नंगी होकर खाना बना रही थी संजू थोड़ी सी दूरी पर खड़ा होकर सोने की खूबसूरती को अपनी आंखों से पी रहा था नंगी होने के बाद तो सोनी स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लगती थी बदन में जरा सा भी ज्यादा चर्बी नहीं थी जो भी थी एकदम सीमित थी जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती में चार चांद लग जाता था कमर के नीचे नितंबों का गहरा हो तो बेहद अद्भुत था मानो कि जैसे चांद खिल गया हो,,,,, जरा सा दबा देने पर गांड एकदम टमाटर की तरह लाल हो जाती थी जिसे देखने में भी एक अद्भुत आनंद प्राप्त होता था,,,।



अंधेरा छा चुका था इसलिए रसोई घर में लालटेन जलाया हुआ था जिसकी पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था राजू की नंगा और सोनी भी नंगी दोनों इस समय अद्भुत जोड़ी लग रहे थे,,, सोनी को इस बात का एहसास था कि उसके ठीक पीछे राजू खड़ा होकर उसे देख रहा है वैसे तो राजू से सोनी को शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी लेकिन इस तरह के हालात पहली बार उसके सामने आ रहे थे इसलिए वह खाना बनाते समय राजू की मौजूदगी से शर्म आ रही थी और यह शर्म पन उसके तन बदन में उत्तेजना की हवा भर रहा था,,,, बैठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड और ज्यादा बड़ी लग रही थी जिसे देख देख राजू अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था,,,,, सोनी तुरंत आटा एक बड़े से बर्तन में लेकर उसमें पानी डालकर उसे मिलाने लगी ताकि पूरी बना सके और ऐसा करते हुए देखकर राजू से सोने की मदमस्त कर देने वाली जवानी देखी नहीं गई और वह तुरंत सोनी के करीब आकर बैठ गया और उसकी नंगी पीठ पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा,,,।



आहहहह राजू कुछ देर तक तो रुक जाओ उसके बाद तो मैं तुम्हें रोकने वाली नहीं हूं,,,,

हाय मेरी रानी है मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है,,,(ऐसा कहते हुए राजू सोने की पीठ पर चुंबन करते हुए अपने एक हाथ को उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले जाकर उसकी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसकी बुर को पूरी तरह से अपनी हथेली के नीचे ढक लिया,,,, सोनी संपूर्ण रुप से जवानी से भरी हुई थी इसलिए राजू की यह हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसके मुख्य हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहहह आहहहहह,,,, राजू अभी रहने दो वरना मैं खाना नहीं बना पाऊंगी,,,,



कोई बात नहीं मैं तुम्हारा दूध पीकर अपनी भूख मिटा लूंगा,,,

(राजू किस तरह की बात सुनकर और उसकी कामुक हरकत की वजह से मदहोशी के आलम में मुस्कुराते हुए सोनी बोली)

थोड़ा सब्र करो मेरे राजा तुम्हें दूध के साथ-साथ अपनी बुर की मलाई भी खिलाऊंगी,,,

ओहहहह मेरी रानी,,,,(इस तरह की बातें सुनकर राजू से रहा नहीं गया और वह अपनी बीच वाली उंगली को तुरंत सोनी की बुर में प्रवेश करा दिया) तुम तो मुझे पागल बना कर छोड़ोगी,,,,,,,

(और राजू की इस कामुक हरकत पर सोनी आटा गूथते हुए पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहरह आहहहहह,,,,, राजू रहने दे नहीं तो यही मेरा पानी निकल जाएगा,,,,





पानी मत बोलो रानी अमृत है अमृत थोड़ा सा साथ दो तो तुम्हारी बुर से निकले अमृत को अपने गले में गटक जाऊं,,,,,

नहीं रहने दो राजा मैं कहां भागी जा रही हूं,,,,,(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली हालांकि राजू की हरकत की वजह से उसकी बुर पानी आने लगी थी उसका भी मन कर रहा था अपना गर्म पानी निकालने को उससे भी सफर नहीं था वह तो सिर्फ यूं ही राजू को बोल रही थी लेकिन फिर भी राजू मानने वाला नहीं था वह सोनी की नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला,,,)

बाद की बाद में देखेंगे रानी थोड़ा सा गांड उपर उठा लो,,,,(इतना कहते हुए राजू बिना सोनी की इजाजत ही वह उसकी गोल-गोल गांड को ऊपर की तरफ उठा दिया और ऐसे हालात में राजू को सोनी का गुलाबी छेद लालटेन की पीली रोशनी में भी एकदम साफ नजर आ रहा था,,,, राजू और सोनी दोनों संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र अवस्था में थे इस तरह के माहौल में जीन६ इस पल को महसूस करना बहुत ही कम लोगों के नसीब में आता है और इस समय सोनी और राजू दोनों नसीब के बलवान थे,,,,, राजू एक बार फिर से सोनी के गुलाबी छेद पर हथेली रखकर सीहरते हुए बोला,,,)





सहहहरह आहहहहहह मेरी रानी तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ा है और तुम कहती हो बाद में,,,,, तुम्हारी तड़प देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने होठों को सीधे सोनी की बुर पर लगा दिया और चाटना शुरू कर दिया,,,, अगले ही पल सोनी एकदम से गनगना गई एकदम से मदहोश हो गई और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी वह अपनी गांड को हवा में ऊपर उठाए हुए आटे को जोर जोर से अपनी हथेली में दबाकर अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि राजू पूरी तरह से उसके गुलाबी छेद पर छाया हुआ,, था,,,

हवेली के पीछे बने रसोई घर में सोनी राजू को पूरी तरह से अपने वश में किए हुए उससे अपनी बुर चटवा रही थी और साथ में भोजन भी बना रही थी,,,,



सहहहह आहहहहह राजू,,,,आहहहहहहह,(उत्तेजना के मारे अपने लाल लाल होंठ को दांत से दबाते हुए वह गरमा गरम सिसकारी ले रही थी वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी और राजू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए उसके गुलाबी छेद में एक उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करता हुआ अपनी जीभ से उसे चाट कर मस्त भी कर रहा था,,,,, लालटेन की पीली रोशनी में राजू अपनी मालिक की छोटी बहन से पूरी तरह से मदहोश बनाया हुआ था लाला की बहन भी अपनी गांड को ऊपर उठा कर मजा ले रही थी हालांकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि राजू अपना लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोदने के लिए तड़प रहा हूं लेकिन राजू उसकी तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था,,,, सोनी का गला उत्तेजना के मारे सूखता चला जा रहा था जिसे वह बार-बार अपने थूक से गीला करने की कोशिश कर रही थी,,,,,,



गजब का काम रस टपक रहा था इस दृश्य से रसोई घर में सोनी पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में अपनी गांड को ऊपर उठाएं हुए आटा भी गुंथ रही थी और राजू को अपनी बुर का मजा भी दे रही थी राजू पागलों की तरह उसकी बुर की मलाई को जीभ से चाट कर अपने गले के नीचे उतारकर तर हो रहा था,,,, देखते-देखते सोनी की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,,, वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुकी थी इसलिए राजू उसे और ज्यादा मस्त करते हुए एक साथ अपनी दो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बहार करके मजा देने लगा राजू चाहता तो उसकी बुर में लंड डालकर भी उसे चोद सकता था लेकिन वह अभी उंगली से उसकी बुर को चोदना चाहता था,,,, किसी भी पल सोनी का पानी निकलने वाला था इसलिए वह गूथे हुए आटे को कसके अपनी हथेली में दबा ली थी और अगले ही पल अपनी दूर से काम रस का फव्वारा बाहर मारने लगी बुर से निकला हुआ काम रस का फव्वारा सीधे राजू के मुंह में गिरने लगा और राजू उसे अमृत की बूंद समझकर गटकने लगा,,,,।



रात की शुरुआत बेहद धमाकेदार हुई थी सोनी झड़ चुकी थी और फिर उसने अपना सारा ध्यान रसोई तैयार करने में लगा दी और जल्दी से फिर और पूरी बनाकर तैयार भी कर दी,,,, इस दौरान वह पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थी और राज्यों की पूरी तरह से नंगा होकर दीवारों से घीरी हुई उस जगह पर इधर से उधर घूम रहा था नंगा होकर घूमने मुझे बहुत मजा भी आ रहा था वह बार-बार अपने लंड को पकड़ कर हिला दे रहा था रसोई तैयार होने तक उसका लंड ज्यों का त्यों खड़ा का खड़ा रहा था,,,, रसोई तैयार करने के बाद सोनी दो थाली में खाना लगाकर राजू की तरफ देखी तो राजू उसकी तरफ ही देखकर अपने लंड को मुठिया रहा था यह देखकर सोनी मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे अब खाना भी खाओगे या लंड ही हिलाते रहोगे,,,,

क्या करूं जान जब तक तुम्हें चोद कर अपना पानी निकाल ना दु तब तक यह खड़ा का खड़ा रहेगा,,,,। डाल भी लेना और अपना पानी भी निकाल लेना लेकिन पहले खाना तो खा लो,,,



