Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 16 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित अपने दोस्त की बात को सुनकर अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां भी एकदम चुदवासी है,,, उसकी मां को भी मर्द की जरूरत है,,, उसे भी अपनी बुर में लंड की जरूरत है,,, और उसके पास किसी मर्द का जुगाड़ नहीं है इसलिए तो अपनी उंगली से काम चला रही थी,,,, इस बात का ज्ञात और एहसास होते ही अंकित केतन बदन में आग लग गई वह मदहोश होने लगा और अपने मन में ही सोचने लगा कि का स उसकी मां की प्यास बुझाने का शुभ अवसर उसे खुद मिले तो कितना मजा आ जाए,,,, लेकिन ऐसा होगा कैसे,,,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसमें इतनी हिम्मत नहीं है कि आगे चलकर वह अपनी मां के साथ कुछ कर सके की चाहत रखें और उसकी मां ऐसा कभी करने वाली नहीं है इसलिए उसके मन में निराशा फैलने लगी लेकिन इस बात से उसे राहत थी कि कभी कबार उसे अपनी मां के खूबसूरत अंगों को देखने का मौका मिल जा रहा था,, इतने से ही अंकित मस्त हो जा रहा था,,,,।



दूसरी तरफ सुगंधा की जवानी पूरी तरह से उफान पर थी,,,, जिस तरह का प्रदर्शन उसने बाथरूम के अंदर अपने बेटे के सामने की थी उसके चलते उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह जानती थी जिस तरह का नजारा उसने अपने बेटे को दिखाई थी उससे उसका बेटा उसकी जवानी का दीवाना हो चुका था जिसका सबूत उसे बाथरूम के बाहर फर्श पर गिरा मिला था,,,, और इस बात से सुगंधा काफी खुश भी थी क्योंकि उसकी युक्ति काम कर गई थी,,,‌

अंकित का आकर्षण पड़ोस की मौसी की लड़की सुमन के तरफ भी बढ़ता जा रहा था और वह खुद अंकित को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश करते हैं और पढ़ने के बहाने उसे अपने घर में आने का आमंत्रण भी दे दी थी क्योंकि खेली खाई सुमन अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित के दोनों टांगों के बीच मजबूत हथियार था जिसे वह अपनी बुर में लेकर स्वर्ग का सुख भोगना चाहती थी,,,।



अंकित अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था वह घर पर पहुंच कर औपचारिक रूप से खाना खाया और थोड़ी देर टीवी देखने के बाद अपने कमरे में चला गया उसकी हालत को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी उसका बेटा बेहद सीधा साधा है लेकिन जिस तरह का नजारा उसने उसे दिखाई थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसे नजारे को देखकर कोई भी लड़का अपना आपा खो देगा,,,,, जवान हो चुके लड़के को क्या देखना पसंद है इस बात का आभास सुगंधा को अच्छी तरह से ,, और ऐसे हालात में सुगंधा ने तो दो दो बार अपनी जवानी के दर्शन अपने बेटे को कर चुकी थी एक पेशाब करते हुए अपनी नंगी गांड और दूसरी बार बाथरूम के अंदर तो अपने सारे कपड़े उतार कर संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र होकर जो हाहाकार मचाई थी उससे उसका बेटा पूरी तरह से मस्त हो चुका था और अपनी मां के कदमों में घुटने टेक दिया था,,, सुगंधा जानती थी कि उसके बेटे के कोमल मन पर इन सब का क्या असर पड़ रहा होगा,,,। लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद भी वह अपने कदम को पीछे नहीं देना चाहती थी क्योंकि उसकी मन बहक चुका था वह वर्षों तक अपने बदले में अपने बदन की प्यास को दबा कर रखी थी लेकिन जिस दिन से पड़ोस की सुषमा ने उसे टीवी में गंदी पिक्चर दिखाई थी सबसे वह चुदवाने के लिए तड़प रही थी,,,।



जैसे तैसे करके कुछ दिन गुजर गए और इस दौरान अंकित को ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल पाया जिससे वह अपनी जवानी की गर्मी को बुझा सके,,, लेकिन इन दोनों सुगंधा ही अपने बेटे को और ज्यादा तड़पने की उद्देश्य से उसे कुछ भी नहीं दिखाई थी,,, क्योंकि वह अपने बेटे की तड़प देखना चाहती थी,,, रात को सोते समय वह पहले ड्राइंग रूम से अपने कमरे की तरफ चली जाती थी लेकिन दरवाजे पर चुप कर यह देखने की कोशिश करती थी कि उसका बेटा कहां जाता है और अक्सर वह देखते कि उसका बेटा भले कुछ भी हो जाए एक नजर घर के पीछे की तरफ जरूर डालता था वहां पर जरूर जाता था यह देखने के लिए कि उसकी मां वहां पर पेशाब कर रही है कि नहीं,,, और अपने बेटे की इस हरकत से वह मन ही मन बहुत प्रसन्न होती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे के बदन में भी एक औरत की जवानी की प्यास पनप रही थी,,,।

स्कूल में वह नूपुर से,, कुछ ज्यादा घुल मिल गई थी लेकिन मार्केट में जो लड़का उसके साथ था जो नूपुर के नितंबों पर हाथ रखा था उसके बारे में पूछने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी लेकिन उसकी जानने की उत्सुकता हमेशा बनी रहती थी,,,। लेकिन कैसे शुरुआत करें इस बारे में उसे समझ में ही नहीं आता था,,,,, लेकिन बड़ी हिम्मत करने के बाद वह,,, एक दिन बोली,,,।



नूपुर घर में कौन-कौन है,,,,(क्लास की शुरुआत के पहले वह दोनों खड़ी होकर बातें कर रही थी और बातों ही बातों में सुगंधा ने जिक्र छेड़ दी थी,,,)

