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गुरुदेव ........ उचित है ऋषि दूर्वा हम आपके निवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकते है
कुछ देर बाद सभी ऋषि आवर गुरुदेव जमीं पे लगे नरम घास फ़स के आसान पे बैठे पत्तो के थल में सात्विक भोजन करने लग जाते है जिसमे खीर हलवा पूरी फल आदि सात्विक भोजन था ग
गुरुदेव साम तक विश्राम कर वह अन्य विषय पे बात करने के बाद सभी ऋषि आवर देवी मूल्य साध्वियों से विदा ले सूर्य से भेंट करने सूर्यग्रह निकल गए ...........
अब आगे ..........
सूर्यगढ़ ........... सूर्य साम के करीब 6 बजे हवेली पहुंचा तब गुरुदेव पहले से हवेली में मौजूद थे दादा जी दादी जी से मेर्री जी के विवाह को ले कर चर्चा कर रहे थे
जैसे हे सूर्य हवेली पंहुचा गुरुदेव को सूर्य के आने का आभाष हो चूका था वही सूर्य को भी गुरुदेव का हवेली में होने का पता चल गया था
गुरुदेव ने सूर्य को एकांत में मिलने के लिया मानसिक संकेत भेजा
सूर्य अपने दादा जी दादी जी से कुछ देर बात कर गुरुदेव के साथ हवेली के पीछे की आवर चल दिया करीब आधे घंटे बाद सूर्य वापिस लौटा गुरुदेव सूर्य से भेंट कर सीधा परीलोक के लिया परस्थान कर चुके थे
रात करीब 8 बजे शिव आवर महेंद्र जी भी हवेली आ चुके थे विजय फूफा जी फ़िलहाल बहार किसी बिज़नेस मीटिंग के लिया गए हुए थे
सभी निर्या किरण से ड्रैगन लोक की यात्रा पे चर्चा करते हुए हाशि ख़ुशी के बिच खाना ख़तम किया
ीदार सूर्य ने सभी के साथ खाना खाने के बाद कुछ देर टहलने के लिया हवेली की छठ पे आ गया अभी सूर्य अपने फ़ोन पे सोहेल से उसके निकाह को ले कर मज़ाक करते हुए तायल रहा था
तभी किसी ने पीछे से सूर्य को बहो में भर लिया सूर्य को अपनी पीठ पे बहुत हे कोमल अंगो का आभाष हुआ आवर ुशी के साथ सूर्य की गर्दन पे किसी के नाजुक कोमल होंटो से चुम्बन अंकित किया
सूर्य ने अपने सीने पे कसबे हर कोमल हाथो को पकड़ कर उस साक्ष को अपने सामने किया
वो कोई आवर नहीं बल्कि मेर्री जी हे थी जिसने सूर्य को अकेले में ऊपर आते देख पीछे पीछे चली आई थी आवर सूर्य को पीछे से अपनी बहो में भर लिया था
सूर्य ने सोहेल से बाद में बात करने का बोल कर कॉल डिसकनेक्ट किया आवर मेर्री जी की आँखों में देखने लगा मेर्री जी की आँखे हलकी नाम थी जैसे अभी रो पड़ेगी
सूर्य आवर मेर्री जी कुछ देर दोनों एक दूसरे को देखते रहे
इस बिच कब मेर्री जी की डबडबाई आँखों से आंसू निकल कर उसके गुलाबी गालो से बहते हुए गिरने लगे
सूर्य को भी मेर्री जी की ऐसी हालत देख बहुत दुःख हुआ पैर वो समाज नहीं प् रहा था की आखिर मेर्री जी की आँखों में आंसू आने की वजह क्या है
सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेर्री जी के आँखों से बहते आंसू पोंछता है आवर उन्हें अपने सीने से लगा लेता है
सूर्य ........... क्या हुआ ममी जी आपकी आँखों में ये आंसू किस लिया
कुछ देर मेर्री जी सूर्य की किसी भी बात का जबाब नहीं देती है बस सूर्य के सीने से लगे सुबकती रहती है
मेर्री जी को ऐसे सुबकते रोतीहुए देख सूर्य आवर ज्यादा परेशान हो जाता है फिर अचानक से सूर्य मेर्री जी के आंसुओ से भीगे खूबसूरत चेहरे को अपने हाथो में थामे हुए दोनों बंद आँखों को चुम लेता आसुओं के कारन सूर्य के मुँह में मेर्री जी की आंसुओ का हल्का नमकीन सा टेस्ट आ रहा था
सूर्य ने बिना नमकीन टेस्ट की परवाह किया मेर्री जी के कपकपाते होंटो को अपने होंटो में भर कर किश करने लगता है
अगले हे पल मेर्री जी की आँखों से आंसू बहना बंद हो चूका था साथ हे साथ उनकी सुबकती हुई आवाज भी
देरी डेरी सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे किश में खोते चले गए
करीब 5,6 मिनट्स बाद सूर्य ने किश तोड़ा तो मेर्री जी के साइज 36 के ुनात उभर उनकी तेज सांसो के साथ ऊपर निचे होने लगे थे
सूर्य ने छठ पे बने रूम को खोला आवर मेर्री जी को अपने गौड़ में उठा कर सीधा बीएड पे लिटा दिया आवर खुद भी उनकी बगल में लेट गया
मेर्री जी सूर्य के सीने पे सर रखे किसी गहरी सोच में डूबने लगी
