नूपुर की चुदाई करके अंकित बहुत बड़ी विजय प्राप्त कर चुका था क्योंकि वह नूपुर की चुदाई नहीं किया था बल्कि नूपुर के साथ-साथ उसके बेटे की गांड मार लिया था,,, वह भी उसकी मां की आंखों के सामने ही जिसका विरोध उसकी मां ने बिल्कुल भी नहीं किया था बल्कि उसे पल का वह पूरी तरह से मजा लूटी थी उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसका बेटा गांड मरवा रहा था,,,, शायद एक मोटे और लंबे लंड की लाना जिस तरह से उसकी मां को थी उसी तरह से उस पल के लिए उसके बेटे के मन में भी वही लालच जाग चुकी थी और ऐसा करके अंकित ने राहुल के अहंकार पर वह पूर्ण विराम लगा चुका था। लेकिन पहली बार तीन लोगों के साथ एक ही बिस्तर पर मजा लेने में जो उसे आनंद प्राप्त हुआ था,, वह उसके लिए जिंदगी भर के लिए यादगार बन गया था। वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा फल आएगा कि वह एक बेटे के साथ मिलकर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की चुदाई करेगा और उसकी भी गांड मारेगा, इसलिए तो अंकित का उत्साह पूरे चरम पर था। अब उसे तैयारी करनी थी नैनीताल जाने की और वह भी अपनी मां के साथ एक नए अनुभव के लिए एक नए एहसास के लिए।
अंकित अपने घर पहुंच चुका था और वह नैनीताल जाने की तैयारी में अपनी मां के साथ जुड़ चुका था। कुछ जरूरी कपड़े और सामान उसकी मां बाग में भर रही थी ज्यादा सामान ले नहीं जाना था केवल अपने-अपने कपड़े ले जाना था,,, इस बात को सुगंध भी अच्छी तरह से जानती थी कि यह नैनीताल का सफर उनके जीवन का बेहद यादगार सफल करने वाला है क्योंकि आज तक वह अपने पति के साथ कभी हनीमून पर नहीं जा पाई थी नहीं उसके पति ने उसे कहीं घूमाने ले गए थे,,,, जब से शादी करके आई थी इसी घर में थी हनीमून भी उसी घर में हुआ था लेकिन जिस तरह से हालात बदले थे अपने बेटे के साथ ही वह हम बिस्तर होकर शारीरिक संबंध बना रही थी जो मजा अपने पति और प्रेमी से लेना चाहिए था वह मजा उसे उसका बेटा दे रहा था उसे देखते हैं उसे पूरा आत्मविश्वास था कि जो कभी उसके जीवन में बनी हुई है उसे कमी को उसका बेटा नैनीताल ले जाकर के जरूर पूरा करेगा। सुगंधा खुशी-खुशी पैकिंग कर रही थी क्या करना है कैसे करना है सब कुछ अपने मन में सोच रही थी यह पहला मौका था जब वह अपने बेटे के साथ कहीं घूमने जा रही थी किसी रिश्तेदार के वहां नहीं बल्कि कहीं दूर ऐसी जगह जहां लोग घूमने जाया करते हैं अपने पति के साथ अपनी प्रेमिका के साथ लेकिन वह अपने बेटे के साथ जा रही थी,,, वह अकेले ही पैकिंग कर रही थी क्योंकि अंकित बस की टिकट लेने गया था। उसे बस की टिकट मिल चुकी थी अंकित ने जानबूझकर बस में केबिन बुक करवाया था जिसमें सफर के दौरान भी वह और उसकी मां दोनों मजा ले सके।
अंकीत घर पहुंचता है तो देखता है कि उसकी मां पैकिंग कर रही थी वह बिस्तर के पास झुकी हुई थी और झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम जवानी से भरी हुई गांड को ज्यादा ही उफान मार रही थी। यह देखकर अंकित से रहा नहीं जाता उसके जवानी का जोश बढ़ने लगता है और वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में जकड़ लेता है,,,, कुछ पल के लिए सुगंधा घबरा जाती है लेकिन जल्द ही एहसास हो जाता है कि पीछे उसका बेटा है वह फिर भी पैकिंग करते हुए मुस्कुराते हुए बोलती है।
टिकट मिला क्या,,,,?
मिल गई मम्मी और वह भी केबिन की मजा ही आ जाएगा,,,।
केबिन की क्यों,,,?
