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संजू के दोनों हाथों में गुलाब जामुन मिल चुका था उसकी जवानी सही दिशा में जा रही थी,,, जवानी का पूरा जोश वहअपनी मौसी पर उतार रहा था,,,संजू अभी अभी जवान हुआ था इसलिए औरतों को लेकर उसके मन में उत्सुकता बहुत ज्यादा थी और साधना खेली खाई और उम्र के इस दहलीज पर पहुंच कर वह पूरी तरह से प्यासी औरत थी,,,।
ऐसे में संजू को साधना और साधना को संजू मिल गया था दोनों एक दूसरे के पूरक साबित हो रहे थे,,,,।
साधना के घर जाने की हिम्मत संजु ने दिखाया था तो घर पहुंचने के बाद,,, साधना ने जिस तरह की हिम्मत दिखाई थी वह काबिले तारीफ थी,,, अगर साधना अपनी तरफ से सहकार की प्रतिक्रिया ना देते हुए हिम्मत ना दिखाती तो शायद संजु को वहां से निराश ही लौटना पड़ता,,, लेकिन दोनों प्यासे थे दोनों को एक दूसरे की जरूरत थी,,,, और ऐसे में दोनों ने अपनी अपनी प्यास बुझा ली,,,।
जिस समय वह घर लौटता था इधर उधर घूमने के बाद से समय वह अपने घर पर लौट गया किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुआ कि संजू आज साधना के घर गया था,,,,,,वह बड़े आराम से घर पर पहुंच गया था उसे इस बात की संतुष्टि थी कि आज फिर से वह अपनी मौसी की चुदाई कर के आया है,,, औरत के बदन का नशा उसके दिलो-दिमाग पर छाने लगा था,,,,वह अपने कमरे में बैठा हुआ था अपनी मौसी साधना के बारे में ही सोच रहा था कि किस तरह से हिम्मत दिखाते हुए उसकी मौसी सीढ़ियों पर ही चुदवाई,,,, सीढ़ियों पर पीछे से अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड पकड़ कर चोदने में जो मजा आया था उसे वह अभी भी अपनी बदन में महसूस कर पा रहा था,,,,औरत की बुर के अंदर कितनी गर्मी होती है धीरे-धीरे इस बात का एहसास संजु को होने लगा था,,,,,, वह अपने कमरे में बैठा बैठा अपनी मौसी के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसे ख्याल आया मनीषा का,,,क्योंकि जिस समय वह मनीषा के कमरे में दाखिल हुआ था उस समय मनीषा के बदन पर छोटी सी पेंटिं और एक छोटी सी टी शर्ट थी,,,अपनी मौसी की उपस्थिति में वह अपनी मौसी की लड़की के खूबसूरत बदन को ठीक से देख तो नहीं पाया था लेकिन जितना भी देखा था इतने से ही उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी मौसी की लड़की बहुत ही ज्यादा सेक्सी है क्योंकि वह अपने कमरे में केवल छोटी सी पेंटिं टीशर्ट पहन कर पढ़ाई कर रही थी जिससे संजु को उसकी लंबी चिकनी गोरी गोरी मक्खन जैसी मुलायम टांग देखने को मिल गई थी उतने से ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी,,,,,,, यही सब सोचते सोचते हैं उसे नींद आ गई और वह सो गया,,,।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गया,,, संजु जब जब अपनी मां को देखा तब तक उसे वही दृश्य नजर आता जो दृश्य उसने अपनी मां के पक्ष में बोलने के लिए उसके कमरे में दाखिल हो गया था और उसकी मां बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी उसको याद करके संजू का लंड बार बार खड़ा हो जाता था,,,, जिसके चलते ना चाहते हुए भी वह अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा था,,,,,,,, और वैसे भी आराधना उस दिन से अपने बेटे से ठीक से नजर नहीं मिला पाती थी जब जब उसका बेटा उसकी आंखों के सामने आ जाता था उसके चेहरे पर शर्म और हया की लाली आ जाती थी,,,, शर्म के मारे उसके गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो जाते थे,,, उसे समझ में नहीं आता था कि वह अपने बेटे से कैसे बात करें,,,,, क्योंकि उस दिन उसके बेटे ने उसे अर्धनग्न अवस्था में देख लिया था और उसकी सारी बातों को सुनता था जिसमें गाली गलौज से लेकर के चुदाई की गंदी बातें भी होती थी,,,, यह जानकर आराधना शर्म से पानी पानी हो जाती थी,,,,। लेकिन इस बात से उसे तसल्ली थी कि उसका बेटा उसके दुख दर्द को समझने लगा था उसकी मदद करने लगा था इसी से वह खुश थी,,,,,,,,,, और दिन-ब-दिन संजू के ख्यालात अपनी मां