Incest मजबूरी या जरूरत - Page 3 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

संजू के दोनों हाथों में गुलाब जामुन मिल चुका था उसकी जवानी सही दिशा में जा रही थी,,, जवानी का पूरा जोश वह‌अपनी मौसी पर उतार रहा था,,,संजू अभी अभी जवान हुआ था इसलिए औरतों को लेकर उसके मन में उत्सुकता बहुत ज्यादा थी और साधना खेली खाई और उम्र के इस दहलीज पर पहुंच कर वह पूरी तरह से प्यासी औरत थी,,,।

ऐसे में संजू को साधना और साधना को संजू मिल गया था दोनों एक दूसरे के पूरक साबित हो रहे थे,,,,।

साधना के घर जाने की हिम्मत संजु ने दिखाया था तो घर पहुंचने के बाद,,, साधना ने जिस तरह की हिम्मत दिखाई थी वह काबिले तारीफ थी,,, अगर साधना अपनी तरफ से सहकार की प्रतिक्रिया ना देते हुए हिम्मत ना दिखाती तो शायद संजु को वहां से निराश ही लौटना पड़ता,,, लेकिन दोनों प्यासे थे दोनों को एक दूसरे की जरूरत थी,,,, और ऐसे में दोनों ने अपनी अपनी प्यास बुझा ली,,,।

जिस समय वह घर लौटता था इधर उधर घूमने के बाद से समय वह अपने घर पर लौट गया किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुआ कि संजू आज साधना के घर गया था,,,,,,वह बड़े आराम से घर पर पहुंच गया था उसे इस बात की संतुष्टि थी कि आज फिर से वह अपनी मौसी की चुदाई कर के आया है,,, औरत के बदन का नशा उसके दिलो-दिमाग पर छाने लगा था,,,,वह अपने कमरे में बैठा हुआ था अपनी मौसी साधना के बारे में ही सोच रहा था कि किस तरह से हिम्मत दिखाते हुए उसकी मौसी सीढ़ियों पर ही चुदवाई,,,, सीढ़ियों पर पीछे से अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड पकड़ कर चोदने में जो मजा आया था उसे वह अभी भी अपनी बदन में महसूस कर पा रहा था,,,,औरत की बुर के अंदर कितनी गर्मी होती है धीरे-धीरे इस बात का एहसास संजु को होने लगा था,,,,,, वह अपने कमरे में बैठा बैठा अपनी मौसी के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसे ख्याल आया मनीषा का,,,क्योंकि जिस समय वह मनीषा के कमरे में दाखिल हुआ था उस समय मनीषा के बदन पर छोटी सी पेंटिं और एक छोटी सी टी शर्ट थी,,,अपनी मौसी की उपस्थिति में वह अपनी मौसी की लड़की के खूबसूरत बदन को ठीक से देख तो नहीं पाया था लेकिन जितना भी देखा था इतने से ही उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी मौसी की लड़की बहुत ही ज्यादा सेक्सी है क्योंकि वह अपने कमरे में केवल छोटी सी पेंटिं टीशर्ट पहन कर पढ़ाई कर रही थी जिससे संजु को उसकी लंबी चिकनी गोरी गोरी मक्खन जैसी मुलायम टांग देखने को मिल गई थी उतने से ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी,,,,,,, यही सब सोचते सोचते हैं उसे नींद आ गई और वह सो गया,,,।

कुछ दिन ऐसे ही बीत गया,,, संजु जब जब अपनी मां को देखा तब तक उसे वही दृश्य नजर आता जो दृश्य उसने अपनी मां के पक्ष में बोलने के लिए उसके कमरे में दाखिल हो गया था और उसकी मां बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी उसको याद करके संजू का लंड बार बार खड़ा हो जाता था,,,, जिसके चलते ना चाहते हुए भी वह अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा था,,,,,,,, और वैसे भी आराधना उस दिन से अपने बेटे से ठीक से नजर नहीं मिला पाती थी जब जब उसका बेटा उसकी आंखों के सामने आ जाता था उसके चेहरे पर शर्म और हया की लाली आ जाती थी,,,, शर्म के मारे उसके गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो जाते थे,,, उसे समझ में नहीं आता था कि वह अपने बेटे से कैसे बात करें,,,,, क्योंकि उस दिन उसके बेटे ने उसे अर्धनग्न अवस्था में देख लिया था और उसकी सारी बातों को सुनता था जिसमें गाली गलौज से लेकर के चुदाई की गंदी बातें भी होती थी,,,, यह जानकर आराधना शर्म से पानी पानी हो जाती थी,,,,। लेकिन इस बात से उसे तसल्ली थी कि उसका बेटा उसके दुख दर्द को समझने लगा था उसकी मदद करने लगा था इसी से वह खुश थी,,,,,,,,,, और दिन-ब-दिन संजू के ख्यालात अपनी मां को लेकर बदलते जा रहे थे उसकी कल्पनाओकी दुनिया की महारानी बन चुकी थी उसकी मां,,, जिसकी खूबसूरती के आगे वह हमेशा घुटने टेक देता था,,,,,,,,,, सबसे ज्यादा उत्तेजना उसे अपनी मां को खाना बनाते हुए देखने पर महसूस होता था ,,,क्योंकि उस समय उसकी मां खड़ी होकर खाना बना रही होती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का उभार ,,, कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ नजर आता था,,,, और रोटी पकाते समय हाथों की हरकत की वजह से उसकी गांड की गोलाई में जिस तरह की थिरकन होती थी,,, उसे देख कर संजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगती थी वह अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाता था,,,, और तुरंत उसे अपनी गर्मी शांत करने के लिए मुठ मारना पड़ता था,,,,।

संजू अपनी मम्मी की साड़ी उठाते हुए

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ऐसे ही एक दिन शाम को,,, आराधना खाना बना रही थी और संजू यह देखने के लिए आज क्या बन रहा है वह रसोई घर में चला गया,,,, और अपनी मां को फिर से खाना बनाते हुए देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को खेलते हुए देखने की लालच में वह अपनी मां के पास नहीं बल्कि उसके पीछे तकरीबन 2 फीट की दूरी पर जाकर खड़ा हो गया और अपनी आंखों को अपनी मां की परी परी गांड पर केंद्रित करते हुए वह बोला,,,,।

आज क्या बना रही हो मम्मी,,,,

(अपने बेटे को अपने बेहद करीब महसूस करके आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी और उसी तरह की हलचल उसे इस समय भी महसूस हो रही थी,,,मां अपने बेटे से ठीक से नजर तक नहीं मिला पाती थी लेकिन अपने बेटे को जवाब देते हुए उसकी तरफ देखे कि नहीं बोली,,,)

संजू पंतय उतरता हुआ

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कुछ खास नहीं बस पूरी सब्जी बना रही थी,,,,।(यह कहकर आराधना खाना बनाने में ही अपना ध्यान केंद्रित करने लगी और इस बात से अनजान कि उसका बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी बड़ी-बड़ी भराव दार गांड को देखकर मस्त हो रहा है,,,संजू को अपनी मां की बात सुनाई दी कि आज पूरी सब्जी बन रही है जो कि उसका पसंदीदा भोजन था लेकिन फिर भी उसका ध्यान पूरी सब्जी पर ना होकर कसी हुई साड़ी में कैद अपनी मां की गदराई गांड पर थी,,,,,,संजू का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर ले और अपने पेंट में बने तंबू को ठीक अपनी मां की गांड पर सटा दे,,,,,,वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था जब से साधना की चुदाई किया था तब से वह औरतों की बड़ी बड़ी गांड का दीवाना हो गया था,,,, और अपनी मां को लेकर ना जाने अब तक कहां तक अपनी कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ा चुका था,,,। अपनी मां की हिलती हुई गांड को देखकर संजू अपना सुध बुध खो चुका था,,,,,, उसका सारा ध्यान सिर्फ अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर केंद्रित हुआ था संजू की तरफ से कोई जवाब ना आता देखकर आराधना उसकी तरफ देखे बिना ही फिर से बोली,,,)

तुझे तो बहुत पसंद है ना,,,,

(अपनी मां की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो ईस तरह से बड़बड़ाते हुए बोला,,,)

आराधना की उत्तेजना बढ़ता हुआ

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हं ,,,हं,, मुझे तो बहुत पसंद है,,, अच्छा होगा कि आज तुम पूरी सब्जी बना दी आज पेट भर कर खाऊंगा,,,।

तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि खाना तुझे मिलता ही नहीं है,,

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मम्मी लेकिन पूरी सब्जी की बात ही कुछ और है और थोड़ी सी खीर भी बना देना तो मजा आ जाए,,,,।

चिंता मत कर मुझे पता है कि तुझे क्या पसंद है इसके बाद खीर बनाने वाली हूं मैं जानती हूं कि तुझे खीर भी बहुत पसंद है,,,।(संजू की तरफ देखे बिना ही आराधना मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे से कई दिन बाद हुआ है इस तरह से बातें कर रही थी और ना जाने क्यों उसे अपने बेटे से बातें करने में उत्तेजना का एहसास हो रहा था,यह, एहसास उसके लिए हैरान कर देने वाला थाक्योंकि उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पत्नी जरा रहने से काम में बैठा हुआ महसूस हो रहा था उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन उसे अंदर से आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, अपनी मां की बातें सुनकर संजू बोला,,)

आराधना छुड़वाते हुए

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थैंक्यू मम्मी तुम्हें मेरी पसंद का कितना ख्याल है,,,,

तेरी पसंद का ख्याल क्यों ना होगा,,,

(अपनी मां की बात सुनकर संजू मन ही मन खुश हो रहा था और अपने मन में यह कह रहा था कि जब तुम्हें मेरी पसंद का इतना ख्याल हो तो यह क्यों नहीं समझ पा रही हो कि मुझे तुम्हारी गांड भी बहुत पसंद है क्यों नहीं परोस देती मुझे अपनी बड़ी बड़ी खूबसूरत गांडमैं आपसे ही यह बात करके संजू की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ गई उसके पेट में अच्छा खासा तंबू सा बन गया जिस पर उसकी मां की नजर पड़ सकती थी,,,,इसलिए वह वहां पर ज्यादा देर ठहर ना नहीं चाहता था लेकिन अपनी गर्मी को शांत करना भी बहुत जरूरी था,,,,वो जल्द से जल्द अपने कमरे में जाकर अपनी गर्मी शांत करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)

आराधना किचन में मस्ती क साथ चुदवाती हुयी

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जल्दी से बनाना मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां की गांड को नजर भर देख कर वह रसोई घर से बाहर निकल जाए और उसे जाता हुआ ना जाने क्यों आराधना को अच्छा नहीं लग रहा था उससे आज बात करने में बहुत अच्छा लग रहा था,,,, संजू के रसोई घर से बाहर जाते ही आराधना से रहा नहीं गया और वह साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को टटोल कर देखने लगी की कितनी गीली हुई है और इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर ढेर सारा पानी छोड़ चुकी थी,,,, इस बात से वह हैरान भी थी और उत्साहित भी,,,।

आरफना को बहोत मजा आ रहा था

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इस समय घर पर केवल संजु और आराधना ही थे,,, मोहिनी के घर आने मे अभी आधा घंटा बचा था इसलिए वह अपने कमरे में जाते ही दरवाजे की कुंडी लगाकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और बिस्तर पर दीवार का सहारा लेकर बैठ गया और अपनी आंखों को बंद करके अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को थोड़ा ना शुरू कर दिया अपने बदन की गर्मी शांत करने का उसके पास यही एक तरीका था,,, अगर मौसी होती तो वह शायद रोज अपनी मौसी की चुदाई करके अपनी गर्मी शांत कर लेता लेकिन यहां उसके पास बुर का जुगाड़ नहीं था इसलिए उसे अपनी गर्मी शांत करने का बस यही एक सहारा था,,,।

वह अपनी आंखों को बंद कर चुका था और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को हवा में तेज लेकर दौड़ रहा था वह कल्पना कर रहा था कि उसकी मां रसोई घर में खाना बना रही है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर वा उत्तेजित हो रहा है और उससे रहा नहीं जा रहा है वह अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर उसे प्यार करने लगता है,,,,कल्पना और उसकी मां भी उसकी हरकत से पूरी तरह से मस्त हुए जा रही है और वह अपनी मां के कदमों को चूमते हुए ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को दबा रहा है,,,,, संजू की कल्पना इतनी जबरदस्त होती थी कि उसे सब कुछ हकीकत सा लगने लगता था,,, वह जोर-जोर से अपने लंड को मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करके मुठिया रहा था,,,,और आंखों को बंद करके अपनी मां के बारे में सोच रहा था उसके चुंबन से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हो गई थी ब्लाउज के ऊपर से ही चूची को दबाते हुए उसकी मां भी गरम सिसकारी ले रही थी,,, धीरे-धीरे करके संजू कल्पना करते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और अपनी मां की नंगी चूची को जोर जोर से दबाने लगा,,, जैसे-जैसे उसकी कल्पना के बरती जा रही थी वैसे वैसे संजू के तन बदन में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,

कल्पना में उसकी मां भी पुरी तरह से उसका साथ दे रही थी,,,वह भी अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे का लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रही थी,,,,।

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कल्पना में संजू और आराधना दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी दोनों पूरी तरह से उतावले हुए जा रहे थे एक दूसरे में समाने के लिए,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी पर की तरफ खाने लगा और कमर तक उठा दिया साड़ी के अंदर उसकी मां बेटी नहीं पहनी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी थी अपनी मां की नंगी गांड देखकर संजू से रहा नहीं गया और दो चार चपत अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर लगा दिया,,,,,संजू की मां भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह भी अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा और ज्यादा खोल दी जिससे संजू को उसकी गुलाबी बुर देखने में आसानी हो,,,।

अपनी मां के बारे में कल्पना करके संजय पूरी तरह से मस्त हो चुका था लंड पर उसका हार बड़ी तेजी से चल रहा था उसका पानी निकलने वाला था,,,, इसलिए संजू कल्पनाओं के घोड़े की रफ्तार और ज्यादा बढ़ाने लगा और तुरंत अपनी पैंट उतार कर नंगा हो गया और अपने लंड को हाथ में लेकर ठीक अपनी मां की गुलाबी छेद पर लगाकर जोरदार झटका लगाया लंड पूरा का पूरा आराधना की बुर में समा गया,,,,कल्पना में आराधना भी अपने बेटे के लैंड का गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हुए आह की आवाज निकाल दी,,,, और संजु अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया कल्पना में वह अभी अपनी मां की बुर में लंड डालकर,,, दो-चार झटके लगाया ही था कि उसका पानी निकल गया,,,,।

जब वह कल्पनाओं की दुनिया से बाहर निकला तो उसका हाथ पूरी तरह से गिला हो चुका था,,,। उसकी सांसें बहुत गहरी चल रही थी,,,। मुठ मारते समय उसे इस बात का एहसास हुआ कि अपनई मौसी की चुदाई करने से ज्यादा मजा उसे अपनी मां के बारे में कल्पना करने में आ रहा था,,,मोहिनी के आने का समय हो गया था इसलिए वह तुरंत खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आकर अपने हाथ पैर धोने लगा,,,,।
 
कुछ दिनों तक आराधना के घर में शांति थी,,, वरना रोज गाली गलौज और झगड़ा होता था जब से संजू ने हस्तक्षेप किया था तब से रमेश गाली गलौज नहीं करता था और इस बात से आराधना भी बहुत खुश थी,,,,,, उसका बेटा बड़ा हो गया था जवान हो गया था अच्छे बुरे की उसमें समझ हो चुकी थी,,,, साधना को कुछ कुछ राहत होने लगी कि उसके बेटे के होते उसे किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,।

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ओर ऐसा चल भी रहा था संजू को लगा था कि उसकी धमकी असर कर गई है क्योंकि उसे रात को वक्त अपनी मम्मी के कमरे से रोने धोने के लिए गाली गलौज की आवाज नहीं आती थी,,, इस तरह की शांति से उसे राहत भी थी लेकिन अधूरापन भी लग रहा था क्योंकि बगल वाले कमरे में हो रही गाली-गलौच और अपनी मां की बातें अपने पापा की गंदी गंदी बातों को सुनकर वह उत्तेजना महसूस करता था,,,, अपने मम्मी पापा की बातें सुनकर वह गंदे गंदे कल्पना किया करता था,,, लेकीन कुछ दिनों से सब कुछ शांत था,,,, संजू को इस बात से राहत भी महसूस हो रही थी,,, कि उसके हस्तक्षेप करने की वजह से घर में शांति कायम है,,,,,,।

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लेकिन एक रात को शायद उसकी धमकी का असर उसके पापा पर कम हो गया और वह रात को फिर शराब पीकर घर पर आए और आराधना को भला बुरा कहने लगे,,,,

संजू बैठ कर पढ़ ही रहा था कि उसके कानों में एक बार फिर से गाली गलौज की आवाज सुनाई देने लगी,,, वह तुरंत उठकर जाना चाहता था लेकिन उसका एक मन उसे रोक दिया संजु वहीं बैठ कर उन दोनों की बातें सुनना चाहता था कि आज क्या बातें होती हैं,,,, वह जानता था कि उसके पापा उसकी मां को गंदी गंदी बातें करेंगे उससे गाली गलौज करेंगे और संजू को उन दोनों की गंदी बातें सुनकर कल्पना करने का मौका मिल जाएगा और वह अपने बारे में भी सुनना चाहता था कि उसके पापा क्या कहते हैं इसलिए वह वहीं रुका रहा,,,।

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क्यों हरामजादी मन भर गया तेरा मुझे मार खिलवा कर अपने ही बेटे से,,,

यह क्या कह रहे हैं आप,,,

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं बेटा नहीं है अब वो तेरा,,, अब तो तेरा यार बन गया है आशिक बन गया है,,,

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तुम्हें कैसी गंदी बातें कर रहे हो अपना बेटा है,,,

बेटा नहीं है,,,, तेरा आशिक है,,,(आराधना के खूबसूरत जिस्म पर नजर दौड़ते हुए) तेरी खूबसूरत बदन का दीवाना हो गया है वो,,,,

आप होश में नहीं है,,, वरना अपने ही बेटे के बारे में इतना गंदा इल्जाम नहीं लगाते,,,

साधना और संजू

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होश में तो मैं पहले नहीं था लेकिन अब होश में आ गया हूं,,, उस दिन कैसे इशारे से उसे कमरे में बुला ली मुझे मारने के लिए,,,, तुम दोनों की ही मिलीभगत थी ना,,, मुझे पीटने की,,,

चुप हो जाइए आप कैसी बातें कर रहे हैं आपका बेटा तो आप को मारने के लिए नहीं बल्कि आप को समझाने के लिए आया था,,,,,,

मैं सब समझता हूं रंडी,,,, उसे अपना दीवाना बना ली है,,, दिखा दी होगी अपनी चूत साड़ी उठाकर,,,।

बाप रे बाप आपको शर्म नहीं आती इस तरह की बातें करते हुए वह मेरा बेटा है,,,।

बेटा है तो क्या हुआ जवान है उसके लंड में ज्यादा ताकत होगी तभी तो तु मुझसे प्यार नहीं करती,,,,

छी,,,, मुझे तो शर्म आ रही है आपको अपना पति कहते हुए,,,।

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सर मैं तो आएगी हरामजादी,,,, जवान आशिक जो तुझे मिल गया है अब मेरा क्या काम,,,, दिन भर में तीन चार बार पानी निकाल देता होगा तेरा,,,,।

(अपने पति की बातें सुनकर आराधना शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी उसका पति नशे में बहुत ही ज्यादा गंदी गंदी बातें कर रहा था और वह भी खुद के ही बेटे के बारे में,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि अपने बेटे के बारे में उसका ही पति गंदी गंदी बातें करेगा और यही बात बगल वाले कमरे में संजू भी सुन रहा था ना जाने क्यों उसे अपने पापा की बातें सुनकर गुस्सा बिल्कुल भी नहीं आ रहा था लेकिन उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,जवानी लंड दिन में तीन चार बार पानी निकाल देना उसकी दीवानी हो जाना यह सब बातें संजू के मन में घर कर जा रही थी,,,, वह बड़ी उत्सुकता से अपने बाप की गंदी बातों को सुन रहा था और उसका बाप इल्जाम पर इल्जाम लगाए जा रहा था,,,, आराधना इस तरह के इल्जाम को सह नहीं पा रही थी और रोने लगी थी,,, उसे रोता हुआ देखकर रमेश बोला,,,)

तेरी चोरी पकड़ी गई है हरामजादी रोने से काम चलने वाला नहीं मैं जानता हूं यह मगरमच्छ के आंसू हैं,,,, मेरी गैर हाजिरी में उसके लंड पर अपनी बड़ी-बड़ी गांड रखकर कुदती है और मेरे सामने सती सावित्री बनने का ढोंग करती है,,,।

(अपने पापा की यह बात सुनकर संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया क्योंकि उसके पापा उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड के बारे में जिक्र कर रहे थे,,, जिसका वह खुद भी दीवाना होता जा रहा था,,,।अपने पापा की बातों को सुनकर उसके पापा जी से बारे में बातें कर रहा था उस बारे में वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना करने लगा था कि अगर वास्तविक में इस तरह का नजारा हो जाए तो कैसा महसूस होगा,,,,वह अपनी आंखों को बंद करके कल्पना करने लगा कि कैसे उसकी मां पूरी तरह से नंगी होकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को उसके मोटे तगड़े लंबे लंड पर रखकर उस पर उठक बैठक कर रही है,,, इस तरह की कल्पना करके वह पुरी तरह से मस्त हो गया,,,। और दीवार से कान लगाकर आगे की बात को सुनने लगा,,,)

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मैं आपके हाथ जोड़ती हूं बंद कीजिए यह सब बकवास,,, मैं सुन नहीं पा रही हूं,,,,।

करने में तो बहुत मजा आता है सुनने में क्यों बुरा लग रहा है,,,।

जैसा आप कह रहे हैं वैसा कुछ भी नहीं है,,, मैं सपने में भी नहीं सोच सकती,,,

सपना नहीं सब कुछ हकीकत ही है,,,।

(आराधना की बातों का रमेश पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ रहा था वह नशे में गलत गलत इल्जाम लगा रहा था और आराधना अपने पति की बातों को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और रो रही थी,,,, बात को खत्म करने के उद्देश्य से आराधना बोली)

आप कपड़े बदल लीजिए मैं खाना लगाती हूं,,,।

खाना नहीं तू अपने कपड़े उतार छीनार आज तेरी चूत की गर्मी मिटाता हूं,,,बहुत गर्मी पड़ रही है ना तुझे इतना अपने ही बेटे के लंड से गर्मी शांत करवा रही हैं,,,, आज तुझे एक दम ठंडी कर दूंगा,,,, उतार ,,,, अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जा,,, हरामजादी,,,,।

नहीं नहीं ऐसा जुल्म मत कीजिए,,,, मैं एकदम थकी हुई हूं,,,

देखा मैं सच कहता हूं ना दिन भर अपने बेटे के लंड से चुदवाई तभी थक गई है,,,, हरामजादी,,,(इतना कहने के साथ ही रमेश ने एक जोरदार थप्पड़ आराधना के गाल पर लगा दिया जिससे उसकी दर्द भरी आह निकल गई,,) देखता हूं आज कैसे नहीं करवाती है मेरे लंड से तुझे मजा नहीं आता ना,,,, लेकिन आज तेरे चूत की गर्मी अपने ही लंड से शांत करूंगा,,,,,(इतना कहने के साथ हीहमें सपना आता के बड़ा कर उसकी साड़ी को पकड़ लिया और एक झटके से खींच कर उसके बदन से उतारने लगा,,, साड़ी उसके कंधे से नीचे उतर कर उसकी कमर तक आए तो जिस तरह से रमेश खींच रहा था वहां गोल गोल घूमने लगी और साड़ी उसकी कमर से उतरने लगी,,, अगले ही पल उसके बदन से साड़ि अलग हो गई थी जिसे रमेश बिस्तर के नीचे फेंक दिया था,,,, अब आराधना के बटन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट रह गया था,,,, आराधना के बस में कुछ भी नहीं था वह रोए जा रही थी,,,, की खूबसूरत गठीला बदन को देख कर रमेश बोला,,,)

यही अपना खूबसूरत बदन दिखाकर तू अपने बेटे को अपना दीवाना बना ली है ना,,, हरामजादी,,,,(और ईतनी कहने के साथ हीरमेश उसे अपनी तरफ पकड़ कर खींच लिया और उसके पर दोनों हाथ रख कर जोर जोर से दबाने लगा,,,,,।

बहुत मजा आता होगा ना तेरे बेटे को तेरी चूचियां दबाने में,,,,(बगल वाले कमरे में बैठा संजू अपने बाप की बात को सुनकर इतना तो समझ गया था कि उसका बाप उसकी मां की चूचियों को दबाना है और उसके बारे में भी गंदा गंदा बोल रहा है,,, रह रहकर उसका मन कर रहा था कि अभी कमरे में कोई चाय और अपने बाप को दो-चार थप्पड़ रसीद कर दे लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था क्योंकि उसके बाप की कही बातें उसके तन बदन में उत्तेजना फैला रही थी,,,)

प्लीज बटन खोल कर ब्लाउज उतारो वरना फट जाएगी,,,।

(अपनी मां की बात को सुनकर संजू समझ गया कि उसके पापा उसकी मां के ब्लाउज को उतार रहे होंगे और वह नहीं चाहती कि उसका ब्लाउज फट जाए,,, आराधना की बात को सुनकर रमेश बोला,,,)