अरे केबिन में केवल हम दोनों ही रहेंगे जाते समय भी मजा करेंगे,,,।
नहीं नहीं बस में कुछ भी नहीं किसी को पता चल गया तो,,,,।
अरे कुछ भी नहीं होगा और तुम तो हिम्मत वाली हो घबराती क्यों हो दर्जी के सामने हिम्मत दिखाई थी ना कितना मजा आया था,,,, बस में भी मजा आएगा।
तु सच में बहुत हारामी हो गया है,,,।
आखिर बेटा किसका हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां की साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर कमर तक उठा दिया यह देखकर सुगंधा उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली)
क्या कर रहा है जब देखो तब शुरू हो जाता है,,,
क्या करूं मुझे रहा नहीं जाता तुम्हारी जवानी देखकर बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,(अपनी मां की नंगी गांड पर अपने पेंट में बना तंबू रगडते हुए अंकित बोला,,,)
तो समझ कर रख इसको तेरे साथ-साथ यह भी मुझे ज्यादा परेशान करने लगा है,,,(सुगंधा इस तरह से कपड़ों को बैग में भरते हुए बोली)
तो फिर थोड़ा सा और परेशानी झेल लो,,,, थोड़ा सा अपनी टांगों को खोल दो और इसी जगह दे दो अपनी गुलाबी गली में,,,,
नहीं नहीं मुझे अभी बहुत काम है,,,, वैसे बस कब की है,,,।
रात को 8:00 की है,,,
तब तो बिल्कुल भी समय नहीं है यह सब छोड़ तू भी जल्दी से जरूर का सामान देख ले कहीं कुछ छूट न जाए,,,
मेरी जरूरत का सामान तो मेरी बाहों में है इसे मैं कैसे छोड़ सकता हूं,,,,।
(अपने बेटे कि ईस तरह की बातों को सुनकर सुगंधा एकदम से मुस्कुराने लगी और अपने बेटे की जीद पूरी करने के लिए अपनी टांगों को खोल भी दी जिससे उसकी गुलाबी गली एकदम से नजर आने लगी यह देखकर अंकित से रहने गया और जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी पेंट की बटन खोलकर घुटनों तक नीचे खींच दिया लंड पूरी तरह से तैयार था,,, और अगले ही पल अंकित अपनी मां की गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया था और इस दौरान भी सुगंधा सिसकारी भरते हुए जरूर का सामान बैग में भर रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता है जब तक की वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और खुद भी नहीं झढ़ गया,,,,।
शाम हो चली थी रास्ते के लिए सुगंधा नाश्ता तैयार कर रही थी,,, अंकित भी मदद कर रहा था क्योंकि 8:00 बजे उसे बस स्टॉप पर पहुंचना था,,, रात भर का सफर था दूसरे दिन सुबह 10:00 बजे तक वालों नैनीताल पहुंच जाते ,,,, जल्दी-जल्दी सुगंधा नाश्ता तैयार करके बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई क्योंकि जाने से पहले नहा लेना चाहती थी क्योंकि गर्मी का समय था इसलिए खाना बनाते समय पसीने से वह तरबतर हो चुकी थी बाथरूम में पहुंचते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नहा रही थी,,, यह देखकर अंकित का मन फिर से डोल गया और वह भी अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में घुस गया इस बार सुगंधा से रहा नहीं गया क्योंकि बार-बार उसका लंड उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था और वह तुरंत नीचे घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरूकर दी,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो गया बाथरूम में वह अपनी आंखों को बंद करके एकदम मदहोशी में खोने लगा,,, उसे मजा आ रहा था क्योंकि उसे उसकी मां मस्त कर रही थी अद्भुत सुख प्रदान कर रही थी,,,, एक बार फिर से अंकित अपनी मां की बुर में लंड डालना चाहता था उसे छोड़ना चाहता था लेकिन सुगंधा का मन इस समय कुछ और कह रहा था। सुगंधा थी कि अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकालने का नाम ही नहीं ले रही थी और तब तक चुसती रही जब तक की उसका बेटा उसके मुंह में ही झड़ नहीं गया।
एक बैग हाथ में लेकर अंकित घर से बाहर निकल गया उसकी मां दरवाजे पर ताला लगा रही थी वैसे तो वह अपनी पड़ोसन सुमन से सब कुछ बता देना चाहती थी लेकिन वह बताना उचित नहीं समझी और वहां से वह दोनों मुख्य सड़क पर आए और ऑटो पकड़कर बस स्टैंड पर पहुंच गए,,, बस स्टैंड पर काफी भीड़ थी। थोड़ी देर में बस में अपना सामान रखकर वह दोनों अपने केबिन में जाकर बैठ गए बस में काफी भीड़ थी एक भी एक्स्ट्रा सीट नहीं बची थी बैठने के लिए,,, यह सब देखकर अंकित अपनी मां से बोला कि अच्छा हुआ मैंने केबिन वाली सीट बुक कराया यहां हम लोग आराम से सोते हुए चले जाएंगे और मजे करते हुए,,, तकरीबन आधे घंटे तक बस वहीं पर खड़ी रही है इसके बाद बस के कंडक्टर ने एक बार आवाज लगा कि कहीं कोई रहे तो नहीं किया है लेकिन सारे लोग बैठ चुके थे और थोड़ी देर बाद वह ड्राइवर को चलने के लिए बोला और थोड़ी ही देर में बस हाईवे पर दौड़ने लगी,,,, गर्मी का महीना था इसलिए थोड़ी बहुत गर्मी का एहसास हो रहा था अंकित थोड़ी सी खिड़की को खोल दिया जिससे ठंडी हवा अंदर आ रही थी और दोनों को राहत पहुंच रही थी,,, अंकित और उसकी मां दोनों लेते हुए थे बस में अभी रोशनी थी क्योंकि लाइट जल रही थी तकरीबन 1 घंटे के सफर होने पर कंडक्टर ने बस की लाइट बंद कर दिया बस में अंधेरा छा गया क्योंकि सबके सोने का समय हो रहा था और कुछ लोग तो सो भी गए थे। अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराया उसकी मुस्कुराहट के मतलब को सुगंधा अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए इशारे में ही उसे मना करने लगी लेकिन अंकित कहां मानने वाला था वह एकदम से अपनी मां को अपनी बाहों में जाकर लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके नितंबों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया आखिरकार सुगंधा कब तक इनकार कर पाती अपने बेटे की हरकत से वह भी मदहोश होने लगी,,।
बस अपनी रफ्तार में हाईवे पर भागती चली जा रहीथी बस में किसी के भी बातचीत करने की आवाज नहीं आ रही थी मतलब साफ था कि सब लोग सो चुके थे। लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि बस में एक नया अनुभव होने मिलने वाला था,,,, अंकित एक हाथ से अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते देखते वह अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया बस हिचकोले खा रही थी इसलिए दोनों को और ज्यादा मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई झूला झूला रहा हो,,,, अंकित अपनी मां की चूचियों को मुंह में लेकर पीना चाहता था उसे दबाना चाहता था इसलिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर के उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो उसकी मां बोली।)