हाय हाय मेरी रानी इतने प्यार से बुलाती हो कि पूछो मत रुको अभी आया,,,,

(इतना सुनते ही सोनी खिलखिला कर हंसते हुए दोनों हाथ में थाली लेकर रसोई घर से बाहर आ गई और हवेली के अंदर जाने लगी उसकी गोरी गोरी मटकती हुई गांड लालटेन की रोशनी में भी एकदम साफ झलक रही थी और राजू वहां पहुंच कर तुरंत लालटेन को अपने हाथ में ले लिया और रोशनी दिखाते हुए सोनी को आगे बढ़ने दिया क्योंकि वहां पर अंधेरा बहुत था,,,,, देखते ही देखते दोनों मेहमान कच्छ में आ गई और कुर्सी पर बैठने के बजाय सोनी नीचे ही दरी बिछाकर थाली को रख दी और दोनों नग्न अवस्था में ही पलाथी मारकर बैठ गए,,,। राजू को भूख भी लगी थी इसलिए वह जल्दी से खीर पुरी खाने लगा और खाना इतना स्वादिष्ट था कि बार-बार सोनी की तरफ देख कर खाने की सारी कर रहा था और राजू के मुंह से अपने बनाए खाने की तारीख सुनकर सोनी फुले नहीं समा रही थी,,,, थोड़ी ही देर में दोनों खाना खाकर तेरी तो हो चुके थे पेट की भूख तो मिल चुकी थी लेकिन जिस्म की भूख अभी भी बाकी थी दोनों में बरकरार भी थी,,,, राजू से आप सब्र करना मुश्किल हो जा रहा था इसलिए मैं तुरंत आगे बढ़ा और सोनी को अपनी गोद में उठा लिया और बोला,,,।

अब तो मुझे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा है जल्दी चलो मेरी रानी तुम्हारी बुर में लंड डालना है,,,

अरे अरे पगला गए हो क्या,,,, मुझे नीचे उतारो मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,,,



नहीं अब मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूंगा मेरे मुंह में ही मुत लेना,,,,

(राजू के मुंह से यह बात सुनकर सोनी हैरान भी हुई और हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

क्या,,,, क्या बकवास कर रहे हो मैं भला तुम्हारे मुंह में क्यों मुतु,,,,,

क्यों इसमें क्या खराबी है तुम्हारी बुर की मलाई चाट सकता हूं तो क्या तुम्हारे घर से निकला हुआ पेशाब नहीं पी सकता,,,

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं मुझे शर्म आ रही है मुझे नीचे उतारो,,,,(राजू के प्रस्ताव को सुनकर सोनी पूरी तरह से हतप्रभ हो गई थी उसे समझ में नहीं आता कि वह क्या करें कुछ पल के लिए तो कल्पना भी करने लगी थी कि कैसे वहां अपनी दोनों टांगें फैलाकर अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रही है जो कि सीधे राजू के मुंह में गिर रही हो राजू बेझिझक पेशाब की धार को अमृत की धार समझ कर उसे अपने गले के अंदर गटक रहा हैं,,,, इस कल्पना से ही सोने के तन बदन में आग लगे वह पूरी तरह से मदहोश हो गई लेकिन उसे शर्म आ रही थी क्योंकि इस बारे में उसने आज तक सोची भी नहीं थी,,,, इसलिए फिर से बोली,,,)

लाला की बहन और राजू



नहीं राजू मैं ऐसा नहीं कर सकती तुम मुझे नीचे उतारो मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

अच्छा कोई बात नहीं तुम्हें मैं इसी तरह से पेशाब कराने के लिए ले चलता हूं,,,, बोलो कहां पर जाना है,,,,

वहीं पर हवेली के पीछे,,,,

ठीक है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू उसी तरह से उसे गोद में उठाए हुए हवेली के पीछे रसोई घर के आगे की तरफ ले जाने लगा और देखते-देखते सोनी को हवेली के पीछे एकदम कोने में ले जाकर खड़ा हो गया जहां पर थोड़ी बहुत झाड़ियां उगी हुई थी वहां पर पहुंचते ही सोनी बोली,,,)

बस यहीं पर उतार दो,,,

(ओर इतना सुनते ही राजू से नीचे जमीन पर उतारते हुए बोला,,,,)

चलो कोई बात नहीं मेरी बात नहीं मानी तो ना सही लेकिन तुम्हें पैसा आप खड़े होकर करना होगा बैठ कर नहीं जैसा कि हम लोग करते हैं,,,

क्या राजू अब यह क्या पागलपन है,,,

Raju lala ki bahan k nange badan se khelta hua



पागलपन नहीं मेरी जानू तुम्हारे प्रति मेरा प्यार है मैं तुम्हें हर एक रुप में देखना चाहता हूं,,,

तुमने एकदम पागल हो मैंने आज तक इस तरह से पेशाब नहीं की हुं,

तभी तो कह रहा हूं खड़ी होकर करो जैसा कि मैं कर रहा हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने लंड को पकड़ कर पेशाब करने लगा उसके लंड से पेशाब की धार बहुत दूर तक जा रही है जिसे देखकर सोनी के तन बदन में आग लग गई उसके मन में काम भावना एकदम से प्रज्वलित होने लगी और हर राजू की बात मानते हो उसी की तरह खड़ी होकर अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा खोल लिया और अपनी कमर को आगे की तरफ करके अपनी बुर से पेशाब की धार मारने लगी जो कि राजू के जितना दूर तो नहीं जा रही थी लेकिन लगभग लगभग वहां तक पहुंच जरूर जा रही थी क्योंकि सोनी को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी सोनी को इस तरह से पेशाब करता हुआ देखकर राजू के लंड का तनाव और ज्यादा बढ़ने लगा राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगा और वह पेशाब करने के बाद तुरंत अपने हाथ को सोनी की बुर पर रहती है जिसमें से पेशाब की धार अभी भी फूट रही थी और उसकी हथेली की उंगलियों को भी कहते हुए झरने की तरह उसकी उंगलियों के बीच में से पेशाब की धार निकलने लगी अब राजू के तन बदन में काम भावना पूरी तरह से अपना असर दिखाने लगी वह एकदम से मस्त हो गया,,,, और वह सोनी की इजाजत लिए बिना ही,,,, सोने की दोनों टांगों की तरफ झुक कर अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी बुर से निकल रही पेशाब की धार पर अपनी जीभ लगाने लगा और उसकी पेशाब की धार उसकी जीभ से स्पर्श करने लगे,,, यह एहसास सोनी के तन बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार भर रहा था वह पागल हो जा रही थी इस नजारे को देखकर वो एकदम मदहोश हो गई थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह साफ तौर पर देख रही थी कि,,,, लालटेन की पीली रोशनी में जो कि उसे गोद में उठाए हुए ही नीचे झुक कर वहां लालटेन को अपने हाथ में ले लिया था,,, शायद अपनी आंखों से यही देखने के लिए और इस समय सोनी एकदम साफ तौर पर देख रही थी कि राजू एकदम कामा दूर होकर उसके पेशाब की धार को अपनी जीभ से स्पर्श कर रहा था,,,, और उसकी बुंदो को अपने गले के अंदर गटक रहा था,,,, कुछ देर पहले राजू यही उससे बोल रहा था यही क्रिया का आनंद लेना चाहता था लेकिन सोनी शर्म के मारे इनकार कर चुकी थी लेकिन इसमें राजू की हरकत उसकी शर्म को एकदम से दूर कर दी थी और वह पागलों की तरह अपने बुर में से निकल रही पेशाब की धार कमजोर पड़ जाए इससे पहले अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर राजू के सर पर रख दी और तुरंत उसके बाल को कस के पकड़ कर उसके होठों को अपनी बुर से लगा ली जिसमें से अभी भी पेशाब की धार निकल रही थी,,,, राजू को तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी सोनी की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से पागल हो गया था और अगले ही पल अपने दोनों हाथों से सोनी की गांड को पकड़कर राजू पागलों की तरह उसकी बुर पर अपने होंठ लगाकर उसके पेशाब की धार को अपने गले के नीचे उतारने लगा या अनुभव यह पल दोनों को पूरी तरह से अपने अंदर डूबोए लिए चला जा रहा था,,,।

Is tarah se Soni raju ko apni taange khol k boor dikhati huyi



राजू एक तरफ अपना मुंह लगाकर सोने की बोल से उसकी पैसा आपको पी रहा था और दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़ कर जोर जोर से हिला रहा था क्योंकि उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह पागल हुआ जा रहा था जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि सोनी कीबोर्ड से पेशाब की धार निकलना बंद हो गई है तो वह पागलों की तरह एक झटके से उठा और तुरंत सोनी को दीवाल के सहारे खड़ी करके उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी गोल गोल गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर पीछे से उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया,,,

यह सब बड़ी जल्दबाजी में हो रहा था सोनी को भी समझ में नहीं आ रहा था लेकिन राजू की हर एक हरकतों से पागल बना रही थी इसीलिए वह किसी भी प्रकार का सवाल करना उचित नहीं समझ रही थी और जिस तरह से राजू उसके बदन को मोड़ रहा था वह उसी स्थिति में होती चली जा रही थी उसके मुंह से हल्की सी चीख तब निकली जब राजू का लंड उसकी बुर में एक झटके में ही पूरा का पूरा घुस गया और राजू उसकी कमर पकड़कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, हवेली के पीछे लाला की बहन छोटी मालकिन के मोसे गरमा गरम सिसकारी की आवाज बोल रही थी लेकिन उसे सुनने वाला यहां कोई नहीं था और उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राजू का जोश बढ़ता जा रहा था और वह कभी उसकी कमर पकड़ता तो कभी उसके दोनों संतरो को जोर से पकड़ कर दबा देता है और अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर देता,,,,

Laalten ki roshni me ek hi bistar par raju or soni



राजू की अद्भुत कामलीला हवेली में हवेली की मालकिन के साथ जारी था वह पागलों की तरह अपने मोटे लंड को सोनी की बुर में अंदर बाहर कर रहा था लड के मोटे पन और उसकी रगड़ से सोने की बुर की अंदरूनी दीवारें पूरी तरह से पसीज रही थी,, उसे बहुत मजा आ रहा था वह राजू के हर धक्के का जवाब अपनी गांड को पीछे ठेल कर दे रही थी,,,,, कुछ देर तक गरमा गरम घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,, सोनी अपनी उखडती सांसो को दुरुस्त करते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो एकदम पागल हो जाता है,,,,