को लेकर बदलते जा रहे थे उसकी कल्पनाओकी दुनिया की महारानी बन चुकी थी उसकी मां,,, जिसकी खूबसूरती के आगे वह हमेशा घुटने टेक देता था,,,,,,,,,, सबसे ज्यादा उत्तेजना उसे अपनी मां को खाना बनाते हुए देखने पर महसूस होता था ,,,क्योंकि उस समय उसकी मां खड़ी होकर खाना बना रही होती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का उभार ,,, कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ नजर आता था,,,, और रोटी पकाते समय हाथों की हरकत की वजह से उसकी गांड की गोलाई में जिस तरह की थिरकन होती थी,,, उसे देख कर संजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगती थी वह अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाता था,,,, और तुरंत उसे अपनी गर्मी शांत करने के लिए मुठ मारना पड़ता था,,,,।
संजू अपनी मम्मी की साड़ी उठाते हुए
ऐसे ही एक दिन शाम को,,, आराधना खाना बना रही थी और संजू यह देखने के लिए आज क्या बन रहा है वह रसोई घर में चला गया,,,, और अपनी मां को फिर से खाना बनाते हुए देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को खेलते हुए देखने की लालच में वह अपनी मां के पास नहीं बल्कि उसके पीछे तकरीबन 2 फीट की दूरी पर जाकर खड़ा हो गया और अपनी आंखों को अपनी मां की परी परी गांड पर केंद्रित करते हुए वह बोला,,,,।
आज क्या बना रही हो मम्मी,,,,
(अपने बेटे को अपने बेहद करीब महसूस करके आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी और उसी तरह की हलचल उसे इस समय भी महसूस हो रही थी,,,मां अपने बेटे से ठीक से नजर तक नहीं मिला पाती थी लेकिन अपने बेटे को जवाब देते हुए उसकी तरफ देखे कि नहीं बोली,,,)
संजू पंतय उतरता हुआ
कुछ खास नहीं बस पूरी सब्जी बना रही थी,,,,।(यह कहकर आराधना खाना बनाने में ही अपना ध्यान केंद्रित करने लगी और इस बात से अनजान कि उसका बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी बड़ी-बड़ी भराव दार गांड को देखकर मस्त हो रहा है,,,संजू को अपनी मां की बात सुनाई दी कि आज पूरी सब्जी बन रही है जो कि उसका पसंदीदा भोजन था लेकिन फिर भी उसका ध्यान पूरी सब्जी पर ना होकर कसी हुई साड़ी में कैद अपनी मां की गदराई गांड पर थी,,,,,,संजू का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर ले और अपने पेंट में बने तंबू को ठीक अपनी मां की गांड पर सटा दे,,,,,,वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था जब से साधना की चुदाई किया था तब से वह औरतों की बड़ी बड़ी गांड का दीवाना हो गया था,,,, और अपनी मां को लेकर ना जाने अब तक कहां तक अपनी कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ा चुका था,,,। अपनी मां की हिलती हुई गांड को देखकर संजू अपना सुध बुध खो चुका था,,,,,, उसका सारा ध्यान सिर्फ अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर केंद्रित हुआ था संजू की तरफ से कोई जवाब ना आता देखकर आराधना उसकी तरफ देखे बिना ही फिर से बोली,,,)
तुझे तो बहुत पसंद है ना,,,,
(अपनी मां की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो ईस तरह से बड़बड़ाते हुए बोला,,,)
आराधना की उत्तेजना बढ़ता हुआ
हं ,,,हं,, मुझे तो बहुत पसंद है,,, अच्छा होगा कि आज तुम पूरी सब्जी बना दी आज पेट भर कर खाऊंगा,,,।
तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि खाना तुझे मिलता ही नहीं है,,
नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मम्मी लेकिन पूरी सब्जी की बात ही कुछ और है और थोड़ी सी खीर भी बना देना तो मजा आ जाए,,,,।
चिंता मत कर मुझे पता है कि तुझे क्या पसंद है इसके बाद खीर बनाने वाली हूं मैं जानती हूं कि तुझे खीर भी बहुत पसंद है,,,।(संजू की तरफ देखे बिना ही आराधना मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे से कई दिन बाद हुआ है इस तरह से बातें कर रही थी और ना जाने क्यों उसे अपने बेटे से बातें करने में उत्तेजना का एहसास हो रहा था,यह, एहसास उसके लिए हैरान कर देने वाला थाक्योंकि उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पत्नी जरा रहने से काम में बैठा हुआ महसूस हो रहा था उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन उसे अंदर से आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, अपनी मां की बातें सुनकर संजू बोला,,)