यह सब मत उतार ऐसे ही मजा ले ले यहां पर सारे कपड़े उतारना अच्छा नहीं है।
अरे मम्मी कुछ नहीं होगा सब लोग सो रहे हैं और वैसे भी हम लोग केबिन के अंदर है कोई देखने वाला नहीं है।
फिर भी मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।
अरे अभी अच्छा लगने लगेगा रुको तो सही,,,,(सुगंधा उसे रोकते रह गई लेकिन उसकी एक नहीं सुना और अंकित अपनी मां की ब्रा का हक खोलकर उसके बदन से ब्रा को भी अलग कर दिया कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह गोल-गोल थी जो की केबिन की लाल रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी और किस तरह नहीं किया और वह तुरंत अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और बारी-बारी से मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया सुगंधा जो अब तक अपने बेटे को रोक रही थी वह भी मजा लेने लगी वह भी मस्त होने लगी,,,, अपनी मां की चूचियों को पीता हुआ अंकित एक हाथ अपनी मां की साड़ी के अंदर डाल दिया और उसके गुलाबी बुर को मसलने लगा जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से अपनी मां को पूरी तरह से मदहोश कर दे रहा था अपने बेटे की हरकत से सुगंधा भी मस्त हो रही थी मजा ले रही थी उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा उसे हर तरह से शुख प्रदान कर रहा था। अंकित अपनी एक उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर कर रहा था जो की मदन रस से पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।
तुम तो इंकार कर रही हो लेकिन तुम्हारी बुर तो कुछ और ही कहानी कह रही है,,,,।
उसे कहने दे मैं तो नहीं कह रही हूं ना,,,।
तुम्हारे कहने ना खाने से क्या होता है मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी,,,।
अच्छा तो मेरी बुर तेरी बीवी हो गई है।
तभी तो मेरा साथ दे रही है तुम भले ना दो लेकिन वह तो मेरा साथ दे रही है मेरी हरकतों से पानी छोड़ रही है।
तभी तो कहती हूं तुम दोनों शैतान हो चुके हो और तुम दोनों की शैतानी में मेरा जीना हराम हुआ है,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसते हुए अपनी मां की साड़ी को खोलने लगा यह देखकर सुगंधा फिर से बोली,,,,)
नहीं रहने दे इसको तो रहने दे,,,, ऊपर का तो खोल दिया है नीचे का रहने दे,,, साड़ी उठाकर कर ले,,,।
क्या मम्मी तुम भी कितना मजा आ रहा है देखो तो सही बस कभी अनुभव ले लो कितना मजा आएगा जब बस में नंगी होकर चुदवाओगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां की साडी को खोलने लगा अौर सुगंधा उसे बिल्कुल भी रोक नहीं रही थी क्योंकि भले ही वह उसे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन अंदर ही अंदर वह भी चाहती थी कि बस में वह नंगी होकर चुदवाए,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां की साड़ी को खोलकर एक तरफ रख दिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) देखना तुम एकदम जवान हो जाओगे लगेगा ही नहीं की तुम दो बच्चों की मां हो ऐसा अनुभव करो कि कि जैसे तुम अपने प्रेमी के साथ हो या अपने पति के साथ हो,,,, (ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के पेटीकोट का नाडा भी खींच कर खोल दिया अपने बेटे की हरकत से सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठी उसके बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था,,,, वह कुछ बोलने लायक नहीं थी बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ती चली जा रही थी और बस के हिसकोले में उन दोनों का बदन भी हिल रहा था दोनों को मजा आ रहा था एक अलग ही नशा छा रहा था हल्की सी खिड़की खुली होने की वजह से ठंडी ठंडी हवा दोनों के बदन को ठंडक देने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन वातावरण की शीतलता जवानी की गर्मी के आगे घुटने टेक दे रही थी। अंकित की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था वह बस में अपनी मां को चोदने के लिए बेकरार हुआ जा रहा था,,,, और देखते ही देखते हो अपनी मां के पेटीकोट को खींचकर उसके वचन से अलग कर दिया पेटिकोट को निकलते समय उसकी मां भी उसका पूरा सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दी थी जिससे उसका पेटिकोट आराम से निकल सके,,,,।
सुगंधा के बदन पर अब केवल उसकी छोटी सी पेटी रह गई थी जो उसकी बुर को ढकी हुई थी उसके खूबसूरत हसीन और बेशकीमती खजाने को ढके हुए थी,,,, अंकित अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को बस की लाल रोशनी में देखता ही रह गया वह जल्द से जल्द अपनी मां की पैंटी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर देना चाहता था इसलिए एकदम से हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां की पेंटिं को दोनों हाथों में पकड़ लिया उसकी मां भी एक बार फिर से अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित ने बिल्कुल भी देर नहीं किया अपनी मां की चड्डी उतारने में देखते ही देखते बस के अंदर सुगंध पूरी तरह से नंगी हो गई एक अद्भुत एहसास के साथ वह गहरी गहरी सांस ले रही थी अपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी एक नई जिंदगी की रही थी एक नई खुशी के साथ। बस में सभी लोग सो चुके थे गहरी नींद में लेकिन मां बेटे की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दोनों मदहोशी के सागर में डुबकी लगाने को तैयार थे देखते ही देखते अंकित भी अपने कपड़े को उतार कर नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से तैयार था उसकी मां की बुर में घुसने के लिए लेकिन अभी अंकित इस मजे को और भी दुगना कर देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर अपना मुंह रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया। सुगंधा मदहोश होने लगी वह अपनी टांगों को थोड़ा और खोल दे क्योंकि सोने लायक जगह कही थी बैठने लायक भी जगह थी इसलिए टांगे खोलने में उसे ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी,,,,, अंकित लपालप अपनी मां की बुर को चाट रहा था उसके नमकीन रस का स्वाद ले रहा था और जितना हो सकता था उतना जीभ अंदर डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,।
