उस बैंक कर्मचारी महिला से मिलकर अंकित बहुत खुश था। पुरूष औरत को अंकित ने जी भर कर खुश भी किया था। अंकित ने उसे औरत को उम्मीद से कहीं ज्यादा गुना खुशी किया था वरना इस उम्र में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसे एक जवान लड़के से इतना सुख मिलेगा और वह भी अनजाने में ही। अंकित ने जी भरकर उसे बैंक कर्मचारी औरत की चुदाई किया था इस उम्र में भी वह इतनी लाजवाब और हुस्न की मल्लिका थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था। उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह औरत इतनी जल्दी उसके साथ हम बिस्तर होने को तैयार हो जाएगी वैसे शारीरिक सुख प्राप्त करने की पहले उसने ही की थी जिससे अंकित का काम आसान हो गया था।
होटल पहुंचकर उसने अपनी मां को यही बताया कि वह थोड़ा घूमने के लिए चला गया था । रात भर अंकित ने जिस तरह से अपनी मां की गांड मरा था उसके बदले में दर्द होने लगा था खास करके गांड के छेद में और उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी इसलिए वह ज्यादा कुछ करी नहीं बस होटल के कमरे में ही दिनभर आराम करती रही। शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा था तब मां बेटे दोनों की नींद खुली दोनों को भूख भी बहुत ही जोरों की लगी थी थोड़ा फ्रेश होकर वह दोनों नीचे आए और अपने होटल के रेस्टोरेंट में खाना ना खाकर वालों को अपने होटल से बाहर निकल गए और अंकित अपनी मां को इस होटल में लेकर आया जहां पर वहां दिन में आया था और बैंक कर्मचारी की जमकर चुदाई किया था यहीं पर उसने खाना भी खाया था और यहां का खाना उसे अच्छा लगा था इसलिए वह अपनी मां को यहां लेकर आया था। रेस्टोरेंट में बैठकर दिन में जो कुछ भी अंकित ने खाया था वही फिर से आर्डर कर दिया और थोड़ी ही देर में दोनों के टेबल पर ऑर्डर का खाना आ गया सुगंधा को भी यहां का खाना अच्छा लग रहा था। पेट भरकर खाने के बाद दोनों भुगतान करके रेस्टोरेंट से बाहर निकल गए और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करके घूमते रहे। देखते देखते रात के 9:30 बज चुके थे वैसे भी यहां पर रात का नजारा कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखता है इसलिए समय कभी दिया उन दोनों को पता ही नहीं चला। थोड़ी ही देर में दोनों अपने कमरे में पहुंच गए।
Madhosh hoti huyi Sugandha
दोनों बालकनी में बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला,,।
बस अब दो दिन और रह गए हैं दो दिन जी भर कर मजा ले लो फिर ना जाने कब यहां आना होगा।
मुझे तो नहीं लगता कि अब यहां पर कभी आना होगा।
ऐसा क्यों कह रही हो।
अरे हम दोनों ही थोड़ी ना घर पर हैं तृप्ति भी तो है और उसे लेकर यहां पर तो आ नहीं सकते।
अरे जब उसकी शादी हो जाएगी अपने घर चली जाएगी तब तो हम दोनों यहां पर खुलकर मजा ले सकेंगे।
तब तो यहां आने की क्या जरूरत है घर पर ही खुलकर मजा लेंगे वैसे भी अब एक-दो साल में तृप्ति की शादी करनी पड़ेगी उसके बाद तो मजा ही मजा है और वैसे भी इसी जगह पर दोबारा आओगे तो इन लोगों को शक नहीं होगा क्योंकि होटल वालों को तो यही लगता है कि मैं धंधे वाली हूं।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और मुस्कुरातेहुए बोला)
सच में अगर तुम धंधे वाली होती तो तुम्हारा एक रात का सबसे ज्यादा चार्ज होता।
कितना होता मेरा चार्ज,,,?(सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली)
कम से कम 8 से 10000 के बीच तो रहता ही एक रात की लेकिन जो भी इतना पैसा चुका था जी भर कर तुम्हारी जवानी का रस निचोड़ भी लेता रात भर में,,,,।
तू तो बिना पैसे खर्च किए मेरी जवानी का रस निचोड़ रहा है।
मैं तुम्हारा ग्राहक थोड़ी ना हूं और वैसे भी तुम्हारी जैसी छिनार पर चढ़ने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है।
छिनार,,,,(झूठ मुठ का गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा अपने बेटे की तरफ देख कर बोली।)
तो क्या छिनार ही तो हो और तुम्हें चोदने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर तुम्हारी बुर पानी छोड़ देती है।
(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का कहना बिल्कुल सही था वैसे उसका ईमान कभी नहीं डगमगाता लेकिन अपने बेटे का मोटा तुम्हारा लंड देखकर उसे न जाने क्या हो जाता है,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर धीरे से वह बोली,,)
पता नहीं तेरे मुंह से छिनार शब्द सुनकर मुझे क्या होने लगता है।
क्या होने लगता है गुस्सा आने लगता है क्या?
गुस्सा तो नहीं आने लगता लेकिन तेरे पर प्यार आने लगताहै।
तो चलो प्यार करते हैं बिस्तर खाली है।
ना बाबा ना आज की रात तो कुछ भी नहीं कल जो तूने रात भर मेरी गांड मरा है तब से अभी तक मेरी गांड दर्द कर रही है।
गांड नहीं मारूंगा तुम्हारी बुर मारूंगा।
आज तो तुझे छूने भी नहीं दूंगी। आज कुछ नहीं आज आराम करते हैं,,,,।
क्या मम्मी आराम करने के लिए जिंदगी पड़ी है यहां जो काम करने के लिए आए हैं उसे तो करना हीहोगा ना।
यह तुझे गांड मारने से पहले सोचना चाहिए था।
क्या मम्मी तुम भी इतनी मस्त जवानी की मालकिन हो फिर भी छोटे से छेद में लेकर इतना तड़प रही हो। तुम्हारी जगह में औरत होता तो कब से घोड़ी बनकर फिर से तैयार हो जाता गांड मरवाने के लिए।
अच्छा बच्चु यह तो तुम इसलिए कह रहा है ना कि तू औरत नहीं है इसलिए औरत होता ना तो तुझे पता चलता है कि मर्द मजा भी देता है और दर्द भी देता है। मेरे पास भी लंड होता तो यह बात तुझे अच्छे से समझा देती।(इतना कहकर सुगंधा हंसने लगी और उसकी बात सुनकर अंकित भी हंसने लगा वह भी अपनी मां की बात को मानते हुए आज की रात कुछ न करने का फैसला कर लिया वह भी आराम करना चाहता था क्योंकि दिन भर उसने दूसरी औरत की शिव जो किया था वह दोनों बालकनी से कमरे में आ गए सोने से पहले सुगंध अपने कपड़े उतारने लगी कपड़े उतारने के बाद अपनी मां को ब्रा और पेटी में देखकर अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आने लगा इस समय उसकी मां का गदराया बदन ब्रा और पेंटि में और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था। जिसे देखकर अंकित का मन देखने लगा और वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया।
यह क्या कर रहा है आज आराम करना है और कुछ नहीं करना है,,,।
Sugandha bra or panty me
यह कैसे हो सकता है ,,,मेरी आंखों के सामने तुम कपड़े उतार रही हो और कहती हो कि मैं कुछ ना करूं यह तो यही हो गया कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए बोल रही हो।