क्यों तेरा बेटा भी बड़े आराम से उतरता है क्या,,,,,,? (आराधना समझ गई थी कि भैंस के आगे बीन बजाने से कुछ नहीं होता उसका पति उसकी है कि नहीं सुनने वाला था इसलिए वह खामोश रहना पसंद की,,, देखते ही देखते ,, रमेश आराधना के ब्लाउज के बटन खोल कर उसे उतार दिया,,,, और ब्रा को आगे के कप के नीचे की पट्टी पकड़ कर ऊपर की तरफ उठा दीया और अग्नीपथ आराधना की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां उछल कर बाहर आ गई,,,,आराधना को इस बात का अहसास नहीं था कि रमेश इतनी जल्दबाजी दिखाते का इसलिए वह ब्रा ना पड़ जाए इसलिए खुद ही अपनी ब्रा को उतार कर नीचे रख दी क्योंकि पैसे बचाकर वह महंगी ब्रा को खरीदी थी और वह नहीं चाहती थी उसकी ब्रा फट जाए,,,, रमेश आराधना की दोनों चुचियों को हाथ में लेकर जोर से दबाते हुए बोला,,,।

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अपने बेटे को भी अपनी चूची पिलाती है ना तभी तो तेरी हर एक बात मानता है,,,, शादी दूसरों को मजा देती है और मुझे इंकार करती है,,,(इतना कहने के साथ ही एक झापड़ और उसके घर पर मार दिया एक बार फिर से उसके मुंह से आह निकल गई और वह रोने लगी संजू से रहा नहीं जा रहा था वह बीच-बचाव करना चाहता था लेकिन उसका दूसरा मनुष्य रोक रहा था वह बगल वाले कमरे में जाकर अपने बाप को सबक सिखाना चाहता था लेकिन उसका दूसरा मन चाहता था कि वह तब जाए जब उसकी मां पूरी तरह से नंगी हो जाए ऐसे में उसे अपनी मां को नंगी देखने का सुख प्राप्त होगा, इसलिए वह रुका रह गया था,,,, रमेश नशे में बहसीपन दिखाते हुए गाल पर थप्पड़ मारते हुए अपनी बीवी के कपड़े उतारकर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,, उसे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया था,,,,,,

क्रमशः
 
आराधना का पति आराधना के साथ मनमानी कर रहा था वह पूरी तरह नशे में धुत था कुछ दिन तक शांति बनाए रखने के बाद वह फिर से अपनी औकात पर उतर आया था,,, बगल वाले कमरे में बैठा संजू सब कुछ समझ रहा था कि उसकी मां के कमरे में उसके साथ क्या हो रहा है,,, वह चाहता तो उसी समय कमरे में दाखिल होकर वह अपने बाप को अपनी मनमानी करने से रोक सकता था लेकिन संजू के मन में उठ रही औरत की दैहिक सौंदर्य को देखने की लालसा के वशीभूत होकर वह आगे बढ़ नहीं पा रहा था इस लालच में था कि थोड़ी देर बाद जाने पर उसे बहुत कुछ देखने वाला था यह बात अच्छी तरह से जानता था इसलिए अपने आप को रोक कर रह गया ऐसा नहीं था कि उसे गुस्सा नहीं आ रहा था,,,,दुनिया का कोई भी ऐसा बेटा नहीं होगा जो उसकी मां पर जुर्म होता देखकर खामोशी से बैठा रहे लेकिन यहां पर कोई गैर मर्द नहीं था बगल वाले कमरे में उसका खुद का बाप था जिसका उस स्त्री पर पूरा हक था,,, जो कि उसकी बीवी थी,,,, बस मारपीट गाली-गलौज को छोड़कर लेकिन नशे की हालत में वह सब कुछ कर रहा था,,,,,,, और सही समय का इंतजार करने का धैर्य रखकर संजू बगल वाले कमरे में बैठा था,,, संजू के लिए सही समय उसकी मां का पूरी तरह से निर्वस्त्र हो जाना,,, था अपनी मां का नंगी होने का इंतजार कर रहा था अपनी आंखों से अपनी मां को पूरी तरह से निर्वस्त्र हालत में देखना चाहता था पूरी तरह से नंगी उसके जिस्म के हर कोने को अपनी आंखों से नाप लेना चाहता था,,,क्योंकि संजू यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बहुत ही खूबसूरत है उसकी मौसी से भी अत्यधिक ज्यादा खूबसूरत,,,, और मौसी के संगत में ही तो उसकी आदत खराब होने लगी थी मौसी के साथ दो बार चुदाई कर चुका संजू,,,, हर औरत को प्यासी नजरों से देखता था जिसमें उसकी खुद की मां भी शामिल थी,,,,और उसके पापा तो उसकी मां पर उसको लेकर गंदा-गंदा इल्जाम भी लगाते आ रहे थे,,,, साधना की चुदाई कर चुका संजू उसको लेकर अपनी मां पर लगाएं इल्जाम के चलते और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने लगा था,,, जिसके चलते हैं वहां हर वक्त अपनी मा‌मे एक औरत को ढूंढता था उसके अंगों को नजर भर कर देखता था छातियों का उभार हो या नितंबों का गोलाई सब कुछ संजू के लिए आंख सेंकने के लिए होता जा रहा था,,,।

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बगल वाले कमरे में बैठा संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा हो गया था कि उसकी मां के बदन पर एक भी कपड़ा बचा नहीं था उसकी मां पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,,,, और यह आभास होते ही उसके लंड का थाना अत्यधिक बढ़ गया था और वह अपने पेंट के ऊपर से अपने लंड को दोबारा आता अगर उसे अपने बगल वाले कमरे में जाना ना होता तो अब तक वह अपनी पेंट उतार कर अपने लंड को हाथ में लेकर हीलाना शुरू कर दिया होता,,,,,,वह बैठा बैठा अपनी मां के बारे में सोच रहा था कि सारे कपड़े उतर जाने के बाद उसकी मां नग्न अवस्था में कैसी नजर आती होगी,,,अपने सवाल का अपने आप से जवाब देते हो बोला कि उसकी मां नंगी होने के बाद स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं लगती होगी,,, उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम मक्खन मलाई की तरह चमकती होगी जिस पर हाथ लगाने से ही फिसल जाए उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां पूरी तरह से रस से भरी होंगी जिसे दबाकर मुंह में लेकर पीने में बहुत मजा आता होगा,,,, उसकी मोटी मोटी केले के तने की जैसी चिकनी जांघों के बीच की वह पतली दरार कितनी खूबसूरत नजर आती होगी,,,, उसमें से काम रस अमृत की बुंद बनकर टपकती होगी,,,

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जब तक संजू अपने मौसी से किसी और रूप में मिला नहीं था तब तक वह औरतों की चूत के बारे में केवल कल्पना किया करता था कि कैसी नजर आती होगी कैसी दिखती होगी लेकिन जब से अपनी मौसी की उसने चुदाई किया था उसने चूत से रूबरू हुआ था तब से वह बेहद सटीक रूप से चूत के बारे में कल्पना करने लगा था,,,वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच की उस गुलाबी चूत के बारे में कल्पना करते हुए अपने तन बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते अपनी मां को चोदने की जिज्ञासा उसके मन में बढने लगी थी,,वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसे अपनी मां को चोदने का मौका मिला तो उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा,,,,और यह भी जानता था कि उसका मोटा लंड उसकी मां की चूत में रगड़ कर अंदर बाहर जाएगा उस पल के लिए वह पूरी तरह से मचल उठा था,,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां जब ऊपर से इतनी खूबसूरत लगती है तो अंदर से तो कयामत होगी,,,,,उसे अपने पापा पर गुस्सा भी आता था कि ईतनी खूबसूरत औरत के साथ प्यार करने की जगह उसके साथ नफरत और गुस्से से पेश आते हैं अगर उसके पापा की जगह वह होता तो सारी रात उससे प्यार करता उसे ना सोने देता ना खुद सोता रात भर उसके गुलाबी चूत में अपना लंड डालकर पड़ा रहता ,,,,,, अभी संजू अपने मन में इस तरह की कल्पना कर ही रहा था कि बगल वाले कमरे से आवाज आई,,,।

मेरी गैर हाजरी में कितनी बार चुदवाती है अपने बेटे से,,,,(आराधना की दोनों टांगों को पकड़कर जबरदस्ती खोलते हुए बोला और उसकी गुलाबी चूत पर नजर पड़ते ही वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) तेरी चूत देखकर ही पता चल रहा है कि दिनभर चुदवाई है,,,, देख कैसी गुलाबी गुलाबी हो गई है ऐसा लग रहा है कि तेरा बेटा दिन भर अपने जीभ से तेरी गुलाबी चूत को चाटा है,,,,।

(अपने पति की इस तरह की गंदी बातों को सुनकर आराधना सिर्फ रो रही थी वह अपने बेटे के बारे में अपने आप को देख कर इस तरह के गंदे एग्जाम को सह नहीं पा रही थी और दूसरी तरफ संजू के तन बदन में आग लग रही थी जैसा जैसा उसका बाप बोलता जा रहा था मैं हमेशा संजू अपने मन में कल्पनाओं के घोड़े को और तेजी से जुड़ा रहा था उसे कल्पनाओं के खड़े को दौड़ाने में बहुत मजा आया था कल्पना के घोड़े पर सवार होकर इस पार से उस पार वह कब पहुंच जाता था उसे पता नहीं चलता था,,,।आराधना के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे इस समय वहां बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी पीठ के बल लेटी हुई थी उसे अचरज हो रहा था कि अभी तक उसका बेटा आया क्यों नहीं,,, क्योंकि उस दिन से उसकी इस बात से डांढस बंध गई थी कि उसका बेटा उसे इस हालात में बचाने के लिए जरूर कमरे में आएगा,,,, लेकिन अभी तक वहां आया नहीं था इस बात से वह हैरान थीअपने मन में सोचने लगे कि शायद हो सकता है कि वह सो गया हूं गहरी नींद में हो लेकिन ऐसा तो कभी नहीं होता था ना चाहता रहता था उसकी बातों से पता चलता था,,,, आराधना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,, रमेश के मुंह से शराब की गंध बड़े जोरों से आ रही थी और ऐसे हालात में वह चुदवाना नहीं चाहती थी क्योंकि ऐसे में अपने पति का सहकार बिल्कुल भी नहीं कर सकती थी,,,, वैसे भी उसका जीवन कराकर अस्ति सब कुछ चिंताओं से भरा हुआ था इसलिए उसे कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती थी खास करके जुदाई के मामले में,,,,।

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आराधना बिस्तर पर लेटे हुए यही सोच रही थी कि अगर उसका बेटा आ जाता तो बहुत अच्छा होता लेकिन फिर अपने हालात पर गौर करते हुए वह अपने आप से ही बोल रही थी कि नहीं खुशी नहीं आना चाहिए क्योंकि इस समय वह उसके सामने आने की हालत में बिल्कुल भी नहीं मिलती वह भला कैसे अपने बेटे की आंखों के सामने एकदम नंगी नजर आएगी उसका बेटा उसे ईस‌ हाल में देखेगा तो क्या सोचेगा,,, यही सोचकर वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी और मन ही मन प्रार्थना कर रही थी कि उसका बेटा इस हालत में नहीं आना चाहिए क्योंकि वह पल भर के लिए उसके नजरिए से वाकिफ हो चुकी थी उस दिन उसे बचाने के लिए कमरे में आया तो जरूर था और उसे बचाया भी था लेकिन उसके अर्ध नग्न शरीर को देखकर उसे घूरता ही रह गया था,,, आराधना को अपने बेटे की आंखों में औरतों के नंगे जिस्म को देखकर जो चमक नजर आई थी,,, वह उस चमक को बहुत से मर्दों की आंखों मेंपहले भी देख चुकी हो अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की आंखों में उतरा की चमक पर आती है जब वह एक औरत के प्रति आकर्षित होता है उस खूबसूरत बदन से प्रभावित होता है,,,

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रमेश आराधना को घूरते हुए अपने शर्ट के बटन को खोल रहा था इतना ज्यादा नशे में था कि ठीक से बटन खोल नहीं पा रहा था,,,,,,,,, अपने शर्ट के बटन को खोलने की कोशिश करते हुए रमेश बोला,,,।

संजू से चुदवाकर बहुत मस्त हो गई है,,, अब देखना मैं तेरी कैसे चुदाई करता हूं,,,,(इतना कहने के बाद वह अपनी शर्ट तो नहीं उतार पाया लेकिन पेंट के बटन खोलने लगा अपने आप को बचाने के लिए आराधना भले बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अपनी दोनों टांगों को उठाई हुई थी जोकि अनजाने में रमेश के छाती पर लग गया और वह लड़खड़ा गया,,,, इतने में उसे गुस्सा आ गया और वह,,, आराधना की जांघ पर चपात मारते हुए बोला,,,।

हरामजादी मुझे लात मारती है अपने बेटे के लिए अपनी दोनों टांगे खोल देती है और मुझे लात मारती है,,,, रुक अभी तुझे बताता हूं,,,, और फिर जागो पर चपाट मारते ही रहा जागो पर्चा पाठ लगने की वजह से उसका शोर संजू को अपने कानों तक पहुंच रहा था उससे रहा नहीं गया क्योंकि उसकी मां दर्द से चिल्ला रही थी,,,,, और संजु अपनी जगह से उठा और अपने कमरे का दरवाजा खोलकर बगल वाले कमरे पर पहुंचकर दरवाजा खोलने लगा तो दरवाजा की कड़ी लगी हुई थी दरवाजा अंदर से बंद था वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर वह दरवाजा खोलने के लिए बोलेगा तो कोई खोलेगा नहीं इसलिए गुस्से में जोर से दरवाजे पर एक लात मारा दरवाजा फटाक की आवाज के साथ बड़ी जोर से खुला,,,, और आराधना एकदम से चौक में दरवाजे पर अपने बेटे को देखकर उसकी आंखों में खुशी की चमक नजर आने लगी क्योंकि वह समझ गई थी कि उसके बेटे की होती उसका पति उस पर हाथ नहीं उठा पाएगा,,,, दरवाजे पर खड़ी होकर सब्जी पहले अपनी मां पर नजर डालें जो बिस्तर पर एकदम नंगी पीठ के बल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को फैलाई हुई थी पल भर में ही संजू ने अंदाजा लगा लिया कि उसका बाप की मां को चोदने जा रहा था लेकिन बीच में बात बिगड़ गई,,,,

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और अपने बाप की तरफ देखा तो एकदम गुस्से में तिल मिला उठाशर्ट के बटन आधी खुले हुए थे और उसका पैंट कमर से नीचे उतर कर उसके घुटनों पर टिका हुआ था और उसकी अंडरवियर में हल्का सा तंबू बना हुआ था यह देखकर संजू को एकदम गुस्सा आ गया,,,, , अपनी आंखों के सामने के नजारे को देखकर उससे बर्दाश्त नहीं हुआ,,,क्योंकि बिस्तर पर उसकी मां पूरी तरह से नंगी पीठ के बल लेटी हुई थी और उसके सामने उसका बाप अस्त-व्यस्त कपड़ों में खड़ा था यह देखकर वह उन दोनों के बीच के रिश्ते को भूल भूल गया कि वह दोनों पति पत्नी है उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे उसकी मां के सामने कोई अनजान आदमी खड़ा है और वह उसकी मां के साथ जबरदस्ती करने जा रहा है उसकी इज्जत से खेलने जा रहा है और यही सोच संजू के तन बदन में क्रोध की ज्वाला भड़काने लगी और वह गाली देते हुए आगे बढ़ा यह पहली मर्तबा था जब वह अपने पिता को इस तरह के लहजे में बात कर रहा था,,,,।

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हरामी मादरचोद तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी मां को हाथ लगाने की,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू बिना कुछ सोचे समझे अपने बाप के गाल पर तमाचा मारने लगा वह पूरी तरह से नशा में था और संजु के तमाचे से उसका नशा एकदम से उड़ गया,,, वह उसके गिरेबान को कस के पकड़ कर बोला,,,) भोंसड़ी वाले इंसान नहीं तु हैवान है,,,, फूल जैसी नाजुक औरत पर इस तरह का जुर्म करता है,,,, तुझे शर्म नहीं आती इतना बेशर्म हो गया है तू,,,,(ऐसा कहते हुए संजु उसके गाल पर कई तमाचा रसीद कर दिया,,,,अपने बाप को इस तरह से मारता हुआ देखकर आराधना अपने बेटे को रोकने के लिए उठी वह अपने नंगे बदन को ढकने की बिल्कुल भी तस्दी नहीं ली,,, और छुड़ाने लगी ,,,,,, तो संजु बोला,,,।)

नहीं मम्मी तुम हट जाओ यह इंसान कहलाने के लायक नहीं है,,, देख नहीं रही हो मुझको लेकर तुम पर कैसे-कैसे इन जाम लगा रहा है,,, अपनी ही बीवी और बेटे के बीच कितना गलत ईल्जाम लगा रहा है इसे शर्म नहीं आती,,, हरामजादा इसे तो बाप कहने में मुझे शर्म आ रही है,,,(संजू अभी भी अपने पापा का गिरेबान पकड़े हुए था आराधना जो पूरी तरह से नंगी थी वह बिस्तर से उठकर छुड़ाने की कोशिश कर रही थी,,,,)

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जाने दे संजू,,, छोड़,,,,ये तेरे पापा है मत भुल,,,

मैं कुछ भी नहीं बोला मम्मी लेकिन यह इंसान सब कुछ भूल चुका है मुझे और तुम्हें हम दोनों को भूल चुका है,,,,

नहीं जाने दे छोड़ जो कुछ भी हुआ उसे भूल जा,,, अब ये ऐसा नहीं करेंगे,,,,(रमेश के तो मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे रमेश पूरी तरह से सदमे में था उसका नशा उतर चुका था,,,,)

इसकी क्या गारंटी है मम्मी के इंसान फिर से ऐसी हरकत नहीं करेगा कितने दिनों से तो मैं सुनता हूं देखता रहा हूं मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मुझे ऐसा कदम उठाना पड़ा,,,

अब जाने दे,,,,

नहीं आज मैं से सबक सिखा कर रहा हूं यह बातो से मानने वाला नहीं है,,,,

नहीं जाने दे छोड़ मैं कहती हूं छोड़ दे,,,,।

(आराधना छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और संजू अपना पूरा गुस्सा निकाल रहा था,,,)

तुम हट जाओ मम्मी,,,,,

नहीं जाने दे,,,,

नहीं मम्मी आज मैं ऐसे ही ऐसा सबक सिखाना कि यह दोबारा तुम्हारे साथ इस तरह की जर्रत नहीं करेगा,,,,।

नहीं छोड़,,(आराधना छुडाने की कोशिश कर रही थी संजू छोड़ने के लिए तैयार नहीं था,,,,,, आराधना पूरी तरह से नंगी खड़ी थी वह अपने बेटे के गुस्से को देखकर भूल गई थी कि उसके बदन पर वस्त्र का एक रेसा भी नहीं था वह पूरी तरह से नंगी थी,,,, और इसी अफरा-तफरी में संजू के हाथ की कोहनी आराधना की बड़ी-बड़ी चूचियां पर एकदम से रगड़ खाने लगी,,,, छोड़ने छुड़ाने की अफरा तफरी मे ना तो इस बात का आभास आराधना को हुआ और ना ही संजू को,,,,लेकिन जैसे ही संजू को अपनी कोहनी में कुछ भाले की तरह चुभता हुआ महसूस हुआ तो वह तिरछी नजरों से अपने हाथ की कोहनी की तरह देखा जो की आराधना की चूची पर दबा हुआ था,,,, यह अहसास होते ही वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गयालेकिन आराधना को इसका आभास बिल्कुल भी नहीं था कि उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर उसके बेटे की हाथ की कोहनी दब रही है,,,, वह अभी भी छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली,,,

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तुझे मेरी कसम संजु छोड़ दे,,,,,

(कसम का नाम सुनते ही रमेश के गिरेबान से संजू की पकड़ ढीली होने लगी लेकिन वह अपनी नजरों को अपनी मां की चुचियों के आकर्षण से रोक नहीं पा रहा था वह अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को ही घूर रहा था जिस पर अभी भी उसकी कोहनी टीकी हुई थी,,,, संजू की नजरों का पीछा करते हुए जैसे ही आराधना अपनी ही छातियों की तरफ नजर दौड़ाई तो उसके होश उड़ गए क्योंकि अभी भी संजू की कोहनी उसकी चुचियों पर टिकी हुई थी और उसकी निप्पल दबी हुई थी,,,,,,पल भर में ही इस अहसास से आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई वो एकदम से सिहर उठी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, संजू मदहोश होकर ऐसे हालात में भीअपनी मां की चूचियों को घूर रहा था जो कि खरबूजे की तरह एकदम गोल-गोल और पपैया की तरह तनी हुई थी,,,,,,,रागनी की सांसे गहरी चल रही थी जिसकी वजह से उसकी उठती बैठती सांसो के साथ-साथ संजू की कोहनी भी उसकी छातियों पर ऊपर नीचे हो रही थी,,,, जैसे ही संजु को इस बात का आभास हुआ कि वहपागलों की तरह अपनी मां की चूचियों को घूर रहा है तो उसकी नजर अनायास ही अपनी मां की नजरों से टकरा गई दोनों की नजरें आपस में मिली और शर्म के मारे संजू की नजरें नीचे झुक गई और यही आराधना के साथ भी हुआ वह शर्म से पानी-पानी हो गई,,,,संजू को इस बात का कहां से वाक्य उसकी मां पूरी तरह से नंगी खड़ी है और यह एहसास और आभास आराधना को भी हुआ तो वह एकदम से हावड़ा गई,,,, वो झट से अपनी नजरों को इधर-उधर दौडाकर अपने बदन पर डालकर अपने बदन की नग्नता को छुपाने के लिए चादर को ढूंढने लगी,,,,।

जब एहसास संजु को हुआ कि उसकी मां अपने नंगे बदन को ढकना चाहती है तो वहअपने पापा के गिरेबान को छोड़ दिया और जैसे ही वहां अपने पापा की गिरेबान को छोड़ा रमेश तुरंत सूखे हुए लकड़ी की तरह बिस्तर पर जा गिरा लेकिन इस समय रमेश को संभालने का बिल्कुल भी होश नहीं था आराधना तो अपने नंगे बदन को छुपाने के लिए इधर उधर नजर घुमा रही थी ,,, संजू समझ गया कि उसकी मां असहज महसूस कर रही हैं इसलिए वह तुरंत कमरे से बाहर निकल गया,,,,,, उसकी मां झट से चादर उठाकर अपने बदन पर डाल ली और जल्दी से दरवाजे की तरफ बढ़ कर दरवाजा बंद कर दी लेकिन अब इसका फायदा नहीं था क्योंकि जिससे वह अपने बदन को बचाना चाहती थी अपनी नंगे बदन को छुपाना चाहती थी वह तो कमरे से बाहर जा चुका था फिर भी आराधना उसी तरह से नहीं अपने बदन पर चादर बिस्तर तक आई और बिस्तर पर पड़े अपने पति की तरफ देख कर अपनी किस्मत को कोसने लगी,,,।,,,,
 
संजू मौके की नजाकत और जरूरत को समझ नहीं पा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसे हालात में क्या करना चाहिए जहां पर उसकी मां को मदद की जरूरत होती थी वहां पर वह मदद तो करता था लेकिन उसकी अपनी लालच भी थी अपनी मां के नंगे बदन को देखने की जिसमें वह लगभग कामयाब‌ भी होता जा रहा था,,,,, धीरे-धीरे वह अपनी मां को संपूर्णता नग्न अवस्था में देख चुका था और अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखने के बाद वह अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत है जो कि कपड़े पहनने के बाद भी खूबसूरत नजर आती है और उससे भी ज्यादा खूबसूरत कपड़े उतार देने के बाद नजर आती है,,,। अपनी मौसी की दो बार चुदाई कर चुका था उसके अंग अंग से वाकिफ हो चुका था लेकिन अपनी मां के नंगे बदन को देखने के बाद वह इस अहसास से अपने मन में यही सोच कर मत हो सुबह जा रहा था कि अगर उसे मौका मिलेगा तो वह अपनी मां की चुदाई जरूर करेगा और उसे बहुत ज्यादा मजा आएगा उसकी मौसी से भी ज्यादा मजा उसकी मां देगी,,,, इस बात से उसके तन बदन की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी,,,, अपनी मां के बारे में इस तरह के गंदे ख्याल लाना उसे भी खराब लगता था लेकिन वह मजबूर हो जाता था उम्र के जिस पड़ाव पर वह था,,, ऐसे में इंसान ना तो अपने दिल की सुनता था और दिमाग की बस जरूरत के मुताबिक ही उसकी सोच बदलती जाती थी और इस समय जवानी के दौर से गुजरते हुए उसके मन में औरतों के अंगों को लेकर उत्सुकता हमेशा बढ़ती रहती थी और ऐसे में घर में ही अपनी मां के नंगे बदन को देख कर वह उतेजीत हो जाता था और अपनी मां को लेकर गंदे गंदे विचार करने में उसे आनंद की अनुभूति होती थी,,,।

अपनी मां की मदद करने के लिए जिस पल का इंतजार कर रहा था वह पल आते ही वह अपनी मां के कमरे में घुस तो गया था और गुस्से में वह अपने बाप को दो चार थप्पड़ भी लगा दिया था,,,,,, और संजू का गुस्सा देखकर आराधना बीज बचाओ करने के लिए उठ खड़ी हुई थी उसे इस बात का भी अहसास तक नहीं था कि वह इस समय पूरी तरह से नंगी है और वह अपने बेटे को छुडाने लगी थी,,, और छुड़ाने में संजु का हाथ उसकी मां की चूची पर दब गया थाइस बात का एहसास होते हैं संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और यही एहसास आराधना के भी तन बदन में हो रही थी,,,, इस हरकत की वजह से वह अपनी मां की असहजता को समझ गया था और तुरंत कमरे से बाहर निकल गया था,,,,।

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दूसरे दिन रमेश कुछ बोला नहीं और चुपचाप नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल गया,,,, मोहिनी भी जा चुकी थी लेकिन संजू अभी नाश्ता नहीं किया था तो नाश्ता करने के लिए वह रसोई घर में चला गया,,, आराधना रसोई तैयार कर रही थी,,, अपने बेटे को रसोई घर में आता देख कर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,,,, कुछ दिनों से अपने बेटे की उपस्थिति में उसे उत्तेजना का अनुभव होने लगा था उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी थी,,,।वह अपने आप को असहज महसूस कर रही थी लेकिन किसी भी तरह से अपना मन खाना बनाने मैं लगा रखी थी,,,

संजूमटके में से पानी निकालते हुए अपनी मां की गोल-गोल गांड को ही देख रहा था क्योंकि कसी हुई साड़ी पहनने की वजह से गांड की दोनों फांकों का उभार साड़ी के ऊपर से भी एकदम साफ झलक रहा था,,,,,,,और अपनी मां की गांड को देखकर संजू का मन कर रहा था कि उसकी गांड की दोनों फांकों में अपना मुंह डाल दे,,,,, यह सोचता हुआ संजू पानी पीने लगा,,,,, आराधना की हिम्मत नहीं हो रही थी अपने बेटे से नजर मिलाने की क्योंकि रात को वह अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और अपनी चूची पर उसके हाथ को दबा हुआ भी पाई थी जिसकी वजह से उसके तन बदन में शर्म की उमंग उठ रही थी,,,, वह संजू से बात करना तो चाहती थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, लेकिन वह इस समय खामोश की तो नहीं रह सकती थी अगर वह कुछ बोलेगी नहीं तो उसकी बेटी को ऐसा ही लगेगा कि उसकी मां नाराज है और वह ऐसा नहीं चाहती थी,,, इसलिए खाना बनाते समय अपनी नजरों को झुकाए हुए ही आराधना बोली,,,।

तुझे देर नहीं हो रही है कब से नाश्ता तैयार है,,,

हां मम्मी आज थोड़ा देर हो गई,,, वो,,, में,,,,मै,,,,तुमसे यह कहना चाह रहा था कि कल जो कुछ भी हुआ उसके लिए माफी चाहता हूं,,,,

क्यों,,,?