सुगंधा अपने आप पर काबू किए हुए शिसकारी ले रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,, रह रह कर वह अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे अब समय आ गया था सुगंधा की चुदाई करने का इसलिए वह धीरे से उठा और अपनी मां की टांगों के बीच जगह बनाते हुए उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसकी आधी गांड उसकी जांघों पर आ गई और फिर अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई नापने लगा अंकित कमर हिला हिला कर अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया मां बेटे दोनों के लिए ही बस के अंदर चुदाई का यह पहला अनुभव था,,,, इससे पहले बस का अनुभव सुगंधा को तब हुआ था जब वह अपने छोटे भाई के घर जा रही थी,,,, लेकिन उसे समय केवल रगड़ स्पर्श यही सब चल रहा था आज बस के अंदर वह खुलकर चुदवा रही थी,,, सुगंधा को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका बेटा सही कह रहा था कि आज वह अपने आप को एकदम जवान लड़की की तरह महसूस करेगी और ऐसा ही वह महसूस कर रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दो बच्चों की मां नहीं बल्कि एक जवान खूबसूरत लड़की है जो अपनी प्रेमी के साथ चुदाई का शुख भोग रही है।
आखिरकार 25 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद अंकित का अलावा उसकी मां की बुर को भरने लगा इस दौरान सुगंध दो बार झड़ चुकी थी,,,, इसके बाद दोनों अपनी कपड़े पहनकर आराम करने लगे और जल्द ही दोनों को नींद आ गई,,,, तकरीबन 3:30 बजे बस एक स्टॉप पर रुकी,,,, कुछ यात्री सोए रह गए और कुछ यात्री उतर गए,,,, अंकित की भी नींद खुल गई वह अपनी मां को जगाया क्योंकि उसे भी पेशाब लगी थी और सोचा कि उसकी मां भी इसी समय पेशाब कर ले तो अच्छा होगा,,,,, मां बेटे दोनों उतर कर पेशाब करने के लिए चले गए पेशाब करने के बाद मां बेटे दोनों वही ढाबे पर आकर बैठ गए क्योंकि वहां पर भी बहुत से लोग बैठे हुए थे और चाय पानी कर रहे थे,,, अंकित और उसकी मां भी वहीं पर बैठकर चाय पीने लगे तभी सामने से एक ऑटो आया और उनके पास रुक गया उसमें से एक औरत तकरीबन 30-35 साल की थी वह उतरी उसके साथ उसका आदमी भी था उसे भी कहीं जाना था वापस के कंडक्टर से बात करने लगी उसे पर ज्यादा ध्यान न देते हुए अंकित चाय पीते अपनी मां से बात करने लगा कुछ देर पहले जिस तरह का मजा हम दोनों में लिया था उसका एहसास अभी तक दोनों के चेहरे पर दिखाई दे रहा था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे,,,, तभी वह कंडक्टर उसे औरत और उसके आदमी को लेकर उनके पास आया और सुगंधा से बोलने लगा,,,,।
बहन जी अगर आपको दिक्कत ना हो तो क्या आप इन्हें बैठ सकती हैं,,,।
(उसे कंडक्टर की बात सुनकर मां बेटे दोनों कंडक्टर की तरफ तो कभी उसे औरत की तरफ तो कभी उसके आदमी की तरफ देखने लगे तभी उसका आदमी एकदम से हाथ जोड़ते हुए बोला)
देखिए दीदी यह मेरी बीवी है इसकी बहन की तबीयत खराब है और इसे जल्दबाजी में जाना पड़ रहा है बच्चे घर पर है इसलिए मैं जा नहीं सकता और आप तो देख ही रही हो 3:30 बज रहे हैं इस समय कोई बस मिलने वाली नहीं है और इसका वहां पहुंचना जरूरी है,,,,,।
लेकिन भाई साहब इसमें हम क्या कर सकते हैं आप तो कंडक्टर से बात करिए ना बस उनकी है बस तो उन्हें लेकर जाना है,,,(सुगंधा उस आदमी से बोली)
आप बिल्कुल ठीक कह रही है दीदी लेकिन बस में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,, यह भाई साहब बता रहे हैं कि आप दोनों केबिन बुक किए हैं अगर उसने मेरी बीवी को जगह दे देंगे तो वह भी समय पर पहुंच जाएगी निश्चिंत होकर,,, क्योंकि रात का समय है और औरतों का इस तरह से सफर करना ठीक नहीं है आप एक औरत है इसलिए आपके सहारे मैं यह आपसे बात कर रहा हूं,,,,,।
(अंकित को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह अपने मन में सोच रहा था अगर यह औरत उनके साथ बैठ जाएगी तो उन दोनों का मजा किरकिरा हो जाएगा और सुगंध अपने मन में सोच रही थी कि मजा तो वह दोनों ले चुके हैं और अब कुछ ही घंटे की बात है और वैसे भी वह अब सोने वाली है कुछ करने वाले तो है नहीं इसलिए उसके मन में यही चल रहा था कि अगर इसे अपने साथ बिता भी लेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी और वैसे भी उसे औरत को देखकर और जिस तरह से उसका पति मिन्नतें कर रहा था सुगंधा का दिल पिघल गया,,,, इसलिए वह बोली,,,)
चलिए कोई बात नहीं कुछ घंटे की ही तो बात है वैसे आपको जाना कहां है,,,,।
नैनीताल से एक स्टॉप पहले ही उतरना है,,,।
चलो ठीक है कोई बात नहीं एक औरत को इसलिए मैं तुम्हारी मदद कर रही हूं,,,,(सुगंधा की बात सुनकर वह औरत के भी चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और उसका आदमी जल्दी से कंडक्टर से टिकट कटाया इसके बाद वह तीनों अपने केबिन में आकर बैठ गए उसका पति बस के बाहर खिड़की में देखता रहा जब तक की बस चली नहीं गई,,,, दोनों के बीच में सुगंधा जानबूझकर लेटी हुई थी क्योंकि वह एक औरत थी और वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसके साथ सोए वैसे तो उसे अपने बेटे पर भरोसा था लेकिन फिर भी वह एक औरत होने के नाते एक औरत का जलन उसके अंदर कुछ पल के लिए पनप गया था। बस फिर से हाईवे पर अपनी रफ्तार से भागती चली जा रही थी अंकित अपने मन में ही सोच रहा था कि अगर यह औरत साथ में ना होती तो अपनी मां को बाहों में लेकर वह चैन की नींद सोता,,,, लेकिन कोई बात नहीं जो काम दोनों को करना था वह काम तो कर चुका था इसलिए वह भी मन मार कर सोने लगा थोड़ी ही देर में तीनों को नींद आ गई,,,,, तकरीबन 1 घंटे बाद बस फिर से एक जगह पर रुक गई,,,, कुछ देर पहले ही उसे औरत की नींद खुली थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी लेकिन वह किसी को कुछ कह नहीं पा रही थी जब बस रुकी तो उसे रहने क्या और वह सुगंधा को जगाने की कोशिश करने लगी लेकिन वह गहरी नींद में सो रही थी इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंकित को जागने लगी और अंकित एकदम से उठकर बैठ गया वह बोला,,,)
क्या हुआ,,,?