ना तुम्हें दूध हूं और ना ही तो बिल्ली है समझ गया ना इसलिए अपना दिमाग ज्यादा मत लगा,,,(सुगंधा अपने आप को अपने बेटे की बाहों के कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी अंकित अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में पड़े हुए था और इस दौरान अपनी पेट में बना हुआ तंबू लगातार अपनी मां की गांड पर धंसा रहा था जिससे सुगंधा के भी तन बदन में लहर उठने लगी थी वह ऊपर से तो इंकार कर रही थी लेकिन अंदर से उसकी भी कामाग्नि भड़कने लगी थी लेकिन वह अपने बेटे को आगे बढ़ने नहीं देना चाहती थी क्योंकि वह उसे आज ऐसा कुछ भी न करने के लिए पहले से ही बोल रखी थी और अगर इस समय वह अपनी बेटी को कुछ करने देगी तो वह खुद ही अपने बेटे की आंखों के सामने छिनार साबित हो जाएगी। उसे शर्म महसूस हो रही थी वह बार-बार अपने बेटे की कैसे आजाद होना चाहती थी लेकिन इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद होने नहीं देगा। सुगंध को इस बात का एहसास हो गया था कि उसका बेटा अपनी मनमानी करके ही मानेगा क्योंकि वह जानती थी कि जब उसकी बेटी का लंड खड़ा हो जाता है तब बिना पानी निकाले शांत नहीं होता लेकिन फिर भी इस दौरान वह अपने आप को पूरी कोशिश कर रही थी छुड़ाने को लेकिन अंकित की भुजाओं का बोल कुछ ज्यादा ही था वह ब्रा के ऊपर से उसकी चुचियों को पदकर दबाना शुरू कर दिया था। वैसे भी अंकित औरत को खुश करने का उनमें कामाग्नि भड़काने का होना अच्छी तरह से जानता था और इस समय वह अपनी मां के साथ वही कर रहा था। जब अंकित को एहसास होने लगा कि उसकी मां की पकड़ ढीली पड़ रही थी और उसके मुंह से हल्की-हल्की गर्म शिसकारी की आवाज निकलने लगी है तो अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह समझ गया कि अब उसका काम बन गया है, वह अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली रखकर दबाव बनाते हुए उसे एकदम से बिस्तर पर झुका दिया और सुगंधा भी जानती थी कि इस समय अंकित अपनी मनमानी किए बिना मानने वाला नहीं है इसलिए वह भी विवश होकर बिस्तर पर झुक गई वैसे भी उसके बदन में भी उत्तेजना के चिंगारी भड़कने लगी थी। उसे सिर्फ इस बात का डर था कि कहीं इस बार भी उसका बेटा उसके गुलाबी छेद की जगह उसके भूरे रंग के छेद में अपना लंड ना डाल दे।
मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित एकदम से अपनी मां की पेंटिं को पकड़कर नीचे खींच दिया और उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दिया,,, और खुद अपनी पेंट का बटन खोलकर पेट को भी घुटनो तक लाकर अटका दिया क्योंकि अब अंकित के पास बिल्कुल भी समय नहीं था वह जल्द से जल्द अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाल देना चाहता था और ढेर सारा थुक अपने सुपाड़े पर लगाकर धीरे से अपनी मां के गुलाबी छेद में सरकाना शुरू कर दिया तब जाकर सुगंधा की जान में जान आई कि उसका बेटा उसे चोदने के लिए लंड उसकी बुर में डाला है ना की उसकी गांड के छेद में,,, अपनी मां के इनकार करने के बावजूद भी अंकित अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था वैसे उसका भी मन आराम करने कोई था लेकिन अपनी मां को ब्रा और पेटी में देख कर और उसकी कई हुई जवान को देखकर एक बार फिर से उसकी मन बहक गया था,,, अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को संतुष्ट करके अपना पानी उसकी बुर में डाल नहीं दिया। मां बेटे दोनों फिर से संतुष्ट हो चुके थे। अपनी पैंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचते हुए सुगंधा शरारत भरे स्वर में अपने बेटे से बोली।
सच में तू एकदम मादरचोद हो गया है।
इसमें कोई शक है क्या? तुम्हारे जैसी मां हो तो बेटे को मादरचोद बनने से कोई नहीं रोक सकता। (ऐसा कहते हुए अंकित भी अपनी पेंट को ऊपर की तरफ खींचा और उसका बटन बंद करने लगा इसके बाद मां बेटे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर गहरी नींद में सो गए सुबह दोनों के लिए जल्दी खुल गई नहा धोकर तैयार होने के बाद अंकित उसे जगह पर जाने के लिए जहां के बारे में उसे बैंक वाली औरत में बताई थी वह पूछताछ करने के लिए नीचे रेस्टोरेंट में आ गया था थोड़ी देर में उसकी मां भी नीचे आ गई थी अंकित इस वेटर से उसे जगह के बारे में पूछ रहा था जिसे अपनी मां की नंगी जवानी का दर्शन कराया था और उसके एहसान के बदले में वह वेटर पूरी तरह से अंकित का खास हो गया था। क्योंकि होटल से जाते-जाते अंकित उसे इस बात का दिलासा दिया था कि उसके जाने के बाद वह उस औरत को उसके हाथों सौंप देगा जिसके साथ वह एक दिन के लिए पूरा मजा ले सकेगा। और इस बात का लालच उस वेटर के मन में बस गया था। सुगंधा की खूबसूरत बदन को याद करके ना जाने कितनी बार वह अपने हाथ से हिला कर काम चला लिया था। अपनी मां के साथ बैठकर वह उस वेटर से नाश्ता मंगवाया और उस जगह के बारे में पूछने लगा,,, उस वेटर को उसे जगह के बारे में अच्छी तरह से मालूम था इसलिए उसने जल्द ही एक गाड़ी का बंदोबस्त भी कर दिया था उन लोगों के नाश्ता करते-करते कार आकर होटल के सामने रुक गई थी। मां बेटे दोनों वेटर के कार्य को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे। इस बात से सुगंधा खुश होते हुए अपने बेटे से बोली।
वेटर तो बहुत काम का इंसान निकला।
काम का इंसान तो है ही हम दोनों का काम कुछ ज्यादा ही कर रहा है पता है किस लिए।
किसलिए,,,!(सुगंधा आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली)
वह इसलिए की मैंने उस वेटर से बात किया हूं कि जब मैं इस होटल से जाऊंगा तब मैं उसे औरत को मतलब कि तुम्हें उसे सौंप दूंगा एक रात के लिए खूब मजा करना लेकिन खर्चा भी ज्यादा होगा जिसके लिए बहुत तैयार हो गया था।
हरामजादा वह भी और तू भी,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसने लगा दोनों ने नाश्ता खत्म कर चुके थे। सुगंधा अपना पर्स अपने हाथ में लेकर उठकर खड़ी हो गई अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,, और दोनों होटल से बाहर आ गए कार की तरफ कार का ड्राइवर दोनों को नष्ट करता हुआ देखकर खुद भी नष्ट करने के लिए रेस्टोरेंट में बैठ गया था और वह इशारे से दोनों को कर में बैठ जाने के लिए कह रहा था सुगंधा अपनी भारी भरकम गांड लेकर कर का दरवाजा खोलकर अंदर बैठने को हुई तो झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम गांड का उभार को ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल आया जिसे देखकर कार का ड्राइवर एकदम से मत हो गया और नजर भरकर सुगंधा की गांड को भी देखता रह गया,,, यह सब करते हुए अंकित की नजर उसे कर ड्राइवर पर चली गई थी और उसका ड्राइवर की हरकत को देखकर वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था। थोड़ी देर में मां बेटे के कार में बैठने के बाद वह ड्राइवर भी अपनी सीट पर आकर बैठ गया और आते ही उसने बातचीत की शुरुआत करते हुए बोला।)
तुम दोनों पहली बार आए हो क्या यहां पर,,,(ऐसा कहते हुए उसने कार को स्टार्ट कर दिया,,,, जवाब में अंकित बोला,,,)
जी हां,,,, हम दोनों पहली बार इधर आए हैं,,,
वैसे तुम दोनों की जोड़ी काफी अच्छी लग रही है।
जी शुक्रिया,,,( अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा भी कोई ड्राइवर की बात पर मुस्कुराने लगी थी,,, क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया था कि वह ड्राइवर भी उसे वही समझ रहा है जो वेटर ने दोनों को समझा था,,,, उसे इस बात की खुशी थी कि कोई भी उन दोनों को मां बेटा नहीं समझ रहा था वरना दिक्कत आ जाती,,, अंकित जानता था कि उसे ड्राइवर की मन में क्या चल रहा है इसलिए वह पहले ही सब कुछ साफ करते हुए उस ड्राइवर से बोला)
यह मेरी कॉलेज की मैडम है लेकिन इन्हें देखकर कोई कह नहीं सकता कि तो बच्चों की मां है आज भी एकदम जवान और कैसे हुए बदन की मालकिन है।
बात तो तुम यार एकदम सही कह रहे हो,,, मैं भी देख कर हैरान रह गया,,,,।
खूबसूरत है ना,,,,।
खूबसूरत,,,, सच कहूं तो महीनों बाद में इतनी खूबसूरत औरत देख रहा हूं यह तो तुमने बताया कि तो बच्चों की मां है तब मुझे पता चल वरना तो मुझे लगी नहीं रहा था,,,,।
(उसे ड्राइवर की बात सुनकर सुगंधा के तन-बदन में गुदगुदी होने लगी थी उसे इस बात का डर हो रहा था कि उसे देखकर कोई बोल नहीं सकता था कि वह दो बच्चों की मां है,,,,,, कार के मिरर में वह ड्राइवर बार-बार सुगंधा कोई देख रहा था सुगंधा शर्म के मारी अपनी नज़रें नीचे झुका ली थी,,,,, उसके मन में भी कई सवाल घूम रहे थे इसीलिए थोड़ी देर बाद कुछ सोच विचार करके वह बोला,,,)
अगर बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछूं,,,।
हां हां पूछो पूछो इसमें कौन सी बात है,,,,।
