Incest कैसे कैसे परिवार - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

hotaks

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ससुराल की नयी दिशा: Chapter 58 is posted

पात्र परिचय

अध्याय ५८: पल्लू का मायका और ससुराल

Please read and give your views.
 
Hello Friends,

main apni pahli kahani yaha post kar raha hoon.

kahani main hindi mein likhoonga.

shayad mein ek hafte mein 2 se jyada update na de paoon.

Jo lekhak hindi mein likhate hain agar wo bata saken ki wo kaise likhte hain to shayad, mein thoda jyada bade update de paoonga. kyonki mujhe kafi time lag raha hai.

kahani mein lagbhag 40 se 50 tak updates honge.

mein koin intro nahin de raha hoon, jaise jaise log ayenge, unhe introduce karta rahoonga.

Aj aur kal mein is kahani ki 5 se 7 jhalakiyan post karoonga.

Kahani ki posting saturday se hogi.

Thank you every one.

I hope, mein apka manoranjan kar paoonga.

(103749 )
 
पात्र परिचय


पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.

अजीत बजाज:
व्यवसायी. अच्छी कद काठी है, लंड काफी भारी भरकम, मोटा और लम्बा. बहुत रंगीन स्वभाव है.

अदिति बजाज: ग्रहणी, अजीत की पत्नी। अलोक और अनन्या की माँ। बेहद सुन्दर और कामुक स्त्री.

गौतम बजाज: घर का बेटा, चतुर और सबको प्रेम करने वाला. शारीरिक रूप से अपने पिता पर गया है. चुदाई का नया नया खिलाडी है.

अनन्या बजाज: घर की सबसे छोटी सदस्य. अल्हड़ और चंचल. माँ से उसे खूबसूरती मिली है. जानने वाले इसे देखकर अदिति की जवानी की याद करते हैं. गौतम से १.५ वर्ष छोटी है.

शालिनी देवी बजाज: अजीत की माँ. ३ वर्ष पहले पति का देहांत हो गया. एक वर्ष से यहाँ अपने बच्चों के साथ रहती हैं. जब तक पति जीवित थे, इनका सेक्स जीवन भरपूर था. आज भी इन्हें देखकर हर उम्र का आदमी एक बार तो चोदने की इच्छा करता ही है.

गोकुल: रसोइया और राधा: नौकरानी, जो पीछे के सर्वेंट क्वाटर में रहते हैं.

दूसरा घर: सुनीति और आशीष राणा

आशीष राणा:
घर के मुखिया। हरियाणा के जाट और कसरत प्रेमी. शरीर एकदम गठा हुआ. चुदाई में मानो स्नातकोत्तर हैं.

सुनीति राणा: आशीष की पत्नी और उसके बचपन की साथी. दोनों बचपन से एक ही मोहल्ले में पले बढ़े. दोनों के परिवारों में घनिष्ट मित्रता थी. दोनों का विवाह कालेज से निकलते ही हो गया था. अब २४ वर्ष बाद भी दोनों का प्यार कम नहीं हुआ है. इसकी प्यास बुझाना बिरलों के ही बस में है. असीम सुंदरता और अनंत वासना का संगम.

अग्रिमा राणा: पहली संतान. माँ बाप की आँखों का तारा. क्या नहीं जो सुनीति और आशीष इसके लिये न कर दें. माँ की सुंदरता विरासत में मिली है तो सेक्स की भूख भी.

असीम राणा: पहला बेटा, अपने पिता की तरह मजबूत और कसरती. इसे थोड़ा कठोर सेक्स पसंद है. फिर भी लड़कियाँ और महिलाएं इसका साथ पाने को तड़पती हैं. अग्रिमा से १ साल छोटा.

कुमार राणा: दूसरा बेटा। असीम से लगभग २ साल छोटा है. दोनों भाई उम्र के सिवाय लगभग एक जैसे हैं. रुचियाँ भी लगभग एक हैं. असीम के साथ लगा रहता और इसका भरपूर लाभ भी उठाता है. जब अपने किसी कॉलेज के साथी की माँ लाइन पर आती है, तो तीन चार बार के बाद अधिकतर दोनों भाई उसको जुगलबंदी में बजाते हैं.

जीवन राणा: आशीष का पिता. अपनी पत्नी सरला का देहांत होने के कुछ महीनों बाद यहाँ रहने आ गए हैं. परन्तु अपने गाँव के चक्कर लगाते रहते हैं, जहाँ इनके मित्र इनके आने की राह देखते हैं. देखकर ही पता लगता ही की आशीष का बीज कितना प्रबल था.

सलोनी: घर की सहायक. सांवला गठा शरीर. सुनीति के बचपन से उसके साथ है. इसकी पढ़ाई और विवाह का सारा खर्चा सुनीति के पिता ने ही किया था. सुनीति के साथ ही वो भी आ गई थी. घर की सदस्य ही मानी जाती है. तीनों राणा संतानें इसे मौसी पुकारती हैं. जब बंगला बना था तो उसके परिवार को भी एक सटा हुआ दो बैडरूम का आउट हाउस बनवाया था.

बिरजू: सलोनी का पति. शुरू में इसे यहाँ आना रास नहीं आया था. पर राणा परिवार के व्यव्हार ने इसे जीत लिया.

भाग्या: सलोनी और शंकर की बेटी. साल भर पहले विवाह हुआ है. अभी गर्भवती है. पास ही के गांव में विवाह हुआ है, फिर आशीष ने पति की नौकरी इसी नगर में लगा दी. अब जब मन हो चली आती है. पहले सास बहुत परेशान करती थी, फिर एक दिन अदिति ने बुला कर उसे समझाया और कुछ पैसे दिए. ये बता दिया की ये तब तक मिलते रहेंगे जब तक भाग्या सुख से रहेगी। ये भी चेताया कि अगर कुछ ऊँच नीच हुई तो सूद समेत वापिस लेंगी और सूद इतना भरी पड़ेगा कि जीवन भर कष्ट रहेगा. तब से सास उसे सर पर बैठाती है. सप्ताह में एक दो दिन तो यहीं रहती है. पति भी कुछ नहीं कहता क्योंकि वो उसे बहुत चाहता है.

सूरज: भाग्या का पति.

बलवंत मान: जीवन के बचपन का मित्र. सुनीति के पिता. अभी गांव में ही रहते हैं और अपनी और जीवन के खेती की देखभाल करते हैं.

गीता मान: बलवंत की पत्नी और सुनीति की माँ.
 
पात्र परिचय


तीसरा घर: शीला और समर्थ सिंह

समर्थ सिंह:
एक बड़ी सिक्यूरिटी कंपनी के मालिक हैं. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से वे बहुत बड़े बड़े व्यवसायों में हर तरह की सुरक्षा का इंतजाम करते हैं. हालाँकि अब अर्ध रिटायरमेंट में हैं. संभ्रांत नगर की सुरक्षा का भी यही ध्यान रखते हैं. उम्र अब ६५ पार कर चुकी होगी.

शीला सिंह: समर्थ की पत्नी. जिस प्रकार से अपने आप को बनाये रखना चाहिए, ये कोई इनसे सीखे। दोनों की शादी को लगभग ४० साल हो चुके हैं. आज भी बेहद चुस्त और सक्रिय। इनका एक शौक है जिसे हम आगे जान पाएंगे.

सुप्रिया: समर्थ और शीला की बड़ी बेटी. शादी के पांच साल बाद तलाक हो गया. कारण हम आगे जान पाएंगे. अपने दोनों बेटों को पलने और बड़ा करने में उसने अपना जीवन लगा दिया. समर्थ की कंपनी में MD के पद पर है, और संभवतः समर्थ के पूर्ण रिटायरमेंट के बाद चेयरमैन भी बनेगी. ये शहर में अपने घर में रहता है, पर अक्सर सप्ताहांत अपने माता पिता के घर ही बिताती है.

सुरेखा : दूसरी बेटी. अपने पति से अब बहुत दुखी है. एक बेटा और एक बेटी है. समर्थ की कंपनी में डायरेक्टर है. दोनों बहनों में कोई द्वेष नहीं है कंपनी में अपने पद को लेकर. ऑफिस कम ही जाती है. सुप्रिया के निकट ही अपने घर में रहती है.

निखिल: सुप्रिया का बड़ा बेटा। बिलकुल हीरो जैसा लम्बा चौड़ा. इसका हथियार भी इसके शरीर से मेल खाता है. तेज तर्रार और आक्रामक.

नितिन: सुप्रिया का दूसरा बेटा। निखिल की कार्बन कॉपी. हालाँकि स्वाभाव में दोनों बहुत अलग हैं. तीव्र बुद्धि और सौम्य स्वभाव। पर इसका औजार निखिल से भी भारी है.

सजल: सुरेखा का बड़ा बेटा. इसके बारे में बाद में जानेंगे।

संजना: सुरेखा की बेटी. इसके बारे में बाद में जानेंगे।

नागेश: सुरेखा का पति.

चौथा घर: मिशेल और रिचर्ड डिसूज़ा

रिचर्ड डिसूज़ा:
इनका इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स का बिज़नेस है. काफी साल साउथ अफ्रीका भी रहे है. वैसे केरल से हैं, पर अफ्रीका से लौटकर इसी शहर में बस गए. समर्थ के अच्छे दोस्त हैं और उनके कहने पर ही साथ में यहाँ घर लिया था.

मिशेल डिसूज़ा: रिचर्ड की पत्नी. ये भारतीय नस्ल की अफ्रीकन महिला हैं. रंग थोड़ा हल्का है, पर नैन नक्श और जिस्म बिलकुल कटावदार. रिचर्ड से शादी के ७ साल बाद वो भारत आ गए थे. पहले इन्हें बड़ी मुश्किल हुई, पर अंततः अच्छा लगने लगा. इनके लगभग सारे रिश्तेदार अफ्रिका में ही है.

