अपनी मां से हुई बातचीत की वजह से अंकित अपने तंबदन में अजीब सी हलचल का अनुभव कर रहा था आज साफ-साफ उसकी मां के मुंह से लंड शब्द पूरा निकलते निकलते रह गया था,,, अपनी मां के मुंह से केवल लं,,,, शब्द सुनकर ही अंकित चारों खाने चित हो चुका था क्योंकि आज तक उसने अपनी मां के मुंह से एक भी शब्द अश्लीलता के नहीं सुना था यह पहली बार था कि अपनी मां के मुंह से अश्लील शब्द सुन रहा था जो कि वह पूरा बोल नहीं पाई थी अपने शब्दों को अपने होठों में ही दबा ले गई थी ,, लेकिन अंकित अपनी मां के मुंह से निकलने वाले शब्दों को अच्छी तरह से समझ गया था वह जानता था कि उसकी मां क्या कहना चाह रही थी इसीलिए तो उसका खुद का लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,। अभी भी उसकी सांसे उत्तेजना का एहसास दिला रही थी,,,।
रास्ते में फुटपाथ पर चलते हो गई वह अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था,,, वह जानता था कि उसकी मां एक शिक्षिका थी,, और एक शिक्षिका के व्यवहार को लेकर वह अच्छा खासा परिचित था वह जानता था कि एक शिक्षिका का व्यवहार कैसा होता है क्योंकि वह बचपन से ही अपनी मां को देखता आ रहा था,, और आज तक उसने अपनी मां के मुंह से ऐसा कोई भी शब्द नहीं सुना था जो मोहल्ले की आम औरतें आपस में बात करते हुए करती है,, कहीं औरतों के मुंह से तो उसने गाली गलौज तक सुना था और वह भी मां बहन की और वह अपने मन में यही सोचता था कि अच्छा ।हुआ उसकी मां इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करती किसी से गाली गलौज नहीं करती,,, और दिल सेवा अपनी मां की इज्जत भी करता था लेकिन धीरे-धीरे अंकित का खुद का रवैया बदलता जा रहा था ,,, अपनी मां को लेकर उसकी सोच बदलती जा रही थी,,, अंकित अपने मन में सोच रहा था कि अच्छा ही हुआ कि उसने केले वाला जिक्र छेड़ दिया था उसे अकेले की वजह से पता तो चला कि उसकी मां को क्या पसंद है जो कि उसके मुंह से निकली गया था कि उसे मोटा तगड़ा लंड पसंद है भले ही इशारे में उसकी मां के लिए बोल रही थी लेकिन केले का बोलते समय भी उसके मुंह से उसके मन की बात निकल ही गई थी,, और अपनी मां के मन में क्या चल रहा है एहसास अंकित को होते ही उसके तन बदन में आग लग गई थी बात ही बात में उसे पता चल गया था कि उसकी मां को मोटा और तगड़ा लंड पसंद है,, जोकि दुनिया की हर औरतों को पसंद है और इसीलिए उसकी मां भी दूसरी औरतों से अपवाद बिल्कुल भी नहीं थी भले ही चरित्र दूसरों से अलग था लेकिन औरत की जरूरत दूसरी औरतों से बिल्कुल भी अलग नहीं थी,,,।
अंकित पूरी तरह से उत्तेजना का अनुभव कर रहा था वह अपने मन में ही चलते हुए कल्पना कर रहा था कि उसकी मां मोटे तगड़े लंड से चुदवाना चाहती है,,, वैसे भी उसकी गांड इतनी बड़ी-बड़ी है कि छोटा और पतला लंड उसकी जवानी की आपको बुझा ही नहीं सकता उसे मोटा तगड़ा लंड चाहिए एकदम मेरी तरह,,, यह सब सोचते हुए अंकित अपने आप से ही बात करते हो बोल रहा था कि स्कूल से छूटने के बाद वह मोटे और तगड़े केले खरीद कर घर ले जाएगा,,,।