क्या उनके पति को तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है इस बात का पता नहीं है ।
बिल्कुल भी नहीं,,,, ईनके पति बैंक कर्मचारी हैं दिनभर ऑफिस के काम में लगे रहते हैं उनके लिए समय ही नहीं निकलने और तुम तो देख ही रहे हो अपनी आंख से की जवानी से भरी हुई औरत को पैसे से ज्यादा किस चीज की जरूरत ज्यादा रहती है और वही जरूरत इनके पति पूरा नहीं कर पा रहे हैं,,,,(अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला तो उसकी मां गुस्से से उसे आंख दिखाने लगी,,,, अंकित की बात सुनकर वह ड्राइवर भी एकदम से खुश होता हुआ बोला)
तुम बिल्कुल सही कह रहे हो औरत को इस उम्र में सबसे ज्यादा प्यार की जरूरत होती है ना कि पैसे की इसीलिए तो औरतों के कदम बहक जाते हैं,,,, अब देखो ना मेरी उम्र 40 साल होने को आ गई लेकिन मैंने एक भी दिन अपनी पत्नी को छोड़कर कहीं गया नहीं हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि ऐसे में कोई दूसरा फायदा उठा सकता है,,,,।
तो तुम्हें क्या लगता है कि मैं फायदा उठा रहा हूं,,,।
नहीं नहीं मैं यह बात नहीं कह रहा हूं सर जी मैं तो अपना तजुर्बा बता रहा हूं उनके पति को हमेशा इनका साथ रहना चाहिए उनकी जरूरत को पूरी करना चाहिए अगर ऐसा होता तो शायद यह भी तुम्हारे साथ यहां ना आती।
ऐसा मत कहो मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं कि उनके बिना रह नहीं सकता और यहां पर इन्हें प्यार करने के लिए ही तो लाया हूं,,,।
पर इन्होंने अपने पति से बहाना कौन सा मारा।
औरतों के पास बहानों की कमी होती है क्या,,,, इन्होंने कह दी की कॉलेज का काम है तीन-चार प्रोफेसर लोग दूसरे कॉलेज में जा रहे हैं बस यही कहकर घर से निकल गई है तीन दिन हो गया है जी भर कर मजा ले रही है,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित एकदम से बेशर्म बनता हुआ यह जानते हुए भी कि वह ड्राइवर कर की मिरर में उन दोनों को देख रहा है वह एकदम से अपनी मां की चूची पर हाथ रख कर दबा दिया सुगंधा एकदम से चौंक गई और अंकित का हाथ हटाने लगी लेकिन ड्राइवर नहीं अंकित की हरकत को देख लिया था और एकदम से मस्त हो गया था,,, ड्राइवर की हालत खराब हो गई थी उसे इस समय अंकित से बहुत जलन हो रही थी कि इतनी खूबसूरत औरत उसके हाथ में थी जिसके साथ वह जब चाहे तब मजा ले सकता था मिरर में देखकर ड्राइवर ने सुगंधा की चूचियों के आकार का अंदाजा लगा लिया था और मन ही मन गर्म आहे भर रहा था,,,, सुगंधा के हाथ हटाने से अंकित फिर से अपने हाथ को उसकी चूची पर रखकर दबाने लगा सुगंधा बार-बार ऐसा कर रही थीऔर अंकित बार-बार अपनी हरकत को दोहरा रहा था,,,,, ड्राइवर की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सुगंधा शर्मा रही थी उसे उस ड्राइवर के सामने अंकित किस तरह की हरकतें अच्छी नहीं लग रही थी। अंकित के बताएं अनुसार वह दोनों यहां पर 3 दिन से थे और 3 दिन से मजा ले रहे थे इसका मतलब साफ था कि वह औरत भी मजा लेने के उद्देश्य से ही यहां पर आई थी लेकिन इस समय कर के अंदर उसके सामने वह शर्मा रही थी इसीलिए वह उसकी शर्म दूर करने के लिए बोला।)
Ankit car me apni ma ki chuchiyo se khelta hua
कोई बात नहीं तुम दोनों कुछ भी कर सकते हो यहां कोई बोलने वाला नहीं है और वैसे भी कार के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।
लो सुन ली कार के अंदर हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,, इन्हें बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा और वैसे भी कर के अंदर शीशा चढ़ा हुआ है बाहर से किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।
नहीं यहां कुछ भी नहीं मुझे शर्म आती है,,,।
शर्माइए नहीं मैडम,,, बाहर से आने वाले लोग अक्सर कर के अंदर यह सब करते ही रहते हैं और हम लोगों को इस बात का बुरा भी नहीं लगता क्योंकि यहां पर आते ही इंजॉय करने के लिए इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो जब तक हम उसे जगह पर पहुंचेंगे तब तक तुम दोनों जन का काम खत्म हो जाएगा,,,।
अरे वह ड्राइवर साहब ड्राइवर हो तो आपके जैसा,,,(ऐसा कहने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया उसके लाल-लाल होठों पर अपने हाथ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा सुगंधा शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी वह अनजान ड्राइवर के सामने यह सब नहीं करना चाहती थी लेकिन अंकित मान ही नहीं रहा था,,, जब अंकित को भी लगने लगा की सुगंधा मानने वाली नहीं है इसलिए वह उस ड्राइवर के सामने ही बोला,,)
क्या करती हो मेरी जान ड्राइवर साहब से शर्माने की जरूरत नहीं है हम कहां अपने शहर के अंदर यह सब कर रहे हैं कि कोई देख लेगा यह शहर यह जगह हम दोनों के लिए अनजान है यहां पर हम दोनों को कोई नहीं जानता इसलिए तो यहां खुलकर मजा लेने के लिए आए हैं,,,।
यह बिल्कुल ठीक कह रहे हैं यहां परआने वाले लोग इसीलिए खुलकर यहां मजा लेते हैं क्योंकि यहां पर उन्हें कोई पहचानता नहीं है कोई जानता नहीं है तुम पहले नहीं हो पहले भी कई लोग मेरी कार के अंदर मजा ले चुके हैं बस जाते समय 50 100 ज्यादा दे देते हैं,,,, वह लोग भी खुश हो जाते हैं और हम लोग भी खुश हो जाते हैं,,,,,।
इन्हें भी ₹100 दे देंगे,,,,।(इतना कहने के साथ ही फिर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची दबाना शुरू कर दिया)
क्या कर रहे हो अंकित,,,,,,,,।
वही जो हमें करना चाहिए थोड़ी देर में हम लोग वहां पर पहुंच जाएंगे लेकिन कर के अंदर चुदाई करने का जो मजा है वह नहीं ले पाएंगे क्यों ड्राइवर साहब सही कह रहा हूं ना,,,।
बिल्कुल सही कह रहे हो कार के अंदर चुदाई करने का अपना अलग ही मजा है मैं भी कभी खबर अपनी बीवी को कार में बिठाकर ऐसे ही निकल पड़ता हूं और एक अच्छी सी जगह देखकर खड़ी कर देता हूं और फिर हम दोनों शुरू हो जाते हैं क्योंकि काले रंग के शीशे के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देता अक्सर हम लोग ऐसी जगह पर कर खड़ी करते हैं जहां पर लोगों का आना-जाना कुछ ज्यादा ही रहता है जैसे सब्जी मार्केट किसी कपड़े की दुकान के सामने ऐसी जगह पर कुछ ज्यादा ही मजा आता है तुम्हें भी इस तरह का मजा लेना चाहिए इसमें कोई हैरत नहीं है। (कार का ड्राइवर जानबूझकर उन दोनों को इस तरह की बातें करते हो गुस्सा आ रहा था ताकि वह दोनों उसकी आंखों के सामने ही चुदाई का खेल शुरू कर दे और वह अपनी आंखों से देख कर मस्त हो जाए। उसके तन बदन में खुद गुदगुदी हो रही थी उत्तेजना से उसका भजन कंपन कर रहा था,,, वह तो चाहता था कि कब वह उस औरत की नंगी चूचियों के दर्शन करें उसकी नंगी जवान को अपनी आंखों से देखें,, जबकि उसकी कार में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था,,,,, उसे ड्राइवर की बात को सुनकर अंकित भी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी मां से बोला,,,)
