सुगंधा जिस स्थिति से गुजर रही थी वह बेहद नाजुक स्थिति थी,,, ऐसे में किसी भी औरत का कदम जगमगा जाना लगभग निश्चित ही होता है,,,, और ऐसा कुछ होगा सुगंध को भी पक्का यकीन नहीं था वह भी पुरुष के प्रति आकर्षित हो रही थी,,, अपने बेटे के गति ले बदन को देखकर तो उसके मन में और भी ज्यादा हलचल होने लगी,,,, वह अपने बेटे को ऐसे देख रही थी मानो जी से पहली बार अपने बेटे को देख रही हो लेकिन पहले जिस तरह से देखी थी और अब देखने में जमीन आसमान का फर्क हो चुका था पहले वह मां के रूप में अंकित को एक बेटी के रूप में देखी थी लेकिन अब वह एक औरत के रूप में एक औरत की तरह ही अपने बेटे को एक मर्द की तरह देख रही थी अपने बेटे में उसे एक जवान मार देना जरा रहा था जो किसी भी औरत की प्यास बुझाने में पूरी तरह से सक्षम था,,,।
अपने बेटे की गठीले बदन को प्यासी नजरों से देखने पर उसके मन में भी अभिलाषा जागने लगी थी,,, और औपचारिक रूप से अंकित के अंडरवियर में हो रही हलचल को उसके उभार को सुगंधा गलत नजरिया से देख कर उसका गलत ही अर्थ निकाल ली थी,,, सुगंधा को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी उपस्थिति में उसका बेटा उत्तेजित हो रहा है और इसी के चलते वह अपने मां पर काबू नहीं कर पाई और छत से नीचे आते ही तुरंत बाथरूम में घुसकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यासी बुर की प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन अब यह प्यास पूरी तरह से भड़क चुकी थी,,, जोकी उंगली से बुझने वाली नहीं थी,,,,,
अब तो ऐसा लगता था कि जैसे सुगंधा को रात होने का ही बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता था,,, टीवी बंद होते ही वह अपने कमरे में चली जाती थी और कमरे में जाते ही अपने सारे वस्त्र उतार कर संपूर्ण रूप से नंगी हो जाती थी और बिस्तर पर अंगड़ाइयां लेते हुए अपने ही नाजुक अंगों से खेलती थी और अपनी बुर में एक उंगली नहीं बल्कि दो दो उंगली डालकर अपनी प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करती थी,,, लेकिन निरंतर यह प्यास बढ़ती जा रही थी इसका कोई हाल उसे नजर नहीं आ रहा था उसकी मन पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रहा था,,, लेकिन वह दूसरी औरतों की तरह नहीं थी उन औरतों में से नहीं थी जो अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी भी मर्द का सहारा ले लेती थी पैशे से वह शिक्षिका थी,,, अपनी स्थिति को देखते हुए सुगंधा अपने मन में आए इस तरह के विचार को रफा-दफा करते थे लेकिन बार-बार उसका मन उसी तरफ आकर्षित होता था इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी भरी जवानी में वह पति के सुख से वंचित हो चुकी थी फिर भी जैसे तैसे करके वह इतने बरस निकाल ली थी लेकिन अब बरसों से दबी हुई आज भड़क चुकी थी उसके बदन की चिंगारी अब शोले का रूप ले रही थी वह ऐसे मर्द की तलाश में थी जो उसकी प्यास बुझा सके उसकी आग को शांत कर सके,,, और जब इस तरह का ख्याल आता था तो न जाने क्यों उसकी आंखों के सामने उसका बेटा ही नजर आता था न जाने क्यों उसे ऐसा लगने लगा था कि उसकी जवानी कृपया बुझाने का सही हकदार उसका बेटा ही है,,,। लेकिन जब कभी भी उसके मन में इस तरह का ख्याल आता था तो उसके मन में बहुत ग्लानी होती थी उसे अपने आप पर ही बहुत गुस्सा आता था,,, वह अपने आप को धिक्कारने लगती थी वह अपने आप को कोसने लगती थी कि इस तरह का ख्याल भी उसके मन में क्यों आया,,, वासना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था लेकिन फिर भी वह वासना में इस कदर अंधी भी नहीं हो चुकी थी कि वह अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे का सहारा ले,,, मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को वह तार तार नहीं करना चाहती थी,,,, इसलिए इस तरह के ख्याल पर वह पुर्णविराम लगा देती थी और दोबारा इस तरह का ख्याल अपने मन में ना आए इसलिए कम भी खा लेती थी लेकिन फिर दूसरे दिन जब भी उसके दिलों दिमाग पर वासना का भूत सवार होता था तब उसकी आंखों के सामने फिर उसके बेटी का अर्धनग्न शरीर नजर आने लगता था उसके अंडरवियर का उभार नजर आने लगा है पर वह अपने मन में सोचने लगती थी कि उसके अंडरवियर में उसका लंड कैसा दिखता होगा कैसा होगा खड़ा होने के बाद उसकी स्थिति क्या होती होगी कितने इंच का होगा क्या वह किसी औरत की प्यास बुझाने में सक्षम होगा कि नहीं यही सब सोचकर वह अपनी बुर को पूरी तरह से गीली कर लेती थी और फिर अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा लेती थी,,,,।