सूर्य .. ...... आपको क्या हुआ है ममी जी किसी ने आपसे कुछ कहा है क्या या फिर कोई आवर परेशानी है जिसे ले कर आप इतनी परेशान है आप कब से इतनी कमजोर हो गई
मेर्री जी ........ मुझे ये सदी नहीं करनी है सूर्य
मेर्री जी की बात सुन मनो सूर्य के दिमाग में बचल हे आ गया हो
सूर्य ....... ये आप क्या कह रही है क्या मां जी ने आपको कुछ कहा है क्या
मेर्री जी ........ उन्होंने कुछ नहीं कहा मुझे
सूर्य ......... फिर बात क्या है सभी ने आपकी मर्जी से आपकी पसंद से हे तो इस रिश्ते के लिया है कहा था फिर भी अगर आप सदी नहीं करना चाहती है तो कोई आपको कुछ नहीं कहेगा ये आपका अपना फैसला है आवर मैं आपके हर फैसले की कदर करता हूँ पैर एक बार दोनों परिवार मां जी सभी के बारे में जरूर सोचियेगा फिर जो भी आपकी इच्छा होगी वही होगा
( सूर्य ने बोलने को तो बोल दिया था आवर ये सच भी था पैर उस हे अभी भी मेर्री जी के ऐसा करने की पीछे की वजह समाज नहीं आ रही थी आवर न हे सूर्य परिवार में से किसी का मंद रीड कर सकता था किरण से वडा जो किया था )
मेर्री जी ........ तुम कितना कुछ सोच लिया इतनी हे देर में मैं बस इस लिया सदी नहीं करना चाहती की मैं अपने इस परिवार से आवर तुमसे दूर नहीं होना चाहती
सूर्य ......... आप न सच में पागल है यार आवर किसने कहा की सदी हो जाने के बाद ये परिवार आपका नहीं रहेगा या फिर हम सब आपसे दूर हो जायेंगे
मेर्री जी .......आवर तुम क्या तुम सदी के बाद भी ऐसे हे मुझसे प्यार करते रहोगे
मेर्री जी इतना बोल सूर्य की आँखों में देखने लगती है जैसे वो सूर्य के भीतर जनकः कर इस बात की सचाई जानना चाहती हो
सूर्य ....... ये आप अपने दिल से पूछिए वो आपके इस सवाल का जबाब दे देगा
मेर्री जी ने सूर्य की t-shirts निकल कर उस से अलग कर देती है आवर सूर्य के सीने पे हर हिस्से पे अपने नाजुक होंतु से मिहिर लगाने लगती है
डेरी डेरी कमरे में तापमान भड़के लगता है आवर देखते हे देखते सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे जन्मजात नंगे एक दूसरे की बहो में समाये हुए थे
सूर्य का कामदण्ड मेर्री जी की गुलाबी योनि की गहराई में पेवस्त अंदर बहार हो रहा
हर गुजरते पल के साथ सूर्य पुर मेर्री जी के सम्भोग सिसकारियां रूम के भीतर किसी को भी उत्तेजित कर देने वाले कामुक संगीत के जैसे सुनाई दे रही थी
मेर्री जी का घाटी दूडिया शरीर पसीने से मनो कहा चूका हो पसीने की बुँदे मेर्री जी के गोर बदन पे ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे सफ़ेद संगेमरमर से निर्मित किसी खूबसूरत अप्सरा अपने यौवन की तपिश को ोंश की बूंदो से मिटा रही हो
सूर्य आवर मेर्री जी के इस 1हर तक चले अद्भुत सम्भोग मिलान से मेर्री जी का शरीर पूरी तरशा से पस्त हो चूका था जहा अभी भी मेर्री जी सूर्य के सीने पे ोंदे मुँह लेते तेज तेज साणे ले रही थी वही उनकी गुलाबी योनि से सूर्य आवर मेर्री जी के इस मिलान का कामर्स बहते हुए बीएड पे बिछी वाइट चादर पे इस मिलान की चाप छोड़ रहा था
मेर्री जी रह रक् कर सूर्य के होंटो को चुम कर मुस्कुरा देती
भले हे इस मिलान ने मेर्री जी की लगभग पूरी ऊर्जा ख़तम कर दी थी पैर इस सम्भोग मिलान की जो ख़ुशी संतुष्टि उनके मुख मंडल पे थी उसने बया कर पाना सायद हे संभव हो
कुछ देर बाद जब सूर्य का लिंग सुस्त हो कर मेर्री जी की योनि से निकल तो एक बाद फिर से मेर्री जी के मुँह से सीसी निकल गई
सूर्य ....... क्या अभी भी आपको लगता है की मैं आपसे दूर हो जाऊंगा या आपसे प्यार करना बंद कर दूंगा
मेर्री जी ........ ी ऍम रियली सॉरी माय स्वीटहार्ट लव ुम्मम्हा जब से सदी तय हुए है तब से पता नहीं आप सब को खो देने का दर सा लगने लगा है
सूर्य ....... समाज सकता हम मेर्री जी आपकी चिंता को बूत don't वोर्री आप हमेशा के इस परिवार का मुख्या हिस्सा रहेंगी जहा आप हर पल इन्तजार रहेगा
मेर्री जी ....... आवर तुम्हारा क्या हम्म
सूर्य ...........अच्छे से सोच लीजिये अभी हे प्रूफ दे सकता हूँ
