Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 6 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

Ek din Ankit isi tarah se apni mummy ki gaand chatega



Or uski lega

 
सुगंधा अपनी भावनाओं पर काबू करके अपने मन को नियंत्रित करके अपने मन को घर के कार्य में लगा रही थी और ऐसे में ही वह सुबह-सुबह,,, कपड़े धोकर सूखाने के लिए छत पर पहुंच गई थी,,,,, लेकिन उसे क्या मालूम था की छत पर उसका बेटा कसरत कर रहा होगा और जैसे ही वह छत पर पहुंची उसकी नजर जैसे ही अपने बेटे अंकित कर गई तो वह एकदम से दंग रह गई एक तो पहले ही बदन पर भावनाओं का जोर अपना असर दिख रहा था जैसे तैसे वह अपने आप को अपने मन को नियंत्रित करके घर के काम में अपना मन लग रही थी और ऐसे में,,, जब उसका आकर्षण मर्दों की तरफ बढ़ने लगा था ऐसे में अपने बेटे के कसरती बदन को देखकर,,, उसके बदन में अजीब सी हलचल होने की वह एकटक अपने बेटे के बदन को देखे जा रही थी,,,,,

और ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि वह अपने बेटे को पहली बार देख रही थी आखिरकार अंकित उसका बेटा था दिन रात उसे देखा करती थी लेकिन सुषमा के द्वारा दिखाई गई फिल्म के बाद से उसके देखने का रवैया बदलने लगा था,,, इसीलिए तो आज अपने बेटे पर नजर पडते ही उसके देखने की परिभाषा पूरी तरह से बदल गई और वैसे भी अंकित जी अवस्था में था उसे अवस्था में उसे देखकर कोई भी औरत या लड़की उसकी तरफ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकती थी क्योंकि अंकित गठीले बदन का मालिक था और तो और इस समय वह कसरत कर रहा था केवल अंडरवियर में,,,, इसलिए सुगंधा अपने बेटे को देखते ही रह गई,,, आज पहली बार सुगंधा अपने बेटे को बड़े गौर से देख रही थी,,, उसके मजबूत बड़ों को चौड़ी छाती को उसकी नंगी चिकनी पीठ को और मोटी मोटी जांघों को जिस पर नस उभरी हुई साफ नजर आ रही थी,,,,,, यह सब देखकर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में जो कि कुछ दिनों से बार-बार गीली होती चली जा रही थी और इस समय भी उसका यही हाल था अपने बेटे को अर्धनग्न अवस्था में और बाकी कसरत करते हुए देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ने लगी थी उसे अपनी पैंटी साफ़ गीली होती हुई महसूस हो रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी आंखों के सामने जिससे जवान लड़की को देखकर वह अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही है वह कोई और नहीं बल्कि उसका सगा बेटा है यह उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है उसे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन न जाने क्यों इस आकर्षण में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,

यूं तो अपने बदले हुए देखने के रवैये के चलते वह कई मर्दों की तरफ आकर्षित हुई थी लेकिन अंकित उन सब में सबसे अलग था एक तो उसकी उम्र भी अभी पूरी तरह से मिली नहीं थी लेकिन फिर भी उसका पूरा बदन एकदम कठीला और कसरती था जिसकी वजह से वह एकदम जवां मर्द लग रहा था,,, हल्की-हल्की उसकी मुछे फूटने लगी थी,,,, सुगंधा का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह एकटक अपने बेटे की तरफ देखे जा रही थी लेकिन अंकित कसरत करने में पूरी तरह से मस गुल था,,,, फिर भी अचानक उसकी नजर अपनी मम्मी पर गई तो वह एकदम से मुस्कुराते हुए बोला,,,।

अरे मम्मी तुम यहां सुबह-सुबह क्या कर रही हो,,

अरे वह कहना कि आज जल्दी से कपड़े धो ली थी इसलिए छत पर सूखाने के लिए आई थी,,,,(सुगंधा उत्तेजना की वजह से कंपन भरे स्वर में बोली अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला)

क्या मम्मी तुम भी मुझे आवाज लगती होती मैं कपड़े डाल देता,,,,,(अंकित इस तरह से वजनदार डंबल उठाते हुए बोला तो सुगंधा उसके बदन की तरफ ही प्यासी नजरों से देखते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं अंकित यह तो मेरा काम है मैं भला कपड़े सुखाने के लिए तुझसे कैसे कह सकती हूं,,,(कितना कहते हुए सुगंधा हाथ में पड़ी हुई बाल्टी को नीचे रखते हुए बोली,,, अपने बेटे की आकर्षङ में वह वजनदार बाल्टी को नीचे जमीन पर रखना ही भूल गई थी,,,, और जमीन पर बाल्टी रखने के बाद उसमें से वह गीले कपड़े निकालने ही चली थी कि अंकित हाथ में लिया हुआ वजनदार डंबल नीचे जमीन पर रखते हुए बोला,,,)

बिल्कुल नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी मत करना आज मैं कपड़े रस्सी पर डालूंगा वैसे भी तुम बहुत मेहनत करती हो इतना तो मुझे करना ही चाहिए,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा और अपनी मां के हाथ में से अपने ही टीशर्ट को ले लिया,,, लेकिन सुगंधा वापस धुली हुई टी-शर्ट को पकडते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं बेटा यह मेरा काम है,,, तु मुझे ही करने दे,,,

नहीं नहीं है कैसे हो सकता है तुम दिन भर काम करती हो स्कूल भी जाती हो घर का काम भी करती हो मुझे भी तो थोड़ा काम करने का मौका दो तुम्हारा हाथ बंटाने का मौका दो,,,(ऐसा कहते हैं हमें अंकित अपनी मां के हाथ में से धुले हुए अपने शर्ट को वापस छीन लिया,,,)

लेकिन बेटा यह तेरा काम,,,,(सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ती थी इससे पहले ही अंकित बीच में बोला,,)

बस और कुछ नहीं सुनना चाहता तुम्हें मेरी कसम अगर मुझे रोकी तो,,, और जब तक मैं कपड़े ना डाल लूं तब तक तुम कुछ बोलना भी नहीं अगर कुछ बोली तो तुमको मेरी कसम है,,,,,।