मेरे साथ जरा नीचे चलो ना,,,,।
क्यों क्या हुआ,,,,,?
अब मैं कैसे बताऊं,,,,, मुझे बाथरूम जाना है,,,,,(यह सुनकर अंकित का मन हिचकोले खाने लगा वैसे भी बस की लाल रोशनी में वह कुछ और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन फिर भी अंकित उसे पर से नजर हटाकर खिड़की से बाहर देखने की कोशिश करते हुए बोला कि वह लोग है कहां पर,,,,, और वह उसे औरत से पूछा)
लेकिन बस खड़ी कहां पर है,,,?
मुझे यह तो नहीं मालूम लेकिन आप जल्दी चलो तो मेरा भी काम हो जाएगा नहीं तो अगर बस शुरू हो गई तो,,,,,,(इतना कहकर वह रुक गई अंकित समझ गया था कि मामला गंभीर था इसलिए वह उसके साथ चलने को तैयार हो गया दोनों केबिन से नीचे उतरे और अंकित उसे बस से नीचे लेकर आया बस एक पेट्रोल पंप पर खड़ी थी जहां पर बस में ईंधन भरा जा रहा था,,,, पेट्रोल पंप के पास ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जो कि इस समय भी चालू थी और बस का ड्राइवर कंडक्टर दोनों वहीं पर बैठकर चाय पी रहे थे बाकी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,, वह औरत शरमाते हुए अंकित से बोली,,,)
कहां जाऊं,,,?
(उसके इस सवाल पर उसकी मासूमियत पर अंकित उसे पर पूरी तरह से फिदा हो चुका था और वैसे भी वह देखने में बहुत सुंदर थी इस बात का एहसास अंकित को अभी हो रहा था उसके चमकते मोती जैसे दांत बहुत खूबसूरत थे उसका गोल चेहरा अच्छी नैन नक्श और उसके छातियों का उभार उसकी जवानी की पूरी कहानी कह रहा था,,,,, उसकी बात सुनकर वह अपने चारों तरफ देखने लगा और बोला,,,)
देखो यहां पर हम दोनों के सिवा कोई पैसेंजर नीचे उतरा नहीं है और यहां पर काफी अंधेरा भी है इसलिए ज्यादा दूर तक जाना ठीक नहीं है ऐसा करो तुम यह सामने की झाड़ी के पास बैठ जाओ,,,,,।
(अंकित का इतना कहना था कि वह औरत अपने पेशाब की तीव्रता को रोक नहीं पा रही थी और तुरंत जाकर उसके सामने झाड़ियां के पास गई और साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को नीचे करने लगी वह कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में थी अंकित उसकी जल्दबाजी को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,,, अंधेरा कुछ ज्यादा ही था लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं था कि वह उसे औरत को देखना सके वह औरत एकदम साफ दिखाई दे रही थी क्योंकि दोनों के बीच की दूरी केवल 2 मीटर की ही थी दोनों के बीच ज्यादा दूरी नहीं थी और उसे औरत ने अंकित के सामने बिल्कुल भी शर्म नहीं की थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह थोड़ी देर और रखेगी तो शायद वह अपने कपड़े को गीला कर लेगी,,, वह अपनी पैंटी को अपने हाथों से नीचे करके वहीं पर बैठ गई थी साड़ी उसकी कमर तक थी बैठे हुए भी अपनी साड़ी को पीछे से उठाई हुई थी,,,, जिससे उसकी भरपूर गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और यह नजारा देखकर तो अंकित का लंड एकदम से खड़ा हो गया था,,,, अंकित उसकी भरपूर जवानी को अपनी आंखों से देख रहा था वह अपनी आंखों को दूसरी तरफ घूमा भी नहीं रहा था क्योंकि इतना खूबसूरत है की आंखों के सामने जो नजारा था उसे देखने का लालच हुआ अपने मन से रोक नहीं पा रहा था,,,,
उसकी बुर से निकलने वाली सीटी की मधुर ध्वनि अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, जिसे सुनकर अंकित व्याकुल हो रहा था मदहोश हो रहा था और वह पेशाब कर रही औरत पीछे नजर घुमा कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि कहीं अंकित चला तो नहीं किया लेकिन जब उसने देखी कि कहीं पीछे ही खड़ा है और उसे ही देख रहा है तो वह राहत की सांस ली और फिर से पेशाब करने में मशगूल हो गई थोड़ी देर में वह पेशाब करके खड़ी हो गई और अपने हाथों से पेंटी को ऊपर की तरफ खींचने लगी उसकी नंगी गांड का उभार देखकर अंकित को यह समझते देर नहीं लगी कि वह पूरी तरह से जवानी से पकी हुई थी,,,,, वह अंकित के पास आई और बोली।
अब चलो,,,,(उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में चला रहे थे क्योंकि काफी देर से वह पेशाब की तीव्रता से जूझ रही थी और अब जाकर उसे राहत महसूस हुई थी अंकित उससे बोला,,,)
तुम चलो मैं चाय लेकर आता हूं,,,,,।(इतना सुनकर वह औरत बस में चढ़ गई और अंकित जल्दी से दो कप चाय लेकर आ गया क्योंकि वह चाहता था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वैसे भी अंकित को अपनी मां की आदत अच्छी तरह से मालूम थी वह जानता था कि जब उसकी मां जमकर चुदवाती थी तो सोती भी एकदम गहरी नींद में थी,,,, अंकित चाय लेकर जब बस में पहुंचा तो वह औरत के बिन के पास ही खड़ी थी यह देखकर अंकित उससे बोला,,,,)
क्या हुआ तुम खड़ी क्यों हो केबिन में चलो,,,।
मैं उपर चढ़ नहीं पा रही हूं,,,,,