कहने को तो बहुत कोई है सुगंधा,,, लेकिन अपना कोई नहीं है क्योंकि मेरे दो देवर हैं और वह दोनों अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं,,, वैसे मैं शुरू से ही साथ में रहने के लिए हिदायत देती थी लेकिन,,, शुरू शुरु में तो सब कुछ सही चला लेकिन जैसे ही दोनों की शादी हुई,,, दोनों अलग हो गए,,,,(सुगंधा को इन सब बातों से बिल्कुल भी मतलब नहीं था सुगंधा को तो उस लड़के के बारे में जानना था,, जो उस दिन मार्केट में उसके साथ था,,,। लेकिन इससे आगे वह कुछ बता पाते उससे पहले ही क्लास शुरू होने की घंटी बज गई और ना चाहते हुए भी सुगंधा को वहां से जाना पड़ा नूपुर भी अपनी क्लास की तरफ चली गई,,,,। और सुगंधा की उत्सुकता, उत्सुकता ही बनी रह गई,,,,।

लेकिन एक दिन अचानक ही उसकी मुलाकात मार्केट में हो गई और वह भी इस मार्केट में जहां पर सुगंधा ने नूपुर को उसे जवान लड़के के साथ देखी थी,,,।



० अरे नूपुर तुम यहां कैसे,,,!(सुगंधा औपचारिकता निभाते हुए बोली...)

मार्केट में लोग किस लिए आते हैं सब्जियां लेने में भी वही लेने आई हूं,,,,(नूपुर मुस्कुराते हुए जवाब दी,,,, तभी किराने की दुकान से सामान लेकर लौट रहा अंकित ठेले में साबुन रखते हुए बोला,,,)

मम्मी मैंने कपड़े धोने वाले साबुन ले लिए हैं,,,,

बहुत अच्छा किया बेटा,, लो इनसे मिलो,,, हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाते हैं,,,।

(अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही अंकित नूपुर की तरफ देखने लगा और मुस्कुराते हुए उसका अभिवादन करते हुए बोला)

जी नमस्ते आंटी,,,



खुश रहो बेटा,,,(इतना कहने के साथ है कि नूपुर अपना हाथ उठाकर अंकित के सर पर रख दी और हल्के से उसके बालों को सहलाते हुए मुस्कुरा दी लेकिन अंकित की नजर,,, उसके हाथ उठाते ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर चली गई जो ब्लाउज में पूरी तरह से केक थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसकी चूचियों को समाने के लिए उसका ब्लाउज छोटा पड़ रहा था,,, उसे देखते ही अंकित के मुंह में पानी आ गया और उसकी इस नजर को नूपुर भी पहचान गई थी इसलिए उसके इस नजरिए से उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,,,।)

कभी हमारे यहां भी आ जाया करो बेटा ,,

जी आंटी जरूर आऊंगा,,,,(अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला अभी बातचीत चली रही थी कि पीछे से आवाज आई,,,,)





मम्मी,,,,(इतना सुनते ही सुगंधा के साथ-साथ नूपुर और अंकित भी उसे आवाज की दिशा में देखने लगे सुगंध को उसे लड़के को देखते ही रह गई जो मम्मी कह रहा था वह एकदम पास आ गया था और नूपुर से बोला,,,)

मम्मी मैं भिंडी ले लिया हूं आज भिंडी की सब्जी बनाना,,,,,।

ठीक है बेटा कोई बात नहीं लेकिन इनसे तो मिलो,,, ये है सुगंधा,,, हम दोनों एक ही स्कूल में है,,,।

(इतना सुनते ही,,, वह लड़का थी अंकित की तरह ही सुगंधा का अभिवादन करते हुए नमस्ते बोला तो सुगंधा भी उसे आशीर्वाद देते हुए बोली,,,)





खुश रहो बेटा,,,,(औपचारिकता निभाते हुए सुगंधा उसे लड़के को आशीर्वाद तो दे रही थी लेकिन इस बात का अहसास होते ही कि नूपुर का और उसे लड़के का संबंध आपस में मां बेटे का है उसके तो होश उड़ गए थे उसकी आंखों के सामने वही मार्केट वाला दृश्य उभर कर सामने आने लगा था जब वह अपनी आंखों से देखी थी कि यही लड़का अपनी ही मां की गांड पर हाथ घुमा रहा था और वह बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जता रही थी,,,)

और यह मेरा बेटा राहुल है,,,,

मैंने तो पहले कभी तुम्हारे साथ इसे देखा नहीं,,,

यह यहां नहीं पढता,,, यह बाहर पढ़ता है और कुछ दिनों के लिए यहां आया है,,,।(नूपुर एकदम खुश होते हुए बोली)

चलो अच्छी बात है इसी बहाने तुम्हारे बेटे से मुलाकात हो गई,,,।



(अंकित और राहुल दोनों हम उम्र होने की वजह से एक दूसरे से बातें कर रहे थे और बातों ही बातों में राहुल ने उसे अपने साथ क्रिकेट खेलने के लिए आमंत्रित कर दिया जिसका शहर्स स्वीकार भी अंकित ने कर लिया,,,,,,,

रास्ते भर सुगंधा नूपुर और उसके बेटे के बारे में सोच रही थी उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था लेकिन इतना तो समझ गई थी कि दोनों के बीच किस तरह का हिस्सा है अगर वह मार्केट में उसे लड़के की हरकत ना अच्छी होती तो शायद उसके मन में यह सब ख्याल नहीं आते लेकिन सब कुछ पानी की तरह साफ था जिस तरह से उसका लड़का मार्केट में अपनी ही मन की गांड पर हाथ रख कर दबा रहा था इससे उसे अंदाजा लग गया था कि दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता है और इस बात से वहां खुद सोचनी पड़ गई थी कि क्या मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कायम हो सकता है पहले तो वह सोचती थी और अपने ही ख्याल पर उसे शर्म भी आती थी लेकिन,,, वह खुद इस तरह का रिश्ता बनाने के लिए उत्साहित थी लेकिन एक तरह का उसके मन में डर भी था लेकिन आज नूपुर और उसके बेटे के बीच के रिश्ते को देखकर उसकी हिम्मत बढ़ गई थी आप सही गलत के फैसले पर उसका दिमाग बिल्कुल भी अटका हुआ नहीं था बल्कि अब वह उससे परे हो चुकी थी,,,,।