कहते हुए सूर्य ने थोड़ी सख्ती से मेर्री जी की छूट के हलके सूजे हुए होंटो को अपने हाथ से सहला देता है
मेर्री जी ........अह्हह्ह्ह्ह िस्स्सस्स अभी नहीं अभी फिर से खेलने की ताकत नहीं है ुम्म्हा चलिए साथ में कहा कर निचे चलते है
कुछ देर बाद दोनों नाहा कर निचे आ गए अब ताज लगभग सब अपने अपने रूम में जा चुके थे केवल शालिनी जी आवर रेखा जी हे अभी हॉल में नजर आ रही थी
सूर्य सीधा अपने रूम में आ कर लेट गया जहा कोई भी नहीं था बाद हलकी हलकी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आ रही थी
सूर्य ......... स्वीटी बाथरूम में तुम हो क्या
मानसी ....... नहीं कुंवर जी मैं हूँ स्वीटी दीदी आज माँ के साथ सोने वाली है
सूर्य ....... Ok वैसे तुम क्या कर रही हो मनु
मानसी ....... वो मैं नाहा रही हूँ आपको कुछ काम था क्या
सूर्य ....... नहीं बस ऐसे हे पूछ लिया
कुछ देर बाद मानसी नाईट गाउन पहने बालो को टॉवल से बन्दे हुए बहार निकली
सूर्य जो अभी लेते लेते मोबाइल में लगा हुआ था वो बाथरूम के दूर खुलने की आवाज से उस आवर देखता है तो सामने पर्पल हॉट निघ्त्य पहने हुए मानसी बहार निकल रही थी
सूर्य अपने मोबाइल से खेलना छोड़ मानसी को हे देखने लगता है जो सीधा मिरर के सामने पहुंच कर हाथ पेअर सीने आदि भी किसी तरह की क्रीम का उसे कर रही थी जिस से पूरा रूम महक उठा
अभी अभी मेर्री जी के साथ सम्भोग करने के बाद भी फिर से हलचल होने लगी फिर भी सूर्य ने अभी के लिया कण्ट्रोल किया पैर बीएड से खड़ा हो कर मानसी के पीछे से उसने अपनी बहो में भर लिया
मानसी ......... ये आप क्या कर रहे है छोड़िये ने
सूर्य ........ आवर वो क्यों भला
मानसी ........मुझे त्यार होना है मेरा मतलब की मुझे अपने बालो को ठीक करना है आप बीएड पे चलिए
सूर्य ........ हम्म्म वैसे तुम्हारी ये खुसबू बहुत प्यारी है मनु उन्न्नणा
मानसी ......... आपको पसंद आई
सूर्य ......... है तुम्हारी बॉडी से निकलती तुम्हारी खुसबू इस क्रीम के साथ आवर भी प्यारी लगती है
मानसी ........ ये स्वीटी दीदी ने मुझे गिफ्ट की थी
सूर्य ........ ये तो अच्छी बात है दोनों बहनो में प्यार भडेगा वैसे आज साम को मैं बाबा से मिला था
मानसी ........ बाबा से मतलब .क्या सच में आप पिता श्री से मिले थे पैर वो तो इस संजय सुक्रलोक में है फिर आप क्या उनसे मिलने सुक्रालोम गए थे वो भी अकेले
सूर्य ....... नहीं मैं उनसे यही पृथ्वीलोक में हे मिला था पैर तुम कहना क्या चाहती हो की मैं अकेला सुक्रलोक नहीं जा सकता या तुम्हे दर है की मुझे सुक्रलोक में कोई नुकसान पंहुचा सकता है
मानसी ........ नहीं नहीं कुंवर जी हम ऐसा सोच भी नहीं सकते हमें नाफ्फ कर दीजिये बस हमें आपको ले दर लगता है अगर आपको कुछ हो गया तो हमारा परिवार हम सब का क्या होगा
मानसी का जो कुछ डेट पहले चेहरा खिला हुआ था वो अभ कुछ मुर्जा सा गया था
सूर्य ........ तुम बहुत भोली हो मनु सुक्रलोक में असुरगुरु सुक्रलोक के अलावा कोई नहीं है जो मेरा सामना कर सके
मानसी ....... मैं जानती हूँ पैर आप भी जानते है असुर चाल से वॉर करते है पीठ पीछे जैसे नरकादुर ने निर्भयासुर के साथ किया था
सूर्य ....... छोड़ो इन बातो को वो मैंने बाबा को सदी के लिया निमंत्रित किया था वो सदी में शामिल होने वाले है
मानसी .......क्या सच में पिता श्री परीलोक आपकी सदी में शामिल होंगे पैर उनके साथ अगर कोई आवर असुर आया तब आपने उन्हें किसी आवर को साथ लेन तो मन कर दिया था न
सूर्य ....... है वो अकेले आएंगे मैंने पहले देवयानी जी को भक आमंत्रित करने का सोचा था फिर बाबा ने ऐसा करने के लिया मन कर दिया
मानसी सूर्य को लिया बीएड पे आप पंहुचा
मानसी ....... आप किसी पे भी इतना जल्दी यकीं न किया कीजिये खाश कर के असुर आवर दानवो पे
सूर्य ....... अच्छा ठीक है बाबा अब मुस्कुरा भी दो
सूर्य आवर मानसी ऐसे हे कुछ देर बात करते है फिर मानसी की चाहत को समझते हुए सूर्य मानसी के साथ सम्भोग करता हक़ आवर दोनों एक दूसरे की बहो में भरे सो जाते है
परीलोक ............
