Incest मजबूरी या जरूरत - Page 2 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

तू घबरा मत किसी को कानों कान खबर नहीं होने वाला है और वैसे भी रात के अंधेरे में कमल के अंदर क्या हो रहा है यह तो बगल वाले कमरे में रहने वाले को भी नहीं पता चलता,,, समझ गया ना तु,,,

जी मौसी,,,,(इतना कहते हुए संजू मन ही मन प्रसन्न होने लगा आखिरकार प्रसन्न होता क्यों नहीं उसकी मौसी ने उसे इतना महत्वपूर्ण काम जो सौंप दी थी जो कि एक औरत सिर्फ एक प्रेमी और अपने पति को ही सौंपती है,,,, अपनी मौसी की चड्डी उतारने के लिए वह बहुत उतावला हुआ जा रहा था,,,, जल्द से जल्द वह अपने हाथों से अपनी मौसी को नंगी करना चाहता था वह अपने मन में ही सोच रहा था कि मौसी की दोनों टांगों के बीच की चड्डी के अंदर किस तरह का खजाना छुपा होगा कैसा नजर आता होगा उसका फोटो और कैसा होगा आकार कैसा होगा यही सब सोचकर वह मन ही मन उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,क्योंकि भले ही संजू ने औरतों के दोनों टांगों के बीच के उस खजाने के बारे में कल्पना किया हो लेकिन अपनी आंखों से उसे वास्तविक में नहीं देखा था,,,,इसलिए एक औरत के दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार के भूगोल से संजू पूरी तरह से अनजान था लेकिन आज लग रहा था कि जैसे उसकी मौसी अपनी दोनों टांगों के बीच के उस अमूल्य खजाने से जान पहचान करा देगी,,,, तभी तो संजू अपनी मौसी की बुर से गुफ्तगू करने के लिए उतावला और बावला हुआ जा रहा था,,,,,)

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अब उतारेगा भी या सोचता ही रह जाएगा,,,,

हां हां उतारता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा दिया उत्तेजना की वजह से उसके दोनों हाथों में कंपन हो रही थी वह कहां पर आया था क्योंकि अब वह जो काम करने जा रहा था वह काम सही मायने में संजू के लिए तो बिल्कुल भी आसान नहीं था,,, क्योंकि औरतों के कपड़े उतारने में संजू का यह पहला अनुभव था और जिसमें वह धीरे-धीरे सफल भी होता आ रहा था लेकिन अब चड्डी उतारने की बारी थी और औरतों की,,, चड्डी तभी उतारी जाती है जब चोदने का पूरा मन हो,,, जिसमें मर्द अपनी उत्तेजना को शांत कर लेता है लेकिन यहां पर संजू को अभी तक ऐसा नहीं लग रहा था कि वह अपनी मौसी को चोद पाएगा इसलिए अपनी मौसी की चड्डी उतारने के बाद वह अपनी उत्तेजना को शायद संभाल सकने में समर्थ ना हो,,,और उसे अपने हाथ से ही दिन आकर अपनी उत्तेजना को शांत करना पड़ेगा लेकिन इस बात की शंका भी थी कि अपने हाथ से ही क्या उसे इतने अत्यधिक उत्तेजना में परम आनंद का अनुभव हो पाएगा कि नहीं अगर उसे अपनी मौसी की चड्डी उतारने के बाद उसकी चुदाई करने को मिल जाए तो शायद वह परम आनंद को प्राप्त कर ले,,, लेकिन फिर भी वह मन में आंस लिए हुए वह अपनी कांपती ऊंगलियो को अपनी मौसी की चड्डी पर रख दिया,,,, जैसे ही संजू की उंगलियां साधना की कमर के साथ-साथ चड्डी पर स्पर्श हुई वैसे साधना का पूरा बदन सिहर उठा और उसके मुख से हल्की सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।

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सीईईईईईईई,,,,,,

(यह आवाज बेहद सुरीली और मादक थी,,,, संजू इस आवाज को सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,, और अपनी मौसी की चड्डी को उतारने के लिए अंगूठा चड्डी के ऊपर रखा और अपनी बाकी की तीन उंगलियों को साधना की मखमली चड्डी के अंदर सरका दिया यह एहसास संजू के साथ-साथ साधना के तन बदन में आग लगाने लगा साधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द औरत की चड्डी उसे चोदने के लिए ही उतारता है,,,, लेकिन यहां पर चड्डी उतारने वाला ना तो उसका प्रेमी था और ना ही उसका पति केवल उसका भतीजा था लेकिन उत्तेजना के एहसास से डूबी हुई साधना को अब धीरे-धीरे अपने भतीजे में केवल एक मर्द नजर आने लगा था जो कि इस समय उसकी चड्डी उतार रहा था,,,, संजू अपनी मौसी की चड्डी को उतारने की तैयारी में ही था कि तभी साधना बोली,,,)

जानता है संजू औरत की चड्डी कौन उतारता है,,,?

मुझे क्या पता मौसी मैं तो यह काम पहली बार करने जा रहा हूं,,,

जानती हूं पहली बार कर रहा है लेकिन सिर्फ तुझसे पूछ रही हूं,,,

नहीं नहीं मौसी मैं नहीं जानता तुम ही बता दो,,,

एक औरत की चड्डी केवल उसका प्रेमी और उसका पति ही उतारता है जानता है किस लिए,,,

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नहीं तो,,,(उत्तेजना के मारे अपने सुख के गले को अपने थूक से गीला करने की कोशिश करते हुए बोला,,, जवान हो चुका संजू इतना तो जानता ही था कि एक औरत की चड्डी क्यों उतारा जाता है लेकिन वह देखना चाहता था कि अब उसकी मौसी क्या जवाब देती है।,,, इसलिए वह अपनी मौसी की चड्डी को पकड़े हुए हैं अपनी मौसी के जवाब का इंतजार करने लगा,,,।)

अरे बुद्धू इतना भी नहीं जानता,,,।

हा मौसी तुम ही बताओ ना,,, मुझे तो बिल्कुल भी अनुभव नहीं,,, है,,,।(संजू अपनी मौसी की चड्डी को पकड़े हुए बोला,,, साधना अपनी बातों से संजू को पूरी तरह से मस्त कर देना चाहती थी,,, और ऐसा हो भी रहा था साधना धीरे-धीरे पूरी तरह से खुल रही थी,,, संजू की बात सुनकर साधना को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि संजू भी उसकी बात सुनने के लिए उत्सुक है इसलिए वह बोली,,)

तु सच में एकदम बुद्धू है,,,, इतना भी नहीं जानता,,, खूबसूरत औरत की चड्डी क्यो उतारी जाती है अरे पागल उसको चोदने के लिए,,,,,, क्योंकि बिना चड्डी उतारे तो यह काम हो नहीं सकता,,,।

( चोदना शब्द अपनी मौसी के मुंह से सुनते ही संजू के पूरे बदन में सनसनी सी दौड़ गई और उसका लंड और ज्यादा टनटना गया,,, संजू अपनी मौसी के सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,,)

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बाप रे क्या तुम सच कह रही हो मौसी,,,(उत्तेजना के मारे संजू अपनी ऊंगलियों का कसाव अपनी मौसी की चड्डी पर बढाता हुआ बोला,,,)

तो क्या मुझे सब मालूम है क्योंकि तेरे मौसा भी यही करते हैं,,,

तुम्हारी तुम्हारी चड्डी उतारते हैं,,,(उत्तेजना भरे स्वर में संजू बोला)

तो क्या,,, उनको करना है तो उतारना तो पड़ेगा ही,,,

क्या करना है,,, मौसी,,?

मतलब की चुदाई,,,,

ओहहहहह,,, तो क्या मौसा जी तुम्हारी रोज चुदाई करते हैं,,,,,(संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था औरत को इस तरह की बात करते हुए उसने कभी देखा नहीं था और ना ही सुना था और आज पहली बार अपनी मौसी को इस तरह की गंदी बातें करते हुए देखकर उसके होश उड़ते चले जा रहे थे वह मदहोशी के सागर में डुबता जा रहा था धीरे धीरे संजू भी खुली बातों का दौर शुरू कर दिया था संजू को बहुत मजा आ रहा था और संजू के मुंह से धीरे-धीरे इस तरह की बातों को सुनकर साधना को अंदर ही अंदर मजा आ रहा था,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानते थे कि अगर संजू इसी तरह से खुल जाएगा तो जरूर उसके साथ कुछ कर सकने की हिम्मत जुटा पाएगा इसलिए साधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

पहले करते थे जब वह पूरी तरह से जवान थे लेकिन अब उम्र के हिसाब से 15 दिन में दो-तीन बार ही हो पाता है,,,।

मतलब जवान थे तब क्यों रोज करते थे,,,।

क्योंकि तब वह जवान थे जवान शरीर था शरीर में स्फूर्ति थी और उनका वह भी बहुत काम करता था,,,

वह क्या मौसी,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला लेकिन इतना तो जान ही किया था कि उसकी मौसी किस बारे में बात कर रही थी लेकिन फिर भी वह अपनी मौसी के मुंह से सुनना चाहता था)

अब सब कुछ मैं ही बताऊं ईतना बड़ा हो गया तुझे यह सब नहीं पता,,,

मुझे कैसे पता होगा मौसी,,,स्कूल,,,, स्कूल से घर दिन भर पढ़ाई बस यही तो रोज का काम है,,, इसीलिए इन सब बातों का समय ही नहीं मिलता और मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट भी नहीं था,,,।

मैं तुझे पहला लड़का देख रही हूं जो औरतों में इंटरेस्ट नहीं रखता वरना दुनिया आजकल औरतों के पीछे ही पागल हुई जा रही है,,,,

अच्छा यह तो बताओ मौसी,,, किस बारे में बात कर रही थी कि ज्यादा काम करता था,,,।

अरे बुद्धू,,, मैं लंड के बारे में बात कर रही थी,,, जवानी में लंड की बहुत ताकतवर होता है उस समय तेरे मौसा रात को तीन-तीन बार करते थे और थकते नहीं थे,,, लेकिन अब उम्र की वजह से नहीं हो पाता लेकिन तेरा जरूर होगा तेरी शादी जब होगी तो तु भी अपनी औरत की दिन-रात चुदाई करता रहेगा,,,।

क्या मौसी तुम भी,,,,(ऐसा कहते हुए संजु शर्मा गया,,,और साथ ही अपने बदन में गर्मी का अनुभव करने लगा,,,। अपनी मौसी के साथ गरमा गरम बातें करने में संजु अपनी मौसी की चड्डी उतार नहीं रहा था,,,तो साधना ही बोली,,)

अरे उतारेगा भी या बातें ही करता रहेगा,,,

हां ,,,हा ,,,,, मौसी उतारता हुंं,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मौसी की चड्डी को नीचे की तरफ खींचने लगा,,,,,,और साधना भी उस का साथ देते हुए अपनी भारी भरकम गांड को एक बार फिर से थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा देता कि वह उसकी चड्डी को आराम से उतार सके,,, संजू अपनी मौसी का सहयोग पाकर,, तुरंत उसकी चड्डी को उसकी मदमस्त गांड की घेराव से दूर करती है उसे बाहर निकाल दिया,,,, पैरों से बाहर करते हुए चड्डी को देखते हुए साधना बोली,,,)

संजू देखना मेरा दिया हुआ ज्ञान मुझ पर ही मत ठोक देना,,,

मैं समझा नहीं मौसी,,,(अपनी मौसी की चड्डी को एक तरफ रखते हुए बोला,,,)

अरे पागल मैं अभी अभी तुझे बताई थी ना कि एक औरत की चड्डी कौन उतारता है और क्यों उतारता है,,,।

हां हां मौसी,,,

हां तो देखना कहीं मेरी चुदाई मत कर देना,,,।

(साधना की बातों में साफ-साफ निमंत्रण था और इस बात को समझो भी धीरे-धीरे समझ में लगा था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी आगे बढ़ने की इसलिए वह अपनी मौसी की बात सुनकर बोला,,,)

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नहीं नहीं मौसी,,,,,(थोड़ी देर शांत रहने के बाद) अब तुम बिल्कुल नंगी हो गई हो मौसी,,,,।

हारे नंगी होने के बाद देख कितना बदन हल्का लग रहा है,,, पता नहीं तु इतना टाइट कपड़े पहनकर कैसे सोता है,,, निकाल दे सारे कपड़े मेरी तरह,,,,।

नहीं नहीं मौसी मेरी आदत नहीं है ना,,,,

अरे पागल है तू एक बार कपड़े उतार कर नंगा होकर सो देख कितनी अच्छी नींद आती है,,,। आ अब बैठा क्यों है,,, आ कर लेट जा,,,।

जी मौसी,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू तुरंत अपनी मौसी के बगल में जाकर लेट गया नंगे होने की अपनी मौसी के प्रस्ताव पर उसकी खुद की भी हामी थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,, साधना और संजू दोनों पीठ के बल लेट आए हुए थे आपस में दोनों का बदन स्पर्श हो रहा था और अपनी मौसी के नंगे बदन का स्पर्श होते ही,,, संजू के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और यही हाल साधना का भी था,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर पानी छोड़ गई थी और साधना उत्तेजना के मारे अपनी बुर पर अपनी हथेली रख कर उसे रख कर रही थी अंधेरा होने की वजह से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था,,, साधना इस रात को यूं ही बर्बाद होने देना नहीं चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि जिस तरह की आग उसने अपने भतीजे के बदन में लगाई है,,, उसे बुझा कर शांत करना भी उसका फर्ज था,,, और आज वह एक जवान लंड़ कों अपनी बुर में लेना चाहती थी जिसके लिए वह अत्यधिक उत्सुक भी थी,,,। इसलिए वह संजू से बोली,,)

संजू एक नंगी औरत के पास लेटने से तुझे कैसा लग रहा है,,,।

पता नही मौसी,,,,

क्यों क्या हुआ पता क्यों नहीं है,,,

कुछ अजीब सा लग रहा है ना जाने मुझे क्या हो रहा है,,,

तुझे क्या हो रहा है तुझे पता नहीं है,,,

पता नहीं मौसी लेकिन सांस ऊपर नीचे हो रही है माथे से पसीना टपक रहा हैं,,,।

इसका मतलब तुझे अच्छा लग रहा है,,,

तुम को कैसे मालूम,,,

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मैं सब जानती हूं एक खूबसूरत औरत के पास अगर कोई जवान लड़का इस तरह से लेट जाएं और औरत को एकदम नंगी हो तो उस लड़के का हाल भी तेरे जैसा ही होगा सभी लड़कों का हाल तेरे जैसा है क्योंकि उन्हें अच्छा लगने लगता है और भी ज्यादा बदलाव बदन में होने लगता है,,,

कैसा बदलाव मौसी,,,

लंड खड़ा होने लगता है,,,

धत्त मौसी कैसी बातें करती हो,,,(संजू शर्माते हुए बोला लेकिन जो कुछ भी उसकी मौसी बोल रही थी वह बिल्कुल सच था उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ नहीं आ चुका था,,,,, साधना और कुछ बोल पाती इससे पहले ही दरवाजा खुला और दरवाजे की आवाज सुनते ही वह संजु से बोली,,)

लगता है तेरे पापा आ गए,,,

हां मौसी,,, रोज देर से आते हैं,,,,

कोई बात नहीं अब इस समय तो ने अपने कपड़े उतार चुकी हूं कि ईस हाल में जा नहीं सकती सुबह बात करूंगी,,,।(उसका इतना कहना था कि आराधना वाले कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज दोनों के कानों में पड़ी ,,, और थोड़ी देर बाद रमेश की आवाज आई)

अभी तक मेरा इंतजार कर रही है,,,

आप हाथ मुंह धो लीजिए मैं खाना लगाती हूं,,,

मुझे भूख नहीं है,,,(रमेश नशे में था उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी,,,)

खा लीजिए मैंने पूरी सब्जी और खीर बनाई हुं,,,,,,

(बगल वाले कमरे में संजू और साधना दोनों बड़े गौर से बातों को सुन रहे थे,,, इतनी साफ आवाज सुनाई दे रही थी इसलिए साधना बोली,,,।)

बगल वाले कमरे की आवाज तो एकदम साफ आ रही है,,, वह दोनों क्या बातें कर रहे हैं सब कुछ सुनाई दे रहा है,,,।

हां मौसी सब कुछ साफ सुनाइ देता है लेकिन तुम चिंता मत करो इस कमरे की आवाज नहीं सुनाई देती,,,।

ओहहह तब तो ठीक है,,,, मैं तो डर ही गई थी,,,।

( तभी बगल वाले कमरे में से बर्तन की आवाज आने लगी आराधना अपनी जगह से उठकर थाली लगा रही थी,,,।)

अब जल्दी से हाथ मुंह धोकर आइए तब तक मैं खाना लगा देती हूं,,,

मुझे खाना नहीं खाना है,,, मुझे सबसे पहले तेरी लेना है,,,

यह क्या कह रहे हैं आप,,,, धीरे बोलिए,,, बड़ी दीदी आई हुई है,,,।

(अपने पापा की बात सुनकर संजू समझ गया था कि उसके पापा क्या चाहते हैं लेकिन फिर भी अनजान बनता हुआ अपनी मौसी से बोला,,,)

क्या लेने की बात कर रहे हैं मौसी,,,

अरे बुद्धू तेरे पापा तेरी मां को चोदने की बात कर रहे है मतलब की तेरी मां की बुर लेना चाहते हैं,,,,।(साधना को अच्छा मौका मिल गया था खुलकर बातें करने के लिए संजु सीधी सरल भाषा में यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसके पापा क्या लेने की बात कर नहीं देखी उसकी मौसी घुमा फिरा कर उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा दी थी ना जाने क्यों संजू के तन बदन में और ज्यादा वासना के शोले भड़कने लगे,,,, यह सब अपनी मां के बारे में खुलकर बात करने की वजह से था,,,, अपनी मौसी की बात सुनकर संजू कुछ बोला नहीं और साधना फिर से कान लगाकर सुनने लगी,,,।)

देख कुछ भी हो,,, मुझे चोदने का मन कर रहा है और आज मैं अपना लंड तेरी बुर में डाल कर ही रहुगा,,,,,

( बाप रे संजू तेरे पापा कितनी गंदी गंदी बातें कर रहे हैं,, लगता है आज वो तेरी मां की चोद कर ही रहेंगे,,)

चुप हो जाइए भगवान के लिए दीदी सो रही है अगर सुन लेगी तो क्या समझेंगी तुम्हारे बारे में,,,,

सुन लेगी तो क्या हुआ,,, मैं तेरी दीदी की भी चुदाई कर दूंगा,,,(अपना जिक्र होते ही साधना संजू से बोली,, ब बाप रे तेरे पापा लगता है ज्यादा नशा करते हैं,,)

यह क्या कह रहे हैं आप ,,,, आप होश में बिल्कुल भी नहीं है,,,,

चल चुप कर हरामजादी तेरे से ज्यादा सेक्सी तो तेरी बड़ी बहन है उसकी बड़ी बड़ी गांड देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है देखा भी देख तेरी बहन का जिक्र आते ही कैसे खड़ा हो गया है,,,(और इतना कहने के साथ ही रमेश अपने पेंट की चैन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगा,,, यह देखकर आराधना बोली,,)

आपको क्या हो गया है नशे में अनाप-शनाप बोल रहे हैं,,,।

मैं सच बोल रहा हूं,,,, तेरी बहन को देखते ही मेरा मन उसका चोदने को करता है,,,।

(बाजू वाले कमरे में सुन रही साधना हक्की बक्की हो गई थी,,, लेकिन इस बात से उसे करो महसूस हो रहा था कि उसके जीजा उसकी खूबसूरती की तारीफ ही कर रहे थे भले ही उसे चोदने की बात कर रहे थे,,, अपने पापा की बात सुन रहा संजू बोला,,)

मौसी पापा तुम्हारे बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे हैं,,,

सुन रही हु,,,अभी तेरे पापा होश में नहीं है इसलिए कुछ भी कहना ठीक नहीं है,,, सुबह में जरूर उनसे बात करुंगी,, अभी तु सिर्फ उन दोनों की बातें सुन)

भगवान के लिए चुप हो जाइए आप जो कहेंगे वह करूंगी लेकिन आवाज मत करिए,,,।

(आराधना पूरी कोशिश कर रही थी कि उसके पति शांत करने की ताकि वह ऊंची आवाज में बोल ना सके उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी बहन जागना जाए और उसकी बात सुन ना ले नही तो वह अपनी बहन के सामने शर्मिंदा हो जाएगी,,,)

हां तो ठीक है,,,,,, चल अपने ब्लाउज के बटन खोल,,, तेरी चूचियां बड़ी बड़ी है,,,।

(अपने पापा के मुंह से अपनी मां के लिए इस तरह की बात सुनकर गुस्सा की जगह संजू की उत्तेजना बढ़ने लगी थी वह बिना ब्लाउज के अपनी मां की कल्पना करने लगा था और आग में घी डालने का काम साधना कर रही थी वह बोली,,,) देख संजु तेरी मां की चूची बहुत बड़ी बड़ी है,, अब देखना तेरे पापा तेरी मां की चूची को जोर जोर से दबाएंगे और से मुंह में ले कर पिएंगे,,,।

(अपनी मौसी की बात सुनकर संजु कुछ बोल नहीं रहा था बस मजे ले रहा थाउसकी उत्तेजना और ज्यादा पर जा रही थी क्योंकि उसकी मौसी का नंगा बदन कोशिश पर सो रहा था उसका मन कर रहा था कि वह खुद अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मौसी की चुची पकड़कर दबाने लगे,,, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी,,, तभी उसके कानों में उसके पापा की आवाज सुनाई दी,,,)

बहुत देर कर रही है शाली,,, मेरे लिए ब्लाउज खोलने में तुझे ईतना समय लगता है,,, और अपने आशिक के लिए तुरंत नंगी हो जाती है,,,

यह आप कैसी बातें करते हैं मुझ पर इस तरह का इल्जाम मत लगाया करो वरना किसी दिन जहर खा कर मर जाऊंगी,,,

ओहहहह नखरे तो देखो,,,, अब जल्दी-जल्दी ब्लाउज उतार आज तेरा दूध पीना है,,,।

(यह सब बातें आराधना को जहर की तरह लग रही थी लेकिन बगल वाले कमरे में सुमिरन साधना और संजू दोनों को यह सब बातें ज्यादा उत्तेजना महसूस करवा रही थी वह दोनों काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे,,, रमेश की बातें साधना की बुर में और ज्यादा नमकीन भर रहे थे संजू का लंड और ज्यादा कड़क हो रहा था,,,, अपनी उत्तेजना को संजू संभाल नहीं पा रहा था बार-बार उसे अपनी मौसी का नंगा बदन छूने का मन कर रहा था,,,,,)

वाह ,,,, रे मेरी छम्मक छल्लो,,, कुछ भी कहो तेरी चूचीया लाजवाब,,, है,,,,,(और इतना कहकर रमेश आगे बढ़ा और सीधा आराधना की चूचीयो से अपना मुंह लगाकर पीना शुरु कर दिया,,,,, उसके मुंह से,,ऊममममम ऊनममममम की आवाज आ रही थी जिससे साधना समझ गई थी कि रमेश और आराधना की चूचियां पी रहा है,,,, यही बात संजू को समझाते हुए वह बोली,,,)

तुझे पता है तेरे पापा क्या कर रहे हैं,,,

क्या कर रहे हैं,,,?