तुम ही सोचो जरा इसमें कितना मजा आता है,,,, भूल गई दर्जी और होटल का वेटर उन दोनों की हालत क्या हो गई है बस वैसा ही मजा हमें इस मोटर गाड़ी में लेना है,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा गहरी सांस लेते हुए कुछ देर तक सोचने लगी वह भी जानती थी कि अनजान लोगों के सामने मजा लेने में अत्यधिक उत्तेजना और संतुष्टि का एहसास होता है क्योंकि दो बार इसका एहसास उसे हो चुका था दो बार वह अनजान लोगों के साथ मजा ले चुकी थी और उन पर अपनी जवानी का जलवा बिखेर चुकी थी अब शायद बारी था ड्राइवर का उसकी हालत देखकर ही पता चल रहा था कि वह कितना ज्यादा उत्सुक था आगे का नजारा देखने के लिए,,,, ऐसा नहीं था कि अपने बेटे की हरकत से उसे मजा नहीं आ रहा था उसे भी अत्यधिक आनंद की अनुभुति हो रही थी,,, उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी। कुछ देर सोचने के बाद सुगंधा खुद एकदम से अपने बेटे के चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले ली और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगी,,,,, मिरर में यह सब एकदम साफ दिखाई दे रहा था और ड्राइवर ने मिरर को थोड़ा व्यवस्थित भी कर लिया था ताकि पिछले सीट का सारा नजारा उसे बड़े आराम से दिखाई दे सके सुगंधा की हरकत से तो ड्राइवर की हालत एकदम से खराब हो गई, उसकी ईस हरकत से ड्राइवर समझ गया था कि वाकई में यह औरत कितनी प्यासी है तभी तो अपना शहर छोड़ कर इधर मजा लेने आई है,,,,, ड्राइवर की हालत खराब हो रही थी वह एक किनारे से धीरे-धीरे गाड़ी आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह का नजारा उसकी पिछली सीट पर दर्शाया जा रहा है उसे देखते हुए कभी भी उसका एक्सीडेंट हो सकता है इसलिए वह एहतियात के तौर पर गाड़ी धीरे चल रहा था।
अंकित मौके की नजाकत को समझते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूचियों पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे दबाना शुरू कर दिया और अपनी मां के लाल लाल होठों पर रस पीना शुरू कर दिया,,,, मां बेटे दोनों मोटर गाड़ी की पिछली सीट पर बैठकर मस्त हो गए थे,,, इस शहर का नजारा बेहद खूबसूरत था अक्सर लोग मोटर गाड़ी में बैठकर बाहर की तरफ देखते हुए खूबसूरत नजारे का आनंद लेते हैं लेकिन इस समय मां बेटे के पास बिल्कुल भी समय नहीं था क्योंकि बाहर के खूबसूरत नजारे से थी अत्यधिक आनंदित कर देने वाला नजारा अंदर खुद दोनों दर्शा रहे थे। ड्राइवर बार-बार मिरर में पीछे का नजारा देखकर मस्त हुआ जा रहा था। उससे जब रहा नहीं जाता था तो खुद पीछे मुड़कर देख लेता था,,,, वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत की उम्र थोड़ा ज्यादा थी और लड़के की उम्र कम थी,,,, ड्राइवर दोनों की उम्र के अंदर कोई अच्छी तरह से समझता था दोनों मां बेटे की उम्र की थी लेकिन वह जानता था की मां बेटे इस तरह की हरकत कभी नहीं कर सकते और वह जमाने को देख चुका था उसे मालूम था कि मर्द से ज्यादा औरत इस कदर प्यासी होती है कि वह अपनी मनमानी करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाती है जिसका नमूना वह अपनी ही कार में देख रहा था,,,,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इस उम्र में भी यह जवान लड़का कितना तेज है एक औरत के अंगों से खेलना अच्छी तरह से जानता है इसलिए तो लगातार उसके होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हाथ की उंगलियों को उलझा दिया था सुगंधा के ब्लाउज के बटन खोलने के लिए और जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खोल रहा था वैसे वैसे ड्राइवर की हालत एकदम खस्ता होते चली जा रही थी।
मोटर कार में अद्भुत आनंदित कर देने वाला वासना से भरा हुआ दृश्य दर्शाया जा रहा था ड्राइवर की हालत पतली होती चली जा रही थी घर से निकलते समय वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी मोटर गाड़ी के अंदर एक खूबसूरत जवान औरत और एक जवान लड़का पूरी तरह से बेशर्म होकर एक दूसरे से मजा लेंगे,,, इस समय उसके खुद के आनंद की कोई सीमा नहीं थी वैसे तो ड्राइवर एकदम शरीफ इंसान था लेकिन इस समय जो कुछ भी उसकी कार के अंदर हो रहा था वह उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था,,,,, अंकित देखते-देखते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच दिया और उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद होकर हवा में उड़ने लगे,,, ड्राइवर की तो आंखें फटी की फटी रह गई मिरर में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखकर उसके होश उड़ गए,,,, मिरर में देखकर उसकी उत्तेजना शांत नहीं हो रही थी उसका मन बेकाबू हुआ जा रहा था। इसलिए वह गाड़ी को एकदम धीमे चलते हुए बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था पीछे देखने में से कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था उसने आज तक इतनी गोलाकार लिए हुए मदमस्त कर देने वाली चुचियी नहीं देखा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में दो बच्चों की मां होने के बावजूद ईस औरत की चूची में इतना कसाव और तनाव कैसे बरकरार रह सकता है,,,,, वह भी अपने मन में यह सोच ही रहा था कि अंकित तुरंत अपने मुंह को अपनी मां की चूची पर रखकर उसे पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया यह सब ड्राइवर के लिए अनदेखा अनजाना सा था आज उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था कि कोई ब्लू फिल्म चल रही थी।
ड्राइवर उत्तेजना से ग्रस्त हुआ जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह धीरे-धीरे मोटर गाड़ी को आगे बढ़ा रहा था ताकि उसे मोटर गाड़ी की कहानी किसी से टक्कर ना हो जाए क्योंकि हालात जिस तरह से बने हुए थे निश्चित तौर पर ऐसे में एक्सीडेंट होने का अनुपात बढ़ जाता है और ड्राइवर नहीं चाहता था कि उसका एक्सीडेंट हो। सामान्य तौर पर यह ड्राइवर पैसेंजर के बैठने पर गाड़ी का शिशा खोल देता था, लेकिन आज वह ऐसा नहीं कर पाया था क्योंकि शीशा नीचे करने का मतलब था एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा पर जाना और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था उसकी खुशी सेक्स लाइफ नीरस थी जिसमें कभी कबार ही वह अपनी बीवी के साथ संबंध बना पाता था क्योंकि दिन भर इतनी थकान हो जाती थी कि वह घर जाकर एकदम से थक कर कर हो जाता था और खाना खाकर बिस्तर पर लेट जाता था उसकी ईस हरकत से उसकी बीवी भी परेशान थी,,,, उन दोनों को देखकर कर वह अपने मन में एक तरह का कल्पना भी कर रहा था कि वह जिस तरह से अपने बीवी के साथ पेश आ रहा था उसकी जरूरत को पूरी नहीं कर रहा था हो सकता है कि उसकी बीवी भी किसी जवान लड़के के साथ यह सब करती हो,,, क्योंकि सुगंधा की उम्र लगभग लगभग उसकी बीवी की उम्र जितनी ही थी या हो सकता है दो-चार साल आगे पीछे लेकिन फिर भी दोनों की चाहत एक थी। इसलिए वह देखना भी चाहता था कि अपने पति से प्यार न पाकर एक घरेलू औरत की सहायता तक एक जवान लड़की के साथ मजा लेने के लिए तड़प पड़ती है और वही तड़प इस समय सुगंधा में दिखाई दे रही थी।
कर की सीट पर पीछे कर आराम से टिकाकर वह अपने बेटे से अपनी चूची मर्दन और स्तनपान का भरपूर मजा ले रही थी और यह सब वह ड्राइवर देखकर मस्त हुआ जा रहा था। वह अंकित को देख कर कुछ सीखने की कोशिश कर रहा था अंकित किस तरह से औरत को खुश कर रहा था यह उसके लिए अध्ययन का विषय था।
उसे साफ दिखाई दे रहा था कि एक जवान लड़का अपनी से बड़ी उम्र की औरत या यूं कह लो कि अपनी मां की उम्र की औरत के साथ बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था सब कुछ बड़े आराम से कर रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों से बड़े प्यार से खेल रहा था उसे मुंह में लेकर चूस रहा था दबा रहा था ऐसा सब कुछ कर रहा था जिससे एक औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है जबकि वह खुद अपनी बीवी के साथ आज तक ऐसा नहीं कर पाया था बस जब भी उसका मन करता था चढ़कर उतर जाता था कभी मन हुआ तो ब्लाउज के ऊपर से दबा देता था क्या नंगी चूची को दोनों हाथ में लेकर बस हल्का सा दबा दबा कर मजा लेता था,,,, उसे इस बात का ज्ञान नहीं था कि औरतों की चुची से जी भर कर खेलने पर औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है,,,, कार को धीरे-धीरे चलते हुए वह बार-बार मिरर की तरफ तो कभी नजर पीछे घूमा कर देख ले रहा था,,,, उसे यह भी दिखाई दे रहा था की चूचियों से प्यार से खेलते खेलते, जोर से दबा दे रहा था जिससे सुगंधा की चीज तो निकल जा रही थी लेकिन उसे आनंद भी बहुत आ रहा था जो कि उसके चेहरे के भाव को देखकर पता चल रहा था,,,,।
