Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 8 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 64

दिलीप- मैं तो कुछ सोच ही नही पा रहा था

तभी मुझे बड़ी नानी की बात याद आई

जब प्यार करने को मिल रहा हो

तो प्यार कर लेना चाहिए

मैं अपने होंठ विद्या दी के गुलाबी होंठ पे रखके चूसने लगा

कभी मैं दी के उपरी होंठ को चूस्ता कभी नीचली होंठ को

दी भी आँखें बंद किए मेरे होंटो को चूस रही थी

थोड़ी देर बाद मैने किस तोड़ दिया

मैने दी की दोनो आँखो को चूम लिया

दी ने धीरे से अपनी आँखे खोल दी

और मुझे देखने लगी

मैं दी को अपनी गोद में लेके बैठ गया

दिलीप- दी आपने मुझे रोका क्यूँ नही

विद्या- तूने मेरे साथ क्या किया

दिलीप- प्यार

विद्या- देखा तूने ही कहा कि तू मुझे प्यार कर रहा था

फिर मैं अपने बाबू को क्यूँ रोकू

दिलीप- इसका मतलब आप मुझपे गुस्सा नही हैं

विद्या- नही

दिलीप- लेकिन यह सब हुआ कैसे

विद्या- मैं तेरे रूम में आई

मैने देखा कि तू बैठके गेट की तरफ अपनी बाहे फैलाए हुआ है

मैं समझी कि तू मुझे गले लगाना चाहता है

मैं जैसे ही तेरे गले लगी तूने मुझे किस करना शुरू कर दिया

आज तक मुझे किसी ने भी किस नही किया था

तू पहला लड़का है जिसने मुझे किस किया

पहली बार तूने मुझे किस किया तो अपने आप को संभालते हुए मैने तुझे थप्पड़ मार दिया

लेकिन अभी तूने मुझे किस किया तो ऐसा फील हुआ कि तेरे किस में सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार है

दिलीप- बस इतना ही

विद्या- बाबू एक बात हमेशा याद रखना

एक लड़की सिर्फ़ यही चाहती है कि जब उसे कोई पहली बार प्यार करे

तो वो प्यार इतना प्यारा हो कि उसी प्यार के सहारे वो पूरी जिंदगी गुज़ार दे

दिलीप- दी कही मुझे किस करने की बीमारी तो नही हो गयी

विद्या- बाबू तेरा किस तो अनमोल है

दिलीप- अच्छा

मैं मुस्कुरा के कहा

तभी मेरे सर में दर्द होने लगा

दी सर में दर्द हो रहा है

दी ने मुझे लेटा दिया

फिर मैं सो गया

जब मैं उठा तो वँया सोफे पे बैठी हुई थी

मैने देखा रात के. 9 बजे हैं

वँया ने फिर मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया

मैने कोशिश की वँया से बात करने की पर वो नही मानी

वँया चली गयी

थोड़ी देर बाद बड़ी नानी मेरे लिए हल्दी वाला दूध लेके आगाई

बड़ी नानी ने मुझे दवाई खिलाया

फिर मैं दूध पीके सो गया

जब से मैने होश संभाला है तबसे मैने एक बात गौर की है

रात को मेरे रूम में कोई नही रहता है

पर अब मुझे भी डर लगता है कि कोई मेरे रूम में रात को रुका

तो कहीं मैं उसके साथ कुछ उल्टा सीधा ना कर दूं

रात कोई मुझे हिलाने लगा

मैने आँख खोलके देखा तो यह अवन्तिका दी थी

मैं उठके बैठ गया

अवन्तिका- बाबू अब तबीयत कैसी है

दिलीप- ठीक है दी

अवन्तिका- तुझसे एक बात कहनी थी

दिलीप- जी कहिए

अवन्तिका- मैं कह रही थी कि जब तक तू पूरी तरह से ठीक नही हो जाता तब तक हम प्यार नही करते हैं

दिलीप- क्या आप मुझसे नाराज़ हैं

अवन्तिका- नही बाबू डॉक्टर ने हमे बोला है कि जब तक तू ठीक नही हो जाता तब तक तुझे आराम करना चाहिए

दिलीप- प्यार करने से मुझे क्या होगा

अवन्तिका दी ने मुझे अपनी कसम दे दी

मैं कुछ नही बोला

1 हफ़्ता ऐसे ही बीत गया

इस 1 हफ्ते में मैं अपने रूम में ही रहा

सुबह का नाश्ता मैं खुद खा लेता

दोपेहर का खाना मुझे मेरी बहने मिलके खिलाती

और रात का खाना तो वँया मुझे अपने हाथ से खिलाती थी

अब मुझे वीकेडी के बारे में सोचना था

प्रिन्सिपल का काम एग्ज़ॅम के बाद छुट्टियों में तमाम करूँगा..,.
 
अपडेट 65

मंडे सुबह मैं उठा नहाया धोया तय्यार हुआ किताब सब अपने बॅग में रक्खा और नीचे हॉल में गया

