जिस मौके की तलाश में सुगंध थी इस मौके की तलाश में अंकित भी था,,,,। अंकित समझ गया था कि बुखार के बद हवासी में उसकी मां को कुछ भी नहीं मालूम है की दवा खाने में क्या हुआ था और वही वह जानना चाहती थी और इसीलिए अंकित का मन प्रसन्न हुआ जा रहा था क्योंकि वह अब दवा खाने वाली बात में नमक मिर्च लगाकर बताने वाला था लेकिन मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि तृप्ति हमेशा साथ में रहती थी,,, सुगंधा की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी सुगंधा को ऐसा था कि रात में तृप्ति जब अपने कमरे में सोने के लिए चली जाएगी तब वहां अंकित को अपने कमरे में बुलाकर दवा खाने वाली घटना के बारे में पूछेगी,,, लेकिन ऐसा नहीं हुआ,,,, क्योंकि तृप्ति भी अंकित के साथ अपनी मां के कमरे में थी जब तक वह सो नहीं गई तब तक वह भी वहां से नहीं हटी,,।
दूसरे दिन सुबह तृप्ति की नींद जल्दी खुल गई क्योंकि वह जानती थी कि उसकी मां की तबीयत खराब है और उसे ही घर का सारा काम करना पड़ेगा,,, काम क्या करना पड़ेगा अपनी मां की तबीयत खराब होने की वजह से वह खुद ही अपनी मां को बिल्कुल भी काम करने देना नहीं चाहती थी,,, उसकी मां बिस्तर में ही थी और वह घर का सारा काम कर चुकी थी उसने अपने भाई अंकित को भी नहीं जागाई,,, उसे भी स्कूल जाना था लेकिन वह चाहती थी कि उसका भाई उसकी गैर मौजूदगी में घर पर उसकी मां का ख्याल रखे,,, अपने भाई को जगाने के ख्याल से उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब वह अपनी मां के कहने पर अपने भाई को जगाने के लिए उसके कमरे में गई थी और जिस अस्तव्यस्त हालत में उसे अपना भाई दिखाई दिया था,,, उसे बारे में सोच कर उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी एक पल के लिए तो उसे ऐसा लगा कि वह फिर से अपने भाई को जगाने के लिए उसके कमरे में जाए लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई क्योंकि अपने भाई के लंड को देखकर उसके मन में कुछ-कुछ होने लगा था,,,।
उसे घटना को याद करके उसे संदीप याद आ गया और कॉलेज की मैडम के घर में जो कुछ भी हुआ था पल भर में उसकी आंखों के सामने किसी फिल्म की तरह घूमने लगा और एक बार फिर से वह हैरान हो गई थी संदीप के लंड को देखकर और सुबह-सुबह अपने भाई के लंड को देखकर दोनों के लंड की तुलना करना जमीन आसमान को एक करने जैसा था एकदम नामुमकिन जहां एक तरफ संदीप का लंड छोटा सा था वही उसके भाई का लंड एकदम बम पिलाट की तरह मोटा तगड़ा था,,,। और इसीलिए वह अपने भाई कमरे में नहीं जाना चाहते थे क्योंकि वह जानती थी अगर वह अपने भाई के कमरे में कहीं और एक बार फिर से उसके भाई के लंड के दर्शन उसे हुए तो वह अपना काबू खो बैठेगी,,,।
वह तब तक दोनों को सोने दी जब तक कि वह खाना बनाकर तैयार नहीं हो गई,,,, सब कुछ तैयार हो चुका था वह कॉलेज जाने के लिए तैयार हो गई थी और अपनी मां को जगाने के लिए उसके कमरे की तरफ जा ही रही थी कि अंकित अपने कमरे में से बाहर निकल गया वह बहुत हड़बड़ाहट में था क्योंकि उसे भी देर हो चुकी थी उसे हडबडाता हुआ देखकर तृप्ति बोली,,,।
अरे अरे इतना हड़बड़ा क्यों रहा है,,,?