शैली डिसूज़ा: बड़ी बेटी, ये शादी के एक साल बाद पैदा हुई थी. रंग रूप और सुंदरता में एकदम माँ पर गई है. अब कॉलेज के लास्ट ईयर में है. संभवतः आगे की पढाई के लिए विदेश जाये.

डेविड डिसूज़ा: बेटा , शैली से दो साल छोटा. फूटबाल का खिलाडी और शानदार शरीर का मालिक. कसरत और तैराकी का शौक़ीन. अपनी क्लास की लड़कियों और उनकी मम्मियों का चहेता।

जैसन वार्ड: मिशेल का बड़ा भाई. अफ्रीका में अपना बिज़नेस है. रिचर्ड और जैसन ट्रेडिंग पार्टनर्स हैं. दोनों में अब अच्छी घनिष्ठता है. हालाँकि आरम्भ में जैसन उसे पसंद नहीं करता था, पर जानने के बाद ठीक हो गया.

ईव वार्ड: जैसन की पत्नी. मिशेल की अंतरंग मित्र.

ऐलिस वार्ड: जैसन और ईव की बेटी. ये मॉडलिंग करती है. और बहुत प्रख्यात है अफ्रीका के देशों में.

मार्क वार्ड: जैसन और ईव का बेटा।
 
पात्र परिचय

पाँचवाँ घर: शोनाली और जॉय चटर्जी

जॉय चटर्जी:
ये एक प्राइवेट कंपनी में ऊंचे ओहदे पर काम करते है. बहुत आकर्षक व्यक्तित्व और मृदुभाषी. अपनी पत्नी शोनाली पर जान छिड़कते हैं. नयी और कमसिन लड़कियों के शौकीन, जो इन्हें इनकी पोजीशन के कारण पूरा करने में कोई समस्या नहीं होती.

शोनाली चटर्जी: बेहद हसीन, थोड़ी गुदाज और मांसल हैं, पर इनके व्यक्तित्व पर खूब फबता है. गांड ऐसी चौड़ी की ट्रैफिक लाइट की जरूरत नहीं, बस इन्हे खड़ा कर दो, ट्रैफिक अपने आप रुक जाये. पर इनकी शरीर की भूख इतनी है की आसानी से नहीं मिटती। जवान लड़कों की शौक़ीन.

सागरिका चटर्जी: बड़ी बेटी. बिलकुल रोशोगुल्ला. अपने पिता की चहेती। पर बहुत कुछ माँ पर गई है.

पारुल चटर्जी: छोटी बेटी. एकदम रसमलाई की मिठास और रास से भरपूर. सागरिका की पिछलग्गू. माँ की सुंदरता पाई है.

सुमति बोस: जॉय की विधवा बहन. अब साथ ही रहती है.

पार्थ बोस: सुमति का बेटा। अपने पिता की अकाल मृत्यु से इस पर काफी बोझ पड़ गया था. अंततः यहाँ आने के बाद अब बहुत आराम से है. पढाई बीच में छूटी तो दोबारा नहीं की. दिंची क्लब का मालिक और सदस्य चयन समिति का मुखिया. चयन समिति में शोनाली भी हैं.

छठा घर: दिया और आकाश पटेल

आकाश पटेल:
ये एक गुजराती व्यवसाई हैं. इनका ट्रेडिंग का काम है और बहुत सफल है. इनकी शादी इनके पिता के व्यवसाई दोस्त की बेटी से हुई थी. दोनों एक दूसरे को बचपन से जानते थे और ये तय था कि इनका विवाह होना ही है. अपने काम को बढ़ने के उद्देश्य से ये करीब १६ साल पहले इस शहर में आये थे. व्यवसाई वर्ग में इनकी अच्छी पहचान और प्रतिष्ठा है.

दिया पटेल: आकाश की पत्नी. इनका समय अक्सर किट्टी पार्टी और महिलाओं से मिलने जुलने में ही जाता है. घरेलू महिला हैं पर अपना बहुत ध्यान रखती हैं. एकदम कटीले नैन नक्श. बनने संवरने का शौक जैसा की किसी भी संपन्न स्त्री का स्वभाव होता है.

दर्शन (आलोक) पटेल: दिया और आकाश का इकलौता बेटा। अपने पिता के बिज़नेस को अब अपने एम बी ए के बाद साथ में संभाल रहा है. बेहद आकर्षक लड़कियों के लिए चुंबक सामान व्यक्तित्व. मौका देख कर चौका लगाने में निपुण. ये बिना उम्र के लिहाज के खेलता है.

(आलोक का नाम बदल कर दर्शन कर दिया है, तीनों नामों की समानता से दुविधा हो रही थी.)

आकार पटेल: ये आकाश का छोटा भाई है. ७ साल पहले जब बिज़नेस में बहुत उतर चढ़ाव थे तब आकाश ने इसे अपने ही पास बुला लिया था. संयुक्त परिवार के समर्थक आकाश ने इसे अपने ही घर साथ रखा है. हालाँकि व्यावसायिक कारणों से उससे एक किराया लिया जाता है, जो लेशमात्र ही है. परन्तु घर के कुछ खर्चे केवल आकार के ही कहते में आते हैं. ऐसे समझौते का एक कारण और भी है, और वो है नीलम. ये अब अपना अलग एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट का काम करते हैं और दोनों भाइयों के बिज़नेस पृथक हैं.

नीलम पटेल: आकार की पत्नी. ये जरा चतुर और तेज तर्रार है. हालाँकि घरेलू ये भी है, पर इसकी ऑंखें चारों ओर रहती हैं. इसी कारण दिया ने किराये पर आने का सुझाव दिया था, क्योंकि वो नहीं चाहती थी की कोई अनबन हो. इस निर्णय से दोनों परिवारों में एक सहजता आ गई है. नीलम और आकार ने अपना एक घर भी बना लिया है कुछ २ किमी दूर, पर वो रहते यहीं हैं. अभी सप्ताहांत में या किसी पार्टी के लिए प्रयोग में लाया जाता है.

कनिका पटेल: आकार और नीलम की इकलौती बेटी. अभी बी कॉम फाइनल ईयर में है और CA की इच्छुक है. पढ़ने में तेज है और स्वभाव में भी. ज्यादा किसी को भाव नहीं देती, पर घर में बहुत सरल और सलीके से रहती है.

सिया: दिया की बहन जो दूसरे नगर में निवास करती है.

चंद्रेश: सिया का पति.

प्रकाश: चंद्रेश का छोटा भाई, जिसने अब तक विवाह नहीं किया.

हितेश पटेल: दिया की बहन सिया का बेटा है जो पढाई के लिए यहाँ पर है. पाठ्यक्रम का अभी १० महीना शेष है, फिर ये घर जाकर अपने पिता के काम में जुड़ जायेगा.
 
पात्र परिचय

सातवां घर: वर्षा और समीर नायक

समीर नायक
: ये एक पुराने जमींदार परिवार से हैं और अब इनका बहुत बड़ा खेती बाड़ी का काम है. इनके पास जितना पैसा है वो शायद सात पुश्तों तक भी नहीं संभले। इन्होने अपनी बेटी के लिए इसीलिए एक घर दामाद को चुना था जिससे वो इनसे दूर न रहे. अब इनका काम दामाद और बेटा ही सँभालते हैं.

वर्षा नायक: समीर की पत्नी. ये खुद भी एक धनाढ्य परिवार से हैं और उसी तरह के इनके शौक भी हैं.

अंजलि शिर्के: ये समीर और वर्षा की बेटी है. बचपन से लाड़ प्यार में बड़ी हुई. इसके भाव ही अलग हैं. ये किसी भी लड़के को दोबारा देखती भी नहीं थी. हाँ अनगिनत बॉय फ्रेंड बनाया और शायद एक बार से ज्यादा किसी से नहीं चुदी। पर एक माध्यम वर्ग के लड़के राहुल ने इसका दिल जीत लिया. या यूँ कहिये कि उसके लंड ने इसका दिल जीत लिया.

राहुल शिर्के: अंजलि का पति. एक बहुत ही तेज और होनहार आदमी है. अंजलि इसके पास ट्यूशन के लिए आयी थी. उधर अंजलि अपनी पढाई में पास हुई और इधर राहुल अंजलि के मापदंड पर. हालाँकि समीर ने ये स्पष्ट कर दिया था की उसे घर जमाई ही चाहिए. आखिर जब समीर ने माना की राहुल का परिवार भी साथ रहेगा तब ये रिश्ता पक्का हो पाया था. इसके लिए राहुल को अपनी सासू माँ के कठोर मापदंडों पर भी खरा उतरना पड़ा था. पर एक रात में ही वो अपनी विशेष योग्यता से उत्तीर्ण हो गया था.

जयंत नायक: समीर और वर्षा का बेटा। ये अब राहुल के साथ खेती संभालता है. अक्सर ये महीने में एक हफ्ते साथ जाते है, और बाकी में एक हफ्ते के लिए एक जाता है. इसकी अभी शादी नहीं हुई है. पर इसको चूत की कभी कमी नहीं हुई. पैसे और बलिष्ठ शरीर के आकर्षण से न जाने कितने फूलों का रस चूसा है. इसे औरत की उम्र नहीं उसके जिस्म में दिलचस्पी रहती है.

