Incest मजबूरी या जरूरत - Page 4 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

दूसरे दिन सुबह संजू को जरा भी शक नहीं हुआ कि रात को उसकी बहन मोहिनी ने उसके लंड के दर्शन कर लिए हैं और उसके लंड को देखते हुए पहली बार अपने हाथों से ही झड़ गई है,,,, मोहिनी के जीवन में बदलाव लाने वाली यह पहली रात थी,, जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,, रात को जो कुछ नहीं हुआ था उसने उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी,,, पहली बार वह अपनी मौसी के मुंह से गंदी गंदी बातों को सुनकर उत्तेजित हुई थी और,,दूसरी बार कल रात को अनजाने में ही अपने भाई के झंडे के दर्शन कर ली थी इससे पहले वह लंड की भूगोल आकार,, के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानती थी कल रात को ही वह लंड से उसके आकार से उसके संपूर्ण भूगोल से मुखातिब हुई थी भले ही वह उसे छूकर उसे अपने अंदर महसूस नहीं कर पाई थी लेकिन फिर भी उसे देखने के बाद जो उत्तेजना का संचार उसके बदन में हुआ था उसके चलते वह पूरी तरह से काम विभोर हो गई थी,,, और अपने हाथ से ही अपनी चूत को मसलना शुरू कर दी थी,,, और अपनी चूत के गुलाबी चूत में उंगली डालकर अपना काम रस भी बाहर निकाल दी थी,,, अपने भाई के लंड को देखकर उसके ऊपरी हिस्से के गोलार्ध के बारे में सोचकर ही अभी भी हैरान थी,,, जो कि शायद अधिकांशतः जवान होती लड़कियों में यह सहज ही होता है,, लंड के आकार को लेकर उसकी मोटाई को लेकरउनके मन में यही शंका रहती है कि इतना मोटा और लंबा लंड उनकी चूत में घुस पाएगा कि नहीं,,, और यही शंका मोहिनी के मन में भी पैदा हो गई थी,,,,,, अब अपने भाई को देखने का उसका नजरिया बदलता जा रहा था सुबह से जब जब उसकी नजर अपने भाई पर पड़ी थी तब तक उसके मन में वही दृश्य नजर आने लगता था,,,बार-बार अनजाने में ही महीने की नजर अपने भाई के दोनों टांगों के बीच चली जाती थी और वह उसके लंड के बारे में कल्पना करने लगती थी,,।

और दूसरी तरफ अपनी मां के विकार से संजू थोड़ा चिंतित हो गया था और व्यथित भी,,,क्योंकि जो कुछ भी उसकी मां ने रात को की थी,,,और शाम को दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ था उसे देखते हुए,, उसकी उसने कल्पना नहीं किया था उसे लगा था कि सब कुछ अच्छे तरीके से हो जाएगा,, लेकिन ऐन मौके पर उसकी मां ने उसे झटका दे दिया,,, संजू एकदम से तडप उठा,, उसके लंड की हालत एकदम से खराब हो गई,,, क्योंकि जब तक उसकी मां ने उससे दूर नहीं हुई थी तब तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि आज कि वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच होगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया हालांकि संजू ने अपना उद्देश्य बताते हुए अपनी मां की आंखों का चुंबन करने के साथ ही ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था,,,, आराधना दो बच्चों की मां थी इसलिए उसे इतना तो आभास हो गया था कि उसका लड़का उसके साथ क्या करना चाहता है उसके मन में क्या चल रहा है और एक हद तक वह भी अपनी बेटी का सहकार देने के लिए तैयार हो गई थी और एक नई खुशी की उमंग उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी लेकिन मौके पर उसकी आत्मा ने ऐसा करने से इंकार कर दिया,,,,और वह अपने बेटे का दिल तोड़ते हुए अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दी,,, संजू आहत था,, व्यथित था,, परेशान था,,, एकाएक उसके हाथों से एक अच्छे मौके को छीन लिया गया था ऐसा लग रहा था कि उसके मुंह में आया नहीं वाला किसी ने जबरदस्ती करते हुए छीन लिया था,,,,, संजू किसी भी तरह से अपनी मां को बनाना चाहता था उसका यह व्यवहार उसे अच्छा नहीं लगा था,,,,, जब से वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देखा था तब से उसके बदन की मादकता उसकी खुशबू उसके दिलो-दिमाग पर पूरी तरह से छा चुकी थी,,, जिसकी मादकता में वह पूरी तरह से अपनी मां की जवानी के नशे में खो गया था,,,,,।

इसलिए मोहिनी और अपने पापा के जाते ही वह अपनी मां से बात करने के लिए रसोई घर में चला गया,,,आराधना भी उसे ठीक से नजर नहीं मिला पा रही थी क्योंकि संजू को देखते ही उसे शाम और रात वाली बात याद आने लगती थी कि किस तरह से उसका सगा बेटा,,, काम भावना से लिप्त होकर,, उसे चोदने के लिए तड़प रहा है उसके अंगों से खेलने के लिए मचल रहा है,,, जिस तरह से वहउसे गुलाबी होठों को अपने मुंह में लेकर उसके रस को चूस रहा था उससे आराधना पूरी तरह से हैरान थी कि यह सब संजू ने कहां सीखा और ब्लाउज के ऊपर से ही जिस तरह से चूचियों को दबाना था उसे देखते हुए आराधना को अपने बेटे की हरकत बेहद अजीब लगी अजीब इसलिए कि वह अपने बेटे को अच्छी तरह से जानती थी लड़कियों से वह शर्माता,,, नहीं उसकी कोई गर्लफ्रेंड थी तो वह इस तरह की हरकत किया कैसे,,,, जिस तरह से वह जोर लगाता हुआ,, ब्लाउज के ऊपर से चूचियों को दबा रहा था आराधना को आभास हो गया था कि,,, उसके बेटे को ही अच्छी तरह से मालूम था कि औरतों की चूचियां दबाने में मजा आता है,,,,, और शाम को जिस तरह से वह उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का रसपान कर रहा था और साथ ही उसकी बड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेलियां रखकर दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींच रहा था और अपनी मोटे तगड़े लंड की ठोकर उसकी चूत पर साड़ी के ऊपर से ही मार रहा था वह सब देखकर महसूस करके आराधना पूरी तरह से समझ गई थी कि उसका बेटा उसका पूरी तरह से दीवाना हो चुका है उसे चोदना चाहता है लेकिन यह सब हरकत वह सीखा कहां से ऐसे तो संस्कार उसके बिल्कुल भी नहीं थे उसे तो अपने बेटे पर नाज होता था और जहां तक जिस तरह से अपने पति से मारपीट के दौरान हुआ बीच-बचाव किया था तब से तो उसके मन में अपने बेटे के लिए इज्जत और बढ़ गई थी वह अपने बेटे को अपना सहारा समझने लगी थी लेकिन,,,, अपनी मां के साथ ही इस तरह के काम भावना दिखाने पर वह हैरान थी,,,फिर वह अपने मन में सोचने लगी कि आखिर क्यों ना एक जवान लड़का अपने ही घर में अपनी मां के प्रति आकर्षित होगा,,, क्योंकि घर में माहौल ही कुछ इस तरह से था रात को मारपीट गालियां देना गंदी गंदी बातें करना और उसके पति के द्वारा अपने ही बेटे को लेकर लगाया गया इल्जाम,,,, यह सब सोचकर आराधना अपने आप से भी जैसे बात करते हुए अपने मन में बोली इन सब को सुनकर ही उसका बेटा इस कदर खराब हुआ है खास करके वह बात की अपने ही बेटे के साथ चुदवाती है,,, संजू रात भर दो उन लोगों की हर एक बात सुनता था गंदी गंदी गाली गलौज के साथ साथ अपने आप को लेकर अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध जैसे इल्जाम यह सब उसके मन पर गहरा प्रभाव कर रहा था और यही सब सुनकर वह अपने मन में कल्पना करने लगा था और धीरे-धीरे अपनी मा के प्रति आकर्षित होने लगा था,,,और उसकी यह काम भावना और ज्यादा प्रज्वलित तब हो गई होगी जब वह बीच-बचाव करने के लिए कमरे में दाखिल हुआ था और उस समय वह पूरी तरह से नंगी होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी,,, तभी तो वह पागलों की तरह उसके नंगे बदन को खोले जा रहा था शायद इससे पहले वह कभी किसी औरत को नंगी नहीं देखा था इसीलिए वह दृश्य उसके मन पर गहरा प्रभाव डालने लगा जिस के वशीभूत होकर,,, वह अपनी ही मां को चोदने के लिए तैयार हो गया,,,यही सब सोचते हुए आराधना खाना बना रही थी और उसी समय संजू उधर आ गया था कि उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी और ना ही संजू की,,,, लेकिन किसी भी तरह से संजू अपनी मां को मनाना चाहता था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी प्रेमिका उससे रुठ गई हो,,,,,,

किचन में आते ही औपचारिक रूप से नाश्ते के लिए पूछा तो उसकी मां ने बिना कुछ बोले नाश्ता देकर वहीं पास में रखी नाश्ते की प्लेट उठाते हुए संजू बोला,,,।

क्या हो गया मम्मी तुम को नाराज क्यों हो,,,

मैं नाराज नहीं हूं,,,

नाराज तो लग रही हो,,, अगर नाराज ना होती तो रात को यु दरवाजा बंद ना कर लेती,,,

सजु तु समझता क्यों नहीं है जैसा तू सोच रहा है वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है,,, हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता कभी नहीं होने वाला क्योंकि हम दोनों मां बेटे हैं,,,।

तो क्या हुआ मां बेटे के पहले तुम एक औरत हो और मैं एक मर्द तुम्हारी भी कुछ जरूरते है ख्वाहिशें है,,,

संजु तू पागल हो गया है,,, तु एकदम से बदल गया है,,, लेकिन तू ही चेहरा सोच है क्या एक मां और बेटे के बीच शारीरिक संबंध नैतिक रूप से संभव है,,, क्या तेरे जैसा बेटा अपनी मां के साथ इस तरह के गंदे रिश्ते को स्थापित करने के लिए तड़पता है जो कि मुमकिन ही नहीं है,,,।

तुम ऐसा कैसे कह सकती हो मम्मी,,,चारदीवारी के बीच क्या होता है यह जमाने को कहां पता चलता है,,, जैसा मैं सोच रहा हूं वैसा शायद दूसरे लड़के कर चुके हो,, कौन जानता है,,,,,,

नहीं नहीं मैं नहीं मानती,,, यह सब तेरे मन की उपज है,,,,,(रोटी को तवे पर रखते हुए बोली)

मम्मी तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करती तुम जिसे करने के लिए कतरा रही हो ऐसा हो भी सकता है कि घर की चारदीवारी के बीच ना जाने कितने घरों में इस तरह के रिश्ते पनप रहे हो,,,, मर्यादा और संस्कार के आगे भी औरत की नई जिंदगी होती है जिसमें वह खुल कर जीना चाहती है,,,तुम ही सोच लो अगर कल रात को हम दोनों के बीच कुछ हो गया होता तो यह बात क्या बाहर वालों को पता चलता,,, कभी नहीं पता चलता,,,,, यह राज सिर्फ हम दोनों के ही बीच रहता,,,,

तेरे संस्कार भटक गए हैं तु वासना में अंधा हो चुका है,,,संजु,,,

अंधा नहीं हुं,,, तुम्हारी आंखों पर मर्यादा और संस्कार का पर्दा पड़ चुका है तो अपनी ख्वाहिशों को अपनी जरूरतों को अपनी मर्यादा की दीवार में दबा दे रही हो एक औरत होने के नाते तुम्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि तुम्हें क्या चाहिए,,, पेट की भूख के साथ-साथ तुम्हें तन की भी फुर्सत आती है लेकिन तुम अपनी उस भूख को दबा रही हो,,, मैं जानता हूं कि तुम पापा के साथ बिल्कुल भी खुश नहीं हो,,,,।

(अपने बेटे की बातों को सुनकर आ रहा था ना पूरी तरह से हैरान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब बातें संजू कहां से सीखा औरतों को क्या जरूरत है क्या नहीं यह सब उसे कहां से पता चला,,,लेकिन वहां अपने मन में सोचने लगी थी जो कुछ भी उसका बेटा कह रहा है उसमें सच्चाई है जिसे वह चाह कर भी नहीं छुपा सकती,,, फिर भी अपने बेटे की बात का जवाब देते हुए वह बोली,,,)

बहुत बड़ा हो गया है तू तुझे पता चलने लगा कि औरतों की ख्वाहिश क्या है जरूरते क्या है,,,(आराधना गुस्से में बोली)

एक बेटे के नजरिए से सागर मुझे तुम्हारा दुख दर्द ही नजर आता लेकिन एक मर्द के नजरिए से तुम्हारे खूबसूरत बदन में छुपी हुई तुम्हारी जरूरते तुम्हारी ख्वाहिशें नजर आती है तुम्हारी बदन की भुख नजर आती है जो कि पूरी नहीं हो पा रही है,,,,

और उसे तो पूरा करना चाहता है यही ना,,,

पापा ने भी तो हम दोनों पर यही इल्जाम भी लगाया है,,,

और तू उस एग्जाम को हकीकत का रुप देना चाहता है,,,हे ना,,,

मम्मी तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करती जब से मैंने तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखा हूं तब से ना जाने मुझे क्या हो गया,,,(संजू हिम्मत जुटाकर अपने मन की बात बताते हुए बोला ,,) मेरी रातों की नींद हराम हो गई है,,,

(अपने बेटे की यह बात सुनते ही आराधना के बदन में भी सिहरन सी दौड़ने लगी,,,क्योंकि उसे इस बात का आभास है कि इस उम्र में लड़के जवान लड़कियों के पीछे भागते हैं और उसका बेटा है कि उसके नंगे बदन को देखकर उसका दीवाना हो गया है,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)

क्यों दीवाना हो गया इससे पहले कभी किसी औरत को नंगी नहीं देखा,,,(जानबूझकर आराधना इस सवाल सेअपने बेटे के मुंह से यह जानना चाहते थे कि क्या इससे पहले भी वह किसी औरत को नंगी देख चुका है या उसके जीवन में वह पहली औरत है जिसे वह बिना कपड़ों के पहली बार देखा था,,)

मैंने कभी नहीं देखा मैंने अपनी जिंदगी में सबसे पहले नंगी औरत को सिर्फ तुम्हें देखा और तुम्हें नंगी देखने के बाद पता चला कि तुम कितनी ज्यादा खूबसूरत हो,,,,(संजू के जीवन में सबसे पहली बिना कपड़ों के आने वाली औरत थी उसकी खुद की मौसी यानी उसकी मां की बड़ी बहन लेकिन संजू इस बात को अपनी मां के आगे जाहीर नहीं होने देना चाहता था इसलिए बात को छुपा ले गया था,, पर संजू की यह बात सुनकर जो अभी तक पूरी तरह से गुस्से में थे अब वही आराधना नरम पड़ने लगी थी,,,अपने बेटे की बात सुनकर उसे ना जाने क्यों अपने आप पर गर्व होने लगा था,,,उसे यह महसूस होने लगा था कि 2 बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन का कसाव एकदम जवानी के दिनों का ही था और यह बात तो खुद उसके बेटे ने हीं अपने मुंह से उसे बताया था,,,, अपने बेटे की बात सुनकर आराधना का मन थोड़ा शांत हो रहा था लेकिन वह अपने मन की शांति को अपने चेहरे पर बिल्कुल भी नहीं आने देना चाहती थी,,। इसलिए गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख समझो तू जो कुछ भी कह रहा है एक औरत के लिए वह सब अच्छा लगता होगा लेकिन एक मां के लिए नहीं समझ रहा है ना मैं तेरी मां हूं और तेरी इन बातें मुझ पर बिल्कुल भी शोभा नहीं देती और ना ही तुझे यह सब कहने मैं शोभा देती है,,,

शोभा दे या ना दे लेकिन जो मुझे सच लग रहा है मैं वही कह रहा हूं,,,

तुझे मैं खूबसूरत लगी तो इसका मतलब थोड़ी नहीं कि तू मेरे साथ कुछ भी करेगा,,,आखिर तुझे रिश्ता और मर्यादा का भी तो ख्याल रखना चाहिए,,।

और तुम्हारी जरूरत का क्या,,, क्या तुम्हारा मन नहीं करता संतुष्ट होने का कोई तुम्हें प्यार करें अपनी बाहों में कस के भरे,,, तुम्हें वह खुशियां दें जिसकी तुम हकदार हो,,, ना की मारपीट गाली-गलौज जबरदस्ती का प्यार इन सब चीजों के लिए तुनटम नहीं बनी हो मम्मी,,,, परिवार संभालने में पति की सेवा करने में और संस्कार और मर्यादा से घिरे रहने में शायद तुम्हें भूल गई हो कि तुम कितनी ज्यादा खूबसूरत हो तुम्हारी जरूरत है क्या है शायद तुम आईना देखना भूल गई हो,,, उस इंसान के साथ जबरदस्ती खुश रहने की कोशिश करती हो जो तुम्हें बिल्कुल भी नहीं चाहता ना तो तुम्हारी इज्जत करता है,,, और खुद तुम्हें अपने ही बेटे के साथ चुदवाने का इल्जाम भी लगा चुका है,,,।

(अपने बेटे के मुंह से चुदवाना शब्द सुनते ही वह एकदम से सिहर उठी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा इन सब बातों को ऐसे गंदे शब्दों को कहां सीख कर आया लेकिन तभी वह अपने मन में सोची,,, जो लड़का अपनी मां को चोदने की कोशिश कर सकता है तो क्या वह इन सब बातों को नहीं जानता होगा,,,,,,, लेकिन फिर भी अपने बेटे की बातों को सुनकर अपने बदन में उत्तेजना महसूस करने लगी, अपने बेटे की बात सुनकर बोली,,,)

संजू तो तुम बिगड़ गया है तुझे अपनी ही मां से इस तरह की गंदी बातें करने में बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही है,,,,

मुझे बहुत शर्म आती है मुझे यह सब नहीं करना चाहिए,,, तुम्हारे बारे में जिस तरह की मैंने बात की वैसे भी नहीं बोलना चाहिए लेकिन क्या करूं मैं जानता हूं कि तुम अंदर से दुखी हूं अपने ही पति से संतुष्ट नहीं हूं इसलिए डरता हूं,,,

डरता हूं,,, किस लिए डरता है,,,(आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

मैं कहना तो नहीं चाहता लेकिन तुम नहीं समझ रही हो तो मैं तुम्हें बताता हूं,,, तुम्हारी जो हालत है वैसे ही एक मेरे दोस्त की हालत है क्योंकि मेरा बहुत ही जिगरी दोस्त है उसी ने मुझे बताया था और मुझे कसम दिया था किस बारे में किसी को मत बताना लेकिन मैं तुम्हें बता रहा हूं,,,

क्या,,,,?

यही कि उसकी मां भी तुम्हारे जैसी ही खूबसूरत है लेकिन अपने पति से बिल्कुल भी खुश नहीं है ऐसा नहीं है क्या उसके पति काम नहीं करते मेरे दोस्त के घर किसी चीज की कमी नहीं है बस उसकी मां को कमी रहती है कि उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता और इसीलिए वहां तंग आकर,,, बाहर सुख ढूंढने लगी अपनी प्यास बुझाने के लिए वह गैर मर्दों का सहारा लेने लगी और धीरे-धीरे उसकी आदत हो गई अब तो वह जब कोई नहीं होता तो घर पर ही बुलाकर चुदवाती है,,,(एक बार फिर से संजू ने एकदम साफ और गंदे लफ्जों में बोला,, लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर आराधना समझ गई और गुस्से में बोली,,)

तो तुझे क्या लगता है किस बात का डर लगता है कि मैं भी बाहर जाकर किसी और से संबंध बनाओगी दूसरे मर्दों को अपने घर पर लाऊंगी तो पागल हो गया है मुझे इतना गिरा हुआ समझता है,,,।

नहीं मम्मी मैं तुम्हारी तुलना उस औरत से नहीं कर रहा हूं क्योंकि तुम कई मायने में उस औरत से बहुत अच्छी हो लेकिन दोनों की एक ही बात सामान नहीं कि दोनों अंदर से प्यासी है,,, तुम भी उसी की तरह प्यासी हो,,, इसलिए मुझे डर लगता है,,,,। मेरे अंदर यही डर था जो मै रिश्तो की मर्यादा को लांघ कर आगे बढ़ जाना चाहता था,,, मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारी हालत उस औरत की तरह हो जाए जो की चाह कर भी पीछे आना नामुमकिन हो,,,, बस यही कहना था,,,,

(पर इतना कहने के साथ ही अपना बैठाया और जाने लगा नाश्ते की प्लेट वैसे ही थी उसने कुछ भी नहीं खाया था तो आराधना पीछे से आवाज लगाते हुए बोली,,)

नाश्ता तो कर ले,,,

लेकिन संजू कुछ बोला नहीं और घर से बाहर चला गया आराधना उसे जाते हुए देखती रह गई आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, अपने बेटे की अपने दोस्त की मां वाली बात सुनकर उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन वह जानती थी कि हालत कैसी भी हो वह उसके दोस्त की मां की तरह तो बिल्कुल भी नहीं बनेगी जो कि यह बात संजू अपने ही फायदे के लिए मनगडंत कहानी बताया था,,,,,संजू के जाने के बाद आराधना एकदम सोच में पड़ गई उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कोई राह दिखाई नहीं दे रही थी अपने मन में सोचने लगी कि क्या वाकई में उसका बेटा उसके दोस्त की मां की तरह हालत ना हो जाए इसलिए खुद उसे संतुष्ट करने की जिम्मेदारी उठाया था,,, अगर ऐसा भी है तो भी तो अपने दोस्त की मां की हालत का वर्णन करते हुए अपनी मां के साथ गलत संबंध बनाना यह तो गलत ही है,,,, आराधना को कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन सच में जिस तरह से खुले शब्दों में चुदाई वाली बात किया था उसके मुंह से चुद वाना सब को सुनकर आराधना अंदर ही अंदर उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, वह इन सब बातों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देना चाहती थी क्योंकि यह सब बातें उसे कमजोर बना रहे थे और वह कमजोर नहीं बनना चाहती थी किसी भी हालत में वह मां बेटे के बीच के रिश्ते को तार-तार नहीं करना चाहती थी इसलिए अपने आप पर काबू करके अपना ध्यान घर के काम में लगा कर अपने आप को व्यस्त करने लगी,,,।
 
संजू गुलाब जामुन का स्वाद चखते चखते रह गया,, इस बात का मलाल उसे बहुत था,,,उसे पूरा विश्वास था कि स्वादिष्ट व्यंजन की थाली उसे खाने को मिलेगी लेकिन,,, एकाएक उसके सामने परोसी गई थाली हटा ली गई थी,,, इसलिए उसे भूखा ही सोना पड़ा था,,,,लेकिन उसे अपने आप पर विश्वास था कि एक ना एक दिन जरूर वह पेट भरकर भोजन करेगा,,, अपनी भूख को स्वादिष्ट व्यंजन से तृप्त करेगा,,,,

दूसरी तरफ मोहिनी जवानी की दहलीज पर खड़ी होकर दस्तक दे रही थी ऐसे में जो नजारा उसकी आंखों के सामने नजर आया था उसे देखकर उसकी जवानी अपने आप पिघलने लगी थी,,, मोहिनी ने कभी भी एक जवान लंड को अपनी आंखों से देखी नहीं थी उसके दर्शन नहीं किए थे,,, लेकिन पहली बार जब उसे यह मौका मिला तो वह पूरी तरह से मदहोश हो गई,,,,, और वह भी अपने ही भाई का,,, उसे तो लंड के आकार को देखकर उसकी मोटाई को देखकर अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था,,,,,, मोहिनी ऐसे हालात में बहकना नहीं चाहती थी लेकिन इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं की जवानी का दौर ही कुछ ऐसा होता है लंड पर नजर पड़ी नहीं कि उसकी चुत फुदकने लगी, वह, मजबूर हो गईऔर उसके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था इसलिए मजबूरन हुआ है अपने अंदर भड़की आग को शांत करने के लिए अपने ही हाथ का सहारा लेते हुए अपनी चूत को मसल मसल के उसके गुलाबी छेद ने अपनी उंगली डालकर अपने गरम लावा को बाहर निकाल दी,,, इस वाक्ये के बाद मोहिनी की सोच बदलने लगी थी उसका नजरिया बदलने लगा था,,,अब वह बार-बार रात को ऐसे लोगों की तलाश में रहती थी कि उसके भाई का लंड उसे देखने को मिल‌ जाए लेकिन ऐसा हो रही पा रहा था इसलिए उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी,,, ऐसे ही ऐसे मैं 10 दिन जैसा गुजर गया इन दिनों में संजू भी यह सोच कर अपनी मां के करीब जाने का प्रयास नहीं किया क्योंकि वह सोचता था कि उसकी मां खुद उसके पास आएगी,,,अपनी मौसी की बदल की प्यास देखकर उसे ऐसा ही लगता था कि उसकी मां में भी उसी की तरह की प्यास भरी होगी और अपनी प्यास बुझाने के लिए वह खुद उसके पास आएगी लेकिन यहां पर संजू की सोच कमजोर पड़ गई थी क्योंकि साधना उसकी मौसी थी और अपने भतीजे के साथ संबंध बनाने में उसे किसी भी प्रकार का एतराज महसूस नहीं हो रहा था लेकिन आराधना उसकी मां थी भले ही संजू अपनी मां की तरफ तुरंत आकर्षित होकर उसके साथ संबंध बनाने के तैयार हो गया था लेकिन आराधना उसकी मां थी उसके लिए इस तरह के संबंध किसी पाप से कम नहीं थे,,, और यह वास्तविक रूप में पापा ही था मां बेटे के बीच इस तरह के शारीरिक संबंध समाज में बिल्कुल भी मंजूर नहीं है,,,।और इस बात को आराधना अच्छी तरह से जानती थी वह अपनी मर्यादा की दीवार को गिराना नहीं चाहती थी ना ही खुद अपनी नजरों में गिर जाना चाहती थी,,,हालांकि दो बार ऐसे क्षण आया जब वह भावनाओं में बहकर अपने बेटे का साथ देने लगी थी लेकिन जल्द ही अपने आप को संभाल भी ली थी,,,,,,,

