Incest मजबूरी या जरूरत - Page 7 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

स्वप्नदोष की स्थिति में गहरी नींद में सो चुकी थी और उसे मोहिनी ही जगाई इसलिए वह झट से उठकर काम में लग गई थी लेकिन उसका काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था क्योंकि आज तक उसने इस तरह का सपना नहीं देखी थी,,,, सपना भी एकदम हकीकत की तरह हो सकता है उसे विश्वास नहीं हो रहा था सब कुछ एकदम हकीकत ही तो लग रहा था वह बैठे-बैठे इसी बारे में सोच रही थी कि कैसे उसका बेटा उसके कमरे का दरवाजा खोल कर आया था उसके करीब बैठा था और अपने हाथों से ब्लाउज का बटन खोला था सब कुछ एकदम हकीकत मतलब कि जैसे उसकी आंखों के सामने हो रहा है,,, उसका अपने हाथों से साड़ी उतार कर अलग करना ब्लाउज के बटन खोल कर उसकी नंगी चूचियों को जोर जोर से दबा कर मुंह में लेकर पीना और साड़ी उतारने के बाद पेटीकोट की डोरी खोल कर,,, उसे उतारने की कोशिश करना है और खुद उसका ‌हकार करते हुए अपनी भारी-भरकम गांड को हवा में उठा देना और उसके बेटे का मौके का फायदा उठाते हुए पेटीकोट के साथ पैंटी भी उतार देना पलभर में ही उसका अपने ही हाथों से नंगी कर देना,,, और अपने हाथों से ही दोनों टांगों को फैला कर टांगों के बीच आ जाना सब कुछ तो हकीकत लग रहा था और उस पल को उस एहसास को वह कैसे बोल सकती है जब अपनी चूत पर अपने बेटे की होंठों का स्पर्श महसूस की थी एकदम से झनझनाहट पूरे बदन में फैल गई थी,,, पहली बार आराधना अपनी चूत पर जवान होठो और जीभ का स्पर्श महसूस कर रही थी,,,, और फिर एक झटके में ही पूरा का पूरा लंड और चूत में डाल देना सपना होते हुए भी सब कुछ हकीकत सा लग रहा था तभी तो उसका पानी निकल गया था,,,,,।

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झाड़ू लगाते समय आराधना रात के सपने के बारे में ही सोच रही थी,,, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, पहली बार सपने में ही सही संभोग के अद्भुत सुख का एहसास उसे हुआ था एक परम तृप्ति का एहसास पहली बार उसे हुआ था और वह भी अपने बेटे के द्वारा भले ही सपने में लेकिन अकल्पनीय सुख को महसूस करके वह बार-बार गीली हो जा रही थी,,,,।

नाश्ता तैयार कर चुकी थी थोड़ी ही देर में संजू और मोहिनी दोनों नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल गए थे और वह से भी ऑफिस के लिए तैयार होना और थोड़ी ही देर में वह भी नाश्ता करके घर से निकल गई,,,।

दूसरी तरफ कोचिंग क्लास का कार्यभार बड़े अच्छे से चल रहा था संजू ने बहुत ही जल्दी सभी विद्यार्थियों में एक छाप छोड़ दिया था,,,, संजू जिस तरह से पढ़ाता था और समझाता था उसे देखकर मनीषा भी आश्चर्यचकित रह जाती थी उसे उम्मीद नहीं थी कि संजू इस कदर अपने काम में माहिर निकलेगा लेकिन धीरे-धीरे संजू की ही वजह से कोचिंग क्लास का नाम फैलने लगा और धीरे-धीरे और भी विद्यार्थी कोचिंग लेने के लिए आने लगे,,,, संजू का आकर्षण मनीषा के प्रति दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था वह पढ़ाते समय तिरछी नजरों से मनीषा की तरफ देख लेता था कभी और सलवार कमीज पहनकर आती तो कभी जींस और टीशर्ट और दोनों धरा के कपड़ों में वह कयामत लगती थी,,,, कसी हुई सलवार से बाहर जाती है उसकी सुडौल और सुगठित गांड हमेशा से संजू की उत्तेजना का केंद्र बिंदु बना रहता था छातियों की शोभा बढ़ाती उसकी दोनों नौरंगिया कुर्ती में से अपनी निप्पल को भाला बनाकर कुर्ती को छेंदने के लिए बेकरार रहती थी,,,,,,, मनीषा को भी धीरे-धीरे संजू की नजरों का पता चलने लगा था वह समझ रही थी कि संजू चोर नजरों से उसे ही देखता रहता है और मनीषा भी संजू के व्यक्तित्व के आगे आकर्षित हुए जा रही थी,,,,,,, दोनों के बीच सहज रुप ही वार्तालाप होती थी बातों में किसी भी प्रकार की अश्लीलता नजर नहीं आती थी दोनों एक दूसरे के प्रति एकदम सहज थे भले ही एक दूसरे के प्रति देना आकर्षित हो रहे थे लेकिन यह बात दोनों को ही पता नहीं था,,,दोनों सिर्फ अपना काम कर रहे थे,,,,,,।

साधना

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ऐसे ही एक दिन संजू घर से निकल कर सीधा कोचिंग क्लास पहुंचने की जगह मनीषा के घर पहुंच गया वह सोच रहा था कि ऐसे में मौसी से भी मुलाकात हो जाएगी और मुलाकात करने के बहाने अगर मौका मिला तो मौसी के संग थोड़ी मस्ती कर लेगा वैसे भी चुदाई किया उसे काफी दिन हो गए थे इसलिए लंड अपने काबू में नहीं था,,,, साधना के घर के बाहर खड़ा होकर बेल दबाने लगा,,,, और तभी थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला तो सामने मनीषा खड़ी थी,,, मनीषा को देखकर संजू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे मनीषा को देखने के बाद ऐसा लग रहा था कि मनीषा अभी कोचिंग क्लास जाने के लिए तैयार नहीं हुई थी बाल बिखरे हुए थे लेकिन बिखरे हुए बालों में उसकी खूबसूरती और ज्यादा निखर कर नजर आ रही थी,,, संजू एकटक मनीषा को ही देखता रह गया और मनीषा भी मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे संजू तू यहां कोचिंग क्लास नहीं गया,,,

मैं सोचा कि तुम्हारे साथ चलूंगा इसलिए यहां आ गया इसी बहाने मौसी से भी मुलाकात हो जाएगी क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या मेरा यहां पर आना,,,

अरे नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है,,,

नहीं ऐसी ही बात है तभी तो दरवाजे पर ही खड़ी रखी हो अंदर आने के लिए कह नहीं रही हो,,,

अरे सॉरी,,, आओ अंदर आओ इधर आने के लिए इजाजत की जरूरत थोड़ी है यह भी तो तुम्हारा ही घर है,,,

जानता हूं दीदी तभी तो बिना बुलाए चला अाता हूं,,,,(संजू घर में प्रवेश करता हुआ पूरा संजू की आवाज सुनकर तब तक साधना भी वहीं आ गई क्योंकि काफी दिनों बाद वह संजू से मिल रही थी,,,)

अरे संजू तू बहुत दिन बाद आ रहा है ईथर का रास्ता भूल गया क्या,,,,,

अरे नहीं मौसी इसीलिए तो आया हूं कि चलो मुलाकात भी हो जाएगी,,,,।

अच्छा मम्मी जब तक तुम चाय बना दो मैं नहा कर फ्रेश होकर आ जाती हुं,,,,

(नहाने की बात सुनते ही संजू के पेंट में हरकत होने लगी और यही हाल साधना का भी होने लगा अपनी बेटी से नजरें बचाकर साधना आंखों के इशारे से उसे किचन में आने के लिए बोली,,,, और जैसे ही साधना किचन में प्रवेश की संजू धीरे से किचन के दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया और जैसे ही बाथरूम के बंद होने की आवाजाही तुरंत संजू बिना देर किए किचन के अंदर प्रवेश कर गया और तुरंत अपनी मौसी को अपने बाहों में भरकर उसके लाल लाल होंठों पर अपने होंठ रख कर उसके होंठों का रसपान करने लगा,,, बहुत दिनों बाद दोनों मिले थे इसलिए पलभर में ही या चुंबन एकदम गहरा होने लगा दोनों तरफ से एक दूसरे के होठों का रस चूसने का सिलसिला शुरू हो गया और इसी बीच संजू अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड को जोर-जोर से पकड़कर दबाना शुरू कर दिया साड़ी के ऊपर से ही गांड को दबाने पर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और आगे से उसका लंड साड़ी के ऊपर से ही साधना की चूत पर ठोकर मार रहा था,,, तुरंत ही संजू का लंड एकदम अपनी औकात में आ गया था इसलिए साधना बोली,,,।

आराधना की बड़ी गांड

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तेरा लंड भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता है तभी तो देख इतनी जल्दी खड़ा हो गया है,,।

अरे मौसी तुम्हारी चूत की खुशबू सुंघ कर मेरे लंड से रहा नहीं जाता है इसलिए तो तुरंत खड़ा हो जाता है,,,(ब्लाउज के ऊपर से चूची को दबाते हुए बोला)

हम दोनों के पास 10 मिनट का समय है 10 मिनट में मनीषा नहा कर बाहर आ जाएगी इतनी देर में तुझे जो करना है कर ले,,,(साधना एकदम से संजू को आमंत्रण देते हुए बोली,,, वैसे तो एक संपूर्ण तृप्ति भरा संभोग का एहसास दिलाने के लिए 10 मिनट काफी नहीं था लेकिन संजू को अपनी मर्दाना ताकत पर पूरा विश्वास था इसलिए इस समय उसके लिए 10 मिनट भी बहुत था इसलिए वह ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत अपनी मौसी को पकड़कर घुमा दिया और उसे किचन का फ्लोर पकड़कर नीचे झुकने के लिए बोला,,,,)

तब देर किस बात की है मेरी रानी बस अब तुम थोड़ा सा झुक जाओ फिर देखो मेरा कमाल,,,, लेकिन मनीषा ने तो चाय बनाने के लिए बोली है,,,,।

अरे बुद्धू मैं सब जानती हूं पहले स्टॉव पर देख तो ले,,,।

(स्टॉव पर नजर पड़ते ही संजू एकदम से खुश हो गया,,, क्योंकि इस समय मनीषा कोचिंग के लिए जाती थी इसलिए साधना पहले से ही चाय बनाने के लिए रख दी थी और उसका फल उसे इस रूप में मिल रहा था,,, साधना को पता था कि उसे क्या करना है वह तुरंत झुक गई और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में ऊपर की तरफ उठा दी संजू भी देर किए बिना तुरंत अपनी मौसी की साड़ी को उठाते हुए कमर पर लाकर इकट्ठा कर दिया लाल रंग की पैंटी में मौसी की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी बेटी के ऊपर से ही संजू अपनी मौसी की गांड जोर-जोर से दबाते हुए उस पर चपत लगाने लगा और फिर लाल रंग की पेंटिंग अपने दोनों हाथों से नीचे की तरफ उतारते हुए घुटनों में लाकर फंसा दिया,,,।)

सहहहरह आहहहरह मौसी तुम्हारी गांड बहुत मस्त है,,,ऊमममम,,,(और इतना कहने के साथ ही गांड की दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर एक दूसरे के विरुद्ध खींचने लगा जिससे उसका गुलाबी छेद नजर आने लगा उसे देखकर संजू के मुंह में पानी आने लगा हुआ तुरंत नीचे झुक कर अपनी जीभ को साधना की चूत पर लगाकर उसे चाटने लगा,,, संजू की हरकत को देखकर साधना अपने मन में सोचने लगी कि मादरचोद को औरतों को खुश करने का हुनर अच्छी तरह से आता है और कुछ देर तक समझो अपनी मौसी की चूत को चार तरह चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए तुरंत खड़ा हुआ और अपने पेंट को बिना उतारे उसमें से लंड को बाहर निकाल लिया,,,, और साधना की गुलाबी छेद में डालकर उसकी कमर पकड़ लिया और पहली बार से ही जबरदस्त धक्कों का प्रहार करने लगा हर धक्के के प्रहार से साधना के मुंह से आह निकल जा रही थी लेकिन यह आहह उसके आनंद की परिभाषा को बयां कर रहे थे,,,

संजू अपनी मौसी की चुदाई करते हुए

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संजू बिना रुके लगातार अपनी मौसी की चूत में लंड पर रहा था उसकी रफ्तार बिल्कुल भी कम नहीं हो रही थी देखते ही देखते साधना की सांसें उखड़ने लगी और यही हाल संजू का भी हो रहा था वह जानता था कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर ब्लाउज के ऊपर सही अपनी मौसी की चूची को जोर से पकड़ कर दबाते हुए अपनी कमर को मशीन की तरह चलाना शुरु कर दिया,,,,, और जैसे ही बाथरूम का दरवाजा खुला वैसे ही संजू ने अपना लावा अपनी मौसी की चूत में उडेलना शुरू कर दिया,,, संजू अपनी मौसी की पीठ पर ढेर हो गया वह जानता था कि बाथरूम से निकलकर मनीषा सीधे अपने कमरे में जाएगी और ऐसा ही हुआ और थोड़ी ही देर में दोनों संतुष्ट होकर अपने कपड़ों को दुरुस्त किए और खुद संजू चाय लेकर मनीषा के कमरे में आ गया तब तक मनीषा तैयार हो चुकी थी ना आने के बाद मनीषा की खूबसूरती और भी ज्यादा खुशबूदार और मनमोहक हो चुकी थी संजू तो देखता ही रह गया मनीषा जब उसे इस तरह से अपने आप को देखता हुआ पाई तो मुस्कुराते हुए ,,,।

बोली क्या हुआ,,,?

कककक कुछ नहीं,,,(मनीषा के ऐसे सवाल पर संजू एकदम से सकपकाते हुए बोला,,,)

तो ऐसे क्या देख रहा था,,,

कुछ नहीं देख रहा था कि तुम कितनी खूबसूरत लग रही है,,,

चल पागल जल्दी से चाय खत्म कर कोचिंग के लिए चलना है,,,,।

(मनीषा जानबूझकर बात को टालने की गरज से बोली थी लेकिन संजू के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर मनीषा के गाल शर्म से लाल हो गए थे पहली बार किसी लड़के ने उसके सामने उसकी खूबसूरती की तारीफ करने की हिम्मत किया था मनीषा कुछ बोल नहीं पाई और जल्दी से चाय खत्म करके दोनों कोचिंग के लिए निकल गए,,,,,)

दूसरी तरफ मोहिनी घर पर पहुंच चुकी थी और चाय बना रही थी वह जानती थी कि उसकी मां किसी भी वक्त आ जाएगी इसलिए वह पहले से चाय बनाकर तैयार करना चाहती थी तभी बाहर गाड़ी की आवाज आई तो वह तुरंत दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई लेकिन देखी तो आज उसकी मां किसी और की बाइक पर बैठ कर आई थी,,, मोहिनी या देखकर एकदम हैरान हो गए कि उसकी मां किसी गैर मर्द की बाइक पर बैठ कर आई थी और बाइक से उतरने के बाद उसी से हंस हंस कर बात कर रही थी और वह भी मुस्कुरा कर उसकी मां से बात कर रहा था मोहिनी यह देखकर अजीब सी बातों को सोचने लगी क्योंकि पहली बार मोहिनी अपनी मां को किसी गैर मर्द से बात करते हुए देख रही थी और वह भी मोहिनी के लिए बिल्कुल अनजान था,,,, वह आदमी तकरीबन 35 36 साल का था,,, गठीला बदन का ऐसा लग रहा था कि जैसे रोज जिम जाता था और काला चश्मा लगाया हुआ था ,,, चेहरा दाढ़ी और मूंछ से घिरा हुआ था जिसमें वह बेहद आकर्षक लग रहा था,,, मोहिनी देख रही थी कि उसकी मां उसे घर में ले आने के लिए जिद कर रही थी चाय पिलाने के लिए जिद कर रही थी,,,, मोहिनी पर अभी तक आराधना की नजर नहीं पड़ी थी इसलिए मोहिनी सोचने लगी कि वह तो हमेशा अपनी मां के घर पहुंचने के बहुत देर बाद आती थी कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी मां उसे घर में बुलाकर उससे चुदवाने का प्रोग्राम बना रही हो क्योंकि कुछ महीनों से वह औरतों की जरूरत को अच्छी तरह से समझने लगी थी और जब से उसने अपने पापा को किसी केयर लड़की के साथ गेस्ट हाउस में जाते हुए देखी थी तब से उसके सोचने का तरीका बदल चुका था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां दूसरे मर्द के साथ संबंध ना बना ले क्योंकि औरतों की भी जरूरत होती है वह अपने आप को देख कर ही समझ गई थी क्योंकि वह अपनी जरूरत को समझते हुए अपने भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाते चली आ रही थी,,,।

आराधना जिद कर रही थी लेकिन वह जल्दबाजी में था इसलिए किसी दिन और आने का वादा करके वहां से चला गया और जैसे ही आराधना की नजर दरवाजे पर पड़ी और मोहिनी को वहां खड़ा देखी तो एकदम से खुश होते हुए बोली,,,।

अरे मोहिनी,,, तू आ जल्दी आ गई,,,

हां मम्मी आज मैं जल्दी आ गई,,,(इतना क्या करूं अपने मन में सोचने लगी कि उसकी मां उसे जल्दी आता देखकर कितना हैरान हो गई है कहीं सही मैं तो उसने प्रोग्राम नहीं बना रखी थी,,,,, और शायद वह इंसान उसे देख लिया हो इसलिए बहाना करके चला गया मोहिनी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें को एकदम हैरान हो गई थी,,,, घर में आराधना प्रवेश कर गई और मोहिनी भी मोहिनी ने चाय बना कर रखी थी इसलिए आराधना फ्रेश होने के बाद तुरंत चाय लेकर पीने लगी,,,, मोहिनी जल्द से जल्द यह बात अपने भाई को बता देना चाहती थी इसलिए रात को जब दोनों सोने के लिए कमरे में गए तब मोहिनी अपनी मां के बारे में सोच कर हैरान भी थी और ना जाने क्यों दूसरे मर्द के साथ अपनी मां की कल्पना करके उत्तेजित हो जा रही थी इसलिए अपने भाई से पहले खुद ही वह अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी और खुद अपने भाई के कपड़े उतार कर उसे नंगा कर दी थी उसका भाई भी हैरान था कि आज उसकी बहन ज्यादा ही चुदवा‌‌सी हो गई है,,,, देखते ही देखते हैं मोहिनी अपने भाई के ऊपर चढ़कर अपनी गुलाबी चूत को अपने भाई के लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसे अपनी चूत का रास्ता दिखाते हुए,,, गरम सिसकारी लेते हुए बोली,,,।

‌सससहहहह आहहहह,,,,, भाई अब तुझे ही कुछ जल्दी करना होगा मम्मी के साथ,,,

क्यों क्या हुआ,,,?

आज मम्मी को उनके ऑफिस का कोई आदमी छोड़ने आया था,,,

क्या,,,?(एकदम से हैरान होते हुए) लेकिन मम्मी के पास तो उनकी स्कूटी है ना,,,

हां लेकिन मम्मी कह रही थी कि स्कूटी को 2 दिन के लिए सर्विस में कंपनी ने दी है ताकि दुरुस्त रहें,,, भाई वह आदमी हैंडसम मैंने पहली बार मम्मी को इस तरह से किसी गैर मर्द से हंस-हंसकर बातें करते हुए देखी हूं वरना मम्मी तो इतनी शर्म आती है कि किसी गैर मर्द की तरफ देखने से भी कतराती है लेकिन आज मैं मम्मी का रूप देखकर एकदम घबरा गई हूं,,,

क्या,,, अरे तू गलत समझ रही होगी,,,

नहीं भाई,,,(अपनी गोरी गोरी कहां को अपने भाई के लंड पर पटकाते हुए,,,,) मम्मी हंस हंस कर बातें कर रही थी और उसे घर में आने के लिए बोल रही थी लेकिन वह शायद मुझे देख लिया था और इसीलिए आनाकानी कर रहा था और मम्मी तो जानती है कि मैं मम्मी के आने के बाद घंटे बाद ही घर पर वापस लौटती हूं हो सकता है मम्मी ने प्रोग्राम बनाया हो घर में चुदाई का,,,,

क्या कह रही है मोहिनी,,,

हां भाई मैं सच कह रही हूं बाहर मम्मी किसी गैर से चुदवाई से अच्छा है कि तू ही मम्मी को चोदे,,, इससे बदनामी तो नहीं होगी और वैसे भी मैं मम्मी को किसी गैर मर्द के साथ देखना भी पसंद नहीं करते मुझे तो सोचकर ही कितना खराब लग रहा है कि मम्मी अगर किसी गैर मर्द के साथ चुदवाएगी तो सोच कैसा लगेगा,,, वह अपने हाथों से मम्मी के कपड़े उतारे गा उसकी चूची दबाएगा,,, उसकी चूत चाटने का और अपना लंड मम्मी के मुंह में लेकर चूसने के लिए बोलेगा और जबरदस्ती करता हुआ मम्मी को चोदेगा भी और अगर एक बार यह सिलसिला शुरू हो गया तो सोच भाई वह घर में भी आकर मम्मी को चोदकर जाएगा,,, और मम्मी को एक बार चुदाई का चस्का लग गया तो वह घर में भी बुलाकर रात को अपने कमरे में रात भर चुदवाएगी,,,,,, भाई मेरा तो सोचकर ही हालत खराब हो रहा है,,,

हां तो सच कह रही है मोहिनी अगर ऐसा हो गया तो गजब हो जाएगा,,, अगर इस बात का किसी को पता भी चल गया तो हम लोग को बदनाम हो जाएंगे,,

इसीलिए तो कह रही हूं भाई तू ही कुछ चक्कर चला कि मम्मी को कोई और चोदे ईससे पहले तू उसे अपने बस में कर ले,,,,

तू चिंता मत कर मोहिनी मैं जरूर कोई चक्कर चलाऊंगा,,,, जैसा तू सोच रही है मैं वैसा होने नहीं दूंगा,,,,(अपनी बहन की तरफ से अपनी मां के लिए हरी झंडी पाकर संजू एकदम खुश हो गया था वह समझ गया था क्या अगर वह अपनी मां की चुदाई करेगा तो उसकी बहन को बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा वह खुलकर घर में मजा ले सकेगा इसलिए वह पूरी तरह से जोश में आ गया था और अपनी बहन को उसी तरह से अपनी बाहों में पकड़े हुए उसे पलट कर उसे नीचे कर दिया और अपना ऊपर आ गया और फिर घमासान चुदाई करने लगा,,,)
 
जबसे संजू अपनी बहन की तरफ से पूरी तरह से राजामंदी प्राप्त कर लिया था तब से वह रात दिन सिर्फ अपनी मां को कैसे अपनी बात मनाने के लिए राजी किया जाए इसी बारे में सोचता रहता था वह अपना अगला ध्येय,,, तय कर चुका था,,, अब वह किसी भी तरह से अपनी मां को हासिल करना चाहता था उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता था अपनी मां के खूबसूरत बदन को भोगना चाहता था जिसके लिए वह दिन रात अपने मन में सपने संजो रहा था,,,,,, वैसे भी जब वह मोहिनी को चोदना शुरू नहीं किया था उसके पहले से ही अपनी मां को चोदने का ख्वाब देखता था क्योंकि वह कई बार अपनी मां को नग्न अवस्था में देख चुका था और अपनी मां की मजबूरी और जरूरत देखते हुए एक बार उसके साथ शरीर संबंध बनाने की हिम्मत भी कर दिया था लेकिन यह मौके पर उसकी मां उसे पीछे हटा दी थी वरना वह मोहिनी के साथ-साथ अपनी मां की भी चुदाई करना शुरू कर दिया होता लेकिन अब उसे खुली छूट थी घर में मोहिनी का साथ मिल जाने की वजह से वह अपनी मां के साथ किसी भी तरह की शारीरिक छेड़छाड़ कर सकता था क्योंकि मोहिनी भी यही चाहती थी,,,।