(अंकित अपनी मां को अपनी कसम की दुहाई दे चुका था एक तरह से वहां अपनी मां के होठों पर अपनी कसम की लकीर खींच चुका था जिस पर करना सुगंधा के बस में बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करती थी और पहली बार ऐसा हुआ था कि हम कितने उसे अपनी कसम दिया था इसलिए सुगंधा अपने बेटे की बात मानते हुए खामोश रहना ही ठीक समझी,,,, वैसे भी अंकित उसके बेहद करीब था और वह भी केवल अंडरवियर में था पहली बार सुगंधा को ईस बात का एहसास हो रहा था कि उसके पति के देहांत के बाद पहली बार कोई मर्द उसके बेहद करीब केवल अंडरवियर में खड़ा था और वह भी उसका खुद का सगा बेटा इस बात का एहसास सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फैला रही थी उसके बदन से उत्तेजना के शोले भड़क रहे थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बार-बार सुगंधा की नजर अपने बेटे के अंदर बियर के आगे वाले भाग पर चली जा रही थी जो की अच्छा खासा उभार लिए हुए था,,, मात्र इतने से ही सुगंधा के बुर जवाब दे रही थी उसकी बुर से लगातार मादक रस टपक रहा था,,,,। वह संजू को बड़ी गौर से देख रही थी जो कि अपनी ही टीशर्ट को छत पर बंधी हुई रस्सी पर डाल रहा था और थोड़ा ऊपर की तरफ हाथ करके जब वह शर्ट को रस्सी पर डाल रहा था तो उसके अंदर बियर में अजीब सी हलचल हो रही थी सुगंधा की नजर तो अपने बेटे के अंदर बियर पर ही लगातार टिकी हुई थी ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे सुगंधा का मनपसंद खिलौना उसके बेटे के अंडर बियर में छुपा हुआ है,,, अंकीत रस्सी पर अपनी शर्ट डालने के बाद,,, वापस बाल्टी के करीब आया और उसमें से दूसरे कपड़ों को निकलने लगा,,, इस बार उसके हाथ,,, उसकी बड़ी बहन तृप्ति की सलवार आ गई और वह सलवार को लेकर सहज रूप से रस्सी पर डालने लगा सुगंधा सब कुछ अपनी आंखों से देख रही थी सुगंधा का ध्यान पूरी तरह से अपने बेटे पर ही था एक तरह से वह अपने बेटे की तरफ आकर्षण के माया जाल में खो चुकी थी वह अपनी शुध बुध खो चुकी थी,,,, अंकित अपने आप में ही मगन होकर धीरे-धीरे बाल्टी में से गीले कपड़ों को लेकर रस्सी पर डाल रहा था तभी सुगंधा को ख्याल आया कि बाल्टी में तो खुद उसकी और उसकी बेटी की ब्रा और पैंटी भी है,,,, इतना ख्याल आते ही न जाने क्यों उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर फूलने पीचकने लगी,,, उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह अपने मन में सोचने लगी कि उसके बेटे के हाथ में अगर उसकी ब्रा और पेटी आ गई तो वह कैसा महसूस करेगा उसे देखकर,,,

सुगंधा एक औरत होने के नाते मर्दों की फितरत को अच्छी तरह से जानते थे वह जानती थी की औरतों के अंग वस्त्र अगर मर्दों के हाथ में आ जाए तो वह कितने प्यासी नजरों से अंक वस्त्र को ही देखते हैं मानव के जैसे उसे अंग वस्त्र में औरत के कोमल अंग लिपटे हुए है,,,, और वैसे भी मर्दों की कल्पना में हमेशा औरतों के अंग और औरतों के अंग वस्त्र बने ही रहते हैं,,, क्योंकि सुगंधा को स्कूल की एक बात याद आ गई जब वह रीशेष के समय,,, सीढीओ से होते हुए ऊपर की तरफ जा रही थी और कुछ लड़के आपस में बातें कर रहे थे और उन लोगों को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था की सुगंधा उनके पास से ही जा रही है,,, उन लड़कों की बात याद करके सुगंधा के तन बदन में अभी भी उत्तेजना की लहर उठने लगती थी क्योंकि बात ही कुछ इस तरह की वह लड़के कर रहे थे,,, उसे अच्छी तरह से याद था कि एक लड़का उसके ही बारे में बात कर रहा था कि,,, यार अपनी सुगंध मैडम कितनी कसी हुई साड़ी पहनती है उनकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम उभार कर बाहर निकली रहती है,,,

इस बात को सुनकर दूसरा लड़का जवाब देते हुए बोला,,,

हां यार तू सच कह रहा है मैं तो पूरी क्लास में सिर्फ सुगंधा मैडम की गांड ही देखता रहता हूं और देख कर तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,।

(उसे लड़के की बात सुनकर तो सुगंधा के कान एकदम से खड़े हो गए थे और पल भर में उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी पहले तो उसे उन लड़कों पर बहुत गुस्सा आया था क्योंकि वह लड़के उसके बारे में ही गंदी बातें करके दिल की न जाने क्यों सुगंधा के पर वहीं पर जमे रह गए और वह उन लड़कों की बात सुनने लगी कि तभी उनमें से तीसरा लड़का बोला,,,)

यार वह सब तो छोड़ो सुगंधा मैडम कितनी खूबसूरत है एकदम मक्खन मलाई लगती है और तो और उनकी खूबसूरत अंगों को ढकने के लिए उनकी दोनों चूचियां और उनकी बुर (उसे लड़के के मुंह से अपने लिए चुची और बुर शब्द सुनकर सुगंधा के तो होश उड़ गए सुगंधा की दोनों टांगों के बीच हल्की सी सुरसुराहट होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह उन लड़कों को डांटना चाहती थी और वहां से चली भी जाना चाहती थी लेकिन ऐसा हुआ कर नहीं पा रही थी इसलिए कुछ देर तक वहीं खड़ी रही या यूं कहना कि उसके कदम आगे बढ़ने से इनकार कर दिए थे क्योंकि कहीं ना कहीं भले ही वह लड़के उसके लिए गंदी बातें कर रहे थे लेकिन उसकी खूबसूरती की तारीफ थी उन्हें लड़कों की बातों में छुपी हुई थी वह लड़का अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) जरा सोचो सुगंधा मैडम कौन सी कंपनी की ब्रा और पेटी पहनती होगी,,,

हां यार तू सच कह रहा है मुझे तो पूरा यकीन है कि मैडम की बुर और चूची इतनी मुलायम और खूबसूरत है कि मैडम उन्हें मखमल की बराबर पेंटी में छुपाती होगी ताकि जरा भी उनके बुर में और चूची में दरार ना पड़ सके,,,

हाय मैं तो पागल हो जाऊंगा आकाश में मखमल की चड्डी और ब्रा बन जाता तो उनके खूबसूरत अंगों से चिपका होता,,,।

