Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 9 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 71

दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर और सीधा विद्या दी के रूम मे गया जैसी ही मैने गेट नॉक किया गेट खुल गया

अंदर विद्या दी और वँया बेड पे बैठके बाते कर रही थी दोनो में से किसी का भी ध्यान मुझपे नही गया

[हे भगवान यह लड़कियो को ज़ुबान दी तो दी पर इतनी लंबी देने की क्या ज़रूरत थी]

मैं खिसक गया वहाँ से और अपने रूम में आके बेड पे लेट गया

तभी मुझे याद आया

मैने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो प्ले कर दिया

यह क्या यह तो सरपंच की बेटी मुखिया के बेटे से चुदवा रही है साला आजकल क्या हो रहा है बाप तो बाप बेटी उससे भी एक कदम आगे निकली मैने दूसरा मेमोरीकार्ड अपने फोन में डालके कॉपी किया थोड़ी देर बाद नींद आ गई

कोई मुझे हिलाने लगा मैं आँख खोलके देखा .......यह अवनी थी

दिलीप- अवनी

अवन्तिका- हाँ बाबू

दिलीप- अवनी ने इतना ही कहा था मैने अवनी का हाथ पकड़ा और अपने उपर गिरा लिया अपने दोनो पैर अवनी की कमर पे लपेट लिया और अवनी के होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगा और एक हाथ अवनी के दूध पे रखके दबाने लगा अवनी अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी मैं किस तोड़ दिया

दिलीप- क्या हुआ

अवन्तिका- गेट खुला है

यह सुनके मेरी फट गई मैं जल्दी से उठा और गेट लॉक किया पीछे मुड़ा तो अवनी मुस्कुरा रही थी

मैं अवनी का पास पहुँचा

तभी किसीने डोर नॉक किया

मैं जल्दी से अपना रुमाल निकाला और अवनी के मुँह पे लिपस्टिक फैला हुआ था

उसे सॉफ करके बाथरूम भागा

अवनी ने गेट खोला

वँया- गेट क्यूँ बंद था

अवन्तिका- वो ऐसे ही बाबू ने बोला था

वँया- अच्छा अब तू जा मुझे दिलीप के साथ पढ़ाई करनी है

अवनी चली गयी]

दिलीप- मैं बाहर आया तो वँया बेड पे बैठी थी मैं वँया के पास गया

दिलीप- वँया तुम यहाँ कुछ काम था क्या

वँया- पढ़ाई नही करनी है

दिलीप- आज रहने देते हैं

वँया- चुप चाप बैठके पढ़ाई करो

दिलीप- डाँट क्यूँ रही हो

वँया- तो क्या तुम्हारी आरती उतारू जब देखो तब घूमते रहते हो

[उसके बाद 2 घंटे तक वँया के साथ पढ़ाई किया]

फिर वँया और मैं नीचे गये

डाइनिंग टेबल पे बैठ गये सब खाने में बिज़ी थे मैं अरुणा दी को देख रहा था

अरुणा दी बहुत उदास लग रही थी

मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया और कपड़े बदलके सो गया..

[विद्या रूम]

विद्या- आज अरुणा बहुत उदास दिख रही थी क्या बात होगी अभी उससे जाके पूछती हूँ

विद्या अरुणा के रूम मे पहुँची

विद्या ने गेट नॉक किक्या

अरुणा ने गेट खोला

अरुणा- दी आप आइए ना

विद्या और अरुणा बेड पे जाके बैठ गयी

विद्या- क्या बात है आज तू बहुत उदास लग रही है

अरुणा- नही दी ऐसी कोई बात नही है

विद्या- देख मैं तुझे अच्छि तरह जानती हूँ बता ना क्या बात है

अरुणा- मैने कहा ना ऐसी कोई बात नही है

विद्या- ठीक है अगर तू नही बताना चाहती तो मैं नही पूछूंगी शायद तू मुझे इस लायक नही समझती..

विद्या उठके जाने लगी

अरुणा ने विद्या का हाथ पकड़ते हुए बोली

अरुणा- मैं बताती हूँ.. फिर अरुणा ने सारी बात विद्या को बताई और फुट फुट के रोने लगी

विद्या- [अब मैं क्या करूँ शायद बाबू ने मुझे समझके अरुणा के साथ यह सब कर दिया अगर मैं झूठ भी बोल दूँ कि बाबू को किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है फिर अरुणा को मुझे सब बताना पड़ेगा और कही अरुणा ने मुझे ग़लत समझ लिया तो

भले ही हमारी नज़र में यह प्यार हो पर जिसने किसी से भी प्यार ना किया हो वो कभी हमारे प्यार को नही समझेगा]

एक काम करती हूँ बाबू सब संभाल लेगा] अरुणा मैं तेरी तकलीफ़ समझती हूँ पर तुझे एक बार बाबू से बात करनी चाहिए क्या पता कुछ और बात हो यह मैं तेरी बड़ी बहेन होने के नाते नही बल्कि तेरी बेस्ट फ़्रेंड होने के नाते कह रही हूँ..

विद्या अरुणा के रूम से बाहर चली गयी

और अरुणा सोचने लगी

[अब क्या होगा दिलीप का वो बेचारा तो इश्स सबसे बेख़बर अपने रूम में घोड़े बेचके सो रहा है..,
 
अपडेट 72

दिलीप- रात को कोई गेट नॉक करने लगा

मैं टाइम देखा 11 बजे थे

मैने उठके गेट खोला सामने अरुणा दी खड़ी थी

दिलीप- दी आप यहाँ

अरुणा- तुझसे कुछ बात करनी है

दिलीप- [दी अंदर आगयि]

मैने गेट लॉक किया

अरुणा- तू मुझे सच-2 बता तूने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया

दिलीप- [ यह क्या हो रहा है मेरे साथ अब क्या जवाब दूं मैने तो कुछ सोचा भी नही था ]

मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

अरुणा- तू झूठ बोल रहा है

दिलीप- मैं झूठ नही बोल रहा हूँ

अरुणा- तो फिर तू मेरी आँखो में देखके यह बात कह

दिलीप- [मैने अरुणा दी की आँखों में देखके कहा]

मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

फिर अरुणा दी चली गयी

बच गया

वैसे भी यह बात तो सच ही थी कि मुझे किस करने का कॉंप्लेक्स है

फिर मैं सो गया

सुबह 6आम मैं उठके नहाया धोया तय्यार होके नीचे गया नाश्ता किया फिर लखन के साथ अखाड़े में गया आज कालिए ने और बुरी तरह कसरत करवाया फिर वोही लस्सी टाइप गिलास में जो आज और ज़्यादा कड़वा था पीके स्कूल पहुँचा वँया के क्लास में गया वँया से अपना बॅग लिया आज भी सब लड़कियाँ मुझे ही घूर रही थी

मैं अपने क्लास में आके अपनी बेंच पे बैठ गया

रवि- और भाई क्या चल रहा है

दिलीप- हमारे यहाँ तो फॉग चल रहा है

रवि मुझे घूर्ने लगा

फिर हम दोनों एक साथ हँसने लगे

रवि- वैसे आज तू कसरत करके नही आया

दिलीप- अरे आज तो ज़्यादा कसरत किया है

रवि- तेरी शकल देखके तो नही लग रहा है

[अब मैं इसे क्या बोलू कि कालिया मुझे ऐसी ज़हरीली चीज़ पिलाता है कि मेरा सारा दर्द छु मंतर हो जाता है]