हो नहीं जाता हूं तुम बना देती हो तुम्हारी जवानी देख कर तो कोई भी पागल हो जाए,,,,

चलो रहने दो अब चलो कमरे में चलते हैं लेकिन पहले अपना मुंह धो लो वरना मैं तुम्हें अपने होठों का रस पीने नहीं दूंगी,,,

अरे तुम्हारा ही तो पैसाब लगा है किसी और का थोड़ी है,,,

राजु सोनी की जबरदस्त चुदाई करता हूआ



भले किसी का भी हो लेकिन मैं तुम्हें अपने होठों का रस पीने नहीं दूंगी अगर अपना मुंह नहीं दोगे तो तुम्हें करने भी नहीं दूंगी,,,,

तुम्हें चोदने से तो आप मुझे कोई नहीं रोक सकता क्योंकि इस हवेली के मालिक ने भी इजाजत दे दिया है जाओ मेरी बहन को जी भर कर चोदो,,,,

तुम ना बिलकुल भी नहीं सुधरोगो,,,,(इतना कहते हुए हवेली के पीछे ही उसी जगह पर बने हुए हेडपंप के लग पहुंच गई और हेडपंप को चलाते हुए बोली,,,)

अब चलो जल्दी से धो लो,,,,

(राजू सोनी की बात मानते हुए अपने मुंह को पानी से धो लिया और फिर दोनों सोनी के कमरे में पहुंच गए सोनी का कमरा हवेली की ऊपरी मंजिल पर बना हुआ था जिसकी खिड़की खुली हुई थी और उसमें से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी कि कमरे में दोनों तरफ लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा रहा था,,, खिड़की के पास ही एक कुर्सी खींचकर खुद बैठ गई और दूसरी कुर्सी की तरफ इशारा करके राजू को भी बैठने के लिए बोली राजू की कुर्सी पर बैठ गया और दोनों खिड़की से बाहर देखने लगे जहां पर दरबान खड़े थे और,,,, सामने की तरफ देख कर बड़ी ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहे थे यह देखकर राजू मुस्कुराते हुए बोला,,,।)

सोनी को मजा देता हुआ





देख रही हो तुम्हारे दरबान को बड़ी ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहे हैं,,,

तुम्हारा दरबन क्या यह तुम्हारे नहीं है आखिरकार भैया ने तुम्हें भी तो अब आधा मालिक बना ही दिया है तो यह तुम्हारे भी हुए ना,,,

हां तुम सच कह रही हो यह तो मेरे भी हुए,,,, बड़ा अच्छा लग रहा है मालिक बनकर कल से देखना मैं और भी अच्छा काम करूंगा और व्यापार कारोबार को और ज्यादा बढ़ाऊंगा ,,,

तभी तो भैया तुम पर विश्वास करके आधा मालिक बना दिए हैं क्योंकि वह जानते थे कि उनके बाद तुम ही एक ऐसे हो जो उनके व्यापार हो जमीदारी को अच्छी तरह से संभाल सकते हो किसी की बुरी नजर लगने नहीं दोगे,,,,

उनके बाद अरे अभी दादा जी को कुछ थोड़ी होने वाला है,,,

दुश्मन भी तो बैठे हैं उनका बुरा करने के लिए,,,,

कौन है मुझे बताओ मैं उसे मार मार कर ठीक कर दूंगा,,,।

(सोनी राजू की बात सुनकर अंदर ही अंदर खुश हो रही थी और अच्छी तरह से समझ रही थी कि यही मौका है राजू को सच बताने का और राजू से कसम देने का कि वह जी जान से लाला के साथ साथ घर की इज्जत और हवेली के साथ साथ कारोबार की रखवाली करेगा और वह बोली)

दोनों एकसाथ मजा लेते हुए



० तुम्हारे बस का नहीं है राजू जो लोग इस हवेली का भैया का बुरा करना चाहते हैं वह लोग बहुत बड़े आदमी है,,,

अरे कौन है मुझे बताओ गी,,,,।

अरे तुम्हारा लंड तो एकदम सिकुड़ गया अभी तो मैं पूरी बात बताई भी नहीं हूं अभी से घबराहट होने लगी,,,(राजू के दोनों टांगों के बीच झूलते हुए उसके लंड की तरफ देखकर सोनी बोली)

तुम इसकी चिंता मत करो सोनी एक बार अपनी बुर की झलक दिखा दो कि फिर भी यह खड़ा हो जाएगा,,,, पहले तुम दुश्मन के बारे में बताओ,,,

राजू जमकर चोदते हुए



अब क्या बताऊं राजू भैया बड़ी मुसीबत में हूं इसीलिए तो सुबह कारोबार का मालिक तुम्हें बना रहे हैं ताकि तुम इसकी इजाजत कर सको लेकिन मुझे लगता नहीं है कि तुम भैया की उम्मीद पर खरा उतर पाओगे,,,

ऐसा कोई भी काम नहीं है सोनी जो मैं कर ना पाऊं,,,

(सोनी जानबूझकर राजू को उकसा रही थी और राजू उसकी बात को सुनकर गुस्से में उत्तेजित भी हो रहा था,,,)

यह बात है,,, तो सुनो विक्रम सिंह को तो जानते ही होगे,,,

विक्रम सिंह,,,(कुछ देर सोचने के बाद) हां याद आया 1 दिन गोदाम पर आया था लेकिन उसे देखते ही लाला को ना जाने क्या हो गया था लाला एकदम घबरा गए थे,,,

बस यही तो राजू विक्रम सिंह की ताकत बहुत ज्यादा है और हमारे पिताजी ने ना जाने कब उनके पिताजी से कुछ कर्जा लिया था जिसके एवज में जमीन जायदाद के कागजात उनके पास गिरवी रखे थे लेकिन दोस्ती के चलती है उनके पिताजी ने जमीन जायदाद के कागज को पिताजी के हाथों लौटा दिया था लेकिन आप विक्रम सिंह धमकी देकर हमारी जायदाद हवेली और कारोबार को हथियाना चाहता है यहां तक कि मुझ पर भी उसकी गंदी नजर है,,,,

सोनी मजा लेती हुई



क्या कह रही हो सोनी,,,(एकदम से क्रोधित अवस्था में)

मैं सच कह रही हूं राजू भैया नहीं चाहते कि विक्रम सिंह के हाथ में बापदादा पुरखों की जमीन दारी और हवेली के साथ-साथ करो बार उस दुष्ट विक्रम सिंह के हाथों में चली जाए और यहां तक कि मेरी इज्जत भी इसीलिए तो भैया तुम पर पूरा विश्वास करके आधा मालिक बना दिए हैं ताकि अगर उन्हें कुछ हो जाए तो तुम उनके जमीन जायदाद की रक्षा कर सको मेरी इज्जत की रक्षा कर सको,,,,

अगर यह बात है सोनी तो मैं लाला के भरोसे को टूटने नहीं दूंगा,,, क्योंकि अब लाला के साथ-साथ मेरी भी इज्जत का सवाल है कोई सहेली की तरफ कारोबार की तरफ जमीदारी की तरफ आंख उठाकर देखेगा तुम्हें उसकी आंख फोड़ दूंगा और तो और सोनी तुम्हारी इज्जत से कोई खेलने की कोशिश किया तो मैं उसे जिंदा नहीं छोडूंगा,,,,(तुरंत अपने हाथ को सोनी के सर पर रखकर कसम खाते हुए,) मैं कसम खाता हूं सोनी की तुम्हारे सर की इस हवेली और जमीन जायदाद मैं जरा सा भी हिस्सा किसी को लूटने नहीं दूंगा क्योंकि अब यह मेरा भी है,,,

(राजू की आंखों में गुस्सा साफ नजर आ रहा था और यह भरोसा भी नजर आ रहा था कि वह लाला के विश्वास को टूटने नहीं देगा वह किसी भी कीमत पर हवेली के साथ-साथ जमीन जायदाद का एक हिस्सा भी किसी गैर के हाथ में जाने नहीं देगा,,,,,, यह देखकर सोनी बहुत खुश थी अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्न हो रही थी उसे इस बात का विश्वास हो गया था कि अब उसके भैया की चिंता दूर हो जाएगी अच्छी तरह से जानती थी कि राजू किसी से भी बैठ जाएगा और उस में विजय प्राप्त करेगा,,, क्योंकि वह अपनी ताकत का परिचय दिखाते हुए दो डाकुओं को ढेर कर चुका था जिन से लड़ने की गांव में किसी की भी हिम्मत नहीं थी और उन लोगों से वीरता दिखाते हुए राजू ने विजय प्राप्त करते हुए गांव को गांव की बहू बेटी की इज्जत को भी बचाया था,,,,, एक बात का तो उसे विश्वास हो गया था कि उसकी जमीन जायदाद की रक्षा करने वाला अब मिल गया है और अब उसे एक बार फिर से अपनी जवानी की तरफ आकर्षित करके उसे पूरी तरह से अपना बनाना था औरत के जिस्म का दीवाना बनाना था जो कि वह पहले से ही था,,, उसकी सर की कसम खाने के लिए राजू अपनी जगह से खड़ा हो गया था और बात को दूसरी तरफ घुमाते हुए सोनी उसके झूलते हुए लंड की तरफ देखकर बोली,,,)

सोनी के पसीने छुड़ाता हुआ राजू



लगता है तुम्हारे बंदूक की गोली खत्म हो गई है राजा,,,,

(हाथ आगे बढ़ा कर राजू के ढीले पड़े लंड को पकड़ते हुए बोली,,,, जवाब में राजू सोनी की चूची को दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए बोला,,,)