(पल भर के लिए तो उसे लड़के की जिज्ञासा और उसकी बातें सुनकर सुगंधा की हंसी निकलने वाली थी लेकिन वह किसी तरह से अपने आप पर काबू करके वहां से चलती बनी क्योंकि ठीक उसके पीछे दूसरी मैडम आ रही थी इसलिए सुगंधा वहां पर रुकना उचित नहीं समझी थी लेकिन उन लड़कों की बातें उसके मन में गहरा प्रभाव डाल रही थी इसीलिए औरतों के अंगों के अंग वस्त्र के बारे में लड़कों की जिज्ञासा के बारे में उसे अच्छी तरह से समझ में आ गया था और इसीलिए वह इस समय,,, यही समझ रही थी कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी पूरी तरह से जवान हो चुका है औरतों के अंगों के बारे में उनके अंगों के वस्त्र के बारे में उसके मन में भी जिज्ञासा होती होगी और इस समय उसके हाथों में जरूर उसकी बहन की और उसकी खुद की ब्रा और पेटी आने वाली है इसीलिए सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह देखना चाहती थी कि अपनी मां और अपनी बहन की ब्रा और चड्डी को हाथ में लेते ही उसका अंकित पर कैसा प्रभाव पड़ता है उसके चेहरे के हाव-भाव किस तरह से बदलते हैं और अंकित था की अपने में ही मस्त अपनी मां से बात करते हुए बाल्टी में से गीले कपड़ों को निकल रहा था,,)

घर के कुछ काम मुझे भी करने दिया करो इस तरह से सारा काम करोगी तो थक जाओगी वैसे भी घर की सारी जिम्मेदारी तुम्हारे ही कंधों पर है इसलिए तुमको थोड़ा सा आराम देना भी मेरा फर्ज है,,,,।

(अंकित की बातों को सुगंधा बड़ी गौर से सुन भी रही थी और उसके अंडरवियर की तरफ भी देखे जा रही थी ,,,, सुगंधा छत पर खड़ी होकर अपने चारों तरफ नजर घूम कर दूसरी छत की तरफ भी देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,, लेकिन इस छत पर देखे जाने की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि सुगंधा की छत औरों की छत से कहीं ज्यादा ऊंची थी बल्कि सुगंधा अपनी छत पर खड़ी होकर अपने आस पड़ोस की छत पर आराम से नजर रख सकती थी,,,, सुगंधा इस बात से निश्चित हो चुकी थी कि कोई उसकी तरफ नहीं देख रहा है और वैसे भी उसका जवान बेटा लंबी कद काठी का एकदम जवान लड़का था और वह भी इस समय केवल अंडरवियर में खड़ा था इसलिए अगर किसी और की नजर इस समय दोनों पैर पड़ती तो शायद लोग इधर-उधर की बातें बनाने लगते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं था इसलिए सुगंधा निश्चित थी,,,।

सुगंधा बार-बार बाल्टी में देख ले रही थी क्योंकि उसे अपनी चड्डी एकदम साफ दिखाई दे रही थी जो की मैरून कलर की थी और साथ में मेहरून कलर की ब्रा भी थी और ठीक उसके नीचे उसकी बेटी की चड्डी और ब्रा दोनों थी जो की गुलाबी कलर की थी अंकित अपनी मां से औपचारिक रूप से बात करते हुए बाल्टी में हाथ डाला और उसके हाथ में उसकी मां की चड्डी आ गई जिसे वह बाल्टी में से तो निकाल लिया लेकिन उसमें से ढेर सारा पानी गिर रहा था मानो कि जैसे सुगंधा की जवानी का रस टपक रहा हो पल भर के लिए,,, सुगंधा के साथ एकदम से अटक गई क्योंकि अंकित उसकी चड्डी को हाथ में लेकर कुछ पल के लिए उसे गौर से देख रहा था मानो कि समझने की कोशिश कर रहा हूं कि यह क्या है और ऐसा ही था संजू के हाथ में जैसे ही उसकी मां की चड्डी आई वह दोनों हाथों में लेकर उसे देखकर परख रहा था कि उसके हाथ में कौन सा कपड़ा आया है लेकिन जल्दी से इस बात का एहसास हो गया था कि उसके हाथ में जो कपड़ा आया था वह औरतों का अंतर्वस्त्र था और यह किसका था उसकी बहन का थी या उसकी मां का यह वह नहीं जानता था लेकिन सहज रूप से वह उसे दोनों हाथों से पड़कर घुमा घुमा कर निचोड़ने लगा जिसे देखकर सुगंधा की बुर पानी छोड़ने लगी क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जैसे उसका बेटा,,, उसकी गदराई हुई जवानी को दोनों हाथों से पकड़ कर निचोड़ कर उसका रस निकाल रहा हो,,,, सुगंधा के सांस गहरी चलने लगी थी वह अपने बेटे को बड़े गौर से देख रही थी लेकिन उसे कुछ भी बोल नहीं रही थी क्योंकि ना बोलने के लिए उसके बेटे ने अपनी कसम जो दे रखा था और सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ की उसका बेटा उसे ना बोलने के लिए कसम दे रखा था अगर वह कम ना दिया होता तो शायद वह उसके हाथों से अपनी चड्डी को ले लेती,,,।

सुगंधा को ऐसा महसूस हो रहा था कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी औरतों के अंग वस्त्र को देखकर उत्तेजित हो रहा है क्योंकि बार-बार उसकी नजर अपने बेटे के अंडरवियर की तरफ जा रही थी जो की सहज रूप से अंडरवियर में इधर-उधर होने की वजह से उसमें थोड़ी सी हलचल होने लगी थी जिसकी वजह से उसके अंडरवियर का आकार थोड़ा सा बढ़ गया था जिसे देखकर सुगंधा का रोम रोम पुलकित होने लगा उत्तेजित होने लगा,,,, क्योंकि उसे ऐसा ही लगने लगा था कि दूसरे लड़कों की तरह उसका बेटा भी उसकी चड्डी को देखकर उत्तेजित हो रहा है और न जाने क्यों सफलता इस बात से अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रही थी,,,।

लेकिन अंकित के मन में ऐसा कुछ भी नहीं था यह बात को अच्छी तरह से जानते हुए कि उसके हाथ में जो गीला कपड़ा आया था उसकी मां किया उसकी बहन की चड्डी थी इसका एहसास होने पर भी उसके बदन में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आया वह पूरी तरह से सहज था और उसी तरह से औपचारिक रूप से अपनी मां से बात करते हुए बाल्टी में वापस हाथ डालकर अपनी मां की ब्रा को हाथ में ले लिया और इतना तो उसे पता ही था कि यह उसके हाथ में जो कपड़ा आया है वह औरतों को पहनने वाला बना था जिसे पहनकर औरतें अपनी चूचियों को अपनी पकड़ में रखती हैं लेकिन उसे भी सहज रूप से अंकित अपने हाथ से निचोड़ कर उसका पानी बाहर निकाल कर उसे रस्सी पर डाल दिया था लेकिन यह देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी क्योंकि जिस तरह से संजू ने उसकी ब्रा के दोनों कप को अपने दोनों हथेलियां में लेकर उसे दबा दबा कर उसमें से पानी निकला था यह देखकर उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी थी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी क्योंकि वह कल्पना करने लगी थी कि मानो जैसे उसका बेटा खुद उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों में लेकर जोर-जोर से दबा रहा है,,, और इस तरह की कल्पना उसकी बुर से पानी की झड़ी बरसा रही थी,,,,।