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कुछ दिनों से घर का माहौल शांत था सिर्फ मन के आंतरिक माहौल में हलचल मची हुई थी,,, आराधना मोहिनी और संजू अपने ही मनो मंथन में लगे हुए हैं उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कोई राह दिखाई नहीं दे रही थी बस किसी भी तरह से अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहते थे संजू का इस तरह से नाराज होना आराधना को अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन जो कुछ भी संजू चाह रहा था उसकी चाह को पूरा करना आराधना के बस में बिल्कुल भी नहीं था,,,, और दूसरी तरफ मोहिनी के दिलों दिमाग पर अलग ही मंजर छाया हुआ था,,,, जब भी वह एकांत में बैठती थी तो हमेशा उसकी आंखों के सामने उसके भाई का खड़ा लंड ही नजर आता था,,,,,, ना जाने क्यों उसकी इच्छा लंड को अपनी चुत के अंदर महसूस करने को कर रही थी,, जिसके लिए वह तड़प रही थी उसकी कामभावना प्रज्वलित हो रही थी,,, ऐसे में उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,,,,,,।

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रविवार का दिन था और वह अपनी सहेली के घर गई थी जहां से उसकी सहेली अपनी एक्टिवा पर बिठाकर पार्क में यूं ही टहलने के लिए गई थी,,,। दोनों आइसक्रीम लेकर पार्क में एकांत में बैठकर बातें कर रहे थे,,, उसकी सहेली आइसक्रीम खाते हुए,,,।

यार मोहिनी तु ना सच में एकदम बेकार है,,,

ऐसा क्यों,,,?(आइसक्रीम खाते हुए)

इतनी खूबसूरत होने के बावजूद भी अभी तू अकेली है तेरा फिगर कितना कातिल है देखी है कभी,,,

तू भी ना कौन सी बात छेड़ दी,,,

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अरे मैं सच कह रही हूं शायद तुझे पता नहीं है कॉलेज के सारे लड़के तेरे चक्कर में पड़े रहते हैं और तू है कि किसी को भाव तक नहीं देती,,,

मुझे भाव देना भी नहीं है,,,।

यही तो तेरी गलती है जवानी का असली मजा तो लड़कों को अपने पीछे गुलाम बनाकर घुमाना है,,, जब बुढी हो जाएगी तब कोई पूछने वाला नहीं, है,,,।

तू क्यों नहीं घुमाती लड़कों को अपने पीछे पीछे,,,

तू नहीं जानती तीन तीन लड़के मेरे पीछे हैं लेकिन मैं जिसे अपना गुलाम बनाना चाहती हूं साला भाव ही नहीं देता,,,

फिर क्यों उसके पीछे पड़ी है छोड़ दे उसको,,,,

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अरे नहीं नहीं वह मुझे बहुत अच्छा लगता है और मुझे पूरा यकीन है कि वह मेरे पीछे लट्टु बनकर घूमेगा,,,

क्यों कोई चमत्कार होने वाला है क्या,,,?

चमत्कार होता नहीं मेरी जान चमत्कार करके दिखाना पड़ता है,,,,,,

मैं तेरी बात समझी नहीं,,,

समझेगी भी नहीं तु एकदम बुद्धू है,,,

अरे समझाएगी तभी ना समझ में आएगा,,,,,,( वैसे तो मोहिनी इस तरह की बातों में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नहीं लेती थी लेकिन जब से अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे लंड का दर्शन कि हैतब से उसका इंटरेस्ट इस तरह की बातों में बट गया था और वो जानती थी कि उसकी सहेली इस तरह की बातें हमेशा करती रहती है इसलिए वहां आज उसकी बातों को सुनने के लिए व्याकुल हो रही थी वह सुनना चाहती थी कि उसकी सहेली क्या कहती है,,, )

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अच्छा सुन,,,,,, तुझे मालूम है कि लड़के लड़कियों के पीछे कौन सी लालच से सबसे ज्यादा भागते हैं,,,

नहीं तो,,,

यही तो बात है इतनी जवान और खूबसूरत है लेकिन इन सब बातों में जरा भी इंटरेस्ट नहीं है इन सब बातों में भी इंटरेस्ट लिया कर आगे चलकर यही काम आने वाला है जब पति को खुश करना पड़ेगा और तुझे नहीं आएगा ना तब तुझे छोड़कर वह किसी और के पास चला जाएगा तब तुझे इस बात का एहसास होगा कि कुछ सीख ली होती तो अच्छा होता,,,,

तू है ना सीखाने को,,,

हां मैं तो हू सिर्फ बताने को सिखा नहीं सकती क्योंकि मेरे पास नहीं है तुझे अच्छी तरह से सिखाने के लिए लंड की जरूरत है,,,,।

(अपनी सहेली के मुंह से लंड शब्द सुनते ही मोहिनी के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,, दोनों टांगों के बीच सुरसुराहट सी महसूस होने लगी,,, आज मोहिनी को इस बात का अहसास हुआ कि उसकी सहेली लंड शब्द कितने आराम से और जल्दी से बोल गई अगर उसे बोलना होगा तो उसकी जीभ ही अकड जाएगी,,,, अपनी सहेली की बात सुनकर मोहिनी बोली)

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रेणुका तु मुझे बता देती है यही मेरे लिए बहुत है,,,(इतना कहकर दोनों हंसने लगे तो रेणुका अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

अच्छा सुन मैं तुझे बताती हूं मुझे सब पता है कि तुझे सिखाने के लिए मेरी ही जरूरत पड़ेगी,,,,(दोनों आइसक्रीम खा चुकी थी और आज के पास में भी बड़े डस्टबिन में डाल कर वापस टेबल पर बैठ गई थी) मैं तुझे बताती हूं कि लड़के लड़कियों के पीछे किस लालच की वजह से सबसे ज्यादा पड़े रहते हैं,,,,लड़कों को लड़कियों में सबसे ज्यादा इंटरेस्ट उनकी रूचि होती है तो सिर्फ लड़कियों के दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में,,,

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पतली दरार में,,,(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली)

पतली दरार मतलब चूत मेरी जान,,,, अच्छा तु चुत बोल कर बता,,,, तभी मैं तुझे सब कुछ बताऊंगी,,,

यह क्या कहने को कह रही है यार मैंने आज तक इस शब्द को नहीं बोली,,,

तभी तो मैं हैरान हूं अपने ही अंग का नाम तो अगर नहीं ले सकती तो क्या खाक सीख पाएगी,,, चल जाने दे तेरे बस का बात नहीं है चल घर चलते हैं,,,(इतना कहने के साथ ही वह उठ कर खड़ी हो गई तो उसका हाथ पकड़ कर बैठाते हुए मोहिनी बोली,,,)

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यार तू तो अजीब सा जीद लेकर बैठ जाती है,,,

नहीं आज तो बिल्कुल नहीं जब तक तू अपने मुंह से चुत नहीं बोलेगी तब तक तुझे कुछ नहीं बताऊंगी,,,।

(मोहिनी रेणुका को नाराज नहीं करना चाहती थी आज उसकी मुंह से कुछ सीखना चाहती थी उसकी बातों पर इसीलिए गौर कर रही थी क्योंकि उसे लगने लगा था कि अब उसकी जिंदगी में भी रेणुका की बातें काम आने वाली है,,, इसलिए ना चाहते हुए भी उसकी बात मानते हुए मोहिनी बोली

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अच्छा अच्छा,,,, बोलती हूं तू ऐसे मानेगी नहीं,,,, बोलना क्या है,,,?

चुत बोलना है मेरी जान,,,, अब बोल,,,

अरे बोलती हूं इतनी जल्दी क्यों है तुझे,,,

अच्छा बोल,,,,

(मोहिनी को आगे की बात सुनने के लिए उसे चूत शब्द बोलना ही था लेकिन झूठ बोलने से पहले उसके चेहरे का हाव भाव पलभर में ही बदलता हुआ नजर आ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह चूत कैसे अपने होठों से निकाले फिर भी हिम्मत करके वह लड़खडाते शब्दों में बोली,,,)

चचचच,,चुत,,,,,, अब बस,,,,(इतना कहते हुए मोहिनी की सांसे ऊपर नीचे होने लगी है देख कर रेणुका हंसने लगी मोहिनी ने पहली बार अपने मुंह से चुत शब्द बोली थी इसलिए वह पूरी तरह से इन दो शब्दों को बोलने में उत्तेजित हो गई थी,,, उसे अपनी पेंट गीली होती हुई महसूस हो रही थी रेणुका को इस तरह से हंसते हुए देखकर मोहिनी बोली,,,)

अब हंसते ही रहेगी या बोलेगी भी,,,

हां हां बोलती हुं,, सच कहूं तो तेरे मुंह से चूत शब्द सुनकर मेरी चुत फड़फड़ाने लगी,,,,(और यही हाल मोहिनी का भी हो रहा था जिस तरह से रेणुका एकदम खुलकर‌ चुत शब्द बोल रही थी चूत फड़फड़ाना बोल रही थी यह सब सुनकर मोहिनी की चूत पनियाने लगी थी,,, रेणुका अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) देख दुनिया के सभी लड़के लड़कियों और औरतों की चूत के पीछे ही भागते हैं,,,जब तक उन्हें चोदने को चोदने मिल जाती तब तक बहुत लड़कियों की हर एक बात मानते उनकी हर एक ख्वाहिश पूरी करते हैं,,, यह सारा माजरा सिर्फ चूत (अपना हाथ सीधे-सीधे मोहिनी की चूत पर रखते हुए) का है,,,।

आहहहह,,, क्या कर रही है यार,,,

अरे तुझे बता रही हूं कि सारा खेल चुत का ही है,,,

(रेणुका की बातें मोहिनी को पानी-पानी कर रही थी,,, रेणुका की बात सुनकर मोहिनी बोली,,)

तो अब तू क्या करेगी उस लड़के को अपने पीछे पीछे घुमाने के लिए जिसे तू पसंद करती हैं,,,,(मोहिनी यह सवाल सिर्फ जानने के लिए पूछी थी कि एक लड़के को दीवाना कैसे बनाया जाता है अपने पीछे पीछे पागलों की तरह कैसे घुमाया जाता है क्योंकि अब उसे भी यह तरीका सीखना था,,)

अरे बहुत आसान है मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे आइडिया की वजह से वह मेरा गुलाम बन जाएगा लेकिन सच बताऊं मैं उसे इतनी जल्दी अपनी चुत देने वाली नहीं हूं,,,

धत्,,, यह क्या बोल रही है,,,

अरे बुद्धू यह तो जरूरी है,,, जब ऐसा लड़का तुम्हारा दीवाना बन जाए जिसे तुम पसंद करती हो तो एक ना एक दिन तो उसे अपनी चूत देना ही होगा क्योंकि वह उसी के लिए तुम्हारे पीछे पीछे घूम रहा होगा और जब तुम बार-बार से इनकार करोगी तो एक दिन छोड़कर चला जाएगा दूसरे के पीछे सब तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी,,,,

(रेणुका का की यह बात सुनकर मोहिनी अपने मन में सोचने लगी कि किसी को अपना गुलाम बनाने के लिए उससे से चुदवाना ही पड़ेगा,,,)

चल ठीक है उसी तड़पाने के बाद दे देना लेकिन उसे अपना दीवाना बनाएगी कैसे यह तो बता,,,

अरे यही तो तुझे बताने जा रही हूं,,,, अभी अभी मैंने तुझे बताई नाकि लड़के लड़कियों की चूत के पीछे पागल है तू तो उसे किसी न किसी बहाने से अपनी चूत के दर्शन करा दूंगी और मेरी चूत देखने के बाद वह पागल हो जाएगा और मेरे पीछे लार टपकाते हुए घूमता रहेगा,,,,

(अपनी सहेली रेणुका की यह बात और उसका इरादा जानकर मोहिनी के तन बदन में आग लगने लगी उत्तेजना /भड़कने लगी,,,)

अरे लेकिन बताएं कि कैसे क्या सीधे जाकर उसके सामने अपनी सलवार उतार कर खड़ी हो जाएगी,,,

अरे नहीं मेरी जान ऐसे दिखाने में वह मजा नहीं है ऐसे तो वहां समझेगा कि वह जानबूझकर दिखा रही है,,,

फिर कैसे दिखाएगी,,,

दिख रही है ना मैं क्या पहनी हूु,,

हां शॉर्ट फ्रॉक,,,,

बस फिर क्या,,,, उसके सामने टेबल पर बैठ जाऊंगी और टांगों को किसी न किसी बहाने कुर्सी पर रखकर या थोड़ा फैलाकर बैठ जाऊंगी उसे मेरी चूत दीखना ही दीखना है और उसके बाद तो कुछ बोलने की जरूरत नहीं है खुद लार टपका ता हुआ मेरे पीछे-पीछे आएगा,,,, ऊताऊं कैसे दिखाऊंगी,,,,(मोहिनी कुछ बोल पाती इससे पहले ही रेणुका पार्क में इधर-उधर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद तुरंत अपनी दोनों टांगों को टेबल पर बैठे हुए हैं थोड़ा सा फैलाई और सबसे नजरें बचाकर अपनी फ्रॉक को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा दी और मोहिनी की आंखों के सामने जो नजारा नजारा है उसे देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,, केवल 3 या 4 सेकंड के लिए रेणुका ने अपनी फ्रॉक को ऊपर की तरफ उठाई थी इतने में मोहिनी को रेणुका का सारा भुगोल नजर आने लगा था,,, और रेणुका ने हंसते हुए फिर से फ्रॉक को व्यवस्थित करके बैठ गई,,,,।

बाप रे रेणुका,,, फ्रॉक के नीचे तो तूने कुछ भी नहीं पहनी है,,,

तो क्या हुआ अभी से प्रैक्टिस शुरू कर दी हु,,, सच कहूं तो फ्रॉक के नीचे पेंटी ना पहनने से कितना हल्का-हल्का महसूस हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है,,,।

बाप रे तू कितनी बेशरम है,,,(मोहिनी आश्चर्य से आंखें फाड़े बोली,,)

सच कहूं मोहिनी जिंदगी का मजा बेशर्म बनने में ही है,,, तू अपने आप को ही देख ले इतनी खूबसूरत है सेक्सी है लेकिन शर्म कब घर में छोड़कर तुझे अपनी खूबसूरती का जरा भी आनंद मिल रहा है,,, साली अगर मे तेरी जगह होती ना तक ना जाने कितने लड़कों को पागल बना दी होती और अपनी चूत का उद्घाटन भी करवा दी होती,,,

तू सच में बहुत हारामी है,,,,।

(फ्रोक के नीचे रेणुका ने पेंटी नहीं पहनी थी वह फ्रॉक के नीचे एकदम नंगी थी यह जानकर और देख कर मोहिनी की चूत में हलचल सी मचने लगी पहली बार मोहिनी किसी अपनी हम उम्र लड़की की चूत को देख रही थी एकदम क्लीन एकदम चिकनी बाल का रेशा तक नहीं था और एकदम थोड़ी हुई और एक बात पर और मोहिनी ने गौर की थी कि उसकी चूत के पतली दरार में से पानी की बूंद किसी मोती की दाने की तरह उभर कर बाहर आई थी,,,, यह देख कर मोहिनी के तन बदन में हलचल सी मच गई थी,,, रेणुका मुस्कुरा रहे थे और मोहिनी हैरान थी,,,)

मुझे तो बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा है कि तुम इतनी दूर है कि वह चला कर और वह भी बिना पैंटी पहने आ गई है कोई देख लेता तो,,,

अरे यार किसी को अगर मेरी चूत नजर भी आ जाती तो घर जाकर लंड हिला कर शांत हो जाता,,,

और कुछ रह गया है तो वह भी बोल दे,,,(लंड हिलाने वाली बात सुनकर हैरानी जताते हुए मोहिनी बोली,,)

अरे यार लड़की भी इस तरह से आपस में बातें करते रहते तो हम लड़कियों को भी तरह से बातें करना चाहिए इसमें हर्ज ही क्या है,,,।

हर्ज तो कुछ नहीं है लेकिन,,, यह सब तानसेन किसके लिए है किस को दिखाना चाहती है तू अपनी चूत,,,(इस बार उत्तेजित स्वर में मोहिनी चूत शब्द बोल दी यह सुनकर रेणुका मुस्कुराने लगी और बोली,,)

अरे यार मेरे ही पड़ोस का लड़का है मुझ से 2 साल बड़ा है और मुझे ट्यूशन पढ़ाने आता है सच में इतना हैंडसम है ना कि वह मेरे पास बैठकर जब पढ़ाता है तो अपने आप ही मेरी चूत गीली होने लगती है,,,

तू नहीं सुधरेगी,,,

सुधारना होता तो इतना तामझाम थोड़ी ना करती मैं तो कह रही हूं कि तू इतनी खूबसूरत है तू भी किसी को अपनी चूत की झलक दिखा दे फिर देख जिंदगी का मजा,,,

ना बाबा ना रहने दे तू,,,

साली ऐसे ही इंकार करती रही नाकिसी दिन गलती से भी तेरे भाई ने तेरी चुत देख लिया ना तो वह तेरे पीछे हाथ धोकर पड़ जाएगा,,, और तेरी चूत मारे बिना शांत नहीं होगा ,,,,वैसे तेरा भाई भी बहुत हैंडसम है मेरा दिल उसपर भी आया हुआ है लेकिन वह भी साला तेरे जैसा ही है एक दम सीधा-साधा,,,।

(अनजाने में ही रेणुका ने उसके भाई का जिक्र छेड़ कर और वह भी इस तरह के मादक मुद्दे पर जिसे सुनकर मोहिनी के तन बदन में खलबली सी मचनें लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि उसके भाई ने क्यों उसकी चूत के दर्शन नहीं किया लेकिन उसने अपने भाई के लंड के दर्शन कर चुकी है,,,और अपने भाई के लंड के दर्शन करने के बाद जो हलचल उसे अपने बदन में महसूस हुई थी उसे शांत करने के लिए उसे पहली बार अपने हाथ का सहारा लेना पड़ा था उस बात को याद करके उसके तन बदन में आग सी लगने लगी और वह अपने मन में सोचने लगी कि जब अपने भाई के लंड को देखकर पूरी तरह से मतवाली हो गई थी तो अगर उसका भाई उसकी चूत के दर्शन कर लेगा तो उसका क्या हाल होगा,,, फिर तो रेणुका जो कह रही है वैसा ही हो जाएगा उसका भाई भी उसकी चूत का दीवाना हो जाएगा,,,,मोहिनी अपने मन में यही सब सोच रही थी कि रेणुका अपना पर्स लेकर खड़ी हो गई और चलने के लिए तैयार हो गई पीछे पीछे मोहिनी भी चल पड़ी लेकिन अब उसका दिमाग घूमने लगा था रेणुका की बताई युक्ति को वह अब अपने भाई पर आजमाना चाहती थी,,,, लेकिन कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था ,,,,,।
 
मोहिनी अपनीसहेली रेणुका से मिलके काफी खुश और उत्साहित नजर आ रही थी क्योंकि अपनी सहेली से मिलने के बाद से उसे एक नया रास्ता मिल गया था जैसे वह अपनी मंजिल तक पहुंच सकती थी,,,रेणुका की बताई युक्ति जो कि वह अपने बॉयफ्रेंड पर आजमाना चाहती थी उसे सुनकर मोहिनी के मन में भी उत्सुकता जागने लगी उसे अपनी सहेली की इस युक्ति पर पूरा भरोसा नजर आ रहा था,,, क्योंकि यही हाल उसका भी था जब वह अपने भाई के लंड को अपनी आंखों से देखी थी और उसे पूरा यकीन था कि उसका भाई भी पूरी तरह से पागल हो जाएगा जब उसे बिना पेंटी के देखेगा तब,,,।

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दूसरी तरफ साधना परेशान थी अपने बेटे को लेकर,,, साधना अच्छी तरह से जानती थी कि संजू जो कुछ भी करने की सोच रहा है वह बहुत गलत है एक बेटा भला अपनी मां के साथ इस तरह का रिश्ता कैसे रख सकता है और उसे ताज्जुब भी हो रहा था कि इस नौजवान उम्र मेंएक लड़का एक नौजवान लड़की की तरफ आकर्षित होता है ऐसे मोड़ पर उसका बेटा एक उम्रदराज औरत की ओर आकर्षित हुआ जा रहा है और वह भी अपनी मां की तरफ,,,,इस बात को लेकर मैं बेचैन नजर आती थी लेकिन ना जाने क्यों अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित होता देखकर उसके मन में अजीब सी हलचल भी होती थी क्योंकि उसे लगने लगता था कि इस उम्र में भी उसके अंदर जवानी की आग पूरी तरह से बरकरार है,,, वरना भला उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित क्यों होता,,,, अपने बेटे की हरकत की सोच के बारे में सोच सोच कर कभी कभी साधना की आंखों से आंसू टपक पड़ते थे तो कभी उसकी हरकत को लेकर उसकी चूत से काम रस बहने लगता था साधना समझ नहीं पा रही थी फैसला नहीं कर पा रही थी कि वह, अपने बेटे को समझाए या आगे बढ़ने दें,,,,,

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, कहीं ना कहीं उसे अपने बेटे की हरकत अच्छी भी लगती थी,,,,,, वरना उसकी चुत से काम रस युं ना बहता,,,,, कभी-कभी अपने बेटे की मौजूदगी में दोनों के बीच हालात कुछ इस कदर आगे बढ़ जाते की साधना को समझ में नहीं आता था कि वह क्या करें,,, उसका बदन अपने बेटे की हरकत के आगे घुटने टेक देता था लेकिन दिमाग पर जोर देकर वह बार-बार कतरा जा रही थी,,,,,,,। अब तो उसी और की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्योंकि उसके बेटे ने खुले शब्दों में एक औरत की जरूरत है को उदाहरण के रूप में उसकी आगे धर दिया था,,, और वह भी अपने ही दोस्त और उसकी मम्मी का उदाहरण देते हुए,,,,।

खैर जैसे-तैसे दिन गुजरने लगे संजू के मन में अपनी मां को लेकर थोड़ा गुस्सा भी था लेकिन प्यार भी बहुत था लेकिन यह प्यार स्नेह ना होकर पूरी तरह से वासना था जिसमें संजू पूरी तरह से लिप्त हो चुका था और किसी भी तरह से अपनी मां को चोदना चाहता था उसे अपना बनाना चाहता था उसकी खूबसूरत बदन पर अपना अधिकार जमाना चाहता था,,,, वह तो साधना थी जो अपने पति से संतुष्ट ना होते हुए भी,,अपने बेटे की जरूरत के आगे घुटने नहीं टेक दिए वरना उसकी जगह कोई और औरत होती तो अब तक वह अपने बेटे के साथ हमबिस्तर हो चुकी होती,,,,,,,,।

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दूसरी तरफ मोहिनी अपने भाई के ऊपर मोहिनी बाण चलाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अपनी सहेली के बताए युक्ति पर वह पूरी तरह से काम करना चाहती थी लेकिन,, वह डरती भी थी कि अगर उसका भाई उसकी हरकत पर उसे डांट दिया तो क्या होगा,,,, लेकिन अपनी सहेली की बात उसे याद थी कि अगर उसका बॉयफ्रेंड एक बार उसकी चूत देख लेगा तो पागलों की तरह उसके पीछे-पीछे दीवाना बनकर घूमेगा और यही उसकी बात उसकी ताकत बन चुकी थी उसे भी पूरा यकीन हो चुका था किअगर उसका भाई भी उसकी चूत का झलक देख लेगा तो उसका दीवाना हो जाएगा जैसा कि वह अपने भाई के लंड की दीवानी हो चुकी थी,,,,,,।