जहां एक तरफ बेटे के मन में इस तरह के खयालात चल रहे थे वहीं दूसरी तरफ मां का भी बुरा हाल था रसोई का काम पूरा कर चुकी थी लेकिन फिर भी वह रसोई घर में ही थी किचन फ्लोर पर अपनी गांड टीकाकर वह कुछ देर पहले की बात चीत के बारे में ही सोच रही थी,,, वह अपने मन में सोच रही थी कि नूपुर के बेटे से मिलकर उसका बेटा भी उसकी तरह होता जा रहा है और यह उसके लिए अच्छा ही दिशा निर्देश करते हैं आज पहली बार उसका बेटा दो अर्थ में बातें जो किया था,,, और इस बात को सुगंधा अच्छी तरह से समझ गई थी क्योंकि आज से पहले उसने कभी भी घर में कुछ भी खरीद कर लाने की बात नहीं की थी ,,, और इसीलिए तो उसके खुद के तन बदन में आग लगी हुई थी क्योंकि आज अनजाने में ही केले की जगह उसके मुंह से लंड निकल गया था,,,।
वैसे भी औपचारिक रूप से किले को देखकर अक्सर औरतें एक मोटे तगड़े लंड की कल्पना करने ही लगती हैं,,, क्योंकि केले का आकार एकदम लंड के आकार से मिलता जुलता रहता है,,, इसीलिए अनजाने में केले की जगह आज उसके मुंह से लंड शब्द निकलते निकलते रह गया था,,, सुगंधा इस बात से हैरान थी कि उसका बेटा उसके कहे शब्दों को जरूर समझ गया होगा उसका बेटा समझ गया होगा कि उसकी मां क्या चाहती है,,, और इसी बात से जहां एक तरफ हुआ परेशान नजर आई थी वहीं दूसरी तरफ अनजाने में अपने मुंह से लंड शब्द निकल जाने की वजह से वह अपने बदन में मदहोशी का एहसास कर रही थी और अपने आप से बात करते हुए बोल रही थी कि अच्छा युवा की उसके मुंह से आज वह निकल गया जो वह चाहती है खास उसका बेटा उसके कहने का मतलब कुछ समझ जाता तो उसकी भी रातें रंगीन हो जाती,,, अपने मन में इस तरह की बातें सोचते हुए उसके तन बदन में आग लग रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसे भी स्कूल जाना था ,,, वरना बाथरूम में जाकर वह अपनी जवानी की प्यास अपनी उंगली से बुझाने की भरपूर कोशिश करती,,,,।
अपने मन को काबू में करके वह स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी,,, और थोड़ी देर में वह भी स्कूल जाने के लिए निकल गई,,,,।
दूसरी तरफ,, त्रप्ती संदीप से मिलने के लिए व्याकुल नजर आ रही थी कॉलेज में पहुंच जाने के बावजूद भी उसे संदीप कहीं नजर नहीं आ रहा था,,, क्लास में बैठकर वह संदीप के बारे में ही सोच रही थी ,,वह जल्दी से जल्दी संदीप से मुलाकात करना चाहती थी और प्रेम पत्र के बारे में बातें करना चाहती थी,,, प्रेम पत्र को लेकर उसके मन में कोई शिकायत नहीं थी वह खुशी-खुशी संदीप से मिलकर इस बारे में बात करना चाहती थी इसीलिए उसका मन किसी काम में लग नहीं रहा था और जल्द से जल्द छुट्टी होने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि संदीप अगर इस समय नहीं मिला है तो छुट्टी में जरूर मिलेगा क्योंकि वह भी इसी कॉलेज में पढ़ता था,,,, धीरे-धीरे समय अपनी रफ्तार से गुजर रहा था इस बीच तृप्ति कई बार संदीप के द्वारा लिखे गए प्रेम पत्र को चोरी-चोरी पढ़कर उसे बैग में रख ले रही थी,,, उससे रहा नहीं जा रहा था,,, आखिरकार अपने समय पर छुट्टी की घंटी बाज ही गई,,,।
एक तरफ छुट्टी की घंटी बज गई दूसरी तरफ तृप्ति के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,, संदीप से मिलने से पहले वह कभी सोची भी नहीं थी कि वह प्यार व्यार के चक्कर में पड़ जाएगी वह अपने आप से ही दृढ़ निश्चय कर चुकी थी कि वह दूसरी लड़कियों की तरह अपने कदम डगमगाने नहीं देगी प्यार व्यार के चक्कर में कभी नहीं पड़ेगी,,, लेकिन यह जो उम्र होती है यह बहुत ज्वलनशील होती है इस उम्र की जलन में जो जल गया तो समझो वह झुलस गया और जो इसकी तपन से बच गया तो वह आगे निकल गया वह अपना करियर बना ले गया क्योंकि यही उम्र होती है डगमगाने की,,, और जो बच गया सो बच गया वरना सब बर्बाद और यही इस समय तृप्ति के साथ हो रहा था,,,। वह अपने आप को संभालने में नाकामयाब साबित हो रही थी,,,,, वह कुछ समझ नहीं पा रही थी वह भूल गई थी कि इस उम्र का प्यार बिस्तर पर जाकर खत्म हो जाता है और संदीप उसे अपने बिस्तर पर ले जाना चाहता था,,, उसके रुप यौवन से खेलना चाहता था,,,, क्योंकि सुगंधा की तरह ही उसकी बेटी भी बला की खूबसूरत थी,,,।