आराधना छुड़वाते हुए
थैंक्यू मम्मी तुम्हें मेरी पसंद का कितना ख्याल है,,,,
तेरी पसंद का ख्याल क्यों ना होगा,,,
(अपनी मां की बात सुनकर संजू मन ही मन खुश हो रहा था और अपने मन में यह कह रहा था कि जब तुम्हें मेरी पसंद का इतना ख्याल हो तो यह क्यों नहीं समझ पा रही हो कि मुझे तुम्हारी गांड भी बहुत पसंद है क्यों नहीं परोस देती मुझे अपनी बड़ी बड़ी खूबसूरत गांडमैं आपसे ही यह बात करके संजू की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ गई उसके पेट में अच्छा खासा तंबू सा बन गया जिस पर उसकी मां की नजर पड़ सकती थी,,,,इसलिए वह वहां पर ज्यादा देर ठहर ना नहीं चाहता था लेकिन अपनी गर्मी को शांत करना भी बहुत जरूरी था,,,,वो जल्द से जल्द अपने कमरे में जाकर अपनी गर्मी शांत करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)
आराधना किचन में मस्ती क साथ चुदवाती हुयी
जल्दी से बनाना मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां की गांड को नजर भर देख कर वह रसोई घर से बाहर निकल जाए और उसे जाता हुआ ना जाने क्यों आराधना को अच्छा नहीं लग रहा था उससे आज बात करने में बहुत अच्छा लग रहा था,,,, संजू के रसोई घर से बाहर जाते ही आराधना से रहा नहीं गया और वह साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को टटोल कर देखने लगी की कितनी गीली हुई है और इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर ढेर सारा पानी छोड़ चुकी थी,,,, इस बात से वह हैरान भी थी और उत्साहित भी,,,।
आरफना को बहोत मजा आ रहा था
इस समय घर पर केवल संजु और आराधना ही थे,,, मोहिनी के घर आने मे अभी आधा घंटा बचा था इसलिए वह अपने कमरे में जाते ही दरवाजे की कुंडी लगाकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और बिस्तर पर दीवार का सहारा लेकर बैठ गया और अपनी आंखों को बंद करके अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को थोड़ा ना शुरू कर दिया अपने बदन की गर्मी शांत करने का उसके पास यही एक तरीका था,,, अगर मौसी होती तो वह शायद रोज अपनी मौसी की चुदाई करके अपनी गर्मी शांत कर लेता लेकिन यहां उसके पास बुर का जुगाड़ नहीं था इसलिए उसे अपनी गर्मी शांत करने का बस यही एक सहारा था,,,।
वह अपनी आंखों को बंद कर चुका था और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को हवा में तेज लेकर दौड़ रहा था वह कल्पना कर रहा था कि उसकी मां रसोई घर में खाना बना रही है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर वा उत्तेजित हो रहा है और उससे रहा नहीं जा रहा है वह अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर उसे प्यार करने लगता है,,,,कल्पना और उसकी मां भी उसकी हरकत से पूरी तरह से मस्त हुए जा रही है और वह अपनी मां के कदमों को चूमते हुए ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को दबा रहा है,,,,, संजू की कल्पना इतनी जबरदस्त होती थी कि उसे सब कुछ हकीकत सा लगने लगता था,,, वह जोर-जोर से अपने लंड को मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करके मुठिया रहा था,,,,और आंखों को बंद करके अपनी मां के बारे में सोच रहा था उसके चुंबन से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हो गई थी ब्लाउज के ऊपर से ही चूची को दबाते हुए उसकी मां भी गरम सिसकारी ले रही थी,,, धीरे-धीरे करके संजू कल्पना करते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और अपनी मां की नंगी चूची को जोर जोर से दबाने लगा,,, जैसे-जैसे उसकी कल्पना के बरती जा रही थी वैसे वैसे संजू के तन बदन में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,