सुलभा शिर्के: राहुल की माँ. आज ये जितना सुख भोग रही हैं उतना उन्हें जीवन में कभी नहीं मिला. एक मध्यम वर्ग के रोज के संघर्ष से ये उम्र से पहले बूढी लगने लगी थीं. पर अब इनकी मानो जवानी लौट आयी थी. और इसका ये भरपूर लाभ उठा रही हैं और दूसरों को भी उठाने दे रही हैं.

पवन शिर्के: राहुल के पिता. सुलभा की तरह जीवन का भरपूर आनंद ले रहे हैं. वो उन कुछ भाग्यशाली लोगों में से हैं जिनके बेटे उनके जीवन के सारे दुःख दूर कर देते हैं.

कुसुम: ये घर की नौकरानी है, हालाँकि घर की सदस्य की तरह ही रहती है. घर वाले भी उसे उतना ही आदर देते है. इसकी उम्र अब ४० से ४२ के बीच है.

संतोष: कुसुम का पति. ये खेतों पर ही रहता है. उसे एक दो कमरे का मकान दिया है, जिसमे वो आराम से रहता है. जब खेती का काम बंद रहता है, वो यहीं आ जाता है. बाकी समय में कुसुम महीने में दो बार २-३ दिन के लिए चली जाती है समय देखकर.

काम्या: संतोष और कुसुम की बेटी. ये अभी कर्णाटक के एक कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढाई कर रही है. अभी फाइनल ईयर में है.

कमलेश: काम्या का जुड़वाँ भाई. ये भी उसी कॉलेज में मेकैनिकल इंजीनियरिंग पढ़ रहा है और फाइनल ईयर में है. पहले दो साल हॉस्टल में रहने के बाद दोनों भाई बहन अब एक किराये के फ़्लैट में रहते हैं.

आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी

विक्रम शेट्टी:
ये एक ट्रेवल एजेंसी के मालिक है. इनका नेटवर्क पूरे देश में और कुछ अन्य देशों में भी है. घूमने और पार्टियों के शौक़ीन। इनके संपर्कों के कारण अधिकतर इनके मित्र पार्टियों के लिए इनकी ही सहायता लेते है. पार्टी में जो चाहिए उसका प्रबंध कर सकते हैं और वो भी २-४ घंटों में ही.

स्मिता शेट्टी: विक्रम की पत्नी। इनका वैसे तो अपना ब्यूटी सलून का काम है, जिसकी चार शाखाएं इनके ही शहर में हैं. पर इन्होंने स्वयं जाना छोड़ दिया है. और अपना समय एक विशिष्ट समुदाय के प्रबंधन में लगाती हैं. और घर से ही ज्यादा काम करती हैं. देखने में टीवी सीरियल की किसी सुन्दर माँ की तरह है.

मोहन शेट्टी: स्मिता और विक्रम का बड़ा बेटा। ये अब अपने पिता बिज़नस के लिए एक कार कंपनी चलाता है. भारत के हर बड़े नगर में इनकी कारें उपलब्ध है. महीने में १० दिन बाहर रहता है काम के सिलसिले में.

श्रेया शेट्टी: मोहन की पत्नी। इनकी शादी को लगभग ३ साल हुए हैं. समुदाय के आदेशानुसार मोहन के साथ शादी थोड़ी जल्दी ही हो गयी थी. पर ससुराल में आकर उसने अपनी पढाई पूरी की. अभी एम बी ए की तैयारी कर रही है. हालाँकि आगे करेगी या नहीं कुछ पक्का नहीं है. पति और ससुर दोनों उसे अपने बिज़नेस में सहयोग देने के लिए कह रहे हैं. पर उसका कहना है की जब तक उनकी पहली संतान (जब भी होगी) ५ वर्ष की न हो जाये, वो कुछ नहीं ज्वाइन करेगी. परिवार वाले भी सहमत हैं. ससुराल के अथाह प्यार ने उसे अपने घर की कमी अनुभव नहीं करने दी.

महक शेट्टी: स्मिता और विक्रम की बेटी, ये मोहन से छोटी है और घर की सबसे लाड़ली. अभी इसने अपनी मास्टर की पढाई समाप्त की है. पिता के बिज़नेस की देखभाल करना शुरू किया है, बिलकुल जूनियर स्तर से. समुदाय में शादी के लिए बहुत दबाव है और रिश्ते भी आये हुए हैं. संभवतः अगले साल के अंत तक विवाह हो ही जायेगा.

मेहुल शेट्टी: स्मिता और विक्रम का दूसरा बेटा। ये बहुत शर्मीला और शांत स्वभाव का है. पढ़ने में प्रखर और जटिल समस्याओं का सरल समाधान निकलने में निपुण. घर में सब इसे बहुत प्यार और दुलार से रखते हैं. अगले महीने इसका २०वां जन्मदिन है. अभी कॉलेज में ही है.

स्नेहा गौड़ा: श्रेया की छोटी बहन. श्रेया की बहन की उम्र मेहुल से कोई ६ महीने बड़ी है. मेहुल इसे बहुत पसंद करता है, जो स्नेहा को पता है. उसे मेहुल भी अच्छा लगता है, पर उसके इतने नम्र और सरल स्वभाव से वो थोड़ी असंतुष्ट है. श्रेया के घर बहुत आना जाना रहता है.

सुजाता गौड़ा: श्रेया की माँ. श्रेया की सुंदरता का श्रोत. बहुत अधिक सुन्दर. त्वचा ऐसी की छूने से मैली होने का आभास होता है. इनके बारे में आगे और बताया जायेगा.

अविरल गौड़ा: श्रेया के पिता। इनका भी अपना दवाईयों का काम है. शहर के बाहर ३ फैक्टरियां हैं. बहुत आकर्षक व्यक्तित्व. इनकी जोड़ी किसी भी जगह जाती है तो लोग कुछ देर के लिए बस इन दोनों को ही देखते रह जाते है.

विवेक गौड़ा: श्रेया का भाई. ये श्रेया से छोटा है. इसके बारे में आगे बताया जायेगा.
 
अन्य पात्र:

मोनिका:
अजीत की सेक्रेटरी, इसकी सीमित या नगण्य भूमिका है.

निशा: आकार सेक्रेटरी. आयु कोई ४० वर्ष की थी, पर कामुकता में उसकी कोई तुलना नहीं थी.

मेधा: आकाश की सेक्रेटरी. ये अभी अविवाहित है और इतनी अनुभवी नहीं है.

बोरिस, रिकी, मार्टिन और डॉन: ये जैसन के बिज़नेस पार्टनर्स है.

सबीना:

सना:

श्रीमती गुप्ता:


रमोना:

सचिन:

जीवन के गाँव के मित्र:




कँवल
और उसी पत्नी बबिता.

सुशील और उसकी पत्नी निर्मला.

जस्सी (जसवंत) और उसकी पत्नी पूनम.
 
सबीना का परिवार


खान परिवार शहर का एक प्रतिष्ठित परिवार है। इनका कपड़े का बहुत बड़ा बिजनेस है।

सलीम ख़ान (अब्बू): घर के मुखिया व्यवसाई अच्छी कद काठी है, लंड भारी भरकम, मोटा और लम्बा. बहुत रंगीन स्वभाव है.

अमीना खान (अम्मी): ग्रहणी, सलीम की पत्नी। नदीम और सबीना की माँ। अत्यधिक सुन्दर और कामुक स्त्री.

नदीम खान (बेटा): घर का बेटा, चतुर और सबको प्रेम करने वाला. शारीरिक रूप से अपने पिता पर गया है. चुदाई में प्रवीण है.

निगार खान (नदीम की पत्नी): अत्यंत सुंदर, थोड़ी गुदाज और मांसल हैं, पर इनके व्यक्तित्व पर खूब फबता है. गांड चौड़ी और इनकी शरीर की भूख इतनी है किआसानी से नहीं मिटती। जवान लड़कों से चुदवाने में रूचि है.

अर्शी खान : नदीम और निगार की बेटी, घर की लाडली। ये पढ़ाई छोड़ चुकी है। विवाह के लिए लड़का ढूंढा जा रहा है।

आमिर खान : नदीम और निगार की बेटा, घर का सब से छोटा , पर शरीर से अपने पिता पर गया है। वही कद काठी, और वैसा ही लंबा मोटा लन्ड। एमबीए है। पारिवारिक व्यवसाय में लिप्त है। इसे एक विशेष लत है, मूत्र पान की. इस लत को अधिकतर उसकी अम्मी निगार पूरा करती हैं. ।

सबीना खान (बेटी): इसी नगर में अपनी ससुराल में रहती है. इसलिए जब भी इसे अपने पिता और भाई से चुदाने का मन करता है घर पहुंच जाती है।

नासिर खान : सबीना का पति, ये भी सलीम के व्यवसाय में उसका सहयोगी है. उसे अपनी पत्नी का अपने परिवार वालों से चुदवाने में कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि उसे स्वयं भी परिवार की अन्य स्त्रियों को चोदने का आनंद मिलता है.

नूर खान : सबीना और नासिर का बेटा, ये भी एक तगड़े लन्ड का मालिक है।

सना खान: सबीना और नासिर की बेटी. देखने में बिलकुल भोली भाली. पर चुदाई के समय इसका रूप ही भिन्न होता है.

फातिमा: नासिर की बहन. पास के ही नगर में रहती है. इसके तीनों बेटे सबीना के घर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. इसका अपनी भाभी से कोई विशेष प्रेम नहीं है. परन्तु अपने बेटों की पढ़ाई के कारण अब संबंध सामान्य से हो गए हैं.

ज़रीना: नासिर और रेहाना की विधवा अम्मी. ये अपनी बेटी के ही साथ रहती हैं. इनकी भी अपनी बहू सबीना के साथ पटती नहीं है. उन्हें लगता है कि सबीना और उसके परिवार ने उनसे उनके बेटे को छीन लिया है. हालाँकि अमीना बी से उनके संबंध अच्छे हैं.
 