(यह सुनकर अंकित के तन बदन में गुदगुदी होने लगी वह चाय के कप को एक सीट के किनारे रख दिया और उसे औरत को केबिन में चढ़ाने की कोशिश करने लगा,,, इस दौरान वह जानबूझकर उसे औरत के भारी भरकम गोलाकार नितंबों पर हाथ रखकर उसे ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगा जिसमें उसे औरत ने बिल्कुल भी ऐतराज नहीं किया और वह केबिन में चढ़ गई लेकिन इस दौरान अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह भी चाय का कप उसे औरत को थाम कर वह भी केबिन में चला गया और केबिन को बंद कर लिया वह देखा तो उसकी मां एकदम गहरी नींद में सो रही थी,,,, और नींद में होने की वजह से वह एक किनारे पर आ चुकी थी जिसे अंकित को खूबसूरत के पास में ही सोना था इस बात की खुशी अंकित के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी वह एकदम से खिड़की वाली जगह पर पहुंच गया और वह औरत बीच में आ गई दोनों चाय पी रहे थे बस अभी भी खड़ी थी दोनों एक दूसरे से बात करने लगे बात ही बात में उसे पता चला कि उसका नाम मनीषा है और वह अपनी बहन से मिलने के लिए जा रही थी वैसे तो उसकी तबीयत ज्यादा खराब तो नहीं थी लेकिन फिर भी उससे मुलाकात करना जरूरी था।
उस औरत से अंकित को यह भी पता चला कि,,,, उसे अभी बच्चा नहीं था यह बात सुनकर अंकित बोला,,,।
लेकिन तुम तो मतलब कि तुम्हारे पति तो बता रहे थे कि बच्चों को छोड़कर आए हैं,,,।
वह उनकी बहन के बच्चे हैं जो साथ में ही रहते हैं इसलिए ऐसा कह रहे थे,,,,।
(एक भी बच्चा ना होने की बात सुनकर अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह अपने मन में ही सोचने लगा कि इसका मतलब माल एकदम कड़क है,,,, दोनों की चाय खत्म होती इससे पहले ही बस चल पड़ी,,,, अंकित आजमाना चाहता था कि यह औरत उसका साथ देगी कि नहीं इसलिए वह पैर फैला कर लेटा हुआ था और लेते-लेते दोनों बात करने लगे थे इस दौरान अंकित जानबूझकर अपने पैर को उसके पैर से स्पर्श कर रहा था और अंकित को एहसास हो रहा था कि वह औरत अपने पैर को बिल्कुल भी हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,, दोनों पीठ के बोल लेते हुए थे और अंकित एकदम से उसकी तरफ करवट लेकर एक हाथ के सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर उससे बात करने लगा क्योंकि वह उसकी चूचियों को देखना चाहता था और उसे उसकी चूची दिखाई भी दे रही थी क्योंकि साड़ी का पल्लू एक तरफ हट गया था और उसकी बड़ी-बड़ी चूची उसके ब्लाउज में कैद लाल रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,, चूचियों के बीच की गहरी लकीर उसकी चूचियों के आकार को साफ बयां कर रही थी,,,, तभी अंकित उससे बोला,,,)
अगर हम लोग तुम्हें साथ में नहीं बैठाते तब क्या करती,,,,।
फिर क्या हमें घर जाना पड़ता और फिर दो-तीन दिन लग जाते,,,,।
इसका मतलब हमने सही किया तो मैं साथ में आने के लिए बोलकर,,,,।
बिल्कुल सही किया वैसे आप लोग भी बहुत अच्छे हैं तभी तो मेरे पति आप लोग के भरोसे छोड़कर गए हैं,,,,।
वैसे तो अच्छी तो तुम भी हो और खूबसूरत भी,,,।
(अंकित की यह बात सुनकर वह एकदम से शर्मा गई अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर पिघलने लगती है और इस समय यही हो भी रहा था,,, वह शरमाते हुए बोली)
लेकिन मेरे पति तो कहते हैं कि कुछ महीने और रुक जाता तो तुमसे कई गुना खूबसूरत औरत मुझे मिलती,,,।
देखो मनीषा जी मेरी बात का बुरा बिल्कुल भी मत मानना बस स्टॉप पर मैं तुम्हारे पति को देखा हूं और सच कहूं तो तुम दोनों जिनकी जोड़ी कुछ खास नहीं है तुम आसमां हो तो वह जमीन है कोई मिल नहीं है तुम गुलाब का खूबसूरत फूल हो और तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो तुम्हारे पति बगीचे के माली भी नहीं लगते,,, क्यों ठीक कहा ना,,,,।
(अंकित की बात सुनकर वह हंसने लगी और फिर कुछ सोच में पड़ गई और बोली)
तुम बिल्कुल सही कह रहे हो वैसे यह शादी मेरे मन मर्जी की नहीं हुई है मैं किसी और से प्यार करती थी,,,, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहता था बस दोस्ती रखना चाहता था,,,।
मतलब है कि प्यार के नाम पर उसने कुछ और,,,
नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,, वह मुझसे प्यार तो बहुत करता था लेकिन अपने परिवार वालों के खिलाफ नहीं जा पाया मेरी और उसकी बात बहुत लोगों को मालूम हो चुकी थी इसलिए मेरे पिताजी जल्दबाजी में मेरी शादी कर दिए।
तो क्या तुम ईस शादी से खुश हो,,,,।