सुगंधा नूपुर और उसके बेटे के बीच के नाजायज संबंध के बारे में अंदाजा लगा रही थी लेकिन जो हकीकत ही था,,,, क्योंकि वह जानती थी मां बेटे के बीच इतना खुलापन तभी आता है जब दोनों के बीच कुछ चल रहा हो वरना एक बेटे की हिम्मत कहां होती है जो अपनी मां की गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाए और उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज ना करें,,,। और दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता किस तरह से पनपा होगा इस बारे में भी वह अंदाजा लगा रही थी क्योंकि वहां उसके पति से मिल चुकी थी जो की काफी मोटा था जिसकी तोंद बहुत ज्यादा निकली हुई थी और उसकी उम्र भी नूपुर की उम्र से बहुत ज्यादा थी ऐसे में वहां अच्छी तरह से समझ रही थी कि उसका पति उसे बिल्कुल भी शारीरिक सुख नहीं दे पा रहा होगा और जिसके चलते,, नूपुर को अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ा जिसमें कोई एतराज भी नहीं था नूपुर के हालात को देखकर वह खुद अपने हालात के बारे में सोचने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि नूपुर का तो पति भी थे लेकिन फिर भी उसके जीवित होने के बावजूद भी वह शारीरिक सुख उसे नहीं दे पा रहा है जिसके चलते नूपुर को अपने ही घर में अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाना पड़ रहा है और वह बहुत खुश भी हैं,,, लेकिन उसका क्या उसके पति के देहांत हुए 5 साल गुजर चुके थे इस बीच में अपनी सारीरीक जरूरत को दबा कर रखी हुई थी,,, ऐसे में अपनी शरीर की जरूरत को पूरा करने में अपने बेटे का सहारा लेने में कोई दिक्कत नहीं है इस बात का ख्याल उसके मन में आते हैं उसके बदन में झुनझुनी सी फैल गई,,,, और उसके चेहरे पर मादक मुस्कान तैरने लगी



अब उसका इरादा पक्का हो रहा था अब वह अपने मन को मजबूत कर चुकी थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझाने चाहती थी आगे बढ़ाने के लिए उसे नूपुर का उदाहरण तो मिल गया था लेकिन कैसे आगे बढ़ाना है इस बारे में नहीं मालूम था लेकिन फिर भी वह एक औरत थी वह जानती थी की मर्द को किस तरह से काबू में किया जाता है किस तरह से उसे घुटनों पर लाया जाता है,,
 
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नूपुर और उसके बेटे के बीच अनैतिक संबंध को लेकर सुगंधा बहुत सोच विचार कर रही थी,,, अगर वह मार्केट में नूपुर के साथ उसके बेटे को असली हरकत करते हुए ना देखी तो शायद उन दोनों के बीच मां बेटे के रिश्ते को वह पवित्र ही समझती लेकिन मार्केट की हरकत ने उसे पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। उसे पूरा शक हो चुका था,, की दोनों मां बेटे के बीच कुछ तो जरूर चल रहा है वरना एक बेटा अपनी मां की गांड पर इस तरह से हाथ ना फिराता,,,।



वह अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे नूपुर और उसके बेटे के बारे में ही सोच रही थी रात के 12:00 बज चुके थे लेकिन उसकी आंखों से नींद दूर जा चुकी थी,,, उसके बदन पर साड़ी नहीं थी साड़ी उसके बिस्तर से नीचे बिक्री पड़ी थी वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी और पेटीकोट भी उसकी जांघों तक चढी हुई थी,,, उसकी मोटी मोटी केले के तने की तरह चिकनी जांघें डिम लाइट की लाल रोशनी में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,,,, उसकी हथेली पेंटी के ऊपर उसकी बुर के अस्तित्व को छुपाए हुए थी,,, रह रह कर नूपुर के बारे में सोचते हुए वह अपनी बुर को हथेली में दबोच ले रही थी,,, जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी,,,।





पंखा बड़ी तेजी से चल रहा था और उससे भी ज्यादा तेज सुगंधा के विचार चल रहे थे वह नूपुर के बारे में सोच रही थी,, जब वह नुपुर से मिली थी तब वह खोई खोई रहती थी,,, उदास रहती थी और उसके पति से मिलने के बाद सुगंधा अपने मन में समझ गई थी कि वह किस लिए उदास है लेकिन कुछ दिनों से उसके चेहरे की लालिमा बढ़ती जा रही थी वह काफी खुश मिजाज नजर आती थी और इसका प्रमुख कारण था उसका बेटा जो की छुट्टी के कारण घर आया हुआ था,,,, इस बारे में सोचकर सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी कि वाकई में नूपुर और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका है और अपने मन में कल्पना कर रही थी कि नूपुर कैसे अपने बेटे से चुदवाती होगी,,,। किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता नूपुर में थी,,, एक औरत होने के नाते सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि,,, औरत की खूबसूरती क्या होती है,,, नूपुर भी उसकी ही उम्र की थी,,, लंबी कद काठी गोरा बदन,, खूबसूरत चेहरा लाल लाल भरे हुए होंठ बड़ी-बड़ी चूचियां नितम्बो का आकार भी एकदम गठीला,,, चलने पर गांड की दोनों फाके बड़े-बड़े तरबूज की तरह आपस में टकराती थी,,, और देखने वालों की हालत खराब हो जाती थी सब कुछ तो था नूपुर में और भला एक जवान लड़का कैसे इतनी रसमलाई जवान औरत के पीछे लट्टू ना हो जाए भले ही वह उसका बेटा क्यों ना हो,,,,,,, राहुल भी तू उसके बेटे की तरह एकदम जवान था लंबी कद काठी और चौड़ी छाती ,,,,, नूपुर अपने बेटे की चोडी छाती में पूरी तरह से अपनी अस्तित्व को छुपा लेती होगी,,,।