बड़े मामा और छोटे मामा डिन्निंग टेबल पे बैठे थे

मैं भी जाके बैठ गया

बड़े मामा- दिलीप कल सुबह से तुम लखन के साथ अखाड़े में जाओगे

दिलीप- जी

बड़ी नानी मेरे लिए नाश्ता लेके आगयि

मैं नाश्ता किया और पूछा वँया कहाँ है

बड़ी नानी- वो तो चली गयी स्कूल

फिर मैं बाहर आया और पैदल ही चल दिया स्कूल

10 मिनिट लग गया स्कूल पहुँचने में

मैं अपनी क्लास पहुँचा और अपनी बेंच पे जाके बैठ गया

सब स्टूडेंट्स मुझे घूर्ने लगे

मेरे साथ में एक लड़का बैठा था

रवि यह सब मुझे क्यूँ घूर रहे हैं

रवि- 2 हफ्ते से ज़्यादा हो गया तुम स्कूल ही नही आए

दिलीप- तो इसमें घूर्ने वाली कौनसी बात है

रवि- अगले महीने से फाइनल एग्ज़ॅम्स हैं

दिलीप- क्या पर एग्ज़ॅम्स तो 2 महीने बाद होने वाले थे ना

रवि- वो मुझे नही पता

रवि- तुझे अगर मेरे नोट्स चाहिए तो ले लेना

दिलीप- अपनी हॅंडराइटिंग देख ऐसा लगता है कि किसी दानव ने लिखने की कोशिश की हो

फिर टीचर आगये पढ़ा कर चले भी गये

कुछ दिमाग़ में नही घुसा

एक लड़की मेरे पास आई

दीपा- दिलीप तुम्हे नोट्स चाहिए तो मुझसे ले लेना

दिलीप- 17 दिनो के नोट्स चाहिए

दीप्ति- कल सुबह दे दूँगी

दिलीप- फिर तुम्हारी पढ़ाई का क्या होगा

दीप्ति- अरे बुद्धू मार्केट जाके मेरे नोट्स की कॉपी करवा लेना

दिलीप- ठीक है

रवि- भाई कुछ ज़्यादा ही करीबी नही हो रही है

दिलीप- तू बहुत जानता है उसे

रवि- बहुत चालू लड़की है कितने लड़को का ले चुकी है

दिलीप- फिर भी पिछले साल 3र्ड आई थी

रवि- यही तो मुझे समझ नही आता

दिलीप- मुझे क्या है मुझे सिर्फ़ उसके नोट्स से मतलब है

फिर टीचर्स आते गये पढ़ाते गये

मैं बैठा रहा

थोड़ी देर बाद एक लड़का आके बोला प्रिन्सिपल ने बुलाया है

मैं गया प्रिन्सिपल ऑफीस मैने जैसे ही गेट खोला

रीना मेडम कुर्सी पे बैठी थी

रीना मेडम आप

रीना- हाँ

आशा देवी ने मुझे अब स्कूल का प्रिन्सिपल बना दिया है

दिलीप- यह तो आपके लिए बहुत अच्छा हुआ

मैं बैठ गया

रीना मेडम- दिलीप तुमने मेरी मदद क्यूँ की

दिलीप- मन किया तो कर दिया

रीना मेडम- मतलब तुम्हे मुझसे कुछ नही चाहिए

दिलीप- कुछ नही चाहिए

रीना मेडम- पर मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ

दिलीप- क्या

रीना मेडम- वही जो प्रिंसीपल मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके भी ना पा सका

दिलीप- मैं कुछ समझा नही

रीना मेडम ने मुझे एक लेटर दिया

रीना मेडम- यह यहाँ से जाने के बाद पढ़ना

दिलीप- मैने वो लेटर अपनी पॅंट की जेब में रक्खा और क्लास में आगया

थोड़ी देर बाद छुट्टी होगयि

मैं स्कूल से तालाब की तरफ चल दिया

थोड़ी देर बाद मैं तालाब पे पहुँचा

मैने अपनी जेब से लेटर निकाला

लेटर

प्यारे दिलीप

मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाके प्रिंसीपल ने मेरी इज़्ज़त लूट ली

मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ

तुमने प्रिंसीपल से ना मेरी इज़्ज़त बचाई है

और ना ही तुमने मेरी जान बचाई है

तुमने मेरी और मेरे पति की जिंदगी बचाई है

मेरा बस चलता तो मैं तुम्हारे लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती

पर मैं किसी की बीवी हूँ

तुम यह मत समझना कि मैं तुम्हे ग़लत समझ रही हूँ

लेकिन तुम मेरी जिंदगी का एक दिन मुझसे कभी भी माँग सकते हो

मैं यह इसलिए नही कह रही हूँ कि तुमने मेरी मदद की है

मैने जिससे प्यार किया

उसी से मैने शादी की

जिस दिन तुम मेरे घर आए उस दिन से आज तक मैं तुम्हारे बारे में ही सोचती हूँ

तुम ऐसा समझ सकते हो कि मैं खुद तुमसे प्यार करना चाहती हूँ

अगर मैं शादी शुदा नही होती

तो मैं खुद तुमसे कहती कि तुम मुझे प्यार करो

उम्मीद है कि तुम मेरी बात समझोगे

और मुझसे गुस्सा नही होगे

दिलीप- मैने वो लेटर फाड़के तलब में फेंक दिया

थोड़ी देर बाद मैं घर पहुँचा.,..,..
 
अपडेट 66

घर पहुँचके मैं अपने रूम में गया

और बेड पे लेटके सोचने लगा

क्या मुझे रीना को प्यार करना चाहिए

क्या करूँ मैं

अगर मैने रीना को प्यार कर भी लिया तो मेरे दिल में यह बात हमेशा रहेगी कि मैने रीना की मदद की उसके बदले रीना ने मुझे प्यार करने को कहा

मैं यह सोच रहा था कि बड़ी नानी गेट खोलके अंदर आगयि

बड़ी नानी- क्या हुआ मेरे बेटे को

दिलीप- कुछ नही बस सोच रहा था कि अगले महीने से फाइनल एग्ज़ॅम्स है

बड़ी नानी- इसमें इतना क्यूँ सोच रहा है अच्छे से पढ़ाई कर

एक काम क्यूँ नही करता तू और वँया एक साथ पढ़ाई कर

दिलीप- ठीक है

फिर बड़ी नानी चली गयी

मैं अपने रूम से बाहर आया और अवन्तिका दी के रूम में गया

अवन्तिका दी मोबाइल पे कुछ कर रही थी मुझे देखते ही दी ने मोबाइल बंद कर दिया

अवन्तिका- बाबू तू स्कूल से कब आया

दिलीप- थोड़ी देर पहले

मैं बेड पे बैठ गया

दी अब तो मैं ठीक हो गया हूँ अब मैं आपको प्यार करूँ

अवन्तिका- मेरे मना करने पे तू मुझे प्यार नही करेगा

मैने दी को खींचके अपनी गोद में बिठा लिया और दी के होंठ चूसने लगा

10 मिनट बाद मैने किस तोड़ दिया

फिर मैं दी की गर्दन पे अपने होंठ रखके चूमने लगा

दी आज रात आप आओगी मेरे रूम में

अवन्तिका- क्यूँ

दिलीप- आज रात मैं आपको पूरा प्यार करना चाहता हूँ

अवन्तिका- किसी को पता चल गया तो

दिलीप- आप बताएँगी

अवन्तिका- नही

दिलीप- मैं भी नही बताउन्गा किसी को

मैने फिर अवन्तिका दी को किस किया और बाहर आ गया

फिर मैं वँया के रूम पे गया

मैने गेट नॉक किया

वँया ने गेट खोला

मुझे देख के गेट बंद करने लगी कि मैं जल्दी से अंदर चला गया

वँया- तुम जाओ यहाँ से

दिलीप- मुझे तुमसे बात करनी है

वँया- मुझे नही करनी

दिलीप- तो तुम मुझसे बात नही करोगी

वँया- नही

दिलीप- ठीक है मैं छत पे जा रहा हूँ 10 मिनट में अगर तुम छत पे नही आई तो मैं छत से कूद जाउन्गा

