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नूपुर और उसके बेटे के बीच अनैतिक संबंध को लेकर सुगंधा बहुत सोच विचार कर रही थी,,, अगर वह मार्केट में नूपुर के साथ उसके बेटे को असली हरकत करते हुए ना देखी तो शायद उन दोनों के बीच मां बेटे के रिश्ते को वह पवित्र ही समझती लेकिन मार्केट की हरकत ने उसे पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। उसे पूरा शक हो चुका था,, की दोनों मां बेटे के बीच कुछ तो जरूर चल रहा है वरना एक बेटा अपनी मां की गांड पर इस तरह से हाथ ना फिराता,,,।
वह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे नूपुर और उसके बेटे के बारे में ही सोच रही थी रात के 12:00 बज चुके थे लेकिन उसकी आंखों से नींद दूर जा चुकी थी,,, उसके बदन पर साड़ी नहीं थी साड़ी उसके बिस्तर से नीचे बिक्री पड़ी थी वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी और पेटीकोट भी उसकी जांघों तक चढी हुई थी,,, उसकी मोटी मोटी केले के तने की तरह चिकनी जांघें डिम लाइट की लाल रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, उसकी हथेली पेंटी के ऊपर उसकी बुर के अस्तित्व को छुपाए हुए थी,,, रह रह कर नूपुर के बारे में सोचते हुए वह अपनी बुर को हथेली में दबोच ले रही थी,,, जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,।
पंखा बड़ी तेजी से चल रहा था और उससे भी ज्यादा तेज सुगंधा के विचार चल रहे थे वह नूपुर के बारे में सोच रही थी,, जब वह नुपुर से मिली थी तब वह खोई खोई रहती थी,,, उदास रहती थी और उसके पति से मिलने के बाद सुगंधा अपने मन में समझ गई थी कि वह किस लिए उदास है लेकिन कुछ दिनों से उसके चेहरे की लालिमा बढ़ती जा रही थी वह काफी खुश मिजाज नजर आती थी और इसका प्रमुख कारण था उसका बेटा जो की छुट्टी के कारण घर आया हुआ था,,,, इस बारे में सोचकर सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी कि वाकई में नूपुर और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है और अपने मन में कल्पना कर रही थी कि नूपुर कैसे अपने बेटे से चुदवाती होगी,,,। किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता नूपुर में थी,,, एक औरत होने के नाते सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि,,, औरत की खूबसूरती क्या होती है,,, नूपुर भी उसकी ही उम्र की थी,,, लंबी कद काठी गोरा बदन,, खूबसूरत चेहरा लाल लाल भरे हुए होंठ बड़ी-बड़ी चूचियां नितम्बो का आकार भी एकदम गठीला,,, चलने पर गांड की दोनों फाके बड़े-बड़े तरबूज की तरह आपस में टकराती थी,,, और देखने वालों की हालत खराब हो जाती थी सब कुछ तो था नूपुर में और भला एक जवान लड़का कैसे इतनी रसमलाई जवान औरत के पीछे लट्टू ना हो जाए भले ही वह उसका बेटा क्यों ना हो,,,,,,, राहुल भी तू उसके बेटे की तरह एकदम जवान था लंबी कद काठी और चौड़ी छाती ,,,,, नूपुर अपने बेटे की चोडी छाती में पूरी तरह से अपनी अस्तित्व को छुपा लेती होगी,,,।
कैसा लगता होगा जब राहुल खुद अपनी मां के बदन से उसके कपड़ों को अलग करता होगा,,, पहले साड़ी उतारता होगा,,, पीछे से उसे अपनी बाहों में भर कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाते हुए मसलते होगा उसकी हरकत पर उसकी मां मजबूत हो जाती होगी उसका खड़ा लंड पीछे से उसकी गांड में चुभता होगा,,,, नूपुर की मदहोशी और ज्यादा बढ़ जाती होगी और उसका बेटा अपने हाथ को उसकी कमर पर रखकर उत्तेजना से उसे दबाते हुए अपनी हथेली को उसकी पेटिकोट के अंदर सरका देता होगा जहां पर उसकी गीली बुर पहले से ही उसका इंतजार कर रही होगी,,,, गीली बुर पर हथेली पहुंचते ही उसका बेटा मदहोश हो जाता होगा और तुरंत अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को हाथों में भरकर उसके मुंह से लगा लेता होगा उसे बड़ी-बड़ी से दबा दबा कर पीता होगा,,,, अपने पति से असंतुष्ट नूपुर अपने बेटे की हरकत से पानी पानी हो जाती होगी,,,, उसका बेटा उसे अपनी गोद में उठाकर नर्म नर्म बिस्तर पर ले जाकर पटक देता होगा उसकी पेटीकोट को उसकी डोरी को खोलकर खींचता होगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा देती होगी और उसका बेटा अगले ही पल उसका पेटिकोट उतार कर उसे पूरा नंगी कर देता होगा और फिर अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो जाता होगा,,,, और फिर राहुल अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदता होगा,,,,