कैसा लगता होगा जब राहुल खुद अपनी मां के बदन से उसके कपड़ों को अलग करता होगा,,, पहले साड़ी उतारता होगा,,, पीछे से उसे अपनी बाहों में भर कर ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाते हुए मसलते होगा उसकी हरकत पर उसकी मां मजबूत हो जाती होगी उसका खड़ा लंड पीछे से उसकी गांड में चुभता होगा,,,, नूपुर की मदहोशी और ज्यादा बढ़ जाती होगी और उसका बेटा अपने हाथ को उसकी कमर पर रखकर उत्तेजना से उसे दबाते हुए अपनी हथेली को उसकी पेटिकोट के अंदर सरका देता होगा जहां पर उसकी गीली बुर पहले से ही उसका इंतजार कर रही होगी,,,, गीली बुर पर हथेली पहुंचते ही उसका बेटा मदहोश हो जाता होगा और तुरंत अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को हाथों में भरकर उसके मुंह से लगा लेता होगा उसे बड़ी-बड़ी से दबा दबा कर पीता होगा,,,, अपने पति से असंतुष्ट नूपुर अपने बेटे की हरकत से पानी पानी हो जाती होगी,,,, उसका बेटा उसे अपनी गोद में उठाकर नर्म नर्म बिस्तर पर ले जाकर पटक देता होगा उसकी पेटीकोट को उसकी डोरी को खोलकर खींचता होगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा देती होगी और उसका बेटा अगले ही पल उसका पेटिकोट उतार कर उसे पूरा नंगी कर देता होगा और फिर अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो जाता होगा,,,, और फिर राहुल अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बना कर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदता होगा,,,,





उफफफ,,, कितना मजा आ जाता होगा दोनों मां बेटे को,,,, अपने मन में ही यह सब सो कर सुगंधा पानी पानी हो रही थी और अपनी किस्मत पर रो रही थी कि जहां एक तरफ पति होने के बावजूद भी एक मां अपने बेटे के साथ अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा कर रही थी वहीं दूसरी तरफ वह खुद थी जो पति के न होने के बावजूद भी और घर में एक जवान बेटा होने के बाद भी अपनी जवानी की प्यास बुझाने में असमर्थ साबित हो रही थी,,,। वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसे अच्छी किस्मत तो नूपुर की थी जो अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख भोग रही थी,,, काश उसका बेटा भी उसकी हालत को समझ पाता तो आज वह भी नूपुर की तरह मजे लुटती,,,।





लेकिन इन सब बातों को सोचकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस बह रहा था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी चड्डी को पकड़ कर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाई और एक झटके से उसे नीचे की तरफ खींचकर पैरों का सहारा लेकर अपनी चड्डी को अपने बदन से अलग कर दी,,, और टेबल पर रखे हुए मोटे बैगन को अपने हाथ में ले ली और उसे मुंह में लेकर थोड़ा सा उसे पर थूक लगना शुरू कर दी जब पूरी तरह से गिला हो गया तो वह अपने दोनों टांगों को खोलकर अपनी गुलाबी छेद पर उसे बैगन को रखकर उसे हल्का-हल्का दबाने लगी,,, बुर की चिकनाहट पाकर मोटा तगड़ा बैंगन बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर घुसने लगा और देखते ही देखते हुआ उसकी गहराई नापने लगा जिसे सुगंधा अपने हाथों से पकड़ कर अंदर बाहर करते हुए चुदाई का सुख भोगने लगी,,,, लेकिन वह जानती थी जिस तरह की प्यास उसके बदन में उठ रही थी वह प्यास बैगन से नहीं बल्कि मर्द के मोटे लंड से बुझने वाली थी,,,, इसलिए थोड़ी ही देर में तृप्त होकर वह उसी हालत में सो गई,,,



सुबह में अंकित की नींद जल्दी खुल गई और सुबह औपचारिक रूप से उसके लंड का तनाव पूरी तरह से चरम सीमा पर था,,, वह केवल चड्डी मे ही सो रहा था,,, और उसकी नजर जैसे ही अपनी चड्डी की तरफ गई तो उसके खुद के होश उड़ गए उसमें अच्छा खासा तुमको बना हुआ था जो कि बडा ही मनभावन लग रहा था,,,। वह चड्डी के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा,,, लेकिन कभी उसे एहसास हुआ कि घर में किसी भी तरह की आवाज नहीं आ रही थी,,,। और वह समझ गया कि आज उसकी मां को उठने में देर हो गई है,,, अपनी उत्तेजना को देखकर उसका मन मुठ मारने को कर रहा था,,,, और इसीलिए वह अपनी चड्डी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके आगे वाले भाग को ऊपर की तरफ खींचा और अपने लंड को देखने लगा जो की काफी मोटा और लंबा नजर आ रहा था वह धीरे से उसे पीछे की तरफ खींचकर अपने लंड के दूसरी तरफ ले गया और अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर ऊपर नीचे करके हिलने लगा,,,, मुठ मारने में वह कल्पना का सहारा लेता था और उसकी कल्पना की राजकुमारी नहीं बल्कि महारानी होती थी उसकी मां अपनी मां के बारे में सोचकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाता था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,,।