तेरे पापा तेरी मां का दूध पी रहे,,,(अपनी मौसी के मुंह से अपने मम्मी और पापा के बारे में यह बात सुनते ही उसके लंड की अकड बढ़ने लगी लेकिन कुछ बोल नहीं रहा था,,, साधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

एक बात बता संजू,,, जैसे आज उन दोनों की बात सुनाई दे रही है ऐसे तो रोज सुनाई देती होगी तु रोज सुनता है ना,,,।

हां,,, अब काम तो बंद करके नहीं सो सकता ना,,,

मतलब रोज इसी तरह की चुदाई वाली बातें होती हैं,,,

सब कुछ होता है झगड़ा मार चुदाई,,,(अनायास ही संजू के मुंह से चुदाई शब्द निकल गया जिसे सुनकर साधना मुस्कुराने लगी,,,)

उन दोनों की चुदाई वाली बातें सुनकर तुझे भी तो कुछ कुछ होता ही होगा,,,,

(इस बात को सुनकर संजू कुछ बोला नहीं तो साधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

मैं जानती हूं तुझे भी कुछ कुछ होता होगा तेरी मम्मी पापा की बात सुनकर तू मेरी बुर पूरी गीली हो गई,,, और मुझे पूरा यकीन है कि तेरा लंड भी खड़ा हो गया होगा,, तेरी मां की बातें सुनकर,,,

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है,,,

तू झूठ बोल रहा है मुझे पता है,,,(अब साधना से गिर के भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था बगल वाले कमरे में उसके जीजा उसकी छोटी बहन के दूध को पी रहे थे और ऐसे में उसकी उत्तेजना बढ़ना लाजमी था इसीलिए वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेंट के ऊपर से ही संजय के लंड को टटोलकर पकड़ ली और बोली,,)

झूठ बोल रहा था ना मुझसे देख तेरा भी खड़ा हो गया है,,,।

(अब संजू क्या बोलता वह तो पूरी तरह से गनगना गया,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें पेंट के ऊपर से ही सही लेकिन उसके लंड को उसकी मौसी पकड़े हुए थी,,, अनुभव से भरी हुई साधना पेंट के ऊपर से ही संजू के लंड को टटोलकर अंदाजा लगा ली थी कि संजू का लंड काफी मोटा तगड़ा और लंबा है उसकी बुर फुदकने लगी थी,,)
 
बगल वाले कमरे में हो रही वार्तालाप को सुनकर साधना पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, यह जानकर कि उसकी छोटी बहन की चूची उसके जीजा दबा दबा कर पी रहे हैं इस हिसाब से वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी उत्तेजना उसके बगल में अपना असर दिखा रही थी और वैसे भी बहुत पहले से ही काफी उत्तेजित हो चुकी थी और अपने भतीजे के साथ कुछ कर सकने के उद्देश्य से उसके यहां पर से अपने सारे कपड़े उतरवा कर नंगी हो गई थी,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब उसकी हालत खराब है तो उसके जवान भतीजे की हालत और ज्यादा खराब होगी इसीलिए वह अपने सब्र का बांध खोते में अपना हाथ आगे बढ़ाकर पेंट के ऊपर से ही अपने भतीजे के लंड को पकड़ ली थी और अनुभव से भरी हुई साधना अपनी भतीजे के लंड को पेंट के ऊपर से ही पकड़ कर अंदाजा लगा ली थी कि उसका लंड बेहद दमदार है,,,।

आहहहहहह,,,, मौसी,,,,

संजू अपनी मौसी का पेटीकोट उतारते हुए

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देख कहती थी ना जब मेरी हालत खराब है तो तेरी तो बहुत ज्यादा खराब होगी,,,,,मुझसे कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है मैं सब कुछ जानती हूं तुम जवान लड़कों की हर एक हरकत बदन के हर एक बदलाव को मैं अच्छी हूं तरह से समझती हूं,,,(पेंट के ऊपर सही संजू के लंड को जोर-जोर से दबाते हुए बोली संजू के तन बदन में आग लग रही थी यह पहला मौका था जब एक औरत उसके लंड को पकड़ रही थी और वह भी पैंट के ऊपर से ही मन ही मन में संजू बहुत खुश भी हो रहा था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इससे आगे क्या करना है,,, तभी बगल वाले कमरे से उसके पापा की आवाज आई,,,)

अरे मेरी रानी पूरा ब्लाउज तो उतार,,

आहहहह ,,, काटिए मत दुखता है,,,,

मेरा तो मन कर रहा है कि तेरी चूचियों को खा जाऊं बहुत बड़ी बड़ी है,,,,

रुकीए में उतार देती हूं आप फाड देंगे,,,

संजू ने अपनी मौसी क बदन पर से उसकी पेंटी भी उतारकर नंगी कर दिया

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जल्दी उतार मेरी रानी,,, नहीं तो अपना लंड तेरी बोर में डालकर फाड़ दूंगा,,,

(शराब के नशे में और अपनी बीवी की जवानी की मदहोशी में रमेश सब कुछ भूल गया था और अश्लील बातें कर रहा था जोकि साधना और संजू को एकदम साफ सुनाई दे रहा था,,, अपने पापा की बातें सुनकर संजू को बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई क्योंकि इस तरह की वार्तालाप गंदी बातें वह हमेशा से सुनता रहा था लेकिन आज अपने करीब अपनी मौसी जो की पूरी तरह से नंगी थी,,इस अहसास से उसकी उत्तेजना उसके पापा की बातें और ज्यादा बढ़ा रही थी वह अपने मन में कल्पना करने लगा था कि कि उसे उसके पापा उसकी मां के साथ गंदी हरकत कर रहे होंगे उसका ब्लाउज उतार रहे होंगे और उसकी मां उसके पापा को समझाते हुए खुद ही अपना ब्लाउज उतार रही है ,,,यह सब अपने दिमाग में कल्पना करके संजु अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसका लंड और ज्यादा को फुलने लगा था,,,)

हाय संजू तेरा लंड तो और ज्यादा कड़क हो रहा है अपने मम्मी पापा की बात सुनकर ना,,, तेरे पापा कितना गंदा बोलते हैं,,,

संजू अपनी मौसी की चुकी से खेलता हुआ

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नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है मौसी,,,

अरे बुद्धू मैं सब समझती हूं,,,,तेरे पापा पागल ह6 जा रहे हैं तेरी मां की चूची पीने के लिए,,, और सुना कैसे कह रहे हैं कि जल्दी उतार नहीं तो तेरी बुर में लंड डालकर फाड़ दूंगा,,,,।(साधना एकदम खुले शब्दों में संजु को सब कुछ बता रही थी औरएक औरत के मुंह से इस तरह की अश्लील बातें सुनकर संजू की उत्तेजना सातवें आसमान पर थी,,,, साधना अपनी बात को आगे बढ़ाती हुई बोली,,,)

तेरे पापा अच्छी तरह से जानते हैं कि एक औरत की चूची पीने में कितना मजा आता है,,, तूने कभी पिया है,,,

न,,नहीं,,,(उत्तेजना के मारे उसके मुख से हक लाते हुए स्वर निकला क्योंकि साधना की हथेली पेंट के ऊपर से ही उसके लंड पर कसी हुई थी,,,)

साधना अपनी जवानी का जलवा दिखते हुए

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तू बुद्धू है,,,एक जवान मर्द होकर इस तरह के सुख से अभी भी अनजान है एक मर्द ही जानता है कि औरत की चूची दबा दबा कर पीने में कितना मजा आता है,,, तेरे पापा भी वही मजा लूट रहे हैं तुझे पता है मर्दों के साथ साथ औरत को भी यह काम करवाने में बहुत मजा आता है तेरे मौसा भी तेरे पापा की तरह ही करते हैं तेरे पापा तेरे में ऐसा ही क्या दुनिया का हर मर्द यही करता है और सच बताऊं तो मुझे भी बहुत मजा आता है,,, मैं तो बारी बारी से अपनी दोनों चूचियां पकड़कर तेरे मौसा के मुंह में डाल देती हूं,,,

(साधना की बातें राजू के लंड में उबाल भर रहे थे,,,उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें बार-बार उसका मन भी कर रहा था कि हाथ बढ़ा कर अपनी मौसी की चूची को थाम ले और जोर-जोर से दबाए,,,लेकिन अपनी मौसी की इस तरह की हरकत को देखते हुए भी वह हिम्मत नहीं बना पा रहा था,,,और इसीलिए साधना भी उसे बुद्धू ही समझती थी वरना उसकी जगह कोई और लड़का होता तो अब तक शायद उसकी दोनों टांगों के बीच आकर उसकी चुदाई कर दिया होता,,,। बगल वाले कमरे से संजू की मां की गरम सिसकारियों की आवाज आ रही थी जो कि इस बात का सबूत है था कि संजू के पापा की जबरदस्ती में भी आराधना को बहुत मजा आ रहा था उसकी गरमा गरम सिसकारीयो का जिक्र करते हुए साधना बोली,,,।)

पहली बार संजू चुकी का पान कर रहा था

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देख रहा है तेरी मां की आवाज निकाल रही है,,,

हां मौसी लेकिन मम्मी इस तरह की आवाज क्यों निकलती है,,,

अरे बुद्धूतेरी मां को बहुत मजा आ रहा है भले ही तेरे पापा तेरी मां के साथ जबरदस्ती कर रहे हैं लेकिन तेरे पापा की जबरदस्ती में भी तेरी मां को बहुत मजा आ रहा है एक औरत को जब इस तरह की हरकत करने में बहुत मजा आता है तब उसके मुख से अपने आप इस तरह की आवाज निकलना शुरू हो जाती है,,,

क्या तुम सच कह रही हो मौसी,,,

मैं भला तुझसे झूठ क्यों बोलूंगी जब तू भी किसी औरत के साथ इस तरह का संबंध बनाएगा इस तरह की हरकत करेगा जैसा कि तेरे पापा कर रही तो देखना उस औरत के मुंह से भी इसी तरह की आवाज निकलेगी जो कि तुझे पूरी तरह से मस्त कर देगी,,,,।

(संजू से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था उसकी मां की हरकत और साधना की बातें उसके ऊपर दोहरा वार कर रही थी उसकी जवानी को पानी पानी कर रही थी कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था मोहिनी घोड़े बेच कर सो रही थी उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके बगल में ही उसकी मौसी पूरी तरह से नंगी लेटी हुई है,,, और बगल वाले कमरे में उसकी मां अपनी चूची पिला रही है,,, साधना उत्तेजना के मारे जोर-जोर से पेंट के ऊपर से उसके लंड को दबा रही थी तो संजू से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मौसी के हाथ पर रख दिया,,,, संजू की हथेली अपने हाथ पर पडते ही साधना बोली,,,)

साधना संजू क लुंड को पकड़ कर मस्त हो गयी थी

तुझे भी मजा आ रहा है ना संजू,,,।

(संजू कुछ बोला नहीं कोशिश शर्मा भी महसूस हो रही थी संजू को खुद अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि उसकी मौसी को व्रत होने के बावजूद भी इतनी गंदी-गंदी बातें कर रही थी और उसके लंड से खेल रही थी और एक वह मर्द होकर भी हिम्मत नहीं दिखा पा रहा था अपनी मौसी के अंगों से नहीं खेल पा रहा था जबकि उसकी मौसी उसके बगल में एकदम नंगी लेटी हुई थी क्योंकि उसकी तरफ से खुला आमंत्रण था)

मुझे मालूम है तुझे भी बहुत मजा आ रहा है वरना तेरा लंड इस तरह से खड़ा नहीं होता,,,, तु यही सोच रहा हैं ना कि तेरी मां कैसे अपना दूध तेरे पापा को पिला रही होगी,,।,,, तेरी मां की चूचियां भी तो बड़ी-बड़ी है,,, नंगी ना सही ब्लाउज के ऊपर से तूने देखा ही होगा,,, भले ही मेरे पूछने पर झूठ बोले लेकिन मैं सब जानती हूं,,, तुम लड़कों की उम्र कुछ ऐसी होती है इस उमर में,,, चोरी-छिपे कपड़ों के ऊपर से ही अंगों को देखने की उनके आकार को नापने की कोशिश करते रहते हैं,,,, जैसा कि तुम इस समय अपनी मां के बारे में कल्पना कर रहा होगा,,, तेरे पापा इस समय तेरी मम्मी का दूध दबा दबा कर पी रहे हैं,,,। जानता है ना संजु,,,

हां,,,,,

तो तेरा मन नहीं करता मजा लेने को,,,, सच बोलना मुझसे शर्मा मत,,,,,,(साधना जोर से पेंट के ऊपर से ही संजू के लंड को दबाते हुए बोली,,,)

हां,,, करता है ना लेकिन मेरे लिए जुगाड़ कहां है,,,,(संजू का आप के स्वर में बोला उसकी यह बात सुनकर साधना मुस्कुराते हुए बोली)

ओहहहह,,,हो,,,, मेरा बेटा जवान हो गया,,, है,,, चल कोई बात नहीं अगर मैं जुगाड़ लगा दु तो,,,,

नहीं नहीं मौसी तुम कैसी बातें कर रही हो,,,

संजू साधना की चुदाई करके मस्त हुआ का रहा था

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दे तू बिल्कुल भी चिंता मत करो मुझसे घबरा मत और शर्मा तो बिल्कुल भी मत इस समय सोच ले कि मैं तेरी दोस्त हूं,,,,,(हल्के हल्के पैंट के ऊपर से लंड को मसलते हुए जिससे संजू के बदन में खुमारी छा रही थी,,,)

ठीक है लेकिन कैसे,,,

अरे बुद्धू तुझे बाहर जाने की जरूरत नहीं है मैं किस दिन काम आऊंगी,,,

तततत,,तुम,,,,, तुम मौसी,,,,

हारे तो क्या हुआ इस समय तो भूल गया कि मैं तेरी मौसी हूं और तू मेरा भतीजा है इस समय सिर्फ तो यह सोच कि मैं एक औरत हूं और एक तू एक मर्द जिनके बीच सिर्फ एक ही रिश्ता रहता है सिर्फ शारीरिक,,,,,,,।

सहहहहह ईहहहहह आआआहहहह आहहहहहह,,,, धीरे से,,, धीरे से पियो,,,आहहहहहह,,,

(संजू और साधना दोनों के कानों में संजू की मां की शिकारियों की आवाज गूंजने लगी और उसकी तरफ से इस कार्य की आवाज सुनकर साधना के तन बदन में आग लगने लगी और वह बोली)

दिख रहा है संजू तेरे पापा कितना मजा लेकर तेरी मां का दूध पी रहें हैं,,,, तू भी इसी तरह से मजा ले सकता है,,,

कैसे,,,?

(इतना सुनते ही साधना के सब्र का बांध टूट गया और वह,, संजू का हाथ पकड़कर उसे अपनी चुचियों पर रख दी,,, समझो तो एकदम हक्का-बक्का रह गया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बिजली के तार पर हाथ रख दिया हो,,, और तुरंत वह अपना हाथ पीछे खींच लिया,,,,)

क्या हुआ संजु,,,

मममम,,मौसी,,,,

तू घबरा मत संजू,,,,बस धीरे धीरे से दबा बहुत मजा आएगा (इतना कहने के साथ ही साधना एक बार फिर से उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे अपने दोनों खरबूजा पर रख दी,,, साधना की बातों को सुनकर संजू का हौसला बढ़ने लगा,,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि जब वह एक औरत होकर इतनी हिम्मत दिखा रही हैं तब तो वह एक मर्द है उसे तो एकदम आगे होना चाहिए यही सोचकर वह अपनी मौसी की दोनों चूचियों को अपनी हथेली में दबा कर मसलने लगा,,,, जवान हथेली की पकड़ में अपनी चुचियों को महसूस करते ही साधना अंदर ही अंदर सिहरने लगी उसका पूरा बदन कसमसाने लगा,,,,,, पल भर में ही संजू को मजा आने लगा उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि दूर से कड़क दिखने वाली चूचियां ईतनी रुई की तरह नरम होती है,,, संजू का यह पहली मर्तबा था जब वह किसी औरत के अंगों से खेल रहा था,,,, संजू धीरे-धीरे स्तन मर्दन के आनंद में खोने लगा उसे मजा आने लगा और देखते ही देखते जैसे किसी दशहरी आम को जोर जोर से दबा कर उसका रस निचोड़ रहा हो इस तरह से वह अपनी मौसी की चूचियों को दबाने लगा,,।

कैसा लग रहा है संजू,,,

बहुत मजा आ रहा है मौसी,,,,

इससे भी ज्यादा मजा आएगा जब तो इसे अपने मुंह में लेकर तेरे पापा की तरह पीएगा,,,

क्या सच में,,,

हारे,,,, देखना चाहता है,,,

हां,,,

(इतना सुनते ही साधना संजू का सर पकड़ कर उसे अपने साथियों की तरफ खींचने लगी और से अपनी एक चूची पर रख कर उसके बालों को सहलाने लगी,,,, उत्तेजना के मारे संजू का लंड फटा जा रहा था उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है वह हकीकत है उसे सब कुछ सपना सा लग रहा था,,, संजू तुरंत छोटे बच्चों की तरह अपनी मौसी की निप्पल को मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया और आनंद के सागर में गोते लगाने लगा इससे तो सुख के बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,,वह इस सुख से बिल्कुल अनजान था उसे नहीं पता था कि औरतों की चुचियों को पीने में इतना मजा आता है देखते ही देखते वह खुद ही अपनी मौसी की दोनों चूचियों को बारी-बारी से पीना शुरु कर दिया,,,, यह उसके लिए अतुलनीय पल था इसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह अपनी मौसी की चूची को मुंह में लेकर पिएगा और वह भी अपने ही कमरे में अपनी बहन की मौजूदगी में,,,, कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था लेकिन अब शायद संजीव को उजाले की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि धीरे-धीरे उसे अपनी मौसी की चूची का भूगोल पता चल गया था,,,, उसकी मौसी की भी चूची उसकी मां की तरह ही बड़ी-बड़ी थी,,,, जिसे दबाने में उसे अद्भुत सुख का ऐहसास हो रहा था,,,।

साधना की मस्ती और ज्यादा बढ़ती जा रही थी क्योंकि परिवार में पहली बार बार अपने भतीजे के साथ इस तरह की हरकत कर रही थी उसे अत्यधिक आनंद की अनुभूति हो रही थी,,।

ओहहहहह,,,, संजू,,,सहहहहह आआआआईहहहहहह,,,ऊमममममम बहुत मजा आ रहा है और जोर-जोर से आहहहहहह,,,।

अपनी मौसी की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर संजीव को यकीन हो गया कि जो कुछ भी उसकी मौसी बता रही थी वह सच थाउसकी मौसी को भी मजा आ रहा था इसलिए अपनी मौसी की बात सुनते ही हो और जोर-जोर से जितना हो सकता था उतना अपनी मौसी की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था,,,,बगल वाले कमरे से भी लगातार गरमा गरम सिसकारियों की आवाज आ रही थी,,,जिसे सुनकर संजू की उत्तेजना और ज्यादा पर जा रही थी क्योंकि बगल वाले कमरे में उसकी मां मजे ले रही थी और अपनी मां के बारे में सोच कर उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ रही थी,,,, साधना अपनी चूची को पिलाने में आनंद के सागर में डूबती चली जा रही थी और संजू को भी मजा आ रहा था कि तभी बगल वाले कमरे से आवाज़ आई,,,।

हाय मेरी जान बस अपना जलवा दिखा दे,,, उतार अपनी साड़ी को और नंगी हो जा,,, आज तुझे नंगी करके चोदुंगा,,,

(इतना सुनते ही उत्तेजना के मारे साधना पेंट के ऊपर से ही संजू के लड्डू को जोर-जोर से दबाते हुए उसके पेंट का बटन खोलने लगी और संजू अपने पापा की यह बात सुनकर पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी मौसी की दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाता हुआ उसका दूध पीने लगा,,,,)

नहीं नहीं नंगी करके नहीं बस ऐसे ही कर लीजिए मैं साड़ी कमर तक उठा देती हूं,,,।

(अपनी मां की रंगीन बातें सुनकर संजू के होश उड़ रहे थे ऐसा नहीं था कि वह पहली बार सर की बातों को सुनकर बता दें कि इस समय का माहौल कुछ और था क्योंकि वह खुद ही खूबसूरत औरत के बदन से खेल रहा था उसकी मां की यह बात उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी इससे पहले अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना नहीं करता था लेकिन आज उसकी कल्पना में सिर्फ उसकी मां ही थी वह अपने मन में यही सोच रहा था कि कैसे उसकी मां साड़ी कमर तक उठाकर चुदवाती होगी,,,, आराधना की बात सुनते ही साधना संजू बोली,,)

संजू अब तेरी मां की चुदाई होने वाली है लेकिन तेरी मां कपड़े उतार कर नंगी होकर चुदवाना नहीं चाहती बस साड़ी कमर तक उठाकर छुड़वाना चाहती है,,, लेकिन असली मजा तो नंगी होने के बाद ही आता है,,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना संजू के पेंट का बटन खोल कर उसके मोटे लंबे लंड को बाहर निकाल ले और उसे अपने हाथ में लेकर उसकी गरमाहट को महसूस करते ही उसकी बुर पानी छोड़ने लगी,,,)

बाप रे तेरा तो कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है,,,, तेरे लंड से तो बहुत मजा आएगा,,,,(संजू को बहुत मजा आ रहा था उसका नंगा लंड उसकी मौसी के हाथ में था जिसे वो धीरे-धीरे हिला रही थी अपनी मौसी के मुंह से ही उसे पता चला कि उसके लंड की लंबाई और मोटाई कुछ ज्यादा ही है,,,, उसे अपने लंड पर गर्व होने लगा,,,, लेकिन वह बोला कुछ नहीं बस उसकी चुचियों से खेलता रहा,,, तभी बगल वाले कमरे से उसके पापा की आवाज आई)

नहीं साली रंडी एक औरत की तरह चुदवा रंडी की तरह नहीं की साड़ी उठाकर डलवाली बस हो गया,,,

यह कैसी बातें करते हैं आप,,, मैं तुम्हारी बीवी हुं,,

बीवी है तो बीवी की तरह कि नहीं देती रंडी की तरह लेने के लिए क्यों कहती है,,,, उतार अपने कपड़े देख मै भी उतार रहा हूं,,,

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हाय तेरे पापा तो तेरी मां के साथ खुलकर मजा लेना चाहते हैं,,,,,,हाय यह तेरा लंड मुझे तो पागल बना रहा है,,,, अब तेरी मां चुदने वाली है,,,,

(अपनी मौसी की बातें सुनकर और बगल वाले कमरे से अपने मां-बाप की बात को सुनकर उसका मजा और उत्तेजना दोनों दुगना होता जा रहा थासंजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पापा जीती है वह उसकी मम्मी को नंगी करके ही चोदेंगे,,और समझो अपने मम्मी कल्पना कर रहा था कि कैसे उसकी मां अपने हाथों से अपनी साड़ी उतारेगी अपने पेटीकोट की डोरी खोल कर उसे नीचे गिराएगी और अपनी पेंटिं उतारेगी,,संजू यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बहुत खूबसूरत एकदम गोरी चिट्टी है इसलिए नंगी होने के बाद ही कम कयामत लगती होगी हालांकि अभी तक संजू को है सुबह से और नहीं मिला था कि वह अपनी मां को संपूर्ण रूप से नंगी देख सके और उसने कभी देखने की कोशिश भी नहीं किया था लेकिन धीरे-धीरे उसका मन बदल रहा था,,,, वह जोर-जोर से अपनी मौसी की चूची को पीकर उसे लाल टमाटर बना दिया था,,,,

साधना की हालत खराब होती जा रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह कभी सोची नहीं थी कि अपनी बहन के घर पर आकर उसने इस तरह का काम करने को मिलेगा अपनी प्यास बुझाने का उसे एक नया अवसर मिलेगा और वह भी अपने भतीजे के साथ हालांकि अपने जवान भतीजे के साथ उसे बहुत मजा आ रहा था,,, बगल वाले कमरे की अपनी बहन और अपने जीजा की गरमा गरम वार्तालाप को सुनकर उसके सब्र का बांध धीरे-धीरे टूटता चला जा रहा था और वह काम कीड़ा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी,,,, संजू के कपड़े उसके काम क्रीडा में बाधा डाल रहे थे इसलिए वह संजू से बोली,,,