उदार गुरुदेव ने रानी पारी प्रेतराज पारिजात रिद्धि j.king वैद्यराज को सूर्य आवर जीनत के विवाह को ले कर सूर्य आवर ऋषि दूर्वा आवर उनके भारतो के बिच जो कुछ भी बात हुई वो सभी के सामने रख दी
प्रेतराज भी इस बात से बेहद खुश थे आखिर जीनत उनकी बेटी थी कोई भी पिता यही चाहेगा की उसकी बेटी की डॉली उसकी चौखट से उसके द्वार से हे उसकी आँखों के सामने विदा हो
प्रेतराज ......... गुरुदेव आपके इस निर्णय से मैं आवर सम्पूर्ण प्रेतलोक आपके आभारी है
गुरुदेव .......... प्रेतराज हम आपकी मनोयस्थित से पूर्णतया अवगत है हम परीलोक के राज गुरु होने के साथ साथ एक पुत्री के पिता भी है किन्तु आपको इस बात का विशेष ख्याल रखना होगा की पुत्री जीनत आवर पुत्र सूर्य के आत्मा मिलान के दौरान किसी भी तरह का विघ्न उत्पन्न न हो पाए उचित समय पे ऋषि दूर्वा प्रेतलोक पधारेंगे आपको उनकी आज्ञा अनुसार हे कार्य करना होगा
प्रेतराज .......... आप निश्चिन्त रहे गुरुदेव ऋषि हर दूर्वा की हर आज्ञा का पालन आपके आदेश के सामान होगा आपके आवर उनके परिश्रम के चलते हे तो प्रेतलोक की राजकुमारी का विवाह उसके हे लोक में होना संभव हो पाया है फिर भला उनकी आज्ञा उनके आदेश की अवहेलना कैसे की जा सकती है
गुरुदेव .......... पुत्री जीनत के विवाह के लिया आपको ये सभी आवशयक तयारिया पूर्ण करनी होगी
कहते हुए गुरुदेव उन्हें कुछ सामग्री आवर उनका प्रयोग बताते है जिन्हे प्रेतराज खुशु ख़ुशी स्वीकार कर लेते है
प्रेतराज की तो सबसे बड़ी इच्छा अपनी पुत्री जीनत का विवाह अपने हे लोक में करने की इच्छा पूर्ण हो रही थी फिर भला उन्हें आवर क्या चाइये था
गुरुदेव ने वयपमासुर जी के आगमन की सुचना भी वह मौजूद सभी लोगो के सामने राखी जिसे सुन कुछ लोग चिंतित भी हुए
किन्तु जब गुरुदेव ने स्पष्ट किया के वो अकेले हे पुत्री मानसी के पिता आवर पुत्र सूर्य के ससुर श्री के रूप में ओस विवाह में शामिल हो रहे तब उनका मन संत हुआ
सब कुछ सभी को समाज कर गुरुदेव ने विवाह की तयारिया आवर सुरक्षा पे सभी से चर्चा की
रात का भोजन भरण कर गुरुदेव मंदिर में लौट आये आवर आराम करने के स्थान पे गगन ध्यान साधना में लीं हो गए
सूर्यगढ़ ........
.
ीदार ऐसे हे दो दिन बिट गए आज रात सूर्य का पुरे परिवार को परीलोक जाना था कल रात्रि सूर्य जीनत परिधि का विवाह जो होना था
शालिनी जी रेखा जी ने दादी जी के कहे अनुसार सभी तयारिया पूरी कर ली थी
दादा जी नाना जी दादी जी नानी जी दोनों मां जी फूफा जी शिव महेंद्र दोनों ममिया शालिनी जी रेखा जी मेनका जी मेर्री अलीना राधा किरण पायल प्रीती कोमल सपना वयोम सभी परीलोक जाने के लिया त्यार थे
सूर्य ने अपनी सकती से सभी के क्लोन त्यार किये ताकि किसी को भी उनकी इन उपस्थित का आभाष न हो विधि आवर गायत्री पहले से हे परीलोक में मौजूद थी व्योमासुर जी कल विवाह के समय हे परीलोक आने का सन्देश सूर्य को भेज चुके थे
तभी सूर्य को सोफिया की याद आई उसने भी तो सूर्य अपने विवाह के लिया आमंत्रित किया था
सूर्य ......... स्वीटी आप सभी को ले कर परीलोक चलो मैं सोफिया को ले कर आता हूँ
किरण ....... क्या वो भी परीलोक आ रही है
सूर्य ....... है उसने हमारी सचाई का पता है ऐसे में मुझे नहीं लगता की उसे इन्विते करना गलत होगा
किरण ........ ठीक है फिर आप एक काम क्यों नहीं करते है आप उसने पहले यही ले आइये हम सभी एक साथ हे वह चलते है
सूर्य ........ ठीक है तुम इस बारे में माँ को बता देना मैं अभी गया आवर अभी आया
सूर्य वह से गायब हो कर दिल्ली पंहुचा कुछ देर बाद सोफिया को लिया वापिस लौटा सभी लड़किया सोफिया से मिल काट खुश हो गई
शालिनी जी आवर रेखा जी ने भी सोफिया को गले लगा कर प्यार से स्वागत किया
सोफिया भी दिल से खुश होते हुए सभी से बड़े हे अपने पैन के साथ मिली उसने कही से भी ये मह्सुश नहीं हुआ की ये उसका परिवार नहीं है
शालिनी जी ......... सूर्य ये तुमने बहुत अच्छा किया जो सोफिया को ले आया
शिव ........ सूर्य तुम जानते हो न क्या कर रहे हो कही ये बात खुल गई तो
सोफिया ........ अंकल आप परेशान न हो मैं आप लोगो की सचाई कभी किसी को नहीं बताउंगी फिर भी आप को लगता है की मेरी वजह से आपको परेशानी हो सकती है तो ( सूर्य की आवर देख कर )
आप मेरी सभी यादें मिटा दीजिये ऐसा करने के बाद मैं चहु तब भी आप लोगो का सच किसी को पता नहीं चलेगा
शिव ........ उसकी जरुरत नहीं है सोफिया बीटा मुझे यकीं है ऐसा कभी नहीं होगा आवर अगर कभी ऐसा समय आया भी तो सूर्य सब संभल लेगा
दादा जी ........ अब हम सभी को चलना चाइये परीलोक सभी हमारा इन्तजार कर रहे होंगे
दादा जी के काने के बाद सूर्य ने टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण किया आवर सभी लोग परीलोक के लिया निकल गए पीछे से उन सभी का स्थान उनके क्लोन ने ले लिया था ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
गुरुदेव ........ उचित है ऋषि दूर्वा हम आपके निवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकते है
कुछ देर बाद सभी ऋषि आवर गुरुदेव जमीं पे लगे नरम घास फ़स के आसान पे बैठे पत्तो के थल में सात्विक भोजन करने लग जाते है जिसमे खीर हलवा पूरी फल आदि सात्विक भोजन था ग
गुरुदेव साम तक विश्राम कर वह अन्य विषय पे बात करने के बाद सभी ऋषि आवर देवी मूल्य साध्वियों से विदा ले सूर्य से भेंट करने सूर्यग्रह निकल गए ...........