वह मूठ मारना शुरू कर दिया था और ख्यालों में उसकी मां थी जो कल्पना में अपने हाथों से अपने कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई थी,,, और अपनी होठों पर मादक मुस्कान लाते हुए खुद घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गई थी और अपने बेटे की कमर के ईर्द गिर्द जगह बनाते हुए अपनी भारी भरकम गोल-गोल गांड को ,, उसके लंड पर रखकर धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठ रही थी और देखते ही देखते उसकी गुलाबी छेद में अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से छुप गया,,, और अंकित कल्पना में अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर अपनी कमर को नीचे से ऊपर की तरफ मारने लगा,,,।



अंकित की कल्पना काफी हद तक,,, वास्तविक ही महसूस होती थी इसलिए अंकित पूरी तरह से मदहोश होकर मूठ मार रहा था,,,, वैसे भी उसकी मां अपनी मां को चोदने के लिए बहुत करता था लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करने की हिम्मत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी और देखते ही चरम सुख की तरफ आगे बढ़ने लगा और जैसे ही उसे एहसास हुआ की उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली है,,, वह तुरंत वापस अपनी चड्डी को ऊपर की तरफ ले लिया और चड्डी के अंदर अपने लंड को जोर से दबा दिया और उसकी पिचकारी निकल गई जो की चड्डी में ही ठहर गई,,,,, वह नहीं चाहता था कि उसकी पिचकारी बिस्तर पर करें और उसकी मां को उस पर शक होने लगे,,,,।





10 मिनट के अंतराल में सुबह अपनी जवानी की प्यास को अपनी मां की बदन की गर्मी से बुझा लिया था भले ही कल्पना में ही सही आनंद उसे बहुत आया था,,,, लेकिन उसे एहसास हुआ कि अभी तक उसकी मां कमरे में सो रही थी और उसकी बहन भी उठी नहीं थी इसलिए वह उठकर कपड़े पहनकर सीधे अपनी मां के कमरे की तरफ गया और दरवाजे पर पहुंचकर जैसे ही दस्तक देने के लिए वह दरवाजे पर हाथ रखा दरवाजा खुद बा खुद खुल गया,,, और वह आवाज देने के पहले अपने हाथ के सहारे से दरवाजे को हल्के से खोल दिया और जैसे ही उसकी नजर सामने बिस्तर पर गई उसके होश उड़ गए सामने बिस्तर पर उसकी मां पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगें एकदम खुली हुई थी उसकी साड़ी कमर तक चढी हुई थी यह नजारा देखकर,,, उसकी हालत खराब होने लगी,,,। पहली बार अंकित अपनी मां को अस्त व्यस्त हालत में सोते हुए देख रहा था,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह कुछ देर दरवाजे पर ही खड़ा रहकर अंदर की तरफ देखता रह गया उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत उन्मादक भरा दृश्य नजर आ रहा था,,,, दरवाजे पर खड़े होकर उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां साड़ी नहीं पहनी थी उसके बदन पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट था और पेटीकोट भी एकदम कमर तक चढ़ा हुआ था जहां से उसे मोटी -मोटी चिकनी जांघें दिख रही थी,,,,।



अंकित का दिमाग काम करना बंद कर दिया था पहली बार वह अपनी मां को घर के पीछे पेशाब करते हुए देखा था तब से लेकर आज तक उसकी दुनिया ही बदल गई थी लेकिन आज वह अपनी मां को अर्धनग्न अवस्था में देख रहा था,,,, और वैसे भी जिस उम्र के दौर में अंकित था इस उम्र में औरतों के अंग का झलक ही काफी होता है और यहां तो सब कुछ खुला नजर उसकी आंखों के सामने था इसके लिए उसके बदन में मदहोशी नशा की तरह घुल रही थी,,, इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह बार-बार इधर-उधर देख ले रहा था कहीं उसकी बहन तो नहीं आ रही है लेकिन वह भी आज घोड़े बेचकर सो रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज यह मौका बड़ी मुश्किल से उसके लिए ही मिला है कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद जब किसी भी प्रकार की हलचल उसकी मां के बदन में नहीं हुई तो वह समझ गया कि वह अभी भी गहरी नींद में सो रही है इसलिए बात फिर से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हल्के से बंद कर दिया और दबे कदमों से वह अपनी मां के पलंग तक पहुंच गया और उसके करीब पहुंचने पर उसे जब उसकी आंखें उसकी मां की दोनों टांगों के बीच गई तो उसके होश उड़ गए दरवाजे से तो नहीं पता चल रहा था लेकिन इतने करीब आकर उसे सब को साथ दिखाई दे रहा था और उसके होश और ज्यादा उड़े हुए नजर आने लगे क्योंकि उसकी मां पेंटिंग नहीं पहनी थी कमर के नीचे वही समय पूरी तरह से नंगी थी,,,,।



अपनी मां की नंगी बुर देखते ही उसका दिल जोरों से धड़कने लगा,,, अपनी मां को पेशाब करते हुए तो वह देख चुका था लेकिन उसकी बुर पर उसकी नजर नहीं गई थी केवल वह अपनी मां की नंगी गांड को ही देखा था लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां की बुर को देख रहा था अपनी मां की बुर क्या और पहली बार औरतों की बुर को खुली आंखों से देख रहा था अब तक उसने केवल किताबों में ही देखा था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने वास्तविक में एक खूबसूरत औरत की नंगी बुर देखकर उसकी आंखों में चमक आने लगी,,,,,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अपनी मां के बेहद करीब खड़ा था उसकी नजर अपनी मां की कमर के दोनों त्रिकोण पर पड़ी हुई थी और जब ऊपर की तरफ नजर गई तो अपनी मां का खूबसूरत चेहरा देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी वह बेसुध होकर सो रही थी,,,, नीचे देखा तो साड़ी गिरी पड़ी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपनी मां की हालत देखकर,,,, हालात तो ऐसे ही नजर आ रहे थे कि अगर उसके सिवा घर में कोई और मर्द होता तो उसे ऐसा ही लगता है कि उसकी मां रात भर चुदवाई है,,, लेकिन इस तरह का शंका करने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने था उसे देखकर उसके बदन में उत्तेजना के लहर उठा रही थी उसके पजामे में एक बार झड़ने के बावजूद भी तुरंत तंबू बन गया था,,,।