आराधना की मस्त चूचिया

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जबसे मोहिनी नहीं है बताई थी कि उसकी मां किसी ऑफिस के कर्मचारी के साथ घर पर आई थी और उसके साथ हंस-हंसकर बातें कर रही थी और तो और वह उसे घर में आने के लिए बोल रही थी तब से संजू का भी दिमाग चकराने लगा था,,, अपनी मौसी के चरित्र को देखते हुए उसे अब किसी भी औरत पर भरोसा नहीं होता था क्योंकि वह अपनी मौसी के बारे में कभी भी इस तरह की कल्पना भी नहीं किया था लेकिन जिस तरह से उसकी मौसी आगे चलकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी जवानी की प्यास बुझा रही थी उसे देखते हुए संजू समझ गया था कि औरत को भी शारीरिक भूख होती है और उसे मिटाने के लिए वह भी किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो जाती है तभी तो उसकी मौसी अपने ही भतीजे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर संतुष्टि प्राप्त कर रही थी और यही हाल मोहिनी का भी था,,, संजू अपने मन में यही सोच रहा था कि जब मोहिनी उसकी सगी बहन होने के बावजूद भी अपनी जवानी की आग को उसके लंड से बुझा रही थी उसे देखते हुए उसे समझ में आ रहा था कि अगर कोई मर्द उसकी मां को बहका ना चाहे तो आराम से बहका सकता था और वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार भी हो जाएगी,,, क्योंकि संजू अच्छी तरह से जानता था कि कुछ महीनों से उसकी मां की रातें अकेले ही करवट बदलते हुए गुजर रही थी,,,,,,, ऐसे में उसे इस बात का एहसास था कि उसकी मां को भी जवानी की प्यास बदन की भूख सता रही होगी और वह शारीरिक भूख एक हद से ज्यादा बढ़ जाने से वह अपने ऑफिस के कर्मचारी के साथ चुदवा कर अपनी प्यास बुझा सकती है,,,, इस तरह के ख्याल संजू के मन में आते ही वह परेशान होने लगा था,,, वह अपनी मां को किसी गैर मर्द की बांहों में नहीं देखना चाहता था वह नहीं चाहता था कि कोई भी मर्द उसकी मां को अपने बिस्तर तक ले जाएं और उसका सहारा लेकर अपनी प्यास बुझाए,,,,,,, संजू को तो कल्पना में सब कुछ नजर भी आने लगा था कि कैसे उसकी मां अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने सहकर्मी चारी का सहारा लेते हुए,,, उसे अपने घर पर लेकर आती है और घर में प्रवेश करते ही अपने हाथों से दरवाजा बंद करके उसे अपनी बाहों में लेकर अपने पैसे हो तो को उसके होंठ पर रखकर उसे चुंबन करने लगती है और साथ ही उसके दोनों हाथों को खुद अपने हाथों में लेकर उससे अपनी चुचियों पर रखकर दबाने के लिए बोलती है,,,, इतनी अद्भुत जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत को अपनी बाहों में पाकर उत्साह कर्मचारी के बदन में उत्तेजना की फुहार उठने लगती है और वह पहली बार इस तरह की खूबसूरत औरत हो अपनी बाहों में पाकर खुशी से फूला नहीं समाता लेकिन उसकी हिम्मत भी आगे बढ़ने के लिए नहीं होती है,,,, उसके बदन में कंपन होने लगता है और उसकी मां खुद ही अपने हाथों में उसकी हथेली लेकर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी चूची को दबाना शुरू कर देती है और थोड़ी ही देर में खुद अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोल कर अपनी नंगी चूची को उसके मुंह में देकर चूसने के लिए बोलती है,,, और वह कर्मचारी पागलों की तरह सूचियों पर टूट पड़ता है और किसी बच्चे की तरह बारी-बारी से सूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर देता है,,,, और उसकी मां गरम सिसकारी लेते हुए स्तन मार देना और चूची पिलाई का मजा लेती है ,,, साथ ही खुद ही अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसके कमर पर बंदी बेल्ट को अपने हाथों से खोलकर उसके पैंट की चैन खोलकर उसमें अपना हाथ डालकर उंगलियों का सहारा लेकर उसके लंड को बाहर निकाल कर खुद ही अपने घुटनों के बल बैठ कर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरु कर देती है,,, और फिर वह कर्मचारी अपने आप को हवा में उड़ता हुआ महसूस करके पूरी तरह से तृप्ति का एहसास करता है और साथ ही धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर देता है और थोड़े ही देर बाद उसकी मां खुद ही अपने कपड़ों उतार कर एकदम नंगी हो जाती हो और अपनी दोनों टांगे फैलाकर उसे उंगली से इशारा करके अपनी दोनों टांगों के बीच आने के लिए कहती है और उसके सर को उसके बालों को अपने हाथों से पकड़कर उसे अपनी चूत की तरफ खींचती है और अगले ही पल वह आदमी चूत को जीभ से चाटना शुरू कर देता है,,,, और उसकी मां पागलों की तरह गरमा गरम सिसकारी की आवाज से पूरे कमरे में शोर मचाने लगती है और थोड़ी देर बाद उस आदमी को अपना लंड उसकी चूत में डालने के लिए बोलती है और वह आदमी खुशी के मारे और उत्तेजित होते हुए तुरंत घुटनों के बल बैठकर उसकी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचता है और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर देता है इस तरह की कल्पना करके संजू एकदम से गन गना जाता है और जैसे ही उसकी कल्पनाओं की श्रृंखला टूटती है वह अपनी इस कल्पना पर अपने आप को ही धिक्कार ने लगता है,,,।

नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं ऐसा हरगिज़ नहीं होने दूंगा कोई पराया मर्द मेरी मां के खूबसूरत बदन को अपने हाथों में लेकर से छुए मैं कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता मुझे ही कुछ करना होगा मैं अपनी मां को दूसरी औरतों की तरह दूसरे मर्दों के सामने अपनी टांगे नहीं खोलने दूंगा,,,,,,,,, संजू सुबह-सुबह ही अपने मन में ही इस तरह का संकल्प ले रहा था उठने का समय हो गया था लेकिन जिस तरह का ख्याल उसके मन में अपनी मां को लेकर आ रहा था उसकी वजह से वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और वह अपने दोनों टांगों के बीच नजर डाला तो उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था रात को अपनी बहन की चुदाई करने के बाद हुआ बिना कपड़े पहने ही सो गया था और बगल में नजर गई तो उसकी बहन भी उसी तरह से लगने वास्ता में गहरी नींद में सो रही थी अभी भी उसके पास 20 मिनट का समय था इसलिए वह,,, अपनी बहन की तरफ करवट लेकर घूम गया उसकी पीठ संजू की तरह की थी संजू अपने नंगे बदन को अपनी बहन की नंगी जवानी से एकदम सटा दिया,,,

संजू और मोहिनी

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उभरी हुई नंगी गांड से लंड का स्पर्श होते ही लंड में और ज्यादा कड़क पन आ गया,,,, वैसे भी मोहिनी की गांड़ रुई की तरह नरम नरम थी जिसे पकड़कर दबाने में संजू को बहुत मजा आता था,,,, वह तुरंत पूरी तरह से उत्तेजित होता हुआ अपनी बहन को पीछे से ही अपनी बाहों में भर लिया,,, और अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को हाथ से पकड़ कर,,,, उसे अपनी बहन की गांड की दरार के बीचो-बीच डालने की कोशिश करने लगा लेकिन वह सीधे-सीधे सो रही थी इसलिए इस तरह से अंदर प्रवेश कराना मुश्किल नजर आ रहा था इसलिए संजू अपनी बहन की टांग को घुटने से मोड़ दिया जिससे उसकी बहन की गांड और ज्यादा उभरकर उसके सामने परोसी हुई नजर आने लगी अभी भी मोहनी पूरी तरह से नींद में थी संजू अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख कर टटोलने की कोशिश करने लगा तो देखा उसकी चूत पूरी तरह से गिरी थी जो कि रात के ही कारनामे से अभी तक गीलापन उसमें बरकरार था,,,, अपनी बहन की चूत का गीलापन पाकर संजू समझ गया कि बड़े आराम से उसका लंड उसकी बहन की चूत में चला जाएगा और थोड़ा सा अपने आप को नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड के सुपारी को अपनी बहन की चूत पर रख कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया,,,, मोहिनी की चूत में संजू के लंड का सांचा बन चुका था,,, इसलिए संजीव को अपनी बहन की चूत में इस पोजीशन में लंड डालने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं हुई और बड़े आराम से,,, संजू का लंड मोहिनी की चूत में आधा घुस गया भले ही मोहिनी गहरी नींद में सो रही थी लेकिन मोटा तगड़ा आधा लंड चूत में घुसने की वजह से वह कुछ बोल नहीं भाई बस इतना उसके मुंह से निकला,,,।

ऊमममम,,, क्या कर रहे हो भाई,,,,

कुछ नहीं मेरी जान तेरी चूत में अपना लंड डाल रहा हूं,,,

रात को तो चोदे थे,,,(मोहिनी अभी भी नींद में थी और वह नींद में ही बोली)

तो क्या हो गया मेरी रानी तेरी नंगी गांड देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया,,,, वैसे भी तू कपड़े पहनकर नहीं सही थी इसलिए तेरी महंगी जवानी देखकर मेरा मन फिर से कर दिया,,,

संजू मोहिनी की चुदाई करते हुए

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क्या भाई रात भर अपने लंड मेरी चूत में डालकर पड़े रहते हो तो कपड़ा पहनने का समय कहां मिलता है ऐसा जमकर चोदते हो कि एकदम से गहरी नींद आने लगती है,,,(मोहिनी अपनी आंखों को बंद किए हुए ही बोली और धीरे-धीरे संजू अपना पूरा लंड पीछे से अपनी बहन की चूत में प्रवेश करा दिया था,,,)

आहहरर‌ मेरी रानी देख पूरा लंड घुस गया,,,,(एक हाथ से अपनी बहन की नंगी चूची को पकड़कर दबाते हुए)

आरहहह‌ आराम से,,,,,ऊहह,,,(अपनी चूत में लंड घुसने की वजह से वह भी उत्तेजित होने लगी थी लेकिन अपनी आंखों को अभी भी बंद किए हुए थी,,, वैसे भी कमरे में दोनों निश्चिंत रहते थे कोई रोकने वाला नहीं कोई टोकने वाला नहीं था संजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,, संजू की सांसे भी ऊपर नीचे हो रही थी मोहिनी जैसी खूबसूरत गर्म जवानी से भरी हुई लड़की की चुदाई करने में उसे परम आनंद की अनुभूति होती थी और सबसे अच्छी बात यह थी कि मोहिनी की चूत एकदम कसी हुई थी और उसका मोटा लंड पर जाते ही चूत के अंदरूनी दीवारों से ऐसा घर से करता था कि दोनों को स्वर्ग का अनुभव प्राप्त होता था,,,

लेकिन जिस तरह के आसन का प्रयोग संजू कर रहा था उस तरह से वह जमकर धक्के नहीं लगा पा रहा था जिस का आभास मोहिनी को भी हो रहा था इसलिए मोहिनी बोली,,।

ऐसे नहीं ऊपर आ जाओ भाई तब अच्छे से कर पाओगे,,,

(इतना सुनते ही संजू अपनी बहन की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और मोहिनी तुरंत पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को फैला दी संजू तुरंत अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसके ऊपर एकदम से लेट कर अपने लंड को एक बार फिर से उसकी चूत में डालकर कसकस के धक्के लगाना शुरू कर दिया,,, इस आसन से मोहिनी को भी अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती थी क्योंकि इस तरह से संजू बहुत जमकर धक्के लगाता था,,,, मोहिनी तुरंत अपनी बाहों का हार अपने भाई के गले में डाल कर उसे अपनी तरफ खींच ली और उसका भाई अपनी बहन की चूची पकड़कर चोदना शुरू कर दिया थोड़ी देर में मोहिनी की गर्म सांसे तेजी से चलने लगी और फिर दोनों एक साथ झड़ गए,,,,,।

दोनों के उठने का समय हो गया था इसलिए दोनों उठकर अपने अपने कपड़े पहन लिया और कमरे से बाहर आ गए,,,
 
संजू की कामलीला लगातार जारी थी वह रोज रात को अपनी बहन की जमकर चुदाई करता था चुदवा चुदवा कर मोहिनी की बुर और ज्यादा खूबसूरत और रसीली हो चुकी थी उसके बदन में भराव आना शुरू हो गया था चुचियों का उठाव थोड़ा और बढ़ गया था नितंबों का घेराव सुडोल और बेहद खूबसूरत आकर्षक होता जा रहा था मोहिनी पहले से ही बला की खूबसूरत थी लेकिन अपने भाई के हाथों से जी भर कर चुदवाने के बात उसकी जवानी और ज्यादा महकने लगी थी जिसकी खुशबू कॉलेज के सभी लड़कों में उत्तेजना जगा रहे थे लेकिन मोहिनी किसी को भी भाव नहीं देती थी,,,। दूसरी तरफ अपनी बहन से पूरी तरह से रजामंदी पाकर संजू अपनी मां को उकसाने में पूरी तरह से लग गया था वह किसी भी तरह से अपनी मां को चोदना चाहता था उसकी बड़ी बड़ी गांड उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसका नंगा बदन हमेशा से संजू की उत्तेजना का प्रमुख कारण रहा था और अब तो उसे इस बात का पूरा यकीन था कि उसकी मां भी अंदर ही अंदर प्यासी है क्योंकि अशोक महीनों से घर नहीं आया था एक औरत के बदन की प्यास एक औरत को किस कदर मजबूर कर देती है वह अपनी मौसी की हालत को देखकर अच्छी तरह से जानता था,,,, ऐसा नहीं था कि आराधना के तन बदन में उत्तेजना की आग नहीं लगती थी रह रहे कर उसे भी बदन की प्यास सताने लगती थी पुरुष संसर्ग के लिए वह भी तड़पने लगती थी लेकिन,, किसी भी तरह से वह अपने आप को संभाल ले जाती थी उसी के चलते तो वह बेहद माधव और कामोत्तेजना से भरा हुआ सपना देखी थी जिसमें वह खुद अपने बेटे के साथ संभोग करके तृप्त हो रही थी,,,, और उस सपने के चलते वह इतनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी कि उसे सपना भी हकीकत लग रहा था,,,,,,

संजु का अपनी चचेरी बहन मनीषा के प्रति भी लगाव था,,, क्योंकि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देख चुका था उसके नंगे गोरे बदन को देख कर उस समय भी उसके तन बदन में आग लग गई थी लेकिन,,, लेकिन अपने बदन की गर्मी उसने उसकी मां की चुदाई करके मिटाया था लेकिन जब से दोनों साथ मिलकर कोचिंग क्लास करने लगे थे तब से संजू का लंड मनीषा को देखकर टन टना जाता है लेकिन वह मनीषा के मन में क्या चल रहा है इस बात से पूरी तरह से वाकिफ नहीं था इसलिए वह आगे बढ़ने से डरता था किसी हद तक मनीषा का भी आकर्षण संजू की तरफ बढ़ता जा रहा था वैसे भी संजू बेहद आकर्षक और कसरती बदन का लड़का था,,,। कोचिंग क्लास बहुत बढ़िया चल रही थी देखते ही देखते कोचिंग क्लास का नाम फेमस होने लगा था,,,,।

अपनी सबसे अच्छी सहेली सा कोचिंग क्लास फेमस होता देखकर,,, काव्या जो कि मनीषा की सबसे अच्छी सहेली थी वह उसका कोचिंग क्लास देखने की जिद करने लगी,,,।

अरे यार मनीषा तेरा कोचिंग क्लास तो चल निकला जरा हमें भी तो ले चल हम भी तो देखें कैसा है तेरा कोचिंग क्लास जरूरत पड़ेगी तो हम भी तेरा साथ देंगे,,,

अरे ले चलूंगी काव्या तू भी कहां इतना जिद कर रही है,,,, किसी दिन समय मिलेगा तो तुझे ले चलूंगी,,,,(कॉलेज से छूटकर पार्किंग की तरफ जाते हुए मनीषा काव्या से बोली जो कि वह भी पार्किंग की तरफ ही जा रही थी,,,,)

नहीं ऐसे काम नहीं चलेगा मैं आज ही तेरे कोचिंग आऊंगी आखिरकार मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड का कोचिंग क्लास है और मैंने अभी तक उसकी मुलाकात भी नहीं नहीं हूं यह तो नाइंसाफी है,,,,

तू समझा कर काव्या मैं तुझे खुद ले चलूंगी,,,,

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं तो मुझे एड्रेस बता मैं आज शाम को ही पहुंच जाऊंगी आखिरकार तुझसे पार्टी भी तो चाहिए,,,,

पार्टी तो मैं दे दूंगी,,,

वह तो मैं ले ही लूंगी लेकिन तू एड्रेस बता,,,

(काव्या के इतना पीछे पड़ने पर मनीषा कोई बहाना नहीं बना पाई और उसे एड्रेस दे दी और थोड़ी देर में दोनों अपने अपने घर की तरफ निकल गए मनीषा काव्या को कोचिंग क्लास नहीं ले जाना चाहती थी जिसकी वजह था संजू,,,,, क्योंकि वह काव्य को अच्छी तरह से जानती थी और संजू के व्यक्तित्व से अच्छी तरह से वाकिफ थी वह जानती थी कि संजू को देखते ही काव्या उस पर लट्टू हो जाएगी और मनीषा ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि कहीं ना कहीं संजू के लिए उसके मन के कोने में आकर्षण था और वह किसी और लड़की को उसके करीब जाने नहीं देना चाहती थी लेकिन उसकी जीद के आगे वह ना चाहते हुए भी उसे एड्रेस दे दी थी,,,,,,,,,,,।

कोचिंग का समय होते ही संजू और मनीषा दोनों अपने-अपने घर से निकल चुके थे और थोड़ी ही देर में कोचिंग क्लास पहुंच चुके थे,,, आज मनीषा चुस्त सलवार और शॉर्ट कुर्ती पहनी हुई थी जिसमें उसकी मोटी मोटी जांगे और भी ज्यादा खूबसूरत उभर कर नजर आ रहे थे और साथ ही उसके नितंबों का आकार गोलाकार मटके की तरह नजर आ रहा था जिसे देखकर संजू का लंड बुलबुला छोड़ रहा था,,,,,,,,,,,, अभी तक काव्या कोचिंग क्लास पर नहीं पहुंची थी इसलिए मनीषा को लग रहा था कि वह नहीं आने वाली है और इस बात का उसे राहत थी,,,,,,, क्लास छूटने में 10 मिनट का समय रह गया था तभी काव्या क्लास के दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई जिस पर नजर पड़ते मनीषा एकदम से परेशान हो गई,,,,,।

अरे काव्या तुम बहुत लेट आई अब तो क्लास छूटने वाला है,,,

अरे तो क्या हुआ कौन सा मैं इधर कोचिंग क्लास ज्वाइन करने आई हूं मैं तो सिर्फ तुम्हारा यह कोचिंग क्लास देखने के लिए आई थी,,,,(इतना कहने के साथ ही काव्या क्लास के अंदर प्रवेश कर गई और क्लास के अंदर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगी काफी स्टूडेंट पढ़ रहे थे)

काफी कम समय में तुम्हारी कोचिंग क्लास का बहुत नाम हो गया है मनीषा इस बात की मुझे बहुत खुशी है,,,,(इतना कहते हुए उसकी नजर संजू के ऊपर जाकर ठहर गई जो कि एक स्टूडेंट को कुछ समझा रहा था,,)

यह कौन है मनीषा,,,,?

ये ये,,,, मेरा कजिन है संजू,,,,

वाव काफी हैंडसम है तुम्हारा कजिन,,,,,,,(उसके कसरती गठीला बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देखते हुए) लगता है रोज जिम जाता है,,,,

(मनीषा काव्या की नजरों को अच्छी तरह से पहचानती थी इसलिए अंदर ही अंदर उसे जलन हो रही थी मनीषा कुछ बोल पाती,,, काव्या अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) यार मनीषा तुम्हारा कजिन इतना हैंडसम है मिलवाओगी नहीं उससे,,,

हां हां क्यों नहीं,,,(मनीषा एकदम बेमन से बोली,,,,) क्लास खत्म हो जाने दो फिर तुम्हें मिलवाती हुं,,,,

ठीक है कोई बात नहीं मैं यहीं पर इंतजार कर लेती हूं,,,,,

(काव्या उसी क्लास में खाली बेंच पर जाकर बैठ गई और बार-बार संजू की तरफ भी देख रही थी संजू भी उसके आते ही तिरछी नजर उसके खूबसूरत बदन पर डाल चुका था इसलिए बार-बार चोर नजरों से उसे देख ले रहा था,,, काव्या की बेहद खूबसूरत सुडोल बदन वाली खूबसूरत लड़की थी एक मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सब कुछ था उसके पास पीली रंग की टीशर्ट में उसकी चुचियों का उभार बेहद कामुकता भरा नजर आ रहा था,,, जिस पर बार-बार संजू की नजर चली जा रही थी,,,, लेकिन मनीषा काव्या की उपस्थिति से असहज महसूस कर रही थी,, काव्या का इधर आना मनीषा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था,,,,।

देखते ही देखते समय गुजर गया और कोचिंग क्लास छूट गई सभी स्टूडेंट कोचिंग क्लास से निकल गए और क्लास में रह गए केवल मनीषा काव्या और संजू,,, मौजूदा हालात को देखते हुए मनीषा को ना चाहते हुए भी संजू को काव्या से अवगत कराना पड़ा,,,।

संजू यही मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड काव्या,,, और काव्या यह है संजू,,,,

(काव्या संजू को करीब से देखी तो देखती ही रह गई उसके मोहक आकर्षक व्यक्तित्व के आगे वह धराशाई होती हुई नजर आने लगी वो खुद ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस से हाथ मिलाने चाहिए तो संजू भी उसकी खूबसूरती के आगे अपने आप को रोक नहीं पाया और हाथ आगे बढ़ा कर काव्या से हाथ मिलाने लगा उसकी गोरी नरम नरम हथेली के साथ-साथ उंगलियों का स्पर्श महसूस करते ही संजू के लंड में हलचल होने लगी,,,,)

तुमसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई संजू,,,,

और मुझे भी काव्या,,,(संजू मुस्कुराते हुए बोला मनीषा दोनों की हरकतों को देख रही थी और अंदर ही अंदर जल भून रही थी,, संजू मनीषा का चचेरा भाई था लेकिन ऐसा महसूस कर रही थी कि जैसे वह उसका भाई नहीं बल्कि उसका प्रेमियों और वह अपने प्रेमी को किसी और से बांटना नहीं चाहती थी,,,,, मनीषा चाह कर भी दोनों के बीच में कुछ बोल नहीं पा रही थी और काव्य इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा रही थी,,,,)

इस कोचिंग कलास की सफलता प्राप्ति में मनीषा को मुझे पार्टी देने वाली नहीं है लेकिन संजू तुम तो मुझे पार्टी दे सकते हो,,,,

हां हां क्यों नहीं काव्या,,,,,, मैं अभी सबके लिए कुछ नाश्ता लेकर आता हूं,,,, मनीषा दीदी अपनी स्कूटी की चाबी देना तो,,,

मेरी स्कूटी में पेट्रोल कम है फिर वापस जाने में दिक्कत हो जाएगी,,,,

लो संजू तुम मेरी स्कूटी ले जाओ,,, नीचे पार्किंग में लाल रंग की स्कूटी है उस पर भी मेरा नाम लिखा हुआ है तो पहचान जाओगे,,,,(इतना कहने के साथ ही वह बेंच पर बैठे हुए ही अपने पर्स में से अपनी स्कूटी की चाबी निकालने लगी और संजू की नजर उसके पीली टीशर्ट में से नजर आती हुई उसकी दोनों गोलाइयों पर पड़ गई,,, संजू काव्या की सूचियों को देखकर एकदम मस्त हुआ जा रहा था और काव्या अपने पर्स में से चाबी निकालकर संजू को थमा दी संजू काव्या के हाथों से स्कूटी की चाबी लेकर तुरंत बाहर आ गया और उसे काव्या की स्कूटी ढूंढने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई,,,, मनीषा अंदर ही अंदर काव्या से एकदम जलने लगी थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,, लेकिन का पिया को इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि उसका यहां आना मनीषा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है और वैसे भी काव्या को उन दोनों के बीच किसी भी प्रकार के रिश्ते के पनपने की शंका ही नहीं थी क्योंकि दोनों चचेरे थे और संजू उसे मनीषा दीदी कहकर बुलाता था,,,,)

यार मनीषा संजू कितना हैंडसम है उसके चेहरे पर कितनी मासूमियत है और उसकी बॉडी कितनी डिवेलप है ऐसा लगता है कि किसी फिल्म का हीरो हो मैं तो कसम से तेरे चचेरे भाई को देखती ही रह गई,,,

चल अब ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश मत कर वह ऐसा वैसा लड़का नहीं है,,,

यार मनीषा लड़के तो सब एक जैसे ही होते हैं बस इशारे की देर होती है,,,, वरना संजू भी उन्हीं लड़कों में से है जिन्हें इस उम्र में लड़कियों के दोनों टांगों के बीच की ही ज्यादा जरूरत होती है,,,

कैसी बातें कर रही है काव्या,,,, कोचिंग क्लास में इस तरह की बातें शोभा नहीं देती कोई सुन लेगा तो हम लोगों की इमेज खराब हो जाएगी,,,

सॉरी सॉरी बाबा मैं तो ऐसे ही मजाक कर रही थी,,,,।

(दोनों अभी बातें कर ही रहे थे कि संजू आ गया और स्कूटी की चाबी काव्या गौतम आते हुए पॉलीथिन की थैली में से समोसे कचोरी और पेप्सी का कैन निकालने लगा,,,, यह देखकर काव्या बोली,,)

यह हुई ना बात संजू तुमने तो सच में पार्टी दे दी,,,

(मनीषा को बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी देखते ही देखते संजू ने तीन प्लेट लगा दिया और तीनों में एक समोसा एक कचोरी रख दिया और मनीषा और काव्या को थमा दिया और खुद भी खाने लगा संजू तिरछी नजरों से काव्या की तरफ देख रहा था खासकर के पीली टी-शर्ट में भरी हुई उसकी दोनों चूचियां और टी-शर्ट के अंदर से झांकती हुई उसकी चुचियों के बीच की पतली लकीर जिसे देखकर वह पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,, काव्या भी चोर नजरों से संजू की तरफ देख रही थी दोनों की नजरें आपस में टकराई और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे,,,, एक लड़की होने के नाते दोनों की यह हरकत भला मनीषा से कैसे चुप ही रह सकती थी मनीषा भी उन दोनों की हरकत को देख रही थी और अंदर ही अंदर जल रही थी वह किसी भी तरह से संजू को रोकना चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि संजू काव्या की तरफ आकर्षित हो क्योंकि मन ही मन मनीषा उसे चाहने लगी थी,,,,।

जैसे तैसे करके तीनों ने अपना अपना नाश्ता खत्म करके पेप्सी पीना शुरू कर दी और बात ही बात में काव्या एक बार फिर से मनीषा का दिल जलाने वाली बात कर दी,,,

यार संजू तुम इतना अच्छा पढ़ाते हो मुझे भी पढ़ा दिया करो मेरी इंग्लिश थोड़ी कमजोर है,,,

जरूर तुम भी चली आया करो कोचिंग क्लास,,,

नहीं नहीं यहां नहीं प्राइवेट में मेरे घर पर,,,,,

हां हां क्यों नहीं बोलो कब से पढ़ाना है,,,

जब से तुम कहो मैं तो हमेशा तैयार हूं,,,

नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है,,,,(दोनों की बातों को सुनकर मनीषा एकदम से बीच में कूदते हुए बोली) संजू को और भी काम रहते हैं वह प्राइवेट में नहीं पढ़ा सकता,,,

नहीं दीदी मैं पढ़ा लूंगा,,,,

लेकिन मैंनेज कैसे करोगे,,,,

कर लूंगा दीदी,,,,

हां मनीषा संजू मैनेज कर लेंगे थोड़ा बहुत मुझे पढ़ा देंगे तो फाइनल एग्जाम में मुझे भी राहत मिल जाएगी,,,

ठीक है तुम दोनों जैसा ठीक समझो,,,,,

चलो तब तय है कल से संजू तुम मेरे घर आ जाना मैं तुम्हें एड्रेस बता दूंगी,,, लेकिन तुम्हारा मोबाइल नंबर तो मुझे मालूम ही नहीं है,,,