तभी दीपा मेरे पास आई

दीपा- कैसे हो दिलीप

दिलीप- ठीक हूँ तुम कैसी हो

दीपा- मैं भी ठीक हूँ

दिलीप- मैने दीपा के नोट्स अपनी बॅग में से निकालके उसको दे दिया

थॅंक यू दीपा तुमने मुझे फैल होने से बचा लिया

दीपा- कोई बात नही अब तो हम फ्रेंड्स हैईना

दिलीप- हाँ अब हम फ़्रेंड है

फिर दीपा चली गयी

रवि- इतनी जल्दी कोई लड़का भी दोस्त नही बनता

दिलीप- तू चुप रह यार हर वक़्त बोर करता रहता है फिर लंच टाइम हो गया मैने सोचा बाथरूम होके आता हूँ

मैं जैसे ही बाथरूम पहुँचा सरपंच की बेटी आज किसी और लड़के के साथ बाहर निकली यह तो कपड़े की तरह लड़के बदल रही है लगता है पूरी बोल्ड है इसकी तो लेनी पड़ेगी मैं वही पे छुप गया

फिर बाथरूम गया और अपने क्लास में आ गया

तभी वँया मुझे बुलाने आई मैं वँया के साथ उसके क्लास में गया फिर हम ने साथ मिलके खाना खाया

वँया- दिलीप कल से दो दिन की छुट्टी है

दिलीप- तुम्हे कैसे पता

वँया- पापा ने बोला है

दिलीप- पर क्यूँ

वँया- अरे एग्ज़ॅम्स आने वाले हैं ना तो हम स्टूडेंट्स का माइंड फ्रेश हो इसलिए

दिलीप- फिर मैं अपने क्लास में आ गया छुट्टी होने से पहले टीचर ने वही बासी खबर सुनाया मैं सोचा कल का टाइम सही है

विनय की बहन का चेक अप करवाने के लिए

मैं विनय के घर गया

[ज़ोर से] विनय

विनय की बहन बाहर आई

विनय की बहन- छ्होटे मालिक आप अंदर आइए

दिलीप- मैं अंदर गया

विनय कहाँ है

विनय की बहन- वो और माँ खेत गये हैं

दिलीप- आप तो मुझसे नाराज़ होंगी कि मैं 2 दिन का कहके 10 दिन बाद आया हूँ

विनय की बहन- नही मुझे पता है आप के सर में चोट लगी थी

दिलीप- कल मेरे स्कूल की छुट्टी है तो क्यूना हम कल ही डॉक्टर से आपका चेकप करवा लें

विनय की बहन- ठीक है पर

दिलीप- क्या

विनय की बहन- मैं आपके साथ अकेले कैसे जा सकती हूँ और माँ को क्या कहूँगी

दिलीप- मैने कब कहा कि सिर्फ़ हम दोनो जाएँगे

बिम्ला काकी भी हमारे साथ जाएगी

विनय की बहन- आपने उसे सब बता दिया

दिलीप- नही

[फिर मैं विनय की बहन को सब समझा कर बिम्ला के घर गया]

बिम्ला ने गेट खोला

बिम्ला- आप अंदर आइए

दिलीप- काकी तुमसे कुछ मांगू तो दोगि

बिम्ला- सब कुछ तो आप ही का है

दिलीप- [इसकी चूत में हर वक़्त आग ही लगी रहती]

आपको विनय की माँ को जाके बोलना कि आप की तबीयत खराब है आपको शहेर जाना है डॉक्टर के पास

तो आप शांति को अपने साथ ले जाना चाहती हैं वो भी कल

[बिम्ला मुझे घूर्ने लगी]

ऐसे क्या घूर रही हो

[फिर मैं बिम्ला को बताया कि शांति को बच्चा नही हो रहा है उसके लिए वो अपना चेकप करवाना चाहती है उसका पति उसका इलाज नही कराना चाहता है बाकी सब बात नही बताया]

बिम्ला- ठीक है मैं बात कर लूँगी पर इसके बदले मुझे क्या मिलेगा

दिलीप- (लवडा) मैं तुमको क्या दे सकता हूँ और यह तुम्हारी बेटी कहाँ हैं

बिम्ला- अपने मामा के यहाँ गयी है

दिलीप- गयी है या भेजी गयी है

बिम्ला हँसने लगी

बिम्ला- आज चाइ नही पिएँगे

दिलीप- ना अब मैं चलता हूँ फिर मैं अपने घर चल दिया.'.,,,..
 
अपडेट 73

[अरुणा का रूम]

विद्या अरुणा के साथ बैठी हुई थी

विद्या- तूने बात की बाबू से

अरुणा- उसने कहा कि उसे किस करने का कॉंप्लेक्स हो गया है

विद्या- तुझे क्या लगता है

अरुणा- पता नही मुझे नही लगता है कि बाबू झूठ बोल रहा है

दिलीप- थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर मैं सीधा किचन में गया किचन में बड़ी मामी थी

दिलीप- बड़ी नानी कहाँ हैं

बड़ी मामी- बाहर गयी हैं कुछ काम से तुम्हे कुछ चाहिए

दिलीप- नही बस उनसे बात करनी थी यह कहके मैं अपने रूम में आ गया कपड़े बदलके लेट गया

थोड़ी देर बाद वँया आगयि

उसके साथ 2 घंटे पढ़ाई किया

जैसे ही वँया रूम से बाहर गयी

अवनी अंदर आगयि

मैने देखा खाने के टाइम को अभी 2 घंटा था मैं जल्दी से उठा गेट लॉक किया 2 मिनट में पूरा नंगा हो गया अवनी मुझे आँखें फाड़ के देखने लगी मैं अवनी के पास पहुँचा बिना उससे पूछे अवनी की शलवार कमीज़ ब्रा पैंटी सब एक साथ निकालके साइड में रख दिया और अवनी को अपनी बाहो में ले लिया

अवनी- अया दिलीप अभी कोई आजाएगा

दिलीप- आने दो आज हम खुलके प्यार करेंगे

मैं अवनी के होंठ चूसने लगा और एक हाथ से दूध दबाने लगा मैने अवनी का हाथ अपने लंड पे रख दिया अवनी मेरे लंड को आगे पीछे करने लगी अब मैने अपनी ज़ुबान को अवनी के मुँह में डाल दिया अवनी पूरे जोश में मेरी ज़ुबान चूसने लगी मैने अवनी को गोद में उठाके बेड पे लेटा दिया और अवनी का दूध चूसने लगा दूसरे दूध को अपने हाथ में भर के दबाने लगा

अवनी आह आह किए जा रही थी मैने अवनी के दोनो दूध को चुस्के लाल कर दिया फिर मैं अवनी को पलटा दिया अब अवनी पेट के बल लेटी हुई थी मैं अवनी के दोनो नितंबो पे अपना हाथ रखके मसल्ने लगा अवनी आहे भरने लगी और अवनी की पीठ को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा अवनी की पीठ मेरे थूक से गीली हो चुकी थी मैं अवनी को पलट दिया और अवनी की चूत पे अपना मुँह रखके चूसने लगा मैं 2 उंगली अवनी की चूत में डालके आगे पीछे करने लगा और मैं चूत के दाने को अपने होंठो में पकड़के चूसने लगा

थोड़ी देर बाद अवनी ने पानी छोड़ दिया मैने अवनी की चूत चाटके पूरा सॉफ कर दिया औ फिर मैने अपने लंड पे ढेर सारा थूक लगाया और जैसे ही अवनी की चूत पे लगाया अवनी खड़ी हो गयी और मुझे बेड पे धकेल दिया मैं बेड पे गिर गया

अवनी मेरे दोनो टाँगो के बीच आगयि और मेरे लंड को पकड़के उपर नीचे करने लगी

अवनी- बाबू कितना बड़ा लंड है तेरा कल तो मैं इसे ठीक से देख ही नही पाई

अवनी ने धीरे से अपना मुँह खोला और अपनी ज़ुबान से मेरे लंड को चाटने लगी और मेरे आंडो को सहलाने लगी