आज शनिवार का दिन था वह आज ही पूरी तैयारी कर लेना चाहती थी क्योंकि कल रविवार था कल स्कूल जाना नहीं था किसी भी तरह सेवा अपने भाई को अपनी मोहिनी जाल में फंसाना चाहती थी,,, अपने हुस्न का जलवा दिखाकर उसे लुभाना चाहती थी,,,, मोहिनी ऐसी पहले कभी नहीं थी पहली बार अपनी मौसी के मुंह से गंदी गंदी बातों को सुनकर उसके तन बदन में जो हलचल हुई थी उसके चलते उसके दिलो-दिमाग पर उसकी मौसी की बातें घर कर गई थी जब वह अपनी मौसी की बातों को थोड़ा-थोड़ा बोल चुकी थी तभी ऐन मौके पर उसने अपने भाई के खड़े लंड का दर्शन कर ली और एक जवान लंड के दर्शन कर लेने से एक जवान लड़की के तन बदन में जो हलचल होती थी वही हलचल व अपनी बदन में महसूस करते हुए अपनी जवानी की गर्मी को अपने ही हाथ की उंगली से शांत करने पर मजबूर हो गई और उसकी यही मजबूरी उसकी दीवानगी बन गई अपनी सहेली की बातों को सुनकर उसने भी अपने भाई को अपने माया जाल में फंसाने का पूरी तरह से इंतजाम कर ली और उसी के इंतजाम के चलते वह ,, चोरी छुपे अपनी मां के कमरे की अलमारी में से ड्रावर में छिपाकर रखे गए वीट क्रीम को निकाल ली,,, जिसका उपयोग साधना कभी कबार कर लेती थी क्योंकि उसे अपनी चूत पर ढेर सारे बाल पसंद बिल्कुल भी नहीं थे वह हमेशा अपनी चूत को चिकनी रखना चाहती थी और रखती भी थी लेकिन कुछ महीनों से उसके जीवन में जिस तरह का बदला हुआ था उसे देखते हुए वह‌ सजना सवरना और चूत को क्रीम से साफ करके चिकना रखना भूल चुकी थी,,,, वैसे भी उसकी जिंदगी में मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी जिससे कि उसका ध्यान अपने बदन पर सजने सवरने पर जाएं वह तो अपना जीवन बचाने पर लगी हुई थी अपने जीवन की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने की पूरी कोशिश में लगी हुई थी लेकिन उसकी कोशिश बिल्कुल भी रंग लाती दिखाई नहीं दे रही थी हां उसके बेटे की थोड़ी सी हिम्मत ने घर में शांति का माहौल बना रखा था,,,, लेकिन इस शांति के पीछे भी बहुत बड़ा तूफान था जोकि मोहिनी संजू और साधना के मन पर अपने तरीके से भारी असर कर रहा था,,,,।

मोहिनी अपनी मम्मी की अलमारी में से वीट क्रीम से थोड़ी बहुत क्रीम एक साथ पेपर पर निकाल कर उसे सबकी नजरों से बचाकर बाथरूम में लेकर आ गई,,,,,,सुबह का समय था नहाने का समय उसी का था इसलिए इत्मीनान से वह बाथरूम का दरवाजा बंद करके धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतारने लगी,,, आज दूसरी बार वह अपनी चूत को साफ करने जा रहे थे इसलिए उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी बाथरूम के दरवाजे की कड़ी लगाते समयउसके दिल की धड़कन जोरों से चल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई वह चोरी वाला काम करने जा रही है,,, देखते ही देखते मोहिनी अपने बदन पर से सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई,,, बाथरूम में शीशा तो लगा नहीं था क्योंकि मोहिनी का परिवार पूरी तरह से सुख सुविधा से संपन्न नहीं था,,, एक तरह से इस समय रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे,,, और ऐसे हालात में मोहिनी अपनी जरूरतों को पूरी करने की कोशिश कर रही थी,,,,अपने नंगे बदन को अपनी ही नजरों से ऊपर से नीचे की तरफ देखकर वह संतुष्ट होते हुए सबसे पहले अपनी छातियों की शोभा बढ़ा रहे हैं छोटे-छोटे अनार को जो की पूरी तरह से सुगठित अवस्था में थी उसे अपनी हथेली में लेकर हल्के हल्के दबाने की कोशिश करने लगे और उसकी यह हरकत उसके तन बदन में उत्तेजना का संचार बढ़ाने लगी,,,,।

हथेली की हरकत धीरे-धीरे शख्ती में बदलने लगी,,,, अपने ही बदन के नाजुक अंग को अपनी हथेली में लेकर दबाने में उसे आनंद आने लगा,,, उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी मोहनी यह हरकत अपने बदन के साथ पहली बार कर रही थी,,, और वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी देखते देखते वह अपनी चुचियों को जोर जोर से दबाने लगी,,,, इस समय आनंद की परिभाषा शायद उसके लिए यही थी,,,, पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, दोनों हथेलियों पर अपनी चुचियों को लेकर वह अपनी आंखों से देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी,,,, छोटी-छोटी नारंगीयो को देखकर उसे अपने ऊपर गर्व का अनुभव हो रहा था,,,, चुचियां उसकी पल भर भी एकदम कड़क हो चुकी थी और उन चूचियों की शोभा बढ़ा रहे छोटी सी छुआरा टाइप की निप्पल पूरी तरह से जितना हो सकता था अपनी औकात में आकर खड़ी हो चुकी थी और खड़ी होने के बाद कैडबरी की कोई स्वादिष्ट चॉकलेट लगने लगी थी,,,, जिसे देखकर महीने का मन मुंह में लेकर चूसने को कर रहा था लेकिन उसकी चूचियां अभी पूरी तरह से जवान हो रही थी इसलिए उसमें जवाबी लचक और घेराव पन नहीं था जिसे वह खुद अपने हाथ में लेकर उसे मुंह में लगा सके,,,,,,, लेकिन जवानी के दौर में अरमानों को अपने आप ही पंख लग जाते हैं इसलिए अपने मुंह पर ना पहुंचने के बावजूद भी वह पूरी कोशिश कर रही थी कि उसकी चूची उसके मुंह तक पहुंच जाएं और वह अपनी ही निप्पल को मुंह में लेकर चुसे,,, लेकिन उसके हार मान उसकी यह चाहत इस समय असंभव थी,,, इसलिए वह मुंह में लेकर चूसने की अपनी इच्छा को मन में ही दबाकर वह अपनी चुचियों को जोर जोर से दबाने लगी ना जाने क्यों उसे अपनी चूचियां दबाने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,देखते ही देखते मोहिनी ने खुद अपने हाथों से अपनी गोरी गोरी सूचियों को टमाटर की तरह लाल कर दी जिसे देख कर उसके गाल भी शर्म से लाल हो गए,,,,,,,।

मोहिनी है बात अच्छी तरह से जानती थी कि वह काफी सुंदर थी जो कि खुद उसकी नहीं सहेली उसे बताती भी थी अपने बदन के बनावट पर उसे भी गर्व होता था,,,, अपने नितंबों को अपने ही हाथ से स्पर्श करके वह उत्तेजित हो जा रही थी और अपने मन में सोच रही थी आज उसकी यह खूबसूरत कांड उसके भाई के हाथों में होती तो कितना मजा आता उसका भाई अपनी जीभ से उसकी गोरी गोरी गांड को पूरी तरह से चाट जाता मानो कि जैसे उस पर मक्खन लगा हो,,,,,,, मोहिनी अपनी गांड के उभार को अपनी आंखों से देखना चाहती थी उसकी खूबसूरती को निहारना चाहती थी पर देखना चाहती थी कि खुद की गांड देखने में उसे कैसा अनुभव होता है कैसा महसूस होता है,,,, क्योंकि सड़क पर चलते समय वहां लड़कों की निगाह को भांप चुकी थी,,,आगे से आने वाले लड़के उसकी चूचियों को देखते रहते थे और पीछे से आने वाले उसकी खूबसूरत गांड के उभार को इसे देखकर ना जाने वालों को अपने बारे में कैसी-कैसी कल्पना करके अपने आप ही संतुष्ट होने का इंतजाम करते थे,,,।

एक बात तो उसे समझ में आ गई थी कि जिस तरह से उसने अपने भाई के लंड को देखकर खुद की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा ले थी उसी तरह से लड़के भी खूबसूरत लड़कियों की कल्पना करके अपने लंड को हिला कर पानी निकाल कर अपनी गर्मी को शांत करते थे और उसको यह ज्ञान उसकी सबसे अच्छी सहेली रोहिणी से ही मिला था,,,, और इसलिए वह इतना तो अंदाजा लगा ही लिखी थी उसे भी देखकर कॉलेज की ना जाने कितने लड़के अपने मन में कल्पना करके उसके साथ ना जाने क्या-क्या करते होंगे,,,,एक तरह से उसे अपनी जवानी पर गर्म होने लगा था कि उसके बारे में सोच कर ना जाने कितने लड़के मुट्ठ मार कर अपना पानी निकाल देते हैं,,,,।

यह सब सोचकर उसके तन बदन में आग लग रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से काम रस का बहना शुरु हो चुका था,,,, मोहिनी अपनी ही गांड के उभार को देखने के लिए पूरी कोशिश कर रही थी अपनी नजरों को पीछे की तरफ घुमा कर जितना हो सकता था उतना देखने की पूरी कोशिश करती थी और उसे अपनी कोशिश थोड़ी बहुत कामयाब होती नजर भी आ रही थी,,, पूरी तरह से नहीं फिर भी एक तरफ की गांड की फांक को देखकर अंदाजा लगा लेती थी कि उसकी गांड का उभार कितना है,,, वह अपनी हथेलियों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी गांड पर जोर जोर से चपत लगाकर उसे अपनी हथेली में दबोच ले रही थी और ऐसा करने में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,।

अपने ही पतन के साथ खेलने में वह भूल चुकी थी कि समय ज्यादा हो रहा है किसी भी समय कोई भी आ सकता था नहाने चलेगा कागज मिला ही वीट क्रीम को जल्दी जल्दी अपनी तिकोन आकार की चूत पर लगाकर कुछ देर तक उसे ऐसे ही रहने दी,,, और रात के प्रोग्राम के बारे में सोचने लगे कि रात को उसे क्या करना है,,, वह अपने मन में रात के सारे इंतजाम को तय कर ली थी आज वह फ्रॉक पहन कर सोने वाली थी और ट्रक के नीचे कुछ भी नहीं क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने भाई को अपनी चूत की झलक दिखा देना चाहती थी अपनी जवानी के उस काम रस से भरे हुए कटोरे को अपने भाई के आगे परोस देना चाहती थी ताकि उसका भाई काम रस से भरे हुए उस कटोरे को अपनी जीभ लगाकर पूरा का पूरा चट कर जाए,,,,।

तकरीबन 5 मिनट का समय बीत चुका था और वह तुरंत नीचे थैंक्यू ही अपनी पेंटी को उठाकर चुत पर की क्रीम को साफ करने लगी,,,,देखते ही देखते वह पूरी क्रीम अपनी पेंटी से साफ कर लेने के बाद जब एक निगाह अपनी चूत पर डाली तो उसे देखती ही रह गई,,,, उसकी चूत अभी पूरी तरह से कुंवारी थी क्योंकि अभी तक किसी भी मर्द की परछाई भी उस पर नहीं पहुंची थी केवल एक बार ही मोहिनी ने अपनी उंगली का सहारा लेकर अपनी चूत की गर्मी को शांत करने की कोशिश की थी और आज दूसरी बार था जब वह अपनी चूत को चिकना कर के अपनी ही चूत को देखकर मदहोश हुए जा रही थी,,,,।

वह अपनी निगाहों को अपनी दोनों टांगों के बीच स्थिर की हुई थी उत्तेजना के मारे उसकी चूत फुल कर कचोरी जैसी हो गई थी उसे यह देख कर बिल्कुल भी सब्र नहीं हुआ और उस पर अपनी हथेली रख दी,,, चूत चूल्हे पर रखे हुए तवे की तरह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,, जिसकी गरमी हथेली पर महसूस होते हैं उसके तन बदन में आग लगने लगी,,,,, आंखें बंद होने लगी पूरे बदन पर मदहोशी छाने लगी,,,, आंखों में खुमारी का नशा पूरी तरह से उसेअपनी गिरफ्त में ले चुका,,, था,,,,, और उसकी हथेली चूत के भूगोल पर पूरी तरह से फैली हुई थी,, और मदहोशी और उत्तेजना के आलम में उसकी एक उंगली धीरे धीरे उसकी पतली दरार के गुलाबी छेद में प्रवेश करने लगी और उंगली को प्रवेश कराते समय आंखों को बंद करके मोहिनी उस उंगली की जगह अपने भाई के लंड की कल्पना करने लगी,,, जो कि उसके आलूबुखारे जैसा सुपाड़ा धीरे-धीरे कल्पना में उसकी चूत के गुलाबी छेद को भेंदता हुआ अंदर की तरफ सरकने लगा,,,, मोहिनी उत्तेजना और आनंद में पूरी तरह से डूबने लगी थी अपने भाई के लंड की कल्पना करके उसकी उत्तेजना काफी हद तक बढ़ चुकी थी,,,देखते ही देखते वह पूरी उंगली को अपनी चुत की गहराई में जहां तक हो सकता था वहां तक डालने की कोशिश करने लगी और कल्पना में वह अपने भाई के लंड को अपनी चूत की गहराई में ले चुकी थी,,, धीरे-धीरे महीने अपनी उंगली को अंदर बाहर कर रही थी और कल्पना में उसका भाई उसकी कमर थामे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया उसे चोदना शुरू कर दिया था और यह ख्याल‌ यह कल्पना उसके तन बदन में आग लगा रही थी और देखते ही देखते वह पल भर में ही झड़ने लगी,,,,, जब वह अपना काम रस निकालते हुए झड़ रही थी तभी दरवाजे पर दस्तक हुई,,,।

अरे जल्दी निकल कॉलेज के लिए देर हो रहा है।

हां,,,,हा,,,,, बस 5 मिनट भैया,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने बदन पर पानी डालकर साबुन लगाकर नहाना शुरू कर दी,,,,अपनी हालत पर उसे खुद हंसी आ गई थी क्योंकि जिस भाई की कल्पना करके वह उसे अपने साथ सैया वाला काम करवा रही थी,,, और उसी को दरवाजे पर दस्तक देता हुआ देखकर भैया कह रही थी,,,, 5 मिनट बाद ही बना तो कर बाहर निकल कर बहुत काफी तरोताजा महसूस कर रही थी और फिर नाश्ता करके वह कॉलेज के लिए निकल गई,,,,।
 
मोहिनी बाथरूम में अपने बदन के साथ मनमानी करके चली गई थी,,,, क्योंकि संजू बाहर खड़ा होकर उसका इंतजार कर रहा था और उसे भी देर हो रही थी,,,, मोहिनी अपनी मां की इस्तेमाल करने वाली वीट क्रीम को अपनी चूत पर लगाकर उसे पूरी तरह से चिकनी मखमली कर ली थी,,, जैसे कि उसे इस बात का अंदाजा था कि एक जवान लड़के को लड़कियों की चिकनी चूत ज्यादा पसंद होती है,,,,उत्तेजित अवस्था में मोहिनी को भी इस बात का आभास हुआ था कि उसकी चूत कचोरी की तरफ फूल गई थी और फुली हुई चूत और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आ रही थी,,, इसलिए तो अपनी चूत को देखकर मोहिनी खुद अपने आप को संभाल नहीं पाई और अपनी उंगली से कुरेद कुरेद कर उसका सारा काम रस बाहर निकाल दी,,,,।

साधना

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मोहिनी नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल चुकी थी और संजु बाथरूम के अंदर प्रवेश कर चुका था,,,,,,,वह अपने सारे कपड़े उतार कर केवल अंडरवियर में नहाना शुरू कर दिया था कि तभी उसकी नजर,,, नीचे पड़ी लाल रंग की पैंटी पर पड़ी तो उसकी आंखें चमक गई,,,,,,,उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके पैरों के नीचे जो पैंटी पड़ी है वह उसकी बहन की है,,,,,, और कोई समय होता तो शायद वह इस बात पर बिल्कुल भी गौर नहीं करता लेकिन अपनी मौसी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद और अपनी मां के प्रति आकर्षित होने के बाद से एक औरत और लड़की के प्रति उसका रवैया बदल चुका था इसलिए वह उत्सुकता बस नीचे झुक कर अपनी बहन की पैंटी को उठा दिया,,,, अपनी बहन की पेंटी को अपने हाथों में लेकर उसे अजीब से उथल पुथल का एहसास हो रहा था,,,, संजू के मन में औरतों के प्रति आकर्षण का भाव जागने लगा था लेकिन उसने अभी तक अपनी बहन के बारे में कुछ भी गलत बातें नहीं सोचा था और ना ही उसकी तरफ आकर्षित हुआ था लेकिन अपनी बहन की पहनी हुई पेंटिंग को अपने हाथों में लेकर उसे अजीब सी हलचल सा महसूस हो रहा था,,,वह अपनी बहन की लाल रंग की पैंटी को अपने हाथ में लेकर इधर-उधर घुमा कर देख रहा था,,,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन इतना एहसास उसे अच्छी तरह से हो गया था कि अपनी बहन की पैंटी को हाथ में लेते ही उसके लंड का कड़क पन बढ़ने लगा था,,,,।

साधना की गदरायी जवानी

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तन बदन में उत्तेजना का संचार होते ही संजू के दिलों दिमाग पर मदहोशी का आलम छाने लगा वह उत्तेजित होने लगा और अपनी बहन की पैंटी को ध्यान से देखते हुए वह,,, अंदाजा लगा रहा था कि पेंटिं कहां से सीधी है और कहां से उल्टी है,,, बहुत ही जल दवा इस निष्कर्ष पर पहुंच गया था कि पेंटी को किस ओर से पहनी जाती है,,,, और मदहोशी के आलम में वह अपनी बहन की पेंटिं को हाथों में लेकर उस जगह पर अपनी उंगली से इन स्पर्श करने लगा जिस जगह पर वह पहनती पहनने के बाद चूत ढंकी होती है,,,, उस छोटे से स्थान पर हाथ रखते ही संजू के तन बदन में आग लगने लगी,,,, क्योंकि अब वह पूरी तरह से औरत की चूत से वाकिफ हो चुका था,,,, उसके आकार से उसके भूगोल से और तो और उसका उपयोग करके भी देख चुका था इसलिए अपनी बहन की पेंटी को पकड़कर उस छोटे से स्थान पर रखकर उसके तन बदन में आग लग रही थी तो अपनी बहन की चूत के बारे में कल्पना करने लगा था,,, अपने मन में अपनी बहन की चूत को लेकर उसके आकार को लेकर उसके भूगोल को लेकर एक अद्भुत आकर्षक चित्र बनाने लगा था,,,,,वह धीरे-धीरे उसे स्थान पर अपनी उंगली को सहना रहा था मानो जैसे कि वह वास्तविक में,, अपनी बहन की चूत पर अपनी उंगली घुमा रहा हो,,,,

ऐसा करने में उसे अधिक उत्तेजना का एहसास हो रहा था उसे अपने लंड में प्रचंड गति से लहू का दौरा महसूस हो रहा था जिससे उसके लंड का अकड़न पूरी तरह से बढ चुका था,,,, उससे रहा नहीं गया होगा अपनी बहन की पेंटी को अपनी नाक से लगाकर उस स्थान पर की खुशबू को अपने अंदर उतारने लगा जहां पर उसकी बहन की चूत होती थी,,,, संजू की यह सोच ,यह हरकत रंग ला रही थी,,, उसे अपनी बहन की चूत की खुशबू अपने नथुनों में महसूस होने लगी,,,, वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,उसे समझते देर न लगी कि उसकी बहन ने जल्दबाजी में अपनी पेंटी साबुन से धोना भूल गई थी और वहीं छोड़कर चली गई थी जिसका फायदा संजू को मिल रहा था,,,,,।

अपनी बहन की चूत की खुशबू पाते ही संख्या पूरी तरह से मदहोश होने लगा और उसकी यह मादक खुशबू उसके तन बदन में आग लगाने लगी जिसका असर उसकी दोनों टांगों के बीच लटकते हुए उसके खंजर पर हो रहा था,,,, अंडरवियर के अंदर उसका लंड पूरी तरह से गदर मचाने को तैयार हो चुका था,,,, संजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,,, उसे अपने लंड की स्थिति पर दया आ रही थी और वह तुरंत अपनी अंडरवियर को घुटनों तक सरका कर अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल लिया अगर ऐसा हुआ नहीं करता तो शायद अंडरवियर फाडकर उसका लंड खुद ही बाहर आ जाता ,,,,।

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संजू के दिलों दिमाग पर उसके बहन की चूत की मादक खुशबू छाई हुई थी,,,उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके हाथों में उसकी बहन की पेंटी ना होकर उसकी भरपूर गांड आ गई हो और मैं उसे अपने हाथों में लेकर उससे खेल रहा हो,,,, संजू संपूर्णता उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था,,, वह अपनी बहन के बारे में गंदी विचारधारा को जन्म दे रहा था जो कि उसकी उत्तेजना का कारण भी था,,,,,,,संजू के तन बदन में मदहोशी अपना असर दिखा रही थी आंखों में खुमारी छाई हुई थी और वह अपनी जीएफ को हल्के से बाहर निकालकर उस चूत वाली जगह पर रखकर उसकी खुशबू से लस लसे नमकीन काम रस को काटना शुरू कर दिया जो कि मोहिनी की उत्तेजना के कारण उसकी चूत से निकला काम रस उस पर लगा हुआ था,,,, संजू की हालत खराब होने लगी वह ऐसा महसूस कर रहा था कि जैसे वह खुद अपनी बहन की दोनों टांगों को फैला कर उसकी गुलाबी चूत को अपने होंठों पर रखकर उसे जीभ से चाट रहा हो,,,। संजू के आनंद की कोई सीमा नहीं थे एक हाथ में उसकी बहन की पेंटी और दूसरा हाथ उसके लंड पर था जिसे वो धीरे-धीरे हीला रहा था,,,

संजू अपनी आंखों को बंद करके कल्पना के सागर में गोते लगाना शुरू कर दिया था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि वह अपनी बहन के नंगे बदन से खेल रहा है उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी गुलाबी चूत में डालने की कोशिश कर रहा है,,, और अपनी चूत में लेने के लिए उसकी बहन खुद लालायित हुए जा रही है,,,।

पूरा नजारा बेहद अद्भुत था संजू जिंदगी में पहली बार अपनी बहन के बारे में इस तरह की गंदी कल्पना कर रहा था और अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रहा था,,,, बाथरूम कुछ खास बडा नहीं था,,, बाथरूम के अंदर संजू अपनी चड्डी को घुटनों तक नीचे सरकाए विकास में अपनी बहन की लाल रंग की पैंटी को लेकर उसे नाक लगाकर सुंघते हुए और दूसरे हाथ मेंअपने लंड को पकड़ कर अपनी बहन के बारे में गंदी से गंदी कल्पना करते हुए आनंद के सागर में सरोबोर हुआ जा रहा था,,,।

कल्पना में उसका मोटा लंड धीरे-धीरे उसकी बहन की गुलाबी चूत के अंदर सरकता चला जा रहा था,,, और मोहिनी संजू की कल्पना में पूरी तरह से मस्त होकर अपनी आंखों को मूंदकर उत्तेजना के मारे अपने लाल-लाल होठों को अपने दांतों से काट रही है उसकी मदमस्त कर देने वाले दोनों अमरूद उसके होश उड़ा रहे हैं,,, जिसे संजू खुद अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपने दोनों हाथों में थाम लिया और जोर जोर से दबाने लगा,,,, संजू वास्तविक मैं अपना हाथ हिला रहा था और कल्पना में अपनी कमर,,, दोनों तरफ की लय बराबर थी लेकिन कल्पना का अपना अलग मजा था,,,, अपनी बहन की गरम चूत की गर्मी को संजु ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका पानी निकल गया,,,,।कल्पना की दुनिया से जैसे ही वह बाहर आया तो अपनी हालत को देखकर उसके होश उड़ गए,,,, वह तुरंत पेंटी को जिस तरह से नीचे पड़ी थी उसी तरह से रख दिया ताकि किसी को शक ना हो और थोड़ी देर में वह भी नहा कर बाहर आ गया,,,,, अपने कमरे में कपड़े पहनते हुए उसे अपनी बहन के बारे में इस तरह की बातें सोचना कुछ अजीब सा लग रहा था लेकिन जिस तरह का आनंद से प्राप्त हुआ था उस‌से वह इंकार नहीं कर पा रहा था,,,,, लेकिन वो जानता था कि जिस तरह कल्पना बहन के बारे में कर रहा था वह गलत है अभी उसका दूसरा मन उसे समझाते को बोल रहा था कि जब वह अपनी मां के बारे में इतनी गंदी सोच रख सकता है तो बहन के बारे में क्यों नहीं आखिर दोनों के पास उसकी जरूरत की चीज जो है,,,,,,संजू इस बारे में ज्यादा देर तक विचार नहीं कर पाया तभी नाश्ता तैयार होने की आवाज उसके कानों में सुनाई दी और तुरंत रसोई घर में आ गया जहां उसकी मां उसके लिए नाश्ता निकाल रही थी,,,।रसोई घर में प्रवेश करने से पहले ही उसकी नजर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर चली गई थी जोकी पहले की ही तरह खाना बनाते समय थिरक रही थी,,,, आराधना की बड़ी-बड़ी और थिरकती हुई गांड संजू की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई थी,,, जिसको वह कभी भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहा था,,,,,,,,वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को घुरते हुए रसोई घर में प्रवेश किया,,।