अरे हां मेरा मोबाइल नंबर लिख लो,,,

(मनीषा की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह बहुत गुस्से में थी लेकिन अपना गुस्सा जाहिर नहीं होने दे रही थी कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के बाद ही संजू ने एक छोटा सा मोबाइल ले लिया था और अपना नंबर काव्या को दे दिया काव्या अपने मोबाइल में नंबर सेट करके उसे सेव कर ली थी,,,, थोड़ी ही देर में काव्या मनीषा और संजू के साथ बाहर आई और अपनी स्कूटी पर बैठ कर चली गई,,,, और संजू भी ऑटो पकड़ कर अपने घर की तरफ चला गया मनीषा अपने घर पर पहुंचकर बहुत परेशान हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें काव्या की हरकत से वह अच्छी तरह से वाकिफ थी,,,,,, वह जानती थी कि जिस तरह से वह कोचिंग क्लास में बात कर रही थी कि मर्दों को केवल लड़कीयों कि दोनों टांगों के बीच पहुंचना रहता है वह अपना कथन सच कर देगी वह संजू को जरूर अपनी दोनों टांगों के बीच ले लेगी और फिर संजू उसका गुलाम बन जाएगा ऐसा सोचकर मनीषा पूरी तरह से परेशान हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा संजीव को रोकना चाहती थी वह काव्या से दूर रखना चाहती थी क्योंकि संजू के प्रति उसका लगाव बढ़ता जा रहा था,,,,, वह मोबाइल हाथ में लेकर अपनी बालकनी में इधर से उधर घूम रही थी वह संजू को फोन लगाना चाहती थी और संजू को फोन पर सब कुछ बता देना चाहती थी लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं था वह उस से रूबरू मुलाकात करना चाहती थी लेकिन अभी समय बहुत हो रहा था इसके लिए वह संजू से कुछ बोल नहीं पाई,,,,,,,।

दूसरी तरफ संजू खाना खा रहा था साथ में उसकी मां और उसकी बहन भी खाना खा रही थी,,,,,,, खाना खाते समय आराधना का आंचल उसके कंधे पर से नीचे सरक गया था जिससे उसकी मद भरी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में अपना उभार लिए हुए नजर आ रही थी और उसके ऊपर का एक बटन खुला नहीं था बल्कि टूट चुका था जिस पर संजू की नजर पड़ते ही पेंट में उसका लंड दंगल मचाने को तैयार हो गया,,,,,,, संजू खाना खाते समय तिरछी नजरों से अपनी मां की चूची की तरफ देख रहा था उसे इस बात का एहसास हो गया था कि ब्लाउज के अंदर उसकी मां ने ब्रा भी नहीं पहनी थी जिसकी वजह से,,, उसकी सूची की निप्पल खजूर की तरह ब्लाउज के ऊपर से ही उप्सी हुई नजर आ रही थी जिसे देख कर संजू के मुंह में पानी आ रहा था मोहिनी भी अपने भाई की नजर से वाकिफ हो चुकी थी वह भी अपने भाई की तिरछी नजरों को देखकर दंग रह गई थी क्योंकि वह समझ गई थी कि उसका भाई उसकी मां की चुचियों को देख रहा है और इस बात की उसके मन में खुशी भी थे क्योंकि वह भी चाहती थी किसी तरह से उसकी मां उसके भाई से चुदवाना शुरू कर दे ताकि बाहर का कोई इतनी खूबसूरत औरत के साथ गलत ना कर सके,,,, मोहिनी अपने भाई की हरकत को अच्छी तरह से समझ रही थी लेकिन उसकी मां बिल्कुल भी उन दोनों की ओर ध्यान नहीं दे रही थी और खाना खाने में मस्त बोलते इसलिए नजर बचाकर मोहिनी अपने भाई के हाथ पर अपनी कोहनी से मारकर इशारा करते हुए उसे आंख मार दी संजू भी अपनी बहन का इशारा पाकर और ज्यादा मस्ती में आ गया था और अपनी बहन की उपस्थिति में ही अपनी मां से बोला,,,।)

मम्मी तुम्हारे ब्लाउज का बटन टूटा हुआ है,,, तुम बटन लगाना भूल गई कि अभी अभी टूटा है,,,,।

(आराधना अपने बेटे के बात को सुनकर अपनी स्थिति पर गौर कर पाती इससे पहले ही संजू फिर से अपना दूसरा पासा फेंकते हुए बोला,,,) और मम्मी तुमने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी हो सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा है,,,,.

(इस बार आराधना एकदम से झेंप गई वह अपनी छातियों की तरफ देखी तो उसे भी इस बात का आभास हुआ कि उसके ब्लाउज का ऊपर का बटन टूटा हुआ है और उसकी साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर गया है और आज उसने जल्दबाजी में ब्रा भी नहीं पहनी थी,,,,,, उसका गोरा मुखड़ा शर्म से लाल हो गया हुआ तुरंत अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करके अपने कंधे पर डाल दी और अपनी छातियों को साड़ी के पल्लू के नीचे छुपा ली,,, उसे ऐसा करता हुआ देखकर मोहिनी भी चुटकी लेते हुए बोली,,,)

क्या करती हो मम्मी ब्लाउज तो ढंग का पहन लिया करो तुम्हें ऑफिस जाना पड़ता है अगर इसी हाल में ऑफिस पहुंच गई तो देखने वालों का तो होश उड़ जाएगा और तुमने ब्रा भी नहीं पहनी हो भाई ठीक कह रहा है ऐसे में तुम्हारा आधा तो बाहर झूल रहा है,,,,।

(मोहिनी की बात सुनते ही शर्म के मारे और आश्चर्य से आराधना का मुंह खुला का खुला रह गया और वह उसे चुप कराते हुए बोली)

चुपकर बेशरम जल्दी से खाना खत्म कर मुझे पता है मुझे क्या करना है,,,,(आराधना यह बात गुस्से में बोली थी इसलिए दोनों एकदम खामोश हो गए थे और खाना खा रहे थे खाना खत्म करते ही,,,, संजू थोड़ा हवा लेने के लिए घर से बाहर निकल गया और मोहिनी अपनी मां का हाथ बताने लगी तो आराधना उससे बोली)

मैंने तुझे जरा भी शर्म है कि नहीं अपने भाई के सामने ऐसी बातें करती है,,,

ऐसा क्या कह दी मम्मी जो कुछ कही थी सच तो कही थी तुम्हारे ब्लाउज के बटन टूटा हुआ है और भाई ने भी तो यही कहा,,,

कहां तू कहां लेकिन तूने क्या कही आधा बाहर झुल रहा है,, अपने भाई के सामने यह सब कहते हुए तुझे शर्म नहीं आती है इतनी बड़ी हो गई लेकिन तुझे जरा भी अक्ल नहीं है कि कहां क्या कहा जाता है,,,

क्या मम्मी तुम भी कुछ ज्यादा ही ओवर रिएक्ट कर रही हो आखिर इस घर में हम तीनों के सिवा है कौन ऐसा भी तो नहीं था कि मैं किसी और के सामने कह रही थी अपने भाई के सामने ही कहीं ना,,,

अरे बुद्धू अब तुझे कैसे समझाऊं तो उसकी गैर हाजरी में मुझसे यह कहीं होती तो मैं तुझे कुछ नहीं कहती लेकिन वह एक लड़का है वह लड़कों के सामने औरतों कि ईस तरह की बातें नहीं की जाती समझ में आया,,,

ठीक है मम्मी आगे से ऐसा नहीं होगा बस,,,

(और इतना कहकर दोनों फिर से अपने-अपने काम में लग गए मोहिनी बात को ज्यादा तूल नहीं देना चाहती थी क्योंकि अगर वह बात को आगे बढ़ाती तो हो सकता था उसकी मां को इस बात का शक हो जाए कि उसकी लड़की गलत राह पर चल पड़ी है और इसीलिए वह किसी तरह से बात को वही खत्म कर दी थी लेकिन काम करते समय आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी अपने बेटे के द्वारा कहा गया एक-एक शब्द को याद करके वह उत्तेजित हो जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे ने ऐसे खुले शब्दों में उसी से कैसे कह दिया कि ब्लाउज का बटन टूटा हुआ है और वह ब्रा भी नहीं पहनी है उसे भी अपनी बहन की उपस्थिति का जरा भी बाहर नहीं रहा और ना ही एक मां के सामने इस तरह के शब्दों का उपयोग करने में उसे जरा भी शर्म नहीं आई,,,, आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे अपने बेटे को समझाए उसकी हरकत को देखते हुए आराधना को इस बात का एहसास हो गया था कि संजू उसकी खूबसूरती का दीवाना हो चुका है लेकिन वह अपना निशाना गलत जगह लगा रहा है उसे आकर्षण और वासना इन्हें इतना अंधा और नासमझ कर दिया है कि वह आपसी रिश्तो को भी नहीं पहचान रहा है,,, आराधना बड़े ही धर्म संकट में फंसी हुई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे को कैसे समझाएं लेकिन इस बात से उसे इनकार भी नहीं था कि उसकी इन हरकतों की वजह से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी बदन में उत्तेजना का संचार होने लगता था खास करके उसके दोनों टांगों के बीच की पतली दरार हमेशा गीली होने लगती थी,,,,,, इन्हीं सब खयालों में खोए हुए वहां अपने सारे काम खत्म करके अपने कमरे में चली गई थोड़ी ही देर में संजू घर में वापस लौटा तो मोहिनी का दरवाजा बंद था लेकिन उसकी मां की कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था जिसमें से ट्यूबलाइट की रोशनी आ रही थी वह बाहर का दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगाकर अपने कमरे मैं जाने वाला था कि तभी उसके मन में क्या हुआ वह अपनी मां के कमरे की तरफ चल दिया और जैसे ही थोड़े से खुले हुए दरवाजे को धक्का देकर खोला तो बिस्तर पर बैठी हुई उसकी मां के होश उड़ गए और तुरंत उसकी उंगली में सुई चुभ गई,,,,

आराधना अपने बेटे और बेटी की बात को सुनकर वह कमरे में आकर अपना ब्लाउज उतार कर उसमें बटन टांग रही थी और अपने बदन पर चादर डाल रखी थी लेकिन संजू के द्वारा इस तरह से दरवाजा खोलने पर वह पूरी तरह से चौक गई थी और उसके हाथ की उंगली में सोई चुभ गई थी जिसकी वजह से उस में से खून निकलने लगा था संजू भैया देखकर एकदम हैरान हो क्या और तुरंत दौड़ता हुआ आया और एकदम से अपनी मां के कदमों घुटनों के बल बैठ गया और तुरंत उसका कलाई पकड़ कर उसकी उंगली को जिस में से खून निकल रहा था उसे अपने मुंह में भर कर उसके खून को चूसने लगा या देखकर आराधना पूरी तरह से गनगना गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने हाथ को पीछे लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन संजू ने उसकी कलाई को कस के पकड़ रखा था और उसकी उंगली को अपने मुंह में लेकर उसके खून को बंद करने की कोशिश कर रहा था आराधना के तन बदन में आग लगने लगी थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके सामने बैठा हुआ उसका बेटा नहीं बल्कि उसका प्रेमी है और उसके चोट लग जाने पर वह पूरी तरह से परेशान है और उसकी परेशानी दूर करने के लिए उसकी उंगली को अपने मुंह में लेकर चूस रहा है,,,, यह सब आराधना के लिए बिल्कुल नया था उसके तन बदन में उत्तेजना की फुहार फूटने लगी थी,,,,।

अद्भुत और मादकता से भरा हुआ यह दृश्य धीरे-धीरे दोनों को मदहोश कर रहा था संजू को अपनी मां की उंगली अपने मुंह में लेकर चूसने में इतना अधिक मजा आ रहा था कि पूछो मत उसे ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चूची की निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा हो,,, संजू पूरी तरह से अपनी मां की उंगली को अपनी मां की चूची की निप्पल समझकर उसे चूसने में मशगूल हो चुका था आराधना भी अपने बेटे की हरकत की मदहोशी में खोने लगी थी उसे भी अपनी स्थिति का भान बिल्कुल भी नहीं था अभी तक संजू का ध्यान केवल अपनी मां की उंगली पर था लेकिन जैसे ही उसकी नजरें अपनी मां की छातियों पर गई उसके होश उड़ गए,,,,, संजू को अब जाकर इस बात का एहसास हुआ कि उसकी मां अपना ब्लाउज उतार कर उसने बटन लगा रही थी उसकी नंगी चूचियां संजू की आंखों के सामने नृत्य कर रही थी आराधना थोड़ा सा झुकी हुई थी इसलिए उसकी दोनों खरबूजे जैसी सूचियां दशहरी आम की तरह झूल रही थी जिसे देखने में संजू को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आम के बगीचे में आम के पेड़ पर लटक रहे दशहरी आम को जी भर कर देख रहा हो और उन्हें पाने की लालसा में लार टपका रहा हो,,,,,,, जैसे ही आराधना का ध्यान अपने बेटे की नजरों पर गई और उसकी नजरों की सीधान को वह अपनी छातियों पर खत्म होता हुआ महसूस की तो वैसे ही वह शर्म से पानी पानी हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने बेटे के सामने अपनी छातियों को छुपाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ट्यूबलाइट की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था उसे भी इस बात का अंदाजा था कि उसकी चूचियां उसके बेटे को एकदम साफ नजर आ रही हैं और अपने बेटे की आंखों में वह अपनी चूची की मस्ती की चमक एकदम साफ देख पा रही थी ,,, आराधना को अपने बेटे की आंखों में मदहोशी नजर आ रही थी उसकी खूबसूरत जवानी का नशा नजर आ रहा था वह अच्छी तरह से देख पा रही थी कि उसकी मदहोश जवानी में उसका बेटा पूरी तरह से खो चुका है,,, अपने बेटे की आंखों में हूं चलती हुई मस्ती को देखकर आराधना भी अपना आपा खोने लगी थी संजू काफी देर से देख रहा था कि उसकी मां को पता होने के बावजूद भी अपनी चुचियों को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही है तो संजू की हिम्मत पड़ने लगी और संजू अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की चूची को पकड़ लिया उसे अपनी हथेली में लेकर संजू को ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पूरी दुनिया को अपनी हथेली में भर लिया हो रख लिया हो और वह धीरे-धीरे अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया पल भर में ही आराधना के तन बदन में आग लगने लगी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी उसकी सांसो की गति तेज होने लगी संजू अपनी मां की मूली को अपने मुंह में लिए हुए ही दूसरा हाथ भी आगे बढ़ाया और दोनों हाथों से अपनी मां के लटक रहे जैसे चुचियों को पकड़ लिया और उन्हें दबाना शुरू कर दिया उसे इस बात का आभास था कि स्तन मर्दन से औरतों की उत्तेजना जाग जाती है और इसीलिए वह अपनी मां को पूरी तरह से अपनी आगोश में लेना चाहता था अपनी मां की चूची दबाकर उसे उत्तेजित करना चाहता था इसी कार्य में वह पूरी तरह से लग चुका था और धीरे-धीरे अपनी मां की चूची को अपनी हथेली में भरकर दबाते हुए अपनी मां के चेहरे की तरफ देख रहा था पल भर में ही आराधना का चेहरा उत्तेजना के मारे एकदम लाल हो चुका था धीरे-धीरे संजू अपनी जगह से ऊपर की तरफ उठा और अपने मुंह से अपनी मां की उंगली को बाहर निकालकर धीरे से अपनी मां की चूची को पकड़े हुए उसे बिस्तर पर लेट आने लगा उसकी मां पूरी तरह से अपने बेटे की हरकत के आगे मंत्रमुग्ध हो गई थी जैसा संजू कर रहा था वैसे ही आराधना होती जा रही थी। ,, देखते ही देखते संजू अपनी मां को बिस्तर पर लिटा दिया पीठ के बल आराधना लेट चुकी थी कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी बड़ी-बड़ी भी खरबूजे जैसी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी जिसे संजू जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया था देखते ही देखते आराधना के मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज उठने लगी थी जिसे सुनकर संजू पागल हुआ जा रहा था और देखते ही देखते वह अपने प्यासे होठों को अपनी मां की चूची की तरफ बढ़ाया और देखते ही देखते अपनी मां की चूची को मुंह में भर लिया और उसे पीना शुरु कर दिया आराधना पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूबना शुरू कर दी थी वह अपने बेटे की हरकत को देखकर वह पूरी तरह से काम आतुर हुए जा रही थी उसे अपनी चूत पानी छोड़ते हुए महसूस हो रही थी बरसों के बाद किसी ने उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरु किया था,,,, इसलिए वह अपने बेटे की हरकत पर पूरी तरह से गदगद हुए जा रही थी,,, देखते ही देखते वह उत्तेजना के मारे अपना सर दाएं बाएं पटकने लगी और तभी बगल में बर्तन के गिरने और दरवाजा खुलने की आवाज‌ आई तो उसे एकदम से होश आया और वह तुरंत संजू को अपने ऊपर से उठाने लगे लेकिन संजू पूरी तरह से हम मस्ती के सागर में डूबता चला जा रहा था वह अपनी मां की चूची को बारी-बारी से पीना शुरू कर दिया था,,,।

मोहिनी जाग गई है,,,(आराधना एकदम घबराए स्वर में बोली संजू इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ था कि अगर उसकी बहन मोहिनी दोनों को ही सहादत में देख भी लेती तो गुस्सा करने की जगह वह खुश हो जाएगी लेकिन वहां अपनी मां को मोहिनी की आंखों के सामने बेइज्जत होते हुए नहीं देखना चाहता था इसलिए तुरंत अपनी मां की बात मानते हुए उठकर खड़ा हो गया और तुरंत आराधना भी उठ कर बैठ गई संजू ने तुरंत चादर को अपनी मां के बदन पर डाल दिया और उसके हाथों से गिरा ब्लाउज और सुई धागा लेकर खुद ही बटन लगाने का नाटक करने लगा तब तक मोहिनी दरवाजे पर आ चुकी थी और दरवाजे पर खड़ी होकर बोली)

भाई तुम मम्मी के ब्लाउज में बटन लगा रहे हो,,,

हां मोहिनी वो क्या है ना कि मम्मी की उंगली में सुई छुप गई थी इसके लिए मैं लेकर बटन लगा रहा हूं,,,

(इतना सुनकर मोहिनी अपने भाई के पजामे की तरफ देखी तो सारा मामला उसे समझ में आ गया था उसे समझते देर नहीं लगी थी कि कुछ देर पहले उसके आने से पहले यहां पर कुछ और चल रहा था इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी लेकिन फिर भी वह कमरे में आते हुए बोली)

लाओ भाई तुमसे नहीं होगा मैं लगा देती हूं,,,(इतना कहकर मोहिनी अपने भाई के पास आई और उसके हाथ से अपनी मां का ब्लाउज लेकर उसमें बटन लगाने लगे तब तक आराधना की नजर अपने बेटे के पजामे की तरफ गई तो एकदम पूरी तरह से चौक गई उसकी पैंट में तंबू बना हुआ था और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटी की नजर उसके भाई के बने तंबू पर पड़े इसलिए वह 1 बहाने से बोली)

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संजू अब तू जा मोहिनी लगा देगी जाकर आराम कर,,,,

(संजू भी ज्यादा कुछ बोला नहीं और मुस्कुराता हुआ अपनी मां के कमरे से बाहर चला गया थोड़ी ही देर में मोहिनी भी अपनी मां के ब्लाउज में बटन लगाकर उसे दे दी और वापस अपने कमरे मैं चली गई आराधना तुरंत खड़ी हुई और ब्लाउज पहनकर अपने दरवाजे को बंद करके कड़ी लगा ले क्योंकि उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका बेटा फिर से ना आ जाए वह बिस्तर पर बैठ कर मन ही मन अपनी स्थिति पर शर्मिंदा होने लगी और इस इस बात की खुशी थी कि अच्छा हुआ उसकी बेटी आ गई वरना आज जरूर कुछ ना कुछ हो जाता और दूसरी तरफ संजू मोहिनी का इंतजार कर रहा था मोहिनी के आते ही वह तुरंत मोहिनी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके बदन से उसके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी कर दिया क्योंकि कुछ देर पहले की उत्तेजना वह अपनी बहन को चोद कर शांत कर देना चाहता था मोहिनी मुस्कुराते हुए अपने भाई से बोली,,,

कमरे में क्या हो रहा था,,,?

पूछ मत मोहिनी आज तो मैं मम्मी की चूची को पकड़कर जोर-जोर से दबाया,,,

क्या भाई तू सच कह रहा है,,,

हारे मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं,,,,,,(अपनी बहन की चूची को दबाते हुए बोला)

लेकिन यह हो कैसे गया,,,,?

पूछ मत मोहिनी आज तो ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरी दुनिया मेरी बाहों में आ गई हो मैंने तो मां की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथ से दबाया भी और उन्हें बिस्तर पर लेटा कर उनकी दोनों चूची को मुंह में लेकर जी भरकर पिया,,,

मममी ने कुछ बोला नहीं,,,,,

अरे वह क्या बोलती उनकी तो हालत मैंने खराब कर दिया था वह तो गर्मागर्म सिसकारी ले रही थी मानो कि जैसे मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया,,,,

फिर क्या हुआ भाई,,,

फिर क्या फिर तू आ गई और सारा मामला खत्म हो गया अगर तू थोड़ी देर और नहीं आई होती तो आज मैं अपने लंड को मम्मी की चूत में डाल ही दिया होता,,,

धत् तेरी की मैं भी गलत समय पर आ गई,,,

चल कोई बात नहीं मेरी रानी आधा सफर तो तय हो गया है हम मंजिल दूर नहीं है देखना एक ना एक दिन में मम्मी की दोनों टांगों के बीच पहुंच ही जाऊंगा,,,,( और इतना कहने के साथ ही,, संजू अपनी बहन की दोनों टांगों को फैला कर अपने खड़े लंड को अपनी बहन की चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया और तब तक चोदता रहा जब तक कि दोनों एकदम शांत नहीं हो गए,,,,।)
 
सुबह आराधना की नींद बहुत जल्दी खुल गई थी रात को जो कुछ भी हुआ था उसको लेकर आ रहा था ना एकदम परेशान थी और खुद की नजरों में शर्मिंदगी महसूस कर रही थी,,, वह कुछ देर तक अपने बिस्तर पर बैठ कर रात की घटना के बारे में सोच रही थी,,, संजू की हरकतें मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते पर कलंक का सामान था लेकिन ना जाने क्यों सब कुछ जानते हुए भी,,

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, आराधना संजू को रोक नहीं पा रही थी,,, और ऐसा भी था आराधना उसे रोकना चाह रही थी लेकिन संजू रुकने का नाम नहीं ले रहा था,,,, अजीब कशमकश और दुविधा में आराधना पड़ चुकी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था आगे की राह उसे साफ नजर नहीं आ रही थी ऐसा लग रहा था कि एक न एक दिन जरूर वह अपना वजूद अपने बेटे की बाहों में पिघलता हुआ महसूस करेगी,,,,,,, इस बात को लेकर हुआ कभी-कभी परेशान हो जाती थी तो कभी उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी रात का घटनाक्रम उसकी आंखों के सामने किसी मूवी की तरह चल रहा था खाना खाते समय उसके बेटे का उसके ब्लाउज को लेकर ठोकना और यहां तक कह देना कि ब्रा नहीं पहनी है और रात को कमरे में घुस आना और उसकी मदद करने के बहाने उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथों से पकड़कर दबाना उसे बिस्तर पर लेटा ना उसके लाल-लाल होठों पर चुंबन करके रस पीना और साथ ही चूची को मुंह में लेकर पीना सब कुछ अजीब सा था लेकिन उसके भी तन बदन में आग लगा रहा था,,,,

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अगर ऐसा ना होता तो वह कब से संजू को अपने कमरे से बाहर निकल जाने के लिए कहती ना कि उसकी हरकतों से उत्तेजित हो जाती,,,,,,, यह सब सोचते हुए अपने आप ही उसे अपनी चूत गीली होती हुई महसूस होने लगी वह तुरंत अपने बिस्तर पर से उठ कर खड़ी हो गई,,, और कमरे की सफाई करने लगी झाड़ू लगा रही थी झाड़ू लगाते लगाते कमरे से बाहर आ गई तब तक संजू भी जाग चुका था,,,, रात को जो कुछ भी हुआ था उससे संजू बहुत प्रभावित था रात को जिस तरह से बिना विरोध के उसकी मां उसकी हरकतों का आनंद ले रही थी उसे देखते हुए संजू समझ गया था कि एक ना एक दिन वह जरूर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच विजय हासिल कर लेगा और इसी विजई मुस्कान के साथ वह उठकर खड़ा हुआ है और अपने कमरे से बाहर आकर ब्रश करने लगा लेकिन तभी उसकी नजर उसकी मां पर पड़ी जो कि पोछा लगा रही थी और पोछा लगाते समय जिस तरह से वह बैठे हुए ही आगे की तरफ झुक कर पोछा लगा रही थी ऐसा करने पर उसकी भारी-भरकम गोल-गोल गांड और ज्यादा उभर कर बाहर की तरफ निकली भी नजर आ रही थी संजू यह सब देखकर एक बार फिर से उत्तेजित होने लगा,,, अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि काश मोहीनी रात को ना आई होती तो,,,,,

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यह भारी-भरकम गोल गोल गांड मेवा अपना लंड डालकर मस्त हो गया होता एक तरह से उसे मोहिनी पर गुस्सा भी आ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने जिस मुद्रा में उसकी मां बैठकर पोछा लगा रही थी संजू का मन उसी मुद्रा में अपनी मां की चुदाई करने को कर रहा था,,,, कुछ देर तक संजू अपनी मां को इसी मुद्रा में देखता रहा और उसके अंगों से टपकता हुआ रस अपनी आंखों से पीकर मस्त हो जा रहा अपनी मां से नजरें बचाकर उसे देखते हुए संजू अपने पेंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को दबा दबा कर मजा ले रहा था इस बात से अनजान आराधना अपने काम में पूरी तरह से मशगूल हो चुकी थी लेकिन जैसे ही उसकी नजर अपने बेटे पर गई तो वह एकदम से चूक गई उसे समझते देर नहीं लगी कि जिस तरह से वह बैठी हुई है उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी नजर आ रही है और उसी को देख कर उसका बेटा मस्त हो रहा है एक तरफ अपने बेटे की हरकत से एकदम से झेंप गई थी वहीं दूसरी तरफ अपने बेटे की हरकत को लेकर उसके तन बदन में उत्तेजना की फुहार फूट रही थी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे की उम्र के लड़के अपनी हम उम्र की लड़कियां ढूंढते हैं वही उसका बेटा एक उम्र दराज औरतों के पीछे पड़ा है और वह भी अपनी ही मां के पीछे शायद इस बात से आराधना अंजान थी कि जवान लड़कों को ज्यादातर 40 प्लस की औरतें ही ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लगती हैं उनकी बदन से टपकता हुआ मादक रस उन्हें बार-बार उत्तेजित कर देता है,,,, आराधना पूरी तरह से शर्म से लाल हो चुकी थी वह तुरंत खुद ही वहां से उठकर अपने कमरे में चली गई और संजू बाथरूम में जाकर अपनी गर्मी को अपने हाथों से ही शांत करने लगा,,,,।