मां बेटे दोनों कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से चलती कर के अंदर वह दोनों जवानी का मजा लूटेंगे सुगंध को एहसास हो रहा था कि उसका बेटा जहां मौका देखा है शुरू हो जाता है यह भी नहीं दिखता है कि कभी कुछ गड़बड़ हो गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे चलती बस में तो ठीक था कि दोनों का केबिन अलग था जिसमें वह दोनों खुलकर मजा लूट रहे लेकिन करा के अंदर कब कैसे इंसान मिल जाए क्या भरोसा,,,, लेकिन यह भी उसे मालूम था कि अपनी हरकतों से उसका बेटा उसे पूरी तरह से मस्त भी कर देता है जाने अनजाने में ऐसा सुख प्रदान करता है कि इसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। और इस समय भी उसका बेटा ही वही कर रहा था जिसमें सुगंधा को भी मजा आ रहा था,, मदहोशी के इस आलम में बार-बार सुगंधा की नजर और ड्राइवर की नजरों से टकरा जा रही थी पहले शुरू शुरू में तो सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ले रही थी लेकिन इस बात का एहसास उसे भी हो रहा था कि यह जगह उसके लिए बिल्कुल नहीं थी यहां पर उसे कोई जाने वाला नहीं था पहचान वाला नहीं था ना कोई रोकने वाला था ना रोकने वाला था इसलिए वह भी थोड़ी हिम्मत दिखा कर जब से कुछ ड्राइवर से नजर मिलती तो वह ड्राइवर को देखने लग जाती थी इसका असर यह हो रहा था कि ड्राइवर शर्मा कर अपनी नजर को वापस दूसरी तरफ घुमा ले रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित अपने पेट की बटन खोलने लगा यह देखकर सुगंधा हैरान होने लगी वह अपनी आंखों को बड़ी करके अंकित की तरफ देखकर उसे इशारा भी कर रही थी कि यह सब यहां पर मत कर लेकिन वह मुस्कुराता हुआ अपनी मां की एक नहीं सुना होती अपने पेंट की बटन खोलकर पेंट को घुटने तक नीचे खींच दिया मिरर में यह सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,, अभी भी अंकित का लंड उसके अंडरवियर के अंदर केद था जो कि अच्छा खासा उभार बनाया हुआ था,,,, ड्राइवर की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि करा चलाए या कहीं पर रोक दे और यह सब कुछ अपनी आंखों से इत्मीनान से देखें,,,, लेकिन यह हाईवे काफी छोटा था कार कहीं पर भी रोका नहीं जा सकता था इसलिए मजबूरी में उसे चलाना ही था।
सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे जो आपस में ऊपर जाकर मिल जाते थे और एक अद्भुत खूबसूरत दृश्य को उपसाते थे जिसे देखकर वातावरण की खूबसूरती को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता था। वैसे तो मां बेटे को यहां के खूबसूरत नजारे को देखकर एक अद्भुत और अविस्मरणीय प्रवास का आनंद लेना चाहिए था लेकिन इस समय दोनों अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगे हुए थे,,,,, अंडरवियर के ऊपर अपने लंड पर हाथ रखते हुए अपनी मां की तरफ देखकर अंकित बोला,,,,,
देखो जान तुम्हारी जवानी देखकर कैसे खड़ा हो गया है,,,,,(अपनी मां की उम्र को जान कहकर संबोधन करना अंकित को तो बहुत अच्छा लगता था लेकिन ड्राइवर एकदम हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक जवान लड़का अपनी बड़ी उम्र की औरत के साथ इतना खुलकर कैसे मजा ले सकते हैं ऐसा लग ही नहीं रहा था कि दोनों की उम्र में काफी अंतर है ऐसा लग रहा था कि दोनों हम उम्र ही हैं,,,, ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि वाकई में दोनों कितने बेशर्म है लेकिन उनकी बेशर्मी से ड्राइवर को भी कुछ सीखने को मिल रहा था कुछ देखने को मिल रहा था जिसका उपयोग अपने जीवन में करके अपनी नीरस जिंदगी को रंगीन बना सकता था। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की बेशरम बन चुकी थी उसे यह सब करने में भी अच्छा लगने लगा था इसलिए बिना कुछ सोचे समझे अपना हाथ अपने बेटे के अंडरवियर के उभार पर रखकर हल्के हल्के सेहराने लगी हालांकि वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन उसकी निगाहें सब कुछ बयां कर रही थी मिरर में यह सब देखकर ड्राइवर की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह धीरे से मिरर को थोड़ा सा और नीचे की तरफ कर दिया ताकि पिछली सीट का पूरा नज़ारा वह देख सके,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था की सुगंधा अपनी हथेली को उसके अंडरवियर पर रखकर हल्के-हल्के सहला रही थी और अंकित एकदम मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, यह सब देखकर ड्राइवर हैरान भी था और देखते ही देखते सुगंधा दोनों हाथों से उसके अंडरवियर को पकड़ कर खींचने लगी,,, अंकित भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी गांड को सीट पर से थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और सुगंधा अंडरवियर को तुरंत नीचे की तरफ खींचकर उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दी,,,, अंडरवियर की कैद से आजाद होते ही अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर सुगंधा की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसके चेहरे की प्रसन्नता और उत्तेजना ड्राइवर को एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसकी उत्तेजना और आंखों की चमक देखकर ड्राइवर को हैरानी हो रही थी और अंदर ही अंदर उसे एक दुख भी हो रहा था। यह दुख उसे अपनी बीवी को लेकर था।
तभी मिरर में उसने देखा की सुगंधा अपने हाथ को आगे बढ़ाकर अंकित के लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दी थी और मुस्कुरा रही थी,,,,,, उसकी मुस्कुराहट देखकर अंकित ड्राइवर से बोला,,,,।
देख रहे हो ड्राइवर साहब यही फर्क होता है जवान लड़कियों से और दो बच्चों की मां से मजा लेने में अभी उनकी जगह कोई जवान लड़की होती तो इस तरह की हरकत नहीं करती हाथ से नहीं पकड़ती लेकिन देख रही हो तो बच्चों की मां को मेरे बिना कुछ बोल ही वह अपने हाथ में लेकर कैसे खेल रही है मेरे लंड से,,,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर पीछे मुड़कर देखे बिना नहीं रह सका और जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सुगंधा के हाथ में उसका लंड देखकर उसकी भी आंखें फटी की फटी रह गई उसे एहसास होने लगा था कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था वह कुछ पल के लिए अपनी नजर अंकित के लंड से हटा ही नहीं पा रहा था,,,, वह उसे देखता ही रह गया था,,, तभी सुगंधा की बात उसके कान में पड़ी जो उसकी शंका को हकीकत का स्वरूप दे रही थी वह अपनी कल्पनाओं के घोड़े को बड़ी तेजी से भगा भी रहा था वह सुगंधा के मुंह से सुना वह अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोल रही थी।
ऐसा मोटा तगड़ा लंड हो तो कौन सी औरत दीवानी नहीं हो जाएगी कौन सी औरत इसे पकड़ कर खेलेगी नहीं,,,,।