कल थोड़ा गुस्से में पापा पर हाथ उठा दिया,,,, लेकिन रोज-रोज का अब सहन नहीं होता,,,, मुझे कल ज्यादा गुस्सा आ गया था,,,

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मैं जानती हूं बेटा,,,,मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होता लेकिन क्या करूं मजबूर हूं अपने घर को बिखरने नहीं देना चाहती किसी भी तरह से सब को समेट कर रखना चाहती हूं लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है,,, तेरे पापा घर की जिम्मेदारियों से अपने फर्ज से मुंह मोड़ते जा रहे हैं,,,, तू देख रहा है तनख्वाह की तारीख निकल चुकी है और तेरे पापा एक रुपया भी घर पर नहीं लाए हैं,,,, राशन खत्म हो गया है राशन लेने जाना है,,,, दूध वाले का कर्जा राशन वाले का कर्जा,,,, मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कैसे होगा,,,,।

संजू और आराधना किचन में

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पापा से पैसे मांगना चाहिए था ना,,,,

जो इंसान रोज झगड़ा करता है मारपीट करता है ऐसे इंसान से उम्मीद भी क्या रख सकते है,,, मुझे नहीं लगता कि इस बार तेरे पापा पैसा देंगे,,,,

सच कहूं तो मम्मी तुम्हारा दुख मुझसे देखा नहीं जाता,,,।

(अपने बेटे की बातें सुनकर आराधना को अपने मन में थोड़ी तसल्ली हो रही थी कि उसका बेटा समझदार हो गया है वह मन में प्रसन्न होते हुए बोली)

कल तू सो गया था क्या,,,?

क्यों,,,?

तेरे पापा तो बहुत देर से झगड़ा कर रहे थे,, मैं कब से तेरा इंतजार कर रही थी कि तू अब आएगा अब आएगा लेकिन तू बहुत देर में आया,,,,

हां वो कल मेरी आंख लग गई थी,,,,बहुत देर से आंख खुली जब तुम्हारी चिल्लाने की आवाज मेरे कानो तक पहुंची तब,,,,(गिलास को मटके के ऊपर रखी प्लेट पर रखता हुआ बोला,,,अपने बेटे की बातें सुनकर आराधना को इस बात से थोड़ी राहत तो हुई क्योंकि वह अपने मन में सोच रही थी कि कहीं उसका बेटा सब कुछ जानता हुआ और सुनने के बावजूद भी कहीं उसके कपड़े उतार कर नंगी होने का इंतजार तो नहीं कर रहा था कि जब वह नंगी हो जाए ताकि चले क्योंकि पहले भी जब अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी तभी उसका बेटा था और कल भी ऐसा ही हुआ था लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर उसे थोड़ी बहुत सर्दी हो रही थी कि हो सकता है उसकी आंख लग गई हो लेकिन आया तो सही बचाने यही उसके लिए काफी था,,,,)

क्या सच में मम्मी तुम्हें मेरा इंतजार था,,,

हां मुझे पक्का यकीन हो गया है कि जब से तेरे पापा मुझ से बदसलूकी करेंगे तो मुझे बचाने जरूर आएगा,,,।

(तवे पर रोटी रखते हुए आराधना बोली और अपनी मां की बात सुनकर संजू मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,, अपने बेटे के चेहरे के हाव-भाव को देखने के लिए आराधना पल भर के लिए अपनी नजर को पीछे करके संजू की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपनी कमर के नीचे के उभार पर टिका हुआ पाकर वह उत्तेजना के मारे अंदर तक सिहर उठी,,,, अपने बेटे की नजरों को और दो बार में जो भी वाकया हुआ था,,, और उसी समय अपने बेटे की उपस्थिति को देखते हुए उसे इस बात का आभास हो गया था कि उसका बेटा चोरी छुपे उसके बदन को देखता है यह ख्याल ही उसके तन बदन को झकझोर कर रख दिया था,,,,,उसके बदन में अजीब सी हलचल होने वाली थी पल भर के लिए वह अपने तन बदन में उत्तेजना तांडव कर रही थी और उसे अपनी बुर के अंदर रिसाव का अनुभव हो रहा था,,,, तवे पर गर्माहट पाकर फूल रही रोटी की तरह उसकी बुर भी रोटी की तरह उत्तेजना की वजह से फूल रही थी,,,।

संजू के तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,, रह रह कर उसे अपने ख्यालों पर अपने नजरिए पर गुस्सा भी आ रहा था वह अपनी मां के पीछे खड़े खड़े यह सोच रहा था कि वह क्या देखकर उत्तेजित हो रहा है अपनी मां की गांड,,,, नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए वह जो कुछ भी करना है गलत कर रहा है ऐसा ख्याल मन में आते ही तुरंत,,, अपनी मां की हिलती हुई गांड को देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लग जाती थी,,,। चाह कर भी वह अपने ख्यालों को अपनी सोच को दूसरी तरफ मोड़ नहीं पाता था,,,,,,।

संजू उसकी गदराई बड़ी बड़ी गांड को देख रहा है यह जानकर वह पीछे नजर करने में घबरा रही थी,,, वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसी स्थिति में कैसे संभाला जाए,,,, और खास करके ऐसी ही स्थिति में ना चाहते हुए भी उसकी गोल गोल गांड कुछ ज्यादा ही लहर मार रही थी,,,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी छाई रही इस खामोशी से आराधना तोड़ते हुए बोली,,,।

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ले बेटा नाश्ता कर ले,,,(नाश्ते की प्लेट को किचन फ्लोर पर ही आगे की तरफ सरकाते हुए बोली,,,,संजय समझ गया कि ज्यादा देर तक अपनी मां के पीछे खड़ा रहना ठीक नहीं था इसलिए वह आगे की तरफ आ गया और नाश्ते की प्लेट को हाथ में ले लिया और नाश्ता करते हुए जोर नजरों से अपनी मां की तरफ देख रहा था वह ठीक अपनी मां के बगल में खड़ा था और उसकी लंबाई उसकी मां से थोड़ा ज्यादा थी इसलिए उसकी नजर अपनी मां की ब्लाउज पर बराबर जा रही थी और खास करके ब्लाउज में कह दोनों चूचियों के बीच की गहरी लकीर पर उसका ध्यान बार बार चला जा रहा था,,,। आराधना की चूचियों के बीच की घाटी का आकर्षण बेहद मंत्रमुग्ध कर देने वाला था जिसमें उसका खुद का बेटा डूबता चला जा रहा था और दोनों के बीच की गहरी लकी किसी नहर की तरह नजर आ रही थी जिस में संजू का मन डुबने को कर रहा था,,,, लो कट ब्लाउज होने की वजह से चुची का अधिकांश हिस्सा संजू को एकदम साफ तौर पर नजर आ रहा था और ऊपर से चुचियों का उठाव उसके पेंट में हलचल मचा रहा था,,,, नाश्ता करते समय पेट की भूख तो शांत होती जा रही थी लेकिन अपनी मां की चूचियों को देखकर उसके तन की भूख और ज्यादा बढ़ती जा रही थी आराधना इस बात से अनजान थी कि नाश्ता करते समय उसका बेटा उसकी चूचियों को घूर रहा है अगर वह यह देख लेती तो शायद उत्तेजना के मारे उसकी बुर से काम रस की बुंद टपक पड़ती,,,,,, वह जानबूझकर अपने आप को खाना बनाने में मशगूल किए हुए थी,,और,, संजू अपनी आंखों को गर्म करने में लगा हुआ था,,,,, अपनी मां की सूचियों को देखकर वह अपने मन में सोचने लगा के ब्लाउज के ऊपर से जब उसकी मां की चूचियां इतनी जानदार दिखती है तो पूरी तरह से नंगी होने के बाद तो पूरी तरह से कयामत लगती है,,,,जिसका एहसास उसने कल ही रात को कर लिया था और अनजाने मे ही उसके हाथ से उसकी मां की चूचियां दब दी गई थी,,, रात वाली घटना याद आते ही संजू के पैंट में तंबू बनना शुरू हो गया,,,,,,,वह किसी भी तरह से अपनी मां को रात वाली घटना के बारे में याद दिलाना चाहता था इसलिए वह एक बहाने से बोला,,।

मम्मी,,,

क्या हुआ,,,?(अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली)

वो,,, वो,,,, कल रात को जो कुछ भी हुआ था उसके लिए मैं माफी मांगता हूं मुझसे अनजाने में हो गया था,,,।

कोई बात नहीं बेटा जिस तरह के हालात थे उसे देखते हुए तो नहीं ठीक ही किया था,,,,(आराधना को लग रहा था कि संजू अपने पापा पर हाथ उठा दिया था उस बारे में बोल रहा है लेकिन संजु किसी और के बारे में बात करना चाहता था इसलिए संजू फिर बोला,,,)

उसके लिए नहीं मम्मी,,,

तो किसके लिए,,,,

वो वो,,,, अनजाने में ही ,,,,, मेरे हाथ से,,,,, तुम्हारी ये,,,(उंगली से अपनी मां की चूचियों की तरफ इशारा करते हुए,,,) दब गई थी ना इसके लिए,,,।

(अपने बेटे के मुंह से उसकी बात सुनकर और उसकी उंगली का इशारा अपनी चूचियों की तरफ होता देखकर पहले तो आराधना को कुछ समझ में ही नहीं आया वह आश्चर्य से संजू की तरफ देखती ही रह गई,,,जब उसे एहसास हुआ कि संजू क्या कहना चाह रहा है तो वह शर्म से पानी पानी हो गई,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें,,, अपने ही बेटे को अपनी चूची की तरफ इशारा करते हुए उसे दिखाते हुए जिस अंदाज में संजू ने बोला था आराधना को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि कुछ इस तरह की हरकत संजू करेगा,,,,,,,आराधना इस बात से और शर्म से पानी पानी में जा रही थी कि उसका बेटा उसकी चूचियों की तरफ देखते हुए इशारा किया था उसके ब्लाउज में कैद उसके दोनों गोलाइयों को अपनी आंखों से देखा था,,, उसे इस बात का आभास था कि रात को उसके हाथ से उसकी चूची दब गई थी और उसकी चुची उस समय बिल्कुल नंगी थी,,,,,,,,, आराधना एकदम आश्चर्य में थी वह संजू की तरफ देख रही थी और समझो कभी उसके चेहरे को तो कभी उसकी छातियों की गोलाई को,,,, दोनों कुछ देर के लिए एक दूसरे में एकदम से खो गए,,, तवे पर रखी हुई रोटी जलने लगी,,,,, जब उसकी गंध आराधना की नाक में गई तो उसे इस बात का एहसास हुआ और वह जैसे होश में आई हो इस तरह से तवे पर रखी हुई रोटी को हाथ से हटाते हुए बोली,,।

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कककक ,,, कोई बात नहीं जो कुछ भी हुआ था अनजाने में हुआ था,,,, मैं तुमसे बिल्कुल भी नाराज नहीं हूं,,,(आराधना संजू की तरफ देखे बिना ही बोल रही थी और जली हुई रोटी को एक तरफ रख कर दूसरी रोटी को तवे पर रखने की तैयारी कर रही थी,,,, अपनी मां की चुचियों को देखते हुए संजू पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया था और उसके पैंट में तंबू भी बन गया था,,,अपनी मां की हालत को संजू अच्छी तरह से समझ रहा था वह एकदम असहज हो रही थी इसलिए वहां पर खड़े रहना उसे उचित नहीं लगा,,, तो वह नाश्ता खत्म करके खाली प्लेट को किचन फ्लोर पर रखते हुए बोला,,,।

अब मैं जाता हूं मम्मी बहुत देर हो रही है,,,,

ठीक है बेटा,,,,(इतना कहते हुए वह संजू की तरफ एक नजर डाली तो अनजाने में ही उसकी नजर संजू के पेंट के आगे वाले भाग पर चली गई और उसमें बने तंबू को देखकर एकदम से हैरान रह गई,,,,,,संजू वहां से जा चुका था लेकिन जाते-जाते अपने पीछे अपनी मां के लिए उत्तेजनाओं का तूफान छोड़ गया था,,,,,,।

संजू की हरकत से आराधना पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गई थी उसकी हर एक हरकत के बारे में सोचने पर मजबूर हो गई थी पेंट में बनी तंबू को लेकर वह और ज्यादा हैरान थी,,, वह अपने मन में सोचने लगी थी क्या उसका बेटा उसे देखकर उत्तेजित होता है,,, अगर उत्तेजित ना होता तो उसका लंड खड़ा ना होता ,,,, पेंट में बने तंबू के मतलब को वह अच्छी तरह से समझती थी,,,। वह अच्छी तरह से जानती थी पैंट में तंबू कब बनता है इसलिए तो हैरान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा खुद अपनी मां को ही देख कर उत्तेजित हो रहा था अपना लंड खड़ा कर रहा था,,, यह सब क्या है उसकी समझ में नहीं आ रहा था,,,, रोटी बनाते समय वाह एकदम से विचार मग्न हो गई थी,,,, पल भर में ही समझो की सारी हरकतों के बारे में हो सोचने लगी,, पानी पीते समय उसकी गांड को घुरना , चुचियों की तरफ इशारा करना फिर तंबू का बन जाना यह सब उसकी जवानी की कहानी बयां कर रहा था जहां एक तरफ अपने बेटे की हरकत से आराधना हैरान थी वहीं दूसरी तरफ सोच में पड़ गई थी कि इस उम्र में भी क्या बात है जवान लड़के को आकर्षित करने में सक्षम है,,,, अगर वह आकर्षक ना होती तो उसके बेटे का लंड खड़ा ना होता है क्योंकि ऐसे उम्र में तो लड़के अपनी उम्र की ही लडकीयां पसंद करते हैं,,,और उसका बेटा था की अपनी मां को देखकर उत्तेजित हो रहा था,,,,,,, यह सब सोचकर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस हो रही थी,,,

चूत की पतली दरार से काम रस का बहाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,,, जिससे आराधना हैरान थी पहले भी एक बार वह अपने बेटे की उपस्थिति में अपनी चूत को गीली होती हुई महसूस की थी,,,,।

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आराधना अपनी भावनाओं में आए बदलाव को समझ नहीं पा रही थी,,,एक तरफ अपनी बेटी का बर्ताव उसे अजीब लग रहा है और अपने बेटे के बर्ताव से उत्तेजित भी हो रही थी फिर जैसे तैसे करके वहा रसोई का काम पूरा करके अपने कमरे में घुस गई वह अपने बदन को गौर से देखना चाहती थी,,,वह देखना चाहती थी कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उसके बदन का कसाव कोयले की तरह बरकरार है या कुछ ढीलापन आ गया है,,,,इसलिए व रसोई का काम पूरा करके अपने कमरे में चली गई और कमरे में जाते हैं अपने सारे कपड़े उतार कर आदम कद आईने के सामने एकदम नंगी हो गई,,,, अभी कुछ देर पहले ही नहा कर रसोई बना रही थी इसलिए उसके बाल खुले हुए थे आईने में अपनी नंगे बदन को देखकर अनजाने में ही उसके होठों पर मुस्कान आ गई यह मुस्कान अपने बदन के कसाव पर बरकरार रखने की खुशी में थी,,,, अपनी तनी हुई चूचियों को देखकर खुद उसकी हालत खराब हो गई थी क्योंकि दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी चुचियों में जरा भी ढीलापन नहीं आया था वह अभी भी जवानी के दिनों की तरह एकदम तनी हुई थी जो की छातियों की शोभा बढ़ा रही थी,,, बस पहले से उसका आकार थोड़ा सा ज्यादा बढ़ गया था जवानी के दिनों में नारंगी के आकार की थी और उम्र के इस पड़ाव पर खरबूजे की तरह एकदम गोल-गोल रस से भरी हुई थी,,,,।

अपनी गोल-गोल चुचियों को देखकर खुद आराधना के मुंह में पानी आ गया और अनजाने में ही उसके हाथ अपने दोनों चूचियों पर चले गए जिसे वह हल्के से दबा दी,,,,,,सीईईईईई,,, की आवाज उसके मुख से निकल गई वह दोनों हथेली में अपनी दोनों चुचियों को लेकर अपने दोनों खरबूजो का वजन का अंदाजा लगा रही थी,,,,

घर में इस समय कोई भी नहीं था और ना ही कोई आने वाला था इसलिए पूरी तरह से निश्चिंत अपने कमरे में पूरी तरह से नंगी खड़ी थी,,,,अपनी गांड को आईने के सामने करके आईने में अपनी गोल-गोल गांड को निहार रही थी,,,एक मर्द को पूरी तरह से पानी पानी कर देने की क्षमता अभी भी उसकी गोल-गोल गांड में थी जिसे देखकर मर्द के मुंह से आह निकल जाती है केवल उसका पति हीइस अद्भुत और मादकता भरे सुख से विमुख होकर उस पर जुर्म कर रहा था,,, अपनी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड का जबर्दस्त उभार देख कर खुद उसका मन ललचा रहा था,,,।

आईने में अपनी नंगी गांड को देखकर आराधना समझ गई थी कि उसके बेटे का यह हाल क्यों हो रहा है,,, यह सोचकर उसके होठों पर मुस्कान आ गई,,,,गांड को आईने के सामने किए हुए ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर हथेली से अपनी गांड की दोनों फांकों को पकड़ कर उसे जोर जोर से मसलने लगी,,, और उस पर दो-चार चपत भी लगा दी पल भर में ही उसकी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई,,,, यह देख कर उसके चेहरे पर भी शर्म की लालिमा छाने लगी वो थोड़ा आगे की तरफ झुक कर अपनी बड़ी बड़ी गांड का उभार देखना चाहती थी जो कि बेहद लाजवाब और जानलेवा था,,,,अपने नंगे रूपरेखा को देखकर आराधना मन ही मन अपने बदन पर गर्व कर रही थी लेकिन निराश थी तो अपने पति की तरफ से कितनी खूबसूरत होने के बावजूद भी उसका पति उसे प्यार करने की जगह उसे मारता पीटता था,,,,

आराधना आईने क सामने

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अपनी चूत की पतली दरार की स्थिति का जायजा लेने के लिएवह फिर से आईने की तरह मिला लें और धीरे-धीरे अपनी नजर को आईने में ही दिख रही अपनी दोनों टांगों के बीच ले गई और उस पत्नी दरार को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई जो कि हल्के हल्के रेशमी बालों से घिरा हुआ था,,,, उस पर हल्के से हथेली रख करआराधना यह सोचने लगी कि क्या उसका बेटा भी उसकी चूत के बारे में कल्पना करता होगा हालांकि तो बार-बार उसे पूरी तरह से नंगी देख चुका ना तो क्या उसकी चूत को भी उसके बेटे ने देखा होगा अगर देखा होगा तो क्या सोच रहा होगा,,,, कहीं उसकी चूत को देखकर उसका बेटा उसको चोदने की कल्पना तो नहीं करता है यह ख्याल मन में आते ही उसकी चूत से काम रस की बुंद अमृत की धारा बनकर नीचे जमीन पर चु गई,,,, अपने बेटे के बारे में सोच कर आराधना की उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी यह भी उसके लिए आश्चर्य की बात थी उसकी हथेली अभी भी उसकी चूत पर थी जिसे वह उत्तेजना के मारे धीरे-धीरे मसलने लगी थी और ऐसा करते हुए उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी हालांकि इस तरह के कार्य को उसने कभी भी नहीं की थी लेकिन आज अनजाने में ही वह अपनी चूत को अपनी हथेली से मसल रही थी,,,

देखते ही देखते उसकी उत्तेजना बढने लगी,,पति से उसे अब बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह उसे अच्छी तरह से शरीर सुख देकर उसे संतुष्टि प्रदान करेगा,,,,

वह अपनी चूत को मसलते हुए अपनी आंखों को बंद कर दी थी और उसकी आंखों के सामने उसके बेटे के पेंट में बने तंबू का दृश्य नजर आ रहा था जिसे देख कर उसकी कल्पना और ज्यादा बढ़ने लगी सब कुछ अनजाने में हो रहा था वह उत्तेजना की भावनाओं में बहती चली जा रही थी,,,,यह जानते हुए भी कि जिस तरह की वह कल्पना कर रही है वह ठीक नहीं है,,,, उसकी आंखें बंद थी और उसे अपने बेटे के पेंट में बना तंबू नजर आ रहा था जिसे कल्पना में वह अपने हाथों से उसके पेंट की बटन खोलने लगी और पेंट की बटन खुलते ही उसमें से मोटा तगड़ा लंबा लंड बाहर को उछल कर आ गया जिसे देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई और वह कल्पना में ही अपने बेटे का लंड को अपने हाथ से पकड़ ली,,,,,

कल्पना में उसे हकीकत का अनुभव रहा था उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी देखते ही देखते वह कल्पना में अपने बेटे की लंड को पकड़ कर उसे अपनी चूत पर रख कर उसके सुपाड़े को अपनी चूत की गुलाबी पत्तियों पर रखकर रगड़ना शुरु कर दी,,,,वास्तविकता में आराधना की उत्तेजना बढ़ने लगी और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को और तेजी से ले जाते हुए आराधना अपने बेटे के लंड को अपने गुलाबी छेद पर रखकर अपने बेटे को धक्का मारने के लिए बोली आराधना की कल्पना इतनी जबरदस्त थी कि उसे साफ महसूस हो रहा था कि कल्पना में भी उसका बेटा उसकी कमर को थाम कर अपने लंड को उसकी चूत में डालता हुआ आगे की तरफ बढ़ रहा था,,,आराधना अपने बेटे की लंड की कल्पना कर रही थी लेकिन वास्तविक में वह अपनी उंगली को अपनी चूत में डाल रही थी और वह भी एक टांग पलंग पर रख कर,,,, देखते ही देखते आराधना की उंगली उसकी खुद की चूत में अंदर बाहर होने लगी और कल्पना में उसका बेटे का लंड उसकी चुत की गहराई नापने लगा,,,एक तरफ हकीकत में उसकी खुद की उंगली उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी और दूसरी तरफ कल्पना में उसके बेटे का लंड उसकी बुर की गहराई नाश्ता हुआ उसे कल्पना नहीं चल रहा था जिसकी कल्पना करके वह पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,, और देखते ही देखते जरा सिसकारी की आवाज के साथ आराधना झड़ने लगी,,,।

और थोड़ी देर बाद जब वासना के तूफान से वह बाहर निकली तो अपनी खुद की हरकत पर उसे शर्मिंदगी महसूस होने लगी,,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि ऐसा उसे नहीं करना चाहिए था,,, संजू की कामुक हरकत की वजह से वह दूसरी बार इस तरह की क्रिया करने पर मजबूर हो गई थी और वह अपने आप को ही वचन देते हुए की आईंदा ऐसा नही करेगी ,,,,,, ऐसा समझकर वह बिना कपड़े पहने ही नग्न अवस्था में ही अपने कमरे से बाहर निकल गई और बाथरूम में चली गई,,।
 
