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- Dec 5, 2013
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दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर और सीधा विद्या दी के रूम मे गया जैसी ही मैने गेट नॉक किया गेट खुल गया
अंदर विद्या दी और वँया बेड पे बैठके बाते कर रही थी दोनो में से किसी का भी ध्यान मुझपे नही गया
[हे भगवान यह लड़कियो को ज़ुबान दी तो दी पर इतनी लंबी देने की क्या ज़रूरत थी]
मैं खिसक गया वहाँ से और अपने रूम में आके बेड पे लेट गया
तभी मुझे याद आया
मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो प्ले कर दिया
यह क्या यह तो सरपंच की बेटी मुखिया के बेटे से चुदवा रही है साला आजकल क्या हो रहा है बाप तो बाप बेटी उससे भी एक कदम आगे निकली मैने दूसरा मेमोरीकार्ड अपने फोन में डालके कॉपी किया थोड़ी देर बाद नींद आ गई
कोई मुझे हिलाने लगा मैं आँख खोलके देखा .......यह अवनी थी
दिलीप- अवनी
अवन्तिका- हाँ बाबू
दिलीप- अवनी ने इतना ही कहा था मैने अवनी का हाथ पकड़ा और अपने उपर गिरा लिया अपने दोनो पैर अवनी की कमर पे लपेट लिया और अवनी के होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा और एक हाथ अवनी के दूध पे रखके दबाने लगा अवनी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी मैं किस तोड़ दिया
दिलीप- क्या हुआ
अवन्तिका- गेट खुला है
यह सुनके मेरी फट गई मैं जल्दी से उठा और गेट लॉक किया पीछे मुड़ा तो अवनी मुस्कुरा रही थी
मैं अवनी का पास पहुँचा
तभी किसीने डोर नॉक किया
मैं जल्दी से अपना रुमाल निकाला और अवनी के मुँह पे लिपस्टिक फैला हुआ था
उसे सॉफ करके बाथरूम भागा
अवनी ने गेट खोला
वँया- गेट क्यूँ बंद था
अवन्तिका- वो ऐसे ही बाबू ने बोला था
वँया- अच्छा अब तू जा मुझे दिलीप के साथ पढ़ाई करनी है
अवनी चली गयी]
दिलीप- मैं बाहर आया तो वँया बेड पे बैठी थी मैं वँया के पास गया
दिलीप- वँया तुम यहाँ कुछ काम था क्या
वँया- पढ़ाई नही करनी है
दिलीप- आज रहने देते हैं
वँया- चुप चाप बैठके पढ़ाई करो
दिलीप- डाँट क्यूँ रही हो
वँया- तो क्या तुम्हारी आरती उतारू जब देखो तब घूमते रहते हो
[उसके बाद 2 घंटे तक वँया के साथ पढ़ाई किया]
फिर वँया और मैं नीचे गये
डाइनिंग टेबल पे बैठ गये सब खाने में बिज़ी थे मैं अरुणा दी को देख रहा था
अरुणा दी बहुत उदास लग रही थी
मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया और कपड़े बदलके सो गया..
[विद्या रूम]
विद्या- आज अरुणा बहुत उदास दिख रही थी क्या बात होगी अभी उससे जाके पूछती हूँ
विद्या अरुणा के रूम मे पहुँची
विद्या ने गेट नॉक किक्या
अरुणा ने गेट खोला
अरुणा- दी आप आइए ना
विद्या और अरुणा बेड पे जाके बैठ गयी
विद्या- क्या बात है आज तू बहुत उदास लग रही है
अरुणा- नही दी ऐसी कोई बात नही है
विद्या- देख मैं तुझे अच्छि तरह जानती हूँ बता ना क्या बात है
अरुणा- मैने कहा ना ऐसी कोई बात नही है
विद्या- ठीक है अगर तू नही बताना चाहती तो मैं नही पूछूंगी शायद तू मुझे इस लायक नही समझती..
विद्या उठके जाने लगी
अरुणा ने विद्या का हाथ पकड़ते हुए बोली
अरुणा- मैं बताती हूँ.. फिर अरुणा ने सारी बात विद्या को बताई और फुट फुट के रोने लगी
विद्या- [अब मैं क्या करूँ शायद बाबू ने मुझे समझके अरुणा के साथ यह सब कर दिया अगर मैं झूठ भी बोल दूँ कि बाबू को किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है फिर अरुणा को मुझे सब बताना पड़ेगा और कही अरुणा ने मुझे ग़लत समझ लिया तो
भले ही हमारी नज़र में यह प्यार हो पर जिसने किसी से भी प्यार ना किया हो वो कभी हमारे प्यार को नही समझेगा]
एक काम करती हूँ बाबू सब संभाल लेगा] अरुणा मैं तेरी तकलीफ़ समझती हूँ पर तुझे एक बार बाबू से बात करनी चाहिए क्या पता कुछ और बात हो यह मैं तेरी बड़ी बहेन होने के नाते नही बल्कि तेरी बेस्ट फ़्रेंड होने के नाते कह रही हूँ..
