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सुगंधा अपने बेटे को राहुल के पास उसके संगत का असर देखने के लिए भेज रही थी क्योंकि वह जानती थी की संगत में ही लड़के अक्सर बिगड़ जाते हैं और जिस तरह का राहुल था सुगंधा अंकित को भी उसी की तरह बनना चाहती थी ताकि वह उसके सहयोग से अपनी जवानी की प्यास बुझा सके,,,, सुगंधा तो राहुल की संगत में आने के बाद अंकित को लेकर कल्पना भी करने लगी थी,,, पर उसकी कल्पना में वही दृश्य सामने उभर कर आता था वही मार्केट वाला जहां पर वह अब खुद नूपुर की जगह सब्जी के ठेले पर खड़ी होकर सब्जी खरीद रही होती है और उसका लड़का उसके अंगों से छेड़खानी कर रहा होता है उसके लिए तंबू पर हाथ रख दे रहा होता है और अपने हाथों को नीचे की तरफ से ही उसकी बुर वाली जगह पर दबा दे रहा होता है इस तरह की कल्पना करके उसकी बर पानी छोड़ देती थी,,,, और अपनी कल्पना को हकीकत में बदलने के लिए वह बेहद उत्सुक और बेताब नजर आ रहीथी,,,।
देखते ही देखते रविवार का दिन आ गया था और अपनी मां से इजाजत लेने के बाद दोबारा है राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया था जो कि कुछ ही दूरी पर था,,,, थोड़ी ही देर में अंकित उसे जगह पर पहुंच गया था जहां पर राहुल ने उसे बुलाया था यह भी एक मैदान था जहां पर लोग क्रिकेट खेल रहे थे पहले तो अंकित वहीं बड़े से पेड़ के नीचे खड़ा होकर ईधर उधर राहुल को ढूंढने लगा,,,, लेकिन राहुल उसे कहीं नजर नहीं आ रहा था उसे लग रहा था कि शायद राहुल उसे बुलाकर ना आया हो उसे कोई काम पड़ गया हो लेकिन तभी उसके कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ और वह पीछे मुड़कर देखा तो राहुल खड़ा था उसे देखते ही अंकित मुस्कुरा दिया जवाब में राहुल भी मुस्कुराने लगा और बोला,,,।
तेरा ही इंतजार कर रहे थे,,, चल आजा क्रिकेट खेलते हैं,,,।
(दो टीम खेलने के लिए तैयार हो चुकी थी उनमें से अंकित राहुल की टीम में था और वाकई में राहुल का इंतजार हो रहा था उसके आते हैं क्रिकेट का खेल शुरू हो गया था पहले बल्लेबाजी विरोधी टीम की थी और उन लोगों ने 10 ओवर में 80 रन बना चुके थे,,, अब बारी राहुल की टीम की थी,,,,)
यार राहुल सामने वालों ने तो जबरदस्त खेल है 10 ओवर में 80 रन,,,,
हां तु ठीक कह रहा है अंकित,,,रन कुछ ज्यादा ही लग गया है,,,, अपनी बोलींग भी ठीक नहीं थी,,,।,, पता नहीं कैसे बन पाएगा,,,,
कुछ चिंता मत कर बन जाएगा बस आराम से और ध्यान से खेलना है,,,(इतना कहने के साथ यही दोनों एक जगह पर बैठ गए थे क्योंकि ओपनिंग जोड़ी किसी और किसी और दोनों 15 रन बनाने के बाद ही आउट हो गए और उसके बाद तो लगातार तीन विकेट और गई मतलब पांच ओवर में 35 रन और 5 विकेट इसके बाद,,,, राहुल और अंकित दोनों की जोड़ी मैदान में जम चुकी थी दोनों तरफ से रन बनाए जा रहे थे हर एक रन पर हर एक चोके पर राहुल की टीम जोरों से शोर मचा रही थी,, राहुल और अंकित की जोड़ी में हारी हुई बाजी को जीत में बदलने जा रहे थे और आखरी बोलकर तीन रन चाहिए था और बेटिंग में था अंकित,,,, राहुल उसके पास आया और बोला,,,।)
यार टीम की इज्जत तेरे हाथ में है तुझे ही टीम को जिताना है,,,,,।
देख राहुल में पूरी कोशिश करूंगा,,,,,।