संजू तू भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो जा फिर बहुत मजा आएगा,,,।

(अपनी मौसी की बातें सुनकर संजू झट से तैयार हो गया और तुरंत अपने कपड़े उतारने लगा क्योंकि वह समझ गया था कि उसके लिए उसकी मौसी के दोनों टांग के बीच के सारी बाधा दूर होती चली जा रही है,,,, और देखते ही देखते वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,,,।)

हां अब आया ना मजा,,,,

( सभी बगल वाले कमरे से आवाज़ आई,,)

यह पेंटिं क्यों छोड़ रखी है,,, इसे भी उतार मेरी जान,,,।

उतारती हूं,,,।

सहहहहह ईहहहहह,,, संजू सुन रहा है तेरी मां सिर्फ पेंटी पर खडी है और अब पेंटिं उतारने जा रही है और उसके बाद तेल ना बिल्कुल मेरी तरह के नंगी हो जाएगी औरत नंगी औरत बेश खजाने से कम नहीं होती,,,,।

(संजू भी अपनी मां के बारे में सोच कर ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,, साधना अपने भतीजे के लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दी थी,,, और धीरे-धीरे वह उसके लंड पर झुकती चली गई,,, और देखते ही देखते संजू को पता भी नहीं चला और वह उसके लंड को गप्प से अपने मुंह में ले ली और से लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी,,,, संजू की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसे उम्मीद से कई गुना ज्यादा मिल रहा था,,,, वो कभी सोचा नहीं था कि उसकी जिंदगी में भी तरह का कोई पल आएगा जब एक औरत उसके बदन से खेलेगी उससे प्यार करेगी लेकिन उसकी खुद की मौसी उसकी कल्पना को साकार कर रही थी एक मोटे तगड़े लंबे लंड को अपने मुंह में लेकर भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे देखते ही देखते संजू का मजा आने लगा और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मौसी के रेशमी बालो से खेलने लगा,,,, साधना को मजा आ रहा था उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि उसके पति का लंड संजू से आधा ही है इसलिए उसके लंड की मोटाई और लंबाई को देखते हुए उसकी बुर फुदकने लगी,,, साधना पागलों की तरह उसके लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर कर रही थी उसे गले तक उतार ले रही थी और संजू की हालत पल पल खराब होती जा रही थी उसके बदन की कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,, वो धीरे धीरे नीचे से जितना हो सकता था उतना अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाने की कोशिश कर रहा था यह क्रिया अपने आप ही हो रही थी उत्तेजना के वह आधीन हो चुका था,,, दोनों उत्तेजना से पागल हुए जा रहे थे कि तभी बगल वाले कमरे से आवाज आई,,,।

थोड़ी अपनी टांग खोल,,,, हां ऐसे अब देख कैसे मेरा लंड तेरी बुर में जाता है,,,।

यह सुनते ही साधना और संजू का जोश पढ़ने लगा क्योंकि दोनों समझ गए थे कि अब वह अपना लंड बुर में डालने वाला है,,, और इसी उत्तेजना के चलते साधना घूम गई और लंड को बिना मुंह से बाहर निकाले हीअपनी स्थिति को बदलते हुए वह घुटनों के बल संजू के कंधों के इर्द-गिर्द अपनी पोजीशन बना दी संजीव को समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहा था कि उसकी मौसी क्या कर रही है कि तभी साधना अपनी भाभी भरकम गांड को उसके चेहरे पर रगड़ने लगी,,, उसकी बुर पहले से ही पानी पानी हुई थी गांड को उसके चेहरे पर रगड़ने की वजह से उसकी बुर का काम रस संजू के होठों पर लग रहा था संजु को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है,,, साधना यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि संजू इस खेल में अनाड़ी है इसलिए वह बोली,,,।

संजू मेरी बुर चाट,,,, जैसे में तेरा लंड चूस रही हुं,,,

अपनी मौसी का आदेश मानना संजू के लिए बहुत जरूरी था क्योंकि अभी तक सुबह अपनी मौसी की बात मानता आ रहा था और उसे बहुत मजा आ रहा था उसे लगने लगा था कि इसके लिए हमें भी उसे बहुत मजा आएगा हर बार अपनी जीभ निकालकर अपनी मौसी की बुर को चाटना शुरू कर दिया बुर से उठती हुई मादक खुशबू उसके नथुनों से होकर उसके बदन में भर रही थी,,, और यह उसकी उत्तेजना को ज्यादा बढ़ा रहा था,,, पहले तो उसे अपनी मौसी का काम रस कसैला लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे वह नमकीन रस मे बदल गया और उसे मजा आने लगा,,, अब वह उत्तेजना के मारे अपने दोनों हाथों से अपनी मौसी की गांड पकड़कर उसकी बुर को चाट रहा था,,, और साधना अपनी भारी-भरकम गांड को गोल-गोल घुमा रही थी उसके चेहरे पर रगड़ रही थी,,,साधना को इस पोजीशन में बहुत मजा आता था अपने पति के साथ अक्सर वह इसी पोजीशन का उपयोग करते हुए एक साथ दो-दो काम करती थी,,,। और तभी बगल वाले कमरे से गरमा गरम सिसकारियों की आवाज गुंजने लगी,,,। दोनों समझ गए कि अंदर चुदाई शुरू हो गई है,,,, एहसास दोनों को और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था,,,, कुछ देर तक दोनों इसी पोजीशन का मजा लेते रहें और अंदर कुछ देर बाद शांति छा गई साधना समझ गई कि दोनों झड़ गए हैं,,,, अब साधना की बुर में भी चींटियां रेंग रही थी,,,।वह भी समझू के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी लेकिन यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि संजु को चोदना बिल्कुल भी नहीं आता इसलिए वह पहले शुरुआत करना चाहती थी इसलिए वह अपने मुंह में से संजू के लंड को बाहर निकाली

और बिना कुछ बोले ही,, अपनी गांड को संजु के मुंह पर से उठाकर,,, उसकी कमर के इर्द-गिर्द अपना घुटना रखकर अपनी स्थिति को बदलने लगी संजू को समझ पाता इससे पहले ही वह उसके खडे लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी गुलाबी बुर के छेद पर लगा कर धीरे-धीरे अपनी भारी-भरकम गांड का वजन उस पर बढ़ाने लगी पर देखते ही देखते संजू का मोटा लंड साधना की बुर में प्रवेश करने लगा,,, संजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी ,,, संजू के लंड का यह सर्वप्रथम बुर प्रवेश था,,,,,, वह कभी सोचा नहीं था कि सब कुछ इतनी जल्दी हो जाएगा,,, और देखते ही देखते संजु के लंड की मोटाई की रगड़ को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर महसुस करते हुए साधना अपनी बुर में संजू के समूचे लंड को उतार ली,,,,, साधना को इस बात का एहसास हो गया था कि संजू का लंड ज्यादा मोटा है उसे अंदर लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन वह इस तकलीफ को झेलते हुए पहले से ही गीली हो चुकी है अपनी बुर की चिकनाहट की मदद से उसे अंदर तक ले ली थी,,,।

साधना संजू क लुंड को लेकर गदगद हुए जा रही थी

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देखा संजू तेरा लैंड पूरा का पूरा मेरी बुर में घुस गया है,,,

हां मौसी,,,(उत्तेजना के मारे संजू कहां पर स्वर में बोला)

अब देख मैं तेरी कैसी चुदाई करती हूं,,,।

(और इतना कहने के साथ ही साधना धीरे-धीरे अपनी भारी-भरकम गांड को संजू के लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, बड़े आराम से संजू का लंड साधना की बुर की गहराई तक जा रहा था,,,, साधना संजू के कंधे को पकड़कर अपनी गांड को जोर-जोर से पटकना शुरू कर दी थी,,,संजू भी अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी कमर को थाम लिया था और उसे अपने लंड पर उठक बैठक करते हुए मदद कर रहा था चुदाई में इतना मजा आता है संजू कभी सोचा नहीं था,,, आज उसका सपना सच हो रहा था,,,, उसकी जवानी रंग ला रही थी,,,। आज अपने साथ-साथ वह अपनी मौसी की भी प्यास बुझा रहा था,,।

बगल वाले कमरे से किसी भी प्रकार की आवाज नहीं आ रही थी चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था रात के करीब 1:00 बज रहे थे और ऐसे में साधना अपने भतीजे से संभोग सुख का मजा लूट रही थी बड़े आराम से उसका लेना साधना के बुर के अंदर बाहर हो रहा था बार-बार साधना संजू के लंड को अपने बच्चेदानी तक लेकर फिर अपनी गांड को उठा ले रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत संतुष्टि की प्राप्ति हो रही थी कुछ देर तक साधना खुद संजू की चुदाई करती रही लेकिन नीचे से उसकी हरकत को देख कर उसे लगने लगा था कि अब एक मौका उसे देना चाहिए इसलिए वह तुरंत संजू के लंड के ऊपर से उठ गई और पीठ के बल लेट गई और संजू को उसकी दोनों टांगों के बीच आकर चुदाई करने के लिए बोली संजू तो इतना समझ गया था कि अब उसे क्या करना है इसलिए पोजीशन बनाकर,,, वह अपने लंड को उसकी बुर के छेंद‌पर रखने लगा लेकिन उसे अंधेरे में साधना की बुर दिखाई नहीं दे रही थी इसलिए साधना ही उसकी मदद करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके लंड को पकड़ ली और अपने बुर के छेद कर रख दी,,, अब संजू के लिए आसान हो चुका था और वह अपनी कमर हिला कर आगे बढ़ा और बड़े आराम से उसका लंड साधना की बुर में प्रवेश कर गया और वह अपनी मौसी की कमर थाम कर अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया संजीव जिंदगी में पहली बार किसी औरत की चुदाई कर रहा था तेज तेज धक्के लगा रहा था,,,, उसके हर एक धक्के पर साधना हील जा रही थी साधना को इस बात का एहसास हो गया कि संजू में बहुत दम है क्योंकि वह बिना रुके एक ही करा से बड़े तेज तेज धक्के लगा रहा था साधना अपनी गरम सिसकारियों की आवाज पर पूरी तरह से काबू करके धीरे-धीरे आवाज निकाल रही थी,,, क्योंकि वह जानती थी कि वातावरण में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ है और बगल वाले कमरे में उसके जीजा और उसकी बहन इस तरह की गर्म सिसकारी की आवाज को अच्छी तरह से पहचानते हैं इसलिए वह किसी भी प्रकार की गलती नहीं करना चाहती थी और संजू के द्वारा चुदाई का मजा लूट रही थी,,,, साधना खुद उसके दोनों हाथों को पकड़कर अपनी चूची पर रख दी और उसे दबाने के लिए बोली और ऐसा करने में संजू की उत्तेजना हो ज्यादा बढ़ जा रहे थे वह अपनी मौसी की चूची को दबा दबा कर धक्के पर धक्का खेल रहा था,,,।

आखिरकार 20 मिनट के बाद दोनों की सांसें बड़ी तेजी से चलने लगी,,, दोनों अपने चरम सुख के बेहद करीब थे साधना संजू को अपनी बाहों में कस लेी और संजू अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दिया और कुछ ही धक्कों के बाद वह साधना के छातीयो पर गिरकर हांफने लगा,,,एक औरत को चोदते समय उसके जीवन का पहला चरण सुखदाई जो कि बेहद संतुष्टि भरा था इसके पहले वह अपनी गर्मी को अपने हाथ से हिला कर शांत करता था लेकिन कभी कबार ही,,, आज उसे इस बात का एहसास हुआ था कि अपने हाथ से ज्यादा बुर चोदने में ज्यादा मजा आता है,,,, साधना उसके बालों को सहना रही थी और सब कुछ शांत होने के बाद बोली,,,।

कैसा लगा संजु,,,

बहुत मजा आया मौसी,,,

मैं कहती थी ना बहुत मजा आएगा अब जब भी में इधर आऊंगी तेरे से जरूर से चुदवाऊंगी,,,।

जरूर मौसी मुझे भी इंतजार रहेगा,,,,।

चलो मेरे ऊपर से उतर और सो जा बहुत रात हो गई है,,,

ठीक है मौसी,,,

(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मौसी की बुर में से अपने लंड बाहर निकाल के बगल में लेट गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में नींद की आगोश में चली गई सुबह साधना कि नहीं जल्दी खुली और वहां चली गई अपने कपड़े पहनकर संजू को भी अपने कपड़े पहनने के लिए बोली,,, मोहिनी उससे पहले ही दोनों अपने कपड़े पहन कर वापस सो चुके थे)
 
साधना

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साधना की नंगी गांड

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साधना की मदमस्त जवानी

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मोहिनी उठकर नहाने के लिए चली गई थी और जाते-जाते अपनी मौसी को भी जगा दी थी,,,, साधना अंगढ़ाई लेते हुए उठ कर बैठ गई,,, बगल में संजू गहरी नींद में सो रहा था वह जानती थी कि संभोग करने में कुछ ज्यादा ही ताकत और ऊर्जा खर्च हो जाती है और गहरी नींद आती है इसलिए संजू की मासूमियत भरे चेहरे को देखकर वह मंद मंद मुस्कुराने लगी,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा है ताकि इतना मासूम सा दिखने वाला संजू संभोग में इतना जबरदस्त तगड़ा होगा,,,,,, उसके मोटे तगड़े लंड से जिस तरह की संतुष्टि उसे प्राप्त हुई थी,,,,, अब तक उसने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी,,,,,, इसलिए तो उसे अभी भी अपनी बुर में मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था,,,।

संजू और साधना

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स्कूल का समय हो रहा था साधना जाती थी कि संजू को स्कूल भी जाना है इसलिए वह उसे उठाने लगी,,।

उठ ए संजू स्कूल नहीं जाना क्या,,,, देख कितना बज रहा है,,,(इतना सुनते ही संजू एकदम से हड़बड़ा गया क्योंकि वह स्कूल पहुंचने में कभी भी लेट नहीं होना चाहता था,,,, वह जैसे ही अपनी आंखों को खोला तो उसकी आंखों के सामने साधना बैठ कर उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी उसके मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर संजू की भी होठों पर मुस्कान आ गई लेकिन वो रात वाली बात से एकदम से शरमा गया और शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका लिया,,,,)

साधना

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अरे उठ जा तुझे स्कूल जाना है मोहिनी तो फ्रेश होने के लिए चली गई,,, तू लेट हो जाएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही साधना संजू पर प्यार बरसाते हुए नीचे झुककर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन कर दी,,, इस चुंबन से संजू पूरी तरह से उत्तेजना के मारे सिहर उठा उसे अपनी मौसी से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं क्या उम्मीद तो वैसे उसे जिस तरह का रात को कार्यक्रम हुआ था उसकी भी नहीं थी लेकिन वह हो गया था,,,,, जीवन के प्रथम संभोग से संजू बहुत ही खुश और संतुष्ट था उसे इतना तो पता था कि इस कार्य में बहुत आनंद आता है लेकिन इतना मजा आता है वह इस कल्पना को साकार होने के बावजूद ही महसूस कर रहा था,,,,उसके लिए आज की रात बेहद अद्भुत और अतुलनीय थी इसके बारे में उसने कभी कल्पना नहीं किया था और ना ही सोचा था कि पहला संभोग उसकी इतनी करीबी रिश्तेदार से ही होगा,,,।

संजू अपने जीवन के प्रथम चुंबन से पूरी तरह से गदगद हो गया था साधना के गुलाबी होंठ गुलाब की पत्तियों की तरह एकदम नरम नरम स्पर्श प्रदान कर रहे थे एक बार फिर से अपनी मौसी के चुंबन की वजह से उसका लैंड खड़ा होने लगा था,,, मन तो साधना का भी कर रहा था लेकिन अब उचित समय बिल्कुल भी नहीं था,,,, चुंबन लेने के बाद साधना उससे बोली,,,,,।

रात को कैसा लगा था संजू,,,

पूछो मत मौसी बहुत मजा आया था,,,।

मेरा मन तो आप एक ही मजा लेने को कहा है लेकिन अब सुबह हो गई है कोई भी आ सकता है,,,,

हां मौसी मेरा भी मन बहुत कर रहा है,,,(अपनी मौसी की भारी-भरकम चूचियों की तरफ देखते हुए) लेकिन इस समय मुमकिन नहीं है,,,

मोहिनी

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कोई बात नहीं अब तो हम दोनों के बीच एक नई रिश्तेदारी शुरू हो गई है,,,, फिर मौका मिलेगा,,,, और हां मैं बाथरूम जा रही हूं इस बार मत आकर झांकने लग जाना,,,

तुम भी दरवाजा लॉक करके बैठना,,,(इतना कहकर संजू और साधना दोनों हंसने लगे,,,, साधना कमरे से बाहर निकल गई और संजू वही बैठा बैठा अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड हिलते हुए देखता रह गया,,,, संजू अपने मन में सोचने लगा कि भले ही रात को उसे अपनी मौसी को चोदने का सौभाग्य प्राप्त हुआ लेकिन अभी भी उस में कमी रह गई थी क्योंकि वह अंधेरे में अपनी मौसी की चुदाई किया उजाले में किया होता तो उसके हर एक अंग को अपनी आंखों से देख कर और ज्यादा मस्ती का अनुभव कर पाता उसकी गुलाबी बुर में अपना लंड अंदर बाहर होता हुआ अपनी आंखों से देख पाता,,,। अपनी मौसी को पूरी तरह से नंगी देख पाने का मलाल उसके मन में रह गया था लेकिन उसे उम्मीद थी कि एक न एक दिन जरुर होगा उजाले में अपनी मौसी की चुदाई करेगा,,,।

संजू की मम्मी की मस्त गांड

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थोड़ी देर बाद मोहिनी और संजू दोनों स्कूल जाने के लिए तैयार थे और साथ में साधना भी अपने घर की तरफ जाने के लिए तैयार थी,,,, रमेश जो सुबह ही बाहर टहलने निकल गया था वह भी अभी घर वापस लौटा तो साधना को देखते ही बोला,,,।

अरे तुम कब आई साधना,,,

मैं तो कल ही आई थी और अब जा रही हूं आप तो इतना शराब पीने लगे हैं कि तेरा भी होश नहीं रहता कि कौन घर में आया है कौन जा रहा है,,,।

मुझे माफ कर देना साधना क्या करूं कुछ ज्यादा हो गई थी,,,

(रमेश की बातें सुनकर साधना संजू की तरफ देखने लगी मानो कि अपने आंखों के इशारों से संजू से कह रही हो कि रात को कैसे उसकी चुदाई करने का मन बना रहा था और अभी कितना सीधा साधा बना है,,,,, रात को अपने जीजा की बातों को सुनकर साधना के तन बदन में चुदाई का जो सिहरन उठ रहा था वह उसे संजू की तरफ और ज्यादा आकर्षित किया जा रहा था,,, पहली बार साधना को इस बात का एहसास हुआ था कि उसके जीजा उसके बदन की तरफ आकर्षित है,,, उसे चोदना चाहते हैं,,,,,,,)

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अच्छा आराधना अब मैं चलती हूं फिर आऊंगी लेकिन जो तुझे कल मेने हिदायत दी थी उस पर अमल जरूर करना,,,।

(अपनी मौसी की आवाज सुनते ही मोहिनी के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि साधना जो कुछ भी आराधना को करने के लिए बोल रही थी बगल वाले कमरे में बैठकर मोहिनी सब कुछ सुन रही थी जिसे सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच कामरस का रिसाव होने लगा था,,,और वह अपने मम्मी को अपने पापा के साथ अपनी मौसी के द्वारा बताए गए हरकत के करने की कल्पना करके अपनी जवानी का रस बहा रही थी,,,। अपनी बड़ी बहन की बात सुनकर आराधना बोली,,, और मोहिनी भी यही सुनना चाहती थी कि उसकी मां क्या जवाब देती है,,,)

ठीक है दीदी जैसा तुम बताई हो मैं वैसा करने की पूरी कोशिश करूंगी,,,

कोशिश नहीं करना है अमल करना है तभी तेरा जीवन फिर से हरा भरा हो जाएगा,,,,

ठीक है दीदी,,,,,

अब बच्चों चलो हमें चलना चाहिए,,,, देर हो रही है,,,,।

(इतना कहने के साथ ही तीनों घर से बाहर निकल गए और संजू अपने मन में सोचने लगा की साधना मौसी कितने आराम से बोल दी कि चलो बच्चों और रात को ईसी बच्चे का मोटा लंबा लैंड लेकर कितना मस्त हो रही थी,,,, संजू अपने मन में सोचने लगा कि कुछ भी हो मौसी की बुक अंदर से बहुत गर्म थी,,,,। रास्ते पर संजू रात में जो कुछ भी हुआ था सब के बारे में बड़े बारीकी से सोच रहा था की कैसे-कैसे क्या हुआ था,,,,,,उसकी मौसी ने उसे उत्तेजित करने के लिए अपनी तरफ से कोई भी कसर नहीं बाकी रखी थी उसकी हर एक हरकत संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ा रही थी चाहे बाथरूम वाला दृश्य चाहे कमरे में एक साथ सोने का दृश्य हो या फिर चाहे एक बहाने से लाइट चालू करके चादर छोड़ने का और उसी बहाने अपने बदन को दिखाने का,,, जिससे संजू तो मौसी की लाल रंग की पैंटी देखकर पूरी तरह से मस्त हो गया था और उसका स्वभाव इतना अच्छा था कि उसी पेंटी को अपने हाथों से उतार कर अपनी मौसी को नंगी किया था,,,, संजू अपने मन यह सब सोच रहा था कि तभी उसका कॉलेज आ गया,,,,,, और वह और मोहिनी दोनों वहीं उतर गए और उसकी मौसी आगे चली गई,,,,।

आराधना तुमने मुझे पता ही नहीं कि तुम्हारी बड़ी बहन आई है,,,।

कितनी बार बताऊं होश में रहोगे तब ना समझ में आएगा कि कौन घर में आया है रात को तो तुम्हारी हरकत देख कर मुझे डर लगने लगा था कि कहीं तुम्हारी बातें दीदी सुन ली तो गजब हो जाएगा,,,,

अरे ऐसा क्या कह दिया था कि गजब हो जाता,,,

मुझे तो बताते शर्म आ रही है नशे में रहकर पूरी तरह से बेहोश हो जाते हो तुम्हें किसी भी प्रकार का होश नहीं रहता कि क्या कह रहे हो क्या बक रहे हो और क्या कर रहे हो,,,,।

देखो मेरा दिमाग मत खाओ मैं बिल्कुल भी नहीं जानता कि रात को क्या हुआ था अब बताओगी नहीं तो पता कैसे चलेगा,,,।,,

किस मुंह से बताओ मुझे तो बताते भी शर्म आ रही है,,,।

बताओ तो हुआ क्या था,,,, (रमेश जानने के लिए तड़प रहा था कि रात को आखिरकार वह क्या हरकत किया था)

नशा उतरते ही सीधे साधे बन जाते हो और शराब पीते ही एकदम शैतान बन जाते हो तुम्हारा रूप मुझे समझ में नहीं आ रहा है,,,,(आराधना थोड़ी गुस्से में अपने पति की तरफ देखते हुए बोली तो रमेश बोला)