Sugandha ast vyast haalat me



अभी तक सुगंधा के बदन में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी और इसीलिए अंकित का मन बहक रहा था वह अपनी मां की बुर को अपने हाथ से स्पर्श करना चाहता था उसे छूना चाहता था उसकी गरमाहट को देखना चाहता था वह देखना चाहता था कि एक औरत की बुर स्पर्श करने में कैसी महसूस होती है,,,,, इस तरह का खूबसूरत नजारा देखकर उसकी मां पूरी तरह से बैठ चुका था और अभी तक उसकी मां के बदन में किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई थी इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह धीरे से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच झुकने लगा,,,, जैसे-जैसे वह अपनी मां की बुर के करीब बढ़ रहा था वैसे-वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही है,,,,।

उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर की हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जिसकी वजह से उसकी बुर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी बाल ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन पहली बार अंकित औरत की बुर और औरत की बुर के ऊपर बाल देख रहा था,,, यह नजारा उसके लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था,,,,, उसे नहीं मालूम था कि जिस तरह से उसके लंड के इर्द-गिर्द बाल उगे हुए हैं इस तरह से औरतों की बुर के ईर्द गिर्द बाल होते हैं,,,, यह नजारा वास्तव में अंकित के लिए उन्मादकता भरा हुआ था,,,।





देखते ही देखते वह अपनी मां की बुर के बेहद करीब पहुंच गया था इतनी करीब कि उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसके नथुनिया में आराम से पहुंच रही थी और इस तरह की खुशबू को वह पहली बार महसूस कर रहा था उसके बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का संचार होने लगा था,,,,,,, इतने करीब आकर अंकित पीछे लौटना नहीं चाहता था वह एक बार अपनी मां की बुर को छू लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपना हाथ अपनी मां की बुर के करीब ले जाने लगा लेकिन इस तरह की हरकत करने का डर उसके हाथों की कंपन बयां कर रही थी उसकी उंगलियां कांप रही थी,,,, लेकिन हिम्मत जताकर उसने आखिरकार एक अद्भुत कार्य को अंजाम दे ही दिया वह अपनी मां की बुर को हल्के से अपनी उंगली से स्पर्श कर ही लिया लेकिन जैसे ही उसकी उंगली सुगंधा की बुर पर स्पर्श हुई सुगंधा के बदन में हल्की सी कसमाशाहट हुई और अंकित एकदम से घबरा गया और तुरंत वहां पर एक पल भी रुक अपने कदमों को पीछे लिया और अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया वह पीछे मुड़कर देखा भी नहीं लेकिन अपनी बुर पर अचानक स्पर्श का अहसास होते ही सुगंधा की आंख खुल गई थी और वह सिर्फ इतना ही देख पाई कि उसका बेटा दरवाजे से बाहर निकल कर जा रहा था,,, और जैसे ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ उसके होश उड़ गए,,,।
 
,,,अंकीत,,,

अपनी स्थिति को देखकर सुगंधा की हालत खराब हो गई थी वह अपने बेटे को केवल दरवाजे से बाहर निकलता हुआ देखी थी और कुछ पल के लिए तो उसे कुछ भी एहसास नहीं हुआ था लेकिन जैसे ही उसने अपने ऊपर नजर डाली तो उसके होश उड़ गए थे वह आज तक में थी और उसकी साड़ी जांघों तक उठी हुई थी उसकी पेंटि बिस्तर से नीचे गिरी हुई थी और कमर के नीचे वह संपूर्ण रूप से नंगी थी,,,, यह सब देखकर उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी और अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी जहां पर उसकी फुली हुई बुर एकदम साफ नजर आ रही थी उस पर हल्के हल्के बाल थे,,,, यह सब देख कर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी और वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा उसे दरवाजे से बाहर निकलता हुआ दिखता है इसका मतलब कि वह कमरे में अंतर आया था और जरूर उसकी तरफ देखा होगा,,,, यह सब सोते हुए उसकी नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर गई तो वह एकदम हैरान हो गई क्योंकि उसके उठने में आज 20 मिनट की देर हो चुकी थी जिसका मतलब साथ है कि उसका बेटा कमरे में उसे जगाने के लिए और उसकी हालत को देखकर वहां से सीधा चला गया,,,,।



इन सब बातों को सोचकर वह अपने मन में सोचने लगी कि अगर उसका बेटा वाकई में उसके कमरे में आया होगा तो जरूर बिस्तर तक आया होगा और जरूर उसकी हालत को देखा होगा और उसकी नजर जरूर उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी बुर पर गई होगी यह ख्याल उसके मन में आती है उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी वह अपने मन में कल्पना करने लगी कि कैसे उसका बेटा उसके कमरे में उसे जगाने के उद्देश्य से आया होगा कमरे का दरवाजा वैसे भी खुल ही था उसने रात को बंद नहीं की थी वह,,, दरवाजे को अपने हाथ से खोलकर उसे जगाने के लिए कमरे में दाखिल हुआ होगा और चलते हुए बिस्तर के करीब आया होगा और उसकी नजर उसके ऊपर पड़ी होगी,,,,।