(इतना कहने के साथ ही ,,, अंकित क्रीज पर खड़ा हो गया और चारों तरफ देखकर मुआयना करने लगा कि कौन सा खिलाड़ी कहां खड़ा है,,,, और फिर तैयार हो गया बल्लेबाजी के लिए और जैसे ही अगली गेंद उसके करीब आई वह आगे बढ़कर ऐसा जोरदार शॉट मारा की गेंद हवा में बाउंड्री पर हो गई अंकित छक्का जड़ दिया था और इसी के साथ उसकी पूरी टीम एकदम से उत्साहित होकर दौड़ते हुए उसके पास आई और उसे उठा ली,,,, राहुल बहुत खुश था क्योंकि उसने भरोसा करके अंकित को अपनी टीम में शामिल किया था और अंकित ने विजय दिलाया था,,,।
जीतने के बाद राहुल की टीम नाश्ता पानी करने के लिए चाय की दुकान पर गई और वहां पर बैठकर सभी लोग समोसे खा रहे थे तभी राहुल अपने ही साथी खिलाड़ी को बोला,,,,)
मैं तुझे हमेशा कहता हूं कि चौथे नंबर पर मर जाया कर चौथे नंबर पर मुझे आने दिया कर तु हमेशा अपनी मां चुदवा लेता है,,,,।
चल रहने दे पिछली मैच में तुझे ही चौथे नंबर पर भेजा गया था वहां क्या किया अपनी मां की तरह टांग खोल दिया और बोल जैसे लंड बुर में घुसती है इस तरह स्टंप में घुस गई याद है की याद दिलाऊं,,,।
चल रहने दे पीच भी तो तेरी मां की भोसड़े की तरह एकदम चिकनी थी समझ में नहीं आया,,,(चाय की चुस्की लेते हुए बेहद सहज भाव से राहुल बोला राहुल के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हो गया था क्योंकि राहुल एक शिक्षिका का लड़का था और एक शिक्षिका का लड़का होने के बावजूद भी उसकी बोली भाषा एकदम निम्न स्तर की थी और वह एक दूसरे की मां के बारे में गंदे गंदे शब्द का प्रयोग कर रहे थे हालांकि अंकित को थोड़ा अजीब तो लग रहा था लेकिन उसके बदन में अजीब से सियाराम सी दौड़ने लग रही थी क्योंकि जिस तरह से राहुल का दोस्त राहुल की मां के बारे में बातें कर रहा था यह सुनकर अंकित की आंखों के सामने राहुल की मां का खूबसूरत चेहरा और उसका गदराया बदन नजर आने लगा और अभी कुछ दिन ही हुए थे उसे अपनी मां की बुर का दीदार किए हुए इसलिए अंकित तुरंत राहुल की मां की बुर के बारे में कल्पना करने लगा और यह सब करते हुए वह बेहद उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,।)
अब चल रहने दे तेरी मां की बुर की तरह तो चिकनी बिल्कुल भी नहीं थी जो संभाल नहीं पाया और फिसल गया,,,,, जितने नंबर पर तु उतरता है उतने ही नंबर पर उतरेगा,,,,।
देख ऐसा नहीं है कभी-कभी हो जाता है चौथे नंबर पर उतरता हूं तो मुझे गेंद तेरी मां की चूची की तरह बड़ी-बड़ी दिखती है,,,,
मुझे भी चौथे नंबर पर गेंद तेरी मां की चुची की तरह नजर आती है,,,,
और चुची नजर आती है तभी तो खेल नहीं पता है ना,,,।
यार राहुल क्या बताऊं तेरी मां की चूची के बारे में सोच कर ही दिमाग फेल हो जाता है,,,।
चल अब रहने दे,,, तेरी मां इतनी कसी हुई साड़ी पहनती है कि उसकी गांड ऐसा लगता है कि बाहर निकल जाएगी और जब भी मैं देखता हूं उसी समय मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,।
बस देख कर ही मन बहला लेना अगर कभी उल्टा सीधा करने की सोच भी तो मेरी मां तेरा लंड काट देंगी,,, बहुत गुस्से वाली है,,,।
तेरी मां का गुस्सा शांत करना मुझे आता है देखना किसी दिन मौका मिलेगा ना उसे अपना लंड दिखा दूंगा फिर देखना तेरी मां को उसके ही कमरे में पटक कर चोदुंगा और तू देखते ही रह जाएगा,,,,।