कल्पना में उसकी मां भी पुरी तरह से उसका साथ दे रही थी,,,वह भी अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे का लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रही थी,,,,।
कल्पना में संजू और आराधना दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी दोनों पूरी तरह से उतावले हुए जा रहे थे एक दूसरे में समाने के लिए,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी पर की तरफ खाने लगा और कमर तक उठा दिया साड़ी के अंदर उसकी मां बेटी नहीं पहनी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी थी अपनी मां की नंगी गांड देखकर संजू से रहा नहीं गया और दो चार चपत अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर लगा दिया,,,,,संजू की मां भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह भी अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा और ज्यादा खोल दी जिससे संजू को उसकी गुलाबी बुर देखने में आसानी हो,,,।
अपनी मां के बारे में कल्पना करके संजय पूरी तरह से मस्त हो चुका था लंड पर उसका हार बड़ी तेजी से चल रहा था उसका पानी निकलने वाला था,,,, इसलिए संजू कल्पनाओं के घोड़े की रफ्तार और ज्यादा बढ़ाने लगा और तुरंत अपनी पैंट उतार कर नंगा हो गया और अपने लंड को हाथ में लेकर ठीक अपनी मां की गुलाबी छेद पर लगाकर जोरदार झटका लगाया लंड पूरा का पूरा आराधना की बुर में समा गया,,,,कल्पना में आराधना भी अपने बेटे के लैंड का गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हुए आह की आवाज निकाल दी,,,, और संजु अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया कल्पना में वह अभी अपनी मां की बुर में लंड डालकर,,, दो-चार झटके लगाया ही था कि उसका पानी निकल गया,,,,।
जब वह कल्पनाओं की दुनिया से बाहर निकला तो उसका हाथ पूरी तरह से गिला हो चुका था,,,। उसकी सांसें बहुत गहरी चल रही थी,,,। मुठ मारते समय उसे इस बात का एहसास हुआ कि अपनई मौसी की चुदाई करने से ज्यादा मजा उसे अपनी मां के बारे में कल्पना करने में आ रहा था,,,मोहिनी के आने का समय हो गया था इसलिए वह तुरंत खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आकर अपने हाथ पैर धोने लगा,,,,।
ऐसे में संजू को साधना और साधना को संजू मिल गया था दोनों एक दूसरे के पूरक साबित हो रहे थे,,,,।
साधना के घर जाने की हिम्मत संजु ने दिखाया था तो घर पहुंचने के बाद,,, साधना ने जिस तरह की हिम्मत दिखाई थी वह काबिले तारीफ थी,,, अगर साधना अपनी तरफ से सहकार की प्रतिक्रिया ना देते हुए हिम्मत ना दिखाती तो शायद संजु को वहां से निराश ही लौटना पड़ता,,, लेकिन दोनों प्यासे थे दोनों को एक दूसरे की जरूरत थी,,,, और ऐसे में दोनों ने अपनी अपनी प्यास बुझा ली,,,।
जिस समय वह घर लौटता था इधर उधर घूमने के बाद से समय वह अपने घर पर लौट गया किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुआ कि संजू आज साधना के घर गया था,,,,,,वह बड़े आराम से घर पर पहुंच गया था उसे इस बात की संतुष्टि थी कि आज फिर से वह अपनी मौसी की चुदाई कर के आया है,,, औरत के बदन का नशा उसके दिलो-दिमाग पर छाने लगा था,,,,वह अपने कमरे में बैठा हुआ था अपनी मौसी साधना के बारे में ही सोच रहा था कि किस तरह से हिम्मत दिखाते हुए उसकी मौसी सीढ़ियों पर ही चुदवाई,,,, सीढ़ियों पर पीछे से अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड पकड़ कर चोदने में जो मजा आया था उसे वह अभी भी अपनी बदन में महसूस कर पा रहा था,,,,औरत की बुर के अंदर कितनी गर्मी होती है धीरे-धीरे इस बात का एहसास संजु को होने लगा था,,,,,, वह अपने कमरे में बैठा बैठा अपनी मौसी के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसे ख्याल आया मनीषा का,,,क्योंकि जिस समय वह मनीषा के कमरे में दाखिल हुआ था उस समय मनीषा के बदन पर छोटी सी पेंटिं और एक छोटी सी टी शर्ट थी,,,अपनी मौसी की उपस्थिति में वह अपनी मौसी की लड़की के खूबसूरत बदन को ठीक से देख तो नहीं पाया था लेकिन जितना भी देखा था इतने से ही उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी मौसी की लड़की बहुत ही ज्यादा सेक्सी है क्योंकि वह अपने कमरे में केवल छोटी सी पेंटिं टीशर्ट पहन कर पढ़ाई कर रही थी जिससे संजु को उसकी लंबी चिकनी गोरी गोरी मक्खन जैसी मुलायम टांग देखने को मिल गई थी उतने से ही संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी,,,,,,, यही सब सोचते सोचते हैं उसे नींद आ गई और वह सो गया,,,।