मैं तो पागल हुए जा रहा था

अब अवनी मेरे लंड के सुपाडे को अपने होंठो में पकड़के चूसने लगी मेरे लंड के सुपाडे को चूसने के बाद अवनी मेरे लंड को आधा मुँह में लेके चूसने लगी थोड़ी देर बाद अवनी मेरे लंड को पकड़के मूठ मारने लगी और मेरा आंडो को अपने मुँह में लेके चूसने लगी फिर अवनी मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी अवनी तो मेरे लंड को छोड़ ही नही रही थी

मैने अपना लंड अवनी के मुँह से निकाला और अवनी को लेटा दिया अवनी की गान्ड के नीचे एक तकिया रखके अवनी की चूत के होंठो में अपना लंड फँसा दिया और वेट करने लगा

जब अवनी को बर्दाश्त नही हुआ तो

अवन्तिका- बाबू क्यूँ तडपा रहा है अपनी अवनी को

दिलीप- मैने कहा था कि आज हम खुलके प्यार करेंगे फिर आप शरमा क्यूँ रही है

अवन्तिका- बाबू चोद ना अपनी अवनी को

अवनी के इतना कहते ही मैने एक झटके में अपना आधा लंड अवनी की चूत में डाल दिया

अवनी की चीख निकल गयी

मैं अवनी के दोनो दूध दबाने लगा थोड़ी देर बाद जब अवनी शांत हुई

तो मैं एक और झटका मारके अपना लंड अवनी की चूत की गहराई में डाल दिया

अवनी रोने लगी मैं अवनी के होंठ चूस्ते हुए अवनी के दूध दबाने लगा थोड़ी देर बाद अवनी अपनी गान्ड गोल गोल हिलाने लगी मैं अपने लंड को आगे पीछे करने लगा फिर तो मैं रुका ही नही ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा

अवनी कैसा लग रहा है

अवन्तिका- अया बहुत अच्च्छा लग रहा है बाबू अयाया और ज़ोर से चोद अपनी अवनी को ओह यआः फक मी फक मी हार्डर यह बेबी ऊवू ईआ फक मी बाबू फक मी हार्दर ओह ईआ अयाया

दिलीप- हिन्दी में बोलो ना मैने अवनी की चूत में लंड अपना पेलते हुए बोला

अवन्तिका- बाबू मैं झड़ने वाली हूँ और ज़ोर से चोद मुझको फाड़ दे आज मेरी चूत को

मैं अवनी की चूत में ज़ोर ज़ोर से अपना लंड पेले जा रहा था थोड़ी देर बाद अवनी झड़ने लगी

मैने अपना लंड अवनी की चूत के मुँह तक निकाला और एक बार में ही पूरा पेल दिया

अवनी की चीख निकल गयी मैं तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा अवनी दूसरी बार झड गयी

मैने अवनी को घोड़ी बनाया और अवनी की चूत में अपना लंड पेलने लगा

आज मैं भी हैरान था कि आज 30 मिनट से ज़्यादा हो गया है मेरी पानी निकलने का नाम ही नही ले रहा है

अवनी एक बार फिर से झड गयी

अवन्तिका- बाबू अब और नही बहुत जलन हो रही है

दिलीप- मैने अपना लंड अवनी की चूत से निकाल लिया

अवनी मेरे लंड को मुँह में लेके चूसने लगी 10 मिनट तक अवनी मेरे लंड को चुस्ती रही

दिलीप -अवनी मेरा पानी निकलने वाला है

अवनी और ज़ोर्से मेरे लंड को चूसने लगी थोड़ी देर बाद मैं अवनी के मुँह में ही झड़ने लगा अवनी मेरा सारा कम पी गयी

फिर हम बाथरूम में गये एक साथ नहा कर बाहर आए फिर मैने और अवनी ने अपने कप्डे पहने और मैने गेट का लॉक खोल दिया..?.,..,
 
अपडेट 74

दिलीप- हम दोनो बेड पे बैठे हुए थे

अवनी तुम बहुत खूबसूरत हो

अवन्तिका- अच्छा और क्या खूबसूरत है मेरा

दिलीप- तुम्हारे दूध जब भी देखता हूँ मन करता है चूस्ता ही रहूं

और तुम्हारी गान्ड जब तुम मटक के चलती हो तो मन करता है अभी

अवन्तिका- क्या अभी

दिलीप- रहने दो तुम नाराज़ हो जाओगी

अवन्तिका- तूने ही कहा था कि हमारे बीच कोई शरम नही होनी चाहिए

दिलीप- मन करता है अभी आपकी गान्ड में अपना डालके आप की गान्ड मार लूँ

हर वक़्त तुमको चोदता रहूं

अब मैने तो बता दिया

आप को मुझमे क्या अच्छा लगता है

अवन्तिका- तेरी हर बात जब तू मुझे चोदता है तो मुझे कभी नही लगता कि तेरे आँखो में हवस है

तेरा लंड जो की पोर्न्स्टार के जितना बड़ा है

देखा नही आज मेरी चूत भी तेरे लंड को नही हरा पाई

दिलीप- यह पोर्न्स्टार क्या होता है

अवन्तिका- तेरे पास तो मोबाइल है तो मैं तुझे एक साइट बताती हूँ जिससे सेक्स

दिलीप- हिन्दी में बोलो ना

अवन्तिका- [मुस्कुरा के]

चुदाई से जुड़ी हर चीज़ तुझे पता चल जाएगी

दिलीप तुझे पता है ना कि हमारा रिश्ता इससे आगे नही बढ़ सकता

दिलीप- हाँ पता है

अवन्तिका- मैं चाहती थी कि जिससे मैं प्यार करूँ वही मुझे औरत बनाए

दिलीप- अभी यह सब बात क्यूँ कर रही हो

अवन्तिका- क्यूँ कि मैं डरती हूँ तू कहीं मुझे ग़लत ना समझे

कि मैने सिर्फ़ तेरे साथ चुदाई करने के लिए तुझे अपना बाय्फ्रेंड बनाई हूँ

दिलीप- आपको पता है मेरे लिए एक पल का प्यार ही काफ़ी है किसी को अपना मानने के लिए

अब अपने आँसू पोछो

फिर मैने दोनो गोलियों को अवनी को खिला दिया

अवन्तिका- तुझे यह सब का ध्यान कैसे रहता है

तभी किसी ने गेट नॉक किया

मैने जाके गेट खोला

मैं बड़ी नानी के गले लग गया

मेरे सर पे हाथ फिराने लगी

बड़ी नानी- बहू ने बताया कि तुझे मुझसे कुछ बात करनी है

दिलीप- पहले अंदर तो आओ

फिर बड़ी नानी अंदर आके मेरे साथ बेड पे बैठ गयी

अवन्तिका- बड़ी दादी मैं जाती हूँ

बड़ी नानी- तू कहाँ जा रही है बैठ यही पे

दिलीप- हाँ यह कोई प्राइवेट बात नही हैवो विनय की बहेन की तबीयत खराब है

तो मैं आपसे पूछ रहा था कि वो मुझे कह रही थी कि वो और उसकी पड़ोसन बिम्ला शहर जा रही हैं

डॉक्टर को दिखाने तो मैं भी उनके साथ चला जाऊं

बड़ी नानी- विनय भी तो जा सकता है

दिलीप- नही जा सकता है वो चला जाएगा तो उसका खेत कौन देखेगा

[बड़ी नानी कुछ देर तक सोचती रही]