और यही स्थिति तृप्ति की भी थी वह भी अब बेचैन रहने लगी थी संदीप की हरकत से जहां एक तरफ वह परेशान थी वहीं दूसरी तरफ उसे उसकी हरकत आनंददायक भी लग रही थी हालांकि उसने संदीप से बातचीत करना बंद कर दी थी उसे अब डर लगने लगा था संदीप के सामने आने में,,,, और संदीप इस बात से पूरी तरह से परेशान था,,,, वह किसी भी तरह से तृप्ति से बात करना चाहता था उससे माफी मांगना चाहता था,,, क्योंकि वह अपनी गलती की वजह से कीर्ति जैसी खूबसूरत लड़की को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था हालांकि उसका मकसद तृप्ति के खूबसूरत बदन को प्राप्त करना ही था लेकिन फिर भी वह दोस्ती दिनों के लिए अपने दिमाग से यह बात को निकाल दिया था और किसी भी तरह से वह तृप्ति से मिलकर माफी मांग कर उसे फिर से दोस्ती का रिश्ता आगे बढ़ना चाहता था क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि अगर एक बार फिर से तृप्ति उससे बातचीत करना शुरू कर देगी तो वह एक बार जरूर बातचीत के जरिए अपनी हरकतों की जरिए उसकी दोनों टांगों के बीच आराम से पहुंच जाएगा क्योंकि उसने भी तृप्ति की स्थिति को भांप लिया था ,,, वह भी समझ गया था कि उसकी हरकत से तृप्ति को भी आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, और तृप्ति से बातचीत करने का मौका उसे जल्द ही प्राप्त हो गया,,,, वह ट्यूशन से लौट रही थी और रास्ते में संदीप उसका इंतजार कर रहा था और जैसे ही तृप्ति उसके पास से गुजरने लगी वह ठीक उसके साथ चलना शुरू कर दिया अपने करीब संदीप को इस तरह से चलता हुआ देखकर वह पल भर के लिए घबरा गई,,,, और एकदम से चौंकते हुए बोली,,,।
संदीप तुम,,, अप किस लिए मेरा पीछा कर रहे हो मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,
अरे तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी लेकिन मुझे तो तुमसे बात करनी है ना,,,
किस लिए बात करनी है तुम्हारे मन में क्या है उस दिन मुझे पता चल गया,,,
अरे उसी बारे में तो मुझे बात करनी है,,,
क्या बात करनी है अब मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,
अरे यार सुनो तो,,,(सड़क पर एक जगह घने पेड़ के नीचे एकांत पाकर वह तृप्ति का हाथ पड़कर उसे रोक लिया और तृप्ति संदीप की हरकत पर एकदम से चौंक गई और इधर-उधर देखने लगी उसे इस बात का डर था कि कहीं संदीप इस समय भी वही हरकत करना शुरू न कर दे इसलिए वह अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली,,,)
देखो संदीप तुम्हारी यही बदतमीजी मुझे अच्छी नहीं लगती,,,
और इसीलिए तो मैं माफी मांगना चाहता हूं तुमसे,,,,(तृप्ति का हाथ उसी तरह से पकड़े हुए,,) मुझे मेरी गलती का एहसास है,,,, मुझे भी नहीं मालूम की वह सब कैसे हो गया इसलिए तो मैं तुमसे माफी मांगने के लिए तुम्हारी आगे पीछे घूम रहा हूं और तुम होगी मुझे नजर बचाकर हमेशा भाग जाती हो,,,
भाग ना जाऊं तो और क्या करूं,,,(संदीप के हाथ से अपना हाथ छुड़ाने हुए लेकिन वह संदीप से बिल्कुल भी दूर जाने की कोशिश नहीं की बल्कि वही खड़ी रही) तुम्हारी हरकत के बारे में सोच कर मुझे कितनी शर्म आती है तुम्हें पता है अगर हम दोनों को कोई ने देख लिया होता तो,,, तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगड़ता संदीप लेकिन मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाती,,,,,,
मैं जानता हूं तृप्ति तुम जो कुछ भी कह रही हो उसमें सच्चाई है लेकिन इसमें भी सच्चाई है कि उसकी ना जाने मुझे क्या हो गया एकांत पाकर और तुम्हें अपने इतने नजदीक प्रकार मेरे होश उड़ गए थे मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,, तुम्हारी खूबसूरती में मै पूरी तरह से डूब गया था,,,, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखकर मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए और मैं भी वही किया जो प्रेमी प्रेमिका एकांत में करते हैं और सब कुछ अपने आप ही हो गया,,,,
