Incest यह क्या हुआ - Page 38 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

आज गणेश पुर का मेला है। मेला का उद्घाटन मुख्यमंत्री जी के हाथ से होना है। मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में धरम पुर जिले के सभी सत्ता पक्ष के विधायको सांसद और अन्य नेताओं का पहुंचना, जरूरी था। चूंकि सामने चुनाव था, यह इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मेला था, जिसमे दूर दूर से लोग आते है अतः नेताओ को अपने एवम पार्टी का प्रचार प्रसार का एक मौका था।

इधर मेले में गीता और ठाकुर बालेंद्र सिंह भी जाने वाले थे। ठाकुर साहब ने आई जी साहब से कड़ी सुरक्षा की मांग की थी। आई जी साहब ने पूरा आश्वासन दिया था।

इधर भूरा ने नेताओ के काफिले पर हमला करने की पूरी योजना बना ली थीं।

उसने गणेश पुर घाटी के उस जगह को हमले के लिए चुना था। जहा पर सड़क के दोनो ओर जंगल और थोड़ा कम ऊंचाई का पहाड़ था।

वह काफिले पर चारो ओर से हमला करने का योजना बनाया था।

अपनी योजना को इतना गुप्त रखा था की। पुलिस वालो के मुखबिरों तक को इसकी भनक नहीं हो पाई। साथ ही दूसरे गुट के नक्सलियों को भी इसकी कोई सूचना नहीं थी।

उद्घाटन कार्यक्रम दोपहर 2बजे आयोजित था।

गीता और ठाकुर दोनो जाने के लिए तैयारी कर रहे थे।

दिव्या ने राजेश को फ़ोन किया,,

राजेश ने फ़ोन उठाया।

दिव्या _राजेश, कैसे हो?

राजेश _मै ठीक हू दिव्या जी आप कैसी है?

दिव्या _मै भी ठीक हूं। वैसे अभी कर क्या रहे हो?

राजेश _ कुछ नहीं घर में हूं, थोड़ा पढ़ाई कर रहा था।

कुछ काम था क्या?

दिव्या _, तुम्हे तो पता ही होगा आज से गणेश पुर में तीन दिनों का मेला प्रारंभ हो रहा है।

राजेश _हां, भुवन भईया बता रहा था।

दिव्या _आज संडे है, तो मैं कह रही थीं क्यू न हम मेला देखने चलें।

मेरा बडा मन है देखने का।

राजेश _ठीक है दिव्या जी, दोस्त की मन का ख्याल तो रखना पड़ेगा ही।

कितना समय चलना है?

दिव्या _मै 10बजे स्वास्थ्य केंद्र जाऊंगी, वहा से हम गणेश पुर के लिए निकल जायेंगे।

तुम घर आ जाओ , हम यही से मेरे कार से निकलेंगे।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

राजेश तैयार होकर, हवेली पहुंचा।

जब राजेश हवेली पहुंचा,सभी नाश्ता कर रहे थे।

वह हाल में बैठ गया।

नौकरानी ने दिव्या को जाकर बताया कि, राजेश बाबू आया है।

ठाकुर _राजेश, वो क्यू आया है?

दिव्या _पिता जी मैंने उसे बुलाया था। आज संडे है तो मैं भी मेला देखने के लिए जाना चाहती हूं।

रत्नवती _बेटी, वो क्षेत्र सेफ नहीं है। तुम्हरा जाना ठीक नहीं है, तुम मत जाओ।

ठाकुर _दिव्या बेटी तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हरा जाना उचित नहीं।

दिव्या _मां, मेरे साथ राजेश जा रहा है न, मेरा बडा मन है, मेरा बडा मन है मेला देखने का। प्लीज

ठाकुर _,, ठीक है, अगर चलना है तो तुम हमारे साथ चलो, हमारी सुरक्षा के लिए, जवान भी होंगे।

गीता _हा, दिव्या पिता जी ठीक कह रहे हैं, तुम हमारे साथ चलो।

दिव्या _दीदी, आप लोगो के साथ जाऊंगी तो मेला में घूम नही पाऊंगी।

मुझे मेला घूमना है।

मां प्लीज मुझे जाने दो न राजेश के साथ।

रत्नवती _अच्छा ठीक है कर लो अपनी इच्छा पूरी।

रत्नवती ने नौकरानी से राजेश को बुलाने कहा, ताकि वह भी नाश्ता कर सके।

नौकरानी ने राजेश से कहा,

नौकरानी _राजेश बाबू, रानी मां आपको बुला रही है।

राजेश अन्दर डायनिंग हाल में गया।

राजेश _नमस्ते, मां जी।

रत्नवती _नमस्ते, राजेश।

ठाकुर _नमस्ते, ठाकुर साहब।

ठाकुर ने कुछ नहीं कहा,,,

नमस्ते, गीता दीदी _नमस्ते राजेश आओ बैठो हमारे साथ लंच करो।

रत्नवती _हा बेटा, आओ बैठो। साथ में लंच करो।

राजेश चेयर पर बैठ गया।

दिव्या _राजेश लो न,

राजेश _दिव्या जी, मै घर से लंच करके आया हूं।

रत्नवती _अरे थोड़ा सा ले लो।

राजेश न चाहते हुए भी, थोड़ा सा लंच लिया।

इधर ठाकुर, लंच करके वहा से चला गया।

रत्नवती _बेटा, गणेश पुर क्षेत्र, नक्सलियों का गड़ है। मै तो दिव्या को जानें से मना कर रही थीं, पर वो जाने के लिए जिद कर रही है। तुम्हे उसकी सुरक्षा का ख्याल रखना होगा।

राजेश _मां जी, आप चिंता बिलकुल न करे। दिव्या जी की जवाबदारी मेरी है।

वैसे गीता दीदी, सुना है आप भी जा रही हो, मेले में,,,

गीता _हा राजेश, वैसे मुझे तो मेला पसंद नही है, उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी आ रहे है तो मुझे भी जाना होगा।

पिता जी और मैं साथ ही निकलेंगे।

सुरक्षा के लिए, कुछ जवान भी हमारे साथ रहेंगे।

राजेश _ओह, ये तो अच्छी बात है।

लंच करने के बाद,,,

दिव्या _राजेश, मै जल्दी आती हूं तैयार होकर, फिर निकलेंगे।

राजेश _ठीक है, दिव्या जी।

दिव्या अपने कमरे में चली गई।

राजेश _गीता दीदी, आप लोग कितना समय निकल रहे हो।

गीता _हम लोग 12बजे यहां से निकल जायेंगे, राजेश।

2बजे तक वहां हमे पहुंचना है।

कुछ देर में ही दिव्या तैयार होकर आई, वह सलवार सूट में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

दिव्या _अच्छा राजेश, चलो चलते है।

दोनो हवेली से बाहर आए,

दिव्या _राजेश, तुम गाड़ी ड्राइव करोगे न की, ड्राइवर को लेकर चलें।

राजेश _दिव्या जी मै कार ड्राइव कर लूंगा।

राजेश और दिव्या कार से निकल गए।

दोनो पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गए।

दिव्या ने वहा भर्ती हुवे पेसेन्ट का पहले हाल चाल जाना, नर्सों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।

फिर वहा से दोनो। ग्यारह बजे

गणेश पुर के लिए निकल गए।

रास्ते में घने जंगल, पहाड़ एवम घांटी पड़ा, प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनद लेते हुए दोनो कब मेला स्थल पहुंचे, समय का पता ही नहीं चला।

करीब दो घंटे मेंवे दोनो मेला स्थल पहुंच गए।

मेला में लोगो की काफी भीड़ थी।

दिव्या _राजेश चलो पहले गणेश मंदिर चलते है वहा, भगवान गणेश जी का दर्शन करते हैं फिर मेला घूमेंगे।

राजेश _ठीक हैं दिव्या जी,,

मंदिर में दर्शन करने के लिए लोगो की कतार लगी थीं।

वे दोनो भी कतार में खड़े हो गए। करीब आधा घंटा के बाद वे उन्हें भगवान गणेश का दर्शन हुवे।

जब वे मंदिर से दर्शन कर निकले,,,

दिव्या _राजेश, तुमने भगवान से क्या मांगा?

राजेश,_इस क्षेत्र के लोगो की सुख शांति और तरक्की।

और आपने क्या मांगा?

दिव्या _मैंने मांगा, हम ऐसे ही दोस्त बनकर रहे कभी हमारा साथ न छूटे।

राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,

राजेश _दिव्या जी ये आपने क्या मांग लिया।

दिव्या _, क्यू, कुछ गलत मांग लिया क्या?

राजेश _नही दिव्या जी बात ऐसी नही है, तुम्हारी शादी हो जायेगी, फिर तुम चले जावोगी, अपने पति के संग, फिर हमारा साथ कहा रहेगा।

दिव्या _ये सब तो मैंने सोचा ही नहीं,,,

मतलब मेरी प्रार्थना अधूरी रहेगी,,,

राजेश _आपको भगवान से ऐसी प्रार्थना नही करनी चाहिए थी, जो पूरी न हो सके।

आप एक काम करो! भगवान गणेश से क्षमा मांग कर, कोई दूसरा मुरादे मांग लो,,

दिव्या _, शायद तुम ठीक कह रहे हो, मुझे भगवान से क्षमा मांग कर दूसरी प्रार्थना करनी चाहिए।

दिव्या ने अपनी आंखे बंद कर ली।

जब उसने अपनी आंखे बंद की, और भगवान गणेश से फिर प्रार्थना की।

हे भगवान, राजेश और मेरी दोस्ती कभी न टूटे बस यहीं प्रार्थना है मेरी।

दिव्या ने अपनी आंखे खोली,,,

राजेश _अब आपने भगवान से क्या मांगा?

दिव्या _यही की हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहें।

राजेश _हा, ये आपने भगवान से सही मांगा।

मैं आपसे वादा करता हूं, दिव्या जी, हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहेगी। चाहे इसके लिए मुझे कितना बडा त्याग भले ही क्यूं न करना पड़े?

दिव्या _शुक्रिया, राजेश।

चलो अब मेला घूमते है।

दोनो मीना बाजार पहुंचे,,,

दिव्या _राजेश, चलो न आकाश झूला में बैठते हैं।

राजेश _न बाबा मुझे डर लगता है आकाश झूले से।

दिव्या, हसने लगी,,,

राजेश तुम्हे डर लगता है?

राजेश _हां, क्या मैं इंसान नही हूं।

दिव्या _, क्या तुम मेरे शौक पूरा करने साथ नही बैठ सकते।

राजेश _दिव्या जी कही ऐसा न हो की आपकी शौंक पूरा करने के चक्कर में मेरे प्राण निकल जाए।

दिव्या _ठीक है, मत बैठो, मै घर जा रही, मुझे नहीं घूमना है मेला।

राजेश _ओ हो, दिव्या जी, तुम भी न, कितनी जिद्दी हो,,, अच्छा चलो, तुम्हारे साथ,, झूले से गिर भी जायेंगे तो कोई डर नहीं,,,

दिव्या खुश हो गई,,,

दोनो झूले पर बैठे,,,

राजेश _दिव्या जी मुझे डर लग रहा है?

दिव्या _राजेश कुछ नही होगा। अच्छा तुम अपनी आंखे बंद कर लो।

राजेश ने अपनी आंखे बंद कर दिया।

झूला घूमना प्रारंभ हुआ।

दो तीन चक्कर के बाद, राजेश का डर जाता रहा। उसने अपनी आंखे खोल दिया।

दिव्या _राजेश बोलो कैसा लग रहा है?

राजेश _दिव्या जी आकाश झूले में तो बहुत मजा आ रहा है? मै बेकार ही अब तक इसमें बैठने से डरता था। शुक्रिया आपका।

दोनो आकाश झूले का मजा लिए। उसके बाद,,,

दिव्या _राजेश चलो, वहा जल परी का शो ढिखाया जा रहा है, चलो न देखते हैं।

दोनो जलपरी देखने लगे।

वहा से निकलने के बाद,

दिव्या _राजेश मुझे भेल पूरी खाना है।

राजेश ने दो प्लेट भेलपुरी ऑर्डर किया।

दिव्या _राजेश यहां तो सर्कस भी आया huwa है, चलो न सर्कस देखते है?

राजेश _, दिव्या जी ये सर्कस तो 3घंटे का शो है। इसे देखेंगे तो मेला पूरा घूम नही पाएंगे।

इधर 12बजते ही गीता और ठाकुर अपने अपने जीप पर बैठ गए। साथ में उसके बॉडी गार्ड।

ठाकुर के साथ, माखन बैठा था। साथ में एक उसके कुछ आदमी भी बैठे थे सुरक्षा के लिए।

जब वे लक्षमण पुर पहुंचे। जवानों की एक टुकड़ी भी उसके आगे और पीछे चलने लगे। जो आई जी के आदेश से ठाकुर की सुरक्षा के लिए लगाया गया था।

वे 2बजे गणेश पुर मेला स्थल पहुंचे गए। सभी विधायक और सांसद वहा पहुंच चुके थे। अब मुख्यमंत्री के आने का इंतजार कर रहे थे।

मेले में एक मंच बनाया गया था। जहां पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने थे।

कुछ देर बाद मुख्यमंत्री जी हेलीकाफ्तर से मेला स्थल पहुंचे।

वहा मेले के समिति द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री द्वारा मेला का उद्घाटन किया गया।

माइक संचालक ने सभी नेताओ को एक एक कर सभा को संबोधित करने के लिए बुलाया।

विधायको ने एवम मंत्री ने अपने सरकार के द्वारा किए गए कामों के बारे में लोगो को बताया। चलाए जा रहे योजनाओं की जानकारी दिया गया, और भविष्य में क्या योजनाएं है इससे भी लोगो को अवगत कराया।

आने वाले चुनाव में अपनी पार्टी को सपोर्ट करने के लिए लोगो से अपील की।

इधर भूरा ने अपने साथियों को भेस बदलकर मेला में भेजा था ताकि वहा क्या चल रहा है कि पल पल की खबर उन्हे मिलता रहे।

फ़ोन के माध्यम से भूरा के साथी, भूरा को पल पल की जानकारी दे रहे थे।

इन सब से बेखबर, दिव्या और राजेश दोनो मेले का आनंद ले रहे थे।

मेले में एक खेल आया था। 6गिलास को एक के ऊपर एक रखा था। एक गेंद से जो 6गिलास को नीचे गिरा देगा। उसे टीवी इनाम पर दिया जायेगा।

बहुत से लोग प्रयास कर रहे थे, पर कोई सफल नही हो पा रहे थे।

दिव्या _राजेश मुझे भी, वह गिलास गिराना है।

राजेश _, भईया जी, हमारी राजकुमारी को भी गिलास गिरानी है बॉल दो,,

दिव्या, ने कई बार प्रयास किया पर वह सफल नही हुई।

दुकानदार मुस्कुराने लगा,,,

दिव्या को बहुत गुस्सा आया,,

दिव्या _राजेश मुझे वो टीवी चाहिए।

राजेश _भईया जी आपका टीवी, मैम को पसंद आ गया है। उसे लाओ हमे दे दो। बदले में इसकी कीमत ले लो।

दुकानदार हसने लगा,,

बाबू जी ये टीवी बिकाऊ नहीं है। ये गिलास गिराओ और इनाम ले जाओ।

दुकानदार हसने लगा।

दिव्या को गुस्सा आया।

दिव्या _राजेश मुझे ये टीवी चाहिए।

राजेश _पर दिव्या जी दुकानदार तो गिलास देने तैयार नहीं,,

कहता है गिलास गिराओ।

दिव्या _तो गिलास गिरा दो,,

राजेश _क्या? ये इतना आसान है क्या? जिसे सुबह से कोई नहीं गिरा पाया है उसे,,

दिव्या _मै कुछ नही जानती, गिलास को गिराओ तभी मैं यहां से जाऊंगी।

राजेश _दिव्या जी ये आपको लगता है मुझसे हो पाएगा।

दिव्या _हां,,

राजेश _और नही huwa तो,,

दिव्या _मै घर नहीं जाऊंगी। जब तक गिलास नही गिरेंगी।

राजेश _दिव्या जी आप तो बिलकुल बच्ची बन गई है?