हाय दइया उसने तो सब कुछ देख लिया होगा उसकी बुर पूरी तरह से उसकी आंखों के सामने ही तो थी यह सब सोते हुए उसे याद आने लगा की रात को वह अपने हाथों से ही अपनी चड्डी उतार कर बिस्तर से नीचे फेरती थी और फिर एक मोटी बैगन को अपनी बर के अंदर बाहर करके अपनी जवानी की प्यास को बुझाई थी और उसी हालत में ही सो गई थी,,, बैगन और चड्डी का ख्याल मन में आते ही वह इधर-उधर देखने लगे और जब वह बिस्तर के दूसरी तरफ नीचे देखी तो वहां पर उसकी चड्डी और बैगन दोनों पड़े हुए थे उसे यह समझ में नहीं आ रहा था और वह हैरान भी हो रही थी कि कहीं उसका बेटा उसकी चड्डी और बैगन को तो नहीं देख लिया यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके मन में घबराहट होने लगी थी लेकिन उसके बदन में उत्तेजना की लहर अत्यधिक उठ रही थी,,, और भला क्यों ऐसा ना हो यही सब तो वह खुद से अपने बेटे को दिखाना चाहती थी लेकिन अनजाने में ही आज उसका बेटा उसके जवानी के केंद्र बिंदु को अपनी आंखों से देख लिया था,,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर को देखकर क्या सोच रहा होगा अकेले जैसी मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर उसके तन बदन में हलचल तो जरूर हुई होगी,,, आखिरकार हुआ भी तो एक मर्द है एकदम जवान और ऐसे में एक जवान मर्द के सामने कोई औरत अर्धनग्न अवस्था में भी नजर आ जाए तो ऐसे हालात में उसे मर्द का लंड खड़ा होना जायज है,,, और अगर ऐसा ना हो तो उसे मर्द की मर्दानगी नाजायज है,,,,,।



सुगंधा अपने मन में सोचने लगे कि जरूर उसके बेटे ने आज सुबह-सुबह उसकी बुर के दर्शन किए हैं तभी तो दबे पांव वह कमरे से चला गया था वरना उसे जरूर जगाता क्योंकि आज उठने मे उसे देर हो गई थी,,,,। पता नहीं अपने मन में क्या सोच रहा होगा अपनी ही मन की बुर को देखकर जरूर उसका लंड खड़ा हो गया होगा क्या कमी है मेरे बेटे में पूरी तरह से जवान है और अब तो चोर नजरों से मेरे बदन को देखता रहता है,,,,,,आहहहहह कितना मजा आया होगा मेरे बेटे को मेरी बुर देखकर उसके मन में भी अरमान मचल गए होंगे बुर के अंदर लंड डालने के लिए,,,, क्या वह जानता होगा की औरत की बुर में लंड डाला जाता है तब चुदाई होती है,,,(सुगंधा अपने आप से ही इस तरह की बातें कर रही थी और अपने सवाल का जवाब अपने आप से ही दे रही थी अपनी बात को आगे बढ़ते हुए अपने मन में बोली)..



क्यों नहीं जानता होगा आखिरकार वह भी तो मर्द है और एक मर्द को भले कुछ पता हो ना हो लेकिन औरत की चुदाई करना जरूर जानते हैं,,,, (सुगंधा अपने मन में ही अपने आप से बात करते हुए बोली) जरूर मेरा बेटा मेरी बुर देखकर मुझे चोदने का ख्याल मन में लाया होगा,,,,,,(यह सब सोचकर सुगंधा की बर पानी चोदने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,, वह तो सिर्फ इतना अनुमान ही लग रही थी कि उसका बेटा कमरे में आकर उसकी बुर के दर्शन किया होगा जबकि उसके बेटे ने तो इससे भी ज्यादा उसकी बुर को छू कर देखा था उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करके देखा था,,,और अपनी मां की बुर स्पर्श करने के बाद उसे अपने अंदर अत्यधिक उत्तेजना का एहसास हुआ था उसका लंड खड़ा हो गया था,,,, और अपनी मां को उसे अस्त्-व्यस्त अवस्था मैं उठा बिना ही वह कमरे से बाहर निकल गया था और अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने के लिए जो कि कुछ देर पहले अपने कमरे में लंड हिला कर वह अपना पानी निकाल चुका था,, लेकिन जिस तरह का नजारा हुआ अपनी मां के कमरे में देखा था अपनी मां को आशीर्वाद अवस्था में देखा था अपनी मां की कचोरी जैसी खुली हुई बुर को देखा था वैसे तो जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत की बुर को देख रहा था और वह भी अपनी ही मन की इसलिए वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते उसके पेट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था और वह अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए अपनी मां के कमरे से निकाल कर सीधा बाथरूम में घुस गया था और फिर वहां पर अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी मां के बारे में सोचते हुए अपना लंड हिला कर पानी निकाल रहा था,,,,,।





सुगंधा अपने कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी लेकिन कुछ देर वह अपने कमरे में यूं ही लेटी रही क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा अभी-अभी कमरे से बाहर निकाल कर गया है और यही सोचकर बाहर निकाल कर गया है कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही हो और ऐसे हालात में वह तुरंत कमरे से बाहर निकाल कर जाएगी तो उसके बेटे को भी शक हो जाएगा कि उसकी मां जग रही थी इसीलिए वह कुछ देर लेटे रहने के बाद धीरे से ऊपर कोई और नीचे पड़ी अपनी चड्डी को वापस पहन ली और बैगन को ले जाकर कूड़ेदान में डाल दी,,,,।