अपने बेटे के बारे में ही कामुक कल्पना करके आराधना दो बार अपने हाथों से ही झड़ चुकी थी लेकिन इन दो बारो में ही उसे अधिक सुख की अनुभूति हुई थी भले ही वह अपना चर्मसुख अपनी उंगली से प्राप्त क्यों ना कि हो,,,, अपने बेटे की कल्पना करने में उसे अद्भुत उत्तेजना का अनुभव होता था,,,,,

रमेश इस बार घर में तनख्वाह नहीं दिया था,,,, वह तनख्वाह के सारे पैसे शराब और जुए में उड़ा दिया था,, जिससे धीरे-धीरे किल्लत पड़ने लगी, राशन का डब्बा खाली होने लगा, था,,, दूध वाले का उधार चुकाया नहीं गया था इसलिए उसने दुध देने से इनकार कर दिया था,,,, आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,,, जैसे तैसे करके वह अपने बच्चों का पेट भर रही थी लेकिन राशन पूरी तरह से समाप्त हो जाने की वजह से अब आराधना के पास कोई रास्ता नहीं बचा था वह करेगी क्या करें उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,।

आराधना संजू क बारे में सोच कर

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ऐसे ही एक दिन रविवार को दूध ना होने की वजह से चयनित और मोहिनी सुबह सुबह नहाने के बाद अपनी मम्मी से चाय नाश्ता के लिए बोली तो आराधना एकदम से परेशान हो गई,,,, रमेश की छुट्टी होने की वजह से वह भी घर पर ही था,,,,, आराधना परेशान होने की वजह से थोड़ा गुस्से में थी रमेश नहा धोकर तैयार हो रहा था,,,,वैसे उसे ड्यूटी पर जाना नहीं था लेकिन फिर भी बाहर अभी भी इसी तरह से निकल जाया करता था,,,,,,,, आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि रमेश से बोले भी तो कैसे बोले उस इंसान को तो जरा भी फर्क नहीं पड़ने वाला था वह भी यही सब सोच रही थी कि,,,, मोहिनी दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और बोली,,,।

मम्मी तुमने चाय और नाश्ता नहीं बनाई,,,,

चाय नहीं बनेगी बेटा,,,

क्यों मम्मी ऐसा क्यों बोल रही हो,,,,(मोहिनी परेशान होते हुए बोली क्योंकि उसे सुबह-सुबह चाय चाहिए ही था)

क्योंकि दूध वाले ने दूध देने से इनकार कर दिया,,, है,,,(आराधना बिस्तर पर बैठी रमेश की तरफ गुस्से से देखते हुए बोली,,,)

क्या,,,? दूधवाले ने दूध देने से इनकार कर दिया है लेकिन क्यों,,,?(मोहिनी आश्चर्य से बोली,,)

क्योंकि दूधवाले को उसका बकाया नहीं मिला है,,,

क्या,,,? लेकिन मम्मी तनख्वाह तो आई होगी ना,,,,

मेरे हाथ में तो नहीं आई अपने पापा से पूछ,,,,(आराधना रमेश की तरफ देखते हुए बोले जा रही थी और इस समय रमेश बिल्कुल भी नशे में नहीं था इसलिए वह जानता था कि उसने इस महीने की तनख्वाह घर पर नहीं दिया है,,,)

संजू क बारे में कैलपना करते हुए पनि पंतय उतरती हुयी

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यह क्या है पापा मम्मी जो कुछ भी कह रही हैं सच कह रही हैं,,,

(रमेश कुछ बोला नहीं)

चाय नाश्ता क्या आज तो घर में खाना भी नहीं बन पाएगा जाकर किचन में आटा चावल दाल के डिब्बे देख ले सब खा ली है,,,।

क्या कह रही हो मम्मी,,, लेकिन ऐसा क्यों हो गया,,,?(मोहनी एकदम चिंतित स्वर में बोली ,,, इतने में नहाकर संजू भी दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया और बोला,,)

क्या हुआ मोहिनी,,,,?

भैया मम्मी कह रही थी आज चाय नाश्ता और खाना भी नहीं बन पाएगा,,,,

क्यों,,,?

क्योंकि घर पर कुछ भी नहीं है,,,

ऐसे कैसे हो सकता है,,,

क्या हुआ मम्मी घर पर सच में कुछ नहीं है,,,

हां बेटा घर पर कुछ भी नहीं है,,, तेरे पापा इस बार तनख्वाह कहां दी मैंने जैसे तैसे करके मैं 1 सप्ताह तक निकाल ले गई,,,।

पापा क्या मम्मी सच कह रही है इस महीने की तनख्वाह कहां है,,,,

सब खत्म हो गया,,,,

कहां खत्म हो गया है,,,,( संजू गुस्से से अपने पापा से पूछा,,,)

मैं बोला ना खत्म हो गया है तो खत्म हो गया है,,,,

यह क्या बोल रहे हो पापा तुम्हें कुछ एहसास है,,,,

आराधना अपनी छूट मसलते हुए

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रहने दे मोहिनी तेरे बाप को एहसास होने वाला नहीं है,, इन्हें बिल्कुल भी फिक्र नहीं हम लोगों की,,, हम लोग जिए या मरे इन्हें तो सिर्फ अपने शराब से ही मतलब है,,,

देखो सुबह-सुबह तुम लोगों मेरा दिमाग मत खराब करो,,,,

पापा घर पर कुछ भी नहीं है खाने को और तुम्हें जैसे दिमाग खराब लग रहा है,,, मुझे तो आज शर्म आ रही है अगर किसी को पता चला तो क्या होगा,,,,

(संजू को अपने पापा पर बहुत गुस्सा आ रहा था अगर मोहिनी मौजूद ना होती तो अपने पापा को तो चार थप्पड़ फिर से लगा देता लेकिन उनके सामने वह किसी भी तरह का बखेड़ा खड़ा नहीं करना चाहता था इसलिए वह खामोश रहा,,,, आराधना रोने लगी उसके आंसुओं का भी रमेश पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ा था,,, अपनी मां को रोता हुआ देखकर मोहीनी दौड़कर अपनी मां के पास गई और उसे चुप कराने लगी,,,। और रमेश के पास यहां से चले जाने के सिवा कोई चारा नहीं था क्योंकि वह उन लोगों के सवाल का जवाब देने में असमर्थ था,,, और वह वहां से चला गया उसके चले जाने पर आराधना को बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई,,, क्योंकि वह जानती थी कि वह ऐसा ही करेगा,,,,।

मम्मी पापा को क्या हो गया है पहले तो वो ऐसा नहीं करते थे,,,

जानती हूं लेकिन जब से शराब की लत लगी है तब से सब कुछ बदल सा गया है,,,

लेकिन अब क्या होगा मम्मी,,,,

तू चिंता मत कर मैं हूं ना,,,,

मम्मी मुझे ट्यूशन जाना है,,,,

रुक,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना बिस्तर पर से उठी और अलमारी खोल कर उसके ड्रोवर में से 20 का नोट निकाली,,, और मोहिनी को थमाते हुए बोली,,,)

ले तु ट्यूशन जा और रास्ते में कुछ खा लेना,,,

नहीं मम्मी मैं चली जाऊंगी,,,(अपने घर की हालत को देखकर मोहिनी समझ गई थी कि घर में पैसे की किल्लत है इसलिए वह अपनी मां से बीस का नोट लेना नहीं चाहती थी लेकिन फिर भी आराधना जबरदस्ती से मांगने के हाथ में बीस का नोट थमाते हुए बोली,,,)

कल्पना में अपने बेटे क साथ मस्ती करती हुयी

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ले बेटा तु चिंता मत कर,,,, मैं सब कुछ सही कर लूंगी,,,, रास्ते में जरूर कुछ खा लेना,,,,(20 का नोट मोहीनी अपने हाथ में ले ली थी,,, सुबह-सुबह उसे चाय नाश्ता चाहिए ही था,,,, थोड़ी देर में वह ट्यूशन के लिए निकल गई,,,,,, संजू और आराधना दोनों बिस्तर पर बैठे हुए थे घर पर राशन खत्म हो गया था इस बात की चिंता संजु को भी थी,,,आपस में चल रही बहस सुनकर संजू बाथरूम से निकलकर वैसे ही अपनी मां के कमरे में आ गया था वह सिर्फ अपने बदन पर टावल लपेटा हुआ था उसकी चौड़ी नंगी छाती बिल्कुल नंगी थी,,,, जिस पर ऐसे हालात में भी बार बार आराधना कि नजर चली जा रही थी,,,, घर पर कोई भी नहीं था बिस्तर पर आराधना और संजू ही बैठे हुए थे इसलिए आराधना का दिमाग उसी तरफ घूमने लगा वह अपने बेटे की जंगी छातियों को देखकर उसकी तरफ आकर्षित हुए जा रही थी वह अपने मन में सोच रही थी कि उसके पति का शरीर उसके बेटे जैसा बिल्कुल भी नहीं है उसके बेटे के बदन में पूरी तरह से मर्दाना ताकत भरा हुआ है जो कि उसकी चौड़ी छाती से ही नजर आती थी उसके पति की चौड़ी छाती बिल्कुल भी नहीं थी,,,,,,,अपने बेटे की उपस्थिति में आराधना की हालत अजीब सी होने लगती थी और इस समय भी उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,, जब तक रामेश मोहिनी थी तब तक आराधना अपने बेटे की तरफ बिल्कुल भी आकर्षित नहीं थी और न ही उसके मन में कुछ और रहा था लेकिन जैसे ही वह दोनों घर से बाहर चले गए वैसे ही आराधना के तन बदन में उलझन सी होने लगी,,,,,। लेकिन संजू घर के हालात को देखकर थोड़ा चिंतित था वही सोच रहा था कि अगर घर में पैसा नहीं है तो राशन कहां से आएगा इसलिए वह अपनी मां से चिंतित स्वर में बोला,,,।

अपनी मम्मी क बारे में संजू भी इस तरह की कल्पना कर रहा था

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अब क्या होगा मम्मी,,,, घर पर राशन नहीं है खाना कैसे बनेगा,,,,,,

मैं भी यही सोच रही हूं संजु,,, तेरे पापा से तो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है,,,

फिर अब क्या करेंगे मम्मी,,,, खाना कैसे बनेगा,,,,

(संजू की बातें सुनकर आराधना भी चिंतित थी उसे भी फिक्र थी कि अब क्या होगा तभी उसे अपनी बहन साधना का ख्याल आ गया और वह संजू से बोली,,,)

दीदी से कुछ पैसे उधार लेने पड़ेंगे,,,,,,,

मौसी से,,,,

हां तेरी मौसी से,,,, तेरी मौसी ही है जो हम लोगों की मदद कर सकती हैं,,,, वह हम लोगों की हालत से अच्छी तरह से वाकिफ है,,,,।

आराधना को भी मजा आ रहा था

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(अपनी मौसी का जिक्र आते ही संजू की आंखों के सामने अपनी मौसी का नंगा बदन नाचने लगा,, साधना का जिक्र होते ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी,,, भला एक जवान लड़का उस औरत का जिक्र सुनते ही उत्तेजित क्यों ना हो जाए जिसके साथ वह दो दो बार चुदाई का सुख भोग चुका हो,,,,जिसके खूबसूरत नंगे बदन को देख कर पहली बार औरत के नंगे बदन के भूगोल के बारे में वाकीफ हुआ हो,,,, पहली मर्तबा जिस औरत के नंगे बदन को अपने हाथों से छूकर उसकी गर्मी को महसूस किया हो,,, इसीलिए तो साधना का जिक्र होते ही संजू का लंड खड़ा होने लगा था,,,)

तुम सच कह रही हो मम्मी मौसी ही हमारी मदद कर सकती हैं,,,,

तो थोड़ी देर में तैयार हो जा हमें तेरी मौसी के घर जाना है,,

सच में मम्मी,,,

हां रे तेरी मौसी के घर जाएंगे नहीं तो मदद कैसे मिलेगी,,,

आराधना संजू क लिए अपने ब्लाउज क बटन खोलते हुए

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(अपनी मौसी के घर जाने के बारे में सुनकर ही संजु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,,, आराधना को पूरा यकीन था कि उसकी बड़ी दीदी उसकी मदद जरूर करेगी क्योंकि वैसे भी पैसे से वह लोग मजबूत ही थे किसी चीज की कमी नहीं थी,,,

तकरीबन 2 घंटे बाद आराधना तैयार हो चुकी थी अपनी दीदी के घर जाने के लिए,,, वैसे तो वह कहीं भी जाने के लिए ज्यादा तैयार नहीं होती थी लेकिन वह इतनी ज्यादा खूबसूरत थी कि हल्का सा मेकअप करने पर भी वह बला की खूबसूरत करने लगती थी,,, आराधना तैयार हो चुकी थी वह अपने कमरे से अपने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए बाहर निकली तो बाहर संजू खड़ा था और अपनी मां को देखा तो देखता ही रह गया,,,,,,संजु को उसकी मां स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी जो की आसमानी रंग की साड़ी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, चेहरे पर हल्का सा मेकअप थावैसे तुम्हारा देना को किसी भी प्रकार के मेकअप की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी फिर भी हल्का सा पाउडर आराधना ने अपने गोरे गोरे गालों पर लगा रखी थी,,,, जिससे उसके गोरे गोरे गाल और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहे थे,,,, वैसे तो आराधना अपने लाल-लाल होठों पर लिपस्टिक लगाती थी क्योंकि लिपस्टिक लगाए बिना उसके लाल लाल होंठ गुलाब की पत्तियों की तरह एकदम लाल रहते थे लेकिन आज वह अपने होठों पर भी हल्की सी लिपस्टिक लगा रखी थी जैसे से उसके लाल-लाल होठों को देखकर संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर कुछ ज्यादा ही पड़ रही थी उसका मन कर रहा था कि आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का सारा रस पी जाए,,,,,,,।

संजू कुछ देर तक मंत्रमुग्ध होकर वहीं खड़ा रहा हूं अपनी मां की खूबसूरती का रस अपनी आंखों से पीता रहा,,, संजू को इस तरह से अपनी तरफ देखता हुआ पाकर आराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अंदर ही अंदर वह भी बहुत खुश थी,,, कि उसका बेटा उसको देख कर पागल हुआ जा रहा है,,,, वैसे तो कहीं भी आराधना जाती थी अपने पति के साथ तो ज्यादा टीप टाप नहीं करती थी,,, लेकिन आज ना जाने क्यों वह बाहर निकलने से पहले अपने आप को थोड़ा बहुत तैयार कर ली थी,,,, शायद आज पहली बार किसी के घर अपने बेटे के साथ जा रही थी,,,, एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन में हो रही थी,,,,,,, और अपने बेटे को इस तरह से अपनी तरफ देखता हूं आप आकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में सुरसुराहट सी होने लगी थी,,,,,, अपने बेटे की तंद्रा भंग करते हुए वही खुद बोली,,,।)

अब चले,,,

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हां हां क्यों नहीं,,,(अपनी मां की आवाज सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो इस तरह से हड़बड़ाते हुए बोला,,,,, उसकी हालत देखकर आराधना मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, वह अपने बेटे से दो कदम आगे निकलते हुए घर से बाहर निकल गई और पीछे पीछे संजू भी घर से बाहर निकल गया,,,, आराधना घर का दरवाजा बंद करके उस पर ताला लगाने लगी क्योंकि मोहिनी भी शाम को ही घर लौटती थी और वह लोग भी शाम को ही आने वाले थे,,,ताला लगाने के लिए आना था ना थोड़ा सा झुक गई और उसके झुकने के साथ ही उसकी बड़ी बड़ी गांड का गोल आकार उभर कर संजू की आंखों के सामने नजर आने लगा जिसे देखते हैं संजू के पेंट में खलबली सी मचने लगी,,,, ताला लगाने के बाद चाबी को रात में रखने लगी संजू की नजर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे से हट ही नहीं रही थी यह देख कर आराधना मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

ऐसे क्या देख रहा है कभी देखा नहीं है क्या,,,?

आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो मम्मी,,,(हिम्मत जुटा तेरे संग अपने मन की बात बोल ही दिया और उसकी बात सुनकर आराधना मन ही मन प्रसन्न हो गई बरसों बाद किसी ने उसकी खूबसूरती की तारीफ जो किया था,,,,अपने बेटे की तारीफ सुनकर वो शर्मा गई थी जिसकी वजह से उसकी गोरे गोरे गाल सुर्ख लाल पड़ गए थे,,,,)

चल रहने दे अब इस उमर में,,,(इतना कहकर वो चलने लगी तो संजू भी साथ में चलते हुए बोला,,,)

क्या उमर,,,, तुमको देखकर लगता ही नहीं है कि तुम दो बच्चों की मां हो,,,

धत् कैसी बातें कर रहा है तु,,,

मैं जानता हुं जो कुछ भी मैं कह रहा हूं वह मुझे नहीं कहना चाहिए था ,,, लेकिन तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,

चल अब बस रहने दे,,, आगे चलकर चौराहे से ऑटो पकड़ लेंगे,,,,

ठीक है मम्मी,,,

(अपनी मां की बात सुनकर इससे ज्यादा ओर कुछ भी बोलने की हिम्मत संजू नहीं कर पाया,,, क्योंकि मैं किसी भी तरह से अपनी मम्मी को नाराज नहीं करना चाहता था और जिस तरह की बातें संजु कर रहा था उसे सुनकर आराधना की तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी इस तरह की बातें एक पति या प्रेमी हीं करता हैआराधना अपने आप को असहाय महसूस कर रही थी कि तन बदन में उत्तेजना कि लहर दौड़ने रही थी,,,उसे इस बात की खुशी थी कि इस उम्र में भी हुआ एक जवान लड़के को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती थी,,,, दोनों के बीच खामोशी छाई रही,,, अपने बेटे की बात को सुनकरआराधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी उसे अपनी पेंट गीली होती हुई महसूस हो रही थी खास करके उस बात पर जब संजु ने ये कहा था कि तुम्हें देखने के बाद लगता ही नहीं है कि तुम दो बच्चों की मां हो,,,,।

यही सब सोचते हुए दोनों चौराहे पर पहुंच गए वहां से ऑटो पकड़ कर साधना के घर की तरफ निकल गए,,,।
 
आराधना बहुत खुश नजर आ रही थी,,,ऑटो में बैठते वक्त उसके होठों पर हल्की मुस्कान थी जो कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था,,, आखिरकार ये मुस्कान महीनों बाद उसके होठों पर आई थी और वह भी इस वजह से कि उसका बेटा उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और उसे घूर घूर कर देख रहा था,,, ऐसा नहीं था की अपने बेटे के इस बदलते रहोगे और नजरिए से उसे ताज्जुब नहीं हो रहा था वह भी बेहद हैरान थी लेकिन जिस तरह के हालात बनते जा रहे थे उसे देखते हुए ना जाने क्यों आराधना के तन बदन में उसके मन में उमंग सी उठ रही थी,,, जो अधिकांशतः जवानी के दिनों में ही होती थी जब लड़कियों को पहली नजर में किसी के प्रति आकर्षण हो जाता था यह लड़की को इस बात का एहसास हो जाता था कि कोई लड़का उसे पसंद करने लगा है,,,,ठीक उसी तरह का एहसास इस समय आराधना के मन में हो रहा था,,,।

हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थी घर में राशन खत्म हो चुका था पति की बेरुखी उसे पल-पल कचोट रही थी लेकिन ऐसे में उसके बेटे का साथ आराधना को हिम्मत के साथ साथ खुशी दे रहा था,,,, आराधना को अपनी बेटी का उसके खूबसूरत बदन को घूरना,,उसके खूबसूरत चेहरे की तरफ देख कर उसकी खूबसूरती की तारीफ करना और यह कहना कि लगता ही नहीं कि 2 बच्चों की मां हो,,, किसी और के मुंह से तो वह इस तरह की बातें शायद सुन सकती थी लेकिन अपने ही बेटे के मुंह से इस तरह की तारीफ सुनने में उसे गर्व का अहसास हो रहा था,,,,,, यह तो रही तारीफ की बात लेकिन पिछले कुछ दिनों में जिस तरह की हरकत संजू की तरफ से आराधना को देखने को मिली थी आराधना उसी से पूरी तरह से हैरानी के साथ-साथ प्रभावित भी थी,,,, पति के साथ मारपीट में बीच-बचाव करना उसके खातिर अपने ही पिता के साथ हाथापाई पर उतर आना,,, और तो और एकदम नग्न अवस्था की हालत में नंगे बदन को प्यासी नजरों से घुरना,,, यह सब आराधना के लिए बिल्कुल अद्भुत था,,,, ऑटो में दोनों पास पास में बैठे हुए थे और पास में बैठे होने की वजह से दोनों का बदन आपस में स्पर्श हो रहा था,,,,और एक दूसरे का बदन स्पर्श होने की वजह से दोनों की तन बदन में अजीब सी हलचल भी हो रही थी आराधना को तो बार-बार अपनी पेंटिंग गीली होती भी महसूस हो रही थी इस तरह की उत्तेजना वह बरसों के बाद महसूस कर रही थी,,, और यही हाल संजू का भी था पेंट के अंदर लंड पूरी तरह से गदर मचाने के लिए बेताब था,,,अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को देखकर वह पूरी तरह से पानी पानी में जा रहा था उसका बस चलता तो किसी कोने में ले जाकर अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी चुदाई कर दिया होता,,,वैसे भी पहले सिर्फ उसे इस बात का अहसास होता था वह कल्पना करता था लेकिन उसकी मौसी ने उसे चोदना सिखा दिया था इसलिए अच्छी तरह से जानता था कि औरत को कैसे चोदा जाता है,,,,इसलिए उसके लिए यह काम नामुमकिन बिल्कुल भी नहीं था लेकिन मुश्किल भरा जरूर था क्योंकि यह तो वह खुद ऐसा सोच रहा था लेकिन उसे क्या मालूम था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है,,,,।

मौसी के घर जाने सेसंजू की काफी उत्साहित और उत्सुक था समझ में नहीं आ रहा था कि किस हालात में मौसी से मुलाकात होगी मौका मिलेगा या नहीं और वैसे भी जहां तक उसे अंदेशा था कि अपनी मां की मौजूदगी में उसे बिल्कुल भी मौका नहीं मिलेगा,,, हालांकि इस बात से उसे तसल्ली भी थी कि अपनी मौसी के खूबसूरत बदन का भूगोल तो उसे देखने को मिल ही जाएगा और मौका मिला तो उसकी मौसी किसी ना किसी बहाने उसे जन्नत का नजारा दिखा ही देगी,,,,

देखते ही देखते थोड़ी देर में वह दोनों अपनी मौसी के घर पहुंच गए,,,, आराधना के मन में हलचल सी मच आई हुई थी कि वह अपनी बड़ी बहन से क्या बोलेगी हालांकि वह तो सब कुछ जानती नहीं थी लेकिन फिर भी यह पहली बार था जब वह अपनी बड़ी बहन से मदद मांगने के लिए आई थी,,,क्या बोलकर मांगना है इसके बारे में उसने कुछ सोच ही नहीं कि अगर ऐसा कहती है कि घर में राशन खत्म हो गया है और एक पैसा भी नहीं है तो उसकी और ज्यादा बदनामी होगी इसलिए अपने मन में यही सोच रही थी कि किस तरह से वह अपनी बहन से मदद मांगी यही सोचते हो वह दरवाजे के बाहर खड़ी होकर बेल बजा दी,,, थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला और दरवाजा साधना ने खोली थी तो सामने दरवाजे पर अपनी छोटी बहन और संजू को देखकर एकदम से उसके चेहरे पर खुशी आगई,,,,वह एकदम से खुश होते हुए बोली,,,

अरे आराधना तु बहुत दिनों बाद आई,,,आ आ जल्दी अंदर आ,,,,(आराधना मुस्कुराते हुए कमरे में दाखिल हुई और उसके पीछे-पीछे संजु,, संजू की तरफ देखकर अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए,, आराधना से नजर बचाकर वह अपना हाथ संजू के पेंट पर रखकर पेंट के ऊपर से इस कमेंट को दबा दी जो कि उत्तेजित अवस्था में था,,,, पेंट में संजू का लंड खड़ा होता है एहसास होते ही उसकी भौवें तन गई,,, और अपनी जीभ को अपने लाल-लाल होठों पर फेरते हुए संजू की तरफ देख कर आंख मार दी,,, अपनी मौसी की इस हरकत से संजू पूरी तरह से उत्तेजना से गनगना गया था,,,,,,,और जब उसकी मौसी इस तरह की हरकत कर रही है तो वह क्यों पीछे रहे यही मन में सोच कर वह अपनी मां से नजरे बचाता हुआ अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड पर साड़ी के ऊपर से ही हाथ फेर दिया,,,,,,,

दोनों की यह छोटी सी छेड़खानी दोनों के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फैलाने लगी दोनों को अपने अपने अंगों में सुरसुरा हट सी महसूस होने लगी,,,।

आराधना सोफे पर बैठ गई थी ठीक उसके सामने सोफे पर साधना बैठ गई,,, और संजू उसी तरह से खड़ा रह गया तो साथ ना बोली,,,।

अरे खड़ा क्यों है बैठ जा,,,

(अपनी मौसी की बात सुनकर संजू अपनी मां के बगल में जाकर बैठ गया,,, बातों का दौर शुरू करते हुए आराधना बोली)