अब तो कोशिश करनी ही पड़ेगी,,

दो भईया बाल दो,,,

दुकानदार _लो बाबू ये 6बाल लो, अगर तुमने ये छै बालो में भी ये सभी गिलास गिरा दिए तो भी ये टीवी आपकी।

दुकानदार हसने लगा।

राजेश,_ये तो बड़ी अच्छी बात है भाई।

राजेश ने बाल लिया,,

निशाना लगाया,,,

दिव्या हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करने लगी।

राजेश ने निशाना लगाकर तेजी से गिलास को फेका।

एक ही बाल में सभी गिलास हवा में उड़ गए।

एक गिलास तो दुकानदार के मुंह पे लगा। वह अपना मुंह पकड़ कर बैठ गया। सभी दंग रह गए।

लोग ताली बजाने लगे।

दिव्या ने खुशी के मारे राजेश की गालों को चूम लिया।

राजेश दंग रह गया।

दिव्या, ने दुकानदार से ईनाम मांगा।

दुकानदार का मुंह लटक गया था।

उसने टीवी के बदले पैसे देने की बात कही।

दिव्या नही मानी,

हमे टीवी ही चाहिए। ये जो लगाए हो।

आखिर मजबूर होकर दुकानदार को टीवी देना ही पड़ा।

दिव्या ने वह टीवी, वहा पर भीख मांग रहे भिखारी को दे दिया।

दोनो वहा से चले गए,,

राजेश _दिव्या जी ये नही करना था, सबके सामने,,

दिव्या _सॉरी, खुशी में एक्साइटटेट हो गई,,,

अब तो मुझे भी बड़ी शर्म आ रही है, आखिर ये मूझसे कैसे हो गया।

इधर सभी नेता के संबोधन के बाद अंतिम संबोधन मुख्य मंत्री जी का चल रहा था।

संबोधन समाप्त होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री जी कुछ देर रुकने के बाद, हेलीकाफ्टर राजधानी के लिए निकल गए।

उसके बाद सभी विधायक और धरमपुर के सांसद भी अपने गंतव्य की और प्रस्थान करने के लिए। निकल पड़े। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए।

उन सभी को एक साथ वहां से निकलने के लिए कहा गया। आगे पीछे जवानों से वाहन उनकी सुरक्षा में चलने लगे।

इधर भूरा के साथी इस बात की जानकारी। भूरा को दे दिया की नेताओ का काफिला यहां से रवाना हो गया है। आधे घण्टे में वे निर्धारित स्थल पर पहुंच जायेंगे।

भुरा ने अपने साथियों से तैयार रहने के लिए कहा।

वे काफिला का आने का इंतजार करने लगे।

वे सड़क के दोनो ओर पहाड़ पे उगे घने पेड़ में छुपे थे। पहाड़ को काटकर सड़क बनाया गया था।

जैसे ही नेताओ का काफिला यहां पहुंचा।

सड़क पर टिफिन बम लगा दिया था।

उसमे बड़ा धमाका हुआ। जवानों को वाहन पलट गया।

नक्सलियों ने गोली बरसाना सुरू कर दिया।

इधर जवानों ने भी मोर्चा सम्हाला।

ठाकुर के आदमियों ने भी नक्सलियों पर गोली बरसाना सुरु किया।

नक्सलियों ने चारो तरफ से काफिला को घेर कर गोली बरसाना सुरू कर दिया।

नक्सली पेड़ में छुप कर हमला कर रहे थे।

उन्हे ज्यादा नुकसान नहीं हो रहा था। इधर जवान और ठाकुर के आदमी एक एक कर शहीद होने लगे।

क़रीब आधा घंटे तक जवानों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चला, सभी जवान और ठाकुर के आदमी शहीद हो गए।

माखन अंत तक हिम्मत नही हारा, वह लड़ता रहा। फिर भूरा ने उस पर निशाना साधा, और वह भी मारा गया।

गीता का बॉडीगार्ड ने बडा बहादुरी दिखाया पर अंत में वह भी शहीद हो गया।

जब जवानों के तरफ से फायरिंग बंद हो गया। तब भुरा और उसके साथी, सड़क पर आ गए और वाहनों को घेर लिए।

वे वाहनों पर बैठे नेताओ से पूछने लगे तुम कौन हो।

कल्लू _ये तो यहा का सांसद है इसका क्या करना है?

भुरा _ये शाला हमारा विरोधी है, उड़ा दो इसे।

नक्सलियों ने उसे गोली से उड़ा दिया।

उसके बाद विधायको को भी उड़ाने लगे।

गणेश पुर के विधायक को छोड़ दिया, ये हमारा आदमी है। इसे छोड़ दो।

भुरा _ठाकुर किसमे बैठा है ढूंढो?

एक नक्सली ने कहा _भुरा भईया ठाकुर यहां बैठा है।

भुरा उसके पास गया।

भूरा _ठाकुर, अपने हाथ ऊपर कर दो और चुप चाप हमारे साथ चलो।

कल्लू _भईया, इसमें एक लङकी बैठी है, इसका क्या करे। गीता जिला अध्यक्ष,

भुरा वहा आया,,,

वह गीता को देखने लगा,,,

भुरा _बड़ी खूबसूरत है,,,

इसे भी ले चलो, ये हमारा मन बहलाएगी,, हा हा हा हा,,

ठाकुर _नही मेरी बेटी को छोड़ दो,, मै तुम्हारे साथ चलने तैयार हूं, पर मेरी बेटी को छोड़ दो,,

भुरा _छोड़ देंगे, तुम्हारी बेटी को, पर इस पर हमारा दिल आ गया। बड़ी खूबसूरत है तुम्हारी बेटी। कुछ दिन हमारे मन बहलाएगी फिर छोड़ देंगे।

गीता को नीचे उतरने कहा,,

भुरा ने गीता की गालों को हाथ से छुना चाहा।

गीता ने भुरा की गाल पर एक तमाचा जड़ दिया। बदतमीज मुझे हाथ मत लगाओ।

भुरा _साली, अकड़ दिखाती हैं, मुझ पर हाथ उठाती है भुरा पर, तुझे तो ऐसे रगडूंगा। जिंदगी भर किसी और से रगड़ने लायक नहीं रहेगी।

ले चलो साली को।

नक्सली ठाकुर और गीता को अपने साथ जंगल में ले गए साथ में जो साथी उसके घायल हो गए थे उसे भाई अपने साथ ले गए।

इधर दिव्या ने राजेश का चुम्मन लेने के बाद से शर्म से गड़ी जा रही थीं। उसे अब मेले में मन नहीं लग रहा था।

दिव्या _राजेश चलो अब घर चलते है। घर पहुंचते शाम हो जायेगा।

राजेश और दिव्या, वहा से घर के लिए निकल पड़े थे।

जब वे घटना स्थल के पास पहुंचे।

उसने वहा मौजूद लोगो से पूछा क्या हुआ है यहां?

लोगो ने बताया की नेताओ पर नक्सलियों ने हमला कर दिया।

दिव्या पागलों की तरह गीता और ठाकुर को ढूंढने लगीं।

माखन वहा सड़क पर पड़ा huwa था।

वह अंतिम सांस ले रहा था।

दिव्या _माखन, दीदी और पिता जी कहा है? रोते हुए बोली।

माखन आंखे खोला।

माखन लड़खड़ाते जुबाने से बोला, नक्सली दोनो को जंगल में ले गए।

राजेश _किधर ले गए,,

माखन ने उंगली से इशारा कर बताया,, और उसकी सांसे चली गई।

राजेश ने ठाकुर के जीप से हथियार ढूढा, उसे गन और चाकू मिला। वह उसे लें लिया।

राजेश _दिव्या जी, तुम यहीं रुको। पुलिस वाले यहां आएंगे। वो तुम्हे घर तक छोड़ देंगे। मै गीता को लेकर लौटूंगा।

दिव्या _नही, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगी।

राजेश _नही आपकी जान को वहा खतरा हो सकता है, तुम यहीं रुको।

दिव्या _नही, मै साथ चलूंगी। चाहे जो हो जाए।

राजेश, दिव्या को समझाने की कोशिश किया पर वह नही माना।

वह भी राजेश के पीछे पीछे जाने लगीं।

दिव्या _राजेश, यहां देखो। खून के निशान,,,

राजेश _लगता है नक्सली इधर ही गए है,,,

जो नक्सली जख्मी हुए थे उनके खून जमीन पे गिरे हुवे थे। खून के निशान देखकर दोनो जंगल में आगे बढ़ते गए।

वे जंगल में काफी अन्दर तक चले गए।

कही कोई नजर नहीं आ रहा था।

कुछ देर सुस्ताने के बाद वे फिर आगे बढ़े।

घने जंगलों के बीच पहाड़ के नीचे उन्हें टेंट नजर आया।

दिव्या _राजेश वो देखो।

वे दोनो, नक्सलियों के ठिकाने तक पहुंच चुके थे।

राजेश ने देखा टेंट के चारो ओर 500मीटर के सर्कल में कुछ नक्सली पहरा दे रहे थे।

दिव्या _,, राजेश अब क्या करे।

राजेश _अभी हम कुछ नही कर सकते।

हमे रात होने का इंतजार करना होगा।

तब तक हमे यहां से निकलने का रास्ता ढूंढना होगा।

राजेश जंगल में नक्सली के ठिकाने के चारो ओर भागने के लिए रास्ते तलासने लगा।

तभी उसने देखा की ठिकाने से करीब एक km दूर एक नदी बह रही है।

राजेश को भागने का रास्ता मील चुका था।

राजेश _,, हम इस नदी के रास्ते से जायेंगे।

वे दोनो नदी के किनारे पहुंचे।

दिव्या _पर हम नदी से जायेंगे कैसे?

राजेश ने आसपास के पेड़ के डालियों को तोड़ना शुरू कर दिया फिर पेड़ की डालियों को लताओं से बांध कर गठ्ठा बना दिया।

राजेश हम इस गट्ठे पर बैठ कर नदी के रास्ते निकल जायेंगे।

धीरे धीरे रात हो गई।

इधर नक्सली लोग। जो साथी जख्मी हो गए थे। उनका उपचार कर रहे थे। तो कुछ लोग भोजन बना रहें थे।

कुछ लोग पहरा दे रहें थे।

ठाकुर और गीता के दोनों हाथ बांध दिए गए थे।

दोनो को एक टैंट में रखे थे।

टैंट में भुरा आया।

ठाकुर _देखो, भुरा मेरी और तेरी कोई दुश्मनी नहीं है। तुम मुझे और मेरी बेटी को छोड़ दो। बदले में जितना धन कहोगे उतना मेरा साथी तुम्हारे पास छोड़ दिया करेंगे।

भुरा _ठाकुर, मुझे पता नहीं लाखन काका की तुमसे क्या दुश्मनी है। पर उसने मुझे चैलेंज किया था, अपनी ताकत दिखाने। तुम्हे अगवा कर उसके सामने पेस करने।

मुझे कमांडर का विश्वास जीतना था। मै तुम्हे लाखन के हवाले कर दूंगा। फिर लाखन तुम्हे छोड़े या मारे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

वैसे मैं तुम्हे मै छोड़ सकता हूं, अगर तुम्हारी बेटी मेरे साथ खुशी खुशी जंगल में रहने तैयार हो जाए।

भुरा _बोलो दिलरुबा क्या कहती हो।

भुरा ने फिर से गीता को छूने की कोशिश किया।

गीता _कुत्ते मुझे हाथ मत लगाओ। मेरे पास भी आया तो ठीक नहीं होगा।

ठाकुर _, भुरा मेरी बेटी को कुछ मत करो, मै तेरी पैर पड़ता हूं।

भुरा _ठाकुर, भुरा को जो चीज पसंद आ जाती है, उसे हर हाल में पाकर रहता है।

कुछ देर और फड़ फड़ा ले मेरी रानी फिर जंगल में तुम्हारी चीखे निकलेगी।

इधर भोजन बन जाने के बाद, सभी नक्सली भोजन करने लगे।

ठाकुर और गीता को भी भोजन करने के लिए दिया। पर वे नही किए।

इधर भूरा और कल्लू मुर्गा पार्टी करने लगा।

कल्लू _भुरा भईया, शराब के बाद, उन लड़कियों को बुलाऊं क्या जो गांवों से उठा कर लाए थे।

नशा चढ़ने के बाद chut मारने का मजा ही कुछ और है।

भुरा _सच कहा तुमने, लेकिन उन लड़कियों के साथ तुम मजा करो। आज तो मैं उस गीता का सिल तोडूंगा। साली ने भुरा पे हाथ उठाया है न, जाओ उसे यहां लेकर आओ।

कल्लू ने टैंट के आस पास के पहरे दारो से गीता को लाने को कहा।

पहरे दार, गीता को टैंट से घसीटते हुवे। भुरा के टैंट पे ले आया।

कल्लू _लो भईया तुम्हारी बुलबुल तो आ गई। अब तुम मजे करो, मै भी चलता हूं मजे करने।

कल्लू वहा से चला गया।

इधर राजेश ने पहरेदारों को एक एक कर मारना सुरू कर दिया।

एह पहरेदारों पर अचानक से हमला करता और उसका मुंह बंद कर उसका गर्दन घुमा कर तोड़ देता। बिना चीखे उसके प्राण पखेरू उड़ जाते।

उसने अपना कपड़ाउतार कर नक्सली यो का कपड़ा पहन लियाऔर दिव्या को भी पहनने बोल दिया ताकि नक्सलीउसे अपना साथी समझे।

एक एक कर बाहर सर्कलके पहरेदारों को खत्म करने के बाद।

वे अन्दर गए और छुपकर मुआइना करने लगे की ठाकुर और गीता को कहा रखे है।

तभी ठाकुर टैंट से बाहर आया, वह गीता को छोड़ देने गिड़गिड़ा रहा था।

पहरेदार _तेरी बेटी के साथ तो भूरा भईया, सुहागरात मना रहा है , हा हा हा हा,,

पहरेदार उसे धकियाते हुवे अन्दर ले गया।

राजेश को पता चल गया की ठाकुर किस टैंट में है।

इधर सभी नक्सली अपने अपने टैंट में सोने लगे सभी थके हुए थे।

सिर्फ पहरेदार ही बाहर पहरा दे रहें थे।

राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।

वे दोनो ठाकुर के टैंट में गए।

दिव्या _पिता जी,,,

ठाकुर _, बेटी तुम यहां।

दिव्या _हा हम तुम लोगो को बचाने आए है।

दीदी कहा है।

ठाकुर _बेटी, गीता को भूरा के पास ले गए हैं, वो उसके इज्जत के साथ खेलना चाहता है, उसे बचा लो।

राजेश _दिव्या जी तुम ठाकुर को लेकर नदी किनारे पहुंचो मैं गीता दीदी को लेकर आता हूं।

ठाकुर और दिव्या दोनों वहा से छुपतेछूपाते चले गए।

इधर राजेश टैंट के सामने पहरेदार बनकर खड़ा हो गया।

इधर भूरा गीता के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था।

गीता उसका विरोध कर रही थी।

भुरा _अरे आजा मेरी जान क्यू तडफा रही है। यहां तुझे बचाने वाला कोई नहीं है, हा हा हा हा,,

गीता की चीख सुनकर राजेश को पता चल गया, की गीता कहा है।

राजेश उस टैंट की ओर गया। कुछ नक्सली उसे देखे पर राजेश को सपना साथी समझने लगे।

राजेश ने देखा टैंट के बाहर, कुछ पहरेदार है।

जो गीता की सोर सराबे पर हस रहे थे।

राजेश ने मोबाइल की टार्च ऑन किया। झाड़ी में और छिप गया।

पहरेदार _अबे वहां किसी ने टार्च मारी देखो कौन है?