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गया,,, संजु जब जब अपनी मां को देखा तब तक उसे वही दृश्य नजर आता जो दृश्य उसने अपनी मां के पक्ष में बोलने के लिए उसके कमरे में दाखिल हो गया था और उसकी मां बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई थी उसको याद करके संजू का लंड बार बार खड़ा हो जाता था,,,, जिसके चलते ना चाहते हुए भी वह अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा था,,,,,,,, और वैसे भी आराधना उस दिन से अपने बेटे से ठीक से नजर नहीं मिला पाती थी जब जब उसका बेटा उसकी आंखों के सामने आ जाता था उसके चेहरे पर शर्म और हया की लाली आ जाती थी,,,, शर्म के मारे उसके गोरे गाल लाल टमाटर की तरह हो जाते थे,,, उसे समझ में नहीं आता था कि वह अपने बेटे से कैसे बात करें,,,,, क्योंकि उस दिन उसके बेटे ने उसे अर्धनग्न अवस्था में देख लिया था और उसकी सारी बातों को सुनता था जिसमें गाली गलौज से लेकर के चुदाई की गंदी बातें भी होती थी,,,, यह जानकर आराधना शर्म से पानी पानी हो जाती थी,,,,। लेकिन इस बात से उसे तसल्ली थी कि उसका बेटा उसके दुख दर्द को समझने लगा था उसकी मदद करने लगा था इसी से वह खुश थी,,,,,,,,,, और दिन-ब-दिन संजू के ख्यालात अपनी मां को लेकर बदलते जा रहे थे उसकी कल्पनाओकी दुनिया की महारानी बन चुकी थी उसकी मां,,, जिसकी खूबसूरती के आगे वह हमेशा घुटने टेक देता था,,,,,,,,,, सबसे ज्यादा उत्तेजना उसे अपनी मां को खाना बनाते हुए देखने पर महसूस होता था ,,,क्योंकि उस समय उसकी मां खड़ी होकर खाना बना रही होती थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का उभार ,,, कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ नजर आता था,,,, और रोटी पकाते समय हाथों की हरकत की वजह से उसकी गांड की गोलाई में जिस तरह की थिरकन होती थी,,, उसे देख कर संजू के तन बदन में उत्तेजना के शोले भड़कने लगती थी वह अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाता था,,,, और तुरंत उसे अपनी गर्मी शांत करने के लिए मुठ मारना पड़ता था,,,,।
संजू अपनी मम्मी की साड़ी उठाते हुए
ऐसे ही एक दिन शाम को,,, आराधना खाना बना रही थी और संजू यह देखने के लिए आज क्या बन रहा है वह रसोई घर में चला गया,,,, और अपनी मां को फिर से खाना बनाते हुए देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को खेलते हुए देखने की लालच में वह अपनी मां के पास नहीं बल्कि उसके पीछे तकरीबन 2 फीट की दूरी पर जाकर खड़ा हो गया और अपनी आंखों को अपनी मां की परी परी गांड पर केंद्रित करते हुए वह बोला,,,,।
आज क्या बना रही हो मम्मी,,,,
(अपने बेटे को अपने बेहद करीब महसूस करके आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी और उसी तरह की हलचल उसे इस समय भी महसूस हो रही थी,,,मां अपने बेटे से ठीक से नजर तक नहीं मिला पाती थी लेकिन अपने बेटे को जवाब देते हुए उसकी तरफ देखे कि नहीं बोली,,,)
संजू पंतय उतरता हुआ