मुझे तो नहीं लगता,,,(गहरी सांस लेते हुए,,,, अंकित को उसका दर्द समझ में आ गया था और अभी तक उसके बच्चे भी नहीं थे इसका मतलब साफ था कि उसका पति कोई काम का नहीं था अंकित उसकी आंखों में देख रहा था वह भी अंकित की आंखों में देख रही थी तो उन्होंने एक दूसरे की आंखों की गहराई में डूब रहे थे अंकित से रहा नहीं किया और वह तुरंत अपने होठों को उसके होंठ पर रख दिया पल भर के लिए वह औरक एकदम से हिचकीचाई अंकित ने अपने होठों को वापस उसके होठों से अलग कर लिया और उसकी आंखों में देखने लगा लेकिन इस बार वह औरत हल्के से अपने होठों को ऊपर की तरफ करने की कोशिश करने लगी और यह देखकर हम किस रहा नहीं किया और अंकित फिर से उसके होठों पर टूट पड़ा और दोनों एकदम से मदहोश होने लगी अंकित उसके लाल-लाल होठों का रस पीने लगा वह औरत भी उसका पूरा साथ दे रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार हुआ किसी पुरुष संसर्ग का आनंद ले रही थी,,,, बगल में ही सुगंधा गहरी नींद में सो रही थी उसे तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है क्योंकि कुछ देर पहले ही वह काम क्रीड़ा का आनंद लेकर सो गई थी। अंकित फिर से उसे आजमाना चाहता था और फिर से उसके होठों से अपने होठों को अलग कर दिया और गहरी गहरी सांस लेता हुआ उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा इस बार अंकित कोई भी पहल करना नहीं चाहता था और उसका यह सब्र रंग लाया,,, वह औरत अपने हाथ की कहानी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठे और खुद ही अपने हाथ को अंकित के होठों पर रख दी बस अब सब्र जवाब दे चुका था अंकित एकदम से उसे औरत पर टूट पड़ा और उसके होठों का रसपान करते हुए ब्लाउज के ऊपर से उसकी चुचियों का दबाना शुरू कर दिया,,,,।
चूचियों पर हथेलियो का कसाव से उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि आज वह एक अच्छे मर्द के पाले पड़ी थी,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी दोनों सूचियां को दबाता हुआ उसके होठों का रसपान कर रहा था अंकित का लंड खड़ा हो चुका था,, अंकित बिल्कुल भी देर ना करते हुए पूरी मजबूती के साथ उसे अपनी बाहों में भरकर अपने ऊपर खींच लिया वह औरत अंकित के ऊपर थी और अंकित दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था मसल रहा था और नीचे से उसका तना हुआ लंड उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था,,, लंड की चुभन को अपनी बुर के ऊपर महसूस करते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद होने लगी। उसे एहसास होने लगा कि अंकित के पास मोटा तगड़ा लंड है जो उसकी प्यास पूरी तरह से बुझा सकता है इसलिए वह भी अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेट के ऊपर से अंकित के लंड को दबाए अंकित पागल हुआ जा रहा था मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, वह गहरी सांस लेते हुए फिर से अंकित की तरफ देखने लगी और उसकी मां की तरफ देखने लगी अंकित समझ रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला।
अभी उठने वाली नहीं सुबह होगी तभी उठेगी तुम बिल्कुल चिंता मत करो,,,,(इतना सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वहां अंकित की टांगों के पास आ गई और अपने हाथों से उसके पेंट की बटन खोलने लगी अंकित तो पागल हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सफर के दौरान इतनी खूबसूरत औरत उसे मिलेगी जो उसे भरपूर मजा देगी,,,, देखते ही देखते वहां अंकित के पेट की बटन खोलकर दोनों हाथों से उसकी पेंट और अंडरवियर दोनों नीचे खींच दी और अंकित के लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अंकित उसके चेहरे के हाव-भाव कोई देख रहा था,,,,, वह जानता था कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,,)
क्या हुआ तुम तो शादीशुदा हो यह सब देख चुकी होगी फिर क्यों हैरान हो रही है।
इतना बड़ा इतना मोटा बाप रे,,,,।
क्यों तुम्हारे पति का नहीं है क्या ऐसा,,,।
बीत्ता भर का है,,,, इसके सामने तो बच्चा ही है,,,,।
(यह सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह एकदम से उसे अपने मुंह में लेकर भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी अंकित को मजा आ रहा था उसे एहसास हो रहा था कि यह औरत कितनी प्यासी है अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और वाकई में जितनी खूबसूरत वह औरत थी उसके हिसाब से उसे उसका पति नहीं मिला था उसे खुश करने वाला भी पति नहीं मिला था इसलिए अंकित अपने मन में सोच रहा था कि जितना भी समय मिलता है आज उसे जी भर कर खुश कर देगा शायद किस्मत ने ही इसे उसके साथ केबिन में भेजी है,,,, अंकित अपना हाथ उसके सर पर रखकर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा रहा था जिससे उसका लंड उसके गले के गहराई तक घुस जा रहा था उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी फिर भी वह लंड को बाहर नहीं निकाल रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, अंकित कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद बोला,,,)
तुम्हें एक काम करो अपनी गांड मेरे मुंह पर रख दो ताकि मैं तुम्हारी बुर की चटाई कर सकूं तुम्हें भी मजा मिलेगा और मुझे भी,,,.