मुझे देर हो गई है दीदी तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं,,,
मैंने तो मम्मी को भी नहीं उठाई हूं और तुझे भी जान बुझ कर नहीं उठाई हूं,,,( तृप्ति अपनी कमर पर हाथ रखते हुए,,, और उसके ऐसा करने पर कमर और नितंबों का जो जोड़ होता है,,, वह एकदम से उभरकर दिखाई देने लगा और उसे पर नजर पडते ही अंकित अपने मन में ही बोला पूरी जवान हो गई है दीदी,,,,)
जानबूझकर मे कुछ समझा नहीं,,,।
अरे बुद्धू मम्मी की तबीयत खराब है कोई तो होना चाहिए घर पर उनका ख्याल रखने के लिए,,,।
(तृप्ति का इतना कहना था कि उसे सब कुछ एकदम से याद आने लगा कि उसे तो दवा खाने वाली बात उसकी मां को बताना है और यही मौका भी सही रहेगा जब उसकी दीदी घर पर नहीं रहेगी वह बड़े आराम से नमक मिर्च लगाकर वह बात बता सकेगा,,,, इसलिए तृप्ति की बात सुनकर वह बोला)
बात तो तुम ठीक कह रही हो दीदी,,, चलो कोई बात नहीं मैं घर पर रुक जाता हूं लेकिन खाना,,,।
उसकी चिंता तो मत कर मैं खाना और नाश्ता दोनों तैयार कर चुकी हूं मैं अब कॉलेज जा रही हूं तू ही मम्मी को जगा देना,,,।
ठीक है दीदी तुम जाओ मैं मम्मी को जगा दूंगा,,,,।
(इतना सुनते ही तृप्ति अपनी कॉलेज का बेग अपने हाथ में ले ली और घर से निकलते निकलते बोली,,)
मम्मी को सही समय पर दवाई खिला देना,,,।
ठीक है दीदी तुम जाओ,,,,,।
(तृप्ति कॉलेज के लिए निकल गई अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था वह जल्दी से जाकर दरवाजा बंद कर दिया था अब घर में केवल अंकित और उसकी मां ही थी जो खुद जानने के लिए बेताब थी की दवा खाने में क्या हुआ था अंकित भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां भी यह जानना चाहती है कि आखिरकार डॉक्टर को उसके पेशाब का सैंपल कैसे मिला,,,, और यह सब अपने मन में सोच कर अंकित बहुत प्रसन्न भी हो रहा था और तेजी भी हो रहा था क्योंकि वहां जानता था कि आप उसे अपनी मां को क्या बताना है आज उसके पास पूरा मौका था अपनी मां के सामने खुलने का,,, वह अपनी मां से इस तरह की बातें करना चाहता था जिस तरह की बातें एक प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी के बीच होती है,,,, इसलिए वह अपनी मां को बिना जगाए पहले खुद नहाने के लिए बाथरुम में चला कर और बाथरूम में जाते ही अपने सारे कपड़े उतार दिया,,,,।
आज उसके बदन में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, आज उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि घर में केवल वह और उसकी मां ही है एक अजीब सा है उसके तन बदन को रंगत से भर दे रहा था ऐसा एहसास के बाद उसने किसी से संबंध बनाने के लिए मचल उठता है और उसे इस बात का एहसास होता है कि कमरे में केवल वह और उसके साथी है लेकिन यहां मामला कुछ और था वह अपनी मां से सिर्फ बात करने की उद्देश्य से उत्तेजित और जानता था कि उसकी इतनी जल्दी उसके साथ हम बिस्तर होने वाली नहीं है,,,, क्या कभी ऐसा ना भी हो लेकिन फिर भी न जाने के मन में एक तरह की उम्मीद जगी रहती थी,,,।