आखिरकार दोनों का मिलन हो ही गया ,, संदीप थोड़ा त्रप्ती से घबरा रहा था क्योंकि पहले बार का अनुभव अच्छी तरह से जानता था,,, तृप्ति के रवैये से अच्छी तरह से वाकीफ था,, इसलिए घबरा रहा था कि कहीं फिर से वह नाराज ना हो जाए,,, इसलिए उससे मुंह छुपा रहा था,,, लेकिन तृप्ति बहुत खुश थी,,, वह संदीप से बोली,,,।
बगीचे में चलो तुमसे कुछ बात करना है वहीं बैठकर बातें करेंगे,,,
बगीचे में,,,(थोड़ा डरते हुए बोला)
हां बगीचे में हरकत जो तुमने इस तरह की किए हो की ,,
मैंने क्याकिया,,,
अब अनजान बनने की कोशिश मत करो यहां सड़क पर मैं कुछ कहना नहीं चाहती,,,
ठीक है चलो,,,(इतना कहकर संदीप आगे बढ़ गया तकरीबन 5 मिनट की दूरी पर ही बगीचा था जहां पर अक्सर लोग बैठकर बगीचे की ठंडक का एहसास करते हुए आपस में बातचीत करते थे और प्रेमी प्रेमिका प्रेमालाप करते थे,,, संदीप जानबूझकर बगीचे में सबसे पीछे वाली जगह पर गया जहां पर बड़े-बड़े पेड़ थे और यहां पर ज्यादा लोग आते भी नहीं थे,,, बड़ी-बड़ी घनी झाड़ियां होने की वजह से दूर से देखे जाने का डर भी नहीं था,,। दोनों टेबल पर अपना अपना बैग रख कर बैठ गए तृप्ति संदीप को ही देखे जा रही थी और संदीप डर के मारा अपनी नजर को नीचे झुका कर बैठा था वैसे तो लड़कियों से बातचीत करने में बिल्कुल भी घबराते नहीं था और ना ही तृप्ति से डरता था तृप्ति से इस बात से डरता था कि कहीं वह उसे नाराज होकर उससे दूरी न बना ले क्योंकि वह किसी भी कीमत पर तृप्ति का जिस्म पाना चाहता था,, उसे भोगना चाहता था,,,, कुछ देर की खामोशी के बाद बात की शुरुआत करते हुए तृप्ति बोली,,)
तुमने नोटबुक में क्या लिख कर दिए थे,,,।
क्या लिख कर दिए थे,,, मुझे क्या मालूम क्या लिख कर दिए थे,,,( संदीप जानबूझकर अनजान बनता हुआ बोला,,,)
अब बनने की कोशिश बिल्कुल भी मत करो,,, मैं सब जानती हूं,,, और तुम्हें पता होना चाहिए कि अगर किसी के हाथ लग जाता तो क्या होता,,,।
(संदीप तृप्ति की बात सुनकर कुछ बोला नहीं बस खामोश रहा तृप्ति संदीप की तरफ ही देख रही थी और संदीप की हालत देखकर मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि संदीप घबरा रहा है जबकि वह घबरा नहीं रहा था बस नाटक कर रहा था,,, तृप्ति अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
तुम मुंह से भी तो कह सकते थे,,,
मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,
वैसे तो बहुत हिम्मत दिखाते रहते हो इतना कहने में हिम्मत नहीं हो रही है,,,
सच में मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं तुम्हारी बहुत इज्जत करता हूं और मैं कुछ ऐसा नहीं करना चाहता जिससे तुम्हें बुरा लग जाए और तुम मुझे छोड़ दो,,,