मैं जो पूछ रहा हूं वह बताओ इस तरह से आंख दिखाने से काम नहीं चलने वाला,,,।

कल दीदी हम लोगों से मिलने आई थी खबर अंतर पूछने और वह कितना खुश थी,,, वह समझती है कि हम लोग भी खुश होंगे लेकिन वह हम लोगो का दुख कहां जानती है,,,,,, मैं उनकी खुशी की खातिर जो हमें पसंद का था कल खीर पूरी सब्जी बनाई थी वह सोच रही थी कि तुम आ जाते तो साथ में मिलकर खाते हैं कि तुम्हारा का ठिकाना था इसलिए मैं जल्दी से खिला दे और उन्हें बगल वाले कमरे में सोने के लिए भेज दी,,, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि वह तुम्हें लड़खड़ाता हुआ देखें,,,, मैं आपके बारे में इतना सोचती हूं लेकिन तुम हम लोगों के बारे में जरा भी नहीं सोचते हम लोगों की खुशियां तुम्हारे लिए कोई मायने नहीं रखती अपने बच्चों तक की खुशियों का तुम्हें बिल्कुल भी भान नहीं है मैं देर रात तक आपका इंतजार करती रहती हूं,,, लेकिन किसी भी दिन आपने मुझे खाने के लिए नहीं बोले,,,,।

कल भी मैं आपका इंतजार कर रही थी बिना खाए ,,,,,सोच रही थी कि आपके साथ खाऊंगी,,, लेकिन आप आते ही शुरु पड़ गए,,, चल उतार अपने कपड़े उतार आज मुझे तेरी लेना है,,,, यह किस भाषा में बात करने लगे हैं आप पहले तो ऐसे ही बिल्कुल भी नहीं थे,,,,।

(आराधना की बातों को सुनकर रमेश कुछ बोल नहीं रहा था बस उसे देखे जा रहा था,,,, आराधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) किस तरह की जिद करने लगे हैं मैं कहीं भागे नहीं जा रही थी,,, बोल रही थी खाना खा लीजिए उसके बाद जो करना है करें लेकिन नहीं तू अभी कपड़े उतार नंगी हो,,,, जोर जोर से चिल्ला रहे थे मेरे कहने के बावजूद भी की बड़ी दीदी आई हुई है अगर सुन लेगी तो गजब हो जाएगा लेकिन फिर भी नहीं,,, माने,,,, दीदी का जिक्र होते ही और गंदी गंदी बातें करने लगे,,,, तुम्हारी दीदी बहुत खूबसूरत है उसकी चूचियां बड़ी बड़ी है अगर वह ईसारा करे तो मैं उस की चुदाई कर दुं,,,,, तुम्हें जरा भी इस बात का एहसास है कि अगर तुम्हारी कही गई बातों को दीदी सुन लेती तो वह क्या सोचती तुम्हारे बारे में,,,,,,।

कुछ नहीं सोचतीबल्कि मेरी बातों पर सेंड करें खुद ही अपनी दोनों टांगें खोल देती मेरे लिए,,, मैं जानता हूं तुम्हारी दीदी बहुत प्यासी है,,,।

बंद करिए अपनी बकवास,,,

बकवास नहीं कर रहा हूं सच कह रहा हूं तुम्हारी दीदी को मोटा लंड़ चाहिए,,,,

चुप हो जाइए आप इतने बेशर्म हो जाएंगे मैं कभी सोची नहीं थी,,,,, मुझे तो शर्म आने लगी है तुम्हारे से,,,।

शर्म तो आएगी ही कोई जवान लौंडा मिल गया जवानी रगडवाने के लिए,,,,

आपसे तो बात करना ही बेकार है,,,

सच कड़वा लगता है ना,,,

छी,,,, इतनी घिनौनी बात करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,, ,,, अब तो मुझे आपको अपना पति कहते हुए शर्म आने लगी है,,,,।

शर्म तो आएगी ही ,,,, अब तो तुझे जवान लड़के जो चाहिए तेरी प्यास बुझाने के लिए,,,,,, अब मेरे से तेरी प्यास नहीं बुझती,,,,तुझे अपनी बुर में मोटा और जवान लंड चाहिए ना,,,। संजू का ले ले जवान है ,,, कसरती बदन वाला है एक ही धक्के मे तेरा पानी निकाल देगा,,,।

(अपनी बेटी के बारे में इतनी गंदी बात सुनकर आराधना से बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपने पति पर हाथ उठा दी ,,, और बदले में रमेश ने उसकी खूब पिटाई किया,,, उसके बाद नहा धोकर बिना कुछ खाए ऑफिस चला गया,,,,।आराधना वहीं पर ठीक होती है कि उसे लगने लगा कि उसका पति अब सुधरने वाला नहीं है क्योंकि बात बिगड़ती जा रही थी उसके ऊपर वह शक कर रहा था और अब तो संजू को लेकर उसके बारे में कितनी बातें कर रहा था यह बातों को सुनकर आराधना अपने मन में सोचने लगी कि इससे अच्छा तो मौत आ जाती तो अच्छा होता अपने बेटे के बारे में और अपने बारे में गंदी गंदी बातें सुनना उसके लिए जहर पीने के बराबर था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका पति इस कदर क्यों बदल गया कैसे बदल गया आखिरकार उसके प्यार में क्या कमी रह गई है जिसे को पूरा नहीं कर पा रही है,,,,। कुछ देर तक रोती सुबकती आराधना खड़ी हुई और अपने मन को शांत करने के लिए नहाने चली गई,,,,।
 
दिन इसी तरह से गुजरने लगे,,, रमेश के बर्ताव में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आ रहा था,,,,, आराधना एकदम परेशान हो गई थी, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,, रमेश का व्यवहार दीन ब दीन अपने ही परिवार के लिए खराब होते जा रहा था,,,,,, आराधना अपने पति को सुधारने का हर तरीका इख्तियार कर चुकी थी,,, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था,,,यहां तक कि अपनी बड़ी बहन के बताए अनुसार अपने पति को रिझाने का हर एक प्रयास कर चुकी थी लेकिन उसने भी उसे ना करा मैं अभी के साथ-साथ बदनामी भी मिली थी क्योंकि उसकी हर एक हरकत का अर्थ रमेश गलत तरीके से निकाल रहा था,,,,।अपने आप ही जब अपने पति का लंड मुंह में लेकर चूसने की कोशिश करने लगी तो उसका पति मजा तो खूब लिया लेकिन फिर उसे बदनाम करते हुए बोला,,,।

आराधना

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पीठ पीछे लगता है किसी जवान लड़के से मजा ले रही है तभी खुद ही मुंह में लेकर चूस रही है आज तक तो ऐसा कभी नहीं हुआ,,,। कहीं ऐसा तो नहीं संजू की जवानी देख कर तेरी जवानी पिघलने लगी है,,, कहीं अपने ही बेटे के साथ मुंह तो काला नहीं करवा रही है,,,।

अपनी पति की इस तरह की गंदी बातों को सुनकर आराधना के पास बोलने के लिए कुछ नहीं बचा था वह पत्थर से सर टकरा रही थी वह जानती थी कि किसी भी प्रकार की बात का उसके पति पर बिल्कुल भी असर होने वाला नहीं है वह पूरी तरह से निराश हो चुकी थी अपने बेटे के साथ गलत रिश्ते का अपमानजनक ईल्जाम उससे सहा नहीं जा रहा था,,, वह पूरी तरह से परेशान हो चुकी थी,,,,अपने मन में यह सोच कर और ज्यादा परेशान हो जाती थी कि अगर उसके पति की बातें उसका बेटा सुनेगा तो क्या सोचेगा उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा,,,,,, इसलिए वह अपने बच्चों की हाजिरी में अपने पति के साथ बिल्कुल भी तो हंस नहीं करती थी क्योंकि उसके बच्चे जवान हो रहे थे ऐसे में उसके पति की गंदी बातें उन पर बुरा प्रभाव कर सकती थी,,,। लेकिन धीरे-धीरे वह रमेश से दूर होती जा रही थी,,,,,, अपने पति का गलत व्यवहार गलत रवैया शराब पीना उसके साथ जबरदस्ती करना और अपने ही बेटे के बारे में गंदा इल्जाम लगाना यह सब सुनकर आराधना धीरे-धीरे अपने पति से ही नफरत करने लगी थी,,,,,,,,,,।

अब तो तनख्वाह मेरी कटौती होने लगी थी क्योंकि ज्यादातर वह अपनी तनख्वाह का हिस्सा शराब पीने में उड़ा देता था घर चलाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,,,,,, घर चलाने में आ रही दिक्कत को देखते हुए आराधना को लगने लगा था कि जैसे अब उसे भी कोई नौकरी ढूंढनी पड़ेगी,,,अपने पति से यह बात कह नहीं सकती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह नौकरी के बारे में बात करेगी तो वह जरूर कोई गलत ईल्जाम लगा देगा,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, किससे नौकरी की बात करें और अगर बात भी कर लेगी तो भी क्या उसका पति उसे नौकरी करने देगा इन सब बातों को सोच कर आराधना परेशान हुई जा रही थी,,,।

रमेश अपनी बीवी की चुचियों को मसलता हुआ

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दूसरी तरफ संजू एक औरत की मदहोश कर देने वाली जवानी का स्वाद चख चुका था अपनी मौसी की रफ्तार जवानी का स्वाद का चटकारा लेने के बाद उसके जेहन में उसकी मौसी पूरी तरह से विराजमान हो चुकी थी,,, सोते जागते बस उसे अपनी मौसी का नंगा बदन ही नजर आता था उसकी गंदी बातें उसकी हरकत और किस तरह से उसने अपनी मौसी की चुदाई किया इन सब बातों को सोचकर कहीं भी संजु का लंड खड़ा हो जाता था,,,अपनी मौसी की बुर की गर्माहट उसे अभी तक महसूस होती थी उसे यकीन नहीं होता था कि औरत की बुर के अंदर इतनी ज्यादा गर्मी होती है,,,,,, पहले वह कभी कबार ही मुठ मारा करता था लेकिन अपनी मौसी के साथ अद्भुत संतुष्टि भरे जुदाई के बाद से उसके तन बदन में चुदाई का नशा भरता चला जाना है और अपनी गर्मी शांत करने के लिए उसे अपने हाथ का सहारा लेना पड़ता था क्योंकि अब इसकी आदत बन चुकी थी रात को सोते समय अपने पेंट में हाथ डालकर अपनी मौसी को याद करके पूरी तरह से गर्म हो जाता था और अपना लावा बाहर निकाल देता था,,,। उसकी मौसी के कारण उसकी सोच में और व्यवहार में धीरे-धीरे बदलाव आता जा रहा था,,,। औरतों को देखने और सोचने का तरीका उसका बदलता जा रहा था,,, एक बार तो बाहर नाइट बल्ब की रोशनी में अपनी बहन के खूबसूरत बदन को देख कर कल्पना करते हुए अपनाकर अपनी गर्मी को शांत किया था हालांकि इसके बाद उसे बहुत पछतावा हुआ था और दोबारा ऐसा ना करने की कसम खा कर सो गया था लेकिन धीरे-धीरे यह हरकत उसकी आदत में शुमार होता जा रहा था,,,।

साधना को इस हाल में देखकर संजू का मन मचल उठा था

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जिस तरह से अनजाने में ही वहां बाथरूम के अंदर अपनी मौसी के दर्शन करके एक अद्भुत सुख को प्राप्त किया था उसी तरह से अपने मन में यही धारणा बांध के रखता था कि काश उसकी मौसी की तरह बाथरूम में उसकी मां के नंगे बदन को भी देखने का मौका मिल जाता तो वह धन्य हो जाता,,,, हालांकि वह अपनी मां के बारे में इस तरह के गंदे विचार कभी नहीं रखता था लेकिन उसकी मौसी साधना की वजह से उसका व्यवहार बदलता जा रहा था क्योंकि उस रात को बार-बार उसकी मौसी ने उसकी मां का जिक्र जो कर रही थी,,,, कि तेरी मां अपना तो तेरे पापा को भी कह रही है नंगी हो रही है अपनी साड़ी उठा रही है तेरे पापा के लंड को अपनी बुर में ले रही है चुदवा रही है,,, यह सब बातें सोच कर संजू अर्जेंट है ना चाहते हुए भी पूरी तरह से खड़ा हो जाता था और अपनी मां के लिए अपने लैंड को खड़ा होता देख कर उसके तन बदन में अद्भुत उत्तेजना का प्रसार होने लगता था जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं करता था और ऐसे हालात में अपनी मां के बारे में गंदे विचार लाते हुए अपने लंड को हिलाने में जिस प्रकार का उसे सुख प्राप्त होता था,,, उसके बारे में बयां कर पाना शायद उसके बस में नही था,,,कुल मिलाकर अपनी मां के बारे में कल्पना करना उसे अच्छा भी लगता था और ग्लानी भी होती थी और वह दोबारा ऐसी गलती ना करने की कसम खाकर अपने मन को शांत करने की कोशिश करता था लेकिन दूसरे दिन फिर यही होता था जवानी की गर्मी शांत करने के लिए उसे अपनी मां की कल्पना का सहारा लेना पड़ रहा था,,,,। क्योंकि उसकी मौसी के कहे अनुसार और वो खुद जानता था कि उसकी मां बेहद खूबसूरत है उसकी चूचियां बड़ी बड़ी है खरबूजे जैसी उसकी गांड गोल-गोल एकदम मस्त है तरबुज जैसी,,,, और तो और वह हर रात को अपने मम्मी पापा की बातें भी सुना करता था उसके पापा की तरह से गंदी गंदी बातें करके उसकी मां के साथ गंदी हरकत करते थे उसके चुदाई करते थे और उसकी मां कैसे उसे रोक दी थी और सहकार करती थी उसे बातों को सुनकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाता था और उसके मन की कल्पना में उसकी मां सदैव ही अग्रसर रहती थी,,,,। हालांकि उसे कभी भी ऐसा मौका नहीं मिला था कि वह अपनी मां के नंगे बदन की झलक भी पा सकें,,,। कोशिश वह पूरी करता था लेकिन जाने अनजाने में भी उसकी मां के द्वारा कभी भी ऐसी कोई भी गलती नहीं होती थी कि उसके बेटे को उसका नंगा बदन देखने का मौका मिले,,,,,।

रमेश अपनी बीबी की छूट सहलाता हुआ

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संजू यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसके पापा उसकी मां के साथ अत्याचार कर रहे हैं उसके साथ हमेशा से गलत व्यवहार करते आ रहे हैं,,,, संजू को अपनी मां पर दया आने लगी थी क्योंकि वह धीरे-धीरे अपनी मां के दुख को समझने लगा था क्योंकि एक औरत मर्द को कितना सुख दे पाती है इससे वह भली भांति परिचित हो चुका था और उसे सुख को पाने के लिए वह किसी भी हद तक कर गुजरने को तैयार भी था और वह इसीलिए परेशान था कि उसकी मां बेहद खूबसूरत औरत थी और उसके बदन का बनावट भी बेहतरीन था लेकिन फिर भी ना जाने क्यों उसके पापा उसकी मां के साथ इस तरह का गलत व्यवहार करते थे यह बात उसे समझ में नहीं आती थी,,,,,,। ना जाने कि उसके मन में ख्याल आने लगा के काश उसकी मां उसकी बीवी होती तो वह उसे सर आंखों पर रखता उसके हर एक ख्वाहिश को पूरी करता और उसे अपनी पलकों पर बिठा कर रखता किसी भी प्रकार की उसे कमी नहीं आने देता और ना ही कभी उसे दुख देता,,,। यह ख्याल उसके मन में अनजाने में ही आया था ,,, और इस खयाल के मन में आते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी ना चाहते हुए भी उसके मन में अपनी मां को बीवी के रूप में देखने का ख्याल आया था ख्याल उसके जीवन में पहली बार आया था जिसका कारण थी उसकी मां की बड़ी बहन जिसने उसकी जिंदगी में सर्वप्रथम उसे औरत का सुख दी थी,,, उसी औरत के सुख के चलते उसके ख्याल देखने का नजरिया सब कुछ बदलता जा रहा था वरना वह कभी सपने में भी अपनी मां को स्वरूप में नहीं देखा था और ना ही देखने की चाहत थी,,, लेकिन इस ख्याल के बदौलत उसके लंड में सुरसुरा हाइट बढ़ने लगी थी एक बात पर वह भी गौर करता था कि जब जब वहां अपने मन में अपनी मां के प्रति गंदा ख्याल आता था तब तक उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगती थी उसका आनंद पूरी तरह से खड़ा हो जाता है और उसका कड़क पन पहले के भांति और भी अत्यधिक बढ़ जाता था जिससे उसे बहुत ज्यादा आनंद की अनुभूति होती थी और ऐसे में अपने हाथ से हिला कर संतुष्टि प्राप्त करने की कोशिश करता था पहले तो उसे अपने हाथ से हिलाने के बाद संतुष्टि मिल जाती थी लेकिन जब से वह अपनी मौसी की चुदाई किया था तब से अब उसे मुट्ठी में नहीं बल्कि बुर में डालने की ज्यादा इच्छा होने लगी थी लेकिन,,,

साधना और संजू

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मौसी के जाने के बाद ऐसा कोई जुगाड़ उसके पास नहीं था,,, ख्यालों में ही वह अपनी मौसी और अपनी मां का कल्पना करके मस्त हो जाता था लेकिन इसी से उसे ग्लानी भी महसूस होती थी लेकिनकुछ समय बाद फिर से उसकी उत्तेजना का केंद्र बिंदु उसकी मौसी या उसकी मां ही होती थी,,,, यह अब रोज का होता जा रहा था,,,,।

ऐसे ही एक दिन रात को संजू अपने कमरे में बेठा पढ़ाई कर रहा था मोहिनी घोड़े बेच कर सो रही थी उसकी यह आदत का वह फायदा उठा लेता था हालांकि अपनी बहन के साथ कुछ भी शारीरिक छेड़छाड़ तो नहीं करता था लेकिन फिर भी अपने मन में कल्पना करके अपने लंड को बाहर निकाल कर हीलाता जरूर था,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके पापा का इंतजार हमेशा करती थी भले ही वह उसे किसी भी प्रकार की खुशी नहीं देता था लेकिन फिर भी वह अपनी तरफ से अपना धर्म और फर्जी दोनों निभाती थी तकरीबन रात के 12:30 बजे दरवाजा खुलने की आवाज के साथ ही वह समझ गया कि उसके पापा घर पर आ गए हैं,,,,,,,देर रात तक जागने की उसकी एक लालच और भी बढ़ गई थी कि वह अपनी मां की तरफ से गंदी गंदी बातें सुनता था और उसके पापा भी गंदी बातें करते थे हालांकि उसकी मां मजबूरी में सिर्फ अपने पति को खुश करने के लिए ही इन सब बातों को सुनती और सहती रहती थीलेकिन संजू को इससे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव होता था क्योंकि वहां अपनी मां के बारे में कल्पना करता था कि उसके पापा इस समय बगल वाले कमरे में क्या कर रहे होंगे,,,।

raमेष और आराधना

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दरवाजा उसकी मां ने ही खोला था,,,रात के 12:30 बज रहे थे लेकिन वहां अपना फर्ज निभाते हुए जाग रही थी दिन भर की थकान को भूल कर भी अपने पति को खुश करने की पूरी कोशिश करती थी अपनी मां पर संजू को दया आने लगी थी लेकिन वह कर भी क्या सकता था,,,लेकिन वह धीरे-धीरे अपने मन में क्या सोचेंगे लगा था कि वह पूरी तरह से जवान हो गया है ऐसे में उसे अपनी मां का साथ देना चाहिए अपनी मां के पक्ष में खड़ा होना चाहिए उसके पापा जब भी उसके साथ जाती कर रहे हो तब उन्हें रोकना चाहिए यह सब ख्याल मन में आते ही उसमें अद्भुत ऊर्जा का संचार होने लगा था,,,, वह अपने कमरे में बैठा बैठा बगल वाले कमरे में हो रही वार्तालाप को सुन रहा था,,,।

साधना और संजू

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आप 9:00 बजे छूट जाते हैं फिर भी रात को 12:30 बजे आते हैं आपको जरा भी एहसास है कि आप किस कदर शराब में डूबते जा रहे हैं और आपका परिवार किस तरह से बिखर रहा है,,,।

देख तू ज्यादा चु चपड़ मत कर,,,, और खाना निकाल मुझे भूख लगी है,,,,(अपने जूते को निकालने की कोशिश करता हुआ रमेश बोला तो आराधना बोली)

आप कितने नशे में हैं आपसे अपना खुद का जूता भी निकाला नहीं जा रहा है रुकीए में निकाल देती हुं,(इतना कहने के साथ ही आराधना आगे बढ़ी और नीचे बैठकर जैसे ही जूते की डोरी खोलने लगी वैसे ही रमेश ने एक लात मारते हुए बोला,,,)

चल हट मादरचोद,,,, बड़ी आई है एहसान जताने,,,,

(लात पढ़ने की वजह से आराधना की कराहने की आवाज संजू को साफ सुनाई दी थी,,, अपने बाप के व्यवहार से वह एकदम से तिलमिला उठा था,,,उसका मन कर रहा था कि इसी समय बगल वाले कमरे में घुस जाए और अपने बाप को 2-4 थप्पड़ लगा दे हालांकि इस तरह का ख्याल उसके मन में कभी भी नहीं आया था लेकिन अब वह जवान हो रहा था वैसे मैं अपनी मां पर हो रहे अत्याचार को सहन नहीं कर पा रहा था और अपने ही बाप के प्रति उसका क्रोध बढ़ता जा रहा था,,,।) तू मेरे लिए किसी काम की नहीं है बस तू मेरे लिए चोदने की काम आती है बस समझी चल जल्दी खाना दे,,,,।

(इतना कुछ सहने के बाद भीआराधना उठी और खाने की थाली उसके पास लाकर रख दिया और पानी का गिलास भी रख दे नशे में पूरी तरह से धुत्त होने के कारण वो ठीक से खाना भी नहीं खा पा रहा था ऐसे कैसे करके बाहर थोड़ा बहुत खाना और फिर उसी थाली में हाथ धोने लगा यह सब देखकर आराधना अपनी किस्मत को कोसने लगी थी कि कैसे आदमी से वह शादी कर ली उसकी जिंदगी पूरी नरक हो गई,,,, ऐसा सोचते हुए वह बिस्तर लगाने लगी,,, उसे बिस्तर लगाता हुआ देखकर रमेश बोला,,)

मादरचोद रंडी दिल में किसी और से चुद वाली है क्या जो अभी सोने की तैयारी कर रही है मेरी प्यास कौन बुझाएगा,,,, ना जाने किस-किस की प्यास बुझाती रहती है,,,

यह कैसी बातें कर रहे हैं आप आपको शर्म नहीं आती,,,इस तरह की गंदी गंदी बातें करते हुए अच्छा हुआ कि बच्चे नहीं सुनते वरना हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा,,,।

रमेश और आराधना

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बच्चा नहीं है वो पूरा जवान हो गया है और साली मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि अब तेरी प्यास वहीं बुझाता है,,,, जवान लंड लेने की तेरी तड़प बढती जा रही है,,, इसलिए मुझे जल्दी से सुला देना चाहती है ताकि फिर अपने बेटे को बुला सके और रात भर रंगरेलियां मना सकें,,,।

हे भगवान आपको क्या हो गया है अपने ही बेटे के बारे में इतना गंदा ईल्जाम लगाते हो आप को शर्म नहीं आती कोई सुनेगा तो क्या कहेगा,,,

क्या कहेगा सब यही कहेंगे कि जो कुछ भी मैं कह रहा हूं सही कह रहा हूं तभी तो तेरी चाल बदल गई है इस उम्र में भी देख कितना बन ठन कर रहती है,,, तेरी गांड और चूची दोनों का साइज बढ़ता जा रहा है,,, संजू रोज लेता है ना तेरी,,,,।