(अंकित के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह जल्दी से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी पैंटी को बैठे-बैठे अपनी टांगों से बाहर निकाल दी और उसे अपने पर्स में रख दी,,,, और जैसे अंकित बोला था वैसे ही अपनी भारी भरकम गांड को उसके मुंह पर रख दी अंकित दोनों हाथों से उसकी मुलायम गांड को पकड़ कर उसकी गुलाबी पर को चाटना शुरू कर दिया उसमें से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी क्योंकि अभी-अभी उसने इसमें से पेशाब की थी जिसकी बूंदे अभी भी उसकी बुर पर लगी हुई थी जिसे अंकित अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया,,,, वह औरत पूरी तरह से मदहोश हो रही थी मस्त हो रही थी इस तरह का सुख आज तक उसके पति ने उसे कभी नहीं दिया था इसलिए वह पागलों की तरह अपनी गांड को अंकित के चेहरे पर पटक रही थी रगड़ रही थी गोल-गोल घूम रही थी अंकित पूरी तरह से उसे मजा दे रहा था अपनी दो उंगली एक साथ उसकी बुर में डालकर अपने लंड के लिए जगह भी बना रहा था उंगली डालने पर उसे एहसास हो गया था कि वाकई में उसकी बुर में पतला लंड ही गया था तभी तो उसकी बुर अभी भी कसी हुई थी। दो उंगली एक साथ उसकी बुर के अंदर बाहर करने से वह अपनी उत्तेजना को संभाल नहीं पाई और भलभला कर झड़ने लगी उसका मदन रस अंकित की नाक और मुंह में घुसने लगा जिसे वह अपनी जेब से चाटना शुरू कर दिया और तब तक चाटता रहा जब तक कि वह चाटकर एकदम चिकना नहीं कर दिया,,,,, लेकिन वह हैरान थी कि अभी भी अंकित के लंड से पानी नहीं निकला था वह ज्यो का त्यों खड़ा था,,,,,
थोड़ी ही देर में वह अंकित के ऊपर से अपनी गांड को उठाई और अंकित के लंड को एक हाथ से पकड़ कर उसे मुठियाने लगी घुटनों के बाल उसकी जांघों के ईर्द गिर्द जगह बनाकर एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़ी और अपनी गुलाबी छेद को उसके सुपाड़े पर रख दी जल्द ही उसे एहसास हो गया कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था जो उसकी बुर में आराम से नहीं घुस पा रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी मसक्कत कर रही थी और उसकी मेहनत रंग ला रही थी हालांकि इस दौरान वह पसीने से करवात्तर हो चुकी थी लेकिन फिर भी धीरे-धीरे अंकित का लंड उसके गुलाबी गली में जगह बना था वह अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था और जैसे-जैसे अंदर घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे का हाव-भाव बदल रहा था। देखते ही देखते वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड उसके लंड पर रखते चली गई अपना दबाव बनाते चली गई और अंकित का लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया तब जाकर उसे सुकून मिला और यह देखकर वह भी हैरान थी कितना मोटा तगड़ा लंड उसने बड़े आराम से अपनी बुर में ले ली थी हालांकि उसे लेने के लिए थोड़ी बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी लेकिन फिर भी उसने कर दिखाई थी,,,,,
चेहरे पर पसीने की बूंदे ऊपस आई थी लेकिन अब उसे अच्छा लग रहा था वह अपनी गांड को धीरे-धीरे अंकित के लंड के ऊपर पटक रही थी मोटा तगड़ा लंड सब कुछ रगड़ हुआ अंदरूनी एहसास दिलाता हुआ बर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंकित ब्लाउज का बटन खोलकर उसकी दोनों चूचियों को बाहर निकाल कर दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया था और नीचे से भी धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर उछाल रहा था,,,,, उसने आज तक इस तरह के एहसास को कभी महसूस नहीं की थी इसलिए वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी देखते ही देखते वह जोर-जोर से अपनी गांड को अंकित के लंड पर पटक रही थी अब बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी बुर कीगहराई नाप रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अंकित की मां जाग न जाए,,,, कुछ देर तक वह अंकित के लंड पर इसी तरह से कूदती रही लेकिन अंकित अब जोर-जोर से धक्के लगाना चाहता था उसे एहसास दिलाना चाहता था की असली मर्द कैसे चोदता है।
इसलिए अंकित अब आसन बदल चुका था वह पीठ केवल लेटी हुई थी और अंकित उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसे एहसास दिला रहा था असली चुदाई का वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था बस अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रही थी और हिचकोले खा रही थी जिसे किसी दूसरे को शक भी नहीं हो रहा था कि केबिन के अंदर क्या हो रहा है वह जोर-जोर से उसे औरत की चुदाई कर रहा था वह पूरी तरह से पल में जा रही थी उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि जिंदगी में पहली बार हुआ इस तरह की चुदाई का सुख प्राप्त कर रही थी और देखते ही देखते अंकित उसकी बुर में अपना लावा उगलने लगा,,,,, कुछ देर तक अंकित उसके ऊपर ही लेटा रह गया और फिर धीरे से उसके बगल में लेट गया,,,,, दोनों फिर से कुछ देर तक बात करते हैं 5:00 चुका था थोड़ी देर में उजाला होने वाला था,,, एक बार फिर से वह अंकित के लंड का मजा लेना चाहती थी अंकित का पेंट अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था और बातचीत के दौरान धीरे-धीरे खड़ा हो चुका था लेकिन अंकित को नहीं मालूम था कि उसके मन में क्या चल रहा है वह तो सोच रहा था कि बस हो गया लेकिन तभी वह फिर से अपने हाथ में उसके लंड को पकड़ लिया और मुस्कुराने लगी फिर किया था एक बार फिर से दोनों के बीच चुदाई का खेल शुरू हो गया और इस बार अंकित ने पूरा दम लगा दिया उसकी चुदाई करने में वह पूरी तरह से मचल उठी थी उसका बदन तड़प उठा था उसकी जवानी का रस पूरी तरह से अंकित ने नीचोड़ दिया था।
थोड़ी देर बाद उसका स्टॉप आ गया अंकित उसे नीचे तक छोड़ने आया जाते समय उसकी आंखों में आंसू था क्योंकि एक ही रात में अंकित ने उसे वह प्यार दिया था जिसके बारे में वह कभी सपने भी नहीं सोची थी हालांकि इस दौरान अभी तक सुगंधा की आंख नहीं खुली थी और अंकित फिर से आकर केबिन में लेट गया था उजाला हो चुका था नैनीताल भी आने वाला था इसलिए अंकित ने अपनी मां को जगाया और सुगंधा जैसे ही जागी वह बोली।
वह कहां गई,,,?
वह तो कब से उतर गई उसका स्टॉप आ गया था,,,।
चलो कोई बात नहीं वह भी समय से अपने घरपहुंच गई,,,,(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा था उसे इस बात की खुशी थी कि उसकी मां पास में लेटी हुई थी और उसके पास में ही वह एक दूसरी औरत की जमकर चुदाई किया था लेकिन उसे बिल्कुल अहसास तक नहीं था थोड़ी देर बाद उन दोनों का भी स्टॉक आगे और वह दोनों भी नीचे उतर गए)