एक पहरे दार वहा गया, राजेश ने उसे खत्म कर दिया।

जब वहां मौजूद पहरेदार को लगा की उसका साथी अब तक आया नही है। एक एक कर उस ओर जाने लगे, राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।

अंत में सिर्फ एक पहरे दार बच गया, राजेश उसके पास जाकर उसे खत्म कर दिया।

इधर भूरा गीता की साड़ी खींचकर अलग कर दिया था।उसे खाट में लिटा कर हाथ खाट से बांध कर, उसकी ब्लाउज को फाड़ने केलिए पकड़ लिया था।

वह उसकी ब्लाउज फाड़ने ही वाला था की राजेश टैंट में घुस गया।

भुरा राजेश की ओर मुड़ कर देखा।

राजेश ने फुर्ती दिखाते हुए, एक भुजा से गर्दन पकड़कर उसका मुंह बंद किया, और दूसरे हाथ से चाकू से उसका गला काट दिया।

भुरा वही ढेर हो गया,,,

उसने गीता के हाथ खोले जो खाट से बंधा था।

गीता राजेश को पहचान नहीं पा रही थीं,,

राजेश _गीता दीदी, मै राजेश हूं

गीता _, राजेश तुम यहां,,

वह राजेश से लिपटकर रोने लगी,,

राजेश _, दीदी, चुप हो जाओ,,, उसके मुंह को बंद कर दिया, हमे यहां से निकलना है।

गीता _पर पिता जी इनके कब्जे में है।

राजेश _,, तुम उसकी चिंता मत करो, ,,

उसे छुड़ा लिए है।

राजेश ने गीता को मरे पड़े पहरेदार का कपड़ा उतार कर गीता को दे दिया।

दीदी इसे पहन लो,,,

राजेश टैंट के बाहर खड़ा हो गया।

गीता अपनी पेटीकोट उतार कर नक्सली ड्रेस पहन ली।

फिर दोनों वहा से छिपते छिपाते नदी की ओर जाने लगे।
 
शुक्रिया आप सभी मित्रो का।
 
राजेश, गीता को लेकर छुपते छुपाते नदी किनारे पहुंचा। जहां दिव्या उन दोनों का इंतजार कर रही थीं।

दिव्या ने गीता को देखते ही गले लगा ली।

दिव्या _दीदी तुम ठीक तो हो न।

गीता _, मै ठीक हूं छोटी, अगर राजेश समय पर नहीं पहुंचता,तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहती।

राजेश _, देखो, बाते बाद में करती रहना। चलो हम दोनों को यहां से निकलना होगा।

राजेश ने पेड़ के टहनियों का जो गठ्ठा बनाया था । उसे नदी में डाला , फिर गीता और दिव्या को बिठा दिया। ठाकुर को भी बैठने के लिए बोल दिया।

ठाकुर भी उसमे बैठ गया।

उसके बाद राजेश उस गट्ठे को धक्का देते हुए। नदी की धार तक ले गया। गठ्ठा नदी की धार में बहने लगा।

राजेश तैरते हुए , गट्ठे को पकड़ लिया।

उसमे तैरने की की कोशिश करने लगा, पर जैसे ही वह गट्ठे पर बैठा, लकड़ी का गठ्ठा पानी में डूबने लगा।

राजेश फिर से पानी में आ गया।

दिव्या _राजेश क्या huwa

राजेश _दिव्या जी, यह गठ्ठा हम चारो का भार नहीं सह पा रहा है। मुझे पानी में ही रहना होगा।

राजेश, गट्ठे का पकड़ा रहा, गठ्ठे के साथ वह भी पानी में बहता रहा।

दिव्या _, राजेश पानी बहुत ही ठंडा है।

अगर तुम ज्यादा देर तक पानी में रहे तो, तुम्हारे स्वास्थ पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।

गीता _हा राजेश, दिव्या ठीक कह रही है।

राजेश _, दिव्या की,मुझे कुछ नहीं होगा, मेरी चिंता मत करो।

उधर नक्सलियों को जब पता चला की ठाकुर और गीता फरार हो गया है, उसका लीडर भूरा मारा गया है, हड़कंप मच गया।

नक्सली,_कल्लू भईया, ये ठाकुर और उसकी बेटी तो बड़े चालक निकले। यकीन नहीं हो रहा ये ठाकुर भूरा जैसे हमारे ताकतवर को ऐसे मार देगा की उसकी चीख भी नहीं निकल पाई।

कल्लू,_मुझे लगता है ठाकुर और उसकी बेटी को बचाने ज़रूर कोई आया होगा। उन लोग अभी आस पास ही होंगे। चप्पा चप्पा छान मारो, साले कही भागने न पाए।

नक्सली रात के अंधेरे में जंगल में छान मारने लगा।

इधर नदी के तेज बहाव में बहते बहते चारो काफी दूर निकल गए।

पर पानी बहुत ठंडा था। राजेश का शरीर ठंडा पड़ने लगा। उसका खून जमने लगा।

इधर news के माध्यम से घटना की खबर पूरे देश में फैल गया।

गृह मंत्रालय मे घटना को लेकर मंत्री और पुलीस अधिकारियों के बीच बैठके होने लगा।

मंत्री ने आई जी को नक्सलियों के खिलाफ कड़े एक्सन लेने और ठाकुर और उसकी बेटी को छुड़ाने का आदेश दिया।

इधर कल्लू और उसके साथियों ने ठाकुर और उसकी बेटी की तलाश में आस पास पूरे जंगल को छान मारा लेकिन वे उसकी पहुंच से काफी दूर निकल गए थे।

इधर राजेश का शरीर ठंडे पानी से अकड़ने लगा।

उसे बेहोशी छाने लगा।

दिव्या को राजेश की बड़ी चिन्ता हो रही थी।

उसने राजेश को कई बार आवाज दिया लेकिन राजेश ने कोई जवाब नही दिया।

उसका पूरा शरीर जमने लगा था। पर सांसे अभी चल रहा था।

दिव्या राजेश के हाथ को पकड़े रखा कही कही उसका हाथ छूट जाता तो राजेश पानी में समा न जाए।

दिव्या _दीदी, राजेश बेहोश हो गया है, हमे जल्दी ही पानी से बाहर निकालना होगा। नही तो अनर्थ हो जाएगा। पिता जी आप कुछ कीजिए।

ठाकुर,_, बेटी हम कर भी क्या सकते हैं अंधेरे में नदी का किनारा भी नहीं दिख रहा है।

तभी नदी का बहाव धीरे धीरे कम होने लगा। शायद नदी पर आगे बांध बना था।

पानी बांध में रुका हुआ था।

तभी दिव्या को कुछ रोशनी दिखाई पड़ा।

दिव्या _दीदी देखो उधर वहा रोशनी दिखाई पड़ रही है। लगाता है वहा कोई है, हमे मदद मांगनी चाहिए।

ठाकुर _बेटा इस घने जंगल में कौन हो सकता है कही नक्सली न हो। हमे खतरा मोल नहीं लेना चाहिए।

गीता _पिता जी जो होगा देखा जाएगा, राजेश ने हमारे लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।

हम उसे ऐसे मरने नही दे सकते।

दिव्या ने आवाज लगाई,,,

दिव्या _कोई है, हमारी मदद कीजिए।

दिव्या की आवाज आदमियों तक पहुंची।

एक आदमी _ये आवाज कैसी?

दूसरा आदमी _नदी के बीच से आ रही है।

उसने टार्च मारी,,,

एक आदमी _कुछ लोग है, जो मदद के लिए पुकार रहे हैं।

दरअसल ये लोग मछली पकड़ने वाली थे जो बांध में रात जाल डालकर मछली पकड़ते थे।

वे दोनों अपना नाव लेकर मदद करने उन लोगों के पास पहुंचे।

दिव्या _कृपया हमारी मदद कीजिए। हम आपके अहसान मंद रहेंगे।

एक आदमी _आइए आप लोग इस नाव में आ जाइए।

दिव्या _पहले राजेश को नाव में डालना होगा, उसका पूरा शरीर ठंडे पानी से अकड़ गया है।

राजेश को पानी से निकालकर नाव में डाला गया।

उसके बाद सभी नाव में सवार होकर किनारे तक पहुंचे।

नदी किनारे एक झोपड़ा बनाया गया था। जिसमे मछली पकड़ने वाले रात बिताते और निगरानी करते थे।

वहा एक खाट था, राजेश को खाट में लिटा दिया गया।

राजेश बेहोश था। उसका शरीर अकड़ गया था।

दिव्या ने जांच किया तो पाया उसकी सांसे अभी भी चल रही है।

दिव्या _, दीदी राजेश की सांस चल रहीं है। हमे इसे गर्मी देना होगा।

दिव्या _दीदी, हमे राजेश के गीले कपड़े उतारने पड़ेंगे।

आदमियों में एक बूढ़ा था, तो एक अधेड़ उम्र का था।

दिव्या ने सभी को बाहर जाने के लिए कहा।

ठाकुर और मछली पकड़ने वाले बाहर चले गए, वे बाहर लकड़ी जलाकर तापने लगे।

इधर दिव्या और गीता ने राजेश के सारे गीले कपड़े निकाल कर अलग कर दिया। उसकी शरीर के गिलेपन को कपडे से पोछा फिर कंबल ओढ़ा दिया।

दिव्या राजेश के पैर के तलवे को रगड़ने लगीं, गीता उसकी हथेली को।

राजेश के खाट के आसपास लकड़ी जलाया गया। ताकि उसका शरीर को गर्मी मिल सके ।

काफी प्रयासों के बावजूद राजेश ने आंखे नही खोली।

दिव्या _राजेश आंखे खोलो, मै तुम्हे कुछ होने नही दूंगी।

गीता _दिव्या, राजेश पर तो कुछ असर ही नहीं पड़ रहा। अब क्या करे?

दिव्या _दीदी मै राजेश को ऐसे मरने नही दे सकती, उसे बचाना ही होगा, चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करनी पड़े।

गीता _हमने सारी कोशिश कर ली, अब और क्या कर सकते हैं।

दिव्या _दीदी मुझे पता है अब क्या करना है? दीदी तुम भी बाहर जाओ।

गीता _दिव्या, तुम ऐसी क्या करने जा रही हो जो मुझे बाहर जाने कह रही।

दिव्या _दीदी, राजेश को जिश्म की गर्मी देना होगा। यही अब अंतिम उपाय है।

गीता _दिव्या ये तुम क्या कह रही हो?

दिव्या_दीदी राजेश ने हमारे लिए इतना कुछ किया है, उसके अहसान के सामने ये कुछ भी नहीं।

दीदी तुम बाहर जाओ। देखना कोई अन्दर नआए।

गीता _ठीक है दिव्या अगर तुम्हरा यही फैसला है तो,,

गीता झोपड़ी से बाहर आई।

आदमियों ने पूछा की बाबू को होश आया।

दिव्या _नही बाबा राजेश अभी भी बेहोश है।

ठाकुर _,, बेटी जो कोशिश करना था कर लिए, अब खुदा की मर्जी के सामने हम कर भी क्या सकते है,शायद राजेश इतने ही दिनों के लिए आया था।

ठाकुर मन ही मन खुश हो रहा था, अच्छा huwa जो रास्ते का कांटा निकल गया साला,,,

इधर दिव्या अपने कपडे उतार कर निर्वस्त्र हो गई। झोपड़ी पर जल रही कंडिल को बुझा दी।और राजेश के सीने को जकड़ कर कंबल ओढ़ ली।

आदमियों ने राजेश की हालात का जायजा लेने, अन्दर जाकर देखना चाहा, पर गीता ने उन्हें रोक दिया।

ठाकुर _क्या huwa बेटी, इन्हे झोपड़ी के अन्दर जाने से क्यों रोक रही हो।

गीता _दिव्या ने किसी को भी अन्दर जाने से मना किया है पिता जी।

ठाकुर _ऐसा क्या उपाय कर रहि है जो दिव्या ने किसी को अन्दर आने से मना की है।

गीता _पिता जी दिव्या एक डॉक्टर है, वो जो भी कर रही होगी, सोच समझ कर कर रही होगी।

इधर दिव्या की जिस्म की गर्मी का प्रभाव राजेश पर पढ़ने लगा।

उसकी शरीर का अकड़न कम होने लगा, शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।

धीरे धीरे राजेश के हाथ पैर में जान आने लगा।

तीन घंटे बाद उसका शरीर सामान्य होने लगा, पर उसका मस्तिष्क अभी निंद्रा की स्थिति में ही था।

धीरे धीर राजेश के शरीर को किसी औरत के जिस्म का अहसास होने लगा।

उसका शरीर गर्म होने लगा उसके लिंग में तनाव आने लगा।

राजेश का मस्तिष्क अभी भी अचेतन अवस्था में था, उसे लगा की उसके भाभी पूनम उसके कमरे में आई है और उससे लिपटी हुई है।

राजेश का लंद तन चुका था। उसने दिव्या को जकड़ लिया।

राजेश जैसे वह सपने में हो,,,,

वह दिव्य को अपनी बाहों में जकड़ कर उसके ऊपर आ गया।

दिव्या की सांसे भी तेज होने लगीं। वह राजेश के साथ निर्वस्त्र सोकर पहले ही गर्म हो चुकी थीं। जब उसे राजेश के खड़े लंद का अहसास huwa उसकी योनि से पानी बहने लगीं थीं।

राजेश जैसे नींद में हो उसने दिव्या को चूमना चाटना शुरु कर दिया, उसकी चूची को चूसने मसलने लगा।

दिव्या सिसकने लगी।

राजेश को लग रहा था कि वह घर में है और उसकी भाभी उसके साथ है।

वह अपना लंद दिव्या के chut पे रखकर दबाव डाला।

लंद chut के अन्दर नहीं जा पा रहा था।

उसने जोर लगा कर धकेल दिया।

लंद boor की झिल्ली फाड़कर अन्दर घुस गई।

दिव्या चीख उठी।

उसकी चीख बाहर बैठे लोगो को सुनाई पढ़ी।

ठाकुर _ये किसी की चीखने की आवाज, क्या huwa है दिव्या को।

ठाकुर झोपड़ी की के अन्दर जाना चाहा।

गीता ने उसे रोक दिया।

गीता _पिता जी, आप रुकिए मैं देखती हूं क्या huwa है? दिव्या ने किसी को अन्दर आने से मना किया है।

इधर गीता ने झोपड़ी के दरवाजे पे बनी छेद से अंदर देखने की कोशिश करने लगी, पर झोपड़ी में अंधेरा होने के कारण उसे कुछ दिखाई नहीं पढ़ा।

पर दिव्या की सिसकारी और चीख से उसे पता चल गया की अन्दर क्या चल रहा है। मतलब राजेश को होश आ गया है, उसे बड़ी खुशी हुई। पर दिव्या ने राजेश की जान बचाने अपनी शील भंग कर दी थीं, इस बात से उसे चिंता होने लगी।

गीता, ठाकुर के पास आ गई।

ठाकुर _क्या बात है बेटी, अन्दर दिव्या ठीक तो है न।

गीता _हा पिता जी दिव्या ठीक है।

इधर मछली पकड़ने वाले कोठाकुर ने अपना परिचय दे दिया था। और यहां से निकलने में मदद करने पर खूब सारा पैसा देने की बाते कहा।

इधर राजेश दिव्या को पूनम समझ कर उसकी chudai करने लगा और स्खलन की ओर बढ़ने लगा।

कुछ देर दर्द का का अनुभव करने के बाद दिव्या को भी राजेश के साथ संभोग में परम सुख प्राप्त करने लगी। वह भी राजेश को जकड़ ली थीं और मुंह से सिसकारी निकालने लगीं।

आखिर कुछ देर बाद राजेश ने एक जोर का धक्का मारते हुवे, अपने लंद से वीर्य की लंबी लंबी पिचकारी दिव्या के योनि में छोड़ने लगा।

दिव्या जो कई बार झड़ चुकी थीं। राजेश के गर्म वीर्य का अहसास पाकर अंत में एक बार और झड़ गई।

राजेश झड़ने के बाद एक ओर लुड़क गया। और गहरी नींद में चला गया।

गीता _कुछ देर लेटी रही, उसके बाद वह उठी और अपने कपडे पहनकर बाहर आई, सुबह के पांच बज चुके थे।

गीता _दिव्या तुम ठीक तो हो न।

दिव्या _हा दीदी।

गीता _राजेश, को होश आया।

दिव्या _हा दीदी अब वो ठीक है, अभी सो रहा है।

बूढ़ा आदमी _बिटिया , बाबू को होश आया।

दिव्या _हा बाबा अब राजेश ठीक है। अभी सो रहा है।

इधर कल्लू ने वाकी टाकी से लाखन को इस बात की जानकारी दी की भूरा मारा गया। ठाकुर और उसकी बेटी भूरा को मारकर भाग गया।

लाखन ने कहा जो भी huwa वो ठीक नहीं huwa।

सुबह होते ही सीआरपीएफ के जवान न्नक्सलियो पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। अब तुम लोगो का वहा रहना ठीक नहीं है। तुम लोग तत्काल वहा से निकलो।

और सुरक्षित जगह पर पहुंचो।

कल्लू _, पर काका हम कहा जाए।

लाखन _तुम लोग मेरे ठिकाने पर आ जाओ, ये जगह ज्यादा सुरक्षित है।

कल्लू _ठीक है काका हम अभी वहा से निकलते हैं।

कल्लू अपने साथियों के साथ अपने ठिकाने से निकल पड़े।

इधर सुबह सात बजे नींद से जागा।

उसने अपने को झोपड़े में पाया।

रात में क्या huwa उसे याद नहीं था। बस उसे इतना याद था की वह तो गीता दीदी को बचाने के लिए आया था और वे सभी नदी के रास्ते निकल पड़े थे।

उसे अनुभव huwa की कंबल के अन्दर वह बिना कपड़ो के है।

वह खाट से उठ बैठा।

देखा उसका कपड़ा वहा नही है।

उसने आवाज लगाया। कोई है,,,

गीता _लगता है राजेश जाग गया। मै देखती हूं।

गीता _अरे राजेश तुम उठ गए। कैसे हो?