इसी के चलते बाथरूम के अंदर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था,,,, अंकित इस बात को बिल्कुल भी नहीं जानता था कि उसके नंगे लंड का दर्शन उसकी मां के साथ साथ उसकी बहन भी कर चुकी है,,, अगर यह बात वह जानता तो शायद उसकी कल्पनाएं और भी ज्यादा रंगीन हो जाती,,,, फिर भी नहाने से पहले अपनी मां के बारे में सोचकर अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में गरम फवारा झाड़ के वह गहरी गहरी सांस लेने लगा,,,।
सुगंधा की प्यास
अंकित नहा चुका था तैयार हो चुका था और रसोई घर में जाकर अपने लिए और अपनी मां के लिए चाय गरम कर रहा था उसकी बहन पहले से ही चाय बनाकर गई थी बस उसे गरम करने की देरी थी,,, थोड़ी देर में चाय गरम हो गई और वह ट्रे में दो कप चाय लेकर और बिस्किट लेकर अपनी मां के कमरे में पहुंच गया कमरे का दरवाजा पहले से खुला हुआ था क्योंकि रात को वह उसकी बहन कमरे से बाहर निकलते समय दरवाजे को खुला छोड़ रखी थी,,,।
अपनी मां के कमरे में अंकित पहुंचा तो देखा उसकी मां बिस्तर पर अस्त व्यस्त हालत में गहरी नींद में सो रही थी,,, साड़ी पूरी तरह से कमर के ऊपरी भाग से हट चुकी थी और उसका भारी भरकम और जवानी से भरा हुआ शरीर अपनी आभा बिखेर रहा था,,,, अंकित तो कुछ देर के लिए अपनी मां को देख नहीं रही क्या उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी का रस अपनी आंखों से पिता ही रह गया,,,, उसकी मां पीठ के पास हो रही थी एकदम बेसुध होकर,,, नीचे से साड़ी घुटनों तक उठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी मानसिक पिंडलियों एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसकी गोरी चिकनी टांग देखकर और उसकी भरी हुई जवानी देखकर एक बार फिर से उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया अभी कुछ देर पहले ही वह अपने हाथ से हिला कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करके आया था लेकिन अपनी मां की गर्म जवानी देखकर एक बार फिर से वह गर्म हो चुका था,,,,।
सुगंधा अपने बेटे से दमदार चुदाई चाहती थी
जिस हालत में उसकी मां सो रही थी अंकित उसे जगाना नहीं चाहता था,,, ब्लाउज में कसा हुआ उसका पपाया जैसी चुचीया,,, सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी वह कुछ देर तक अपनी मां की जवानी को देखता ही रह गया घूरता ही रह गया,,, चिकना मांसल पेट और बीच में गहरी नाभि किसी गुलाबी बुर के क्षेंद से कम नहीं थी,,,, पल भर के लिए अंकित के मन में ख्याल आया कि क्यों ना अपनी उंगली अपनी मां की नाभि में डालकर देखा जाए की कितनी गहरी है और फिर उसे ख्याल आया कि क्यों ना जीभ से चाट कर अपनी मां की नाभि का स्वाद लिया जाए,,,,, और फिर उसके मन में ख्याल आया कि यह सब करने से अच्छा है कि क्यों ना एक बार अपने हाथ को अपनी मां की चूची पर रखकर उसकी गर्मी को महसूस किया जाए वैसे भी चूचियों की गहरी लकीर ब्लाउज से बाहर उभर कर सामने दिखाई दे रही थी गले में सोने की चेन उसकी खूबसूरती को चार चांद लग रही थी,,,,,,।
एक तरफ अपनी मां की मदद उसका देने वाली जवानी की लालच और दूसरी तरफ चाय ठंडा होने की फिक्र उसके दिलों दिमाग पर दबाव सा डाल रहा था,,, आखिरकार चाय ठंडी होने की फिक्र में वह अपनी मां को जगाने लगा,,,।