कैसे कैसे परिवार

प्रस्तावना

एक बड़े शहर में एक सुंदर कॉलोनी थी. मात्र ८ घर ही घर थे इस कॉलोनी में. इनके स्वामी अधिकतर या तो व्यवसाई थे या ऊँचे पद पर काम करने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति. पुरुषों की एक मित्र मंडली थी, और महिलाओं की किटी. आठों भवन दो पंक्तियों में थे. एक ओर इन्होने एक जिम, स्पोर्ट्स हाल और स्विमिंग पूल बनवाया था, और दूसरी ओर एक दो मंज़िला भवन जिसमे लगभग ४०० लोगों की पार्टी आराम से हो सकती थी. इसमें ही एक किचॅन था. पहले रेस्तराँ खोलने का प्लान था पर इतने कम लोगों के लिए उसका कोई औचित्य नहीं था. परन्तु किटी पार्टीस और जेंट्स पार्टीस यहीं होती थीं. हालाँकि सब अच्छे दोस्त थे पर एक दूसरे के जीवन में कोई हस्तक्षेप नहीं करता था. ये पार्टीस ही थीं जिनमें कुछ बातें सामने आती थीं. पर कभी भी इस कमरे से बाहर किसी ने इसको दोबारा नहीं बोला.

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६ लोग इन दोनों की प्रबंधन के लिए रखे थे, और एक सेक्यूरिटी एजेन्सी पहरेदारी के लिए.

अब क्योंकि इस कॉलोनी का कोई नाम भी होना चाहिए, तो हम इसे "संभ्रांत नगर" से बुला लेंगे. ये अलग बात है कि पर्दे के पीछे झाँकने पर कुछ और ही मिलेगा.

हम अब हर घर का लेखा जोखा लेंगे और देखेंगे की उन घरों में कब कब क्या क्या खेल खेले जाते हैं.

अध्याय १ पहला घर: अदिति और अजीत बजाज १

इस घर में वैसे तो चार ही लोग रहते हैं, पर कुछ महीनों से अजीत की माँ शालिनी बजाज भी यहीं आ गई थीं. अपने पति के देहांत के बाद तीन साल तो उन्होंने काट लिए, पर अजीत की बहुत ज़िद के कारण उन्होंने अपना घर बेचकर यहीं रहना शुरू कर दिया था. अब लगभग साल भर निकालने के बाद वो अपने निर्णय से बहुत संतुष्ट थीं. न सिर्फ़ अदिति उनका अत्यधिक आदर सम्मान करती थी, बल्कि बच्चों के साथ रहने से उनका अकेलापन भी अब उन्हें सताता नहीं था. अजीत तो दिन में हमेशा बाहर ही रहता था, पर दोनों सास बहू की खूब पटती थी.

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अदिति के बेटी अनन्या और बेटा गौतम भी अपनी दादी का बहुत ध्यान रखते थे. दोनों में बस १.५ साल का अंतर था और कॉलेज में थे. गौतम अनन्या से बड़ा था.

कुछ ही दिन पहले अदिति का एक ऑपरेशन हुआ था जिससे उसको शारीरिक संबंध बनाने की ३ महीने की मनाही थी. अजीत उसे पहले हफ्ते में लगभग तीन से चार दिन चोदता था, पर इस ऑपरेशन ने उस पर अंकुश लगा दिया था. अदिति और गौतम कई बार अपने दोस्तों के घर रुक जाते थे, उनके भी दोस्त ऐसा ही करते थे. सप्ताह में एक दिन तो वो बाहर ही रहते थे. आज भी वो अपने दोस्तों के साथ बाहर थे.

आज शाम को अजीत अपने कार्यालय से घर पहुँचा और मुंह हाथ धोकर अदिति के साथ सोफे पर बैठ गया. अदिति ने उसे उसकी मनपसंद ड्रिंक हाथ में थमाई और एक अपने लिए भी ले ली. तभी किचन से शालिनी भी अपनी ड्रिंक के साथ आ गई. इस प्रकार से एक साथ मदिरा सेवन सामान्य घटना थी. तीनों पूरे दिन में घटित घटनाओं की बातें करने लगे. ड्रिंक्स का एक और राउंड होने के बाद सब खाने के लिए बैठ गये. अजीत को इस सबमें कुछ योजना दिख रही थी. पर वो शांत रहा और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगा. खाने के बाद अदिति ने एक और ड्रिंक की बात की तो अजीत चौंक गया. पर उसने हामी भारी और जाकर सोफे पर बैठ गया. तीनों फिर अपनी ड्रिंक्स की चुस्कियाँ लेने लगे.

"हनी, मेरे ऑपरेशन के समय से अपने बहुत धैर्य रखा है." ये कहते हुए उसने अजीत के हाथ में एक गोली थमा दी. गोली देखते ही अजीत सकपका गया.

"पर तुम्हें तो अभी २ महीने तक कुछ भी नहीं करना है." अजीत ने अदिति की ओर देखकर कहा. वो अपनी माँ को भी कनखियों से देख रहा था क्योंकि ये पति और पत्नी के बीच का संवाद था जिसे अदिति उसकी माँ के सामने ही उदित कर रही थी.

"वो तो है. पर मैं चाहती हूँ कि अब मैं भी तुम्हारी और शालिनी की प्रेम कहानी में भागीदार बन जाऊं."

अजीत का दिमाग़ चक्कर खाने लगा. उसकी पत्नी उसकी माँ को नाम से पुकार रही थी. न सिर्फ़ इतना बल्कि उसे संभवतः उन दोनों के बारे में पता था. अजीत ने अपनी माँ को ओर नज़र डाली तो वो मुस्कुरा रही थी.

"मैं तुम्हें हमेशा कहती हूँ कि मुझे इस घर में बहुत प्यार मिला है." शालिनी उठकर अदिति के पास बैठ गई और उसके होंठ चूम लिए. "अदिति को अपने बारे में मैने ही बताया, पर शायद तुम्हें हम दोनों के बारे में कुछ नहीं पता." शालिनी ने फिर से अदिति को चूमते हुए कहा.

"मैने तुम्हारे लिए एक अविस्मरणीय रात्रि शाम का प्रबंध किया है."

इस बार अजीत का ध्यान अपनी माँ की ओर गया, अभी तक उसने ध्यान नहीं दिया थे पर वो इस समय बहुत सुंदर लग रही थी. वो अपने शरीर का बहुत ध्यान रखती थी और इस आयु में भी लोगों को आकर्षित कर सकती थी. अजीत के दिमाग़ पर छाई धुन्ध छटने लगी और उसे योजना का अनुमान होने लगा. उसने बेध्यानी में अपने हाथ की गोली तो एक सिप के साथ खा लिया.

अब ऐसा नहीं था की अजीत इन तीन हफ्तों में सेक्स से वंचित रहा था. वो हफ्ते दो बार तो अपनी सेक्रेटरी को चोद लेता था. इसका लाइसेन्स उसे अदिति ने ही दिया था. दरअसल दोनों काफ़ी खुले विचारों के थे. जब वो कहीं बाहर जाता तो उसे और अदिति के बाहर जाने पर अदिति को कुछ सीमा तक दूसरों को चोदने की छूट थी. पर वो ऐसा कम ही करते थे. वो सोचता था कि अपनी माँ के साथ संबंधों का अदिति को भी पता नहीं था.

"बेडरूम में चलें?" अदिति ने अचंभित अजीत का हाथ पकडकर उसे उठाया और अपनी सास को साथ आने का इशारा किया.

बिस्तर के पास पहुँचकर अदिति ने उसे जोरदार चुंबन दिया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया.

"माँ जी, आइए." अदिति बोली.

उन दोनों ने मिलकर कुछ ही क्षणों में अजीत को नंगा कर दिया. अजीत का शरीर काफ़ी गठा हुआ था. जो गोली उसने खाई थी उसके असर से उसका लंड भी बुरी तरह से तना हुआ था. अदिति घुटनों के बल बैठ गई और उसने अजीत का लंड अपने मुँह में भर लिया और पूरे ज़ोर शोर से चूसने लगी. अजीत ने कनखियों से देखा तो उसकी माँ अपने कपड़े उतार रही थी और जल्दी ही वो भी नंगी हो गई. उसने अजीत के चेहरे की ओर आकर अजीत के मुँह पर अपनी पसीजी हुई चूत को रख दिया. अजीत उसकी चूत को चूसने लगा. जल्दी ही उसने अपनी जीभ अंदर डाल दी और घुमाने लगा. नीचे अदिति उसके लंड को चूस रही थी और ऊपर वो शालिनी की चूत.

"माँ जी, आपका बेटा तैयार है सवारी के लिए. चढ जाइए."

"और तुम?"

"मुझे ज़्यादा तनाव नहीं लेना है. मैं आपकी जगह ले लेती हूँ."

ये कहते हुए, अदिति ऊपर आ गई और शालिनी ने अजीत का भारी मोटा लंड अपने हाथ में लिया. २ मिनट के लिए चूसा और फिर दोनों ओर पाँव फैलाकर अपनी रसीली चूत को उस पर उतार दिया. अदिति ने थोड़ा संभाल कर अपनी चूत को अजीत के मुँह पर रखा, अजीत की जीभ फिर हरकत में आ गई. पर अदिति के लिए इसमे थोड़ी मुश्किल हो रही थी. सो वो हट गई और एक तरफ बैठकर अपनी चूत को सहलाने लगी. अजीत को देखकर अच्छा नहीं लगा.