राजेश _, दीदी मै ठीक हूं, मुझे क्या huwa था।हम तो नदी पे थे न, फिर ये झोपड़ी।

गीता _राजेश ठंडे पानी के कारण, तुम्हरा शरीर जम गया था। तुम बेहोश हो गए थे, तो हम तुम्हे झोपड़ी में ले आए।

राजेश _ओह, दिव्या जी कहा है, वो ठीक तो है न।

गीता _हा हम सब ठीक है।

मैं तुम्हारे कपडे लाती हूं तुम उसे पहन लेना। वह मुस्कुराते हुवे वहा से चली गई।

दिव्या ने राजेश का कपड़ा, गीता को दे दिया। उसे राजेश के पास जाने में शर्मिंदगी महसूस हो रही थी।

गीता ने राजेश को कपड़ा दे दिया। जो लकड़ी के आग से सुख चुके थे।

राजेश कपड़ा पहन कर झोपड़े से बाहर आया।

राजेश _दिव्या जी आप ठीक तो है न।

दिव्या _शर्माते हुई, हूं,,

वहा पर मछली पकड़ने वाले में से एक अधेड़ आदमी अपने घर चला गया था।पास में ही उसका गांव था।

ठाकुर , बूढ़ा आदमी से जंगल से बाहर निकलने के रास्ता के बारे में जानकारी ले रहा था, और साथ चलने के लिए कह रहा था।

राजेश _ये बाबा कौन है?

दिव्या _राजेश, बाबा ने कल रात हमारी मदद की।

राजेश _ओह, मुझे तो कुछ भी याद नहीं कल रात क्या क्या huwa?

दिव्या _क्या सच में तुम्हे कुछ याद नहीं कल रात क्या क्या huwa? वह आश्चर्य के साथ निराश होते हुए बोली।

राजेश _मुझे तो बस इतना याद है की हम नदी के रास्ते से निकले थे। नदी के बहाव के साथ आगे बड़ रहे थे।

ठाकुर _देखो, बेटी हमे यहां से अब निकलना होगा। जंगल में ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं।

ये आदिवासी हमे मुख्य सड़क तक ले जाएगा।

चलो हम निकलते है यहां से।

दिव्या _ठीक है पिता जी,,

इधर आई जी के आदेश से जवान, नक्सलियों से जवाबी कार्यवाही करने के लिए। उनके ठिकाने की ओर निकल पड़े थे।

हेलीकाप्टर से भी उसके ठिकाने को ढूंढा जा रहा था।

और आखिर कार उसके ठिकाने तक पहुंचने में जवान कामयाब हो चुके थे।

जवानों ने देखा की नक्सली वहा से भाग चुके हैं। कुछ नक्सलियों की उन्हे लाश मिली। उसमे से भूरा भी था।

जवानों के कमांडर ने यह बात अपने प्रमुख को बताया।

इधर राजेश, दिव्या, ठाकुर और गीता चारों बूढ़े आदमी के पीछे पीछे चलने लगे। तभी उन्हें हेलीकाप्टर की आवाज सुनाई पढ़ी।

हेलीकाप्टर वहा से निकल गया। घने पेड़ के कारण वे इन लोगो को देख नही पाए।

राजेश _लगता है, जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे है। हमे किसी ऊंचे भू भाग पर जाना चाहिए।

जंहा घने पेड़ न हो। ताकि वे हमे देख सके।

वे सभी ऊंचे भाग पर आ गए।

राजेश ने दिव्या का दुपट्टा मांगा।

उसे एक लंबे टहनी से बांध दिया और लहराने लगा।

कुछ देर बाद हेलीकाप्टर फिर उस ओर आया।

दुपट्टे को लहराता huws, हेलीकाप्टर पर बैठा जवान ने देख लिया। उसने पायलेट को वहा नीचे उतारने को कहा।

हेलीकाप्टर जब नीचे उतरा, चारों उसके पास गए।

राजेश ने जवान से बात किया।

जवान नेअपने प्रमुख को बताया की ठाकुर और उसकी बेटी मिल गया है।

आई जी ने उसे उनके कैंपस में लाने को कहा,,

जवान ने सभी को हेलीकाप्टर में बैठने को कहा, लेकिन हेलीकाप्टर में तीन लोग ही बैठ सकते थे।

राजेश ने जवान से कहा की इन तीनो को ले जाओ। मै आ जाऊंगा।बाबा तो है ही मुझे रास्ता बताने।

दिव्या_राजेश मै भी तुम्हारे साथ रुकूंगी। पिता जी और गीता दीदी को ले जाने दो।

इन्हे छोड़कर हमे लेने आ जायेगा।

राजेश _नही दिव्या जी आप जाए,आप मेरी चिंता न करे। मै पहुंच जाऊंगा।

ठाकुर _दिव्या बेटी, राजेश ठीक कह रहा है।

मैं आई जी साहब को बोलूंगा, की हेलीकाप्टर को राजेश को लेने भेज देगा।

दिव्या न चाहते हुए भी जाने मजबूर हो गई।

तीनो को लेकर हेलीकाप्टर उड़ गया।

इधर आई जी के पास पहुंचने के बाद, आई जी ने सारी बातों की जनकारी ली की उनके साथ क्या हुआ।

आई जी ने जवानों को तीनो को घर सुरक्षित पहुंचाने के लिए कहा।

दिव्या ने कहा की राजेश को आ जानें दो फिर हम साथ घर चलेंगे।

आई जी ने कहा की राजेश की चिंता मत करो, वो जवानों के साथ आ जायेगा।

दिव्या और गीता वाहन में बैठ गई।

ठाकुर ने आई जी कहा _आई जी साहब ये राजेश मेरी बेटी के पीछे पड़ा है। साले ने मेरी इज्जत पर कीचड़ उछालने की कोशिश की है। साला दो टकाका लड़का महलों काख्वाब देख रहा है अगर वह जंगल से न लौटे तो मैं आपको मुंह मांगा रकम दूंगा।

आई जी _ठीक है ठाकुर साहब, आप का काम हो जायेगा।

आई जी ने हेलीकाप्टर पर बैठे जवान से कह दिया की। वह लड़का नक्सलियों से मिला huwa है? उसे खत्म कर दो।

हेलीकाप्टर जैसे ही राजेश के पास पहुंचा। जवान राजेश पर गोली बरसानी शुरू कर दिया।

राजेश को समझ नही आया की, उस पर गोली क्यू बरसाया जा रहा है।

राजेश उससे बचते हुए जंगल में जा छिपा।

हेलीकाप्टर से सर्च कर राजेश को खत्म करने की बहुत कोशिश किया, पर राजेश बच निकला। वह घने जंगलों की ओर चला गया।

तभी कल्लू और उसके साथी उस रास्ते से गुजर रहे थे वे हेलीकाप्टर को देखे, उसमे बैठे जवान को किसी पर गोली बरसाते देखे।

कल्लू और उसके साथी छुपे रहें ताकि उसका लोकेशन सीआरपीएफ के जवानों को न मील सके नही तो वे हेलीकाप्टर पर हमला कर सकते थे।

जब जवान काफी देर कोशिश करने के बाद भी, राजेश को मारने में कामयाब नही हो सका। उसकी राइफल की गोलियां खत्म हो गई। वह वापस लौट गया।

हेलीकाप्टर के जाने के बाद,,,

कल्लू और उसके साथी ने राजेश को घेर लिया।

कल्लू _कौन है बे तू, पुलिस वाले तुम प र क्यू गोली चला रहा था।

राजेश _पता नही, शायद वो मुझे नक्सली समझ रहें है?

कल्लू _पर तुम जंगल में आया कैसे?

राजेश _मै दोस्तो के साथ गणेश पुर मेला देखने आया था। मै जंगल में भटक गया।

कल्लू _तू कहा का रहने वाला है।

राजेश _सूरज पुर

कल्लू _क्या तुम सूरज पुर का रहने वाला है,?

कल्लू सोंचने लगा।

नक्सली साथी _कल्लू भईया हो सकता है ये पुलिस वालो का ही आदमी हो, हमे पकड़ने उन लोगो की कोई चाल हो,,,

कल्लू _हूं,,

इसके हाथ बांध दो, और आंखो पर पट्टी बांध दो, इसे काका के पास ले जाते है। वही इसका फैसला करेगा।

कल्लू राजेश को लेकर अपने साथियों के साथ लाखन के पास जाने लगे।

इधर आई जी ने मंत्री को बताया की, हमने भूरा को खत्म कर दिया, उसके कई साथी मारे गए। ठाकुर और उसकी बेटी को भी हमने छुड़ा लिया।

मंत्री खुश हो गया।
 
सभी मित्रो का बहुंत बहुत शुक्रिया
 
आप लोगो ने साथ दिया इसलिए 500 पेज पूरा हो पाया।
 
नक्सली राजेश को लेकर, लाखन के इलाके में पहुंचा।

राघव _कल्लू, यहां पहुंचने में काफी देर कर दिए।

कल्लू _क्या बताए राघव भाई, सीआरपीएफ के जवान हेलीकाप्टर में छान मार रहा है, छुपते छुपाते यहां तक पहुंचे।

राघव _ये युवा कौन है, इसके आंखो में पट्टी क्यू बांधा गया है?

कल्लू _जब हम यहां आ रहें थे तो सीआरपीएफ के जवान इस पर गोली बरसा रहे थे।

राघव _दिखने में तो ये कोई फौजी लगता है इसे यहां क्यूं ले आए। हो सकता है ये पुलिस वालो की कोई चाल हो।

कल्लू _हम इसे यहां लाना तो नही चाहते थे, पर इसने कहा कि ये सूरज पुर का रहने वाला है।

राघव _क्या?

कल्लू _हा,

राघव _मै काका को तुम लोगो के यहां पहुंचने की खबर दे देता हू। तुम लोग इस लड़के की आंखों की पट्टी को अभी मत खोलना। और हा तुम लोग थक गए होगे, जाओ सब आराम करो।

राघव, लाखन के पास उसके टैंट में आया।

राघव _काका, कल्लू अपने साथियों के साथ यहां पहुंच चुके हैं।

लाखन _चलो ठीक है? उन्हे आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई।

राघव _वे पुलिस वालो से छिपते छिपाते यहां पहुंचे है। सभी थक चुके है। मैंने उन लोगों को आराम करने कह दिया है।

लाखन _हूं, अच्छा किया।

राघव _काका, उन लोगो ने एक युवा को अपने साथ पकड़ कर ले आया है। कह रहे थे की पुलिस के जवान उस पर गोली चला रहे थे।

लाखन _तो उसे अपने साथ यहां क्यूं ले आया?

राघव _उन लोगो ने बताया कि युवा, सूरज पुर का रहने वाला है। वह मेला देखने गणेश पुर आया था, जंगल में भटक गया।

लाखन_क्या कहा वह सूरज पुर का रहने वाला है?

राघव _उस लड़के ने तो उन लोगो को यही बताया है।

क्या करना है उस लड़के का?

लाखन _उसे मेरे पास लेकर आओ।

राघव _ठीक है काका।

राघव ने राजेश को लेकर लाखन के पास गया।

अभी भी राजेश की आंखों में पट्टी बंधा था और हाथ बंधे हुए थे।

लाखन _क्या नाम है तेरा?

राजेश _, राजेश

लाखन _दिखने में तो कोई फौजी लगते हो। पुलिस वाले तुम पर गोलियां क्यू चला रहे थे।

राजेश _शायद वो मुझे नक्सली समझ रहें होंगे।

लाखन _क्या तुम सूरज पुर के रहने वाले हो?

राजेश _जी।

लाखन _तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है,?

राजेश _जान कर क्या करोगे?

राघव_देखो तुम हमारे कब्जे में हो, तुम्हे जो भी पूछा जा रहा है उसका सच सच जवाब दो।

राजेश _, और न दू तो।

लाखन_तो हम यही समझेंगे की तुम झूठ बोल रहे हो। तुम एक पुलिस वाले हो और जासूसी करने आए हो।

बताओ, तुम्हारे पिता जी का नाम क्या है?

राजेश _शेखर

लाखन, चौंका,,

लाखन _क्या? तुम शेखर के बेटे हो, मानव प्रसाद का मंझला लड़का

राजेश _, तुम मेरे दादा जी को कैसे जानते हो?

लाखन _ राघव,इसके आंखो की पट्टी खोल दो।

राघव ने राजेश की आंखों की पट्टी खोल दिया।

लाखन ने राजेश के चेहरे को गौर से देखा।

लाखन _तुम्हारी शकल तुम्हारे दादा जी से काफी मिलती है।

राघव इसके इसके हाथ खोल दो। और तुम यहां से जाओ।

राघव ने राजेश का हाथ खोल दिया और वहा से चला गया।

लाखन सिगरेट निकाल कर, जलाया और पीने लगा।

राजेश _क्या तुम मेरे पिता जी को जानते हो।

लाखन _वो मेरा जिगरी दोस्त था।

राजेश _, क्या?

लाखन,_हा, मै भी सूरज पुर का रहने वाला हूं। मै और शेखर जिगरी दोस्त थे।

राजेश,_पर पापा ने आपके बारे में कभी बताया नही।

लाखन _वो क्या बतायेगा? की एक हत्यारा उसका दोस्त है, जो नक्सली बन गया है।

राजेश _क्या, तुमने हत्या किया है?

लाखन _नही मैंने हत्या नही किया है? पर सब यही समझते है?

राजेश _क्या आप बता सकते हैं, आप के साथ क्या huwa है?, आप क्यूं नक्सली बन गए।

लाखन _ठाकुर बालेंद्र सिंह के कारण।

शेखर ने मुझे बताया था कि ठाकुर बालेंद्र सिंह, के कारण।

मैं, शेखर और बिरजू हम तीन मित्र थे। बिरजू ज्यादा पढलिखा नही था वह ठाकुर के हवेली में काम करता था। शेखर पढ़ाई में अच्छा था। कालेज से निकलते ही बैंक में उसकी नौकरी लग गई।

मैं पुलिस बनना चाहता था, उसकी मै तैयारी भी कर रहा था। इधर शेखर की शादी सुनीता भाभी से हुई।

एक दिन शेखर ने मुझे बताया की ठाकुर बालेंद्र सिंह सुनीता भाभी पर बुरी नियत रखता है? वह अकेले में उसे परेशान करता है। मै तो ड्यूटी में चला जाता हूं। तुम अपनी भाभी की उस बालेंद्र सिंह से सुरक्षा करना।

बालेंद्र सिंह के के कहने पर एक दिन सुनीता भाभी को घर में अकेली पाकर, उसके साथी उठा ले जा रहें थे। मैंने उन्हें रोकने का पूरा प्रयास किया।

पर असमर्थ रहा, तब मैं किसी तरह यह बात ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी के पास जाकर, घटना की जानकारी दिया।

वे तत्काल उस खेत में बने झोपड़ी में पहुंचे जहां सुनिता भाभी के साथ, ठाकुर बालेंद्र सिंह जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था।

ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी ने समय पर पहुंच कर भाभी को ठाकुर के हाथो लूटने से बचा लिया।

उसके बाद, बालेंद्र सिंह को गधे में बिठाकर, जूते की माला पहनाकर, बाल मुड़वाकर पूरे गांव में घुमाया गया।

उस घटना के बाद ठाकुर मुझे अपना दुश्मन समझने लगा।

उस घटना के बाद शेखर सुनिता भाभी को लेकर दूर शहर चला गया।

कुछ दिनों के बाद ठाकुर महेंद्र सिंह और तुम्हारे दादा जी का कुछ लोगो ने हत्या कर दिया।

वे नक्सली भेष में थे। पर मुझे लगता है वे ठाकुर के ही आदमी थे।

राजेश _पर आप पर किसने और किसकी हत्या का इल्जाम लगाया गया ।

लाखन _मेरे दोस्त बिरजू का।

राजेश _क्या?