अंकित ठीक उसी तरह से अपनी बहन की भी ब्रा और पैंटी को हाथों में लेकर उसमें से पानी निचोड़ कर रस्सी पर डाल दिया था सूखने के लिए,,,,, अंकित ने अपना काम कर दिया था लेकिन उसकी मां शून्य मनस्क होकर एकदम से मूर्ति बनी वहीं खड़ी की खड़ी रह गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कहां करें उसके बाद में उत्तेजना का एहसास साथ झलक रहा था लेकिन अंकित एक औरत के बदन में उत्तेजना के असर को उसके चिन्ह को पहचानने के लिए पूरी तरह से परीपकव नहीं था,,, या यूं कह लो की औरतों को समझने के लिए अभी वह पूरी तरह से नादान था,,,, ठीक उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी जो की पूरी तरह से उत्तेजित होकर चुदवासी हो चुकी थी जिस तरह का हलचल उसके बदन में अपना असर दिख रहा था जवानी कर मार रही थी वह ऐसी हालत में बहकने के लिए पूरी तरह से तैयार थी,,,, वह केवल इंतजार कर रही थी कि कोई उसकी तरफ आगे बढ़े और उसने अपनी बाहों में रहकर उसकी जवानी से खेल यहां तक की पल भर में ही वह अपने बेटे के बारे में कल्पना करने लगी थी की खास उसका बेटा उसके अंतर मन को समझ पाता और आगे बढ़ाकर उसे अपनी बाहों में लेकर उसे जी भर कर प्यार करता तो शायद आज वह अपने बेटे के लिए अपनी जवानी के लिए अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर अपनी मदहोश जवानी को उसके सामने परोस देती,,,, लेकिन यह केवल सुगंधा के मन का कपोल कल्पना थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसके बेहद करीब एक जवान लड़का तथा जो जवानी से भरा हुआ था और जिस तरह से जवान उसके चेहरे पर झलक रही थी सुगंधा को पूरा विश्वास था कि अगर ऐसी हालत में उसका बेटा उसके साथ संबंध बनाए तो बरसों की प्यास को बुझा सकता है,,, लेकिन इस समय सब कुछ निरर्थक था क्योंकि उसके बेटे में औरत के प्रति बिल्कुल भी आकर्षण नहीं था,,,। यहां तक की उसकी आंखों के सामने पूरी तरह से जवानी से भरी हुई बेहद खूबसूरत औरत खड़ी थी लेकिन फिर भी उसके प्रति उसके मन में उसके तन-बदन में बिल्कुल भी एहसास या जिज्ञासा नहीं हो रही थी हालांकि उसके अंडरवियर का उभार कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था और इसी बात से सुगंधा काफी प्रभावित और प्रसन्न नजर आ रही थी,,, क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी पेंटिं और ब्रा को देखकर कभी उसके बेटे के लंड का उभार बढ़ने लगा है,,, और अपने बेटे के अंडरवियर में बढ़ते हुए लंड के ऊभार को वह अपने लिए आशा की किरण समझ रही थी,,,,।

अंकित अपना काम करने के बाद बाल्टी को अपने हाथ में उठा लिया और,,, अपनी मम्मी से बोला,,,

लो तुम्हारा काम मैंने कर दिया हूं,,,,( अंकित की बात सुनते ही सुगंधा की तंन्दा भंग हुई और वह एकदम से अंकित की तरफ तो नजर को हल्की सी नीचे की तरफ करके उसके अंदर बियर को देखने लगी जिसमें अच्छा खासा उभार बना हुआ था उसकी सांसे अभी भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, वह अपने हाथ में लिया हुआ बाल्टी अपनी मां की तरफ बढ़ाते हुए बोला,,) लो इसे पकड़ो,,,,( अंकित की इस बात को सुनकर सुगंधा को ऐसा एहसास होने लगा कि मानो जैसे उसका बेटा उसे बाल्टी नहीं बल्कि अपना लंड पकड़ने के लिए बोल रहा है फिर भी वह अपने जज्बात पर काबू करते हुए अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी थी और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और जल्दी से जाकर नाश्ता तैयार करो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं,,,।

(सुगंधा एकदम से अपने बेटे के आकर्षण में खो चुकी थी वह बिना कुछ बोले अपने बेटे के हाथ में से बाल्टी को ले ली और मुस्कुराते हुए छत से नीचे आ गई और अंकित वापस कसरत करने लगा,,, सुगंधा केवल अपने बेटे के अंडरवियर के हल्के से बढे हुए उभार को देखी थी जोकी शाहजिक रूप से था,,, निश्चित रूप से अगर सुगंधा अपने बेटे के उत्तेजित टनटनाए हुए लंड को देख लेती तो जरूर उसे अपनी बुर में लेने के लिए उतावली हो जाती,,,, लेकिन फिर भी छत पर जो कुछ भी हुआ था उसके चलते सुगंधा के तन बदन में अजीब सी उलझन पैदा हो गई थी जिसके चलते बाहर सीधा बाथरूम में प्रवेश कर गई थी और वहां जाकर के अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी उंगली से अपनी बुर की गर्मी को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रही थी,,,।
 
सुगंधा जिस स्थिति से गुजर रही थी वह बेहद नाजुक स्थिति थी,,, ऐसे में किसी भी औरत का कदम जगमगा जाना लगभग निश्चित ही होता है,,,, और ऐसा कुछ होगा सुगंध को भी पक्का यकीन नहीं था वह भी पुरुष के प्रति आकर्षित हो रही थी,,, अपने बेटे के गति ले बदन को देखकर तो उसके मन में और भी ज्यादा हलचल होने लगी,,,, वह अपने बेटे को ऐसे देख रही थी मानो जी से पहली बार अपने बेटे को देख रही हो लेकिन पहले जिस तरह से देखी थी और अब देखने में जमीन आसमान का फर्क हो चुका था पहले वह मां के रूप में अंकित को एक बेटी के रूप में देखी थी लेकिन अब वह एक औरत के रूप में एक औरत की तरह ही अपने बेटे को एक मर्द की तरह देख रही थी अपने बेटे में उसे एक जवान मार देना जरा रहा था जो किसी भी औरत की प्यास बुझाने में पूरी तरह से सक्षम था,,,।