एक बार दुश्मन नजर आ जाए तो फिर अपने आप इसमें गोली भर जाती है मेरी रानी एक बार अपनी टांग खोल कर अपनी बउर दिखा दो फिर देखना मेरा लंड कैसा दागता है,,,

हममम बड़ी जल्दी है दुश्मन की झलक पाने के लिए,,,

क्या करूं मेरी रानी,,,,(राजू एक झटके से उसकी बांह पकड़कर कुर्सी से उठाते हुए अपने सीने से लगा लिया और उसकी आंखों में आंखें डाले हुए बोला) जब जंग के मैदान में उतरे हैं तो दुश्मन सीना तान कर मिलना तो होगा ही,,,,

(राजू की हरकत और उसकी बातें सोनी के तन बदन में फिर से उत्तेजना की लहर बढ़ा रहा था लेकिन तभी उसकी नजर खिड़की से बाहर गई बाहर दरबान अभी भी जाग रहे थे और कमरे में लालटेन की रोशनी पूरी तरह से फैली हुई थी और वह दोनों नग्न अवस्था में खिड़की पर खड़े थे ऐसे में उन दोनों की नजर खिड़की पर पड़ना स्वाभाविक था इसलिए वो एकदम से हडबढ़ाते हुए बोली,,,)

राजू छोड़ो मुझे दरबार की नजर अगर पड़ गई तो गजब हो जाएगा,,,

हो जाने दो मेरी रानी,,,(सोनी की गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाते हुए राजू बोला)

अरे पागल हो गए हो क्या अगर वालों की नजर हम दोनों पर पड़ गई तो मैं बदनाम हो जाऊंगी,,,,

तो क्या हो गया तुम तो मेरी रानी हो,,,,

तुम्हारी रानी हूं तभी तो कहती हूं मैं बदनाम हो जाऊंगी तो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा,,,,

यह बात है लेकिन वादा करो कि मुझे कुछ भी करने से रोकोगी नहीं,,,

नहीं रोकुंगी छोड़ो मुझे,,,,

(इतना कहने के साथ ही सोनी की बात पर राजू उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद करता हुआ तुरंत लालटेन की तरफ गया और लालटेन को बुझा दिया और यही वह दूसरे लालटेन के साथ भी किया,,,, कमरे में अंधेरा छा गया लेकिन खिड़की खुली होने की वजह से चांदनी अंदर कमरे तक आ रही थी जिससे उजाला बरकरार था बस इस बात की तसल्ली थी कि बाहर से कोई अंदर देखने की कोशिश करने पर भी देख नहीं सकता कि क्या हो रहा है कौन खड़ा है,,,,,)

राजू का दिल धक-धका रहा था बहुत बार लाला की बहन की जवानी का रस रखने के बावजूद कि राजू एक बार फिर से उसके अंदर समाने के लिए पूरी तरह से तड़प रहा था,,,, यही हाल सोनी का भी था,,, कुछ देर पहले ही राजू जबरदस्त चुदाई करते हुए उसकी बुर की प्यास बुझा चुका था लेकिन इस समय फिर से उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, सोनी के कहने पर उसके हवेली के बाहर खड़े पहरेदार उसे इस स्थिति में देखना है इसलिए वह कमरे के दोनों लालटेन को बुझा चुका था लेकिन चांदनी रात की रोशनी खिड़की से कमरे मैं आ रही थी और पूरी ताकत से कमरे को प्रकाशित करने की कोशिश कर रही थी राजू को चांदनी रात की रोशनी में सोनी का खूबसूरत नंगा बदन कहार एक कोना साफ-साफ नजर आ रहा था,,,, सोनी अपनी भैया की मजबूरी बता चुकी थी और राजू बिना विचलित हुए लाला के द्वारा दिए गए जिम्मेदारी को अपने सर पर उठा लिया था इसके पीछे उसका भी एक लालच था वह आधा मालिक बन चुका था और साथ ही हवेली की खूबसूरत औरत को भोगने का सुख हमेशा हमेशा के लिए प्राप्त होने वाला था इसलिए वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि विक्रम सिंह जैसे मजबूत और बलिष्ठ जमीदार आदमी से कैसे मुकाबला कर पाएगा,,,, लेकिन इस समय वह विक्रम सिंह के बारे में सोच कर अपना सारा मजा किरकिरा नहीं करना चाहता था इसलिए अपना सारा ध्यान वह लाला की बहन पर केंद्रित किया हुआ था क्योंकि वह जानता था कि तब की तब देखेंगे लेकिन इस समय का मजा तो उठा लिया जाना चाहिए,,,,,

कमरे में पूरी तरह से मदहोशी का आलम छाया हुआ था दो बदन पूरी तरह से उत्तेजना से भरे हुए थे राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था और सोनी के बुर पानी से लबालब थी,,,, चांदनी रात की रोशनी में राजू मदहोशी भरी नजरों से सोनी के नंगे बदन को देख रहा था उसकी बड़ी बड़ी छातियों को देख रहा था उसकी टांग के बीच की पतली दरार को देख रहा था और सोनी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी भले ही वह राजू के साथ अनेकों बार संभोग रत हो चुकी थी लेकिन फिर भी उसकी आंखों में शर्म साफ नजर आ रही थी राजू तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी बाहों में भर कर उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,,

सोनी अब तो ठीक है ना अब तो पहरेदार की नजर नहीं पड़ेगी ना,,,,

नही,,,,(उत्तेजना के मारे कांपते होठों से उसके मुंह से इतना ही निकला और राजू उसके लाल लाल होंठ पर अपने होंठ रख दिया और कुछ देर तक उसके होठों का रसपान करने के बाद उसकी कलाई पकड़ कर उसे कुर्सी तक लाया और कुर्सी पर बिठा दिया और खुद घुटनों के बल बैठ गया कुर्सी पर बैठी हुई सोने की दोनों टांगों को फैला कर और उसके नितंबों को आगे की तरफ खींचकर एकदम किनारे कर लिया और उसकी काम रस से भरी हुई बुर पर अपने होंठ रख कर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,,,,, सोनी उत्तेजना से सिहर उठी वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच ली और उसके होठों का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी,,, और राजू पागलों की तरह अपनी जीभ को सोनी के बुर में डूबो डूबो कर चाटने लगा ,,, पूरे कमरे में सोनी की गरमा गरम सिसकारी गूंज रही थी ,,,,, राजू भले ही सोनी की बुर चाट रहा था लेकिन उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और अपनी सोच के मुताबिक ही वह अपने होठों को उसकी बुर से अलग किया और खुद खड़े होकर सोनी को भी खड़े होने के लिए बोल दिया सोनी को समझ में नहीं आ रहा था कि राजू अब क्या करने वाला है राजू ने तुरंत उसे कुर्सी के ऊपर ही अपने दोनों घुटने रखकर कुर्सी के पार्टियों को पकड़कर अपनी गोल-गोल गांव को ऊपर की तरफ उठाने के लिए बोला,,,, राजू की बात सुनकर सोनी को ऐसा लगा कि अब राजू पीछे से उसकी लेने वाला है इसलिए वह भी राजू की बात मानते हैं वह अपने दोनों घुटनों को कुर्सी के ऊपर रखकर कुर्सी के पार्टी को पकड़कर अच्छे से बैठ गई और अपनी गांड को हवा में उठा दी और लहराने लगी चांदनी रात में सोनी की गोरी गोरी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था वह उसकी गोल-गोल गांड को देखकर अपने पर काबू नहीं रख पाया और तुरंत उसकी गांड पर चपत लगाने लगा इससे सोनी को दर्द तो हो रहा था लेकिन उसे दर्द के बदले आनंद भी अत्यधिक प्राप्त हो रहा था देखते ही देखते राजू ने उसकी गांड की दोनों फांकों पर चपत लगाते हुए उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,,

सहहहह हाएएएए,,,, मेरी रानी तेरी गांड कितनी गोल गोल है कसम से तभी तो लाला भी तुझ पर पागल हुआ है,,,,(सोनी की गांड को सहलाते हुए राजू बोला,,,) सच-सच बताना लाला के साथ मजा आता है कि नहीं,,,.

नहीं रे राजू मजा तो मुझे सिर्फ तेरे साथ ही आता है,,, तेरा लंड जब मेरी बुर के अंदर जाता है ना तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई ने मुंसल डाल दिया हो,,,, ऐसा लगता ही नहीं कि किसी इंसान का लैंड है ऐसा लगता है कि गधा का अंदर जा रहा है,,,,

क्या बात कर रही है मेरी रानी,,,,ऊफफ,,, तेरे मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर तो मेरा लंड फटने जैसा हो जाता है,,,,,

आहहह देखना फट ना जाए फिर मेरा क्या होगा,,,,

तू चिंता मत कर मेरी रानी फटेगा भी तो तेरी बुर में,,,,उफफ तेरा गुलाबी छेद,,,(थोड़ी सी गर्दन तो नीचे झुका कर सोनी की बड़ी बड़ी गांड के बीचो-बीच देखते हुए बोला,,,) अब तो मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है,,,,आहहहह मेरी जान,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गया उसकी गोल-गोल गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए बस थोड़ा सा और ऊपर उठाकर अपनी जीभ को उसकी टपकती हुई बुर पर रखकर चाटना शुरु कर दिया और एक बार फिर से सोनी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,, राजू भले ही सोनी की बुर चाट रहा था लेकिन उसका ध्यान उसके दूसरे छेद पर था जो कि इस समय बहुत ही खूबसूरत लग रहा था और बिल्कुल भी देर किए बिना राजू अपने पैसे होठों को सोनी के भूरे रंग के छेद पर रख दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगा इस तरह एकाएक,,,, अपनी गांड के छोटे से छेद पर राजू के होठ और उसकी जीभ को महसूस करते ही सोनी एकदम से गनगना गई और अंदर ही अंदर सिहर उठे पल भर में उसे आम के बगीचे वाला दृश्य नजर आने लगा जब राजू ने पहली बार उसकी गांड के छेद को अपने लंड की मोटाई से खोला था उस समय दर्द तो बहुत हुआ था लेकिन मजा भी बहुत आया था लेकिन फिर से उस दर्द के बारे में सोच कर ही उसके पसीने छूटने लगे थे लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि राजू को उसकी मनमानी करने से वह रोक नहीं पाएगी क्योंकि वह पहले से ही उसे वचन दे चुकी है और वैसे भी भले ही दर्द क्यों ना महसूस हो मजे की चाहत उसे भी थे जो कि गांड मरा ने में कुछ अजीब ही मजा आता है,,,,,