(दोनों जिस तरह से आपस में बातें कर रहे थे बाकी के लोग सुनकर मजा ले रहे थे और वह लोग भी आपस में मां बहन की गाली देते हुए ही बात कर रहे थे आज पहली बार अंकित ऐसे लोगों से मिल रहा था जो भेज दीजिए एक दूसरे को मां बहन की गाली देकर बात कर रहे थे और किसी को भी बुरा नहीं लग रहा था,,,, अंकित चाय की चुस्की लेते हुए सब लोगों के बारे में सोच रहा था खास करके राहुल के बारे में राहुल अपनी मां के बारे में इतनी गंदी बातें बडे आराम से सुन ले रहा था,,, और अगर इस तरह की बातें कोई उससे करता तो शायद वह झगड़ा कर लेता ,, अभी अंकित यह सब बातें सोच ही रहा था कि तभी उनकी टीम का कप्तान उसके पास आया और हाथ मिलाने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ा दिया अंकित भी अपना हाथ आगे बढ़ाकर मुस्कुरा कर हाथ मिलाने लगा और वह बोला,,,)
यार तूने तो सभी बोलरो की मां चोद दिया,,, क्या छक्का चौका लगाया है,,,, वैसे नाम क्या है तेरा,,,,।
अंकित नाम है इसका,,,,(अंकित से पहले राहुल उसका परिचय देते हुए बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसकी मां भी स्कूल में पढाती है मेरी मां के साथ,,,
अरे वाह,,, उसकी मां भी तेरी मां की तरह एकदम चिकनी होगी,,,,
बहुत जोरदार मेरी मां से भी जबरदस्त है,,,,।
(उसकी बात सुनकर अंकित तो दोनों को देखा ही रह गया अंकित को यकीन नहीं हो रहा था कि यह दोनों इतने सहज रूप से पहली मुलाकात में ही उससे इस तरह की बातें करेंगे,,, अंकित कुछ बोल नहीं पाया और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
चल कोई बात नहीं आते रहना अगली बार तुझसे ओपनिंग करवाएंगे,,,,
(इतना कहकर वह और उसके साथी धीरे-धीरे वहां से जाने लगे राहुल अभी भी उसके साथ बैठा हुआ था,,,, सबके चले जाने के बाद अंकित बोला,,)
यार तुम लोग आपस में इतनी गंदी गंदी बातें करते हुए दूसरे की मां के बारे में तुम लोगों को बुरा नहीं लगता,,,।
नहीं तो इसमें क्या हो गया भले एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करते हैं लेकिन इससे पता तो चलता है कि किसकी मां सबसे ज्यादा सेक्सी और गर्म है,,,।
क्या,,,,!(अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,)
देख जिसे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था उसकी मां की गांड के लिए जबरदस्त है कि जब भी वह साड़ी पहनती है तो ऐसा लगता है कि उसकी बड़ी-बड़ी गांड बाहर निकल आएगी और उसकी गांड देखकर लंड खड़ा हो जाता है,,,, और जो हमारी टीम का कप्तान है उसकी मां एकदम लंबी चौड़ी कद काठी की है उसकी चूचियां बहुत ज्यादा बड़ी है उसकी गांड भी इतनी ज्यादा बड़ी है कि पूछो मत इतना समझ लो कि अगर उसे चोदने का मौका मिले,,, तो तुम पीछे से उसकी ले ही नहीं पाओगे,,,।
मतलब ,,,,!(एक बार फिर से अंकित आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)
मतलब किसकी गांड इतनी बड़ी-बड़ी है कि पीछे से तुम्हारा लंड उसकी बुर तक पहुंच ही नहीं पाएगा अगर उसकी लेना है तो उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी टांगें खोल कर लेना होगा,,, यह बात मैंने कई बार अपने कप्तान से कह चुका हूं,,,
क्या कह रहे हो यार और वह कुछ बोला नहीं,,,।
वह क्या बोलेगा वह तो हंसते रहता है पर मेरी बात सुनकर वह भी यही बोलता है कि तू सच कह रहा है,,,
बाप रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,,,