मम्मी मम्मी कह कर दो बार पुकारा लेकिन उसकी मां दवा के नशे में गहरी नींद में सो रही थी इसलिए वह एक हाथ में प्लेट लेकर दूसरे हाथ से अपनी मां के कंधे को पकड़कर उसे हिलाते हुए जगाने लगा,,,, उसके ऐसा करने पर उसकी मां की आंख हल्के से खुली,,, वह होश में आती इससे पहले ही अंकित बोला,,,।
लो मम्मी तुम्हारे लिए चाय लाया हूं,,,,।
(अंकित की बात सुनकर वहां अपनी दोनों आंखों को सिकुड़ कर खोलते हुए उसे बड़े गौर से अच्छी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे पहचानने की कोशिश कर रही है,,, क्योंकि वह अभी भी नींद में थी लेकिन थोड़ी देर में उसे समझ में आने लगा और जल्दी से उठकर बैठ गई और इधर-उधर देखने लगी दीवार पर टंगी घड़ी में दिखी तो एक घंटा लेट हो चुका था वह एकदम से घबरा गई उसकी घबराहट हडबड़ाहट को अंकित अच्छी तरह से समझता था इसलिए,, जल्दी से अपने हाथ को उसके कंधे पर रख दिया और उसे समझाते हुए बोला,,,,)
आराम से मम्मी आराम से,,,,,।
अरे मुझे तो देर हो गई है,,,,।
तो क्या हो गया मैं ही तुम्हें जगाना नहीं चाहता था,,,।
लेकिन क्यों नहीं जगाना चाहता था,,,?(आश्चर्य से अंकीत की तरफ देखते हुए बोली,,,)
मम्मी तुम्हारी तबीयत खराब है और दो-तीन दिन तक तुम घर पर लेकर आराम करो तुम्हें कोई काम करने की जरूरत नहीं है जब एकदम ठीक हो जाना तब स्कूल जाना और घर का काम करना,,,,।
(अंकित का इतना कहना था कि सुगंधा की नजर अपनी हालत पर गए तो एकदम से उसके होश उड़ गए उसकी साड़ी एकदम बिस्तर पर बिक्री हुई थी कमर के ऊपर वह सिर्फ ब्लाउज में की बाकी उसका पूरा गदराया बदन एकदम से दिखाई दे रहा था,,, एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई और तुरंत अपनी साड़ी को व्यवस्थित करने लगी अपनी मां का इस तरह से हडबढ़ाना और शर्माना,,, और शर्माने के साथ-साथ अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करना अंकित और भी ज्यादा उत्तेजित कर गया था,,,,।)
तुम मम्मी बिल्कुल भी चिंता मत करो खाना और नाश्ता दीदी तैयार करके कॉलेज चली गई है,,,।
क्या कह रहा है अंकीत,,,,!(एकदम आश्चर्य से अंकित की तरफ देखते हुए बोली)
हां मम्मी मै सच कह रहा हूं दीदी ने सब कुछ तैयार कर दिया घर की सफाई भी कर दि है,,, और सब कुछ करने के बाद कॉलेज के लिए चली गई,,,।
(अंकित की बात सुनते ही सुगंध मन ही मन बहुत खुश हो रही थी खुश इसलिए हो रही थी कि उसकी दोनों बच्चे उसका बहुत ख्याल रख रहे थे और यही तो चाहिए रहता है मां-बाप को अपने बच्चों से,,,,, सुगंधा अपने बेटे के हाथ में चाय के ट्रे को देख रही थी और अपना हाथ आगे बढ़कर चाय का कप उठा ली और बोली,,,)
वैसे तो तू जानता ही है कि बिना नहाए धोए में चाय नहीं पीती लेकिन आज मुंह बुखार की वजह से ठीक-था लग रहा है इसलिए पीना पड़ रहा है।(चाय के कप को होठो से लगाते हुए बोली,,,)
मैं जानता हूं मम्मी,,, तुम बिना नहाए चाय नहीं पीती लेकिन मैं जानता था कि बुखार की वजह से मन सही नहीं रहता,,, इसलिए मैं चाय गरम करके लेकर आया था,,,,।