लाखन _तुमने ठीक सुना।

दरसल, शेखर, लाखन और बिरजू तीनो मित्र थे। बिरजू कम पढ़ा लिखा था वह हवेली में नौकरी करता था।

उसकी शादी बिंदिया से हुई। बिंदिया बहुत ही खूबसूरत थी।

एक दिन ठाकुर बालेंद्र सिंह अपने पिता जी के विधायक चुनाव के प्रचार में। सूरज पुर आया था। बिरजू भी प्रचार में घूम रहा था।

बिरजू ने ठाकुर बालेंद्र सिंह को अपने घर चलने और चाय पानी के लिए कहा तो।

बिरजू हवेली का खास नौकर था तो बिरजू के कहने पर,

ठाकुर बालेन्द्र सिंह बिरजू के घर चाय पानी के लिए रुक गया।

बिरजू की पत्नी, बिंदिया चाय लेकर आई,,,

बिरजू _छोटे ठाकुर ये मेरी पत्नी बिंदिया है।

बिंदिया पैर छुओ, छोटे ठाकुर के,

बिंदिया ने ठाकुर की पैर छूने जैसे ही नीचे झुकी, ठाकुर की नजर बिंदिया की मस्त बड़ी बड़ी चूचियां पर पड़ी जो ब्लाउज से बाहर निकलने बेकरार थे। ठाकुर का लंद तन गया।

बिंदिया ने ठाकुर की नजर को भांप लिया।

वह अपनी पल्लू को ठीक किया और शरमाते हुए, कमर मटकाते कमरे में चली गई।

ठाकुर, बालेन्द्र सिंह बिंदिया को देखता रह गया।

ठाकुर _अरे बिरजू, तुम्हारी लुगाई तो बड़ी खूबसूरत है।

चाय पीकर ठाकुर वहा से चला गया। पर रात को उनके आंखों के सामने बिंदिया की मस्त चूचियां ही झूल रहा था।

एक दिन जब घर में बिंदिया अकेली थी, बिरजू के घर पहुंच गया।

बिंदिया ने दरवाजा खोला।

बिंदिया _छोटे ठाकुर आप।

बालेन्द्र सिंह _मै इधर से गुजर रहा था तो सोचा आपके हाथो की चाय पी लूं, उस दिन आपके हाथो का चाय पी थी, बहुत अच्छी चाय बनाती हो तुम।

बिंदिया _पर वो तो हवेली गया है घर पे नही है।

ठाकुर _ठीक है भाई अगर हमारा यहां अकेले में आना अच्छा नहीं लगा तो हमे चले जाते हैं।

बिंदिया _ नही ऐसी बात नहीं है, आइए न बैठिए।

ठाकुर कुर्सी पर बैठ गया।

बिंदिया _आप बैठिए, मै आपके लिए चाय बना कर लाती हूं।

बिंदिया किचन में चाय बनाने चली गई।

कुछ देर बाद ठाकुर भी किचन में चला गया।

बिंदिया चौंकी,

बिंदिया _ठाकुर साहब, आप यहां क्यूं चले आएं।

ठाकुर _मैंने तुम्हारे लिए कुछ लाया है।

बिंदिया _मेरे लिए,

ठाकुर_ने सोने की कंगन और गले की हार देते हुवे कहा,

ये लो तुम्हारे लिए, मै उस दिन जब तुम्हे पहली बार देखा तो मुंह दिखाई में कुछ दे नही पाया था, तो आज ले आया।

बिंदिया _पर ये तो बहुत कीमती है।

ठाकुर _तुम्हारे हुस्न के आगे तो ये कुछ भी नहीं।

ठाकुर ने बिंदिया को बाहों में भर लिया, जब से तुम्हे देखा है तुम्हरा दीवाना हो गया हूं।

एक बार तुम मेरी बन जाओ, तुम्हे गहनों से लाद दूंगा।

बिंदिया लालच में आ गई,,

बिंदिया _पर ठाकुर साहब किसी को पता चल गया तो मैं बदनाम हो जाऊंगी।

ठाकुर _किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, कोई मुंह खोलेगा तो उस साले को ऊपर पहुंचा दूंगा।

उसके बाद ठाकुर ने बिंदिया को बेडरूम में ले जाकर जी भर कर चोदा।

उसे बिंदिया की chudai करने में बहुँत मजा आया। बिंदिया को भी ठाकुर से चुदाने में मजा आया।

उसके बाद तो बालेन्द्र सिंह मौका पाकर बिरजू के घर आ जाता, और बिंदिया की जमकर chudai करता।

बिंदिया _ठाकुर साहब अगर इसी तरह घर आते रहें तो मैं बदनाम हो जाऊंगी कोई दूसरा रास्ता निकालिए न।

ठाकुर _एक रास्ता है, तुम अपने पति से कहना की दिन भर मै घर में अकेली रहकर बोर हो जाती हूं मुझे भी हवेली में कुछ काम दिलवा दो। उसके बाद फिर हम हवेली में जब चाहे अपनी प्यास बुझा सकेंगे।

बिंदिया को ठाकुर का प्लान अच्छा लगा।

बिंदिया बिरजू को हवेली में काम लगवाने जिद करने लगीं।

बिरजू नही चाहता था की बिंदिया हवेली में काम करे पर उसके जिद के आगे मजबूर हो गया।

बिंदिया भी हवेली में काम करने बिरजू के साथ जाने लगीं।

हवेली में ठाकुर और बिंदिया मौका पाकर अपनी प्यास बुझाने लगे।

जब ठाकुर महेंद्र सिंह और मानव प्रसाद का हत्या huwa तो बिरजू ने हवेली का काम छोड़ दिया। बिंदिया को भी छुड़वा दिया।

इधर ठाकुर लाखन से बदला लेना चाहता था।

इस लिए उसने बिंदिया के साथ मिलकर एक योजना बनाया।

बिरजू की हत्या करने की। और लाखन को फसाने की।

एक दिन रात में जब सभी लोग सो गए थे।

बिंदिया रोते हुवे लाखन के घर गई,,

लाखन _भाभी क्या बात है इतनी रात को क्या हो गया?

बिंदिया _लाखन, पता नही तुम्हारे दोस्त को क्या हो गया है वह खून की उल्टी कर रहा है जल्दी चलो, वह रोते हुवे बोली।

लाखन _बिंदिया के साथ उसके घर गया।

जब लाखन घर पहुंचा तो देखा बिरजू को किसी ने चाकू मार दिया है। वह तड़फ रहा है।

लाखन ने बिरजू को बचाने के लिए चाकू को अपने हाथो से खीच कर बाहर निकाला।

लाखन ने पूछा की किसने चाकू मारा है। बिरजू बता पाता उससे पहले उसने दम तोड दिया।

उसके बाद बिंदिया चिल्लाने लगीं, मेरे पति को मार डाला लाखन ने मेरे पति को मार डाला।

गांव के लोग इकट्ठा हो गए।

बिंदिया ने गांव वालो को बताया की लाखन मुझपे बुरी नियत रखता था वह मुझे अकेली पाकर जबरदस्ती कर रहा था तभी मेरा पति आ गया, उसने लाखन से मुझे बचाने की कोशिश किया तो लाखन ने उसे चाकू मार दिया। मुझे विधवा बना दिया।

गांव वालो के सामने लाखन ने अपनी बात रखनी चाही। तभी वहां पुलिस पहुंच गया। और लाखन को अपने साथ ले गया। ठाकुर ने पुलिस वालो को पहले ही खरीद लिया था।

उसके बाद लाखन ने कोर्ट में अपनी बात रखी। लेकिन जज और वकीलों को भी ठाकुर ने खरीद लिया।

लाखन को उम्र कैद की सजा सुनाया गया। उसे जेल में डाल दिया गया।

एक दिन मौका पाकर लाखन जेल से भाग गया।

वह ठाकुए से बदला लेने के लिए नक्सली बन गया।

इधर बिंदिया बिरजू के मृत्यु के बाद हवेली में ही रहने लगीं।

वह ठाकुर बालेन्द्र सिंह की खास सेविका बन गई।

लाखन ने राजेश को सारी बाते बताया कि किस प्रकार वह नक्सली बनने मजबूर huwa

उसने बताया कि आज अगर ठाकुर भागने में कामयाब नही होता तो वह अपना बदला ले पाता।

राजेश _लाखन काका, अगर आप ठाकुर को मार दोगे तो आपकी बेगुनाही साबित नहीं होगी।

आप बेगुनाह तभी साबित होंगे जब ठाकुर अपना जुर्म कबूल कर लेगा।

लाखन _,, राजेश तुम ठीक कह रहें हो, पर ठाकुर अपना जुर्म कबूल नही करेगा।

राजेश _, काका, ठाकुर ज़रूर अपना जुर्म कबूल करेगा। तुम पर अपने दोस्त की हत्या का जो कलंक लगा है, उस कलंक को हटाना जरूरी है।

बेगुनाह साबित करने में मै तुम्हारी मदद करूंगा।

लाखन _पर तुम ये अकेले कैसे कर पाओगे?

राजेश _काका, भुरा को मैंने ही मारा और ठाकुर उसकी बेटी को मैंने ही छुड़ाया।

लाखन _राजेश ये तुम क्या कह रहे हो?

राजेश _मुझे लगता है मैंने जो किया बिलकुल सही किया।

लाखन _वो कैसे?

राजेश _अगर मै ठाकुर को न बचाता तो आप उसे मार देते। फिर आप अपना बेगुनाही साबित नहीं कर पाते।

भुरा गीता दीदी के साथ जबरदस्ती कर रहा था इसलिए वह मारा गया।

लाखन _भुरा को मैंने भी गलत कार्य करने से मना किया था, पर वो सुधरा नही। आखिर उसकी सजा उसे मिला।

राजेश _काका, मै आपसे वादा करता हूं, आपको बेगुनाह साबित करूंगा।

बिंदिया ही ठाकुर के खिलाफ अपना मुंह खोलेगी।

लाखन _राजेश, तुम्हे किसी भी प्रकार की मेरी मदद की आवश्यकता हो तो मुझ तक खबर भिजवा देना।

मैं और मेरे साथी, तुम्हारी मदद के लिए पहुंच जायेंगे।

राजेश _अच्छा काका अब मुझे चलना होगा, घर वाले मुझे लेकर बड़े चिंतित होंगे।

लाखन _ठीक है राजेश, मै राघव को तुम्हारे साथ भेजता हूं, वह तुम्हे मुख्य सड़क तक पहुंचा देगा।

लाखन ने राजेश को गले लगाया।

फिर राघव को बुला कर राजेश को छोड़ने के लिए भेजा।

राघव ने राजेश को मुख्य सड़क तक छोड़ा, राजेश वहा बस में बैठकर सूरज पुर आया।

उसने फोन कर दिव्या को जानकारी दे दिया की वह घर पहुंच गया है।

जब राजेश घर पहुंचा,,,

पदमा _बेटा तुम कहां थे रात भर, हम कितने चिंतित थे तुम्हे लेकर।

अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो, सुनिता को मैं क्या जवाब देती।

अब के बाद तुम्हे हवेली कभी जाने नही दूंगी। तुम ठाकुर और उसकी बेटियो से दूर ही रहो। इसी में तुम्हारी और हम सबकी भलाई है।

राजेश _ताई, मै बिल्कुल ठीक हूं मुझे कुछ नहीं huwa है, देखो।

भुवन _राजेश, कल रात भर हम में से कोई नहीं सोया है। जो घटना घटित हुआ है नक्सलियों द्वारा, हम तो डर गए थे कही तुम्हारे साथ कुछ गलत न हो गया हो।

तभी सविता भी वहा आ पहुंची।

सविता _राजेश तुम ठीक तो हो न,

राजेश _हां चाची मैं बिल्कुल ठीक हूं। मुझे कुछ नहीं huwa?

सविता _भगवान का लाख लाख शुक्र है, हम सब तुम्हे लेकर बहुत चिंतित थे।

तुम ठाकुर के बेटी के साथ जो थे। जब तुम शाम को नहीं लौटे, तो हमे लगा की तुम्हारे साथ भी कुछ गलत तो नहीं हो गया।

राजेश _अच्छा किसमे है इतना दम जो तुम्हारे भतीजे के साथ कुछ कर सके।

सविता _हा हा, तू तो बडा बहादुर है तुम्हरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

तेरी खबर तो आज लेनी पड़ेगी।

बडा बहादुरी दिखा रहा है।
 
रात में अपडेट देने का कोशिश करूंगा।
 
अगले दिन राजेश की दिनचर्या पहले की ही तरह जारी रहा। सुबह उठकर अखाड़ा जाता, वहा व्यायाम करता, पुलिस एवम फौजी भर्ती केंद्र के प्रशिक्षणार्थियों को लिखित परीक्षा का अभ्यास कराता। फिर घर आकर नहाता, नाश्ता करता, आईएएस की इंटरव्यू की तैयारी करता।

दोपहर में ज्योति और पूनम अपना दुध पिलाती, मूड बन जानें पर दोनों की ठुकाई भी करता। दोनो की दुध पीकर राजेश और ताकतवर बनता जा रहा था।

इधर मधु और आरती दोनों स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ, प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रही थीं।

राजेश दोनो की मदद कर रहा था।

एक दिन मधु को राजेश से चुदाने की बहुत इच्छा हो रही थी।

संडे का दिन था, मधु के माता पिता दोनों घर पर नहीं थे। दोपहर का समय था।

मधु ने राजेश को फ़ोन किया।

राजेश _हा मधु बोलो कुछ काम था क्या?

मधु _हा भईया, कुछ टॉपिक पर समझ नही बन पा रही है, आप की मदद चाहिए।

राजेश _अच्छा ठीक है घर आ जाओ, जो भी समस्या है पूछ लेना।

मधु_भईया मां बाबू जी बाहर गए है, उन्हे आने में रात हो जायेगी। घर और मुन्ने की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। आप घर आ जाइए न ।

राजेश _ठीक है।

राजेश मधु के घर जा रहा था तभी,

पूनम _राजेश, इस समय कहा जा रहे हो।

राजेश _भाभी, मधु के घर जा रहा हूं। उसे परीक्षा की तैयारी में कुछ दिक्कतें है।

राजेश मधु के घर पहुंचा।

मधु _आओ भईया, बैठो, देखो ने इस सवाल को कैसे सॉल्व करना है मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है।

राजेश _दिखाओ मुझे, कहां दिक्कत हो रही है तुम्हे।

मधु _भईया आप बैठो न, मै चाय बना कर लाती हूं।

राजेश _मधु पहले दिक्कत कहां है उस पर बाते कर लेते।

मधु_, भईया बात तो होती रहेगी, पहले चाय चढ़ा देती हूं।

मधु चाय चढ़ाने चली गई।

राजेश घर के बैठक कमरा में रखे कुर्सी पर बैठ कर टॉपिक को देखने लगा।

मधु _चाय चढ़ा कर कमरे में आ गई।

राजेश _चलो बताओ, किस विषय पर तुम्हे दिक्कत हो रही है।

मधु ने कुछ टॉपिक को बताया जिसमे उसे कठिनाई महसूस हो रही थी।

राजेश उन टॉपिक को सरल तरीके से मधु को समझाने लगा।

कुछ देर बाद किचन में जाकर वह कप में चाय ले आई। दोनो चाय पीने लगे।

तभी बेडरूम में मुन्ने की रोने की आवाज सुनाई पड़ा।

मधु _भईया लगता है, मुन्ना उठ गया।

मधु अपने बेडरूम में गई और बच्चे को पुचकारते हुवे मेला मुन्ना उठ गया, आजा मेला राजा बेटा,,, वह बच्चे को गोद मे उठाई।

बच्चे को बैठक कक्ष में लाई, बच्चा अभी भी रो रहा था।

मधु _लगता है इसे भूख लगी है।

मधु अपनी दुपट्टा नीचे कर दी और अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

उसकी बड़ीबड़ी दुध से भरी मस्त चूचियां, राजेश के आंखों के सामने आ गया।

मधु बिना आंचल ढके ही बच्चे को गोद मे लेकर दुध पिलाने लगी।

राजेश मधु की चुचियों को इग्नोर करना चाहा, पर उसकी चूचियां इतनी मस्त था की, राजेश की नजर जब चुचियों पर गया तो उसके शरीर में रक्त संचार बढ़ने लगा।