विद्या अरुणा के रूम से बाहर चली गयी
और अरुणा सोचने लगी
[अब क्या होगा दिलीप का वो बेचारा तो इश्स सबसे बेख़बर अपने रूम में घोड़े बेचके सो रहा है..,
दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर और सीधा विद्या दी के रूम मे गया जैसी ही मैने गेट नॉक किया गेट खुल गया
अंदर विद्या दी और वँया बेड पे बैठके बाते कर रही थी दोनो में से किसी का भी ध्यान मुझपे नही गया
[हे भगवान यह लड़कियो को ज़ुबान दी तो दी पर इतनी लंबी देने की क्या ज़रूरत थी]
मैं खिसक गया वहाँ से और अपने रूम में आके बेड पे लेट गया
तभी मुझे याद आया
मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो प्ले कर दिया
यह क्या यह तो सरपंच की बेटी मुखिया के बेटे से चुदवा रही है साला आजकल क्या हो रहा है बाप तो बाप बेटी उससे भी एक कदम आगे निकली मैने दूसरा मेमोरीकार्ड अपने फोन में डालके कॉपी किया थोड़ी देर बाद नींद आ गई
कोई मुझे हिलाने लगा मैं आँख खोलके देखा .......यह अवनी थी
दिलीप- अवनी
अवन्तिका- हाँ बाबू
दिलीप- अवनी ने इतना ही कहा था मैने अवनी का हाथ पकड़ा और अपने उपर गिरा लिया अपने दोनो पैर अवनी की कमर पे लपेट लिया और अवनी के होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा और एक हाथ अवनी के दूध पे रखके दबाने लगा अवनी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी मैं किस तोड़ दिया
दिलीप- क्या हुआ
अवन्तिका- गेट खुला है
यह सुनके मेरी फट गई मैं जल्दी से उठा और गेट लॉक किया पीछे मुड़ा तो अवनी मुस्कुरा रही थी
मैं अवनी का पास पहुँचा
तभी किसीने डोर नॉक किया
मैं जल्दी से अपना रुमाल निकाला और अवनी के मुँह पे लिपस्टिक फैला हुआ था
उसे सॉफ करके बाथरूम भागा
अवनी ने गेट खोला
वँया- गेट क्यूँ बंद था
अवन्तिका- वो ऐसे ही बाबू ने बोला था
वँया- अच्छा अब तू जा मुझे दिलीप के साथ पढ़ाई करनी है
अवनी चली गयी]
दिलीप- मैं बाहर आया तो वँया बेड पे बैठी थी मैं वँया के पास गया
दिलीप- वँया तुम यहाँ कुछ काम था क्या
वँया- पढ़ाई नही करनी है
दिलीप- आज रहने देते हैं
वँया- चुप चाप बैठके पढ़ाई करो
दिलीप- डाँट क्यूँ रही हो
वँया- तो क्या तुम्हारी आरती उतारू जब देखो तब घूमते रहते हो
[उसके बाद 2 घंटे तक वँया के साथ पढ़ाई किया]
फिर वँया और मैं नीचे गये
डाइनिंग टेबल पे बैठ गये सब खाने में बिज़ी थे मैं अरुणा दी को देख रहा था
अरुणा दी बहुत उदास लग रही थी
मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया और कपड़े बदलके सो गया..
[विद्या रूम]
विद्या- आज अरुणा बहुत उदास दिख रही थी क्या बात होगी अभी उससे जाके पूछती हूँ
विद्या अरुणा के रूम मे पहुँची
विद्या ने गेट नॉक किक्या
अरुणा ने गेट खोला
अरुणा- दी आप आइए ना
विद्या और अरुणा बेड पे जाके बैठ गयी
विद्या- क्या बात है आज तू बहुत उदास लग रही है
अरुणा- नही दी ऐसी कोई बात नही है
विद्या- देख मैं तुझे अच्छि तरह जानती हूँ बता ना क्या बात है
अरुणा- मैने कहा ना ऐसी कोई बात नही है
विद्या- ठीक है अगर तू नही बताना चाहती तो मैं नही पूछूंगी शायद तू मुझे इस लायक नही समझती..
विद्या उठके जाने लगी
अरुणा ने विद्या का हाथ पकड़ते हुए बोली
अरुणा- मैं बताती हूँ.. फिर अरुणा ने सारी बात विद्या को बताई और फुट फुट के रोने लगी
विद्या- [अब मैं क्या करूँ शायद बाबू ने मुझे समझके अरुणा के साथ यह सब कर दिया अगर मैं झूठ भी बोल दूँ कि बाबू को किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है फिर अरुणा को मुझे सब बताना पड़ेगा और कही अरुणा ने मुझे ग़लत समझ लिया तो
भले ही हमारी नज़र में यह प्यार हो पर जिसने किसी से भी प्यार ना किया हो वो कभी हमारे प्यार को नही समझेगा]
एक काम करती हूँ बाबू सब संभाल लेगा] अरुणा मैं तेरी तकलीफ़ समझती हूँ पर तुझे एक बार बाबू से बात करनी चाहिए क्या पता कुछ और बात हो यह मैं तेरी बड़ी बहेन होने के नाते नही बल्कि तेरी बेस्ट फ़्रेंड होने के नाते कह रही हूँ..
विद्या अरुणा के रूम से बाहर चली गयी
और अरुणा सोचने लगी
[अब क्या होगा दिलीप का वो बेचारा तो इश्स सबसे बेख़बर अपने रूम में घोड़े बेचके सो रहा है..,