अच्छा एक बात बात कभी किसी को चोदने का मौका मिला है,,,
नहीं,,,,(शब्दों के साथ-साथ इशारे से सर को भी ना है हिलाते हुए अंकित बोला ,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तू,,,,
मुझे तो कई बार मौका मिल चुका है,,,, और हां जिससे मैं चौथे नंबर पर खेलने के लिए बोल रहा था ना उसकी मां की चुदाई में कर चुका हूं लेकिन यह बात उसे मालूम नहीं है,,,,
क्या कह रहे हो यार,,,,
हां तभी तो मैं जानता हूं उसकी मां के बारे में इतना कुछ यह खुद अपनी मां को अभी तक साड़ी में देखा होगा लेकिन मैं उसकी मां की साड़ी को अपने हाथों से उतार कर नंगी कर चुका हूं,,,,।
(राहुल की बातों को सुनकर अंकित का दिल जोरो से धडक रहा था,,,। भले ही टीम का कप्तान उसकी मां के बारे में गंदी बात कह कर गया था लेकिन न जाने क्यों पहली बार उसे दूसरे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर बहुत अच्छा लग रहा था और से इस बात का एहसास भी हो रहा था कि वाकई में उसकी मां बहुत खूबसूरत है क्योंकि राहुल ने भी यही कहा था कि उसकी मां से भी ज्यादा चिकनी उसकी मां है,,,,और राहुल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
यार अंकित सच में वैसे तो सब कुछ ठीक है लेकिन उसकी मा बुर एकदम साफ रखती है एकदम चिकनी और मुझे बालों वाली बुर ज्यादा पसंद है,,,,( राहुल की यह बात सुनते ही अंकित के मन में उभरने लगा जब वह अपनी मां के कमरे में उसे जगाने के लिए गया था और पहली बार जिंदगी में अपनी मां की बुर के दर्शन किया था और उसे समय उसकी मां की पूरी एकदम चिकनी थी लेकिन चिकनी बुर अंकित को बहुत अच्छी लग रही थी खूबसूरत लग रही थी,,,)
तुझे कैसी बुर पसंद है,,,?(एकदम से राहुल ने अंकित से पूछ लिया और उसका यह सवाल सुनकर अंकित एकदम से हड़बड़ा गया,,,,, और कुछ बोल नहीं पाया तो राहुल फिर बोला,,,)
अरे बोलना शरमाता क्यों है,,,.
(उसके इतना कहने पर अंकित धीरे से शरमाते हुए बोला)
अब मैं क्या बताऊं मैं तो कभी देखा ही नहीं हूं,,,,।
(इतना सुनते ही राहुल हंसने लगा और हंसते हुए बोला)
यार सच में तू कमाल का लड़का है,,,, मेरी और तेरी उम्र में कोई फर्क नहीं है,,, लेकिन फिर भी तो इस उम्र में भी बहुत पीछे है मुझको ही देखले ना जाने कितनी औरतें की बुर देख चुका हूं और चोद भी चुका हूं,,, यहां पर नहीं जहां रहकर पढ़ाई करता हूं वहां पर यहां पर तो सिर्फ एक ही औरत की चुदाई किया हूं जो मैं तुझे बता रहा था और वहां तो इसके घर में किराए पर रहता हूं उसे और उसकी लड़की दोनों के साथ मेरा चक्कर है,,,,।
(यह सब सुनकर अंकित को अपने ऊपर गुस्सा आने लगा क्योंकि उसके उम्र का ही राहुल जवानी का मजा लूट रहा था और वह भी बहुत सी औरतों को लड़कियों के साथ और वह था कि अभी तक सिर्फ ताका झांकी में लगा हुआ था,,,,)
तू भी कोई चक्कर चला ले और जवानी का मजा लूट और तो इतना मजा देती है कि पूछो मत स्वर्ग का सुख मिलेगा अगर बाहर कहीं जुगाड़ नहीं हो पा रहा है तो घर में ही जुगाड़ बना ले मजा ही मजा लूटेगा,,,।
(इतना कहने के साथ ही राहुल अपनी जगह से खड़ा हो गया और अंकित से बोला)