अब आगे ..........
सूर्यगढ़ ........... सूर्य साम के करीब 6 बजे हवेली पहुंचा तब गुरुदेव पहले से हवेली में मौजूद थे दादा जी दादी जी से मेर्री जी के विवाह को ले कर चर्चा कर रहे थे
जैसे हे सूर्य हवेली पंहुचा गुरुदेव को सूर्य के आने का आभाष हो चूका था वही सूर्य को भी गुरुदेव का हवेली में होने का पता चल गया था
गुरुदेव ने सूर्य को एकांत में मिलने के लिया मानसिक संकेत भेजा
सूर्य अपने दादा जी दादी जी से कुछ देर बात कर गुरुदेव के साथ हवेली के पीछे की आवर चल दिया करीब आधे घंटे बाद सूर्य वापिस लौटा गुरुदेव सूर्य से भेंट कर सीधा परीलोक के लिया परस्थान कर चुके थे
रात करीब 8 बजे शिव आवर महेंद्र जी भी हवेली आ चुके थे विजय फूफा जी फ़िलहाल बहार किसी बिज़नेस मीटिंग के लिया गए हुए थे
सभी निर्या किरण से ड्रैगन लोक की यात्रा पे चर्चा करते हुए हाशि ख़ुशी के बिच खाना ख़तम किया
ीदार सूर्य ने सभी के साथ खाना खाने के बाद कुछ देर टहलने के लिया हवेली की छठ पे आ गया अभी सूर्य अपने फ़ोन पे सोहेल से उसके निकाह को ले कर मज़ाक करते हुए तायल रहा था
तभी किसी ने पीछे से सूर्य को बहो में भर लिया सूर्य को अपनी पीठ पे बहुत हे कोमल अंगो का आभाष हुआ आवर ुशी के साथ सूर्य की गर्दन पे किसी के नाजुक कोमल होंटो से चुम्बन अंकित किया
सूर्य ने अपने सीने पे कसबे हर कोमल हाथो को पकड़ कर उस साक्ष को अपने सामने किया
वो कोई आवर नहीं बल्कि मेर्री जी हे थी जिसने सूर्य को अकेले में ऊपर आते देख पीछे पीछे चली आई थी आवर सूर्य को पीछे से अपनी बहो में भर लिया था
सूर्य ने सोहेल से बाद में बात करने का बोल कर कॉल डिसकनेक्ट किया आवर मेर्री जी की आँखों में देखने लगा मेर्री जी की आँखे हलकी नाम थी जैसे अभी रो पड़ेगी
सूर्य आवर मेर्री जी कुछ देर दोनों एक दूसरे को देखते रहे
इस बिच कब मेर्री जी की डबडबाई आँखों से आंसू निकल कर उसके गुलाबी गालो से बहते हुए गिरने लगे
सूर्य को भी मेर्री जी की ऐसी हालत देख बहुत दुःख हुआ पैर वो समाज नहीं प् रहा था की आखिर मेर्री जी की आँखों में आंसू आने की वजह क्या है
सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेर्री जी के आँखों से बहते आंसू पोंछता है आवर उन्हें अपने सीने से लगा लेता है
सूर्य ........... क्या हुआ ममी जी आपकी आँखों में ये आंसू किस लिया
कुछ देर मेर्री जी सूर्य की किसी भी बात का जबाब नहीं देती है बस सूर्य के सीने से लगे सुबकती रहती है
मेर्री जी को ऐसे सुबकते रोतीहुए देख सूर्य आवर ज्यादा परेशान हो जाता है फिर अचानक से सूर्य मेर्री जी के आंसुओ से भीगे खूबसूरत चेहरे को अपने हाथो में थामे हुए दोनों बंद आँखों को चुम लेता आसुओं के कारन सूर्य के मुँह में मेर्री जी की आंसुओ का हल्का नमकीन सा टेस्ट आ रहा था
सूर्य ने बिना नमकीन टेस्ट की परवाह किया मेर्री जी के कपकपाते होंटो को अपने होंटो में भर कर किश करने लगता है
अगले हे पल मेर्री जी की आँखों से आंसू बहना बंद हो चूका था साथ हे साथ उनकी सुबकती हुई आवाज भी
देरी डेरी सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे किश में खोते चले गए
करीब 5,6 मिनट्स बाद सूर्य ने किश तोड़ा तो मेर्री जी के साइज 36 के ुनात उभर उनकी तेज सांसो के साथ ऊपर निचे होने लगे थे
सूर्य ने छठ पे बने रूम को खोला आवर मेर्री जी को अपने गौड़ में उठा कर सीधा बीएड पे लिटा दिया आवर खुद भी उनकी बगल में लेट गया
मेर्री जी सूर्य के सीने पे सर रखे किसी गहरी सोच में डूबने लगी
सूर्य .. ...... आपको क्या हुआ है ममी जी किसी ने आपसे कुछ कहा है क्या या फिर कोई आवर परेशानी है जिसे ले कर आप इतनी परेशान है आप कब से इतनी कमजोर हो गई
मेर्री जी ........ मुझे ये सदी नहीं करनी है सूर्य
मेर्री जी की बात सुन मनो सूर्य के दिमाग में बचल हे आ गया हो