उफफफ,,, कितना मजा आ जाता होगा दोनों मां बेटे को,,,, अपने मन में ही यह सब सो कर सुगंधा पानी पानी हो रही थी और अपनी किस्मत पर रो रही थी कि जहां एक तरफ पति होने के बावजूद भी एक मां अपने बेटे के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर रही थी वहीं दूसरी तरफ वह खुद थी जो पति के न होने के बावजूद भी और घर में एक जवान बेटा होने के बाद भी अपनी जवानी की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रही थी,,,। वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसे अच्छी किस्मत तो नूपुर की थी जो अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी,,, काश उसका बेटा भी उसकी हालत को समझ पाता तो आज वह भी नूपुर की तरह मजे लुटती,,,।
लेकिन इन सब बातों को सोचकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस बह रहा था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी चड्डी को पकड़ कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाई और एक झटके से उसे नीचे की तरफ खींचकर पैरों का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने बदन से अलग कर दी,,, और टेबल पर रखे हुए मोटे बैगन को अपने हाथ में ले ली और उसे मुंह में लेकर थोड़ा सा उसे पर थूक लगना शुरू कर दी जब पूरी तरह से गिला हो गया तो वह अपने दोनों टांगों को खोलकर अपनी गुलाबी छेद पर उसे बैगन को रखकर उसे हल्का-हल्का दबाने लगी,,, बुर की चिकनाहट पाकर मोटा तगड़ा बैंगन बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर घुसने लगा और देखते ही देखते हुआ उसकी गहराई नापने लगा जिसे सुगंधा अपने हाथों से पकड़ कर अंदर बाहर करते हुए चुदाई का सुख भोगने लगी,,,, लेकिन वह जानती थी जिस तरह की प्यास उसके बदन में उठ रही थी वह प्यास बैगन से नहीं बल्कि मर्द के मोटे लंड से बुझने वाली थी,,,, इसलिए थोड़ी ही देर में तृप्त होकर वह उसी हालत में सो गई,,,
सुबह में अंकित की नींद जल्दी खुल गई और सुबह औपचारिक रूप से उसके लंड का तनाव पूरी तरह से चरम सीमा पर था,,, वह केवल चड्डी मे ही सो रहा था,,, और उसकी नजर जैसे ही अपनी चड्डी की तरफ गई तो उसके खुद के होश उड़ गए उसमें अच्छा खासा तुमको बना हुआ था जो कि बडा ही मनभावन लग रहा था,,,। वह चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा,,, लेकिन कभी उसे एहसास हुआ कि घर में किसी भी तरह की आवाज नहीं आ रही थी,,,। और वह समझ गया कि आज उसकी मां को उठने में देर हो गई है,,, अपनी उत्तेजना को देखकर उसका मन मुठ मारने को कर रहा था,,,, और इसीलिए वह अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके आगे वाले भाग को ऊपर की तरफ खींचा और अपने लंड को देखने लगा जो की काफी मोटा और लंबा नजर आ रहा था वह धीरे से उसे पीछे की तरफ खींचकर अपने लंड के दूसरी तरफ ले गया और अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर ऊपर नीचे करके हिलने लगा,,,, मुठ मारने में वह कल्पना का सहारा लेता था और उसकी कल्पना की राजकुमारी नहीं बल्कि महारानी होती थी उसकी मां अपनी मां के बारे में सोचकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाता था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,,।
वह मूठ मारना शुरू कर दिया था और ख्यालों में उसकी मां थी जो कल्पना में अपने हाथों से अपने कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई थी,,, और अपनी होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए खुद घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गई थी और अपने बेटे की कमर के ईर्द गिर्द जगह बनाते हुए अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को ,, उसके लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठ रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी छेद में अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से छुप गया,,, और अंकित कल्पना में अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर को नीचे से ऊपर की तरफ मारने लगा,,,।