मुझे तुम्हारी बात का बुरा नहीं लगता,,,, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं,,,,(इतना कहते हुए दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे तृप्ति मदहोश होने लगी क्योंकि संदीप धीरे-धीरे अपने होठों को उसके करीब ले जाने लगा उत्तेजना वश तृप्ति भी अपने होठों को हल्के से आगे की तरफ बढ़ा दी यह उसकी तरफ से संदीप के लिए आमंत्रण था और इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए,, संदीप अपने प्यासे होठों को त्रप्ती के लाल लाल दहकते हुए होंठों पर रख दिया,,, महीनों बाद तृप्ति फिर से मदहोश हो गई,,, संदीप इस खेल में माहिर था वह पल भर में ही तृप्ति के लाल लाल रस भरे होठों को अपने होठों के बीच रखकर उसका रसपान करने लगा संदीप का यह चुम्मन तृप्ति को पूरी तरह से मदहोश कर रहा था,,, तृप्तिकेतन बदन में आग लगने लगी,,,, और इस बार मौका देखकर संदीप ने फिर से अपनी हथेली को उसकी छाती पर रख दिया,,, उसके संतरे को अपनी हथेली में हल्के से लेकर दबा दिया और तृप्ति के मुंह से घुटी-घुटी सी आह निकल गई,,,।
तृप्ति को इस चुंबन में बहुत मजा आ रहा था इस बार तृप्ति खुद पागलों की तरह संदीप के होठों को भी अपनी होठों के पीछे लेकर चूसना शुरू कर दी थी कोशिश बात का अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि संदीप उसकी चूची को दबा रहा था और चूची को दबाने में जो मजा उसे प्राप्त हो रहा था उससे भी ज्यादा मजा तृप्ति को महसूस हो रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी,,,। लेकिन यह चुंबन और स्तन मर्दन का क्रियाकलाप कुछ देर और चल पाता इससे पहले की किसी के आने की आहट दोनों के कानों में सुनाई दी और दोनों तुरंत अलग हो गए,,, क्योंकि वहां पर कुछ आवारा लड़के आ रहे थे और अब वहां पर ज्यादा देर तक ठहरना उचित नहीं था इसलिए दोनों अपनी जगह से खड़े हो गए और जल्दी से वहां जाने लगे लेकिन जाते-जाते ही उनमें से एक लड़का बोला,,,।
चुदाई का प्रोग्राम था क्या,,, हमसे गलती हो गई थोड़ी देर बाद आना चाहिए था ताकि चुदाई का खेल अपनी आंखों से देख लेते,,,,।
(उसे हमारे लड़के की बात को अनसुना करके दोनों वहां से निकल गए लेकिन भले बात को अनसुना कर गए थे लेकिन जो बात उस आवारा लड़के ने बोली थी चुदाई वाली,,, उसे बात का तृप्ति के मन पर बहुत गहरा असर पड़ रहा था उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी थी,,, उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वास्तव में वह बगीचे के कोने वाली जगह पर चुदवाने के लिए गई थी,,, दोनों बगीचे से बाहर निकाल कर कुछ देर साथ चलकर अपने-अपने रास्ते हो लिए,,,
वादे के मुताबिक अंकित स्कूल से छूटने के बाद वास्तव में मोटे तगड़े और बड़े-बड़े केले खरीद लिया था एकदम अपने लंड के साइज का क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी मां को इस माप का ही जरूरत है,,। वह जानता था कि घर पर केला ले जाते ही उसकी मां की नजर जैसे ही कैला पर पड़ेगी उसकी मां की बुर पानी छोड़ने लगेगी,,, वह जल्दी-जल्दी घर पहुंच गया,,, शाम के 5:00 बजे रहते और इस समय घर पर उसकी मां के लिए रहती थी इसलिए अंकित मन ही मन खुश हो रहा था लेकिन जैसे ही घर पर पहुंचा तो घर पर तृप्ति भी मौजूद थी वह पढ़ाई कर रही थी,,, और घर पर तृप्ति को देखकर उसके अरमानों पर पानी फिर गया,,, तृप्ति की नजर जैसे ही अंकित के हाथों में केले के थैले पर गई तो मोटे-मोटे तगड़े केले को देखकर तृप्ति बोली,,,।
यह क्या उठा लाया तू,,,
क्यों दीदी तुम्हें पसंद नहीं है क्या,,,?