सोनी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके भाई की बस का बिल्कुल भी नहीं है उसकी गांड मारना क्योंकि वह जानती थी कि उसके भाई के लंड का कड़ापन राजू के लंड के कड़क पन जितना बिल्कुल भी नहीं है,,,,, और लाला तो उसकी गांड मारने के बारे में सोच‌ ही नहीं सकता था और राजू था कि उसकी गांड के उस छोटे से छेद को अपनी जीभ से चाट रहा था और जैसे-जैसे जीभ उसकी गांड के छेद पर घूम रही थी वैसे वैसे सोनी के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह पागल हुए जा रही थी,,,।

राजू बड़ी दिलचस्पी लेकर सोनी की गांड को चाट रहा था दोनों हाथों से गांड को पकड़कर गांड चाटने का मजा ही कुछ और है,,, राजू इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि गांड मरवाने के लिए अच्छा खासा जिगर चाहिए सबके बस की बात भी नहीं है और तब तो और भी कोई भी औरत हिम्मत नहीं कर सकती जब गांड के छेद में जाने वाला लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो इसीलिए तो वह सोनी की हिम्मत को सलाम करता था सोनी अपनी गांड को गोल-गोल घुमा कर राजू की चटाई का मजा ले रही थी,,,, और देखते ही देखते राजू में अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए सोनी को पूरी तरह से मस्त कर दिया और गांड मरवाने के लिए उत्सुक भी कर दिया,,,,,

राजू अच्छी तरह से जानता था कि आज सोने की गांड मारने में तेल की जरूरत पड़ने वाली थी इसलिए वह उसी स्थिति में सोनी को छोड़कर तुम्हें तो भागता हुआ गया और रसोई घर में से एक कटोरी सरसों का तेल लेकर आ गया और उसकी धार को सोनी की गांड पर गिराने लगा,,,, सोनी तेल की धार को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी थोड़ा सा तेल राजू ने अपने लंड पर भी लगा लिया था की गांड के छेद में घुसने किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो,,,,

राजू आधी कटोरी सरसों का तेल अपने लंड और सोनी की गांड के छेद पर बर्बाद कर चुका था लेकिन वहां अच्छी तरह से जानता था कि सरसों के तेल की बर्बादी उसे कामयाबी तक ले जाएगी और देखते ही देखते राजू अपने लंड के सुपाड़े को सोने की गांड के छोटे से छेद पर सटा दिया और जैसे ही सोनी को अपनी गांड के छेद पर गरमा गरम लंड का सुपाड़ा महसूस हुआ वह तुरंत पीछे की तरफ देखते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ ले गई और राजू के लंड को पकड़ कर उसे रोकते हुए बोली,,,।)

नहीं राजा ,,,, मुझे बहुत दर्द करता है,,,

मस्त भी तो कर देता हैं,,,,

नहीं नहीं तुम मेरी बुर ले लो लेकिन गांड को छोड़ दो,,,

नहीं मेरी जान,,,(उसकी कलाई पकड़ कर उसे अपने लंड से हटाते हुए) आज बहुत दिनों बाद ऐसा मौका मिला है कि में जमकर आज तुम्हारी गांड मार सकता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से लंड को उसकी गांड के छेद पर लगा दिया और हल्का सा धक्का मारा था लंड का सुपाड़ा आधा प्रवेश करा दिया इतना तो राजू को विश्वास ही था कि वह बड़े आराम से सोनी की गांड मार सकता है क्योंकि एक बार वह इस का सुख प्राप्त कर चुका था,,, लेकिन इस हल्के से प्रहार से भी उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई राजू अच्छी तरह से जानता था कि जितना दर्द वह झेल पाएगी उससे ज्यादा मजा भी वह ले पाएगी,,,, और इसीलिए अपना प्रयास जारी रखते हुए राजू उसकी गोल-गोल गांड को अपने दोनों हथेली में दबाए हुए सकासा और अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला,,, और इस बार उसके थोक की चिकनाहट पाकर एंड का आधा बचा भाग भी गांड के छेद में समा गया और एक बार मुंह चला जाने के बाद तो पूरा का पूरा दस्ता ही अंदर घुस जाता है इसीलिए राजू के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वह तुरंत बाकी बचा लंड हल्के हल्के धक्के के पहाड़ के साथ वह पूरा का पूरा सोनी की गांड में उतार दिया,,,,,

देख रही है छीनार पूरा का पूरा लंड तुने अपनी गांड से खा गई है,,,,।

आहहहह तेरा लंड इतना स्वादिष्ट है कि थोड़ा सा खाने में मजा ही नहीं आती पूरा का पूरा खाने में ही मजा आता है,,,

तो फिर देर किस बात की है रानी पूरा का पूरा तो तु खा चुकी है अब देखने तेरी कैसे गांड मारता हूं,,,,।

(शुरू से लाला अपनी बहन की चुदाई करता रहा है लेकिन गांड मारने के बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था लेकिन राजू उसे सब सुख दे रहा था थोड़ी सी भी कसर बाकी नहीं रख रहा था इसीलिए तो सोनी राजू की दीवानी थी,,,, राजू कुर्सी पर घोड़ी बनाकर सोनी की गांड मार रहा था सोनी कुर्सी के हत्थे को कस के पकड़ कर अपने आप को संभाले हुए थी,,, शुरू शुरू में तो सोनी को बहुत दर्द हो रहा था ऐसा लग रहा था कि उसकी गांड के छेद में लंड नहीं बल्कि गरम सरिया जा रहा हो लेकिन देखते ही देखते थोड़ी ही देर में राजू का लंड गांड के छोटे से छेद में भी आनंद भरने लगा सोनी पूरी तरह से मदहोश होने लगे और देखते-देखते उसके मुंह से गर्मागर्म सिसकारी की आवाज आने लगी राजू पागलों की तरह उसकी कमर पकड़े अपनी कमर को हिला रहा था वह सोनी की गांड मार रहा था महीनों बाद उसे गांड मारने का शुख प्राप्त हो रहा था,,,,

राजू जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था और खिड़की से बाहर हवेली की पहरेदारी कर रहे दोनों पहरेदार को भी देख रहा था जो कि बीड़ी जलाकर बीड़ी का कस खींच रहे थे लेकिन उन दोनों का ध्यान हवेली के ऊपर बिल्कुल भी नहीं था बल्कि वालों सामने की ओर ध्यान करके बैठे हुए थे और ऐसा करना भी था,,, राजू भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि पहरेदार की नजर खिड़की पर पड़ जाने से लालटेन की रोशनी में दोनों को पहचाने जाने की आशंका थी राजू तो लड़का था उसका तो कुछ भी नहीं होता लेकिन सोनी बदनाम हो जाती,,, इसलिए तो राजू ने लालटेन को बुझा दिया था और चांदनी रात की रोशनी में सोनी की गांड मार रहा था,,,,,

राजू सोने की गांड मारने में अपनी पूरी ताकत झोंक दे रहा था वह जानता था कि पुर से ज्यादा गांड मारने में मेहनत लगती है और अगर ज्यादा देर ठहर ना पाओ तो सारा मजा किरकिरा हो जाता है लेकिन राजू को अपने लंड की मर्दाना ताकत पर पूरा भरोसा था और वैसे भी कुछ भ पहले ही वह अपना पानी निकाल कर आया था इसलिए इस बार पानी निकलने में थोड़ा समय लग रहा था और इसी का फायदा उठाते हुए राजू लाला की बहन की गांड मारने का शुभ प्राप्त कर रहा था लाला की बहन कुर्सी पर घोड़ी बनी बैठी हुई थी एकदम नंगी और राजू का लंड उसकी गांड के छेद में घुसकर छल्ला बनाया हुआ था,,,, राजू अपने दोनों हाथ को आगे की तरफ लाकर सोनी के दोनों दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर हिला रहा था सोने की गवाही गोल-गोल रिदम नरम नरम थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पूर्वी भरकर तकिया बनाया हो और ऐसे हालात में जब-जब राजू का प्रहार गांड के छेद पर पड़ रहा था तो सोने की बड़ी-बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा उठ रहे थे जिसे देखकर राजू की उत्तेजना ओर बढ़ जा रही थी,,,।

सोनी के कमरे की खिड़की खुली हुई थी और खिड़की का पर्दा एक तरफ होकर हवा के झोंकों से लहरा रहा था सोनी अभी भी चाहती थी कि राजू खिड़की का पर्दा भी लगा दे लेकिन वह जानती थी कि ऐसा राजू नहीं करेगा क्योंकि एकदम अंधेरे में राजू को चोदने में मजा नहीं आता उसे चुदाई का मजा तभी ज्यादा आता है जब एक दूसरे का बदन साफ साफ दिखाई देता हो,,,