चल मेरे घर,,,, थोड़ी बातें करेंगे और तू मेरा घर भी देख लेगा,,,,(उसकी बात सुनकर अंकित अपनी जगह से खड़ा हो गया वैसे तो अपने घर जाने की सोच रहा था लेकिन जिस तरह की बातें राहुल कर रहा था उसे सुनकर उसका मन नहीं कर रहा था घर जाने को वह इस तरह की बातें सुनने में आनंदित हो रहा था और खड़े होकर उसके साथ उसके घर की तरफ जाने लगा लेकिन उसके मन में असमंजस बढ़ रहा था क्योंकि अभी-अभी राहुल ने घर में ही जुगाड़ वाली बात कहा था जो कि उसे समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह चलते-चलते ही राहुल से बोला,,,)
तो घर में ही जुगाड़ वाली बात कर रहा था मैं तेरी बात नहीं समझा,,,,
अरे यार तू सच में बहुत भोला है घर में जुगाड़ का मतलब है कि घर में ही किसी स्त्री से संबंध बना ले जो कि बिलकुल सेफ रहता है जिसमें पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता,,,,
घर की स्त्री से संबंध मतलब,,,
यार तुझे तो सब कुछ समझाना पड़ता है,,,, देख मेरी बात ध्यान से सन और गुस्सा मत होना बस मेरी बात पर गौर करना जिन लड़कों का बाहर जुगाड़ नहीं होता चोदने का वह लड़के घर में ही संबंध बना लेते हैं,,,,
लेकिन किससे,,,(अंकित को भी थोड़ा-थोड़ा समझ में आ रहा था लेकिन फिर भी वह बोला)
किसी से भी घर में कोई भी स्त्री हो जो एकदम गजब की लगती हो जैसे की चाची हो भाभी हो मामी हो या फिर अपनी खुद की बहन या मां हो,,,,।
(राहुल की बातें सुनकर अंकित एकदम हैरान हुआ जा रहा था क्योंकि राहुल घर के ही औरतों के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रहा था जिनमे मां और बहन दोनों शामिल थी ,, इसलिए वह हैरान होते हुए बोला,,,)
की औरतें मां और बहन के साथ भी,,, पागल हो गया है क्या,,,!
अरे बुद्धू मैं जानता था तू ऐसा ही बोला क्योंकि तू इन सब के बारे में भी कुछ नहीं जानता,,,, जैसा लड़कों को हमेशा बुर की जरूरत पड़ती रहती है उस तरह से औरतों को भी हमेशा लंड की जरूरत पड़ती रहती है मोटा तगड़ा लंड जो उनके बुर में जाकर उनकी प्यास बुझा सके,,,, और तू नहीं जानता घर में अक्सर इस तरह के संबंध स्थापित हो ही जाते हैं क्योंकि घर की औरतों को ज्यादातर घर के लड़के ही हर हालत में देख लेते हैं कपड़े बदलते हुए नहाते हुए नंगी या फिर घर में चुदवाते हुए,,, अच्छा एक बात बात सच-सच बताना लंड खड़ा होता है कि नहीं,,,,
यार अब यह कैसा सवाल है,,,,
अरे जैसा भी है लेकिन सच-सच बताना खड़ा होता है कि नहीं,,,,
हां जरूर होता है,,,,
लड़की और औरतों के बारे में ख्याल आता है कि नहीं उनकी गांड देखकर उनकी चूची में देखकर मन में कल्पना होती है कि बिना कपड़ों की यह कैसी दिखती होगी,,,,
हां जरूर,,,,(अंकित भी धीरे-धीरे खुल के जवाब देने लगा,,,)
और फिर जब बिना कपड़ों की औरतों के बारे में सोचता है तो उनके अंगों के बारे में भी सोचता होगा उनकी बुर के बारे में उनकी चुची के बारे में,,,,
हां,,,,(कुछ देर सोचने के बाद चलते-चलते जवाब दिया,,,)
और फिर जब इतना कुछ खाया जाता है तो फिर बच्चे ख्याल आता होगा कि अगर मैं बुर में लंड डालकर चुदाई करूंगा तो कितना मजा आएगा और यही सोचकर हिलाता भी होगा आप सच सच बताना तुझे तेरी मां की कसम मुठ मारता है कि नहीं,,,।
(अंकित एकदम फस चुका था राहुल बहुत ही चालक लड़का था और वह अपनी चालाकी से अंकित के मुंह से सच बुलवाना चाहता था और अंकित को भी इन सब में मजा आ रहा था इसलिए वह कुछ देर खामोश रहने के बाद बोला)
यह तो सब करते हैं यार,,,,