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आराधना अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी वहीं दूसरी तरफ मोहिनी नहा धोकर तैयार हो गई थी और अपनी मां को देखकर अपने मन ही मन में मुस्कुरा रही थी वह इस बात से खुश थी कि उसका भाई उसकी मां को पटाने में कामयाब होता नजर आ रहा है,,, क्योंकि मोहिनी अपनी मां को किसी गैर मर्द की बांहों में देखना पसंद नहीं करती थी,,,,,, संजू और मोहिनी दोनों नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल गए थे और थोड़ी देर में आराधना भी ऑफिस के लिए निकल चुकी थी,,,,।

काव्या को लेकर मनीषा बहुत परेशान थी वह किसी भी हालत में का पिया को संजू से दूर रखना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि संजू के करीब पहुंचने का मतलब था कि काव्या उसे जरूर अपने बिस्तर तक ले कर चली जाएगी और तब वह कुछ नहीं कर पाएगी,, इसलिए वो किसी भी तरह से संजू को मनीषा से दूर करने की युक्ति सोच रही थी,,,,, इसी कशमकश में मनीषा कॉलेज से वापस आ चुकी थी और देखते ही देखते कोचिंग क्लास का समय हो रहा था मनीषा को इस बात का डर था कि काव्या संजू को फोन ना की हो अगर एक बार वह फोन कर देगी तो संजू उसकी बातों में आ जाएगा और फिर जो नहीं चाहती है वही होकर रहेगा इसीलिए वह कोचिंग क्लास जाने के बजाय खुद संजू को लेने उसके घर चली गई,,, थोड़ी ही देर में मनीषा संजू के घर पहुंच चुकी थी बाहर स्कूटी खड़ी करके दरवाजे पर दस्तक देने लगी तो थोड़ी ही देर में संजू ने खुद दरवाजा खोला और मनीषा को अपने घर के दरवाजे पर खड़ी पाकर एकदम से खुश हो गया,,,।

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अरे मनीषा दीदी तुम यहां,,,, अरे इसकी क्या जरूरत थी मैं तो खुद कोचिंग क्लास के लिए निकलने वाला था,,,

अंदर आने के लिए नहीं कहोगे,,,

कैसी बातें कर रही हो मनीषा की थी कि तुम्हारा ही घर है जब चाहे तब आओ,,,(इतना कहकर वह एक तरफ हो गया और मनीषा कमरे में प्रवेश कर गई और अंदर आते ही पहला ही सवाल दाग दी)

काव्या का फोन आया था,,,

नहीं तो अभी तक तो नहीं आया,,,,

तुमने किए थे,,,

नहीं मैंने तो नहीं किया उसका नंबर मेरे पास था ही नहीं,,,

अगर होता तो तुम फोन करते,,,

हां जरूर क्योंकि उसे इंग्लिश का कोचिंग देना है ताकि एग्जाम में उसे थोड़ी हेल्प मिल जाए,,,

बड़ी हेल्प करना चाहते हो उसकी,,,(मनीषा नजरें घुमाते हुए बोली)

ऐसा कुछ भी नहीं है मनीषा दीदी वह तो आपकी सहेली है तो एक तुम्हारी सहेली होने के नाते मैं कह रहा था,,,,

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तुम काव्या के घर उसे पढ़ाने के लिए नहीं जाओगे,,,

(मनीषा की बातें सुनकर संजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह आश्चर्यजनक मुद्रा में मनीषा से बोला)

आखिर क्यों,,? पढ़ाने का मुझे पैसा मिलेगा और उसकी हेल्प हो जाएगी और ऐसे में अपनी कोचिंग क्लास का नाम भी और ज्यादा बढ़ेगा और उसके क्लास की लड़कियां भी कोचिंग लेने आएंगी,,,,

नहीं संजू तुम बिल्कुल भी नहीं जाओगे मैं तुमसे बड़ी हूं इसलिए तुम्हें मेरी बात माननी होगी,,,

मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं मनीषा दीदी आखिर ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि मैं नहीं चाहती कि तुम उसके चक्कर में पढ़ो वह तुमसे पढ़ना नहीं पड़ती और कुछ करना चाहती हैं,,,

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और कुछ,,,, मैं कुछ समझा नहीं मनीषा दीदी,,,,

अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊं संजू,,,,वो लड़की ठीक नहीं है,,,

लेकिन वह तो तुम्हारी सहेली है और उससे बात करके मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि वह सही नहीं है,,,

(मनीषा संजू को लाख समझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन संजू ताकि समझने का नाम ही नहीं ले रहा था इसलिए मनीषा एकदम गुस्से में आ गई थी,,,, और तुरंत संजु को दोनों कंधों से पकड़ कर उसे झकझोरते हुए बोली,,,,)

बताऊं किस लिए,,,, तुझे कबसे समझाने की कोशिश कर रही है लेकिन तू है कि समझने का नाम ही नहीं ले रहा है बताऊं तुझे,,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा ने संजू को पकड़कर इदम हिला डाली थी वह एकदम हैरान था मनीषा को देखकर वह पूरी तरह से गुस्से में थे और संजू कुछ समझ पाता इससे पहले ही मनीषा आपने लाल-लाल होठों को संजू के फोटो पर रखकर चुंबन करना शुरू कर दी संजू एकदम से चौक गया उसे कुछ समझ में नहीं आया जब तक कुछ समझ पाते इससे पहले उसे आनंद आने लगा था उसे मजा आने लगा था वह भी मनीषा के होठों का रसपान करना शुरू कर दिया था दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करना शुरू कर दिए थे और दोनों उत्तेजना की ओर बढ़ते चले जा रहे थे संजू अपने दोनों हाथों को मनीषा की पीठ पर रखकर धीरे-धीरे उसे नीचे की तरफ लाते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया था मनीषा संजू की हरकत से एकदम गदगद हुए जा रहे थे दोनों के होंठ एक दूसरे में गूंथे हुए थे,,, संजू की उत्तेजना बढ़ने लगी तो वह अपने दोनों हथेली को मनीषा की कमर से हटाकर नीचे की तरफ लाकर उसके उभरे हुए नितंबों पर रख दिया और कस के दबा दिया जैसे ही मनीषा को अपनी गांड पर संजू की हथेली का स्पर्श हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई या दूसरी तरफ संजू का लंड पैंट में तंबू बना लिया था और दोनों एक दूसरे के करीब आते जा रहे थे इतना करीब कि संजू का लंड आगे से मनीषा की चूत वाले भाग पर ठोकर मारने लगा था जैसे ही मनीषा ने अपनी चूत पर कुछ चुभता हुआ महसूस की तुरंत उसे इस बात का एहसास हो गया कि वह कोई दूसरी चीज नहीं बल्कि संजू का लंड है और वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और उसकी चूत से मदन रस टपकने लगा,,,, संजू और मनीषा दोनों की हालत खराब होती जा रही थी दोनों एक दूसरे को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे थे दोनों के होंठ खुले हुए थे और दोनों की जीभ एक दूसरे के मुंह में अपना लार टपका रही थी जिसे दोनों गटागट अपनी गली के नीचे उतार रहे थे संजू धीरे से एक हाथ ऊपर की तरफ लाया और मनीषा की चूची पर रख कर उसे दबाना शुरू कर दिया इससे मनीषा की हालत और ज्यादा खराब हो गई वह‌पल-पल संजू की हरकतों से कमजोर होता हुआ महसूस करने लगी कि तभी बाहर स्कूटी के होरन की आवाज सुनाई थी वह संजू समझ गया कि उसकी मां आ गई है वह तुरंत पीछे हटते हुए बोला,,,)

मम्मी आ गई,,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा एकदम से चौक गई और वह अपने आप को दुरुस्त करने लगी संजू जानबूझकर किचन की तरफ चला गया और दरवाजे पर दस्तक होने लगी तो मनीषा दरवाजा खुली मनीषा को अपने घर देखकर आराधना एकदम से चौक गई और मारे खुशी के उसे अपने गले लगा ली,,,)

अरे मनीषा तू यहां कैसे,,,

वो मौसी यही से गुजर रही थी की सोची संजू को भी साथ कोचिंग क्लास लेते चलु,,,,

ठीक किया तूने,,,, संजू कहां गया,,,

मम्मी मैं यहां हूं चाय बनाने की कोशिश कर रहा हूं बहुत दिनों बाद मनीषा दीदी अपने घर पर आई है शायद पहली बार इसीलिए सोचा चाय बना दु,,,

अच्छा किया तू रहने दे मैं बना देती हूं,,,,(इतना कहकर वह अपना पर्स टेबल पर रख कर आगे बढ़ी अभी तक पूरी तरह से सब कुछ सही चल रहा था आराधना के लिए लेकिन जैसे ही संजू से नजरें टकराई रात वाली बात उसे फिर याद आ गई और वह फिर से शर्म से पानी पानी हो गई और तुरंत जाकर चाय बनाने लगी थोड़ी देर में चाय बनाकर लेकर आई और तीनों चाय पीने लगे,,, संजु को समझ में आने लगा था कि मनीषा उसे काव्या के घर जाने के लिए क्यों रोक रही थी मनीषा की हरकत और उसकी हिम्मत को देखकर संजू पूरी तरह से दंग रह गया था और उसकी हरकत पर पूरी तरह से मोहित हो गया था जिस तरह के चुंबन का मजा मनीषा ने उसे दी थी उससे संजू अभी तक अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,।

थोड़ी सी देर में संजू मनीषा की स्कूटी के पीछे बैठकर चल दिया रास्ते में मनीषा बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,

ज्यादा हैरान मत हो,,,, ना जाने क्यों तु मुझे अच्छा लगने लगा है,,,

ऐसा तो नहीं की तुम्हें मुझसे प्यार हो गया है,,,

हां ऐसा ही कुछ आई एम इन लव,,,, आई लव यू संजू,,,

क्या,,,?(संजू एकदम से चौक ते हुए)

हां आई लव यू संजू,,,

लेकिन तुम तो मेरी दीदी लगती हो,,,

तो क्या हुआ सगी थोड़ी हुं,,

मैं तुझे पसंद हूं कि नहीं सच सच बताना,,,

अब अब मैं क्या बताऊं,,,,

हिम्मत नहीं है तुझमें,,,,(मनीषा संजू को उक‌ाते हुए बोली,,, तो संजू भी एकदम तैश में आ गया था वैसे भी मनीषा को वह शुरू से पसंद करता था लेकिन कुछ बोल नहीं पाता था लेकिन आज सब कुछ साफ हो चुका था इस समय उसकी 10 उंगलियां घी में थी,,, इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए बोला,,,)

तुम मुझे बहुत पसंद हो आई लव यू,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू अपने दोनों हाथ मनीषा की कमर पर रखकर दबा दिया मनीषा के तन बदन में झनझनाहट फैल गई और थोड़ी देर में दोनों कोचिंग क्लास पर पहुंच गए स्कूटी को पार करते समय संजू को फिर से समझाते हुए मनीषा बोली,,,)

अब समझ गया ना काव्या के घर तुझे नहीं जाना है पढ़ाने कोई भी बहाना कर देना,,,, क्योंकि क अच्छी लड़की नहीं है,,,)

ठीक है मनीषा दीदी,,,

अरे बुद्धू अकेले में मुझे मनीषा ही कहा कर,,,

सॉरी दीदी,,, मतलब सॉरी मनीषा मैं काव्या के घर नहीं जाऊंगा,,,,।

(इतना कहकर दोनों कोचिंग क्लास में चले गए संजू बहुत खुश था क्योंकि मनीषा उसे पहले से ही अच्छी लगती थी और वह खूबसूरत भी थी मौसी की लड़की होने के नाते उसे घर पर नहीं बना सकता था लेकिन मनीषा ने खुद ही सब कुछ एकदम साफ कर चुकी थी वह खुद आगे से चलकर उसकी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी और जिस तरह का दोनों के बीच चुंबन हुआ था उसे देखते हुए संजू को लगने लगा था कि उसकी मौसी की तरह उसकी लड़की की भी जवानी का रस वह आराम से पी लेगा और से कहे अनुसार वह काव्या को पढ़ाने के लिए उसके घर जाने के लिए अब अपने मन में इंकार कर चुका था बस उसे आगे से कहना बाकी था लेकिन अभी तक काव्य का फोन भी नहीं आया था इसलिए वह निश्चिंत था,,,,,,, रात के लगभग 10:00 बज रहे थे तभी मोबाइल की घंटी बजने लगी अनजान नंबर होने की वजह से संजू कॉल रिसीव कर लिया और अपने कान से लगाकर बोला,,,)

हेलो कौन,,,?

इतनी जल्दी भूल गए,,,,

(पल भर में ही संजू उस सुरीली आवाज को पहचान लिया और एकदम से खुश हो गया)
 
काव्या के साथ संजू अद्भुत और अविस्मरणीय पल गुजार कर अपने घर वापस आ चुका था लेकिन इस बारे में किसी को कानों कान तक खबर नहीं हुई थी,,, उसके बिस्तर पर आने वाली काव्य तीसरी औरत थी पहली उसकी मौसी दूसरी उसकी खुद की बहन और तीसरी मनीषा की सहेली काव्या काव्या के साथ बिताया गया एक-एक पल उसके लिए मद भरी थी जिसमें पूरी तरह से नशा छाया हुआ था वह कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह से कोई लड़की अपने ही घर ले जाकर उससे चुदवाएगी,,,

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धीरे-धीरे संजु को अपनी मर्दाना ताकत पर गर्व होने लगा था औरत को चोदने और उसको संतुष्टि प्रदान करने में उसका आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था उसे पूरा यकीन हो गया था कि अब वह किसी भी तरह की औरत को अपनी मर्दाना ताकत से तृप्त करने की क्षमता रखता है,,,, काव्या की गोल-गोल और बड़ी बड़ी चूची उसे अभी तक याद आ रही थी,,,,,, एक तरह से वह मन ही मन काव्या को धन्यवाद कर रहा था क्योंकि काव्या की वजह से ही मनीषा अपने प्यार का इजहार उससे कर पाई थी और वह इस बात को भी समझ गया था कि बहुत ही जल्द मनीषा भी उसके बिस्तर पर आने वाली है क्योंकि जिस तरह से उसने पहल करते हुए उसके होठों को चुंबन की थी और उसने खुद उसका सहकार देते हुए उसके होंठों का रसपान करना शुरू किया था और अपने दोनों हाथों से उसके गोल गोल नितंबों को पकड़कर दबाया था,,, यह सब उसकी जिंदगी में आने वाले सुख के लक्षण थे,,,,,, मनीषा ने जिस तरह से अपने प्यार का इजहार की थी उसे लगने लगा था कि संजू काव्या के करीब बिल्कुल भी नहीं जाएगा लेकिन वह कहां जानती थी कि संजू औरतों के मामले में चालाक हो गया है और एक तरफ उसका प्यार पाने के बावजूद भी उसे धोखा देते हुए,, काव्या के साथ संभोग सुख प्राप्त करके अपने घर आ चुका होगा,,,, इस बात से अनजान वह अपने ख्यालों में खोई हुई थी संजू उसे बहुत अच्छा लगने लगा था जिस तरह से उसने उसका साथ देते हुए कोचिंग क्लास चलाने में मदद किया था और धीरे-धीरे कोचिंग क्लास को और भी आगे लेते जा रहा था यह सब देखते हुए मनीषा उसे प्यार करने लगी थी वैसे भी संजू का व्यक्तित्व और उसकी कद काठी उसका भोला चेहरा सब कुछ मनीषा को भा गया था इसलिए वह चचेरी बहन होने के बावजूद भी संजु को किसी और से बांटना नहीं चाहती थी संजू को अपना बॉयफ्रेंड समझने लगी थी,,,।

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ऐसे ही धीरे-धीरे दिन गुजरने लगे थे,,, काव्या का जब भी मन होता वह फोन करके संजू को अपने घर बुला लेती और संजू काव्या को पूरी तरह से संतुष्टि प्रदान करके खुद संतुष्ट होकर वहां से वापस आ जाता था संजू की कोशिश उसकी मां को पाने में लगातार जारी थी लेकिन आराधना अपने कदम को डगमगाने से बार-बार रोक ले रही थी वहीं दूसरी तरफ मोहिनी अपनी जवानी की खुशबू अपने भाई पर लुटा रही थी,,,,,, अशोक धीरे-धीरे घर पर आना छोड़ दिया था संजू ए बात अच्छी तरह से जानता था कि उसके पिताजी आई आज किस्म के इंसान हो चुके हैं जब से वह अपने पिताजी को गेस्ट हाउस में किसी लड़की को ले जाते देखा था तब से वह अपने बाप से और ज्यादा नफरत करने लगा था और यही हाल मोहिनी का भी था पहले उसे अपने पापा की बहुत याद आती थी लेकिन सच्चाई जानने के बाद वह भी अपने पापा से घृणा करने लगी थी,,,,,,

ऐसे ही रविवार का दिन था रविवार का दिन होने की वजह से मोहिनी और संजू दोनों को कॉलेज नहीं जाना था दोनों देर तक कमरे में सो रहे थे और आराधना उठकर घर का काम करते हुए नहा धोकर तैयार हो गई थी और रसोई बना रही थी वही बगल वाले कमरे में नींद खुल जाने की वजह से सुबह की उत्तेजना का पूरा फायदा उठाते हुए संजू अपनी बहन के दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत में अपना लंड डालकर अपनी कमर हिला रहा था इस बात से आराधना बिल्कुल अनजान थी उसे अपने बेटे और अपनी बेटी पर बिल्कुल भी शक नहीं होता था यह जानते हुए भी कि एक जवान बेटा होने के बावजूद भी अपनी ही मां पर गंदी नजर रखता है तो वह अपनी बहन के साथ क्या करता होगा इस बात का ख्याल कभी भी आराधना के मन में नहीं आया था और इसी का फायदा उठाते हुए संजू और मोहिनी एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे,,,, मोहिनी शुरू शुरू में अपना संपूर्ण दामोदार अपना संपूर्ण वजूद संजू के हाथों में सौंप देती थी लेकिन धीरे-धीरे वह चलाक होने लगी थी औरतों को अपने तरीके से किस तरह का सुख प्राप्त करना है वह समझने लगी थी इसलिए अब वह पूरी तरह से कंट्रोल अपने हाथों में रख लेती थी और आज सुबह भी वह पूरी तरह से अपने भाई पर छा जाने की कोशिश कर रही थी उसके ऊपर सवार होकर वहां पर अपनी चूची को पकड़कर खुद उसके मुंह में डाल रही थी और उसे जबरजस्ती पिला रही थी संजू को अपनी बहन का यह रवैया बहुत ज्यादा उत्तेजित कर जाता था वह भी अपनी बहन के हाथों में पूरा कंट्रोल देकर पूरी तरह से उसके हाथों की कठपुतली बन जाना पसंद करता था,,,, और उसे इसमें मजा भी आता था,,,।

सुबह के 6:15 बज रहे थे आराधना रसोई तैयार कर रही थी और संजू और मोहिनी अपने कमरे में बिल्कुल नग्न अवस्था में काम क्रीड़ा में खोए हुए थे संजू पीठ के बल लेटा हुआ था और मोहिनी उसके ऊपर सवार होकर अपनी चूची उसके मुंह में डालकर उसे अपना दूध पिला रही थी,,।

मोहिनी अपने भाई पर पूरी तरह से छाते हुए

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ले पी मेरे भाई ले पी,,,आहहहहह कितना मजा आता है जब तु पीता है,,,, ले दूसरा भी पी,,( पहले चूची को मुंह में से निकाल कर दूसरी चूची उसके मुंह में डालते हुए) पहले कितनी नारंगी जैसी थी तो धीरे-धीरे से खरबूजा की तरह बनाता जा रहा है,,,ऊहहहहहह‌ निप्पल को चाट,,,आहहहहह बस मेरे भाई ऐसे ही बहुत मस्त पीता है तू,,,,ऊफफ,,,,,आहहहहहहह ,,,,

(मोहिनी पूरी तरह से गर्म हो जा रही थी उसकी गरम सिसकारियां एकदम सीमित आवाज में थी जो कि कमरे से बाहर तक नहीं पहुंच पा रहे थे क्योंकि मोहिनी को मालूम था कि अगर जोर-जोर से वह सिसकारी लेना शुरू कर देगी तो उसकी मां को शक हो जाएगा इसीलिए वह अपने आप पर पूरी तरह से काबू करके आनंद ले रहे थे संजय पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था अपनी बहन की इस हरकत पर वह आनंद विभोर हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही मोहिनी है जो पहले लड़कों से शर्म आती थी लेकिन अब देखो खुद ही उसके नंगे बदन पर बैठी हुई है और मजा ले रही है मोहिनी को इस कदर बेशर्म बनाने में भी संजू का ही हाथ था अगर संजू उसके साथ इस तरह की गलत हरकत ना करता तो शायद मोहिनी अभी भी पहले वाली ही मोहिनी रहती,,,, संजू औरतों के बदन से कैसे आनंद लेना है अच्छी तरह से जानता था वह पूरी तरह से मस्त होकर मोहिनी की चूची को दबा दबा कर पी रहा था और मोहिनी भी उसे पिला रही थी संजू का लंड पूरी तरह से खड़ा होकर मोहिनी की पीठ पर ठोकर मार रहा था जिसे अपनी पीठ पर महसूस करके मोहिनी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,,

मोहिनी अपने भाई क मुँह पर छूट रखते हुए

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इस तरह की कामुक हरकत की वजह से मोहिनी की चूत से मदन रस टपक रहा था जो की पूरी तरह से संजू के पेट को भिगो रहा था,,,,, संजीव को मोहिनी कुछ भी बोलने का मौका नहीं दे रही थी बार-बार उसके मुंह में अपनी चूचियां दे दे रही थी और संजू को अपनी बहन की चूची पीने में बहुत मजा आता था अपनी बहन की क्या संजू को किसी भी औरत की चूची पीने में बहुत मजा आता था इस तरह से उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी,,,, कुछ देर तक मोहिनी और संजू इसी तरह से मजा लेते रहे दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि आज छुट्टी का दिन है और उसकी मां उसे सात 7:30 बजे से पहले उठाने वाली नहीं थी इसीलिए इस मौके का वह दोनों पूरी तरह से फायदा उठा रहे थे,,,

मोहिनी और संजू

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भाई इसी तरह से तु मां की भी चूचियों को पी रहा था ना,,,, बड़ा मजा आया होगा तुझे मेरे से ज्यादा बड़ी बड़ी चूचीया है मां की,,,, काश तू मां की चूत में लंड डालकर चोद‌ पाता तो मुझे और मजा आता,,, कोई बात नहीं तू बिल्कुल भी चिंता मत कर एक दिन देखना मम्मी खुद तुझे अपनी चूत परोस कर देगी,,,,(अपनी बात का खुद ही जवाब देते हुए मोहिनी बोल रही थी क्योंकि वह खुद संजू को बोलने का मौका नहीं दे रही थी,,, लेकिन मोहिनी के मुंह से अपनी मां का जिक्र करते हैं उसकी उत्तेजना हो ज्यादा बढ़ गई और वह अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर मोहिनी की नंगी गांड को अपनी हथेली में दबोच लिया और उसे जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,, संजू के लिए अपनी उत्तेजना दबा पाना मुश्किल हुआ जा रहा था क्योंकि मोहिनी ने आराधना का जिक्र करके आग में घी डालने का काम कर दी थी,,,, इसलिए संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,,, अपनी फाइल की हालत देखकर मोहिनी भी समझ गई थी कि उसका भाई एकदम से चुदवासा हो गया है,,, किस लिए वह अपने भाई के मुंह में से अपनी चूची को बाहर निकाल कर उसके ऊपर से उतर गई और उसके लंड को पकड़ कर ले जाने लगी जो कि काफी मोटा महसूस हो रहा था,,,।

संजू और मोहिनी

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ओहहहह भाई लगता है कि तू आज मेरी चूत फाड़ डालेगा आज तो तेरा लंड और ज्यादा मोटा हो गया है,,,,।