बड़ी नानी- ठीक है पर अपना ख्याल रखना

[फिर हम सब खाना खाने नीचे गये

हम सब ने एक साथ खाना खाया

बड़ी नानी ने मुझे पैसे दिए

फिर मैं अपने कमरे में आ गया

थोड़ी देर बाद जब मुझे यक़ीन होगया कि सब सो गये हैं

तो मैं चीख चीख के रोने लगा

मुझे तो समझ ही नही आरहा था कि मैं क्या करूँ

अब मैं कर भी क्या सकता हूँ

फिर मैं नहा कर विद्या दी के रूम पे पहुँचा

गेट नॉक किया

जब गेट नही खुला तो मैं मास्टर की से गेट खोलके अंदर गया

फिर गेट लॉक किया

और विद्या दी के बेड पे जाके बैठ गया

विद्या दी सोई हुई थी

मैं विद्या दी से सट के लेट गया

पता ही नही चला कब आँख लग गयी

कोई मुझे हिलाने लगा

मैं आँख खोलके देखा

विद्या दी थी

मैं उठके बैठ गया

विद्या- बाबू तू कब आया

दिलीप- जब आप सोई हुई थी

विद्या- पर क्यूँ

दिलीप- बस आप को देखने का मन हुआ

यह कहके मैं विद्या दी के गले लग गया

विद्या- मेरा प्यारा बाबू अब तू जा सुबह होने वाली है

दिलीप- पहले एक किस दो

विद्या दी ने मेरे गाल पे किस किया

दिलीप-यह क्या था

विद्या- किस

दिलीप- यह तो चीटिंग है मैने होंठो पे कहा था

विद्या- तूने किस कहा था अब जल्दी जा

दिलीप- मैने विद्या दी के गाल पे किस किया और अपने रूम में आया

किसीने सच ही कहा है एक प्यार में गम मिला एक प्यार में खुशी

हर पल क़ीमती है खुलके जी ले जिंदगी फिर मैं अलार्म लगाके सो गया...
 
अपडेट 75

ठीक 6आम मैं उठके मुँह धोके नीचे गया

डाइनिंग टेबल पे बैठ गया

आज मन किया कि सबका आशीर्वाद लूँ

बड़ी नानी बड़े मामा बड़ी मामी छोटे मामा छोटी मामी सबका मैने पैर छुए

सब ने एक ही बात कही हमेशा खुश रहो फिर हम सबने नाश्ता किया

बड़ी नानी- तेरे साथ लखन भी जाएगा

दिलीप- बड़ी नानी उसे जाने की कोई ज़रूरत नही है मैं वहाँ डॉक्टर के यहाँ जा रहा हूँ किसी से लड़ने नही

बड़े मामा- बड़ी माँ ने जो कहा वो तुमने सुना कि नही हा या ना

दिलीप- [हकलाते हुए]हाा

बड़े मामा- तो बात ख़तम अब तुम जाओ

दिलीप- फिर मैं लखन के साथ अखाड़े में गया कसरत करके पूरा बदन टूट गया फिर कालिए ने ज़हर पिलाया

ज़हर पीके मैं लखन के साथ बस स्टॅंड पे गया

[मेरी भी समझ में यह बात नही आई कि लखन को मेरे साथ भेज दिया गया पर गाड़ी साथ नही भेजा खैर मुझे क्या मुझे तो अपने प्लान से मतलब है]

बस स्टॅंड पे बिम्ला और शांति हमारा इंतजार कर रही थी शांति लखन को देखके मुझे घूर्ने लगी

पहले से ही हमारे लिए 4 सीट्स बुक थी 2 सीट्स आगे 2 सीट्स पीछे पिछली सीट्स पे लखन और बिम्ला

अगली सीट्स पे मैं और शांति बैठ गये शांति अभी भी मुझे घूर रही थी

दिलीप- इस तरह मुझे घूर्ने की ज़रूरत नही है

बड़ी नानी ने इसे मेरे साथ भेजा है

शांति- आप ने यह बात किसिको बताई तो नही है

दिलीप- नही

शांति- अब क्या करेंगे

दिलीप- क्या करेंगे शहर पहुँचके किसी अच्छे से प्राइवेट हॉस्पिटल में आपका चेकप करवाएँगे

1 घंटे बाद हम शहेर पहुँचे

लखन ने एक टॅक्सी रुकाई

हम सब उसमें बैठ गये

डॉक्टर- कहाँ चलूं साहब

दिलीप- किसी अच्छे से प्राइवेट हॉस्पिटल ले चलो

डॉक्टर- साहब यहाँ तो बहुत से अच्छे हॉस्पिटल हैं

दिलीप- एक काम करो जहा सिर्फ़ लॅडीस का इलाज होता है वही ले चलो

30 मिनट बाद हम हॉस्पिटल पहुँचे मैं डॉक्टर को पैसे दिया

हम हॉस्पिटल के अंदर गये मैने सब को बोला बैठने के लिए

फिर मैं जाके नर्स से बात किया

नर्स ने 2 घंटे बाद का आपपॉइंटमें दिया

इंतेज़ार करते 2 घंटे ऐसे ही बीत गये फिर नर्स आई

नर्स- आप में से एक पेशेंट के साथ जा सकता है मैं और शांति अंदर गये

डॉक्टर खूबसूरत थी नाम था रिया

डॉक्टर रिया- बैठ जाइए

[शांति बैठ गयी]

डॉक्टर-कहिए क्या प्राब्लम है

शांति- [शर्माके]

जी वो मेरी शादी को 2 साल हो गये हैं मुझे अभी तक बच्चा नही हुआ है

डॉक्टर रिया- आप कौन हैं

दिलीप- मैं इनका देवर हूँ

डॉक्टर रिया- ओके आप बाहर बैठिए मुझे इनका चेकप करना है

दिलीप- मैं बाहर आके बैठ गया

[एक घंटे बाद]

नर्स- आपको अंदर बुलाया है

दिलीप- मैं अंदर गया

डॉक्टर रिया- मैने इनका चेकप कर लिया है आपको 1 हफ्ते बाद रिपोर्ट मिल जाएगी अब आप जा सकते हैं

हम दोनो बाहर आए

दिलीप- [शांति से कहा] आप रूको मैं एक मिनट में आता हूँ फिर मैं अंदर गया

डॉक्टर क्या रिपोर्ट लेने के लिए भाभी का आना ज़रूरी है

[डॉक्टर रिया मुझे घूर्ने लगी]

डॉक्टर रिया- आप या पेशेंट में से कोई भी आसकता है

दिलीप- [फिर हम सब हॉस्पिटल से बाहर आए]

पहले कुछ खा लेते हैं

हॉस्पिटल के साथ ही एक होटेल था हम उसमें गये थोड़ा बहुत खाया

फिर बस स्टॅंड में आए बस में बैठे थोड़ी देर बाद बस चलने लगी

शांति मेरे साथ ही बैठी हुई थीवो कुछ बोल ही नही रही थी

मैं भी आँख बंद करके बैठ गया

1 घंटे बाद हम गाओं पहुँचे

बिम्ला और शांति अपने घर चले गये

मैं और लखन हवेली पहुँचे....
 
अपडेट 76

दिलीप- लखन अपने सर्विस क्वॉर्टर में चला गया..

मैं हॉल में पहुँचा

और सोफे पे बैठ गया..

विद्या दी मुझे देखते ही मेरे लिए पानी लेके आई..

मैने पानी पी लिया..

दिलीप- बाकी सब कहाँ है..

विद्या- अपने अपने रूम में..

दिलीप- बड़ी नानी..

विद्या- वो स्कूल गयी हैं..

दिलीप- ठीक है मैं अपने रूम में जा रहा हूँ..

मैं सीढ़ियो से उपर पहुँचा.. अपने रूम में आके लेट गया..