यह कहके मैं छत पे आ गया

एक तो मुझे समझ नही आरहा था कि वँया मुझसे गुस्सा क्यूँ है

उपर से बात करने को तय्यार नही थी

5 मिनट हो गया था

तभी वँया मुझे सीढ़ियो पे दिखी

मैं जल्दी से छत के साइड में आ गया

वँया दौड़ते हुए मेरे पास आई और मुझे थप्पड़ मारने लगी मैं थप्पड़ ख़ाता गया

1 नही 2 नही कम से 15 थप्पड़ मारने के बाद वँया मेरे गले लग्के रोने लगी

मैने वँया को रोने दिया

थोड़ी देर बाद मैने वँया को अलग किया

अब भी नाराज़ हो तो और मार लो

मैं वँया के आँसू पोछते हुए कहा

वँया मेरे गालो को सहलाने लगी

वँया- बहुत दर्द हो रहा है

दिलीप- नही पर तुम मुझसे बात क्यूँ नही कर रही थी

वँया- तुम नही समझोगे

दिलीप- बताओगी तो समझूंगा ना

वँया- बोला ना तुम नही समझोगे

दिलीप- अच्छा बाबा नही पूछता हूँ लेकिन तुम आज स्कूल क्यूँ नही आई

वँया- आई थी मैं स्कूल

दिलीप- लेकिन मुझे क्यूँ नही दिखी

वँया- तुम भूल गये क्या 10थ के लिए 2 क्लासरूम है

एक में सिर्फ़ गर्ल्स पढ़ती हैं और एक में बाय्स आंड गर्ल्स दोनो

दिलीप- समझ गया अच्छा सुनो एग्ज़ॅम्स अगले महीने से है तो क्यूँ ना हम एक साथ पढ़ाई करे इससे हमने जो पढ़ाई नही की है उसकी भरपाई हो जाएगी

वँया- ठीक है

दिलीप- फिर हम दोनो नीचे गये

मैं बड़ी नानी को कहा कि मैं शहेर जाके आता हूँ

बड़ी नानी नही मानी

किसी तरह मैने बड़ी नानी को मनाया

मैने अपनी बाइक को चला दिया

कुछ देर बाद मैं शहेर पहुँचा

सबसे पहले मैं दवाई की दुकान पे गया

एक दुकान से कॉंडम खरीदा

दूसरी दुकान से पेनकिलर और ट्यूब

और तीसरी दुकान से प्रेग्नेन्सी रोकने की दवाई

यह सब लेके मैने जलेबी पॅक करवा ली

और चल दिया घर.,..,.'...
 
अपडेट 67

3 घंटे बाद मैं पहुँचा घर

बाइक से उतरा और बिना रुके अपने रूम की तरफ भागा

शूकर है हॉल में कोई नही था

मैं अपने रूम में पहुँचके जल्दी से सब चीज़ छुपा दिया

और जलेबी लेके नीचे गया

मैने विद्या दी को आवाज़ दी

[जब से सी मामा आए हैं घर में कोई नौकर ही नही है नौकरानी घर की सॉफ सफाई करती है

कपड़े धोती हैं दो काम के बाद इनके पास एक ही काम होता अपने क्वॉर्टर में अपने पति के साथ]

विद्या दी दौड़ते हुए आई

मैने विदयादि को जलेबी दिया

सबको बुला लीजिए

तभी बड़ी नानी अपने रूम से बाहर निकलके मेरे पास आई

बड़ी नानी- आगया मेरा बेटा

दिलीप- हाँ मेरी बड़ी नानी

बड़ी नानी ने मेरे सर पे चपत लगा दी

विद्या दी जलेबी प्लेट में रखके ले आई

इस बार हम सब ने मिलके जलेबी खाया

आज दोनो मामी भी हमारे साथ बैठ गयी जलेबी खाने

जलेबी ख़ाके हम सब अपने अपने रूम में आ गये

थोड़ी देर बाद वँया मेरे रूम में आई

वँया तुम यहाँ

वँया- खुद ही भूल गये की हमे पढ़ाई करनी है

दिलीप- मेरे पास नोट्स नही है

वँया- मेरे पास सब है

दिलीप- तुम्हारे पास पर कैसे

वँया- मैं तो 1 ही हफ़्ता नही गयी थी स्कूल अब चुप करके पढ़ाई करो

2 घंटे तक हम दोनो ने पढ़ाई की फिर हम सब ने रात का खाना खाया

खाना खाते वक़्त छोटी मामी मुझे घूर रही थी

मैं खाना ख़ाके उपर आ गया

सबसे पहले मैं बाथरूम में गया

अच्छे से मैने खुद को सॉफ किया

अभी 10 पीम हुआ था

अवन्तिका दी 12 पीयेम आने वाली थी

मैं 2 घंटे तक बोर होता रहा

यह क्या 12:15 हो गया

अवन्तिका दी अभी तक नही आई

मैं मास्टर की जेब में रक्खा और पहुँचा अवन्तिका दी के रूम पे

मैने गेट नॉक किया

दी ने गेट ही नही खोला

मैं मास्टर की से गेट खोला तो क्या देखा

अवन्तिका दी घोड़े बेचके सो रही थी

मैं दी के पास गया

मुझे तो कुछ समझ ही नही आरहा था

मैं दी के चेहरे को ध्यान से देखा

दी अपनी मुस्कुराहट रोकने की कोशिश कर रही थी

मैं भी मुस्कुरा दिया

मैं अपना एक हाथ दी की पीठ पे ले गया

दूसरा हाथ दी के पैर पे ले गया

और धीरे से दी को अपनी गोद में उठा लिया

मैं दी को अपनी गोद में उठाए अपने रूम में पहुँचा

मैं दी को धीरे से अपने बेड पे लिटा दिया

फिर मैं दी के रूम पहुँचा

दी के लिए एक शलवार कमीज़ ब्रा और पैंटी एक थैले में रख लिया

दी के रूम की लाइट ऑफ किया

फिर मास्टर की से रूम लॉक किया

और अपने रूम में पहुँचा

गेट लॉक किया

दी अभी भी सोने का नाटक कर रही थी

मैं दी के पास गया

और अपने हाथ से के दी के गालो को सहलाने लगा

दिलीप- दी अपनी आँखें खोलो ना दी प्लीज़

मैं नीचे झुका और अपने होंठो से दी की दोनो आँखो को चूम लिया

दी अपनी आँखें खोलके मुझे देखने लगी

दिलीप- आप आई क्यूँ नही

दी ने कुछ नही कहा

मैं बेड पे बैठ गया

बोलिए

अवन्तिका- मैं तेरे पास आके यह कहती कि आ बाबू अपनी दी को प्यार कर

दिलीप- हाँ तो इसमें ग़लत क्या है

अवन्तिका- बाबू रहने दे तू नही समझेगा

दिलीप- अब तो मैं समझ के रहूँगा

अवन्तिका- अच्छा सुन

यह हाथ में 5 उंगली है यह सब बराबर क्यूँ नही

दिलीप- मुझे क्या पता

अवन्तिका- लड़की भी उंगली जैसी ही होती हैं

कोई लड़की पूरी शर्मीली होती है

तो कोई पूरी बोल्ड

कोई लड़की थोड़ी शर्मीली

तो कोई थोड़ी बोल्ड

और एक लड़की ऐसी होती है

जो थोड़ी बोल्ड होती है और थोड़ी शर्मीली

दिलीप- मतलब आप पाँचवी टाइप की लड़की हो

अवन्तिका- सिर्फ़ तेरे साथ.'.'.
 