राजू का लंड बेहद बलिस्ठ था इसीलिए तो बड़े आराम से बिल्कुल भी नरम पड़े बिना सोनी की गांड के छोटे से छेद में अंदर बाहर हो रहा था राजू का मोटा लंड सोनी की गांड के छोटे से छेद को छल्ला नुमा बना दिया था,,,, धीरे-धीरे राजू चरम सुख के करीब पहुंच रहा था जिसे जिसे वह चरम सुख के करीब पहुंचता जा रहा था वैसे वैसे उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी वह दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर नीचे की तरफ से ला करके उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़ लिया था और उसे हल्के से उठाते हुए अपनी तरफ खींच लिया था लेकिन इस तरह से उसके बदन को कमान की तरह ताना था कि उसकी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी और कमर अंदर की तरफ धंसी हुई थी एकदम धनुष की तरह ऐसे में उसकी गोल-गोल गांड एकदम लंड गहराई तक जाने पर राजू के बदन से फटी हुई थी और राजू को सोनी की गोल-गोल नरम नरम गांव का स्पर्श इतना जबरदस्त लग रहा था कि वह पागलों की तरह अपनी कमर हीलाता हुआ सोने की गांड मार रहा था सोनी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, सोनी को इस बात का अहसास हो रहा था की चुदाई करते समय राजू और भी ज्यादा ताकतवर हो जाता था इसीलिए तो वह बड़े आराम से अपनी कमर हिलाता हुआ उसकी गांड मार रहा था,,,,,।

खिड़की से शीतल पवन का झोंका पूरे कमरे में फेल जा रहा था लेकिन फिर भी दोनों के बदन की जवानी की गर्मी के कारण दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे लेकिन फिर भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे,,,, देखते ही देखते राजू की सांसें उखड़ने लगी सुबह चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच चुका था और इस दौरान वह बड़ी ही तीव्रता से अपनी कमर को हिला रहा था मानो कि जैसे कोई मोटर हो,,, और देखते ही देखते हल्की चीख के साथ वह अपना गरम लावा सोनी की गांड में भरने लगा,,,,

दोनों एकदम शांत हो चुके थे राजू ने धीरे से अपने लंड को सोनी की गांड से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से गरमा गरम था,,,, और लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,.

मुझे आज अपने लंड पर बहुत गर्व हो रहा है कि तुम जैसी खूबसूरत औरत की गांड में पूरा का पूरा घुसकर एकदम मस्त कर दिया,,,

तुम्हें तो गर्व हो रहा है लेकिन मेरी तो हालत खराब हो गई मेरी गांड फाड़ के रख दीए,,,,(कमर पर हाथ रखे हुए वह धीरे से उठते हुए बोली)

मजा तो ऐसी ही चुराई में आती है जब गांड और बुर दोनों फट जाए,,,

ना बाबा ना चुदाई से तो मैं दूर ही रहती हूं और हां अपने लंड को धो कर आना वरना मैं इसे अपने मुंह में नहीं लूंगी,,,।

(सोनी की इस तरह की बातें सुनकर राजू मुस्कुराने लगा कि कि वह जानता था कि सोनी ऐसा क्यों कह रही है क्योंकि लंदन में उसकी गांड के छेद का सफर जो करके आया था इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए बोला)

कोई बात नहीं मैं अभी जाता हूं और धोकर आता हूं क्योंकि रात भर मजा जो करना है,,,,।

(राजू जल्दी से हवेली के बाहर वाली जगह पर गया जहां पर वह मुंह धोया था और सोनी मोटा तगड़ा लंड गांड के छेद में जाने से ठीक से चल नहीं पा रही थी वह अपनी कमर पर हाथ रखकर धीरे-धीरे चल रही थी उसे हल्का हल्का दर्द हो रहा था लेकिन जो मजा राजू ने दिया था वह बेहद अद्भुत और मदहोश कर देने वाला था थोड़ी देर में राजू अपने लंड को धोकर वापस आ गया था तब तक सोनी अपने नरम नरम बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी चांदनी रात की चांदनी बिस्तर तक थोड़ी धीमी पड़ जा रही थी इसलिए राजू कमरे में आते ही कोने में पड़ी एक लालटेन को जला दिया और उसकी पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा उठा,,,, और फिर बिस्तर पर बैठ कर कुछ देर बातें करने के बाद राजू ने फिर से सोने की दोनों टांगों को फैला कर अपने होठों को उसकी बुर पर लगा दिया लेकिन इस बार वह आसन की कला दिखाते हुए एक साथ दोनों को मजा मिले किस तरह की तरकीब लगाया था और राजू सुदूर को चाट रहा था और सोनी उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने ही थी इस तरह से दोनों एक दूसरे के अंगों को आनंद ले रहे थे,,,, और कुछ देर बाद राजू ने सोने की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया और यह सिलसिला सुबह तक चला जब तक कि सूरज की पहली किरण ना दिख जाए,,,,, सुबह होते ही राजू हवेली से बाहर निकल गया और रात भर की चुदाई से सोनी पूरी तरह से थक चुकी थी इसलिए नंगी ही बिस्तर पर सो गई थी,,,,

लाला जब हवेली में प्रवेश किया तो सीधा अपनी बहन के कमरे में पहुंच गया दरवाजा खुला हुआ था दरवाजे पर खड़ा होकर उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी तो सोने की हालत देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई और उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, अपनी बहन को बिस्तर पर नंगी देखकर और उसे चैन की नींद लेता हुआ देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि सोनी अपनी जवानी का जलवा राजू को दिखा चुकी है और अपनी जवानी का रस उसे पीला भी चुकी है अब उसका काम एकदम आसान हो जाएगा लेकिन इस समय अपनी बहन के नंगे बदन को देखकर लाला की आंखों में वासना की चमक उठने लगी और वह धीरे से बिस्तर की तरफ आगे बढ़ा,,,, और बिना कुछ बोले अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया पर अपनी बहन की दोनों टांगों को खींचकर उसे बिस्तर के किनारे कर दिया उसकी बुर उसे साफ दिख रही थी जो कि पूरी तरह से भीगी हुई थी,,,, जिसे लाला ने अपनी धोती से साफ किया और फिर उसमें लैंड डालने का प्रयास करने लगा तो तुरंत सोनी की नींद खुल गई और वह चकर पकर देखने लगी,,, तो लाला बोला,,,।

घबराओ मत में हूं,,,

राजू कहां है,,,?

राजू के चला गया था जब मैं घर आया हमारी हालत देख कर लग रहा है कि रात भर तुमने राजू को मजा दि हो,,,

(अपने भाई की बात सुनकर सोनी मुस्कुराने लगी और उसकी मुस्कुराहट देखकर लाना तुरंत उसकी टांगों को फैला कर उसके अंदर समा गया और अपनी कमर हिलाने लगा अपनी कमर हिलाते हुए बहुत सोनी से बोला,,,)

क्या राजू इतना बड़ा खतरा अपने सर पर लेगा,,,

वह तैयार है भैया मैं उसे सब कुछ बता दि हूं,,,

ओहह सोनी तुमने मेरा कितना बड़ा काम की हो यह तुम भी जानती हो मैं बहुत खुश हूं तुमसे सोनी,,,।

(और फिर जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर वहीं ढेर हो गया)
 
राजू अब लाला की जायदाद का आधा मालिक बन चुका था मालिक बनने का एहसास कुछ और ही होता है और यही एहसास मे राजु पूरी तरह से मस्त हो गया था,,,,

राजू को सब कुछ एक सपना सा लग रहा था लेकिन जैसे ही वह गोदाम पर पहुंचा गोदाम के सारे मजदूर उसे मालिक का दर्जा देने लगे जो कि कुछ देर पहले ही लाला आकर सब लोगों को इतना कर दिया था कि आज से कारोबार की जिम्मेदारी राजू के ही सर पर है और राजू भी तुम लोगों का मालिक है ऐसा समझना और राजू के व्यवहार पर किसी भी प्रकार की बदतमीजी नहीं होनी चाहिए,,,

गोदाम के मजदूर से लेकर खेतों के मजदूर की और भी लोग जो लोग हवेली से जुड़े काम कर रहे थे सभी लोग राजू को मालिक मालिक कह कर पुकार रहे थे और राजू का सीना गदगद हो जा रहा था यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल चुकी थी सब लोग राजू की किस्मत पर बहुत खुश हो रहे थे क्योंकि राजू से किसी की भी दुश्मनी नहीं थी राजू हमेशा किसी न किसी की मदद किसी भी रूप में करता ही रहता था इसलिए सभी लोग राजू से खुश थे,,,,,,, राजू इस बात की खबर सबसे पहले झुमरी को देना चाहता था इसलिए वह घोड़े पर सवार होकर झुमरी के घर की तरफ निकल गया और यह घोड़ा लाला की हवेली का था जो कि हवेली की शोभा बढ़ा रहा था राजू ने गोदाम में काम करते हुए घोड़ा चलाना भी सीख लिया था इसलिए उसे बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आ रही थी और देखते ही देखते झुमरी के घर पहुंच गया,,,, झुमरी के घर के सामने पहुंचते ही उसकी नजर झुमरी की मां पर गई पहले तो झुमरी मां राजू को पहचान ही नहीं पाई क्योंकि उसने कभी राजू को घोड़े पर सवार नहीं देखी थी इसलिए राजू मुस्कुरा रहा था और घोड़े से उतर कर वह हाथ जोड़कर नमस्कार किया और बोला,,,।

कैसी हो सासू मां,,,,(राजू के इस तरह से कहने पर भी ज्वेलरी की मां कुछ समझ नहीं पाई तो राजू मुस्कुराता हुआ बोला) अरे अपने दामाद को नहीं पहचान रही हो तब कैसे अपनी बेटी को मुझे दोगी,,,,