अपने आप हो गया,,,, यह कहकर तुम अपनी गलती को छुपाने की कोशिश कर रहे हो संदीप,,,,
मैं अपनी गलती को छुपा नहीं रहा हूं बल्कि बता रहा हूं मेरी जगह कोई और लड़का होता तो वह भी वही करता जो मैंने किया हूं तृप्ति शायद तुम नहीं जानती कि तुम कितनी खूबसूरत हो तुम्हारी कद कट तुम्हारी बदन की बनावट किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह से सछम में और मैं बहक गया उसे समय मुझे सही गलत किसी भी चीज का अंदाजा नहीं था बस में तुम्हारी खुशबू को अपने अंदर महसूस करना चाहता था और मुझसे गलती हो गई,,,,, बस मुझे कहना चाहता हूं और मैं इसके लिए तुमसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं,,,(ऐसा कहते हुए संदीप सच में तृप्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया,,,
(यह देखकर तृप्ति एकदम से हड़बड़ा गई वह अपने चारों तरफ नजर तोड़ा कर देखने लगी थी कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय वहां से कोई गुजर नहीं रहा था इसलिए वह संदीप से बोली)
यह क्या कर रहे हो संदीप अगर कोई देख लेगा तो क्या समझेगा तुम फिर से मेरी बदनामी करने पर लगे हुए हो,,,,
नहीं मुझे माफी मांग लेने दो मुझसे गलती हुई है,,,(संदीप इस तरह से हाथ जोड़े हुए उसे विनती करते हुए बोला)
प्लीज संदीप अपना हाथ सही से करो,,,,।
(तृप्ति संदीप के भोले भाले चेहरे पर पूरी तरह से मोह गई थी,,,,,, उसके जाल साज बातों में पूरी तरह से आ चुकी थी,,, इसमें तृप्ति की गलती नहीं थी,,, क्योंकि वह थी भी तो एक औरत ही और औरत का स्वभाव होता है अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर प्रसन्न हो जाना और वह तारीफ भले ही कोई भी कर रहा हो कुछ देर पहले ही तृप्ति को अच्छी तरह से मालूम था कि संदीप ने उसके साथ जो कुछ भी किया था वह गलत था लेकिन उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आकर उसे लगने लगा था कि यह उसकी खूबसूरती का ही परिणाम था जो संदीप को,,,,,,, असली हरकत करने पर मजबूर कर दी थी तृप्ति को संदीप की बात सुनकर इस बात का एहसास हो रहा था कि वह वाकई में बहुत खूबसूरत है इसलिए मन ही मन संदीप की बातों से प्रसन्न भी हो रही थी और मन ही मन वह संदीप को माफ भी कर चुकी थी,,,, तृप्ति की बात सुनने के बाद भी वह उसी तरह से हाथ जोड़े खड़ा था तो खुद तृप्ति उसके हाथ पैर हाथ रखते हुए उसे नीचे कर दी तृप्ति की हरकत पर संदीप को इस बात से संतुष्टि महसूस हुई की तृप्ति ने उसे माफ कर दि है,,, लेकिन फिर भी वह इस तरह से उदास चेहरा बनकर खड़ा रहा तो तृप्ति कुछ देर शांत रहने के बाद बोली,,,)
चलो ठीक है इस बार तो मैं तुम्हें माफ कर देती हूं लेकिन आइंदा इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए,,,
क्या सच में तुमने माफ कर दी,,,(संदीप एकदम खुश होता हुआ)
हां मैं तुम्हें माफ करती लेकिन यह तुम्हारी आखरी गलती होगी अगर इसके बाद कोई भी गलती करे तो फिर मुझे कोई भी वास्ता नहीं होगा,,,,
बिल्कुल नहीं होगा तृप्ति,,, एक बार जो गलती हो गई मैं उसे दोहराना नहीं चाहता क्योंकि मैं तुम जैसी दोस्त को खोना नहीं चाहता,,,,,,(इतना सुनकर तृप्ति के चेहरे पर मुस्कान पर मिलेगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संदीप अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे अब जाकर खुशी मिल रही है और खुशी इस बात की कि तुम मेरे से फिर से दोस्ती कायम रख रही हो आज जाकर भगवान के दर्शन करूंगा,,,।
भगवान के दर्शन लेकिन क्यों ,,?(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)
मैं भगवान से प्रार्थना किया था कि तुम अगर मान जाओगी तो में भगवान के दर्शन करने मंदिर जाऊंगा,,,,
(तृप्ति उसकी बात सुनकर हंसने लगी,,,, संदीप पूरी तरह से अपनी चिकनी चुपड़ी बाद में तृप्ति को बहला लिया था और उसकी अश्लील हरकत के बावजूद भी अब तृप्ति एक बार फिर से उसके साथ दोस्ती का रिश्ता रखने के लिए तैयार हो चुकी थी फिर दोनों मुस्कुराते हुए अपने रास्ते पर चले गए,,,,,,,.