हारे मोहिनी तुमने मम्मी का जिक्र करके मेरी हालत खराब कर दी है,,,

तू चिंता मत कर भाई मैं तेरी हालत एकदम सही कर दूंगी,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी अपने भाई के लंड को अपने लाल-लाल होठों के बीच भर ली और उसे लॉलीपॉप कि तरह चूसना शुरु कर दी,,,,,, मोहिनी भी पूरी तरह से चुदक्कड़ हो गई थी उसे भी पूरा ज्ञान हो चुका था कि मजा कैसे लिया जाता है इसलिए वह अपने भाई के लंड को पूरा का पूरा अपने गले तक उतारकर उसे चूसने का आनंद ले रही थी,,,,,, जिस समय दोनों शुरुआत किए थे दोनों इस खेल में नए-नए थे हालांकि संजू को एक बार की चुदाई का अनुभव हो चुका था और वह भी अपनी मौसी के साथ अपनी मौसी के साथ उसने औरत को खुश करने के लिए बहुत कुछ क्रियाओं को सीखा था जो कि वह अपनी बहन पर पूरी तरह से आजमा चुका था और देखते ही देखते मोहिनी खुद इस खेल में इतनी माहिर हो गई थी कि अपने भाई पर पूरी तरह से हावी हो रही थी वह उसके मोटे तगड़े लंबे लंड को बड़े आराम से अपने गले तक उतार लेती थी और उसे इतना तड़पाती थी कि कभी-कभी संजू को लगने लगता था कि उसका पानी छूट जाएगा,,,, मोहिनी उसकी तड़प और ज्यादा बढ़ाते हुए उसके लंड के बैगनी रंग के सुपाड़े को आइसक्रीम के कौन की तरह जीभ लगाकर चाट रही थी और मोहिनी के जीभ की गर्मी से धीरे-धीरे संजू का लंड आइसक्रीम के बर्फ की तरह पिघल रहा था और उसमें से लार नहीं कर रही थी जिसे मोहिनी खुद अपनी जीभ से चाट रही थी संजू हाथ की कोहनी के सहारे अपनी गर्दन को ऊपर उठाकर अपने लंड की तरफ देख रहा था और मोहिनी के खूबसूरत चेहरे की तरफ संजू अपनी बहन की तरफ देखकर समझ ही नहीं पा रहा था कि यह वही सीधी साधी भोली भाली मोहिनी है अब उसमें कितना बदलाव आ चुका था इस समय संजू को अपनी बहन में एक रंडी पन दिख रहा था जो कि एक मर्द को खुश करने के सारे तरीके को आजमा रही थी,,, मोहिनी के बाल में बकल लगा हुआ था और संजू अपना हाथ आगे बढ़ा कर उस बक्कल को खींच लिया और देखते ही देखते उसके खूबसूरत रेशमी बाल एकदम से खुल गए और खुले बालों में मोहिनी की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई रह-रहकर संजू अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल देता था,,,, मोहिनी अपनी हरकत से अपने भाई को पूरी तरह से पागल कर चुकी थी संजु को लगता था कि किसी भी वक्त उसके लंड का फव्वारा फूट पड़ेगा,,,,, इसलिए वह कसमसा रहा था और अपने भाई की कसम साहट को देखकर मोहिनी समझ गई कि उसका भाई पूरी तरह से गर्म हो चुका है और देखते ही देखते मोहिनी अपने भाई के लंबे मोटे लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर खुद अपने भाई के कमर के इर्द-गिर्द अपने घुटने रख कर अपने लिए जगह बनाने लगी देखते ही देखते मोहिनी की खूबसूरत सुगठित मांसल गांड संजू के मोटे तगड़े लंड के ऊपर आ चुकी थी संजू समझ चुका था कि उसकी बहन का करने वाली है और मोहिनी तुरंत अपना एक हाथ नीचे की तरफ से जाकर अपने भाई के लंड को पकड़ लिया और धीरे से अपनी तरबूज जैसी गांड को नीचे की तरफ ले जाने लगी देखते ही देखते मोहिनी अपने हाथों से अपने भाई के लंड के सुपाड़े को रास्ता दिखाते हुए अपने गुलाबी चूत से सटा दी और गरम चूत का स्पर्श होते हैं संजू पूरी तरह से गनगना गया,,,, मोहिनी की हर एक हरकत जानलेवा साबित हो रही थी संजू पल पल चुदास की आग में जल रहा था,,,,, संजू को इस समय अपनी तरफ से कुछ नहीं करना था जो कुछ करना था मोहिनी को करना था इसलिए मोहिनी जैसे ही संजू के लंड को अपने चूत का द्वार दिखाइ,,, मोहिनी तुरंत अपनी तरबूज जैसी गांड का भार अपने भाई के भालानुमा लंड पर बढ़ाने लगी और देखते ही देखते चूत की चिकनाहट पाते ही संजू का मोटा तगड़ा लंड धीरे-धीरे करके मोहिनी की चूत में समाने लगा यह नजारा संजू अपनी आंखों से एकदम साफ देख रहा था और इस नजारे को देखकर काम विह्वल हुआ जा रहा था,,,,।

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देखते ही देखते ही मोहिनी अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी चूत की गहराई में छुपा ली और अपने भाई के लंड को पूरी तरह से गप कर लेने के बाद उसके ऊपर आसन लगाकर बैठ गई,,,, दोनों की सांसे गहरी चल रही थी कुछ देर तक मोहिनी उसी अवस्था में बैठी रही अपने भाई के मोटे तगड़े लंड की गर्माहट को अपनी चूत के अंदर महसूस करके वह पल पल मदहोश हुए जा रही थी,, मोहिनी आज अपने अनुभव से संजू को पूरी तरह से तड़पा दाल रही थी संजू का मन नीचे से धक्का लगाने को कर रहा था,,, लेकिन मोहिनी ने पूरी तरह से अपने भाई पर कब्जा जमा रखा था वह नीचे से अपनी कमर तक मिला नहीं पा रहा था लेकिन मोहिनी को इस बात का एहसास हो रहा था कि संजू धक्का लगाना चाहता है इसलिए वह बोली,,,।

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आज तू कुछ नहीं करेगा भाई जो कुछ करना है मुझे करना है ,,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी धीरे से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाने लगी और संजू का लंड धीरे-धीरे उसकी चूत के छेद से बाहर होने लगा देखते ही देखते संजीव को लगने लगा कि मोहिनी उसकी चूत से उसके नंबर को पूरी तरह से बाहर निकाल देंगे लेकिन जैसे ही सुपाड़ा किनारे पर आया मोहिनी तुरंत नीचे बैठ गई और इसी तरह से ऊपर नीचे करके उठक बैठक करने लगी संजु को स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था देखते ही देखते मोहिनी की रफ्तार उठक बैठक में बढ़ने लगी और उसकी चूत से चप्प चप्प की आवाज आना शुरू हो गई संजू की सबसे बड़ी गहरी चलने लगी मोनी पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी वह अपने भाई के कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी गांड को जोर-जोर से अपने भाई के लंड पर पटक रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे ही वह कपड़े धो रही हो,,, संजू का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से सटाक सटाक करके चूत के अंदर बाहर हो रहा था,,,,,,,

देखते ही देखते घड़ी में 7:15 बज गए दोनों की इस काम क्रीड़ा को 1 घंटे जैसा समय हो गया था,,,,, आराधना को लगने लगा कि मोहिनी और संजू आज देर तक सो रहे हैं इसलिए वहां रसोई का काम छोड़कर उनके कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटाते हुए बोली,,,।

संजू अरे मोहिनी कब तक सोते रहोगे बहुत देर हो रही है चलो जल्दी उठो,,,,।

(अपनी मां की आवाज सुनते ही दोनों एकदम से चौंक गए मोहिनी उसी तरह से अपने भाई के लैंड कर बैठी रह गई कोई जवाब ना मिलने पर आराधना फिर से उन दोनों का नाम लेकर बुलाई तो इस बार संजू नींद में होने का नाटक करते हुए बोला,,,)

क्या मम्मी आज रविवार है आज तो सोने दो,,,

7:15 बज रहे हैं कितना सोएगा जल्दी से उठ कर नहा धो लो नाश्ता तैयार हो गया,,, चलो जल्दी,,,,,

ठीक है मम्मी 10 मिनट में आया,,

10 मिनट से 1 मिनट भी ज्यादा नहीं होना चाहिए,,,(इतना कहने के साथ ही आराधना वापस रसोई घर में चली गई तो संजू मोहिनी की तरफ देख कर मुस्कुराया और उसे अपनी बाहों में लेकर तुरंत पलट गया यह देखकर मोहिनी भी हैरान हो गई अब वह नीचे और संजू ऊपर था अब पूरा कंट्रोल संजू के हाथ में आ चुका था और संजू कमर हिलाना शुरू कर दिया मोहिनी को भी मजा आने लगा संजू का लंड बड़ी तेजी से मोहिनी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था मोहिनी बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारी को रोके हुए थी,,,, अपने वादे के मुताबिक संजू मोहिनी को और 5 मिनट तक चोदता रहा और घर जाने के बाद कुछ ही देर में अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आ गया और थोड़ी देर में मोहिनी भी कमरे से बाहर आ गई थी,,,,।

संजू कुछ देर तक यूं ही कुर्सी पर बैठा रहा और मोहिनी जल्दी-जल्दी बाथरूम जाकर नहा कर बाहर आ गई थी मोहिनी को देखकर संजू मुस्कुराया और वह भी उठकर बाथरूम में चला गया और नहाने के लिए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया था और से मालूम था कि आप कोई आने वाला नहीं है इसलिए निश्चिंत होकर वा नहा रहा था कि तभी उसकी नजर सामने की दीवार पर बनी हुई पेंटिं पर गई और संजू उत्सुकता बस उस पेंटी को अपने हाथ में ले लिया और पेंटी को हाथ में लेते उसे समझते देर नहीं लगी कि वह पहनती उसकी मां की है और अपनी मां की पेंटिंग को हाथ में लेते हुए उसके तन बदन में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,,
 
मोहिनी की अद्भुत कामलीला और और उसकी संभोग की छटपटाहट को देखते हुए आखिरी पल में संजू ने अपनी बहन को अपने नीचे लेकर जबरदस्त चुदाई का प्रदर्शन किया और अद्भुत संतुष्टि को प्राप्त किया उसके बाद बाथरूम में आते ही सामने टंगी पेंटी को हाथ में लेकर इधर-उधर करके देखने लगा,,, पेंटी की चौड़ाई और उसकी रूपरेखा को देख कर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह पेंटिंग उसकी मां की है क्योंकि मोहिनी की पेंटी से वह अच्छी तरह से वाकिफ था क्योंकि हम रात को वह अपने हाथों से ही उतारता था अपनी मां की पेंटी अपने हाथ में लेते हैं फिर से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी कुछ मिनटों पहले ही वह अपनी बहन की चुदाई करके झड़ चुका था लेकिन एक बार फिर से उसके लंड में झनझनाहट होना शुरू हो गया था क्योंकि उसके हाथों में उसकी सपनों की रानी की चड्डी जो आ गई थी,,, चड्डी बिल्कुल भी धुली हुई नहीं थी चड्डी को देखकर संजू अपने मन में सोचने लगा कि शायद उसकी मां उसे धोना भूल गई है जल्दबाजी में उतार कर वही टांग दी होगी और फिर बाथरूम से बाहर निकल गई होगी,,,,,,

अपनी मां के बदन से उतरी हुई चड्डी हाथ में आते ही उसके तन बदन में होते सेना की जो लहर उठ रही थी उसे बयां करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था पल भर में उसका लंड लोहे की तरह कड़क हो चुका था जबकि जुदाई के बाद तुरंत खड़ा होने में कुछ मिनट का समय जरूर लगता था लेकिन उसकी उत्तेजना का केंद्र बिंदु जो उसके हाथ लग गया था इसके लिए लंड को खड़ा होने में ज्यादा समय नहीं लगा और वह भी 1 दिन की पहनी हुई पेंटी थी,,, राजू के तन बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था वह भी बाथरूम में घुसते ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो चुका था,,,,, राजू के हाथों में उसकी खुद की उत्तेजना बढ़ाने का खिलौना हाथ लग गया था जिसे वह पूरी तरह से उपयोग में ले लेना चाहता था चड्डी को दोनों हाथों में पकड़ कर वहां उसे फैलाते हुए अपनी मां की गांड के आकार की कल्पना करने लगा और उस पेंटिं को देखकर अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां की भारी-भरकम गोल-गोल गांड इतनी सी पेंटी में कैसे समा जाती है,,,,,, संजू अपनी मां की पेंटिंग को गांड की तरफ से पकड़ा था और उसे अपने चेहरे पर रगडना शुरू कर दिया मानो कि जैसे वह अपनी मां की पेंटी नहीं बल्कि अपने चेहरे को अपनी मां की गांड के बीचों बीच धंशा कर रगड़ रहा हो,,, अपनी मां की यूज की हुई पेंटी को अपने चेहरे पर रगड़ने हुए उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी,,,, अपनी मां की नंगी गांड की कल्पना करते हुए वह पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था एक अद्भुत माधव खुशबू उस चड्डी से उठ रही थी जो कि संजू के सांसो में घुलकर उसके बदन में आग लगा रही थी,,,,,

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,, देखते ही देखते उस चड्डी का सहारा लेकर संजू उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचना चला जा रहा था अब वह एक हाथ से चड्डी को अपने चेहरे पर लगाते हुए दूसरे हाथ से अपने लंड को मुट्ठीयाना शुरू कर दिया था,,, तभी जैसे उसे कुछ याद आया हो वह तुरंत अपने लंड पर से अपना हाथ हटा कर फिर से अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसकी चूत वाली जगह को तलाश करने लगा दूसरी तरफ पलटने के बाद ही संजू को चड्डी के अंदर वह हिस्सा नजर आने लगा जिसमें उसकी मां की खूबसूरत चूत पर्दे के पीछे छुपी हुई होती है उस जगह को देखकर संजू पूरी तरह से हैरान रह गया था क्योंकि चूत वाली जगह पर उसकी मां की चड्डी मैं हल्का सा छेद बन चुका था देखने पर ही पता चल रही थी की पेंटिं पुरानी हो चुकी है,,, अपनी मां को अभी भी पुरानी पेंटिं पहनता हुआ देखकर संजू को थोड़ा दुख होने लगा,,,, लेकिन फिर अपनी मां की चड्डी में उस छोटे से बने हुए चेहरे को देखकर कुछ उसके दिमाग में चमक आने लगे और वह तुरंत अपनी मां की चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उस चूत वाली जगह पर बने छेद में अपने लंड के सुपाड़े को सटाकर उसके अंदर डालने की कोशिश करने लगा,,,,, संजू के लिए यह अनुभव बेहद अद्भुत और उत्तेजना आत्मक था वह पूरी तरह से मदहोश बजा रहा था अपनी मां की चड्डी में बने छोटे से छेद में धीरे-धीरे करके अपना पूरा लंड डाल दिया था और ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की जल्दी में नहीं बल्कि अपनी मां की चूत में लंड डाल रहा हो वह पूरी तरह से उत्तेजना के महासागर में डुबकी लगाना शुरू कर दिया था दोनों हाथों से अपनी मां की चड्डी पकड़े बाद धीरे-धीरे उस छोटे से छेद में अपने लंड को डालकर आगे पीछे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,

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तीन तीन औरतों का साथ होने के बावजूद भी संजीव को अपनी उत्तेजना शांत करने के लिए इस तरह का सहारा लेना पड़ रहा था जो कि यह दर्शा रहा था कि संजू का लगाओ उसकी मां की खूबसूरत बदन से कितना अधिक है वह अपनी मां को भोगने के लिए किस तरह से तत्पर है,, जोकि उसे अपनी मां की चूत और उसकी चड्डी में बने छोटे से छेद में जरा भी फर्क महसूस नहीं हो रहा है और वह उस छोटे से छेद को ही अपनी मां की चूत समझ कर अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ कर रहा था देखते ही देखते संजू का मोटा तगड़ा लंड उस छोटे से छेद को और ज्यादा बड़ा कर दिया वह छोटा सा छेद संजू के लंड के गोलाई का छल्ला बन चुका था,,,,,, संजू के तन बदन में पूरी तरह से मदहोशी जाने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी आगोश में अपनी मां को लेकर उसकी चूत में अपना लंड पहल रहा हूं दोनों हाथों में पकड़ी गई अपनी मां की चड्डी को वह उसकी चिकनी कमर समझकर और जोर से दबाई जा रहा था और अपनी कमर का धक्का लगातार उस छोटी सी चड्डी पर बढ़ाए जा रहा था देखते ही देखते संजू की आंखें बंद हो चुकी थी वह अपने उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था किसी भी पल उसके लंड से लावा निकलने को तैयार हो चुका था,,,,,,,, और देखते ही देखते वह अपनी मां की चड्डी की हालत खराब करते हुए झड़ने लगा और झड़ने के साथ ही उसके मुंह से,,,ओहहहह मम्मी,,,,,ओहहहहह मम्मी,,, की आवाज निकलने लगी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था अपनी मां की चड्डी को वह उसकी चूत समझकर अद्भुत हस्तमैथुन का कला प्रदर्शन किया था,,,,, वासना का तूफान शांत होने के बाद अपने लैंड में से अपनी मां की चड्डी को बाहर निकाल कर एक बार फिर से उस पर नजर दौड़ा या तो हैरान रह गया था वह छोटा सा छेद पूरी तरह से छल्ला बन चुका था और वह भी उसके लंड के गोलाई के माप का,,,।

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थोड़ी ही देर में वह नहा कर बाहर आ चुका था,,,, और तैयार होकर रसोई घर में अपनी मां के पास जाकर खड़ा हो गया था और ठीक उसके पीछे जहां से उसकी मां का पिछवाड़ा उसे साफ नजर आ रहा था और वह भी कसी हुई साड़ी में नितंबों पर साड़ी की धार बहते हुए नदी की धार की तरह लग रही थी नितंबों में उठ रही थी थिरकन नदी में बहाव की तरह लग रहा था,,,, राजू अपनी मां की मदमस्त गांड को देखकर पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,, वह अपनी मां के द्वारा निकाले गए प्लेट में नाश्ता और चाय लेकर ठीक अपनी मां के पीछे कुर्सी लेकर बैठ गया था उसकी मां को अपने बेटे की मौजूदगी बहुत अजीब लग रही थी उसके तन बदन में कसमस आहट महसूस हो रही थी क्योंकि वह ठीक उसके पीछे बैठा हुआ था और एक औरत होने के नाते एक मर्द की नजर औरत के किस अंग पर पड़ती है या उसे भलीभांति मालूम था और उसे इसी बात का शक भी हो रहा था कि उसका बेटा जरूर उसके पीछे बैठकर उसकी थीरकती हुई गांड को देख रहा होगा और यही जानने के लिए अपने शक को मजबूत करने के लिए वह पीछे नजर घुमाकर देखी तो एकदम सन्न रह गई क्योंकि उसके सोच के मुताबिक उसका बेटा उसकी गोल-गोल गांड को ही देख रहा था,,,,,, नाश्ता करते हुए अपनी मां के बदन के बारे में सोच रहा था और कल्पना करने लगा था,,,, वहीं दूसरी तरफ आराधना से बिल्कुल भी सहज रहा नहीं जा रहा था वह असहजता महसूस कर रही थी उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,, अपने बेटे के चुंबन की गर्मी को अपने अंदर महसूस कर चुकी थी उसके द्वारा स्तन मर्दन का आनंद रह चुकी थी इसलिए वह ना जाने क्यों पुरुष संसर्ग के लिए रह-रहकर तड़प उठती थी,,,,

संजू की कल्पना

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दोनों में किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों अपने ही अपने मन में अपनी भावनाओं को लेकर परेशान हुए जा रहे थे संजू रसोई घर में अपनी मां को लेकर पूरी तरह से कल्पना के सागर में गोते लगाना शुरू कर दिया था वहां कल्पना कर रहा था कि काश अगर उसकी मां उसकी जज्बात को समझती तो वह उसके बेहद करीब जाकर उससे प्यार करता उसकी साड़ी को अपने हाथों से उठाकर उसकी नंगी चिकनी गांड को देखता उसे अपने हाथों से जोर-जोर से दबाता,,,, उसकी मां की गरम सिसकारियां उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाती,,, अपनी हरकतों से वह अपनी मां को पूरी तरह से कामातुर कर देता,,, उसके इस काम क्रीडा में उसकी मां भी उसका भरपूर सहयोग करती वह किचन फ्लोर पर ही झुक जाती और संजू को अपनी चड्डी उतारने की इजाजत दे देती और संजू भी उस मौके का फायदा उठाता हुआ,,, अपनी मां की चड्डी उतारने का सुख प्राप्त करने लगा कल्पना में उसे सब कुछ साफ नजर आ रहा था वह अपनी मां की चड्डी उतारकर खुद अपने कपड़े उतारने लगा और अपनी मां के सामने ही नंगा होकर अपना लड हिलाने लगा जो की पूरी तरह से कड़क हो चुका था,,,, आराधना तिरछी नजरों से अपने बेटे के लंड को देखी तो वह अंदर ही अंदर एकदम सिहर उठे क्योंकि उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसे अपनी चूत में लेने के लिए वह खुद फड़फड़ा रही थी,,, देखते ही देखते संजु अपनी मां को घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोदने शुरू कर दिया अपने बेटे के गर्म मोटे लंड को अपनी चूत में महसूस करके आराधना पूरी तरह से मस्त हो गई और मदहोशी में गरमागरम सिसकारियां लेने लगी संजू बड़ी मस्ती के साथ अपनी मां की चूत में धक्के लगा रहा था और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए जैसे ही यह कल्पना टूटा संजू की सांसे गहरी चलने लगी वह अपने आप पर गौर किया तो वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ,,, कुछ घंटों के अंतराल में ही संजू की उत्तेजना है तीसरी बार थी जिसमें वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपना नाश्ता खत्म करके अपनी मां को बिना कुछ बोले वह रसोई घर से बाहर चला गया,,,,,,

संजू कल्पना में अपनी माँ की पंतय उतारते हुए

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दोपहर का समय हो गया था दोपहर का खाना खाकर तीनों घर में आराम कर रहे थे कुछ देर आराम करने के बाद मोहिनी अपनी सहेली के घर चली गई और संजू अपनी मां से बोला,,,।

चलो मम्मी आज तुम्हें मैं कहीं घुमा लाता हूं,,,

अरे नहीं मुझे नहीं जाना है तू भी जा कर घूम के आ जा,,,

यह क्या मम्मी आज रविवार का दिन है छुट्टी का दिन है चलो ना कहीं घूम कर आते हैं,,,,

अरे लेकिन घूम कर क्या करेंगे,,,

थोड़ी बहुत खरीदी कर लेंगे और क्या,,,,

अरे लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है,,,,

अरे मम्मी तुम भी गजब करती हो मेरे पास तो है ना कोचिंग क्लास से अच्छी कमाई हो रही है तुम चिंता मत करो मेरे पास पैसे हैं तुम्हें जो मन करे वह खरीद लेना,,,

साड़ी उतारते हुए

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क्या बात है तू तो सच में बड़ा हो गया है,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने मन में बोली और तेरे साथ साथ तेरा वह भी बहुत बड़ा हो गया है)

आखिर बेटा किसका हुं,,,,

(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर खुश होते हुए आराधना उसे अपने गले लगाते हुए बोली)

मेरा बेटा है,,,,

(इतना कहते हुए वह उसकी पीठ पर अपनी हाथ फेरने लगी लेकिन उसे कहा मालूम था कि इस मौके का भी फायदा संजू उठा लेगा वह तुरंत अपनी बाहों में अपनी मां को कस लिया और उसके गले लगे हुए हैं वह अपनी दोनों हथेली को उसकी गोलाकार नितंबों पर रखकर उसे दबाते हुए अपनी तरफ खींच लिया ऐसा करने से पेंट में तना हुआ उसका लंड सीधे उसकी चूत पर दस्तक देने लगा इस बात का अहसास होते ही आराधना के तन बदन में आग लग गई उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह कसमसा हाट महसूस करने लगी और गहरी सांस लेते हुए एक बहाने से अपने बेटे को अपने से अलग करते हुए बोली,,,)

आराधना क ब्लाउज क बटन खोलते हुए

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तू रूक में तैयार होकर आती हूं,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह झट से अपने कमरे में चली गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा इतनी जल्दी कैसे होते जीत हो जाता है वह साफ महसूस कर पा रही थी कि उसके बेटे का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जो कि सीधे-सीधे साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत पर अपनी बेटी के लंड को महसूस करके आराधना समझ गई थी कि उसके बेटे का लंड बेहद दमदार है,,,, वह आईने के सामने खड़ी थी अभी भी उसकी सांसे दूरी चल रही थी वह तुरंत अपनी साड़ी उतारने लगी और देखते ही देखते आईने के सामने केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी हो गई आईने में उसे साफ नजर आ रहा था कि उसकी चुचियों का आकार अभी भी जानलेवा था उसका कसाव किसी भी मर्द के पानी को पिघला देने के लिए सक्षम था,,, ना चाहते हुए भी अपने बेटे की हरकत से मदहोश होते हुए वह थोड़ा सा घूमकर आईने में अपनी गांड का उभार देखने लगी जो कि बेहद कातिलाना अंदाज में उभरा हुआ नजर आ रहा था आईने में अपनी गांड को देखकर वह मन में सोचने लगी कि कुछ देर पहले ही उसकी गांड को उसका बेटा अपनी हथेली में लेकर दबाया था, यह ख्याल अपने मन में आते ही उसकी चूत से काम रस टपकना शुरू हो गया,,,, बहुत ज्यादा देर लगाना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे मालूम था कि थोड़ा भी देर होगा तो उसका बेटा कमरे में आ जाएगा और इस हालत में उसे देखकर ना जाने क्या घर बैठे अपने बेटे के बारे में सोच कर उसे थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था लेकिन उसके होठों पर मुस्कान भी तैर रही थी जो किस बात का सबूत था कि उसके बेटे की हरकत उसे भी कहीं ना कहीं अच्छी लगती थी,,,

किचन फ्लोर पर झुका कर लेते हुए

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थोड़ी ही देर में अपनी साड़ी बदल कर तैयार हो चुकी थी हल्का सा मेकअप करने के बाद वह आईने में अपने बदले हुए रूप को देखी तो खुद ही शर्मा गई,,, और जैसे ही अपने कमरे से बाहर आई तो संजु अपनी मां को देखा तो देखता ही रह गया,,, अपनी मां की खूबसूरती की चमक में उसकी आंखें चौंधिया जा रही थी और आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था अपने बेटे की हालत को देखकर आराधना मन ही मन खुश हो रही थी और बोली,,,।

ऐसे क्या देख रहा है पहले कभी देखा नहीं क्या,,,,(अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए आराधना बोली)

अरे देखा तो बहुत बार हो लेकिन आज तुम सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो ऐसा लग रहा है कि जैसे आसमान से कोई अप्सरा नीचे जमीन पर आ गई हो,,,

(अपने बेटे के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और अपने बेटे को शांत करते हुए बोली)

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धत्,,,, पागलों जैसी बात करता है चल जल्दी देर हो रही है और लेकर कहां जा रहा है तू,,,

अरे मम्मी तुम चलो तो सही,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही दोनों घर से बाहर आ गए और दरवाजा बंद करके ताला लगा दिए,,,, स्कूटी स्टार्ट करके वह दोनों पैर जमीन पर रखकर खड़ा हो गया और उसकी मां अपने बेटे के कंधे का सहारा लेकर पीछे बैठ गई संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह स्कूटी के पीछे अपनी मां को नहीं बल्कि अपनी प्रेमिका को बैठाकर कहीं घुमाने ले जा रहा है,,,, देखते ही देखते संजू की स्कूटी सड़क पर दौड़ने लगी दोपहर का समय होने की वजह से सड़क पर भीड़भाड़ बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए संजू बड़े आराम से स्कूटी लेकर जा रहा था,,, आराधना के तन बदन में और उसके मन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसे भी ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपने बेटे के साथ नहीं अपने प्रेमी के साथ घूमने जा रही हो क्योंकि उसने तैयार भी इसी तरह से हुई थी,,,, स्कूटी पर चलते हुए हवा के झोंकों से उसकी बाल की लट ए बार-बार उसके चेहरे पर आ जा रही थी जिसे वह अपनी हाथ की उंगलियों से लटको समझा कर अपने कान के पीछे ले जाने की कोशिश कर रही थी और बार-बार हवा के झोंकों से उसकी लटे उसे परेशान कर रही थी उसकी मां की यह हरकत संजू को स्कूटी में लगे शीशे में साफ नजर आ रही थी जिसे देखकर वह मन ही मन उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,,,,।