और सोचने लगा कि शांति की रिपोर्ट सही आई तो फिर मैं क्या करूँगा

मैं सोचा अवनी के पास जाता हूँ..

कहीं अवनी यह ना समझे कि मैं सिर्फ़ चुदाई करने के लिए ही उसके पास जाता हूँ

मैं अवनी के रूम पे गया

2 3 बार नॉक किया

फिर वापस अपने रूम में आगया

तभी मुझे याद आया

मैं मोबाइल से उस साइट पे गया ( राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम )

बाप रे बाअप सेक्स करने के इतने तरीके थेऔर लड़के लड़कियो के बारे में

ऐसी ऐसी बाते लिखी थी

मैने तो सुना था लड़के ही सिर्फ़ उस टाइप के होते हैं

लेकिन आज एक लड़की को दूसरी लड़की की चूत चूस्ते हुए पढ़ कर मेरा तो पूरा लंड खरा हो गया

पूरे 4 घंटे तक मैने राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम को पढ़ा

तभी कोई गेट नॉक करने लगा मेरी फट गई

एक तो साला यह लंड

पैंट के उपर से ही सॉफ दिख रहा था

मैने डरते हुए जाके गेट खोला

सामने अरुणा दी खड़ी थी

[मर गया इतनी मुश्किल से तो मानी थी]

आआप

अरुणा- ऐसे एक्सप्रेशन क्यूँ दे रहा है..

आज वँया की तबीयत ठीक नही है..

तो मैं तुझे पढ़ाने आई हूँ..

[अरुणा दी अंदर आके बेड पे बैठ गयी..]

मैं डरते हुए अरुणा दी के पास पहुँचा

अरुणा- खड़ा खड़ा क्या देख रहा है

जा जल्दी से किताब लेके आ

[फिर मैं किताब लेके बैठ गया]

अब तू पढ़ अगर कहीं पे प्राब्लम हुई तो मैं बता दूँगी

2 घंटे तक पढ़ाई किया

फिर अरुणा दी चली गयी

मैं भी जल्दी से वँया के रूम पे पहुँचा

गेट नॉक किया

वँया ने गेट ही नही खोला

मैने सोचा गाओं में घूम लेता हूँ

अब बड़ी नानी तो घर में थी नही

कोटि मामी से बात करने का मतलब 3 4 गाली

अब बची बड़ी मामी

मैं पहुँचा बड़ी मामी के रूम पे

गेट नॉक किया

थोड़ी देर बाद बड़ी मामी ने गेट खोला

बड़ी मामी- दिलीप कुछ चाहिए तुम्हे

दिलीप- बड़ी मामी वो मैं बाहर जा रहा हूँ बड़ी नानी पूछे तो बता दीजिएगा

बड़ी मामी- ठीक है

दिलीप- फिर मैं हवेली से बाहर आया और गाओं में घूमने लगा मैदान में लड़के सब क्रिकेट खेल रहे थे मैं भी साथ में खेलने लगा अब शाम हो चुकी थी अंधेरा भी होने लगा था

1 घंटे तक खेलते रहने के बाद मैं जब घर की तरफ जा रहा था

तभी एक लड़की को मैने एक खाली घर में जाते हुए देखा

लड़की की पीठ मेरी तरफ थी

पहले तो मन नही किया लेकिन साला यह लंड माने तब ना

मैं भी खाली घर में खिड़की रास्ते घुस गया घर में पूरा अंधेरा था

तभी वो लड़की बोली

लड़की- आगये तुम चलो जल्दी से मेरी चुदाई करो हमारे पास सिर्फ़ एक घंटा है

दिलीप- मेरा तो दिमाग़ घूम गया एक तो यह लड़की कॉन है पता नही उपर से इस लड़की का वीडियो भी नही है कहीं शोर मचाने लगी तो फिर मैं धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का एक काम करता हूँ जो होता है होने देता हूँ

अगर इसे पता चल गया तो समझाउंगा अगर नही समझी तो यह अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते

बस यही डर है कि इस बीच कहीं इसका यार ना आजाए.'..,
 
अपडेट 77

लड़की- क्या सोच रहे हो जल्दी करो ना अच्छा अब समझी देखो आज कपड़े पहें कर ही करते हैं

अगर कोई आ गया तो हमें भागने में आसानी होगी फिर वो लड़की मेरे पैंट पे अपने हाथ रखके मेरे लंड को सहलाने लगी

और मेरे हाथ पकड़के अपने दूध पे रख दी मैं समंझ गया मैं उस लड़की के दूध दबाने लगा

लड़की- पहले तुम मेरी चूत चूसो फिर मैं तुम्हारा लंड चुसुन्गि

दिलीप- मैं वही पे बैठ गया और उसके शलवार का नाडा खोल दिया एक झटके में शलवार नीचे गिर गयी

लड़की ने अपनी टाँगे चौड़ी कर ली मैं अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया

[इसने तो पैंटी भी नही पहनी है]

और इसकी चूत पे एक भी बाल नही था मैं अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दियाऔर आगे पीछे करने लगा फिर मैं अपना मुँह उसकी चूत पे रखके चूसने लगा

लड़की- अया आज तो बहुत अच्छे से चूस रहा है ऐसे ही चूस मेरी चूत को मैं अपनी ज़ुबान से उसकी छूट छोड़ रहा था

वो आआहए भर रही थी अब मैं उसकी चूत चूस्ते हुए अपनी दो उंगली उसकी चूत में डालके चोदने लगा

लड़की- अया अओर ज़ोर से चूस अया हाआँ ऐसे ही अया मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- मैं उसकी चूत और ज़ोर से चूसने लगा थोड़ी देर बाद वो झड़ने लगी मैं उसका सारा पानी पी गया

फिर मैं खड़ा हो गया अब वो नीचे बैठ गयी और मेरा पॅंट खोलने लगी मेरा पैंट नीचे गिर गया जैसे ही उसने मेरा अंडरवेर नीचे किया मेरा लंड उसके चेहरे से टकरा गया उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया

थोड़ी देर बाद

लड़की- कौन हो तुम बोलते क्यूँ नही

दिलीप- तुम्हे क्या लगता है

लड़की- तुम वो नही हो

[फिर वो लड़की खड़ी हो गयी और अपनी शलवार पहनने लगी]

[मैने उसका हाथ पकड़ लिया]

लड़की- छोड़ो मुझे जाने दो मैं ऐसी वैसी लड़की नही हूँ मैं किसी और का इंतेज़ार कर रही थी

[वो रोने लगी]

दिलीप- रो मत मेरी बात सुनो अगर तुम कहोगी तो मैं तुम्हे जाने दूँगा पर ना तो मैने तुम्हारा चेहरा देखा है

और ना ही तुमने मेरा अगर तुम मेरे साथ चुदाई करोगी तो मैं तुम्हे कभी परेशान नही करूँगा

लड़की- नही तुम झूठ बोल रहे हो

दिलीप- साली मेरे साथ गेम खेलती है तेरे बोलने के अंदाज़ से पता चल रहा है कि तू नाटक कर रही है

चुदवाना है तो चुदवा वरना भाग यहाँ से एक तो लंड खड़ा करती है मन कर रहा है कि अभी तुझे पटक के चोद दूं

और तू किसी को कुछ नही बता पाएगी क्यूंकी तूने मेरा चेहरा ही नही देखा है

तीन तक गिनूंगा जाना है तो चली जाना

1

2

[इसके आगे मैं कुछ बोल ही नही पाया]

वो लड़की मेरे लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी और एक हाथ से वो मेरे आंडो को सहला रही थी

मैने उसका सर पकड़ा और अपने लंड से उसके मुँह को चोदने लगा थोड़ी देर बाद मैने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया

लड़की- कुत्ते

मैने फिर अपना लंड उसके मुँह में पेल दिया अब वो खुद अपना मुँह आगे पीछे करके मेरे लंड को चूस रही थी

मैने उसको खड़ा करके उसकी एक टाँग को हवा में उठा दिया

और उसकी चूत पे अपना लंड रगड़ने लगा

लड़की- कमिने डाल ना क्यूँ तडपा रहा है

मैने एक धक्का मारा उसकी चीख निकल गयी

मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया

लड़की- मार डाला कुत्ते ने

मैने एक और धक्का मारा एक बार फिर उसकी चीख निकल गयी

मैं उसके होंठ चूसने लगा और धीरे धीरे धक्के मारने लगा

जब वो अपनी गान्ड घुमाने लगी तो मैने अपने होंठो को अलग किया

लड़की- अया बस्त इतना ही दम है बोल तो ऐसे रहा था कि बहुत बड़ा मर्द है

दिलीप- सोचे ले अगर दम दिखा दिया तो रोने लगेगी

लड़की- जा जा तेरे जैसे बहुत देखे हैं

उसने इतना ही कहा था कि मैने अपना लंड उसकी चूत के मुँह तक निकाला और एक ही बार में डाल दिया

उसकी भयानक चीख निकल गयी वो रोने लगी

मैं रुका नही तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा पूरे घर में पच पच की आवाज़ आ रही थी

लड़की- ऐसे ही चोद मुझे फाड़ दे मेरी चूत को अया भोसड़ा बना दे मेरी चूत का हाआँ ऐसे ही और ज़ोर से चोद अयाया मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- फिर वो झड़ने लगी अब मेरा लंड उसकी चूत में आराम से जा रहा था थोड़ी देर बाद वो फिर झड गयी मैने उसको गोद में उठा लिया और अपने लंड को उसकी चूत में पेलने लगा वो 3 बार झड चुकी थी

दिलीप- अब मैं भी झड़ने वाला था मैं पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था तभी मुझे याद आया

दिलीप- अंदर ही डालु या मुँह में

लड़की- अंदर मत डालना

मैने अपना लंड उसकी चूत से निकाला वो नीचे बैठ गयी और मेरे लंड को मुँह लेके चूसने लगी

थोड़ी देर बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ने लगा वो मेरा सारा कम पी गयी

दिलीप- बहुत मज़ा आया तुझे चोदने में वैसे तेरा नाम क्या है

लड़की- ऋतु

दिलीप- अभी तक कितने ले चुकी है

लड़की- तुम चौथे हो

दिलीप- इतना नाटक क्यूँ कर रही थी

ऋतु- अरे तो मैं कोई रंडी थोड़ी हूँ

दिलीप- अच्छा अब मैं चलता हूँ

ऋतु- फिर कब मिलोगे

दिलीप- किस लिए

ऋतु- मुझे चोदने के लिए

दिलीप- तुमने कभी गान्ड मरवाई है

ऋतु- नही

दिलीप- अगर गान्ड मारने देगी तो यही पे आ जाउन्गा

ऋतु- पहले अपना नाम तो बता दो

दिलीप- जिस दिन गान्ड मारने दोगि उसी दिन बता दूँगा

ऋतु- तुमको बुलाउन्गी कैसे

दिलीप- एक काम करना स्कूल में ब्लॅक बोर्ड पे खाली घर लिख देना

मैं यही पे आ जाउन्गा फिर मैं घर चल दिया'..'.,.
 
अपडेट 78

दिलीप- शाम के 7 बज रहे थे मैं तो बस यही दुआ कर रहा था कि बड़े मामा घर पे ना हो

थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर सब बहने हॉल में बैठी थी वँया को छोड़ के मैं जैसे ही अंदर गया

सब मुझे घूर्ने लगे

दिलीप- आप सब मुझे घूर क्यूँ रही हो

अरुणा- अपने कपड़े देख कितने गंदे हैं किसी से मार पीट करके आया है क्या

दिलीप- वो खेलते वक़्त गिर गया

[इतना कहा ही था कि सब बहनें मेरे पास आगयि]

विद्या- दिखा कहाँ पे चोट लगी है

अरुणा- चुप क्यूँ है बोल ना

दिलीप- कोई चोट नही लगी है आप सब ऐसे ही परेशान होने लगती हो

मेघा- [मुस्कुरा कर]जा जाके जल्दी से नहा कर आ तेरे लिए एक सर्प्राइज़ है

दिलीप- क्या सर्प्राइज़ है

अरुणा- मेघाअ

अवन्तिका- तेरे पेट में कोई बात पचती क्यूँ नही है

विद्या- तू खड़ा क्या कर रहा है जल्दी से नहा कर आ वरना सर्प्राइज़ कॅन्सल

[यह सुनके मैं भाग के अपने रूम में आया नहा कर तय्यार हुआ और दौड़के नीचे आया]

दिलीप- अब बताइए कॉन्सा सर्प्राइज़ है

विद्या- पहले अपनी आँखें बंद कर

[मैने अपनी आँखें बंद कर ली]

फिर विद्या दी मेरा हाथ पकड़के मुझे अपने साथ ले जाने लगी

अरुणा- अब तू अपनी आँख धीरे से खोल

[मैने अपनी आँखो को धीरे से खोला]

दिलीप- यह क्या है

विद्या- तेरा केक है

दिलीप- पर क्यूँ आज मेरा बर्तडे थोड़ी है

अरुणा- तू भूल गया आज मेरा बर्तडे है

दिलीप- आज आपका बर्तडे है और मुझे पता ही नही

अरुणा- नाराज़ तो मुझे होना चाहिए कि तू मेरा बर्तडे गिफ्ट मुझे नही दे रहा

दिलीप- [यार यह क्या एक तो मुझे बताया नही उपर से गिफ्ट माँग रही हैं]

क्या चाहिए आपको

अरुणा- मैं चाहती हूँ कि तू मेरी जगह मेरा बर्तडे मना

दिलीप- मैं कुछ समझा नही

विद्या- अरे मेरे भोले बाबू अरुणा चाहती है कि तू उसका बर्तडे केक काट के पहली बाइट उसे खिला

दिलीप- पर क्यूँ

अरुणा- क्यूँ कि मैं चाहती हूँ

अवन्तिका- सोच क्या रहा है

दिलीप- मैं सोच रहा हूँ कहीं मैं सपना तो नही देख रहा हूँ

अरुणा- तू मेरा मज़ाक उड़ा रहा है जा मैं तुझसे बात नही करती

दिलीप- [अरुणा दी के गले लगते हुए]

अरे मेरी प्यार दी आप तो गुस्सा हो गयी अच्छा आओ फिर मैं अरुणा दी को अपने साथ लेके गया

केक काटके पहली बाइट खिलाया सब बोलने लगे हॅपी बर्तडे टू यू हॅपी बर्तडे टू यू

हॅपी बर्तडे डियर अरुणा

[वैसे मुझे पता था कि आज अरुणा दी का बर्तडे नही हैशायद मेरी बहनो का मन हुआ होगा मेरे हाथ से केक खाने का]

अच्छा आप सब बैठ के बाते कीजिए मैं आता हूँ

विद्या- मुझे तो खिला

अवन्तिका- मुझे भी

मेघा- हमें भी

[फिर क्या था सब बहनों को केक खिलाया]

अब जाऊं

अरुणा- पहले हमारे हाथ से ख़ाके जा

[फिर सब बहनो ने मुझे खिलाया]

बड़ी नानी कहाँ हैं

विद्या- अपने रूम में

दिलीप- और दोनो मामा

विद्या- अपने रूम में

दिलीप- ठीक है

मैं भी अपने रूम में जा रहा हूँ फिर मैं अपने रूम में आके बेड पे बैठ गया

[अब तो कॉंडम हर वक़्त जेब में रखना पड़ेगा क्या पता कब काम आजाए]

और कल सुधा से भी मिल लेता हूँ अभी तो बहुत नींद आरहि है पहले वँया से बात कर लेता हूँ मैं मास्टर की अपनी जेब में रखके वँया के रूम पे पहुँचा रूम नॉक किया

वँया ने गेट खोला

वँया- क्या है

दिलीप- तुमसे बात करनी है

वँया साइड हो गयी

मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया

वँया- बोलो

दिलीप- वो मैं सोच रहा था कि कल हम कहीं पे घूमने जाए

[वँया मुस्कुराने लगी]

वँया- ठीक है

[मैं वँया के रूम से बाहर आके बड़ी नानी के रूम पे पहुँचा]

बड़ी नानी ने गेट खोला उसके बाद हम सब ने मिलके खाना खाया

फिर मैं अपने रूम में आके सो गया...
 