आज तू बड़े दिनों बाद आई है,,, आज तुझे ऐसे नहीं जाने दूंगी,,,, खाना खाकर ही जाना,,,

अरे खाना खाकर ही जाऊंगी किसी गैर का घर थोड़ी है,,, मेरी दीदी का घर है,,,(इतना कहकर मुस्कुराने लगी संजु अच्छी तरह से जानता था कि वह दोनों उधार पैसे के लिए ही घर पर आए हैं लेकिन कहने में शर्म महसूस हो रही थी,,,,, क्या कहें कैसे कहें आदमी को समझ में नहीं आ रहा था इसलिए बात को इधर-उधर घुमाते हुए बोली,,)

बच्चे नजर नहीं आ रहे हैं,,,

अरे वह दोनों मॉल गए हैं शॉपिंग करने के लिए,,, बस अभी अभी निकले हैं,,,,(यह बताते हुए उसे बेहद अफसोस हो रहा था इस बात के लिए की उसके बच्चे घर पर नहीं थे और ऐसे में संजू उसके घर आया था लेकिन अपनी मां को लेकर काश वह अकेले आया होता तो आज उसे बहुत मजा आ जाता,,,,,,)

ओहहहह ,,, बच्चों से मुलाकात हो जाती तो अच्छा था,,,

अरे यार वह तो अब शाम को ही लौटेंगे आज छुट्टी का भी दिन था,,,,,, अच्छा तु यहीं बैठ में चाय बना कर लाती हूं,,,,

अरे दीदी रुको ना चाय तो पीती रहूंगी तुमसे एक जरूरी बात कहनी थी,,,।

(आराधना की बात सुनते ही चाय बनाने के लिए अपनी भारी-भरकम गांड को सोफे के ऊपर से उठाकर खड़ी होती हुई साधना एकदम सही स्थिर हो गई और अपनी भारी-भरकम गांड को उसी तरह से हवा में ही उठाए रह गई यह संजु देख रहा था,,,अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड देखकर वह अपने मन में सोचने लगा की मौसी की गांड कितनी खूबसूरत है जिसके साथ वह दो-तीन बार मस्ती कर चुका है,,, अगर मौसी उसे अपने करीब आने का मौका ना दी होती तो शायद इस समय बाद सोफे पर बैठा बैठा अपनी मौसी के नंगे बदन केऔर उसकी बड़ी बड़ी गांड के बारे में सिर्फ कल्पना ही कर पाता लेकिन वह अपनी मौसी को सर से लेकर पांव तक पूरी तरह से नंगी देख भी चुका है और उसे भोग भी चुका है,,,।,,, हवा में लहराती हुई भारी भरकम गांड को आराधना की बात सुनते ही हल्के से वापस सोफे कर रख दी,,,, और यह देखकर संजू अपने मन में सोचने लगा कि सोफे की भी किस्मत कितनी अच्छी है जो इतनी खूबसूरत औरत की गांड अपने ऊपर रखे हुए हैं,,,, आराधना की बात सुनकर साधना बोली,,,)

हां बोल क्या जरूरी बात करनी है,,,

वो ,,, दीदी वह क्या है ना कि,,,

अरे तू हिचकिचाह क्यो रही है बोलना,,,,

वो दीदी मुझे पैसों की कुछ जरूरत थी,,, और इस समय घर पर पैसे नहीं है तो,,,,,(इतना कहकर शर्म के मारे आराधना अपनी नजरों को नीचे कर लिया तो साधना बोल पड़ी)

तो पगली इसमें कौन सी बड़ी बात है पैसों की जरूरत है सबको पढ़ती रहती है और तू तो मेरी छोटी बहन है तेरी मदद नहीं करूंगी तो किसकी करूंगी,,, बोल कितने पैसों की जरूरत है,,,

ज्यादा नहीं दीदी 5000,,,,

बस पाच हजार,,,, अरे पगली तू 10000 ले जा,,,मैं जानती हूं जिस तरह के हालात है घर में दिक्कत होती होगी और मैं नहीं चाहती कि मेरे होते हुए तुझे इतनी परेशानी हो और किसी चीज में तो शायद में मदद नहीं कर सकती लेकिन पैसों के मामले में और तेरे साथ खड़े रहने के मामले में मै हमेशा तेरे साथ हूं,,,(और किसी चीज का मतलब आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी,,,)

दीदी तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया,,,, मुझे पूरा विश्वास था कि आप मेरी मदद जरूर करेंगी,,, लेकिन मन में हिचकिचाहट थी कभी पैसे उधार मांगी नहीं ना इसलिए,,,।

चल कोई बात नहीं,,,,,,, मैं चाय बना देती हूं,,,,(इतना कहकर साधना अपनी चेहरा पर से खड़ी हो गई और एक नजर संजू की तरफ डालकर मुस्कुराते हुए किचन की तरफ जाने लगी तो आराधना भी खड़ी हो गई संजू को लगा की आराधना मौसी की मदद करने के लिए किचन की तरफ जा रही है लेकिन वह बाथरूम की तरफ जा रही थी जाहिर था कि उसे जोरो की पिशाब लगी होगी इसीलिए बाथरूम की तरफ जा रही थी और इसी मौके की तलाश में था,,,, जैसे ही आराधना बाथरूम के अंदर घुसकर दरवाजा बंद करें और दरवाजा बंद करने की आवाज जैसे संजू के कानों में पड़ी संजू लगभग दौड़ता हुआ किचन की तरफ गया और देखा भी उसकी मौसी चाय बनाने की तैयारी कर रही थी और पीछे से उसका पिछवाड़ा गजब ढा रहा था यह देखकर संजू से रहा नहीं गया और पीछे से जाकर अपनी मौसी को अपनी बाहों में भर कर उसकी गर्दन को चूमने लगा,,,

संजू और साधना किचन में

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,संजू की इस हरकत की वजह से साधन से सिहर उठी वह बेहद उत्तेजित हो गई लेकिन तभी उसे ज्ञात हुआ कि आराधना भी बाहर मौजूद है इसलिए वह संजु को हटाने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

पागल हो गया क्या तेरी मां घर में है और तू है कि यह सब कर रहा है,,,,(साधना संजु को हटाने की कोशिश करते हुए बोली और संजू तब तक पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था पेंट में उसका लंड पूरी तरह से खाना हो गया था जोकी साधना की भारी-भरकम गांड पर धंस रहा था,,,, अपनी गांड पर संजू के लंड की चुभन महसूस करते ही साधना का भी धैर्य टूटने लगा और वह अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही संजु के लंड को पकड़ ली और बोली,,,)

बाप रे तेरा तो इतनी जल्दी खडा हो गया,,,

साधना से बिलकुल भी साबरा नहीं हो रहा था

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मौसी तुम्हारी गांड देखकर मुझ से रहा नहीं गया,,,(अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मासी के चूचियों को दबाते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला साधना भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी,,,संजू की हरकत उसके तन बदन में उत्तेजना की आग को और ज्यादा भड़का रही थी वैसे भी संजू को अपने घर में देखा करवा पूरी तरह से उत्सुक थी उसके साथ कुछ कर गुजरने के लिए लेकिन अपनी छोटी बहन की उपस्थिति में यह होना संभव बिल्कुल भी नहीं था लेकिन संजू ने जिस तरह की हिम्मत दिखाते हुए उसकी हमको से खेलना शुरू किया था उसकी आंख फड़कने लगी थी,,,,)

तेरी मां इधर ही है यह सब करना था तो अपनी मां को क्यों लेकर आया तू अकेले आ गया होता,,, तुझे पैसे भी मिल जाते और मजा भी,,,

क्या करूं मौसी में तो अकेले आने वाला था लेकिन मम्मी मानी नहीं,,,,,,(इतना कहते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा तो साधना उसे रोकते हुए,,,)

पागल हो गया है तेरी मां ईधर ही है,,,

मममी बाथरूम में गई है,,,

साधना और संजू

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तो तेरी मां बाथरूम में मुतने गई होगी आराम करने नहीं जो इतना उतावला हो रहा है,,, जा बाहर जाकर बैठ में कुछ करती हूं,,,,

तुम्हें छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा है मौसी,,,

मुझे छोड़कर या मेरी चूत को,,,

चूत भी तो तुम्हारी है मौसी,,, जितनी खूबसूरत तुम हो उतनी खूबसूरत तुम्हारी चूत भी है,,,,(संजीव पुरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अपनी बात कहते हुए वह अपनी मौसी की सारी ऊपर की तरफ उठाने लगा था संजू की हिम्मत देखकर साधना का भी हौसला टूट रहा था उसका भी धैर्य जवाब दे रहा था लेकिन वह जानती थीआराधना की मौजूदगी में उन दोनों की एक गलती सब कुछ बिगाड़ सकती थी,,,, ईसलिए साधना समझदारी दिखाते हुए संजु को रोकने का की और उसे बाहर जाने के लिए कहने लगी,,,)

देख संजू तुझे मेरी कसम अगर तेरी मां को इस बारे में पता चल गया था जो मजा तु ले रहा है सब बंद हो जाएगा,,,,

( अपनी मौसी की बात को समझो अच्छी तरह से समझ रहा था मैं जानता था कि उन दोनों की एक गलती दोनों के लिए सजा बन सकती है इसलिए वह अपनी मौसी की बात मान गया लेकिन बोला,,)

तूम कहती हो तो चला जाता हूं मौसी लेकिन एक बार अपनी साड़ी ऊपर करके दिखा तो दो कौन से रंग की पैंटी पहनी हो,,,

साधना और संजू

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क्या पागलों जैसी बात कर रहा है,,,(साधना मुस्कुराते हुए बोली संजू की हरकतों से पूरी तरह से उत्तेजित कर रही थी और वह अच्छी तरह से देख रही थी कि एक जवान लड़का कैसे उसकी जवानी का दीवाना हो गया है,,, सिर्फ संजू का ही मन नहीं था उसके अंगों को देखने का उसके कपड़ों को देखने का बल्कि साधना भी चाहती थी कि संजू अगर अकेले में मिलता है तो अपना सारा वस्त्र निकालकर पूरी तरह से नंगी होकर उसे अपनी जवानी के रस में डुबो देती लेकिन इस समय मजबूर थी क्योंकि उसकी छोटी बहन घर पर मौजूद थी,,,)

तू चला जा बाद में दिखा दूंगी,,,

नहीं नहीं मुझे अभी दिखाओ तुम्हें मेरी कसम,,,

कितना पागल है तू,,,, अच्छा रुक दिखा देती हूं,,,(किचन के दरवाजे की तरफ देखते हुए बोली,,,, और पूरी तरह से एहतियात बरतते हुए साधना अपनी साड़ी को एकदम से कमर तक उठाती वह लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो कि गोरी गोरी जांघों पर बहुत खूबसूरत लग रही थी यह देख कर संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसे अपनी मौसी का काम रस भी नजर आ रहा था जिससे पेंटिं गोलाकार बिंदु में भीगी हुई थी,,,, संजू से रहा नहीं गया और वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मौसी की चूत को पेंटी सहीत अपनी हथेली में दबाते हुए बोला,,,)

सहहहहह ,,,,,ओहहहहह मौसी,,,, तुम्हारी चुत तो गीली हो गई है,,,,(साधना की चूत को अपनी हथेली में दबोचे हुए ही बोला,,पर उसकी हरकत से साधना को अपनी चूत में मीठा मीठा दर्द महसूस हुआ तो वह बोली,,)

आऊचचच,,,, क्या कर रहा है तो इस तरह की हरकत करेगा तो चुत तो गीली होगी ही,,,,

(संजू की आंखों में उत्तेजना और वासना का तोहफा नजर आ रहा था वह किसी भी हाल में अपनी मौसी की चूत को अपने हाथों से अलग नहीं करना चाहता था वह बल्कि अपनी मौसी की पैंटी को उतार कर उसकी नंगी चूत को देखना चाहता था कि तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और भड़ाक की आवाज के साथ बंद भी हो गया,,,जैसे ही बाथरूम का दरवाजा बंद होने की आवाज दोनों के कानों में पड़ी दोनों एकदम से चौकन्ने हो गए और साधना अपनी साड़ी को नीचे करते हुए बोली,,)

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हट तेरी मां आ गई,,,,

(संजू भी तुरंत साधना से दूर हो गया और फ्रिज का दरवाजा खोल कर पानी की बोतल निकालने लगा तब तक आराधना भी किचन में आ गई थी और उसे जरा भी शक नहीं हुआ था क्योंकि साधना एकदम सहज हो चुकी थी और संजू भी फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर पीना शुरू कर दिया था,,,,)

मैं कुछ मदद करूं क्या दीदी,,,,

नहीं रहने दे मैं बना लूंगी,,,(जिस तरह की आंख संजू ने साधना के तन बदन में लगाया था वह चुदवाने के लिए पूरी तरह से ललाईत हो गई थी,,,वह अच्छी तरह से जानती थी क्या करें इस समय वहां संजू के लंड को अपनी चूत में नहीं ली तो अपनी चूत की आग बुझाने के लिए उसे काकड़ी और बैगन का सहारा लेना पड़ेगा और उससे भी उसे ज्यादा आनंद नहीं मिल पाएगा जितना मजा संजू के लंड से उसे आने लगा था,,, इसलिए साधना अपना दिमाग चलाने लगी कि क्या युक्ति लगाया जाए कि आज वह अपनी बहन की मौजूदगी में ही उसके बेटे से चुदवा सके,,,,इसी मामले में उसका दिमाग शायद कुछ ज्यादा ही तेजी से काम करता था जैसा कि अगले बार संजू घर पर आया था तो सब की मौजूदगी में ही वह कपड़े सुखाने के बहाने समझू को सीढ़ियों पर ले गई थी और सीडी पर का दरवाजा बंद करके अद्भुत चुदाई का सुख प्राप्त की थी आज भी उसे कुछ ऐसा ही करना था,,,,,,, और उसकी आंखों में खुशी की चमक नजर आने लगी और वह आराधना से बोली,,,।

अच्छा एक काम कर तू चाय बना तब तक मैं अपने कमरे में जाकर पैसे ले करके आती हूं क्योंकि सूटकेश ऊपर ऊंचाई पर रखा हुआ है और मैं उसे उतार नहीं पाऊंगी,,,

ठीक है दीदी तुम जाओ मैं बना दूंगी,,,

संजू तु मेरे साथ चल तो,,, और हां आराधना इलायची वाली कड़क चाय बनाना जैसा कि तू बनाती है तेरे हाथ की चाय का मजा ही कुछ और है जल्दबाजी बिल्कुल भी मत करना बहुत दिन हो जाते हैं तेरे हाथ की चाय पीए,,,

ठीक है दीदी तुम चिंता मत करो तुम्हें अच्छी चाय पिलाऊंगी,,,,

(साधना की युक्ति काम कर गई थी केवल 10 मिनट का समय चाहिए था उसे और वह कैसे अपने सूटकेस में नहीं रखी थी वह तो एक बहाना था संजु को अपने कमरे में ले जाने का क्योंकि पहले से ही दोनों एकदम कामातुर हो चुके थे एक दूसरे में समाने के लिए तड़प रहे थे,,,, संजू का भी कोई जरूरत है साथ में लगा था क्योंकि वह अपनी मौसी के इरादे को अच्छी तरह से समझ गया था और मन ही मन अपनी मौसी के दिमाग की दाद दे रहा था,,,,अपनी मौसी के कमरे में क्या करना है यह सोच कर ही उसका लंड ठुनकी मारने लगा था,,,, आराधना चाय बनाने की तैयारी करने लगी और साधना आगे आगे और संजु अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड देखकर लार टपकाते हुए उसके पीछे पीछे जाने लगा,,, साधना आगे आगे चलते हुए पीछे की तरफ संजु को देखते हुएउत्तेजना के मारे अपने लाल-लाल होठों को बात से काटते हुए इशारा कर रही थी कि आज बहुत मजा आएगा,,,,।

अगले ही पल साधना संजु को अपने कमरे में ले आई,,, दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,, साधना तुरंत दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी,,,, और संजू की तरफ घूम कर उसे अपनी बांहों में भरते हुए बोली,,,।

देखा ना सब्र का फल बहुत मीठा होता है,,, तेरी मां की मौजूदगी में तेरा लंड अपनी चूत में लुंगी,,,

मान गए मौसी तुम्हारे दिमाग की दाद देनी होगी ऐसे ही उस दिन भी घर में सब की हाजिरी में ही चुदवाली और किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुआ,,,,

अब बातें मत कर अपना काम कर जो करने आया है,,,

वही तो कर रहा हूं मेरी जान,,,

(इंसान इसी तरह से खुल जाता है अगर आपस में इस तरह के संबंध स्थापित हो जाए तो और उसी तरह से संजू भी अपनी मौसी के साथ पूरी तरह से खुल चुका था इसीलिए तो मौसी की जगह से जान कहकर बुला रहा था और उसकी मौसी को जान कहने में कोई बुराई भी नजर नहीं आ रही थी क्योंकि एक तरह से उसने अपना सब कुछ अपने भतीजे को सौंप दी थी,,, संजू झटके से अपनी मौसी को अपनी बांहों में कस लिया और उसके होठों पर होठ रखकर चूसना शुरू कर दिया,,, और अपना हाथ उसकी गांड पर रखकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, दोनों पूरी तरह से कामातुर हो चुके थे,,, संजू का लंड पेंट में होने के बावजूद भी साधना की दोनों टांगों के बीच ठोकर मार रहा था,,, इसलिए उत्तेजना के मारे उसकी चूत और ज्यादा पानी छोड़ रही थी,,,।

आहहहह ,,संजु,,,,ऊमममममम,,, बहुत मजा आ रहा है,,,

अभी डाला कहां हु मौसी जब लंड डालूंगा तो और मजा आएगा,,,

तो डालना हरामजादे रुका क्यों है,,,,

इतना सुनना था कि संजू दोनों हाथों से अपनी मौसी की सारी ऊपर की तरफ उठाने लगा और देखते ही देखते साधना की साड़ी को वह कमर तक उठा दिया,,,, साड़ी कमर तक उठाते ही संजू अपनी दोनों हाथेली ,,,साधना की लाल रंग की पेंटी के अंदर डालकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में दबोच लिया,,,, साधनआ पूरी तरह से गर्मा जा रही थी,,,संजू की इस तरह की हरकत उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे लेकिन वह जानती थी कि दोनों के पास समय बहुत कम है इसलिए साधना समय बर्बाद ना करते हो अपना दोनों हाथ में से की तरफ ले जाकर के संजू का बेल्ट खोलने लगी वह संजू के पेंट को उसके अंडरवियर सहित नीचे की तरफ सरका ने लगी,,,,,, और उसके टनटनाए लंड को अपनी हथेली में लेकर आगे पीछे करके मुठिया ना शुरू कर दी,,,अपनी मौसी के नरम नरम हथेली में अपना कड़क लंड महसूस करते ही उसके लंड की गर्मी और ज्यादा बढ़ने लगी,,,,।

संजू के गरम लगने के कारण साधना की चूत पिघल रही थी उसे रहा नहीं जा रहा था उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए वह संजू से बोली,,,।

सहहह संजु मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी से डाल दे,,,,

जैसी आज्ञा महारानी,,, आपका यह सेवक सेवा में हाजिर है,,,(इतना कहकर वह एक कदम पीछे हटा और अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर दिया साधना की नजर संजू के खड़े लंड पर पड़ी तो वह एकदम से ललच उठी,,,, अपने लंड को हिलाते हुए संजू बोला,,,

चूत में लेने से पहले मौसी इसे एक बार अपने मुंह में लेकर गीला तो कर दो बहुत मजा आएगा,,,,

(संजू की बात को साधना इनकार नहीं कर पाई और तुरंत संजू के लंड पर झुक गई और उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,, और उत्तेजना के मारे संजू साधना के घने बाल को अपनी मुट्ठी में लेकर अपनी कमर को आगे पीछे करके उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया साधना को बहुत मजा आ रहा था लेकिन समय ज्यादा नहीं था इसलिए वह जल्द ही अपने मुंह में से संजु के लंड को बाहर निकाल दी,,, और गहरी सांस लेते अपने बिस्तर के करीब आई और दोनों टांगों को बिस्तर के नीचे रखकर अपने हाथ की कोहनी को नरम नरम गद्दे पर रखकर झुककर घोड़ी बन गई,,,, साधना का यह रूप संजू के तन बदन में आग लगा रहा था वह तुरंत आगे बढ़ा और अपनी मौसी के लाल रंग की पैंटी को खींच कर नीचे घुटनों में फंसा दिया अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड देख कर उससे रहा नहीं गया और वह दो चार चपत गांड पर लगा दिया,,,, जिससे साधना के मुंह से आह निकल गई और संजू बिना देर किए अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,, शुरुआत से ही संजू अपनी रफ्तार को तेज किए हुए था और तेज रफ्तार की चुदाई में लपा लप धक्के पर धक्का लगाने लगा पल भर में ही साधना के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज छूटने लगी जो कि बड़ी मुश्किल से वहां कंट्रोल में किए हुए थे लेकिन फिर भी वह ज्यादा जोर से गर्म सिसकारी की आवाज नहीं निकल रही थी उसे डर था कि कहीं कमरे से बाहर आवाज चली गई तो कहीं आराधना के कानों में आवाज ना पड़ जाए,,,।

संजू पूरी मस्ती के साथ अपनी मौसी की चुदाई कर रहा था वह अपने दोनों हाथ को आगे की तरफ लाकर अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोल कर उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था,,, और संजू की इस हरकत की वजह से उसका मजा दुगुना होता जा रहा था क्योंकि एक तरफ वह स्तनमर्दन कर रहा था और दूसरी तरफ चूत में अपना लंड पेल रहा था,,,,देखते ही देखते 15 मिनट के करीब होने वाला था ज्यादा समय गुजर गया था इतनी देर में चाय बन कर तैयार हो जानी चाहिए थी इसलिए साधना संजू से बोली,,,।

जोर जोर से धक्के मार संजू अपना पानी निकाल,,,, ऐर मेरा भी,,,

चिंता मत करो मैसी,,, यह लो,,,,( ईतना कहने के साथ ही संजू की रफ्तार और ज्यादा बढ़ गई किसी मशीन की तरह उसका मौसी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,,,, थोड़ी देर में गहरी सांस लेते हुए संजु अपने लंड को अपनी मौसी की चूत में से बाहर निकाला और अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगा,,,, साधना भी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,, वापी गहरी गहरी सांस लेते हुए नीचे की तरफ झुकी और अपने घुटनों में फंसी पेंटी को ठीक करके उसे ऊपर की तरफ उठाने लगी और अपने बेशकीमती खजाने को पेंटी की आड़ में छुपा ली,,,।

कैसा लगा मौसी,,,(अपने बेल्ट को बंद करते हुए,,,)

हमेशा की तरह बहुत मजा आया,,,(अपने ब्लाउज के बटन को बंद करते हुए साधना बोली,,, साधना अपने कपड़ों को दुरुस्त कर चुकी थी,,, दोनो बाहर निकलने की तैयारी में थे तभी संजू बोला,,)

मौसी सूटकेस उतारू क्या,,,

नहीं रे सूटकेस उतारने की जरूरत नहीं है मैं पैसे सूटकेस में थोड़ी रखती हूं रुक,,,(इतना कहकर अलमारी के पास गई बार आलमारी खोलकर उसमें से ₹10000 निकालकर मुस्कुराते हुए बोली,,,)

वह तो एक बहाना था तुझे अपने कमरे में लाकर चुदवाने का,,,

मान‌ गए मौसी तुम्हारे जैसा दिमाग किसी का भी नहीं है,,,

(और मुस्कुराते हुए दोनों कमरे से बाहर आ गए,,, चाय बन कर तैयार हो चुकी थी और आराधना ने कप मे निकाल भी दी थी,,,, तीनों बैठकर चाय पीने लगे इधर उधर की बातें होने लगी आराधना को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि 15 मिनट से साधना उसके जवान बेटे को अपने कमरे में ले जाकर के सूटकेस खोलकर पैसे निकलवा रही थी या साड़ी उठाकर कुछ और करवा रही थी,,,,,, संजु साधना बहुत खुश थे दोनों से भी ज्यादा खुशी साधना को थी क्योंकि उसकी बहन ने उसे ₹10000 दिए थे,,,, बात ही बात में साधना ने आराधना को कोई अच्छी सी नौकरी करने की सलाह दी ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी रह सके क्योंकि वह पढ़ी लिखी थी और कंप्यूटर का भी अच्छा खासा ज्ञान था अपनी दीदी का प्रस्ताव आराधना को भी अच्छा लगा और इस बारे में सोचने के लिए वह बोल दी थी,,,

दोपहर का खाना खाने के बाद कुछ देर तक आराधना और संजू वहीं रुके रहे हो और शाम के 4:00 बजते हैं वह लोग साधना के घर से बाहर निकल गए क्योंकि साधना ने संजू से बताई थी कि कर चलते समय मार्केट में से राशन की खरीदी करना है,,, पर वह लोग ऑटो करके मार्केट के लिए निकल गए,,,।)
 
संजु और आराधना दोनों, साधना के घर से निकलते हुए थे लेकिन आसमान में बादल उमड़ रहे थे जो कि बारिश के आने की शंका को बता रहे थे,,,,, मौसम बेहद खुशनुमा हो चुका था घर से निकली थी तब बेहद गर्मी थी,,,शाम होने को थी तो मौसम एकदम ठंडा हो गया था भले ही इस समय बारिश नहीं पड़ी थी लेकिन बारिश पड़ने के आसार पूरी तरह से नजर आ रहे थे,,,,। थोड़ी ही देर में दोनों मार्केट में आ गए थे,,,