अंकित नहा कर तैयार हो चुका था वह अपनी मां से नजर मिलाने से कतरा रहा था क्योंकि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर ही नजर आ रही थी,,,, जिंदगी में पहली बार अंकित एक औरत की खूबसूरत बुर को देखा था और वह भी अपनी मां की इसलिए आज उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से उसकी मां की बुर छाई हुई थी,,,, वह कर नजरों से अपनी मां की तरफ देखकर अपने मन में कह रहा था कि उसकी मां जितना ऊपर से खूबसूरत है उतना अंदर से भी बहुत खूबसूरत है अंकित अपने मन में सोच रहा था कि औरत भी कितनी खूबसूरत चीज होती है उसका अंग अंग देखने लायक होता है प्यार करने लायक होता है खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार तो एकदम जान लेवा होती है। अपनी मां की पतली दरार के बारे में सोचकर वह हैरान ईस बात से हो गया था कि,,, पतली सी दरार में मोटा लंड प्रवेश कैसे करता होगा,,, क्योंकि वह अपने मन ही मन में अपनी मां की पतली सी छोटी सी दरार और अपने मोटे तगड़े लंड के बारे में सोच रहा था,,, पर वह अपनी मन में सोच कर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था कि जब कभी भी उसे मौका मिलेगा अपनी मां की बुर में लंड डालने को तो वह अपनी मां की छोटे से छेंद में अपना मोटा लंड कैसे डाल पाएगा,,,। यह ख्याल उसके मन में अचानक ही आया था और इसी तरह के ख्याल से उसके बदन में झुरझुर्री सी होने लगी थी,,,,, यह सब सोते हुए अंकित की नजर अपनी मां की उभरी हुई नितंबों पर ही थी और जिस तरह से वह कर नजरों से देख रहा था उसी तरह से सुगंध भी कर नजरों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी और इस बात से काफी उत्साहित और उत्तेजित की थी कि इस समय उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभर कर रोटी पका रही थी और अपने बेटे की नजरों को सेंक रही थी,,,। एकाएक रोटी पकाते हुए अपने बेटे के नजरों को अपने नितंबों पर स्थित देखकर वह एकदम से पूछ बैठी,,,।





ऐसे क्या देख रहा है अंकित,,,,?

(इतना सुनते ही अंकित को तो जैसे सांप सूंघ गया हो वह एकदम से हक्का-बक्का रह गया उसे अपनी मां से इस तरह के सवाल की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी और इस समय उसकी गलती भी थी क्योंकि वह अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ ही देख रहा था और अपने मन में उसकी बुर को लेकर कल्पना कर रहा था इसलिए वह एकदम से हडबडाते हुए बोला,,,।)



कककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी,,,,वो ,,,वो मै,,, राहुल के बारे में सोच रहा था,,,,।

(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसकी गांड की तरफ ही देख रहा था और मन ही मन उत्तेजित हो रहा था लेकिन उसके बेटे ने बड़ी सफाई से बात को बदल दिया था लेकिन सिग्मा होने के नाते और एक औरत होने के नाते वह मर्दों के मन की बातों को अच्छी तरह से जानती इसलिए वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उससे झूठ बोल रहा है और वह बोली,,,)

कौन राहुल,,,?





अरे मम्मी वह तुम्हारे साथ पढ़ती है ना नूपुर आंटी उनका लड़का अभी कल ही तो मार्केट में मिले थे,,,

अरे हां याद आया नूपुर का लड़का राहुल,,,(नूपुर का जिक्र आते ही सुगंध की आंखों के सामने उसके बेटे की हरकत याद आ गई और वह अपने मन में सोचने लगी की खास उसका बेटा भी उसी तरह की हरकत उसके साथ करता तो कितना मजा आता लेकिन मन मसोस सोचकर वह बोली)।

अच्छा हां राहुल,,,,, क्या हुआ,,,?(सहज होते हुए सुगंधा उसी तरह से रोटी को तवे पर रखने लगी,,)



अरे हुआ कुछ नहीं मम्मी उसने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया है,,,, मैं यह सोच रहा हूं जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए,,,, तुम ही बताओ ना,,,,

(अंकित की बात सुनकर वैसे तो सुगंधा उसे कोई और समय होता तो नहीं जाने देती लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि लड़के को संगत में ही बिगड़ते हैं और राहुल अपनी मां के साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहा था सुगंधा को पूरा विश्वास था कि दोनों मां बेटे के बीच नाजायज संबंध थे,,, और इसीलिए राहुल की संगत उसके विचार आमतौर पर बिल्कुल भी अच्छे नहीं होंगे औरत के मामले में वह एकदम बिगड़ा हुआ होगा तभी तो अपनी मां के साथ जिस्मानी संबंध बनाता है,,,, ऐसा सुगंधा सिर्फ अनुमान लगा रही थी उसकी हरकत को देखकर जिस तरह से अपनी मां के नितंबों पर हाथ रखकर उसे चल रहा था उसे देखकर वह अंदाजा लगा ली थी कि उसके और उसकी मां के बीच जिस्मानी ताल्लुकात जरूर होंगे,,, और इस समय राहुल के अनुभव का अंकित को बेहद जरूरत थी और सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कोई भी लड़का संगत में ही बिगड़ा है अगर वह राहुल की संगत में आ गया तो राहुल उसे भी अपनी तरह बना देगा और फिर सुगंधा का काम बन जाएगा इसलिए कुछ देर सोचने के बाद वह बोली,,,।)



अगर वह तुम्हें खेलने के लिए बुलाया है तो तुम्हें जाना चाहिए उसके साथ संबंध आगे बढ़ाना चाहिए वैसे भी लड़कों को समय-समय पर दोस्त बदलते रहना चाहिए क्योंकि उनसे कुछ सीखने को मिलता है और वैसे भी वह मेरी सहेली का दोस्त है तो उसके साथ मिलने झूले में कोई बुराई नहीं है,,,, जाना कब है,,,

रविवार को,,,,

चलो कोई बात नहीं ठीक है यही पास में ही तो रहता है चले जाना,,,,।(अपने बेटे को राहुल के पास उसके साथ क्रिकेट खेलेंगे जाने के लिए इजाजत देने से उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने मन में ही सोच रही थी कि उसका बेटा भी राहुल की तरह बन जाएगा अगर राहुल की संगत में आ गया तो और अगर ऐसा हो गया तो जिस तरह की हरकत राहुल अपनी मां के साथ करता है इस तरह की हरकत हुआ भी उसके साथ करेगा यह सोचकर ही उसके बदन में उत्तेजना के लहर दौड़ने लगी,,,,।

आखिरकार रविवार का दिन आ ही गया ,, और अंकित राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,।
 
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