कुछ खास नहीं बस पूरी सब्जी बना रही थी,,,,।(यह कहकर आराधना खाना बनाने में ही अपना ध्यान केंद्रित करने लगी और इस बात से अनजान कि उसका बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी बड़ी-बड़ी भराव दार गांड को देखकर मस्त हो रहा है,,,संजू को अपनी मां की बात सुनाई दी कि आज पूरी सब्जी बन रही है जो कि उसका पसंदीदा भोजन था लेकिन फिर भी उसका ध्यान पूरी सब्जी पर ना होकर कसी हुई साड़ी में कैद अपनी मां की गदराई गांड पर थी,,,,,,संजू का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर ले और अपने पेंट में बने तंबू को ठीक अपनी मां की गांड पर सटा दे,,,,,,वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था जब से साधना की चुदाई किया था तब से वह औरतों की बड़ी बड़ी गांड का दीवाना हो गया था,,,, और अपनी मां को लेकर ना जाने अब तक कहां तक अपनी कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ा चुका था,,,। अपनी मां की हिलती हुई गांड को देखकर संजू अपना सुध बुध खो चुका था,,,,,, उसका सारा ध्यान सिर्फ अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर केंद्रित हुआ था संजू की तरफ से कोई जवाब ना आता देखकर आराधना उसकी तरफ देखे बिना ही फिर से बोली,,,)
तुझे तो बहुत पसंद है ना,,,,
(अपनी मां की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो ईस तरह से बड़बड़ाते हुए बोला,,,)
आराधना की उत्तेजना बढ़ता हुआ
हं ,,,हं,, मुझे तो बहुत पसंद है,,, अच्छा होगा कि आज तुम पूरी सब्जी बना दी आज पेट भर कर खाऊंगा,,,।
तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि खाना तुझे मिलता ही नहीं है,,
नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मम्मी लेकिन पूरी सब्जी की बात ही कुछ और है और थोड़ी सी खीर भी बना देना तो मजा आ जाए,,,,।
चिंता मत कर मुझे पता है कि तुझे क्या पसंद है इसके बाद खीर बनाने वाली हूं मैं जानती हूं कि तुझे खीर भी बहुत पसंद है,,,।(संजू की तरफ देखे बिना ही आराधना मुस्कुराते हुए बोली अपने बेटे से कई दिन बाद हुआ है इस तरह से बातें कर रही थी और ना जाने क्यों उसे अपने बेटे से बातें करने में उत्तेजना का एहसास हो रहा था,यह, एहसास उसके लिए हैरान कर देने वाला थाक्योंकि उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पत्नी जरा रहने से काम में बैठा हुआ महसूस हो रहा था उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन उसे अंदर से आनंद की अनुभूति भी हो रही थी,,, अपनी मां की बातें सुनकर संजू बोला,,)
आराधना छुड़वाते हुए
थैंक्यू मम्मी तुम्हें मेरी पसंद का कितना ख्याल है,,,,
तेरी पसंद का ख्याल क्यों ना होगा,,,
(अपनी मां की बात सुनकर संजू मन ही मन खुश हो रहा था और अपने मन में यह कह रहा था कि जब तुम्हें मेरी पसंद का इतना ख्याल हो तो यह क्यों नहीं समझ पा रही हो कि मुझे तुम्हारी गांड भी बहुत पसंद है क्यों नहीं परोस देती मुझे अपनी बड़ी बड़ी खूबसूरत गांडमैं आपसे ही यह बात करके संजू की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ गई उसके पेट में अच्छा खासा तंबू सा बन गया जिस पर उसकी मां की नजर पड़ सकती थी,,,,इसलिए वह वहां पर ज्यादा देर ठहर ना नहीं चाहता था लेकिन अपनी गर्मी को शांत करना भी बहुत जरूरी था,,,,वो जल्द से जल्द अपने कमरे में जाकर अपनी गर्मी शांत करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)
आराधना किचन में मस्ती क साथ चुदवाती हुयी
जल्दी से बनाना मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां की गांड को नजर भर देख कर वह रसोई घर से बाहर निकल जाए और उसे जाता हुआ ना जाने क्यों आराधना को अच्छा नहीं लग रहा था उससे आज बात करने में बहुत अच्छा लग रहा था,,,, संजू के रसोई घर से बाहर जाते ही आराधना से रहा नहीं गया और वह साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को टटोल कर देखने लगी की कितनी गीली हुई है और इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर ढेर सारा पानी छोड़ चुकी थी,,,, इस बात से वह हैरान भी थी और उत्साहित भी,,,।
आरफना को बहोत मजा आ रहा था