अपने बेटे की गठीले बदन को प्यासी नजरों से देखने पर उसके मन में भी अभिलाषा जागने लगी थी,,, और औपचारिक रूप से अंकित के अंडरवियर में हो रही हलचल को उसके उभार को सुगंधा गलत नजरिया से देख कर उसका गलत ही अर्थ निकाल ली थी,,, सुगंधा को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी उपस्थिति में उसका बेटा उत्तेजित हो रहा है और इसी के चलते वह अपने मां पर काबू नहीं कर पाई और छत से नीचे आते ही तुरंत बाथरूम में घुसकर अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यासी बुर की प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन अब यह प्यास पूरी तरह से भड़क चुकी थी,,, जोकी उंगली से बुझने वाली नहीं थी,,,,,



अब तो ऐसा लगता था कि जैसे सुगंधा को रात होने का ही बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता था,,, टीवी बंद होते ही वह अपने कमरे में चली जाती थी और कमरे में जाते ही अपने सारे वस्त्र उतार कर संपूर्ण रूप से नंगी हो जाती थी और बिस्तर पर अंगड़ाइयां लेते हुए अपने ही नाजुक अंगों से खेलती थी और अपनी बुर में एक उंगली नहीं बल्कि दो दो उंगली डालकर अपनी प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करती थी,,, लेकिन निरंतर यह प्यास बढ़ती जा रही थी इसका कोई हाल उसे नजर नहीं आ रहा था उसकी मन पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रहा था,,, लेकिन वह दूसरी औरतों की तरह नहीं थी उन औरतों में से नहीं थी जो अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी भी मर्द का सहारा ले लेती थी पैशे से वह शिक्षिका थी,,, अपनी स्थिति को देखते हुए सुगंधा अपने मन में आए इस तरह के विचार को रफा-दफा करते थे लेकिन बार-बार उसका मन उसी तरफ आकर्षित होता था इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी भरी जवानी में वह पति के सुख से वंचित हो चुकी थी फिर भी जैसे तैसे करके वह इतने बरस निकाल ली थी लेकिन अब बरसों से दबी हुई आज भड़क चुकी थी उसके बदन की चिंगारी अब शोले का रूप ले रही थी वह ऐसे मर्द की तलाश में थी जो उसकी प्यास बुझा सके उसकी आग को शांत कर सके,,, और जब इस तरह का ख्याल आता था तो न जाने क्यों उसकी आंखों के सामने उसका बेटा ही नजर आता था न जाने क्यों उसे ऐसा लगने लगा था कि उसकी जवानी कृपया बुझाने का सही हकदार उसका बेटा ही है,,,। लेकिन जब कभी भी उसके मन में इस तरह का ख्याल आता था तो उसके मन में बहुत ग्लानी होती थी उसे अपने आप पर ही बहुत गुस्सा आता था,,, वह अपने आप को धिक्कारने लगती थी वह अपने आप को कोसने लगती थी कि इस तरह का ख्याल भी उसके मन में क्यों आया,,, वासना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था लेकिन फिर भी वह वासना में इस कदर अंधी भी नहीं हो चुकी थी कि वह अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे का सहारा ले,,, मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को वह तार तार नहीं करना चाहती थी,,,, इसलिए इस तरह के ख्याल पर वह‌ पुर्णविराम लगा देती थी और दोबारा इस तरह का ख्याल अपने मन में ना आए इसलिए कम भी खा लेती थी लेकिन फिर दूसरे दिन जब भी उसके दिलों दिमाग पर वासना का भूत सवार होता था तब उसकी आंखों के सामने फिर उसके बेटी का अर्धनग्न शरीर नजर आने लगता था उसके अंडरवियर का उभार नजर आने लगा है पर वह अपने मन में सोचने लगती थी कि उसके अंडरवियर में उसका लंड कैसा दिखता होगा कैसा होगा खड़ा होने के बाद उसकी स्थिति क्या होती होगी कितने इंच का होगा क्या वह किसी औरत की प्यास बुझाने में सक्षम होगा कि नहीं यही सब सोचकर वह अपनी बुर को पूरी तरह से गीली कर लेती थी और फिर अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी उंगलियों का सहारा लेती थी,,,,।

और यही स्थिति तृप्ति की भी थी वह भी अब बेचैन रहने लगी थी संदीप की हरकत से जहां एक तरफ वह परेशान थी वहीं दूसरी तरफ उसे उसकी हरकत आनंददायक भी लग रही थी हालांकि उसने संदीप से बातचीत करना बंद कर दी थी उसे अब डर लगने लगा था संदीप के सामने आने में,,,, और संदीप इस बात से पूरी तरह से परेशान था,,,, वह किसी भी तरह से तृप्ति से बात करना चाहता था उससे माफी मांगना चाहता था,,, क्योंकि वह अपनी गलती की वजह से कीर्ति जैसी खूबसूरत लड़की को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था हालांकि उसका मकसद तृप्ति के खूबसूरत बदन को प्राप्त करना ही था लेकिन फिर भी वह दोस्ती दिनों के लिए अपने दिमाग से यह बात को निकाल दिया था और किसी भी तरह से वह तृप्ति से मिलकर माफी मांग कर उसे फिर से दोस्ती का रिश्ता आगे बढ़ना चाहता था क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि अगर एक बार फिर से तृप्ति उससे बातचीत करना शुरू कर देगी तो वह एक बार जरूर बातचीत के जरिए अपनी हरकतों की जरिए उसकी दोनों टांगों के बीच आराम से पहुंच जाएगा क्योंकि उसने भी तृप्ति की स्थिति को भांप लिया था ,,, वह भी समझ गया था कि उसकी हरकत से तृप्ति को भी आनंद प्राप्त हो रहा था,,,, और तृप्ति से बातचीत करने का मौका उसे जल्द ही प्राप्त हो गया,,,, वह ट्यूशन से लौट रही थी और रास्ते में संदीप उसका इंतजार कर रहा था और जैसे ही तृप्ति उसके पास से गुजरने लगी वह ठीक उसके साथ चलना शुरू कर दिया अपने करीब संदीप को इस तरह से चलता हुआ देखकर वह पल भर के लिए घबरा गई,,,, और एकदम से चौंकते हुए बोली,,,।



संदीप तुम,,, अप किस लिए मेरा पीछा कर रहे हो मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,

अरे तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी लेकिन मुझे तो तुमसे बात करनी है ना,,,