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वाह,,, मौसम कितना सुहाना हो गया है,,, है ना संजु,,,

हां मम्मी तुम सच कह रही हो ,, गर्मी बिल्कुल भी नहीं है ठंडा मौसम हो गया है ऐसे में मार्केट में खरीदी करने में भी अच्छा रहेगा,,,,,,(ऐसा कहते हो कि दोनों फुटपाथ पर चल रहे थे संजू ज्यादा से ज्यादा यह कोशिश करता था कि वह हमेशा अपनी मां से दो कदम पीछे रहे क्योंकि उसे आज ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मां तैयार होते समय अपनी साड़ी को कुछ ज्यादा ही कस के कमर से बांधी हुई थी जिससे कसी हुई साड़ी में उसकी भारी-भरकम गांड कुछ ज्यादा ही उभर कर निखर रही थी,,,, और सैंडल पहने होने की वजह से चाल में एक नजाकत सी आ गई थी और उस नजाकत के चलते,, उसकी गांड कुछ ज्यादा ही मटक रही थी,,,, मटकती हुई गांड के मटके को देखकर राजू का मुसल हिलोरे ले रहा था,,, अभी-अभी कुछ घंटे पहले ही वह अपनी मौसी की जमकर चुदाई किया था फिर भी अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर उसका लंड ललच रहा था,,,,,)

संजू मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि दीदी झट से अपनी मदद कर देंगी और वह भी 5000 की जगह 10000,,,

हां मम्मी मौसी का दिल बहुत बड़ा है,,,(इतना कहकर वो अपने मन में ही बोला और गांड भी)

आखिर वह है तो मेरी दीदी,,, मेरा शुरू से बहुत ख्याल रखती हैं,,,(आराधना आज बहुत खुश नजर आ रही थी और आती भी कैसे नहीं घर में राशन खत्म हो चुका था हाथ में पैसा नहीं था और ऐसे में उसकी बहन ने 5000 की जगह 10000 की मदद जो कर दी थी,,, इतने से वह आराम से खर्चा निकाल लेंगी,,,,,, संजू का ध्यान अपनी मां की बातों पर नहीं बल्कि उसकी कमर के नीचे के आकार और उसके भूगोल पर था,,,, और आते जाते हैं वह दूसरे की नजरों को भी देख ले रहा था जो कि आते जाते उसकी मां की गांड की एक झलक लेकर आह भरते हुए निकल जा रहे थे,,,,,, संजू यह बात अच्छी तरह समझ गया था कि उसकी मां की गांड का आकर्षण एकदम मदहोश कर देने वाला है,,,आराधना संजू की तरफ देखे बिना ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

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अगर दीदी ने पैसे ना दिए होते तो आज शाम का खाना शायद हम लोग खा नहीं पाते,,,,,(संजू की तरफ से किसी भी प्रकार का जवाब नहीं आ रहा था तो वह अचरज से पीछे नजर करके देखी तो उसे अपनी गोल गोल गांड की तरफ देखता हुआ पाकर एकदम से सिहर उठी,,, और उसने झट से अपनी नजरों को फिर से सीधा कर ली,,,, उसे यकीन हो गया था कि उसका बेटा उसके हुस्न का दीवाना हो गया है,,,लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक जवान लड़का एक जवान लड़की की तरफ आकर्षित होने की जगह एक 40+ औरत के प्रति आकर्षित क्यों हुआ जा रहा है,,, लेकिन जो भी हो उसे अपने बेटे की नजर बड़ी ही मादक लग रही थी,,,, अपने आप ही ना चाहते हुए भी उसकी चाल एकदम से और ज्यादा मजाक हो गई थी अब वह चलते समय पैर को आगे रखते हुए अपनी कमर को थोड़ा सा बलखा दे रही थी जैसे कोई मोडल रैंप पर चल रही हो,,, अपनी मां की बदली हुई चाल देखकर संजू का लंड पैंट के अंदर बवाल मचाया था,,, संजू को ऐसा लग रहा था कि कहीं अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को मटकती हुई देखकर कहीं उसका लंड पानी ना फेंक दे,,,,, देखते ही देखते एक बड़ी सी किराना की दुकान देख कर आराधना और संजु दोनों वहीं खड़े होकर राशन का सामान लेने लगे,,,,,, दुकान पर थोड़ी भीड़ भाड़ थी,,, आराधना राशन का सामान लेने में व्यस्त थी धीरे-धीरे दुकानदार का सामान बता रही थी और दुकानदार सामान निकालता जा रहा था,,,, संजू की दुकान में इधर-उधर नई नई सामान को देखने में व्यस्त था कि तभी वहीं पर एक उसके ही हम उम्र का लड़का आया और वह भी सामान लेने लगा ,,,,,, वह दुकान पर खड़ा होकर सामान तो ले रहा था लेकिन वह तिरछी नजर से आराधना की उभरी हुई गांड को देख रहा था जो कि साड़ी में भी क़यामत लग रही थी,,,,, संजू की नजर बहुत ही जल्द उस लड़के पर पड़ गई,,, पर उसकी प्यासी नजरों को अपनी मां की गांड पर घूमता हुआ देखकर वह क्रोधित तो हुआ लेकिन इस समय वह उस लड़के को कुछ बोल भी नहीं सकता था और बोलता भी क्या बोलता हूं कि उसकी मां की गांड की देख रहा है सब बोलने में भी खुद उसकी ही फजेती हो जाती,,, और वैसा वह चाहता नहीं था,,,,

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संजू की नजर उस लड़के पर ही हूं और वह लड़का संजू की मां को देख रहा था आसमानी रंग की साड़ी में उसकी मां इस समय किसी हीरोइन से कम नहीं लग रही थी खुला गले का ब्लाउज पहने होने की वजह से उसकी नंगी चिकनी पीठ पर बस एक पतली सी रस से भरी हुई थी और बाकी की नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, संजू ने साफ-साफ देखा था कि वह लड़का उसकी मां की नंगी चिकनी पीठ करके उसकी कमर के बीच में बनती पतली गहरी लकीर और कमर के नीचे के घेराव को देखकर जींस के ऊपर से ही अपने लंड को दबाया था,,,,। एक लड़का होने के नाते संजु को इतना तो पता ही था कि एक औरत को देखने के बाद एक लड़की के मन में क्या चलता रहता है और जिस तरह से उस लड़के ने अपने लंड को दबाया था संजू,, संजू समझ गया था कि अपने मन में उसकी मां की गांड की कल्पना कर रहा है और अपने मन में यही सोच रहा था कि काश यह गांड उसे चोदने को मिल जाती तो कितना मजा आता,,,,उस लड़के के मन में क्या चल रहा है यह संजू अपने मन में सोच कर परेशान भी हो रहा था और उत्तेजित भी हो रहा था कि उसकी मां को देखकर ना जाने कितने लोग गर्म आहें भरते होंगे,,,, अपनी मां के इस कदर खूबसूरत होने पर संजु को भी गर्व का अनुभव हो रहा था,,,,,, वह लड़का बार-बार सबसे नजर बचाकर आराधना की गांड के उधार का मजा ले रहा था,,,, और आराधना के इस बारे में बिल्कुल भी खबर नहीं थी वह अपनी मस्ती में एक-एक करके राशन का सामान ले रही थी,,और सामान लेते समय बातें करते समय इधर-उधर हाथ करके दिखाते समय जिस तरह से उसकी गांड की थिरकन हो रही थी उसे देखकर खुद संजू का भी लंड जवाब दे रहा था,,,,, संजु को भी यह नजारा देखने में बहुत मजा आ रहा था,,,

आरधना की बड़ी बड़ी चूचिया और उभरी हुयी गांड

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वह लड़का सामान ले चुका लेकिन फिर भी एक बहाने से संजू की मां की गांड के दीदार के लिए ही एक बहाने से वहीं खड़ा होकर कभी यह सामान तो कभी वह सामान का भाव पूछ रहा था,,,,संजु को इस बारे में पता था कि वह सामान ले चुका है फिर भी जानबूझकर नाटक कर रहा है,,,लेकिन संदीप जानता था कि उसके राशन की लिस्ट ज्यादा लंबी थी वह कितनी देर खड़ा रहता आखिरकार वह चला गया,,, तभी खूबसूरत औरत सामान लेने आई और थोड़ा सा हिचकीचाते हुए दुकानदार से विहस्पर मांगी और विहस्पर मांगते समय इधर उधर नजर दौड़ा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा है,,,, ऐसे में संजू की नजर उस औरत से टकरा गई और वह औरत शर्माकर दूसरी तरफ नजर फेर ली,,, और अचानक उसकी बड़ी बड़ी गांड पर संजू की नजर पड़ गई,,, जिसे देख कर उसके मुंह से भी आह निकल गई उसकी पतली कमर में हल्की से कमर के पीछे वाले भाग में लकीर बनी हुई थी जिससे उसकी खूबसूरती और मादकता दोनों बढ़ रही थी संजु अपने मन में सोचने लगा कि जब वह किसी गैर खूबसूरत औरत को देखकर इतना उत्तेजित और आनंद ले रहा है तो दूसरे कैसे नहीं उसकी मां की खूबसूरत बदन को देखकर अपने मन में गलत विचार लाते होंगे,,,,,, थोड़ी देर में वह औरत भी वहां से चली गई,,, धीरे-धीरे दो चार ग्राहक और आ गए जिसमें दो लड़के उसके ही हम उम्र के थे,,,, आराधना संजू से पूछ पूछ कर सामान लिए जा रही थी,,,,वैसे तो संजू को इस बारे में कुछ पता नहीं चाहता था लेकिन फिर भी आराधना तसल्ली के लिए एक बार उससे पूछ लेती थी कि यह सामान लेना है या नहीं लेना है,,, संजु भी अपनी राय बताता जा रहा था,,,,,,

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खरीदारी चली रही थी कि तभी वह दोनों लड़कों के आपस में फुसफुसाने की आवाज संजू के कानों में पड़ी ,,,उसे कुछ साफ सुनाई नहीं दे रहा था लेकिन कहीं से अंदाजा लग गया था कि वह दोनों उसकी मां के बारे में कुछ बोल रहे हैं इसलिए वह अपने कान एकदम से खड़ा कर लिया,,,,,इन दोनों की बातों को सुनने की कोशिश करने लगा वह दोनों उसकी मां के दूसरे साइड पर खड़े थे और संजू इस और खड़ा था,,,,, तभी उसके कानों में दस्तक हुआ जो कि वह दोनों लड़के आपस में बात करते हुए बोल रहे थे,,,।

यार ये भाभी कितनी जोरदार है एकदम मक्खन की तरह चिकनी है,,,,(इतना सुनते ही संजू को गुस्सा आ गया लेकिन वह बोलता भी तो क्या बोलता है सबके सामने झगड़ा करने में मजा नहीं था क्योंकि दूसरे लोग पूछते जरूर की क्या हुआ तब,,,वह क्या कहता यह कहता कि वह उसकी मां को जोरदार बोल रहा है अभी वह इतना सोच रहा था कि दूसरे लड़के ने बोला,,,)

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यार इसकी गांड कितनी मस्त है बड़ी-बड़ी,,, अगर मिल जाए तो दोनों हाथों से पकड़कर चोदने मे मजा आ जाए,,,,

( यह सुनते ही,, संजू के तन बदन में आग लग गई वह लोग सीधे सीधे उसकी मां को चोदने की बात कर रहे थे,, संजीव को समझ में नहीं आ रहा कि क्या करेंउसका मन तो दोनों को पीटने को कर रहा था लेकिन फिर भी बात का बतंगड़ बन ही जाता और ऐसे में वह दोनों ही मजाक का कारण बन जाते हैं क्योंकि उन दोनों को पीटने के पीछे का कारण संजू बता नहीं सकता था,,, वह दोनों तिरछी नजरों से उसकी मां की गांड को ही देख रहे थे,,, तभी वह लड़का आगे लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसकी मुझे आराधना की छातियों पर गई तो वह अपने दोस्त से बोला,,,)

बे पीछे का सामान तो जोरदार है ही आगे की चुची तो देख एक एक चूची डेढ़ डेढ़ लीटर की है,,,बाप रे उसकी किस्मत कितनी जोरदार होगी जो इसकी चुचियों को दोनों हाथ में लेकर मुंह में भरकर पीता होगा,,, मेरी किस्मत में अगर यह औरत एक रात के लिए भी आ जाए तो चोद चोद कर इसकी बुर का भोसड़ा बना दूं,,,,

(उस लड़के की बात सुनकर संजू आग बबूला हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था गुस्से से उसका चेहरा लाल पीला हो रहा था ,, वो अपने मन में सोचने लगा कि जब उसे उस लड़के की बात सुनाई दे रही है की वह क्या बोल रहा हैतब तो उसकी मां उसके पास में खड़ी है तो क्या उसकी मां को नहीं सुनाई दे रहा होगा कि वह लड़का उसके बारे में कितनी गंदी गंदी बात कर रहा है लेकिन वह अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी मां अपनी मस्ती में मशगूल थी,,,, ऐसा संजू सोच रहा था लेकिन हकीकत यह थी कि उन लड़कों की बात आराधना भी सुन रही थी जहां एक तरफ से गुस्सा आ रहा था तो वहीं एक तरफ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी हो रहा था कि जवान लड़के उसके पीछे लार टपकाए पड़े हैं,,,,अपने बारे में इतनी गंदी गंदी बात उसने कभी नहीं सुनी थी हालांकि अपने पति से वह गालियां जरूर सुनती थी लेकिन उसके लड़के की उम्र के लड़के उसके बारे में इतनी गंदी विचारधारा रखते हैं उसे आज पहली बार पता चल रहा था,,,, उस लड़के की बात से वह गुस्से के साथ-साथ उत्तेजित भी होने लगी ,,, क्योंकि वह लड़का बोला कि रात भर के लिए मिल जाए तो उसकी बुर का भोसड़ा बना दें,,,मतलब साफ था कि उसके बेटे की उम्र की लड़की है उसे चोदने के लिए बेताब है इसका मतलब कि उसके बदन में अभी भी जवानी का कसाव बरकरार था जिससे जवान लड़के उसकी तरफ आकर्षित हो रहे थे,,, इन दोनों लोगों की बातें सुनकर आराधना को इस बात का एहसास होगा कि जब उसके बेटे की उम्र की लड़की मुझसे एक बार देखने के बाद अपनी विचारधारा इस तरह की गंदी रखते हैं तो उसका बेटा तो उसके साथ हमेशा रहता है उसे नाम की भी देख चुका है तो उसके मन में कितनी भावनाए उमड़ती होंगी,,,।,,, लेकिन वह नहीं चाहती थी कि उन्होंने लड़के की बातें सुनकर संजू गुस्से में आए और उन दोनों से मारपीट करें इसलिए अपने बेटे का ध्यान भटकाने के लिए वह कोई न कोई सामान उसे पकड़ा दे रही थी जिसकी प्राइस देखने में उसका बेटा उलझा रहता था वह सोच रही थी कि वह दोनों लड़के के यहां से चले जाएं कि तभी,,, उनमें से एक लड़का बोला,,,।

यार मेरा मन तो एक बार इसकी गांड पर हाथ रखने को कर रहा है,,,

यह सुनते ही आराधना डर और उत्तेजना के मारे पीहर उठी,,,, वह नहीं चाहती थी कि ऐसा कुछ हो,,, इसलिए एक बहाने से अपने बेटे के बीच की तरफ किसी सामान को लेने का बहाना करके आ गई और अपने बेटे को दूसरी तरफ कर दी अब वह दोनों लड़के उसके बेटे के करीब हो गए,,,, वह तिरछी नजर से उन दोनों लड़कों को देख रही थी,,, उनका चेहरा देखकर लग रहा था कि उसका उधर जाना उन दोनों को कितना खल रहा था वैसे भी वह दोनों सामान ले चुके थे थोड़ी देर में वहां से निकल गए लेकिन जाते जाते वह दोनों लड़के उसे इस बात का एहसास करा गए थे की अभी भी उसके अंदर जवानी कूट-कूट कर भरी हुई है और इस उम्र में भी वह उसके बेटे की उम्र के लड़कों का पानी निकाल देने में पूरी तरह से सक्षम है,,,,।

आराधना अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी,,,, राशन का सामान वह ले चुकी थी कि तभी बारिश पड़ने लगी,,,, सभी सामान को वह प्लास्टिक में पैक करवाने लगे ताकि बारिश में भीग ना जाए,,, थोड़ी देर में बारिश रुक भी गई थी लेकिन फिर से बारिश पड़ने के आसार नजर आ रहे थे इसलिए,,, आराधना जल्द से जल्द अपने घर पहुंच जाना चाहती थी इसलिए तुरंत सामान्य कर बाहर निकल गई,,, और बाजार में से ही समोसे और पानी पूरी पेक करवा ली ,,,बाजार से थोड़ी दूर पर ही उसका घर का इसलिए दोनों पैदल चलने लगे कि तभी फिर से बारिश पढ़ना शुरू हो गई और इतनी जोर से पड़ने लगी कि उन दोनों को सर छुपाने की जगह नहीं मिली और दोनों पूरी तरह से खरीदें बारिश अभी भी लगातार हो रही थी अच्छा हुआ सामान कि वह दोनों प्लास्टिक में पैक करवाए थे इसलिए सामान भीगने का सवाल ही नहीं उठता था,,,वह दोनों भीगते भीगते चले जा रहे थे,,,,,,, क्योंकि अब बारिश से बचने का कोई सवाल ही नहीं था क्योंकि दोनों पूरी तरह से पानी में भीग चुके थे,,,,,,

थोड़ी ही देर में दोनों अपने घर पर पहुंच गए घर का दरवाजा अभी भी बंद था और दरवाजे पर ताला लगा हुआ है जिससे पता चल रहा था कि मोहिनी अभी घर पर नहीं आई थी बारिश की वजह से वह भी अपनी सहेली के वहां रुक गई थी रखना जल्दी से ताला खोलकर दरवाजा खोलिए दोनों घर में प्रवेश कर गए प्रवेश करते ही,,, दरवाजा बंद कर दी और सामान रखने लगी,,,।

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बाप रे बारिश से बचने का तो समय ही नहीं मिला,,,

हम अभी अच्छा हुआ कि तुमने सामान को प्लास्टिक में पैक करवा ली थी वरना सारा सामान भीग जाता ,,,

हां इसीलिए तो,,,, मैं जानती थी घर बारिश पड़ जाएगा तो सारा सामान खराब हो जाएगा,,,,

( इतना कहते हुए आराधना अपने साड़ी के पल्लू अपने कंधे पर से हटा कर पानी को साड़ी में से गारने लगी,,, वहीं पास में संजु भी खड़ा था जो कि अपने शर्ट के बटन बोलने लगा और अपने शर्ट के बटन को खोलते हुए उसकी नजर जैसे ही अपनी मां की भारी-भरकम छातियों पर गई तो उसकी नजर छातियों पर ही गड गई,,,,, उसे तुरंत दुकान पर खड़े दोनों लड़कों की बात याद आ गई की एक एक चूची डेढ़ डेढ़ लीटर की है,,, संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, आराधना को जब इस बात का अहसास हुआ कि वह अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपने साड़ी को अपने कंधे पर से हटा दि है और उसकी भारी-भरकम छातिया उसकी आंखों के सामने उजागर हो गई है तो वह एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई,,, पल भर में ही उसकी आंखों में भी उत्तेजना का तूफान नजर आने लगा उसे ढूंढो की बात याद आने लगी जो कि उसके बेटे के ही हमउम्र थे और उसके बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे थे,,, कि रात भर के लिए मिल जाए तो सारी रात चोद चोद कर बुर का भोसड़ा बना दे,,,उन लड़कों की बात याद आते ही वह अपने मन में सोचने की क्या ऐसा हो सकता है अगरवह सच में एक रात के लिए किसी जवान लड़के की बाहों में चली जाए तो क्या वह लड़का सारी रात उसकी बुर में अपना लंड डालकर इस की चुदाई कर करके रात भर में उसकी बुर का भोसड़ा बना सकता है ,,,, यह ख्याल मन में आते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर गीली होने लगी,,,, अभी भी संजू आंखें फाड़े उसकी चूची की तरफ ही देखे जा रहा था जो कि बारिश की वजह से पानी की धार उस पर पड़ने की वजह से अपने आप ही ब्लाउज के ऊपर वाला बटन खुल गया था और चुचियों का वजन इतना ज्यादा था कि ऐसा लग रहा था कि अभी ब्लाउज फट जाएगा और दोनों चूचियां बाहर आ जाएंगी,,,,,,,आराधना अपने बेटे की प्यासी नजरों को देखकर शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी कि तभी आसमान में जोर की बिजली कड़की और आराधना एकदम से डर गई और तुरंत जाकर संजू से चिपक गई,,,, संजू को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई हो,,, वह तुरंत अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया एक जवान लड़के की बाहों में अपने आप को पाकर ना जाने क्यों आराधना सुकून महसूस कर रही थी,,, बड़ी-बड़ी चूचियां संजू के शर्ट का बटन खुला होने की वजह से उसकी नंगी छातियों रगड़ खा रही थी यह एहसास संजु को और ज्यादा गर्म कर रहा था,,, संजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,कोट पैंट में तंबू बनाकर सीधे-सीधे उसकी मां की दोनों टांगों के बीच से होता हुआ उसकी बुर पर दस्तक देना शुरू कर दिया था,,,, यह एहसास आराधना के लिए बिल्कुल अद्भुत और नया था,, इतने से ही आराधना की जवानी का रस पिघलने लगा उसकी बुर से काम रस बहना शुरू हो गया,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है,,,।

संजू जैसे इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था अपना दोनों हाथ पीछे की तरफ लाकर अपनी मां की गांड पर रख दिया और उसे हल्के से दबाकर अपनी तरफ खींच लिया अपने बेटे की यह हरकत से आराधना पूरी तरह से पिघलने लगी,,,दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे दोनों एक दूसरे की आंखों के समंदर में डूबने लगे दोनों को इस बात का अहसास तक नहीं था कि दोनों क्या कर रहे हैं,,,, संजु अपनी मां के लाल लाल होठों का रस अपने होठों से पी जाना चाहता था इसलिए उससे रहा नहीं जा रहा था तो वह अपने होठों को अपनी मां के तपते हुए रसीले होठों पर रखकर उसके होंठों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,, दोनों के तन बदन में आग लग गई,,,आराधना अपने बेटे की हरकत से शर्म से पानी पानी तो हुए जा रही थी लेकिन एकदम से चुदवासी भी हुए जा रही थी क्योंकि संजू का मोटा तगड़ा लंड बार बारिश की बुर के ऊपर साड़ी के ऊपर से ही ठोकर मार रहा था,,,, संजू पूरी तरह से मस्त हो गया था पहली बार वह इस तरह से चुंबन जो कर रहा था और वह भी अपनी मां के ही होंठों का इसलिए एहसास के तन बदन में और ज्यादा आग लगा रहा था,,,,, संजू पुरी तरह से मस्ती के सागर में डुबता चला जा रहा था,,, वह अपनी मां की नितंबों को कस के दोनों हाथों से पकड़े हुए उसे अपने लंड से सटाया हुआ था,,,,

संजू और आराधना का चुम्बन

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आराधना भी गहरी गहरी सांसे ले रही थी अपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी इस समय अपने बेटे को रोक सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,,, वह दोनों आगे बढ़ जाना चाहते थे कि तभी दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक होने लगी,,,।

मम्मी,,, दरवाजा खोलो,,,, मम्मी,,,,,

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इतना सुनते ही दोनों चौक गए और दोनों एक दूसरे से अलग हो गए आराधना अपनी साड़ी को ठीक करने लगी जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसे उतारना भी जरूरी था लेकिन फिर भी दरवाजे पर उसकी लड़की खड़ी थी इसलिए,,,नंग धड़ंग हालत में दरवाजा खोलना ठीक नहीं था और वह भी बंद कमरे के अंदर अपने बेटे की मौजूदगी में,,,, इसलिए आराधना जल्दी से अपने आप को संभाल कर दरवाजा कोली तो सामने मोहिनी खड़ी थी और वह भी छाता लिए,,, उसे देखते ही आराधना बोली,,,।

अरे मोहिनी तु कहां इतनी देर लगा दी,,,,

अरे मम्मी देख नहीं रही हो इतनी जोर से बारिश होने लगी थी आने का मौका ही नहीं था वो तो मैं अपनी सहेली का छाता लेकर यहां तक पहुंच पाई हु नहीं तो मैं भी भीग जाती,,,

अच्छा हुआ बेटी की तु अपनी सहेली का छाता लेकर आए हम दोनों एक दम से भीग गए हैं,,, आजा अंदर आकर दरवाजा बंद कर दे,,,।
 
संजू क8 वजह से आराधना की चाल और भी ज्यादा मादक हो गयी

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मोहिनी के इस तरह से काहे का जाने की वजह से आराधना और संजू के रंग में भंग पड़ गया था दोनों को ना चाहते हुए भी अलग होना पड़ा था,,,,।

कपड़े बदलने के बाद आराधना बाजार से लाए हुए थैले में से एक-एक करके सामान निकालने लगी,,, यह देखकर मोहिनी बोली,,,।

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क्या हुआ मम्मी पापा ने पैसे दे दिए क्या,,?