मोहिनी और संजू

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जिस दिन से उसकी मां ने उसके अरमानों पर पानी फेर रहा था तब से वह अपनी मां से ठीक से बात नहीं कर पाया था और यह बात संजू को भी अंदर ही अंदर कचोट रही थी,,, संजू को अपनी मां से बात करना बहुत अच्छा लगता था खास करके उस दिन से जिस दिन से वह अपनी मां की तरफ आकर्षित होता चला जा रहा था क्योंकि उससे बात करने में भी उसे उत्तेजना महसूस होती थी,,, वो किसी भी तरह से अपनी मां से बात करना चाहता था और यही हाल आराधना का भी था,,,, अपने बेटे की अपने लिए जिस तरह की सोच थी उसे लेकर आराधना परेशान थी इसलिए उसे आगे बढ़ने देना नहीं चाहती थी लेकिन अपने बेटे की हरकतों से भी अच्छी लगती थी लेकिन कुछ दिनों से सब कुछ शांत था संजू की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत को उसने देखी नहीं थी इसलिए ना जाने क्यों उसके मन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, और वह भी शायद इसलिए कि वह दो दो बच्चों की मां थी और वो भी जवान बच्चों की,,,, और इस उमर में उसका खुद का जवान लड़का उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था यह बात उसे अंदर ही अंदर गर्वित करती थी,,, की अभी भी उसमें जवानी की आग बाकी है,,,।

दोनों में से संजू ही बात की शुरुआत करते हुए बोला,,,।

मम्मी पापा अब तुम्हें परेशान तो नहीं करते ना,,,,

नहीं,,,(संजू की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)

चलो अच्छा है कि सुधर तो गए,,,,लेकिन यह काम तुम्हें पहले ही कर देना चाहिए था तुम डरती रही सहती रही इसीलिए उनकी हिम्मत बढ़ती रही,,, तुम पहले दिन ही उन्हें डांट फटकार लगाई होती तो शायद ऐसा नहीं होता,,,।(नाश्ते की प्लेट को हाथ में लेते हुए बोला)

मैं कर भी क्या सकती थी आखिरकार में हूं तो एक औरत ही,,,

औरत हो तो क्या हुआ औरत तो आजकल बहुत से काम कर रही है जरूरी नहीं कि औरत का काम हो सिर्फ अपने आदमी का बिस्तर गरम करना,,, खुश करना,,,, अपने आप को बचाना भी उसका धर्म होता है,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से अपने पति को खुश करना बिस्तर गर्म करना यह सब बातें सुनकर उसकी दोनों टांगों के बीच अजीब सी हलचल होने लगी वह अपने बेटे के मुंह से इस समय इस तरह की बातें सुनने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और इस तरह की बातें सुनकर ना जाने क्यों उसके तन बदन में भी अजीब सी हलचल होने लगी,,,वह कुछ दिनों से देखते आ रही थी कि उसके बेटे का उसके साथ बात करने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी अनजान औरतों के साथ बातें कर रहा हो उसे इस बात की बिल्कुल भी चिंता नहीं रहती थी कि वह अपनी मां के साथ इस तरह की बातें कर रहा है,,,, अपने बेटे की बातों को सुनकर आराधना कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,,, तो संजु ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं अगर कोई भी तकलीफ हो तो मुझे जरूर बताना,,,,,मैं नहीं चाहता कि मम्मी तुम्हें किसी भी प्रकार की तकलीफ हो तो मैं तकलीफ में देखना मुझे पसंद नहीं है,,,,,,, और हां अपनी खुशी के लिए भी थोड़ा सोच लिया करो मैं जानता हूं तुम खुश नहीं हो अपनी जिंदगी से अपनी जरूरत से,,,(आराधना यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बातें कर रहा है इसलिए उसके बोलने के मतलब को समझते हुए आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी थी पल भर के लिए तो वह भी यही सोच रही थी कि क्यों ना इस खेल में आगे बढ़ जाया जाए,,, जब उसका बेटा उसके साथ इतना खुल चुका है तो थोड़ा सा और खुलने में क्या हर्ज है,,,, आराधना के मन में कभी-कभी इस तरह के ख्यालात आते जरूर थे,,, लेकिन,, वह अपने आप को संभाल ले जाती थी,,,, अपनी मां की तरफ से ना उम्मीद हो चुका संजु के मन में अभी भी उम्मीद की किरण नजर आती थी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि किसी भी औरत का मन वह लाया जा सकता है उनकी मान मर्यादा की दीवार को गिराया जा सकता है संस्कारों की चादर को अपने हाथों से खींचा जा सकता है बस थोड़ी बहुत मशक्कत करनी पड़ती है और उसी में संजू लगा हुआ था,,,, संजू नाश्ता कर चुका था और हाथ धो रहा था तभी उसकी मां उसके तरफ देखे बिना ही बोली,,,।)

तूने जो मेरे लिए किया है उसके लिए तेरा बहुत-बहुत शुक्रिया,,, नहीं तो अभी तक ना जाने क्या हो गया होता,,,।

कोई बात नहीं यह तो मेरा फर्ज था लेकिन मेरा एक और फर्जी था जिसे तुम निभाने नहीं दे रही हो,,,,।

(अपने बेटे की बातें सुनकर आश्चर्य से उसकी तरफ देखते हुए उसकी कही गई बात को समझने की कोशिश कर रही थी कि तभी संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तुम्हारी जरूरत को पूरा करने का फर्ज तुम्हारी खुशियों वापस लौटाने का फर्ज और तुम्हें संपूर्ण रूप से स्त्री सुख देने का फर्ज,,,,।

(इससे ज्यादा संजू कुछ बोला नहीं और ना ही अपनी मां की बात सुनने के लिए वहां खड़ा रहा वह तुरंत बाहर निकल गया और अपना बैग लेकर कॉलेज के लिए निकल गया आराधना अपने बेटे को जाते हुए देखती रह गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका जवान बेटा खुद अपनी मां के पीछे इस कदर क्यों हाथ धोकर पड़ा है,,,, उसे क्या अच्छा लगने लगा है कि वह दुनियादारी मान मर्यादा संस्कार रिश्तेदारी भुलकर सिर्फ उसे पाना चाहता है,,,। आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे को कैसे समझाएं,,, वह इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसे वह पल याद आ गया जब अभी अभी थोड़ी देर पहले संजू से बात कर रहा था और अचानक ही उसकी नजर उसके पैंट की तरफ चली गई थी जिसमें अच्छा खासा तंबु बना हुआ था,,, उसे दृश्य और उस पल को याद करके आराधना के तन बदन में हलचल सी उठने लगी,,,, आराधना यह बात अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसी से बात करते समय उसके बेटे का लंड खड़ा हो जाता था और उसका लंड उसे चोदने के उद्देश्य से ही खड़ा होता था,,,।,,उसका बेटा उसके बारे में ना जाने कैसी कैसी गंदी बातों को सोचता होगा और से करने के लिए लालायित होगा यह सब सोचकर ही आराधना की चुत पानी छोड़ने लग रही थी,,,,इस तरह की बातों को सोचते हुए आराधना का मन भी अपने बेटे की तरह ही हो जाता था वह भी अपनी बेटी के साथ संभोग के इस खेल को खेलने के लिए मन ही मन तैयार हो जाती थी लेकिन फिर अपने आप को मना कर इस तरफ से अपने ध्यान को दूसरी तरफ लगा देती थी,,,,।

रात का समय हो चुका था,,,संजू और मोहिनी दोनों खाना खा चुके थे उसकी मां भी खाना खा चुकी थी अब वह अपने पति का इंतजार नहीं करती थी अपने कमरे में जा चुकी थी और वह दोनों अपने कमरे में,,, मोहिनी जांघो तक का फ्रॉक पहनी हुई थी और फ्रॉक के नीचे कुछ भी नहीं पहनी थी ,,,आज फ्रॉक के नीचे चड्डी ना पहनकर वह अपने भाई को पूरी तरह से पागल बना देना चाहती थी जिसके तैयारी स्वरुप वह सुबह ही क्रीम लगाकर अपनी चूत को साफ कर चुकी थी,,,,,,,आज तक उसने इस तरह की हरकत को अंजाम नहीं की थी इसलिए इस तरह की हरकत करते हो उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,उसे शर्म भी महसूस हो रही थी कि अपने भाई के सामने ऐसी हरकत कैसे कर सकती है लेकिन जवानी के जोश में वह मजबूर हो चुकी थी,,,,कुछ देर तक दोनों पढ़ाई करते रहे अभी तक संजु अपनी बहन की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया था,,,,। मोहिनी संजु से बोली,,,

संजू तू लाइट बंद बंद किया कर उस दिन लाइट बंद कर दिया था रात को मैं नींद में दीवार से टकरा गई थी,,,,

ठीक है तो चिंता मत कर उस दिन अनजाने में बंद हो गई थी,,, मुझे भी अंधेरे में सोने की आदत नहीं है,,,,।

(लाइट बंद करने वाली बात है तो संजू को मोहिनी ने जानबूझकर डाली थी ताकि कमरे में उजाला रहे और उस उजाले में उसका भाई उसकी जवानी के केंद्र बिंदु को अपनी आंखों से देख सकें,,, इसलिए वह अपने भाई से पहले ही सोने का नाटक करते हुए अपने स्कूल के लिए के

बैग को एक तरफ रख कर सोने का नाटक करने लगी अभी तक संजू ने अपनी बहन की तरफ देखा तक नहीं था उसके दिलो-दिमाग पर उसकी मां का खूबसूरत बदन छाया हुआ था वह एक-एक पल को याद करके उत्तेजित हो जा रहा था जब अपनी मां को बीच बचाव करते हुए कपड़े में दाखिल हुआ था और उस समय वह अपनी मां को पूरी तरह से नंगी देख लिया था और बरसात में घर लौटने पर उत्तेजना के चलते अपनी मां के लाल लाल होठों का चुंबन करते हुए उसके रस को पी रहा था और उसकी मां भी साथ दे रही थी ऐसी ने अपनी मां को कस के अपनी बाहों में पकड़े हुए उसकी बड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर जोर जोर से दबा रहा था,,,, उस पल को याद करके संजू पूरी तरह से व्याकुल हुए जा रहा था,,, अपने मन में यही सोच रहा था कि काश उस दिन कुछ हो गया होता तो कितना मजा आ जाता,,,,यही सोचते-सोचते 12:00 बज गया था और मांगने की आंखों से नींद गायब थी क्योंकि वह इंतजार कर रही थी कि कब उसके भाई की नजर उसके ऊपर पड़े और नींद में होने का बहाना करके वह खुद ही अपनी फ्रॉक को अपनी कमर तक उठा कर लेटी हुई थी और वह भी पीठ के बल,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था अंदर ही अंदर और कसमसा रही थी,,,,।

कमरे में बल्ब जल रहा था जिसकी रोशनी में सब को साफ नजर आ रहा था पंखा चालू होने की वजह से वातावरण में थोड़ी ठंडा कहां गई थी इसलिए संजू जैसे चादर लेने के लिए अपनी बहन की तरफ नजर घुमाया तो उस नजारे को देखकर उसके होश उड़ गए,,,।
 
कुछ देर पहले जाग रही मोहिनी सोने का नाटक करके लेटी हुई थी और जानबूझकर अपनी फ्रॉक को कमर से ऊपर तक खींच ली थी ताकि उसके भाई को उसकी मदद से जवानी का व केंद्र बिंदु नजर आ जाए जिसे देखकर वह पूरी तरह से मदहोश कर उसके साथ संभोग करें जिसके बारे में अपने भाई के लंड को देख कर मोहिनी मदहोश हो गई थी,,,,,,,,, अपनी सहेली के बताई गई युक्ति पर वह पूरी तरह से काम कर रही थी उसे विश्वास था कि उसकी सहेली की बताई गई युक्ति जरूर काम करेंगी,,,, इसीलिए तो वह पूरी तैयारी के रूप में सुबह ही अपनी चूत को क्रीम लगाकर एकदम साफ कर ली थी,,,, इतना तो वह जानती थी कि लड़कों को लड़कियों की जवान चिकनी चूत ज्यादा पसंद आती है,,,, इसीलिए वह समय होते ही अपने भाई से नजर बचाकर लेट गई थी और अपनी फ्रॉक को कमर तक उठा दी थी और इस तरह से लेटी थी कि उसके भाई को ऐसा ही लग रहा था कि वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रही है जबकि वह जाग रही थी,,,,।

मोहिनी वैसे तो इस तरह की लड़की बिल्कुल भी नहीं थी वह संस्कारी लड़की थी और अपने बड़े भाई की इज्जत भी करती थी लेकिन जवानी का यह उम्र यह दौर उसे भी वही करने पर मजबूर कर रहा था जैसा कि आमतौर पर दूसरी लड़कियां उम्र के दबाव में आकर कर बैठती हैं,,, अपनी मौसी के मुंह से गंदी गंदी बातों को सुनकर पहले ही उसे अपनी चूत से काम रस बहता हुआ महसूस हो चुका था और रही सही कसर संजू के खाने लंदन में कर दिया था जिसे वह अनजाने में ही अपनी नजरों के सामने देख ली थी,,, जिंदगी में पहली बार एक जवान तगड़े लंड के दर्शन कर लेने के बाद से तो उसकी सोच ही बदल गई,,,अपने भाई के खड़े लंड को देखकर ही उसकी चूत से काम रस बहना शुरू हो गया था अपनी जवानी की आग को भड़कता हुआ देखकर मोहिनी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,और जवानी में नादानी करते हुए वहां अपनी हथेली से ही अपनी चूत की गर्मी को शांत करने का बेड़ा उठाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को अपनी कोमल पंखुड़ियों के बीच उसे प्रवेश कराकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश करी थी और उसमें कामयाब भी हो गई थी लेकिन यह गर्मी यह जरूरत यह कामना कभी पूरी होने वाली थोड़ी थी जितनी पूरी करने की कोशिश करो इतनी ज्यादा भड़कती है और ऐसा ही कुछ महीने के साथ भी हो रहा था,,, इसीलिए तो वह अपने भाई को अपनी जवानी दिखाकर मदहोश कर देना चाहती थी और वही अपने भाई के साथ करना चाहती थी जो एक जवान लड़का जवान लड़की के साथ करता हैं,,,भाई-बहन के बीच के पवित्र रिश्ते को वह एक तरफ रख कर केवल एक मर्द और एक औरत के बीच के रिश्ते को ही देख रही थी,,,,।

और देखते ही देखते मोहिनी की युक्ति काम करने लगी क्योंकि समय हो जाने पर संजू भी सोने की तैयारी कर रहा था और अचानक ही ट्यूबलाइट की रोशनी में संजू की आंखों में वह तेरे से देखा जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था संजू की सांसे अटक सी गई आंखों में अजीब सी चमक नजर आने लगी वह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया वह अपनी बहन मोहिनी को देख रहा था जो कि उसके बगल में लेटी हुई थी और उसका फ्रॉक कमर तक उठा हुआ था और आश्चर्य की बात यह थी कि वह फ्रॉक के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी,,,, पल भर में ही संजू की सांसे धुकनी की तरह चलने लगी,,, उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था वह बार-बार अपनी आंखों को मलमल कर दोबारा देखने की कोशिश कर रहा था कि कहीं वह कोई सपना तो नहीं देख रहा है लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखें देख रही थी वह सपना नहीं बल्कि हकीकत का रूप था,,,,।

संजू को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वहां क्या करें कभी मोहिनी की तरफ से कभी बंद दरवाजे की तरफ तो कभी ट्यूबलाइट की तरफ देख ले रहा था,,,,, कुछ देर तक संजू उसी तरह से घुटनों के बल बैठा का बैठा रह गया,,,,,,, मोहिनी के चेहरे को बड़ी बारीकी से देख रहा था और मोहिनी भी अद्भुत अदाकारी दिखाते हुए सोने का नाटक बड़ी बखूबी से निभा रही थी संजू को यही लग रहा था कि उसकी बहन मोहिनी गहरी नींद में सो रही है जबकि वह पूरी तरह से जागी हुई थी नींद तो उसकी आंखों में कोसों दूर तक नजर नहीं आ रही थी और वैसे भी ऐसे हालात में नींद कब नौ दो ग्यारह हो जाती है पता ही नहीं चलता,,,,,,,,, कुछ देर तक समझो बड़े गौर से मोहिनी को इसलिए देख रहा था कि कहीं उसे लग रहा था कि वह जॉब तो नहीं रही है लेकिन पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद वहां निश्चिंत हो गया था कि मोहिनी गहरी नींद में है और उसकी नींद के बारे में उसे अच्छी तरह से मालूम था कि वह हमेशा घोड़े बेच कर सोती है उसे कुछ भी पता नहीं रहता और शायद यही ख्याल संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था,,,,

उत्तेजना के मारे सुख रहे गले को अपने दुख से गिला करते हुए संजू अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच अपना ध्यान केंद्रित करते हुए उस खूबसूरत बेशकीमती खजाने को अपनी आंखों से टटोलने लगा जो की पूरी तरह से एक पत्नी दरार के रूप में नजर आ रही थी और उत्तेजना के मारे उसके इर्द-गिर्द दो अंगुल जितनी गोलार्ध तवे पर गर्म रोटी की तरह उपसी हुई थी,,,,,, ऐसा नहीं था कि संजू पहली बार किसी चूत को अपनी आंखों से देख रहा था जिंदगी में पहली बार वहां सर्वप्रथम अपनी मौसी की चूत के दर्शन करने वाला वह पहला लाभार्थी था,,,,पहली बार अपनी मौसी की चूत देखकर उसके तन बदन में जो आग लगी थी जो उत्तेजना का बवंडर उठा था,, उस बारे में लिखने में शायद कोई शब्द नहीं मिल रहे थे,,,,और वाकई में मर्दों के जीवन में पहली बार किसी चूत के दर्शन कर लेना किसी बड़े सफलता को हासिल कर लेने से कम नहीं होता,,,कोई संजू के साथ भी हुआ था संजू दिन-रात बस अपनी मौसी की चूत के बारे में ही सोचता रह जाता था लेकिन संजय की मौसी उम्र दराज औरत थी और उसकी चूत में और मोहिनी की चूत में जमीन आसमान का फर्क था,,, क्योंकि उसकी मौसी दो बच्चों की मां थी और उम्रदराज होने के नाते उसकी चूत के भूगोल में बदलाव लाजमी था इसीलिए तो संजीव अपनी बहन की कमसिन चूत देखकर एकदम पागल हुआ जा रहा था,,,, मोहिनी की चूत क्या है बस एक हल्की सी पतली लकीर थी और उसकी मौसी की चूत संजू अच्छी तरह से देख चुका था और उसे भोग भी चुका था,,, संजू की मौसी की चुत के अंदर की गुलाबी पत्तियां बाहर निकल कर चूत की शोभा बढ़ा रही थी और वह थोड़ी सी फैली हुई थी संजू जब तक अपनी बहन की चूत ने देखा था तब तक वह सब औरतों की चूत के बारे में बस अपनी मौसी की चूत की भी कल्पना किया करता था उसे लगता था कि सब की चूत एक जैसी ही होती है और यह वास्तविक भी था कि सब की चूत एक जैसी होती है लेकिन उम्र में फर्क होता है जिससे चूत की साइज और उसके दिखाव में भी फर्क आ जाता है,,,,।

यहां पर संजू साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसकी बहन की चूत एकदम चिकनी है और अंदर की गुलाबी पत्तियां बिल्कुल भी बाहर निकली हुई नहीं है,,,,, संजू की हालत खराब होती जा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कुछ देर पहले ही अपनी मां के बारे में सोच कर अपने आपको प्रेषित कर चुका था दिन रात अपनी मां को चोदने का उसके तन बदन में आग लगा रहा,, था,,,, अपनी मां की जवानी की गर्मी तो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था दूसरी तरफ उसे अपनी छोटी बहन की कमसिन जवानी अपनी आंखों से नंगी देखकर उसकी हालत और ज्यादा खराब हो गई थी लंड का आलम यह था कि कभी भी अंदर से लावा फुटने का डर महसूस हो रहा था,,,,। अपनी बहन की चूत देखकर समझो अपने मन में सोच रहा था कि इसे अपने हाथ से छूकर देखा जाए की कैसा महसूस होता है,,, फिर उसके मन में इस बात का डर भी था कि कहीं मोहिनी जाग गई तो,,, फिर यह कहना था कि मोहिनी तो हमेशा घोड़े बेच कर सोती है उसे कुछ भी पता नहीं चलता अगर उसके साथ कुछ कर लिया भी जाए तो उसे पता नहीं चलेगा,,,, यह सोच कर सब्जियों की सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,,, और वह इस बात से हैरान था कि उसकी बहन आज चड्डी क्यों नहीं पहनी है,,,,फिर अपने मन में सोचता कि हो सकता है कि वह हमेशा चड्डी ना पहनती हो बस आज ही उसका ध्यान उस पर गया हो वैसे भी गर्मी का मौसम है,,,।

संजू का दिमाग काम करना बंद कर दिया था अपनी आंखों के सामने अपनी बहन की कमसिन जवानी को नंगी देख कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,आखिरकार सोच विचार कर लेने के बाद अपनी बहन की गहरी नींद का फायदा उठाने का मन में सोच कर वह अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत के करीब ले जाने लगा,,,दूसरी तरफ काफी देर से मोहिनी को महसूस हो रहा था कि उसकी चूत उसके भाई की आंखों के सामने एकदम नंगी पड़ी है और उसका भाई कुछ कर नहीं रहा है उसे अपने भाई पर गुस्सा भी आ रहा था और इस तरह से अपने भाई को अपनी चूत का दीदार कराने में उत्तेजना का भी अनुभव हो रहा था वह काफी हद तक उत्तेजित हो गई थी,,,,हालांकि उसके भाई को किसी भी प्रकार का शक ना हो जाए इस वजह से वह अपनी चूत का बार-बार शुक्रिया भी अदा कर रहे थे क्योंकि अभी तक उत्तेजित होने के बावजूद भी उसकी चूत से काम रस की एक बूंद भी उस पतली लकीर से बाहर नहीं आई थी,,,, वरना उसका भाई समझ जाता कि जवानी की गर्मी उसे भी सता रही है,,,,,,, संजू पूरी तरह से आत्ममंथन कर चुका था वह सोच विचार दिया था कि जो होगा देखा जाएगा इसलिए वह अपनी हथेली को अपनी बहन की चूत के करीब न जाने लगा जैसे जैसे उसकी हथेली उसकी चूत के करीब जा रही थी वैसे वैसे संजू के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके पूरे बदन में कंपन सा महसूस हो रहा था,,,, इस कार्य को करने में बहुत जोखम था इस बात को वह जानता थाअपने मन में यही सोच रहा था कि अगर उसकी बहन जाग गई और उसे इस तरह की गंदी हरकत करते देख ली तो क्या सोचेगी कहीं वह अपनी मम्मी या पापा को ना बता दें कि यह सोच कर तो संजू की हालत और ज्यादा खराब हुई जा रही थी लेकिन जवानी का जोश उन्माद खुमारी उसकी आंखों में भी छा चुकी थी,,,,, बेहद खूबसूरत कली उसकी आंखों के सामने खेलती हुई नजर आ रही थी और उसे पकड़ कर उसकी खुशबू लेने का मन संजू को तड़पा रहा था और संजू इसी तड़प को कम करना चाहता था इसलिए जो भी होगा देखा जाएगा सोच कर वह अपनी हथेली को धीरे-धीरे अपनी बहन की चूत के बेहद करीब ले गया,,,,,,।

संजू को अपनी उंगलियों में कंपन साफ महसूस हो पा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें चूत की गर्मी उसे अपनी उंगली के पोरो तक महसूस हो रही थी,,, और देखते ही देखते अपनी इच्छाओं के आधीन हो कर,, संजू अपनी बहन की चूत पर अपनी अगली को हल्के से रख दिया,,,,, फिर क्या था पहली बार संजू ने किसी सवाल लड़की की चूत पर अपनी उंगली का स्पर्श कराया था जिसका असर उसके तन बदन में देखने को मिल रहा था,,,, जैसे मोती से भरे सीप पर हाथ रखते ही सीपी अपने पूरे वर्चस्व को अपने अंदर सी कोड देती है उसी तरह से ही मोहिनी भी अपनी चुत पर अपने भाई की उंगली स्पर्श होते ही वह अपने बदन को हल्की सी सिकोड ली,,, मोहिनी की यह हरकत उत्तेजना के वजह से संजू की नजर में नहीं आई वह तो पूरी तरह से अपनी बहन की चूत की बनावट में खो चुका था और उसकी उंगली चूत की बीचो-बीच की पत्नी दरार पर टिकी हुई थी जोकी बड़े हल्के से वह अपनी उंगली को अपनी बहन की चूत पर रखे हुए था ताकि उंगली के दबाव से उसकी बहन की नींद ना खुल जाए,,,,।