तूने कभी देखा मुझे केला खाते हुए,,,,
हां सही बात है देखा तो नहीं हुं,,,
फिर तु यह सब क्यों लेकर आया,,,
अरे दीदी तुम्हें नहीं पसंद है तो क्या किसी को पसंद नहीं आएगा मम्मी को तो पसंद है ना,,,,
तो यहां लेकर क्यों खड़ा जा मम्मी को दे दे,,,,
( ओर इतना सुनकर अपने कमरे से सुगंधा बाहर निकल कर आ गई,,, अपने बेटे के हाथ में केला देखकर उसकी साइज देखकर उसकी मोटाई देखकर मन ही मन उत्तेजित होने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
तु कितना ख्याल रखता है मेरा,,, और एक यह है जो आज तक कुछ नहीं लेकर आई,,,(तृप्ति की तरफ इशारा करते हुए बोली तो अंकित बोल पड़ा)
मां का ख्याल हमेशा हम लड़कों को ही रखना पड़ता है लड़कियों से थोड़ी ना कुछ होता है,,,,।
(अंकित दो अर्थ वाली बात कर रहा था जो कि उसकी मां अच्छी तरह से समझ रही थी और अपने बेटे के कहने के मतलब को समझ कर वह अंदर ही अंदर सिहर उठी,,,,,, वह जानती थी किसका बेटा मां का ख्याल लड़के रखते हैं ऐसा क्यों किया है क्योंकि लड़कों के पास लंड होता है जिनकी प्यास हर एक मां को होती है जिससे वह अपनी जवानी की प्यास बुझा सकती है,,,, यह सब सुनकर तृप्ति बोली,,,)
चलो कोई बात नहीं मैं जैसी हूं वैसी ही ठीक हूं अब मम्मी जल्दी से चाय बना दो,,,
को देखो महारानी के नखरे चालू हो गए,,,,।
(इतना कहकर सुगंधा रसोई घर में चली गई और पीछे-पीछे अंकित भी अकेला लेकर अपनी मां के पीछे चला गया और वही किचन फ्लोर पर रख दिया दोनों में और कुछ बात हो पाती से पहले तृप्ति भी वहीं आ गई और बोली,,,)
अच्छा लाओ मैं ही बना देती हुं,,,
(और तृप्ति चाय बनाने लगी तृप्ति की मौजूदगी में दोनों मां बेटे किसी भी तरह से दो अर्थ वाले संवाद नहीं कर पा रहे थे जिससे दोनों के अरमानों पर पानी फिर गया था,,,,।
रात को अपने कमरे में सुगंधा अपने बेटे के द्वारा खरीद कर लाए गए मोटे तगड़े केले को लेकर गई,, और बिस्तर पर लेट गई और अपने मन में कल्पना करने लगी अपने बेटे के लंड को लेकर उसके हाथ में लिया हुआ अकेला उसे अपने बेटे का लंड लग रहा था क्योंकि वह केला वाकई में बेहद दमदार और मोटा और तगड़ा और काफी लंबा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके बेटे ने केला नहीं बल्कि अपना लंड ही उसे खाने के लिए दे दिया हो वह उस केले को अपने हाथ में लेकर अपने अंगूठे और उंगली का छल्ला बनाकर उसके अंदर केले को धीरे-धीरे इस तरह से प्रवेश करने लगी मानव की जैसे वह उसकी उंगलियों के द्वारा बनाया गया छल्ला नहीं बल्कि उसकी खुद की गुलाबी बुर हो और वह केला उसके बेटे का लंड हो जिसमें वह धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा हो,,,, सुगंधा को मन में कल्पना करते हुए बहुत मजा आ रहा था,,,।
सुगंधा केले से मस्त होती हुई