(सुगंधा की बात उसके दिल पर हथौड़े की तरह चल रही थी वह अपनी बीवी को लेकर कल्पना कर रहा था और उसके मन में चल रही शंका को एक हवा से मिल गई थी सुगंधा की बात सुनकर वह अपने मन में यही सोच रहा था कि वाकई में वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पा रहा है तो उसकी बीवी भी किसी जवान लड़की को ढूंढ कर इस तरह से मजा लेती होगी वह तो दिन भर इस तरह से गाड़ी चलाता है अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए लेकिन इस बीच उसे यही गलती हो जाती है कि वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पाता और हो सकता है कि उसकी बीवी भी इस औरत की तरह जवान लड़के में अपना सुख ढूंढ़ रही हो और अगर एक बार जवान लड़के का चस्का लग गया तो वह उसे कभी भाव भी नहीं देगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिल बैठ जा रहा था वह अपनी बीवी के बर्ताव के बारे में सोचने लगा कि वाकई में जब वह अपने घर पहुंचता है तो उसकी बीवी भी ऐसा कुछ पहन नहीं करती कि जैसे उसका मनु उत्तेजित हो जाए और वह अपनी बीवी से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़प उठे वह उसे खाना पर उसका आराम से करवट लेकर सो जाती है यह सब सोच कर उसके शंका के बदले गिरने लगे थे वह अपने मन में यही सोचने लगा था कि उसकी बीवी भी इसी तरह से जवान लड़की के साथ मजा लूट रही होगी। वह अपने मन में यह सब सो रहा था कि इसी बीच मिरर के अंदर सुगंधा नीचे झुकती हुई दिखाई दी और अगले ही पल माध्यम से झुक गई ड्राइवर को एहसास हो गया कि वह क्या करने के लिए नीचे झुकी है और वह मिरर में ना देख कर पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगा तो हैरान रह गया। वह पूरा का पूरा लंड अपने मुंह में लेकर चूस रही थी।
Car me driver k samne maja lete huye
ड्राइवर हैरान परेशान हो गया उसके माथे पर से तो पसीना टपकने लगा उत्तेजना और शंका में उसका दिल बैठ जा रहा था पिछली सीट पर जो कुछ भी हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश और मस्त कर दिया था लेकिन उसे नजारे से वह अपनी बीवी के बारे में कल्पना करने लगा था,,,, वह अपने मन में सोच रहा था किस तरह की हरकत तो उसकी बीवी ने आज तक उसके साथ नहीं की थी,,,,, अभी वह यह सब सो ही रहा था कि तभी अंकित ड्राइवर से बोला,,,)
देख रहे हो ड्राइवर साहब इस उम्र की औरत की प्यास बुझती नहीं है इन्होंने अपने पति के साथ इस तरह की हरकत कभी नहीं की कभी भी उसके लंड को हाथ में लेकर हिलाई नहीं है ना तो मुंह में लेकर चूसी लेकिन यहां देखो बिना कुछ बोले हाथ में लेकर खेल भी रही थी और मुंह में लेकर चुस भी रही है,,,।(अंकित की बात सुनकर अपने माथे से रुमाल से पसीना साफ करते हुए ड्राइवर बोला)
देख रहा हूं,,,।
और हां मैंने तो कभी देखा नहीं लेकिन इन्होंने ही खुद बताया कि उनके पति का लंड मेरे लंड से आधा भी नहीं है और पतला है,,,, और अब आप ही सोचो भला पतले और छोटे लंड से इस औरत की प्यास बुझ पाएगी कभी,,,, बड़ी-बड़ी चूचियां बड़ी-बड़ी गांड गुलाबी बर मुझे नहीं लगता कि इनका पति ने खुश कर पाता था तभी तो यह मेरे पास आई है,,,, और हां ड्राइवर साहब इस उम्र की औरतें मोटे और लंबे लंड को ज्यादा पसंद करती है और खास करके जवान लंड को जो इनकी बुर में जाकर बुर का भोसड़ा बना दे देख रहे हो कैसे चूस रही है मलाई कोन की तरह,,,,,आहहहहह मैं तो पागल हो जाऊंगा वाकई में इस उम्र की औरत कुछ ज्यादा ही मजा देती है बिल्कुल भी नखरे नहीं करती,,,ऊमममममम पूरा गले तक लेकर चूसो मेरी जान,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,,आहहहहहह बहुत मजाआ रहा है,,,,,।
(अंकित कि ईस तरह की बातें ड्राइवर को एकदम से परेशान कर रही थी मजा तो उसे भी आ रहा था लेकिन अपनी बीवी के बारे में कल्पना करके वह हैरान हो गया था,,,,, वाकई में दो बच्चों की मां यह औरत उसे पागलों की तरह प्यार कर रही थी इस तरह का मजा तो आज तक उसकी बीवी ने उसे कभी भी नहीं दी,,, ड्राइवर इस बारे में बहुत कुछ सोच रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि दुनिया के हर मर्द कोई इसी तरह का सुख चाहिए भले ही वह किसी भी उम्र का हो लेकिन खुद की बीवी इस तरह का सुख अपने पति को क्यों नहीं दे पाती बल्कि दूसरे मर्द को जी जान लगाकर हर एक सुख देती है जिससे वह पागल की तरह उसके आगे पीछे घूमता रहता है अब इसमें गलती किसकी है दुनिया की मर्दों की जो घर की जवाबदारी निभाने के लिए घर से बाहर निकाल कर मजदूरी करते हैं या फिर इस तरह की औरतों को जो पति को तो इस तरह का सुख नहीं देती लेकिन अपने आशिकों को खुलकर मजा देती है अगर अपने पति को किस तरह का आनंद दे तो भला पति घर पर पहुंच कर बीवी से प्यार क्यों ना करें। बीवी इस तरह का प्यार नहीं करती तभी वह घर जाकर खाना खाकर सो जाता है उसे एहसास तक नहीं होता कि उसके बिस्तर पर एक खूबसूरत औरत सोई है जिसे प्यार चाहिए और जिसका फर्ज बनता है कि अपने पति को प्यार देना चाहिए लेकिन ऐसा दोनों के बीच कुछ भी नहीं होता। ड्राइवर के दिमाग में यही बातें चल रही थी कि इन सब में गलती किसकी है मर्द की है या औरत की,,,,,, उसे सबसे ज्यादा गलती औरत की दिखाई दे रही थी क्योंकि पिछली सीट पर वही औरत थी जो घर पर अपने पति से प्यासी थी अपने घर पर अपने पति से प्यार नहीं पाती लेकिन बाहर अपने आशिक के साथ खुलकर मजा लूट रही थी और उसका आशिकों से मजा भी दे रहा था शायद इसका कारण भी यही था कि वह औरत खुद खुलकर उस मर्द को आनंद कर रही थी जो कि अपने पति के साथ वह ऐसा कुछ भी नहीं करती थी वह इस तक में रहती थी कि उसका पति सिर्फ उससे प्यार करें उसे संतुष्ट करें शायद वह औरत इस बात को भूल जाती है कि शारीरिक संबंध मर्द और औरत के बीच आपसी एहसास को दर्शाता है ना कि किसी एक की जिम्मेदारी को दर्शाता है दोनों को चाहिए कि दोनों आपस में खुलकर प्यार करें ताकि दोनों में किसी बात की कमी दिखाई ना दे लेकिन मामला पूरी तरह से उल्टा हो चुका था।
गाड़ी को धीरे चलते हुए ड्राइवर बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था अंकित के चेहरे पर बदलते भाव को देख ले रहा था और उसे औरत की बेशर्मी को देख ले रहा था जो इस समय अपने बेटे की उम्र के लड़के को संपूर्ण सुख देने के इरादे से उस पर टूट पड़ी थी,,,, आधा सफर पूरा हो चुका था आधा सफर बाकी था और दोनों का भी आधा सफर बाकी रह गया था जिसे पूरा करने के लिए सुगंधा धीरे से अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल दी और गहरी गहरी सांस लेने लगी अंकित बिना शर्माए अपनी मां को सिर पर थोड़ा सा पीछे की तरफ झुका दिया जिसे सिर्फ अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा लेकिन भारी भरकम गांड के नीचे दबे होने की वजह से उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठ नहीं पा रही थी जिसे सुगंधा खुदाई अपने हाथों से ऊपर की तरफ खींच मिलेगी यह सब ड्राइवर को मिरर में दिख रहा था उसकी गोरी गोरी चिकनी टांगों को देखकर ड्राइवर कमाई गया था और जैसे ही साड़ी जांघों तक आई तो उसके होश उड़ गए,,,, शायद वह पहली बार किसी गोरी औरत को इस अवस्था में देख रहा था और अपने मन में बोल भी रहा था कि बाप रे अपनी खूबसूरत और गोरी औरत को तो आज वह पहली बार देख रहा है घर में उसकी बीवी थोड़ा सा दबे रंग की थी इसलिए उसे नहीं मालूम था की गोरी औरत नंगी होने के बाद कैसी दिखती है वह सिर्फ कल्पना किया करता था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने उसकी कल्पना साकार हो रही थी देखते-देखते सुगंध अपनी साड़ी को कमर तक उठा रही थी और साड़ी के अंदर उसकी ब्लू रंग की चड्डी साफ दिखाई दे रही थी,,,,, सुगंधा की ब्लू रंग की चड्डी ड्राइवर की आंखों की चमक को बढ़ा रही थी क्योंकि उसकी बीवी साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनती थी साड़ी के अंदर वह नंगी ही रहती थी,,, पहले तो खुद ड्राइवर को भी यह सब सामान्य लगता था लेकिन आज अपनी पिछली सीट पर एक औरत को ब्लू रंग की चड्डी पहने हुए देखकर उसे एहसास होने लगा कि उसके जीवन में कितनी बड़ी कमी है वह भी अपनी बीवी को इसी अवस्था में देखना चाहता है,,, क्या हो सकता है कि अपने आशिक के पास जाने से पहले वह भी इस तरह की चड्डी पहन लेती हो जिसे उतार कर उसका आशिक एकदम मस्त हो जाता होगा यह सब ख्याल ड्राइवर को उत्तेजना के साथ-साथ परेशानी भी दे रही थी।