अपडेट 67ए

दिलीप- दी ने इतना ही कहा था कि

मैने दी को खींचके अपनी गोद में बिठा लिया

दी ने शर्माके अपनी नज़र नीचे कर ली

मैं दी को अपनी बाहो में भींच लिया

दी की आह निकल गयी

दी के दूध मेरी सीने में दब गये

थोड़ी देर तक मैं दी को महसूस करता रहा

फिर मैं दी को अलग किया और अपने होंठ दी के गालो पे रखके चूमने लगा

दी मेरे सर में उंगली फिराने लगे

अब मैं दी के पूरे चेहरे को चूमने लगा

आज दी को चूमने में इतना मज़ा आ रहा है

तो आगे कितना मज़ा आएगा

अब मैने दी के होंठो पे अपने होंठ रख दिए

मैं कुछ नही कर रहा था

थोड़ी देर बाद दी मेरे उपरी होंठ को चूसने लगी

मैं भी दी की नीचली होंठ को चूसने लगा

मुझे कोई जल्दी नही थी

मैं दी के होंठो को आराम से चूस रहा था

अब दी मेरे निचले होंठ को चूसने लगी

मैं अपना मुँह पूरा खोल दिया

दी समझ गयी

दी ने बड़े प्यार से अपनी ज़ुबान को मेरे मुँह में डाल दिया

मैं भी दी की ज़ुबान को बड़े प्यार से चूसने लगा

दी अभी भी मेरे गोद में बैठी हुई थी

दी की ज़ुबान चूस्ते हुए मैं दी के दूध पे हाथ रखके सहलाने लगा

मुझे लगा कि अब मुझसे बरदाश्त नही होगा

मैने तुरंत किस तोड़ दिया

हम दोनो लंबी लंबी साँसे लेने लगे

मैं अपने होंठ दी की गर्दन पे रखके चूमने लगा

मैं दी की पूरी गर्दन को चूमने लगा

दी अपना सर इधर उधर करने लगी

फिर मैं दी कान के नीचे वाले हिस्से को अपनी ज़ुबान से सहलाने लगा

दी जल बिन मछ्ली की तरह मचलने लगी

थोड़ी देर बाद मैं अपनी ज़ुबान हटा लिया

और दी को देखने लगा

दी भी मुझे देखके शर्मा रही थी

मैं दी की कमीज़ को नीचे से पकड़ा और उपर उठाने लगा

दी ने मेरा साथ देते हुए अपने दोनो हाथ उपर की तरफ ले गयी

और मैं दी की कमीज़ निकाल दिया

अब दी मेरे सामने उपर से सिर्फ़ ब्रा में थी

मैं दी के दूध की गोलाई नापने लगा

अवन्तिका- बाबू ऐसे मत देख मुझे शरम आरहि है

दिलीप- मैं दी के ब्रा पे ही अपना मुँह लगाके चूसने लगा

दी आहे भरने लगी

फिर मैने अपना हाथ दी की पीठ पे ले जाके ब्रा की स्ट्रीप खोल दिया

मैने दी की ब्रा को निकाल दिया

अब मैने दी को लेटा दिया

और अपने दोनो हाथ

दी के दूध पे रखके दबाने लगा

एक दूध दबाते हुए दूसरे दूध को चूसने लगा

मुझे पता था दी खुलके प्यार करना चाहती हैं

फिर भी शर्मा रही हैं

कि मैं उनके बारे में क्या सोचूँगा

मैने अपना मुँह दी के दूध पे से हटा लिया

और बेड के साइड में बैठ गया

दी अभी भी लेटी हुई थी

अवन्तिका- क्या हुआ बाबू

दिलीप- आप मुझसे प्यार नही करती हैं

अवन्तिका- ऐसा क्यूँ कह रहा है

दिलीप- मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं ही आपको प्यार कर रहा हूँ

अवन्तिका- तू कहना क्या चाहता है

दिलीप- मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप मेरे साथ खुलके प्यार कीजिए

हम दोनो बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड हैं

तो हमारे बीच शरम कैसी

हम दोनो प्यार कर रहे हैं

कोई गुनाह थोड़ी कर रहे हैं

मैं इतना ही कहा था कि दी ने मेरे सर को पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठ पे रखके पूरे जोश के साथ किस करने लगी

मैं भी पूरे जोश के साथ किस करने लगा

मैं दी को फिरसे लेटा दिया

दी के निपल को अपने मुँह में लेके चूसने लगा

और दूसरे को अंगूठे में पकड़के खींचने लगा

फिर मैं दूसरे निपल को भी वैसे ही चूसने लगा

अवन्तिका- बाबू और ज़ोर से चूस अपनी दी के दूध को

हाँ हाँ हाँ ऐसे ही

मैंदी के निपल को अपने मुँह में लेके चूसने लगा

और दूसरे को अंगूठे में पकड़के खींचने लगा

फिर मैं दूसरे निपल को भी वैसे ही चूसने लगा

अवन्तिका- बाबू और ज़ोर से चूस अपनी दी के दूध को

हाँ हाँ हाँ ऐसे ही

आह आह

दिलीप- यह सुनके मैं पूरे जोश के साथ दी के निपल चूसने लगा

अब मैं दी के दूधसे नीचे आया और दी की नाभि में अपनी ज़ुबान डालके घूमने लगा...'.
 
अपडेट 67ब

दी मचलने लगी

थोड़ी देर तक मैं दी की नाभि को चूस्ता रहा

अब मेरे लंड में दर्द होने लगा था

मैं खड़ा हुआ और अपनी पॅंट उतार दिया

अंडरवेर तो मैने पहना नही था

वो तो अच्छा हुआ दी ने अपनी आँखें बंद की हुई थी वरना..............