रात को खाना बनाते समय सुगंधा के मन में अजीब सी हलचल हो रही थी और यह हलचल किसी और को लेकर नहीं बल्कि अपने ही बेटे को लेकर हो रही थी क्योंकि अब अपने बेटे को देखने की नजरिया उसकी पूरी तरह से बदल चुका था अब वह अंकित में अपना बेटा नहीं बल्कि एक मर्द तलाशती थी जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सके उसे संतुष्ट कर सके लेकिन इस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था उसे तो इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसकी मां किसी राह पर चल पड़ी है वह तो अपनी ही मस्ती में रहता था,,,, औरतों के प्रति उसने कभी भी अपना नजरिया गलत रखा ही नहीं वह औरतों को इज्जत की नजर से देखा था चाहे घर पर हो या चाहे घर के बाहर सिर्फ एक बार उसके मन में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हुई थी जब किराणा की दुकान पर अनाज लेते समय एक औरत अपने पैसे उठाने के लिए नीचे झुकी थी और झुकता समय उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से अंकित के लंड से जाकर स्पर्श हो गया था उसी समय अंकित के तन बदन में एक चिंगारी से फूटी थी और वह उस औरत को अजीब सी नजर से देखता रह गया था जब तक कि वह उसकी नजर से ओझल नहीं हो गई थी,,,, लेकिन फिर भी अंकित के मन में उसे औरत के प्रति जिस तरह का पल भर का आकर्षण था उसके परिणाम स्वरुप उसके मन में किसी भी प्रकार की वासना और दुषणता अपना घर नहीं कर गई थी जिसके चलते उसे अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर मूठ मारना पड़ जाता वह इस दुष्परिणाम से पूरी तरह से बचा हुआ था अपनी मां की तरह बिल्कुल भी नहीं की रोज रात को,,, अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर अपनी बुर से पानी निकाले,,,,।
सारे काम निपटाकर सुगंधा तैयार होकर स्कूल जाने के लिए निकली वह अपना पर्स लेकर घर से बाहर निकली और घर बंद करके दरवाजे पर ताला लगा दी आज उसे थोड़ा देर हो चुकी थी वह जल्दी-जल्दी सड़क पर चलते हुए बार-बार अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी में समय देख रही थी आज वह पूरा 10 मिनट लेट हो चुकी थी,,,, आज उसे कोई रिक्शा भी नहीं मिल रहा था तो थक हार कर वह बस स्टैंड पर पहुंची ही थी कि वहां पर तुरंत बस आ गई और वह बस में ही चढ़ गई,,,।
बस में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी जिसे तैसे करके वह आगे की तरफ चलते हुए बीच में जाकर खड़ी हो गई तभी बस एक जगह पर रुकी और वहां पर दो-तीन लड़के बस में चढ़ गए और कुछ लोग नीचे उतर गए वह तीनों लड़के अंकित के ही उम्र के थे अब तक सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन देखते ही देखते वह लड़की एकदम सुगंधा के करीब पहुंच गए,,,, सुगंधा आगे की तरफ मुंह करके बस का हैंडल पकड़ कर खड़ी थी और बस जिस तरह से