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अदिति ने थोड़ा संभाल कर अपनी चूत को अजीत के मुँह पर रखा, अजीत की जीभ फिर हरकत में आ गई. पर अदिति के लिए इसमे थोड़ी मुश्किल हो रही थी. सो वो हट गई और एक तरफ बैठकर अपनी चूत को सहलाने लगी. अजीत को देखकर अच्छा नहीं लगा.

उसने जानने के लिए पूछा, "तो तुम दोनों का क्या रहस्य है."

"हम दिन में एक दूसरे को सुख देते हैं." माँ ने बड़े नपे तुले शब्दों में कहा. अजीत को हँसी आ गई.

"अपने बेटे से यहाँ नंगी होकर अपनी बहू के सामने चुदवा रही हो और बातें ऐसी जैसे कोई सती सावित्री हो. कोई बात नहीं मैं समझ गया."

"अदिति, आओ तुम यहाँ लेट जाओ और माँ को तुम्हें सुख देने दो और मैं उन्हें घोडी बनाकर सुख दूँगा" अजीत ने व्यंग्य से कहा.

अदिति और शालिनी की हँसी छूट गई. पर शालिनी हट गई और उसने अदिति को बिस्तर पर लिटा दिया. खुद घोड़ी बनकर, अदिति की चूत में अपना मुँह घुसा दिया. पीछे से अजीत ने उसकी चूत में लंड पेल दिया.

"ओह, माँ ! तुम्हारी चूत की अब भी कोई तुलना नहीं है ." अजीत ज़ोरदार धक्के लगता हुआ बोला.

शालिनी भी पूरी मस्ती से इस तबाड़तोड़ चुदाई का आनंद ले रही थी. उसका मुँह उसकी बहू के चूत में था और अपनी जीभ पूरी अंदर कर रखी थी. अदिति भी इस समय एक अलग ही लोक में थी. अजीत ने ये दृश्य कभी सपने में भी नहीं सोचा था.उसने अपने धक्कों की गति तेज़ कर दी.

"अओऊउघह" अजीत की आँखों के आगे तारे से नाचने लगे. उसे अपने लंड में एक जबरदस्त फुलाव महसूस हुआ. वो झडने लगा था और उसने अपनी माँ की चूत में अपना रस भर दिया. ये दुनिया का संभवतः सबसे नीच काम था पर वो तीनों अपने वासना में ऐसे रंगे हुए थे कि इस सुख के आगे उन्हें कुछ न दिख रहा था. तभी अदिति और शालिनी का भी पानी छूट गया. शालिनी बेझिझक अपनी बहू का स्वादिष्ट रस पी गई. अदिति भी इस समय निढाल सी हो गई.

"अपने पति और मेरे रस का एक साथ स्वाद लोगी?" शालिनी ने अदिति की चूत पर एक चुंबन लेते हुए पूछा.

अदिति की आँखों में एक चमक आ गई.

"क्यों नहीं"

"तुम लेटी रहो, मैं तुम्हारे मुँह में सीधे परोसती हूँ." ये कहकर उसने अजीत को हटने को कहा और अपने दोनों पाँव अदिति के सिर के पास रखकर अपनी चूत को उसके मुँह से लगा दिया.

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अदिति सडप सडप कर शालिनी की चूत से बहता हुआ रस गटक गई. तीनों एक संतुष्टि का अहसास करते हुए एक दूसरे से लिपट गए.

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"आई लव यू" तीनों के मुँह से एक साथ निकला.

तीनों हँसते हुए आगे आने वाले नये रोमांच के बारे में सोचते हुए सो गये.

कुछ दिनों बाद:

रात के १ बजे अदिति की नींद खुली तो उसने देखा की वो अकेली है. वो बाथरूम गई, और लौट कर बिस्तर पर आकर लुढ़क गई. दोबारा नींद लगने से पहले उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आयी ये सोचकर कि अजीत शायद शालिनी के कमरे में चला गया होगा. माँ बेटे का दिल नहीं भरा होगा और वो उसकी नींद न टूटे इस कारण दूसरे कमरे में चले गए होंगे.

शालिनी के कमरे में वही चल रहा था जैसी अदिति ने कल्पना की थी. अजीत लेटा हुआ था और उसकी माँ उसके ऊपर चढ़कर उसका लंड चूस रही थी. इस समय शालिनी की चूत अजीत के मुंह पर सटी थी जिसे वो बहुत प्यार और जोश से चाट रहा था. शालिनी को अपनी चूत चटवाने और चुसवाने में बहुत आनंद आता था. जब उसके पति जीवित थे तो वो घंटों उसकी चूत में छुपे रहते थे. उसके इसी प्रेम के कारण शालिनी अब मौखिक सहवास की इतनी आदी हो गई थी कि उसका दिन बिना इस क्रीड़ा के निकलता ही नहीं था. जब अजीत लगभग २० वर्ष का था तो एक बार शालिनी ने उसे कमरे में झांककर अपने पिता के इस कार्य में रत देख लिया था. शालिनी ने तब ये निश्चय किया था कि वो अजीत को वो सब गुर सिखाएगी जिससे वो किसी भी स्त्री को हर प्रकार से संतुष्ट कर सके.

और एक दिन जब उसके पति टूर पर बाहर थे उसने अवसर देखकर अजीत को ये प्रशिक्षण देने का प्रण किया था.

और उस रात शालिनी ने अजीत को रात भर चूत चाटने का प्रशिक्षण दिया. पर उसने अजीत के लंड को छुआ तक नहीं. अगले दिन अजीत की हालत ख़राब थी, एक तो रात भर का परिश्रम और उस पर उसे कोई झड़ने का समय जो नहीं मिला. उसने एक दो बार मुठ मारी और खाना खाने के बाद सो गया. रात में फिर शालिनी के उसे अपने कमरे में बुला लिया और इस बार माँ बेटे ने एक दूसरे की चूत और लंड चाटे और चूसे. और तीसरी रात में शालिनी ने उसे अपनी चूत में प्रवेश दिया. जवान लड़का रात में ५ बार अपनी माँ को चोदकर सोया था. अगले दिन ही शालिनी के पिता वापिस आने वाले थे और इस रात शालिनी ने उसे गांड चाटना सिखाया और अंततः प्रशिक्षण की अंतिम सीढ़ी पार कराते हुए उसके लंड को अपनी गांड की यात्रा भी करा दी.

अपने पति के आने के बाद अब अजीत और शालिनी जब समय मिलता तब इस नैसर्गिक सुख में लिप्त हो जाते थे. ४ साल बाद अजीत का विवाह अदिति से हो गया और इस सम्बन्ध पर विराम लग गया. अजीत अब कभी कभार ही अकेला आ पाता था. लगभग २० साल इसी तरह निकल गए और शालिनी के पति का स्वर्गवास हो गया. शालिनी अब इस अकेलेपन में बहुत दुखी रहने लगी थी. अजीत और अदिति से जब बात होती तो वो उसके इस दर्द को समझ लेते थे. एक दिन अदिति गयी और जिद करके शालिनी को अपने साथ ले आई। २ महीने निकलने के बाद अंततः शालिनी ने यहीं रहने का निर्णय लिया. इस दो महीनों में माँ बेटे के सम्बन्ध दोबारा स्थापित हो चुके थे. अजीत ने शालिनी का घर बेचकर उसके खाते में जमा कर दिए. अब शालिनी के पास धन और परिवार दोनों थे. उसका मन और तन दोनों खिल गए. चढ़ता हुआ बुढ़ापा जैसे लौटने लगा था.

इसी बीच शालिनी ने राधा को अपना हमराज बनाया और राधा से सुबह सुबह अपनी चूत और गांड चटवा कर संतुष्ट हो जाती. पर इसकी भनक अदिति को लग गई क्योंकि जब एक दिन राधा शालिनी के कमरे से बाहर निकली तो अदिति ने उसे किसी काम के लिए बुलाया. उसके मुंह और उँगलियों से चूत की सुगंध आते ही वो सब समझ गई. अदिति ने अपनी सास के पास जाकर उनसे पूछा तो शालिनी घबरा गई, की वो अब कहाँ जाएगी.

"माँ जी, आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है. पर क्या आप चूत केवल अपनी ही चटवाती हो या दूसरे की भी चाटती हो."

शालिनी ने माना की उसने अभी तक कभी चूत चाटी नहीं है.

"ठीक है, माँ जी. वो अब मैं आपको सिखाऊंगी." कहकर अदिति ने अपने कपडे उतारे और पांव फैलाकर शालिनी को बुलाकर काम पर लगने को कहा.

"माँ जी आप जैसे चटवाती हो, बस वैसे ही करो."

उस दिन से शालिनी के जीवन में और बहार आ गई. सुबह राधा, दोपहर अदिति, और अवसर के अनुरूप अजीत उसके शरीर की प्यास बुझाने लगे. जब अदिति का ऑपरेशन हुआ तो शालिनी ने अजीत को आराम देने के लिए अपना शरीर प्रस्तुत कर दिया. इसमें अदिति की सहमति थी हालाँकि अजीत को इसका ज्ञान नहीं था. वो हफ्ते में २ बार अपनी सेक्रेटरी को चोद लेता था, पर अपनी माँ को वो कभी भी मना नहीं कर पाया.

यही वो समय है जहाँ हम इस परिवार से मिले थे.

घर के सर्वेंट क्वार्टर में इस समय राधा अपने पति गोकुल का लंड चूस रही थी. गोकुल बिस्तर पर लेटा हुआ था और राधा के मुंह का आनंद ले रहा था.

गोकुल ने राधा से पूछा, "बड़ी मालकिन ने क्यों बुलाया था आज तुझे?"