किस लिए बात करनी है तुम्हारे मन में क्या है उस दिन मुझे पता चल गया,,,

अरे उसी बारे में तो मुझे बात करनी है,,,

क्या बात करनी है अब मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है,,,

अरे यार सुनो तो,,,(सड़क पर एक जगह घने पेड़ के नीचे एकांत पाकर वह तृप्ति का हाथ पड़कर उसे रोक लिया और तृप्ति संदीप की हरकत पर एकदम से चौंक गई और इधर-उधर देखने लगी उसे इस बात का डर था कि कहीं संदीप इस समय भी वही हरकत करना शुरू न कर दे इसलिए वह अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

देखो संदीप तुम्हारी यही बदतमीजी मुझे अच्छी नहीं लगती,,,

और इसीलिए तो मैं माफी मांगना चाहता हूं तुमसे,,,,(तृप्ति का हाथ उसी तरह से पकड़े हुए,,) मुझे मेरी गलती का एहसास है,,,, मुझे भी नहीं मालूम की वह सब कैसे हो गया इसलिए तो मैं तुमसे माफी मांगने के लिए तुम्हारी आगे पीछे घूम रहा हूं और तुम होगी मुझे नजर बचाकर हमेशा भाग जाती हो,,,

भाग ना जाऊं तो और क्या करूं,,,(संदीप के हाथ से अपना हाथ छुड़ाने हुए लेकिन वह संदीप से बिल्कुल भी दूर जाने की कोशिश नहीं की बल्कि वही खड़ी रही) तुम्हारी हरकत के बारे में सोच कर मुझे कितनी शर्म आती है तुम्हें पता है अगर हम दोनों को कोई ने देख लिया होता तो,,, तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगड़ता संदीप लेकिन मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाती,,,,,,



मैं जानता हूं तृप्ति तुम जो कुछ भी कह रही हो उसमें सच्चाई है लेकिन इसमें भी सच्चाई है कि उसकी ना जाने मुझे क्या हो गया एकांत पाकर और तुम्हें अपने इतने नजदीक प्रकार मेरे होश उड़ गए थे मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,, तुम्हारी खूबसूरती में मै पूरी तरह से डूब गया था,,,, तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखकर मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए और मैं भी वही किया जो प्रेमी प्रेमिका एकांत में करते हैं और सब कुछ अपने आप ही हो गया,,,,

अपने आप हो गया,,,, यह कहकर तुम अपनी गलती को छुपाने की कोशिश कर रहे हो संदीप,,,,

मैं अपनी गलती को छुपा नहीं रहा हूं बल्कि बता रहा हूं मेरी जगह कोई और लड़का होता तो वह भी वही करता जो मैंने किया हूं तृप्ति शायद तुम नहीं जानती कि तुम कितनी खूबसूरत हो तुम्हारी कद कट तुम्हारी बदन की बनावट किसी भी मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करने में पूरी तरह से सछम में और मैं बहक गया उसे समय मुझे सही गलत किसी भी चीज का अंदाजा नहीं था बस में तुम्हारी खुशबू को अपने अंदर महसूस करना चाहता था और मुझसे गलती हो गई,,,,, बस मुझे कहना चाहता हूं और मैं इसके लिए तुमसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं,,,(ऐसा कहते हुए संदीप सच में तृप्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया,,,

(यह देखकर तृप्ति एकदम से हड़बड़ा गई वह अपने चारों तरफ नजर तोड़ा कर देखने लगी थी कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसे समय वहां से कोई गुजर नहीं रहा था इसलिए वह संदीप से बोली)

यह क्या कर रहे हो संदीप अगर कोई देख लेगा तो क्या समझेगा तुम फिर से मेरी बदनामी करने पर लगे हुए हो,,,,

नहीं मुझे माफी मांग लेने दो मुझसे गलती हुई है,,,(संदीप इस तरह से हाथ जोड़े हुए उसे विनती करते हुए बोला)

प्लीज संदीप अपना हाथ सही से करो,,,,।

(तृप्ति संदीप के भोले भाले चेहरे पर पूरी तरह से मोह गई थी,,,,,, उसके जाल साज बातों में पूरी तरह से आ चुकी थी,,, इसमें तृप्ति की गलती नहीं थी,,, क्योंकि वह थी भी तो एक औरत ही और औरत का स्वभाव होता है अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर प्रसन्न हो जाना और वह तारीफ भले ही कोई भी कर रहा हो कुछ देर पहले ही तृप्ति को अच्छी तरह से मालूम था कि संदीप ने उसके साथ जो कुछ भी किया था वह गलत था लेकिन उसकी चिकनी चुपड़ी बातों में आकर उसे लगने लगा था कि यह उसकी खूबसूरती का ही परिणाम था जो संदीप को,,,,,,, असली हरकत करने पर मजबूर कर दी थी तृप्ति को संदीप की बात सुनकर इस बात का एहसास हो रहा था कि वह वाकई में बहुत खूबसूरत है इसलिए मन ही मन संदीप की बातों से प्रसन्न भी हो रही थी और मन ही मन वह संदीप को माफ भी कर चुकी थी,,,, तृप्ति की बात सुनने के बाद भी वह उसी तरह से हाथ जोड़े खड़ा था तो खुद तृप्ति उसके हाथ पैर हाथ रखते हुए उसे नीचे कर दी तृप्ति की हरकत पर संदीप को इस बात से संतुष्टि महसूस हुई की तृप्ति ने उसे माफ कर दि है,,, लेकिन फिर भी वह इस तरह से उदास चेहरा बनकर खड़ा रहा तो तृप्ति कुछ देर शांत रहने के बाद बोली,,,)

चलो ठीक है इस बार तो मैं तुम्हें माफ कर देती हूं लेकिन आइंदा इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए,,,

क्या सच में तुमने माफ कर दी,,,(संदीप एकदम खुश होता हुआ)

हां मैं तुम्हें माफ करती लेकिन यह तुम्हारी आखरी गलती होगी अगर इसके बाद कोई भी गलती करे तो फिर मुझे कोई भी वास्ता नहीं होगा,,,,

बिल्कुल नहीं होगा तृप्ति,,, एक बार जो गलती हो गई मैं उसे दोहराना नहीं चाहता क्योंकि मैं तुम जैसी दोस्त को खोना नहीं चाहता,,,,,,(इतना सुनकर तृप्ति के चेहरे पर मुस्कान पर मिलेगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संदीप अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखकर मुझे अब जाकर खुशी मिल रही है और खुशी इस बात की कि तुम मेरे से फिर से दोस्ती कायम रख रही हो आज जाकर भगवान के दर्शन करूंगा,,,।





भगवान के दर्शन लेकिन क्यों ,,?(तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली)

मैं भगवान से प्रार्थना किया था कि तुम अगर मान जाओगी तो में भगवान के दर्शन करने मंदिर जाऊंगा,,,,

(तृप्ति उसकी बात सुनकर हंसने लगी,,,, संदीप पूरी तरह से अपनी चिकनी चुपड़ी बाद में तृप्ति को बहला लिया था और उसकी अश्लील हरकत के बावजूद भी अब तृप्ति एक बार फिर से उसके साथ दोस्ती का रिश्ता रखने के लिए तैयार हो चुकी थी फिर दोनों मुस्कुराते हुए अपने रास्ते पर चले गए,,,,,,,.