मैं आगे बढ़ा और दी की शलवार के नाडे को अपने दांतो में लेके तान दिया

मैने दी की शलवार को उतारने की कोशिश की

दी ने अपनी कमर उठाके मेरा साथ दिया

अब दी सिर्फ़ पैंटी में थी

मैने दी की दोनो टाँगो को अलग किया

और दी की पैंटी के उपर से ही किस करने लगा

दी मेरे सर को अपनी चूत पे दबाने लगी

मैं दी की पैंटी भी उतार दिया

दी की गुलाबी चूत देखके मैं पागल हो गया

दी की चूत से रस टपका रही थी

मैं जैसे ही दी की चूत पे अपना मुँह लगाया दी की चूत ने पानी छोड़ दिया

सारा पानी मेरे मुँह में चला गया

फिर भी मैं दी की चूत पे किस करके चूसने लगा

मैं दी की चूत को चूस्ते हुए अपनी एक उंगली दी की चूत में डालने की कोशिश किया दी की चीख निकल गयी

मैं समझ गया बहुत मेहनत करनी पड़ेगी

लेकिन यह हरम्खोर लंड माने तब ना

उस वक़्त से दर्द किए जा रहा है

मैं उठा एक कटोरी में तेल डाला और टेबल पे रख दिया

दी को भी उसी तरफ किया

मैने अपने हाथ को तेल में भीगाया और दी की चूत पे रखके सहलाने लगा

थोड़ी देर तक सहलाने के बाद मुझे लगा की अब दी मदहोश हो गयी हैं

मैं धीरे से अपनी एक उंगली को दी की चूत में पूरा डाल दिया

दी कुछ समझ पाती उससे पहले ही मैं अपनी उंगली दी की चूत में तेज़ी से आगे पीछे करने लगा

दी को भी अब मज़ा आने लगा था

अब मैने दो उंगली तेल में भीगाई और दी की चूत में डालके आगे पीछे करने लगा

अवन्तिका- बाबू और ज़ोर्से डाल अपनी दी की चूत में

जब मुझे लगा कि दी का पानी निकलने वाला है

मैने अपनी उंगली निकाल ली

दी मुझे आस भरी नज़रो से देखने लगी

मैने दी को आँख बंद करने का इशारा किया

दी ने फिरसे अपनी आँखें बंद कर ली

मैने अपने लंड पे खूब सारा तेल लगाया

बाकी बचा तेल मैने दी की चूत पे डाल दिया

मैने दी के होंठो पे अपने होंठ रख दिए

दी समझ गयी अब वक़्त आगया है

मैं अपने हाथ से अपने लंड को दी की चूत पे सेट करके रगड़ने लगा

दी अपनी आँखें खोलके और मुझे देखने लगी

जैसे कह रहीं हो क्यूँ तडपा रहा है अपनी दी को

मैने अपनी कमर पीछे करके हल्का सा धक्का मारा

दी की चीख मेरे मुँह में ही दब गयी

मेरे लंड का सुपाडा अंदर चला गया

दी मेरे होंठो को काटने लगी

मैने अपने होंठ अलग किए

अवन्तिका- बाबू प्लीज़ निकाल ले बहुत दर्द हो रहा है आह आह बाबू प्लीज़

दी दर्द से रोने लगी

मैने अपनी कमर पीछे करके एक और धक्का मार दिया

अवन्तिका- आआआः बाआआअबुउुउउ निकााअल ल्लीी

दी और ज़ोर से रोने लगी

मेरा 3 इंच लंड अंदर चला गया

दी का दर्द कम करने के लिए

मैं दी के दूध को चूसने लगा

थोड़ी देर बाद दी शांत हुई

मैं अपने होंठ फिर दी के होंठो पे रकखे

अपने लंड को थोड़ा पीछे करके धक्का मार दिया

इस बार मेरा लंड किसी चीज़ से टकराया

मुझे अपने लंड पे कुछ गरम महसूस हुआ

मैं समझ गया दी कि चूत से खून निकल रहा है

मेरा 6 इंच लंड अंदर जा चुका था

दी शांत ही नही हो रही थी

मैं दी के दूध चूस्ते हुए

दी की चूत को सहलाने लगा

थोड़ी देर बाद मैने अपने लंड को पीछे खींचने की कोशिश की

लंड हिल भी नही रहा था

मैने अपनी पूरी ताक़त लगाके आखरी धक्का मारा

मेरा लंड दी की चूत चीरते हुए अंदर चला गया

दी अपने हाथो से चादर पकड़े हुए थी

मैं अपने लंड को धीरे से आगे पीछे करने लगा

मैने दी के होंठो से अपने होंठ हटा दिए

अवन्तिका- बाबू बहुत दर्द हो रहा है

दिलीप- दी बस कुछ देर और

अब मैं थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाने लगा

अवन्तिका- बाबू धीरे आह

मैने अपना लंड दी की चूत के मुँह तक निकाला और पूरा एक बार में डाल दिया

दी की फिर चीख निकल गयी

मैं अब अपनी गति तेज़ कर दिया

दी अया किए जा रही थी

मैं अपना लंड दी की चूत में पूरे ताक़त से पेले जा रहा था

दी अपनी गांद गोल घुमाने लगी

मैं समझ गया

मैं अपना लंड आधा बाहर निकाला

और पूरी ताक़त से दी की चूत में पेलने लगा

5 मिनट बाद दी ने पानी छोड़ दिया

अब मेरा लंड आराम से दी की चूत में जा रहा था

मैं दी के दूध चूस्ते हुए ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा

दी ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया

मैं अपना लंड बाहर निकालके फिर एक बार में डाल दिया

अब मैं दी के दूध को दोनो हाथ से दबाने लगा

और नॉर्मल धक्के मारने लगा

अब मेरे पैर में दर्द होने लगा था

मैं दी को पोज़िशन चेंज के करने का बोल भी नही सकता था

मैने दी को अपनी गोद में उठा लिया

और बेड पे लेट गया

मेरा लंड अभी भी दी की चूत में था

अब मैं नीचे था और दी मेरे उपर

मैं दी को नीचे से चोदने लगा

अब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ

अवन्तिका- बाबू मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- मैं भी ,,,,,,,,मैं अपनी पूरी ताक़त से दी को चोदने लगा

थोड़ी देर बाद दी झड़ने लगी

मैं भी दी की चूत में ही पानी छोड़ दिया

हम दोनो हाँफने लगे..,.
 