(यह बात सुनकर इतना हैरान उसकी मां थी उसे भी कहीं ज्यादा हैरान और परेशान संजू हुआ जा रहा था संजू के यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बाप उसके बारे में इतना गंदा इल्जाम लगा सकता है,,, लेकिन ना जाने क्यों अपने पास की बातों को सुनकर उसके मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी अपनी ही मां के साथ अपना खुद का संबंध जुड़ता देखकर पलभर में ही उसकी आंखों के सामने कल्पना में ही उसकी मां का नंगा बदन नजर आने लगता था जैसा कि उसके बाप ने बोला था कि तेरी गांड और चूची दोनों का साइज बढ़ता जा रहा है यह बात सुनते ही उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां झुलने लगती थी और उसकी बड़ी-बड़ी गाना अपना पूरा जलवा बिखरने लगती थी,,, उसके लंड का तनाव बढ़ता जा रहा था,,,, बगल वाले कमरे में उसकी मां के रोने का आवाज आने लगा था वह अपने पति की बातों को सुनकर हैरान थी और बहुत दुखी भी थी लेकिन उसके पति पर उसके आंसुओं का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था,,,।)

संजू क मन में अपनी माँ क लिए इस तरह क विचार आने लगे थे

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चल कपड़े उतार कर नंगी हो जा अब मेरी बारी है दिन भर तो अपने बेटे को मजा देती है अब मुझे दे,,,।

नहीं नहीं आज मेरा बिल्कुल भी मन नहीं है मैं एकदम थक गई हूं,,,।

थक तो जाएगी जवान लंड अपनी बुर मे लेगी तो वह तो तुझे थका ही डालेगा,,,

(अपने पति की बात सुनकर सफाई देने के लिए आराधना के पास कुछ भी नहीं था क्योंकि वह जानती थी कि वह कुछ भी कहे कि उसके पति उस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करेगा बल्कि और गंदे गंदे अंजाम लगाएगा इसलिए वह खामोश होकर बस रोती सुबकती रही,,,)

साधना और संजू



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रोना-धोना मेरे सामने नहीं चलेगा जल्दी से कपड़े उतार कर नंगी हो जा वरना आज तेरी गाना दूंगा फिर मत कहना,,,

नहीं नहीं ऐसा मत करना,,,, मैं उतारती हूं कपड़े,,,,

(इतना कहने के साथ ही आराधना खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतारने लगी अपनी मां की बातें सुनकर संजू भी अपने मन में कल्पना करने लगा था कि कैसे उसकी मां अपनी साड़ी उतार रही होगी हालांकि उसके मन में क्रोध भी पैदा हो रहा था लेकिन उत्तेजना का असर उसके दिमाग पर कुछ ज्यादा ही था धीरे-धीरे आराधना अपनी साड़ी को उतार दी और ब्लाउज में कैद उसके दोनों कबूतर अपनी औकात में फड़फड़ा रहे थे जिसे देखकर रमेश बोला,,,)

आहहहह देख मैं बोलता था ना तेरी चूची का साइज बढ़ता जा रहा है लगता है संजू खूब दबाता है और खूब इसका दूध पीता है,,,।(इतना कहने के साथ ही रमेश आगे बढ़ा और ना उसके ऊपर से ही आराधना की दोनों चुचियों को थाम लिया दूसरी तरफ संजू अपने बाप की बात सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,।उसका बाप इसकी मां की चूची पीने की बात इससे जोड़कर कर रहा था इसलिए उसके मन में उत्तरा की कल्पना होने लगी थी,,, जिसका असर उसके दिमाग के साथ-साथ इसके दोनों टांगों के बीच में हो रहा था,,। रमेश पहले से ही शराब के नशे में धुत्त था और अपनी बीवी की नशीली जवानी की खुशबू से वह और ज्यादा मदहोश होने लगा,,, आराधना अपने कपड़े अपने हाथों से उतारती ईससे पहले ही रमेश उसकी ब्लाउज के बटन खोले बिना ही उसे दोनों हाथों से पकड़ कर खींच दिया जिससे उसका ब्लाउज फट गया और वह बोली,,,)

यह क्या कर रहे हो ब्लाउज फट गया,,,

(अपनी मां की बात सुनकर संजू को इस बात का एहसास हुआ कि उसके पापा इसकी मां का ब्लाउज फाड़ दीए है,,,)

फट गया तो फट गया नया ले लेना,,,मेरे से तो पहली बार फटा है लेकिन तेरे आशिक तो ना जाने कितनी बार फाड़ते होंगे,,,, अब ज्यादा नखरा मत दिखा,,, आज तो तेरी जी भर कर लूंगा,,,,

अब मैं आपको हाथ भी नहीं लगाने दुंगी,,,

क्या बोली हरामजादी,,, तेरी इतनी हिम्मत,,,(और इतना कहने के साथ ही लगातार दो चार थप्पड़ वह आराधना के गाल पर लगा दिया,,,आराधना दर्द से बिलबिला उठी लेकिन आराधना के दर्द का रमेश पर बिल्कुल भी असर नहीं हो रहा था बगल वाले कमरे में अपनी मां की चीख सुनकर संजु के होश उड़े जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, मोहिनी तो घोड़े बेच कर सो रही थी,,,।)

हरामजादी मुझसे जबान लडाती है,,, रुक तुझे अभी बताता हूं तुझे पूरी नंगी करके ही रहुंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां जबरजस्ती आराधना के पेटीकोट की डोरी को खींच दिया,,, आराधना की कमर पर कसी हुई पेटीकोट,,, डोरी खुलने की वजह से एकदम ढीली हो गई वह नीचे गीरती ईससे पहले ही आराधना अपनी पेटीकोट को पकड़ ली,,,, लेकिन रमेश जबरदस्ती करते हुए अपनी बीवी का पेटीकोट खींचने लगा और ऐसे में आराधना बिस्तर पर गिर गई और मौके की नजाकत को देखते हुए रमेश ने तुरंत उसकी पेटीकोट को जोर से खींच लिया और अगले ही पल,,, आराधना के पेटीकोट उसकी कमर से छूट कर उसकी नंगी चिकनी कामों से बाहर निकल गई और वह आधी नंगी हो गई उसकी बेशकीमती खजाने को छुपाने के लिए अभी भी गुलाबी रंग की पेंटी उसका पूरी तरह से सहारा बनी हुई थी,,,)

रहने दीजिए आप क्या कर रहे हैं,,,

साली मुझसे नखरा दिखाती है देखी तेरा कैसे पेटीकोट निकाल दिया,,, अब यह तेरी पेंटी भी निकाल दूंगा,,,।

संजू अपने मन में इस तरह की कल्पना करने लगा था

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नहीं नहीं,,,(अपने पति से बचने के लिए वह पूरी कोशिश कर रही थी और इसी अफरा तफरी में रमेश के गाल पर तमाचा लग गया जो कि अनजाने में लगा था और इससे वह एकदम से तिलमिला उठा और आराधना को पीटना शुरू कर दिया इतनी जोर से उसे थप्पड़ मार रहा था कि आराधना की चीख निकल जा रही थी,,,,संजू से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ उसके धैर्य का बांध टूटने लगा और वह अपने मन में फैसला कर लिया कि जो कुछ भी होगा देखा जाएगा और यही सोचकर अपने कमरे से बाहर निकला और अपने बगल वाले कमरे का दरवाजा खोलने वाला था कि उसके हाथ लगाते ही दरवाजा एकदम से खुल गया और सामने का नजारा देखकर उसका खून खोलता उसकी मां बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उसका बाप उस पर चढ़कर उसे थप्पड़ से मार रहा था,,,, संजू से रहा नही गया और वह कमरे में दाखिल हो गया,,, अपने बाप को पीछे से कॉलर से पकड़कर में जोर से खींचा तो एक झटके में ही रमेश बिस्तर से नीचे गिर गया,,,, और गुस्से में बोला,,,।

इंसान हो कि जानवर कोई अपनी बीवी से इस तरह से पेश आता है,,,।

आहहह,,आहहहह,,,,(हंसते हुए) देख आ गया तेरा आशिक तुझे बचाने के लिए,,,, तुम दोनों मिले हुए हो रुक अभी बताता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही रमेश पास में पड़ा डंडा उठाकर जैसे ही खड़ा हुआ और आराधना को मारने को हुआ संजु फिर से फुर्ती दिखाता हुआ अपने बाप को फिर से पकड़ कर पीछे खींच दीया और उसका बाप इस बार लड़खड़ा कर नीचे गिर गया तो गिरा ही रह गया वह पूरी तरह से नशे में चूर था,,,, आराधना अपने घर में मची क्लेश को देखकर बिलक बिलक कर रो रही थी और इस अफरा तफरी में वह अपने नंगे बदन को छुपाना भी भूल गई थी,,,संजू बिस्तर पर लेटी अपनी मां की तरफ देखा तो उसे उसकी हालत का एहसास हुआ उसके बदन पर कपड़े के नाम पर गुलाबी रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की पहनती है और ब्लाउज पूरी तरह से फटा हुआ था ऐसी हालात में भी ना जाने क्यों संजू अपनी मां के दैनिक सौंदर्य को देखकर पूरी तरह से उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था उसकी नजर अपनी मां की छातियों पर थी जो कि गुलाबी रंग की ब्रा में से उसकी दोनों खरबूजे बाहर आने को मचल रहे थे पहली बार वह अपनी मां को इस हालत में देखा था अपनी मां की चूचियों की आकार को पहली बार अपनी आंखों से ना प्रार्थना की भले ही वह गुलाबी रंग के छिलके में कैद थी लेकिन फिर भी अपनी पूरी आभा बिखेर रही थी,,,, पल भर में ही ना जाने संजू का गुस्सा कहां हवा की तरह फुर्र होने लगा वह अपनी मां की दैहीक सौंदर्य में खोता चला जा रहा था,,, ट्यूबलाइट की रोशनी में उसकी मां का गोरा बदन चमक रहा था,,, एकदम मांसल सुडोल देह की मालकीन थी आराधना,,,, संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी बिस्तर पर लेटी हुई अपनी मां के बदन को ऊपर से देखता हुआ उसकी नजर नीचे की तरफ बढ़ रही थी चिकना सपाट मांसल पेट और उसके बीच की गहरी नाभि जिसकी गहराई में संजू को डूब जाने का मन कर रहा था और जैसे ही उसकी नजर अपनी मां की गुलाबी रंग की पेंटी पर पड़ी तो उसके तन बदन में आग लग गई उसे अपनी मौसी साधना याद आ गई जो इसी तरह से एक पल के लिए उसे अपनी पैंटी की झलक दिखाई थी लेकिन उस समय तो उसकी किस्मत बड़ी तेज थी कि उसे अपने ही मौसी की पैंटी उतार कर उसके खूबसूरत बदन से प्यार करने का मौका मिला था लेकिन यहां पर ऐसा होने वाला नहीं था लेकिन फिर भी वह अपनी मां की पेंटिं को देखकर पेंटी के अंदर छुपे खजाने के बारे में कल्पना करने लगा था,,,,अपनी मां की खूबसूरती की चमक देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसका पूरा ध्यान केंद्रित हुआ जा रहा था,,लेकिन जैसे ही दर्द से और अपने दुख से तड़पती आराधना को इस बात का एहसास हुआ कि उसका जवान लड़का उसकी खूबसूरत बदन को प्यासी नजरों से घूर रहा है तब वह एकदम से शरमा गई और अपने बदन को सीनेट ने लगी,,, अपने बेटे की प्यासी नजरों को वहां पलभर में ही पहचान गई थी क्योंकि जिस तरह से हुआ देख रही थी आराधना उन नजरों को अच्छी तरह से समझ रही थी और शर्म से पानी पानी में जा रही थी बगल में पड़ी चादर को उठाने की उसमें हिम्मत नहीं थी लेकिन जैसे ही संजू को भी इस बात का एहसास हुआ कि उसकी मां शर्मा कर सिमट रही है तो उसे भी अपनी गलती का एहसास हुआ और वह बिस्तर पर पड़ी चादर को अपनी मां के नंगे बदन पर डाल दिया और जाते-जाते अपने बाप से बोला,,।

अब तक जो कुछ भी चलता आ रहा था बिल्कुल भी चलने वाला नहीं है क्योंकि मैं अच्छी तरह से समझ गया हूं कि तुम्हें कैसे समझाया जा सकता है,,, अगर आज के बाद मेरी मां पर किसी भी प्रकार का अत्याचार किए तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।
 
आराधना रोती रही सुबकती रही,,, अपनी किस्मत को कोसती रही,,,बड़े अरमान से उसने रमेश के साथ विवाह की थी उसे लगा था कि उसे उसके सपनों का राजकुमार मिल गया है,,,, पर शुरू शुरू में सब कुछ सही भी लग रहा था लेकिन कुछ वर्षों में इतना कुछ बदल गया था कि सब कुछ नरक की तरह लगने लगा था,,,,,,,,

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अपनी किस्मत को कोसते हुए उसे कब नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला,,, लेकिन दूसरी तरफ संजु की नींद हराम हो चुकी थी,,,क्योंकि उसने अपनी आंखों से वह देख लिया था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना नहीं किया था और ना ही कभी अनजाने में इस तरह का दृश्य नजर आया था,,,।

वह अपनी मां को बचाने के लिए बगल वाले कमरे में दरवाजा खोलकर घुस गया था इतना तो जानता ही था कि उसकी मां अस्त-व्यस्त हालत में होगी लेकिन अस्त-व्यस्त हालत में भी उसकी मां इतनी खूबसूरत लगती होगी इस बारे में उसने कभी सोचा नहीं था हालांकि उसकी मां बेहद खूबसूरत है लेकिन उस समय उसे कुछ भी सोचा नहीं था और वह बिना सोचे समझे कमरे में घुस गया था जहां पर उसने जो देखा उसे देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगे हालांकि ऐसा बिल्कुल भी एक बेटे के लिए अपनी मां के प्रति नहीं होना चाहिए,,, लेकिन यहां माहौल कुछ और था जबसे संजू अपनी मौसी की जमकर चुदाई किया था उसके खूबसूरत अंको से खेला था एक औरत के नाजुक खूबसूरत रंगों से खेलने में कितना आनंद आता है इस अनुभव से गुजरा था तब से उसे हर औरत ने केवल खूबसूरती और संभोग का सूख नजर आता था,,, और वैसे भी रात को वहां अपनी मम्मी-पापा के बीच हो रही गंदी बातों को चलता ही रहता था और अनुमान लगाता रहता था कि अब उसकी मां क्या कर रही है उसके पापा क्या कर रहे हैं इसलिए उसके तन बदन में उत्तेजना के साथ-साथ कल्पनाओं का घोड़ा भी बड़ी तेजी से दौड़ता था,,,।

साधना

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जिस समय संजू अपनी मां के कमरे में दाखिल हुआ था उस समय उसके पापा उसकी मां पर झुके हुए थे और उसे मार रहे थे लेकिन उस हाल में,,, उसकी मां का ब्लाउज पूरी तरह से टूट चुका था,,, क्योंकि उसके पापा ने उसकी मम्मी पर वैसी पन दिखाया था उसके ब्लाउज का बटन खोलने की जगह उसे खींचकर फाड़ दिया था जिसकी वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां गुलाबी रंग की ब्रा में कैद नजर आ रही थी और चुचियों का साइज इतना ज्यादा था कि,,, ऐसा लग रहा है कि मानो ब्लाउज फाड़ के चूचियां बाहर आ जाएंगी,,, ट्यूबलाइट की दूधियां रोशनी में संजू को अपनी मां का खूबसूरत नंगा बदन एकदम साफ नजर आ रहा था उसका मांसल चिकना पेट पतली कमर,,, और पेटीकोट भी उतर जाने की वजह से उसकी गुलाबी रंग की पेंटी नजर आ रही थी जिसे देखते ही,,,संजू की आंखों में आकर्षण और वासना की चमक नजर आने लगी थी इसलिए अपनी मां को तकलीफ में देखने के बावजूद भी वह कुछ देर तक उसके खूबसूरती के आकर्षण में पूरी तरह से खो चुका था और उसे घूर रहा था,,,,,, वह पल संजू के लिए बेहद अजीब था अद्भुत था और बेहद अतुल्य था जिसके बारे में उसने आज तक कभी कल्पना भी नहीं किया था,,,,,,,

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अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में देखकर अपनी मौसी के साथ बिताए पल के बारे में उसे ख्याल आ गया उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी एक बार बुर की रगड़ का सुख प्राप्त कर चुका संजू बार-बार उसी सुख की लालसा में उत्तेजित हुआ जा रहा था अब उसे हर एक औरत में,,, आनंद प्रमोद की अभिलाषा नजर आती थी,,,,।

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संजू की नींद हराम हो चुकी अपने कमरे में जाते ही वह अपनी मां के बारे में सोच कर अपने पेंट में हाथ डालकर अपने लंड को बाहर निकाल दिया था और उसके अर्ध नग्न बदन के बारे में सोच सोच कर और कल्पनाओं में जो उसने अपनी मौसी के साथ वास्तविक में चुदाई किया था उसी तरह की कल्पना वह अपनी मां के बारे में करने लगा और अपने मन में सोचने लगा कि वह जिस तरह से अपनी मौसी की चड्डी को उतारा था उसी तरह से अपनी मां की चड्डी को उतार रहा है और उसकी नमकीन बुर पर अपनी जीभ लगाकर चाट रहा है,,,

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।संजू की कल्पना इतनी जबरदस्त थी कि उसे सब कुछ वास्तविक सा लग रहा था वह अपनी आंखों को बंद किए हुए था और अपने लंड को धीरे धीरे मुठिया रहा था,,, उत्तेजना की मदहोशी में वो इतना भी भूल गया था कि उसकी मां तकलीफ में थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां के बारे में मदहोश कर देने वाली कल्पना करते हुए अपने आप को संतुष्ट करने की कोशिश कर रहा था,,,,संजू की कल्पनाओं का घोड़ा अपनी गति पकड़ लिया था और संजू कल्पना में अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आकर अपने मोटे और लंबे लंड को हाथ में पकड़ कर उसके गुलाबी छेद पर रख दिया था,,, कल्पना में भी वह अपनी मां की बुर की गर्मी को अपने अंदर महसूस कर पा रहा था और नतीजा यही होगा कि वह इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया की कल्पना में भी अपनी मां की चुत में लंड डालने से पहले ही झड़ गया,,,, वह अपनी कल्पना से बेहद हैरान था उसे इस तरह की कल्पना गंदे विचार अपनी मां के बारे में लाना नहीं चाहिए था लेकिन वह मजबूर होता जा रहा था ना चाहते हुए भी उसके जेहन में उसकी मां का ख्याल आ जाता था,,,। अपने आप को संतुष्ट कर के वह सो गया,,,।

संजू की कल्पना में उसकी मम्मी

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सुबह सबसे पहले आराधना कि नींद खुली और वह जल्दी-जल्दी अपने दिनचर्या में लग गई,,,,,, आज वह अपने पति को नहीं जगाई क्योंकि धीरे-धीरे वह अपने पति से नफरत करने लगी थी उसकी बातें उसका ईल्जाम सब कुछ उसके कानों में जैसे जहर की तरह घूलता था,,,। वह जल्दी जल्दी खाना बना रही थी और नाश्ता तैयार कर रही थी,,,, पराठा बनाते समय उसके दिमाग में रात वाली बातें चल रही थी,,, उसके बेटे के द्वारा उठाया गया कदम उसे बहुत अच्छा लगा था,,, क्योंकि वह उसे बचाने के लिए आया था,,, एक मां को एक बेटे से यही उम्मीद भी होती है,,,, उसके पति से तो वह अब ना उम्मीद हो चुकी थी,,,,।आराधना अपने मन में ही सोच रही थी कि कैसे उसका पति उसे पीट रहा था और ऐसे में उसके बेटे से रहा नहीं गया और मैं उसे बचाने आ गया और कैसे उसका कॉलर पकड़कर पीछे खींचा था और उसका पति नीचे जा गिरा था फिर दोबारा डंडे से वार करने के चक्कर में फिर से संजू ने उसे नीचे गिरा दिया था,,,,। संजू की यह प्रतिक्रिया आराधना को विचार मांगने कर दी थी वह अपने मन में अब सोचने लगी थी कि उसके बाप की हरकतों से तंग आकर उसका बेटा भी अपने बाप की इज्जत करना बंद कर दिया है तभी तोबिल्कुल भी शर्म किए बिना ही वह अपने बाप के ही कॉलर को पकड़ लिया था और उसे नीचे गिरा दिया था पैसा एक बेटा तभी करता है जब उसका बाप उसकी नजरों से गिर जाता है उसका अत्याचार बढ़ जाता है,,,। आराधना को लगने लगा कि अब उसका बेटा उसके सामने दीवार बनकर खड़ा रहेगा उसका पति उसके साथ अब किसी भी प्रकार की जात्ती नहीं कर पाएगा,,, यह ख्याल मन में आते ही उसके होठों पर मुस्कान आ गई थी,,,

लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि जब उसका बेटा कमरे में दाखिल हुआ था तो वह किस अवस्था में थी,,,,,,,,, उस पल को याद करते ही वह शर्म से पानी-पानी होने लगी,,,,,,क्योंकि उसे ख्याल आ गया था कि जब उसका बेटा कमरे में दाखिल हुआ था तब वह केवल ब्रा और पैंटी में ही थी उसका गोरा बदन उसके बेटे की आंखों के सामने चमक रहा था,,,,। उसका बेटा उसे बचाने आया था और उसे बचाया भी था लेकिन उसकी खूबसूरती देखकर वह दंग रह गया था और घूर कर उसे देख रहा था इस बात का एहसास उस समय आराधना को होते ही वह शर्म से गड़ी जा रही थी,,,,,,एकदम से असमंजस में पड़ गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह इतनी ज्यादा आ सकते हो गई थी कि बगल में पड़ी चादर भी उठा कर अपने ऊपर डाल सकने की हिम्मत उसने नहीं थी,,,, उसे याद आया कि उसके बेटे को यह ख्याल होते ही कि वह किसको घूर रहा है वह तुरंत बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाकर उसके ऊपर डाल दिया था,,,, अपने बेटे की यह हरकत याद आते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,,।

वह पराठा को तवे पर रखते हुए इस बात के बारे में विचार कर रही थी कि,,,, क्या इस उमर में भी उसकी जवानी पूरी तरह से बरकरार है क्योंकि संजू एक जवान लड़का था उसे तो लड़कियों की खूबसूरत बदन में रुची होना चाहिए था लेकिन,,, वह उस समय जबकि वह परेशान थी मुसीबत में थी सताई हुई थी,,, फिर भी वह उसे प्यासी नजरों से घुर रहा था उसकी खूबसूरत अंगों को ऊपर से नीचे तक अपनी आंखों से जी भर कर देख रहा था,,,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,पर एक बात और उसे परेशान कर रही थी कि उसे कैसे पता चला कि उसका बाप मार रहा है,,, फिर अपने सवाल का जवाब खुद ही देते हुए वह अपने मन में सोची,,, शायद उसके रोने की आवाज सुनकर उसका बेटा आ गया और वो भी तो जोर-जोर से चिल्ला रहा था,,,,फिर वह अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ उसका बेटा सही मौके पर आ गया था क्योंकि उसका पति उसे जानवर की तरह पीट रहा था,,,।