सब तो करते हैं मुझे पता है मैं भी करता हूं लेकिन तू करता है कि नहीं,,,,
(अब अंकित को जवाब देने में कोई हर्ज नहीं था क्योंकि राहुल ने भी हम ही भर दिया था कि वह भी मुठ मारता है,,, इसलिए वह भी बोला।)
करता हूं,,,,
यह हुई ना बात,,,, देख दोस्त शर्माने का नहीं डरने का नहीं यह उम्र ही होती है मजा लेने के लिए अगर यह सब नहीं किया तो जिंदगी बेकार है,,,, अच्छा जब तुम मुठ मारता है तो तेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,(यह सवाल पूछ कर जवाब भी खुद देते हुए वह बोला) अपनी मां का या अपनी बहन का,,,
(इस बार राहुल का सवाल सुनकर वह थोड़ा झेंप गया ,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें क्या करें वैसे तो बात सच ही थी कि जब से हुआ मूठ मारना शुरू किया था उसके मन में उसकी कल्पना में केवल उसकी मां ही रहती थी हालांकि अभी तक वह अपनी बहन के बारे में गंदी विचार नहीं रखता था लेकिन अपनी मां को चोदने का उसके मन में ख्याल जरूर आता था,,,। लेकिन अब यह अपने मुंह से कैसे कह दे,,,, फिर भी वह अपने मन को मजबूत करके बोला,,,)
पागल हो गया क्या इस तरह के ख्याल मेरे मन में नहीं आते हां कल्पना करता हूं लेकिन मेरी पड़ोस की आंटी है उनके बारे में सोचकर,,,,(अंकित झूठ बोल रहा था और उसकी बात सुनकर राहुल बोला)
कोई बात नहीं जैसे बिस्तर पर चुदाई के लिए किसी स्त्री का होना जरूरी होता है इस तरह से मुथ मरने के लिए भी ख्यालों में किसी स्त्री की जरूरत पड़ती ही है,,,, और तुझे सच बताऊं,,, मुठ मारते समय मेरे मन में किसका ख्याल आता है,,,,।
किसका,,,,?(एकदम से अंकित बोल पड़ा)
मेरी मम्मी का,,,,(बड़े आराम से राहुल बोला,,, लेकिन जितना सहज होकर वह जवाब दिया उतना असहजता अंकित महसूस कर रहा था एकदम हैरान था और से भी ज्यादा हिरण करने वाली बात यह थी कि राहुल बेझिझक बता रहा था उसके चेहरे पर उसकी बातों में बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं हो रहा था,,,,)
क्या बात कर रहा है राहुल तु तो एकदम बेशर्म है,,,
देख अंकित,,,, इस तरह के खेल में बेशर्म बनना पड़ता है बिस्तर में या बाथरूम में बेशर्म बनने के बाद ही ज्यादा मजा आता है और मैं सच कह रहा हूं तो भी अपनी मां और बहन के बारे में सोचकर कल्पना करना इतना मजा आएगा कि तू हिलता रह जाएगा और तेरे मुठ की धार बहुत दूर तक जाएगी,,,,
ना बाबा ना मुझे तो यह ना हो पाएगा,,,,
चल कोई बात नहीं लेकिन मेरी बात पर गौर जरूर करना ज्यादा नहीं तो एक बार जरूर अपनी मां का ख्याल अपने मन में लाकर हिलाना चोदने से भी ज्यादा मजा आएगा,,,,, ।
(अंकित हैरान था एक लड़का अपना अपनी मां के बारे में इतना खुलकर कैसे बोल सकता है लेकिन जो कुछ भी वह बोल रहा था उसमें अंकित को बहुत मजा आ रहा था और वह अपने मन में सोचने लगा कि राहुल भी अपनी मां के बारे में सोच कर मुठ मारता है इसका मतलब है कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो घर में ही अपनी मां के बारे में सोच कर उत्तेजित होते हैं और मुठ मारते हैं,,,, अंकित यही सब सो रहा था कि राहुल का घर आ गया और राहुल ने दरवाजे पर पहुंचकर बेल बज दिया,,,, और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला तो सामने के दिल से कोई देख कर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई,,,,,