रात को खाना बनाते समय सुगंधा के मन में अजीब सी हलचल हो रही थी और यह हलचल किसी और को लेकर नहीं बल्कि अपने ही बेटे को लेकर हो रही थी क्योंकि अब अपने बेटे को देखने की नजरिया उसकी पूरी तरह से बदल चुका था अब वह अंकित में अपना बेटा नहीं बल्कि एक मर्द तलाशती थी जो उसकी इच्छाओं की पूर्ति कर सके उसे संतुष्ट कर सके लेकिन इस बात से अंकित पूरी तरह से अनजान था उसे तो इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसकी मां किसी राह पर चल पड़ी है वह तो अपनी ही मस्ती में रहता था,,,, औरतों के प्रति उसने कभी भी अपना नजरिया गलत रखा ही नहीं वह औरतों को इज्जत की नजर से देखा था चाहे घर पर हो या चाहे घर के बाहर सिर्फ एक बार उसके मन में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हुई थी जब किराणा की दुकान पर अनाज लेते समय एक औरत अपने पैसे उठाने के लिए नीचे झुकी थी और झुकता समय उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से अंकित के लंड से जाकर स्पर्श हो गया था उसी समय अंकित के तन बदन में एक चिंगारी से फूटी थी और वह उस औरत को अजीब सी नजर से देखता रह गया था जब तक कि वह उसकी नजर से ओझल नहीं हो गई थी,,,, लेकिन फिर भी अंकित के मन में उसे औरत के प्रति जिस तरह का पल भर का आकर्षण था उसके परिणाम स्वरुप उसके मन में किसी भी प्रकार की वासना और दुषणता अपना घर नहीं कर गई थी जिसके चलते उसे अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर मूठ मारना पड़ जाता वह इस दुष्परिणाम से पूरी तरह से बचा हुआ था अपनी मां की तरह बिल्कुल भी नहीं की रोज रात को,,, अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपने हाथ का सहारा लेकर अपनी बुर से पानी निकाले,,,,।



सारे काम निपटाकर सुगंधा तैयार होकर स्कूल जाने के लिए निकली वह अपना पर्स लेकर घर से बाहर निकली और घर बंद करके दरवाजे पर ताला लगा दी आज उसे थोड़ा देर हो चुकी थी वह जल्दी-जल्दी सड़क पर चलते हुए बार-बार अपने हाथ में बंधी हुई घड़ी में समय देख रही थी आज वह पूरा 10 मिनट लेट हो चुकी थी,,,, आज उसे कोई रिक्शा भी नहीं मिल रहा था तो थक हार कर वह बस स्टैंड पर पहुंची ही थी कि वहां पर तुरंत बस आ गई और वह बस में ही चढ़ गई,,,।

बस में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी जिसे तैसे करके वह आगे की तरफ चलते हुए बीच में जाकर खड़ी हो गई तभी बस एक जगह पर रुकी और वहां पर दो-तीन लड़के बस में चढ़ गए और कुछ लोग नीचे उतर गए वह तीनों लड़के अंकित के ही उम्र के थे अब तक सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन देखते ही देखते वह लड़की एकदम सुगंधा के करीब पहुंच गए,,,, सुगंधा आगे की तरफ मुंह करके बस का हैंडल पकड़ कर खड़ी थी और बस जिस तरह से चल रही थी मुझे नीचे खड़े आते थे तब उसकी भारी भरकम गांड अजीब सा उछाल लेती थी जिसकी वजह से उसकी गांड में हलचल होने लगती थी और वैसे भी सुगंधा कमर पर साड़ी को थोड़ा कस के ही बांधती थी जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल गांड कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी,,,,, और ऐसे माहौल में तीनों लड़कों की नजर सुगंधा की खूबसूरती पर पड़ गई कोई उसकी चिकनी पीठ को देख रहा था तो कोई उसकी गोल-गोल गांड के उभार को,,, देखते देखते वह तीनों लड़के भीड़भाड़ का फायदा उठाते हुए,,, वह तीनों लड़के सुगंधा की बेहद करीब पहुंच गए थे उनमें से आगे वाला लड़का कुछ ज्यादा ही उत्साहित हो जाता था जब उसकी आंखों के सामने बस में ऐसी खूबसूरत औरत नजर आती थी और ऐसे माहौल में वहां ऐसी खूबसूरत औरतों के अंगों को छूने का आनंद लेता था और खास करके इसी सुख को प्राप्त करने के लिए तीनों बस का सफर करते थे,,,,।

उन तीनों में से आगे वाला लड़का बस का हैंडल पकड़ कर देखते ही देखते सुगंधा के बेहद करीब पहुंच गया था और वह दोनों लड़के भी उसके ठीक पीछे खड़े थे,,,, तभी उनमें से एक लड़का आगे वाले लड़के से बोला,,,।

बाप रे देख रहा है कितनी खूबसूरत है आज तो अपनी चांदी ही चांदी है मैंने आज तक ऐसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,



हां यार तू सच कह रहा है इसके बदन की खुशबू ही मेरे दिमाग में नशा सा घोल रही है,,,

(तभी पीछे वाला लड़का बोला)

यार इसकी गांड तो देख मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,,

(पीछे वाले लड़के की बात सुनकर वह दोनों एकदम से उत्साहित होते हुए बोले,,)

कसम से ऐसी औरत मिल जाए ना तो दिन भर कपड़े पहनने ना दु्,,,,

(वह तीनों आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे थे लेकिन इन तीनों की बात सुगंधा को अच्छी तरह से सुनाई दे रही थी,,, वह तीनों की बातों को सुनकर एकदम से घबरा गई थी उसे इतना तो समझ में आ गया था कि वह तीनों उसी के बारे में बातें कर रहे थे,,, लेकिन फिर भी सब कुछ जानते हुए वह अनजान बनी खड़ी रही क्योंकि वह जानती थी कि जल्द ही उसका स्टॉप आ जाएगा और वह उतर जाएगी ऐसे में वह उन तीनों से उलझना नहीं चाहती थी उसने तो अभी तक तीनों की तरफ देखा भी नहीं था कि वह कैसे थे किस उम्र के थे,,,,,,, लेकिन तभी तीसरे नंबर वाला लड़का बोला,,,)

यार सुमित मुझे तो यह तेरी मां की तरह लग रही है तेरी मां की उम्र कि भी है,,, बस यह तेरी मां से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत है,,,



हां यार सुमित यह सच कह रहा है पीछे से बिल्कुल तेरी मां की तरह लगती है बस इसकी गांड कुछ ज्यादा बड़ी है,,,

(उन दोनों की बात सुनकर आगे वाला लड़का बोला,,,)

मादरचोद तुम लोग मेरी मा को देखते रहते हो क्या,,?