अपडेट 68

दिलीप- 10 मिनट तक मैं ऐसे ही लेटा रहा

मैं टाइम देखा तो हमारी चुदाई 30 मिनट तक चली

अब मेरा लंड मुरझा गया था

लेकिन दी की चूत में ही था

मैं धीरे से अपना लंड दी की चूत से निकाल लिया

जब मेरी नज़र बेड पे पड़ी

तो पूरा बेड पे खून फैला हुआ था

जो दी की वर्जिन चूत से निकला था

दिलीप- अवनी

अवन्तिका- यह तू किसे अवनी कह रहा है

दिलीप- आज से मैं आपको अकेले में अवनी कहूँगा

अवन्तिका- ठीक है बाबू

दिलीप- मैं अवनी को अपनी गोद में उठा लिया

और बाथरूम ले गया

अवनी को अपने गोद में ही उठाए शवर ऑन कर दिया

पानी तो पहले ही गरम हो चुका था

फिर खुदको और अवनी को अच्छे से सॉफ किया

अवनी की चूत डबल रोटी जैसी फूल गयी थी

दिलीप- आप गरम पानी से अच्छे से सिकाई कर्लो

तब तक मैं रूम में हूँ

मैं रूम में आया बेडशीट चेंज किया

सब समान सेट किया

फिर मैं अवनी को उठाके बेड पे लेटा दिया

मैं अभी तक नंगा ही था

ड्रॉयर में से पेनकिलर प्रेग्नेसी वाली गोली और ट्यूब तीनो लेके बेड पे बैठ गया

पहले मैने अवनी को दोनो टॅबलेट खिलाया

फिर ट्यूब में से थोड़ा सा क्रीम अपने हाथ में लिया

और अवनी की चूत पे जैसे ही लगाया अवनी की आह निकल गयी

अवन्तिका- बहुत दर्द हो रहा है बाबू

तभी अवनी मेरे लंड को देखने लगी

दिलीप- क्या हुआ

अवन्तिका- यह क्या है

[जब भी यह सुनता हूँ खून खौल जाता है]

दिलीप- आपके बाबू का लंड है

अवन्तिका- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे गया होगा

दिलीप- आपको कैसे पता यह इतना बड़ा होता है

अवन्तिका- ब्लू फिल्म

दिलीप- अच्छा तो मेरी अवनी ने यह शौक भी पाला हुआ है

अब मैं आपको कह देता हूँ आप मेरे सामने कभी नही शरमाओगी

अवन्तिका- ठीक है बाबू

दिलीप- फिर मैने अवनी की चूत पे अच्छे से क्रीम लगाया

अवन्तिका- तूने यह क्यूँ लगाया

दिलीप- इससे आपको चलने में तकलीफ़ नही होगी

फिर मैने थैले में से शलवार कमीज़ निकाला

पहले ब्रा पहनाया फिर शलवार और फिर कमीज़

मैं गेट खोलके अवनी के रूम मे गया

गेट खोला

फिर अवनी को गोद में उठाके उसके रूम में ले गया

और बेड पे लेटा दिया

एक लंबी किस फिर मैं अपने रूम में आया

मैं खुदको देखा तो मैं अभी नंगा था

निक्कर और बनियान पहना 6आम का अलार्म लगाके सो गया

ठीक 6 आम अलार्म बजने लगा

नींद तो खुली नही

तभी मेरे कान में बड़े मामा की आवाज़ आई

कल से लखन के साथ अखाड़े जाना है

एक झटके में उठा 15 मिनट में तय्यार होके

कॉंडम अपनी जेब में रखके नीचे हॉल में गया

दोनो मामा डाइनिंग टेबल पे बैठे थे

मैने नाश्ता किया

बड़ी मामा- लखन तुम्हारा बाहर में इंतेज़ार कर रहा है

तुम्हार बॅग वँया स्कूल लेके जाएगी

दिलीप- मैं बाहर गया तो लखन मुझे अपने साथ अखाड़े में ले गया

उसके बाद जो लखन ने मुझे कोल्हू का बैल समझके कसरत करवाया हाई

बदन की पूरी हड्डी टूट गयी

फिर यह फ़िल्मो में जो लस्सी का गिलास होता है

उसने मुझे दिया

उस ग्लास में पता नही क्या था

जैसे ही मैने एक घूँट पिया इतनी ज़ोर से उल्टी आई

मन किया गिलास लखन के मुँह पे मार दूं

पर था तो 7 फीट का पहेलवान

कहीं मेरी ही मार लेता तो

जैसे तैसे गिलास खाली किया

फिर गिडते पड़ते स्कूल पहुँचा

क्लास में पहुँचा

और बेंच पे जाके बैठ गया

रवि- क्या हुआ बहुत थका थका सा लग रहा है

दिलीप- कुछ नही कसरत करके आरहा हूँ

मैं वहाँ से वँया के क्लास गया

सब लड़किया मुझे घूर्ने लगी

मैं वँया के पास गया

और अपना बॅग लेके अपने क्लास में आगया,.,'..,,.
 
अपडेट 69

दिलीप- टीचर आते गये पढ़ाते गये

लंच टाइम में दीपा मेरे पास आई

दीपा- कैसे हो दिलीप

दिलीप- ठीक हूँ

दीपा- यह लो

दीपा ने मुझे नोट्स देते हुए कहा

मैने भी चुप करके नोट्स अपने बॅग में रख लिए

फिर दीपा अपने बेंच पे जाके बैठ गयी

रवि- भाई संभलके मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है यह

दिलीप- तू उसके पीछे क्यूँ पड़ा है

रवि- अरे इसकी वजह से कई लड़के स्कूल छोड़ चुके हैं

दिलीप- मैं भी यही पढ़ता हूँ मुझे पता नही चला

रवि- पहले तुम स्कूल आते थे तो किताब में घुसे रहते थे

दिलीप- सच बोल रहा है

रवि- अपनी गर्लफ्रेंड की कसम

दिलीप- कौन है वो बेचारी

रवि- होने वाली गर्लफ्रेंड की कसम

यह सुनके मेरी हँसी छूट गयी

इसका मतलब दीपा मेरे साथ गेम खेलना चाहती है

चलो खेलते हैं गेम

हम भी तो देखे कि यह दीपा है क्या चीज़

तभी मुझे प्रेशर आया

मैं बाथरूम की तरफ चल दिया

जब मैं बाथरूम पहुँचा तो मुझे कुछ आवाज़े आने लगी

[आप को बता दूं कि स्कूल में गर्ल्स और बाय्स के लिए एक ही बाथरूम है जब किसी को बाथरूम जाना होता है तो गेट के बाहर एक बोर्ड लगा है जिसमें एक तरफ गर्ल्स और दूसरी तरफ बाय्स लिखा है जो बाथरूम जाता वो अपने हिसाब से बोर्ड पलट देता है]