अपने मन में कल्पना करते हैं वह धीरे-धीरे अपने वस्त्र उतारने लगी और देखते ही देखते वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी हो गई उसके अरमान पूरी तरह से मचल उठे थे,,,, वह अपने दोनों टांगों को फैला कर उसके लिए को इसकी मोटाई को धीरे-धीरे अपनी गुलाबी पत्तियों पर रगड़ रही थी पर ऐसा महसूस कर रही थी कि जैसे यह क्रिया उसका बेटा उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाकर अपने लंड को हाथ में पकड़ कर अपने गरम सुपाड़े को उसके गुलाबी पत्तियों पर रगड़ रहा हो,,, यह कल्पना बेहद मदहोश कर देने वाली थी वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगी वह मदहोश होने लगी,,, उसकी कल्पनाओ के आज कुछ ज्यादा ही पर लग गए थे,,, वह केले को धीरे-धीरे अपनी बुर पर थपथपा रही थी,,, वह पागल हो जा रही थी और कल्पना कर रही थी कि जैसे उसका बेटा अपने लंड को हाथ में लेकर उसकी बुर पर उसकी चोट मार रहा हो ,,जिससे उसे दर्द तो हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
केले से चुदाई का मजा लेती हुई
सुगंधा से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था अपनी दोनों टांगों को खोल दी और फिर धीरे-धीरे उसकेले को जो कि उसके मदन रस से पूरी तरह से गिला हो चुका था धीरे-धीरे अपनी गुलाबी पत्तियों के बीच प्रवेश कराना शुरू कर दी,,, उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि किला का साइज बहुत ज्यादा ही मोटा था और अपने मन में सोच रही थी कि काश ऐसा मोटा तगड़ा लंड मिल जाता तो उसकी तो जिंदगी बन जाती,,, और वह ऐसा सोचते हुए धीरे-धीरे केले को आधा से ज्यादा अपनी बुर में प्रवेश करा दी और उसे अंदर बाहर करने लगी और अपनी आंखों को बंद करके महसूस करने लगी की जैसे उसका बेटा उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया है,,, उसे बहुत मजा आ रहा था वह मदहोशी में अपने सर को दाएं बाएं पाठक रही थी और अपने हाथ को जोरो से चला रही थी जैसे-जैसे अकेला अंदर बाहर हो रहा था वैसे-वैसे उसकी रगड़ का एहसास उसे पागल बना रहा था,,,।
केले सेचुदाई का मजा लेती हुई सुगंधा
उसकी आंखें पूरी तरह से बंधी थी वह कल्पनाओं की दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी थी अपने बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में वह कामांध हो चुकी थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था बस अपनी कल्पनाओं में वह पूरी तरह से खो चुकी थी तेज चलते हैं हाथों के साथ-साथ उसकी कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ रहा था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका बेटा उसे अपनी बाहों में लेकर जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर धक्के पर धक्का लगा रहा है,,,, पल भर में उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने उखड़ने लगी वह पागलों की तरह अपने सर को इधर-उधर पटकने लगी पसीने से तरबतर उसका गोरा नंगा बदन पूरी तरह से ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रहा था वह चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुकी थी और देखते ही देखते उसके मुंह से हल्की सी चीज निकाली और उसकी कमर ऊपर उठ गई वह अपनी भारी भरकम गांड को पल भर के लिए ऊपर उठाकर झड़ना शुरू कर दी,,, और देखते ही देखते हैं उसकी बुर से गरम लावा पिचकारी का रूप धारण करके निकलना शुरू कर दिया,,,,।
वासना का तूफान शांत हो चुका था,,, वह अपनी बुर में से केला बाहर निकाली जो की पूरी तरह से उसके मदन रस में डूब चुका था और वह धीरे से उसे टेबल पर रख दी उसकी सांसे अभी भी ऊपर नीचे हो रही थी और थोड़ी ही देर बाद वह नींद की आगोश में चली गई,,,।