अंकित की कल्पना काफी हद तक,,, वास्तविक ही महसूस होती थी इसलिए अंकित पूरी तरह से मदहोश होकर मूठ मार रहा था,,,, वैसे भी उसकी मां अपनी मां को चोदने के लिए बहुत करता था लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी और देखते ही चरम सुख की तरफ आगे बढ़ने लगा और जैसे ही उसे एहसास हुआ की उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली है,,, वह तुरंत वापस अपनी चड्डी को ऊपर की तरफ ले लिया और चड्डी के अंदर अपने लंड को जोर से दबा दिया और उसकी पिचकारी निकल गई जो की चड्डी में ही ठहर गई,,,,, वह नहीं चाहता था कि उसकी पिचकारी बिस्तर पर करें और उसकी मां को उस पर शक होने लगे,,,,।
10 मिनट के अंतराल में सुबह अपनी जवानी की प्यास को अपनी मां की बदन की गर्मी से बुझा लिया था भले ही कल्पना में ही सही आनंद उसे बहुत आया था,,,, लेकिन उसे एहसास हुआ कि अभी तक उसकी मां कमरे में सो रही थी और उसकी बहन भी उठी नहीं थी इसलिए वह उठकर कपड़े पहनकर सीधे अपनी मां के कमरे की तरफ गया और दरवाजे पर पहुंचकर जैसे ही दस्तक देने के लिए वह दरवाजे पर हाथ रखा दरवाजा खुद बा खुद खुल गया,,, और वह आवाज देने के पहले अपने हाथ के सहारे से दरवाजे को हल्के से खोल दिया और जैसे ही उसकी नजर सामने बिस्तर पर गई उसके होश उड़ गए सामने बिस्तर पर उसकी मां पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगें एकदम खुली हुई थी उसकी साड़ी कमर तक चढी हुई थी यह नजारा देखकर,,, उसकी हालत खराब होने लगी,,,। पहली बार अंकित अपनी मां को अस्त व्यस्त हालत में सोते हुए देख रहा था,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ा रहकर अंदर की तरफ देखता रह गया उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत उन्मादक भरा दृश्य नजर आ रहा था,,,, दरवाजे पर खड़े होकर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां साड़ी नहीं पहनी थी उसके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट था और पेटीकोट भी एकदम कमर तक चढ़ा हुआ था जहां से उसे मोटी -मोटी चिकनी जांघें दिख रही थी,,,,।
अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया था पहली बार वह अपनी मां को घर के पीछे पेशाब करते हुए देखा था तब से लेकर आज तक उसकी दुनिया ही बदल गई थी लेकिन आज वह अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था,,,, और वैसे भी जिस उम्र के दौर में अंकित था इस उम्र में औरतों के अंग का झलक ही काफी होता है और यहां तो सब कुछ खुला नजर उसकी आंखों के सामने था इसके लिए उसके बदन में मदहोशी नशा की तरह घुल रही थी,,, इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह बार-बार इधर-उधर देख ले रहा था कहीं उसकी बहन तो नहीं आ रही है लेकिन वह भी आज घोड़े बेचकर सो रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज यह मौका बड़ी मुश्किल से उसके लिए ही मिला है कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद जब किसी भी प्रकार की हलचल उसकी मां के बदन में नहीं हुई तो वह समझ गया कि वह अभी भी गहरी नींद में सो रही है इसलिए बात फिर से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हल्के से बंद कर दिया और दबे कदमों से वह अपनी मां के पलंग तक पहुंच गया और उसके करीब पहुंचने पर उसे जब उसकी आंखें उसकी मां की दोनों टांगों के बीच गई तो उसके होश उड़ गए दरवाजे से तो नहीं पता चल रहा था लेकिन इतने करीब आकर उसे सब को साथ दिखाई दे रहा था और उसके होश और ज्यादा उड़े हुए नजर आने लगे क्योंकि उसकी मां पेंटिंग नहीं पहनी थी कमर के नीचे वही समय पूरी तरह से नंगी थी,,,,।