अब गेट तो बंद था और नही कोई अंदर था

मुझे पक्का यकीन था

कि अंदर चुदाई हो रही है

तभी मैने अपना मोबाइल निकालके साइलेंट पे किया

और वीडियो रेकॉर्डिंग ऑन करके मोबाइल उपर किया

उपर में थोड़ी सी जगह खुली थी

लगा मैं रेकॉर्डिंग करने

जब आवाज़ आनी बंद हो गयी

तो मैं छुप गया

तभी एक लड़का और एक लड़की बाहर निकले

लड़के को मैं पहचान गया

पर लड़की ने मुँह पे दुपट्टा लगाया हुआ था

फिर मैं बाथरूम गया और जल्दी से हल्का होके

अपनी क्लास में पहुँचा

अब घर से खाने को तो कुछ लाया नही था

ऐसे ही बैठा हुआ था कि वँया क्लास में आ गई

वँया को देखके रवि पीछे वाली बेंच पे बैठ गया

फिर मैने और वँया ने एक साथ खाना खाया

वँया अपने क्लास चली गयी

फिर स्कूल की छुट्टी हुई

और मैं और वँया घर पहुँचे

[मैने ध्यान दिया कि वँया मुझसे बेमतलब बात नही करती जब कोई काम हो तभी बात करती है]

पूरी टोली हॉल में ही बैठके बात कर रही थी

अवनी भी बैठी थी

अवनी को देखके लग रहा था कि वो ठीक है

मैं अवनी से सटके बैठ गया

वैसे तो इतनी लड़कियो के बीच कोई भी लड़का इनकी बात सुनके पक जाएगा

पर मेरा इरादा कुछ और ही था

[मेरी किस्मत अच्छी थी कि जहाँ पे मैं बैठा वहाँ पर किसी की नज़र भी नही पड़ सकती थी]

मैने धीरे से अपना एक हाथ अवनी की कमीज़ के

अंदर घुसा के कमर पे रख दिया

अवनी हड़बड़ा गयी

अरुणा- क्या हुआ

अवन्तिका- कुछ नही दी

फिर सब बाते करने लगी

अवनी पीछे मूड कर मुझे आँख दिखाने लगी

मैं अवनी की चिमटी काट लिया

अवनी दूसरी तरफ देखने लगी

मैं अवनी की कमर सहलाने लगा

अवनी को गुद गुदि हो रही थी

थोड़ी देर तक मैं अवनी की पीठ सहलाता रहा

फिर मैं अवनी को अपने साथ आने का इशारा किया

अवनी मुझे आँख दिखाने लगी

मैं ऐसे दिखाया कि मैं गुस्सा हूँ

मैं वहाँ से उठके अपने रूम में आ गया

मैने गेट थोड़ा खुला रहने दिया

ताकि जब अवनी आए तो मैं कदमो की आवाज़ सुन सकूँ

तभी मुझे किसिके आने की आहट हुई

जैसे ही वो अंदर आई

मैने उसे अपनी बाहो में खींच लिया

[कौन है यह अगर यह अवनी नही हुई तो दिलीप का क्या होगा

और अगर दिलीप ने कुछ ऐसा वैसा कर दिया तो].,.,.,..,.?.
 
अपडेट 70

दिलीप- मैं उसे अपनी बाहो में खींच लिया

और उसके होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा

तभी एक थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ा

मैं होश में आया

मेरे सामने अरुणा दी खड़ी थी

मन किया कि अपना सर दीवार में दे मारु

वो इतने ही पे नही रुकी..

मुझे थप्पड़ मारती गयी

मैं थप्पड़ खाता रहा

जैसे ही अरुणा दी ने मुझे अगला थप्पड़ मारा उनका हाथ मेरी आँखो को छु कर निकल गया

सच में बहुत दर्द होने लगा

मैं अरुणा दी को गेट पर से हाथ पकड़के खींचा

और जल्दी से गेट बंद किया

गेट बंद करते ही मेरी चीख निकल गयी

मेरी आँख खुल ही नही रही थी

लगातार मेरी आँख से पानी बह रहा था

तभी अरुणा दी दौड़के मेरे पास आई

और अपने दुपट्टे में फूँक मारके मेरी आँख पे लगाने लगी

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मेरी आँख खुली

मैं देखा कि अरुणा दी रो रही थी

मैने अरुणा दी को गले लगा लिया

दिलीप- आप क्यूँ रो रही हैं ग़लती तो मेरी थी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था

आप मुझे कभी माफ़ मत करना मैने ग़लती ही ऐसी की है आप चाहो तो और मार लो

अरुणा- हाँ हाँ मैं तुझे कभी माफ़ नही करूँगी

अरुणा दी गेट खोलके बाहर चली गयी

मैं अपने कपड़े बदला

और नीचे हॉल में गया बड़ी नानी के पास

बड़ी नानी- दिलीप यह क्या हुआ तेरी आँख को

दिलीप- कुछ नही मुँह पे पानी मार रहा था तो हाथ लग गया मैं विनय के घर जा रहा हूँ बहुत दिन हो गये उससे मिला नही

बड़ी नानी- शाम तक आ जाना

फिर मैं पैदल ही चल दिया गाओं की ओर

थोड़ी देर बाद पहुँचा विनय के घर

मैने बाहर से आवाज़ दिया

कोई बाहर नही आया

मैं अंदर गया आँगन में कोई नही था

फिर मैं किचेन में गया वहाँ भी कोई नही था

बेडरूम और बाथरूम में मैं जा नही सकता था

सोचा बिम्ला के यहाँ जाता हूँ

मैने बिम्ला के घर का गेट नॉक किया

बिम्ला ने गेट खोला

मैं अंदर गया

दिलीप- कैसी हो काकी

बिम्ला- कैसी रहूंगी आप बताइए आप कैसे हैं

और यह आप की आँख को क्या हुआ

दिलीप- कुछ नही एक कप चाइ पिला दो

बिंला- आप मेरे घर की चाइ पिएँगे

दिलीप- नही पिलाना है तो सॉफ मना करदो

बिम्ला- मैं तो कब से तय्यार पिलाने को आप ही नही पीते हैं

दिलीप- पिलाओगी तब तो पियुंगा

बिम्ला- अभी बनाके लाती हूँ

बिम्ला किचन की तरफ जाने लगी

मैं उसकी गान्ड को घूर्ने लगा

वैसे मेरी नज़र ऐसी नही है

पर मेरे लंड को कौन समझाए

मैं अगर बिम्ला को कहूँ कि मुझे तुम्हे चोदना है तो वो मना नही करेगी

क्यूंकी उसके चूत में आग लगी हुई

पर मैं कोई सेक्स का भूखा भेड़िया तो हूँ नही

ऐसी आग लगाउन्गा कि खुद मुझसे आके कहेगी

बिम्ला- [ज़ोर्से] छोटे मालिक

दिलीप- मैं किचन में गया

बिम्ला- वो चीनी का डब्बा उपर है आप उतार देंगे

दिलीप- [जहाँ पे बिम्ला खड़ी थी ठीक वही उपर में डब्बा रखा हुआ था]