तूने बहुत अच्छा किया,,, तू भी पी ले,,,।
हां मम्मी मैं पी रहा हूं,,,,(इतना कहने के साथ है यह अंकित भी चाय का कप हाथ में लेकर अपनी मां के पास ही बिस्तर पर बैठ गया और चाय पीने लगा,,,, और मर ही मन सोचने लगा कि उसकी मां दवा खाने में क्या हुआ था इस बात का जिक्र छेडे तो मजा आ जाए,,,, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा था उसकी मां कुछ बोल नहीं रही थी वह सिर्फ अपने मन में यही सोच रही थी कि जब उसका बेटा कमरे में आया था तब वह कितनी अस्त व्यस्त हालत में थी जरूर उसके बेटे की नजर उसके चिकनी कमर उसका चिकना पेट और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर गई होगी,,, उसकी नजर उसकी गहरी नाभि पर भी गई होगी,,, और गहरी नाभि को देखकर पता नहीं क्या सोच रहा होगा,,,, यही सब सो कर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने बेटे से कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,,। थोड़ी देर में सुगंधा और अंकित दोनों चाय पी चुके थे,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बात की शुरुआत की जाए,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोला,,,,।)
मम्मी तुम दवा भी पी लो,,,, रुको मे देता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी मां के बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और सामने टेबल के ड्रोवर में से,, दवा निकालने लगा जो की रात को उसने ही रखा था,,,, टेबल पर ही मग भरकर पानी पड़ा था उसे धीरे से गिलास में डालकर दवा और पानी दोनों अपनी मां के पास लाया अपनी मां के हाथों में थमा दिया,,, सुगंधा अपने बेटे के हाथ में से दवा में पानी दोनों लेकर पीने लगी,,,, अंकित का मन मचल रहा था बात की शुरुआत करने के लिए लेकिन कैसे की जाए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि तभी उसे ख्याल आया और वह बोला,,,)
अरे मम्मी कल की रिपोर्ट कहां पड़ी है दोबारा दवा खाने जाओगी तो रिपोर्ट दिखाना पड़ेगा,,,,।
वही ड्रोवर में ही होगा,,,,(सुगंधा टेबल की तरफ देखते हुए बोली और तुरंत अंकित टेबल के पास गया और ड्रोवर में से रिपोर्ट निकाल कर अपने हाथ में ले लिया,,,, और फिर तुरंत अपनी मां के पास आ गया और दोनों रिपोर्ट को अपने हाथ में संभाल कर रखते हुए बोला,,,)
राहत की बात यह है की रिपोर्ट एकदम नॉर्मल है दो-तीन दिन में तो एकदम आराम हो जाएगा,,,,।
(जानबूझकर अंकित रिपोर्ट वाली बात कर रहा था ताकि उसकी मां को याद आ जाएगी उसे कौन सी बात करनी है और ऐसा ही हुआ रिपोर्ट की बात सुनते ही सुगंधा को भी एकदम से याद आ गया कि वह जानना चाहती थी की दवा खाने में क्या हुआ था,,, इसलिए दवा पीने के बाद वह तुरंत बोली,,,)
अरे हां मैं तो भुल ही गई थी,,, तूने बताया नहीं की दवा खाने में क्या हुआ था,,,,?
अरे हां मम्मी मैं तो भूल ही गया था,,, ठीक है तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ तो तुम्हें भी तरोताजा लगने लगेगा,,,।
नहीं नहीं तु मुझे अभी बता दवा खाने में जो कुछ भी हुआ था वह मुझे बिल्कुल भी याद नहीं है,,,।
कल्पना में सुगंधा की दमदार चुदाई