इस समय घर पर केवल संजु और आराधना ही थे,,, मोहिनी के घर आने मे अभी आधा घंटा बचा था इसलिए वह अपने कमरे में जाते ही दरवाजे की कुंडी लगाकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया और बिस्तर पर दीवार का सहारा लेकर बैठ गया और अपनी आंखों को बंद करके अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को थोड़ा ना शुरू कर दिया अपने बदन की गर्मी शांत करने का उसके पास यही एक तरीका था,,, अगर मौसी होती तो वह शायद रोज अपनी मौसी की चुदाई करके अपनी गर्मी शांत कर लेता लेकिन यहां उसके पास बुर का जुगाड़ नहीं था इसलिए उसे अपनी गर्मी शांत करने का बस यही एक सहारा था,,,।
वह अपनी आंखों को बंद कर चुका था और अपनी कल्पनाओं के घोड़े को हवा में तेज लेकर दौड़ रहा था वह कल्पना कर रहा था कि उसकी मां रसोई घर में खाना बना रही है उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर वा उत्तेजित हो रहा है और उससे रहा नहीं जा रहा है वह अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर उसे प्यार करने लगता है,,,,कल्पना और उसकी मां भी उसकी हरकत से पूरी तरह से मस्त हुए जा रही है और वह अपनी मां के कदमों को चूमते हुए ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को दबा रहा है,,,,, संजू की कल्पना इतनी जबरदस्त होती थी कि उसे सब कुछ हकीकत सा लगने लगता था,,, वह जोर-जोर से अपने लंड को मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करके मुठिया रहा था,,,,और आंखों को बंद करके अपनी मां के बारे में सोच रहा था उसके चुंबन से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हो गई थी ब्लाउज के ऊपर से ही चूची को दबाते हुए उसकी मां भी गरम सिसकारी ले रही थी,,, धीरे-धीरे करके संजू कल्पना करते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और अपनी मां की नंगी चूची को जोर जोर से दबाने लगा,,, जैसे-जैसे उसकी कल्पना के बरती जा रही थी वैसे वैसे संजू के तन बदन में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,
कल्पना में उसकी मां भी पुरी तरह से उसका साथ दे रही थी,,,वह भी अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे का लंड को पकड़ कर जोर जोर से दबा रही थी,,,,।
कल्पना में संजू और आराधना दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी दोनों पूरी तरह से उतावले हुए जा रहे थे एक दूसरे में समाने के लिए,,,, और देखते ही देखते संजू अपनी मां की साड़ी पर की तरफ खाने लगा और कमर तक उठा दिया साड़ी के अंदर उसकी मां बेटी नहीं पहनी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी थी अपनी मां की नंगी गांड देखकर संजू से रहा नहीं गया और दो चार चपत अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर लगा दिया,,,,,संजू की मां भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह भी अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा और ज्यादा खोल दी जिससे संजू को उसकी गुलाबी बुर देखने में आसानी हो,,,।
अपनी मां के बारे में कल्पना करके संजय पूरी तरह से मस्त हो चुका था लंड पर उसका हार बड़ी तेजी से चल रहा था उसका पानी निकलने वाला था,,,, इसलिए संजू कल्पनाओं के घोड़े की रफ्तार और ज्यादा बढ़ाने लगा और तुरंत अपनी पैंट उतार कर नंगा हो गया और अपने लंड को हाथ में लेकर ठीक अपनी मां की गुलाबी छेद पर लगाकर जोरदार झटका लगाया लंड पूरा का पूरा आराधना की बुर में समा गया,,,,कल्पना में आराधना भी अपने बेटे के लैंड का गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हुए आह की आवाज निकाल दी,,,, और संजु अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया कल्पना में वह अभी अपनी मां की बुर में लंड डालकर,,, दो-चार झटके लगाया ही था कि उसका पानी निकल गया,,,,।
जब वह कल्पनाओं की दुनिया से बाहर निकला तो उसका हाथ पूरी तरह से गिला हो चुका था,,,। उसकी सांसें बहुत गहरी चल रही थी,,,। मुठ मारते समय उसे इस बात का एहसास हुआ कि अपनई मौसी की चुदाई करने से ज्यादा मजा उसे अपनी मां के बारे में कल्पना करने में आ रहा था,,,मोहिनी के आने का समय हो गया था इसलिए वह तुरंत खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आकर अपने हाथ पैर धोने लगा,,,,।