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धीरे धीरे खाना और नाश्ता दोनों तैयार हो चुका था रमेश अपने आप उठ कर नहा धोकर तैयार हो गया था ना सब करने के बाद बहुत सीधा-साधा इंसान हो जाता था इसलिए बिना कुछ बोले ही अपना टिफिन लेकर अपनी ड्यूटी पर चला गया मोहिनी भी उठकर तैयार हो गई थी,,,, और वह नाश्ता करके जल्दी कॉलेज के लिए निकल गई थी,,,। घर में केवल संजू और उसकी मा रह गए थे,,,, संजू नहा रहा था,,,,। और आराधना अपने मन में यही सोच रही थी कि कल रात वाले वाक्ये की वजह से वह अपने बेटे से नजर कैसे मिला पाएगी जो समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे के सामने कैसे जाएगी,,,, इसलिए वह रसोई घर में ही इधर उधर का काम करती रही तभी नहा धोकर तैयार होकर संजु रसोई घर में प्रवेश करते हुए बोला,,, और रसोई घर में प्रवेश करते समय उसकी नजर ऐसी थी उसकी मां की गोलाकार गांड पर टकराई जो की कसी हुई साड़ी पहनने की वजह से उसकी गांड का उधार कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकला हुआ नजर आ रहा था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली कसी गांड देखकर संजू के मुंह से आह निकल गई,,,, और वह बोला,,,।

मम्मी नाश्ता तैयार हो गया है,,,

नाश्ता तो मैंने कब से तैयार कर दी हूं मोहिनी तो नाश्ता करके चली भी गई है तू ही लेट हो गया है,,,।(आराधना बोल तो अपने बेटे से ही रही थी लेकिन उसे नजर नहीं मिला पा रही थी वह अपने आप को दूसरे काम में व्यस्त रखने का बहाना बनाते हुए उससे बात कर रही थी,,,)

ठीक है मम्मी जल्दी से नाश्ता निकाल दो देर हो रही है,,,

तेरा नाश्ता प्लेट में रखा हुआ है,,,

ओहहहह मम्मी तुम कितनी अच्छी हो,,,(भले ही बेहद सहज रूप से संजू अपनी मां से बातें कर रहा था लेकिन उसके दिमाग में रात वाला ही दृश्य नजर आ रहा था जब वह अपनी मां को बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में देखा था बार-बार उसकी चूचियों का उठावपन जोकी कसी हुई ब्रा में कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी वह झलक उसकी आंखों के सामने आ जा रहा था,,।गुलाबी रंग की रंग बिरंगी पेंटी में उसकी मां की मोटी मोटी सुडौल जांघें और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,,, और उस रात वाले द्शय को याद करके उसके पैंट में तंबू बनना शुरू हो गया था,,, वह तुरंत नाश्ता करना शुरू कर दिया वह रसोई घर में ही पलाठी मारकर बैठ गया था,,, ना जाने क्यों इस समय अपनी बेटी की उपस्थिति में आराधना अपने आप को असहज महसूस कर रही थी उसका बदन कसमसा रहा था अजीब सी उलझन में फंसी हुई थी,,, उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो जैसे किसी को हाथ पैर जमाने लड़के की उपस्थिति में खड़ी हो,,,, आराधना ऐसा पहली बार महसुस कर रही थी जिसका कारण था रात वाला वाक्या,,,,,, जबसे संजीव ने उसे अर्धनग्न अवस्था में देख लिया था तब से आराधना अजीब सी कशमकश में फसी हुई थी,,,।

वह काम करते हुए तिरछी नजरों से संजू की तरफ देख ले रही थी वह बड़ी मासूमियत के साथ बैठकर नाश्ता कर रहा था उसे देखने के बाद उसके मासूम चेहरे को देखने के बाद आराधना को यकीन नहीं हो रहा था कि रात को वह उसे बचाने के लिए उसके कमरे में आया था और उसकी मत मस्त जवानी देख कर उसे प्यासी नजरों से घुर रहा था,,,,इस समय आराधना के मन में भावनाओं का बवंडर उड़ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या सोचे क्या ना सोचे,,, तभी उसे उसके पति के द्वारा लगाया गया गंदा एग्जाम याद आने लगा कि उसका पति अपने ही बेटे को लेकर उसे बदनाम कर रहा था,,, उसके पति के द्वारा उसकी बेटी के बारे में कहां गया एक एक शब्द शुल कि‌ तरह चुभ रहा था,,,, बार-बार उसके घर के सब उसके कान में गूंज रहे थे कि संजू का जवान लंड से पसंद आ गया है संजू एक ही झटके में उसका पानी निकाल देता होगा,,,, यह सब बातें सोच कर ना जाने क्यों आराधना को गुस्सा भी आ रहा था और उसे अपनी दोनों टांगों के बीच कुछ हलचल सी महसूस भी हो रही थी,,,,,,,,,यह अनुभव आराधना के लिए बेहद अद्भुत था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने इस अनुभव के एवज में खुश हो या हैरान,,,,।

वह संजू से बात करना चाहती थी लेकिन कैसे करें उसे समझ में नहीं आ रहा था और एक लड़का भी था वह भी रात में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में बात करना चाहता था लेकिन शुरुआत कहां से करनी थी यह उसे समझ में नहीं आ रहा था भाई नाश्ता खत्म करने वाला ही था कि तभी आराधना हिम्मत जुटाते हुए बोली,,,।

रात को तूने जो कुछ भी किया उसके लिए थैंक यू,,,,

कैसी बातें कर रही हो मम्मी,,, वह तो मेरा फर्ज था मां के लिए उसके बेटे का यही फर्ज होता है कि वह उसकी हर हाल में सेवा करें उसकी हिफाजत करें,,,,मैं सुन सुनकर हैरान हो गया था मुझसे रहा नहीं गया जब तुम्हारे रोने की आवाज आने लगी तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं तुम्हें बचाने के लिए कमरे में आ गया,,,,।

तेरे पापा एकदम जानवर हो गए हैं,,,, मुझसे अब बर्दाश्त नहीं होता अच्छा हुआ तु सही-समय पर आ गया था वरना तेरे पापा ना जाने मेरा क्या हाल करते ,,,,(आराधना संजू से नजर मिलाए बिना ही बोल रही थी,,)

अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मम्मी भी रोज सुनता आ रहा था सच में पापा जानवर हो गए हैं कल रात को तो हद ही हो गई थी लेकिन अब पापा तुम पर हाथ नहीं उठा पाएंगे,,, क्योंकि तुम्हारे आगे तुम्हारा यह बेटा खड़ा रहेगा,,,

(संजू की यह बातें सुनकर आराधना का दिन खुशी से झूम उठ रहा था,,, उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा बड़ा हो गया था,,, लेकिन उसका इस तरह प्यासी नजरों से घुरना उसे अभी भी समझ में नहीं आ रहा था,,,, आराधना अपने मन में यही सोच रही थी उस बारे में बात करे लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन फिर समझदारी दिखाते हुए,,, अपनी उस बात पर पुर्णविराम लगा दी,,, क्योंकि वह क्षेत्र से समझ रही थी कि उसके बारे में जिक्र छेड़ना भी उसके बेटे का मनोबल तोड़ सकता है इसलिए उस बारे में उसने बात भी नहीं की लेकिन वह बोली,,,)

बेटा क्या हम दोनों की बात तु रोज सुनता था,,,

(अपनी मां की यह बात सुनने के बाद संजय थोड़ा सोच में पड़ गया क्योंकि वह जान रहा था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है वह जानना चाहती थी कि उसकी हर एक बात को वह सुनता था या नहीं,,, और संजु बात को बिना छुपाए ही एक दम सच बोलते हुए बोला)

हां मम्मी मैं रात देर तक पढ़ाई करता हूं तो मुझे सब कुछ सुनाई देता है,,,

सब कुछ,,,(आराधना एकदम आश्चर्य जताते हुए बोली)

हां मम्मी सब कुछ,,,,(संजीव अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मम्मी के मन में क्या चल रहा है)

मतलब कि हम दोनों के बीच में कुछ भी बातें होती थी कार्यक्रमों से लेकर सब कुछ तुझे सब कुछ सुनाई देता था,,,।

हां मम्मी तुम दोनों की एक एक बात मुझे सुनाई देती थी,,,।

(अपनी मम्मी को सच्चाई बताते हुए संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि उसकी मम्मी अपने मन में क्या सोच रही है और उसी के चलते संजु उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,उसे कॉलेज आने में देर भी हो रही थी इसलिए वह जल्दबाजी दिखाते हुए बोला,,,)

मम्मी अब मैं चलता हूं मुझे बहुत देर हो रही है और हां अब तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना पापा तुम्हारे साथ जरा सी भी बदसलूकी नहीं कर पाएंगे क्योंकि मैं अच्छी तरह से समझ गया हूं कि उन्हें किस तरह से समझाना है तुम तो समझा समझा कर हार गई,,,(और इतना कहते हो गई संजू जल्दी से रसोई घर से बाहर आ गया क्योंकि उसके पैंट में तंबू अपनी औकात में बन चुका था इसलिए जल्दी से बैग उठाया और कुछ देर तक घर से बाहर खड़ा होकर अपने तंबू को गिरने का इंतजार करने के लिए और जैसे ही वह शांत हुआ ले कॉलेज की तरफ निकल गया और दूसरी तरफ आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी क्योंकि उसके बेटे के बताए अनुसार वह उन दोनों की सभी बातों को सुनता था,,,जिनमें गाली गलौज इसीलिए करके एक-दूसरे पर इल्जाम लगाने तक की बातें थी और आराधना के द्वारा अपने कपड़े उतारने की बात और उसके पति के द्वारा जबरदस्ती करने की उससे कपड़े उतरवाने कि उसे नंगी करने की हर तरह की बातें थी जिसके बारे में सोच कर ना जाने क्यू आराधना की चूत से काम रस टपकने लगा था,,,,, वह इस बात से और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने ताकि कि उसका पति बार-बार उसके बेटे के द्वारा गंदा एक जाम लगा रहा था वह समझ गई थी कि उसका बेटा उसके पति के द्वारा लगाया गया ईल्जाम भी सुना होगा,,, उसे धीरे-धीरे समझ में आने लगा कि जिस तरह का इल्जाम उसका पति लगा रहा था उसी के चलते संजू उसे घूर कर प्यासी नजरों से देख रहा था,,,, इन सब बातों को सोच कर आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जो कुछ भी हुआ था उसे सेवा गुस्सा करें या खुशी मनाएं इतनी बात की खुशी उसे जरूर हो रही थी कि अब उसका पति उसे मारपीट नहीं पाएगा,,,,। लेकिन इस बात का डर भी उसे था की उसके बेटे के बीच में आ जाने से अब उसका पति उस पर उसके बेटे को लेकर और गलत गलत इल्जाम लगाएगा,,, लेकिन ना जाने क्यों अब उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं थीक्योंकि वह समझ गई थी कि अब इसका पति सुधरने वाला नहीं है वह नशे में पूरी तरह से डुब चुका है,,,,,,,।अपने बेटे के बारे में सोच कर उसके माथे से पसीना टपकने लगा और उसकी दोनों टांगों के बीच से काम रस अपने बदन की गर्मी उसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह तुरंत बाहर का दरवाजा बंद कर दे क्योंकि वह जानती थी कि अब घर में उसके सिवा कोई नहीं है और वह तुरंत बाथरूम में घुस गई और अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होगी वह अपने आप को एक जवान लड़के के नजर से देखने लगी और सोचने लगी कि क्या इस उम्र में भी वह किसी जवान लड़के के लंड को खड़ा कर सकती है,,,। ऊपर से नीचे तक अपने नंगे बदन को देखने लगी चुचियों का कसाव अभी भी बरकरार था,,, जिसे वह अपने हाथ में लेकर अनजाने में ही दबाने लगी उसे अपनी इस हरकत पर अपने बदन में सिहरन सी दौड़ टी हुए महसूस होने लगी वह अपनी नजरों को चुचियों से नीचे की तरफ ले गई तो मांसल चिकना पेट देख कर,,, खुद उसकी हालत खराब होने लगी उसके पेट का आकार ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन बेहद खूबसूरत और कामुक था जिसकी शोभा उसकी गहरी नाभि बढ़ा रही थी,,, नाभि से नीचे की तरफ नजर ले जाने पर उसे अपनी चूत पर फैले झांट के बाल नजर आने लगे जो कि काफी बड़े होकर झुरमुट से बन गए थे ऐसा नहीं था कि आराधना को सफाई पसंद नहीं थी वह हमेशा अपनी चूत को क्रीम लगाकर साफ रखती थी लेकिन अपने पति के रवैए को देखते हुए उसका मन नहीं करता था और धीरे-धीरे उसकी चूत पर झाटों का झुरमुट हो गया था,,,, वह अनजाने में अपनी हथेली को अपनी चूत पर रखकर दबाने लगी और अपने बेटे के बारे में सोचने के लिए,,,,

आराधना इस तरह की कल्पना करते हुए

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ना चाहते हुए भी उसके पति के द्वारा लगाए गए इल्जाम के बारे में व कल्पना करने लगी,,,,और उसकी कल्पना उसे अपने साथ बाहर ले जा रहे थे वह कल्पना में पूरी तरह से खाने लगी अपनी आंखों को बंद करके वह अपने बेटे के द्वारा कल्पना करने लगे और अपने पति के कहे गए एक-एक शब्द को वास्तविक का रूप देते हुए सोचने लगे कि कैसे उसका पति कहता था कि उसका बेटा एक ही धक्के में उसका पानी निकाल देता होगा,,,, और वह देखते ही देखते ‌अपनी चूत पर अपनी हथेली रगड़ते हुएअनजाने में ही अपने बेटे के लंड की कल्पना करने लगी उसका बेटा घट के लिए बदन का था कसरती बदन होने के नातेआराधना अपनी कल्पना में उसकी दोनों टांगों के बीच के इस हथियार को बेहद दमदार और लंबा मोटा कल्पना करने लगी इसके बारे में सोच कर ही उसकी चूत से काम रस टपक ने लगा था,,,, और वह अपने मन में कल्पना करने लगी कि कैसे उसका बेटा उसके पति के जैसा नहीं बल्कि बड़े प्यार से उसके बदन से एक-एक वस्त्र अपने हाथों से उतारकर उसे,,, नंगी कर रहा है,,,,

आराधना की मदहोशी भरी कल्पना

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और उसके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करने के बाद,,, उसे प्यासी नजरों से देखते हुए,,, अपने खुद के कपड़े उतार रहा है,,,,आराधना एकदम मन से कल्पना कर रही थी इसलिए उसे सब कुछ ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आपको तो सब कुछ अनुभव कर रही हो उसकी हथेली चूत कर बराबर की रगड़ बना रही थी,,,,इस समय घर में कोई नहीं था और दरवाजे पर कड़ी लगी हुई थी इसलिेए वह पूरी तरह से निश्चिंत थी,,,, देखते ही देखते कल्पना नहीं उसका बेटा अपने कपड़े उतार कर अपनी जींस की पेंट खोल रहा था उसकी जींस में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर आराधना के मुंह में पानी आ रहा था,,,,कल्पना में भी आराधना यही सोच रही थी कि उसका बेटा जल्दी से अपनी पैंट उतार कर अपने नंगे लंड का दर्शन उसे करवाएं,,,, और देखते ही देखते संजु ने अपनी पेंट भी उतार दिया,,,।कल्पना में अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर आराधना के मुंह में पानी आ गया,,, और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,,,,।

आराधना की कल्पना में संजू

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आराधना ने कभी इस तरह की हरकत नहीं की थी लेकिन आज ना जाने क्यों वह अपने आप को बदल देना चाहती थी अनजाने में ही उससे यह हरकत हो रही थी बाथरूम में वह पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और उसकी हथेली उसकी चूत पर थी जिसे वो जोर जोर से लग रही थी आंखें बंद थी और कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,,,, कल्पना में ही संजू उसे ईसारा करके अपनी तरफ बना रहा था और आराधना पैरों के बल चलते हुए बिस्तर के करीब पहुंच गई और उसके लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,, आराधना को बहुत मजा आ रहा था कुछ देर तक उसकी कल्पना इसी तरह से चलती रही और फिर वह अपनी दोनों टांगे फैलाकर खुद अपने बेटे का मुंह पकड़ कर उसे अपनी चूत पर रख दी उसका बेटा लपा लप चाटना शुरू कर दिया,,,,कल्पना में भी आराधना की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उस से बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपने बेटे को उसके लंड को उसकी चूत में डालने के लिए बोल रही थी,,,,। उसका बेटा भी उसकी आज्ञा मानते हुए तुरंत अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की चूत में डाल कर सोचना शुरू कर दिया और कल्पना के अधीन होकर आराधना एक साथ अपनी दो उंगली को अपनी चूत में डाल दी,,,कल्पना करके वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी और जल्दी जल्दी अपनी उंगली को अंदर बाहर कर रही थी और उसे ऐसा लग रहा है कि जैसे उसका बेटा अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करके उसकी चुदाई कर रहा है वह इतनी ज्यादा गरम हो गई थी कि,,, थोड़ी ही देर में उसका कामरस उसकी चूत से भलभला बहने लगा,,,,जैसे ही वह कल्पनाओं की दुनिया से बाहर आई तो उसे वास्तविकता का ज्ञान हुआ और वह शर्म के मारे पानी पानी हो गई और अपनी हालत को देखकर एकदम से शर्म आ गई जल्दी से नहा कर वो बाहर आ गई और अपने कपड़े पहन कर अपने काम में लग गई,,,।

दूसरी तरफ संजू से बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह कॉलेज जाने की जगह अपनी मौसी के घर की तरफ चल दिया,,,।
 
संजू की तडप बढ़ती जा रही थी,,,,,, उसकी मां का वह रूप जो उसने अपनी आंखों से देख लिया था और वह भी पहली बार उसका पूरा नंगा बदन उसकी आंखों में वासना की चमक को और ज्यादा बढ़ा रहा था उसकी भावनाएं काबू में बिल्कुल भी नहीं थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां का अर्ध नग्न बदन नजर आ रहा था,,, उसके बदन मे चुदास की लहर उठ रही थी,,, जब से वह अपनी मौसी की चुदाई कर लिया था तब से औरत को चोदने का उसकी तडप बढ़ती जा रही थी,,,जिसकी बदौलत वहां कॉलेज की जगह अपनी मौसी के घर जा रहा था उसे पता नहीं था कि वहां क्या होने वाला है फिर भी एक आस लेकर वह अपनी मौसी के घर जा रहा था कि उसे चुदाई करने का सुख प्राप्त हो जाएगा,,,,,।

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,, तकरीबन 1 घंटा पैदल चलने के बाद वह अपने मौसी के घर पहुंच गया,,, वह ऑटो करके भी जा सकता था लेकिन,,, उसकी मौसी जा रही थी वहां तक का किराया कुछ ज्यादा था तो वापस आने में दिक्कत हो जाती है इसलिए वह पैदल ही चल दिया था,,,, संजू की मौसी का घर अच्छा खासा था क्योंकि घर में आवक काफी थी और सुकून था,,,, संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह पहले कभी अपनी मौसी के घर अकेले या नहीं जब भी आता था अपनी मां के साथ आना था और वह भी कभी-कभार ही आया था,,,, अपनी मौसी के अलावा वह अपनी मौसी के घर में किसी से बातचीत ज्यादा किया नहीं था इसलिए थोड़ा असहज महसूस कर रहा था,,, मौसी के भी एक लड़का और एक लड़की थी जो कि उसके हम उम्र ही थे,,,,,, मेन गेट खोल कर वहां अंदर प्रवेश किया,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर क्या होने वाला है जिस काम के लिए वह इतनी आस लगाकर इधर आया है वह काम होगा भी या नहीं लेकिन इस बात की तसल्ली थे कि इसी बहाने वहां अपनी मौसी के दर्शन तो कर सकेगा उसके कपड़े उतार के ऊसे नंगी ना सही कपड़ों के ऊपर से तो उसके अंगों का दीदार कर पाएगा,,,, हां इस बात का मलाल रह जाएगा कि इतनी दूर आने के बावजूद भी वह अपनी मौसी के खूबसूरत बदलता लुफ्त उठा नहीं पाया ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों को दबा नहीं पाया,,,,,,, यही सब संजू के मन में चल रहा था,,,, और देखते ही देखते खयालों के बवंडर में उलझते हुए वह दरवाजे तक पहुंच गया,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि दरवाजे पर दस्तक दे या ना दे वह सोच रहा था कि उसे यहां पर देखकर उसकी मौसी क्या सोचेगी क्योंकि पहले तो वह कभी इस तरह से अकेले आया नहीं था,,,, वह अपने मन में यह भी सोच रहा था कि उसे अपने घर पर देख कर उसकी मौसी जरूर यह सोचेगी कि वह उसे चोदने के लिए आया है,,,।यह सब सोचते हुए संजू कुछ देर तक दरवाजे के बाहर क्यों ही खड़ा रहा और अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगा,,,, गेट के अंदर मोटरसाइकिल और स्कूटी खड़ी थी जिसे देखकर संजीव दिल और जोरो से धड़कने लगा क्योंकि मोटरसाइकिल और स्कूटी की उपस्थिति के यह साबित हो रहा था कि घर में मौसी का लड़का और लड़की दोनों मौजूद होंगे,,,यह देख कर उसे अपने अरमानों पर पानी फिरता हुआ नजर आने लगा,,,, कॉलेज मैं ना जाने के बजाज इधर आने का मकसद उसका पूरा होता हुआ नजर नहीं आ रहा था,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें यहां से वापस चला जाए या फिर मौसी से मिलकर ही जाए,,,,,,फिर वह अपने मन में ठान लिया कि आज वह मौसी से मिलकर ही जाएगा क्या पता उसकी किस्मत का ताला खुल जाए,,, यही सोचकर वह दरवाजे पर लगी बेल बजा दिया,,,,, और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला तो ,, संजू की आंखें फटी की फटी रह गई सामने मौसी खड़ी थी उन्होंने ही दरवाजा खोला था लेकिन इस समय जिस हालत में थी उसे देखते ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसके मुंह में पानी आने लगा,,, क्योंकि साधना कपड़े धोते हुए सीधे इधर आ गई थी उसे लगा था कि शायद,,, उसकी पड़ोसन आई है इसीलिए वह इस हालत में आ गई थी साड़ी को वह थोड़ा ऊपर उठाकर कमर में खोंस रखी थी और साड़ी थोड़ा नीचे बात हुई थी जिसकी वजह से उसकी गहरी नाभि के साथ-साथ नाभि के नीचे वाला हिस्सा काफी नजर आ रहा था अगर सारी थोड़ी एक अंगूल और नीचे होती तो शायद संजू को अपनी मौसी के झांट का बाल भी नजर आने लगता,,,,संजू पल भर के लिए पूरी तरह से मस्त हो गया और अपनी मौसी की खूबसूरती के आकर्षण में एकदम से खो गया,,, संजू अपनी मौसी को ऊपर से नीचे का नजर भर कर देख रहा था साड़ी पूरी तरह से भेजी थी जिसकी वजह से उसकी छातियों से चिपकी हुई थी और ब्लाउज भी गीला हो गया था ऊपर के दो बटन खुले हुए थे आधे से ज्यादा चूचियां नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,, पैरों की तरफ नजर ले गया तो घुटनों तक साड़ी ऊपर उठी हुई थी जिससे उसकी नंगी चिकनी पिंडलिया साफ नजर आ रही थी,,,,,, इस अवस्था में देखकर संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था संजु अपने मन में सोच रहा था,,की मौसी जितनी सेक्सी कपड़े उतार कर नंगी हो जाने के बाद दीखती है उतनी ही सेक्सी कपड़ों में इस अवस्था में भी दिख रही है,,,,संजू के मुंह से तो एक भी शब्द नहीं निकल रहे थे दरवाजा खोलने पर सामने एक जवान लड़की को देखकर तो पहले साधना भी एकदम से हड़बड़ा गई थी है कि जब यह एहसास हुआ कि सामने संजू खड़ा है तब वह मंद मंद मुस्कुराने लगी,,,, और अपनी इस अवस्था का प्रदर्शन उसकी आंखों के सामने करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव रहा था उसे अच्छा लग रहा था