स्कूटी को संजू ज्यादा रफ्तार से नहीं भगा रहा था क्योंकि वह ज्यादा से ज्यादा समय अपनी मां के साथ गुजारना चाहता था अपने पीछे बैठा कर उसे बहुत अच्छा लग रहा था रह रह कर आराधना भी अपने बेटे के कंधे का सहारा ले लेती थी ऐसा करने से दोनों के बदन में अजीब सी हलचल हो जा रहे थे जब-जब संजू स्कूटी की ब्रेक लगा था तब तब आराधना आगे को सरक जाती और ऐसा करने से उसकी दाईं चूची सीधे जाकर उसकी पीठ से दब जाती थी और यह अनजाने में ही हुई हरकत की वजह से संजू के तन बदन में आग लग जाती थी संजू अपनी मां की चूची के आकार से अच्छी तरह से वाकिफ था इसलिए उसके बारे में कल्पना करने में उसे जरा भी दिक्कत नहीं पेश आती थी,,,, देखते ही देखते संजू काफी दूर आ गया था और अभी तक कहां जाना है इस बात का अंदाजा आराधना को बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह बोली,,,।

अरे बताएगा कि कहां जा रहा है,,,

क्या मम्मी तुम भी सिर्फ चुपचाप बैठी रहो मैं तुम्हें ले चलता हूं ना जहां चलना है,,,,

लेकिन कहां चलना है,,,

तुम्हारे लिए कुछ कपड़े खरीदने हैं,,,

मेरे लिए,,,(आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली)

हां मम्मी तुम्हारे लिए,,,,

लेकिन मेरे पास तो कपड़ों की कोई कमी नहीं है,,

कमी है मम्मी जिस कपड़े की तुम्हें जरूरत है वह कपड़ा तुम्हारे पास नहीं है और मैं नहीं चाहता कि तुम मेरे होते हुए अपने बदन के किसी भी वस्त्र के लिए तरसती रह जाओ,,,

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(अपने बेटे की यह बात सुनकर आराधना के तन बदन में हलचल सी मच ने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा कौन से कपड़े की बात कर रहा है वह इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि बाथरूम में टंगी उसकी छेद वाली पेंटिं को उसके बेटे ने देख लिया है और उसके साथ अपनी मनमानी करते हुए अपने लंड का लावा भी निकाल चुका है,,,, अपने बेटे की बात सुनकर आराधना बोली,,)

तेरी बातें मेरे पल्ले नहीं पड़ रही है चल देखती हूं कि तू क्या खरीदना चाहता है,,,

मैं जो भी खरीद लूंगा तुम्हारे बदन पर बहुत खूबसूरत लगेगा,,

यह बात है,,,

हां मम्मी मैं सच कह रहा हूं,,,,

(इतना कहते हुए उसकी स्कूटी उसी जगह से गुजरी जहां पर वह और मोहिनी दोनों ने अपने पिताजी को किसी अनजान लड़की के साथ गेस्ट हाउस में जाते हुए देखा था उस गेस्ट हाउस से गुजरते हुए संजू के मन में आया कि मम्मी को उस दिन वाली सारी बात बता दें और उन्हें भी अपने तरीके से जीने के लिए बोल दे लेकिन कुछ सोचकर वह शांत रहा,,, देखते ही देखते थोड़ी ही देर में वह दोनों बड़े से मोल के सामने पहुंच गए संजू स्कूटी खड़ा करने लगा तो स्कूटी पर बैठे-बैठे ही आराधना बोली,,,)

यह कहां लेकर आया संजू तु,,,

तुम्हारे लिए कपड़े खरीदने,,,

लेकिन मेरे पास कपड़े हैं तू खामखा इधर आ गया है,,,

सब कुछ तुम्हारे पास है लेकिन एक चीज तुम्हारे पास अभी भी ढंग की नहीं है,,,

क्या,,,?

बुरा ना मानो तो कहूं,,,,

नहीं मैं बुरा नहीं मानूंगी,,,(इतना कहते हुए भी आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा क्या कहने वाला है किस चीज के बारे में कह रहा है अभी तक उसे इस बात का अंदाजा तक नहीं था)

तुम्हारी चड्डी,,,(इतना कहने के साथ ही संजू इधर-उधर देखने लगा और अपनी जेब में जिसे वह घर से निकलने से पहले ही बाथरूम में जाकर अपनी मां की चड६ को अपनी जेब में रख लिया था उसे अपनी जेब से निकाल कर अपनी हथेली में लेकर अपनी मां को दिखाने लगा,,, एक तो पहले वह संजू के मुंह से चड्डी शब्द सुनकर एकदम से गनगना गई थी उसे समझ में नहीं आया कि उसका बेटा क्या कह रहा है,, लेकिन जब संजू की हथेली में अपनी चड्डी देखी तो एकदम शर्म से पानी पानी हो गई उसका बेटा साफ तौर पर उसकी चड्डी के बारे में ही बात कर रहा था आराधना को तो जैसे सांप सूंघ गया होगा एकदम से सन्न रह गई,,, वह इधर-उधर देखकर तुरंत अपने बेटे के हाथ से अपनी चड्डी ले ली,,,)

यह क्या है संजू यह कहां से लाया तु,,,,

बाथरूम में से वहां टंगी हुई थी लेकिन बीच में छेद है और मैं नहीं चाहता कि तुम इस तरह के खराब कपड़े पहनो,,,

कहां छेद है,,,, इतना ज्यादा भी नहीं था जो तू अपनी जेब में लेकर आ गया इसे तुझे शर्म नहीं आ रही थी,,,(इतना कहते हुए सबसे से नजरें बचाकर दीवार की तरफ मुंह करके अपनी चड्डी को अपने दोनों हाथों में लेकर फैलाने लगी ताकि कुछ छोटे से छेद को संजू को दिखा सके लेकिन जैसे ही आराधना उस व्यक्ति को अपने हाथ में लेकर खिलाई तो उसके होश उड़ गए क्योंकि छोटा सा छेंद एकदम बड़ा हो गया था,,,, जिस तरह से छोटा सा छेद एकदम बड़ा हो गया था उसी तरह से आश्चर्य से आराधना की आंखें फटी की फटी रह गई तो उसे समझ में नहीं आ रहा था कि छोटा सा छेद इतना बड़ा कैसे हो गया था उसे छेद को गौर से देखने पर आराधना को कुछ कुछ समझ आ रहा था कि जैसे उसकी गोलाई पूरी तरह से लंड के बराबर हो गई थी लेकिन आराधना यह निश्चय नहीं कर पा रही थी कि आखिरकार यह हुआ कैसे,,,, आराधना जहां हैरान थी वहीं दूसरी तरफ उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी खास करके उसे अपनी चूत में गीलापन महसूस हो रहा था,,,, आराधना ना तो खुद समझ पा रही थी और ना ही अपनी बेटी को समझा पा रही थी,,,,। अपनी मां को इस तरह से आश्चर्य से अपनी चड्डी को देखते हुए देखकर संजू बोला,,,।)

लाओ मुझे दो और अंदर चलते हैं,,(इतना कहने के साथ ही संजू अपना हाथ बढ़ाया ही था की आराधना खुद उस चड्डी को अपना पर्स खोलकर उसमें भरली संजू से नजर तक मिलाने की उसने हिम्मत नहीं थी क्योंकि संजू ने उसके अंतर्वस्त्र उसकी चड्डी को अपने हाथ में ले लिया था और उसे जेब में रखकर यहां तक लाया था और खुद उसे उसकी पसंद की चड्डी दिलाने के लिए मॉल लेकर आया था यह सब आराधना के लिए शर्मनाक था वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, लेकिन पलभर में ही उसके विवाहित जीवन की वह सारी घड़ियां याद आने लगी जिनमें विवाहित जीवन में एक भी वह पल नहीं था जिस पर उसके पति ने उसे उसके अंतर्वस्त्र उसे ब्रा पेंटी चड्डी दिलाने के लिए कपड़े की दुकान पर लेकर आया हो,,, उसके जीवन का यह पहला अवसर था जब उसे उसका ही बेटा उसके लिए चड्डी और ब्रा दीलाने के लिए लेकर आया था,,, अपने बेटे की बात मानते हुए अपनी आंखों में शर्म लिए हुए वह अपने बेटे के साथ मॉल की तरफ जाने लगी,,,,,
 
संजू ने अपनी मां को उसकी ही उपयोग में ली हुई पेंटी दिखाने में जरा भी संकोच किया ना तो शर्म किया वह एक तरह से अपनी मां को पूरी तरह से बहला फुसला रहा था उसके अंदर की कामाग्नी को भड़का रहा था,,,,,,, वरना कौन लड़का होगा जो अपनी मां की पेंटी को अपनी जेब में लेकर घूमता होगा,,,,, लेकिन संजू ने अपनी मां को उसकी ही पहनती देकर और दिखाकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ावा दे रहा था और इसका एहसास आराधना को भी अच्छी तरह से हो रहा था आराधना अपने बेटे की हाथ में अपनी यूज की हुई चड्डी जोकि सुबह ही अपने बदन पर से उतार कर टांगे दी थी लेकिन उसे धोना भूल गई थी उसे अपने बेटे के हाथ में लेकर वह पूरी तरह से गनगना गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,, आराधना के लिए यह बात बड़ी शर्मसार कर देने वाली थी कि उसका बेटा उसकी ही पेंटी में छोटे से छेद को दिखा रहा था जो कि पहले से ज्यादा बड़ी हो गई थी आराधना को यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह छोटा सा छेद आखिरकार बड़ा कैसे हो गया था और एकदम गोलाई आकार में,,,,,,।

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कुछ भी हो जिस तरह से बिना बताए संजू ने अपनी मां को मोर ले कर आया था और वह भी शहर से दूर उसे देखते हुए आराधना समझ गई थी कि उसका बेटा उसे ब्रा पेंटी दीलाए बिना मानने वाला नहीं है,,,, संजू आगे-आगे चल रहा था और आराधना पीछे-पीछे उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल पैदा हो रहे थे खासकर के चड्डी में बढ़ गए छेंद के बारे में सोच कर,,, अपने बेटे की हरकत के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी थी जिस तरह से वह मौका देखते ही उसके बदन के साथ अपनी मनमानी करने की सोचता था उसे देखते हुए आराधना को शक हो रहा था कि कहीं उसका बेटा उसकी चड्डी के छेद में अपना लंड डालकर अपने आप को शांत करने की कोशिश तो नहीं किया क्योंकि हुआ छोटा सा छेद बिल्कुल लंड के आकार का बन चुका था और वह भी संजू के लंड का हालांकि करीब से अभी तक आराधना ने अपने बेटे के लंड के दर्शन कुछ खास तौर पर नहीं कर पाई थी,,, लेकिन अनजाने में ही बाथरूम में पूरी तरह से नंगा होकर नहाते हुए अपने बेटे को देख चुकी थी और हल्की झलक उसके लंड की भी प्राप्त कर चुकी थी,, और इतनी सी छलक में आराधना यह अंदाजा लगा ली थी कि उसकी चड्डी में बढ़ गए छोटे से छेद को बड़ा करने में उसके बेटे का ही हाथ है और इस बात को सोच कर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल सी मचने लगती थी,,,।

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देखते ही देखते दोनों मॉल में प्रवेश करके,,,, इस तरह के बड़े मोहन में आराधना पहली बार आ रही थी इसलिए इस जगह की चकाचौंध में पूरी तरह से खो गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खरीदे क्या ना खरीदे चारों तरफ एक से एक बढ़कर अच्छी क्वालिटी के सामान रखे हुए थे किराना के सामान से लेकर के घर के उपयोग में लिए जाने वाले वस्तुएं यहां सजा कर रखी हुई थी जिसे लोग पसंद करके खरीद रहे थे लेकिन संजू सीधा अपनी मां को उस स्टोर पर लेकर गया जहां पर औरतों के अंतर्वस्त्र मिलते थे,,,, काउंटर पर एक लेडी खड़ी हुई थी,,, हालांकि यहां पर अपने हाथ से ही पसंद करके लिया जाता था लेकिन संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को कुछ समझ में नहीं आएगा कि उसे क्या खरीदना है इसलिए वहां काउंटर पर खड़ी लड़की से बोला,,,।

इश्क यूज मी,,,

जी सर बोलिए मैं क्या मदद कर सकती हूं,,,।

जी देखिए इनको अच्छी सी ब्रा और पेंटी दिखा दीजिए जो कि इनके बदन पर एकदम कंफर्टेबल हो,,,

जी सर कोई बात नहीं,,,, हम उनको एक से एक ब्रांडेड ब्रा और पेंटी दिखाएंगे जो कि इन्हें जरूर पसंद आएगी,,,

मैम आप की साइज बताएंगी,,,,

(उस काउंटर वाली लड़की की बात सुनते हैं आराधना एकदम से झेंप गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,,, आराधना इस बात से और ज्यादा शर्म से पानी पानी होने जा रही थी कि एक अनजान लड़की के सामने उसका बेटा उसके लिए उस काउंटर वाली लड़की को ब्रा और पेंटी निकालने के लिए बोल रहा था और वह भी एकदम बेझिझक ,,, आराधना तू इतना तो समझ ही गई थी कि वह काउंटर वाली लड़की उन दोनों के बीच के पवित्र रिश्ते के बारे में नहीं जानती थी वह लड़की उन दोनों के रिश्ते को कुछ और ही समझ रही थी वरना इतना तो वह समझ ही जाती थी एक बेटा अपनी मां के लिए ब्रा पेंटिं इस तरह से नहीं खरीद सकता,,,, आराधना तेरी जोरों से धड़क रहा था वह उसी लड़की के सवाल का जवाब नहीं दे पा रही थी वह वह अपना नाम जानती थी लेकिन बताने में शर्म आ रही थी और भी अपने बेटे की मौजूदगी में हालांकि उसका बेटा बिल्कुल भी नहीं शर्म आ रहा था फिर भी एक मां होने के नाते एक औरत ना होने के नाते आराधना को शर्म महसूस हो रही थी तो वह लड़की फिर से बोली,,,)

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बताइए मैडम आप का साइज क्या है,,,

(दोबारा पूछने पर भी जब आराधना नहीं बोली तो वह काउंटर वाली लड़की संजू से बोली)

आप ही बता दीजिए सर,,

अरे मैं कैसे बता सकता हूं,,(हालांकि संजू अपनी मां की चूची का साइज अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह अपनी मां की चूची को हाथ में लेकर दबा चुका था लेकिन अपनी मां के सामने वह जानबूझकर उसकी साइज नहीं बता रहा था तो वह लड़की बोली)

अरे सर ऐसा कैसे हो सकता कि आपको इनका ‌साईज ना पता हो,,, आपकी गर्लफ्रेंड है ना,,,

(उस लड़की के मुंह से अपने लिए गर्लफ्रेंड शब्द यूज करता हुआ सुनकर आराधना एकदम से ‌सकपका गई उसके बदन में झनझनाहट होने लगी,,,, वह कभी आश्चर्य से संजू को तो कभी उस काउंटर वाली लड़की को देख रही थी संजू इस बात को समझ गया था कि उस लड़की की बात को सुनकर उसकी मां एकदम हैरान हो गई है इसलिए वह उसकी हैरानी दूर करता हुआ संजू बोला,,,)

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अरे यार समझा करो अभी नहीं नहीं है अभी इतना हम दोनों के बीच कुछ हुआ नहीं है कि मुझे इनका साइज पता हो,,,

(संजू उस लड़की से धीरे से लेकिन इस तरह से बात कर रहा था कि उसकी मां को साफ सुनाई दे ,, और ऐसा हो भी रहा था अपने बेटे की बात सुनकर आराधना के तन बदन में आग लगने लगी क्योंकि वह साफ तौर पर उस लड़की से यही कह रहा था कि ‌ वह उसकी नई नई गर्लफ्रेंड बनी है और अभी तक उन दोनों का रिश्ता आगे नहीं बढ़ा है जिसमें दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाए हालांकि संजू ने खुले शब्दों में नहीं कहा था लेकिन उसका इशारा इसी तरफ था और उसके इशारे को समझकर उस लड़की के साथ-साथ शर्म के मारे आराधना के भी गाल लाल हो गए,,,, आराधना का दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी सांसे गहरी चलने लगी थी,,,, और वह लड़की मुस्कुराते हुए बोली,,,)

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कोई बात नहीं मैं मदद कर देती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह लड़की एक से एक ब्रांडेड नरम गरम कपड़े की ब्रा और पेंटी दोनों एक साथ निकालकर टेबल पर रखने लगी जिसकी तरफ देखने में भी आराधना को शर्म महसूस हो रही थी लेकिन संजू था कि उसे हाथ में ले ले कर देख रहा था ,,, आराधना गहरी सांसों के साथ तिरछी नजर से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी उसकी आंखों में जरा भी शर्म नहीं थी एक गैर लड़की को अपनी ही मां को अपनी गर्लफ्रेंड बताने में उसे बिल्कुल भी झिझक महसूस नहीं हुई थी,, बल्कि ऐसा लग रहा था कि उस लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड के रूप में अपनी मां को बताने पर उसे गर्व महसूस हो रहा था,,, आराधना समझ नहीं पा रही थी कि सब क्या हो रहा है उस लड़की की बात सुनकर उसे ना जाने क्यों अपने बदन के दिखावे पर अपने बदन की कसावट पर गर्व महसूस होने लगा था क्योंकि दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी वह लड़की उसे उसके ही बेटे की गर्लफ्रेंड समझ रहे थे तो जरूर उसमें कुछ तो बात होगी जो उसकी उम्र का पता नहीं चल रहा था,,,,,, उस काउंटर वाली लड़की ने ढेर सारी ब्रा और पेंटी टेबल पर बिछा दी थी लाल पीली बैंगनी कुछ जादू वाली कुछ नए डिजाइन की बहुत खूबसूरत लग रही थी संजू अपने हाथ में पेंटिंग लेकर कल्पना कर रहा था कि उस पेंटिं में उसकी मां की गोरी गोरी गांड कैसी नजर आएगी,,,,, तभी संजू ने एक गुलाबी रंग की पेंटी को हाथ में लिया उसकी नरम नरम कपड़े पर अपनी उंगलियां घुमा कर उसकी नरमाहट को परखने लगा और फिर उसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ाकर उसे दिखाते हुए बोला।)

यह तुम पर बहुत अच्छी लगेगी,,,

(इतना शंकर आराधना शर्म से पानी पानी होने लगी है दूसरी तरफ नजर घुमा ली या देखकर काउंटर वाली लड़की बोली)

सर आपकी गर्लफ्रेंड बहुत शर्माती हैं,,,,,

पहली बार कहीं पर आई है ना इसलिए शर्मा रही है,,,

वैसे मैडम इन्होंने आपके लिए बहुत ही अच्छी पेंटिं पसंद की है,,,, यह पेंटी आपके गोरे रंग पर और ज्यादा खिल उठेगी,,,,,,,(उस लड़की की बात सुनकर आराधना कुछ ज्यादा नहीं बोली बस उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी क्योंकि उसकी भी हामी थी,,,, इसके बाद कम से कम 3 जोड़ी संजू ने अपनी मां के लिए ब्रा और पेंटी खरीदा और एक से एक ब्रांडेड बहुत महंगी थी जो की आराधना कभी सोची भी नहीं थी कि वह इतनी महंगी ब्रा और पैंटी पहने कि उसे हाथ में लेने पर ही एकदम नरम नरम मुलायम लग रही थी कि पूछो मत,,, थोड़ी ही देर में उस काउंटर वाली लड़की ने ब्रा पेंटी को पैक कर दी लेकिन वह बिल बनाती इससे पहले वह संजू से बोली,,,।)

सर आप दोनों के लिए मेरे पास एक और सरप्राइज कर देने वाला ब्रा और पेंटी का सेट है अगर बुरा ना माने तो मैं आपको दिखा दू,,,(ऐसा कहते हुए वहां आराधना और संजू दोनों की तरफ देख रही थी दोनों की रजामंदी कि उसे जरूरत थी जो कि संजू ने उसे इजाजत दे दिया था और आराधना भी अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा कर अपनी शर्म को कम करने की कोशिश कर रही थी थोड़ी ही देर में उस काउंटर वाली लड़की ने एक इतनी खूबसूरत ब्रा और पेंटी का सेट दिखाई जिसे देखते ही संजु का लंड खड़ा होने लगा,,,,,,,,)

यह देखिए सर,,,, आजकल इसका फैशन कुछ ज्यादा ही है,,, लड़के यही खरीद खरीद कर अपनी गर्लफ्रेंड को गिफ्ट करते हैं,,,, मेरी मां ने यह ले लीजिए आपकी मैडम पर बहुत खूबसूरत लगेगा,,,,,।

(उस पेंटी को हाथ में लेते ही संजू का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,,,, क्योंकि वह पेंटी नहीं थी बल्कि औरत को बोंम्ब बनाने वाला सामान था पेंटिं औरतों के अंगों को छुपाने के काम आती है लेकिन यह पहनती थी कि छुपाने का नहीं बल्कि दिखाने का काम कर रही थी पेंटी के आगे जहां बुर होती है उस जगह को छुपाने के लिए कपड़ा नहीं बल्कि जाली लगी हुई थी जिसमें से औरत की बुर एकदम साफ नजर आती पहनने के बाद और पीछे कपड़ा नहीं था बल्कि एक पतली सी रस्सी थी जो कि बड़ी बड़ी गांड की दरार के पीछे पीछे छुप जाती थी संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपनी मां की तरफ दिखाते हुए बोला,,,)

यह लोगी तुम्हारे ऊपर बहुत अच्छी लगेगी,,,

(आराधना उस पेंटिं की तरफ देखकर शर्म से गड़ी जा रही थी और वह इस बात से और शर्मिंदगी का अहसास करी थी कि उसका बेटा उससे इस तरह से पूछ रहा था कि जैसे वहां सच में उसकी प्रेमिका हो उस पेंटिं की तरफ देखकर आराधना को समझ में आ गया था कि वह किस तरह की पेंटिं है जिसे पहनकर उसके लिए छुपाने लायक कुछ भी नहीं बचता था,,,, शर्म के मारे आराधना बोली,,,)

नहीं नहीं मैं इसे नहीं पहनूंगी,,,(एकदम शर्म के मारे बोलते हुए वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली तो यह देखकर वह काउंटर वाली लड़की बोली)

ले लीजिए सर मैडम अभी शर्म आ रही है लेकिन एक बार पहनेंगे तो इनकी सारी शर्म दूर हो जाएगी,,,,

तुम ठीक कह रही हो,,,, तुम ईसे पैक कर दो,,,

(इतना सुनकर वह काउंटर वाली लड़की मुस्कुराने लगी लेकिन आराधना की हालत खराब हो जा रही थी वह शर्म से पानी पानी में जा रही थी और उसकी शर्मा मदन रस बन कर उसकी बुर से टपक रही थी,,,, संजू मन ही मन में कल्पना कर लिया था कि उस पेंटिं में उसकी मां का नंगा गोरा बदन किस तरह से खिल उठेगा,,,, थोड़ी ही देर में दोनों खरीदी कर लिए थे लेकिन तभी संजू की नजर नाइट गाउन पर चली गई जो कि एकदम जालीदार और फ्रॉक की तरह थी और वह उसे लेने के लिए उस काउंटर की तरफ चला गया,,,, और उस नाईट ड्रेस को निकलवाने लगा ,, यह देखकर आराधना उसके पास गई और बोली,,)

अब क्या ले रहा है,,,

यह नाइट ड्रेस,, तुम्हारी लिए,,,

(इतना सुनते ही हो से ट्रांसपेरेंट ड्रेस पर नजर पड़ते हैं उसके होश उड़ गए और वह आश्चर्य जताते हुए बोली)

क्या,,,, तू पागल हो गया है संजू इसे पहनकर कुछ भी छुपाया नहीं जा सकता सब कुछ तो दिखता है,,,

इसीलिए तो ,, ले रहा हूं इसमें तुम और ज्यादा खूबसूरत लगोगी,,,,,।

(आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि समय उसका ६ उसकी एक भी सुनने वाला नहीं है इसलिए वह ज्यादा कुछ बोली नहीं,,, उसे भी वह ट्रांसपेरेंट नाइटी ड्रेस अच्छी लग रही थी थोड़ी देर में दोनों खरीदी करके मॉल से बाहर निकल गए और स्कूटी पर बैठकर दोनों घर की तरफ जाने लगे,,, रास्ते में आराधना बोली,,,)

यह सब क्या था संजू,,,?

क्या,,,?