सूर्य ....... ये आप क्या कह रही है क्या मां जी ने आपको कुछ कहा है क्या
मेर्री जी ........ उन्होंने कुछ नहीं कहा मुझे
सूर्य ......... फिर बात क्या है सभी ने आपकी मर्जी से आपकी पसंद से हे तो इस रिश्ते के लिया है कहा था फिर भी अगर आप सदी नहीं करना चाहती है तो कोई आपको कुछ नहीं कहेगा ये आपका अपना फैसला है आवर मैं आपके हर फैसले की कदर करता हूँ पैर एक बार दोनों परिवार मां जी सभी के बारे में जरूर सोचियेगा फिर जो भी आपकी इच्छा होगी वही होगा
( सूर्य ने बोलने को तो बोल दिया था आवर ये सच भी था पैर उस हे अभी भी मेर्री जी के ऐसा करने की पीछे की वजह समाज नहीं आ रही थी आवर न हे सूर्य परिवार में से किसी का मंद रीड कर सकता था किरण से वडा जो किया था )
मेर्री जी ........ तुम कितना कुछ सोच लिया इतनी हे देर में मैं बस इस लिया सदी नहीं करना चाहती की मैं अपने इस परिवार से आवर तुमसे दूर नहीं होना चाहती
सूर्य ......... आप न सच में पागल है यार आवर किसने कहा की सदी हो जाने के बाद ये परिवार आपका नहीं रहेगा या फिर हम सब आपसे दूर हो जायेंगे
मेर्री जी .......आवर तुम क्या तुम सदी के बाद भी ऐसे हे मुझसे प्यार करते रहोगे
मेर्री जी इतना बोल सूर्य की आँखों में देखने लगती है जैसे वो सूर्य के भीतर जनकः कर इस बात की सचाई जानना चाहती हो
सूर्य ....... ये आप अपने दिल से पूछिए वो आपके इस सवाल का जबाब दे देगा
मेर्री जी ने सूर्य की t-shirts निकल कर उस से अलग कर देती है आवर सूर्य के सीने पे हर हिस्से पे अपने नाजुक होंतु से मिहिर लगाने लगती है
डेरी डेरी कमरे में तापमान भड़के लगता है आवर देखते हे देखते सूर्य आवर मेर्री जी दोनों हे जन्मजात नंगे एक दूसरे की बहो में समाये हुए थे
सूर्य का कामदण्ड मेर्री जी की गुलाबी योनि की गहराई में पेवस्त अंदर बहार हो रहा
हर गुजरते पल के साथ सूर्य पुर मेर्री जी के सम्भोग सिसकारियां रूम के भीतर किसी को भी उत्तेजित कर देने वाले कामुक संगीत के जैसे सुनाई दे रही थी
मेर्री जी का घाटी दूडिया शरीर पसीने से मनो कहा चूका हो पसीने की बुँदे मेर्री जी के गोर बदन पे ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे सफ़ेद संगेमरमर से निर्मित किसी खूबसूरत अप्सरा अपने यौवन की तपिश को ोंश की बूंदो से मिटा रही हो
सूर्य आवर मेर्री जी के इस 1हर तक चले अद्भुत सम्भोग मिलान से मेर्री जी का शरीर पूरी तरशा से पस्त हो चूका था जहा अभी भी मेर्री जी सूर्य के सीने पे ोंदे मुँह लेते तेज तेज साणे ले रही थी वही उनकी गुलाबी योनि से सूर्य आवर मेर्री जी के इस मिलान का कामर्स बहते हुए बीएड पे बिछी वाइट चादर पे इस मिलान की चाप छोड़ रहा था
मेर्री जी रह रक् कर सूर्य के होंटो को चुम कर मुस्कुरा देती
भले हे इस मिलान ने मेर्री जी की लगभग पूरी ऊर्जा ख़तम कर दी थी पैर इस सम्भोग मिलान की जो ख़ुशी संतुष्टि उनके मुख मंडल पे थी उसने बया कर पाना सायद हे संभव हो
कुछ देर बाद जब सूर्य का लिंग सुस्त हो कर मेर्री जी की योनि से निकल तो एक बाद फिर से मेर्री जी के मुँह से सीसी निकल गई
सूर्य ....... क्या अभी भी आपको लगता है की मैं आपसे दूर हो जाऊंगा या आपसे प्यार करना बंद कर दूंगा
मेर्री जी ........ ी ऍम रियली सॉरी माय स्वीटहार्ट लव ुम्मम्हा जब से सदी तय हुए है तब से पता नहीं आप सब को खो देने का दर सा लगने लगा है
सूर्य ....... समाज सकता हम मेर्री जी आपकी चिंता को बूत don't वोर्री आप हमेशा के इस परिवार का मुख्या हिस्सा रहेंगी जहा आप हर पल इन्तजार रहेगा
मेर्री जी ....... आवर तुम्हारा क्या हम्म
सूर्य ...........अच्छे से सोच लीजिये अभी हे प्रूफ दे सकता हूँ
कहते हुए सूर्य ने थोड़ी सख्ती से मेर्री जी की छूट के हलके सूजे हुए होंटो को अपने हाथ से सहला देता है
मेर्री जी ........अह्हह्ह्ह्ह िस्स्सस्स अभी नहीं अभी फिर से खेलने की ताकत नहीं है ुम्म्हा चलिए साथ में कहा कर निचे चलते है