अपडेट 79

दिलीप- सुबह 6 बजे मैं उठा नहाया धोया तय्यार होके नीचे गया

आज तो पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पे बैठा हुआ था मैं भी जाके बैठ गया

दोनो मामा कुंडली मारके बैठे हुए थे हम सब ने नाश्ता किया

छोटे मामा- चार दिन बाद हम सब वापस शहर जा रहे हैं

[यह सुनके मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया]

अरुणा- इतनी जल्दी

अवन्तिका- हाँ

छोटे मामा- आप सबके एग्ज़ॅम्स नज़दीक आ रहे हैं

ख़ासकर अवन्तिका मेघा और सुनीता के लिए तो बहुत ही ज़रूरी है

विद्या- चाचा जी ठीक कह रहे हैं

[मन तो कर रहा था छोड़ यार]

दिलीप- खाने का मन ही नही हो रहा था इतने सालो बाद बहनें मिली खैर पढ़ाई भी तो ज़रूरी है मैं भी नाश्ता किया

और हॉल में ही बैठ गया दोनो मामा बाहर चले गये सब बहनों का चेहरा उदासी में डूबा हुआ था

विद्या दी छुपाने की कोशिश कर रही थी पर मुझसे नही छुपा पाई विदयादि अपने रूम में जाने लगी

मैं भी थोड़ी देर बाद विद्या दी के रूम पे पहुँचा मुझे पता था विद्या दी रो रही होंगी तो गेट खोलेंगी ही नही

मैं मास्टर की से लॉक खोलके अंदर गया और गेट लॉक किया विद्या पीठ के बल लेटके सिसक रही थी

मैं धीरे से विद्या के पास गया और विद्या के बगल में लेट गया विद्या का मुँह दूसरी तरफ था

मुझे तो रोने का वरदान मिला है तो तकिये में अपना मुँह छुपा कर लगा मैं रोने

और यह आँसू मेरी आँखो से सच में निकल रहे थे कोई नाटक नही था

विद्या ने जब सुना तो वो पीछे मूडी मुझे देखके विद्या अपने सारे गम भूल गयी

विद्या- दिलीप तू रो क्यूँ रहा है

[विद्या ने मुझे उठाने की कोशिश की मैं नही उठा]

दिलीप मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

विद्या--उठना दिलीप

दिलीप- मैं उठके बैठ गया और विद्या को अपने गले लगा लिया

विद्या मेरे गले लगते ही फूट-2 के रोने लगी मैं विद्या की पीठ सहलाता रहा

थोड़ी देर बाद विद्या ने रोना बंद किया

दिलीप- अब बताइए क्यूँ रो रही थी

विद्या- क्यूँ ना रोउँ तुझे एक पल के लिए अपनी नज़रो से दूर नही कर सकती

और मैं इतनी मजबूर हूँ कि तुझसे दूर जाने का सोच भी नही सकती

दिलीप- अच्छा तो इस लिए मेरी विदू रो रही है लेकिन इसमें रोने वाली कोन्सि बात है

जब भी मौका मिलेगा मैं अपनी विदू से मिलने आता रहूँगा

विद्या- अभी जो बोला फिर से बोल

दिलीप- इसमें रोने वाली कोन्सि बात है

विद्या- यह नही लास्ट में जो बोला

दिलीप- मैं आपसे रोज़ मिलने आता रहूँगा

विद्या- प्लीज़

दिलीप- मैं अपनी विदू से मिलने आता रहूँगा

[यह सुनके विद्या का चेहरा पूरी तरह शरम से लाल हो गया]

दिलीप-हाए मर जाउ

[विद्या ने मेरे मुँह पे हाथ रख दिया]

विद्या- ऐसा कभी मत कहना

दिलीप- नही कहता अब रोना बंद करो

विद्या- अपना चेहरा देख मुझसे ज़्यादा तो तेरी आँखो से आँसू निकल रहे हैं

दिलीप- मैने विदू को खींचके अपनी गोद में बिठा लिया और विदू के गाल को सहलाने लगा

मेरी प्यारी विदू कितनी खूबसूरत है रात में चाँद भी देखले तो जल जाए

[विदू शरमाने लगी]

[विदू मुझसे कितना प्यार करती है और एक मैं हूँ जो किसी और के साथ सेक्स करता हूँ]

एक बात बोलता हूँ बुरा मत मानना

विद्या- मैं अपने दिलीप की बात का बुरा मान ही नही सकती

दिलीप- [सर झुकाके]मेरा दूसरी लड़कियो के साथ भी संबंध है आप चाहो तो मुझे मारलो पर मुझसे नाराज़ मत होना

विद्या- यह तू कैसी बात कर रहा है अगर तेरा संबंध अगर दूसरी लड़कियो के साथ है तो मैं क्या करूँ

दिलीप- इसका मतलब आप मुझसे नाराज़ हो

विद्या- बिकुल नही मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ पर मैं यह कभी नही चाहूँगी क़ि मेरा प्यार तुझे बाँध के रक्खे

दिलीप- पर क्यूँ

विद्या- कितना बोलता है अब एक वर्ड भी नही बोलेगा तू

दिलीप- [मैं वादा करता हूँ जिस्दिन आपसे प्यार करूँगा उस दिन से आपके साइवा किसी और से प्यार नही करूँगा]

तो क्या करूँ

विद्या- मुझे क्या पता

दिलीप- मैं अपने होंठ विदू के होंठ पे रखके चूसने लगा कितने मुलायम होंठ है विदू के

मैं विदू के उपरी होंठ को चूस रहा था विदू मेरी निचले होंठ को चूसने लगी तभी कोई गेट नॉक करने लगा मैने किस तोड़ दिया और अपना रुमाल निकाल के विदू के होंठ पे से लिपस्टिक सॉफ किया फिर विदू ने मेरे होंठ से लिपस्टिक सॉफ किया

मैं आँख बंद करके लेट गया विदू ने गेट खोला

अरुणा- दी दिलीप यहाँ पे है क्या

विद्या- हाँ

अरुणा- वो लखन बाहर खड़ा है और वो दिलीप को बुला रहा है

[यह सुनके मैं उठके बैठ गया]

क्या हुआ अरुणा दी

अरुणा- लखन तुझे बाहर बुला रहा है

दिलीप- मेरा तो खून खौल गया मैं घर से बाहर आया कालिया मुँह बनाए खड़ा था

लखन- छोटे मालिक आप 30 मिनट लेट हैं आज आपको डबल कसरत करनी पड़ेगी

दिलीप- यह सुनके मेरी फट गई

फिर भी कालिए के साथ अखाड़े में जाना तो पड़ेगा ही मैं और लखन चल दिए अखाड़े की तरफ.,.'.,..
 