तेरे पापा से उम्मीद नहीं रह गई यह तो मैं दीदी के घर जाकर उधार मांग कर लाई हुं,,,

(यह सुनकर मोहिनी के चेहरे पर थोड़ी उदासी और थोड़ी खुशी नजर आ रही थी,,, उसे वास्तव में समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे हालात में वह हसे या रोए,,, क्योंकि इस तरह के हालात उसने अपने घर पर कभी नहीं देखी थी,,, लेकिन उसके पापा की वजह से क्यों नहीं देखना था वह उसे देखना पड़ रहा था,,,। वह भी थैले मे से सामान को एक-एक करके बाहर निकालने लगी,,, और अपनी मम्मी से बोली,,)

मम्मी पापा कुछ समझते क्यों नहीं,,,? ऐसे तो वहां बिल्कुल भी नहीं थे,,

मैं भी तो हैरान हूं मोहिनी,,, शराब की लत ने उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है और साथ में हमें भी,,,, लगता है तेरी मौसी ने जो बोली है मुझे भी वही करना होगा,,,।(स्तर की बात सुनकर मोहिनी के जेहन में उस दिन वाली बात याद आने लगी जब उसकी मौसी उसे उसके पापा को खुश करने के लिए औरतों के लिए नए-नए तरीके बता रही थी कि आदमी को खुश करने के लिए क्या क्या करना चाहिए वह बात याद आते ही मोहिनी के तन बदन में अचानक ही उत्तेजना की दर्द होने लगी हालांकि इस तरह की उत्तेजना वह कम ही महसूस कर पाते इसलिए उसे समझ में नहीं आता था कि उसके बदन में यह कैसी हलचल हो रही है,,, लेकिन तभी उसकी मां भी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली तो वह समझ गई की उसकी मा किसी और चीज के बारे में बात कर रही है,,,) तेरी मौसी मुझे भी कोई जॉब करने की हिदायत दी है,,,

आराधना की मदहोश जवानी

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तुम और जॉब,,,, यह कैसे हो सकता है मम्मी मुझे नहीं लगता है कि तुम जॉब कर पाओगी,,,।

क्यों तुझे क्यों नहीं लगता आखिरकार में पढ़ी लिखी हूं कंप्यूटर चलाना जानते हो किसी भी ऑफिस में मुझे काम मिल जाएगा और काम दीलाने की जिम्मेदारी भी तेरी मौसी की है,,,,

पापा मानेंगे,,,

उनके मानने ना मानने से क्या होता है अगर घर की जरूरतों को वह पूरा करते तो इस तरह की नौबत ही नहीं आती वह तो अच्छा हुआ कि आज दीदी ने मदद कर दी वरना हमें भूखा ही सोना पड़ता और कब तक यह भी कोई कह नहीं सकते थे,,,।

बात तो तुम ठीक कह रही हो मम्मी,,,,

मैं भी मन बना ली हूं मे भी जॉब करूंगी क्योंकि तेरे पापा की हालत देखते हुए मुझे नहीं लगता है कि घर में उनके पैसे से राशन या जरूरत संबंधी कोई चीज आ सकती है,,,, क्योंकि वह सारे पैसे शराब में ही उड़ा देते हैं,,,। जॉब करूंगी पैसे मिलेंगे दो-चार पैसे पास में होंगे तभी ना मैं तुम लोगों की जरूरतें पूरी कर पाऊंगी,,,

(अपनी मां की आवाज सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई क्योंकि उसकी मां का भी कहना ठीक ही था मोहनी को भी अपनी मां के यह बात अच्छी लगी थी,,, थोड़ी देर में मोहिनी खाना बनाने अपनी मां का हाथ बताने लगी और बगल वाले कमरे में संजू अपनी मां के होठों का चुंबन याद करके पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,, इससे पहले वह अपनी मौसी के होठों को चुम चुका था लेकिन जो मजा उसे अपनी मां के लाल लाल होठों को चूसने में मिला था इस तरह का मजा उसे अपनी मौसी के होठों से नहीं मिला था हालांकि उस समय के हालात कुछ और थे उस समय वह अपनी मौसी की चुदाई कर रहा था और उसके बाहों में उसकी मौसी का खूबसूरत बदन था लेकिन फिर भी उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव अपनी मां के होंठों का चुंबन करने में हुआ था,,, क्योंकि इस पल को याद करके भी इस समय उसका लंड पूरी तरह से लोहे का रोड बना हुआ था,,,,लंड के कड़क पन की वजह से उसे अपने लंड में मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था और वह पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबाते हुए अपनी मां के बारे में सोच रहा था,,,,।

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वह अपने मन में सोचने लगा कि बड़े आराम से उसकी मां उसे उसके होठों पर चुंबन करने दे रही थी और खुद भी उसका साथ भी दे रही थी उस समय उसके दोनों हाथ उसकी चिकनी पीठ से होते हुए उसके नितंबों पर आ गई थी,,, उस समय वह पूरी तरह से भीगी हुई थी और भीगने के बावजूद भी उसके बदन की गर्मी संजू को अपने बदल में महसूस हो रही थी अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर दोनों हाथ को रखकर किस तरह की उत्तेजना और सुख का अनुभव संजू ने किया था उस बारे में व कल्पना भी नहीं कर सकता था उस समय माने के जैसे उसके हाथों में उसकी मां की गाना नहीं बल्कि दुनिया भर का खजाना हाथ लग गया हो,,,, संजू उस पल को याद करके पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, और देखते ही देखते उस पल की याद में वह अपने पेंट की बटन खोलने लगा और अगले ही पल उसका नंगा लंड उसके हाथ में था जो कि मोटे मुसल की तरह नजर आ रहा था जिससे ओखली कुटी जाती है,,,, उस पल की गर्मी संजू को अभी भी अपने बदन में महसूस हो रही थी,,, पल भर में ही संजू अपनी मां की तुलना अपनी मौसी से करने लगा जिसको वह चोद भी चुका था,,,और आज ही उसकी चुदाई करके भी आया है वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां की नंगी होने के बावजूद भी इतनी अत्यधिक उसे उत्तेजित नहीं कर पाते जितना कि उसकी मां साड़ी में होने के बावजूद भी उसे मदहोश कर देती है,,,,यह तुलनात्मक स्थिति उसे तब महसूस हुई जब वह अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का चुंबन करते हैं उसकी बड़ी-बड़ी काम को दोनों हथेलियों में लेकर दबाया था इससे पहले,,, उसकी उत्तेजना का थर्मामीटर का पारा उसकी मौसी के खूबसूरत बदन से ही पार हो जाती थी लेकिन तुलनात्मक स्थिति में इस समय वह अत्यधिक उत्तेजना अपनी मां से महसूस कर रहा था,,,,।

संजु को इस बात का भी एहसास अच्छी तरह से था कि जब अपनी मां को बाहों में भर कर उसके होठों पर चुंबन करते हुए उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों दबाएए हुए उसे अपनी तरफ खींचे हुए था तब उसका मोटा तगड़ा लैंड पेंट में होने के बावजूद भी उसकी मां की साड़ी सहित अंदर की तरफ घुसता हुआ उसकी चुत पर ठोकर मार रहा था,, बड़े अच्छे से मार रहा था संजू को पूरा विश्वास था कि चुंबन का आनंद लेते हुए उसकी मां भी उसके लंड की ठोकर को अपनी चूत पर साफ साफ महसूस की होगी तभी तो पूरी तरह से मस्त होकर उसका साथ दे रही थी,,,,,,, संजु अपने मन मे सोचने लगा कि उस समय उसकी मां क्या सोच रही होगी जब उसे अपनी चूत पर उसका मोटा लंड ठोकर मारता हुआ महसूस हुआ होगा संजु यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां भी प्यासी है उसे प्यार की जरूरत है जो कि उसे अपने पति की तरफ से नहीं मिल रहा है,,,, अपनी मां का सहकार पाकर संजू इतना तो समझ गया था कि उसकी मां को भी यह सब अच्छा लग रहा था तभी तो वहां आगे बढ़ रही थी और उसे आगे बढ़ने दे रही थी नहीं तो वह इस तरह की हरकत कभी ना करने देती,,,,।

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संजू अपनी मां की गुलाबी चूत के बारे में कल्पना करके पूरी तरह से मदहोश होता हुआ अपने लंड को धीरे धीरे मुठीयाना शुरू कर दिया था,,,, और अपने मन में कल्पना करने लगा अब आए दिन संजीव अपनी मां के बारे में कृपया करके मुठ मारने लगा था इस समय वह वही कल्पना कर रहा था जिस हालात में दोनों बरसात में भीगते हुए अंदर आए थे उसी हकीकत को कल्पना का स्वरूप देकर आगे ले जाते हुए अपने मन में सोचने लगा कि बाहों में कैद उसकी मां अपनी चूत पर उसके लंड की ठोकर बर्दाश्त नहीं कर पाई तुरंत अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ना शुरु कर दी,,,, इस तरह की कल्पना करते हुए संजू आसमान में उड़ने लगा था,,, यह जानकर कि साड़ी के नीचे उसकी मां पेंटी नहीं पहनी है,, संजू का लंड और ज्यादा अकड़ने लगा,,, और अपने लंड को मुठीयाते हुए अपनी कल्पना को और आगे ले जाते हैं अपने मन में सोचने लगा कि वह अपनी मां को चोदने के लिए तुरंत उसकी बाहों को पकड़कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी मां भी जल्दबाजी दिखाते हुए,,, थोड़ा सा और नीचे की तरफ झुक गई और अपनी नजरों को पीछे करके उसकी हरकत को देखने लगी संजू अपनी मां की आंखों में देखते हुए अपने लंड को हाथों में पकड़ कर जोर जोर से उसकी गोल-गोल गांड पर पटकने लगा मानो कि जैसे कोई पत्थर पर पटक पटक कर कपड़े धो रहा हो,,,

आराधना साड़ी उठा क

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उसकी मां को इस बात का एहसास था कि उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा है इसलिए संजू की हरकत भी उसे बेहद लुभावनी लग रही थी,,, एक पल के लिए संजू कल्पना करते हुए भी अपने लंड के छोर को पकड़ कर अपनी मां की गांड की फांकों के बीचो-बीच रखकर लैंड की लंबाई नापने लगा की चूत में घुसने की बाद कहां तक पहुंचता है,,,, कल्पना में ही एहसास करते हुए की उसकी मां को उसकी चूत की खुजली बर्दाश्त नहीं हो रही है वहां बार-बार अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल रही है तो संजू भी जल्दबाजी दिखाता हुआ,,, अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखकर उसकी चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया और चूत का गीलापन पाकर उसका मोटा तगड़ा लंड चूत की गहराई में सरकना शुरू कर दिया देखते ही देखते संजू का पूरा लंड उसकी मां की चूत की गहराई में कहीं खो गया इसके बाद संजू दोनों हाथों से अपनी मां की गोरी गोरी गांड को पकड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया उसकी मां अपनी नजरों को पीछे कर के अपने बेटे की हरकत को देख कर शर्म से पानी पानी भी हो रही थी और मजे भी ले रही थी और अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल कर अपने बेटे का साथ भी दे रही थी,,, पर अपनी मां की आंखों में देखते हुए संजू के धक्के तेज होने लगे,,, और इस तरह की कल्पना करते हुए संजु अपने लंड को जोर-जोर से मुठीयाते हुए अपने लंड का पानी निकाल दिया,,,, गहरी गहरी सांसे लेने लगासंजू को अपनी मां के बारे में इस तरह की कल्पना करते हुए मुठ मारने में भी अत्यधिक उत्तेजना और संतुष्टि का अहसास होता था और वह अपने मन में सोचने लगा कि कब तक वह अपनी मां के बारे में सोच सोच कर सिर्फ हाथ से हिलाता रहेगा,,, और शाम को जिस तरह से दोनों के बीच चुंबन का प्रकरण शुरू हुआ था उसे देखते हुए संजु को लगने लगा था कि बहुत ही जल्दी उसे गिफ्ट में उसकी मां की चूत मिल जाएगी,,,क्योंकि संजू को लगने लगा था कि जिस तरह से उसकी मां चुंबन में उसका सहकार दे रही थी,, जरूर उसके लिए अपनी दोनों टांगों को खोल देगी,,,,।

आराधना की बड़ी बड़ी गांड

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मुठ मारने के बाद संजू अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके पढ़ने लगा था क्योंकि जानता था कि इस समय अपनी मां से बात भी नहीं कर पाएगा क्योंकि मोहिनी भी साथ में है,,,,,,।

और दूसरी तरफ खाना बनाते समय आराधना के मन में भी भावनाओं का बवंडर उठ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जो कुछ भी हुआ वह होना चाहिए था या नहीं,,,, अपने मन में सोचने लगी कि आखिरकार एक मा है उसका बेटा अगर भटक रहा है तो उसे समझाना चाहिए ना कि उसे और ज्यादा भड़काना चाहिए,,, वह रोटियां पकाते समय शाम के वक्त के हादसे को याद कर रही थी,,, कुछ देर पहले शाम वाला वाक्याउसे सुनहरा मौका नजर आ रहा था लेकिन जैसे ही वासना का तूफान उसके दिमाग से उतरा तो वह उसे हादसा नजर आने लगा था,,,, आराधना कभी नहीं चाहती कि उसका बेटा उसके बदन का दीवाना बने क्योंकि यह मां बेटे के बीच की मर्यादा बिल्कुल भी नहीं है,,, और आराधना नहीं चाहती थी कि किसी भी तरह से दोनों के बीच यह मर्यादा की दीवार टूटे,,,,,, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं था कि उसके बेटे की हरकत को लेकर उसे अच्छा ना लगा हो उसे अच्छा भी लग रहा था अगर अच्छा ना लगता तो वह चुंबन में इस तरह से साथ ना देती,,, अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह खुश ना होती,,,, कहीं ना कहीं उसके बेटे की हरकत उसे भी पसंद आ रही थी लेकिन एक औरत के नजरिए से लेकिन जब वह अपने बेटे की हरकत पर की मां की नजर से देखती थी तो उसे सब कुछ गलत नजर आता था क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह गलत ही था,,,,

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आराधना किस बात का एहसास हो गया था कि जवान के दौर से गुजरते हुए अक्सर इस उमर में लड़के भटक जाते हैं तो यही उसके बेटे के साथ भी हो रहा था जिसे समझा कर सही राह दिखाना बहुत जरूरी था,,, खाना बनाते समय मोहिनी के बात को वह बिल्कुल भी सुन नहीं रही थी बस हां हूं मैं जवाब दे रही थी,,, और वह अपने ही ख्यालों में खोई हुई थी,,वह अपने मन में सोचने लगी कि उसके बेटे में आए बदलाव की वजह भी वह खुद हैं और उसका पति भी,,, रात को अक्सर जिस तरह से गाली-गलौज गंदी बातें हो रही थी उसका बेटा रोज सुनता था और उन दोनों की गाली गलौज गंदी बातों को सुनकर वह अपने मन में भी ना जाने कैसी कैसी भावनाओं को जन्म देने लगा था जिसका नतीजा यह हुआ था कि वह अपने मां के प्रति आकर्षित होने लगा था खास करके तब जब उसके और उसके पति के बीच मारपीट होने लगी और बीच बचाव करने के लिए वह कमरे में आ गया था और उस समय वह पूरी तरह से नंगी बिस्तर पर थी और ऐसा दो बार हो चुका था दोनों बार आराधना ने इस बात को महसूस की थी कि उसकी मदद करते हुए भी संजू की नजर उसके नंगे बदन पर थी उसके अंगों पर थी,,,पर एक बार तो उसके हाथ की कोहनी से उसकी चूची दबा दी गई थी तब भी वह बड़े हैरानी से उसकी चूचियों की तरफ देखने लगा था यह सब हालात से गुजरते हुए उसका बेटा उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो‌ चुका था,,, नतीजन वह शाम को अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पाया और उसे अपनी बाहों में लेकर उसका चुंबन करने लगा जिसका साथ वह खुद दे रही थी लेकिन आराधना को लगने लगा था कि,, उसे उसके बेटे को समझाना चाहिए उसे इस तरह के गलत राह से बचाना चाहिए वरना सब कुछ बिगड़ जाएगा,,, यही सोचते हुए खाना बना रही थी,,,,,,, और थोड़ी देर में ही खाना बनकर तैयार हो गया,,,,,,,, संजू अपनी मां से बात करना चाहता था,,, वह जिस काम को अधूरा छोड़ा था उसे पूरा करना चाहता था,,,,, चुंबन अपनी मां का सहकार पाकर संजू को लगने लगा था कि उसकी मां आगे भी उसका इसी तरह से साथ देगी,,, संजू को लगने लगा था कि उसकी मां उससे तू चुदवाएगी,,, इसलिए संजू अपने मन में यही सोच रहा था कि खाना खा लेने के बाद अपनी मां के कमरे में जाएगा और उस की चुदाई करेगा,,, क्योंकि वह जानता था कि उसके पापा 11 12 बजे के पहले नहीं आ वापस आते,,,,,

संजू अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था अपनी मां के बारे में सोच कर बार-बार उसका लंड खड़ा हो जाना था उसे लगने लगा था कि बहुत ही जल्द उसका पूरा वजूद उसकी मां की दोनों टांगों के बीच होगा और आज उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत चोदने को मिलेगी,,,,।

खाना खाने का समय हो गया था संजु और मोहिनी दोनों खाना खाने के लिए बैठ चुके थे,,, आराधना दोनों को खाना परोस कर थाली दोनों के आगे रख दी तो मोहिनी बोली,,,

मम्मी तुम भी खा लो,,,

नहीं मैं तेरे पापा आएंगे तब खाना खाऊंगी,,,,

नहीं मम्मी जिसको हम लोगों की फिकर बिल्कुल भी नहीं है,,, तुम उस इंसान का इंतजार करके अपना ही अपमान करवा रही हो,,,

नहीं मुझे आदत नहीं है जब वह आ जाएंगे तो मैं खा लूंगी,,,

कैसी बातें करती हो मम्मी,,,(संजू बीच में बोल पड़ा) आखिर इंतजार करके क्या मिलेगा इतने वर्षों से तो इंतजार करती आ रही हो बदले में क्या मिला दो पल की खुशी भी नहीं दे सकते,,, तुम ही जरा सोचो आज घर पर ,,,राशन बिल्कुल भी नहीं था लेकिन पापा को उस इंसान को कोई फर्क पड़ा मुझे तो उन्हें अब पापा कहने में भी शर्म आने लगी है,,,,

नहीं समझी ऐसा मत बोल,,,

क्यों ना बोलूं मम्मी,,,,, तुम पर इस तरह का जुल्म,, मारपीट जलील किया जाता है,,, रात भर जो कुछ भी होता है मुझे अच्छी तरह से मालूम है,,,

रात को क्या होता है संजु,,,

(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली क्योंकि रात को क्या होता है उसे कुछ भी नहीं मालूम था,,, मोहिनी को आश्चर्यचकित होता देखकर आराधना संजू की तरफ देखने लगी,,,, कोई कुछ नहीं बोल रहा था तो मोहिनी फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

क्या होता है रात को मम्मी,,,?

कककक,, कुछ नहीं बेटा यह तो संजू पागल हो गया,,, है,,,

क्यों मम्मी बता क्यों नहीं देती,,,,

तुम बताओ भैया क्या होता है,,,

रात को शराब पीने के बाद पापा घर पर आते हैं और मम्मी से मारपीट करते हैं गाली गलौज करते हैं,,,(संजू अपनी मां की तरफ देखती क्या बोला और आराधना शर्म से अपनी नजरें ले नीचे झुका ली,,,)

क्या,,,? यह सब होता है रात को और मुझे पता तक नहीं है,,,,,, मुझे पता क्यों नहीं है मम्मी,,, तुम मुझे बताई क्यो नहीं,,, वह इंसान ऐसा कैसे कर सकता है,,,,,,

जाने दे बेटी मेरी किस्मत ही शायद ऐसी है,,,

नहीं ऐसे कैसे जाने दे मम्मी,,, जैसे के साथ तैसा बनना पड़ता है तब इंसान को समझ में आता है कि वह क्या कर रहा है,,, अब तुम्हें भी वही करना होगा,, तभी शायद पापा को अक्ल आएगी,,,।

हां मम्मी मोहिनी ठीक कह रही है तुमको पापा की गुलामी छोड़ना होगा उनकी जी हुजूरी छोड़ना होगा,,, तभी जाकर शायद हम लोग सुखी से रह पाएंगे,,,।

(अपने बच्चों की बातें सुनकर आराधना को हिम्मत आ रही थी,,,,वह अपने मन में सोचने लगी कि शायद अगर किसी तरह की हिम्मत वह पहले दिखाई होती तो शायद यह नोबत नहीं आती,,,,)

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हां मम्मी पापा को सुधारने का काम आज ही से ही शुरु कर दो लाओ तुम भी खाना और हम लोगों के साथ खाओ और इंतजार करना एकदम से छोड़ दो,,,,,

लेकिन,,,,

लेकिन वेकिन कुछ भी नहीं रुको मैं खाना परोसती हुं,,,(इतना कहकर मोहनी अपनी जगह से उठी और अपनी मम्मी के लिए खाना निकालने लगी और खाना निकालते निकालते बोली) जिस इंसान को इतना सा भी एहसास नहीं है कि उसके बीवी बच्चे घर में भूखे हैं घर में राशन नहीं पैसा नहीं है उस इंसान के लिए पत्नी धर्म निभाने की कोई जरूरत नहीं है,,,,(इतना कहते हुए थाली में खाना परोस दी और अपनी मां के सामने थाली रख कर और एक गिलास पानी रखकर वह भी बैठ गई,,, और अपनी मां से बोली,,)

खाओ मम्मी,,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अब हम दोनों तुम्हारे साथ हैं,,,, संजू तो सब कुछ जानते हुए भी कभी पापा से बोला नहीं उन्हें रोका नहीं,,,

मैंने तो बहुत रोका मम्मी से पूछो लेकिन पापा मानने वाले थोड़ी हैं,,,

तो हम भी नहीं मानने वाले,,, देख क्या रही हो मम्मी खाना खाओ,,,,,,

अपने बच्चों की जीत के आगे आराधना की एक न चली और वह भी खाना खाने लगी और खाना खाते खाते अपने मन में सोच लेंगे कि जो कुछ भी उसके बच्चे कह रहे हैं उसमें सच्चाई है उसे भी थोड़ा कड़क रहना चाहिए नहीं तो ऐसे ही जिंदगी चलती रही तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा,,, और थोड़ी देर में तीनों ने खाना खा लिया,,,,, संजू को तो बस यह इंतजार था कि मोहिनी जल्दी से सो जाएं ताकि वह अपना आगे का काम शुरू कर सकें संजू के मन में भी ऐसा था कि उसकी मां भी यही चाहती है,,, आखिरकार एक औरत कब तक प्यासी रह सकती है यह बात उसने अपनी मौसी से सीखा था अपनी मौसी की बदन की प्यास को लेकर वहअपनी मां के बारे में भी यही अंदाजा लगा रहा था,,,,,,,।

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थोड़ी देर बात करने के बाद मोहिनी कमरे में चली गई और सो गई,,,, संजू और आराधना दोनों कमरे के बाहर ही अगल-बगल बैठे हुए थे,,,, संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था उसका लंड अपने आप खड़ा हो चुका था सिर्फ यह सोच कर कि अब उसे उसकी मां की चूत मिलने वाली है,,,,।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे करें और आराधना अपने बेटे से बात करना चाहती थी शाम को जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में,,,, लेकिन शुरुआत कैसे करें वह भी नहीं समझ पा रही थी,,, तभी संजू बात की शुरुआत करते हुए अपनी मां से बोला,,,।

मम्मी तुम्हारे होठों का रस बहुत ही नशीला है,,,,

यह क्या कह रहा है संजु तू,,,

मैं सच कह रहा हूं मम्मी तुम्हारे जैसे खूबसूरत होठ मैंने आज तक किसी के नहीं देखें,,,(संजु अपनी मां की आंखों में देखते हुए बोलाऔर आराधना शर्मा कर और घबराकर अपनी नजरों को नीचे कर ली और बोली,,,)

नहीं संजु,,,,

मम्मी मैं तुम्हारे होठों का रस फिर से पीना चाहता हूं,,,(और इतना कहते हुए संजू अपने होठों को अपनी मां के होठों की तरफ आगे बढ़ाया ,,, संजू को लग रहा था कि उसकी मां फिर से अपने होठों को चूमने देगी और साथ ही बहुत कुछ देगी,,,, ऐसा नहीं था कि आराधना अपने बेटे को एकदम से इंकार कर देतीना जाने क्यों संजू की बात है उसे बेहद अच्छी लग रही थी और उसे मदहोश भी कर रही थी क्योंकि एक जवान लड़का उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था उसके होठों के रस को पीने की बात कर रहा था,,,, और संजू अपनी मां के होठों को चूमने के लिए एकदम करीब आ गया,,,, संजू के सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और यही हाल आराधना का भी था,, दोनों आराधना के कमरे के दहलीज पर बैठे हुए थे ट्यूबलाइट की रोशनी उन दोनों पर भी पढ़ रही थी,,, संजू को सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,,, संजू धीरे-धीरे अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी होंठों के करीब लेता चला जा रहा था जैसे-जैसे संजू के होठ आराधना के होठों की तरफ बढ़ रहे थेआराधना की हालत खराब होती जा रही थी उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके बदन में कपकपी सी महसूस हो रही थी खास करके उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में कुछ ज्यादा ही हलचल महसूस होने लगी थी,,,,।