उसका लंद में तानव आने लगा।

तभी मधु के मुंह से उई मा निकला,,,

राजेश _क्या huwa मधु? क्यू चिखी।

मधु _मुन्ना बड़ा बदमाश हो गया है, बडा जोर से कांटा मेरे निप्पल को।

वह मुन्ने के मुंह से निप्पल निकाला, और राजेश को दिखाने लगा।

मधु _भईया देखो ना, काटने से कैसा लाल हो गया मेरा निप्पल।

राजेश मधु के निप्पल को देखने लगा।

मधु _भईया बडी जलन हो रही है, थोड़ा चांटकर निप्पल को आराम दो ना।

राजेश ने मधु के दूदू को हाथ में पकड़ लिया फिर उसके निप्पल को जीभ से चाटने लगा।

मधु _भईया, आप बहुत अच्छे कर रहे है? मुझे बडा आराम मिल रहा है।

निप्पल को मुंह में लेकर प्यार से चूस लो,

राजेश मधु के निप्पल को मुंह में डाल कर चूसना शुरु कर दिया।

एक निपल को मुन्ना चूस रहा था तो एक को राजेश।

मधु बहुत गर्म हो गई। उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।

इधर राजेश का लंद भी अकड़ चुका था।

उसे chut मारने का मन करने लगा।

इधर मधु राजेश के पेंट के ऊपर से उसका लंद सहलाने लगी।

दोनों बहुत उत्तेजित हो गए।

मधु अपने कपकपाते लब्जो में कहा, भईया चलो बेड रूम में चलते है।

राजेश और मधु दोनों बेडरूम में चले गए।

मधु ने बच्चे को बेड में सुला कर दरवाजा बंद कर दिया।

इधर आरती भी अपने कमरे पढ़ाई कर रही थीं।

उसे भी राजेश से कुछ पूछना था, वह राजेश के कमरे में गई। राजेश उसे नही मिला।

आरती _ये राजेश भईया, कहा चला गया।

उसने अपनी भाभी से पूछा,,

भाभी तुम्हे पता है क्या राजेश भईया कहा है।

पूनम _हा वो मधु के घर गया है।

कह रहा था की मधु को उसकी पढाई में कुछ समस्या है, उसे समझाने गया है।

आरती _भाभी मै भी जा रही मधु के घर, मुझे भी भईया से कुछ पूछना है।

आरती पुस्तक लेकर मधु के घर गई l। बाहर का दरवाजा खुला था। आरती जब अन्दर गई तो राजेश और मधु दोनों कही नजर नहीं आए।

तभी उसने देखा, मधु के कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द है।

उसे लगा दोनों अन्दर होंगे उसने दरवाजा खटखटाना चाहा तभी, उसे मधु की सिसकने की आवाज सुनाई पढ़ी।

आह उन,, आई ई,, उई मां आह,,,,

आरती ने अन्दर क्या चल रहा है जानने के लिए दरवाजे पर छेद ढूंढी,,

पर उसे कोई छेद नही मिला।

वह कुछ देर तक मधु की मादक सिसकारी सुनती रही।

वह अन्दर क्या चल रहा है जानने को व्याकुल हो गई,तभी उसे याद आया की मधु के कमरे में वेंटीलेटर लगा है। बाड़ा के पीछे जाकर सीढ़ी चडकर वेंटिलेटर से अन्दर झांक सकती है, आखिर अंदर चल क्या रहा है?

वह घर के पीछे बाड़ा में चली गई। वहा बांस से बनी सीढ़ी रखी थीं।

उसे मधु के कमरे के दीवार पे लगा करऊपर चड़ गई, और वेंटीलेटर से अन्दर झांकने लगीं।

अन्दर का दृश्य देखकर उसकी होश उड़ गई।

राजेश और मधु दोनों बिल्कुल नंगे थे।

राजेश मधु को पलंग किनाने लिटा का, उसकी टांगे फैला कर।

गच गच चोद रहा था।

उसकी चूची दबा दबा कर दुध निचोड़ एवम पी रहा था।

मधु अपनी मुंह से कामुक सिसकारी निकाल रही थीं।

आरती की आंखे फटी की फटी रह गई।

वह बिना पलके झपकाए अन्दर का दृश्य देखने लगी।

वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं। की वह ऐसा भी किसी औरत के साथ कर सकता है।

इधर राजेश ने अपना लंद मधु की chut से बाहर निकाला, उसका मोटा लंबा लंद को आरती आश्चर्य से देखने लगीं।

राजेश ने मधु को लंद चूसने का इशारा किया।

मधु बेड से उठ कर राजेश के लंद के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर, मुंह में भर कर गप गप चूसने लगीं।

आरती ऐसा दृश्य कभी देखी नही थीं।

वह तो राजेश को भोला भाला समझता था। वह राजेश के बारे में ऐसा सोच भी नही सकती थीं।

वह आंखे गढ़ाए अन्दर के दृश्य को देखने लगी।

इधर राजेश ने मधु को पलंग पकड़ाकर झुका दिया, और पीछे से लंद को boor में डालकर, फ्च फ़च चोदना शुरु कर दिया।

मधु फिर जन्नत की सैर करने लगीं।

आह उन उई मा,, आई ई,,,,

आरती ने कभी ऐसा दृश्य की कल्पना भी नहीं की थी।

यह दृश्य देखकर उसके शरीर में खून दोगुने गति से बहने लगा।

इधर राजेश मधु को दना दन चोदे जा रहा था।

आरती दंग थी राजेश का इतना मोटा लंद आखिर मधु कैसे अंदर ले पा रही है। उसकी boor की छेद तो एकदम सकरी है।

इधर राजेश तेज तेज चोदने लगा, मधु जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

कुछ देर बाद राजेश ने मधु को अपने गोद में बिठा लिया। वह उसकी ओंठ चूसने लगा, चूची मसलने पीने लगा। उसकी chut सहलाने लगा।

जिससे मधु फिर गर्म हो गई। राजेश बेड पे लेट गया।

उसका लंद हवा में लहरा रहा था।

मधु बेड पर चढ़ गई, और लंद को पकड़ कर अपनी योनि में सेट कर उस पर बैठ गई। लंद boor में समा गया।

अब मधु राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

आरती आश्चर्य से इन दृश्यों को देखने लगी। उसे अपनी योनि में गिला पन महसूस होने लगा।

इधर राजेश मधु की कमर चूतड पकड़ कर नीचे से कमर उचका ऊचका कर लंद को boor की गहराइयों में पहुंचाने लगा।

मधु और राजेश दोनों जन्नत की सैर करने लगें।

दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।

मधु की कामुक सिसकारी से कमरा गूंज रहा था।

इधर राजेश काफी जोश में आ गया था।

इधर मधु उछल उछल कर थक गई, तब राजेश ने मोर्चा सम्हाला।

राजेश ने मधु को नीचे लिटाया उसकी चूतड के नीचे तकिया लगा दिया फिर उसने उसकी टांगो को अपने कंधे पर रख दिया और लंद को boor में डालकर गच गच चोदने लगा। लंद मधु की बच्चे दानी को ठोकने लगा।

जिससे मधु का पूरा शरीर झनझनाने लगा।

उसके मुंह से अत्यंत मादक आवाजें निकलने लगी। कुछ ही देर में वह फिर से झड़ने लगीं। इधर राजेश भी झड़ने के करीब था, वह और जोर जोर से चोदने लगा, अपना लंद बाहर निकाला और मधु के मुंह में डाल कर,, आह,, आह आह मां,,,,

कराहते हुवे झड़ने लगा। कुछ वीर्य उसके चेहरे पर छोड़ दिया।

मधु का मुंह वीर्य से पूरा लबा लब भर गया।

वह गटक गटक कर पूरा वीर्य पी गई।

यह दृश्य देखकर आरती को चक्कर आने लगा, वह सीढ़ी से गिर न जाए। वह कापते हुवे पैरो से सीढ़ी से नीचे उतरी और सीधा अपना घर चली गई।

वह अपने कमरे में चली गईं, उसकी आंखों के सामने अभी भी वही सब दृश्य चलने लगा।

उसने अपनी चड्डी का मुआइना किया, जो पूरी तरह गीली हो चुकी थीं। उसके साथ ऐसा पहली बार huwa था।

इधर राजेश और मधु दोनों सुस्ता रहें थे।

कुछ देर बाद दोनों अपने कपडे पहने फिर राजेश घर आ गया।

अपने कमरे में आकर आराम करने लगा।

आरती पलंग पर लेट कर उन्ही दृस्यो को याद कर रहि थी।

मधु तो पूरी रण्डी निकली, कैसे भईया का के लंद का पानी पी गई।

और भईया तो रण्डी बाज निकला, कितना भोला भाला लगता है।

लोग कितना इज्जत और मान सम्मान करते है उसका, उसने राजेश का नया रूप देख कर अभी भी विश्वास नहीं कर पा रही थी।

वह भोजन के लिए कमरे से बाहर, भोजन करने का उसका मन नहीं था। थोड़ा सा भोजन कर कमरे में जाकर फिर लेट गई।

वह रात भर सो नहीं सकी, उसके आंखो के सामने अभी भी वही दृस्य चल रहा था।

वह रात में पहली बार अपनी boor में खुजली महसूस की और उसे अपनी उंगली से रगड़ने लगीं।

राजेश के लंद को याद कर दो बार झड़ी।

उसका शरीर गर्म हो चुका था। उसे बुखार चढ़ गया था।

जब वह देर तक सोई रही।

पदमा _अरे बहु ये आरती को क्या huwa है, अभी तक उठी क्यू नही है?

पूनम कमरे में आई।

अरे आरती आज क्या हो गया है तुमको, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

पूनम ने उसकी माथे को छू कर देखा।

पूनम _तुम्हे तो तेज बुखार है।

कही मासिक धर्म तो नही शुरू हो गया।

Ma जी पूछ रही है इतने देर तक सो क्यू रही हो। मै मां जी को बता कर आती हूं तुम्हे तेज बुखार है।

आरती _भाभी, रुको मैं उठ रही हूं, मुझे कुछ नहीं huwa है मै ठीक हूं।

मां को कुछ मत बताओ।

पूनम _पर क्यू?

आरती _कहा न मुझे कुछ नहीं huwa है? वो रात में मैं देर तक पढ़ती रहि न इसलीय है।

राजेश भईया उठ गए क्या?

पूनम _क्यू? राजेश को क्यों पूछ रही हो? वो अखाड़ा पे चला गया है।

आरती _वो राजेश भईया से कुछ पूछना था।

पुनम _तुम्हारी तबियत ठीक नहीं लग रहि है, तुम आराम करो, मै टैबलेट लाकर देती हूं उसे खा लो।

पुनम ने आरती को टैबलेट लाकर दिया।

आरती टैबलेट खाकर आराम करनेलगीं।

इस घटना के बाद आरती के अन्दर का औरत जाग चुका था।

अब वह राजेश के सामने जाता तो उसकी नजर उसके टांगो बीच जाता।

उसके लंद का याद करता कितना मोटा और लंबा है।

रात में अब राजेश के लंद को याद कर boor रगड़ती और झड़ने के बाद ही उसे नींद आता।

अब वह राजेश से चुदने की इच्छा रखने लगीं।

पर वह राजेश से कह नहीं सकती थीं, भईया मुझेचोदो, मै रोज तुम्हारे लंद को याद कर boor रगड़ती हूं।

उसे मधु पर गुस्सा आने लगा, वह भोले भाले भईया को बिगाड़ दी है, उसने राजेश भईया को फांस रखी है।

उसे समझ नही आ रहा था कि वह भईया से चुदने की इच्छा कैसे पूरी करे? समय ऐसा ही निकलता रहा।

आज राजेश बहुत खुश था, आज निशा का जन्म दिन था।

सुबह उठते ही उसने निशा को मेसेज किया, हैप्पी बर्थडे डे निशा जी, जन्म दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाए।

इधर लंदन में निशा न राजेश का मेसेज पढ़ा। पर कोई रिप्लाई नही दिया।

कालेज में उसके दोस्तो ने जन्म दिन की बधाई दिया और निशा के मना करने के बाद भी लंच के समय आर्यन ने कैंटीन में केक काट कर बर्थ डे सेलिब्रेट किया, पर निशा को उसमे कोई रूचि नहीं थी।

सीमा चाह रही थीं की किसी अच्छे से होटल में जाकर निशा का बर्थ डे सेलिब्रेट करे पर निशा नही मानी।

कालेज में छुट्टी के बाद, निशा अपनी फेक्ट्री जो निर्माणधीन था, वहा चली गई।

वहा एडम फेक्ट्री का काम देख रहा था।

निशा ने एडम से पूछा की production शुरू होने में और कितने दिन लग जायेंगे।

एडम _मैम बस एक दो माह में प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।

निशा _आर्यन हमे प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ही, प्रचार प्रसार शुरू कर देना चाहिए।

तुम विज्ञापन बनानेवाले किसी अच्छी कंपनी से संपर्क करो।

आर्यन _निशा, ये काम मुझ पर छोड़ दो, एक अच्छी कंपनी के बारे में मै जानता हूं। मै आज ही वहा जाकर संपर्क करता हूं।

निशा _,, गुड

मैं चाहती हूं की प्रोडक्शन से पहले ही हमारे प्रोडक्ट की जानकारी, लोगो तक पहुंचे और उसकी खूबियों के बारे में लोगो को पता चले।

निशा को उसकी बुआ ने फोन किया, बेटा तुमसे मिलने कोई आया है?

निशा से कहा,,,

कौन है बुवा,,

ये तुम्हारे लिए सरप्राइज है,,

तुम जल्दी से घर आ जाओ,,

निशा और सीमा दोनों घर पहुंचे,,

निशा देखो उसकी मां सुजाता, इण्डिया से आई थी।

निशा _,, मां,,

सुजाता _,, बेटा,,,

दोनों एक दूसरे से लिपट गए,,

सुजाता _मेरी बच्ची कैसी है तू?

निशा _मै अच्छी हू मां।

आप कैसी है?

सुजाता _मुझे तो बस तुम्हारी ही चिंता लगीं रहती है मेरी बच्ची।

निशा _मां, आप मेरी चिंता न किया करो, यहां बुआ और फूफा जी मेरे अच्छे से ख्याल रखते है, और सीमा तो है न मेरे साथ।

मां आपने बताया नही आप आ रही है?

सुजाता _बेटा, मै तुम्हे सरप्राईज देना चाहतीं थी।

आज तुम्हारा जन्म दिन जो है।

सुजाता _चलो बेटा तुम तैयार हो जाओ, फिर केक काटना,,,

निशा _मां, मेरा मन नहीं कर रहा,,,

सीमा _निशा ये क्या कह रही हो? आंटी इंडिया से आई है तुम्हारे जन्म दिन सेलीब्रेट करने।

सुजाता _सीमा तुम अपने कालेज के दोस्तो को भी बुला लो,,

सीमा _ठीक, है आंटी।

सीमा ने अपने कालेज के दोस्तो को फ़ोन कर बुला लिया,,

इधर निशा न चाहते हुवे भी अपनी मां को निराश न हों इसलिए कमरे में जाकर तैयार होने लगीं।

इधर राजेश आज बहुत खुश था।

वह निशा के जन्म दिन को सेलीब्रेट करना चाहता था।

वह लक्षमण पुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा।

दिव्या राजेश को देखकर सरप्राइज हो गई।

दिव्या _राजेश तुम यहां,, अचानक,,

राजेश _हा दिव्या जी, मै आपको कुछ बताने के लिए यहां आया था,,

दिव्या _बड़े खुश लग रहे हो, ऐसा क्या बात है मैं भी तो जानू?

राजेश _दिव्या जी आज निशा जी का जन्म दिन है।

दिव्या _ये तो बड़ी खुशी की बात है? तुमने उसे बधाई दिया की नही?

राजेश _मैंने उसे बधाई संदेश भेजा पर अभी तक कोई रिप्लाई नही आया।

दिव्या _ओह हो सकता है, उसने मेसेज पढ़ी न हो!

राजेश _दिव्या जी, मै निशा जी का जन्म दिन सेलीब्रेट करना चाहता हूं? आपके साथ, क्या आप मेरे साथ चलेंगी, किसी पार्क में।

दिव्या राजेश को नही कर सकता था, वह उसकी खुशी के लिए साथ चलने तैयार हो गई।

दोनों केक लेकर एक खूबसूरत पार्क में पहुंचे।

राजेश _दिव्या जी, निशा जी तो यहां है नही, आज आप ही निशा बन जाओ न,,,

दिव्या _अच्छा जो, हुकुम, बोलो क्या करना होगा।

राजेश _ये केक काटना होगा,और कोई अच्छी सी गीत सुनाना होगा, निशा जी बनकर, और क्या?

दिव्या _ठीक है पर एक शर्त पर,

राजेश _कैसी शर्त?

दिव्या _,, तुम्हे गीत में मेरा साथ देना होगा?