चल‌ अब बनने की कोशिश मत कर,,, तुझे सब मालूम है मैं क्या कह रही हूं,,,,,,, वह लड़की मुझे तेरी गर्लफ्रेंड समझ रही थी,,,

अरे वो,,, इसमें क्या हो गया मम्मी तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हें वह लड़की समझ रही थी और मेरी गर्लफ्रेंड समझ रही थी सोचो तुम्हारी खूबसूरती के आगे तुम्हारी उम्र का पता ही नहीं चलता,,, सच में मम्मी उस लड़की की बात सुनकर मेरा भी दिल जोरों से धड़क रहा था मैं भी अपने मन में सोच रहा था कि काश तुम सच में मेरी गर्लफ्रेंड होती तो कितना मजा आ जाता,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर आराधना का दिल जोरो से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी बात से थोड़ा बहुत हुआ भी सहमत थी ना जाने क्यों उस लड़की की बात सुनकर आराधना को भी उस समय यही महसूस हो रहा था कि वह सचमुच में उसकी गर्लफ्रेंड है,,,,)

नहीं यह गलत है तुझे उस लड़की को बताना चाहिए था कि मैं तेरी मां हूं,,,

क्या मम्मी पागलों जैसी बात कर रही हो एक तरह से उस लड़की ने तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ ही की है,,, तुमने अपने बदन को इस तरह से संभाल कर रखा हुआ है कि तुम्हारे हैं और उस लड़की में जरा भी फर्क ही नजर नहीं आता,,,,,,,

(संजू की बातों को सुनकर अंदर ही अंदर आराधना को भी उत्सुकता बढ़ रही थी उस लड़की की बातों ने आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर दी थी और जाते-जाते जो उसने अंतिम ब्रा और पैंटी का सेट दिखाई थी उसे देखकर आराधना की चूत पानी-पानी हो रही थी,, आराधना अपने मन में सोच रही थी कि उस पेंटी और ब्रा को पहनने के बाद वह कैसी नजर आएगी,,,,, आज जो कुछ भी हो रहा था सब कुछ अजीब था,,,, संजू धीरे-धीरे बड़ी चालाकी पूर्वक आगे बढ़ रहा था अपनी मां को पूरी तरह से अपने बहकावे में ले रहा था और धीरे-धीरे आराधना भी अपने बेटे की तरफ आकर्षित होती चली जा रही थी उसका इस तरह से शहर से दूर मॉल में लेकर आना और उसके लिए अंतर्वस्त्र खरीदना यह सब कुछ आराधना के लिए अद्भुत था क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि वह इस तरह की खरीदी अपने बेटे के साथ करेगी और उसका बेटा ही उसे यह सब खरीदी करवाएगा वरना इतना महंगा और ब्रांडेड ब्रा और पेंटी पहनने की तो कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,,,।

देखते ही देखते समझो अपनी मां को उसी रेस्टोरेंट पर लेकर आया जहां पर मोहिनी को लेकर आया था जिसके ठीक सामने वही गेस्ट हाउस था जिस गेस्ट हाउस में उसके पिताजी एक लड़की को लेकर जा रहे थे,,,, रेस्टोरेंट के सामने स्कूटी खड़ी करते समय आराधना संजू से बोली,,,।

आप यहां को खड़ी कर रहा है,,,

अरे इतनी दूर आई हो कुछ खा तो लो और यहां से मोहिनी के लिए भी कुछ पैक करवा लेंगे,,,,

(संजू की बातों को सुनकर और उसकी समझदारी को देखते हुए आराधना मन ही मन सोचने लगी कि उसका बेटा सच में अब बड़ा हो गया है,,,, स्कूटी खड़ी करके संजू आगे आगे और उसकी मां पीछे पीछे जाने लगी है रेस्टोरेंट में प्रवेश करके वह दोनों एक टेबल पर लगी कुर्सी पर बैठ गए जहां से वह गेस्ट हाउस साफ नजर आता था रेस्टोरेंट्स में दोपहर का समय होने की वजह से भीड़-भाड़ बिल्कुल भी नहीं थी,,,, और वह दोनों ऐसी जगह पर बैठे थे जहां से गेस्ट हाउस एकदम साफ नजर आ रहा था,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को समोसा और कचोरी पसंद है इसलिए वह समोसा और कचोरी का ऑर्डर दे दिया और साथ में पेप्सी केन का भी ऑर्डर दे दिया था थोड़ी ही देर में समोसा और कचोरी एक एक प्लेट में दोनों के लिए आ गई थी और आराधना समोसा खाना शुरू कर दी थी,,,, आराधना समोसा खाने में व्यस्त थी जिसकी वजह से उसकी चूचियां जोकि ब्लाउज से निकलने के लिए बेताब नजर आ रही थी संजू की नजर उसकी चुचियों पर ही थी,,, संजू अपनी मां की चूचियों को ही देख रहा था और यह एहसास आराधना को होते ही वह संजू की तरफ देखी तो एकदम से सन् में रह गई संजू जी समझ गया था कि उसकी मां को पता चल गया कि वह उसकी चूची देख रहा है इसलिए बात को बदलते हुए बोला,,,)

मम्मी तुमने उस लड़की को अपना साइज क्यों नहीं बताई,,,

मुझे शर्म आ रही थी,,(अपना आंचल ठीक करते हुए बोली)

तुम्हारे अंग के बारे में बताने में और वह भी एक लड़की से शर्म कैसी,,,

उसे तो मैं बता देती लेकिन तू जो खड़ा था तेरे सामने बताने में मुझे शर्म महसूस हो रही थी,,,

अरे लेकिन वह लड़की तो हम दोनों को प्रेमी और प्रेमिका समझ रही थी तुम्हें मेरी गर्लफ्रेंड समझ रही थी फिर शर्माने की क्या जरूरत थी,,,

अरे बुद्धू वह समझ रही थी ना मैं तो नहीं समझ रही थी ना मैं तो अच्छी तरह से जानती हूं कि तू मेरा बेटा है,,,

लेकिन बता भी दी होती तो उसे कौन सा पता चलने वाला था कि हम दोनों के बीच कौन सा रिश्ता है,,,,

चल अब रहने दे जल्दी से नाश्ता खत्म कर घर भी पहुंचना है शाम होने वाली है,,,

अरे कोई बात नहीं जल्दी पहुंच जाएंगे,,,।

(इतना कहकर संजू भी नाश्ता करने लगा और बार-बार गेस्ट हाउस की तरफ देख रहा था आराधना भी उस तरफ देख रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी सारी लड़कियां जो कि होठों से उतर कर अंदर जा रही थी उसे यह समझना रही थी आखिरकार यह लड़की अंदर काम करती थी या कुछ और संजू भी अपनी मां की नजरों को देख रहा था उसकी नजर भी उसी गेस्ट हाउस के बाहर टिकी हुई थी क्योंकि जो लड़कियां वहां खड़ी थी और आ रही थी वह कुछ ज्यादा ही सज धज कर और मॉडल टाइप के कपड़े पहने हुए थी अपनी मां के शंका को दूर करते हुए संजू बोला,,,)

क्या देख रही हो मम्मी,,,?

मैं ऊन लड़कियों को देख रही हूं जो होटल के बाहर सज धज कर खड़ी है और थोड़ी ही देर में ना जाने कितने होठों उधर आए हैं और उसमें से जोड़े उतरकर होटल में जा रहे हैं,,,, क्या वह इससे भी अच्छी होटल है वहां खाना अच्छा मिलता है क्या,,,?

(अपनी मां के इस तरह की भोलेपन वाली बातें सुनकर संजू हंसने लगा और से हंसता हुआ देखकर आराधना परेशान हो जा रही थी उसे समझ में आया था कि उसका बेटा हंस क्यों रहा है)

अरे तू हंस क्यों रहा है,,,?(आराधना हैरान होते हुए बोली)

अरे तुम्हें इतना भी नहीं पता वह गेस्ट हाउस है,,,

गेस्ट हाउस,,,, होटल रेस्टोरेंट यह सब तो सुनी थी लेकिन गेस्ट हाउस क्या होता है,,,(आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली)

क्या सच में तुम्हें गेस्ट हाउस का मतलब नहीं मालूम,,,

गेस्ट हाउस का मतलब अगर देखा जाए तो हिंदी में यही होता है गेस्ट मतलब मेहमान और हाउस मतलब घर मेहमानों को रुकने का घर.

हां मम्मी तुम सच कह रही हो मतलब तो यही होता है लेकिन मैं गेस्ट हाउस के असली मतलब को तुम्हें बताना चाहता हूं,,,, लेकिन थोड़ा रुको,,,।

(दोनों ने नाश्ता खत्म कर चुका था और संजू उठकर काउंटर पर बिल चुकाने गया हुआ था और वहां से अपनी बहन मोहिनी के लिए भी उसके पसंद का चाइनीस पेक करवा लिया था जब तक संजू पैसे चूका कर आराधना के पास आता तब तक आराधना वही गेस्ट हाउस की ओर ही देख रही थी थोड़ी ही देर में चाइनीस का पैकेट अपनी मम्मी के हाथों में पकड़ा कर वह रेस्टोरेन से बाहर निकल गया और स्कूटी पर बैठकर एक नजर गेस्ट हाउस की तरफ डाला आराधना भी उत्सुकता वश गेस्ट हाउस की तरफ भी देख रही थी जिस तरह से खूबसूरत जवान लड़की है और अधेड़ उम्र के आदमी और उन से कम उम्र के आदमी लड़की के साथ अंदर जा रहे थे उसे कुछ तो गड़बड़ होने की आशंका नजर आ रही थी लेकिन वह अपने बेटे से पूछ नहीं पा रही थी,,, स्कूटी चालू करके संजू आगे बढ़ गया और कंधे पर हाथ रखकर आराधना बड़े आराम से बैठ गई उसके हाथ में चाइनीस का पैकेट था और जो कपड़े उसने खरीदी थी वह स्कूटी की डिक्की में डाल दिए थे,,,,, थोड़ी दूर पर स्कूटी जाने पर आराधना उत्सुकता वश बोली,,)

अच्छा तुम मुझे गेस्ट हाउस का मतलब बता रहा था बता तो सही,,,

हां हां बताता हूं,,,, तुम्हारे लिए भी जानना जरूरी है,,,,

(इतना कहकर संजू अपने मन में सोचने लगा कि आज वह गेस्ट हाउस से जुड़ी उसके पिताजी की बात भी वह अपनी मां से बता देगा ताकि उसे भी पता चले कि उसके पीठ पीछे क्या चल रहा है जिसके लिए वह अपने आप को चरित्रवान बनाए हुए हैं उसके पीठ पीछे उसका पति क्या गुल खिला रहा है वह इंसान कितनी नीच हरकत पर उतर आया है)
 
आराधना अपने बेटे से गेस्ट हाउस का मतलब पूछ रही थी आराधना को गेस्ट हाउस का मतलब इंग्लिश का हिंदी पता था लेकिन असलियत में गेस्ट हाउस होता क्या है इस बारे में उसे अंदाजा भी नहीं था वह अपनी आंखों से उस केस हाउस में कुछ ही मिनटों में बहुत सी लड़कियों को अंदर बाहर होते हुए देखी थी और वह भी लड़के बुढे आदमी लोग के साथ,,,, जब से संजू ने बताया था कि गेस्ट हाउस का मतलब कुछ और होता है तब से आराधना के मन में गेस्ट हाउस के असली मतलब को जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी इसलिए स्कूटी पर पीछे बैठकर सफर का मजा लेते हुए आराधना अपने बेटे से गेस्ट हाउस का मतलब पूछ रही थी,,,, जिसका मतलब बताने में संजू को बिल्कुल भी झिझक महसूस नहीं हो रही थी,,,, क्योंकि गेस्ट हाउस से जुड़ी अपने पिताजी की कहानी भी वह अपनी मां को सुनाना चाहता था,,,, जिसके चलते वह अपनी मां को बहला-फुसलाकर उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाना चाहता था इसलिए वह अपनी बातों को नमक मिर्च लगाता हुआ वह बोला,,,,।

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अच्छा पहले यह बताओ पेंटी तुम्हें कैसी लगी ऐसा तो नहीं है ना कि तुम्हारी पसंद की ना हो मैं जबरदस्ती तुम्हें अपनी पसंद की दिला दिया हूं,,,,

अब यह कैसा सवाल है,,,,(आराधना हैरानी जताते हुए बोले क्योंकि उसे अपने बेटे से इस तरह के सवाल की उम्मीद नहीं थी क्योंकि वह उस‌से गेस्ट हाउस के मतलब को पूछ रही थी और उसका बेटा उसकी बात को घुमा रहा था,,,,)

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अरे मम्मी सही सवाल है आखिरकार मैं तुम्हें घर से इतनी दूर लेकर गया खरीदी करवाने तुम्हारी भी तो पसंद मुझे पता होनी चाहिए ना मुझे तो लग रहा है कि मैंने जो पसंद किया हूं तुम्हें पसंद आएगा भी या नहीं,,,

अब उस में पसंद आने या ना आने से क्या मतलब है मुझे पहनकर किसी को दिखाना थोड़ी है,,,,,,

और अगर मान लो कि पहन कर दिखाना ही हो तो,,,,

धत् कैसी बातें करता है तू धीरे-धीरे बेशर्म होता जा रहा है,,,,

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बेशर्म नहीं करती जिम्मेदार होता जा रहा हूं अगर मैं आज बाथरूम में तुम्हारी फटी हुई चड्डी ना देखता तो मुझे पता ही नहीं चलता कि तुम इस तरह की छेंद वाली चड्डी पहनती हो,,,

(अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर आराधना के तन बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी उसका ब्लाउज तन तना जा रहा था क्योंकि उसकी बातें उसकी दोनों चूचियों में मीठी लहर भर रही थी,,,,, अपने बेटे की बातों को सुनकर आराधना से कुछ बोला नहीं जा रहा था वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,, स्कूटी तेज रफ्तार में नहीं बल्कि सीमित गति से चल रही थी क्योंकि संजू इस सफर को यूंही चलने देना चाहता था,,,)

तुझे ऐसा नहीं देखना चाहिए औरतों की बस तू खास करके उन के पहनने वाले अंतर्वस्त्र को यु देखना अच्छे बच्चों का काम नहीं है,,,

वह बच्चे अच्छे भी नहीं होते जो अपनी मां की मजबूरी को नहीं समझते एक जवान लड़का होने के बावजूद भी उसकी मां इस तरह के कपड़े पहने पेंटिं में छेद हो जुनी हो तो बच्चों को तो डूब कर मर जाना चाहिए,,,,

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तुझे बड़ी बड़ी बातें आने लगी है,,,

बड़ी बातें नहीं है लेकिन काम की बात है,,, सच कहूं तो तुम्हारे लिए मैंने जितने भी पेंटी और ब्रा खरीदा हूं सब एक से एक बढ़कर है तुम्हारे बदन पर और ज्यादा खूबसूरत लगेगी,,,,(अपने बेटे के मुंह से इस तरह की खुली बातें और खास करके अपने लिए ही भले ही वह उसकी तारीफ कर रहा था लेकिन आराधना के लिए सब कुछ शर्म से पानी पानी कर देने वाला था हालांकि आराधना को ना जाने क्यों अपने बेटे की बातें अच्छी भी लग रही थी,,, जिसके चलते उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी मच ती हुई महसूस हो रही थी,,,) और हां जब उस काउंटर वाली लड़की ने आखिर में जालीदार ब्रा और पैंटी दिखाई वह मुझे बहुत खूबसूरत लगी सच कहूं तो उसमें तुम स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लगोगी,,,,,

तुझे कैसे मालूम कि मैं उसे पहनकर सबके से उतरी अप्सरा लगुंगी तु क्या देखेगा क्या मुझे,,,,

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क्या पता किस्मत अच्छी होगी तो देख लूंगा जैसा कि पहले भी देख चुका हूं,,,।

चल अब रहने दे तेरी यह सब बातें मुझे अच्छी नहीं लगती,,,

(आराधना यह बात ऊपरी मन से बोल रही थी लेकिन उसे अंदर ही अंदर अपने बेटे की बातें बड़ी लुभावनी और उत्तेजित कर देने वाली लग रही थी जैसा कि उसे खुद ही अपनी चूत गीली होती ही महसूस हो रही थी,,,, कहीं ना कहीं संजू को भी इस बात का आभास हो चुका था कि उसकी मां को इस तरह की गंदी बातें अच्छी लग रही है वरना वह उसे कब से रोग चुकी होती,,, तभी आराधना अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

जो तुझसे पूछ रही हूं वह तो बता ही नहीं रहा है बस इधर-उधर की बातें कर रहा है,,,

कौन सी बात,,,?(सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हुए संजू बोला)

अरे गैस्ट हाउस वाली बात,,,

अरे हां वह तो भूल ही गया,,, गेस्ट हाउस का मतलब जैसा कि तुम बोल रही हो कि मेहमानों के लिए रहने वाला घर तुम सही कह रही हो लेकिन गेस्ट हाउस का असली मतलब होता है घंटों के हिसाब से लिया गया कमरा और उस कमरे में जानती हो क्या होता है,,,

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क्या,,,?(उत्सुकता बस आराधना बोली)

गंदा काम होता है ,,,

कैसा गंदा काम किस तरह का,,,,?

बहुत ही गंदा,,,,

अरे किस तरह का बताएगा भी चोरी चिनारी जुआ शराब क्या होता है,,,

अरे मम्मी उससे भी गंदा,,

अब बताएगा भी कि सिर्फ पहेलियां बुझाता रहेगा,,,,

( अपने बेटे की बात को सुनकर आराधना बहुत ज्यादा उत्सुक हो जा रही थी और उसकी उत्सुकता देख कर संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी संजू अच्छी तरह से जानता था कि सब कुछ बता देने के बाद ही शायद वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच के सफर को पूरा कर पाएगा वरना वह सफर में ही इधर-उधर भटकता रह जाएगा और मंजिल पास में होने के बावजूद भी दूर लगने लगेगी इसलिए वह अपनी बात को नमक मिर्ची लगाता हुआ बोला,,,)

वैसे तो मैं बताना नहीं चाहता था लेकिन तुम सुनना चाहती हो तो मैं बता देता हूं तुमने रेस्टोरेंट में बैठकर बहुत सी लड़की को अंदर जाते वह देखी होगी ना,,,

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हां कई लड़कियों को मैंने देख चुकी,,,

और उनके साथ जवान लड़के बूढ़े अधेड़ उम्र के इस तरह के आदमी नजर आ रहे थे ना,,,

हां बाबा तो,,,

तो बस और क्या गेस्ट हाउस में वह लोग लड़कियों को चोदने के लिए ले जा रहे थे,,,

(संजू पूरी तरह से अपनी मां के सामने बेशर्मी की हद पार करते हुए गंदे शब्दों में बोला और आराधना अपने बेटे के मुंह से चोदना शब्द सुनकर एकदम से गदगद हो गई और इस बात को सुनकर तो वह और ज्यादा आश्चर्यचकित हो गई की जिन लड़कियों को वह गेस्ट हाउस में जाते हुए देख रही थी वह लड़कियां चुदवाने के लिए जा रही थी, आराधना को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ तो वह फिर से बोली)

क्या,,, क्या कहा तूने,,,,?

अरे मम्मी वह लोग घंटों के हिसाब से कमरा बुक कराते हैं और लड़की को ले जाकर कमरे में उसकी चुदाई करते हैं और उसके बाद बाहर आ जाते हैं और यह सब काम गेस्ट हाउस में ज्यादा होता है,,,,

बाप रे यह क्या कह रहा है संजू मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि लड़कियां इस तरह का काम करते हैं और वह भी ऐसी जगह पर मैं तो सुनकर ही हैरान हूं,,,(वास्तविकता यही थी कि गेस्ट हाउस के बारे में आराधना को कुछ भी नहीं मालूम था इसलिए अपने बेटे के मुंह से पहली बार गेस्ट हाउस में क्या होता है इस बारे में जानकारी पूरी तरह से हैरान हो चुकी थी लेकिन उसकी बातें सुनकर उसे अपनी पतली दरार में से मदन रस पैदा हुआ महसूस हो रहा था,,, अपनी मां की बात सुनकर संजू उन लोगों का पक्ष लेता हुआ बोला,,)

क्या मम्मी तभी पुरानी बातों मैं लगी हुई हो इसमें कौन सी बुरी बात है उन लोगों की मजबूरी है जरूरत है इसीलिए तो वह लोग यहां पर आते हैं,,,

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संजू पागल हो गया है तू यह सब अच्छी बात है अच्छे घर के लड़के कभी यहां नहीं आते,,,

तुम सच में कुछ नहीं जानती मम्मी अच्छे घर के लड़के ही इधर आते हैं क्योंकि उनके पास पैसा होता है और एक 1 घंटे का दो ₹2000 चार्ज होता है,,,

1 घंटे का ₹2000 लेकिन तुझे कैसे मालूम तू भी गया है क्या,,,

अरे नहीं नहीं मम्मी मैं नहीं गया हूं लेकिन कॉलेज में मेरा दोस्त है ना वह गया था और वही मुझे बता भी रहा था और जिस गेस्ट हाउस को तुम देख रही थी उसी गेस्ट हाउस में लेकर गया था,,,,,

बाप रे तेरे दोस्त इतने हरामि है,,,

हरामी नहीं है उनकी जरूरत है और लड़कियों की भी जरूरत होती है इसलिए तो वह लोग उनके साथ आती हैं पैसे की जरूरत होती है घर खर्च की जरूरत होती है और तो और उन्हें शौक भी होता है,,,

शौक कैसा शौक,,,

चुदवाने का मम्मी चुदवाने का,,,

क्या,,,?

हां मम्मी मैं सच कह रहा हूं मेरा दोस्त ही मुझसे बता रहा था कि उसकी एक गर्लफ्रेंड थी उसके खर्चे इतनी ज्यादा देखी वह खर्चे पूरा करने के लिए इस काम में आ गई थी और कॉलेज आने के बहाने वह गेस्ट हाउस में जाती थी और अपनी गर्मी शांत करके पैसे भी कमा लेती थी,,,, यहां पर सब लोग अपनी अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं जबरदस्ती तो नहीं ले जाते ना वह लोग खुद जाने के लिए तैयार होती हैं उनकी भी मजबूरी होती है जरूरत होती है घर पर शायद वह सुख नहीं मिल पाता अपने पति से सुख नहीं मिल पाता तो वह लोग भी इधर आती हैं और आदमी भी उनके पास जुगाड़ नहीं होगा या पत्नी उन्हें उतना प्यार नहीं करती होगी बेवफा होगी तो वह लोग भी अपनी गर्मी शांत करने के लिए यहीं पर आते हैं,,,,,

(अपने बेटे की बातों को सुनकर आराधना एकदम हैरान हो गई थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी दोनों के बीच खामोशी छाई रही आराधना अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा बात तो ठीक ही कह रहा था सब लोग अपनी अपनी जरूरत पूरी करने के लिए इधर आते हैं शायद वह घर में वह सुख प्राप्त नहीं कर पाते इसलिए इस तरह का सहारा लेना पड़ता है और तभी उसे अपनी बड़ी दीदी याद आ गई जो आधी रात को उसके ही जवान बेटे से चुदवा रही थी जाते जाते उसे नसीहत भी दी गई थी कि अपने लिए भी जीना चाहिए अपनी खुशी का भी ख्याल रखना चाहिए शायद उसकी बड़ी दीदी इसी मामले में कह रही थी और शायद अपनी प्यास बुझाने के लिए ही किसी ना किसी बहाने उसके घर आया करती थी,,,,, अपनी बड़ी दीदी का ख्याल आते हैं आराधना अपने मन में सोचने लगी कि क्या सच में औरतों को अपने लिए भी जीना चाहिए रिश्ते नाथ परिवार अपनी जिम्मेदारियों को कुछ देर के लिए भूल कर अपने सुख के लिए कदम उठाना चाहिए अपनी भी उमंगों तरंगों का ख्याल रखना चाहिए,,,, आराधना अपने मन में यही सोच रही थी कि तभी उसे एक पल के लिए लगा कि वह अपने बेटे को उसकी बड़ी दीदी और उसके बेटे वाली बात को बता दे लेकिन कुछ सोच कर वहां खामोश रह गई तभी उसका बेटा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

सच कहूं तो मम्मी आदमी हो या औरत अपने अपने लिए जीना ही चाहिए कब तक जिम्मेदारियों का बोझ लेकर अपनी भावनाओं को उस बोझ के तले दबाते चले जाना है,,,, बाकी जिम्मेदारी तो जिंदगी भर चलने वाली है लेकिन अगर जिम्मेदारी के साथ-साथ अपनी भावनाओं को दबाते चलोगे तो जिंदा होने के बावजूद भी मुर्दा ही रहने वाले हो,,, तुम अपनी भावनाओं को अपनी जरूरत को दबाते आ रही हो और वह भी ऐसे इंसान के लिए जो तुम्हारे पीठ पीछे तुम्हें धोखा दे रहा है,,,,

धोखा कैसा धोखा,,,,

तुम बहुत भोली हो मम्मी तुम पापा की करतूतों से वाकिफ नहीं हो सिर्फ तुझे यही मालूम है कि वहां शराब और जुआ मैं अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं,,,, लेकिन एक उनकी और सबसे गंदी और खराब हरकत के बारे में जानती हो,,,

कौन सी हरकत,,,(आराधना एकदम से हैरान और परेशान होते हुए बोली,,)

मैं तुम्हें नहीं बताना चाहता था मम्मी लेकिन बताना जरूरी है क्योंकि तुम्हें के ऐसे इंसान के लिए अपनी जिंदगी खराब कर रही हो जो तुम्हें एक कौड़ी का भी नहीं समझता,,,, तुम नहीं जानती कि तुम्हारे पीठ पीछे पापा लड़की और औरतों को गेस्ट हाउस में ले जाते हैं,,,,

नहीं तो झूठ बोल रहा है तू मुझे बहलाना फुसलाना चाहता है,,, अपने पापा का नाम लेकर तुम मेरे करीब आना चाहता है ना संजू

मम्मी तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही हो मेरी बातें तुम्हें झूठ लग रही है मैं सच कह रहा हूं और सवाल रहा तुम्हारी करीब आने का तो मैं कितनी बार तुम्हारे करीब आ गया हूं लेकिन,,,, अगर मैं अपना मनमानी करना चाहता तो ना जाने कब से मैं तुम्हारे साथ मनमानी कर चुका होता अभी उस दिन ही देखो मैं तुम्हारी कमरे में आ गया था तू मेरी चूची दबाने के साथ-साथ ने तुम्हारे होठो का चुंबन भी कर रहा था तुम मुझे कुछ बोल नहीं पा रही थी मैं चाहता तो उसी समय तुम्हारी चूत में अपना लंड डाल देता है और तुम्हारी चुदाई कर दिया होता फिर यह सब नखरा सहना नहीं पड़ता मैं जो कुछ भी कह रहा हूं सच कह रहा हूं मैंने अपनी आंखों से पापा को इस गेस्ट हाउस में औरतों को ले जाते हुए देखा हूं और इस केस हाउस में क्या होता है मैं तुम्हें अच्छी तरह से बता चुका हूं अगर मुझ पर विश्वास ना आए तो मोहिनी से पूछ लेना उस दिन जब मैं उसे किताब दिलाने के लिए लाया था तो इसी रेस्टोरेंट में हम दोनों बैठे हुए थे और तभी,,, उसने ही पापा को एक औरत को फोटो से उतर कर अंदर गेस्ट हाउस में ले जाते हुए देखी थी और उसी ने मुझे दिखाई थी कि पापा गेस्ट हाउस में जा रहे हैं,,,

क्या मोहिनी भी जानती है गेस्ट हाउस में क्या होता है,,,!(आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली)