"जिस काम के लिए हमेशा बुलाती है."

ये सुनते ही गोकुल के लंड में तनाव और बढ़ गया.

"पर बुलाती क्यों हैं तुझे ? और वहां से लौटकर तू मुझसे चुदने के लिए बहुत अधीर रहती है."

राधा ने अपना दायाँ हाथ बढ़ाया और गोकुल की नाक से लगाया. गोकुल ने बिना कुछ जाने एक गहरी साँस ली तो उसकी नाक में चूत की खुशबू भर गयी."

"तू अपनी चूत मुझे क्यों सुंघा रही है?"

"इतने साल में तुझे क्या मेरी चूत की खुशबू भी नहीं पता?"

गोकुल ने फिर सूंघा तो ये गंध राधा की चूत से अलग थी.

"तू बड़ी मालकिन की चूत चोद कर आयी है क्या."

"हाँ, मेरे राजा. बेचारी इस उम्र में भी बहुत प्यासी है. सुबह इसीलिए बुलाती है जिससे उसे एक दो बार झड़ा देती हूँ तो उनका दिन अच्छा निकलता है. पर उनकी चूत चूसने में मजा बहुत आता है."

"तुझे तो लंड हो या चूत कुछ भी चुसवा लो, मजा ही आता है."

"सच कहा, पर आज का उनका स्वाद अलग था."

"कैसे?"

"उसमे मर्द के पानी का भी स्वाद था. लगता है रात में चुदवाई है किसी से."

"पर घर में तो कोई दूसरा आदमी आया नहीं. फिर?"

"घर वाला ही कोई रहा होगा." राधा अर्थपूर्ण ढंग में बोली.

"घर वाला ?" अचानक गोकुल के पसीने छूट गए. "सुन ये किसी से कहना नहीं. हमारी नौकरी खतरे में आ जाएगी."

"मुझे पता है. अब तेरा लंड तैयार है. पेल दे मेरी चूत में."

ये कहकर राधा पांव फैलाकर लेट गयी और गोकुल उसे चोदने में व्यस्त हो गया.

************

शालिनी, अदिति और अजीत इस बात से अनिभिज्ञ थे की कल रात का खेल गौतम ने देख लिया था. रात में जब बीच में उसकी नींद खुली तो उसने पाया कि उसके कमरे में पीने का पानी नहीं है. जब उसने किचन में जाने के लिए कमरे का दरवाजा खोला ही था कि उसने पापा और दादी को दादी के कमरे में घुसते हुए देखा. पर सबसे बड़े अचरज की बात ये थी कि दोनों ने अपने कपडे पहने नहीं थे बल्कि हाथ में लिए हुए थे. अपनी दादी की मटकती गांड देखकर गौतम के लंड में तनाव आ गया. वो पानी के लिए किचन में गया और एक बोतल भर कर ले आया.

पूरे समय उसके दिमाग में यही घूम रहा था कि चक्कर क्या है. उसे कुछ बातें तो समझ आ रही थी.

१. पापा और दादी के सम्बन्ध उतने पवित्र नहीं जैसे दिखते हैं.

२. उसकी माँ को या तो पता है या वो भी इसमें शामिल हैं.

और उसने इस संदेह को दूर करने का निश्चय किया. और संभवतः अपने लिए एक या दो नई चूतों की उपलब्धि. यही सोचकर उसने अगले दो तीन दिन घर में ही रहने का निश्चय किया और अपनी दादी की दिनचर्या को समझा. दूसरे दिन उसने चूतों की संभावित सूची में राधा का नाम भी जोड़ दिया. उसने ये समझा कि राधा के जाने के लगभग आधे घंटे बाद दादी किचन में जाती है और दो घंटे वहीँ रहती हैं उसकी मम्मी के साथ. फिर यही क्रम शाम पांच बजे दोहराया जाता है, पर इस समय दादी ३ घंटे से अधिक अपने कमरे से बाहर रहती है. गौतम ने दादी के कमरे में गुप्त कैमरे लगाने का निश्चय किया.

उसने अगले दो दिन दोपहर को दादी के कमरे में जाकर उनसे बातें कीं और ये ताड़ने का प्रयास किया कि कैमरे कहाँ सही बैठेंगे. अंत में उसने तीन कैमरे का स्थान सुनिश्चित किया। अब बारी थी कैमरे खरीदने और फिर लगाने की. HD कैमरे जो केवल बैटरी से चलते हैं और साउंड भी रिकॉर्ड करते हैं, इस के लिए सबसे उपयुक्त थे. मंहगे होने के बाद भी गौतम ने उन्हें ख़रीदा और समझा कि किस प्रकार लगाया और प्रयोग किया जाता है. इसके लिए उसने तीन दिन अपने कमरे में इसका अभ्यास किया. जब उसने ये जान लिया की वो तीनों कैमरे २ घंटे के अंदर लगा सकता है, तब उसने अगले दिन शाम को (जब तीन घंटे कमरा खाली रहता है) कैमरे लगाने का निश्चय किया.

अगले दिन उसने सफलता पूर्वक कैमरे लगा दिए और अपने कमरे में चेक भी कर लिया. अब वो तैयार था.

************

अगले दिन गौतम अपने काम से दो दिन के लिए बाहर चला गया. और लौटने के बाद उसका ध्यान अपने कमरे में रिकॉर्डर पर ही था जहाँ दो दिन के उसकी दादी के कमरे के वीडियो रिकॉर्ड हुए पड़े थे. रात को खाना होने के बाद उसने सबसे कहा कि वो सोने जा रहा है. अपने कमरे में जाकर उसने रिकॉर्डर को टीवी से लगाया और ब्लू टूथ एयरफ़ोन अपने कानों में लगाकर पहले कमरे के वीडियो को चालू कर दिया. वीडियो पहले दिन रात का था.

************

क्रमशः
 
अध्याय २ दूसरा घर: सुनीति और आशीष राणा १

कमरा प्रकाश में नहाया हुआ था. एक सीट के सोफे पर लगभग ४५ साल का पुरुष बैठा हुआ था. उसके हाथ में एक महँगी व्हिस्की का पेग था और वो उसकी चुस्कियां ले रहा था और वो इस समय वो नंगा था. पर कमरे में वो अकेला नहीं था, चार लोग और थे. और वो सब भी इस समय नंगे ही थे. सामने एक तीन सीट के सोफे पर एक अत्यंत सुन्दर महिला जो उस पुरुष की ही आयु की थी. वो भी अपनी व्हिस्की की चुस्कियां ले रही थी. वो पांव फैलाकर बैठी थी. उसकी बगल में एक जवान लड़का उसके सुडौल स्तनों से खेल रहा था. कभी वो उन्हें दबाता और कभी झुक कर उन्हें प्यार से चूसता। उसके बगल में दो पेग रखे थे. एक से वो बीच बीच में गहरे घूँट ले लेता था और फिर अपने मुख्य काम में लग जाता.

उस स्त्री के पांवों के बीच में एक और जवान लड़का अपना चेहरा घुसाए हुए था और उसकी चूत को चाट और चूस रहा था. रह रह कर वो अपना हाथ बढ़ाता, जिसमें पहला लड़का उसे उसकी ड्रिंक दे देता, जिसे पीने के बाद वो अपने काम में लग जाता. सामने बैठा हुआ पुरुष भी इस समय खाली नहीं था. उसके मोटा लम्बा लंड एक जवान लड़की के मुंह में था, जिसे वो पूरी श्रद्धा से निगल निगल कर चूस रही थी. आदमी ने अपना हाथ उसके बालों पर रखा हुआ था और उसे बड़े प्यार से सहला रहा था.

"तू खुश तो है न अपने घर में?" आदमी ने पूछा.

"हाँ मौसाजी, मेरा बहुत ख्याल रखते हैं सब लोग. सूरज तो मुझ पर जान छिड़कते. मौसी के मेरे सास से बात करने के बाद तो वो पूरी तरह ही बदल गई है."

महिला बोली, “तुझे कितनी बार समझाया है, अपने पति का नाम मत लिया कर.”

“जी मौसी.”

आदमी मुस्कुराया. "बहुत ख़ुशी की बात है कि तू खुश है. सूरज की नौकरी ठीक चल रही है?"

"हाँ, आपके दोस्त की कंपनी में अब सुपरवाइसर हो गए हैं. पर उसे दो दिन रात में अभी भी जाना पड़ता है."

"जानता हूँ. नहीं तो तुझे यहाँ कैसे आने मिलेगा ? हटवा दूँ उसकी नाईट शिफ्ट?"

"अब आपने सोचा होगा तो ठीक ही होगा." लड़की ने चतुराई से उत्तर दिया.

सामने बैठी स्त्री खिलखिला पड़ी. "तुम इससे नहीं जीत सकते, आशीष. ये बहुत प्रखर बुद्धि की है. है न भाग्या ?"

"मौसी जी. आपसे क्या इतना भी नहीं सीखूंगी?" भाग्या ने इठला कर कहा.

इस बार हंसने की बारी आशीष की थी. सुनीति ने मुस्कुराकर मुंह बिचकाया.

"लड़की वाकई बहुत चतुर है."

"सो तो है", सोफे पर सुनीति के साथ बैठा हुआ लड़का बोला, "हफ्ते में दो दिन यहाँ पापा से चुदवाने आती है और पति को भनक भी नहीं. कभी हमें भी कभी भोग लगाने दे न." असीम शिकायत भरे लहजे में बोला.

"हाँ दीदी, तुम तो हमारी ओर देखती भी नहीं. कभी हमें भी चखने दो तुम्हारी मलाई." कुमार अपने चेहरे को सुनीति की चूत से हटाता हुआ बोला।

सच यही था, भाग्या आशीष, बिरजू और सूरज के सिवाय किसी को भी अपने शरीर से खेलने नहीं देती थी.