कुछ देर बाद दोनों नाहा कर निचे आ गए अब ताज लगभग सब अपने अपने रूम में जा चुके थे केवल शालिनी जी आवर रेखा जी हे अभी हॉल में नजर आ रही थी
सूर्य सीधा अपने रूम में आ कर लेट गया जहा कोई भी नहीं था बाद हलकी हलकी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आ रही थी
सूर्य ......... स्वीटी बाथरूम में तुम हो क्या
मानसी ....... नहीं कुंवर जी मैं हूँ स्वीटी दीदी आज माँ के साथ सोने वाली है
सूर्य ....... Ok वैसे तुम क्या कर रही हो मनु
मानसी ....... वो मैं नाहा रही हूँ आपको कुछ काम था क्या
सूर्य ....... नहीं बस ऐसे हे पूछ लिया
कुछ देर बाद मानसी नाईट गाउन पहने बालो को टॉवल से बन्दे हुए बहार निकली
सूर्य जो अभी लेते लेते मोबाइल में लगा हुआ था वो बाथरूम के दूर खुलने की आवाज से उस आवर देखता है तो सामने पर्पल हॉट निघ्त्य पहने हुए मानसी बहार निकल रही थी
सूर्य अपने मोबाइल से खेलना छोड़ मानसी को हे देखने लगता है जो सीधा मिरर के सामने पहुंच कर हाथ पेअर सीने आदि भी किसी तरह की क्रीम का उसे कर रही थी जिस से पूरा रूम महक उठा
अभी अभी मेर्री जी के साथ सम्भोग करने के बाद भी फिर से हलचल होने लगी फिर भी सूर्य ने अभी के लिया कण्ट्रोल किया पैर बीएड से खड़ा हो कर मानसी के पीछे से उसने अपनी बहो में भर लिया
मानसी ......... ये आप क्या कर रहे है छोड़िये ने
सूर्य ........ आवर वो क्यों भला
मानसी ........मुझे त्यार होना है मेरा मतलब की मुझे अपने बालो को ठीक करना है आप बीएड पे चलिए
सूर्य ........ हम्म्म वैसे तुम्हारी ये खुसबू बहुत प्यारी है मनु उन्न्नणा
मानसी ......... आपको पसंद आई
सूर्य ......... है तुम्हारी बॉडी से निकलती तुम्हारी खुसबू इस क्रीम के साथ आवर भी प्यारी लगती है
मानसी ........ ये स्वीटी दीदी ने मुझे गिफ्ट की थी
सूर्य ........ ये तो अच्छी बात है दोनों बहनो में प्यार भडेगा वैसे आज साम को मैं बाबा से मिला था
मानसी ........ बाबा से मतलब .क्या सच में आप पिता श्री से मिले थे पैर वो तो इस संजय सुक्रलोक में है फिर आप क्या उनसे मिलने सुक्रालोम गए थे वो भी अकेले
सूर्य ....... नहीं मैं उनसे यही पृथ्वीलोक में हे मिला था पैर तुम कहना क्या चाहती हो की मैं अकेला सुक्रलोक नहीं जा सकता या तुम्हे दर है की मुझे सुक्रलोक में कोई नुकसान पंहुचा सकता है
मानसी ........ नहीं नहीं कुंवर जी हम ऐसा सोच भी नहीं सकते हमें नाफ्फ कर दीजिये बस हमें आपको ले दर लगता है अगर आपको कुछ हो गया तो हमारा परिवार हम सब का क्या होगा
मानसी का जो कुछ डेट पहले चेहरा खिला हुआ था वो अभ कुछ मुर्जा सा गया था
सूर्य ........ तुम बहुत भोली हो मनु सुक्रलोक में असुरगुरु सुक्रलोक के अलावा कोई नहीं है जो मेरा सामना कर सके
मानसी ....... मैं जानती हूँ पैर आप भी जानते है असुर चाल से वॉर करते है पीठ पीछे जैसे नरकादुर ने निर्भयासुर के साथ किया था
सूर्य ....... छोड़ो इन बातो को वो मैंने बाबा को सदी के लिया निमंत्रित किया था वो सदी में शामिल होने वाले है
मानसी .......क्या सच में पिता श्री परीलोक आपकी सदी में शामिल होंगे पैर उनके साथ अगर कोई आवर असुर आया तब आपने उन्हें किसी आवर को साथ लेन तो मन कर दिया था न
सूर्य ....... है वो अकेले आएंगे मैंने पहले देवयानी जी को भक आमंत्रित करने का सोचा था फिर बाबा ने ऐसा करने के लिया मन कर दिया
मानसी सूर्य को लिया बीएड पे आप पंहुचा
मानसी ....... आप किसी पे भी इतना जल्दी यकीं न किया कीजिये खाश कर के असुर आवर दानवो पे
सूर्य ....... अच्छा ठीक है बाबा अब मुस्कुरा भी दो
सूर्य आवर मानसी ऐसे हे कुछ देर बात करते है फिर मानसी की चाहत को समझते हुए सूर्य मानसी के साथ सम्भोग करता हक़ आवर दोनों एक दूसरे की बहो में भरे सो जाते है
परीलोक ............