नहीं मोहिनी नहीं जानती क्योंकि मैंने उसे बताया था कि ऑफिस के काम के लिए लोग इधर ही आते हैं क्योंकि वह भी बहुत सी लड़कियों को अंदर जाते हुए देखा कर उत्सुकता बस मुझसे यही सवाल पूछी थी जो तुम पूछ रही थी अगर यकीन ना आए तो वहीं से घर जाकर पूछ लेना कि उसने पापा को किसी औरत के साथ कंपनी के काम के लिए गेस्ट हाउस में जाते हुए देखी थी,,,, तब देखना वह क्या कहती है,,, तुम्हें तो ऐसा ही लगता है कि मैं तुम्हारी करीब आने का बहाना ढूंढ रहा हूं हां यह सच है कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो तुम बहुत खूबसूरत हो मैंने तुम्हारी जैसी औरत आज तक देखा हूं इसलिए ना जाने क्यों तुम्हारे पीछे पागल हो गया यह जानते हुए भी कि हम दोनों के बीच का रिश्ता बहुत खास है फिर भी ना जाने क्यों तुम्हें देखते ही मेरा दिल जोरो से धड़कने लगता है,,,,,

(स्कूटी चलाते हुए संजू अपनी बातों के जाल में अपनी मां को फंसा रहा था,,,, अपने बेटे की इस तरह की बातों को सुनकर उसे भी अजीब महसूस होने लगा था ऐसा लग रहा था कि कोई अनजान लड़का जो कि उसका दीवाना है और उससे प्यार का इजहार कर रहा हूं अंदर ही अंदर आराधना के बदन में कसमसाहट बढ़ रही थी और जिस तरह से उसने,,, एकदम खुले शब्दों में मनमानी और अगर वो चाहता तो उसे चोद दिया होता इस तरह की बात को सुनकर आराधना की चूत से पानी टपक रहा था जहां एक तरफ वह अपने पति की बेवफाई के बारे में सुनकर हैरान थी वहीं दूसरी तरफ अपने बेटे की दीवानी की अपनी प्रति देखकर अजीब से हालात में अपने आप को महसूस करने लगे थे उसे खुशी भी हो रही थी और दुख भी हो रहा था बेटा उसे सुख देना चाह रहा था और पति बार-बार लगातार उसे दुख पर दुख दे रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरफ उसे झुकना चाहिए,,,, एक तरफ उसका नालायक शराबी ज्वारी और अय्याश बाज पति था तो दूसरी तरफ उसका समझदार जवान बेटा था ऐसे हालात में वह अपने बेटे की तरफ भी झुकना चाहती थी लेकिन उन दोनों के बीच का रिश्ता उसे आगे बढ़ने से रोक रहा था,,,, बार-बार उसके कानों में उसके बेटे की वही बात गुंज रही थी कि अगर वह चाहता था उसे चोद भी दिया होता,,, और उसकी कही बाद में उसे सच्चाई भी नजर आ रही थी क्योंकि बहुत बार उन दोनों के बीच इस तरह के हालात बन चुके थे कि संजू उसके साथ मनमानी कर सकता था लेकिन ऐन मौके पर वह हट जाता था,, क्योंकि अपनी हरकतों से जिस तरह के हालात में पैदा कर देता उसके चलते उसके पास और कोई चारा नहीं रहता था केवल समर्पण के,,,,,

स्कूटी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती चली जा रही थी संजू खामोश था आराधना खामोश थी संजू की बातें आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी खास करके उसके पति की बेवफाई वह अपने मन में सोचने लगी कि उसका पति इसीलिए अपनी सारी तनख्वाह बाहरी लुटा कर आता था किसी गैर औरत के ऊपर अपनी पूरी तनख्वाह लुटा कर खाली हाथ घर पर आता था केवल घर में कलेश फैलाने के लिए मारने पीटने के लिए और बाहर औरतों के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा है,,,, अपनी जरूरत पूरी कर रहा है,,,,,,, यह सब सोचते हुए थोड़ी ही देर में वह दोनों घर पर पहुंच गए,,,, शाम हो चुकी थी मोहिनी घर पर आकर चाय बना दी थी,,,,,,,। घर पर पहुंचते ही मोहिनी सवालों की झड़ी बरसाना शुरू कर दी थी क्योंकि वह दोनों ने उसे बताकर नहीं गए थे जब संजय ने बताया कि वह दोनों ऐसे ही घूमने निकल गए थे अब जाकर और शांत‌ हुई और ,,, चाइनीस नूडल्स का पैकेट पाकर वो खुश हो गई आराधना अपने साथ लाया हुआ पैकेट अपने कमरे में जाकर अलमारी में रख दी और वापस आकर बोली,,,।

तुम दोनों चाय पी लेना मैं नहा कर आती हूं,,,

(और इतना कहने के साथ ही आराधना लाने के लिए बाथरूम में घुस गई और आराधना के बाथरूम में घुसते ही संजू की तरफ देखकर मोहिनी मुस्कुराते हुए बोली)

कहां ले गया था मम्मी को घुमाने बात बनी क्या भाई,,,

अरे बन जाएगी मोहिनी बस उसी चक्कर में लगा हुआ हूं,,,,

अब मम्मी नहा कर बाहर आ जाए इससे पहले तो कमरे में चल मम्मी ने मेरा लंड खड़ा कर दि है,,,

क्या बात कर रहा है भाई,,,(इतना कहने के साथ ही पेंट के ऊपर से ही अपने भाई के लंड पर हाथ रखते हुए और उसके कड़कपन का एहसास करते हुए बोली,,) हां भाई सच में तेरा तो खड़ा हो गया है,,,,

बस अब जल्दबाजी दिख‌ा और चल कमरे में,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू मोहिनी का हाथ पकड़कर खड़ा हुआ और कमरे में ले जाने लगा क्योंकि वह दोनों के पास इतना समय नहीं था कि वह दोनों आराम से कुछ कर पाए,,, देखते ही देखते हैं संजू मोहिनी का हाथ पकड़कर अपने कमरे में ले आया और दरवाजे पर कड़ी नहीं लगाया बस उसे बंद कर दिया,,,,)

कपड़े उतार लूं क्या,,,

अरे नहीं इतना समय नहीं है हम दोनों के पास बस सलवार की डोरी खोल,,,

(इतना सुनते ही मोहिनी अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी और सलवार की डोरी खोलते हुए बोली)

क्या बात है भाई मम्मी ने ऐसा क्या कर दिया कि तुझ से रहा नहीं जा रहा है,,,

संजू अपनी बहन मोहिनी क साथ

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अरे सब कुछ बताऊंगा लेकिन अभी शांत करने दे,,,,

(और अपने भाई की बात मानते हो अपनी सलवार की डोरी को खोल कर अपनी सलवार ढीली कर दी सलवार के ढीली होते हैं संजू खुद फुर्ती दिखाते हुए अपनी बहन की सलवार के साथ-साथ उसकी पेंटी भी साथ में पकड़ लिया और उसे एक झटके से उसके घुटनों में लाकर फंसा दिया और उसे टेबल पर झुकने के लिए बोल दिया मोहिनी भी जल्दबाजी दिखाते हुए कमरे के टेबल पर झुक गई और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी,,, सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही संजू ने उसकी सलवार और पेंटी उतारा था क्योंकि इतने से ही उसके जरूरत का सामान उसकी बहन की गुलाबी चूत नजर आ रही थी और तुरंत अपना पेंट भी घुटनो तक सरका कर अपने लंड को बाहर निकाल लिया और तुरंत मोहिनी की गुलाबी चूत पर लगाकर धक्का दे दिया,,, पहले प्रयास नहीं संजू का आधा लंड मोहिनी की चूत में घुस गया और फिर अगले ही प्रयास में पूरा का पूरा लंड मोहिनी की चूत में समा गया मोहिनी के मुंह से हल्की सी आर निकली और फिर उसके बाद आनंद के सागर में गोते लगाने लगी जल्दबाजी में किया गया यह चुदाई का खेल मोहिनी को और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था संजू धक्के पर धक्के लगा रहा था संजू की आंखों के सामने बार-बार वर जालीदार पेंटी में उसकी मां की चूत नजर आ रही थी वह अपनी कल्पना में ही सोच रहा था कि वह जालीदार पेंटिं‌ और जालीदार ब्रा को पहनकर उसकी मां उसकी आंखों के सामने आकर अपने बदन को दिखा रही है,,,,

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संजू के धक्के तेज होने लगे उसके पास ज्यादा समय बिल्कुल भी नहीं था वह अपनी मां के साथ बिताए गए सफर का मजा लेकर उत्तेजित होता हुआ अपनी बहन की चुदाई कर रहा था और देखते ही देखते मोहिनी भी गर्म सांसे लेते हुए ऊपर नीचे हो रही थी दोनों को इस चुदाई में बहुत मजा आ रहा था,,,, और थोड़ी देर में सब कुछ शांत हो गया दोनों के सर से वासना का तूफान हट गया,,,।

दोनों ने अपने अपनी कपड़ों को दुरुस्त u जैसे ही कमरे से बाहर आए वैसे ही बाथरुम का दरवाजा भी खुल गया,,, आराधना को बिल्कुल शक भी नहीं हुआ और दोनों अपने अपने काम में लग गए,,,
 
एक बड़े से मॉल में से ब्रा और पेंटी खरीदने का यह आराधना का पहला अनुभव था जिसमें वह काफी हद तक उसे खरी देते समय उसे पसंद करते समय उत्तेजना का अनुभव कर रही थी क्योंकि उसके साथ उसका बेटा था और वह भी उसके बेटे ने काउंटर वाली लड़की के साथ-साथ खुद की अपनी ही मां को अपनी प्रेमिका बताकर उसके लिए ब्रा पेंटी खरीद रहा था,,,,, सब कुछ लगभग सही था धीरे-धीरे भाभी अपने बेटे के तरफ झुकती चली जा रही थी अपने बेटे की हरकत उसकी सोच समझ और जिस तरह से वह उसका ख्याल रख रहा था उसके चलते वह पूरी तरह से अपने बेटे से आकर्षित होती चली जा रही थी यह जानते हुए भी कि उसके बेटे की नजर उसके ऊपर गंदी है वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता है फिर भी ना जाने क्यों आराधना अपने आप को रोक नहीं पा रही थी वैसे तो वह अपने बेटे को समझाने की बहुत कोशिश कर चुकी थी लेकिन संजू था कि मांगने का नाम नहीं ले रहा था,,,, एक समझदार बेटे की तरह वह उसका ख्याल रख रहा था लेकिन आराधना को इस बात का अंदाजा था कि उसका बेटा एक बेटा होने के नाते नहीं बल्कि एक मर्द होने के नाते उसकी मदद कर रहा था उसका ख्याल रख रहा था क्योंकि उसके पीछे उसकी लालच छुपी हुई थी जो कुछ भी हो सब कुछ ठीक था लेकिन गेस्ट हाउस वाली बात सुनकर ‌ आराधना खुद हैरान हो चुकी थी,,,,,, मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा सच कह रहा था या बनी बनाई कहानी बता रहा था लेकिन अपने पति की हरकत को देखते हुए उसे इसमें बिल्कुल भी शंका का एहसास नहीं हो रहा था कि उसका पति इस कदर नीच हरकत कर सकता है जिस तरह से वह कुछ महीनों से घर पर तनख्वाह नहीं गया था घर की देखरेख नहीं कर रहा था एहसास तो उसी समय आराधना को हो गया था लेकिन उसका दिल नहीं मानता था लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर वह पूरी तरह से अंदर ही अंदर हिल चुकी थी,,,,, बस एक बार मोहिनी से कंफर्म कर लेना चाहती थी कि उसका बेटा जो कुछ भी कह रहा है उसके पति के बारे में क्या सच है,,,,,।

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रात को खाना खाकर वह अपने कमरे में जाकर सो गई थी क्योंकि वह परेशान नजर आ रही थी और संजू ऐसे हालात में अपनी मां को किसी भी तरह से उकसाना नहीं चाहता था ना ही उसे परेशान करना चाहता था वह जानता था कि जिस तरह का खुलासा उसने रेस्टोरेंट में बैठे-बैठे किया था वह एक पत्नी के लिए आसमान गिरने के बराबर था,,, लेकिन संजू को अपने आप पर पूरा विश्वास था कि वह जरूर अपनी मां को इस मुसीबत से बाहर निकाल लेगा,,,, अपने पति की सच्चाई मोहिनी से पूछने की हिम्मत आराधना में बिल्कुल नहीं थी इसलिए वह मोहिनी से कुछ बोली नहीं,,, और संजू ने मोहिनी को सब समझा दिया था कि अगर आराधना पूछेगी तो उसे क्या कहना है,,,, लेकिन यह नहीं बताया था कि वह मम्मी को ब्रा और पेंटी दिलाने के लिए ले गया था वरना वह भी जिद करती थी उसके लिए क्यों नहीं लेकर आया,,,।

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धीरे-धीरे दिन गुजरने लगा था,,,, मनीषा का लगाव दिन प्रतिदिन संजू के प्रति बढ़ता जा रहा था जिस दिन से‌ वह खुद संजू को पकड़कर उसके होठों का चुंबन की थी उस दिन से उसकी तन बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी जब जब वह संजू को देखी थी तब तक उसकी दोनों टांगों के बीच की पत्नी लकीर में लहर उठना शुरू हो जाती थी ऐसा उसे पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन अब धीरे-धीरे ऐसा लग रहा था कि उस पर भी जवानी पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी,,,,,, क्लास में पढ़ाते समय संजू चोर नजरों से मनीषा की तरफ देख लेता था और मनीषा भी समझो को तिरछी नजरों से देख लेती थी दोनों की नजरें आपस में टकराती थी और दोनों मुस्कुरा देते थे यह दोनों की तरफ से प्यार का इजहार था दोनों एक दूसरे को चाहने लगी थी और वैसे भी इसमें सबसे ज्यादा फायदा संजू का ही था क्योंकि मनीषा जैसी खूबसूरत लड़की का साथ पाना उसका भी एक ख्वाब जैसा ही था,,,, मनीषा को देखकर संजू के मन में कुछ और चल रहा था उस दिन का चुंबन वह बोला नहीं था इसलिए आज फिर से वह मनीषा के होठों का रस पीना चाहता था उसके बदन पर अपना हाथ रखना चाहता था इसकी नरम नरम गांड को अपनी हथेली में लेकर दबाना चाहता था ,,,,, और इसीलिए वह छुट्टी होने का इंतजार कर रहा था,,, और थोड़ी ही देर में छुट्टी भी हो गई,,,, सभी स्टूडेंट क्लास से बाहर जा चुके थे क्लास में केवल मनीषा और संजू ही थे,,,,।

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मनीषा भी जाने की तैयारी में थी वह टेबल पर रखा हुआ अपना पर्स लेने के लिए आकर बड़ी और संजू भी उसकी तरफ आगे बढ़ा,,, संजू मनीषा के बेहद करीब आ गया अपने बेहद करीब संजू को खड़ा देखकर मनीषा के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह संजू की आंखों में देखने लगी और संजू की उसकी काली-काली गहरी आंखों में डूबा दोनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं हो रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों आंखों से ही बातचीत का दौर शुरू कर दिए हो ,,देखते ही देखते संजू मनीषा के बेहद करीब आ गया,,, मनीषा की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी क्योंकि पहली बार कोई जवान लड़का उसके बेहद करीब आया था,,,, देखते ही देखते समझो अपने प्यार से होठों को मनीषा के लाल-लाल होठों के करीब बढ़ाने लगा मनीषा भी जैसे संजू की मनसा को समझ गई थी और वह भी धीरे-धीरे अपने होठों को आगे करने लगी देखते ही देखते दोनों के दहकते हुए होंठ आपस में मिल गए और संजू मनीषा के लाल लाल होठों को अपने फोटो के पीछे रखकर उसके रस को पीना शुरु कर दिया साथ ही अपनी हथेली को उसकी पतली चिकनी कमर पर रखकर उत्तेजना के मारे हल्का सा दबाव देने लगा,,, एक जवान लड़की इस तरह की हरकत से पूरी तरह से उत्तेजित हो जाती है और वही मनीषा के साथ भी हो रहा था मनीषा की चूत से पानी टपकना शुरू कर दिया था,,,, दूसरी तरफ एक खूबसूरत लड़की के होठ को अपने होंठों में भरकर उस का रस चूसते हुए संजू पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रहा था देखते ही देखते संजू ने मनीषा की चिकनी कमर को पकड़े हुए उसे और अपनी तरफ खींच लिया और वह एकदम से संजू के बदन से चिपक गई और संजू ने अपनी हथेली को कमर पर से हटा कर उसकी गांड पर रख दिया और सलवार के ऊपर से ही जोर जोर से मसल ना शुरू कर दिया मनीषा के बदन पर पूरी तरह से मदहोशी की खुमारी छा रही थी पहली बार इस तरह की हरकत से वह अपने तन बदन में सुरसुरा हट महसूस कर रही थी उसकी चूत लगातार पानी टपका रही थी,,,, पेंट के अंदर संजू का लंड खड़ा होने लगा था और देखते ही देखते वह पेंट के अंदर तंबू की शक्ल में आ चुका था और सीधे सलवार के ऊपर से ही मनीषा की चूत पर दस्तक देना शुरू कर दिया था कठोर नुकीली चीज को अपनी चूत पर महसूस करते ही मनीषा एकदम से चौक गई वह पहले तो कुछ समझ नहीं पाई और अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसे हटाने की कोशिश करने लगी तो अनजाने में ही पेंट के ऊपर से ही सही मनीषा के हाथ में संजू का लैंड आ गया जो कि पूरा तरह से टनटनाकर फौलाद बन चुका था,,,, मनीषा एकदम से चूक गई उसके बदन में एक अनजाने डर की लहर दौड़ने लगी वह तुरंत संजू के लंड पर से अपना हाथ हटा ली तो संजू बोला,,,।

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हाथ क्यों हटा ली मनीषा दीदी,,,,

मुझे लगा कि कुछ और था,,,(मदहोशी भरे स्वर में बोली)

तुम्हें क्या लगा था मनीषा,,,,(संजू मनीषा के लाल-लाल होठों को छोड़कर उसकी गर्दन पर चुंबनो की बारिश करता हुआ बोला,,,)

बहुत बड़ा है,,,,

क्या बड़ा है मनीषा दीदी,,,(संजू उसी तरह से उसकी गर्दन पर अपनी जीभ से चाटते हुए उस को उत्तेजित करता हुआ बोला)

मुझसे नहीं बोला जाएगा,,,,

तुम बहुत खूबसूरत हो मनीषा,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू सलवार के अंदर जबरदस्ती अपना हाथ डालने लगा मनीषा उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली)

नहीं संजू यह गलत है,,,

कुछ गलत नहीं है मनीषा मैं तुमसे प्यार करता हूं तुम भी मुझसे प्यार करती हो और प्यार में तो यह सब होना ही है,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू कुश्ती दिखाते हुए अपनी पूरी हथेली को मनीषा की सलवार में डाल कर सीधे उसकी चूत पर पहुंच गया जो भी पूरी तरह से गर्म होने के साथ-साथ चिपचिपी हो गई थी उसके चिपचिपाहट को अपनी उंगली और हथेली पर महसूस करते ही उत्तेजना के मारे संजू मनीषा की चूत को अपनी हथेली ने दबोच लिया)

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सहहहरह आहहहरहह ,,,,, संजू क्या कर रहे हो,,,

तुम्हारी चूत बहुत गर्म है मनीषा दीदी और बहुत पानी छोड़ रही है,,,,(अपनी हथेली को मनीषा की चूत पर रगडते हुए संजू बोला,,,, यह पहली बार था जब मनीषा से कोई इस तरह से अश्लील बातें कर रहा था और वह भी एकदम गंदी है लफ्जों में लेकिन ना जाने क्यों संजू के मुंह से चूत शब्द सुनकर वह पूरी तरह से मचल उठी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें इतनी कमजोर वह कभी नहीं पड़ी थी जैसा कि आज वह अपने आप को कमजोर महसूस कर रही थी,,,, संजू मौके का फायदा उठाते हुए बहुत बुरी तरह से मनीषा की चूत को रगड़ रहा था चूत की गर्मी के साथ-साथ उसकी हथेली भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी जब देखा कि मनीषा को मजा आ रहा है तो वह चालाकी से अपनी एक उंगली उसकी बुर की गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगा तो मनीषा तुरंत उसका हाथ पकड़ ली,,,,)

नहीं संजू यह ठीक नहीं है,,,

क्या ठीक नहीं है,,,(संजू समझ गया था कि इस समय उंगली डालना ठीक नहीं है इसलिए वह फिर से अपनी हथेली उसकी चूत पर रगड़ते हुए बोला,,,)

यही जो तुम कर रहे हो,,,

मैं तो तुमसे प्यार कर रहा हूं और जिंदगी भर करता रहूंगा,,,

वह तो ठीक है लेकिन यह जो तुम कर रहे हो यहां पर बिल्कुल भी ठीक नहीं है,,,

तो बोलो ना मनीषा दीदी कहां पर चले मैं तड़प रहा हूं तुम्हारी चूत को अपनी आंखों से देखने के लिए मैं देखना चाहता हूं कि तुम्हारी चूत कितनी खूबसूरत है तुम्हारी खूबसूरत चेहरे की तरह वह भी एकदम गुलाबी होगी,,,।

(ना चाहते हुए भी मनीषा संजू की बातों में बहक‌ रही थी,, लेकिन फिर भी उसे इस बात का अहसास था कि जिस जगह पर दोनों खड़े थे उस जगह पर इस तरह की हरकत करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था इसलिए वह अपने आप पर काबू करते हुए संजू का हाथ पकड़कर अपनी सलवार से बाहर निकाल दिया और एक नजर अनजाने में ही संजू के पेंट की तरफ डाली तो एकदम हक्की बक्की रह गई क्योंकि ऐसा लग रहा था कि जैसे संजू की पेंट में मोटा सा लकड़ा डालकर तंब६ बनाया गया हो,,, उस तंबू को देखकर मनीषा एकदम से सिहर उठी थी,,,, संजू की हथेली मनीषा की सलवार से बाहर निकल चुकी थी जो कि पूरी तरह से उसके मदन रस से भीगी हुई थी,,,, उसकी चूत से भीगी हुई अपनी पूरी हथेली पर उसकी आंखों के सामने इधर-उधर करके देखते हुए बोला,,,।

क्या दीदी कितना मजा आ रहा था,,,

(अपनी चूत से निकले हुए काम रस से भीगे हुए संजू की हथेली को देखकर मनीषा शर्म से पानी पानी होने लगी वह अपनी नजरों को दूसरी तरफ शर्म के मारे घूम आती है इससे पहले ही संजू अपनी चाल चलते हुए एक उंगली को जो की पूरी तरह से मनीषा के कामराज से भीगी हुई थी उसे अपने मुंह में डाल कर चाटने लगा यह देखकर मनीषा की चूत फुदकने लगी और एकदम शरमाते हुए बोली,,)

छी यह क्या कर रहे हो,,,,

तुम्हारी चूत से निकला अमृत चाट रहा हूं,,,

धत् संजू कितना गंदा काम कर रहे हो तुम,,,

तुम्हें ऐसा लगता है ना मनीषा दीदी लेकिन चूत का रस चाटने में मर्दों को कितना मजा आता है यह तुम शायद नहीं जानती अगर मौका दो तो मैं तुम्हें बता दूं,,,,

धत् तू पागल हो गया है,,,(इतना कहने के साथ ही वो टेबल पर रखा हुआ अपने पर्स उठा ली बचाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी कि तभी संजू बोला,,,)

अरे ज्यादा कुछ नहीं तो यह तो बता दो की पेंटि कौन से रंग की पहनी हो,,,,।

( संजू की बातों को सुनकर मनीषा के तन बदन में आग लग रही थी वह किसी तरह से अपने आप पर काबू करते हुए संजू की तरफ देख कर मुस्कुराई और बोली,,,)

चलो अब देर हो रही है,,,,।

(संजू को मनीषा की मुस्कुराहट में जवाब मिल गया था वह समझ गया था कि किसी भी दिन मनीषा उसके नीचे आ जाएगी और वह उसके नीचे आने के लिए तैयार भी हो जाएगी और वह भी मुस्कुराता हुआ क्लास से बाहर आ गया और क्लास का दरवाजा बंद करके ताला लगा दे जब दोनों नीचे उतर के आए तो मनीषा बोली,,,।)

आज रात का खाना तुम्हें मेरे घर पर खाना है,,,,

क्यों कोई खास वजह,,,

वजह तो कुछ खास नहीं लेकिन जो अपनी कोचिंग क्लास सक्सेस होती जा रही है उसके ही चलते समझ लो छोटी सी पार्टी है तुम्हारे लिए,,,,

कितने बजे आना है,,,

रात के 8:00 बजे,,,

कुछ और तो प्रोग्राम नहीं है ना,,,(संज६ अपने होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए बोला उसके कहने का मतलब को मनीषा अच्छी तरह से समझ गए इसलिए वह हंसते हुए बोली,,)

अब भाग जा नहीं तो मारूंगी,,,,

(और संजू वहां से हंसता हुआ चला गया,,, मनीषा पूरी तरह से उसके काबू में आ चुकी थी रात को ठीक 7:45 कम था तभी संजू मनीषा के घर पहुंच गया था दरवाजा खुद मनीषा ने खोली थी मनीषा के साथ-साथ साधना भी संजू को देखकर बहुत प्रसन्न हो गई थी लेकिन जानती थी कि सब की हाजरी में वह संजू के साथ कुछ कर नहीं सकती थी,,, संजू का अभिवादन करने के लिए मनीषा के साथ-साथ उसकी मां भी दरवाजे तक आई थी और दरवाजा खोल कर संजू का अभिवादन की थी मौसी होने के नाते इस समय सब की हाजरी में संजू भी हाथ जोड़कर मैं नमस्ते किया था और जब दरवाजा बंद करके अंदर की तरफ जाने लगा तो मनीषा से नजर बचाकर एक हाथ साधना की गांड पर रखकर जोर से दबा दिया था और इस हरकत से साधना के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ उठी थी,,,,।

संजू अपने मौसा से काफी दिनों बाद मिल रहा था पिछली बार कब मिला था उसे ध्यान नहीं था जब सेवा साधना के घर आना जाना शुरू किया था तब से वह अपनी मौसा से ठीक से मिला नहीं था आज पहली बार उन्हें देख कर यह एहसास हो गया था कि मौसी क्यों उसके साथ चुदवाती है क्योंकि वह एकदम से ढीले ढाले और कौन निकली हुई ऐसे हालात में वह औरत को बिल्कुल भी खुश करने में सक्षम नहीं थे,,,,
 
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