एक जवान लड़के की उंगली पहली बार मोहिनी अपनी चूत पर महसूस करते ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गई,,, यह पल उसके लिए बेहद खास होता जा रहा था जिसके बारे में वर्णन कर पाना बहुत मुश्किल था अवर्णनीय पल का आनंद वह ले रही थी,,,,,देखते ही देखते संजू अपनी हिम्मत को बढ़ाते हुए अपनी हरकत को भी बनाना शुरू कर दिया और अपनी उंगली को केवल एक उंगली को अपनी बहन की चूत की पतली दरार की संपूर्ण लकीर पर ऊपर से नीचे तक अपनी उंगली के पोर को घसीटने लगा,,,,संजू को जितना मजा आ रहा था उससे कहीं ज्यादा आनंद मोहिनी के तन बदन को अपनी आगोश में लिए हुए था मोहिनी बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं को काबू में किए हुए थी,,,,

उसकी आंखें बंद थी जो कि बार-बार संजू अपनी बहन के चेहरे की तरफ देख ले रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी नींद ना खुल जाए जबकि वह बात अच्छी तरह से जानता था कि सुबह से पहले बाबू उठने वाली नहीं है क्योंकि जब भी सोती है तो घोड़े बेच कर सोती है वरना उसके मम्मी पापा में इतना ग्रह कलेश लड़ाई झगड़ा गाली गलौज हुआ लेकिन उसकी आंख एक बार भी नहीं खुली थी और यही शायद संजू के हौसले को बढ़ा रहा था,,,,,हल्के हल्के अपनी उंगली को अपनी बहन की चूत पर घुमा रहा संजू उत्तेजना के मारे अपनी उंगली का दबाव अपनी बहन की चूत पर बढ़ाने लगा,,,,,और ऐसा करने में संजू की हालत खराब होती जा रही थी उत्तेजना के मारे उसका लंड पूरी तरह से गदर मचाने पर आमादा हो चुका था जिसे वह बार-बार अपने हाथ से दबा कर उसे काबू में करने की नाकाम कोशिश कर रहा था,,,,,,,।

अपनी मौसी की चूत से खेल चुका संजु इस समय अपनी बहन की चूत से खेल रहा था दोनों में उम्र और अनुभव दोनों मेल बिल्कुल भी नहीं था जहां एक तरफ संजू की मौसी पूरी तरह से परिपक्व और अनुभव से भरी हुई थी वहीं दूसरी तरफ मोहिनी बिलकुल नादान थी उसकी चूत बेहद कोमल और चिकनी थी जिस पर उंगली घुमाने ने संजू को स्वर्ग का आनंद प्राप्त हो रहा था संजू का मन कर रहा था कि अपनी बीच वाली उंगली को उसकी चूत के गुलाबी छेद में डालकर उसके काम रस को अपनी जीभ से चाटा जाए उसके स्वाद को अपने अंदर उतार कर देखा जाए कि कितना नशा होता है लेकिन ऐसा करने मे संजू को डर भी लग रहा था,,, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू भी नहीं कर पा रहा था जैसा उसके दिमाग में करने को चल रहा था वैसा वैसा बा करता चला जा रहा था देखते ही देखते संजू अपनी बहन की गहरी नींद में होने का फायदा उठाते हुए अपनी पूरी हथेली को उसकी चूत पर रख कर उसकी छोटी सी चूत को अपनी हथेली में छुपा लिया,,,, चूत की गर्मी उसके तन बदन में आग लगा रही थी और यही हालत मोहिनी की भी थी संजू तो औरत की चूत को चोद कर मजा ले चुका था इसलिए वह थोड़ा बहुत अपने आप पर काबू करने में माहिर था लेकिन मोहिनी का तो यह पहली बार था पहली बार वह किसी जवान लड़की की हंसी को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी और वह भी अपने बड़े भाई की,,,अपनी भावनाओं पर काबू कर पाना उसके लिए बेहद मुश्किल हुआ जा रहा था लेकिन फिर भी वहां एक आनंद की परिभाषा को सार्थक करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए थी,,, जिसमें वहां अब तक तो कामयाब होती नजर आ रही थी क्योंकि संजीव को जरा भी शक नहीं हुआ था कि उसकी बहन गहरी नींद में नहीं बल्कि जाग रही है,,,,

उत्तेजना के मारे संजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी लंड की हालत खराब थी जिसे वह बार-बार अपने हाथ से दबा कर काबू में करने की कोशिश कर रहा था लेकिन दूसरी हथेली से अपनी बहन की चूत को दबोच कर‌ वह पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था उससे रहा नहीं जा रहा था और वह तुरंत एक हाथ में अपनी बहन की चूत को थामे हुए दूसरे हाथ से अपने पहचानो को नीचे की तरफ सरकार रहा था वह घुटनों के बल बैठा हुआ था,,, और देखते ही देखते वह अपनी बहन की चूत को अपनी हथेली में दबोचे हुए दूसरे हाथ से अपने पहचाने को घुटनो तक नीचे खींच कर ला दिया था पहचान में से बाहर आते हैं उसका लंड हवा में खुली सांस लेते हुए ऊपर नीचे होकर हिलने लगा जो कि बेहद लुभावना और मादकता से भरा हुआ लग रहा था,,,अगर इस समय मोहिनी अपनी आंखें खोल कर अपने भाई के लंड को देख ले तो शायद खुद ही अपने भाई के लंड को पकड़ कर अपनी गुलाबी चूत के छेद पर रख दे और उसे धक्का मारने के लिए बोले,,,,।

लाख कोशिश करने के बावजूद भी अपने भाई की कामुक हरकत की वजह से अपने तन बदन की उत्तेजना को ना छुपा सकने और उसे काबू में ना कर सकने के कारण मोहिनी की चूत से काम रस की भूत अमृत की धार बनकर मोती के दाने की तरह पतली दरार से बाहर आने लगी जो कि संजू की हथेली को गिला करने लगी,,,, दो दो बार अपनी मौसी की चुदाई कर चुका संजु इतना तो समझ ही गया था कि एक औरत की चूत कब गीली होती है,,, और इसीलिए हीअपनी बहन की चूत से काम रस बहार आता हुआ देखकर संजू मन ही मन खुश होने लगा लेकिन वह यह नहीं अंदाजा लगा पाया कि उसकी बहन जाग रही थी शायद अगर यह अंदाजा लगा लेता तो अब तक वह अपनी बहन की दोनों टांगें फैलाकर उसके ऊपर चढ़ चुका होता,,, उसे ऐसा ही लग रहा था कि नींद में उसकी बहन उत्तेजित हुई जा रही है खैर जो भी हो मजा दोनों को आ रहा था दोनों भाई बहन अपने अपने तरीके से आनंद ले रहे थे मोहिनी नींद में होने का नाटक करके पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अपने भाई की हथेली की हरकत उसे आनंद विभोर कर रही थी,,,वहीं दूसरी तरफ संजय की हरकत बढ़ती जा रही थी अब तक अपनी बहन में किसी भी प्रकार का बदलाव आता ना देख कर उसकी हिम्मत बढ़ने लगी वह समझ गया कि उसकी बहन के साथ कुछ भी करो उसे कुछ समझ में नहीं आएगा क्योंकि वह गहरी नींद में सो रही है इसीलिए संजू उत्तेजना के मारे अपनी हथेली को उसकी चूत पर एकदम से कस लिया,,,,मदहोश होकर संजीवनी इतनी जोर से उसकी चूत को अपनी हथेली में दबोचा था कि मोहिनी के मुंह से आह निकलती निकलते रह गई थी,,,,।

मोहिनी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी वह समझ गई थी कि उसकी सहेली की बताई गई युक्ति उसे बराबर काम आ रही है वह कभी सोच नहीं थी कि उसका भाई उसके साथ इस तरह की हरकत करेगा लेकिन इतना विश्वास जरूर था कि उसकी चूत देख लेने के बाद उसके भाई की हालत खराब हो जाएगी और ऐसा हो भी रहा था लेकिन इस तरह की हरकत की उसे उम्मीद नहीं थी,,,,वह तो बस अपनी चूत दिखा कर अपने भाई को पागल कर देना चाहती थी और धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी लेकिन उसका भाई खुद ही अपनी हरकत को बढ़ावा दे रहा था मोहिनी को भी अपने भाई की मदहोशी भरी गर्म सांसे अच्छी लग रही थी और जिस तरह से उसने अपनी हथेली में उसकी चूत को लेकर जोर से दबाया था उसकी हरकत पर तो वह पानी पानी हुई जा रही थी,,,,। जवानी के खेल में कितना मजा आता है मोहिनी में कभी सोची ही नहीं थी लेकिन आज उसे सब कुछ समझ में आने लगा था कि क्यों लड़कियां लड़कों के पीछे और लड़के लड़कियों के पीछे पागल रहते हैं आखिरकार दोनों की मंजिल यही तो रहती है दोनों टांगों के बीच,,,,लड़कियां लड़कों को अपनी दोनों टांगों के बीच लाने के लिए परेशान और लड़के लड़कियों के दोनों टांगों के बीच जाने के लिए परेशान बस यही आजकल का फलसफा और प्रेम है,,,, जो कि सिर्फ चुदाई पर आकर खत्म हो जाती है,,,।

संजू अपने खाने लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे मुठिया रहा था और दूसरे हाथ की उंगली को धीरे-धीरे अपनी बहन की चुत को कुरेदना शुरू कर दिया था,,,। गोरी गोरी चूत के अंदर का भुगोल पूरी तरह से गुलाबी था जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था,,,, संजू अपनी एक उंगली से उसकी चूत की दरार को खोलने की कोशिश कर रहा था और वह इस कोशिश में कामयाब भी होता जा रहा था चुत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से चूत से निकला हुआ काम रस संजू की उंगलियों को भी भीगो रहा था,,,,,,, मोहिनी हल्के सेअपनी एक आंख को थोड़ा सा खोज कर संजू की तरफ देख रही थी और जैसे ही हो अपनी आंख खोलकर संजू की तरफ नजर दौड़ाई तो मोहिनी को संजू के हाथ में उसका मोटा तगड़ा लंड नजर आया जिसे वो धीरे धीरे हिला रहा था यह देखकर मोहिनी के तन बदन में आग लग गई वह जल्द से जल्द अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए मचलने लगी,,,लेकिन ऐसा अभी वह कर नहीं सकती थी बस देखकर ही अपने मन को मनाने की कोशिश कर रही थी,,,।

मोहिनी की छूट देखता संजू

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संजू अपनी हरकत को बढ़ा रहा था देखते ही देखते वह अपनी उंगली को अपनी बहन की चूत की दरार में ऊपर से नीचे तक उसमें हल्के से गडा कर घुमाने लगा,,,, संजू के साथ-साथ मोहिनी को भी मजा आ रहा था,,,,,,मोहिनी बड़ी मुश्किल से अपने घर में शिकारियों को काबू में की हुई थी हालांकि अभी तक उसके मुंह से गर्म सिसकारी कभी निकली नहीं थी लेकिन इस तरह के हालात में लड़की के मुंह से कर्मचारी निकलना लाजमी था,, लेकिन जैसे तैसे करके वहां अपने आप पर काबू रखी हुई थी अपने भाई की हरकत उसे पूरी तरह से मस्त कर रही थी,,,हल्की-हल्की कसमसा हाट मोहिनी के भजन में हो रही थी जिस पर उत्तेजना के मारे मदहोश संजू के ध्यान में नहीं आ रहा था वह तो एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर अपनी बहन की चूत से खेल रहा था,,,,,,,,,

इस खेल को धीरे-धीरे खेलते हुए इस खेल में आगे बढ़ते हुए रात के तकरीबन 1:00 बज गए,,,, ना तो संजू को पता चला और ना ही मोहिनी को आखिरकार खेल ही कुछ ऐसा था,,,, इस खेल को खेलते समय ना तो समय की परवाह रहती है ना जमाने की,,,, संजू की हिम्मत बढ़ती जा रही थी एक पल तो उसका मन किया कि अपने लंड को अपनी बहन की चूत से सिर्फ सटाकर ही मजा लिया जाए,,,लेकिन ऐसा कर रहे हैं उसे डर लग रहा था तो वह अपनी बीच वाली उंगली कोअपनी बहन की चूत की लकीर में ऊपर से नीचे तक लाते हुए उसकी गुलाबी छेद को उंगली से टटोलते हुए,,, अपनी बीच वाली उंगली को धीरे धीरे उस गुलाबी मुख्यद्वार में प्रवेश कराने लगा,,,, यह हरकत पूरी तरह से संजु को मदहोश किए जा रही थी चुदाई से भी ज्यादा सुख संजु को प्राप्त हो रहा था,,, और यही हाल मोहिनी का भी था आज दूसरी बार उसकी चूत के गुलाबी छेद में कोई उंगली प्रवेश कर रही थी पहली बार तो वह खुद की उंगली थी और दूसरी बार अपने भाई की इसलिए वह पूरी तरह से गदगद हुए जा रही थी,,,, जैसे-जैसे चूत के अंदर अपनी भाई की उंगली को प्रवेश करने दे रही थी वैसे वैसे मोहिनी की सांस अटक जा रही थी,,,,मोहिनी हल्के से अपनी आंखों को खोल कर अपने भाई की तरफ देख रही थी उसके हाथ में उसका मोटा तगड़ा लंड था जिसे वो जोर जोर से हिला रहा था,,,,अपने भाई के नंबर को देखकर वह अपने मन यहीं सोच रही थी विकास उसका भाई हिम्मत दिखाकर अपने लंड को उसकी चूत में डाल देता तो कितना मजा आ जाता,,,।

मोहिनी की छूट छत्ता संजू

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देखते ही देखते धीरे-धीरे संजू अपनी बहन की चूत के गुलाबी छेद में अपनी बीच वाली उंगली को धीरे धीरे डालना शुरू कर दिया,,,, देखते ही देखते चुत की अंदरूनी अड़चनों को दूर करते हुए संजु की उंगली चूत की गहराई में अधिक से अधिक अंदर तक जा पहुंची और मोहिनी के तन बदन में आग लगाने लगी आखिरकार मोहिनी की खुद की उंगली नहीं थी यह तो एक जवान लड़की की उंगली थी जो कि इस समय मोहिनी को लंड से कम मजा नहीं दे रही थी,,,,मोहनी पूरी तरह से पागल हो जा रही थी उसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल बजा रहा था क्योंकि संजू अपनी हरकत को पढ़ाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था एक तरह से वह अपनी बहन की चूत को अपनी उंगली से चोद रहा था,,, और जोर-जोर से अपने लंड को हिला रहा था,,,,,,मोहिनी के लिए हालात काबू से बाहर जा रहे थे अपने आप पर बिल्कुल भी काबू पर सकने की स्थिति में नहीं थी,,,,, किसी भी वक्त उसके मुंह से गर्म सिसकारी की धार फूट सकती थी जिसे वह बड़ी मुश्किल से अपने काबू में लिए हुए थी,,,,,।

अभी तक मोहिनी की नींद नहीं टूटी थी और इसीलिए संजू की हरकत बढ़ती जा रही थी उसकी हिम्मत और उसका हौसला भी बढ़ता जा रहा था,,,, जिस तरह का आनंद संजू लुट रहा था वह अपने आनंद को बढ़ाना चाहता था,,क्योंकि अपनी बहन की गुलाबी चूत के साथ खेलने के बाद वह पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था,,,,,, क्योंकि आज वह अपनी बहन की चूत से खेल कर ही पूरी तरह से मस्त हो चुका था ,, चुदाई से भी अधिक अद्भुत सुख से प्राप्त हो रहा था,,,।उसकी इतनी हरकत के बावजूद भी अभी तक मोहिनी के तन बदन में किसी भी प्रकार की हरकत होता ना देगा कर संजू का हौसला बढ़ रहा था वह अपनी बहन की चूत में लगातार अपनी उंगली को अंदर बाहर कर रहा था और उसी के छोटे से गुलाबी छेद का जायजा ले रहा था,,,अब तो खुश है इतना तो समझ में आ ही गया था कि उसकी मौसी की चूत की तरह उसकी बहन की चूत खुली नहीं है क्योंकि इसमें उंगली भी बड़ी मुश्किल से जा रही थी और उसकी मौसी की चूत में उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड बड़े आराम से चला गया था,,, और वहअपनी बहन की गुलाबी चूत के छोटे से छोटे को देखते हुए इतना तो समझ ही गया था कि अपनी बहन का सरकार पाए बिना वह अपनी बहन की चूत में अपना लंड नहीं डाल सकता था,,, और वह मन मानी भी नहीं कर सकता था क्योंकि ऐसा करने पर मोहिनी के लिए खोल सकती थी और बात भी कर सकती थी,,, संजू अपने मन में यही सोच रहा था लेकिन वह कहां जानता था कि अगर जो कुछ भी अपने मन में सोच रहा है अगर वह अपनी बहन के साथ पड़े तो उसकी बहन उसका पूरा का पूरा साथ दें क्योंकि यही तो मोहिनी भी चाहती थी,,,,,लेकिन संजू इस बात से अनजान था इसलिए वो अपने तरीके से मजा लेना चाहता था,,,,।

होनी बहन की छूट देखकर संजू से रहा नहीं जवराः था

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संजू अपनी बहन की चूत में डूबी हुई अपनी पूरी उंगली को एक बार बाहर निकाल कर उसे बड़ी बारीकी से देखने लगा उसकी बीच वाली उंगली पूरी तरह से उसकी बहन की चूत के काम रस में डूबी हुई थी जिसमें से कामरस अमृत की बूंद की तरह नीचे टपक रही थी,,, जिसे संजू जाया नहीं होने देना चाहता था और वह अपनी बहन की चूत में घुसी हुई पूरी उंगली को पूरी की पूरी ऊंगली को अपने होठों के बीच प्रवेश करा कर चाटना शुरू कर दिया और अपने भाई की यह हरकत को मोहिनी अपनी आंखों से देख रही थी और अपने भाई की हरकत को देखकर वह पूरी तरह से रोमांचित हो उठी,,,मोहिनी अपने भाई की हरकत को देखकर अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका भाई उसकी चूत का रस चाट रहा है अगर यही काम वह अपना मुंह लगाकर उसके चुत से सीधे-सीधे चाटता तो कितना मजा आ जाता,,,,,,मोहिनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे काफी गहरी चल रही थी जो कि अभी भी उत्तेजना से ग्रस्त संजू की नजर में नहीं आ रहा था अगर अपनी बहन की हालत को देखने का तो शायद संजीव आज अपनी बहन को चुदाई का अद्भुत सुख देता जिसके लिए उसकी बहन तड़प रही थी,,,,।

संजू पूरी तरह से कामाग्नि में जलते हुए अपनी बहन की चूत से अपनी उंगली को निकाल कर उसे जीभ लगाकर चाट रहा था,,, हल्का कड़वा नमकीन रस पूरी तरह से संजू को पागल किए जा रहा था एक हाथ से वो जोर-जोर से लंड को हिला रहा था मानो कि जैसे वह अपनी बहन की चुदाई कर रहा हो,,,,अच्छी तरह से चाट लेने के बाद वह दोबारा उसी उंगली को अपनी बहन की चूत में डाल दिया और फिर से अंदर-बाहर करने लगा,,,, उत्तेजना के मारे मोहिनी की कमर कसमसा रही थी,,,उसके पास में होता तो वह कब से अपनी कमर को ऊपर उठाकर अपने भाई को अपनी आगोश में ले लेती,,, लेकिन अभी ऐसा करना ठीक नहीं था अगर वो ऐसा करती तो उसका भाई क्या सोचता कि उसकी बहन खुद छुड़वाना चाहती है,,,, और ऐसा ना करना नहीं चाहती थी इसलिए अपने मन पर बहुत भारी पत्थर रखकर काबू किए हुए थी,,,।

संजू फिर से अपनी बहन की चूत से होली को बाहर निकाल कर फिर से उसे अपने मुंह में ले कर चाटना शुरू कर दिया यही क्रिया वह तीन चार बार कियामोहिनी एक बार झड़ चुकी थी जिसका अंदाजा संजू को बिल्कुल भी नहीं था और दूसरी बार पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,,।संजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसका मन बिल्कुल भी काबू में नहीं था वह तो मोहिनी को चोदना चाहता था लेकिन उसके छोटे से छेद के कारण वह अपनी इस हरकत को अपने तरीके से अंजाम नहीं दे सकता था यह बात भी अच्छी तरह से जानता था इसलिए अपने मन को मनाते हुए वह अपनी उंगली को उसकी चूत से बाहर निकालकर अपने प्यासे होठों को उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाने लगा जो कि मोहिनी हल्की खुली आंखों से यह देख रही थी उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चलने लगी,, क्योंकि वह समझ गई थी जो काम संजू उंगली से चाट कर कर रहा है वही काम अब वह शायद अपने होठों से करना चाहता है यह ख्याल मोहिनी के तन बदन में आग लगा रहा था,,,

और देखते ही देखते संजू अपनी बहन के गहरी नींद का फायदा उठाते हुए अपने प्यासी होठों को अपनी बहन की गरम चूत पर रख दिया और जैसे ही संजू ने अपने होठों को अपनी बहन की चूत पर रखा उसमें से मादक खुशबू पूरी तरह से संजू को अपनी आगोश में ले ली और वह जोर लगाकर अपने नथुनों से,, अपनी बहन की चूत के अंदर के मादक खुशबू को अपनी छाती में भर लेना चाहता था और वैसा ही हो रहा था संजू पूरी तरह से मस्त हो गया और यही हाल मोहिनी का भी था मोहिनी पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें एक पल के लिए तो उसके दोनों हाथ उठ गए थे अपने भाई के सर पर रख कर उसे जोर से दबाने के लिए लेकिन तुरंत अपने आप को संभाल कर अपने हाथों को संभाल ले गई,,, और अपने को कैसे अपने सूखे गले को गिला करने की कोशिश करने लगी,,,, मोहिनी के लिए यह सब कुछ नया नया सा था मोहिनी की युक्ति काम कर गई थी उसका भाई पूरी तरह से उसकी जवानी के केंद्र बिंदु पर अपना ध्यान केंद्रित कर चुका था,,,,, संजु गहरी सांस लेते हुए अपनी बहन की चूत को चाटना शुरू कर दिया था उसका सिर मोहिनी की दोनों टांगों के बीच था इसलिए मोहिनी अपनी आंखों को अच्छी तरह से खोलकर अपने भाई की हरकत को साफ तौर पर देख पा रही थी क्योंकि उसके भाई का ध्यान पूरी तरह से उसकी चूत में डूबा हुआ था,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में मोहिनी को सब कुछ साफ नजर आ रहा था वह अपनी युक्ति पर जो कि उसकी सहेली की बताई गई थी उस पर अमल करके पूरी तरह से खुश थी उसका भाई उसकी चूत का दीवाना हो चुका था और इस समय उसकी दोनों टांगों के बीच कब्जा जमाया हुआ था,,,,

संजू अपनी चड्ढी निकल कर अपनी बहन क ऊपर झुक गया

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पहली बार मोहिनी किसी जवान लड़के से अपनी चूत चटवां रही थी और वह भी अपने भाई से,,, मोहिनी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी संजू की अभी तक केवल अपनी मौसी की चूत का मजा ले रहा था लेकिन आज अपनी बहन की जवान कमसिन चूत का मजा लेते हुए वह सारी दुनिया को भूल चुका था,,,मोहिनी पूरी तरह से मस्त होकर अपनी अमृतधारा बार-बार अपनी चूत से बहा रही थी जिसे उसका भाई अपने होंठ और जीभ से चाट कर साफ कर दे रहा था,,, मोहिनी अपनी भाई की कामुक हरकत की वजह से दूसरी बार झड़ चुकी थी,,,, संजू की हालत खराब हो जा रही थी उसके लंड से कभी भी लावा फूट सकता था अपनी बहन की चूत चाटते हुए संजू बार-बार अपने मन में उसकी चूत में अपने लंड डालने का विचार कर रहा था लेकिन इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं था कि उसकी बहन की चूत के छेद के मुकाबले उसके लंड की मोटाई कुछ ज्यादा ही थी और ऐसा कर पाना इस समय संभव बिल्कुल भी नहीं था,,, इसलिए वहां अपने मन को मनाते हुए एक और युक्ति लगाने की सोचा क्योंकि किसी भी वक्त उसके लंड का पानी निकल सकता था और वह चाहता था कि अपनी बहन की नींद का फायदा उठाते हुए अपने लंड को उसके सुपाड़े को अपनी बहन की गुलाबी चूत पर रगड कर हीं पानी निकाला जाए,,,, यही सोचकर वहअपने सिर को अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच से उठाते हुए गहरी गहरी सांस लेने लगा और तुरंत मोहिनी अपनी आंखों को फिर से बंद कर दी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आप उसका भाई क्या करने वाला है लेकिन अब वह धीरे-धीरे अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच आ चुका था अपनी बहन की चिकनी जांघों पर हाथ रखते हुए उसे स्वर्ग का आनंद प्राप्त हो रहा था,,, संजू यह बात अच्छी तरह से जानता था कि मोहिनी बला की खूबसूरत लड़की थी जिसे पाना शायद हर लड़कों का मकसद रहता है,,,, लेकिन यह बात भीसंजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन सीधी-सादी और भोली भाली है कभी भी लड़कों के चक्कर में पढ़ने वाली नहीं थी,,,, लेकिन इस बात से संजर पूरी तरह से अनजान था कि धीरे-धीरे उसे जवानी की गर्मी सताने लगी थी और यह भी उसी की मर्जी थी कि आज संजू उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाए हुए हैं,,,।