तू तो ऐसा कह रहा है जैसे कि तू हम लोगों की मां को नहीं देखता मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तु सुबह-सुबह क्यों मेरे घर आ जाता है,,,,,, मेरी मां बिना कपड़ों के नहाती है इसके लिए ना उसे नंगी देखने के लिए आता है,,,,

तो क्या करूं तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,

तो यही तो बात है जैसे तेरा लंड खड़ा होता है वैसे हम लोगों का भी तेरी मां को देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,

(तीनों को आपस में इस तरह से एक दूसरे की मां के बारे में गंदी बातें करता हुआ देखकर सुगंधा के तो होश उड़ गए उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से अपनी मां के बारे में गंदी बातें सुन सकता है और कर भी सकता है,,,, वह हैरान थी की तीनों एक दूसरे की मां के बारे में गांधी से गंदी बातें कर रहे थे लेकिन फिर भी तीनों में से किसी को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी तीनों आराम से एक दूसरे की बातें सुन रहे थे,,,, उन तीनों की बातें सुनकर सुगंधा के मन में अजीब सी उलझन पैदा हो रही थी उसके तार बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी ना चाहते हुए भी उसका बदन उत्तेजित हो रहा था,,, तभी उसके कानों में उसके पास में जो लड़का खड़ा था उसकी बात सुनाई दी और उसकी बात को सुनकर उसके एकदम से होश उड़ गए,,,)

तुम दोनों बकवास बंद करो इस समय तो इस मक्खन मलाई की गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया,,,,, अभी अपने लंड को इसकी गांड से सटाता हूं,,,,।

(इतना सुनते ही सुगंधा के रीड की हड्डी एकदम सुनना पड़ गई उसके माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई इस तरह से बातें कर सकता है,,, और जो बात उसने कही थी उसके बारे में सोच कर ही उसकी हालत खराब हुए जा रही थी वह जाकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी और मन ही मन मना रही थी कि जल्दी उसका स्टॉप आ जाए,,,, सुगंधा यही सब सो रही थी कि तभी बस वाले ने ब्रेक मारा और इसी का फायदा उठाते हुए उसके ठीक पीछे खड़ा लड़का एकदम से उसके बदन से सट गया और पेट में बना तंबू एकदम से उसके पिछवाड़े से सटा दिया और अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया वह लड़का भीड़ बाढ़ का बराबर फायदा उठाते हुए सुगंधा के खूबसूरत है जिसमें पर अपना हाथ रख दिया था उसकी कमर पर हाथ रख दिया था उसकी चिकनी कमर जो की मक्खन की तरह एकदम फिसलन भरी थी उसे अपनी हथेली में रखकर दबा दिया था,,, और अपने लंड को एकदम से उसकी गांड से सटाकर हल्का सा धक्का दे दिया था,,,, उसे लड़के ने पल भर में ही अपना काम कर दिया था अगर उसे लड़के के मुंह से सुगंधा उसकी गंदी बात सुनी ना होती तो शायद उसे इस पर ब्रेक करने की वजह से एहसास भी ना होता,,, लेकिन वह अपनी कानों से उसे लड़के की हरकत के बारे में सुन ली थी इसलिए उसकी हरकत उसे एकदम साफ महसूस हुई थी उसे साफ महसूस हुआ था कि उसकी गांड के बीचो-बीच में पीछे खड़े लड़के का लंड एकदम से धंस गया था,,, और उसे लड़के की हथेली उसे अपनी कमर पर महसूस हुई थी जिसे उसे लड़के ने कमर पर रखकर हल्का सा मसल दिया था मानों जैसे किसी औरत को खुश करते हुए उसके साथ संभोग करते हुए उसकी कमर को दबोच लिया हो,,,,,,, उसे लड़के की हरकत से पल भर में ही सुगंधा की बुर पानी पानी हो गई थी,,, उसकी सांस एकदम से गहरी चलने लगी थी और वह एकदम से घबरा भी गई थी,,,, लेकिन फिर भी सुगंधा उस लड़के की हरकत से थोड़ा बहुत नाराज थी हालांकि इसकी हरकत से उन तीनों की बातों से उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उत्तेजना महसूस हो रही थी और इसके चलते ही उसे लड़के की हरकत की वजह से उसकी बुर पूरी तरह से पानी पानी हो गई थी,,,,वह वैसे तो बहुत शर्मीली किस्म की थी राह पर चलते समय किसी गैर मर्द से बात करना भी उसके लिए गवारा नहीं था,,,, लेकिन फिर भी हिम्मत दिखाते हुए वह धीरे से अपनी नजर को पीछे की तरफ घूमाकर वह अपने पीछे वाले लड़के से बोली,,,।

देख कर बेटा,,,,(वैसे तो सुगंधा उस लड़के से थोड़ा शख्ती से पेश आना चाहती थी लेकिन जैसे ही उसकी नजर उस लड़के पर पड़ी थी उसे अंकित याद आ गया था,,, वह लड़का एकदम उसके बेटे जैसा था अच्छे घर का लग रहा था और यही वजह थी कि सुगंधा के शब्दों में नर्मी आ गई थी और सुगंधा की बात सुनकर वह पीछे वाला लड़का भी बोला,,)

सॉरी आंटी वह कहने की एकाएक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया इसके लिए,,,।

(वह लड़का भी अपने आप को शरीफ पेश करता हुआ एकदम शांति से जवाब देता हुआ बोला और आगे कुछ हो पता है इससे पहले ही सुगंधा का स्टॉप आ गया और सुगंधा भी मन ही मन भगवान को धन्यवाद देने लगी थी उसकी स्कूल आ गई थी और वह तुरंत बस में से नीचे उतर गई,, और वह तीनों लड़के हाथ मलते रह गए,,,)
 
Thanks dear ,,,der aayenge lekin aap logo ko mast kar denge

Sandhya apne bistar par machalti huyi

 
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