चल रही थी मुझे नीचे खड़े आते थे तब उसकी भारी भरकम गांड अजीब सा उछाल लेती थी जिसकी वजह से उसकी गांड में हलचल होने लगती थी और वैसे भी सुगंधा कमर पर साड़ी को थोड़ा कस के ही बांधती थी जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल गांड कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी,,,,, और ऐसे माहौल में तीनों लड़कों की नजर सुगंधा की खूबसूरती पर पड़ गई कोई उसकी चिकनी पीठ को देख रहा था तो कोई उसकी गोल-गोल गांड के उभार को,,, देखते देखते वह तीनों लड़के भीड़भाड़ का फायदा उठाते हुए,,, वह तीनों लड़के सुगंधा की बेहद करीब पहुंच गए थे उनमें से आगे वाला लड़का कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो जाता था जब उसकी आंखों के सामने बस में ऐसी खूबसूरत औरत नजर आती थी और ऐसे माहौल में वहां ऐसी खूबसूरत औरतों के अंगों को छूने का आनंद लेता था और खास करके इसी सुख को प्राप्त करने के लिए तीनों बस का सफर करते थे,,,,।
उन तीनों में से आगे वाला लड़का बस का हैंडल पकड़ कर देखते ही देखते सुगंधा के बेहद करीब पहुंच गया था और वह दोनों लड़के भी उसके ठीक पीछे खड़े थे,,,, तभी उनमें से एक लड़का आगे वाले लड़के से बोला,,,।
बाप रे देख रहा है कितनी खूबसूरत है आज तो अपनी चांदी ही चांदी है मैंने आज तक ऐसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,
हां यार तू सच कह रहा है इसके बदन की खुशबू ही मेरे दिमाग में नशा सा घोल रही है,,,
(तभी पीछे वाला लड़का बोला)
यार इसकी गांड तो देख मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,,
(पीछे वाले लड़के की बात सुनकर वह दोनों एकदम से उत्साहित होते हुए बोले,,)
कसम से ऐसी औरत मिल जाए ना तो दिन भर कपड़े पहनने ना दु्,,,,
(वह तीनों आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे थे लेकिन इन तीनों की बात सुगंधा को अच्छी तरह से सुनाई दे रही थी,,, वह तीनों की बातों को सुनकर एकदम से घबरा गई थी उसे इतना तो समझ में आ गया था कि वह तीनों उसी के बारे में बातें कर रहे थे,,, लेकिन फिर भी सब कुछ जानते हुए वह अनजान बनी खड़ी रही क्योंकि वह जानती थी कि जल्द ही उसका स्टॉप आ जाएगा और वह उतर जाएगी ऐसे में वह उन तीनों से उलझना नहीं चाहती थी उसने तो अभी तक तीनों की तरफ देखा भी नहीं था कि वह कैसे थे किस उम्र के थे,,,,,,, लेकिन तभी तीसरे नंबर वाला लड़का बोला,,,)
यार सुमित मुझे तो यह तेरी मां की तरह लग रही है तेरी मां की उम्र कि भी है,,, बस यह तेरी मां से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत है,,,
हां यार सुमित यह सच कह रहा है पीछे से बिल्कुल तेरी मां की तरह लगती है बस इसकी गांड कुछ ज्यादा बड़ी है,,,
(उन दोनों की बात सुनकर आगे वाला लड़का बोला,,,)
मादरचोद तुम लोग मेरी मा को देखते रहते हो क्या,,?
तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि तू हम लोगों की मां को नहीं देखता मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तु सुबह-सुबह क्यों मेरे घर आ जाता है,,,,,, मेरी मां बिना कपड़ों के नहाती है इसके लिए ना उसे नंगी देखने के लिए आता है,,,,
तो क्या करूं तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,
तो यही तो बात है जैसे तेरा लंड खड़ा होता है वैसे हम लोगों का भी तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,
(तीनों को आपस में इस तरह से एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करता हुआ देखकर सुगंधा के तो होश उड़ गए उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से अपनी मां के बारे में गंदी बातें सुन सकता है और कर भी सकता है,,,, वह हैरान थी की तीनों एक दूसरे की मां के बारे में गांधी से गंदी बातें कर रहे थे लेकिन फिर भी तीनों में से किसी को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी तीनों आराम से एक दूसरे की बातें सुन रहे थे,,,, उन तीनों की बातें सुनकर सुगंधा के मन में अजीब सी उलझन पैदा हो रही थी उसके तार बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी ना चाहते हुए भी उसका बदन उत्तेजित हो रहा था,,, तभी उसके कानों में उसके पास में जो लड़का खड़ा था उसकी बात सुनाई दी और उसकी बात को सुनकर उसके एकदम से होश उड़ गए,,,)
तुम दोनों बकवास बंद करो इस समय तो इस मक्खन मलाई की गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,, अभी अपने लंड को इसकी गांड से सटाता हूं,,,,।
(इतना सुनते ही सुगंधा के रीड की हड्डी एकदम सुनना पड़ गई उसके माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से बातें कर सकता है,,, और जो बात उसने कही थी उसके बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब हुए जा रही थी वह जाकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी और मन ही मन मना रही थी कि जल्दी उसका स्टॉप आ जाए,,,, सुगंधा यही सब सो रही थी कि तभी बस वाले ने ब्रेक मारा और इसी का फायदा उठाते हुए उसके ठीक पीछे खड़ा लड़का एकदम से उसके बदन से सट गया और पेट में बना तंबू एकदम से उसके पिछवाड़े से सटा दिया और अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया वह लड़का भीड़ बाढ़ का बराबर फायदा उठाते हुए सुगंधा के खूबसूरत है जिसमें पर अपना हाथ रख दिया था उसकी कमर पर हाथ रख दिया था उसकी चिकनी कमर जो की मक्खन की तरह एकदम फिसलन भरी थी उसे अपनी हथेली में रखकर दबा दिया था,,, और अपने लंड को एकदम से उसकी गांड से सटाकर हल्का सा धक्का दे दिया था,,,, उसे लड़के ने पल भर में ही अपना काम कर दिया था अगर उसे लड़के के मुंह से सुगंधा उसकी गंदी बात सुनी ना होती तो शायद उसे इस पर ब्रेक करने की वजह से एहसास भी ना होता,,, लेकिन वह अपनी कानों से उसे लड़के की हरकत के बारे में सुन ली थी इसलिए उसकी हरकत उसे एकदम साफ महसूस हुई थी उसे साफ महसूस हुआ था कि उसकी गांड के बीचो-बीच में पीछे खड़े लड़के का लंड एकदम से धंस गया था,,, और उसे लड़के की हथेली उसे अपनी कमर पर महसूस हुई थी जिसे उसे लड़के ने कमर पर रखकर हल्का सा मसल दिया था मानों जैसे किसी औरत को खुश करते हुए उसके साथ संभोग करते हुए उसकी कमर को दबोच लिया हो,,,,,,, उसे लड़के की हरकत से पल भर में ही सुगंधा की बुर पानी पानी हो गई थी,,, उसकी सांस एकदम से गहरी चलने लगी थी और वह एकदम से घबरा भी गई थी,,,, लेकिन फिर भी सुगंधा उस लड़के की हरकत से थोड़ा बहुत नाराज थी हालांकि इसकी हरकत से उन तीनों की बातों से उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उत्तेजना महसूस हो रही थी और इसके चलते ही उसे लड़के की हरकत की वजह से उसकी बुर पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी,,,,वह वैसे तो बहुत शर्मीली किस्म की थी राह पर चलते समय किसी गैर मर्द से बात करना भी उसके लिए गवारा नहीं था,,,, लेकिन फिर भी हिम्मत दिखाते हुए वह धीरे से अपनी नजर को पीछे की तरफ घूमाकर वह अपने पीछे वाले लड़के से बोली,,,।
देख कर बेटा,,,,(वैसे तो सुगंधा उस लड़के से थोड़ा शख्ती से पेश आना चाहती थी लेकिन जैसे ही उसकी नजर उस लड़के पर पड़ी थी उसे अंकित याद आ गया था,,, वह लड़का एकदम उसके बेटे जैसा था अच्छे घर का लग रहा था और यही वजह थी कि सुगंधा के शब्दों में नर्मी आ गई थी और सुगंधा की बात सुनकर वह पीछे वाला लड़का भी बोला,,)
सॉरी आंटी वह कहने की एकाएक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया इसके लिए,,,।
(वह लड़का भी अपने आप को शरीफ पेश करता हुआ एकदम शांति से जवाब देता हुआ बोला और आगे कुछ हो पता है इससे पहले ही सुगंधा का स्टॉप आ गया और सुगंधा भी मन ही मन भगवान को धन्यवाद देने लगी थी उसकी स्कूल आ गई थी और वह तुरंत बस में से नीचे उतर गई,, और वह तीनों लड़के हाथ मलते रह गए,,,)