मैं बिम्ला के पीछे खड़ा हो गया

और डब्बा उतारने लगा

मैं थोड़ा और आगे बढ़ा

जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड को टच हो गया

बिम्ला- आह

दिलीप- क्या हुआ

बिम्ला- कक्कुच्छ नही

दिलीप- कितना उपर रखा है यह कहते हुए मैं बिम्ला से पूरा सटके खड़ा हो गया अब मेरा लंड पूरी तरह बिम्ला की गान्ड पे घिस रहा था मैं अपने जिस्म को इधर उधर करने लगा जिससे मेरा लंड बिम्ला की गान्ड पे आगे पीछे होने लगा

दिलीप- बिम्ला आप थोड़ा सा झुको मेरा हाथ नही पहुँच रहा है

बिम्ला बिना देरी किए झुक गयी

मैं डब्बा उतारते हुए बिम्ला की गान्ड पे धक्के लगाने लगा

दिलीप- आप थोड़ा और झुको

अब बिम्ला पूरी झुक चुकी थी

मेरे हाथ में डब्बा आ गया

मैने डब्बा को आगे धकेल दिया

अब मैने अपने धक्के लगाने की गति को तेज़ कर दिया

बिम्ला- अयाया ऊवू आआआः

दिलीप- क्या काकी आपने डब्बा कितना उपर रक्खा है

यह कहके मैने थोड़ा ज़ोर से धक्का मार दिया

बिम्ला- म्मैइन क्या क्क्हु अया

दिलीप- 10 मिनट तक मैं अपना लंड बिम्ला की गान्ड पे घिसता रहा

बिंला- अयाया ऊवू उम्म्म्मम

दिलीप- मैं समझ गया कि काकी झड गयी हैं

मैने डब्बा उतार दिया

और किचन से बाहर आ गया

थोड़ी देर बाद बिम्ला चाइ बनाके ले आई मैने चाइ पिया और बिम्ला के घर से बाहर आ गया

फिर चल दिया अपने घर.,.
 
अपडेट 70

घर.............

वँया विद्या के रूम पे जाके गेट नॉक करती है

विद्या गेट खोलती है

विद्या- वानु अंदर आना

वँया अंदर गयी और बेड पे बैठ गयी

वँया- दी आपसे एक बात पुच्छू आप बुरा मत मानना

विद्या- पूछ मैं अपनी वानु की बात का बुरा क्यूँ मानूँगी

वँया- आप सब पहले दिलीप से इतनी नफ़रत करती थी पर आज आप सब उसको इतना प्यार करती हैं ऐसा क्यूँ

विद्या- हम ने दिलीप से कभी भी नफ़रत नही की किसी से बात ना करने का यह मतलब थोड़ी होता है कि हम उससे नफ़रत करते हैं

वँया- लेकिन फिर भी

विद्या- मेरी बात ध्यान से सुन मुझे नही पता कि पिताजी और चाची जी दिलीप से क्यूँ नफ़रत करते हैं हम ने बचपन से ही इनकी नफ़रत देखी है दिलीप के लिए बचपन से हम जो अपने माता पिता को करते हुए देखते हैं वोही हमे सही लगता है उपर से चाची जी कहती थी कि उसी की वजह से बड़ी दादी ने हमे छोड़ दिया तो हमारे दिल में भी दिलीप के नाराज़गी पैदा हो गयी लेकिन नफ़रत कभी नही पर दिल के एक कोने से हमेशा यहाँ आवाज़ आती कि वो हमारा भाई है वो भी एक लौता हम उससे नाराज़ क्यूँ हैं उसने हमारे साथ क्या बुरा किया है

जब दिलीप पहली बार चाचा जी के यहाँ आया तो उसकी गोद में एक बेहोश लड़की थी उसके लिए हम सबने उसको कितना सुनाया पर जब वो लड़की हमारी मेघा निकली तो हम अपनी ही नज़रो में गिर गये फिर हम सबके दिल में दिलीप के लिए जितनी भी नाराज़गी थी वो कम हो गयी फिर हम सब ने दिलीप से माफी माँगने की कितनी कोशिश की और माफी इस वजह से नही माँग रहे थे कि दिलीप ने मेघा की जान बचाई है

हम दिलीप से माफी माँगना चाहते थे कि हम ने आजतक उसको कितना दुख दिया उसके बाद तूने हमे वो रेकॉर्डिंग सुनाई

जिसके बाद हम अपने आप को रोक नही पाए और हम ने दिलीप को दिल से अपना भाई मान लिया और दिलीप को मना भी लिया हमें दिलीप को भाई माने कितना वक़्त हुआ था जब चाचा जी मेघा की तरफ बढ़ रहे थे तब दिलीप कैसे बीच में आ गया चाचा जी से इतनी मार खाई

फिर मेघा के लिए अपनी जान पे खेल गया यहाँ तक कि अपने आपको गोली भी मार ली सिर्फ़ एक दिन में दिलीप ने अपने भाई होने का फ़र्ज़ पूरा कर दिया उसके इतना करने के बाद अगर हम दिलीप को अपनी पूरी जिंदगी दे दें तो भी वो कम ही होगा

वँया- पर अरुणा दी कुछ ज़्यादा ही नही बोल रही थी उस दिन

विद्या- वो इसलिए कि अरुणा सब से ज़्यादा चाची जी से प्यार करती है चाची जी की हर बात उसे सही लगती है तू मुझे एक बात बता तुझे रेकॉर्डिंग का आइडिया कब आया

वँया- वो जब मैं और दिलीप अवन्तिका के लिए गुलदस्ता लाने मार्केट गये थे तब एक दुकान में टीवी पे न्यूज़ वाले दिखा रहे थे कि एक गुनेहगार को वकील ने उकसाया और उसे सच बोलने पे मजबूर किया वो सब बाते वकील ने अपने फोन में रेकॉर्ड करलिया तभी मुझे यह आइडिया आया

फिर जब आप सब बात करने में बिज़ी थे तो मैने चुपके से आपका मोबाइल उठा ली

लेकिन दी आपने यह क्यूँ कहा कि हम सब ,,,,,,,,,आपको कैसे पता की अरुणा दी अवन्तिका मेघा और सुनीता भी ऐसा ही सोचती हैं

विद्या- क्यूंकी हम सब एक दूसरे से अपनी फीलिंग्स शेर करती हैं अगर तुझे मेरी बात पे यकीन ना हो तो अरुणा से अवन्तिका से मेघा और सुनीता किसी से भी जाके पूछ सकती है

वँया- दी आपको पता है मेरा वो मतलब नही था

विद्या- अच्छा वो सब छोड़

चल बाते करते हैं.,.,

[अब इनकी फालतू गॉसिप स्टार्ट]
 
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