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

उसके बाद दिव्या ने, केक काटा,,

राजेश _, हैप्पी बर्थडे टू यू निशा जी,,,

दिव्या ने राजेश को केक का टुकड़ा खिलाया।

राजेश ने भी दिव्या को केक का टुकड़ा खिलाया।

राजेश _दिव्या जी अब कोई गीत सुनाओ।

दिव्या _तुम भी साथ देना, ये सोचना गाना मैं नहीं निशा गा रही है।

राजेश _ठीक है।

दिव्या ने गीत गाना शुरू किया,,

राजेश ने उसका साथ दिया,,

प्यार करते है हम तुम्हे इतना,,,

दो आंखे तो क्या , दो जहा में समाए न जितना,,

प्यार करते हैं हम तुम्हे इतना,,,,,

दोनो एक अच्छी से रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाए।

दिव्या का मन तो नही था,,,

वह अन्दर से दुखी थी,,

बीच बीच में उसकी आंखो से आंसू निकल आते थे, जिसे राजेश से छुपाकर पोंछ लेती थीं।

जब दिव्या घर पहुंची, तो रात हो चुकी थी।

रत्नवती और गीता दिव्या के लिए चिंतित थी पर वह फोन द्वारा बता दी थीं की वह राजेश के साथ है।

जब घर पहुंची तो,,

रत्नवती ने उसे भोजन के लिए बुलाया तो, दिव्या ने बताया की वह खाकर आई है।

इधर गीता को दिव्या की आंखों में उदासी नजर आया।

वह रात में उसके कमरे में गई,,,

दिव्या _दीदी तुम इस समय,,,

गीता _हू, क्या बात है? तुम इतनी उदास क्यों हो?

दिव्या _कुछ भी तो नहीं दी,,

मुझे क्या huwa?

गीता _तुम्हारे चेहरे की ये उदासी मूझसे छिपा नहीं सकती, बोलो क्या बात है?

दिव्या की आंखों से आंसू बहने लगीं।

दिव्या _दीदी, कुछ भी तो नहीं?

गीता _छोटी, मुझे मालूम है, तुम राजेश को लेकर उदास हो।

उसने तुमसे कुछ कहा?

दिव्या ने न में सिर हिलाया।

गीता _दिव्या, मै जानती हूं तुम, राजेश से बहुत प्यार करती हो?

तुम राजेश को इस बारे में अब तक बताई की नही।

दिव्या _नही दी, वो निशा से प्यार करता है मेरे लिए उसके दिल में कोई फीलिंग नही।

दिव्या, गीता के गले से लिपट कर रोने लगी।

गीता _क्या उसे पता है उस रात उसने तुम्हारे साथ क्या किया है?

दिव्या _नही दी, उसे कुछ मालूम नहीं।

गीता _उसे बता क्यू नही देती।

दिव्या _नही दी मै उसे कभी नहीं बताऊंगी।

गीता _छोटी मै तुम्हारे आंखो में आंसू नहीं देख सकती, अगर तुम्ह नही बताओगी तो मैं बताऊंगी।

दिव्या _नही दी, तुम्हे मेरी कसम है तुम राजेश को कुछ भी नहीं बताओगी।
 
अपनी मां का मन रखने के लिए, निशा बर्थ डे पार्टी के लिए तैयार होने लगी।

इधर सीमा अपने कालेज के सभी दोस्तो को फ़ोन लगाकर पार्टी में आने के लिए कह दिया।

निशा के फूफा ने पार्टी के लिए सारी व्यवस्था कर लिया था। और अपने कंपनी के प्रमुख कर्मचारियों को भी आमंत्रित किया था।

रात के आठ बजते, सभी लोग पार्टी के लिए अपनी उपस्थिति दे चुके थे।

निशा तैयार होकर पार्टी हाल में पहुंची, लोग ताली बजाने लगे।

सुजाता_ केक काटने का समय हो चुका है बेटा।

निशा ने केक कांटी, सभी उपस्थित मेहमानों नई निशा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

उन्हे बर्थ डे गिफ्ट भेट किए।

सीमा ने अपने दोस्तों आर्यन, एडम को सुजाता से मिलाया।

उसके बाद नाचने गाने खाने पीने का प्रोग्राम शुरू huwa।

सीमा ने माइक सम्हाला,,,,

सीमा _दोस्तों, आप सभी को मैं यह बताना चाहूंगी कि निशा बहुत अच्छा गाती है, तो हम सब निशा से गुजारिश करते है कि आज जन्म दिन के अवसर पर हमे कुछ सुनाए।

निशा ने मना किया, माफ करना मूझसे गाना नहीं हो पाएगा।

सीमा, आर्यन _निशा प्लीज यार,,

हम सब का मन रखने के लिए कुछ सुना दो।

निशा _क्या सुनाऊं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

मुझे माफ कीजिए, प्लीज।

सीमा,_कुछ भी अपनी, दिल की बात ही कह दो।

सुजाता _सुना दो न बेटा, अपने दोस्तों का मन रखने के लिए,,,

निशा न चाहते हुवे भी, माइक अपने हाथ में थाम ली और कुछ देर सोचती रही,,

अपनी दिल की बात जुबा तक लाने लगी,,,

जीती थी जिसके लिए जिसके लिए मरती थी,,,

एक ऐसा लड़का था जिसे मैं प्यार करती थी,,,,

चाहा था जिसको खुद से भी ज्यादा,,,

उसने ही धोखा दिया,,,

उसने ही धोखा दिया,,,

बना के उसी ने बिगाड़ा मेरा आसिया,,,

एक ऐसा लड़का था जिसे मैं प्यार करती थी,,,,,

पार्टी खत्म होने के बाद, सभी मेहमान चले गए।

रात में सोने के समय,,,

सुजाता ने सीमा से कहा _सीमा बेटा आज मैं निशा के पास सोना चाहती हूं।

सीमा दूसरे कमरे में सोने चली गई,,,

निशा गुमसुम सी थी।

सुजता _बेटा तुम राजेश को अब तक भूले नहीं,,,

निशा _कोशिश तो कर रही हूं न मॉम,,,

सुजाता _बेटा, उसे तुम भूल जाओ उसी में तुम्हारी भलाई हैक्यों की उसमे कोई ईमान नहीं, वह धोखेबाज है। वह किसी एक के साथ नही रह सकता।

पता नही कितने लोगो के साथ वह अपनी राते रंगीन करता फिर रहा है।

वह आवारा बन चुका है।

उसने तुम्हे मेसेज किया था क्या?

निशा ने हा में सिर हिलाया,,,

सुजाता _, तुमने उसे रिप्लाइ दिया।

निशा ने न में सिर हिलाया,

सुजाता _ठीक किया, वो उसी लायक है।

अगले दिन फ्लाइट से सुजाता, इंडिया निकल गई।

निशा और सीमा उसे एयरपोर्ट छोड़ने गई।

सुजाता_बेटा तुम अपना ख्याल रखना, कोई भी बात हो तो मुझे फोन करना।

निशा ने हां में सिर हिलाई।

सुजाता _सीमा बेटा, तुम निशा का ख्याल रखना।

सीमा _आंटी आप चिन्ता न करो, मै हूं न।

निशा _लव यू मॉम

निशा सुजाता की गले लग कर बोली।

सुजाता _लव यू टू बेटा।

सुजाता फ्लाइट से इंडिया आ गई।

इधर आरती उस दिन राजेश और मधु को कामक्रीड़ा को देखने के बाद, उसकी अन्दर की औरत जाग चुकी थी।

अब वह खूब रगड़ रगड़ कर नहाती, सज धजने लगी। वह राजेश को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने लगी।

उसे मधु पे गुस्सा भी आ रहा था। वह उससे ठीक से बात नही कर रही थी।

एक दिन मधु ने उससे कहा,,,

मधु _आरती मै देख रही हूं तुम कुछ दिनों से मूझसे ठीक से बात नही कर रही हो, कटी कटी सी रहती हो। आखिर बात क्या है?, बताओ मुझे।

आरती ने अनसुना कर दिया,,

मधु _मधु, मै तुमसे कुछ पूछ रही हूं, तुम मुझे इग्नोर कर रही हो, आखिर बात क्या है?

आरती _मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी।

मधु _क्यू क्या huwa?

मुझसे कोई गलती हुई है?

आरती _रहने दो, मेरा मुंह मत खुलवाओ।

मधु _आरती तुम ऐसी नही जा सकती। तुम्हे बताना होगा, आखिर बात क्या है?

आरती _मुझे तुम्हारी सब सच्चाई पता चल गई है?

मधु _कैसी सच्चाई?

आरती _बोला न रहने दो, मेरा मुंह मत खुलवाओ।

मधु _नही, तुम्हे बताना ही होगा।

आरती _मुझे पहले नही पता था तुम इतनी गिरी हुई हो। राजेश भईया को अपने घर में बुलाकर जो गंदा खेल खेलती हो न, ओ मैंने अपने आंखों से देखा है?

मधु _क्या?

आरती _मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी।

आरती जाने लगीं।

मधु _तुमने हमे संबंध बनाते देखा।

ये बात तुमने किसी को बताया तो नही।

आरती _तुम मेरी सहेली न होती तो तुम्हारी पिटाई कर देती।

अपने पति को छोड़कर, यहां गांव में बैठी हो और मेरे भोले भाले भईया को अपनी जाल में फसा ली हो।

मधु _हा हा मै कुल्टा हूं मारो मुझे,,

पर यह इल्जाम मत लगाओ की मैंने राजेश भईया को फसाया है।

तुम तो जानती हो न, गांवों की कितने लड़के मुझे बुरी नियत से देखते है।

मुझे पाना चाहते है।

अगर मैं कुल्टा होती तो, किसी भी लड़के के साथ अपनी प्यास बुझा सकती हूं।

लेकिन मैंने कभी दूसरे लड़के के बारे में ऐसा सोचा ही नहीं।

रहि बात राजेश भईया कि हां मैंने राजेश भईया के साथ संबंध बनाए।

क्यों कि वो मुझे पसंद है? वो मुझे प्यारा लगता है। मै अपने को खुश नसीब समझती हूं जो उसका मुझे सानिध्य मिला।

राजेश भईया को फसाने के बारे में मैंने कभी सोंचा ही नहीं।

मधु रोने लगी।

मधु _मै तुम्हे अपनी सबसे अच्छी सहेली समझती थी। पर तुमने मेरा दर्द कभी समझा ही नहीं। तुम समझोगी भी कैसे तुम्हारी तो अभी सादी नही हुई है न।

शरीर की भूख क्या होती है तुम नहीं समझोगी अभी।

जाओ चले जाओ, मै कुलटा हूं। मै अपनी पति को छोड़कर यहां बैठी हूं, यहां के लड़को को फसाने।

मधु को रोते देख,, आरती का दिल पसीज गया,,, आखिर वह उसकी बचपन की सहेली थी।

आरती _मधु मुझे माफ कर दो, मै कुछ ज्यादा ही बोल दी।

सच बात तो ये है कि जब से मैंने, तेरे और भईया के बीच में काम क्रीड़ा देखा है।

पता नही मुझे क्या हो गया है। मेरे अंदर का औरत जाग चुका है।

मैं रात में ठीक से सो नहीं पाती।

मधु _ओह, तब तो मैं सच मुच गुनहगार हूं।

मेरे कारण तुम्हारी ये हालत हुई है।

आरती _अब तुम्हे ही मेरी ईच्छा पूरी करने में मेरी मदद करनी होगी?

मधु _कैसी ईच्छा?

आरती _राजेश भईया को पाने की।

मधु _आरती, ये तुम क्या कह रही हो?

आरती _क्यू? जब तुम राजेश भईया के साथ सब कर सकती हो तो मैं क्यूं नही?

मधु _पर तुम उसकी बहन हो, क्या राजेश भईया इसके लिए तैयार होगा?

आरती _मै कुछ नहीं जानती? मुझे राजेश भईया के साथ करना है, मतलब करना है? अब क्या करना है ये तुम जानो।

मधु _ठीक है, मै राजेश भईया से बात करूंगी।

अबकी बार जब मैं राजेश भईया जब मेरे साथ संभोग कर रहें होंगे तब मैं यह बात राजेश भईया को बताऊंगी। की तुम उससे अपना सिल तुड़वाना चाहती हो, मधु ने आरती को छेड़ते हुए बोली,,,,

आरती _चुप बेशरम।

मधु _हां, तुम राजेश भईया और मेरे बीच में जो संबंध है उसके बारे में किसी को बताना मत, नही तो हम दोनों की बडी बदनामी हो जाएगी।

आरती _अरे मै पागल हूं क्या? जो राजेश भईया को बदनाम करूंगी।

मधु _पर क्या तुम राजेश भईया का ले पावोगी, तुमने तो देखा होगा उसका कितना बडा है।

आरती को छेड़ते हुवे बोली।

आरती _जब तू ले सकती है तो मैं क्यूं नहीं?

मधु _मैंने तो एक बच्चे को जन्म दिया है उसके बाद भी भईया का पहली बार लेने में बडा दर्द huwa था। कुछ दिनों तक ठीक से चल नहीं पाई थी।

तुमने तो देखा ही है, कैसे बुरी तरह चोदता है?, भईया।

सोच लो क्या हाल होगा तुम्हारा?

आरती _मैंने सोच लिया है, जो होगा देखा जाएगा? मुझे भईया के साथ करना है, मतलब करना है?

मधु _लगता है बहुत तड़प रही हो, राजेश भईया का लेने के लिए।

अब तो कुछ करना ही पड़ेगा,,,
 
कुछ दिन बाद, मधु ने अपने माता पिता के अनुपस्थिति में राजेश को फिर अपना घर बुलाया।

राजेश, मधु को घोड़ी बना कर चोदने लगा।

दोनों को chudai में बहुत मजा आ रहा था।

कमरे में मधु की मादक सिसकारी गूंज रही थी।

उसकी चूड़ियां मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रहे थे।

राजेश मधु की कमर पकड़ कर लंद को boor में दनादन पेले जा रहा था।

तभी,,,

मधु _राजेश भईया,,,, उई मां,,, आह,,,

राजेश _क्या है मेरी जान,,,, जोर जोर से धक्का मारते हुए कहा,

मधु _मुझे आपको एक बात,, आह,,,, उन,,, आई,,, उई मां,,,,

राजेश _बोल मेरी जान,

क्या बात है,,,

उसकी एक चूची को मसलते एवम नंगी पीठ को चूमते हुए बोला।

मधु _आरती को सब पता,,,, आ,,, उन,,, आई,, उन,, आह मां आई,,,,

राजेश _राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, लंद मधु की गर्भाशय से टकराया,, और धक्का मारना रोक दिया,,

आरती को क्या पता,

ठीक से बोल क्या कहना चाह रही?

राजेश ने लंद फिर बाहर खींचकर जोर से धक्का मारा,,

मधु _उई मां,,,

आरती को सब पता चल गया,,,,, आह

हमारे बारे,,, आई,,, उन,,,

राजेश ने चोदना रोक कर,,, उसकी चूची मसलते हुए पूछा,,

क्या पता चल गया?

मधु _यही की हम chudai करते हैं?

राजेश _क्या? ये तू क्या कह रही है?

मधु _हां,, ये सच है?

उसने हमे देख लिया,,,

राजेश _पर कैसे और कब?

मधु _पिछले बार जब हम chudai का खेल खेल रही थे।

राजेश _उसने किसी को बताया तो नही?

मधु की चुचियों को मसलते हुए पूछा।

मधु _नही,, उसने अब तक किसी को यह बात नहीं बताई है?

पर,,,

राजेश _पर क्या?

मधु _वह भी आपसे chudna चाहती है?

राजेश _ये तू क्या कह रही है?

मधु _ये सच है!

वो जब से chudai देखी है आपसे चुदने के लिय तड़प रही है।

राजेश ने अपना लंद उसकी boor से बाहर निकाल लिया।

मधु ने उसका लंद पकड़ कर चूसना शुरु कर दी।

मधु _वह आपके लंद से chudna चाहती है।

राजेश _नही, उसे मना कर देना

मैं उसे नही चोद सकता।

आरती प्लान के मुताबिक, पलंग के नीचे छुपी थी वह बाहर निकली,,,

आरती _क्यू? क्यू नही चोद सकते मुझे?, जब मधु को चोद सकते हो तो।

राजेश _आरती, तुम यहां?

राजेश चौंक गया?

आरती _हा मै?

राजेश _, तुम लोगो का ये कोई प्लान था?