सुगंधा सीट पर लेट चुकी थी और अंकित अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां की चड्डी को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगा था एक बार फिर से सुगंध अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित बिना देर की अपनी मां की चड्डी को उसके बदन से अलग कर दिया,,, अपनी मां की चड्डी को बगल में रखते हुए वह बोला,,,।
ड्राइवर साहब एक बात मानना पड़े इस उम्र की औरत की चड्डी अपने हाथों से उतारने में जो मजा मिलता है वाकई में वह मजा किसी और चीज में नहीं है,,, तुम भी कभी ऐसा मजा लेना बाहर की औरत के साथ दिल खुश हो जाएगा,,,,(अपने बेटे की इस तरह की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह उत्तेजना की जान शिखर पर पहुंच चुकी थी अब उसे ड्राइवर से बिल्कुल भी शर्म नहीं लग रही थी इसलिए वह अपनी एक टांग को एकदम से फैला कर ड्राइवर की सीट के बगल में कर दी एकदम उसके चेहरे के पास ड्राइवर की तो हालत खराब होने लगी एक खूबसूरत औरत की टांग अपने सर के पास महसूस करके वह नजर पीछे घूम करके देखा तो सुगंध अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी,,,, ड्राइवर की हालत और ज्यादा खराब होने लगी ड्राइवर नजर पीछे घूम कर आश्चर्य से फटी आंखों से इस खूबसूरत नजारे को देख रहा था और सुगंध भी अपनी हथेली को अपनी बुर पर रगड़ते हुए अपनी उंगलियों को खोल दे रही थी ताकि उंगलियों के बीच से वह ड्राइवर उसकी बुर के दर्शन कर सके ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि उसकी पूरे दिन चिकनी थी बाल का रेशा तक नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी क्रीम लगाकर साफ की हो,,,,,,, सूरज एकदम से अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को उसकी बुर से हटाते हुए उसकी चिकनी बुर को देखकर उसकी तारीफ करते हुए बोला,,,।
आहहहहह क्या मस्त बुर है एकदम कचोरी की तरह खुली हुई एक जवान लड़के को और क्या चाहिए,,,,, देख रहे हो ड्राइवर साहब ऐसी चिकनी बुर देख कर तो मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाए,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर नजर पीछे घूमाकर नजर भरकर सुगंधा की बुर को देखने लगा,,,, ड्राइवर की आंखों की चमक बता रही थी कि वह कितना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था उसकी उत्तेजना को देखकर अंकित बोला,,,)
मुझसे मिलने के पहले यह अपनी बर के सारे बाल साफ करने की क्रीम लगाकर और घर पर बालों वाली बुर लेकर घूमती रहती है,,,,, हम लड़कों को अपना गुलाम बनाने के लिए औरतों को ढेर सारा होना रहता है मैं तो पागल हो जाता हूं इसकी चिकनी बुर देखकर,,,(अंकित कि ईस तरह की बात सुनकर ड्राइवर एकदम हैरान हो जाता है यह सोचकर मजबूर होने के लिए की यह सब वाकई में क्या है उसने तो अपनी बीवी की बुर को चिकनी होते हुए कभी नहीं देखा था हमेशा उसके बाल के गुच्छे बुर पर दिखाई देते हैं वह कभी क्रीम लगाकर अपनी बुर को साफ नहीं की थी या ऐसा भी हो सकता है कि अपने आशिक से मिलने से पहले वह भी क्रीम लगाकर अपनी बर के बाल साफ कर देती हो अगर ऐसा करती भी होगी तो उसे कहां पता चलने वाला है दो-तीन महीने में एकाद बार तो वह अपनी बीवी की बुर को देखता है,,, ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह अपनी बीवी की चिकनी बुर को देखा हो उस पर हल्के हल्के बाल रहते हैं,,,, अपने मन में ऐसा सोच ही रहा था कि कभी उसे ख्याल आया कि एक बार वह अपनी बीवी की बुर पर हल्के हल्के बाल देखा था लेकिन उस समय उसे कुछ समझ में नहीं आया वह सामान्य बना रहा लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देखकर उसे विश्वास होने लगा था कि उसकी बीवी का भी चक्कर किसी जवान लड़के के साथ है वह भी उससे मिलने से पहले अपनी बुर के बाल साफ कर लेती होगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिमाग खराब हुआ जा रहा था और इसी बीच, अंकित अपनी मां की टांगों के बीच झुकता हुआ उसकी बुर पर अपने होठ रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,, ड्राइवर सामने देखने में व्यवस्था लेकिन अंकित की हरकत से उसकी मां के मुंह से एकदम से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी।
सहहहहह आबहहहहह मेरेराजा,,,,
(इतना सुनते ही ड्राइवर अपनी नजर पीछे घूमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए अंकित उसे औरत की बुर को चाट रहा था पागलों की तरह जीभ डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था ड्राइवर यह सब देखकर एकदम से हैरान हो गया उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था उसने सिर्फ सुन रखा था कि यह सब भी होता है लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देख रहा था और इस बात से और ज्यादा हैरान हो रहा था कि उसे लड़के की हरकत से पिछली सीट पर टांगे फैलाए औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, यह देखकर ड्राइवर हैरान था यह कैसा खेल है भला एक जवान लड़का एक औरत की बुर को कैसे चाट सकता है जहां से वह पेशाब करती है क्योंकि आज तक ऐसा उसने कभी नहीं किया था,,,, और नहीं कभी इस बारे में सोचा था क्योंकि उसे भी बड़ा अजीब लगता था सोचकर ही लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह यह सब क्या देख रहा है। जिस कार्य को करने में उसे घिन्न आता था और उसने आज तक ऐसा काम किया भी नहीं था इस कर को यह जवान लड़का पागलों की तरह कर रहा था और उसकी हरकत से वह औरत मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि भला इस तरह की हरकत से एक औरत इतना आनंदीत कैसे हो सकती है,,,, तभी ड्राइवर के कानों में फिर से सुगंधा के आनंदित होने की सरकारी की आवाज सुनाई देने लगी,,,)
सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,ऊमममममममम ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से चाटो,,,,ऊममममम पूरी मलाई चाट जाओ,,ओहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर देगा,,,,,,।
(सुगंधा की गरमा गरम सिसकारी और उसकी मदहोशी भरी बातें सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन अपनी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था उसे देखकर इस कार्य को करने में औरत को कितना मजा आता है,,, उसने तो आज तक अपनी औरत के साथ ऐसी कोई हरकत किया नहीं था लेकिन उसे हल्का-हल्का याद आ रहा था कि एक बार शुरू शुरू में जब उसके कोई औलाद नहीं थे तब उसकी औरत उसके ऊपर चढ़ने की कोशिश की थी अपनी भारी भरकम गांड को उसके चेहरे पर रखने की कोशिश की थी लेकिन उसने उसे धक्का देकर हटा दिया था क्योंकि उसकी हरकत उसे पसंद नहीं थी उसे समय तो वह अपनी बीवी की तरफ से इसे सामान्य हरकत ही समझ रहा था लेकिन आज सुगंधा की हरकत और उसकी हालत को देखकर उसे एहसास होने लगा था कि उसकी औरत भी उसके साथ शायद इसी तरह का सुख लेना चाहती थी इसी तरह का मजा लेना चाहती थी और वह मुझे नहीं बोल पा रही थी तो खुद ही अपनी बुर को उसके होठों पर रखना चाहती थी जिसे वह हटा दिया था,,,,, बरसों पहले हुई इस हरकत के बारे में आज सोचकर ड्राइवर हैरान को जा रहा था उसे एहसास हो रहा था कि उसकी औरत भी इस तरह का सुख भोगने चाहती थी और उसने कभी ऐसी हरकत को अंजाम नहीं दिया था तो ऐसा भी हो सकता है कि इस तरह का सुख वह अपने आशिक से प्राप्त करती हो और और अपनी पिछली सीट पर जवान लड़के की हरकत को देखकर उसे यकीन हो गया था कि लड़के इस तरह की हरकत करने से बिल्कुल भी बाज नहीं आते उन्हें भी शायद यह सब करने में मजा आता है,,,, उसकी बीवी की भी बुरे कोई आशिक चाट रहा होगा उसे सुख दे रहा होगा तभी तो उसके बाद से उसने कभी भी अपने मन की इच्छा जाहिर नहीं होने दी थी। यह सब सो कर ड्राइवर के माथे से पसीना टपकने लगा था और पिछली सीट पर घमासान मचा हुआ था अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था और सुगंधा दोनों हाथ से अपने बेटे के सर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबाई हुई थी,,,, तभी सुगंधा की आवाज बड़ी जोर से आने लगी,,,)