आराधना अजीब सी कशमकश में फंसी हुई थी उसका एक मन कर रहा था कि आगे बढ़ जाए और दूसरा मन उसे रोक रहा था वह संजू के साथ चुदाई का सुख भोगना चाहती थी क्योंकि शाम के वक्त जिस तरह से उसने अपनी बाहों में पकड़ कर उसके होंठों को चूमा था और जिस तरह से उसकी बड़ी बड़ी गांड कर अपनी दोनों हथेलियां रखकर दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींचा था,,, और अपने मोटे तगड़े लंबे लंड का एहसास उसे अपनी चूत पर करवाया था,,, पल भर में ही जिस तरह का एहसास आराधना ने उस समय महसूस की थी उससे वह पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी,,,, उस मर्दाना ताकत से भरे हुए एहसास को वह फिर से अपने अंदर महसूस करना चाहती थी अपने आप को अपने बेटे की मर्दाना चाहती हो के बीच महसूस करना चाहती थी उसके मर्दाना अंदर की गर्मी को अपने कोमल गुलाबी पत्तियों के बीचो-बीच महसूस करना चाहती थी,,, इसीलिए वह आगे बढ़ जाना चाहती थी,,, लेकिन उसका जमीर उसके संस्कार उसे रोक रहे थे,,, वह मर्यादा की इस दीवार को गिरने नहीं देना चाहती थी किसी भी हालत में दहलीज लांघना नहीं चाहती थी,,,,,,, वह अभी इसी कशमकश में थी कि आगे बढ़े के पीछे कदम हटा ले और इसी बीच उसे अपने होठों पर अपने बेटे के होंठों का स्पर्श महसूस होने लगा और अगले ही पल संजू ने उसके लाल-लाल होठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया आराधना को तो कुछ समझ में ही नहीं आया आखिरकार उसे भी एक मर्द के साथ की जरूरत थी इसलिए वह पिघलने लगी चूत से काम रस बहने लगा संजू पूरी तरह से उसे अपनी आगोश मे लेकर उसके लाल-लाल होठों को चुस रहा था,,,,,, संजू की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी और वहां आराधना का भी था संजू को लगने लगा था कि उसका काम बन गया है क्योंकि संजू को इस बात का एहसास हुआ कि उसकी मां के लाल लाल होठ हल्के से खुलकर उसे आगे बढ़ने की इजाजत दे रहे हैं,,,,

और वह इस मौके का फायदा उठाती हो अपना एक हाथ रख लेना के ब्लाउज पर रखती है और ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया आराधना को संजू की तरफ से इस तरह की हरकत का अंदेशा इस समय तो बिल्कुल भी नहीं था वह नहीं जानती थी कि संजू इतनी जल्दी आगे बढ़ने की कोशिश करेगा लेकिन आराधना को उसका इस तरह से चूची दबाना बहुत ही आनंददायक लग रहा था अपने मन में सोचने लगी कि क्यों ना वह आज जमाने के दस्तूर और मर्यादा को भूल कर अपने बेटे के साथ हमबिस्तर हो जाए और बरसों की प्यास को बुझा‌ले आखिरकार उसके पति ने भी तो इसी तरह का इल्जाम लगाते चला रहा था तो उस एग्जाम को हकीकत करने में कैसी शर्म,,,,।यह सब सोचकर आराधना पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी आखिरकार वह एक और औरत जो थी फिर बाद में एक मा थी,,,, एक जवान बेटे की हरकत की वजह से शायद एक मां नहीं बहती लेकिन एक औरत के नाते वह बहकने लगी थी उसकी चूत लगातार काम रस बहा रही थी,,,,।

संजू की खुशी का ठिकाना ना था उसे लगने लगा था कि आज की रात उसके जीवन की अनमोल और अद्भुत और आती थी वह समझ गया था कि कुछ ही देर में वह अपनी मां के दोनों टांगों के बीच होगा और उसका लंड उसकी मां की चूत में इसीलिए अपनी मां का ब्लाउज खोलने के लिए उसका बटन खोलने लगा और जैसे ही पहला बटन खुला हुआ दूसरे बटन को जल्दबाजी में खोलने लगा और तुरंत जैसे आराधना नींद से जागी हो वह एकदम से संजू का हाथ पकड़ ली और उसे रोकने लगी,,,,।

नहीं बेटा नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,

क्यों नहीं हो सकता मम्मी खोलने को नापना ब्लाउज,,,( और ऐसा कहते हुए दूसरा बटन खोलने की कोशिश करने लगा,,)

नहीं नहीं संजु हम दोनों के बीच स्थान का रिश्ता बिल्कुल भी कायम नहीं हो सकता मैं मर्यादा की दीवार को नहीं गिराना चाहती,,,

लेकिन हम दोनों की जरूरत यहीं है,,,

जरूरत नहीं वासना है,,,,

प्यार है,,,

ऐसे कलंकित काम को प्यार का नाम मत दे,,,,(आराधना गुस्से में संजु को दूर झटकते हुए बोली और तुरंत खड़ी हो गई,,,, संजू के अरमानों पर पानी फिर गया,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हो गया,,, अभी तक तो उसकी मां भी मजा ले रही थी लेकिन एकाएक,,,,

आराधना दहलीज के उस पार कदम रखकर दरवाजा बंद करते हुए बोली,,,।

हम जो करने जा रहे हैं थे वह पाप है,,, हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता,,,(और इतना कहने के साथ ही दरवाजा भडाक की आवाज के साथ बंद हो गया,,, और संजु आश्चर्य से देखता ही रह गया क्योंकि एकाएक उसके सपनों का महल ढह गया,,, उसके अरमान उसकी मां के दृढ़ निश्चय के आगे घुटने टेक दिया,,,, संजु को समझ नहीं आ रहा था कि एकाएक क्या हो गया उसे तो ऐसा लग रहा था जैसे उसका कोई सपना टूट गया हो वह नींद‌ से जाग गया हो,,,

आराधना क बारे में सोचकर संजू उत्तेजित हुआ जा रहस्य था

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वह कुछ देर तक वहीं बैठा रहा और अपने कमरे में आ गया,,, बल्ब बुझा कर‌ वह भी लेट गया हालांकि उसके अरमानों पर तो पानी फिर ही चुका था लेकिन फिर भी जितना भी उसे सुख मिला था उसे याद करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अपने पेट में से अपने लंड को निकाल कर सहलाते सहलाते कब सो गया उसे भी पता नहीं चला,,,, रात के तकरीबन 3:00 बजे मोहिनी की नींद खुली उसे जोरों की पेशाब लगी हुई थी कमरे में चारों तरफ अंधेरा था उसे लगा कि शायद वह बत्ती बुझा कर सो गई थी इसलिए धीरे से उठी और अंदाजन वश कमरे से बाहर निकल कर बाथरूम गई और बाथरूम से वापस कमरे में आ गई अंधेरे में सोने की आदत नहीं थी इसलिए नाइट बल्ब जलाने के लिए टटोलते हुए वहां स्विचतक अपना हाथ ले गई और स्विच चालू कर दी स्विच के चालू होते ही बल्ब जगमगा उठा और बल्ब की रोशनी में उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए,,,, उसका भाई पेट के बल लेटा हुआ था पैजामा जांघो तक सरका हुआ था,,, और दोनों टांगों के बीच जो चीज को मोहिनी ने अपनी आंखों से देखी उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए,,,,वह आंखें फाड़े उसी दृश्य को देखती रह गई,,,।
 
बाथरूम से आने के बाद कमरे में दाखिल होते ही मोहिनी ने जैसे ही स्विच ऑन की और ट्यूबलाइट के उजाले में जो भी उसे नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,,,, उसकी सांसे एकदम से अटक गई वह एकटक उस नजारे को देखने लगी,,,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आखिरकार नजारा ही कुछ ऐसा था,,,

आराधना की गदरायी जवानी

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संजू शाम को जो कुछ भी हुआ था अपनी मां के साथ जबरदस्त चुंबन का स्वाद लेने के बाद और अपनी मां का सहकार पाकर उसे लगने लगा था कि उसकी मां आगे भी उसका इसी तरह से साथ देगी इसलिए खाना खा लेने के बाद मोहिनी को अपने कमरे में जाते ही संजू अपनी मां के पास बैठा था और मदहोश होता हुआ उसके होठों का चुंबन करने लगा था कुछ देर तक तो सब कुछ सही चल रहा था संजू तेरी दे आगे भी बढ़ रहा था वह चुंबन के साथ-साथ अपनी मां की चुची को भी ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया था,,, जिसमें उसकीमां को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह भी मदहोश हुए जा रही थी,,, उसकी चूत से लगातार काम रस बहना शुरू हो गया था उसे भी लगने लगा था कि आगे बढ़ जाने में ही भलाई है वह भी आगे बढ़ जाना चाहती थी क्योंकि उसका मन कमजोर पड़ने लगा था अपने बेटे की हरकत की वजह से,,,और संजू को लगने लगा था कि आज वह अपनी मां की चूत पर विजय पाकर रहेगा लेकिन तभी आराधना को इस बात का एहसास हुआ कि जो कुछ भी वह दोनों कर रहे हैं वह मर्यादा के खिलाफ है मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए और इसी के चलते वह संजु कोएक तरफ करके समझाने लगी लेकिन समझो समझने का नाम नहीं ले रहा था इसलिए वह दरवाजा बंद करके कमरे में चली गई,,,, संजू के हाथ से तो जैसे गुलाब जामुन नीचे छूट गया हो उसके सारे अरमान धरे के धरे रह गए थे लंड के कड़क पन के कारण उसे अपने लंड में दर्द भी हो रहा ,,,,, और यह दर्द मिलने वाले सुख से बहुत कम था लेकिन उसकी मां ने एक खूबसूरत नाटक पर से पर्दा गिरा दि थी,,, संजू का मुंह बन गया था,,, और अपनी मां के द्वारा मुंह की खा कर वह अपने कमरे में आ गया लेकिन बदन की गर्मी उसी तरह से बरकरार थी अपनी मां के खूबसूरत बदन को याद करके उसके चुंबन को याद करके ब्लाउज के ऊपर से स्तन मर्दन को याद करके उसे रहा नहीं जा रहा था और उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था जिसे वह पजामे से बाहर निकाल कर धीरे-धीरे सहला रहा था,,,।और अपनी मां के बारे में सोचते सोचते कब उसे नींद लग गई उसे पता नहीं चला और ज्यों का त्यों ही उसका लंड पजामे के बाहर ही लहराता रह गया,,,,,,और अनजाने में ही उस पर मोहिनी की नजर पड़ गई थी जिसे देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह किसी जवान लड़के के लंड को देख रही थी और वह भी पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हुआ ,,, जिसे देखते ही पल भर में उसके तन बदन में हलचल सी मचने लगी,,, वह दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजे के पास ही ट्यूबलाइट की स्विच थी इसे दबाते ही ट्यूबलाइट तो प्रकाशित हो गई लेकिन उसके अंदर की जवानी भी जोर मारने लगी,,,,, उसे भी शायद रोशनी मिल गई थी पल भर में ही उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,, आंखों के सामने उसके भाई का मोटा तगड़ा लंबा लंड छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था और उसका भाई बेसुध होकर सो रहा था,,,,।

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मोहिनी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी अंगो में उभार आना शुरू हो गया था,,, छातियों की शोभा बढ़ा रहे दोनों अमरूद टी शर्ट में अपना भूगोल अच्छे तरीके से बताना शुरू कर दिए थे,,, कमर के नीचे का उठाव मादकता का रूप ले रहा था,,,, टांगों के बीच की पतली दरार में कभी-कभी रिसाव सा महसूस होने लगा था,,, और इस समय भी मोहिनी दोनों टांगों के बीच सुरसुरी सी दौड़ रही थी,,, मोहिनी का रूप किसी को भी मोह लेने वाला था,,, लेकिन इस समय वह खुद अपने भाई के लंड की तरफ आकर्षित हुए जा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ट्यूब लाइट को बंद कर दे या यूं ही चलने दे क्योंकि ट्यूब लाइट बंद करने के बाद ऐसा मादकता से भरा हुआ नजारा अंधेरे कै स्याही में खो जाएगा,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में इस उमर में खेलने वाला खिलौना साफ नजर आता रहेगा,,,,।

मोहिनी की हालत ख़राब हो रही थी

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दरवाजा खुला हुआ था इसलिए मोहिनी बार-बार बाहर की तरफ भी देख ले रही थी कि कहीं उसकी मा भी बाथरूम यूज़ करने के लिए ना आ जाए,,, इसलिए वह दरवाजे को धीरे से बंद कर दी जरा सा भी आवाज नहीं होने दी,,, क्योंकि उसे डर था कि अगर जरा सी भी आवाज होगी तो कहीं उसका भाई जाग ना जाए,,, और ऐसी खूबसूरत नजारे को देखने का मौका उसके हाथ से चला जाए,,,, मोहिनी का दिल जोरों से धड़क रहा था आखिरकार वह एक जवान लड़की थी जिस तरह से,, उसकी उम्र की लड़कियों के मन में लड़कों को लेकर उमंगे ‌जागती हैं उसी तरह का हाल मोहिनी का भी था,,,वह भी कभी-कभी अपने सपनों के राजकुमार के बारे में सोचा करती थी और लड़कियों के मुंह से गंदी गंदी बातें सुनकर उस बारे में कल्पना किया करती थी अपनी सहेलियों के मुंह से वहां कई बार चुदाई की बातें सुनी थी जिसे सुनकर उसे अपनी चूत गीली होती हुई महसूस होती थी उसका मन भी करता था लेकिन वह एक संस्कारी लड़की थी इसलिए बहुत ही जल्दी अपने आप पर काबू कर लेती थी और इस और बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती थी,,, अपनी सहेलियों के बताए अनुसार लड़कों के लंड के बारे में सुनकरवह अपने मन में ही संत के बारे में कल्पना किया करती थी उसके आकार के बारे में कल्पना किया करती थी कैसा दिखता होगा कैसा होगा उसकी लंबाई क्या होगी उसकी मोटाई क्या होगी इस बारे में और की परिकल्पना करती थी लेकिन उसकी कल्पना कभी हकीकत का रूप नहीं ले पाती थी,,,

मोहिनी संजू का देखकर मस्त हो रही थी

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लेकिन आज जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देख रही थी वह उसके कल्पना के परे था वह कभी इस तरह की कल्पना नहीं कर पाई थी कि लड़कों का लंड ईतना मोटा तगड़ा और लंबा होता है,,, इस तरह के भूगोल के बारे में वह कभी सोची भी नहीं थी लेकिन आज अपनी आंखों से देख कर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि लड़कों का लंड ईतना मोटा तगड़ा होता है,,,।

संजू और मोहिनी

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अपने बड़े भाई की जवान लंड को देखकर वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी,,, उसके दिल की धड़कन बड़ी तेज रफ्तार से चल रही थी,,,उसे इस बात का डर भी था कि कहीं उसका भाई जाग ना जाए और उसे इस हालत में देखकर क्या सोचेगा,,, और एक बात और उसके मन में घूम रही थी कि आखिरकार उसके भाई का लंड पजामे से बाहर आया कैसे,,? यही सब सोचते सोचते वह अपने भाई के एकदम बगल में बैठ गई जहां से उसे अपने भाई का लंड एकदम साफ नजर आ रहा था,,,एक जवान उत्तेजित लोगों से बहुत ज्यादा प्रभावित कर रहा था जिसकी तरफ हो वह धीरे-धीरे आकर्षित हुए जा रही थी लंड के सुपाड़े को देखकर उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, क्योंकि संजू का सपना आलूबुखारा की तरह एकदम गोल और बड़ा था,,,

मोहिनी से बिलकुल भी रहा नहीं जा रहा था

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पढ़ी-लिखी होने के नाते उसे औरत और मर्द के बीच के संबंध के बारे में अच्छी तरह से मालूम था और इसीलिए उसकी आंखों में एकाएक चमक आ गई यह सोच कर कि उसकी चूत का छेंद तो बहुत छोटा है तब इतना मोटा लंड घुसेगा कैसे,,, यह ख्याल उसके मन में अचानक ही आया था और इस ख्याल के चलते उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी वह अपने मन में सोचने लगी कि कहीं दूसरी लड़कियों के मुकाबले उसकी चूत का छेद ज्यादा छोटा तो नहीं,, है,,,,, क्योंकि अभी तक उसे इस बात का ज्ञान तक नहीं था कि सभी औरतों की चूत एक ही तरह की होती है,,,,,, इसलिए अपने भाई के लैंड को देख कर उसे अंदेशा होने लगा था कि चूत में इतना मोटा लंड घुसेगा कैसे हालांकि अभी तक उसे चुदाई का कोई अनुभव नहीं था लेकिन फिर भी अनायास उसके मन में ख्याल आया था और उसके हर के चलते उसकी पेंटी गीली होना शुरू हो गई थी,,,।

संजू का लुंड अपनी पूरी औकात में

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ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,,, मोहिनी की नजर अपनी बहन के लंड पर खड़ी हुई थी क्योंकि अभी भी पूरी तरह से खड़ा हुआ था उसका मन ना जाने क्यों उसे छूने को कर रहा था उसे पकड़ने को कर रहा था देखना चाहती थी कि पकड़ने से कैसा एहसास होता है,,, लेकिन ऐसा करने में से डर लग रहा था,,, बार-बार वह संजू के चेहरे की तरफ देख ले रही थी कि कहीं उसकी नींद ना खुल जाए,,,,

मोहिनी

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एक जवान लड़की के सामने एक जवान लंड पूरी तरह से अपनी औकात में मोखड़ा था जिसे देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिसके चलते उसकी चूत काम रस छोड़ रही थी,,, जिसकी वजह से उसकी पैंटी गीली होने लगी थी,,। उसे अपनी पैंटी गीली होती हुई महसूस होने लगी,,, तो वह बैठे-बैठे ही अपनी फ्रॉक को ऊपर की तरफ करके अपनी पेंटी की तरफ देखने लगी चूत वाली जगह पर पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,। सोते समय मोहिनी कभी लोअर टी शर्ट तो कभी पजामा टीशर्ट पहनती थी और कभी-कभी फ्रॉक पहन लिया करती थी जब ज्यादा गर्मी लगने लगती थी तब और गर्मी की वजह से आज मोहिनी फ्रॉक पहनी हुई थी इसलिए अपनी पेंटी देखने में उसे ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी बैठे-बैठे ही वह अपनी फ्रॉक कमर तक उठा दी थी वैसे भी फ्रॉक सिर्फ उसके घुटनों तक आती थी जो कि बैठने की वजह से खुद ही चढ़कर जांघों पर आ जाती थी,,,।

मोहिनी का मन उसे हाथ में लेकर पकड़ने को कर रहा था

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गजब का नजारा बना हुआ था एक तरफ उसका भाई बेसुध होकर गहरी नींद में सो रहा था और उसका लंड पजामे से बाहर निकला हुआ था जिसे देखते हुए मोहिनी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी,,,,,,, वो कभी अपने भाई के लंड को तो कभी अपनी गीली पेंटी को देख रही थी,,,,, अपनी गिली पेंटी को देखकर उसकी उत्सुकता बढ़ने लगी थी उसे ऐसा लग रहा था कि कहीं उसकी पेशाब तो नहीं निकल रही हैं,,, लेकिन अभी अभी तो वह बाथरूम जाकर आई है,,, यही सोचकर वह अपनी तसल्ली के लिए,,,, अपनी पेंटिं को थोड़ा सा खींचकर अपनी चुत की मुआयना करने लगी,,,,, जिस पर हल्के हल्के बाल उगे हुए थे,, जो कि अपने भाई के लंड को देखकर उतेजीत अवस्था में कचोरी की तरह फुल गई थी,,,,,,वह देखना चाहती थी कि उसकी चुत से अभी भी काम रस निकल रहा है कि नहीं जिसे वह पेशाब की बुंद समझ रही थी,,,। इसलिए वह यहां से अपनी पेंटिंग तकरीबन 5 इंच तक खींचकर दूसरीहथेली को अपनी चूत का लंड की चूत पूरी तरह से काम रस मे भीगी हुई थी,,, मोहिनी को लिसलिसा सआ महसूस होने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था की यह क्या है,,,।

हथेली को चूत पर रखने के बाद उसकी नजर अपने भाई के लैंड पर पड़ी तो एकाएक उसके तन बदन में कामवासना अपना असर दिखाने लगी अपनी चूत पर हथेली रखने में उसे आनंद आने लगा,,,, उसे अपने भाई के ‌जाग जाने में डर भी महसूस हो रहा था और मजा भी आ रहा था,,,जैसे जैसे वह अपनी हथेली को अपनी चूत पर दबा रही थी वैसे वैसे उसकी आनंद मैं हढोतरी होती जा रही थी,,,, उसकी सांसे तेजी से चलने लगी थी इसने कामवासना के चलते उसका मन अपने भाई के लंड को पकड़ने को कर रहा था लेकिन ऐसा करने में उसे डर भी लग रहा था,,,।उसने अभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह हिम्मत दिखाकर अपने भाई के लंड को अपनी मुट्ठी में दबा सके ऐसा करने से उसके भाई की नींद भी खुल सकती थी और फिर क्या होगा यह उसे भी नहीं मालूम था,,,,।

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जवान लंड का कडकपन लोहे के रोड की तरह नजर आ रहा था,,,,,, मोहिनी की सांसे धीरे-धीरे तेजी से चलने लगी थी ट्यूबलाइट की रोशनी में अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को देखकर अनजाने में ही मोहिनी अपने हाथों से हस्तमैथुन करना शुरू कर दी थीइस तरह की हरकत में पहली बार कर रही थी लेकिन अपनी चूत से अपनी हथेली को रगडने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,लेकिन ठीक से वह इस क्रिया को कर नहीं पा रही थी इसलिए वह अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपनी पेंटी को नीचे जांघों तब खींचकर सरका दी,,,,, वासना का तूफान मोहिनी को अपनी गिरफ्त में रह रहा था,,,, आज पहली बार वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी वह अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिकाए हुए थी,,,अपनी कचोरी जैसी फुली हुई चूत को देखकर वो खुद उत्तेजित हुए जा रही थी,,,।

देखते ही देखते वह अपनी चूत पर जोर जोर से हथेली को रगडना शुरू कर दी,, काम रस से उसकी हथेली पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, अपने भाई के लंड के सुपाडे की तरफ नजर करते हुए उसकी आंखों में चमक आ गई और वह मुझे देखना चाहती थी कि वाकई में उसकी चूत का छेद छोटा है या बड़ा,,, नादानी वश वह अपनी बीच वाली उंगली को धीरे-धीरे अपनी चूत के गुलाबी छेद में सरकाना शुरू कर दी,,, मोहिनी की पतली सी उंगली बड़े आराम से उसकी चूत की गहराई में प्रवेश करना शुरू कर दी थी,,,,लेकिन उसकी यह हरकत उसके तन बदन में अजीब सी हलचल को बढ़ावा देने लगा,,, वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,,।

सांसो की गति पर उसका खुद का नियंत्रण नहीं रह गया था वह भावनाओं में बहती चली जा रही थी,,, वह अपने भाई के खड़े लंड को नशीली नजरों से देख रही थी,,, क्योंकि उसकी आंखों में वासना का नशा छाने लगा था खुमारी छाने लगी थी,,, अपने आनंद को और ज्यादा बढ़ाने के लिए वह अपनी उंगली को जल्दी-जल्दी अपनी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दी,,,,अपने मन में सोचने लगी कि शायद इसी तरह से लंड चूत के अंदर बाहर होता है,,, पर यह ख्याल मन में आते ही उसकी उत्तेजना ओर ज्यादा बढ़ने लगी उसकी सांसो की गति तेज होने लगी,,, आंखों में नशा छाने लगा बीच वाली उंगली को जितना हो सकता था उतना चूत के अंदर डालने की कोशिश कर रही थी और बड़े आराम से उसकी बीच वाली उंगली चली भी जा रही थी,,,

उंगली की रबड़ चूत की अंदरूनी दीवारों पर होने से वह बहुत ही जल्द चर्मसुख की तरफ बढ़ने लगे,,, यह अनजाने में उसका हस्तमैथुन थाजो कि बेहद आनंददायक लग रहा था देखते ही देखते उसके मुख से अजीब सी सिसकारी की आवाज निकली तो वह एक हाथ से अपना मुंह दबा दी,,, और देखते ही देखते उसकी जिंदगी का अपने हाथों से पहला स्खलन हो गया,,, वह पूरी तरह से भावविभोर हो गई,,,।एकदम से मस्त हो रहे थे उसके बदन में यह कैसी मजबूरी सी होने लगी थी दोनों टांगों के बीच किस तरह का कंपन होने लगा था उसे इस बारे में थोड़ा सा भी ज्ञान नहीं था लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसने उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी जो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,।

घर जाने के बाद थोड़ी ही देर में उसके ऊपर से वासना का तूफान उतरा तो वह तुरंत अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी अपने भाई को उसी स्थिति में छोड़कर ट्यूब लाइट को बंद कर दी क्योंकि,,, उसे मालूम था कि ट्यूबलाइट उसके भाई मैं ही बंद किया होगा,,, वह नहीं चाहती थी कि उसके भाई को किसी भी प्रकार का शक हो,,,, और वह तुरंत अपनी जगह पर आकर सो गई,,,।
 
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