उदार गुरुदेव ने रानी पारी प्रेतराज पारिजात रिद्धि j.king वैद्यराज को सूर्य आवर जीनत के विवाह को ले कर सूर्य आवर ऋषि दूर्वा आवर उनके भारतो के बिच जो कुछ भी बात हुई वो सभी के सामने रख दी
प्रेतराज भी इस बात से बेहद खुश थे आखिर जीनत उनकी बेटी थी कोई भी पिता यही चाहेगा की उसकी बेटी की डॉली उसकी चौखट से उसके द्वार से हे उसकी आँखों के सामने विदा हो
प्रेतराज ......... गुरुदेव आपके इस निर्णय से मैं आवर सम्पूर्ण प्रेतलोक आपके आभारी है
गुरुदेव .......... प्रेतराज हम आपकी मनोयस्थित से पूर्णतया अवगत है हम परीलोक के राज गुरु होने के साथ साथ एक पुत्री के पिता भी है किन्तु आपको इस बात का विशेष ख्याल रखना होगा की पुत्री जीनत आवर पुत्र सूर्य के आत्मा मिलान के दौरान किसी भी तरह का विघ्न उत्पन्न न हो पाए उचित समय पे ऋषि दूर्वा प्रेतलोक पधारेंगे आपको उनकी आज्ञा अनुसार हे कार्य करना होगा
प्रेतराज .......... आप निश्चिन्त रहे गुरुदेव ऋषि हर दूर्वा की हर आज्ञा का पालन आपके आदेश के सामान होगा आपके आवर उनके परिश्रम के चलते हे तो प्रेतलोक की राजकुमारी का विवाह उसके हे लोक में होना संभव हो पाया है फिर भला उनकी आज्ञा उनके आदेश की अवहेलना कैसे की जा सकती है
गुरुदेव .......... पुत्री जीनत के विवाह के लिया आपको ये सभी आवशयक तयारिया पूर्ण करनी होगी
कहते हुए गुरुदेव उन्हें कुछ सामग्री आवर उनका प्रयोग बताते है जिन्हे प्रेतराज खुशु ख़ुशी स्वीकार कर लेते है
प्रेतराज की तो सबसे बड़ी इच्छा अपनी पुत्री जीनत का विवाह अपने हे लोक में करने की इच्छा पूर्ण हो रही थी फिर भला उन्हें आवर क्या चाइये था
गुरुदेव ने वयपमासुर जी के आगमन की सुचना भी वह मौजूद सभी लोगो के सामने राखी जिसे सुन कुछ लोग चिंतित भी हुए
किन्तु जब गुरुदेव ने स्पष्ट किया के वो अकेले हे पुत्री मानसी के पिता आवर पुत्र सूर्य के ससुर श्री के रूप में ओस विवाह में शामिल हो रहे तब उनका मन संत हुआ
सब कुछ सभी को समाज कर गुरुदेव ने विवाह की तयारिया आवर सुरक्षा पे सभी से चर्चा की
रात का भोजन भरण कर गुरुदेव मंदिर में लौट आये आवर आराम करने के स्थान पे गगन ध्यान साधना में लीं हो गए
सूर्यगढ़ ........
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ीदार ऐसे हे दो दिन बिट गए आज रात सूर्य का पुरे परिवार को परीलोक जाना था कल रात्रि सूर्य जीनत परिधि का विवाह जो होना था
शालिनी जी रेखा जी ने दादी जी के कहे अनुसार सभी तयारिया पूरी कर ली थी
दादा जी नाना जी दादी जी नानी जी दोनों मां जी फूफा जी शिव महेंद्र दोनों ममिया शालिनी जी रेखा जी मेनका जी मेर्री अलीना राधा किरण पायल प्रीती कोमल सपना वयोम सभी परीलोक जाने के लिया त्यार थे
सूर्य ने अपनी सकती से सभी के क्लोन त्यार किये ताकि किसी को भी उनकी इन उपस्थित का आभाष न हो विधि आवर गायत्री पहले से हे परीलोक में मौजूद थी व्योमासुर जी कल विवाह के समय हे परीलोक आने का सन्देश सूर्य को भेज चुके थे
तभी सूर्य को सोफिया की याद आई उसने भी तो सूर्य अपने विवाह के लिया आमंत्रित किया था
सूर्य ......... स्वीटी आप सभी को ले कर परीलोक चलो मैं सोफिया को ले कर आता हूँ
किरण ....... क्या वो भी परीलोक आ रही है
सूर्य ....... है उसने हमारी सचाई का पता है ऐसे में मुझे नहीं लगता की उसे इन्विते करना गलत होगा
किरण ........ ठीक है फिर आप एक काम क्यों नहीं करते है आप उसने पहले यही ले आइये हम सभी एक साथ हे वह चलते है
सूर्य ........ ठीक है तुम इस बारे में माँ को बता देना मैं अभी गया आवर अभी आया
सूर्य वह से गायब हो कर दिल्ली पंहुचा कुछ देर बाद सोफिया को लिया वापिस लौटा सभी लड़किया सोफिया से मिल काट खुश हो गई
शालिनी जी आवर रेखा जी ने भी सोफिया को गले लगा कर प्यार से स्वागत किया
सोफिया भी दिल से खुश होते हुए सभी से बड़े हे अपने पैन के साथ मिली उसने कही से भी ये मह्सुश नहीं हुआ की ये उसका परिवार नहीं है
शालिनी जी ......... सूर्य ये तुमने बहुत अच्छा किया जो सोफिया को ले आया
शिव ........ सूर्य तुम जानते हो न क्या कर रहे हो कही ये बात खुल गई तो
सोफिया ........ अंकल आप परेशान न हो मैं आप लोगो की सचाई कभी किसी को नहीं बताउंगी फिर भी आप को लगता है की मेरी वजह से आपको परेशानी हो सकती है तो ( सूर्य की आवर देख कर )
आप मेरी सभी यादें मिटा दीजिये ऐसा करने के बाद मैं चहु तब भी आप लोगो का सच किसी को पता नहीं चलेगा
शिव ........ उसकी जरुरत नहीं है सोफिया बीटा मुझे यकीं है ऐसा कभी नहीं होगा आवर अगर कभी ऐसा समय आया भी तो सूर्य सब संभल लेगा
दादा जी ........ अब हम सभी को चलना चाइये परीलोक सभी हमारा इन्तजार कर रहे होंगे
दादा जी के काने के बाद सूर्य ने टेलेपोर्टेशन द्वार का निर्माण किया आवर सभी लोग परीलोक के लिया निकल गए पीछे से उन सभी का स्थान उनके क्लोन ने ले लिया था ...........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................