ओहहह मेरे राजा मेरे को गई मेरा होने वाला है मेरा निकलने वाला है मैं जा रही हूं मेरे राजा जोर-जोर से चाट,,,,(उसका इतना कहना था कि ड्राइवर पीछे नजर घुमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए सुगंधा की बुर से मदन रस के पिचकारी फूट पड़ी थी जो अंकित के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी थी ड्राइवर पहली बार किसी औरत को इस तरह से झड़ते हुए देख रहा था उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पूरी तरह से उत्तेजना से मदहोश हो चुका था मस्त हो चुका था उसका लंड भी खड़ा हो चुका था इस तरह के कड़कपन का एहसास उसे कभी पहले नहीं हुआ था जैसा आज हो रहा था)
बाप रे तुमने तो मेरे चेहरे को गीला कर दी,,,,(अपने मुंह को अपनी मां की बुर से हटाते हुए अंकित बोल तो ड्राइवर उसके चेहरे को देखने लगा और मुस्कुरा दिया वाकई में सुगंधा के बुरे से निकलने वाली पिचकारी उसे भिगो दी थी अंकित अपनी मां के पेटीकोट से ही अपने चेहरे को साफ करने लगा,,,,, ड्राइवर को लग रहा था कि झड़ने के बाद दोनों का काम खत्म हो चुका था लेकिन तभी सुगंधा अपनी बर को फिर से अपनी हथेली से मसलते हुए बोली)
चला जा मेरे राजा डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में बुझा दे मेरी प्यास,,,,आहहहह बिल्कुल भी देर मत कर तू सच कह रहा था कार के अंदर कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,,।
(सुगंधा की बात सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि दो बच्चों की मां अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे की उम्र के लड़के से मिन्नते कर रही थी,,,, और घर पर अपने पति को ऐसा सुख कभी नहीं देती होगी जो एक जवान लड़के को दे रही थी,,,,, ड्राइवर के मन में दुख हो रहा था कि एक औरत इस उम्र मे पहुंचकर अपनी खुशियों का अपनी जरूरत का कितना ख्याल रखती है कि अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए अपने पति से बेवफाई करके अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ इस कारण आती है अपनी जरूरत को पूरा करती है अपनी इज्जत उसे देती है और एक मर्द जो अपने घर की जरूरत को पूरा करते-करते मर जाता है वह कभी भी अपने सुख को इस तरह से बाहर की औरतों में नहीं ढूंढता,,,, और अगर ढूंढता भी होगा तो इस तरह से बेशर्म तो नहीं बन जाता जिस तरह से यह औरत अनजान मर्द के सामने खुलकर मजा लूट रही है और वह भी अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ। अपनी मां की प्यास को बुझाने का चुम्मा अपने कंधे पर लेकर अंकित अपनी पेंट को पूरी तरह से कार के अंदर ही निकाल दिया और कमर के नीचे से नंगा हो गया,,,, ड्राइवर लगातार अपनी नजर को पीछे बनाया हुआ था कभी मिरर में तो कभी खुद पीछे नजर घूमाकर सब कुछ देख रहा था अंकित के लंड को देखकर उसके मन में भी इस बात का एहसास होने लगा कि काश उसका लैंड कितना मोटा और लंबा होता तो वह भी अपनी पत्नी को शरीर सुख अच्छी तरह से दे सकता था और देखते-देखते उसकी आंखों के सामने अंकित अपनी मां की बुर में अपना लंड डाल दिया और उसे अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया।
ड्राइवर को ऐसा था कि काफी देर से लंड खड़ा होने की वजह से और चुसाई करवाने के बाद दो-तीन मिनट में ही उसका पानी निकल जाएगा लेकिन वह हैरान होता चला गया जब धीरे-धीरे समय गुजरने लगा वह अपनी मां की चुदाई बड़े जोरों से कर रहा था उसकी रफ्तार बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी यहां तक कि उसे अपनी गाड़ी के अंदर फच्च फच्च की आवाज बड़ी तेजी से सुनाई दे रही थी,,,और वह ईस बात को जानता था कि ईस तरह की आवाज उस औरत की बुर से ही आ रही थी,,,, इस तरह की आवाज को सुनकर ड्राइवर मदहोश हो रहा था उसे भी एहसास हो रहा था कि वाकई में उसने अब तक अपने जीवन में कितना अच्छा समय सिर्फ थकान के मारे गंवा दिया था अपनी जरूरत को पूरा करने में अपने परिवार की जरूरत को पूरा करने में गवा दिया था जबकि अपनी शारीरीक जरूरत को अनदेखा कर दिया था। अंकित पागलों की तरह अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड बड़ी आराम से उसके गुलाबी छेंद में अंदर तक जाता था और बाहर आ रहा था,,, हर धक्के के साथ सुगंधा के मुंह से आहहहहह आहहहहह की आवाज निकल रही थी यह देखकर ड्राइवर अंदर ही अंदर दुखी हो रहा था कि अपने पति को छोड़कर एक जवान लड़के के साथ मजा लेते हुए कैसी-कैसी आवाज निकाल रही है यह औरत,,,,, काफी देर तक इसी अवस्था में अंकित अपनी मां की चुदाई करता रहा और गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही,,,, अंकित को एहसास हो रहा था कि अब आसन बदलने का समय आ चुका था,,, इसलिए वह धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाला,,,, और खुद सीट पर बैठ गया अपनी टांगें फैला कर,,,।
Car me chudai ka maja lete huye
ड्राइवर यह सब अपनी आंखों से देख रहा था वह देखना चाहता था कि अब क्या होने वाला है उसे लग रहा था कि शायद अंकित का पानी निकल चुका है लेकिन ऐसा नहीं था शायद अंकित के इशारे को उसकी मां समझ गई थी और वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और फिर अपने बेटे की तरफ मुंह करके घूम गई और घुटनों के बाल उसके घुटनों के इर्द-गिर्द अपने घुटनों को रखकर अपनी भारी भरकम गांड को अपने बेटे के लंड पर रखने लगी,,, और देखते ही देखते ड्राइवर की आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड सुगंधा के गुलाबी बुर के अंदर खो गया,,,, और सुगंधा अपने बेटे के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड को पटकना शुरू कर दी,,,, और तब तक पटकती रही जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया,,,, मां बेटे पूरी तरह से फिर से प्राप्त हो चुके थे एक अनजान इंसान के सामने और वह भी चलती गाड़ी के अंदर और यह सब देखकर ड्राइवर भी मत हो चुका था उसे एहसास हो रहा था कि उसने अपने जीवन में कितनी बड़ी गलती कर दिया है अपनी पत्नी की प्यास को ना बुझा कर,,, मां बेटे दोनों अपने कपड़े को दुरुस्त करके बैठ चुके थे और थोड़ी देर में वह स्थान आ चुका था जहां पर आने के लिए उन्होंने कार कों किराए पर लिया था।
दोनों कर से उतर चुके थे और निश्चित की गई रकम के अलावा ₹100 का नोट भी उस ड्राइवर को देने लगे लेकिन ड्राइवर ने लेने से इनकार कर दिया,,, तो अंकित बोला।
क्यों क्या हुआ यह तो आपने पहले ही बता दिया था कि 50 100 लोग ज्यादा देकर जाते हैं तो हम भी ₹100 दे रहे हैं ले लो,,,।
नहीं नहीं मुफ्त में इतना खूबसूरत नजार तुम दोनों जलने दिखाया है वह कभी जिंदगी भर में बोलने वाला नहीं और मुझे यह सब देखकर कुछ सीखने को भी मिला है इसलिए मैं यह ₹100 नहीं ले सकता,,,,,(इतना कहकर वह फिर से अपनी कार में बैठ गया वैसे तो वह रुकना चाह रहा था लेकिन यहां पर कितना समय लगता है इस बारे में मां बेटे दोनों नहीं जानते थे इसलिए उसे जाने के लिए कह दिए थे और वैसे भी उसे ड्राइवर की आंखों के सामने जो काम लीला दोनों ने दिखाया था उसे ड्राइवर को वह दोनों ज्यादा देर तक साथ में नहीं रख सकते थे,,, वह ड्राइवर मुस्कुराता हुआ चला गया था।