संजू अपनी बहन की दोनों टांगों को फैला कर उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल आ चुका था यह पूरी तरह से संभोग मुद्रा था जिसमें मर्द का लंड औरत की चूत में होता है लेकिन यहां पर संजू को ऐसा कुछ भी नहीं करना था,,, हालांकि यहां भी एक मर्द का लंड और एक औरत की चूत थी लेकिन लंड को चूत में प्रवेश नहीं कराना था,,संजीव अपनी खुली आंखों से अपनी बहन की चूत को देख रहा था जिससे वह जी भर कर खेल रहा था,,, चूत फुल कर गरम रोटी की तरह हो गई थी,,,, जिसमें से काम रस बह रहा था संजू अपनी बहन की चूत को नजर भर कर देख रहा था क्योंकि ट्यूबलाइट की रोशनी में एकदम साफ नजर आ रही थी जिसका रंग एकदम गुलाबी हो गया था संजू पूरी तरह से तैयार था अपनी हरकत को अंजाम देने के लिए और दूसरी तरफ मोहिनीव्याकुल और बेचैन नजर आ रही थी उसे लग रहा था कि जिस तरह से संजू उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बना रहा है जरूर अपने लंड को उसकी बुर में डालने की कोशिश करेगा और इसलिए मोहिनी अपने आप को तैयार कर चुकी थी उसे लगने लगा था कि उसकी जिंदगी का मकसद पूरा होने वाला है,,,, उसकी चूत में अब उसके भाई का लंड होगा,,, जिसके बारे में सोच कर ही उसने यह सारी काम लीला रचाई थी,,, अपने मकसद में वह इतनी जल्दी कामयाब हो जाएगी इस बारे में उसने कभी अंदाजा नहीं लगाई थी उसकी दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी वह हल्के से अपनी आंखों को खोलकर अपने भाई के तरफ देख रही थी संजू के हाथ में उसका नंबर था जिसे वह ऊपर नीचे करके हीला रहा था अपने भाई के लंड को देख कर मोहिनी के तन बदन में आग लग रही थी उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसके छोटे से छेद में उसके भाई का लंड घुसेगा कैसे,,,, फिर भी वह अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी,,,,।।

संजू की सांस अटक रही थी वह जानता था कि वह इस हालत में अपनी बहन को चोद नहीं पाएगा लेकिन ऊपर ऊपर से मजा ले कर अपना पानी निकाल जरूर सकता है इसीलिए वह अपने घुटनों को अपनी बहन की जांघों के और करीब लाते हुए अपने लंड की सुपाड़े को अपनी बहन की चूत पर रख दिया,,, यह मोहिनी और संजू दोनों के लिए वह पल था जब वह दुनिया को भूल कर एक नई दुनिया में प्रवेश कर रहे थे और यह सुख यह पल दोनों के लिए अद्भुत और अवर्णनीय था,,, जिसकी किसीसे तुलना नहीं कर सकते थे,,,।

अपने भाई के लंड कैसे पानी को अपनी चूत की गुलाबी छेद पर महसूस करते ही मोहिनी की तो सांस ही अटक गई,,, संजू की यह हरकत मोहिनी के लिए चुत में लंड घुसाने से कम नहीं था,,, उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी साथ ही उसकी चुचियों में अकड़न सी आने लगी,,, संजू अपनी बहन की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रहा था उसका सारा ध्यान अपनी बहन की गुलाबी चूत पर था जिसमें से काम रस अभी भी निकल रहा था संजू अपनी हरकत को आगे बढ़ाते हुए अपने लंड को हाथ में पकड़ कर,,, अपने सुपाड़े को अपनी बहन की चूत के गुलाबी छेद पर रगडते हुए उसे एक पल के लिए अंदर डालने की कोशिश करने लगा,,,,,, अपनी गुलाबी चूत के छेद में अपने भाई के लंड के सुपाड़े को अंदर घुसता हुआ महसूस करते हीमोहिनी को इस बात का आभास हो गया कि इतनी जल्दी उसके भाई का लंड उसकी चूत में घुसने वाला नहीं है और उसके बदन में उत्तेजना के मारे कसमसाहट आ गई,,,, अपनी बहन के बदन में आई कसमसाहट को देखकरसंजू पूरी तरह से सचेत हो गया वह समझ गया कि इसके आगे हरकत करना ठीक नहीं है अगर ऐसा करेगा तो यह सुख भी उसके हाथ से ज्यादा रहेगा इसलिए वह समझदारी दिखाते हुए अपनी बहन की चूत पर अपने लंड के सुपाड़े को रगड़ना शुरु कर दिया,,,

बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से निकलने वाली सिसकारी को अपने होठों को दबाकर महीने में शांत कर दी यह सुख बेहद अद्भुत और अवर्णनीय था इस बारे में कभी मोहिनी ने सोची भी नहीं थी कि ऐसी हरकत करने में इतना आनंद आएगा वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी उसकी चूत पानी पानी हुई जा रही थी,,, बार-बार उसकी चूत से काम रस रह-रहकर बह जा रहा था,,,, वह पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,, मोहिनी के लिए यह चुदाई से कम नहीं था,,, संजू पागल हो जा रहा था अपनी लंड क सुपाडे को अपनी बहन की चूत की गुलाबी दरार पर रगडते हुए उसे भी एक बेहद खूबसूरत चूत का मजा मिल रहा था जिसका मजा चुदाई से कम बिल्कुल भी नहीं था,,,, लेकिन या खेल ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया क्योंकि मोहिनी की गरम चूत की आंच में संजू का मोटा तगड़ा लंड ज्यादा देर टिक नहीं पाया और पिघलने लगा उसके लंड से गरम लावा फूट पड़ा,,, और धीरे-धीरे मोहिनी की चूत के ऊपरी भाग को भी होने लगा अपने भाई के लंड से निकलेगरम लावा की गर्मी को वह अपनी चूत के इर्द गिर्द महसूस करके वह पूरी तरह से गनगना गई थी,,,,।

थोड़ी ही देर में संजू पूरा का पूरा अपना गरम लावा अपनी बहन की चूत के ऊपर गिरा दिया,,, वासना का तूफान शांत हो चुका था संजू अभी भी अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल था और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे अपनी बहन की चूत पर सटाया हुआ था,,,फिर एक नजर अपनी बहन के ऊपर डाला वह उसी स्थिति में सोने का नाटक कर रही थी जो कि संजु को लग रहा था कि वह गहरी नींद में सो रही है,,, संजू धीरे से अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच से अलग हुआ और अपना टी-शर्ट बाहर निकाल कर अपनी बहन की चूत पर गिराया हुआ सारे लावा को साफ करने लगा और अच्छे से साफ करने के बाद वह वापस अपनी जगह पर आ गया मोहिनी अभी भी उसी स्थिति में सो रही थी अभी भी उसकी चूत साफ नजर आ रही थी,,,,दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ संजू किधर गई तो वह हैरान रह गया क्योंकि घड़ी में 3:00 बज रहा था,,, अपनी बहन की गर्म जवानी से खेलने के चक्कर में समय कब गुजर गया उसे पता ही नहीं चला,,। मोहिनी भी अपने बाल की हरकत से तृप्त हो चुकी थी हाना की चुदाई का असली सुख से प्राप्त नहीं हुआ था लेकिन इतना भी उसके लिए बहुत था वह उसी स्थिति में गहरी नींद में सो गई और संजू भी सो गया,,,।
 
सुबह जब मोहिनी की नींद खुली तो देखी बगल में उसका भाई नहीं था सुबह के 6:00 बज रहे थे उसका भाई कमरे से बाहर निकल गया था कमरे की लाइट अभी भी चल रही थी मोहिनी अपनी दोनों टांगों के बीच की उस पतली करार की तरफ ध्यान से देखिए तो उस पर चिपचिपा पदार्थ लगा हुआ था जिसे वहां अपने हाथ लगाकर उसकी चिपचिपाहट को महसूस करने लगी,,,पल भर में ही रात को जो कुछ भी हुआ था वह सब कुछ मोहिनी की आंखों के सामने किसी मूवी की तरह चलने लगा,,,रात को उसने जिस तरह की हिम्मत दिखाई थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने भाई की आंखों के सामने ऐसा कुछ कर गुजरने की लेकिन जवानी की आग ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया था और वह उसमें सफल भी हो गई थी,,,,।

मोहिनी अपने मन में सोचने लगी कि उसका भाई उसकी चिकनी चूत को देखकर क्या सोच रहा होगा,,,,,,अपने भाई की हालत को देखकर वहां बहुत खुश थी जितना वहां सोची थी उससे कहीं ज्यादा वहां अपने भाई को अपनी चूत दिखा कर परेशान कर चुकी थी,,,, मोहिनी की युक्ति पूरी तरह से कारगर साबित हुई थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसका भाई उसकी चूत को देखकर इस कदर मदहोश हो जाएगा कि उसकी चूत से खेलने लगेगा,,,, मोहिनी को अभी भी अपनी चूत के अंदर अपने भाई की उंगली अंदर बाहर होती हुई महसूस हो रही थी जिससे उसके बदन में खुमारी छा रही थी,,,,।

अपनी चिकनी चूत से खेलते हुए अपने भाई को देखकर जिस तरह का आनंद का अनुभव मोहिनी के तन बदन में हो रहा था उसने आज तक ऐसा अनुभव महसूस नहीं की थी अपने भाई को अपना लंड हिलाता हुआ देखकर मोहिनी का धैर्य जवाब दे जा रहा था,,,, वह साफ तौर पर अपनी आंखों से देखी थी कि उसकी चूत से खेलते हुए कैसे उसका भाई अपना लंड अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से हीला रहा था,,,और उसके लिए पहला मौका था जब अपनी आंखों से एक लड़के को अपने लंड हिलाता हुआ देख रही थी एक तरह से मुठीयाता हुआ देख रही थी,,,हालांकि मोहिनी को लड़कों के द्वारा किया जाने वाला हस्तमैथुन के बारे में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था वरना वह अपने भाई की हरकत का अंदाजा लगा लेती कि वह क्या कर रहा है,,,,।

उस पल को याद करके उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी जब उसका भाई उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए अपने प्यासे होठों को उसकी चूत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया था,,,,,, संजू की यह हरकतमोहिनी के लिए बेहद अद्भुत और आदरणीय थी जिसके बारे में उसने कभी कल्पना नहीं की थी लेकिन जिस तरह का सुख उसके भाई ने उसकी चूत को अपने होठों से लगा कर दिया था उस पल को वहां याद करके अभी भी पानी पानी हुई जा रही थी,,,,,, मोहिनी कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका भाई अपने होठों को उसकी चूत पर रख देगा और जीभ से उसके काम रस को चाट जाएगा शायद ऐसा करने में मर्दों को ज्यादा सुख मिलता होगा,,, क्योंकि उसकी हरकत का मजा मोहिनी ने भी खुल कर ली थी,,,, शायद औरत को प्यार करने का ढंग मर्दों के द्वारा इसी तरह से होता होगा,,,, मोहिनी अभी तक सिर्फ यही समझती आ रही थी कि औरतों से प्यार करने का मतलब था चुदाई जिसमें मर्द अपना लंड औरत की चूत में डाल कर हीलाता है और शांत हो जाता है लेकिन रात को उसके भाई की हर एक हरकत ने मोहिनी को सोचने पर मजबूर कर दिया था कि औरतों से प्यार करने का तरीका बहुत ही अलग अलग है और हर एक तरीका मस्ती से भरा हुआ मदहोश कर देने वाला है जिसका थोड़ा बहुत झलक मोहिनी को भी प्राप्त हो चुका था जिस की मस्ती में वह दो तीन बार झड़ चुकी थी,,,,,,।

मोहिनी अपने कमरे में बैठे बैठे अपनी हिम्मत की दाद दे रही थी और मन ही मन अपनी सबसे अच्छी सहेली रेणुका का धन्यवाद भी कर रही थी क्योंकि उसी की बदौलत आज उसे जवानी का थोड़ा बहुत उसे प्राप्त हुआ था जिसके चलते वह आगे भी इस सुख को प्राप्त करने में निरंतर लगी रहेगी,,,,,,लेकिन मोहिनी के समझ में एक बात बिल्कुल भी नहीं आ रही थी कि सब कुछ करने के बावजूद भी उसके भाई ने अपने लंड को उसकी चूत में डाला क्यों नहीं जिसकी वह बेसब्री से इंतजार कर रही थी और उसी सुख को प्राप्त करने के लिए उसका दिल की धड़कन बड़े जोरों से धड़क भी रहा था और वह व्याकुल भी थी अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए,,, लेकिन उसके सोच के विपरीत उसके भाई ने अपने लंड का सुपाड़ा सिर्फ उसके चूत पर रगड़ा भर था उसमें डालने की हल्की सी कोशिश भर किया था लेकिन डाला नहीं था,,,यही मोहिनी को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार सब कुछ करने के बावजूद उसका भाई उसकी चूत में लंड डालकर चोदा क्यों नहीं,,,,, इस सवाल का जवाब शायद इस समय उसके पास बिल्कुल भी नहीं था,,, तभी दरवाजे पर हल्की सी आहट हुई तो वह अपने फ्रॉक को वापस सही से करने लगी,,,, दरवाजा खोल कर संजू कमरे में दाखिल हुआ और एक नजर मोहिनी के ऊपर डाला ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसकी गोरी गोरी जांघें चमक रही थी,,, जिसे देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था,,,,वही शर्म के मारे अपने भाई की तरफ नजर उठा कर देख नहीं पा रही थी वह अपनी नजरों को नीचे छुपाई हुई थी और संजू को ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अभी भी नींद में है,,,,और यही हाल संजू का भी था संजू भाई ठीक से मोहिनी से नजर नहीं मिला पा रहा था दोनों को ऐसा लग रहा था कि रात को जो कुछ भी हुआ था उस बात से दोनों अपने अपने तरीके से अनजान हैं दोनों को कुछ भी पता नहीं है,,,,

लेकिन समझो की हरकत को मोहिनी अच्छी तरह से जानती थी और मोहिनी रात में किस अवस्था में सोई थी कैसे सोई थी इस बारे में संजु अच्छी तरह से जानता था,,, लेकिन एक बात का दुख उसे था कि अपनी बहन की चिकनी चूत को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया था और जो नहीं करना चाहिए था हम आकर बैठा था अच्छा हुआ कि उसकी बहन को इस बारे में कुछ पता नहीं है वरना वह क्या सोचेगी,,,।

जबकि मोहिनी को सब कुछ पता था उसकी हरे कर कर जानबूझकर की गई थी वह अपने भाई को अपनी चिकनी तो दिखा कर उकसा रही थी और संजू अपनी बहन की चिकनी चूत देखकर बहक भी गया थालेकिन वह संजू के सामने ऐसे भी वार कर रही थी कि जैसे रात में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं हो और संजू कोई तुझे ही लग रहा था कि रात में जो कुछ भी हुआ था उस बारे में मोहिनी को कुछ भी पता नहीं है क्योंकि संजू मोहिनी के सोने की आदत से अच्छी तरह से वाकिफ था,,,,।

संजू नहा चुका था,,,मोहिनी दीदी नजर नीचे झुका कर बैठी हुई थी संजू को लग रहा था कि जैसे वह नींद में है इसलिए वहां उसके कंधे को पकड़कर हिलाते हुए बोला,,,।

मोहिनी उठ जा कॉलेज नहीं जाना है क्या देर हो रही है,,,

कितना बज रहा है,,,,(नींद में होने का नाटक करते हुए मोहिनी बोली)

6:30 बज रहा है देर हो रही है जल्दी से उठ जा,,,,

बाप रे 6:30 बज गए और तुम मुझे अभी उठा रहे हो,,,

( और इतना कहने के साथ ही मोहिनी होंठों पर कामुक मुस्कान लिए हुए कमरे से बाहर निकल‌,गई,,, और संजू अपनी बहन को कमरे से बाहर जाते हुए देखता रह गया उसकी सुडोल गांड फ्रॉक के घेराव में बहुत ही सुगठीत लग रही थी,,,रात को जिस तरह का मजा उसकी बहन ने दी थी उस बारे में संजू ने भी कभी कल्पना नहीं किया था उसकी बहन की चूत इतनी खूबसूरत होगी इस बारे में कभी उसने सोचा नहीं था अपनी बहन की चिकनी चूत देखने से पहले वह केवल अपनी मौसी की चूत के बारे में कल्पना किया करता था और उसी के बारे में सोचा करता था लेकिन अपनी बहन की चिकनी चूत देखने के बाद चूत के मायने बदल गए थे,,, अभी भी संजू को अपनी उंगली के अंदर अपनी बहन की चूत की गर्मी महसूस हो रही थी,,,,उसकी चूत से निकला काम रस चाटने में जिस तरह कहा ना तो उसे प्राप्त हुआ था शायद ऐसा मजा उसे कभी नहीं आया था,,,,संजू का मन बहुत कर रहा था कि अपने लंड को अपनी बहन की चूत में डालकर उसकी चुदाई करते लेकिन संजू दो बार अपनी मौसी की चुदाई कर चुका था और अपने लंड की मोटाई के बारे में उसे अच्छी तरह से ज्ञान था जोकि अपनी बहन की गुलाबी चूत के छोटे से छेद को देखकर उसका ज्ञान और ज्यादा बढ़ गया था वह समझ गया था कि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी बहन की गुलाबी चूत के छोटे से छेद में बिना मोहिनी की मदद के बिना जाना नामुमकिन है इसलिए वह अपनी मंशा को मारकर केवल अपने लंड के सुपाड़े को अपनी बहन की चूत पर रगड कर अपना पानी निकाल कर शांत किया था,,,।संजू अपने कमरे में खड़े खड़े अपने बाल को संवारते हुए आईने में अपने आप को देखकर यही सोच रहा था कि अगर उसकी बहन की सोने की आदत इसी तरह से रही तो वह जरूर एक दिन अपनी बहन की चुदाई करके रहेगा,,,,,।

दूसरी तरफ आराधना परेशान थी अपनी बहन से उधार के पैसे लिए हुए महीना जैसा बीतने को हो गया था लेकिन अशोक की तरफ से किसी भी प्रकार का पैसे की मदद नहीं मिल पा रही थी,,, उसकी तनख्वाह कहां चली जाती थी इस बारे में उसे अंदाजा भी नहीं था,,,, आराधना एक अच्छी सी जॉब के लिए अपनी बहन को पहले से ही बोल के रखी हुई थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर अशोक उसे पैसे ना दे सका तो वह खुद नौकरी करके अपनी बहन के पैसे लौटा देगी और परिवार को थोड़ी बहुत मदद करेगी भले ही अशोक को उसकी नौकरी करने में किसी भी प्रकार की चीजें महसूस होती हो लेकिन वह नौकरी करके ही रहेगी,,,,

इसीलिए आराधना आज ज्यादा परेशान थे क्योंकि आज उसे जॉब के लिए इंटरव्यू देने जाना था,,,,जिसके बारे में उसने अब तक किसी को भी नहीं बोली थी वहां अपने मन में यही सोच रही थी कि जब जॉब फाइनल हो जाएगी तभी सब को बताएगी क्योंकि उसे इस बात का डर था कि अगर उसे जो बोले कंपनी नहीं दिए तो उसका मजाक बनकर रह जाएगा और वह अपने परिवार में अपना मजाक बनता और ज्यादा देखना पसंद नहीं कर सकती थी,,,,,, अशोक से अब उसे उम्मीद ना के बराबर रह गई थी क्योंकि घर में झगड़ा मार तो नहीं हो रहा था लेकिन अशोक की तरफ से किसी भी प्रकार का सहायता भी नहीं हो रहा था,,,, घर में फिर से पैसों की किल्लत हो जाए, अब यह आराधना को मंजूर नहीं था,,, जिंदगी में पहली बार वह मजबूरन अपनी बहन से सहायता मांगने उसके घर गई थी,,, वह तो उसकी बहन उसकी मुसीबत को समझती थी कि उसकी मदद करती वरना कोई और होता तो खाली मुंह लौटना पड़ता और इससे बड़ी बेइज्जती और क्या हो सकती थी,,,,।

आराधना जल्दी जल्दी नाश्ता तैयार करने के बाद खाना बना रही थी क्योंकि उसे 10:00 बजे तक ऑफिस पहुंचना था,,, संजू तैयार हो चुका था लेकिन वह सबसे लास्ट में घर से बाहर निकलता था मोहिनी नहा धोकर तैयार हो चुकी थी और नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल गई थी अशोक बीपी ना बोले चाय नाश्ता करके घर से निकल गया था अब घर में उसका होना ना होना एक बराबर हो गया था,,, अशोक को आराधना से बात किए 15: 20 दिन हो चुके थे,,,लेकिन अशोक को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था लेकिन आराधना को फर्क जरूर पड़ता था क्योंकि अशोक उसका पति था उसका हमसफर था उसका अमराही था लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसका इस तरह से नजरअंदाज करना आराधना के दिल पर गहरा गांव दे रहा था,,, प्यार से बात करना तो दूर उसकी तरफ देखना भी अशोक ने छोड़ दिया था तो शारीरिक सुख की तो बात ही क्या करनी इस उम्र में औरतें शरीर सुख पाने के लिए कुछ ज्यादा ही एक्टिव रहती है लेकिन आराधना के लिए सब कुछ सपना सा लगने लगा था,,,,,

रोज की तरह संजू सब के चले जाने के बाद रसोई घर में प्रवेश किया और अपनी मां का देह लालित्य देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गया,,,, कुछ देर पहले ही आराधना बाथरूम से नहाकर बाहर निकली थी और अपने गीले बालों को टोवल से पोछकर सुखाई नही थी,, जिसकी वजह से गीले बालों से टपकता हुआ पानी पीछे से उसके ब्लाउज को पूरी तरह से भिगो दिया था,,, और यही हाल ब्लाउज का आगे से भी था क्योंकि रेशमी बालों की लटे आगे को भी ब्लाउज से चिपकी हुई थी जो कि आगे से ब्लाउज को पूरी तरह से गिला कर चुकी थी,,,, आनन-फानन में आराधना को अपनी स्थिति का धान बिल्कुल भी नहीं था रसोई घर में प्रवेश करते समय बालों के पानी से जिले ब्लाउज को देखकर संजू के तन बदन में आग लग गई थी क्योंकि जो जुल्फें आगे से ब्लाउज को गीला कर चुकी थी उसमें से आराधना की चूची की चॉकलेटी निप्पल एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, वो भी इसलिए की आराधना ने जल्दबाजी में खाना बनाने के चक्कर में ब्रा नहीं पहनी थी सिर्फ ब्लाउज पहन ली थी और पानी से भीगने की वजह से उसकी गोरी गोरी चूचियों के साथ-साथ उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल साफ नजर आ रही थी जिसे देख कर संजु की हालत खराब होने लगी और उसके मुंह में पानी आने लगा,,,, आराधना इस बात से बिल्कुल बेखबर थी कि उसकी चूची पानी के पीलेपन की वजह से साफ नजर आ रही है,,,, संजू के पेंट में हलचल सी होने लगी वह रोज की तरह पीछे की तरफ जाकर मटके में से पानी निकाल कर पीने लगा और अपनी मां को पीछे से देखने लगा उसका पिछवाड़ा बेहद खूबसूरत नजर आ रहा था एकदम गोल-गोल कसी हुई साड़ी में एकदम कसी हुई गांड,,, कमर की गहराई को नापने के लिए गहरी लगी है उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे,,, कुल मिलाकर अद्भुत रूप की मालकिन थी आराधना,,, जिसके जवानी का रस संजू खुद अपनी आंखों से पी रहा था,,,,,,।

पेंट में संजू का लंड पूरी तरह से अकड़न पर था वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी का तो पहले से ही कायल था लेकिन आज अपनी मां का गीला ब्लाउज देखकर उसमें से झांकती चूचियां ओर चुचीयों की शोभा बढ़ा रही चॉकलेटी निप्पल देखकर उसकी तो और ज्यादा हालत खराब हो गई,,,,,,, खूबसूरत औरत की मदहोश कर देने वाली जवानी का रस आंखों से पीने का भी अपना अलग मजा था,,, और इस मजे को देखो कि उसका बेटा खुद लूट रहा था,,,,।