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और यह वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि संजू उसके खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे तक प्यासी नजरों से देख कर मस्त हो हुआ जा रहा है,,,जवान लड़के को इस उमर में भी अपने बदन की तरफ आकर्षित होता देखकर साधना को बहुत खुशी और अपने बदन पर गर्व महसूस हो रहा था,,,।वह भी कुछ देर तक उसी तरह से खड़ी होकर संजु को देखती रही उसकी हरकत पर गौर करती रही,,,लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि संजू एकाएक घर पर क्यों आ गया क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता था फिर उसके मन में ख्याल आया कि शायद उस रात वाली घटना से संजू का मन मचल उठा,,,है,,,।और यह ख्याल मन में आते ही उसकी भी दोनों टांगों के बीच हलचल सी होने लगी वह वहीं खड़ी खड़ी है सोचने लगी कि अगर ऐसे में वह संजू से चुदवा लेती है तो कितना मजा आता है,,,क्योंकि यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि इत्मीनान से अत्यधिक आनंद जल्दबाजी में उतावले पन मेंचोरी छिपे में आता है पर इसका आनंद लेना चाहती थी वह चित्र से जाती थी घर पर उसके बच्चे मौजूद थे जो कि एग्जाम की तैयारी में लगे हुए थे और अपने अपने कमरे में थी उसके सास और ससुर दोनों की घर में मौजूद थे,,,,उसके खुद के कमरे में उसकी लड़की है एग्जाम की तैयारी कर रही थी कोई भी कमरा खाली नहीं था वह अपने मन में सोचने लगी कि अगर ऐसे में संजू के साथ वह चुदवाना चाहेगी तो कहां चुदवाएगी,,,,यह सोचकर थोड़ा सा परेशान हो रही थी लेकिन सब कुछ अभी दरवाजे पर खड़े खड़े ही हो रहा था दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे,,,,।

साधना और संजू

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अजीब सा रिश्ता दोनों में बंध चुका थामौसी और भतीजे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाने के बाद दोनों को एक दूसरे के प्रति आकर्षण भी बढ़ता जा रहा था,,,,, दोनों एक दूसरे के बीच पवित्र रिश्ते को नहीं देख पा रहे थे और संजू अपनी मौसी कि ना तो उम्र देख पा रहा था और ना ही,,, उसके बीच के पवित्र रिश्ते को बस वह अपनी मौसी को एक औरत के नजरिए से देखता था जो कि कपड़े उतारने के बाद एक औरत ही नजर आती थी जिसके साथ संभोग सुख प्राप्त कर चुका था और उसी लालच में उसके घर तक आ गया था,,,, संजू जवानी के दहलीज पर खड़ा था जवानी के जोश में उससे नादानी होना लाजमी था रिश्तो के बीच की मर्यादावह नहीं समझ पा रहा था लेकिन साधना तो एक उम्रदराज औरत थी उसे अपनी और अपने भतीजे के बीच के रिश्ते को समझना चाहिए था,,, उसे यह समझना चाहिए था कि संजू उसकी छोटी बहन का लड़का है लेकिन नहीं दोनों की अपनी अपनी जरूरतें थी साधना उम्रदराज होने के बावजूद भी कसी हुई जवानी की मालकिन थी,,,जिसके अंग अंग में से जवानी फूट रही थी जिसके कुछ अरमान थे दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में ढेर सारी प्यास थी और संजू जवान होने के नाते वह अनुभवहीन था उसे भी अनुभव की जरूरत थी जो कि उसकी मौसी के द्वारा प्राप्त होना था और यही लालच दोनों को एक दूसरे के करीब ला रही थी,,,।

संजू और साधना दोनों दरवाजे पर काफी देर से खड़े थेदोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों की बीच की चुप्पी को साधना तोड़ते हुए बोली,,,।

साधना की चुदाई

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अरे संजू तू इधर क्या कर रहा है,,,।

वो,,वो,,,, मैं यहां से गुजर रहा था तो सोचा की मौसी से मिलता चलूं,,,,

अच्छा किया कि तू मिलने आ गया वरना तू तो आता ही नहीं है,,, आ,, अंदर आ,,(इतना सुनते ही संजू अंदर आ गया और साधना दरवाजा बंद करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली),, वो क्या है ना कि मैं कपड़े धो रही थी इसलिए ऐसे हालत में आ गई,,,,

घर पर कोई नहीं है क्या मौसी,,,,(इस सवाल के मतलब को साधना अच्छी तरह से समझ रही थी वह भी मन में इस बात से दुखी थी की इस समय घर पर सभी लोग मौजूद थे कोई भी कमरा खाती नहीं था इसलिए उदास होते हुए बोली,,)

,, नहीं रे सब लोग घर पर ही हैं बच्चों की एग्जाम शुरू होने वाली है इसलिए दोनों तैयारी कर रहे हैं सांस ससुर अपने कमरे में है,,,।

(जिस रूखे पन से साधना ने संजू के सवाल का जवाब देती संजू अच्छी तरह से समझ रहा था कि इस बात का दुख उसकी मौसी को भी है,,,,,, दोनों एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख रहे थे,,अब क्या करें कैसे करें हालांकि दोनों ने अपने मन की बात अभी तक बयां नहीं की थी लेकिन दोनों के मन में वही एक ही बात चल रही थी चुदाई,,,,जिसके लिए मौका और जगह की जरूरत थी जो कि दोनों उन दोनों के पास बिल्कुल भी नहीं था,,, साधना अपने मन में कोई ना कोई रास्ता सोच ही रही थी इसलिए एक बहाने से उसे मिलाने के लिए अपने सास-ससुर के कमरे में ले गए और वहां से फिर,,, अपने बेटे अमन के कमरे में जहां पर दोनों एक दूसरे से हाय हेलो किए और अमन वापस अपने एग्जाम की तैयारी में लग गया इसके बाद साधना संजु को,,, मनीषा के कमरे में ले गई जो कि अपने कमरे में एग्जाम की तैयारी कर रही थी दरवाजा खुला था साधना दरवाजा खोल कर संजू को भी अंदर लेकर आई लेकिन मनीषा जिस हाल में थी साधना को भी बिल्कुल भी एहसास नहीं था वह केवल छोटी सी पेंटी और टी-शर्ट में बिस्तर पर बैठकर पढ़ रही थी,,,, दरवाजा खुलते ही मनीषा की नजर जैसे ही पीछे गई तो अपनी मां के साथ संजू को आया देखकर वो एकदम से शर्मा गई,,, लेकिन एकदम सहज होते हुए संजू से हाय हेलो की संजू तो उसे देखता ही रह गया वह भी अपनी मां की तरह बेहद खूबसूरत गोरी चिट्टी थी,,,, टी-शर्ट ना उसके दोनों नारंगीया उभरी हुई नजर आ रही थी जिसकी निप्पल भी टी-शर्ट के ऊपरी सतह पर झलक रही थी,,,,। साधना समझ गई कि उसे इस हाल में संजू को या नहीं लेकर आना चाहिए था और इशारे में मनीषा भी अपनी मां को यही समझाते हुए बोली,,,।

संजू साधना की चुदाई करता हुआ

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क्या मां मुझे पढ़ने दो एग्जाम की तैयारी करना है,,,,

ठीक है तू पढ़ाई कर,,, छत पर कपड़े सूखने के लिए डालना है अच्छा रहने दे मैं संजू को लेकर चली जाती हूं,,,, और हां मैं तेरे लिए कॉफी भिजवाती हु,,, नहीं नहीं मैं खुद लेकर आती हूं और इतना कहकर संजू को लेकर कमरे से बाहर निकल गई संजू के तन बदन में मनीषा के खूबसूरत बदन को और उसका पहनावा देखकर एकदम उत्तेजना,,, से भर गया लेकिन कुछ बोल नहीं रहा था,,,,।

बाप रे यह बच्चे भी ना पढ़ने के चक्कर में कोई भी काम नहीं करते अच्छा हुआ तू आ गया कपड़े डालने में मुझे मदद मिल जाएगी लेकिन दुख में तेरे लिए और मनीषा के लिए कॉफी बना देती हूं,,,।

साधना और संजू

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नहीं रहने दीजिए मौसी मैं चाय नाश्ता करके आया हूं मैं कॉफी नहीं पीता,,,,।

(संजू की बात सुनकर संध्या अपने मन में सोचने लगी कि बेटा तुझे तो मैं अपना दूध खुद तेरे मुंह में डालकर पी लेना चाहती हूं लेकिन क्या करूं यहां मौका ही नहीं है,,, फिर भी वह बोली,,) ठीक है तू रुक मैं जल्दी से कॉफी बनाकर मनीषा के कमरे में पहुंचा कर आती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही व रसोई घर में चली गई और कॉफी बनाने लगी थोड़ी देर में वहां कॉफी का मग कुछ ज्यादा ही भर कर अपनी बेटी के कमरे में लेकर गई वह जानबूझकर कॉफी का मग भरकर पहुंचाई थी ताकि वह कॉफी पीती रही हो कमरे से बाहर ना आए,,,,,। कॉफी को कमरे में लेकर पहुंचते ही मनीषा थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)

क्या मम्मी तुम भी देखती नहीं हो कि मैं किस हालत में हूं बस लेकर चली आती हूं

बेटा इसमें तो तेरी गलती है मुझे क्या मालूम था कि तो छोटी सी चड्डी पहन कर पढ़ाई कर रही है,,,।

ठीक है ठीक है,,, लाओ कॉफी दो,,,

(साधना कॉफी देकर कमरे से बाहर आ गई,,, और संजू को लेकर बाथरूम की तरफ आ गई क्योंकि ढेर सारे कपड़े बाल्टी में रखे हुए थे,,,, संजू के मन में उत्तेजना का बवंडर उठ रहा था मैं किसी भी हालत में अपनी मौसी को चोदना चाहता था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें फिर भी हिम्मत जुटाकर वह अपनी मौसी से बोला,,,)

तुम बहुत खूबसूरत हो मौसी,,,

(संजू के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह संजू की तरफ देखने लगी और बोली,,)

इतनी दूर से मेरे घर तु यह कहने के लिए आया है,,, ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है तेरे मन में कुछ और चल रहा है तु यहां एक बहाने से आया है,,,(साधना मुस्कुराते हुए बोली संजू को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोलेअच्छी तरह से जानता था कि साधना जो कुछ भी अपने मन में सोच रही है वही सच है वह किसी और बहाने से किसी और मकसद से इधर आया था साधना के भी तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फुट रही थी संजू के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर वह और भी ज्यादा प्यासी होती जा रही थी,,,उस दिन से लेकर आज तक उसी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह दिन-रात संजू के बारे में ही सोच रहे थे और आज संजु उसकी आंखों के सामने था संजू के शर्मीले पन के स्वभाव को अच्छी तरह से समझ रही थी वह इतनी हिम्मत दिखाकरउसके घर तक आया था यही बहुत था अब आगे साधना को हिम्मत दिखाना था इसलिए वहां संजू से बोली,,)

संजू तेरे में बहुत दम है उस दिन की रात में कभी भूल नहीं पाती मुझे बहुत मजा आया था तुझे आया था कि नहीं,,

संजू बोला कुछ नहीं बस आने से हिला दिया क्योंकि अपनी मौसी की बात सुनकर उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी साधना चोर नजरों से उसकी पेंट की तरफ देखी तो उसमें तंबू बनाना शुरू हो गया था साधना समझ गए कि मामला कुछ गंभीर है,,,
 
साधना के तन बदन में भी हलचल होना शुरू हो गया था,,,,व चित्र जाति के लिए समय घर के सभी सदस्य अपने अपने कमरे में अपने काम में व्यस्त हैं कोई भी बाहर आने वाला नहीं था जिसका वह फायदा उठाना चाहती थी,,, एक बहाने से अपनी बेटी को पूरा मग कॉफी भर कर दी थी ताकि वह उस की चुस्की लेते हुए पढ़ते रहे,,,,अपने भतीजे संजू के मन में क्या चल रहा है वह अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि वह पूरी तरह से अनुभव से भरी हुई थी वह जानती थी इस उमर में लड़के किस तरह की हरकत करने को मैं चलते रहते हैं,,

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,,वह संजू के मन की बात को समझ चुकी थी क्योंकि संजू कभी भी उसके घर आता नहीं था और आज उसके घर से बिना बताए आ गया था और वह भी उस रात वाली घटना के बाद ही इसका साफ मतलब था कि उसके लिए संजू की तडप बढ़ती जा रही थी,,यह,एहसास की एक जवान लड़का उसके पीछे इस कदर पागल हो गया है कि उसके पीछे पीछे उसके घर तक आ गया इससे साधना खुशी और उत्तेजना के मारे गदगद हुए जा रही थी उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसके बदन में अभी भी वही जवानी वाला आकर्षण कायम है,,,,।

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संजू बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा था और साधना बाथरूम के अंदर धुले हुए कपड़ों को बाल्टी में डाल रही थी और ठीक उसके सामने झुकी हुई थी जहां से संजू को साधना की मदमस्त कर देने वाली चूचियों की झलक मिल रही थी,,,, संजू तो उसके दोनों खरबूजे को देखकर पूरी तरह से पागल हो गया क्योंकि पहले से ही ब्लाउज के दोनों बटन खुले हुए थे जिसकी वजह से साधना की दोनों चूचियां पेड़ में पके हुए पपीते की तरह लटक गई थी और उस पपीते की शोभा बढ़ा रहे छोटे-छोटे कठोर अंगूर भी नजर आने लगे थे जिसको देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, ऊपर से साधना का ब्लाउज पुरी तरह से पानी से गीला हो चुका था,, जिसकी वजह से उसका ब्लाउज उसकी चुचियों से कौन से चिपक गया था और अंदर साधना ने ब्रा भी नहीं पहनी थी,,,जिसकी वजह से साधना के दोनों पपैया का आकार एकदम साफ साफ नजर आ रहा था,,,,।

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इसका मादक नजारे को देखते ही संजू की पैंट में तंबू सा बन गया और कपड़ों को समेटते साधना की चोर नज़रें उसके पेंट में बने तंबू को देखकर प्यासी हुए जा रही थी,,,एक बार फिर से रात वाली संतुष्टि प्राप्त करने की लालसा साधना के मन में जागरूक होने लगी,,,वह, अच्छी तरह से जानती थी कि संजू एकदम नवजवान गठीला बदन का नौजवान लड़का है,,, और उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है जिसकी वजह से 8-10 धक्कों में ही उसका पानी निकाल देता है,, इसीलिए साधना एक बार फिर उन्हीं धक्कों को अपनी चूत के अंदर महसूस करना चाहती थी लंड की मोटाई की रागड चूत की अंदरूनी दीवारों पर महसूस करना चाहती थी,,,,।

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यह साधना के लिए भी अजीब था क्योंकि संजू उसका बेटा था उसकी छोटी बहन का लड़का और वह खुद एक उम्र दराज औरत थी जो दो दो जवान बच्चों की मां थी लेकिन फिर भी अपने जिस्म की चाहत के आगे वह सब कुछ भूल गई थी,,,, अपने और संजू के बीच की उम्र की दूरियों को भी वह भूल चुकी थी एक तरह से वह उसके बेटे के उम्र का ही था,,, बहन का लड़का होने की वजह से उसका बेटा ही था लेकिन फिर भी साधना की नजर में सबसे पहले वह एक जवान लड़का था जो उसकी शारीरिक भूख को मिटा सकता था और फिर बाद में रिश्तेदार,,,,,,

धुले हुए कपड़ों को बाल्टी में रखते समय जानबूझकर साधना उसकी आंखों के सामने झुक कर अपनी दोनों गोलाइयों को दिखा रही थी संजू ऐसा लड़का था जिसे इन सब के बारे में पहले बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था लेकिन साधना ने जो उसे रात को एक औरत के शारीरिक भूगोल का ज्ञान दी थी उसके चलते संजू की रूचि औरतों के खूबसूरत अंगों के प्रति बढ़ने लगी थीऔर इसीलिए इस समय ब्लाउज में से झांकती उसकी मौसी की दोनों चूचियां उसके तन बदन में आग लगा रही थी,,,,,,, संजू कुछ बोल नहीं रहा था बस खामोश होकर अपनी मौसी की खूबसूरती को अपनी आंखों से पी रहा था जिसका नशा उसके तन बदन में हिलोरे पैदा कर रहा था,,, खास करकेउसकी दोनों टांगों के बीच के लटकते उसके हथियार में अजीब सी हलचल सी पैदा होने लगी,,, साधना बार बार उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दे रही थी उसकी मुस्कुराहट के पीछे उसकी सहमति छुपी हुई थी जो कि हर तरीके से संजू के प्रति वफादार थी,,। बातों के दौर को शुरू करता हुआ संजू बोला,,,।

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मौसी तुम अकेले ही इतने सारे कपड़े धोती हो,,, मनीषा भी तो है तुम्हारी मदद नहीं करती क्या,,,

नहीं रे ऐसा नहीं है वह भी मेरी मदद करती ही है लेकिन एग्जाम आ रहे हैं इसके लिए वह पढ़ाई में लगी हुई है और वैसे भी मुझसे परेशान करना नहीं चाहती,,,,

बहुत थक जाती होगी ना मौसी,,,

हारे थक तो जाती हूं,,,

मौसा जी तुम्हारी मदद नहीं करते क्या,,,

मौसा जी को अपने काम से फुर्सत ही कहां मिलती है रात देर को आते हैं और आकर खाना खाकर सो जाते हैं,,,।(मौसा जी के बारे में बताते हुए साधना थोड़ा उदास हो गई जिसका एहसास संजू को अच्छी तरह से हो रहा था वह समझ गया कि उसकी मौसी उसके मौसा से खुश नहीं है)

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क्या सच में मौसी,,, मौसा जी को तुम्हारे लिए बिल्कुल भी टाइम नहीं मिलता,,,।

नहीं बिल्कुल भी,,, नहीं,,,,,, महीने में एक आद बार ही वह मुझसे प्यार करते हैं,,,।

क्या बात कर रही हो मौसी महीने में एक बार मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है तुम इतनी खूबसूरत हो सेक्सी हो,,,(संजू के मुंह से अनजाने में ही सेक्सी शब्द निकल गया था,, जिसकी वजह से उसे थोड़ी घबराहट भी होने लगी कि कहीं उसकी मौसी कुछ बोलना चाहिए लेकिन उसकी मौसी कुछ बोली नहीं लेकिन अपनी तारीफ सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी दुनिया में कौन सी ऐसी औरत होगी जो अपनी खूबसूरती की तारीफ ना सुनना पसंद करती होगी,,, साधना को भी संजय की बातें अच्छी लग रही थी संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) सच में मौसी मुझे तो तुम्हारी बातों पर यकीन ही नहीं हो रहा है,,,

अब क्या करूं मेरे साथ क्या हो रहा है यह तो नहीं जानती हूं,,,।

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ओहह मौसी,,,सच में तुम अपने जीवन में इतनी दुखी हो मुझे तो यकीन ही नहीं होता कसम से अगर मैं मौसा जी की जगह होता तो,,,(इतना कहने के साथ ही वो एकदम से खामोश हो किस बात का एहसास हो गया कि वह क्या कह रहा है साधना उसकी बात को सुनकर उसकी तरफ देखने लगी लेकिन संजू खामोश था उसकी ख़ामोशी को तोड़ते हुए वह बोली)

तू होता तो क्या करता,,,,

जाने दोना मौसी,,,,मममम, मेरे मुंह से निकल गया,,,।

अरे तो क्या हो गया मैं भी तो सुनु कि मेरा बेटा मेरी कैसे मदद करना चाहता है,,,,

(अपनी मौसी की बात सुनकर संजू मुस्कुराने लगा क्योंकि एक बार शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसे इतना तो यकीन हो गया था कि मौसी उसकी बात का बुरा नहीं मानेगी इसलिए वह अपनी मन की बात को बताते हुए बोला)

सच कहूं तो मौसी में तुम्हारी हर तरह से मदद करता अगर मैं मौसा की जगह होता तो,,,

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वही तो पूछ रही हूं कैसी मदद करता,,,(साधना अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली ऐसा करने से उसकी कमर की गहरी लकीर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी,,,)

बोल तो रहा हूं मौसी हर तरह से,,,

अरे लेकिन किस तरह से यह भी तो बताएगा,,,(साधना अपनी साड़ी को अपनी नाभि से हटाते हुए बोली,,, और संजू की नजर उसकी गहरी नाभि पर चली गई साधना की नाभि काफी गहरी थी छोटी सी चूत की तरह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी साधना की तरह से जानती थी कि जवान होती लड़कों को यह सब देखना बेहद पसंद होता है और बेहद उत्तेजना आत्मक भी,,,और उसका यह सोचना सच ही था क्योंकि संजू उसकी नाभि की गहराई में अपनी नजरों को गडा दिया था,,,)

मैं,,,, मैं,,,, अगर मौसम की जगह होता तो तुम्हें बहुत प्यार करता ,,, दिन-रात बस प्यार प्यार प्यार,,,,

(संजू की बात को सुनकर साधना मुस्कुराने लगी अच्छी तरह से जानती थी कि संजू कौन सी प्यार वाली बात कर रहा है लेकिन फिर भी वह उसके मुंह से सुनना चाहती थी इसलिए बोली)

प्यार मतलब कैसा प्यार ऐसे ही औपचारिक वाला है या,,,

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दोनों,,(संजू मुस्कुराता हुआ बोला लेकिन शर्मा भी रहा था क्योंकि इस तरह की बातों को वह पहली बार किसी औरत से कह रहा था)

फिर भी बोलकर बताएगा,,,(साधना संजू की उत्तेजना को बढ़ाते पर जानबूझकर अपनी हथेली को अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी चूत वाली जगह पर रखकर खुजलाते हुए बोली,,,संजू यह देखकर पूरी तरह से मस्त हो गया क्योंकि वह अच्छी तरह से देख रहा था कि उसकी मौसी उसके कौन से अंग को खुजला रही है,,,, चूत का अहसास होते ही पेंट के अंदर ही संजू का लंड ठुनकी मारने लगा,,,)

औपचारिक भी और उस दिन रात वाला भी,,,(रात वाला बात सुनकर साधना के होठों पर मुस्कुराहट आ गई,,, रात वाला भी,,)

तू सच कह रहा है संजू क्या मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हो कि तुझे हम दोनों के बीच की उम्र की खाई भी नजर नहीं आ रही है,,,

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उम्र से कुछ नहीं होता मौसी,,,

(संजू की बातें सुनकर साधना अपने मन में बोली हां तू सच कह रहे उम्र से कुछ नहीं होता तुम जवान लड़कों को तो खाली चूत से मतलब होता है बस चूत में लंड डाला अपनी गर्मी निकाली बस,,, फिर भी संजू की बातें सुनकर साधना मुस्कुरा रही थी उसे संजू की बातें अच्छी लग रही थी,, और इस बार थोड़ा खुलकर साधना बोली क्योंकि वह छत पर ले जाने से पहले संजू को पूरी तरह से गर्म कर देना चाहती थी ताकि जल्दी जल्दी वह उसकी चुदाई कर सकें,,,)

तू सच कह रहा है तो एकदम जवान लड़का है मेरे बेटे की उम्र का और उस उम्र में औरतों की उम्र कोई मायने नहीं रखती जवान लड़कों को तो खाली चूत चाहिए,,,अपनी प्यास बुझाने के लिए भले ही वह छूट अपनी खुद की बहन मौसी या अपनी मां की क्यों ना हो,,,(साधना यह बात एकदम मुस्कुराते हुए सहज भाव से बोली थी लेकिन उसकी बात का असर संजु पर बहुत गहरा पड रहा था,,,बहन और मां का जिक्र आते ही उसकी आंखों के सामने पल भर में ही उसकी बहन मोहिनी और उसकी मां का खूबसूरत बदन नजर आने लगा वह कुछ नहीं बोल पाया लेकिन अपनी उत्तेजना बढ़ता हुआ महसूस करने लगा,,,, उसे खामोश देखकर साधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