आरती _भईया, मुझे आपसे chudna है बस? आगे मै कुछ नहीं जानती।

आरती, राजेश के लंद के नीचे मधु के बाजू घुटने के बल बैठ गई।

मधु ने राजेश का लंद अपने मुंह से निकाल ली।

आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर उसके टोपे को मुंह में ले ली।

फिर अन्दर बाहर करना शुरू कर दी।

राजेश _आरती, ये तुम क्या कर रही छोड़ो उसे।

मधु _वाह आरती, ऐसा तो लग ही नहीं रहा है कि तुम पहली बार लंद चूस रही हो।

मधु राजेश के अंडकोष को अपने हाथो से सहलाते हुए बोली।

थोड़ा और अन्दर लेकर चूसो,,,

हा ऐसे ही,,,

अच्छी चूस रही हो,,,

राजेश _आरती छोड़ो उसे। ये तुम्हे नही करना चाहिए।

आरती _क्यों, भईया, मै क्यू नही,,,

राजेश _तुम अभी कुंवारी हो,,

ताई को पता चल गया न, तो मैं उसे क्या जवाब दूंगा?

तुम्हारी शादी नही हुई है, अभी तुम्हार शील भंग हो जायेगा।

तेरी शादी के बाद तेरे पति को पता चलने पर, प्रॉब्लम हो सकती है।

तुम्हे अभी शादी से पहले इन चीजों से दूर रहना चाहिए।

आरती _नही भईया, मैंने ठान ली है? मै शील आप ही से तुड़वाऊंगी।

राजेश _तू पागल हो गई हो क्या?

आरती _हा हां, मै आपके लंद के लिए पागल हो गई हूं।

मैं पिछले कुछ दिनों से ठीक से सो नहीं पा रही।

अगर आप मुझे चोद कर मेरी ईच्छा पूरी नहीं की न तो मैं सच में पागल हो जाऊंगी।

तभी मधु बेड पकड़ कर झुक गई,,,

मधु _आरती, भईया का लंद मेरे boor पे डाल दे।

आरती ने राजेश का लंद अपने मुंह से निकाल कर, मधु की योनि में सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का लगा दिया, लंद boor चिर कर अन्दर समा गया।

अब राजेश मधु की कमर दोनों हाथो से पकड़ कर।

गच गच, चोदना शुरु कर दिया,,,

कमरे में मादक सिसकारी गूंजने लगा,,,

इधर आरती अपना कपड़ा उतार फेकी और पूरी नहीं हो गई।

आरती, काम के देवी लग रही थी, बडी बडी चूचे।

गोरा बदन, लंबी लंबी बाल। उसने अपनी boor की बाल को अच्छी तरह साफ कर दी थी।

मधु _आरती, आजा मेरे सामने बेड पर लेट जा, तेरी boor चाट दू।

आरती बेड पर चढ़ कर, मधु के सामने टांगे फैला कर बेड पर लेट गई।

मधु उसकी boor चाटना शुरू कर दी।

आरती को बहुत मजा आने लगा।

उसकी boor पानी फेकने लगा।

उसकी मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगीं।

इधर राजेश मधु की कमर पकड़ कर लंद को boor में अन्दर बाहर करने में लगा हुआ था।

मधु _भईया, थोड़ा और तेज चोदो मैं झड़ने वाली हूं।

मधु भी अपना कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगीं,,

राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,

कुछ ही देर में मधु, चीखते हुए झड़ने लगी,,

झड़ने के बाद,

मधु बेड में सुस्ताने लगी, राजेश अपना लंद बाहर खींच लिया। इधर आरती अपनी दोनों टांगे फैला रखी थी, उसकी मस्त चिकनी boor पानी टपका रही थी। राजेश ने आरती की योनी की ओर देखा।

उसकी योनि बहुत खूबसूरत थी। गोरी मस्त फूली हुई।

एक दम गीली।

आरती _भईया देख क्या रहे हो डाल दो अन्दर।

राजेश _न मै ऐसा नहीं कर सकता, ताई को क्या जवाब दूंगा।

आरती _भईया तुम्हे मेरी कसम हैं, अगर तुमने मेरी ईच्छा पूरी नहीं की तो मैं कभी आपसे बात नहीं करूंगी।

राजेश _पर आरती ये गलत है। तुम्हारे सील तोड़ने का हक तुम्हारे पति का है, मेरा नही।

आरती _ये chut मेरी है, मेरी मर्जी मै किससे इसकी सील तुड़वाऊ।

अगर अगर मेरी ईच्छा पूरी नहीं की तो मैं जान दे दूंगी।

मधु _राजेश भईया, आरती की इच्छा पूरी कर दो, नही तो ये कुछ भी कर सकती है ।

राजेश _पर,,, ताई को क्या जवाब दूंगा?

आरती _मां को कभी पता चले तो कह दूंगी की मैंने ही भईया को मजबूर किया, उसकी कोई गलती नही।

राजेश सोचने लगा,,,

आरती _भईया अब सोंचो मत,,,डाल दो अपना लंद मेरी योनि में, बुझा दो मेरी प्यास।

राजेश, आरती के टांगो के बीच आ गया।

मधु _भईया रुको, मै आरती के चूतड के नीचे कपड़ा बिछा दूं। खून बेड के चादर , पे लग जायेगा।

मधु कपडे ढूंढने लगीं।

इधर राजेश आरती की chut चाटना शुरू कर दिया।

आरती स्वर्ग में उड़ने लगी।

उसकी योनि से पानी झरने की तरह बहने लगा।

मधु कपड़ा को आरती के चूतड के नीचे बिछा दिया।

और राजेश के लंद को चूसने लगी।

फिर उसके लंद को पकड़ कर आरती की योनी के मुंह पे सेट कर दी।

मधु _फाड़ दो भईया आरती की chut को, तोड़ दो इसकी सील।

राजेश ने आरती की ओंठ को चूसा, उसकी मस्त चूचियां को पकड़ कर मसला जो काफी कड़क थे।

उसकी निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

आरती के मुंह से सिसकारी निकलने लगीं।

फिर आरती के नाभी को चाटने लगा।

और आखिर लंद को पकड़ कर उसकी योनी की भगनाशा को घिसने लगा।

आरती सिसकने लगी।

राजेश ने लंद को योनि छेद में रखकर एक दबाव डाला।

लंद अन्दर नहीं जा पा रहा था।

इधर मधु आरती की बालो को सहला रही थी।

मधु _भईया जरा जोर लगाओ। आरती की chut टाइट है आसानी से अन्दर नहीं जाएगा।

राजेश ने एक जोर का दबाव डाला।

लंद का टोपा boor फाड़कर, अंदर चला गया।

आरती चीख उठी।

मधु ने उसके मुंह में उसकी पेंटी ठूस दी।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

योनि की झिल्ली फाड़कर लंद आधा अन्दर घुस गया।

आरती जोर से चीखी पर मुंह में कपड़ा ठूसे होने के कारण आवाज, निकाल न पाई।

Boor से खून टपकने लगा।

मधु, आरती की बालो को सहलाने लगीं।

राजेश, आरती की निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

अब राजेश धीरे धीरे लंद को अन्दर बाहर सरकाने लगा।

धीरे धीर लंद योनि में जगह बनाने लगा।

कुछ देर बाद लंदयोनि को फैला कर पूरा योनि में समा गया।

अब राजेश आरती की चूची मसलते हुवे लंद को योनि में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

धीरे धीर आरती का दर्द कम होने लगा, अब उसे भी मज़ा आने लगा।

इधर टाइट योनि चोदने से राजेश को भी बहुत मजा आने लगा।

आरती की योनी में उसका लंद कसा कसा अन्दर बाहर होने लगा।

अब आरती को दर्द के साथ मजा भी आ रहा था। कभी दर्द से चीखती तो कभी मज़े में मादक सिसकारी निकालती।

उसकी योनि से खून निकलना बंद हो गया। अब उसकी योनि खूब पानी छोड़ने लगा।

उसकी योनि को लंद ने पूरी तरह फाड़ दिया।

लंद अब आसानी से अन्दर बाहर होने लगा।

अब आरती को बहुत मजा आने लगा।

मधु ने उसके मुंह से कपड़ा निकाल दी।

आरती अपने मुंह से कामुक सिसकारी निकालने लगीं।

मधु _आखिर फडवा ही ली अपनी boor राजेश भईया से।

आ रहा है न मजा,,,

आरती _हूं,,,, आह मां आई,,, बहुत मजा आ रहा,,,, आई ,,,

राजेश तेज तेज चोदने लगा,,,

आरती स्वर्ग में उड़ने लगीं, वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई,,,

और कुछ ही देर में राजेश की कमर को जकड़ कर झड़ने लगीं,,, आह मां आह,, वह बेहीश सी हो गई,

वह पहली बार झड़ी थी उसे इतना आनंद का अनुभव huwa जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी

राजेश ने चोदना बंद कर दिया।

अपना लंद बाहर निकाल दिया।

मधु राजेश के लंद को चूसने लगी।

मधु _भईया, आज आपको एक और सील तोड़नी है।

राजेश _मै कुछ समझा नही, और किसकी सील,,,

मधु _मेरी गाड़ की सील,,,

राजेश _तुम्हारी गाड़ की छेद सकरी है, झेल पाएगी।

मधु _ आपके लंद के लिए तो कुछ भी झेल सकती हूं।

राजेश _जाओ किचन से घी का डिब्बा ले आओ।

मधु, किचन में चली गईं।

इधर आरती होश में आई,,,

उसने देखा राजेश का लंद अभी भी खड़ा था। जो हवा में लहरा रहा था।

उसने अपनी योनि की ओर देखा जो फट चुकी थी। पूरी तरह फैल गई थी।

राजेश _आरती तुम ठीक तो हो न।

आरती _हूं,,

राजेश ने आरती की सिर को प्यार से सहलाने लगा।

इधर मधु किचन से घी का डिब्बा ले आई।

राजेश ने मधु का बेड के सहारे झुका दिया।

उसकी गाड़ पे सहलाया फिर उंगली में घी लगाया और उंगली गाड़ के अन्दर घुसा दिया।

उसे अन्दर बाहर करने लगा।

घी को उसकी गाड़ में पूरा भर दिया।

एक ऊंगली डालकर अन्दर बाहर करने के बाद दो ऊंगली डालने की कोशिश करने लगा।

मधु के मुंह में पेंटी ठूस दिया।

इधर आरती समझ नही पा रही थी की भईया क्या करने जा रहा है।

क्या इतना मोटा लंद गाड़ में घुसा देगा।

ये कैसा मुमकिन होगा? वह बेड में लेटे लेटे राजेश और मधु की हरकत देखने लगीं।

इधर राजेश ने दो ऊंगली डाल कर गाड़ को फैलाने की कोशिश करने लगा।

मधु को दर्द हो रहा था। पर मजा भी आ रहा था।

राजेश दो ऊंगली गाड़ में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा। उसकी गाड़ फैलाने लगा।

फिर तीनो ऊंगली में घी लगा कर, उसे गाड़ में डालने की कोशिश करने लगा, धीरे धीरे तीन ऊंगली डालने में कामयाब हो गया।

मधु को दर्द हो रहा था, वह कभी चीख रही थी, तो कभी कराह रही थी, तो कभी आनद में सिसक भी रही थी।

राजेश ने सपना तीन ऊंगली डाल कर योनि चौड़ा करने लगा।

कुछ देर तक वह तीन ऊंगली योनि डाल कर गाड़ में अन्दर बाहर किया।

उसके बाद योनि में अच्छी तरह घी को भर दिया और अपने लंद में भी अच्छी तरह चुपड़ लिया।

राजेश _मधु क्या तुम, गाड़ में लंद लेने के लिए तैयार हो?

मधु _हूं,,,

राजेश ने मधु की योनि में लंद एक ही झटके में डाल दिया और दनादन चोदने लगा।

मधु के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।

लंद boor की पानी और घी से एकदम चिकना हो गया।

अब राजेश ने लंद boor से निकाल कर गाड़ के छेद में सेट किया और अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा।

काफी कोशिश के बाद लंद का टोपा, गाड़ में डालने में कामयाब हो गया।

मधु को दर्द होने लगा वह दर्द से कराहने लगीं।

राजेश उसकी चूंची मसलने लगा।

कुछ देर बाद दर्द थोड़ा कम होने पर राजेश ने लंद का दबाव गाड़ में बडा दिया।

लंद धीरे धीरे अन्दर सरकने लगा।

वह गाड़ को फैलाने लगा।

राजेश मधु की योनि की भगनाश को ऊंगली से छेड़ने लगा एक हाथ से उसकी चूची मसलने लगा।

मधु को मजा आने लगा।

राजेश धीरे धीर लंद को गाड़ में उतरता चला गया।

कुछ समय बाद लंद गाड़ को फाड़ कर आधा अन्दर घुस गया।

अब राजेश लंद को गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया।

मधु की चूची मसलते हुवे वह अपना लंद गाड़ में धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।

मधु दर्द से कराहने लगीं।

राजेश का लंद अन्दर घुसता चला गया। गाड़ को फैला कर लंद उसमे समाता चला गया।

अब राजेश मधु की दर्द का परवाह न करते हुए। सपना स्पीड बढ़ाने लगा।

लंद गाड़ में अब अन्दर बाहर होने लगा।

मधु दर्द से छटपटाने लगीं।

राजेश उसकी कमर को पूरी तरह जकड़ लिया और लंद को गाड़ में स्पीड के साथ अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद गाड़ को फैला कर, अन्दर बाहर होने लगा।

इधर मधु को दर्द के कारण आंसू निकल आए।

पर धीरे धीर उसे भी अब मजा आने लगा।

उसकी गाड़ पूरी तरह फैल गई।

अब लंद गाड़ में आसानी से अन्दर बाहर होने लगा।

आरती आंखें फाड़े आश्चर्य से देखने लगीं।

इतना मोटा लंद गाड़ में कैसे घुस गया?

इधर मधु कभी दर्द से कराहती, चीखती तो कभी मज़े से सिसकती।

उसे गाड़ मरवाने में एक अलग मजा आने लगा।

राजेश अब तेज तेज गाड़ चोदने लगा।

कुछ देर बाद लंद गाड़ से बाहर निकाल कर योनि में डाल दिया।

और फच फैच चोदने लगा।

मधु जन्नत में उड़ने लगी।

राजेश लंद योनि से निकाल कर गाड़ में डाल दिया फिर सर सर अन्दर बाहर करने लगता।

इस तरह कभी योनि तो कभी गाड़ में लंद डालकर, मधु को संभोग की परम सुख देने लगा।

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था।

गाड़ की कसावट के कारण वह भी झड़ने की स्थिति में पहुंचने लगा।

वह तेज तेज गाड़ मारने लगा।

मधु की गाड़ फट चुकी थी, उससे खून भी निकलने लगा।

राजेश का पूरा लंद गाड़ में समा चुका था।

वह तेज तेज गाड़ मारने लगा।

राजेश अब खुद को रोक न सका और कराहते हुवे लंद से वीर्य की पिचकारी गाड़ में छोड़ने लगा।

मधु की गाड़ को वीर्य से पूरी तरह भर दिया।

और बेड पर लुड़क गया।

इधर मधु ने राहत की सांस ली।

उसने अपनी योनि में गर्म गर्म वीर्य जाति हुई महसूस की।

और एक बार फिर झड़ गई।

उसकी गाड़ से वीर्य बहने लगा।

इधर आरती आश्चर्य से देखती रही।

तीनो बेड में सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद, राजेश उठा।

राजेश _चलो इससे पहले घर में काका काकी आ जाए। अपने कपडे पहन लो।

आरती बेड से उठी तो वह ठीक से चल नहीं पा रही थी।

उसकी योनि सूज गई थी।

अन्दर से छिल गया था।

राजेश _आरती क्या huwa?

आरती शर्मा गई।

राजेश _दर्द हो रहा है क्या?

आरती कुछ नहीं बोली। अपनी कपडे पहनने लगीं।

कुछ देर बाद मधु भी उठी, वह भी ठीक से चल नहीं पा रही थी। उसकी गाड़ फट चुकी थी।

अन्दर से छिल गया था।

उसे चलने में दर्द होने लगा।

आरती _मधु तुम ठीक तो हो न।

मधु _हूं,,

तीनो ने अपना कपड़ा पहन लिया।

राजेश _देखो, आज से chudai बंद अब दोनों, पढ़ाई में ध्यान दो। अब एग्जाम के पहले कोई chudai नही होगी।

राजेश _तुम दोनों समझ गए ना।

मधु _ठीक है राजेश भईया, वैसे भी अब 15, दिनों तक हम चुदने के लायक नहीं है।

क्यू आरती?

मधु हसने लगी।
 
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