अरे राजू तो मैं तो पहचान ही नहीं पाए मुझे तो लगा कोई जमींदार का बेटा आ गया है,,,

ऐसा ही समझो सासु मां,,,,, मैं अब मालिक बन गया हूं,,,,

क्या तू सच कह रहा है राजू पर ऐसा कैसे हो सकता है,,,

यूं समझ लो सासु मां किस्मत मुझ पर मेहरबान हो गई है,,,,

(राजू और झुमरी की मां के बीच शारीरिक संबंध का रिश्ता था राजू मौका मिलने पर झुमरी की मां की जमकर चुदाई करता था और इसमें खुद श्याम ने ही साथ दिया था लेकिन अब राजू झुमरी से विवाह करना चाहता था और इस रिश्ते से झुमरी कि मां उसकी सांस बन चुकी थी जब-जब राजू झुमरी की मां को सासू मां कहकर संबोधित करता था तब तक झुमरी की मां के तन बदन में हलचल सी मच जाती थी क्योंकि उसे बड़ा अजीब सा लगता था कि जिस लड़के से वह चुदवा कर अपनी प्यास बुझा रही थी उसी को अपना दमाद बनाने वाली थी और उसे अपनी जवान बेटी देने वाली थी,,,,)

यह तो बड़ी खुशी की बात है राजू अब तो मेरी बेटी तेरे साथ राज करेंगे,,,,

क्यों सांसु मा तुम नहीं करोगी,,,

जवान और खूबसूरत औरत पाकर तुझे मेरी याद क्यों आएगी भला,,,

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है सासु मां तुम्हारी बुर तो झुमरी की बुर से भी बहुत खूबसूरत है,,,

(बुर वाली बातें सुनकर झुमरी की एकदम से चौक ते हुए बोली,,,)

हाय दैया तूने कब देखा,,,,

क्या बात कर रही हो सासू मां जो दमाद अपनी सास की बुर देख सकता है उसे चोद सकता है तो अपनी होने वाली बीवी की बुर को भला कैसे छोड़ेगा,,,,

और झुमरी तेरे साथ करने के लिए मान गई थी,,,

झुमरी अब बच्ची नहीं है और मेरे साथ विवाह करना चाहती हो तुम भला अपनी बुर मुझे देने में इंकार क्यों करेंगी,,,,

चलो यह तो ठीक ही हो गया मेरी बेटी तुम्हारे साथ खुशी से अपना जीवन बिताएंगी और वह भी एकदम रानी बनकर,,,

हां सासू मां मैं झुमरी कोई तुम रानी बनाकर रखूंगा इसीलिए तो यह खबर उसे सुनाने के लिए आया हूं लेकिन झुमरी है कहां,,,,?

अंदर नहा रही है,,,

ओहहहह मैं अभी झुमरी से मिल कर आता हूं,,,(इतना कहते ही राजू अंदर कमरे की तरफ जाने लगा और पीछे से आवाज देते हुए झुमरी की मां बोली)

अरे अरे कुछ करना नहीं विवाह हो जाए उसके बाद मैं तुझे नहीं रोकूंगी,,,

तुम चिंता मत करो सासु मां मैं सिर्फ झुमरी से मिलने आया हूं,,,(और इतना कहने के साथ अभी राजू अंदर वाले कमरे पर पहुंच गया जहां पर उसने पहली बार झुमरी को नहाते हुए देखा था उसके बदन को देखा था उसकी नग्न जवानी को देखा था और तभी से वह झुमरी का दीवाना हो गया था,,, आज भी राजू झुमरी को नहाते हुए देख रहा था बस फर्क इतना था कि उस दिन तू मेरी पूरी तरह से नंगी थी और आज वह कुर्ती पहनी हुई थी लेकिन उसके बदन पर सलवार नहीं थी लेकिन पानी से भीगी होने की वजह से उसकी कुर्ती उसके नितंबों से इस तरह से चिपक गई गई थी कि कपड़े मैं होने के बावजूद भी उसका हर एक रंग साफ नजर आया था,,,, जिसे देखते ही राजु का लंड खड़ा हो गया था,,,, झुमरी को इस अवस्था में देखकर भले ही राजू का लैंड खड़ा हो गया था लेकिन राजु इस समय कुछ करने के लिए नहीं आया था बल्कि खुशखबरी सुनाने के लिए आया था इसलिए वह पीछे से आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

झुमरी,,,,

(झुमरी एकदम से चौक गई और पीछे की तरफ देखी तो राजू खड़ा था तब उसे राहत महसूस हुई उसे लगा कि कोई और आ गया है,,,,)

तुम यहां कैसे मां बाहर ही है ऐसे में तुम अंदर तक आ गए,,,

अरे तुम चिंता मत करो मेरी सासू मां ने ही मुझे अंदर भेजी है,,,,

क्या,,,?

हां आखिरकार में इस घर का दामाद हूं जब चाहे तब आ सकता हूं जा सकता हूं,,,

दमाद हो नहीं होने वाले हो,,, अब थोड़ा इज्जत से रहा करो मां क्या सोचेगी,,,।

(राजू से बात को अच्छी तरह से जानता था कि एक इज्जत दार परिवार के लिए और एक इज्जतदार दामाद के लिए यह सब शोभा नहीं देता इसीलिए अपनी मर्यादा को समझता था वह अच्छी तरह से जानता था कि झुमरी को इस बात का भनक तक नहीं है कि राजू और उसकी मां के बीच किस तरह का संबंध है और खुद उसके भाई और उसकी मां के बीच किस तरह का संबंध है वरना झुमरी इस तरह की बात नहीं करती और राजू उसे बताना भी नहीं चाहता था इसलिए बोला,,)

झुमरी नहाते हुए



ठीक है ठीक है मैं जानता हूं मैं तो सिर्फ तुम्हें यह पता नहीं आया था कि मेरी किस्मत एकदम बदल गई है,,,

क्यों क्या हुआ,,,?(झुमरी उसी तरह से अपने बदन पर पानी डालते हुए बोली और उसकी गोल गोल नितंब पानी से गीली कुर्ती के ऊपर झलक ने लगी)

लाला ने मुझे अपने कारोबार जमीन जायदाद और हवेली का आधा मालिक बना दिया है,,,

क्या कह रहे हो राजू,,,

एकदम ठीक कह रहा हूं झुमरी तभी तो हवेली का घोड़ा लेकर आया हूं जो कि तुम्हारे घर के सामने ही खड़ा है अब मैं घोड़े पर ही घूमुंगा,,,

यह तो बहुत खुशी की बात है राजू मैं तुम आज बहुत खुश हूं,,,,,

अच्छा तो मैं चलता हूं,,,,(इतना क्या कर रहा है तू घर के बाहर आ गया तो देखा कि श्याम भी वहीं खड़ा था और घोड़े को सहला रहा था यह देखकर राजू बोला)

अच्छा हुआ तू श्याम इधर मिल गया,,,

क्यों क्या हुआ और यह घोड़ा कहां से ले आया,,,

सब अपना ही है और हां कल से गोदाम पर आ जाना और दो चार अपने दोस्तों को भी लेते आना,,,

क्यों क्या हुआ,,,?

हुआ कुछ नहीं बस तुम लोगों को नौकरी दे रहा हूं गोदाम पर आकर काम करना गोदाम का काम संभालना सब कुछ तेरे जिम्मेदारी पर और तुझे सब काम कराना है तू मजदूरों का मालिक रहेगा,,,, समझ रहा है ना और तुझे अच्छे पैसे भी मिलेंगे,,,

अरे यह तो बहुत अच्छा है राजू,,,,(श्याम की मां एकदम खुश होते हुए बोली,) दिन भर इधर-उधर घूमता रहता है थोड़े पैसे आने लगेंगे तो अच्छा ही होगा,,,

इसीलिए तो मैं इधर आया हूं चाची,,,, तुम चिंता मत करो श्याम भी कमाने लगेगा,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह घोड़े पर बैठ गया और श्याम को धीरे से बोला) आखिरकार साले के लिए इतना तो फर्ज बनता ही है,,,,

साले भाग जा,,,,,(श्याम के मुंह से इतना सुनकर राजू मुस्कुराता हुआ घोड़ा लेकर आगे बढ़ गया और बोला)

कल पहुंच जाना,,,,

ठीक है पहुंच जाऊंगा,,,,।

दूसरे दिन शयाम को सारा काम समझा कर राजू दूसरे कामों में ध्यान देने लगा,,,, राजू के दोस्त लोग भी बहुत खुश हो गए थे क्योंकि उन लोगों के हाथ में भी अब पैसा आने लगा था,,,,, राजू की मां और उसके पिताजी राजू की इस कामयाबी पर बहुत खुश हो रहे थे गर्व कर रहे थे क्योंकि जिस तरह से राजू तरक्की कर रहा था उसे देखते हुए मां-बाप दोनों का सीना गर्व से चौड़ा होता जा रहा था,,,, लाला भी राजू के काम से बहुत खुश था उसे अपने फैसले पर संतुष्टि हो रही थी कि उसने अपनी जायदाद को अपनी हवेली को गलत हाथों में नहीं दिया था,,,,

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए तो मधु एक दिन राजु से बोली,,,

राजू तू तो बड़ा आदमी बन गया है मुझे भी तो अपने गोदाम पर ले चल मैं भी तो देखूं क्या काम हो रहा है,,,,

दशहरी आम को लकड़ी के छोटे-छोटे बक्से में भरकर शहर भेजा जा रहा है इस समय तो गोदाम पर यही काम हो रहा है क्योंकि लाला के आम के बगीचे बहुत हैं और इतना आम हुआ है कि पूछो मत,,,

राजू मुझे भी तो ले चल अपनी गोदाम पर मैं भी देखना चाहती हूं और मुझे भी दशहरी आम बहुत पसंद है वहां से थोड़ी बदाम लेकर आ जाऊंगी,,,,