अपनी मां की नंगी बुर देखते ही उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, अपनी मां को पेशाब करते हुए तो वह देख चुका था लेकिन उसकी बुर पर उसकी नजर नहीं गई थी केवल वह अपनी मां की नंगी गांड को ही देखा था लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की बुर को देख रहा था अपनी मां की बुर क्या और पहली बार औरतों की बुर को खुली आंखों से देख रहा था अब तक उसने केवल किताबों में ही देखा था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने वास्तविक में एक खूबसूरत औरत की नंगी बुर देखकर उसकी आंखों में चमक आने लगी,,,,,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अपनी मां के बेहद करीब खड़ा था उसकी नजर अपनी मां की कमर के दोनों त्रिकोण पर पड़ी हुई थी और जब ऊपर की तरफ नजर गई तो अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी वह बेसुध होकर सो रही थी,,,, नीचे देखा तो साड़ी गिरी पड़ी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपनी मां की हालत देखकर,,,, हालात तो ऐसे ही नजर आ रहे थे कि अगर उसके सिवा घर में कोई और मर्द होता तो उसे ऐसा ही लगता है कि उसकी मां रात भर चुदवाई है,,, लेकिन इस तरह का शंका करने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने था उसे देखकर उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठा रही थी उसके पजामे में एक बार झड़ने के बावजूद भी तुरंत तंबू बन गया था,,,।
Sugandha ast vyast haalat me
अभी तक सुगंधा के बदन में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी और इसीलिए अंकित का मन बहक रहा था वह अपनी मां की बुर को अपने हाथ से स्पर्श करना चाहता था उसे छूना चाहता था उसकी गरमाहट को देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि एक औरत की बुर स्पर्श करने में कैसी महसूस होती है,,,,, इस तरह का खूबसूरत नजारा देखकर उसकी मां पूरी तरह से बैठ चुका था और अभी तक उसकी मां के बदन में किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई थी इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकने लगा,,,, जैसे-जैसे वह अपनी मां की बुर के करीब बढ़ रहा था वैसे-वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है,,,,।
उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी बुर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी बाल ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन पहली बार अंकित औरत की बुर और औरत की बुर के ऊपर बाल देख रहा था,,, यह नजारा उसके लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था,,,,, उसे नहीं मालूम था कि जिस तरह से उसके लंड के इर्द-गिर्द बाल उगे हुए हैं इस तरह से औरतों की बुर के ईर्द गिर्द बाल होते हैं,,,, यह नजारा वास्तव में अंकित के लिए उन्मादकता भरा हुआ था,,,।
देखते ही देखते वह अपनी मां की बुर के बेहद करीब पहुंच गया था इतनी करीब कि उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसके नथुनिया में आराम से पहुंच रही थी और इस तरह की खुशबू को वह पहली बार महसूस कर रहा था उसके बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का संचार होने लगा था,,,,,,, इतने करीब आकर अंकित पीछे लौटना नहीं चाहता था वह एक बार अपनी मां की बुर को छू लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपना हाथ अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा लेकिन इस तरह की हरकत करने का डर उसके हाथों की कंपन बयां कर रही थी उसकी उंगलियां कांप रही थी,,,, लेकिन हिम्मत जताकर उसने आखिरकार एक अद्भुत कार्य को अंजाम दे ही दिया वह अपनी मां की बुर को हल्के से अपनी उंगली से स्पर्श कर ही लिया लेकिन जैसे ही उसकी उंगली सुगंधा की बुर पर स्पर्श हुई सुगंधा के बदन में हल्की सी कसमाशाहट हुई और अंकित एकदम से घबरा गया और तुरंत वहां पर एक पल भी रुक अपने कदमों को पीछे लिया और अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया वह पीछे मुड़कर देखा भी नहीं लेकिन अपनी बुर पर अचानक स्पर्श का अहसास होते ही सुगंधा की आंख खुल गई थी और वह सिर्फ इतना ही देख पाई कि उसका बेटा दरवाजे से बाहर निकल कर जा रहा था,,, और जैसे ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ उसके होश उड़ गए,,,।