अपनी स्थिति से बेखबर आराधना जल्दी-जल्दी प्लेट में नाश्ता लगाकर अपने बेटे की तरफ बढ़ाते हुए बोली,,,।

ले संजु जल्दी से नाश्ता कर ले,,, मुझे आज एक बहुत जरूरी काम है जिसके सिलसिले में मुझे बाहर जाना है,,,

कहां जाना है मम्मी,,,(इतना कहते हुए संजू जानबूझकर किचन के ऊपरी फ्लोर पर अपनी कमर टीका कर अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

बहुत जरूरी काम है अभी कुछ नहीं बता सकती जब काम हो जाएगा तब तुझे शाम को बता दूंगी,,,,(आराधना जल्दी-जल्दी रोटी पकाते हुए बोली,,, संजू ठीक है अपनी मां के सामने खड़ा होकर अपनी मां की चूचियों की तरफ देख रहा था जो कि ब्लाउज के गले पन से बाहर की तरफ झांक रही थी,,,, और अपनी मां की चूचियों को घूरते हुए वह बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं मम्मी अभी नहीं बताना है तो ना सही लेकिन ऐसे ही मत चली जाना बाहर नहीं तो पूरा मोहल्ला तुम्हारे पीछे पीछे चल पड़ेगा,,,।

(आराधना को संजीव के कहने का मतलब बिल्कुल समझ में नहीं आया तो वह आश्चर्यजनक तरीके से संजू की तरफ देखते हुए सिर्फ इशारा करके पूछी की क्या हुआ जवाब में संजू बिल्कुल भी शर्म ना करते हुए एकदम बेशर्मी की हद पार करते हुए अपनी उंगली से अपनी मां की ‌चुचीयों की तरफ इशारा करते हुए बोला,,,)

देख लो तुमने आज ब्रा नहीं पहनी हो और ब्लाउज गीला होने की वजह से सब कुछ नजर आ रहा है,,,।

(जैसे ही आराधना संजू की बात सुनकर अपनी छातियों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए बालों के पानी से गिला हुआ ब्लाउज में सेउसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ नजर आ रही थी और सूचियों के लिए कल भी एक दम साफ नजर आ रही थी जिसे खुद देखकर वह शरमा गई अपने बेटे के सामने हुआ शर्म से पानी पानी होने लगी,,,अपने बेटे से नजर मिलाने तक की हिम्मत उसमें नहीं थी वह अपनी नजरों को नीचे झुका कर इधर-उधर करने लगी,,,,,, वह हैरान थी कि उसके बेटे ने कितने साफ शब्दों में उसकी गलती को बता दिया था जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस होने लगी थी,,,आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे के सामने वह क्या करें उसका बेटा जो कि अपनी आंखों से उसकी चूचियों को घूर रहा था यह पल उसके लिए बेहद है शर्मसार कर देने वाला था लेकिन उसके बेटे के लिए यह पल बेहद मादकता से भरा हुआ था उसे तो इस नजारे को देखने में खुशी मिल रही थी वरना वह इस तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपनी मां को उसकी गलती का एहसास नहीं कराता,,,,।

पल भर में आराधना की सांसे तेजी से चलने लगी क्योंकि उसका बेटा उस जगह से हटने की जगह उसे ही घूर कर देख रहा था,,,शायद यह आराधना की गलती थी जो कि संजू इस कदर बेशर्मी दिखा रहा था क्योंकि अगर वह पहले ही उसे डांट फटकार कर मना कर दी होती तो शायद वह उसे अपनी बाहों में लेकर उसके होठों को चुंबन करने की हिम्मत ना कर सकता और ना ही उसे अपनी बाहों में लेकर उसके नितंबों को अपनी हथेली में लेकर जोर से दबाने की जुर्रत कर पाता,,,,, वह तो अच्छा हुआ कि रात के समय आराधना अपने आप को काबू में करके अपने बेटे को अपने से अलग कर दिया वरना उस रात को ही दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता खत्म हो जाता ,,,, संजू को उसी तरह से बेशर्मी से खड़ा देखकर आराधना ही वहां से हटना मुनासिब समझी और शर्मिंदगी का अहसास लिए हुए वह बोली,,।

ओहो,,,, जल्दबाजी में ‌मेै भूल गई,,,(इतना कहने के साथ ही वह रसोई घर से बाहर निकलने लगी और जाते-जाते अनजाने में ही एक नजर संजू की पेंट के आगे वाले भाग पर डाली तो हैरान रह गई उसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जो कि इस बात का सबूत था कि उसकी चुचियों को देखकर उसके लड़के का लंड खड़ा हो गया था,,, उसके खड़े लंड के एहसास सेआराधना की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार की नसों में रक्त का भ्रमण बड़ी तेजी से होने लगा,,,, आराधना जल्दी-जल्दी अपने कमरे में गई और अपना ब्लाउज का बटन खोल कर अपने ब्लाउज को बिस्तर पर फेंक दी और अलमारी में से लाल रंग की ब्रा निकाल कर उसे पहनने लगी,,,, ब्लाउज पूरा किया था इसलिए पहनना ठीक नहीं था इसलिए वह अलमारी में से दूसरा ब्लाउज खोजने लगी तो उसे सिर्फ रस्सी वाली जो कि पीछे से बांधी जाती थी वही ब्लाउज मिला और उसे पहनना उसकी मजबूरी थी,,, आनन-फानन में वह अपना ब्लाउज पहनकर पीछे अपना दोनों हाथ लाकर रस्सी को बांधने की कोशिश करने लगी जो की रस्सी ठीक से बंध नहीं पा रही थी,,,, आराधना चाहती तो नॉर्मल कपड़े पहनकर ही इंटरव्यू देने जा सकती थी लेकिन वह इंप्रेशन खराब नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसे इस नौकरी की सख्त जरूरत थी इसलिए वह थोड़ा बन ठन कर जाना चाहती थी,,,।

आराधना वापस रसोई घर में आ चुकी थी संजू नाश्ता कर चुका था इस बार का ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ केवल एक पतली सी रस्सी थी जिसे बांधा जाता था,,,।संजू अपनी मां को इस ब्लाउज में देखकर पूरी तरह से मस्त हो गया वह बला की खूबसूरत नजर आ रही थी,,,, संजू अपनी मां की तारीफ करना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पाया तभी उसकी नजर अपनी मां के पेट पर गई जहां से ठीक से रस्सी ना बांधने की वजह से अंदर की ब्रा की पट्टी नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर संजु अपनी मां से बोला,,,।

मम्मी ब्लाउज की तस्वीर ठीक से बांधो ब्रा की पट्टी नजर आ रही है,,,।

(अपनी बेटी की बातें सुनकर आराधना फिर से हक्की बक्की रह गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें आनन-फानन में वह फिर से अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाने की कोशिश करते हुए अपनी ब्लाउज की रस्सी बांधने की नाकाम कोशिश करने लगी तो संजू ही आगे बढ़कर बिना कुछ बोले अपनी मां के ठीक पीछे आ गया और जल्दबाजी में बांधी गई ब्लाउज की डोरी को अच्छे से बांधने के लिए फिर से खोलने लगा आराधना उसे इनकार नहीं कर पाए वह एकदम से संजू के आकर्षण में बंद चुकी थी उसके मुंह से एक शब्द नहीं फूट रहे थे वह अपने आप को एक तरह से संजू के हवाले कर चुकी थी,,,,।

संजु अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को खोल दो रहा था फिर से अच्छी तरह से बांधने के लिए लेकिनआराधना को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसका बेटा उसके ब्लाउज की डोरी खोल कर उसे धीरे-धीरे अपने हाथों से नंगी करने जा रहा है यह एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित करने लगा था उसकी चूत से काम रस बहना शुरू हो गया था जो कि उसकी पेंटी को गीला कर रहा था,,, संजू ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा था उसकी उन्नत गांड से महज 2 अंगुल की दूरी पर संजू का तंबू था अगर अनजाने में ही आराधना के पैर हल्के से पीछे की तरफ आ जाती तो यह संजू ही थोड़ा सा आगे की तरफ अपनी कमर कर देता तो संजू का लंड उसकी मां की गांड से एकदम स्पर्श हो जाता और वह पल शायद दोनों की जिंदगी में एक नई गाथा लिखने की शुरुआत कर देता,,,,, अपनी मां की चिकनी पीठ पर अपने मूल्यों का स्पर्श होते ही संजू पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा थाअपनी मां के ब्लाउज की डोरी को खोलते समय संजू को भी वही एहसास हो रहा था जो की आराधना को हो रहा था संजु को भी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां के ब्लाउज की डोरी खोल कर धीरे-धीरे उसे नंगी करने जा रहा है,,,,।

देखते ही देखते अपनी मां की इजाजत पाए बिना ही समझू आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को खोलकर उसे वापस अच्छी तरह से मांग रहा था और उसे अच्छी तरह से बांध भी चुका था यह उसका पहली बार था जब वह किसी औरत के ब्लाउज की डोरी को बांध रहा था और उसे अच्छी तरीके से बात भी दिया था इस बात से शायद आराधना को भी हैरानी हो रही थी,,,, ब्रा की पट्टी थोड़ी सी टीम ली थी तो संजू अपनी मां की ब्रा की पट्टी में उंगली को हल कैसे डालकर उसे उंगली से ही सीधा करने लगा यह हरकत आराधना के लिए अद्भुत अवर्णनीय थी साथ ही ना जाने क्या हुआ के आराधना खुद ही अपनी कमर को हल्के से पीछे की तरफ कर दी और जैसे किसी पल का इंतजार संजू को भी था बॉबी हल्के से आगे आया और दोनों के कोमल अंग एक दूसरे के अंगों से रगड़ खा गए,,, आराधना की गांड संजू के पेंट में बने तंबू से स्पर्श हो गई और आराधना को इतने से हीअपने बेटे की लंड के कड़क पन का एहसास अपनी गांड पर हो गया वह पूरी तरह से मस्त हो गई और इस पल की मस्ती को वह काबू में ना कर सकी और उसकी चूत से काम रस की बूंदे टपकने लगी,,,।

संजू अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को बांध चुका था और वह भी अच्छे तरीके से उसे कॉलेज आने में देर हो रही थी तो वह तुरंत रसोई घर से बाहर आया और अपना बैग उठाकर अपनी मां को बाय बोल कर चला गया कुछ देर तक आराधना वहीं खड़ी की खड़ी रह गई,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया अपनी पेंटिंग को पूरी तरह से की थी महसूस कर रही थी और उसी का जायजा लेने के लिए वह अपनी साड़ी को उठाकर कमर तक खींच दी और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच पर जाकर अपनी पैंटी का मुआयना करने लगी जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी गीली पेंटिं मैं वह अपने आप को सहज महसूस नहीं कर पा रही थी,,, और इसलिए वह तुरंत अपने कमरे में वापस गई,,, और अपनी गीली पेंटिं निकालकर दूसरी पेंटी पहन ली और तैयार होकर घर से बाहर निकल गई इंटरव्यू के लिए,,,।
 
आराधना ऑफिस में इंटरव्यू देने के लिए घर से निकल गई थी लेकिन रास्ते भर वह रसोई घर वाले बात के बारे में सोचने लगी,,, लाख समझाने के बावजूद भी उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित होने से बाज नहीं आ रहा था,,,, बार-बार उसका यह कहना की ऐसे घर से बाहर मत निकल जाना वरना पूरा मोहल्ला तुम्हारे पीछे-पीछे आएगा यही बात संजू की बार-बार आराधना को याद आ रही थी,,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा बेझिझक उससे इस तरह की बातें करने लगा था,,, जिस तरह से एक प्रेमी या पति ही बातें करते हैं ,,बेटा नहीं,,,, आराधना परेशान थी कि उसका बेटा आखिर उसे समझ कर क्या रखा है,,,, उसे अपनी मर्यादा में रहना चाहिए बेटा है बेटे की तरह रहना चाहिए पति या प्रेमी बनने की कोशिश नहीं करना चाहिए,,,लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी हरकत बेटी लाइफ बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने आप को जबरदस्ती उसका प्रेमी या पति साबित करने पर तुला था या सिर्फ आकर्षण भर था जो कि जवानी के इस दौर में अक्सर लड़कों के साथ होता ही रहता है,,,,। आराधना रास्ते पर यही सोचती जा रही थी कि उसका बेटा उसकी जवानी की हर एक कोने को अपनी आंखों से अच्छी तरह से देख कर ना जाने अपने मन में कैसे-कैसे ख्यालात लाता होगा,,, गीले ब्लाउज में सेउसकी नंगी चूचियां दम साफ नजर आ रही थी साथ ही उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल भी यह सब देख कर उसके बेटे पर क्या गुजर रही होगी,,, उसकी तो हालत खराब हो गई थी आराधना अपने मन में यह सोचते कि अपने आप से ही बोल रही थी कि कैसे उसका लंड खड़ा हो गया था जिसे वह चोर नजरों से देख ली थी,,,,आराधना को अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था कि जल्दबाजी में उसने आज ब्रा नहीं पहनी थी फिर अपने मन में सोचने लगी अगर ब्रा पहन भी लेती तो क्या हो जाता,,,उसका बेटा तो हर हाल में उसे प्यासी नजरों से देख कर मजा ही लेने वाला था,,,

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इस हालत में आराधना घर से बाहर नहीं निकल सकती थी इसीलिए वहां जाकर अपना ब्लाउज बदलने लगी लेकिन आज शायद उसकी किस्मत ही खराब थी जो उसे डोरी वाली ब्लाउज मिली और वह ठीक से थोड़ी बात भी नहीं पाई जिसे खुद उसका बेटा उसकी मदद करने के लिए बिना बोले ही उसके ब्लाउज की डोरी खोलने लगा था एक पल को तो ऐसे लगा था कि जैसे उसका बेटा अपने हाथों से उसकी ब्लाउज की डोरी खोल कर उसे नंगी कर रहा है इस बात के एहसास से आराधना की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल सी होने लगी थी,,, उसमें से उसे कामरस बहता हुआ महसूस होने लगा था,,,,आराधना को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका बेटा पहली बार किसी औरत के ब्लाउज की डोरी से बांध रहा है क्योंकि वह एकदम अच्छी तरह से और एकदम सटीक रूप से डोरी को बांधा था और इस टाइप की पट्टी टेढ़ी होने के कारण बाहर को निकल जा रही थी जिसे खुद अपनी उंगली से सही करके वह ब्रा की स्टे्प को ठीक किया था,,,,आराधना अपने मन में सोचने लगी कि उसकी नंगी चिकनी गोरी पीठ पर अपनी उंगलियां फिराकर जरूर उसका बेटा मस्त हो गया होगा,,,,उसकी मतलब जवानी देख कर उसके बेटे का लैंड खड़ा हो गया होगा इस बात को अच्छी तरह से समझ गई थी तभी तो अपनी बहन पर उसके लंड की ठोकर को अच्छी तरह से महसूस कर पा रही थी,,,,।

आराधना रास्ते पर यही सोचती रह गई कि वह अपने बेटे को कैसे रोके लेकिन एक तरफ उसका मन अपनी बेटी को रोकने को भी कर रहा था लेकिन दूसरी तरफ उसकी हरकत का मजा भी ले रही थी और अपने तन बदन में अजीब सी हलचल को उठता देख कर वह उम्र के इस दौर पर भी अपनी मदमस्त कर देने वाली जवानी पर गर्व महसूस कर रही थी,,,।

अपने बेटे के बारे में सोचते हुए पैदल चलते हुए भी कब ऑफिस आ गया उसे इस बात का पता भी नहीं चला वह ऑफिस पहुंच चुकी थी,,,,जो के लिए पहले ही उसकी बड़ी बहन ने अपने पति से कहकर इस ऑफिस में आराधना के लिए जगह फिक्स करा दी थी बस इंटरव्यू देने की औपचारिकता ही बाकी थी,,,,,,,,

आराधना ऑफिस पहुंचकर ऑफिस के मालिक के कमरे में गई,,,, कुर्सी पर बैठा ऑफिस का मालिक आराधना की खूबसूरती को देखता ही रह गया,,,, आज तक उसकी ऑफिस में इतनी खूबसूरत औरत काम करने के लिए नहीं आई थी,,,,,, कंपनी के मालिक को आराधना से क्या पूछना चाहिए था यह सब वह एकदम से भूल गया बस उसकी खूबसूरती में खो गया,,,,वैसे भी आराधना आज थोड़ा बहुत मेकअप करके आई थी इसलिए उसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी,,,, आराधना को कंप्यूटर चलाना आता था इसलिए कंपनी के मालिक ने उसे जल्द ही उसे ऑफिस में काम करने के लिए रख लिया,,,, तनख्वाह 12000 जोकि कंपनी के मालिक ने उसकी खूबसूरती को देखते हुए ही तय कर दिया था वरना सिर्फ 10000 ही तनख्वाह थी,,,, 12000 तनख्वाह सुनकर आराधना एकदम खुश हो गई उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी,,,,।

नौकरी फिक्स कर लेने के बाद कंपनी का मालिक किसी ना किसी बहाने से आराधना को छूना चाहता था इसलिए अपनी कुर्सी पर से खड़ा होकर आगे हाथ बढ़ाकर से कांग्रेस बधाई देने के लिए कांग्रेचुलेशन बोला,,,जवाब में आराधना भी खड़ी हो गई और तुरंत हाथ बढ़ाकर हाथ मिलाने लगी लेकिन हाथ मिलाते समय उसके कंधे पर से उसके साड़ी का पल्लू नीचे को गिर गया और उसकी भारी-भरकम गोल गोल छातियां एकदम से उजागर हो गई,,,डीप गले का ब्लाउज पहनने की वजह से उसकी आदत से चूचियां बाहर को नजर आने लगी और झुकी होने की वजह से चूचियों के बीच की आपस की रगड़ और बीच की पतली लकीर और भी ज्यादा कह रही हो गई यह देखकर कंपनी का मालिक एकदम मदहोश हो गया वह आंख पाढे आराधना की दोनों जमानियो को देखने लगा जोकि ब्लाउज में से छलक रहे थे,,,, अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू गिर जाने की वजह से और छातिया एकदम से उजागर होने की वजह से आराधना एकदम से असहज महसूस करने लगी और जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि कंपनी का मालिक उसकी चूचियों को प्यासी नजरों से घुर रहा है तो वह एकदम से सिहर उठी,,,,,,, अभी भी उसका कोमल हाथ कंपनी के मालिक के हाथ में था जिसे वह हल्के हल्के अपनी उंगली से सहला भी रहा था,,,,आराधना कम शर्म से पानी-पानी हुए जा रहे थे वही खान से अपनी साड़ी का पल्लू को वापस संभाल कर कंधे पर रखी और अपना हाथ छुड़ाने की गरज से बोली,,,।

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थैंक यू सर में कब से जॉइन कर सकती हूं,,,

कल से आराधना,,,, तुम्हें स्कूटी चलाने तो आती होगी,,,

हां,,,, चला लूंगी,,,

फैंटास्टिक,,,, तो कल ऑफिस आना और कंपनी की स्कूटी घर ले जाना और उसी से आना जाना तो क्या जल्दी से ऑफिस पहुंच सकती हो,,,

बहुत-बहुत शुक्रिया सर,,,,,(अभी भी वह आराधना की कोमल हाथ को अपने हाथ में लिए हुए उसकी मादकता और उसकी गरमी को अपने अंदर महसूस कर रहा था आराधना कीमत मस्त रूप जोगन उसकी मादक काया को देखकर पहले से ही कंपनी के मालिक के पेंट में हलचल सी मच ने लगी थी लेकिन जब उसकी आंखों के सामने आराधना के कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे गिरा और उसकी भारी-भरकम छातियां उसकी आंखों के सामने एकदम से आ गई तो कंपनी के मालिक का लंड एकदम से खड़ा हो गया,,,,,,, काफी देर से आराधना के हाथ को अपने हाथ में लिए हुए आनंद ले रहा था लेकिन आराधना असहज महसूस कर रही थी इसलिए अपने हाथ को पीछे खींचते हुए वह धीरे से बोली,,,)

सर मेरा हाथ,,,

ओहहहह सॉरी,,,, आराधना तुम कल से ऑफिस आ सकती हो,,,,

बहुत-बहुत शुक्रिया सर आप नहीं जानते इस नौकरी की मुझे कितनी जरूरत थी,,,

तुम्हें नौकरी की जरूरत थी आराधना और हमें तुम्हारे जैसी खूबसूरत एम्पलाई की,,,, जो हमारी कंपनी में मन लगाकर काम करें और कंपनी को आगे बढ़ने में मदद करें,,,

जी सर मैं अपनी पूरी मेहनत और कोशिश करूंगी कि कंपनी और आगे बढ़े,,, अब मैं इजाजत लेती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही मेज पर रखी गई अपनी क्वालिफिकेशन की फाइल को वह हाथ में ले ली और नमस्ते करके जाने लगी,,,, कंपनी का मालिक कुर्सी पर बैठ के और आराधना को जाते हुए देखते रह गया उसकी नजरें आराधना की गोल-गोल कसी हुई गांड पर टिकी हुई थी जो की कसी हुई साड़ी पहनने की वजह से आराधना की भारी-भरकम गांड और ज्यादा बाहर की तरफ नजर आ रही थी,,, ऑफिस से बाहर निकलते समय आराधना की मदमस्त गांड आपस में रगड़ खाते हुए ऊपर नीचे हो रही थी,,, जिसे देखकर कंपनी के मालिक का लंड ऊपर नीचे होने लगा था,,, साफ तौर पर कंपनी के मालिक का ईमान आराधना की खूबसूरती पर डोलने लगा था,,,,।

आराधना बहुत खुश थी ऑफिस से निकलने के बाद सबसे पहले वहां अपनी बड़ी बहन साधना को फोन करके जॉब के बारे में खबर देने लगी,,,साधना को भी बहुत खुशी हुई की आराधना की नौकरी करने से थोड़ी बहुत मुश्किले आसान हो जाएंगी,,,, घर लौटते समय वह रास्ते में से मिठाई खरीद ली थी सबका मुंह मीठा करने के लिए,,,,,,,घर पर पहुंचने के बाद सबसे पहले अपने कपड़े बदलने लगी घर पर समय कोई नहीं था इसलिए मुख्य दरवाजा बंद करके वह अपने कमरे में जाकर एक एक करके अपने बदन पर से साड़ी को उतारने लगी,,, और साड़ी को उतारते समय वह कंपनी के मालिक के बारे में सोच रही थी,,,,,, आराधना अपने मन में है उसकी उम्र की कल्पना करने लगी की 45 से कम नहीं होगा,,,,,,कंपनी के मालिक का नाम आराधना जानती नहीं थी लेकिन टेबल प्लेट पर लिखे नाम से वह समझ गई थी कि उसका नाम क्या है,,,, प्रभात सक्सेना,,,,।

धीरे-धीरे करके आराधना अपने बदन से साड़ी को उतारकर पलंग पर रख दी थी और इस समय आईने के सामने वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर उसे वापस याद आ गया जब कंपनी के मालिक ने उसके साड़ी के पल्लू को कंधे से नीचे गिरने वजह से उसकी भारी भरकम चुचियों को प्यासी नजरों से देख कर पागल हुआ जा रहा था,,,, आराधना उस समय एकदम से सिहर उठी थी,,,, अपने ब्लाउज के बटन खोलते समय आराधना अपने मन में सोचने लगी कि,,,क्या वाकई में अभी भी उसके बदन की बनावट इस काबिल है कि किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है,,, आईने में देखने पर वह बहुत खूबसूरत लग रही थी तो अपने आप को देख कर और जिस तरह से उसका बेटा और आज कंपनी का माल है उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था यह देखकर तो उसे अपने आप पर गर्व के साथ साथ आत्म विश्वास भी आने लगा था वह समझ गई थी कि उसकी जवानी अभी भी बरकरार है उसके बदन का कसाव पूरी तरह से अभी भी उसके बदन की शोभा बढ़ा रही थी,, नहीं सब सोचते सोचते वह अपना दोनों हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने ब्लाउज की डोरी को खोलने लगी जो कि सुबह उसके बेटे ने बड़े कसके वादा था जिसकी वजह से उसकी चूचियों का आकार कुछ और ज्यादा बडा लगने लगा था,,,,,, वैसे तो वाकई में आराधना की चूचियां दशहरी आम की तरह थी लेकिन ब्लाउज का साइज थोड़ा छोटा था उसे संजू ने अपने हाथों से कसकर बांध दिया था इसलिए थोड़ा और ज्यादा उभरकर बाहर निकल गया था,,,, ब्लाउज को निकाल लेने के बाद वह अपनी ब्रा को भी निकाल कर अपनी नंगी चूचियों को आईने में देखने लगी चुचियों का कसाव अभी भी बरकरार था,,,,अपनी चूचियां देखकर आराधना से रहा नहीं गया और अपने दोनों हाथों को अपनी छातियों पर रखकर अपनी गोल गोल चूचियों को हथेली में लेकर हल्के हल्के दबाने लगी,,, अनायास ही उसके जेहन में चूचियों को दबा के समय संजू का ख्याल आ गया जो कि सुबह-सुबह है अपने लंड की ठोकर उसकी गांड पर महसूस कराया था,,,, गांड का ख्याल आते ही आराधना घूमकर आईने में अपनी गांड के उभार को देखने लगी,,, जो की कसी हुई पेटीकोट में बेहद आकर्षक लग रही थी,,,,,,, यही वह चीज थी जिसे देख देख कर उसका बेटा पागल हुआ जा रहा था यह सोचकर वह अपने मन में बोली मैं भी तो देखूं कि क्यों मेरे बेटे को मेरी गान्ड इतना दीवाना बना रही है,,,।