थोड़े बहुत क्यों पूरा का पूरा लेकर आ जाओ और वैसे भी उस दशहरी आम से कहीं ज्यादा खूबसूरत और मिठास से भरे हुए तुम्हारे दशहरी आम है,,,,(इतना सुनते ही मधु एकदम से हड़बड़ा कर दरवाजे की तरफ देखने लगी क्योंकि घर पर हरिया मौजूद था और वह नहीं चाहती थी कि जिस तरह की बातें उसका बेटा कर रहा है इसकी भनक उसके पति को कानों तक पहुंचे इसलिए वह धीरे से बोली)

अरे पागल तेरे पिताजी घर पर ही हूं अगर सुन लिए तो गजब हो जाएगा,,,,

पिताजी घर के पीछे गए हैं बेल को चारा देने इतनी जल्दी नहीं आएंगे,,,

तो,,,(मधु आश्चर्य से राजू की तरफ देखते हुए बोली क्यों कि वह उसके कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी और राजू बोला)

तो,,,, कल तुम्हें गोदाम के दशहरी आम खिलाऊंगा लेकिन आज मुझे अपने दशहरी आम खिला दो,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के ब्लाउज पर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाने लगा यह देखकर मधु को अच्छा तो लग रहा था लेकिन डर भी लग रहा था इसलिए वह पीछे हो गई तो राजू आगे बढ़ कर उसकी खबर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और एकदम अपने बदन से हटा लिया और उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला)

तुम बिल्कुल भी मत डरो,,,, पिताजी इतनी जल्दी नहीं आएंगे तब तक तो अपना काम भी हो जाएगा,,,

कैसा काम,,,,,?

जैसा कि मेरी रानी को पता ही नहीं,,,(और इतना कहने की शादी है राजू अपनी मां को बाहों में भरे हुए ही उसकी बड़ी बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबाते हुए धीरे-धीरे साड़ी के ऊपर करने लगा इस समय घर में गुलाबी भी मौजूद नहीं थी वह हरिया घर के पीछे बेल को चारा पानी देने गया था और इसी के मौके का फायदा उठाते हुए राजू अपनी मां के साथ मस्ती कर रहा था,,,, मधु अपने बेटे की पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन राजू की मजबूत भुज३ओ से‌ वह छूट नहीं पा रही थी,,,, ऐसा नहीं था कि राजू की हरकत से मधु को मजा नहीं आ रहा था,,, मधु भी पूरी तरह से आनंदित हो रही थी और भाभी अंदर ही अंदर यह चाह रही थी कि राजू उसके साथ जबरदस्ती करते हुए उसे चोदे,,, और फिर भी अपने पति के डर से वह राजू की पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

राजू रहने दे कुछ समझा कर तेरे पिताजी घर पर मौजूद है किसी भी वक्त इधर आ जाएंगे अगर हम दोनों की इस हालत में देखेंगे तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ गजब नहीं होगा मां बस एक बार साड़ी उठाकर झुक जाओ जल्दी जल्दी काम हो जाएगा बहुत दिन हो गए हैं तुम्हारी बुर का मजा लिए,,,,

अरे मैं कभी इंकार कर रही हूं बाद में कर लेना ना,,,

नहीं मुझे तो अभी तुम्हारी चाहिए,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की साड़ी पर कमर तक उठाकर कमर के नीचे उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया था उसकी बड़ी बड़ी नंगी गोरी गोरी गांड पर अपने दोनों हाथों से ही रखकर से जोर-जोर से दबाकर उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों से लगाकर उसका रस पी रहा था मधु भी पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी और राजू वक्त की नजाकत को अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह तुरंत अपनी मां को पीछे घुमा कर दीवाल का सहारा लेकर उसे झुका दिया और उसकी गोल-गोल बड़ी बड़ी गांड को अपनी तरफ खींच कर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डाला कर एक झटके में पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया,,,,

आहहहह ,,,,, देखना बेटा तेरे पिताजी ना जाए,,,(दरवाजे की तरफ नजर गड़ाए हुए वह बोली,,,,)

तुम चिंता मत करो मैं पिताजी के आने से पहले ही तुम्हारा पानी निकाल दूंगा,,,,

(राजू इतना कहने के साथ ही अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया था वह अपनी मां को दिन के उजाले में चोद रहा था अपने पिताजी की उपस्थिति में जो कि किसी भी वक्त कमरे में आ सकते थे लेकिन ऐसा लग रहा था कि राजू को अपने पिताजी की उपस्थिति का भी किसी भी प्रकार का भय नहीं लग रहा था वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजित होकर अपनी मां को चोद रहा था और इस चुदाई से मधु पूरी तरह से आनंदित हो रही थी उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर राज्यों का जोश बढ़ता जा रहा था चोदते चोदते राजू अपनी मां की एक टांग उठा कर उसे अपनी कमर पर लपेटना चाहा लेकिन घोड़ी बनी हुई मधु को इस स्थिति में उसकी टांग उठा कर अपनी कमर पर लपेट नहीं सकता था इसलिए उसके घुटनों को अपने हाथ से पकड़ कर थोड़ा सा उठा दिया और इस अवस्था में वह अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया इस अवस्था में मधु की कुछ ज्यादा ही खुली हुई नजर आ रही थी जिसमें राजू का लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था,,,,,

ज्यादा समय राजू और मधु दोनों के पास नहीं था राजू के मोटे तगड़े लंड से जबरदस्त चुदाई के कारण मधु पानी पानी हुई जा रही थी,,,, मधु इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अचानक हुई चुदाई से कुछ ज्यादा ही मजा आता है और कुछ देर पहले मधु चुदवाने के बारे में सोच भी नहीं रही थी लेकिन दशहरी आम का जिक्र आते ही अपनी मां की चुचियों को देखकर राजू का मन डोल गया और जिसके परिणाम स्वरुप वह इस समय अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था,,, मधु बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी क्योंकि उसे डर था कि कहीं राजू के पिताजी नाम आ जाए वह एक तरफ राजू के पिताजी के आने से डर भी रही थी और दूसरी तरफ राजू के लंड का मजा भी ले रही थी देखते ही देखते मधु की सांसे तेज होने लगी वह अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और वह भी पीछे की तरफ अपनी बड़ी बड़ी गांड को धक्का दे रही थी राजू का साथ दे रही थी राजू भी अपने धक्कों को बढ़ा दिया था और देखते ही देखते मधु का पानी निकल गया और राजू अपना पानी निकालने के लिए जबरदस्त धक्के पर धक्का मार रहा था और जैसे ही उसे दरवाजे पर सूखी हुई घास पर किसी के चलने की आवाज आई वैसे ही खुद राजू का भी पानी छूट गया लेकिन वह जानता था कि उसके पिताजी घर में प्रवेश कर रहे हैं इसलिए तुरंत अपना लंड बाहर निकाल लिया और एक पिचकारी सीधा लंड के निकलने से मधु की गोरी गोरी गांड पर गिर गई और राजू तुरंत अपनी मां की साड़ी को उसकी कमर से खींच कर नीचे कर दिया,,,, और अपने लंड को जो कि अभी भी रह रह कर उसमें से पिचकारी निकल रही थी उसे अपने पजामे के अंदर डाल दिया,,,,, राजू ने सही समय पर स्फूर्ति दिखाते हुए सब कुछ सही कर दिया था हाथ में बाल्टी लिए हरिया घर के अंदर प्रवेश किया और दोनों को घर के कोने में खड़ा पाकर बोला,,,।

मां बेटे में क्या खिचड़ी पक रही है,,,

(इतना सुनते ही मधु एकदम से सक पका गई,,,, लेकिन तभी बात को संभालते हुए राजू बोला,,,)

वो वो मां कह रही थी कि उसे भी गोदाम का काम देखना है वह भी थोड़ा घूमना चाहती है,,,,

क्यों ऐसा क्या है गोदाम में जो तुम घूमना चाहती हो,,,(बाल्टी को नीचे रखते हुए मधु की तरफ देखकर हरिया बोला तो मधु की अपनी स्थिति को संभालते हुए बोली)

अरे वह क्या है ना कि गोदाम में आजकल दशहरी आम को बक्से में रखकर शहर भेजा जा रहा है तो सोच रही हूं कि मैं थोड़ा घूम भी लूंगी और दशहरी आम भी घर पर लेकर आ जाऊंगी,,,

हां यह तुमने ठीक सोचा है जरूर चली जाना कब जाना है,,,

अब राजू बताएं तब ना,,,

कल ही चलते हैं क्योंकि कल मजदूरों की छुट्टी है उन्हें किसी काम से बाहर जाना है कल गोदाम पर कोई नहीं रहेगा,,,,

(राजू अपनी मां और अपने पिताजी की तरफ देखते हुए बोला,,,)

ठीक है राजू अपनी मां को थोड़ा घुमा देना वैसे भी घर पर काम कर कर के थक जाती है,,,, और वैसे भी तुम्हारा रुतबा गांव में कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा है मुझे भी बहुत खुशी होती है जब गांव वाले तुम्हारी इज्जत करते हैं,,,

यह तो आप दोनों का आशीर्वाद है पिताजी,,,,

(इतना कहते ही राजू घर से बाहर चला गया और मधु अपने काम में लग गई दोनों एकदम साफ बच गए थे लेकिन आज राजू से चुदवाते समय वह अपने मन में ठान ली थी कि अगर राजू के पिता जी दोनों को इस हालत में देख लेंगे तो मधु जरूर अपने पति से अपनी बहन की चुदाई की बात कह कर अपने पति का मुंह दबा लेगी लेकिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था दोनों एकदम साफ बच गए थे)
 
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