संजू क लुंड से खेलती साधना

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सच कहूं तो संजू उस रात जो तूने मुझसे प्यार किया है ऐसे प्यार के लिए मैं तड़प रही थी तेरे मौसा मुझे इस तरीके का कभी भी प्यार नहीं कर पाए,,, सच कहूं तो तेरा मौसा ने मुझे असली स्त्री सुख दिया ही नहीं,,,,, देखा है ना तूने अपनी मौसा को तोंद निकली हुई है ढीले ढाले से रहते हैंअगर अपने कपड़े उतार कर खड़े हो जाएं तो किसी भी औरत का मन ना करें उनके साथ सोने के लिए मैं खुद से अपनी नजरों से ही अपने लंड को नहीं देख पाते पता है क्यों क्योंकि उनका पेट बाहर निकला हुआ है,,, क्या खाक बिस्तर पर दम दिखाएंगे इसीलिए तो काम पर से आते ही सो जाते हैं,,,, मुझे तो तेरे जैसा पति चाहिए था एकदम हट्टा कट्टा तंदुरुस्त जिसका लंड हमेशा आसमान छूने के लिए मचल रहा हो,,,(इस तरह की गंदी और उत्तेजना आत्मक बातें करते हुए साधना धीरे धीरे संजू की तरफ आगे बढ़ रही थी और अपनी मौसी की गंदी बातों को सुनकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी वह जल्द से जल्द अपने लंड को अपने मौसी की चूत में उतार देना चाहता था देखते ही देखते साधना एकदम करीब आ गई और अपने होठों को संजू के होठों पर रखकर चुंबन करने लगे संजू पूरी तरह से मचल उठा और अपना एक हाथ उसकी कमर में डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया हालांकि औरतों से प्यार करने का हुनर उसने बिल्कुल भी नहीं था लेकिन वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और उत्तेजित अवस्था में जो उसे सही लग रहा था वही वहां कर रहा था और उसकी यह हरकत साधना को भी बेहद मस्त कर रही थी संजू पागलों की तरह अपनी मौसी के होंठों को अपने होंठों में भर कर उसे चूस रहा था और अपनी हथेली को उसकी कमर पर रखकर एकदम जोर से उसकी कमर को दबा दिया था जिसकी वजह से हल्की चीज साधना की मुंह से निकल गई थी संजय कौल एंड पैंट के अंदर पूरी तरह से खड़ा था जो कि सीधे-सीधे साधना की दोनों टांगों के बीच साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत वाली जगह पर ठोकर मार रहा था,,,इस अहसास से साधना पूरी तरह से मचल उठी थी क्योंकि साड़ी पहनी होने की वजह से भी संजू का दमदार लंड उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था जो कि उसकी दमदार लंड की कहानी बयां कर रहा था,,, संजू पागल हुआ जा रहा था बाथरूम का दरवाजा खुला था और संजू अपना हाथ अपनी मौसी के बदन पर चारों तरफ घुमा रहा था कभी कमर पर कभी उसकी चूची पर और चूची दबाते समय उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह ब्लाउज के ऊपर से दबा रहा था लेकिन वह पूरी आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उससे भी ज्यादा मजा उसे अपने दोनों हाथ उसकी कमर से नीचे ले जाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को जोर जोर से दबाने में आ रहा था,,

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आग दोनों तरफ बराबर की लगी हुई थी,,,साधना अपने आपको संजू के जवान हाथों में सौंप कर पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी कोई और निश्चिंत रहें क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि संजू उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा क्योंकि अभी से ही उसकी चूत पानी फेंक रही थी और इस उमर में इतना पानी फेंकना संभव नहीं था लेकिन यह संजू की ताकत का ही प्रचार था कि वह अपनी मौसी को पानी-पानी कर दे रहा था,,,, होंठों में होठों को भरकर उसके पति ने कभी भी चुंबन नहीं किया था,, सही मायने में वह भी अपने पति से प्राप्त होने वाले सुख से वंचित थी,,,सिर्फ जानबूझकर वह अपनी बहन आराधना को पति को कैसे खुश किया जाता है उसके बारे में तरकीब ए बता रही थी ताकि उसका घर संसार सुखी से चलने लगे और वह खुद ही दुखी थी लेकिन ऐसा लगने लगा था कि भगवान ने उसे भी एक सहारा भेजा है उसके भतीजे के रूप में जिससे वह अपनी जवानी की गर्मी शांत कर सकती थी इसीलिए वह भी पागलों की तरह मस्त होकर चुंबन का मजा ले रही थी,,,।

बाथरूम के अंदर खड़े-खड़े दोनों एक दूसरे के बदन से मजा लेने दे संजू उसके खूबसूरत अंगों को दबा रहा था सोच रहा था और साधना अपने हाथ को नीचे लाकर उसके पैंट के ऊपर से ही उसके कठोर लंड को जोर जोर से मसल रही थी,,, एहसास दोनों को पूरी तरह से मस्त किए जा रहा था,,, घर में घर के सारे सदस्य मौजूद थे,,,,, लेकिन फिर भी साधना अपने बदन की प्यास बुझाने की लालच में सब कुछ भूल चुकी थी,,, उसे इस बात का भी डर नहीं लग रहा था कि कोई भी इधर आ सकता है,,,, इस पल को वह बिल्कुल भी खोना नहीं चाहती थी,,,।

संजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थीवह अपनी मौसी की प्यास और उसकी सहमति का पूरा का पूरा फायदा उठा लेना चाहता था इसलिए धीरे-धीरे अपनी मौसी के साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा और देखते-देखते वह अपनी मौसी की साड़ी को कमर तक उठा दिया उसकी नंगी गांड को अपनी हथेली में ले ले कर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया उसे इस बात से भी आश्चर्य हो रहा था कि साड़ी के अंदर उसकी मौसी ने पैंटी नहीं पहनी हुई थी,। शायद कपड़े धोते समय बाद अपनी पेंटी भी निकाल कर धो दी थी,,।

नंगी गोरी गोरी गांड का मक्खन जैसी चिकनाहट को अपनी हथेली में महसूस करके संजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, संजू को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी मौसी की गांड एकदम मक्खन की तरह चिकनी है जिस पर उसे अपनी जीभ फिराने का मन कर रहा था,,, उसका मन मचल रहा था अपनी मौसी की गांड को चाटने के लिए,,,। साधना पैंट के ऊपर से ही संजू के मूसल जैसे लंड को दबा दबा कर चुत से कामरस बहा रही थी।,,, हर एक पल अद्भुत उत्तेजना का संचार दोनों के तन बदन में हो रहा था,,, दोनों में से किसी को भी पकड़े जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था या फिर दोनों सब कुछ भूल चुके थे अपनी दुनिया में मस्त हो चुके थे अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ साधना पूरी तरह से मस्ती का लुफ्त उठा रही थी,,,, संजू ऐसा लग रहा था कि जैसे दोबारा उसकी मौसी उससे मिलने वाली देखी इसलिए आज ही सारी कसर निकालते हुए इसके लाल-लाल होठों का रस बड़ी शिद्दत से पी रहा था,,,, संजू का यह पहला चुंबन था जिसमें वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,,लगभग लगभग इस तरह का साधना का भी यह पहला चुंबन था जिसमें उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,,,,।

संजू मौके का फायदा उठाकर भी अपनी मौसी की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी कोरी कोरी कांड को जोर जोर से दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था इस तरह से अपनी कांड दबाने में साधना को भी मजा आ रहा था,,, संजू पूरी तरह से जवान था गठीला बदन का था इसलिए जाहिर था कि उस में दम भी बहुत था इसलिए उसका पूरा दम साधना अपनी जवानी लूटवाने में लगा रही थी,,,। संजू का दमदार लंड बार-बार साधना की चूत के ऊपर ठोकर मार रहा था जिससे साधना कामज्वर में तड़प रही थी,,, वह भी अपनी कमर को हीलाते हुए अपने भतीजे के लंड का मजा ले रही थी कभी-कभी तो साड़ी के ऊपर से ही संजू का दमदार लंड उसकी चूत के दोनों गुलाबी फांको के बीच फंस जा रहा था,,,।

संजू अपनी मौसी का ब्लाउज खोलता हुआ

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संजू की हालत हर पल खराब होती जा रही थी उस रात की तरह वह अपनी मौसी को पूरी तरह से नंगी करना चाहता था लेकिन मौका यहां पर बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी हिम्मत दिखाते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा और उसकी मौसी भी उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी उसके दिमाग में ऐसा कुछ भी नहीं था कि वह पकड़ी जाएगी जबकि घर में सब कोई मौजूद थे कोई भी किसी भी वक्त वहां आ सकता था लेकिन कामवासना में साधना का भी दिमाग काम करना बंद कर दिया था और देखते ही देखते संजू अपनी मौसी के ब्लाउज के तीसरे बटन को भी खोल दिया आधे से ज्यादा चूचियां बाहर को निकलने के लिए फड़फड़ाने लगी,,,,,,, ऐसा लग रहा था कि मानव ब्लाउज के अंदर साधना की चुचियों का दम घुट रहा हो इसीलिए संजू उसकी मदद करते हुए अपने हाथ से उसकी एक चूची को बाहर निकाल दिया और उसे मुंह में लगा कर पीने लगा,,, संजू की इस हरकत की वजह से साधना एकदम से उत्तेजना से सिहर उठी और उसके मुख से गर्मागर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहह आहहहहह ,,,,

इन सब का अनुभव संजू को पहले कभी भी नहीं था लेकिन उस रात से थोड़ा-थोड़ा संजीव को औरतों के बदन से खेलने का हुनर आने लगा था,,, इसीलिए संजू बड़े अच्छे से अपनी मौसी की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया था,,,, दोनों पूरी तरह से मस्त हुए जा रहे थे एक हाथ से पीते हुए दूसरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर संजू अपनी मौसी की चूत को सहलाने लगा,,,, गरमा गरम चूत का स्पर्श संजू के तन बदन में उत्तेजना का संचार और ज्यादा बढ़ाने लगा,,,, हल्के हल्के रेशमी बालों का स्पर्श भी उसे बड़े अच्छे से हो रहा था दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,, साधना यही बाथरूम में संजू से चुदवाने का कार्यक्रम बना चुकी थी कि तभी उसके ससुर को जोर-जोर से खांसी आने लगी और उनकी खासी की आवाज सुनते ही जैसे दोनों को होश आया हो दोनों बाथरूम का दरवाजा खुला देख कर एक दम से चौंक गए,,,,, साधना तुरंत संजू से अलग हुई और,,,, और अपने कपड़ों को दुरुस्त करते हुए बोली,,।

बाप रे ख्याल ही नहीं रहा के बाथरूम का दरवाजा खुला है अच्छा होगा कि यहां पर कोई आया नहीं वरना आज गजब हो जाता,,,।

(अपनी मौसी की बात सुनकर संजू को भी एहसास हुआ लेकिन मनोरंजन में बाधा आ गई थी इसलिए उसे यह सब अच्छा नहीं लग रहा था वह खामोश था बस गहरी गहरी सांस ले रहा था,,, इस तरह से इस खेल को बीच में रोकने की वजह से साधना को भी गुस्सा आ रहा था लेकिन एहतियात भी बहुत जरूरी था इसलिए वहां कपड़े की बाल्टी हाथ में उठाते हुए संजू से बोली,,,)

यह नहीं चल सीढ़ियों पर वही कुछ हो सकता है,,,

सीढ़ियों पर क्यों मौसी छत पर,,,

अरे बुद्धू छत पर तो बिल्कुल भी नहीं क्योंकि पड़ोसियों की छत आपस में जुड़ी हुई है वहां पर बिल्कुल भी नहीं कर सकते कोई भी आ सकता है कोई भी देख सकता है,,,

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ठीक है मौसी,,,,(इतना कहते हुए वह भी कपड़ों से भरी हुई बाल्टी उठा लिया और अपनी मौसी के पीछे पीछे चलने लगा उसकी बड़ी-बड़ी गदराई गांड की चाल देख कर संजू को अपने आप पर गर्व होने लगा कि इसी गांड को वह जोर जोर से दबा रहा था,,,देखते ही देखते दोनों सीढ़ियों के पास पहुंच गए सीढ़ियों की जहां से शुरुआत होती थी वही दरवाजा लगा हुआ था ताकि कोई ऊपर से नीचे ना आ सके और आज यही दरवाजा उन दोनों के लिए आशीर्वाद साबित हो रहा था,,,, क्योंकि जैसे ही दोनों सीढ़ियों पर चढ़े साधना ने सीढ़ियों पर के दरवाजे को बंद कर दी,,, अब उन दोनों को कोई भी देख नहीं सकता था,,,। अपनी मौसी की चालाकी को देखकर संजू का भी दिल गदगद हुआ जा रहा था उसे अपनी मौसी को बहुत प्यार आ रहा था कि चुदवाने के लिए कैसे-कैसे जुगाड़ उसकी मौसी कर रही है,,,,।जैसे ही दरवाजा साधना ने बंद की वैसे ही वापस पलटते ही सीढ़ियों पर ही वहां संजू को अपनी बाहों में भर कर फिर से उसके होठों पर होठ रखकर चूमना शुरु कर दी,,,,,, इस बार संजू दुगने जोश के साथ अपनी मौसी को बाहों में भर कर उसके होठों को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया और तुरंत अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मौसी की साड़ी को कमर तक उठा दिया और उसकी पूरी पूरी कांड पर इस बार उत्तेजना के मारे जोर जोर से चपत लगाना शुरू कर दिया लेकिन चपत की आवाज जोर जोर से आ रही थी इसलिए उसकी मौसी ने उसे रोक दी और बोली,,,।)

अरे बुद्धू चपात मत मारदेख नहीं रहा कितनी जोर जोर से आवाज आ रही है कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा तु बस जोर-जोर से दबा,,,,(और इतना सुनते ही संजू पूरा जोर लगा कर अपनी मौसी की गांड को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और उसकी मौसी भी उतावलापन दिखाते हुए अपने दोनों हाथों से अपने भतीजे की पेंट को खोलना शुरू कर दी और अगले ही पल उसके पेंट को नीचे घुटनों तक खींच दी,,, अंडरवियर में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था अब वक्त जाया करना दोनों के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं था इसलिए जल्दबाजी दिखाते हुए साधना सीढ़ियों पर ही अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपने भतीजे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और उसके लंड का लुफ्त उठाते हुए अपने मन में सोच रही थी कि इसे कहते हैंमर्दाना जोश से भरा हुआ लंड जिसे मुंह में लेने में कितना मजा आ रहा है और एक लंड है उसके पति का है जिसे मुंह में लेकर ऐसा लगता है कि गोली को चूस रहे हो,,,।

अनुभव से भरी हुई साधना अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड किसे कहते हैं उसे उसका भतीजा मिल गया था जो उसे चोद कर उसे असली सुख दे सकता था,,, इसलिए देखते ही देखते साधना संजू के लंड को अपने गले तक उतार कर चूसना शुरु कर दी,,,, संजू की उत्तेजना के मारे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया,,,, ,,, सीढ़ियों पर काम क्रीडा का यह साधना का पहला अनुभव था और बेहद उत्तेजना आत्मक था,,,,,संजू से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी तो वह बार-बार अपने हाथ को नीचे ले जाकर अपनी मौसी की चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर देता था,,,, कुछ देर तक दोनों की काम क्रीड़ा इसी तरह से चलती रही तो समय के अभाव के कारण साधना खड़ी हुई और मन में यह सोच कर कि पता नहीं ऐसा मौका फिर कभी मिलेगा या नहीं वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी कमर तक उठा दी,, और उत्तेजना भरे स्वर में बोली,,।

चाट संजू मेरी चूत चाट,,,।

(उस रात को संजु यह भी अनुभव ले चुका था इसलिएवह तुरंत अपनी मौसी की तरह घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों को अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड पर रखकर,,,उसे अपनी तरफ खींच लिया और तुरंत अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की दहकती हुई चूत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, जैसे ही संजू के होठ साधना की चूत पर स्पर्श हुए वैसे ही साधना एकदम से काम विह्वल हो गई,,, और तुरंत उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,, ऊपर सीढ़ियों से इधर कोई आने वाला नहीं था और ना ही नीचे से क्योंकि,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी छत पर कोई आता नहीं था और नीचे सेवा दरवाजा बंद किए हुए थे इसलिए पूरी तरह से निश्चिंत थी,,,देखते ही देखते संजु वाली हरकत साधना करने का कि वह अपनी कमर को आगे पीछे करके संजू के मुंह को ही चोदना शुरू कर दी,,,,।

साधना की हालत खराब होती जा रही थी और समझ गई थी कि अब जीभ से काम चलने वाला नहीं है संजू को अपना मोटा मुसल उसकी चूत में डालना ही होगा,,, इसलिए वह संजू के बाल को पकड़ कर उसे पीछे की तरफ की ओर बोली,,,।

बस मेरे लाल अब अपना लंड डाल दे मेरी चूत में,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है ,,,(और इतना कहने के साथ ही साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए अपनी गांड को संजू के सामने परोस दी और दीवार पकड़कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाने लगी और आगे से झुकना शुरू कर दी,,, देखते ही देखते साधना ने अपनी चूत का गुलाबी छेद संजू के सामने परोस दी जिसे देखते ही संजू के तन बदन में आग लग गई और वह तुरंत संभोग मुद्रा बनाते हुए अपने लंड को पकड़ कर,,, अपनी मौसी के गुलाबी क्षेंद में अपना लंड डाल दिया,,, और उसकी कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया,,,, जैसे-जैसे संजू का लंड साधना की गुलाबी चूत में अंदर तक जा रही थी वैसे वैसे साधनों की तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी लेकिन वह ज्यादा जोर से सिसकारी की आवाज नहीं निकल रही थी क्योंकि कोई भी सुन सकता था लेकिन उसका आनंद बढ़ता ही जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अपनी बहन के लड़के के साथ वह अपने ही घर में सीढ़ियों पर इस तरह से चुदवा रही है,,,उसे समझते देर नहीं लगी थी कि जिंदगी में वक्त और हालात कभी भी बदल सकते हैं वह कभी सोची नहीं थी कि अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ इस तरह से वह चुदवा कर अपनी प्यास बुझाएगी,,,,

संजू को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई थी उसकी सारी मनसा पूरी हो चुकी थी उसके हाथों में उसकी मौसी की गोरी गोरी गांड थी और उसकी चूत में उसका लंड था जिसे वह धक्के पर धक्का मारता हुआ उसे अंदर बाहर करना था,,,, हर धक्के के साथ साधना की आह निकल जा रही थी वह सीढ़ियों पर छुट्टी चली जा रही थी पीछे से चोदते समय संजू को अपनी मौसी की गांड और ज्यादा बड़ी लग रही थी जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को पकड़ कर दबा रहा था और धक्के पर धक्के पेल रहा था,,,।

ससहहह आहहहह आहहहहह,,, संजू एक ही रात में तु बहुत कुछ सीख गया है,,,।

जिसे सिखाने वाली इतनी अच्छी गुरु मिल जाए तो वह तो एक ही बार में सब कुछ सीख जाएगा मौसी,,,, तुम मेरी गुरु हो,,,,आहहहहह,,, तुम्हारी चूत कितनी गर्म है मौसी,,,।

तेरे लंड भी कुछ कम नहीं है मेरी चूत में बवाल मचाया हुआ है,,,,आहहहह आहहहहह आहहहहह,,,,, और जोर से चोद मेरे लाल,,,,आहहहह (अपनी मौसी की बात सुनकर संजू के धक्के और तेज हो गए) हां ऐसे ही ऐसे ही,,, जोर-जोर से,,,आहहहहह आहहहहहह,,,,,, मेरी चूत पूरी भर गई है तेरे लंड से,,,,।

बहुत मोटा है क्या मौसी,,,,

हां रे तेरा बहुत मोटा और लंबा भी है,,,

मौसा जी का कैसा है,,,

तेरे से आधा ही होगा,,, और वह भी दम बिगर का,,,,आहहहह,,,,आहहहहह,,,,, तेरे हर धक्के पर मैं तेरी गुलाम होती जा रही हूं,,,।

ओहहहह मौसी तुम कितनी खूबसूरत और सेक्सी हो नंगी होने के बाद तो एकदम कयामत लगती हो सच में तुम्हारी गांड इतनी बड़ी बड़ी है कि देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,, मौसा जी सबसे बड़े बेवकूफ है जो इतनी खूबसूरत औरत के साथ प्यार नहीं करते,,,

सीढ़ियों पर अपनी मौसी की चूड़ी करता हुआ

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आहहहह आहहहह मेरी तो किस्मत ही खराब है संजू क्या करूं,,, लेकिन अब लगता है कि भगवान ने तुझे मेरे लिए भेजा है ऐसे ही मेरी प्यास बुझाए गा ना,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो ना जी शायद तुम्हारे लिए ही नहीं बना, हुंंं, इतना प्यार मुझे किसी से नहीं मिला,,,, तुम्हें चोदने में इतना मजा आ रहा है कि पूछो मत,,,, तुम्हारी चूत बहुत टाइट है मौसी,,,।

हारे तेरी मौसी जी का छोटा है ना और तेरा लंड बहुत मोटा और लंबा है इसलिए तुझे और ज्यादा टाइट लग रहा है,,,

लेकिन बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी चुची तुम्हारी गांड तुम्हारी चूत,,, सब कुछ लाजवाब है,,,,। मौसी तुमने कभी सीढ़ियों पर इस तरह से चुदवाई,,हो,,,।

आहहहह ,,,नहीं रे पहली बार ऐसा कर रही हूं और सच बताऊं तो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,,सीढ़ियों पर सब से नजरें बचाकर चोरी-छिपे और ज्यादा मजा आता है,,,,आहहहहह ,,,,,,,,

(दोनों पूरी तरह से चुदाई में मस्त हो चुके थे साधना अपने जीवन में इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी संजू उसे अद्भुत सुख प्रदान कर रहा था और उससे मजा भी ले रहा था देखते ही देखते दोनों किससे बड़ी तेजी से चलने लगी और दोनों ही एक साथ झड़ गए,,,, वासना का तूफान थम चुका था दोनों की मस्ती शांत हो चुकी थी दोनों संतुष्ट हो चुके थे अपनी मौसी की चूत में से अपना घंटे निकाल कर वह अपनी मौसी की साड़ी को हाथ में लेकर उसे से अपना लंड साफ किया और अपना पेंट पहन लिया साधना भी अपने कपड़ों को दुरुस्त कर दी और सीढ़ियों के दरवाजे को खोल दी ताकि किसी को शक ना हो और कपड़े लेकर उपर की तरफ आ गई,,,,।

कपड़ा फैलाने के बाद दोनों नीचे आ गए,,साधना को इस बात की संतुष्टि थी कि किसी को कानों कान इस बात की भनक तक नहीं लगी थी कि घर में सब के मौजूद होने के बावजूद भी साधना चुदवा रही है,,,, संजू जाने लगा तो साधना बोली,,,।

ऐसे ही बीच बीच में आते रहना संजू,,, तेरे बिना अब मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,

आना ही पड़ेगा मासी तुम्हारे बिना मुझे भी कहां चैन मिलता है,,, अब तो और भी नहीं मिलेगा,,,(और इतना कह कर मुस्कुराता हुआ वह कमरे से बाहर निकल गया,,,)
 
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