अपने मन में इतना कहते हुए वहां पेटीकोट की डोरी पूछो की साइड में बनी हुई थी उसे एक झटके से अपनी उंगली का सहारा देकर खींच ली और पेटीकोट अपने आप एकदम से ढीली हो गई,,, लेकिन फिर भी दिल्ली होने के बावजूद भी उसकी कमर के घेराव में फंसी हुई थी जिसे आराधना अपने हाथों से ढीला करके उसे कदमों में गिरने पर मजबूर कर दी,,,, अपने ही पल में उसकी पेटीकोट भरभरा कर उसके कदमों में गिर गई,,,, और वह आईने के सामने केवल पेंटी में खड़ी थी,,,, लाल रंग की पैंटी में उसकी गोरी गोरी गांड बेहद आकर्षक लग रही थी,,,जिसे देखकर खुद उसकी हालत खराब हो रही थी वह अपने मन में सोचना चाहिए कि जब अपनी गांड को देख कर वह अपने कान की तरफ आकर्षित हुए जा रही है तो उसके बेटे की क्या हालत होती होगी,,,, अपने मन में इतना सोच कर वह वापस अपने आप से ही बात करते हुए बोली,,,, देखो तो सही बिना पैंटी के कैसे नजर आती है,,, और इतना कहने के साथ ही अपनी उंगलियों का सहारा देकर अपनी पेंटिंग को अपने बदन से उतारने लगी,,, देखते ही देखते वहां अपनी पैंटी को उतार कर कमरे के अंदर आदम कद आईने के सामने एकदम नंगी हो गई,,,, वह आईने की तरफ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई और अपनी मदमस्त कर देने वाली गांड की बनावट को देखने लगी दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी गांड अभी भी एकदम कसी हुई थी,,, जिस पर चर्बी का थर नहीं जमा था,,,,,, आईने में आराधना की कसी हुई गांड बेहद आकर्षक लग रही थी जिसकी खुद आराधना ही कायल होती जा रही थी,,,अपने मन में सोचने लगी कि जब उसका यह हाल है तो उसके बेटे का क्या हाल होता होगा वह तो उसे पूरी तरह से नंगी भी देख चुका है इसीलिए वह दिन रातउसके साथ कुछ ना कुछ करने की सोचता रहता है यह ख्याल मन में आते ही अनायास ही आराधना के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,, वह अब सीधी खड़ी हो गईअवनी की तरफ मुंह करके अपनी मदमस्त कर देने वाली दोनों चूचियों को देखते हुए इसके नीचे धीरे-धीरे नीचे की तरफ जा रहा था इतना सपाट पेट के बीच में उसकी शोभा बढ़ा रही गहरी नाभि किसी छोटी सी चूत से कम नहीं लग रही थी,,, आराधना अपनी दोनों हथेलियों को अपने चिकने पेट पर रखकर सहला रही थी,,,,,और जैसे ही नाभि के नीचे उसकी नजर गई तो वह अपनी चूत की बनावट को देखकर दंग दंग रह गई काफी समय बाद वह अपनी चूत की तरफ ईस तरह से गौर से देख रही थी,,, हल्के हल्के बालों का झुरमुट सा उग आया था,,,,,काफी दिन हो गए थे आराधना अपनी चूत को क्रीम लगाकर साफ नहीं की थी आखिर किसके लिए साफ करती ,,, अशोक उसके में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नहीं देता था जब कभी भी मन करता था तो सिर्फ अपनी प्यास बुझा लेता था,,, इसलिए आराधना भी उसके साथ सफाई करना छोड़ दी थी फिर भी थी तो उसकी ही चैट वह रेशमी बालों के झुरमुट में अपनी उंगली घुमाते हुए अपनी चूत के गुलाबी पत्तियों को हल्के हल्के सहलाने लगी और उसे सहलाने की वजह से अनायास उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,,,उसकी सांसे गहरी होने लगी उसे वह पल याद आने लगा जब सुबह में उसका बेटा अपने हाथों से इसकी ब्लाउज की डोरी को बांधा था और अपने लंड की ठोकर को उसकी गांड पर महसुस कराया था,,,। अपनी कसी हुई गांड पर अपने बेटे के लंड की ठोकर को याद करके पलभर में ही आराधना के तन बदन में आग लगने लगी क्योंकि वह अपने बेटे को याद करके उसके लंड की ठोकर को याद करके अपनी चुच को भी सहला रही थी,,, सांसों में वासना की गर्मी भरने लगी छातियों में अजीब सा कसाव आने लगा सूचियों की रंगत बदलने लगी और देखते ही देखते आराधना अपने बेटे को याद करके अनायास ही अपनी चूत में अपनी बीच वाली उंगली प्रवेश कराने लगी ऐसा करने से उसके तन बदन में अद्भुत सुख अनुभूति हो रही थी जिसमें वह पूरी तरह से खोने लगी थी,,,

आराधना कल्पना में

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, यह मादकता भरा पल उसे बेहद कमजोर करने लगा था,,,,अपनी आंखों को बंद करके ना जाने क्यों अपने बेटे की कल्पना करने से क्या अपनी चूत में उंगली करते हुए वैसा महसूस कर रही थी कि उसका बेटा अपने हाथों से उसकी टांगों को खोल रहा है उसकी नंगी चूचियों को अपने हाथों में लेकर दबा रहा है,,, इस तरह की कल्पना उसके तन बदन में और ज्यादा जोश भर दे रहा था उसकी सांसों की गति तेज होने लगी थी चूत में उंगली करने की वजह से उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज निकलने लगी थी,,,, बड़ी तेजी से कल्पनाओं का घोड़ा दौड़ रहा था कल्पना में संजय उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने मोटे तगड़े लंड का सुपाड़ा को उसकी गुलाबी चूत पर रख कर उसे हल्के हल्के रगड़ रहा

आराधना

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था,,,कल्पना का एहसास आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का रहा था और इसीलिए कल्पना में आराधना अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी चूत पर रख कर,, सुपाड़े का दबाव अपनी चूत के गुलाबी छेंद पर बढाने लगी उत्तेजना के मारे चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी इसलिए पनियाऊ चूत पर सुपाड़े का दबाव तुरंत अंदर प्रवेश करने पर मजबूर कर दिया और देखते ही देखते अपने हाथ का सहारा लेकर आराधना अपने ही बेटे के लंड को अपनी चूत में डालने लगी,,,,संजू पूरी तरह सहमत हुआ जा रहा था आराधना की कल्पना में संजू सपनों का राजकुमार बन चुका था जो कि अपनी ही मां की कमर पकड़कर हल्के हल्के अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,,आराधना को कल्पना में भी चुराई का अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था वह गहरी गहरी सांस लेते हुए सिसकारी की आवाज छोड़ने लगी थी क्योंकि इस समय कमरे में सुनने वाला उसके सिवा और कोई नहीं था बड़ी तेजी से उसकी उंगली चूत के अंदर बाहर हो रही थी और कल्पना में उसके बेटे का लंड अपना पूरा असर दिखा रहा था,,, नतीजन अगले ही पल पल की आह के साथ आराधना झड़ने लगी,,,,अपने बेटे को याद करके वह पहली बार इस तरह की हिम्मत कर रही थी और अपनी इस हरकत पर पूरी तरह से संतुष्टि का अहसास भी उसके तन बदन में हिचकोले खा रहा था,,,,वह अपनी आंखों को खोल कर अपनी दोनों टांगों के बीच देखी तो काम रस नीचे जमीन पर टपक रहा था वह आईने में अपनी शक्ल देखकर शरमा गई,,, और तुरंत उसी हाल में कमरे से बाहर निकल कर बाथरूम में घुस गई और नहाने लगी,,,।
 
आराधना को बड़ी बेसब्री से शाम होने का इंतजार था वह अपने बच्चों को अपनी जॉब के बारे में बताना चाहती थी वह काफी खुश नजर आ रही थी लेकिन जो कुछ भी वह इंटरव्यू देने के बाद घर पर आकर की थी उसके बारे में सोच कर उसकी हालत खराब हो जा रही थी क्योंकि आज वह कल्पना‌ में अपने बेटे के साथ थी और अपने बेटे के साथ की कल्पना करके वह जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव अपने तन बदन में कर रही थी वह एहसास आराधना के लिए अद्भुत था,,,वह कभी सोची नहीं थी कि वह अपने बेटे के बारे में इस तरह की कल्पना करेगी लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह के हालात घर के अंदर बदल रहे थे उसे देखते हुए ना जाने क्यों वह खुद अपने बेटे की तरफ आकर्षित हुई जा रही थी,,,, वह अपने बेटे की बातों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं कर पा रही थी क्योंकि उसकी बातों में उसकी हरकतों में उसके लिए प्यार और एहसास दोनों था वह उसकी परवाह करता था उसके बारे में सोचता था,,,,आराधना अच्छी तरह से समझ रही थी कि जो कुछ भी उसके उसके पति के बीच में हो रहा था संजू नहीं चाहता था कि वह इस तरह की जिंदगी जिए संजू उसे दुनिया की हर खुशी देना चाहता था उसे प्यार से रखना चाहता था लेकिन इसके बदले में संजू उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता था जो कि मां और बेटे के बीच में इस तरह के नाजायज संबंध सही बिल्कुल भी नहीं थे ना तो खुद की नजरों में ना ही दुनिया की नजरों में,,,,।

लेकिन इस बात से आराधना इंकार भी नहीं कर सकती थी कि उसके पति से उसे अब किसी प्रकार की खुशियां संतुष्टि नहीं मिल रही थी उसका पति उससे मैं तो प्यार भरी बातें करता था ना ही प्यार करता था और तो और ना तो उसकी परवाह करता था अगर इंसान अच्छी तरह से कमाता ना होऔर ना ही औरतों को अच्छी तरह से खिला पाता हूं लेकिन उसकी परवाह करता हूं उसकी इज्जत करता हूं उससे बेशुमार प्यार करता हो तो औरत के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और कुछ नहीं होती वहां दुनिया की हर खुशी को त्याग कर अपने पति के पहलू में अपनी जिंदगी बिता लेना चाहती है लेकिन यहां तो ना तो पति का प्यार था और ना ही अच्छे जीने के लिए जिंदगी,,,,,इसलिए अपने पति से विमुख होकर ना जाने क्यों उसका आकर्षण अपने बेटे की तरफ बढ़ता जा रहा था,,,, आराधना यह बात अच्छी तरह से समझ रही थी कि मर्द तो आखिर मर्द ही होता है किसी चीज के बदले में उसे कुछ न कुछ फायदा चाहिए जरूर होता है और उसे अपने बेटे के पक्ष में भी यही नजर आ रहा था उसका बेटा उसकी परवाह करता था उसका ख्याल रखा था उसे तकलीफ देना नहीं चाहता था लेकिन बदले में वह भी चाहता तो उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार ही,,,, आराधना अपने बेटे से दूरी बनाकर रहती थी क्योंकि औरत वह बाद में थी पहले एक मां थी लेकिन यह बात संजू बिल्कुल भी नहीं समझ पा रहा था वह बेटा होने के बावजूद भी उसके साथ अपने आप को मर्द के रूप में देता था और अपनी मां को एक औरत के रूप में,,,, आराधना अपने मन में सोच रही थी कि उस दिन रात को वह सही समय पर अपने बेटे के बाहों में से अलग हो गई वरना उस दिन वह अपनी मर्यादा को लांघ गई होती,,, और एक बार जब वह मर्यादा की दीवार को लांघ जाती तो उसके लिए वापस आना मुश्किल हो जाता,,,,। आराधना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रही थी वह बीच मझधार में फंसी हुई थी चारों तरफ से किनारा तो नजर आ रहा था लेकिन वहां तक पहुंचने की कोई राह नजर नहीं आ रही थी और ना ही वहां पहुंचने की उसकी हिम्मत हो रही थी,,, वाह अपनी चाहत और भावनाओं के घेरे में घिरी हुई थी,,,,, एक तरफ उसे अपने बेटे की हरकत ठीक नहीं लगती थी वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा आगे बढ़े और दूसरी तरफ वह अपने बेटे की तरफ आकर्षित भी हुई जा रही थी,,, हद तो आज हो गई थी जब वह अपने ही नंगे बदन को देखकर उत्तेजित हो गई और उत्तेजित अवस्था में अपनी उंगली को अपनी चुत में डालकर अपने बेटे के बारे में कल्पना करने लगी,,,, और कल्पना में उसकी खुद की उंगली उसे उसके बेटे का लंड महसूस होने लगा जिसे कल्पना में उसका बेटा उसकी मांसल चिकनी कमर पर थाम कर अपने लंड को उसकी चूत में डालकर उसे चोद रहा था और उसके लिए यह कल्पना बेहद अद्भुत और अवर्णनीय थी अपने बेटे के बारे में इस तरह की कल्पना करके वह झड़ चुकी थी,,,,।

आराधना अपने बच्चों का इंतजार करती हो यही सोच रही थी कि जब कल्पना में अपने बेटे के साथ उसे इतना आनंद की अनुभूति हुई तो अगर यह सब वास्तविक का रूप ले ले तो उसका क्या हाल होगा,,,,,,आराधना चित्र से जानती थी कि उसे समझाने की उसके बेटे ने लाख कोशिश कर चुका था लेकिन वो टस का मस नहीं हुई थी,,,उसके बेटे ने उसे यह भी समझाने की कोशिश किया था कि दुनिया की नजर में या पाप होगा लेकिन चारदीवारी के अंदर जो कुछ भी हो रहा है वह किसे पता चलने वाला है और इसमें वह भी खुश और वो भी खुश ,,,,,,, आराधना अपने मन में चारदीवारी के अंदर वाली बात को बड़ी गहराई से सोच रही थी वह अपने मन में अनजाने में ही इस बात पर गौर कर रही थी कि उसके बेटे के कहे अनुसार अगर चारदीवारी के अंदर उन दोनों के बीच कुछ होता है तो यह बात वास्तव में कहां किसी को पता चलने वाली है और ऐसे में उसे शारीरिक सुख भी मिल जाएगा जिसके लिए वह तरस तो रही है लेकिन कर कुछ नहीं रही है लेकिन फिर अपने मन में सोचने लगी कि नहीं यह गलत है चारदीवारी के अंदर भी अगर वह अपनी बेटी के साथ संबंध बना लेती है तो अगर घर का ही सदस्य कोई अपनी आंखों से देख लिया तो क्या होगा,,,,

यह सब ख्याल उसकी अंतरात्मा को पूरी तरह से झकझोर कर रख दे रहा था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन इन सभी ख्यालों के चलते उसकी टांगों के बीच की पतली दरार फिर से गीली होने लगी थी,,, अपनी चूत की नमी आराधना को भी तरोताजा कर जाती थी उसे इस बात का अहसास होने लगता था कि अभी भी उसमें बहुत कुछ बाकी है,,,,।

आराधना

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मोहिनी और संजू के आने का समय हो गया था आराधना खाना बनाने की तैयारी करने लगी थी वह बहुत खुश थी क्योंकि उसे 12000 की जॉब लगी थी और जॉब पर आने जाने के लिए स्कूटी भी मिल रही थी,,, जिससे आने जाने का किराया बस जाता वरना किराया बचाने के लिए पैदल आना जाना पड़ता,,,,,,,

दूसरी तरफ मोहिनी घर लौटते समय रात वाली बात को याद करके पूरी तरह से उत्तेजित में जा रही थी रात को जो कुछ भी हुआ था उसकी युक्ति पूरी तरह से काम कर गई थी,, बस उसके भाई ने थोड़ी सी और ज्यादा हिम्मत दिखाने की कोशिश नहीं कर पाया वरना,,,पहली बार मैं उसके भाई का लंड उसकी चूत के अंदर होता और वह जिंदगी में पहली बार चुदाई का सुख प्राप्त कर लेती,,,,, लेकिन रात का नशा आप ही किसके तन बदन में छाया हुआ था वह रात वाली बात को याद करके एकदम गदगद हुए जा रहे थे कैसे उसके भाई ने उसकी चूत को अपनी हथेली में लेकर सहलाया था,,,और कैसे अपनी जी उस में डाल कर उसके रस को चाट रहा था यह देखना मोहिनी के लिए बेहद अचरज भरा था लेकिन अपने भाई की हरकत से और पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसकी नस-नस में मदहोशी का नशा भरने लगा था एक पल के लिए तो उसमें ऐसा लग रहा था कि वह अपने भाई के सिर को जोर से पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दें,,,,ऊफफ वह एहसास गजब का था,,,, सड़क पर चलते हुए मोहिनी यही सोच रही थी कि उसकी सबसे अच्छी सहेली रोहिणी की युक्ति उसके ऊपर काम करी कि नहीं यह तो वह नहीं जानती लेकिन उसकी बताई युक्ति उसके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही थी वह इस युक्ति को और ज्यादा आजमाना चाहती थी क्योंकि वह किसी भी सूरत में अपने भाई के लंड को अपनी चूत के अंदर लेना चाहती थी,,,।

मां और बेटी में इस मामले में बहुत फर्क नजर आ रहा था एक तरफ मां की जो अपनी बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाने से कतरा रही थी वह नहीं चाहती थी कि वहां अपनी मर्यादा से आगे निकल कर जाएं अपनी बेटी के ही साथ शारीरिक संबंध बनाकर मां बेटे के बीच के रिश्ते को कलंकित करें और दूसरी तरफ मोहिनी थी जो कि किसी भी सूरते हाल में अपने भाई के साथ संबंध बनाकर चुदाई का सुख भोगना चाहती थी,,, उसे लोक लाज शर्म किसी का भी डर बिल्कुल भी नहीं था भाई बहन के पवित्र रिश्ते को तार-तार करने का भी दुख उसमें जरा भी नहीं था बल्कि वहां तो एक औरत और मर्द के बीच के संबंध का मजा लेना चाहती थी,,,,,, और इसी प्रयास में वह अपना प्रयास जारी रखना चाहती थी,,,,।

संजू भी रात के बारे में ही सोच रहा था वह यह सोच रहा था कि अगर रोज उसकी बहन फ्रॉक पहनकर सोए तो कितना मजा आ जाए,,,। पहली बार संजू किसी जवान लड़की की चूत देखा था और वह भी अपनी बहन की अब तक उसने केवल अपनी मौसी की चूत देखा था और उसे चोदा भी था,,,अपनी बहन की चूत का काम रस पीकर जिस तरह का नशा संजू के तन बदन में चढ़ने लगा था उस नशे में वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,,,,सड़क पर चलते हुए संजू उस पल को याद करके रोमांचित हुआ जा रहा था जब वह हिम्मत दिखाते हुए अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच आकर अपनी खड़े लंड को उसकी चूत की दरार पर लगा रहा था उस समय उसके तन बदन में जो उत्पात हो रहा था वह बता नहीं सकता था संजू का मन उस समय अपना लंड पूरा का पूरा अपनी बहन की चूत में डाल देने को कर रहा था,,, लेकिन अपनी मौसी की दो बार की चुदाई से थोड़ा बहुत अनुभव संजू को हो गया था वह अपनी बहन की चूत का छेद देख कर समझ गया था कि बिना उसके सहकार के उसका मोटा तगड़ा लंड चूत में घुसने वाला नहीं है,,,इसीलिए केवल संजू अपने लंड को अपनी बहन की चूत पकड़ कर ही अपना पानी निकाल दिया था लेकिन इतना भी संजू के लिए बहुत था,,,, अब वह अपने मन में सोचने लगा कि क्या वाकई में रोज उसकी बहन बिना चड्डी के सोती है वहअंदर कुछ नहीं पहनती अगर ऐसा है तो उसे फिर से वही खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा,,, और यह सोच कर सही रोमांचित हो उठा,,, थोड़ी ही देर में वह भी घर पर पहुंच गया अभी अभी कुछ देर पहले ही मोहिनी घर पर पहुंची थी और हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो रही थी,,,,, संजू के भी घर पर पहुंच जाने की वजह से मोहिनी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि अब वह अपनी भाई की उपस्थिति में अजीब सा अनुभव करने लगी थी वह अपने भाई से नजर मिलाने में शर्म महसूस कर रही थी,,, और संजू का भी यही हाल था यह जानते हुए भी कि जो कुछ भी उसने किया है वह मोहिनी को बिल्कुल भी पता नहीं है क्योंकि वह बेहद गहरी नींद में सोती है फिर भी संजू अपनी बहन से नजर मिलाने में कतरा रहा था,,,।

दोनों हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो चुके थे,,, आराधना तुरंत मिठाई का डिब्बा लेकर आई और डीपी को खोलते हुए दोनों के आंखें मिठाई का डब्बा करते हुए बोली,,,।

लो तुम दोनों मुंह मीठा करो,,,,

(आराधना की बात सुनकर मोहिनी और संजू दोनों अच्छे से एक दूसरे की तरफ देखते हुए अपनी मां से एक साथ बोले,,)

यह किस खुशी में,,,,

पहले तुम दोनों मिठाई लो तो सही,,,,

(संजू और मोहिनी दोनों मिठाई के डिब्बे में से मिठाई निकालकर खाते हुए अपनी मां की तरफ से से देखने लगे तो उन दोनों की उत्सुकता को खत्म करते हुए आराधना बोली,,)

मुझे बहुत ही अच्छी जॉब मिल गई है और वह भी कंप्यूटर चलाने की ऑफिस में और ज्यादा दूर भी नहीं है 10 मिनट का रास्ता है,,,और तो और कंपनी मुझे कंपनी की स्कूटी भी कह रही है आने जाने के लिए किराया भी बच जाएगा,,,(आराधना किसी और सामान के लिए अपने बच्चों को बिल्कुल भी मौका नहीं देना चाहती थी इसलिए एक ही सांस में सब कुछ बता दी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) और हां तनख्वाह है 12000,,,,,

क्या,,,?(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली,,)

12000 अब हमें किसी से भी पैसे उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,,,,( आराधना अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बोली,,, मोहिनी और संजू अभी भी आश्चर्य में थे इतनी जल्दी नौकरी के लिए और वह भी ₹12000,,,,दोनों अभी भी आश्चर्य से आराधना की तरफ भी देख रहे थे तो आराधना बोली,,)

क्यों क्या हुआ तुम दोनों को खुशी नहीं हुई,,,

नहीं मम्मी बहुत खुशी हुई लेकिन थोड़ा अजीब लग रहा है तुम कभी नौकरी नहीं किए और घर चलाने की वजह से पहली बार जॉब करना पड़ रहा है,,,(संजू सांत्वना दर्शाते हुए भोला और संजू की यही बात आराधना को बहुत अच्छी लगती थी कि वह उसकी फिक्र बहुत करता था लेकिन उसकी बात को सुनते समय आराधना का ध्यान उसकी नजरों पर भी था संजू उसकी चूचियों की तरफ घूर रहा था,,,जो कि साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे होने की वजह से ब्लाउज में से उसकी चूचियों की गहराई एकदम साफ नजर आ रहे थे अपनी छातियों पर नजर जाते ही आराधना संजू की नजरों की वजह से शर्म से पानी पानी होने लगे वह अपने मन में सोचने लगी कि यह लड़का कभी भी कहीं भी शुरू हो जाता है,,,, आनन-फानन में अपने बेटे के बातों का जवाब देते हुए आराधना बोली,,)

मुझे कोई दिक्कत नहीं है ऐसा तो है नहीं कि औरतें नौकरी नहीं करती मैं जहां काम करने जा रही हूं वहां पर ज्यादातर औरतें ही है,, इसलिए ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,, तुम दोनों मिठाई खाओ मैं जल्दी जल्दी खाना बना लेती हूं,,,,(इतना कहकर आराधना रसोई घर में चली गई,,, और मोहिनी आश्चर्य से संजू की तरफ देखते हुए बोली,,)

मम्मी जोब कर पाएगी,,,

क्यों नहीं कर पाएगी जरूर कर पाएंगी,,,,

((इतना कहते हो संजू एक नजर अपनी बहन के ऊपर डाला तो देखा कि उसकी बहन आज फ्रॉक नहीं पहनी थी सलवार कमीज पहनी थी लेकिन सलवार समीज में भी वह पूरी तरह से कयामत लग रही थी,,,, अपनी बहन के ऊपर एक नजर डालने के बाद वह अपने कमरे में चला गया और वहां जाकर थोड़ी पढ़ाई करने लगा,,,, मोहिनी कमरे में नहीं गई बल्कि रसोई घर में जाकर अपनी मां का हाथ बटाने लगी ,,
 
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