अपडेट 80

थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा अखाड़े में वैसे अपनी एज का मैं ही एक नमूना था अखाड़े में

डबल कसरत करवाया कालिए ने फिर वही लस्सी टाइप गिलास चुप करके पी लिया

वहाँ से थोड़ी देर बाद पहुँचा घर और सीधा अवनी के रूम पे गया

गेट नॉक किया

अवनी ने गेट खोला और मैं अंदर गया और गेट लॉक कर दिया

मैं अवनी के गाल सहलाने लगा

दिलीप- मेरी प्यारी अवनी परेशान लग रही है

अवन्तिका- नही ऐसी कोई बात नही है

दिलीप- अच्छा मैने अवनी को गले लगा लिया -----------अब बताओ

नही पहले मेरी बात सुनो

अवन्तिका- क्या

दिलीप- आज रात को आपकी गान्ड मारु

अवन्तिका- छि कितना बेशरम है तू

दिलीप- अब गाओं में तो ऐसे ही बोला जाता है वैसे मुझे लगता है आप के यह बड़े हो रहे हैं

अवन्तिका- क्या यह

दिलीप- आपके दूध यह कहके मैं अवनी के दोनो दूध के निपल को पकड़के खींच दिया

अवन्तिका- अया

दिलीप- अब मैं जाता हूँ फिर मैं अवनी के रूम से बाहर आया और अपने रूम में जाके बेड पे लेट गया

तभी किसीने गेट नॉक किया

मैं जाके गेट खोला सामने वँया खड़ी थी वैसे तो जाने का मन नही था

दिलीप- वँया अंदर आओ

वँया बेड पे बैठ गयी

वँया- दिलीप मैं कह रही थी कि आज हमे नही जाना चाहिए

दिलीप- क्यूँ

वँया- देखो ना सनडे को सब वापस जाने वाले हैं और हम दोनो के पास आज का ही दिन है तो क्यूँ ना हम दोनो आज का दिन सब के साथ ही बिताए

दिलीप- तुम कहती हो तो ठीक है

[वैसे तो मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे]

वँया- एक काम करते हैं क्यूँ ना हम सब शहर जाए शॉपिंग भी कर लेंगे और कोई अच्छि सी मूवी भी देख लेंगे

दिलीप- बहुत अच्छा आइडिया है

वँया- लेकिन एक प्राब्लम है

दिलीप- क्या

वँया- पापा नही मानेंगे

दिलीप- अरे उनसे कॉन पूछने जाएगा मैं तो डाइरेक्ट बड़ी नानी से बात करूँगा तुम बहनों को तय्यार करो

मैं बड़ी नानी से बात करता हूँ फिर मैं नीचे किचन में गया

बड़ी नानी- कुछ चाहिए मेरे बेटे को

[मेरे सर पे हाथ फेरते हुए )

दिलीप- हाँ वो हम सब शहर जाना चाहते हैं शॉपिंग भी कर लेंगे और साथ में मूवी भी देखेंगे

बड़ी नानी- ठीक है

लखन को अपने साथ ले जा और बड़ी वाली गाड़ी ले जाना

दिलीप- मेरी प्यारी बड़ी नानी

[फिर बड़ी नानी अपने रूम में चली गयी )

मैं विद्या सॉरी विदू के रूम में गया जैसे ही अंदर गया मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी मुझे मेरी सब बहनें इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़कियाँ लग रही थी मैं अभी भी आँखें फाड़के सबको देख रहा था

तभी किसीने मुझे चींटी काटी

दिलीप- अया क्या कर रही हो

वँया- तुम तय्यार नही हुए

दिलीप- मैं कोई लड़की नही हूँ

अरुणा- तो क्या गाओं वाले कपड़े में जाएगा

सब तुझपे हसेन्गे

दिलीप- मुझे कोई फ़र्क़ नही पड़ता

विद्या- पर हमे पड़ता है तू रुक[फिर विद्या अपने अलमारी में से एक बॅग निकालके मेरे पास आई]

यह ले इसमें तेरे लिए कपड़े हैं जो अच्छा लगे पहेन लेना

दिलीप- आप सब गाड़ी में बैठो मैं आता हूँ वो बॅग लेके मैं अपने रूम में आया फिर उस बॅग में से एक टीशर्ट और एक जीन्स निकालके पहेन लिया पहली बार मैं यह कपड़े पहेन रहा था थोड़ा अजीब लग रहा था मैं अपने रूम से बाहर आया और नीचे पहुँचा बड़ी नानी अपने रूम से बाहर निकली

बड़ी नानी- तू तो पूरा हीरो लग रहा है

दिलीप- एक काम करो आप भी चलो मेरे साथ

बड़ी नानी- ना बाबा ना मैं बुढ़िया तेरे साथ जाके क्या करूँगी यह ले पैसे

दिलीप- यह कुछ ज़्यादा नही हैं

बड़ी नानी- नही तू पहली बार अपनी बहनो के साथ घूमने जा रहा है अगर कम पड़ गये तो

दिलीप- अच्छा ठीक है अब मैं जाता हूँ फिर मैं घर से बाहर आया

अवनी सीटी बजाने लगी

दिलीप- [मैं अवनी के पास पहुँचके बोला]

क्या जमाना आ गया है अब लड़किया लड़को को छेड़ने लगी हैं

यह सुनके सब हँसने लगे

विद्या- वैसे आज तू बहुत हॅंडसम लग रहा है

अरुणा- तू तो बिकुल हीरो लग रहा है

दिलीप- मेरी तारीफ़ बाद में करना पहले गाड़ी में बैठते हैं

फिर हम सब गाड़ी में बैठे

हमारा ड्राइवर और कोई नही लखन था लखन ने गाड़ी चला दी

दिलीप- आप ने यह कपड़े कब लिए

विद्या- कल जब तू बाहर गया था

दिलीप- और मुझे बताया भी नही

विद्या- मेरी मर्ज़ी

गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल रही थी हमें पहुँचने में अभी 45 मिनट लगने वाले थे तभी विदू ने वो बात कह दी मेरे कान में जो मुझपर किए गये किसी विस्फोट से कम नही था

हुआ यह कि विदू मेरे कान के पास अपना मुँह लेके आई

विद्या- मुझे अभी किस चाहिए

दिलीप- मैने विदू को घुरके देखा विदू मुस्कुरा रही थी

मैं विदू और अरुणा दी पीछे वाली सीट पे बैठे हुए थे मेरे एक साइड वो लड़की बैठी है जो मुझसे बेंतिहा प्यार करती है

और एक साइड वो लड़की जो बात बात पे मुझे थप्पड़ मार देती है

मैं अपनी आँख बंद कर ली तभी गाड़ी ज़ोर से हिली

दिलीप- क्या हुआ लखन

लखन- एक खड्डा था

मेरी नज़र विदू पे पड़ी मैने देखा विदू की आँखो से आँसू बह रहे थे मुझे अच्छा नही लगा मैने जानबूझके अपना मोबाइल नीचे गिरा के अपने पैरो के नीचे दबा दिया

दिलीप- विद्या दी मेरा मोबाइल उठाओ ना विदू झुक गई और मेरा मोबाइल ढूँढने लगी

मैं झट से नीचे झुका विदू मुझे देखने लगी मैने अपने होंठ विदू के होंठ पे रखके हल्का सा चूम लिया

और वापस बैठ गया विदू भी बैठ गयी फिर मैं अपना मोबाइल वापस अपनी जेब में रख लिया

अब मैं विदू को ही देखे जा रहा था फिर मैने अपने आप को कंट्रोल किया

थोड़ी देर बाद लखन ने एक बड़े से माल के सामने गाड़ी रोक दी,..,...
 
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