"भैया, आप दोनों तो जानते हो की मैं आपका कितना सम्मान करती हूँ. आपके बारे में तो मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती."

"अच्छा, पापा. कुछ समझे? ये आपका सम्मान नहीं करती."

"अब फंसी!" सुनीति खिलखिला पड़ी. "क्यों भाग्या, क्या कहती है?"

"मौसी, मैं तो इनसे प्यार करती हूँ. अगर ये आपके न होते तो मैं सूरज को कभी न ब्याहती।"

"तभी तो तेरी शादी कर दी कि कहीं तू ही मेरी सौत न बन जाये." सुनीति ने चुहल करते हुए कहा.

"मौसी, ऐसा कभी सोचना भी मत. अब मुझे इस लंड का स्वाद लेने दो "

"असीम, मेरे लिए एक और ड्रिंक बना दे." आशीष ने आज्ञा दी.

"और कोई भी?"

"सबके लिए बना दे."

असीम उठा और सबके लिए नए ड्रिंक्स बनाने लगा. सुनीति ने अपने पांव जोड़े और बोली, "कुमार बेटा ऊपर आ, मुझे तेरा लंड चूसने दे, असीम भी मेरी चूत पीना चाहता है."

"ठीक है, मॉम." कहते हुए कुमार सोफे पर आ गया.

इस समय उसका लंड पूरी तरह से तना हुआ था. वो सुनीति के मम्मों से खेलने लगा. तब तक असीम ड्रिंक्स बना लाया और सबको बाँट दीं। भाग्या ने बस सादा ठंडा पानी ही लिया. असीम अपनी ड्रिंक सिप करता हुआ सुनीति के पांवों के बीच बैठ गया. उसने सुनीति की चूत की पंखुडिओं को फैलाया और अपनी जीभ से उसे कुरेदने लगा. सुनीति की आह निकल गई. उसने अपनी ड्रिंक का एक लम्बा घूँट भरा और ग्लास एक कोने में रखकर कुमार के लौड़े को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी.

"ओह, माँ, तुम से अच्छा लंड चूसने वाला अभी तक नहीं मिला."

"अच्छा जी, कितनों को आजमा चुके हो?"

"गिनना मुश्किल है." कुमार ने गर्व से कहा.

"ये सच कह रहा है, असीम?"

"हाँ माँ, आंटियों का काफी अनुभव है इसे, कहता है कि उन्हें जितना अच्छा लंड पीना आता है वो हमारी उम्र की लड़कियों को तो बिलकुल नहीं आता। "

"मैं इसका समर्थन नहीं करता. भाग्या बेहतरीन लंड चूसती है." आशीष बोला.

"आप तो न ही बोलें पापा तो ठीक है. आपने भाग्या पर एकाधिकार बनाया हुआ है. आप ही सिफारिश करो न दीदी से हमारी."

इन सब बातों से दूर सुनीति कुमार के लौड़े सड़प सड़प के चूस रही थी. उससे अब रुका नहीं जा रहा था.

"चलो इस खेल को बिस्तर पर ले चलते हैं." तीनों ने अपनी ड्रिंक एक ही साँस में ख़त्म की और बिस्तर की ओर बढ़ गए.

कुमार जाकर बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया, और सुनीति ने उसका लंड दोबारा मुंह में ले लिया. असीम ने पीछे जाकर उसकी चूत की फांकें खोलीं और फिर से जीभ से चोदने लगा. फिर उसने सुनीति के दोनों नितम्बों को फैलाया और उसकी गांड में अपनी जीभ घुसा दी. हलके हलके वो दो उंगलियां चूत में डालकर आगे पीछे करने लगा और गांड को जीभ से चाट चाट कर गीला कर दिया.

उधर आशीष ने भी भाग्या को उठाया और उसे एक गहरा चुम्बन देकर हाथ पकड़कर बिस्तर के दूसरी ओर ले आया. उसने भाग्या को बिस्तर पर लेटाया और उसकी चूत भूखे भेड़िये की तरह चाटने लगा. भाग्या की सिसकारियों से कमरा भर गया. सुनीति ने असीम को हटने का इशारा किया और घुटनों के बल उठकर कुमार के लंड को अपनी चूत से लगाया और एक थाप में अंदर ले लिया.

"ओह माँ" कुमार और सुनीति दोनों के मुंह से एक साथ निकला.

सुनीति झुकी और कुमार के होठों को चूसने लगी. कुमार ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि उसकी माँ का मुंह कुछ पल पहले ही उसका लंड चूस रहा था. धीरे धीरे सुनीति ने अपने कूल्हे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिए. असीम अपने लंड को हलके से सहलाते हुए बिस्तर पर चढ़ा और सुनीति के सामने खड़ा हो गया. सुनीति ने बिना झिझक उसके लंड को अपने मुंह में लिया और गले तक ले जाकर चूसने लगी.

"सच में माँ, आपके जैसे लंड कोई नहीं चूसता, बिलकुल वैक्यूम क्लीनर की तरह."

सुनीति के मुंह से सिर्फ गौं गौं की आवाज़ ही निकली. उसके नीचे से कुमार उसे बड़े प्यार से चोद रहा था.

"मौसा जी, अब प्लीज़ मुझे चोदो, मेरी प्यास बुझा दो." भाग्या ने अनुरोध किया.

आशीष ने एक तकिया भाग्या की गांड के नीचे रखा और बहुत प्यार से अपने लंड को उसकी चूत की गहराइयों में उतार दिया. फिर उसने झुककर उसके एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. नीचे उसने अपने लंड का प्रहार जारी रखा. भाग्या उत्तेजना से कांपने लगी. ऐसा लगा जैसे वो झड़ रही हो. आशीष ने उसके मम्मों को हाथ में भरा और बड़े प्यार से मसलने लगा.

सुनीति ने अब अपनी गति तेज कर दी थी. असीम के लंड पर उसकी पकड़ कमजोर हो रही थी. वो वासना के उन्माद में थरथरा उठी और कांपने लगी. वो झड़ने लगी थी.

"क्यों माँ, मजा आ रहा है.?" नीचे से कुमार धक्के लगता हुआ बोला।

"अब दूसरा चरण शुरू करें, दोनों एक बार झड़ चुकी हैं." आशीष ने कहा.

सब जानते थे इसका क्या अर्थ है. पर उत्तर सिर्फ भाग्या और सुनीति को ही देना था. ये उनकी ही इच्छा होने पर आगे जाने वाले थे.

"हाँ", सुनीति ने हामी भरी.

"भाग्या ?"

"मैंने कभी मौसी की बात टाली है?"

इतना सुनके तीनो मर्दों के चेहरे पर एक वहशी मुस्कान आ गई.

कुमार ने नीचे से धक्के तेज करते हुए पूछा, "क्यों मॉम, क्या मन है?"

"आज दोनों को एक साथ लेना चाहती हूँ चूत में. बहुत दिन हो गए तुम लोगों ने मुझे वैसे नहीं चोदा। "

"ठीक है मॉम. आपकी आज्ञा सर आँखों पर." कहते हुए असीम नीचे आ गया. "मॉम इस आसन में सही नहीं होता है. बार बार लंड निकल जाता है. ऐसा करो पलट जाओ."

सुनीति ऊपर उठकर पलट जाती है. कुमार का लंड अभी भी चूत में ही था, पर अब उसकी पीठ कुमार की ओर थी और लंड से भरी चूत सामने. असीम सही अवस्था में आता है. वो सुनीति की छाती पर हाथ रखकर उसे थोड़ा नीचे झुकाता है. कुमार अपनी माँ को अपने हाथों से थाम लेता है, और अपना लंड थोड़ा बाहर निकालता है. असीम अपने लंड को सुनीति के चूत पर कुमार के लंड के समकक्ष लगाता है. सुनीति दोनों एक मुट्ठी में लेकर एक साथ अपनी चूत के मुंह पर रखती है. असीम कुमार को उंगली से इशारा करता है…

एक..,

दो..

तीन..

और दोनों भाई एक संयोजित तरीके से एक ही धक्के में अपने लौडों को सुनीति की चूत में उतार देते है. सुनीति दर्द और आनंद से चीख उठती है.

"आ जा भाई, कर जुगलबंदी." ये दोनों का एक दूसरे को संकेत था.

बस फिर क्या था, ऐसी लय बंधी की देखने वाले अगर कोई होते तो विस्मित रह जाते. दोनों अपने मोटे तगड़े लंड एक साथ बाहर खींचते, थोड़ा ठहरते और फिर एक ही लय में अंदर पेल देते.

दूसरी ओर भी आशीष अब भाग्या को लम्बे और तगड़े धक्के लगा रहा था. कोई सोच नहीं सकता था कि ५. ५ फुट की इतनी छोटी लड़की ऐसे डील डौल वाले मर्द के भीषण धक्के इतनी आसानी से झेल रही होगी. बल्कि वो और ज्यादा की मांग कर रही थी.

"हाय मौसाजी, आपसे अच्छा मुझे कोई नहीं चोद सकता, और जोर से मारो, फाड़ दो मेरी चूत। हफ्ते भर मुझे इस लंड के बिना रहना है. और जोर से मारो."

आशीष ने भी अपनी पूरी ताकत लगा दी और भीषण धक्कों से भाग्या को चोदने लगा.

"अरे मेरे लाल, वारी जाऊं तुम पर, मेरी चूत का कीमा बना दोगे तुम. आह , क्या लंड पाए हैं. वाह. और अंदर तक डालो, बहुत मजा आ रहा है. और जोर से. फक मी , फक मी डीपर, फक मी हार्डर."

असीम और कुमार ने अपने गियर बदले और पांचवे गियर में एक साथ अपनी माँ की चूत एक साथ चोदने लगे. दोनों औरतों की वासना भरी चीखें और सिसकारियां माहौल को बेहद रंगीन बना दे रही थी.

"मौसा जी, मैं गई! मौसा जी ईईई ईईई ईईई ईईई !" चीखते हुए भाग्या थरथरा कर झड़ गई और एकदम से ढीली पड़ गई.

आशीष भी अब रुक नहीं पाया. "मैं भी गया." उसका शरीर अकड़ गया और उसने अपना पूरा लंड भाग्या की चूत में जड़ तक गाढ़ दिया. उसका पानी भाग्या की चूत को लबालब भर रहा था. वो निढाल सा होकर भाग्या के ऊपर लेट गया. फिर हलके से एक करवट ली और उसके बगल में लेट गया. दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.

वहां सुनीति भी अब झड़ रही थी. पर वो दो दो मुश्टंडों के बीच थी और वो शिथिल हो कर अपनी छाती कुमार के ऊपर लगाकर वासना और संतुष्टि से गहरी साँसे ले रही थी. पर उसके बेटे अभी तक उसे पेल रहे थे.

"टॉप गियर." असीम ने कहा.

ये सुनकर दोनों ने अपनी लय बदल दी. अब कुमार अंदर पेलता तो असीम बाहर निकालता. और जब असीम अंदर डालता तो कुमार बाहर निकालता. सुनीति की चूत के ऊपरी और निचले हिस्से अब अलग अलग घर्षण महसूस कर रहे थे. सुनीति से अब रहा नहीं गया वो सिसकते हुए फिर से झड़ने लगी. बगल से आशीष और भाग्या ये खेल देखकर स्तंभित थे.

"तरस खाओ अपनी माँ पर हरामखोरों. क्या मार ही दोगे ?" आशीष ने अपनी पत्नी की हालत देखकर बोला।

"अरे पापा, आप टेंशन मत लो. माँ को ऐसे ही मजा आता है. इन्हें कुछ नहीं होगा."

कहते हुए असीम और कुमार ने अपनी रफ़्तार भयंकर रूप से बढ़ा दी. दस मिनट की दुर्दांत चुदाई के पश्चात असीम और कुमार भी अपने लक्ष्य के निकट पहुंच गए थे.

"कहाँ निकालें माँ?"

"मेरे मुंह में और मेरे चेहरे पर. अंदर नहीं."

"ओके मॉम."

कहकर असीम ने धीरे से अपना रस से ओतप्रोत लंड बाहर निकल लिया. सुनीति ने धीरे से अपने आपको कुमार के लंड पर से उठाया. उसकी चूत इस समय ऐसे खुली हुई थी जैसे की बच्चा निकला हो. वो बिस्तर से उठकर घुटनों के बल बैठ गई. कुमार भी उठा और असीम के साथ खड़ा हो गया. सुनीति ने दोनों लंडों को एक बार अपने मुंह में लेकर चूसा और अपने हाथों में लेकर उनकी मुठ मारने लगी.

कुछ ही देर में असीम कराहा, "मैं आया."

"मैं भी" कुमार बोला।

सुनीति ने अपना मुंह खोल दिया. दोनों भाइयों के लौडों ने पिचकारियां छोड़ना शुरू किया. जितना सुनीत पी पाई, पी गई बाकी का रस उसके चेहरे पर बिखर गया. उसने इस पानी को अपने चेहरे और स्तनों पर मल दिया.

"देख और सीख की अपनी सुंदरता कैसे बनाये रखते हैं अपनी मौसी से." आशीष ने भाग्या को सलाह दी. भाग्या ऐसे शरमाई मानो बड़ी पतिव्रता हो.

"एक बड़ा पेग बनाकर ला कुमार. मजा आ गया आज तो. है न जान." सुनीति ने कुमार को आज्ञा देकर आशीष से पूछा.

"तुम्हें कब मजा नहीं आता ? चलो अब अपनी ड्रिंक्स लेते हैं. सोने का भी समय हो रहा है." आशीष ने कहा.

कुमार से सबको ड्रिंक्स और भाग्या को जूस दिया. फिर सब बैठकर बातें करते रहे.

"दीदी, मौसा मौसी कुछ नहीं कहते आप जो इतने देर गायब रहती हो घर से?" कुमार से भाग्या से पूछा।

इससे पहले की भाग्या कुछ बोल पाती, आशीष और सुनीति ने एक दूसरे को अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा. फिर सुनीति ने कुमार को एक हल्का चुम्बन दिया.

“वो दोनों भी तुम्हारे दादाजी के साथ अपने खेल में व्यस्त हैं.”

भाग्या ने कुछ सोचते हुए कहा, “माँ की माँ चोद देंगे दोनों मिलकर आज रात में.”

इस बात पर सब हंस पड़े और अपने पेग पीने लगे.

आशीष के पिता जीवन के कमरे में भाग्या का वचन सत्य सिद्ध हो रहा था. उसकी माँ सलोनी इस समय न चीख ही पा रही थी न ही कराह. अपितु उसके मुंह से जो ध्वनि निकल रही थी उसे किसी भी श्रेणी में रखना लगभग असम्भव था. कुछ मायनों में उन्हें आनंद की किलकारियां भी कहा जा सकता था. उसका पति बिरजू उसकी गांड मार रहा था और उसके धक्कों में शक्ति की कमी न थी. करता भी कैसे उसकी तुलना इस समय जीवन से जो हो रही थी. जीवन आज भी कसरती शरीर रखते थे और उनके लंड का आकार और शक्ति पूर्ण रूप से अद्भुत थे. इस समय वो सलोनी की चूत में अपने लंड को डाले विश्राम कर रहे थे.

सलोनी उन पर चढ़ी हुई थी और बिरजू ही सारा व्यायाम कर रहा था. उसके धक्कों के कारण सलोनी स्वयं ही जीवन के विशाल लौड़े पर ऊपर नीचे हो रही थी.

“बाबूजी, आप भी चोदो न! पूरा आनंद नहीं आ रहा है.”

जीवन ने बिना कुछ बोले अपने लंड को एक जोरदार झटके से सलोनी की चूत में पेल दिया. सलोनी के मुंह से इस बार जो निकली थी वो अवश्य ही चीख थी.

“कितना समझाया है तुझे, बाबूजी को मत छेड़ा कर.” बिरजू ने बिना रुके सलोनी को झिड़का.

“छेड़ती नहीं हूँ तो बाबूजी अच्छे से नहीं चोदते, उई माँ, मरी!” सलोनी ने आनंद से कराह ली.

बिरजू और जीवन हंसने लगे और ताबड़तोड़ धक्के मारने लगे. सलोनी को कस कर पीस रहे थे और सलोनी भी कम न थी वो भी इस चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी. लम्बे समय तक चुदाई के बाद जीवन और बिरजू ने अपना पानी सलोनी के दोनों छेदों में छोड़ दिया. बिरजू हाँफते हुए जाकर सोफे पर बैठ गया. सलोनी जीवन के चौड़े सीने पर सिर रखकर हाँफते हुए ढह गई. कुछ समय यूँ लेते रहने के बाद वो हटी और जीवन का लंड उसकी चूत से बाहर निकल गया और ढेर सारा रस भी. उसकी गांड से भी रस बह रहा था.

“जाकर सफाई कर ले बाथरूम में.” जीवन ने सलोनी से कहा और फिर बिरजू से बोला, “लगा एक एक और पेग प्यास बढ़ गयी इसे चोदकर।” जीवन ने कहा.

“सच है बाबूजी,” ये कहते हुए बिरजू तीनों के लिए पेग बनाने लगा.

कुछ देर में ही सलोनी बाहर आ गई और दो गीले तौलियों से जीवन और बिरजू के लंड साफ कर दिए. बिरजू ने उसे उसका ग्लास दिया.

जीवन राणा इस आयु में भी वही रोब रखते थे जो ४० साल पहले था. इनके लम्बे और बलिष्ठ शरीर को जैसे उम्र ने छुआ तक नहीं था. उनकी पत्नी की मृत्यु को अब कोई दस वर्ष हो चुके थे. आज भी उसकी याद में उनकी ऑंखें भर आती थीं. परन्तु जीवन का यही नियम है कि किसी के जाने के बाद भी ये नहीं रुकता. आज भी वो अपने गांव और खेतों से उतना ही प्यार करते थे जितना पहले. साल में दो बार १० दिनों के लिए वो हरियाणा के अपने गाँव अवश्य जाते थे. अपने पुराने मित्रों के साथ मिलने बैठने का आनंद ही कुछ और था. उस गाँव से जुडी उनकी यादें ताजा करके उनके मन को एक शांति मिलती थी.

“बाबूजी, इस बार आप कितने दिनों के लिए गाँव जा रहे हो?” बिरजू ने पूछा.

“देखता हूँ, इस बार अधिक नहीं रुकूँगा। वैसे तुम्हारे घर पर कुछ भेजना है तो बता दो, मैं भिजवा दूँगा।” जीवन ने कहा.

“नहीं बाबूजी. कुछ नहीं. वो सलोनी कर देगी.”

“ठीक है. कल सुबह निकलना है. तो तुम दोनों भी सो जाओ. सलोनी तुमने अपना सामान ले लिया न?”

“जी बाबूजी.”

पेग समाप्त होते ही बिरजू और सलोनी अपने कमरों में चले गए और जीवन भी कुछ देर तक बैठने के बाद सो गए.

क्रमशः

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